चारधाम यात्रा मार्गों पर एमआरपी से अधिक वसूली बर्दाश्त नहीं, होगी सख्त कार्रवाई : आयुक्त

पौड़ी : गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गढ़वाल मंडल के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा एवं आपूर्ति विभाग की समीक्षा बैठक ली। बैठक में चारधाम यात्रा मार्गों पर खाद्य सुरक्षा, मूल्य नियंत्रण तथा प्रवर्तन संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गयी।

मंडलायुक्त ने निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा मार्गों पर स्थित सभी दुकानों, होटल-ढाबों एवं खाद्य प्रतिष्ठानों में रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए, ताकि यात्रियों को निर्धारित दरों पर खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एमआरपी अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक धनराशि वसूलने वाले दुकानदारों एवं प्रतिष्ठानों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

समीक्षा के दौरान आयुक्त ने चारधाम यात्रा प्रारंभ होने के बाद अब तक की गई प्रवर्तन एवं निरीक्षण संबंधी कार्रवाइयों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उन्होंने निर्देशित किया कि भविष्य में निरीक्षण, सैंपलिंग तथा प्रवर्तन संबंधी समस्त सूचनाएं प्रतिदिन गूगल शीट के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएं, जिससे प्रभावी निगरानी और त्वरित समीक्षा सुनिश्चित हो सके।

आयुक्त ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सैंपलिंग अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों पर खाद्य सुरक्षा से जुड़े निरीक्षणों एवं जांच अभियानों को और अधिक सघन बनाया जाए, ताकि श्रद्धालुओं एवं यात्रियों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं गुणवत्तायुक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।

बैठक में चारधाम यात्रा की सुगमता के लिए स्थापित ट्रांजिट कैंपों में खाद्य पदार्थों के लिए अधिक मूल्य वसूले जाने संबंधी प्राप्त फीडबैक का भी संज्ञान लिया गया। इस पर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने तथा प्राप्त शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने खाद्य सुरक्षा एवं आपूर्ति विभाग को अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त प्रवर्तन दल गठित करने तथा नियमित निरीक्षण अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। आयुक्त ने कहा कि यात्रियों के हितों की रक्षा, उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

समीक्षा बैठक में मंडल के सभी जनपदों के खाद्य सुरक्षा एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।

कोटद्वार : लालपानी में सरकारी भूमि से हटाया गया अवैध अतिक्रमण, प्रशासन की कार्रवाई जारी

कोटद्वार : जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशों के क्रम में जनपद में राजकीय भूमि पर अतिक्रमण के विरुद्ध प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। इस कड़ी में तहसील कोटद्वार प्रशासन द्वारा ग्राम लालपानी, पटवारी क्षेत्र सनेह में अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई की गयी।

राजस्व विभाग को प्राप्त शिकायत तथा अभिलेखीय जांच में ग्राम लालपानी स्थित लगभग एक बीघा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई की। तहसील प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण को जेसीबी मशीन की सहायता से हटाते हुए उक्त भूमि को पुनः अतिक्रमणमुक्त कराया। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार राजेंद्र सनवाल के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम मौके पर मौजूद रही। इस दौरान कानूनगो अतर सिंह तथा पटवारी सीता मुयाल सहित अन्य कार्मिक उपस्थित रहे।

उपजिलाधिकारी संदीप कुमार ने कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राजकीय भूमि की सुरक्षा एवं सार्वजनिक हितों की रक्षा के लिए अतिक्रमण के विरुद्ध अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बैंक खाते किराए पर देने वालों पर भी होगी सख्त कार्रवाई – STF

देहरादून : उत्तराखण्ड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा साइबर अपराधियों के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक और बड़ी विधिक कार्रवाई की गई है। देश भर में चल रहे डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम की अवैध रकम को विभिन्न बैंक खातों में मँगवाकर उसकी लेयरिंग (Layering) करने वाले एक संगठित गिरोह के 03 सदस्यों के विरुद्ध थाना साइबर क्राइम, देहरादून में मुकदमा (FIR No. 32/2026) दर्ज किया गया है।

​एसटीएफ की साइबर टीम अब ऐसे सभी डिजिटल, गूगल और बैंक अकाउंट्स पर कड़ी तकनीकी व डिजिटल निगरानी रख रही है, जो चंद रुपयों या कमीशन के लालच में साइबर ठगों के मददगार बन रहे हैं। 

एसटीएफ की जांच में हुआ खुलासा: कैसे काम कर रहा था यह सिंडिकेट?

​म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) का जाल: जांच में सामने आया है कि कुछ लोग मामूली कमीशन या पैसों के लालच में आकर अपने बैंक खाते, इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, ATM कार्ड और सिम कार्ड इन अपराधियों को इस्तेमाल के लिए दे रहे थे।

​मल्टी-लेयरिंग (Multi-layer Transactions): पुलिस और कानून को धोखा देने के लिए आरोपी इस ठगी की रकम को तुरंत कई अलग-अलग बैंक खातों, ATM निकासी और POS ट्रांजेक्शन के जरिए ट्रांसफर कर देते थे, ताकि मनी ट्रेल (धन के स्रोत) को उलझाया जा सके।

एसटीएफ उत्तराखण्ड द्वारा जारी आधिकारिक एडवाइजरी: 10 कड़े निर्देश

1-​कमीशन का लालच पड़ेगा भारी: थोड़े से कमीशन या पैसों के लालच में आकर किसी भी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक अकाउंट बिल्कुल न खुलवाएं।

2- ​खाता किराए पर देना गंभीर अपराध: कभी भी किसी अनजान, अनधिकृत या बाहरी व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल (किराए) के लिए न दें।

3- ​क्रेडेंशियल्स रखें पूरी तरह गोपनीय: अपनी इंटरनेट बैंकिंग का यूजरनेम, पासवर्ड, यूपीआई पिन या गूगल अकाउंट क्रेडेंशियल्स किसी के साथ भी साझा न करें।

4- ​सिम कार्ड का दुरुपयोग रोकें: अपने नाम पर रजिस्टर्ड सिम कार्ड कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने या बेचने के लिए न दें।

5-​बैंकिंग किट्स को रखें सुरक्षित: अपने बैंक की चेकबुक, पासबुक और ATM कार्ड हमेशा अपने पास सुरक्षित रखें, इन्हें किसी और को सौंपना कानूनन गलत है।

6-​अज्ञात ट्रांजेक्शन पर तुरंत नजर: यदि आपके खाते में अचानक कोई अज्ञात या संदिग्ध बड़ी रकम ट्रांसफर होती है, तो तुरंत अपने बैंक और पुलिस को सूचित करें।

7-​हर डिजिटल फुटप्रिंट ट्रैक हो रहा है: याद रखें, डिजिटल दुनिया में किया गया हर एक ट्रांजेक्शन ट्रैक होता है। एसटीएफ की साइबर टीम गहन वित्तीय विश्लेषण (Financial Analysis) के जरिए हर संदिग्ध खाते की निगरानी कर रही है।

8-​अपराधियों के सीधे हिस्सेदार: साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते या संसाधन (Resources) उपलब्ध कराना आपको कानूनी रूप से उनका हिस्सेदार (Co-accused) बना देता है।

9-​कठोर कानूनी कार्रवाई तय: म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी उतनी ही कठोर कानूनी कार्रवाई (गिरफ्तारी व मुकदमा) की जा रही है, जितनी वास्तविक अपराधियों पर।

10-​सजग रहें, सुरक्षित रहें: आपकी एक छोटी सी लापरवाही या चंद रुपयों का लालच आपको साइबर अपराधियों का मददगार साबित कर जेल पहुँचा सकता है।

UKSSSC की स्नातक स्तरीय पुनर्परीक्षा में सभी 1.54 लाख अभ्यर्थियों को मिलेगा मौका

देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) ने स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा की पुनर्परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 14 जून को आयोजित होने वाली पुनर्परीक्षा में सभी 1.54 लाख पंजीकृत अभ्यर्थियों को शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। इसमें वे अभ्यर्थी भी शामिल हैं जो प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से पिछली परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे।

आयोग की ओर से 416 पदों के लिए यह महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा आयोजित की जा रही है। युवाओं और अभ्यर्थियों की मांग को देखते हुए आयोग ने सभी पंजीकृत उम्मीदवारों को पुनर्परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का निर्णय लिया है।

परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस बार हाईटेक निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। प्रदेशभर के 445 परीक्षा केंद्रों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी। प्रत्येक केंद्र पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे किसी भी प्रकार की नकल या अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

गौरतलब है कि पूर्व में आयोजित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा पेपर लीक प्रकरण के बाद निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद आयोग के सामने निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पुनर्परीक्षा आयोजित करने की बड़ी चुनौती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने आधुनिक तकनीक और कड़े सुरक्षा प्रबंधों के साथ परीक्षा संपन्न कराने की तैयारी की है।

आयोग का दावा है कि 14 जून को होने वाली परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित वातावरण में आयोजित की जाएगी, ताकि अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल किया जा सके और भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष रूप से पूरा किया जा सके।

बीएलओ करेंगे घर-घर संपर्क, मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू

पौड़ी : भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जनपद में संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उप निर्वाचन अधिकारी/अपर जिलाधिकारी एफआर चौहान ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में निर्वाचन नामावली के पुनरीक्षण कार्यक्रम, निर्धारित समय-सारिणी तथा राजनीतिक दलों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गयी।

उप निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 01 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर निर्वाचक नामावली का विशेष गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत 08 जून से 07 जुलाई 2026 तक बूथ लेवल अधिकारी अपने-अपने मतदान क्षेत्रों में घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का वितरण करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस चरण में मतदाताओं से किसी भी प्रकार के दस्तावेज प्राप्त नहीं किए जाएंगे तथा केवल गणना प्रपत्रों का वितरण एवं आवश्यक जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीएलओ द्वारा वितरित किए जाने वाले एन्यूमरेशन फॉर्म, फॉर्म-6 तथा घोषणा पत्र निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भरे जाएंगे। मतदाता सूची में नए पात्र मतदाताओं को शामिल करने, मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने तथा त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों के संशोधन की कार्यवाही पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत की जाएगी।

उप निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से प्रत्येक मतदान स्थल पर बीएलए-2 नियुक्त करने तथा मतदाता जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय सहयोग देने को कहा। उन्होंने कहा कि निर्वाचक नामावली को शुद्ध, त्रुटिरहित और अद्यतन बनाने में राजनीतिक दलों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सभी दलों को अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से मतदाताओं को अभियान की जानकारी देने और गणना प्रपत्र समय पर भरने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने पुनरीक्षण कार्यक्रम की समय-सारिणी की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 14 जुलाई 2026 को प्रारूप निर्वाचक नामावली का प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद दावे एवं आपत्तियां प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी कर 15 सितंबर 2026 को अंतिम निर्वाचक नामावली प्रकाशित की जाएगी।

उप निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदाता सूची में पंजीकरण आवश्यक है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों से निर्वाचन आयोग के इस अभियान में सहयोग करने की अपील की। 

इस अवसर पर सहायक निर्वाचन अधिकारी शांति लाल शाह, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मयंक शर्मा, खंड शिक्षाधिकारी मास्टर आदर्श, राजनीतिक दलों से भरत रावत, राजेंद्र सिंह राणा, ललित नेगी, विपिन कुकरेती, सुरेश चमोली, सुरेन्द्र रावत, महेंद्र सिंह रावत सहित अन्य उपस्थित थे।