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अक्टूबर 22, 2025
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Opinion
नई दिल्ली: भारत के इतिहास में सबसे बड़ी और तकनीकी रूप से सबसे उन्नत कवायद की शुरुआत होने जा रही है। केंद्र सरकार ने लंबे इंतजार के बाद जनगणना 2027 (Census 2027) की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। कोरोना महामारी के कारण एक दशक से अधिक समय से लटकी इस प्रक्रिया का रोडमैप अब पूरी तरह साफ हो गया है। गुरुवार को गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी नोटिफिकेशन ने देश की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर बदलने वाली इस मेगा-एक्सरसाइज की नींव रख दी है।READ ALSO:-यूपी में वोटरों पर 'कागज' का संकट: 2003 की लिस्ट में नाम नहीं तो 'निवास प्रमाण पत्र' भी बेकार; आयोग ने कहा- 'सिर्फ ये 11 सबूत चलेंगे' इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है। यह न केवल आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना (Caste Census) होगी, बल्कि यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना (Digital Census) भी होगी। सरकार ने पहले चरण (House Listing) के लिए 33 सवालों की एक विस्तृत सूची जारी की है, जो यह तय करेगी कि भारत के लोग कैसे रहते हैं, क्या खाते हैं और किन सुविधाओं का उपयोग करते हैं। इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको जनगणना 2027 के हर पहलू, 33 सवालों की डिटेल, डिजिटल प्रक्रिया, जियो-टैगिंग के 5 बड़े फायदे और इसके राजनीतिक व सामाजिक असर के बारे में विस्तार से बताएंगे। दो चरणों में होगी महा-गिनती: जानें पूरा शेड्यूल सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना की यह प्रक्रिया दो चरणों (Two Phases) में पूरी की जाएगी। चूंकि भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है, इसलिए डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। पहला चरण (Phase-1): मकानों की लिस्टिंग (House Listing) अवधि: 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक। प्रक्रिया: इस चरण में नागरिकों की गिनती नहीं होगी, बल्कि मकानों, इमारतों और उनमें उपलब्ध सुविधाओं का डेटा जुटाया जाएगा। समय सीमा: प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को अपने अधिकार क्षेत्र में यह काम 30 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। उद्देश्य: यह चरण यह निर्धारित करेगा कि देश में कितने मकान हैं, उनकी स्थिति क्या है और उनमें रहने वाले परिवारों का जीवन स्तर कैसा है। दूसरा चरण (Phase-2): जनसंख्या की गिनती (Population Enumeration) शुरुआत: फरवरी 2027 से। प्रक्रिया: यह मुख्य चरण है जहां देश के हर नागरिक की व्यक्तिगत जानकारी, जैसे- नाम, उम्र, लिंग, धर्म, शिक्षा और (पहली बार) जाति का ब्योरा दर्ज किया जाएगा। संशोधन: 1 से 5 मार्च 2027 के बीच एक 'रिविजन राउंड' होगा जिसमें उन लोगों को शामिल किया जाएगा जो फरवरी में छूट गए थे या जिनका जन्म इस दौरान हुआ हो। 33 सवाल जो आपकी लाइफस्टाइल की पोल खोलेंगे पहले चरण यानी मकान सूचीकरण (House Listing) और मकान गणना (Housing Census) के लिए सरकार ने 33 सवालों की एक सूची तैयार की है। यह प्रश्नावली न केवल आपके सिर पर छत की जानकारी लेगी, बल्कि आपकी आर्थिक स्थिति का भी पूरा स्कैन करेगी। परिवार के मुखिया को इन सवालों के जवाब देने होंगे। प्रमुख सवाल और उनका महत्व: मकान की स्थिति: क्या मकान पक्का है या कच्चा? फर्श, दीवार और छत किस सामग्री (कंक्रीट, टाइल्स, घास-फूस) से बनी है? यह देश में गरीबी और आवास योजनाओं की सफलता को मापने में मदद करेगा। कमरों की संख्या: घर में कितने कमरे हैं और कितने शादीशुदा जोड़े वहां रहते हैं? इससे प्रति व्यक्ति स्थान और भीड़भाड़ (Overcrowding) का पता चलेगा। पानी का स्रोत: पीने का पानी कहां से आता है? (नल, हैंडपंप, कुआं या टैंकर)। क्या पानी का स्रोत घर के अंदर है या दूर? शौचालय की सुविधा: क्या घर में शौचालय है? यह 'स्वच्छ भारत अभियान' की वास्तविकता को परखेगा। रसोई और ईंधन: खाना पकाने के लिए किस ईंधन का उपयोग होता है? (LPG, लकड़ी, गोबर के उपले या बिजली)। क्या रसोई घर अलग है? वाहनों की जानकारी: क्या आपके पास साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार या जीप है? यह मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति (Purchasing Power) का सूचक होगा। डिजिटल गैजेट्स: क्या परिवार के पास स्मार्टफ़ोन, लैपटॉप या इंटरनेट कनेक्शन है? यह 'डिजिटल इंडिया' की पहुंच को मापेगा। मुख्य अनाज: परिवार में मुख्य रूप से कौन सा अनाज (चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा) खाया जाता है? इससे खाद्य सुरक्षा योजनाओं (Food Security) को क्षेत्रवार लागू करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा बिजली कनेक्शन, बैंक खाता, मोबाइल नंबर और घर के मालिकाना हक (किराए का या अपना) से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। पूछे जाने वाले सवाल मकान के स्वामित्व की स्थिति परिवार के पास कमरों की संख्या परिवार में रहने वाले विवाहित दंपत्तियों की संख्या पेयजल का मुख्य स्रोत पेयजल स्रोत की उपलब्धता लाइट का मुख्य स्रोत शौचालय की सुलभता शौचालय का प्रकार गंदे पानी की निकासी बाथरूम की उपलब्धता रसोईघर और एलपीजी /पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता खाना पकाने के लिए प्रयुक्त मुख्य ईंधन रेडियो/ट्रांजिस्टर टेलीविजन इंटरनेट सुविधा लैपटॉप/कंप्यूटर टेलीफोन/मोवाइल फोन/स्मार्ट फोन साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड कार/जीप/वैन परिवार द्वारा उपभोग किया जाने वाले मुख्य अनाज मोबाइल नंबर डिजिटल क्रांति: मोबाइल ऐप और 'डिजी-डॉट' जनगणना 2027 तकनीकी रूप से अब तक का सबसे उन्नत सर्वे होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कागज-कलम (Paper-Pen) के पुराने दौर को पीछे छोड़ते हुए, इस बार सब कुछ डिजिटल होगा। ऐप के जरिए डेटा कलेक्शन: करीब 30 लाख कर्मचारी (Enumerators) अपने स्मार्टफोन पर विशेष रूप से तैयार किए गए मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा करेंगे। यह ऐप Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। ऐप में डेटा फीड करते ही यह रियल-टाइम में केंद्रीय सर्वर पर अपलोड हो जाएगा, जिससे डेटा प्रोसेसिंग में लगने वाला समय (जो पहले 2-3 साल होता था) घटकर कुछ महीनों में रह जाएगा। सेल्फ एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) का विकल्प: सरकार ने नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए 'सेल्फ एन्यूमरेशन' का विकल्प भी दिया है। इसका मतलब है कि अगर आप चाहें तो प्रगणक (Enumerator) के आने का इंतजार किए बिना, खुद ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने परिवार की जानकारी भर सकते हैं। यह सुविधा मकानों की लिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले खोली जाएगी। खुद जानकारी भरने के बाद आपको एक कोड मिलेगा, जिसे प्रगणक के आने पर सिर्फ वेरीफाई करवाना होगा। आजादी के बाद पहली बार: जातिगत जनगणना जनगणना 2027 का सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक पहलू जाति की गिनती (Caste Census) है। आजादी के बाद (1951 से 2011 तक) भारत में केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की गिनती होती थी, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामान्य जातियों (General) की अलग से गिनती नहीं की जाती थी। क्यों है यह ऐतिहासिक? आखिरी बार जाति आधारित जनगणना 1931 में अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी। इसके बाद से सरकारों ने इसे "विभाजनकारी" मानकर टाल दिया था। विपक्ष और कई क्षेत्रीय दलों की लंबी मांग के बाद, पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में इसे मंजूरी दी थी। इस डेटा का उपयोग आरक्षण नीतियों (Reservation Policies), कल्याणकारी योजनाओं के पुनर्गठन और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा। जियो-टैगिंग का जादू: हर घर बनेगा 'डिजी-डॉट' इस जनगणना में इसरो (ISRO) और तकनीकी एजेंसियों की मदद से हर घर की जियो-टैगिंग (Geo-tagging) की जाएगी। इसका मतलब है कि भारत के नक्शे पर आपका घर एक डिजिटल बिंदु (Digital Dot) के रूप में दिखाई देगा। सरकार ने इसके 5 बड़े फायदे बताए हैं जो आपदा प्रबंधन से लेकर विकास तक सब कुछ बदल देंगे। 1. आपदा में सटीक राहत (Disaster Relief): जियो-टैगिंग से बना डिजिटल मैप आपदाओं के समय जीवन रक्षक साबित होगा। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड या हिमाचल के किसी गांव में बादल फटने पर प्रशासन को तुरंत पता चल जाएगा कि उस विशिष्ट स्थान (डिजी-डॉट) पर कितने घर हैं और वहां कितने लोग रहते हैं। इससे बचाव दल को यह अनुमान लगाने में मदद मिलेगी कि कितने हेलिकॉप्टर, नावें या फूड पैकेट भेजने की जरूरत है। 2. परिसीमन में मदद (Delimitation): भविष्य में होने वाले संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) के लिए यह डेटा रीढ़ की हड्डी साबित होगा। घरों के सटीक लोकेशन से यह तय करना आसान होगा कि किसी चुनाव क्षेत्र की सीमा कहां खत्म होनी चाहिए ताकि जनसंख्या का संतुलन बना रहे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि एक ही मोहल्ले के लोग अलग-अलग क्षेत्रों में न बंटें। 3. शहरी प्लानिंग (Urban Planning): शहरों का विकास अब अंधाधुंध नहीं, बल्कि डेटा-आधारित होगा। अगर डिजिटल मैप दिखाता है कि किसी इलाके में बच्चों की संख्या ज्यादा है, तो वहां पार्क और स्कूल बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी। इसी तरह, अगर किसी बस्ती में बुजुर्ग ज्यादा हैं, तो वहां अस्पताल या सामुदायिक केंद्र बनाए जाएंगे। कच्ची बस्तियों की पहचान कर वहां मोबाइल मेडिकल वैन और पक्के मकानों की योजना बनाई जा सकेगी। 4. पलायन और शहरीकरण का डेटा (Migration Tracking): भारत में गांव से शहर की ओर पलायन (Migration) एक बड़ी चुनौती है। 2027 के डिजिटल मैप की तुलना जब 2037 के मैप से होगी, तो यह साफ दिखेगा कि कौन से गांव खाली हो रहे हैं और किन शहरों पर दबाव बढ़ रहा है। इससे सरकार को स्मार्ट सिटी और रूरल डेवलपमेंट की नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। 5. फर्जी वोटर कार्ड पर लगाम (Voter List Cleanup): अक्सर देखा जाता है कि एक व्यक्ति का नाम गांव और शहर दोनों जगह की वोटर लिस्ट में होता है। जियो-टैगिंग और आधार लिंकिंग से यह समस्या खत्म हो जाएगी। जब एक वोटर किसी एक भौगोलिक स्थान (Geo-location) से डिजिटली जुड़ जाएगा, तो सिस्टम अपने आप दूसरे स्थान से उसका नाम हटाने का सुझाव देगा। इससे भारत की चुनाव प्रक्रिया और पारदर्शी बनेगी। चुनौतियां और तैयारी हालांकि, यह राह आसान नहीं है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 121 करोड़ थी, जो अब 140 करोड़ के पार होने का अनुमान है। इतने बड़े पैमाने पर डिजिटल डेटा इकट्ठा करना, सर्वर की सुरक्षा (Cyber Security), और डेटा की गोपनीयता (Privacy) बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी साक्षरता की कमी भी 'सेल्फ एन्यूमरेशन' के रास्ते में रोड़ा बन सकती है। सरकार ने इसके लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई है। जनगणना 2027 केवल सिरों की गिनती नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारत का ब्लूप्रिंट है। 33 सवालों के जवाब और डिजिटल डॉट्स मिलकर यह तय करेंगे कि अगले दशक में सरकारी योजनाएं कैसे बनेंगी, आरक्षण किसे मिलेगा और आपदाओं से हम कैसे लड़ेंगे। 2021 में जो प्रक्रिया महामारी के कारण रुक गई थी, वह अब 2027 में एक नई तकनीक और नई सोच के साथ पूरी होने जा रही है। नागरिकों के लिए यह एक अवसर है कि वे सही जानकारी देकर देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। केन्द्र सरकार ने जनगणना 2027 की अधिसूचना जारी कर दी है। पहला चरण (मकानों की लिस्टिंग) 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसके लिए 33 सवाल तय किए गए हैं। दूसरा चरण (जनसंख्या गिनती) फरवरी 2027 में होगा। यह पहली बार होगा जब जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और इसमें जाति की गिनती भी शामिल की जाएगी।
आज की सुबह भारतवर्ष के लिए सामान्य सुबह नहीं है। क्षितिज पर उगता हुआ सूरज आज न केवल एक नए दिन का संदेश लेकर आया है, बल्कि राष्ट्र के गौरव और धर्म की पवित्रता का एक अनूठा संगम भी लेकर आया है। आज, 26 जनवरी 2026 (सोमवार) को पूरा देश 77वें गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) के जश्न में डूबा है। वहीं, सनातन धर्म की कालगणना और पंचांग के अनुसार, आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है, जिसे शास्त्रों में 'भीष्म अष्टमी' (Bhishma Ashtami) के रूप में पूजा जाता है।READ ALSO:-आगरा का 'संजय प्लेस हॉरर': ऑफिस के सन्नाटे में प्यार का खूनी अंत, प्रेमी ने प्रेमिका के सिर-पैर काटे, यमुना पुल पर खुले बोरे ने उगला मौत का सच सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है, अष्टमी तिथि माँ दुर्गा की शक्ति का प्रतीक है, और गणतंत्र दिवस राष्ट्र की शक्ति का पर्व है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो आज आकाश मंडल में ग्रहों की स्थिति (Planetary Positions) बेहद दिलचस्प बनी हुई है। ग्रहों का यह गोचर न केवल देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर असर डालेगा, बल्कि आम आदमी की जेब, सेहत और रिश्तों पर भी गहरा प्रभाव छोड़ेगा। इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि आज का दिन आपकी राशि के लिए क्या सौगात लाया है, ध्वजारोहण का सबसे शुभ समय क्या है, और भीष्म अष्टमी पर कौन से उपाय करने से पितृ दोष और कष्टों से मुक्ति मिल सकती है। आज का पंचांग: 26 जनवरी 2026 (Aaj Ka Panchang) किसी भी शुभ कार्य, विशेषकर गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण के लिए शुभ मुहूर्त का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। आज का पंचांग बताता है कि दिन का मध्य भाग अत्यंत शुभ है। दिनांक: 26 जनवरी 2026 दिन: सोमवार (Somwar) विक्रम संवत: 2082 मास: माघ पक्ष: शुक्ल पक्ष तिथि: अष्टमी (रात 09:15 बजे तक), उसके बाद नवमी। नक्षत्र: अश्विनी (दोपहर 12:30 बजे तक), तदुपरांत भरणी। (अश्विनी नक्षत्र के स्वामी केतु हैं और यह ऊर्जा, गति और नई शुरुआत का प्रतीक है, जो गणतंत्र दिवस परेड के लिए बहुत शुभ है।) योग: साध्य (सुबह 09:11 बजे तक), उसके बाद शुभ योग। करण: विष्टि (भद्रा) - सुबह 10:15 तक, उसके बाद बव। चंद्र राशि: मेष (Aries) - चंद्रमा आज मंगल की राशि में संचरण करेंगे, जिससे लोगों में उत्साह और ऊर्जा का संचार होगा। सूर्य राशि: मकर (Capricorn) - सूर्य देव शनि की राशि में विराजमान हैं। ऋतु: शिशिर। महत्वपूर्ण मुहूर्त (Important Timings) अभिजीत मुहूर्त (ध्वजारोहण के लिए सर्वश्रेष्ठ): दोपहर 12:12 बजे से 12:55 बजे तक। (शास्त्रों के अनुसार, यह समय किसी भी विजय अभियान या सरकारी कार्य के लिए सर्वोत्तम है।) विजय मुहूर्त: दोपहर 02:22 बजे से 03:05 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:50 बजे से 06:15 बजे तक। अमृत काल: सुबह 06:48 बजे से 08:30 बजे तक। राहुकाल (अशुभ समय - वर्जित): सुबह 08:30 बजे से 09:55 बजे तक। (इस दौरान ध्वजारोहण या कोई नया अनुबंध न करें।) ग्रहों की चाल और देश का हाल (Astrological Analysis) आज चंद्रमा मेष राशि में हैं। मेष राशि काल पुरुष की कुंडली का पहला भाव है, जो 'स्वयं', 'पहचान' और 'मस्तिष्क' का प्रतिनिधित्व करता है। गणतंत्र दिवस पर चंद्रमा का पहले भाव की राशि में होना यह दर्शाता है कि आज देश का आत्मविश्वास चरम पर होगा। मेष में चंद्रमा: जनता (चंद्रमा) में जोश और देशभक्ति (मेष-मंगल की राशि) का ज्वार रहेगा। मकर में सूर्य: सूर्य (सरकार/सत्ता) मकर (अनुशासन/कानून) में हैं। यह संविधान के प्रति निष्ठा और कानून के राज को मजबूत करने का संकेत है। भीष्म अष्टमी का संयोग: महाभारत काल में भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर आज ही के दिन देह त्यागी थी। यह दिन संकल्प शक्ति और दृढ़ प्रतिज्ञा का प्रतीक है। राशिफल: 12 राशियों का भविष्यफल (Detailed Horoscope) मेष राशि में चंद्रमा का गोचर और मकर राशि में सूर्य की स्थिति का सभी 12 राशियों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा? आइए जानते हैं विस्तार से। 1. मेष राशि (Aries): आत्मविश्वास और ऊर्जा का महाविस्फोट आज चंद्रमा आपकी ही राशि (Lagna) में विराजमान हैं। आपके लिए आज का दिन 'नायक' (Hero) की भूमिका निभाने जैसा है। सामान्य: आज आप ऊर्जा से लबरेज रहेंगे। गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों में आपकी सक्रियता देखते ही बनेगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। करियर: सरकारी नौकरी करने वालों के लिए आज का दिन विशेष उपलब्धियों वाला हो सकता है। यदि आप सेना, पुलिस या प्रशासन से जुड़े हैं, तो आपको मेडल या प्रशंसा मिल सकती है। आर्थिक: धन आगमन के रास्ते खुलेंगे। रुका हुआ पैसा मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य: सिरदर्द या आंखों में जलन हो सकती है। धूप में चश्मा लगाकर निकलें। प्रेम: जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर रहेंगे। शुभ रंग: केसरिया (Saffron)। भाग्य प्रतिशत: 95% 2. वृषभ राशि (Taurus): विदेश योग और खर्चों पर चिंतन चंद्रमा आपके 12वें भाव (व्यय भाव) में गोचर कर रहे हैं। सामान्य: आज मन थोड़ा बैचेन हो सकता है। भीड़भाड़ से दूर एकांत में समय बिताने का मन करेगा। करियर: मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) में काम करने वालों के लिए दिन अच्छा है। विदेश से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। आर्थिक: आज हाथ खुला रहेगा। देशभक्ति के जोश में या दान-पुण्य में धन खर्च हो सकता है। बजट बनाकर चलें। स्वास्थ्य: पैरों में दर्द या नींद न आने की समस्या परेशान कर सकती है। प्रेम: पार्टनर के साथ छोटी सी बात पर अनबन हो सकती है, वाणी पर संयम रखें। शुभ रंग: सफेद (White)। भाग्य प्रतिशत: 65% 3. मिथुन राशि (Gemini): लाभ और सामाजिक दायरा आज चंद्रमा आपके 11वें भाव (लाभ भाव) में हैं। यह स्थिति 'एक पंथ दो काज' वाली है। सामान्य: दोस्तों और बड़े भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। आज आप सामाजिक समारोहों की जान रहेंगे। करियर: बिज़नेस में आज बड़ी डील फाइनल हो सकती है। नेटवर्किंग के लिए आज का दिन स्वर्ण अवसर है। आर्थिक: आय में वृद्धि के प्रबल योग हैं। कोई पुराना निवेश आज अच्छा रिटर्न दे सकता है। स्वास्थ्य: स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। मानसिक रूप से प्रसन्न महसूस करेंगे। प्रेम: लव लाइफ में रोमांस का तड़का लगेगा। सिंगल लोगों को कोई खास मिल सकता है। शुभ रंग: हरा (Green)। भाग्य प्रतिशत: 88% 4. कर्क राशि (Cancer): कर्मक्षेत्र में झंडे गाड़ने का दिन आपकी राशि के स्वामी चंद्रमा आज आपके 10वें भाव (कर्म भाव) में हैं। सामान्य: आज पूरा ध्यान काम और सामाजिक प्रतिष्ठा पर रहेगा। लोग आपकी राय को महत्व देंगे। करियर: ऑफिस में बॉस आपके काम की तारीफ करेंगे। पदोन्नति की बात चल सकती है। राजनीति से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन शक्ति प्रदर्शन का है। आर्थिक: पिता या पैतृक संपत्ति से लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य: घुटनों में तकलीफ हो सकती है। काम के बीच में आराम जरूर करें। प्रेम: माता-पिता के साथ समय बिताएंगे, जिससे घर का माहौल सुखद रहेगा। शुभ रंग: दूधिया (Milky White)। भाग्य प्रतिशत: 90% 5. सिंह राशि (Leo): भाग्य का पूरा साथ सूर्य की राशि सिंह वालों के लिए चंद्रमा 9वें भाव (भाग्य भाव) में हैं। सामान्य: आज का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में बीतेगा। गणतंत्र दिवस पर देशभक्ति की भावना प्रबल रहेगी। करियर: उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को कोई बड़ी सफलता मिल सकती है। नौकरी में स्थानांतरण (Transfer) के योग बन रहे हैं जो आपके पक्ष में होंगे। आर्थिक: धन को लेकर स्थिति मजबूत रहेगी। लंबी यात्रा का योग है जो फायदेमंद साबित होगी। स्वास्थ्य: पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा। प्रेम: दांपत्य जीवन में समझदारी और प्रेम बढ़ेगा। शुभ रंग: सुनहरा (Golden)। भाग्य प्रतिशत: 92% 6. कन्या राशि (Virgo): सावधानी हटी, दुर्घटना घटी चंद्रमा आज आपके 8वें भाव (रंध्र भाव) में हैं। आज का दिन थोड़ा संभलकर चलने का है। सामान्य: मन में अज्ञात भय या चिंता रह सकती है। नकारात्मक विचारों से बचें। करियर: कार्यस्थल पर किसी से विवाद न करें। आज कोई भी नया काम शुरू करने से बचें। गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें। आर्थिक: अचानक धन हानि हो सकती है। ऑनलाइन ट्रांजैक्शन सावधानी से करें। स्वास्थ्य: पेट या पाचन संबंधी समस्याएं (Acidity/Indigestion) हो सकती हैं। बाहर का खाना खाने से बचें। प्रेम: ससुराल पक्ष से कोई तनाव मिल सकता है। शुभ रंग: गहरा हरा (Dark Green)। भाग्य प्रतिशत: 55% 7. तुला राशि (Libra): साझेदारी और रोमांस चंद्रमा आपके 7वें भाव में हैं। आज का दिन रिश्तों को समर्पित है। सामान्य: आपका व्यक्तित्व आज बहुत आकर्षक रहेगा। लोग आपकी ओर खिंचे चले आएंगे। करियर: साझेदारी (Partnership) के बिजनेस में बड़ा मुनाफा हो सकता है। नई पब्लिक डीलिंग सफल रहेगी। आर्थिक: दैनिक आय में बढ़ोतरी होगी। जीवनसाथी के नाम से किया गया निवेश फलदायी होगा। स्वास्थ्य: मूत्र विकार या कमर दर्द की शिकायत हो सकती है। पानी खूब पिएं। प्रेम: अविवाहित लोगों के लिए विवाह का प्रस्ताव आ सकता है। वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। शुभ रंग: सिल्वर/सफेद (Silver)। भाग्य प्रतिशत: 85% 8. वृश्चिक राशि (Scorpio): शत्रु परास्त, विजय प्राप्त चंद्रमा 6वें भाव में हैं। आज आप 'शत्रुहंता' योग में हैं। सामान्य: आपका मनोबल ऊंचा रहेगा। कोई भी चुनौती आपके सामने टिक नहीं पाएगी। करियर: नौकरी में कम्पटीशन है तो जीत आपकी ही होगी। कोर्ट-कचहरी के मामलों में फैसला आपके पक्ष में आ सकता है। आर्थिक: कर्ज लेने या देने के लिए दिन ठीक है। फंसा हुआ पैसा प्रयास करने पर मिल सकता है। स्वास्थ्य: ननिहाल पक्ष से किसी के बीमार होने की खबर मिल सकती है। अपनी आंखों का ध्यान रखें। प्रेम: प्रेम संबंधों में अहंकार को बीच में न आने दें। शुभ रंग: गहरा लाल (Maroon)। भाग्य प्रतिशत: 82% 9. धनु राशि (Sagittarius): रचनात्मकता और संतान सुख चंद्रमा 5वें भाव में हैं। आज बुद्धि और विवेक का अद्भुत संगम दिखेगा। सामान्य: आज आप कुछ नया सीखने या सिखाने के मूड में रहेंगे। छात्रों के लिए दिन वरदान समान है। करियर: शिक्षा, लेखन, मीडिया और कला जगत से जुड़े लोगों को ख्याति मिलेगी। शेयर बाजार में सोच-समझकर किया गया निवेश लाभ देगा। आर्थिक: अचानक धन लाभ (Lottery/Speculation) का योग बन रहा है, लेकिन लालच से बचें। स्वास्थ्य: एसिडिटी की समस्या हो सकती है। प्रेम: लव लाइफ बहुत ही रोमांटिक रहेगी। संतान की ओर से कोई खुशखबरी मिल सकती है। शुभ रंग: पीला (Yellow)। भाग्य प्रतिशत: 88% 10. मकर राशि (Capricorn): घर-गृहस्थी की चिंता चंद्रमा 4वें भाव में हैं और सूर्य आपकी ही राशि में हैं। सामान्य: आज मन थोड़ा भावुक रहेगा। पुरानी यादें ताज़ा हो सकती हैं। घर के रिनोवेशन का प्लान बन सकता है। करियर: वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोगों के लिए दिन अच्छा है। कार्यस्थल पर काम का दबाव महसूस करेंगे। आर्थिक: वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने का विचार बन सकता है। मां से आर्थिक मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य: छाती में कफ या सर्दी-जुकाम की शिकायत हो सकती है। ठंडी चीजों से परहेज करें। प्रेम: जीवनसाथी के साथ समय बिताने की जरूरत है, अन्यथा दूरियां बढ़ सकती हैं। शुभ रंग: आसमानी (Sky Blue)। भाग्य प्रतिशत: 70% 11. कुंभ राशि (Aquarius): पराक्रम और साहस चंद्रमा 3रे भाव में हैं। आज आपका साहस देखते ही बनेगा। सामान्य: आज आप बहुत सक्रिय रहेंगे। छोटी यात्रा (Short Travel) का योग है। पड़ोसियों या भाई-बहनों के साथ अच्छा समय बीतेगा। करियर: मार्केटिंग, सेल्स और कम्युनिकेशन से जुड़े लोगों के टारगेट्स पूरे होंगे। आपकी वाणी का जादू चलेगा। आर्थिक: भाग्य का साथ मिलेगा। मेहनत के अनुपात में धन लाभ अधिक होगा। स्वास्थ्य: कंधे या गर्दन में जकड़न महसूस हो सकती है। योगाभ्यास करें। प्रेम: पार्टनर के साथ कहीं घूमने जाने का प्लान बनेगा। शुभ रंग: नीला (Blue)। भाग्य प्रतिशत: 87% 12. मीन राशि (Pisces): वाणी और धन चंद्रमा 2रे भाव (धन भाव) में हैं। सामान्य: आज आपकी वाणी बहुत मधुर और प्रभावकारी रहेगी। आप अपनी बातों से किसी का भी दिल जीत लेंगे। करियर: बैंकिंग, फाइनेंस और शिक्षण क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए दिन शानदार है। परिवार के बिज़नेस में हाथ बंटाएंगे। आर्थिक: रुका हुआ धन प्राप्त होगा। बैंक बैलेंस बढ़ने के आसार हैं। खान-पान पर खर्चा हो सकता है। स्वास्थ्य: दांतों में दर्द या मुंह में छाले हो सकते हैं। प्रेम: परिवार के साथ भोजन का आनंद लेंगे। रिश्तों में मिठास बढ़ेगी। शुभ रंग: नारंगी/हल्दी (Orange/Turmeric)। भाग्य प्रतिशत: 80% भीष्म अष्टमी और सोमवार का संयोग: आज करें ये महाउपाय आज 26 जनवरी को भीष्म अष्टमी होने के कारण इस दिन का धार्मिक महत्व बहुत बढ़ जाता है। मान्यता है कि आज के दिन भीष्म पितामह ने अपनी इच्छा से शरीर का त्याग किया था। निःसंतान दंपत्तियों और पितृ दोष से पीड़ित लोगों के लिए आज का दिन बहुत खास है। 1. पितृ दोष निवारण उपाय आज दोपहर के समय (अभिजीत मुहूर्त के आसपास) दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों को जल में तिल मिलाकर तर्पण दें। मंत्र: "ॐ भीष्माय नमः" का जाप करते हुए जल अर्पित करें। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है। 2. सोमवार के विशेष उपाय (शिव कृपा) आज सुबह स्नान के बाद शिवालय जाएं। शिवलिंग पर कच्चा दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल (पंचामृत) अर्पित करें। बेलपत्र पर सफेद चंदन से 'राम' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे मानसिक शांति मिलेगी और चंद्रमा (मन का कारक) मजबूत होगा। 3. गणतंत्र दिवस विशेष उपाय (सरकारी लाभ के लिए) यदि आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं या सरकारी काम अटका हुआ है, तो आज सूर्य देव को अर्घ्य देते समय जल में थोड़ा सा गुड़, लाल फूल और रोली मिलाएं। देशभक्ति का संकल्प लें और किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं। क्या कहते हैं सितारे? कुल मिलाकर, 26 जनवरी 2026 का दिन मेष, मिथुन, सिंह, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए अत्यंत भाग्यशाली रहने वाला है। इन राशियों के जातकों को किस्मत का पूरा साथ मिलेगा। वहीं, वृषभ, कन्या और मकर राशि वालों को थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। गणतंत्र दिवस का यह पर्व हम सभी को अनुशासन (शनि-सूर्य) और देशभक्ति (मंगल-चंद्रमा) का संदेश दे रहा है। ग्रहों की स्थिति भारत के लिए भी शुभ संकेत दे रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर देश की साख और मजबूत होगी। खबरीलाल डेस्क की ओर से आप सभी को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! (अस्वीकरण: यह राशिफल ग्रहों की सामान्य गणना पर आधारित है। व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार परिणामों में भिन्नता हो सकती है। किसी भी बड़े निर्णय के लिए विद्वान ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।)
नई दिल्ली/मुंबई | बिजनेस डेस्क वर्ष 2026 का गणतंत्र दिवस भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है, लेकिन खरीदारों के लिए यह किसी झटके से कम नहीं है। वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने और चांदी की कीमतों (Gold-Silver Prices) ने अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।READ ALSO:-'अंगूठा लगाने' का झंझट होगा खत्म: आधार में होने जा रहा है अब तक का सबसे बड़ा 'Tech-Upgrade', जानें क्या है सरकार का 'विजन 2032' सोना, जिसे संकट का साथी माना जाता है, ने अपनी चमक से निवेशकों की आंखों को चौंधिया दिया है। जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने $5,000 प्रति औंस का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं घरेलू बाजार में यह ₹1,60,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ते हुए नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। चांदी की चमक भी कम नहीं हुई है और यह ₹3.34 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर को छू रही है। हालांकि, आज दिल्ली के बाजार में मामूली सी सुस्ती देखी गई, लेकिन पिछले एक हफ्ते की तेजी ने बाजार का पूरा गणित बदल कर रख दिया है। महा-विस्फोट: क्यों लगी है कीमतों में यह आग? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण 'वैश्विक अनिश्चितता' (Global Uncertainty) है। जब भी दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव या आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक शेयर बाजार या मुद्रा बाजार से पैसा निकालकर 'सुरक्षित हेवन' (Safe Haven Assets) मानी जाने वाली संपत्तियों में लगाते हैं। सोना और चांदी सदियों से निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते रहे हैं। आज के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली है: अंतरराष्ट्रीय बाजार: सोने ने पहली बार $5,000 प्रति औंस का ऐतिहासिक स्तर पार किया है। यह एक ऐसा मनोवैज्ञानिक बैरियर था, जिसके टूटने की कल्पना विश्लेषक साल के अंत तक कर रहे थे, लेकिन यह जनवरी में ही संभव हो गया। घरेलू बाजार (भारत): भारत में 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव ₹1,60,250 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी ने भी लंबी छलांग लगाते हुए ₹3,34,900 प्रति किलोग्राम का स्तर छू लिया है। यह उछाल केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि निवेशकों का भरोसा कागजी मुद्रा (Currency) के मुकाबले ठोस धातुओं (Hard Assets) पर बढ़ रहा है। राजधानी दिल्ली का हाल: रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर आज ₹10 की मामूली राहत देश की राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज कीमतों में एक बेहद मामूली सुधार देखने को मिला, जिसे 'ऊंट के मुंह में जीरा' कहा जा सकता है। ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद, आज यानी 26 जनवरी को सोने के भाव में मात्र ₹10 की गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना (दिल्ली): आज ₹10 सस्ता होकर ₹1,60,040 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। 22 कैरेट सोना (दिल्ली): आभूषण बनाने में इस्तेमाल होने वाला यह सोना भी ₹10 टूटकर ₹1,47,040 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। हालांकि, यह गिरावट खरीदारों को कोई खास राहत देने वाली नहीं है, क्योंकि कीमतें अभी भी ₹1.60 लाख के स्तर के ऊपर बनी हुई हैं। यह गिरावट तकनीकी रूप से 'प्रोफिट बुकिंग' (Profit Booking) का नतीजा मानी जा सकती है, जहाँ निवेशक ऊंचे दामों पर थोड़ा मुनाफा वसूलते हैं। बीते हफ्ते की तूफानी तेजी: 7 दिनों में बदला पूरा मंजर आज की ₹10 की गिरावट को समझने के लिए हमें पिछले एक हफ्ते (19 जनवरी से 25 जनवरी) के आंकड़ों को देखना होगा। यह हफ्ता सोने के लिए किसी 'रॉकेट' से कम नहीं था। 24 कैरेट में उछाल: केवल 7 दिनों के भीतर 24 कैरेट सोने की कीमतों में ₹16,480 प्रति 10 ग्राम की भारी भरकम तेजी दर्ज की गई। 22 कैरेट में उछाल: ज्वैलरी गोल्ड यानी 22 कैरेट सोने में भी लगभग ₹15,100 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई। इतनी कम अवधि में इतना बड़ा उछाल बताता है कि बाजार में 'पैनिक बाइंग' (Panic Buying) की स्थिति बनी हुई थी। देश के 10 बड़े शहरों का 'गोल्ड मीटर': जानें कहाँ क्या है भाव आज देश के प्रमुख महानगरों में सोने के भाव लगभग एक सीमित दायरे में बने हुए हैं, लेकिन कुछ शहरों में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है। मुंबई और कोलकाता, जो सर्राफा व्यापार के बड़े केंद्र हैं, वहां भाव अपने चरम पर हैं। नीचे दी गई तालिका में आप अपने शहर के अनुसार आज (26 जनवरी) के सोने के भाव देख सकते हैं: शहर (City) 24 कैरेट (10 ग्राम) 22 कैरेट (10 ग्राम) 18 कैरेट (10 ग्राम) दिल्ली ₹1,60,040 ₹1,47,040 ₹1,20,330 मुंबई ₹1,60,250 ₹1,46,890 ₹1,20,180 कोलकाता ₹1,60,250 ₹1,46,890 ₹1,20,180 चेन्नई ₹1,59,480 ₹1,47,490 ₹1,22,990 बेंगलुरु ₹1,60,250 ₹1,46,890 ₹1,20,180 हैदराबाद ₹1,60,250 ₹1,46,890 ₹1,20,180 लखनऊ ₹1,60,040 ₹1,47,040 ₹1,20,330 पटना ₹1,60,300 ₹1,46,940 ₹1,20,230 जयपुर ₹1,60,040 ₹1,47,040 ₹1,20,330 अहमदाबाद ₹1,60,300 ₹1,46,940 ₹1,20,230 विश्लेषण: सबसे महंगा सोना: पटना और अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना ₹1,60,300 के स्तर पर है, जो दिल्ली से थोड़ा अधिक है। चेन्नई में विरोधाभास: चेन्नई में 24 कैरेट सोना अन्य महानगरों के मुकाबले थोड़ा सस्ता (₹1,59,480) है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वहां 22 कैरेट सोने का भाव (₹1,47,490) दिल्ली और मुंबई से भी ज्यादा है। यह वहां की स्थानीय मांग और ज्वैलरी मेकिंग चार्जेज की संरचना के कारण हो सकता है। समानता: मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में भाव एक समान ₹1,60,250 पर चल रहे हैं, जो एक एकीकृत बाजार धारणा (Market Sentiment) का संकेत देता है। चांदी की चाल: ₹3.34 लाख के पार, लेकिन आज थोड़ी नरमी सोने की तरह चांदी भी निवेशकों की पसंदीदा बनी हुई है। औद्योगिक मांग और निवेश मांग के दोहरे इंजन ने चांदी की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। आज की स्थिति: एक दिन की स्थिरता के बाद आज चांदी की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता: यहाँ चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹3,34,900 प्रति किलोग्राम पर बिक रही है। चेन्नई का हाल: दक्षिण भारत में चांदी की चमक सबसे ज्यादा है। चेन्नई में चांदी का भाव ₹3,64,900 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया है, जो उत्तर भारत के मुकाबले करीब ₹30,000 अधिक है। साप्ताहिक प्रदर्शन (The Weekly Rally): चांदी ने पिछले कारोबारी हफ्ते (19-25 जनवरी) में जिस तरह की तेजी दिखाई, उसने विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया। ₹40,000 की छलांग: केवल एक हफ्ते के उतार-चढ़ाव के दौरान चांदी की कीमतों में करीब ₹40,000 प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई। कारण: मजबूत रिटेल मांग (Strong Retail Demand), मोमेंटम आधारित निवेश (Momentum Trading) और फिजिकल मार्केट में सप्लाई की कमी (Supply Shortage) ने चांदी को रॉकेट बना दिया। विशेष रूप से ईवी (EV) सेक्टर और ग्रीन एनर्जी में चांदी के बढ़ते उपयोग ने इसकी औद्योगिक मांग को मजबूत किया है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा दौर 'सोने की नई महामंदी' का नहीं, बल्कि 'महा-तेजी' (Super Cycle) का है। ₹1.60 लाख का स्तर पार करना भारतीय रुपये के कमजोर होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मजबूती दोनों का परिणाम है। शादियों का सीजन: भारत में शादियों का सीजन चल रहा है। ऐसे में 22 कैरेट सोने का ₹1.47 लाख के पार जाना आम आदमी के बजट को बुरी तरह बिगाड़ सकता है। पोर्टफोलियो में बदलाव: जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में सोना था, उन्हें जबरदस्त रिटर्न मिला है। 18 कैरेट सोना, जो डायमंड ज्वैलरी में इस्तेमाल होता है, वह भी ₹1.20 लाख के पार है, जिससे डायमंड ज्वैलरी भी महंगी हो जाएगी। आगे क्या? सोने और चांदी की यह ऐतिहासिक तेजी यह बताती है कि दुनिया अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। ₹10 या ₹100 की दैनिक गिरावट महज एक छोटा सा सुधार है, लेकिन दीर्घकालिक ट्रेंड (Long-term Trend) अभी भी बेहद मजबूत और ऊपर की ओर (Bullish) बना हुआ है। खरीदारों के लिए यह 'देखो और इंतजार करो' (Wait and Watch) की स्थिति हो सकती है, लेकिन निवेशकों के लिए यह अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने का एक प्रमाण है। अगले कुछ दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सोना ₹1.60 लाख के इस नए आधार (Base) को बनाए रखता है या यहां से कुछ मुनाफावसूली हावी होती है। (नोट: ऊपर दिए गए सोने और चांदी के रेट सांकेतिक हैं और इनमें जीएसटी (GST) या मेकिंग चार्जेज शामिल नहीं हैं। सटीक भाव के लिए कृपया अपने स्थानीय ज्वैलर से संपर्क करें।)
भारत की डिजिटल पहचान 'आधार' (Aadhaar) जल्द ही एक नए और हाई-टेक अवतार में नजर आने वाला है। सरकार ने आधार के तकनीकी ढांचे को पूरी तरह से बदलने के लिए 'आधार विजन 2032' (Aadhaar Vision 2032) दस्तावेज तैयार कर लिया है। इस नए विजन का उद्देश्य आधार को न केवल तेज और सुरक्षित बनाना है, बल्कि इसे फ्रॉड-फ्री (धोखाधड़ी मुक्त) भी करना है। सबसे बड़ा बदलाव बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन में देखने को मिलेगा, जहां फिंगरप्रिंट की जगह अब फेशियल रिकग्निशन (Facial Recognition) यानी चेहरे से पहचान को प्राथमिकता दी जाएगी।READ ALSO:-अलर्ट! ट्रैफिक चालान या टोल टैक्स नहीं भरा तो नेशनल हाईवे पर ड्राइविंग भूल जाएं; सरकार कस रही है नकेल, बजट सत्र में आएगा ऐतिहासिक प्रस्ताव यूआईडीएआई (UIDAI) के सीईओ भुवनेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि भले ही लक्ष्य 2032 का है, लेकिन तैयारियां भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों को ध्यान में रखकर अभी से शुरू कर दी गई हैं। फेशियल रिकग्निशन: सुरक्षा और सुविधा का नया स्तर अब तक आधार वेरिफिकेशन के लिए मुख्य रूप से फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल होता आया है, लेकिन अक्सर तकनीकी खामियों या उंगलियों के निशान मिटने (खासकर बुजुर्गों और मजदूरों में) के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 'आधार विजन 2032' के तहत सरकार का लक्ष्य इस निर्भरता को खत्म करना है। 100 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन का लक्ष्य: वर्तमान में रोजाना लगभग 9 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन होते हैं, जिनमें से करीब 1 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए किए जा रहे हैं। सरकार ने इसे बढ़ाकर हर महीने 100 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन करने का लक्ष्य रखा है। एआई का इस्तेमाल: नई व्यवस्था में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम समय-समय पर यूजर के फेशियल डेटा को ऑटोमैटिकली अपडेट करेगा। इसका फायदा यह होगा कि लोगों को बार-बार आधार केंद्र जाकर अपना बायोमेट्रिक अपडेट नहीं कराना पड़ेगा। क्वांटम कंप्यूटिंग और ब्लॉकचेन से अभेद्य होगी सुरक्षा डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए यूआईडीएआई तकनीकी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। नए रोडमैप में क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum Computing) और ब्लॉकचेन (Blockchain) जैसी तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की गई है। क्वांटम कंप्यूटिंग के जरिए आधार के डेटा को इतना सुरक्षित बनाया जाएगा कि भविष्य के सुपरकंप्यूटर भी इसकी एन्क्रिप्शन (Encryption) को तोड़ न सकें। वहीं, ब्लॉकचेन तकनीक डेटा में पारदर्शिता लाएगी और किसी भी तरह की छेड़छाड़ को असंभव बना देगी। यूआईडीएआई का मौजूदा तकनीकी अनुबंध 2027 में समाप्त हो रहा है, जिसके बाद 2032 तक के लिए नया और उन्नत तकनीकी ढांचा लागू किया जाएगा। विशेषज्ञ समिति ने तैयार किया रोडमैप इस महत्वकांक्षी दस्तावेज को तैयार करने के लिए पिछले साल अक्टूबर में यूआईडीएआई के चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। समिति अपने प्रस्ताव को अगले महीने अंतिम रूप देगी और मार्च तक इसे यूआईडीएआई को सौंप दिया जाएगा। समिति में देश-विदेश के दिग्गज तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं: विवेक राघवन (सह-संस्थापक, सर्वम् एआई) धीरज पांडेय (संस्थापक, न्यूटनिक्स) डॉ. पी. पूर्णचंद्रन (अमृता यूनिवर्सिटी) प्रो. अनिल जैन (मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी) मयंक वत्स (आईआईटी जोधपुर) बच्चों और किशोरों के लिए विशेष राहत सरकार ने बच्चों और किशोरों के आधार अपडेट को लेकर भी बड़ी जानकारी साझा की है। दिसंबर तक करीब 5 करोड़ बच्चों और किशोरों का बायोमेट्रिक अपडेट पूरा कर लिया गया है। आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि बायोमेट्रिक अपडेट की यह प्रक्रिया सितंबर 2026 तक मुफ्त जारी रहेगी। इससे अभिभावकों को अपने बच्चों के आधार को अपडेट रखने में आसानी होगी और उन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। 'आधार विजन 2032' भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग का समावेश न केवल डेटा सुरक्षा को मजबूती देगा, बल्कि आम आदमी के लिए सेवाओं का लाभ उठाना और भी आसान बना देगा। फेशियल रिकग्निशन की तरफ बढ़ता यह कदम बताता है कि भारत अब डिजिटल पहचान के मामले में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। सरकार 'आधार विजन 2032' के जरिए आधार को हाई-टेक बना रही है। इसमें फिंगरप्रिंट की जगह फेशियल रिकग्निशन पर जोर होगा और सुरक्षा के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। बच्चों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट सितंबर 2026 तक फ्री रहेगा।
कहते हैं कि बच्चों का मन कांच की तरह नाजुक होता है, जरा सी ठेस लगे तो बिखर जाता है। लेकिन कभी-कभी यह बिखराव इतना भयानक होता है कि पूरा परिवार हमेशा के लिए टूट जाता है। उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी ही खबर सामने आई है, जिसने हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहाँ एक मां का अपने बेटे को पढ़ाई के लिए टोकना और दोस्तों के सामने डांटना इतना भारी पड़ गया कि 14 साल के बेटे ने अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर ली।Read also:-UGC के 'नए कानून' से सुलग उठा उत्तर भारत: सवर्णों ने भाजपाइयों के लिए टांगे 'नो एंट्री' के बोर्ड, करणी सेना ने फूंका आंदोलन का बिगुल आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगे, दोस्तों का शोर और बसंत का उल्लास—सब कुछ एक पल में सन्नाटे में बदल गया। शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि आज की पीढ़ी के घटते धैर्य और बढ़ते गुस्से का एक खौफनाक उदाहरण है। आइये, इस पूरे मामले की गहराई में जाते हैं और समझते हैं कि आखिर उस डेढ़ घंटे में ऐसा क्या हुआ जिसने हंसते-खेलते अनंत को मौत के गले लगाने पर मजबूर कर दिया। घटनाक्रम: वह काली दोपहर यह घटना मेरठ के नौचंदी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पॉश इलाके शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की है। तारीख थी 26 जनवरी, यानी गणतंत्र दिवस। पूरा देश जश्न में डूबा था और बसंत पंचमी के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पतंगबाजी का जोर था। अनंत चौहान (14 वर्ष), जो विद्या मंदिर स्कूल में कक्षा 9 का होनहार छात्र था, पिछले तीन दिनों से लगातार पतंगबाजी का लुत्फ उठा रहा था। उसके पिता, विनय चौहान, जो पेशे से ड्राइवर हैं, अपनी मेहनत से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार की तरह उनकी भी अपने बेटे से यही उम्मीद थी कि वह पढ़-लिखकर कुछ बड़ा करे। समय: सुबह 11:00 बजे अनंत अपने घर की छत पर दोस्तों के साथ मौजूद था। पिछले दो दिनों से बारिश और मौसम खराब होने के बावजूद उसका पतंग उड़ाने का जुनून कम नहीं हुआ था। 26 जनवरी की छुट्टी होने के कारण वह सुबह ही छत पर चढ़ गया था। इसी दौरान उसकी मां छत पर पहुंची। बेटे को लगातार तीसरे दिन पढ़ाई छोड़कर पतंग उड़ाते देख उनका सब्र जवाब दे गया। मां ने स्वाभाविक गुस्से में, जैसा कि हर भारतीय घर में होता है, अनंत को डांट दिया। लेकिन यहाँ एक गलती हो गई—डांट अकेले में नहीं, बल्कि उसके दोस्तों के सामने पड़ी। मां ने कहा, "अब पतंग नहीं उड़ाओ, जाकर पढ़ाई करो। पिछले 3 दिन से तो पतंग ही उड़ा रहे हो।" समय: दोपहर 11:15 बजे से 12:30 बजे के बीच मां की यह बात अनंत के दिल पर तीर की तरह लगी। दोस्तों के सामने अपमानित महसूस कर वह गुस्से में तमतमाता हुआ छत से नीचे आया और सीधे मकान की दूसरी मंजिल पर बने अपने कमरे में चला गया। उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। नीचे घर में किसी को अंदाजा नहीं था कि ऊपर कमरे में अनंत क्या सोच रहा है। मां को लगा कि बेटा गुस्से में है, थोड़ी देर में शांत हो जाएगा और पढ़ने लगेगा। पिता अपने काम में व्यस्त थे या घर के अन्य सदस्यों को लगा कि यह सामान्य 'टीनेज टेंट्रम' (किशोरावस्था का नखरा) है। लेकिन कमरे के अंदर अनंत जिंदगी और मौत का फैसला ले रहा था। समय: दोपहर 12:30 बजे करीब डेढ़ घंटे बीत चुके थे। छत पर अनंत के दोस्त अभी भी पतंग उड़ा रहे थे। जब अनंत काफी देर तक वापस नहीं आया, तो उसके दोस्तों को चिंता हुई। वे पतंग समेटकर नीचे उतरे और अनंत को खोजते हुए उसके कमरे की तरफ गए। दरवाजा या तो खुला था या दोस्तों ने खिड़की से झांका—दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अनंत का शरीर दुपट्टे के सहारे पंखे/हुक से लटका हुआ था। चीख-पुकार और अस्पताल की दौड़ दोस्तों की चीख ने पूरे घर को हिला दिया। उनकी आवाज सुनकर अनंत के माता-पिता और अन्य परिजन बदहवास होकर दौड़ते हुए दूसरी मंजिल पर पहुंचे। सामने का मंजर देखकर मां वहीं बेसुध होने लगीं। जिस बेटे को अभी डेढ़ घंटे पहले पढ़ाई के लिए डांटा था, वह अब शांत हो चुका था। आनन-फानन में पड़ोसियों की मदद से अनंत को फंदे से नीचे उतारा गया। उम्मीद की एक धुंधली किरण बाकी थी कि शायद सांसें चल रही हों। परिजन उसे लेकर तुरंत पास के लोकप्रिय अस्पताल भागे। अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में डॉक्टरों ने अनंत की जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एक 14 साल का बच्चा, जो सुबह तक आसमान में पेंच लड़ा रहा था, अब दुनिया छोड़ चुका था। पुलिस कार्यवाही और परिवार का इनकार घटना की सूचना मिलते ही नौचंदी थाने की पुलिस मौके पर और अस्पताल पहुंची। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत शव का पंचनामा भरने और पोस्टमार्टम कराने की बात कही। यह एक मानक प्रक्रिया है ताकि मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सके। हालांकि, अनंत के परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि यह एक दुर्घटना है और वे अपने बेटे के शरीर की चीर-फाड़ नहीं चाहते। वे पहले से ही गहरे सदमे में थे और कानूनी पचड़ों में नहीं पड़ना चाहते थे। चूंकि मामला आत्महत्या का था और परिवार की तरफ से कोई संदिग्ध परिस्थिति या किसी के खिलाफ शिकायत नहीं जताई गई, पुलिस ने परिजनों की भावनाओं और कानूनी प्रावधानों का सम्मान करते हुए शव को बिना पोस्टमार्टम के उन्हें सौंप दिया। "दोस्तों के सामने बेइज्जती": एक जानलेवा ट्रिगर इस पूरी घटना में जो सबसे महत्वपूर्ण पहलू उभरकर आया है, वह है—"दोस्तों के सामने डांटना"। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, 13 से 18 वर्ष की उम्र (किशोरावस्था) में बच्चों के लिए उनका 'पीयर ग्रुप' (दोस्तों का समूह) सबसे ज्यादा अहम होता है। इस उम्र में बच्चों के अंदर 'Self-Identity' (आत्म-पहचान) बन रही होती है। उनके लिए दोस्तों के बीच उनकी छवि, उनके माता-पिता की राय से भी ज्यादा मायने रखती है। अहंकार (Ego) की चोट: जब मां ने दोस्तों के सामने अनंत को डांटा, तो उसे अपनी 'इमेज' खराब होती महसूस हुई। उसे लगा कि अब दोस्त उसका मजाक उड़ाएंगे। आवेग (Impulse): किशोरावस्था में दिमाग का 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (जो निर्णय लेने और भावनाओं को नियंत्रित करने का काम करता है) पूरी तरह विकसित नहीं होता। यही कारण है कि किशोर गुस्से में बिना परिणाम सोचे घातक कदम उठा लेते हैं। अनंत के साथ भी यही हुआ। वह गुस्सा बर्दाश्त नहीं कर पाया। क्या सिर्फ एक डांट वजह थी? सतही तौर पर देखने पर लगता है कि मां की डांट की वजह से बच्चे ने जान दे दी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदम के पीछे कई परतें होती हैं: एग्जाम का दबाव: जनवरी का अंत और फरवरी की शुरुआत बच्चों के लिए तनावपूर्ण होती है क्योंकि फाइनल एग्जाम (Final Exams) सिर पर होते हैं। हो सकता है अनंत के मन में पढ़ाई को लेकर पहले से ही तनाव हो, और मां की डांट ने उस तनाव को 'ट्रिगर' कर दिया हो। संवाद की कमी: क्या अनंत अपनी बातें अपने माता-पिता से शेयर करता था? अक्सर जब बच्चों और पेरेंट्स के बीच 'दोस्ताना संवाद' की कमी होती है, तो बच्चे अपनी हताशा जाहिर नहीं कर पाते और उसे अंदर ही अंदर घोंटते रहते हैं। सहनशीलता की कमी (Low Tolerance): आज की पीढ़ी में 'ना' सुनने की आदत या अपमान सहने की शक्ति कम होती जा रही है। डिजिटल युग में 'इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन' (तुरंत संतुष्टि) की आदत ने धैर्य को कम कर दिया है। अभिभावकों के लिए वेक-अप कॉल: क्या करें, क्या न करें? मेरठ की यह घटना हर उस माता-पिता के लिए एक चेतावनी है जिनके घर में बढ़ते बच्चे (Teenagers) हैं। परवरिश अब सिर्फ खाना खिलाने और स्कूल भेजने तक सीमित नहीं है, यह एक मनोवैज्ञानिक जिम्मेदारी बन गई है। विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई 5 महत्वपूर्ण बातें: सार्वजनिक रूप से न डांटें (No Public Shaming): सबसे महत्वपूर्ण नियम—अपने बच्चे को कभी भी उसके दोस्तों, रिश्तेदारों या पड़ोसियों के सामने न डांटें। अगर आपको उसकी गलती बतानी है, तो उसे अकेले में ले जाकर समझाएं। सार्वजनिक डांट बच्चे के आत्म-सम्मान को कुचल देती है। गुस्से को पहचानें: अगर आपका बच्चा डांटने पर बहुत ज्यादा आक्रामक हो रहा है या बिल्कुल चुप हो गया है, तो इसे नजरअंदाज न करें। अनंत कमरे में गया और डेढ़ घंटे तक बाहर नहीं आया। अगर उसी समय मां या पिता जाकर उससे बात कर लेते, उसके सिर पर हाथ फेर देते, तो शायद यह घटना नहीं होती। तुलना न करें: "शर्मा जी के बेटे को देखो", "तुम्हारे दोस्त कितना पढ़ रहे हैं"—ऐसी तुलना बच्चों को डिप्रेशन में डाल देती है। हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। हॉबीज का सम्मान करें: अनंत को पतंग उड़ाना पसंद था। पढ़ाई जरूरी है, लेकिन अगर साल में एक-दो दिन त्योहार पर बच्चा खेल रहा है, तो उसे थोड़ी छूट दी जा सकती है। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाने में उसकी मदद करें, उसे रोके नहीं। कम्युनिकेशन गैप खत्म करें: अपने बच्चों से रोज कम से कम 20 मिनट बिना किसी उपदेश के बात करें। उनकी सुनें, अपनी सुनाएं। ताकि जब वे मुसीबत में हों, तो कमरे का दरवाजा बंद करने के बजाय आपके पास आएं। पड़ोस और स्कूल में पसरा मातम शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की उस गली में अब सन्नाटा है जहाँ कल तक शोर था। अनंत के दोस्तों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार यही कह रहे हैं, "अगर हमें पता होता कि वो ऐसा कर लेगा, तो हम उसे डांट पड़ने ही नहीं देते, या हम उसे अकेला नहीं छोड़ते।" विद्या मंदिर स्कूल में, जहाँ अनंत पढ़ता था, वहां भी शोक की लहर है। शिक्षकों और सहपाठियों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि उनकी क्लास का एक छात्र अब कभी वापस नहीं आएगा। स्कूल प्रशासन भी अब विचार कर रहा है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' पर काउंसलिंग सेशन आयोजित किए जाएं। सामाजिक परिदृश्य: पतंगबाजी का जुनून और जोखिम पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मेरठ, हापुड़ और मुजफ्फरनगर में बसंत पंचमी और स्वतंत्रता/गणतंत्र दिवस पर पतंगबाजी का एक अलग ही जुनून होता है। यह संस्कृति का हिस्सा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह जुनून जानलेवा होता जा रहा है। कभी चाइनीज मांझे से राहगीरों की गर्दन कटने की खबरें आती हैं। कभी छत से गिरकर बच्चों की मौत होती है। और अब, पतंग उड़ाने से रोकने पर आत्महत्या जैसा कदम। यह दर्शाता है कि मनोरंजन का एक साधन कैसे जीवन और मरण का प्रश्न बन गया है। समाज को भी यह सोचना होगा कि त्योहारों को उत्सव की तरह कैसे मनाया जाए, न कि उन्माद की तरह। एक अधूरा सपना अनंत के पिता विनय चौहान एक ड्राइवर हैं। उन्होंने अपने बेटे के लिए न जाने कितने सपने देखे होंगे। वे शायद धूप और बारिश में गाड़ी चलाते वक्त यही सोचते होंगे कि मेरा बेटा पढ़-लिखकर अफ़सर बनेगा, एसी कमरे में बैठेगा। लेकिन एक क्षण के आवेग ने उन सपनों की डोरी हमेशा के लिए काट दी। यह घटना हमें सिखाती है कि जिंदगी किसी भी परीक्षा, किसी भी पतंग और किसी भी डांट से कहीं ज्यादा कीमती है। हमें अपने बच्चों को यह सिखाना होगा कि "विफलता" या "डांट" जीवन का अंत नहीं है। और हमें खुद को यह सिखाना होगा कि बच्चों को पालना, कांच के बर्तन को संभालने जैसा है—बहुत सावधानी, बहुत प्यार और बहुत समझदारी की जरूरत है। अनंत तो चला गया, लेकिन अनंत सवाल छोड़ गया है। उम्मीद है कि मेरठ की इस घटना से हम सब सबक लेंगे ताकि किसी और घर का चिराग इस तरह न बुझे। संक्षिप्त सारणी (Quick Summary) विवरण जानकारी मृतक का नाम अनंत चौहान उम्र/कक्षा 14 वर्ष, कक्षा 9 पिता का नाम विनय चौहान (पेशा: ड्राइवर) घटना स्थल शास्त्रीनगर सेक्टर-3, मेरठ घटना की तारीख 26 जनवरी (सोमवार) वजह मां द्वारा दोस्तों के सामने डांटना मृत्यु का कारण फांसी (आत्महत्या) पुलिस थाना नौचंदी थाना (नोट: यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया अकेले न रहें। अपने परिवार से बात करें या हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। जीवन अमूल्य है।)
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने मिर्जापुर की हालिया घटना को लेकर एक बेहद गंभीर और बड़ा बयान दिया है। रविवार को मिर्जापुर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अब लव जिहाद का स्वरूप बदल गया है। मिर्जापुर में जो हुआ, वह केवल लव जिहाद नहीं है, बल्कि अगर इसे 'जिम जिहाद' (Gym Jihad) कहा जाए, तो यह कतई गलत नहीं होगा।READ ALSO:-आगरा का 'संजय प्लेस हॉरर': ऑफिस के सन्नाटे में प्यार का खूनी अंत, प्रेमी ने प्रेमिका के सिर-पैर काटे, यमुना पुल पर खुले बोरे ने उगला मौत का सच बबीता चौहान का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने न केवल जिम संचालकों और ट्रेनरों की मंशा पर सवाल उठाए, बल्कि बुर्के की आड़ में होने वाली गतिविधियों और अभिभावकों की जिम्मेदारी पर भी खुलकर बात की। इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर बबीता चौहान ने जिम जिहाद को लेकर क्या तर्क दिए, मिर्जापुर का वह कौन सा मामला है जिसने इस बहस को जन्म दिया, और महिला सुरक्षा को लेकर आयोग अब क्या कदम उठाने जा रहा है। क्या है 'जिम जिहाद' (Gym Jihad)? बबीता चौहान का तर्क बबीता चौहान ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि धर्म विशेष के युवकों द्वारा नाम बदलकर या अपनी पहचान छिपाकर हिंदू युवतियों को प्रेम जाल में फंसाना अब पुराने तरीके (लव जिहाद) से आगे बढ़कर 'संस्थानिक जिहाद' का रूप ले रहा है। उन्होंने विशेष रूप से जिम (Gym) का उल्लेख करते हुए इसे जिम जिहाद की संज्ञा दी। उन्होंने कहा, "मिर्जापुर की घटना अब केवल लव जिहाद नहीं रही है। अगर इसे जिम जिहाद कहा जाए तो कतई गलत नहीं होगा। जिम में अब जितना जिहाद चल रहा है, उतना कहीं और नहीं चल रहा।" उनके अनुसार, जिम एक ऐसी जगह है जहाँ युवा लड़कियां अपनी फिटनेस और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जाती हैं। वहां वे अपने ट्रेनर पर भरोसा करती हैं। इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ ट्रेनर, जिनकी मानसिकता दूषित है, उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं। बबीता चौहान ने कहा कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र जैसा प्रतीत होता है, जहाँ शारीरिक प्रशिक्षण की आड़ में मानसिक ब्रेनवॉश किया जा रहा है। मिर्जापुर कांड और रमीज का कनेक्शन बबीता चौहान का यह बयान मिर्जापुर में हुई एक विशिष्ट घटना के संदर्भ में आया है। दरअसल, मिर्जापुर में एक जिम ट्रेनर रमीज (Rameez) पर आरोप है कि उसने एक युवती को अपने प्रेम जाल में फंसाया। आरोप है कि जिम ट्रेनिंग के दौरान नजदीकी बढ़ाई गई और बाद में युवती का शोषण किया गया। बबीता चौहान ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि "लव जिहाद को बढ़ावा देने वाला वह शख्स कोबरा सांप था। यह जो जिम जिहाद में शामिल रमीज जैसे लोग हैं, यह उसी के पैदा किए गए सपोले हैं।" उन्होंने प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार सख्त है। जिम जिहाद के मामले सामने आने के बाद कई लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं और जो बचे हैं, उन्हें भी जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। महिला ट्रेनर की अनिवार्यता पर जोर एक साल पहले उत्तर प्रदेश महिला आयोग ने एक प्रस्ताव रखा था कि महिलाओं के जिम और योग केंद्रों में महिला ट्रेनर का होना अनिवार्य किया जाए। अपने इस पुराने बयान को याद करते हुए बबीता चौहान ने कहा, "मुझे अपनी एक साल पुरानी वह बात याद आ रही है जिसमें मैंने जिम में महिला ट्रेनरों को शामिल किए जाने और बड़े ब्यूटी पार्लर व बुटीक में महिलाओं को अवश्य स्थान दिए जाने पर जोर दिया था।" उनका मानना है कि: सुरक्षा: अगर महिला जिम में महिला ट्रेनर होंगी, तो 'बैड टच' या गलत नीयत से छूने की घटनाओं पर लगाम लगेगी। रोजगार: इससे महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा। बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। विश्वास: परिवार वाले अपनी बेटियों को जिम भेजने में सुरक्षित महसूस करेंगे। आयोग का मानना है कि जिम, बुटीक और टेलरिंग की दुकानों पर जहां माप लेने का काम होता है, वहां पुरुषों के बजाय महिलाओं की नियुक्ति से 'जिम जिहाद' जैसे अपराधों को काफी हद तक रोका जा सकता है। "झांगुर बाबा" और जिहादी जाल पत्रकारों से वार्ता के दौरान बबीता चौहान ने एक स्थानीय संदर्भ या प्रतीकात्मक रूप में "झांगुर बाबा" का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सब उसी झांगुर का फैलाया हुआ जाल है। यह शब्दावली इस बात की ओर इशारा करती है कि वे इसे किसी एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह या मानसिकता (इकोसिस्टम) का हिस्सा मानती हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "इनसे बचने के लिए हमें सजग रहना होगा। क्योंकि जिम, बुटीक व ब्यूटी पार्लर जैसे स्थान उनके निशाने पर हैं।" बुर्के पर विवादास्पद और सीधा बयान बबीता चौहान ने बुर्के को लेकर भी अपनी बेबाक राय रखी। जब उनसे बुर्के को लेकर उनके पुराने बयानों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "आज बुर्के के पीछे क्या नहीं हो रहा, यह सब जानते हैं।" उनके प्रमुख बिंदु इस प्रकार थे: पहचान छिपाना: उनका कहना है कि बुर्के की आड़ में कई बार अपराधी अपनी पहचान छिपा लेते हैं। सुरक्षा का प्रश्न: उन्होंने उदाहरण दिया कि कई ज्वेलर्स ने सुरक्षा कारणों से अपनी दुकानों में बुर्का पहनकर आने वाली महिलाओं को प्रतिबंधित कर दिया है, ताकि चोरी या डकैती की वारदातों को रोका जा सके। सुनवाई के दौरान: उन्होंने बताया कि जब वे आयोग में सुनवाई करती हैं, तब भी कई महिलाएं बुर्का पहनकर आती हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "सवाल यह है उनके सामने बुर्का पहन के आने की क्या जरूरत है?" 6 साल की बच्ची का उदाहरण: अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने एक दर्दनाक घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "6 साल की बच्ची के साथ बुर्के में मौजूद हैवान ने गलत हरकत की, यह घटना किसी से छिपी नहीं है।" यह बयान स्पष्ट करता है कि महिला आयोग अध्यक्ष के अनुसार, परिधान की आड़ में सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और पहचान सुनिश्चित करना अनिवार्य है। अभिभावकों के लिए सलाह: "बच्चियों से संवाद बढ़ाएं" बबीता चौहान ने इस समस्या का एक बड़ा कारण परिवारों में बढ़ती दूरियों को बताया। उन्होंने कहा कि जिम जिहाद या लव जिहाद जैसे मामलों में फंसने का एक कारण यह भी है कि युवतियां अपने माता-पिता से कटी हुई हैं। उन्होंने अभिभावकों और महिलाओं को निम्नलिखित सलाह दी: बैकग्राउंड चेक: महिलाएं अपना दिमाग खोलकर किसी भी काम में शामिल हों। जिससे मिल रही हैं या जिससे दोस्ती कर रही हैं, उसकी पृष्ठभूमि (Background) जरूर देख लें। संवादहीनता खत्म करें: घरों के भीतर अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहने की जो प्रथा शुरू हो गई है, उसे खत्म करना होगा। माता-पिता को अपने बच्चों से बात करनी चाहिए ताकि वे बाहर की समस्याओं को घर पर साझा कर सकें। सुरक्षा ऑडिट: माता-पिता यह ध्यान रखें कि उनके बच्चे जिस जिम या सेंटर में जा रहे हैं, वह उनके लिए सुरक्षित है या नहीं। आयोग का एक्शन प्लान: जागरूकता अभियान उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग केवल बयानों तक सीमित नहीं है। अध्यक्ष बबीता चौहान ने बताया कि आयोग ने ऐसे प्रकरणों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने एक विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की है। जागरूकता: आयोग स्कूल, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जाकर महिला वर्ग को जागरूक करेगा। निगरानी: जिम और योगा सेंटर्स की निगरानी के लिए प्रशासन के साथ मिलकर काम किया जाएगा। पुलिस की भूमिका: उन्होंने कहा कि "जिहादियों के पीछे पुलिस पड़ चुकी है।" यूपी पुलिस मिशन शक्ति और अन्य अभियानों के तहत महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। जिम जिहाद: एक सामाजिक चुनौती बबीता चौहान का "जिम जिहाद" शब्द का प्रयोग करना दर्शाता है कि प्रशासन अब अपराध के बदलते तरीकों को डिकोड कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जिम एक ऐसा स्थान है जहाँ शारीरिक आकर्षण और स्वास्थ्य चर्चा के बीच भावनात्मक संबंध बनाना आसान होता है। इसी मनोवैज्ञानिक पहलू का फायदा उठाकर कुछ अपराधी प्रवृति के लोग युवतियों का शोषण करते हैं। आयोग का मानना है कि जब तक जिम संचालक पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराते और महिला ट्रेनर्स की नियुक्ति नहीं करते, तब तक यह खतरा बना रहेगा। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान का बयान यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार और आयोग महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है। मिर्जापुर की घटना को जिम जिहाद (Gym Jihad) का नाम देकर उन्होंने समाज को एक नए खतरे के प्रति आगाह किया है। चाहे वह बुर्के के पीछे की संदिग्ध गतिविधियों का मुद्दा हो या जिम और ब्यूटी पार्लर में पुरुष कर्मचारियों द्वारा शोषण का, आयोग ने साफ कर दिया है कि अब "आंख मूंदकर भरोसा करने का जमाना नहीं है।" बबीता चौहान के अनुसार, पुलिस की सख्ती के साथ-साथ पारिवारिक जागरूकता ही इस 'जाल' को काट सकती है। आने वाले दिनों में यूपी में जिम और योग सेंटर्स के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश देखने को मिल सकते हैं। यूपी महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने मिर्जापुर दौरे के दौरान कहा कि अब लव जिहाद का तरीका बदलकर 'जिम जिहाद' हो गया है। उन्होंने जिम ट्रेनर रमीज के मामले का हवाला देते हुए जिम और ब्यूटी पार्लर्स में महिला कर्मचारियों की अनिवार्यता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने बुर्के की आड़ में हो रहे अपराधों और अभिभावकों की सतर्कता पर भी बेबाक राय रखी।
नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए 'इक्विटी रेगुलेशन 2026' (Equity Regulation 2026) को लेकर देशभर में सवर्ण समाज का गुस्सा फूट पड़ा है। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और राजस्थान तक, इस नए कानून का जमकर विरोध हो रहा है। सवर्ण समाज के छात्र और संगठन इसे समाज को बांटने वाला और सवर्ण विरोधी बताकर सड़कों पर उतर आए हैं। करणी सेना (Karni Sena) ने इस मुद्दे पर देशभर में आंदोलन करने और दिल्ली कूच कर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की चेतावनी दी है।READ ALSO:-बिजनौर की 'लौह महिला' का दिल्ली में डंका: राष्ट्रपति मुर्मू ने डीएम जसजीत कौर को सौंपा राष्ट्रीय पुरस्कार, त्रुटिरहित मतदाता सूची के लिए देश भर में मिली सराहना यह विरोध प्रदर्शन भाजपा के लिए भी मुसीबत बनता जा रहा है, कई जगहों पर भाजपा नेताओं का बहिष्कार शुरू हो गया है। यूपी में भाजपा नेताओं का बहिष्कार, पोस्टर वॉर शुरू उत्तर प्रदेश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। मेरठ और हापुड़ में छात्र पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। हापुड़ के सिंभावली क्षेत्र के बक्सर में दर्जनों घरों के बाहर पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर साफ लिखा है कि "भाजपा नेता वोट मांगने ना आएं" और "यह सवर्ण समाज का घर है"। पोस्टरों पर 'सवर्ण अगेंस्ट बीजेपी' (Savarn Against BJP) के नारे भी लिखे गए हैं। विरोध की आग अमेठी तक पहुंच गई है, जहां भाजपा के एक बूथ अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया है। अमेठी के भेंटुआ ब्लॉक के कोरारी हीरशाह के बूथ संख्या 7 के अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने व्हाट्सएप के जरिए अपना इस्तीफा भेजते हुए कहा कि यूजीसी का नया कानून "समाज विभाजन का कानून" है और यह उनके "वैचारिक, सामाजिक और नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ" है। करणी सेना की दिल्ली कूच की चेतावनी राजस्थान के अलवर में करणी सेना ने यूजीसी के नए कानून का कड़ा विरोध किया है। करणी सेना ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार यह बिल लाकर "समाज में खाई खोदने का काम" कर रही है। उन्होंने कहा कि इस बिल का सीधा असर सवर्ण जाति की आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। करणी सेना ने ऐलान किया है कि इस बिल के विरोध में पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा और वे दिल्ली कूच कर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। यति नरसिंहानंद गिरि नजरबंद इस बीच, गाजियाबाद के डासना पीठ के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि को पुलिस ने नजरबंद कर दिया है। वह यूजीसी के नए कानून के विरोध में दिल्ली जाकर अनशन करने वाले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गाजियाबाद में ही रोक लिया। नरसिंहानंद गिरि ने योगी सरकार पर सवर्ण समाज की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बिल "पूरी तरह से सवर्ण विरोधी" है। बिहार में भी सुलग रही विरोध की आग बिहार में भी इस कानून का विरोध हो रहा है। मधुबनी सहित कई जिलों में सवर्ण समाज के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। वैशाली के हाजीपुर में एक कार्यक्रम के दौरान जब केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय से पत्रकारों ने यूजीसी मुद्दे पर सवाल किया, तो वे बचते नजर आए और 'हर हर महादेव' का उद्घोष करते हुए आगे बढ़ गए। आखिर क्या है यूजीसी का नया कानून, जिस पर मचा है बवाल? विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में 'यूजीसी एक्ट 2026 इक्विटी रेगुलेशन' लागू किया है, जिसे सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया गया है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना है। समान अवसर प्रकोष्ठ: नए नियमों के तहत, सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में अब अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 'समान अवसर प्रकोष्ठ' (Equal Opportunity Cell) बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पहले यह प्रावधान केवल एससी और एसटी के लिए था। विवाद का कारण: सबसे ज्यादा बवाल इस बात पर है कि नए नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी 'जातिगत भेदभाव' की श्रेणी में शामिल किया गया है। जनरल कैटेगरी (सवर्ण समाज) के छात्रों का तर्क है कि ओबीसी को पहले से ही आरक्षण जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, ऐसे में उन्हें इस नई श्रेणी में शामिल करने का क्या औचित्य है। उनका मानना है कि यह कानून सवर्ण छात्रों के हितों के खिलाफ है और समाज में भेदभाव को और बढ़ाएगा। यूजीसी का नया 'इक्विटी रेगुलेशन' एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले चुका है। सवर्ण समाज का यह आंदोलन केंद्र सरकार के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरा है, खासकर तब जब कई राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। देखना होगा कि सरकार इस विरोध से कैसे निपटती है और क्या वह इस कानून में कोई संशोधन करने पर विचार करती है या नहीं। यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए 'इक्विटी रेगुलेशन 2026' का सवर्ण समाज देशभर में विरोध कर रहा है। यूपी, बिहार और राजस्थान में प्रदर्शन हो रहे हैं। करणी सेना ने दिल्ली में आंदोलन की चेतावनी दी है। इस नए कानून के तहत विश्वविद्यालयों में अब एससी/एसटी के साथ-साथ ओबीसी के लिए भी 'समान अवसर प्रकोष्ठ' बनाना अनिवार्य है, जिसका सवर्ण छात्र विरोध कर रहे हैं।
नई दिल्ली/शिमला: देश भर में जब 77वें गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) का जश्न मनाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, वहीं मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 जनवरी 2026 के लिए उत्तर भारत, विशेषकर पहाड़ी राज्यों के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Active Western Disturbance) के चलते मौसम विभाग ने 'ऑरेंज अलर्ट' (Orange Alert) जारी किया है, जिसका सीधा असर गणतंत्र दिवस समारोहों और लंबी छुट्टी पर निकले पर्यटकों पर पड़ने वाला है।READ ALSO:-मेरठ में यूजीसी के नए फरमान के खिलाफ बिगुल: 'समानता सर्वेक्षण' या सामाजिक विभाजन? युवा ब्राह्मण समाज ने विनियमन-2026 को बताया शिक्षा जगत के लिए 'काला अध्याय' हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की ऊंची चोटियों पर भारी बर्फबारी (Heavy Snowfall) की चेतावनी दी गई है, जबकि मैदानी इलाकों में बारिश और शीतलहर का प्रकोप देखने को मिलेगा। इस बीच, प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए होटलों और टैक्सी संचालकों के लिए एक विशेष और सख्त एडवाइजरी जारी की है, जिसका मूल मंत्र है—"मुनाफा नहीं, मदद"। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि 26 जनवरी को आपके शहर का मौसम कैसा रहेगा, पर्यटकों के लिए क्या निर्देश हैं और आने वाले 2-3 दिनों में मौसम क्या गुल खिलाने वाला है। गणतंत्र दिवस पर कुदरत का 'कोल्ड स्ट्राइक' Mausam Update 26 January 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 26 जनवरी का दिन उत्तर भारत के लिए हड्डियों को जमा देने वाली ठंड लेकर आ रहा है। IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा। इसका प्रभाव 25 जनवरी की रात से ही दिखना शुरू हो जाएगा, लेकिन 26 जनवरी को इसकी तीव्रता चरम पर होगी। पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी का दौर शुरू होने के साथ ही मैदानी इलाकों, विशेषकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर में बर्फीली हवाएं (Icy Winds) ठिठुरन बढ़ाएंगी। मौसम विभाग का कहना है कि यह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस इस सीजन का सबसे मजबूत सिस्टम हो सकता है। हिमाचल प्रदेश: -18°C तक लुढ़केगा पारा, तूफानी हवाओं का अलर्ट हिमाचल प्रदेश में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर रहने का अनुमान है। IMD के आंकड़ों के अनुसार, 26 जनवरी को राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में दिन के समय 45% और रात के समय 75% तक बर्फबारी की संभावना है। यह आंकड़ा बताता है कि गणतंत्र दिवस की रात पहाड़ पूरी तरह सफेद चादर में लिपट जाएंगे। तापमान में भारी गिरावट: राज्य के ऊपरी इलाकों में अधिकतम तापमान -13°C (माइनस 13 डिग्री) और न्यूनतम तापमान -18°C (माइनस 18 डिग्री) तक गिरने का अनुमान है। यह तापमान इतना कम है कि पानी की पाइपलाइन जमने और सड़कों पर 'ब्लैक आइस' (Black Ice) बनने का खतरा पैदा हो गया है। तेज हवाएं और बिजली: केवल बर्फबारी ही नहीं, बल्कि मौसम विभाग ने 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी है। हवा की दिशा दक्षिण-पूर्व (South-East) से रहेगी और इसकी गति 4 mph तक सामान्य रह सकती है लेकिन झोंके तेज होंगे। इसके साथ ही कई स्थानों पर बिजली गिरने (Lightning) की भी आशंका जताई गई है। पर्यटकों के लिए सख्त एडवाइजरी: 'मुनाफा नहीं, मदद' पहाड़ों पर खराब मौसम को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एक सराहनीय और सख्त कदम उठाया है। आपदा प्रबंधन और पर्यटन विभाग ने संयुक्त रूप से होटलों, होम-स्टे और टैक्सी यूनियनों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी का थीम है—'मुनाफा नहीं, मदद' (Profit not, Help)। प्रशासन के निर्देशों के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं: जबरन चेक-आउट पर रोक: होटलों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि भारी बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो जाती हैं, तो किसी भी पर्यटक को होटल से चेक-आउट (Check-out) करने के लिए मजबूर न किया जाए। पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। किराए में वृद्धि पर प्रतिबंध: आपदा या खराब मौसम को 'अवसर' मानकर पर्यटकों को लूटने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। होटल, टैक्सी या रेस्तरां संचालक तय दरों से अधिक किराया या सेवा शुल्क (Service Charge) नहीं वसूल सकेंगे। यदि कोई ऐसा करता पाया गया, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। यात्रा न करने की सलाह: प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे 26 और 27 जनवरी को अनावश्यक यात्रा से बचें। विशेषकर उन रास्तों पर जहां बर्फबारी के कारण सड़क संपर्क टूटने (Road Connectivity issues) का खतरा है। हेल्पलाइन नंबर: प्रशासन ने पर्यटकों की सहायता के लिए 24x7 कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं। यह एडवाइजरी उस समय आई है जब 26 जनवरी की लंबी छुट्टी (Long Weekend) के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक हिमाचल और कश्मीर का रुख कर रहे हैं। मैदानी इलाकों का हाल: कोहरा और शीतलहर पहाड़ों पर बर्फबारी का सीधा असर मैदानी राज्यों पर पड़ेगा। Mausam Update 26 January 2026 के अनुसार: पंजाब और हरियाणा: 26 जनवरी की सुबह पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में 'घने से बहुत घना कोहरा' (Dense to Very Dense Fog) छाया रहेगा। इससे विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम हो सकती है, जिससे गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों में खलल पड़ सकता है और यातायात प्रभावित होगा। शीतलहर (Cold Wave): राजस्थान के उत्तरी हिस्सों (चूरू, सीकर, बीकानेर) और हरियाणा में शीतलहर चलने की संभावना है। दिन का तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री नीचे रह सकता है। दिल्ली-NCR: राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी को आसमान में बादल छाए रहेंगे और ठंडी हवाएं चलेंगी। हालांकि, बारिश की मुख्य गतिविधि 27 जनवरी से शुरू होगी, लेकिन 26 तारीख को भी मौसम ठंडा और नम रहेगा। 27-28 जनवरी: बारिश और ओलावृष्टि का दौर मौसम विभाग ने केवल 26 जनवरी ही नहीं, बल्कि अगले दो दिनों के लिए भी चेतावनी जारी की है। 26 जनवरी को पहाड़ों पर शुरू हुआ यह सिस्टम 27 और 28 जनवरी को मैदानी इलाकों में अपनी ताकत दिखाएगा। दिल्ली-NCR में बारिश: IMD के मुताबिक, 27 जनवरी को दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में गरज के साथ बारिश (Thunderstorm with Rain) होने के आसार हैं। यह बारिश पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ने के कारण होगी। बारिश के कारण दिन के तापमान में 4°C से 8°C तक की भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे 'कोल्ड डे' (Cold Day) जैसी स्थिति बन सकती है। हिमाचल के इन जिलों में रेड अलर्ट: 27 जनवरी को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में भारी से बहुत भारी बर्फबारी का अनुमान है। यह वह समय होगा जब अटल टनल (Atal Tunnel) और रोहतांग दर्रा जैसे मार्ग पूरी तरह बंद हो सकते हैं। किसान और कृषि पर प्रभाव इस बेमौसम बारिश और बर्फबारी का मिश्रित प्रभाव कृषि पर पड़ेगा: फायदेमंद: गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए हल्की बारिश और पहाड़ों पर बर्फबारी अमृत समान है। इससे जमीन में नमी बनी रहेगी और तापमान कम होने से गेहूं की पैदावार अच्छी होगी। नुकसान: यदि मैदानी इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorm) होती है या बहुत तेज हवाएं चलती हैं, तो खड़ी फसलों के बिछने (Lodging) का खतरा है, जिससे किसानों को नुकसान हो सकता है। बागवानी किसानों, विशेषकर सेब उत्पादकों के लिए यह बर्फबारी 'व्हाइट गोल्ड' साबित होगी क्योंकि सेब की फसल के लिए 'चिलिंग आवर्स' (Chilling Hours) की जरूरत होती है। स्वास्थ्य और सुरक्षा सावधानियां मौसम में आ रहे इस बदलाव को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी सलाह जारी की है। तापमान में अचानक 4 से 8 डिग्री की गिरावट बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक हो सकती है। गणतंत्र दिवस परेड देखने जाने वाले: जो लोग सुबह परेड देखने खुले में जा रहे हैं, वे थ्री-लेयर वूलन (Three-layer woolens) पहनें। सिर और कान को ढककर रखें। हृदय रोगी: अत्यधिक ठंड खून को गाढ़ा करती है और ब्लड प्रेशर बढ़ाती है। दिल के मरीजों को सुबह की सैर (Morning Walk) से बचने और घर के अंदर रहने की सलाह दी गई है। ड्राइविंग: कोहरे के कारण दृश्यता कम रहेगी, इसलिए गाड़ियों में फॉग लैंप का इस्तेमाल करें और गति सीमा का पालन करें। जश्न के साथ सतर्कता भी जरूरी 26 जनवरी 2026 का गणतंत्र दिवस मौसम के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। एक तरफ जहां पहाड़ों पर बर्फबारी पर्यटकों को लुभा रही है, वहीं प्रशासन की 'मुनाफा नहीं, मदद' की अपील यह याद दिलाती है कि प्रकृति के आगे सुरक्षा ही सबसे बड़ा उपाय है। Mausam Update 26 January 2026 स्पष्ट करता है कि अगले 48 से 72 घंटे उत्तर भारत के लिए मौसम के लिहाज से उथल-पुथल भरे रहेंगे। पर्यटकों से अनुरोध है कि वे स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहें और मौसम विभाग के अपडेट्स को नजरअंदाज न करें। अगर आप पहाड़ों की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो सड़क की स्थिति जांच कर ही घर से निकलें। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 जनवरी 2026 के लिए पहाड़ी राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी और तापमान -18°C तक गिरने का अनुमान है। प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए होटलों को "मुनाफा नहीं, मदद" की नीति अपनाने और जबरन चेक-आउट न कराने का निर्देश दिया है। वहीं, 27-28 जनवरी को दिल्ली-NCR और पंजाब-हरियाणा में बारिश और तापमान में भारी गिरावट की संभावना है।
भारत की डिजिटल पहचान 'आधार' (Aadhaar) जल्द ही एक नए और हाई-टेक अवतार में नजर आने वाला है। सरकार ने आधार के तकनीकी ढांचे को पूरी तरह से बदलने के लिए 'आधार विजन 2032' (Aadhaar Vision 2032) दस्तावेज तैयार कर लिया है। इस नए विजन का उद्देश्य आधार को न केवल तेज और सुरक्षित बनाना है, बल्कि इसे फ्रॉड-फ्री (धोखाधड़ी मुक्त) भी करना है। सबसे बड़ा बदलाव बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन में देखने को मिलेगा, जहां फिंगरप्रिंट की जगह अब फेशियल रिकग्निशन (Facial Recognition) यानी चेहरे से पहचान को प्राथमिकता दी जाएगी।READ ALSO:-अलर्ट! ट्रैफिक चालान या टोल टैक्स नहीं भरा तो नेशनल हाईवे पर ड्राइविंग भूल जाएं; सरकार कस रही है नकेल, बजट सत्र में आएगा ऐतिहासिक प्रस्ताव यूआईडीएआई (UIDAI) के सीईओ भुवनेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि भले ही लक्ष्य 2032 का है, लेकिन तैयारियां भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों को ध्यान में रखकर अभी से शुरू कर दी गई हैं। फेशियल रिकग्निशन: सुरक्षा और सुविधा का नया स्तर अब तक आधार वेरिफिकेशन के लिए मुख्य रूप से फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल होता आया है, लेकिन अक्सर तकनीकी खामियों या उंगलियों के निशान मिटने (खासकर बुजुर्गों और मजदूरों में) के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 'आधार विजन 2032' के तहत सरकार का लक्ष्य इस निर्भरता को खत्म करना है। 100 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन का लक्ष्य: वर्तमान में रोजाना लगभग 9 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन होते हैं, जिनमें से करीब 1 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए किए जा रहे हैं। सरकार ने इसे बढ़ाकर हर महीने 100 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन करने का लक्ष्य रखा है। एआई का इस्तेमाल: नई व्यवस्था में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम समय-समय पर यूजर के फेशियल डेटा को ऑटोमैटिकली अपडेट करेगा। इसका फायदा यह होगा कि लोगों को बार-बार आधार केंद्र जाकर अपना बायोमेट्रिक अपडेट नहीं कराना पड़ेगा। क्वांटम कंप्यूटिंग और ब्लॉकचेन से अभेद्य होगी सुरक्षा डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए यूआईडीएआई तकनीकी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। नए रोडमैप में क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum Computing) और ब्लॉकचेन (Blockchain) जैसी तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की गई है। क्वांटम कंप्यूटिंग के जरिए आधार के डेटा को इतना सुरक्षित बनाया जाएगा कि भविष्य के सुपरकंप्यूटर भी इसकी एन्क्रिप्शन (Encryption) को तोड़ न सकें। वहीं, ब्लॉकचेन तकनीक डेटा में पारदर्शिता लाएगी और किसी भी तरह की छेड़छाड़ को असंभव बना देगी। यूआईडीएआई का मौजूदा तकनीकी अनुबंध 2027 में समाप्त हो रहा है, जिसके बाद 2032 तक के लिए नया और उन्नत तकनीकी ढांचा लागू किया जाएगा। विशेषज्ञ समिति ने तैयार किया रोडमैप इस महत्वकांक्षी दस्तावेज को तैयार करने के लिए पिछले साल अक्टूबर में यूआईडीएआई के चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। समिति अपने प्रस्ताव को अगले महीने अंतिम रूप देगी और मार्च तक इसे यूआईडीएआई को सौंप दिया जाएगा। समिति में देश-विदेश के दिग्गज तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं: विवेक राघवन (सह-संस्थापक, सर्वम् एआई) धीरज पांडेय (संस्थापक, न्यूटनिक्स) डॉ. पी. पूर्णचंद्रन (अमृता यूनिवर्सिटी) प्रो. अनिल जैन (मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी) मयंक वत्स (आईआईटी जोधपुर) बच्चों और किशोरों के लिए विशेष राहत सरकार ने बच्चों और किशोरों के आधार अपडेट को लेकर भी बड़ी जानकारी साझा की है। दिसंबर तक करीब 5 करोड़ बच्चों और किशोरों का बायोमेट्रिक अपडेट पूरा कर लिया गया है। आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि बायोमेट्रिक अपडेट की यह प्रक्रिया सितंबर 2026 तक मुफ्त जारी रहेगी। इससे अभिभावकों को अपने बच्चों के आधार को अपडेट रखने में आसानी होगी और उन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। 'आधार विजन 2032' भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग का समावेश न केवल डेटा सुरक्षा को मजबूती देगा, बल्कि आम आदमी के लिए सेवाओं का लाभ उठाना और भी आसान बना देगा। फेशियल रिकग्निशन की तरफ बढ़ता यह कदम बताता है कि भारत अब डिजिटल पहचान के मामले में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। सरकार 'आधार विजन 2032' के जरिए आधार को हाई-टेक बना रही है। इसमें फिंगरप्रिंट की जगह फेशियल रिकग्निशन पर जोर होगा और सुरक्षा के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। बच्चों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट सितंबर 2026 तक फ्री रहेगा।
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।
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कहते हैं कि बच्चों का मन कांच की तरह नाजुक होता है, जरा सी ठेस लगे तो बिखर जाता है। लेकिन कभी-कभी यह बिखराव इतना भयानक होता है कि पूरा परिवार हमेशा के लिए टूट जाता है। उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी ही खबर सामने आई है, जिसने हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहाँ एक मां का अपने बेटे को पढ़ाई के लिए टोकना और दोस्तों के सामने डांटना इतना भारी पड़ गया कि 14 साल के बेटे ने अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर ली।Read also:-UGC के 'नए कानून' से सुलग उठा उत्तर भारत: सवर्णों ने भाजपाइयों के लिए टांगे 'नो एंट्री' के बोर्ड, करणी सेना ने फूंका आंदोलन का बिगुल आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगे, दोस्तों का शोर और बसंत का उल्लास—सब कुछ एक पल में सन्नाटे में बदल गया। शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि आज की पीढ़ी के घटते धैर्य और बढ़ते गुस्से का एक खौफनाक उदाहरण है। आइये, इस पूरे मामले की गहराई में जाते हैं और समझते हैं कि आखिर उस डेढ़ घंटे में ऐसा क्या हुआ जिसने हंसते-खेलते अनंत को मौत के गले लगाने पर मजबूर कर दिया। घटनाक्रम: वह काली दोपहर यह घटना मेरठ के नौचंदी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पॉश इलाके शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की है। तारीख थी 26 जनवरी, यानी गणतंत्र दिवस। पूरा देश जश्न में डूबा था और बसंत पंचमी के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पतंगबाजी का जोर था। अनंत चौहान (14 वर्ष), जो विद्या मंदिर स्कूल में कक्षा 9 का होनहार छात्र था, पिछले तीन दिनों से लगातार पतंगबाजी का लुत्फ उठा रहा था। उसके पिता, विनय चौहान, जो पेशे से ड्राइवर हैं, अपनी मेहनत से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार की तरह उनकी भी अपने बेटे से यही उम्मीद थी कि वह पढ़-लिखकर कुछ बड़ा करे। समय: सुबह 11:00 बजे अनंत अपने घर की छत पर दोस्तों के साथ मौजूद था। पिछले दो दिनों से बारिश और मौसम खराब होने के बावजूद उसका पतंग उड़ाने का जुनून कम नहीं हुआ था। 26 जनवरी की छुट्टी होने के कारण वह सुबह ही छत पर चढ़ गया था। इसी दौरान उसकी मां छत पर पहुंची। बेटे को लगातार तीसरे दिन पढ़ाई छोड़कर पतंग उड़ाते देख उनका सब्र जवाब दे गया। मां ने स्वाभाविक गुस्से में, जैसा कि हर भारतीय घर में होता है, अनंत को डांट दिया। लेकिन यहाँ एक गलती हो गई—डांट अकेले में नहीं, बल्कि उसके दोस्तों के सामने पड़ी। मां ने कहा, "अब पतंग नहीं उड़ाओ, जाकर पढ़ाई करो। पिछले 3 दिन से तो पतंग ही उड़ा रहे हो।" समय: दोपहर 11:15 बजे से 12:30 बजे के बीच मां की यह बात अनंत के दिल पर तीर की तरह लगी। दोस्तों के सामने अपमानित महसूस कर वह गुस्से में तमतमाता हुआ छत से नीचे आया और सीधे मकान की दूसरी मंजिल पर बने अपने कमरे में चला गया। उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। नीचे घर में किसी को अंदाजा नहीं था कि ऊपर कमरे में अनंत क्या सोच रहा है। मां को लगा कि बेटा गुस्से में है, थोड़ी देर में शांत हो जाएगा और पढ़ने लगेगा। पिता अपने काम में व्यस्त थे या घर के अन्य सदस्यों को लगा कि यह सामान्य 'टीनेज टेंट्रम' (किशोरावस्था का नखरा) है। लेकिन कमरे के अंदर अनंत जिंदगी और मौत का फैसला ले रहा था। समय: दोपहर 12:30 बजे करीब डेढ़ घंटे बीत चुके थे। छत पर अनंत के दोस्त अभी भी पतंग उड़ा रहे थे। जब अनंत काफी देर तक वापस नहीं आया, तो उसके दोस्तों को चिंता हुई। वे पतंग समेटकर नीचे उतरे और अनंत को खोजते हुए उसके कमरे की तरफ गए। दरवाजा या तो खुला था या दोस्तों ने खिड़की से झांका—दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अनंत का शरीर दुपट्टे के सहारे पंखे/हुक से लटका हुआ था। चीख-पुकार और अस्पताल की दौड़ दोस्तों की चीख ने पूरे घर को हिला दिया। उनकी आवाज सुनकर अनंत के माता-पिता और अन्य परिजन बदहवास होकर दौड़ते हुए दूसरी मंजिल पर पहुंचे। सामने का मंजर देखकर मां वहीं बेसुध होने लगीं। जिस बेटे को अभी डेढ़ घंटे पहले पढ़ाई के लिए डांटा था, वह अब शांत हो चुका था। आनन-फानन में पड़ोसियों की मदद से अनंत को फंदे से नीचे उतारा गया। उम्मीद की एक धुंधली किरण बाकी थी कि शायद सांसें चल रही हों। परिजन उसे लेकर तुरंत पास के लोकप्रिय अस्पताल भागे। अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में डॉक्टरों ने अनंत की जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एक 14 साल का बच्चा, जो सुबह तक आसमान में पेंच लड़ा रहा था, अब दुनिया छोड़ चुका था। पुलिस कार्यवाही और परिवार का इनकार घटना की सूचना मिलते ही नौचंदी थाने की पुलिस मौके पर और अस्पताल पहुंची। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत शव का पंचनामा भरने और पोस्टमार्टम कराने की बात कही। यह एक मानक प्रक्रिया है ताकि मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सके। हालांकि, अनंत के परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि यह एक दुर्घटना है और वे अपने बेटे के शरीर की चीर-फाड़ नहीं चाहते। वे पहले से ही गहरे सदमे में थे और कानूनी पचड़ों में नहीं पड़ना चाहते थे। चूंकि मामला आत्महत्या का था और परिवार की तरफ से कोई संदिग्ध परिस्थिति या किसी के खिलाफ शिकायत नहीं जताई गई, पुलिस ने परिजनों की भावनाओं और कानूनी प्रावधानों का सम्मान करते हुए शव को बिना पोस्टमार्टम के उन्हें सौंप दिया। "दोस्तों के सामने बेइज्जती": एक जानलेवा ट्रिगर इस पूरी घटना में जो सबसे महत्वपूर्ण पहलू उभरकर आया है, वह है—"दोस्तों के सामने डांटना"। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, 13 से 18 वर्ष की उम्र (किशोरावस्था) में बच्चों के लिए उनका 'पीयर ग्रुप' (दोस्तों का समूह) सबसे ज्यादा अहम होता है। इस उम्र में बच्चों के अंदर 'Self-Identity' (आत्म-पहचान) बन रही होती है। उनके लिए दोस्तों के बीच उनकी छवि, उनके माता-पिता की राय से भी ज्यादा मायने रखती है। अहंकार (Ego) की चोट: जब मां ने दोस्तों के सामने अनंत को डांटा, तो उसे अपनी 'इमेज' खराब होती महसूस हुई। उसे लगा कि अब दोस्त उसका मजाक उड़ाएंगे। आवेग (Impulse): किशोरावस्था में दिमाग का 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (जो निर्णय लेने और भावनाओं को नियंत्रित करने का काम करता है) पूरी तरह विकसित नहीं होता। यही कारण है कि किशोर गुस्से में बिना परिणाम सोचे घातक कदम उठा लेते हैं। अनंत के साथ भी यही हुआ। वह गुस्सा बर्दाश्त नहीं कर पाया। क्या सिर्फ एक डांट वजह थी? सतही तौर पर देखने पर लगता है कि मां की डांट की वजह से बच्चे ने जान दे दी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदम के पीछे कई परतें होती हैं: एग्जाम का दबाव: जनवरी का अंत और फरवरी की शुरुआत बच्चों के लिए तनावपूर्ण होती है क्योंकि फाइनल एग्जाम (Final Exams) सिर पर होते हैं। हो सकता है अनंत के मन में पढ़ाई को लेकर पहले से ही तनाव हो, और मां की डांट ने उस तनाव को 'ट्रिगर' कर दिया हो। संवाद की कमी: क्या अनंत अपनी बातें अपने माता-पिता से शेयर करता था? अक्सर जब बच्चों और पेरेंट्स के बीच 'दोस्ताना संवाद' की कमी होती है, तो बच्चे अपनी हताशा जाहिर नहीं कर पाते और उसे अंदर ही अंदर घोंटते रहते हैं। सहनशीलता की कमी (Low Tolerance): आज की पीढ़ी में 'ना' सुनने की आदत या अपमान सहने की शक्ति कम होती जा रही है। डिजिटल युग में 'इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन' (तुरंत संतुष्टि) की आदत ने धैर्य को कम कर दिया है। अभिभावकों के लिए वेक-अप कॉल: क्या करें, क्या न करें? मेरठ की यह घटना हर उस माता-पिता के लिए एक चेतावनी है जिनके घर में बढ़ते बच्चे (Teenagers) हैं। परवरिश अब सिर्फ खाना खिलाने और स्कूल भेजने तक सीमित नहीं है, यह एक मनोवैज्ञानिक जिम्मेदारी बन गई है। विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई 5 महत्वपूर्ण बातें: सार्वजनिक रूप से न डांटें (No Public Shaming): सबसे महत्वपूर्ण नियम—अपने बच्चे को कभी भी उसके दोस्तों, रिश्तेदारों या पड़ोसियों के सामने न डांटें। अगर आपको उसकी गलती बतानी है, तो उसे अकेले में ले जाकर समझाएं। सार्वजनिक डांट बच्चे के आत्म-सम्मान को कुचल देती है। गुस्से को पहचानें: अगर आपका बच्चा डांटने पर बहुत ज्यादा आक्रामक हो रहा है या बिल्कुल चुप हो गया है, तो इसे नजरअंदाज न करें। अनंत कमरे में गया और डेढ़ घंटे तक बाहर नहीं आया। अगर उसी समय मां या पिता जाकर उससे बात कर लेते, उसके सिर पर हाथ फेर देते, तो शायद यह घटना नहीं होती। तुलना न करें: "शर्मा जी के बेटे को देखो", "तुम्हारे दोस्त कितना पढ़ रहे हैं"—ऐसी तुलना बच्चों को डिप्रेशन में डाल देती है। हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। हॉबीज का सम्मान करें: अनंत को पतंग उड़ाना पसंद था। पढ़ाई जरूरी है, लेकिन अगर साल में एक-दो दिन त्योहार पर बच्चा खेल रहा है, तो उसे थोड़ी छूट दी जा सकती है। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाने में उसकी मदद करें, उसे रोके नहीं। कम्युनिकेशन गैप खत्म करें: अपने बच्चों से रोज कम से कम 20 मिनट बिना किसी उपदेश के बात करें। उनकी सुनें, अपनी सुनाएं। ताकि जब वे मुसीबत में हों, तो कमरे का दरवाजा बंद करने के बजाय आपके पास आएं। पड़ोस और स्कूल में पसरा मातम शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की उस गली में अब सन्नाटा है जहाँ कल तक शोर था। अनंत के दोस्तों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार यही कह रहे हैं, "अगर हमें पता होता कि वो ऐसा कर लेगा, तो हम उसे डांट पड़ने ही नहीं देते, या हम उसे अकेला नहीं छोड़ते।" विद्या मंदिर स्कूल में, जहाँ अनंत पढ़ता था, वहां भी शोक की लहर है। शिक्षकों और सहपाठियों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि उनकी क्लास का एक छात्र अब कभी वापस नहीं आएगा। स्कूल प्रशासन भी अब विचार कर रहा है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' पर काउंसलिंग सेशन आयोजित किए जाएं। सामाजिक परिदृश्य: पतंगबाजी का जुनून और जोखिम पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मेरठ, हापुड़ और मुजफ्फरनगर में बसंत पंचमी और स्वतंत्रता/गणतंत्र दिवस पर पतंगबाजी का एक अलग ही जुनून होता है। यह संस्कृति का हिस्सा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह जुनून जानलेवा होता जा रहा है। कभी चाइनीज मांझे से राहगीरों की गर्दन कटने की खबरें आती हैं। कभी छत से गिरकर बच्चों की मौत होती है। और अब, पतंग उड़ाने से रोकने पर आत्महत्या जैसा कदम। यह दर्शाता है कि मनोरंजन का एक साधन कैसे जीवन और मरण का प्रश्न बन गया है। समाज को भी यह सोचना होगा कि त्योहारों को उत्सव की तरह कैसे मनाया जाए, न कि उन्माद की तरह। एक अधूरा सपना अनंत के पिता विनय चौहान एक ड्राइवर हैं। उन्होंने अपने बेटे के लिए न जाने कितने सपने देखे होंगे। वे शायद धूप और बारिश में गाड़ी चलाते वक्त यही सोचते होंगे कि मेरा बेटा पढ़-लिखकर अफ़सर बनेगा, एसी कमरे में बैठेगा। लेकिन एक क्षण के आवेग ने उन सपनों की डोरी हमेशा के लिए काट दी। यह घटना हमें सिखाती है कि जिंदगी किसी भी परीक्षा, किसी भी पतंग और किसी भी डांट से कहीं ज्यादा कीमती है। हमें अपने बच्चों को यह सिखाना होगा कि "विफलता" या "डांट" जीवन का अंत नहीं है। और हमें खुद को यह सिखाना होगा कि बच्चों को पालना, कांच के बर्तन को संभालने जैसा है—बहुत सावधानी, बहुत प्यार और बहुत समझदारी की जरूरत है। अनंत तो चला गया, लेकिन अनंत सवाल छोड़ गया है। उम्मीद है कि मेरठ की इस घटना से हम सब सबक लेंगे ताकि किसी और घर का चिराग इस तरह न बुझे। संक्षिप्त सारणी (Quick Summary) विवरण जानकारी मृतक का नाम अनंत चौहान उम्र/कक्षा 14 वर्ष, कक्षा 9 पिता का नाम विनय चौहान (पेशा: ड्राइवर) घटना स्थल शास्त्रीनगर सेक्टर-3, मेरठ घटना की तारीख 26 जनवरी (सोमवार) वजह मां द्वारा दोस्तों के सामने डांटना मृत्यु का कारण फांसी (आत्महत्या) पुलिस थाना नौचंदी थाना (नोट: यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया अकेले न रहें। अपने परिवार से बात करें या हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। जीवन अमूल्य है।)
जनवरी 26, 2026
नई दिल्ली (New Delhi): इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप (WhatsApp) आज हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. बड़ों से लेकर बच्चों तक, हर कोई इसका इस्तेमाल पढ़ाई, दोस्तों से बात करने और परिवार से जुड़े रहने के लिए कर रहा है. लेकिन, बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन और इंटरनेट की दुनिया थमाना माता-पिता के लिए हमेशा चिंता का विषय रहा है. क्या मेरा बच्चा सुरक्षित है? क्या वह किसी अनजान व्यक्ति से बात तो नहीं कर रहा? क्या वह गलत कंटेंट तो नहीं देख रहा? ये सवाल हर अभिभावक को परेशान करते हैं.READ ALSO:-ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की अब खैर नहीं! केंद्र सरकार ने लागू किए बेहद सख्त नियम; साल में 5 गलतियां कीं तो 3 महीने के लिए सस्पेंड होगा आपका ड्राइविंग लाइसेंस इन चिंताओं को दूर करने के लिए वॉट्सऐप (Meta) एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है. खबरों के मुताबिक, वॉट्सऐप एक नए सिस्टम पर काम कर रहा है जिसे 'WhatsApp Primary Controls Feature' नाम दिया गया है. यह फीचर माता-पिता को अपने बच्चों के वॉट्सऐप अकाउंट पर निगरानी रखने और उसे कंट्रोल करने की शक्ति देगा. इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि यह फीचर क्या है, यह कैसे काम करेगा, और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा (Digital Safety) के लिए यह क्यों जरूरी है. क्या है WhatsApp Primary Controls Feature? वॉट्सऐप के आगामी फीचर्स पर नजर रखने वाली वेबसाइट WABetaInfo की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी एक ऐसे फीचर पर काम कर रही है जो 'पैरेंटल कंट्रोल' (Parental Control) की तरह काम करेगा. इस फीचर के तहत, माता-पिता अपने मुख्य वॉट्सऐप अकाउंट के जरिए अपने बच्चों के लिए एक 'Secondary Account' (द्वितीयक खाता) बना सकेंगे. यह सेकेंडरी अकाउंट एक सामान्य वॉट्सऐप अकाउंट से अलग होगा. इसमें बच्चों को पूरी आजादी नहीं मिलेगी, बल्कि कुछ चुनिंदा फीचर्स और कॉन्टैक्ट्स तक ही उनकी पहुंच होगी. इसका सीधा मकसद बच्चों को ऑनलाइन दुनिया के खतरों, जैसे- साइबर बुलिंग, स्कैमर्स और अनुचित सामग्री से बचाना है. कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम? (How it Works) रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फीचर अभी डेवलपमेंट स्टेज (Development Stage) में है, लेकिन इसके काम करने के तरीके के बारे में कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं. यह पूरा सिस्टम माता-पिता के फोन और बच्चे के फोन के बीच एक डिजिटल लिंक पर आधारित होगा. 1. अकाउंट लिंकिंग और सेटअप: जब यह फीचर रोलआउट होगा, तो माता-पिता अपने फोन पर मौजूद वॉट्सऐप सेटिंग में जाकर बच्चे का अकाउंट क्रिएट कर सकेंगे. इस प्रक्रिया में संभवतः एक QR कोड स्कैन करने की आवश्यकता होगी, जिससे बच्चे का डिवाइस माता-पिता के डिवाइस से लिंक हो जाएगा. 2. 6-डिजिट का प्राइमरी पिन (Primary PIN): सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए वॉट्सऐप एक 'प्राइमरी पिन' सिस्टम ला रहा है. माता-पिता को सेटअप के दौरान एक 6 अंकों का पिन सेट करना होगा. यह पिन मास्टर की (Master Key) की तरह काम करेगा. अगर बच्चा अपनी सेटिंग्स में कोई बड़ा बदलाव करना चाहेगा, तो उसे इस पिन की जरूरत होगी. चूँकि यह पिन केवल माता-पिता को पता होगा, इसलिए बच्चे अपनी मर्जी से सुरक्षा घेरे को नहीं तोड़ पाएंगे. 3. कॉन्टैक्ट्स पर कंट्रोल: सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस फीचर के जरिए माता-पिता यह तय कर सकेंगे कि उनका बच्चा किससे बात कर सकता है. WhatsApp Primary Controls Feature वाले अकाउंट में बच्चे केवल उन लोगों से चैट या कॉल कर पाएंगे जिनके नंबर उनकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव हैं. इसका मतलब है कि कोई अनजान व्यक्ति (Unknown Number) आपके बच्चे को मैसेज करके परेशान नहीं कर पाएगा. बच्चों के लिए बंद रहेंगे ये फीचर्स वॉट्सऐप बच्चों के लिए बनाए गए इस सेकेंडरी अकाउंट को 'डिस्ट्रैक्शन-फ्री' (Distraction-free) और सुरक्षित बनाने के लिए ऐप के कुछ लोकप्रिय लेकिन जोखिम भरे फीचर्स को डिसेबल (Disable) कर देगा. अपडेट्स टैब (Updates Tab) गायब: रिपोर्ट बताती है कि सेकेंडरी अकाउंट में 'Updates' टैब नहीं दिखेगा. इसका मतलब है कि बच्चे वॉट्सऐप चैनल्स (Channels) और ब्रॉडकास्ट (Broadcast) कंटेंट तक नहीं पहुंच पाएंगे. आज के दौर में चैनल्स पर कई तरह की खबरें और वीडियो शेयर होते हैं, जो हमेशा बच्चों की उम्र के हिसाब से उपयुक्त नहीं होते. इसे हटाकर वॉट्सऐप बच्चों को केवल चैटिंग तक सीमित रखेगा. चैट लॉक (Chat Lock) की सुविधा नहीं: वॉट्सऐप ने हाल ही में प्राइवेसी के लिए 'चैट लॉक' फीचर दिया था, जिससे लोग अपनी निजी चैट छिपा सकते हैं. लेकिन बच्चों के सेकेंडरी अकाउंट में यह फीचर नहीं मिलेगा. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि बच्चे माता-पिता से कोई भी बातचीत छिपा न सकें और पारदर्शिता बनी रहे. प्राइवेसी और निगरानी का संतुलन (Privacy vs Supervision) अक्सर पैरेंटल कंट्रोल टूल्स को लेकर यह बहस होती है कि क्या यह बच्चों की निजता (Privacy) का हनन है? वॉट्सऐप ने इस मामले में एक बहुत ही संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है. भले ही WhatsApp Primary Controls Feature माता-पिता को निगरानी का अधिकार देता है, लेकिन वॉट्सऐप का मूल मंत्र यानी 'End-to-End Encryption' यहां भी लागू रहेगा. क्या देख सकेंगे पैरेंट्स: माता-पिता यह देख पाएंगे कि उनके बच्चे के अकाउंट में कौन सा नया कॉन्टैक्ट जोड़ा गया है. वे अकाउंट की सेटिंग्स मैनेज कर सकेंगे और स्क्रीन टाइम या इस्तेमाल पर नजर रख सकेंगे. क्या नहीं देख सकेंगे: एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के कारण, माता-पिता अपने बच्चों द्वारा भेजे गए या प्राप्त किए गए मैसेज (Messages) को नहीं पढ़ पाएंगे और न ही उनकी कॉल्स सुन पाएंगे. यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि बच्चों के मन में यह डर न रहे कि उनकी हर बात सुनी जा रही है, लेकिन साथ ही उन्हें यह पता रहे कि एक सुरक्षा घेरा (Safety Net) उनके चारों ओर मौजूद है. वॉट्सऐप को इस फीचर की जरूरत क्यों पड़ी? डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा एक वैश्विक चुनौती बन गई है. मेटा (Meta) जो कि वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी है, पिछले कुछ समय से अपने सभी प्लेटफॉर्म्स (Instagram, Facebook) पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई कदम उठा रही है. अनजान लोगों का खतरा: वॉट्सऐप पर किसी का भी नंबर होने पर उसे मैसेज किया जा सकता है. इससे बच्चे अक्सर स्कैमर्स या गलत नीयत वाले लोगों के संपर्क में आ जाते हैं. नया फीचर इस 'ओपन डोर' पॉलिसी को बंद कर देगा. गलत कंटेंट का प्रसार: वॉट्सऐप चैनल्स और स्टेटस के जरिए कई बार हिंसात्मक या वयस्क सामग्री वायरल हो जाती है. बच्चों के अकाउंट से अपडेट्स टैब हटाकर उन्हें इससे बचाया जा सकेगा. माता-पिता का दबाव: दुनियाभर के अभिभावक और बाल सुरक्षा आयोग (Child Safety Commissions) सोशल मीडिया कंपनियों पर दबाव बना रहे हैं कि वे बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करें. यह फीचर उसी दिशा में एक बड़ा कदम है. कब तक आएगा यह फीचर? फिलहाल, WhatsApp Primary Controls Feature पर काम चल रहा है. इसे वॉट्सऐप के बीटा वर्जन (Beta Version) में भी पूरी तरह से रिलीज नहीं किया गया है, बल्कि इसके कोड्स देखे गए हैं. टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसे पूरी तरह तैयार होकर आम यूज़र्स तक पहुंचने में कुछ महीनों का समय लग सकता है. संभावना है कि यह फीचर पहले कुछ चुनिंदा देशों में टेस्ट किया जाएगा और फिर इसे भारत जैसे बड़े बाजारों में रोलआउट (Rollout) किया जाएगा, जहां वॉट्सऐप के सबसे ज्यादा यूज़र्स हैं. जब तक फीचर नहीं आता, तब तक क्या करें? जब तक वॉट्सऐप यह ऑफिशियल पैरेंटल कंट्रोल फीचर लॉन्च नहीं करता, तब तक माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए मौजूदा सेटिंग्स का इस्तेमाल कर सकते हैं: Privacy Checkup: बच्चे के फोन में वॉट्सऐप की प्राइवेसी सेटिंग्स में जाकर 'Last Seen', 'Profile Photo' और 'Status' को 'My Contacts' पर सेट करें. Group Privacy: 'Groups' की सेटिंग में जाकर 'Everyone' की जगह 'My Contacts Only' चुनें. इससे कोई भी अनजान व्यक्ति आपके बच्चे को किसी फालतू ग्रुप में नहीं जोड़ पाएगा. Two-Step Verification: बच्चे के अकाउंट में टू-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन करें और पिन खुद सेट करें, ताकि अकाउंट हैक न हो सके. Block & Report: बच्चों को सिखाएं कि अगर कोई अनजान नंबर से मैसेज आए या परेशान करे, तो तुरंत उसे ब्लॉक और रिपोर्ट कैसे करना है. WhatsApp Primary Controls Feature निश्चित रूप से डिजिटल पेरेंटिंग (Digital Parenting) की दुनिया में एक गेम-चेंजर साबित होगा. यह न केवल बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाएगा, बल्कि माता-पिता को भी एक मानसिक शांति देगा. हालांकि, तकनीक केवल एक मदद है. सबसे जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चों के साथ खुला संवाद रखें और उन्हें इंटरनेट के सही और सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जागरूक करते रहें. जैसे ही इस फीचर के लॉन्च की कोई आधिकारिक तारीख आएगी, हम आपको अपडेट करेंगे. तब तक के लिए, अपने वॉट्सऐप को अपडेट रखें और सुरक्षा फीचर्स का इस्तेमाल करते रहें. वॉट्सऐप 'Primary Controls' नामक एक नए फीचर पर काम कर रहा है जो माता-पिता को बच्चों के लिए एक सेकेंडरी अकाउंट बनाने और लिंक करने की अनुमति देगा. इस अकाउंट में अपडेट्स टैब और चैट लॉक जैसे फीचर्स नहीं होंगे और बच्चे सिर्फ सेव किए गए कॉन्टैक्ट्स से बात कर सकेंगे. यह फीचर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ आएगा, जिससे सुरक्षा और प्राइवेसी दोनों बनी रहेगी.
जनवरी 24, 2026
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से दिल (Heart) की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बेहद राहत देने वाली खबर सामने आई है। अब तक जिन मरीजों को हार्ट वॉल्व (Heart Valve) की समस्या के चलते ओपन हार्ट सर्जरी (Open Heart Surgery) के दर्दनाक और जोखिम भरे रास्ते से गुजरना पड़ता था, उन्हें अब एक नई और आधुनिक तकनीक का तोहफा मिला है। शहर के हृदय रोग संस्थान (Heart Disease Institute) ने 'तावी' (TAVI - Transcatheter Aortic Valve Implantation) विधि से इलाज शुरू करने का फैसला किया है। सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि निजी अस्पतालों में जिस इलाज का खर्च 15 से 20 लाख रुपये आता है, वह यहां पूरी तरह मुफ्त (Free) होगा।READ ALSO:-यूपी में वोटरों पर 'कागज' का संकट: 2003 की लिस्ट में नाम नहीं तो 'निवास प्रमाण पत्र' भी बेकार; आयोग ने कहा- 'सिर्फ ये 11 सबूत चलेंगे' इसके साथ ही, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) भी हार्ट ट्रांसप्लांट (Heart Transplant) के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन डोनर (अंगदान करने वाले) न मिलने के कारण यह प्रक्रिया रुकी हुई है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर यह 'तावी' तकनीक क्या है, मरीजों को इसका लाभ कैसे मिलेगा और अंगदान को लेकर क्या चुनौतियां सामने आ रही हैं। इतिहास में पहली बार: लखनऊ में फ्री 'तावी' (TAVI) सर्जरी मेडिकल साइंस ने पिछले कुछ दशकों में अभूतपूर्व तरक्की की है, और Lucknow TAVI Surgery की यह पहल उसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। हृदय रोग संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, वॉल्व की बीमारी से ग्रस्त मरीजों के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है। अभी तक की स्थिति यह थी कि जब भी किसी मरीज के दिल का वॉल्व खराब होता था या उसमें सिकुड़न आ जाती थी, तो डॉक्टरों के पास केवल 'ओपन हार्ट सर्जरी' ही एकमात्र विकल्प बचता था। इसमें मरीज की छाती को चीरकर ऑपरेशन किया जाता है, जिसमें रिकवरी का समय लंबा होता है और संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। विशेषकर बुजुर्ग मरीजों के लिए ओपन सर्जरी जानलेवा साबित हो सकती है। लेकिन 'तावी' विधि ने इस पूरे परिदृश्य को बदल दिया है। क्या है तावी (TAVI) तकनीक? 'तावी' यानी ट्रांसकैथेटर एरोटिक वॉल्व इंप्लाटेशन (Transcatheter Aortic Valve Implantation)। यह एक 'मिनिमली इनवेसिव' (Minimally Invasive) प्रक्रिया है। बिना चीर-फाड़ के इलाज: इस विधि में छाती को चीरने की जरूरत नहीं पड़ती। जांघ की नस से रास्ता: डॉक्टरों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में मरीज की जांघ (Groin) की नस (Femoral Artery) के जरिए एक कैथेटर (पतली नली) को दिल तक पहुंचाया जाता है। नया वॉल्व: इसी कैथेटर के जरिए सिकुड़े हुए या खराब वॉल्व के स्थान पर एक नया कृत्रिम वॉल्व (Artificial Valve) फिट कर दिया जाता है। वॉल्व कवच: यह नया वॉल्व पुराने वॉल्व के अंदर फिट होकर एक 'कवच' की तरह काम करता है और रक्त प्रवाह को सुचारू रूप से बहाल कर देता है। 30 मरीजों पर होगा पहला परीक्षण: डॉ. संतोष सिन्हा हृदय रोग संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संतोष सिन्हा ने इस नई पहल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया शुरू करने के लिए संस्थान पूरी तरह तैयार है। "पहले चरण में हम ऐसे 30 मरीजों का चयन करेंगे जिन्हें वॉल्व बदलने की सख्त जरूरत है। इन मरीजों पर Lucknow TAVI Surgery विधि से वॉल्व इम्प्लांटेशन का परीक्षण किया जाएगा। सरकार की तरफ से हरी झंडी मिलते ही इसे बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया जाएगा।" — डॉ. संतोष सिन्हा डॉ. सिन्हा ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर के चुनिंदा 9 अस्पतालों को इस विधि से इलाज करने के लिए चिन्हित किया है, जिनमें लखनऊ का हृदय रोग संस्थान भी शामिल है। यह उत्तर प्रदेश के लिए गर्व की बात है। लाखों की बचत: 15 लाख का इलाज अब 0 रुपये में भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का महंगा होना आम आदमी की कमर तोड़ देता है। ऐसे में यह खबर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संजीवनी समान है। खर्च का गणित: निजी अस्पताल: यदि कोई मरीज किसी प्राइवेट हॉस्पिटल या कॉरपोरेट अस्पताल में TAVI विधि से वॉल्व बदलवाता है, तो उसका औसतन खर्च 15 लाख रुपये से 20 लाख रुपये के बीच आता है। वॉल्व की कीमत ही लाखों में होती है। सरकारी संस्थान (लखनऊ): डॉ. संतोष सिन्हा के अनुसार, हृदय रोग संस्थान में यह इलाज पूरी तरह से फ्री (Fully Free) रहेगा। किसे नहीं देना होगा शुल्क: सरकार से मिले निर्देशों के मुताबिक, चयनित मरीजों को वॉल्व की कीमत या सर्जरी का कोई भी शुल्क नहीं देना होगा। यह पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। यह कदम उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को नई जिंदगी देगा जो पैसों की कमी के कारण अपना इलाज बीच में ही छोड़ देते थे। KGMU: सब कुछ तैयार, बस 'दिल' का इंतजार एक तरफ जहां हृदय रोग संस्थान में वॉल्व सर्जरी की नई शुरुआत हो रही है, वहीं दूसरी तरफ लखनऊ का प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) हार्ट ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है। KGMU के सीवीटीएस (CVTS) विभाग ने हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर और सभी जरूरी उपकरण तैयार कर लिए हैं। लेकिन विडंबना यह है कि सारी तैयारियों के बावजूद अभी तक एक भी ट्रांसप्लांट नहीं हो पाया है। इसकी वजह है—अंगदान (Organ Donation) की कमी। जागरूकता की कमी बनी रोड़ा KGMU की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि तकनीक और संसाधनों के स्तर पर विश्वविद्यालय पूरी तरह सक्षम है, लेकिन समाज में अभी भी अंगदान को लेकर भ्रांतियां और जागरूकता की कमी है। "हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए 'ब्रेन डेड' (Brain Dead) मरीज के परिजनों की सहमति जरूरी होती है। दुखद है कि लोग अभी भी अंगदान के महत्व को पूरी तरह नहीं समझ पा रहे हैं। एक व्यक्ति का अंगदान कई लोगों को नई जिंदगी दे सकता है।" — प्रो. सोनिया नित्यानंद, कुलपति, KGMU जागरूकता अभियान: अब गांव-गांव पहुंचेंगे डॉक्टर अंगदान की इस खाई को पाटने के लिए KGMU प्रशासन ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। विश्वविद्यालय अब केवल अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों के बीच जाकर उन्हें जागरूक करेगा। क्या है रणनीति? कैंप और सेमिनार: लखनऊ और आसपास के जिलों में विशेष जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। सामाजिक संगठनों का सहयोग: डॉक्टरों के साथ-साथ एनजीओ (NGOs) और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद ली जाएगी। काउंसलिंग: अस्पतालों में ब्रेन डेड घोषित मरीजों के परिजनों की काउंसलिंग के लिए विशेष टीमें बनाई जाएंगी जो उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित कर सकें। प्रस्ताव की तैयारी: इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए जल्द ही एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा। अन्य अंगों के प्रत्यारोपण में KGMU की प्रगति भले ही हार्ट ट्रांसप्लांट में डोनर की कमी आड़े आ रही हो, लेकिन अन्य अंगों के प्रत्यारोपण में KGMU ने बेहतरीन काम किया है। लिवर और किडनी: वर्तमान में यहां लिवर (Liver) और किडनी (Kidney) ट्रांसप्लांट की सुविधा सुचारू रूप से चल रही है और सैकड़ों मरीजों को इसका लाभ मिला है। फेफड़ा प्रत्यारोपण (Lung Transplant): केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि जल्द ही फेफड़ा प्रत्यारोपण की सुविधा भी शुरू करने की तैयारी चल रही है। हार्ट ट्रांसप्लांट: अब जैसे ही कोई डोनर मिलेगा, सीवीटीएस विभाग पहला हार्ट ट्रांसप्लांट करके प्रदेश में एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा। लखनऊ के चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे ये बदलाव बताते हैं कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। हृदय रोग संस्थान में Lucknow TAVI Surgery का मुफ्त होना न केवल चिकित्सा विज्ञान की जीत है, बल्कि यह लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को भी मजबूत करता है। 15 लाख रुपये की बचत और चीर-फाड़ रहित इलाज निश्चित रूप से हजारों मरीजों की जान बचाएगा। वहीं, KGMU की तैयारियां यह इशारा करती हैं कि भविष्य उज्ज्वल है, बस जरूरत है तो सामाजिक सोच में बदलाव की। अंगदान महादान है—इस मंत्र को जन-जन तक पहुंचाना अब केवल सरकार या डॉक्टरों की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि हम अंगदान के प्रति जागरूक होते हैं, तो न जाने कितने घरों के चिराग बुझने से बच सकते हैं। लखनऊ के हृदय रोग संस्थान में दिल के वॉल्व की बीमारी का इलाज अब 'तावी' (TAVI) विधि से मुफ्त में किया जाएगा, जिसके लिए निजी अस्पतालों में 15 लाख रुपये लगते हैं। पहले चरण में 30 मरीजों का इलाज होगा। वहीं, KGMU में हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारियां पूरी हैं, लेकिन अंगदान (डोनर) न मिलने के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है, जिसके लिए अब जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
जनवरी 22, 2026
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में बसने और वहां की नागरिकता पाने का सपना देख रहे रईस निवेशकों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने बुधवार को व्हाइट हाउस में एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड' (Trump Gold Card) वीजा कार्यक्रम का आधिकारिक शुभारंभ कर दिया है। इस कार्यक्रम के तहत विदेशी नागरिकों को अमेरिका में स्थायी निवास (Permanent Residency) और नागरिकता हासिल करने का एक 'फास्ट-ट्रैक' रास्ता दिया गया है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी जेब ढीली करनी होगी।READ ALSO:-यूपी में सर्दी का 'Second Attack': पश्चिमी विक्षोभ जाते ही ठिठुरा प्रदेश, 13 जिलों में 'विजिबिलिटी जीरो' का खतरा, देखें अपने शहर का हाल क्या है ट्रम्प गोल्ड कार्ड वीजा? व्हाइट हाउस में व्यापारिक नेताओं की मौजूदगी में इस कार्यक्रम को लॉन्च करते हुए ट्रम्प ने इसे गेम-चेंजर बताया। इस योजना के मुताबिक, कोई भी विदेशी नागरिक लगभग 10 लाख डॉलर (करीब 8.5 करोड़ रुपये) का निवेश करके अमेरिका का स्थायी निवासी बन सकता है। इसके बाद उन्हें अमेरिकी नागरिकता (US Citizenship) प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा। ट्रम्प ने दावा किया कि यह 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड' (Trump Gold Card) पारंपरिक 'ग्रीन कार्ड' से कई मायनों में बेहतर है। उन्होंने कहा, "यह योजना ग्रीन कार्ड जैसी है, लेकिन इसके फायदे उससे कहीं अधिक हैं। इससे हम दुनिया भर के उच्च-मूल्य वाले निवेशकों और प्रतिभाशाली उद्यमियों को अमेरिका ला सकेंगे।" कंपनियों के लिए 20 लाख डॉलर का विकल्प सिर्फ व्यक्तिगत निवेशक ही नहीं, बल्कि बड़ी कंपनियों के लिए भी इस प्रोग्राम में खास प्रावधान किए गए हैं। ट्रम्प ने 'कॉर्पोरेट गोल्ड कार्ड' (Corporate Gold Card) का विकल्प भी पेश किया है। The Department of Homeland Security is working closely with @CommerceGov to facilitate the rollout of President Trump’s Gold Card program. Under this historic initiative, qualified individuals and corporations, who contribute $1 million and $2 million respectively, will receive… pic.twitter.com/10htrjYyxx — Secretary Kristi Noem (@Sec_Noem) December 10, 2025 नियम: यदि कोई अमेरिकी कंपनी किसी विदेशी प्रतिभाशाली कर्मचारी को अमेरिका लाना चाहती है या यहां बनाए रखना चाहती है, तो वह 20 लाख डॉलर (लगभग 17 करोड़ रुपये) का निवेश कर उस कर्मचारी को स्पॉन्सर कर सकती है। फायदा: राष्ट्रपति ने विशेष रूप से एपल (Apple) जैसी दिग्गज टेक कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे वे बेहतरीन टैलेंट को अपने पास रख सकेंगी। उन्होंने कहा, "प्रतिभाशाली लोग देश में आकर काम कर सकेंगे और हमारी इकोनॉमी को मजबूती देंगे।" सीधे अमेरिकी खजाने में जाएगा पैसा इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि निवेश की गई राशि सीधे अमेरिकी सरकार के खजाने में जाएगी। ट्रम्प ने बताया कि इस योजना से अमेरिकी राजस्व में अरबों डॉलर आने की उम्मीद है। ट्रम्प गोल्ड कार्ड वीजा (Trump Gold Card Visa) के लिए आधिकारिक वेबसाइट लाइव हो चुकी है और ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। अमीरों के लिए 'गोल्डन टिकट' या अवसर? हालांकि, इस योजना के लॉन्च होते ही बहस भी छिड़ गई है। आलोचकों का कहना है कि यह वीजा प्रोग्राम केवल अमीरों के लिए है और सामान्य श्रमिकों या मध्यम वर्ग के प्रवासियों के लिए इसमें कोई जगह नहीं है। आलोचना: कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिकता को "बिकाऊ" बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हो सकता है। समर्थन: वहीं, समर्थकों का कहना है कि यह अमेरिका की 'निवेश-आधारित आव्रजन नीति' (Investment-based Immigration) को नया आयाम देगा और देश की अर्थव्यवस्था को बूस्ट करेगा। ग्रीन कार्ड बैकलॉग से मिलेगी मुक्ति? भारत जैसे देशों के हजारों लोग सालों से ग्रीन कार्ड के बैकलॉग में फंसे हैं। ऐसे में जिनके पास पूंजी है, उनके लिए ट्रम्प गोल्ड कार्ड (Trump Gold Card) एक त्वरित समाधान साबित हो सकता है। ट्रम्प ने साफ किया कि उनका उद्देश्य वैश्विक प्रतिभाओं को अमेरिका की ओर आकर्षित करना है, ताकि अमेरिका ग्लोबल रेस में सबसे आगे रहे। डोनाल्ड ट्रम्प का यह कदम अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में एक बड़ा बदलाव है। 10 लाख डॉलर की कीमत वाला यह कार्ड निश्चित रूप से अमीरों के लिए अमेरिका का दरवाजा खोलता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दुनिया भर के निवेशक और भारतीय उद्योगपति इस नई योजना में कितनी रुचि दिखाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड' वीजा लॉन्च किया है। इसके तहत 10 लाख डॉलर (व्यक्तिगत) या 20 लाख डॉलर (कॉर्पोरेट) निवेश करके अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की जा सकती है। आवेदन शुरू हो चुके हैं। इसका उद्देश्य विदेशी निवेश बढ़ाना और टैलेंट को अमेरिका में रोकना है।
दिसम्बर 11, 2025
आजकल Online Shopping हर व्यक्ति के जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस खाली डिब्बे को आप सामान्य कचरा समझकर बाहर फेंक देते हैं, वह आपको बड़े Cyber Fraud का शिकार बना सकता है? साइबर अपराधी अब इन डिब्बों पर मौजूद निजी जानकारी का उपयोग करके ठगी की नई वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। Packing Fraud के इस नए तरीके से बचने के लिए अब उपभोक्ताओं को पहले से कहीं अधिक सावधान रहने की जरूरत है।READ ALSO:-लाइसेंस, पंजीकरण से 'पूरी आज़ादी'! 25 Km/h से कम स्पीड वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर ट्रैफिक पुलिस नहीं काटेगी चालान; जानें केंद्र सरकार का नियम Background: डिब्बे पर मौजूद है आपकी 'पहचान' ऑनलाइन शॉपिंग से मिले डिलीवरी बॉक्स पर आपकी कई गोपनीय और निजी जानकारी मुद्रित होती है: पूरा नाम और पता: आपका पूरा नाम, मकान नंबर, सोसायटी का नाम और शहर का पता। मोबाइल नंबर: आपका प्राथमिक संपर्क नंबर। ईमेल आईडी: आपकी ईमेल आईडी, जिसका उपयोग अक्सर लॉग-इन के लिए होता है। साइबर अपराधी इन्हीं जानकारी को कूड़ेदान या रीसाइक्लिंग केंद्रों से उठाकर डेटा चोरी (Data Theft) करते हैं। वे इस डेटा का इस्तेमाल करके Cyber Awareness की कमी वाले लोगों को आसानी से निशाना बनाते हैं। यह तरीका डेटा चोरी का एक नया और अप्रत्याशित जरिया बन रहा है। Latest Update: इस तरह हो रहा है Packing Fraud राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध शाखा (Cyber Crime Branch) सहित कई एजेंसियां लगातार चेतावनी दे रही हैं कि डिलीवरी बॉक्स डेटा चोरी का माध्यम बन रहे हैं। साइबर ठग आपके खाली डिब्बे से मिली जानकारी का उपयोग इस प्रकार करते हैं: विश्वास हासिल करना: ठग आपके नाम और मोबाइल नंबर से आपको कॉल या मैसेज करते हैं, जिससे आपको तुरंत उन पर विश्वास हो जाता है कि वे कंपनी से जुड़े हैं। लुभावने झांसे: वे आपको Online Shopping फीडबैक, मेगा डिस्काउंट, लॉटरी जीतने, या अधूरे पेंडिंग ऑर्डर को पूरा करने जैसे लुभावने ऑफर का झांसा देते हैं। फिशिंग लिंक: इस बातचीत के दौरान, वे आपके फोन पर एक दुर्भावनापूर्ण लिंक (Malware Link) भेजते हैं। यह लिंक अक्सर किसी फर्जी वेबसाइट या ऐप को डाउनलोड करने के लिए कहता है। खाता खाली: जैसे ही यूजर उस लिंक पर क्लिक करता है और अपनी बैंक या निजी जानकारी डालता है, साइबर अपराधी मैलवेयर के जरिए उनका खाता खाली कर देते हैं। Official Statements: पुलिस और विशेषज्ञों की अपील साइबर क्राइम विशेषज्ञों का साफ कहना है कि खाली डिब्बा केवल पैकेजिंग नहीं है, बल्कि आपकी पहचान का एक टुकड़ा है। सुरक्षा उपाय: साइबर अपराध शाखा ने आमजन से अपील की है कि इन डिलीवरी बॉक्स को बाहर फेंकने से पहले उन पर दर्ज निजी जानकारी को पूरी तरह नष्ट (Shred or Scratch) करना जरूरी है। तत्काल शिकायत: धोखाधड़ी का शिकार होने पर तत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और ऑनलाइन पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करवाएं। Public Reaction या सोशल मीडिया ट्रेंड सोशल मीडिया पर #CyberFraud और #khalidibba हैशटैग के साथ यह जागरूकता संदेश वायरल हो रहा है। आम लोगों के बीच यह जानकारी फैलने के बाद, कई यूजर्स ने डिलीवरी बॉक्स को फेंकने से पहले उस पर लिखे पते और नाम को फाड़ने या मिटाने की अपील की है। लोग अब इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि डिजिटल युग में सिर्फ ऑनलाइन ही नहीं, बल्कि फिजिकल कचरे से भी डेटा की सुरक्षा करना कितना महत्वपूर्ण है। Impact & Next Step: साइबर जागरूकता ही बचाव इस प्रकार के Cyber Crime से बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका व्यक्तिगत Cyber Awareness है। उपभोक्ताओं को हर हाल में यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न हो। छोटी सी सावधानी आपको बड़े वित्तीय नुकसान से बचा सकती है।
आज की सुबह भारतवर्ष के लिए सामान्य सुबह नहीं है। क्षितिज पर उगता हुआ सूरज आज न केवल एक नए दिन का संदेश लेकर आया है, बल्कि राष्ट्र के गौरव और धर्म की पवित्रता का एक अनूठा संगम भी लेकर आया है। आज, 26 जनवरी 2026 (सोमवार) को पूरा देश 77वें गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) के जश्न में डूबा है। वहीं, सनातन धर्म की कालगणना और पंचांग के अनुसार, आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है, जिसे शास्त्रों में 'भीष्म अष्टमी' (Bhishma Ashtami) के रूप में पूजा जाता है।READ ALSO:-आगरा का 'संजय प्लेस हॉरर': ऑफिस के सन्नाटे में प्यार का खूनी अंत, प्रेमी ने प्रेमिका के सिर-पैर काटे, यमुना पुल पर खुले बोरे ने उगला मौत का सच सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है, अष्टमी तिथि माँ दुर्गा की शक्ति का प्रतीक है, और गणतंत्र दिवस राष्ट्र की शक्ति का पर्व है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो आज आकाश मंडल में ग्रहों की स्थिति (Planetary Positions) बेहद दिलचस्प बनी हुई है। ग्रहों का यह गोचर न केवल देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर असर डालेगा, बल्कि आम आदमी की जेब, सेहत और रिश्तों पर भी गहरा प्रभाव छोड़ेगा। इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि आज का दिन आपकी राशि के लिए क्या सौगात लाया है, ध्वजारोहण का सबसे शुभ समय क्या है, और भीष्म अष्टमी पर कौन से उपाय करने से पितृ दोष और कष्टों से मुक्ति मिल सकती है। आज का पंचांग: 26 जनवरी 2026 (Aaj Ka Panchang) किसी भी शुभ कार्य, विशेषकर गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण के लिए शुभ मुहूर्त का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। आज का पंचांग बताता है कि दिन का मध्य भाग अत्यंत शुभ है। दिनांक: 26 जनवरी 2026 दिन: सोमवार (Somwar) विक्रम संवत: 2082 मास: माघ पक्ष: शुक्ल पक्ष तिथि: अष्टमी (रात 09:15 बजे तक), उसके बाद नवमी। नक्षत्र: अश्विनी (दोपहर 12:30 बजे तक), तदुपरांत भरणी। (अश्विनी नक्षत्र के स्वामी केतु हैं और यह ऊर्जा, गति और नई शुरुआत का प्रतीक है, जो गणतंत्र दिवस परेड के लिए बहुत शुभ है।) योग: साध्य (सुबह 09:11 बजे तक), उसके बाद शुभ योग। करण: विष्टि (भद्रा) - सुबह 10:15 तक, उसके बाद बव। चंद्र राशि: मेष (Aries) - चंद्रमा आज मंगल की राशि में संचरण करेंगे, जिससे लोगों में उत्साह और ऊर्जा का संचार होगा। सूर्य राशि: मकर (Capricorn) - सूर्य देव शनि की राशि में विराजमान हैं। ऋतु: शिशिर। महत्वपूर्ण मुहूर्त (Important Timings) अभिजीत मुहूर्त (ध्वजारोहण के लिए सर्वश्रेष्ठ): दोपहर 12:12 बजे से 12:55 बजे तक। (शास्त्रों के अनुसार, यह समय किसी भी विजय अभियान या सरकारी कार्य के लिए सर्वोत्तम है।) विजय मुहूर्त: दोपहर 02:22 बजे से 03:05 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:50 बजे से 06:15 बजे तक। अमृत काल: सुबह 06:48 बजे से 08:30 बजे तक। राहुकाल (अशुभ समय - वर्जित): सुबह 08:30 बजे से 09:55 बजे तक। (इस दौरान ध्वजारोहण या कोई नया अनुबंध न करें।) ग्रहों की चाल और देश का हाल (Astrological Analysis) आज चंद्रमा मेष राशि में हैं। मेष राशि काल पुरुष की कुंडली का पहला भाव है, जो 'स्वयं', 'पहचान' और 'मस्तिष्क' का प्रतिनिधित्व करता है। गणतंत्र दिवस पर चंद्रमा का पहले भाव की राशि में होना यह दर्शाता है कि आज देश का आत्मविश्वास चरम पर होगा। मेष में चंद्रमा: जनता (चंद्रमा) में जोश और देशभक्ति (मेष-मंगल की राशि) का ज्वार रहेगा। मकर में सूर्य: सूर्य (सरकार/सत्ता) मकर (अनुशासन/कानून) में हैं। यह संविधान के प्रति निष्ठा और कानून के राज को मजबूत करने का संकेत है। भीष्म अष्टमी का संयोग: महाभारत काल में भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर आज ही के दिन देह त्यागी थी। यह दिन संकल्प शक्ति और दृढ़ प्रतिज्ञा का प्रतीक है। राशिफल: 12 राशियों का भविष्यफल (Detailed Horoscope) मेष राशि में चंद्रमा का गोचर और मकर राशि में सूर्य की स्थिति का सभी 12 राशियों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा? आइए जानते हैं विस्तार से। 1. मेष राशि (Aries): आत्मविश्वास और ऊर्जा का महाविस्फोट आज चंद्रमा आपकी ही राशि (Lagna) में विराजमान हैं। आपके लिए आज का दिन 'नायक' (Hero) की भूमिका निभाने जैसा है। सामान्य: आज आप ऊर्जा से लबरेज रहेंगे। गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों में आपकी सक्रियता देखते ही बनेगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। करियर: सरकारी नौकरी करने वालों के लिए आज का दिन विशेष उपलब्धियों वाला हो सकता है। यदि आप सेना, पुलिस या प्रशासन से जुड़े हैं, तो आपको मेडल या प्रशंसा मिल सकती है। आर्थिक: धन आगमन के रास्ते खुलेंगे। रुका हुआ पैसा मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य: सिरदर्द या आंखों में जलन हो सकती है। धूप में चश्मा लगाकर निकलें। प्रेम: जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर रहेंगे। शुभ रंग: केसरिया (Saffron)। भाग्य प्रतिशत: 95% 2. वृषभ राशि (Taurus): विदेश योग और खर्चों पर चिंतन चंद्रमा आपके 12वें भाव (व्यय भाव) में गोचर कर रहे हैं। सामान्य: आज मन थोड़ा बैचेन हो सकता है। भीड़भाड़ से दूर एकांत में समय बिताने का मन करेगा। करियर: मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) में काम करने वालों के लिए दिन अच्छा है। विदेश से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। आर्थिक: आज हाथ खुला रहेगा। देशभक्ति के जोश में या दान-पुण्य में धन खर्च हो सकता है। बजट बनाकर चलें। स्वास्थ्य: पैरों में दर्द या नींद न आने की समस्या परेशान कर सकती है। प्रेम: पार्टनर के साथ छोटी सी बात पर अनबन हो सकती है, वाणी पर संयम रखें। शुभ रंग: सफेद (White)। भाग्य प्रतिशत: 65% 3. मिथुन राशि (Gemini): लाभ और सामाजिक दायरा आज चंद्रमा आपके 11वें भाव (लाभ भाव) में हैं। यह स्थिति 'एक पंथ दो काज' वाली है। सामान्य: दोस्तों और बड़े भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। आज आप सामाजिक समारोहों की जान रहेंगे। करियर: बिज़नेस में आज बड़ी डील फाइनल हो सकती है। नेटवर्किंग के लिए आज का दिन स्वर्ण अवसर है। आर्थिक: आय में वृद्धि के प्रबल योग हैं। कोई पुराना निवेश आज अच्छा रिटर्न दे सकता है। स्वास्थ्य: स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। मानसिक रूप से प्रसन्न महसूस करेंगे। प्रेम: लव लाइफ में रोमांस का तड़का लगेगा। सिंगल लोगों को कोई खास मिल सकता है। शुभ रंग: हरा (Green)। भाग्य प्रतिशत: 88% 4. कर्क राशि (Cancer): कर्मक्षेत्र में झंडे गाड़ने का दिन आपकी राशि के स्वामी चंद्रमा आज आपके 10वें भाव (कर्म भाव) में हैं। सामान्य: आज पूरा ध्यान काम और सामाजिक प्रतिष्ठा पर रहेगा। लोग आपकी राय को महत्व देंगे। करियर: ऑफिस में बॉस आपके काम की तारीफ करेंगे। पदोन्नति की बात चल सकती है। राजनीति से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन शक्ति प्रदर्शन का है। आर्थिक: पिता या पैतृक संपत्ति से लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य: घुटनों में तकलीफ हो सकती है। काम के बीच में आराम जरूर करें। प्रेम: माता-पिता के साथ समय बिताएंगे, जिससे घर का माहौल सुखद रहेगा। शुभ रंग: दूधिया (Milky White)। भाग्य प्रतिशत: 90% 5. सिंह राशि (Leo): भाग्य का पूरा साथ सूर्य की राशि सिंह वालों के लिए चंद्रमा 9वें भाव (भाग्य भाव) में हैं। सामान्य: आज का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में बीतेगा। गणतंत्र दिवस पर देशभक्ति की भावना प्रबल रहेगी। करियर: उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को कोई बड़ी सफलता मिल सकती है। नौकरी में स्थानांतरण (Transfer) के योग बन रहे हैं जो आपके पक्ष में होंगे। आर्थिक: धन को लेकर स्थिति मजबूत रहेगी। लंबी यात्रा का योग है जो फायदेमंद साबित होगी। स्वास्थ्य: पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा। प्रेम: दांपत्य जीवन में समझदारी और प्रेम बढ़ेगा। शुभ रंग: सुनहरा (Golden)। भाग्य प्रतिशत: 92% 6. कन्या राशि (Virgo): सावधानी हटी, दुर्घटना घटी चंद्रमा आज आपके 8वें भाव (रंध्र भाव) में हैं। आज का दिन थोड़ा संभलकर चलने का है। सामान्य: मन में अज्ञात भय या चिंता रह सकती है। नकारात्मक विचारों से बचें। करियर: कार्यस्थल पर किसी से विवाद न करें। आज कोई भी नया काम शुरू करने से बचें। गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें। आर्थिक: अचानक धन हानि हो सकती है। ऑनलाइन ट्रांजैक्शन सावधानी से करें। स्वास्थ्य: पेट या पाचन संबंधी समस्याएं (Acidity/Indigestion) हो सकती हैं। बाहर का खाना खाने से बचें। प्रेम: ससुराल पक्ष से कोई तनाव मिल सकता है। शुभ रंग: गहरा हरा (Dark Green)। भाग्य प्रतिशत: 55% 7. तुला राशि (Libra): साझेदारी और रोमांस चंद्रमा आपके 7वें भाव में हैं। आज का दिन रिश्तों को समर्पित है। सामान्य: आपका व्यक्तित्व आज बहुत आकर्षक रहेगा। लोग आपकी ओर खिंचे चले आएंगे। करियर: साझेदारी (Partnership) के बिजनेस में बड़ा मुनाफा हो सकता है। नई पब्लिक डीलिंग सफल रहेगी। आर्थिक: दैनिक आय में बढ़ोतरी होगी। जीवनसाथी के नाम से किया गया निवेश फलदायी होगा। स्वास्थ्य: मूत्र विकार या कमर दर्द की शिकायत हो सकती है। पानी खूब पिएं। प्रेम: अविवाहित लोगों के लिए विवाह का प्रस्ताव आ सकता है। वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। शुभ रंग: सिल्वर/सफेद (Silver)। भाग्य प्रतिशत: 85% 8. वृश्चिक राशि (Scorpio): शत्रु परास्त, विजय प्राप्त चंद्रमा 6वें भाव में हैं। आज आप 'शत्रुहंता' योग में हैं। सामान्य: आपका मनोबल ऊंचा रहेगा। कोई भी चुनौती आपके सामने टिक नहीं पाएगी। करियर: नौकरी में कम्पटीशन है तो जीत आपकी ही होगी। कोर्ट-कचहरी के मामलों में फैसला आपके पक्ष में आ सकता है। आर्थिक: कर्ज लेने या देने के लिए दिन ठीक है। फंसा हुआ पैसा प्रयास करने पर मिल सकता है। स्वास्थ्य: ननिहाल पक्ष से किसी के बीमार होने की खबर मिल सकती है। अपनी आंखों का ध्यान रखें। प्रेम: प्रेम संबंधों में अहंकार को बीच में न आने दें। शुभ रंग: गहरा लाल (Maroon)। भाग्य प्रतिशत: 82% 9. धनु राशि (Sagittarius): रचनात्मकता और संतान सुख चंद्रमा 5वें भाव में हैं। आज बुद्धि और विवेक का अद्भुत संगम दिखेगा। सामान्य: आज आप कुछ नया सीखने या सिखाने के मूड में रहेंगे। छात्रों के लिए दिन वरदान समान है। करियर: शिक्षा, लेखन, मीडिया और कला जगत से जुड़े लोगों को ख्याति मिलेगी। शेयर बाजार में सोच-समझकर किया गया निवेश लाभ देगा। आर्थिक: अचानक धन लाभ (Lottery/Speculation) का योग बन रहा है, लेकिन लालच से बचें। स्वास्थ्य: एसिडिटी की समस्या हो सकती है। प्रेम: लव लाइफ बहुत ही रोमांटिक रहेगी। संतान की ओर से कोई खुशखबरी मिल सकती है। शुभ रंग: पीला (Yellow)। भाग्य प्रतिशत: 88% 10. मकर राशि (Capricorn): घर-गृहस्थी की चिंता चंद्रमा 4वें भाव में हैं और सूर्य आपकी ही राशि में हैं। सामान्य: आज मन थोड़ा भावुक रहेगा। पुरानी यादें ताज़ा हो सकती हैं। घर के रिनोवेशन का प्लान बन सकता है। करियर: वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोगों के लिए दिन अच्छा है। कार्यस्थल पर काम का दबाव महसूस करेंगे। आर्थिक: वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने का विचार बन सकता है। मां से आर्थिक मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य: छाती में कफ या सर्दी-जुकाम की शिकायत हो सकती है। ठंडी चीजों से परहेज करें। प्रेम: जीवनसाथी के साथ समय बिताने की जरूरत है, अन्यथा दूरियां बढ़ सकती हैं। शुभ रंग: आसमानी (Sky Blue)। भाग्य प्रतिशत: 70% 11. कुंभ राशि (Aquarius): पराक्रम और साहस चंद्रमा 3रे भाव में हैं। आज आपका साहस देखते ही बनेगा। सामान्य: आज आप बहुत सक्रिय रहेंगे। छोटी यात्रा (Short Travel) का योग है। पड़ोसियों या भाई-बहनों के साथ अच्छा समय बीतेगा। करियर: मार्केटिंग, सेल्स और कम्युनिकेशन से जुड़े लोगों के टारगेट्स पूरे होंगे। आपकी वाणी का जादू चलेगा। आर्थिक: भाग्य का साथ मिलेगा। मेहनत के अनुपात में धन लाभ अधिक होगा। स्वास्थ्य: कंधे या गर्दन में जकड़न महसूस हो सकती है। योगाभ्यास करें। प्रेम: पार्टनर के साथ कहीं घूमने जाने का प्लान बनेगा। शुभ रंग: नीला (Blue)। भाग्य प्रतिशत: 87% 12. मीन राशि (Pisces): वाणी और धन चंद्रमा 2रे भाव (धन भाव) में हैं। सामान्य: आज आपकी वाणी बहुत मधुर और प्रभावकारी रहेगी। आप अपनी बातों से किसी का भी दिल जीत लेंगे। करियर: बैंकिंग, फाइनेंस और शिक्षण क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए दिन शानदार है। परिवार के बिज़नेस में हाथ बंटाएंगे। आर्थिक: रुका हुआ धन प्राप्त होगा। बैंक बैलेंस बढ़ने के आसार हैं। खान-पान पर खर्चा हो सकता है। स्वास्थ्य: दांतों में दर्द या मुंह में छाले हो सकते हैं। प्रेम: परिवार के साथ भोजन का आनंद लेंगे। रिश्तों में मिठास बढ़ेगी। शुभ रंग: नारंगी/हल्दी (Orange/Turmeric)। भाग्य प्रतिशत: 80% भीष्म अष्टमी और सोमवार का संयोग: आज करें ये महाउपाय आज 26 जनवरी को भीष्म अष्टमी होने के कारण इस दिन का धार्मिक महत्व बहुत बढ़ जाता है। मान्यता है कि आज के दिन भीष्म पितामह ने अपनी इच्छा से शरीर का त्याग किया था। निःसंतान दंपत्तियों और पितृ दोष से पीड़ित लोगों के लिए आज का दिन बहुत खास है। 1. पितृ दोष निवारण उपाय आज दोपहर के समय (अभिजीत मुहूर्त के आसपास) दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों को जल में तिल मिलाकर तर्पण दें। मंत्र: "ॐ भीष्माय नमः" का जाप करते हुए जल अर्पित करें। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है। 2. सोमवार के विशेष उपाय (शिव कृपा) आज सुबह स्नान के बाद शिवालय जाएं। शिवलिंग पर कच्चा दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल (पंचामृत) अर्पित करें। बेलपत्र पर सफेद चंदन से 'राम' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे मानसिक शांति मिलेगी और चंद्रमा (मन का कारक) मजबूत होगा। 3. गणतंत्र दिवस विशेष उपाय (सरकारी लाभ के लिए) यदि आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं या सरकारी काम अटका हुआ है, तो आज सूर्य देव को अर्घ्य देते समय जल में थोड़ा सा गुड़, लाल फूल और रोली मिलाएं। देशभक्ति का संकल्प लें और किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं। क्या कहते हैं सितारे? कुल मिलाकर, 26 जनवरी 2026 का दिन मेष, मिथुन, सिंह, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए अत्यंत भाग्यशाली रहने वाला है। इन राशियों के जातकों को किस्मत का पूरा साथ मिलेगा। वहीं, वृषभ, कन्या और मकर राशि वालों को थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। गणतंत्र दिवस का यह पर्व हम सभी को अनुशासन (शनि-सूर्य) और देशभक्ति (मंगल-चंद्रमा) का संदेश दे रहा है। ग्रहों की स्थिति भारत के लिए भी शुभ संकेत दे रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर देश की साख और मजबूत होगी। खबरीलाल डेस्क की ओर से आप सभी को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! (अस्वीकरण: यह राशिफल ग्रहों की सामान्य गणना पर आधारित है। व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार परिणामों में भिन्नता हो सकती है। किसी भी बड़े निर्णय के लिए विद्वान ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।)
नई दिल्ली/ढाका (22 जनवरी, 2026): क्रिकेट की दुनिया में भूचाल आ गया है। खेल और राजनीति का मिश्रण एक बार फिर फैंस के लिए निराशाजनक साबित हुआ है। भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहे कूटनीतिक और राजनीतिक तनाव की आंच अब सीधे क्रिकेट के मैदान तक पहुंच गई है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए भारत में आयोजित होने वाले T20 World Cup 2026 का आधिकारिक तौर पर बहिष्कार (Boycott) कर दिया है।READ ALSO:-जम्मू-कश्मीर: डोडा में बड़ा हादसा, 200 फीट गहरी खाई में गिरी सेना की गाड़ी, 10 जवान शहीद; रेस्क्यू ऑपरेशन में एयरलिफ्ट किए गए घायल 72 घंटे के हाई-वोल्टेज ड्रामे, ICC के साथ मैराथन बैठकों और सुरक्षा चिंताओं के दावों के बाद, बांग्लादेश ने यह कदम उठाया है। वहीं, इस आग में घी डालने का काम पाकिस्तान के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ ने किया है, जिन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को भी भारत के खिलाफ मोर्चा खोलने और टूर्नामेंट से हटने की सलाह दे डाली है। इस विस्तृत विशेष रिपोर्ट में हम आपको इस पूरे विवाद की जड़, ICC के कड़े रुख, राशिद लतीफ के भड़काऊ बयान और टूर्नामेंट पर पड़ने वाले असर के बारे में विस्तार से बताएंगे। क्यों लिया बांग्लादेश ने बॉयकॉट का फैसला? (The Reason Behind Withdrawal) बांग्लादेश के इस फैसले के पीछे केवल एक कारण नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच चल रही घटनाओं की एक लंबी श्रृंखला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को साफ कर दिया था कि उनकी टीम मौजूदा हालात में भारत का दौरा करने के लिए मानसिक और सुरक्षा के लिहाज से तैयार नहीं है। 1. सुरक्षा और राजनीतिक तनाव: अगस्त 2024 में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट और उनके भारत में शरण लेने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई है। बांग्लादेश में नई अंतरिम सरकार और कट्टरपंथी समूहों द्वारा भारत विरोधी भावनाओं को हवा दी जा रही है। BCB ने ICC को भेजे अपने पत्र में इसी "असुरक्षित माहौल" का हवाला दिया था। बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने स्पष्ट कहा है, "हम तार्किक दबाव और अनुचित जबरदस्ती के आगे नहीं झुकेंगे।" 2. वेन्यू बदलने की मांग खारिज: बांग्लादेश ने ICC के सामने शर्त रखी थी कि उनके मैच भारत की बजाय सह-मेजबान देश श्रीलंका (Sri Lanka) में शिफ्ट कर दिए जाएं। उन्होंने तर्क दिया कि वे ग्रुप बी में शिफ्ट होना चाहते हैं जिसके मैच श्रीलंका में होने हैं। लेकिन ICC ने इस मांग को 14-2 के बहुमत से खारिज कर दिया। केवल पाकिस्तान ने बांग्लादेश का समर्थन किया। ICC का कड़ा रुख: 'खेलना है तो भारत आओ, वरना बाहर जाओ' इस पूरे मामले में ICC ने बेहद सख्त रवैया अपनाया है। दुबई में हुई आपातकालीन बोर्ड मीटिंग में ICC ने स्पष्ट कर दिया कि टूर्नामेंट के शेड्यूल में अब कोई बदलाव संभव नहीं है। सुरक्षा की गारंटी: ICC ने बताया कि उन्होंने स्वतंत्र सुरक्षा एजेंसियों से भारत में वेन्यू की जांच कराई है और बांग्लादेशी खिलाड़ियों या फैंस को वहां कोई खतरा नहीं है। अल्टीमेटम: सूत्रों के मुताबिक, ICC ने बांग्लादेश को 21 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया था कि वे लिखित में पुष्टि करें कि वे भारत आ रहे हैं या नहीं। जब BCB ने अपनी जिद नहीं छोड़ी, तो ICC ने उन्हें टूर्नामेंट से बाहर मानने का फैसला किया। स्कॉटलैंड की एंट्री: अब खबर है कि बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड (Scotland) को टूर्नामेंट में शामिल किया जा सकता है, जो यूरोपीय क्वालिफायर में अगले स्थान पर था। स्कॉटलैंड को ग्रुप सी में बांग्लादेश की जगह दी जा सकती है। राशिद लतीफ का विवादित बयान: पाकिस्तान को उकसाने की कोशिश जले पर नमक छिड़कने का काम पाकिस्तान के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज राशिद लतीफ (Rashid Latif) ने किया है। लतीफ ने एक यूट्यूब शो पर कहा कि यह सही समय है जब पाकिस्तान को बांग्लादेश का समर्थन करना चाहिए और भारत में होने वाले वर्ल्ड कप का बहिष्कार कर देना चाहिए। क्या कहा राशिद लतीफ ने? लतीफ ने कहा, "अगर पाकिस्तान और भारत का मैच नहीं होता है, तो वर्ल्ड कप का 50% रोमांच और राजस्व खत्म हो जाएगा। यह मौजूदा क्रिकेट ऑर्डर को चुनौती देने का एक शानदार मौका है। पाकिस्तान को कहना चाहिए कि हम बांग्लादेश के साथ खड़े हैं और हम भी नहीं खेलेंगे।" उन्होंने इसे "गीदड़ भभकी" से आगे ले जाकर एक रणनीतिक कदम बताया। लतीफ ने आगे कहा, "ट्रंप कार्ड अभी भी पाकिस्तान के पास है। अगर वे झुक गए और खेलने चले गए, तो भविष्य में उन्हें हर तरफ से आलोचना झेलनी पड़ेगी ('हर कोने से थप्पड़ पड़ेंगे')।" उनका मानना है कि जय शाह (ICC चेयरमैन) और भारतीय प्रशासन के सामने झुकना पाकिस्तान क्रिकेट की साख गिरा देगा। मुस्तफिजुर रहमान और IPL विवाद: जहां से शुरू हुई चिंगारी इस आग की शुरुआत दरअसल क्रिकेट के मैदान से ही हुई थी। कुछ दिन पहले ही BCCI के निर्देशों पर आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने बांग्लादेश के स्टार तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान (Mustafizur Rahman) को अपनी टीम से रिलीज कर दिया था। इसके जवाब में बांग्लादेश सरकार ने अपने देश में IPL के प्रसारण पर रोक लगा दी। बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने कहा था, "जब एक बांग्लादेशी खिलाड़ी भारत में सुरक्षित महसूस नहीं कर सकता, तो पूरी टीम वहां वर्ल्ड कप खेलने कैसे जा सकती है?" इस घटना ने दोनों बोर्ड (BCCI और BCB) के बीच के रिश्तों को पूरी तरह खत्म कर दिया। U19 वर्ल्ड कप में शर्मनाक घटना: जब नहीं मिलाए हाथ तनाव का असर जूनियर लेवल पर भी देखने को मिला। 17 जनवरी को हुए U19 वर्ल्ड कप मैच के दौरान भारत और बांग्लादेश के कप्तानों ने टॉस के वक्त एक-दूसरे से हाथ नहीं मिलाया। यह क्रिकेट की 'जेंटलमैन स्पिरिट' के खिलाफ था और इसने संकेत दे दिया था कि मामला अब खेल से बहुत आगे निकल चुका है। बांग्लादेश के क्रिकेट भविष्य पर संकट इस फैसले के दूरगामी परिणाम बांग्लादेश क्रिकेट के लिए विनाशकारी हो सकते हैं: आर्थिक दंड: ICC बांग्लादेश पर भारी जुर्माना लगा सकता है और उनकी फंडिंग रोक सकता है। BCB अध्यक्ष ने दावा किया था कि उन्हें फर्क नहीं पड़ता, लेकिन हकीकत में ICC की फंडिंग के बिना बोर्ड का चलना मुश्किल है। भविष्य के टूर्नामेंट: 2031 में बांग्लादेश को भारत के साथ वनडे वर्ल्ड कप की सह-मेजबानी करनी है। इस हरकत के बाद उनसे मेजबानी का अधिकार छीना जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय अलगाव: द्विपक्षीय सीरीज के लिए भी अन्य देश बांग्लादेश का दौरा करने से कतरा सकते हैं। T20 World Cup 2026 अब केवल चौकों-छक्कों का टूर्नामेंट नहीं, बल्कि कूटनीतिक रस्साकशी का अखाड़ा बन गया है। बांग्लादेश का हटना टूर्नामेंट की चमक को थोड़ा फीका जरूर करेगा, लेकिन ICC ने स्कॉटलैंड को लाने की तैयारी करके साफ कर दिया है कि 'शो मस्ट गो ऑन' (The Show Must Go On)। अब सबकी निगाहें पाकिस्तान पर टिकी हैं कि क्या वे राशिद लतीफ की सलाह मानकर आत्मघाती कदम उठाते हैं या खेल भावना का परिचय देते हुए मैदान में उतरते हैं। भारत के लिए यह एक कूटनीतिक जीत भी है कि वैश्विक मंच (ICC) ने उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा जताया और दबाव के सामने झुकने से इनकार कर दिया। बांग्लादेश ने सुरक्षा और राजनीतिक तनाव का हवाला देते हुए भारत में होने वाले T20 World Cup 2026 से नाम वापस ले लिया है। ICC ने वेन्यू बदलने से मना कर दिया था। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ ने इसे सही ठहराते हुए अपनी टीम को भी बॉयकॉट की सलाह दी है। बांग्लादेश की जगह अब स्कॉटलैंड के खेलने की संभावना है।
गोपेश्वर / चमोली / देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड के हिमालयी शिखरों में बसने वाले आदियोगी भगवान शिव के भक्तों के लिए आज का दिन अत्यंत मंगलकारी समाचार लेकर आया है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी, जिसे हम वसंत पंचमी (Vasant Panchami) के रूप में मनाते हैं, के पावन पर्व पर 'पंच केदार' (Panch Kedar) में से एक और अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति के लिए प्रसिद्ध चतुर्थ केदार भगवान श्री रुद्रनाथ (Rudranath) के कपाट खुलने की तिथि की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है।READ ALSO:-Badrinath Dham Kapat Opening Date 2026: 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, वसंत पंचमी पर हुआ तिथियों का ऐलान—जानें पूरी डिटेल चतुर्थ केदार भगवान श्री रुद्रनाथ के कपाट दिनांक 18 मई 2026 को दोपहर 12:57 बजे विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोले जाएंगे। 🙏🕉️ pic.twitter.com/N4IGeaSe3t — Chamoli Police Uttarakhand (@chamolipolice) January 23, 2026 शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को भगवान रुद्रनाथ के शीतकालीन गद्दी स्थल, ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर (Gopinath Mandir), गोपेश्वर में एक भव्य धार्मिक समारोह के दौरान हक-हकूकधारियों, पुजारियों और वेदपाठी ब्राह्मणों ने पंचांग गणना के आधार पर यह शुभ तिथि तय की। प्रमुख घोषणा: साल 2026 में भगवान रुद्रनाथ जी के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए 18 मई को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर पूर्ण वैदिक परंपरा और विधि-विधान के साथ आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। यह घोषणा न केवल धार्मिक आस्था का विषय है, बल्कि यह उस साहसिक यात्रा की शुरुआत का भी संकेत है, जिसे 'रुद्रनाथ ट्रैक' कहा जाता है—एक ऐसी यात्रा जो शरीर की परीक्षा लेती है और आत्मा को तृप्त करती है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कपाट खुलने की प्रक्रिया, डोली यात्रा का कार्यक्रम, भगवान के 'एकानन' स्वरूप का रहस्य, और 18 किलोमीटर की उस कठिन चढ़ाई के बारे में, जिसे पार करके भक्त अपने आराध्य तक पहुंचते हैं। वसंत पंचमी पर घोषणा: गोपीनाथ मंदिर में उत्सव का माहौल उत्तराखंड की परंपराओं में वसंत पंचमी का दिन केवल ऋतु परिवर्तन का सूचक नहीं है, बल्कि यह आगामी यात्रा सीजन की तैयारियों का शंखनाद भी है। शुक्रवार को गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर परिसर, जो भगवान रुद्रनाथ का शीतकालीन आवास है, वैदिक मंत्रों और स्थानीय वाद्य यंत्रों की ध्वनियों से गूंज उठा। पंचांग गणना की प्रक्रिया परंपरा के अनुसार, मंदिर के मुख्य पुजारी और हक-हकूकधारियों (मंदिर के पारंपरिक अधिकार धारक) ने भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद, ग्रहों और नक्षत्रों की चाल को देखते हुए, 'अभिजित मुहूर्त' और अन्य शुभ योगों का मिलान करके 18 मई की तारीख तय की गई। घोषणा का समय: 23 जनवरी, 2026 (शुक्रवार) कपाट खुलने का मुहूर्त: 18 मई, 2026 (दोपहर 12:57 बजे) स्थानीय लोगों के लिए यह क्षण भावुक करने वाला होता है, क्योंकि वे जानते हैं कि अब जल्द ही उनके आराध्य देवता शीतकालीन प्रवास से अपने मूल धाम (हिमालय की ऊंचाइयों पर) के लिए प्रस्थान करेंगे। डोली यात्रा और कपाट खुलने का विस्तृत कार्यक्रम भगवान रुद्रनाथ की यात्रा केवल एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि यह कई दिनों तक चलने वाला एक धार्मिक उत्सव है। मंदिर समिति द्वारा जारी किए गए कार्यक्रम के अनुसार, कपाट खुलने की प्रक्रिया इस प्रकार रहेगी: 15 और 16 मई: अंतिम शीतकालीन दर्शन कपाट खुलने के लिए डोली के प्रस्थान करने से पहले, भक्तों को भगवान के शीतकालीन आवास में दर्शन का अंतिम अवसर मिलेगा। स्थान: गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर। विवरण: 15 और 16 मई तक भगवान रुद्रनाथ के 'उत्सव विग्रह' (चल विग्रह) के दर्शन भक्त गोपेश्वर में ही कर सकेंगे। इस दौरान विशेष आरती और भोग का आयोजन होगा। स्थानीय भक्त अपने देवता को विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में उमड़ेंगे। 17 मई: डोली का प्रस्थान घटना: भगवान रुद्रनाथ जी की उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दी स्थल से मूल धाम के लिए प्रस्थान करेगी। दृश्य: यह एक अद्भुत नजारा होता है। फूलों से सजी डोली, पारंपरिक वाद्य यंत्रों (ढोल-दमाऊ) की थाप और 'जय भोलेनाथ' के जयकारों के साथ डोली गोपेश्वर से निकलती है। हजारों भक्त डोली को कंधे देने के लिए उत्सुक रहते हैं। पड़ाव: डोली सगर गांव होते हुए जंगल के रास्ते ल्वीटी बुग्याल या पनार बुग्याल में रात्रि विश्राम करती है (यह मौसम और व्यवस्था पर निर्भर करता है)। 18 मई: कपाट खुलना समय: दोपहर 12 बजकर 57 मिनट। प्रक्रिया: डोली के रुद्रनाथ मंदिर पहुंचने पर, मुख्य पुजारी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के द्वार (कपाट) खोलेंगे। सबसे पहले मंदिर के अंदर साफ-सफाई और शुद्धिकरण किया जाएगा। प्रथम पूजा: इसके बाद भगवान के 'एकानन' (मुख) स्वरूप का जलाभिषेक और श्रृंगार किया जाएगा, और फिर आम भक्तों के लिए दर्शन शुरू हो जाएंगे। चतुर्थ केदार रुद्रनाथ: जहां होती है शिव के 'मुख' की पूजा पंच केदार (केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर) में रुद्रनाथ का स्थान चौथा है, लेकिन महत्ता और विशिष्टता में यह अद्वितीय है। पौराणिक कथा: पांडवों और शिव का मिलन महाभारत युद्ध के बाद, पांडव अपने गोत्र हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव को खोज रहे थे। शिव उनसे नाराज थे और नंदी (बैल) का रूप धारण कर धरती में समाने लगे। उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से पांच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए। केदारनाथ: पीठ (कूबड़)। तुंगनाथ: भुजाएं। मध्यमहेश्वर: नाभि। कल्पेश्वर: जटाएं। रुद्रनाथ: मुख (Face)। एकानन स्वरूप और नील-लोहित रुद्रनाथ ही वह एकमात्र स्थान है जहां भगवान शिव के 'मुख' (Face) के दर्शन होते हैं। यहां शिवलिंग के बजाय एक प्राकृतिक शिला पर भगवान शिव का मुख बना हुआ है। इसे 'एकानन' (एक मुख वाला) स्वरूप कहा जाता है। स्थानीय मान्यताओं में उन्हें 'नील-लोहित' शिव भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। 18-20 किलोमीटर का कठिन ट्रैक: साहस और आस्था की परीक्षा रुद्रनाथ मंदिर समुद्र तल से लगभग 2286 मीटर (कुछ स्रोतों के अनुसार 3600 मीटर तक की ऊंचाई वाले बुग्यालों को पार करना पड़ता है) की ऊंचाई पर स्थित है। पंच केदारों में रुद्रनाथ की यात्रा को सबसे कठिन (Toughest Trek) माना जाता है। रास्ता 1: सगर गांव से (सबसे प्रचलित मार्ग) कपाट खुलने के दौरान डोली इसी रास्ते से जाती है। शुरुआत: गोपेश्वर से लगभग 5 किमी दूर 'सगर गांव'। चढ़ाई: यह लगभग 18-19 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई है। प्रमुख पड़ाव: पुंग बुग्याल: सगर से चढ़ाई शुरू करते ही घने जंगल और फिर घास के मैदान (बुग्याल) शुरू हो जाते हैं। ल्वीटी बुग्याल: यहां से हिमालय का दृश्य खुलने लगता है। पनार बुग्याल (Panar Bugyal): यह इस ट्रैक का सबसे सुंदर और कठिन हिस्सा है। मीलों तक फैले मखमली घास के मैदान और सामने नंदा देवी पर्वत का विराट रूप। यहां ऑक्सीजन की कमी महसूस हो सकती है। पितृधार: यह यात्रा का सबसे ऊंचा बिंदु है। यहां से रास्ता थोड़ा नीचे की ओर जाता है। रुद्रनाथ: अंत में चट्टानों के बीच स्थित छोटा सा मंदिर दिखाई देता है। रास्ता 2: मंडल और अनुसूया देवी से एक दूसरा रास्ता मंडल गांव से होकर जाता है, जो माता अनुसूया देवी के मंदिर से गुजरता है। यह रास्ता थोड़ा लंबा है लेकिन प्रकृति प्रेमियों के लिए अद्भुत है। कठिनाई का स्तर केदारनाथ में खच्चर और पालकी की सुविधा आसानी से मिल जाती है, लेकिन रुद्रनाथ का रास्ता संकरा और जंगलों से भरा है, इसलिए यहां सुविधाएं कम हैं। पानी के स्रोत सीमित हैं, इसलिए यात्रियों को अपनी व्यवस्था के साथ चलना होता है। यही कठिनाई इस यात्रा को 'विशिष्ट' बनाती है—यहां केवल वही पहुंचता है जिसमें दृढ़ इच्छाशक्ति हो। वैतरणी कुंड और पितरों का तर्पण रुद्रनाथ मंदिर के पास ही पवित्र 'वैतरणी कुंड' (Vaitarni Kund) स्थित है। हिंदू धर्म में वैतरणी नदी का विशेष महत्व है, जिसे मृत्यु के बाद पार करना होता है। महत्व: यहां श्रद्धालु अपने पूर्वजों (पितरों) का तर्पण और पिंडदान करते हैं। मान्यता: कहा जाता है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों को सीधे शिवलोक की प्राप्ति होती है। गया (बिहार) के बाद इसे पिंडदान के लिए अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य: फूलों की घाटी जैसा अनुभव रुद्रनाथ की यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक विजुअल ट्रीट (Visual Treat) भी है। बुरांश के जंगल: मई के महीने में जब कपाट खुलते हैं, तो पूरा रास्ता लाल और गुलाबी बुरांश (Rhododendron) के फूलों से लदा होता है। हिमालय दर्शन: पनार बुग्याल से नंदा देवी (Nanda Devi), त्रिशूल (Trishul) और नंदा घुंटी (Nanda Ghunti) चोटियों का जो नजारा दिखता है, वह दुनिया में कहीं और दुर्लभ है। ऐसा लगता है मानो आप हाथ बढ़ाकर पर्वतों को छू लेंगे। वन्यजीव: यह क्षेत्र नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है। भाग्यशाली यात्रियों को यहां हिमालयन मोनाल (उत्तराखंड का राज्य पक्षी), कस्तूरी मृग और कभी-कभी हिमालयी भालू भी देखने को मिल सकते हैं। शीतकालीन गद्दी: गोपीनाथ मंदिर का महत्व जब 18 मई को कपाट खुलेंगे, तब तक (यानी आज से मई तक) भगवान रुद्रनाथ की पूजा गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में ही होगी। ऐतिहासिकता: गोपीनाथ मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। यह पत्थरों से बना एक भव्य मंदिर है जिसका शिखर थोड़ा झुका हुआ है। त्रिशूल: मंदिर परिसर में एक विशाल अष्टधातु का त्रिशूल है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसे किसी भी मानवीय शक्ति से हिलाया नहीं जा सकता, लेकिन सच्चे मन से स्पर्श करने पर यह कंपन करता है। 6 माह का नियम: पौराणिक परंपराओं के अनुसार, शीतकाल में बर्फबारी के कारण रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 6 माह के लिए बंद कर दिए जाते हैं। तब भगवान की चल विग्रह डोली गोपीनाथ मंदिर में विराजमान होती है। जो भक्त कठिन चढ़ाई नहीं चढ़ सकते, वे सर्दियों में यहीं भगवान रुद्रनाथ के दर्शन करते हैं। यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह (Travel Tips) यदि आप 18 मई को कपाट खुलने के अवसर पर वहां जाने की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें: फिटनेस: यह ट्रैक आसान नहीं है। अभी से वॉक और कार्डियो शुरू करें। सामान: अपने साथ गर्म कपड़े, रेनकोट, टॉर्च, और ड्राई फ्रूट्स जरूर रखें। गाइड: यदि आप पहली बार जा रहे हैं, तो सगर गांव से किसी स्थानीय गाइड या पोर्टर को साथ लेना उचित है, क्योंकि जंगलों में रास्ता भटकने का डर रहता है। रुकने की व्यवस्था: रुद्रनाथ में मंदिर समिति की धर्मशाला और कुछ साधारण होमस्टे/टेंट उपलब्ध हैं। सुविधाएं बहुत ही बुनियादी हैं (बिना बिजली के), इसलिए विलासिता की उम्मीद न करें। पंजीकरण: चारधाम यात्रा की तरह ही इसके लिए भी उत्तराखंड पर्यटन की वेबसाइट पर पंजीकरण आवश्यक हो सकता है। एक बार अवश्य करें दर्शन भगवान रुद्रनाथ की यात्रा आपको शहर की भीड़भाड़ और शोर से दूर, शांति और आध्यात्म की एक अलग दुनिया में ले जाती है। 18 मई 2026 की तारीख नोट कर लें। जब आप पनार बुग्याल की ऊंचाइयों पर ठंडी हवाओं के बीच खड़े होकर सामने विशाल हिमालय और नीचे बादलों को देखेंगे, और फिर मंदिर में भगवान शिव के शांत मुखारविंद के दर्शन करेंगे, तो सारी थकान एक पल में गायब हो जाएगी। "जय भोलेनाथ, जय रुद्रनाथ" के उद्घोष के साथ, आइए हम सब इस पवित्र यात्रा के साक्षी बनने के लिए तैयार हों। त्वरित तथ्य (Quick Facts Box) विवरण जानकारी मंदिर श्री रुद्रनाथ (चतुर्थ केदार) स्थान चमोली जिला, उत्तराखंड कपाट खुलने की तिथि 18 मई, 2026 कपाट खुलने का समय दोपहर 12:57 बजे घोषणा स्थल गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर घोषणा तिथि 23 जनवरी, 2026 (वसंत पंचमी) विशेषता भगवान शिव के 'मुख' की पूजा ट्रैक की दूरी सगर गांव से लगभग 18-19 कि.मी. शीतकालीन आवास गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर निकटतम शहर गोपेश्वर (जिला मुख्यालय)
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश ने जहां प्रदूषण से थोड़ी राहत दी थी, वहीं अब यह बारिश कड़ाके की ठंड (Cold Wave) का कारण बनने जा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों के लिए नया अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में दिल्ली वालों को हाड़ कंपाने वाली सर्दी का सामना करना पड़ सकता है। 27 जनवरी को दोबारा बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।READ ALSO:-यूपी बोर्ड 2026: प्रैक्टिकल परीक्षा की तारीखों में बड़ा फेरबदल! 29-30 जनवरी को भी होंगे एग्जाम, सचिव ने जारी किया 'अर्जेंट' आदेश दिल्ली और इसके आसपास के शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में रहने वाले लोगों के लिए यह सप्ताह मौसम के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव के चलते मौसम में यह अस्थिरता बनी हुई है। बारिश के बाद अब शीतलहर का प्रकोप दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में हुई बारिश के बाद अब कड़ाके की ठंड का नया दौर शुरू होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक, अगले एक हफ्ते तक तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जाएगी। दिन में भले ही धूप-छांव का खेल चलता रहे, लेकिन रात होते ही ठिठुरन काफी बढ़ जाएगी। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादलों के छंटते ही बर्फीली हवाएं मैदानी इलाकों का रुख करेंगी। इससे रात का पारा तेजी से नीचे गिरेगा। अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस (4°C) तक लुढ़क सकता है। यह इस सीजन की सबसे सर्द रातों में से एक हो सकता है। दिन के समय अधिकतम तापमान 18 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है, जो सामान्य से थोड़ा कम है। लेकिन असली मुसीबत रात की सर्दी होगी। आने वाले दिनों में सर्दी का सितम ऐसा होगा कि लोगों को दिन में भी भारी जैकेट और अलाव का सहारा लेना पड़ेगा। विशेषकर सुबह और शाम के समय दोपहिया वाहन चालकों को संभलकर रहने की जरूरत है। 27 जनवरी को फिर बारिश और आंधी का अलर्ट मौसम विभाग ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। 25 और 26 जनवरी को मौसम के शुष्क रहने के बाद, 27 जनवरी को फिर से मौसम करवट लेगा। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के चलते 27 जनवरी को दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि इस दौरान तेज हवाएं भी चलेंगी। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 27 जनवरी को करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं (Gusty Winds) चल सकती हैं। ये हवाएं बर्फीली ठंडक लेकर आएंगी, जिससे ठिठुरन और बढ़ जाएगी। बारिश की यह गतिविधि ठंड को लंबे समय तक खींच सकती है। 28 जनवरी के बाद भले ही बारिश रुक जाए, लेकिन हवाओं में नमी (Moisture) और ठंडक बरकरार रहेगी। यह बदलता मौसम फरवरी की शुरुआत तक सर्दी के तेवर तीखे बनाए रख सकता है। इसलिए, जो लोग सोच रहे थे कि सर्दी अब जाने वाली है, उनके लिए यह चेतावनी है कि अभी गर्म कपड़ों को पैक करने की जल्दबाजी न करें। कोहरे और बादलों का डेरा: 24 से 30 जनवरी का पूर्वानुमान कोहरा दिल्ली की सर्दी का एक अभिन्न हिस्सा है, और आने वाले दिनों में यह और घना होने वाला है। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, 24 से 30 जनवरी के बीच पूरे एनसीआर इलाके में आसमान में बादल छाए रहेंगे और सुबह के समय घना कोहरा (Dense Fog) देखने को मिलेगा। विजिबिलिटी पर असर: घने कोहरे की वजह से विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम हो सकती है। कई इलाकों में विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम रह सकती है। इसका सीधा असर सड़क, रेल और हवाई यातायात पर पड़ेगा। सड़क यातायात: कोहरे की वजह से गाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है। यमुना एक्सप्रेसवे और अन्य हाईवे पर चालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। रेल यातायात: कोहरे के कारण लंबी दूरी की ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चल सकती हैं। हवाई उड़ानें: विजिबिलिटी कम होने पर आईजीआई एयरपोर्ट (IGI Airport) से उड़ानों के संचालन में भी बाधा आ सकती है। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि 28 से 30 जनवरी के बीच मौसम थोड़ा सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन हल्का कोहरा और बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। सुबह के वक्त घर से निकलने वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि ठंडी हवाएं सीधे सेहत पर असर डाल सकती हैं। 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) पर कैसा रहेगा मौसम? 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस (Republic Day) के अवसर पर कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड को देखने के लिए हजारों लोग इकट्ठा होते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 26 जनवरी को सुबह के समय हल्का कोहरा रह सकता है, लेकिन दिन में आसमान साफ रहने या आंशिक रूप से बादल छाए रहने की उम्मीद है। बारिश की संभावना 26 जनवरी को कम है, जो कि एक राहत की खबर है। हालांकि, सुबह की ठंड काफी तेज होगी, इसलिए परेड देखने जाने वाले दर्शकों को पूरी तरह से गर्म कपड़ों में लिपटे रहने की सलाह दी जाती है। न्यूनतम तापमान 6 डिग्री के आसपास रहने की उम्मीद है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) क्या है और इसका असर दिल्ली के मौसम में आए इस बदलाव का मुख्य कारण 'पश्चिमी विक्षोभ' है। यह भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठने वाला एक तूफान है जो ईरान, इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में पहुंचता है। जब यह सिस्टम पहाड़ों (हिमालय) से टकराता है, तो वहां भारी बर्फबारी होती है। जब यह मैदानी इलाकों (जैसे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा) से गुजरता है, तो यहां बारिश और ठंडी हवाएं लाता है। फिलहाल, पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ रहा है। वहां से आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाएं (North-Westerly Winds) दिल्ली के तापमान को गिरा रही हैं। स्वास्थ्य के लिए चेतावनी: बच्चों और बुजुर्गों का रखें ख्याल तापमान में अचानक गिरावट और नमी का बढ़ना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। डॉक्टरों ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सतर्क रहने को कहा है। हृदय रोगी (Heart Patients): अत्यधिक ठंड में नसों के सिकुड़ने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा रहता है। बुजुर्गों को सलाह दी गई है कि वे सुबह बहुत जल्दी सैर पर जाने से बचें। धूप निकलने के बाद ही बाहर निकलें। सांस की बीमारी: कोहरा और प्रदूषण मिलकर 'स्मॉग' (Smog) बनाते हैं, जो अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए खतरनाक है। बारिश के बाद नमी बढ़ने से सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। वायरल इन्फेक्शन: मौसम में उतार-चढ़ाव (कभी बारिश, कभी धूप, कभी ठंड) से वायरल बुखार, खांसी और जुकाम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बचाव के उपाय: बाहर निकलते समय सिर और कान को ढककर रखें। लेयरिंग (Layering) करें: एक मोटे जैकेट की जगह दो-तीन पतले गर्म कपड़े पहनना ज्यादा बेहतर होता है। गर्म पानी और ताजा भोजन का सेवन करें। विटामिन सी (Vitamin C) युक्त फल खाएं ताकि इम्यूनिटी बनी रहे। यातायात एडवाइजरी: कोहरे में ड्राइविंग के नियम आने वाले दिनों में घने कोहरे को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने वाहन चालकों के लिए कुछ सुझाव दिए हैं: फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करें: अपनी गाड़ी में फॉग लाइट्स हमेशा ठीक रखें और कोहरे में लो बीम (Low Beam) पर गाड़ी चलाएं। हाई बीम पर रोशनी कोहरे से परावर्तित होकर वापस आपकी आंखों में लगती है, जिससे कुछ दिखाई नहीं देता। धीमी गति: कोहरे में दृश्यता का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है, इसलिए गति सीमा के भीतर ही वाहन चलाएं। सड़क पर पट्टियों का पालन करें: अगर आगे कुछ दिखाई न दे, तो सड़क के किनारे बनी सफेद या पीली पट्टियों को देखते हुए गाड़ी चलाएं। इंडिकेटर का प्रयोग: लेन बदलते समय या मुड़ते समय इंडिकेटर का इस्तेमाल जरूर करें और अपनी गाड़ी के इमरजेंसी इंडिकेटर (Hazard lights) का उपयोग तभी करें जब गाड़ी खड़ी हो या बहुत खतरनाक स्थिति हो। नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम का हाल दिल्ली से सटे इलाकों का हाल भी कमोबेश एक जैसा ही है। नोएडा और गाजियाबाद: यहां ऊंची इमारतों के कारण हवा का प्रवाह कई बार रुक जाता है, जिससे कोहरा ज्यादा देर तक बना रह सकता है। 27 तारीख की बारिश से यहाँ की सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है। गुरुग्राम और फरीदाबाद: अरावली की पहाड़ियों के नजदीक होने के कारण गुरुग्राम में रात का तापमान दिल्ली से भी 1-2 डिग्री कम दर्ज किया जा सकता है। यहाँ शीत लहर (Cold Wave) का असर ज्यादा महसूस होगा। फरवरी की शुरुआत तक कैसी रहेगी सर्दी? आमतौर पर जनवरी के अंत तक सर्दी कम होने लगती है, लेकिन इस बार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता ने सर्दी को बढ़ा दिया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि फरवरी के पहले सप्ताह तक सुबह और शाम की ठंडक बरकरार रहेगी। 27 जनवरी की बारिश के बाद जब आसमान साफ होगा, तो 'रेडिएशन कूलिंग' (Radiation Cooling) के कारण रातें और ठंडी हो जाएंगी। फरवरी में दिन का तापमान धीरे-धीरे बढ़ेगा और धूप में तेजी आएगी, लेकिन सुबह की सैर करने वालों को फरवरी के मध्य तक जैकेट की जरूरत महसूस होगी। कुल मिलाकर, दिल्ली-एनसीआर के लोगों को अभी सर्दी से राहत मिलती नहीं दिख रही है। 27 जनवरी को होने वाली बारिश और उसके साथ चलने वाली 40 किमी/घंटा की हवाएं ठंड को चरम पर पहुंचा देंगी। 4 डिग्री तक गिरता पारा और घना कोहरा जनजीवन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप मौसम विभाग के अलर्ट को गंभीरता से लें। घर से बाहर निकलते समय मौसम का हाल जरूर देख लें और अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखें। यह सर्दी का 'फिनाले' हो सकता है, लेकिन यह जाते-जाते अपना असर जरूर दिखाएगा।
मुंबई (Mumbai): साल 2026 की शुरुआत बॉलीवुड के 'भाईजान' यानी सलमान खान (Salman Khan) के फैंस के लिए बेहद खास खबर के साथ हुई है. लंबे समय से जिस फिल्म की चर्चा हो रही थी, अब उसकी पहली झलक संगीत के माध्यम से सामने आ गई है. सलमान खान की मच-अवेटेड फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' (Battle of Galwan) का पहला गाना 'मातृभूमि' (Maatrubhumi Song) रिलीज कर दिया गया है.READ ALSO:-WhatsApp का 'सुरक्षा चक्र': अब बच्चों की सीक्रेट चैट्स और ऑनलाइन दुनिया पर रहेगी माता-पिता की सीधी नजर, आ रहा है 'Primary Controls' का महा-अपडेट इस गाने के रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर तहलका मच गया है. गाने में सलमान खान का फौजी अवतार और अरिजीत सिंह (Arijit Singh) की रूह को छू लेने वाली आवाज ने श्रोताओं की आंखों में आंसू ला दिए हैं. यह गाना न केवल देशभक्ति के जज्बे को सलाम करता है, बल्कि गलवान घाटी के वीरों की शहादत को भी याद दिलाता है. आइए विस्तार से जानते हैं इस गाने की खासियत, फिल्म की कहानी और सलमान खान के इस नए अवतार के बारे में. 'मातृभूमि' ने जगाया देशप्रेम का अलख (Maatrubhumi Song Details) फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' का यह पहला गाना एक इमोशनल और पैट्रियोटिक ट्रैक है. गाने का टाइटल 'मातृभूमि' रखा गया है. इस गाने की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसका संगीत और गायन है. बॉलीवुड के मशहूर म्यूजिक कंपोजर हिमेश रेशमिया (Himesh Reshammiya) ने इस गाने को कंपोज किया है, जबकि सुरों के सरताज अरिजीत सिंह ने इसे अपनी मखमली आवाज दी है. अरिजीत सिंह का साथ दिया है सुरीली आवाज की मल्लिका श्रेया घोषाल (Shreya Ghoshal) और मणि धर्मकोट ने. इन तीनों की जुगलबंदी ने गाने को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया है. दिल को छू लेने वाले बोल: गाने के लिरिक्स मशहूर गीतकार समीर अंजान (Sameer Anjaan) ने लिखे हैं. गाने की शुरुआती पंक्तियां ही रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं: "मातृभूमि आज मैं संकल्प लूं तेरे लिए, मैं जिऊं तेरे लिए और मैं मरूं तेरे लिए… मेरी जान वतन पे जाए तो जीवन सफल हो जाए." ये लाइनें एक सैनिक के अपनी मिट्टी के प्रति समर्पण और बलिदान को खूबसूरती से बयां करती हैं. सोशल मीडिया पर फैंस इस गाने को 'साल 2026 का एंथम' बता रहे हैं. वीडियो में सलमान और चित्रांगदा की केमिस्ट्री वायरल हो रहे इस गाने के वीडियो में सलमान खान एक भारतीय सेना के अधिकारी की वर्दी में बेहद प्रभावशाली लग रहे हैं. उनके चेहरे पर गंभीरता और आंखों में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून साफ देखा जा सकता है. गाने में उनके साथ अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह (Chitrangda Singh) भी नजर आ रही हैं. फिल्म में चित्रांगदा, सलमान खान के किरदार की पत्नी की भूमिका में हैं. वीडियो में एक फौजी की निजी जिंदगी, उसका परिवार से दूर जाना और फर्ज के लिए कुर्बानी देने के जज्बे को दिखाया गया है. सलमान और चित्रांगदा की केमिस्ट्री काफी सोबर और इमोशनल नजर आ रही है, जो गाने के मूड के साथ पूरी तरह न्याय करती है. असली घटना पर आधारित है 'बैटल ऑफ गलवान' जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह फिल्म साल 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प पर आधारित है. यह घटना भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें भारतीय जांबाज सैनिकों ने चीनी घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब दिया था. कर्नल संतोष बाबू के रोल में सलमान: रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलमान खान इस फिल्म में कर्नल बी. संतोष बाबू (Col. B. Santosh Babu) का किरदार निभा रहे हैं. कर्नल संतोष बाबू 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे, जो चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में शहीद हो गए थे. उन्हें मरणोपरांत 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया था. एक रियल लाइफ हीरो का किरदार निभाना सलमान खान के लिए एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी दोनों है. डायरेक्शन और प्रोडक्शन (Production Details) इस फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया (Apoorva Lakhia) ने किया है, जो इससे पहले 'शूटआउट एट लोखंडवाला' जैसी एक्शन फिल्में बना चुके हैं. फिल्म का निर्माण खुद सलमान खान ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी सलमान खान फिल्म्स (Salman Khan Films) के बैनर तले किया है. फिल्म की शूटिंग पिछले साल यानी दिसंबर 2025 में पूरी हो चुकी है और फिलहाल यह पोस्ट-प्रोडक्शन (Post-Production) स्टेज में है. मेकर्स इस फिल्म को बड़े पैमाने पर रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं. खबरों की मानें तो फिल्म अप्रैल 2026 में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है. सलमान खान के लिए क्यों अहम है यह फिल्म? सलमान खान के करियर के लिहाज से 'बैटल ऑफ गलवान' बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. दरअसल, मार्च 2025 में रिलीज हुई उनकी पिछली फिल्म 'सिकंदर' (Sikandar) बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी. 'सिकंदर' के फ्लॉप होने के बाद आलोचकों ने सलमान के स्टारडम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे. ऐसे में, सलमान को एक बड़ी हिट की दरकार है. चूंकि देशभक्ति (Patriotism) एक ऐसा जॉनर है जिसे भारतीय दर्शक हमेशा पसंद करते हैं—जैसे 'बजरंगी भाईजान' या 'टाइगर' सीरीज—इसलिए ट्रेड पंडितों को उम्मीद है कि 'बैटल ऑफ गलवान' सलमान की शानदार वापसी कराएगी. सोशल मीडिया पर फैंस का रिएक्शन Maatrubhumi Song रिलीज होते ही ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर ट्रेंड कर रहा है. फैंस अरिजीत और सलमान के रीयूनियन की तारीफ कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, "अरिजीत सिंह की आवाज और सलमान का स्वैग, यह गाना ब्लॉकबस्टर है." दूसरे यूजर ने कमेंट किया, "हिमेश रेशमिया का संगीत पुराने दिनों की याद दिलाता है. मास्टरपीस!" कुल मिलाकर, 'बैटल ऑफ गलवान' का पहला गाना 'मातृभूमि' दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरा है. अरिजीत सिंह, श्रेया घोषाल और हिमेश रेशमिया की तिकड़ी ने एक ऐसा गाना तैयार किया है जो लंबे समय तक लोगों की जुबां पर रहेगा. अब देखना यह होगा कि अप्रैल में जब यह फिल्म रिलीज होगी, तो क्या सलमान खान बॉक्स ऑफिस पर वही पुराना जादू चला पाएंगे या नहीं. फिलहाल, फैंस इस देशभक्ति तराने का आनंद ले रहे हैं. सारांश: सलमान खान की अपकमिंग फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' का इमोशनल सॉन्ग 'मातृभूमि' रिलीज हो गया है. अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल की आवाज से सजे इस गाने में सलमान खान शहीद कर्नल संतोष बाबू के किरदार में नजर आ रहे हैं. फिल्म 2020 के गलवान संघर्ष पर आधारित है और अप्रैल 2026 में रिलीज होने की संभावना है.
मध्य प्रदेश के उज्जैन (Ujjain) में दिवाली के पावन अवसर पर एक अत्यंत हृदय विदारक घटना सामने आई है। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर (Mahakal Mandir) में भस्म आरती में शामिल होने पहुंचे भोलेनाथ के एक अनन्य भक्त सौरभ राज सोनी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। सौरभ राज नियमित रूप से हर सोमवार बाबा महाकाल की आरती में शामिल होने आते थे, लेकिन इस बार नियति ने उन्हें आरती से ठीक पहले अपने पास बुला लिया। उनकी मौत से पहले WhatsApp पर लिखा गया उनका मार्मिक स्टेटस अब वायरल हो रहा है। नियमित भक्त और मार्मिक स्टेटस 47 वर्षीय सौरभ राज सोनी उज्जैन की पार्श्वनाथ सिटी के निवासी थे और फ्रीगंज क्षेत्र में 'विनायक कैफे' नाम से एक चाय की दुकान चलाते थे। वह बाबा महाकाल के सच्चे भक्त थे और प्रत्येक सोमवार को भस्म आरती में नियमित रूप से उपस्थित होते थे। घटना: सोमवार तड़के, दिवाली की रात को, महाकाल मंदिर परिसर में गेट नंबर एक के पास सौरभ राज अचानक अचेत होकर गिर पड़े। तत्काल मदद: आसपास मौजूद श्रद्धालुओं और मंदिर कर्मियों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया। निधन: डॉक्टरों ने जाँच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। WhatsApp पर आखिरी संदेश हुआ वायरल सौरभ राज के मित्र धर्मेंद्र पंड्या ने एक अत्यंत मार्मिक जानकारी देते हुए बताया कि सौरभ ने अपनी मौत से कुछ ही घंटे पहले अपने WhatsApp स्टेटस पर एक संदेश लिखा था, जो उनकी बाबा महाकाल के प्रति गहरी भक्ति को दर्शाता है। अंतिम स्टेटस: सौरभ ने लिखा था: "मिट्टी का शरीर है, सांसें सारी उधार हैं, दिल तो महाकाल का है, हम तो किरायेदार हैं।" भक्ति का प्रमाण: इस स्टेटस को देखकर उनके मित्र और अन्य श्रद्धालु भावुक हो गए। सौरभ को महाकाल के दरबार में नियमित रूप से दर्शन करने आने वाला 'सच्चा शिव भक्त' बताया गया। पारिवारिक स्थिति: सौरभ के परिवार में उनकी पत्नी, एक 17 साल की बेटी और एक 7 साल का छोटा बेटा है। वह परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। मंदिर परिसर में शोक की लहर इस दुखद घटना से महाकाल के भक्तों और सौरभ के परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई है। मंदिर प्रशासन: मंदिर परिसर में हुई इस घटना पर मंदिर प्रबंधन ने भी दुःख व्यक्त किया है। अन्य आस्था: सौरभ बाबा महाकाल के अलावा खाटू श्याम जी और सांवरिया सेठ के भी अनन्य भक्त थे और अक्सर अपने दोस्तों के साथ इन मंदिरों में दर्शन के लिए जाते थे। हार्ट अटैक की बढ़ती घटनाएं दिवाली जैसे खुशी के मौके पर हार्ट अटैक से हुई इस मौत ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ा दी है। यह घटना दर्शाती है कि कम उम्र में भी तनाव और जीवनशैली के कारण हार्ट अटैक की घटनाएं कितनी सामान्य होती जा रही हैं। सौरभ राज का भक्तिमय अंतिम संदेश अब सोशल मीडिया पर उनकी अटूट आस्था की कहानी बनकर वायरल हो रहा है।
पानीपत: हरियाणा की औद्योगिक नगरी पानीपत से रिश्तों और इंसानियत को तार-तार कर देने वाला एक ऐसा घिनौना मामला सामने आया है, जिसने हर सुनने वाले की रूह कंपा दी है। यहां एक महिला यूट्यूबर ने, जो अपनी पहचान बनाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती थी, उसी की आड़ में एक खौफनाक साजिश रची और अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर एक निर्दोष महिला को अपनी हवस का शिकार बनाया। पुलिस ने इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता यूट्यूबर समेत सभी चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।READ ALSO:-बिजनौर शर्मसार! घर के बाहर खेल रही 6 साल की 'गुड़िया' को उठा ले गया पड़ोस का नाबालिग 'राक्षस', सवाल- किस ओर जा रहा हमारा समाज? जंगल का सन्नाटा और दरिंदों की साजिश यह खौफनाक वारदात पानीपत रिफाइनरी के पास स्थित एक सुनसान जंगली इलाके में हुई। एक स्थानीय महिला, जो अपना घर चलाने के लिए जंगल से लकड़ियां बीनने का काम करती है, रोज की तरह ही अपना काम करने पहुंची थी। उसे इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि आज जंगल का यह सन्नाटा उसके लिए एक भयावह चीख में बदलने वाला है। तभी, एक कार उसके पास आकर रुकी। कार से एक महिला यूट्यूबर और उसके तीन साथी उतरे। पीड़िता के अनुसार, पहले तो यूट्यूबर ने उसे पैसों का लालच देकर अपने दोस्तों के साथ गलत काम करने के लिए उकसाया। जब पीड़िता ने स्वाभिमान दिखाते हुए सख्ती से इनकार कर दिया, तो आरोपियों का असली शैतानी चेहरा सामने आ गया। अगुवाई करती यूट्यूबर, पहरेदारी में हुई दरिंदगी पीड़िता के इनकार करते ही चारों आरोपियों ने उसे जबरन पकड़कर कार में खींच लिया और पीटना शुरू कर दिया। वे उसे घसीटते हुए जंगल के और भी घने हिस्से में ले गए। इसके बाद तीनों पुरुष आरोपियों ने महिला के साथ बारी-बारी से अपनी हवस मिटाई। इस पूरी दरिंदगी के दौरान, महिला यूट्यूबर किसी अपराधी सरगना की तरह हाथ में डंडा लेकर कुछ दूरी पर पहरा देती रही, ताकि कोई उन्हें देख न सके और उनके काले कारनामे में खलल न पड़े। ब्लैकमेलिंग का खेल और कुदरत का इंसाफ हैवानियत की हदें पार करने के बाद भी जब उनका मन नहीं भरा, तो उन्होंने इस पूरी घटना का एक वीडियो बना लिया। उन्होंने पीड़िता को धमकाते हुए कहा कि अगर उसने मुंह खोला तो यह वीडियो सोशल मीडिया पर डालकर उसकी इज्जत नीलाम कर देंगे और उसे जान से भी हाथ धोना पड़ेगा। लेकिन शायद कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। ठीक उसी समय, कुछ अन्य महिलाएं लकड़ियां बीनते हुए उसी ओर आ पहुंचीं। उन्हें अपनी तरफ आता देख चारों आरोपियों के हाथ-पैर फूल गए और वे पीड़िता को बदहवास हालत में छोड़कर अपनी कार से फरार हो गए। पुलिस का एक्शन और अंजाम उन महिलाओं ने पीड़िता को संभाला और हिम्मत बंधाई। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। सदर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत अपहरण, गैंगरेप, मारपीट और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया। डीएसपी सतीश वत्स के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई, जिसने कुछ ही घंटों के भीतर सिठाना गांव के पास से चारों आरोपियों—महिला यूट्यूबर, अमनदीप, अश्वनी और मोनू—को धर दबोचा। उनके पास से वारदात में इस्तेमाल हुई कार और मोबाइल फोन भी बरामद कर लिए गए हैं, जिसमें पीड़िता का वीडियो होने की आशंका है। अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
क्या आपने कभी सोचा है कि आप 180 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से सफर कर रहे हों, और आपके सामने टेबल पर रखा पानी का गिलास हिले तक नहीं? सुनने में यह किसी जादू या विज्ञान गल्प (Sci-Fi) जैसा लग सकता है, लेकिन भारतीय रेलवे ने इसे हकीकत में बदल दिया है।READ ALSO:-सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट को लेकर केंद्र की 'रेड नोटिस': आईटी मंत्रालय ने दी चेतावनी- तुरंत हटाएं गंदा कंटेंट वरना दर्ज होगा केस, यूजर्स भी रहें सावधान भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजना 'वंदे भारत स्लीपर' (Vande Bharat Sleeper) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह केवल गति के मामले में ही नहीं, बल्कि स्थिरता और यात्री आराम (Passenger Comfort) के मामले में भी विश्व स्तरीय ट्रेनों को टक्कर देने के लिए तैयार है। हाल ही में राजस्थान के कोटा-नागदा रेल खंड पर हुए एक ट्रायल रन के दौरान, कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (CRS) ने एक ऐसा 'वॉटर टेस्ट' (Water Test) किया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। Vande Bharat Sleeper tested today by Commissioner Railway Safety. It ran at 180 kmph between Kota Nagda section. And our own water test demonstrated the technological features of this new generation train. pic.twitter.com/w0tE0Jcp2h — Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) December 30, 2025 यह वीडियो सिर्फ एक क्लिप नहीं है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' की उस इंजीनियरिंग क्षमता का प्रमाण है, जो अब भारतीय पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है। 1. क्या है यह वायरल 'वॉटर टेस्ट'? (The Viral Water Test) अक्सर हम ट्रेनों में सफर करते समय चाय या पानी पीते हैं तो कप हिलता रहता है। कई बार तो झटकों (Jerks) के कारण चाय कप से बाहर गिर जाती है। लेकिन वंदे भारत स्लीपर के ट्रायल के दौरान जो नजारा दिखा, वह अविश्वसनीय था। वीडियो में क्या दिखा? ट्रायल के दौरान ट्रेन 180 किलोमीटर प्रति घंटे (180 kmph) की रफ्तार से दौड़ रही थी। यह गति भारतीय रेलवे के इतिहास में सबसे तेज गति के ट्रायल्स में से एक है। इस दौरान ट्रेन के कोच के अंदर एक टेबल पर पानी से लबालब भरा एक कांच का गिलास रखा गया। रोमांच यहीं खत्म नहीं हुआ—अधिकारियों ने उस भरे हुए गिलास के ऊपर एक और कांच का गिलास संतुलित करके रख दिया। हैरानी की बात यह रही कि बाहर पटरियों पर ट्रेन हवा से बातें कर रही थी, लेकिन अंदर गिलास का पानी बिल्कुल शांत था। उसमें कोई लहर नहीं थी, कोई छलकन नहीं थी। पानी की एक बूंद भी मेज पर नहीं गिरी। किसने किया यह टेस्ट? यह टेस्ट किसी यूट्यूबर या आम यात्री ने नहीं, बल्कि रेलवे सुरक्षा के सबसे बड़े अधिकारी—कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (CRS) ने किया। सीआरएस रेलवे का वह स्वतंत्र निकाय है जो किसी भी नई ट्रेन को हरी झंडी देने से पहले उसकी सुरक्षा और मानकों की कड़े शब्दों में जांच करता है। उनका यह टेस्ट करना इस बात की पुष्टि करता है कि ट्रेन का 'सस्पेंशन सिस्टम' वर्ल्ड क्लास है। 2. रेल मंत्री का दावा: "सुरक्षा को समझने का नया तरीका" इस अद्भुत वीडियो को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया। उन्होंने इस वीडियो के साथ एक गर्व भरा संदेश भी लिखा। रेल मंत्री ने कहा, “यह रेलवे सेफ्टी और तकनीक को समझने का एक बिल्कुल अलग तरीका है। इस टेस्ट से नई तकनीक और सेफ्टी को समझाने का प्रयास किया गया है। वंदे भारत लगातार भारतीय रेल में लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है। हाई स्पीड ट्रेनों के इस जमाने में जहां हर देश एक के बाद एक नए आयाम स्थापित करना चाहता है, ऐसे में भारत भी लगातार वंदे भारत से तेज गति और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के प्रयास में है।” मंत्री का यह बयान स्पष्ट करता है कि सरकार का फोकस अब सिर्फ ट्रेन चलाने पर नहीं है, बल्कि 'क्वालिटी ट्रैवल' (Quality Travel) पर है। अगर 180 की स्पीड पर पानी नहीं छलक रहा, तो इसका मतलब है कि रात में सोते समय यात्रियों को झटके महसूस नहीं होंगे और उनकी नींद खराब नहीं होगी। 3. इसके पीछे का विज्ञान: आखिर यह संभव कैसे हुआ? (The Engineering Behind Stability) 180 की स्पीड पर इतना संतुलन बनाए रखना कोई चमत्कार नहीं, बल्कि उन्नत इंजीनियरिंग का नतीजा है। आइए समझते हैं कि आखिर वंदे भारत स्लीपर में ऐसा क्या खास है: सेमी-परमानेंट कपलर (Semi-Permanent Couplers): पुरानी ट्रेनों में डिब्बों को जोड़ने के लिए स्क्रू कपलर का इस्तेमाल होता था, जिससे ट्रेन चलने और रुकने पर झटके लगते थे। वंदे भारत में आधुनिक कप्लर्स हैं जो डिब्बों को कसकर पकड़े रहते हैं, जिससे झटके खत्म हो जाते हैं। एयर स्प्रिंग सस्पेंशन (Air Spring Suspension): इस ट्रेन के पहियों और कोच के बीच में लोहे की कमानी की जगह 'हवा के गुब्बारे' (Pneumatic Suspension) जैसे सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। यह सिस्टम पटरियों के कंपन को सोख लेता है और ऊपर बैठे यात्री तक पहुंचने नहीं देता। एयरोडायनामिक डिजाइन (Aerodynamic Design): ट्रेन का अगला हिस्सा बुलेट ट्रेन की तरह नुकीला है, जो हवा को चीरते हुए निकलता है। इससे हवा का दबाव (Air Drag) कम होता है और ट्रेन उच्च गति पर भी स्थिर रहती है। बोगी डिजाइन: बोगियों (Bogie) को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे 200 kmph तक की स्पीड पर भी ट्रैक पर अपनी पकड़ बनाए रखें। 4. जनवरी में भी हुआ था ऐसा ही टेस्ट आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब रेलवे ने यह 'बैलेंस टेस्ट' किया है। इससे पहले इसी साल जनवरी 2025 में भी वंदे भारत स्लीपर के शुरुआती प्रोटोटाइप ट्रायल के दौरान यह प्रयोग किया गया था। तब भी ट्रेन को 180 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ाया गया था और पानी का गिलास रखकर स्थिरता जांची गई थी। उस समय और अब के टेस्ट में एक निरंतरता (Consistency) दिखाई देती है। यह साबित करता है कि ट्रेन की परफॉर्मेंस कोई तुक्का नहीं है, बल्कि यह एक सुस्थापित मानक (Standard) बन चुका है। कोटा-नागदा सेक्शन ही क्यों? राजस्थान का कोटा-नागदा रेल खंड भारतीय रेलवे का सबसे बेहतरीन और सीधा ट्रैक माना जाता है। यहाँ घुमाव (Curves) कम हैं और पटरियां हाई स्पीड के लिए अनुकूल हैं। इसलिए, जब भी किसी ट्रेन की अधिकतम सीमा (Max Speed Limit) टेस्ट करनी होती है, तो इसी रूट को चुना जाता है। 5. जापान की 'बुलेट ट्रेन' से तुलना इस टेस्ट ने लोगों को जापान की प्रसिद्ध शिंकांसेन (Shinkansen) बुलेट ट्रेन की याद दिला दी। वहां अक्सर यात्री अपनी वीडियो में दिखाते हैं कि 300 kmph की स्पीड पर भी खिडकी पर रखा सिक्का (Coin) गिरता नहीं है। भारत का यह 'वॉटर टेस्ट' उसी दिशा में एक कदम है। हालांकि हमारी स्पीड अभी 180 है, लेकिन भारतीय पटरियों की स्थिति (जो जापान जैसी उन्नत नहीं है) को देखते हुए, इतनी स्थिरता हासिल करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह दिखाता है कि भारत अब 'हाई स्पीड रेल नेटवर्क' की दिशा में परिपक्व हो रहा है। 6. यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है? तकनीकी बातें अपनी जगह हैं, लेकिन आम यात्री के लिए इसका सीधा मतलब है—आरामदायक सफर। गहरी नींद: स्लीपर ट्रेन होने के नाते, इसमें लोग लंबी दूरी का सफर करेंगे। स्थिरता का मतलब है कि आप बिना हिले-डुले रात भर चैन की नींद सो सकेंगे। काम करने में आसानी: जो लोग ट्रेन में लैपटॉप पर काम करते हैं या खाना खाते हैं, उनके लिए यह स्थिरता बहुत मायने रखती है। सुरक्षा का भरोसा: जब ट्रेन पटरियों पर इतनी स्थिर (Stable) चलती है, तो पटरी से उतरने (Derailment) का खतरा भी कम हो जाता है। 7. कब शुरू होगी यात्री सेवा? कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (CRS) के ये ट्रायल्स अंतिम चरण में माने जाते हैं। सर्टिफिकेट: इन ट्रायल्स के सफल होने के बाद सीआरएस अपनी फाइनल रिपोर्ट देगा और ट्रेन को 'सेफ्टी सर्टिफिकेट' जारी करेगा। लॉन्च: उम्मीद की जा रही है कि सर्टिफिकेट मिलते ही अगले कुछ हफ्तों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। रूट: पहली वंदे भारत स्लीपर दिल्ली-मुंबई या दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त और लंबे रूटों पर चलाई जा सकती है। वंदे भारत स्लीपर का यह वाटर टेस्ट सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि बदलते भारत की तस्वीर है। एक समय था जब ट्रेन के सफर का मतलब ही 'खड़-खड़' की आवाज और लगातार लगते झटके होते थे। आज, 180 की स्पीड पर पानी का न छलकना यह बताता है कि भारतीय रेलवे ने तकनीक के मामले में कितनी लंबी छलांग लगाई है। यह ट्रेन न केवल राजधानी एक्सप्रेस का विकल्प बनेगी, बल्कि यात्रा के अनुभव को पूरी तरह से बदल देगी। अतिरिक्त जानकारी: वंदे भारत स्लीपर की 5 बड़ी खासियतें स्पीड: डिजाइन स्पीड 220 kmph, ऑपरेशनल स्पीड 160-180 kmph। इंटीरियर: वर्ल्ड क्लास एर्गोनोमिक सीटें, मॉडर्न टॉयलेट्स और सेंसर वाले दरवाजे। सुरक्षा: 'कवच' (Kavach) एंटी-कोलिजन सिस्टम से लैस। साइलेंट केबिन: बाहर का शोर कम करने के लिए बेहतर साउंडप्रूफिंग। किफायती: विश्व स्तरीय सुविधाओं के बावजूद, इसका किराया हवाई जहाज से कम रहने की उम्मीद है। (नोट: यह रिपोर्ट वायरल वीडियो, रेल मंत्री के बयान और उपलब्ध तकनीकी जानकारी पर आधारित है।)
हैदराबाद, तेलंगाना, भारत भारत के सबसे दूरदर्शी रियल एस्टेट डेवलपर्स में से एक, ASBL ने “Beyond Four Walls” कार्यक्रम की मेजबानी की जो हैदराबाद में इस प्रकार का पहला उद्योग आधारित कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम रियल एस्टेट ब्रोकर्स और सेक्टर को बढ़ावा देने में व उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को समर्पित था। यह एक पारंपरिक समारोह नहीं था जो केवल क्रय-विक्रय पर केन्द्रित होते हैं। इसके विपरीत इस पहल ने ब्रोकर्स और डेवलपर्स को एक साथ लाने के लिए एक खुले मंच (open forum) के रूप में कार्य किया, जिससे सहयोग, पारदर्शिता और रियल एस्टेट के भविष्य पर संवाद को बढ़ावा मिला। इंडस्ट्री की आवाज़ उठाने वाला एक मंच इस इवेंट में चर्चा एवं विचार-विमर्श के लिए देशभर से प्रमुख आवाज़ें एक साथ आईं। डेवलपर्स का प्रतिनिधित्व करते हुए, ASBL के संस्थापक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजितेश कोरुपोलू ने सैकड़ों बिल्डरों की आवाज़ उठाई जबकि ब्रोकर्स के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व रवि केवलरमानी, मयंक अग्रवाल और दीप्ती मलेक जैसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त लीडर्स ने किया। ब्रोकर्स, चैनल पार्टनर्स और रियल एस्टेट पेशेवरों से बने दर्शकों के साथ इस इवेंट ने एक ऐसा स्थान बनाया जहाँ विचारों को स्वतंत्र रूप से और सीधे रखा जा सका। मुख्य विषय और चर्चा पैनल और दर्शकों ने आज के रियल एस्टेट बाजार से संबंधित मुद्दों के एक विस्तृत स्पेक्ट्रम पर विचार-विमर्श किया: शहरों की तुलना और बुनियादी ढाँचा : मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद की जीवनशैली, बुनियादी ढाँचे और सामर्थ्य (affordability) के आधार पर तुलना की गई। पैनलिस्टों ने हैदराबाद के ‘प्लानिंग-फर्स्ट’ दृष्टिकोण की प्रशंसा की और इसकी बढ़ती स्थिति पर प्रकाश डाला। भारतीय रियल एस्टेट का भविष्य (20-30 साल आगे): भविष्यवाणियां वर्टिकल मेगा-सिटी और सैटेलाइट टाउनशिप से लेकर टेक्नोलॉजी-संचालित योजना और NRI मांग के साथ हाइब्रिड, टिकाऊ क्लस्टर तक रहीं। शहरों में खरीदारों की प्राथमिकताएं : युवा खरीदारों को अधिक तर्क-संचालित (logic-driven) के रूप में देखा गया, जो capital appreciation और रेंटल यील्ड की तलाश में हैं। Mumbai में लग्ज़री खरीददारों को स्थान और दृश्यों के लिए अत्यधिक प्रीमियम का भुगतान करते हुए देखा गया, जबकि हैदराबाद वैल्यू-संचालित, विशाल घरों के लिए सबसे अलग रहा। टेक्नोलॉजी की भूमिका : पैनल ने इस बात पर चर्ची की कि डिस्कवरी ऑनलाइन कैसे हुई है और यह कि अगला कदम खरीददार और ब्रोकर के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए लेन-देन, दस्तावेज़ीकरण और एट्रिब्यूशन को डिजिटाइज़ करने में निहित है। ब्रोकर को आने वाली चुनौतियाँ इस चर्चा के दौरान एक समर्पित हिस्सा और दर्शकों के कई सवाल ब्रोकर्स के सामने आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित थे। क्लाइंट्स द्वारा ब्रोकर्स को बाईपास करने, कमीशन में देरी या इनकार और केंद्रीकृत नियमन की कमी जैसे मुद्दे उठाए गए। पैनलिस्टों ने मजबूत एट्रिब्यूशन सिस्टम, डेवलपर्स के साथ पारदर्शी संचार और दीर्घकालिक साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया जो ब्रोकर्स के प्रयासों की रक्षा करते हुए निष्पक्ष सहयोग सुनिश्चित करे। यह क्यों मायने रखता है ब्रोकर्स को मंच देकर ASBL ने निर्माण से परे सहयोग में अपना विश्वास प्रदर्शित किया। इस पहल ने डेवलपर्स और ब्रोकर्स के बीच दूरी को कम करने का काम किया व इस विचार को मजबूत किया कि भारतीय रियल एस्टेट में प्रगति साझा विश्वास और खुले संवाद पर निर्भर करती है। इवेंट में बोलते हुए, अजितेश कोरुपोलू ने कहा, "हमारा दृष्टिकोण घर बनाने से आगे बढ़कर, भरोसे का इकोसिस्टम बनाने का है। ब्रोकर्स के लिए एक पारदर्शी, सम्मानजनक मंच बनाकर हम सुनिश्चित करते हैं कि खरीदार और विक्रेता दोनों को मजबूत अधिक सहयोगी उद्योग प्रथाओं से लाभ मिले।” स्पॉटलाइट में हैदराबाद पैनलिस्टों ने हैदराबाद के बुनियादी ढाँचे, सामर्थ्य और रहने योग्य होने की प्रशंसा की इसे भारत के "उभरते सितारे" के रूप में स्थापित किया। चर्चाओं में शहर के उच्च-उदय सामर्थ्य, मजबूत बुनियादी ढाँचे, और बढ़ते IT/फार्मा क्षेत्रों के संतुलन पर प्रकाश डाला गया, जिससे यह न केवल एक आकर्षक बाजार बन गया है, बल्कि भविष्य के शहरी विकास के लिए एक खाका (blueprint) भी बन गया है।
भारत का स्वतंत्रता संग्राम अनगिनत वीरों और बलिदानियों के लहू और त्याग से सफल हो पाया। उन नामों में से एक नाम ऐसा है, जिसे क्रांति का प्रतीक और बलिदान का पर्याय माना जाता है— शहीद-ए-आजम भगत सिंह। सिर्फ 23 साल की छोटी सी उम्र में उन्होंने देश के लिए वह कर दिखाया, जिसे आज भी शब्दों में बयां करना मुश्किल है। आज, उनकी 118वीं जयंती के अवसर पर, आइए याद करें भारत माँ के उस महान सपूत को, जिसने न सिर्फ आज़ादी की लड़ाई को एक नई दिशा दी, बल्कि युवाओं को क्रांतिकारी सोच और सच्ची देशभक्ति का पाठ पढ़ाया।READ ALSO:-'बुलडोजर' बनाम 'विकास': 'आई लव...' की आड़ में लखनऊ की सड़कों पर छिड़ी योगी-अखिलेश की सीधी जंग बचपन में ही पड़ी क्रांति की नींव भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर जिले (अब पाकिस्तान के फैसलाबाद) के बंगा गाँव में एक देशभक्त सिख परिवार में हुआ था। उनके पिता किशन सिंह और चाचा अजित सिंह स्वयं स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय थे, जिसके कारण देशभक्ति उन्हें विरासत में मिली थी। कहते हैं कि जब वे मात्र 12 वर्ष के थे, तब 1919 में हुए जालियांवाला बाग हत्याकांड ने उनके कोमल हृदय को गहराई से झकझोर कर रख दिया। वे स्कूल से भागकर सीधे अमृतसर पहुंचे और उस पवित्र मिट्टी को अपनी बोतल में भरकर ले आए, जो निर्दोष भारतीयों के खून से सनी थी। यहीं से उनके मन में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की पहली चिंगारी प्रज्वलित हुई। गांधीवाद से सशस्त्र क्रांति का सफर शुरुआत में भगत सिंह महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से काफी प्रभावित थे। लेकिन 1922 में चौरी-चौरा कांड के बाद जब गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया, तो भगत सिंह समेत देश के कई युवाओं को गहरा आघात लगा। उन्हें यह विश्वास हो गया कि सिर्फ सत्याग्रह से आजादी नहीं मिलेगी, बल्कि बहरी हो चुकी अंग्रेज़ी हुकूमत को जगाने के लिए एक बड़े धमाके की जरूरत है। इसी सोच के साथ उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) से जुड़कर सशस्त्र क्रांति का मार्ग अपनाया। लालाजी की शहादत का बदला और असेंबली बम कांड 1928 में साइमन कमीशन का विरोध कर रहे 'पंजाब केसरी' लाला लाजपत राय पर हुए बर्बर लाठीचार्ज में उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना से क्रांतिकारियों का खून खौल उठा। भगत सिंह, राजगुरु और चंद्रशेखर आज़ाद ने इसका बदला लेने का संकल्प लिया और ब्रिटिश पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या कर दी। इसके बाद, 1929 में जब अंग्रेज़ी सरकार दमनकारी 'पब्लिक सेफ्टी बिल' और 'ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल' लाई, तो भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने इसका विरोध करने के लिए सेंट्रल असेंबली में बम फेंका। उनका मकसद किसी की जान लेना नहीं, बल्कि सोई हुई ब्रिटिश हुकूमत को जगाना था। बम फेंकने के बाद वे भागे नहीं, बल्कि अपनी गिरफ्तारी दी और पहली बार बुलंद आवाज में नारा लगाया — "इंकलाब जिंदाबाद!" अदालत बनी विचारों का मंच भगत सिंह ने अपनी गिरफ्तारी को एक अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने अदालत को अपने क्रांतिकारी विचारों के प्रचार का मंच बना दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य हिंसा फैलाना नहीं, बल्कि एक ऐसी क्रांति लाना है जो इंसानों द्वारा इंसानों के शोषण को समाप्त कर दे। अदालत में उनके द्वारा कही गई यह पंक्ति आज भी प्रेरणा का स्रोत है:"क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।" 23 मार्च 1931: अमर शहादत का दिन 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई। उस समय उनकी उम्र मात्र 23 वर्ष थी। कहा जाता है कि फांसी से पहले भी वे मुस्कुरा रहे थे और "इंकलाब जिंदाबाद" का नारा लगाते हुए फांसी के फंदे की ओर बढ़े। उनके इस बलिदान ने पूरे देश में स्वतंत्रता की ज्वाला को और प्रचंड कर दिया। आज के युवाओं के लिए संदेश भगत सिंह ने सिर्फ राजनीतिक आजादी के लिए संघर्ष नहीं किया, बल्कि वे एक ऐसे समाज का निर्माण चाहते थे जो शोषण और भेदभाव से मुक्त हो। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे सिर्फ नौकरी और व्यक्तिगत सफलता के पीछे न भागें, बल्कि अपनी सोच को क्रांतिकारी बनाएं और देश के लिए योगदान दें। आज उनकी 118वीं जयंती पर यह समय है कि हम अपने भीतर झांकें और सोचें कि क्या हम भगत सिंह के सपनों का भारत बना पाए हैं? उनका जीवन और बलिदान हमें हमेशा यह याद दिलाता रहेगा कि देश के लिए जीने और मरने से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।