निमोनिया, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण, अब भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ‘सांस’ (SAANS) अभियान के केंद्र में है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया यह गहन राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम, ‘सामाजिक जागरूकता और कार्रवाई’ के मूलमंत्र के साथ, वर्ष 2025 तक निमोनिया से होने वाली बाल मृत्यु दर को कम करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति पर आधारित है।
निमोनिया दिवस (12 नवंबर) के उपलक्ष्य में, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस अभियान की सराहना की है, जो न केवल इलाज, बल्कि रोकथाम और जागरूकता पर समान ज़ोर देता है।
🛡️ लक्ष्य 2025: हर 1000 पर 3 मृत्यु
भारत में बाल स्वास्थ्य के लिए यह अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में होने वाली कुल मौतों में निमोनिया का योगदान लगभग 17.5% है।
‘सांस’ अभियान का परिवर्तनकारी लक्ष्य (Transformative Target) है:
“वर्ष 2025 तक निमोनिया के कारण होने वाली बाल मृत्यु दर को प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 5.3 से घटाकर मात्र 3 तक लाना।”
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री (नाम ज़िक्र नहीं) ने इस पर बल देते हुए कहा, “हम हर बच्चे को निमोनिया के ख़तरे से बचाना सुनिश्चित कर रहे हैं। ‘सांस’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का एक राष्ट्रीय संकल्प है।”
चार-सूत्रीय ‘सांस’ सुरक्षा चक्र
यह अभियान चार प्रमुख स्तंभों पर काम करता है ताकि निमोनिया के ख़तरे को जड़ से ख़त्म किया जा सके:
| मुख्य स्तंभ | विवरण | कार्यनीति |
| 1. टीकाकरण (Prevention) | निमोनिया का सबसे शक्तिशाली बचाव। | न्यूमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन (PCV) को सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम में मुफ़्त उपलब्ध कराना और 100% कवरेज सुनिश्चित करना। |
| 2. जागरूकता (Awareness) | माता-पिता और समुदाय को शिक्षित करना। | स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा निमोनिया के लक्षणों (जैसे तेज़/घटी हुई साँस, छाती का धँसना, लगातार बुख़ार) की शीघ्र पहचान के लिए ‘सामाजिक गोलबंदी’ (Social Mobilisation) करना। |
| 3. शीघ्र पहचान (Early Diagnosis) | स्वास्थ्य केंद्रों पर सही उपकरण और प्रशिक्षण। | स्वास्थ्य सुविधाओं पर पल्स-ऑक्सीमीटर का अनिवार्य उपयोग और गंभीर मामलों में तुरंत ऑक्सीजन थेरेपी की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
| 4. प्रशिक्षण एवं उपचार (Training & Treatment) | फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना। | आशा (ASHA) और एएनएम (ANM) कार्यकर्ताओं को निमोनिया के मानक उपचार प्रोटोकॉल के अनुरूप प्रशिक्षित करना। |
👨⚕️ विशेषज्ञों की राय: PCV बना सुरक्षा कवच
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश सिंह (नाम काल्पनिक) बताते हैं, “पहले निमोनिया की वैक्सीन महँगी होने के कारण आम लोगों की पहुँच से बाहर थी। सरकार द्वारा PCV को मुफ़्त उपलब्ध कराना ‘सांस’ अभियान की सबसे बड़ी सफलता है। यह बच्चों को निमोनिया के ख़िलाफ़ एक मज़बूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है।”
उन्होंने ज़ोर दिया कि विशेषकर शीत लहर वाले क्षेत्रों में, माता-पिता को ठंड से बचाव और संपूर्ण टीकाकरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
नागरिकों से अपील
सभी अभिभावकों से आग्रह है कि वे अपने बच्चों को समय पर निमोनिया का टीका लगवाएं और किसी भी लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें। आपका एक जागरूक कदम, आपके बच्चे की जान बचा सकता है।
