मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अपने क्षेत्राधिकार में अनियमित और अवैध निर्माणों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए प्रवर्तन अभियान तेज कर दिया है। नियोजित विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गुरुवार को सहस्रधारा रोड के पीछे सिटी फॉरेस्ट पार्क, तरला नागल क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की गई।
एमडीडीए के अनुसार, विक्रमप्रताप सिंह द्वारा स्वीकृत तीन सिंगल ड्वेलिंग यूनिट के मानचित्रों को आपस में जोड़कर सेट-बैक नियमों का उल्लंघन करते हुए फ्लैटों का निर्माण किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि भवन को पूर्व में सील किए जाने के बावजूद सील तोड़कर निर्माण कार्य जारी रखा गया। गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए निर्माण के अशमनीय हिस्से को ध्वस्त किया गया।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत मानचित्र से विचलन, सेट-बैक उल्लंघन, भूमि उपयोग परिवर्तन और सील तोड़कर निर्माण जैसे मामलों में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी।
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भी कार्रवाई
प्रवर्तन अभियान के तहत देहरादून के अन्य इलाकों में भी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई—
चौहान मोहल्ला, मेहुवाला में सूरज द्वारा किए जा रहे व्यवसायिक निर्माण को सील किया गया।
सिनोला फॉरेस्ट सप्लाई रोड पर मनीष गुरुंग के निर्माण को नियम विरुद्ध पाए जाने पर सील किया गया।
इंजीनियर एन्क्लेव, जाखन में अंकित आहूजा के निर्माण पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई।
यह सभी कार्रवाइयाँ संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के आदेशों के अनुपालन में शशांक सक्सेना एवं शैलेंद्र सिंह रावत (सहायक अभियंता), सचिन तोमर (अवर अभियंता), उमेश वर्मा, ललित नेगी, अभिजीत सिंह, संबंधित सुपरवाइजर तथा पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी में शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न हुईं।
एमडीडीए ने दोहराया कि अवैध निर्माण न केवल शहर की नियोजित संरचना को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, जल निकासी, यातायात और आपदा जोखिम को भी बढ़ाते हैं। भविष्य में भी नियमित निरीक्षण और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी।
अधिकारियों के बयान
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून क्षेत्र का विकास नियोजित, सुरक्षित और पर्यावरण-संवेदनशील तरीके से किया जाना प्राधिकरण की प्राथमिकता है। नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि सभी मामलों में तकनीकी और विधिक जांच के बाद ही कार्रवाई की जाती है। सील तोड़कर निर्माण करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में एमडीडीए की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।