ज्योतिर्मठ। सीमांत क्षेत्र के अग्रणी शिक्षण संस्थान, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ज्योतिर्मठ में वार्षिक महोत्सव एवं पारितोषिक वितरण समारोह का आयोजन अत्यंत भव्यता के साथ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने शिरकत की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में गुरुद्वारा प्रबंधक सेवा सिंह, रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष ओमप्रकाश डोभाल और छात्र संघ अध्यक्ष उमेश राणा, छात्र संघ अध्यक्ष दिव्यांशु सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस दौरान अतिथियों ने मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया।
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) प्रीति कुमारी ने सत्र 2025-26 की वार्षिक आख्या प्रस्तुत करते हुए संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1996 में स्थापित यह महाविद्यालय आज कला और विज्ञान संकाय के विभिन्न विषयों में उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। वर्ष 2024 के परीक्षा परिणामों में संस्थान का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा, जिसमें बी.एससी. द्वितीय वर्ष का परिणाम शत-प्रतिशत रहा। साथ ही, ‘भारत दर्शन योजना’ के तहत छात्रों ने वाराणसी, दिल्ली और बेंगलुरु के प्रतिष्ठित संस्थानों का भ्रमण कर व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
समारोह का मुख्य आकर्षण ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना’ रही, जिसके तहत मेधावियों के चेहरे खिल उठे। स्वर्ण श्रेणी में कु. सिमरन, दिया, प्रिया, साक्षी और समीर सिंह रावत को ₹35,000 से ₹60,000 तक की धनराशि प्रदान की गई। वहीं, रजत और कांस्य श्रेणी में कुमकुम, पूर्णिमा, अनामिका, अदिति और मनीषा सहित दर्जनों छात्रों को ₹18,000 से ₹25,000 तक की प्रोत्साहन राशि से सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि ऋषि प्रसाद सती ने अपने संबोधन में कहा कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यहाँ के छात्र शिक्षा और अनुशासन में मिसाल पेश कर रहे हैं, जो क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। प्राचार्या ने भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि आगामी सत्र से ‘रोवर रेंजर्स’ की इकाई भी शुरू की जाएगी। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी आगंतुकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
इस दौरान छात्र संघ अध्यक्ष दिव्यांशु ने विद्यालय की विभिन्न समस्याओं से मुख्य अतिथियों को अवगत कराया उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि विद्यालय में कई अध्यापकों के पद खाली है जिन पर भर्ती होनी चाहिए विद्यालयों में प्रोफेसर की कमी की वजह से बच्चे क्षेत्र से बाहर पढ़ने को मजबूर हैं गरीब वर्ग के बच्चों को इससे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अगर सरकार महाविद्यालय की विभिन्न समस्याओं का समाधान नहीं करती है तो आने वाले समय में विद्यालय के छात्र-छात्राएं एक बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगी..