चेक बाउंस मामले में आरोपी दोषमुक्त, अदालत ने कहा- वैधानिक देनदारी साबित नहीं

कोटद्वार : अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने चेक बाउंस के एक महत्वपूर्ण मामले में आरोपी संदीप डोबरियाल को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि परिवादी आरोपी की वैधानिक देनदारी साबित करने में असफल रहा, जिसके चलते आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया।

अधिवक्ता पूजा शर्मा एवं अधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि जयश्री स्टील के प्रोपराइटर लोक मणिपुर निवासी सतीश कुमार ने संदीप डोबरियाल निवासी दुर्गा कालोनी शिवपुर के खिलाफ धारा-138 परक्राम्य लिखित अधिनियम के तहत एक परिवाद न्यायालय में प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी हार्डवेयर की दुकान है। आरोपी उनकी दुकान से हार्डवेयर का सामन ले जाता था। आरोपी उनसे 2,10,000 रुपये का हार्डवेयर का सामान ले गया और इसके बदले 8 दिसंबर, 2022 को उत्तराखंड ग्रामीण बैंक शाखा लालपुर स्थित अपने खाते का चेक इस आश्वासन के साथ दिया कि उक्त चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर भुगतान प्राप्त हो जाएगा। उन्होंने इस चेक को भारतीय स्टेट बैंक शाखा कोटद्वार स्थित अपने खाते में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया । आरोपी के खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। नोटिस प्राप्ति के बाद भी आरोपी ने भुगतान नहीं किया। 

मामला वर्ष 2023 में न्यायालय में दायर किया गया था। परिवादी की ओर से आरोप लगाया गया था कि आरोपी द्वारा जारी किया गया चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर अनादृत हो गया था। इसके बाद परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत न्यायालय में परिवाद दायर किया गया।

मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज कुमार द्विवेदी की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जिस धनराशि के लिए चेक जारी किया गया था, उसे लेकर कोई स्पष्ट और वैधानिक देनदारी प्रमाणित नहीं हो सकी।

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि संबंधित चेक सुरक्षा (सिक्योरिटी चेक) के रूप में लिया गया था और बाद में उसका दुरुपयोग करते हुए मुकदमा दायर किया गया। न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि धारा 139 के तहत बनने वाली कानूनी धारणा को जिरह और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर खंडित किया जा सकता है।

न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि आपराधिक मामलों में यदि संदेह की स्थिति उत्पन्न होती है तो उसका लाभ आरोपी को दिया जाना न्यायसंगत है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी संदीप डोबरियाल को धारा 138 के आरोप से ब

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *