उत्तराखंड में छह दिनों तक ऐसा रहेगा मौसम, अगले 24 घंटों के लिए अलर्ट जारी

देहरादून। उत्तराखंड में अगले कई दिनों तक मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के पर्वतीय जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ वर्षा होने के आसार हैं, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी भी हो सकती है। वहीं मैदानी जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 1 जून को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल, चम्पावत और पिथौरागढ़ जिलों के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश तथा गर्जन के साथ वर्षा होने की संभावना है। 3800 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी भी हो सकती है। राज्य के अन्य जिलों में भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने के आसार हैं।

2 जून को पर्वतीय जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ वर्षा का अनुमान है। इस दौरान 4000 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। मैदानी जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है।

3 और 4 जून को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा तथा गर्जन के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। जबकि राज्य के अन्य जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। 5 और 6 जून को भी पर्वतीय जिलों में मौसम सक्रिय बना रहेगा। कई स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में छिटपुट स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने बताया कि बीते 24 घंटों के दौरान उत्तराखंड के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया गया। हालांकि आगामी चार से पांच दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।

मौसम विभाग ने पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों, तीर्थयात्रियों और स्थानीय प्रशासन को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश के कारण सड़क मार्गों पर फिसलन बढ़ सकती है, जिससे सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

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