देहरादून। वैदिक साधन आश्रम में आयोजित पांच दिवसीय ग्रीष्मोत्सव के दूसरे दिन वैदिक यज्ञ, भजनोपदेश और युवा जागरण के कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ-हवन से हुआ, जिसमें वैश्विक कल्याण एवं पर्यावरण शुद्धि की कामना के साथ आहुतियां दी गईं।
यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य हरि प्रसाद जी, हैदराबाद ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए 33 कोटि देवताओं के पूजन की वैदिक विधि बताई तथा सभी को नियमित यज्ञ करने के लिए प्रेरित किया। वहीं वानप्रस्थ आश्रम हरिद्वार के आचार्य शैलेश मुनि सत्यार्थी जी ने यज्ञ को वैज्ञानिक एवं आत्मिक शक्ति बढ़ाने वाला माध्यम बताया। प्रातःकालीन सत्र का समापन गुरुकुल द्रोणस्थली की वेदपाठी कन्याओं द्वारा शांतिपाठ एवं जयघोष के साथ हुआ।
दूसरे सत्र में “आर्षग्रंथों में युवा निर्माण के सूत्र” विषय पर मंथन किया गया। कार्यक्रम का संचालन आचार्य जगदीप जी ने किया। दिल्ली की रोशनी आर्य ने ईश्वर भक्ति भजनों से वातावरण को भक्तिमय बनाया, जबकि रमेश चंद्र स्नेही एवं पंडित दिनेश पथिक ने भजनों के माध्यम से लक्ष्मण और अभिमन्यु के आदर्श चरित्रों का चित्रण प्रस्तुत किया।
गुरुकुल पौंधा के आचार्य डॉ. धनंजय जी ने युवाओं को अनुसंधान कार्यों की ओर प्रेरित करते हुए वैदिक साहित्य पर शोध केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता बताई। गुरुकुल द्रोणस्थली की आचार्या डॉ. अन्नपूर्णा जी ने कहा कि आर्षग्रंथों का स्वाध्याय ही समाज में बढ़ते अनाचार को समाप्त कर सकता है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आर्य युवक हार्दिक आत्मोन्नति केंद्र, जींद हरियाणा ने कहा कि व्यक्ति आयु से नहीं बल्कि विचारों से युवा होता है और युवाओं को उच्च आदर्श अपनाने चाहिए।
सायंकालीन सत्र में यज्ञ की आहुतियों के बाद भजन एवं प्रवचन हुए। विदुषी श्वेता आर्या ने “इतनी शक्ति हमें देना दाता” भजन प्रस्तुत किया, जबकि पंडित रमेश चंद्र स्नेही एवं पंडित दिनेश पथिक ने भी मधुर भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया।
उत्तराखंड रत्न से सम्मानित युवा वक्ता आचार्य अनुज शास्त्री जी ने युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि भारत की स्वतंत्रता में युवाओं की निर्णायक भूमिका रही है। उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक पीढ़ी में आध्यात्मिक एवं सामाजिक क्रांति का नेतृत्व युवा ही करते हैं। देहरादून के प्रसिद्ध पुरोहित पंडित वेद वसु शास्त्री जी ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए संस्कारित एवं राष्ट्रभक्त युवाओं के निर्माण पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन शयनकालीन मंत्रोच्चार एवं शांतिपाठ के साथ हुआ।