देहरादून नगर निगम बोर्ड बैठक में हंगामा, अतिक्रमण पर सख्ती, 715 पदों पर भर्ती को मंजूरी

देहरादून। नगर निगम देहरादून की बोर्ड बैठक दूसरे दिन भी हंगामे और तीखी नोंकझोंक के बीच जारी रही। बैठक के दौरान भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच कई मुद्दों को लेकर बहस देखने को मिली। देर शाम तक कुल 65 प्रस्तावों में से केवल 26 पर ही चर्चा हो सकी, जबकि शेष 39 प्रस्तावों पर अब शनिवार को विचार किया जाएगा।

बैठक में सबसे अहम फैसला शहर में बढ़ते अतिक्रमण पर सख्ती को लेकर लिया गया। नगर निगम ने तय किया है कि अब अवैध निर्माण या अतिक्रमण पाए जाने पर एक सप्ताह के भीतर नोटिस जारी किया जाएगा और एक महीने के अंदर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

पार्षदों ने बैठक में आरोप लगाया कि शहर में अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि निगम की कार्रवाई के बावजूद कुछ ही घंटों में दोबारा रेहड़ी-पटरी लग जाती है, ऐसे में स्थायी समाधान के लिए ठोस नीति बनाने की जरूरत है।

इसके अलावा सिंगल यूज प्लास्टिक के मुद्दे पर भी पार्षदों ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को घेरा। आरोप लगाया गया कि छोटे व्यापारियों पर तो कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े थोक विक्रेताओं पर कोई सख्ती नहीं दिखती।

बैठक में बल्लूपुर फ्लाईओवर के नीचे शौचालय निर्माण में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई गई। फिलहाल यहां अस्थायी रूप से मोबाइल टॉयलेट लगाने का निर्णय लिया गया है।

इस बीच, नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 715 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है। नगर आयुक्त नमामि बंसल ने बताया कि इन भर्तियों से सफाई, जल निकासी और अन्य नागरिक सेवाओं में सुधार आएगा।

उन्होंने कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई और नई भर्तियों के जरिए नगर निगम शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

संस्कृत महाविद्यालय में शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन प्रभावित, वेद आचार्य के अभाव पर उठे सवाल

ज्योतिर्मठ : श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) से संबद्ध संस्कृत महाविद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी के चलते पठन-पाठन की व्यवस्था चरमरा गई है। सबसे गंभीर स्थिति वेद विषय की है, जहाँ आचार्य के न होने से छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। इस समस्या को लेकर देव पुजाई समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए मंदिर समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है..

देव पुजाई समिति का आरोप है कि महाविद्यालय में कार्यरत वेद विषय के एकमात्र आचार्य को श्री बदरीनाथ मंदिर में वेदपाठी के कार्य हेतु तैनात कर दिया गया है। इसके चलते विद्यालय में अब वेदों का ज्ञान देने वाला कोई भी शिक्षक मौजूद नहीं है। समिति के अध्यक्ष **अनिल न नंबुदरी और उपाध्यक्ष प्रकाश चंद्र सती ने कहा कि वेदों की शिक्षा के लिए प्रसिद्ध इस संस्थान में मुख्य विषय के ही शिक्षक का न होना छात्रों के हित में नही है।

मामले की गंभीरता पर संस्कृत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य अरविंद पंत ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि व्यवस्था के तहत ही अध्यापक को वर्तमान में बदरीनाथ धाम भेजा गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि विद्यालय में केवल वेद ही नहीं, बल्कि हिंदी, राजनीति विज्ञान, ज्योतिष और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के पद भी रिक्त चल रहे हैं। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि विद्यालय प्रशासन अपने स्तर से वैकल्पिक व्यवस्थाएं कर रहा है ताकि छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो।

गौरतलब है कि बद्रीनाथ धाम में वेदपाठी का पद वर्षो से खाली चल रहा है हालांकि इस पर परीक्षाएं हो चुकी है लेकिन अभी तक परीक्षा परिणाम जारी नहीं किए गए हैं वर्षों से स्थानीय लोग भी वेदपाठी पदों पर नियुक्ति की मांग करते आए हैं लेकिन अभी तक मंदिर समिति के द्वारा वेदपाठी की नियुक्ति नहीं की गई है।

कोटद्वार : छात्राओं को दी गई सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता की जानकारी

कोटद्वार : जनपद में महिला सुरक्षा एवं जनजागरूकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट कोटद्वार एवं ANTF टीम द्वारा ट्रू फ्रेंड्स चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ मिलकर आर्य कन्या इंटर कॉलेज, कोटद्वार में एक विशेष जागरूकता पाठशाला का आयोजन किया गया।

 

कार्यक्रम में विद्यालय की समस्त अध्यापिकाओं की उपस्थिति में छात्राओं को विभिन्न सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। महिला उपनिरीक्षक सुमन लता एवं महिला कांस्टेबल विद्या मेहता द्वारा छात्राओं को मानव तस्करी, वेश्यावृत्ति, भिक्षावृत्ति, महिला अपराध, पॉक्सो एक्ट एवं यातायात नियमों के संबंध में जागरूक करते हुए सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया गया।

नशे से दूरी और डिजिटल सुरक्षा पर विशेष जोर

छात्राओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए सुरक्षित एवं जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही उत्तराखंड पुलिस ऐप, गौरा शक्ति ऐप के सम्बन्ध में भी जानकारी देने के साथ साथ आपातकालीन सहायता एवं हेल्पलाइन नंबरों डायल 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तथा मानस हेल्पलाइन 1933 के बारे में विस्तार से बताया गया, एवं जन जागरूकता हेतु जागरूकता पंपलेट वितरित किए गए।

अप्रैल में दिखे मौसम के तीखे तेवर, कभी भारी गर्मी फिर अचानक भारी बारिश

देहरादून: कुमाऊं समेत प्रदेशभर में इस बार अप्रैल माह ने मौसम के कई रंग दिखाए। जहां एक ओर तापमान ने बीते दशक के रिकॉर्ड तोड़ते हुए गर्मी का अहसास कराया, वहीं दूसरी ओर सामान्य से अधिक वर्षा भी दर्ज की गई।

मौसम विभाग के अनुसार, इस बार अप्रैल में कुमाऊं क्षेत्र में तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक है। इससे मई और जून में भीषण गर्मी के संकेत मिल रहे हैं। इससे पहले तराई क्षेत्र में अप्रैल का सर्वाधिक तापमान वर्ष 2009 में 41.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

हालांकि, गर्मी के साथ-साथ इस बार अप्रैल में वर्षा भी सामान्य से अधिक रही। प्रदेश में औसतन 39.3 मिमी वर्षा होती है, जबकि इस बार 46.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 18 प्रतिशत अधिक है। चंपावत, ऊधम सिंह नगर, बागेश्वर, अल्मोड़ा और नैनीताल समेत अधिकांश जिलों में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

गुरुवार को काशीपुर और पंतनगर में गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा हुई। सुबह 8:30 बजे तक काशीपुर में 2.5 मिमी और पंतनगर में 3.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई। दिन में धूप निकलने के बाद शाम को एक बार फिर मौसम बदला और हल्की बारिश हुई।

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि हालिया पश्चिमी विक्षोभ और 2 मई को आने वाले नए सिस्टम के प्रभाव से मई के पहले सप्ताह में भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। हालांकि, इसके बाद तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है।

मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि अगले तीन दिनों तक तराई क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहेगा और तापमान में वृद्धि दर्ज की जाएगी, जबकि 3 मई से एक बार फिर मौसम करवट ले सकता है और बादल छाने के आसार हैं।

 
उत्तराखण्ड का चारधाम यात्रा मॉनिटरिंग मॉडल बना मिसाल, हिमाचल प्रदेश के अधिकारी ने किया निरीक्षण

देहरादून : हिमाचल प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जगत सिंह नेगी ने गुरुवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) का दौरा कर आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने दोनों राज्यों के बीच आपसी समन्वय एवं सहयोग को और मजबूत करने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश भौगोलिक दृष्टि से समान प्रकृति वाले पर्वतीय एवं संवेदनशील राज्य हैं, जहां भूस्खलन, अतिवृष्टि एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियां भी लगभग समान हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के बीच समन्वित रणनीति अपनाकर प्रभावी आपदा प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकता है।

इस दौरान मंत्री ने USDMA द्वारा संचालित चारधाम यात्रा की मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली का अवलोकन किया। उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के माध्यम से केदारनाथ यात्रा की लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम, भीड़ प्रबंधन, मौसम एवं मार्ग की सतत निगरानी तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच त्वरित समन्वय की व्यवस्था को सराहा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का यह तकनीक-आधारित मॉडल अत्यंत प्रभावी है, जिसे हिमाचल प्रदेश में भी लागू किया जाएगा।

सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास उत्तराखण्ड विनोद कुमार सुमन ने USDMA की गतिविधियों एवं नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण द्वारा तकनीकी नवाचारों एवं सुदृढ़ तंत्र के माध्यम से आपदा प्रबंधन व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

मंत्री ने तहसील स्तर पर गठित की जा रही क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की सराहना करते हुए इसे आपदा प्रबंधन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि ये टीमें आपदा के प्रारंभिक चरण में त्वरित राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने USDMA द्वारा विकसित ‘भूदेव’ एप एवं मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) की भी सराहना की तथा भूस्खलन प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों राज्यों के बीच संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘भूदेव’ एप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे आपदा संबंधी सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित हो सके।

इस अवसर पर यूप्रिपेयर के परियोजना निदेशक आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन महावीर सिंह चौहान, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी DIG राजकुमार नेगी, अपर सचिव हिमाचल प्रदेश निशांत ठाकुर, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी, ULMMC के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार, एसके बिरला आदि उपस्थित रहे।

मौसम के दिखे तीखे तेवर, कभी भारी गर्मी फिर अचानक भारी बारिश

देहरादून: कुमाऊं समेत प्रदेशभर में इस बार अप्रैल माह ने मौसम के कई रंग दिखाए। जहां एक ओर तापमान ने बीते दशक के रिकॉर्ड तोड़ते हुए गर्मी का अहसास कराया, वहीं दूसरी ओर सामान्य से अधिक वर्षा भी दर्ज की गई।

मौसम विभाग के अनुसार, इस बार अप्रैल में कुमाऊं क्षेत्र में तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक है। इससे मई और जून में भीषण गर्मी के संकेत मिल रहे हैं। इससे पहले तराई क्षेत्र में अप्रैल का सर्वाधिक तापमान वर्ष 2009 में 41.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

हालांकि, गर्मी के साथ-साथ इस बार अप्रैल में वर्षा भी सामान्य से अधिक रही। प्रदेश में औसतन 39.3 मिमी वर्षा होती है, जबकि इस बार 46.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 18 प्रतिशत अधिक है। चंपावत, ऊधम सिंह नगर, बागेश्वर, अल्मोड़ा और नैनीताल समेत अधिकांश जिलों में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

गुरुवार को काशीपुर और पंतनगर में गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा हुई। सुबह 8:30 बजे तक काशीपुर में 2.5 मिमी और पंतनगर में 3.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई। दिन में धूप निकलने के बाद शाम को एक बार फिर मौसम बदला और हल्की बारिश हुई।

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि हालिया पश्चिमी विक्षोभ और 2 मई को आने वाले नए सिस्टम के प्रभाव से मई के पहले सप्ताह में भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। हालांकि, इसके बाद तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है।

मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि अगले तीन दिनों तक तराई क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहेगा और तापमान में वृद्धि दर्ज की जाएगी, जबकि 3 मई से एक बार फिर मौसम करवट ले सकता है और बादल छाने के आसार हैं।

 
वृद्धावस्था पेंशन से लेकर फ्री मोतियाबिंद सर्जरी तक, जानें CM की बड़ी बातें

हल्द्वानी : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हल्द्वानी स्थित डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रेक्षागृह में आयोजित वरिष्ठ नागरिक सम्मान एवं खेल समारोह-2026 में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में बुजुर्गों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनका सम्मान ही किसी भी सभ्य समाज की पहचान है। जिस परिवार और समाज में बुजुर्गों का सम्मान होता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। 

उन्होंने समारोह में वरिष्ठ नागरिकों द्वारा वॉलीबॉल, फुटबॉल और बैडमिंटन जैसी प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि यह संदेश देता है कि उम्र केवल एक संख्या है और जीवन में ऊर्जा एवं उत्साह का कोई विकल्प नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। विभिन्न योजनाओं जैसे अटल वयोअभ्युदय योजना, प्रधानमंत्री वय वंदना योजना और राष्ट्रीय वयोश्री योजना के माध्यम से वरिष्ठजनों के जीवन को सुरक्षित और गरिमामय बनाने का कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत राज्य के लगभग 6 लाख वरिष्ठजनों को प्रतिमाह ₹1500 की पेंशन DBT के माध्यम से दी जा रही है। साथ ही, पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग पेंशन देने का निर्णय उनकी आर्थिक सुरक्षा को और सुदृढ़ कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वृद्धाश्रमों की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी में राजकीय वृद्धाश्रम संचालित हैं, जबकि देहरादून, अल्मोड़ा और चम्पावत में नए भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, रुद्रपुर में एक आधुनिक मॉडल वृद्धाश्रम का निर्माण भी किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अटल वयोअभ्युदय योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और मनोरंजन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही, राज्य में पहली बार जेरियाट्रिक केयर गिवर प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से मानव संसाधन तैयार किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय वयोश्री योजना के अंतर्गत वरिष्ठजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा निशुल्क मोतियाबिंद सर्जरी की सुविधा भी दी जा रही है। इस वर्ष 1300 वरिष्ठ नागरिकों की निःशुल्क सर्जरी का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिसके तहत वरिष्ठ नागरिकों को अपने भरण-पोषण के लिए कानूनी अधिकार प्राप्त हैं।

मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा उनके गरिमामय जीवन के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

घंटाघर में श्रमिक सम्मान कार्यक्रम, महिला श्रमिकों को सूट और पुरुषों को गमछा भेंट

देहरादून: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर राजधानी में उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ द्वारा घंटाघर पर “श्रमिक सम्मान कार्यक्रम” आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने महिला श्रमिकों को सूट और पुरुष श्रमिकों को गमछा पहनाकर सम्मानित किया।

इस मौके पर श्रमिकों को संबोधित करते हुए सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्ग के हितों के लिए कार्य करती रही है। उन्होंने कहा कि भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और स्थानीय निकायों में महिला आरक्षण जैसी व्यवस्थाएं कांग्रेस सरकारों की प्राथमिकताओं का प्रमाण हैं।

धस्माना ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान में केंद्र और राज्य की सरकारें गरीब और मजदूर विरोधी नीतियां अपना रही हैं, जिससे श्रमिक वर्ग को रोजगार और आवास जैसी मूलभूत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में मजदूरों को भारी कठिनाइयों से गुजरना पड़ा और आज महंगाई व गैस संकट के कारण उनकी स्थिति और भी दयनीय हो गई है।

उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि किसी भी बस्ती को हटाने से पहले वहां रहने वाले लोगों के पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनने पर प्रदेश में किसी भी गरीब की झोपड़ी नहीं टूटने दी जाएगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कौशल ने कहा कि कांग्रेस श्रमिकों को एकजुट कर उनके अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में महंगाई के कारण मजदूरों के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो गया है।

कार्यक्रम में श्रम प्रकोष्ठ की मुख्य महासचिव पूनम कंडारी, कांग्रेस नेता विनोद कुमार (एडवोकेट), राम गोपाल वर्मा, फरजान अंसारी, आजाद अंसारी, चंद्रपाल, लक्की राणा, बच्चन सिंह नेगी, मनीष गर्ग, कमल किशोर शर्मा, मानसिंह देशराज, विलियम सहित बड़ी संख्या में श्रमिक मौजूद रहे।

राशनकार्ड सत्यापन अभियान प्रारम्भ, अपात्र धारकों पर होगी कार्रवाई

पौड़ी : शासन द्वारा प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जनपद पौड़ी गढ़वाल में ऐसे राशनकार्डों का सत्यापन अभियान प्रारम्भ किया गया है, जो उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड दोनों राज्यों से राशनकार्ड के माध्यम से आयुष्मान, गैस कनेक्शन आदि सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं अथवा जो अपात्र श्रेणी में आते हैं। 

जिला खाद्य पूर्ति अधिकारी अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि अभियान के अंतर्गत अपात्र राशनकार्ड धारकों के राशनकार्ड निरस्त किए जाएंगे तथा उनसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत वसूली आदि की आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। कार्डधारक निर्धारित मानकों के अनुरूप पात्र नहीं हैं, तो वे अपना राशनकार्ड तत्काल संबंधित क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी/पूर्ति निरीक्षक कार्यालय, खण्ड विकास कार्यालय अथवा संबंधित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के कार्यालय में जमा करा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि यदि सत्यापन के दौरान कोई राशनकार्ड अपात्र पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राशनकार्ड धारकों से अनुरोध किया कि वे इस अभियान में सहयोग प्रदान करें। इस संबंध में अधिक जानकारी हेतु संबंधित क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी/पूर्ति निरीक्षक कार्यालय/गोदाम आदि से संपर्क किया जा सकता है।

केदारनाथ धाम पहुंचे गौतम अदाणी, बाबा केदार के दर्शन कर लिया आशीर्वाद

रुद्रप्रयाग/देहरादून: गौतम अदाणी, अदाणी समूह के संस्थापक एवं चेयरमैन, शुक्रवार को केदारनाथ धाम पहुंचे और बाबा केदार के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रहीं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौतम अदाणी सुबह नई दिल्ली से देहरादून पहुंचे, जहां से वह निजी हेलिकॉप्टर के माध्यम से सीधे केदारनाथ धाम रवाना हुए। धाम पहुंचने पर उन्होंने विधि-विधान से पूजा कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की।

बताया जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने सोनप्रयाग से केदारनाथ तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना के एरियल सर्वे का भी जायजा लिया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य अदाणी समूह को सौंपा गया है, जिससे यात्रा को सुगम बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

वीआईपी दौरे को देखते हुए केदारनाथ धाम क्षेत्र में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा के मद्देनजर विशेष इंतजाम किए।

गौरतलब है कि केदारनाथ धाम में इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और यात्रा अपने चरम पर है। ऐसे में रोपवे परियोजना को भविष्य में यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।