उत्तराखण्ड की बेटी महक चौहान बनीं भारत की टॉप रग्बी स्कोरर

उत्तरकाशी : उत्तराखण्ड की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। चाहे सेना में जाकर देश की सुरक्षा करनी हो या खेल के मैदान में शानदार प्रदर्शन करना हो, देवभूमि की बेटियां लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। ऐसी ही एक होनहार बेटी हैं उत्तरकाशी जिले के छोटे से गांव भद्रासू गुडगाड़, मोरी की महक चौहान, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय रग्बी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर पूरे देश को गर्व महसूस कराया है।

संयोग से शुरू हुआ रग्बी का सफर

महक चौहान का रग्बी तक पहुंचने का सफर बेहद प्रेरणादायक और दिलचस्प है। करीब तीन साल पहले महक एक ट्रायल में यह सोचकर पहुंची थीं कि वहां दौड़ प्रतियोगिता के लिए चयन हो रहा है, लेकिन वह ट्रायल रग्बी खेल का था।

यही एक संयोग उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया। अपनी मेहनत, फिटनेस और खेल के प्रति जुनून के दम पर महक ने कम समय में खुद को साबित किया और आज अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गईं।

ताशकंद में चमकी उत्तराखंड की बेटी

16 से 17 मई के बीच उज्बेकिस्तान के ताशकंद में आयोजित Central and South Asia (CASA) Rugby 7s Championship में महक चौहान ने अपने शानदार खेल से सभी को प्रभावित किया। यह उनका पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

महक ने पूरे टूर्नामेंट में भारत के लिए कुल 9 ट्राई स्कोर किए और भारतीय टीम की सबसे अधिक स्कोर करने वाली खिलाड़ी बनीं। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें महिला वर्ग में “Player of the Tournament” के सम्मान से नवाजा गया।

भारत के लिए गर्व का क्षण

इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत की महिला टीम चौथे स्थान पर रही, जबकि पुरुष टीम ने सिल्वर मेडल हासिल किया। महिला वर्ग में उज्बेकिस्तान, श्रीलंका, भारत, मंगोलिया, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान की टीमें शामिल थीं।

उत्तराखंड रग्बी एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष और राज्य महिला रग्बी टीम के कोच आयुष सैनी ने महक की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि उनकी स्पीड, फिटनेस और आक्रामक खेल ने सभी को प्रभावित किया।

उन्होंने कहा, “महक ने पूरे टूर्नामेंट में 9 ट्राई स्कोर किए। उनकी गति और फिटनेस शानदार रही। भले ही भारतीय टीम पदक नहीं जीत सकी, लेकिन महक के व्यक्तिगत प्रदर्शन ने देश को गर्व महसूस कराया।”

पहाड़ की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

सीमित संसाधनों और दूरस्थ क्षेत्र से आने के बावजूद महक चौहान ने यह साबित कर दिया कि अगर मेहनत और लगन हो तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।

आज महक चौहान उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश की युवा बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका सफर उन युवाओं के लिए एक मिसाल है जो छोटे गांवों से निकलकर बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

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