उत्तराखंड : जंगल की भीषण आग से दहशत, इस यूनिवर्सिटी के परिसर तक पहुंचीं लपटें

पौड़ी। जनपद पौड़ी के देवप्रयाग क्षेत्र में जंगल में लगी भीषण आग ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी। बाह बाजार के निकट जंगल में भड़की आग धीरे-धीरे रिहायशी इलाकों और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर तक पहुंच गई, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल बन गया। देर रात कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

जानकारी के अनुसार, देवप्रयाग नगरपालिका के वार्ड संख्या चार स्थित बाह बाजार क्षेत्र में आग सौड़ गांव की ओर से फैलते हुए पहुंची। इससे पहले भी नृसिंहाचल पर्वत पर लगी आग को विश्वविद्यालय परिसर के अध्यापकों और वन विभाग की टीम ने करीब चार घंटे की मेहनत के बाद बुझाया था। हालांकि दो दिन बाद एक बार फिर आग ने विकराल रूप ले लिया और धीरे-धीरे विश्वविद्यालय परिसर की ओर बढ़ने लगी।

स्थिति गंभीर होते देख परिसर प्रशासन ने तत्काल वन विभाग, दमकल विभाग और पुलिस को सूचना दी। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वन विभाग की टीम ने एक ओर से आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश की, लेकिन तेज हवाओं के चलते आग तेजी से फैलती चली गई।

दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर पहुंची, लेकिन घटनास्थल तक पाइप नहीं पहुंच पाने से आग बुझाने में परेशानी हुई। हालात को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियातन छात्रों और कर्मचारियों से आवास खाली करा दिए। छात्रावास के ऊपर उठती आग की ऊंची लपटों को देखकर छात्रों और कर्मचारियों में दहशत फैल गई।

कुछ ही देर में आग बाह बाजार के ऊपर स्थित जंगल तक पहुंच गई और तेजी से बस्ती की ओर बढ़ने लगी। आग की लपटें घरों के करीब पहुंचती देख स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। ग्रामीण अपने घरों को बचाने के लिए खुद आग बुझाने में जुट गए। कई घंटों की मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने आग को बस्ती तक पहुंचने से रोक लिया।

हालांकि सोमवार को भी कई स्थानों पर आग सुलगती रही। बाह बाजार के ऊपर स्थित खेड़ा गांव चारों ओर से आग की चपेट में आ गया, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बना रहा। जंगल में लगी आग से पूरे क्षेत्र में धुएं का गुबार फैल गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है।

जंगल की आग का असर वन्यजीवों पर भी दिखाई देने लगा है। कई जंगली जानवर और पक्षी जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों और विश्वविद्यालय परिसर की ओर पहुंच रहे हैं। पिछले तीन दिनों से परिसर के आसपास गुलदार दिखाई देने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इसके अलावा कई घायल पक्षी भी सड़कों और बस्तियों में नजर आए।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति Srinivas Varkhedi ने मामले का संज्ञान लिया है। भविष्य में परिसर को जंगल की आग से सुरक्षित रखने के लिए विस्तृत योजना तैयार की जाएगी, जिसमें वन विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा।

उत्तरकाशी में आवारा कुत्तों का आतंक, एक दिन में 16 लोगों पर हमला

उत्तरकाशी। जिला मुख्यालय क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर के विभिन्न इलाकों में एक ही दिन में कुत्तों ने 16 लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। सबसे गंभीर मामला तांबाखानी क्षेत्र से सामने आया, जहां एक चार वर्षीय मासूम पर घर के आंगन में घुसकर कुत्ते ने हमला कर दिया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी रोष है।

जानकारी के अनुसार, तांबाखानी निवासी गौरव का चार वर्षीय बेटा दिव्यांश घर के आंगन में खेल रहा था। इसी दौरान मोहल्ले में घूमने वाला एक आवारा कुत्ता अचानक घर में घुस आया और बच्चे की छाती व उंगली पर हमला कर दिया। बच्चे को गंभीर चोटें आई हैं। परिजनों ने किसी तरह बच्चे को कुत्ते से छुड़ाया और तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है।

वहीं केदारघाट क्षेत्र में भी एक व्यक्ति पर कुत्ते ने हमला कर दिया। स्थानीय निवासी हरीश कुमार ने बताया कि वह सड़क किनारे खड़े थे, तभी अचानक एक कुत्ते ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने डंडे की मदद से खुद को बचाया, लेकिन तब तक वह घायल हो चुके थे।

इसके अलावा जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों में 14 अन्य लोग भी आवारा कुत्तों के हमले में घायल हुए हैं। जिला अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पिछले दो महीनों से प्रतिदिन औसतन आठ से दस लोग डॉग बाइट के मामलों में अस्पताल पहुंच रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका और पशुपालन विभाग की ओर से आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। लगातार बढ़ते हमलों के कारण लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।

नगर पालिका की प्रभारी ईओ कुसुम राणा ने बताया कि कुत्तों को पकड़ने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हो गए हैं। एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर के निर्माण के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया चल रही है। तब तक पशुपालन विभाग के सहयोग से आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा।

कोटद्वार में स्मैक सप्लायर चढ़ा पुलिस के हत्थे, नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस

कोटद्वार : “ऑपरेशन प्रहार” के तहत पौड़ी पुलिस नशा तस्करों की कमर तोड़ने के अभियान में जुटी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार के सख्त निर्देशों पर जनपदभर में नशे के कारोबार से जुड़े प्रत्येक नेटवर्क को चिन्हित कर उसके विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। नशे की सप्लाई चेन को ध्वस्त करने के उद्देश्य से पुलिस टीमों द्वारा दिन-रात सघन चेकिंग एवं निगरानी अभियान चलाए जा रहे हैं।

इसी क्रम में 26 मई को अपर पुलिस अधीक्षक कोटद्वार मनोज कुमार ठाकुर, क्षेत्राधिकारी कोटद्वार अस्मिता मंमगाई के पर्यवेक्षण एवं प्रभारी निरीक्षक कोटद्वार प्रदीप नेगी के नेतृत्व में पुलिस व सीआईयू टीम कोटद्वार द्वारा संयुक्त चैकिग अभियान चलाया जा रहा था। चेकिंग के दौरान पुलिस टीम ने संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों पर पैनी नजर रखते हुए कौडिया कोटद्वार के पास एक संदिग्ध व्यक्ति को रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान व्यक्ति के कब्जे से 20 ग्राम अवैध स्मैक बरामद हुई। बरामदगी के आधार पर पुलिस टीम ने अभियुक्त को मौके पर गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में अभियुक्त के विरुद्ध कोतवाली कोटद्वार में मु0अ0सं0- 121/2026, धारा- 8/21 एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है। 

पुलिस द्वारा अभियुक्त के आपराधिक इतिहास का सत्यापन किया जा रहा है तथा यह भी जांच की जा रही है कि बरामद स्मैक की आपूर्ति किस स्रोत से की गई और इसके नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। गिरफ्तारशुदा अभियुक्त को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। 

पंजीकृत अभियोग

  • मु0अ0सं0- 121/2026, धारा 8/21 एनडीपीएस एक्ट

बरामदगी विवरण

  •  20 ग्राम स्मैक (कीमत लगभाग 6,00,000 रू0/-)

नाम पता अभियुक्त

  • प्रमोद यादव (उम्र-55 वर्ष) पुत्र ब्रह्म सिंह यादव, निवासी- नजीबाबाद, बिजनौर उ0प्र0।
डीएम स्वाति एस. भदौरिया के निर्देश पर पेयजल व्यवस्था की समीक्षा, प्रभावित क्षेत्रों में जलापूर्ति सुधारने के निर्देश

पौड़ी : जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशों के क्रम में सभी तहसीलों में उपजिलाधिकारियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में कोटद्वार में उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में पेयजल समस्याओं के समाधान को लेकर सहायक अभियंताओं के साथ बैठक आयोजित की गयी।

उपजिलाधिकारी द्वारा क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षकों से जलापूर्ति की स्थलीय सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त की गयी, जिसमें कई स्थानों में पेयजल संबंधी समस्याएं सामने आईं। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार गाड़ीघाट स्थित गिंवई स्रोत पीडब्ल्यूडी कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति बाधित पाई गई। वहीं पनियाली, सिताबपुर, लालपुर तथा पदमपुर सुखरो में पानी का दबाव कम होने और केवल सुबह के समय सीमित जलापूर्ति होने की जानकारी मिली। इसके अतिरिक्त उमरावपुर एवं जशोधरपुर किशनपुर सहित कुछ अन्य क्षेत्रों में भी कई परिवार पेयजल संकट से प्रभावित पाए गए।

बैठक में सहायक अभियंताओं ने अवगत कराया कि गिंवई स्रोत में मोटर खराब होने के कारण पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिसे मरम्मत कर पुनः सुचारू कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि कुछ वार्डों में जलस्तर कम होने के कारण भूतल तक पानी पहुंच रहा है, लेकिन दबाव कम होने से प्रथम मंजिल तक जलापूर्ति नहीं हो पा रही है।

साथ ही उमरावपुर तथा जशोधरपुर में ट्यूबवेल निर्माण कार्य प्रगति पर है। वर्तमान में अधिकांश क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सामान्य रूप से संचालित की जा रही है, जबकि दूरस्थ घरों तक पानी न पहुंच पाने की स्थिति में पेयजल टैंकरों के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

उपजिलाधिकारी ने जल संस्थान के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल आपूर्ति में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

बैठक में सहायक अभियंता बृजमोहन रावत, देवकी नंदन, किरण कुमार, त्रिभुवन गंसाई एवं शूरवीर सिंह चौहान उपस्थित रहे।

जंगलों में भड़की आग की लपटें, फायर सर्विस पौड़ी ने आग पर पाया काबू

पौड़ी : बढ़ती गर्मी एवं शुष्क मौसम के चलते जनपद में जंगलों में आग लगने की घटनाओं की संभावनाओं को देखते हुए फायर सर्विस पौड़ी लगातार सतर्कता एवं मुस्तैदी के साथ कार्य कर रही है। वन संपदा, वन्यजीवों एवं आसपास के आबादी क्षेत्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फायर सर्विस एवं वन विभाग की टीमें निरंतर निगरानी बनाए हुए हैं तथा आगजनी की प्रत्येक सूचना पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

इसी क्रम में फायर स्टेशन पौड़ी को सूचना प्राप्त हुई कि मांडा खाल के पास व देवप्रयाग रोड स्थित खांडूसैंण के जंगलों में भीषण आग लगी हुई है, जो तेज़ी से आसपास के वन क्षेत्रों में फैल रही है। सूचना मिलते ही फायर सर्विस की टीम आवश्यक अग्निशमन उपकरणों एवं मोटर फायर इंजन के साथ तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई। 

घटनास्थल पर पहुंचकर फायर सर्विस कर्मियों द्वारा वन विभाग की टीम के साथ समन्वय स्थापित करते हुए युद्धस्तर पर राहत एवं अग्निशमन कार्य शुरू किया। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद टीमों ने मोटर फायर इंजन से पंपिंग कर होजरील एवं अन्य अग्निशमन उपकरणों की सहायता से लगातार प्रयास करते हुए आग को नियंत्रित किया तथा काफी मशक्कत के बाद पूर्ण रूप से बुझा दिया।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 को लेकर पौड़ी जनपद में होंगे विविध योग कार्यक्रम

पौड़ी : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में जनपद पौड़ी गढ़वाल में जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। योग को जन-जन तक पहुंचाने तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर योग शिविर, हरित योग कार्यक्रम, लाइव स्ट्रीमिंग एवं “रन फॉर योग” जैसे आयोजन किए जाएंगे।

जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ शैलेन्द्र पांडेय ने बताया कि जनपद मुख्यालय स्थित राजकीय कार्यालयों में 20 मई से 10 जून तक कार्मिकों को नमस्ते योग ऐप एवं योग ब्रेक ऐप के माध्यम से योगाभ्यास और योग के महत्व की जानकारी दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि इसके तहत यूजेवीएन लिमिटेड बैराज पार्क, ऋषिकेश में 25 मई से 05 जून तक 12 दिवसीय योग पार्क कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता को जोड़ते हुए हरित योग कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ताड़केश्वर मंदिर प्रांगण में 29 मई, ग्राम सिरासू विकासखंड यमकेश्वर में 03 जून तथा शारदा घाट श्रीनगर गढ़वाल में 05 जून को प्रातः 7 बजे से 8 बजे तक योग कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अतिरिक्त कंडोलिया पार्क पौड़ी में में 03 एवं 04 जून 2026 को प्रातः 6:30 बजे से 7:30 बजे तक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

आयुर्वेद अधिकारी ने बताया कि योग के प्रति युवाओं और आमजन में उत्साह बढ़ाने के उद्देश्य से 20 जून को “रन फॉर योग” कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह दौड़ एजेन्सी चौक से प्रारंभ होकर माल रोड एवं बस स्टेशन होते हुए पुनः एजेन्सी चौक पर समाप्त होगी। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य अवसर पर 21 जून को जनपद के प्रमुख स्थानों में सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें शहीद राइफलमैन जसवंत सिंह (महावीर चक्र) स्टेडियम रांसी पौड़ी, राजकीय इंटर कॉलेज कोटद्वार तथा वेद निकेतन ऋषिकेश प्रमुख रूप से शामिल हैं। 

जिला प्रशासन एवं आयुष विभाग ने जनपदवासियों से अधिक से अधिक संख्या में प्रतिभाग कर योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की है।

राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा : क्या 2027 से पहले कांग्रेस को मिलेगी बूस्टर डोज?
  • प्रदीप रावत ‘रवांल्टा’ 

उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय बाद कांग्रेस को ऐसा मौका मिला है, जिसे पार्टी केवल एक औपचारिक दौरे के रूप में नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीतिक शुरुआत के तौर पर देख रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रस्तावित दो दिवसीय उत्तराखंड दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब राज्य कांग्रेस लगातार संगठनात्मक कमजोरी, नेतृत्व संकट और कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता जैसे सवालों से जूझ रही है।

चार जून को अल्मोड़ा में जनसभा, पौड़ी में पूर्व सैनिक सम्मेलन और पांच जून को देहरादून में कांग्रेस नेताओं व संगठन के साथ बैठक—इन तीन कार्यक्रमों को यदि राजनीतिक नजरिए से देखा जाए, तो यह केवल एक सामान्य दौरा नहीं बल्कि कांग्रेस की “री-लॉन्चिंग एक्सरसाइज” भी माना जा सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है राहुल गांधी का यह दौरा?

उत्तराखंड में कांग्रेस पिछले कई वर्षों से भाजपा के मजबूत चुनावी और संगठनात्मक ढांचे के सामने संघर्ष करती दिखाई दी है। 2022 विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी माहौल की उम्मीदों के बावजूद पार्टी सत्ता में वापसी नहीं कर सकी। इसके बाद कई वरिष्ठ नेताओं की निष्क्रियता, गुटबाजी और संगठनात्मक ढीलापन लगातार चर्चा में रहा।

ऐसे में राहुल गांधी का सीधे मैदान में उतरना कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से बड़ा संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या केवल चुनाव हारना नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटना रहा है। राहुल गांधी का दौरा इस मनोबल को फिर से खड़ा करने का प्रयास माना जा रहा है।

अल्मोड़ा से संदेश: पहाड़ की राजनीति पर फोकस

राहुल गांधी की पहली बड़ी जनसभा अल्मोड़ा में प्रस्तावित है। यह केवल भौगोलिक चयन नहीं बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। कुमाऊं क्षेत्र में कांग्रेस परंपरागत रूप से मजबूत आधार रखने का दावा करती रही है, लेकिन पिछले चुनावों में भाजपा ने यहां भी अपनी पकड़ मजबूत की।

अल्मोड़ा से राहुल गांधी पलायन, बेरोजगारी, सैन्य भर्ती, शिक्षा और स्वास्थ्य संकट, और पहाड़ी जिलों में घटती आबादी जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश कर सकते हैं।कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा के“डबल इंजन”मॉडल के बावजूद पहाड़ के मूल मुद्दे आज भी जस के तस हैं।

पौड़ी का पूर्व सैनिक सम्मेलन: रणनीतिक राजनीति

उत्तराखंड को सैनिक बाहुल्य राज्य माना जाता है। बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और सैनिक परिवार राज्य की राजनीति को प्रभावित करते हैं। ऐसे में पौड़ी में पूर्व सैनिक सम्मेलन आयोजित करना कांग्रेस की एक बेहद रणनीतिक चाल मानी जा रही है।

  • अग्निपथ योजना।
  • सैन्य भर्ती में बदलाव।
  • युवाओं में रोजगार को लेकर असंतोष।

जैसे मुद्दों पर विपक्ष लगातार भाजपा को घेरने की कोशिश करता रहा है। राहुल गांधी पहले भी अग्निवीर योजना को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। कांग्रेस इस सम्मेलन के जरिए सैन्य परिवारों और युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पैठ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।

देहरादून बैठक का फोकस संगठन

राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम देहरादून में होने वाली संगठनात्मक बैठक मानी जा रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी, विधायकों, पूर्व विधायकों और आनुषंगिक संगठनों के साथ राहुल गांधी की बैठक कई संकेत देती है। बैठक में संगठन में जवाबदेही तय हो सकती है। निष्क्रिय नेताओं को संदेश दिया जा सकता है और 2027 की तैयारी का रोडमैप तैयार हो सकता है।

उत्तराखंड कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी से प्रभावित रही है। वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग शक्ति केंद्र अक्सर पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े करते रहे हैं। ऐसे में राहुल गांधी की मौजूदगी संगठन को एक मंच पर लाने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है।

कांग्रेस को कैसे मिल सकता है“बूस्टर डोज?

1. कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा

कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत यह रही है कि केंद्रीय नेतृत्व उत्तराखंड को पर्याप्त राजनीतिक महत्व नहीं देता। राहुल गांधी का सीधा दौरा इस धारणा को बदल सकता है।

2. भाजपा के खिलाफ नैरेटिव सेट करने का मौका

कांग्रेस बेरोजगारी, पलायन, पेपर लीक, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्वतीय क्षेत्रों की बदहाली जैसे मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी में दिख सकती है।

3. युवा वोट बैंक पर फोकस

राहुल गांधी की राजनीति पिछले कुछ वर्षों में युवाओं, बेरोजगारी और सामाजिक न्याय के मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है। उत्तराखंड में बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी और बेरोजगार युवा हैं, जिन तक पहुंच बनाने की कोशिश कांग्रेस कर सकती है।

4. 2024 लोकसभा हार के बाद रिकवरी प्रयास

लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की सभी सीटें भाजपा के खाते में गईं। ऐसे में कांग्रेस अब विधानसभा स्तर पर लंबी तैयारी शुरू करना चाहती है। राहुल गांधी का दौरा उसी प्रक्रिया की शुरुआती कड़ी माना जा रहा है।

5. पहाड़ बनाम मैदान की राजनीति

कांग्रेस लंबे समय बाद फिर“पर्वतीय अस्मिता”और “स्थानीय मुद्दों को केंद्र में लाने की कोशिश कर सकती है। भाजपा पर यह आरोप लगाया जा सकता है कि विकास का बड़ा हिस्सा केवल चुनिंदा शहरी क्षेत्रों तक सीमित रहा।

लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि कांग्रेस के लिए यह दौरा राजनीतिक ऊर्जा ला सकता है, लेकिन केवल भीड़ जुटा लेना चुनावी सफलता की गारंटी नहीं होगा।

कांग्रेस के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं

  • मजबूत संगठन का अभाव।
  • स्पष्ट मुख्यमंत्री चेहरा नहीं होना।
  • आंतरिक गुटबाजी।
  • बूथ स्तर पर कमजोर नेटवर्क।
  • भाजपा की बेहद आक्रामक चुनावी मशीनरी।

भाजपा की नजर भी इस दौरे पर

राजनीतिक तौर पर भाजपा भी राहुल गांधी के दौरे को हल्के में नहीं लेगी। भाजपा कोशिश करेगी कि कांग्रेस की आंतरिक कलह को मुद्दा बनाया जाए। राहुल गांधी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाएं, और केंद्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं को सामने रखकर जवाबी नैरेटिव तैयार किया जाए।

राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की जमीन तलाशने की कोशिश है।

यदि यह दौरा संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं में विश्वास जगाने और स्थानीय मुद्दों को प्रभावी राजनीतिक आंदोलन में बदलने में सफल होता है, तो यह कांग्रेस के लिए वास्तव में“बूस्टर डोज”साबित हो सकता है।

लेकिन यदि दौरा केवल भाषणों और भीड़ तक सीमित रह गया, तो उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा बदलाव लाना कांग्रेस के लिए फिर मुश्किल हो जाएगा।

मुख्यमंत्री धामी ने अल्मोड़ा को दी 138 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात
अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने मंगलवार को अल्मोड़ा पहुंचकर जनपद को करीब 138 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की सौगात दी। उन्होंने 17 योजनाओं का लोकार्पण और 9 योजनाओं का शिलान्यास किया।

अल्मोड़ा स्थित Soban Singh Jeena University के नवीन प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई, नगर विकास और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा व्यवस्था और पेयजल योजनाओं को तेजी से मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण जनपद है। यहां की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। इन योजनाओं से क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

112 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण

मुख्यमंत्री ने करीब 112.11 करोड़ रुपये की 17 योजनाओं का लोकार्पण किया। इनमें रानीखेत तहसील भवन निर्माण, महिला पॉलीटेक्निक अल्मोड़ा की बाउंड्रीवाल, बहुस्तरीय पार्किंग निर्माण, पेयजल योजनाएं, विभिन्न मोटर मार्गों का सुधारीकरण, बाढ़ सुरक्षा कार्य और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लमगड़ा में ट्रांजिट हॉस्टल निर्माण जैसी योजनाएं शामिल हैं।

इसके अलावा Soban Singh Jeena University के प्रशासनिक भवन और कुलपति आवास निर्माण कार्य का भी लोकार्पण किया गया, जिसकी लागत करीब 25 करोड़ रुपये है।

25 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास

मुख्यमंत्री ने लगभग 25.97 करोड़ रुपये की 9 योजनाओं का शिलान्यास भी किया। इनमें विभिन्न मोटर मार्गों के डामरीकरण, बैराज निर्माण, मंदिर सौंदर्यीकरण और विद्यालयों में कक्षा-कक्ष निर्माण कार्य शामिल हैं।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री Ajay Tamta, जिला पंचायत अध्यक्ष हेमा गैड़ा, विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, कुलपति सतपाल सिंह बिष्ट, जिलाधिकारी अंशुल सिंह और एसएसपी चंद्रशेखर आर घोड़के सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

उत्तरकाशी में आवारा कुत्तों का आतंक, एक दिन में 16 लोगों पर हमला

उत्तरकाशी। जिला मुख्यालय क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर के विभिन्न इलाकों में एक ही दिन में कुत्तों ने 16 लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। सबसे गंभीर मामला तांबाखानी क्षेत्र से सामने आया, जहां एक चार वर्षीय मासूम पर घर के आंगन में घुसकर कुत्ते ने हमला कर दिया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी रोष है।

जानकारी के अनुसार, तांबाखानी निवासी गौरव का चार वर्षीय बेटा दिव्यांश घर के आंगन में खेल रहा था। इसी दौरान मोहल्ले में घूमने वाला एक आवारा कुत्ता अचानक घर में घुस आया और बच्चे की छाती व उंगली पर हमला कर दिया। बच्चे को गंभीर चोटें आई हैं। परिजनों ने किसी तरह बच्चे को कुत्ते से छुड़ाया और तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है।

वहीं केदारघाट क्षेत्र में भी एक व्यक्ति पर कुत्ते ने हमला कर दिया। स्थानीय निवासी हरीश कुमार ने बताया कि वह सड़क किनारे खड़े थे, तभी अचानक एक कुत्ते ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने डंडे की मदद से खुद को बचाया, लेकिन तब तक वह घायल हो चुके थे।

इसके अलावा जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों में 14 अन्य लोग भी आवारा कुत्तों के हमले में घायल हुए हैं। जिला अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पिछले दो महीनों से प्रतिदिन औसतन आठ से दस लोग डॉग बाइट के मामलों में अस्पताल पहुंच रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका और पशुपालन विभाग की ओर से आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। लगातार बढ़ते हमलों के कारण लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।

नगर पालिका की प्रभारी ईओ कुसुम राणा ने बताया कि कुत्तों को पकड़ने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हो गए हैं। एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर के निर्माण के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया चल रही है। तब तक पशुपालन विभाग के सहयोग से आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा।

प्रेरणा कोचिंग सेंटर में स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित, 48 विद्यार्थियों ने लिया प्रतिभाग

पौड़ी : जनपद पौड़ी गढ़वाल में संचालित प्रेरणा कोचिंग सेंटर में आज स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें कुल 48 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। जिला प्रशासन द्वारा संचालित कोचिंग सेंटर द्वारा आयोजित परीक्षा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी ने बताया कि स्क्रीनिंग परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता का आकलन कर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना रहा। परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों में अनुशासन एवं सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का माहौल देखने को मिला।

उन्होंने बताया कि इस प्रकार की परीक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों की तैयारी का मूल्यांकन किया जाता है, जिससे उन्हें अपनी कमजोरियों को पहचानने और भविष्य की तैयारी को और बेहतर बनाने में सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि जनपद के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति प्रेरित करने के उद्देश्य से नियमित रूप से शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।