हल्द्वानी पहुंचे सीएम धामी, आम जनता की सुनी समस्याएं

हल्द्वानी। जनपद नैनीताल के भ्रमण पर पहुंचे मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को हल्द्वानी-काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस में आम जनता एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भेंट कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों को मौके पर ही समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं का समयबद्ध और संतुष्टिपरक समाधान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए जनता को राहत पहुंचाने के लिए अधिकारी संवेदनशीलता से कार्य करें।

इस दौरान पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण सड़कों की स्थिति, विद्युत आपूर्ति एवं सिंचाई से जुड़ी शिकायतें प्रमुखता से सामने आईं। मुख्यमंत्री ने पेयजल निगम को ग्रीष्मकाल के दृष्टिगत आवश्यकतानुसार टैंकरों की व्यवस्था करने तथा खराब नलकूपों एवं हैंडपंपों, को शीघ्र दुरुस्त करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग को क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों को प्राथमिकता पर गड्ढामुक्त करने और विद्युत विभाग को निर्धारित रोस्टर के अनुसार निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर संबंधित की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रामसिंह कैड़ा, विधायक सरिता आर्या, दायित्वधारी अनिल कपूर डब्बू, दिनेश आर्या, जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित अन्य विभागीय अधिकारी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

सेंट्रल कमांड अंतर-क्लस्टर अंडर-17 दो दिवसीय बालिका फुटबॉल प्रतियोगिता 2026 का हुआ सफल समापन

लैंसडाउन : आर्मी पब्लिक स्कूल लैंसडाउन में आयोजित सेंट्रल कमांड अंतर-क्लस्टर अंडर-17 बालिका फुटबॉल प्रतियोगिता 2026 का दो दिवसीय आयोजन उत्साह, अनुशासन एवं खेल भावना के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रतियोगिता में आर्मी पब्लिक स्कूल बीरपुर, आर्मी पब्लिक स्कूल नं. 1 रुड़की तथा आर्मी पब्लिक स्कूल लैंसडाउन की टीमों ने प्रतिभाग कर उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि कर्नल कुलदीप सिरोही, सेना मेडल, डिप्टी कमांडेंट, गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर उपस्थित रहे।

रविवार का मुकाबला एपीएस लैंसडाउन एवं एपीएस बीरपुर के मध्य खेला गया, जिसमें एपीएस बीरपुर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एपीएस लैंसडाउन को 5-0 से पराजित किया।

समापन समारोह में विजेता एवं उपविजेता टीमों को ट्रॉफी, पदक एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में ओवरऑल विजेता का खिताब आर्मी पब्लिक स्कूल नं. 1 रुड़की ने, जबकि उपविजेता का खिताब एपीएस बीरपुर ने अपने नाम किया।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने छात्राओं के उत्साह, समर्पण एवं खेल भावना की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ बालिकाओं को आगे बढ़ने तथा अपनी प्रतिभा को निखारने का सशक्त मंच प्रदान करती हैं।

अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य विजेंद्र दत्त सुंद्रियाल ने सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों, अधिकारियों एवं विद्यालय प्रबंधन का सफल आयोजन हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया। यह प्रतियोगिता नारी शक्ति, अनुशासन एवं खेल उत्कृष्टता का प्रेरणादायी उदाहरण बनी।

बीकेटीसी वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल ने संभाला कार्यभार

सीटीआरएफए के उपनिदेशक सहित एनसीसी, होमगार्ड वित्त अधिकारी का दायित्व

• ऋषिकेश ट्रांजिट केंप कार्यालय में बीकेटीसी अधिकारियों-कर्मचरियों ने किया स्वागत

ऋषिकेश/ देहरादून। 25 मई सेंटर फार ट्रेनिंग एंड रिसर्च इन फाइनेंशियल एडमिस्ट्रेशन ( सीटीआरएफए) उपनिदेशक हेम कांडपाल ने सोमवार को ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कार्यालय में श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के नये वित्त नियंत्रक का अतिरिक्त कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इस अवसर पर समिति के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी सहित अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने वित्त नियंत्रक का स्वागत किया। इसके पश्चात वित्त नियंत्रक ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी से भी भेंट की।

कार्यभार ग्रहण करने के बाद वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल ने कहा कि वह समिति की वित्तीय व्यवस्थाओं को पारदर्शी एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित करने का कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं एवं मंदिर समिति की योजनाओं के सफल संचालन में वित्तीय अनुशासन प्राथमिकता रहेगी ।

इस दौरान मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी ने नये वित्त नियंत्रक का स्वागत करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं तथा बीकेटीसी कार्यालय पत्रावलियों के बावत जानकारी सांझा की।

साथ ही उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी वित्त नियंत्रक का अभिनंदन किया तथा उनके सफल कार्यकाल की कामना की इस अवसर पर
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन‌ नैथानी सहित ओएसडी राकेश सेमवाल, प्रशासनिक अधिकारी रमेश नेगी,  बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़, कार्यालय प्रभारी संजय भट्ट, आशुतोष शुक्ला,अनीता बर्त्वाल, दीपेंद्र रावत, बिनोद नौटियाल आदि मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि हेम कांडपाल उत्तराखंड वित्त सेवा के वरिष्ठ अधिकारी है तथा सीटीआरएफए देहरादून के उपनिदेशक है।उनके पास राष्ट्रीय केडेट कोर ( एनसीसी) सहित होम गार्ड के वित्त अधिकारी का भी प्रभार है।

सात महीनों के कार्यकाल में विकास कार्यों को गति देने वाली जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे के तबादले को लेकर जनमानस में चर्चा तेज

बागेश्वर : जनपद बागेश्वर में हालिया प्रशासनिक तबादलों ने एक बार फिर उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर बहस छेड़ दी है। खासकर जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे के तबादले को लेकर लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या ईमानदारी और जनहित में काम करने वाले अधिकारियों के लिए अब स्वतंत्र रूप से काम करना कठिन होता जा रहा है।

बागेश्वर में जिलाधिकारी के रूप में अपने लगभग सात महीने के कार्यकाल के दौरान आकांक्षा कोंडे ने कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों को गति दी। प्रशासनिक सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार उन्होंने बंद पड़ी आर्थिक इकाइयों को पुनर्जीवित करने, महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने, आपदा पुनर्निर्माण योजनाओं को आगे बढ़ाने और कृषि आधारित आजीविका को प्रोत्साहित करने की दिशा में सक्रिय पहल की।

जनपद में अल्मोड़ा मैग्नेसाइट फैक्ट्री और कौसानी चाय फैक्ट्री जैसी बंद इकाइयों को दोबारा संचालित कराने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाएं बढ़ीं। वहीं खड़िया खनन पर लगी रोक हटने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलने की बात कही जा रही है।

कपकोट क्षेत्र में ‘कुटकी’ की खेती को बढ़ावा देकर ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया गया। इसके अलावा आपदा पुनर्निर्माण से जुड़ी करोड़ों रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति दिलाने तथा लंबे समय से लंबित विज्ञान संकाय भवन को विद्यार्थियों के लिए समर्पित करने जैसे कार्य भी उनके कार्यकाल की उपलब्धियों में गिने जा रहे हैं।

हालांकि उनके तबादले के बाद राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक स्थिरता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई सामाजिक और स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि कोई अधिकारी अनुशासन, पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता देता है तथा राजनीतिक दबाव से अलग रहकर कार्य करता है, तो क्या उसे व्यवस्था में लंबे समय तक काम करने का अवसर मिल पाता है?

विशेष रूप से एक महिला अधिकारी के रूप में आकांक्षा कोंडे की कार्यशैली को लेकर भी चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि उन्होंने संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ प्रशासन चलाने का प्रयास किया, लेकिन लगातार तबादलों की संस्कृति विकास कार्यों की निरंतरता को प्रभावित करती है।

विश्लेषकों का मानना है कि बार-बार होने वाले प्रशासनिक बदलावों से योजनाओं की गति प्रभावित होती है। अधिकारी जब तक क्षेत्र की समस्याओं और जरूरतों को पूरी तरह समझ पाते हैं, तब तक तबादले की स्थिति बन जाती है। इसका सीधा असर विकास कार्यों और आम जनता पर पड़ता है।

धामी, योगी और हिमंता को अमेरिका में निशाना बनाने की कोशिश; भारत में सनातन मजबूत क्या हुआ… विदेशी एजेंडों की नींद उड़ गई!
  • हिंदुत्व की सबसे मजबूत आवाज़ों पर विदेशी मंच से हमला
  • सनातन की आवाज़ उठी तो विदेशी मंचों पर शुरू हुआ रोना!
  • जो अपने धर्म, संस्कृति और सभ्यता के लिए खड़ा हुआ… वही दुनिया भर के निशाने पर आ गया!

देश में अपनी संस्कृति, अपने धर्म और अपनी सभ्यता की बात क्या होने लगी… कुछ लोगों को इसकी जलन सात समंदर पार तक होने लगी।

अमेरिका की तथाकथित धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की सुनवाई में भारत के तीन ऐसे मुख्यमंत्रियों को घेरने की कोशिश की गई, जो लगातार हिंदू संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रहित की बात खुलकर करते रहे हैं।

USCIRF की सुनवाई में एक वामपंथी-लिबरल एक्टिविस्ट रक़ीब अहमद नाइक द्वारा हिंदुत्व विचारधारा, राष्ट्रवादी संगठनों और भारत की लोकतांत्रिक सरकारों के खिलाफ बयानबाज़ी करते हुए पुष्कर सिंह धामी, योगी आदित्यनाथ और हिमंता बिस्वा सरमा पर “प्रतिबंध” लगाने की मांग तक कर दी गई। इसके साथ ही RSS, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों को भी निशाना बनाया गया।

अब सवाल उठ रहा है कि आखिर धर्म और संस्कृति की रक्षा की आवाज़ कुछ लोगों को इतनी क्यों चुभ रही है?

उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता, अवैध कब्जों और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर सख्त रुख अपनाया। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने माफिया और कट्टरपंथ के खिलाफ कार्रवाई कर कानून का डर पैदा किया। वहीं असम में हिमंता बिस्वा सरमा लगातार घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन जैसे मुद्दों को उठाते रहे हैं।

अब यही नेता विदेशी मंचों पर निशाने पर हैं। सवाल यह है कि आखिर क्यों?

क्या अपने ही देश में अपनी जमीन बचाने की बात करना गुनाह है?
क्या अपनी संस्कृति, अपने मंदिरों और अपनी पहचान की रक्षा की आवाज़ उठाना गलत है?

या फिर कुछ लोगों को दिक्कत सिर्फ इस बात से है कि अब हिंदू समाज खुलकर अपनी पहचान और अपने अधिकारों की बात करने लगा है?

विडंबना देखिए… जो लोग भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास नहीं जीत पाते, वही विदेशी मंचों पर जाकर देश की छवि खराब करने में जुट जाते हैं। दुनिया के सामने ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जाती है मानो यहां अपनी संस्कृति और धर्म की रक्षा करना कोई अपराध हो।

देश की जनता अब यह समझ रही है कि निशाना सिर्फ तीन मुख्यमंत्रियों पर नहीं है। निशाना उस सोच पर है जो भारत को उसकी जड़ों, उसकी संस्कृति और उसकी सभ्यता से जोड़कर देखती है।

क्योंकि सच यही है — जिस दिन भारत अपनी संस्कृति और सनातन परंपरा की रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़ा हो जाता है, उसी दिन सबसे ज्यादा बेचैनी उन लोगों को होती है जिन्हें भारत की जड़ों से हमेशा परेशानी रही है।

देहरादून को मिला नया नेतृत्व : IAS डॉ. आशीष चौहान ने संभाली जिलाधिकारी की कमान, जनसेवा और सुशासन के संकल्प के साथ बताई प्राथमिकताएं

देहरादून : देहरादून जनपद में नए जिलाधिकारी के रूप में डॉ. आशीष चौहान ने कार्यभार संभाल लिया है, जबकि पूर्व जिलाधिकारी सविन बंसल का स्थानांतरण सचिवालय में किया गया है। सरकार द्वारा जारी तबादला सूची के बाद जहां सविन बंसल को अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आमजन ने भावुक विदाई दी, वहीं अब जनपद की कमान ऐसे प्रशासनिक अधिकारी के हाथों में आई है, जिनकी पहचान भी जनकेंद्रित, संवेदनशील और नवाचार आधारित कार्यशैली के रूप में रही है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने सितंबर 2024 से देहरादून में अपने कार्यकाल के दौरान प्रशासन को आमजन के और करीब लाने का प्रयास किया। उनके कार्यकाल में कई ऐसी पहलें शुरू हुईं, जिन्होंने सीधे समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को राहत और नई दिशा देने का कार्य किया।

बालिकाओं की शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘नंदा-सुनंदा’ पहल विशेष रूप से चर्चा में रही। इसके साथ ही भिक्षावृत्ति और कूड़ा बीनने में लगे बच्चों के पुनर्वास के लिए भी जिला प्रशासन ने अभियान चलाया, जिसके तहत ऐसे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने, शिक्षा उपलब्ध कराने और सुरक्षित वातावरण देने की दिशा में कार्य किया गया। इसके अतिरिक्त जनसुनवाई, त्वरित शिकायत निस्तारण, जरूरतमंदों तक योजनाओं की पहुंच, संवेदनशील प्रशासनिक हस्तक्षेप और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पहलों के कारण सविन बंसल को एक “पीपुल्स एडमिनिस्ट्रेटर” के रूप में पहचान मिली। यही कारण रहा कि उनके स्थानांतरण की खबर के बाद आमजन ने भावुकता के साथ उन्हें विदाई दी।

अब देहरादून को नए जिलाधिकारी के रूप में डॉ. आशीष चौहान का नेतृत्व मिला है, जिनकी कार्यशैली भी जनता से सीधे संवाद, तकनीक आधारित समाधान और जनहितकारी नवाचारों के लिए जानी जाती है। डॉ आशीष चौहान, भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2012 बैच के अधिकारी है।

नव नियुक्त जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सोमवार को कोषागार पहुंचकर विधिवत रूप से अपना कार्यभार ग्रहण किया। कार्यभार संभालने से पूर्व उन्होंने कोषागार का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कोषागार में सभी रिकार्डो को व्यवस्थित एवं सुरक्षित संरक्षण करने और डिजिटल माध्यम से पेंशनरों का सत्यापन कराने पर जोर दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। साथ ही चारधाम यात्रा प्रबंधन को सशक्त बनाना, आपदा प्रबंधन के कार्यो को समयबद्व पूर्ण करना एवं जनपद के विकास योजनाओं का त्वरित गति से पूर्ण कराना करना और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ सुगमता से जनता तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता में शामिल है। कार्यभार ग्रहण करने के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नवागत जिलाधिकारी का स्वागत किया।

उल्लेखनीय है कि आईएएस डा. आशीष चौहान इससे पूर्व पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और पौड़ी जैसे चुनौतीपूर्ण जनपदों में जिलाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके कार्यकाल में तकनीक आधारित जनहितकारी पहल, स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार, सड़क सुरक्षा, जन संवाद और पर्यटन विकास जैसे कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य हुए, जिन्हें प्रदेश स्तर पर सराहा गया।

पौड़ी जनपद में उनके नेतृत्व में शुरू किया गया ‘सेफ सफर ऐप’ सड़क सुरक्षा की दिशा में एक अभिनव पहल के रूप में सामने आया। विवाह समारोहों में किराये पर चलने वाले वाहनों की निगरानी और पंजीकरण के लिए विकसित इस डिजिटल प्लेटफॉर्म ने ओवरलोडिंग, नशे में वाहन संचालन और दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया।

स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में डॉ. चौहान की पहल ‘काव्या ऐप’ विशेष रूप से चर्चा में रही। वर्ष 2023 में शुरू किए गए इस ऐप के माध्यम से हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान, पंजीकरण और लगातार निगरानी सुनिश्चित की गई। पहाड़ी क्षेत्रों में समय पर सुरक्षित प्रसव की चुनौती को देखते हुए यह पहल मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में बेहद प्रभावी साबित हुई।

पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में भी उनके नेतृत्व में कई कार्य हुए। पौड़ी में हिमालय दर्शन स्थल के समीप विकसित हो रहा ‘त्रिशूल पार्क’ इसी सोच का परिणाम है। धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाए जा रहे इस पार्क में 56 फीट ऊंचा भव्य त्रिशूल स्थापित किया गया है, जो आने वाले समय में प्रमुख आकर्षण केंद्र बनने जा रहा है।

डॉ. आशीष चौहान की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उन्होंने हर योजना में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जनभागीदारी को प्राथमिकता दी। तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता के समन्वय के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. चौहान से अब देहरादून में भी जनहितकारी और नवाचार आधारित प्रशासनिक कार्यशैली की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं।

आरटीआई से बड़ा खुलासा- “केदारनाथ-बदरीनाथ” के चढ़ावे से वीआईपी मेहमाननवाजी.? अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने बीकेटीसी में वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई

देहरादून। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने में लगे हुए सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आज नया खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीकेटीसी ने विगत यात्राकाल में तमाम अनाधिकृत व्यक्तियों के आवास, भोजन और हेलीकॉप्टर टिकट पर लाखों रुपए खर्च कर दिए।

सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि बीकेटीसी प्रबंधन श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के धन को अपने राजनीतिक प्रबंधन में उड़ाने में लगा हुआ है। भाजपा व आरएसएस नेताओं को खुश करने के लिए अनाधिकृत तरीके से उन्हें अतिथि दिखा कर आवास-भोजन आदि की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने बताया कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की सुपुत्री नेहा जोशी विगत वर्ष केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के मौके पर वहां पहुंची थी। नेहा जोशी के 30 अप्रैल व 01 मई, 2025 का दो दिन के आवास- भोजन पर बीकेटीसी ने 60 हजार रुपए खर्च कर दिए।

केदारनाथ की विधायक आशा नौटियाल के 37,500, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई पंकज मोदी का 22,000 रुपए, आरएसएस नेता प्रकाश व निरंजन का 20,000 रुपए, रुद्रप्रयाग के भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट एवं अन्य कार्यकर्ताओं के 24,000 रुपए, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निजी सहायक अजय श्रीवास्तव के 23,000 रुपए के आवास का बिल मंदिर समिति द्वारा भरा गया।

अधिवक्ता नेगी ने बताया कि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, बीकेटीसी के अध्यक्ष व मुख्य कार्याधिकारी के अतिथि दिखाकर कई अन्य लोगों के आवास-भोजन पर भी लाखों रूपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने बताया कि बीकेटीसी ने गत वर्ष यात्राकाल के दौरान हेलीकॉप्टर टिकटों के भुगतान का जो विवरण दिया है, वो भी हैरान करने वाला है। बीकेटीसी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के अतिथियों के हेली टिकटों का भुगतान भी मंदिर कोष से किया गया। हेली किराए में भी लाखों रुपये खर्च किए गए।

सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने प्रदेश सरकार से बीकेटीसी में व्याप्त भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच की मांग की और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ व केदारनाथ धाम करोड़ों-करोड़ों सनातनियों की आस्था व श्रद्धा के केंद्र हैं। इन धामों में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

गौरतलब है कि अधिवक्ता नेगी सूचना अधिकार के माध्यम से लगातार बीकेटीसी में व्याप्त घपले-घोटाले उजागर करने में लगे हुए हैं। विगत दिनों उन्होंने बीकेटीसी के एक उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण द्वारा अपनी पत्नी को अपने साथ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दिखा कर बारह हजार रूपये और रुद्रप्रयाग में अपने घर पर कार्यालय दिखा कर पच्चीस हजार रूपये प्रतिमाह भुगतान लेने का मामला उजागर किया गया था। इसके अलावा मंदिर कोष से ग्यारह लाख रूपये केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों को बांटने का खुलासा भी किया था।

 

मानकों के विपरित संचालित 103 होमस्टे पर जिला प्रशासन का बड़ा एक्शन, नियम उल्लंघन पर पंजीकरण निरस्त, पर्यटन वेबसाइट से विलोपन प्रक्रिया शुरू
  • मानकों के विपरित संचालित 103 होमस्टे के जिला प्रशासन ने किए पंजीकरण निरस्त; पर्यटन वेबसाइट से विलोपन प्रक्रिया शुरू
  • जिला प्रशासन का ऑपरेशन सफाई; प्रथम चरण में 17 व द्वितीय चरण में 79 व तृतीय चरण में 7 अवैध होमस्टे का पंजीकरण निरस्त; एक्शन निरंतर जारी  
  • लीज पर चल रहे होटलरूपी होमस्टे पर  प्रशासन का शिंकंजा; जिला प्रशासन की 05 मजिस्ट्रेट टीमों के 153 निरीक्षण; मानक विपरित मिले 103 होमस्टे के पंजीकरण निरस्त 
  • होटल रूप में शहरी धनाडय अमीरों के होमस्टे पर जिला प्रशासन का प्रहार जारी  103 के पंजीकरण निरस्त;  
  • होमस्टे में रात भर नियम विरुद्ध बार संचालन व लाउड डीेजे;  गैर कानूनी गतिविधि के अड्डे बन रहे होमस्टे 
  • पंजीकरण होमस्टे के चल रहे होटल; बिना अग्निशमन  उपकरण व फूड लाईसेंस के संचालन पर कार्रवाई
  • कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहे उपद्रवी प्रवृत्ति के लोग; होमस्टे होटल में ठहर शहर में नशे की हालत में हुड़दंग, ओवर स्पीड, पिस्टल तमचों से फायरिंग करने के आ रहे थे मामले
देहरादून : जनपद में कानून व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने तथा आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी  के निर्देशानुसार होमस्टे संचालन की गहन जांच कराई जा रही है। जांच में मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर जिला प्रशासन द्वारा बड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक 103 होमस्टे का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। जिसमें प्रथम चरण में 17 तथा द्वितीय चरण में 79 तथा तृतीय चरण में 7  होमस्टे के पंजीकरण निरस्त कर दिए गए हैं। संबंधित होमस्टे को विभागीय वेबसाइट से भी विलोपित करने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी है। 
जिले में होटल रूप में शहरी धनाडय अमीरों के होमस्टे पर  डीएम ने  कार्रवाई का  डंडा चला दिया है। इसी क्रम में जिला प्रशासन की मजिस्ट्रेट टीमों ने अब तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 153 निरीक्षण करते हुए मानक विपरित संचालित मिले 103 होमस्टे का पंजीकरण निरस्त करते हुए पर्यटन वेबसाइट से विलोपित की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला प्रशासन ने ऑपरेशन सफाई शुरू करते हुए प्रथम चरण में 17 तथा द्वितीय चरण में 79, तृतीय चरण में  7 अवैध होमस्टे का पंजीकरण निरस्त कर दिया है तथा आगे भी कार्रवाई गतिमान रहेगी। विगत कई माह से शहर में बढती आपराधिक घटना नशे एवं ओवर स्पीड में वाहन चलाना अदि घटनाएं बढी है। जिसका एक बडे़ कारण में से एक  होमस्टे में रात भर नियम विस्द्ध बार संचालन आदि निकल कर सामने आए है, जहां लाउड डीेजे नशे गैर कानूनी गतिविधि के अड्डे बन रहे होमस्टे में उपद्रवी प्रवृत्ति के व्यक्तियों के ठहरने से आमजन की जान का खतरा बना हुआ है। इसी के मद्देनजर  जिला प्रशासन ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए होमस्टे का सत्यापन एवं निरीक्षण किया जा रहा है।  होमस्टे होटल में निर्धारित प्रक्रिया पालन किए बिना पर्यटक एवं उपद्रवी प्रवृत्ति के लोग ठहराए जा रहे है। होमस्टे भी लीज पर संचालित हो रहे है जो जिले की कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहे है। उपद्रवी प्रवृत्ति के व्यक्तियों द्वारा शहर में हुड़दंग मचाने तथा नशे की हालत में ओवर स्पीड, पिस्टल तमचों से फायरिंग की घटनाएं भी सामने आ रही है। 
होमस्टे योजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों के प्रचार-प्रसार तथा स्थानीय निवासियों की आय में वृद्धि करना है, किंतु निरीक्षण के दौरान कई होमस्टे का उपयोग होटल अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठान की भांति किया जाना पाया गया, जिससे अव्यवस्था एवं कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।
जिलाधिकारी  सविन बंसल के निर्देशानुसार सहसपुर एवं रायपुर विकासखंड के नगरीय क्षेत्रों में पंजीकृत होमस्टे की जांच हेतु क्षेत्रवार समितियों का गठन किया गया। समितियों द्वारा निरीक्षण उपरांत 103  होमस्टे ऐसे पाए गए जो उत्तराखण्ड गृह आवास (होमस्टे) नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे थे। इन सभी के पंजीकरण निरस्त करने की संस्तुति की गई, जिसे स्वीकार करते हुए प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई।
निरीक्षण के दौरान कई होमस्टे में रसोई की व्यवस्था नहीं पाई गई। अग्निशमन उपकरण अनुपलब्ध या उनकी वैधता समाप्त पाई गई। होमस्टे का उपयोग बारात घर एवं व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। कई स्थानों पर स्वामी का निवास नहीं पाया गया तथा इकाइयों को लीज/किराये पर संचालित किया जा रहा था। निर्धारित क्षमता से अधिक कमरों का संचालन किया जा रहा था। विगत निरीक्षण में विदेशी नागरिकों के ठहराव की सूचना (सी-फॉर्म) उपलब्ध नहीं कराने सम्बन्धी घटनाएं प्रकाश में आई थी। कुछ होमस्टे पंजीकृत होने के बावजूद संचालित नहीं पाए गए।
श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में बिना निशान वाली थायरॉयड सर्जरी की सुविधा उपलब्ध
  • विश्व थायरॉयड दिवस : अब बिना निशान थायरॉयड सर्जरी

देहरादून : 25 मई को विश्व थायरॉयड दिवस मनाया जाता है। आजकल थायरॉयड संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, विशेषकर महिलाओं और युवा वर्ग में। कई मरीजों को गले में गांठ, आवाज में बदलाव, निगलने में कठिनाई या थायरॉयड कैंसर जैसी समस्याओं के कारण सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।

डॉ. पंकज गर्ग, विभागाध्यक्ष, कैंसर विभाग, श्री महंत इन्दिरेश हॉस्पिटल ने बताया कि पहले थायरॉयड ऑपरेशन के बाद गर्दन पर बड़ा निशान रह जाता था, लेकिन अब आधुनिक तकनीकों की मदद से “स्कारलेस थायरॉयडेक्टॉमी” या “मिनिमली इनवेसिव थायरॉयड सर्जरी” संभव हो गई है। इस तकनीक में गले पर चीरा लगाए बिना एंडोस्कोपिक विधि से थायरॉयड की गांठ निकाली जाती है, जिससे गर्दन पर कोई निशान नहीं आता।

डॉ. पल्लवी कौल, हेड-नेक ऑन्को सर्जन, ने बताया कि श्री महंत इन्दिरेश हॉस्पिटल में “बिना निशान वाली थायरॉयड सर्जरी” की सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध है और इस तकनीक से कई सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। चयनित मरीजों में इसके उत्कृष्ट परिणाम देखने को मिले हैं। थायरॉयड की गांठ, शुरुआती थायरॉयड कैंसर तथा कुछ अन्य थायरॉयड रोगों में यह तकनीक सुरक्षित एवं प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है।

इस सर्जरी के प्रमुख लाभों में कम दर्द, कम रक्तस्राव, जल्दी रिकवरी, कम अस्पताल में भर्ती अवधि तथा मरीज का शीघ्र सामान्य जीवन में लौट पाना शामिल है। विशेषज्ञों ने बताया कि थायरॉयड रोगों के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। गले में गांठ, सूजन, आवाज में बदलाव, निगलने में कठिनाई या लंबे समय तक रहने वाली थायरॉयड समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और विशेषज्ञ सलाह से अधिकांश रोगों का सफल उपचार संभव है।

श्री महंत इन्दिरेश हॉस्पिटल के चेयरमैन श्रीमहंत देवेंद्र दास जी ने कहा कि अस्पताल में मरीजों को आधुनिक, सुरक्षित और उन्नत सर्जिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को 25 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी पद्मभूषण से सम्मानित
  • कोश्यारी प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, पत्रकार और राष्ट्रवादी नेता के रूप में जाने जाते हैं
  • 1966 में कोश्यारी ने उत्तराखंड के सीमावर्ती जिले पिथौरागढ़ में ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ की स्थापना की, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा के अवसरों को मजबूत किया गया
  •  वर्ष 2008 में कोश्यारी राज्य सभा के लिए चुने गए और 2014 में वह नैनीताल-ऊधम सिंह नगर निर्वाचन क्षेत्र से लोक सभा के लिए चुने गए
  • 25 मई को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण से सम्मानित किया जाएगा।

देहरादून/नई दिल्ली : भगत सिंह कोश्यारी, जिन्हें उत्तराखंड राज्य में ‘भगत दा’ के नाम से जाना जाता है, एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, पत्रकार और समर्पित राष्ट्रवादी नेता हैं, जिन्होंने अपना जीवन जन सेवा और समाज के गरीब और पिछडे वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया है। वह आरएसएस के एक निष्‍ठावान स्वयंसेवक हैं और अपनी सादगी, अनुशासन और सीखने के प्रति गहरे प्रेम के लिए जाने जाते हैं।

17 जून, 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के पहाड़ी इलाके के सुदूर गांव पलानधुरा में जन्मे कोश्यारी ने अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद दृढ़ संकल्प के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त की और 1964 में आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री पूरी की। उन्होंने 1964-1965 के दौरान राजा का रामपुर (एटा, उत्तर प्रदेश) में व्याख्याता के रूप में अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। हालांकि, शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दृष्टि से प्रेरित होकर, उन्होंने 1965 के बाद से स्‍वयं को पूरी तरह से शैक्षणिक और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

कोश्यारी ने सरस्वती शिशु मंदिर, कासगंज (उत्तर प्रदेश) में पढ़ाना शुरू किया, जहां उन्होंने छोटे बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय मूल्य प्रदान करने का काम किया। वर्ष 1966 में, उन्होंने उत्तराखंड के एक सीमावर्ती जिले पिथौरागढ़ में ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ की स्थापना की, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा के अवसरों को मजबूत किया गया। उन्होंने पिथौरागढ़ में विवेकानंद इंटर कॉलेज की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सरस्वती विहार, नैनीताल से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने कई वर्षों तक आरएसएस के विभाग कार्यवाह के रूप में कार्य किया और बाद में उत्तरांचल उत्थान परिषद के सचिव बने, जो दशकों तक उत्तराखंड में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के विकास के लिए समर्पित संगठन है। वर्ष 1979 से 1990 तक, वह कुमाऊं विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य थे, जिन्होंने शैक्षिक नीति और संस्थागत विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने जागरूकता और सामाजिक चेतना को बढ़ावा देने के लिए पिथौरागढ़ से हिंदी साप्ताहिक “पर्वत पीयूष” के प्रकाशन की भी शुरुआत की। राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान, उन्हें आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम (मीसा) के तहत गिरफ्तार किया गया था, जो सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।

वर्ष 1997 में कोश्यारी को उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए नामित किया गया था। नवंबर 2000 में उत्तराखंड के गठन के बाद, वह राज्य के पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने और बाद में थोड़े समय के लिए उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में भी काम किया। वर्ष 2008 में, वह राज्य सभा के लिए चुने गए और 2014 में, वह नैनीताल-ऊधम सिंह नगर निर्वाचन क्षेत्र से लोक सभा के लिए चुने गए। उत्तराखंड में ऊर्जा मंत्री के रूप में, उन्होंने लंबे समय से लंबित टिहरी हाइड्रो परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें टिहरी के ऐतिहासिक शहर और जिला मुख्यालय का स्थानांतरण शामिल था। उन्होंने राज्य सभा और लोक सभा दोनों में याचिका समिति के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया, जहां उन्होंने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन सहित वन रैंक वन पेंशन, रेल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों पर विस्तृत सिफारिशें प्रस्तुत कीं। बाद में उन्हें 5 सितंबर, 2019 को महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने प्रभावी ढंग से सेवा की और राज्य के लगभग सभी जिलों के साथ-साथ कई ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण किलों का दौरा किया। इसके अलावा, अगस्त 2020 में, उन्हें गोवा के राज्यपाल (अतिरिक्त प्रभार) के रूप में भी नियुक्त किया गया था।

शिक्षा और राजनीति में उनके योगदान के अलावा, कोश्यारी एक लेखक भी हैं। उन्होंने “उत्तरांचल प्रदेश क्यों” और “उत्तरांचल प्रदेश: संघर्ष एवं समाधान” नामक दो पुस्तकें लिखी और प्रकाशित की, जो उत्तराखंड के विकास के प्रति उनकी संकल्‍पना और प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, नेतृत्व और अटूट सेवा का एक प्रेरक उदाहरण है।