गंगा तट पर गूंजे आध्यात्म और संस्कृति के स्वर, मुख्यमंत्री धामी व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने की भव्य गंगा आरती

ऋषिकेश : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने शुक्रवार को ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन पहुंचकर विधिवत गंगा पूजन एवं भव्य गंगा आरती में सहभाग किया। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने मां गंगा से देश एवं प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

परमार्थ निकेतन घाट पर आयोजित गंगा आरती के दौरान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। वेद मंत्रों, भजन-कीर्तन और दीपों की अलौकिक छटा के बीच मुख्यमंत्री एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मां गंगा की आराधना कर प्रदेश की उन्नति, जनकल्याण एवं विश्व शांति के लिए प्रार्थना की।

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उपस्थित संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि मां गंगा के पावन तट पर आना सदैव आत्मीय एवं आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और सनातन परंपरा की जीवंत धारा है, जिसने सदियों से देश की आध्यात्मिक चेतना को पोषित किया है।

उन्होंने कहा कि भारत की संत परंपरा ने हर कठिन और विपरीत परिस्थिति में समाज को दिशा देने का कार्य किया है। जब-जब देश सामाजिक, सांस्कृतिक या वैचारिक चुनौतियों से गुजरा, तब संतों और ऋषियों ने अपने तप, त्याग और ज्ञान के माध्यम से समाज को नई ऊर्जा एवं मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भारत की तपस्या, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों की परंपरा सदियों से जनमानस में जीवित रही है और संत समाज ने इस महान विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने का कार्य किया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आज भी भारत की सांस्कृतिक शक्ति और आध्यात्मिक चेतना विश्व को आकर्षित कर रही है। उत्तराखंड जैसी देवभूमि हमारी सनातन संस्कृति की आत्मा है, जहां से पूरे देश को आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि गंगा, संत परंपरा और भारतीय संस्कृति का संरक्षण केवल धार्मिक दायित्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है।

परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद मुनि ने मुख्यमंत्री एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए गंगा संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन एवं मानव सेवा के संदेश पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक स्तर पर निरंतर नयी ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है तथा राष्ट्रहित में लिए गए निर्णयों से देश की प्रतिष्ठा विश्वभर में बढ़ी है। उन्होंने उत्तराखंड को दिव्यता, संयम और संगम की धरती बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यों की सराहना की। उन्होंने गंगा एवं भारतीय संस्कृति के वैश्विक महत्व को रेखांकित किया।

इस अवसर पर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरी, निरंजन अखाड़े के महामंडलेश्वर कैलाशानंद जी गिरी, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत, स्थानीय विधायक रेनू बिष्ट, उपजिलाधिकारी चतर सिंह चौहान सहित विभिन्न अधिकारी, संत-महात्मा, श्रद्धालु एवं देश-विदेश से आए पर्यटक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 

जिला प्रशासन और विद्युत विभाग की सक्रियता से अधिकांश क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल

पौड़ी : जनपद में गुरुवार रात तेज हवाओं और बारिश के चलते कई स्थानों पर विद्युत लाइनों और पोलों को नुकसान पहुंचने से बिजली आपूर्ति बाधित हो गयी। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के निर्देशन पर विद्युत विभाग की टीमों ने रात्रि में ही राहत एवं मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। त्वरित कार्रवाई के चलते अधिकांश क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी गयी है, जबकि शेष स्थानों पर कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

पौड़ी शहर में बीजीआर कैंपस के समीप विद्युत तारों पर पेड़ गिरने से 11 केवी लाइन क्षतिग्रस्त हो गयी थी, जिससे पर्यटन विभाग कार्यालय, परिवहन विभाग कार्यालय और आसपास के क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। विभागीय दलों ने मौके पर पहुंचकर पेड़ हटाने और लाइन मरम्मत का कार्य तेजी से पूरा किया, जिसके बाद क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति सुचारू कर दी गई।

नैनीडांडा ब्लॉक क्षेत्र में 33 केवी लाइन क्षतिग्रस्त होने से मस्टखाल क्षेत्र, थलीसैंण ब्लॉक में चाकीसैंण बाजार, चाकीसैंण तहसील क्षेत्र तथा आसपास के गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी। विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शुक्रवार सुबह तक विद्युत आपूर्ति पूर्ण रूप से बहाल कर दी।

इसके अतिरिक्त लैंसडौन क्षेत्र के डेरियाखाल तथा रिखणीखाल ब्लॉक के शंकरपुर, हल्दुखाल (धुमाकोट) और आसपास के गांवों में भी विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त होने से आपूर्ति प्रभावित रही। वहीं मैठाणाघाट क्षेत्र के रसिया महादेव एवं समीपवर्ती गांवों में विद्युत व्यवस्था बहाल करने का कार्य तेजी से जारी है।

रिखणीखाल क्षेत्र में तेज आंधी और बारिश के कारण टकोलीखाल, पैनो-दो, ढाबखाल, नुनेरा, घोटला-गुडलखेत, ग्राम कठूड, मरखोला पट्टी इडियाकोट मल्ला, पैनो-चार, गुठेरता, सेन्धी, कोटा और देवियोखाल बाजार क्षेत्र में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी। विभागीय टीमों ने कई क्षेत्रों में आपूर्ति बहाल कर दी है तथा शेष क्षेत्रों में कार्य जारी है।

उधर, ढाबखाल-देवियोखाल मोटर मार्ग पर तीन स्थानों पर पत्थर और मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ था। संबंधित विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए मार्ग को हल्के वाहनों के लिए सुचारू कर दिया गया है। हालांकि मलबा आने से पेयजल पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचा है, जिसकी मरम्मत का कार्य जारी है।

जल संस्थान पौड़ी एवं श्रीनगर से किसी बड़ी क्षति की सूचना नहीं है। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने तथा आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने डीजल, पेट्रोल, एलपीजी समेत जरूरी वस्तुओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने शुक्रवार को सचिवालय में प्रदेश में खाद्यान्न एवं दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुओं को लेकर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने आयुक्त खाद्य बी. एल. राणा से प्रदेश में दैनिक आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं कीमतों की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में आमजन की रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की उचित दरों पर निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सम्बन्धित विभागों को लगातार एवं नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि बाजार में खाद्य सामग्री, डीजल-पेट्रोल, एलपीजी एवं अन्य आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता एवं मूल्य स्थिति पर सतत् निगरानी रखी जाए, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने वाले तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। इसके लिए सम्बन्धित विभागों द्वारा लगातार निरीक्षण अभियान चलाए जाएं तथा बाजारों, गोदामों एवं थोक विक्रेताओं की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार आमजन को राहत प्रदान करने एवं बाजार व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी जनपदों विशेषकर चारधाम यात्रा से सम्बन्धित जनपदों में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं मूल्य नियंत्रण की स्थिति पर विशेष ध्यान दिए जाने एवं किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं।

इस अवसर पर आयुक्त खाद्य बी.एल. राणा, चीफ मार्केटिंग ऑफिसर डॉ. एम.एस. विसेन, रीजनल मार्केटिंग ऑफिसर सी.एम, घिल्डियाल एवं उपायुक्त निधि रावत भी उपस्थित थे।

उत्तराखंड में सीमा पर्यटन को बढ़ावा देगा नीती एक्सट्रीम अल्ट्रा रन

गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड की दुर्गम नीती घाटी में 31 मई एवं 01 जून को आयोजित होने वाला नीती एक्सट्रीम अल्ट्रा रन भारत में तेजी से विकसित हो रहे एडवेंचर पर्यटन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग की ओर भारतीय सेना के समन्वय से आयोजित यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सीमा पर्यटन को बढ़ावा देने, सैन्य-नागरिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा हिमालय के दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक संभावनाओं को नई पहचान देने का प्रयास है।

चमोली जनपद में भारत-तिब्बत सीमा के निकट स्थित नीति घाटी अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता, ऊंचाई वाले दुर्गम भूभाग और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि, भौगोलिक दूरस्थता और सीमित आधारभूत सुविधाओं के कारण यह क्षेत्र अब तक अपेक्षाकृत कम विकसित रहा है। नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन जैसे आयोजन इस क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा इसे सतत पर्यटन एवं आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

इस अल्ट्रा रन में 75 किमी, 42 किमी, 21 किमी, 10 किमी एवं 5 किमी की विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं, जिनमें पेशेवर खिलाड़ियों के साथ-साथ शौकिया धावक भी भाग लेंगे। प्रतिभागियों को तीव्र चढ़ाई, कम ऑक्सीजन स्तर और बदलते मौसम जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना होगा। यही कारण है कि यह प्रतियोगिता देश की सबसे चुनौतीपूर्ण सहनशक्ति दौड़ों में से एक मानी जा रही है, जिसमें शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक दृढ़ता भी आवश्यक है।

इस आयोजन की एक विशेषता नागरिक प्रशासन और भारतीय सेना के बीच उत्कृष्ट समन्वय है। नीती घाटी जैसे दुर्गम एवं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सेना की लॉजिस्टिक क्षमता, चिकित्सा सुविधाएं और संचालन विशेषज्ञता अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। टेंट एवं आवास व्यवस्था से लेकर चिकित्सा सहायता और मार्ग सुरक्षा सुनिश्चित करने तक, सेना की भागीदारी आयोजन को सुरक्षित एवं सुचारु रूप से संपन्न कराने में अहम योगदान दे रही है।

यह पहल केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। आयोजन के दौरान बढ़ने वाली पर्यटकों की संख्या से होम-स्टे, परिवहन, भोजन एवं गाइड सेवाओं की मांग बढ़ेगी, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही यह सीमावर्ती गांवों से हो रहे पलायन को रोकने के व्यापक उद्देश्य को भी समर्थन प्रदान करेगा।

यह आयोजन सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में सरकार की ‘वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज’ अवधारणा के अनुरूप भी है। प्रतिभागियों और मीडिया का ध्यान आकर्षित कर नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन इस क्षेत्र को एक जीवंत और सुलभ पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।

पर्यावरण संरक्षण और सतत पर्यटन भी इस आयोजन के प्रमुख केंद्र बिंदु हैं। आयोजकों द्वारा अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने तथा प्रतिभागियों के बीच जागरूकता बढ़ाने जैसे उपायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि घाटी की प्राकृतिक सुंदरता सुरक्षित रह सके।

आयोजन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। समन्वय बैठकें, मार्ग सर्वेक्षण, चिकित्सा योजना एवं लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रतिभागियों एवं स्थानीय समुदायों में इस आयोजन को लेकर उत्साह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

नीती एक्सट्रीम अल्ट्रा रन केवल एक दौड़ नहीं, बल्कि साहस, एकता और प्रगति का प्रतीक है। यह आयोजन दर्शाता है कि खेल किस प्रकार विकास, राष्ट्रीय एकीकरण और राष्ट्र गौरव का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

शिक्षकों की हुंकार, 8 जून को सचिवालय घेराव का ऐलान

देहरादून। राजकीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ ने अपनी 13 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। प्रदेशभर से आए शिक्षकों ने देहरादून में प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलनरत शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। कई बार मांगें उठाने और ज्ञापन सौंपने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे शिक्षकों में भारी नाराजगी है।

शिक्षकों की प्रमुख मांगों में टीईटी अनिवार्यता से स्थायी छूट, पुरानी पेंशन योजना  की बहाली, सेवाकाल में तीन पदोन्नति, पारदर्शी अंतर्जनपदीय स्थानांतरण व्यवस्था लागू करना तथा 17140 वेतनमान की वसूली पर रोक शामिल हैं।

संघ पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार उन्हें उग्र आंदोलन के लिए मजबूर न करे। उन्होंने साफ किया कि अब शिक्षक अपने अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं और पीछे हटने वाले नहीं हैं।

इसी कड़ी में 8 जून को देहरादून में प्रदेशभर के शिक्षक विशाल ‘गर्जना रैली’ निकालेंगे और सचिवालय का घेराव करेंगे। संगठन का दावा है कि इस आंदोलन में बड़ी संख्या में शिक्षक भाग लेंगे। शिक्षकों ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दिए निर्देश

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में सुरक्षित भोजन एवं स्वस्थ आहार पर गठित राज्य स्तरीय सलाहकार समिति की 6वीं बैठक सम्पन्न हुयी। मुख्य सचिव ने प्रदेश की दूसरी खाद्य परीक्षण लैब को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस अवसर पर (07 जून, 2026 को) अनिवार्य रूप से लोकार्पित किए जाने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने प्रवर्तन गतिविधियों को बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने खाद्य पद्धार्थों की जांच बढ़ाए जाने के लिए राज्य सेक्टर के बजट में प्राविधान किए जाने की बात कही। कहा कि केन्द्र सरकार से मिलने वाले बजट के लिए एक कॉर्पस भी बनाया जाए, ताकि खाद्य पद्धार्थों की लगातार एवं नियमित जांच करायी जा सके। उन्होंने मिलावटखोरी में लगातार संलिप्त व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि मिलावटखोरी से सम्बन्धित न्यायालयों में चल रहे मामलों पर मजबूत पैरवी की जाए, ताकि मिलावटखोरों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।

मुख्य सचिव ने शिकायतों के लिए एक सरल चार अंकों का हेल्प डेस्क नंबर जारी कर प्रचार-प्रसार किए जाने के निर्देश दिए, ताकि आमजन मिलावट या किसी भी प्रकार की शिकायत करने में आसानी हो सके। मुख्य सचिव ने प्रदेश के भीतर खाद्य सुरक्षा के लिए उपलब्ध ईको सिस्टम को और मजबूत किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि फूड सैंपल की टेस्टिंग सही से हो सके इसके लिए टेस्टिंग लैब के साथ ही, मोबाईल टेस्टिंग लैब्स की संख्या बढ़ाए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कुंभ 2027 को ध्यान में रखते हुए अभी से खाद्य सुरक्षा को लेकर तैयारियों सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कुंभ मेला क्षेत्र के लिए परीक्षण एवं निगरानी के लिए समर्पित टीमें तैनात किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मेला क्षेत्र में डेडिकेटेड वेंडिंग जोन भी चिन्हित किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि ईट राईट कैम्पस सर्टिफिकेशन को सर्वप्रथम सरकारी संस्थानों बढ़ावा दिए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि राजकीय शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों, होस्टल, सरकारी वृद्धा आश्रमों, बाल गृहों, नारी निकेतन आदि अपनाया जाए। साथ ही निर्देश दिए कि मिड डे मील और आंगनवाड़ी केन्द्रों में दी जाने वाली टेक होम राशन में भी गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यूज्ड कुकिंग ऑयल को फूड चेन से बाहर करने के लिए संग्रहणकर्ता बढ़ाए जाने की दिशा में कार्य किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने होटल रेस्टोरेंट आदि के प्रबन्धकों एवं मुख्य शेफ के लिए वर्कशॉप आयोजित किए जोन की भी बात कही। कहा कि इससे ईट राईट की दिशा में जागरूकता बढ़ेगी।

इस अवसर पर सचिव विनय शंकर पाण्डेय एवं अपर सचिव रोहित मीणा सहित अन्य सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

SIR अभियान को लेकर जिला प्रशासन सक्रिय, डीएम ने अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश

देहरादून। जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम को लेकर सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर पुनरीक्षण कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर त्रुटिरहित ढंग से पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने निर्देशित किया कि मतदाता सूची की मैपिंग गंभीरता एवं पारदर्शिता के साथ की जाए तथा सभी पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए जाए। साथ ही अनुपस्थित, स्थानांतरित एवं मृत मतदाताओं के नाम अत्यंत सावधानीपूर्वक सूची से हटाए जाएं, ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का गहन अध्ययन कर लें, ताकि किसी भी समस्या का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) एवं सुपरवाइजरों को पुनरीक्षण कार्यों का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाए तथा उनकी सभी शंकाओं का समाधान प्रशिक्षण के दौरान ही सुनिश्चित किया जाए। इसके अतिरिक्त संबंधित क्षेत्रों में पटवारियों के माध्यम से भी सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए, जिससे किसी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का बूथ लेवल पर पुनरीक्षण हेतु राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्ति बीएलए-2 की अहम भूमिका है। सभी ईआरओ अपने क्षेत्र में राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर प्रत्येक बूथ हेतु बीएलए-2 अवश्य नियुक्त करवा लें। ताकि पुनरीक्षण कार्य त्रुटिरहित व पारदर्शिता के साथ हो सके। मतदान केंद्रों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सभी ईआरओ को अपने-अपने क्षेत्रों के बूथों का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी ने पुनरीक्षण कार्यों के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों को समयबद्ध ढंग से सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन सितंबर माह में किया जाना है। इसके साथ ही निर्वाचन संबंधी विभिन्न व्यवस्थाओं हेतु टेंडर प्रक्रिया की सूची तैयार कर समय पर समस्त प्रक्रियाएं पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनव शाह ने बैठक में जानकारी देते हुए बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 7 जून तक गणना प्रपत्रों की प्रिंटिंग एवं कार्मिकों का प्रशिक्षण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके बाद 8 जून से 7 जुलाई 2026 तक बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का वितरण एवं संकलन करेंगे। इसी अवधि में नए पोलिंग बूथों को सम्मिलित करते हुए बूथों का अंतिम निर्धारण भी किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि 14 जुलाई को मतदाता सूची के प्रथम ड्राफ्ट का प्रकाशन किया जाएगा। इसके उपरांत 14 जुलाई से 13 अगस्त तक दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी तथा 11 सितंबर तक उनका निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 15 सितंबर को किया जाएगा।

जनपद देहरादून की सभी 10 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 13 लाख 80 हजार 800 मतदाता पंजीकृत हैं। प्री-एसआईआर अभियान के अंतर्गत 16 मई तक 11 लाख 1 हजार 437 मतदाताओं, अर्थात 80.38 प्रतिशत की मैपिंग पूर्ण की जा चुकी है, जबकि शेष 2 लाख 70 हजार 161 मतदाताओं की मैपिंग प्रक्रिया प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि 47923 अनुपस्थित, 145797 स्थानांतरित एवं 33008 मृत मतदाता हो गए है।

उन्होंने बताया कि जनपद में कुल 1882 मतदेय स्थल हैं, जिनमें अब तक भारतीय जनता पार्टी द्वारा 1836, कांग्रेस द्वारा 1443 तथा सीपीआई द्वारा 378 बीएलए-2 नियुक्त किए गए हैं। अधिकृत बीएलए-2 अपने संबंधित मतदेय स्थलों पर बीएलओ के साथ समन्वय स्थापित कर मतदाता सूची के परीक्षण, संशोधन एवं अन्य कार्यों में सहयोग कर सकते हैं।

उप जिलाधिकारी ने बताया कि कोई भी नागरिक निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित ईसीआई-नेट के माध्यम से पंजीकरण एवं मतदाता पहचान पत्र संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। एप पर उपलब्ध “बुक ए कॉल विद बीएलओ” सुविधा के माध्यम से संबंधित बीएलओ से भी संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त निर्वाचन कार्यालय के टोल फ्री नंबर 1950 पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनव शाह, सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों सहित पुनरीक्षण व्यवस्थाओं से जुड़े सभी नोडल अधिकारी उपस्थित थे।

अंकिता केस में फिर उभरा जनाक्रोश, देहरादून की सड़कों पर उतरी महिलाएं

देहरादून। देहरादून में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जनता का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच और उत्तराखंड महिला मंच के बैनर तले सोमवार को बड़ी संख्या में महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गांधी पार्क से प्रदर्शन शुरू किया और एस्ले हॉल चैक पर सांकेतिक जाम लगाकर सरकार व प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी चेहरों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। महिलाओं ने कहा कि जब तक मामले में पूरी पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शन के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की देहरादून में आयोजित बैठक का भी विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बैठक में दुष्यंत गौतम और अजय कुमार की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कड़ा ऐतराज जताया। महिलाओं का कहना था कि वे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से मिलकर दुष्यंत गौतम और अजय कुमार को तत्काल उत्तराखंड से बाहर भेजने की मांग करना चाहती थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया।

एस्ले हॉल चैक पर कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने साफ कहा कि अंकिता को न्याय मिलने तक यह लड़ाई जारी रहेगी और वीआईपी चेहरों को बचाने की हर कोशिश का विरोध किया जाएगा।

इस विरोध प्रदर्शन में कमला पंत, निर्मला बिष्ट, मोहित डिमरी, सुजाता पॉल, ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, विमला कोली, ईश्वर शर्मा, त्रिलोचन भट्ट, हरिओम पाली और पंकज क्षेत्री समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल रहे।

राज्य निगम कर्मचारी महासंघ की बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों पर हुई व्यापक चर्चा

देहरादून : राज्य निगम कर्मचारी महासंघ, उत्तराखण्ड प्रदेश की पूर्व निर्धारित महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को अरण्य विकास भवन, 73 नेहरू रोड, डालनवाला, देहरादून में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रकाश राणाकोटी ने की, जबकि मंच संचालन प्रदेश महामंत्री नन्दलाल जोशी द्वारा किया गया। बैठक में राज्य के विभिन्न निगमों एवं प्राधिकरणों में कार्यरत कर्मचारियों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों, वेतन विसंगतियों तथा कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। महासंघ ने राज्य निगमों में कार्यरत कर्मचारियों को ₹25 लाख ग्रेज्युटी लागू किए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया। पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग को सरकार द्वारा शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए, जिससे कर्मचारियों को सेवा निवृत्ति के समय आर्थिक सुरक्षा मिल सके। इसके अतिरिक्त बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि उत्तराखण्ड सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत कार्मिकों को शिथलीकरण का लाभ दिया जा रहा है, जबकि निगमों एवं प्राधिकरणों के कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। महासंघ ने सरकार से मांग की कि राज्य सरकार के कर्मचारियों की भांति सभी निगमों एवं प्राधिकरणों में कार्यरत कर्मचारियों को भी समान रूप से शिथलीकरण का लाभ प्रदान किया जाए। इस संबंध में प्रस्ताव पारित करते हुए शासन स्तर पर सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई।

वन विकास निगम के स्केलर कर्मचारियों के वेतनमान संशोधन की मांग

बैठक में उत्तराखण्ड वन विकास निगम में कार्यरत स्केलर वर्ग के कर्मचारियों की वेतन विसंगति का मुद्दा भी गंभीरता से उठाया गया। महासंघ ने वर्तमान वेतनमान ₹19900-63200, लेवल-2, ग्रेड वेतन ₹1900 को संशोधित कर ₹21700-69100, लेवल-3, ग्रेड वेतन ₹2000 किए जाने का प्रस्ताव पारित किया। पदाधिकारियों ने कहा कि स्केलर वर्ग के कर्मचारी कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हैं, इसलिए उनके कार्य के अनुरूप उचित वेतनमान दिया जाना आवश्यक है।

महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि उपरोक्त सभी मांगों के संबंध में शीघ्र ही सचिवालय में शासन स्तर पर वार्ता की जाएगी तथा कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। बैठक में प्रेम सिंह चौहान, सुन्दराम टमटा, कुनाल शर्मा, महेन्द्र सिंह गैड़ा, केदार सिंह चौहान, गिरीश प्रसाद जोशी, देवीराम सेमवाल, चतर सिंह, कीरत सिंह नेगी, सुरेन्द्र कुमार, सुनील पुण्डीर, दलीप सिंह रावत, रणजीत सिंह रावत, प्रभात बंसल सहित अनेक पदाधिकारी एवं कर्मचारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सौर ऊर्जा क्षमता में दो वर्षों में 10 गुना वृद्धि, उत्तराखण्ड बना अग्रणी राज्य

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को कैंप कार्यालय में काउंसिल ऑन एनर्जी, इन्वायरमेन्ट एण्ड वॉटर (CEEW) द्वारा तैयार की गई ‘सौर जागरूकता स्मारिका पुस्तिका’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पहल केवल एक स्मारिका पुस्तिका का विमोचन नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड के उज्ज्वल, आत्मनिर्भर एवं हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संकट एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में सौर ऊर्जा केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत उत्तराखण्ड ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं, जो देश के लिए प्रेरणास्रोत बन रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने 40 हजार रूफटॉप सोलर संयंत्रों का अपना प्रारंभिक लक्ष्य निर्धारित समय से पूर्व प्राप्त कर लिया है तथा निर्धारित संयंत्रों के लक्ष्य का लगभग 95% कार्य पूर्ण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्य घर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तराखण्ड आज देश के शीर्ष राज्यों की  श्रेणी में पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 से अब तक मात्र दो वर्षों में राज्य ने सौर ऊर्जा क्षमता में लगभग 10 गुना वृद्धि दर्ज की है।  उत्तराखण्ड लगभग 290 मेगावाट क्षमता के रेजिडेंशियल रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने में सफल हुआ है। ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण की दिशा में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

मुख्यमंत्री ने यूपीसीएल, उरेडा, क्षेत्रीय अधिकारियों तथा इस अभियान से जुड़े सभी विभागों एवं संस्थाओं के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता टीम उत्तराखण्ड की सामूहिक प्रतिबद्धता और समर्पण का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आयोजित सौर कौथिग,  जन-जागरूकता अभियान, नुक्कड़ नाटक एवं अधिकारियों के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने प्रदेश में सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता का वातावरण तैयार किया है। उन्होंने CEEW की टीम के सहयोग एवं उल्लेखनीय योगदान की भी सराहना की। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल सोलर संयंत्र स्थापित करना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ ऊर्जा क्रांति का सक्रिय भागीदार बनाना है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के व्यापक उपयोग से आम नागरिकों के बिजली बिल में कमी आएगी, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी तथा आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं हरित भविष्य प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में उत्तराखण्ड नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश के समक्ष एक प्रेरणादायक एवं आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगा।

इस अवसर पर  विधायक सुरेश गड़िया, प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव विनय शंकर पांडेय, CEEW के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अरुणाभ घोष, पिटकुल के प्रबंध निदेशक डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक जी. एस बुदियाल एवं संबंधित विभागीय अधिकारी मौजूद थे।