मसूरी में बड़ा सड़क हादसा : गहरी खाई में गिरी कार, चार लोग बताएं जा रहे सवार

मसूरी। पर्यटन नगरी मसूरी में बुधवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। झड़ीपानी शॉर्टकट मार्ग पर एक कार अनियंत्रित होकर सैकड़ों फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के समय वाहन में चार लोगों के सवार होने की जानकारी सामने आ रही है।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ और 108 एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। दुर्घटनास्थल दुर्गम और घनी झाड़ियों से घिरा होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन के अनुसार कार खाई में काफी नीचे जा गिरी है, जिसके चलते रेस्क्यू टीमों को वाहन तक पहुंचने के लिए चुनौतीपूर्ण अभियान चलाना पड़ रहा है। एसडीआरएफ के जवान रस्सियों और विशेष उपकरणों की मदद से खाई में उतरकर बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

हादसे के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कार में चार लोग सवार थे, हालांकि उनकी पहचान और स्थिति के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।

मसूरी-कोलूखेत मार्ग से जुड़े झड़ीपानी क्षेत्र में हुए इस हादसे के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। पुलिस और राहत एजेंसियां प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

फिलहाल रेस्क्यू अभियान जारी है और प्रशासन की ओर से लोगों से दुर्घटनास्थल के आसपास भीड़ न लगाने की अपील की गई है। हादसे के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है।

मानसून को लेकर धामी सरकार अलर्ट, सभी विभागों को जीरो कैज्यूएलिटी के निर्देश

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित बैठक में राज्य की मानसून पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने सभी रेखीय विभागों तथा जनपदों से मानसून को लेकर की गई तैयारियों की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभाग एवं जनपद जीरो कैज्यूएलिटी एप्रोच के साथ कार्य करें तथा यह सुनिश्चित करें कि मानसून अवधि में जनहानि को न्यूनतम किया जा सके। 

उन्होंने सभी प्रभारी सचिवों को अपने-अपने आवंटित जनपदों का मानसून पूर्व कम से कम दो बार भ्रमण कर व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारियों के बारे में बताया। 

मुख्यमंत्री ने मानसून के दौरान संभावित जोखिम वाले एवं संवेदनशील स्थलों को चिन्हित कर वहां आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी 24×7 अलर्ट मोड में कार्य करें तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखें, जिससे आम जनता को कम से कम कठिनाइयों का सामना करना पड़े। 

उन्होंने कहा कि आपदा की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सरकार और प्रशासन का दायित्व केवल राहत एवं बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के साथ प्रभावित लोगों के साथ खड़े रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय जनता का विश्वास बनाए रखने में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, सभी इसी भाव के साथ कार्य करें। 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानसून के दौरान खतरे वाले क्षेत्रों में निवास कर रहे लोगों को आवश्यकता पड़ने पर समय रहते सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने नगर निकायों एवं संबंधित विभागों को नालों एवं नालियों की सफाई युद्धस्तर पर करने तथा कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि मानसून से पूर्व जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह सुचारू हो सके। 

उन्होंने नदियों की डिसिल्टिंग एवं ड्रेजिंग कार्यों को प्राथमिकता देने, तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा नदियों के किनारे किए गए अवैध अतिक्रमणों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए। 

मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी पुलों का सुरक्षा ऑडिट कराने तथा आवश्यकता के अनुरूप बैली ब्रिज का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थलों पर जेसीबी मशीनों के साथ-साथ सड़क खोलने के लिए आवश्यक उपकरण एवं संसाधन पूर्व से ही तैनात रखने को कहा। बैठक में मुख्यमंत्री ने गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी सभी गर्भवती महिलाओं का डाटा बैंक तैयार किया जाए जिनकी डिलीवरी मानसून अवधि में संभावित है। यदि मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति उत्पन्न हो तो उनके सुरक्षित प्रसव की पूर्व व्यवस्था की जाए। आवश्यकता पड़ने पर अस्पतालों के निकट किराए के भवन अथवा अन्य सुरक्षित स्थलों पर उनके ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए व्यापक उपाय करने, डेंगू नियंत्रण हेतु नियमित फॉगिंग कराने तथा अन्य आवश्यक स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सार्वजनिक जलापूर्ति से जुड़ी पानी की टंकियों एवं टैंकरों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने को भी कहा।

उन्होंने विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून के दौरान यदि कहीं बिजली अथवा पानी की आपूर्ति बाधित होती है तो उसे तत्काल बहाल किया जाए। इसके लिए सभी आवश्यक स्पेयर पार्ट्स का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने बिजली एवं पेयजल संबंधी शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु कॉल सेंटर संचालित करने तथा विद्युत पोलों एवं तारों का सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए। 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में मार्ग अवरुद्ध होने की संभावनाओं को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न, पेट्रोल, डीजल एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का अग्रिम भंडारण किया जाए। उन्होंने आपदा की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं पुलिस बल की पूर्व तैनाती सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में मदन कौशिक, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग के उपाध्यक्ष विनय रूहेला, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव डाॅ0 आर मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख सचिव एल फैनाई, सचिव नितेश कुमार झा, पंकज कुमार पाण्डेय, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, एडीजी वी मुरूगेशन, सचिव रविशंकर, सचिव धीराज सिंह गब्र्याल, सचिव रणबीर सिंह चैहान, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर सचिव प्रकाश चंद्र, महावीर सिंह चैहान, अपर सचिव रोहित मीणा, आनंद श्रीवास्तव, तृप्ती भट्ट, विनीत कुमार, डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी आदि उपस्थित रहे। 

सड़कों को गड्ढामुक्त करने की डेडलाइन तय 

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त होने वाली सड़कों की मरम्मत के लिए 15 नवंबर की समयसीमा निर्धारित करते हुए निर्देश दिए कि हर हाल में 15 नवंबर तक सभी सड़कों को गड्ढामुक्त बनाया जाए। उन्होंने संबंधित विभागों को अभी से कार्ययोजना तैयार कर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।

भ्रामक खबरों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश

देहरादून। मुख्यमंत्री ने आपदाओं से संबंधित भ्रामक, असत्य एवं भ्रम फैलाने वाली खबरों, वीडियो अथवा सोशल मीडिया पोस्ट प्रसारित करने वालों के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संकट की परिस्थितियों में अफवाहें राहत एवं बचाव कार्यों में बाधा उत्पन्न करती हैं तथा जनमानस में अनावश्यक भय का वातावरण बनाती हैं।

संचार व्यवस्था की सुनिश्चितता पर विशेष जोर

देहरादून। मुख्यमंत्री ने राज्य के ऐसे सभी क्षेत्रों को चिन्हित करने के निर्देश दिए जहां अभी भी मोबाइल नेटवर्क एवं संचार सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बीएसएनएल एवं अन्य दूरसंचार कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर इन क्षेत्रों में शीघ्र संचार सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि आपदा की स्थिति में सूचना एवं राहत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

संवेदनशील एवं क्षतिग्रस्त स्कूलों का ऑडिट करने के निर्देश

देहरादून। मुख्यमंत्री ने मानसून से पूर्व संवेदनशील एवं क्षतिग्रस्त विद्यालय भवनों की पहचान करने तथा खतरे वाले विद्यालयों में पठन-पाठन न कराने के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही उन्होंने अन्य महत्वपूर्ण सरकारी परिसंपत्तियों एवं सार्वजनिक अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने की आपदा प्रबंधन विभाग की सराहना

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ब्रिक्स डिजास्टर रिस्क रिडक्शन वर्किंग ग्रुप की बैठक में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल को मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, एसडीआरएफ, यूएलएमएमसी तथा आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी एजेंसियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि राज्य के समन्वित प्रयासों, तकनीक आधारित कार्यप्रणाली और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे सतत नवाचारों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिल्क्यारा रेस्क्यू ऑपरेशन तथा अन्य आपदा प्रबंधन अभियानों ने उत्तराखंड की क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है।

बद्रीनाथ धाम सहित नरसिंह मंदिर में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की विशेष पूजा अर्चना

चमोली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफल नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम और पौराणिक नरसिंह मंदिर में विशेष महा-अभिषेक और भव्य पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही बदरी विशाल के गर्भगृह में प्रधानमंत्री मोदी के नाम और उत्तम स्वास्थ्य के संकल्प के साथ विशेष महा-अभिषेक पूजन शुरू हुआ, जिसकी दिव्यता देखते ही बनती थी। बदरीनाथ धाम के मुख्य धर्माधिकार (स्वयंवर दत्त सेमवाल) सहित अन्य वेदपाठियों और तीर्थ पुरोहितों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। आज धाम में आयोजित होने वाले महा-अभिषेक, विशेष आरती और हवन-पूजन मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से ही संपन्न किए गए। इसी कड़ी में, जोशीमठ स्थित भगवान नरसिंह के मंदिर में भी भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा विश्व कल्याण और राष्ट्र की समृद्धि के लिए पवित्र हवन-पूजन किया गया, जिसमें देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

​इस अवसर पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड के प्रति हमेशा से ही विशेष और गहरा लगाव रहा है। आज उनके ही प्रयासों और विजन से केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत अभूतपूर्व विकास कार्य धरातल पर उतरे हैं। सड़कों की शानदार कनेक्टिविटी होने से चारधाम यात्रा सुगम हुई है और इसी का परिणाम है कि रिकॉर्ड 10 लाख से अधिक यात्री भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर चुके हैं। वहीं, भाजपा नेता और श्रीमती रोहिणी रावत ने प्रधानमंत्री के कार्यकाल को अब तक का सबसे सफलतम कार्यकाल बताते हुए कहा कि पीएम मोदी के प्रयासों से आज उत्तराखंड में रोजगार की अपार संभावनाएं बढ़ी हैं, जो उनके उस कथन को सच साबित करता है जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘आने वाला दशक उत्तराखंड का होगा।’ इस अवसर पर भगवती प्रसाद नंबुदरी, मुकेश डिमरी,अनिल सकलानी, शिवप्रसाद सकलानी,श्रीमती सुषमा डिमरी आदि मौजूद

थलीसैंण में करोड़ों की विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास, डॉ. धन सिंह रावत ने दी सौगात

थलीसैंण : कैबिनेट मंत्री एवं श्रीनगर विधायक डॉ धन सिंह रावत ने बुधवार को थलीसैंण क्षेत्र में करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा, सड़क, खेल और धार्मिक पर्यटन के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है।

अपने तीन दिवसीय क्षेत्र भ्रमण के दूसरे दिन मंत्री ने राजकीय महाविद्यालय उफरैंखाल में 1.77 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले खेल मैदान एवं सुरक्षा दीवार निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र के युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं मिलेंगी तथा खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होगा। इस दौरान उन्होंने 1.09 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुए चकरगांव-कल्याणखाल मोटर मार्ग के 1.25 किलोमीटर डामरीकरण कार्य का लोकार्पण किया। साथ ही उन्होंने उफरैंखाल-घण्डियाल मोटर मार्ग से भेड़गांव मल्ला मोटर मार्ग के सुधारीकरण कार्य का शिलान्यास भी किया।

वहीं कैबिनेट मंत्री ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ग्राम कलाण स्थित भैरव मंदिर परिसर में कराए गए सौंदर्यीकरण कार्य का लोकार्पण भी किया। इसके अलावा उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज उफरैंखाल के निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण कर अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा, सड़क, खेल और पर्यटन से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य रजनी रावत, अंजली जोशी, ज्येष्ठ प्रमुख मनवर सिंह, उपजिलाधिकारी कृष्णा त्रिपाठी, बीडीओ टीकाराम तथा आनंद सिंह, अमर सिंह नेगी, नवीन जोशी, मनोज रमोला, दिलीप सिंह नेगी सहित विभागीय अधिकारी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

मसूरी रोड पर हादसा : झड़ीपानी में कार खाई में गिरी, चार लोगों की मौत

देहरादून। मसूरी रोड स्थित झड़ीपानी क्षेत्र में बुधवार को एक कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में वाहन सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ, फायर सर्विस एवं अन्य बचाव एजेंसियों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।

डीसीआर देहरादून की सूचना पर पोस्ट सहस्त्रधारा से अपर उपनिरीक्षक मनोज जोशी के नेतृत्व में एसडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर पहुंची। दुर्घटनास्थल अत्यंत दुर्गम और गहरी ढलानों वाला होने के कारण रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संचालित किया जा रहा है।

पुलिस से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वाहन में सवार चारों व्यक्तियों की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। इसके बाद पुलिस, एसडीआरएफ तथा अन्य बचाव एजेंसियों की टीमों ने संयुक्त रूप से शवों को खाई से निकालकर मुख्य सड़क तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया। शवों को सड़क मार्ग तक लाने के बाद पुलिस द्वारा आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हादसे में मृतकों की पहचान सत्यप्रकाश निवासी सोनीपत (हरियाणा), 19 वर्षीय मानित निवासी गाजियाबाद, सविता (48 वर्ष) पत्नी धर्मवीर निवासी गाजियाबाद तथा संगीता (46 वर्ष) पत्नी टीटू निवासी करोलबाग (दिल्ली) के रूप में हुई है।

घटना के कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस जांच में जुटी है। दुर्घटना के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है, जबकि बचाव दल देर शाम तक राहत एवं रेस्क्यू कार्य में जुटे रहे।

18 केंद्रों पर आयोजित होगी यूकेएसएसएससी की परीक्षा

गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की स्नातक स्तरीय अर्हता परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिले में 14 जून को 18 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए केंद्र व्यवस्थापकों को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां दी गई हैं। परीक्षा केंद्रों के आसपास विशेष निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी।

जिला मजिस्ट्रेट गौरव कुमार ने बताया कि गोपेश्वर, नन्दप्रयाग, कर्णप्रयाग एवं गौचर क्षेत्र में कुल 18 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सभी केंद्रों के सेंटर सुपरिंटेंडेंट को परीक्षा अवधि के लिए विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। उन्हें अपने-अपने केंद्रों की सीमा के भीतर कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में आवश्यक कार्रवाई करने के अधिकार प्रदान किए गए हैं।

जिला मजिस्ट्रेट ने संबंधित उपजिलाधिकारियों को परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में धारा-163 प्रभावी करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत परीक्षा के दौरान अनावश्यक भीड़, बाहरी हस्तक्षेप तथा अवांछित गतिविधियों पर रोक लगाई जाएगी। कहा कि परीक्षा को नकलविहीन और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। परीक्षा 14 जून (रविवार) को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित की जाएगी। जिला प्रशासन ने अभ्यर्थियों से समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने तथा आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

 

परियोजनाओं के लिए भूमि चयन के लिए डीएम डॉ. आशीष चौहान ने की तहसीलदारों की जिम्मेदारी तय; एसडीएमस को अनुश्रवण के निर्देश

देहरादून। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित विभिन्न प्रकरणों की समीक्षा बैठक आयोजित कर संबंधित विभागीय अधिकारियों को राष्ट्रीय एवं राज्य महत्व की परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से धरातल पर उतारने के लिए वन भूमि हस्तांतरण के मामलों का आपसी समन्वय से त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि विकास परियोजनाओं के सर्वेक्षण एवं क्रियान्वयन के दौरान यह विशेष ध्यान रखा जाए कि वन संपदा को न्यूनतम क्षति पहुंचे। उन्होंने निर्देशित किया कि जिन परियोजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण आवश्यक है, उनके लिए प्रतिपूरक वनीकरण (कम्पेन्सेटरी अफॉरेस्टेशन) हेतु सीए भूमि का समयबद्ध चिन्हीकरण किया जाए, जिससे परियोजनाओं को अनावश्यक विलंब का सामना न करना पड़े।

बैठक में अवगत कराया गया कि आशारोड़ी से झाझरा-मसूरी हाईवे परियोजना के लिए लगभग 110 हेक्टेयर सीए भूमि की आवश्यकता है। इस पर जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के अधिकारियों को परियोजना का विस्तृत प्लान प्रस्तुत करने तथा वन विभाग के अधिकारियों को राज्य एवं राष्ट्रीयहित की परियोजनाओं के प्रकरणों का विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए। वहीं लोनिवि के 14 प्रोजेक्ट हेतु 68 हे0 सीए भूमि के सम्बन्ध में सम्बन्धित उप जिलाधिकारियों एवं वन विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय करते हुए भूमि चिन्हित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने वन भूमि हस्तांतरण एवं सीए भूमि चिन्हीकरण से संबंधित लंबित प्रकरणों के प्रभावी समाधान के लिए संबंधित प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ), उपजिलाधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं के अधिशासी अभियंताओं की संयुक्त टीम गठित कर प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनहित एवं विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्धता एक महत्वपूर्ण विषय है। इस दृष्टि से जिलाधिकारी ने तहसीलदारों की जिम्मेदारी तय करते हुए निर्देश दिए कि राष्ट्रीय एवं राज्य महत्व की परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि चयन की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई जाए। साथ ही समस्त उपजिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में प्रस्तावित महत्वपूर्ण परियोजनाओं हेतु भूमि चयन एवं वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े प्रकरणों की नियमित अनुश्रवण एवं समीक्षा करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण कराने के लिए सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करें तथा किसी भी स्तर पर लंबित प्रकरणों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें।

बैठक में प्रभावी वनाधिकारी चकराता वैभव कुमार, अपर जिलाधिकारी प्रशासन समृता परमार, संयुक्त मजिस्टेªट राहुल आनंद, उप जिलाधिकारी रविन्द्र जुवांठा, अधीक्षण अभियंात लोनिवि ओमपाल सिंह, एनएच सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, वन विभाग के अधिकारी, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रतिनिधि उपस्थित रहे तथा उपजिलाधिकारी एवं कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक से जुड़े रहे।

शारदा घाट श्रीनगर में गूंजा योग का संदेश, 92 लोगों ने किया सामूहिक योगाभ्यास

पौड़ी : जनपद पौड़ी में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग द्वारा बुधवार को शारदा घाट, श्रीनगर में सामूहिक योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पुरुषों, महिलाओं एवं बच्चों सहित कुल 92 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए योग और प्राणायाम का अभ्यास किया।

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. अंजू अग्रवाल ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नियमित योगाभ्यास न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक तनाव को दूर कर सकारात्मक जीवनशैली विकसित करने में भी सहायक है। उन्होंने प्रतिभागियों से योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

योग अनुदेशकों द्वारा प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया गया तथा योग के वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्यवर्धक लाभों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान दण्डासन, पादहस्तासन, वज्रासन, शशकासन, वक्रासन, उत्तानपादासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन एवं सेतुबंधासन सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह एवं अनुशासन के साथ योग क्रियाओं में सहभागिता करते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के समापन पर जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. शैलेंद्र पांडेय ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन में सहयोग करने वाले व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास का प्रभावी माध्यम है।

इस अवसर पर महापौर प्रतिनिधि दिनेश पटवाल, ब्रह्मकुमारी आयुषी तथा सामाजिक कार्यकर्ता सुकृति गौड़, योग विभाग के कर्मचारी तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी, विज्ञान आधारित विकास को मिलेगा नया आधार

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के क्रम में सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग ने उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी कर दी है। नई नीति का उद्देश्य राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित विकास को गति देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और उत्तराखंड को विज्ञान, तकनीक तथा सूचना प्रौद्योगिकी के अग्रणी केंद्र के रूप में विकसित करना है।

नीति में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देते हुए स्थानीय समस्याओं और चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान एवं तकनीक के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय संतुलन के साथ सतत विकास सुनिश्चित करना है। नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एक सलाहकार निकाय का गठन किया जाएगा, जो इसके कार्यान्वयन, अनुश्रवण और मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभालेगा। साथ ही अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विकेंद्रीकृत संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाएगी।

स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान

नई नीति के तहत राज्य की भौगोलिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे। पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक अनुसंधान और नवाचार से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार शिक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा तथा विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

एआई, ड्रोन और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों को बढ़ावा

नीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, ड्रोन, संवर्धित वास्तविकता (AR), आभासी वास्तविकता (VR) और मिश्रित वास्तविकता (MR) जैसी उभरती तकनीकों को विशेष महत्व दिया गया है। इसके अलावा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक, खाद्य-जल-ऊर्जा सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्यों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

विज्ञान नगरी, तारामंडल और एआई लैब स्थापित होंगी

राज्य में विज्ञान संचार और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान नगरी, विज्ञान केंद्र, तारामंडल, अटल टिंकरिंग लैब, एआई प्रयोगशालाएं, खगोल अवलोकन संघ तथा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। शिक्षकों के कौशल विकास के लिए अत्याधुनिक शिक्षण-अधिगम केंद्र भी विकसित किए जाएंगे।

वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों के लिए विशेष मंच

नीति के तहत जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाएं, संयुक्त शोध परियोजनाएं, फेलोशिप और छात्रवृत्ति कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसके साथ ही राज्य के वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक विशेष सहभागिता पोर्टल भी विकसित किया जाएगा।

बनेगी विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार वेधशाला

राज्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार वेधशाला की स्थापना की जाएगी, जो योजनाओं, कार्यक्रमों, अनुदानों और प्रोत्साहनों से संबंधित जानकारी का केंद्रीकृत डिजिटल भंडार होगी। शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे तथा नवप्रवर्तकों को पेटेंट, कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान की जाएगी।

आपदा और जलवायु चुनौतियों के समाधान पर फोकस

उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि उत्तराखंड वर्तमान में प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। नई नीति विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों, शोध संस्थाओं, शिक्षाविदों, उद्योगों और नवप्रवर्तकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर इन चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि नीति महिलाओं, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों, सीमांत समुदायों और दिव्यांगजनों की विज्ञान एवं नवाचार क्षेत्र में समान और समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया भविष्य की दिशा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 राज्य को ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विज्ञान और तकनीक को आम जनजीवन, सुशासन, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन से जोड़ना है। यह नीति युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को एक साझा मंच प्रदान करेगी तथा आत्मनिर्भर और विकसित उत्तराखंड के निर्माण को नई गति देगी।

ज्योतिर्मठ के जीरोबैंड क्षेत्र में जंगल में लगी आग

ज्योतिर्मठ : उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में वनाग्नि की घटनाओं के बीच चमोली जनपद के ज्योतिर्मठ से राहत भरी खबर सामने आई है, जहाँ फायर ब्रिगेड की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक बड़े हादसे को टाल दिया। बुधवार को ज्योतिर्मठ के समीप जीरो बैंड गौरंग के पास जंगल में अचानक भीषण आग लग गई। चीड़ की सूखी पत्तियों और तेज हवाओं के कारण आग की लपटें तेजी से सड़क किनारे से होते हुए नजदीकी रिहायशी (आबादी) क्षेत्र की तरफ बढ़ने लगीं, जिससे स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना दमकल विभाग को दी।

​जंगल में आग लगने और उसके आबादी की ओर बढ़ने की सूचना प्राप्त होते ही फायर यूनिट ज्योतिर्मठ बिना समय गंवाए तत्काल हरकत में आई। विभाग की टीम आवश्यक उपकरणों और फायर टेंडर के साथ तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई। मौके पर पहुँचकर दमकल कर्मियों ने देखा कि आग विकराल रूप ले चुकी थी और आबादी क्षेत्र के बेहद करीब पहुँच चुकी थी। स्थिति की गंभीरता और खतरे को भांपते हुए फायर कर्मियों ने बिना देरी किए मोर्च संभाला और तत्काल आग बुझाने का कार्य प्रारम्भ कर दिया।

​चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच दमकल कर्मियों द्वारा लगातार पानी की बौछारें कर आग को आगे बढ़ने से रोका गया और उस पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया। टीम के अथक प्रयासों और सूझबूझ से आखिरकार जंगल की इस भीषण आग को पूर्ण रूप से बुझा दिया गया। राहत की बात यह रही कि समय रहते की गई इस त्वरित कार्रवाई के चलते घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि या जीवहानि नहीं हुई और एक बड़ा संकट टल गया। स्थानीय जनता ने भी फायर ब्रिगेड की इस तत्परता की जमकर सराहना की है।

​इस रेस्क्यू ऑपरेशन फायर टीम में मुख्य रूप से फायरमैन (FM) पंकज थपलियाल, भरत कुमार, वीरेंद्र, मीनाक्षी, राकेश गौड़ सहित फायरमैन अरविंद, विकास नौटियाल, रोहित तिवारी और शोभा ने भी आग पर काबू पाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।