ड्रॉपआउट बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए चलेगा विशेष अभियान, डीएम डॉ. आशीष चौहान ने दिए निर्देश
  • बेटियां पढ़े, आगे बढ़े : स्नातक तक बेटियों की शिक्षा सुनिश्चित करने को जिला प्रशासन की बडी पहल
  • नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट से ड्रॉपआउट बालिकाओं को मिलेगी शिक्षा की राह
  • डीएम डॉ. आशीष चौहान ने दिए सर्वे कर ड्रॉपआउट बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निर्देश

देहरादून : जनपद में बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित करने और स्कूल छोड़ चुकी छात्राओं को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित ‘नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट’ की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को ठोस एवं परिणामोन्मुखी कार्ययोजना पर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी बालिका की शिक्षा आर्थिक, सामाजिक अथवा पारिवारिक कारणों से बाधित नहीं होनी चाहिए और प्रशासन का प्रयास होगा कि प्रत्येक बालिका को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराया जाए।

शुक्रवार को आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने जनपद में ड्रॉपआउट बालिकाओं के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी को व्यापक सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर से लेकर माध्यमिक शिक्षा तक ऐसी सभी बालिकाओं की पहचान की जाए, जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी है। इन बालिकाओं को पुनः विद्यालयों से जोड़कर उनकी शिक्षा को निरंतर बनाए रखने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन का लक्ष्य केवल बालिकाओं का विद्यालय में पुनः नामांकन कराना नहीं, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जनपद की प्रत्येक ड्रॉपआउट बालिका को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए कम से कम स्नातक स्तर तक शिक्षा प्राप्त कराने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियों, सामाजिक परिस्थितियों अथवा अन्य विषम कारणों से पढ़ाई छोड़ चुकी बालिकाओं के लिए विशेष सहायता तंत्र विकसित किया जाए। जरूरतमंद छात्राओं को शासकीय योजनाओं, छात्रवृत्तियों तथा अन्य उपलब्ध संसाधनों से लाभान्वित कर उनकी शिक्षा में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाए।

बैठक में जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को इस अभियान का नोडल अधिकारी नामित करते हुए कहा कि ड्रॉपआउट बालिकाओं की पहचान, पुनः नामांकन, शैक्षिक प्रगति तथा स्नातक स्तर तक उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाई जाए। उन्होंने विभागीय समन्वय के साथ नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति समीक्षा पर भी जोर दिया।

जिलाधिकारी ने कहा कि बालिका शिक्षा केवल सामाजिक विकास का आधार नहीं, बल्कि सशक्त और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। नंदा-सुनंदा प्रोजेक्ट के माध्यम से जनपद की प्रत्येक बालिका को शिक्षा का अधिकार और बेहतर भविष्य का अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है।

बैठक में जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंकुश पांडेय सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल सुविधाओं में नहीं होनी चाहिए लापरवाही – मुख्य सचिव

टिहरी गढ़वाल। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने अपने दो दिवसीय जनपद भ्रमण कार्यक्रम के दूसरे दिन टिहरी गढ़वाल के बौराड़ी क्षेत्र में स्थित राजकीय मॉडल प्राथमिक विद्यालय, आंगनबाड़ी केन्द्र ढुंगीधार, श्रीदेव सुमन पुस्तकालय एवं बौराड़ी स्टेडियम का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

मुख्य सचिव द्वारा निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य जांच एवं टीकाकरण की नियमित एवं प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन योजना, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं मूलभूत सुविधाओं का सतत अनुश्रवण कर आवश्यक सुधार समयबद्ध रूप से किए जाएं, श्रीदेव सुमन पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों, अभिलेखों एवं पांडुलिपियों का समुचित संरक्षण करते हुए अध्ययन हेतु बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएं तथा बौराड़ी स्टेडियम एवं प्रस्तावित खेल सुविधाओं के निर्माण कार्यों को गुणवत्ता एवं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जाए।

निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने आंगनबाड़ी केन्द्र ढुंगीधार में बच्चों की संख्या, उपलब्ध खेल सामग्री तथा बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे खाद्य एवं पोषण पदार्थों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर उन्होंने गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पोषण किट वितरित की तथा केन्द्र में बच्चों का वजन भी माप करवाया। उन्होंने एएनएम एवं आशा कार्यकर्त्रियों को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा बच्चों के घरों तक पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच एवं टीकाकरण सुनिश्चित करें।

इसके उपरांत मुख्य सचिव ने राजकीय मॉडल प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालय में संचालित मध्यान्ह भोजन योजना, बच्चों के लिए उपलब्ध फर्नीचर, उपस्थिति पंजिका एवं अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। विद्यालय के शिक्षकों द्वारा दी गई जानकारी पर उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के प्रयासों की सराहना की।

मुख्य सचिव ने श्रीदेव सुमन पुस्तकालय का भी निरीक्षण किया। उन्होंने पुस्तकालय की व्यवस्थाओं, पुस्तकों के रखरखाव, अभिलेखों, पंजीकरण व्यवस्था तथा दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण संबंधी जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्हें अवगत कराया गया कि उक्त पुस्तकालय को पुरानी टिहरी से विस्थापित कर वर्तमान स्थान पर स्थापित किया गया है। पुस्तकालय में राजशाही काल से लेकर आधुनिक विषयों तक की समृद्ध पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध है, जिससे साहित्य प्रेमियों, शोधार्थियों एवं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है।

इसके पश्चात मुख्य सचिव ने बौराड़ी स्टेडियम का निरीक्षण किया तथा प्रस्तावित बैडमिंटन हॉल के निर्माण स्थल का अवलोकन किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्य सचिव, स्थानीय विधायक किशोर उपाध्याय, नगर पालिका परिषद टिहरी अध्यक्ष मोहन सिंह रावत, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने डाइजर क्षेत्र में जैकरेण्डा (Jacaranda) के पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इस अवसर पर जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे, मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल, जिला शिक्षा अधिकारी वी.पी. सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय गौरव, जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी पंकज तिवारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई उड़ान, मुख्य सचिव ने स्वरोजगार मॉडलों का किया निरीक्षण

टिहरी गढ़वाल। मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन श्री आनन्द बर्द्धन द्वारा जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड चम्बा अंतर्गत विभिन्न आजीविका एवं स्वरोजगार संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। यह भ्रमण केवल परियोजनाओं की समीक्षा तक सीमित न रहकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उभरते आत्मनिर्भरता के मॉडल को समझने और उसे और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा गया।

मुख्य सचिव द्वारा निर्देश दिए गए कि रीप एवं अन्य आजीविका संवर्धन योजनाओं के अंतर्गत संचालित सभी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाते हुए महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण एवं स्वरोजगार को प्राथमिकता दी जाए, मिनी फिश प्रोसेसिंग यूनिट सहित सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं में गुणवत्ता मानकों का पालन करें एवं स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं बाजार विस्तार को सुदृढ़ कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास सुनिश्चित किए जाएं।

ग्राम दिखोलगांव में रीप (ग्रामोत्थान) परियोजना एवं आईएफएडी (IFAD) के सहयोग से संचालित “हिमालयन भोजनालय” फूड कार्ट के निरीक्षण के दौरान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से संवाद स्थापित किया गया। महिलाओं द्वारा स्थानीय व्यंजनों के निर्माण, विपणन व्यवस्था एवं दैनिक आय से जुड़े अनुभव साझा किए गए। मुख्य सचिव ने इस पहल को ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल बताते हुए स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और बाजार पहुंच को और अधिक व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इसके पश्चात नागणी में निर्माणाधीन मिनी फिश प्रोसेसिंग यूनिट का निरीक्षण किया गया। आरआईडीएफ (RIDF) नाबार्ड पोषित इस परियोजना के माध्यम से मत्स्य उत्पादन को मूल्य संवर्धन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। उप निदेशक मत्स्य प्रमोद कुमार शुक्ला ने परियोजना की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि संपर्क मार्ग एवं पुस्तों के निर्माण का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। आवश्यक मशीनरी की आपूर्ति की जा चुकी है तथा पीयूएफ पैनलिंग का कार्य प्रगति पर है। मुख्य सचिव ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखते हुए समयबद्ध रूप से परियोजना पूर्ण करने के निर्देश दिए।

भिन्नू ग्राम में मूर्ति राम पोल्ट्री फार्म के निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि पशुपालन एवं पोल्ट्री आधारित गतिविधियाँ ग्रामीण स्वरोजगार का प्रभावी आधार बन रही हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ डी के शर्मा ने अवगत कराया कि लाभार्थी द्वारा संचालित यह इकाई ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करती है।

इसी क्रम में दुवाधार स्थित 3K जैविक आउटलेट का अवलोकन किया गया, जहां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह द्वारा स्थानीय जैविक उत्पादों जैसे मांडुआ, चौलाई एवं दालों का विपणन किया जा रहा है। यह पहल न केवल स्थानीय कृषि उत्पादों को बाजार उपलब्ध करा रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्य सचिव ने उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग एवं बाजार विस्तार को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

समग्र रूप से यह निरीक्षण जनपद में आजीविका आधारित गतिविधियों की उस उभरती संरचना को दर्शाता है, जहां सरकारी योजनाएं, स्वयं सहायता समूह और स्थानीय संसाधन मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।

इस अवसर पर जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे, सीडीओ वरुणा अग्रवाल, तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने नैनीताल को दी 96.71 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात

नैनीताल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को जनपद नैनीताल को 96 करोड़ 71 लाख रुपये की 13 विकास योजनाओं की सौगात दी। जिसमें 67 करोड़ लागत की 6 योजनाओं का लोकार्पण एवं 29.71 करोड़ की 7 योजनाओं का शिलान्यास शामिल है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा भीमताल क्षेत्र के विकास हेतु अनेक घोषणा की गई, जिसमें भीमताल में सैनिकों एवं व्यापारियों हेतु एक बहुउद्देश्यीय भवन का निर्माण, भीमेश्वर मंदिर एवं ओखलकांडा पशुपतिनाथ मंदिर को मंदिर माला मिशन में जोड़े जाने, रामगढ़ ब्लॉक के ओढ़ाखांन से मुक्तेश्वर मोटर मार्ग, जीप मार्ग का मिलान, रामगढ़ उप तहसील का शीघ्र संचालन किये जाने के साथ क्षेत्र में प्राधिकरण की समस्या के समाधान हेतु उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर समस्या का समाधान किया जाना शामिल है।

मुख्यमंत्री ने सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यहां की सुंदर झील, चारों ओर फैली हरियाली, पर्वतों की अद्भुत श्रृंखला और प्रकृति की अनुपम छटा हमें केवल आनंद का अनुभव ही नहीं कराती, बल्कि हमें ये भी याद दिलाती है कि प्रकृति और पर्यावरण ही हमारा वर्तमान भी है और भविष्य भी है। इसलिए इस प्रकृति और पर्यावरण को संरक्षित और सुरक्षित रखना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि आज का दिन केवल पौधे लगाने या औपचारिक कार्यक्रमों को करने का ही नहीं है, बल्कि आज का दिन आत्मचिंतन करने का भी दिन है। आज का दिन स्वयं से ये पूछने का अवसर है कि हम अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को कैसी धरती, कैसा पर्यावरण और कैसा भविष्य सौंपकर जाना चाहते हैं, क्या हम उन्हें स्वच्छ नदियाँ, हरे-भरे जंगल और शुद्ध वातावरण देंगे, या फिर प्रदूषण, जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों से भरा भविष्य देकर जायेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड का पर्यावरण कैसा हो ये हम सभी के लिए एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। क्योंकि अच्छा पर्यावरण न केवल हमारी पहचान है बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और जीवन का आधार भी है। उन्होंने कहा कि हम उस पवित्र भूमि के निवासी हैं जहाँ से माँ गंगा और यमुना जैसी जीवनदायिनी नदियाँ निकलती हैं। जहाँ हिमालय केवल पर्वत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता का प्रहरी है और हम उस संस्कृति के वाहक हैं जिसने हजारों वर्षों पहले ही प्रकृति को पूजनीय माना और पूरी दुनिया को प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया आज जिस पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही है, वह हमारी संस्कृति का हिस्सा हजारों वर्षों से रहा है। हमने नदियों को माँ कहा, वृक्षों को देवता माना, पर्वतों को पूजनीय माना और प्रकृति को जीवन का आधार माना।उन्होंने दुनिया में हो रहे जलवायु परिवर्तन को एक बड़ी चुनौती मानते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल वैज्ञानिकों की चर्चा का विषय नहीं रह गया है।

यह हमारे रोजमर्रा जीवन की वास्तविकता बन चुका है। बदलता मौसम, बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, सूखते जल स्रोत, पिघलते ग्लेशियर और बढ़ती प्राकृतिक आपदाएँ हमें लगातार चेतावनी दे रही हैं। जलवायु परिवर्तन से हमारे जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं, हमारी खेती प्रभावित हो रही है, हमारी जैव विविधता प्रभावित हो रही है साथ ही साथ हमारे राज्य की आर्थिकी का मूल आधार पर्यटन भी प्रभावित हो रहा है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण हमारे लिए अति महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने विश्व को एक नई दिशा देने का काम किया है। उन्होंने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। इसी सोच के साथ भारत प्रकृति भी और प्रगति भी के मंत्र को लेकर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी ने मिशन लाइफ के माध्यम से दुनिया को यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है। जब करोड़ों लोग अपने जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करने शुरू कर देते हैं, तब बड़े-बड़े परिवर्तन अपने आप संभव होने लग जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रारंभ किया गया एक पेड़ माँ के नाम अभियान भी केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है। बल्कि ये भावनाओं से जुड़ा हुआ एक जनआंदोलन है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रत्येक परिवार से आग्रह किया कि वह अपनी माँ के नाम एक पौधा अवश्य लगाए और उसे वृक्ष बनाऐं। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया जंगलों की रक्षा की बात कर रही थी, तब उत्तराखंड की मातृशक्ति ने चिपको आंदोलन के माध्यम से इतिहास रचा था। गौरा देवी और यहॉं को माताओं, बहनों ने दुनिया को यह संदेश दिया था कि प्रकृति की रक्षा के लिए जनशक्ति से बड़ी कोई शक्ति नहीं होती। आज फिर उसी भावना को जगाने की आवश्यकता है। आज फिर हमें पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि राज्य में जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन, नदी संरक्षण, वनीकरण, वन्यजीव संरक्षण और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण कार्य सरकार द्वारा किए जा रहे हैं। उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने सकल पर्यावरण उत्पाद की अवधारणा को लागू किया है। यह केवल एक नीति नहीं, बल्कि बेहतर सोच का प्रतिबिंब है। जो बताती है कि हमारे लिए जंगल, जल और जैव विविधता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी आर्थिक प्रगति। सरकार का स्पष्ट संकल्प है, विकास भी होगा और पर्यावरण संरक्षण भी होगा। उन्होंने वनाग्नि की घटनाओं को रोकने हेतु प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि जंगलों को आग से बचाने में सरकार का सहयोग करें। जहाँ कहीं भी आग की छोटी सी चिंगारी दिखाई दे, तुरंत सूचना दें। एक छोटी सी सावधानी हजारों पेड़ों और अनेक जीवों का जीवन बचा सकती है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का उद्देश्य अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि नैनीताल जनपद की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सड़क कनेक्टिविटी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रामसिंह कैड़ा ने मुख्यमंत्री का स्वागत एवं आभार व्यक्त करते हुए भीमताल विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत गतिमान विभिन्न योजनाओं एवं विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों योजनाओं की जानकारी दी।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने रामलीला मैदान स्थित श्री हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

कार्यक्रम में अध्यक्ष जिला पंचायत दीपा दरमवाल, विधायक नैनीताल सरिता आर्या, उत्तराखंड सरकार में दर्जा राज्य मंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू, ध्रुव रौतेला, अध्यक्ष नगर पालिका भीमताल सीमा टमटा, कुमाऊं आयुक्त एवं सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति दीवान सिंह रावत, सीडीओ अरविंद कुमार पाण्डे सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में बड़े प्रशासनिक फेरबदल, IPS, PPS और PCS अधिकारियों के तबादले

देहरादून। उत्तराखंड शासन ने प्रदेश में प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था को लेकर बड़ा फेरबदल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (IPS), प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) तथा प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारियों के तबादलों की सूची जारी कर दी है। लंबे समय से प्रतीक्षित इस सूची में कई वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है।

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जारी आदेश के अनुसार आईपीएस अधिकारी निवेदिता कुकरेती को कुमाऊं परिक्षेत्र का पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नियुक्त किया गया है। वहीं अब तक यह दायित्व संभाल रही रिद्धिम अग्रवाल को पुलिस महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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इसके अलावा विम्मी सचदेवा को पुलिस महानिरीक्षक दूरसंचार एवं फायर सर्विस, कृष्ण कुमार वीके को पुलिस महानिरीक्षक यातायात तथा अनंत शंकर ताकवाले को पुलिस महानिरीक्षक सीआईडी बनाया गया है। सुनील कुमार मीणा को पुलिस महानिरीक्षक कार्मिक एवं पीएसी तथा योगेंद्र सिंह रावत को पुलिस महानिरीक्षक एसडीआरएफ की जिम्मेदारी दी गई है।

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शासन ने वरिंदरजीत सिंह को पुलिस महानिरीक्षक मुख्यालय नियुक्त किया है, जबकि आयुष अग्रवाल को 40वीं वाहिनी पीएसी हरिद्वार का सेनानायक बनाया गया है। हरीश वर्मा को आईआरबी प्रथम का सेनानायक, अमित श्रीवास्तव को पुलिस अधीक्षक सीआईडी देहरादून तथा जितेंद्र चौधरी को पुलिस अधीक्षक अपराध एवं यातायात देहरादून नियुक्त किया गया है।वहीं, नीलेश आनंद भरणे से सचिव पुलिस, स्पोर्ट्स कंट्रोल रूम सहित अन्य दायित्व वापस ले लिए गए हैं। फिलहाल उन्हें कोई नई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है।

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PCS अधिकारियों में भी बदलाव

प्रांतीय सिविल सेवा अधिकारियों के तबादलों में देहरादून के सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह को हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण का सचिव नियुक्त किया गया है। उनकी जगह राकेश तिवारी को देहरादून का सिटी मजिस्ट्रेट बनाया गया है। राकेश तिवारी को संयुक्त सचिव मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त गोपाल सिंह बिनवाल को रुड़की नगर निगम का नगर आयुक्त नियुक्त किया गया है।

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PPS अधिकारियों के तबादले

प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) अधिकारियों में वीर सिंह को उपसेनानायक आईआरबी प्रथम, लोगजीत सिंह को अपर पुलिस अधीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था पुलिस मुख्यालय, विमल आचार्य को उपसेनानायक 46वीं वाहिनी पीएसी रुद्रप्रयाग, शांतनु पाराशर को अपर पुलिस अधीक्षक साइबर क्राइम तथा अंकुश मिश्रा को अपर पुलिस अधीक्षक अभिसूचना नियुक्त किया गया है। शासन के इस व्यापक फेरबदल को प्रशासनिक एवं पुलिस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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SIR को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए 07 जून तक नियुक्त करें बीएलए-2 – डीएम डॉ. आशीष चौहान
  • 08 जून से शुरू होगा डोर-टू-डोर अभियान, गणना प्रपत्र वितरण और संकलन
  • अनुपस्थित, स्थानांतरित व मृत मतदाताओं की एएसडी सूची होगी सार्वजनिक
  • आयोग के निर्देश-मतदाता विवरण के सत्यापन हेतु अनुमन्य दस्तावेजों की प्रति आवश्यक
  • देहरादून में 80.38 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी, 14 जुलाई को प्रकाशित होगा प्रथम ड्राफ्ट
  • SIR को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी ने की राजनीतिक दलों के साथ अहम बैठक

देहरादून : जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शुक्रवार को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम को लेकर समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे 7 जून से पूर्व प्रत्येक मतदान केंद्र पर अपने बीएलए-2 (बूथ लेवल एजेंट) नियुक्त कर जिला निर्वाचन कार्यालय को इसकी सूचना उपलब्ध कराएं, ताकि मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य पूरी पारदर्शिता और त्रुटिरहित ढंग से संपन्न किया जा सके।

बैठक में जिला निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों को गणना प्रपत्र की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने बताया कि जनपद की 10 विधानसभा क्षेत्रों के 1,882 मतदान केंद्रों पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा 1,839, कांग्रेस द्वारा 1,717 तथा सीपीआई(एम) द्वारा 378 बीएलए-2 नियुक्त किए जा चुके हैं, जबकि अन्य मान्यता प्राप्त दलों ने अभी तक अपने प्रतिनिधियों की नियुक्ति नहीं की है।

उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 8 जून से 7 जुलाई 2026 तक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का वितरण एवं संकलन करेंगे। जिन घरों में पहली बार भ्रमण के दौरान ताला बंद मिलेगा, वहां बीएलओ तीन बार पुनः संपर्क करेंगे। इसके साथ ही 1 जुलाई 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले पात्र नागरिकों के फार्म-6 भी स्वीकार किए जाएंगे।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत तथा डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान कर एएसडी सूची तैयार की जाएगी, जिसे पंचायत भवनों, नगर निकायों तथा संबंधित वेबसाइटों पर प्रकाशित करने के साथ राजनीतिक दलों को भी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीएलए-2 पुनरीक्षण अभियान के दौरान बीएलओ के साथ समन्वय स्थापित कर सत्यापन, संशोधन तथा अन्य निर्वाचन संबंधी कार्यों में सहयोग करेंगे।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने जानकारी दी कि 14 जुलाई को मतदाता सूची का प्रथम प्रारूप प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद 14 जुलाई से 13 अगस्त तक दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी तथा 11 सितंबर तक उनका निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 15 सितंबर 2026 को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एसआईआर के तहत जिन मतदाताओं का नाम वर्ष 2003 की निर्वाचक नामावली में दर्ज नहीं है, उन्हें निर्वाचन आयोग द्वारा अनुमन्य दस्तावेजों में से किसी एक की प्रति प्रस्तुत करनी होगी।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की तैनाती की जा चुकी है। प्री-एसआईआर अभियान के अंतर्गत जनपद के कुल 13,76,813 मतदाताओं में से 11,06,652 मतदाताओं की मैपिंग पूरी कर ली गई है, जो कुल मतदाताओं का 80.38 प्रतिशत है।

जिलाधिकारी ने कहा कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, बीएलए तथा आम नागरिक निर्वाचन आयोग के ईसीआई-नेट प्लेटफॉर्म के माध्यम से मतदाता संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त ‘‘बुक ए कॉल विद बीएलओ’’ सुविधा के जरिए संबंधित बीएलओ से सीधे संपर्क किया जा सकता है। मतदाता सहायता के लिए निर्वाचन आयोग के टोल फ्री नंबर 1950 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनव शाह, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेन्द्र प्रसाद देवली, भारतीय जनता पार्टी से नवीन रावत, संतोष रावत, धर्मेश रावत, सुशील गुप्ता, ऊषा कोठारी, आरएस परिहार, पंकज गुप्ता, उमा नरेश तिवारी, कांग्रेस पार्टी से सतेन्द्र, गोदावरी थपलियाल, कुलदीप कोहली, संजय किशोर सहित अन्य राजनीतिक दलों के पदाधिकारी मौजूद थे।






मैनुअल स्कैवेंजिंग पर सख्त हुए राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना, सफाई कर्मियों के उत्पीड़न पर होगी कठोर कार्रवाई, समान कार्य-समान वेतन के दिए निर्देश

देहरादून : उत्तराखंड राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री) भगवत प्रसाद मकवाना ने शुक्रवार को विकास भवन सभागार में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में सफाई कर्मचारियों को दी जा रही सुविधाओं और उनके अधिकारों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी संस्थानों में कार्यरत सफाई कर्मचारियों के हितों और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

बैठक में उपाध्यक्ष ने मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोने की प्रथा) के उन्मूलन में प्रगति न हाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एमएस अधिनियम-2013 के तहत इस अमानवीय प्रथा को पूर्ण रूप से समाप्त करना अनिवार्य है। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मैनुअल स्कैवेंजर्स का सर्वेक्षण न किए जाने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए पुनः सर्वेक्षण कराने तथा चिन्हित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए ऋण सहायता, कौशल विकास एवं स्वरोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान कार्ड, पहचान पत्र तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने ‘नमस्ते योजना’ के अंतर्गत सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में लगे सफाई मित्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सभी सफाई कर्मियों को पीपीई किट और आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं तथा सीवर एवं सेप्टिक टैंकों की सफाई पूरी तरह मशीनीकृत की जाए।

बैठक में उपाध्यक्ष ने उपनल के माध्यम से अस्पतालों, नगर निगमों और नगर पालिकाओं में कार्यरत उन सफाई कर्मचारियों को समान कार्य-समान वेतन का लाभ देने के निर्देश दिए, जिन्होंने 10 वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर ली है। उन्होंने ऐसे कर्मचारियों की सूची 15 दिनों के भीतर आयोग को उपलब्ध कराने को कहा।

आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से तैनात सफाई कर्मचारियों को ईपीएफ, ईएसआई, अवकाश और श्रम कानूनों के अनुरूप न्यूनतम वेतन उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। दून मेडिकल कॉलेज में कार्यरत सफाई कर्मचारियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी प्रस्तुत न किए जाने पर संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश देते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि सफाई कर्मचारियों का किसी भी प्रकार का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने नगर निकायों को सफाई कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि के लिए बोर्ड बैठकों में प्रस्ताव लाने तथा मृतक सफाई कर्मचारियों के आश्रितों को शीघ्र नियुक्ति प्रदान करने के निर्देश दिए। जिला समाज कल्याण अधिकारी को सफाई कर्मियों के लिए बहुउद्देशीय शिविर आयोजित कर राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने तथा लीड बैंक अधिकारी को स्वरोजगार के लिए प्राप्त ऋण आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया।

बैठक के उपरांत विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उपाध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना ने समाज कल्याण विभाग परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल सहित विभिन्न विभागों एवं नगर निकायों के अधिकारी उपस्थित रहे।






पैनीबैंड के पास टेंपो ट्रैवलर पलटा, महिला यात्री की मौत
  • 16 घायल, बदरीनाथ धाम यात्रा पर आए श्रद्धालु थे सवार

गोपेश्वर (चमोली)। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर हेलंग से आगे पैनीबैंड के पास एक टेंपो ट्रैवलर दुर्घटनाग्रस्त होकर सड़क पर पलट गई। हादसे में गाजियाबाद निवासी एक महिला यात्री की मौत हो गई, जबकि चालक समेत 16 लोग घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योतिर्मठ में भर्ती कराया गया है।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार की सुबह 5.37 बजे जिला नियंत्रण कक्ष को 112 के माध्यम से सूचना मिली कि पैनीबैंड के समीप एक टेंपो ट्रैवलर (टीपीडीएम 1वी4545) अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया है। सूचना मिलते ही थाना जोशीमठ से प्रभारी निरीक्षक पुलिस बल और रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर घायलों को वाहन से बाहर निकाला तथा 108 एंबुलेंस और निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल में चिकित्सकों ने गंभीर रूप से घायल अन्ना मक्कर (45 वर्ष), निवासी इंदिरापुरम, गाजियाबाद को मृत घोषित कर दिया। अन्य सभी घायलों का उपचार चल रहा है। बताया जा रहा है कि वाहन में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और हिमाचल प्रदेश के श्रद्धालु सवार थे।

दुर्घटना में घायल होने वालों में फरीदाबाद निवासी पूनम शर्मा व विशाल शर्मा, दिल्ली निवासी मोहित अग्रवाल, शिवानी गोयल, रोहित अग्रवाल, जसमीत, अभिनव अग्रवाल, आशी अग्रवाल, आकृति अग्रवाल, लिपाक्षी, गाजियाबाद निवासी मिताली मक्कर, नोएडा निवासी अंकुर गुप्ता, अर्शी गुप्ता एवं उनकी नौ माह की पुत्री अर्हिता गुप्ता तथा सोलन निवासी निधि जिंदल शामिल हैं। वाहन चालक दलजीत वर्मा निवासी बुराड़ी, दिल्ली भी घायल हुआ है।

पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने की कार्रवाई शुरू कर दी है। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

कोटद्वार में स्व. भुवन चन्द्र खण्डूडी को श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ा जनसैलाब

कोटद्वार : दुर्गापुरी स्थित हल्दी हाथ वेडिंग प्वाइंट में मेजर जनरल (से. नि.) स्व. भुवन चंद्र खण्डूडी, ए.वी.एस.एम. की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। श्रद्धांजलि सभा में कोटद्वार एवं आसपास के क्षेत्रों से आए विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों तथा गणमान्य नागरिकों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित हुए मनिन्दरजीत सिंह बिट्टा ने सभा को संबोधित करते हुए स्व. भुवन चंद्र खण्डूडी के राष्ट्र एवं समाज के प्रति योगदान को स्मरण किया तथा उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।

सभा को संबोधित करते हुए अजय कोठियाल ने कहा कि स्व. भुवन चंद्र खण्डूडी का जीवन राष्ट्रसेवा, अनुशासन और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण था। उन्होंने कहा कि उनके आदर्श और कार्य आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।

कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए ऋतु खण्डूडी भूषण ने अपने पिता से जुड़ी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें स्व. भुवन चंद्र खण्डूडी जी की पुत्री होने पर गर्व और गौरव का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि उनके पिता का अनुशासन, राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व भाव उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है।

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी लोगों ने स्व. भुवन चंद्र खण्डूडी जी के योगदान को याद करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का समापन उनकी पुण्य स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर किया गया।

देवभूमि की दिव्यता में खोए नवजोत सिंह सिद्धू, सुरकंडा देवी मंदिर में की गहन साधना

टिहरी : देवभूमि उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री सुरकंडा देवी मंदिर में हाल ही में पूर्व भारतीय क्रिकेटर, राजनेता और प्रसिद्ध वक्ता नवजोत सिंह सिद्धू ने चार दिनों तक ध्यान-साधना और पूजा-अर्चना कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

सिद्धू 30 मई को कनाताल पहुंचे और एक निजी होटल में ठहरे। इसके बाद 31 मई से 3 जून तक वे प्रतिदिन शाम के समय श्री सुरकंडा धाम पहुंचे, जहां उन्होंने लगभग आधे घंटे तक पूजा-अर्चना की और करीब तीन घंटे तक गहन ध्यान-साधना में समय बिताया।

अपने अनुभव साझा करते हुए सिद्धू ने कहा कि पूरा उत्तराखंड देवभूमि है, लेकिन श्री सुरकंडा धाम में एक विशेष प्रकार की दिव्य ऊर्जा विद्यमान है। उन्होंने इसे “असीम ऊर्जा का स्रोत” बताते हुए कहा कि यहां का आध्यात्मिक वातावरण मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक शक्ति प्रदान करता है।

दिलचस्प बात यह रही कि उनका प्रारंभिक कार्यक्रम केवल तीन दिनों का था, लेकिन मंदिर और वहां के आध्यात्मिक वातावरण से प्रभावित होकर उन्होंने अपना प्रवास एक दिन और बढ़ा दिया।

एक आम श्रद्धालु की तरह पहुंचे सिद्धू

सेलिब्रिटी होने के बावजूद नवजोत सिंह सिद्धू मंदिर में किसी विशेष व्यवस्था या सुरक्षा घेरे के साथ नहीं पहुंचे। उन्होंने एक सामान्य भक्त की तरह मंदिर में दर्शन और साधना की। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने उनके साथ तस्वीरें और सेल्फी भी लीं।

मंदिर समिति से साझा किए सुझाव

मंदिर समिति के प्रबंधक रघुभाई जड़धारी के अनुसार, सिद्धू ने मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ समय बिताया और मंदिर की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने मंदिर की आरती व्यवस्था, पैदल मार्ग की साज-सज्जा तथा कद्दूखाल पार्किंग क्षेत्र के विकास को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में यदि मंदिर समिति को किसी भी प्रकार के सहयोग की आवश्यकता होगी, तो वे हर संभव सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगली बार वे अपने परिवार के साथ श्री सुरकंडा धाम के दर्शन के लिए अवश्य आएंगे।

आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

नवजोत सिंह सिद्धू जैसे प्रसिद्ध व्यक्तित्व का श्री सुरकंडा धाम में ध्यान-साधना के लिए आना न केवल मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता को रेखांकित करता है, बल्कि उत्तराखंड के धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को भी नई पहचान प्रदान करता है। उनके अनुभव और सोशल मीडिया पर साझा किए गए विचार देशभर के श्रद्धालुओं को इस पवित्र धाम की ओर आकर्षित कर सकते हैं।