नई दिल्ली: अगर आप भी अपनी गाड़ी लेकर नेशनल हाईवे (National Highway) पर फर्राटे भरने के शौकीन हैं और ट्रैफिक चालान (Traffic Challan) या टोल टैक्स (Toll Tax) भरने में आनाकानी करते हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बहुत बड़ा 'अलर्ट' है। केंद्र सरकार सड़क हादसों पर लगाम लगाने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) में अब तक का सबसे सख्त संशोधन करने की तैयारी कर रही है।READ ALSO:-भारतीय रेलवे का ऐतिहासिक फैसला: अब 'अमृत भारत' में नहीं करना होगा सीट साझा, RAC का झंझट हमेशा के लिए खत्म! ताजा जानकारी के मुताबिक, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 'सेंट्रल मोटर व्हीकल (सेकेंड अमेंडमेंट) रूल्स, 2026' के तहत सख्ती बढ़ानी शुरू कर दी है। वहीं, आगामी बजट सत्र में एक और बड़ा प्रस्ताव पेश किया जा सकता है, जिसके तहत पुराना हिसाब चुकता न करने वालों को हाईवे पर चढ़ने से ही रोका जा सकता है। क्या है सरकार का नया प्रस्ताव? (New Driving Rules 2026) केंद्र सरकार के इस नए प्रस्ताव का मुख्य मकसद उन लोगों पर शिकंजा कसना है जो ई-चालान (e-challan) को नजरअंदाज करते हैं। बजट सत्र में पेश किए जाने वाले प्रस्ताव के अहम बिंदु इस प्रकार हैं: हाईवे पर नो-एंट्री: यदि किसी वाहन पर ई-चालान या टोल टैक्स बकाया है, तो उसे नेशनल हाईवे पर ड्राइविंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। एडवांस कैमरा सिस्टम (ANPR) ऐसे वाहनों को ट्रैक करेगा और उन्हें रोका जा सकता है। टोल प्लाजा पर सख्ती: मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में संशोधन के बाद, प्रवर्तन एजेंसियों को अधिकार मिलेगा कि वे टोल टैक्स देने में आनाकानी करने वालों के खिलाफ मौके पर ही एक्शन ले सकें। सर्विसेज होंगी ब्लॉक: यह नियम केवल ड्राइविंग तक सीमित नहीं है। अगर आपका पुराना चालान बाकी है, तो गाड़ी से जुड़ी जरूरी सेवाएं जैसे—फिटनेस सर्टिफिकेट (Fitness Certificate), एनओसी (NOC), और परमिट रिन्यूअल रोक दिया जाएगा। क्यों पड़ी इस सख्त संशोधन की जरूरत? सरकार का यह कदम केवल राजस्व वसूली के लिए नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा (Road Safety) को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी जानलेवा साबित हो रही है। बकाया वसूली का पहाड़: साल 2015 से 2025 के बीच देश में करीब 40 करोड़ ई-चालान जारी किए गए। इनसे सरकार को 61,000 करोड़ रुपये की वसूली होनी थी, लेकिन अभी तक इसका सिर्फ एक-तिहाई हिस्सा ही वसूला जा सका है। लोग चालान कटने के बाद उसे भरते ही नहीं हैं। सड़क हादसों का रिकॉर्ड: भारत सड़क हादसों में होने वाली मौतों के मामले में दुनिया में शीर्ष पर है। 2025 में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में 4% से अधिक की वृद्धि देखी गई है। ई-चालान और टोल टैक्स पर 'लिंक' सिस्टम सरकार एक एकीकृत सिस्टम (Integrated System) तैयार कर रही है जो 'वाहन' (Vahan) और 'सारथी' (Sarathi) पोर्टल को फास्टैग (FASTag) और पुलिस डेटाबेस से जोड़ेगा। फिटनेस और ट्रांसफर पर रोक: 20 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, अब वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट का रिन्यूअल और स्वामित्व हस्तांतरण (Ownership Transfer) तब तक नहीं होगा जब तक कि सभी टोल बकाया और चालान क्लियर नहीं हो जाते। कमर्शियल वाहनों पर असर: ट्रांसपोर्ट जगत के लिए यह नियम और भी सख्त है। 'नेशनल परमिट' (National Permit) प्राप्त करने के लिए कमर्शियल वाहनों को यह प्रमाण देना होगा कि उन पर कोई यूजर फीस (User Fee) बकाया नहीं है। पेट्रोल-डीजल पर भी संकट? रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसा सिस्टम भी विचाराधीन है जहां ई-चालान या टोल टैक्स बकाया होने पर वाहन चालक को पेट्रोल पंप पर फ्यूल (Petrol/Diesel) देने से मना किया जा सकता है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए तकनीकी ढांचे पर काम चल रहा है। ड्राइविंग का तरीका बदलने की तैयारी भारत में करीब 45,428 किलोमीटर लंबा टोल रोड नेटवर्क है। नई व्यवस्था में: GNSS टोलिंग: सरकार सैटेलाइट-आधारित टोलिंग (GNSS) की ओर बढ़ रही है, जहां गाड़ी रोकने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन अगर अकाउंट में पैसा नहीं है या पिछला बकाया है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। बैकग्राउंड चेक: जब आप ड्राइविंग लाइसेंस (DL) रिन्यू करवाने जाएंगे, तो आरटीओ अधिकारी सिस्टम पर आपका बैकग्राउंड चेक करेंगे। यदि आप 'बार-बार नियम तोड़ने वाले' (Habitual Offender) पाए गए, तो लाइसेंस रिन्यूअल अटक सकता है। आम जनता के लिए सलाह: अभी क्या करें? नए नियम लागू होने से पहले यह जरूरी है कि आप अपने वाहन का स्टेटस चेक कर लें। अपना चालान चेक करें: सड़क परिवहन मंत्रालय की वेबसाइट (echallan.parivahan.gov.in) पर जाकर अपनी गाड़ी का नंबर डालें और देखें कि कोई पुराना चालान पेंडिंग तो नहीं है। फास्टैग अपडेट रखें: टोल टैक्स चोरी अब भारी पड़ सकती है। अपने फास्टैग केवाईसी (KYC) को अपडेट रखें और बैलेंस मेंटेन करें। लोक अदालत का फायदा उठाएं: कई राज्यों में लंबित चालानों के निपटारे के लिए लोक अदालतें लगाई जाती हैं, जहां आप डिस्काउंट के साथ पुराने चालान भर सकते हैं। आगामी बजट सत्र (Budget Session 2026) सड़क परिवहन नियमों के लिहाज से ऐतिहासिक होने वाला है। "नो चालान पेमेंट, नो हाईवे एंट्री" का यह प्रस्तावित नियम भले ही सख्त लगे, लेकिन इसका उद्देश्य भारतीय सड़कों को सुरक्षित बनाना और अनुशासन लाना है। लापरवाही अब सिर्फ जेब पर भारी नहीं पड़ेगी, बल्कि आपकी गाड़ी को घर के गैराज में खड़ा भी करवा सकती है। केंद्र सरकार मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन कर ट्रैफिक चालान और टोल टैक्स न भरने वालों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। नए नियमों के तहत, बकाया होने पर हाईवे पर ड्राइविंग रोकी जा सकती है और गाड़ियों का फिटनेस सर्टिफिकेट या ट्रांसफर भी ब्लॉक हो जाएगा। यह प्रस्ताव 2026 के बजट सत्र में पेश किया जाएगा। अस्वीकरण: यह रिपोर्ट मीडिया सूत्रों और प्रस्तावित सरकारी योजनाओं पर आधारित है। नियमों के अंतिम रूप से लागू होने पर ही विस्तृत अधिसूचना जारी की जाएगी।)
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने अपनी महत्वाकांक्षी ट्रेन सेवा 'अमृत भारत एक्सप्रेस' को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अगर आप भी ट्रेन में 'आधी सीट' यानी RAC (Reservation Against Cancellation) की समस्या से परेशान थे, तो यह खबर आपके लिए राहत भरी है। रेलवे बोर्ड ने घोषणा की है कि जनवरी 2026 से अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों में RAC टिकट का सिस्टम पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।READ ALSO:-मेरठ में वायु प्रदूषण: 2026 तक सांस लेना होगा आसान, 540 इलेक्ट्रिक बसों और कचरा निस्तारण का मेगा प्लान तैयार इस बदलाव के बाद, यात्रियों को या तो कन्फर्म सीट मिलेगी या फिर वे वेटिंग लिस्ट में रहेंगे, लेकिन उन्हें सीट शेयर करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, रेलवे ने किराए के स्ट्रक्चर (Fare Structure) में भी बड़े बदलाव किए हैं, जिसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। आइये विस्तार से जानते हैं कि अमृत भारत एक्सप्रेस के नए नियम (Amrit Bharat Express New Rules) क्या हैं, किन 12 ट्रेनों में यह बदलाव लागू होगा, और आपकी यात्रा अब कितनी महंगी या आरामदायक होने वाली है। अमृत भारत एक्सप्रेस में अब 'पूरी सीट' की गारंटी अक्सर देखा जाता है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में स्लीपर क्लास के यात्रियों को RAC टिकट थमा दिया जाता है। इसका मतलब है कि एक बर्थ पर दो यात्रियों को बैठकर सफर करना पड़ता है। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक होती है, बल्कि रात के सफर में नींद हराम कर देती है। लेकिन अब, रेलवे ने अपनी 'आम आदमी की खास ट्रेन' यानी अमृत भारत एक्सप्रेस को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। रेलवे द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक: "जनवरी 2026 या उसके बाद शुरू होने वाली अमृत भारत II एक्सप्रेस (Amrit Bharat II Express) सेवाओं में RAC टिकट का कोई प्रावधान नहीं होगा। इन ट्रेनों में यात्रियों को अब कन्फर्म बर्थ ही दी जाएगी।" इसका सीधा मतलब है कि अब अमृत भारत ट्रेनों में यात्रा का अनुभव वंदे भारत जैसा ही प्रीमियम होगा, भले ही यह एक नॉन-एसी ट्रेन है। यात्रियों को अब साइड लोअर बर्थ पर किसी अजनबी के साथ सीट साझा करने की चिंता नहीं करनी होगी। किराए में बड़ा बदलाव: कम दूरी का सफर पड़ेगा महंगा सिर्फ सीटिंग ही नहीं, रेलवे ने अमृत भारत एक्सप्रेस के किराए के नियमों में भी 'मिनिमम चार्जेबल डिस्टेंस' (Minimum Chargeable Distance) का पेंच जोड़ा है। यह बदलाव उन यात्रियों के लिए झटका हो सकता है जो इन प्रीमियम ट्रेनों का इस्तेमाल बहुत छोटी दूरी के लिए करना चाहते थे। अमृत भारत एक्सप्रेस के नए नियम के तहत किराए का गणित इस प्रकार है: स्लीपर क्लास (Sleeper Class): अगर आप स्लीपर क्लास में टिकट बुक करते हैं, तो आपको कम से कम 200 किलोमीटर का किराया देना होगा, भले ही आपकी यात्रा 50 या 100 किलोमीटर की ही क्यों न हो। न्यूनतम किराया: 200 किमी की दूरी के लिए बेसिक स्लीपर किराया 149 रुपये तय किया गया है। सेकंड क्लास/जनरल (Second Class Unreserved): अनारक्षित कोच या जनरल टिकट के लिए न्यूनतम दूरी की सीमा 50 किलोमीटर रखी गई है। न्यूनतम किराया: 50 किमी की दूरी के लिए बेसिक किराया 36 रुपये से शुरू होगा। नोट: इस बेसिक किराए के ऊपर रिजर्वेशन चार्ज, सुपरफास्ट सरचार्ज और अन्य कर (यदि लागू हों) अतिरिक्त रूप से लिए जाएंगे। भीड़ कम करने की रणनीति? विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे ने 'मिनिमम डिस्टेंस चार्ज' का नियम इसलिए लागू किया है ताकि लंबी दूरी की इन ट्रेनों में लोकल यात्रियों की भीड़ को कम किया जा सके। अक्सर देखा जाता है कि लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों में छोटी दूरी के यात्री चढ़ जाते हैं, जिससे दूर का सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी होती है। 200 किमी का न्यूनतम किराया रखने से केवल वही यात्री स्लीपर बुक करेंगे जिन्हें वास्तव में लंबी यात्रा करनी है। इन 12 ट्रेनों में लागू होगा नो-RAC नियम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाई गई 12 नई अमृत भारत ट्रेनों में यह नियम सबसे पहले लागू होगा। ये ट्रेनें देश के विभिन्न कोनों को जोड़ती हैं। अगर आपने इनमें से किसी ट्रेन में टिकट बुक करने का प्लान बनाया है, तो लिस्ट जरूर चेक कर लें। अमृत भारत ट्रेनों की लिस्ट (No RAC Allowed List): गुवाहाटी (कामाख्या) ⇋ रोहतक अमृत भारत एक्सप्रेस: पूर्वोत्तर भारत को हरियाणा से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण ट्रेन। डिब्रूगढ़ ⇋ लखनऊ (गोमती नगर) अमृत भारत एक्सप्रेस: यूपी और असम के बीच संपर्क बढ़ाएगी। न्यू जलपाईगुड़ी ⇋ नागरकोइल अमृत भारत एक्सप्रेस: उत्तर बंगाल से दक्षिण भारत तक की लंबी यात्रा। न्यू जलपाईगुड़ी ⇋ तिरुचिरापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस: दक्षिण भारत के धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली सेवा। अलीपुरद्वार ⇋ एसएमवीटी बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस: पश्चिम बंगाल से भारत की सिलिकॉन वैली तक। अलीपुरद्वार ⇋ मुंबई (पनवेल) अमृत भारत एक्सप्रेस: बंगाल और महाराष्ट्र के बीच प्रवासियों के लिए वरदान। कोलकाता (संतरागाछी) ⇋ ताम्बरम अमृत भारत एक्सप्रेस: चेन्नई और कोलकाता के बीच तेज कनेक्टिविटी। कोलकाता (हावड़ा) ⇋ आनंद विहार टर्मिनल अमृत भारत एक्सप्रेस: दिल्ली-हावड़ा रूट पर आम आदमी की सुपरफास्ट। कोलकाता (सियालदह) ⇋ बनारस अमृत भारत एक्सप्रेस: काशी विश्वनाथ के दर्शनार्थियों के लिए खास। तिरुवनंतपुरम सेंट्रल ⇋ तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस: दक्षिण भारत के भीतर इंटर-सिटी कनेक्टिविटी। तिरुवनंतपुरम उत्तर ⇋ चार्लापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस: केरल और तेलंगाना को जोड़ने वाली सेवा। नागरकोइल जंक्शन ⇋ मंगलुरु जंक्शन अमृत भारत एक्सप्रेस: तटीय इलाकों के यात्रियों के लिए सुविधा। RAC क्या है और इसे हटाना क्यों जरूरी था? जो लोग रेलवे के नियमों से ज्यादा वाकिफ नहीं हैं, उनके लिए यह समझना जरूरी है कि RAC (Reservation Against Cancellation) क्या होता है। भारतीय रेलवे में जब कन्फर्म सीटें भर जाती हैं, तो यात्रियों को RAC टिकट दिया जाता है। पुरानी व्यवस्था: स्लीपर क्लास में साइड लोअर बर्थ (Side Lower Berth) को दो RAC यात्रियों के बीच बांट दिया जाता है। यानी, एक सीट पर दो लोग बैठकर पूरी रात सफर करते हैं। नई समस्या: अमृत भारत एक्सप्रेस एक 'पुश-पुल' तकनीक (Push-Pull Technology) वाली हाई-स्पीड ट्रेन है। इसे आरामदायक यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है। ऐसे में एक ही सीट पर दो लोगों को बैठाना इस ट्रेन की 'ब्रांड वैल्यू' और यात्री सुविधा के खिलाफ था। रेलवे का यह कदम स्पष्ट करता है कि सरकार अब 'क्वांटिटी' (संख्या) की जगह 'क्वालिटी' (गुणवत्ता) पर ध्यान दे रही है। अमृत भारत एक्सप्रेस के नए नियम लागू होने से वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने की उम्मीद तो कम नहीं होगी, लेकिन जिन्हें टिकट मिलेगा, उनका सफर राजाओं जैसा होगा। यात्रियों के लिए क्या बदलेगा? (Analysis) इस फैसले के दो पहलू हैं। आइए समझते हैं कि एक आम यात्री के तौर पर यह आपके लिए कैसे फायदेमंद या नुकसानदेह हो सकता है। फायदे (Pros): आरामदायक सफर: अब आपको अपनी बर्थ किसी और के साथ शेयर नहीं करनी पड़ेगी। पूरी सीट का मतलब है पूरी नींद। भीड़ से मुक्ति: स्लीपर कोच में अक्सर RAC और वेटिंग वालों की वजह से पैर रखने की जगह नहीं होती थी। अब कोच में उतने ही लोग होंगे जितनी सीटें हैं। स्पष्टता: बुकिंग के समय ही पता चल जाएगा कि टिकट कन्फर्म है या नहीं। 'शायद सीट मिल जाए' वाला भ्रम नहीं रहेगा। चुनौतियां (Cons): महंगा टिकट: अगर आपको पास के शहर (जैसे 60-70 किमी दूर) जाना है, तो भी आपको 200 किमी का किराया देना पड़ेगा। इससे दैनिक यात्रियों की जेब पर बोझ बढ़ेगा। टिकट की उपलब्धता: चूंकि RAC खत्म कर दिया गया है, इसका मतलब है कि ट्रेन की कुल क्षमता तकनीकी रूप से थोड़ी कम हो जाएगी (क्योंकि RAC के जरिए एक्स्ट्रा यात्री यात्रा कर लेते थे)। पीक सीजन में कन्फर्म टिकट मिलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। अमृत भारत एक्सप्रेस: आम आदमी की वंदे भारत अमृत भारत एक्सप्रेस को 2023 में लॉन्च किया गया था। यह एक नॉन-एसी (Non-AC) ट्रेन है, जिसे खास तौर पर आम आदमी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें वंदे भारत जैसी कई सुविधाएं हैं, जैसे: झटके रहित यात्रा के लिए विशेष कप्लर्स। बेहतर टॉयलेट और वॉशबेसिन। हर सीट पर चार्जिंग पॉइंट और मोबाइल होल्डर। आकर्षक इंटीरियर और आरामदायक सीटें। जनवरी 2026 से लागू होने वाले ये नियम अमृत भारत के 'अपग्रेडेड वर्जन' (Amrit Bharat II) के लिए हैं। भारतीय रेलवे का यह फैसला साहसिक और यात्री-हितैषी है। अमृत भारत एक्सप्रेस के नए नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि जो यात्री टिकट के पैसे दे रहा है, उसे सफर का पूरा आनंद मिले। हालांकि, 200 किमी का न्यूनतम किराया और RAC का खात्मा कुछ लोगों को परेशान कर सकता है, लेकिन लंबी दूरी की आरामदायक यात्रा के लिए यह एक आवश्यक कदम था। अगर आप 2026 में इन 12 रूट्स पर यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं, तो अपनी टिकट पहले से बुक कर लें, क्योंकि अब 'जुगाड़' (RAC) वाली सीट नहीं मिलेगी! रेलवे ने 12 अमृत भारत ट्रेनों में जनवरी 2026 से RAC टिकट बंद कर दिए हैं। अब यात्रियों को फुल बर्थ मिलेगी। साथ ही स्लीपर में न्यूनतम 200 किमी और जनरल में 50 किमी का किराया लगेगा। यह फैसला यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए लिया गया है। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) Q1: क्या पुरानी ट्रेनों में भी RAC खत्म हो गया है? Ans: नहीं, यह नियम केवल नयी शुरू हुई 12 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों पर लागू है। राजधानी, शताब्दी और सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों में RAC नियम पहले की तरह ही रहेंगे। Q2: अगर मैंने पहले ही टिकट बुक कर लिया है, तो क्या होगा? Ans: यह नियम जनवरी 2026 से प्रभावी है। यदि आपने एडवांस बुकिंग की है और आपको RAC मिला है, तो रेलवे के अपडेट का इंतजार करें, संभवतः उसे कन्फर्म किया जाएगा या फुल रिफंड का विकल्प मिलेगा (अधिसूचना के आधार पर)। Q3: अमृत भारत ट्रेन का किराया कितना है? Ans: इसका किराया सामान्य मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों से लगभग 15-17% अधिक है, लेकिन इसमें सुविधाएं और स्पीड भी ज्यादा है। (नोट: यह जानकारी रेलवे द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचनाओं और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। यात्रा से पहले कृपया IRCTC या रेलवे पूछताछ सेवा 139 से पुष्टि करें।)
नई दिल्ली: यदि आप भी उन लाखों उपभोक्ताओं में शामिल हैं जो रसोई गैस (LPG) का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार ने एलपीजी सब्सिडी (LPG Subsidy) और गैस कनेक्शन में पारदर्शिता लाने के लिए आधार कार्ड को एलपीजी कनेक्शन से लिंक करना (Aadhaar-LPG Linking) अनिवार्य कर दिया है। अगर आपने अभी तक यह जरूरी काम नहीं किया है, तो आपको भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।READ ALSO:-यूपी बोर्ड 2026: प्रैक्टिकल परीक्षा की तारीखों में बड़ा फेरबदल! 29-30 जनवरी को भी होंगे एग्जाम, सचिव ने जारी किया 'अर्जेंट' आदेश हाल ही में हुए नियमों में बदलाव और सख्ती के बाद, जिन उपभोक्ताओं का आधार उनके गैस कनेक्शन और बैंक खाते से लिंक नहीं है, उनकी सब्सिडी रोकी जा रही है। केवल इतना ही नहीं, भविष्य में बिना केवाईसी (KYC) वाले कनेक्शन को अवैध मानकर बंद भी किया जा सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आप घर बैठे या एजेंसी जाकर अपने आधार को एलपीजी से कैसे लिंक कर सकते हैं और इसके लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होगी। आधार-एलपीजी लिंक क्यों है जरूरी? (Why Aadhaar-LPG Link is Mandatory) सरकार द्वारा चलाई जा रही 'पहल' (PAHAL - DBTL) योजना के तहत, गैस सब्सिडी का पैसा सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खाते में भेजा जाता है। इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए दो चीजें होना अनिवार्य हैं: एलपीजी कनेक्शन का आधार से लिंक होना। बैंक खाते का आधार से लिंक होना। यदि इनमें से कोई भी एक कड़ी टूटी हुई है, तो सिस्टम सब्सिडी की राशि को प्रोसेस नहीं कर पाएगा और आपको सिलेंडर बाजार मूल्य (Non-Subsidized Rate) पर ही खरीदना पड़ेगा। पिछले कुछ महीनों में बायोमेट्रिक ई-केवाईसी (Biometric e-KYC) पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि फर्जी या 'घोस्ट' कनेक्शनों को हटाया जा सके। लिंकिंग के लिए जरूरी फॉर्म (Forms Required) जैसा कि आपने जाना, इस प्रक्रिया के लिए मुख्य रूप से दो फॉर्म की आवश्यकता होती है। यह उन लोगों के लिए सबसे कारगर तरीका है जो तकनीकी पचड़ों में नहीं पड़ना चाहते या जिनका मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है। फॉर्म 1 (Form 1): यह फॉर्म बैंक के लिए होता है। इसे भरकर आपको अपनी बैंक शाखा में जमा करना होता है ताकि आपका बैंक खाता आधार से जुड़ जाए और सब्सिडी सीधे खाते में आए। फॉर्म 2 (Form 2): यह एलपीजी लिंकिंग फॉर्म है। इसे भरकर आपको अपनी गैस एजेंसी (डिस्ट्रीब्यूटर) के पास जमा करना होता है। इससे आपकी एलपीजी आईडी (LPG ID) आपके आधार नंबर के साथ मैप हो जाती है। आप ये दोनों फॉर्म अपनी गैस कंपनी (Indane, HP, Bharat Gas) की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं या डिस्ट्रीब्यूटर के ऑफिस से प्राप्त कर सकते हैं। आधार को एलपीजी से लिंक करने के तरीके (Step-by-Step Guide) आप अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन, किसी भी माध्यम का चुनाव कर सकते हैं। यहाँ दोनों प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई है। 1. ऑफलाइन तरीका (Offline Method - Agency Visit) यह सबसे विश्वसनीय तरीका माना जाता है, खासकर यदि आप इंटरनेट का उपयोग करने में सहज नहीं हैं। फॉर्म प्राप्त करें: सबसे पहले अपने नजदीकी एलपीजी वितरक (Distributor) के कार्यालय जाएं। वहां से 'सब्सिडी फॉर्म' (PAHAL joining form) मांगें। दस्तावेज़ तैयार रखें: फॉर्म भरने के साथ-साथ आपको अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी, पासबुक की कॉपी और एक पासपोर्ट साइज फोटो की जरूरत होगी। जानकारी भरें: फॉर्म 2 में अपना नाम, एलपीजी कंज्यूमर नंबर (Consumer Number), 17 अंकों की एलपीजी आईडी और आधार नंबर सही-सही भरें। जमा करें: भरे हुए फॉर्म को दस्तावेजों के साथ डिस्ट्रीब्यूटर के पास जमा करें। जमा करते समय पावती रसीद (Acknowledgment Slip) लेना न भूलें। वेरिफिकेशन: एजेंसी आपके दस्तावेजों की जांच करेगी और करीब एक हफ्ते के भीतर आपका आधार लिंक हो जाएगा। आपको मोबाइल पर इसका कन्फर्मेशन मैसेज भी मिलेगा। 2. ऑनलाइन तरीका (Online Method) तकनीक के इस दौर में आप घर बैठे भी यह काम कर सकते हैं। हालाँकि, पूरी प्रक्रिया के लिए कभी-कभी डिस्ट्रीब्यूटर की मंजूरी की जरूरत होती है, लेकिन आवेदन ऑनलाइन किया जा सकता है। स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले mylpg.in वेबसाइट पर जाएं। यहाँ आपको तीनों प्रमुख कंपनियों (Bharat Gas, HP Gas, Indane) के सिलेंडर की फोटो दिखेगी। अपने कनेक्शन वाली कंपनी के सिलेंडर पर क्लिक करें। स्टेप 2: साइन-इन या रजिस्टर करें अगर आपने पहले अकाउंट नहीं बनाया है, तो 'New User' पर क्लिक करके अपना कंज्यूमर नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालकर आईडी बनाएं। अगर आईडी है, तो 'Sign In' करें। स्टेप 3: आधार लिंकिंग विकल्प चुनें लॉगिन करने के बाद डैशबोर्ड पर आपको 'View/Update Aadhaar' या 'Link Aadhaar' का विकल्प मिलेगा। उस पर क्लिक करें। स्टेप 4: आधार विवरण भरें यहाँ आपको अपना 12 अंकों का आधार नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद सत्यापन के लिए आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा। स्टेप 5: सबमिट करें ओटीपी दर्ज करने के बाद 'Submit' बटन पर क्लिक करें। आपकी रिक्वेस्ट दर्ज हो जाएगी और यूआईडीएआई (UIDAI) से वेरिफिकेशन के बाद आधार लिंक हो जाएगा। कंपनी-वार लिंकिंग प्रक्रिया (Company-wise Process) इंडेन गैस (Indane Gas) उपभोक्ताओं के लिए वेबसाइट: indane.co.in पर जाएं। IVRS: आप अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से इंडेन के IVRS नंबर 1800-233-3555 पर कॉल करके निर्देशों का पालन कर सकते हैं। SMS: यदि आपका मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड है, तो आप SMS भेजकर भी लिंक कर सकते हैं। मैसेज बॉक्स में लिखें: UID <Aadhaar Number> और इसे अपनी क्षेत्र की इंडेन गैस डीलर के नंबर पर भेज दें। भारत गैस (Bharat Gas) उपभोक्ताओं के लिए वेबसाइट: https://www.google.com/search?q=ebharatgas.com पर जाएं। पोस्ट द्वारा: वेबसाइट से फॉर्म डाउनलोड करें, उसे भरें और आवश्यक दस्तावेजों के साथ 'भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड' (BPCL) के पते पर डाक द्वारा भेज दें। IVRS: 24x7 हेल्पलाइन नंबर 1800-22-4344 पर कॉल करें और हिंदी या अंग्रेजी भाषा चुनने के बाद आधार अपडेट का विकल्प चुनें। एचपी गैस (HP Gas) उपभोक्ताओं के लिए वेबसाइट: myhpgas.in पर लॉगिन करें। मोबाइल ऐप: 'HP Pay' ऐप डाउनलोड करके भी आधार लिंक किया जा सकता है। IVRS: एचपी गैस उपभोक्ता भी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके बायोमेट्रिक या ओटीपी के जरिए सत्यापन पूरा कर सकते हैं। बायोमेट्रिक ई-केवाईसी (Biometric e-KYC): नया अपडेट सिर्फ आधार नंबर लिंक करना ही अब काफी नहीं है। हाल ही में तेल विपणन कंपनियों ने निर्देश दिए हैं कि सभी उपभोक्ताओं को अपनी एजेंसी पर जाकर एक बार बायोमेट्रिक सत्यापन (Biometric Authentication) करवाना होगा। इसके लिए आपको गैस एजेंसी जाना होगा। वहां फिंगरप्रिंट स्कैनर या फेस स्कैनर के जरिए आपकी पहचान की पुष्टि की जाएगी। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए है कि कनेक्शन का उपयोग वही व्यक्ति कर रहा है जिसके नाम पर कनेक्शन जारी है। अगर आप बुजुर्ग हैं या बीमार हैं, तो कुछ एजेंसियां घर आकर भी यह सुविधा दे रही हैं (इसके लिए एजेंसी से संपर्क करें)। सब्सिडी आ रही है या नहीं? ऐसे चेक करें (How to Check Subsidy Status) आधार लिंक करने के बाद यह जांचना जरूरी है कि सब्सिडी शुरू हुई या नहीं। mylpg.in पर जाएं और अपनी गैस कंपनी चुनें। 'Give up Subsidy' या 'Audit Distributor' जैसे विकल्पों के पास आपको 'Check Subsidy Status' का लिंक मिल सकता है (कंपनियों के इंटरफेस अलग-अलग हो सकते हैं)। सबसे आसान तरीका है कि लॉगिन करें और 'View Cylinder Booking History' देखें। वहां आपको पिछले सिलेंडरों की बुकिंग के साथ सब्सिडी की राशि और ट्रांसफर की तारीख दिखाई देगी। यदि राशि 0.00 है या खाली है, तो इसका मतलब है कि या तो आधार लिंक नहीं है या आपकी आय 10 लाख सालाना से अधिक है। आधार लिंक करते समय ध्यान रखने योग्य बातें नाम में अंतर: अगर आपके एलपीजी कनेक्शन और आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग अलग-अलग है, तो लिंकिंग फेल हो सकती है। पहले आधार या गैस कनेक्शन में नाम सुधरवाएं। मोबाइल नंबर: कोशिश करें कि गैस कनेक्शन और आधार कार्ड में एक ही मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड हो, इससे ओटीपी वेरिफिकेशन आसान हो जाता है। बैंक खाता: जिस बैंक खाते को आप लिंक कर रहे हैं, वह सक्रिय (Active) होना चाहिए। जन-धन खातों में कभी-कभी लिमिट क्रॉस होने पर पैसा अटक जाता है। LPG कनेक्शन को आधार से लिंक करना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। 'मेरठ साउथ से मोदीपुरम' जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की तरह ही, डिजिटल भारत का यह ढांचा भी पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है। अगर आप बिना किसी रुकावट के सब्सिडी का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आज ही ऊपर बताए गए तरीकों में से किसी एक का इस्तेमाल करें। याद रखें, थोड़ी सी लापरवाही आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। अगर ऑनलाइन प्रक्रिया में कोई दिक्कत आ रही हो, तो सीधे अपनी गैस एजेंसी जाकर फॉर्म 1 और 2 जमा करना सबसे बेहतर विकल्प है।
नई दिल्ली: भारतीय सड़कों पर फर्राटा भरने वालों और ट्रैफिक नियमों (Traffic Rules) को अपनी जेब में रखने वालों के लिए अब खतरे की घंटी बज चुकी है। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो रेड लाइट (Red Light) को सजावट समझते हैं या हेलमेट (Helmet) को सिर का बोझ, तो संभल जाइए। केंद्र सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है।READ ALSO:-Bijnor Crime News: शिक्षा का मंदिर हुआ शर्मसार, शिवाला कला में छात्रा से दुष्कर्म करने वाला ट्यूशन टीचर गिरफ्तार 1 जनवरी 2026 से मोटर वाहन नियमों में हुए ऐतिहासिक बदलावों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब गलती करने पर सिर्फ आपकी जेब ढीली नहीं होगी, बल्कि आपकी गाड़ी चलाने की आजादी भी छिन सकती है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने नियमों में जो संशोधन किए हैं, उनका सीधा मकसद सड़कों पर अनुशासन लाना और हादसों को रोकना है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि यह नया "5 स्ट्राइक नियम" क्या है, टोल टैक्स को लेकर क्या पेंच फंसा है, और दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में कैसे आपकी हर हरकत पर नजर रखी जा रही है। नया नियम: '5 गलतियां और आप आउट' (The 5-Strike Rule) सड़क परिवहन मंत्रालय ने क्रिकेट की तरह ही अब सड़कों के लिए भी कड़े नियम तय कर दिए हैं। जैसे 3 स्टंप उखड़ने पर खिलाड़ी आउट होता है, वैसे ही अब 5 ट्रैफिक उल्लंघन (Traffic Violations) करने पर आप 'ड्राइवर सीट' से आउट हो जाएंगे। क्या है यह नियम? मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यदि कोई वाहन चालक एक कैलेंडर वर्ष (1 जनवरी से 31 दिसंबर) के भीतर 5 या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License - DL) तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया जाएगा। सस्पेंशन की अवधि: ड्राइविंग लाइसेंस 3 महीने के लिए निलंबित किया जाएगा। प्रभावी तारीख: यह प्रावधान 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में लागू हो चुका है। कौन सी गलतियाँ पड़ेंगी भारी? अक्सर लोग सोचते हैं कि लाइसेंस सस्पेंड सिर्फ बड़े अपराधों जैसे 'ड्रंकन ड्राइविंग' (शराब पीकर गाड़ी चलाना) या 'हिट एंड रन' में होता है। लेकिन नए नियमों ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। अब 'छोटी' मानी जाने वाली गलतियां भी आपके रिकॉर्ड में 'ब्लैक मार्क' बनेंगी: हेलमेट न पहनना: अगर आप दोपहिया वाहन बिना हेलमेट चला रहे हैं। सीट बेल्ट की अनदेखी: कार चलाते समय सीट बेल्ट न लगाना। रेड लाइट जंप करना: लाल बत्ती पार करना। स्टॉप लाइन क्रॉस करना: जेब्रा क्रॉसिंग या स्टॉप लाइन के ऊपर गाड़ी रोकना। मोबाइल का प्रयोग: ड्राइविंग के दौरान फोन पर बात करना। यदि साल भर में इन गलतियों का कुल योग 5 तक पहुँच गया, तो समझ लीजिए कि अगले 3 महीने आप पैदल चलने वाले हैं। विशेष नोट: "पुराने चालान (2025 या उससे पहले के) इस गिनती में शामिल नहीं होंगे। हर साल 1 जनवरी से आपका रिकॉर्ड 'रीसेट' (Reset) होगा और नई गिनती शुरू होगी। यह चालकों को सुधरने का एक मौका देने जैसा है।" पहले सिर्फ चालान, अब लाइसेंस पर वार: क्यों बदला कानून? अब तक की व्यवस्था में, अगर आप हेलमेट नहीं पहनते थे तो 1000 रुपये का चालान कटता था। अगर आप अमीर हैं, तो आप चालान भरते थे और अगली बार फिर वही गलती करते थे। इसे 'आदतन अपराधी' (Habitual Offenders) की श्रेणी में रखा जाता है। सरकार की सोच: सरकार ने पाया कि सिर्फ आर्थिक दंड (Fine) लोगों के व्यवहार में बदलाव नहीं ला रहा है। लोग चालान को 'फीस' समझकर भर देते हैं और नियम तोड़ना जारी रखते हैं। मनोवैज्ञानिक असर: लाइसेंस सस्पेंड होने का डर पैसे जाने के डर से कहीं ज्यादा बड़ा होता है। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह नौकरीपेशा हो या व्यवसायी, 3 महीने तक बिना गाड़ी के रहने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगा। दुर्घटनाओं में कमी: सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल लाखों लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं। इनमें से अधिकतर हादसे रेड लाइट जंपिंग और ओवरस्पीडिंग के कारण होते हैं। इस सख्त नियम का उद्देश्य इन आंकड़ों को नीचे लाना है। ड्राइवर को मिलेगा अपना पक्ष रखने का 'पूरा मौका' लोकतंत्र में किसी को भी बिना सुनवाई के सजा नहीं दी जा सकती। नए मोटर वाहन नियमों में 'प्राकृतिक न्याय' (Natural Justice) के सिद्धांत का पूरा पालन किया गया है। सस्पेंशन की प्रक्रिया (Process of Suspension): ऐसा नहीं है कि 5वां चालान कटते ही उसी वक्त पुलिस आपका लाइसेंस छीन लेगी। इसकी एक विधि सम्मत प्रक्रिया होगी: नोटिस (Show Cause Notice): जब सिस्टम (सॉफ्टवेयर) देखेगा कि आपके नाम पर इस साल 5 चालान हो चुके हैं, तो आरटीओ (RTO) आपको एक 'कारण बताओ नोटिस' भेजेगा। सुनवाई (Hearing): आपको अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। हो सकता है कि कोई चालान गलती से कटा हो, या उस वक्त गाड़ी कोई और चला रहा हो। फैसला: अगर आप संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं या यह साबित हो जाता है कि गलतियां आपने ही की हैं, तभी सस्पेंशन ऑर्डर जारी होगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि "बिना सुनवाई के कोई भी एकतरफा कार्रवाई न की जाए।" यह सुनिश्चित करता है कि सिस्टम का दुरुपयोग न हो। टोल टैक्स चोरों की खैर नहीं: गाड़ी बेचना होगा नामुमकिन! नियमों में दूसरा सबसे बड़ा बदलाव टोल टैक्स (Toll Tax) और वाहनों की खरीद-फरोख्त को लेकर किया गया है। यह बदलाव सीधे तौर पर उन लोगों पर असर डालेगा जो फास्टैग (FASTag) में बैलेंस न होने पर टोल लेन में घुस जाते हैं या टोल देने से बचते हैं। नया 'टोल-लिंक' सिस्टम: अब आपके वाहन का 'टोल पेमेंट हिस्ट्री' सीधे 'वाहन पोर्टल' (Vahan Portal) से जुड़ गया है। बकाया टोल का असर: यदि किसी गाड़ी पर कोई टोल टैक्स बकाया (Pending) है, तो उस गाड़ी के साथ निम्नलिखित चीजें नहीं की जा सकेंगी: गाड़ी बेचना (Transfer of Ownership): आप अपनी कार या बाइक किसी दूसरे को बेच नहीं पाएंगे क्योंकि आरटीओ में ट्रांसफर ही नहीं होगा। फिटनेस सर्टिफिकेट (Fitness Certificate): कमर्शियल वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू नहीं होगा। NOC: दूसरे राज्य में जाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी नहीं किया जाएगा। डिजिटल ट्रैकिंग और फ्री-फ्लो टोलिंग की नींव एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह नियम भारत में आने वाले GPS आधारित टोल सिस्टम (GNSS) की तैयारी है। सरकार बैरियर-लेस टोलिंग (बिना रुकावट के टोल) लाना चाहती है। जब बैरियर नहीं होंगे, तो टोल अपने आप कटेगा। अगर किसी के खाते में पैसे नहीं हुए, तो वह 'बकाया' माना जाएगा। उस बकाया को वसूलने के लिए सरकार ने यह 'गाड़ी न बिकने' वाला लॉक सिस्टम लगाया है। इससे राजस्व (Revenue) का घाटा रुकेगा। दिल्ली-मुंबई में 'तीसरी आँख' का पहरा: टेक्नोलॉजी का खेल अगर आप सोच रहे हैं कि पुलिस तो हर जगह खड़ी नहीं होती, तो हम बच निकलेंगे, तो आप गलतफहमी में हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और नोएडा जैसे महानगरों में अब ITMS (Intelligent Traffic Management System) ने कमान संभाल ली है। कैसे पकड़े जाएंगे आप? CCTV चालान: चौराहों पर लगे हाई-डेफिनिशन कैमरे अब न सिर्फ नंबर प्लेट पढ़ते हैं, बल्कि यह भी देख लेते हैं कि ड्राइवर ने सीट बेल्ट बांधी है या नहीं। ऑटोमैटिक डेटाबेस अपडेट: जैसे ही कैमरा आपको नियम तोड़ते हुए पकड़ेगा, वह तुरंत ई-चालान (E-Challan) जनरेट करेगा। यह चालान सीधे केंद्रीय डेटाबेस में जाएगा और आपकी '5 गलतियों' वाली लिस्ट में जुड़ जाएगा। कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं: इसमें सिफारिश नहीं चलेगी। कंप्यूटर ने अगर 5वीं गलती दर्ज कर ली, तो नोटिस अपने आप जनरेट हो जाएगा। आंकड़े गवाह हैं: दिल्ली पुलिस ने पिछले साल ही लाखों चालान सिर्फ कैमरों की मदद से काटे थे। अब 2026 में इनकी संख्या और बढ़ने वाली है क्योंकि निगरानी बढ़ा दी गई है। नए नियमों का आम आदमी पर असर: कुछ उदाहरण आइए समझते हैं कि यह नियम आम जिंदगी को कैसे प्रभावित करेगा: परिस्थिति 1: ऑफिस जाने वाला व्यक्ति राहुल रोज अपनी बाइक से ऑफिस जाता है। उसे जल्दबाजी रहती है। जनवरी में: उसने रेड लाइट जंप की (1 स्ट्राइक)। फरवरी में: हेलमेट घर भूल गया (2 स्ट्राइक)। मार्च में: गलत दिशा (Wrong Side) में गाड़ी चलाई (3 स्ट्राइक)। मई में: फिर से रेड लाइट जंप की (4 स्ट्राइक)। जून में: राहुल ने फिर गलती की। नतीजा: जून में राहुल का लाइसेंस सस्पेंड हो जाएगा। अब जुलाई, अगस्त और सितंबर में वह अपनी बाइक नहीं चला पाएगा। उसे कैब या मेट्रो से जाना होगा, जिससे उसका खर्च बढ़ेगा। परिस्थिति 2: ट्रक ड्राइवर एक ट्रक ड्राइवर का टोल बकाया है। वह सोचता है कि बाद में देख लेंगे। जब साल के अंत में मालिक ट्रक का फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू कराने जाएगा, तो सिस्टम मना कर देगा। जब तक पुराना टोल नहीं भरा जाता, ट्रक सड़क पर नहीं उतर पाएगा। इससे बिजनेस का नुकसान होगा। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों की राय सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ (Road Safety Experts) इस कदम को भारत के ट्रैफिक सुधार में 'गेम चेंजर' मान रहे हैं। "अभी तक भारत में ड्राइविंग लाइसेंस को एक 'अधिकार' माना जाता था, जबकि यह एक 'विशेषाधिकार' (Privilege) है। अगर आप नियमों का पालन नहीं कर सकते, तो आपको सड़क पर गाड़ी चलाने का कोई हक नहीं है। 5 चालान की सीमा बहुत तार्किक है। एक साल में 5 बार गलती करना यह दिखाता है कि ड्राइवर लापरवाह है।" वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि टोल को फिटनेस और ट्रांसफर से जोड़ने से NHAI (National Highways Authority of India) को करोड़ों रुपये के डूबे हुए राजस्व की वसूली में मदद मिलेगी। 8. चालान और सस्पेंशन से कैसे बचें? (Tips to Avoid Trouble) नए नियमों के डर के बीच, बचने का रास्ता बहुत सीधा और सरल है—नियमों का पालन। यहाँ कुछ टिप्स दिए गए हैं: DigiLocker का इस्तेमाल करें: अपने डॉक्यूमेंट्स हमेशा डिजिटल फॉर्म में साथ रखें ताकि 'दस्तावेज न होने' का चालान न कटे। ई-चालान स्टेटस चेक करें: महीने में एक बार parivahan.gov.in पर जाकर अपनी गाड़ी का चालान स्टेटस चेक करें। अगर कोई पेंडिंग चालान है, तो उसे तुरंत भरें (हालांकि 5 की गिनती में भुगतान करने से स्ट्राइक कम नहीं होगी, लेकिन रिकॉर्ड साफ रहेगा)। मोबाइल होल्डर का प्रयोग: अगर नेविगेशन देखना है, तो मोबाइल हाथ में न पकड़ें, होल्डर का इस्तेमाल करें। स्टॉप लाइन का सम्मान: रेड लाइट पर हमेशा सफेद पट्टी से पीछे गाड़ी रोकें। कैमरे अक्सर इसी गलती को पकड़ते हैं। सुधार का मौका या जेब पर डाका? सरकार का यह कदम सख्त जरूर है, लेकिन सड़कों पर बहते खून को रोकने के लिए शायद यही कड़वी दवा जरूरी थी। 1 जनवरी 2026 से शुरू हुआ यह नया अध्याय भारतीय ड्राइवरों की मानसिकता को बदलने का काम करेगा। यह सिर्फ राजस्व या चालान का मामला नहीं है, यह मामला है 'जीवन रक्षा' का। अगर यह डर कि "मेरा लाइसेंस छिन जाएगा" किसी को हेलमेट पहनने पर मजबूर करता है, तो यह कानून सफल माना जाएगा। अब गेंद आपकी पाले में है। क्या आप 2026 में एक जिम्मेदार नागरिक की तरह गाड़ी चलाएंगे, या फिर 3 महीने के लिए पैदल चलने की तैयारी करेंगे? फैसला आपका है। FAQs: पाठकों के मन में उठने वाले सवाल Q1: क्या पिछले साल के पेंडिंग चालान भी 5 की लिमिट में गिने जाएंगे? Ans: नहीं, यह नियम 1 जनवरी 2026 से लागू हुआ है और हर साल 1 जनवरी को मीटर रीसेट होगा। पिछले साल के चालान इसमें नहीं जुड़ेंगे। Q2: अगर मेरा लाइसेंस सस्पेंड हो गया, तो क्या मैं गाड़ी चला सकता हूँ? Ans: बिल्कुल नहीं। सस्पेंशन के दौरान गाड़ी चलाते पकड़े जाने पर भारी जुर्माना (10,000 रुपये तक) और जेल की सजा का प्रावधान है। Q3: क्या मैं सस्पेंशन के खिलाफ अपील कर सकता हूँ? Ans: हाँ, लाइसेंस सस्पेंड करने से पहले आपको सुनवाई का मौका मिलेगा। आप आरटीओ या न्यायालय में अपील कर सकते हैं। Q4: टोल टैक्स बकाया कैसे चेक करें? Ans: आप अपने फास्टैग ऐप या संबंधित बैंक के पोर्टल पर जाकर अपना बैलेंस और बकाया चेक कर सकते हैं। Q5: क्या यह नियम सिर्फ दिल्ली-मुंबई में लागू है? Ans: नहीं, मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) एक केंद्रीय कानून है। यह नियम पूरे भारत में लागू है, हालांकि बड़े शहरों में कैमरों की वजह से इसे लागू करना ज्यादा आसान है। (अस्वीकरण: यह लेख उपलब्ध जानकारी और सरकारी अधिसूचनाओं के विश्लेषण पर आधारित है। ट्रैफिक नियमों की नवीनतम और सटीक जानकारी के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें।)
नई दिल्ली (स्पेशल डेस्क): भारत के करोड़ों कामगारों और असंगठित क्षेत्र (Unorganized Sector) के कर्मचारियों के लिए बुधवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की अहम बैठक में सरकार की सबसे लोकप्रिय सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक—अटल पेंशन योजना (Atal Pension Yojana - APY) को अगले 5 वर्षों के लिए विस्तार देने का फैसला किया गया है।READ ALSAO:-UP RTE Admission 2026-27: प्राइवेट स्कूलों में 'मुफ्त शिक्षा' का सपना होगा सच, 2 फरवरी से शुरू हो रही प्रक्रिया; योगी सरकार ने बदले नियम सरकार के इस फैसले के मुताबिक, अब अटल पेंशन योजना वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रहेगी। इस विस्तार का सीधा मतलब है कि सरकार असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, किसानों और छोटे व्यापारियों को बुढ़ापे में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना जारी रखेगी। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको इस योजना के विस्तार के मायने, इससे जुड़ने के फायदे, प्रीमियम की गणना और अब तक की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताएंगे। कैबिनेट का फैसला: 2031 तक जारी रहेगा 'पेंशन का कवच' बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार ने न केवल योजना की अवधि बढ़ाई है, बल्कि इसके प्रचार-प्रसार और कार्यान्वयन के लिए वित्तीय सहायता (Financial Support) जारी रखने की भी बात कही है। फैसले की मुख्य बातें: समय सीमा का विस्तार: अटल पेंशन योजना को मार्च 2026 से आगे बढ़ाते हुए वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की स्वीकृति दी गई है। गैप फंडिंग (Gap Funding): सरकार ने पेंशन के भुगतान में किसी भी कमी की भरपाई के लिए 'गैप फंडिंग' को मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि अगर फंड में कोई कमी आती है, तो सरकार अपनी जेब से पैसा मिलाकर पेंशन धारकों को भुगतान करेगी। यह इस योजना की 'गारंटी' को और मजबूत करता है। जागरूकता अभियान: योजना को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए प्रचार (Promotional Activities) और विकासात्मक गतिविधियों (Developmental Activities) के लिए बजट आवंटित किया जाएगा। APY का रिपोर्ट कार्ड: 19 जनवरी 2026 तक 8.66 करोड़ सदस्य सरकार द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों ने इस योजना की सफलता की कहानी बयां की है। लॉन्च की तारीख: 9 मई 2015 कुल सब्सक्राइबर (19 जनवरी 2026 तक): 8.66 करोड़ से अधिक। यह आंकड़ा अपने आप में ऐतिहासिक है। यह दर्शाता है कि भारत का आम नागरिक अब अपनी भविष्य की सुरक्षा को लेकर जागरूक हो रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण भारत और छोटे शहरों (Tier-2 & Tier-3 Cities) में इस योजना ने जबरदस्त पैठ बनाई है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030-31 तक इस संख्या को और बढ़ाकर देश के हर पात्र नागरिक को पेंशन के दायरे में लाया जाए। अटल पेंशन योजना (APY) आखिर है क्या? (विस्तृत जानकारी) अटल पेंशन योजना (APY) भारत सरकार की एक फ्लैगशिप सोशल सिक्योरिटी स्कीम है, जिसे विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो सरकारी नौकरी में नहीं हैं या जिन्हें पीएफ (EPF) का लाभ नहीं मिलता। योजना का मूल उद्देश्य: असंगठित क्षेत्र के कामगार जैसे—घरेलू सहायिका, ड्राइवर, माली, प्लंबर, दुकानदार, खेतिहर मजदूर आदि को 60 वर्ष की आयु के बाद एक निश्चित मासिक आय सुनिश्चित करना। पेंशन स्लैब (Pension Slabs): इस योजना के तहत आपको आपके योगदान (Contribution) के आधार पर 60 साल की उम्र के बाद निम्नलिखित 5 विकल्पों में से पेंशन मिलती है: ₹1,000 प्रति माह ₹2,000 प्रति माह ₹3,000 प्रति माह ₹4,000 प्रति माह ₹5,000 प्रति माह खास बात: यह पेंशन जीवन भर मिलती है और सरकार इसकी गारंटी लेती है। यानी बाजार के उतार-चढ़ाव का आपकी पेंशन राशि पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पात्रता (Eligibility): कौन बन सकता है इसका हिस्सा? योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने बहुत ही सरल नियम बनाए हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें। नागरिकता: आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए। आयु सीमा: प्रवेश के समय आवेदक की आयु 18 वर्ष से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसका मतलब है कि आपको कम से कम 20 साल तक निवेश करना होगा (अगर आप 40 की उम्र में जुड़ते हैं)। बैंक खाता: आवेदक के पास किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में एक वैध बचत खाता (Savings Account) होना चाहिए। मोबाइल नंबर: बैंक खाते से लिंक मोबाइल नंबर होना आवश्यक है ताकि अपडेट्स मिलते रहें। टैक्स पेयर नियम: (नोट: हाल के नियमों के अनुसार, जो लोग आयकर दाता हैं, वे 1 अक्टूबर 2022 के बाद से इस योजना में शामिल होने के पात्र नहीं हैं। हालांकि, पुराने सदस्यों पर इसका असर नहीं है)। निवेश का गणित: कम उम्र में शुरुआत, बड़ा फायदा अटल पेंशन योजना की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि आप जितनी जल्दी (कम उम्र में) इससे जुड़ेंगे, आपकी मासिक किस्त (Premium) उतनी ही कम होगी। उदाहरण (Case Study): ₹5,000 पेंशन के लिए 18 साल की उम्र में: अगर कोई युवा 18 साल की उम्र में इस योजना से जुड़ता है और 60 साल के बाद ₹5,000 मासिक पेंशन चाहता है, तो उसे हर महीने केवल 210 रुपये जमा करने होंगे। रोजाना का खर्च: 7 रुपये से भी कम। 30 साल की उम्र में: अगर वही व्यक्ति 30 साल की उम्र में जुड़ता है, तो उसे ₹5,000 पेंशन के लिए हर महीने लगभग 577 रुपये देने होंगे। 40 साल की उम्र में: अगर कोई व्यक्ति अंतिम मौके पर यानी 40 साल की उम्र में जुड़ता है, तो उसे उसी ₹5,000 की पेंशन के लिए हर महीने 1,454 रुपये जमा करने होंगे। निष्कर्ष: जल्दी शुरुआत करने में ही समझदारी है। इससे आपकी जेब पर बोझ बहुत कम पड़ता है। APY के बेमिसाल फायदे (Benefits of Atal Pension Yojana) बाजार में कई निवेश विकल्प मौजूद हैं, लेकिन अटल पेंशन योजना अपने खास फीचर्स के कारण अलग पहचान रखती है। (A) गारंटीड रिटर्न (Guaranteed Pension) म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार आधारित पेंशन योजनाओं के विपरीत, APY में सरकार एक निश्चित राशि देने का वादा करती है। अगर फंड का रिटर्न कम भी रहता है, तो सरकार अपनी तरफ से पैसा मिलाकर आपको वादा की गई पेंशन (जैसे ₹5000) देगी। (B) जीवन भर पेंशन 60 वर्ष की आयु पूरी होते ही सब्सक्राइबर को मृत्यु तक मासिक पेंशन मिलती रहती है। (C) जीवनसाथी को सुरक्षा (Spouse Benefit) भगवान न करे, अगर पेंशन धारक (Subscriber) की मृत्यु हो जाती है, तो पेंशन बंद नहीं होती। वही पेंशन राशि उनके पति या पत्नी (Spouse) को जीवन भर मिलती रहेगी। (D) नॉमिनी को पैसा (Corpus to Nominee) यदि सब्सक्राइबर और उनके पति/पत्नी दोनों की मृत्यु हो जाती है, तो 60 साल तक जमा की गई कुल राशि (Corpus Fund) नॉमिनी (जैसे बच्चों) को एकमुश्त लौटा दी जाती है। उदाहरण: ₹5,000 वाली पेंशन स्कीम में नॉमिनी को लगभग 8.5 लाख रुपये तक मिल सकते हैं। (E) टैक्स छूट (Tax Benefit) आयकर अधिनियम की धारा 80CCD (1B) के तहत इसमें किए गए निवेश पर टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है, जो धारा 80C की 1.5 लाख की सीमा के अतिरिक्त है। आवेदन कैसे करें? (How to Apply for APY) 2026-27 के दौर में आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस हो चुकी है। आप घर बैठे या बैंक जाकर आवेदन कर सकते हैं। तरीका 1: नेट बैंकिंग (Online Process) अगर आपके पास नेट बैंकिंग की सुविधा है, तो यह सबसे आसान तरीका है: अपने बैंक की नेट बैंकिंग में लॉग इन करें। 'Social Security Schemes' या 'Insurance/Pension' सेक्शन में जाएं। Atal Pension Yojana का विकल्प चुनें। अपना बैंक खाता चुनें जिससे पैसा कटना है। पेंशन राशि (1000 से 5000) चुनें। नॉमिनी का विवरण भरें और सबमिट कर दें। तरीका 2: बैंक शाखा जाकर (Offline Process) उस बैंक या पोस्ट ऑफिस में जाएं जहां आपका खाता है। APY रजिस्ट्रेशन फॉर्म मांगें। फॉर्म में अपना आधार नंबर, मोबाइल नंबर और नॉमिनी की जानकारी भरें। पेंशन विकल्प चुनें। फॉर्म जमा करें। आपको रसीद के तौर पर PRAN (Permanent Retirement Account Number) कार्ड दिया जाएगा। ऑटो-डेबिट सुविधा (Auto-Debit) इस योजना की सबसे अच्छी बात 'ऑटो-डेबिट' है। आपको हर महीने बैंक जाने की जरूरत नहीं है। आपके द्वारा चुनी गई तारीख को आपके बैंक खाते से किस्त अपने आप कट जाएगी। आपको बस यह सुनिश्चित करना है कि खाते में पर्याप्त बैलेंस हो। योजना का विस्तार क्यों जरूरी था? (Why Extension Matters) 2030-31 तक योजना को बढ़ाने का फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बढ़ती हुई बुजुर्ग आबादी भारत तेजी से युवा देश से बुजुर्ग होती आबादी की ओर बढ़ रहा है। 2050 तक भारत में बुजुर्गों की संख्या बहुत अधिक होगी। ऐसे में, जिनके पास सरकारी पेंशन नहीं है, उनके लिए गरीबी में जीने का खतरा है। APY इस खतरे के खिलाफ एक ढाल है। असंगठित क्षेत्र का बड़ा हिस्सा भारत में आज भी लगभग 80% से अधिक वर्कफोर्स असंगठित क्षेत्र में है। इनके पास पीएफ या ग्रेच्युटी की सुविधा नहीं होती। सरकार इस विस्तार के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि वह रेहड़ी-पटरी वालों, रिक्शा चालकों और घरेलू कामगारों के साथ खड़ी है। वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा यह विस्तार सरकार को और अधिक समय देगा कि वह दूर-दराज के गांवों में कैंप लगाकर लोगों को बचत का महत्व समझा सके। पेनाल्टी और एग्जिट के नियम (Penalty & Exit Rules) योजना में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन अगर कभी किस्त चूक जाए तो क्या होगा? लेट फीस: अगर आपके खाते में बैलेंस न होने के कारण किस्त बाउंस होती है, तो बैंक बहुत मामूली पेनाल्टी लगाता है (आमतौर पर 1 रुपये से 10 रुपये प्रति माह, योगदान राशि के आधार पर)। बीच में छोड़ना (Premature Exit): सामान्य तौर पर 60 साल से पहले योजना से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। केवल असाधारण परिस्थितियों में (जैसे लाभार्थी की मृत्यु या लाइलाज बीमारी) ही इसे समय से पहले बंद किया जा सकता है। स्वैच्छिक निकास: अब सरकार ने कुछ शर्तों के साथ स्वैच्छिक निकास की अनुमति दी है, लेकिन इसमें आपको केवल अपना जमा पैसा और उस पर मिला साधारण ब्याज ही वापस मिलेगा। सरकार द्वारा दिया गया योगदान (यदि कोई हो) वापस नहीं मिलता। बुढ़ापे की लाठी है अटल पेंशन योजना "बूढ़े होने पर बेटा शायद पानी न पूछे, लेकिन अटल पेंशन योजना हर महीने 1 तारीख को आपके खाते में पैसे जरूर पहुंचाएगी।" यह कहावत ग्रामीण इलाकों में काफी प्रचलित हो रही है। केंद्र सरकार द्वारा 2030-31 तक इस योजना को विस्तार देना एक स्वागत योग्य कदम है। ₹210 या ₹500 का निवेश आज आपको शायद छोटी बात लगे, लेकिन 60 साल की उम्र में जब शरीर काम करने लायक नहीं रहेगा, तब हर महीने मिलने वाले ₹5000 किसी वरदान से कम नहीं होंगे। अगर आप या आपके परिवार में कोई सदस्य (जैसे ड्राइवर, मेड, या युवा बच्चे) 18 से 40 वर्ष के बीच हैं और अभी तक इस योजना से नहीं जुड़े हैं, तो यह सही समय है। आज ही बैंक जाएं और अपने बुढ़ापे को सुरक्षित करें। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) Q1: क्या मैं एक से अधिक APY खाते खोल सकता हूँ? Ans: नहीं, एक व्यक्ति केवल एक ही अटल पेंशन योजना खाता खोल सकता है। यह आधार कार्ड से लिंक होता है, इसलिए डुप्लीकेट खाता संभव नहीं है। Q2: अगर मैं 60 साल से पहले मर गया तो क्या होगा? Ans: ऐसी स्थिति में, आपके पति/पत्नी (Spouse) के पास दो विकल्प होते हैं: वे बचे हुए समय तक योगदान जारी रखें और बाद में पेंशन प्राप्त करें। वे अब तक जमा पूरी राशि निकालकर खाता बंद कर दें। Q3: क्या मैं अपनी पेंशन राशि (Slab) को बाद में बदल सकता हूँ? Ans: जी हां, आप वर्ष में एक बार (आमतौर पर अप्रैल में) अपनी पेंशन राशि को बढ़ाने (अपग्रेड) या घटाने (डाउनग्रेड) का अनुरोध बैंक में कर सकते हैं। तदनुसार आपकी किस्त बदल जाएगी। Q4: क्या यह स्कीम सरकारी कर्मचारियों के लिए है? Ans: नहीं, जो लोग पहले से किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना (जैसे EPF, NPS) के सदस्य हैं, वे भी इसमें शामिल हो सकते थे, लेकिन मुख्य रूप से यह असंगठित क्षेत्र के लिए है। अब करदाता (Taxpayers) इसमें शामिल नहीं हो सकते। Q5: मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा पैसा जमा हो रहा है? Ans: आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर हर ट्रांजेक्शन के बाद SMS आता है। इसके अलावा, आप NSDL की वेबसाइट या APY मोबाइल ऐप के जरिए अपना स्टेटमेंट (PRAN विवरण) कभी भी चेक कर सकते हैं। नोट: यह आर्टिकल 21 जनवरी 2026 की ताजा खबरों और सरकारी अधिसूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। निवेश से पहले अपने बैंक से वर्तमान नियमों की पुष्टि अवश्य करें।
यदि आप अपनी कार से अक्सर दूसरे शहरों का सफर करते हैं या लॉन्ग ड्राइव के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके ड्राइविंग अनुभव को पूरी तरह बदलने वाली है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और केंद्र सरकार ने देश की सड़क परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठाने का मन बना लिया है।READ ALSO:-नोटबंदी 2.0 का खौफ: क्या सच में 'रद्दी' होने वाले हैं 500 के नोट? सरकार ने तोड़ी चुप्पी, बताई वायरल दावे की 'अंदर की बात' आगामी 1 अप्रैल से देश के सभी नेशनल हाईवे (National Highways) के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान (Cash Payment) की व्यवस्था पूरी तरह से बंद होने जा रही है। जी हाँ, आपने सही पढ़ा—अब आप अपनी जेब से नोट निकालकर टोल टैक्स नहीं भर पाएंगे। सरकार टोल प्लाजा को 100% कैशलेस बनाने जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत, टोल बैरियर को पार करने के लिए आपके पास केवल दो ही विकल्प होंगे— FASTag या UPI (Unified Payments Interface)। यह फैसला न केवल ड्राइवरों का समय बचाएगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए भी 'गेम चेंजर' साबित होगा। आइए, इस बड़े बदलाव के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि आखिर सरकार ने यह फैसला क्यों लिया और इसका आम जनता पर क्या असर पड़ेगा। क्या है नया नियम? (The Big Change from April 1) अब तक की व्यवस्था यह थी कि अगर किसी गाड़ी में FASTag नहीं है या वह काम नहीं कर रहा है, तो ड्राइवर 'कैश लेन' (Cash Lane) में जाकर या दोगुनी राशि देकर नकद में टोल चुका सकता था। लेकिन 1 अप्रैल से यह विकल्प खत्म होने वाला है। नकद लेन-देन पर पूर्ण प्रतिबंध रिपोर्ट्स और विभागीय तैयारियों के अनुसार, केंद्र सरकार 1 अप्रैल से नेशनल हाईवे के सभी टोल प्लाजों पर नकद लेन-देन को पूरी तरह प्रतिबंधित कर देगी। इसका मतलब है कि टोल बूथ पर बैठा कर्मचारी आपसे कैश स्वीकार नहीं करेगा। सिर्फ डिजिटल भुगतान ही मान्य नई व्यवस्था में भुगतान के केवल डिजिटल माध्यम ही स्वीकार किए जाएंगे: FASTag: यह प्राथमिक और सबसे तेज़ माध्यम बना रहेगा। UPI: यदि किसी कारणवश FASTag स्कैन नहीं होता है, तो क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करके UPI के जरिए भुगतान किया जा सकेगा। यह बदलाव 'डिजिटल इंडिया' मुहिम का एक बड़ा हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को निर्बाध (Seamless) बनाना है। आखिर क्यों लिया गया यह फैसला? (The Logic Behind 100% Cashless) टोल प्लाजा को कैशलेस बनाने की तैयारी रातों-रात नहीं हुई है, बल्कि यह एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है। फिलहाल एक आधिकारिक अधिसूचना (Official Notification) का इंतजार किया जा रहा है, जिसके जारी होते ही यह नियम पूरे देश में लागू हो जाएगा। सरकार के इस कदम के पीछे चार मुख्य कारण हैं: A. ट्रैफिक जाम का खात्मा (Reducing Congestion) टोल प्लाजा पर लगने वाला जाम आज भी एक बड़ी समस्या है। कैश लेन में एक गाड़ी को टोल चुकाने में औसतन 2 से 3 मिनट का समय लगता है (छुट्टे पैसे देना, रसीद काटना, बैरियर खुलना)। डिजिटल पेमेंट से यह समय घटकर कुछ सेकंड रह जाता है। सरकार का लक्ष्य टोल प्लाजा पर "जीरो वेटिंग टाइम" (Zero Waiting Time) सुनिश्चित करना है। B. समय की बचत (Saving Time) जब गाड़ियां बिना रुके या मात्र कुछ सेकंड में टोल पार करेंगी, तो यात्रा का कुल समय (Turnaround Time) काफी कम हो जाएगा। इससे माल ढुलाई (Logistics) की गति बढ़ेगी और सामान एक शहर से दूसरे शहर जल्दी पहुंचेगा। C. ईंधन की बर्बादी पर रोक (Fuel Efficiency) एक अध्ययन के मुताबिक, टोल प्लाजा पर गाड़ियों के स्टार्ट रहने और रेंग-रेंग कर चलने से हर साल हजारों करोड़ रुपये का ईंधन बर्बाद होता है। कैशलेस सिस्टम से गाड़ियां फर्राटे से निकलेंगी, जिससे फ्यूल की भारी बचत होगी और देश का आयात बिल (Import Bill) कम होगा। D. पारदर्शिता और डाटा (Transparency) नकद लेन-देन में अक्सर हेराफेरी या कम रिपोर्टिंग की गुंजाइश रहती थी। 100% डिजिटल पेमेंट से हर एक रुपये का हिसाब सरकार के पास होगा। इससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और राजस्व की चोरी रुकेगी। टोल कलेक्शन का बदलता स्वरूप: एक नजर इतिहास पर भारत में टोल कलेक्शन की यात्रा काफी दिलचस्प रही है। यह बदलाव एक दिन में नहीं आया: मैनुअल दौर: जब हाथ से रसीद कटती थी और बैरियर हाथ से उठाए जाते थे। हाइब्रिड दौर: जब कुछ लेन FASTag के लिए और कुछ कैश के लिए आरक्षित थीं। FASTag अनिवार्य (2021): सरकार ने FASTag अनिवार्य किया, लेकिन कैश का विकल्प (जुर्माने के साथ) खुला रखा। 100% कैशलेस (1 अप्रैल 2026): अब नकद का विकल्प पूरी तरह समाप्त होने जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव भारत के टोल सिस्टम को आधुनिक (Modern) बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जो हमें विकसित देशों की कतार में खड़ा करेगा। UPI की एंट्री: ड्राइवरों के लिए बड़ी राहत FASTag अनिवार्य होने के बाद कई बार तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। कभी टैग स्कैन नहीं होता, तो कभी बैलेंस कम होने पर गाड़ी फंस जाती थी। इस समस्या को देखते हुए सरकार ने UPI को दूसरे विकल्प के रूप में मजबूती से शामिल किया है। टोल प्लाजा पर UPI भुगतान की सुविधा को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था, जिसे बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। अब: अगर आपका FASTag काम नहीं कर रहा है। या टैग 'ब्लैकलिस्ट' हो गया है। तो आप अपने मोबाइल से Google Pay, PhonePe या Paytm का इस्तेमाल कर तुरंत भुगतान कर सकेंगे। यह सुविधा उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो कभी-कभार ही हाईवे पर निकलते हैं और FASTag रिचार्ज करना भूल जाते हैं। भविष्य की तस्वीर: 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' (Multi-lane Free Flow) क्या आपको लगता है कि टोल प्लाजा पर रुककर FASTag स्कैन कराना ही अंतिम तकनीक है? जी नहीं, सरकार की योजना इससे कहीं आगे की है। बैरियर-फ्री टोलिंग (Barrier-Free Tolling) सरकार 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' मॉडल पर काम कर रही है। यह दुनिया की सबसे एडवांस टोलिंग तकनीकों में से एक है। कैसे काम करेगा: इसमें टोल प्लाजा पर कोई बैरियर (डंडा) नहीं होगा। रफ्तार: गाड़ियां अपनी सामान्य हाईवे स्पीड (जैसे 100 किमी/घंटा) से टोल एरिया से गुजरेंगी। तकनीक: हाई-टेक कैमरे और सेंसर गाड़ी की नंबर प्लेट या जीपीएस (GPS) को ट्रैक करेंगे और चलते-चलते ही आपके खाते से पैसा कट जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारी उन देशों (जैसे यूरोप और अमेरिका) की तकनीकों का अध्ययन कर रहे हैं जहां यह सिस्टम पहले से लागू है। 1 अप्रैल से कैश बंद करना, इसी 'बैरियर-फ्री' भविष्य की ओर पहला कदम है। आम जनता के लिए गाइडलाइंस: 1 अप्रैल से पहले क्या करें? इस नए नियम के लागू होने से पहले आपको किसी भी असुविधा से बचने के लिए कुछ तैयारियां कर लेनी चाहिए: I. FASTag का KYC पूरा करें हाल ही में NHAI ने 'One Vehicle, One FASTag' अभियान के तहत बिना KYC वाले फास्टैग को बंद कर दिया है। 1 अप्रैल से पहले सुनिश्चित करें कि आपका FASTag एक्टिव है और उसका KYC अपडेटेड है। II. UPI ऐप्स तैयार रखें अपने फोन में कम से कम दो UPI ऐप्स (जैसे BHIM, PhonePe) एक्टिव रखें। हाईवे पर कई बार नेटवर्क की समस्या हो सकती है, इसलिए ऑफलाइन पेमेंट मोड की जानकारी भी रखें। III. पर्याप्त बैलेंस रखें सफर पर निकलने से पहले FASTag वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस रखना अब 'विकल्प' नहीं बल्कि 'जरूरत' बन जाएगा, क्योंकि कैश का बैकअप अब आपके पास नहीं होगा। चुनौतियां और समाधान हालांकि यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं: नेटवर्क इश्यू: दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट न होने पर UPI काम नहीं करेगा। इसके लिए सरकार को टोल प्लाजा पर मजबूत वाई-फाई या नेटवर्क बूस्टर लगाने होंगे। जागरूकता: ग्रामीण क्षेत्रों के ड्राइवरों को पूरी तरह डिजिटल मोड पर शिफ्ट करना एक चुनौती होगी। तकनीकी खराबी: अगर टोल का सर्वर डाउन हो तो क्या होगा? (नियमों के अनुसार, अगर स्कैनिंग मशीन खराब है, तो वाहन को बिना टोल दिए जाने की अनुमति होती है, लेकिन 100% कैशलेस में इसे कैसे लागू किया जाएगा, इस पर स्पष्टता का इंतजार है)। एक नए सफर की शुरुआत 1 अप्रैल से होने वाला यह बदलाव केवल भुगतान के तरीके का बदलाव नहीं है, बल्कि यह हमारी यात्रा की मानसिकता (Mindset) का बदलाव है। कैशलेस टोल प्लाजा से न केवल हमारा समय बचेगा, बल्कि यह प्रदूषण कम करने और देश को डिजिटल शक्ति बनाने में भी मदद करेगा। हालांकि शुरुआत में कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है, लेकिन लंबी अवधि में यह फैसला हर भारतीय यात्री के लिए सुखद साबित होगा। तो अगली बार जब आप हाईवे पर निकलें, तो अपनी जेब में नोट नहीं, बल्कि मोबाइल और विंडशील्ड पर FASTag लेकर चलें। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) प्रश्न 1: अगर मेरे पास FASTag नहीं है और UPI भी काम नहीं कर रहा, तो क्या होगा? उत्तर: चूंकि नकद भुगतान पूरी तरह बंद हो रहा है, ऐसी स्थिति में आपको टोल प्लाजा पर भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। हो सकता है कि प्रशासन ऐसे मामलों के लिए कोई आपातकालीन डिजिटल डेस्क बनाए, लेकिन अभी के लिए सलाह यही है कि बिना डिजिटल तैयारी के हाईवे पर न जाएं। प्रश्न 2: क्या 1 अप्रैल से यह नियम हर टोल पर लागू होगा? उत्तर: यह नियम नेशनल हाईवेज (NHAI) के टोल प्लाजा के लिए है। राज्य के राजमार्गों (State Highways) पर पुराने नियम कुछ समय तक जारी रह सकते हैं, जब तक कि राज्य सरकारें भी इसे अपना न लें। प्रश्न 3: क्या FASTag न होने पर दोगुना टोल देना होगा? उत्तर: मौजूदा नियमों के अनुसार, अगर आप बिना वैलिड FASTag के FASTag लेन में घुसते हैं, तो दोगुना जुर्माना लगता है। चूंकि अब सभी लेन कैशलेस होंगी, इसलिए बिना टैग वाली गाड़ियों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान जारी रहने की संभावना है। प्रश्न 4: मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम कब आएगा? उत्तर: यह अभी परीक्षण और योजना के चरण में है। 1 अप्रैल से कैशलेस होना इसका आधार तैयार करेगा। जीपीएस आधारित (GPS-based) टोलिंग सिस्टम अगले 1-2 वर्षों में पूरी तरह लागू हो सकता है। क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके लिए "FASTag KYC कैसे अपडेट करें" या "ब्लैकलिस्टेड FASTag को एक्टिव कैसे करें" पर एक स्टेप-बाय-स्टेप गाइड तैयार कर दूँ, ताकि आपके पाठकों को 1 अप्रैल से पहले कोई दिक्कत न हो?
क्या आपकी जेब में रखा 500 रुपये का नोट (500 Rupee Note) जल्द ही महज एक कागज का टुकड़ा बनकर रह जाएगा? क्या देश में एक बार फिर 2016 जैसी लंबी कतारें लगने वाली हैं? पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया (Social Media) पर एक ऐसी खबर जंगल की आग की तरह फैल रही है, जिसने आम जनता की नींद उड़ा दी है। "नोटबंदी 2.0" (Demonetization 2.0) का शोर हर तरफ सुनाई दे रहा है।READ ALSO:-RTE एडमिशन 2026-27: निजी स्कूलों में 'मुफ्त शिक्षा' का सपना होगा साकार, बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किया 3 चरणों का विस्तृत शेड्यूल व्हाट्सएप (WhatsApp), फेसबुक (Facebook) और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लगातार यह दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मिलकर 500 रुपये के नोटों को चलन से बाहर करने की बड़ी तैयारी कर चुके हैं। इन अफवाहों ने एक बार फिर आम लोगों के जेहन में नोटबंदी की पुरानी यादें ताजा कर दी हैं। लेकिन घबराने से पहले, यह जानना बेहद जरूरी है कि इस खबर में कितनी सच्चाई है और कितना फसाना। A claim is being made in a social media post that the Government of India plans to ban ₹500 notes.#PIBFactCheck ❌ This claim is #FAKE ✅ No such announcement has been made by the Central Government. 🔎 For authentic information related to financial policies and decisions,… pic.twitter.com/kOvEZ3BjVH — PIB Fact Check (@PIBFactCheck) January 18, 2026 इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब खुद सरकार को आगे आना पड़ा है और इस पूरी खबर का 'पोस्टमार्टम' करते हुए अपना रुख स्पष्ट किया है। वायरल खबर का पूरा सच: आखिर क्या दावा किया जा रहा है? सोशल मीडिया आज के दौर में सूचना का एक सशक्त माध्यम है, लेकिन कई बार यह भ्रामक जानकारियों (Misinformation) का अड्डा भी बन जाता है। पिछले कुछ समय से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक मैसेज सर्कुलेट हो रहा है, जिसमें बेहद चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। दावे के मुख्य बिंदु: 500 के नोटों पर प्रतिबंध: वायरल मैसेज में कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार 500 रुपये के नोटों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है। नोटबंदी 2.0: इसे 'नोटबंदी 2.0' का नाम दिया जा रहा है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि यह 2016 की नोटबंदी जैसा ही कोई बड़ा कदम होगा। 100 रुपये का नोट होगा सबसे बड़ा: सबसे हैरान करने वाला दावा यह है कि 500 रुपये के नोट हटने के बाद देश के करेंसी सिस्टम (Currency System) में 100 रुपये का नोट ही सबसे बड़ी मुद्रा (Highest Denomination) के रूप में बचेगा। गायब हो जाएंगे नोट: दावा है कि देश से 500 रुपये के नोटों का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म होने जा रहा है। ये सवाल और दावे देश की सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं और आम लोगों को परेशान कर रहे हैं। जब से ऐसी बातें सामने आई हैं, तब से आम लोगों को एक दशक पुरानी नोटबंदी और उस दौरान की परेशानी याद आनी शुरू हो गई है। जनता में घबराहट: 2016 की यादें हुईं ताजा जैसे ही यह खबर वायरल हुई, लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बनने लगा। "क्या सरकार और आरबीआई मिलकर करीब एक दशक के बाद नोटबंदी 2.0 की तैयारी कर रही है?" यह सवाल हर किसी की जुबान पर है। आम जनता के लिए नोटबंदी केवल एक आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और शारीरिक संघर्ष का नाम रहा है। 2016 में जब 500 और 1000 के पुराने नोट बंद हुए थे, तो लोगों को अपना ही पैसा निकालने के लिए घंटों बैंकों के बाहर खड़ा रहना पड़ा था। अब जब दोबारा 500 के नोट बंद होने की खबरें आईं, तो लोगों को लगा कि फिर से वही दौर लौटने वाला है। बाजार में छोटे व्यापारियों, दिहाड़ी मजदूरों और आम वेतनभोगी वर्ग में इस खबर को लेकर सबसे ज्यादा चिंता देखी गई। लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए कि क्या उन्हें अपने घर में रखे नकद रुपयों को बैंक में जमा कर देना चाहिए? क्या देश का बैंकिंग रेगुलेटर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) देश की सरकार के साथ मिलकर यह कदम उठाने जा रहा है? सरकार का आधिकारिक रुख: पीआईबी (PIB) ने खोला राज जनता के बीच बढ़ती बेचैनी और सोशल मीडिया पर फैलते झूठ को रोकने के लिए सरकार की फैक्ट चेक विंग, प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB - Press Information Bureau) ने मोर्चा संभाला। पीआईबी ने इस मामले की गहनता से जांच की और जो सच्चाई सामने आई, वह पूरी तरह से अलग है। PIB Fact Check का बड़ा खुलासा पीआईबी की फैक्ट चेक यूनिट ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन तमाम दावों का पुरजोर खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि केंद्र सरकार 500 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है। पीआईबी की जांच के मुख्य निष्कर्ष: दावा फर्जी है: पीआईबी फैक्ट चेक ने इस जानकारी को स्पष्ट शब्दों में “फर्जी” (FAKE) करार दिया है। कोई योजना नहीं: सरकार ने साफ किया है कि 500 रुपये के नोटों को बंद करने की कोई भी योजना विचारधीन नहीं है। कोई घोषणा नहीं: पीआईबी ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। जो भी खबरें चल रही हैं, वे निराधार हैं। सोशल मीडिया पर PIB की पोस्ट पीआईबी फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए जनता को जागरूक किया। उन्होंने वायरल हो रहे मैसेज का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए उस पर बड़े अक्षरों में "FAKE" का स्टैम्प लगाया। पीआईबी ने अपनी पोस्ट में लिखा: "सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार 500 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है… यह दावा #फर्जी है।" RBI और सरकार की क्या है असल तैयारी? क्या देश में 500 रुपये के नोट गायब होने वाले हैं? इस सवाल का सीधा जवाब है—नहीं। सरकार और आरबीआई की ओर से जारी स्पष्टीकरण से यह साफ हो गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में 500 रुपये का नोट बदस्तूर जारी रहेगा। 2000 रुपये के नोटों को चलन से वापस लेने (Withdrawal) की प्रक्रिया के बाद 500 रुपये का नोट ही वर्तमान में भारतीय मुद्रा प्रणाली में सबसे अधिक मूल्य वाला नोट है। यह अफवाह संभवतः 2000 रुपये के नोटों की वापसी के बाद उपजी भ्रांतियों का नतीजा हो सकती है, जिसे शरारती तत्वों ने "नोटबंदी 2.0" का नाम देकर वायरल कर दिया। लेकिन हकीकत यह है कि वित्त मंत्रालय या आरबीआई ने 500 के नोट को लेकर किसी भी बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। सतर्क रहें: फर्जी खबरों से कैसे बचें? पीआईबी ने जनता से केवल इस खबर का खंडन नहीं किया, बल्कि भविष्य के लिए भी सतर्क रहने की सलाह दी है। पीआईबी ने जनता से आग्रह किया है कि वे सरकारी पॉलिसीज (Government Policies) और फैसलों से संबंधित सटीक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। PIB की सलाह: आधिकारिक स्रोत: किसी भी वायरल खबर पर भरोसा करने से पहले देखें कि क्या वह जानकारी RBI की वेबसाइट, वित्त मंत्रालय के ट्विटर हैंडल या PIB की विज्ञप्ति में है। दुर्भावनापूर्ण इरादे: प्रेस सूचना ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट रेगुलरली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलाई जाने वाली झूठी सूचनाओं का पर्दाफाश करती है, जो अक्सर सरकार की छवि खराब करने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से फैलाई जाती हैं। फॉरवर्ड न करें: बिना पुष्टि किए किसी भी मैसेज को फॉरवर्ड करने से बचें। इससे समाज में अनावश्यक पैनिक फैलता है। अफवाहों पर न दें ध्यान संक्षेप में कहें तो, 500 रुपये के नोट बंद नहीं हो रहे हैं। "नोटबंदी 2.0" की खबरें पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठी हैं। न तो सरकार और न ही आरबीआई ऐसा कोई कदम उठा रहे हैं। 100 रुपये के नोट के सबसे बड़े नोट होने की बात भी पूरी तरह काल्पनिक है। सोशल मीडिया पर तैर रहे ये सवाल कि "क्या देश से 500 रुपए के नोटों का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म होने जा रहा है?" का जवाब न में है। आप अपने 500 रुपये के नोटों का इस्तेमाल बिना किसी डर के कर सकते हैं। सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, और अब जिम्मेदारी आम जनता की है कि वे ऐसी अफवाहों को फैलने से रोकें।
भारतीय रेलवे ने देश की प्रीमियम ट्रेन सेवा 'वंदे भारत' के स्लीपर वर्जन को लॉन्च कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हावड़ा और कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच चलने वाली देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। सुविधाओं, स्पीड और लग्जरी के मामले में यह ट्रेन हवाई जहाज को टक्कर देने के लिए तैयार है। लेकिन, इस लग्जरी सफर का आनंद लेने की योजना बना रहे यात्रियों के लिए एक बेहद जरूरी और चौंकाने वाली खबर है।READ ALSO:-भविष्य का 'ब्रह्मास्त्र': बच्चों के नाम आज से जोड़ें ₹28 रोज, बुढ़ापे तक वो बनेंगे ₹11 करोड़ के मालिक; जानें NPS वात्सल्य स्कीम का जादुई गणित रेलवे बोर्ड ने इस प्रीमियम ट्रेन के लिए रिफंड और कैंसिलेशन (Refund and Cancellation) के जो नए नियम जारी किए हैं, वे सामान्य ट्रेनों के मुकाबले बेहद सख्त हैं। अगर आपने टिकट बुक करने में जल्दबाजी दिखाई या बाद में यात्रा का प्लान बदला, तो आपको भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। नए नियमों के मुताबिक, एक निश्चित समय सीमा के बाद टिकट कैंसिल कराने पर आपका पूरा पैसा डूब सकता है। जेब पर भारी मार: टिकट कैंसिलेशन का नया गणित रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नए नोटिफिकेशन ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। अब तक हम सामान्य ट्रेनों में चार्ट बनने तक टिकट कैंसिल कराकर कुछ रिफंड की उम्मीद रखते थे, लेकिन वंदे भारत स्लीपर में यह नियम पूरी तरह बदल दिया गया है। 1. 8 घंटे वाला 'डेडलाइन' नियम (The 8-Hour Rule): सबसे बड़ा झटका उन यात्रियों के लिए है जो आखिरी वक्त में प्लान बदलते हैं। नए नियम के अनुसार, यदि आप ट्रेन छूटने के निर्धारित समय से 8 घंटे पहले तक अपना कन्फर्म टिकट कैंसिल नहीं कराते हैं, तो आपको रिफंड के तौर पर एक रुपया भी वापस नहीं मिलेगा। यानी 8 घंटे की समय सीमा के भीतर टिकट कैंसिल करने पर 100% किराया डूब जाएगा। 2. 72 घंटे से 8 घंटे के बीच का नियम: यदि आप ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले तो नहीं, लेकिन 72 घंटे के भीतर टिकट कैंसिल करते हैं, तो भी आपको बड़ा नुकसान होगा। इस समय सीमा (72 घंटे से 8 घंटे) के बीच कैंसिलेशन कराने पर किराए का 50% हिस्सा काट लिया जाएगा। यानी आपको अपनी जेब से दी गई रकम का सिर्फ आधा हिस्सा ही वापस मिलेगा। 3. 72 घंटे से पहले का नियम: अगर आप यात्रा की तारीख से काफी पहले (ट्रेन छूटने के 72 घंटे से ज्यादा समय पहले) टिकट कैंसिल कराते हैं, तो भी पूरा पैसा वापस नहीं मिलेगा। इस स्थिति में रेलवे किराए का 25% हिस्सा कैंसिलेशन चार्ज के रूप में काट लेगा। बाकी 75% राशि ही यात्री को रिफंड की जाएगी। अब नहीं मिलेगी 'आधी सीट': RAC सुविधा पूरी तरह खत्म भारतीय रेल यात्रियों के लिए 'आरएसी' (RAC - Reservation Against Cancellation) एक बड़ी राहत होती थी। जब कन्फर्म टिकट नहीं मिलता था, तो आरएसी के जरिए कम से कम ट्रेन में चढ़ने की अनुमति और बैठने के लिए 'आधी सीट' मिल जाती थी। लेकिन, वंदे भारत स्लीपर में रेलवे ने RAC की सुविधा को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसका मतलब है कि इस ट्रेन में या तो आपका टिकट 'कन्फर्म' (CNF) होगा या फिर 'वेटिंग' (WL)। बीच की वह स्थिति जिसमें दो यात्री एक सीट साझा करते थे, अब इस प्रीमियम ट्रेन में मान्य नहीं होगी। यह फैसला यात्रियों को आरामदायक और भीड़-भाड़ मुक्त यात्रा अनुभव देने के लिए लिया गया है। कोटा सिस्टम पर भी चला रेलवे का डंडा वंदे भारत स्लीपर को लेकर रेलवे ने कोटा सिस्टम (Quota System) में भी बड़े बदलाव किए हैं। सामान्य ट्रेनों में चलने वाले कई तरह के कोटे इस ट्रेन में लागू नहीं होंगे। क्या लागू नहीं होगा: इस ट्रेन में किसी भी प्रकार का वीआईपी (VIP) कोटा या सामान्य कोटा नहीं चलेगा। क्या मान्य होगा: मौजूदा निर्देशों के अनुसार, सिर्फ निम्नलिखित श्रेणियों के लिए कोटा सुविधा उपलब्ध होगी: महिलाएं (Ladies Quota) दिव्यांगजन (Divyangjan) सीनियर सिटीजन (Senior Citizens) ड्यूटी पास (Duty Pass) न्यूनतम 400 किलोमीटर का किराया देना होगा रेलवे ने इस प्रीमियम सर्विस को छोटी दूरी की यात्रा के लिए हतोत्साहित करने के उद्देश्य से एक और नियम जोड़ा है। इस ट्रेन में न्यूनतम किराया दूरी (Minimum Chargeable Distance) 400 किलोमीटर तय की गई है। इसका मतलब: यदि आप इस ट्रेन में 400 किलोमीटर से कम दूरी (जैसे 100 या 200 किमी) का सफर भी करते हैं, तो भी आपको किराया पूरे 400 किलोमीटर का ही देना होगा। यह नियम स्पष्ट करता है कि यह ट्रेन लंबी दूरी की 'ओवरनाइट जर्नी' (Overnight Journey) के लिए डिजाइन की गई है। हवाई जहाज जैसी सुविधाएं और रणनीति हावड़ा-गुवाहाटी रूट पर शुरू हुई यह ट्रेन पूरी तरह से वातानुकूलित (Fully AC) है। रेलवे का प्रयास है कि यात्रियों को किफायती किराए में एयरलाइन जैसा अनुभव दिया जाए। समय की बचत: यह ट्रेन इस रूट पर यात्रा के समय को करीब ढाई घंटे तक कम कर देगी। एयरलाइन तर्ज पर नियम: जिस तरह एयरलाइन्स में प्रस्थान के समय के करीब टिकट कैंसिल कराने पर भारी चार्ज लगता है और रिफंड नाममात्र का मिलता है, ठीक उसी मॉडल को वंदे भारत स्लीपर में अपनाया गया है। इसका उद्देश्य सीटों की बर्बादी को रोकना और केवल गंभीर यात्रियों (Serious Travelers) को ही बुकिंग के लिए प्रोत्साहित करना है। बुकिंग से पहले हो जाएं सतर्क वंदे भारत स्लीपर निश्चित रूप से भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन, इसके सख्त नियम यह संकेत देते हैं कि अब ट्रेन यात्रा के लिए भी आपको हवाई यात्रा जैसी ही 'प्लानिंग' और 'अनुशासन' की जरूरत होगी। "चलो टिकट करा लेते हैं, नहीं गए तो कैंसिल करा देंगे"—वाली सोच अब आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। क्विक हाइलाइट्स (Key Takeaways) रूट: हावड़ा से कामाख्या (गुवाहाटी)। नो रिफंड: ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल कराने पर 0% वापसी। 50% कटौती: 72 से 8 घंटे के बीच कैंसिलेशन पर आधा किराया कटेगा। RAC खत्म: अब नहीं मिलेगी शेयरिंग सीट की सुविधा। मिनिमम किराया: कम से कम 400 किलोमीटर का चार्ज लगेगा। नोट: यात्री अपनी यात्रा प्लान करते समय इन नियमों का विशेष ध्यान रखें। रेलवे के नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव है, इसलिए बुकिंग के वक्त आधिकारिक वेबसाइट पर शर्तों को जरूर पढ़ें।
हर माता-पिता की आंखों में एक ही सपना होता है—उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो, उन्हें कभी आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े और उनकी जिंदगी खुशहाली में बीते। इसी सपने को हकीकत में बदलने के लिए केंद्र सरकार और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने एक ऐसी क्रांतिकारी योजना पेश की है, जो निवेश की दुनिया में गेम-चेंजर साबित हो रही है। इस योजना का नाम है—NPS वात्सल्य योजना (NPS Vatsalya Scheme)।READ ALSO:-मेजर शुभम सैनी: जिस घर में फरवरी में बजनी थी शहनाई, वहां पसरा मातम; ताबूत चूमकर मां बोली- 'देखो, मेरा शेर बेटा दूल्हा बनकर जा रहा है... सितंबर 2024 में लॉन्च की गई इस स्कीम ने वित्तीय विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसका सबसे बड़ा आकर्षण इसका "कंपाउंडिंग इफेक्ट" (Compounding Effect) है। जानकारों का दावा है कि अगर आप अपने बच्चे के जन्म के समय से ही इस योजना में मात्र ₹10,000 सालाना (यानी महीने के लगभग ₹834 या दिन के ₹28) का निवेश शुरू करते हैं, तो 60 साल की उम्र तक यह रकम बढ़कर ₹11 करोड़ हो सकती है। आज की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम इस स्कीम की एक-एक परत खोलेंगे। हम जानेंगे कि आखिर यह गणित कैसे काम करता है, इसमें निवेश करना कितना सुरक्षित है, और यह पुरानी योजनाओं (जैसे PPF या सुकन्या समृद्धि) से बेहतर क्यों साबित हो सकती है। क्या है NPS वात्सल्य योजना? (Understanding the Concept) NPS वात्सल्य, मौजूदा 'नेशनल पेंशन सिस्टम' (NPS) का ही एक विस्तार है, जिसे विशेष रूप से नाबालिगों (Minors) के लिए डिजाइन किया गया है। पहले NPS में केवल 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोग ही निवेश कर सकते थे, लेकिन अब माता-पिता अपने नवजात शिशु से लेकर 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी खाता खोल सकते हैं। योजना का उद्देश्य: सरकार का उद्देश्य भारत में 'पेंशन कल्चर' को बढ़ावा देना है। इस योजना के जरिए बच्चों में कम उम्र से ही बचत और निवेश की आदत डाली जाती है, ताकि जब वे बड़े हों, तो उनके पास एक मजबूत आर्थिक आधार हो। मुख्य विशेषताएं एक नजर में: खाताधारक: माता-पिता या कानूनी अभिभावक बच्चे के नाम पर खाता खोलते हैं। न्यूनतम निवेश: मात्र ₹1,000 सालाना (लॉन्च के समय) या लचीले विकल्पों के साथ ₹250 तक की सुविधा। अधिकतम निवेश: कोई सीमा नहीं। प्रबंधन: यह पैसा प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स द्वारा शेयर बाजार (Equity), सरकारी बॉन्ड और कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश किया जाता है। ₹10,000 से ₹11 करोड़ का सफर (The Magic Calculation) यह आंकड़ा सुनकर किसी को भी अविश्वास हो सकता है, लेकिन 'चक्रवृद्धि ब्याज' (Compound Interest) की ताकत इसे संभव बनाती है। आइए इस गणित को विस्तार से समझते हैं। परिदृश्य (Scenario): मान लीजिए आपने अपने बच्चे के जन्म के पहले साल ही NPS वात्सल्य खाता खोला। चरण 1 (0 से 18 वर्ष): निवेश: आप हर साल ₹10,000 जमा करते हैं। कुल अवधि: 18 साल। रिटर्न की दर: मान लीजिए औसतन 10% (इक्विटी और डेट का मिश्रण)। 18 साल पर कॉर्पस: 18 साल पूरे होने तक जमा राशि पर ब्याज जुड़ता रहेगा। चरण 2 (18 से 60 वर्ष): जैसे ही बच्चा 18 साल का होता है, खाता 'NPS Tier-1' (All Citizen Model) में बदल जाता है। अब बच्चा खुद उसमें निवेश जारी रखता है (वही ₹10,000 सालाना)। जादू यहां होता है: निवेश की अवधि अब 42 साल और बढ़ जाती है। कंपाउंडिंग में 'समय' ही पैसा है। कैलकुलेशन टेबल: विवरण राशि/विवरण वार्षिक निवेश ₹10,000 मासिक औसत ~₹834 निवेश की शुरुआत 0 वर्ष (जन्म के समय) निवेश की समाप्ति 60 वर्ष (रिटायरमेंट) अनुमानित रिटर्न (CAGR) 12-13% (एग्रेसिव इक्विटी प्लान में) कुल निवेशित राशि ₹6 लाख (60 वर्षों में) मैच्योरिटी पर संभावित फंड ₹11 करोड़ (लगभग) नोट: यह गणना एग्रेसिव प्लान (75% इक्विटी) और बाजार की लंबी अवधि की चाल (12-13% रिटर्न) पर आधारित है। यदि रिटर्न 10% भी रहता है, तो भी फंड करोड़ों में होगा। निवेश के विकल्प – एग्रेसिव या कंजर्वेटिव? (Investment Choices) NPS वात्सल्य की सबसे बड़ी खासियत इसका लचीलापन (Flexibility) है। सुकन्या समृद्धि या PPF में आपको एक तय ब्याज मिलता है, लेकिन यहां आपको चुनने का मौका मिलता है कि आपका पैसा कहां लगे। 1. डिफॉल्ट चॉइस (Moderate Lifecycle Fund - LC50): अगर आप कुछ नहीं चुनते, तो पैसा अपने आप यहां लगेगा। इसमें 50% पैसा शेयर बाजार में और 50% सुरक्षित सरकारी बॉन्ड में लगता है। यह जोखिम और रिटर्न का संतुलन है। 2. एक्टिव चॉइस (Active Choice): इसमें अभिभावक खुद तय करते हैं: इक्विटी (Equity - E): अधिकतम 75% तक पैसा शेयर बाजार में। (सबसे ज्यादा रिटर्न की संभावना, लेकिन थोड़ा जोखिम)। कॉर्पोरेट बॉन्ड (Corporate Debt - C): बड़ी कंपनियों के बॉन्ड में निवेश। गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (G-Sec - G): सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश (सबसे सुरक्षित)। 3. ऑटो चॉइस (Auto Choice): LC75 (Aggressive): 75% इक्विटी। (लंबी अवधि में 11 करोड़ का लक्ष्य इसी से संभव है)। LC25 (Conservative): केवल 25% इक्विटी, बाकी सुरक्षित निवेश। सलाह: चूंकि बच्चे के पास 18 या 60 साल का लंबा समय है, इसलिए बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो जाता है। ऐसे में एक्सपर्ट्स अक्सर बच्चों के लिए 'अधिक इक्विटी' (Higher Equity) एक्सपोजर की सलाह देते हैं, क्योंकि यही महंगाई को मात देकर असली वेल्थ क्रिएट करता है। पात्रता और जरूरी दस्तावेज (Eligibility & KYC) इस योजना का लाभ उठाने के लिए शर्तें बेहद सरल हैं: नागरिकता: बच्चा और अभिभावक भारतीय नागरिक होने चाहिए। (NRI भी निवेश कर सकते हैं)। आयु: बच्चे की उम्र 18 वर्ष से कम होनी चाहिए। KYC: अभिभावक का केवाईसी अनिवार्य है। जरूरी दस्तावेज: बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)। अभिभावक का आधार कार्ड और पैन कार्ड। मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी। बच्चे का आधार कार्ड (यदि उपलब्ध हो, तो बेहतर है)। निकासी के नियम – कब और कितना पैसा निकाल सकते हैं? अक्सर माता-पिता को चिंता होती है कि पैसा फंस तो नहीं जाएगा? सरकार ने इसके लिए व्यावहारिक नियम बनाए हैं। 18 साल से पहले निकासी (Partial Withdrawal): लॉक-इन: खाता खुलने के 3 साल बाद ही निकासी संभव है। सीमा: कुल जमा राशि का 25% ही निकाला जा सकता है। कारण: केवल विशेष परिस्थितियों में—जैसे बच्चे की उच्च शिक्षा, गंभीर बीमारी का इलाज, या विकलांगता। आवृत्ति: 18 साल का होने तक कुल 3 बार पैसा निकाला जा सकता है। 18 साल का होने पर (On Turning Major): जब बच्चा 18 साल का हो जाएगा, तो योजना के नियम बदल जाएंगे: केवाईसी अपडेट: बच्चे को अपना नया केवाईसी (KYC) करना होगा। खाता परिवर्तन: NPS वात्सल्य खाता सामान्य NPS Tier-1 खाते में बदल जाएगा। निकासी शर्त: यदि फंड 2.5 लाख रुपये से कम है: पूरा पैसा एकमुश्त निकाला जा सकता है। यदि फंड 2.5 लाख रुपये से अधिक है: तो कम से कम 80% पैसे को पेंशन फंड (Annuity) में डालना होगा और 20% एकमुश्त निकाल सकते हैं। नोट: अगर आप 18 साल पर पैसा नहीं निकालना चाहते (जो कि वेल्थ क्रिएशन के लिए सही भी है), तो आप इसे 60 साल तक जारी रख सकते हैं। NPS वात्सल्य vs अन्य योजनाएं (Comparison) विशेषता NPS वात्सल्य सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पात्रता लड़का और लड़की दोनों केवल लड़कियां कोई भी ब्याज/रिटर्न मार्केट लिंक्ड (10-14% संभावित) सरकार द्वारा तय (वर्तमान ~8.2%) सरकार द्वारा तय (वर्तमान ~7.1%) जोखिम मध्यम से उच्च (बाजार आधारित) शून्य (सरकारी गारंटी) शून्य (सरकारी गारंटी) इक्विटी विकल्प हां (75% तक) नहीं नहीं लंबी अवधि में वेल्थ सबसे ज्यादा मध्यम कम (महंगाई के सापेक्ष) सुकन्या समृद्धि और PPF सुरक्षित हैं, लेकिन महंगाई दर को मात देकर 'करोड़ों' का फंड बनाने की क्षमता केवल इक्विटी-लिंक्ड NPS में ही है। खाता कैसे खोलें? (Step-by-Step Guide) आप यह खाता ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से खोल सकते हैं। ऑनलाइन तरीका (सबसे आसान): eNPS पोर्टल पर जाएं: nps.kfintech.com या enps.nsdl.com पर विजिट करें। रजिस्ट्रेशन: 'National Pension System' चुनें और फिर 'Registration' पर क्लिक करें। विकल्प चुनें: 'Register on behalf of Minor' का विकल्प चुनें। विवरण भरें: अभिभावक और बच्चे की जानकारी भरें। पैन और आधार से डेटा वेरिफाई होगा। प्लान चुनें: पेंशन फंड मैनेजर (जैसे SBI, LIC, HDFC, ICICI) और निवेश का विकल्प (एग्रेसिव/मॉडरेट) चुनें। भुगतान: नेट बैंकिंग या UPI से पहली किस्त जमा करें। PRAN कार्ड: प्रक्रिया पूरी होने पर बच्चे के नाम पर PRAN (Permanent Retirement Account Number) जनरेट होगा। ऑफलाइन तरीका: अपने नजदीकी बैंक (जैसे SBI, HDFC, ICICI) या पोस्ट ऑफिस जाएं। वहां 'Point of Presence (POP)' डेस्क पर NPS वात्सल्य का फॉर्म मांगें। फॉर्म भरकर और दस्तावेज अटैच करके जमा करें। विशेषज्ञों की राय प्रसिद्ध वित्तीय सलाहकार सतीश कुमार बताते हैं, "NPS वात्सल्य स्कीम उन माता-पिता के लिए वरदान है जो रिस्क को समझते हैं। अगर आप पारंपरिक एफडी (FD) मानसिकता से बाहर निकलकर इस स्कीम में एसआईपी (SIP) की तरह निवेश करते हैं, तो 20-25 सालों में जो रिटर्न मिलेगा, वह किसी भी सरकारी स्कीम से दोगुना या तिगुना हो सकता है।" एक छोटा कदम, बड़ी छलांग ₹10,000 साल का मतलब है—रोज़ का एक बर्गर या पिज़्ज़ा का खर्च भी नहीं। अगर हम अपनी फिजूलखर्ची को थोड़ा कम करके इस रकम को अपने बच्चे के भविष्य के लिए 'वात्सल्य' में डाल दें, तो हम उन्हें एक ऐसा जीवन दे सकते हैं जहाँ उन्हें पैसे के लिए कभी संघर्ष न करना पड़े। आज ही अपने बच्चे के सुनहरे भविष्य की नींव रखें। याद रखें, निवेश में 'कल' कभी नहीं आता, सही समय 'आज' ही है। (डिस्क्लेमर: NPS बाजार जोखिमों के अधीन है। ₹11 करोड़ का आंकड़ा 12-13% के अनुमानित रिटर्न और 60 साल तक निरंतर कंपाउंडिंग पर आधारित है। वास्तविक रिटर्न बाजार की चाल पर निर्भर करेगा। निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।)
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे के करोड़ों यात्रियों के लिए आज का दिन (14 जनवरी 2026) किसी उत्सव से कम नहीं है। यदि आप उन लाखों यात्रियों में से हैं जो रोजाना जनरल डिब्बे (Unreserved Coach) में सफर करते हैं और स्टेशन पर टिकट के लिए घंटों लंबी कतारों में धक्का-मुक्की सहते हैं, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला देगी। भारतीय रेलवे ने अपनी डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने और स्टेशनों पर भीड़ कम करने के उद्देश्य से आज से अपनी नई डिस्काउंट स्कीम लागू कर दी है। अब रेलवे के आधिकारिक 'सुपर ऐप'— रेलवन (RailOne) के जरिए टिकट बुक करने पर यात्रियों को न केवल सहूलियत मिलेगी, बल्कि उनकी जेब को भी सीधा फायदा पहुंचेगा। रेलवे ने सामान्य (अनारक्षित) टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग पर 6% तक की छूट देने की शुरुआत कर दी है। यह फैसला न केवल डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि आम आदमी के लिए राहत की खबर भी है। क्या है 'दोगुना फायदा' वाला यह नया ऑफर? रेलवे ने इस ऑफर को दो हिस्सों में बांटा है। यात्रियों को पेमेंट के तरीके (Mode of Payment) के आधार पर छूट दी जाएगी। आइए समझते हैं इस गणित को: (A) 3% का फ्लैट डिस्काउंट (सभी के लिए) अगर आप अपने स्मार्टफोन में RailOne App डाउनलोड करते हैं और उससे जनरल टिकट बुक करते हैं, तो आपको 3% की छूट मिलेगी। शर्त: इसके लिए आप पेमेंट किसी भी माध्यम से कर सकते हैं— जैसे UPI (PhonePe, Google Pay, Paytm), क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग। लाभ: अगर टिकट 100 रुपये का है, तो आपको केवल 97 रुपये चुकाने होंगे। (B) 6% का महा-डिस्काउंट (R-Wallet यूजर्स के लिए) असली फायदा उन यात्रियों को मिलेगा जो रेलवे के अपने डिजिटल वॉलेट यानी R-Wallet का इस्तेमाल करेंगे। पहले R-Wallet से बुकिंग करने पर 3% का बोनस मिलता था। आज से (14 जनवरी 2026) इसे बढ़ाकर दोगुना यानी 6% कर दिया गया है। लाभ: यानी अगर आप R-Wallet में पैसा रखकर उससे टिकट कटाते हैं, तो 100 रुपये के टिकट पर आपको 6 रुपये की सीधी बचत होगी। रोजाना सफर करने वालों (Daily Commuters) के लिए महीने के अंत में यह एक बड़ी बचत बन सकती है। ऑफर की समयसीमा और नियम रेलवे अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह स्कीम एक सीमित अवधि के लिए लॉन्च की गई है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को एप पर शिफ्ट किया जा सके। शुरुआत: 14 जनवरी 2026 (आज से) अंतिम तिथि: 14 जुलाई 2026 अवधि: कुल 6 महीने महत्वपूर्ण चेतावनी: रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह छूट सिर्फ और सिर्फ RailOne App पर मिलेगी। अगर आप किसी थर्ड पार्टी एप (जैसे पेटीएम या फोनपे के मुख्य इंटरफेस) या किसी अनाधिकृत वेबसाइट से जनरल टिकट बुक करने की कोशिश करेंगे, तो आपको पूरा किराया देना होगा। रेलवे का मकसद अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देना है। आखिर क्यों पड़ी RailOne App की जरूरत? (The One-Stop Solution) भारतीय रेलवे का डिजिटल इकोसिस्टम पहले बहुत बिखरा हुआ था। यात्रियों को अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग एप्स मोबाइल में रखने पड़ते थे, जिससे फोन की मेमोरी भर जाती थी और कन्फ्यूजन होता था। पुरानी व्यवस्था की समस्याएँ: IRCTC App: केवल रिजर्वेशन टिकट के लिए। UTS App: केवल जनरल टिकट के लिए। NTES: ट्रेन की लाइव लोकेशन देखने के लिए। Rail Madad: शिकायत दर्ज करने के लिए। Food on Track: खाना मंगाने के लिए। नई व्यवस्था (RailOne): रेल मंत्रालय ने इन सभी समस्याओं का समाधान करते हुए RailOne को लॉन्च किया है। यह एक 'सुपर एप' है। इसमें एक बार लॉगिन करने के बाद आप ट्रेन से जुड़ा हर काम एक ही जगह कर सकते हैं। टिकट बुकिंग (जनरल + रिजर्वेशन) लाइव स्टेटस PNR स्टेटस रिफंड क्लेम शिकायत निवारण R-Wallet क्या है? (सुरक्षित और तेज पेमेंट) R-Wallet भारतीय रेलवे का अपना 'डिजिटल पर्स' है। जैसे आप Paytm Wallet में पैसे रखते हैं, वैसे ही आप रेलवे के वॉलेट में पैसे रख सकते हैं। R-Wallet के फायदे: पेमेंट फेल होने का डर नहीं: कई बार UPI सर्वर डाउन होने से पेमेंट अटक जाता है, लेकिन R-Wallet रेलवे के अपने सर्वर पर काम करता है, इसलिए पेमेंट तुरंत होता है। इंस्टेंट बुकिंग: भीड़-भाड़ में जब ट्रेन छूट रही हो, तो OTP का इंतजार करने के बजाय वॉलेट से एक क्लिक में टिकट बुक होता है। सुरक्षा: इसमें बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) या mPIN का सिस्टम है, जिससे आपका पैसा सुरक्षित रहता है। गाइड: RailOne App कैसे डाउनलोड और इस्तेमाल करें? यदि आप तकनीक में बहुत माहिर नहीं हैं, तो भी चिंता न करें। नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें: स्टेप 1: डाउनलोड करें अपने मोबाइल के Google Play Store (Android) या App Store (iPhone) पर जाएं। सर्च बार में "RailOne" टाइप करें। रेलवे के आधिकारिक लोगो वाले एप को 'Install' करें। स्टेप 2: रजिस्ट्रेशन (पहली बार के लिए) एप खोलें और 'Register' पर क्लिक करें। अपना मोबाइल नंबर, नाम और एक पासवर्ड डालें। आपके नंबर पर एक OTP आएगा, उसे दर्ज करें। अब अपनी सुरक्षा के लिए 4 अंकों का एक mPIN सेट करें (जैसे ATM पिन होता है)। स्टेप 3: टिकट बुकिंग और डिस्काउंट एप में लॉग-इन करें। 'Unreserved Booking' (अनारक्षित टिकट) विकल्प चुनें। 'From Station' (कहां से) और 'To Station' (कहां तक) चुनें। 'Book Ticket' पर क्लिक करें। महत्वपूर्ण: पेमेंट पेज पर आपको डिस्काउंट अपने आप दिखाई देगा। यदि आप R-Wallet चुनते हैं तो 6% और अन्य विकल्प पर 3% छूट मिलेगी। यात्रियों के मन में उठने वाले सवाल (FAQ Analysis) इस नई व्यवस्था को लेकर यात्रियों के मन में कई सवाल हैं, जिनका जवाब नीचे विस्तार से दिया गया है: Q: क्या मुझे स्टेशन पर जाकर टिकट प्रिंट कराना होगा? A: नहीं। RailOne एप में 'Paperless Ticket' का विकल्प होता है। टिकट बुक करने के बाद वह आपके एप में सेव हो जाता है। TTE या चेकिंग स्टाफ के मांगने पर आप मोबाइल में ही टिकट दिखा सकते हैं। Q: क्या यह एप हिंदी में उपलब्ध है? A: जी हां। RailOne एप को भारत की विविधता को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, बांग्ला समेत कई क्षेत्रीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। आप सेटिंग्स में जाकर अपनी मनपसंद भाषा चुन सकते हैं। Q: अगर मैंने टिकट बुक किया और यात्रा नहीं की, तो क्या रिफंड मिलेगा? A: जनरल टिकट के नियमों के अनुसार कैंसिलेशन की शर्तें लागू होती हैं। हालांकि, RailOne एप में 'Refund Management' की सुविधा है। अगर आप तय समय सीमा के भीतर (ट्रेन छूटने से पहले) टिकट कैंसिल करते हैं, तो पैसा वापस आपके वॉलेट या बैंक खाते में आ जाएगा। इसके लिए आपको स्टेशन पर बाबू के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। Q: क्या ट्रेन अलर्ट की सुविधा है? A: बिल्कुल। RailOne एप में रियल-टाइम नोटिफिकेशन फीचर है। अगर आपकी ट्रेन लेट है, प्लेटफॉर्म बदला गया है, या बुकिंग कन्फर्म हुई है, तो यह एप आपको तुरंत नोटिफिकेशन भेजकर सूचित करेगा। प्रभाव: डिजिटल इंडिया की ओर एक और कदम रेलवे के इस कदम को विशेषज्ञ 'मास्टरस्ट्रोक' मान रहे हैं। इसके दूरगामी परिणाम होंगे: कागज की बचत: पेपरलेस टिकट को बढ़ावा मिलने से हर साल टन कागज की बचत होगी, जो पर्यावरण के लिए अच्छा है। भ्रष्टाचार में कमी: ऑनलाइन बुकिंग से टिकट खिड़की पर होने वाली चिल्लर की किचकिच और अवैध वसूली खत्म होगी। डाटा मैनेजमेंट: रेलवे के पास सटीक आंकड़े होंगे कि किस रूट पर कितने यात्री सफर कर रहे हैं, जिससे भविष्य में नई ट्रेनें चलाने में मदद मिलेगी। मौका न चूकें, आज ही डाउनलोड करें कुल मिलाकर, RailOne App और R-Wallet का यह नया गठजोड़ आम यात्रियों के लिए फायदे का सौदा है। 14 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस ऑफर का लाभ उठाकर आप न केवल पैसे बचा सकते हैं, बल्कि यात्रा को तनावमुक्त भी बना सकते हैं। अब लाइन में लगने का जमाना गया, अब फोन निकालिए और 'स्मार्ट यात्री' बनिए।
क्या आप भी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में इसलिए निवेश करने से कतराते थे कि इसमें रिटायरमेंट के बाद "फिक्स रिटर्न" की गारंटी नहीं थी? अगर हाँ, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। भारत की पेंशन व्यवस्था एक क्रांतिकारी बदलाव की दहलीज पर खड़ी है।READ ALSO:-Good News: सड़क हादसों में अब पैसे की कमी से नहीं जाएगी जान, मोदी सरकार देगी ₹1.5 लाख का 'कैशलेस इलाज'; गडकरी ने किया कन्फर्म पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS को और अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और 'रिटर्न की गारंटी' वाला प्रोडक्ट बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम उठाया है। PFRDA ने एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति (High-Level Expert Committee) का गठन किया है, जिसका एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि NPS सब्सक्राइबर्स को बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद एक 'सुनिश्चित और स्थिर आय' (Assured Income) मिल सके। इस समिति की कमान Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) के पूर्व अध्यक्ष और जाने-माने विशेषज्ञ डॉ. एम. एस. साहू (Dr. M.S. Sahoo) को सौंपी गई है। यह कदम सरकार के 'विकसित भारत 2047' के विजन से जुड़ा है, ताकि हर बुजुर्ग को आर्थिक आत्मनिर्भरता मिल सके। इस 'मेगा एक्सक्लूसिव' रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि यह नई कमेटी आपके बुढ़ापे को कैसे सुरक्षित करेगी, 'मार्केट लिंक्ड गारंटी' क्या है, और आपको इसका फायदा कैसे मिलेगा। क्या है PFRDA का मास्टरप्लान? अभी तक NPS पूरी तरह बाजार आधारित (Market Linked) है। यानी अगर बाजार अच्छा है तो पैसा ज्यादा, अगर गिरा तो कम। लेकिन अब PFRDA इसे बदलना चाहता है। समिति का मुख्य उद्देश्य: इस 15-सदस्यीय समिति को NPS के मौजूदा ढांचे के भीतर ही ऐसे नियम और दिशा-निर्देश (Guidelines) बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे पेंशनधारकों को "बाजार आधारित लेकिन कानूनी रूप से लागू होने वाली सुनिश्चित पेंशन" मिल सके। आसान शब्दों में कहें तो, पैसा बाजार में ही लगेगा, लेकिन आपको मिलने वाली पेंशन की राशि में एक 'सुरक्षा कवच' (Guarantee) होगा। आधार क्या है? यह समिति 30 सितंबर 2025 को PFRDA द्वारा जारी किए गए परामर्श पत्र (Consultation Paper) में सुझाई गई पेंशन योजनाओं को आगे बढ़ाएगी। इसका काम 'स्ट्रक्चर्ड पेंशन पेआउट्स' (Structured Pension Payouts) के लिए एक स्थायी सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करना होगा। कौन हैं डॉ. एम.एस. साहू और उनकी टीम? PFRDA ने इस काम के लिए देश के सबसे बेहतरीन दिमागों को एक साथ जमा किया है। अध्यक्ष: डॉ. एम. एस. साहू (पूर्व अध्यक्ष, IBBI और संस्थापक, Dr. Sahoo Regulatory Chambers)। सदस्य: समिति में कानून, एक्चुरियल साइंस (Actuarial Science), वित्त, बीमा, पूंजी बाजार और अकादमिक क्षेत्र के दिग्गज शामिल हैं। विशेष अधिकार: समिति को यह छूट दी गई है कि वह जरूरत पड़ने पर बाहरी विशेषज्ञों और मध्यस्थ संस्थाओं को भी चर्चा में शामिल कर सकती है। 'मार्केट गारंटी' को कानूनी जामा कैसे पहनाएंगे? समिति का सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण काम यह तय करना है कि 'बाजार की गारंटी' को कानूनी रूप से कैसे लागू किया जाए। इसके लिए समिति दो प्रमुख कॉन्सेप्ट्स पर मंथन कर रही है: Novation (नवीनीकरण): पुराने अनुबंध की जगह नया अनुबंध लागू करना ताकि शर्तों को अपडेट किया जा सके। Settlement (निपटान): भुगतान की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना। इन तरीकों से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पेंशन भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी हो और अगर बाजार गिरे भी, तो भी वादे के मुताबिक पेंशनधारक को भुगतान मिले। समिति यह देखेगी कि निवेश के संचय चरण (Accumulation Phase) से लेकर निकासी चरण (Decumulation Phase) तक का सफर बिना किसी रुकावट के पूरा हो। आम निवेशक को कैसे मिलेगा फायदा? (Impact on Subscribers) यह समिति सिर्फ नियम नहीं बनाएगी, बल्कि सीधे तौर पर आपकी जेब और सहूलियत का ध्यान रखेगी। समिति के एजेंडे में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं: A. मिस-सेलिंग पर रोक (No Mis-selling): अक्सर एजेंट यह कहकर पॉलिसी बेचते हैं कि "इतना तो मिलेगा ही", जबकि वह सच नहीं होता। समिति एक मानकीकृत डिस्क्लोज़र फ्रेमवर्क (Standardized Disclosure Framework) तैयार करेगी। इससे 'आश्वासन' (Assurance) और 'बाजार आधारित गारंटी' (Market-based Guarantee) के बीच का अंतर साफ-साफ समझाया जाएगा। B. परिचालन पहलू (Operational Aspects): लॉक-इन अवधि: पैसा कितने साल तक नहीं निकाल पाएंगे। निकासी सीमाएं: कब और कितना पैसा निकाल सकते हैं। प्राइसिंग और शुल्क: इस गारंटीड प्रोडक्ट की कीमत और सर्विस चार्ज क्या होंगे, इसकी रूपरेखा तैयार होगी। C. टैक्स और जोखिम प्रबंधन (Tax & Risk): समिति उन टैक्स पहलुओं की समीक्षा करेगी, जिनमें पेंशनधारक NPS से बाहर निकले बिना ही सुनिश्चित पेंशन प्राप्त कर सके। साथ ही, कंपनियों की सॉल्वेंसी (Solvency) तय की जाएगी ताकि वे भविष्य में पैसा देने से मुकर न सकें। 5. 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य यह पहल केवल एक वित्तीय सुधार नहीं है, बल्कि एक सामाजिक सुरक्षा का कदम है। PFRDA का यह कदम संकेत देता है कि सरकार NPS को केवल एक 'निवेश उत्पाद' से आगे ले जाकर एक 'भरोसेमंद पेंशन व्यवस्था' में बदलना चाहती है। विकसित भारत 2047 के तहत हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन देना सरकार की प्राथमिकता है। सुरक्षित भविष्य की ओर एक कदम विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें आने वाले समय में भारत की पेंशन प्रणाली की दिशा और दशा दोनों बदल सकती हैं। अगर यह मॉडल सफल होता है, तो NPS भारत का सबसे आकर्षक रिटायरमेंट प्लान बन जाएगा, जहाँ शेयर बाजार का रिटर्न भी होगा और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी सुरक्षा भी। 'खबरीलाल' की राय: निवेशकों को फिलहाल समिति की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। लेकिन यह स्पष्ट है कि आने वाला समय पेंशनभोगियों के लिए ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी होने वाला है। [डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट PFRDA द्वारा जारी आधिकारिक घोषणाओं और 13 जनवरी 2026 तक की जानकारी पर आधारित है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से संपर्क करें।]
भारत में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) के 'खुले खेल' का दौर अब आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। अगर आप बिटकॉइन (Bitcoin), एथेरियम (Ethereum), डॉगकॉइन या किसी भी अन्य डिजिटल करेंसी में निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके लिए खतरे की घंटी है। भारत सरकार और वित्तीय खुफिया इकाई (Financial Intelligence Unit - FIU-IND) ने देश की आर्थिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए क्रिप्टो ट्रेडिंग की दुनिया में 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी सख्ती लागू कर दी है।READ ALSO:-Good News: सड़क हादसों में अब पैसे की कमी से नहीं जाएगी जान, मोदी सरकार देगी ₹1.5 लाख का 'कैशलेस इलाज'; गडकरी ने किया कन्फर्म मंगलवार को जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों ने भारतीय क्रिप्टो बाजार में हलचल मचा दी है। ये नियम इतने सख्त हैं कि अब क्रिप्टो एक्सचेंज पर एक भी ट्रांजैक्शन सरकार की नजर से बच नहीं पाएगा। नए नियमों के तहत निजता (Privacy) की आड़ में अब कोई भी अपनी पहचान नहीं छिपा सकेगा। चाहे आप WazirX, CoinDCX, CoinSwitch जैसे भारतीय प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हों या भारत में रजिस्टर्ड किसी विदेशी एक्सचेंज का, अब आपको 'बिग बॉस' यानी FIU-IND की शर्तों पर ही चलना होगा। इस विस्तृत विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आखिर ये 5 नए नियम क्या हैं, इनसे आपकी ट्रेडिंग पर क्या असर पड़ेगा, और अगर आपने गलती से भी नियम तोड़ा तो आपके पैसों का क्या होगा। पृष्ठभूमि: आखिर सरकार को क्यों उठानी पड़ी लाठी? पिछले कुछ सालों में, खासकर 2024 और 2025 के दौरान, भारत में क्रिप्टो के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) और टेरर फंडिंग के मामलों में बेतहाशा वृद्धि देखी गई। साइबर अपराधी ठगी का पैसा क्रिप्टो के जरिए विदेश भेज रहे थे। FIU-IND का मिशन: वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) ने साफ कर दिया है कि क्रिप्टो का इस्तेमाल अब 'हवाला' के डिजिटल संस्करण के रूप में नहीं होने दिया जाएगा। FATF का दबाव: फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के ग्लोबल मानकों को पूरा करने के लिए भारत ने ये कदम उठाए हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर डिजिटल पैसे का एक 'मालिक' हो और उस पैसे का एक 'इतिहास' हो। नियम नंबर 1: लॉगिन मतलब 'लाइव लोकेशन' (Geo-Tagging Mandatory) अब तक आप रजाई में बैठकर या दुनिया के किसी भी कोने से चुपचाप ट्रेडिंग कर लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। क्या है नया नियम? FIU-IND ने सभी एक्सचेंजों को निर्देश दिया है कि वे यूजर की 'जियो-लोकेशन' (Geo-Location) को ट्रैक करें। जब भी आप अपने क्रिप्टो ऐप (App) या वेबसाइट पर लॉगिन करेंगे, सिस्टम आपसे आपकी लोकेशन का एक्सेस मांगेगा। इसका असर: लोकेशन शेयरिंग अनिवार्य: अगर आप अपने फोन या लैपटॉप की लोकेशन (GPS) ऑन नहीं करते हैं, तो ऐप खुलेगा ही नहीं। IP एड्रेस की निगरानी: एक्सचेंज अब आपके IP एड्रेस पर पैनी नजर रखेंगे। अगर आपका IP एड्रेस भारत के बाहर का दिखता है और आपने अपने अकाउंट में 'NRI स्टेटस' अपडेट नहीं किया है, तो आपका अकाउंट तुरंत रेड फ्लैग (Red Flag) हो जाएगा। मकसद: यह सुनिश्चित करना कि यूजर भारतीय न्यायक्षेत्र (Jurisdiction) के भीतर ही है और वह किसी प्रतिबंधित देश से ट्रेडिंग नहीं कर रहा है। सावधानी: अगर आप विदेश यात्रा पर हैं, तो वहां से ट्रेडिंग करने से पहले एक्सचेंज को सूचित करें, वरना आपका अकाउंट 'सस्पिशियस एक्टिविटी' के तहत फ्रीज हो सकता है। नियम नंबर 2: VPN पर 'जीरो टॉलरेंस' (Total VPN Ban) क्रिप्टो की दुनिया में गोपनीयता पसंद करने वाले लोग अक्सर वीपीएन (Virtual Private Network) का इस्तेमाल करते हैं। सरकार ने इस पर सबसे बड़ा प्रहार किया है। क्या है नया नियम? नए नियमों के मुताबिक, क्रिप्टो ट्रेडिंग के दौरान VPN, प्रॉक्सी सर्वर या टॉर ब्राउज़र (Tor Browser) का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। तकनीकी पहलू: एक्सचेंजों ने ऐसे सॉफ्टवेयर इंटीग्रेट किए हैं जो तुरंत पकड़ लेंगे कि यूजर VPN के पीछे अपनी असली पहचान छिपा रहा है। सजा: जैसे ही सिस्टम VPN डिटेक्ट करेगा, वह ट्रांजैक्शन को तुरंत ब्लॉक कर देगा। बार-बार ऐसा करने पर यूजर का अकाउंट स्थायी रूप से बंद (Permanent Ban) किया जा सकता है और उसके फंड्स फ्रीज हो सकते हैं। विश्लेषण: सरकार का तर्क है कि ईमानदार निवेशक को अपनी पहचान छिपाने की क्या जरूरत है? VPN का इस्तेमाल अक्सर अवैध गतिविधियों या बैन वेबसाइट्स को एक्सेस करने के लिए किया जाता है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम नंबर 3: सेल्फी विद 'लाइवनेस' (Liveness Check KYC) सिर्फ आधार कार्ड या पैन कार्ड की फोटो अपलोड करके केवाईसी (KYC) कराने का जमाना गया। अब आपको यह साबित करना होगा कि आप 'जिंदा' इंसान हैं और वही हैं जो दस्तावेजों में दिख रहे हैं। क्या है नया नियम? केवाईसी प्रक्रिया में 'लाइवनेस चेक' (Liveness Check) को अनिवार्य कर दिया गया है। लाइव सेल्फी: अकाउंट बनाते समय या ट्रांजैक्शन करते समय आपको ऐप के कैमरे के सामने लाइव सेल्फी लेनी होगी। इसमें आपको पलकें झपकाने या सिर घुमाने के लिए कहा जा सकता है (ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह फोटो की फोटो नहीं है)। वीडियो वेरिफिकेशन: बड़े ट्रांजैक्शन या संदिग्ध मामलों में वीडियो कॉल के जरिए वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। बेनामी खातों पर वार: अब तक जालसाज दूसरों के आधार कार्ड चुराकर अकाउंट बना लेते थे। लाइवनेस चेक से यह संभव नहीं होगा क्योंकि दस्तावेज और चेहरा लाइव मैच करना जरूरी होगा। नियम नंबर 4: पैसे कहाँ से आए? (Source of Funds) यह नियम छोटे और मध्यम निवेशकों को सबसे ज्यादा परेशान कर सकता है, लेकिन मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए यह सबसे अहम है। क्या है नया नियम? यदि कोई निवेशक एक निश्चित सीमा (जैसे 50,000 रुपये या उससे अधिक) का डिपॉजिट या ट्रेड करता है, तो उसे 'फंड्स का स्रोत' (Source of Funds) घोषित करना होगा। क्या दस्तावेज देने होंगे? एक्सचेंज आपसे निम्नलिखित सबूत मांग सकते हैं: पिछले 3 से 6 महीने का बैंक स्टेटमेंट। सैलरी स्लिप (नौकरीपेशा लोगों के लिए)। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) की कॉपी। अगर पैसा गिफ्ट मिला है, तो गिफ्ट डीड। असर: अगर आप यह नहीं बता पाए कि निवेश के लिए पैसा कहां से आया, तो आपका ट्रांजैक्शन फेल कर दिया जाएगा और मामले की सूचना FIU को दी जा सकती है। यह नियम उन लोगों के लिए मुश्किल खड़ी करेगा जो कैश में कमाई करते हैं और उसे क्रिप्टो में डालते हैं। नियम नंबर 5: ट्रैवल रूल और बेनेफिशियरी डिटेल (Know Your Beneficiary) बैंक ट्रांसफर की तरह अब क्रिप्टो ट्रांसफर में भी रिसीवर (प्राप्तकर्ता) की कुंडली देनी होगी। इसे वैश्विक स्तर पर 'ट्रैवल रूल' (Travel Rule) कहा जाता है। क्या है नया नियम? अगर आप अपने एक्सचेंज वॉलेट से किसी दूसरे वॉलेट (चाहे वह दोस्त का हो, किसी दुकानदार का, या आपका खुद का हार्डवेयर वॉलेट) में क्रिप्टो भेज रहे हैं, तो आपको बताना होगा: रिसीवर का नाम। रिसीवर का वॉलेट एड्रेस। रिसीवर किस देश का है। रिसीवर के साथ आपका संबंध। निजी वॉलेट्स (Unhosted Wallets) पर संकट: प्राइवेट वॉलेट्स (जैसे MetaMask, Trust Wallet) में ट्रांसफर करना अब मुश्किल हो गया है क्योंकि इन वॉलेट्स की कोई केवाईसी नहीं होती। एक्सचेंजों को निर्देश है कि वे ऐसे वॉलेट्स में ट्रांजैक्शन को शक की निगाह से देखें जहां रिसीवर की पहचान सत्यापित न हो सके। एक्सचेंजों की प्रतिक्रिया: WazirX और CoinDCX का हाल FIU-IND के इन निर्देशों के बाद भारतीय एक्सचेंजों पर अनुपालन (Compliance) का भारी बोझ आ गया है। CoinDCX के प्रवक्ता का बयान: "हम सरकार के दिशा-निर्देशों का स्वागत करते हैं। एक सुरक्षित इकोसिस्टम बनाने के लिए ये कदम जरूरी हैं। हमने अपने ऐप में लाइव लोकेशन और एन्हांस्ड केवाईसी फीचर्स अपडेट कर दिए हैं। हम यूजर्स से अपील करते हैं कि वे बिना VPN के ही ट्रेड करें।" यूजर अनुभव पर असर: लॉगिन प्रक्रिया धीमी हो सकती है। बार-बार वेरिफिकेशन से झुंझलाहट हो सकती है। हालांकि, इससे भारतीय एक्सचेंजों की साख (Credibility) बढ़ेगी और संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) आकर्षित होंगे। टैक्स का जाल: 30% टैक्स + 1% TDS अभी भी लागू पाठकों को याद दिला दें कि नए नियम सिर्फ सुरक्षा के लिए हैं, टैक्स से इनका कोई लेना-देना नहीं है। टैक्स के पुराने नियम अब भी जस के तस हैं: 30% फ्लैट टैक्स: क्रिप्टो से होने वाली किसी भी कमाई पर 30% टैक्स देना होगा (सेस और सरचार्ज अलग से)। 1% TDS: हर सेल (बिक्री) ट्रांजैक्शन पर 1% टीडीएस कटेगा। लॉस सेट-ऑफ नहीं: अगर आपको बिटकॉइन में नुकसान होता है और एथेरियम में मुनाफा, तो आप नुकसान को मुनाफे से एडजस्ट नहीं कर सकते। मुनाफे पर पूरा टैक्स देना होगा। क्या यह क्रिप्टो पर बैन (Ban) की तैयारी है? विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'बैन' नहीं, बल्कि 'रेगुलेशन' (Regulation) है। अगर सरकार को क्रिप्टो बैन करना होता, तो वह ऐसे जटिल नियम नहीं बनाती। नियम बनाने का मतलब है कि सरकार क्रिप्टो के अस्तित्व को स्वीकार कर रही है, लेकिन अपनी शर्तों पर। यह कदम भारत में क्रिप्टो को 'एसेट क्लास' के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सख्त लेकिन जरूरी पड़ाव है। यूजर गाइड: अब आपको क्या करना चाहिए? 'Khabreelal' अपने पाठकों के लिए एक चेकलिस्ट दे रहा है ताकि आप किसी परेशानी में न पड़ें: KYC अपडेट करें: अगर आपने बहुत पहले केवाईसी कराई थी, तो एक्सचेंज पर जाकर दोबारा 'री-केवाईसी' (Re-KYC) कर लें और लाइव सेल्फी दें। VPN हटाएं: ट्रेडिंग ऐप खोलते समय फोन का VPN बंद रखें। लोकेशन ऑन रखें: ऐप परमिशन में जाकर 'Location' को 'Always On' या 'While Using the App' पर सेट करें। दस्तावेज तैयार रखें: अगर आप बड़ा निवेश करने वाले हैं, तो अपना बैंक स्टेटमेंट पीडीएफ फॉर्मेट में तैयार रखें। पीयर-टू-पीयर (P2P) से बचें: अब P2P ट्रांजैक्शन में बहुत जोखिम है। अगर सामने वाला व्यक्ति संदिग्ध पाया गया, तो पुलिस आपके दरवाजे पर भी आ सकती है। केवल एक्सचेंज के जरिए ही खरीदें-बेचें। पारदर्शिता का नया युग कुल मिलाकर, भारत में क्रिप्टो का 'वाइल्ड वेस्ट' (Wild West) युग खत्म हो चुका है। अब यह शेयर बाजार की तरह ही एक रेगुलेटेड और निगरानी वाला बाजार बन गया है। जो निवेशक ईमानदारी से पैसा लगा रहे हैं, उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन जो लोग क्रिप्टो को टैक्स चोरी या काले धन को छिपाने का जरिया मानते थे, उनके लिए रास्ते बंद हो चुके हैं। सरकार का संदेश साफ है— "ट्रेडिंग करो, मुनाफा कमाओ, लेकिन अपनी पहचान और पैसे का हिसाब हमें दो।" [डिस्क्लेमर: क्रिप्टो करेंसी एक बेहद जोखिम भरा बाजार है। इसमें निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय जरूर लें। Khabreelal किसी भी वित्तीय नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं है।]
[नई दिल्ली | स्पेशल इन्वेस्टिगेशन डेस्क] भारत की सड़कों पर हर साल लाखों सपने टूटते हैं, लाखों परिवार उजाड़ते हैं। वजह सिर्फ एक—सड़क दुर्घटना (Road Accident)। और उससे भी ज्यादा दर्दनाक वजह—समय पर इलाज न मिलना या इलाज के लिए जेब में पैसे न होना। लेकिन अब तस्वीर बदलने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार एक ऐसी योजना को हरी झंडी दिखाने जा रही है, जो भारत के स्वास्थ्य और परिवहन क्षेत्र में 'गेम चेंजर' साबित होगी। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने पुष्टि की है कि सरकार जल्द ही पूरे देश में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए 'कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम' (Cashless Treatment Scheme) शुरू करने जा रही है। इस योजना का ब्लूप्रिंट तैयार है, पायलट प्रोजेक्ट सफल हो चुका है और अब बस आधिकारिक लॉन्चिंग का इंतजार है। यह खबर केवल एक सरकारी योजना की घोषणा नहीं है, बल्कि उन करोड़ों भारतीयों के लिए 'जीवन रक्षा कवच' है जो रोज सड़कों पर सफर करते हैं। आइये, इस विस्तृत विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि यह योजना कैसे काम करेगी, इसका लाभ किसे मिलेगा, और यह आयुष्मान भारत से कितनी अलग है। योजना का परिचय: 'गोल्डन आवर' में मिलेगा जीवनदान अक्सर देखा गया है कि एक्सीडेंट के बाद अस्पताल प्रशासन पहले "पैसे जमा कराने" की मांग करता है, और इसी देरी में घायल व्यक्ति अपनी जान गंवा देता है। चिकित्सा विज्ञान में दुर्घटना के बाद के पहले एक घंटे को 'गोल्डन आवर' (Golden Hour) कहा जाता है। अगर इस दौरान सही इलाज मिल जाए, तो बचने की संभावना 80% तक बढ़ जाती है। योजना के प्रमुख स्तंभ: कवरेज राशि: सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त दिया जाएगा। कैशलेस सुविधा: घायल व्यक्ति या उसके परिवार को अस्पताल में एक भी रुपया नकद नहीं देना होगा। सारा खर्च सरकार और बीमा कंपनियां मिलकर वहन करेंगी। समय सीमा: यह कवरेज दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक के लिए मान्य होगा। इसका उद्देश्य मरीज को खतरे से बाहर (Stabilize) लाना है। पात्रता (Eligibility): यह योजना हर किसी के लिए है। चाहे वह अमीर हो या गरीब, बीमित हो या गैर-बीमित। अगर भारत की सड़क पर मोटर वाहन से एक्सीडेंट हुआ है, तो इलाज मिलेगा। नितिन गडकरी ने कहा, "हमारा लक्ष्य समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने से होने वाली मौतों को रोकना है। पैसे की कमी अब किसी की मौत का कारण नहीं बनेगी।" पायलट प्रोजेक्ट का रिपोर्ट कार्ड: चंडीगढ़ मॉडल की सफलता केंद्र सरकार ने इस योजना को पूरे देश में लागू करने से पहले इसकी जमीनी हकीकत परखने का फैसला किया था। इसके लिए चंडीगढ़ को चुना गया। ट्रायल रन की टाइमलाइन: शुरुआत: सड़क परिवहन मंत्रालय ने 14 मार्च, 2024 को चंडीगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। विस्तार: सफलता को देखते हुए बाद में इसे 6 और राज्यों में आंशिक रूप से लागू किया गया। आंकड़े क्या कहते हैं? मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़े बताते हैं कि यह मॉडल बेहद सफल रहा है: कुल आवेदन: मार्च 2024 से अब तक 6,833 सड़क दुर्घटना के मामले दर्ज हुए और आवेदन आए। स्वीकृत मामले: इनमें से 5,480 लोगों को योजना के तहत कैशलेस इलाज मिला। यानी सफलता दर लगभग 80% रही। भुगतान: सरकार ने अस्पतालों को इलाज के बदले 73,88,848 रुपये (करीब 74 लाख रुपये) का भुगतान किया। रिजेक्शन क्यों? बाकी बचे मामले पुलिस जांच में खारिज कर दिए गए क्योंकि वे या तो मोटर वाहन दुर्घटना नहीं थे या फर्जी क्लेम पाए गए। इस पायलट प्रोजेक्ट ने साबित कर दिया है कि सिस्टम काम कर रहा है और अब इसे 140 करोड़ देशवासियों के लिए लागू करने का समय आ गया है। योजना की विस्तृत कार्यप्रणाली: यह कैसे काम करेगा? आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि एक्सीडेंट के वक्त अफरातफरी में इस योजना का लाभ कैसे मिलेगा? सूत्रों और पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर इसकी प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होगी: स्टेप 1: दुर्घटना और पुलिस रिपोर्ट जैसे ही कोई सड़क दुर्घटना होती है, स्थानीय पुलिस को सूचित किया जाएगा। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचेगी या अस्पताल में बयान दर्ज करेगी। पुलिस एक 'एक्सीडेंट रिफरेन्स नंबर' या 'यूनिक आईडी' जनरेट करेगी। स्टेप 2: अस्पताल में भर्ती घायल को नजदीकी अस्पताल (चाहे सरकारी हो या एंपैनल किया गया प्राइवेट अस्पताल) ले जाया जाएगा। वहां रिसेप्शन पर यह आईडी या पुलिस रिपोर्ट दिखाई जाएगी। स्टेप 3: कैशलेस इलाज शुरू अस्पताल प्रशासन मरीज से एडवांस पैसा नहीं मांगेगा। 1.5 लाख रुपये तक के पैकेज के तहत इलाज तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। इसमें सर्जरी, आईसीयू चार्ज, दवाइयां और जांच शामिल होंगी। स्टेप 4: क्लेम सेटलमेंट इलाज का बिल अस्पताल सीधे नोडल एजेंसी (बीमा कंपनी या सरकारी ट्रस्ट) को भेजेगा। मोटर वाहन दुर्घटना कोष (Motor Vehicle Accident Fund) से इसका भुगतान किया जाएगा। मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 और कानूनी ताकत यह योजना हवा में नहीं बनाई गई है, बल्कि इसे कानूनी जामा पहनाया गया है। मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 162 के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज की व्यवस्था करे। मोटर वाहन दुर्घटना कोष (Motor Vehicle Accident Fund): सरकार ने इस योजना को फंड करने के लिए एक विशेष कोष बनाया है। इस फंड में पैसा चालान (Traffic Challans) का एक हिस्सा, इंश्योरेंस कंपनियों का योगदान और केंद्र सरकार के बजट से आएगा। हिट एंड रन (Hit and Run): यह योजना 'हिट एंड रन' मामलों (जहां टक्कर मारने वाली गाड़ी का पता न चले) में भी पूरी तरह लागू होगी। ऐसे मामलों में अक्सर पीड़ित को बीमा क्लेम नहीं मिल पाता था, लेकिन अब सरकार इलाज का खर्च उठाएगी। भारत में सड़क हादसों की भयावहता: क्यों जरूरी है यह योजना? इस योजना की गंभीरता को समझने के लिए हमें भारत के सड़क हादसों के आंकड़ों पर नजर डालनी होगी। ये आंकड़े डराने वाले हैं: वैश्विक स्थिति: विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में वाहनों की कुल संख्या का केवल 1% भारत में है, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों का 11% भारत में होता है। हर घंटे मौतें: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर घंटे लगभग 18 से 20 लोग सड़क हादसों में मरते हैं। आर्थिक नुकसान: सड़क दुर्घटनाओं के कारण भारत को अपनी जीडीपी का करीब 3% (लाखों करोड़ रुपये) का नुकसान उठाना पड़ता है। युवा आबादी: मरने वालों में सबसे बड़ी संख्या 18 से 45 वर्ष के युवाओं की होती है, जो अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले होते हैं। नितिन गडकरी का विजन है कि 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50% तक कम किया जाए। 'कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम' उसी दिशा में एक बड़ा हथियार है। आयुष्मान भारत vs एक्सीडेंट कैशलेस स्कीम: अंतर समझें कई लोग इस योजना को 'आयुष्मान भारत' से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन ये दोनों अलग हैं। विशेषता आयुष्मान भारत योजना एक्सीडेंट कैशलेस स्कीम पात्रता केवल गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (BPL)। अमीर-गरीब, हर भारतीय नागरिक। कार्ड की जरूरत आयुष्मान कार्ड होना अनिवार्य है। किसी विशेष कार्ड की जरूरत नहीं (पुलिस रिपोर्ट/ID काफी है)। बीमारी कवरेज पहले से मौजूद बीमारियों और अन्य रोगों के लिए। केवल सड़क दुर्घटना (Trauma) के लिए। लिमिट 5 लाख रुपये सालाना (पूरे परिवार के लिए)। 1.5 लाख रुपये (प्रति एक्सीडेंट, प्रति व्यक्ति)। समय सीमा साल भर मान्य। एक्सीडेंट के 7 दिनों तक मान्य। यानी, अगर किसी अमीर व्यक्ति का एक्सीडेंट होता है जिसके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, तो उसे भी इस नई योजना का लाभ मिलेगा। चुनौतियां और समाधान: सरकार की तैयारी इतने बड़े स्तर पर योजना लागू करने में कई चुनौतियां भी हैं, जिनसे निपटने के लिए मंत्रालय ने रोडमैप तैयार किया है। 1. फर्जी क्लेम (Fake Claims): अक्सर देखा गया है कि लोग पुराने चोट या घर में लगी चोट को एक्सीडेंट बताकर क्लेम लेने की कोशिश करते हैं। समाधान: पुलिस रिपोर्ट (FIR/GD Entry) को अनिवार्य बनाया जाएगा। एआई (AI) आधारित सिस्टम से चोट की प्रकृति की जांच होगी। 2. ग्रामीण इलाके: शहरों में तो अस्पताल हैं, लेकिन गांव के हाईवे पर एक्सीडेंट होने पर अच्छे अस्पताल नहीं मिलते। समाधान: सरकार हाईवे के किनारे स्थित छोटे निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को भी इस योजना से जोड़ रही है (Empanelment)। जीपीएस इनेबल्ड एम्बुलेंस नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। 3. अस्पतालों की आनाकानी: प्राइवेट अस्पताल अक्सर सरकारी योजनाओं के मरीजों को लेने से बचते हैं क्योंकि भुगतान में देरी होती है। समाधान: नितिन गडकरी ने भरोसा दिलाया है कि भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी और एक तय समय सीमा के भीतर अस्पतालों के खाते में पैसा ट्रांसफर होगा। आम आदमी के लिए गाइड: एक्सीडेंट हो जाए तो क्या करें? देश में जल्द ही शुरु होगी 'कैशलेस ट्रीटमेंट' योजना : रोड एक्सिडेंट घटना में जान बचाने के लिए होगी मददगार।#RoadSafety #SadakSurakshaAbhiyaan #सड़कसुरक्षाअभियान pic.twitter.com/p357UO8IHO — Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) January 9, 2026 'खबरिलाल' अपने पाठकों को जागरूक करने के लिए एक स्टेप-बाय-स्टेप गाइड भी साझा कर रहा है। भगवान न करे, अगर आपके सामने कोई एक्सीडेंट हो, तो आप इस योजना का लाभ कैसे दिला सकते हैं: मदद से न डरें (Good Samaritan): सबसे पहले घायल की मदद करें। कानून अब 'गुड समैरिटन' (मददगार) को सुरक्षा देता है। पुलिस आपको परेशान नहीं करेगी और न ही बार-बार थाने बुलाएगी। पुलिस को कॉल करें (112/100): तुरंत पुलिस को सूचना दें। यह सबसे जरूरी है क्योंकि योजना का लाभ लेने के लिए पुलिस की एंट्री (General Diary) जरूरी होगी। नजदीकी अस्पताल: एंबुलेंस या निजी वाहन से घायल को नजदीकी अस्पताल ले जाएं। योजना का जिक्र करें: रिसेप्शन पर बताएं कि यह रोड एक्सीडेंट का मामला है और केंद्र सरकार की कैशलेस स्कीम के तहत इमरजेंसी इलाज शुरू किया जाए। दस्तावेज: घायल का आधार कार्ड या कोई भी आईडी प्रूफ दें। अगर आईडी नहीं है, तो पुलिस सत्यापन करेगी। नितिन गडकरी का विजन और भविष्य की राह केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सड़क सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील रहे हैं। उन्होंने कई मंचों पर स्वीकार किया है कि भारत में सड़क इंजीनियरिंग और ड्राइविंग बिहेवियर में सुधार की जरूरत है। उन्होंने हाल ही में कहा: "हम सिर्फ सड़कें नहीं बना रहे, हम सुरक्षित सफर का वादा कर रहे हैं। 1.5 लाख रुपये की यह कैशलेस योजना गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो एक्सीडेंट होने पर जमीन-जायदाद बेचने को मजबूर हो जाते हैं। हम इसे राज्यों के परिवहन मंत्रालयों के सहयोग से मिशन मोड में लागू करेंगे।" 2026 में क्या बदलेगा? इंटीग्रेटेड डेटाबेस: पुलिस, अस्पताल और बीमा कंपनियां एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़ेंगी। फास्ट ट्रैक इलाज: एक्सीडेंट के मामलों के लिए अस्पतालों में अलग 'ट्रॉमा डेस्क' बन सकती है। बीमा कंपनियों की भूमिका: जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) इस योजना के क्रियान्वयन में नोडल एजेंसी की भूमिका निभाएगी। एक संवेदनशील भारत की ओर कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह योजना 'सबका साथ, सबका विकास' के साथ-साथ 'सबका जीवन' बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 1.5 लाख रुपये की राशि भले ही बहुत बड़ी सर्जरी के लिए कम लग सकती है, लेकिन यह शुरुआती 7 दिनों में घायल की जान बचाने (Stabilize करने) के लिए पर्याप्त है। पायलट प्रोजेक्ट में 80% सफलता दर यह बताती है कि अगर नीयत साफ हो, तो सरकारी योजनाएं फाइलों से निकलकर जमीन पर असर दिखाती हैं। अब देखना यह है कि देशव्यापी स्तर पर इसका क्रियान्वयन कितनी कुशलता से होता है। 'Khabreelal' की अपील: सड़क पर चलते समय ट्रैफिक नियमों का पालन करें। हेलमेट और सीट बेल्ट जरूर लगाएं। याद रखें, सरकार इलाज का खर्च उठा सकती है, लेकिन आपके शरीर और जीवन की भरपाई कोई नहीं कर सकता। सुरक्षित रहें, सतर्क रहें। [नोट: यह विस्तृत रिपोर्ट मंत्रालय द्वारा जारी हालिया बयानों और चंडीगढ़ पायलट प्रोजेक्ट के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है। योजना के राष्ट्रव्यापी लॉन्च की तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी।]
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे (Indian Railways) से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए आज का दिन यानी सोमवार, 12 जनवरी 2026 बेहद महत्वपूर्ण है। रेलवे ने आज से टिकट बुकिंग के नियमों में एक ऐसा ऐतिहासिक बदलाव (IRCTC New Booking Rules) लागू कर दिया है, जो न केवल टिकटों की कालाबाजारी पर लगाम लगाएगा, बल्कि आम यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने की संभावना को भी कई गुना बढ़ा देगा।READ ALSO:-बिजनौर में 'बुर्का गैंग' का आतंक: सामान देखने के बहाने उलझाती हैं महिलाएं, बच्चा कर देता है हाथ साफ; CCTV ने खोला शातिर राज नए नियम के तहत, आईआरसीटीसी (IRCTC) ने आधार कार्ड से वेरिफाइड यूजर्स को 'वीआईपी' दर्जा देते हुए बुकिंग के लिए विशेष समय सीमा तय की है। अगर आप भी अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं और कन्फर्म टिकट के लिए जूझते हैं, तो यह खबर आपके लिए राहत की सांस लेकर आई है। क्या है आज से लागू हुआ नया नियम? रेल मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, आज 12 जनवरी से एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) खुलने के पहले दिन टिकट बुक करने का अधिकार मुख्य रूप से उन यूजर्स को दिया गया है, जिनका आईआरसीटीसी अकाउंट आधार कार्ड से लिंक (Aadhar Verified) है। सबसे बड़ी खबर यह है कि रेलवे ने ऐसे वेरिफाइड यूजर्स के लिए बुकिंग का समय बढ़ाकर 'मिडनाइट' यानी आधी रात तक कर दिया है। (External link: IRCTC Official Website) पहले बुकिंग खिड़की खुलते ही सुबह 8 बजे भारी भीड़ और सर्वर पर लोड के कारण आम आदमी टिकट नहीं बुक कर पाता था, लेकिन अब आधार वेरिफाइड यूजर्स के पास एआरपी (ARP) खुलने वाले दिन पूरा समय होगा। 'मिडनाइट' बुकिंग: यात्रियों को कैसे मिलेगा फायदा? इस बदलाव को आसान भाषा में समझें। मान लीजिए आप आज से चार महीने बाद (120 दिन) की किसी यात्रा के लिए टिकट बुक करना चाहते हैं। रेलवे के नियम के मुताबिक, आज सुबह 8 बजे उस तारीख की बुकिंग खुली। पुराना सिस्टम: सुबह 8 बजे बुकिंग खुलते ही दलाल और ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर चंद सेकंड में सारी सीटें बुक कर लेते थे। 8:05 तक वेटिंग लिस्ट आ जाती थी। नया सिस्टम (आज से लागू): अब अगर आपका अकाउंट आधार से वेरिफाइड है, तो आपको सुबह 8 बजे की मारामारी में फंसने की जरूरत नहीं है। रेलवे ने आपको IRCTC New Booking Rules के तहत प्राथमिकता दी है। आप उस दिन रात के 12 बजे तक (Midnight) आराम से टिकट बुक कर सकते हैं। यह सुविधा उन नौकरीपेशा लोगों के लिए वरदान है जो सुबह ऑफिस जाने की जल्दी में तत्काल या जनरल बुकिंग की रेस में शामिल नहीं हो पाते थे। दलालों पर रेलवे की 'सर्जिकल स्ट्राइक' रेल मंत्रालय ने 6 जनवरी को ही अपने इरादे साफ कर दिए थे। मंत्रालय का मानना है कि ई-टिकटिंग सिस्टम में पारदर्शिता लाना समय की मांग है। अक्सर देखा गया है कि अवैध सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने वाले दलाल (Touts) बुकिंग खुलते ही फर्जी आईडी से सारी सीटें ब्लॉक कर लेते थे। आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य करने से दो फायदे होंगे: असली पहचान: टिकट बुक करने वाला व्यक्ति एक वास्तविक यात्री है, इसकी पुष्टि हो सकेगी। दलालों पर रोक: एक आधार कार्ड पर सीमित संख्या में ही टिकट बुक हो सकते हैं, जिससे दलाल थोक में टिकटों की कालाबाजारी नहीं कर पाएंगे। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "हमारा उद्देश्य सिस्टम से बिचौलियों को हटाना है। जो यूजर अपना आधार लिंक करेगा, उसे हम प्रीमियम सुविधा देंगे। इससे असली यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने का चांस 90% तक बढ़ जाएगा।" काउंटर टिकट वालों का क्या होगा? जैसे ही यह खबर सामने आई, उन यात्रियों में बेचैनी बढ़ गई जो तकनीकी रूप से ज्यादा सक्षम नहीं हैं या जो अभी भी रेलवे स्टेशन जाकर टिकट लेते हैं। लेकिन रेलवे ने स्पष्ट किया है कि IRCTC New Booking Rules केवल ऑनलाइन टिकट बुकिंग पर लागू होंगे। जो यात्री रेलवे स्टेशन के पीआरएस (PRS) काउंटर से टिकट खरीदते हैं, उनके लिए नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वे पहले की तरह ही फॉर्म भरकर काउंटर से रिजर्वेशन करवा सकते हैं। यह सख्ती केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म (IRCTC Website और App) के लिए है। (Internal link: रेलवे काउंटर से टिकट बुक करने के नियम) चरणबद्ध तरीके से लागू हुआ नियम यह फैसला रातों-रात नहीं लिया गया है। रेलवे इसे धीरे-धीरे लागू कर रहा था ताकि सिस्टम को परखा जा सके: शुरुआत: सबसे पहले बुकिंग खुलने के शुरुआती 15 मिनट केवल आधार वेरिफाइड यूजर्स के लिए रिजर्व किए गए थे। 29 दिसंबर 2025: इसे बढ़ाकर सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक किया गया। 5 जनवरी 2026: समय सीमा को और बढ़ाकर शाम 4:00 बजे तक किया गया। 12 जनवरी 2026 (आज से): अब इसे पूरी तरह खोलते हुए 'मिडनाइट' तक कर दिया गया है। कैसे करें अपना IRCTC अकाउंट आधार से लिंक? (Step-by-Step Guide) अगर आपने अभी तक अपना आईआरसीटीसी अकाउंट आधार से लिंक नहीं किया है, तो आप इस नई सुविधा का लाभ नहीं उठा पाएंगे। यहाँ जानें लिंक करने का आसान तरीका: सबसे पहले IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर जाएं और लॉग इन करें। 'My Account' सेक्शन में जाएं और 'Link Your Aadhar' पर क्लिक करें। अपना आधार कार्ड नंबर और नाम दर्ज करें (जैसा आधार पर लिखा है)। चेक बॉक्स पर टिक करें और 'Send OTP' पर क्लिक करें। आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा, उसे दर्ज करें और वेरीफाई करें। वेरिफिकेशन सफल होते ही आपका अकाउंट आधार से लिंक हो जाएगा। फिर से लॉग इन करके आप टिकट बुक कर सकते हैं। एक महीने में कितनी टिकटें बुक कर सकते हैं? आधार लिंक करने का एक और बड़ा फायदा है। बिना आधार लिंक किए: एक यूजर महीने में अधिकतम 6 टिकट ही बुक कर सकता है। आधार लिंक करने के बाद: एक यूजर महीने में 12 टिकट तक बुक कर सकता है। अगर यात्री भी वेरिफाइड है: अगर टिकट बुक करने वाले के साथ-साथ यात्रा करने वाले पैसेंजर की भी आधार केवाईसी (KYC) हो चुकी है, तो आप एक महीने में 24 टिकट तक बुक कर सकते हैं। आज 12 जनवरी से लागू हुए IRCTC New Booking Rules भारतीय रेलवे की दिशा में एक सकारात्मक कदम हैं। यह न केवल डिजिटलीकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि उन लाखों यात्रियों को न्याय दिलाएगा जो दलालों की वजह से अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करके भी वेटिंग टिकट पर यात्रा करने को मजबूर थे। अब गेंद यात्रियों के पाले में है—जल्द से जल्द अपना अकाउंट वेरिफाई करें और इस सुविधा का लाभ उठाएं। भारतीय रेलवे ने 12 जनवरी से टिकट बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब केवल आधार-वेरिफाइड (Aadhar Verified) यूजर्स ही एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) के पहले दिन 'मिडनाइट' यानी रात 12 बजे तक टिकट बुक कर सकेंगे। यह कदम दलालों को रोकने और असली यात्रियों को कन्फर्म सीट दिलाने के लिए उठाया गया है। काउंटर टिकट बुकिंग के नियमों में कोई बदलाव नहीं है।
नई दिल्ली (Khabreelal News Desk): भारत सरकार की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत दी जाने वाली मुफ्त राशन योजना (Free Ration Scheme) देश के करोड़ों गरीबों की लाइफलाइन है। लेकिन साल 2026 की शुरुआत के साथ ही खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने नियमों में एक बड़ा और सख्त बदलाव कर दिया है। यह बदलाव सीधा आपकी रसोई और आपकी थाली पर असर डाल सकता है।READ ALSO:-यूपी के इस शहर में ज्वैलर्स का कड़ा फरमान: 'चेहरा दिखाओ, तभी मिलेगी एंट्री', बुर्का और घूंघट पर लगाई शर्त; चोरी रोकने के लिए उठाया कदम अगर आप या आपका परिवार पिछले कई सालों से राशन कार्ड के जरिए सरकारी कोटे का गेहूं, चावल, दाल या चीनी ले रहा है, तो आज यानी 5 जनवरी 2026 की यह खबर आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राशन कार्ड में e-KYC (Know Your Customer) अब एक विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि नए नियम क्या हैं, 2013 का कनेक्शन क्या है, और सबसे महत्वपूर्ण बात—आप बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे, अपने घर के बेडरूम में बैठकर अपने मोबाइल से e-KYC कैसे पूरी कर सकते हैं। 1. नया नियम क्या है? (What is the New Rule?) केंद्र सरकार ने राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए एक नया प्रोटोकॉल सेट किया है। इसके तहत: 5 साल का नियम: अब हर राशन कार्ड धारक को हर 5 साल में कम से कम एक बार अपनी e-KYC अपडेट करवानी होगी। सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य: यह e-KYC सिर्फ परिवार के मुखिया (Head of Family) की नहीं, बल्कि राशन कार्ड में दर्ज हर उस सदस्य की होनी है, जिसका नाम यूनिट में शामिल है। चाहे वह बच्चा हो (5 साल से ऊपर) या बुजुर्ग। डेडलाइन का डर: जिन लोगों की KYC पेंडिंग पाई जाएगी, उनका नाम राशन कार्ड से अस्थाई रूप से हटा दिया जाएगा या उनका राशन रोक दिया जाएगा (Blocked)। 2013 का कनेक्शन क्यों? दरअसल, भारत में खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) 2013 में बड़े स्तर पर लागू हुआ था। सरकार के डेटा के मुताबिक, करोड़ों लोग ऐसे हैं जिन्होंने 2013 में राशन कार्ड बनवाया था और तब से अब तक (2026 तक) एक बार भी अपनी जानकारी अपडेट नहीं की है। इन 13 सालों में कई लोगों की मृत्यु हो चुकी है। कई बेटियों की शादी होकर वे दूसरे घर जा चुकी हैं। कई लोग अमीर होकर अब पात्रता की श्रेणी से बाहर हो चुके हैं। बावजूद इसके, उनके नाम पर राशन उठ रहा है। इसी "फर्जीवाड़े" को रोकने के लिए सरकार ने e-KYC का ब्रह्मास्त्र चलाया है। 2. अगर e-KYC नहीं कराई तो क्या होगा? (Consequences) यह सवाल हर किसी के मन में है। अगर आप इसे हल्के में ले रहे हैं, तो इसके परिणाम जान लीजिए: राशन पर रोक: सबसे पहला असर यह होगा कि डीलर (कोटेदार) की मशीन (e-POS) में आपका अंगूठा काम करना बंद कर देगा। मशीन बताएगी कि "KYC पेंडिंग है"। यूनिट कटना: मान लीजिए आपके घर में 5 सदस्य हैं। 3 ने KYC करा ली और 2 ने नहीं कराई। तो कोटेदार आपको केवल 3 लोगों का राशन देगा। बाकी 2 का हिस्सा (10 किलो अनाज) आपको नहीं मिलेगा। कार्ड रद्दीकरण: अगर लंबे समय तक KYC अपडेट नहीं होती है, तो सरकार यह मान लेगी कि वह व्यक्ति या तो वहां नहीं रहता या उसकी मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में उसका नाम परमानेंट डिलीट कर दिया जाएगा। 3. 'टेक्नोलॉजी का कमाल': घर बैठे e-KYC कैसे करें? (Complete Online Guide) पहले राशन कार्ड में सुधार के लिए तहसील या खाद्य आपूर्ति विभाग के चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन 'डिजिटल इंडिया' मुहिम के तहत अब यह काम आपके स्मार्टफोन पर आ गया है। आपको दो ऐप्स की जरूरत पड़ेगी। नीचे दिए गए ट्यूटोरियल को स्टेप-बाय-स्टेप फॉलो करें। स्टेप 1: जरूरी ऐप्स इंस्टॉल करें अपने एंड्रॉयड फोन के Google Play Store पर जाएं और ये दो ऐप्स डाउनलोड करें: Mera Ration / Mera KYC App: (ध्यान दें: अलग-अलग राज्यों के अपने ऐप्स भी हो सकते हैं, लेकिन 'मेरा राशन' केंद्र सरकार का ऐप है)। Aadhaar FaceRD (Early Access): यह सबसे जरूरी ऐप है। यह ऐप आपके फोन के कैमरे को आधार के बायोमेट्रिक स्कैनर में बदल देता है। इसे UIDAI ने बनाया है। स्टेप 2: सेटअप और लॉग-इन ऐप ओपन करें। ऐप आपसे 'Location' की परमिशन मांगेगा, उसे 'Allow' करें। भाषा का चयन करें (हिंदी/English)। स्टेप 3: आधार ऑथेंटिकेशन होम स्क्रीन पर आपको 'Check Aadhaar Seeding' या 'e-KYC' का विकल्प दिखेगा। उस पर क्लिक करें। अब अपना राशन कार्ड नंबर या आधार नंबर दर्ज करें। सबमिट बटन दबाएं। स्टेप 4: फेस ऑथेंटिकेशन (सबसे महत्वपूर्ण चरण) अब आपको जिस सदस्य की e-KYC करनी है, उसका आधार नंबर चुनें। 'Face e-KYC' ऑप्शन पर टैप करें। आपका मोबाइल कैमरा (Selfie Camera) खुल जाएगा। निर्देश: चेहरे पर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। पीछे का बैकग्राउंड साफ (Plain) होना चाहिए। कैमरे की तरफ देखते हुए अपनी पलकें झपकाएं (Blink Your Eyes)। जैसे ही ऐप आपके चेहरे को आधार के डेटाबेस से मैच कर लेगा, स्क्रीन पर "Captured Successfully" का मैसेज आ जाएगा। स्टेप 5: फाइनल सबमिशन फोटो मैच होने के बाद सबमिट बटन दबाएं। स्क्रीन पर मैसेज आएगा: "Your e-KYC has been successfully updated." 4. स्टेटस कैसे चेक करें: काम हुआ या नहीं? (How to Check Status) कई बार तकनीकी खामी की वजह से प्रोसेस बीच में अटक जाता है। इसलिए कन्फर्म करना जरूरी है। वापस 'Mera Ration' या 'Mera KYC' ऐप पर जाएं। 'आधार सीडिंग' (Aadhaar Seeding) विकल्प चुनें। अपना राशन कार्ड नंबर डालें। आपके परिवार के सभी सदस्यों की लिस्ट खुल जाएगी। हर नाम के आगे 'Aadhaar Seeding' का कॉलम देखें। अगर वहां 'Yes' या 'Y' लिखा है → सब ठीक है। अगर वहां 'No' या 'N' लिखा है → KYC नहीं हुई है। 5. स्मार्टफोन नहीं है? तो अपनाएं ऑफलाइन तरीका (Offline Process) भारत में अभी भी एक बड़ा तबका है जो स्मार्टफोन या ऐप्स चलाने में सहज नहीं है। उनके लिए सरकार ने पुराने दरवाजे खुले रखे हैं। राशन की दुकान (Fair Price Shop - FPS): आप अपनी राशन की दुकान (जहां से गेहूं-चावल लाते हैं) पर जाएं। कोटेदार के पास e-POS मशीन (वह मशीन जिस पर अंगूठा लगाते हैं) होती है। कोटेदार से कहें- "मेरा e-KYC अपडेट कर दो।" वह मशीन में आपका आधार नंबर डालेगा और आपको अंगूठा (Biometric) लगाने को कहेगा। जैसे ही मशीन 'Match' बोलेगी, आपकी KYC हो जाएगी। यह सेवा पूरी तरह मुफ्त है। जन सेवा केंद्र (CSC): नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाएं। अपना राशन कार्ड और आधार कार्ड लेकर जाएं। CSC संचालक मामूली फीस (10-20 रुपये) लेकर आपका बायोमेट्रिक अपडेट कर देगा। 6. e-KYC और 'वन नेशन वन राशन कार्ड' का रिश्ता सरकार e-KYC पर इतना जोर क्यों दे रही है? इसका एक बड़ा कारण 'One Nation One Ration Card' (ONORC) योजना है। पोर्टेबिलिटी: इस योजना के तहत बिहार का मजदूर मुंबई में बैठकर अपने कोटे का राशन ले सकता है। पहचान जरूरी: लेकिन यह तभी संभव है जब सिस्टम को पता हो कि मुंबई में अंगूठा लगाने वाला व्यक्ति वही है जिसका नाम बिहार के राशन कार्ड में है। इसलिए, अगर आप रोजगार के लिए दूसरे शहर में रहते हैं, तो e-KYC आपके लिए वरदान है। इसके बिना आप दूसरे राज्य में राशन नहीं ले पाएंगे। 7. अक्सर आने वाली समस्याएं और समाधान (Troubleshooting) ऑनलाइन प्रोसेस करते समय यूजर्स को कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। Khabreelal की टेक टीम ने इनके समाधान निकाले हैं: समस्या 1: "Face Not Matching" एरर आ रहा है। समाधान: पर्याप्त रोशनी में जाएं। चश्मा या टोपी हटा दें। फोन को चेहरे के बिल्कुल सामने (Eye Level) पर रखें। आधार फेस आरडी ऐप को अपडेट करें। समस्या 2: OTP नहीं आ रहा है। समाधान: चेक करें कि आपके आधार में जो मोबाइल नंबर लिंक है, वह चालू है या नहीं। नेटवर्क एरिया में जाएं। समस्या 3: ऐप में राशन कार्ड नंबर "Not Found" बता रहा है। समाधान: कभी-कभी सर्वर डाउन होता है। रात के समय या सुबह जल्दी (Early Morning) कोशिश करें। या फिर आधार नंबर के जरिए सर्च करें। 8. बच्चों की e-KYC: एक जरूरी नोट अक्सर माता-पिता बच्चों की e-KYC को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं। 5 साल से कम उम्र: इनका e-KYC बायोमेट्रिक से नहीं होता। इनका आधार माता-पिता से लिंक होता है। 5 से 15 साल: 5 साल पूरा होते ही बच्चे का आधार अपडेट (Blue Aadhaar to Normal Aadhaar) करवाना जरूरी है। उसके बाद ही राशन कार्ड में e-KYC होगी। 15 साल के बाद: 15 साल की उम्र में बायोमेट्रिक्स (अंगूठा और चेहरा) दोबारा अपडेट होते हैं। इसलिए टीनएजर्स का आधार अपडेट करवाकर ही राशन कार्ड e-KYC करें। 9. 2026 में राशन कार्ड के अन्य बड़े बदलाव सिर्फ e-KYC ही नहीं, 2026 में राशन कार्ड से जुड़े कुछ और नियम भी बदले हैं, जिन्हें जानना आपके लिए जरूरी है: फ्री गेहूं-चावल की अवधि: केंद्र सरकार ने 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' (PMGKAY) को अगले 5 वर्षों के लिए बढ़ा दिया है। यानी 2028 तक राशन मुफ्त मिलता रहेगा, लेकिन शर्त वही है—KYC अपडेट होनी चाहिए। अपात्रों पर कार्रवाई: अगर किसी के पास पक्का मकान (1000 वर्ग फीट से बड़ा), कार, ट्रैक्टर या सरकारी नौकरी है और फिर भी वह राशन ले रहा है, तो e-KYC के जरिए उसकी पहचान की जाएगी और वसूली (Recovery) भी हो सकती है। राशन कार्ड केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार के भोजन की गारंटी है। सरकार द्वारा e-KYC अनिवार्य करना व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक कदम है। हो सकता है कि आपको यह प्रोसेस थोड़ा झंझट भरा लगे, लेकिन यह 5 मिनट की मेहनत आपको अगले 5 साल तक निर्बाध राशन की गारंटी देती है। Khabreelal की आपसे अपील है कि अंतिम तारीख का इंतजार न करें। आज ही अपना और अपने परिवार का e-KYC स्टेटस चेक करें और अपडेट करें। याद रखें, जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। इस जानकारी को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी शेयर करें ताकि किसी गरीब की थाली खाली न रहे। FAQ: राशन कार्ड e-KYC से जुड़े आपके सवाल प्रश्न 1: क्या e-KYC करवाने की कोई अंतिम तारीख (Last Date) है? उत्तर: फिलहाल सरकार ने कोई सख्त 'लास्ट डेट' घोषित नहीं की है, लेकिन कई राज्यों में 31 जनवरी या 28 फरवरी तक का समय दिया जा रहा है। राशन रुकने से बचने के लिए इसे 'आज ही' निपटाएं। प्रश्न 2: क्या मैं e-KYC के लिए राशन डीलर को पैसे देने होंगे? उत्तर: जी नहीं, राशन की दुकान (FPS) पर e-KYC की सुविधा बिल्कुल मुफ्त है। अगर डीलर पैसे मांगे, तो आप खाद्य आपूर्ति विभाग के टोल-फ्री नंबर पर शिकायत कर सकते हैं। प्रश्न 3: मेरे पिताजी गांव में रहते हैं और मैं शहर में, उनकी KYC कैसे होगी? उत्तर: वे गांव में डीलर के पास जाकर अपनी KYC करा सकते हैं और आप शहर में ऑनलाइन ऐप के जरिए या यहां के किसी डीलर के पास जाकर अपनी KYC करा सकते हैं। परिवार के सदस्य अलग-अलग जगहों से भी KYC करवा सकते हैं। प्रश्न 4: ऐप में 'FaceRD' काम नहीं कर रहा, क्या करें? उत्तर: फोन की सेटिंग्स में जाएं, Apps में जाएं, FaceRD ऐप चुनें और 'Clear Cache' करें। फिर से ट्राई करें। (डिस्क्लेमर: यह जानकारी सरकारी अधिसूचनाओं और वर्तमान नियमों पर आधारित है। राज्य सरकारों के नियमों में थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट nfsa.gov.in पर जाएं।)
भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने साल 2026 की शुरुआत में ही टिकट दलालों और फर्जी बुकिंग एजेंट्स की कमर तोड़ने के लिए अपना सबसे बड़ा दांव चल दिया है। अगर आप भी ट्रेन से सफर करते हैं और ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।READ ALSO:-Gold Price Today: महंगाई का महा-विस्फोट! सोना ₹1.36 लाख तो चांदी ₹2.37 लाख के पार; जानें क्यों मची है बाजार में हाहाकार? आज, यानी 5 जनवरी 2026 से IRCTC ने टिकट बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। रेलवे के नए फरमान के मुताबिक, जिन यूजर्स का IRCTC अकाउंट उनके आधार कार्ड (Aadhaar Card) से लिंक नहीं है, वे आज से रिजर्वेशन खुलने के समय टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। रेलवे ने यह कदम दलालों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अवैध सॉफ्टवेयर और फर्जी आईडी को रोकने के लिए उठाया है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि यह नियम कैसे काम करेगा, इसके तीन चरण (Phases) क्या हैं, और अगर आपका आधार लिंक नहीं है तो अब आप टिकट कैसे बुक कर पाएंगे? 1. आज (5 जनवरी) से क्या बदल गया है? (The Big Change) रेलवे ने टिकट बुकिंग में पारदर्शिता लाने के लिए नियमों को सख्त कर दिया है। यह नियम विशेष रूप से "ओपनिंग डे" (Opening Day) यानी जिस दिन रिजर्वेशन खुलता है (यात्रा से 60 दिन पहले), उस दिन लागू होगा। आज से लागू होने वाला नियम: आज 5 जनवरी से रेलवे ने अपने प्लान का दूसरा चरण (Phase-2) लागू कर दिया है। इसके तहत: जिन यूजर्स का IRCTC अकाउंट आधार से वेरीफाई (KYC) नहीं है, वे सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। यह वही समय होता है जब जनरल कोटे की बुकिंग शुरू होती है और मिनटों में सीटें भर जाती हैं। यानी, अगर आपका आधार लिंक नहीं है, तो आप 'कन्फर्म टिकट' की रेस से बाहर हो जाएंगे, क्योंकि शाम 4 बजे तक प्रमुख ट्रेनों की सीटें फुल हो चुकी होंगी। ध्यान दें: यह पाबंदी केवल रिजर्वेशन खुलने के पहले दिन के लिए है। अगर आप पुरानी तारीखों (जैसे कल या परसों खुली बुकिंग) का टिकट ले रहे हैं, तो यह नियम उतनी सख्ती से लागू नहीं होगा, लेकिन पीक सीजन में यह आपके लिए मुसीबत बन सकता है। 2. रेलवे का 'ट्रिपल लेयर' प्लान: 3 चरणों में लागू हो रहा नियम रेलवे ने अचानक यात्रियों को परेशान करने के बजाय इसे 3 अलग-अलग तारीखों में बांटकर लागू करने का फैसला किया है, ताकि लोग जागरूक हो सकें। फेज 1: 29 दिसंबर 2025 (बीत चुका है) इस दिन पहला झटका दिया गया था। नियम: बिना आधार लिंक वाले यूजर्स को सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक टिकट बुक करने से रोका गया था। फेज 2: 5 जनवरी 2026 (आज से लागू) आज सख्ती बढ़ा दी गई है। नियम: अब यह पाबंदी सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक बढ़ा दी गई है। यानी पूरे 8 घंटे का ब्लॉक। फेज 3: 12 जनवरी 2026 (सबसे सख्त नियम) अगले हफ्ते से नियम पूरी तरह लागू हो जाएगा। नियम: 12 जनवरी से बिना आधार वाले यूजर्स सुबह 8 बजे से रात 12 बजे तक टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। इसका सीधा मतलब है कि अगर आपने आधार लिंक नहीं किया, तो 'ओपनिंग डे' पर आप टिकट बुक ही नहीं कर पाएंगे। आपको अगले दिन का इंतजार करना होगा, तब तक वेटिंग लिस्ट 100 के पार जा चुकी होगी। 3. आखिर रेलवे ने ऐसा क्यों किया? (The Real Reason) रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड लंबे समय से शिकायतें सुन रहे थे कि सुबह 8 बजते ही IRCTC की वेबसाइट हैंग हो जाती है या फिर 2 मिनट के अंदर सारी सीटें 'Sold Out' हो जाती हैं। इसकी मुख्य वजह आम आदमी नहीं, बल्कि 'दलाल' थे। (i) फर्जी अकाउंट्स का खेल दलाल एक ही नाम से या फर्जी नामों से सैकड़ों IRCTC आईडी बना लेते थे। चूंकि इनमें आधार लिंक नहीं होता था, इसलिए वे पकड़ में नहीं आते थे। (ii) अवैध सॉफ्टवेयर की घुसपैठ 'रेड मिर्ची' (Red Mirchi), 'नेक्सस' (Nexus) जैसे अवैध सॉफ्टवेयर्स का इस्तेमाल करके दलाल एक साथ हजारों टिकट बुक कर लेते थे। ये सॉफ्टवेयर आधार ऑथेंटिकेशन को बाईपास नहीं कर सकते, इसलिए रेलवे ने आधार को अनिवार्य करके इन सॉफ्टवेयर्स की 'गर्दन' पकड़ ली है। (iii) आम यात्री को प्राथमिकता इस नियम का मकसद यह है कि जो व्यक्ति टिकट बुक कर रहा है, वह एक असली इंसान (Genuine User) हो। आधार लिंक होने से एक व्यक्ति महीने में केवल सीमित टिकट (12 या 24) ही बुक कर सकता है, जिससे कालाबाजारी रुकेगी। 4. स्टेशन काउंटर पर भी नहीं मिलेगी राहत अगर आप सोच रहे हैं कि "ऑनलाइन झंझट छोड़ो, स्टेशन जाकर टिकट लेंगे", तो वहां भी रेलवे ने नियम बदल दिए हैं। काउंटर बुकिंग के नए नियम: OTP अनिवार्य: अब रिजर्वेशन काउंटर पर भी फॉर्म भरते समय आपको अपना मोबाइल नंबर देना होगा। आधार वेरिफिकेशन: आपके मोबाइल पर एक OTP आएगा, जिसे काउंटर क्लर्क को बताना होगा। यह मोबाइल नंबर आपके आधार से लिंक होना चाहिए। दूसरों के लिए टिकट: अगर आप किसी और के लिए लाइन में लगे हैं, तो उस यात्री का आधार नंबर और उसके मोबाइल पर आया OTP जरूरी होगा। यानी अब एजेंट 50 फॉर्म भरकर लाइन में नहीं लग पाएंगे, क्योंकि हर फॉर्म के लिए उन्हें अलग-अलग OTP की जरूरत पड़ेगी। 5. गाइड: अपना IRCTC अकाउंट आधार से कैसे लिंक करें? (Step-by-Step Guide) अगर आपने अभी तक अपना अकाउंट लिंक नहीं किया है, तो घबराएं नहीं। यह प्रक्रिया 2 मिनट की है। नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें: वेबसाइट के जरिए (Via Website): IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट (irctc.co.in) पर जाएं और लॉग-इन करें। मेन्यू बार में 'My Account' पर क्लिक करें। ड्रॉप-डाउन मेन्यू में 'Link Your Aadhaar' का विकल्प चुनें। अपना आधार कार्ड पर लिखा नाम और आधार नंबर दर्ज करें। चेकबॉक्स पर टिक करें और 'Send OTP' पर क्लिक करें। आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर OTP आएगा, उसे दर्ज करें और 'Update' बटन दबाएं। सफल होने पर मैसेज आएगा। इसके बाद एक बार लॉग-आउट करके दोबारा लॉग-इन करें। मोबाइल ऐप के जरिए (Via IRCTC Rail Connect App): ऐप खोलें और लॉग-इन करें। नीचे दिए गए 'More' ऑप्शन पर टैप करें। 'Link Aadhaar' पर क्लिक करें। अपना नाम और आधार नंबर डालें। OTP वेरीफाई करें। आपका काम हो गया! फायदा: आधार लिंक करने के बाद आप महीने में 6 की जगह 24 टिकट तक ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। 6. रेलवे का '60 दिन' वाला नियम क्या है? (Understanding Advance Reservation) कई यात्रियों में अभी भी कन्फ्यूजन है कि टिकट कितने दिन पहले बुक होता है। आपको बता दें कि रेलवे ने 1 नवंबर 2024 से नियमों में बड़ा बदलाव किया था। पुराना नियम: पहले आप यात्रा से 120 दिन (4 महीने) पहले टिकट बुक कर सकते थे। नया नियम: अब आप यात्रा से केवल 60 दिन (2 महीने) पहले टिकट बुक कर सकते हैं। कैसे गिनें दिन? इस 60 दिन की अवधि में यात्रा का दिन शामिल नहीं होता है। उदाहरण: अगर आपको 30 जून को यात्रा करनी है। तो 30 जून को छोड़कर उससे ठीक 60 दिन पहले की तारीख (कैलेंडर के हिसाब से लगभग 1 मई) को सुबह 8 बजे बुकिंग खुलेगी। यह नियम इसलिए बदला गया क्योंकि 4 महीने पहले टिकट बुक करने वाले 20-30% लोग बाद में टिकट कैंसिल कर देते थे, जिससे सीटें ब्लॉक रहती थीं और जरूरतमंदों को नहीं मिलती थीं। 7. पाठकों के सवाल और हमारे जवाब (Detailed FAQ Analysis) इस नए नियम को लेकर यात्रियों के मन में कई सवाल हैं। हमने सबसे महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तैयार किए हैं: सवाल 1: मेरे पास आधार कार्ड नहीं है, क्या मैं अब कभी ट्रेन टिकट बुक नहीं कर पाऊंगा? जवाब: ऐसा नहीं है। आप टिकट बुक कर सकते हैं, लेकिन 'ओपनिंग डे' (बुकिंग खुलने के पहले दिन) पर आप प्रतिबंधित समय (जैसे आज शाम 4 बजे तक) के बाद ही बुकिंग कर पाएंगे। अगर आप यात्रा की तारीख के करीब (जैसे 10 दिन पहले) टिकट बुक कर रहे हैं, तो आधार की इतनी सख्ती नहीं होगी। लेकिन कन्फर्म टिकट पाने के लिए आधार लिंक करना ही समझदारी है। सवाल 2: क्या तत्काल टिकट (Tatkal Ticket) पर भी यह नियम लागू है? जवाब: तत्काल टिकट यात्रा से 1 दिन पहले बुक होता है। तत्काल बुकिंग के समय (AC के लिए सुबह 10 बजे और स्लीपर के लिए 11 बजे) IRCTC पहले से ही बहुत सख्त है। आधार लिंक होने से आपकी तत्काल टिकट बुक होने की संभावना बढ़ जाती है क्योंकि आपको बार-बार पैसेंजर डिटेल्स भरने की जरूरत नहीं पड़ती (मास्टर लिस्ट का उपयोग करें)। सवाल 3: मैं एक एजेंट हूं, क्या मेरा धंधा बंद हो जाएगा? जवाब: अगर आप IRCTC के अधिकृत एजेंट (Authorized Agent) हैं, तो आपके लिए अलग नियम और लॉग-इन विंडो होती है। लेकिन अगर आप पर्सनल आईडी से टिकट बुक करके ब्लैक में बेचते थे, तो अब यह संभव नहीं होगा। सवाल 4: अगर OTP नहीं आया तो क्या होगा? जवाब: यह तकनीकी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में आप IRCTC की हेल्पलाइन 139 पर कॉल कर सकते हैं। आधार से जुड़ी समस्या के लिए UIDAI के हेल्पलाइन नंबर 1947 पर संपर्क करें। नेटवर्क एरिया में रहें, क्योंकि OTP के बिना बुकिंग आगे नहीं बढ़ेगी। सवाल 5: क्या बच्चों के टिकट के लिए भी आधार जरूरी है? जवाब: 5 साल से कम उम्र के बच्चों का टिकट नहीं लगता। 5 से 11 साल के बच्चों के लिए अगर आप बर्थ नहीं ले रहे हैं, तो आधार जरूरी नहीं है। लेकिन अगर बर्थ ले रहे हैं, तो बुकिंग करने वाले यूजर (मास्टर यूजर) का आधार लिंक होना अनिवार्य है। 8. निष्कर्ष: यात्रियों के लिए राहत या आफत? शुरुआती दौर में यह नियम आम जनता को थोड़ा परेशान कर सकता है, खासकर उन्हें जो तकनीक से ज्यादा वाकिफ नहीं हैं या जिनके मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं हैं। लेकिन अगर 'लॉन्ग टर्म' (Long Term) में देखें, तो यह एक शानदार कदम है। सोचिए, अगर सुबह 8:05 बजे आपको अपनी मनचाही ट्रेन में कन्फर्म सीट मिल जाए, क्योंकि कोई दलाल फर्जी सॉफ्टवेयर से उसे ब्लॉक नहीं कर पाया, तो 2 मिनट की आधार लिंकिंग की मेहनत सफल हो जाएगी। Khabreelal की राय: 12 जनवरी से पहले अपना अकाउंट आधार से लिंक जरूर कर लें, क्योंकि आने वाले त्योहारों और गर्मियों की छुट्टियों में बिना आधार के कन्फर्म टिकट मिलना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। (डिस्क्लेमर: यह जानकारी रेलवे द्वारा जारी अधिसूचना और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। नियमों में रेलवे कभी भी बदलाव कर सकता है, इसलिए यात्रा से पहले IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट चेक करें।)
भारत में अगर आपकी जेब में पैन कार्ड (PAN Card) नहीं है, तो आपकी 'आर्थिक पहचान' अधूरी है। आज के डिजिटल युग में यह महज प्लास्टिक का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि आपके वित्तीय अस्तित्व की सबसे अहम चाबी है। लेकिन क्या हो जब इस चाबी में ही जंग लग जाए? यानी आपके पैन कार्ड पर आपका नाम गलत हो, पिता के नाम की स्पेलिंग मिस्टेक हो, या पता पुराना हो?READ ALSO:-MSME Export Boost: मोदी सरकार का 'मास्टरस्ट्रोक', एक्सपोर्टर्स के लिए खोली तिजोरी! 2 नई स्कीमें लॉन्च; अब 2.75% सस्ता मिलेगा कर्ज और 'गारंटी' का झंझट होगा खत्म अक्सर देखा गया है कि एक छोटी सी गलती के कारण लोगों के बैंक अकाउंट फ्रीज हो जाते हैं, लोन रिजेक्ट हो जाता है या फिर आईटी रिटर्न (ITR) अटक जाता है। पहले इन गलतियों को सुधारने के लिए सरकारी दफ्तरों और एजेंटों के चक्कर काटने पड़ते थे, जहाँ समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था। लेकिन अब इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) ने इस पूरी व्यवस्था को बदलकर रख दिया है। अब आपको धूप में लाइनों में लगने की जरूरत नहीं है। आप अपने ड्राइंग रूम में बैठकर, चाय की चुस्की लेते हुए अपने पैन कार्ड की हर गलती को सुधार सकते हैं। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि एनएसडीएल (NSDL) और यूटीआईआईटीएसएल (UTIITSL) के जरिए यह काम कैसे होता है, कौन से दस्तावेज चाहिए, और सबसे अहम बात—दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करने पर आपको कितनी सजा हो सकती है। 1. पैन कार्ड: सिर्फ कार्ड नहीं, आर्थिक कुंडली है आपकी इससे पहले कि हम सुधार की प्रक्रिया जानें, यह समझना जरूरी है कि यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है। पैन कार्ड (Permanent Account Number) 10 अंकों का एक अल्फान्यूमेरिक नंबर है जो इनकम टैक्स विभाग जारी करता है। कहाँ-कहाँ होती है इसकी सख्त जरूरत? नौकरी: किसी भी नई कंपनी में जॉइनिंग के वक्त सैलरी अकाउंट के लिए पैन अनिवार्य है। बैंकिंग: 50,000 रुपये से ज्यादा का लेन-देन, नया खाता खोलना, या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के लिए। निवेश: शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, या डीमैट अकाउंट खोलने के लिए पैन के बिना एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा जा सकता। प्रॉपर्टी और ज्वेलरी: 5 लाख से ऊपर की अचल संपत्ति या 2 लाख से ऊपर की ज्वेलरी खरीदने पर पैन देना कानूनी बाध्यता है। विदेश यात्रा: वीजा आवेदन और फॉरेन करेंसी एक्सचेंज के लिए। अगर इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज में आपके नाम की स्पेलिंग (जैसे 'Sharma' की जगह 'Sarma') हो जाए, तो यह आपके सारे काम रोक सकता है। 2. डिजिटल क्रांति: दो वेबसाइट्स, मिनटों में समाधान सरकार ने पैन कार्ड सेवाओं के प्रबंधन के लिए दो प्रमुख एजेंसियों को अधिकृत किया है: NSDL (अब Protean eGov Technologies Limited) UTIITSL (UTI Infrastructure Technology and Services Limited) ये दोनों एजेंसियां इनकम टैक्स विभाग की ओर से पैन कार्ड बनाने और सुधारने का काम करती हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन, पारदर्शी और सुरक्षित है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको किसी दलाल या एजेंट को 200-500 रुपये एक्स्ट्रा कमीशन देने की जरूरत नहीं है। सरकार द्वारा निर्धारित मामूली शुल्क देकर आप यह काम खुद कर सकते हैं। 3. स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: कैसे करें ऑनलाइन सुधार? (The Master Guide) अगर आप टेक्नोलॉजी में बहुत माहिर नहीं हैं, तो भी घबराएं नहीं। नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें और अपना पैन कार्ड अपडेट करें। स्टेप 1: वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले आपको NSDL (https://www.onlineservices.nsdl.com/) या UTIITSL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। (ज्यादातर लोग NSDL का उपयोग करते हैं क्योंकि इसका इंटरफेस यूजर-फ्रेंडली है)। स्टेप 2: सही विकल्प चुनें वेबसाइट के होमपेज पर 'Application Type' का ड्रॉपडाउन मेनू दिखेगा। यहाँ आपको ‘Changes or Correction in existing PAN Data / Reprint of PAN Card’ का विकल्प चुनना है। याद रखें, 'New PAN' का विकल्प न चुनें, क्योंकि आपके पास पहले से पैन नंबर है। स्टेप 3: फॉर्म भरें और टोकन जनरेट करें 'Category' में 'Individual' (व्यक्तिगत) चुनें। अपनी बेसिक डिटेल्स जैसे—नाम (Title: Shri/Smt), जन्मतिथि (DOB), ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर भरें। कैप्चा कोड डालकर 'Submit' करें। महत्वपूर्ण: सबमिट करते ही स्क्रीन पर एक 15 अंकों का टोकन नंबर (Token Number) आएगा। इसे तुरंत नोट कर लें या स्क्रीनशॉट ले लें। अगर फॉर्म भरते समय इंटरनेट चला गया या पेज बंद हो गया, तो इसी टोकन नंबर से आप दोबारा वहीं से शुरू कर पाएंगे। स्टेप 4: e-KYC या फिजिकल डॉक्यूमेंट? अब आपके सामने तीन विकल्प आएंगे कि आप दस्तावेज कैसे जमा करना चाहते हैं: e-KYC & e-Sign (Paperless): यह सबसे आसान है। इसमें आपके आधार कार्ड की फोटो और डिटेल्स अपने आप ले ली जाएंगी। कोई कागज भेजने की जरूरत नहीं। इसके लिए आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना जरूरी है। Submit Scanned Images through e-Sign: इसमें आप अपनी पसंद की फोटो और साइन स्कैन करके अपलोड कर सकते हैं। Forward Application Documents Physically: इसमें आपको फॉर्म का प्रिंट निकालकर, दस्तावेज साथ लगाकर कूरियर से NSDL के दफ्तर भेजना होगा। सलाह: पहले दो विकल्पों में से किसी एक को चुनें ताकि काम जल्दी हो। स्टेप 5: सुधार का चयन करें अब आपके सामने पूरा फॉर्म खुल जाएगा। आपको जिस जानकारी में सुधार करना है, उसके सामने बने चेक-बॉक्स (Check Box) पर टिक करें। उदाहरण: अगर नाम बदलना है, तो 'Name' वाले बॉक्स पर टिक करें और सही नाम लिखें। अगर पता बदलना है, तो 'Address' वाले बॉक्स पर टिक करें। जो जानकारी नहीं बदलनी है, उसे वैसा ही रहने दें और चेक-बॉक्स खाली छोड़ें। स्टेप 6: दस्तावेज अपलोड करें (Evidence) अगर आपने स्कैन विकल्प चुना है, तो आपको प्रमाण अपलोड करने होंगे: पहचान प्रमाण (Identity Proof): आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि। पता प्रमाण (Address Proof): आधार, बिजली बिल, बैंक स्टेटमेंट आदि। जन्मतिथि प्रमाण (DOB Proof): जन्म प्रमाण पत्र, मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट, आधार कार्ड। साथ ही अपनी पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर (Signature) भी अपलोड करें। स्टेप 7: फीस पेमेंट और सबमिशन अंत में, आपको फीस का भुगतान करना होगा। भारतीय पते के लिए यह फीस लगभग 107 रुपये (GST सहित) होती है। अगर पैन कार्ड विदेश मंगाना है, तो फीस 1000 रुपये से ज्यादा हो सकती है। पेमेंट नेट बैंकिंग, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या UPI से किया जा सकता है। स्टेप 8: एकनॉलेजमेंट स्लिप (Acknowledgement Slip) पेमेंट सफल होने के बाद एक रसीद (Acknowledgement Slip) जनरेट होगी। इसे डाउनलोड कर लें। इसमें 15 अंकों का नंबर होता है, जिससे आप बाद में चेक कर सकते हैं कि आपका पैन कार्ड प्रिंट होकर निकला या नहीं। 4. सावधान: 'शॉर्टकट' के चक्कर में हो सकती है जेल! सुविधा के साथ-साथ सतर्कता भी जरूरी है। कई बार लोग जल्दी काम कराने के चक्कर में फर्जी दस्तावेज (Fake Documents) लगा देते हैं या गलत जानकारी देते हैं। यह एक गंभीर अपराध है। क्या कहता है कानून? यूआईडीएआई (UIDAI) नियम: अगर पैन सुधार के दौरान आप फर्जी आधार कार्ड या उससे जुड़ी गलत जानकारी का इस्तेमाल करते हैं, तो आधार एक्ट के तहत आपको 3 साल की जेल और 10,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इनकम टैक्स एक्ट: मीडिया रिपोर्ट्स और नियमों के अनुसार, फर्जी पैन कार्ड बनवाने या एक से अधिक पैन कार्ड रखने पर (Section 272B के तहत) 10,000 रुपये का जुर्माना लगता है। धोखाधड़ी का केस: अगर आपने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पैन सुधरवाया और उसका इस्तेमाल बैंक लोन या किसी वित्तीय लाभ के लिए किया, तो आप पर आईपीसी (IPC/BNS) की धाराओं के तहत धोखाधड़ी (420) का केस भी दर्ज हो सकता है, जिसमें 6 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल हो सकती है। चूंकि पैन कार्ड इनकम टैक्स विभाग की निगरानी में रहता है और अब यह आधार से लिंक है, इसलिए सिस्टम किसी भी विसंगति (Mismatch) को तुरंत पकड़ लेता है। इसलिए, हमेशा सही और वैध दस्तावेज ही अपलोड करें। 5. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q: पैन कार्ड में सुधार होने में कितना समय लगता है? A: आमतौर पर ऑनलाइन आवेदन के बाद 15 से 20 दिनों के भीतर सुधरा हुआ पैन कार्ड आपके घर के पते पर पहुंच जाता है। e-PAN (डिजिटल कॉपी) 3-4 दिनों में ही ईमेल पर आ जाता है। Q: क्या शादी के बाद सरनेम बदलने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट जरूरी है? A: जी हां, अगर आप शादी के बाद नाम बदल रही हैं, तो मैरिज सर्टिफिकेट या मैरिज इनविटेशन कार्ड, गजट नोटिफिकेशन की कॉपी देना अनिवार्य हो सकता है। Q: क्या मैं फोटो और साइन बदल सकता हूँ? A: बिल्कुल। अगर आपके बचपन की फोटो पैन कार्ड पर है, तो आप 'Photo Mismatch' का विकल्प चुनकर अपनी नई फोटो और साइन अपडेट कर सकते हैं। सरकार ने पैन कार्ड सुधार की प्रक्रिया को घर-घर तक पहुंचाकर आम आदमी को बड़ी राहत दी है। अब आपको दलालों के चक्कर में फंसने या दफ्तरों की धूल फांकने की जरूरत नहीं है। बस थोड़ी सी जागरूकता और सही प्रक्रिया का पालन करके आप अपनी 'आर्थिक पहचान' को दुरुस्त कर सकते हैं।
भारतीय रेलवे में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए नए साल की शुरुआत एक बेहतरीन खबर के साथ हो रही है। अगर आप भी उन यात्रियों में से हैं जिन्हें स्टेशन पर पहुंचकर जनरल टिकट (Unreserved Ticket) लेने के लिए घंटों लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ता है, तो आपकी यह परेशानी अब हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। इतना ही नहीं, रेलवे अब आपको लाइन से बचाने के साथ-साथ पैसे बचाने का मौका भी दे रहा है।READ ALSO:-सिगरेट पीने वालों को तगड़ा झटका: 18 रुपये की सिगरेट अब मिलेगी 72 रुपये में! संसद से पास हुआ विधेयक, तंबाकू पर 300% तक बढ़ा टैक्स भारतीय रेलवे ने अपने डिजिटल इंडिया मिशन को अगले स्तर पर ले जाते हुए एक नई पहल की घोषणा की है। अब 'रेल वन' (RailOne) ऐप के जरिए अनारक्षित टिकट बुक करने पर यात्रियों को किराए में तीन प्रतिशत (3%) की विशेष छूट दी जाएगी। यह फैसला न केवल यात्रियों की जेब को राहत देगा, बल्कि स्टेशनों पर टिकट काउंटरों के बाहर लगने वाली भीड़ को भी नियंत्रित करेगा। पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के लखनऊ मंडल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस योजना की पुष्टि की है। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा ऑफर, कब से लागू होगा और आप इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं। 1. क्या है 'स्पेशल डिस्काउंट' स्कीम? (The 3% Discount Offer) रेलवे ने टिकट बुकिंग को डिजिटल मोड पर शिफ्ट करने के लिए यह आकर्षक ऑफर पेश किया है। ऑफर: 'रेल वन' ऐप से जनरल टिकट बुक करने पर कुल किराए में 3% की छूट। शर्त: यह छूट तब मिलेगी जब आप भुगतान के लिए UPI (जैसे Google Pay, PhonePe), डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करेंगे। अवधि: यह योजना 14 जनवरी 2026 (मकर संक्रांति के आसपास) से शुरू होकर 14 जुलाई 2026 तक, यानी पूरे 6 महीने के लिए प्रभावी रहेगी। उदाहरण से समझें: मान लीजिए आप लखनऊ से दिल्ली का जनरल टिकट लेते हैं और उसका किराया 100 रुपये है। अगर आप काउंटर से लेंगे तो आपको 100 रुपये देने होंगे और लाइन में भी लगना होगा। लेकिन अगर आप 'RailOne' ऐप से UPI के जरिए टिकट बुक करते हैं, तो आपको 3 रुपये की छूट मिलेगी और आपको केवल 97 रुपये का भुगतान करना होगा। यह छोटी बचत नियमित यात्रियों (Daily Commuters) के लिए महीने में एक बड़ी रकम बन सकती है। 2. R-Wallet वालों के लिए क्या नियम है? (The R-Wallet Confusion) यहाँ एक तकनीकी बात समझना जरूरी है। रेलवे के ऐप में एक इन-बिल्ट वॉलेट होता है जिसे R-Wallet कहते हैं। पुराना नियम: R-Wallet को रिचार्ज करते समय रेलवे पहले से ही बोनस देता है (जैसे 100 रुपये के रिचार्ज पर कुछ प्रतिशत एक्स्ट्रा बैलेंस)। नया नियम: चूंकि R-Wallet यूजर को रिचार्ज के समय ही फायदा मिल चुका होता है, इसलिए उन्हें टिकट बुक करते समय यह अतिरिक्त 3% की छूट नहीं मिलेगी। निष्कर्ष: R-Wallet से टिकट बुक करने पर पुराना बोनस सिस्टम लागू रहेगा, जबकि सीधे बैंक/UPI से पेमेंट करने पर 'इंस्टेंट डिस्काउंट' मिलेगा। यानी फायदा दोनों तरह के यूजर्स को है। 3. 'RailOne' ऐप: रेलवे का नया 'सुपर ऐप' (What is RailOne?) अब तक यात्रियों को अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग ऐप्स रखने पड़ते थे। टिकट के लिए IRCTC Rail Connect, जनरल टिकट के लिए UTSonMobile, और स्टेटस के लिए NTES। लेकिन अब इन सबकी जगह एक ही 'सुपर ऐप' ने ले ली है, जिसका नाम है RailOne। यह ऐप 'वन-स्टॉप सॉल्यूशन' (One-Stop Solution) है। इसकी खासियतें इसे बेहद खास बनाती हैं: ऑल-इन-वन बुकिंग: आप इसी एक ऐप से आरक्षित (Reserved), अनारक्षित (Unreserved) और प्लेटफॉर्म टिकट (Platform Ticket) तीनों बुक कर सकते हैं। लाइव ट्रैकिंग: ट्रेन अभी कहां पहुंची है (Live Train Status) और आपके स्टेशन पर कब आएगी, यह सटीक जानकारी यहाँ मिलेगी। PNR स्टेटस: अपनी वेटिंग लिस्ट या कन्फर्म सीट की जानकारी चुटकियों में चेक करें। कोच पोजिशन: ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर आने से पहले जानें कि आपका डिब्बा इंजन से कितनी दूर लगेगा। फूड ऑर्डरिंग: सफर के दौरान सीट पर खाना मंगाना हो (e-Catering), तो वह भी इसी ऐप से होगा। पार्सल और शिकायत: अपना सामान ट्रैक करना हो या गंदे टॉयलेट की शिकायत करनी हो, सब कुछ 'रेल वन' पर उपलब्ध है। 4. रेलवे को इसकी जरूरत क्यों पड़ी? (Why This Move?) रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) महेश गुप्ता ने इस पहल के पीछे के उद्देश्यों को स्पष्ट किया। लंबी लाइनों से मुक्ति: जनरल टिकट काउंटरों पर सबसे ज्यादा भीड़ होती है। त्योहारों के समय यह भीड़ अनियंत्रित हो जाती है। ऐप के इस्तेमाल से यात्री स्टेशन पहुंचने से पहले या रास्ते में ही टिकट बुक कर सकेंगे, जिससे काउंटरों पर दबाव कम होगा। कैशलेस इकोनॉमी: सरकार का जोर डिजिटल लेन-देन पर है। खुल्ले पैसों (Chhutte Paise) का झंझट खत्म करने और पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। कागज की बचत: डिजिटल टिकट पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। पेपरलेस टिकट (Paperless Ticket) को बढ़ावा देने से हर साल टनों कागज की बचत होगी। 5. यात्रियों के लिए 'स्मार्ट गाइड': कैसे उठाएं लाभ? अगर आप 14 जनवरी 2026 से इस छूट का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपको अभी से तैयार होना पड़ेगा। यहाँ स्टेप-बाय-स्टेप गाइड दी गई है: डाउनलोड करें: अपने स्मार्टफोन के Google Play Store या Apple App Store पर जाएं और 'RailOne' ऐप सर्च करके डाउनलोड करें। (ध्यान रहे कि यह आधिकारिक रेलवे ऐप हो)। रजिस्ट्रेशन: अपने मोबाइल नंबर और आधार कार्ड/आईडी के साथ एक बार रजिस्ट्रेशन करें। यह प्रक्रिया बेहद आसान है। जीपीएस (GPS) ऑन रखें: जनरल टिकट बुक करते समय ऐप आपकी लोकेशन चेक करता है। आप स्टेशन के ट्रैक से एक निश्चित दूरी (Geofencing) पर रहकर ही पेपरलेस टिकट बुक कर सकते हैं। बुकिंग: 'Unreserved Ticket' ऑप्शन चुनें, स्टेशन चुनें और पेमेंट पेज पर जाएं। पेमेंट: छूट पाने के लिए UPI या कार्ड का विकल्प चुनें। पेमेंट होते ही टिकट आपके मोबाइल में आ जाएगा। इसे TTE को दिखाने के लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं होती। 6. आम यात्री पर क्या होगा असर? यह कदम दैनिक यात्रियों (Daily Passengers), छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। समय की बचत: अक्सर लोग टिकट लेने के चक्कर में अपनी ट्रेन मिस कर देते थे। अब वे ऑटो या रिक्शा में बैठते हुए टिकट ले सकते हैं। भ्रष्टाचार पर लगाम: कई बार काउंटरों पर ज्यादा पैसे लेने या छुट्टे न लौटाने की शिकायतें आती थीं। ऑनलाइन पेमेंट में यह समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। भारतीय रेलवे का 'रेल वन' ऐप और यह 3% डिस्काउंट ऑफर 2026 की एक शानदार शुरुआत है। यह न केवल तकनीक को अपनाने का प्रोत्साहन है, बल्कि आम आदमी की जेब और समय दोनों की कद्र करने वाला फैसला है। 14 जनवरी से शुरू हो रही इस योजना का लाभ उठाने के लिए आज ही अपने फोन को 'स्मार्ट' बनाएं और रेलवे के इस नए सफर का हिस्सा बनें। तो देर किस बात की? लाइन में लगना छोड़िए, 'RailOne' डाउनलोड कीजिए और शान से सफर कीजिए! (नोट: यह जानकारी पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और रेलवे के आधिकारिक अपडेट्स पर आधारित है। योजना की शर्तें और नियम रेलवे के अनुसार लागू होंगे।)
गर आप सोशल मीडिया पर रील्स बनाने, वीडियो शेयर करने या बेधड़क कुछ भी पोस्ट करने के शौकीन हैं, तो सावधान हो जाइए। केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग और उस पर परोसे जा रहे अश्लील कंटेंट (Obscene Content) को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना ली है। सरकार ने मंगलवार को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एक कड़ा 'अल्टीमेटम' जारी किया है।READ ALSO:-सिगरेट पीने वालों को तगड़ा झटका: 18 रुपये की सिगरेट अब मिलेगी 72 रुपये में! संसद से पास हुआ विधेयक, तंबाकू पर 300% तक बढ़ा टैक्स मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी (Meity) की तरफ से जारी एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म से अश्लील, भद्दे और गैर-कानूनी कंटेंट को तुरंत हटाएं। सबसे बड़ी चेतावनी यह है कि अगर नियमों का पालन नहीं हुआ, तो अब सिर्फ नोटिस नहीं भेजा जाएगा, बल्कि कंपनियों और यूजर्स दोनों पर आपराधिक मुकदमा (Criminal Case) चलाया जाएगा। 1. सरकार का 'रेड सिग्नल': क्या है नई एडवाइजरी में? पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह एडवाइजरी सोमवार को जारी की गई थी, लेकिन मंगलवार को इसे सार्वजनिक पटल पर रखा गया। आईटी मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया कंपनियां 'IT एक्ट' और उसके नियमों (IT Rules, 2021) का पालन करने में ढिलाई बरत रही हैं। एडवाइजरी के मुख्य बिंदु: तुरंत कार्रवाई: कंपनियों को अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मॉडरेशन टीम को सक्रिय करना होगा ताकि अश्लील कंटेंट अपलोड होते ही हट जाए। लीगल इम्युनिटी (Legal Immunity) खत्म: अगर कंपनियां ऐसे कंटेंट को रोकने में फेल होती हैं, तो IT एक्ट की धारा 79 के तहत उन्हें मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (Safe Harbor Protection) छीन ली जाएगी। इसका मतलब है कि यूजर द्वारा डाली गई किसी भी पोस्ट के लिए कंपनी का मालिक और अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे। यूजर की जिम्मेदारी: यह चेतावनी सिर्फ मार्क जुकरबर्ग या एलन मस्क के लिए नहीं है। अगर कोई भारतीय यूजर ऐसा कंटेंट पोस्ट या शेयर करता है, तो उस पर भारतीय दंड संहिता (BNS) और IT एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज होगा। 2. किस तरह के कंटेंट पर लगी है रोक? सरकार ने अपनी लिस्ट में उन सभी तरह के कंटेंट को शामिल किया है, जो भारतीय संस्कृति, कानून और बच्चों की सुरक्षा के खिलाफ हैं। अगर आप नीचे दी गई कैटेगरी में से कुछ भी पोस्ट करते हैं, तो आप मुसीबत में पड़ सकते हैं: अश्लील या भद्दा कंटेंट (Obscene Material): कोई भी ऐसा वीडियो या फोटो जो सार्वजनिक शालीनता को भंग करता हो। पोर्नोग्राफिक सामग्री: स्पष्ट यौन कृत्यों को दर्शाने वाला कंटेंट। CSAM (Child Sexual Abuse Material): बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कोई भी कंटेंट। इसे शेयर करना, स्टोर करना या देखना एक गैर-जमानती अपराध है। हानिकारक कंटेंट: ऐसा कंटेंट जो बच्चों के मानसिक विकास के लिए खतरनाक हो। गैर-कानूनी गतिविधियां: डीपफेक (Deepfakes) या किसी की निजता का हनन करने वाले वीडियो। 3. 'सेफ हार्बर' हटने का क्या मतलब है? सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा डर है। वर्तमान में, IT एक्ट की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 'बिचौलिया' (Intermediary) माना जाता है। यानी, अगर कोई यूजर कुछ गलत पोस्ट करता है, तो प्लेटफॉर्म पर केस नहीं होता था। लेकिन नई एडवाइजरी में सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर उन्होंने अश्लीलता नहीं रोकी, तो यह सुरक्षा कवच हटा लिया जाएगा। इसके बाद पुलिस सीधे प्लेटफॉर्म के अधिकारियों को गिरफ्तार कर सकेगी। 4. मद्रास हाईकोर्ट की सलाह: 'बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखो' सरकार की यह सख्ती ऐसे समय में आई है जब न्यायपालिका भी सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों को लेकर चिंतित है। 26 दिसंबर को मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बेहद महत्वपूर्ण सुझाव दिया। क्या कहा हाईकोर्ट ने? कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि भारत में भी ऑस्ट्रेलिया मॉडल लागू करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में एक ऐतिहासिक कानून पास किया है, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित (Ban) कर दिया गया है। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, "नाबालिगों को ऑनलाइन पोर्नोग्राफिक कंटेंट बहुत आसानी से मिल रहा है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है। केंद्र को सोचना चाहिए कि क्या 16 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाई जा सकती है?" याचिकाकर्ता एस. विजयकुमार के वकील केपीएस पलानीवेल राजन ने कोर्ट में तर्क दिया कि बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन बारूद की तरह साबित हो रहे हैं, जहां वे बिना किसी रोक-टोक के एडल्ट कंटेंट तक पहुंच रहे हैं। 5. क्यों पड़ी इस सख्ती की जरूरत? पिछले कुछ महीनों में सोशल मीडिया पर 'सॉफ्ट पोर्न' और अभद्र भाषा की बाढ़ आ गई है। रील्स और शॉर्ट्स: इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स पर व्यूज पाने के लिए लोग अश्लीलता की सारी हदें पार कर रहे हैं। डबल मीनिंग जोक्स और एक्सपोजिंग वीडियोज की भरमार है। डीपफेक का खतरा: रश्मिका मंदाना और अन्य अभिनेत्रियों के डीपफेक वीडियो वायरल होने के बाद सरकार ने माना कि प्लेटफॉर्म्स की सुस्ती ही असली समस्या है। बच्चों की सुरक्षा: एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि साइबर क्राइम और बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 6. अब यूजर्स को क्या करना चाहिए? (सावधानी के उपाय) सरकार की यह चेतावनी सिर्फ कागजी नहीं है, इसे लागू करने के लिए साइबर सेल अब ज्यादा सक्रिय होगी। एक जागरूक नागरिक के तौर पर आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए: पुराना कंटेंट डिलीट करें: अगर आपकी टाइमलाइन पर कोई ऐसा पुराना पोस्ट, वीडियो या फोटो है जो अश्लील या विवादित हो सकता है, तो उसे तुरंत हटा दें। शेयर करने से बचें: व्हाट्सएप ग्रुप या मैसेंजर पर आने वाले गंदे वीडियो को फॉरवर्ड न करें। ग्रुप एडमिन की जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है। रिपोर्ट करें: अगर आपको कोई ऐसा कंटेंट दिखता है, तो तुरंत प्लेटफॉर्म के 'Report' ऑप्शन का इस्तेमाल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। इंटरनेट अब 'फ्री फॉर ऑल' नहीं रहा। सरकार का यह कदम डिजिटल दुनिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सोशल मीडिया दिग्गज (Tech Giants) इसे कितनी गंभीरता से लेते हैं। फिलहाल, संदेश साफ है- सफाई रखिए, वरना कार्रवाई के लिए तैयार रहिए। (नोट: यह रिपोर्ट सरकारी एडवाइजरी और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सदैव IT कानूनों का पालन करें।)
भारत के मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए हर महीने आने वाला बिजली का बिल किसी झटके से कम नहीं होता। गर्मियों में एसी और सर्दियों में गीजर के चलते यह बिल बजट बिगाड़ देता है। लेकिन अब देश भर में एक 'सौर क्रांति' (Solar Revolution) चल रही है, जिसने 25 लाख परिवारों की इस चिंता को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।READ ALSO:-रेल यात्रियों के लिए 'नये साल' का तोहफा: 1 जनवरी से बदल जाएगा आपकी ट्रेन का समय; 89 ट्रेनें भरेंगी फर्राटा, तो 61 को मिले नए स्टॉपेज केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' (PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana) ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, योजना के तहत अब तक 25 लाख (2.5 मिलियन) घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम इंस्टॉल किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि इस योजना को शुरू हुए अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी 2024 को इस योजना का शुभारंभ किया था। सरकार का लक्ष्य 1 करोड़ घरों को 'सौर ऊर्जा' से जोड़ना है। इस योजना ने न केवल लोगों को मुफ्त बिजली दी है, बल्कि उन्हें बिजली उत्पादक (Power Producer) भी बना दिया है। आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कि कैसे ₹1.5 लाख का सिस्टम आपको आधे दाम में मिल सकता है, बैंक लोन कितना सस्ता है और आवेदन की ए-टू-जेड प्रक्रिया क्या है। 1. 25 लाख घरों का भरोसा: योजना की सफलता की कहानी पीएम सूर्य घर योजना की सफलता का राज इसका सरल और फायदेमंद मॉडल है। यह योजना सीधे तौर पर आम आदमी की जेब को राहत देती है। शुरुआत: 13 फरवरी 2024। उपलब्धि: 25 लाख से अधिक घरों में इंस्टॉलेशन पूरा। लक्ष्य: कुल 1 करोड़ परिवारों को कवर करना। कोर बेनिफिट: हर महीने 300 यूनिट तक बिजली बिल्कुल मुफ्त। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम अवधि में 25 लाख घरों तक पहुंचना यह दर्शाता है कि भारतीय नागरिक अब नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को अपनाने के लिए तैयार हैं, बशर्ते उन्हें सही वित्तीय सहायता मिले। और इस योजना ने सब्सिडी और लोन के माध्यम से वही सहायता प्रदान की है। 2. सब्सिडी का 'सुपर गणित': ₹1.5 लाख का काम ₹60 हजार में कैसे? इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू इसकी सब्सिडी संरचना (Subsidy Structure) है। सरकार ने सोलर प्लांट लगाने के खर्च का एक बड़ा हिस्सा खुद उठाने का फैसला किया है। सब्सिडी की दरें: सरकार ने क्षमता के आधार पर सब्सिडी तय की है: 2 KW तक: सिस्टम की लागत का 60% हिस्सा सरकार सब्सिडी के रूप में देती है। 2 KW से 3 KW तक: अतिरिक्त क्षमता पर 40% की सब्सिडी मिलती है। 3 KW प्लांट का पूरा हिसाब-किताब: एक सामान्य भारतीय परिवार (जिसमें 2-3 कमरे, एसी, फ्रिज और टीवी हो) के लिए 3 किलोवाट (3 KW) का कनेक्शन आदर्श माना जाता है। बाजार में कुल लागत: करीब ₹1,50,000 (डेढ़ लाख रुपये)। सरकारी सब्सिडी: ₹90,000 (यह राशि सीधे आपके खाते में आती है)। ग्राहक की जेब से खर्च: केवल ₹60,000। सोचिए, ₹60,000 का एकमुश्त निवेश करके आप अगले 25 सालों तक बिजली बिल से मुक्त हो सकते हैं। अगर आप महीने का ₹2,000 भी बिल भरते हैं, तो साल का ₹24,000 और 25 साल में ₹6 लाख बचाएंगे। यानी निवेश का 10 गुना फायदा! 3. लोन ऐसा कि यकीन न हो: रेपो रेट से सिर्फ 0.5% ज्यादा सरकार जानती है कि एक साथ ₹60,000 देना भी कुछ परिवारों के लिए मुश्किल हो सकता है। इसलिए, वित्त मंत्रालय ने बैंकों के साथ मिलकर 'सस्ते लोन' का रास्ता साफ किया है। ब्याज दर का नियम: इस योजना के तहत बैंक रेपो रेट (Repo Rate) से केवल 0.5% ज्यादा ब्याज वसूल सकते हैं। वर्तमान दर: अभी रेपो रेट 5.25% पर है। ग्राहक के लिए ब्याज: 5.25% + 0.5% = 5.75%। जहां पर्सनल लोन 12% से 15% ब्याज पर मिलता है और होम लोन 8.5% पर, वहां सोलर लोन सिर्फ 5.75% पर मिल रहा है। यह दर इतनी कम है कि इसकी ईएमआई (EMI) आपके द्वारा बचाए गए बिजली बिल से भी कम होगी। यानी, सोलर प्लांट अपनी किस्त खुद चुकाएगा। 4. बिजली भी फ्री और कमाई भी: ₹15,000 का बोनस पीएम सूर्य घर योजना सिर्फ बचत नहीं, बल्कि कमाई का भी जरिया है। सरकार का दावा है कि एक परिवार इस योजना से सालाना करीब ₹15,000 की कमाई कर सकता है। यह कैसे संभव है? आइए समझते हैं। बिजली उत्पादन की क्षमता: 1 KW का प्लांट: एक दिन में औसतन 4-5 यूनिट बिजली बनाता है। 3 KW का प्लांट: एक दिन में करीब 15 यूनिट बिजली बनाता है। मासिक उत्पादन: 15 यूनिट x 30 दिन = 450 यूनिट। नेट मीटरिंग (Net Metering) का जादू: योजना के तहत आपके घर पर 'नेट मीटर' लगाया जाता है। यह दो तरफा मीटर होता है। खपत: मान लीजिए आपके घर में महीने में 300 यूनिट बिजली खर्च होती है। उत्पादन: आपके प्लांट ने 450 यूनिट बिजली बनाई। बचत: आपने 300 यूनिट खुद इस्तेमाल कर ली, और बची हुई 150 यूनिट ग्रिड (बिजली विभाग) को वापस भेज दी। कमाई: बिजली वितरण कंपनी (Discom) इस 150 यूनिट का पैसा आपके बिजली बिल खाते में क्रेडिट करेगी या भुगतान करेगी। इस तरह, साल भर में बची हुई बिजली बेचकर आप आसानी से ₹15,000 तक कमा सकते हैं। 5. आवेदन कैसे करें? घर बैठे पाएं सोलर कनेक्शन सरकार ने पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। इसके लिए नेशनल पोर्टल लॉन्च किया गया है। आपको किसी दलाल या ऑफिस के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। चरण-दर-चरण प्रक्रिया (Step-by-Step Guide): पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाएं। रजिस्ट्रेशन: अपना राज्य और बिजली वितरण कंपनी (Discom) चुनें। अपना बिजली उपभोक्ता नंबर (Consumer Number), मोबाइल नंबर और ईमेल डालें। लॉग-इन करें: रजिस्ट्रेशन के बाद मोबाइल नंबर से लॉग-इन करें। आवेदन फॉर्म: 'Apply for Rooftop Solar' पर क्लिक करें। फॉर्म में अपना पता, बैंक डिटेल और प्लांट की क्षमता (जैसे 2 KW या 3 KW) भरें। फीजिबिलिटी अप्रूवल: आपके आवेदन के बाद डिस्कॉम इंजीनियर यह चेक करेंगे कि आपकी छत पर पैनल लगाने की जगह है या नहीं और तकनीकी मंजूरी देंगे। वेंडर का चयन: अप्रूवल मिलते ही आपको पोर्टल पर अपने क्षेत्र के रजिस्टर्ड वेंडर्स की लिस्ट दिखेगी। आप अपनी पसंद और बजट के हिसाब से वेंडर चुन सकते हैं। इंस्टॉलेशन: वेंडर आपके घर आकर सोलर प्लांट लगा देगा। 6. सब्सिडी कैसे मिलेगी? (DBT Process) प्लांट लगने के बाद सब्सिडी पाने की प्रक्रिया बहुत सरल है: नेट मीटर इंस्टॉलेशन: प्लांट लगने के बाद आपको नेट मीटर के लिए पोर्टल पर आवेदन करना होगा। डिस्कॉम अधिकारी आकर मीटर लगाएंगे। कमीशनिंग सर्टिफिकेट: सिस्टम चालू होने पर डिस्कॉम एक 'कमीशनिंग सर्टिफिकेट' जारी करेगा। दस्तावेज अपलोड: आपको यह सर्टिफिकेट और अपनी बैंक पासबुक/चेक की कॉपी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। पैसा खाते में: दस्तावेज अपलोड होने के 30 दिनों के भीतर सरकार सीधे आपके बैंक खाते में सब्सिडी (जैसे ₹90,000) भेज देगी। 7. जरूरी दस्तावेज (Documents Checklist) आवेदन करने से पहले इन कागजातों को तैयार रखें: आधार कार्ड: पहचान के लिए अनिवार्य। निवास प्रमाण पत्र: (Address Proof) जैसे वोटर आईडी, राशन कार्ड आदि। बिजली का बिल: यह 6 महीने से पुराना नहीं होना चाहिए। मोबाइल नंबर: जो आधार और बैंक खाते से लिंक हो। बैंक डिटेल: पासबुक की साफ फोटो या कैंसिल चेक (सब्सिडी ट्रांसफर के लिए)। छत का फोटो: (कभी-कभी फीजिबिलिटी के लिए मांगा जा सकता है)। 8. क्यों यह योजना 'गेम चेंजर' है? 25 लाख परिवारों द्वारा इस योजना को अपनाना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम है। ऊर्जा आत्मनिर्भरता: हम कोयले से बनने वाली बिजली पर निर्भरता कम कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण: हर सोलर प्लांट कार्बन उत्सर्जन कम करने में सैकड़ों पेड़ों के बराबर काम करता है। आर्थिक बचत: एक परिवार 25 साल में लाखों रुपये की बचत करता है, जिसे वह बच्चों की पढ़ाई या अन्य जरूरतों में लगा सकता है। रोजगार: इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस और वेंडर्स के रूप में स्थानीय स्तर पर हजारों नए रोजगार पैदा हो रहे हैं। 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' केवल एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक स्मार्ट निवेश है। ₹1.5 लाख की चीज ₹60,000 में मिलना और उस पर भी सस्ता लोन—यह मौका बार-बार नहीं मिलता। अगर आपके पास अपनी छत है और आप बिजली के बिल से परेशान हैं, तो आज ही इस योजना का हिस्सा बनें। 25 लाख लोग पहले ही समझदारी दिखा चुके हैं, अब बारी आपकी है। आवेदन करने के लिए आज ही pmsuryaghar.gov.in पर जाएं और सूर्य की शक्ति को अपनी बचत में बदलें। FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) Q1: क्या 1 KW का प्लांट लगवाने पर भी सब्सिडी मिलेगी? Ans: जी हां, 2 KW तक के किसी भी प्लांट पर 60% सब्सिडी मिलेगी। 1 KW के लिए भी आप आवेदन कर सकते हैं। Q2: सोलर पैनल की लाइफ कितनी होती है? Ans: आमतौर पर सोलर पैनल की वारंटी 25 साल की होती है। यानी एक बार लगवाने के बाद आप ढाई दशक तक निश्चिंत रह सकते हैं। Q3: क्या किरायेदार इस योजना का लाभ ले सकते हैं? Ans: नहीं, कनेक्शन और छत का अधिकार उसी व्यक्ति के पास होना चाहिए जिसके नाम पर बिजली का मीटर है। किरायेदार मकान मालिक की सहमति से उनके नाम पर आवेदन करवा सकते हैं। Q4: अगर धूप न निकले तो क्या बिजली मिलेगी? Ans: सोलर पैनल दिन में बिजली बनाते हैं। रात में या बादल होने पर आप ग्रिड (बिजली विभाग) की बिजली इस्तेमाल करेंगे। नेट मीटरिंग के जरिए महीने के अंत में इसका हिसाब हो जाता है। Q5: लोन के लिए किस बैंक में जाना होगा? Ans: नेशनल पोर्टल पर आवेदन करते समय आपको लोन का विकल्प भी मिलता है। एसबीआई (SBI), पीएनबी (PNB), केनरा बैंक समेत कई सरकारी और प्राइवेट बैंक इस योजना के तहत सस्ता लोन दे रहे हैं।
भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने आज यानी 29 दिसंबर 2025 से ट्रेन टिकट बुकिंग के इतिहास में एक ऐसा बदलाव कर दिया है, जिसका असर करोड़ों यात्रियों पर पड़ने वाला है। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो छुट्टियों में घर जाने के लिए ट्रेन टिकट बुक करने का प्लान बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। अब सिर्फ पैसे और इंटरनेट कनेक्शन होने से टिकट नहीं मिलेगा; अब आपके पास 'आधार' (Aadhaar) का पावर होना जरूरी है।READ ALSO:-रेल यात्रियों के लिए 'नये साल' का तोहफा: 1 जनवरी से बदल जाएगा आपकी ट्रेन का समय; 89 ट्रेनें भरेंगी फर्राटा, तो 61 को मिले नए स्टॉपेज रेलवे ने टिकट दलालों (Touts) और अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए होने वाली कालाबाजारी को खत्म करने के लिए 'आधार आधारित ऑथेंटिकेशन' (Aadhaar Based Authentication) को अनिवार्य कर दिया है। यह नियम आज सुबह 8 बजे से प्रभावी हो गया है। इसके तहत, जिन IRCTC यूजर्स का अकाउंट उनके आधार से लिंक नहीं है, उन्हें पीक आवर्स (Peak Hours) यानी टिकट बुकिंग खुलने के समय ब्लॉक कर दिया जाएगा। आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कि रेलवे का यह नया 'चक्रव्यूह' कैसे काम करेगा, तीन चरणों वाला प्लान क्या है और अब आपको टिकट लेने के लिए क्या-क्या तैयारी करनी होगी। 1. आज से क्या बदला? (फेज-1 की शुरुआत) रेलवे ने इस नियम को अचानक पूरा थोपने के बजाय इसे तीन चरणों (Three Phases) में लागू करने का फैसला किया है, ताकि यात्रियों को संभलने का मौका मिले। इसका पहला चरण आज, 29 दिसंबर से शुरू हो चुका है। नियम: आज से, जिन यूजर्स का मोबाइल नंबर और IRCTC अकाउंट आधार से लिंक नहीं है, वे सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक कोई भी टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। क्यों खास है यह समय? सुबह 8 बजे ही जनरल रिजर्वेशन (General Quota) की बुकिंग खुलती है। यही वह समय होता है जब दलाल और फर्जी आईडी वाले लोग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके सेकंडों में सारी कन्फर्म सीटें उड़ा ले जाते हैं। आम यात्री जब तक डिटेल भरता है, तब तक 'वेटिंग लिस्ट' (Waiting List) आ जाती है। किसे रोका गया? यह पाबंदी उन टिकटों पर लागू होगी जो 'ओपनिंग डे' (Opening Day) यानी यात्रा से 60 दिन पहले बुक किए जा रहे हैं। 2. आगे का रोडमैप: 5 और 12 जनवरी से बढ़ेगी सख्ती रेलवे सिर्फ यहीं नहीं रुकने वाला। आने वाले दो हफ्तों में यह नियम और भी सख्त होता जाएगा। दूसरा चरण (5 जनवरी से): अगले हफ्ते से पाबंदी का समय 4 घंटे और बढ़ा दिया जाएगा। 5 जनवरी से बिना आधार लिंक वाले यूजर्स सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। यानी लगभग पूरा दिन उनके हाथ से निकल जाएगा। तीसरा चरण (12 जनवरी से): यह सबसे कड़ा प्रहार होगा। 12 जनवरी से ऐसे यूजर्स सुबह 8 बजे से रात 12 बजे तक टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। इसका सीधा मतलब है कि अगर आपका आधार लिंक नहीं है, तो आप 'ओपनिंग डे' पर कन्फर्म टिकट की उम्मीद छोड़ दीजिए। आपको बची-कुची सीटों या वेटिंग लिस्ट से ही संतोष करना होगा। 3. 'फर्जी अकाउंट्स' पर डिजिटल ताला रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी कवायद का एकमात्र मकसद फर्जी अकाउंट्स (Fake Accounts) को सिस्टम से बाहर करना है। कैसे होती थी धांधली? दलाल एक ही व्यक्ति के नाम पर दर्जनों फर्जी ईमेल आईडी और मोबाइल नंबरों से फेक यूजर आईडी बना लेते थे। जब बुकिंग खुलती थी, तो वे एक साथ कई आईडी से लॉग-इन करके सॉफ्टवेयर के जरिए टिकट बुक करते थे। चूंकि इन आईडी की कोई पुख्ता पहचान (KYC) नहीं होती थी, इसलिए इन्हें पकड़ना मुश्किल था। अब क्या होगा? आधार लिंकिंग अनिवार्य होने से हर यूजर की एक डिजिटल पहचान तय हो जाएगी। एक आधार पर सीमित संख्या में ही आईडी बन सकती हैं। जैसे ही बुकिंग के लिए OTP आएगा, यह पुष्टि हो जाएगी कि यूजर असली है। दलाल अब फर्जी नामों से टिकट बुक नहीं कर पाएंगे क्योंकि उनके पास इतने आधार कार्ड और लिंक मोबाइल नंबर नहीं होंगे। 4. काउंटर टिकट: अब लाइन में भी 'मोबाइल' जरूरी यह बदलाव सिर्फ ऑनलाइन (IRCTC) बुकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर रेलवे स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर (PRS Counter) पर भी पड़ेगा। अगर आप सोचते हैं कि ऑनलाइन झंझट से बचने के लिए काउंटर से टिकट ले लेंगे, तो वहां भी नियम बदल गए हैं। OTP अनिवार्य: अब काउंटर से टिकट बुक करते समय भी आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP (वन टाइम पासवर्ड) आएगा। उस OTP को काउंटर क्लर्क को बताने के बाद ही आपका टिकट जनरेट होगा। आधार वाली सिम: जिस नंबर पर OTP आएगा, वह नंबर आधार से लिंक होना चाहिए। दूसरों का टिकट: यदि आप अपने परिवार या दोस्त के लिए काउंटर से टिकट लेने जा रहे हैं, तो आपके पास उस यात्री का आधार नंबर होना चाहिए और उसका फोन (या OTP) आपके पास उपलब्ध होना चाहिए। इसका मतलब है कि अब आप पुराने तरीके से सिर्फ फॉर्म भरकर टिकट नहीं ले सकते। रेलवे का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जो व्यक्ति यात्रा कर रहा है, टिकट उसी के नाम और पहचान पर जारी हो। 5. सवाल-जवाब: आसान भाषा में समझें पूरी प्रक्रिया यात्रियों के मन में इस नए नियम को लेकर कई सवाल हैं। यहाँ उनके विस्तृत जवाब दिए गए हैं: सवाल 1: अगर मेरा आधार लिंक नहीं है, तो क्या मैं कभी टिकट बुक नहीं कर पाऊंगा? जवाब: ऐसा नहीं है। आप टिकट बुक कर पाएंगे, लेकिन 'ओपनिंग विंडो' (Opening Window) के दौरान नहीं। जैसे आज (29 दिसंबर) को आप दोपहर 12 बजे के बाद टिकट बुक कर सकते हैं। लेकिन तब तक कन्फर्म सीटें बचने की संभावना बहुत कम होती है। अगर आपको पीक सीजन में कन्फर्म टिकट चाहिए, तो आधार लिंक करना अनिवार्य है। सवाल 2: बुकिंग के समय आधार कैसे काम करेगा? जवाब: यह एक टू-स्टेप वेरिफिकेशन प्रोसेस होगा। पहले आपको अपना IRCTC प्रोफाइल आधार से लिंक करना होगा। जब आप टिकट बुक करेंगे, तो आपके आधार-रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा। इस OTP को डालने पर ही ट्रांजैक्शन पूरा होगा। सवाल 3: रेलवे का '60 दिन' वाला नियम क्या है? जवाब: पहले आप यात्रा से 120 दिन (4 महीने) पहले टिकट बुक कर सकते थे। लेकिन 1 नवंबर 2024 से रेलवे ने इसे घटाकर 60 दिन (2 महीने) कर दिया है। उदाहरण: अगर आपको 30 जून को यात्रा करनी है, तो इसकी बुकिंग यात्रा की तारीख को छोड़कर 60 दिन पहले, यानी 1 मई को सुबह 8 बजे खुलेगी। इसी 'ओपनिंग डे' की बुकिंग के लिए आधार जरूरी किया गया है। सवाल 4: क्या यह नियम तत्काल (Tatkal) बुकिंग पर भी लागू होगा? जवाब: फिलहाल यह नियम 'एडवांस रिजर्वेशन पीरियड' (ARP) यानी 60 दिन पहले खुलने वाली बुकिंग के लिए है। लेकिन चूंकि तत्काल बुकिंग का समय (AC के लिए 10 बजे और स्लीपर के लिए 11 बजे) भी इसी प्रतिबंधित समय सीमा (सुबह 8 से 12) के बीच आता है, इसलिए बिना आधार लिंक किए आप तत्काल टिकट भी बुक नहीं कर पाएंगे। सवाल 5: परेशानी होने पर मदद कहां से मिलेगी? जवाब: बुकिंग या OTP की समस्या के लिए: IRCTC हेल्पलाइन (139) आधार संबंधी दिक्कत के लिए: UIDAI हेल्पलाइन (1947) आप नजदीकी रेलवे स्टेशन के 'मे आई हेल्प यू' (May I Help You) काउंटर पर भी जा सकते हैं। 6. स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: IRCTC पर आधार लिंक कैसे करें? अगर आपने अभी तक अपना अकाउंट लिंक नहीं किया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह प्रक्रिया बहुत आसान है और इसे घर बैठे 2 मिनट में किया जा सकता है: लॉग-इन करें: IRCTC की वेबसाइट (irctc.co.in) या 'IRCTC Rail Connect' ऐप खोलें और लॉग-इन करें। प्रोफाइल में जाएं: 'My Account' सेक्शन में जाएं और वहां 'Link Your Aadhaar' का विकल्प चुनें। डिटेल्स भरें: अपना आधार कार्ड पर लिखा नाम और आधार नंबर दर्ज करें। OTP वेरिफिकेशन: चेक बॉक्स पर टिक करें और 'Send OTP' पर क्लिक करें। आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। वेरिफाई करें: OTP दर्ज करें और 'Verify' पर क्लिक करें। KYC अपडेट: इसके बाद 'Update' बटन दबाएं। स्क्रीन पर कन्फर्मेशन मैसेज आ जाएगा और आपका अकाउंट आधार से लिंक हो जाएगा। फायदा: आधार लिंक करने के बाद आप एक महीने में 12 टिकट तक बुक कर सकते हैं (बिना लिंक किए सीमा 6 टिकट है)। 7. विशेषज्ञ की राय: "आम आदमी के लिए वरदान, दलालों के लिए काल" रेलवे मामलों के जानकार और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था। "दलाल अवैध सॉफ्टवेयर का उपयोग करके मिलीसेकंड में टिकट बुक कर लेते थे क्योंकि सिस्टम को यह पता नहीं चलता था कि बुकिंग करने वाला इंसान है या बॉट। आधार ऑथेंटिकेशन और OTP की अनिवार्यता से बुकिंग प्रक्रिया में कुछ सेकंड की देरी जरूर होगी, लेकिन यह 'फेयर प्ले' (Fair Play) सुनिश्चित करेगा। अब टिकट उसे ही मिलेगा जो वास्तव में यात्रा करना चाहता है।" हालांकि, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां बुजुर्गों के पास मोबाइल नहीं है या उनका नंबर आधार से लिंक नहीं है, उन्हें काउंटर से टिकट लेने में परेशानी हो सकती है। रेलवे को ऐसे मामलों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। 8. निष्कर्ष: पारदर्शिता की ओर एक बड़ा कदम 29 दिसंबर 2025 का यह दिन भारतीय रेलवे के सुधारों में एक मील का पत्थर साबित होगा। दलालों के मकड़जाल को तोड़ने के लिए रेलवे ने तकनीक का सहारा लिया है। हालांकि, शुरुआत में यात्रियों को थोड़ी असुविधा हो सकती है, खासकर उन्हें जो तकनीक के साथ बहुत सहज नहीं हैं। लेकिन लंबी अवधि में, यह नियम आम यात्रियों को उनकी हक की सीट दिलाने में मददगार साबित होगा। तो इंतज़ार मत कीजिए, अगर आपने अभी तक अपना IRCTC अकाउंट आधार से लिंक नहीं किया है, तो अभी करें। याद रखें, 5 जनवरी और 12 जनवरी से नियम और सख्त होने वाले हैं। FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) Q1: क्या 12 जनवरी के बाद मैं बिना आधार के बिल्कुल टिकट बुक नहीं कर पाऊंगा? Ans: आप बुक कर पाएंगे, लेकिन बुकिंग खुलने के दिन (Opening Day) सुबह 8 बजे से रात 12 बजे तक नहीं। आपको अगले दिन या बची हुई सीटों पर बुकिंग करनी होगी। Q2: काउंटर टिकट के लिए किसका आधार लगेगा? Ans: जो व्यक्ति यात्रा कर रहा है या जो व्यक्ति टिकट लेने गया है, उसका मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना चाहिए और उस पर OTP आना चाहिए। Q3: एक महीने में कितने टिकट बुक कर सकते हैं? Ans: आधार लिंक होने पर आप एक महीने में 12 टिकट तक बुक कर सकते हैं। बिना आधार लिंक किए यह सीमा 6 टिकट है। Q4: क्या यह नियम तत्काल टिकट पर भी असर डालेगा? Ans: जी हाँ, क्योंकि तत्काल बुकिंग का समय (10 AM और 11 AM) प्रतिबंधित स्लॉट में आता है। बिना आधार लिंक किए आप तत्काल टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। Q5: क्या यह नियम पूरे भारत में लागू है? Ans: हाँ, यह नियम कश्मीर से कन्याकुमारी तक सभी रेलवे जोन और सभी रूट्स पर समान रूप से लागू है।
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।