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Weather Update 26 January 2026 IMD Issues Orange Alert for Hills Heavy Snow and Rain Predicted on Republic Day
26 जनवरी पर कुदरत का 'कर्फ्यू': पहाड़ों पर 'सफेद आफत' का ऑरेंज अलर्ट, -18°C में जमने वाली है नसें; प्रशासन का मंत्र- 'मुनाफा नहीं, मदद'

नई दिल्ली/शिमला: देश भर में जब 77वें गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) का जश्न मनाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, वहीं मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 जनवरी 2026 के लिए उत्तर भारत, विशेषकर पहाड़ी राज्यों के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Active Western Disturbance) के चलते मौसम विभाग ने 'ऑरेंज अलर्ट' (Orange Alert) जारी किया है, जिसका सीधा असर गणतंत्र दिवस समारोहों और लंबी छुट्टी पर निकले पर्यटकों पर पड़ने वाला है।READ ALSO:-मेरठ में यूजीसी के नए फरमान के खिलाफ बिगुल: 'समानता सर्वेक्षण' या सामाजिक विभाजन? युवा ब्राह्मण समाज ने विनियमन-2026 को बताया शिक्षा जगत के लिए 'काला अध्याय'   हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की ऊंची चोटियों पर भारी बर्फबारी (Heavy Snowfall) की चेतावनी दी गई है, जबकि मैदानी इलाकों में बारिश और शीतलहर का प्रकोप देखने को मिलेगा। इस बीच, प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए होटलों और टैक्सी संचालकों के लिए एक विशेष और सख्त एडवाइजरी जारी की है, जिसका मूल मंत्र है—"मुनाफा नहीं, मदद"।   इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि 26 जनवरी को आपके शहर का मौसम कैसा रहेगा, पर्यटकों के लिए क्या निर्देश हैं और आने वाले 2-3 दिनों में मौसम क्या गुल खिलाने वाला है।   गणतंत्र दिवस पर कुदरत का 'कोल्ड स्ट्राइक' Mausam Update 26 January 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 26 जनवरी का दिन उत्तर भारत के लिए हड्डियों को जमा देने वाली ठंड लेकर आ रहा है। IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा। इसका प्रभाव 25 जनवरी की रात से ही दिखना शुरू हो जाएगा, लेकिन 26 जनवरी को इसकी तीव्रता चरम पर होगी।   पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी का दौर शुरू होने के साथ ही मैदानी इलाकों, विशेषकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर में बर्फीली हवाएं (Icy Winds) ठिठुरन बढ़ाएंगी। मौसम विभाग का कहना है कि यह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस इस सीजन का सबसे मजबूत सिस्टम हो सकता है।   हिमाचल प्रदेश: -18°C तक लुढ़केगा पारा, तूफानी हवाओं का अलर्ट हिमाचल प्रदेश में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर रहने का अनुमान है। IMD के आंकड़ों के अनुसार, 26 जनवरी को राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में दिन के समय 45% और रात के समय 75% तक बर्फबारी की संभावना है। यह आंकड़ा बताता है कि गणतंत्र दिवस की रात पहाड़ पूरी तरह सफेद चादर में लिपट जाएंगे।   तापमान में भारी गिरावट: राज्य के ऊपरी इलाकों में अधिकतम तापमान -13°C (माइनस 13 डिग्री) और न्यूनतम तापमान -18°C (माइनस 18 डिग्री) तक गिरने का अनुमान है। यह तापमान इतना कम है कि पानी की पाइपलाइन जमने और सड़कों पर 'ब्लैक आइस' (Black Ice) बनने का खतरा पैदा हो गया है। तेज हवाएं और बिजली: केवल बर्फबारी ही नहीं, बल्कि मौसम विभाग ने 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी है। हवा की दिशा दक्षिण-पूर्व (South-East) से रहेगी और इसकी गति 4 mph तक सामान्य रह सकती है लेकिन झोंके तेज होंगे। इसके साथ ही कई स्थानों पर बिजली गिरने (Lightning) की भी आशंका जताई गई है।   पर्यटकों के लिए सख्त एडवाइजरी: 'मुनाफा नहीं, मदद' पहाड़ों पर खराब मौसम को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एक सराहनीय और सख्त कदम उठाया है। आपदा प्रबंधन और पर्यटन विभाग ने संयुक्त रूप से होटलों, होम-स्टे और टैक्सी यूनियनों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी का थीम है—'मुनाफा नहीं, मदद' (Profit not, Help)।   प्रशासन के निर्देशों के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं: जबरन चेक-आउट पर रोक: होटलों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि भारी बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो जाती हैं, तो किसी भी पर्यटक को होटल से चेक-आउट (Check-out) करने के लिए मजबूर न किया जाए। पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। किराए में वृद्धि पर प्रतिबंध: आपदा या खराब मौसम को 'अवसर' मानकर पर्यटकों को लूटने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। होटल, टैक्सी या रेस्तरां संचालक तय दरों से अधिक किराया या सेवा शुल्क (Service Charge) नहीं वसूल सकेंगे। यदि कोई ऐसा करता पाया गया, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। यात्रा न करने की सलाह: प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे 26 और 27 जनवरी को अनावश्यक यात्रा से बचें। विशेषकर उन रास्तों पर जहां बर्फबारी के कारण सड़क संपर्क टूटने (Road Connectivity issues) का खतरा है। हेल्पलाइन नंबर: प्रशासन ने पर्यटकों की सहायता के लिए 24x7 कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं।   यह एडवाइजरी उस समय आई है जब 26 जनवरी की लंबी छुट्टी (Long Weekend) के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक हिमाचल और कश्मीर का रुख कर रहे हैं।   मैदानी इलाकों का हाल: कोहरा और शीतलहर पहाड़ों पर बर्फबारी का सीधा असर मैदानी राज्यों पर पड़ेगा। Mausam Update 26 January 2026 के अनुसार:   पंजाब और हरियाणा: 26 जनवरी की सुबह पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में 'घने से बहुत घना कोहरा' (Dense to Very Dense Fog) छाया रहेगा। इससे विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम हो सकती है, जिससे गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों में खलल पड़ सकता है और यातायात प्रभावित होगा। शीतलहर (Cold Wave): राजस्थान के उत्तरी हिस्सों (चूरू, सीकर, बीकानेर) और हरियाणा में शीतलहर चलने की संभावना है। दिन का तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री नीचे रह सकता है। दिल्ली-NCR: राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी को आसमान में बादल छाए रहेंगे और ठंडी हवाएं चलेंगी। हालांकि, बारिश की मुख्य गतिविधि 27 जनवरी से शुरू होगी, लेकिन 26 तारीख को भी मौसम ठंडा और नम रहेगा।   27-28 जनवरी: बारिश और ओलावृष्टि का दौर मौसम विभाग ने केवल 26 जनवरी ही नहीं, बल्कि अगले दो दिनों के लिए भी चेतावनी जारी की है। 26 जनवरी को पहाड़ों पर शुरू हुआ यह सिस्टम 27 और 28 जनवरी को मैदानी इलाकों में अपनी ताकत दिखाएगा।   दिल्ली-NCR में बारिश: IMD के मुताबिक, 27 जनवरी को दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में गरज के साथ बारिश (Thunderstorm with Rain) होने के आसार हैं। यह बारिश पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ने के कारण होगी। बारिश के कारण दिन के तापमान में 4°C से 8°C तक की भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे 'कोल्ड डे' (Cold Day) जैसी स्थिति बन सकती है।   हिमाचल के इन जिलों में रेड अलर्ट: 27 जनवरी को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में भारी से बहुत भारी बर्फबारी का अनुमान है। यह वह समय होगा जब अटल टनल (Atal Tunnel) और रोहतांग दर्रा जैसे मार्ग पूरी तरह बंद हो सकते हैं।   किसान और कृषि पर प्रभाव इस बेमौसम बारिश और बर्फबारी का मिश्रित प्रभाव कृषि पर पड़ेगा:   फायदेमंद: गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए हल्की बारिश और पहाड़ों पर बर्फबारी अमृत समान है। इससे जमीन में नमी बनी रहेगी और तापमान कम होने से गेहूं की पैदावार अच्छी होगी। नुकसान: यदि मैदानी इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorm) होती है या बहुत तेज हवाएं चलती हैं, तो खड़ी फसलों के बिछने (Lodging) का खतरा है, जिससे किसानों को नुकसान हो सकता है। बागवानी किसानों, विशेषकर सेब उत्पादकों के लिए यह बर्फबारी 'व्हाइट गोल्ड' साबित होगी क्योंकि सेब की फसल के लिए 'चिलिंग आवर्स' (Chilling Hours) की जरूरत होती है।   स्वास्थ्य और सुरक्षा सावधानियां मौसम में आ रहे इस बदलाव को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी सलाह जारी की है। तापमान में अचानक 4 से 8 डिग्री की गिरावट बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक हो सकती है।   गणतंत्र दिवस परेड देखने जाने वाले: जो लोग सुबह परेड देखने खुले में जा रहे हैं, वे थ्री-लेयर वूलन (Three-layer woolens) पहनें। सिर और कान को ढककर रखें। हृदय रोगी: अत्यधिक ठंड खून को गाढ़ा करती है और ब्लड प्रेशर बढ़ाती है। दिल के मरीजों को सुबह की सैर (Morning Walk) से बचने और घर के अंदर रहने की सलाह दी गई है। ड्राइविंग: कोहरे के कारण दृश्यता कम रहेगी, इसलिए गाड़ियों में फॉग लैंप का इस्तेमाल करें और गति सीमा का पालन करें।   जश्न के साथ सतर्कता भी जरूरी 26 जनवरी 2026 का गणतंत्र दिवस मौसम के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। एक तरफ जहां पहाड़ों पर बर्फबारी पर्यटकों को लुभा रही है, वहीं प्रशासन की 'मुनाफा नहीं, मदद' की अपील यह याद दिलाती है कि प्रकृति के आगे सुरक्षा ही सबसे बड़ा उपाय है। Mausam Update 26 January 2026 स्पष्ट करता है कि अगले 48 से 72 घंटे उत्तर भारत के लिए मौसम के लिहाज से उथल-पुथल भरे रहेंगे।   पर्यटकों से अनुरोध है कि वे स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहें और मौसम विभाग के अपडेट्स को नजरअंदाज न करें। अगर आप पहाड़ों की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो सड़क की स्थिति जांच कर ही घर से निकलें।   भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 जनवरी 2026 के लिए पहाड़ी राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी और तापमान -18°C तक गिरने का अनुमान है। प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए होटलों को "मुनाफा नहीं, मदद" की नीति अपनाने और जबरन चेक-आउट न कराने का निर्देश दिया है। वहीं, 27-28 जनवरी को दिल्ली-NCR और पंजाब-हरियाणा में बारिश और तापमान में भारी गिरावट की संभावना है।

Unknown जनवरी 26, 2026 0
celestial conjunction moon saturn neptune january 23 2026 viewing guide
23 जनवरी की शाम अंतरिक्ष में मचेगी हलचल: चांद, शनि और नेपच्यून का होगा 'महासंगम', जानें कब और कैसे देखें यह जादुई नजारा

नए साल 2026 की शुरुआत खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए बेहद रोमांचक होने जा रही है. अंतरिक्ष के रहस्यों और तारों की दुनिया में खो जाने का शौक रखने वाले लोगों के लिए 23 जनवरी की शाम एक विशेष सौगात लेकर आ रही है. 23 जनवरी की रात आकाश में आपको एक शानदार खगोलीय नजारा (Celestial Event) दिखाई देगा, जब हमारे सौर मंडल के दो प्रमुख ग्रह और पृथ्वी का उपग्रह चंद्रमा एक साथ एक ही फ्रेम में नजर आएंगे. आकाश में मीन (Pisces) तारामंडल में चंद्रमा और शनि की युति (Moon and Saturn Conjunction) होने जा रही है. इस दौरान ये दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब दिखाई देंगे, जिनके बीच की दूरी लगभग 4°21′ (डिग्री-मिनट) होगी.Read also:-भारत की अब तक की सबसे 'हाई-टेक' जनगणना का शंखनाद: 2027 में गिना जाएगा हर सिर और हर घर; पहली बार जातियों का भी होगा डेटाबेस, 33 सवालों में कैद होगी देश की तस्वीर   यह घटना केवल चंद्रमा और शनि तक सीमित नहीं है, बल्कि उसी समय सौर मंडल का आठवां ग्रह नेपच्यून (Neptune) भी इनके पास मौजूद होगा. जिससे ये तीनों खगोलीय पिंड लगभग 3°49′ के दायरे में एक साथ दिखाई देंगे. यह जानकारी वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने साझा की है. आइए विस्तार से जानते हैं कि इस घटना को कब, कहां और कैसे देखा जा सकता है और इसके पीछे का विज्ञान क्या है.   क्या है यह खगोलीय घटना? खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 23 जनवरी को होने वाली यह खगोलीय घटना तकनीकी रूप से चंद्रमा, शनि और नेपच्यून का 'संयोजन' (Conjunction) है. आम भाषा में इसे ग्रहों का मिलन कहा जाता है. इस दौरान पृथ्वी से देखने पर ऐसा प्रतीत होगा कि ये तीनों पिंड आकाश में एक-दूसरे से सट गए हैं, यानी बेहद करीब नजर आएंगे. हालांकि, यह सिर्फ़ एक दृष्टिभ्रम (Optical Illusion) है, क्योंकि वास्तव में इनके बीच करोड़ों किलोमीटर की दूरी होगी.   घटना का आकाशीय विवरण काफी दिलचस्प होगा. जिस समय यह नजारा घटित होगा, उस समय चंद्रमा अपनी कलाओं (Phases) के चक्र में 5 दिन का बढ़ता हुआ अर्धचंद्र (Waxing Crescent) होगा. इस दौरान चंद्रमा का लगभग 26% हिस्सा सूर्य की रोशनी से प्रकाशित दिखाई देगा. चंद्रमा की यह पतली सुनहरी लकीर आकाश में बेहद खूबसूरत नजर आएगी. इसी दौरान शनि ग्रह (Saturn) बेहद चमकीला होगा, जिसे साधारण आंखों से आसानी से देखा जा सकेगा. वहीं, नेपच्यून अपनी कम चमक के कारण नग्न आंखों से ओझल रहेगा.   किस दिशा में और कब दिखेगा यह अद्भुत नजारा? इस खगोलीय घटना का गवाह बनने के लिए आपको सही दिशा और सही समय की जानकारी होना बहुत जरूरी है. खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार:   दिशा (Direction): यह नजारा आकाश में पश्चिम (West) से थोड़ा दक्षिण-पश्चिम (South-West) दिशा में दिखाई देगा. आपको क्षितिज (Horizon) से लगभग 30–35 डिग्री ऊपर देखना होगा. समय (Timing): इसको देखने का सबसे अच्छा समय शाम 6:00 बजे से रात 8:30 बजे तक रहेगा. जैसे-जैसे रात गहरी होगी, ये ग्रह क्षितिज की ओर नीचे जाते जाएंगे और अंततः डूब जाएंगे. इसलिए सूर्यास्त के तुरंत बाद ही आकाश निहारना सबसे बेहतर होगा. दृश्य (View): आकाश में सबसे पहले आपको चमकीला शनि ग्रह दिखाई देगा. इसी के ठीक पास में आपको पतला सा चंद्रमा (Crescent Moon) चमकता हुआ नजर आएगा. चंद्रमा के थोड़ा नीचे या पास में ही नेपच्यून भी मौजूद होगा, लेकिन उसे देखने के लिए आपको दूरबीन की मदद लेनी होगी.   इस दौरान यह अपने चरम पर होगा. इसके बाद इनके बीच की कोणीय दूरी (Angular Separation) धीरे-धीरे कम होने लगेगी और वे अस्त होने की दिशा में बढ़ेंगे.   नेपच्यून: जिसे देखने के लिए चाहिए होगी 'तीसरी आंख' जहां चंद्रमा और शनि की युति को आप अपनी छत या मैदान से आसानी से देख सकेंगे, वहीं इस तिकड़ी के तीसरे सदस्य, नेपच्यून को देखना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है. खगोलविद ने बताया कि नेपच्यून ग्रह हमारे सौर मण्डल का सूर्य से दूरी के क्रम में आठवां ग्रह है, जो सबसे वाह्य (Outer) ग्रह है. पृथ्वी से इसकी अत्यधिक दूरी के कारण इसका मैग्नीट्यूड (चमक का पैमाना) लगभग +7.8 होता है.   खगोल विज्ञान में, जिस वस्तु का मैग्नीट्यूड जितना अधिक (+) होता है, वह उतनी ही धुंधली होती है. मानव आंखें आमतौर पर +6 मैग्नीट्यूड तक की वस्तुओं को देख सकती हैं (वह भी एकदम अंधेरे आकाश में). +7.8 मैग्नीट्यूड होने के कारण नेपच्यून साधारण आंखों से दिखाई नहीं देता है. यहां तक कि किसी छोटी या साधारण दूरबीन से भी यह बहुत धुंधला, एक तारे जैसा दिखाई देता है. इसलिए इसे स्पष्ट रूप से देखने के लिए किसी अच्छी गुणवत्ता वाली दूरबीन या टेलीस्कोप (Telescope) की आवश्यकता पड़ती है. हालांकि, यह एक सुंदर खगोलीय संयोग है, जो स्टारगेजिंग (Stargazing) के शौकीनों और एस्ट्रोफोटोग्राफी (Astrophotography) के लिए बेहतरीन अवसर भी है. 'त्रि-संयोजन' का दुर्लभ संयोग   हालांकि ये तीनों ग्रह (चंद्रमा, शनि, नेपच्यून) एक सटीक सीधी रेखा में नहीं होंगे, बल्कि शनि और नेपच्यून के करीब चंद्रमा का गुजरना इसे एक प्रकार का 'त्रि-संयोजन' (Triple Conjunction) जैसा दृश्य बना सकता है. खगोल प्रेमियों के लिए यह एक खास मौका होगा क्योंकि एक ही 'फील्ड ऑफ व्यू' (Field of View) में तीन अलग-अलग प्रकार के खगोलीय पिंडों को देखना दुर्लभ होता है. शनि: गैस का विशाल गोला जिसके चारों ओर छल्ले हैं. चंद्रमा: हमारा सबसे करीबी ठोस उपग्रह. नेपच्यून: बर्फ का विशाल गोला (Ice Giant).   यह नजारा सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी आकाश में देखा जा सकेगा. इस दौरान चंद्रमा और शनि ग्रह के बीच कोणीय दूरी (एंगुलर सेपरेशन) कम होगा. इस कारण से दोनों खगोलीय पिंड विनोकुलर (Binocular) के फील्ड ऑफ व्यू (FOV) में समा जाएंगे. इसका मतलब है कि अगर आप दूरबीन से देख रहे हैं, तो आपको अपनी दूरबीन को हिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी; दोनों पिंड एक साथ दिखाई देंगे. इस दौरान शनि ग्रह की दृश्य चमक लगभग +1.1 होगी, जो इसे मध्यम चमक वाले तारे जैसा दिखाएगी. लेकिन याद रहे, यह जोड़ी क्षितिज के नीचे डूबने से पहले कुछ ही समय के लिए दिखाई देगी, इसलिए समय का पाबंद होना जरूरी है.   क्या होता है 'संयुग्मन' (Conjunction)? इस घटना की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि को समझना भी आवश्यक है. खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस प्रकार के संयोजन को 'युति' या 'कंजंक्शन' के रूप में मान्यता दी जाती है. खगोल विज्ञान की तकनीकी भाषा में इसे ऐपल्स (Appulse) यानी 'निकट आगमन' भी कहा जाता है.   जब दो या दो से अधिक खगोलीय पिंड (जैसे ग्रह और चंद्रमा) पृथ्वी से देखने पर आकाश में एक ही देशांतर (Longitude) या राईट असेंशन (Right Ascension) पर आ जाते हैं, तो इसे 'संयुग्मन' (Conjunction) कहा जाता है. यह खगोलीय पिंडों के एक ही दिशा में संरेखित होने से बनता है. सरल शब्दों में, यह एक "दृष्टिभ्रम" (Line of sight effect) है. इसे ऐसे समझें—जैसे आप एक सीधी सड़क पर खड़े हैं. आपसे 100 मीटर दूर एक पेड़ है और उस पेड़ के ठीक पीछे 2 किलोमीटर दूर एक पहाड़ है. आपको देखने में लगेगा कि पेड़ और पहाड़ एक साथ हैं, जबकि उनके बीच बहुत दूरी है. ठीक यही स्थिति 23 जनवरी को अंतरिक्ष में होगी: चंद्रमा: पृथ्वी से लगभग 3.84 लाख किलोमीटर दूर. शनि: पृथ्वी से लगभग 1.5 अरब किलोमीटर दूर. नेपच्यून: पृथ्वी से लगभग 4.5 अरब किलोमीटर दूर.   ये तीनों अपनी-अपनी कक्षाओं में घूमते हुए पृथ्वी के सापेक्ष एक सीध में आ जाएंगे. भले ही वे वास्तव में लाखों-करोड़ों किलोमीटर दूर हों, लेकिन पृथ्वी से देखने पर बेहद करीब दिखाई देते हैं. यह खास क्षण चंद्रमा और शनि की युति का अद्भुत मिलन, अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए साल 2026 की शुरुआत में ही बेहद रोमांचक होगा.   देखने के लिए जरूरी सुझाव और सावधानियां खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस अद्भुत नजारे का पूरा आनंद लेने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. अगर आप इस घटना को मिस नहीं करना चाहते, तो इन बातों का ध्यान रखें:   स्थान का चुनाव: खगोलविद ने सुझाव दिया है कि इस घटना को देखने के लिए किसी ऊंचे स्थान (जैसे घर की छत) या ऐसे खुले मैदान का चुनाव करें जहां पश्चिम दिशा का क्षितिज साफ हो. ऊँची इमारतें या पेड़ आपके दृश्य को बाधित कर सकते हैं. प्रकाश प्रदूषण से बचें: शहर की तेज रोशनी तारों और ग्रहों की चमक को फीका कर देती है. कोशिश करें कि ऐसी जगह से देखें जहां प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution) बहुत ही कम हो. अंधेरे आकाश में शनि और नेपच्यून को पहचानना आसान होगा. मौसम की भूमिका: उन्होंने सलाह दी है कि इस दृश्य का आनंद लेने के लिए मौसम भी अनुकूल होना चाहिए. आकाश साफ होना चाहिए और बादल नहीं होने चाहिए. कोहरा या धुंध इस नजारे को खराब कर सकते हैं. उपकरण: नग्न आंखें: चंद्रमा को साधारण आंखों से साफ देख सकते हैं. इस दौरान चंद्रमा लगभग 26% रोशनी के साथ प्रकाशित होगा, जो बहुत ही मनमोहक लगेगा. साथ ही शनि ग्रह को भी बिना किसी उपकरण के देखा जा सकता है. यह एक स्थिर, बिना टिमटिमाते हुए पीले-सुनहरे तारे जैसा दिखेगा. विनोकुलर (Binoculars): अगर आपके पास 10×50 की दूरबीन है, तो आप चंद्रमा के क्रेटर्स (गड्ढे) और शनि के रंग को थोड़ा बेहतर देख पाएंगे. नेपच्यून को देखने के लिए यह कम से कम जरूरत है. टेलीस्कोप: शनि ग्रह के प्रसिद्ध छल्लों (Rings) को बिना किसी खगोलीय दूरबीन के नहीं देखा जा सकता है. यदि आप शनि के छल्ले और चंद्रमा के क्रेटर्स को विस्तार से देखना चाहते हैं, तो एक छोटा टेलीस्कोप अद्भुत अनुभव देगा. टेलीस्कोप से देखने पर शनि के छल्ले और चंद्रमा के क्रेटर्स एक साथ देखना किसी जादुई अनुभव से कम नहीं होगा.   मीन राशि (Pisces) का महत्व यह पूरी घटना मीन (Pisces) तारामंडल की पृष्ठभूमि में घटित हो रही है. मीन राशि आकाश का एक बड़ा लेकिन धुंधला तारामंडल है. ज्योतिष और खगोल विज्ञान दोनों में इसका महत्व है. वर्तमान में शनि और नेपच्यून दोनों ही मीन राशि में भ्रमण कर रहे हैं. 23 जनवरी को चंद्रमा भी अपनी यात्रा करते हुए मीन राशि में प्रवेश करेगा, जिससे यह "त्रि-ग्रहीय मिलन" संभव हो पाएगा. मीन तारामंडल की पहचान करना थोड़ा कठिन होता है क्योंकि इसमें बहुत चमकीले तारे नहीं हैं, लेकिन 23 जनवरी को चंद्रमा स्वयं मार्कर (संकेतक) का काम करेगा. जहां चंद्रमा होगा, वही मीन राशि का क्षेत्र है.   फोटोग्राफी के लिए सुनहरा मौका एस्ट्रोफोटोग्राफर्स (Astrophotographers) के लिए यह रात किसी त्योहार से कम नहीं है.   स्मार्टफोन: आजकल के आधुनिक स्मार्टफोन में 'नाइट मोड' का उपयोग करके आप चंद्रमा और शनि की जोड़ी की तस्वीर ले सकते हैं. अपने फोन को ट्राइपॉड पर रखें ताकि फोटो धुंधली न आए. DSLR कैमरा: यदि आपके पास DSLR है, तो 200mm या उससे अधिक का जूम लेंस उपयोग करें. शटर स्पीड को थोड़ा कम रखें (1/10 से 1 सेकंड, चंद्रमा की चमक के अनुसार) और ISO को 400-800 के बीच रखें. कंपोज़िशन: आप क्षितिज पर मौजूद किसी पेड़ या इमारत के सिलहूट (Silhouette) के साथ इस जोड़ी को फ्रेम कर सकते हैं, जो तस्वीर को और भी कलात्मक बना देगा.   अर्थशाइन (Earthshine) का जादू एक और खास बात जो इस घटना को सुंदर बनाएगी, वह है 'अर्थशाइन' या 'दा विंची ग्लो'. जब चंद्रमा अर्धचंद्र (Crescent) अवस्था में होता है, तो उसका बाकी का अंधकारमय हिस्सा पूरी तरह काला नहीं होता, बल्कि हल्का सा चमकता है. यह चमक पृथ्वी से परावर्तित होकर चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी के कारण होती है. 23 जनवरी को 26% प्रकाशित चंद्रमा के साथ, आप उसके बाकी हिस्से पर इस "राख जैसी चमक" (Ashen glow) को देख पाएंगे. यह दृश्य दूरबीन से देखने पर बेहद रूहानी लगता है.   23 जनवरी की शाम, विज्ञान, प्रकृति और ब्रह्मांड की सुंदरता का एक अनूठा संगम होगी. वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह द्वारा दी गई यह जानकारी हमें याद दिलाती है कि हमारा ब्रह्मांड कितना विशाल और गतिशील है. चंद्रमा और शनि की युति न केवल एक खगोलीय घटना है, बल्कि यह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम इस अनंत ब्रह्मांड में कितने छोटे हैं.   तो, 23 जनवरी को अपनी शाम की चाय के साथ छत पर जाना न भूलें. पश्चिम दिशा की ओर देखें और इस ब्रह्मांडीय नृत्य (Cosmic Dance) का गवाह बनें. चाहे आपके पास महंगी दूरबीन हो या सिर्फ आपकी आंखें, यह नजारा हर किसी के लिए खास है. याद रखें, समय शाम 6:00 बजे से 8:30 बजे तक ही अनुकूल रहेगा.   23 जनवरी 2026 की शाम मीन तारामंडल में चंद्रमा, शनि और नेपच्यून का दुर्लभ संयोग देखने को मिलेगा. चंद्रमा और शनि नग्न आंखों से पश्चिम-दक्षिण पश्चिम दिशा में देखे जा सकेंगे, जबकि नेपच्यून के लिए दूरबीन की आवश्यकता होगी. यह घटना शाम 6:00 बजे से 8:30 बजे तक दृश्यमान रहेगी. खगोल प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए यह साल का पहला बड़ा अवसर है.

Unknown जनवरी 23, 2026 0
census 2027 notification issued digital process-33 questions caste data complete guide
भारत की अब तक की सबसे 'हाई-टेक' जनगणना का शंखनाद: 2027 में गिना जाएगा हर सिर और हर घर; पहली बार जातियों का भी होगा डेटाबेस, 33 सवालों में कैद होगी देश की तस्वीर

नई दिल्ली: भारत के इतिहास में सबसे बड़ी और तकनीकी रूप से सबसे उन्नत कवायद की शुरुआत होने जा रही है। केंद्र सरकार ने लंबे इंतजार के बाद जनगणना 2027 (Census 2027) की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। कोरोना महामारी के कारण एक दशक से अधिक समय से लटकी इस प्रक्रिया का रोडमैप अब पूरी तरह साफ हो गया है। गुरुवार को गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी नोटिफिकेशन ने देश की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर बदलने वाली इस मेगा-एक्सरसाइज की नींव रख दी है।READ ALSO:-यूपी में वोटरों पर 'कागज' का संकट: 2003 की लिस्ट में नाम नहीं तो 'निवास प्रमाण पत्र' भी बेकार; आयोग ने कहा- 'सिर्फ ये 11 सबूत चलेंगे'   इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है। यह न केवल आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना (Caste Census) होगी, बल्कि यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना (Digital Census) भी होगी। सरकार ने पहले चरण (House Listing) के लिए 33 सवालों की एक विस्तृत सूची जारी की है, जो यह तय करेगी कि भारत के लोग कैसे रहते हैं, क्या खाते हैं और किन सुविधाओं का उपयोग करते हैं।   इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको जनगणना 2027 के हर पहलू, 33 सवालों की डिटेल, डिजिटल प्रक्रिया, जियो-टैगिंग के 5 बड़े फायदे और इसके राजनीतिक व सामाजिक असर के बारे में विस्तार से बताएंगे।   दो चरणों में होगी महा-गिनती: जानें पूरा शेड्यूल सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना की यह प्रक्रिया दो चरणों (Two Phases) में पूरी की जाएगी। चूंकि भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है, इसलिए डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।   पहला चरण (Phase-1): मकानों की लिस्टिंग (House Listing) अवधि: 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक। प्रक्रिया: इस चरण में नागरिकों की गिनती नहीं होगी, बल्कि मकानों, इमारतों और उनमें उपलब्ध सुविधाओं का डेटा जुटाया जाएगा। समय सीमा: प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को अपने अधिकार क्षेत्र में यह काम 30 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। उद्देश्य: यह चरण यह निर्धारित करेगा कि देश में कितने मकान हैं, उनकी स्थिति क्या है और उनमें रहने वाले परिवारों का जीवन स्तर कैसा है।   दूसरा चरण (Phase-2): जनसंख्या की गिनती (Population Enumeration) शुरुआत: फरवरी 2027 से। प्रक्रिया: यह मुख्य चरण है जहां देश के हर नागरिक की व्यक्तिगत जानकारी, जैसे- नाम, उम्र, लिंग, धर्म, शिक्षा और (पहली बार) जाति का ब्योरा दर्ज किया जाएगा। संशोधन: 1 से 5 मार्च 2027 के बीच एक 'रिविजन राउंड' होगा जिसमें उन लोगों को शामिल किया जाएगा जो फरवरी में छूट गए थे या जिनका जन्म इस दौरान हुआ हो।   33 सवाल जो आपकी लाइफस्टाइल की पोल खोलेंगे पहले चरण यानी मकान सूचीकरण (House Listing) और मकान गणना (Housing Census) के लिए सरकार ने 33 सवालों की एक सूची तैयार की है। यह प्रश्नावली न केवल आपके सिर पर छत की जानकारी लेगी, बल्कि आपकी आर्थिक स्थिति का भी पूरा स्कैन करेगी। परिवार के मुखिया को इन सवालों के जवाब देने होंगे।   प्रमुख सवाल और उनका महत्व: मकान की स्थिति: क्या मकान पक्का है या कच्चा? फर्श, दीवार और छत किस सामग्री (कंक्रीट, टाइल्स, घास-फूस) से बनी है? यह देश में गरीबी और आवास योजनाओं की सफलता को मापने में मदद करेगा। कमरों की संख्या: घर में कितने कमरे हैं और कितने शादीशुदा जोड़े वहां रहते हैं? इससे प्रति व्यक्ति स्थान और भीड़भाड़ (Overcrowding) का पता चलेगा। पानी का स्रोत: पीने का पानी कहां से आता है? (नल, हैंडपंप, कुआं या टैंकर)। क्या पानी का स्रोत घर के अंदर है या दूर? शौचालय की सुविधा: क्या घर में शौचालय है? यह 'स्वच्छ भारत अभियान' की वास्तविकता को परखेगा। रसोई और ईंधन: खाना पकाने के लिए किस ईंधन का उपयोग होता है? (LPG, लकड़ी, गोबर के उपले या बिजली)। क्या रसोई घर अलग है? वाहनों की जानकारी: क्या आपके पास साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार या जीप है? यह मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति (Purchasing Power) का सूचक होगा। डिजिटल गैजेट्स: क्या परिवार के पास स्मार्टफ़ोन, लैपटॉप या इंटरनेट कनेक्शन है? यह 'डिजिटल इंडिया' की पहुंच को मापेगा। मुख्य अनाज: परिवार में मुख्य रूप से कौन सा अनाज (चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा) खाया जाता है? इससे खाद्य सुरक्षा योजनाओं (Food Security) को क्षेत्रवार लागू करने में मदद मिलेगी।   इसके अलावा बिजली कनेक्शन, बैंक खाता, मोबाइल नंबर और घर के मालिकाना हक (किराए का या अपना) से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।     पूछे जाने वाले सवाल मकान के स्वामित्व की स्थिति परिवार के पास कमरों की संख्या परिवार में रहने वाले विवाहित दंपत्तियों की संख्या पेयजल का मुख्य स्रोत पेयजल स्रोत की उपलब्धता लाइट का मुख्य स्रोत शौचालय की सुलभता शौचालय का प्रकार गंदे पानी की निकासी बाथरूम की उपलब्धता रसोईघर और एलपीजी /पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता खाना पकाने के लिए प्रयुक्त मुख्य ईंधन रेडियो/ट्रांजिस्टर टेलीविजन इंटरनेट सुविधा लैपटॉप/कंप्यूटर टेलीफोन/मोवाइल फोन/स्मार्ट फोन साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड कार/जीप/वैन परिवार द्वारा उपभोग किया जाने वाले मुख्य अनाज मोबाइल नंबर   डिजिटल क्रांति: मोबाइल ऐप और 'डिजी-डॉट' जनगणना 2027 तकनीकी रूप से अब तक का सबसे उन्नत सर्वे होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कागज-कलम (Paper-Pen) के पुराने दौर को पीछे छोड़ते हुए, इस बार सब कुछ डिजिटल होगा।   ऐप के जरिए डेटा कलेक्शन: करीब 30 लाख कर्मचारी (Enumerators) अपने स्मार्टफोन पर विशेष रूप से तैयार किए गए मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा करेंगे। यह ऐप Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। ऐप में डेटा फीड करते ही यह रियल-टाइम में केंद्रीय सर्वर पर अपलोड हो जाएगा, जिससे डेटा प्रोसेसिंग में लगने वाला समय (जो पहले 2-3 साल होता था) घटकर कुछ महीनों में रह जाएगा।   सेल्फ एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) का विकल्प: सरकार ने नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए 'सेल्फ एन्यूमरेशन' का विकल्प भी दिया है। इसका मतलब है कि अगर आप चाहें तो प्रगणक (Enumerator) के आने का इंतजार किए बिना, खुद ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने परिवार की जानकारी भर सकते हैं।   यह सुविधा मकानों की लिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले खोली जाएगी। खुद जानकारी भरने के बाद आपको एक कोड मिलेगा, जिसे प्रगणक के आने पर सिर्फ वेरीफाई करवाना होगा।   आजादी के बाद पहली बार: जातिगत जनगणना जनगणना 2027 का सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक पहलू जाति की गिनती (Caste Census) है। आजादी के बाद (1951 से 2011 तक) भारत में केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की गिनती होती थी, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामान्य जातियों (General) की अलग से गिनती नहीं की जाती थी।   क्यों है यह ऐतिहासिक? आखिरी बार जाति आधारित जनगणना 1931 में अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी। इसके बाद से सरकारों ने इसे "विभाजनकारी" मानकर टाल दिया था। विपक्ष और कई क्षेत्रीय दलों की लंबी मांग के बाद, पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में इसे मंजूरी दी थी। इस डेटा का उपयोग आरक्षण नीतियों (Reservation Policies), कल्याणकारी योजनाओं के पुनर्गठन और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा।   जियो-टैगिंग का जादू: हर घर बनेगा 'डिजी-डॉट' इस जनगणना में इसरो (ISRO) और तकनीकी एजेंसियों की मदद से हर घर की जियो-टैगिंग (Geo-tagging) की जाएगी। इसका मतलब है कि भारत के नक्शे पर आपका घर एक डिजिटल बिंदु (Digital Dot) के रूप में दिखाई देगा। सरकार ने इसके 5 बड़े फायदे बताए हैं जो आपदा प्रबंधन से लेकर विकास तक सब कुछ बदल देंगे।   1. आपदा में सटीक राहत (Disaster Relief): जियो-टैगिंग से बना डिजिटल मैप आपदाओं के समय जीवन रक्षक साबित होगा। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड या हिमाचल के किसी गांव में बादल फटने पर प्रशासन को तुरंत पता चल जाएगा कि उस विशिष्ट स्थान (डिजी-डॉट) पर कितने घर हैं और वहां कितने लोग रहते हैं। इससे बचाव दल को यह अनुमान लगाने में मदद मिलेगी कि कितने हेलिकॉप्टर, नावें या फूड पैकेट भेजने की जरूरत है।   2. परिसीमन में मदद (Delimitation): भविष्य में होने वाले संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) के लिए यह डेटा रीढ़ की हड्डी साबित होगा। घरों के सटीक लोकेशन से यह तय करना आसान होगा कि किसी चुनाव क्षेत्र की सीमा कहां खत्म होनी चाहिए ताकि जनसंख्या का संतुलन बना रहे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि एक ही मोहल्ले के लोग अलग-अलग क्षेत्रों में न बंटें।   3. शहरी प्लानिंग (Urban Planning): शहरों का विकास अब अंधाधुंध नहीं, बल्कि डेटा-आधारित होगा। अगर डिजिटल मैप दिखाता है कि किसी इलाके में बच्चों की संख्या ज्यादा है, तो वहां पार्क और स्कूल बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी। इसी तरह, अगर किसी बस्ती में बुजुर्ग ज्यादा हैं, तो वहां अस्पताल या सामुदायिक केंद्र बनाए जाएंगे। कच्ची बस्तियों की पहचान कर वहां मोबाइल मेडिकल वैन और पक्के मकानों की योजना बनाई जा सकेगी।   4. पलायन और शहरीकरण का डेटा (Migration Tracking): भारत में गांव से शहर की ओर पलायन (Migration) एक बड़ी चुनौती है। 2027 के डिजिटल मैप की तुलना जब 2037 के मैप से होगी, तो यह साफ दिखेगा कि कौन से गांव खाली हो रहे हैं और किन शहरों पर दबाव बढ़ रहा है। इससे सरकार को स्मार्ट सिटी और रूरल डेवलपमेंट की नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।   5. फर्जी वोटर कार्ड पर लगाम (Voter List Cleanup): अक्सर देखा जाता है कि एक व्यक्ति का नाम गांव और शहर दोनों जगह की वोटर लिस्ट में होता है। जियो-टैगिंग और आधार लिंकिंग से यह समस्या खत्म हो जाएगी। जब एक वोटर किसी एक भौगोलिक स्थान (Geo-location) से डिजिटली जुड़ जाएगा, तो सिस्टम अपने आप दूसरे स्थान से उसका नाम हटाने का सुझाव देगा। इससे भारत की चुनाव प्रक्रिया और पारदर्शी बनेगी।   चुनौतियां और तैयारी हालांकि, यह राह आसान नहीं है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 121 करोड़ थी, जो अब 140 करोड़ के पार होने का अनुमान है। इतने बड़े पैमाने पर डिजिटल डेटा इकट्ठा करना, सर्वर की सुरक्षा (Cyber Security), और डेटा की गोपनीयता (Privacy) बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।   इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी साक्षरता की कमी भी 'सेल्फ एन्यूमरेशन' के रास्ते में रोड़ा बन सकती है। सरकार ने इसके लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई है।   जनगणना 2027 केवल सिरों की गिनती नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारत का ब्लूप्रिंट है। 33 सवालों के जवाब और डिजिटल डॉट्स मिलकर यह तय करेंगे कि अगले दशक में सरकारी योजनाएं कैसे बनेंगी, आरक्षण किसे मिलेगा और आपदाओं से हम कैसे लड़ेंगे। 2021 में जो प्रक्रिया महामारी के कारण रुक गई थी, वह अब 2027 में एक नई तकनीक और नई सोच के साथ पूरी होने जा रही है। नागरिकों के लिए यह एक अवसर है कि वे सही जानकारी देकर देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।   केन्द्र सरकार ने जनगणना 2027 की अधिसूचना जारी कर दी है। पहला चरण (मकानों की लिस्टिंग) 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसके लिए 33 सवाल तय किए गए हैं। दूसरा चरण (जनसंख्या गिनती) फरवरी 2027 में होगा। यह पहली बार होगा जब जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और इसमें जाति की गिनती भी शामिल की जाएगी।

Unknown जनवरी 22, 2026 0
Mumbras Youngest Corporator 22 Year Old Sahar Sheikh Wins for AIMIM, Sparks Row with 'Paint Mumbra Green' Remark
ठाणे: 'मेरे खिलाफ गिद्धों की फौज थी, पर मैं शेर की बच्ची हूं'... मुंब्रा में AIMIM की जीत पर सहर शेख के इस भाषण ने मचाया तहलका; NCP को NOTA से भी कम वोट!

ठाणे/मुंब्रा: महाराष्ट्र की सियासत में ठाणे जिला हमेशा से ही राजनीतिक रस्साकशी का केंद्र रहा है, लेकिन हाल ही में संपन्न हुए ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (TMC) के चुनावों ने एक नई इबारत लिख दी है। मुंब्रा, जिसे पारंपरिक रूप से एनसीपी (NCP) का गढ़ माना जाता था, वहां ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी पैठ मजबूत कर ली है। इस जीत का चेहरा बनी हैं महज 22 साल की Sahar Sheikh (सहर शेख), जिन्होंने न केवल विरोधियों को धूल चटाई है, बल्कि अपने विजय भाषण से पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है।READ ALSO:-T20 वर्ल्ड कप 2026: 'खेल में राजनीति' का सबसे बड़ा भूचाल; बांग्लादेश ने किया बॉयकॉट, ICC ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम   सहर शेख की जीत सिर्फ एक सीट की जीत नहीं है, बल्कि यह मुंब्रा की डेमोग्राफी और सियासी मिजाज में आ रहे बदलाव का संकेत है। जीत के बाद सहर शेख का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है, जिसमें वे अपने विरोधियों को ललकारती हुई नजर आ रही हैं। हालांकि, उनके एक नारे "पेंट मुंब्रा ग्रीन" (Paint Mumbra Green) ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है, जिसे लेकर सियासी गलियारों में बहस छिड़ गई है।   इस विस्तृत विशेष रिपोर्ट में हम आपको सहर शेख की जीत, उनके वायरल भाषण, एनसीपी की शर्मनाक हार और मुंब्रा के बदलते राजनीतिक समीकरणों के बारे में विस्तार से बताएंगे।   कौन हैं सहर शेख? (Who is Sahar Sheikh) Sahar Sheikh Mumbra AIMIM की जीत इसलिए खास है क्योंकि वे ठाणे मनपा के इतिहास की सबसे कम उम्र की पार्षदों में से एक हैं। महज 22 वर्ष की आयु में, जब युवा अक्सर अपने करियर की शुरुआत कर रहे होते हैं, सहर ने मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा और जीत हासिल की।   पारिवारिक पृष्ठभूमि: स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सहर एक सामान्य परिवार से आती हैं, लेकिन उनके तेवर किसी मंझे हुए राजनेता से कम नहीं हैं। उनकी शिक्षा और सामाजिक कार्यों में सक्रियता ने उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाया। पार्टी का भरोसा: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और स्थानीय नेतृत्व ने एक युवा चेहरे पर दांव खेला, जो सही साबित हुआ। पार्टी का मकसद नए और बेबाक नेतृत्व को सामने लाना था, जो मुंब्रा के युवाओं की भाषा बोल सके।   वायरल भाषण: "गिद्धों की फौज बनाम शेर की बच्ची" चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सहर शेख ने अपने समर्थकों को संबोधित किया। उनका यह भाषण अब सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर वायरल है। अपने संबोधन में उन्होंने विरोधियों पर बेहद आक्रामक अंदाज में हमला बोला।   1. विरोधियों को करारा जवाब: सहर ने कहा, "मेरे विरोधी मुझे और मेरी पार्टी को नेस्तनाबूद (पूरी तरह खत्म) करने के सपने देख रहे थे। उन्होंने हर तरह के हथकंडे अपनाए—पैसा, बाहुबल और साजिशें। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनका मुकाबला किससे है।"   2. खुद को बताया 'शेर की बच्ची': भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा वह था जब उन्होंने अपनी तुलना शेर से की। उन्होंने गरजते हुए कहा, "मेरे खिलाफ गिद्धों की पूरी फौज उतार दी गई थी। वे मुझे नोचना चाहते थे, डराना चाहते थे। लेकिन मैं डरने वालों में से नहीं हूं। मैं शेर की बच्ची हूं और मैंने अकेले ही उन सबको धूल चटा दी।"   यह बयान उनके आत्मविश्वास और आक्रामक राजनीति की झलक पेश करता है, जो AIMIM की ब्रांडिंग के साथ मेल खाता है।   विवाद की जड़: 'पेंट मुंब्रा ग्रीन' का नारा सहर शेख की जीत के जश्न के बीच उनके एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने अगले पांच सालों का विजन रखते हुए कहा:   "अगले पांच सालों में मुंब्रा के हर वार्ड से उम्मीदवार AIMIM का होगा। हमें मुंब्रा को पूरी तरह 'ग्रीन' (हरा) करना है।"   क्या है इसके मायने? पार्टी का तर्क: AIMIM समर्थकों का कहना है कि हरा रंग उनकी पार्टी के झंडे का रंग है (पतंग का निशान हरे झंडे पर होता है)। इसलिए, 'ग्रीन करने' का मतलब है कि पूरे मुंब्रा में AIMIM की जीत सुनिश्चित करना। विरोधियों का आरोप: वहीं, विरोधी दलों (खासकर भाजपा और शिवसेना-शिंदे गुट) ने इसे धार्मिक ध्रुवीकरण (Polarization) से जोड़ दिया है। उनका कहना है कि 'मुंब्रा को हरा करना' एक विशेष समुदाय के वर्चस्व और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने जैसा बयान है।   राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयानों से AIMIM अपने कोर वोटर बेस को तो खुश कर सकती है, लेकिन इससे ध्रुवीकरण की राजनीति को भी हवा मिलती है, जो अंततः क्षेत्र के विकास के मुद्दों को पीछे धकेल देती है।   NCP (शरद पवार गुट) की शर्मनाक हार: NOTA से भी पीछे! सहर शेख की जीत से ज्यादा चर्चा उनके प्रतिद्वंद्वी की हार की हो रही है। मुंब्रा को एनसीपी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) का अभेद्य किला माना जाता है। लेकिन इस चुनाव में जो हुआ, वह एनसीपी (शरद पवार गुट) के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था।   आंकड़ों की जुबानी: सहर शेख ने अपने भाषण में एक चौंकाने वाला तथ्य रखा। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में NOTA (None of the Above) को जितने वोट मिले, वे एनसीपी उम्मीदवार को मिले वोटों से ज्यादा थे।   क्या यह किले में सेंध है? सहर ने तंज कसते हुए कहा, "मुंब्रा की जनता ने दिखा दिया है कि अब उन्हें पुरानी और घिसी-पिटी राजनीति नहीं चाहिए। एनसीपी का उम्मीदवार नोटा से भी हार गया, यह उनके लिए डूब मरने वाली बात है।" जनता का मोहभंग: यह परिणाम बताता है कि मुंब्रा के मतदाताओं, विशेषकर मुस्लिम वोटरों का एनसीपी से मोहभंग हो रहा है। वे अब AIMIM को एक बेहतर और ज्यादा मुखर विकल्प के रूप में देख रहे हैं।   मुंब्रा की राजनीति में AIMIM का उदय: क्यों हुआ बदलाव? Sahar Sheikh Mumbra AIMIM की जीत कोई तुक्का नहीं है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं जिन्होंने मुंब्रा की सियासी हवा बदली है:   वैकल्पिक नेतृत्व की तलाश: मुंब्रा के लोग लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं—जैसे पानी, सड़क, और अवैध निर्माण—की समस्याओं से जूझ रहे हैं। स्थापित पार्टियां (जैसे एनसीपी) इन मुद्दों को सुलझाने में विफल रही हैं। ओवैसी का प्रभाव: असदुद्दीन ओवैसी और अकबरुद्दीन ओवैसी के भाषणों ने युवाओं को आकर्षित किया है। वे सीधे तौर पर मुस्लिम पहचान और प्रतिनिधित्व की बात करते हैं, जो मुंब्रा जैसे मुस्लिम बहुल इलाके में प्रभावी साबित होता है। युवा कनेक्ट: सहर शेख जैसी युवा उम्मीदवार, जो सोशल मीडिया का इस्तेमाल जानती हैं और युवाओं की भाषा बोलती हैं, ने वोटरों के साथ सीधा कनेक्ट बनाया। एनसीपी का आंतरिक कलह: एनसीपी में हुई टूट (अजित पवार गुट का अलग होना) का असर भी जमीनी स्तर पर दिखा है। संगठन कमजोर हुआ है और इसका सीधा फायदा AIMIM को मिला।   क्या हैं भविष्य के संकेत? सहर शेख की यह जीत ठाणे और मुंबई क्षेत्र (MMR) में AIMIM के विस्तार की योजना का हिस्सा है।   आगामी बीएमसी चुनाव: राजनीतिक पंडितों का मानना है कि मुंब्रा की जीत का असर आगामी बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनावों पर भी पड़ेगा। AIMIM मुंबई के मुस्लिम बहुल इलाकों (जैसे भायखला, गोवंडी, कुर्ला) में अपनी दावेदारी और मजबूती से पेश करेगी। नए समीकरण: अब तक कांग्रेस और एनसीपी मुस्लिम वोटों को अपना जागीर समझती थीं। लेकिन सहर शेख की जीत ने यह साफ कर दिया है कि अगर मुस्लिम वोट एकमुश्त AIMIM की तरफ शिफ्ट होता है, तो महाविकास अघाड़ी (MVA) के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी।   मुंब्रा से Sahar Sheikh की जीत लोकतंत्र में बदलाव की एक नई कहानी कहती है। 22 साल की एक लड़की ने न केवल एक स्थापित पार्टी के गढ़ को ढहा दिया, बल्कि अपनी बेबाकी से यह भी बता दिया कि वह यहां लंबी पारी खेलने आई है। उनका 'शेर की बच्ची' वाला बयान उनके आत्मविश्वास का प्रतीक है, तो वहीं 'पेंट मुंब्रा ग्रीन' का नारा भविष्य के सियासी संघर्षों का संकेत देता है।   अब देखना यह दिलचस्प होगा कि पार्षद बनने के बाद सहर शेख अपने वादों पर कितना खरा उतरती हैं। क्या वे मुंब्रा की बुनियादी समस्याओं (पानी, बिजली, ट्रैफिक) को सुलझा पाएंगी, या फिर उनकी राजनीति केवल विवादास्पद बयानों तक सीमित रह जाएगी? फिलहाल, मुंब्रा ने अपना फैसला सुना दिया है और पतंग ऊंची उड़ान भर चुकी है।   AIMIM की 22 वर्षीय सहर शेख ने ठाणे मनपा चुनाव में मुंब्रा से जीत हासिल की है। उन्होंने अपने भाषण में खुद को 'शेर की बच्ची' बताया और एनसीपी पर तंज कसा कि उन्हें NOTA से भी कम वोट मिले। हालांकि, उनके 'मुंब्रा को हरा करने' के बयान पर विवाद छिड़ गया है, जिसे विरोधी ध्रुवीकरण बता रहे हैं।

Unknown जनवरी 22, 2026 0
Doda Tragedy 10 Indian Army Soldiers Killed as Vehicle Plunges into Gorge on Bhaderwah Chamba Road
जम्मू-कश्मीर: डोडा में बड़ा हादसा, 200 फीट गहरी खाई में गिरी सेना की गाड़ी, 10 जवान शहीद; रेस्क्यू ऑपरेशन में एयरलिफ्ट किए गए घायल

डोडा (जम्मू-कश्मीर): जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से गुरुवार को एक हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है। डोडा जिले के भद्रवाह-चंबा इंटरस्टेट रोड पर सेना का एक वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। इस भीषण सड़क हादसे में भारतीय सेना के 10 जवान शहीद हो गए हैं। वहीं, कई अन्य जवानों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।READ ALSO:-मेरठ: स्कूटी से आया, घर पर चिपका नोटिस देखा और उड़ गए होश... अलकायदा का 'ब्रेनवॉश एक्सपर्ट' उजैद कुरैशी ऐसे हुआ फरार, इंडियन आर्मी थी निशाने पर   यह घटना 22 जनवरी, 2026 की दोपहर को हुई जब सेना का एक काफिला अपनी नियमित गश्त पर था। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और रेस्क्यू के लिए हेलीकॉप्टर की मदद लेनी पड़ी।   खानी टॉप के पास कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा? सैन्य अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, यह दुर्घटना डोडा जिले के भद्रवाह सब-डिवीजन स्थित खानी टॉप (Khani Top) इलाके के पास हुई।   घटनास्थल: भद्रवाह-चंबा रोड, जो अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और तीखे मोड़ों के लिए जाना जाता है। वाहन: दुर्घटनाग्रस्त वाहन सेना का एक 'बुलेट प्रूफ' (Bullet Proof) ट्रक था। खबरों के मुताबिक, इसमें कुल 17 जवान सवार थे। वजह: प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वाहन एक ऊंची पहाड़ी पोस्ट की तरफ जा रहा था। इसी दौरान एक तीखे मोड़ पर ड्राइवर ने गाड़ी पर से नियंत्रण खो दिया। सड़क पर फिसलन और घुमावदार रास्ता होने के कारण वाहन सीधे सड़क से नीचे लुढ़क गया।   गाड़ी करीब 200 फीट गहरी खाई में जा गिरी। खाई इतनी गहरी थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और जवानों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।   रेस्क्यू ऑपरेशन: घायलों को एयरलिफ्ट कर उधमपुर भेजा गया हादसे की सूचना मिलते ही सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला और संयुक्त रूप से एक व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।   कठिन रेस्क्यू: घटनास्थल पर गहरी खाई और दुर्गम रास्ता होने के बावजूद, बचाव दल ने रस्सियों के सहारे नीचे उतरकर जवानों को बाहर निकाला। शहादत: दुर्भाग्यवश, घटनास्थल पर ही कुछ जवानों के शहीद होने की पुष्टि हो गई थी। बाद में गंभीर चोटों के कारण शहीदों की संख्या बढ़कर 10 हो गई। घायलों का इलाज: हादसे में घायल हुए जवानों को मलबे से निकालकर प्राथमिक उपचार दिया गया। गंभीर रूप से घायल जवानों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा एयरलिफ्ट किया गया और उधमपुर स्थित कमांड हॉस्पिटल (Command Hospital, Udhampur) भेजा गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।   उपराज्यपाल ने जताया गहरा शोक इस त्रासदी पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट साझा करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी।   एलजी मनोज सिन्हा ने कहा, "डोडा में एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना में हमारे 10 बहादुर भारतीय सेना के जवानों की जान जाने से गहरा दुख हुआ। हम हमेशा अपने बहादुर सैनिकों की उत्कृष्ट सेवा और सर्वोच्च बलिदान को याद रखेंगे। मेरी गहरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।"   उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वरिष्ठ अधिकारियों को घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।   पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे डोडा और किश्तवाड़ जैसे पहाड़ी जिलों की सड़कें बेहद खतरनाक मानी जाती हैं। यहां अक्सर तीखे मोड़ और गहरी खाइयां ड्राइवरों के लिए चुनौती पेश करती हैं।   कुछ समय पहले ही पुंछ-राजौरी सेक्टर में भी सेना के वाहनों के साथ दुर्घटनाएं हुई थीं। जनवरी की शुरुआत में ही गुलमर्ग सेक्टर में भी एक हादसे में सेना के पोर्टर्स की जान गई थी।   इन घटनाओं ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सैन्य वाहनों की आवाजाही और सड़क सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, सेना के ड्राइवर अत्यधिक प्रशिक्षित होते हैं, लेकिन कई बार मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी घटनाओं का कारण बन जाती हैं।   डोडा में हुआ यह हादसा देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। 10 जांबाज सैनिकों का जाना उनके परिवारों और पूरे राष्ट्र के लिए एक गहरा आघात है। फिलहाल, पूरा देश नम आंखों से अपने वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दे रहा है और अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे घायल जवानों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है। सेना ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (Court of Inquiry) के आदेश दे दिए हैं ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।   22 जनवरी 2026 को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भद्रवाह-चंबा रोड पर सेना का वाहन 200 फीट गहरी खाई में गिर गया। इस हादसे में 10 जवान शहीद हो गए हैं, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हैं जिन्हें उधमपुर एयरलिफ्ट किया गया है। एलजी मनोज सिन्हा ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

Unknown जनवरी 22, 2026 0
IMD Issues Rain and Hailstorm Alert for Delhi UP and 7 Other States
उत्तर भारत में मौसम का 'प्रचंड रूप': दिल्ली-यूपी से बिहार तक आंधी-पानी और ओलावृष्टि का हाई अलर्ट; 60 KM की रफ्तार से कांपेगा हिंदुस्तान

उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी के बीच मौसम ने एक बार फिर करवट लेने की पूरी तैयारी कर ली है। अगर आप सोच रहे थे कि ठंड अब जाने वाली है, तो संभल जाइए। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जो ताजा बुलेटिन जारी किया है, वह डराने वाला है। 22 जनवरी 2026 से मौसम का मिजाज बेहद आक्रामक होने वाला है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा समेत देश के 9 प्रमुख राज्यों में अगले दो दिनों तक तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि (Hailstorm) का खतरा मंडरा रहा है।READ ALSO:-मेरठ में 'पूजा' का रहस्य: 17 साल से लापता युवती के पोस्टरों से पटा दिल्ली रोड, 'अरुण बिजनौर' कौन? पुलिस के लिए बनी पहेली   पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की नई सक्रियता ने पूरे उत्तर और मध्य भारत के वायुमंडल में उथल-पुथल मचा दी है। मौसम विभाग का स्पष्ट कहना है कि 22 और 23 जनवरी को लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जो कमजोर पेड़ों और पुरानी इमारतों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।   क्यों बदला मौसम का मिजाज? समझिए विज्ञान इस अचानक आए बदलाव के पीछे मुख्य कारण 'पश्चिमी विक्षोभ' है।   पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठने वाली नमी वाली हवाएं जब हिमालय क्षेत्र से टकराती हैं, तो पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है। इस बार का विक्षोभ काफी मजबूत है। हवाओं का टकराव: अरब सागर से आ रही नमी और पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं का जब मैदानी इलाकों में टकराव होगा, तो गरज-चमक (Thunderstorm) की स्थिति बनेगी। इसी वजह से बिहार और यूपी जैसे राज्यों में भी इसका असर दिखेगा।   राज्यवार मौसम का 'एक्स-रे': कहां, क्या और कब होगा? मौसम विभाग ने 9 राज्यों को विशेष निगरानी में रखा है। आइए विस्तार से जानते हैं हर राज्य का हाल:   1. दिल्ली-NCR: राजधानी में फिर लौटेगी ठिठुरन देश की राजधानी दिल्ली में 23 जनवरी को मौसम सबसे ज्यादा खराब रहने का अनुमान है।   पूर्वानुमान: 22 जनवरी की रात से ही बादलों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। 23 जनवरी को दिन भर रुक-रुक कर बारिश होने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। हवा की गति: 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जिससे दिन के तापमान में गिरावट आएगी और 'विंड चिल फैक्टर' (Wind Chill Factor) बढ़ जाएगा।   2. उत्तर प्रदेश: पश्चिमी से पूर्वी यूपी तक बारिश का दौर यूपी के लिए मौसम विभाग ने 'यलो' और कुछ स्थानों के लिए 'ऑरेंज' अलर्ट के संकेत दिए हैं।   पश्चिमी यूपी: मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में 23 जनवरी को बिजली कड़कने और तेज बारिश के आसार हैं। पूर्वी यूपी: लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज में भी बादलों का डेरा रहेगा। ठंडी हवाएं गलन बढ़ाएंगी।   3. पंजाब और हरियाणा: ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा खतरा इन दो राज्यों के लिए चेतावनी सबसे गंभीर है।   ओलावृष्टि (Hailstorm): 22 और 23 जनवरी को पंजाब और हरियाणा के कई जिलों में गरज-चमक के साथ ओले गिरने की प्रबल संभावना है। यह रबी की फसलों के लिए चिंता का विषय है। कोहरा: बारिश के साथ-साथ सुबह और शाम के समय यहां घना कोहरा भी छाया रहेगा, जिससे विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम हो सकती है।   4. बिहार: ठंड और बारिश का डबल अटैक बिहार में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखेगा। पटना, गया और मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में 22 जनवरी के बाद मौसम बदलेगा। स्थिति: आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इससे राज्य में चल रही शीत लहर (Cold Wave) का असर और गहरा जाएगा।   5. पहाड़ी राज्य (J&K, हिमाचल, उत्तराखंड): बर्फबारी का तांडव मैदानी इलाकों में जो ठंड बढ़ेगी, उसका स्रोत यही पहाड़ी राज्य हैं।   जम्मू-कश्मीर और लद्दाख: 22 और 23 जनवरी को यहां भारी बर्फबारी और बारिश का अनुमान है। कई रास्ते बंद हो सकते हैं। हिमाचल और उत्तराखंड: 23 जनवरी को इन दोनों राज्यों के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात (Snowfall) होगा। पर्यटकों के लिए यह खतरे की घंटी है, क्योंकि भूस्खलन (Landslide) की आशंका बढ़ जाती है।   6. राजस्थान: बिजली कड़कने का डर राजस्थान को दो हिस्सों में बांटा गया है:   पश्चिमी राजस्थान: 22 जनवरी को यहां 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और बिजली कड़केगी। पूर्वी राजस्थान: 22 और 23 जनवरी को यहां हवा की रफ्तार 50-60 किमी/घंटा रहेगी। कोटा, जयपुर और आसपास के इलाकों में मौसम खराब रहेगा।   तापमान का 'रोलर कोस्टर': पहले गर्मी, फिर कड़ाके की सर्दी मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, आने वाले दिनों में तापमान किसी झूले की तरह ऊपर-नीचे होगा।   चरण 1 (22-23 जनवरी): तापमान में बढ़ोतरी जब पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है और बादल छाते हैं, तो न्यूनतम तापमान (Minimum Temperature) में बढ़ोतरी होती है। अगले 2 दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत में रात का तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। यानी रातें थोड़ी कम ठंडी लगेंगी। चरण 2 (24 जनवरी के बाद): तापमान में गिरावट जैसे ही बारिश थमेगी और आसमान साफ होगा, पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाएं सीधे मैदानी इलाकों में पहुंचेंगी। इसके बाद तापमान में 2 से 4 डिग्री की भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। यानी 25 और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के आसपास कड़ाके की ठंड पड़ने वाली है। अन्य राज्य: महाराष्ट्र: अगले 2 दिनों तक न्यूनतम तापमान में 2-4 डिग्री की वृद्धि होगी, उसके बाद स्थिरता आएगी। गुजरात: यहां तापमान में पहले कोई खास बदलाव नहीं होगा, फिर गिरावट और अंत में बढ़ोतरी का दौर चलेगा।   50-60 KM प्रति घंटा की रफ्तार: क्या हैं खतरे? IMD ने हवा की गति को लेकर विशेष चेतावनी जारी की है। 50-60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार सामान्य नहीं होती।   बिजली के खंभे: इतनी तेज हवा में पुराने बिजली के खंभे और तार टूटकर गिर सकते हैं। होर्डिंग्स और पेड़: कमजोर जड़ों वाले पेड़ और बड़े होर्डिंग्स के गिरने का खतरा रहता है। कच्चे मकान: ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों और टीन शेड को नुकसान पहुंच सकता है।   किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी: 'फसलों पर संकट के बादल' यह बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने निम्नलिखित सलाह दी है:   गेहूं (Wheat): हल्की बारिश गेहूं के लिए फायदेमंद है, यह यूरिया का काम करती है। लेकिन अगर ओले गिरे या तेज हवा चली, तो फसल बिछ सकती है (Lodging), जिससे दाना कमजोर रह जाएगा। सरसों (Mustard): इस समय सरसों में फूल आ चुके हैं या फलियां बन रही हैं। ओलावृष्टि सरसों की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। फूलों के झड़ने से पैदावार घट सकती है। सिंचाई रोकें: चूंकि बारिश का पूर्वानुमान है, इसलिए किसान भाई अगले 3-4 दिनों तक खेतों में सिंचाई न करें। खेत में पानी रुकने से जड़ों के गलने का खतरा है। सब्जियां: आलू और टमाटर की फसल में 'ब्लाइट' (झुलसा रोग) लगने का खतरा बढ़ जाता है। मौसम साफ होते ही फफूंदनाशक का छिड़काव करें।   यातायात और पर्यटन पर असर फ्लाइट्स: दिल्ली और आसपास के एयरपोर्ट्स पर खराब मौसम और लो विजिबिलिटी के कारण उड़ानों में देरी हो सकती है। यात्रियों को सलाह है कि वे घर से निकलने से पहले फ्लाइट स्टेटस चेक करें। ट्रेनें: कोहरे के कारण पहले से ही दर्जन भर ट्रेनें लेट चल रही हैं। बारिश के बाद कोहरा और घना हो सकता है, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी बढ़ सकती है। पहाड़ों की यात्रा: 22 और 23 जनवरी को हिमाचल और उत्तराखंड जाने से बचें। बर्फबारी के कारण सड़कें ब्लॉक होने और फंसने का खतरा है।   स्वास्थ्य चेतावनी: वायरल और निमोनिया का खतरा मौसम में यह अचानक बदलाव (Fluctuation) स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।   बच्चे और बुजुर्ग: गीली ठंड और सर्द हवाएं बच्चों में निमोनिया और बुजुर्गों में जोड़ों के दर्द (Arthritis) को बढ़ा सकती हैं। वायरल फीवर: तापमान के उतार-चढ़ाव से वायरल बुखार और फ्लू के मामले बढ़ सकते हैं।   क्या करें? गर्म कपड़े पहनें, भले ही थोड़ी गर्मी महसूस हो। बारिश में भीगने से बचें। गुनगुना पानी पिएं।   26 जनवरी तक रहें सतर्क कुल मिलाकर, 22 जनवरी से शुरू होने वाला यह मौसमी बदलाव 25 जनवरी तक अपना असर दिखाएगा। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की तैयारियों पर भी मौसम का असर पड़ सकता है, खासकर दिल्ली में परेड के दौरान कोहरा या ठंड बाधा बन सकती है। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया है।   मौसम विभाग (IMD) का संदेश: "अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें। मेघगर्जन के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें।"   (यह रिपोर्ट भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा 22 जनवरी 2026 के लिए जारी किए गए आधिकारिक पूर्वानुमान और डेटा पर आधारित है।)

Unknown जनवरी 22, 2026 0
North India Weather Update 20 January 2026 Rain Fog and School News
मौसम और स्कूल अपडेट: उत्तर भारत में 'शीतलहर' और पहाड़ों पर 'बर्फबारी' का अलर्ट, कल इन बड़े शहरों में बंद रहेंगे स्कूल

Weather Update North India January 2026: उत्तर भारत के विशाल मैदानी इलाकों से लेकर हिमालय की ऊँची चोटियों तक मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। जनवरी का तीसरा सप्ताह अपने साथ कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और अब बारिश की चेतावनी लेकर आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कल यानी 20 जनवरी 2026 के लिए 'ऑरेंज' और 'येलो' अलर्ट जारी करते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यह मौसमी बदलाव दो बैक-टू-बैक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के सक्रिय होने के कारण हो रहा है, जिसका सीधा असर जनजीवन, यातायात और विशेषकर स्कूली बच्चों की दिनचर्या पर पड़ रहा है।READ ALSO:-नोटबंदी 2.0 का खौफ: क्या सच में 'रद्दी' होने वाले हैं 500 के नोट? सरकार ने तोड़ी चुप्पी, बताई वायरल दावे की 'अंदर की बात'   कल की मौसम संबंधी भविष्यवाणियों और क्षेत्रीय प्रशासन द्वारा जारी किए गए स्कूल बंदी के आदेशों ने अभिभावकों और यात्रियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कल आपके शहर में मौसम कैसा रहेगा और क्या स्कूल खुले रहेंगे या बंद।   दिल्ली-NCR का हाल: कोहरे की चादर और ठिठुरन देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के शहरों—नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में कल सुबह की शुरुआत घने कोहरे के साथ होगी। Weather Update North India January 2026 के अनुसार, दिल्ली के पालम और सफदरजंग मौसम केंद्रों पर विजिबिलिटी (दृश्यता) 50 मीटर से भी कम रहने की संभावना है।   तापमान का अनुमान: दिल्ली में अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 8-9 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है। प्रदूषण का स्तर: ठंड और हवा की धीमी गति के कारण दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'गंभीर' श्रेणी में बना हुआ है, जिसके चलते GRAP-IV की पाबंदियां लागू हैं। धूप की स्थिति: दोपहर के समय बादल छाए रहने और हल्की धूप निकलने की संभावना है, लेकिन शाम होते ही एक बार फिर ठंडी हवाएं (Cold Winds) ठिठुरन बढ़ा देंगी।   पहाड़ों पर बर्फबारी का अलर्ट: उत्तराखंड और हिमाचल पहाड़ों पर मौसम का मिजाज काफी सख्त बना हुआ है। Weather Update North India January 2026 के अनुसार, 21 जनवरी से एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, लेकिन इसका असर 20 जनवरी की शाम से ही दिखने लगेगा।   उत्तराखंड: बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे ऊँचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी शुरू हो सकती है। चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में प्रशासन ने पर्यटकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। हिमाचल प्रदेश: मनाली, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और किन्नौर के कई हिस्सों में कल भारी बर्फबारी की संभावना है। शिमला और नैनीताल जैसे पर्यटन स्थलों पर न्यूनतम तापमान 3 से 5 डिग्री के बीच बना रहेगा, जिससे पर्यटकों को 'बोनफायर' का सहारा लेना पड़ रहा है। कश्मीर: गुलमर्ग और सोनमर्ग में पारा शून्य से काफी नीचे (-8 डिग्री तक) जा सकता है, जिससे डल झील के जमने की खबरें फिर से सामने आ रही हैं।   स्कूल बंदी और समय में बदलाव: कहाँ-कहाँ रहेगी छुट्टी? ठंड, कोहरे और स्थानीय आयोजनों के कारण कल 20 जनवरी 2026 को देश के कई हिस्सों में स्कूलों की स्थिति प्रभावित रहेगी:   महाराष्ट्र: पुणे में स्कूल बंद महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में कल 'पुणे ग्रैंड टूर 2026' नामक अंतरराष्ट्रीय साइकिलिंग प्रतियोगिता आयोजित हो रही है। रेस के रूट पर पड़ने वाले सभी सरकारी और निजी स्कूल कल बंद रहेंगे। जिला कलेक्टर ने ट्रैफिक जाम और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत यह आदेश जारी किया है।   उत्तर प्रदेश: प्रयागराज में छुट्टी प्रयागराज में चल रहे माघ मेले और मौनी अमावस्या की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने जिले के सभी स्कूलों (कक्षा 8 तक) को 20 जनवरी तक बंद रखने का आदेश दिया है। माघ मेले में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से परिवर्तित है।   नोएडा और गाजियाबाद: समय में बदलाव गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के जिला मजिस्ट्रेट ने भीषण ठंड और कोहरे के कारण स्कूलों के समय में बदलाव किया है। कल से सभी स्कूल सुबह 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक ही संचालित होंगे।   पंजाब और हरियाणा पंजाब सरकार ने भी स्कूलों के समय में संशोधन किया है। प्राइमरी स्कूल सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक और माध्यमिक स्कूल सुबह 10 बजे से 3:30 बजे तक खुलेंगे।   राज्य / शहर स्कूल की स्थिति (20 जनवरी) मुख्य कारण पुणे (विशिष्ट क्षेत्र) बंद (Holiday) अंतरराष्ट्रीय साइकिलिंग प्रतियोगिता प्रयागराज बंद (Holiday - Class 8 तक) माघ मेला भीड़ प्रबंधन नोएडा / गाजियाबाद समय बदला (10 AM - 3 PM) घना कोहरा और ठंड पंजाब (पूरा राज्य) समय बदला (10 AM से) शीतलहर का प्रकोप दिल्ली खुला (समय में कुछ निजी बदलाव संभव) सामान्य सर्दी   'पश्चिमी विक्षोभ' का विज्ञान: क्यों बदल रहा है मौसम? Weather Update North India January 2026 को समझने के लिए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव को जानना आवश्यक है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्य सागर से उठने वाली नमी युक्त हवाएं जब हिमालय से टकराती हैं, तो पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का कारण बनती हैं। इस बार दो विक्षोभ एक के बाद एक (19 और 21 जनवरी) सक्रिय हो रहे हैं, जो हवा के दबाव में बदलाव ला रहे हैं। इसी कारण आने वाले 72 घंटों में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश की प्रबल संभावना है।   यातायात पर प्रभाव: रेल और हवाई सेवा बाधित घने कोहरे के कारण उत्तर भारत का ट्रांसपोर्ट सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।   रेलवे: दिल्ली आने-जाने वाली लगभग 25 से 30 ट्रेनें कल 2 से 6 घंटे की देरी से चलने की संभावना है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और आनंद विहार टर्मिनल पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। हवाई सेवा: आईजीआई एयरपोर्ट (IGI) पर 'कैट-III' (CAT III) नेविगेशन प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। यदि विजिबिलिटी 50 मीटर से नीचे गिरती है, तो कई उड़ानों को डाइवर्ट या रद्द किया जा सकता है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक करें।   किसानों के लिए विशेष मौसम सलाह Weather Update North India January 2026 के अनुसार, बारिश की यह चेतावनी किसानों के लिए मिली-जुली खबर है। गेहूं की फसल: हल्की बारिश गेहूं की फसल के लिए 'अमृत' समान साबित होगी, क्योंकि इससे दानों में नमी बनी रहेगी। सरसों की फसल: यदि बारिश के साथ ओले पड़ते हैं, तो सरसों और आलू की फसल को नुकसान पहुँच सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में जल निकासी (Drainage) की व्यवस्था दुरुस्त रखें और कीटनाशकों के छिड़काव से अभी बचें।   स्वास्थ्य और सुरक्षा: ठंड से कैसे बचें? कड़ाके की ठंड और प्रदूषण के दोहरे हमले से बचने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ सुझाव जारी किए हैं:   स्तरित कपड़े पहनें: एक भारी कपड़े के बजाय कई पतली परतें पहनना शरीर की गर्मी को बेहतर तरीके से रोककर रखता है। हाइड्रेटेड रहें: सर्दी में अक्सर प्यास नहीं लगती, लेकिन गुनगुना पानी पीते रहना मेटाबॉलिज्म के लिए जरूरी है। कोहरे में ड्राइविंग: यदि बहुत जरूरी न हो तो सुबह 8 बजे से पहले वाहन न चलाएं। कोहरे में 'फॉग लाइट्स' और 'इंडिकेटर' का प्रयोग करें और गति कम रखें। बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान: हृदय रोगियों और सांस के मरीजों के लिए यह मौसम चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्हें धूप निकलने के बाद ही बाहर निकलना चाहिए।   बिहार और राजस्थान का हाल Weather Update North India January 2026 के दायरे में बिहार के कई जिले 'कोल्ड डे' (Cold Day) की चपेट में हैं। पटना, गया और भागलपुर में न्यूनतम तापमान 10-12 डिग्री के बीच रहेगा, लेकिन उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण ठिठुरन अधिक महसूस होगी। वहीं राजस्थान के चुरू और सीकर में पारा 4 डिग्री तक गिर सकता है, जिससे रात के समय पाला (Frost) पड़ने की संभावना है।   20 जनवरी की बड़ी तस्वीर समग्र रूप से देखें तो Weather Update North India January 2026 यह संकेत दे रहा है कि कल यानी मंगलवार को उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में जनजीवन धीमी गति से चलेगा। पुणे और प्रयागराज जैसे शहरों में स्थानीय आयोजनों के कारण स्कूल बंद रहेंगे, जबकि दिल्ली-NCR और पंजाब में कोहरे का आतंक रहेगा। 21 जनवरी से शुरू होने वाली बारिश और बर्फबारी इस सप्ताह के अंत तक तापमान में और गिरावट लाएगी।   अभिभावकों को अपने जिले के शिक्षा विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि मौसम के बिगड़ने पर अंतिम समय में भी छुट्टी के आदेश आ सकते हैं। सुरक्षित रहें, गर्म रहें और सावधानी से यात्रा करें।   20 जनवरी 2026 को उत्तर भारत में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड का अलर्ट जारी किया गया है। पुणे में साइकिलिंग रेस और प्रयागराज में माघ मेले के कारण स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है, जबकि नोएडा और पंजाब में समय बदला गया है। पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर कल शाम से तेज होने की संभावना है, जिसका असर मैदानी इलाकों में आने वाले दिनों में बारिश के रूप में दिखेगा।

Unknown जनवरी 19, 2026 0
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Indian Railways: पटरियों पर दौड़ी 'रफ्तार की नई क्रांति'! PM मोदी ने दी 3 अमृत भारत एक्सप्रेस की सौगात; आसनसोल से दिल्ली-बनारस का सफर अब और भी आसान

भारतीय रेलवे (Indian Railways) के इतिहास में और पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी के लिहाज से आज का दिन बेहद ऐतिहासिक रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सिंगूर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तीन नई Amrit Bharat Express ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। आम आदमी की 'वंदे भारत' कही जाने वाली ये ट्रेनें न केवल पश्चिम बंगाल को उत्तर प्रदेश और दिल्ली से जोड़ेंगी, बल्कि आसनसोल मंडल (Asansol Division) के यात्रियों के लिए यह किसी बड़े उपहार से कम नहीं है।READ ALSO:-Greater Noida Horror: 'पापा मैं डूब रहा हूं, बचा लीजिए'... धुंध में रास्ता भटका इंजीनियर, 70 फीट गहरे 'मौत के गड्ढे' में समाई कार   रेलवे बोर्ड और स्थानीय प्रशासन द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में पीएम मोदी ने इन ट्रेनों को पूर्वी भारत के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया। इन तीन ट्रेनों में से दो प्रमुख ट्रेनें—बनारस-सियालदह-बनारस और हावड़ा-आनंद विहार टर्मिनल-हावड़ा—पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल से होकर गुजरेंगी। इससे दुर्गापुर, आसनसोल, मधुपुर और जसीडीह जैसे शहरों की कनेक्टिविटी को नए पंख लग गए हैं। पूर्वी भारत में रेल नेटवर्क का नया अध्याय   प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि Amrit Bharat Express सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की बदलती तस्वीर है। यह ट्रेन विशेष रूप से उन आम नागरिकों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जो कम किराए में तेज और आरामदायक सफर करना चाहते हैं। सिंगूर से शुरू हुई ये सेवाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच सामाजिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेंगी।   आसनसोल मंडल: कनेक्टिविटी का नया हब इस लॉन्चिंग का सबसे बड़ा फायदा पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल को मिला है। औद्योगिक शहर होने के नाते आसनसोल और दुर्गापुर से हजारों यात्री रोजाना दिल्ली और वाराणसी (बनारस) का सफर करते हैं। अब तक सीमित ट्रेनों के कारण उन्हें कन्फर्म टिकट के लिए जूझना पड़ता था, लेकिन इन नई ट्रेनों के चलने से वेटिंग लिस्ट की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी। पीएम मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाए जाने के उपलक्ष्य में आसनसोल, दुर्गापुर, मधुपुर और जसीडीह स्टेशनों पर विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय सांसद, विधायक और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।   1. बनारस–सियालदह–बनारस अमृत भारत एक्सप्रेस यह ट्रेन उन श्रद्धालुओं और व्यापारियों के लिए वरदान साबित होगी जो कोलकाता से बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी (वाराणसी) जाना चाहते हैं। आवृत्ति (Frequency): यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन (Tri-weekly) चलेगी। रूट और ठहराव: यह ट्रेन सियालदह से चलकर दुर्गापुर, आसनसोल, मधुपुर और जसीडीह होते हुए बनारस पहुंचेगी। महत्व: जसीडीह (बैद्यनाथ धाम) और बनारस दोनों ही प्रमुख तीर्थ स्थल हैं। इस ट्रेन के शुरू होने से 'कांवरिया रूट' और धार्मिक पर्यटन को सीधा लाभ मिलेगा। आसनसोल मंडल के स्टेशनों पर इसके ठहराव से क्षेत्र के लोगों को अब ट्रेन बदलने की झंझट से मुक्ति मिलेगी।   2. हावड़ा–आनंद विहार टर्मिनल–हावड़ा अमृत भारत एक्सप्रेस राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को जोड़ने वाली यह ट्रेन पूर्वी भारत के श्रमिकों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए लाइफलाइन बनेगी।   ट्रेन नंबर: 13065/13066 आवृत्ति: यह ट्रेन साप्ताहिक (Weekly) आधार पर चलेगी। रूट: हावड़ा से चलकर यह ट्रेन दुर्गापुर और आसनसोल स्टेशनों पर रुकेगी और फिर आनंद विहार (दिल्ली) के लिए आगे बढ़ेगी। फायदा: दुर्गापुर और आसनसोल के लोग जो सीधे दिल्ली जाना चाहते हैं, उन्हें अब राजधानी एक्सप्रेस या कालका मेल पर ही निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह ट्रेन एक किफायती विकल्प प्रदान करेगी।   अमृत भारत एक्सप्रेस: आम आदमी की 'खास' ट्रेन Amrit Bharat Express को भारतीय रेलवे ने 'आम आदमी' की जरूरतों को केंद्र में रखकर डिजाइन किया है। इसे नॉन-एसी स्लीपर और जनरल कोच वाली प्रीमियम ट्रेन कहा जा सकता है। आइए जानते हैं इसकी वो खूबियां जो इसे दूसरी ट्रेनों से अलग बनाती हैं:   पुश-पुल तकनीक (Push-Pull Technology) इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 'पुश-पुल तकनीक' है। इसमें ट्रेन के दोनों सिरों (आगे और पीछे) पर इंजन लगे होते हैं।   फायदा: इससे ट्रेन को बार-बार इंजन बदलने (Reversal) की जरूरत नहीं पड़ती। रफ्तार: यह तकनीक ट्रेन को जल्दी एक्सीलरेट (गति पकड़ने) और जल्दी रुकने में मदद करती है, जिससे यात्रा का समय काफी बचता है। यह ट्रेन झटके मुक्त (Jerk-free) यात्रा का अनुभव देती है।   किफायती और आरामदायक यह ट्रेन पूरी तरह से नॉन-एसी है, जिसमें स्लीपर और जनरल क्लास के डिब्बे हैं। इसका किराया सामान्य मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों से थोड़ा अधिक लेकिन एसी ट्रेनों से काफी कम है, जो इसे निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए सुलभ बनाता है।   आधुनिक सुविधाएं सीटिंग: आरामदायक सीटें और बेहतर कुशनिंग। चार्जिंग पॉइंट्स: हर सीट के पास मोबाइल चार्जिंग पॉइंट और होल्डर। शौचालय: बायो-वैक्यूम टॉयलेट्स (Bio-toilets) जो बदबू रहित और साफ-सुथरे रहते हैं। सुरक्षा: हर कोच में सीसीटीवी कैमरे (CCTV) और धुएं का पता लगाने वाले सेंसर लगे हैं। लुक: ट्रेन का केसरिया और ग्रे रंग (Orange-Grey Livery) इसे आकर्षक लुक देता है।   यात्रियों और विशेषज्ञों की राय आसनसोल से वरिष्ठ पत्रकार अमर देव पासवान की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय लोगों में इस घोषणा के बाद भारी उत्साह है। एक स्थानीय व्यापारी, राजेश अग्रवाल ने कहा, "हमारा व्यापार बनारस और कोलकाता दोनों से जुड़ा है। सप्ताह में तीन दिन चलने वाली इस ट्रेन से हमारा माल लाना और जाना आसान हो जाएगा।"   वहीं, रेलवे विशेषज्ञ मानते हैं कि आसनसोल मंडल से गुजरने वाली ये ट्रेनें इस औद्योगिक बेल्ट के आर्थिक विकास को गति देंगी। आसनसोल और दुर्गापुर में स्टील और कोयले का बड़ा कारोबार है, और बेहतर कनेक्टिविटी से निवेशकों और कामगारों का आना-जाना सुगम होगा।   चुनौतियां और उम्मीदें हालांकि, यात्रियों की मांग है कि हावड़ा-आनंद विहार ट्रेन की आवृत्ति बढ़ाई जाए। साप्ताहिक होने के कारण इसमें भीड़ बहुत अधिक हो सकती है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की प्रतिक्रिया (Occupancy) देखने के बाद फेरे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।   इसके अलावा, इन ट्रेनों के संचालन में समयपालन (Punctuality) एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि मुगलसराय (पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) रूट पर पहले से ही ट्रेनों का भारी दबाव है।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सिंगूर से शुरू की गई ये तीन Amrit Bharat Express ट्रेनें भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। विशेष रूप से आसनसोल मंडल के लिए, यह कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरुआत है। बनारस और दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों से सीधा जुड़ाव न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा बल्कि पश्चिम बंगाल, झारखंड और यूपी के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक सेतु का काम भी करेगा।   अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यात्री इन नई सुविधाओं का लाभ किस तरह उठाते हैं और रेलवे इनकी समयबद्धता को कैसे बनाए रखता है।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के सिंगूर से 3 नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई है। इनमें से दो ट्रेनें—बनारस-सियालदह और हावड़ा-आनंद विहार—आसनसोल मंडल से होकर गुजरेंगी। यह ट्रेनें 'पुश-पुल तकनीक' से लैस हैं और आम आदमी के लिए किफायती यात्रा सुनिश्चित करती हैं। इससे दुर्गापुर, आसनसोल, मधुपुर और जसीडीह के यात्रियों को यूपी और दिल्ली के लिए सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी।

Unknown जनवरी 18, 2026 0
8th Pay Commission Update Huge Arrears Likely for Employees if Implementation Delayed Calculation Explained
8वें वेतन आयोग का शंखनाद: केंद्रीय कर्मचारियों की झोली में गिरेंगे लाखों रुपये! 1 जनवरी 2026 से 'अच्छे दिनों' की शुरुआत, समझें 1.5 लाख के एरियर का पूरा मेगा-कैलकुलेशन

भारत के सरकारी महकमे में इस समय केवल एक ही चर्चा है— '8वां वेतन आयोग' (8th Pay Commission)। केंद्र सरकार के 50 लाख से अधिक कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए यह खबर किसी उत्सव से कम नहीं है। अक्टूबर 2025 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) को अपनी आधिकारिक मंजूरी दी, तभी से यह स्पष्ट हो गया था कि सरकार अब नए वेतन ढांचे की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। यह रिपोर्ट न केवल वेतन वृद्धि की बात करती है, बल्कि उस 'मेगा एरियर' का भी विश्लेषण करती है जो भविष्य में कर्मचारियों के बैंक खातों में एकमुश्त जमा होने वाला है।READ ALSO:-भारतीय रेलवे का 'सूर्योदय': पटरी पर उतरा 5-स्टार होटल जैसा सफर, देश को मिली पहली 'वंदे भारत स्लीपर' की सौगात   8वें वेतन आयोग का सफर: अब तक क्या हुआ और आगे क्या? वेतन आयोग का गठन एक जटिल प्रक्रिया है। यह केवल सैलरी बढ़ाना नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई दर (Inflation) और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ का संतुलन बनाना है।   ToR को मंजूरी: अक्टूबर 2025 में 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' को मंजूरी मिलना सबसे बड़ी उपलब्धि रही। इसमें आयोग के कार्यक्षेत्र और शर्तों को निर्धारित किया गया है। आयोग का कार्य: अब आयोग देश भर के विभिन्न कर्मचारी संगठनों, मंत्रालयों और आर्थिक विशेषज्ञों के साथ बैठकें करेगा। आयोग यह देखेगा कि क्या मौजूदा 'पे मैट्रिक्स' महंगाई को मात देने में सक्षम है? रिपोर्ट सौंपने की प्रक्रिया: आमतौर पर आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में 12 से 18 महीने का समय लगता है।   प्रभावी तिथि: 1 जनवरी 2026 ही क्यों? भारत में हर 10 साल के अंतराल पर वेतन आयोग लागू करने की एक अनकही परंपरा रही है।   ऐतिहासिक संदर्भ: * 6ठा वेतन आयोग: 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ। 7वां वेतन आयोग: 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ। तार्किक आधार: इसी 10 साल के चक्र (Cycle) को देखते हुए यह लगभग तय है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी मानी जाएंगी। भले ही सरकार इसकी घोषणा 2026 के मध्य में या 2027 में करे, लेकिन इसका लाभ पिछली तारीख (Retrospective Effect) से ही मिलेगा।   एरियर (Arrears) का 'करोड़पति' गणित: कैसे बरसेगा पैसा? कर्मचारियों के मन में सबसे ज्यादा उत्साह 'एरियर' को लेकर है। सरकारी प्रक्रिया अक्सर धीमी होती है, और यही 'धीमापन' कर्मचारियों के लिए एकमुश्त मोटी रकम (Bulk Amount) का जरिया बनता है।   एरियर क्या है? जब सरकार किसी वेतन वृद्धि को पिछली तारीख से लागू करती है, तो उस तारीख से लेकर वर्तमान तक के अंतर की राशि को 'एरियर' कहा जाता है।   विस्तृत कैलकुलेशन (Case Study): मान लीजिए एक केंद्रीय कर्मचारी (जैसे रेलवे या डाक विभाग) की वर्तमान बेसिक सैलरी ₹40,000 है।   अनुमानित सैलरी वृद्धि: विशेषज्ञ मान रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बढ़ने के बाद न्यूनतम सैलरी में 25% से 30% का इजाफा हो सकता है। नई बेसिक सैलरी (अनुमानित): ₹40,000 का 25% बढ़कर यह ₹50,000 हो सकती है। मासिक अंतर: ₹10,000 का सीधा फायदा। देरी का परिदृश्य: मान लीजिए सरकार मई 2027 में एरियर के साथ नई सैलरी देना शुरू करती है। कुल महीनों का अंतर: जनवरी 2026 से मई 2027 = 16 महीने। कुल एरियर राशि: ₹10,000 (मासिक वृद्धि) x 16 (महीने) = ₹1,60,000।   यह तो केवल बेसिक सैलरी का अंतर है। इसके साथ ही DA (महंगाई भत्ता), HRA (मकान किराया भत्ता) और TA (यात्रा भत्ता) पर मिलने वाले बढ़े हुए एरियर को जोड़ दें, तो यह राशि ₹2 लाख से ₹2.5 लाख के पार जा सकती है।   फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor): सैलरी वृद्धि की असली चाबी 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था। कर्मचारी संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि इसे बढ़ाकर 3.68 किया जाए।   यदि फिटमेंट फैक्टर 3.00 होता है: तो न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹26,000 के आसपास पहुँच सकता है। यदि फिटमेंट फैक्टर 3.68 होता है: तो न्यूनतम वेतन सीधे ₹30,000 के पार जा सकता है। यह फिटमेंट फैक्टर ही तय करेगा कि 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की सैलरी में 15% का इजाफा होगा या 40% का।   पेंशनभोगियों के लिए 'वरदान' साबित होगा 8वां वेतन आयोग देश के 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए भी यह एक बड़ी राहत है। 8वें वेतन आयोग के लागू होने से:   पेंशन में वृद्धि: जिस अनुपात में सेवारत कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी, उसी अनुपात में पेंशन में भी वृद्धि होगी। ग्रैच्युटी और अन्य लाभ: रिटायरमेंट के समय मिलने वाले लाभों की सीमा (Capping) में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। वर्तमान में ग्रैच्युटी की सीमा ₹25 लाख है (DA 50% होने के बाद), जिसे 8वें आयोग में और बढ़ाया जा सकता है।   आर्थिक प्रभाव: क्या सरकार पर पड़ेगा बोझ? यह सच है कि 8वां वेतन आयोग लागू करने से सरकारी खजाने पर सालाना ₹1 लाख करोड़ से ₹1.5 लाख करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा। लेकिन इसके सकारात्मक पहलू भी हैं:   बाजार में डिमांड: जब 1 करोड़ से अधिक लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा, तो बाजार में खर्च बढ़ेगा, जिससे ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और रिटेल सेक्टर को मजबूती मिलेगी। जीडीपी को बूस्ट: कर्मचारियों द्वारा किया गया खर्च अंततः देश की जीडीपी में योगदान देता है। टैक्स रेवेन्यू: बढ़ी हुई सैलरी के साथ कर्मचारी अधिक इनकम टैक्स भी चुकाएंगे, जो सरकार के पास वापस आएगा।   चुनौतियां और कर्मचारी संगठनों का रुख रेलवे और अन्य कर्मचारी संगठनों ने पहले ही सरकार को ज्ञापन सौंपे हैं। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:   न्यूनतम वेतन में भारी वृद्धि। पेंशन के लिए 'पुरानी पेंशन योजना' (OPS) जैसा सुरक्षा जाल। समय पर भुगतान और एरियर में पारदर्शिता।   आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी— वेतन विसंगतियों (Salary Anomalies) को दूर करना। अक्सर देखा गया है कि निचले स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन वृद्धि के अनुपात में अंतर होता है, जिसे इस बार संतुलित करने की मांग है।   सब्र का फल होगा मीठा अंततः, 8वां वेतन आयोग केवल एक वित्तीय अपडेट नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों के जीवन स्तर को सुधारने का जरिया है जो देश की प्रशासनिक व्यवस्था को चलाते हैं। हालाँकि सरकार ने अभी '1 जनवरी 2026' की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' की मंजूरी इस बात का प्रमाण है कि प्रक्रिया सही दिशा में है।   कर्मचारियों के लिए सलाह है कि वे अपनी वर्तमान वित्तीय योजना को 2026-27 के 'एरियर' को ध्यान में रखकर बना सकते हैं। यह एकमुश्त राशि भविष्य के लिए एक बेहतरीन फिक्स्ड डिपॉजिट या घर बनाने के सपने को पूरा करने में सहायक हो सकती है।   संक्षिप्त डेटा टेबल: 8वें वेतन आयोग की एक झलक विवरण संभावित जानकारी प्रभावी तिथि 1 जनवरी 2026 अनुमानित फिटमेंट फैक्टर 2.86 से 3.68 के बीच न्यूनतम सैलरी (अनुमानित) ₹26,000 - ₹30,000 लाभार्थी 1.19 करोड़ (कर्मचारी + पेंशनर) संभावित एरियर राशि ₹1,50,000+ (पदों के अनुसार) घोषणा का समय साल 2026 के अंत तक   अस्वीकरण: यह न्यूज़ रिपोर्ट वर्तमान रुझानों, ऐतिहासिक डेटा और आर्थिक विश्लेषण पर आधारित है। अंतिम निर्णय और आधिकारिक आंकड़े केंद्र सरकार द्वारा ही जारी किए जाएंगे।

Unknown जनवरी 17, 2026 0
Historic Launch India s First Vande Bharat Sleeper Connects Howrah to Guwahati
भारतीय रेलवे का 'सूर्योदय': पटरी पर उतरा 5-स्टार होटल जैसा सफर, देश को मिली पहली 'वंदे भारत स्लीपर' की सौगात

मालदा/हावड़ा: भारतीय रेलवे के 170 साल से अधिक के इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। पटरियों पर दौड़ती प्रगति की कहानी में आज एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के मालदा से देश की पहली 'वंदे भारत स्लीपर' (Vande Bharat Sleeper) ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह केवल एक ट्रेन का उद्घाटन नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और पूर्वोत्तर भारत (Northeast India) की कनेक्टिविटी की दिशा में एक 'क्वांटम जंप' (Quantum Jump) है।READ ALSO:-2025: जब 'सोने' ने दिखाई अपनी असली चमक और 'चांदी' ने लगाई ऐतिहासिक दौड़ — निवेशकों के वारे-न्यारे, आम आदमी हुआ बेहाल   अब तक देश में दौड़ रहीं वंदे भारत ट्रेनें केवल 'चेयर कार' थीं, जो दिन के सफर के लिए मुफीद थीं। लेकिन लंबे समय से यात्री रात के सफर और लंबी दूरी के लिए इस तकनीक का इंतजार कर रहे थे। आज वह इंतजार खत्म हुआ। हावड़ा से गुवाहाटी के बीच शुरू हुई यह सेवा न केवल दो राज्यों को जोड़ेगी, बल्कि 'चिकन नेक' (Chicken Neck) कॉरिडोर के जरिए शेष भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाली एक लाइफलाइन साबित होगी।   मालदा में उत्सव: जब पीएम मोदी ने की 'भविष्य' से मुलाकात मालदा स्टेशन का नजारा आज किसी त्योहार से कम नहीं था। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे ही रिमोट का बटन दबाकर और हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया, पूरा स्टेशन 'भारत माता की जय' के नारों से गूंज उठा। लेकिन यह कार्यक्रम केवल रस्म अदायगी तक सीमित नहीं था।   लोको पायलट और क्रू से तकनीकी संवाद ट्रेन को रवाना करने से पहले, पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल से हटकर लोको पायलट (ड्राइवर) और ट्रेन के क्रू सदस्यों से आत्मीय मुलाकात की।   उन्होंने ड्राइवर के केबिन (कॉकपिट) में जाकर ट्रेन की नई तकनीकों को समझा। पीएम ने पूछा कि पारंपरिक ट्रेनों के मुकाबले वंदे भारत स्लीपर को कंट्रोल करना कितना अलग है? उन्होंने 'कवच' (Kavach) सुरक्षा प्रणाली और ब्रेकिंग सिस्टम के बारे में बारीकी से जानकारी ली।   बच्चों के सपनों को मिली उड़ान सबसे भावुक पल वह था जब प्रधानमंत्री ट्रेन के कोच के अंदर गए और वहां मौजूद स्कूली बच्चों के बीच बैठ गए। यह बच्चे पहली यात्रा के गवाह बनने आए थे।   पीएम ने बच्चों से पूछा, "बड़े होकर क्या बनोगे?" और "इस ट्रेन में तुम्हें सबसे अच्छा क्या लगा?" बच्चों के उत्साह को देखकर पीएम ने कहा कि यह ट्रेन सिर्फ लोहे और स्टील का ढांचा नहीं, बल्कि 'विकसित भारत' की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है।   रूट का गणित: हावड़ा-गुवाहाटी ही क्यों? रेल मंत्रालय ने देश की पहली स्लीपर वंदे भारत के लिए हावड़ा-गुवाहाटी रूट को चुना है, जो रणनीतिक और व्यापारिक दोनों नजरिए से 'मास्टरस्ट्रोक' है।   समय की भारी बचत हावड़ा और गुवाहाटी के बीच की दूरी तय करने में मौजूदा मेल/एक्सप्रेस और राजधानी ट्रेनों को भी 18 घंटे या उससे अधिक का समय लगता है। यह रूट घुमावदार और ट्रैफिक से भरा है।   पुरानी ट्रेनें: औसत समय 18-20 घंटे। वंदे भारत स्लीपर: अनुमानित समय 15.5 से 16 घंटे। फायदा: करीब 2.5 से 3 घंटे की बचत।   यह समय की बचत उन व्यापारियों के लिए संजीवनी है जो कोलकाता के बड़ाबाजार से असम के लिए माल का आर्डर लेकर जाते हैं, और उन पर्यटकों के लिए भी जो काजीरंगा या शिलांग जाना चाहते हैं।   'चिकन नेक' को मजबूती सिलीगुड़ी और न्यू जलपाईगुड़ी होते हुए जाने वाला यह रूट भारत के लिए सामरिक महत्व रखता है। यह संकरा गलियारा (Chicken Neck) ही शेष भारत को उत्तर-पूर्व के सात राज्यों से जोड़ता है। यहाँ एक हाई-स्पीड, रिलायबल ट्रेन का होना सेना और सामान्य नागरिकों दोनों के लिए कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करता है।   'वंदे भारत स्लीपर' vs राजधानी एक्सप्रेस: क्या बदला है? लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि जब राजधानी एक्सप्रेस पहले से चल रही है, तो वंदे भारत स्लीपर की क्या जरूरत थी? इसका जवाब है—तकनीक और अनुभव।   फीचर (Feature) राजधानी एक्सप्रेस (Rajdhani Express) वंदे भारत स्लीपर (Vande Bharat Sleeper) इंजन अलग से लोकोमोटिव इंजन लगा होता है। सेल्फ-प्रोपेल्ड (Self-Propelled): इंजन कोच के नीचे ही लगा है, जिससे एक्सीलरेशन (Pick-up) बहुत तेज होता है। झटके (Jerks) पुरानी कपलिंग तकनीक के कारण झटके महसूस होते हैं। सेमी-परमानेंट कपलर: झटकों से मुक्त (Jerk-free) यात्रा का अनुभव। दरवाजे मैनुअल दरवाजे (ज्यादातर)। ऑटोमैटिक स्लाइडिंग डोर्स: मेट्रो की तरह, जो सुरक्षा बढ़ाते हैं। शौचालय बायो-टॉयलेट (पुराने डिजाइन)। वैक्यूम टॉयलेट: हवाई जहाज जैसी तकनीक, दुर्गंध मुक्त। एक्सीलरेशन 0-100 किमी/घंटा पहुँचने में समय लगता है। बुलेट ट्रेन जैसी तकनीक, बहुत तेजी से रफ़्तार पकड़ती है।   ट्रेन के अंदर की दुनिया: पहियों पर 5-स्टार होटल रेलवे के सूत्रों और उद्घाटन के दौरान दिखीं तस्वीरों के मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर का इंटीरियर किसी वर्ल्ड क्लास होटल से कम नहीं है। यात्रियों की थकान को मिटाने के लिए इसमें कई खास फीचर्स जोड़े गए हैं।   साउंड इंसुलेशन (Sound Insulation): ट्रेन के अंदर बाहर का शोर न के बराबर आता है। ड्राइवर केबिन को एयरोडायनामिक बनाया गया है ताकि हवा का घर्षण कम हो और शोर घटे। प्रीमियम बर्थ डिजाइन: स्लीपर बर्थ की गद्दी (Cushioning) सामान्य ट्रेनों से ज्यादा आरामदायक और एर्गोनोमिक है। हर बर्थ के साथ अलग से रीडिंग लाइट, चार्जिंग सॉकेट और मोबाइल होल्डर दिया गया है। सेंसर आधारित सुविधाएँ: पानी के नल से लेकर सोप डिस्पेंसर तक, सब कुछ टच-फ्री और सेंसर आधारित है। सुरक्षा कवच: पूरी ट्रेन में सीसीटीवी कैमरे और फायर अलार्म सिस्टम लगा है। साथ ही, यह ट्रेन 'कवच' (Train Collision Avoidance System) से लैस है, जो इसे दो ट्रेनों की टक्कर से बचाता है।   'एक्ट ईस्ट' नीति और पूर्वोत्तर का उदय इस ट्रेन का शुभारंभ केंद्र सरकार की 'एक्ट ईस्ट' (Act East) नीति का एक जीवंत उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भी इस बात पर जोर दिया कि पूर्वोत्तर भारत अब देश के विकास का 'ग्रोथ इंजन' बन रहा है।   पर्यटन को बढ़ावा: असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। हावड़ा से गुवाहाटी की सुगम यात्रा बंगाली पर्यटकों (जो पूर्वोत्तर में सबसे ज्यादा जाते हैं) की संख्या में भारी इजाफा करेगी। आर्थिक एकीकरण: पश्चिम बंगाल पूर्वी भारत का व्यापारिक केंद्र है। इस ट्रेन के शुरू होने से बंगाल और पूर्वोत्तर के बीच सप्लाई चेन और मजबूत होगी। कनेक्टिविटी: मालदा, जो उत्तर बंगाल का प्रवेश द्वार है, वहां से इस ट्रेन का गुजरना इस क्षेत्र के लोगों के लिए कोलकाता और गुवाहाटी दोनों तरफ जाने के लिए एक प्रीमियम विकल्प तैयार करता है।   किराया और बुकिंग: क्या यह आम आदमी की जेब में फिट होगी? हालांकि रेलवे ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किराए की पूरी सूची (Fare Chart) जारी नहीं की है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसका किराया राजधानी एक्सप्रेस से 10-15% अधिक हो सकता है।   3-Tier AC: यह आम मध्यवर्गीय परिवारों के लिए लक्षित होगा। 2-Tier & 1st AC: इसमें हवाई जहाज जैसी सुविधाएं मिलेंगी, इसलिए किराया भी उसी टक्कर का होगा। खान-पान: वंदे भारत की परंपरा के अनुसार, इसमें टिकट के साथ खाना (Catering) वैकल्पिक हो सकता है, लेकिन मेन्यू में बंगाली और असमी व्यंजनों (जैसे- माछेर झोल, लूची, खआर) को शामिल किए जाने की उम्मीद है।   भविष्य की राह: 2026 और उससे आगे हावड़ा-गुवाहाटी वंदे भारत स्लीपर तो बस एक शुरुआत है। रेल मंत्री के बयानों और रेलवे बोर्ड की योजना के अनुसार, आने वाले समय में देश के अन्य प्रमुख रूट्स पर भी स्लीपर वंदे भारत दौड़ती नजर आएगी।   अगले संभावित रूट्स: दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-बेंगलुरु। निर्यात की तैयारी: भारत न केवल अपनी जरूरतों के लिए ये ट्रेनें बना रहा है, बल्कि भविष्य में दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के देशों को वंदे भारत स्लीपर निर्यात करने की योजना भी है।   बदलता भारत, बदलती रेल मालदा से गुवाहाटी की ओर बढ़ती यह ट्रेन सिर्फ यात्रियों को नहीं ढो रही, बल्कि यह एक बदलते भारत की तस्वीर भी साथ ले जा रही है। एक ऐसा भारत, जहाँ अब ट्रेन का सफर 'सजा' नहीं, बल्कि 'मजा' होगा। जहाँ स्वच्छता, सुरक्षा और स्पीड केवल अमीरों की जागीर नहीं, बल्कि आम यात्रियों का अधिकार होगा।   हावड़ा-गुवाहाटी वंदे भारत स्लीपर का सफल संचालन यह तय करेगा कि भारत में लंबी दूरी की रेल यात्रा का भविष्य कैसा होगा। फिलहाल, यात्रियों के चेहरों की मुस्कान और पीएम मोदी की हरी झंडी ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय रेलवे सही ट्रैक पर है।

Unknown जनवरी 17, 2026 0
Weather Update Severe Cold Wave and Dense Fog Alert for North India Rain and Snowfall Predicted from Jan 16
कुदरत का 'कोल्ड अटैक': उत्तर भारत में जम गई जिंदगी, 16 जनवरी से बर्फीले तूफ़ान और बारिश का डबल अलर्ट; जानें कब मिलेगी इस 'हाड़ कंपाने वाली' ठंड से राहत?

जनवरी का महीना अपने मध्य पड़ाव पर है, लेकिन उत्तर भारत में सर्दी का सितम कम होने के बजाय और भी जानलेवा होता जा रहा है। कुदरत ने मानो पूरे उत्तर भारत को एक 'फ्रीजर' में तब्दील कर दिया है। सुबह की शुरुआत घने कोहरे की सफेद चादर से होती है, जो दिन चढ़ते-चढ़ते बर्फीली हवाओं (Cold Wave) में बदल जाती है। सूरज देवता के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं और अगर धूप निकलती भी है, तो उसकी तपिश नदारद है।READ ALSO:-Mardaani 3: शिवानी शिवाजी रॉय की दहाड़ से कांपा सोशल मीडिया, लेकिन महफिल लूट ले गई 'अम्मा'; जानिए उस खूंखार विलेन के बारे में जिससे टकराने आ रही है 'मर्दानी'   इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जो ताजा भविष्यवाणी की है, उसने लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। विभाग के मुताबिक, अभी ठंड से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है, बल्कि 16 जनवरी 2026 से मौसम एक नया और रौद्र रूप धारण करने वाला है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) उत्तर भारत की तरफ तेजी से बढ़ रहा है, जो पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश लेकर आएगा। यह बदलाव ठंड को और ज्यादा तीखा और चुभने वाला बना देगा।   इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको न केवल मौसम का हाल बताएंगे, बल्कि यह भी समझाएंगे कि आखिर क्यों इस बार ठंड इतनी ज्यादा पड़ रही है, इसका आपकी सेहत और खेती पर क्या असर होगा, और कोहरे में ड्राइविंग करते समय आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।   1. मौसम का 'मिजाज': अगले 5 दिनों का महा-अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में मौसम की स्थिति अगले कुछ दिनों तक बेहद गंभीर रहने वाली है। इसे तीन चरणों में समझा जा सकता है:   फेज 1 (14-15 जनवरी): भीषण शीतलहर और 'कोल्ड डे' (Cold Day) की स्थिति। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिन का तापमान सामान्य से 5-7 डिग्री सेल्सियस नीचे रह सकता है। फेज 2 (16-18 जनवरी): पश्चिमी विक्षोभ की एंट्री। पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू होगी और मैदानी इलाकों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। इससे रात के तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन दिन में ठिठुरन बनी रहेगी। फेज 3 (19-21 जनवरी): बारिश के बाद घना कोहरा। बारिश थमने के बाद हवा में नमी बढ़ जाएगी, जिससे 19 जनवरी के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार में 'वेरी डेंस फॉग' (Very Dense Fog) की वापसी होगी।   IMD के वैज्ञानिक डॉ. [काल्पनिक नाम] का कहना है, "जनवरी 2026 का यह सप्ताह मौसम के लिहाज से सबसे ज्यादा उथल-पुथल भरा रहने वाला है। एक तरफ बर्फीली हवाएं चल रही हैं, तो दूसरी तरफ अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी बारिश के हालात बना रही है। यह 'डबल वेदर सिस्टम' लोगों की परेशानी बढ़ाएगा।"   2. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) क्या है और यह क्यों डरा रहा है? अक्सर हम खबरों में 'पश्चिमी विक्षोभ' का नाम सुनते हैं, लेकिन इसका असल मतलब क्या है? सरल शब्दों में कहें तो यह भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठने वाला एक तूफान है। यह तूफान ईरान, इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को पार करते हुए भारत के उत्तरी हिस्से में दाखिल होता है।   क्यों है खतरनाक? जब यह सिस्टम भारत पहुंचता है, तो यह अपने साथ भारी मात्रा में नमी लाता है। जब यह नमी हिमालय की ऊंची चोटियों से टकराती है, तो वहां भारी बर्फबारी होती है। मैदानी इलाकों पर असर: पहाड़ों पर होने वाली इस बर्फबारी की ठंडक हवाओं के जरिए जब दिल्ली, यूपी और पंजाब के मैदानी इलाकों में पहुंचती है, तो यहां तापमान तेजी से गिरता है। 16 जनवरी का अपडेट: 16 जनवरी 2026 को आने वाला पश्चिमी विक्षोभ काफी मजबूत बताया जा रहा है। इसका असर सिर्फ पहाड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राजस्थान और मध्य प्रदेश तक बारिश करवा सकता है।   3. राज्यवार मौसम का विस्तृत हाल: जानें आपके शहर में क्या होगा? मौसम विभाग के आंकड़ों और सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर हमने विभिन्न राज्यों के लिए यह विशेष रिपोर्ट तैयार की है:   (A) उत्तर प्रदेश: कोहरे और गलन की दोहरी मार यूपी में मौसम का मिजाज सबसे ज्यादा खराब है।   पश्चिमी यूपी (मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, सहारनपुर): यहां 15 से 19 जनवरी तक घने कोहरे का 'रेड अलर्ट' है। दृश्यता (Visibility) 50 मीटर से भी कम रह सकती है। 19 और 20 जनवरी को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना है। पूर्वी यूपी (लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज): यहां शीतलहर का प्रकोप ज्यादा रहेगा। दिन में धूप निकलने के बावजूद बर्फीली हवाएं लोगों को परेशान करेंगी। 16 से 18 जनवरी के बीच यहां भी आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। चेतावनी: हाईवे और एक्सप्रेसवे (यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे) पर रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक यात्रा करने से बचें।   (B) दिल्ली-एनसीआर: प्रदूषण और ठंड का कॉकटेल देश की राजधानी दिल्ली में ठंड के साथ-साथ प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या है।   तापमान: दिल्ली का न्यूनतम तापमान 3-4 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। 15 जनवरी को शीतलहर की स्थिति बन सकती है। बारिश: 16 और 17 जनवरी को दिल्ली में हल्की बारिश होने के आसार हैं, जिससे प्रदूषण के स्तर (AQI) में थोड़ा सुधार हो सकता है, लेकिन ठंडक बढ़ जाएगी। सलाह: सुबह की सैर (Morning Walk) से बचें, क्योंकि ठंड और प्रदूषण का मिश्रण फेफड़ों के लिए घातक हो सकता है।   (C) पंजाब और हरियाणा: 'कोल्ड डे' का प्रकोप पंजाब और हरियाणा भारत के 'शीत मरुस्थल' बनते जा रहे हैं। स्थिति: यहां अगले 48 घंटों तक 'सीवियर कोल्ड डे' (Severe Cold Day) घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि दिन का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे जा सकता है। किसानों के लिए: पाला (Frost) पड़ने की संभावना है, जो फसलों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।   (D) राजस्थान: रेगिस्तान में जमी बर्फ रेतीले राजस्थान के कुछ इलाकों (जैसे माउंट आबू, चूरू और सीकर) में तापमान जमाव बिंदु (0 डिग्री) के पास पहुंच गया है।   मावठ की बारिश: 19 और 20 जनवरी को पूर्वी राजस्थान (जयपुर, कोटा, भरतपुर) में 'मावठ' (सर्दियों की बारिश) होने की संभावना है। यह बारिश रबी की फसलों के लिए अमृत समान मानी जाती है।   (E) बिहार और झारखंड: पछुआ हवाओं ने कंपकपाया बिहार और झारखंड में पछुआ हवाओं (Westerly Winds) ने कनकनी बढ़ा दी है। पटना, गया और रांची में सुबह के समय घना कोहरा देखने को मिल रहा है। अगले 3 दिनों तक यहां तापमान में 2-3 डिग्री की और गिरावट आ सकती है।   (F) पहाड़ी राज्य (J&K, हिमाचल, उत्तराखंड): बर्फबारी का आनंद और आफत सैलानियों के लिए खुशखबरी है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए आफत।   16 से 20 जनवरी: जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग, सोनमर्ग; हिमाचल के शिमला, मनाली; और उत्तराखंड के औली, केदारनाथ में भारी बर्फबारी की संभावना है। चेतावनी: हिमस्खलन (Avalanche) का खतरा भी बढ़ गया है, इसलिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।   4. घना कोहरा: सड़क हादसों का 'साइलेंट किलर' मौसम विभाग ने विशेष रूप से 'कोहरे' (Fog) को लेकर चेतावनी जारी की है। 14 जनवरी से 21 जनवरी तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में विजिबिलिटी जीरो हो सकती है।   कोहरे के प्रकार और उनका असर: शैलो फॉग (Shallow Fog): विजिबिलिटी 500 मीटर तक। (ड्राइविंग में थोड़ी परेशानी) मॉडरेट फॉग (Moderate Fog): विजिबिलिटी 200 मीटर तक। (सावधानी जरूरी) डेंस फॉग (Dense Fog): विजिबिलिटी 50 मीटर तक। (बेहद खतरनाक) वेरी डेंस फॉग (Very Dense Fog): विजिबिलिटी 0 से 50 मीटर। (सड़क पर कुछ नहीं दिखता)   हाईवे पर सुरक्षित ड्राइविंग के 5 गोल्डन रूल्स: कोहरे के दौरान यमुना एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे पर एक्सीडेंट की खबरें आम हो जाती हैं। अपनी सुरक्षा के लिए इन नियमों का पालन करें:   फॉग लाइट्स का इस्तेमाल: अपनी गाड़ी की फॉग लाइट्स और लो-बीम हेडलाइट्स हमेशा ऑन रखें। हाई-बीम का इस्तेमाल न करें, क्योंकि यह कोहरे में रोशनी को रिफ्लेक्ट कर देता है और आपको कुछ नहीं दिखता। स्पीड लिमिट: गाड़ी की रफ्तार सामान्य से 50% कम रखें। अगर स्पीड लिमिट 100 है, तो 50-60 पर चलें। लेन ड्राइविंग: अपनी लेन में ही चलें और बार-बार लेन बदलने से बचें। सड़क की सफेद पट्टी (White Line) को फॉलो करें। पार्किंग: कभी भी हाईवे के किनारे गाड़ी पार्क न करें। अगर रुकना जरूरी हो, तो पेट्रोल पंप या ढाबे पर ही रुकें। इंडिकेटर: मुड़ने से काफी पहले इंडिकेटर दें ताकि पीछे वाले को पता चल सके।   5. सेहत की सुरक्षा: सर्दियों में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा सर्दियों का यह मौसम सिर्फ बाहर ही ठंडा नहीं होता, बल्कि यह हमारे शरीर के अंदरूनी सिस्टम को भी प्रभावित करता है। डॉक्टरों के अनुसार, कड़ाके की ठंड में हार्ट अटैक (Heart Attack) और ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) के मामले 30% तक बढ़ जाते हैं।   ऐसा क्यों होता है? ठंड में शरीर की नसें (Blood Vessels) सिकुड़ जाती हैं। इससे ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) बढ़ जाता है और दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। साथ ही, खून गाढ़ा होने लगता है, जिससे क्लॉटिंग (Clotting) का खतरा बढ़ जाता है।   बचाव के उपाय (Health Advisory): बुजुर्गों का ख्याल: घर के बुजुर्गों को सुबह की ठंड में बाहर न निकलने दें। उन्हें धूप निकलने के बाद ही वॉक पर जाने की सलाह दें। लेयरिंग (Layering): एक मोटा जैकेट पहनने के बजाय, 3-4 पतले ऊनी कपड़े एक के ऊपर एक पहनें। यह शरीर की गर्मी को लॉक करने में ज्यादा कारगर होता है। सिर और पैर कवर रखें: शरीर की 30% गर्मी सिर से बाहर निकलती है। इसलिए टोपी और मोजे हमेशा पहनकर रखें। पानी पिएं: सर्दियों में प्यास कम लगती है, जिससे डिहाइड्रेशन होता है। गुनगुना पानी पीते रहें। खान-पान: अपनी डाइट में गुड़, तिल, खजूर, अदरक, लहसुन और हल्दी वाला दूध शामिल करें। ये शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं।   6. किसान भाई ध्यान दें: फसलों पर मौसम की मार यह मौसम किसानों के लिए मिला-जुला रहने वाला है।   गेहूं (Wheat): गेहूं की फसल के लिए यह ठंड वरदान है। जितनी ज्यादा ठंड पड़ेगी, गेहूं का दाना उतना ही मोटा और अच्छा होगा। 19-20 जनवरी की बारिश भी गेहूं के लिए 'टॉनिक' का काम करेगी। सरसों (Mustard) और आलू (Potato): पाला (Frost) पड़ने से सरसों और आलू की फसल को नुकसान हो सकता है। उपाय: अगर पाला पड़ने की आशंका हो, तो खेत में शाम के समय हल्की सिंचाई कर दें। नमी होने से तापमान में गिरावट कम होती है। इसके अलावा, खेत के उत्तर-पश्चिमी कोने पर धुआं करने से भी फसलों को पाले से बचाया जा सकता है। सब्जियां: टमाटर और बैंगन के पौधों को प्लास्टिक की शीट या पुआल (Straw) से ढंककर रखें।   7. शिक्षा और स्कूल अपडेट भीषण ठंड को देखते हुए उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा के कई जिलों में जिलाधिकारियों (DM) ने स्कूलों की छुट्टियों को आगे बढ़ा दिया है।   उत्तर प्रदेश: कई जिलों में कक्षा 8 तक के स्कूल 17 जनवरी तक बंद कर दिए गए हैं। ऑनलाइन क्लासेज को प्राथमिकता दी जा रही है। दिल्ली: स्कूलों का समय बदल दिया गया है। अब स्कूल सुबह 9:00 या 10:00 बजे के बाद ही खुलेंगे। अभिभावकों के लिए सलाह: बच्चों को स्कूल भेजते समय पूरी तरह से ऊनी कपड़ों में लपेटकर भेजें और उनके टिफिन में गर्म तासीर वाला खाना दें।   8. परिवहन व्यवस्था: ट्रेनें और फ्लाइट्स लेट कोहरे का सबसे बुरा असर रेलवे और एविएशन सेक्टर पर पड़ा है।   रेलवे: दिल्ली आने-जाने वाली 50 से ज्यादा ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 4 से 10 घंटे की देरी से चल रही हैं। राजधानी और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनें भी लेट हैं। यात्रा करने से पहले 'NTES' ऐप पर अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर चेक करें। फ्लाइट्स: दिल्ली एयरपोर्ट पर कम विजिबिलिटी के कारण कई फ्लाइट्स को डायवर्ट या कैंसिल करना पड़ा है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि एयरपोर्ट निकलने से पहले एयरलाइन से संपर्क करें।   अभी खत्म नहीं हुई है सर्दी कुल मिलाकर, मौसम विभाग का संदेश साफ है—सर्दी अभी जाने वाली नहीं है। 16 जनवरी से शुरू होने वाला बारिश और बर्फबारी का दौर जनवरी के अंत तक ठंड को बरकरार रखेगा। यह समय लापरवाही बरतने का नहीं, बल्कि सावधानी रखने का है। चाहे आप सड़क पर हों या घर में, मौसम के इस बदलते मिजाज के हिसाब से अपनी दिनचर्या में बदलाव करें।   'खबरीलाल' आपसे अपील करता है कि आप अपना और अपने परिवार का ख्याल रखें। बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को अगर ठंड में ठिठुरता देखें, तो अपनी क्षमता अनुसार पुराने कपड़े या कंबल दान करके उनकी मदद जरूर करें। मौसम की हर पल की अपडेट के लिए जुड़े रहें www.khabreelal.com के साथ।   FAQ: मौसम से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल क्या 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) तक ठंड रहेगी? जी हां, 16 से 20 जनवरी की बारिश के बाद ठंडी हवाएं चलेंगी, जिससे 26 जनवरी तक कड़ाके की ठंड रहने की संभावना है। धूप कब निकलेगी? 14 जनवरी को कुछ इलाकों में धूप निकल सकती है, लेकिन 15 जनवरी से फिर बादल और कोहरे का असर बढ़ जाएगा। अच्छी धूप के लिए आपको 21 जनवरी के बाद का इंतजार करना पड़ सकता है। क्या अब और भी ज्यादा ठंड बढ़ेगी? तापमान में बहुत बड़ी गिरावट शायद न हो, लेकिन 'विंड चिल फैक्टर' (हवा की वजह से महसूस होने वाली ठंड) बढ़ जाएगा। बारिश के बाद चलने वाली गीली हवाएं ज्यादा ठंड महसूस कराएंगी।   Disclaimer: यह मौसम पूर्वानुमान IMD और निजी मौसम एजेंसियों के डेटा पर आधारित है। मौसम में अचानक बदलाव संभव है। किसी भी यात्रा या कृषि कार्य से पहले स्थानीय मौसम विभाग की आधिकारिक सूचना अवश्य देखें।

Unknown जनवरी 14, 2026 0
End of an Era 10 Minute Delivery Service Stopped in India by Zepto Blinkit and Swiggy after Government Intervention
The End of Speed Game: 10 मिनट का 'खूनी खेल' खल्लास! भारत में अब नहीं होगी 10 मिनट में डिलीवरी; सरकार की सख्ती के आगे झुकीं कंपनियां

[नई दिल्ली | बिजनेस एवं टेक डेस्क] तारीख: 13 जनवरी 2026 नई दिल्ली: भारत के क्विक कॉमर्स सेक्टर में आज एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया गया है। Zepto, Swiggy (Instamart), Zomato और Blinkit जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपनी बहुचर्चित और विवादित '10 मिनट डिलीवरी सर्विस' को तत्काल प्रभाव से बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के साथ हुई एक हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद लिया गया, जिसमें गिग वर्कर्स की सुरक्षा को सर्वोपरि रखने पर सहमति बनी है।READ ALSO:-Crypto Crackdown: भारत में क्रिप्टो पर 'डिजिटल पहरेदारी', सरकार ने कसी नकेल; लोकेशन ट्रैकिंग से लेकर 'नो VPN' तक, ये 5 नियम नहीं माने तो फ्रीज होगा अकाउंट   सरकार का सख्त रुख और कंपनियों का यू-टर्न सूत्रों के मुताबिक, श्रम मंत्रालय ने कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि मुनाफे के लिए इंसानी जान को जोखिम में नहीं डाला जा सकता। श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने दो टूक शब्दों में कहा कि "डिलीवरी की स्पीड से ज्यादा महत्वपूर्ण डिलीवरी बॉय की सुरक्षा है।" इस हस्तक्षेप के बाद, ब्लिंकिट (Blinkit) और अन्य कंपनियों ने अपने ऐप और विज्ञापनों से '10 मिनट' की ब्रांडिंग हटाने और फिक्स्ड टाइम लिमिट को खत्म करने का फैसला किया है। अब डिलीवरी का समय ट्रैफिक और दूरी के हिसाब से तय होगा, न कि किसी मार्केटिंग गिमिक से।   क्यों बंद हुई यह सर्विस? गिग वर्कर्स का संघर्ष लाया रंग इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह गिग वर्कर्स (Gig Workers) का देशव्यापी विरोध और हड़ताल है। पिछले कुछ हफ्तों से डिलीवरी पार्टनर्स सड़कों पर थे। उनका कहना था कि 10 मिनट के 'डेडलाइन' को पूरा करने के चक्कर में उनकी जान हर पल हथेली पर रहती है।     जान का जोखिम: वर्कर्स ने शिकायत की थी कि 10 मिनट में डिलीवरी पूरी करने के लिए उन्हें ट्रैफिक नियम तोड़ने पड़ते हैं, जिससे एक्सीडेंट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। मानसिक दबाव: अगर डिलीवरी में 1-2 मिनट की भी देरी होती, तो उन्हें पेनल्टी और कस्टमर की बदसलूकी का सामना करना पड़ता था। हड़ताल का असर: गिग वर्कर्स की हड़ताल ने सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया था, जिससे कंपनियों पर दबाव और बढ़ गया।   अब आगे क्या? यह फैसला भारत की गिग इकोनॉमी के लिए एक टर्निंग पॉइंट है। अब आपका राशन या खाना शायद 10 मिनट में न आए, लेकिन यह सुनिश्चित होगा कि जो व्यक्ति इसे ला रहा है, वह सुरक्षित तरीके से आप तक पहुंचे। कंपनियों ने आश्वासन दिया है कि वे अपनी लॉजिस्टिक्स को सुधारेंगी लेकिन 'स्पीड' के नाम पर वर्कर्स पर अनुचित दबाव नहीं डालेंगी।   इसे गिग वर्कर्स की एक बड़ी जीत और कॉरपोरेट जगत के लिए एक कड़े सबक के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि डिजिटल इंडिया में तरक्की होगी, लेकिन सुरक्षा से समझौता करके नहीं।

Unknown जनवरी 13, 2026 0
Weather Update Jan 12 Heavy Rain Alert in 4 States Severe Cold Wave to Grip North India 150 Trains Delayed
Mausam 12 January 2026: उत्तर भारत के 17 शहरों में शीतलहर का टॉर्चर, 4 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट; दिल्ली में पारा 5°C तक गिरेगा

नई दिल्ली (वेदर डेस्क/खबरीलाल): साल 2026 का जनवरी महीना अपने सबसे रौद्र रूप में नजर आ रहा है। सोमवार, 12 जनवरी का दिन देश के मौसम के लिहाज से बेहद उथल-पुथल भरा रहने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जो पूर्वानुमान जारी किया है, वह चिंताजनक है। एक तरफ उत्तर भारत के मैदानी इलाके कोहरे की सफेद चादर और बर्फीली हवाओं (Cold Wave) की चपेट में हैं, तो दूसरी तरफ दक्षिण और मध्य भारत में बेमौसम बारिश और आंधी-तूफान ने दस्तक दे दी है।READ ALSO:-   मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 24 घंटों में देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के तीन रूप देखने को मिलेंगे—भीषण शीतलहर, घना कोहरा और तूफानी बारिश।   उत्तर भारत: 17 शहरों में 'कोल्ड टॉर्चर', 5°C तक गिरा पारा उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। IMD ने स्पष्ट कर दिया है कि 12 जनवरी को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के लोगों को ठंड से कोई राहत नहीं मिलने वाली है।   दिल्ली में शीतलहर का येलो अलर्ट देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार को आसमान तो साफ रहेगा, लेकिन बर्फीली हवाएं लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर देंगी।   तापमान: न्यूनतम तापमान 5°C के आसपास रहने का अनुमान है। चेतावनी: कई स्थानों पर शीतलहर (Cold Wave) चलने की आशंका है। सुबह के समय हल्का कोहरा रहेगा, लेकिन दिन में धूप निकलने के बावजूद हवाओं में गलन बरकरार रहेगी।   यूपी-बिहार में 'कोल्ड डे' और घना कोहरा उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने को कहा है।   कोहरा: पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार के अधिकतर जिलों में सुबह के समय 'बहुत घना कोहरा' (Very Dense Fog) छाया रहेगा। दृश्यता (Visibility) शून्य से 50 मीटर तक रह सकती है। कोल्ड डे: बिहार के कई हिस्सों में 'कोल्ड डे' जैसी स्थिति बनी रहेगी, यानी दिन का तापमान सामान्य से काफी नीचे रहेगा और धूप बेअसर साबित होगी।   राजस्थान में 'गंभीर शीतलहर' (Severe Cold Wave) राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में मौसम सबसे ज्यादा सर्द रहने वाला है। यहां अलग-अलग हिस्सों में गंभीर शीतलहर की चेतावनी जारी की गई है। चूरू, सीकर और माउंट आबू जैसे इलाकों में तापमान जमाव बिंदु (Freezing Point) के करीब पहुंच सकता है।   दक्षिण भारत: पश्चिमी विक्षोभ का असर, 4 राज्यों में आंधी-बारिश आमतौर पर जनवरी में दक्षिण भारत में मौसम शांत रहता है, लेकिन इस बार नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने और समुद्री हवाओं के पैटर्न बदलने के कारण मौसम बिगड़ गया है।   इन राज्यों में बारिश का अलर्ट IMD ने अगले 24 घंटों के दौरान दक्षिण भारत के चार प्रमुख राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है:   कर्नाटक केरल पुडुचेरी तमिलनाडु   मछुआरों को चेतावनी: समुद्री तटों पर तेज हवाएं चलने की आशंका है, इसलिए मौसम विभाग ने मछुआरों को सलाह दी है कि वे अगले 24 से 48 घंटों तक गहरे समुद्र में न जाएं।   मध्य भारत: मध्य प्रदेश में ओले और महाराष्ट्र में बिजली गिरने का खतरा मौसम की यह बेरुखी केवल उत्तर और दक्षिण तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य भारत भी इसकी चपेट में है। बेमौसम बारिश रबी की फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।   मध्य प्रदेश (MP): कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ-साथ ओलावृष्टि (Hailstorm) की आशंका जताई गई है। यह किसानों के लिए चिंता का विषय है। छत्तीसगढ़: यहां बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, जिससे ठंड और बढ़ेगी। महाराष्ट्र: विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में गरज के साथ छींटे पड़ने और बिजली गिरने (Lightning) की चेतावनी जारी की गई है। पूर्वी राजस्थान: यहां भी गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।   पहाड़ी राज्य: बर्फबारी से 15 जनवरी तक राहत नहीं  पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों पर पड़ रहा है।   हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: इन दोनों राज्यों के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी हो रही है। मैदानी असर: पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण मैदानी इलाकों में 15 जनवरी तक ठंड का प्रकोप कम होने की कोई संभावना नहीं है। पर्यटकों के लिए यह अच्छी खबर हो सकती है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह मुसीबत का सबब है।   रेल यातायात ध्वस्त: 150 ट्रेनें लेट, यात्री परेशान कोहरे (Dense Fog) की सबसे बड़ी मार भारतीय रेलवे पर पड़ी है। दृश्यता कम होने के कारण ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है।   ताजा अपडेट (Live Train Status): प्रभावित ट्रेनें: दिल्ली आने और जाने वाली 150 से ज्यादा ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से चल रही हैं। प्रमुख रूट्स: कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और पटना की ओर जाने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनें 5 से 15 घंटे की भारी देरी से चल रही हैं। पंजाब रूट: अमृतसर और चंडीगढ़ से आने वाली शताब्दी और अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों की रफ्तार भी थमी हुई है। रद्द ट्रेनें: परिचालन कारणों और कोहरे को देखते हुए कई जोड़ी ट्रेनों को रद्द भी कर दिया गया है।   यात्री सलाह: यदि आप 12 जनवरी को ट्रेन से यात्रा करने वाले हैं, तो घर से निकलने से पहले NTES ऐप या रेलवे हेल्पलाइन 139 पर अपनी ट्रेन का करंट स्टेटस जरूर चेक कर लें, अन्यथा आपको स्टेशन पर पूरी रात बितानी पड़ सकती है।   Khabreelal की खास सलाह (Advisory) वाहन चालक सावधान रहें: पंजाब, हरियाणा, यूपी और बिहार में घने कोहरे के कारण सड़कों पर विजिबिलिटी बहुत कम है। कृपया फॉग लाइट्स (Fog Lights) का इस्तेमाल करें और गति सीमा में रहें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें: बच्चों और बुजुर्गों को सुबह-शाम की ठंड से बचाएं। शीतलहर के कारण हार्ट और अस्थमा के मरीजों की समस्याएं बढ़ सकती हैं। किसानों के लिए: मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसान ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए अपनी कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर ढककर रखें।

Unknown जनवरी 12, 2026 0
10 January 2026 Weather Forecast Delhi NCR UP Cold Wave Dense Fog Alert IMD Update
IMD Alert: कल 10 जनवरी को 15 राज्यों पर कुदरत का 'डबल अटैक'; दिल्ली-NCR में दृश्यता होगी शून्य, यूपी में शीतलहर तो दक्षिण में बारिश बढ़ाएगी मुसीबत

साल 2026 का जनवरी महीना अपने शबाब पर है और कुदरत ने उत्तर से लेकर दक्षिण तक अपने अलग-अलग रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। अगर आप, यानी 10 जनवरी 2026 को किसी जरूरी काम से घर से बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कल के लिए जो पूर्वानुमान (Forecast) जारी किया है, वह डराने वाला भी है और सतर्क करने वाला भी।READ ALSO:-मेरठ का कपसाड़ कांड: एक मां की चिता, अगवा बेटी का इंतजार और 19 घंटे का वह 'महा-संग्राम' जिसने सिस्टम को हिला दिया   देश के एक बड़े हिस्से में कल मौसम की 'दोहरी मार' (Double Attack) पड़ने वाली है। उत्तर भारत जहां 'व्हाइट आउट' (Whiteout) जैसी स्थिति यानी घने कोहरे की सफेद चादर में लिपटा रहेगा, वहीं दक्षिण भारत में बारिश लोगों को भिगोने के लिए तैयार है। पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं ने मैदानी इलाकों को 'फ्रीजर' में तब्दील कर दिया है।   इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको राज्यवार मौसम का हाल, यात्रा के लिए चेतावनी, स्वास्थ्य सलाह और किसानों के लिए विशेष जानकारी विस्तार से बताएंगे।   भाग 1: उत्तर भारत का हाल - 'कोहरा और कनकनी' (North India Weather)   1. दिल्ली-NCR: 'गैस चेंबर' के बाद अब 'कोहरा चेंबर' देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाके (नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद) कल सुबह कुदरत के सबसे सख्त इम्तिहान से गुजरेंगे।   अत्यधिक घना कोहरा (Very Dense Fog): IMD के अनुसार, 10 जनवरी की सुबह दिल्ली-NCR में 'वेरी डेंस फॉग' की स्थिति रहेगी। पालम और सफदरजंग वेधशालाओं के आसपास विजिबिलिटी (दृश्यता) 0 से 50 मीटर तक गिर सकती है। इसका मतलब है कि सुबह के समय हाथ को हाथ दिखाई नहीं देगा। सड़क यातायात पर असर: यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सुबह 4 बजे से 10 बजे तक गाड़ी चलाना जानलेवा हो सकता है। ट्रैफिक पुलिस ने फोग लाइट्स का इस्तेमाल करने और गति धीमी रखने की सलाह दी है। हवाई और रेल सेवा: 'कैट-3' (CAT-III) इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम के बावजूद उड़ानों पर असर पड़ना तय है। इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कई उड़ानें डायवर्ट या लेट हो सकती हैं। वहीं, नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन आने वाली दर्जनों ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से चल सकती हैं।   2. उत्तर प्रदेश: पश्चिम में 'ठिठुरन', पूरब में 'गलन' उत्तर प्रदेश, जो भौगोलिक रूप से बहुत विशाल है, वहां मौसम के दो अलग-अलग रूप देखने को मिलेंगे।   पश्चिमी यूपी (West UP): मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर और बागपत जैसे जिलों में 'कोल्ड डे' (Cold Day) और 'शीतलहर' (Cold Wave) का रेड अलर्ट है। यहां न्यूनतम तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। कोहरा इतना घना होगा कि दिन में 12 बजे तक सूरज के दर्शन नहीं होंगे। पूर्वी यूपी (East UP): लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर में 'गलन' वाली ठंड पड़ेगी। यहां बर्फीली हवाएं (Icy Winds) सीधे शरीर में चुभेंगी। सुबह के समय मध्यम से घना कोहरा रहेगा, लेकिन दोपहर बाद हल्की धूप निकलने की संभावना है, जो बेअसर रहेगी।   3. राजस्थान: रेगिस्तान में जमी बर्फ रेगिस्तानी राज्य राजस्थान में सर्दी का सितम चरम पर है।   जमाव बिंदु (Freezing Point): उत्तरी राजस्थान के चुरू, सीकर और माउंट आबू में कल पारा जमाव बिंदु (0 डिग्री) के पास या उससे नीचे जा सकता है। पाला (Frost): खुले में रखी गाड़ियों और पेड़-पौधों पर सुबह बर्फ की पतली परत (पाला) जमी हुई दिखाई दे सकती है। शेखावाटी क्षेत्र में शीतलहर का सबसे ज्यादा प्रकोप रहेगा।   4. पंजाब और हरियाणा: कोहरे का 'लॉकडाउन' पंजाब और हरियाणा के मैदानी इलाकों में कल सुबह 'विजिबिलिटी जीरो' रहने की आशंका है। अमृतसर, लुधियाना, अंबाला और हिसार में घना कोहरा जनजीवन को अस्त-व्यस्त करेगा। यहां दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से 5-6 डिग्री नीचे रह सकता है, जिससे 'सीवियर कोल्ड डे' (Severe Cold Day) की स्थिति बनेगी।   भाग 2: पहाड़ी राज्यों का हाल - 'सफेद आफत' (Himalayan Region) मौसम विभाग के अनुसार, हिमालयी क्षेत्रों में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) अपना असर दिखा रहा है।   जम्मू-कश्मीर और लद्दाख: कल 10 जनवरी को गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की से मध्यम बर्फबारी (Snowfall) हो सकती है। लद्दाख के लेह और कारगिल में तापमान माइनस 10 से माइनस 15 डिग्री तक लुढ़क सकता है। डल झील के जमने की प्रक्रिया तेज हो गई है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: यहां बर्फबारी के साथ-साथ 'पाले' (Ground Frost) की चेतावनी जारी की गई है। शिमला, मनाली, औली और नैनीताल में पर्यटकों को संभलकर रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि सड़कों पर 'ब्लैक आइस' (Black Ice) जमने से फिसलन बढ़ गई है।   भाग 3: दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत - 'बारिश और नमी' जहां पूरा उत्तर भारत ठंड से कांप रहा है, वहीं दक्षिण भारत में मौसम का मिजाज बिल्कुल अलग है। बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) से आ रही नम हवाओं ने यहां बारिश का माहौल बना दिया है।   तमिलनाडु और केरल: कल 10 जनवरी को चेन्नई, कोयंबटूर, कोच्चि और तिरुवनंतपुरम के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। यह बेमौसम बारिश किसानों के लिए चिंता का विषय है, लेकिन गर्मी से राहत दिलाएगी। पूर्वोत्तर भारत (North East): असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के घना कोहरा छाया रहेगा। सुबह के समय दृश्यता कम रहेगी, लेकिन दिन में मौसम साफ होने की उम्मीद है।   भाग 4: मध्य और पूर्वी भारत (Central & East India) बिहार: मुजफ्फरपुर, पटना और गया में सुबह के समय 'घना कोहरा' (Dense Fog) छाया रहेगा। यहां पछुआ हवाओं के कारण कनकनी (Shivering) बढ़ेगी। फिलहाल बारिश की कोई संभावना नहीं है। मध्य प्रदेश: ग्वालियर और चंबल संभाग, जो उत्तर प्रदेश और राजस्थान से सटे हैं, वहां कोहरे और ठंड का असर ज्यादा रहेगा। भोपाल और इंदौर में मौसम मिला-जुला रहेगा—सुबह ठंड और दिन में धूप। गुजरात: पूरे देश में गुजरात ही ऐसा राज्य होगा जहां मौसम सबसे 'सुखद' (Pleasant) रहेगा। अहमदाबाद, सूरत और गांधीनगर में न तो कड़ाके की ठंड होगी और न ही कोहरा। दिन में खिली हुई धूप लोगों को राहत देगी।   भाग 5: वैज्ञानिक विश्लेषण - क्यों हो रहा है ऐसा? (Scientific Analysis) मौसम विज्ञानियों के अनुसार, 10 जनवरी 2026 को बनने वाली इस स्थिति के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:   पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance - WD): एक मध्यम तीव्रता का WD हिमालयी क्षेत्र से गुजर रहा है, जो पहाड़ों पर बर्फबारी करवा रहा है और वहां से ठंडी हवाओं को मैदानी इलाकों की ओर धकेल रहा है। जेट स्ट्रीम (Jet Stream): ऊपरी वायुमंडल में चलने वाली तेज 'जेट स्ट्रीम' हवाएं इस समय उत्तर भारत के ऊपर से गुजर रही हैं, जो अपने साथ हाड़ कंपाने वाली ठंड ला रही हैं। नमी (Moisture): जमीन में मौजूद नमी और हवा का कम दबाव (Low Wind Speed) मिलकर 'रेडिएशन फॉग' (Radiation Fog) बना रहे हैं, जो रात भर में घना हो जाता है और सुबह सूरज की किरणों को धरती तक पहुंचने से रोकता है।   भाग 6: इसका आप पर क्या असर होगा? (Impact Analysis)   1. स्वास्थ्य पर असर (Health Advisory) डॉक्टरों ने कल के मौसम को देखते हुए 'हेल्थ इमरजेंसी' जैसी सावधानी बरतने को कहा है।   हार्ट पेशेंट (Heart Patients): अत्यधिक ठंड में नसों के सिकुड़ने (Vasoconstriction) से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। हार्ट और अस्थमा के मरीजों को सुबह की सैर (Morning Walk) से बचने की सलाह दी गई है। बच्चे और बुजुर्ग: निमोनिया और ठंड लगने का खतरा सबसे ज्यादा है। कानों को ढककर रखें और लेयर्ड क्लोथिंग (एक के ऊपर एक कपड़े) पहनें। प्रदूषण (AQI): कोहरे और ठंड के कारण प्रदूषक तत्व (Pollutants) हवा में नीचे ही जम जाएंगे, जिससे दिल्ली-NCR का AQI 400 के पार (Severe) जा सकता है। मास्क का प्रयोग अनिवार्य समझें।   2. यात्रा और परिवहन (Travel Advisory) ट्रेन यात्री: अगर आप कल ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं, तो मानकर चलें कि उत्तर भारत की ट्रेनें (जैसे- राजधानी, शताब्दी, पूर्वा एक्सप्रेस) 4 से 10 घंटे तक लेट हो सकती हैं। घर से निकलने से पहले NTES ऐप पर स्टेटस चेक करें। हवाई यात्री: सुबह की फ्लाइट्स में देरी या कैंसिलेशन हो सकता है। एयरलाइंस के संपर्क में रहें। सड़क यात्री: हाइवे पर 'पार्किंग लाइट्स' जलाकर चलें। अगर कोहरा बहुत घना हो, तो गाड़ी को सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर रोक दें।   3. कृषि और किसान (Farmers' Corner) फायदा: यह ठंड गेहूं (Wheat) की फसल के लिए 'सोने' (Gold) के समान है। तापमान जितना गिरेगा, गेहूं की पैदावार उतनी अच्छी होगी। नुकसान: सरसों, आलू और टमाटर की फसल को 'पाले' (Frost) से खतरा है। किसान भाई शाम के समय खेतों में हल्की सिंचाई (Irrigation) करें या धुंआ करें ताकि तापमान नियंत्रित रहे।   भाग 7: कल के मौसम की 'टाइमलाइन' (Hourly Weather Expectation for 10 Jan) सुबह 04:00 AM - 09:00 AM: अत्यधिक घना कोहरा (दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी)। दृश्यता < 50 मीटर। तापमान न्यूनतम स्तर पर। सुबह 09:00 AM - 12:00 PM: कोहरा छंटना शुरू होगा, लेकिन सूरज धुंधला दिखाई देगा। शीतलहर जारी रहेगी। दोपहर 12:00 PM - 03:00 PM: हल्की धूप (पूर्वी भारत और गुजरात में)। उत्तर भारत में 'कोल्ड डे' की स्थिति। शाम 05:00 PM के बाद: तापमान में फिर तेजी से गिरावट। कोहरा दोबारा बनना शुरू होगा।   10 जनवरी 2026 का दिन इस सीजन के सबसे ठंडे और चुनौतीपूर्ण दिनों में से एक होने वाला है। जहां एक ओर कोहरा हमारी रफ्तार को धीमा करेगा, वहीं दूसरी ओर बारिश और बर्फबारी कुदरत के बदलते मिजाज का एहसास कराएगी। ऐसे मौसम में सबसे बड़ी समझदारी यही है कि आप सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और मौसम विभाग की चेतावनियों को नजरअंदाज न करें।   अगर बहुत जरूरी न हो, तो कल सुबह 10 बजे तक घर के अंदर ही रहें। गर्म पानी पिएं, पौष्टिक भोजन करें और अपने आसपास के बेजुबान जानवरों और जरूरतमंदों का भी ख्याल रखें, जिनके लिए यह ठंड जानलेवा हो सकती है।   अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) Q: कल दिल्ली में सबसे ज्यादा ठंड कब होगी? A: कल सुबह 4 बजे से 7 बजे के बीच दिल्ली का तापमान सबसे कम (लगभग 4-5 डिग्री सेल्सियस) रहने की उम्मीद है। Q: क्या कल स्कूल बंद रहेंगे? A: अत्यधिक ठंड और कोहरे को देखते हुए यूपी (गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ) और हरियाणा के कई जिलों में प्रशासन ने कक्षा 8 तक के स्कूलों की छुट्टियां घोषित कर दी हैं या समय बदलकर सुबह 10 बजे से कर दिया है। अपने स्कूल से पुष्टि करें। Q: कोहरे में गाड़ी चलाने का सही तरीका क्या है? A: हमेशा लो बीम (Low Beam) पर हेडलाइट रखें, फॉग लैंप जलाएं, बार-बार लेन न बदलें और आगे वाली गाड़ी से उचित दूरी बनाकर रखें। Q: दक्षिण भारत में बारिश कब तक होगी? A: मौसम विभाग के अनुसार, तमिलनाडु और केरल में बारिश का यह दौर अगले 24 से 48 घंटों तक जारी रह सकता है।  Q: 'कोल्ड डे' और 'कोल्ड वेव' में क्या अंतर है? A: 'कोल्ड वेव' (शीतलहर) तब होती है जब न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे गिर जाए। वहीं, 'कोल्ड डे' तब होता है जब अधिकतम तापमान (दिन का तापमान) सामान्य से 4.5 डिग्री या उससे ज्यादा नीचे गिर जाए, यानी दिन में भी कड़ाके की ठंड हो। कल उत्तर भारत में दोनों स्थितियां एक साथ देखने को मिल सकती हैं।

Unknown जनवरी 10, 2026 0
supreme court election commission sir hearing citizenship verification voter list rights article 324 update
Supreme Court Live: चुनाव आयोग ने खींची 'लक्ष्मण रेखा', सुप्रीम कोर्ट में कहा- 'वोटर लिस्ट में एक भी विदेशी बर्दाश्त नहीं'; आधार कार्ड नागरिकता का सबूत नहीं, हमें है जांच का पूरा हक

भारतीय लोकतंत्र (Indian Democracy) की पवित्रता को बनाए रखने के लिए क्या चुनाव आयोग (Election Commission) किसी व्यक्ति की नागरिकता (Citizenship) की जांच कर सकता है? क्या वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए सिर्फ 'आधार कार्ड' (Aadhaar Card) काफी है? इन ज्वलंत और संवैधानिक सवालों पर देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में मंगलवार को एक ऐतिहासिक बहस हुई।READ ALSO:-Voter List 2026: लोकतंत्र के महायज्ञ से पहले 'सफाई' का सबसे बड़ा अभियान; 12 राज्यों में गायब हुए 6.5 करोड़ वोटर्स, यूपी में 'शिफ्टेड' वोटरों की भरमार ने बढ़ाई चिंता   स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) यानी वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण अभियान को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग ने अपना पक्ष पूरी मजबूती से रखा। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट शब्दों में बताया कि संविधान ने उसे यह "अधिकार और कर्तव्य" दोनों प्रदान किए हैं कि वह यह सुनिश्चित करे कि भारत की चुनावी प्रक्रिया में कोई भी विदेशी घुसपैठ न कर सके।   मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में क्या-क्या हुआ, चुनाव आयोग ने संविधान के किन अनुच्छेदों का हवाला दिया और इसका देश के करोड़ों मतदाताओं पर क्या असर होगा— 'खबरीलाल' की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको एक-एक पहलू से रूबरू कराएंगे।   सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? (The Courtroom Drama) मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने यह मामला सुनवाई के लिए आया। मामला था—विभिन्न राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया की वैधता और वोटर लिस्ट से काटे जा रहे नामों का औचित्य।   आयोग की दो टूक: 'विदेशी वोट नहीं डाल सकते' चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) राकेश द्विवेदी ने बेंच के सामने सरकार और आयोग का पक्ष रखा। उन्होंने याचिकाकर्ताओं के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि नागरिकता का निर्धारण करना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में नहीं आता।   राकेश द्विवेदी ने दलील दी: "संविधान निर्माताओं का इरादा बिल्कुल साफ था। वे चाहते थे कि भारत में सरकार चुनने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ 'भारतीय नागरिकों' के पास हो। इसलिए, यह सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है कि वोटर लिस्ट में शामिल होने वाला व्यक्ति भारतीय नागरिक है या नहीं।"   याचिकाकर्ताओं की दलील याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए पहचान के तौर पर आधार कार्ड का विवरण ही काफी होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने तर्क दिया कि किसी व्यक्ति की नागरिकता की जांच करने या उसे विदेशी घोषित करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार या ट्रिब्यूनल्स के पास है, चुनाव आयोग के पास नहीं।   लेकिन आयोग ने इस तर्क को ध्वस्त करते हुए कहा कि आधार कार्ड निवास का प्रमाण हो सकता है, लेकिन नागरिकता का नहीं। इसलिए, SIR प्रक्रिया के दौरान कड़ी जांच अनिवार्य है।   संविधान क्या कहता है? (Constitutional Debates) इस सुनवाई का सबसे अहम हिस्सा तब आया जब चुनाव आयोग के वकील ने इतिहास के पन्ने पलटे। उन्होंने संविधान सभा (Constituent Assembly) की बहसों का हवाला दिया।   संविधान निर्माताओं की मंशा एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि जब संविधान लिखा जा रहा था, तब भी यह चिंता थी कि वोटर लिस्ट में कौन शामिल होगा।   अनुच्छेद 326 (Article 326): यह अनुच्छेद वयस्क मताधिकार (Adult Suffrage) की बात करता है। इसमें साफ लिखा है कि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे, और वह व्यक्ति 'भारत का नागरिक' होना चाहिए। अनुच्छेद 324 (Article 324): यह अनुच्छेद चुनाव आयोग को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण (Superintendence, Direction and Control) की असीमित शक्तियां देता है।   आयोग का तर्क है कि जब संविधान कहता है कि वोटर 'नागरिक' होना चाहिए, तो यह जांचने का अधिकार भी उसी संस्था (ECI) के पास होना चाहिए जो वोटर लिस्ट बना रही है।   आयोग ने कहा: "यह पूरी तरह से क्लियर है कि अपनी स्थापना के समय से ही, संविधान सभा का इरादा था कि वोटर लिस्ट को तैयार करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी नागरिकता की जांच करेंगे और जो नागरिक नहीं हैं, उन्हें निर्वाचन क्षेत्रों की वोटर लिस्ट से बाहर कर देंगे।"   'आधार' बनाम 'नागरिकता' (Aadhaar vs Citizenship) इस केस का एक बड़ा पहलू 'आधार कार्ड' की भूमिका है। पिछले कुछ सालों में आधार को हर जगह अनिवार्य सा कर दिया गया है। लेकिन चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक लकीर खींच दी है।   ECI का तर्क: आधार वोटिंग का लाइसेंस नहीं आयोग ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए सिर्फ आधार कार्ड को आधार नहीं बनाया जा सकता।   आधार एक्ट: आधार कानून खुद कहता है कि यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है। यह भारत में रहने वाले किसी भी निवासी (Resident) को मिल सकता है, चाहे वह विदेशी ही क्यों न हो (अगर वह निर्धारित समय से यहां रह रहा है)। वोटिंग का अधिकार: वोटिंग का अधिकार 'रेसीडेंसी' (निवास) से नहीं, बल्कि 'सिटिजनशिप' (नागरिकता) से आता है। SIR की जरूरत: इसीलिए SIR (स्पेशल इंटेसिव रिवीजन) के दौरान आयोग आधार के अलावा अन्य दस्तावेजों की मांग करता है जो नागरिकता सिद्ध कर सकें (जैसे जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता का विवरण आदि)।   SIR प्रक्रिया - क्यों है जरूरी? चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) का पुरजोर बचाव किया। आयोग ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव (Free and Fair Elections) तब तक संभव नहीं हैं, जब तक वोटर लिस्ट शुद्ध न हो।   आयोग की दलील: "चुनाव तब तक स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं कराए जा सकते जब तक कि वोटर लिस्ट को समय-समय पर गहन रूप से संशोधित (Revised) नहीं किया जाए। हमारा संविधान नागरिक-केंद्रित है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि SIR प्रक्रिया से राज्य की वोटर लिस्ट में एक विदेशी पकड़ा जाता है या सैकड़ों। हमारी कोशिश यह सुनिश्चित करने की होती है कि एक भी विदेशी शामिल न होने पाए।"   संविधान का 'कवच' आयोग ने कहा कि धारा 324 के तहत उसे जो शक्तियां मिली हैं, उसमें वोटर लिस्ट को संशोधित करने का भी संवैधानिक आदेश शामिल है। खासकर आम चुनावों से पहले यह प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।   वोटर लिस्ट से नाम कटना ≠ नागरिकता खत्म होना यह इस सुनवाई का सबसे पेचीदा और महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है। याचिकाकर्ताओं को डर था कि अगर चुनाव आयोग ने किसी का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया, तो वह व्यक्ति 'विदेशी' घोषित हो जाएगा और उसके अधिकार छिन जाएंगे।   आयोग ने इस डर को दूर करते हुए एक बहुत ही महीन लेकिन स्पष्ट अंतर (Distinction) समझाया।   दो अलग-अलग प्रक्रियाएं वोटर लिस्ट से हटाना: चुनाव आयोग ने कहा कि अगर हमें लगता है कि कोई व्यक्ति नागरिकता के दस्तावेज नहीं दिखा पा रहा है, तो हम उसे वोटर लिस्ट से बाहर कर सकते हैं। यह हमारी शक्ति है। विदेशी घोषित करना: आयोग ने माना कि किसी व्यक्ति की नागरिकता खत्म करने या उसे आधिकारिक रूप से 'विदेशी' घोषित करने की शक्ति सिर्फ केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) के पास है।   राकेश द्विवेदी ने कहा: "SIR प्रक्रिया की वजह से, नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत किसी व्यक्ति की नागरिकता इसलिए खत्म नहीं हो जाएगी कि उसे वोटर लिस्ट में रजिस्ट्रेशन के लिए अयोग्य करार दिया गया है। नागरिकता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज होते हैं और हर नागरिक को दस्तावेजों के जरिए अपनी नागरिकता साबित करनी होगी।"   सरल शब्दों में: अगर आपका नाम वोटर लिस्ट से कटता है, तो आप वोट नहीं दे पाएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको देश से निकाल दिया जाएगा। आपकी नागरिकता का फैसला अलग ट्रिब्यूनल में होगा।   रिवीजन प्रक्रिया का 'नेचर' (Nature of Revision) वोटर लिस्ट की पड़ताल कैसे होती है, इस पर भी आयोग ने रोशनी डाली।   विवेक का इस्तेमाल: आयोग के वकील ने कहा कि रिवीजन की प्रक्रिया चुनाव आयोग के विवेक और मौजूदा हालात पर निर्भर करती है। गतिशील प्रक्रिया: वोटर लिस्ट कभी भी अंतिम नहीं होती। इसमें लगातार बदलाव होते रहते हैं: लोगों की मौत होने पर नाम काटना। जगह बदलने (शिफ्टिंग) पर नाम हटाना। 18 साल के नए वोटर्स को जोड़ना। संदिग्ध नागरिकता वाले लोगों की जांच करना।   यह एक सतत प्रक्रिया है जिसे रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट 1950 की धारा 16 के साथ पढ़ा जाना चाहिए। धारा 16 उन अयोग्यताओं (Disqualifications) की बात करती है जिसके तहत किसी को वोटर बनने से रोका जा सकता है—और 'नागरिक न होना' सबसे बड़ी अयोग्यता है।   राजनीतिक निहितार्थ और 2027 का चुनाव सुप्रीम कोर्ट में चल रही यह सुनवाई सिर्फ कानूनी बहस नहीं है, इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति पर पड़ने वाला है।   कड़े नियम: अगर सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के तर्क से सहमत होता है (जैसा कि आयोग का पक्ष मजबूत लग रहा है), तो भविष्य में वोटर कार्ड बनवाना और कठिन हो जाएगा। दस्तावेजों की जांच (Verification) और सख्त होगी। 6.5 करोड़ नाम कटना: हाल ही में जो खबर आई थी कि देश भर में SIR के तहत 6.5 करोड़ नाम काटे गए हैं, आयोग की यह दलील उसी कार्रवाई को सही ठहराती है। आयोग कह रहा है कि हमने जो किया, वह संविधान के दायरे में किया। विपक्ष की चिंता: विपक्षी दल अक्सर आरोप लगाते हैं कि SIR के नाम पर विशेष समुदायों को निशाना बनाया जाता है। लेकिन आयोग ने कोर्ट में साफ कर दिया है कि उसका मकसद किसी समुदाय को नहीं, बल्कि 'गैर-नागरिकों' को बाहर करना है।   गुरुवार को क्या होगा? (What's Next?) मंगलवार की सुनवाई अधूरी रही। अब गुरुवार को इस मामले पर फिर से बहस होगी।   सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की बेंच पर टिकी हैं। क्या कोर्ट आयोग की दलीलों को पूरी तरह स्वीकार करेगा? क्या कोर्ट वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए दस्तावेजों की कोई नई गाइडलाइन जारी करेगा? क्या आधार कार्ड को लेकर कोर्ट कोई नई टिप्पणी करेगा?   लोकतंत्र की रक्षा या अधिकारों का हनन? चुनाव आयोग का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह वोटर लिस्ट की शुद्धता (Purity of Electoral Rolls) के साथ कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। आयोग के लिए 'एक भी विदेशी वोटर' सिस्टम की विफलता है। वहीं, नागरिक अधिकारों के कार्यकर्ताओं की चिंता यह है कि कहीं 'शुद्धिकरण' की इस प्रक्रिया में गरीब और दस्तावेज रहित असली भारतीय नागरिक अपने वोट के अधिकार से वंचित न हो जाएं।   सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो भी हो, यह तय है कि भारत में 'वोटर' की परिभाषा और उसके सत्यापन की प्रक्रिया अब बदलने वाली है। 'खबरीलाल' की टीम इस महत्वपूर्ण सुनवाई पर लगातार नजर बनाए हुए है।   वोटर लिस्ट और नागरिकता - आम आदमी के लिए 5 जरूरी बातें सुप्रीम कोर्ट में चल रही इस बहस से आम आदमी को क्या समझना चाहिए?   वोटर आईडी ≠ नागरिकता: वोटर आईडी कार्ड होना इस बात की गारंटी नहीं है कि आपकी नागरिकता पर कभी सवाल नहीं उठाया जा सकता। दस्तावेज सुरक्षित रखें: अपना जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल के सर्टिफिकेट और माता-पिता के दस्तावेज हमेशा संभाल कर रखें। भविष्य में इनकी जरूरत पड़ सकती है। आधार काफी नहीं: अगर आप नया वोटर आईडी बनवाने जा रहे हैं, तो सिर्फ आधार कार्ड लेकर न जाएं। पते और जन्मतिथि के अन्य प्रमाण भी साथ रखें। लिस्ट चेक करें: जैसा कि SIR अभियान चल रहा है, समय-समय पर चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर चेक करते रहें कि आपका नाम लिस्ट में है या नहीं। नोटिस का जवाब दें: अगर कभी चुनाव आयोग या BLO की तरफ से नागरिकता या दस्तावेजों को लेकर नोटिस मिले, तो उसे नजरअंदाज न करें। तुरंत जवाब दें।

Unknown जनवरी 7, 2026 0
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Voter List 2026: लोकतंत्र के महायज्ञ से पहले 'सफाई' का सबसे बड़ा अभियान; 12 राज्यों में गायब हुए 6.5 करोड़ वोटर्स, यूपी में 'शिफ्टेड' वोटरों की भरमार ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली/लखनऊ (स्पेशल इनवेस्टिगेशन डेस्क/खबरीलाल): भारतीय लोकतंत्र की मजबूती उसकी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता में निहित है। इसी पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश के 12 राज्यों में चले स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) अभियान के पहले चरण के नतीजे मंगलवार को सामने आ गए, और इन नतीजों ने सियासी गलियारों से लेकर आम जनता तक सबको चौंका दिया है।READ ALSO:-Noida Infrastructure: नोएडा में अब 'जाम' बनेगा इतिहास! यमुना किनारे तैयार होगा नया 'सुपर एक्सप्रेसवे'; सेक्टर 94 से 150 तक बदल जाएगी पूरे शहर की तस्वीर   मंगलवार को जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (Draft Voter List) यह बताती है कि वोटर लिस्ट में 'फर्जीवाड़े' और 'अशुद्धियों' की जड़ें कितनी गहरी थीं। आयोग की इस मुहिम में 12 राज्यों से कुल 6.59 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। यह आंकड़ा इतना विशाल है कि इसे अगर एक देश मान लिया जाए, तो यह दुनिया के कई बड़े देशों की आबादी से ज्यादा होगा।   विशेष रूप से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आंकड़ों ने सबको हिला कर रख दिया है। यहां वोटर लिस्ट में सबसे बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक' हुई है। 'खबरीलाल' की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको राज्यवार आंकड़ों का पोस्टमार्टम, नाम कटने की असली वजहें, और अगर आप इस लिस्ट से बाहर हो गए हैं तो वापसी का रास्ता क्या है—सब कुछ विस्तार से बताएंगे।   SIR का महाअभियान और चौंकाने वाले आंकड़े चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट को त्रुटिहीन (Error-free) बनाने के लिए 28 अक्टूबर 2025 से स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) शुरू किया था। यह अभियान 2 महीने और 11 दिन तक चला। इस दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर आयोग के शीर्ष अधिकारियों तक ने घर-घर जाकर और डिजिटल माध्यमों से डेटा का सत्यापन किया।   तस्वीर बदलने वाले आंकड़े इस अभियान से पहले और बाद की तस्वीर में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है।   SIR से पहले (कुल मतदाता): 12 राज्यों में कुल 50.97 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। SIR के बाद (ड्राफ्ट लिस्ट): सत्यापन के बाद यह संख्या घटकर 44.38 करोड़ रह गई है। कुल हटाए गए नाम: 6.59 करोड़। कटौती का प्रतिशत: कुल मतदाताओं का 12.93% हिस्सा लिस्ट से बाहर हो गया है। सरल भाषा में समझें तो औसतन हर 100 वोटर्स में से करीब 13 लोग अब वोटर नहीं रहे।   यह कटौती दिखाती है कि वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल थे जो या तो दुनिया छोड़ चुके हैं (मृत), या अपना निवास बदल चुके हैं (शिफ्टेड), या फिर एक ही व्यक्ति के कई जगह नाम थे (डुप्लीकेट)।   उत्तर प्रदेश - सबसे बड़ी छंटनी का केंद्र आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट की सफाई भी सबसे बड़े पैमाने पर हुई है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में वोटर लिस्ट में भारी अनियमितताएं थीं, जिन्हें इस अभियान में दूर किया गया है।   यूपी का रिपोर्ट कार्ड: कुल नाम कटे: 2.89 करोड़ (यह आंकड़ा देश में काटे गए कुल नामों का लगभग 44% है)। पहले मतदाता: 15.44 करोड़। अब मतदाता: 12.55 करोड़। प्रतिशत: 18.72%। यानी यूपी में हर 100 में से लगभग 19 वोटर्स के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं।   यूपी में नाम कटने की 3 बड़ी वजहें: यूपी के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आया है। यहां 'मृत' या 'फर्जी' वोटरों से ज्यादा बड़ी संख्या उन लोगों की है जो अपना घर छोड़कर कहीं और चले गए हैं।   शिफ्टेड/लापता (Shifted/Missing): 2.89 करोड़ में से सबसे बड़ा हिस्सा 2.17 करोड़ वोटर्स का है जो 'शिफ्टेड' या 'लापता' की श्रेणी में आते हैं। यह पलायन (Migration) या स्थाई पते बदलने की ओर इशारा करता है। मृत (Expired): 46.23 लाख मतदाता ऐसे पाए गए जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनका नाम अभी भी लिस्ट में था। डुप्लीकेट/फर्जी: 25.47 लाख नाम ऐसे थे जो डुप्लीकेट थे (यानी एक व्यक्ति का नाम दो जगह या दो बार)।   राजस्थान - हर 13वां वोटर बाहर राजस्थान में भी चुनाव आयोग का डंडा जोर-शोर से चला है। यहां वोटर लिस्ट में करीब 7.6% की कमी आई है।   राजस्थान का रिपोर्ट कार्ड: कुल नाम कटे: 41.85 लाख। पहले मतदाता: 5.48 करोड़। अब मतदाता: 5.06 करोड़। प्रतिशत: 7.6% (हर 100 में से 8 नाम बाहर)।   वजह: राजस्थान में 'शिफ्टेड' वोटरों की संख्या अन्य श्रेणियों के मुकाबले ज्यादा है।   शिफ्ट/अन्य: 29.6 लाख। मृत: 8.75 लाख। डुप्लीकेट: 3.44 लाख। यह आंकड़ा बताता है कि राजस्थान में भी लोग रोजगार या अन्य कारणों से अपना मूल निवास स्थान छोड़कर दूसरी जगह बस रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपना वोटर कार्ड अपडेट नहीं करवाया था।   मध्य प्रदेश - स्थिर सफाई अभियान मध्य प्रदेश (MP) में भी सफाई अभियान के तहत लाखों नाम हटाए गए हैं। हालांकि, यूपी और गुजरात के मुकाबले यहां प्रतिशत थोड़ा कम है, फिर भी संख्या लाखों में है।   मध्य प्रदेश का रिपोर्ट कार्ड: कुल नाम कटे: 42.74 लाख। पहले मतदाता: 5.74 करोड़। अब मतदाता: 5.31 करोड़। प्रतिशत: 7.44% (हर 100 में से 7 नाम बाहर)।   वजह: एमपी में भी 'शिफ्टेड' वोटर्स की तादाद सबसे ज्यादा है।   शिफ्ट/अन्य: 31.51 लाख। मृत: 8.46 लाख। डुप्लीकेट: 2.77 लाख।   गुजरात और तमिलनाडु - भारी कटौती वाले राज्य यूपी के बाद अगर कहीं सबसे ज्यादा प्रतिशत में नाम कटे हैं, तो वे राज्य गुजरात और तमिलनाडु हैं। इन दोनों राज्यों में 'माइग्रेशन' (Migration) का असर साफ दिखता है।   गुजरात: 14.52% नाम साफ कुल नाम कटे: 73.73 लाख। पहले: 5.08 करोड़ -> अब: 4.34 करोड़। वजह: यहां सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा 'शिफ्टेड' वोटर्स का है। कुल 73 लाख में से 51.85 लाख लोग अपनी जगह से शिफ्ट हो चुके थे या लापता थे। यह दिखाता है कि गुजरात में आंतरिक प्रवासन (Internal Migration) काफी ज्यादा है।   तमिलनाडु: हर 100 में से 15 बाहर कुल नाम कटे: 97 लाख। पहले: 6.41 करोड़ -> अब: 5.44 करोड़। प्रतिशत: 15.13%। वजह: यहां भी 66.7 लाख वोटर्स शिफ्टेड या लापता श्रेणी में पाए गए। मृत मतदाताओं की संख्या (26.95 लाख) भी काफी अधिक थी।   पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों का हाल   पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट को लेकर अक्सर राजनीतिक विवाद होते रहे हैं। इस बार आयोग ने यहां भी सख्ती दिखाई है।   कुल नाम कटे: 58.20 लाख। प्रतिशत: 7.6%। खास बात: यहां मृत मतदाताओं की संख्या (24.17 लाख) काफी ज्यादा पाई गई, जो राजस्थान और एमपी के मुकाबले बहुत अधिक है।   छोटे राज्यों का हाल छत्तीसगढ़: 2.12 करोड़ में से 27.34 लाख (12.9%) नाम कटे। यह प्रतिशत के लिहाज से काफी बड़ा आंकड़ा है। केरल: 2.78 करोड़ में से 24.08 लाख (8.66%) नाम हटे। गोवा: 11.85 लाख में से 1.01 लाख (8.52%) नाम कटे। लक्षद्वीप: यहां सबसे कम असर हुआ। 58 हजार में से केवल 1.6 हजार (2.79%) नाम कटे।   क्यों जरूरी था यह 'सर्जिकल स्ट्राइक'? (Impact Analysis) 6.59 करोड़ नामों का कटना कोई सामान्य घटना नहीं है। इसके दूरगामी परिणाम होंगे:   वोटिंग प्रतिशत में सुधार: अक्सर हम देखते हैं कि चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 60-65% के आसपास रहता है। इसका एक बड़ा कारण यह भी होता है कि वोटर लिस्ट में ऐसे लोगों के नाम होते हैं जो वहां रहते ही नहीं या मर चुके हैं। जब 'डिनॉमिनेटर' (कुल वोटर) कम होगा और केवल असली वोटर बचेंगे, तो वोटिंग प्रतिशत अपने आप सुधरेगा। फर्जी वोटिंग पर लगाम: डुप्लीकेट वोटर्स (एक व्यक्ति के दो कार्ड) हटने से बोगस वोटिंग की संभावना खत्म हो जाएगी। संसाधनों की बचत: चुनाव कराने में प्रति वोटर खर्च आता है। लिस्ट छोटी और सटीक होने से सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल होगा।   क्या आपका नाम भी कटा? ऐसे करें चेक (Citizen Guide) यह ड्राफ्ट लिस्ट (Draft List) है, फाइनल नहीं। इसका मतलब है कि अगर आयोग से गलती हुई है और आपका नाम गलत तरीके से कट गया है, तो आपके पास अभी भी मौका है।   स्टेप 1: अपना नाम कैसे चेक करें? आज ही अपना स्टेटस चेक करें, कल का इंतजार न करें।   वेबसाइट: चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाएं। होम पेज पर "Search in Electoral Roll" पर क्लिक करें। अपना राज्य (State) और जिला (District) चुनें। अपना नाम, पिता/पति का नाम और जन्मतिथि डालें। अगर नाम लिस्ट में है, तो आपकी डिटेल्स दिख जाएंगी। मोबाइल ऐप: अपने फोन में 'Voter Helpline' या 'ECINET' ऐप डाउनलोड करें और वहां चेक करें। ऑफलाइन: अपने इलाके के BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) के पास जाएं। उनके पास नई ड्राफ्ट लिस्ट आ चुकी है।   स्टेप 2: अगर नाम नहीं मिला तो क्या करें? अगर लिस्ट में आपका नाम नहीं है, तो घबराएं नहीं। आयोग ने आपको फिर से मौका दिया है।   फॉर्म-6 (Form-6): यह 'ब्रह्मास्त्र' है। अगर आपका नाम कट गया है या आप नए वोटर (18 वर्ष) हैं, तो तुरंत Form-6 भरें। यह 'नया नाम जोड़ने' के लिए होता है। फॉर्म-7 (Form-7): अगर आपको लगता है कि लिस्ट में अभी भी किसी मृत व्यक्ति या फर्जी वोटर का नाम है, तो आप Form-7 भरकर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। (नाम हटाने के लिए)। फॉर्म-8 (Form-8): अगर नाम तो है, लेकिन स्पेलिंग गलत है, फोटो पुरानी है, या आपने घर बदला है (शिफ्टिंग), तो Form-8 भरें। यह 'करेक्शन' (Correction) के लिए है।   स्टेप 3: आवेदन कहां करें? ऑनलाइन: voters.eci.gov.in या 'Voter Helpline App' से घर बैठे फॉर्म भरें। फोटो और आईडी प्रूफ अपलोड करें। ऑफलाइन: BLO के पास फॉर्म जमा करें या अपनी तहसील में स्थित मतदाता पंजीकरण केंद्र (VRC) पर जाएं।   महत्वपूर्ण तिथियां और आगे की राह दावे और आपत्तियां: ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद अब आयोग 'दावे और आपत्तियां' (Claims and Objections) लेगा। नोटिस: जिन लोगों के नाम काटने का प्रस्ताव है, अगर वे आपत्ति करते हैं, तो उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। सुनवाई: अगर आपने दावा किया है कि आपका नाम गलत कटा है, तो BLO आपके घर आकर वेरिफिकेशन (Cross Check) करेंगे। फाइनल लिस्ट: सभी आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद चुनाव आयोग अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) जारी करेगा।   लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत चुनाव आयोग का यह कदम कड़वा जरूर लग सकता है (खासकर जिनका नाम कटा है), लेकिन लोकतंत्र की सेहत के लिए यह बेहद जरूरी था। यूपी में 2 करोड़ से ज्यादा और देश भर में 6.5 करोड़ 'घोस्ट वोटर्स' (Ghost Voters) का हटना यह सुनिश्चित करेगा कि आने वाले चुनाव ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष हों।   खबरीलाल की अपील: एक जागरूक नागरिक होने के नाते, यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप तुरंत ड्राफ्ट लिस्ट चेक करें। अगर आपके परिवार में कोई ऐसा सदस्य है जो अब इस दुनिया में नहीं है या शिफ्ट हो गया है, तो उसकी जानकारी आयोग को दें। और अगर आपका नाम गलती से कटा है, तो Form-6 भरने में देर न करें।   (चुनाव, राजनीति और आपके अधिकारों से जुड़ी हर खबर के लिए पढ़ते रहें 'खबरीलाल' - सच, जो आप तक पहुंचे।)   FAQ: आपके मन में उठने वाले सवाल प्रश्न 1: मेरा नाम क्यों कटा होगा? मैं तो यहीं रहता हूँ। उत्तर: कभी-कभी तकनीकी गलती या BLO के सर्वे के दौरान आपके घर पर न मिलने से आपको 'शिफ्टेड' मान लिया जाता है। आप तुरंत फॉर्म-6 भरकर इसे ठीक करवा सकते हैं। प्रश्न 2: क्या मैं अब भी वोट दे पाऊंगा? उत्तर: अगर ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं है, तो आप वोट नहीं दे पाएंगे। इसलिए फाइनल लिस्ट आने से पहले फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाना अनिवार्य है। प्रश्न 3: नए वोटर (18 साल) कब तक अप्लाई कर सकते हैं? उत्तर: जो युवा 1 जनवरी 2026 को 18 साल के हो चुके हैं या होने वाले हैं, वे अभी फॉर्म-6 भरकर अपना वोटर कार्ड बनवा सकते हैं। प्रश्न 4: फॉर्म भरने के कितने दिन बाद नाम जुड़ता है? उत्तर: आमतौर पर वेरिफिकेशन प्रक्रिया में 15 से 30 दिन का समय लगता है। फाइनल लिस्ट जारी होने पर आपका नाम उसमें शामिल हो जाएगा।

Unknown जनवरी 7, 2026 0
supreme court judgment property ownership registry not enough mutation mandatory mahnur fatima case update
प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए 'सुप्रीम' चेतावनी: केवल रजिस्ट्री करवाकर न बैठें चैन से, वरना धो बैठेंगे घर-जमीन; सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बदल दी 'मालिक' की परिभाषा

नई दिल्ली (खबरीलाल लीगल डेस्क): क्या आप ने अभी-अभी कोई फ्लैट, प्लॉट या मकान खरीदा है? क्या आपने रजिस्ट्रार ऑफिस में जाकर रजिस्ट्री करवा ली है और स्टाम्प ड्यूटी चुका दी है? अगर आप यह सोचकर रिलैक्स हो रहे हैं कि रजिस्ट्री का कागज हाथ में आते ही आप उस प्रॉपर्टी के 'मालिक' बन गए हैं, तो सावधान हो जाइए। आपकी यह गलतफहमी आपको भविष्य में कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगवा सकती है और आपकी मेहनत की कमाई डूब सकती है।   साल 2025 में देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने प्रॉपर्टी ओनरशिप (मालिकाना हक) को लेकर एक ऐतिहासिक और आंखें खोलने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि "केवल सेल डीड (Sale Deed) या रजिस्ट्री कागज का होना किसी व्यक्ति को संपत्ति का पूर्ण स्वामी साबित करने के लिए काफी नहीं है।"READ ALSO:-Ration Card Alert: फ्री राशन लेने वालों के लिए खतरे की घंटी! सरकार का नया फरमान- तुरंत निपटा लें e-KYC, वरना रद्द हो जाएगा नाम; यहाँ है 'A to Z' गाइड   सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल मचा दी है। यह फैसला उन लाखों लोगों के लिए एक सबक है जो रजिस्ट्री को ही सब कुछ मान लेते हैं और सरकारी रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज (Mutation) करवाने में लापरवाही बरतते हैं। 'खबरीलाल' आज आपको इस फैसले की बारीकियों, म्यूटेशन के महत्व और उन दस्तावेजों के बारे में विस्तार से बताएगा, जिनके बिना आपकी प्रॉपर्टी कभी भी विवादों में घिर सकती है।   1. क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला? (The Verdict) सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम फैसला 'महनूर फातिमा इमरान बनाम स्टेट ऑफ तेलंगाना' (Mahnur Fatima Imran vs State of Telangana) मामले की सुनवाई के दौरान सुनाया।   अदालत का तर्क: बेंच ने कहा कि जब कोई व्यक्ति संपत्ति खरीदता है, तो सेल डीड (Registry) केवल दो पार्टियों (खरीदार और विक्रेता) के बीच संपत्ति के हस्तांतरण का एक सबूत है। लेकिन, असली मालिकाना हक तब साबित होता है जब राज्य सरकार के राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) में पुराने मालिक का नाम हटाकर नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है।   अदालत ने कहा, "जब तक संबंधित संपत्ति का म्यूटेशन (नामांतरण) राजस्व रिकॉर्ड में नहीं होता, तब तक सरकारी दस्तावेजों में नए खरीदार का नाम दर्ज नहीं माना जाएगा और न ही उसे पूर्ण स्वामित्व का अधिकार मिलेगा।" यह फैसला प्रॉपर्टी फ्रॉड रोकने और टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के उद्देश्य से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   2. रजिस्ट्री और म्यूटेशन में अंतर: समझिए यह खेल आम जनता अक्सर 'सेल डीड' (Registry) और 'म्यूटेशन' (Mutation) को एक ही समझ लेती है, जो सबसे बड़ी भूल है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।   1. सेल डीड (Registry): यह वह दस्तावेज है जो आप सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में स्टाम्प ड्यूटी देकर बनवाते हैं। यह साबित करता है कि विक्रेता ने आपसे पैसा लिया है और संपत्ति आपको सौंप दी है। यह मालिकाना हक का प्राथमिक दस्तावेज है, लेकिन अंतिम नहीं। 2. म्यूटेशन (नामांतरण/दाखिल-खारिज): यह एक प्रक्रिया है जिसके जरिए स्थानीय निकाय (नगर निगम, तहसील, पंचायत) के रिकॉर्ड में संपत्ति का 'टाइटल' बदला जाता है। इसमें सरकारी रजिस्टर से बेचने वाले का नाम काटकर (खारिज) खरीदने वाले का नाम चढ़ाया (दाखिल) जाता है। इसी के आधार पर प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद आपके नाम पर कटती है। बिजली-पानी का कनेक्शन भी इसी आधार पर मिलता है।   उदाहरण: मान लीजिए आपने एक कार खरीदी। आपने शोरूम से कार के पैसे दिए और रसीद ले ली (यह रजिस्ट्री जैसा है)। लेकिन जब तक आप RTO ऑफिस जाकर कार की RC अपने नाम ट्रांसफर नहीं करवाते, तब तक सरकारी रिकॉर्ड में वह कार आपकी नहीं मानी जाएगी। ठीक यही नियम प्रॉपर्टी पर लागू होता है।   3. नामांतरण न होने पर कैसे होता है 'डबल गेम' (Fraud Warning) सुप्रीम कोर्ट ने म्यूटेशन पर इतना जोर क्यों दिया? इसका सबसे बड़ा कारण है जमीनों में होने वाला फर्जीवाड़ा। म्यूटेशन न कराने की लापरवाही का फायदा उठाकर भू-माफिया कैसे खेल करते हैं, इसे समझिए:   फ्रॉड का तरीका (Modus Operandi): पहला चरण: व्यक्ति 'A' ने अपनी जमीन व्यक्ति 'B' को बेची। 'B' ने रजिस्ट्री तो करवा ली, लेकिन म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) नहीं करवाया। दूसरा चरण: चूंकि म्यूटेशन नहीं हुआ, इसलिए सरकारी खतौनी (राजस्व रिकॉर्ड) में अभी भी मालिक के तौर पर 'A' का ही नाम बोल रहा है। तीसरा चरण: व्यक्ति 'A' ने देखा कि रिकॉर्ड में उसी का नाम है। उसने धोखे से वही जमीन व्यक्ति 'C' को बेच दी। चौथा चरण: जब 'C' ने रिकॉर्ड चेक किया तो उसे 'A' का नाम दिखा और उसने जमीन खरीद ली। नतीजा: एक ही जमीन दो लोगों को बिक गई। अब 'B' और 'C' के बीच सालों साल कोर्ट में केस चलेगा। अगर 'B' ने समय पर म्यूटेशन करवा लिया होता, तो 'C' को पता चल जाता कि जमीन बिक चुकी है।   एक्सपर्ट की राय: रियल एस्टेट वकीलों का कहना है कि रजिस्ट्री के 45 से 90 दिनों के भीतर म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी करवा लेनी चाहिए।   4. प्रॉपर्टी के प्रकार और म्यूटेशन का स्थान हर प्रॉपर्टी का म्यूटेशन एक ही जगह नहीं होता। जमीन की प्रकृति (Nature of Land) के हिसाब से आपको अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं: खेती की जमीन (Agricultural Land): इसका म्यूटेशन तहसीलदार या पटवारी के रिकॉर्ड में होता है। इसे 'खतौनी' में नाम चढ़ाना कहते हैं। आवासीय प्रॉपर्टी (Residential Property): अगर मकान शहर में है, तो म्यूटेशन नगर निगम (Municipal Corporation), नगर पालिका या नगर परिषद में होगा। अगर गांव में है, तो ग्राम पंचायत में होगा। औद्योगिक जमीन (Industrial Land): फैक्ट्री या इंडस्ट्रियल प्लॉट का म्यूटेशन जिले के औद्योगिक विकास केंद्र (IDC) या संबंधित अथॉरिटी (जैसे नोएडा अथॉरिटी, DDA आदि) में होता है।   5. सिर्फ रजिस्ट्री नहीं, ये 3 कागज हैं 'कवच' (Essential Documents) सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में रजिस्ट्री के अलावा कुछ अन्य दस्तावेजों की अहमियत पर भी प्रकाश डाला है। एक जागरूक खरीदार के तौर पर आपको इन तीन शब्दों का मतलब रटा होना चाहिए:   A. मदर डीड (Mother Deed): यह प्रॉपर्टी का 'जन्म प्रमाण पत्र' है। इससे पता चलता है कि संपत्ति की शुरुआत कहां से हुई। क्यों जरूरी है: मान लीजिए आप जिससे घर खरीद रहे हैं, उसने उसे किसी और से खरीदा था। मदर डीड यह ट्रेस करती है कि पिछले 30-40 सालों में यह प्रॉपर्टी किस-किस के हाथ से गुजरी है। अगर चेन (Chain) में कहीं भी गड़बड़ी है, तो प्रॉपर्टी न खरीदें।   B. एंकेम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (Encumbrance Certificate - EC): इसे हिंदी में 'भार-मुक्त प्रमाण पत्र' कहते हैं। यह सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से मिलता है। क्या बताता है: यह सर्टिफिकेट बताता है कि पिछले 13 से 30 सालों में इस प्रॉपर्टी पर कोई लोन (Mortgage), कोर्ट केस या कोई कानूनी बकाया तो नहीं है। अहमियत: अगर आप बिना EC देखे प्रॉपर्टी खरीदते हैं और बाद में पता चलता है कि उस पर बैंक का लोन था, तो बैंक आपकी प्रॉपर्टी जब्त कर सकता है।   C. म्यूटेशन रजिस्टर (Mutation Extract): यह इस बात का सबूत है कि प्रॉपर्टी सरकारी रिकॉर्ड में अपडेटेड है। यह दिखाता है कि पिछले मालिक ने हाउस टैक्स, वाटर टैक्स और अन्य सरकारी देनदारियां चुकाई हैं या नहीं।   6. प्रॉपर्टी खरीदने से पहले की चेकलिस्ट (Buyer's Guide) खबरीलाल अपने पाठकों को सलाह देता है कि प्रॉपर्टी डीलर की मीठी बातों में न आएं। डील फाइनल करने से पहले ये 5 कदम जरूर उठाएं: टाइटल सर्च (Title Search): किसी अच्छे वकील से प्रॉपर्टी के पिछले 30 साल के रिकॉर्ड की जांच करवाएं। EC निकलवाएं: सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से खुद जाकर एंकेम्ब्रेंस सर्टिफिकेट निकालें। म्यूटेशन स्टेटस: देखें कि बेचने वाले का नाम राजस्व रिकॉर्ड/नगर निगम में दर्ज है या नहीं। फिजिकल वेरिफिकेशन: मौके पर जाकर देखें कि प्रॉपर्टी पर किसी और का कब्जा तो नहीं है। अखबार में नोटिस: बड़ी डील करने से पहले स्थानीय अखबार में 'आम सूचना' (Public Notice) दें ताकि अगर किसी को आपत्ति हो तो सामने आ सके।   7. अगर म्यूटेशन नहीं हुआ तो क्या होगा? (Consequences) अगर आपने सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी को नजरअंदाज किया, तो आपको निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं:   बेचने में दिक्कत: भविष्य में आप वह प्रॉपर्टी किसी और को नहीं बेच पाएंगे क्योंकि खरीदार आपसे म्यूटेशन की कॉपी मांगेगा। मुआवजा नहीं मिलेगा: अगर सरकार सड़क या प्रोजेक्ट के लिए आपकी जमीन का अधिग्रहण (Acquisition) करती है, तो मुआवजा उसे मिलेगा जिसका नाम राजस्व रिकॉर्ड में होगा (यानी पुराना मालिक), आपको नहीं। लोन नहीं मिलेगा: बैंक प्रॉपर्टी पर लोन देने से पहले म्यूटेशन का कागज मांगते हैं।   सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला प्रॉपर्टी बाजार में पारदर्शिता (Transparency) लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। "रजिस्ट्री करा ली, काम खत्म"—यह सोच अब पुरानी हो चुकी है। आज के दौर में 'जागरूक ग्राहक' ही सुरक्षित ग्राहक है। अपनी गाढ़ी कमाई निवेश करने से पहले मदर डीड खंगालें, EC चेक करें और रजिस्ट्री के तुरंत बाद म्यूटेशन के लिए आवेदन करें। याद रखें, कागज पूरे होंगे, तभी घर अपना होगा।

Unknown जनवरी 6, 2026 0
imd weather update fog alert in 22 states snowfall in 3-states cold wave forecast january 6 to 12 2026
IMD Weather Alert: कुदरत का 'श्वेत प्रहार'! 22 राज्यों में घने कोहरे का 'लॉकडाउन', 3 राज्यों में बर्फबारी; 10 जनवरी तक हाड़ कंपाने वाली ठंड के लिए हो जाएं तैयार

नई दिल्ली (खबरीलाल वेदर डेस्क): जनवरी का पहला सप्ताह खत्म होते-होते ठंड ने अपने असली तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। अगर आप सोच रहे थे कि ठंड अब जाने वाली है, तो भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का ताजा अपडेट आपको सिहरन से भर देगा। 5 जनवरी की रात को जारी किए गए आधिकारिक बुलेटिन में मौसम विभाग ने जो नक्शा पेश किया है, उसमें आधा हिंदुस्तान कोहरे (Fog) की सफेद चादर और शीतलहर (Cold Wave) की चपेट में दिखाई दे रहा है।READ ALSO:-मेरठ: शाम ढलते ही 'मौत' की आहट! गांधी बाग से मोदीपुरम तक तेंदुए की दहशत; कैंट में मिले घायल जानवर ने खड़े किए रोंगटे   IMD के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, देश के 22 राज्यों में घने से बहुत घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 3 पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी की चेतावनी दी गई है। मौसम का यह रौद्र रूप आगामी 10 से 12 जनवरी तक बना रहेगा। 'खबरीलाल' आपके लिए लाया है मौसम का यह विस्तृत विश्लेषण, ताकि आप अपनी यात्रा और दिनचर्या को उसी अनुसार प्लान कर सकें।   1. कोहरे का 'चक्रव्यूह': 22 राज्यों में थमेगी रफ्तार मौसम विभाग के सैटेलाइट इमेजरी और डेटा बताते हैं कि इंडो-गैंजेटिक प्लेन्स (गंगा के मैदानी इलाके) में नमी और कम तापमान का ऐसा संगम बना है कि सूरज की रोशनी का जमीन तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।   किस राज्य में कब तक रहेगा कोहरे का कहर? पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़: यहाँ स्थिति सबसे ज्यादा खराब रहने वाली है। IMD ने चेतावनी दी है कि 6 जनवरी से लेकर 10 जनवरी तक इन राज्यों में सुबह और रात के समय 'घना से बहुत घना कोहरा' (Dense to Very Dense Fog) छाया रहेगा। दृश्यता (Visibility) 50 मीटर से भी कम रहने की आशंका है। उत्तर प्रदेश (UP): देश का सबसे बड़ा राज्य कोहरे की डबल मार झेलेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश: यहाँ 6 जनवरी से 8 जनवरी तक और फिर 9 से 12 जनवरी तक घने कोहरे का अलर्ट है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश: यहाँ 9 से 12 जनवरी तक स्थिति बेहद गंभीर रहने वाली है। राजस्थान: रेगिस्तानी इलाके भी इससे अछूते नहीं हैं। उत्तराखंड और राजस्थान में 6 जनवरी से 8 जनवरी तक घने कोहरे की चेतावनी जारी की गई है। मध्य प्रदेश (MP): 6 से 8 जनवरी तक एमपी के अलग-अलग इलाकों में, खासकर उत्तरी मध्य प्रदेश में कोहरा छाया रहेगा।   पूर्वी भारत का हाल: कोहरे का विस्तार सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं है।   बिहार: यहाँ 12 जनवरी तक घने कोहरे की चादर तनी रहेगी। पश्चिम बंगाल और झारखंड: गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल और झारखंड में 6 जनवरी को, जबकि उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 7 जनवरी तक कोहरा छाया रहेगा। पूर्वोत्तर भारत (North East): असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 10 जनवरी 2026 तक सुबह के समय घने कोहरे की संभावना है।   2. पहाड़ों पर 'सफेद आफत': 3 राज्यों में बर्फबारी का अलर्ट मैदानी इलाकों में जहाँ कोहरा परेशान करेगा, वहीं पहाड़ों पर बर्फबारी (Snowfall) पर्यटकों को लुभाएगी लेकिन स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ाएगी। एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने के कारण मौसम विभाग ने 6 जनवरी के लिए इन राज्यों में अलर्ट जारी किया है:   जम्मू और कश्मीर: ऊंचे पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश की संभावना है। हिमाचल प्रदेश: कुल्लू, मनाली, लाहौल-स्पीति और किन्नौर में ताजा बर्फबारी हो सकती है। उत्तराखंड: यहाँ भी 6 जनवरी को बर्फबारी का अलर्ट है, जिससे बद्रीनाथ, केदारनाथ और औली जैसे क्षेत्रों में पारा शून्य से काफी नीचे जा सकता है।   3. शीतलहर (Cold Wave): हड्डियों में उतरती ठंड कोहरा सिर्फ दृश्यता कम करता है, लेकिन शीतलहर शरीर को भेद देती है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोहरे के साथ-साथ बर्फीली हवाएं भी चलेंगी, जो 'कोल्ड डे' (Cold Day) की स्थिति पैदा करेंगी।   शीतलहर का टाइम-टेबल: राजस्थान: 6 और 7 जनवरी को पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में गंभीर शीतलहर चल सकती है। वहीं, 8 से 10 जनवरी तक पश्चिमी राजस्थान में इसका प्रभाव बना रहेगा। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़: 6 जनवरी से 9 जनवरी तक यहाँ के कई इलाकों में शीतलहर की स्थिति 'बहुत संभव' है। मध्य प्रदेश और बिहार: 6 जनवरी को इन राज्यों में ठंडी हवाएं लोगों को ठिठुरने पर मजबूर करेंगी। झारखंड और छत्तीसगढ़: 6 से 8 जनवरी के दौरान छत्तीसगढ़ और 6-7 जनवरी को झारखंड में बर्फीली हवाएं चलने का अनुमान है। पश्चिम बंगाल: उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 6 और 7 जनवरी को शीतलहर का अलर्ट है।   4. 6 जनवरी: आज कैसा रहेगा मौसम का मिजाज? (Day Forecast) मौसम विभाग ने विशेष रूप से 6 जनवरी के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। अगर आप आज घर से बाहर निकलने का प्लान बना रहे हैं, तो यह सेक्शन आपके लिए है:   बेहद घना कोहरा (Very Dense Fog): पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तरी मध्य प्रदेश और पंजाब। यहाँ ड्राइविंग करते समय विशेष सावधानी बरतें। शीतलहर (Cold Wave): छत्तीसगढ़, पूर्वी राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, झारखंड और पंजाब में कुछ स्थानों पर। कोल्ड डे (Cold Day): बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और सिक्किम। इसका मतलब है कि दिन में धूप नहीं निकलेगी और अधिकतम तापमान सामान्य से बहुत कम रहेगा। घना कोहरा (Dense Fog): असम, मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा, राजस्थान, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश।   5. समुद्र में हलचल: 55 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं मौसम विभाग की चेतावनी सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। समुद्र में भी हलचल तेज है। मछुआरों और तटीय इलाकों के लोगों के लिए विशेष चेतावनी जारी की गई है।   हवाओं की गति: श्रीलंका तट और बंगाल की खाड़ी: दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी और कोमोरिन क्षेत्र में 35 से 45 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। झोंकों की रफ्तार 55 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। सोमालिया तट: यहाँ हवाओं की गति और भी तेज रहने वाली है। 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जो झोंकों में 65 किमी प्रति घंटे तक जा सकती हैं।   मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे इन क्षेत्रों में समुद्र के अंदर न जाएं।   6. यातायात पर असर: ट्रेनों और उड़ानों पर 'ब्रेक' इस मौसम का सीधा असर यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है।   रेलवे: कोहरे के कारण उत्तर भारत की ओर आने वाली और यहाँ से जाने वाली दर्जनों ट्रेनें देरी से चल रही हैं। राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनें भी 2 से 5 घंटे की देरी से चल रही हैं। कई ट्रेनों को रद्द भी किया जा सकता है। एयरलाइंस: दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट, अमृतसर, चंडीगढ़, लखनऊ और जयपुर एयरपोर्ट पर सुबह के समय विजिबिलिटी कम होने से उड़ानों में देरी हो रही है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक करें। सड़क यातायात: यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे पर कोहरे के कारण वाहनों की रफ्तार थम गई है। पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करने को कहा है।   7. हेल्थ एडवाइजरी: दिल और सांस के मरीज रहें सावधान भीषण ठंड और कोहरा स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौतियां लेकर आता है। डॉक्टरों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है:   हार्ट अटैक का खतरा: अत्यधिक ठंड में नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। बुजुर्गों को सुबह की सैर (Morning Walk) से बचने की सलाह दी गई है। धूप निकलने पर ही बाहर निकलें। सांस की तकलीफ: कोहरे में प्रदूषक तत्व (Pollutants) जम जाते हैं, जिससे AQI खराब हो जाता है। अस्थमा और सीओपीडी (COPD) के मरीजों को अपना इन्हेलर पास रखना चाहिए और मास्क पहनना चाहिए। हाइपोथर्मिया: बच्चों और बुजुर्गों को कपड़ों की कई परतें (Layering) पहनाएं। शरीर का तापमान कम होने से हाइपोथर्मिया हो सकता है।   8. किसानों के लिए सलाह: पाले से फसल को बचाएं शीतलहर और पाला (Frost) रबी की फसलों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को निम्नलिखित सलाह दी है: सिंचाई: खेत में हल्की सिंचाई करें। नमी होने से जमीन का तापमान बना रहता है और फसल पाले से बच जाती है। धुआं: रात के समय खेत के चारों ओर मेड़ों पर कूड़ा-करकट जलाकर धुआं करें। इससे तापमान में थोड़ी वृद्धि होती है। छिड़काव: सरसों और आलू की फसल को पाले से बचाने के लिए 0.1% गंधक के तेजाब (Sulphuric Acid) का छिड़काव किया जा सकता है।   अभी राहत के आसार नहीं कुल मिलाकर, मौसम विभाग का संकेत साफ है कि जनवरी का दूसरा हफ्ता (6 से 12 जनवरी) ठंड के लिहाज से सबसे क्रूर रहने वाला है। एक तरफ पहाड़ों पर गिरती बर्फ मैदानी इलाकों को और ठंडा करेगी, तो दूसरी तरफ कोहरा सूरज को रोककर रखेगा।   'खबरीलाल' आपसे अपील करता है कि मौसम की मार से बचने के लिए पूरी तैयारी रखें। बेवजह यात्रा से बचें और गर्म कपड़ों का सहारा लें। मौसम के हर अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें।

Unknown जनवरी 6, 2026 0
india first bullet train project deadline 2027 ashwini vaishnaw confirms mumbai ahmedabad route updates
रफ्तार की क्रांति: 2027 में हकीकत बनेगा 'बुलेट ट्रेन' का सपना, मुंबई से अहमदाबाद की दूरी सिमटकर रह जाएगी 2 घंटे, रेल मंत्री ने बताया पूरा रोडमैप

भारत के परिवहन इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। दशकों से जिस 'बुलेट ट्रेन' (Bullet Train) की चर्चा हर जुबान पर थी, अब वह कागजों और फाइलों से निकलकर धरातल पर आकार ले चुकी है। देश की बहुप्रतीक्षित मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना (MAHSR) को लेकर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अब तक का सबसे बड़ा और ठोस अपडेट दिया है।READ ALSO:-FASTag धारकों के लिए अब तक की सबसे बड़ी खुशखबरी: NHAI ने खत्म किया KYV का सिरदर्द, 1 फरवरी से लागू होगी 'नो-टेंशन' वाली व्यवस्था   गुरुवार और शुक्रवार को दी गई जानकारी के मुताबिक, भारत अपनी आजादी के अमृत काल में, यानी 15 अगस्त 2027 के आसपास अपनी पहली बुलेट ट्रेन को पटरियों पर सरपट दौड़ते हुए देख सकता है। यह परियोजना न केवल भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि यह देश के मध्यम वर्ग की यात्रा की परिभाषा को बदलने का एक क्रांतिकारी कदम भी है।   2027 - एक नई समय सीमा, एक नई उम्मीद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि बुलेट ट्रेन परियोजना का काम "युद्ध स्तर" पर चल रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो 2027 में देशवासी बुलेट ट्रेन में सफर करने का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।   चरणबद्ध तरीके से होगी शुरुआत (Phased Rollout) रेल मंत्री ने बताया कि पूरी परियोजना एक साथ शुरू नहीं होगी, बल्कि इसे चरणों में जनता के लिए खोला जाएगा ताकि सुरक्षा और संचालन को परखा जा सके:   पहला चरण: सबसे पहले सूरत से बिलिमोरा (Surat to Bilimora) के बीच का सेक्शन चालू किया जाएगा। यह सेक्शन 2027 तक बनकर तैयार हो जाएगा। दूसरा चरण: इसके बाद रूट को वापी से सूरत तक बढ़ाया जाएगा। तीसरा चरण: फिर वापी से अहमदाबाद तक कनेक्टिविटी दी जाएगी। चौथा चरण: इसके बाद ठाणे से अहमदाबाद को जोड़ा जाएगा। अंतिम चरण: अंत में, मुंबई से अहमदाबाद का पूरा 508 किलोमीटर का कॉरिडोर जनता के लिए खोल दिया जाएगा।   मध्यम वर्ग के लिए 'गेम चेंजर' अक्सर बुलेट ट्रेन को 'अमीरों की सवारी' कहा जाता है, लेकिन रेल मंत्री ने इस धारणा को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के चालू होने के बाद, यह मिडिल क्लास को तेज, भरोसेमंद और सस्ती आने-जाने की सुविधा देकर इंटरसिटी यात्रा को बदल देगी।" इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जो यात्रा अभी ट्रेन से 7-8 घंटे और बस से 10 घंटे लेती है, वह बुलेट ट्रेन से मात्र 2 घंटे में पूरी हो जाएगी। इससे लोग एक शहर में रहकर दूसरे शहर में नौकरी कर सकेंगे और शाम को घर लौट सकेंगे।   पालघर का 'माउंटेन टनल-5' और इंजीनियरिंग की चुनौतियां इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था पश्चिमी घाट (Western Ghats) की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को पार करना। रेल मंत्री ने शुक्रवार को गर्व के साथ घोषणा की कि प्रोजेक्ट ने एक और बड़ा मील का पत्थर (Milestone) हासिल कर लिया है।   पहाड़ का सीना चीरकर बना रास्ता महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित 'माउंटेन टनल-5' का निर्माण कार्य पूरा हो गया है।   यह सुरंग 1.5 किलोमीटर लंबी है। यह विरार और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच स्थित है। यह पूरे प्रोजेक्ट की सबसे लंबी पहाड़ी सुरंगों में से एक है।   वैष्णव ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में कुल 7 माउंटेन टनल (पहाड़ी सुरंगें) और एक अंडरसी टनल (समुद्र के नीचे सुरंग) शामिल हैं। पहाड़ों में सुरंग बनाना बेहद जोखिम भरा और तकनीकी रूप से कठिन कार्य है, लेकिन भारतीय इंजीनियरों और जापानी सहयोग से इसे समय सीमा के भीतर पूरा किया जा रहा है।   टनल का गणित: कुल सुरंगों की संख्या: 8 (7 महाराष्ट्र में, 1 गुजरात में)। महाराष्ट्र में लंबाई: 6.05 किलोमीटर। गुजरात में लंबाई: 350 मीटर। अंडरग्राउंड टनल: कुल 21 किलोमीटर। सरफेस टनल: 6.4 किलोमीटर। अंडरसी टनल: ठाणे और बीकेसी (BKC) के बीच 7 किलोमीटर का हिस्सा समुद्र (खाड़ी) के नीचे से गुजरेगा, जो अपने आप में भारत का पहला अनुभव होगा।   जापान भी हुआ भारतीय तकनीक का मुरीद बुलेट ट्रेन परियोजना को अक्सर जापानी तकनीक 'शिंकानसेन' (Shinkansen) का पर्याय माना जाता है, लेकिन रेल मंत्री ने एक चौंकाने वाला और गर्व करने वाला तथ्य साझा किया। इस प्रोजेक्ट के दौरान भारत ने खुद की ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसे अब जापान भी अपनाने को मजबूर है।   1. पोल लगाने की नई तकनीक (New Pole Installation Tech) बिजली के तार (OHE) के लिए पोल लगाने की प्रक्रिया में भारत ने एक नया इनोवेशन किया है।   पुरानी विधि: पहले पोल को साइट पर खड़ा किया जाता था, जिसमें समय और मेहनत ज्यादा लगती थी। नई भारतीय विधि: अब एक नई तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें पोल को जमीन से उठाकर सीधे वायडक्ट (Viaduct) यानी एलिवेटेड ब्रिज तक ले जाया जाता है और मशीनों द्वारा सेट किया जाता है। जापान का फैसला: यह तकनीक इतनी प्रभावी और तेज है कि अब जापान भी अपने आगामी प्रोजेक्ट्स में इस 'मेड इन इंडिया' विधि का इस्तेमाल करेगा।   2. जे-स्लैब ट्रैक सिस्टम (J-Slab Innovation) रेल पटरियों को बिछाने के लिए पारंपरिक गिट्टी (Ballast) का इस्तेमाल बुलेट ट्रेन में नहीं होता। इसके लिए विशेष कंक्रीट स्लैब की जरूरत होती है।   रेल मंत्री ने बताया कि उन्हें J-Slab के लिए एक बेहतरीन इनोवेशन मिला है। यह वह स्ट्रक्चर है जिस पर हाई-स्पीड ट्रैक बिछाया जाता है। ये स्लैब किसी फैक्ट्री में पहले से तैयार (Pre-cast) किए जाते हैं, फिर उन्हें साइट पर लाया जाता है और मशीनों का उपयोग करके एक-एक करके लेगो ब्लॉक्स की तरह बिछाया जाता है। इससे ट्रैक की सटीकता (Precision) मिमी के स्तर तक सही रहती है, जो 320 किमी/घंटा की रफ्तार के लिए बेहद जरूरी है।   4: रूट, स्टेशन और डिपो - कैसी होगी यात्रा? 508 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर भारत के दो सबसे बड़े आर्थिक केंद्रों को जोड़ता है। आइए जानते हैं कि यह ट्रेन किन स्टेशनों पर रुकेगी और इसका स्ट्रक्चर कैसा होगा।   12 वर्ल्ड क्लास स्टेशन इस रूट पर कुल 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। हर स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं और स्थानीय संस्कृति की झलक के साथ डिजाइन किया गया है।   गुजरात में (8 स्टेशन): वापी (Vapi) बिलिमोरा (Bilimora) सूरत (Surat) भरूच (Bharuch) वडोदरा (Vadodara) आनंद/नडियाद (Anand) अहमदाबाद (Ahmedabad) साबरमती (Sabarmati) - टर्मिनल स्टेशन   महाराष्ट्र में (4 स्टेशन): मुंबई (BKC) - टर्मिनल स्टेशन ठाणे (Thane) विरार (Virar) बोइसर (Boisar)   हब और डिपो टर्मिनल: मुंबई स्टेशन बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में भूमिगत (Underground) बनाया जा रहा है, जो शहर का प्रमुख बिजनेस हब है। दूसरा छोर साबरमती में होगा जो मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित हो रहा है। रखरखाव डिपो: ट्रेनों के रखरखाव और सफाई के लिए तीन बड़े डिपो बनाए गए हैं - साबरमती, सूरत और ठाणे में।   शोर कम, रफ्तार ज्यादा - नॉइज बैरियर तकनीक बुलेट ट्रेन जब 300 से 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरती है, तो उससे जबरदस्त हवा का दबाव और शोर (Noise) पैदा होता है। चूंकि यह ट्रेन कई रिहायशी इलाकों और घनी आबादी वाले शहरों के बीच से गुजरेगी, इसलिए 'ध्वनि प्रदूषण' एक बड़ी चिंता थी।   शिंकानसेन एकोस्टिक शील्ड रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए कॉरिडोर के निर्माण के साथ-साथ समुदायों का भी ध्यान रखा जा रहा है।   नॉइज बैरियर (Noise Barriers): हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन ने वायडक्ट (पुल) के दोनों तरफ विशेष अवरोधक लगाने शुरू कर दिए हैं। डिजाइन: इन बैरियर में खास तौर पर इंजीनियर्ड कंक्रीट पैनल लगाए गए हैं। ये पैनल जापान की शिंकानसेन तकनीक पर आधारित हैं। कार्यप्रणाली: हर पैनल रेल के स्तर से दो मीटर ऊपर उठता है और एक मीटर चौड़ा होता है। इनका काम सिर्फ आवाज को रोकना नहीं, बल्कि उसे सोखना (Absorb) और मोड़ना (Deflect) है। फायदा: इससे ट्रेन के चलने से होने वाले ऑपरेशनल शोर में भारी कमी आएगी, जिससे पटरियों के पास रहने वाले लोगों को शांतिपूर्ण माहौल मिलेगा। साथ ही, यह यात्रियों के लिए भी यात्रा को शांत और सुखद बनाएगा।   प्रोजेक्ट का वर्तमान स्टेटस और भविष्य रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, प्रोजेक्ट अब उस चरण में है जहां जमीन के नीचे और ऊपर का काम एक साथ चल रहा है।   जियोटेक्निकल जांच: यह लगभग पूरी हो चुकी है, जिससे मिट्टी की क्षमता का पता चलता है। पियर (खंभे) का काम: लगभग 11 किलोमीटर तक पियर बनाने के लिए ओपन फाउंडेशन का काम पूरा हो चुका है। कई जगहों पर अब पटरियों के लिए वायडक्ट दिखने लगे हैं। नदी और पुल: इस प्रोजेक्ट में कई महत्वपूर्ण नदियों (जैसे नर्मदा, ताप्ती, माही) पर पुल बनाए जा रहे हैं, जिनमें से कुछ बनकर तैयार भी हो चुके हैं।   ट्रांसपोर्टेशन लैंडस्केप में बदलाव अश्विनी वैष्णव का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भारत के 'ट्रांसपोर्टेशन लैंडस्केप' (परिवहन परिदृश्य) को पूरी तरह बदल देगा।   मेगा-रीजन का निर्माण: मुंबई और अहमदाबाद के बीच की दूरी कम होने से यह पूरा बेल्ट एक 'मेगा इकोनॉमिक रीजन' बन जाएगा। पर्यावरण अनुकूल: बुलेट ट्रेन हवाई जहाज और कारों की तुलना में प्रति यात्री बहुत कम कार्बन उत्सर्जन करती है। यह भारत के 'नेट जीरो' लक्ष्यों को पाने में मददगार होगी।   सपनों की उड़ान अब रनवे पर वर्षों की देरी, भूमि अधिग्रहण की समस्याएं और राजनीतिक बाधाओं को पार करते हुए, भारत का बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट अब 'टेक-ऑफ' मोड में आ चुका है। 15 अगस्त 2027 की तारीख सिर्फ एक डेडलाइन नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए एक वादा है- एक विकसित भारत (Viksit Bharat) का वादा।   जब पहली ट्रेन सूरत से बिलिमोरा के लिए रवाना होगी, तो वह सिर्फ यात्रियों को नहीं ले जाएगी, बल्कि वह भारत के तकनीकी कौशल, आत्मविश्वास और भविष्य की आकांक्षाओं को भी अपने साथ ले जाएगी। पालघर की टनल और वडोदरा के पिलर्स यह गवाही दे रहे हैं कि भारतीय रेलवे का 'गोल्डन एरा' अब दूर नहीं है।   खबरीलाल की राय: बुलेट ट्रेन परियोजना की सफलता भारत की क्षमता पर दुनिया की मुहर होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि 2027 तक यह "रफ्तार का सपना" आम आदमी की जिंदगी में कितनी सुगमता लाता है।

Unknown जनवरी 2, 2026 0
fastag new rules 2026 nhai abolishes kyv process for cars relief for millions
FASTag धारकों के लिए अब तक की सबसे बड़ी खुशखबरी: NHAI ने खत्म किया KYV का सिरदर्द, 1 फरवरी से लागू होगी 'नो-टेंशन' वाली व्यवस्था

नई दिल्ली (ब्यूरो): राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर फर्राटा भरने वाली करोड़ों कारों के लिए केंद्र सरकार और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने नए साल का सबसे बड़ा तोहफा दिया है। अगर आप भी अपनी गाड़ी के FASTag को लेकर बार-बार बैंक के चक्कर काटने, केवाईसी (KYC) अपडेट करने और दस्तावेजों के सत्यापन (Verification) से परेशान थे, तो यह खबर आपके लिए राहत की सांस लेकर आई है।READ ALSO:-1 जनवरी से 'महंगा' हुआ कूलिंग का सुकून: AC और फ्रिज की कीमतों में 10% तक का जोरदार उछाल; BEE के नए नियमों ने बदली स्टार रेटिंग की पूरी ABCD   NHAI ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए कार, जीप और वैन जैसी यात्री गाड़ियों के लिए KYV (Know Your Vehicle) की अनिवार्य प्रक्रिया को समाप्त करने की घोषणा कर दी है। यह नया नियम 1 फरवरी 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा।   आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह बदलाव क्यों किया गया है, इससे आपकी जेब और समय पर क्या असर पड़ेगा और नई व्यवस्था काम कैसे करेगी।   क्या है NHAI का नया फैसला? (The Big Announcement) नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया है कि 1 फरवरी 2026 से जारी होने वाले किसी भी नए FASTag के लिए वाहन मालिकों को KYV प्रक्रिया के तहत बार-बार दस्तावेज जमा करने या सत्यापन कराने की जरूरत नहीं होगी। यह नियम न केवल नए जारी होने वाले टैग्स पर लागू होगा, बल्कि पहले से इस्तेमाल हो रहे मौजूदा FASTag पर भी प्रभावी होगा।   अब तक की व्यवस्था में, FASTag खरीदने के बाद उसे एक्टिवेट कराने और चालू रखने के लिए यूजर्स को कई बार वेरिफिकेशन प्रोसेस से गुजरना पड़ता था। कई बार सब कुछ सही होने के बावजूद 'KYV पेंडिंग' का मैसेज आता था और टोल प्लाजा पर टैग ब्लैकलिस्ट (Blacklisted) बता दिया जाता था। अब इस पूरी झंझट को सिस्टम से ही हटा दिया गया है।   अब वेरिफिकेशन कैसे होगा? (The New Mechanism) आपके मन में सवाल होगा कि अगर KYV प्रक्रिया हट गई है, तो गाड़ी का वेरिफिकेशन कैसे होगा? क्या सुरक्षा के साथ समझौता किया जाएगा? इसका जवाब NHAI ने बहुत ही तकनीकी और स्मार्ट तरीके से दिया है।   1. जिम्मेदारी अब बैंकों की होगी (Bank's Responsibility): अब वेरिफिकेशन की सारी सिरदर्दी वाहन मालिक की नहीं, बल्कि FASTag जारी करने वाले बैंकों की होगी। NHAI ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे FASTag जारी करने या एक्टिवेट करने से पहले ही सारी जांच पूरी करें।   2. 'वाहन' डेटाबेस का उपयोग (VAHAN Database Integration): सरकार के पास पहले से ही 'VAHAN' नाम का एक केंद्रीकृत डेटाबेस मौजूद है, जिसमें देश की हर रजिस्टर्ड गाड़ी का पूरा ब्यौरा (चेसिस नंबर, इंजन नंबर, मालिक का नाम, आरसी डिटेल्स) होता है।   अब जैसे ही आप FASTag के लिए आवेदन करेंगे, बैंक आपके गाड़ी नंबर के जरिए सीधे VAHAN डेटाबेस से डेटा मैच करेंगे। अगर डेटा मैच हो जाता है, तो आपका FASTag तुरंत एक्टिवेट कर दिया जाएगा। इसके बाद आपसे दोबारा कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा।   3. एक्टिवेशन के बाद कोई रोक-टोक नहीं: पहले सिस्टम यह था कि टैग एक्टिवेट होने के बाद बैकएंड टीम दस्तावेजों की जांच करती थी, और कमी मिलने पर टैग ब्लॉक कर देती थी। नई व्यवस्था में "Pre-Activation Verification" (एक्टिवेशन से पहले जांच) का नियम लागू होगा। यानी एक बार टैग चालू हो गया, तो मतलब वह पूरी तरह वेरीफाइड है।   पुराने FASTag यूजर्स के लिए क्या बदला? यह बदलाव सिर्फ नई गाड़ी खरीदने वालों के लिए नहीं है। अगर आपकी कार पर पहले से FASTag लगा है, तो आपके लिए भी नियम आसान हो गए हैं।   नियमित KYV से मुक्ति: अब आपको समय-समय पर आने वाले "Update your KYV" के मैसेज से मुक्ति मिलेगी। नियमित रूप से कोई जांच नहीं होगी। किन हालातों में होगी जांच? NHAI ने साफ किया है कि पुराने यूजर्स से दस्तावेज या वेरिफिकेशन केवल 'अपवाद' (Exception) मामलों में ही मांगा जाएगा। जैसे: अगर टोल प्लाजा पर स्कैनर को लगता है कि टैग के साथ छेड़छाड़ हुई है। अगर कार का टैग किसी ट्रक या बस पर इस्तेमाल किया जा रहा है (Wrong Class)। अगर टैग डैमेज है या ठीक से काम नहीं कर रहा है। अगर सिस्टम को फ्रॉड का संदेह होता है। अगर आपका रिकॉर्ड साफ है, तो आपको 1 फरवरी 2026 के बाद बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।   क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? (Why This Change?) NHAI के पास पिछले कुछ सालों में लाखों शिकायतें पहुंची थीं। आम जनता की परेशानी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है:   बेवजह की परेशानियां: कई बार वाहन मालिकों के पास वैलिड आरसी (Registration Certificate) होती थी, फिर भी तकनीकी खामियों के कारण बैंक उनका FASTag ब्लॉक कर देते थे। टोल पर झगड़े: टोल प्लाजा पर जब किसी का टैग अचानक 'ब्लैकलिस्ट' दिखाता था, तो वहां जाम लगता था और टोल कर्मियों के साथ झगड़े होते थे। डिजिटल इंडिया: जब सारा डेटा 'वाहन' पोर्टल पर ऑनलाइन मौजूद है, तो फिर फिजिकल डॉक्युमेंट्स या अलग से अपलोड करने की क्या जरूरत है? इसी सोच के साथ यह डिजिटल इंटीग्रेशन किया गया है।   अगर VAHAN पोर्टल पर डेटा नहीं मिला तो? सरकार ने हर स्थिति के लिए तैयारी की है। कई बार पुरानी गाड़ियों का डेटा VAHAN पोर्टल पर अपडेट नहीं होता है। ऐसी स्थिति के लिए NHAI ने निर्देश दिया है:   यदि किसी तकनीकी कारण से VAHAN डेटाबेस में वाहन की जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो केवल ऐसी स्थिति में बैंक आपसे आरसी (RC) की कॉपी मांग सकता है। यह एक 'अपवाद' होगा, नियम नहीं। और इसकी पूरी जवाबदेही बैंक की होगी कि वह जल्द से जल्द इसे सत्यापित करे।   ऑनलाइन और ऑफलाइन: दोनों पर लागू होगा नियम चाहे आप Paytm, PhonePe, Google Pay जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से FASTag खरीदें, या फिर किसी टोल प्लाजा पर खड़े एजेंट या बैंक की शाखा से ऑफलाइन खरीदें—नियम सब पर समान रूप से लागू होगा।   NHAI ने सभी पेमेंट एग्रीगेटर्स और बैंकों को अपने सॉफ्टवेयर 1 फरवरी 2026 से पहले अपडेट करने का आदेश दे दिया है ताकि जनता को नए नियमों का लाभ पहले दिन से मिल सके।   एक्सपर्ट्स की राय: "सफर होगा सुगम" परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत में 'ईज ऑफ ड्राइविंग' (Ease of Driving) की दिशा में एक मील का पत्थर है।   ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट राजेश कुमार कहते हैं, "KYV प्रक्रिया एक बड़ा अवरोधक थी। कई बार लोग सिर्फ इसलिए FASTag रिचार्ज नहीं करते थे क्योंकि उनका केवाईसी पेंडिंग होता था। अब जब बैंक खुद डेटा वेरीफाई करेंगे, तो सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और फर्जी FASTag पर भी लगाम लगेगी।"   डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ते कदम NHAI का यह कदम साबित करता है कि सरकार अब प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दे रही है। 1 फरवरी 2026 से, जब आप अपनी कार लेकर हाईवे पर निकलेंगे, तो आपको यह चिंता नहीं करनी होगी कि कहीं बैंक ने आपका टैग ब्लॉक तो नहीं कर दिया।   सत्यापन का काम मशीनों और डेटाबेस का है, और ड्राइविंग का आनंद आपका। यह बदलाव न केवल समय बचाएगा बल्कि टोल नाकों पर लंबी कतारों को कम करने में भी मदद करेगा।   महत्वपूर्ण तिथियां और जानकारी: नियम लागू होने की तारीख: 1 फरवरी 2026 किन वाहनों के लिए: कार, जीप, वैन (LMV Class) नया प्रोसेस: बैंक द्वारा VAHAN डेटाबेस से डायरेक्ट वेरिफिकेशन। पुरानी प्रक्रिया: यूजर द्वारा मैनुअल डॉक्यूमेंट अपलोड (अब समाप्त)।

Unknown जनवरी 1, 2026 0
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कुदरत का 'न्यू ईयर गिफ्ट': 2026 का स्वागत बारिश और बर्फीली हवाओं से; दिल्ली बनी 'गैस चैंबर', तो बिहार में ताले में बंद हुए स्कूल

साल 2025 (Year End 2025) अपनी विदाई की बेला में है और कुछ ही घंटों में हम नए साल 2026 (New Year 2026) में प्रवेश कर जाएंगे। लेकिन, साल बदलने के साथ-साथ मौसम का मिजाज भी पूरी तरह बदल चुका है। कुदरत ने नए साल के स्वागत के लिए 'बर्फानी' तैयारी कर ली है। उत्तर भारत से लेकर पूर्वी भारत तक, पूरा देश इस समय कड़ाके की ठंड (Severe Cold) और घने कोहरे (Dense Fog) की चादर में लिपटा हुआ है।READ ALSO:-UP: नए साल में मिलेगा घर का तोहफा; अटल नगर आवासीय योजना की लॉटरी डेट आई, 8-9 जनवरी को निकलेगा ड्रा   ठंड का 'सितम' और कोहरे का 'कहर'—ये दो शब्द आज देश के मौसम का हाल बयां करने के लिए काफी हैं। लेकिन बात सिर्फ ठंड तक सीमित नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली में एक तरफ जहाँ लोग ठंड से ठिठुर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ 'जहरीली हवा' ने सांस लेना भी दूभर कर दिया है। और अब, मौसम विभाग (IMD) ने एक नई भविष्यवाणी कर दी है—नए साल का आगाज बारिश के साथ होगा।   आइये, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि 1 जनवरी 2026 को आपके शहर का मौसम कैसा रहेगा, कहाँ स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं, और पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी मैदानी इलाकों में कैसे सिहरन बढ़ाएगी।   1. दिल्ली-NCR: कोहरा, प्रदूषण और अब बारिश की दस्तक देश की राजधानी दिल्ली में साल का आखिरी दिन (31 दिसंबर) घने कोहरे की सफेद चादर के साथ शुरू हुआ। सुबह के वक्त विजिबिलिटी (Visibility) इतनी कम थी कि सड़कों पर गाड़ियां रेंगती नजर आईं।   कोहरे का अटैक: बुधवार सुबह 6:30 बजे पालम (Palam) और सफदरजंग (Safdarjung) वेदर स्टेशन पर विजिबिलिटी मात्र 50 मीटर दर्ज की गई। इसका सीधा असर हवाई उड़ानों और ट्रेनों की रफ्तार पर पड़ा है। मौसम विभाग के अनुसार, कोहरे की यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है।   सांसों पर संकट (AQI Alert): दिल्ली वालों के लिए ठंड से बड़ी मुसीबत प्रदूषण है। राजधानी का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 384 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' (Very Poor) श्रेणी में आता है।   चेतावनी: वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 1 जनवरी (नए साल के दिन) को AQI का स्तर और गिरकर 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में पहुंच सकता है। यानी, नए साल के जश्न में आतिशबाजी न होने के बावजूद हवा दमघोंटू रहेगी।   बारिश का पूर्वानुमान: IMD के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण मौसम करवट ले रहा है।   1 जनवरी: राजधानी में आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश (Light Rain) की पूरी संभावना है। तापमान: बुधवार को सफदरजंग और आया नगर में न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि लोधी रोड पर यह 6.8 डिग्री रहा। बारिश के बाद तापमान में और गिरावट आ सकती है, जिससे 'गलन' वाली ठंड बढ़ेगी।   2. बिहार में 'कोल्ड इमरजेंसी': स्कूल बंद, बच्चे घरों में कैद पूरब की ओर बढ़ें तो बिहार में स्थिति और भी भयावह है। यहाँ ठंड और कोहरे का 'डबल अटैक' देखने को मिल रहा है। बर्फीली हवाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।   स्कूल्स पर लगा ताला: बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, पटना जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। पटना में कक्षा 8 तक के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को बंद कर दिया गया है।   आदेश: जारी सर्कुलर के मुताबिक, यह बंदी 31 दिसंबर से 2 जनवरी तक लागू रहेगी। प्रशासन ने साफ किया है कि अगर ठंड का प्रकोप जारी रहा, तो छुट्टियों को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। शीतलहर का प्रकोप: राज्य के अधिकांश हिस्सों में 'शीतलहर' (Cold Wave) जैसी स्थिति बनी हुई है। कोहरे के कारण सुबह के समय दृश्यता शून्य के करीब पहुंच रही है, जिससे हाईवे पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।   3. राजस्थान: रेगिस्तान में जमी बर्फ? रेगिस्तानी राज्य राजस्थान भी इस समय 'कश्मीर' बना हुआ है। हाड़ कंपा देने वाली ठंड ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया है।   करौली सबसे ठंडा: राज्य में सबसे कम तापमान करौली में दर्ज किया गया, जहाँ पारा लुढ़ककर 4.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। अन्य शहरों का हाल: अलवर: 6.5°C दौसा: 6.6°C पिलानी: 8.8°C चूरू: 9.1°C जयपुर (राजधानी): 11.4°C   बारिश की चेतावनी: मौसम विभाग ने राजस्थान के लिए भी बारिश का अलर्ट जारी किया है। गुरुवार (1 जनवरी) को बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग में हल्की बारिश हो सकती है। मावठ (सर्दियों की बारिश) से किसानों को फायदा हो सकता है, लेकिन आम जनता की ठिठुरन जरूर बढ़ेगी।   4. झारखंड: कोहरे का 'येलो अलर्ट' जारी पड़ोसी राज्य झारखंड में भी ठंड ने अपने तेवर तीखे कर लिए हैं। मौसम विभाग ने अगले 2 दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में 'घने कोहरे' की आशंका जताई है।   येलो अलर्ट (Yellow Alert): प्रशासन ने गढ़वा, पलामू, कोडरमा, चतरा, हजारीबाग, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। गुमला में ठिठुरन: राज्य का सबसे ठंडा स्थान गुमला रहा, जहाँ न्यूनतम तापमान 3.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह तापमान सामान्य से काफी नीचे है। विजिबिलिटी: 2 जनवरी की सुबह गिरिडीह और देवघर जैसे जिलों में विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर के बीच रहने की संभावना है। वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।   5. पंजाब और हरियाणा: सामान्य से ऊपर पारा, फिर भी कंपकंपी पंजाब और हरियाणा के मौसम में एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। यहाँ कई जगहों पर न्यूनतम तापमान सामान्य (Normal) से कुछ ऊपर रिकॉर्ड किया गया, लेकिन इसके बावजूद ठंड का अहसास कम नहीं हुआ है।   तापमान का मीटर: अमृतसर: 6.1°C लुधियाना: 6.8°C बठिंडा: 7.2°C गुरदासपुर: 5.2°C (सबसे ठंडा) कोहरे के कारण यहाँ भी जनजीवन प्रभावित है। चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में सुबह के समय सूरज के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं।   6. पश्चिम बंगाल: दार्जीलिंग में बर्फबारी, कोलकाता में सर्दी साल के आखिरी हफ्ते में बंगाल भी ठंड की चपेट में है।   कोलकाता: 'सिटी ऑफ जॉय' में साल के आखिरी दिन न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 2.8 डिग्री कम है। मौसम विभाग का कहना है कि यह ठंड का दौर अगले एक सप्ताह तक जारी रहेगा। पहाड़ों की रानी: दार्जीलिंग के ऊपरी इलाकों में अगले 3 दिनों तक हल्की बारिश या बर्फबारी (Snowfall) की संभावना है। नए साल पर दार्जीलिंग घूमने गए पर्यटकों के लिए यह किसी तोहफे से कम नहीं है। हालाँकि, इससे मैदानी इलाकों (दक्षिण बंगाल) में ठंड और बढ़ेगी।   7. कश्मीर: जन्नत में गिर रही बर्फ, पर तापमान में उछाल धरती की जन्नत कश्मीर में नजारा बेहद खूबसूरत है। वादी के ऊंचाई वाले इलाकों में जमकर बर्फबारी हो रही है।   बर्फबारी वाले इलाके: बांदीपोरा के गुरेज, बारामूला के विश्व प्रसिद्ध स्की-रिसॉर्ट गुलमर्ग और कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर में ताजा बर्फबारी हुई है। अनोखा ट्रेंड: दिलचस्प बात यह है कि बर्फबारी के बावजूद कश्मीर घाटी में तापमान सामान्य से 3 से 7 डिग्री सेल्सियस अधिक चल रहा है। यह ग्लोबल वार्मिंग का संकेत हो सकता है या पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव। पूर्वानुमान: मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में घाटी के अधिकतर स्थानों पर बारिश या बर्फबारी की संभावना जताई है।   8. नए साल के जश्न और सावधानियां अगर आप 31 दिसंबर की रात या 1 जनवरी को बाहर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें:   ड्राइविंग में सावधानी: दिल्ली, यूपी, बिहार और झारखंड में घने कोहरे का अलर्ट है। अपनी गाड़ी की फॉग लाइट्स (Fog Lights) सही रखें और धीमी गति से चलें। गर्म कपड़े: बारिश होने पर ठंड अचानक बढ़ सकती है (Wind Chill Factor)। इसलिए वाटरप्रूफ जैकेट या छाता साथ रखें। सेहत का ख्याल: AQI खराब होने के कारण अस्थमा और सांस के मरीजों को सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचना चाहिए। N95 मास्क का प्रयोग करें।   2026 की ठंडी शुरुआत कुल मिलाकर, साल 2026 की शुरुआत कड़ाके की सर्दी के साथ होने जा रही है। एक तरफ पहाड़ों पर बर्फबारी पर्यटकों को लुभा रही है, तो दूसरी तरफ मैदानी इलाकों में बारिश और कोहरा चुनौती बनकर खड़ा है।   मौसम विभाग का यह अपडेट स्पष्ट करता है कि रजाई और कंबल से बाहर निकलने का समय अभी नहीं आया है। बारिश के बाद प्रदूषण से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन ठंड का प्रकोप और तीखा होगा।

Unknown दिसम्बर 31, 2025 0
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बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और गर्लफ्रेंड सोनाली का 15 मिनट का MMS लीक, कपल ने इसे चोरी और ब्लैकमेलिंग बताया

पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है।     कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप   सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है।   सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है।  ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया।  सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया।   प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है।  ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं।    सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं।   इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया।    बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }

बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई

आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला   मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।   बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।   दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था।   अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी।   बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे।   पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया।   एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी   सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता।   पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है।   आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?

देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।   सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया?   क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है।   पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है।   दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है।   सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?"   असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है।   सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है।   विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है।   विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।"   NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है।   NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।   CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।      आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया।  डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है।     कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं:   1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।   2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है।   सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है:   पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है।   दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।   गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।"   आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए।   सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है।   फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है।     जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; Kidney की बीमारी बनी मौत का कारण

बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है।   चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था।   टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।   फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी।   Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप   किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।   इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।"   Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।   सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।

दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी।   आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:   Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi)   मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी।   रूट मैप (Route Map) और स्टेशन   मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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उत्तर प्रदेश

यूपी में मौसम का यू-टर्न: कल से 5 दिनों तक आंधी-बारिश का अलर्ट, कांपने पर मजबूर करेगी लौटती हुई ठंड

Unknown जनवरी 21, 2026 0

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