नई दिल्ली/मुंबई | बिजनेस डेस्क वर्ष 2026 का गणतंत्र दिवस भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है, लेकिन खरीदारों के लिए यह किसी झटके से कम नहीं है। वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने और चांदी की कीमतों (Gold-Silver Prices) ने अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।READ ALSO:-'अंगूठा लगाने' का झंझट होगा खत्म: आधार में होने जा रहा है अब तक का सबसे बड़ा 'Tech-Upgrade', जानें क्या है सरकार का 'विजन 2032' सोना, जिसे संकट का साथी माना जाता है, ने अपनी चमक से निवेशकों की आंखों को चौंधिया दिया है। जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने $5,000 प्रति औंस का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं घरेलू बाजार में यह ₹1,60,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ते हुए नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। चांदी की चमक भी कम नहीं हुई है और यह ₹3.34 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर को छू रही है। हालांकि, आज दिल्ली के बाजार में मामूली सी सुस्ती देखी गई, लेकिन पिछले एक हफ्ते की तेजी ने बाजार का पूरा गणित बदल कर रख दिया है। महा-विस्फोट: क्यों लगी है कीमतों में यह आग? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण 'वैश्विक अनिश्चितता' (Global Uncertainty) है। जब भी दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव या आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक शेयर बाजार या मुद्रा बाजार से पैसा निकालकर 'सुरक्षित हेवन' (Safe Haven Assets) मानी जाने वाली संपत्तियों में लगाते हैं। सोना और चांदी सदियों से निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते रहे हैं। आज के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली है: अंतरराष्ट्रीय बाजार: सोने ने पहली बार $5,000 प्रति औंस का ऐतिहासिक स्तर पार किया है। यह एक ऐसा मनोवैज्ञानिक बैरियर था, जिसके टूटने की कल्पना विश्लेषक साल के अंत तक कर रहे थे, लेकिन यह जनवरी में ही संभव हो गया। घरेलू बाजार (भारत): भारत में 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव ₹1,60,250 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी ने भी लंबी छलांग लगाते हुए ₹3,34,900 प्रति किलोग्राम का स्तर छू लिया है। यह उछाल केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि निवेशकों का भरोसा कागजी मुद्रा (Currency) के मुकाबले ठोस धातुओं (Hard Assets) पर बढ़ रहा है। राजधानी दिल्ली का हाल: रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर आज ₹10 की मामूली राहत देश की राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज कीमतों में एक बेहद मामूली सुधार देखने को मिला, जिसे 'ऊंट के मुंह में जीरा' कहा जा सकता है। ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद, आज यानी 26 जनवरी को सोने के भाव में मात्र ₹10 की गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना (दिल्ली): आज ₹10 सस्ता होकर ₹1,60,040 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। 22 कैरेट सोना (दिल्ली): आभूषण बनाने में इस्तेमाल होने वाला यह सोना भी ₹10 टूटकर ₹1,47,040 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। हालांकि, यह गिरावट खरीदारों को कोई खास राहत देने वाली नहीं है, क्योंकि कीमतें अभी भी ₹1.60 लाख के स्तर के ऊपर बनी हुई हैं। यह गिरावट तकनीकी रूप से 'प्रोफिट बुकिंग' (Profit Booking) का नतीजा मानी जा सकती है, जहाँ निवेशक ऊंचे दामों पर थोड़ा मुनाफा वसूलते हैं। बीते हफ्ते की तूफानी तेजी: 7 दिनों में बदला पूरा मंजर आज की ₹10 की गिरावट को समझने के लिए हमें पिछले एक हफ्ते (19 जनवरी से 25 जनवरी) के आंकड़ों को देखना होगा। यह हफ्ता सोने के लिए किसी 'रॉकेट' से कम नहीं था। 24 कैरेट में उछाल: केवल 7 दिनों के भीतर 24 कैरेट सोने की कीमतों में ₹16,480 प्रति 10 ग्राम की भारी भरकम तेजी दर्ज की गई। 22 कैरेट में उछाल: ज्वैलरी गोल्ड यानी 22 कैरेट सोने में भी लगभग ₹15,100 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई। इतनी कम अवधि में इतना बड़ा उछाल बताता है कि बाजार में 'पैनिक बाइंग' (Panic Buying) की स्थिति बनी हुई थी। देश के 10 बड़े शहरों का 'गोल्ड मीटर': जानें कहाँ क्या है भाव आज देश के प्रमुख महानगरों में सोने के भाव लगभग एक सीमित दायरे में बने हुए हैं, लेकिन कुछ शहरों में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है। मुंबई और कोलकाता, जो सर्राफा व्यापार के बड़े केंद्र हैं, वहां भाव अपने चरम पर हैं। नीचे दी गई तालिका में आप अपने शहर के अनुसार आज (26 जनवरी) के सोने के भाव देख सकते हैं: शहर (City) 24 कैरेट (10 ग्राम) 22 कैरेट (10 ग्राम) 18 कैरेट (10 ग्राम) दिल्ली ₹1,60,040 ₹1,47,040 ₹1,20,330 मुंबई ₹1,60,250 ₹1,46,890 ₹1,20,180 कोलकाता ₹1,60,250 ₹1,46,890 ₹1,20,180 चेन्नई ₹1,59,480 ₹1,47,490 ₹1,22,990 बेंगलुरु ₹1,60,250 ₹1,46,890 ₹1,20,180 हैदराबाद ₹1,60,250 ₹1,46,890 ₹1,20,180 लखनऊ ₹1,60,040 ₹1,47,040 ₹1,20,330 पटना ₹1,60,300 ₹1,46,940 ₹1,20,230 जयपुर ₹1,60,040 ₹1,47,040 ₹1,20,330 अहमदाबाद ₹1,60,300 ₹1,46,940 ₹1,20,230 विश्लेषण: सबसे महंगा सोना: पटना और अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना ₹1,60,300 के स्तर पर है, जो दिल्ली से थोड़ा अधिक है। चेन्नई में विरोधाभास: चेन्नई में 24 कैरेट सोना अन्य महानगरों के मुकाबले थोड़ा सस्ता (₹1,59,480) है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वहां 22 कैरेट सोने का भाव (₹1,47,490) दिल्ली और मुंबई से भी ज्यादा है। यह वहां की स्थानीय मांग और ज्वैलरी मेकिंग चार्जेज की संरचना के कारण हो सकता है। समानता: मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में भाव एक समान ₹1,60,250 पर चल रहे हैं, जो एक एकीकृत बाजार धारणा (Market Sentiment) का संकेत देता है। चांदी की चाल: ₹3.34 लाख के पार, लेकिन आज थोड़ी नरमी सोने की तरह चांदी भी निवेशकों की पसंदीदा बनी हुई है। औद्योगिक मांग और निवेश मांग के दोहरे इंजन ने चांदी की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। आज की स्थिति: एक दिन की स्थिरता के बाद आज चांदी की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता: यहाँ चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹3,34,900 प्रति किलोग्राम पर बिक रही है। चेन्नई का हाल: दक्षिण भारत में चांदी की चमक सबसे ज्यादा है। चेन्नई में चांदी का भाव ₹3,64,900 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया है, जो उत्तर भारत के मुकाबले करीब ₹30,000 अधिक है। साप्ताहिक प्रदर्शन (The Weekly Rally): चांदी ने पिछले कारोबारी हफ्ते (19-25 जनवरी) में जिस तरह की तेजी दिखाई, उसने विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया। ₹40,000 की छलांग: केवल एक हफ्ते के उतार-चढ़ाव के दौरान चांदी की कीमतों में करीब ₹40,000 प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई। कारण: मजबूत रिटेल मांग (Strong Retail Demand), मोमेंटम आधारित निवेश (Momentum Trading) और फिजिकल मार्केट में सप्लाई की कमी (Supply Shortage) ने चांदी को रॉकेट बना दिया। विशेष रूप से ईवी (EV) सेक्टर और ग्रीन एनर्जी में चांदी के बढ़ते उपयोग ने इसकी औद्योगिक मांग को मजबूत किया है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा दौर 'सोने की नई महामंदी' का नहीं, बल्कि 'महा-तेजी' (Super Cycle) का है। ₹1.60 लाख का स्तर पार करना भारतीय रुपये के कमजोर होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मजबूती दोनों का परिणाम है। शादियों का सीजन: भारत में शादियों का सीजन चल रहा है। ऐसे में 22 कैरेट सोने का ₹1.47 लाख के पार जाना आम आदमी के बजट को बुरी तरह बिगाड़ सकता है। पोर्टफोलियो में बदलाव: जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में सोना था, उन्हें जबरदस्त रिटर्न मिला है। 18 कैरेट सोना, जो डायमंड ज्वैलरी में इस्तेमाल होता है, वह भी ₹1.20 लाख के पार है, जिससे डायमंड ज्वैलरी भी महंगी हो जाएगी। आगे क्या? सोने और चांदी की यह ऐतिहासिक तेजी यह बताती है कि दुनिया अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। ₹10 या ₹100 की दैनिक गिरावट महज एक छोटा सा सुधार है, लेकिन दीर्घकालिक ट्रेंड (Long-term Trend) अभी भी बेहद मजबूत और ऊपर की ओर (Bullish) बना हुआ है। खरीदारों के लिए यह 'देखो और इंतजार करो' (Wait and Watch) की स्थिति हो सकती है, लेकिन निवेशकों के लिए यह अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने का एक प्रमाण है। अगले कुछ दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सोना ₹1.60 लाख के इस नए आधार (Base) को बनाए रखता है या यहां से कुछ मुनाफावसूली हावी होती है। (नोट: ऊपर दिए गए सोने और चांदी के रेट सांकेतिक हैं और इनमें जीएसटी (GST) या मेकिंग चार्जेज शामिल नहीं हैं। सटीक भाव के लिए कृपया अपने स्थानीय ज्वैलर से संपर्क करें।)
नई दिल्ली: साल 2025 में कीमती धातुओं में जो तेजी देखी गई थी, साल 2026 के पहले महीने ने उन सभी यादों को धुंधला कर दिया है. कमोडिटी बाजार के इतिहास में जनवरी 2026 को सुनहरे (या कहें रुपहले) अक्षरों में लिखा जाएगा. Silver Price Today (चांदी का भाव) ने शुक्रवार को जिस तरह की चाल दिखाई, उसने न केवल निवेशकों को मालामाल किया है बल्कि बाजार के दिग्गजों को भी हैरान कर दिया है.Read also:-ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की अब खैर नहीं! केंद्र सरकार ने लागू किए बेहद सख्त नियम; साल में 5 गलतियां कीं तो 3 महीने के लिए सस्पेंड होगा आपका ड्राइविंग लाइसेंस महज 23 दिनों या यूं कहें कि 550 घंटों के भीतर चांदी की कीमतों में एक लाख रुपये से अधिक का उछाल दर्ज किया गया है. यह एक ऐसा रिकॉर्ड है जो शायद आने वाले कई दशकों तक न टूटे. शुक्रवार के कारोबारी सत्र में चांदी ने 3.39 लाख रुपये का स्तर छूकर नया इतिहास रच दिया है. आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर वायदा बाजार से लेकर सर्राफा बाजार तक चांदी में यह 'गदर' क्यों मचा है और निवेशकों के लिए इसके क्या मायने हैं. Silver Price Today: 550 घंटों का अविश्वसनीय सफर जनवरी 2026 कमोडिटी मार्केट के लिए बेहद तूफानी साबित हो रहा है. आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट होती है कि चांदी ने किस रफ्तार से दौड़ लगाई है. रिकॉर्ड तेजी: जनवरी महीने के महज 550 घंटों (लगभग 23 दिन) में चांदी की कीमतों में 1,00,000 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. ऐतिहासिक तुलना: कमोडिटी बाजार के इतिहास में एक महीने से भी कम समय में चांदी में इतनी बड़ी तेजी कभी नहीं देखी गई. आंकड़े बोलते हैं: साल 2025 के आखिरी कारोबारी दिन चांदी 2,35,701 रुपये पर बंद हुई थी. वहीं, 23 जनवरी 2026 को यह 3,39,927 रुपये के ऑल टाइम हाई (Record Level) पर पहुंच गई. कुल मुनाफा: इस छोटी सी अवधि में चांदी ने निवेशकों को 1,04,226 रुपये प्रति किलोग्राम का रिटर्न दिया है. प्रतिशत में उछाल: यह तेजी लगभग 44.22 फीसदी की है. दैनिक औसत: अगर इसे प्रतिदिन के हिसाब से देखें, तो जनवरी के 23 दिनों में चांदी रोज औसतन 4,531 रुपये महंगी हुई है. यह अपने आप में एक ऐसा आंकड़ा है जिसे देखकर यह कहा जा सकता है कि चांदी ने सोने को भी पीछे छोड़ दिया है. MCX पर चांदी की चाल: रॉकेट बने दाम देश के वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार का दिन बेहद उथल-पुथल भरा रहा. गुरुवार को आई गिरावट के बाद किसी को उम्मीद नहीं थी कि शुक्रवार को बाजार इतनी जबरदस्त वापसी करेगा. शुक्रवार का हाई: कारोबारी सत्र के दौरान Silver Price Today ने 3,39,927 रुपये का सर्वोच्च स्तर छुआ. इंट्राडे रिकवरी: एक ही दिन के भीतर चांदी के दाम में 12,638 रुपये का विशाल उछाल देखने को मिला. क्लोजिंग भाव: बाजार बंद होने तक चांदी 7,410 रुपये प्रति किलोग्राम की तेजी के साथ 3,34,699 रुपये पर सेटल हुई. पिछला क्लोज: इससे पहले गुरुवार को चांदी 3,27,289 रुपये पर बंद हुई थी और शुक्रवार को इसकी ओपनिंग 3,33,333 रुपये पर हुई थी. दिल्ली सर्राफा बाजार: भाव 3.30 लाख के करीब सिर्फ वायदा बाजार ही नहीं, बल्कि हाजिर बाजार (Spot Market) में भी चांदी की चमक ने लोगों की आंखें चौंधिया दी हैं. राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमतों में जोरदार करंट दौड़ गया. शुक्रवार को दिल्ली में चांदी के भाव में 9,500 रुपये का भारी उछाल आया. इस तेजी के साथ चांदी 3,20,000 रुपये से बढ़कर 3,29,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई. गौरतलब है कि इसी हफ्ते बुधवार को चांदी ने 3,34,300 रुपये का रिकॉर्ड बनाया था. सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि जनवरी के मौजूदा महीने में अब तक दिल्ली में चांदी के भाव में कुल 90,500 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है. शादियों के सीजन और औद्योगिक मांग के कारण भौतिक बाजार में चांदी की किल्लत महसूस की जा रही है, जो कीमतों को और हवा दे रही है. विदेशी बाजारों में $100 का बैरियर टूटा भारतीय बाजारों में तेजी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आया भूचाल है. ग्लोबल मार्केट में चांदी ने एक मनोवैज्ञानिक स्तर (Psychological Level) को तोड़ दिया है. कॉमेक्स (Comex New York): न्यूयॉर्क के कॉमेक्स मार्केट में चांदी 5.15 फीसदी की तेजी के साथ 101.33 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती देखी गई. 100 डॉलर का स्तर पार करना चांदी के लिए एक ऐतिहासिक घटना है. स्पॉट सिल्वर (Spot Silver): हाजिर बाजार में चांदी 7.22 फीसदी की तूफानी तेजी के साथ 103.19 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई. यूरोपीय बाजार: यूरोप में चांदी 6.47 फीसदी उछलकर 87.22 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. ब्रिटिश बाजार: यूके में भी चांदी 6.15 फीसदी की बढ़त के साथ 75.64 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी. क्यों आ रही है चांदी में इतनी भयंकर तेजी? बाजार विश्लेषकों (Market Experts) के अनुसार, साल 2026 में चांदी की कीमतों में आई इस अभूतपूर्व तेजी के पीछे कई बड़े कारण हैं: औद्योगिक मांग (Industrial Demand): सोलर पैनल निर्माण, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और 5G टेक्नोलॉजी में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. 2026 में ग्रीन एनर्जी के प्रोजेक्ट्स दुनिया भर में अपने चरम पर हैं, जिससे चांदी की खपत कई गुना बढ़ गई है. भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की तरफ भाग रहे हैं. सोने के बहुत महंगे होने के कारण चांदी एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरी है. सप्लाई में कमी: मांग के मुकाबले चांदी की माइनिंग (Mining) की रफ्तार धीमी है. सप्लाई और डिमांड के बीच का यह अंतर कीमतों को 'रॉकेट' बना रहा है. डॉलर में कमजोरी: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव का सीधा फायदा बुलियन मार्केट को मिल रहा है. निवेशकों के लिए क्या है संकेत? जानकारों की मानें तो Silver Price Today में जो उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल रही है, वह अभी जारी रह सकती है. 550 घंटों में 1 लाख रुपये की तेजी यह बताती है कि बाजार बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है. ट्रेडर्स के लिए सलाह: वायदा बाजार में कारोबार करने वालों को सख्त स्टॉप-लॉस (Stop Loss) का पालन करना चाहिए, क्योंकि कीमतें जितनी तेजी से ऊपर जाती हैं, मुनाफावसूली (Profit Booking) आने पर उतनी ही तेजी से नीचे भी आ सकती हैं. लंबी अवधि के निवेशक: जिन्होंने निचले स्तरों पर खरीदारी की थी, वे अब भारी मुनाफे में हैं. विशेषज्ञों का सुझाव है कि लंबी अवधि के लिए चांदी अभी भी बुलिश (Bullish) बनी हुई है, लेकिन मौजूदा स्तरों पर नया निवेश करने से पहले थोड़ा इंतजार करना समझदारी हो सकती है. साल 2026 की शुरुआत ने ही साबित कर दिया है कि यह साल कमोडिटी निवेशकों के लिए 'ब्लॉकबस्टर' रहने वाला है. चांदी की कीमतों में 550 घंटों में 1 लाख रुपये की तेजी न केवल एक आंकड़ा है, बल्कि यह बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था और औद्योगिक जरूरतों का प्रतिबिंब है. शुक्रवार को Silver Price Today ने जो रिकॉर्ड बनाया है, वह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या चांदी 3.50 लाख का स्तर भी जल्द पार करती है या फिर ऊंचे दामों पर मुनाफावसूली हावी होती है. जनवरी 2026 में चांदी की कीमतों ने ऐतिहासिक तेजी दिखाते हुए महज 550 घंटों में 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा की बढ़त हासिल की है. शुक्रवार को MCX पर चांदी 3,39,927 रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची और 3,34,699 रुपये पर बंद हुई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 100 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई है, जबकि दिल्ली सर्राफा बाजार में भाव 3.30 लाख रुपये के करीब पहुंच गए हैं. Disclaimer: यह समाचार केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। कमोडिटी बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
नई दिल्ली: देश भर के करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए एक बेहद जरूरी और चिंताजनक खबर है। अगर आपका कोई भी बैंक से जुड़ा जरूरी काम पेंडिंग है, तो उसे तुरंत निपटा लें, क्योंकि भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा 'ब्लैकआउट' देखने को मिल सकता है। बैंक लगातार 96 घंटे यानी पूरे 4 दिन तक बंद रहने वाले हैं।READ ALSO:-प्रयागराज में 'धर्मयुद्ध': शंकराचार्य का अल्टीमेटम—'हम टुकड़ों पर पलने वाले नहीं'; योगी के 'कालनेमि' वार पर अविमुक्तेश्वरानंद का 'गोहत्या' वाला पलटवार जनवरी 2026 का आखिरी सप्ताह बैंकिंग सेवाओं के लिहाज से भारी उथल-पुथल भरा साबित होने वाला है। एक तरफ सरकारी छुट्टियां और दूसरी तरफ बैंक यूनियनों द्वारा बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल (Nationwide Bank Strike) के चलते सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने अपनी लंबित मांगों, विशेष रूप से 'सप्ताह में 5 दिन कार्य दिवस' (5-Day Work Week) को लेकर 27 जनवरी 2026 को अखिल भारतीय हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल और छुट्टियों के संयोग से बैंक लगातार चार दिनों—24, 25, 26 और 27 जनवरी—तक बंद रहेंगे। इसका सीधा असर नकद निकासी, चेक क्लीयरेंस, ड्राफ्ट बनवाने और लोन की प्रक्रियाओं पर पड़ेगा। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) समेत कई बड़े सरकारी बैंकों ने भी इस हड़ताल के संभावित असर को लेकर चेतावनी जारी कर दी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर बैंक क्यों बंद हो रहे हैं, यूनियनों की मांगें क्या हैं, और इस दौरान आप अपनी बैंकिंग जरूरतों को कैसे पूरा कर सकते हैं। लगातार 4 दिन का 'बैंक लॉकदाउन': कब और क्यों? जनवरी के अंतिम सप्ताह में छुट्टियों का एक ऐसा संयोग बन रहा है जिससे बैंकिंग कामकाज पूरी तरह ठप हो जाएगा। यह केवल एक दिन की बात नहीं है, बल्कि शुक्रवार शाम को बैंक बंद होने के बाद सीधे अगले बुधवार को ही खुलने के आसार हैं। यहाँ देखिए छुट्टियों का पूरा गणित: 24 जनवरी 2026 (शनिवार): यह महीने का चौथा शनिवार है। आरबीआई (RBI) के नियमों के अनुसार, देश के सभी सरकारी और निजी बैंक हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं। 25 जनवरी 2026 (रविवार): रविवार होने के कारण यह साप्ताहिक अवकाश है और बैंक बंद रहेंगे। 26 जनवरी 2026 (सोमवार): इस दिन पूरा देश गणतंत्र दिवस (Republic Day) मनाएगा। यह एक राष्ट्रीय अवकाश (Gazetted Holiday) है, जिसके चलते पूरे भारत में बैंक, सरकारी दफ्तर और वित्तीय संस्थान बंद रहेंगे। 27 जनवरी 2026 (मंगलवार): इस दिन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने अपनी मांगों को लेकर देशव्यापी बैंक हड़ताल बुलाई है। इस प्रकार, 24 जनवरी से 27 जनवरी तक लगातार 4 दिन बैंकों के शटर नहीं उठेंगे। अगर हड़ताल सफल रही, तो मंगलवार को भी कामकाज पूरी तरह ठप रहेगा, जिसका सीधा मतलब है कि ग्राहकों को लगातार चार दिन तक शाखा स्तर की कोई सेवा नहीं मिलेगी। 27 जनवरी की हड़ताल: आखिर क्यों उबल रहा है गुस्सा? इस बार की हड़ताल का मुख्य कारण वेतन या भत्ता नहीं, बल्कि 'वर्क-लाइफ बैलेंस' यानी काम के घंटों और दिनों में बदलाव है। बैंक यूनियनों की सबसे बड़ी और प्रमुख मांग बैंकिंग सेक्टर में '5-डे वर्क वीक' (5-Day Work Week) को लागू करना है। यूनियनों का पक्ष और तर्क: यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU), जो कि 9 प्रमुख बैंक यूनियनों का एक साझा मंच है, ने साफ कर दिया है कि वे अब और इंतजार करने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि: लंबे समय से लंबित मांग: 5-डे वर्क वीक की मांग पिछले दो सालों से सरकार और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के पास लंबित है। 2015 में हुए 10वें द्विपक्षीय समझौते में दूसरे और चौथे शनिवार की छुट्टी पर सहमति बनी थी, लेकिन बाकी शनिवारों को छुट्टी घोषित करने का वादा आज तक पूरा नहीं हुआ। समझौता और विश्वासघात: मार्च 2024 में हुए वेतन संशोधन समझौते (Wage Revision Settlement) के दौरान IBA और यूनियनों के बीच सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई थी कि सभी शनिवारों को छुट्टी घोषित की जाएगी। इसके बदले में कर्मचारी हर दिन (सोमवार से शुक्रवार) 40 मिनट अतिरिक्त काम करने को भी तैयार हो गए थे, ताकि कुल कामकाजी घंटों (Man-hours) का नुकसान न हो। भेदभाव का आरोप: यूनियनों का तर्क है कि जब आरबीआई (RBI), एलआईसी (LIC), जीआईसी (GIC) और शेयर बाजारों में पहले से ही 5-डे वर्क वीक लागू है, तो बैंकरों के साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है?। सरकार की तरफ से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने में हो रही देरी ने कर्मचारियों के गुस्से को भड़का दिया है, जिसके परिणामस्वरूप यह हड़ताल बुलाई गई है। पीएनबी और बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने जारी की चेतावनी इस हड़ताल की गंभीरता को देखते हुए कई बड़े बैंकों ने पहले ही अपने ग्राहकों और शेयरधारकों को सचेत कर दिया है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB): देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पीएनबी ने अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में स्वीकार किया है कि ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और अन्य यूनियनों ने हड़ताल का नोटिस दिया है। बैंक ने कहा है कि हालांकि वे हड़ताल के दौरान कामकाज सुचारू रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं, लेकिन फिर भी शाखाओं और प्रशासनिक कार्यालयों में कामकाज प्रभावित होने की पूरी संभावना है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र: इसी तरह, बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने भी चेतावनी जारी की है कि 27 जनवरी को हड़ताल के कारण उनकी शाखाओं में सामान्य बैंकिंग सेवाएं बाधित हो सकती हैं। यह चेतावनी साफ संकेत है कि हड़ताल का असर व्यापक होगा और ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हड़ताल का आम आदमी पर क्या होगा असर? चार दिनों की इस बंदी का असर सीधा आपकी जेब और आपके जरूरी कामों पर पड़ेगा। जानिए कौन सी सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी: चेक क्लीयरेंस (Cheque Clearance): सबसे बड़ा झटका उन लोगों को लगेगा जिन्होंने हाल ही में कोई चेक जमा किया है या करने वाले हैं। चूंकि क्लीयरेंस हाउस (Clearance House) में मानव संसाधन की जरूरत होती है, हड़ताल और छुट्टियों के कारण लाखों चेक अटक सकते हैं। अगर आपने किसी ईएमआई (EMI) या भुगतान के लिए चेक दिया है, तो उसके बाउंस होने या लेट होने का खतरा बढ़ जाएगा। नकद की किल्लत (Cash Crunch): लगातार चार दिन बैंक बंद रहने से एटीएम मशीनों (ATMs) में कैश की किल्लत हो सकती है। आमतौर पर एटीएम में एक या दो दिन का कैश लोड किया जाता है। तीसरे और चौथे दिन तक आते-आते, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में, एटीएम खाली हो सकते हैं। ब्रांच विजिट (Branch Visits): पासबुक अपडेट कराना, नया खाता खुलवाना, केवाईसी (KYC) जमा करना, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) बनवाना या लॉकर ऑपरेट करना—ये सभी काम 24 से 27 जनवरी के बीच पूरी तरह बंद रहेंगे। विदेशी मुद्रा और व्यापार (Forex & Trade): आयात-निर्यात से जुड़े व्यापारियों के लिए यह समय मुश्किल भरा होगा। लेटर ऑफ क्रेडिट (Letter of Credit) और फॉरेक्स ट्रांजेक्शन में देरी होने से व्यापारिक सौदों पर असर पड़ सकता है। डिजिटल बैंकिंग: आपकी जीवनरेखा राहत की बात यह है कि "डिजिटल इंडिया" के इस दौर में बैंक बंद होने का मतलब पूरी तरह से 'बंद' होना नहीं है। बैंकों ने स्पष्ट किया है कि भले ही शाखाओं के ताले लटके रहें, लेकिन डिजिटल द्वार खुले रहेंगे। हड़ताल के दौरान आप इन सेवाओं का बेरोकटोक इस्तेमाल कर सकते हैं: इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप: आप अपने बैंक के ऐप या वेबसाइट के जरिए बैलेंस चेक कर सकते हैं, फंड ट्रांसफर कर सकते हैं और बिल भर सकते हैं। यूपीआई (UPI): Google Pay, PhonePe, Paytm और BHIM जैसे ऐप्स सामान्य रूप से काम करेंगे। छोटे-मोटे लेन-देन के लिए यह सबसे बेहतरीन विकल्प है। एटीएम सेवाएं: हालांकि कैश खत्म होने का डर है, लेकिन एटीएम नेटवर्क तकनीकी रूप से चालू रहेगा। आप नकद निकासी के अलावा मिनी स्टेटमेंट और पिन चेंज जैसी सुविधाएं ले सकते हैं। ऑनलाइन आरटीजीएस/एनईएफटी (Online RTGS/NEFT): अगर आप नेट बैंकिंग के जरिए NEFT या RTGS करते हैं, तो यह सेवा 24x7 उपलब्ध रहेगी। लेकिन याद रखें, अगर आप ब्रांच जाकर आरटीजीएस फॉर्म भरते हैं, तो वह काम नहीं होगा। 5-डे वर्क वीक: क्या यह मांग जायज है? बैंकिंग सेक्टर में 5-डे वर्क वीक की मांग ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है। पक्ष में तर्क: कर्मचारियों का कहना है कि काम का दबाव (Work Pressure) बेहद बढ़ गया है। डिजिटल बैंकिंग के कारण काम की गति 24x7 हो गई है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य और परिवार के लिए समय निकालने के लिए शनिवार की छुट्टी जरूरी है। उन्होंने इसके बदले में रोज 40 मिनट ज्यादा काम करने का प्रस्ताव भी दिया है, जो उत्पादकता (Productivity) को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है। विपक्ष में तर्क: आलोचकों और कुछ व्यापारिक संगठनों का मानना है कि भारत जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्था में, जहां नकद लेन-देन अभी भी बहुत ज्यादा है, बैंकों का हफ्ते में दो दिन बंद रहना व्यापार की गति को धीमा कर सकता है। चेक क्लीयरेंस और लोन प्रोसेसिंग में होने वाली देरी से छोटे व्यापारियों (MSMEs) को नुकसान हो सकता है। फिर भी, जिस तरह से एलआईसी और आरबीआई ने 5-डे वीक को सफलतापूर्वक लागू किया है, उसे देखते हुए बैंक यूनियनों की मांग को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। सरकार के पास यह प्रस्ताव विचाराधीन है और संभव है कि आने वाले समय में इसे मंजूरी मिल जाए, लेकिन फिलहाल यह हड़ताल का कारण बना हुआ है। ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह (Advisory) अगर आप किसी भी असुविधा से बचना चाहते हैं, तो अगले 48 घंटों में ये काम जरूर निपटा लें: पर्याप्त कैश निकाल लें: एटीएम सूखने का इंतजार न करें। अपनी जरूरत के हिसाब से नकद राशि पहले ही निकालकर रख लें। चेक का काम निपटाएं: अगर कोई चेक क्लीयर होना है, तो ध्यान रखें कि वह 23 जनवरी (शुक्रवार) तक क्लीयरेंस के लिए चला जाए। वरना वह सीधे 28 जनवरी को प्रोसेस होगा। ऑनलाइन बैंकिंग क्रेडेंशियल्स चेक करें: सुनिश्चित करें कि आपका नेट बैंकिंग पासवर्ड और यूजर आईडी काम कर रहा है। अगर आप मोबाइल बैंकिंग इस्तेमाल नहीं करते, तो ऐप डाउनलोड करके रजिस्टर कर लें। स्कैमर्स से सावधान रहें: हड़ताल और छुट्टियों के दौरान साइबर ठग सक्रिय हो जाते हैं। वे "आपका खाता ब्लॉक हो जाएगा क्योंकि बैंक बंद है" जैसे मैसेज भेजकर आपको ठगने की कोशिश कर सकते हैं। याद रखें, बैंक कभी भी आपसे फोन या एसएमएस पर पासवर्ड या ओटीपी नहीं मांगते। 27 जनवरी 2026 की बैंक हड़ताल और उससे पहले की छुट्टियां निश्चित रूप से आम जनता के लिए चुनौती पेश करेंगी। हालांकि, डिजिटल बैंकिंग के दौर में इसका असर पहले जैसा व्यापक नहीं होगा, लेकिन फिर भी नकद आधारित लेन-देन और कागजी कार्यवाही पर ब्रेक जरूर लगेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार 27 जनवरी से पहले यूनियनों की 5-डे वर्क वीक की मांग पर कोई सकारात्मक निर्णय लेती है और हड़ताल टलती है, या फिर देश को बैंकिंग सेवाओं में बाधा का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल, समझदारी इसी में है कि आप पहले से तैयार रहें। 24 जनवरी 2026 से 27 जनवरी 2026 तक देश भर के बैंक लगातार चार दिन बंद रहेंगे। 24 को चौथा शनिवार, 25 को रविवार और 26 को गणतंत्र दिवस की छुट्टी है। इसके बाद, 27 जनवरी को बैंक यूनियनों (UFBU) ने '5-डे वर्क वीक' की मांग को लेकर देशव्यापी हड़ताल बुलाई है। पीएनबी और अन्य बैंकों ने सेवाओं में बाधा की चेतावनी दी है। हालांकि, नेट बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाएं जारी रहेंगी। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे नकद और चेक से जुड़े काम 23 जनवरी तक निपटा लें।
नई दिल्ली: देश भर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी जहाँ एक ओर 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने एक सरप्राइज देते हुए फाइनेंशियल सेक्टर के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए खजाना खोल दिया है। इसे 8वें वेतन आयोग की सुगबुगाहट के बीच एक बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।Read also:-सपनों का दुखद अंत: मेरठ में 'अफसर' बनने की तैयारी कर रहे युवक ने बेडरूम में लगाई फांसी, मौत से पहले लिखा- 'पत्नी और ससुराल वालों ने जीना हराम कर दिया...' वित्त मंत्रालय ने हाल ही में जारी एक अधिसूचना (Notification) के जरिए पब्लिक सेक्टर जनरल इंश्योरेंस कंपनियों (PSGICs), नाबार्ड (NABARD) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए वेतन और पेंशन संशोधन को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला न केवल इन संस्थानों के कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाएगा, बल्कि बढ़ती महंगाई के दौर में उन्हें एक मजबूत 'फाइनेंशियल शील्ड' (सुरक्षा कवच) भी प्रदान करेगा। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि इस फैसले की बारीकियां क्या हैं, एरियर का गणित क्या है, और इसका सीधा असर आपकी जेब पर कैसे पड़ेगा। सरकार का बड़ा फैसला: एक नज़र में सब कुछ वित्त मंत्रालय द्वारा जारी की गई रिलीज केवल एक सामान्य वेतन वृद्धि नहीं है, बल्कि यह सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जो वह अपने 'फाइनेंशियल वॉरियर्स' (वित्तीय योद्धाओं) के प्रति रखती है। कोरोना काल और उसके बाद की आर्थिक चुनौतियों के बीच बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर ने देश की अर्थव्यवस्था को संभाले रखने में जो भूमिका निभाई है, यह फैसला उसी का सम्मान है। इस फैसले के मुख्य लाभार्थी कौन हैं? सरकार के इस निर्णय से सीधे तौर पर तीन प्रमुख वर्गों को फायदा होगा: PSGIC: पब्लिक सेक्टर जनरल इंश्योरेंस कंपनियां (जैसे न्यू इंडिया एश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस आदि)। RBI: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पेंशनर्स। NABARD: नाबार्ड के मौजूदा कर्मचारी और पुराने पेंशनर्स। महत्वपूर्ण आंकड़ा: "सरकार के इस फैसले से कुल मिलाकर लगभग 46,322 कर्मचारियों, 23,570 पेंशनर्स और 23,260 फैमिली पेंशनर्स को फायदा होने की उम्मीद है। यह संख्या लगभग 1 लाख परिवारों की खुशियों से जुड़ी है।" PSGIC कर्मचारियों के लिए बंपर धमाका: सैलरी में भारी उछाल पब्लिक सेक्टर जनरल इंश्योरेंस कंपनियों (PSGICs) के कर्मचारियों के लिए यह खबर किसी लॉटरी से कम नहीं है। लंबे समय से वेतन संशोधन (Wage Revision) की मांग कर रहे इन कर्मचारियों की मुराद अब पूरी हो गई है। वेतन वृद्धि का गणित और तारीख लागू होने की तारीख: यह वेतन संशोधन 01 अगस्त, 2022 से प्रभावी माना जाएगा। इसका अर्थ है कि कर्मचारियों को पिछले 2 साल से ज्यादा का एरियर (Arrears) एकमुश्त मिलेगा। कुल बढ़ोतरी: वेतन बिल (Wage Bill) में कुल 12.41% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। मूल वेतन + DA: सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि मौजूदा मूल वेतन (Basic Pay) और महंगाई भत्ते (DA) को मिलाकर 14% की वृद्धि की गई है। क्यों है यह महत्वपूर्ण? बीमा क्षेत्र के कर्मचारी पिछले कई वर्षों से वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग कर रहे थे। 12.41% की यह वृद्धि न केवल उनकी क्रय शक्ति (Purchasing Power) को बढ़ाएगी बल्कि प्राइवेट सेक्टर की इंश्योरेंस कंपनियों के मुकाबले उनके वेतन पैकेज को प्रतिस्पर्धी भी बनाएगी। लाभार्थी: इस फैसले से 43,247 PSGIC कर्मचारी सीधे लाभान्वित होंगे। RBI पेंशनर्स की 'पेंशन अपडेशन' की मांग पूरी: 10% की सीधी बढ़ोतरी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पेंशनर्स के लिए यह फैसला ऐतिहासिक है। RBI के रिटायर कर्मचारी लंबे समय से अपनी पेंशन को अपडेट करने की मांग कर रहे थे। वित्त मंत्रालय ने अंततः उनकी पुकार सुन ली है। क्या मिला है RBI पेंशनर्स को? सरकार ने RBI के रिटायर कर्मचारियों के लिए पेंशन और फैमिली पेंशन में संशोधन को मंजूरी दी है। यह बदलाव उन लोगों के लिए जीवन रक्षक साबित होगा जो बढ़ती उम्र और महंगाई के बीच अपनी जमा पूंजी पर निर्भर थे। लागू होने की तारीख: 1 नवंबर, 2022 (01.11.2022)। वृद्धि दर: बेसिक पेंशन (Basic Pension) और महंगाई राहत (Dearness Relief) में संयुक्त रूप से 10% की बढ़ोतरी की गई है। 1.43 का जादुई गुणांक: तकनीकी भाषा में समझें तो, सभी रिटायर लोगों के लिए बेसिक पेंशन में 1.43 गुना (Factor of 1.43) की बढ़ोतरी होगी। इसका सीधा मतलब है कि आपकी जो बेसिक पेंशन पहले थी, अब वह 1.43 गुना बढ़कर कैलकुलेट होगी, जिससे फाइनल पेंशन राशि में जबरदस्त उछाल आएगा। लाभार्थियों का दायरा कुल लाभार्थी: 30,769 लोग। पेंशनर्स: 22,580 फैमिली पेंशनर्स: 8,189 सरकारी खजाने पर असर सरकार ने इस बदलाव के लिए दिल खोलकर पैसा खर्च किया है। कुल अनुमानित खर्च: 2,696.82 करोड़ रुपये। एरियर (एक बार का खर्च): 2,485.02 करोड़ रुपये (यह राशि पेंशनर्स के बैंक खातों में एरियर के रूप में जाएगी)। सालाना अतिरिक्त खर्च: 211.80 करोड़ रुपये। नाबार्ड (NABARD): वेतन और पेंशन दोनों में 'डबल बोनान्ज़ा' नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड), जो भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, के कर्मचारियों को सरकार ने निराश नहीं किया है। यहाँ वेतन और पेंशन दोनों मोर्चों पर खुशखबरी मिली है। (A) नाबार्ड कर्मचारियों का वेतन संशोधन प्रभावी तिथि: 1 नवंबर, 2022। कवरेज: ग्रुप 'A' (अधिकारी), ग्रुप 'B' और ग्रुप 'C' (कर्मचारी) - यानी चपरासी से लेकर शीर्ष अधिकारियों तक सभी को इसका लाभ मिलेगा। कितनी बढ़ी सैलरी: वेतन और भत्तों (Allowances) में लगभग 20% की भारी-भरकम बढ़ोतरी की गई है। बैंकिंग सेक्टर में 20% की हाइक को बहुत ही सम्मानजनक माना जाता है। खर्च: इस वेतन वृद्धि से सरकार पर सालाना 170 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ आएगा। (B) नाबार्ड पेंशनर्स के लिए समानता (Parity) नाबार्ड के पेंशनर्स की एक पुरानी शिकायत थी कि उनकी पेंशन RBI के पेंशनर्स के मुकाबले कम है, जबकि दोनों संस्थान एक ही तरह के ढांचे से जुड़े हैं। बड़ा बदलाव: जो लोग नाबार्ड द्वारा मूल रूप से भर्ती किए गए थे और 1 नवंबर, 2017 से पहले रिटायर हुए थे, उनकी बेसिक पेंशन और फैमिली पेंशन को अब 'पूर्व-RBI नाबार्ड' रिटायर लोगों के बराबर कर दिया गया है। एरियर का भुगतान: पेंशन में इस सुधार के कारण बकाया भुगतान (Arrears) के रूप में 510 करोड़ रुपये का वितरण किया जाएगा। 8वें वेतन आयोग का कनेक्शन क्या है? अब सवाल यह उठता है कि इस खबर का 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से क्या संबंध है? तकनीकी रूप से, 8वां वेतन आयोग केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों (Central Government Employees) के लिए होता है, जबकि RBI, नाबार्ड और इंश्योरेंस कंपनियां स्वायत्त संस्थाएं (Autonomous Bodies) या PSU हैं। लेकिन, विश्लेषक (Analysts) इसे एक बड़े संकेत के रूप में देख रहे हैं: सरकार का 'मूड': लोकसभा चुनावों के बाद और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले, सरकार का कर्मचारियों के प्रति नरम रुख यह दिखाता है कि वह 'वेतन और पेंशन' के मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। बेंचमार्क सेट करना: जब RBI और नाबार्ड जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों में वेतन में 14% से 20% तक की वृद्धि की जाती है, तो यह आगामी वेतन आयोग के लिए एक 'बेंचमार्क' (मानक) तय करता है। केंद्रीय कर्मचारी अब सरकार से इससे कम की उम्मीद नहीं करेंगे। पेंशन सुधार: RBI में पेंशन अपडेशन को मंजूरी देना यह दर्शाता है कि सरकार पुरानी पेंशन व्यवस्थाओं में सुधार के लिए तैयार है। यह उन केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आशा की किरण है जो OPS (Old Pension Scheme) या NPS में सुधार की मांग कर रहे हैं। एरियर कैलकुलेशन: आपकी जेब में कितना पैसा आएगा? यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। चूँकि ये फैसले 2022 से लागू हो रहे हैं, इसलिए कर्मचारियों और पेंशनर्स को एक मोटी रकम एरियर (बकाया) के रूप में मिलेगी। आइए एक उदाहरण से समझते हैं। उदाहरण (Hypothetical Calculation for PSGIC/NABARD): मान लीजिए एक कर्मचारी की अगस्त 2022 में बेसिक सैलरी 50,000 रुपये थी। पुरानी सैलरी: ₹50,000 (बेसिक) + DA वेतन वृद्धि: लगभग 14-20% (औसतन 15% मान लेते हैं) सैलरी में मासिक अंतर: ₹7,500 (अनुमानित) एरियर की अवधि: अगस्त 2022 से अगस्त 2024 (24 महीने) + अब तक का समय। कुल महीने: लगभग 30 महीने। कुल एरियर: 30 महीने x ₹7,500 = ₹2,25,000 (लगभग) (नोट: यह केवल एक उदाहरण है। वास्तविक गणना आपके ग्रेड, बेसिक पे और लागू DA के आधार पर अलग होगी। लेकिन यह तय है कि लाखों रुपये एरियर के रूप में मिलेंगे।) अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: बाजार में आएगा बूम इस फैसले का असर सिर्फ कर्मचारियों के बैंक खातों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह व्यापक अर्थव्यवस्था (Macro Economy) को भी प्रभावित करेगा। लिक्विडिटी (तरलता): जब हजारों करोड़ रुपये (लगभग 2500+ करोड़ एरियर) एक साथ बाजार में आएंगे, तो इससे मांग (Demand) बढ़ेगी। सेक्टर्स को फायदा: रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर को इसका सीधा फायदा मिलेगा क्योंकि कर्मचारी एरियर का पैसा अक्सर घर, गाड़ी या इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने में निवेश करते हैं। टैक्स कलेक्शन: बढ़ी हुई सैलरी और एरियर पर सरकार को इनकम टैक्स (TDS) भी मिलेगा, जिससे राजस्व में बढ़ोतरी होगी। कर्मचारियों के लिए 'अच्छे दिन' वित्त मंत्रालय का यह फैसला निश्चित रूप से स्वागत योग्य है। जहाँ एक तरफ महंगाई दर (Inflation Rate) आम आदमी की कमर तोड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ 14% से 20% तक की वेतन वृद्धि एक बड़ी राहत है। यह फैसला 8वें वेतन आयोग की मांग कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों और राज्य कर्मचारियों के लिए भी एक 'बूस्टर डोज़' का काम करेगा। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार की अगली घोषणा पर टिकी हैं कि क्या वह केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग के गठन की आधिकारिक घोषणा बजट सत्र या उसके बाद करती है। फिलहाल, RBI, नाबार्ड और सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए यह जश्न मनाने का समय है। उनकी लंबी सेवा और समर्पण को सरकार ने न केवल शब्दों में बल्कि 'आंकड़ों' में भी सम्मान दिया है। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) Q1: क्या यह वेतन वृद्धि सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए है? Ans: नहीं, वर्तमान आदेश केवल पब्लिक सेक्टर जनरल इंश्योरेंस कंपनियों (PSGIC), नाबार्ड (NABARD) और आरबीआई (RBI) के कर्मचारियों/पेंशनर्स के लिए है। केंद्रीय कर्मचारियों (Railway, Defence, etc.) के लिए 8वें वेतन आयोग का फैसला अभी बाकी है। Q2: एरियर (Arrears) का भुगतान कब होगा? Ans: वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद, संबंधित विभाग (RBI/NABARD/Insurance Companies) अपनी आंतरिक प्रक्रिया पूरी करके अगले 1-2 महीनों के भीतर वेतन के साथ एरियर का भुगतान शुरू कर देंगे। Q3: क्या फैमिली पेंशनर्स को भी इसका लाभ मिलेगा? Ans: जी हाँ, RBI और PSGIC के फैमिली पेंशनर्स को भी इस बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा, जैसा कि अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है। Q4: 8वां वेतन आयोग कब आएगा? Ans: 8वें वेतन आयोग को लेकर अभी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है, लेकिन परंपरा के अनुसार हर 10 साल में वेतन आयोग आता है। 7वां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, इसलिए 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 2026 से लागू होने की उम्मीद है। Q5: नाबार्ड कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ी है? Ans: नाबार्ड के ग्रुप A, B और C कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में लगभग 20% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। (अस्वीकरण: यह लेख उपलब्ध जानकारी और सरकारी अधिसूचनाओं के विश्लेषण पर आधारित है। सटीक गणना और भुगतान के लिए कर्मचारी अपने विभाग के आधिकारिक सर्कुलर का संदर्भ लें।)
नई दिल्ली/मुंबई (बिज़नेस डेस्क)। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए साल 2026 की शुरुआत किसी बुरे सपने से कम नहीं रही है। शुक्रवार को विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Forex Market) में जो हुआ, उसने सरकार, रिज़र्व बैंक और आम निवेशकों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं। भारतीय रुपया (Indian Rupee) डॉलर के मुकाबले अपने इतिहास के अब तक के सबसे निचले स्तर यानी 91.99 पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद अहम 92 रुपये के स्तर से महज कुछ पैसे दूर है।READ ALSO:-8th Pay Commission: अगर फिटमेंट फैक्टर हुआ 3.25, तो कितनी होगी सैलरी? 60 पन्नों के ज्ञापन में छिपा है आपकी तरक्की का पूरा रोडमैप बाजार खुलने के साथ ही रुपये पर दबाव साफ देखा जा सकता था। आयातकों (Importers) की ओर से डॉलर की भारी मांग और विदेशी फंड्स की निकासी ने रुपये को संभलने का कोई मौका नहीं दिया। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, दिन के कारोबार के अंत तक रुपया रसातल में जा चुका था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल एक दिन की कहानी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक और घरेलू कारकों का एक जटिल जाल है। गिरावट की टाइमलाइन: 90 से 92 का सफर (The Timeline of Collapse) रुपये की यह गिरावट अचानक नहीं हुई है, बल्कि यह पिछले कुछ महीनों से जारी दबाव का नतीजा है। दिसंबर 2025: यह वह समय था जब रुपये ने पहली बार 90 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार किया था। उस समय इसे एक बड़ी आर्थिक घटना माना गया था और उम्मीद थी कि आरबीआई (RBI) के हस्तक्षेप से स्थिति सुधरेगी। जनवरी 2026 (शुरुआत): नया साल नई चुनौतियां लेकर आया। साल की शुरुआत से ही रुपया दबाव में रहा। 23 जनवरी 2026: महज 20-22 दिनों के भीतर रुपया 91 के स्तर को पार करते हुए 91.99 तक लुढ़क गया। इतनी कम समय सीमा में लगभग 2 रुपये की गिरावट किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। रुपये की कमर तोड़ने वाले 3 बड़े 'विलन' बाजार के दिग्गजों और अर्थशास्त्रियों ने इस ऐतिहासिक गिरावट के लिए मुख्य रूप से तीन बड़े कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। आइये इन्हें विस्तार से समझते हैं: 1. विदेशी निवेशकों (FPI) की रिकॉर्ड बिकवाली: बाजार से मोहभंग भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) की रीढ़ माने जाने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) अब भारतीय बाजार से अपना पैसा तेजी से निकाल रहे हैं। आंकड़े क्या कहते हैं? जनवरी 2026 के पहले 22 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो FPI ने भारतीय बाजार से कुल ₹36,500 करोड़ की बिकवाली की है। यह एक महीने में होने वाली सबसे बड़ी निकासियों में से एक है। रुपये पर असर: अर्थशास्त्र का सीधा नियम है—जब विदेशी निवेशक भारत में शेयर बेचते हैं, तो उन्हें भुगतान रुपये में मिलता है। वे इस रुपये को अपने देश वापस ले जाने के लिए 'डॉलर' में बदलते हैं। इससे बाजार में रुपये की बिकवाली बढ़ती है और डॉलर की मांग (Demand) में उछाल आता है। परिणाम—रुपया कमजोर हो जाता है। वजह: भारतीय बाजारों का महंगा वैल्यूएशन और चीन जैसे बाजारों में सस्ते विकल्प मिलने के कारण FPI अपना पैसा शिफ्ट कर रहे हैं। 2. ट्रम्प की नीतियां और 'ग्रीनलैंड' विवाद: जियोपॉलिटिकल टेंशन अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के बाद की स्थितियों और डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) की वापसी ने वैश्विक व्यापार समीकरणों को बदल दिया है। ग्रीनलैंड विवाद (Greenland Dispute): हाल ही में उभरे 'ग्रीनलैंड' विवाद ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच तनाव पैदा कर दिया है। ट्रम्प प्रशासन द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों और रणनीतिक चालों ने दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता (Uncertainty) का माहौल बना दिया है। टैरिफ वॉर: ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत लगाए जा रहे नए टैरिफ ने ग्लोबल ट्रेड को डरा दिया है। सुरक्षित निवेश (Safe Haven): जब भी दुनिया में युद्ध या तनाव का माहौल बनता है, निवेशक जोखिम भरे बाजारों (जैसे भारत, ब्राजील) से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले 'अमेरिकी डॉलर' या 'सोने' (Gold) में लगाते हैं। यही कारण है कि डॉलर इंडेक्स (DXY) लगातार मजबूत हो रहा है। अमेरिका की 'सुपरपावर' इकोनॉमी और ब्याज दरें तीसरा और सबसे अहम तकनीकी कारण है अमेरिका की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन। बेरोजगारी दर में कमी: अमेरिका से आ रहे ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, वहां बेरोजगारी की दर घटी है और जॉब मार्केट मजबूत हुआ है। इसका मतलब है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी से कोसों दूर है। ब्याज दरों का गणित: मजबूत इकोनॉमी का मतलब है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) ब्याज दरों में कटौती करने की जल्दबाजी नहीं करेगा। निवेशकों का लालच: अगर अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहेंगी, तो पूरी दुनिया के निवेशक अपना पैसा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स (Treasury Bonds) में लगाएंगे क्योंकि वहां बिना जोखिम के अच्छा रिटर्न मिल रहा है। इस 'रिवर्स फ्लो' के कारण भारत जैसे देशों से डॉलर का बहिर्वाह (Outflow) हो रहा है। क्या है रिकवरी का रास्ता? इस घबराहट के बीच निवेशकों को थोड़ी उम्मीद भी दिखाई दे रही है। CR फॉरेक्स एडवाइजर्स (CR Forex Advisors) के प्रबंध निदेशक अमित पाबारी (Amit Pabari) ने तकनीकी चार्ट्स के आधार पर स्थिति का विश्लेषण किया है। अमित पाबारी का बयान: "रुपया फिलहाल एक 'फ्री फॉल' (मुक्त गिरावट) की स्थिति में है, लेकिन 92.00 का स्तर तकनीकी रूप से एक बहुत मजबूत रेजिस्टेंस (Resistance) है। बाजार की मनोविज्ञान को देखते हुए, यहाँ से डॉलर में मुनाफावसूली आ सकती है। अगर वैश्विक मोर्चे पर तनाव थोड़ा भी कम होता है, तो हम रुपये में एक 'पुलबैक' देख सकते हैं। यह वापस सुधरकर 90.50 से 90.70 की रेंज में आ सकता है। लेकिन अगर 92 का स्तर भी टूट गया, तो अगली गिरावट और भी भयावह हो सकती है।" आम आदमी पर असर: आपकी जेब पर डकैती आप सोच रहे होंगे कि अगर डॉलर महंगा हुआ तो आम आदमी को क्या फर्क पड़ता है? फर्क पड़ता है, और बहुत गहरा पड़ता है: पेट्रोल-डीजल: भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल (Crude Oil) आयात करता है, जिसका भुगतान डॉलर में होता है। महंगा डॉलर मतलब महंगा तेल। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे और माल ढुलाई महंगी होगी। महंगाई (Inflation): जब डीजल महंगा होगा, तो सब्जी से लेकर दूध तक, हर चीज की कीमत बढ़ेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स: मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी जैसे गैजेट्स, जिनके पार्ट्स आयात होते हैं, उनकी कीमतें बढ़ सकती हैं। विदेश में पढ़ाई और यात्रा: जिन माता-पिता के बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं, उन पर सबसे ज्यादा मार पड़ेगी। फीस और खर्च के लिए अब उन्हें ज्यादा रुपये भेजने होंगे। विदेश घूमने जाने वालों का बजट भी 10-15% तक बिगड़ सकता है। रुपये की यह गिरावट भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को बढ़ा सकती है। अब सभी की निगाहें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) पर टिकी हैं। क्या RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) का उपयोग करके डॉलर बेचेगा और रुपये को संभालेगा? या फिर वह रुपये को वैश्विक हवा के रुख के साथ बहने देगा? आने वाले कुछ दिन भारतीय बाजार के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं। अगर आप निवेशक हैं, तो फिलहाल करेंसी रिस्क को हेज (Hedge) करके चलना ही समझदारी होगी।
मुंबई/नई दिल्ली: नए साल 2026 की शुरुआत महंगाई के एक ऐसे दौर के साथ हुई है, जिसने अर्थशास्त्रियों और आम जनता दोनों को चौंका दिया है. आज यानी 23 जनवरी 2026 का दिन भारतीय सराफा बाजार के इतिहास में सुनहरे (Gold) और चमकीले (Silver) अक्षरों में दर्ज हो गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची उथल-पुथल और अमेरिकी नीतियों के चलते सोने और चांदी की कीमतों (Gold Silver Price Today) में आज ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला है.READ ALSO:-Badrinath Dham Kapat Opening Date 2026: 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, वसंत पंचमी पर हुआ तिथियों का ऐलान—जानें पूरी डिटेल इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों ने बाजार में खलबली मचा दी है. आज सोना एक ही दिन में 4,300 रुपए महंगा होकर 1,55,428 रुपए प्रति 10 ग्राम के अब तक के सर्वोच्च शिखर (All-Time High) पर पहुंच गया है. वहीं, चांदी की चमक ने तो निवेशकों की आंखें ही चौंधिया दी हैं. चांदी आज 19,249 रुपए की भारी बढ़त के साथ 3,18,960 रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है. मात्र 23 दिनों के भीतर सोने और चांदी की कीमतों में आया यह उछाल सामान्य नहीं है. यह एक बड़े आर्थिक बदलाव और वैश्विक अनिश्चितता (Global Uncertainty) का संकेत दे रहा है. आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्यों सोना-चांदी आसमान छू रहे हैं, इसके पीछे के 3 बड़े कारण क्या हैं और एक्सपर्ट्स 2026 में कीमतों को कहां तक जाते हुए देख रहे हैं. Gold Silver Price Today: आंकड़ों की जुबानी, तेजी की कहानी बाजार खुलते ही आज कमोडिटी मार्केट में जो तेजी दिखी, उसने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए. IBJA की वेबसाइट के मुताबिक, आज के भाव इस प्रकार हैं: सोना (24 कैरेट/10 ग्राम): आज का भाव ₹1,55,428 है. इससे पहले यह ₹1,51,128 पर बंद हुआ था. यानी सीधा ₹4,300 का मुनाफा उन लोगों को हुआ जिन्होंने कल सोना खरीदा था. चांदी (1 किलो): आज का भाव ₹3,18,960 है. इससे पहले गुरुवार को यह ₹2,99,711 पर थी. एक ही दिन में करीब ₹19,250 की तेजी अभूतपूर्व है. 23 दिनों का रिपोर्ट कार्ड: साल 2026 के अभी सिर्फ 23 दिन बीते हैं, लेकिन इन 23 दिनों में महंगाई का ग्राफ रॉकेट बन चुका है. सोना: इस साल अब तक ₹22,233 महंगा हो चुका है. चांदी: इस साल अब तक ₹88,540 महंगी हो चुकी है. सोने में रिकॉर्ड तोड़ तेजी के 3 बड़े कारण विशेषज्ञों का मानना है कि Gold Silver Price Today में जो आग लगी है, उसके पीछे केवल सट्टेबाजी नहीं, बल्कि ठोस भू-राजनीतिक (Geopolitical) और आर्थिक कारण हैं. सोने की कीमतों में इस ऐतिहासिक उछाल के तीन प्रमुख कारण नीचे दिए गए हैं: ग्लोबल टेंशन और 'ग्रीनलैंड' विवाद (The Greenland Conflict) सोना हमेशा से ही संकट का साथी (Safe Haven Asset) माना जाता है. जब भी दुनिया में युद्ध, तनाव या अस्थिरता का माहौल बनता है, निवेशक शेयर बाजार या बॉन्ड से पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं. वर्तमान में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड (Greenland) पर रणनीतिक नियंत्रण या 'कब्जा' करने की जिद ने पश्चिमी दुनिया में तनाव पैदा कर दिया है. इस मुद्दे पर यूरोपीय देशों ने विरोध जताया, जिसके जवाब में ट्रम्प ने उन पर भारी टैरिफ (Tariff) लगाने की धमकी दे दी है. इस 'ग्रीनलैंड विवाद' ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है. ट्रेड वॉर (Trade War) के खतरे को देखते हुए बड़े-बड़े हेज फंड्स और संस्थागत निवेशक सोने की भारी खरीदारी कर रहे हैं, जिससे कीमतें सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं. रुपए की ऐतिहासिक कमजोरी (₹91.10 प्रति डॉलर) भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना आयात (Import) करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है. जब भारतीय रुपया कमजोर होता है, तो हमें सोना खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर चुकाने पड़ते हैं, जिससे सोने की 'लैंडिंग कॉस्ट' बढ़ जाती है. LKP सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी) जतिन त्रिवेदी बताते हैं, "आज रुपया डॉलर के मुकाबले अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर ₹91.10 पर आ गया है. रुपए की यह रिकॉर्ड कमजोरी सोने की कीमतों में आग में घी का काम कर रही है. भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना थोड़ा कम बढ़े, लेकिन रुपए की गिरावट के कारण घरेलू बाजार में यह ₹1.5 लाख के पार निकल गया है." सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी (Central Bank Buying) दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, जिनमें भारत का रिजर्व बैंक (RBI), चीन का पीपल्स बैंक (PBOC) और रूस का सेंट्रल बैंक शामिल हैं, लगातार सोना खरीद रहे हैं. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में इन बैंकों ने रिकॉर्ड खरीदारी की थी और 2026 की शुरुआत में भी यह ट्रेंड जारी है. केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को डॉलर पर निर्भर रखने के बजाय सोने में डायवर्सिफाई (Diversify) करना चाहते हैं. यह मांग इतनी ज्यादा है कि बाजार में सप्लाई कम पड़ रही है, और अर्थशास्त्र का सीधा नियम है—मांग ज्यादा और सप्लाई कम, तो दाम बढ़ेंगे. चांदी की चमक ने किया हैरान: ₹3.19 लाख का भाव अगर आप सोच रहे हैं कि सिर्फ सोना महंगा हुआ है, तो आप गलत हैं. चांदी ने रिटर्न (Return) के मामले में सोने को भी पछाड़ दिया है. चांदी अब सिर्फ गहनों या सिक्कों की धातु नहीं रही, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण 'इंडस्ट्रियल मेटल' (Industrial Metal) बन गई है. आइये जानते हैं चांदी में इस तूफानी तेजी के 3 प्रमुख कारण: इंडस्ट्रियल डिमांड में विस्फोट (Industrial Revolution) चांदी का उपयोग अब व्यापक स्तर पर हो रहा है. सोलर पैनल्स: ग्रीन एनर्जी की तरफ पूरी दुनिया का फोकस है और फोटोवोल्टिक (Photovoltaic) सेल्स बनाने में चांदी का कोई विकल्प नहीं है. इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV): एक इलेक्ट्रिक कार में सामान्य पेट्रोल कार के मुकाबले कहीं ज्यादा चांदी का इस्तेमाल होता है (सर्किट और बैटरी में). 5G टेक्नोलॉजी: 5G टावर्स और उपकरणों में चांदी की कंडक्टिविटी (Conductivity) की वजह से इसकी भारी मांग है. चांदी अब एक लग्जरी नहीं, बल्कि इंडस्ट्री के लिए 'जरूरी कच्चा माल' बन गई है. 2. ट्रंप का टैरिफ डर और स्टॉकपाइलिंग (Stockpiling) अमेरिकी कंपनियों को डर है कि राष्ट्रपति ट्रंप अगर नए टैरिफ नियम लागू करते हैं या सप्लाई चेन में कोई बाधा आती है, तो उन्हें कच्चा माल नहीं मिलेगा. इस डर से बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां (जैसे टेस्ला, एप्पल, और सोलर पैनल निर्माता) चांदी का भारी स्टॉक (Stockpile) जमा कर रही हैं. इस 'पैनिक बाइंग' (Panic Buying) ने ग्लोबल सप्लाई चेन को सूखा दिया है, जिससे कीमतें ऊपर चढ़ रही हैं. 3. मैन्युफैक्चरर्स की होड़ प्रोडक्शन लाइन रुकने का डर सबसे बड़ा होता है. जैसा कि एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर कहते हैं, "चांदी की कमी साफ दिखाई दे रही है. माइनिंग (खनन) से उतनी चांदी नहीं निकल रही जितनी फैक्ट्रियों को चाहिए. इसलिए मैन्युफैक्चरर्स किसी भी कीमत पर चांदी खरीदने को तैयार हैं ताकि उनका उत्पादन न रुके." क्या ₹1.90 लाख तक जाएगा सोना? (Expert Predictions) निवेशकों के मन में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेजी यहीं रुकेगी या भाव और ऊपर जाएंगे? मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुमान आपको हैरान कर सकते हैं. रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी ने एक बहुत ही बुलिश (Bullish) अनुमान जताया है. उनके अनुसार, "बाजार की स्थितियां अभी भी अस्थिर हैं. अगर अमेरिकी टैरिफ लागू होते हैं और मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव और बढ़ता है, तो 2026 में सोना रुकने वाला नहीं है. मेरा अनुमान है कि सोना ₹1,90,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू सकता है." इसका मतलब है कि मौजूदा स्तर से अभी भी सोने में करीब ₹35,000 से ₹40,000 की तेजी की गुंजाइश बाकी है. चांदी का अगला पड़ाव: ₹4 लाख? चांदी को लेकर बाजार के दिग्गज और भी ज्यादा उत्साहित हैं. अलग-अलग ब्रोकरेज हाउस और एक्सपर्ट्स के टार्गेट इस प्रकार हैं: मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज: ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि 2026 में चांदी ₹3.20 लाख प्रति किलो तक आसानी से पहुंच सकती है. उनकी सलाह है कि सोलर और EV सेक्टर की डिमांड को देखते हुए निवेशकों को हर गिरावट (Dip) पर खरीदारी करनी चाहिए. सैमको सिक्योरिटीज (Samco Securities): टेक्निकल चार्ट्स पर 'ब्रेकआउट' (Breakout) को देखते हुए सैमको का अनुमान है कि मजबूत वैश्विक संकेतों के आधार पर चांदी की कीमतें ₹3.94 लाख प्रति किलो के स्तर को भी छू सकती हैं. नीलेश सुराना (कमोडिटी एक्सपर्ट): ग्रीन एनर्जी की बढ़ती मांग और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना को देखते हुए, उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी $100 प्रति औंस तक जा सकती है. भारतीय रुपयों में यह भाव करीब ₹3.5 लाख से ₹4 लाख प्रति किलो के बीच होगा. रॉबर्ट कियोसाकी (Global Investor): 'रिच डैड पुअर डैड' के लेखक और मशहूर निवेशक रॉबर्ट कियोसाकी ने तो और भी चौंकाने वाला अनुमान लगाया है. उनका कहना है कि डॉलर की कमजोरी और भीषण महंगाई (Hyperinflation) को देखते हुए चांदी साल 2026 में $200 प्रति औंस तक जा सकती है. यह एक बहुत बड़ा आंकड़ा है जो भारतीय बाजार में कीमतों को कई गुना बढ़ा सकता है. 2025 vs 2026: तुलनात्मक विश्लेषण मौजूदा तेजी को समझने के लिए हमें पिछले साल के प्रदर्शन पर भी नजर डालनी होगी. 2025 सोने और चांदी के निवेशकों के लिए 'जैकपॉट' साबित हुआ था. सोने का प्रदर्शन (2025): शुरुआत: 31 दिसंबर 2024 को भाव ₹76,162 था. अंत: 31 दिसंबर 2025 को भाव ₹1,33,195 हो गया. कुल बढ़त: ₹57,033 (75% की वृद्धि). चांदी का प्रदर्शन (2025): शुरुआत: 31 दिसंबर 2024 को भाव ₹86,017 था. अंत: 31 दिसंबर 2025 को भाव ₹2,30,420 हो गया. कुल बढ़त: ₹1,44,403 (167% की भारी वृद्धि). यह डेटा साफ दिखाता है कि चांदी ने सोने के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा रिटर्न दिया है. 2026 के पहले महीने का ट्रेंड बता रहा है कि यह साल 2025 के रिकॉर्ड्स को भी छोटा साबित कर सकता है. आम आदमी पर प्रभाव: शादी-ब्याह और निवेश Gold Silver Price Today में आई इस तेजी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है. शादी का बजट बिगड़ा: भारत में शादियों का सीजन चल रहा है. ऐसे में सोने की कीमतें ₹1.55 लाख पार करने से परिवारों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है. लोग अब भारी गहनों के बजाय हल्के (Lightweight) गहनों की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं या फिर पुराने सोने को एक्सचेंज करके काम चला रहे हैं. ज्वेलरी की मांग में कमी: सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि इतनी ऊंची कीमतों पर ग्राहकों की 'फुटफॉल' (Footfall) कम हो गई है. लोग केवल शगुन के तौर पर छोटी खरीदारी कर रहे हैं. निवेशकों की चांदी: दूसरी तरफ, जिन लोगों ने पिछले साल या उससे पहले सोना-चांदी खरीदा था, उनकी संपत्ति में जबरदस्त इजाफा हुआ है. वे इस तेजी को एक अवसर के रूप में देख रहे हैं. निवेशकों के लिए क्या है सलाह? एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर सलाह देते हैं, "चांदी में लंबी अवधि (Long Term) की तेजी का दौर अभी जारी रहेगा. इंडस्ट्रियल डिमांड एक स्ट्रक्चरल बदलाव है, जो जल्दी खत्म नहीं होगा. इसलिए निवेशकों को कीमतों में आने वाली हर छोटी गिरावट का फायदा उठाना चाहिए और पोर्टफोलियो में चांदी को शामिल करना चाहिए." एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अगर आप फिजिकल गोल्ड (Physical Gold) नहीं खरीद सकते, तो सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) या गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जहां आपको मेकिंग चार्ज नहीं देना पड़ता और सुरक्षा की भी चिंता नहीं रहती. 23 जनवरी 2026 को सोने और चांदी की कीमतों (Gold Silver Price Today) ने जो छलांग लगाई है, वह वैश्विक अर्थव्यवस्था में चल रहे बड़े बदलावों का परिणाम है. ग्रीनलैंड विवाद, कमजोर रुपया और ग्रीन एनर्जी की मांग—ये तीनों कारक मिलकर बुलियन मार्केट को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं. जहां एक तरफ यह महंगाई आम आदमी के लिए चिंता का विषय है, वहीं समझदार निवेशकों के लिए यह वेल्थ क्रिएशन (Wealth Creation) का मौका भी है. अगर एक्सपर्ट्स के अनुमान सही साबित होते हैं, तो ₹1.55 लाख का सोना और ₹3.19 लाख की चांदी भविष्य में 'सस्ती' लग सकती है. बाजार की इस चाल पर नजर बनाए रखें, क्योंकि आने वाले दिन और भी अधिक उतार-चढ़ाव वाले हो सकते हैं. 23 जनवरी को सोने की कीमत ₹4,300 बढ़कर ₹1,55,428 और चांदी ₹19,249 बढ़कर ₹3,18,960 हो गई. इसके मुख्य कारण वैश्विक तनाव, कमजोर रुपया और इंडस्ट्रियल डिमांड हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में सोना ₹1.90 लाख और चांदी ₹4 लाख तक जा सकती है.
जयपुर (Jaipur News): क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तरह आप एटीएम (ATM) मशीन से जब चाहे पैसे निकालते हैं, उसी तरह अपना राशन भी निकाल सकें? यह कल्पना अब हकीकत बनने जा रही है। राजस्थान सरकार ने खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) के तहत राशन वितरण प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव करने का फैसला किया है। अब आपको राशन की दुकान के खुलने का इंतजार करने या घंटों लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी।READ ALSO:-8th Pay Commission: अगर फिटमेंट फैक्टर हुआ 3.25, तो कितनी होगी सैलरी? 60 पन्नों के ज्ञापन में छिपा है आपकी तरक्की का पूरा रोडमैप राज्य सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रदेश के तीन प्रमुख जिलों—जयपुर, बीकानेर और भरतपुर—में 'अनाज एटीएम' (Grain ATM) स्थापित करने की घोषणा की है। इन हाई-टेक मशीनों के जरिए लाभार्थी दिन या रात, किसी भी समय अपना निर्धारित गेहूं प्राप्त कर सकेंगे। कहां होगी शुरुआत और क्या है योजना? राजस्थान के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा (Sumit Godara) ने हाल ही में जानकारी दी कि राशन व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट: शुरुआती चरण में ये मशीनें जयपुर, भरतपुर और बीकानेर जिलों में लगाई जाएंगी। सफलता के बाद विस्तार: यदि इन तीन जिलों में यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे पूरे राजस्थान में लागू किया जाएगा। 73 लाख नए लाभार्थी: सरकार के 'गिव अप' (Give Up) अभियान के तहत 54 लाख से अधिक संपन्न लोगों ने अपनी सब्सिडी छोड़ी है, जिससे करीब 73 लाख नए जरूरतमंदों को खाद्य सुरक्षा सूची में जोड़ा गया है। इन नए लाभार्थियों को भी अनाज एटीएम का सीधा लाभ मिलेगा। अनाज एटीएम (Grain ATM): कैसे काम करती है यह मशीन? यह मशीन बिल्कुल आपके बैंक के एटीएम की तरह दिखती और काम करती है, बस फर्क इतना है कि इससे नोट नहीं, बल्कि अनाज निकलता है। इसे 'अन्नपूर्ति' (Annapurti) मशीन भी कहा जाता है। इसकी कार्यप्रणाली बेहद सरल और सुरक्षित है: टच स्क्रीन और पहचान: लाभार्थी को मशीन की टच स्क्रीन पर अपना राशन कार्ड नंबर या आधार नंबर दर्ज करना होता है। बायोमेट्रिक सत्यापन (Biometric Verification): सुरक्षा के लिए मशीन में फिंगरप्रिंट स्कैनर लगा होता है। जैसे ही आप अपना अंगूठा लगाते हैं, मशीन आपकी पहचान सत्यापित करती है कि आप सही लाभार्थी हैं या नहीं। अनाज का वितरण: पहचान होते ही स्क्रीन पर आपके कोटे का अनाज (जैसे 5 किलो, 10 किलो) दिखाई देगा। मशीन के नीचे बोरी या थैला लगाते ही निर्धारित मात्रा में गेहूं अपने आप निकलकर थैले में भर जाएगा। रफ्तार और सटीकता: यह मशीन 5 से 7 मिनट के भीतर 50 से 70 किलो तक अनाज निकाल सकती है। सबसे खास बात यह है कि इसमें तौल की गड़बड़ी (घटतौली) की कोई गुंजाइश नहीं होती, मशीन उतना ही अनाज देगी जितना आपका हक है। ओडिशा और गुरुग्राम में पहले से सफल है मॉडल राजस्थान कोई पहला राज्य नहीं है जो इस तकनीक को अपना रहा है। 'अनाज एटीएम' की सफलता की कहानी अन्य राज्यों में पहले ही लिखी जा चुकी है। ओडिशा मॉडल: ओडिशा के भुवनेश्वर में यह सिस्टम पहले से चल रहा है। वहां चावल वितरण के लिए इन एटीएम का इस्तेमाल किया जाता है। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) के सहयोग से वहां इसे 'अन्नपूर्ति' नाम से चलाया जा रहा है, जिसने वहां की राशन व्यवस्था को काफी सुगम बना दिया है। देश का पहला अनाज एटीएम: भारत का पहला 'ग्रेन एटीएम' हरियाणा के गुरुग्राम (फर्रुखनगर) में स्थापित किया गया था, जहां से इस तकनीक की शुरुआत हुई थी। आम जनता को क्या होगा फायदा? इस नई व्यवस्था से राशन कार्ड धारकों को कई बड़ी राहतें मिलेंगी: 24x7 उपलब्धता: राशन की दुकान खुलने या डीलर के आने का इंतजार खत्म। आप अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी अनाज ले सकेंगे। पूरा तौल: अक्सर राशन डीलरों पर कम तोलने के आरोप लगते हैं। अनाज एटीएम में इलेक्ट्रॉनिक कांटा लगा होता है, जो 100% सटीक वजन देता है। लाइन से मुक्ति: घंटों लाइन में लगने की झंझट खत्म होगी, जिससे दिहाड़ी मजदूरों का समय और पैसा दोनों बचेगा। पारदर्शिता: बायोमेट्रिक सिस्टम होने से फर्जी राशन कार्डों पर लगाम लगेगी और अनाज सही व्यक्ति तक पहुंचेगा। राजस्थान सरकार का अनाज एटीएम प्रोजेक्ट 'डिजिटल इंडिया' और खाद्य सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। जयपुर, बीकानेर और भरतपुर के लाभार्थियों को जल्द ही लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी। यह तकनीक न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि गरीब के हक का एक-एक दाना उसे सम्मान के साथ मिले। अब देखना यह है कि पायलट प्रोजेक्ट के बाद यह सुविधा आपके शहर तक कब पहुंचती है। संक्षिप्त सारांश: राजस्थान सरकार जयपुर, बीकानेर और भरतपुर में 'अनाज एटीएम' शुरू करने जा रही है। इस ऑटोमेटेड मशीन से राशन कार्ड धारक बायोमेट्रिक पहचान के जरिए 24 घंटे कभी भी अपना गेहूं प्राप्त कर सकेंगे। यह मशीन 5 मिनट में 50 किलो तक अनाज डिस्पेंस कर सकती है। ओडिशा और हरियाणा के बाद राजस्थान इस तकनीक को अपनाने वाला प्रमुख राज्य बनने जा रहा है।
नई दिल्ली / बिजनेस डेस्क देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी जिस घड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वह है 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का गठन और उसकी सिफारिशें। महंगाई के इस दौर में, जहां घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है, वहीं कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगों का एक विस्तृत खाका पेश कर दिया है।READ ALSO:-भारत की अब तक की सबसे 'हाई-टेक' जनगणना का शंखनाद: 2027 में गिना जाएगा हर सिर और हर घर; पहली बार जातियों का भी होगा डेटाबेस, 33 सवालों में कैद होगी देश की तस्वीर फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन (FNPO) सहित कई प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने सरकार को 60 पन्नों का एक ज्ञापन (Memorandum) सौंपा है। इस ज्ञापन में वेतन विसंगतियों को दूर करने, पुरानी पेंशन बहाली के साथ-साथ जो सबसे बड़ी मांग है, वह है—फिटमेंट फैक्टर को 3.25 करना और सालाना इंक्रीमेंट को 5% तक बढ़ाना। अगर सरकार इन मांगों पर अपनी मुहर लगा देती है, तो सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में जो उछाल आएगा, वह पिछले कई वेतन आयोगों के मुकाबले अभूतपूर्व होगा। आज हम आपको विस्तार से समझाएंगे कि आखिर यह 3.25 फिटमेंट फैक्टर का गणित क्या है, इससे आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा और लेवल-वार सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी। फिटमेंट फैक्टर: सैलरी गणना की रीढ़ (The Backbone of Salary Calculation) सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) आखिर होता क्या है। सरल शब्दों में कहें तो यह वहmultiplier (गुणक) है, जिसका उपयोग एक वेतन आयोग से दूसरे वेतन आयोग में जाते समय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी (Basic Pay) को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में: सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। यानी अगर किसी की बेसिक सैलरी 6वें वेतन आयोग में 7,000 रुपये थी, तो उसे 2.57 से गुणा करके 18,000 रुपये (न्यूनतम बेसिक पे) कर दिया गया। 8वें वेतन आयोग की मांग: कर्मचारी संगठन अब 3.25 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि महंगाई और जीडीपी की वृद्धि दर को देखते हुए 2.57 का फैक्टर अब पुराना और नाकाफी हो चुका है। 3.25 फिटमेंट फैक्टर का जादुई गुणा-गणित यदि सरकार 3.25 के फार्मूले को स्वीकार करती है, तो सैलरी का स्ट्रक्चर पूरी तरह बदल जाएगा। आइए, अलग-अलग पे-लेवल (Pay Level) के हिसाब से देखते हैं कि सैलरी में कितना अंतर आएगा। लेवल-वार सैलरी विश्लेषण: किसकी जेब में आएंगे कितने पैसे? फेडरेशन के प्रस्ताव के अनुसार, हर स्तर के कर्मचारी को बड़ा लाभ होने की उम्मीद है। यहां हमने लेवल 1 (न्यूनतम) से लेकर लेवल 18 (अधिकतम/कैबिनेट सचिव स्तर) तक का विवरण तैयार किया है: (A) Level 1: ग्रुप डी और एंट्री लेवल कर्मचारी यह वह स्तर है जहां सबसे ज्यादा संख्या में कर्मचारी आते हैं। वर्तमान बेसिक पे (7th CPC): ₹18,000 प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर: 3.25 नई अनुमानित बेसिक पे: ₹18,000 × 3.25 = ₹58,500 कुल बढ़ोतरी: ₹40,500 विश्लेषण: यह एक विशाल छलांग है। अभी 18,000 की बेसिक सैलरी पर भत्ते मिलाकर हाथ में 30-35 हजार आते हैं, लेकिन 58,500 बेसिक होने पर यह सैलरी 80-90 हजार के पार जा सकती है। (B) Level 6: ग्रुप बी (गैर-राजपत्रित) कर्मचारी इस श्रेणी में ऑफिस सुपरिटेंडेंट, इंस्पेक्टर आदि आते हैं। वर्तमान बेसिक पे: ₹35,400 प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर: 3.25 नई अनुमानित बेसिक पे: ₹35,400 × 3.25 = ₹1,15,050 कुल बढ़ोतरी: ₹79,650 विश्लेषण: लेवल 6 के कर्मचारियों के लिए यह एक लाइफस्टाइल बदलने वाला इंक्रीमेंट होगा। बेसिक सैलरी का 1 लाख के पार जाना एक बड़ी उपलब्धि होगी। (C) Level 10: ग्रुप ए (एंट्री लेवल अधिकारी) यहां से क्लास-1 अधिकारियों की शुरुआत होती है (जैसे असिस्टेंट कमिश्नर, आदि)। वर्तमान बेसिक पे: ₹56,100 प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर: 3.25 नई अनुमानित बेसिक पे: ₹56,100 × 3.25 = ₹1,82,325 कुल बढ़ोतरी: ₹1,26,225 विश्लेषण: अधिकारियों के वेतन में यह वृद्धि निजी क्षेत्र (Private Sector) के मैनेजरों के वेतन को टक्कर देने वाली साबित होगी। (D) Level 18: शीर्ष नौकरशाह (कैबिनेट सचिव स्तर) यह सरकारी नौकरी का सर्वोच्च वेतन स्तर है। वर्तमान बेसिक पे: ₹2,50,000 प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर: 3.25 नई अनुमानित बेसिक पे: ₹2,50,000 × 3.25 = ₹8,12,500 कुल बढ़ोतरी: ₹5,62,500 विश्लेषण: यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। 8 लाख रुपये प्रति माह का बेसिक वेतन भारतीय प्रशासनिक सेवा के आकर्षण को और बढ़ा देगा। सालाना इंक्रीमेंट: 3% बनाम 5% की लड़ाई फिटमेंट फैक्टर के अलावा, 60 पन्नों के ज्ञापन में एक और महत्वपूर्ण मांग छिपी है—सालाना वेतन वृद्धि (Annual Increment) की दर को बढ़ाना। वर्तमान व्यवस्था (3%) अभी केंद्रीय कर्मचारियों को साल में दो बार महंगाई भत्ता (DA) और साल में एक बार (जुलाई या जनवरी में) 3% का बेसिक इंक्रीमेंट मिलता है। प्रस्तावित व्यवस्था (5%) फेडरेशन की मांग है कि महंगाई की दर को देखते हुए सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 5% किया जाए। यह सुनने में महज 2% का अंतर लगता है, लेकिन 'कंपाउंडिंग' (Compounding) के जरिए यह बहुत बड़ा अंतर पैदा करता है। उदाहरण से समझें (केस स्टडी) मान लीजिए एक कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹60,000 है। परिदृश्य 1: (3% इंक्रीमेंट पर) अगले साल सैलरी बढ़ेगी: ₹60,000 × 3% = ₹1,800 नई सैलरी: ₹61,800 परिदृश्य 2: (5% इंक्रीमेंट - प्रस्तावित) अगले साल सैलरी बढ़ेगी: ₹60,000 × 5% = ₹3,000 नई सैलरी: ₹63,000 अंतर: एक साल में ही ₹1,200 प्रति माह का अंतर आ गया। 10-20 साल की सर्विस में यह अंतर लाखों रुपये में बदल जाएगा, जिससे रिटायरमेंट के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट पर भारी असर पड़ेगा। पेंशनभोगियों के लिए क्या है खास? 8वें वेतन आयोग का लाभ सिर्फ वर्तमान कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि रिटायर हो चुके लाखों पेंशनभोगियों को भी मिलेगा। पेंशन का रिवीजन: पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन भी उसी 3.25 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर रिवाइज की जाएगी। न्यूनतम पेंशन: अगर न्यूनतम वेतन ₹58,500 होता है, तो नियमानुसार न्यूनतम पेंशन (जो वेतन का 50% होती है) ₹29,250 हो जाएगी, जो अभी ₹9,000 है। बुजुर्गों को राहत: बढ़ती उम्र में चिकित्सा और देखभाल के खर्चों को देखते हुए पेंशन में यह बढ़ोतरी एक संजीवनी बूटी का काम करेगी। मांग के पीछे का तर्क: आखिर 3.25 ही क्यों? फेडरेशन ने जो 60 पन्नों का दस्तावेज सौंपा है, उसमें इस मांग के पीछे ठोस तर्क दिए गए हैं। यह मांग हवा-हवाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और आर्थिक सिद्धांतों का हवाला दिया गया है। (A) 1957 ILC (Indian Labour Conference) फॉर्मूला वेतन निर्धारण का आधार डॉ. एक्रोयड (Dr. Aykroyd) द्वारा दिया गया फार्मूला है, जिसे 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (1957) में स्वीकार किया गया था। इसके तहत एक कर्मचारी की न्यूनतम जरूरतों (भोजन, कपड़ा, आवास) की लागत निकाली जाती है। फेडरेशन का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में दाल, दूध, सब्जियां और मकान के किराए में भारी उछाल आया है। बाजार की मौजूदा कीमतों के हिसाब से 18,000 रुपये में एक परिवार का सम्मानजनक जीवनयापन (Decent Standard of Living) असंभव है। (B) सुप्रीम कोर्ट का 'लिविंग वेज' सिद्धांत माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई फैसलों में कहा है कि सरकार को अपने कर्मचारियों को केवल 'न्यूनतम वेतन' (Minimum Wage) नहीं, बल्कि 'जीवन निर्वाह वेतन' (Living Wage) देना चाहिए। लिविंग वेज का मतलब है—रोटी, कपड़ा और मकान के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक दायित्वों के लिए पर्याप्त पैसा। फेडरेशन का तर्क है कि 3.25 का फैक्टर ही कर्मचारियों को 'लिविंग वेज' के करीब ले जा सकता है। (C) पे-गैप (Pay Gap) को कम करना अभी निचले स्तर के कर्मचारियों और शीर्ष अधिकारियों के वेतन में जमीन-आसमान का अंतर है (अनुपात 1:14 के आसपास है)। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि फिटमेंट फैक्टर बढ़ाकर निचले स्तर के कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को सुधारा जाए ताकि यह असमानता कम हो सके। सरकार का रुख और चुनौतियां हालांकि ये मांगे कर्मचारियों के पक्ष में बहुत मजबूत दिखती हैं, लेकिन सरकार के लिए इसे लागू करना आसान नहीं होगा। राजकोषीय बोझ (Fiscal Burden): 3.25 फिटमेंट फैक्टर लागू करने से सरकारी खजाने पर लाखों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। भारत सरकार पहले ही राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने की कोशिश कर रही है। राज्यों पर दबाव: केंद्र सरकार द्वारा वेतन आयोग लागू करते ही राज्य सरकारों पर भी अपने कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने का दबाव आ जाता है, जिससे कई राज्यों की आर्थिक स्थिति चरमरा सकती है। हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि वेतन बढ़ने से बाजार में मांग (Demand) बढ़ेगी, खपत (Consumption) बढ़ेगी और अंततः इससे अर्थव्यवस्था को ही फायदा होगा। कब तक लागू हो सकता है 8वां वेतन आयोग? परंपरागत रूप से, हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग गठित किया जाता है। 7वां वेतन आयोग: 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ था। 8वां वेतन आयोग: इसे 1 जनवरी 2026 से लागू होना चाहिए। इसके लिए सरकार को 2024-25 में ही आयोग का गठन (Constitution of Commission) करना होगा, ताकि आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 1-2 साल का समय मिल सके। वर्तमान में चल रही चर्चाओं और ज्ञापनों को देखते हुए उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में कोई बड़ा ऐलान कर सकती है। उम्मीद की किरण फेडरेशन का 60 पन्नों का ज्ञापन और 3.25 फिटमेंट फैक्टर की मांग ने कर्मचारियों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है। यदि यह लागू होता है, तो यह न केवल सरकारी नौकरी को आर्थिक रूप से और अधिक आकर्षक बनाएगा, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन स्तर में भी सुधार लाएगा। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। प्रमुख बिंदु एक नजर में (Key Highlights) विवरण वर्तमान (7th CPC) मांग (8th CPC प्रस्ताव) फिटमेंट फैक्टर 2.57 3.25 सालाना इंक्रीमेंट 3% 5% न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 ₹58,500 (अनुमानित) न्यूनतम पेंशन ₹9,000 ₹29,250 (अनुमानित) लागू होने की संभावित तिथि - 01 जनवरी 2026 नोट: यह गणनाएं कर्मचारी फेडरेशन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन और मांगों पर आधारित हैं। अंतिम निर्णय सरकार और वेतन आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगा। आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें।
नई दिल्ली: आज के डिजिटल दौर में क्रेडिट कार्ड (Credit Card) हमारी जीवनशैली का एक अभिन्न अंग बन चुका है। 'अभी खरीदें, बाद में चुकाएं' (Buy Now, Pay Later) की सुविधा, आकर्षक रिवॉर्ड पॉइंट्स और कैशबैक के लालच में हम अक्सर अपनी चादर से बाहर पैर पसार लेते हैं। शॉपिंग मॉल हो या ऑनलाइन सेल, क्रेडिट कार्ड स्वाइप करना बेहद आसान लगता है। लेकिन असली समस्या तब शुरू होती है जब महीने के अंत में भारी-भरकम बिल सामने आता है।Read also:-जम्मू-कश्मीर: डोडा में बड़ा हादसा, 200 फीट गहरी खाई में गिरी सेना की गाड़ी, 10 जवान शहीद; रेस्क्यू ऑपरेशन में एयरलिफ्ट किए गए घायल कई बार नौकरी जाने, मेडिकल इमरजेंसी या खराब फाइनेंशियल प्लानिंग की वजह से लोग समय पर बिल नहीं भर पाते। ऐसे में एक डर जो हर आम आदमी को सबसे ज्यादा सताता है, वह यह है कि "क्या क्रेडिट कार्ड का बिल न भरने पर पुलिस घर आ सकती है? क्या मुझे जेल हो सकती है?" यह सवाल न केवल डराता है बल्कि मानसिक तनाव का भी बड़ा कारण बनता है। आज हम आपको इस डर के पीछे का सच, भारतीय कानून के नियम और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से बताएंगे। कानूनी हकीकत: क्या वाकई जेल हो सकती है? सबसे पहले और सबसे अहम बात जो आपको जाननी चाहिए, वह यह है कि क्रेडिट कार्ड का बिल न चुका पाना भारतीय कानून की नजर में 'सिविल डिस्प्यूट' (Civil Dispute) यानी नागरिक विवाद माना जाता है। यह कोई आपराधिक कृत्य (Criminal Offense) नहीं है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, कर्ज न चुका पाना अपराध की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए: पुलिस आपको गिरफ्तार नहीं कर सकती। आपके खिलाफ सीधे तौर पर कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की जा सकती। बैंक या रिकवरी एजेंट पुलिस को लेकर आपके घर नहीं आ सकते। भारतीय संविधान और कानून किसी भी व्यक्ति को केवल कर्ज न चुका पाने के कारण जेल भेजने की अनुमति नहीं देते, बशर्ते इसमें कोई आपराधिक साजिश न हो। बैंक वसूली के लिए क्या प्रक्रिया अपनाते हैं? भले ही आपको जेल का डर न हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बिल न भरने पर आप निश्चिंत हो जाएं। बैंक अपना पैसा वसूलने के लिए एक सख्त और चरणबद्ध प्रक्रिया का पालन करते हैं, जो किसी भी व्यक्ति के लिए मानसिक रूप से परेशान करने वाली हो सकती है। रिमाइंडर और अलर्ट (Reminders): ड्यू डेट (Due Date) निकलने के तुरंत बाद बैंक आपको एसएमएस और ईमेल के जरिए अलर्ट भेजता है। साथ ही लेट फीस और ब्याज जुड़ना शुरू हो जाता है। कार्ड ब्लॉक करना: कुछ दिनों तक भुगतान न होने पर बैंक आपके कार्ड को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर सकता है, जिससे आप आगे कोई ट्रांजेक्शन नहीं कर पाएंगे। रिकवरी एजेंट (Recovery Agents): अगर आप 90 दिनों तक (NPA घोषित होने से पहले) भुगतान नहीं करते हैं, तो बैंक रिकवरी एजेंटों को आपका केस सौंप देता है। ये एजेंट आपको कॉल कर सकते हैं या घर आ सकते हैं। कानूनी नोटिस (Legal Notice): जब रिकवरी एजेंटों से भी बात नहीं बनती, तो बैंक आपको वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भेजता है। इसमें आपको एक निश्चित समय के भीतर पैसा चुकाने या कोर्ट में जवाब देने के लिए कहा जाता है। सावधान: जेल कब हो सकती है? (The Wilful Defaulter Trap) अब सवाल यह है कि क्या किसी भी सूरत में जेल नहीं हो सकती? यहीं पर पेंच फंसा है। सामान्यतः बिल न भरने पर जेल नहीं होती, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में यह मामला 'सिविल' से 'क्रिमिनल' बन सकता है। 1. विलफुल डिफॉल्टर (Willful Defaulter): अगर बैंक कोर्ट में यह साबित कर दे कि आपके पास पैसे चुकाने की क्षमता (Capacity to Pay) है, लेकिन आप जानबूझकर भुगतान नहीं कर रहे हैं, तो आप 'विलफुल डिफॉल्टर' की श्रेणी में आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में कोर्ट सख्त कार्रवाई कर सकता है। 2. धोखाधड़ी (Fraud): अगर आपने क्रेडिट कार्ड लेते समय फर्जी दस्तावेज दिए थे, या बैंक को धोखा देने की नीयत से खर्च किया है, तो बैंक आपके खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज करा सकता है। इसमें जेल जाने की नौबत आ सकती है। 3. चेक बाउंस (Cheque Bounce): अक्सर लोग क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने के लिए चेक दे देते हैं। अगर वह चेक बाउंस हो जाता है, तो यह नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध है। इसमें आपको 2 साल तक की जेल या चेक की राशि का दोगुना जुर्माना भरना पड़ सकता है। डिफॉल्ट का असली नुकसान: भविष्य पर ताला जेल जाने से ज्यादा बड़ा नुकसान आपके वित्तीय भविष्य को होता है। एक बार डिफॉल्ट करने पर आपको कई साल तक इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। CIBIL स्कोर धड़ाम: क्रेडिट कार्ड का भुगतान चूकने पर आपका क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) तेजी से गिरता है। 750 से कम स्कोर होने पर भविष्य में कोई भी बैंक आपको होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन नहीं देगा। ब्लैकलिस्ट: बैंक आपको अपनी इंटरनल ब्लैकलिस्ट में डाल सकते हैं। भारी ब्याज: क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दरें दुनिया में सबसे ज्यादा (36% से 48% सालाना) होती हैं। डिफॉल्ट करने पर ब्याज पर ब्याज (Compound Interest) लगता है, जिससे छोटी सी रकम भी कुछ ही महीनों में लाखों में बदल सकती है। बचाव का मंत्र: 30% का गोल्डन रूल वित्तीय जानकारों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड 'दोधारी तलवार' है। अगर इसका सही इस्तेमाल हो तो फायदा, वरना गहरा नुकसान। कर्ज के जाल (Debt Trap) से बचने के लिए विशेषज्ञों ने '30% का नियम' सुझाया है। क्या है 30% का नियम? आपकी क्रेडिट लिमिट चाहे कितनी भी हो, आपको उसका केवल 30% से 40% हिस्सा ही इस्तेमाल करना चाहिए। उदाहरण: अगर आपकी क्रेडिट लिमिट 1 लाख रुपये है, तो कोशिश करें कि आपका महीने का खर्च 30,000 रुपये से ज्यादा न हो। फायदा: इससे दो फायदे होते हैं। पहला, बिल चुकाने में आसानी रहती है। दूसरा, क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो (Credit Utilization Ratio) कम रहने से आपका सिबिल स्कोर तेजी से बढ़ता है। RBI के नियम: रिकवरी एजेंट की मनमानी नहीं चलेगी अक्सर देखा गया है कि रिकवरी एजेंट ग्राहकों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसके लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं: रिकवरी एजेंट आपको सुबह 7 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद कॉल नहीं कर सकते। वे आपके परिवार या दोस्तों को धमका नहीं सकते। अभद्र भाषा या शारीरिक हिंसा का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। अगर कोई एजेंट ऐसा करता है, तो आप पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं और बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) से संपर्क कर सकते हैं। अगर फंस गए हैं कर्ज में, तो क्या करें? अगर आप ऐसी स्थिति में हैं जहां बिल चुकाना नामुमकिन लग रहा है, तो भागें नहीं, बल्कि सामना करें: बैंक से बात करें: बैंक से संपर्क करें और अपनी स्थिति बताएं। कई बार बैंक आपको EMI में बिल चुकाने का विकल्प (Restructuring) दे देते हैं। सेटलमेंट (One Time Settlement): अगर स्थिति बहुत खराब है, तो आप 'वन टाइम सेटलमेंट' के लिए बात कर सकते हैं। इसमें बैंक कुछ राशि माफ करके खाता बंद कर देता है (ध्यान रहे, इससे सिबिल स्कोर पर 'Settled' लिखा आएगा जो भविष्य के लिए अच्छा नहीं है)। क्रेडिट काउंसलर: किसी पेशेवर वित्तीय सलाहकार से मदद लें। क्रेडिट कार्ड का बिल न भरना आपको सीधे जेल नहीं पहुंचाता, लेकिन यह आपको आर्थिक जेल में जरूर कैद कर सकता है। पुलिस का डर मन से निकाल दें, लेकिन सिविल कोर्ट और सिबिल स्कोर के डर को हमेशा याद रखें। समझदारी इसी में है कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल डेबिट कार्ड की तरह करें—यानी उतना ही खर्च करें जितना आपके बैंक खाते में मौजूद हो। क्रेडिट कार्ड बिल डिफॉल्ट एक सिविल मामला है, इसमें पुलिस गिरफ्तार नहीं करती। हालांकि, अगर चेक बाउंस हो या जानबूझकर धोखाधड़ी (Willful Default) साबित हो, तो जेल हो सकती है। इससे बचने के लिए अपनी क्रेडिट लिमिट का सिर्फ 30% इस्तेमाल करें और रिकवरी एजेंटों के उत्पीड़न के खिलाफ RBI के नियमों को जानें।
मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय सराफा बाजार (Indian Bullion Market) के इतिहास में आज, यानी गुरुवार, 22 जनवरी 2026 की तारीख एक बड़ी गिरावट के रूप में दर्ज की गई है। पिछले कुछ दिनों से आसमान छू रही सोने और चांदी की कीमतों पर आज करारा ब्रेक लगा है। विशेषकर चांदी (Silver) में आई गिरावट ने निवेशकों और ज्वेलर्स दोनों को चौंका दिया है।READ ALSO:-UP : 'लेडी डॉन' का बर्थडे शूटआउट! केक कटने से पहले गूंजी गोलियां, मोबाइल में कैद मिला 12 खाकी वालों का 'गंदा सच', DSP से लेकर थानेदार तक को न्यूड कॉल में फंसाया सुबह बाजार खुलते ही कीमतों में जो रपट शुरू हुई, वह थमने का नाम नहीं ले रही थी। इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में एक ही दिन में करीब 5% यानी 15,000 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, पीली धातु (Gold) की चमक भी आज फीकी पड़ी है और भाव में 2,700 रुपये से अधिक की कमी आई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट केवल एक दिन की हलचल नहीं, बल्कि पिछले साल (2025) की रिकॉर्ड तोड़ तेजी के बाद जरूरी 'करेक्शन' (Correction) और 'प्रॉफिट बुकिंग' (Profit Booking) का नतीजा है। यह विस्तृत रिपोर्ट आपको बताएगी कि आज के ताजा भाव क्या हैं, गिरावट की असली वजह क्या है और क्या यह गिरावट आपके लिए निवेश का एक सुनहरा अवसर है? आज का मार्केट अपडेट - आंकड़ों की जुबानी बाजार में आज की उथल-पुथल को आंकड़ों के जरिए समझना जरूरी है। यह गिरावट इतनी तेज थी कि कई छोटे निवेशकों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। चांदी का हाल: ₹3.20 लाख के शिखर से फिसली चांदी, जिसे 'आम आदमी का सोना' भी कहा जाता है, आज सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। आज का भाव (Opening): ₹3,03,000 प्रति किलोग्राम। कल का भाव (Close): ₹3,19,000 प्रति किलोग्राम। गिरावट: लगभग ₹15,000 प्रति किलो (-5%)। ऑल टाइम हाई: कल के कारोबारी सत्र के दौरान चांदी ने ₹3,20,000 का ऐतिहासिक स्तर छुआ था। निष्कर्ष: महज 24 घंटे के भीतर चांदी अपने सर्वोच्च शिखर से लुढ़क कर 3 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब आ गई है। सोने की चाल: ₹1.51 लाख पर आया भाव सोने में भी गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि यह चांदी की तुलना में प्रतिशत के हिसाब से कम है, लेकिन रुपए के लिहाज से बड़ी है। आज का भाव: ₹1,51,499 प्रति 10 ग्राम। गिरावट: ₹2,728 प्रति 10 ग्राम। कल का भाव (Close): ₹1,54,277 प्रति 10 ग्राम। ऑल टाइम हाई: एक दिन पहले सोने ने ₹1,55,204 प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड हाई बनाया था। गिरावट का पोस्टमार्टम - आखिर क्यों टूटा बाजार? इतनी बड़ी गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं है। कमोडिटी एक्सपर्ट्स और बाजार विश्लेषकों ने इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। 1. जियो-पॉलिटिकल तनाव में कमी (Geopolitical De-escalation) सोना और चांदी हमेशा से 'सुरक्षित निवेश' (Safe Haven Assets) माने जाते रहे हैं। जब दुनिया में युद्ध या तनाव होता है, तो लोग शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं। ताजा स्थिति: मध्य पूर्व (Middle East) और अन्य क्षेत्रों में चल रहे तनाव में पिछले 24 घंटों में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं। असर: जैसे ही युद्ध का डर कम हुआ, निवेशकों ने सोने-चांदी से पैसा निकालकर वापस रिस्की एसेट्स (जैसे शेयर बाजार) में लगाना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में गिरावट आई। 2. मुनाफावसूली (Profit Booking) बाजार का यह नियम है—'जो ऊपर जाता है, वह थोड़ा नीचे भी आता है'। पिछले तीन दिनों से चांदी और सोने में लगातार तेजी देखी जा रही थी। कीमतें अपने 'ऑल टाइम हाई' पर थीं। जिन निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की थी, उन्होंने ऊंचे भाव देखकर अपना माल बेचना (Sell) शुरू कर दिया ताकि मुनाफा कमा सकें। इस बिकवाली के दबाव ने कीमतों को नीचे धकेल दिया। 3. शेयर बाजार और टेक्निकल फैक्टर्स शेयर बाजार में तेजी: आज वैश्विक और भारतीय शेयर बाजारों में रौनक है। जब इक्विटी मार्केट अच्छा प्रदर्शन करता है, तो कमोडिटी (सोना-चांदी) की डिमांड थोड़ी कम हो जाती है। टेक्निकल कारण: चार्ट्स पर चांदी 'ओवरबॉट' (Overbought) जोन में थी, यानी इसकी खरीदारी बहुत ज्यादा हो चुकी थी। तकनीकी रूप से एक गिरावट (Correction) अपेक्षित थी। भाग 3: फ्लैशबैक 2025 - जब बुलियन बना 'किंग' आज की गिरावट को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे मुड़कर देखना होगा। साल 2025 सोने और चांदी के निवेशकों के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं था। सोने का प्रदर्शन (2025) वृद्धि: 75% 31 दिसंबर 2024 का भाव: ₹76,162 प्रति 10 ग्राम। 31 दिसंबर 2025 का भाव: ₹1,33,195 प्रति 10 ग्राम। शुद्ध मुनाफा: एक साल में निवेशकों को प्रति 10 ग्राम पर करीब ₹57,033 का फायदा हुआ। चांदी का प्रदर्शन (2025) - असली बाजीगर चांदी ने 2025 में सोने को भी पछाड़ दिया और निवेशकों की संपत्ति को ढाई गुना से ज्यादा कर दिया। वृद्धि: 167% (ऐतिहासिक रिटर्न) 31 दिसंबर 2024 का भाव: ₹86,017 प्रति किलो। 31 दिसंबर 2025 का भाव: ₹2,30,420 प्रति किलो। शुद्ध मुनाफा: एक साल में ₹1,44,403 प्रति किलो की बढ़त। विश्लेषण: अगर किसी ने 2024 के अंत में 1 लाख रुपये की चांदी खरीदी होती, तो 2025 के अंत तक उसकी वैल्यू 2.67 लाख रुपये हो चुकी होती। यही कारण है कि अब थोड़ी गिरावट पर भी निवेशक घबरा नहीं रहे हैं, क्योंकि वे अभी भी भारी मुनाफे में हैं। भविष्य की भविष्यवाणी - 2026 में कहां जाएगा बाजार? क्या यह गिरावट खरीदारी का मौका है? या बाजार और गिरेगा? देश और दुनिया के दिग्गज एक्सपर्ट्स की राय 2026 के लिए बेहद 'बुलिश' (तेजी वाली) है। 1. डॉ. रेनिशा चैनानी (रिसर्च हेड) इनका मानना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव अस्थायी है। सोने का लक्ष्य (2026): ₹1,90,000 प्रति 10 ग्राम। चांदी का लक्ष्य (2026): ₹4,00,000 प्रति किलो। शर्त: यदि अमेरिकी टैरिफ नीति और मध्य पूर्व में तनाव दोबारा बढ़ता है, तो ये लक्ष्य आसानी से हासिल हो सकते हैं। 2. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज भारत की दिग्गज ब्रोकरेज फर्म का नजरिया भी सकारात्मक है। चांदी का लक्ष्य: ₹3.20 लाख प्रति किलो (निकट भविष्य में)। तर्क: सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री में चांदी की जबरदस्त औद्योगिक मांग (Industrial Demand) है। सलाह: "हर गिरावट पर खरीदारी करें" (Buy on Dips)। 3. रॉबर्ट कियोसाकी (लेखक 'रिच डैड पुअर डैड' और ग्लोबल इन्वेस्टर) मशहूर निवेशक कियोसाकी ने डॉलर के कमजोर होने की भविष्यवाणी की है। भविष्यवाणी: चांदी $200 प्रति औंस (अंतरराष्ट्रीय बाजार में) तक जा सकती है। कारण: बढ़ती महंगाई और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी चांदी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। 4. नीलेश सुराना (कमोडिटी एक्सपर्ट) ग्रीन एनर्जी का असर: दुनिया भर में ग्रीन एनर्जी (Green Energy) पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें चांदी का उपयोग अनिवार्य है। इसके अलावा, अगर अमेरिका ब्याज दरों में कटौती करता है, तो चांदी $100 प्रति औंस (₹3.5 से ₹4 लाख) तक जा सकती है। निवेश की पाठशाला - कैसे उठाएं इस गिरावट का फायदा? आज की गिरावट ने नए निवेशकों के लिए एक खिड़की खोली है। लेकिन निवेश कैसे करें? क्या सिक्के खरीदें या डिजिटल गोल्ड? यहाँ समझें: तरीका 1: फिजिकल गोल्ड-सिल्वर (Physical Buying) यह भारत का पारंपरिक तरीका है। क्या खरीदें: सोने-चांदी के सिक्के, बार (Bar) या ज्वेलरी। फायदे: भावनात्मक जुड़ाव, तुरंत उपलब्ध। नुकसान: मेकिंग चार्ज: ज्वेलरी पर 10-20% मेकिंग चार्ज लगता है जो निवेश के लिहाज से घाटा है। शुद्धता का डर: असली-नकली की पहचान करना मुश्किल होता है। स्टोरेज: चोरी का डर और लॉकर का खर्चा। तरीका 2: गोल्ड-सिल्वर ETF (Exchange Traded Funds) - स्मार्ट तरीका एक्सपर्ट्स आजकल इसी तरीके की सलाह देते हैं। क्या है: यह शेयर बाजार की तरह सोने-चांदी को डिजिटल रूप में खरीदने का तरीका है। कैसे करें: इसके लिए आपके पास डीमैट अकाउंट (Demat Account) होना जरूरी है। फायदे: कोई मेकिंग चार्ज नहीं: आप शुद्ध सोने के भाव पर खरीदते और बेचते हैं। 100% शुद्धता: आपको प्योरिटी की चिंता नहीं करनी पड़ती। सुरक्षा: चोरी का कोई डर नहीं, यह डीमैट खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप में रहता है। लिक्विडिटी: जब चाहे बाजार के समय में बेचकर पैसा बैंक खाते में पा सकते हैं। घबराएं नहीं, रणनीति बनाएं 22 जनवरी 2026 की यह गिरावट डराने वाली लग सकती है, लेकिन बड़े परिप्रेक्ष्य (Big Picture) में देखें तो बुलियन मार्केट का ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव है। अल्पकालिक निवेशक (Short Term Investors): अभी थोड़ा इंतजार करें, बाजार में अस्थिरता रह सकती है। दीर्घकालिक निवेशक (Long Term Investors): यह एक बेहतरीन मौका है। ₹15,000 की गिरावट पर चांदी जमा करना भविष्य में बड़ा मुनाफा दे सकता है। नजर रखें: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और वैश्विक तनाव की खबरों पर नजर बनाए रखें। एक्सपर्ट की फाइनल राय: "चांदी अभी लंबी रेस का घोड़ा है। औद्योगिक मांग और सीमित आपूर्ति इसे 2026 के अंत तक ₹4 लाख के स्तर तक ले जा सकती है। घबराहट में बिकवाली न करें, बल्कि पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए इसे जमा करें।" प्रमुख बिंदु एक नजर में (Key Highlights) विवरण सोना (Gold) चांदी (Silver) आज की गिरावट ▼ ₹2,728 ▼ ₹15,000 वर्तमान भाव ₹1.51 लाख (10g) ₹3.03 लाख (1kg) कल का भाव ₹1.54 लाख ₹3.19 लाख 2025 का रिटर्न 75% 167% 2026 का लक्ष्य ₹1.90 लाख ₹4.00 लाख मुख्य कारण मुनाफावसूली जियो-पॉलिटिकल शांति (डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। सोने-चांदी में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।)
दशकों से भारतीय घरों में चांदी को केवल पायल, बिछिया या पूजा के बर्तनों तक सीमित माना जाता था। लेकिन साल 2026 तक आते-आते यह धारणा पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। वैश्विक कमोडिटी बाजार में एक ऐसी हलचल मची है जिसने दुनिया के बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों को हैरान कर दिया है। 'सफेद धातु' यानी चांदी (Silver) अब केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि आधुनिक युग का 'कच्चा तेल' (Crude Oil) बनती जा रही है।READ ALSO:-मोटर व्हीकल एक्ट में ऐतिहासिक बदलाव: अब 16 साल के बच्चे भी बनवा सकेंगे ड्राइविंग लाइसेंस, लेकिन भारी वाहन चालकों के लिए अग्निपरीक्षा; जानिए 2025 के नए नियम बाजार के जानकारों का दावा है कि चांदी अब अपने जीवनकाल के सबसे बड़े 'बुल रन' (Bull Run) में प्रवेश कर चुकी है। जहाँ सोने की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ रही हैं, वहीं चांदी में रॉकेट जैसी रफ़्तार देखने को मिल रही है। इस रिपोर्ट में हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि आखिर क्यों चांदी की कीमत ₹4,00,000 प्रति किलो तक जा सकती है। चांदी में तेजी के 3 प्रमुख और बुनियादी कारण चांदी की कीमतों में आ रही यह तेजी कोई संयोग नहीं है। इसके पीछे तीन ऐसे बड़े कारक हैं जिन्होंने वैश्विक सप्लाई चैन को हिलाकर रख दिया है। इंडस्ट्रियल डिमांड का महा-विस्फोट (Solar, Electronics & EV) चांदी दुनिया की सबसे बेहतरीन विद्युत सुचालक (Best Conductor of Electricity) धातु है। तांबे या सोने के मुकाबले चांदी बिजली को कहीं अधिक कुशलता से प्रवाहित करती है। इसी गुण ने इसे आधुनिक तकनीक की जान बना दिया है। सोलर एनर्जी क्रांति: दुनिया भर में जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) को छोड़कर ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ने की होड़ मची है। एक सोलर पैनल बनाने में भारी मात्रा में 'सिल्वर पेस्ट' का उपयोग होता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक दुनिया की 20% से अधिक चांदी केवल सोलर सेक्टर में खर्च होगी। इलेक्ट्रिक वाहन (EV): एक सामान्य कार की तुलना में EV में चांदी का इस्तेमाल लगभग दोगुना होता है। बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, सेंसर और चार्जिंग पोर्ट्स में चांदी अनिवार्य है। 5G और इलेक्ट्रॉनिक्स: आपके स्मार्टफोन से लेकर स्पेस सैटेलाइट तक, हर जगह चांदी के सूक्ष्म सर्किट लगे हैं। जैसे-जैसे दुनिया और अधिक डिजिटल हो रही है, चांदी की मांग आसमान छू रही है। 'ट्रंप टैरिफ' और वैश्विक व्यापार का डर अमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी या उनकी नीतियों के प्रभाव ने एक नया आर्थिक डर पैदा किया है। ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और चीनी उत्पादों पर भारी टैरिफ (Tariff) लगाने की चेतावनियों ने अमेरिकी कंपनियों को डरा दिया है। स्टॉकपाइलिंग (जमाखोरी): बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियां और ऑटो मैन्युफैक्चरर्स इस डर से चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रहे हैं कि भविष्य में ट्रेड वॉर के कारण सप्लाई चैन बाधित हो सकती है। सप्लाई में कमी: जब मांग अचानक बढ़ती है और आपूर्ति सीमित होती है, तो कीमतें स्वाभाविक रूप से ऊपर चढ़ती हैं। वैश्विक खदानों से चांदी का उत्पादन उस रफ़्तार से नहीं बढ़ रहा है जिस रफ़्तार से इसकी मांग बढ़ रही है। मैन्युफैक्चरर्स के बीच 'पैनिक बाइंग' दुनिया भर के कारखानों में एक डर व्याप्त है—"कहीं चांदी खत्म न हो जाए।" इस डर को 'Fear Of Missing Out' (FOMO) कहा जा रहा है। उत्पादन रुकने का डर इतना ज्यादा है कि मैन्युफैक्चरर्स अब हाजिर बाजार (Spot Market) से किसी भी कीमत पर चांदी उठाने को तैयार हैं। यह 'होड़' कीमतों को एक ऐसे स्तर पर ले जा रही है जहां से पीछे मुड़ना मुश्किल लग रहा है। यही कारण है कि आने वाले महीनों में भी गिरावट की गुंजाइश बहुत कम है। विशेषज्ञों की राय और भविष्य के लक्ष्य (Expert Predictions 2026) बाजार के दिग्गज संस्थानों और विश्लेषकों ने चांदी के जो लक्ष्य दिए हैं, वे किसी को भी चौंका सकते हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal) भारत के सबसे प्रतिष्ठित ब्रोकरेज हाउसों में से एक, मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि साल 2026 में चांदी ₹3.20 लाख प्रति किलो के स्तर को आसानी से पार कर जाएगी। उनका तर्क है कि सोलर और EV सेक्टर से आने वाली डिमांड इतनी मजबूत है कि कीमतों में कोई भी बड़ी गिरावट केवल खरीदारी का एक सुनहरा अवसर (Buying Opportunity) होगी। सैमको सिक्योरिटीज (Samco Securities) सैमको के विश्लेषकों ने चार्ट्स पर एक 'टेक्निकल ब्रेकआउट' (Technical Breakout) देखा है। उनके अनुसार, वैश्विक संकेतों और डॉलर की अस्थिरता को देखते हुए चांदी की कीमतें ₹3.94 लाख प्रति किलो के स्तर को छू सकती हैं। यह लगभग ₹4 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब है। नीलेश सुराना (कमोडिटी एक्सपर्ट) प्रसिद्ध एक्सपर्ट नीलेश सुराना का कहना है कि चांदी अब $100 प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर की ओर बढ़ रही है। भारतीय बाजार में डॉलर की विनिमय दर को जोड़कर देखें तो यह भाव ₹3.5 लाख से ₹4 लाख के बीच बैठता है। ग्रीन एनर्जी और अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित कटौती इसका सबसे बड़ा कारण बनेगी। पोनमुडी आर (CEO, एनरिच मनी) पोनमुडी आर का मानना है कि चांदी में लंबी अवधि की तेजी (Secular Bull Run) अभी अपने शुरुआती चरण में है। वे निवेशकों को सलाह देते हैं कि बाजार की हर 2-4% की गिरावट पर चांदी में पैसा लगाएं, क्योंकि अगले 24 महीनों में यह सबसे अधिक रिटर्न देने वाला एसेट क्लास (Asset Class) साबित होगा। रॉबर्ट कियोसाकी (Robert Kiyosaki) 'रिच डैड पुअर डैड' के लेखक और ग्लोबल इन्वेस्टर रॉबर्ट कियोसाकी ने तो चांदी को लेकर सनसनी मचा दी है। उनका कहना है कि अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और डॉलर में बड़ी गिरावट आती है, तो चांदी $200 प्रति औंस (करीब ₹8 लाख+ प्रति किलो) तक भी जा सकती है। वे चांदी को 'भगवान का पैसा' (God's Money) कहते हैं। चांदी बनाम सोना—कौन जीतेगा रेस? अक्सर लोग भ्रमित रहते हैं कि निवेश के लिए सोना बेहतर है या चांदी। लेकिन 2026 का गणित कुछ और ही कह रहा है। कारक सोना (Gold) चांदी (Silver) उपयोग मुख्य रूप से ज्वेलरी और रिजर्व 50% से अधिक इंडस्ट्रियल उपयोग अस्थिरता (Volatility) कम बहुत अधिक (High Risk, High Reward) सप्लाई स्थिर लगातार घट रही (Deficit) रिटर्न क्षमता (2024-26) 15-20% अनुमानित 100-200% अनुमानित गोल्ड-सिल्वर रेश्यो (Gold-Silver Ratio): वर्तमान में यह रेश्यो चांदी के पक्ष में झुक रहा है। इतिहास गवाह है कि जब भी यह रेश्यो ठीक होता है, चांदी सोने के मुकाबले 2 से 3 गुना ज्यादा तेजी से भागती है। चांदी की किल्लत और माइनिंग का संकट चांदी की कीमतों के ₹4 लाख पहुंचने के पीछे एक कड़वा सच 'सप्लाई की कमी' भी है। कोई नई खदान नहीं: पिछले एक दशक में दुनिया में चांदी की कोई बड़ी खदान नहीं खोजी गई है। माइनिंग कॉस्ट: मेक्सिको और पेरू जैसे देशों में माइनिंग की लागत बढ़ गई है। श्रमिक हड़ताल और पर्यावरण नियमों के कारण उत्पादन घटा है। सेकेंडरी सप्लाई का अभाव: पुराने समय में लोग चांदी के बर्तन गलाकर बाजार में लाते थे, लेकिन अब लोग चांदी को 'होल्ड' कर रहे हैं, जिससे बाजार में नई चांदी की कमी हो गई है। निवेश कैसे करें? (Strategic Investment Guide) अगर आप भी इस चांदी की गंगा में हाथ धोना चाहते हैं, तो आपके पास तीन मुख्य विकल्प हैं: फिजिकल सिल्वर (सिक्के और सिल्लियां) यह पारंपरिक तरीका है। लेकिन इसमें शुद्धता (Purity) की जांच और सुरक्षा (Security) का जोखिम रहता है। अगर आप फिजिकल ले रहे हैं, तो हमेशा हॉलमार्क वाली चांदी ही खरीदें। सिल्वर ETF (Exchange Traded Funds) यह निवेश का आधुनिक और सबसे सुरक्षित तरीका है। आप शेयर बाजार के जरिए चांदी के ETF खरीद सकते हैं। इसमें आपको फिजिकल चांदी रखने की जरूरत नहीं होती और आप जब चाहें इसे बेचकर पैसा सीधे बैंक खाते में ले सकते हैं। डिजिटल सिल्वर कई ऐप्स और प्लेटफॉर्म अब ₹1 में भी डिजिटल चांदी खरीदने की सुविधा देते हैं। यह छोटे निवेशकों के लिए बेहतरीन है जो हर महीने थोड़ा-थोड़ा निवेश करना चाहते हैं। आम आदमी पर क्या होगा असर? जब चांदी ₹4 लाख प्रति किलो होगी, तो इसका प्रभाव हर घर पर पड़ेगा: महंगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स: मोबाइल और लैपटॉप की कीमतें 5-10% तक बढ़ सकती हैं। शादियों का खर्च: चांदी के उपहार देना अब स्टेटस सिंबल बन जाएगा, क्योंकि यह आम आदमी के बजट से बाहर हो सकता है। ज्वेलरी मार्केट में बदलाव: लोग चांदी की जगह प्लेटिनम या अन्य धातुओं की ओर रुख कर सकते हैं, या फिर चांदी की ज्वेलरी में 'लाइटवेट' डिजाइन की मांग बढ़ेगी। क्या आपको निवेश करना चाहिए? चांदी की यह कहानी केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह भविष्य की 'ग्रीन इकोनॉमी' की रीढ़ है। यदि एक्सपर्ट्स के अनुमान का आधा भी सच होता है, तो चांदी आने वाले समय में मल्टीबैगर रिटर्न (Multibagger Returns) देने वाली है। ₹4 लाख प्रति किलो का लक्ष्य दूर लग सकता है, लेकिन जिस रफ़्तार से दुनिया बदल रही है, यह असंभव नहीं है। अंतिम सलाह: निवेश हमेशा अपनी रिस्क क्षमता के अनुसार करें। चांदी में उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा होता है, इसलिए एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय 'SIP' (Systematic Investment Plan) का रास्ता अपनाएं। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल बाजार के रुझानों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित जानकारी है। कमोडिटी बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श अवश्य लें।
मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए साल 2026 की शुरुआत चुनौतियों भरी साबित हो रही है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (INR) की कमजोरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को विदेशी मुद्रा बाजार में वह हुआ जिसका डर अर्थशास्त्रियों को सता रहा था—घरेलू मुद्रा ने 91 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक और अहम स्तर को तोड़ दिया।READ ALSO:-मोटर व्हीकल एक्ट में ऐतिहासिक बदलाव: अब 16 साल के बच्चे भी बनवा सकेंगे ड्राइविंग लाइसेंस, लेकिन भारी वाहन चालकों के लिए अग्निपरीक्षा; जानिए 2025 के नए नियम इस ऐतिहासिक गिरावट ने न केवल शेयर बाजारों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि नीति निर्माताओं और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। रुपये की यह गिरावट केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह घरेलू और वैश्विक कारकों के उस "परफेक्ट स्टॉर्म" (Perfect Storm) का परिणाम है, जिसने भारत की वित्तीय स्थिरता को चुनौती दी है। आइए, विस्तार से समझते हैं कि आखिर रुपया क्यों गिर रहा है, विदेशी निवेशक भारत से क्यों भाग रहे हैं और आम आदमी की रसोई से लेकर आपके निवेश पोर्टफोलियो तक इसका क्या असर होने वाला है। मंगलवार को क्या हुआ? बाजार का हाल (Market Recap) सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन, यानी मंगलवार को रुपये की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई। ओपनिंग (Opening): रुपया 2 पैसे की गिरावट के साथ 90.93 प्रति डॉलर पर खुला। इंट्रा-डे (Intra-day): दिन के कारोबार के दौरान डॉलर की मांग इतनी तेज थी कि रुपया दबाव में आ गया और लुढ़कते हुए 91.01 के निचले स्तर तक चला गया। पिछला रिकॉर्ड: इससे पहले सोमवार को रुपया 90.90 पर बंद हुआ था। आपको बता दें कि 16 दिसंबर 2025 को रुपये ने इंट्रा-डे कारोबार में 91.14 का अब तक का सबसे निचला स्तर (All-time low) छुआ था। अब रुपया फिर उसी खतरे के निशान के पास पहुंच गया है। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह गिरावट सामान्य नहीं है। 91 का स्तर टूटना तकनीकी रूप से (Technically) रुपये के लिए बहुत नकारात्मक संकेत है, जो आने वाले दिनों में और बड़ी गिरावट का रास्ता खोल सकता है। गिरावट के दो मुख्य कारण: वैश्विक और घरेलू विदेशी मुद्रा बाजार के दिग्गज इस स्थिति को "घरेलू और वैश्विक कारकों का दोहरी मार" बता रहे हैं। (A) वैश्विक कारण: ट्रंप, टैरिफ और तनाव अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और उनकी आक्रामक आर्थिक नीतियों ने पूरी दुनिया के बाजारों को हिला कर रख दिया है। ट्रंप टैरिफ का डर: डोनाल्ड ट्रंप ने दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद अन्य देशों पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की धमकी दी है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इन टैरिफ की वैधता पर फैसला सुनाने वाला है। अगर फैसला ट्रंप के पक्ष में आता है, तो वैश्विक व्यापार युद्ध (Trade War) छिड़ सकता है। ग्रीनलैंड विवाद: यूरोप और अमेरिका के बीच ग्रीनलैंड को लेकर तनाव बढ़ रहा है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता ने निवेशकों को डरा दिया है। रिस्क-ऑफ (Risk-Off) मूड: जब भी दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक अपना पैसा सुरक्षित जगहों पर ले जाते हैं। फिलहाल, अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड्स को सबसे सुरक्षित माना जा रहा है। इसलिए, निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर अमेरिका ले जा रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत और रुपया कमजोर हो रहा है। मजबूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था: अमेरिका का श्रम बाजार (Job Market) उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखेगा। ऊंची ब्याज दरों का मतलब है कि डॉलर में निवेश पर ज्यादा रिटर्न, जो रुपये के लिए बुरा है। (B) घरेलू कारण: विदेशी निवेशकों (FIIs) का पलायन देश के भीतर रुपये पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली से आ रहा है। भारतीय शेयर बाजार, जो कुछ समय पहले तक विदेशियों का पसंदीदा था, अब भारी बिकवाली का शिकार है। बिकवाली के आंकड़े (2026): जनवरी 2026 अब तक: विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 29,315 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर ली है। रुझान: वे पिछले कई महीनों से शुद्ध विक्रेता (Net Sellers) बने हुए हैं। जब विदेशी निवेशक अपने शेयर बेचते हैं, तो वे रुपयों को डॉलर में बदलते हैं ताकि पैसा अपने देश वापस ले जा सकें। इससे डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है और रुपया गिर जाता है। इसी भारी बिकवाली के चलते रुपया एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन (Worst Performing) करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है। एक्सपर्ट्स की राय: कहां तक गिरेगा रुपया? बाजार विश्लेषकों ने रुपये के भविष्य को लेकर डराने वाली भविष्यवाणी की है। सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स (CR Forex Advisors) के एमडी, अमित पाबरी का कहना है: "यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है और रुपया 91.07 के स्तर के ऊपर टिकने में कामयाब हो जाता है, तो यह 91.70 से 92.00 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। यह एक बड़ी गिरावट होगी। हालांकि, अगर बाजार में सुधार आता है तो 90.30–90.50 के स्तर पर इसे सहारा मिल सकता है।" फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स (Finrex Treasury Advisors) के ट्रेजरी प्रमुख, अनिल कुमार भंसाली ने इसे "परफेक्ट स्टॉर्म" करार दिया है। उनका मानना है कि जब तक आरबीआई कड़ा हस्तक्षेप नहीं करता, रुपये पर दबाव बना रहेगा। आम आदमी पर प्रभाव: आपकी जेब पर कैसे लगेगा झटका? रुपये की गिरावट सिर्फ शेयर बाजार की खबर नहीं है, इसका सीधा असर आपकी और हमारी जेब पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल (Crude Oil) आयात करता है, जिसका भुगतान डॉलर में होता है। महंगाई (Inflation): जब रुपया कमजोर होता है, तो आयात महंगा हो जाता है। पेट्रोल-डीजल: तेल कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा रुपये चुकाने होंगे। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में दिख सकता है। ट्रांसपोर्ट और मालभाड़ा: डीजल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे फल, सब्जियां और दूध जैसी रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाएंगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स: मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी के पार्ट्स का बड़ा हिस्सा आयात होता है। डॉलर महंगा होने से मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में 5% से 10% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। विदेश में पढ़ाई और यात्रा: छात्र: जो भारतीय छात्र विदेश (खासकर अमेरिका) में पढ़ाई कर रहे हैं, उनके माता-पिता का बजट बिगड़ जाएगा। फीस और रहने का खर्च भेजने के लिए अब उन्हें प्रति डॉलर 91 रुपये से ज्यादा चुकाने होंगे। टूरिज्म: विदेश यात्रा करना अब काफी महंगा पड़ेगा। आरबीआई (RBI) की भूमिका: क्या रिजर्व बैंक बचाएगा? अब सभी की निगाहें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर टिकी हैं। आरबीआई के पास लगभग 600 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) है। हस्तक्षेप (Intervention): आमतौर पर, जब रुपया तेजी से गिरता है, तो आरबीआई अपने भंडार से डॉलर बेचता है ताकि रुपये को सहारा दिया जा सके और अस्थिरता को रोका जा सके। चुनौती: हालांकि, अगर वैश्विक दबाव बहुत ज्यादा है, तो आरबीआई भी एक सीमा तक ही डॉलर बेच सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई 91.50 या 92.00 के स्तर के पास आक्रामक रूप से हस्तक्षेप कर सकता है। रुपये का 91 के पार जाना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। साल 2026 की शुरुआत ने स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी नीतियां भारत जैसे उभरते बाजारों को गहराई से प्रभावित करेंगी। फिलहाल, निवेशकों और आम जनता को सतर्क रहने की जरूरत है। यदि आप विदेश जाने की योजना बना रहे हैं या डॉलर से जुड़े खर्च हैं, तो अपनी योजनाएं बजट के अनुसार बनाएं। वहीं, शेयर बाजार के निवेशकों को विदेशी निवेशकों (FIIs) की गतिविधियों और आरबीआई के अगले कदम पर पैनी नजर रखनी होगी। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) Q1: रुपया कमजोर होने से मुझे क्या नुकसान है? उत्तर: रुपया कमजोर होने से आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, मोबाइल फोन, खाद्य तेल और सोने के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे आपकी महीने की बचत कम हो सकती है। Q2: क्या रुपया 100 तक जा सकता है? उत्तर: अभी 100 का स्तर दूर है, लेकिन एक्सपर्ट्स 92 तक जाने की आशंका जता रहे हैं। 100 तक जाने के लिए बहुत बड़ी आर्थिक उथल-पुथल की जरूरत होगी, जिसे आरबीआई रोकने की पूरी कोशिश करेगा। Q3: FII (विदेशी निवेशक) पैसा क्यों निकाल रहे हैं? उत्तर: अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची हैं और वहां की अर्थव्यवस्था मजबूत दिख रही है। इसलिए विदेशी निवेशक भारत जैसे जोखिम भरे बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बाजार में लगा रहे हैं। Q4: क्या यह शेयर बाजार में निवेश करने का सही समय है? उत्तर: जब FII भारी बिकवाली करते हैं, तो बाजार में गिरावट आती है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अच्छे शेयर सस्ते में खरीदने का मौका हो सकता है, लेकिन अभी बाजार में अस्थिरता (Volatility) बहुत ज्यादा है, इसलिए विशेषज्ञों की सलाह लेकर ही निवेश करें। Q5: आरबीआई रुपये को गिरने से कैसे रोकता है? उत्तर: आरबीआई अपने खजाने (Forex Reserves) से डॉलर बाजार में बेचता है और बदले में रुपये खरीदता है। इससे बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ती है और रुपये की गिरावट पर लगाम लगती है।
नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क - स्पेशल रिपोर्ट): भारत के आर्थिक इतिहास में 1 अप्रैल 2026 की तारीख सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रही है। आजादी के कुछ साल बाद बने और 1961 से चले आ रहे जटिल इनकम टैक्स कानूनों के मकड़जाल को काटकर, केंद्र सरकार ने देश को एक नई, सरल और पारदर्शी कर व्यवस्था (Tax System) का तोहफा दिया है। सरकार ने पुराने 'इनकम टैक्स एक्ट 1961' को बदलकर नया 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' पेश किया है।READ ALSO:-Expressway Update: 1 अप्रैल से देश भर के टोल प्लाजा होंगे 100% कैशलेस; अब सिर्फ FASTag और UPI से होगा भुगतान, लंबी कतारों से मिलेगी आजादी इस नए कानून में यूं तो कई बदलाव हैं, लेकिन जिस बदलाव ने आम नौकरीपेशा, छोटे व्यापारी और नए टैक्सपेयर्स के चेहरे पर राहत की मुस्कान ला दी है, वह है— 'असेसमेंट ईयर' (Assessment Year - AY) और 'प्रीवियस ईयर' (Previous Year - PY) की पुरानी अवधारणा को खत्म करना। अब इनकी जगह एक ही शब्द और एक ही व्यवस्था लागू होगी, जिसे 'टैक्स ईयर' (Tax Year) कहा जाएगा। यह महज एक शब्द का बदलाव नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता का बदलाव है जो दशकों से टैक्सपेयर को कन्फ्यूज करती आ रही थी। आइए, इस महा-परिवर्तन को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि आपकी जेब, आपकी ITR फाइलिंग और आपकी समझ पर इसका क्या असर पड़ेगा। आखिर क्या थी पुरानी समस्या? (The Confusion of 1961) नया क्या आया है, यह समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि पुराने सिस्टम में दिक्कत क्या थी? क्यों एक आम आदमी, जो ईमानदारी से टैक्स भरना चाहता है, वह भी CA (चार्टर्ड अकाउंटेंट) के बिना ITR फॉर्म को हाथ लगाने से डरता था? 1. दो अलग-अलग सालों का भ्रम 1961 के कानून के तहत, इनकम टैक्स की दुनिया दो अलग-अलग समय-सीमाओं में चलती थी: प्रीवियस ईयर (Previous Year): यह वह साल होता था जिसमें आपने असल में पैसा कमाया। (जैसे: 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025)। असेसमेंट ईयर (Assessment Year): यह वह साल होता था जिसमें आपकी कमाई का मूल्यांकन (Assessment) होता था और आप रिटर्न फाइल करते थे। यह हमेशा कमाई वाले साल के अगला साल होता था। 2. आम आदमी का सवाल एक साधारण वेतनभोगी व्यक्ति (Salaried Person) के लिए यह समझना मुश्किल था कि जब उसने कमाई 2024 में की है, तो उसके फॉर्म पर AY 2025-26 क्यों लिखा है? अक्सर लोग ITR फॉर्म में गलत साल चुन लेते थे। कई बार लोग सोचते थे कि वे "अगले साल" का टैक्स एडवांस में भर रहे हैं, जबकि वे "पिछले साल" का टैक्स भर रहे होते थे। बैंक लोन लेते समय या वीजा के लिए अप्लाई करते समय "ITR के साल" को लेकर भारी कन्फ्यूजन होता था। पुराना कानून अंग्रेजों के समय की नौकरशाही और बही-खातों की जटिलताओं से प्रेरित था, जहां कमाई का हिसाब लगाने में वक्त लगता था, इसलिए असेसमेंट अगले साल किया जाता था। लेकिन डिजिटल युग में, जहां सब कुछ रियल-टाइम है, इस "एक साल के गैप" वाले नाम की कोई जरूरत नहीं रह गई थी। नया 'टैक्स ईयर' - सरलता की नई परिभाषा नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत, सरकार ने इस दोहरी शब्दावली को खत्म कर दिया है। 1 अप्रैल 2026 से, भारत में 'टैक्स ईयर' (Tax Year) लागू हो जाएगा। टैक्स ईयर का मतलब क्या है? सरल शब्दों में— "जिस साल कमाई, उसी साल का नाम।" नए नियम के अनुसार, वित्तीय वर्ष (Financial Year) और टैक्स वर्ष (Tax Year) एक ही होंगे। अब आपको यह याद रखने की जरूरत नहीं है कि असेसमेंट ईयर कौन सा चल रहा है। उदाहरण से समझें अंतर: स्थिति (Scenario) पुरानी व्यवस्था (Old Act 1961) नई व्यवस्था (New Act 2025) कमाई का समय 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तकनीकी नाम प्रीवियस ईयर (PY) 2026-27 टैक्स ईयर 2026-27 ITR फाइलिंग का नाम असेसमेंट ईयर (AY) 2027-28 टैक्स ईयर 2026-27 परिणाम नाम में 1 साल का अंतर दिखता था नाम बिल्कुल कमाई के साल जैसा होगा इस सारणी से स्पष्ट है कि नई व्यवस्था में 2026-27 की कमाई का टैक्स रिटर्न '2026-27' के नाम से ही भरा जाएगा। इससे नाम में होने वाला एक साल का 'वर्चुअल गैप' खत्म हो जाएगा। ITR फाइलिंग पर क्या और कैसे असर पड़ेगा? टैक्स एक्सपर्ट्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का मानना है कि यह बदलाव ITR फाइलिंग की प्रक्रिया (Process) से ज्यादा उसकी प्रस्तुति (Presentation) को बदलेगा। 1. फॉर्म्स में बदलाव वर्तमान में ITR-1, ITR-2 आदि फॉर्म्स के ऊपर मोटे अक्षरों में "Assessment Year" लिखा होता है। 2026 से इन फॉर्म्स पर "Tax Year" लिखा होगा। जब आप ड्रॉप-डाउन मेनू से साल चुनेंगे, तो आपको वही साल चुनना होगा जिस साल में आपने पैसा कमाया है। 2. गलतियों में कमी हर साल हजारों रिटर्न सिर्फ इसलिए "डिफेक्टिव" (Defective) घोषित कर दिए जाते थे क्योंकि टैक्सपेयर गलती से गलत असेसमेंट ईयर चुन लेते थे। 'टैक्स ईयर' के लागू होने से यह गलती लगभग शून्य हो जाएगी क्योंकि साल का नाम सीधा और स्पष्ट होगा। 3. टीडीएस (TDS) सर्टिफिकेट (Form 16/16A) कंपनियों द्वारा जारी किए जाने वाले फॉर्म-16 में भी अब असेसमेंट ईयर की जगह टैक्स ईयर का जिक्र होगा। इससे कर्मचारी अपनी सैलरी स्लिप और फॉर्म-16 को आसानी से मैच कर पाएंगे। वैश्विक स्तर पर भारत की नई पहचान यह बदलाव केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक मानकों (Global Standards) के अनुरूप बनाने की एक कवायद है। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA): अमेरिका में 'टैक्स ईयर' का कॉन्सेप्ट चलता है जो आमतौर पर कैलेंडर ईयर (1 जनवरी से 31 दिसंबर) के साथ चलता है। वहां जिस साल कमाई होती है, उसी साल के नाम से रिटर्न भरा जाता है। यूनाइटेड किंगडम (UK): यूके में भी टैक्स ईयर का स्पष्ट कॉन्सेप्ट है। भारत का कदम: भारत अब तक पुरानी ब्रिटिश कालीन व्यवस्था को ढो रहा था। 'टैक्स ईयर' अपनाने से बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) और अनिवासी भारतीयों (NRIs) को भारत में टैक्स फाइल करने में आसानी होगी, क्योंकि उन्हें अब दो अलग-अलग देशों के अलग-अलग शब्दावलियों से जूझना नहीं पड़ेगा। कब से दिखेगा बदलाव? (Transition Timeline) चूंकि हम अभी जनवरी 2026 में हैं, इसलिए टैक्सपेयर्स के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि यह बदलाव उनकी अगली ITR पर लागू होगा या नहीं? आइए इस कन्फ्यूजन को दूर करते हैं: वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026): अभी वित्त वर्ष 2025-26 चल रहा है। यह पुरानी व्यवस्था (एक्ट 1961) के तहत ही खत्म होगा। अगली फाइलिंग (जुलाई 2026): जब आप जुलाई 2026 में ITR भरेंगे (वित्त वर्ष 2025-26 के लिए), तो वह तकनीकी रूप से असेसमेंट ईयर 2026-27 कहलाएगा। यहां पुराना नियम ही चलेगा। नया नियम लागू (1 अप्रैल 2026): 1 अप्रैल 2026 से जो कमाई शुरू होगी (यानी वित्त वर्ष 2026-27), उस पर नया एक्ट लागू होगा। पहली नई ITR (जुलाई 2027): जब आप 2027 में रिटर्न भरेंगे, तब पहली बार आप 'टैक्स ईयर 2026-27' शब्द का इस्तेमाल करेंगे। यानी, यह एक क्रमिक बदलाव (Transition) है जिसके लिए विभाग और टैक्सपेयर्स दोनों को तैयारी का पूरा समय दिया गया है। विशेषज्ञों की राय - क्या कहते हैं टैक्स गुरु? इस बड़े बदलाव पर देश के जाने-माने आर्थिक विशेषज्ञों और सीए की प्रतिक्रियाएं सकारात्मक हैं। सीए अनिरुद्ध गुप्ता (टैक्स एक्सपर्ट, नई दिल्ली): "यह एक स्वागत योग्य कदम है। 'असेसमेंट ईयर' एक काल्पनिक अवधारणा थी जिसकी अब डिजिटल युग में कोई आवश्यकता नहीं है। जब डेटा रियल टाइम में प्रोसेस हो रहा है, तो हम 'मूल्यांकन वर्ष' का इंतजार क्यों करें? टैक्स ईयर का कांसेप्ट नए करदाताओं, विशेषकर युवाओं (Gen-Z) के लिए सिस्टम को समझना बहुत आसान बना देगा।" सुरेश नायर (वित्तीय सलाहकार, मुंबई): "इससे लिटिगेशन (कानूनी विवाद) कम होंगे। कई बार नोटिस भेजे जाने पर साल को लेकर विवाद होता था कि यह नोटिस किस साल की कमाई के लिए है। 'टैक्स ईयर' से संवाद सीधा और स्पष्ट होगा।" टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी चेकलिस्ट नए एक्ट के आने से आपको घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जागरुक रहने की जरूरत है। दस्तावेजों पर नजर रखें: 1 अप्रैल 2026 के बाद आपके बैंक स्टेटमेंट, निवेश के सबूत और सैलरी स्लिप पर 'Tax Year' शब्द को चेक करें। सॉफ्टवेयर अपडेट: अगर आप खुद का बिजनेस करते हैं और अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (जैसे Tally, Zoho) इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें 2026 में अपडेट करना होगा। सीए से संवाद: अपने टैक्स सलाहकार से पूछें कि क्या नए एक्ट में आपके निवेश या डिडक्शन को लेकर कोई और 'छिपा हुआ' बदलाव तो नहीं है? (हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव प्रक्रियात्मक है, दरों में नहीं)। सरल भारत, समर्थ भारत की ओर एक कदम इनकम टैक्स एक्ट 1961 अपनी तमाम खूबियों के बावजूद अपनी जटिल भाषा और असेसमेंट ईयर जैसे पेचीदा शब्दों के कारण आम आदमी के लिए एक पहेली बना हुआ था। प्रधानमंत्री के 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) के विजन के तहत उठाया गया यह कदम वाकई सराहनीय है। 'टैक्स ईयर' का लागू होना सिर्फ एक शब्द का बदलना नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और जनता के बीच विश्वास के रिश्ते को मजबूत करने की पहल है। जब कानून की भाषा सरल होती है, तो उसका पालन (Compliance) अपने आप बढ़ जाता है। उम्मीद है कि 2026 से शुरू होने वाला यह नया दौर भारत के टैक्स कल्चर में एक सकारात्मक क्रांति लाएगा। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: क्या 'टैक्स ईयर' लागू होने से मुझे ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा? उत्तर: जी नहीं। यह बदलाव सिर्फ शब्दावली (Terminology) और प्रक्रिया का है। टैक्स स्लैब या टैक्स की दरों (Rates) में इस वजह से कोई बदलाव नहीं हुआ है। Q2: मैं एक वेतनभोगी (Salaried) हूं, मुझे क्या करना होगा? उत्तर: आपको कुछ विशेष नहीं करना है। बस जब आप 2027 में (2026-27 की कमाई के लिए) ITR भरेंगे, तो फॉर्म पर AY 2027-28 की जगह 'Tax Year 2026-27' चुनना होगा। Q3: क्या पुराना 'फाइनेंशियल ईयर' (FY) शब्द भी खत्म हो जाएगा? उत्तर: अकाउंटिंग (Accounting) की दुनिया में फाइनेंशियल ईयर (FY) शब्द चलता रहेगा, लेकिन इनकम टैक्स के नजरिए से अब 'टैक्स ईयर' ही मुख्य शब्द होगा। दोनों एक ही समय अवधि (1 अप्रैल से 31 मार्च) को कवर करेंगे। Q4: यह नियम कब से लागू होगा? उत्तर: यह नियम 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले वर्ष से लागू होगा। Q5: क्या ITR फॉर्म भी बदल जाएंगे? उत्तर: हां, फॉर्म्स का लेआउट और हेडिंग बदल जाएगी ताकि वे 'टैक्स ईयर' के नए नियमों के अनुरूप हो सकें।
नई दिल्ली / मुंबई, 20 जनवरी 2026 (बिज़नेस डेस्क): भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में आज का दिन, यानी 20 जनवरी 2026, सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। आज सुबह जब बाजार खुला, तो स्क्रीन पर जो आंकड़े उभरे, उन्होंने न केवल निवेशकों बल्कि आम खरीदारों के होश भी उड़ा दिए। पीली धातु (सोना) और चमकीली धातु (चांदी) ने आज महंगाई की ऐसी छलांग लगाई है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने इतने कम समय में की थी।READ ALSO:-Expressway Update: 1 अप्रैल से देश भर के टोल प्लाजा होंगे 100% कैशलेस; अब सिर्फ FASTag और UPI से होगा भुगतान, लंबी कतारों से मिलेगी आजादी खासकर चांदी (Silver) ने आज वह करिश्मा कर दिखाया है जो सदियों में कभी नहीं हुआ। चांदी ने पहली बार 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के मनोवैज्ञानिक और ऐतिहासिक स्तर को तोड़ दिया है। वहीं, सोना भी अपनी चमक बिखेरते हुए लगभग 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम की दहलीज पर खड़ा है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) दोनों पर ही तेजी का ऐसा तूफ़ान है जो थमने का नाम नहीं ले रहा। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर क्यों चांदी सोने से भी तेज भाग रही है, 2025 के बाद 2026 में यह तेजी क्यों बरकरार है, और क्या सच में चांदी अब 4 लाख रुपये का आंकड़ा छूने वाली है? आज के भाव: आंकड़ों की जुबानी, महंगाई की कहानी इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए आज दोपहर के आंकड़े हर किसी को चौंका रहे हैं। यह लगातार दूसरा दिन है जब कीमती धातुओं ने अपना 'ऑलटाइम हाई' (All-Time High) टच किया है। 1. सोने की चाल (Gold Price Movement) सोना अब आम आदमी की पहुंच से लगभग बाहर होता जा रहा है। आज का भाव (24 कैरेट): ₹1,46,375 प्रति 10 ग्राम कल का भाव: ₹1,43,946 प्रति 10 ग्राम एक दिन में उछाल: ₹2,429 की भारी बढ़त 2026 में अब तक की तेजी: इस साल के महज 20 दिनों में सोना ₹13,180 महंगा हो चुका है। 2. चांदी की ऐतिहासिक छलांग (Silver Price Movement) चांदी ने आज वो कर दिखाया, जिसका इंतजार बुलियन मार्केट के 'बुल्स' (Bulls) लंबे समय से कर रहे थे। आज का भाव (IBJA): ₹3,04,863 प्रति किलोग्राम कल का भाव: ₹2,93,975 प्रति किलोग्राम एक दिन में उछाल: ₹10,888 की ऐतिहासिक वृद्धि महत्वपूर्ण: MCX पर चांदी कल ही 3 लाख के स्तर को पार कर चुकी थी, लेकिन आज हाजिर बाजार (Spot Market) में भी इसने यह कीर्तिमान स्थापित कर दिया। 2026 में अब तक की तेजी: साल 2026 के पहले 20 दिनों में ही चांदी ₹74,443 महंगी हो चुकी है। यह अपने आप में एक अविश्वसनीय रिकॉर्ड है। फ्लैशबैक: 2025 रहा है 'गोल्डन ईयर' (2025 vs 2026) मौजूदा तेजी को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे मुड़कर पिछले साल, यानी 2025 के प्रदर्शन को देखना होगा। पिछला साल निवेशकों के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं था। सोने का प्रदर्शन (2025): पिछले साल सोने ने अपने निवेशकों को मालामाल कर दिया। 2025 में सोने की कीमतों में 75% की वृद्धि दर्ज की गई। 31 दिसंबर 2024 को जो सोना 76,162 रुपये का था, वह 31 दिसंबर 2025 को बढ़कर 1,33,195 रुपये पर बंद हुआ। यानी एक साल में सीधे 57,033 रुपये का मुनाफा। चांदी का 'मॉन्स्टर' रिटर्न (2025): सोने से भी दो कदम आगे रही चांदी। 2025 में चांदी ने 167% का रिटर्न दिया। 31 दिसंबर 2024 को चांदी 86,017 रुपये थी, जो 2025 के आखिरी दिन 2,30,420 रुपये पर बंद हुई। एक साल में चांदी 1,44,403 रुपये महंगी हुई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जो ट्रेंड 2025 में शुरू हुआ था, 2026 में वह अपने चरम (Peak) पर पहुंच रहा है। चांदी में 'सुनामी' जैसी तेजी के 3 प्रमुख कारण आखिर चांदी में ऐसा क्या हो रहा है कि यह रुकने का नाम नहीं ले रही? इसके पीछे तीन सबसे बड़े ग्लोबल और फंडामेंटल कारण हैं, जो इसे सिर्फ एक कीमती धातु (Precious Metal) से बदलकर एक 'क्रिटिकल इंडस्ट्रियल मेटल' बना रहे हैं। 1. इंडस्ट्रियल डिमांड में विस्फोट (Industrial Revolution 2.0) चांदी अब वह धातु नहीं रही जिसे केवल पायल, बिछिया या बर्तन बनाने के लिए खरीदा जाता था। आज की आधुनिक दुनिया चांदी पर चल रही है। ग्रीन एनर्जी: सोलर पैनल (Photovoltaic cells) बनाने में चांदी का कोई विकल्प नहीं है। जैसे-जैसे दुनिया ग्रीन एनर्जी की तरफ भाग रही है, चांदी की खपत कई गुना बढ़ गई है। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV): एक इलेक्ट्रिक कार में पेट्रोल कार के मुकाबले कहीं ज्यादा चांदी का इस्तेमाल होता है। बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से लेकर कनेक्टर तक, हर जगह चांदी की जरूरत है। निष्कर्ष: चांदी अब 'ज्वेलरी' से ज्यादा 'जरूरी कच्चा माल' (Essential Raw Material) बन गई है, जिसके बिना टेक्नोलॉजी ठप पड़ सकती है। 2. डोनाल्ड ट्रंप का 'टैरिफ डर' (The Trump Tariff Effect) अमेरिका की राजनीति का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ रहा है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और बयानों ने बाजार में एक अजीब सा डर पैदा कर दिया है। सप्लाई चेन का संकट: ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' और टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ाने की नीतियों के डर से अमेरिकी कंपनियों ने चांदी का भारी स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है। जमाखोरी: बड़ी टेक और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां यह सोच रही हैं कि अगर कल को सप्लाई रुकी या महंगी हुई, तो उनका प्रोडक्शन बंद हो जाएगा। इसलिए, वे आज ही मुंहमांगी कीमत पर चांदी खरीद रहे हैं। इससे ग्लोबल मार्केट में 'कृत्रिम कमी' (Artificial Shortage) पैदा हो गई है। 3. मैन्युफैक्चरर्स के बीच मची होड़ (Panic Buying) यह कारण सीधे तौर पर ऊपर दिए गए दो कारणों का परिणाम है। बाजार में यह हवा है कि आने वाले महीनों में चांदी मिलेगी ही नहीं। इस डर (Fear of Missing Out - FOMO) के चलते, छोटे से लेकर बड़े मैन्युफैक्चरर्स तक, सभी प्रोडक्शन लाइन चालू रखने के लिए चांदी खरीद रहे हैं। जब मांग इतनी ज्यादा हो और सप्लाई सीमित हो (क्योंकि चांदी की खदानों से उत्पादन उस गति से नहीं बढ़ा है), तो कीमतों का रॉकेट बनना तय है। यही कारण है कि यह तेजी आने वाले महीनों में भी बनी रहेगी। सोने की चमक क्यों बढ़ रही है? (3 प्रमुख कारण) चांदी अगर इंडस्ट्री की चहेती है, तो सोना अब भी 'संकट का साथी' (Crisis Hedge) बना हुआ है। 1. डॉलर का घुटने टेकना (Weak Dollar Index) अंतर्राष्ट्रीय बाजार का नियम सीधा है- जब डॉलर गिरता है, सोना उठता है। अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के फैसले ने डॉलर को कमजोर कर दिया है। कमजोर डॉलर का मतलब है कि अन्य मुद्राओं (जैसे रुपया, यूरो) धारकों के लिए सोना खरीदना सस्ता पड़ता है (अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर), जिससे मांग बढ़ती है और कीमतें ऊपर जाती हैं। इसके अलावा, सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम होने से निवेशक बॉन्ड्स छोड़कर सोने में पैसा लगा रहे हैं। 2. जियोपॉलिटिकल तनाव (Geopolitical Tension) दुनिया इस समय बारूद के ढेर पर बैठी है। रूस-यूक्रेन युद्ध का लंबा खींचना और मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव निवेशकों को डरा रहा है। शेयर बाजार जब अनिश्चित होता है, तो निवेशक अपना पैसा निकालकर 'सेफ हेवन' (सुरक्षित ठिकाने) यानी सोने में डालते हैं। दुनिया में बढ़ते तनाव ने सोने की मांग को एक मजबूत आधार (Support) दिया है। 3. सेंट्रल बैंकों की भूख (Central Bank Buying) यह सबसे बड़ा और 'छुपा हुआ' कारण है। चीन, रूस और भारत जैसे देशों के केंद्रीय बैंक (Central Banks) लगातार सोना खरीद रहे हैं। चीन अपने रिजर्व बैंक में डॉलर की जगह सोना भर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सेंट्रल बैंक सालाना 900 टन से ज्यादा सोना खरीद रहे हैं। जब दुनिया की सरकारें ही सोना खरीदने लगें, तो आम आदमी के लिए भाव कम होने का सवाल ही नहीं उठता। भविष्यवाणी 2026: क्या 4 लाख तक जाएगी चांदी? अब सबसे बड़ा सवाल- क्या अभी खरीदना सही है या कीमतें गिरेंगी? बाजार के दिग्गज और एक्सपर्ट्स इस पर क्या कह रहे हैं, आइए विस्तार से जानते हैं। 1. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal) टारगेट: ₹3.20 लाख प्रति किलो (2026 में)। सलाह: इनका मानना है कि सोलर और ईवी की मांग स्ट्रक्चरल है (यानी यह लंबी चलेगी)। इसलिए, निवेशकों को घबराना नहीं चाहिए और हर गिरावट (Dip) पर खरीदारी करनी चाहिए। 2. सैमको सिक्योरिटीज (Samco Securities) टारगेट: ₹3.94 लाख प्रति किलो। तर्क: तकनीकी चार्ट्स पर 'ब्रेकआउट' (Breakout) और मजबूत वैश्विक संकेतों को देखते हुए, चांदी 4 लाख के बेहद करीब पहुंच सकती है। यह अब तक का सबसे एग्रेसिव टारगेट है। 3. नीलेश सुराना (कमोडिटी एक्सपर्ट) टारगेट: $100 प्रति औंस (भारतीय रुपयों में करीब ₹3.5 से ₹4 लाख)। तर्क: ग्रीन एनर्जी की बढ़ती मांग और अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती का 'डबल बूस्ट' चांदी को इस स्तर तक ले जाएगा। $100 का स्तर चांदी के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर होगा। 4. पोनमुडी आर (CEO, एनरिच मनी) नजरिया: "लंबी अवधि की तेजी (Bull Run) अभी जारी रहेगी।" सलाह: इन्होंने छोटे निवेशकों को सलाह दी है कि वे कीमतों को देखकर डरें नहीं, बल्कि जब भी भाव थोड़ा गिरे, उसे निवेश का मौका समझें। 5. रॉबर्ट कियोसाकी (फेमस ग्लोबल इन्वेस्टर और 'रिच डैड पुअर डैड' के लेखक) भविष्यवाणी: साल 2026 में चांदी $200 प्रति औंस तक जा सकती है। तर्क: कियोसाकी हमेशा से डॉलर के पतन (Crash) की बात करते रहे हैं। उनका मानना है कि डॉलर की कमजोरी और बेतहाशा महंगाई (Hyperinflation) चांदी को ऐसे स्तर पर ले जाएगी जो "चौंकाने वाला" होगा। अगर यह सच हुआ, तो भारतीय रुपयों में भाव 5-6 लाख के पार भी जा सकता है, हालांकि यह एक अति-उत्साही अनुमान है। आम आदमी क्या करे? सोने और चांदी की यह तेजी न केवल निवेशकों के पोर्टफोलियो को हरा-भरा कर रही है, बल्कि यह बदलती हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था का संकेत भी है। निवेशकों के लिए: अगर आप लंबी अवधि (Long Term) के खिलाड़ी हैं, तो अभी भी मौका है। एक्सपर्ट्स की मानें तो चांदी में अभी भी दोगुना होने की क्षमता बाकी है। शादी-ब्याह के लिए: जिनके घरों में शादियां हैं, उनके लिए यह वक्त मुश्किल है। कीमतें कम होने का इंतजार करना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि ट्रेंड 'अपवर्ड' (Upward) है। ट्रेडर्स के लिए: बाजार बहुत वोलेटाइल (उतार-चढ़ाव वाला) है। स्टॉप-लॉस के बिना काम करना खतरे से खाली नहीं होगा। आज 20 जनवरी 2026 का दिन यह साबित कर रहा है कि कागज की मुद्रा (Currency) के मुकाबले 'हार्ड एसेट्स' (Hard Assets) जैसे सोना और चांदी ही असली धन हैं। 3 लाख की चांदी और डेढ़ लाख का सोना अब 'न्यू नॉर्मल' बन चुके हैं। (अस्वीकरण: यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। कमोडिटी बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।)
19 जनवरी 2026 की तारीख भारतीय सर्राफा बाजार और कमोडिटी मार्केट के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई है। यह वह दिन है जब 'गरीबों का सोना' कही जाने वाली चांदी ने अपनी चमक से सोने को भी फीका कर दिया है। बाजार खुलने के साथ ही चांदी की कीमतों में जो तूफानी तेजी देखी गई, उसने बड़े-बड़े विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। पहली बार चांदी का भाव 3 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के मनोवैज्ञानिक और ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया है।READ ALSO:-RTE एडमिशन 2026-27: निजी स्कूलों में 'मुफ्त शिक्षा' का सपना होगा साकार, बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किया 3 चरणों का विस्तृत शेड्यूल महज एक साल पहले तक जो निवेशक चांदी को नजरअंदाज कर रहे थे, आज वे अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते एक साल में चांदी ने अपने निवेशकों को 2 लाख रुपए से ज्यादा की बढ़त दी है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो यह 200% से अधिक का रिटर्न है, जो किसी भी अन्य एसेट क्लास (चाहे वह रियल एस्टेट हो या फिक्स्ड डिपॉजिट) से कई गुना ज्यादा है। लेकिन क्या यह तेजी यहीं रुकने वाली है? बाजार के दिग्गज एक्सपर्ट्स का जवाब है— "बिल्कुल नहीं।" औद्योगिक मांग (Industrial Demand) में आ रही जबरदस्त उछाल को देखते हुए जानकारों का मानना है कि यह साल चांदी के नाम रहने वाला है। भविष्यवाणी की जा रही है कि साल 2026 के अंत तक चांदी 4 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर को छू सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब भी निवेश का मौका बचा है? और अगर हाँ, तो इतनी महंगी चांदी को सुरक्षित कैसे रखा जाए? इसका जवाब है— सिल्वर ईटीएफ (Silver ETF)। बाजार का विश्लेषण - चांदी में क्यों लगी है 'आग'? चांदी की कीमतों में आई यह ऐतिहासिक तेजी कोई सट्टेबाजी नहीं, बल्कि इसके पीछे ठोस बुनियादी कारण हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, चांदी अब केवल गहनों या सिक्कों तक सीमित नहीं रह गई है। यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक धातु (Industrial Metal) बन चुकी है। 1. 200% रिटर्न का गणित बीते एक वर्ष में चांदी की कीमतों में जो उछाल आया है, वह अभूतपूर्व है। न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार, कीमत में 2 लाख रुपए से ज्यादा की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि जिन निवेशकों ने पिछले साल चांदी में पैसा लगाया था, उनकी दौलत तीन गुनी हो चुकी है। यह रिटर्न शेयर बाजार के कई मल्टीबैगर स्टॉक्स से भी ज्यादा है। 2. 4 लाख रुपए का लक्ष्य क्यों? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की रैली अभी खत्म नहीं हुई है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण 'इंडस्ट्रियल डिमांड' (Industrial Demand) है। इलेक्ट्रॉनिक्स: मोबाइल, लैपटॉप और गैजेट्स में चांदी का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। सोलर एनर्जी: दुनिया भर में ग्रीन एनर्जी पर जोर है और सोलर पैनल बनाने में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। मेडिकल उपकरण: स्वास्थ्य क्षेत्र में भी चांदी की खपत बढ़ी है। इन सभी सेक्टर्स में मांग बढ़ने और खदानों से आपूर्ति सीमित रहने के कारण, कीमतों का ऊपर जाना तय माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स ने साफ कर दिया है कि चांदी इस साल 4 लाख रुपए के स्तर तक जा सकती है। फिजिकल चांदी की समस्याएं और ETF का उदय जब भी चांदी में निवेश की बात आती है, तो पारंपरिक भारतीय निवेशक के दिमाग में सबसे पहले चांदी की ईंटें, सिक्के या पायल-बिछिया खरीदने का विचार आता है। लेकिन ₹3 लाख प्रति किलो के भाव पर फिजिकल चांदी खरीदना और उसे संभालना अब आसान नहीं रहा। फिजिकल चांदी में निवेश की चुनौतियां: चोरी का डर: ₹3 लाख की 1 किलो चांदी घर में रखना खतरे से खाली नहीं है। इसके लिए आपको बैंक लॉकर चाहिए, जिसका सालाना किराया आपके मुनाफे को कम कर देता है। मेकिंग चार्ज: जब आप चांदी के गहने या सिक्के खरीदते हैं, तो आपको मेकिंग चार्ज देना पड़ता है। बेचते समय यह पैसा काट लिया जाता है। शुद्धता (Purity) की चिंता: स्थानीय सुनार से खरीदी गई चांदी 99.9% शुद्ध है या नहीं, इसकी जांच करना एक आम आदमी के लिए मुश्किल होता है। स्टोरेज की समस्या: चांदी समय के साथ काली पड़ जाती है और इसे सुरक्षित रखने के लिए जगह की जरूरत होती है। इन सभी समस्याओं का एक ही आधुनिक समाधान है— सिल्वर ETF (Silver Exchange Traded Fund)। सिल्वर ETF क्या है? (What is Silver ETF) अगर आप शेयर बाजार की जटिलताओं से घबराते हैं, तो भी सिल्वर ETF को समझना बहुत आसान है। यह आधुनिक निवेश का वह तरीका है जो आपको बिना चांदी खरीदे, चांदी का मालिक बनाता है। सरल शब्दों में, सिल्वर ETF (सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) एक ऐसा म्यूचुअल फंड स्कीम है, जो चांदी की कीमतों पर आधारित होता है। यह शेयर बाजार में लिस्टेड होता है। जब आप सिल्वर ETF खरीदते हैं, तो आप वास्तव में कोई धातु नहीं खरीद रहे होते। आप एक डिजिटल सर्टिफिकेट या यूनिट खरीद रहे होते हैं। इस यूनिट की कीमत पूरी तरह से चांदी के बाजार भाव से जुड़ी होती है। जैसे-जैसे बाजार में चांदी महंगी होती है, आपके ETF का मूल्य बढ़ता है। जैसे ही चांदी सस्ती होती है, आपके ETF का मूल्य कम होता है। इसे आप 'कागजी चांदी' या 'डिजिटल सिल्वर' कह सकते हैं, जो आपके डीमैट खाते में सुरक्षित रहती है। यह काम कैसे करता है? (How Does it Work?) बहुत से निवेशकों के मन में सवाल होता है कि "अगर मेरे पास चांदी नहीं है, तो पैसा कैसे बढ़ रहा है?" आइए, सिल्वर ETF की कार्यप्रणाली (Mechanism) को समझते हैं: फंड हाउस की भूमिका: सबसे पहले, एक एसेट मैनेजमेंट कंपनी (जैसे HDFC, Nippon, SBI आदि) निवेशकों से पैसा इकट्ठा करती है। शुद्ध चांदी की खरीद: इस पैसे से फंड हाउस बाजार से 99.9% शुद्धता वाली असली चांदी (Physical Silver Bars) खरीदता है। सुरक्षित स्टोरेज: फंड हाउस इस असली चांदी को कस्टोडियन के पास सुरक्षित वॉल्ट (तिजोरी) में रखता है। यूनिट्स का निर्माण: उस रखी गई चांदी के मूल्य के बराबर, फंड हाउस 'यूनिट्स' जारी करता है। स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग: ये यूनिट्स शेयर बाजार (NSE या BSE) पर लिस्ट हो जाती हैं। निवेशक की एंट्री: आप अपने डीमैट अकाउंट के जरिए इन यूनिट्स को वैसे ही खरीद-बेच सकते हैं, जैसे आप रिलायंस या टाटा के शेयर खरीदते हैं। आपके पैसे के बदले असली चांदी रखी हुई है, लेकिन उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी नहीं, बल्कि फंड हाउस की है। सिल्वर ETF में निवेश के बेमिसाल फायदे आज के डिजिटल दौर में फिजिकल चांदी के बजाय सिल्वर ETF में निवेश करना क्यों समझदारी है? इसके कई ठोस कारण हैं: 1. बहुत कम राशि से शुरुआत (Start Small) यह सिल्वर ETF का सबसे बड़ा आकर्षण है। अगर आप आज बाजार में 10 ग्राम चांदी भी लेने जाएं तो आपको 3000 रुपये से ज्यादा खर्च करने होंगे। लेकिन ETF के जरिए आप बहुत छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं। सिल्वर ETF की 1 यूनिट की कीमत वर्तमान में 150 रुपए के करीब है। इसका मतलब है कि एक छात्र, एक गृहिणी या एक छोटा व्यापारी भी मात्र 150-300 रुपये बचाकर चांदी में निवेश शुरू कर सकता है। 2. सुरक्षा की 100% गारंटी (Safety) सिल्वर ETF इलेक्ट्रॉनिक रूप में आपके डीमैट अकाउंट (Demat Account) में पड़ा रहता है। न इसे कोई चोर चुरा सकता है। न इसके खोने का डर है। न ही इसे लॉकर में रखने का झंझट। आपको बस एक मामूली सालाना डीमैट मेंटेनेंस चार्ज देना होता है। 3. शुद्धता पर कोई सवाल नहीं (Purity) जब आप सिल्वर ETF खरीदते हैं, तो फंड हाउस जिस चांदी को बैकग्राउंड में खरीदता है, वह 99.9% शुद्ध होती है। फिजिकल मार्केट में अक्सर ग्राहकों को कम शुद्धता वाली चांदी थमा दी जाती है, लेकिन ETF में पारदर्शिता और शुद्धता की पूरी गारंटी होती है। 4. जब चाहें बेचें, तुरंत पैसा (High Liquidity) इसे 'व्यापार की आसानी' कहते हैं। फिजिकल चांदी बेचने के लिए आपको सुनार की दुकान पर जाना पड़ता है, जहां वह कई तरह की कटौती करता है। सिल्वर ETF को आप अपने मोबाइल से एक क्लिक पर बेच सकते हैं। बाजार के समय (सुबह 9:15 से 3:30) आप इसे कभी भी खरीद या बेच सकते हैं। पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आ जाता है। 5. कोई मेकिंग चार्ज नहीं फिजिकल ज्वैलरी में 15-20% पैसा मेकिंग चार्ज (गढ़ाई) में चला जाता है, जो निवेश के लिहाज से नुकसान है। ETF में आपको सिर्फ चांदी की कीमत चुकानी होती है, कोई फालतू खर्चा नहीं। सिक्के का दूसरा पहलू - जोखिम (Risks Involved) हर निवेश के साथ कुछ जोखिम जुड़े होते हैं। सिल्वर ETF में निवेश करने से पहले इन बातों को जानना जरूरी है: 1. कीमत का उतार-चढ़ाव (Volatility) चांदी स्वभाव से बहुत चंचल (Volatile) धातु है। इसकी कीमतें सोने के मुकाबले बहुत तेजी से ऊपर और नीचे जाती हैं। अगर बाजार में कोई बुरी खबर आती है, तो ETF का मूल्य तेजी से गिर सकता है। निवेशकों को मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए कि उनका पैसा थोड़े समय के लिए कम भी हो सकता है। 2. औद्योगिक मांग पर निर्भरता जैसा कि बताया गया, चांदी की कीमत अब गहनों से ज्यादा इंडस्ट्री पर निर्भर है। इसका उपयोग सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल उपकरणों में होता है। अगर वैश्विक मंदी आती है और इन इंडस्ट्रीज में उत्पादन घटता है, तो चांदी की मांग घटेगी और दाम नीचे आएंगे। सिल्वर ETF कैसे चुनें? (How to Select the Best ETF) बाजार में कई कंपनियों के सिल्वर ETF उपलब्ध हैं। अपने लिए सबसे सही विकल्प चुनने के लिए इन तीन बातों की चेकलिस्ट बनाएं: 1. फंड हाउस (Fund House) हमेशा ऐसे एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) का ETF चुनें जिसका नाम और रिकॉर्ड अच्छा हो। बड़े फंड हाउस में निवेश करना सुरक्षित माना जाता है। 2. ट्रैकिंग एरर (Tracking Error) यह एक तकनीकी शब्द है, लेकिन इसे समझना जरूरी है। ETF का काम है चांदी की असली कीमत की नकल करना। कभी-कभी फंड के खर्चों की वजह से ETF का रिटर्न असली चांदी के रिटर्न से थोड़ा अलग हो जाता है। इसे 'ट्रैकिंग एरर' कहते हैं। नियम: जिस ETF का ट्रैकिंग एरर जितना कम हो, वह उतना ही अच्छा है। 3. लिक्विडिटी (Volume) देखें कि उस ETF में दिन भर में कितनी खरीद-बिक्री हो रही है। ज्यादा वॉल्यूम वाले ETF को खरीदना और बेचना आसान होता है। निवेश की रणनीति (Investment Strategy) एक्सपर्ट्स की सलाह है कि चांदी में सट्टेबाजी (Trading) करने के बजाय निवेश (Investing) करें। लंबा नजरिया रखें: चांदी की कीमतें छोटी अवधि में बहुत ऊपर-नीचे होती हैं। इसलिए कम से कम 3 से 5 साल का नजरिया (Time Horizon) रखें। SIP करें: एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय, हर महीने थोड़ी-थोड़ी यूनिट्स खरीदें। इससे कीमत औसत (Average) हो जाएगी और जोखिम कम होगा। निवेश का सुनहरा (रजत) अवसर 19 जनवरी को ₹3 लाख प्रति किलो का स्तर पार करना यह साबित करता है कि चांदी अब कमजोर नहीं रही। आने वाले समय में ग्रीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी की बढ़ती मांग चांदी को और नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। ₹4 लाख का लक्ष्य अब दूर नहीं है। अगर आप एक सुरक्षित, पारदर्शी और आसान निवेश विकल्प की तलाश में हैं, तो सिल्वर ETF आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है। मात्र 300 रुपये या उससे भी कम में शुरुआत करके आप अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं। तिजोरी की चिंता छोड़िए और डीमैट अकाउंट के जरिए डिजिटल चांदी में निवेश की शुरुआत कीजिए।
बीते कुछ महीनों से कमोडिटी बाजार में कोहराम मचाने वाली और सोने से भी तेज दौड़ लगाने वाली 'चांदी' (Silver) की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया है। जो चांदी कुछ दिन पहले तक नए रिकॉर्ड बना रही थी, वह अब अपने उच्चतम स्तर से फिसलती नजर आ रही है। शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में चांदी की कीमतों में जो तेज गिरावट देखी गई, उसने बड़े-बड़े ट्रेडर्स और निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।READ ALSO:-भविष्य का 'ब्रह्मास्त्र': बच्चों के नाम आज से जोड़ें ₹28 रोज, बुढ़ापे तक वो बनेंगे ₹11 करोड़ के मालिक; जानें NPS वात्सल्य स्कीम का जादुई गणित बाजार में अब एक ही सवाल गूंज रहा है— क्या चांदी में आई यह तेजी एक बुलबुला थी जो अब फूटने वाला है? या फिर यह एक मामूली करेक्शन है जिसके बाद कीमतें और ऊपर जाएंगी? आज की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम समझेंगे कि आखिर चांदी में अचानक बिकवाली क्यों आई, गोल्ड-सिल्वर रेशियो क्या संकेत दे रहा है और इतिहास के पन्नों में दर्ज 1980 और 2011 की गिरावट से आज के हालात कितने मिलते-जुलते हैं। रिकॉर्ड हाई से 5.5% नीचे फिसली चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट होती है। चांदी ने हाल ही में 93.70 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड हाई (Record High) छू लिया था। निवेशकों को लग रहा था कि यह तेजी अभी और जारी रहेगी और जल्द ही 100 डॉलर का आंकड़ा पार हो जाएगा। लेकिन, शुक्रवार को बाजार का मूड पूरी तरह बदल गया। गिरावट का दौर: चांदी अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 5.5% नीचे आ चुकी है। शुक्रवार का हाल: COMEX (कमोडिटी एक्सचेंज) पर चांदी 88.537 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। यह एक ही दिन में करीब 4.15% की भारी गिरावट थी। इतनी बड़ी गिरावट सामान्य नहीं होती। यह संकेत देती है कि ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली (Profit Booking) हावी है और खरीदार अब ऊंचे भाव पर जोखिम लेने से कतरा रहे हैं। गिरावट के 4 बड़े कारण (Reasons Behind the Fall) बाजार में बिना आग के धुआं नहीं उठता। चांदी की इस गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि चार ठोस कारण काम कर रहे हैं: अमेरिकी डॉलर में मजबूती (Strong Dollar): जब भी अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, कमोडिटी की कीमतें (जैसे सोना-चांदी) अक्सर नीचे आती हैं क्योंकि वे महंगी हो जाती हैं। डॉलर इंडेक्स में आई रिकवरी ने चांदी पर दबाव बनाया है। फेडरल रिजर्व और ब्याज दरें: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती (Rate Cut) की उम्मीदों में हो रहे बदलाव ने भी बाजार को प्रभावित किया है। बेरोजगारी के आंकड़े: अमेरिका में बेरोजगारी के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आए हैं। इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था मजबूत है, जिससे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर धातुओं की मांग थोड़ी कम हुई है। जियो-पॉलिटिकल तनाव में कमी: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में थोड़ी कमी आई है, जिससे अनिश्चितता के दौर में की जाने वाली हेजिंग (Hedging) वाली खरीदारी घटी है। संस्थागत 'हथौड़ा': CME ने बढ़ाया मार्जिन चांदी की बेतहाशा तेजी को रोकने के लिए बाजार नियामकों और एक्सचेंजों ने भी कमर कस ली है। कुछ ट्रेडर्स का मानना है कि कीमतें स्वाभाविक मांग से ज्यादा सट्टेबाजी के कारण बढ़ रही थीं। इसे 'काबू' में रखने के लिए शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) ने वही पुराना हथियार अपनाया है जो अक्सर कमोडिटी बबल्स को फोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है— मार्जिन बढ़ाना। क्या हुआ है? CME ने जनवरी और फरवरी 2026 के सिल्वर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट (Silver Futures Contract) पर मार्जिन को बढ़ाकर 45% कर दिया है। इसका असर: मार्जिन बढ़ने का मतलब है कि ट्रेडर्स को अब चांदी खरीदने या पोजीशन होल्ड करने के लिए एक्सचेंज के पास ज्यादा पैसा जमा करना होगा। इससे छोटे और सट्टेबाज ट्रेडर्स बाजार से बाहर हो जाते हैं और खरीदारी का दबाव कम हो जाता है। SEBI-रजिस्टर्ड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता बताते हैं कि CME द्वारा उठाया गया यह कदम ऊपरी स्तरों पर खरीदारी को कमजोर करेगा, जो कीमतों में गिरावट का एक मुख्य कारण है। गोल्ड-सिल्वर रेशियो: खतरे की घंटी (The Gold-Silver Ratio Warning) तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) में 'गोल्ड-सिल्वर रेशियो' एक बेहद महत्वपूर्ण संकेतक है। यह बताता है कि एक औंस सोने की कीमत से कितनी चांदी खरीदी जा सकती है। मौजूदा स्थिति: यह रेशियो 52 के नीचे आ गया है। इसका मतलब: ऐतिहासिक रूप से, जब यह रेशियो इतना नीचे आता है, तो इसका मतलब होता है कि सोने की तुलना में चांदी बहुत ज्यादा महंगी (Overvalued) हो गई है। संकेत: यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि चांदी में 'करेक्शन' (Correction) आ सकता है। या तो सोने के भाव तेजी से बढ़ें या फिर चांदी के भाव तेजी से गिरें ताकि यह रेशियो अपने सामान्य स्तर पर वापस आ सके। फिलहाल, चांदी के गिरने की संभावना ज्यादा दिख रही है। क्या इतिहास खुद को दोहराएगा? (Lessons from History) बाजार के दिग्गज अक्सर कहते हैं, "इतिहास खुद को दोहराता नहीं है, लेकिन वह अक्सर तुकबंदी (Rhyme) जरूर करता है।" चांदी के मामले में दो ऐतिहासिक घटनाएं निवेशकों को डरा रही हैं। 1. हंट ब्रदर्स का दौर (1980): विशेषज्ञ अनुज गुप्ता याद दिलाते हैं कि 1980 में 'हंट ब्रदर्स' (Hunt Brothers) ने चांदी की जमाखोरी करके भाव आसमान पर पहुंचा दिए थे। उस वक्त भी मार्जिन नियमों में बदलाव किया गया था। परिणाम: चांदी 49 डॉलर से लुढ़क कर सीधे 11 डॉलर पर आ गई थी। यह एक ऐतिहासिक क्रैश था। 2. 2011 का क्रैश: साल 2011 में भी चांदी ने रिकॉर्ड हाई बनाया था। सबको लगा था कि अब यह नई ऊंचाई पर टिकेगी। परिणाम: टॉप बनाने के बाद कीमतों में लगभग 75% की गिरावट देखी गई थी। आज की स्थिति (मार्जिन बढ़ना, रिकॉर्ड हाई बनाना, और फिर गिरावट) काफी हद तक इन घटनाओं से मेल खाती है। इसलिए विश्लेषकों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि चांदी शायद अपना 'टॉप' बना चुकी है। निवेशकों के लिए 'लक्ष्मण रेखा': कहां है सपोर्ट और रेजिस्टेंस? अगर आप चांदी में निवेशित हैं या निवेश करने की सोच रहे हैं, तो Pace 360 के अमित गोयल और अन्य विशेषज्ञों द्वारा बताए गए इन स्तरों (Levels) को अपनी डायरी में नोट कर लें: अंतरराष्ट्रीय बाजार (Global Market): खतरे का निशान (Bearish Trigger): अगर चांदी 82 डॉलर प्रति औंस के नीचे टिक जाती है और वापस ऊपर नहीं आती, तो मान लीजिए कि 'टॉप' बन चुका है और बड़ी गिरावट तय है। मजबूत सपोर्ट: 82-83 डॉलर की रेंज एक मजबूत सपोर्ट जोन है। तेजी की उम्मीद (Bullish Trigger): अगर भाव पलटकर 92 डॉलर के ऊपर निकलता है, तो यह 95 से 100 डॉलर तक जा सकता है। भारतीय बाजार (MCX Levels): मुनाफावसूली का संकेत: अगर MCX पर चांदी 2,70,000 रुपये प्रति किलो (फ्यूचर्स/बड़े लॉट के सन्दर्भ में सांकेतिक स्तर) से नीचे बंद होती है, तो भारी बिकवाली शुरू हो सकती है। सपोर्ट रेंज: 2,80,000 से 2,83,000 रुपये। रेजिस्टेंस/टारगेट: अगर भाव 2,95,000 रुपये के ऊपर टिकता है, तो यह 3,05,000 से 3,20,000 रुपये तक जा सकता है। सावधानी हटी, दुर्घटना घटी कुल मिलाकर, चांदी का बाजार इस समय दोराहे पर खड़ा है। एक तरफ अभी भी थोड़ी तेजी की गुंजाइश (Room for upside) बची हुई है, वहीं दूसरी तरफ तकनीकी संकेतक और ऐतिहासिक पैटर्न एक बड़ी गिरावट की ओर इशारा कर रहे हैं। निवेशकों के लिए सलाह यही है कि वे अंधाधुंध खरीदारी से बचें। 'स्टॉप लॉस' (Stop Loss) का सख्ती से पालन करें और मार्जिन नियमों में हो रहे बदलावों पर नजर रखें। अमेरिकी डॉलर की चाल और फेड के अगले कदम बाजार की दिशा तय करेंगे। क्विक हाइलाइट्स (Key Takeaways) गिरावट: चांदी रिकॉर्ड हाई ($93.70) से 5.5% गिरी। ट्रिगर: मजबूत डॉलर, CME द्वारा 45% मार्जिन बढ़ोतरी। चेतावनी: गोल्ड-सिल्वर रेशियो < 52 (चांदी महंगी है)। इतिहास: 1980 और 2011 में भी मार्जिन बढ़ने और टॉप बनने के बाद क्रैश आया था। अहम लेवल (Global): $82 के नीचे मंदी, $92 के ऊपर तेजी। डिस्क्लेमर: कमोडिटी मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है। यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श अवश्य लें।
नई दिल्ली/मुंबई। भारत के बैंकिंग इतिहास में ग्राहक सेवा और शुल्कों (Service Charges) को लेकर हमेशा से बहस होती रही है। देश के सबसे बड़े सरकारी ऋणदाता, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एक बार फिर अपने करोड़ों ग्राहकों को चौंका दिया है। यदि आप उन करोड़ों लोगों में से हैं जो अपनी बैंकिंग जरूरतों के लिए एसबीआई (SBI) पर भरोसा करते हैं और डिजिटल ट्रांजैक्शन या एटीएम (ATM) का जमकर इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।READ ALSO:-8वें वेतन आयोग का शंखनाद: केंद्रीय कर्मचारियों की झोली में गिरेंगे लाखों रुपये! 1 जनवरी 2026 से 'अच्छे दिनों' की शुरुआत, समझें 1.5 लाख के एरियर का पूरा मेगा-कैलकुलेशन बैंक ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) और एटीएम सेवाओं पर लगने वाले शुल्कों में संशोधन कर रहा है। ये नए नियम 15 फरवरी 2026 से प्रभावी हो जाएंगे। इन बदलावों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, खासकर उन मध्यम वर्गीय परिवारों और छोटे व्यापारियों पर जो ऑनलाइन फंड ट्रांसफर और सुविधा के लिए दूसरे बैंकों के एटीएम का उपयोग करते हैं। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आपकी जेब पर कितना भार बढ़ने वाला है, किन खातों को इससे छूट मिली है और आप इन शुल्कों से कैसे बच सकते हैं। IMPS ट्रांजैक्शन - अब 'फ्री' की सीमा हुई तय इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) भारत में पैसे ट्रांसफर करने का सबसे लोकप्रिय माध्यम है क्योंकि इसके जरिए पैसा 24x7 और तुरंत (Real-time) लाभार्थी के खाते में पहुंच जाता है। अब तक एसबीआई अपने डिजिटल ग्राहकों को बड़ी राहत देता आया था, लेकिन अब बैंक ने 'फ्री' ट्रांजैक्शन पर कैंची चला दी है। बैंक की नई गाइडलाइंस के अनुसार, 15 फरवरी 2026 से आईएमपीएस (IMPS) के चार्ज स्लैब को पूरी तरह से री-स्ट्रक्चर (Restructure) किया गया है। नई रेट लिस्ट: किसकी जेब पर कितना असर? बैंक ने छोटे लेन-देन करने वाले ग्राहकों को राहत बरकरार रखी है, लेकिन मध्यम और बड़ी रकम भेजने वालों पर बोझ डाला है। ₹25,000 तक (राहत): अगर आप डिजिटल माध्यम (नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग या YONO ऐप) से ₹25,000 तक की राशि ट्रांसफर करते हैं, तो यह बिल्कुल मुफ्त (Nil Charges) रहेगा। यह छोटे खर्चों, बिल भुगतान और दोस्तों को पैसे भेजने के लिए अच्छी खबर है। ₹25,000 से ₹1 लाख तक (मामूली शुल्क): जैसे ही आप 25 हजार की सीमा पार करेंगे, मीटर चालू हो जाएगा। इस स्लैब में पैसे भेजने पर आपको ₹2 + GST देना होगा। यानी अगर आप 30,000 रुपये भेज रहे हैं, तो आपके खाते से अतिरिक्त शुल्क कटेगा। ₹1 लाख से ₹2 लाख तक (मध्यम शुल्क): इस श्रेणी में चार्ज को बढ़ाकर ₹6 + GST तय किया गया है। यह उन लोगों को प्रभावित करेगा जो किराया, फीस या ईएमआई आदि के लिए पैसे ट्रांसफर करते हैं। ₹2 लाख से ₹5 लाख तक (अधिकतम शुल्क): IMPS की अधिकतम सीमा के पास पैसे भेजने पर ₹10 + GST का शुल्क लगेगा। विचित्र स्थिति: ब्रांच बैंकिंग vs डिजिटल बैंकिंग आमतौर पर बैंक डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए ब्रांच ट्रांजैक्शन को महंगा रखते हैं। लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। एसबीआई ने स्पष्ट किया है कि शाखा (Branch) से आईएमपीएस करने वालों के लिए शुल्कों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। ब्रांच में पहले की तरह ही ₹2 से लेकर ₹20 + GST तक का चार्ज लगता रहेगा। हालांकि, ब्रांच जाने में समय और पेट्रोल का खर्च भी शामिल होता है, जिसे ग्राहक अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। ATM के नियमों में बड़ा उलटफेर आईएमपीएस के बदलाव तो फरवरी में लागू होंगे, लेकिन एसबीआई ने एटीएम और कैश रिसाइकिलिंग मशीन (ADWM) के चार्जेस में जो बदलाव किए थे, वे 1 दिसंबर 2025 से लागू हो चुके हैं और अब ग्राहकों को इसका असर महसूस होने लगा है। यह बदलाव मुख्य रूप से इंटरचेंज यूसेज (Interchange Usage) यानी दूसरे बैंकों की मशीनों के इस्तेमाल पर केंद्रित है। खाता-वार प्रभाव (Account-wise Impact) 1. सेविंग अकाउंट (Savings Account): आम बचत खाताधारकों के लिए नियम सख्त हुए हैं। मेट्रो शहरों (मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद) में एसबीआई ग्राहकों को दूसरे बैंकों के एटीएम पर महीने में 3 फ्री ट्रांजैक्शन मिलते हैं, जबकि अन्य शहरों में 5। कैश विड्रॉल (Cash Withdrawal): मुफ्त लिमिट खत्म होने के बाद, अगर आप दूसरे बैंक के एटीएम से पैसा निकालते हैं, तो अब आपको हर ट्रांजैक्शन पर ₹23 + GST देना होगा। यह पहले ₹20 हुआ करता था। नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन: अगर आप सिर्फ बैलेंस चेक करते हैं या मिनी स्टेटमेंट निकालते हैं, तो उसके लिए भी आपको ₹11 + GST देना होगा। 2. सैलरी अकाउंट (Salary Account) - सबसे बड़ा झटका: कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाले लोगों के लिए यह सबसे बड़ा बदलाव है। पहले एसबीआई के कई प्रीमियम सैलरी पैकेजों में 'अनलिमिटेड फ्री ट्रांजैक्शन' की सुविधा मिलती थी, चाहे आप किसी भी बैंक के एटीएम का इस्तेमाल करें। नई सीमा: अब सैलरी अकाउंट वालों को महीने में सिर्फ 10 फ्री ट्रांजैक्शन (एसबीआई और दूसरे बैंक मिलाकर) ही मिलेंगे। जैसे ही आप महीने में 11वीं बार एटीएम कार्ड स्वाइप करेंगे, आपके खाते से चार्ज कटना शुरू हो जाएगा। 3. करंट अकाउंट (Current Account): चालू खाताधारकों के लिए कोई फ्री लिमिट नहीं होती, और अब उन पर हर ट्रांजैक्शन के लिए बढ़ा हुआ शुल्क लागू होगा। किसे मिली है छूट? (Exemptions) एसबीआई ने कुछ खास वर्गों और खातों को इन बढ़े हुए शुल्कों से दूर रखा है, जो एक राहत की बात है। अगर आप इनमें से किसी श्रेणी में आते हैं, तो आप बेफिक्र रह सकते हैं: विशेष सैलरी पैकेज: रक्षा और पुलिस कर्मियों के लिए बनाए गए पैकेज जैसे DSP (Defense Salary Package), PMSP (Paramilitary Salary Package), ICSP (Indian Coast Guard Salary Package) आदि। पेंशन खाते: 'शौर्य फैमिली पेंशन अकाउंट' धारकों को छूट जारी रहेगी। पारिवारिक खाते: 'SBI रिश्ते फैमिली सेविंग्स अकाउंट' पर भी नए चार्ज लागू नहीं होंगे। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): किसानों को राहत देते हुए, KCC धारकों के लिए दूसरे बैंकों के एटीएम पर ट्रांजैक्शन अनलिमिटेड फ्री रहेंगे। जन-धन खाते (BSBD): बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट खातों पर नियमों में कोई बदलाव नहीं है, ताकि वित्तीय समावेशन प्रभावित न हो। कार्डलेस सुविधा: एसबीआई या अन्य बैंकों के एटीएम से 'कार्डलेस कैश विड्रॉल' (Cardless Cash Withdrawal) अभी भी फ्री रखा गया है। यह सुविधा योनो ऐप के जरिए मिलती है। विश्लेषण और आपकी रणनीति (Analysis & Strategy) सवाल यह है कि एक ग्राहक के रूप में आप इन शुल्कों से कैसे बच सकते हैं? वित्तीय विशेषज्ञों और बैंक की सलाह के आधार पर यहां कुछ स्मार्ट टिप्स दिए गए हैं: 1. "अपना बैंक, अपना एटीएम": एसबीआई के पास भारत में सबसे बड़ा एटीएम नेटवर्क है, जिसमें 63,000 से ज्यादा एटीएम और ADWM शामिल हैं। रणनीति: जब भी कैश की जरूरत हो, कोशिश करें कि एसबीआई की मशीन का ही इस्तेमाल करें। गूगल मैप्स पर 'SBI ATM near me' सर्च करना आपको ₹23 के चार्ज से बचा सकता है। 2. भुगतान के तरीके बदलें (NEFT vs IMPS): अगर आपको ₹25,000 से ज्यादा भेजना है और बहुत जल्दी नहीं है, तो IMPS की जगह NEFT (National Electronic Funds Transfer) का इस्तेमाल करें। NEFT ऑनलाइन माध्यमों से अभी भी ज्यादातर बैंकों में मुफ्त है। इसमें पैसा पहुंचने में 30 मिनट से 2 घंटे तक का समय लग सकता है, लेकिन आपकी जेब से एक्स्ट्रा चार्ज नहीं कटेगा। 3. एक बार में निकासी: बार-बार थोड़े-थोड़े पैसे निकालने की जगह, महीने के खर्च का अनुमान लगाकर एक या दो बार में ही बड़ी रकम निकाल लें। इससे आप फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट को पार करने से बच जाएंगे। 4. डिजिटल सुरक्षा: IMPS चार्जेस के साथ-साथ सुरक्षा भी एक मुद्दा है। IMPS एक रियल-टाइम सेवा है, यानी एक बार पैसा गया तो वापस (Revert) नहीं आएगा। सलाह: बैंक ने सलाह दी है कि पैसा ट्रांसफर करने से पहले लाभार्थी (Beneficiary) का नाम और अकाउंट नंबर दो बार चेक करें। बदलता बैंकिंग परिदृश्य एसबीआई द्वारा किए गए ये बदलाव इस बात का संकेत हैं कि बैंकिंग सेवाएं अब रखरखाव की लागत (Maintenance Cost) निकालने की ओर बढ़ रही हैं। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा को बनाए रखने में बैंकों का खर्च बढ़ रहा है, जिसे वे ग्राहकों से वसूलना चाहते हैं। हालांकि, 25,000 रुपये तक की फ्री लिमिट आम आदमी के लिए पर्याप्त है, लेकिन व्यापारियों और वेतनभोगी वर्ग को अब अपनी बैंकिंग आदतों में थोड़ा अनुशासन लाना होगा। 15 फरवरी 2026 की तारीख को अपने कैलेंडर में मार्क कर लें और उससे पहले अपने वित्तीय लेन-देन की योजना बना लें। (नोट: यह जानकारी एसबीआई द्वारा जारी हालिया अधिसूचनाओं और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। अंतिम निर्णय और दरें बैंक के विवेकाधिकार पर निर्भर करती हैं।)
भारत में डिजिटलीकरण (Digitalization) के दौर में एक और बड़ी क्रांति होने जा रही है। अगर आप नौकरीपेशा हैं और आपका प्रोविडेंट फंड (PF) कटता है, तो यह खबर आपको खुश कर देगी। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने 8 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स को एक ऐसी सुविधा देने जा रहा है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। जल्द ही आप अपने पीएफ का पैसा वैसे ही निकाल सकेंगे, जैसे आप एटीएम से कैश निकालते हैं या किसी दुकानदार को यूपीआई (UPI) से पेमेंट करते हैं।READ ALSO:-बिजनौर मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026: 18 जनवरी को लगेगा विशेष कैंप, डीएम जसजीत कौर ने दी जानकारी, जानें नाम जुड़वाने का पूरा तरीका केंद्र सरकार और केंद्रीय श्रम मंत्रालय एक ऐसे अत्याधुनिक सिस्टम (Advanced System) पर काम कर रहे हैं, जिससे पीएफ मेंबर्स सीधे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए अपना पैसा निकाल सकेंगे। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को अप्रैल 2026 तक रोलआउट करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम न केवल 'डिजिटल इंडिया' की दिशा में एक बड़ी छलांग है, बल्कि यह उन करोड़ों कर्मचारियों के लिए भी राहत की सांस है, जिन्हें इमरजेंसी के वक्त अपना ही पैसा निकालने के लिए पोर्टल के चक्कर काटने पड़ते थे और कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था। कैसे काम करेगा नया 'UPI विड्रॉल सिस्टम'? पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया सिस्टम मौजूदा बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट व्यवस्था के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा। इसकी कार्यप्रणाली को सरल शब्दों में ऐसे समझा जा सकता है: 1. फंड का वर्गीकरण (सुरक्षित vs उपलब्ध): नये सिस्टम के तहत आपके कुल पीएफ फंड को तकनीकी रूप से दो हिस्सों में देखा जा सकता है। फ्रीज (सुरक्षित) हिस्सा: फंड का एक बड़ा हिस्सा रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित या 'फ्रीज' रखा जाएगा, ताकि भविष्य निधि का मूल उद्देश्य (पेंशन और बुढ़ापे की सुरक्षा) खत्म न हो। लिक्विड (उपलब्ध) हिस्सा: फंड का कुछ हिस्सा (जो नियमों के तहत एडवांस निकालने योग्य है) मेंबर्स के लिए 'लिक्विड' यानी तुरंत निकासी के लिए उपलब्ध रहेगा। 2. UPI पिन का जादू: जिस तरह अभी आप अपने बैंक अकाउंट का बैलेंस चेक करते हैं या पैसे भेजते हैं, वैसे ही पीएफ निकासी होगी। मेंबर को अपने UAN (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) को UPI ऐप से लिंक करना होगा। जैसे ही आप विड्रॉल रिक्वेस्ट डालेंगे और अपना UPI पिन दर्ज करेंगे, सिस्टम तुरंत उसे वेरीफाई करेगा। वेरिफिकेशन सफल होते ही पैसा पलक झपकते (Real-time) आपके बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगा। 3. एटीएम और डिजिटल उपयोग: एक बार पैसा आपके बैंक अकाउंट में आ गया, तो आप उसे एटीएम से कैश निकाल सकते हैं या सीधे किसी भी डिजिटल पेमेंट के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? (वर्तमान चुनौतियां) अभी पीएफ का पैसा निकालना किसी 'मिशन' से कम नहीं होता, खासकर उन लोगों के लिए जो तकनीक में बहुत माहिर नहीं हैं। मौजूदा व्यवस्था में कई खामियां हैं जिन्हें नया सिस्टम दूर करेगा: लंबी प्रक्रिया: अभी पैसा निकालने के लिए मेंबर को ईपीएफओ पोर्टल पर जाना पड़ता है, क्लेम फॉर्म (Form 31, 19 या 10C) भरना पड़ता है, और फिर उसे अप्रूवल के लिए सबमिट करना पड़ता है। समय की बर्बादी: ईपीएफओ ने हाल ही में ऑटो-सेटलमेंट मोड (Auto-Settlement) शुरू किया है, लेकिन फिर भी पैसा खाते में आने में कम से कम 3 दिन और कभी-कभी 10 से 15 दिन लग जाते हैं। क्लेम रिजेक्शन: कई बार पासबुक की फोटो साफ न होने, हस्ताक्षर मैच न होने या छोटी-मोटी तकनीकी गलतियों के कारण क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। UPI सिस्टम में पासबुक अपलोड करने का झंझट ही खत्म हो जाएगा क्योंकि बैंक अकाउंट पहले से लिंक और वेरीफाई होगा। सॉफ्टवेयर की दिक्कतें: अक्सर ईपीएफओ की वेबसाइट डाउन रहती है या सर्वर एरर आता है। सूत्रों के मुताबिक, ईपीएफओ अभी अपने सॉफ्टवेयर (IT 2.0 Project) की खामियों को दूर कर रहा है, ताकि करोड़ों ट्रांजेक्शन का भार उठाया जा सके। अप्रैल 2026: डेडलाइन का क्या है मतलब? आपके मन में सवाल होगा कि इतना अच्छा सिस्टम है तो इसे अभी लागू क्यों नहीं किया जा रहा? 2026 तक का इंतजार क्यों? दरअसल, यह बदलाव केवल एक नया फीचर जोड़ना नहीं है, बल्कि ईपीएफओ के पूरे आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर (IT Infrastructure) को बदलने जैसा है। सेंट्रलाइज्ड सिस्टम: अभी ईपीएफओ का डेटा कई अलग-अलग सर्वरों और क्षेत्रीय कार्यालयों में बंटा हुआ है। इसे एक सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस (C-DAC की मदद से) में बदला जा रहा है। सुरक्षा मानक: यूपीआई से पैसा निकालना बेहद आसान है, लेकिन इसमें फ्रॉड (Fraud) का खतरा भी है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई हैकर या साइबर ठग किसी और का पीएफ पैसा न निकाल ले। इसलिए मल्टी-लेयर सिक्योरिटी (Multi-layer Security) तैयार की जा रही है। टेस्टिंग: 8 करोड़ लोगों के डेटा के साथ कोई रिस्क नहीं लिया जा सकता। इसलिए इस सिस्टम की गहन टेस्टिंग होगी। नियमों की पाठशाला: नौकरी जाने पर कितना पैसा निकाल सकते हैं? यूपीआई की सुविधा आने का मतलब यह नहीं है कि आप जब चाहे पूरा पीएफ खाली कर सकते हैं। पीएफ निकासी के नियम (Withdrawal Rules) अभी भी लागू रहेंगे। नए सिस्टम में भी ये लिमिट्स सेट होंगी। आइए जानते हैं नौकरी जाने की स्थिति में क्या नियम हैं: बेरोजगारी में सहारा: 1 महीने बाद: अगर किसी पीएफ मेंबर की नौकरी छूट जाती है, तो वह बेरोजगार होने के एक महीने बाद अपने कुल पीएफ बैलेंस का 75% हिस्सा निकाल सकता है। यह नियम इसलिए है ताकि बेरोजगारी के दौरान व्यक्ति अपनी घर-गृहस्थी चला सके। 2 महीने बाद: अगर व्यक्ति की नई नौकरी दो महीने तक नहीं लगती है, तो वह दो महीने बाद बचा हुआ 25% हिस्सा भी निकाल सकता है और अपना खाता पूरी तरह सेटल (Full & Final Settlement) कर सकता है। नई नौकरी मिलने पर: अगर आपको एक महीने के भीतर दूसरी नौकरी मिल जाती है, तो आप पुराने पीएफ का पैसा नई कंपनी के पीएफ अकाउंट में ट्रांसफर करवा सकते हैं। टैक्स का गणित: कब कटता है पैसा और कब होता है टैक्स-फ्री? पीएफ निकासी में सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन टैक्स (Taxation) को लेकर होता है। क्या यूपीआई से पैसा निकालने पर टैक्स लगेगा? नियम वही रहेंगे जो अभी हैं: 5 साल का 'गोल्डन रूल': इनकम टैक्स एक्ट के तहत, अगर किसी कर्मचारी ने लगातार 5 साल तक नौकरी की है और उसके बाद वह पीएफ निकालता है, तो वह राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री (Tax Free) होती है। महत्वपूर्ण बिंदु: सेवा की निरंतरता: 5 साल की अवधि का मतलब एक ही कंपनी में काम करना नहीं है। अगर आपने 2 साल कंपनी 'A' में काम किया और फिर 3 साल कंपनी 'B' में, और आपने अपना पीएफ ट्रांसफर करवाया है, तो कुल मिलाकर 5 साल माने जाएंगे। 5 साल से पहले निकासी: अगर आप 5 साल की सर्विस पूरी होने से पहले पीएफ निकालते हैं और निकासी की राशि 50,000 रुपये से अधिक है, तो उस पर TDS (Tax Deducted at Source) कटता है। अगर पैन कार्ड (PAN Card) लिंक है, तो 10% टीडीएस कटेगा। अगर पैन कार्ड लिंक नहीं है, तो 30% तक टीडीएस कट सकता है। (नोट: कोविड या बीमारी जैसे विशिष्ट कारणों के लिए एडवांस पीएफ निकालने पर टीडीएस नहीं कटता)। सब्सक्राइबर्स के लिए चेकलिस्ट: अभी से क्या तैयारी रखें? जब तक 2026 में यह सिस्टम लागू होगा, तब तक आपको अपना पीएफ खाता पूरी तरह अपडेट रखना चाहिए ताकि सुविधा शुरू होते ही आप इसका लाभ ले सकें। UAN एक्टिवेशन: सुनिश्चित करें कि आपका UAN एक्टिव है और उसका पासवर्ड आपको याद है। KYC अपडेट: आपके पीएफ खाते में आपका आधार (Aadhaar), पैन (PAN) और बैंक अकाउंट (Bank Account) सही-सही लिंक होना चाहिए। मोबाइल नंबर: आपका जो मोबाइल नंबर आधार कार्ड से लिंक है, वही पीएफ खाते में भी होना चाहिए। यूपीआई ओटीपी उसी नंबर पर आएगा। नाम में सुधार: अगर आपके पीएफ रिकॉर्ड और आधार कार्ड में नाम या जन्मतिथि में कोई अंतर है, तो उसे अभी 'ज्वाइंट डिक्लेरेशन फॉर्म' (Joint Declaration Form) के जरिए ठीक करवा लें। भविष्य की तस्वीर: EPFO का बदलता स्वरूप ईपीएफओ अब पुरानी फाइलों और बाबूगिरी की छवि से बाहर निकल रहा है। यूनिफाइड सिस्टम: सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में किसी भी कर्मचारी को पीएफ ट्रांसफर करने की जरूरत न पड़े। UAN बैंक अकाउंट की तरह काम करेगा—नौकरियां बदलती रहें, लेकिन पीएफ खाता वही रहेगा और पैसा अपने आप जमा होता रहेगा। पेंशन ऑन क्लिक: केवल पीएफ ही नहीं, भविष्य में ईपीएस (EPS - पेंशन) की गणना और प्राप्ति भी इसी तरह डिजिटल और आसान बनाने की योजना है। यूपीआई (UPI) के जरिए पीएफ निकासी का यह प्रस्ताव निश्चित रूप से एक गेम-चेंजर (Game Changer) है। यह न केवल प्रक्रियाओं को आसान बनाएगा, बल्कि कर्मचारियों को वित्तीय सुरक्षा का अहसास भी दिलाएगा कि उनका पैसा उनकी मुट्ठी में है। हालांकि, अप्रैल 2026 अभी दूर है, लेकिन यह कदम बताता है कि सरकार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को आधुनिक बनाने के लिए गंभीर है। तब तक के लिए, पीएफ मेंबर्स को सलाह दी जाती है कि वे मौजूदा ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करें और अपने दस्तावेजों को दुरुस्त रखें। (नोट: यह समाचार विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और पीटीआई के हवाले से दी गई जानकारी पर आधारित है। ईपीएफओ द्वारा आधिकारिक सर्कुलर जारी होने पर नियमों में कुछ बदलाव संभव हैं।)
नई दिल्ली/मुंबई: क्या आपने कभी सोचा था कि जिस चांदी को हम अक्सर 'गरीबों का सोना' (Poor Man's Gold) कहते थे, वह एक ही साल में अमीरों की तिजोरी की शान बन जाएगी? या सोना, जो भारतीय शादियों की जान है, उसकी कीमतें इतनी बढ़ जाएंगी कि वह आम आदमी की पहुंच से लगभग बाहर हो जाएगा? साल 2025 न केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है, बल्कि इसने कमोडिटी मार्केट (Commodity Market) के सारे पुराने समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है।Read also:-UP Weather Update: यूपी में 'ब्लैक शनिवार', कोहरे के कारण 15 जिलों में 40 गाड़ियां टकराईं; मासूम समेत 7 की मौत, देखें मौसम का डरावना पूर्वानुमान बीते साल, यानी 2025 में बुलियन मार्केट (Bullion Market) में जो हुआ, वह कोई सामान्य घटना नहीं थी। यह एक सुनामी थी—कीमतों की सुनामी। आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने में 75% और चांदी में 167% की अकल्पनीय तेजी दर्ज की गई है। जहां शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा, वहीं कीमती धातुओं ने निवेशकों को वह रिटर्न दिया, जिसकी कल्पना शायद किसी फंड मैनेजर ने भी नहीं की थी। आज की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर 2025 में ऐसा क्या हुआ कि सोना-चांदी रॉकेट बन गए? 2024 के मुकाबले 2025 में आपकी जेब पर कितना असर पड़ा? और सबसे अहम—अमेरिका की नीतियों, रूस-यूक्रेन के तनाव और इंडस्ट्रियल डिमांड ने कैसे इस आग में घी डालने का काम किया। आंकड़ों का खेल: 2024 बनाम 2025 की महा-तुलना सबसे पहले हकीकत को समझते हैं और देखते हैं कि आपकी दौलत में कितनी बढ़ोतरी हुई (अगर आपने निवेश किया था) या आपकी क्रय शक्ति कितनी कम हुई (अगर आप खरीदार हैं)। सोना: 75% की विशाल छलांग अगर हम कैलेंडर वर्ष 2024 के आखिरी दिन को देखें, तो 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम (24 कैरेट) शुद्ध सोने की कीमत 76,162 रुपए थी। उस समय भी लोग इसे महंगा मान रहे थे। लेकिन 2025 ने सारी धारणाएं बदल दीं। साल 2025 के आखिरी कारोबारी दिन, यानी 31 दिसंबर 2025 को जब बाजार बंद हुआ, तो सोने का भाव 1,33,195 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच चुका था। कुल बढ़ोतरी (रुपए में): 57,033 रुपए प्रति 10 ग्राम। कुल बढ़ोतरी (प्रतिशत में): लगभग 75%। यह वृद्धि इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि आम तौर पर सोने में सालाना 10-15% का रिटर्न बहुत अच्छा माना जाता है, लेकिन 75% का रिटर्न किसी 'लॉटरी' से कम नहीं है। चांदी: 167% का विस्फोट सोने की चमक के आगे अक्सर चांदी फीकी पड़ जाती है, लेकिन 2025 पूरी तरह से 'चांदी' के नाम रहा। इसने सोने को भी रिटर्न के मामले में पछाड़ दिया। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी का भाव 86,017 रुपए था। लेकिन 2025 में इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड ने इसे आसमान पर पहुंचा दिया। 31 दिसंबर 2025 को एक किलो चांदी की कीमत 2,30,420 रुपए हो गई। कुल बढ़ोतरी (रुपए में): 1,44,403 रुपए प्रति किलो। कुल बढ़ोतरी (प्रतिशत में): लगभग 167%। यानी अगर किसी ने 2024 के अंत में 1 लाख रुपए की चांदी खरीदी होती, तो आज उसकी वैल्यू 2.67 लाख रुपए होती। यह किसी भी एफडी (FD) या म्यूचुअल फंड से कई गुना ज्यादा है। सोने में 'आग' लगने की असली वजहें: एक गहरा विश्लेषण सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि दुनिया की आर्थिक सेहत का थर्मामीटर है। 2025 में सोने की कीमतों में आए इस 75% के उछाल के पीछे तीन प्रमुख ग्लोबल कारण रहे हैं, जिन्हें समझना हर निवेशक के लिए जरूरी है। (A) कमजोर होता डॉलर और ब्याज दरों का गणित अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने और अमेरिकी डॉलर का '36 का आंकड़ा' होता है। जब डॉलर मजबूत होता है, सोना सस्ता होता है और जब डॉलर कमजोर होता है, सोना महंगा हो जाता है। 2025 में अमेरिका के केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ने अपनी ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू किया। ब्याज दरें घटने से अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स (Treasury Bonds) पर मिलने वाला रिटर्न कम हो गया। इससे वैश्विक निवेशकों का मोह डॉलर से भंग हुआ और डॉलर इंडेक्स लुढ़क गया। जैसे ही डॉलर कमजोर हुआ, दुनिया भर की अन्य मुद्राओं के लिए सोना खरीदना सस्ता हो गया, जिससे मांग बढ़ी। साथ ही, सोने की 'होल्डिंग कॉस्ट' (Holding Cost) कम हो गई, जिसने निवेशकों को पीली धातु की ओर आकर्षित किया। (B) जियोपॉलिटिकल तनाव: जब डर बिकता है, तो सोना चमकता है 2025 साल भर दुनिया के अलग-अलग कोनों में तनाव का माहौल रहा। रूस-यूक्रेन युद्ध: यह संघर्ष खत्म होने के बजाय और गहराता गया, जिसने पूर्वी यूरोप में अस्थिरता पैदा की। वैश्विक अशांति: मध्य-पूर्व और अन्य क्षेत्रों में बढ़ते तनाव ने शेयर बाजारों को अस्थिर कर दिया। अर्थशास्त्र का नियम है—अनिश्चितता के दौर में 'कैश इज किंग' नहीं, बल्कि 'गोल्ड इज किंग' होता है। निवेशकों ने शेयर बाजार के जोखिम से बचने के लिए सोने को सबसे सुरक्षित ठिकाना (Safe Haven Asset) माना। जब-जब दुनिया में डर बढ़ा, सोने की कीमतों ने नई ऊंचाइयां छुईं। (C) सेंट्रल बैंकों की 'गोल्ड रश' (Gold Rush) कीमतें बढ़ने का एक और बड़ा कारण रहा आम जनता नहीं, बल्कि खुद सरकारें। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों, विशेषकर 'पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना' (China), ने डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए सोने का विशाल भंडार जमा करना शुरू कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों ने सालभर में 900 टन से ज्यादा सोना खरीदा। जब बाजार में इतना बड़ा खरीदार (Whale Buyer) आ जाए, तो सप्लाई का कम होना और डिमांड का बढ़ना तय है, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिखा। 3. चांदी क्यों बनी 'हीरा'? 167% उछाल के पीछे की कहानी चांदी की कहानी सोने से थोड़ी अलग है। सोना जहां 'निवेश' और 'ज्वेलरी' पर चलता है, वहीं चांदी अब एक 'इंडस्ट्रियल मेटल' बन चुकी है। 2025 में चांदी की कीमतों में आए 167% के उछाल के पीछे तीन ठोस कारण रहे। (A) इंडस्ट्रियल डिमांड: अब चांदी सिर्फ पायल नहीं, पावर है 2025 में दुनिया ने ग्रीन एनर्जी (Green Energy) की तरफ तेजी से कदम बढ़ाए। सोलर पैनल्स: फोटोवोल्टिक सेल्स (Photovoltaic cells) बनाने में चांदी का भारी इस्तेमाल होता है। सौर ऊर्जा के विस्तार ने चांदी की खपत कई गुना बढ़ा दी। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV): एक इलेक्ट्रिक कार में पेट्रोल कार के मुकाबले कहीं ज्यादा चांदी का उपयोग होता है (सर्किट और कनेक्टर में)। 5G और इलेक्ट्रॉनिक्स: हाई-स्पीड इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी की कंडक्टिविटी (Conductivity) उसे अनिवार्य बनाती है। इस साल चांदी ज्वेलरी आइटम से ज्यादा एक 'जरूरी कच्चा माल' (Critical Raw Material) बनकर उभरी, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों बेकाबू हो गईं। (B) 'ट्रंप टैरिफ' का खौफ और स्टॉकपाइलिंग अमेरिका की आर्थिक नीतियों, विशेषकर पूर्व राष्ट्रपति/राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े 'टैरिफ डर' (Tariff Scare) ने बाजार में खलबली मचा दी। अमेरिकी कंपनियों को डर था कि आयात शुल्क (Import Tariffs) बढ़ने से चांदी महंगी हो जाएगी। इस डर के चलते बड़ी-बड़ी टेक और ऑटोमोबाइल कंपनियों ने चांदी का भारी 'स्टॉक' जमा करना शुरू कर दिया। इस पैनिक बाइंग (Panic Buying) ने ग्लोबल सप्लाई चेन को सूखा दिया, जिससे कीमतें रॉकेट की तरह ऊपर भागीं। (C) मैन्युफैक्चरर्स के बीच होड़ जब कच्चा माल कम हो और मांग ज्यादा, तो होड़ मचना लाजमी है। प्रोडक्शन लाइन रुकने के डर से दुनिया भर के मैन्युफैक्चरर्स ने भविष्य की जरूरतों के लिए पहले ही खरीदारी (Advance Buying) शुरू कर दी। सप्लाई की कमी (Deficit) का यह चक्र 2025 में पूरे साल चलता रहा और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भी यह तेजी बरकरार रह सकती है क्योंकि खदानों से उत्पादन (Mining Output) मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हो पा रहा है। आम आदमी और निवेशकों के लिए गाइड: अब क्या करें? इतनी भारी तेजी के बाद सवाल उठता है कि क्या अब भी सोना खरीदना चाहिए? या जिनके घर में शादी है, वे क्या करें? बाजार के जानकारों का कहना है कि ट्रेंड अभी भी 'पॉजिटिव' है, लेकिन खरीदारी करते समय आपको अब पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें 'ब्रह्म' ध्यान बाजार में जब भाव आसमान पर होते हैं, तो मिलावटखोरी और धोखाधड़ी का जोखिम भी बढ़ जाता है। अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए इन दो नियमों को गांठ बांध लें: 1. बिना 'हॉलमार्क' के सोना = कागज का टुकड़ा 2026 में बिना हॉलमार्क का सोना खरीदना पैसे में आग लगाने जैसा है। हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। क्या देखें? ज्वेलरी पर एक मैग्निफाइंग ग्लास (लेंस) से HUID (Hallmark Unique Identification) कोड देखें। यह 6 अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड होता है (जैसे- AZ4524)। फायदा: हॉलमार्किंग आपको यह गारंटी देती है कि आप जिस कैरेट का दाम दे रहे हैं, आपको सोना भी उतना ही शुद्ध मिल रहा है। इसके बिना, 22 कैरेट बोलकर 18 कैरेट सोना थमाया जा सकता है। 2. कीमत का 'पोस्टमार्टम' करें (Cross-Check Rates) दुकानदार पर आँख मूंदकर भरोसा न करें। सोने का भाव हर शहर और हर दुकान पर थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन बेस रेट (Base Rate) एक ही होता है। कैसे चेक करें? खरीदारी वाले दिन 'इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन' (IBJA) की वेबसाइट या विश्वसनीय न्यूज़ पोर्टल्स से उस दिन का 24 कैरेट और 22 कैरेट का भाव चेक करें। वजन का खेल: डिजिटल कांटे पर वजन अपनी आंखों के सामने करवाएं। याद रखें, सोने के आभूषणों में अक्सर 'मेकिंग चार्ज' (Making Charges) के नाम पर खेल होता है, इसलिए मेकिंग चार्ज और सोने के वजन का बिल अलग-अलग समझें। कैरेट का अंतर: निवेश के लिए ले रहे हैं तो 24 कैरेट (सिक्का/बार) लें, और पहनने के लिए ले रहे हैं तो 22 या 18 कैरेट लें। 24 कैरेट के गहने नहीं बनते क्योंकि वह बहुत नरम होता है। क्या 2026 में भी जारी रहेगी यह रफ़्तार? 2025 ने साबित कर दिया है कि आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सोना और चांदी ही सच्चे साथी हैं। 75% और 167% की यह ऐतिहासिक तेजी एक चेतावनी भी है और अवसर भी। चेतावनी यह कि महंगाई और ग्लोबल तनाव अभी खत्म नहीं हुए हैं, और अवसर यह कि सही समय पर किया गया निवेश आपका भविष्य सुरक्षित कर सकता है। चाहे आप बेटी की शादी के लिए सोना जोड़ रहे हों या रिटायरमेंट के लिए निवेश कर रहे हों—बाजार की चाल, डॉलर की स्थिति और जियोपॉलिटिकल खबरों पर नजर बनाए रखें। जैसा कि हमने 2025 में देखा, कीमतें इंतजार नहीं करतीं। अगला कदम: क्या आप अपने शहर (जैसे मेरठ या बिजनौर) के आज के ताजा सर्राफा भाव जानना चाहते हैं? या फिर आप यह जानना चाहेंगे कि पुराने सोने को एक्सचेंज करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? हमें कमेंट में बताएं। (अस्वीकरण: यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।)
भारत में डिजिटल भुगतान (Digital Payments) का पर्याय बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। जिस UPI ने जेब में नकद रखने की आदत को लगभग खत्म कर दिया है और जिसे दुनिया भर में भारत की 'सॉफ्ट पावर' के रूप में देखा जाता है, आज वही सिस्टम अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।READ ALSO:-EPFO पेंशनरों के लिए 'आजादी' का ऐलान: अब न बैंक की लाइन, न दफ्तरों के चक्कर; डाकिया घर आकर 'मुफ्त' में बनाएगा लाइफ सर्टिफिकेट सब्जी के ठेले से लेकर आलीशान शॉपिंग मॉल तक, "भैया, QR कोड स्कैन कर लूं?" वाला वाक्य अब खतरे में दिखाई दे रहा है। इस फ्री सिस्टम को चलाने वाली रीढ़ यानी फिनटेक कंपनियों (Fintech Companies) ने अब हाथ खड़े करने शुरू कर दिए हैं। PhonePe जैसी दिग्गज कंपनियों और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर कमाई का कोई स्थायी जरिया (Sustainable Revenue Model) नहीं बनाया गया, तो भारत का यह वर्ल्ड क्लास पेमेंट इकोसिस्टम ध्वस्त हो सकता है। बजट 2026 की आहट के बीच, यह मुद्दा अब गरमाता जा रहा है। सवाल बड़ा है—क्या डिजिटल इंडिया का यह रथ अब बिना ईंधन (पैसे) के आगे बढ़ पाएगा? संकट का मूल कारण: लागत ज्यादा, कमाई शून्य आम जनता के लिए UPI भले ही एक जादुई तकनीक हो, जहाँ फोन निकाला, स्कैन किया और पैसा ट्रांसफर हो गया, लेकिन पर्दे के पीछे इस प्रक्रिया को अंजाम देने में भारी-भरकम खर्च आता है। PhonePe ने खोला आंकड़ों का चिट्ठा: मार्केट लीडर PhonePe ने इस मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखी है। कंपनी का कहना है कि एक UPI ट्रांजैक्शन को सफल बनाने के लिए पर्दे के पीछे हजारों करोड़ रुपये का 'टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर' काम करता है। सर्वर और डेटा सेंटर: करोड़ों ट्रांजैक्शन को मिलीसेकंड में प्रोसेस करने के लिए विशाल डेटा सेंटर्स। साइबर सिक्योरिटी: हैकर्स और फ्रॉड से बचाने के लिए हाई-एंड सिक्योरिटी सिस्टम। फ्रॉड प्रिवेंशन: हर ट्रांजैक्शन की निगरानी। कस्टमर सपोर्ट: करोड़ों यूजर्स की समस्याओं का समाधान। मर्चेंट एक्विजिशन: नए दुकानदारों को जोड़ना और उन्हें QR कोड/साउंडबॉक्स देना। कंपनियों का तर्क है कि ये सारे खर्चे वे अपनी जेब से कर रही हैं, जबकि सर्विस पूरी तरह फ्री है। किसी भी बिजनेस के लिए अनिश्चितकाल तक 'लॉस मेकिंग मॉडल' पर चलना संभव नहीं है। घटती सरकारी 'बैसाखी' (Incentive): चिंता की असली वजह अब तक फिनटेक कंपनियां इस उम्मीद में यह बोझ उठा रही थीं कि सरकार उन्हें 'डिजिटल पेमेंट प्रमोशन स्कीम' के तहत इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) देती थी। लेकिन अब सरकार ने इस मदद में भारी कटौती कर दी है, जिससे कंपनियों का गणित बिगड़ गया है। आंकड़े बोलते हैं (Subsidy Cut Analysis): FY 2023-24: सरकार ने फिनटेक सेक्टर को 3,900 करोड़ रुपये का इंसेंटिव दिया था। कंपनियों का कहना है कि यह राशि भी उनकी लागत के मुकाबले कम थी, लेकिन फिर भी एक सहारा था। FY 2024-25: यह राशि घटाकर मात्र 1,500 करोड़ रुपये कर दी गई। मौजूदा बजट प्रावधान: स्थिति तब और गंभीर हो गई जब मौजूदा बजट में इसके लिए केवल 427 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। PhonePe और अन्य कंपनियों का कहना है कि 3,900 करोड़ से सीधे 400 करोड़ के स्तर पर आना, इस बात का संकेत है कि सरकार अब चाहती है कि यह सेक्टर अपने पैरों पर खड़ा हो। लेकिन बिना कमाई (Zero MDR) के यह कैसे संभव होगा? RBI और सरकार का रुख: "मुफ्त में कुछ नहीं मिलता" इस मुद्दे पर नीति निर्माताओं के सुर भी अब बदलते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्व सचिव (Revenue Secretary) और RBI के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि किसी भी वित्तीय प्रणाली का 'हमेशा के लिए मुफ्त' रहना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है। संजय मल्होत्रा (जो राजस्व विभाग से जुड़े हैं और वित्तीय मामलों पर नजर रखते हैं) के हवाले से आई खबरों में कहा गया है कि UPI ने देश को बहुत फायदा दिया है, लेकिन "इसकी एक लागत है और अंततः किसी न किसी को तो वह लागत उठानी ही पड़ेगी।" Payments Council of India (PCI) की चेतावनी: उद्योग संगठन PCI ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो कई फिनटेक कंपनियां, खासकर जो छोटी हैं, अपने ऑपरेशन बंद करने या सीमित करने पर मजबूर हो जाएंगी। इसका सबसे बुरा असर टियर-2 और टियर-3 शहरों (ग्रामीण और छोटे शहर) पर पड़ेगा, जहाँ डिजिटल पेमेंट्स को अभी और बढ़ावा देने की जरूरत है। फिनटेक कंपनियों की मांग: MDR की वापसी इस संकट से उबरने के लिए फिनटेक कंपनियों ने सरकार के सामने एक प्रस्ताव रखा है। वे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को दोबारा लागू करने की मांग कर रहे हैं। क्या है MDR? MDR वह शुल्क है जो दुकानदार (मर्चेंट) डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंक और पेमेंट कंपनी को देता है। क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड पर यह पहले से लागू है, लेकिन UPI पर सरकार ने 'जीरो MDR' पॉलिसी लागू कर रखी है। प्रस्तावित मॉडल (Proposed Model): कंपनियां यह नहीं कह रही हैं कि आम आदमी से पैसा लिया जाए। उनका प्रस्ताव बहुत संतुलित है: आम यूजर (P2P): एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई चार्ज नहीं। छोटे दुकानदार: छोटे मर्चेंट्स (सब्जी वाले, किराना दुकान) के लिए UPI फ्री रहे। बड़े मर्चेंट (Target Group): ऐसे बड़े दुकानदार या कॉरपोरेट्स जिनका सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा है, उनसे ट्रांजैक्शन वैल्यू का 0.25% से 0.30% तक MDR लिया जाए। कंपनियों का मानना है कि बड़े बिजनेस इस मामूली शुल्क को वहन कर सकते हैं, और इससे इकट्ठा होने वाला फंड UPI के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने में काम आएगा। UPI का विशाल आकार: क्यों जरूरी है टिकाऊ मॉडल? UPI अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की जरूरत बन चुका है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के ताजा आंकड़े इसकी गवाही देते हैं। अक्टूबर का रिकॉर्ड: सिर्फ अक्टूबर महीने में देश में 20.7 अरब (2070 करोड़) UPI ट्रांजैक्शन हुए। वैल्यू: इन ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 27.28 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। दबदबा: भारत में होने वाले कुल डिजिटल पेमेंट्स में अब करीब 85% हिस्सेदारी अकेले UPI की है। इतने विशाल वॉल्यूम को संभालने के लिए बैंकिंग सिस्टम पर भी भारी दबाव पड़ता है। कई बार सर्वर डाउन होने की शिकायतें आती हैं। अगर निवेश नहीं बढ़ा, तो ट्रांजैक्शन फेल होने की दर बढ़ सकती है, जिससे लोगों का भरोसा डगमगा सकता है। क्या बजट 2026 में होगा फैसला? अगला आम बजट (Budget 2026) फिनटेक सेक्टर के लिए 'करो या मरो' वाला हो सकता है। वित्त मंत्रालय के सामने दो विकल्प हैं: सब्सिडी बढ़ाए: डिजिटल पेमेंट को पब्लिक गुड (जनहित सेवा) मानते हुए करदाताओं के पैसे से सब्सिडी जारी रखे। MDR की अनुमति दे: बाजार को अपनी लागत खुद निकालने की छूट दे। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार बीच का रास्ता निकाल सकती है। हो सकता है कि लग्जरी ट्रांजैक्शन या बहुत बड़े अमाउंट के कमर्शियल ट्रांजैक्शन पर नॉमिनल चार्ज लगाने की छूट दी जाए। भविष्य की राह UPI भारत की सबसे सफल तकनीकी कहानियों में से एक है। लेकिन 'मुफ्त' का टैग अब इसकी प्रगति में बाधा बन रहा है। अगर हम चाहते हैं कि हमारा पेमेंट सिस्टम चीन या अमेरिका से भी बेहतर बना रहे, सुरक्षित रहे और गांव-गांव तक पहुंचे, तो हमें इसके 'सस्टेनेबिलिटी' (टिकाऊपन) पर ध्यान देना होगा। फिनटेक कंपनियों की मांग जायज नजर आती है क्योंकि कोई भी गाड़ी बिना पेट्रोल के नहीं चल सकती, चाहे वह कितनी ही आधुनिक क्यों न हो। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह इस डिजिटल क्रांति को कैसे बचाए रखती है।
भारत के लाखों बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने एक ऐसी पहल की शुरुआत की है, जिसे पेंशन प्रणाली के इतिहास में 'गेम-चेंजर' माना जा रहा है। बुढ़ापे में जब शरीर साथ नहीं देता, तब बैंक की लंबी लाइनों में खड़े होकर खुद को जीवित साबित करने की जद्दोजहद अब गुजरे जमाने की बात होने जा रही है। ईपीएफओ ने अपने 78 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को 'जीवन सुगमता' (Ease of Living) का तोहफा देते हुए मुफ्त डोरस्टेप डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) सेवा लॉन्च की है। अब आपका 'पोस्टमैन' (डाकिया) सिर्फ चिट्ठी ही नहीं, बल्कि आपकी पेंशन की चाबी भी लेकर आएगा। क्या है यह नई 'डोरस्टेप सेवा'? (Understanding the New Service) अक्सर देखा जाता है कि नवंबर-दिसंबर के महीने में बैंकों के बाहर बुजुर्गों की भीड़ लग जाती है। कई बार बायोमेट्रिक मशीनें काम नहीं करतीं, तो कई बार बुजुर्गों के फिंगरप्रिंट घिस जाने के कारण मैच नहीं होते। ग्रामीण इलाकों में तो यह समस्या और भी विकराल होती है। इसी दर्द को समझते हुए, EPFO ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के साथ हाथ मिलाया है। कैसे काम करेगी सेवा: अब डाकिया या ग्रामीण डाक सेवक (GDS) सीधे पेंशनर के घर जाएंगे। उनके पास स्मार्टफोन और बायोमेट्रिक डिवाइस होगी। फेस ऑथेंटिकेशन: सबसे बड़ी बात यह है कि अब फिंगरप्रिंट की भी जरूरत नहीं। डाकिया आपके चेहरे (Face Scan) के जरिए आपका सत्यापन करेगा। लागत: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहले डोरस्टेप बैंकिंग के लिए कुछ शुल्क लगता था, लेकिन ईपीएफओ ने ऐलान किया है कि अब यह सेवा पेंशनर के लिए 100% मुफ्त होगी। इसका पूरा खर्च ईपीएफओ खुद वहन करेगा। आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Guide for Pensioners) अगर आप या आपके घर में कोई बुजुर्ग ईपीएफओ पेंशनर है, तो वे घर बैठे इस सेवा को कैसे बुला सकते हैं? इसकी प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया गया है। तरीका 1: PostInfo मोबाइल ऐप के जरिए डाउनलोड करें: सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर से 'PostInfo' ऐप डाउनलोड करें। सर्विस रिक्वेस्ट: ऐप खोलें और 'Service Request' विकल्प पर जाएं। जानकारी भरें: अपना नाम, पता, पिन कोड, ईमेल और मोबाइल नंबर दर्ज करें। सर्विस चुनें: 'Select Service' में 'IPPB-Jeevan Pramaan' चुनें। OTP सत्यापन: आपके मोबाइल पर एक OTP आएगा, उसे दर्ज कर रिक्वेस्ट कंफर्म करें। विजट: कुछ ही समय में नजदीकी डाकघर से डाकिया आपके घर संपर्क करेगा। तरीका 2: वेबसाइट के जरिए आप इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भी 'Doorstep Banking' सेक्शन में अपनी रिक्वेस्ट डाल सकते हैं। तरीका 3: डाकिया से सीधा संपर्क ग्रामीण क्षेत्रों में आप सीधे अपने बीट के पोस्टमैन या स्थानीय डाकघर में जाकर भी कह सकते हैं कि आपको जीवन प्रमाण पत्र बनवाना है। घर पर सत्यापन की प्रक्रिया: डाकिया आने पर क्या होगा? जब डाकिया आपके घर आएगा, तो प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी। इसके लिए पेंशनर को तैयार रहना होगा: दस्तावेज तैयार रखें: पेंशनर को अपना आधार कार्ड (Aadhaar Card), मोबाइल नंबर और पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) नंबर अपने पास रखना होगा। डाटा एंट्री: डाकिया अपने डिवाइस में आपकी आधार संख्या और PPO नंबर डालेगा। फेस ऑथेंटिकेशन (Face Authentication): डाकिया अपने फोन के कैमरे से पेंशनर का चेहरा स्कैन करेगा। सॉफ्टवेयर यह जांचेगा कि व्यक्ति जीवित है या नहीं (जैसे पलकें झपकाना)। यह तकनीक उन लोगों के लिए वरदान है जिनके हाथ कांपते हैं या उंगलियों के निशान मिट चुके हैं। बायोमेट्रिक विकल्प: यदि किसी तकनीकी कारण से फेस ऑथेंटिकेशन फेल होता है, तो डाकिया के पास मौजूद बायोमेट्रिक डिवाइस (फिंगरप्रिंट स्कैनर) का उपयोग किया जाएगा। पुष्टिकरण (Confirmation): प्रक्रिया पूरी होते ही पेंशनर के मोबाइल पर एक SMS आएगा कि उनका जीवन प्रमाण पत्र जमा हो गया है। ऑटो-अपडेट: यह डाटा सीधे ईपीएफओ के सर्वर और 'जीवन प्रमाण' पोर्टल पर अपलोड हो जाएगा। आपको बैंक जाने की कोई जरूरत नहीं। पेंडिंग मामलों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक': मार्च 2026 का लक्ष्य ईपीएफओ ने सिर्फ सेवा ही नहीं शुरू की है, बल्कि अपने सिस्टम की सफाई का भी बड़ा अभियान छेड़ा है। कई ऐसे मामले हैं जहां सालों से जीवन प्रमाण पत्र जमा न होने के कारण पेंशन रुकी हुई है। प्राथमिकता (Priority List): ईपीएफओ ने अपने सभी आंचलिक और क्षेत्रीय कार्यालयों को सख्त निर्देश दिए हैं: 5 साल से पुराने मामले: सबसे पहले उन पेंशनरों को ट्रैक किया जाएगा जिनका लाइफ सर्टिफिकेट 5 साल या उससे ज्यादा समय से जमा नहीं हुआ है। 2 से 5 साल पुराने मामले: इसके बाद दूसरे चरण में 2 से 5 साल वाले मामलों का निपटारा होगा। लक्ष्य: ईपीएफओ का टारगेट है कि मार्च 2026 तक ऐसे सभी लंबित मामलों का समाधान कर दिया जाए। मृत्यु के मामलों में कार्रवाई: डाकसेवकों को निर्देश दिया गया है कि सत्यापन के दौरान यदि पता चलता है कि किसी पेंशनर की मृत्यु हो चुकी है, तो इसकी रिपोर्ट तुरंत करें। इससे दो फायदे होंगे: पेंशन भुगतान रोका जा सकेगा (Overpayment से बचाव)। पात्र वारिस (विधवा/विधुर) को फैमिली पेंशन शुरू करने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी। टेक्नोलॉजी का कमाल: फेस ऑथेंटिकेशन क्यों है सुरक्षित? ईपीएफओ ने जिस 'Face RD' (Face Recognition Technology) को अपनाया है, वह UIDAI द्वारा विकसित है। जीवंतता का पता (Liveness Check): यह कोई फोटो खींचने जैसी प्रक्रिया नहीं है। यह तकनीक यह पहचानती है कि सामने वाला व्यक्ति 'लाइव' है। यह आंखों के झपकने और चेहरे की सूक्ष्म हलचल को पकड़ती है। सुरक्षा: इसमें डाटा चोरी होने का खतरा नहीं है क्योंकि यह सीधे आधार सर्वर से मैच करता है। DIY (Do It Yourself): जो खुद कर सकते हैं, उनके लिए विकल्प अगर आपके पास स्मार्टफोन है और आप तकनीक के जानकार हैं, तो आपको डाकिया का इंतजार करने की भी जरूरत नहीं है। ईपीएफओ ने 'डिजिटल आत्मनिर्भरता' को बढ़ावा देने के लिए स्वयं सेवा (Self-Service) विकल्प भी खुले रखे हैं। खुद कैसे बनाएं सर्टिफिकेट? एप्स: अपने फोन में 'UMANG App' या 'Jeevan Pramaan Face App' डाउनलोड करें। आधार फेस आरडी: गूगल प्ले स्टोर से 'AadhaarFaceRD' सर्विस इंस्टॉल करें। प्रक्रिया: ऐप खोलें, आधार नंबर और पीपीओ डालें, अपना चेहरा स्कैन करें और सबमिट कर दें। यह सुविधा भी 2020 से उपलब्ध है और पूरी तरह मुफ्त है। क्यों जरूरी थी यह पहल? (The Need for Change) भारत में ईपीएस (EPS-95) के तहत लाखों पेंशनर आते हैं। पुरानी व्यवस्था में कई खामियां थीं: शारीरिक अक्षमता: 80-90 साल के बुजुर्गों के लिए बिस्तर से उठकर बैंक जाना असंभव होता था। फिंगरप्रिंट की समस्या: उम्र के साथ त्वचा सिकुड़ने से 30-40% बुजुर्गों के फिंगरप्रिंट स्कैनर पर नहीं आते थे। ग्रामीण पहुंच: कई गांवों में बैंक 10-15 किलोमीटर दूर होते हैं। भ्रष्टाचार/दलाली: कई बार एजेंट सर्टिफिकेट बनवाने के नाम पर पैसे ऐंठ लेते थे। डाकिया (Postman) भारतीय समाज का सबसे विश्वसनीय हिस्सा है। वह गांव के हर घर को जानता है। इसलिए, आईपीपीबी के साथ यह साझेदारी सबसे व्यावहारिक समाधान है। ईपीएफओ का विजन: जीवन सुगमता (Ease of Living) श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ का स्पष्ट मानना है कि पेंशन किसी पर अहसान नहीं, बल्कि कर्मचारी की सालों की मेहनत का अधिकार है। विशेषज्ञों का कहना है, "यह कदम डिजिटल इंडिया के सबसे सफल प्रयोगों में से एक है। जब तकनीक का इस्तेमाल कतार में खड़े आखिरी और सबसे कमजोर व्यक्ति (बुजुर्ग) की मदद के लिए होता है, तभी वह तकनीक सफल मानी जाती है।" इस पहल से न केवल बुजुर्गों को सम्मान मिलेगा, बल्कि ईपीएफओ के डेटाबेस में भी पारदर्शिता आएगी। घोस्ट बेनिफिशियरी (फर्जी पेंशनर) हटेंगे और असली हकदारों को बिना रुकावट पेंशन मिलेगी। FAQ: पेंशनरों के मन में उठने वाले सवाल प्रश्न 1: क्या डाकिया को घर बुलाने के लिए कोई फीस देनी होगी? उत्तर: बिल्कुल नहीं। यह सेवा पेंशनरों के लिए पूरी तरह मुफ्त (Free of Cost) है। इसका भुगतान ईपीएफओ करेगा। प्रश्न 2: अगर मेरा चेहरा स्कैन नहीं हुआ तो क्या होगा? उत्तर: घबराएं नहीं। डाकिया के पास बायोमेट्रिक डिवाइस (फिंगरप्रिंट स्कैनर) भी होता है। उससे कोशिश की जाएगी। प्रश्न 3: मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा सर्टिफिकेट जमा हो गया? उत्तर: प्रक्रिया पूरी होते ही आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक SMS आएगा। इसके अलावा आप Jeevan Pramaan पोर्टल पर जाकर अपनी Pramaan ID से स्टेटस चेक कर सकते हैं। प्रश्न 4: यह सेवा किन पेंशनरों के लिए है? उत्तर: यह सेवा मुख्य रूप से ईपीएफओ (EPS-95) के पेंशनरों के लिए है। हालांकि, केंद्र सरकार के अन्य पेंशनर भी आईपीपीबी की डोरस्टेप बैंकिंग का लाभ उठा सकते हैं (लेकिन उनके लिए शर्तें अलग हो सकती हैं)। प्रश्न 5: क्या मुझे बैंक पासबुक दिखानी होगी? उत्तर: नहीं, आपको मुख्य रूप से आधार नंबर और पीपीओ (PPO) नंबर की जरूरत होगी। मोबाइल फोन पास रखें ताकि OTP मिल सके। मार्च 2026 तक सभी लंबित मामलों को निपटाने का लक्ष्य रखकर ईपीएफओ ने यह साफ कर दिया है कि वह 'मिशन मोड' में काम कर रहा है। 'फ्री डोरस्टेप डीएलसी' सेवा डिजिटल इंडिया की ताकत और भारतीय डाक की पहुंच का एक बेहतरीन संगम है। अगर आपके घर में कोई बुजुर्ग है, तो आज ही उनके फोन में PostInfo App डाउनलोड करें और उन्हें बैंक की लाइनों से मुक्ति दिलाएं। यह सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि बुजुर्गों के प्रति सम्मान है।
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।