उत्तर प्रदेश

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मेरठ: बसंत पंचमी की खुशियां मातम में बदलीं; दोस्तों के सामने मां ने पतंग उड़ाने से रोका, तो 9वीं के छात्र ने लगा ली फांसी

कहते हैं कि बच्चों का मन कांच की तरह नाजुक होता है, जरा सी ठेस लगे तो बिखर जाता है। लेकिन कभी-कभी यह बिखराव इतना भयानक होता है कि पूरा परिवार हमेशा के लिए टूट जाता है। उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी ही खबर सामने आई है, जिसने हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहाँ एक मां का अपने बेटे को पढ़ाई के लिए टोकना और दोस्तों के सामने डांटना इतना भारी पड़ गया कि 14 साल के बेटे ने अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर ली।Read also:-UGC के 'नए कानून' से सुलग उठा उत्तर भारत: सवर्णों ने भाजपाइयों के लिए टांगे 'नो एंट्री' के बोर्ड, करणी सेना ने फूंका आंदोलन का बिगुल   आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगे, दोस्तों का शोर और बसंत का उल्लास—सब कुछ एक पल में सन्नाटे में बदल गया। शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि आज की पीढ़ी के घटते धैर्य और बढ़ते गुस्से का एक खौफनाक उदाहरण है।   आइये, इस पूरे मामले की गहराई में जाते हैं और समझते हैं कि आखिर उस डेढ़ घंटे में ऐसा क्या हुआ जिसने हंसते-खेलते अनंत को मौत के गले लगाने पर मजबूर कर दिया।   घटनाक्रम: वह काली दोपहर यह घटना मेरठ के नौचंदी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पॉश इलाके शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की है। तारीख थी 26 जनवरी, यानी गणतंत्र दिवस। पूरा देश जश्न में डूबा था और बसंत पंचमी के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पतंगबाजी का जोर था।   अनंत चौहान (14 वर्ष), जो विद्या मंदिर स्कूल में कक्षा 9 का होनहार छात्र था, पिछले तीन दिनों से लगातार पतंगबाजी का लुत्फ उठा रहा था। उसके पिता, विनय चौहान, जो पेशे से ड्राइवर हैं, अपनी मेहनत से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार की तरह उनकी भी अपने बेटे से यही उम्मीद थी कि वह पढ़-लिखकर कुछ बड़ा करे।   समय: सुबह 11:00 बजे अनंत अपने घर की छत पर दोस्तों के साथ मौजूद था। पिछले दो दिनों से बारिश और मौसम खराब होने के बावजूद उसका पतंग उड़ाने का जुनून कम नहीं हुआ था। 26 जनवरी की छुट्टी होने के कारण वह सुबह ही छत पर चढ़ गया था। इसी दौरान उसकी मां छत पर पहुंची। बेटे को लगातार तीसरे दिन पढ़ाई छोड़कर पतंग उड़ाते देख उनका सब्र जवाब दे गया।   मां ने स्वाभाविक गुस्से में, जैसा कि हर भारतीय घर में होता है, अनंत को डांट दिया। लेकिन यहाँ एक गलती हो गई—डांट अकेले में नहीं, बल्कि उसके दोस्तों के सामने पड़ी। मां ने कहा, "अब पतंग नहीं उड़ाओ, जाकर पढ़ाई करो। पिछले 3 दिन से तो पतंग ही उड़ा रहे हो।"   समय: दोपहर 11:15 बजे से 12:30 बजे के बीच मां की यह बात अनंत के दिल पर तीर की तरह लगी। दोस्तों के सामने अपमानित महसूस कर वह गुस्से में तमतमाता हुआ छत से नीचे आया और सीधे मकान की दूसरी मंजिल पर बने अपने कमरे में चला गया। उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।   नीचे घर में किसी को अंदाजा नहीं था कि ऊपर कमरे में अनंत क्या सोच रहा है। मां को लगा कि बेटा गुस्से में है, थोड़ी देर में शांत हो जाएगा और पढ़ने लगेगा। पिता अपने काम में व्यस्त थे या घर के अन्य सदस्यों को लगा कि यह सामान्य 'टीनेज टेंट्रम' (किशोरावस्था का नखरा) है। लेकिन कमरे के अंदर अनंत जिंदगी और मौत का फैसला ले रहा था।   समय: दोपहर 12:30 बजे करीब डेढ़ घंटे बीत चुके थे। छत पर अनंत के दोस्त अभी भी पतंग उड़ा रहे थे। जब अनंत काफी देर तक वापस नहीं आया, तो उसके दोस्तों को चिंता हुई। वे पतंग समेटकर नीचे उतरे और अनंत को खोजते हुए उसके कमरे की तरफ गए।   दरवाजा या तो खुला था या दोस्तों ने खिड़की से झांका—दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अनंत का शरीर दुपट्टे के सहारे पंखे/हुक से लटका हुआ था।   चीख-पुकार और अस्पताल की दौड़ दोस्तों की चीख ने पूरे घर को हिला दिया। उनकी आवाज सुनकर अनंत के माता-पिता और अन्य परिजन बदहवास होकर दौड़ते हुए दूसरी मंजिल पर पहुंचे। सामने का मंजर देखकर मां वहीं बेसुध होने लगीं। जिस बेटे को अभी डेढ़ घंटे पहले पढ़ाई के लिए डांटा था, वह अब शांत हो चुका था।   आनन-फानन में पड़ोसियों की मदद से अनंत को फंदे से नीचे उतारा गया। उम्मीद की एक धुंधली किरण बाकी थी कि शायद सांसें चल रही हों। परिजन उसे लेकर तुरंत पास के लोकप्रिय अस्पताल भागे।   अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में डॉक्टरों ने अनंत की जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एक 14 साल का बच्चा, जो सुबह तक आसमान में पेंच लड़ा रहा था, अब दुनिया छोड़ चुका था।   पुलिस कार्यवाही और परिवार का इनकार घटना की सूचना मिलते ही नौचंदी थाने की पुलिस मौके पर और अस्पताल पहुंची। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत शव का पंचनामा भरने और पोस्टमार्टम कराने की बात कही। यह एक मानक प्रक्रिया है ताकि मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सके।   हालांकि, अनंत के परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि यह एक दुर्घटना है और वे अपने बेटे के शरीर की चीर-फाड़ नहीं चाहते। वे पहले से ही गहरे सदमे में थे और कानूनी पचड़ों में नहीं पड़ना चाहते थे।   चूंकि मामला आत्महत्या का था और परिवार की तरफ से कोई संदिग्ध परिस्थिति या किसी के खिलाफ शिकायत नहीं जताई गई, पुलिस ने परिजनों की भावनाओं और कानूनी प्रावधानों का सम्मान करते हुए शव को बिना पोस्टमार्टम के उन्हें सौंप दिया।   "दोस्तों के सामने बेइज्जती": एक जानलेवा ट्रिगर इस पूरी घटना में जो सबसे महत्वपूर्ण पहलू उभरकर आया है, वह है—"दोस्तों के सामने डांटना"।   मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, 13 से 18 वर्ष की उम्र (किशोरावस्था) में बच्चों के लिए उनका 'पीयर ग्रुप' (दोस्तों का समूह) सबसे ज्यादा अहम होता है। इस उम्र में बच्चों के अंदर 'Self-Identity' (आत्म-पहचान) बन रही होती है। उनके लिए दोस्तों के बीच उनकी छवि, उनके माता-पिता की राय से भी ज्यादा मायने रखती है।   अहंकार (Ego) की चोट: जब मां ने दोस्तों के सामने अनंत को डांटा, तो उसे अपनी 'इमेज' खराब होती महसूस हुई। उसे लगा कि अब दोस्त उसका मजाक उड़ाएंगे। आवेग (Impulse): किशोरावस्था में दिमाग का 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (जो निर्णय लेने और भावनाओं को नियंत्रित करने का काम करता है) पूरी तरह विकसित नहीं होता। यही कारण है कि किशोर गुस्से में बिना परिणाम सोचे घातक कदम उठा लेते हैं। अनंत के साथ भी यही हुआ। वह गुस्सा बर्दाश्त नहीं कर पाया।   क्या सिर्फ एक डांट वजह थी? सतही तौर पर देखने पर लगता है कि मां की डांट की वजह से बच्चे ने जान दे दी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदम के पीछे कई परतें होती हैं:   एग्जाम का दबाव: जनवरी का अंत और फरवरी की शुरुआत बच्चों के लिए तनावपूर्ण होती है क्योंकि फाइनल एग्जाम (Final Exams) सिर पर होते हैं। हो सकता है अनंत के मन में पढ़ाई को लेकर पहले से ही तनाव हो, और मां की डांट ने उस तनाव को 'ट्रिगर' कर दिया हो। संवाद की कमी: क्या अनंत अपनी बातें अपने माता-पिता से शेयर करता था? अक्सर जब बच्चों और पेरेंट्स के बीच 'दोस्ताना संवाद' की कमी होती है, तो बच्चे अपनी हताशा जाहिर नहीं कर पाते और उसे अंदर ही अंदर घोंटते रहते हैं। सहनशीलता की कमी (Low Tolerance): आज की पीढ़ी में 'ना' सुनने की आदत या अपमान सहने की शक्ति कम होती जा रही है। डिजिटल युग में 'इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन' (तुरंत संतुष्टि) की आदत ने धैर्य को कम कर दिया है।   अभिभावकों के लिए वेक-अप कॉल: क्या करें, क्या न करें?  मेरठ की यह घटना हर उस माता-पिता के लिए एक चेतावनी है जिनके घर में बढ़ते बच्चे (Teenagers) हैं। परवरिश अब सिर्फ खाना खिलाने और स्कूल भेजने तक सीमित नहीं है, यह एक मनोवैज्ञानिक जिम्मेदारी बन गई है।   विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई 5 महत्वपूर्ण बातें: सार्वजनिक रूप से न डांटें (No Public Shaming): सबसे महत्वपूर्ण नियम—अपने बच्चे को कभी भी उसके दोस्तों, रिश्तेदारों या पड़ोसियों के सामने न डांटें। अगर आपको उसकी गलती बतानी है, तो उसे अकेले में ले जाकर समझाएं। सार्वजनिक डांट बच्चे के आत्म-सम्मान को कुचल देती है। गुस्से को पहचानें: अगर आपका बच्चा डांटने पर बहुत ज्यादा आक्रामक हो रहा है या बिल्कुल चुप हो गया है, तो इसे नजरअंदाज न करें। अनंत कमरे में गया और डेढ़ घंटे तक बाहर नहीं आया। अगर उसी समय मां या पिता जाकर उससे बात कर लेते, उसके सिर पर हाथ फेर देते, तो शायद यह घटना नहीं होती। तुलना न करें: "शर्मा जी के बेटे को देखो", "तुम्हारे दोस्त कितना पढ़ रहे हैं"—ऐसी तुलना बच्चों को डिप्रेशन में डाल देती है। हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। हॉबीज का सम्मान करें: अनंत को पतंग उड़ाना पसंद था। पढ़ाई जरूरी है, लेकिन अगर साल में एक-दो दिन त्योहार पर बच्चा खेल रहा है, तो उसे थोड़ी छूट दी जा सकती है। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाने में उसकी मदद करें, उसे रोके नहीं। कम्युनिकेशन गैप खत्म करें: अपने बच्चों से रोज कम से कम 20 मिनट बिना किसी उपदेश के बात करें। उनकी सुनें, अपनी सुनाएं। ताकि जब वे मुसीबत में हों, तो कमरे का दरवाजा बंद करने के बजाय आपके पास आएं।   पड़ोस और स्कूल में पसरा मातम शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की उस गली में अब सन्नाटा है जहाँ कल तक शोर था। अनंत के दोस्तों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार यही कह रहे हैं, "अगर हमें पता होता कि वो ऐसा कर लेगा, तो हम उसे डांट पड़ने ही नहीं देते, या हम उसे अकेला नहीं छोड़ते।"   विद्या मंदिर स्कूल में, जहाँ अनंत पढ़ता था, वहां भी शोक की लहर है। शिक्षकों और सहपाठियों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि उनकी क्लास का एक छात्र अब कभी वापस नहीं आएगा। स्कूल प्रशासन भी अब विचार कर रहा है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' पर काउंसलिंग सेशन आयोजित किए जाएं।   सामाजिक परिदृश्य: पतंगबाजी का जुनून और जोखिम पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मेरठ, हापुड़ और मुजफ्फरनगर में बसंत पंचमी और स्वतंत्रता/गणतंत्र दिवस पर पतंगबाजी का एक अलग ही जुनून होता है। यह संस्कृति का हिस्सा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह जुनून जानलेवा होता जा रहा है।   कभी चाइनीज मांझे से राहगीरों की गर्दन कटने की खबरें आती हैं। कभी छत से गिरकर बच्चों की मौत होती है। और अब, पतंग उड़ाने से रोकने पर आत्महत्या जैसा कदम। यह दर्शाता है कि मनोरंजन का एक साधन कैसे जीवन और मरण का प्रश्न बन गया है। समाज को भी यह सोचना होगा कि त्योहारों को उत्सव की तरह कैसे मनाया जाए, न कि उन्माद की तरह।   एक अधूरा सपना अनंत के पिता विनय चौहान एक ड्राइवर हैं। उन्होंने अपने बेटे के लिए न जाने कितने सपने देखे होंगे। वे शायद धूप और बारिश में गाड़ी चलाते वक्त यही सोचते होंगे कि मेरा बेटा पढ़-लिखकर अफ़सर बनेगा, एसी कमरे में बैठेगा। लेकिन एक क्षण के आवेग ने उन सपनों की डोरी हमेशा के लिए काट दी।   यह घटना हमें सिखाती है कि जिंदगी किसी भी परीक्षा, किसी भी पतंग और किसी भी डांट से कहीं ज्यादा कीमती है।   हमें अपने बच्चों को यह सिखाना होगा कि "विफलता" या "डांट" जीवन का अंत नहीं है। और हमें खुद को यह सिखाना होगा कि बच्चों को पालना, कांच के बर्तन को संभालने जैसा है—बहुत सावधानी, बहुत प्यार और बहुत समझदारी की जरूरत है।   अनंत तो चला गया, लेकिन अनंत सवाल छोड़ गया है। उम्मीद है कि मेरठ की इस घटना से हम सब सबक लेंगे ताकि किसी और घर का चिराग इस तरह न बुझे।   संक्षिप्त सारणी (Quick Summary) विवरण जानकारी मृतक का नाम अनंत चौहान उम्र/कक्षा 14 वर्ष, कक्षा 9 पिता का नाम विनय चौहान (पेशा: ड्राइवर) घटना स्थल शास्त्रीनगर सेक्टर-3, मेरठ घटना की तारीख 26 जनवरी (सोमवार) वजह मां द्वारा दोस्तों के सामने डांटना मृत्यु का कारण फांसी (आत्महत्या) पुलिस थाना नौचंदी थाना   (नोट: यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया अकेले न रहें। अपने परिवार से बात करें या हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। जीवन अमूल्य है।)

Unknown जनवरी 26, 2026 0
A nationwide conflict has erupted over the UGCs new regulations
UGC के 'नए कानून' से सुलग उठा उत्तर भारत: सवर्णों ने भाजपाइयों के लिए टांगे 'नो एंट्री' के बोर्ड, करणी सेना ने फूंका आंदोलन का बिगुल

नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए 'इक्विटी रेगुलेशन 2026' (Equity Regulation 2026) को लेकर देशभर में सवर्ण समाज का गुस्सा फूट पड़ा है। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और राजस्थान तक, इस नए कानून का जमकर विरोध हो रहा है। सवर्ण समाज के छात्र और संगठन इसे समाज को बांटने वाला और सवर्ण विरोधी बताकर सड़कों पर उतर आए हैं। करणी सेना (Karni Sena) ने इस मुद्दे पर देशभर में आंदोलन करने और दिल्ली कूच कर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की चेतावनी दी है।READ ALSO:-बिजनौर की 'लौह महिला' का दिल्ली में डंका: राष्ट्रपति मुर्मू ने डीएम जसजीत कौर को सौंपा राष्ट्रीय पुरस्कार, त्रुटिरहित मतदाता सूची के लिए देश भर में मिली सराहना   यह विरोध प्रदर्शन भाजपा के लिए भी मुसीबत बनता जा रहा है, कई जगहों पर भाजपा नेताओं का बहिष्कार शुरू हो गया है।   यूपी में भाजपा नेताओं का बहिष्कार, पोस्टर वॉर शुरू उत्तर प्रदेश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। मेरठ और हापुड़ में छात्र पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। हापुड़ के सिंभावली क्षेत्र के बक्सर में दर्जनों घरों के बाहर पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर साफ लिखा है कि "भाजपा नेता वोट मांगने ना आएं" और "यह सवर्ण समाज का घर है"। पोस्टरों पर 'सवर्ण अगेंस्ट बीजेपी' (Savarn Against BJP) के नारे भी लिखे गए हैं।   विरोध की आग अमेठी तक पहुंच गई है, जहां भाजपा के एक बूथ अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया है। अमेठी के भेंटुआ ब्लॉक के कोरारी हीरशाह के बूथ संख्या 7 के अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने व्हाट्सएप के जरिए अपना इस्तीफा भेजते हुए कहा कि यूजीसी का नया कानून "समाज विभाजन का कानून" है और यह उनके "वैचारिक, सामाजिक और नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ" है।   करणी सेना की दिल्ली कूच की चेतावनी राजस्थान के अलवर में करणी सेना ने यूजीसी के नए कानून का कड़ा विरोध किया है। करणी सेना ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार यह बिल लाकर "समाज में खाई खोदने का काम" कर रही है। उन्होंने कहा कि इस बिल का सीधा असर सवर्ण जाति की आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। करणी सेना ने ऐलान किया है कि इस बिल के विरोध में पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा और वे दिल्ली कूच कर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे।   यति नरसिंहानंद गिरि नजरबंद इस बीच, गाजियाबाद के डासना पीठ के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि को पुलिस ने नजरबंद कर दिया है। वह यूजीसी के नए कानून के विरोध में दिल्ली जाकर अनशन करने वाले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गाजियाबाद में ही रोक लिया। नरसिंहानंद गिरि ने योगी सरकार पर सवर्ण समाज की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बिल "पूरी तरह से सवर्ण विरोधी" है।   बिहार में भी सुलग रही विरोध की आग बिहार में भी इस कानून का विरोध हो रहा है। मधुबनी सहित कई जिलों में सवर्ण समाज के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। वैशाली के हाजीपुर में एक कार्यक्रम के दौरान जब केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय से पत्रकारों ने यूजीसी मुद्दे पर सवाल किया, तो वे बचते नजर आए और 'हर हर महादेव' का उद्घोष करते हुए आगे बढ़ गए।   आखिर क्या है यूजीसी का नया कानून, जिस पर मचा है बवाल? विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में 'यूजीसी एक्ट 2026 इक्विटी रेगुलेशन' लागू किया है, जिसे सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया गया है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना है।   समान अवसर प्रकोष्ठ: नए नियमों के तहत, सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में अब अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 'समान अवसर प्रकोष्ठ' (Equal Opportunity Cell) बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पहले यह प्रावधान केवल एससी और एसटी के लिए था। विवाद का कारण: सबसे ज्यादा बवाल इस बात पर है कि नए नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी 'जातिगत भेदभाव' की श्रेणी में शामिल किया गया है। जनरल कैटेगरी (सवर्ण समाज) के छात्रों का तर्क है कि ओबीसी को पहले से ही आरक्षण जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, ऐसे में उन्हें इस नई श्रेणी में शामिल करने का क्या औचित्य है। उनका मानना है कि यह कानून सवर्ण छात्रों के हितों के खिलाफ है और समाज में भेदभाव को और बढ़ाएगा।   यूजीसी का नया 'इक्विटी रेगुलेशन' एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले चुका है। सवर्ण समाज का यह आंदोलन केंद्र सरकार के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरा है, खासकर तब जब कई राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। देखना होगा कि सरकार इस विरोध से कैसे निपटती है और क्या वह इस कानून में कोई संशोधन करने पर विचार करती है या नहीं।   यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए 'इक्विटी रेगुलेशन 2026' का सवर्ण समाज देशभर में विरोध कर रहा है। यूपी, बिहार और राजस्थान में प्रदर्शन हो रहे हैं। करणी सेना ने दिल्ली में आंदोलन की चेतावनी दी है। इस नए कानून के तहत विश्वविद्यालयों में अब एससी/एसटी के साथ-साथ ओबीसी के लिए भी 'समान अवसर प्रकोष्ठ' बनाना अनिवार्य है, जिसका सवर्ण छात्र विरोध कर रहे हैं।

Unknown जनवरी 26, 2026 0
father arrested for killing relationships and raping his daughter
रिश्तों का कत्ल: जिसे समझा था रक्षक, वही निकला भक्षक; लखनऊ में 8वीं की छात्रा से पिता ने मिटाई हवस, भाभी की सतर्कता से खुला राज

बिजनौर: राजधानी लखनऊ के बिजनौर थाना क्षेत्र (Bijnor Thana Area) में रिश्तों को तार-तार कर देने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक पिता ने ही अपनी नाबालिग बेटी की अस्मत लूट ली। रक्षक ही जब भक्षक बन जाए, तो समाज का सिर शर्म से झुक जाता है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी कलयुगी पिता (Kalyugi Pita) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।READ ALSO:-'अंगूठा लगाने' का झंझट होगा खत्म: आधार में होने जा रहा है अब तक का सबसे बड़ा 'Tech-Upgrade', जानें क्या है सरकार का 'विजन 2032'   यह घटना समाज में गिरते नैतिक मूल्यों और महिलाओं, विशेषकर बच्चियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।   क्या है पूरा मामला? (Bijnor Rape Case Details) एसीपी कृष्णा नगर (ACP Krishna Nagar) रजनीश वर्मा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि घटना बिजनौर थाना क्षेत्र की है। आरोपी पिता पेशे से सब्जी विक्रेता है। पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी की पत्नी (पीड़िता की मां) की करीब 13 वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। घर में मां की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर पिता अपनी ही सगी बेटी पर बुरी नजर रखने लगा।   पीड़िता 14 वर्ष की है और कक्षा 8 की छात्रा है। आरोप है कि पिता पिछले काफी दिनों से अपनी नाबालिग बेटी के साथ जबरन दुष्कर्म (Rape) कर रहा था। लोक-लाज और पिता के डर से बच्ची काफी समय तक चुप रही, लेकिन जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो उसने अपनी चुप्पी तोड़ी। चचेरी भाभी ने दर्ज कराई रिपोर्ट   बच्ची ने हिम्मत जुटाकर अपनी आपबीती अपनी चचेरी भाभी (Cousin Sister-in-law) को बताई। मासूम की दर्दनाक दास्तां सुनकर भाभी के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने बिना देरी किए पुलिस का दरवाजा खटखटाया।   बीती 23 जनवरी को पीड़िता की चचेरी भाभी ने बिजनौर थाने में आरोपी चचिया ससुर के खिलाफ नामजद तहरीर दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और दुष्कर्म की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया और आरोपी की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने बिछाया जाल, चढ़ा हत्थे   एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही पुलिस आरोपी की सरगर्मी से तलाश कर रही थी। मुखबिरों का जाल बिछा दिया गया था।   शनिवार रात पुलिस को मुखबिर से एक सटीक सूचना मिली। पता चला कि आरोपी बिजनौर थाना क्षेत्र के सरवन नगर (Sarvan Nagar) स्थित गोलू होटल और इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के बीच शंभू नगर रोड के पास मौजूद है और कहीं भागने की फिराक में है।   सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घेराबंदी कर आरोपी को धर दबोचा। पुलिस की मुस्तैदी के चलते आरोपी शहर छोड़कर भागने में नाकाम रहा। नशे में हैवानियत की कबूली बात   गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जब आरोपी से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बताया कि वह नशे का आदी है और नशे की हालत में ही उसने अपनी बेटी के साथ कई बार इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए आरोपी को जेल भेज दिया है। समाज के लिए चिंता का विषय   यह घटना न केवल एक अपराध है, बल्कि एक सामाजिक त्रासदी भी है। जब घर के भीतर ही बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, तो बाहरी सुरक्षा के दावों पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय (Fast Track Court) और कड़ी सजा ही समाज में एक नजीर पेश कर सकती है।   बिजनौर पुलिस (Bijnor Police) की तत्परता से आरोपी पिता सलाखों के पीछे पहुंच गया है, लेकिन 14 साल की मासूम के मन पर जो घाव लगे हैं, उन्हें भरने में शायद पूरा जीवन लग जाए। Lucknow Bijnor Rape Case ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराध और अपराधी की कोई सीमा नहीं होती, यहाँ तक कि खून के रिश्ते भी सुरक्षित नहीं हैं। पुलिस ने आरोपी को जेल भेजकर अपना काम कर दिया है, अब निगाहें न्यायपालिका पर टिकी हैं कि इस 'कलयुगी पिता' को कितनी सख्त सजा मिलती है।   सारांश: लखनऊ के बिजनौर थाना क्षेत्र में एक सब्जी विक्रेता पिता ने अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म किया। चचेरी भाभी की शिकायत पर पुलिस ने 23 जनवरी को केस दर्ज किया था। शनिवार रात पुलिस ने सरवन नगर के पास से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने नशे में घटना को अंजाम देने की बात कबूली है। उसे जेल भेज दिया गया है।

Unknown जनवरी 26, 2026 0
Bijnor DM Jasjeet Kaur receives national award
बिजनौर की 'लौह महिला' का दिल्ली में डंका: राष्ट्रपति मुर्मू ने डीएम जसजीत कौर को सौंपा राष्ट्रीय पुरस्कार, त्रुटिरहित मतदाता सूची के लिए देश भर में मिली सराहना

नई दिल्ली/बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लिए 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस (16th National Voters' Day) गर्व का क्षण लेकर आया। नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने बिजनौर की जिलाधिकारी (DM) और जिला निर्वाचन अधिकारी जसजीत कौर को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्हें यह सम्मान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Summary Revision) कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण (Training and Capacity Building) में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रदान किया गया।READ ALSO:-Meerut: 'लव जिहाद' अब पुराना हुआ, यूपी में अब 'जिम जिहाद' का नया पैंतरा: बबीता चौहान ने कोबरा और सपोले का जिक्र कर दी बड़ी चेतावनी   इस उपलब्धि ने न केवल बिजनौर प्रशासन का मान बढ़ाया है, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता के नए मानक भी स्थापित किए हैं।   नई दिल्ली में भव्य सम्मान समारोह भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा आयोजित 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि थीं। इस वर्ष का विषय (Theme) पिछले वर्षों की तरह मतदाताओं को सशक्त और जागरूक बनाना था। इसी मंच पर देश भर के चुनिंदा अधिकारियों को उनकी 'बेस्ट इलेक्टोरल प्रैक्टिसेज' (Best Electoral Practices) के लिए सम्मानित किया गया, जिनमें बिजनौर की डीएम जसजीत कौर का नाम प्रमुखता से शामिल रहा।   प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में पेश की मिसाल जिलाधिकारी जसजीत कौर को यह पुरस्कार विशेष रूप से 'प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण' (Training and Capacity Building) श्रेणी में दिया गया है। निर्वाचन आयोग का मानना है कि एक त्रुटिरहित मतदाता सूची (Error-free Electoral Roll) निष्पक्ष चुनाव की नींव होती है।   डीएम जसजीत कौर ने इस सम्मान के बाद बताया कि जिला प्रशासन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को त्रुटिरहित ढंग से लागू करने के लिए एक बहुस्तरीय रणनीति अपनाई थी। उन्होंने कहा, "हमने एक मजबूत प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण ढांचा तैयार किया था, जिसमें केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दक्षता सुनिश्चित की गई।"   इस प्रक्रिया की सफलता का मुख्य श्रेय उन्होंने 'अंतर-विभागीय समन्वय' (Inter-departmental coordination) और टीम वर्क को दिया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि शिक्षा, राजस्व और अन्य संबंधित विभाग एक साथ मिलकर काम करें ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए।   बीएलओ (BLO) को बनाया तकनीक-सक्षम मतदाता सूची पुनरीक्षण की रीढ़ बूथ लेवल अधिकारी (BLO) होते हैं। डीएम जसजीत कौर ने जानकारी दी कि बिजनौर में बीएलओ और पर्यवेक्षकों (Supervisors) को पूरी दक्षता के साथ प्रशिक्षित किया गया।   शंका समाधान: प्रशिक्षण सत्रों के दौरान बीएलओ की समस्याओं और शंकाओं का मौके पर ही समाधान किया गया, जिससे फील्ड में कार्य करते समय उन्हें किसी बाधा का सामना न करना पड़े। तकनीकी दक्षता: गरुड़ ऐप (Garuda App) और अन्य डिजिटल टूल्स के उपयोग में उन्हें पारंगत बनाया गया। पारदर्शिता: डीएम ने बताया कि मानव क्षमता में इस केंद्रित निवेश के परिणामस्वरूप 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के कार्य में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित हुई।   राजनीतिक दलों के साथ निरंतर संवाद लोकतंत्र में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। डीएम जसजीत कौर ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के कार्य को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए राजनीतिक दलों के साथ लगातार संपर्क और बैठकों का आयोजन किया गया।   नियमित अंतरालों पर हुई इन बैठकों में राजनीतिक प्रतिनिधियों को मतदाता सूची में जोड़े गए और हटाए गए नामों की जानकारी दी गई, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सभी का विश्वास बना रहा। प्रशासन की इस पहल से आपत्तियों का त्वरित निस्तारण संभव हो सका।   बिजनौर के लिए गर्व का विषय जसजीत कौर, जो 2012 बैच की आईएएस अधिकारी हैं, ने जनवरी 2025 में बिजनौर के डीएम का कार्यभार संभाला था। कार्यभार संभालने के बाद से ही उन्होंने प्रशासनिक दक्षता और जनहित के कार्यों में तेजी दिखाई है। राष्ट्रपति के हाथों मिला यह सम्मान उनकी प्रशासनिक पकड़ और निर्वाचन कार्यों के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाता है।   राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा बिजनौर डीएम जसजीत कौर को सम्मानित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासन योजनाबद्ध तरीके से और टीम भावना के साथ काम करता है, तो उसके परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर सराहे जाते हैं। Bijnor DM Jasjeet Kaur का यह सम्मान अन्य जिलों के निर्वाचन अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर मिला यह पुरस्कार इस संकल्प को और मजबूत करता है कि "कोई भी मतदाता न छूटे" (No Voter to be Left Behind)।   सारांश: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर नई दिल्ली में बिजनौर की डीएम जसजीत कौर को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण में बीएलओ के बेहतरीन प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए दिया गया। डीएम ने इसे टीम वर्क और सटीक कार्ययोजना का परिणाम बताया है।

Unknown जनवरी 26, 2026 0
Regarding the Mirzapur incident, Babita Chauhan described it as gym jihad
Meerut: 'लव जिहाद' अब पुराना हुआ, यूपी में अब 'जिम जिहाद' का नया पैंतरा: बबीता चौहान ने कोबरा और सपोले का जिक्र कर दी बड़ी चेतावनी

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने मिर्जापुर की हालिया घटना को लेकर एक बेहद गंभीर और बड़ा बयान दिया है। रविवार को मिर्जापुर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अब लव जिहाद का स्वरूप बदल गया है। मिर्जापुर में जो हुआ, वह केवल लव जिहाद नहीं है, बल्कि अगर इसे 'जिम जिहाद' (Gym Jihad) कहा जाए, तो यह कतई गलत नहीं होगा।READ ALSO:-आगरा का 'संजय प्लेस हॉरर': ऑफिस के सन्नाटे में प्यार का खूनी अंत, प्रेमी ने प्रेमिका के सिर-पैर काटे, यमुना पुल पर खुले बोरे ने उगला मौत का सच   बबीता चौहान का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने न केवल जिम संचालकों और ट्रेनरों की मंशा पर सवाल उठाए, बल्कि बुर्के की आड़ में होने वाली गतिविधियों और अभिभावकों की जिम्मेदारी पर भी खुलकर बात की।   इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर बबीता चौहान ने जिम जिहाद को लेकर क्या तर्क दिए, मिर्जापुर का वह कौन सा मामला है जिसने इस बहस को जन्म दिया, और महिला सुरक्षा को लेकर आयोग अब क्या कदम उठाने जा रहा है।   क्या है 'जिम जिहाद' (Gym Jihad)? बबीता चौहान का तर्क बबीता चौहान ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि धर्म विशेष के युवकों द्वारा नाम बदलकर या अपनी पहचान छिपाकर हिंदू युवतियों को प्रेम जाल में फंसाना अब पुराने तरीके (लव जिहाद) से आगे बढ़कर 'संस्थानिक जिहाद' का रूप ले रहा है। उन्होंने विशेष रूप से जिम (Gym) का उल्लेख करते हुए इसे जिम जिहाद की संज्ञा दी।   उन्होंने कहा, "मिर्जापुर की घटना अब केवल लव जिहाद नहीं रही है। अगर इसे जिम जिहाद कहा जाए तो कतई गलत नहीं होगा। जिम में अब जितना जिहाद चल रहा है, उतना कहीं और नहीं चल रहा।"   उनके अनुसार, जिम एक ऐसी जगह है जहाँ युवा लड़कियां अपनी फिटनेस और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जाती हैं। वहां वे अपने ट्रेनर पर भरोसा करती हैं। इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ ट्रेनर, जिनकी मानसिकता दूषित है, उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं। बबीता चौहान ने कहा कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र जैसा प्रतीत होता है, जहाँ शारीरिक प्रशिक्षण की आड़ में मानसिक ब्रेनवॉश किया जा रहा है।   मिर्जापुर कांड और रमीज का कनेक्शन बबीता चौहान का यह बयान मिर्जापुर में हुई एक विशिष्ट घटना के संदर्भ में आया है। दरअसल, मिर्जापुर में एक जिम ट्रेनर रमीज (Rameez) पर आरोप है कि उसने एक युवती को अपने प्रेम जाल में फंसाया। आरोप है कि जिम ट्रेनिंग के दौरान नजदीकी बढ़ाई गई और बाद में युवती का शोषण किया गया।   बबीता चौहान ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि "लव जिहाद को बढ़ावा देने वाला वह शख्स कोबरा सांप था। यह जो जिम जिहाद में शामिल रमीज जैसे लोग हैं, यह उसी के पैदा किए गए सपोले हैं।"   उन्होंने प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार सख्त है। जिम जिहाद के मामले सामने आने के बाद कई लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं और जो बचे हैं, उन्हें भी जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।   महिला ट्रेनर की अनिवार्यता पर जोर एक साल पहले उत्तर प्रदेश महिला आयोग ने एक प्रस्ताव रखा था कि महिलाओं के जिम और योग केंद्रों में महिला ट्रेनर का होना अनिवार्य किया जाए। अपने इस पुराने बयान को याद करते हुए बबीता चौहान ने कहा, "मुझे अपनी एक साल पुरानी वह बात याद आ रही है जिसमें मैंने जिम में महिला ट्रेनरों को शामिल किए जाने और बड़े ब्यूटी पार्लर व बुटीक में महिलाओं को अवश्य स्थान दिए जाने पर जोर दिया था।"   उनका मानना है कि: सुरक्षा: अगर महिला जिम में महिला ट्रेनर होंगी, तो 'बैड टच' या गलत नीयत से छूने की घटनाओं पर लगाम लगेगी। रोजगार: इससे महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा। बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। विश्वास: परिवार वाले अपनी बेटियों को जिम भेजने में सुरक्षित महसूस करेंगे।   आयोग का मानना है कि जिम, बुटीक और टेलरिंग की दुकानों पर जहां माप लेने का काम होता है, वहां पुरुषों के बजाय महिलाओं की नियुक्ति से 'जिम जिहाद' जैसे अपराधों को काफी हद तक रोका जा सकता है।   "झांगुर बाबा" और जिहादी जाल पत्रकारों से वार्ता के दौरान बबीता चौहान ने एक स्थानीय संदर्भ या प्रतीकात्मक रूप में "झांगुर बाबा" का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सब उसी झांगुर का फैलाया हुआ जाल है। यह शब्दावली इस बात की ओर इशारा करती है कि वे इसे किसी एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह या मानसिकता (इकोसिस्टम) का हिस्सा मानती हैं।   उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "इनसे बचने के लिए हमें सजग रहना होगा। क्योंकि जिम, बुटीक व ब्यूटी पार्लर जैसे स्थान उनके निशाने पर हैं।"   बुर्के पर विवादास्पद और सीधा बयान बबीता चौहान ने बुर्के को लेकर भी अपनी बेबाक राय रखी। जब उनसे बुर्के को लेकर उनके पुराने बयानों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "आज बुर्के के पीछे क्या नहीं हो रहा, यह सब जानते हैं।"   उनके प्रमुख बिंदु इस प्रकार थे: पहचान छिपाना: उनका कहना है कि बुर्के की आड़ में कई बार अपराधी अपनी पहचान छिपा लेते हैं। सुरक्षा का प्रश्न: उन्होंने उदाहरण दिया कि कई ज्वेलर्स ने सुरक्षा कारणों से अपनी दुकानों में बुर्का पहनकर आने वाली महिलाओं को प्रतिबंधित कर दिया है, ताकि चोरी या डकैती की वारदातों को रोका जा सके। सुनवाई के दौरान: उन्होंने बताया कि जब वे आयोग में सुनवाई करती हैं, तब भी कई महिलाएं बुर्का पहनकर आती हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "सवाल यह है उनके सामने बुर्का पहन के आने की क्या जरूरत है?" 6 साल की बच्ची का उदाहरण: अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने एक दर्दनाक घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "6 साल की बच्ची के साथ बुर्के में मौजूद हैवान ने गलत हरकत की, यह घटना किसी से छिपी नहीं है।"   यह बयान स्पष्ट करता है कि महिला आयोग अध्यक्ष के अनुसार, परिधान की आड़ में सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और पहचान सुनिश्चित करना अनिवार्य है। अभिभावकों के लिए सलाह: "बच्चियों से संवाद बढ़ाएं"   बबीता चौहान ने इस समस्या का एक बड़ा कारण परिवारों में बढ़ती दूरियों को बताया। उन्होंने कहा कि जिम जिहाद या लव जिहाद जैसे मामलों में फंसने का एक कारण यह भी है कि युवतियां अपने माता-पिता से कटी हुई हैं।   उन्होंने अभिभावकों और महिलाओं को निम्नलिखित सलाह दी: बैकग्राउंड चेक: महिलाएं अपना दिमाग खोलकर किसी भी काम में शामिल हों। जिससे मिल रही हैं या जिससे दोस्ती कर रही हैं, उसकी पृष्ठभूमि (Background) जरूर देख लें। संवादहीनता खत्म करें: घरों के भीतर अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहने की जो प्रथा शुरू हो गई है, उसे खत्म करना होगा। माता-पिता को अपने बच्चों से बात करनी चाहिए ताकि वे बाहर की समस्याओं को घर पर साझा कर सकें। सुरक्षा ऑडिट: माता-पिता यह ध्यान रखें कि उनके बच्चे जिस जिम या सेंटर में जा रहे हैं, वह उनके लिए सुरक्षित है या नहीं।   आयोग का एक्शन प्लान: जागरूकता अभियान उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग केवल बयानों तक सीमित नहीं है। अध्यक्ष बबीता चौहान ने बताया कि आयोग ने ऐसे प्रकरणों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने एक विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की है।   जागरूकता: आयोग स्कूल, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जाकर महिला वर्ग को जागरूक करेगा। निगरानी: जिम और योगा सेंटर्स की निगरानी के लिए प्रशासन के साथ मिलकर काम किया जाएगा। पुलिस की भूमिका: उन्होंने कहा कि "जिहादियों के पीछे पुलिस पड़ चुकी है।" यूपी पुलिस मिशन शक्ति और अन्य अभियानों के तहत महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।   जिम जिहाद: एक सामाजिक चुनौती बबीता चौहान का "जिम जिहाद" शब्द का प्रयोग करना दर्शाता है कि प्रशासन अब अपराध के बदलते तरीकों को डिकोड कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जिम एक ऐसा स्थान है जहाँ शारीरिक आकर्षण और स्वास्थ्य चर्चा के बीच भावनात्मक संबंध बनाना आसान होता है। इसी मनोवैज्ञानिक पहलू का फायदा उठाकर कुछ अपराधी प्रवृति के लोग युवतियों का शोषण करते हैं।   आयोग का मानना है कि जब तक जिम संचालक पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराते और महिला ट्रेनर्स की नियुक्ति नहीं करते, तब तक यह खतरा बना रहेगा।   उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान का बयान यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार और आयोग महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है। मिर्जापुर की घटना को जिम जिहाद (Gym Jihad) का नाम देकर उन्होंने समाज को एक नए खतरे के प्रति आगाह किया है।   चाहे वह बुर्के के पीछे की संदिग्ध गतिविधियों का मुद्दा हो या जिम और ब्यूटी पार्लर में पुरुष कर्मचारियों द्वारा शोषण का, आयोग ने साफ कर दिया है कि अब "आंख मूंदकर भरोसा करने का जमाना नहीं है।" बबीता चौहान के अनुसार, पुलिस की सख्ती के साथ-साथ पारिवारिक जागरूकता ही इस 'जाल' को काट सकती है। आने वाले दिनों में यूपी में जिम और योग सेंटर्स के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश देखने को मिल सकते हैं।   यूपी महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने मिर्जापुर दौरे के दौरान कहा कि अब लव जिहाद का तरीका बदलकर 'जिम जिहाद' हो गया है। उन्होंने जिम ट्रेनर रमीज के मामले का हवाला देते हुए जिम और ब्यूटी पार्लर्स में महिला कर्मचारियों की अनिवार्यता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने बुर्के की आड़ में हो रहे अपराधों और अभिभावकों की सतर्कता पर भी बेबाक राय रखी।

Unknown जनवरी 26, 2026 0
Kacha Badam Fame Anjali Aroras Boyfriend Akash Sansanwal Arrested in Meerut for Using Fake MLA Pass
Meerut: 'कच्चा बादाम' गर्ल अंजलि अरोड़ा के मंगेतर आकाश संसनवाल गिरफ्तार; सांसद का फर्जी पास लगाकर दिखा रहे थे 'भौकाल', मेरठ पुलिस ने टोल प्लाजा पर दबोचा

मेरठ (Meerut): उत्तर प्रदेश पुलिस, विशेषकर मेरठ पुलिस ने वीआईपी कल्चर (VIP Culture) और नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में रविवार को मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर एक हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी हुई जिसने सोशल मीडिया जगत में हलचल मचा दी है। मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और 'कच्चा बादाम' (Kacha Badam) गाने पर रील्स बनाकर रातों-रात स्टार बनीं अंजलि अरोड़ा (Anjali Arora) के मंगेतर (बॉयफ्रेंड) आकाश संसनवाल (Akash Sansanwal) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।READ ALSO:-UP Weather Alert: यूपी में मौसम का 'डबल अटैक', पहाड़ों की बर्फबारी के बाद अब बारिश बढ़ाएगी मुसीबत; 27 से 29 जनवरी तक महा-अलर्ट जारी   यह गिरफ्तारी किसी साधारण यातायात नियम के उल्लंघन के लिए नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध के लिए की गई है। आकाश संसनवाल अपनी स्कॉर्पियो कार पर सांसद (MP) का फर्जी पास लगाकर घूम रहे थे। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के मद्देनजर चल रही हाई-अलर्ट चेकिंग के दौरान काशी टोल प्लाजा पर पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। पुलिस ने न केवल आकाश को हिरासत में लिया, बल्कि उनकी गाड़ी को भी सीज कर दिया है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मेरठ पुलिस द्वारा जनपद में सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत टोल प्लाजा एवं प्रमुख स्थलों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। #UPPolice #MeerutPolice@adgzonemeerut@Uppolice@dgp@digrangemeerut pic.twitter.com/mfyswlEXro — MEERUT POLICE (@meerutpolice) January 25, 2026   घटनास्थल का आँखों देखा हाल: काशी टोल प्लाजा पर क्या हुआ? रविवार का दिन पुलिस प्रशासन के लिए बेहद व्यस्त और संवेदनशील था। 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के उपलक्ष्य में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी। खुफिया इनपुट और सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते दिल्ली से सटे सभी बॉर्डर्स और टोल प्लाजा पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। सीओ ब्रह्मपुरी का नेतृत्व: मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे (Meerut-Delhi Expressway) स्थित काशी टोल प्लाजा पर सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना (CO Saumya Asthana) के नेतृत्व में पुलिस टीम तैनात थी। हर आने-जाने वाली गाड़ी, विशेषकर जिन पर काली फिल्म, हूटर या वीआईपी पास लगे थे, उनकी बारीकी से जांच की जा रही थी। फर्जी पास का भंडाफोड़: दोपहर के समय दिल्ली की तरफ से एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो कार तेज गति से मेरठ की ओर आ रही थी। कार के शीशे पर 'सांसद' (Member of Parliament) का पास और स्टीकर लगा हुआ था। सामान्यतः पुलिस वीआईपी पास देखकर गाड़ियां छोड़ देती है, लेकिन सीओ सौम्या अस्थाना की मुस्तैदी ने ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने गाड़ी को रुकवाया और पास की वैधता की जांच की।   जांच में पाया गया कि कार के विंडशील्ड पर चिपका हुआ पास पूरी तरह से फर्जी (Fake) था। कार चालक कोई सांसद या विधायक नहीं, बल्कि दिल्ली के कटवारिया सराय निवासी आकाश संसनवाल थे। पूछताछ में आकाश संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल प्रभाव से उन्हें हिरासत में ले लिया और परतापुर थाने भेज दिया।   कौन हैं आकाश संसनवाल? (Profile of the Accused) गिरफ्तारी की खबर आते ही लोगों में यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई कि आखिर आकाश संसनवाल कौन हैं।   पहचान: आकाश संसनवाल मुख्य रूप से दिल्ली के किशनगढ़ थाना क्षेत्र के कटवारिया सराय के रहने वाले हैं। सेलिब्रिटी कनेक्शन: आकाश की चर्चा मुख्य रूप से अंजलि अरोड़ा के साथ उनके संबंधों को लेकर होती रही है। वे अंजलि अरोड़ा के बॉयफ्रेंड बताए जाते हैं और कई मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें अंजलि का मंगेतर भी बताया गया है। सोशल मीडिया उपस्थिति: आकाश अक्सर अंजलि अरोड़ा के साथ उनके व्लॉग्स (Vlogs) और इंस्टाग्राम रील्स में नजर आते रहते हैं। दोनों की केमिस्ट्री को फैंस काफी पसंद करते हैं। आरोप: उन पर आरोप है कि उन्होंने टोल टैक्स बचाने और पुलिस का रौब झाड़ने के लिए अपनी निजी गाड़ी पर फर्जी तरीके से जनप्रतिनिधि का पास लगाया था।   अंजलि अरोड़ा: एक नजर (The Celebrity Context) इस खबर के वायरल होने की मुख्य वजह अंजलि अरोड़ा का नाम जुड़ना है। अंजलि अरोड़ा आज के दौर की एक बड़ी डिजिटल स्टार हैं।   वायरल फेम: अंजलि को सबसे ज्यादा लोकप्रियता 'कच्चा बादाम' गाने पर डांस रील बनाने से मिली थी। उनकी वह रील इतनी वायरल हुई कि वे इंटरनेट सेंसेशन बन गईं। रियलिटी शो: इसके बाद उन्होंने कंगना रनौत के रियलिटी शो 'लॉक-अप' (Lock Upp) में हिस्सा लिया, जहां मुनव्वर फारुकी के साथ उनकी दोस्ती और गेम ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। फैन फॉलोइंग: इंस्टाग्राम पर उनके करोड़ों फॉलोअर्स हैं। अपने पार्टनर की गिरफ्तारी की खबर से उनके फैंस भी हैरान हैं।   पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन': 16 चालकों पर एक्शन, 5 गाड़ियां सीज रविवार को हुई यह कार्रवाई केवल आकाश संसनवाल तक सीमित नहीं थी। मेरठ पुलिस ने वीआईपी कल्चर का दुरुपयोग करने वाले कई लोगों को सबक सिखाया। पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाकर ऐसे लोगों को चिह्नित किया जो फर्जी पहचान के सहारे कानून को ठेंगा दिखा रहे थे।   अन्य आरोपी और गिरफ्तारियां: पुलिस ने कुल 5 अलग-अलग कार चालकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उनकी गाड़ियां सीज की हैं। ये सभी अपनी गाड़ियों पर विधायक (MLA) या सांसद (MP) का फर्जी स्टीकर लगाकर घूम रहे थे। आकाश के अलावा अन्य आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:   आशीष: निवासी ग्राम नंगला हुकमसिंह, थाना गौतमबुधनगर। कपिल प्रजापति: निवासी विजय विहार, रोहिणी, दिल्ली। दानिश चौधरी: निवासी थाना मसूरी, गाजियाबाद। कर्मवीर सिंह: निवासी दयालपुरा कॉलोनी, खतौली।   इन सभी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि कानून के सामने कोई वीआईपी नहीं है, और फर्जीवाड़ा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।   16 वाहनों का चालान: इसके अलावा, पुलिस ने यातायात नियमों के उल्लंघन पर भी शिकंजा कसा।   ब्लैक फिल्म (Black Film): कई गाड़ियों पर काली फिल्म चढ़ी मिली, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। हूटर और सायरन: निजी वाहनों पर पुलिस सायरन या हूटर का इस्तेमाल करने वालों पर भी कार्रवाई की गई। कुल 16 वाहन चालकों के खिलाफ चालान और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की गई।   क्यों गंभीर है यह मामला? (Legal and Security Implications) गणतंत्र दिवस (Republic Day) भारत का राष्ट्रीय पर्व है और इस मौके पर आतंकी गतिविधियों की आशंका के चलते सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर रहती हैं। ऐसे संवेदनशील समय में फर्जी पास लगाकर घूमना केवल एक यातायात उल्लंघन नहीं, बल्कि एक गंभीर सुरक्षा चूक (Security Breach) का प्रयास माना जाता है।   सुरक्षा को खतरा: फर्जी पास लगी गाड़ियां अक्सर पुलिस चेकपोस्ट से बिना चेकिंग के निकल जाती हैं। अगर ऐसी गाड़ी में कोई संदिग्ध व्यक्ति या सामग्री हो, तो यह देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। धोखाधड़ी और जालसाजी: किसी संवैधानिक पद (जैसे सांसद या विधायक) के प्रतीक का फर्जी इस्तेमाल करना भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत धोखाधड़ी और प्रतिरूपण (Impersonation) का अपराध है। टोल टैक्स की चोरी: अक्सर लोग टोल टैक्स बचाने के लिए ऐसे हथकंडे अपनाते हैं, जो राजस्व की हानि है।   पुलिस अधिकारी का बयान: सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा, "26 जनवरी की सुरक्षा को देखते हुए हम जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं। चेकिंग के दौरान एक स्कॉर्पियो समेत 5 गाड़ियां ऐसी मिलीं जिन पर जनप्रतिनिधियों के फर्जी पास लगे थे। आकाश संसनवाल और अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर वाहनों को सीज कर दिया गया है। जांच जारी है कि ये पास उन्होंने कहां से बनवाए थे।"   वीआईपी कल्चर और 'भौकाल' की सनक पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP) और दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में गाड़ियों पर जातिसूचक शब्द लिखवाना, हूटर लगवाना, या फर्जी पुलिस/विधायक का स्टीकर लगवाना एक फैशन बन गया है। इसे स्थानीय भाषा में 'भौकाल' (रौब जमाना) कहा जाता है।   युवा अक्सर सोशल मीडिया पर रील्स बनाने या समाज में अपना रसूख दिखाने के लिए ऐसे गैरकानूनी काम करते हैं। आकाश संसनवाल का मामला भी इसी 'दिखावे की संस्कृति' का परिणाम प्रतीत होता है। एक सेलिब्रिटी से जुड़े होने के बावजूद, कानून का पालन न करना अब उन पर भारी पड़ गया है।   मेरठ पुलिस की यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो फर्जी पहचान या रसूख के दम पर कानून से ऊपर उठने की कोशिश करते हैं। अंजलि अरोड़ा के मंगेतर की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस की नजरों से कोई नहीं बच सकता, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। 26 जनवरी के मद्देनजर पुलिस की यह सख्ती न केवल सराहनीय है बल्कि नागरिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य भी है।   नोट: यह समाचार उपलब्ध जानकारी और पुलिस रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। यातायात नियमों का पालन करें और फर्जीवाड़े से बचें।

Unknown जनवरी 26, 2026 0
UP Weather Update Rain Alert Issued for January 27 29 Cold Wave Intensifies Across State
UP Weather Alert: यूपी में मौसम का 'डबल अटैक', पहाड़ों की बर्फबारी के बाद अब बारिश बढ़ाएगी मुसीबत; 27 से 29 जनवरी तक महा-अलर्ट जारी

उत्तर प्रदेश में ठंड ने एक बार फिर अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। जनवरी का महीना खत्म होने को है, लेकिन सर्दी जाने का नाम नहीं ले रही। प्रदेश के अधिकांश जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम के इस बदलते मिजाज के पीछे मुख्य कारण पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) है।Read also:-26 जनवरी पर कुदरत का 'कर्फ्यू': पहाड़ों पर 'सफेद आफत' का ऑरेंज अलर्ट, -18°C में जमने वाली है नसें; प्रशासन का मंत्र- 'मुनाफा नहीं, मदद'   बीते कुछ दिनों से लोगों को हल्की धूप से जो राहत मिली थी, वह अब गायब होती दिख रही है। बर्फीली हवाओं ने पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे 'गलन' (ठिठुरन) और भी ज्यादा बढ़ गई है। सुबह और शाम के समय हालात ऐसे हैं कि अलाव का सहारा ही एकमात्र विकल्प बचा है। इसी बीच, मौसम विभाग (IMD) ने 27, 28 और 29 जनवरी के लिए बारिश का अलर्ट जारी कर लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बारिश के बाद तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट दर्ज की जा सकती है।   मौसम विभाग का 3 दिनों का महा-अलर्ट: क्या, कब और कैसे? मौसम विभाग ने आने वाले तीन दिनों के लिए एक विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है, जो न केवल आम जनता बल्कि किसानों और यात्रियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।   27 जनवरी: बादलों का डेरा और गिरावट की शुरुआत इस दिन से मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। प्रदेश के कई हिस्सों में घने बादल छाए रहने की संभावना है। बादलों की इस आवाजाही के बीच हल्की बारिश हो सकती है। सूरज के दर्शन दुर्लभ होंगे, जिससे दिन के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आएगी। यह दिन ठंड की नई लहर की शुरुआत का संकेत होगा।   28 जनवरी: पश्चिमी और पूर्वी यूपी में बारिश का जोर 28 जनवरी को पश्चिमी विक्षोभ का असर अपने चरम पर होगा।   पश्चिमी उत्तर प्रदेश: यहाँ गरज-चमक (Thunderstorm) के साथ बूंदाबांदी होने के आसार हैं। कुछ स्थानों पर बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं, इसलिए सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश: यहाँ भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। बारिश के साथ चलने वाली ठंडी हवाएं गलन को और बढ़ा देंगी।   29 जनवरी: तेज हवाएं और अंतिम प्रहार इस दिन मौसम और भी आक्रामक हो सकता है। गरज-चमक के साथ हल्की बारिश जारी रहेगी, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती होगी तेज हवाएं। मौसम विभाग के अनुसार, कुछ इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। ये हवाएं न केवल ठंड बढ़ाएंगी बल्कि कच्चे मकानों और फसलों के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।   आखिर क्यों बदल रहा है मौसम? लखनऊ स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह ने इस मौसमी उथल-पुथल की वैज्ञानिक वजहों पर प्रकाश डाला है।   उन्होंने बताया, "उत्तर-पश्चिम भारत में एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय है। इसका सीधा असर अब उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों पर साफ दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि प्रदेश के कई हिस्सों में बादलों की आवाजाही अचानक बढ़ गई है।"   हवाओं की दिशा में बदलाव (Wind Pattern Shift): डॉ. सिंह ने एक और महत्वपूर्ण पहलू की ओर इशारा किया—हवा की दिशा।   पहले: कुछ दिन पहले तक प्रदेश में पूर्वी हवाएं (Easterlies) चल रही थीं, जो थोड़ी नमी और उमस ला रही थीं। अब: अब इन हवाओं की जगह 'पछुआ हवाओं' (Westerlies) ने ले ली है। पछुआ हवाएं पहाड़ों से होकर आती हैं, इसलिए ये अपने साथ बर्फीली ठंडक लाती हैं।   इस बदलाव के कारण वातावरण में नमी (Humidity) का स्तर बढ़ गया है। जब यह नमी ठंडी हवाओं के संपर्क में आती है और पश्चिमी विक्षोभ का साथ मिलता है, तो बारिश की स्थिति (Precipitation) बनती है। डॉ. सिंह का कहना है कि बारिश के दौरान तो तापमान में थोड़ी वृद्धि (3 से 5 डिग्री सेल्सियस) हो सकती है क्योंकि बादल गर्मी को रोकते हैं, लेकिन जैसे ही बारिश बंद होगी (29 जनवरी के बाद), न्यूनतम तापमान में तेजी से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी, जिससे "कोल्ड डे" (Cold Day) जैसे हालात बन सकते हैं।   प्रदेश का 'कोल्ड रिपोर्ट कार्ड': सबसे ठंडा कौन? बीते 24 घंटों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तापमान के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं।   सबसे ठंडा जिला (Coldest District): प्रदेश में ठंड का सबसे ज्यादा कहर आजमगढ़ और बिजनौर में देखने को मिला। आजमगढ़: यहाँ न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बिजनौर: यहाँ भी पारा लुढ़क कर 6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जिससे यह रविवार का सबसे ठंडा जिला रहा। सबसे गर्म जिला (Hottest District): ठंड के बीच कुछ जिलों में दिन के समय थोड़ी राहत रही। बहराइच: यहाँ दिन का अधिकतम तापमान 26.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बस्ती: यहाँ अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2 डिग्री अधिक था। कोहरे और दृश्यता का हाल (Fog and Visibility): पूर्वी यूपी के कई इलाकों में घना कोहरा छाया रहा। सबसे खराब स्थिति कुशीनगर में रही, जहाँ दृश्यता (Visibility) घटकर मात्र 50 मीटर रह गई। इसका सीधा असर यातायात पर पड़ा, जहाँ गाड़ियां रेंगती हुई नजर आईं। मंडल-वार तापमान (Zone-wise Temperature): गिरावट वाले मंडल: कानपुर और झांसी मंडल में दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। साथ ही, आगरा, बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल में रात के तापमान में गिरावट आई। बढ़ोत्तरी वाले मंडल: मुरादाबाद और मेरठ मंडल में दिन के तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई, जबकि वाराणसी मंडल में रात का तापमान बढ़ा।   शहरों का हाल: आपके शहर में कैसा है मौसम? मौसम की मार हर शहर पर अलग-अलग पड़ रही है। आइये जानते हैं प्रमुख शहरों की विस्तृत रिपोर्ट:   1. कानपुर (Kanpur): गलन बरकरार, पारा लुढ़का कानपुर में सर्दी का सितम जारी है। शहर में सुबह के समय तो मौसम साफ दिखाई देता है, लेकिन सर्द हवाओं ने गलन को बरकरार रखा है। सुबह के समय जो लोग दफ्तर या मॉर्निंग वॉक के लिए निकले, उन्हें कपकपी का अहसास हुआ।   राहत की खबर: सुबह 7 बजे के करीब हल्की धूप निकलने से थोड़ी राहत मिली। तापमान: पिछले 24 घंटों में यहाँ न्यूनतम पारा 3 डिग्री सेल्सियस गिरकर 10 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, जो रात की कड़ाके की ठंड को दर्शाता है।   2. लखनऊ (Lucknow): नवाबों के शहर में धुंध का पहरा राजधानी लखनऊ में सुबह की शुरुआत हल्की धुंध के साथ हुई। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ मौसम साफ हो गया, लेकिन ठंडी हवाओं ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। पूर्वानुमान: आज लखनऊ का अधिकतम तापमान 22 डिग्री और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने की संभावना है। बादलों की आवाजाही यहाँ भी देखने को मिल सकती है।   3. गोरखपुर (Gorakhpur): सीएम सिटी में राहत गोरखपुर वासियों के लिए मौसम थोड़ा मेहरबान है। यहाँ आज मौसम सामान्य बना हुआ है। कोहरा न पड़ने से लोगों को बड़ी राहत मिली है।   धूप का असर: यहाँ रोजाना अच्छी धूप निकल रही है, जिससे दिन की ठंड कम हो रही है। ट्रेंड: यहाँ तापमान में अब बढ़ोतरी का ट्रेंड देखा जा रहा है। अधिकतम तापमान 22-24 डिग्री और न्यूनतम 10-11 डिग्री रहने की उम्मीद है।   4. सहारनपुर (Saharanpur): शीतलहर की चपेट में पश्चिमी यूपी का यह जिला ठंड की मार झेल रहा है। कई दिनों की धूप और एक दिन की बारिश के बाद आज यहाँ फिर से कोहरा छा गया है।   शीतलहर: यहाँ बाकायदा शीतलहर (Cold Wave) चल रही है, जिससे गलन बहुत ज्यादा है। तापमान: न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो दिन में भी ठंड का एहसास करा रहा है।   कृषि जगत (Agriculture Update): अन्नदाता के लिए सलाह मौसम का यह बदलाव किसानों के लिए 'मिश्रित परिणाम' लेकर आया है। एक तरफ यह कुछ फसलों के लिए वरदान है, तो कुछ के लिए अभिशाप। कृषि विशेषज्ञों ने मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करते हुए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है।   किसके लिए वरदान? (Favorable Crops) कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बेमौसम बारिश और ठंडक रबी की कुछ प्रमुख फसलों के लिए बेहद फायदेमंद है:   गेहूं (Wheat): गेहूं की फसल को इस समय नमी और ठंडक की सख्त जरूरत होती है। यह बारिश गेहूं में कल्ले फूटने (Tillering) और दाने बनने की प्रक्रिया में मदद करेगी। इसे 'प्राकृतिक सिंचाई' माना जा सकता है। चना और मसूर (Gram and Lentil): इन दलहनी फसलों के लिए भी हल्की बारिश टॉनिक का काम करेगी, जिससे पैदावार बढ़ने की उम्मीद है।   किसके लिए नुकसान? (Harmful Crops) वहीं, कुछ फसलों पर खतरा मंडरा रहा है:   सरसों (Mustard): अगर बारिश के साथ तेज हवा चली, तो सरसों की फसल गिर सकती है (Lodging)। इसके अलावा, फूल झड़ने का भी डर है। नमी बढ़ने से सरसों में माहू (Aphids) कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। आलू (Potato): आलू किसानों के लिए यह समय सबसे नाजुक है। बादल छाए रहने और नमी बढ़ने से आलू में 'झुलसा रोग' (Late Blight) लगने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। अगर पानी खेत में रुका, तो आलू सड़ने भी लग सकता है।   किसानों के लिए विशेषज्ञ सलाह: निगरानी: किसान भाई अपने खेतों की नियमित निगरानी करें। सिंचाई: अभी सिंचाई रोक दें, क्योंकि बारिश की संभावना है। जल निकासी: अगर बारिश तेज होती है, तो सरसों और आलू के खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था दुरुस्त रखें। दवा का छिड़काव: आलू और सरसों में रोग के लक्षण दिखते ही मौसम साफ होने पर फफूंदनाशक (Fungicide) दवाओं का छिड़काव करें। विशेषज्ञों से सलाह लिए बिना दवा न डालें।   स्वास्थ्य और सुरक्षा (Health & Safety Advisory) तापमान में अचानक आने वाले इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। डॉक्टरों ने इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है:   हृदय रोगी सावधान रहें: ठंड बढ़ने पर नसों में सिकुड़न होती है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। हार्ट और बीपी के मरीज अपनी दवाएं नियमित लें और सुबह बहुत जल्दी बाहर निकलने से बचें। बच्चों और बुजुर्गों का ख्याल: बारिश के बाद ठंड बढ़ने पर निमोनिया और सर्दी-जुकाम का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों को लेयरिंग (एक के ऊपर एक) कपड़े पहनाएं। खान-पान: शरीर को गर्म रखने के लिए गुड़, तिल, और गर्म सूप का सेवन बढ़ाएं। ठंडा पानी पीने से बचें। ड्राइविंग सेफ्टी: 27 से 29 जनवरी के बीच बारिश और कोहरे के कारण सड़कों पर फिसलन और कम दृश्यता हो सकती है। गाड़ी चलाते समय फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करें और रफ्तार धीमी रखें।   अगले 3 दिनों का विस्तृत पूर्वानुमान (3-Day Forecast) मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए जो चार्ट जारी किया है, वह इस प्रकार है:   तारीख मौसम का पूर्वानुमान चेतावनी 27 जनवरी आसमान में बादल छाए रहेंगे। पश्चिमी यूपी के कुछ जिलों में हल्की बारिश शुरू हो सकती है। तापमान में गिरावट और गलन बढ़ेगी। 28 जनवरी पश्चिमी यूपी: गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी।   पूर्वी यूपी: हल्की से मध्यम बारिश की संभावना। 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 29 जनवरी पूरे प्रदेश में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश। कहीं-कहीं ओलावृष्टि की भी आशंका है। बारिश थमने के बाद कोहरा और ठंड बढ़ेगी।   कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में अगले 72 घंटे मौसम के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं। एक तरफ जहाँ पश्चिमी विक्षोभ बारिश लेकर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ों की बर्फबारी गलन बढ़ा रही है। किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है, वहीं आम जनता को अपनी सेहत और सुरक्षा का ध्यान रखना होगा। 29 जनवरी के बाद बारिश तो थम जाएगी, लेकिन उसके बाद आने वाली 'पछुआ हवाओं' की ठंड असली परीक्षा लेगी।   मौसम से जुड़ी हर पल की अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें।

Unknown जनवरी 26, 2026 0
Horror in Agra HR Manager Beheaded by Lover in Office Body Found on Yamuna Bridge
आगरा का 'संजय प्लेस हॉरर': ऑफिस के सन्नाटे में प्यार का खूनी अंत, प्रेमी ने प्रेमिका के सिर-पैर काटे, यमुना पुल पर खुले बोरे ने उगला मौत का सच

आगरा (Agra): ताजनगरी आगरा में मानवता को शर्मसार और दिल को दहला देने वाली एक वारदात सामने आई है। यहां प्यार, शक और सनक ने एक हंसती-खेलती जिंदगी को मौत के घाट उतार दिया। ट्रांस यमुना क्षेत्र की रहने वाली एक निजी कंपनी की एचआर मैनेजर (HR Manager) मिंसी शर्मा की उनके ही ऑफिस में नृशंस हत्या कर दी गई। हत्यारा कोई और नहीं, बल्कि उसका प्रेमी और ऑफिस का अकाउंटेंट विनय राजपूत निकला।READ ALSO:-मेरठ में यूजीसी के नए फरमान के खिलाफ बिगुल: 'समानता सर्वेक्षण' या सामाजिक विभाजन? युवा ब्राह्मण समाज ने विनियमन-2026 को बताया शिक्षा जगत के लिए 'काला अध्याय'   हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। उसने ऑफिस के अंदर ही युवती का सिर धड़ से अलग (Beheaded) कर दिया। जब शव बोरे में नहीं आया, तो उसने चाकू से युवती के पैर भी काट दिए। शनिवार की रात वह शव को ठिकाने लगाने के लिए स्कूटर से जा रहा था, तभी यमुना पुल (Yamuna Bridge) पर एक हादसे ने इस खौफनाक राज से पर्दा उठा दिया।   इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको इस सनसनीखेज हत्याकांड की एक-एक परत, पुलिस की जांच और आरोपी के कबूलनामे के बारे में विस्तार से बताएंगे।   शनिवार की 'काली रात': यमुना पुल पर कैसे खुला राज? शनिवार देर रात, आगरा का जवाहर पुल (यमुना ब्रिज) सन्नाटे में डूबा था। करीब 12 बजे एक युवक स्कूटर पर एक भारी बोरा लादकर जा रहा था। अचानक स्कूटर का संतुलन बिगड़ा और वह गिर पड़ा। स्कूटर गिरते ही पीछे बंधा हुआ बोरा सड़क पर जा गिरा और उसका मुंह थोड़ा खुल गया।   वहां से गुजर रहे एक वाहन चालक की नजर जब बोरे पर पड़ी, तो उसे कुछ संदिग्ध लगा। उसने रुककर देखा तो उसके होश उड़ गए—बोरे से खून रिस रहा था और इंसानी शरीर का हिस्सा नजर आ रहा था। राहगीर को अपनी ओर आता देख आरोपी विनय राजपूत घबरा गया। वह स्कूटर और बोरे को वहीं छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला।   राहगीरों की सूचना पर थाना एत्माद्दौला और छत्ता पुलिस मौके पर पहुंची। जब बोरे को खोला गया, तो पुलिसकर्मी भी सन्न रह गए। उसमें एक युवती का सिर कटा शव (Headless Body) था। उसके पैर भी काट दिए गए थे, ताकि शव को छोटे बोरे में फिट किया जा सके।   स्कूटी के नंबर से हुई शिनाख्त मौके पर पुलिस को एक स्कूटी (UP 80 number series) मिली। पुलिस ने तुरंत परिवहन विभाग के डेटाबेस से नंबर को ट्रेस किया। यह स्कूटर ट्रांस यमुना के पार्वती विहार निवासी दीपक शर्मा के घर का निकला। पुलिस की टीम रात में ही पते पर पहुंची।   दीपक शर्मा को जब पुलिस ने घटना की जानकारी दी और शव की फोटो (कपड़ों के आधार पर) दिखाई, तो उन्होंने उसकी पहचान अपनी 32 वर्षीय बहन मिंसी शर्मा (Minsi Sharma) के रूप में की। भाई ने बताया कि मिंसी सुबह ऑफिस गई थी, लेकिन रात तक वापस नहीं लौटी थी। उनका फोन भी बंद आ रहा था।   ऑफिस में खूनी खेल: 3 घंटे तक क्या हुआ? पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, परतें खुलती गईं। मिंसी शर्मा संजय प्लेस (Sanjay Place) स्थित 'दिविशा टेक्नोलॉजी लिमिटेड' (Divisha Technology Ltd) कंपनी में एचआर मैनेजर थीं। उसी ऑफिस में ट्रांस यमुना कॉलोनी, सी-ब्लॉक का रहने वाला विनय राजपूत अकाउंटेंट (Accountant) था।   पुलिस सूत्रों के अनुसार, विनय और मिंसी के बीच पिछले दो साल से प्रेम प्रसंग (Love Affair) चल रहा था। लेकिन शनिवार की शाम जो हुआ, वह किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था।   प्लानिंग: आरोपी विनय ने शनिवार शाम को ऑफिस के चपरासी और अन्य स्टाफ को जल्दी छुट्टी दे दी। उसने बहाना बनाया कि कुछ ऑडिट का काम बाकी है। मुलाकात और झगड़ा: शाम को ऑफिस में सिर्फ विनय और मिंसी बचे थे। पुलिस के मुताबिक, दोनों के बीच किसी "तीसरे शख्स" को लेकर तीखी बहस हुई। हत्या: बहस इतनी बढ़ी कि विनय ने ऑफिस में रखे चाकू से मिंसी पर हमला कर दिया। उसने बेरहमी से मिंसी का गला रेत दिया। बर्बरता: मिंसी की मौत के बाद भी विनय की हैवानियत नहीं रुकी। शव को ठिकाने लगाने के लिए उसे एक बोरे की जरूरत थी। जब शव बोरे में पूरा नहीं आया, तो उसने चाकू से मिंसी के दोनों पैर काट दिए और उन्हें मोड़कर बोरे में भर दिया।   हत्या की वजह: "वो किसी और से बात करती थी" गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ में आरोपी विनय राजपूत ने जो बताया, उसने रिश्तों पर से भरोसा उठा दिया है। विनय ने बताया कि वह मिंसी से बहुत प्यार करता था, लेकिन पिछले छह महीनों से मिंसी का व्यवहार बदल गया था।   विनय का आरोप है कि मिंसी की नजदीकी किसी और युवक से बढ़ गई थी। वह ऑफिस में और फोन पर उस दूसरे युवक से घंटों बातें करती थी। विनय ने कई बार उसे मना किया, लेकिन मिंसी ने उसकी बात नहीं मानी। शनिवार को उसने इसी बात को लेकर मिंसी को ऑफिस में रोका था। जब मिंसी ने उसकी बात सुनने से इनकार कर दिया और कहा कि यह उसकी निजी जिंदगी है, तो विनय अपना आपा खो बैठा और उसने यह खौफनाक कदम उठाया।   पुलिस का एक्शन और सिर की तलाश घटना के बाद पुलिस ने सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से रविवार को आरोपी विनय राजपूत को गिरफ्तार कर लिया। एसीपी छत्ता शेषमणि उपाध्याय (ACP Chhatta Sheshamani Upadhyay) ने बताया कि आरोपी लगातार पुलिस को गुमराह कर रहा है।   सिर का रहस्य: सबसे बड़ी चुनौती मिंसी के सिर को बरामद करना है। पूछताछ में विनय ने पहले बताया कि उसने सिर, कपड़े और मोबाइल झरना नाले (Jharna Nala) में फेंक दिए हैं। पुलिस ने घंटों तक नाले में तलाशी अभियान चलाया, गोताखोर उतारे, लेकिन सिर नहीं मिला। बयान बदला: जब नाले में सिर नहीं मिला, तो आरोपी ने बयान बदला और कहा कि उसने सिर को यमुना नदी (Yamuna River) में फेंका है। पुलिस अब दोनों स्थानों पर तलाशी अभियान चला रही है। साक्ष्य संकलन: पुलिस ने ऑफिस को सील कर दिया है। फॉरेंसिक टीम ने वहां से खून के नमूने, हत्या में प्रयुक्त चाकू और सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) जब्त कर लिए हैं।   कानूनी पेंच: BNS के तहत होगी सख्त कार्रवाई चूंकि यह मामला अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज किया जाएगा, इसलिए आरोपी के बचने की संभावनाएं ना के बराबर हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले में निम्नलिखित धाराएं लग सकती हैं:   BNS धारा 103 (हत्या): इरादतन हत्या के लिए, जिसमें मृत्युदंड या आजीवन कारावास का प्रावधान है। BNS धारा 238 (साक्ष्य मिटाना): शव को खुर्द-बुर्द करने और सबूत मिटाने की कोशिश।   इस मामले में 'रेयर ऑफ रेयरेस्ट' (Rarest of Rare) की दलील भी दी जा सकती है क्योंकि जिस तरह से शव के टुकड़े किए गए, वह आरोपी की क्रूर मानसिकता को दर्शाता है।   कार्यस्थल पर सुरक्षा और "टॉक्सिक रिलेशनशिप" यह घटना एक बार फिर कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और 'टॉक्सिक रिलेशनशिप' (Toxic Relationships) के खतरों को उजागर करती है। एक ही ऑफिस में काम करते हुए रिश्तों की सीमाएं लांघना और फिर अधिकार की भावना (Sense of Entitlement) का पैदा होना, अक्सर ऐसे अपराधों की वजह बनता है।   मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि जब प्रेम में 'स्वामित्व' (Possession) की भावना आ जाती है, तो इंसान सही और गलत का फर्क भूल जाता है। विनय का यह कृत्य उसी मानसिक दिवालियेपन का नतीजा है।   परिवार का रो-रोकर बुरा हाल मिंसी शर्मा के घर में कोहराम मचा हुआ है। भाई दीपक शर्मा और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि जिस बेटी ने अपनी मेहनत से करियर बनाया, उसका अंत इतना दर्दनाक होगा। परिवार ने पुलिस से मांग की है कि आरोपी को फांसी की सजा दी जाए।   आगरा में अपराध का बढ़ता ग्राफ ताजनगरी में पिछले कुछ समय से अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। चाहे वह लूट हो या हत्या, अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। मिंसी शर्मा हत्याकांड ने शहर के लोगों को डरा दिया है। लोग सोशल मीडिया पर आगरा पुलिस से सख्त गश्त और अपराधियों के खिलाफ त्वरित न्याय की मांग कर रहे हैं।   आगरा का यह हत्याकांड (Agra Murder Case) हमें दिल्ली के श्रद्धा वालकर कांड की याद दिलाता है। आरोपी विनय राजपूत पुलिस की गिरफ्त में है, लेकिन मिंसी का सिर अभी भी बरामद नहीं हुआ है। पुलिस के लिए यह केस ओपन एंड शट है, लेकिन साक्ष्यों को अदालत में साबित करना और आरोपी को कड़ी सजा दिलाना असली चुनौती होगी।   समाज के लिए यह सोचने का वक्त है कि आखिर रिश्तों में इतनी कड़वाहट और हिंसा क्यों बढ़ रही है? क्या अस्वीकृति (Rejection) को स्वीकार न कर पाना आज के युवाओं को अपराधी बना रहा है?   आगरा के संजय प्लेस स्थित एक ऑफिस में अकाउंटेंट विनय राजपूत ने अपनी प्रेमिका और एचआर मैनेजर मिंसी शर्मा की निर्मम हत्या कर दी। शक और ईर्ष्या के चलते आरोपी ने ऑफिस में ही युवती का सिर काटा और शव को बोरे में भरने के लिए उसके पैर भी काट दिए। शव को स्कूटर से यमुना पुल पर फेंकने जाते समय एक्सीडेंट होने से मामला प्रकाश में आया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन युवती का सिर अभी तक बरामद नहीं हुआ है।

Unknown जनवरी 26, 2026 0
Yuva Brahman Samaj Protests Against UGC Equality Survey Regulation 2026 in Meerut
मेरठ में यूजीसी के नए फरमान के खिलाफ बिगुल: 'समानता सर्वेक्षण' या सामाजिक विभाजन? युवा ब्राह्मण समाज ने विनियमन-2026 को बताया शिक्षा जगत के लिए 'काला अध्याय'

मेरठ (ब्यूरो रिपोर्ट) - 25 जनवरी, 2026: देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता और सुधार के दावों के बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का एक नया प्रस्ताव विवादों के घेरे में आ गया है। साल की शुरुआत के साथ ही UGC द्वारा प्रस्तावित "उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता सर्वेक्षण हेतु विनियमन-2026" (Regulation for Equality Survey in Higher Education Institutions - 2026) ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की छात्र और सामाजिक राजनीति में भूचाल ला दिया है।READ ALSO:-बार्डर-2 की रिलीज के साथ ही मेरठ में भूचाल: दलित स्वाभिमान पर चोट या सिनेमाई चूक? 3 घंटे 19 मिनट की फिल्म के 27वें मिनट ने खड़ा किया बड़ा बखेड़ा   मेरठ, जो हमेशा से क्रांतियों की धरा रही है, वहां से इस विनियमन के खिलाफ विरोध का पहला बड़ा स्वर फूट पड़ा है। युवा ब्राह्मण समाज संगठन (ट्रस्ट), मेरठ मण्डल ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे समाज को बांटने वाली साजिश करार दिया है। संगठन ने रविवार को एक आपात बैठक कर इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।   25 जनवरी: विरोध की पहली चिंगारी आज, रविवार को मेरठ के बी.एच. इंटर कॉलेज (B.H. Inter College) प्रांगण में युवा ब्राह्मण समाज संगठन के बैनर तले एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष जितेन्द्र गौतम ने की। इस बैठक में मेरठ मण्डल के प्रबुद्ध जनों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने हिस्सा लिया।   माहौल में भारी आक्रोश था। वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा के मंदिरों में 'समानता' के नाम पर 'जातिगत और सामाजिक विभाजन' का जो बीज बोने की कोशिश की जा रही है, उसका परिणाम भविष्य में घातक होगा। बैठक के अंत में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर सरकार और यूजीसी को चेतावनी दी गई कि यदि इस विनियमन को रद्द नहीं किया गया, तो सड़कों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।   क्या है विवाद की जड़? संगठन के अनुसार, UGC का नया ड्राफ्ट "समानता सर्वेक्षण" (Equality Survey) के नाम पर शिक्षण संस्थानों में छात्रों और कर्मचारियों की सामाजिक पृष्ठभूमि, जाति और वर्ग का डेटाबेस तैयार करने की बात करता है। युवा ब्राह्मण समाज का तर्क है कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान का प्रसार और अनुसंधान होना चाहिए, न कि यह गिनना कि किस जाति के कितने छात्र किस बेंच पर बैठे हैं।   संगठन द्वारा उठाई गई 4 प्रमुख आपत्तियां:   1. सामाजिक विभाजन का खतरा (Social Division) बैठक में अध्यक्ष जितेन्द्र गौतम ने कहा, "यह विनियमन समानता लाने के बजाय असमानता की खाई को और चौड़ा करेगा। जब आप क्लासरूम में बैठे छात्र को उसकी मेधा के बजाय उसकी सामाजिक पहचान से तौलेंगे, तो वहां शिक्षा नहीं, राजनीति होगी। इससे छात्रों के बीच आपसी वैमनस्य बढ़ेगा।"   2. दुरुपयोग की प्रबल आशंका (Potential for Misuse) पत्र में एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया गया है कि इस नियम का दुरुपयोग केवल सामान्य वर्ग के खिलाफ ही नहीं, बल्कि दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के हितों के खिलाफ भी हो सकता है। डेटा का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए "सॉफ्ट टारगेटिंग" के रूप में किया जा सकता है।   3. शैक्षिक वातावरण का विनाश (Destruction of Academic Environment) संगठन का मानना है कि विश्वविद्यालयों का माहौल पहले ही छात्र राजनीति के कारण संवेदनशील रहता है। ऐसे में यह सर्वेक्षण शिक्षण संस्थानों को 'अखाड़ों' में तब्दील कर देगा। पढ़ाई और रिसर्च पीछे छूट जाएंगे और 'सर्वेक्षण और तुष्टिकरण' मुख्य मुद्दा बन जाएगा।   4. अव्यावहारिक मूल्यांकन (Lack of Practical Assessment) विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यह नियम वातानुकूलित कमरों में बैठकर बनाया गया है। इसमें भारतीय समाज की जटिल संरचना और जमीनी हकीकत (Ground Reality) का कोई वैज्ञानिक आकलन नहीं किया गया है।   "शिक्षा में रिसर्च चाहिए, सर्वे नहीं": संगठन का विजन युवा ब्राह्मण समाज ने सिर्फ विरोध नहीं किया है, बल्कि शिक्षा सुधार के लिए एक सकारात्मक खाका (Roadmap) भी पेश किया है। संगठन के वरिष्ठ सदस्य श्री कुलदीप शर्मा और श्री राजीव नरहरी ने संयुक्त रूप से कहा कि भारत को यदि विश्वगुरु बनना है, तो उसे 'जाति' से ऊपर उठकर 'ज्ञान' की बात करनी होगी।   संगठन ने सरकार के सामने 5 सूत्रीय मांगें रखी हैं:   अनुसंधान-केंद्रित शिक्षा (Research-Centric Education): उच्च शिक्षा का पूरा फोकस रटने या डिग्री बांटने के बजाय रिसर्च पर होना चाहिए। विश्वस्तरीय प्रयोगशालाएं (World-Class Labs): यूजीसी का फंड सर्वे पर खर्च करने के बजाय कॉलेजों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की लैब बनाने पर खर्च हो। ब्रेन ड्रेन पर रोक (Stop Brain Drain): भारत की प्रतिभाएं विदेश क्यों जा रही हैं? उन्हें रोकने के लिए भारत में ही आकर्षक पैकेज और सुविधाएं दी जाएं। इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट: सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर आधुनिक शोध के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करें। स्टार्टअप और इनोवेशन: छात्रों को जातिगत आंकड़ों में उलझाने के बजाय स्टार्टअप और सामाजिक प्रभाव वाली परियोजनाओं (Social Impact Projects) के लिए प्रोत्साहित किया जाए।   "हम चाहते हैं कि हमारा युवा यह न सोचे कि वह किस जाति का है, बल्कि यह सोचे कि वह देश के लिए क्या आविष्कार कर सकता है। यूजीसी का यह नियम युवाओं को पीछे धकेलने वाला है।" - ललित शर्मा, वरिष्ठ सदस्य   28 जनवरी को आर-पार की रणनीति आज की बैठक तो महज एक शुरुआत थी। युवा ब्राह्मण समाज ने आंदोलन को तेज करने का ऐलान कर दिया है। संगठन ने मीडिया को जानकारी दी है कि 28 जनवरी, 2026 (बुधवार) को एक बड़ी रणनीति बैठक बुलाई गई है।   तिथि: 28 जनवरी, 2026 समय: दोपहर 3:00 बजे स्थान: मीटिंग हॉल, एन.ए.एस. इंटर कॉलेज (N.A.S. Inter College), मेरठ।   इस बैठक में मेरठ मण्डल के अलावा आसपास के जिलों से भी युवा प्रतिनिधियों को बुलाया गया है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में "विनियमन वापसी" के लिए चरणबद्ध आंदोलन, धरना प्रदर्शन और यूजीसी चेयरमैन के नाम ज्ञापन सौंपने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।   उपस्थित गणमान्य आज बी.एच. इंटर कॉलेज में हुई बैठक में संगठन की मजबूती साफ दिखाई दी। मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे:   जितेन्द्र गौतम (अध्यक्ष) - जिनके हस्ताक्षर से पत्र जारी किया गया। श्री कुलदीप शर्मा श्री राजीव नरहरी श्री ललित शर्मा  श्री पुनीत शर्मा  श्री सौरव दिवाकर शर्मा  श्री सुरेंद्र शर्मा  श्री रमाकांत पंचोरी  डॉ पंकज शर्मा  श्री गणेश दत्त शर्मा  श्री संजय वाजपई  श्री भूषण शर्मा  सही अंकुर शर्मा तथा अन्य सक्रिय कार्यकर्ता।   शिक्षा या राजनीति? यूजीसी का "समानता सर्वेक्षण-2026" अभी लागू होने की प्रक्रिया में है, लेकिन इसका विरोध यह दर्शाता है कि शिक्षा नीति में किसी भी तरह का सामाजिक हस्तक्षेप अब आसानी से स्वीकार नहीं किया जाएगा। जहां एक तरफ सरकार समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ युवा संगठन इसे 'फूट डालो और राज करो' की नीति के रूप में देख रहे हैं।   28 जनवरी की बैठक पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं। क्या यह विरोध मेरठ तक सीमित रहेगा या यह आग पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निकलकर दिल्ली तक पहुंचेगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।  

Unknown जनवरी 26, 2026 0
Controversy Erupts Over Border 2 in Meerut Complaint Filed Alleging Dalit Insult
बार्डर-2 की रिलीज के साथ ही मेरठ में भूचाल: दलित स्वाभिमान पर चोट या सिनेमाई चूक? 3 घंटे 19 मिनट की फिल्म के 27वें मिनट ने खड़ा किया बड़ा बखेड़ा

मेरठ (स्पेशल रिपोर्ट): भारतीय सिनेमा में देशभक्ति का ज्वार उठाने वाली फिल्मों की जब भी बात होती है, तो जेपी दत्ता की 'बार्डर' का नाम सबसे ऊपर आता है। दशकों बाद जब इस फिल्म का सीक्वल 'बार्डर-2' (Border 2) रिलीज हुआ, तो दर्शकों को उम्मीद थी कि यह फिल्म भी उसी गौरवशाली इतिहास को दोहराएगी। लेकिन, मेरठ में फिल्म की रिलीज के साथ ही स्क्रीन पर दिखाई गई देशभक्ति की जगह एक विवाद ने ले ली है। यह विवाद इतना गहरा गया है कि मामला पुलिस थाने की चौखट तक जा पहुंचा है।Read also:-बिजनौर में मौत बनकर फटा सिलेंडर: शेरकोट में मलबे के ढेर में तब्दील हुआ घर, धमाके की गूंज से सहमा इलाका, एक बुजुर्ग की दर्दनाक मौत   फिल्म में इस्तेमाल किए गए एक संवाद और दृश्य ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दलित समाज को उद्वेलित कर दिया है। आरोप है कि फिल्म निर्माताओं ने मनोरंजन की आड़ में एक विशेष समुदाय की भावनाओं को कुचलने का प्रयास किया है।   फ्लैशबैक: क्या है पूरा मामला? रविवार का दिन मेरठ के परतापुर इलाके के लिए गहमागहमी भरा रहा। बहुजन जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल खोड़ावाल अपने समर्थकों के साथ परतापुर थाने पहुंचे। उनके हाथों में संगठन का लेटर पैड था और चेहरे पर भारी आक्रोश। मामला हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'बार्डर-2' से जुड़ा था।   विवादित दृश्य का 'पोस्टमार्टम' अतुल खोड़ावाल और उनकी लीगल टीम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, फिल्म की कुल अवधि 3 घंटा 19 मिनट है। फिल्म अपनी रफ्तार से चल रही होती है, लेकिन ठीक 27 मिनट 37 सेकेंड पर एक ऐसा दृश्य आता है, जिसने इस पूरे बखेड़े को जन्म दिया।   दृश्य की पृष्ठभूमि: यह सीन एक सैन्य शिविर का है। सैनिक खाली समय में अपने काम कर रहे हैं। पात्रों की भूमिका: एक कलाकार, जो सैनिक का किरदार निभा रहा है, बैठकर अपने जूते पॉलिश कर रहा है। यह एक सामान्य दिनचर्या का हिस्सा लगता है। संवाद और आपत्ति: तभी दूसरा सैनिक वहां पहुंचता है और जूते पॉलिश कर रहे जवान से बात करना शुरू करता है। बातचीत हंसी-मजाक के लहजे में शुरू होती है। पॉलिश कर रहा सैनिक जवाब भी देता है, लेकिन इसी दौरान दूसरा सैनिक उसे संबोधित करने के लिए अनुसूचित जाति से जुड़े एक बेहद आपत्तिजनक शब्द (गाली/स्लर) का प्रयोग करता है।   शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह शब्द अनायास नहीं निकला है, बल्कि इसे स्क्रिप्ट का हिस्सा बनाया गया है, जो सीधे तौर पर जातिगत भेदभाव और एक समाज विशेष को नीचा दिखाने की मानसिकता को दर्शाता है।   शिकायतकर्ता का पक्ष: "कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं निर्माता" परतापुर थाने में मीडिया से बात करते हुए बहुजन जनता दल के अध्यक्ष अतुल खोड़ावाल ने फिल्म के निर्माता और निर्देशक पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड के निर्माता अक्सर 'रचनात्मक स्वतंत्रता' (Creative Liberty) की आड़ में दलित और पिछड़े समाज का अपमान करते आए हैं, लेकिन अब समाज जागरूक हो चुका है और इस तरह के कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।   "जूता पॉलिश करते हुए सैनिक को दिखाना और फिर उसे जातिसूचक शब्द से संबोधित करना, यह संयोग नहीं प्रयोग है। यह दर्शाता है कि फिल्म बनाने वालों के दिमाग में जातिवाद का कीड़ा कितना गहरा बैठा है। क्या सेना जैसे पवित्र संस्थान में, जहां सिर्फ 'भारतीय' होते हैं, वहां ऐसी जातिगत गंदगी दिखाना सेना का अपमान नहीं है?" - अतुल खोड़ावाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बहुजन जनता दल   खोड़ावाल ने आगे कहा कि देश में एससी-एसटी एक्ट (SC/ST Act) और नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के कड़े प्रावधान होने के बावजूद, निर्माता-निर्देशकों ने कानून को ठेंगा दिखाने का काम किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि सेंसर बोर्ड की कैंची इस शब्द पर क्यों नहीं चली? क्या यह जानबूझकर विवाद पैदा करने के लिए रखा गया था?   कानूनी पेंच: BNS और SC/ST एक्ट की धाराओं का चक्रव्यूह अतुल खोड़ावाल ने अपनी लिखित तहरीर में सिर्फ माफी की मांग नहीं की है, बल्कि इसे एक गंभीर आपराधिक कृत्य मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) और SC/ST एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।   आइये समझते हैं कि शिकायत में जिन धाराओं का जिक्र किया गया है, वे कितनी गंभीर हैं और यदि पुलिस इन पर एफआईआर (FIR) दर्ज करती है, तो फिल्म के निर्देशक अनुराग सिंह और निर्माता भूषण कुमार के लिए कितनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।   1. BNS धारा 196 (पुराने IPC की धारा 153A के समतुल्य) यह धारा धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सद्भाव बनाए रखने के प्रतिकूल कार्य करने से संबंधित है।   आरोप: फिल्म में जातिसूचक शब्द का प्रयोग समाज में वैमनस्यता फैला सकता है। प्रावधान: इसमें 3 साल तक की कैद और जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।   2. BNS धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर कोई ऐसा कार्य करता है जिससे दंगा भड़कने की आशंका हो।   आरोप: दलित समाज की भावनाओं को आहत करके उन्हें उग्र प्रतिक्रिया देने के लिए उकसाना।   3. BNS धारा 299 (धार्मिक/जातिगत भावनाओं को ठेस पहुँचाना) यह धारा किसी भी वर्ग की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से अपमानित करने से संबंधित है।   आरोप: फिल्म का दृश्य सीधे तौर पर दलित अस्मिता पर प्रहार है।   4. BNS धारा 353 (2) (गलत जानकारी या अफवाह फैलाना) यह धारा उन बयानों या दृश्यों पर लागू होती है जो विभिन्न समुदायों के बीच नफरत या घृणा पैदा करते हैं।   5. SC/ST एक्ट (अत्याचार निवारण अधिनियम) यह सबसे गंभीर पहलू है। यदि किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति को (भले ही वह फिल्म का पात्र हो, लेकिन वह प्रतिनिधित्व पूरे समाज का कर रहा है) जाति के आधार पर अपमानित किया जाता है, तो यह गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आ सकता है।   नामजद आरोपी: बॉलीवुड के दिग्गजों पर लटकी तलवार शिकायत में किसी अज्ञात व्यक्ति को नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण से जुड़े शीर्ष नामों को आरोपी बनाने की मांग की गई है। तहरीर में निम्नलिखित नाम शामिल हैं:   अनुराग सिंह (निर्देशक): फिल्म के कैप्टन के रूप में, स्क्रीन पर जो भी दिखाया जाता है, उसकी अंतिम जिम्मेदारी निर्देशक की मानी जाती है। भूषण कुमार (टी-सीरीज - निर्माता): फिल्म के फाइनेंसर और प्रोड्यूसर होने के नाते वे भी इस कानूनी दायरे में आते हैं। जेपी दत्ता (निर्माता/प्रेजेंटर): 'बार्डर' फ्रैंचाइज़ी के जनक। निधि दत्ता (निर्माता): फिल्म निर्माण टीम का हिस्सा। संबंधित कलाकार: वह अभिनेता जिसने स्क्रीन पर उस आपत्तिजनक शब्द का उच्चारण किया।   मेरठ का सामाजिक समीकरण और फिल्म का विरोध मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश दलित राजनीति और सामाजिक चेतना का केंद्र रहा है। यहाँ से उठने वाली आवाज अक्सर दिल्ली और मुंबई तक असर करती है। 'बार्डर-2' जैसी बड़ी बजट की फिल्म के खिलाफ यहाँ विरोध शुरू होना फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के लिए खतरे की घंटी हो सकता है।   सेंसर बोर्ड (CBFC) पर भी उठे सवाल इस विवाद ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।   एक तरफ सेंसर बोर्ड फिल्मों में छोटी-छोटी गालियों पर 'बीप' लगा देता है। दूसरी तरफ, 3 घंटे 19 मिनट की फिल्म में एक जातिसूचक शब्द (Caste Slur) कैसे पास हो गया? क्या स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्यों ने इस शब्द को नजरअंदाज किया, या उन्हें इसका सामाजिक प्रभाव समझ नहीं आया?   अतुल खोड़ावाल का कहना है कि यह "सिर्फ एक शब्द" नहीं है, यह सदियों के दंश को कुरेदने जैसा है। उन्होंने मांग की है कि जब तक यह सीन फिल्म से नहीं हटाया जाता और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका संगठन चुप नहीं बैठेगा।   क्या होगा अगला कदम? परतापुर थाने में दी गई तहरीर के बाद अब पुलिस की भूमिका अहम हो गई है। प्रक्रिया के अनुसार:   जांच (Preliminary Inquiry): पुलिस सबसे पहले फिल्म के उस क्लिप की जांच करेगी। कानूनी राय: पुलिस अभियोजन अधिकारियों से राय ले सकती है कि क्या फिल्मी दृश्य पर SC/ST एक्ट सीधे लागू होता है। FIR दर्ज करना: यदि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) आरोप सही पाए जाते हैं, तो पुलिस को FIR दर्ज करनी होगी।   मांगें स्पष्ट हैं: तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज हो। फिल्म से 27:37 मिनट वाला दृश्य काटा जाए। निर्माता सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।   सिनेमा और जातिवाद: एक पुराना संघर्ष बॉलीवुड का दलित प्रतिनिधित्व के साथ रिश्ता हमेशा से खट्टा-मीठा रहा है। पहले फिल्मों में दलित पात्रों को अक्सर पीड़ित या लाचार दिखाया जाता था। हालाँकि, 'आर्टिकल 15', 'जय भीम' और 'मसान' जैसी फिल्मों ने इस नैरेटिव को बदला है। लेकिन 'बार्डर-2' जैसी मसाला और मेनस्ट्रीम फिल्म में इस तरह की चूक (या जानबूझकर किया गया कृत्य) यह साबित करती है कि संवेदनशीलता के मामले में अभी भी बॉलीवुड को लंबा सफर तय करना है। अतुल खोड़ावाल के शब्दों में, "सैनिक सिर्फ सैनिक होता है, उसकी कोई जाति नहीं होती। उसे जाति के चश्मे से दिखाना देश की सुरक्षा में लगे जवानों का मनोबल तोड़ने जैसा है।" निष्कर्ष: विवाद सुलझेगा या और भड़केगा? 'बार्डर-2' अभी सिनेमाघरों में नई है। मेरठ से उठी यह चिंगारी अगर अन्य राज्यों तक फैलती है, तो फिल्म के निर्माताओं के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। फिलहाल, परतापुर पुलिस की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। क्या पुलिस बॉलीवुड के बड़े नामों के खिलाफ FIR दर्ज करने का साहस दिखाएगी? या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?   यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म निर्माण कंपनी 'टी-सीरीज' और निर्देशक अनुराग सिंह इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्या वे दृश्य हटाकर विवाद खत्म करेंगे, या फिर यह मामला कोर्ट की दहलीज तक जाएगा?   प्रमुख बिंदु (Key Highlights for Quick Reading) विवाद का केंद्र: फिल्म 'बार्डर-2' (Border 2)। अवधि: 3 घंटे 19 मिनट। आपत्तिजनक दृश्य का समय: 27 मिनट 37 सेकेंड। स्थान: परतापुर थाना, मेरठ। शिकायतकर्ता: अतुल खोड़ावाल (राष्ट्रीय अध्यक्ष, बहुजन जनता दल)। आरोपी: भूषण कुमार, अनुराग सिंह, जेपी दत्ता, निधि दत्ता और कलाकार। मुख्य धाराएं: BNS 196, 192, 299, 353(2) और SC/ST एक्ट। दृश्य का विवरण: एक सैनिक जूता पॉलिश कर रहा है, दूसरा उसे जातिसूचक शब्द बोलता है। मांग: FIR दर्ज हो और सीन फिल्म से हटाया जाए।  

Unknown जनवरी 25, 2026 0
bijnor sherkot gas cylinder blast death newsupdate
बिजनौर में मौत बनकर फटा सिलेंडर: शेरकोट में मलबे के ढेर में तब्दील हुआ घर, धमाके की गूंज से सहमा इलाका, एक बुजुर्ग की दर्दनाक मौत

उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर के थाना शेरकोट क्षेत्र के मोहल्ला हलवाइयान में आज सुबह उस वक्त कोहराम मच गया, जब एक घर में रखा घरेलू गैस सिलेंडर अचानक बम की तरह फट गया। इस भीषण विस्फोट में न केवल घर की दीवारें और छत ताश के पत्तों की तरह ढह गईं, बल्कि घर में मौजूद एक बुजुर्ग ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई, जिससे आसपास के लोग दहशत में आ गए।READ ALSO:-बिजनौर में 'वर्चस्व' की जंग: बीच सड़क पर भिड़े किन्नरों के दो गुट, जमकर हुई मारपीट; गाड़ी के शीशे तोड़े   घटना का विस्तृत विवरण: कैसे हुआ हादसा?     1. गैस लीकेज बनी काल का कारण शुरुआती जांच और चश्मदीदों के अनुसार, घर के रसोई घर में गैस सिलेंडर से रिसाव (Leakage) हो रहा था। माना जा रहा है कि रात भर गैस कमरे में भरती रही और सुबह जैसे ही किसी ने आग जलाने की कोशिश की या बिजली का स्विच ऑन किया, पूरी गैस ने आग पकड़ ली और सिलेंडर फट गया। @Shakeel57767846 बिजनौर में मौत बनकर फटा सिलेंडर: शेरकोट में मलबे के ढेर में तब्दील हुआ घर, धमाके की गूंज से सहमा इलाका, एक बुजुर्ग की दर्दनाक मौत pic.twitter.com/ksUsyrpOkU — MK Vashisth (@vadhisth) January 25, 2026   2. मलबे में तब्दील हुआ आशियाना विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस कमरे में सिलेंडर फटा, उसकी छत पूरी तरह उड़ गई और दीवारें ढह गईं। ईंटें और पत्थर काफी दूर तक जाकर गिरे। आसपास के मकानों में भी दरारें आने की सूचना है।   3. बुजुर्ग की दर्दनाक मौत हादसे के वक्त घर में मौजूद बुजुर्ग सदस्य मलबे की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों ने मलबे से उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतक के परिवार में अब मातम छाया हुआ है।   पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही थाना शेरकोट की पुलिस भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। दमकल विभाग की गाड़ियों को भी अलर्ट किया गया।      तफ्तीश जारी: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।  फॉरेंसिक जांच: फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ब्लास्ट सिलेंडर की गुणवत्ता की कमी से हुआ या रेगुलेटर/पाइप की लापरवाही से।  आर्थिक सहायता: प्रशासन के अधिकारी मौके पर नुकसान का आकलन कर रहे हैं ताकि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा मिल सके।     आखिर क्यों फटते हैं घरेलू सिलेंडर? सिलेंडर का फटना कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि अक्सर मानवीय चूक या तकनीकी खराबी का परिणाम होता है। यहाँ कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं:   अवैध रिफिलिंग और पुराने सिलेंडर अक्सर कई घरों में लोग गैस एजेंसी के बजाय बाहर से अवैध तरीके से सिलेंडर भरवाते हैं। ये सिलेंडर मानक के अनुरूप नहीं होते। साथ ही, सिलेंडर की एक एक्सपायरी डेट होती है जिसे नजरअंदाज करना घातक हो सकता है।   पाइप और रेगुलेटर की अनदेखी रसोई में इस्तेमाल होने वाला रबर पाइप (Suraksha Hose) अगर 2 साल से ज्यादा पुराना है, तो उसमें दरारें आ जाती हैं। गैस इन्हीं सूक्ष्म दरारों से निकलकर कमरे में जमा हो जाती है।     हवा का संचार (Ventilation) न होना यदि रसोई छोटी है और वहां खिड़की या एग्जॉस्ट फैन नहीं है, तो गैस लीकेज होने पर वह बाहर नहीं निकल पाती। ऐसी स्थिति में एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े धमाके का कारण बनती है।     जीवन रक्षा गाइड: गैस सिलेंडर के साथ सुरक्षा कैसे बरतें? इस तरह के हादसों को रोकने के लिए हमें जागरूक होना पड़ेगा। नीचे दी गई सावधानियों को हर गृहणी और परिवार के सदस्य को जानना चाहिए:   A. लीकेज का पता कैसे लगाएं?  गंध (Smell): एलपीजी में जानबूझकर 'मर्कैप्टन' मिलाया जाता है ताकि उसकी गंध तेज हो। यदि अजीब गंध आए, तो तुरंत सावधान हों।  साबुन का झाग: पाइप या जोड़ों पर साबुन का पानी लगाएं, अगर बुलबुले उठें तो समझें गैस लीक हो रही है।   B. सिलेंडर लेते समय क्या देखें? सिलेंडर की गर्दन पर तीन लोहे की पट्टियां होती हैं। उन पर A-26, B-25 जैसे कोड लिखे होते हैं। 'A' का मतलब पहली तिमाही (मार्च तक) और '26' का मतलब साल 2026 है। एक्सपायरी डेट चेक करना कभी न भूलें। C. रात को सोते समय सुरक्षा  हमेशा रेगुलेटर का नॉब बंद करके सोएं।     एक दुखद सबक शेरकोट की यह घटना दिल दहला देने वाली है। एक बुजुर्ग की जान चली गई और एक परिवार बेघर हो गया। यह हादसा हमें सिखाता है कि घर में सुरक्षा उपकरणों (जैसे फायर अलार्म या अच्छी क्वालिटी का रेगुलेटर) पर खर्च करना फिजूलखर्ची नहीं, बल्कि जीवन बीमा है। प्रशासन को भी चाहिए कि वह क्षेत्र में बिक रहे नकली गैस पाइप और रेगुलेटर के खिलाफ अभियान चलाए।    

Unknown जनवरी 25, 2026 0
Police and Politicians in Honey Trap Ring News
बिजनौर: "मोहब्बत, साजिश और खाकी का दाग..." होटल के कमरे में बनाया वीडियो, फिर वर्दी का रौब दिखाकर मांगे 10 लाख; हनी ट्रैप गैंग का पर्दाफाश

बिजनौर, डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से अपराध की एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पुलिस महकमे की साख पर बट्टा लगा दिया है। अपराध को रोकने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर थी, वही अपराधियों के साथ मिलकर एक सम्मानित व्यापारी को नोचने की साजिश रच रहे थे। थाना कीरतपुर पुलिस ने एक ऐसे हाई-प्रोफाइल 'हनी ट्रैप' (Honey Trap) गैंग का भंडाफोड़ किया है, जिसमें एक शातिर महिला, दो स्थानीय नेता और खुद पुलिस विभाग के दो सिपाही शामिल थे।Read also:-बिजनौर में 'वर्चस्व' की जंग: बीच सड़क पर भिड़े किन्नरों के दो गुट, जमकर हुई मारपीट; गाड़ी के शीशे तोड़े   यह गिरोह लोगों को पहले प्रेम के जाल में फंसाता था, फिर शारीरिक संबंध बनाने के बहाने उनका वीडियो रिकॉर्ड करता था और अंत में पुलिसिया रौब और सियासी धौंस दिखाकर लाखों रुपये की वसूली करता था। इस मामले में एक पेट्रोल पंप मालिक की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी सभासद को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, जबकि महिला और दो सिपाहियों समेत चार आरोपी फरार हैं। #BijnorPolice थाना किरतपुर पुलिस द्वारा मु0अ0सं0 18/2026 धारा 3(5)/61(2)/308(6) बी0एन0एस0 से सम्बन्धित अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया । इस संबंध मे क्षेत्राधिकारी नजीबाबाद की बाइट । #UPPolice pic.twitter.com/LT2FMWHKqE — Bijnor Police (@bijnorpolice) January 24, 2026   कैसे बुना गया साजिश का जाल? (The Modus Operandi) इस पूरी घटना की पटकथा किसी फिल्मी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है। शिकार बने पेट्रोल पंप मालिक के अनुसार, साजिश की शुरुआत जनवरी महीने की शुरुआत में हुई थी। यह वह समय था जब फौजिया (मुख्य आरोपी महिला) ने अपना जाल फेंकना शुरू किया।   स्टेप 1: डिजिटल इश्क और मीठी बातें आरोपी महिला फौजिया ने सबसे पहले पेट्रोल पंप मालिक से फोन कॉल और मैसेज के जरिए संपर्क साधा। शुरुआत में सामान्य बातचीत हुई, लेकिन धीरे-धीरे महिला ने अपनी बातों में मिठास घोलनी शुरू कर दी। वह व्यापारी को अपने प्रेम जाल में फंसाने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन देने लगी। अनजान नंबर से शुरू हुई यह दोस्ती कब 'अवैध संबंधों' की नींव बन गई, व्यापारी को इसका अंदाजा भी नहीं लगा।   स्टेप 2: होटल का कमरा और वो गलती जब बातचीत गहरी हो गई और विश्वास जीत लिया गया, तो फौजिया ने अपना अगला दांव चला। उसने पेट्रोल पंप मालिक को मिलने के लिए बिजनौर बुलाया। व्यापारी, जो अब तक महिला के आकर्षण में पूरी तरह बंध चुका था, उससे मिलने पहुंच गया। दोनों एक होटल में रुके। आरोप है कि यहीं पर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। लेकिन व्यापारी यह नहीं जानता था कि जिस पल को वह निजी समझ रहा है, उसे एक साजिश के तहत रिकॉर्ड किया जा रहा है। महिला ने चुपके से आपत्तिजनक वीडियो बना लिया, जो बाद में ब्लैकमेलिंग का सबसे बड़ा हथियार बना।   खाकी और खादी का गठजोड़: जब रक्षक बने लुटेरे आमतौर पर हनी ट्रैप के मामलों में अपराधी अकेले या अपने गिरोह के साथ काम करते हैं, लेकिन बिजनौर का यह मामला इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि इसमें 'खाकी' (पुलिस) और 'खादी' (नेता) दोनों का गठजोड़ सामने आया है। वीडियो बनने के कुछ दिन बाद ही असली खेल शुरू हुआ।   महिला ने अचानक अपना रंग बदल लिया। प्यार भरी बातें धमकियों में बदल गईं। उसने व्यापारी को वीडियो वायरल करने और बलात्कार जैसे गंभीर मुकदमे में फंसाने की धमकी देनी शुरू कर दी। और यहीं एंट्री हुई इस साजिश के अन्य किरदारों की।   आरोपियों की सूची: फौजिया: मुख्य सूत्रधार, जिसने प्रेम जाल में फंसाया। आदिल जैदी: किसान यूनियन का सदस्य, जो राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर रहा था। शाहवेज: स्थानीय सभासद (गिरफ्तार), जो मामले को सुलझाने (Settlement) के नाम पर दबाव बना रहा था। सिपाही लालू: थाना कीरतपुर में तैनात पुलिसकर्मी। सिपाही पुनीत त्यागी: थाना कीरतपुर में ही तैनात दूसरा पुलिसकर्मी।   वर्दी का डर दिखाकर 10 लाख की डिमांड पीड़ित व्यापारी का आरोप है कि ब्लैकमेलिंग के इस खेल में पुलिसकर्मी लालू और पुनीत त्यागी की भूमिका बेहद डराने वाली थी। इन पुलिसकर्मियों ने कानून का रक्षक होने के बजाय ब्लैकमेलर का साथ दिया। उन्होंने व्यापारी को डराया कि अगर उसने महिला की बात नहीं मानी और पैसे नहीं दिए, तो उसके खिलाफ रेप का केस दर्ज कर उसे जेल में सड़ा दिया जाएगा। समाज में बदनामी और जेल जाने के डर से व्यापारी मानसिक रूप से टूट गया।   इस पूरे गैंग ने मामले को रफा-दफा करने के लिए 10 लाख रुपये की मांग (Demand) रख दी। यह रकम समझौते के नाम पर मांगी जा रही थी। इसमें सभासद शाहवेज और किसान यूनियन नेता आदिल जैदी भी बिचौलिये की भूमिका निभाते हुए दबाव बना रहे थे।   पीड़ित की हिम्मत और पुलिस कप्तान का एक्शन लगातार मिल रही धमकियों और पैसों की डिमांड से परेशान होकर पेट्रोल पंप मालिक ने अंततः साहस जुटाया। उसे समझ आ गया कि अगर उसने आज पैसे दे भी दिए, तो यह सिलसिला कभी नहीं रुकेगा। वह सीधे जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) के पास पहुंचा और अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि कैसे उसे फंसाया गया है और कैसे खुद पुलिस वाले ही उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं।   मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने तुरंत नजीबाबाद के क्षेत्राधिकारी (CO) नीतीश प्रताप को जांच सौंपी। चूंकि आरोप पुलिसकर्मियों पर भी थे, इसलिए जांच बेहद निष्पक्षता और गोपनीयता से की गई।   सीओ नजीबाबाद का बयान: सीओ नीतीश प्रताप ने बताया, "एसपी महोदय के निर्देश पर हमने प्राथमिक जांच की। जांच में पेट्रोल पंप मालिक द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए गए। तकनीकी सर्विलांस और बयानों के आधार पर पुष्टि हुई कि महिला, दोनों पुलिसकर्मी और राजनीतिक व्यक्ति ब्लैकमेलिंग में शामिल थे। इसके बाद थाना कीरतपुर में सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया गया है।"   एक गिरफ्तार, चार फरार: पुलिस की दबिश जारी मुकदमा दर्ज होते ही पुलिस एक्शन में आ गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी सभासद शाहवेज को गिरफ्तार कर लिया है। उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। हालांकि, गिरोह के बाकी चार सदस्य—महिला फौजिया, किसान यूनियन नेता आदिल जैदी, और दोनों आरोपी सिपाही (लालू और पुनीत त्यागी)—अभी फरार हैं।   विभाग ने अपने ही दागी सिपाहियों पर भी शिकंजा कस दिया है। माना जा रहा है कि जल्द ही इन दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई (Suspension/Dismissal) भी की जाएगी। उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं जो उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि खाकी वर्दी पहनकर अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।   हनी ट्रैप: समाज के लिए एक बड़ा खतरा बिजनौर की यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है। हनी ट्रैप (Honey Trap) आज के डिजिटल दौर में एक संगठित अपराध बन चुका है। अपराधी सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स या फोन कॉल्स के जरिए अमीर और प्रतिष्ठित लोगों (व्यापारी, डॉक्टर, अधिकारी) को निशाना बनाते हैं।   कैसे बचें ऐसे जाल से? विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों, विशेषकर विपरीत लिंग के आकर्षक प्रोफाइल से आने वाली फ्रेंड रिक्वेस्ट या मैसेज को लेकर बेहद सतर्क रहना चाहिए।   अनजान वीडियो कॉल रिसीव न करें (अक्सर न्यूड वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर लिए जाते हैं)। जल्दबाजी में किसी अनजान व्यक्ति से मिलने होटल या एकांत जगह पर न जाएं। अगर कोई ब्लैकमेल कर रहा है, तो डरें नहीं, सीधे साइबर सेल या पुलिस से संपर्क करें।   कीरतपुर थाने का यह मामला साबित करता है कि अपराधी चाहे खाकी वर्दी में हों या खादी कुर्ते में, कानून के हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं। पेट्रोल पंप मालिक की सूझबूझ ने न केवल उसे लुटने से बचाया, बल्कि पुलिस विभाग के अंदर छिपे 'काली भेड़ों' को भी बेनकाब कर दिया। अब देखना यह होगा कि फरार पुलिसकर्मी और मुख्य आरोपी महिला कब तक पुलिस की गिरफ्त में आते हैं। फिलहाल, पूरे जिले में इस हाई-प्रोफाइल ब्लैकमेलिंग कांड की चर्चा जोरों पर है।   नोट: यह रिपोर्ट पुलिस द्वारा दी गई जानकारी और दर्ज एफआईआर (FIR) पर आधारित है। पुलिस जांच जारी है और अन्य तथ्यों के सामने आने पर अपडेट किया जाएगा।

Unknown जनवरी 25, 2026 0
Delivery Boy Ends Life in Lucknow News
UP: "हैप्पी एंडिंग करके जाएंगे..." इंस्टाग्राम पर स्टोरी लगाकर डिलीवरी बॉय ने दी जान, 4 पेज के सुसाइड नोट में लिखा- 'सॉरी मम्मी-पापा'

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र से एक बेहद मर्माहत करने वाली और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक मामूली सी बात पर, मां की डांट से नाराज होकर 20 साल के एक युवक ने मौत को गले लगा लिया। मृतक पेशे से एक डिलीवरी बॉय था और उसने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने से पहले सोशल मीडिया पर अपने दर्द का इजहार किया और एक लंबा सुसाइड नोट भी छोड़ा।READ ALSO:-बिजनौर में 'वर्चस्व' की जंग: बीच सड़क पर भिड़े किन्नरों के दो गुट, जमकर हुई मारपीट; गाड़ी के शीशे तोड़े   यह घटना न केवल एक परिवार के उजड़ने की कहानी है, बल्कि आज के युवाओं में कम होती सहनशक्ति और सोशल मीडिया पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की प्रवृत्ति का भी एक दुखद उदाहरण है। 4 पेज के सुसाइड नोट और इंस्टाग्राम पर लगाई गई 5 स्टोरी ने इस घटना को और भी ज्यादा भावुक बना दिया है।   शनिवार की वो काली रात: कैसे शुरू हुआ विवाद? घटना ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के रहमतगंज इलाके की है। मृतक की पहचान 20 वर्षीय हिमांशु शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस और परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना की शुरुआत शनिवार की रात को हुई। हिमांशु जब रात में अपने काम से घर लौटा, तो वह शराब के नशे में था।   एक मां के लिए अपने बेटे को नशे की हालत में देखना तकलीफदेह था। हिमांशु की मां, रश्मि पाल ने उसे शराब पीकर घर आने पर डांट दिया। यह एक सामान्य पारिवारिक घटना हो सकती थी, जहां एक मां अपने बेटे की भलाई के लिए उसे समझा रही थी। लेकिन, शराब के नशे में धुत हिमांशु को मां की यह डांट बर्दाश्त नहीं हुई। वह गुस्से में आ गया और घर छोड़कर चले जाने की बात करने लगा।   मां ने रोका रास्ता, तो छत से कूदकर भागा बेटा हिमांशु का गुस्सा देख मां घबरा गई। बेटे को घर से जाने से रोकने के लिए मां रश्मि पाल ने मुख्य दरवाजा बंद कर दिया। उन्हें लगा कि दरवाजा बंद होने पर बेटा शांत हो जाएगा और घर में ही रहेगा। लेकिन हिमांशु के सिर पर तो जैसे खून सवार था। दरवाजा बंद देख वह घर की छत पर चढ़ गया और वहां से कूदकर घर से बाहर निकल गया। उस वक्त किसी को अंदाजा भी नहीं था कि हिमांशु घर से नहीं, बल्कि हमेशा के लिए दुनिया से जाने की तैयारी कर रहा है।   फैजुल्लागंज का वो सन्नाटा और दोस्तों को आखिरी कॉल घर से निकलने के बाद हिमांशु सीधे फैजुल्लागंज इलाके की तरफ गया। इस दौरान उसके दिमाग में क्या चल रहा था, यह शायद उसकी आखिरी इंस्टाग्राम स्टोरीज और सुसाइड नोट से समझा जा सकता है। घर से निकलने के कुछ ही समय बाद उसने अपने करीबी दोस्तों को फोन किया।   फोन पर उसकी आवाज लड़खड़ा रही थी। उसने दोस्तों से कहा, "मैंने जहर खा लिया है।" यह सुनते ही दोस्तों के पैरों तले जमीन खिसक गई। अनहोनी की आशंका से घबराए दोस्त पागलों की तरह उसे ढूंढने निकले। लोकेशन ट्रेस करते हुए जब वे फैजुल्लागंज पहुंचे, तो वहां का नजारा देख उनकी रूह कांप गई। हिमांशु वहां बेहोशी की हालत में पड़ा था।   जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष दोस्तों ने तुरंत इसकी सूचना परिजनों को दी। बदहवास परिजन और दोस्त उसे लेकर आनन-फानन में ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, इलाज शुरू किया गया, लेकिन जहर शरीर में पूरी तरह फैल चुका था। जिंदगी और मौत के बीच चले कुछ घंटों के संघर्ष के बाद हिमांशु ने दम तोड़ दिया। एक हंसता-खेलता युवक, जो दिन भर लोगों के घर खुशियां (पार्सल) डिलीवर करता था, वह अपने ही घर में मातम डिलीवर कर गया।   4 पेज का सुसाइड नोट: हर शब्द में छिपा दर्द और पश्चाताप पुलिस को जांच के दौरान हिमांशु के पास से 4 पेज का एक विस्तृत सुसाइड नोट मिला है। इस नोट का हर एक शब्द पढ़ने वाले की आंखों में आंसू ला दे रहा है। नोट में उसने अपने माता-पिता से माफी मांगी है और अपने दोस्तों को आखिरी संदेश दिया है।   सुसाइड नोट के प्रमुख अंश: हिमांशु ने लिखा, "सॉरी मम्मी-पापा। अब मैं इस दुनिया में जीने के लायक नहीं हूं। मैं जानता हूं कि आप हमसे बहुत प्यार करते हैं। मैं अपने आप से आत्महत्या कर रहा हूं। इसमें मेरे किसी दोस्त का हाथ नहीं है। ना ही मेरे किसी परिवार वालों का हाथ है।"   उसने आगे अपनी मां के प्रति प्रेम व्यक्त करते हुए लिखा, "मम्मी आई लव यू टू। अपना और तनु (छोटी बहन) का ख्याल रखना। पापा का भी ख्याल रखना।"   दोस्तों के नाम आखिरी पैगाम: अपने जिगरी दोस्त विशाल के लिए उसने लिखा, "विशाल मेरी जान, मेरे मम्मी-पापा का ख्याल रखना। प्रियांशु तुमसे भी बोल रहे हैं। दोस्त मेरे परिवार का ध्यान रखना।"   आर्थिक जिम्मेदारियों का जिक्र: हैरानी की बात यह है कि मौत के मुहाने पर खड़े होकर भी उसे अपनी कुछ जिम्मेदारियों का अहसास था। उसने अपनी मामी के बारे में लिखा, "मामी आपके खाते से एलआईसी (LIC) की किस्त कट रही है। उसके सारे पैसे मम्मी को दे दीजिएगा।" साथ ही उसने एक चांदी की चेन को लेकर पापा से बोले गए झूठ का भी जिक्र किया और स्पष्ट किया कि वह चेन उसके दोस्त विशाल के पास नहीं है।   नोट के अंत में उसने अपने सभी दोस्तों को याद किया: "आई लव यू विशाल, आई लव यू प्रत्यूष, आई लव यू करण, आई लव यू पवन, आई लव यू, सौरभ भाई ठाकुरगंज।"   इंस्टाग्राम पर 'हैप्पी एंडिंग' की दास्तां आजकल की युवा पीढ़ी अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेती है। हिमांशु ने भी यही किया। आत्महत्या जैसा कदम उठाने से ठीक पहले उसने इंस्टाग्राम पर एक के बाद एक 5 स्टोरी अपडेट कीं। ये स्टोरी अब उसके जाने के बाद उसके दर्द की गवाही दे रही हैं।   पहली स्टोरी: बैकग्राउंड में एक बेहद दर्द भरा डॉयलाग चल रहा था- "पता नहीं किस कलम से किस्मत लिखी है मेरी, जब-जब खुश रहने की कोशिश करता हूं, तब-तब एक नया गम मिलता है।" यह लाइन बता रही थी कि वह मानसिक रूप से कितना परेशान था। दूसरी स्टोरी: यह स्टोरी सबसे ज्यादा विचलित करने वाली थी। इसमें डॉयलाग था- "जब हम दुनिया से जायेंगे तो लोग खुश होंगे, हैप्पी एंडिंग करके जाएंगे।"   शायद हिमांशु को लगा कि उसके जाने से सब ठीक हो जाएगा, लेकिन वह यह नहीं समझ पाया कि उसकी यह 'हैप्पी एंडिंग' उसके परिवार के लिए कभी न खत्म होने वाला दुख बन जाएगी।   10 दिन बाद घर लौटे पिता, खुशियां मातम में बदलीं इस घटना का एक और दुखद पहलू यह है कि हिमांशु के पिता अजय पाल, जो प्राइवेट बस चलाते हैं, घटना के समय करीब 10 दिनों के बाद घर लौटे थे। परिवार सोच रहा था कि पिता के आने पर सब साथ मिलकर समय बिताएंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पिता के घर लौटने की खुशी बेटे की मौत के मातम में बदल गई।   परिवार में अब मां रश्मि पाल और छोटी बहन तनु बची हैं। मां का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्हें बार-बार यही पछतावा हो रहा है कि काश उन्होंने उस रात उसे डांटा न होता, या काश दरवाजा बंद करने के बजाय उसे प्यार से समझा लिया होता। लेकिन समय अब वापस नहीं आ सकता।   पुलिस की कार्रवाई और जांच घटना की सूचना मिलते ही ठाकुरगंज पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला है, जिसकी पुष्टि सुसाइड नोट और दोस्तों के बयानों से होती है। फिर भी पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या हिमांशु किसी और तनाव में भी था।   एक चेतावनी और एक सबक हिमांशु की मौत सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है। क्षणिक आवेश और गुस्से में उठाया गया कदम कैसे पूरे परिवार को बर्बाद कर सकता है, यह घटना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि माता-पिता की डांट में उनका प्यार और चिंता छिपी होती है। वहीं, सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाने वाली उदास शायरी और स्टेटस को भी दोस्तों और परिजनों द्वारा गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है, ताकि समय रहते किसी की जान बचाई जा सके।   फिलहाल, ठाकुरगंज के रहमतगंज इलाके में सन्नाटा पसरा है और हर आंख नम है।   नोट: अगर आप या आपका कोई परिचित तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया अकेले न रहें। अपने दोस्तों या परिवार से बात करें। जीवन अनमोल है।

Unknown जनवरी 25, 2026 0
Bijnor Transgender Groups Clash Car Vandalized
बिजनौर में 'वर्चस्व' की जंग: बीच सड़क पर भिड़े किन्नरों के दो गुट, जमकर हुई मारपीट; गाड़ी के शीशे तोड़े

बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जिले में वर्चस्व की लड़ाई अब सड़कों पर हिंसक रूप लेती जा रही है। शनिवार शाम थाना हीमपुर दीपा क्षेत्र में दो किन्नर गुटों (Transgender Groups) के बीच पुरानी रंजिश और इलाके के बंटवारे को लेकर जमकर बवाल हुआ। आरोप है कि एक गुट ने दूसरे गुट की गाड़ी का पीछा किया, उसे बीच रास्ते में रोका और जमकर तोड़फोड़ की।READ ALSO:-अलर्ट! ट्रैफिक चालान या टोल टैक्स नहीं भरा तो नेशनल हाईवे पर ड्राइविंग भूल जाएं; सरकार कस रही है नकेल, बजट सत्र में आएगा ऐतिहासिक प्रस्ताव   इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। गनीमत रही कि इस झड़प में किसी को गंभीर चोट नहीं आई। #BijnorPolice थाना हीमपुर दीपा क्षेत्रान्तर्गत दो पक्षों के मध्य हुई मारपीट की घटना के संबंध में की जा रही पुलिस कार्यवाही के संबंध में क्षेत्राधिकारी चांदपुर जनपद बिजनौर सर की बाइट । #UPPolice pic.twitter.com/eg9Cw0jE8T — Bijnor Police (@bijnorpolice) January 25, 2026   क्या है पूरा मामला? (Incident Details) पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, घटना 24 जनवरी 2026 की शाम करीब 4:00 बजे की है। पीड़ित लता किन्नर ने थाना हीमपुर दीपा में तहरीर देकर बताया कि वह अपने साथियों के साथ गाड़ी से ग्राम उलेढ़ा और छाछी टीप के बीच से गुजर रही थीं। तभी दूसरे गुट की मुस्कान और शबनम ने अपने साथियों के साथ मिलकर उनकी गाड़ी का पीछा करना शुरू कर दिया।   आरोप है कि सुनसान जगह देखकर दूसरे पक्ष ने लता किन्नर की गाड़ी को ओवरटेक करके आगे से घेर लिया और जबरन रोक लिया।   सड़क पर तांडव: गाली-गलौज और तोड़फोड़ गाड़ी रुकते ही दूसरे गुट के लोगों ने लता किन्नर और उनके साथियों के साथ अभद्रता शुरू कर दी।   मारपीट का आरोप: पीड़ित पक्ष का कहना है कि विरोध करने पर उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। गाड़ी में तोड़फोड़: गुस्साए हमलावरों ने लाठी-डंडों या पत्थरों से हमला कर लता किन्नर की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए। गाड़ी को काफी नुकसान पहुंचाया गया है।   पुलिस की कार्रवाई और बयान (Police Action) घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हीमपुर दीपा पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई।   क्षेत्रीय अधिकारी (CO) चांदपुर, देश दीपक ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया: "दिनांक 24 जनवरी को शाम 4 बजे लता किन्नर द्वारा सूचना दी गई कि उलेढ़ा और छाछी टीप के बीच मुस्कान और शबनम पक्ष ने उनकी गाड़ी रोककर अभद्रता की और शीशे तोड़ दिए। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रथम दृष्टया किसी को गंभीर चोट नहीं आई है। तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।"   इलाके में वर्चस्व की लड़ाई स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह विवाद बधाई मांगने के इलाके (Area Distribution) और वर्चस्व को लेकर है। किन्नर समाज में अक्सर अपने-अपने क्षेत्र को लेकर विवाद होते रहते हैं, जो कभी-कभी हिंसक रूप ले लेते हैं। पुलिस अब यह जांच रही है कि इस हमले के पीछे पुराना विवाद क्या था और क्या इसमें कोई बाहरी तत्व भी शामिल था।   वर्तमान स्थिति फिलहाल, पुलिस ने घटनास्थल पर शांति व्यवस्था कायम कर ली है। दोनों पक्षों को थाने बुलाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने दोनों गुटों को सख्त हिदायत दी है कि अगर दोबारा शांति भंग करने की कोशिश की गई, तो कड़ी कार्रवाई होगी।   बिजनौर में किन्नर गुटों का यह विवाद प्रशासन के लिए चुनौती है। सार्वजनिक सड़कों पर इस तरह की गुंडागर्दी आम लोगों में भय पैदा करती है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन ऐसे विवादों का स्थायी समाधान निकालना जरूरी है ताकि भविष्य में खूनी संघर्ष को रोका जा सके।   बिजनौर के हीमपुर दीपा में 24 जनवरी की शाम लता किन्नर और मुस्कान गुट के बीच वर्चस्व को लेकर झड़प हुई। दूसरे पक्ष ने लता किन्नर की गाड़ी रोककर तोड़फोड़ और मारपीट की। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है; फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।   अस्वीकरण: यह रिपोर्ट पुलिस द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी और वादी की तहरीर पर आधारित है। जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।)

Unknown जनवरी 25, 2026 0
Fear of Moral Policing Couple Jumps from 2nd Floor
शाहजहांपुर पिज्जा शॉप कांड: "तुम किस जाति के हो?"... नूडल्स खा रहे प्रेमी जोड़े से भीड़ ने पूछे सवाल; वीडियो बनते ही दहशत में दूसरी मंजिल से कूदा कपल, हालत नाजुक

शाहजहांपुर (Shahjahanpur): उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्या आज के दौर में दो बालिगों का एक साथ बैठकर खाना खाना गुनाह है? क्या 'मॉरल पुलिसिंग' (Moral Policing) का खौफ इतना बढ़ गया है कि लोग अपनी जान देने पर उतारू हो जाएं?READ ALSO:-मेरठ: 'शक' का खूनी खेल; 5 साल के साथ को 5 मिनट में मिटा दिया, बच्चों ने बिस्तर पर देखी मां की लाश   शाहजहांपुर के कांट थाना क्षेत्र (Kant Police Station) के बरेली मोड़ (Bareilly Mod) पर स्थित एक पिज्जा शॉप में शनिवार शाम जो हुआ, वह इसी खौफ की बानगी है। यहां नूडल्स का ऑर्डर देकर बैठे एक युवक (21 वर्ष) और युवती (19 वर्ष) ने सिर्फ इसलिए दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी क्योंकि कुछ लोगों ने उनसे उनकी 'जाति' पूछनी शुरू कर दी थी और उनका वीडियो बनाने लगे थे।   यह घटना शाहजहांपुर कपल उत्पीड़न मामला (Shahjahanpur Couple Harassment Case) के रूप में सामने आई है, जिसने पुलिस प्रशासन और सामाजिक संगठनों दोनों के कान खड़े कर दिए हैं। दोनों युवक-युवती गंभीर रूप से घायल हैं और एक निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं।   शनिवार की शाम: क्या हुआ था उस पिज्जा शॉप में? पुलिस सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना शनिवार शाम की है। 21 वर्षीय युवक और 19 वर्षीय युवती बरेली मोड़ स्थित एक रेस्टोरेंट (पिज्जा शॉप) की दूसरी मंजिल पर बैठे थे। माहौल शांत था, और दोनों ने नूडल्स ऑर्डर किए थे। वे अपने खाने का इंतजार कर रहे थे और आपस में बातचीत कर रहे थे।   तभी वहां अचानक माहौल बदल गया। एक कथित हिंदू संगठन के कुछ कार्यकर्ता वहां आ धमके।   1. पहचान पत्र की मांग और जाति का सवाल: इन कार्यकर्ताओं ने कपल को घेर लिया। उन्होंने पहले उनसे पूछताछ शुरू की। सवाल सामान्य नहीं थे। उन्होंने सीधा पूछा, "तुम कौन हो? कहां से आए हो? तुम्हारी जाति क्या है?" युवक और युवती दोनों बालिग थे और उन्होंने बताया कि वे हिंदू हैं। लेकिन भीड़ का मकसद शायद तसल्ली करना नहीं, बल्कि दहशत फैलाना था।   2. मोबाइल कैमरे बने हथियार: जब कपल ने अपनी पहचान बताई, तो वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल फोन निकाल लिए। उन्होंने वीडियो बनाना शुरू कर दिया। आज के सोशल मीडिया के दौर में, किसी का वीडियो वायरल होना एक सामाजिक कलंक (Social Stigma) बन चुका है। शायद यही डर उस वक्त उन दोनों के मन में घर कर गया।   3. दहशत और छलांग: वीडियो बनता देख और भीड़ के आक्रामक रवैये से युवक बुरी तरह घबरा गया। उसे लगा कि अब उनकी बदनामी होगी या उनके साथ मारपीट की जाएगी। दहशत इतनी हावी हो गई कि युवक ने आव देखा न ताव, पिज्जा शॉप की दूसरी मंजिल की खिड़की की ग्रिल हटाई और नीचे छलांग लगा दी। अपने साथी को कूदता देख, 19 वर्षीय युवती ने भी उसी खिड़की से छलांग लगा दी।   जमीन पर गिरते ही मची चीख-पुकार दूसरी मंजिल से कंक्रीट की सड़क पर गिरने की वजह से दोनों को गंभीर चोटें आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़े। दोनों खून से लथपथ थे और दर्द से कराह रहे थे।   आनंद-फानन में स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उन्हें नजदीकी निजी अस्पताल (Private Hospital) में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, ऊंचाई से गिरने के कारण दोनों के हाथ-पैरों और रीढ़ की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर हैं। उनकी हालत स्थिर लेकिन चिंताजनक बनी हुई है।   पुलिस की कार्रवाई और एफआईआर घटना की सूचना मिलते ही कांट थाना प्रभारी और सीओ (सदर) अमित चौरसिया पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू कर दिए हैं।   पुलिस का बयान: पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शाहजहांपुर कपल उत्पीड़न मामला (Shahjahanpur Couple Harassment Case) में सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस सूत्रों ने बताया, "युवक और युवती बालिग हैं। उन्हें सार्वजनिक स्थान पर साथ बैठने का पूर्ण अधिकार है। किसी को भी कानून हाथ में लेने या निजता का हनन करने का हक नहीं है।"   पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जाति पूछने और वीडियो बनाकर डराने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।   आखिर क्यों कूदा कपल? मनोवैज्ञानिक विश्लेषण यह सवाल हर किसी के मन में है कि क्या वीडियो बनने का डर जान जाने के डर से बड़ा हो सकता है? मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि भारत में 'इज्जत' और 'सामाजिक बहिष्कार' का डर युवाओं में बहुत गहरा है।   बदनामी का डर: छोटे शहरों में अगर किसी लड़के-लड़की का वीडियो वायरल हो जाए, तो उनके परिवार की बदनामी होती है। यही डर उन्हें ऐसे आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर करता है। मॉरल पुलिसिंग का आतंक: पिछले कुछ वर्षों में, कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां भीड़ ने कपल्स के साथ मारपीट की है। यह सामूहिक हिंसा (Mob Violence) का डर भी एक बड़ा कारण है। लव जिहाद का एंगल: भीड़ द्वारा 'जाति' पूछना यह दर्शाता है कि वे यह जांचना चाहते थे कि कहीं लड़का दूसरे समुदाय का तो नहीं है। हालांकि, जब दोनों हिंदू निकले, तब भी उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, जो यह साबित करता है कि मकसद सिर्फ परेशान करना था।   मॉरल पुलिसिंग: कानून क्या कहता है? शाहजहांपुर कपल उत्पीड़न मामला (Shahjahanpur Couple Harassment Case) एक बार फिर यह याद दिलाता है कि भारत में बालिगों के अधिकारों के प्रति जागरूकता की कितनी कमी है।   भारतीय कानून के तहत कपल्स के अधिकार: अनुच्छेद 21 (Article 21): भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को 'जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता' (Right to Life and Personal Liberty) का अधिकार देता है। इसमें अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ बैठने, घूमने और बातचीत करने का अधिकार शामिल है। सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता (Section 294 BNS/IPC): केवल सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। साथ बैठकर खाना खाना, बात करना या हाथ पकड़ना 'अश्लीलता' की श्रेणी में नहीं आता। निजता का अधिकार (Right to Privacy): सुप्रीम कोर्ट के पुट्टास्वामी फैसले (Puttaswamy Judgment) के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। किसी की अनुमति के बिना उसका वीडियो बनाना और उसे परेशान करना कानूनन अपराध है।   उत्पीड़न करने वालों पर कौन सी धाराएं लग सकती हैं? भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं: गलत तरीके से रोकने (Wrongful Restraint) के लिए। हमला या आपराधिक बल (Assault) का प्रयोग करने के लिए। धमकी देने (Criminal Intimidation) के लिए। आईटी एक्ट (IT Act): किसी की अनुमति के बिना वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालना आईटी एक्ट की धारा 66E के तहत दंडनीय अपराध है।   उत्तर प्रदेश में बढ़ते मामले: एक चिंताजनक ट्रेंड शाहजहांपुर की यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी खबरें आती रही हैं। कभी पार्कों में बैठे जोड़ों को खदेड़ा जाता है, तो कभी रेस्टोरेंट में घुसकर आईडी कार्ड मांगे जाते हैं।   कुछ प्रमुख घटनाएं जिन्होंने सुर्खियां बटोरीं: मेरठ का मामला: कुछ साल पहले मेरठ में पुलिसकर्मियों द्वारा ही एक मेडिकल छात्रा और उसके दोस्त के साथ बदसलूकी का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। गाजियाबाद और नोएडा: एनसीआर के पार्कों में भी अक्सर तथाकथित सामाजिक संगठनों द्वारा कपल्स को परेशान करने की खबरें आती रहती हैं।   शाहजहांपुर कपल उत्पीड़न मामला (Shahjahanpur Couple Harassment Case) इस कड़ी में एक नया और भयावह अध्याय है क्योंकि यहां पीड़ितों ने डर के मारे अपनी जान जोखिम में डाल दी।   भीड़तंत्र और 'जाति' का सवाल इस घटना में सबसे हैरान करने वाला पहलू 'जाति' (Caste) का सवाल था। भीड़ ने यह क्यों पूछा?   विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तथाकथित 'लव जिहाद' (Love Jihad) के शक से जुड़ा मामला था। भीड़ यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि लड़का किसी विशेष समुदाय का तो नहीं है। लेकिन विडंबना यह है कि जब दोनों एक ही धर्म के निकले, तो भी उन्हें बख्शा नहीं गया। यह साबित करता है कि ऐसी भीड़ का असली मकसद धर्म की रक्षा नहीं, बल्कि अपनी ताकत दिखाना (Power Play) और दूसरों को डराना होता है।   युवाओं को सलाह: ऐसी स्थिति में क्या करें? अगर आप किसी सार्वजनिक स्थान पर अपने मित्र या साथी के साथ हैं और कोई भीड़ या व्यक्ति आपको परेशान करता है, तो घबराने के बजाय सूझबूझ से काम लें:   शांति बनाए रखें: बहस न करें, क्योंकि भीड़ उग्र हो सकती है। वीडियो बनाएं: अगर वे आपका वीडियो बना रहे हैं, तो आप भी उनका वीडियो बनाएं। यह बाद में सबूत के तौर पर काम आएगा। 112 डायल करें: तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल करें। लोकेशन बताएं और कहें कि आपको खतरा है। भागने की कोशिश खतरनाक हो सकती है: जैसा कि शाहजहांपुर कपल उत्पीड़न मामला (Shahjahanpur Couple Harassment Case) में देखा गया, घबराहट में भागना या कूदना जानलेवा हो सकता है। भीड़भाड़ वाले इलाके की तरफ जाएं या वहीं बैठकर पुलिस का इंतजार करें। कानून जानें: आत्मविश्वास से कहें कि आप बालिग हैं और आपको वहां रहने का अधिकार है।   प्रशासन की जिम्मेदारी और आगे की राह इस घटना के बाद शाहजहांपुर पुलिस प्रशासन पर दबाव है कि वह आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करे। यह सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह कानून के राज (Rule of Law) को चुनौती है। अगर पिज्जा शॉप जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थानों पर भी युवा सुरक्षित नहीं हैं, तो हम किस समाज का निर्माण कर रहे हैं? रेस्टोरेंट मालिकों को भी चाहिए कि वे अपने ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और असामाजिक तत्वों के घुसते ही पुलिस को सूचित करें।   शाहजहांपुर कपल उत्पीड़न मामला (Shahjahanpur Couple Harassment Case) एक गंभीर चेतावनी है। यह बताता है कि समाज में असहिष्णुता और मॉरल पुलिसिंग किस हद तक जड़ें जमा चुकी है। 21वीं सदी के भारत में, नूडल्स खा रहे दो युवाओं का अपनी जान बचाने के लिए इमारत से कूद जाना, हम सभी के लिए शर्मिंदगी का विषय होना चाहिए। उम्मीद है कि पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में किसी भी जोड़े को ऐसे खौफनाक मंजर से न गुजरना पड़े।   यूपी के शाहजहांपुर में मॉरल पुलिसिंग के डर से एक प्रेमी जोड़े ने पिज्जा शॉप की दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी। एक संगठन के लोगों ने उनसे जाति पूछी और वीडियो बनाने लगे, जिससे घबराकर उन्होंने यह कदम उठाया। दोनों गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना समाज में बढ़ती असहिष्णुता और निजता के हनन को उजागर करती है।

Unknown जनवरी 25, 2026 0
Meerut Wife Murder Husband Arrested
मेरठ: 'शक' का खूनी खेल; 5 साल के साथ को 5 मिनट में मिटा दिया, बच्चों ने बिस्तर पर देखी मां की लाश

उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई थी, जिसने रिश्तों की मर्यादा और विश्वास को तार-तार कर दिया था। एक हंसता-खेलता परिवार महज 'शक' (Suspicion) की आग में जलकर खाक हो गया। मेडिकल थाना क्षेत्र में हुई चित्रा नाम की महिला की हत्या की गुत्थी को सुलझाते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी और उसके पार्टनर विशु वाल्मीकि को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है।READ ALSO:-यूपी में कुदरत का डबल अटैक: पहाड़ों जैसी ठंड और आसमान से बरसती आफत; अंगीठी की 'जहरीली गर्मी' ने ली दो जान   वारदात के बाद से आरोपी पिछले 6 दिनों से पुलिस को चकमा दे रहा था। शनिवार की रात पुलिस ने सटीक मुखबिरी के आधार पर उसे जागृति विहार एक्सटेंशन से दबोच लिया। पुलिस की पूछताछ में जो कहानी सामने आ रही है, वह समाज में बढ़ते अविश्वास और लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) में पनप रहे अपराधों की ओर इशारा करती है।   इस विशेष रिपोर्ट में पढ़िए कि कैसे एक विधवा महिला ने नई जिंदगी की शुरुआत की थी, लेकिन उसे क्या मालूम था कि जिसे वह सहारा मान रही है, वही उसका काल बन जाएगा।   गिरफ्तारी और पुलिस का एक्शन:-   6 दिन की लुका-छिपी का अंत 19 जनवरी को हुई इस वारदात के बाद से आरोपी विशु वाल्मीकि फरार था। मेरठ पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में दबिश दे रही थीं। मेडिकल थाना प्रभारी सतवीर सिंह अत्री ने बताया कि सर्विलांस और मुखबिरों के जाल के जरिए पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी जागृति विहार एक्सटेंशन इलाके में छिपा हुआ है और कहीं भागने की फिराक में है।   बिना वक्त गंवाए पुलिस टीम ने शनिवार रात इलाके की घेराबंदी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। अब उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेजने की तैयारी की जा रही है। पुलिस हत्या में इस्तेमाल किए गए तरीकों और अन्य सबूतों को जुटाने के लिए रिमांड की मांग भी कर सकती है।   फ्लैशबैक - प्रेम, पुनर्विवाह और फिर नफरत:-   चित्रा का संघर्षपूर्ण अतीत मूल रूप से बुलंदशहर (Bulandshahr) जिले के टांडा गांव की रहने वाली चित्रा जाटव की जिंदगी दुखों से भरी थी।   पहला झटका: चित्रा के पहले पति की मृत्यु कुछ साल पहले हो गई थी। पति की मौत के बाद वह अकेली पड़ गई थीं। उनके दो बच्चे थे - बेटी परी और बेटा हर्ष। नई उम्मीद: पति के जाने के बाद बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी चित्रा के कंधों पर थी। इसी दौरान, करीब 5 साल पहले उनकी मुलाकात रोहटा रोड, मेरठ के रहने वाले विशु वाल्मीकि से हुई। लिव-इन और उम्मीदें: दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे साथ रहने लगे। समाज की नजर में यह एक लिव-इन रिलेशनशिप या दूसरा विवाह था। वे मेरठ के शास्त्री नगर न्यू के-ब्लॉक में किराए के मकान में रह रहे थे।   वह एक साल, जिसने सब बदल दिया पुलिस जांच में सामने आया है कि पिछले 5 साल सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन बीते एक साल से दोनों के रिश्तों में खटास आ गई थी।   विवाद की जड़: बताया जा रहा है कि विशु को चित्रा पर 'शक' था। यह शक किस बात को लेकर था, अभी पुलिस इसकी विस्तृत जांच कर रही है, लेकिन इसी शक ने रोजमर्रा के झगड़ों को जन्म दिया। दहेज का आरोप: चित्रा के भाई रिंकू जाटव ने जो एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है, उसमें दहेज हत्या का आरोप लगाया गया है। परिजनों का कहना है कि विशु अक्सर चित्रा को प्रताड़ित करता था।   जनवरी की वो काली शाम घटना वाले दिन यानी 19 जनवरी को जो हुआ, वह किसी भी पत्थर दिल इंसान को पिघला देने के लिए काफी है। इस अपराध में सबसे ज्यादा नुकसान उन दो मासूम बच्चों (परी और हर्ष) का हुआ है, जिन्होंने अपनी मां को खो दिया और सौतेले पिता को जेल जाते देखेंगे।   साजिश या आवेश? पुलिस थ्योरी के मुताबिक, घटना वाले दिन विशु ने एक खौफनाक योजना बनाई या फिर गुस्से में ऐसा कदम उठाया:   बच्चों को हटाया: विशु ने बड़ी चालाकी से चित्रा के दोनों बच्चों (परी और हर्ष) को घर से बाहर भेज दिया या मकान के पास छोड़ दिया, ताकि वे घर के अंदर न रहें। वारदात: अकेलेपन का फायदा उठाकर उसने चित्रा की हत्या कर दी। हत्या कैसे की गई (गला दबाकर या किसी हथियार से), इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट होगा। फरारी: हत्या करने के बाद विशु वहां से फरार हो गया।   मासूमों का दर्द जब बच्चे खेल-कूद कर वापस घर लौटे, तो उन्होंने जो मंजर देखा, वह उनकी रूह कंपाने वाला था। उनकी मां बिस्तर पर पड़ी थीं, लेकिन कोई हलचल नहीं हो रही थी। बच्चों के रोने की आवाज सुनकर पड़ोसी इकट्ठा हुए, लेकिन तब तक चित्रा की सांसे थम चुकी थीं।   कानूनी पेच और धाराएं इस मामले में पुलिस ने चित्रा के भाई रिंकू की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया है।   लगाई गई धाराएं: पुलिस ने दहेज हत्या (Dowry Death) और हत्या की धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस का बयान: थाना प्रभारी सतवीर सिंह अत्री ने कहा, "आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। हम उससे पूछताछ कर रहे हैं कि हत्या के पीछे का तात्कालिक कारण (Immediate Provocation) क्या था। क्या उस दिन कोई बड़ा झगड़ा हुआ था या यह प्री-प्लांड मर्डर था।"   सामाजिक विश्लेषण (Crime Analysis) मेरठ की यह घटना हमारे समाज में बढ़ते 'इंटीमेट पार्टनर वायलेंस' (Intimate Partner Violence) का एक और उदाहरण है।   शक का इलाज नहीं: अपराध विज्ञान (Criminology) के अनुसार, वैवाहिक या लिव-इन रिश्तों में होने वाली हत्याओं में 'चरित्र पर शक' एक बहुत बड़ा कारण है। यह एक ऐसा मानसिक विकार बन जाता है जहां तर्क काम नहीं करता। बच्चों का भविष्य: इस घटना ने परी और हर्ष को अनाथ कर दिया है। पहले पिता का साया उठा और अब मां की हत्या हो गई। ऐसे मामलों में बच्चों की काउंसलिंग और पुनर्वास (Rehabilitation) पुलिस और बाल कल्याण समिति (CWC) के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। किराएदारों का सत्यापन: यह घटना मकान मालिकों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे अपने किराएदारों के बीच हो रहे झगड़ों को नजरअंदाज न करें। अक्सर घरेलू हिंसा की आवाजें अनसुनी कर दी जाती हैं, जो बाद में हत्या में बदल जाती हैं।   मेरठ पुलिस ने 6 दिन के भीतर आरोपी को पकड़कर अपनी तत्परता दिखाई है, लेकिन चित्रा को अब वापस नहीं लाया जा सकता। यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि रिश्तों में संवादहीनता और शक किस हद तक घातक हो सकता है। पुलिस अब चार्जशीट दाखिल कर आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की कोशिश करेगी।   आगे की अपडेट: पुलिस की पूछताछ में विशु क्या नए खुलासे करता है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की असली वजह क्या आती है, इस पर हमारी नजर बनी रहेगी।   (नोट: यदि आप या आपके आसपास कोई घरेलू हिंसा का शिकार हो रहा है, तो कृपया पुलिस हेल्पलाइन 112 या महिला हेल्पलाइन 1090 पर तुरंत संपर्क करें। आपकी एक कॉल किसी की जान बचा सकती है।)

Unknown जनवरी 25, 2026 0
UP Weather Alert and Noida Tragedy
यूपी में कुदरत का डबल अटैक: पहाड़ों जैसी ठंड और आसमान से बरसती आफत; अंगीठी की 'जहरीली गर्मी' ने ली दो जान

उत्तर प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। पहाड़ों पर हो रही भीषण बर्फबारी और मैदानी इलाकों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण पूरे प्रदेश में शीतलहर और बारिश का दौर शुरू हो गया है। इस बदलते मौसम के बीच नोएडा से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां ठंड से बचने के लिए कमरे में अंगीठी जलाकर सोना दो चचेरे भाइयों के लिए जानलेवा साबित हुआ।READ ALSO:-यूपी बोर्ड 2026: प्रैक्टिकल परीक्षा की तारीखों में बड़ा फेरबदल! 29-30 जनवरी को भी होंगे एग्जाम, सचिव ने जारी किया 'अर्जेंट' आदेश   मौसम विभाग (IMD) ने आज भी प्रदेश के 15 जिलों में ओलावृष्टि और 20 जिलों में तेज आंधी का अलर्ट जारी किया है। आने वाले दिनों में तापमान में भारी गिरावट और कोहरे की वापसी की आशंका जताई गई है।   नोएडा में ठंड का कहर: अंगीठी बनी काल दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शुक्रवार से ही मौसम खराब था। बारिश के कारण ठंड और गलन बढ़ गई थी। इसी ठंड से बचने की कोशिश में नोएडा के सेक्टर-63 स्थित छिजारसी कॉलोनी में एक बड़ा हादसा हो गया।   मुरादाबाद के रहने वाले दो चचेरे भाई, फुरकान (35) और साहिल (18), जो नोएडा में मजदूरी कर अपना जीवनयापन कर रहे थे, शुक्रवार रात ठंड से बचने के लिए अपने कमरे में अंगीठी जलाकर सोए थे। बंद कमरे में अंगीठी जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड (Carbon Monoxide - CO) गैस बन गई, जिससे दोनों का दम घुट गया और उनकी नींद में ही मौत हो गई।   क्या हुआ उस रात? परिजनों के मुताबिक, शुक्रवार को बारिश की वजह से ठंड बहुत ज्यादा थी। दोनों भाइयों ने रात में अपने परिवार से फोन पर बात की थी और सब कुछ सामान्य था। लेकिन, सुबह जब परिजनों ने उन्हें फोन किया, तो कॉल रिसीव नहीं हुई। अनहोनी की आशंका होने पर परिजनों ने पास में रहने वाले उनके साथियों को संपर्क किया। जब साथी उनके कमरे पर पहुंचे और दरवाजा तोड़ा, तो दोनों बेहोश पड़े थे। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   सावधानी ही बचाव है: (Internal link to related article: बंद कमरे में हीटर या अंगीठी जलाने के नुकसान और बचाव के तरीके)   साइलेंट किलर है 'कार्बन मोनोऑक्साइड' यह घटना पहली बार नहीं हुई है। हर साल सर्दियों में अंगीठी या ब्लोअर जलाकर सोने से कई लोगों की जान जाती है। विज्ञान की भाषा में इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है।   कैसे होती है मौत? जब बंद कमरे में कोयला या लकड़ी जलती है, तो ऑक्सीजन कम होने लगती है और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस बनती है। लक्षण नहीं दिखते: यह गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, इसलिए सो रहे व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि वह जहर अंदर ले रहा है। शरीर पर असर: यह गैस खून में हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर ऑक्सीजन की सप्लाई रोक देती है, जिससे व्यक्ति 'कोमा' में चला जाता है और अंततः उसकी मौत हो जाती है।   मौसम का मिजाज: आज 15 जिलों में ओले, 20 में आंधी का अलर्ट पहाड़ी राज्यों में हो रही भारी बर्फबारी का सीधा असर उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में दिख रहा है। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, आज का दिन भी प्रदेशवासियों के लिए भारी रहने वाला है।   आज का वेदर अलर्ट (Today's Weather Alert): ओलावृष्टि की चेतावनी (15 जिले): सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, संभल, बदायूं और इनके आसपास के क्षेत्र। तेज आंधी का अलर्ट (20 जिले): ऊपर दिए गए जिलों के अलावा बागपत, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, पीलीभीत और शाहजहांपुर में 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। बारिश का रिकॉर्ड: बीते 48 घंटों में पूर्वी और पश्चिमी यूपी में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। संभल में सबसे ज्यादा 95 मिमी बारिश हुई है। इसके अलावा लखनऊ, कानपुर, हरदोई और एनसीआर के इलाकों में भी जमकर बादल बरसे हैं।   क्यों बदला अचानक मौसम? (Meteorological Analysis) मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय है।   हवाओं की दिशा में बदलाव: पहले प्रदेश में पूर्वा हवाएं चल रही थीं, लेकिन अब उनकी जगह 'पछुआ' (Westerly) हवाओं ने ले ली है। पछुआ हवाएं अपने साथ पहाड़ों की ठंडक लेकर आ रही हैं। नमी का असर: अरब सागर से उठी नमी और पहाड़ों की ठंडी हवाओं के मिलने से बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बनी है।   आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह का कहना है, "बदले हुए मौसम के बीच 27 जनवरी से एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इससे दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। हालांकि पश्चिमी यूपी में न्यूनतम तापमान बढ़ सकता है, लेकिन दिन में बादलों के कारण ठंडक बनी रहेगी।"   अगले 4 दिनों का मौसम पूर्वानुमान (Weather Forecast Jan 26-29) मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है। 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के बाद बारिश का एक नया दौर शुरू होने की प्रबल संभावना है।   तारीख मौसम का हाल चेतावनी 26 जनवरी मौसम साफ रहने का अनुमान, कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी संभव। सर्द हवाएं चलेंगी, सुबह कोहरा रह सकता है। 27 जनवरी बादल छाए रहेंगे, हल्की बारिश की शुरुआत। तापमान में गिरावट, नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। 28 जनवरी पश्चिमी यूपी में गरज-चमक के साथ बारिश। पूर्वी यूपी में भी बौछारें। ओलावृष्टि की संभावना, बिजली गिरने का खतरा। 29 जनवरी गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश। तेज हवाएं (30-40 kmph) चल सकती हैं।   किसानों के लिए जरूरी सलाह: फसल पर असर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने अन्नदाताओं की चिंता बढ़ा दी है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मौसम 'मिश्रित फल' लेकर आया है - यानी कुछ फसलों के लिए यह अमृत है, तो कुछ के लिए जहर।   इन फसलों को होगा फायदा: गेहूं (Wheat): गेहूं की फसल के लिए यह बारिश और ठंड किसी टॉनिक से कम नहीं है। इससे दाने मजबूत होंगे और पैदावार बढ़ेगी। चना और मसूर: दलहन की इन फसलों को भी हल्की बारिश से फायदा मिलेगा।   इन फसलों को भारी नुकसान: सरसों (Mustard): जिन खेतों में सरसों की फसल पकने की कगार पर है या फूल आ चुके हैं, वहां ओलावृष्टि और तेज बारिश से फसल गिरने (Lodging) का खतरा है। इससे दाना काला पड़ सकता है। आलू (Potato): खेतों में पानी भरने से आलू में सड़न (Rotting) या 'झुलसा रोग' (Late Blight) लगने की आशंका बढ़ गई है। मटर: मेरठ, हाथरस और इटावा में मटर के दाने के बराबर ओले गिरने से मटर की फसल को भारी क्षति पहुंची है।   किसानों को सलाह (Advisory): कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जलभराव न होने दें। यदि आलू या सरसों में फंगस का प्रकोप दिखता है, तो मौसम साफ होते ही 'मैनकोजेब' (Mancozeb) या उचित कवकनाशी (Fungicide) का छिड़काव करें। साथ ही, पशुओं को भी खुले में न बांधें।   शहरों का हाल: अयोध्या सबसे ठंडा, लखनऊ में 'गर्म' रात मौसम की इस उठापटक में तापमान के दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं।   अयोध्या: भगवान राम की नगरी अयोध्या पिछले 24 घंटों में प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 8°C दर्ज किया गया। लखनऊ: राजधानी लखनऊ में एक अजीब रिकॉर्ड बना। यहां शुक्रवार की रात सीजन की सबसे 'गर्म' रात रही। न्यूनतम तापमान 15.4°C दर्ज किया गया। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2005, 2007 और 2019 के बाद जनवरी की यह चौथी सबसे गर्म रात थी। इसका कारण आसमान में छाए घने बादल थे, जिन्होंने धरती की गर्मी को बाहर नहीं निकलने दिया (Greenhouse effect)।   यूपी में मौसम का यह बदलाव अभी कुछ दिन और जारी रहेगा। 26 जनवरी के बाद बारिश का दूसरा दौर ठंड को और बढ़ा सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचें।   खासकर, नोएडा हादसे से सबक लेते हुए, यह अपील की जाती है कि ठंड से बचने के लिए बंद कमरे में हीटर, ब्लोअर या अंगीठी का प्रयोग बहुत सावधानी से करें। वेंटिलेशन (हवादार रोशनदान) का होना अनिवार्य है। आपकी थोड़ी सी सावधानी किसी बड़े हादसे को टाल सकती है। मौसम की ताजा अपडेट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।   यूपी में पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम ने पलटी मारी है। 15 जिलों में ओले और 20 जिलों में आंधी का अलर्ट है। नोएडा में अंगीठी जलाकर सोने से दो भाइयों की मौत ने सुरक्षा के प्रति गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 27-28 जनवरी को फिर बारिश होगी, जो गेहूं के लिए अच्छी लेकिन सरसों-आलू के लिए नुकसानदेह हो सकती है।

Unknown जनवरी 25, 2026 0
Meerut Pollution Control Plan E Buses and New Plants
मेरठ में वायु प्रदूषण: 2026 तक सांस लेना होगा आसान, 540 इलेक्ट्रिक बसों और कचरा निस्तारण का मेगा प्लान तैयार

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा होने के नाते, मेरठ लंबे समय से विकास की दौड़ में तो आगे रहा है, लेकिन प्रदूषण के मामले में भी यह शहर अक्सर गंभीर श्रेणी में गिना जाता रहा है। सर्दियों में स्मॉग की चादर और गर्मियों में उड़ती धूल ने यहाँ की आबोहवा को जहरीला बना दिया था। लेकिन अब, मेरठ नगर निगम और प्रशासन ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदलने का संकल्प लिया है।Read also:-आधार-LPG लिंक: आधार-LPG गैस ल‍िंक नहीं करने वालों को होगा बड़ा नुकसान; Online पूरा कर लें ये काम   मेरठ शहर को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और स्मार्ट बनाने के लिए एक व्यापक और महत्त्वाकांक्षी 'एक्शन प्लान' तैयार किया गया है। यह केवल कागजी घोड़ा नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरने वाली एक ठोस रणनीति है। लखनऊ में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने जो खाका (Blue Print) पेश किया है, वह बताता है कि 2026 तक मेरठ की हवा में 20 से 30 प्रतिशत तक का सुधार देखने को मिलेगा। इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से लेकर मलबे के वैज्ञानिक निस्तारण तक, हर मोर्चे पर काम शुरू होने वाला है।   लखनऊ में मंथन - अधिकारियों ने तय किया रोडमैप प्रदूषण नियंत्रण की इस महायोजना को अंतिम रूप देने के लिए लखनऊ में एक निर्णायक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक सामान्य नहीं थी, क्योंकि इसमें नीति निर्धारण करने वाले शीर्ष अधिकारी मौजूद थे।   कौन-कौन था मौजूद? शुक्रवार को हुई इस बैठक में निम्नलिखित दिग्गजों ने हिस्सा लिया: राजीव वर्मा: चेयरमैन, कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) इन नेशनल कैपिटल रीजन एंड एडज्वाइनिंग एरियाज। (इनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार मेरठ के प्रदूषण को लेकर कितनी गंभीर है।) पी. गुरु प्रसाद: प्रमुख सचिव, नगर विकास। अनिल कुमार तृतीय: प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण। सौरभ गंगवार: नगर आयुक्त, मेरठ (जिन्होंने शहर का पक्ष और योजना प्रस्तुत की)।   इस बैठक में नगर आयुक्त ने मेरठ शहर की वायु गुणवत्ता सुधार का 'वार्षिक एक्शन प्लान' (Annual Action Plan) प्रस्तुत किया। इस प्लान का मुख्य उद्देश्य केवल प्रदूषण कम करना नहीं, बल्कि शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य की जरूरतों (Future Ready) के हिसाब से तैयार करना है।   पब्लिक ट्रांसपोर्ट में क्रांति - इलेक्ट्रिक बसों का युग परिवहन (Transport) किसी भी शहर में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारक होता है। पेट्रोल और डीजल के वाहन न केवल कार्बन उत्सर्जन करते हैं, बल्कि पीएम 2.5 (PM 2.5) कणों के स्तर को भी बढ़ाते हैं। मेरठ प्रशासन ने इस समस्या की जड़ पर प्रहार करने का फैसला किया है।   लक्ष्य 2030: 540 ई-बसों का बेड़ा एक्शन प्लान के अनुसार, मेरठ में कार्बन उत्सर्जन को शून्य (Zero Emission) की तरफ ले जाने के लिए डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।   दीर्घकालिक लक्ष्य: वर्ष 2030 तक शहर में कुल 540 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की आवश्यकता का आकलन किया गया है। तात्कालिक लक्ष्य (2026): पीएम ई-बस सेवा स्कीम (PM E-Bus Sewa Scheme) के तहत, वर्ष 2026 में 100 नई ई-बसों का प्रस्ताव दिया गया है।   वर्तमान स्थिति और चुनौतियां फिलहाल शहर में 50 ई-बसें संचालित हो रही हैं। ये बसें प्रदूषण रहित तो हैं ही, साथ ही यात्रियों को आरामदायक सफर भी मुहैया करा रही हैं। लेकिन शहर की आबादी और विस्तार को देखते हुए यह संख्या 'ऊंट के मुंह में जीरा' समान है। 100 नई बसों के आने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम मजबूत होगा और लोग निजी वाहनों (कार/बाइक) को छोड़कर बसों में सफर करने के लिए प्रेरित होंगे।   इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास: चार्जिंग और पार्किंग  केवल बसें खरीदना काफी नहीं है, उन्हें चलाने के लिए बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है।   चार्जिंग स्टेशन: ई-बसों की संख्या बढ़ाने के साथ ही शहर में 22 ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (EV Charging Stations) तैयार किए जाएंगे। इससे न केवल बसों को बल्कि निजी इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को भी फायदा होगा। पार्किंग प्रबंधन: शहर में जाम की समस्या प्रदूषण को बढ़ाती है। फिलहाल सरकारी और प्राइवेट मिलाकर कुल 21 पार्किंग स्थल हैं, जिनकी क्षमता 1050 वाहनों की है। नई पार्किंग योजना: सीएम ग्रिड योजना (CM Grid Scheme) के तहत बनी सड़कों पर 15 नई सरफेस पार्किंग बनाई जा रही हैं। इसके अलावा, एक मल्टीलेवल कार पार्किंग का निर्माण भी प्रगति पर है। इससे सड़कों पर खड़े वाहनों से लगने वाला जाम खत्म होगा और ईंधन की बर्बादी रुकेगी।   'डस्ट-फ्री मेरठ' - धूल के खिलाफ जंग विशेषज्ञों का मानना है कि एनसीआर में प्रदूषण का एक बड़ा कारण 'रोड डस्ट' (Road Dust) यानी सड़कों से उड़ने वाली धूल है। जब गाड़ियां चलती हैं, तो सड़क किनारे पड़ी धूल हवा में मिल जाती है और पीएम 10 (PM 10) का स्तर खतरनाक हो जाता है।   890 किमी सड़कों का कायाकल्प नगर निगम ने शहर के रोड नेटवर्क का विस्तृत सर्वे कराया है।   कुल रोड नेटवर्क: 2967 किलोमीटर। अच्छी स्थिति में: 2076 किलोमीटर। धूल मुक्त बनाने का लक्ष्य: 890 किलोमीटर सड़कें ऐसी हैं जिन्हें 'डस्ट-फ्री' बनाने की आवश्यकता है।   कैसे बनेंगी सड़कें धूल रहित? केवल झाड़ू लगाने से धूल खत्म नहीं होगी। इसके लिए इंजीनियरिंग आधारित समाधान अपनाए जाएंगे:   वॉल-टू-वॉल पेविंग (Wall-to-Wall Paving): सड़कों के किनारे बची हुई कच्ची जमीन (Side Berms) को पक्का किया जाएगा। इंटरलॉकिंग टाइल्स: फुटपाथों और पटरियों पर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाई जाएंगी ताकि मिट्टी खुली न रहे। ग्रीन बेल्ट: जहाँ जगह होगी, वहां हरियाली विकसित की जाएगी ताकि धूल न उड़े। बजट: इस काम के लिए 1300 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि की जरूरत है। फिलहाल निगम के पास इस मद में 103 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं, बाकी फंड के लिए सरकार से मांग की जाएगी।   कचरा प्रबंधन (Waste Management) - जीरो वेस्ट सिटी का सपना कूड़ा जलाना और कूड़े के पहाड़ों से निकलने वाली मीथेन गैस प्रदूषण का बड़ा कारण है। मेरठ नगर निगम ने अब 'कचरे से कंचन' (Waste to Wealth) की नीति अपना ली है। गाँवड़ी (Gawdi) अब शहर का डंपिंग ग्राउंड नहीं, बल्कि 'प्रोसेसिंग हब' बनेगा।   1. सी एंड डी (C&D) वेस्ट प्लांट: मलबे का समाधान निर्माण और तोड़फोड़ (Construction and Demolition) से निकलने वाला मलबा हवा में धूल के कण घोलता है।   स्थान: गाँवड़ी। क्षमता: 100 टन प्रतिदिन। समय सीमा: अक्टूबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य। लागत: 5.51 करोड़ रुपये। प्रक्रिया: इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। इस प्लांट में मकानों के मलबे को रिसाइकिल करके ईंटें, टाइल्स और अन्य निर्माण सामग्री बनाई जाएगी। इससे न केवल मलबा खत्म होगा, बल्कि निर्माण सामग्री भी मिलेगी।   2. ताजे कूड़े का 100% निस्तारण शहर से रोज निकलने वाले कचरे को अब डंप नहीं किया जाएगा, बल्कि उसी दिन प्रोसेस किया जाएगा।   कुल क्षमता: 900 टन प्रतिदिन। तकनीक: बैलेस्टिक सेपरेटर प्लांट (Ballistic Separator Plant)। 30 टन प्रति घंटे का एक प्लांट पहले से चल रहा है। लोहिया नगर से 60 टन प्रति घंटे का प्लांट शिफ्ट किया गया है। दोनों प्लांट 10 घंटे चलने पर 900 टन कूड़ा निपटाएंगे। परिणाम: कूड़े से आरडीएफ (Refuse Derived Fuel), कंपोस्ट (खाद) और ईंट-पत्थर अलग किए जाएंगे। RDF: बेचा जाएगा (ऊर्जा उत्पादन के लिए)। कंपोस्ट: किसानों को सस्ती दर पर दी जाएगी। निष्क्रिय कचरा: भराव (Landfilling) में उपयोग होगा। एजेंसी: ब्रिजेंद्रा एनर्जी कंपनी (Brijendra Energy Company) का चयन हो गया है। निस्तारण की दर लगभग 190 रुपये प्रति टन तय की गई है।   3. वेस्ट टू चारकोल (Waste to Charcoal) - भविष्य की तकनीक यह मेरठ के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।   प्रस्ताव: 900 टन क्षमता का वेस्ट टू चारकोल प्लांट। अनुबंध: एनटीपीसी (NTPC) के साथ समझौता हुआ है। फायदा: इस तकनीक से कचरे को 'टोरिफाइड चारकोल' (Torrefied Charcoal) में बदला जाएगा, जिसका उपयोग बिजली संयंत्रों में कोयले के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। यह पूर्णतः पर्यावरण अनुकूल तकनीक है।   4. लीगेसी वेस्ट (पुराना कूड़ा) का सफाया शहर में सालों से जमा कूड़े के पहाड़ों (Legacy Waste) को भी हटाया जा रहा है।   लोहिया नगर: यहाँ डीसीसी कंपनी ने प्लांट लगाया है। मई 2027 तक यहाँ का पूरा कूड़ा खत्म करने का लक्ष्य है। मंगतपुरम: यहाँ सितंबर 2026 तक कूड़े का निस्तारण पूरा कर लिया जाएगा।   वित्तीय प्रबंधन - कहाँ से आएगा पैसा? प्रदूषण नियंत्रण के उपाय महंगे होते हैं। मेरठ को इसके लिए 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission) से मदद मिल रही है।   कुल आवंटन: वायु गुणवत्ता सुधार के लिए 187 करोड़ रुपये मिले थे। खर्च: अब तक 166 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं। शेष राशि: 88 करोड़ रुपये अभी भी शेष हैं, जिनका उपयोग आगामी परियोजनाओं में किया जाएगा।   लक्ष्य 2026 - आंकड़ों की जुबानी नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने जो एक्शन प्लान पेश किया है, उसमें हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए स्पष्ट संख्यात्मक लक्ष्य (Quantitative Targets) निर्धारित किए गए हैं। यह अस्पष्ट वादे नहीं, बल्कि मापने योग्य लक्ष्य हैं।   पैरामीटर (Parameter) लक्ष्य (2026 तक) सुधार का प्रतिशत AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 117 (वार्षिक औसत) 20-30% सुधार PM 2.5 (सूक्ष्म कण) 49 (वार्षिक औसत) महत्वपूर्ण कमी PM 10 (धूल कण) 119 (वार्षिक औसत) महत्वपूर्ण कमी   वैज्ञानिक आधार: ई-बसें 'जीरो इमिशन' (शून्य उत्सर्जन) करती हैं, जो सीधे तौर पर PM 2.5 को कम करती हैं। सी एंड डी प्लांट और पक्की सड़कें PM 10 (मोटे धूल कण) को नियंत्रित करती हैं। अनुमान है कि शहर के कुल प्रदूषण में 40% योगदान ट्रांसपोर्ट और धूल का है। इन दोनों पर प्रहार करके ही लक्ष्य हासिल किया जाएगा।   एक नई सुबह की उम्मीद मेरठ नगर निगम का यह एक्शन प्लान केवल सरकारी फाइल का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह शहर के लाखों नागरिकों के स्वास्थ्य का सुरक्षा कवच है। अगर 2026 तक:   सड़कें गड्ढा मुक्त और धूल मुक्त हो जाती हैं, गाँवड़ी और लोहिया नगर से कूड़े के पहाड़ गायब हो जाते हैं, और सड़कों पर 100 से ज्यादा ई-बसें दौड़ती हैं,   तो निश्चित रूप से मेरठ की हवा सांस लेने लायक हो जाएगी। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार का यह कथन कि "वार्षिक एक्शन प्लान के अनुसार निगम अपनी कार्य योजना पर अमल करेगा" एक सकारात्मक संकेत है। अब जरूरत है तो बस समयबद्ध कार्यान्वयन (Timely Execution) और जनता के सहयोग की।   मेरठ अब बदलाव की राह पर है। दिल्ली का पड़ोसी होने का नुकसान झेलने वाला यह शहर अब प्रदूषण नियंत्रण में एनसीआर के लिए एक 'मॉडल सिटी' बनने की ओर अग्रसर है।

Unknown जनवरी 25, 2026 0
Meerut Metro Update13 Stations Ready from Meerut South to Modipuram Operations to Start Soon
मेरठ का 'महासफर': साउथ से मोदीपुरम तक तैयार हुए 13 हाईटेक स्टेशन, दिल्ली अब बस एक झपकी की दूरी पर, स्टेशनों पर जड़े ताले खुलने का जनता को बेसब्री से इंतजार

पश्चिम उत्तर प्रदेश के सबसे प्रमुख शहरों में से एक, मेरठ, अब एक ऐतिहासिक परिवहन क्रांति की दहलीज पर खड़ा है। वर्षों का इंतजार, धूल-मिट्टी और ट्रैफिक जाम की समस्याओं को झेलने के बाद, मेरठवासियों के लिए वह घड़ी अब बेहद करीब आ गई है, जिसका सपना दशकों से देखा जा रहा था। मेरठ साउथ (Meerut South) से लेकर मोदीपुरम (Modipuram) तक का 27 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर अब पूरी तरह से बनकर तैयार है। यह केवल पटरियों और स्टेशनों का निर्माण नहीं है, बल्कि यह मेरठ की जीवनशैली, अर्थव्यवस्था और दिल्ली-एनसीआर (NCR) के साथ उसकी कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदलने वाला एक महा-प्रोजेक्ट है।Read also:-यूपी बोर्ड 2026: प्रैक्टिकल परीक्षा की तारीखों में बड़ा फेरबदल! 29-30 जनवरी को भी होंगे एग्जाम, सचिव ने जारी किया 'अर्जेंट' आदेश   ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस रूट पर सभी 13 मेट्रो स्टेशन अपनी पूरी भव्यता के साथ तैयार हो चुके हैं। स्टेशनों पर अंतिम फिनिशिंग टच दिया जा चुका है, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और वाहन पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है। अब केवल उस पल का इंतजार है जब इस हाई-स्पीड ट्रैक पर 'नमो भारत' (Namo Bharat) और 'मेरठ मेट्रो' (Meerut Metro) एक साथ हवा से बातें करती नजर आएंगी।   प्रोजेक्ट का विहंगम दृश्य: 27 किमी, 13 स्टेशन और दोहरी ताकत मेरठ का यह प्रोजेक्ट पूरे देश में अपने आप में अनूठा है। भारत में पहली बार ऐसा हो रहा है कि एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर (ट्रैक और सिग्नलिंग सिस्टम) पर दो तरह की ट्रेनें चलेंगी। पहली, आरआरटीएस (RRTS) यानी नमो भारत, जो लंबी दूरी (दिल्ली से मेरठ) तय करेगी, और दूसरी मेरठ मेट्रो (MRTS), जो शहर के स्थानीय यात्रियों को एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचाएगी।   तैयार हुए 13 स्टेशनों की सूची और स्थिति मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक के इस कॉरिडोर पर काम लगभग 100% पूरा हो चुका है। आइए एक नजर डालते हैं इन स्टेशनों की मौजूदा स्थिति पर:   मेरठ साउथ (Meerut South): यह स्टेशन पहले से ही आंशिक रूप से संचालित है और अब मोदीपुरम तक कनेक्टिविटी के लिए तैयार है। परतापुर (Partapur): औद्योगिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण, यहाँ काम कई महीने पहले पूरा हो चुका है। रिठानी (Rithani): फिनिशिंग का काम पूरा हो चुका है। शताब्दी नगर (Shatabdi Nagar): यह एक प्रमुख हब है। यहाँ टिकट काउंटर, प्रवेश-निकास द्वार और पार्किंग तैयार है। ब्रह्मपुरी (Brahmpuri): घनी आबादी वाले क्षेत्र को जोड़ने वाला यह स्टेशन चमकने लगा है। मेरठ सेंट्रल (Meerut Central): शहर के मध्य में स्थित, यहाँ भी निर्माण कार्य संपन्न हो चुका है। भैसाली (Bhaisali): ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से सबसे सुंदर स्टेशन। बेगमपुल (Begumpul): मेरठ का सबसे व्यस्त चौराहा और सबसे बड़ा भूमिगत (Underground) स्टेशन। एमईएस कॉलोनी (MES Colony): गांधी बाग से आगे, सेना क्षेत्र और रिहायशी इलाकों के लिए। डौरली (Daurli): निर्माण कार्य पूरा। मेरठ नॉर्थ (Meerut North): संरचनात्मक कार्य संपन्न। मोदीपुरम (Modipuram): कॉरिडोर का अंतिम स्टेशन, पूरी तरह तैयार। मोदीपुरम डिपो (Modipuram Depot): (नोट: डिपो का काम अभी अंतिम चरण में है)।   स्टेशन-वार विस्तृत रिपोर्ट: कहाँ क्या है खास? इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हर स्टेशन को वहां की स्थानीय जरूरतों और संस्कृति को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।   1. भैसाली स्टेशन: संस्कृति और आधुनिकता का संगम शहीद स्मारक के पास स्थित भैसाली मेट्रो स्टेशन केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह मेरठ की कला और संस्कृति का प्रतिबिंब है। यहाँ की दीवारों पर शास्त्रीय संगीत पर आधारित चित्रकारी की गई है, जो यात्रियों का मन मोह लेती है। जब यात्री यहाँ उतरेंगे, तो उन्हें आधुनिकता के साथ-साथ अपनी विरासत की भी झलक मिलेगी। इसे बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया है, जो इसे रूट के सबसे आकर्षक स्टेशनों में से एक बनाता है।   2. बेगमपुल: इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना बेगमपुल स्टेशन मेरठ मेट्रो प्रोजेक्ट का सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यह एक भूमिगत (Underground) स्टेशन है। शहर के सबसे व्यस्त बाजार और चौराहे के नीचे सुरंग बनाना और इतना विशाल स्टेशन तैयार करना इंजीनियरिंग का एक नायाब उदाहरण है।   मौजूदा स्थिति: स्टेशन के अंदर का काम (प्लेटफॉर्म, ट्रैक, लाइटिंग, एस्केलेटर) पूरा हो चुका है। फिलहाल, स्टेशन के बाहर सड़क के ऊपर का काम (Restoration of Road) चल रहा है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा ताकि सामान्य यातायात सुचारू हो सके।   3. शताब्दी नगर और परतापुर: औद्योगिक और रिहायशी लाइफलाइन शताब्दी नगर स्टेशन पर विशेष ध्यान दिया गया है क्योंकि यह एक बड़ा रिहायशी और कमर्शियल हब बनने की क्षमता रखता है। यहाँ टिकट काउंटर से लेकर ऑटोमेटेड फेयर कलेक्शन (AFC) गेट्स तक सब कुछ टेस्ट किया जा चुका है। पार्किंग की व्यवस्था इतनी सुदृढ़ की गई है कि लोग अपने वाहन यहाँ पार्क करके मेट्रो से दिल्ली या मोदीपुरम जा सकें। परतापुर और रिठानी स्टेशनों पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती यह संकेत देती है कि ये स्टेशन संचालन के लिए 'ग्रीन सिग्नल' का इंतजार कर रहे हैं।   सुरक्षा और सुविधा: विश्वस्तरीय मानक एनसीआरटीसी (NCRTC) ने सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया है। रिपोर्ट के अनुसार, चूंकि अभी पब्लिक के लिए संचालन शुरू नहीं हुआ है, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से सभी स्टेशनों के प्रवेश द्वारों पर ताले लगाए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई अनधिकृत व्यक्ति या जानवर ट्रैक पर न पहुंच जाए, जिससे टेस्टिंग या हाई-स्पीड ट्रायल में बाधा उत्पन्न हो।   निगरानी: हर स्टेशन पर 24x7 सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। सीसीटीवी नेटवर्क: पूरा कॉरिडोर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में है। प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स (PSD): यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर स्टेशन पर प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स लगाए गए हैं, जो ट्रेन के रुकने पर ही खुलेंगे। दिव्यांगजन अनुकूल: सभी स्टेशनों को व्हीलचेयर और दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए सुगम बनाया गया है।   परिवहन व्यवस्था पर प्रभाव: भारतीय रेल और बसों को मिलेगी चुनौती मोदीपुरम से मेरठ साउथ के बीच मेट्रो और नमो भारत का संचालन शुरू होते ही शहर की परिवहन व्यवस्था में एक 'पैराडाइम शिफ्ट' (Paradigm Shift) देखने को मिलेगा।   क्यों पिछड़ जाएंगी बसें और सामान्य ट्रेनें? समय की बचत: जहाँ रोडवेज की बसें या सिटी बसें ट्रैफिक जाम के कारण मोदीपुरम से परतापुर पहुँचने में घंटों लगा देती हैं, वहीं मेट्रो यह दूरी मिनटों में तय करेगी। सुविधा: भारतीय रेल की पैसेंजर ट्रेनों में भीड़ और लेटलतीफी आम है। इसके विपरीत, नमो भारत और मेट्रो पूरी तरह से वातानुकूलित (AC), धूल-मुक्त और शोर-मुक्त यात्रा का अनुभव देंगी। विश्वसनीयता: मेट्रो की आवृत्ति (Frequency) बहुत अधिक होगी (हर 5-10 मिनट में ट्रेन), जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।   विशेषज्ञों का मानना है कि शहर के भीतर ऑटो-रिक्शा और ई-रिक्शा अब 'फीडर' की भूमिका निभाएंगे, जो यात्रियों को घर से मेट्रो स्टेशन तक लाएंगे, लेकिन लंबी दूरी की यात्रा के लिए मेट्रो ही पहली पसंद बनेगी।   'दिल्ली अब दूर नहीं': 82 किमी का सफर, 60 मिनट से कम इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण दिल्ली से कनेक्टिविटी है। दिल्ली के सराय काले खां से मोदीपुरम तक का पूरा आरआरटीएस कॉरिडोर 82 किलोमीटर लंबा है।   वर्तमान स्थिति: दिल्ली (अशोक नगर) से मेरठ साउथ (55 किमी) तक नमो भारत ट्रेनें पहले से ही जनता के लिए चल रही हैं और हजारों लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। आगामी बदलाव: जैसे ही मेरठ साउथ से मोदीपुरम (27 किमी) का हिस्सा जुड़ेगा, पूरा कॉरिडोर एक साथ एक्टिव हो जाएगा। कनेक्टिविटी: इसके बाद मेरठ से गाजियाबाद, साहिबाबाद, आनंद विहार और सराय काले खां (जहाँ से आप दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन या रेलवे स्टेशन जा सकते हैं) जाना बेहद आसान हो जाएगा। जो सफर पहले 3 से 4 घंटे लेता था, वह अब एक घंटे से भी कम समय में पूरा होगा।   मोदीपुरम डिपो: अंतिम बाधा और समाधान हालांकि 13 स्टेशन तैयार हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार मोदीपुरम डिपो का काम अभी थोड़ा अधूरा पाया गया है। डिपो किसी भी रेल सिस्टम का 'हृदय' होता है, जहाँ ट्रेनों की पार्किंग, रखरखाव, सफाई और तकनीकी जाँच होती है। एनसीआरटीसी (NCRTC) युद्धस्तर पर डिपो का काम पूरा कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि डिपो का काम खत्म होते ही पूरे कॉरिडोर पर कमर्शियल रन (Commercial Run) शुरू कर दिया जाएगा।   मेट्रो चलने के बाद मेरठ की बदलती तस्वीर जब शहर के अंदर मेट्रो दौड़ती है, तो वह केवल एक ट्रेन नहीं होती, बल्कि विकास का इंजन होती है। मेरठ में इसके दूरगामी परिणाम होंगे:   1. रियल एस्टेट में बूम मेट्रो रूट के आसपास, विशेषकर शताब्दी नगर, मोदीपुरम और मेरठ साउथ के इलाकों में प्रॉपर्टी के दामों में उछाल आने की संभावना है। दिल्ली में काम करने वाले लोग अब मेरठ में रहना पसंद करेंगे क्योंकि यहाँ घर सस्ते हैं और आवागमन आसान है।   2. प्रदूषण और ट्रैफिक में कमी मेरठ शहर अपनी संकरी गलियों और बेतहाशा ट्रैफिक के लिए जाना जाता है। बेगमपुल, भैसाली और दिल्ली रोड पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी। जब हजारों लोग निजी कारों और बाइकों को छोड़कर मेट्रो का इस्तेमाल करेंगे, तो प्रदूषण का स्तर भी काफी नीचे आएगा।   3. रोजगार के अवसर स्टेशनों के संचालन, सुरक्षा, हाउसकीपिंग और आसपास खुलने वाली दुकानों/रेस्तरां के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के सैकड़ों नए अवसर पैदा होंगे।   नमो भारत और मेरठ मेट्रो में क्या होगा अंतर? आम जनता के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि जब ट्रैक एक ही है, तो दो ट्रेनें कैसे?   नमो भारत (RRTS): यह लंबी दूरी की ट्रेन है। यह केवल प्रमुख स्टेशनों (जैसे मेरठ साउथ, बेगमपुल, मोदीपुरम) पर रुकेगी। इसकी रफ्तार बहुत तेज (160-180 किमी/घंटा) होगी। इसका किराया थोड़ा अधिक हो सकता है। मेरठ मेट्रो (MRTS): यह एक स्थानीय सेवा है। यह 13 के 13 स्टेशनों पर रुकेगी। इसकी रफ्तार मेट्रो मानकों (80-100 किमी/घंटा) के अनुसार होगी और इसका किराया शहर के भीतर यात्रा करने वाले आम आदमी की जेब के अनुकूल होगा।   एक नए सवेरे का इंतजार मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक स्टेशनों का तैयार होना इस बात का प्रमाण है कि विकास अब कागजों से उतरकर धरातल पर आ चुका है। भैसाली की कलाकारी हो या बेगमपुल की अंडरग्राउंड टनल, या फिर मोदीपुरम का विशाल विस्तार—हर पहलू यह बता रहा है कि मेरठ अब एक 'स्मार्ट सिटी' बनने की दिशा में सबसे बड़ी छलांग लगा चुका है।   प्रशासन और एनसीआरटीसी की तैयारी पूरी है। सुरक्षा घेरा सख्त है, और सिस्टम टेस्ट किए जा रहे हैं। अब बस एक हरी झंडी का इंतजार है, जिसके बाद मेरठ की रफ्तार, दिल्ली की रफ्तार से कदमताल करती नजर आएगी। मेरठवासियों के लिए सलाह है कि वे तैयार रहें, क्योंकि उनके शहर का भूगोल और इतिहास, दोनों बदलने वाला है।   (यह लेख उपलब्ध नवीनतम जानकारी और प्रोजेक्ट अपडेट्स पर आधारित है। संचालन की अंतिम तिथि की घोषणा एनसीआरटीसी द्वारा की जाएगी।)

Unknown जनवरी 25, 2026 0
UP Board Practical Dates Revised
यूपी बोर्ड 2026: प्रैक्टिकल परीक्षा की तारीखों में बड़ा फेरबदल! 29-30 जनवरी को भी होंगे एग्जाम, सचिव ने जारी किया 'अर्जेंट' आदेश

प्रयागराज (Prayagraj): उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP), जो कि एशिया का सबसे बड़ा परीक्षा बोर्ड माना जाता है, ने वर्ष 2026 की इंटरमीडिएट प्रयोगात्मक परीक्षाओं (Intermediate Practical Exams 2026) को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहत भरा संशोधन जारी किया है। बोर्ड ने अपने नवीनतम आदेश में स्पष्ट किया है कि अब 29 और 30 जनवरी 2026 को भी प्रयोगात्मक परीक्षाएं सुचारू रूप से आयोजित की जाएंगी।READ ALSO:-मेरठ: 77वें गणतंत्र दिवस की तैयारियों के बीच जवाहर इंटर कॉलेज पर 'गंदगी' का ग्रहण; दबंगों ने गेट पर खोदा 3 फीट गहरा अवैध नाला, सीएम दरबार पहुंची शिकायत   यह निर्णय लाखों छात्रों और विद्यालय प्रशासनों के लिए बड़ी खबर है, क्योंकि पूर्व में इन तिथियों को 'ब्लॉक' कर दिया गया था। बोर्ड सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, यह बदलाव उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP TET) की तिथियों में हुए परिवर्तन के कारण संभव हो सका है। इस संशोधित आदेश के साथ ही बोर्ड ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) और केंद्र व्यवस्थापकों को नई व्यवस्था के तहत परीक्षा संपन्न कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं।   क्यों हुआ था असमंजस? (Reason for the Update) परीक्षा कार्यक्रम में इस संशोधन की मुख्य वजह राज्य स्तरीय "उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा" (UP TET 2026) थी। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, UPTET का आयोजन जनवरी के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित था, जिसके चलते 29 और 30 जनवरी की तिथियों पर किसी भी अन्य परीक्षा के आयोजन पर रोक थी। प्रशासन का मानना था कि एक ही दिन दो बड़ी परीक्षाएं होने से कानून-व्यवस्था और निगरानी में समस्या आ सकती है।   हालांकि, अब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा UPTET 2026 को स्थगित कर दिया गया है। नई सूचना के अनुसार, अब UP TET का आयोजन जुलाई 2026 में (प्रस्तावित तिथियां 2, 3 और 4 जुलाई) किया जाएगा। इस स्थगन के कारण जनवरी माह में परीक्षा तिथियों का टकराव (Clash) समाप्त हो गया है, जिससे यूपी बोर्ड को अपनी प्रयोगात्मक परीक्षाएं लगातार आयोजित करने का अवसर मिल गया है।   दो चरणों में होगी परीक्षा: पूरा शेड्यूल (Phase-wise Schedule) माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षाएं पूर्व की भांति दो चरणों (Two Phases) में ही संपन्न कराई जाएंगी। मंडलवार (Division-wise) कार्यक्रम को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई है।   प्रथम चरण (Phase 1): अवधि: 24 जनवरी 2026 से 1 फरवरी 2026 तक। संशोधन: पहले इस चरण के दौरान 29 और 30 जनवरी को परीक्षा न कराने (No Exam Day) के निर्देश थे, लेकिन अब इन दोनों दिनों में भी पूर्ण क्षमता के साथ प्रैक्टिकल परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। सम्मिलित मंडल: इस चरण में आगरा, सहारनपुर, बरेली, लखनऊ, झांसी, चित्रकूट, अयोध्या, आजमगढ़, देवीपाटन और बस्ती मंडल शामिल हैं। इन मंडलों के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों के विद्यालयों में 24 जनवरी से प्रैक्टिकल शुरू हो जाएंगे।   द्वितीय चरण (Phase 2): अवधि: 2 फरवरी 2026 से 9 फरवरी 2026 तक। सम्मिलित मंडल: इस चरण में अलीगढ़, मेरठ, मुरादाबाद, कानपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी और गोरखपुर मंडल शामिल हैं।   जिला विद्यालय निरीक्षकों को सख्त निर्देश (Orders to DIOS) बोर्ड सचिव ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि संशोधित कार्यक्रम की सूचना तत्काल प्रभाव से अपने जिले के सभी प्रधानाचार्यों और केंद्र व्यवस्थापकों तक पहुंचाई जाए।   अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि:   परीक्षकों की नियुक्ति: 29 और 30 जनवरी के लिए भी बाह्य परीक्षकों (External Examiners) की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। प्रयोगशाला की तैयारी: विद्यालयों में प्रयोगशालाएं (Labs) इन तिथियों पर भी क्रियाशील रहें। छात्रों को सूचना: कोई भी छात्र भ्रम की स्थिति में प्रैक्टिकल देने से वंचित न रह जाए, इसके लिए स्कूलों को नोटिस बोर्ड और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए छात्रों को सूचित करना होगा।   24 फरवरी से शुरू हो रही मुख्य परीक्षाएं (Main Board Exams) प्रयोगात्मक परीक्षाओं के समापन के बाद, छात्रों के पास मुख्य लिखित परीक्षाओं (Theory Exams) की तैयारी के लिए बहुत कम समय शेष रहेगा। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की लिखित परीक्षाएं 24 फरवरी 2026 से शुरू होकर 15 मार्च 2026 तक चलेंगी।   बोर्ड ने इस बार परीक्षाओं को समय पर संपन्न कराने और परिणाम जल्दी घोषित करने की रणनीति बनाई है। परीक्षाएं दो पालियों (Two Shifts) में आयोजित की जाएंगी:   प्रथम पाली (Morning Shift): सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक। द्वितीय पाली (Evening Shift): दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक।   विस्तृत परीक्षा कार्यक्रम (Date Sheet) यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर उपलब्ध है, जहां छात्र अपने विषयवार टाइम-टेबल देख सकते हैं।   52 लाख से अधिक परीक्षार्थी और चुनौती (Statistics & Challenges) यूपी बोर्ड की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2026 की परीक्षाओं के लिए 52 लाख से अधिक परीक्षार्थी पंजीकृत हैं।   हाईस्कूल (Class 10): लगभग 29 लाख छात्र-छात्राएं। इंटरमीडिएट (Class 12): करीब 23 लाख छात्र-छात्राएं।   इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षा कराना किसी चुनौती से कम नहीं है। बोर्ड ने इस बार परीक्षा केंद्रों (Exam Centers) की संख्या में वृद्धि की है ताकि सोशल डिस्टेंसिंग और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा सके और किसी भी केंद्र पर अत्यधिक भीड़ न हो।   सुरक्षा और निगरानी: नकलविहीन परीक्षा का संकल्प (Security Measures) यूपी बोर्ड अपनी परीक्षाओं को नकलविहीन (Cheating-free) और पारदर्शी बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों से तकनीकी का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है। सचिव भगवती सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया है:   CCTV और वॉयस रिकॉर्डिंग: सभी परीक्षा केंद्रों और प्रयोगात्मक परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य कर दिए गए हैं। इन कैमरों में वॉयस रिकॉर्डिंग (Voice Recording) की सुविधा होना आवश्यक है ताकि मौखिक परीक्षा (Viva) की पारदर्शिता जांची जा सके। लाइव मॉनिटरिंग (Live Monitoring): जिला स्तर पर और राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम (Control Room) स्थापित किए गए हैं। लखनऊ और प्रयागराज से सीधे परीक्षा केंद्रों की वेब-कास्टिंग के जरिए निगरानी की जाएगी। STF और LIU की तैनाती: संवेदनशील (Sensitive) और अति संवेदनशील (Hyper-sensitive) केंद्रों पर सादे कपड़ों में पुलिस बल और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की नजर रहेगी। कड़ी कार्रवाई: नकल करते हुए पकड़े जाने पर या अनुचित साधनों का प्रयोग करने पर रासुका (NSA) तक की कार्रवाई का प्रावधान है, साथ ही केंद्र व्यवस्थापकों पर भी गाज गिर सकती है।   छात्रों के लिए प्रैक्टिकल परीक्षा की तैयारी के टिप्स (Preparation Tips) प्रयोगात्मक परीक्षाएं न केवल आपके कुल प्रतिशत को सुधारने में मदद करती हैं, बल्कि मुख्य परीक्षा के लिए भी आत्मविश्वास बढ़ाती हैं। छात्रों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:   फाइल और प्रोजेक्ट: अपनी प्रैक्टिकल फाइल और प्रोजेक्ट वर्क को पूरा रखें और उसे अच्छे से कवर करें। इंडेक्स और पेज नंबर सही से लिखे होने चाहिए। विषय का ज्ञान: परीक्षक (External Examiner) अक्सर आपके प्रोजेक्ट या चार्ट से ही प्रश्न पूछते हैं। आपने जो भी मॉडल या चार्ट बनाया है, उसकी पूरी थ्योरी आपको याद होनी चाहिए। अनुशासन: लैब में अनुशासन बनाए रखें। आपकी वेशभूषा (Uniform) और व्यवहार (Discipline) के भी अंक होते हैं। मौखिक परीक्षा (Viva Voce): परीक्षक के सामने घबराएं नहीं। प्रश्नों का उत्तर विनम्रता और स्पष्टता से दें। यदि किसी प्रश्न का उत्तर नहीं आता है, तो विनम्रतापूर्वक क्षमा मांग लें, गलत उत्तर देने से बचें।   यूपी बोर्ड द्वारा 29 और 30 जनवरी को प्रैक्टिकल परीक्षाओं की अनुमति देना छात्रों और स्कूलों के हित में लिया गया एक सकारात्मक निर्णय है। UPTET के जुलाई 2026 में शिफ्ट होने से अब बोर्ड परीक्षाओं के लिए रास्ता साफ हो गया है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और अपने विद्यालय द्वारा दी गई तिथियों पर ही उपस्थित हों। यह समय पूरी एकाग्रता के साथ अपनी फाइलों को अंतिम रूप देने और 'वाइवा' (Viva) की तैयारी करने का है, क्योंकि प्रैक्टिकल के अंक आपके रिजल्ट की मैरिट तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।   यूपी बोर्ड (UPMSP) ने इंटरमीडिएट प्रयोगात्मक परीक्षा 2026 के कार्यक्रम में संशोधन करते हुए 29 और 30 जनवरी को भी परीक्षाएं आयोजित करने का आदेश दिया है। पहले UPTET परीक्षा के कारण इन तिथियों पर रोक थी, लेकिन UPTET के जुलाई 2026 में स्थगित होने के बाद यह निर्णय लिया गया। परीक्षाएं दो चरणों में (24 जनवरी से 1 फरवरी और 2 फरवरी से 9 फरवरी) मंडलवार होंगी। मुख्य परीक्षाएं 24 फरवरी से शुरू होंगी।

Unknown जनवरी 24, 2026 0
Meerut Cop Sustains Severe Injuries from Chinese Manjha Receives 17 Stitches
मेरठ में 'खूनी मांझे' का कहर: ड्यूटी जा रहे दरोगा का चेहरा चीरा, 17 टांके आने से हड़कंप; प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रही 'मौत'

मेरठ (Meerut): बसंत पंचमी (Basant Panchami) का त्योहार नजदीक आते ही मेरठ के आसमान में पतंगों का रोमांच दिखने लगा है, लेकिन इसके साथ ही सड़कों पर 'मौत का धागा' यानी प्रतिबंधित चाइनीज मांझा (Banned Chinese Manjha) भी अपना कहर बरपाने लगा है। प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद, इस जानलेवा मांझे की बिक्री और इस्तेमाल धड़ल्ले से जारी है।READ ALSO:-मेरठ: 77वें गणतंत्र दिवस की तैयारियों के बीच जवाहर इंटर कॉलेज पर 'गंदगी' का ग्रहण; दबंगों ने गेट पर खोदा 3 फीट गहरा अवैध नाला, सीएम दरबार पहुंची शिकायत   ताजा मामला मेरठ के लोहिया नगर थाना क्षेत्र का है, जहां शनिवार को चाइनीज मांझे की चपेट में आने से एक दरोगा (Sub-Inspector) गंभीर रूप से घायल हो गए। मांझे की धार इतनी तेज थी कि दरोगा के चेहरे और गर्दन पर गहरे जख्म हो गए, जिसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों को उनके घावों को भरने के लिए 17 टांके लगाने पड़े हैं।   ड्यूटी जाते समय हुआ हादसा (The Incident) जानकारी के मुताबिक, घायल दरोगा की पहचान ऋषभ गुप्ता (SI Rishabh Gupta) के रूप में हुई है, जो लोहिया नगर थाना क्षेत्र की जाकिर कॉलोनी चौकी के इंचार्ज हैं। शनिवार को वह अपनी बाइक से ड्यूटी पर जा रहे थे। जैसे ही वह लोहिया नगर क्षेत्र से गुजर रहे थे, अचानक कहीं से कटी हुई पतंग का चाइनीज मांझा उनके सामने आ गया।   जब तक वह कुछ समझ पाते या अपनी बाइक रोक पाते, मांझा उनके हेलमेट और गर्दन के बीच उलझ गया। मांझे की पकड़ इतनी मजबूत और धारदार थी कि उसने हेलमेट के नीचे के हिस्से को पार करते हुए दरोगा की ठोड़ी (Chin) और गाल को बुरी तरह काट दिया।   सड़क पर गिरे, 17 टांके आए (Severe Injuries) मांझे के उलझते ही ऋषभ गुप्ता संतुलन खो बैठे और बाइक समेत सड़क पर गिर पड़े। खून से लथपथ हालत में उन्हें देखकर राहगीर मदद के लिए दौड़े। स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में उन्हें पास के एक निजी अस्पताल (Private Hospital) में भर्ती कराया।   डॉक्टरों के मुताबिक, मांझे की वजह से दरोगा ऋषभ गुप्ता की ठोड़ी और गाल पर गहरा घाव हो गया है। खून को रोकने और घाव को भरने के लिए डॉक्टरों को 17 टांके (17 Stitches) लगाने पड़े। गनीमत रही कि मांझा उनकी मुख्य नस (Jugular Vein) तक नहीं पहुंचा, वरना यह हादसा जानलेवा भी हो सकता था। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन वह अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।   प्रशासनिक दावों की खुली पोल इस घटना ने एक बार फिर मेरठ पुलिस और प्रशासन के उन दावों की पोल खोल दी है, जिनमें चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की बात कही जाती है। युवा समाजसेवी प्रशांत वर्मा (Prashant Verma) ने इस घटना पर गहरा रोष व्यक्त किया है।   प्रशांत वर्मा का आरोप है कि, "अधिकारी सिर्फ बसंत पंचमी के नाम पर रस्म अदायगी कर रहे हैं। जमीनी स्तर पर चाइनीज मांझे की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। अगर पुलिस ने समय रहते सख्त कार्रवाई की होती, तो आज एक पुलिस अधिकारी को ही इसका शिकार नहीं होना पड़ता।"   यह विडंबना ही है कि जो पुलिस आम जनता को चाइनीज मांझे से बचाने का जिम्मा संभालती है, आज उसी विभाग का एक जिम्मेदार अधिकारी इस अवैध कारोबार का शिकार बन गया।   पुलिस का बयान: कार्रवाई जारी है (Police Statement) घटना के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह (SP City Ayush Vikram Singh) ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि एसआई ऋषभ गुप्ता का इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर है।   एसपी सिटी ने कहा, "हम लगातार चाइनीज मांझा बेचने वालों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। लोहिया नगर और आसपास के इलाकों में छापेमारी की जा रही है। ऐसे दुकानदारों को चिह्नित किया जा रहा है जो चोरी-छिपे यह प्रतिबंधित मांझा बेच रहे हैं। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"   क्यों जानलेवा है चाइनीज मांझा? (Why is Chinese Manjha Dangerous?) चाइनीज मांझा पारंपरिक सूती मांझे से बिल्कुल अलग होता है। इसे बनाने में नायलॉन (Nylon) या प्लास्टिक के तारों का इस्तेमाल होता है, जिस पर कांच का बुरादा और धातुओं का लेप चढ़ाया जाता है।   ना टूटने वाला: यह मांझा इतना मजबूत होता है कि आसानी से हाथ से नहीं टूटता। धारदार: कांच और धातु के लेप के कारण यह किसी ब्लेड की तरह काम करता है। कंडक्टर: कई बार इसमें धातु का प्रयोग होने के कारण यह बिजली का सुचालक (Conductor) बन जाता है, जिससे करंट लगने का खतरा भी रहता है। पर्यावरण को नुकसान: यह मांझा नष्ट नहीं होता (Non-biodegradable), जिससे यह सालों तक पेड़ों और खंभों पर लटका रहता है और पक्षियों की जान लेता रहता है।   बसंत पंचमी और सुरक्षा उपाय (Safety Precaution) मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसंत पंचमी पर पतंगबाजी का विशेष महत्व है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चाइनीज मांझे ने इस त्योहार के उत्साह को खौफ में बदल दिया है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक है।   बचाव के तरीके: मफलर या स्कार्फ: दोपहिया वाहन चलाते समय अपनी गर्दन को मफलर या मोटे कपड़े से पूरी तरह ढक कर रखें। सेफ्टी रॉड (Safety Rod): अपनी बाइक पर यू-शेप (U-Shape) की लोहे की तार या सेफ्टी रॉड लगवाएं, जिससे मांझा आपके शरीर तक न पहुंचे। धीरे चलें: फ्लाईओवर और पतंगबाजी वाले इलाकों में गाड़ी की गति धीमी रखें। हेलमेट: फुल फेस हेलमेट का प्रयोग करें और वाइजर (Visor) हमेशा बंद रखें।   कानून क्या कहता है? (Legal Aspect) नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 2017 में ही पूरे देश में चाइनीज मांझे (नायलॉन या सिंथेटिक मांझा) की बिक्री, निर्माण और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (Environment Protection Act) के तहत:   चाइनीज मांझा बेचना या इस्तेमाल करना दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।   मेरठ में SI Rishabh Gupta के साथ हुई यह घटना प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी है। केवल रस्म अदायगी या त्योहारों के समय छापेमारी करने से यह समस्या खत्म नहीं होगी। पुलिस को जहां इसके स्रोतों (Sources) पर प्रहार करना होगा, वहीं आम जनता और अभिभावकों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके बच्चे खूनी चाइनीज मांझे का इस्तेमाल न करें। अगर एक दरोगा सुरक्षित नहीं है, तो आम राहगीर की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है।   मेरठ के लोहिया नगर में ड्यूटी जाते समय दरोगा ऋषभ गुप्ता प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी ठोड़ी और गाल पर 17 टांके लगाए गए हैं। समाजसेवियों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं, जबकि एसपी सिटी ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। बसंत पंचमी से पहले हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

Unknown जनवरी 24, 2026 0
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बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और गर्लफ्रेंड सोनाली का 15 मिनट का MMS लीक, कपल ने इसे चोरी और ब्लैकमेलिंग बताया

पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है।     कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप   सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है।   सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है।  ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया।  सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया।   प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है।  ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं।    सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं।   इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया।    बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }

बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई

आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला   मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।   बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।   दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था।   अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी।   बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे।   पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया।   एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी   सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता।   पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है।   आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?

देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।   सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया?   क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है।   पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है।   दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है।   सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?"   असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है।   सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है।   विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है।   विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।"   NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है।   NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।   CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।      आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया।  डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है।     कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं:   1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।   2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है।   सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है:   पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है।   दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।   गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।"   आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए।   सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है।   फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है।     जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; Kidney की बीमारी बनी मौत का कारण

बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है।   चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था।   टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।   फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी।   Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप   किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।   इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।"   Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।   सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।

दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी।   आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:   Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi)   मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी।   रूट मैप (Route Map) और स्टेशन   मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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उत्तर प्रदेश

यूपी में मौसम का यू-टर्न: कल से 5 दिनों तक आंधी-बारिश का अलर्ट, कांपने पर मजबूर करेगी लौटती हुई ठंड

Unknown जनवरी 21, 2026 0

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