उत्तराखंड

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18 मई को गूंजेगा 'हर-हर महादेव': चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ के कपाट खुलने की तिथि घोषित; जानें हिमालय के सबसे कठिन तीर्थ और 'एकानन' स्वरूप के दर्शन का पूरा शेड्यूल

गोपेश्वर / चमोली / देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड के हिमालयी शिखरों में बसने वाले आदियोगी भगवान शिव के भक्तों के लिए आज का दिन अत्यंत मंगलकारी समाचार लेकर आया है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी, जिसे हम वसंत पंचमी (Vasant Panchami) के रूप में मनाते हैं, के पावन पर्व पर 'पंच केदार' (Panch Kedar) में से एक और अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति के लिए प्रसिद्ध चतुर्थ केदार भगवान श्री रुद्रनाथ (Rudranath) के कपाट खुलने की तिथि की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है।READ ALSO:-Badrinath Dham Kapat Opening Date 2026: 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, वसंत पंचमी पर हुआ तिथियों का ऐलान—जानें पूरी डिटेल चतुर्थ केदार भगवान श्री रुद्रनाथ के कपाट दिनांक 18 मई 2026 को दोपहर 12:57 बजे विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोले जाएंगे। 🙏🕉️ pic.twitter.com/N4IGeaSe3t — Chamoli Police Uttarakhand (@chamolipolice) January 23, 2026   शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को भगवान रुद्रनाथ के शीतकालीन गद्दी स्थल, ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर (Gopinath Mandir), गोपेश्वर में एक भव्य धार्मिक समारोह के दौरान हक-हकूकधारियों, पुजारियों और वेदपाठी ब्राह्मणों ने पंचांग गणना के आधार पर यह शुभ तिथि तय की।   प्रमुख घोषणा: साल 2026 में भगवान रुद्रनाथ जी के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए 18 मई को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर पूर्ण वैदिक परंपरा और विधि-विधान के साथ आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।   यह घोषणा न केवल धार्मिक आस्था का विषय है, बल्कि यह उस साहसिक यात्रा की शुरुआत का भी संकेत है, जिसे 'रुद्रनाथ ट्रैक' कहा जाता है—एक ऐसी यात्रा जो शरीर की परीक्षा लेती है और आत्मा को तृप्त करती है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कपाट खुलने की प्रक्रिया, डोली यात्रा का कार्यक्रम, भगवान के 'एकानन' स्वरूप का रहस्य, और 18 किलोमीटर की उस कठिन चढ़ाई के बारे में, जिसे पार करके भक्त अपने आराध्य तक पहुंचते हैं।   वसंत पंचमी पर घोषणा: गोपीनाथ मंदिर में उत्सव का माहौल उत्तराखंड की परंपराओं में वसंत पंचमी का दिन केवल ऋतु परिवर्तन का सूचक नहीं है, बल्कि यह आगामी यात्रा सीजन की तैयारियों का शंखनाद भी है। शुक्रवार को गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर परिसर, जो भगवान रुद्रनाथ का शीतकालीन आवास है, वैदिक मंत्रों और स्थानीय वाद्य यंत्रों की ध्वनियों से गूंज उठा।   पंचांग गणना की प्रक्रिया परंपरा के अनुसार, मंदिर के मुख्य पुजारी और हक-हकूकधारियों (मंदिर के पारंपरिक अधिकार धारक) ने भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद, ग्रहों और नक्षत्रों की चाल को देखते हुए, 'अभिजित मुहूर्त' और अन्य शुभ योगों का मिलान करके 18 मई की तारीख तय की गई।   घोषणा का समय: 23 जनवरी, 2026 (शुक्रवार) कपाट खुलने का मुहूर्त: 18 मई, 2026 (दोपहर 12:57 बजे)   स्थानीय लोगों के लिए यह क्षण भावुक करने वाला होता है, क्योंकि वे जानते हैं कि अब जल्द ही उनके आराध्य देवता शीतकालीन प्रवास से अपने मूल धाम (हिमालय की ऊंचाइयों पर) के लिए प्रस्थान करेंगे।   डोली यात्रा और कपाट खुलने का विस्तृत कार्यक्रम भगवान रुद्रनाथ की यात्रा केवल एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि यह कई दिनों तक चलने वाला एक धार्मिक उत्सव है। मंदिर समिति द्वारा जारी किए गए कार्यक्रम के अनुसार, कपाट खुलने की प्रक्रिया इस प्रकार रहेगी:   15 और 16 मई: अंतिम शीतकालीन दर्शन कपाट खुलने के लिए डोली के प्रस्थान करने से पहले, भक्तों को भगवान के शीतकालीन आवास में दर्शन का अंतिम अवसर मिलेगा।   स्थान: गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर। विवरण: 15 और 16 मई तक भगवान रुद्रनाथ के 'उत्सव विग्रह' (चल विग्रह) के दर्शन भक्त गोपेश्वर में ही कर सकेंगे। इस दौरान विशेष आरती और भोग का आयोजन होगा। स्थानीय भक्त अपने देवता को विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में उमड़ेंगे।   17 मई: डोली का प्रस्थान घटना: भगवान रुद्रनाथ जी की उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दी स्थल से मूल धाम के लिए प्रस्थान करेगी। दृश्य: यह एक अद्भुत नजारा होता है। फूलों से सजी डोली, पारंपरिक वाद्य यंत्रों (ढोल-दमाऊ) की थाप और 'जय भोलेनाथ' के जयकारों के साथ डोली गोपेश्वर से निकलती है। हजारों भक्त डोली को कंधे देने के लिए उत्सुक रहते हैं। पड़ाव: डोली सगर गांव होते हुए जंगल के रास्ते ल्वीटी बुग्याल या पनार बुग्याल में रात्रि विश्राम करती है (यह मौसम और व्यवस्था पर निर्भर करता है)।   18 मई: कपाट खुलना समय: दोपहर 12 बजकर 57 मिनट। प्रक्रिया: डोली के रुद्रनाथ मंदिर पहुंचने पर, मुख्य पुजारी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के द्वार (कपाट) खोलेंगे। सबसे पहले मंदिर के अंदर साफ-सफाई और शुद्धिकरण किया जाएगा। प्रथम पूजा: इसके बाद भगवान के 'एकानन' (मुख) स्वरूप का जलाभिषेक और श्रृंगार किया जाएगा, और फिर आम भक्तों के लिए दर्शन शुरू हो जाएंगे।   चतुर्थ केदार रुद्रनाथ: जहां होती है शिव के 'मुख' की पूजा पंच केदार (केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर) में रुद्रनाथ का स्थान चौथा है, लेकिन महत्ता और विशिष्टता में यह अद्वितीय है।   पौराणिक कथा: पांडवों और शिव का मिलन महाभारत युद्ध के बाद, पांडव अपने गोत्र हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव को खोज रहे थे। शिव उनसे नाराज थे और नंदी (बैल) का रूप धारण कर धरती में समाने लगे।   उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से पांच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए। केदारनाथ: पीठ (कूबड़)। तुंगनाथ: भुजाएं। मध्यमहेश्वर: नाभि। कल्पेश्वर: जटाएं। रुद्रनाथ: मुख (Face)।   एकानन स्वरूप और नील-लोहित रुद्रनाथ ही वह एकमात्र स्थान है जहां भगवान शिव के 'मुख' (Face) के दर्शन होते हैं।   यहां शिवलिंग के बजाय एक प्राकृतिक शिला पर भगवान शिव का मुख बना हुआ है। इसे 'एकानन' (एक मुख वाला) स्वरूप कहा जाता है। स्थानीय मान्यताओं में उन्हें 'नील-लोहित' शिव भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।   18-20 किलोमीटर का कठिन ट्रैक: साहस और आस्था की परीक्षा रुद्रनाथ मंदिर समुद्र तल से लगभग 2286 मीटर (कुछ स्रोतों के अनुसार 3600 मीटर तक की ऊंचाई वाले बुग्यालों को पार करना पड़ता है) की ऊंचाई पर स्थित है। पंच केदारों में रुद्रनाथ की यात्रा को सबसे कठिन (Toughest Trek) माना जाता है।   रास्ता 1: सगर गांव से (सबसे प्रचलित मार्ग) कपाट खुलने के दौरान डोली इसी रास्ते से जाती है।   शुरुआत: गोपेश्वर से लगभग 5 किमी दूर 'सगर गांव'। चढ़ाई: यह लगभग 18-19 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई है। प्रमुख पड़ाव: पुंग बुग्याल: सगर से चढ़ाई शुरू करते ही घने जंगल और फिर घास के मैदान (बुग्याल) शुरू हो जाते हैं। ल्वीटी बुग्याल: यहां से हिमालय का दृश्य खुलने लगता है। पनार बुग्याल (Panar Bugyal): यह इस ट्रैक का सबसे सुंदर और कठिन हिस्सा है। मीलों तक फैले मखमली घास के मैदान और सामने नंदा देवी पर्वत का विराट रूप। यहां ऑक्सीजन की कमी महसूस हो सकती है। पितृधार: यह यात्रा का सबसे ऊंचा बिंदु है। यहां से रास्ता थोड़ा नीचे की ओर जाता है। रुद्रनाथ: अंत में चट्टानों के बीच स्थित छोटा सा मंदिर दिखाई देता है।   रास्ता 2: मंडल और अनुसूया देवी से एक दूसरा रास्ता मंडल गांव से होकर जाता है, जो माता अनुसूया देवी के मंदिर से गुजरता है। यह रास्ता थोड़ा लंबा है लेकिन प्रकृति प्रेमियों के लिए अद्भुत है।   कठिनाई का स्तर केदारनाथ में खच्चर और पालकी की सुविधा आसानी से मिल जाती है, लेकिन रुद्रनाथ का रास्ता संकरा और जंगलों से भरा है, इसलिए यहां सुविधाएं कम हैं। पानी के स्रोत सीमित हैं, इसलिए यात्रियों को अपनी व्यवस्था के साथ चलना होता है। यही कठिनाई इस यात्रा को 'विशिष्ट' बनाती है—यहां केवल वही पहुंचता है जिसमें दृढ़ इच्छाशक्ति हो।   वैतरणी कुंड और पितरों का तर्पण रुद्रनाथ मंदिर के पास ही पवित्र 'वैतरणी कुंड' (Vaitarni Kund) स्थित है। हिंदू धर्म में वैतरणी नदी का विशेष महत्व है, जिसे मृत्यु के बाद पार करना होता है।   महत्व: यहां श्रद्धालु अपने पूर्वजों (पितरों) का तर्पण और पिंडदान करते हैं। मान्यता: कहा जाता है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों को सीधे शिवलोक की प्राप्ति होती है। गया (बिहार) के बाद इसे पिंडदान के लिए अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है।   प्राकृतिक सौंदर्य: फूलों की घाटी जैसा अनुभव रुद्रनाथ की यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक विजुअल ट्रीट (Visual Treat) भी है।   बुरांश के जंगल: मई के महीने में जब कपाट खुलते हैं, तो पूरा रास्ता लाल और गुलाबी बुरांश (Rhododendron) के फूलों से लदा होता है। हिमालय दर्शन: पनार बुग्याल से नंदा देवी (Nanda Devi), त्रिशूल (Trishul) और नंदा घुंटी (Nanda Ghunti) चोटियों का जो नजारा दिखता है, वह दुनिया में कहीं और दुर्लभ है। ऐसा लगता है मानो आप हाथ बढ़ाकर पर्वतों को छू लेंगे। वन्यजीव: यह क्षेत्र नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है। भाग्यशाली यात्रियों को यहां हिमालयन मोनाल (उत्तराखंड का राज्य पक्षी), कस्तूरी मृग और कभी-कभी हिमालयी भालू भी देखने को मिल सकते हैं।   शीतकालीन गद्दी: गोपीनाथ मंदिर का महत्व जब 18 मई को कपाट खुलेंगे, तब तक (यानी आज से मई तक) भगवान रुद्रनाथ की पूजा गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में ही होगी।   ऐतिहासिकता: गोपीनाथ मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। यह पत्थरों से बना एक भव्य मंदिर है जिसका शिखर थोड़ा झुका हुआ है। त्रिशूल: मंदिर परिसर में एक विशाल अष्टधातु का त्रिशूल है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसे किसी भी मानवीय शक्ति से हिलाया नहीं जा सकता, लेकिन सच्चे मन से स्पर्श करने पर यह कंपन करता है। 6 माह का नियम: पौराणिक परंपराओं के अनुसार, शीतकाल में बर्फबारी के कारण रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 6 माह के लिए बंद कर दिए जाते हैं। तब भगवान की चल विग्रह डोली गोपीनाथ मंदिर में विराजमान होती है। जो भक्त कठिन चढ़ाई नहीं चढ़ सकते, वे सर्दियों में यहीं भगवान रुद्रनाथ के दर्शन करते हैं।   यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह (Travel Tips) यदि आप 18 मई को कपाट खुलने के अवसर पर वहां जाने की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:   फिटनेस: यह ट्रैक आसान नहीं है। अभी से वॉक और कार्डियो शुरू करें। सामान: अपने साथ गर्म कपड़े, रेनकोट, टॉर्च, और ड्राई फ्रूट्स जरूर रखें। गाइड: यदि आप पहली बार जा रहे हैं, तो सगर गांव से किसी स्थानीय गाइड या पोर्टर को साथ लेना उचित है, क्योंकि जंगलों में रास्ता भटकने का डर रहता है। रुकने की व्यवस्था: रुद्रनाथ में मंदिर समिति की धर्मशाला और कुछ साधारण होमस्टे/टेंट उपलब्ध हैं। सुविधाएं बहुत ही बुनियादी हैं (बिना बिजली के), इसलिए विलासिता की उम्मीद न करें। पंजीकरण: चारधाम यात्रा की तरह ही इसके लिए भी उत्तराखंड पर्यटन की वेबसाइट पर पंजीकरण आवश्यक हो सकता है।   एक बार अवश्य करें दर्शन भगवान रुद्रनाथ की यात्रा आपको शहर की भीड़भाड़ और शोर से दूर, शांति और आध्यात्म की एक अलग दुनिया में ले जाती है। 18 मई 2026 की तारीख नोट कर लें। जब आप पनार बुग्याल की ऊंचाइयों पर ठंडी हवाओं के बीच खड़े होकर सामने विशाल हिमालय और नीचे बादलों को देखेंगे, और फिर मंदिर में भगवान शिव के शांत मुखारविंद के दर्शन करेंगे, तो सारी थकान एक पल में गायब हो जाएगी।   "जय भोलेनाथ, जय रुद्रनाथ" के उद्घोष के साथ, आइए हम सब इस पवित्र यात्रा के साक्षी बनने के लिए तैयार हों।   त्वरित तथ्य (Quick Facts Box) विवरण जानकारी मंदिर श्री रुद्रनाथ (चतुर्थ केदार) स्थान चमोली जिला, उत्तराखंड कपाट खुलने की तिथि 18 मई, 2026 कपाट खुलने का समय दोपहर 12:57 बजे घोषणा स्थल गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर घोषणा तिथि 23 जनवरी, 2026 (वसंत पंचमी) विशेषता भगवान शिव के 'मुख' की पूजा ट्रैक की दूरी सगर गांव से लगभग 18-19 कि.मी. शीतकालीन आवास गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर निकटतम शहर गोपेश्वर (जिला मुख्यालय)

Unknown जनवरी 23, 2026 0
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Badrinath Dham Kapat Opening Date 2026: 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, वसंत पंचमी पर हुआ तिथियों का ऐलान—जानें पूरी डिटेल

देहरादून / चमोली / नरेंद्रनगर: देवभूमि उत्तराखंड के कण-कण में देवताओं का वास है और आज का दिन सनातन धर्म के करोड़ों अनुयायियों के लिए एक विशेष उत्सव लेकर आया है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी यानी वसंत पंचमी (Vasant Panchami) के पावन पर्व पर, जिसे ऋतुराज वसंत का आगमन और मां सरस्वती की आराधना का दिन माना जाता है, हिमालय की गोद में स्थित मोक्षधाम 'श्री बदरीनाथ धाम' (Badrinath Dham) के कपाट खुलने की शुभ तिथि की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है।READ ALSO:-23 जनवरी की शाम अंतरिक्ष में मचेगी हलचल: चांद, शनि और नेपच्यून का होगा 'महासंगम', जानें कब और कैसे देखें यह जादुई नजारा   आज शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को राजपुरोहितों, धर्माचार्यों और मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने पंचांग गणना और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का गहन अध्ययन करने के बाद यह शुभ समाचार विश्व भर के भक्तों को सुनाया। भू-बैकुंठ भगवान श्री बद्रीनाथ के कपाट दिनांक 23 अप्रैल 2026 को प्रातः 6:15 बजे विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोले जाएंगे। 🙏🕉️ pic.twitter.com/qjkYAKIMVM — Chamoli Police Uttarakhand (@chamolipolice) January 23, 2026   घोषणा का सार: साल 2026 में भगवान बदरी विशाल के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।   इस घोषणा के साथ ही उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra) की तैयारियों का औपचारिक बिगुल बज गया है। छह महीने के शीतकालीन अवकाश और भारी बर्फबारी के बाद, जब भगवान नर-नारायण अपनी योग निद्रा से जागेंगे और नर (मनुष्य) द्वारा पूजे जाएंगे, तो उस अलौकिक पल का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से लाखों भक्त चमोली जिले की ओर प्रस्थान करेंगे।   इस विस्तृत विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कपाट खुलने की पूरी प्रक्रिया, इस साल के शुभ मुहूर्त का महत्व, बदरीनाथ धाम का पौराणिक इतिहास, भगवान रुद्रनाथ की यात्रा और चारधाम से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जो एक यात्री के रूप में आपके लिए जानना अनिवार्य है।   वसंत पंचमी पर घोषणा की परंपरा और 23 अप्रैल का शुभ मुहूर्त सनातन धर्म की परंपराओं में किसी भी बड़े कार्य के शुभारंभ के लिए मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय करने की एक सदियों पुरानी राजसी परंपरा है।   कैसे तय होती है तिथि? हर साल वसंत पंचमी के दिन टिहरी नरेश (जो बदरीनाथ धाम के संरक्षक माने जाते हैं और जिन्हें 'बोलंदा बदरी' या बोलते हुए बदरीनाथ की उपाधि प्राप्त है) के राजदरबार, नरेंद्रनगर में राजपुरोहित पंचांग गणना करते हैं। इस वर्ष भी टिहरी राजदरबार और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के सदस्यों की उपस्थिति में ग्रहों की चाल देखी गई।   कपाट खुलने की तिथि: 23 अप्रैल, 2026 (गुरुवार) शुभ मुहूर्त: प्रातः 6:15 बजे (ब्रह्म मुहूर्त के बाद और सूर्योदय के समय)। नक्षत्र और योग: ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 23 अप्रैल का दिन अक्षय तृतीया के आसपास का समय है, जो स्वयं में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य अपनी उच्च राशि में होते हैं, जो भगवान विष्णु की उपासना के लिए श्रेष्ठ समय है।   गाडू घड़ा (तेकल कलश) यात्रा तिथि घोषणा के साथ ही 'गाडू घड़ा' (तेल कलश) यात्रा की तारीख भी तय हो गई है। यह एक पवित्र कलश होता है जिसमें तिलों का तेल भरा जाता है। इस तेल को पिरोने की प्रक्रिया राजमहल में होती है और फिर इसे एक भव्य शोभायात्रा के रूप में बदरीनाथ धाम ले जाया जाता है। कपाट खुलने पर सबसे पहले इसी तेल से भगवान बदरीनाथ का अभिषेक किया जाता है, क्योंकि 6 महीने तक कपाट बंद रहने के कारण विग्रह शुष्क हो जाता है।   पिछले साल (2025) से तुलना उल्लेखनीय है कि साल 2025 में बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई को खोले गए थे और नवंबर माह में शीतकाल के लिए बंद किए गए थे। इस बार यात्रा लगभग 11 दिन पहले, यानी 23 अप्रैल से शुरू हो रही है। यह श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है क्योंकि उन्हें दर्शन के लिए अप्रैल के अंत का सुहावना मौसम मिलेगा और यात्रा की अवधि भी थोड़ी लंबी हो जाएगी।   पंच केदार में शामिल भगवान रुद्रनाथ के कपाट 18 मई को खुलेंगे बदरीनाथ धाम के अलावा, आज वसंत पंचमी के दिन 'पंच केदार' (Panch Kedar) में शामिल चौथे केदार, भगवान रुद्रनाथ (Rudranath) जी के कपाट खुलने की तिथि भी घोषित की गई है।   गोपीनाथ मंदिर (Gopinath Mandir), गोपेश्वर, जो भगवान रुद्रनाथ का शीतकालीन गद्दी स्थल है, वहां आज ब्राह्मणों, पुजारियों और हक-हकूकधारियों की मौजूदगी में पंचांग गणना की गई।   रुद्रनाथ कपाट खुलने की तिथि: 18 मई, 2026 विशेषता: भगवान रुद्रनाथ पंच केदारों में एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान शिव के 'मुख' (Face) की पूजा होती है। बाकी केदारों में, जैसे केदारनाथ में पृष्ठ भाग (पीठ), तुंगनाथ में भुजाएं, मध्यमहेश्वर में नाभि और कल्पेश्वर में जटाओं की पूजा होती है। दुर्गम यात्रा: रुद्रनाथ की यात्रा को पंच केदारों में सबसे कठिन माना जाता है। यह मंदिर समुद्र तल से 2286 मीटर की ऊंचाई पर घने जंगलों और बुग्यालों (High altitude meadows) के बीच स्थित है। यहां पहुंचने के लिए लगभग 20-22 किलोमीटर का कठिन पैदल ट्रैक करना पड़ता है।   बदरीनाथ धाम: पौराणिक इतिहास और 'स्वयं व्यक्त' विग्रह का रहस्य बदरीनाथ धाम को शास्त्रों में 'भू-बैकुंठ' कहा गया है, जिसका अर्थ है- धरती पर स्थित बैकुंठ धाम। यह मंदिर अलकनंदा नदी के तट पर, 'नर' और 'नारायण' नामक दो पर्वतों के बीच नीलकंठ शिखर की छाया में स्थित है।   बदरीनाथ नाम की कथा: जब माता लक्ष्मी बनीं 'बदरी' का वृक्ष पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु ने यहां घोर तपस्या करने का निर्णय लिया। वे खुली जगह में तपस्या में लीन हो गए। तभी वहां मौसम खराब हो गया और भारी बर्फबारी शुरू हो गई, साथ ही तेज धूप भी निकलने लगी। भगवान को मौसम की मार से बचाने के लिए माता लक्ष्मी ने वहां एक 'बदरी' (बेर - wild berry) के वृक्ष का रूप धारण कर लिया और भगवान विष्णु के ऊपर छाया बनकर खड़ी हो गईं।   जब भगवान विष्णु की तपस्या पूर्ण हुई, तो उन्होंने देखा कि माता लक्ष्मी बर्फ से ढकी हुई हैं। उनकी इस भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने कहा कि आज से इस स्थान पर मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा होगी और चूंकि तुमने बदरी वृक्ष बनकर मेरी रक्षा की, इसलिए यह स्थान 'बदरीनाथ' के नाम से जाना जाएगा।   3.3 फीट की शालिग्राम मूर्ति और आदि शंकराचार्य मंदिर के गर्भगृह में भगवान बदरी नारायण की 3.3 फीट ऊंची (1 मीटर) काले पत्थर की मूर्ति स्थापित है। यह मूर्ति शालिग्राम पत्थर से बनी है।   स्वयं व्यक्त क्षेत्र: हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु की हजारों मूर्तियां हैं, लेकिन उनमें से 8 मूर्तियां ऐसी हैं जो किसी शिल्पकार ने छेनी-हथौड़े से नहीं बनाईं, बल्कि वे स्वयं प्रकट हुई हैं। बदरीनाथ की मूर्ति इन्हीं आठ 'स्वयं व्यक्त क्षेत्रों' (Swayam Vyakta Kshetras) में से एक है। अन्य सात में श्रीरंगम, तिरुपति और मुक्तिनाथ शामिल हैं। नारद कुंड से पुनर्स्थापना: इतिहासकार और मान्यताएं बताती हैं कि बौद्ध काल के दौरान आक्रमणों के भय से या कालांतर में यह मूर्ति नारद कुंड (अलकनंदा नदी का एक हिस्सा) में विलीन हो गई थी। 7वीं शताब्दी में जब आदि गुरु शंकराचार्य इस क्षेत्र में आए, तो उन्होंने दिव्य दृष्टि से इस मूर्ति को नारद कुंड से निकाला और पहले गरुड़ गुफा के पास और बाद में वर्तमान मंदिर में स्थापित किया। चतुर्भुज रूप: इस मूर्ति में भगवान विष्णु पद्मासन (ध्यान मुद्रा) में बैठे हैं। उनके एक हाथ में शंख, दूसरे में चक्र है, और दो हाथ योग मुद्रा में हैं। यह भगवान का शांत और तपस्वी रूप है।   राष्ट्रीय एकता का प्रतीक: केरल के पुजारी (रावल) की अनूठी परंपरा बदरीनाथ धाम भारत की राष्ट्रीय और सांस्कृतिक अखंडता का एक जीवित प्रमाण है। सोचिए, मंदिर हिमालय की चोटियों पर उत्तर भारत (उत्तराखंड) में है, लेकिन इसके मुख्य पुजारी सुदूर दक्षिण भारत (केरल) से आते हैं।   रावल (Rawal) पद: बदरीनाथ के मुख्य पुजारी को 'रावल' कहा जाता है। आदि शंकराचार्य ने देश को चार कोनों में जोड़ने के लिए यह व्यवस्था बनाई थी। योग्यता: परंपरा के अनुसार, रावल अनिवार्य रूप से केरल राज्य के नम्बूदरी (Nambudiri) सम्प्रदाय के ब्राह्मण होने चाहिए। यह वही समुदाय है जिससे आदि शंकराचार्य स्वयं आते थे। नियम और मर्यादा: रावल को अत्यंत कठोर ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। वे स्त्रियों का स्पर्श तो दूर, उनकी परछाई से भी बचते हैं। मंदिर के कपाट खुलने से लेकर बंद होने तक, वे ही भगवान की विशेष पूजा, श्रृंगार और भोग का अधिकार रखते हैं। उन्हें बदरीनाथ में भगवान का प्रतिनिधि माना जाता है।   चारधाम यात्रा का क्रम और महत्व उत्तराखंड की चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra) मोक्ष दायिनी मानी जाती है। शास्त्रों में इस यात्रा का एक निश्चित आध्यात्मिक क्रम बताया गया है, जो 'परिक्रमा' की तरह पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ता है।   यमुनोत्री (Yamunotri): यात्रा की शुरुआत सूर्य पुत्री यमुना जी के दर्शन से होती है। यह पापों के नाश और शुद्धि का प्रतीक है। गंगोत्री (Gangotri): इसके बाद श्रद्धालु मोक्ष दायिनी भागीरथी (गंगा) के उद्गम स्थल जाते हैं। केदारनाथ (Kedarnath): फिर भगवान शिव के बारहवें ज्योतिर्लिंग, केदारनाथ की कठिन चढ़ाई की जाती है। बिना शिव की अनुमति के विष्णु धाम नहीं जाया जाता। बदरीनाथ (Badrinath): अंत में भगवान विष्णु के धाम बदरीनाथ पहुंचकर यात्रा पूर्ण मानी जाती है। कहावत है- "जो जाए बदरी, वो ना आए ओदरी" (यानी जो व्यक्ति बदरीनाथ के दर्शन कर लेता है, उसे दोबारा माता के गर्भ में नहीं आना पड़ता, उसे मोक्ष मिल जाता है)।   नोट: यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट आमतौर पर अक्षय तृतीया के दिन (इस वर्ष 20-21 अप्रैल के आसपास) सबसे पहले खुलते हैं। इसके कुछ दिनों बाद केदारनाथ और अंत में 23 अप्रैल को बदरीनाथ के कपाट खोले जाएंगे।   छह माह देवता और छह माह मनुष्य करते हैं पूजा बदरीनाथ और अन्य धामों के कपाट साल में केवल 6 महीने (ग्रीष्मकाल) के लिए ही क्यों खुलते हैं? इसके पीछे भौगोलिक और पौराणिक दोनों कारण हैं।   भौगोलिक कारण सर्दियों में (नवंबर से अप्रैल तक) यह पूरा हिमालयी क्षेत्र भारी बर्फबारी की चपेट में रहता है। तापमान शून्य से 10-20 डिग्री नीचे चला जाता है। बदरीनाथ जाने वाले रास्ते बर्फ से ब्लॉक हो जाते हैं और वहां जीवन यापन असंभव हो जाता है। इसलिए कपाट बंद कर दिए जाते हैं और भगवान की चल-विग्रह मूर्ति को नीचे जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में लाया जाता है।   पौराणिक मान्यता: नारद जी की भक्ति मान्यता है कि एक वर्ष इंसानों का एक दिन देवताओं का होता है। इसलिए 6 महीने (जो देवताओं का दिन है) कपाट खुले रहते हैं और मनुष्य पूजा करते हैं। शेष 6 महीने (जो देवताओं की रात है), कपाट बंद होने के बाद देवर्षि नारद और अन्य देवतागण भगवान बदरीनाथ की पूजा करते हैं।   कपाट बंद करते समय मुख्य पुजारी गर्भगृह में एक 'अखंड ज्योति' (घी का दीपक) जलाकर आते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि 6 महीने बाद, भारी बर्फबारी और ऑक्सीजन की कमी के बावजूद, जब कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे, तो वह ज्योति जलती हुई मिलती है। इस अखंड ज्योति के दर्शन को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।   यात्रा के लिए आवश्यक तैयारी: कैसे पहुंचें और कहां ठहरें? 23 अप्रैल की तारीख घोषित होते ही श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा की योजना बनाना शुरू कर देना चाहिए। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:   पंजीकरण (Registration) अनिवार्य उत्तराखंड सरकार ने पिछले कुछ वर्षों से चारधाम यात्रा के लिए बायोमेट्रिक/ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। 2026 में भी आपको यात्रा शुरू करने से पहले उत्तराखंड पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर अपना पंजीकरण कराना होगा।   कैसे पहुंचें? हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा देहरादून (जौलीग्रांट) है। वहां से आप टैक्सी या बस ले सकते हैं। इसके अलावा, देहरादून के सहस्त्रधारा से बदरीनाथ के लिए सीधी हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है। रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और हरिद्वार हैं। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक की रेल लाइन परियोजना (जो निर्माणाधीन थी) 2026 तक काफी हद तक प्रगति पर है, लेकिन मुख्य यात्रा अभी भी सड़क मार्ग से ही होती है। सड़क मार्ग: ऋषिकेश से बदरीनाथ की दूरी लगभग 300 किमी है। ऑल वेदर रोड (All Weather Road) परियोजना के कारण अब सड़क काफी चौड़ी और सुरक्षित हो गई है। आप अपनी कार, टैक्सी या रोडवेज बसों से आसानी से पहुंच सकते हैं।   रुकने की व्यवस्था बदरीनाथ में गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) के गेस्ट हाउस, धर्मशालाएं और निजी होटल उपलब्ध हैं। चूंकि 23 अप्रैल को कपाट खुलने के समय भारी भीड़ होगी, इसलिए बुकिंग पहले से करना समझदारी होगी।   आस्था के महाकुंभ का निमंत्रण 23 जनवरी, वसंत पंचमी का यह पावन दिन हम सभी के लिए एक आध्यात्मिक निमंत्रण लेकर आया है। 23 अप्रैल 2026 की सुबह जब बदरीनाथ के सिंह द्वार खुलेंगे, घंटियों की गूंज हिमालय से टकराएगी और 'जय बदरी विशाल' के जयकारे लगेंगे, तो वह केवल एक मंदिर का खुलना नहीं होगा, बल्कि वह क्षण होगा जब नश्वर मनुष्य का मिलन शाश्वत परमात्मा से होगा।   यदि आप भी इस वर्ष बदरीनाथ धाम जाने का संकल्प ले रहे हैं, तो 23 अप्रैल की तारीख अपने कैलेंडर में सुरक्षित कर लें। अपने स्वास्थ्य की जांच कराएं, गर्म कपड़े तैयार रखें और मन में श्रद्धा का भाव लेकर देवभूमि की ओर कदम बढ़ाएं।   याद रखें: हिमालय केवल घूमने की जगह नहीं, यह महसूस करने की जगह है। अपनी यात्रा को पवित्र रखें, पर्यावरण का ध्यान रखें और प्लास्टिक मुक्त यात्रा का संकल्प लें।   || जय बदरी विशाल ||   त्वरित तथ्य (Quick Facts Summary) विवरण जानकारी मंदिर का नाम श्री बदरीनाथ धाम (चमोली, उत्तराखंड) कपाट खुलने की तिथि 23 अप्रैल, 2026 (गुरुवार) कपाट खुलने का समय सुबह 6:15 बजे घोषणा का दिन वसंत पंचमी (23 जनवरी 2026) प्रधान देवता भगवान विष्णु (बदरी नारायण) मूर्ति का प्रकार शालिग्राम शिला (स्वयं व्यक्त) मुख्य पुजारी रावल (केरल के नम्बूदरी ब्राह्मण) रुद्रनाथ कपाट खुलने की तिथि 18 मई, 2026 शीतकालीन आवास नृसिंह मंदिर, जोशीमठ निकटतम हवाई अड्डा जौलीग्रांट, देहरादून

Unknown जनवरी 23, 2026 0
char dham yatra 2026 mobile camera ban in temple premises new guidelines ssued
चारधाम यात्रा 2026: अब भक्ति में नहीं पड़ेगा 'डिजिटल' खलल; मंदिर परिसरों में मोबाइल-कैमरा पूरी तरह बैन, गढ़वाल कमिश्नर का मास्टर प्लान तैयार!

ऋषिकेश/देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चार धाम यात्रा को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन ने अभी से बड़ी और सख्त तैयारियों का शंखनाद कर दिया है। साल 2026 की यात्रा सीजन में आने वाले श्रद्धालुओं को एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखने के लिए अब मंदिर परिसरों (Temple Premises) के भीतर मोबाइल फोन और कैमरों की एंट्री पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।READ ALSO:-UP बोर्ड का ऐतिहासिक 'गेम चेंजर' कदम: अब रटने से नहीं, हुनर से मिलेगी पहचान; 2026 से कक्षा 9 और 11 में व्यावसायिक शिक्षा हुई अनिवार्य   यह फैसला पिछले कुछ सालों में मंदिरों के भीतर बढ़ती रील बनाने की होड़ और उससे दर्शन व्यवस्था में उत्पन्न हो रही बाधाओं को देखते हुए लिया गया है। गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने ऋषिकेश स्थित चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में आयोजित एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद इन नए नियमों की घोषणा की।   क्यों लिया गया 'No Mobile' का फैसला? पिछले यात्रा सीजन (2025) में चार धामों में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ी थी। आंकड़ों के मुताबिक, 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। हालांकि, इस दौरान यह देखा गया कि कई श्रद्धालु दर्शन कतारों और मंदिर परिसर के अंदर वीडियो बनाने, रील शूट करने और फोटोग्राफी में व्यस्त रहते हैं।   गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए: दर्शन में बाधा: मोबाइल के इस्तेमाल से कतारें धीमी हो जाती हैं और पीछे खड़े श्रद्धालुओं को दर्शन में देरी होती है। पवित्रता और मर्यादा: चार धाम एक पवित्र तीर्थ है, पर्यटन स्थल नहीं। मंदिर के भीतर ध्यान और प्रार्थना की जगह सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएशन ने ले ली थी, जिससे तीर्थ की गरिमा प्रभावित हो रही थी।   कमिश्नर ने स्पष्ट किया, "चार धाम यात्रा राज्य का एक पवित्र तीर्थ है, जहां भक्तजन श्रद्धा के साथ आते हैं। दर्शन के दौरान इन उपकरणों की अनुमति से कई समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसरों में मोबाइल और कैमरे पूरी तरह वर्जित कर दिए गए हैं।"   श्रद्धालुओं के लिए क्या होगी व्यवस्था? प्रशासन जानता है कि मोबाइल आज की जरूरत है, इसलिए प्रतिबंध के साथ-साथ सुविधा का भी ध्यान रखा गया है।   लॉकर और क्लोक रूम: बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) और संबंधित प्रशासनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन और कैमरे सुरक्षित रखने के लिए मंदिर परिसरों के बाहर अलग से उचित व्यवस्था (क्लॉक रूम या लॉकर) सुनिश्चित करें। फोटो कहां खींच सकेंगे?: प्रतिबंध केवल 'मंदिर परिसर' के भीतर लागू है। दर्शन करके मंदिर से बाहर निकलने के बाद श्रद्धालु परिसर की पृष्ठभूमि (Background) में फोटो और वीडियो ले सकते हैं। यानी यादों को कैद करने पर रोक नहीं है, बस पूजा में विघ्न डालने पर रोक है।   मिशन मोड में प्रशासन: 7 दिन में टेंडर, 1 महीने में सड़कें चकाचक चार धाम यात्रा 2026 को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन 'फास्ट ट्रैक मोड' में आ गया है। गढ़वाल आयुक्त ने जिलाधिकारियों (DM), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) और विभागीय अधिकारियों के साथ हुई बैठक में तैयारियों का रोडमैप तैयार किया।   बैठक के प्रमुख निर्देश: 7 दिन का अल्टीमेटम: चार धाम यात्रा से जुड़े सभी आवश्यक कार्यों के टेंडर प्रक्रिया को स्क्रूटनी करते हुए अगले एक सप्ताह (07 दिन) के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। सड़कों की मरम्मत: पिछले साल अत्यधिक वर्षा और भूस्खलन के कारण यात्रा मार्गों पर कई जगह मलबा आ गया था और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। एनएच (National Highway), लोक निर्माण विभाग (PWD) और बीआरओ (BRO) को निर्देश दिया गया है कि एक माह के भीतर मलबे का निस्तारण कर सड़कों को गड्ढा मुक्त और सुचारू किया जाए। बजट की कमी नहीं: आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि जिलों की मांग के अनुरूप सरकार शीघ्र ही बजट उपलब्ध कराएगी, ताकि काम में कोई रुकावट न आए।   सुविधाओं पर विशेष फोकस आयुक्त ने जोर देकर कहा कि इस वर्ष यात्रा को पिछले वर्षों की तुलना में अधिक सुगम और सरल बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया है:   पार्किंग क्षमता: धामों और यात्रा पड़ावों पर वाहनों के दबाव को देखते हुए पार्किंग क्षमता बढ़ाई जाएगी। पैदल मार्ग: केदारनाथ और यमुनोत्री जैसे धामों के पैदल मार्गों का सुधारीकरण किया जाएगा ताकि यात्रियों को चलने में कठिनाई न हो। स्वास्थ्य सुविधाएं: ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर काम होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। हेली सेवाएं: हेलीकॉप्टर सेवाओं की अग्रिम तैयारियां और टिकट बुकिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।   यात्रा कब से शुरू होगी? (Expected Dates) यद्यपि चारों धामों के कपाट खुलने की आधिकारिक तिथियां अभी घोषित नहीं हुई हैं, लेकिन परंपरा के अनुसार:   गंगोत्री और यमुनोत्री: कपाट अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर खुलते हैं। केदारनाथ धाम: कपाट खुलने की तिथि महाशिवरात्रि के दिन तय की जाती है। बद्रीनाथ धाम: कपाट खुलने की तिथि बसंत पंचमी के अवसर पर राजमहल में तय होती है।   गढ़वाल आयुक्त ने संकेत दिए हैं कि इस वर्ष यात्रा अप्रैल माह से प्रारंभ होने की प्रबल संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी विभागों को समय से पहले तैयारियां पूरी करने को कहा गया है।   उत्तराखंड सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि चार धाम यात्रा में अब 'आस्था' को 'मनोरंजन' पर तरजीह दी जाएगी। मोबाइल बैन का फैसला कठोर लग सकता है, लेकिन लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर की पवित्रता के लिए यह समय की मांग थी। जो श्रद्धालु 2026 में चार धाम आने की योजना बना रहे हैं, उन्हें इन नए नियमों के लिए मानसिक रूप से तैयार होकर आना होगा।

Unknown जनवरी 17, 2026 0
dehradun connectivity boost delhi expressway and ballupur paonta road ready soon
देहरादून: जाम के झाम से मिलेगी आजादी, फरवरी में शुरू होगा बल्लूपुर-पांवटा मार्ग, दिल्ली एक्सप्रेसवे से रफ़्तार भरेगी राजधानी

देहरादून (Dehradun News): साल 2026 की शुरुआत उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के लिए बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के लिहाज से ऐतिहासिक साबित होने जा रही है। पहाड़ों की रानी मसूरी के प्रवेश द्वार और राज्य की राजधानी देहरादून में अब ट्रैफिक जाम गुजरे जमाने की बात होने वाला है। देहरादून रोड कनेक्टिविटी (Dehradun Road Connectivity) को विश्वस्तरीय बनाने के लिए चल रही दो बड़ी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।READ ALSO:-गाजियाबाद-जेवर RRTS: रूट में कोई बदलाव नहीं, 72 किमी लंबे कॉरिडोर पर ही दौड़ेगी रैपिड रेल, गुरुग्राम लिंक पर आया नया अपडेट   एक तरफ, बल्लूपुर से हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक शहर पांवटा साहिब को जोड़ने वाला मार्ग फरवरी तक जनता को समर्पित करने की तैयारी है। वहीं दूसरी ओर, बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे भी लगभग बनकर तैयार है। इन दोनों परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से न केवल आम जनता को राहत मिलेगी, बल्कि यह राज्य की आर्थिकी और पर्यटन के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगा।   बल्लूपुर-पांवटा साहिब मार्ग: शहर के ट्रैफिक का नया समाधान देहरादून शहर के बीचों-बीच स्थित बल्लूपुर चौक (Ballupur Chowk) सालों से भीषण ट्रैफिक जाम का पर्याय बना हुआ था। शिमला बाईपास और चकराता रोड का मुख्य जंक्शन होने के कारण यहां वाहनों का दबाव हमेशा बना रहता था। लेकिन अब स्थिति बदलने वाली है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और लोक निर्माण विभाग की मेहनत रंग लाई है।   सूत्रों के मुताबिक, बल्लूपुर से विकासनगर होते हुए पांवटा साहिब जाने वाले मार्ग का चौड़ीकरण और नवनिर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। एनएचएआई के इंजीनियर सुमित के अनुसार, "इस पूरे मार्ग पर भविष्य की जरूरतों को देखते हुए हाईटेक कैमरे लगाए गए हैं। देहरादून और हिमाचल को जोड़ने के लिए यमुना नदी पर लगभग 162 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य पुल भी बनाया गया है। जल्द ही यह मार्ग आम जनता और सेलाकुई जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा।"   यात्रा के समय में भारी कटौती: इस मार्ग के खुलने का सबसे बड़ा फायदा समय की बचत के रूप में सामने आएगा। वर्तमान स्थिति: अभी देहरादून से पांवटा साहिब जाने में खराब सड़कों और ट्रैफिक के कारण 2 से 2.5 घंटे का समय लगता है। नई स्थिति: सड़क के चौड़ीकरण और नए पुल के बनने के बाद यह दूरी सिमटकर मात्र 40 मिनट की रह जाएगी।   औद्योगिक क्षेत्र और व्यापार को मिलेगी नई उड़ान देहरादून रोड कनेक्टिविटी (Dehradun Road Connectivity) के सुधरने का सीधा असर व्यापार पर पड़ेगा। पांवटा साहिब (Paonta Sahib), हिमाचल प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में फार्मास्युटिकल (दवा), सीमेंट और पैकेजिंग इंडस्ट्रीज स्थित हैं।   देहरादून और पांवटा साहिब के बीच सुगम यातायात होने से: कच्चे माल की सप्लाई: उद्योगों तक कच्चा माल पहुंचाने में लगने वाला समय और लागत कम होगी। ट्रांसपोर्ट सेक्टर: सेलाकुई और पांवटा के बीच चलने वाले कमर्शियल वाहनों का ईंधन बचेगा और टर्नअराउंड टाइम सुधरेगा। रोजगार: दोनों शहरों के बीच आवाजाही आसान होने से कुशल श्रमिकों और पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।   दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: 2.5 घंटे में दिल्ली से दून दूसरी और सबसे अहम परियोजना दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi-Dehradun Expressway) है, जिसने देहरादून की कनेक्टिविटी को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। करीब 13,000 करोड़ रुपये की लागत से बना यह 210 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे इंजीनियरिंग का एक नायाब नमूना है।   वन्यजीवों के लिए खास इंतजाम: इस एक्सप्रेसवे का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा गणेशपुर से देहरादून के बीच का था, जो राजाजी नेशनल पार्क के इको-सेंसिटिव जोन से गुजरता है। पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए:   लगभग 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर (Elevated Corridor) बनाया गया है। हाथियों और अन्य जंगली जानवरों के सुरक्षित आवागमन के लिए 50 से अधिक वाइल्डलाइफ अंडरपास बनाए गए हैं। यह एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर वाला एक्सप्रेसवे माना जा रहा है।   इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी, जिसे तय करने में पहले 5 से 6 घंटे लगते थे, अब वह घटकर महज 2.5 से 3 घंटे रह जाएगी।   शहर के अंदरूनी हिस्सों को मिलेगी राहत इन दोनों बाहरी मार्गों के मजबूत होने का सबसे सकारात्मक प्रभाव देहरादून शहर की आंतरिक सड़कों पर पड़ेगा। अभी तक, हिमाचल या पश्चिमी यूपी जाने वाला भारी ट्रैफिक शहर के भीतर से होकर गुजरता था, जिससे जीएमएस रोड (GMS Road), सहारनपुर रोड और कांवली रोड पर दिनभर जाम लगा रहता था।   अब देहरादून रोड कनेक्टिविटी (Dehradun Road Connectivity) के नए मॉडल के तहत:   बाहरी ट्रैफिक शहर में प्रवेश किए बिना बाईपास और एक्सप्रेसवे से निकल जाएगा। स्थानीय लोगों को स्कूल, दफ्तर और बाजार जाने में आसानी होगी। प्रदूषण के स्तर में भी भारी कमी आने की उम्मीद है।   पर्यटन और रियल एस्टेट सेक्टर में बूम उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था (Economy of Uttarakhand) मुख्य रूप से पर्यटन पर निर्भर है। सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने से वीकेंड टूरिज्म (Weekend Tourism) में भारी उछाल आने की संभावना है।   पर्यटन (Tourism): दिल्ली-एनसीआर के पर्यटक अब बिना थके कुछ ही घंटों में देहरादून पहुंच सकेंगे। यहां से मसूरी, चकराता, धनोल्टी और ऋषिकेश जाना और भी आसान हो जाएगा। होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों के लिए यह सुनहरे दौर की शुरुआत है। रियल एस्टेट (Real Estate): कनेक्टिविटी बढ़ते ही देहरादून के बाहरी इलाकों, जैसे झाझरा, सेलाकुई, और शिमला बाईपास पर प्रॉपर्टी के दामों में उछाल देखा जा रहा है। एक्सप्रेसवे के किनारे नए वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और आवासीय कॉलोनियां विकसित हो रही हैं।   भविष्य के ट्रैफिक प्लान पर पुलिस की नजर सड़कें तो बन गई हैं, लेकिन ट्रैफिक मैनेजमेंट अब भी एक चुनौती है। इस पर देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अजय सिंह का कहना है, "हम देहरादून में नए ट्रैफिक रूट प्लान, बाईपास और सिग्नल-फ्री कॉरिडोर पर विचार कर रहे हैं, ताकि बढ़ते वाहनों का दबाव संतुलित किया जा सके। नई सड़कों के साथ-साथ शहर के भीतर भी यातायात को सुचारू बनाने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।"   विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल और एनफोर्समेंट के बिना इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा, इसलिए प्रशासन को अब मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा।   कुल मिलाकर, फरवरी 2026 तक बल्लूपुर-पांवटा साहिब मार्ग का पूरा होना और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का संचालन, दून घाटी के लिए विकास की नई इबारत लिखेगा। देहरादून रोड कनेक्टिविटी (Dehradun Road Connectivity) में आया यह सुधार न केवल यात्रा को सुगम बनाएगा, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक विकास का एक मजबूत आधार स्तंभ भी बनेगा। अब इंतजार है तो बस इन मार्गों पर वाहनों के सरपट दौड़ने का, जिससे देहरादून की 'रफ्तार' को नए पंख लग सकें।   उत्तराखंड की राजधानी में देहरादून रोड कनेक्टिविटी (Dehradun Road Connectivity) को लेकर दो बड़ी परियोजनाएं पूरी होने वाली हैं। बल्लूपुर-पांवटा साहिब मार्ग फरवरी तक शुरू हो जाएगा, जिससे हिमाचल की यात्रा 2.5 घंटे से घटकर 40 मिनट की रह जाएगी। वहीं, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से दिल्ली की दूरी मात्र 2.5 घंटे में तय होगी। इन परियोजनाओं से शहर को जाम से मुक्ति मिलेगी और पर्यटन व उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

Unknown जनवरी 17, 2026 0
Jim Corbett National Park Safari Mobile Phone Ban New Rules Penalty For Tourists And Drivers
Jim Corbett Safari Ban: जिम कॉर्बेट में अब नहीं बनेंगी 'Reels', सफारी में मोबाइल ले जाने पर लगा पूर्ण प्रतिबंध; नियम तोड़ा तो पर्यटक के साथ ड्राइवर पर भी गिरेगी गाज

नैनीताल/रामनगर (ब्यूरो रिपोर्ट)। देवभूमि उत्तराखंड की गोद में बसे विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbett National Park) में अब जंगल सफारी का अनुभव पूरी तरह बदलने वाला है। अगर आप भी छुट्टियों में कॉर्बेट की हसीन वादियों में बाघों (Tigers) का दीदार करने या सोशल मीडिया के लिए 'रील्स' (Reels) और 'स्टोरी' (Stories) बनाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपको थोड़ा मायूस कर सकती है, लेकिन वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह किसी खुशखबरी से कम नहीं है।READ ALSO:-मेरठ का कपसाड़ कांड: एक मां की चिता, अगवा बेटी का इंतजार और 19 घंटे का वह 'महा-संग्राम' जिसने सिस्टम को हिला दिया   पार्क प्रशासन ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लेते हुए सफारी के दौरान पर्यटकों द्वारा मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban) लगा दिया है। अब पर्यटक अपनी जिप्सी में मोबाइल लेकर जंगल के अंदर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देशों और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की गाइडलाइंस का पालन करते हुए लिया गया है।   क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला? (The Reason Behind The Ban) कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) भारत का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित नेशनल पार्क है। यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, पर्यटन का स्वरूप बदला है और 'इको-टूरिज्म' (Eco-Tourism) की जगह 'सेल्फी-टूरिज्म' ने ले ली है। पार्क प्रशासन और वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स ने मोबाइल फोन को जंगल के लिए एक बड़ा खतरा माना है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी वजहें हैं:   1. वन्यजीवों के व्यवहार में बदलाव (Behavioral Changes in Wildlife) अक्सर देखा गया है कि सफारी के दौरान पर्यटक बाघ या हाथी को देखते ही मोबाइल निकालकर शोर मचाने लगते हैं। कई बार उत्साह में मोबाइल से तेज आवाज में म्यूजिक बजाया जाता है या रील बनाने के चक्कर में जानवरों के बहुत करीब जाने की कोशिश की जाती है। मोबाइल की रिंगटोन और कृत्रिम आवाजें जंगल के प्राकृतिक सन्नाटे को भंग करती हैं, जिससे वन्यजीव आक्रामक हो सकते हैं या तनाव (Stress) में आ सकते हैं।   2. लोकेशन शेयरिंग और भीड़ (Location Sharing & Overcrowding) मोबाइल फोन का सबसे बड़ा दुरुपयोग 'लोकेशन शेयरिंग' के रूप में सामने आया है। जैसे ही किसी एक जिप्सी को बाघ दिखाई देता था, पर्यटक और गाइड तुरंत मोबाइल से दूसरे ड्राइवरों को कॉल या मैसेज करके लोकेशन बता देते थे। इसके परिणामस्वरूप, कुछ ही मिनटों में वहां दर्जनों जिप्सियां इकट्ठा हो जाती थीं। इससे बाघ का रास्ता ब्लॉक हो जाता था और जंगल में 'ट्रैफिक जाम' जैसी स्थिति बन जाती थी, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है।   3. फ्लैश और सेल्फी का खतरा (Flash & Selfie Hazard) मोबाइल से फोटो खींचते समय अक्सर पर्यटक अनजाने में फ्लैश लाइट (Flash Light) जला देते हैं। रात की सफारी या कम रोशनी में यह फ्लैश जानवरों की आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है और उन्हें भड़का सकता है। इसके अलावा, सेल्फी लेने के चक्कर में पर्यटक जिप्सी से बाहर लटकने या नीचे उतरने का जोखिम उठाते हैं, जिससे जानलेवा हादसे हो सकते हैं।   क्या है नया नियम? (What are the New Rules?) कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) के उप निदेशक राहुल मिश्रा ने नई व्यवस्था की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करने जा रहा है।   गेट पर जमा होंगे फोन: पर्यटकों को सफारी जोन (बिजरानी, ढिकाला, झिरना, ढेला आदि) में प्रवेश करने से पहले अपने मोबाइल फोन प्रवेश द्वार (Entry Gate) पर जमा कराने होंगे या अपनी निजी गाड़ी में लॉकर में रखने होंगे। चेकिंग अभियान: सफारी गेट पर वन विभाग के कर्मचारी सघन चेकिंग करेंगे। अगर किसी पर्यटक के पास कपड़े या बैग में छिपाया हुआ मोबाइल मिलता है, तो उसे जब्त कर लिया जाएगा। DSLR को हरी झंडी: प्रशासन ने फोटोग्राफी के शौकीनों को राहत दी है। अगर आपके पास प्रोफेशनल कैमरा (DSLR या Mirrorless) है, तो आप उसे ले जा सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि प्रोफेशनल कैमरे का इस्तेमाल करने वाले लोग आमतौर पर वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के नियमों का पालन करते हैं और शोर नहीं मचाते।   उल्लंघन करने पर दोहरी मार: पर्यटक और ड्राइवर दोनों नपेंगे इस बार प्रशासन ने नियमों को लागू करने के लिए 'सामूहिक जिम्मेदारी' (Collective Responsibility) का फॉर्मूला अपनाया है। अगर जंगल के अंदर किसी पर्यटक के पास मोबाइल पाया गया, तो सजा सिर्फ उसे नहीं मिलेगी, बल्कि उसे ले जाने वाले जिप्सी ड्राइवर और नेचर गाइड को भी भुगतना होगा।   पर्यटक पर जुर्माना: मोबाइल के साथ पकड़े जाने पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा और पार्क से तुरंत बाहर निकाला जा सकता है। ड्राइवर/गाइड पर एक्शन: चूंकि पर्यटकों को नियमों का पालन कराना गाइड और ड्राइवर की जिम्मेदारी है, इसलिए उल्लंघन होने पर ड्राइवर की जिप्सी का रजिस्ट्रेशन और गाइड का लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है।   इस नियम के बाद अब जिप्सी चालक खुद ही पर्यटकों को मोबाइल ले जाने से रोक रहे हैं, क्योंकि उनकी रोजी-रोटी का सवाल है।   पर्यटकों के लिए 'डिजिटल डिटॉक्स' (Digital Detox Experience) पार्क प्रशासन इस प्रतिबंध को एक सकारात्मक पहल के रूप में देख रहा है। इसे 'डिजिटल डिटॉक्स' का नाम दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है, "हम चाहते हैं कि पर्यटक जंगल को अपनी आंखों से देखें, न कि 6 इंच की मोबाइल स्क्रीन से। जब आप मोबाइल में उलझे रहते हैं, तो आप जंगल की आवाज़ें, हवा की सरसराहट और पक्षियों की चहचहाहट को मिस कर देते हैं। यह नियम पर्यटकों को प्रकृति से सीधे जोड़ने का एक प्रयास है।"   जिम कॉर्बेट पार्क: एक नजर में (About Jim Corbett National Park) यह नियम जिन क्षेत्रों में लागू होगा, उनके बारे में जानना भी जरूरी है। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान है, जिसकी स्थापना 1936 में हुई थी। पहले इसका नाम हैली नेशनल पार्क था।   स्थान: नैनीताल जिला, उत्तराखंड। कुल क्षेत्रफल: लगभग 1318 वर्ग किलोमीटर। मुख्य आकर्षण: रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, 600 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां। सफारी जोन: ढिकाला (Dhikala): सबसे प्रसिद्ध और बड़ा जोन, जहां नाइट स्टे की सुविधा है। बिजरानी (Bijrani): बाघ दिखने की सबसे ज्यादा संभावना वाला जोन। झिरना (Jhirna): साल भर खुला रहने वाला जोन। ढेला (Dhela): नया इको-टूरिज्म जोन। दुर्गादेवी (Durgadevi): पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग।   इन सभी जोन्स में सफारी के दौरान अब मोबाइल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।   पर्यटकों के मन में उठते सवाल (FAQs for Tourists) Q: अगर इमरजेंसी हुई तो क्या करेंगे? A: हर सफारी जिप्सी के साथ एक प्रशिक्षित नेचर गाइड होता है। इसके अलावा वन विभाग की पेट्रोलिंग गाड़ियां वायरलेस सेट (Wireless Sets) से लैस होती हैं। किसी भी आपात स्थिति में गाइड तुरंत वन अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। पर्यटकों को अपने पास फोन रखने की आवश्यकता नहीं है। Q: क्या हम GoPro या एक्शन कैमरा ले जा सकते हैं? A: अभी तक के निर्देशों के अनुसार, केवल स्टिल फोटोग्राफी (DSLR/Mirrorless) पर स्पष्ट छूट है। एक्शन कैमरों और वीडियो कैमरों पर स्थिति जोन के हिसाब से भिन्न हो सकती है, इसलिए बुकिंग के समय या गेट पर पूछताछ करना बेहतर है। Q: क्या हम अपनी यादें संजो नहीं पाएंगे? A: आप डीएसएलआर कैमरा ले जा सकते हैं। अगर आपके पास कैमरा नहीं है, तो आप जंगल को अपनी यादों में संजोएं। कई बार बिना कैमरे की सफारी ज्यादा यादगार होती है क्योंकि आपका पूरा ध्यान प्रकृति पर होता है।   विशेषज्ञों की राय वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट और फोटोग्राफर्स ने इस कदम का स्वागत किया है। वरिष्ठ वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर सुमित वर्मा कहते हैं, "यह एक बहुत जरूरी कदम था। रणथंभौर और काजीरंगा जैसे अन्य पार्कों में भी मोबाइल के कारण समस्याएं देखी गई हैं। मोबाइल फोन जंगल के अनुशासन को तोड़ते हैं। जब पर्यटक रील बनाने के बजाय जंगल को महसूस करेंगे, तो उन्हें असली रोमांच का पता चलेगा।"   वहीं, स्थानीय होटल एसोसिएशन के कुछ लोगों का मानना है कि इससे युवाओं में थोड़ी निराशा हो सकती है जो सोशल मीडिया के लिए ही ट्रैवल करते हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह जिम कॉर्बेट की ब्रांड वैल्यू को बढ़ाएगा।   जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में मोबाइल बैन का फैसला वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह हमें याद दिलाता है कि हम जंगल में 'मेहमान' हैं, और हमें मेजबान (वन्यजीवों) के नियमों का पालन करना चाहिए। 2026 तक सरकार का लक्ष्य वी2वी (V2V) टेक्नोलॉजी से सड़कों को सुरक्षित बनाना है, वहीं जंगलों में 'नो-नेटवर्क, नो-मोबाइल' पॉलिसी से जानवरों को सुरक्षित बनाने की कवायद है।   अगर आप अगली बार कॉर्बेट जाएं, तो अपना फोन होटल के कमरे में छोड़ें और अपनी आंखों व दिल के शटर को खुला रखें। यकीन मानिए, जंगल आपको वो दिखाएगा जो कोई मोबाइल कैमरा कैप्चर नहीं कर सकता।   नोट: जिम कॉर्बेट जाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट से लेटेस्ट गाइडलाइंस जरूर चेक करें, क्योंकि नियम समय-समय पर अपडेट हो सकते हैं।

Unknown जनवरी 10, 2026 0
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कण्व नगरी कोटद्वार में गूंजी 'पंच' की आवाज; बॉक्सिंग रिंग में पौड़ी के जांबाज और पिथौरागढ़ की धाकड़ बेटियों ने रचा इतिहास, नेशनल के लिए तैयार 'देवभूमि'

उत्तराखंड की ऐतिहासिक और पौराणिक 'कण्व नगरी' कोटद्वार (Kotdwar) ने सोमवार को खेलों की दुनिया में एक नया अध्याय जोड़ दिया। यहाँ आयोजित 8वीं उत्तराखंड राज्य जूनियर अंडर-17 बॉक्सिंग चैंपियनशिप (8th Uttarakhand State Junior U-17 Boxing Championship) का फाइनल मुकाबला जिस हर्षोल्लास और जोश के साथ संपन्न हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि पहाड़ की शांत वादियों में अब 'मेडल जीतने की आग' धधक रही है।READ ALSO:-Bijnor: कलेक्ट्रेट में डीएम जसजीत कौर का 'मिशन प्रहार'; अफसरों को दो टूक- 'कुपोषण सिर्फ बीमारी नहीं, कलंक है... इसे जड़ से मिटाना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी'   फाइनल के दिन का माहौल ऐसा था मानो कोटद्वार की हवाएं और गढ़वाल की पहाड़ियां खुद एलान कर रही हों कि हमारे बच्चे अब नेशनल (National Championship) में अपना परचम लहराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। खचाखच भरे स्टेडियम और दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बालक वर्ग में पौड़ी गढ़वाल और बालिका वर्ग में पिथौरागढ़ हॉस्टल ने चैंपियनशिप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।   इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको रिंग के अंदर की हर हलचल, विजेताओं की सूची और समापन समारोह की पूरी झलकियां विस्तार से बताएंगे।   1. 24 हाई-वोल्टेज मुकाबले और बेस्ट बॉक्सर का खिताब चैंपियनशिप के अंतिम दिन कुल 24 फाइनल मुकाबले खेले गए। रिंग में उतरे नन्हे मुक्केबाजों ने अपनी तकनीक, फुर्ती और स्टेमिना से जजों और दर्शकों को हैरान कर दिया। हर पंच पर बजती तालियां बता रही थीं कि उत्तराखंड में बॉक्सिंग का भविष्य कितना उज्ज्वल है।   किसे मिला 'बेस्ट बॉक्सर' का ताज? इस टूर्नामेंट में अपनी बेहतरीन तकनीक और अजेय प्रदर्शन के लिए दो खिलाड़ियों को विशेष सम्मान से नवाजा गया:   बेस्ट बॉक्सर (बालक): पौड़ी गढ़वाल के होनहार बॉक्सर अभिषेक ने अपने शानदार खेल से जजों का दिल जीता और बालक वर्ग में 'बेस्ट बॉक्सर' का खिताब अपने नाम किया। बेस्ट बॉक्सर (बालिका): बागेश्वर की भूमिका बसेड़ा ने रिंग में बिजली जैसी फुर्ती दिखाई और बालिका वर्ग की सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज बनीं।   उभरते हुए सितारे (Most Promising Boxer): भविष्य की उम्मीद माने जाने वाले 'मोस्ट प्रोमाइजिंग बॉक्सर' का खिताब इन खिलाड़ियों को मिला:   बालक वर्ग: रुद्रप्रयाग के प्रत्युष नेगी। बालिका वर्ग: पिथौरागढ़ की अंशिका आर्य।   2. चैंपियनशिप रिजल्ट: पौड़ी का पावर और पिथौरागढ़ का प्रहार इस चैंपियनशिप में दो जिलों का दबदबा साफ देखने को मिला। एक तरफ जहां पौड़ी गढ़वाल के लड़कों ने अपनी ताकत दिखाई, वहीं दूसरी तरफ पिथौरागढ़ की लड़कियों ने साबित कर दिया कि वे किसी से कम नहीं हैं।   बालक वर्ग (Boys Category): बालक वर्ग की ओवरऑल चैंपियनशिप ट्रॉफी पौड़ी गढ़वाल ने अपने नाम की। पौड़ी के मुक्केबाजों ने रणनीतिक खेल दिखाया। हालांकि, बालक वर्ग में पिथौरागढ़ हॉस्टल के खिलाड़ियों ने भी जबरदस्त टक्कर दी और कई गोल्ड मेडल बटोरे।   प्रमुख विजेता (बालक): धर्मेंद्र, विशाल, प्रत्युष, लकी, अभिषेक और अंश वीर ने अपने-अपने भार वर्ग में विजय पताका फहराई। इनकी तकनीक और डिफेंस देखकर लग रहा था कि ये राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड को पदक जरूर दिलाएंगे।   बालिका वर्ग (Girls Category): बालिका वर्ग में पिथौरागढ़ हॉस्टल एकतरफा मजबूत रहा। 'मिनी स्पोर्ट्स हब' कहे जाने वाले पिथौरागढ़ की बेटियों ने रिंग में उतरते ही विपक्षी खिलाड़ियों को डिफेंसिव होने पर मजबूर कर दिया। प्रमुख विजेता (बालिका): माया राय, गोदावरी, दिया, रिया तेलिया और रिया जोशी ने अपने मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज की। इन खिलाड़ियों का फुटवर्क और पंचिंग एक्यूरेसी देखने लायक थी।   3. रितु खंडूड़ी का संबोधन: 'भविष्य के ओलंपिक मेडलिस्ट यहीं हैं' प्रतियोगिता के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूड़ी भूषण (Ritu Khanduri Bhushan) मौजूद रहीं। कोटद्वार उनका अपना विधानसभा क्षेत्र भी है, इसलिए खिलाड़ियों के बीच उनका उत्साह देखते ही बन रहा था।   मंच से खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए रितु खंडूड़ी ने भविष्य की बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा: "आज मैं इन बच्चों की आंखों में जो चमक देख रही हूं, वो साधारण नहीं है। यह चमक ओलंपिक और एशियाड के मेडल्स की है। कोटद्वार की इस धरती से आज बॉक्सिंग का जो नया इतिहास लिखा गया है, वह गवाह है कि हमारे पहाड़ के बच्चे अब सुविधाओं के अभाव का रोना नहीं रोते, बल्कि अपनी मेहनत से रास्ता बनाते हैं। ये सभी बच्चे भविष्य में उत्तराखंड का नाम रोशन करेंगे, यह मेरा विश्वास है।"   उन्होंने खिलाड़ियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार और खेल विभाग उनकी हर संभव मदद करेगा। उन्होंने कोच और अभिभावकों की भी सराहना की जो इन बच्चों को तराश रहे हैं।   4. आयोजन और प्रबंधन: बीएफआई और स्थानीय सहयोग इतने बड़े आयोजन को सफल बनाने में आयोजक मंडल की बड़ी भूमिका रही। बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) के प्रतिनिधि अजय सिंह, कैप्टन देवी चंद्र, और मुखर्जी जी ने प्रतियोगिता के तकनीकी पहलुओं को बखूबी संभाला।   अनुशासन: 24 मुकाबलों के दौरान रिंग में रेफरी के निर्णय सर्वमान्य रहे और खिलाड़ियों ने खेल भावना (Sportsmanship) का परिचय दिया। माहौल: कोटद्वार के स्थानीय निवासियों ने भी बड़ी संख्या में पहुंच कर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। हर अच्छे मूव पर 'भारत माता की जय' और 'उत्तराखंड की जय' के नारे गूंजते रहे।   5. क्यों खास है यह जीत? (विश्लेषण) 'खबरीलाल' की स्पोर्ट्स डेस्क का मानना है कि यह जीत सिर्फ मेडल तक सीमित नहीं है।   पहाड़ी स्टेमिना: अंडर-17 वर्ग यानी किशोरावस्था में पहाड़ के बच्चों का स्टेमिना मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा होता है। पौड़ी और पिथौरागढ़ की जीत इसी प्राकृतिक लाभ का परिणाम है। स्पोर्ट्स हॉस्टल का योगदान: पिथौरागढ़ हॉस्टल और बालिका वर्ग में पिथौरागढ़ की जीत बताती है कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्पोर्ट्स हॉस्टल सही दिशा में काम कर रहे हैं। वहां मिल रही डाइट और ट्रेनिंग का असर अब गोल्ड मेडल के रूप में दिख रहा है। रुद्रप्रयाग और बागेश्वर का उदय: बेस्ट बॉक्सर का खिताब बागेश्वर और रुद्रप्रयाग जैसे छोटे जिलों के खिलाड़ियों को मिलना यह संकेत है कि अब प्रतिभाएं सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं।   6. आगे की राह: नेशनल चैंपियनशिप इस राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में गोल्ड और सिल्वर जीतने वाले खिलाड़ी अब राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप (National Boxing Championship) में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे। चयनकर्ताओं की नजर विशेष रूप से 'बेस्ट बॉक्सर' अभिषेक और भूमिका पर रहेगी। उम्मीद है कि कोटद्वार के इस रिंग से निकले ये 'पंच' देश के दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर देंगे।   खेल प्रदेश बनता उत्तराखंड कोटद्वार में संपन्न हुई यह चैंपियनशिप एक संकेत है कि उत्तराखंड अब 'देवभूमि' के साथ-साथ 'खेल भूमि' बनने की ओर अग्रसर है। जिस तरह से हरियाणा बॉक्सिंग और कुश्ती का हब है, उसी तरह उत्तराखंड के बॉक्सर्स अब अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। पौड़ी की रणनीति और पिथौरागढ़ का आक्रामक खेल आने वाले समय में देश को कई मैरी कॉम और विजेंदर सिंह जैसे सितारे दे सकता है।   'खबरीलाल' की टीम सभी विजेता खिलाड़ियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देती है।   रिपोर्टिंग: अनिल कुमार शर्मा, खबरीलाल विशेष संवाददाता स्थान: धामपुर, बिजनौर (यूपी) तारीख: 30 दिसंबर 2025

Unknown दिसम्बर 30, 2025 0
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देवभूमि में एंट्री अब नहीं होगी फ्री: 1 जनवरी से हर बाहरी गाड़ी पर लगेगा 'ग्रीन सेस', CM धामी की सख्ती के बाद फास्टैग से वसूली का रोडमैप तैयार

अगर आप नए साल (2026) का जश्न मनाने के लिए उत्तराखंड की हसीन वादियों—मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश या औली—जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। देवभूमि उत्तराखंड ने पर्यावरण संरक्षण और राज्य के राजस्व को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। 1 जनवरी 2026 से राज्य की सीमा में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के सभी कमर्शियल और निजी वाहनों (चार पहिया और उससे ऊपर) को अब 'ग्रीन सेस' (Green Cess) चुकाना होगा।READ ALSO:-दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर फिर लगा 'ब्रेक': 5वें फेज के लिए अब अप्रैल 2026 तक का इंतजार, गंगा एक्सप्रेसवे का सफर अभी दूर   लंबे समय से फाइलों में अटकी इस योजना को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब सख्त रुख अपना लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि पर्यावरण और आर्थिकी से जुड़े इस मामले में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।   CM धामी की नाराजगी: "100 करोड़ का नुकसान कौन भरेगा?" सचिवालय में आयोजित 2025-26 की राजस्व समीक्षा बैठक (Revenue Review Meeting) के दौरान मुख्यमंत्री का पारा तब चढ़ गया जब ग्रीन सेस की फाइल सामने आई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि जिस योजना की घोषणा फरवरी 2024 में ही हो चुकी थी, उसे धरातल पर उतारने में दो साल क्यों लग गए?   बैठक के प्रमुख बिंदु: देरी पर फटकार: सीएम ने कहा कि घोषणा और दरों में संशोधन के बावजूद योजना का लागू न होना प्रशासनिक लापरवाही है। राजस्व की हानि: इस लेटलतीफी के कारण राज्य सरकार को करीब 100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। सख्त निर्देश: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि 1 जनवरी से इस योजना को हर हाल में लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि "राज्य के विकास के लिए अपने संसाधनों से आय बढ़ाना सरकार की टॉप प्रायोरिटी है।"   क्या है ग्रीन सेस और यह क्यों वसूला जा रहा है? उत्तराखंड एक हिमालयी राज्य है, जहाँ का पर्यावरण बेहद संवेदनशील है। हर साल लाखों पर्यटक अपनी गाड़ियां लेकर यहाँ आते हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। इस 'ग्रीन सेस' का मुख्य उद्देश्य इसी प्रदूषण की भरपाई करना है।   पर्यावरण संरक्षण: इस फंड का इस्तेमाल राज्य की इकोलॉजी को बचाने, हरियाली बढ़ाने और प्रदूषण कम करने के उपायों में किया जाएगा। राजस्व का स्रोत: सरकार को उम्मीद है कि इस सेस से हर साल करीब 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी, जिसका उपयोग विकास कार्यों में होगा।   ग्रीन सेस की रेट लिस्ट: आपकी जेब पर कितना भार? परिवहन विभाग ने गाड़ियों की कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग दरें निर्धारित की हैं। यह एंट्री फीस 80 रुपये से शुरू होकर 700 रुपये तक जाएगी।   वाहन की श्रेणी (Vehicle Category) ग्रीन सेस (रुपये में) निजी कारें / मोटर कैब / मैक्सी कैब ₹80 डिलीवरी वैन (3 टन तक) ₹80 हल्के माल वाहन (3 से 7.5 टन) ₹120 बड़ी बसें (12 सीट से ज्यादा) ₹140 भारी निर्माण वाहन (JCB/क्रेन) ₹250 मध्यम माल वाहन (7.5 से 18.5 टन) ₹250 भारी वाहन (एक्सेल के हिसाब से) ₹450 से ₹700   ध्यान दें: एक बार ग्रीन सेस चुकाने के बाद वह रसीद पूरे दिन (24 घंटे) के लिए मान्य रहेगी। यानी एक दिन में आप कितनी भी बार बॉर्डर क्रॉस करें, टैक्स एक ही बार लगेगा।   फ्रीक्वेंट ट्रैवलर्स के लिए 'बंपर डिस्काउंट' जो लोग व्यापार या नौकरी के सिलसिले में अक्सर उत्तर प्रदेश या हिमाचल से उत्तराखंड आते-जाते हैं, उनके लिए सरकार ने पास सिस्टम की सुविधा दी है:   3 महीने का पास: यदि आप एकमुश्त 20 गुना ग्रीन सेस जमा करते हैं, तो आपको तीन महीने की छूट मिलेगी। 1 साल का पास: यदि आप एक बार में 60 गुना ग्रीन सेस जमा करते हैं, तो पूरे साल भर के लिए एंट्री फ्री हो जाएगी।   कैश नहीं, 'फास्टैग' से कटेगा पैसा: डिजिटल हुई सीमाएं पर्यटकों को बॉर्डर पर लंबी लाइनों में न लगना पड़े, इसके लिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को हाई-टेक कर दिया है। अब पर्ची कटाने के लिए गाड़ी रोकने की जरूरत नहीं होगी।   फास्टैग अनिवार्य: ग्रीन सेस की वसूली FASTag के जरिए की जाएगी। NPR कैमरे: मेजर बॉर्डर्स पर नंबर प्लेट रिकग्निशन (NPR) कैमरे लगाए गए हैं। जैसे ही गाड़ी कैमरे की जद में आएगी, सिस्टम ऑटोमैटिकली फास्टैग वॉलेट से पैसा काट लेगा। तैयारियां: उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से लगी सीमाओं पर 10 बॉर्डर चेक पोस्ट पूरी तरह तैयार कर लिए गए हैं। इसके अलावा 6 अन्य चेक पोस्टों पर काम युद्धस्तर पर जारी है।   किन्हें मिलेगी छूट? (Exemption List) मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन सेस का उद्देश्य आम आदमी या आवश्यक सेवाओं को बाधित करना नहीं है। इसलिए एक बड़ी सूची तैयार की गई है जिन्हें इस टैक्स से मुक्त रखा गया है:   इको-फ्रेंडली वाहन: इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सीएनजी (CNG), सोलर और हाइब्रिड गाड़ियों पर कोई टैक्स नहीं। दोपहिया वाहन: बाइक और स्कूटर सवारों को ग्रीन सेस नहीं देना होगा। सरकारी वाहन: केंद्र सरकार, उत्तराखंड राज्य सरकार और अन्य प्रदेशों के सरकारी वाहनों को छूट। कृषि वाहन: ट्रैक्टर, ट्रॉली, कंबाइन हार्वेस्टर। आपातकालीन सेवाएं: एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, शव वाहन। सेना: आर्मी और डिफेंस की गाड़ियों को भी छूट रहेगी।   उत्तराखंड का आर्थिक रोडमैप: ₹24,000 करोड़ का लक्ष्य राजस्व समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए कई अहम आंकड़े और लक्ष्य साझा किए:   पूंजीगत निवेश (Capital Investment): राज्य में पूंजीगत खर्च में 34% की बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा असर सड़कों, पुलों और बुनियादी ढांचे के तेजी से निर्माण पर दिखेगा। राजस्व लक्ष्य: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने 24,015 करोड़ रुपये का कर (Tax) लक्ष्य तय किया है। खनन से आय: खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों से राज्य को 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है।   मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे कर चोरी रोकने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाएं और रजिस्ट्रेशन व निबंधन प्रक्रियाओं (Registration procedures) को पूरी तरह डिजिटल करें।   सतत पर्यटन की ओर एक कदम उत्तराखंड सरकार का यह कदम पर्यावरण संरक्षण और राजस्व संतुलन के बीच एक कड़ी है। हालांकि, पर्यटकों को अपनी यात्रा के बजट में अब 80 से 700 रुपये अतिरिक्त जोड़ने होंगे, लेकिन फास्टैग की सुविधा से यात्रा सुगम बनी रहेगी। 1 जनवरी से लागू होने वाले इस नियम के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

Unknown दिसम्बर 19, 2025 0
kedarnath dham kapat closed today bhai dooj 23 october 2025
केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद, हर-हर महादेव की गूंज से पूरी घाटी हुई भक्तिमय

उत्तराखंड के पंच केदारों में प्रमुख और 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) के कपाट शीतकाल के लिए आज (गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025) सुबह पूरे विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए हैं। भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण हर साल दिवाली के बाद यह कपाट बंद होते हैं। इस बार कपाट बंद होने की तिथि भाई दूज के पावन पर्व पर पड़ी। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु, मंदिर समिति के सदस्य और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) भी मौजूद रहे। पूरी केदार घाटी भक्तिमय 'हर-हर महादेव' की गूंज से गुंजायमान हो उठी।READ ALSO:-मेरठ के गोदाम में भीषण आग, चिप्स-कुरकुरे जलकर राख; फायर ब्रिगेड ने 2 घंटे में पाया काबू   भैया दूज पर कपाट बंद करने की परंपरा केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि हर साल दशहरे के दिन पंचांग गणना के बाद तय की जाती है। कपाट बंद होने का समय: आज, 23 अक्टूबर 2025 को सुबह 8:30 बजे ब्रह्म मुहूर्त में पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। विशेष पूजा: कपाट बंद करने से पहले, परंपरा के अनुसार भगवान शिव की विशेष समाधि पूजा की गई। पंचमुखी भोगमूर्ति को भंडार घर में रखा गया और मुख्य पुजारी द्वारा कपाटों को अंतिम रूप से बंद कर दिया गया।   बाबा केदार की डोली हुई रवाना कपाट बंद होने की प्रक्रिया के बाद, भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह डोली को उनके शीतकालीन प्रवास (Winter Seat) के लिए रवाना कर दिया गया:   प्रस्थान: बाबा केदार की डोली ने केदारनाथ धाम से अपने शीतकालीन प्रवास के लिए प्रस्थान किया। पहला विश्राम: डोली आज रात (23 अक्टूबर) रामपुर में रात्रि विश्राम करेगी। शीतकालीन गद्दी: 25 अक्टूबर को बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह डोली रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर पहुँचेगी, जहाँ अगले छह महीने तक भक्त बाबा केदार के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। यात्री संख्या: इस वर्ष केदारनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रही, जिसने मानसून की चुनौतियों के बावजूद आस्था के मजबूत होने को दर्शाया।   सीएम धामी भी रहे मौजूद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर उपस्थित रहकर पूरे विधि-विधान का अवलोकन किया और कहा कि इस वर्ष की चारधाम यात्रा बहुत सफल रही है। उन्होंने सभी तीर्थयात्रियों का आभार व्यक्त किया।   चारधाम यात्रा का समापन केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही उत्तराखंड की चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra) का भी अंतिम चरण शुरू हो गया है। यमुनोत्री धाम के कपाट भी आज (भैया दूज पर) बंद होंगे, जबकि बद्रीनाथ धाम के कपाट सबसे अंत में (25 नवंबर को) शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।  

Unknown अक्टूबर 23, 2025 0
kedarnath dham closing date muhurat 2025 samadhi puja
केदारनाथ कपाटबंदी की प्रक्रिया शुरू, मंदिर के अंदर प्रविष्ट हुई पंचमुखी डोली, कल सुबह 8.30 बजे बंद होंगे बाबा के कपाट

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग स्थित विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में शीतकाल के लिए कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भैया दूज के पावन अवसर पर, कल यानी 23 अक्टूबर 2025 की सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर, बाबा केदारनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाटबंदी की इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से पहले, चल विग्रह पंचमुखी डोली ने विधि-विधान से मंदिर के अंदर प्रवेश कर लिया है। आज शाम (22 अक्टूबर) को भगवान शिव की समाधि पूजा की तैयारी है।READ ALSO:-मेरठ शर्मसार: राज्य मंत्री का नाम लेते हुए व्यापारी से नाक रगड़वाने के मामले में चौकी प्रभारी समेत 3 Police कर्मी लाइन हाजिर   रिकॉर्ड तोड़ यात्रा और अंतिम दर्शन इस वर्ष की चारधाम यात्रा रिकॉर्ड तोड़ रही है। केदारनाथ धाम में अब तक 17 लाख 45 हजार 065 श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं, जो इस यात्रा के प्रति भक्तों की अटूट आस्था को दर्शाता है। कपाटबंदी के बाद, अगले छह महीने तक भगवान केदारनाथ की पूजा उनके शीतकालीन गद्दीस्थल (Winter Seat) पर की जाएगी।   समाधि पूजा का विधान और कपाटबंदी का समय कपाट बंद होने की प्रक्रिया बेहद धार्मिक और अनुशासित होती है, जिसे बीकेटीसी (Badrinath Kedarnath Temple Committee) पूरा करता है।   अंतिम दर्शन: परंपरा के अनुसार, मध्य रात्रि से सुबह 4 बजे तक आम भक्त बाबा केदारनाथ के अंतिम दर्शन कर सकेंगे। समाधि पूजा: सुबह 5 बजे से 6 बजे तक भगवान शिव की समाधि पूजा की जाएगी। इस दौरान बाबा केदार के स्वयंभू लिंग को विशेष रूप से भस्म, अनाज, फल, फूल, रुद्राक्ष और सफेद कपड़े से ढक दिया जाएगा। कपाटबंदी: ठीक सुबह 6 बजे गर्भ गृह का द्वार बंद कर दिया जाएगा, और उसके बाद सुबह 8:30 बजे परम्परानुसार पूर्वी द्वार (मुख्य द्वार) को शीतकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा।   चल विग्रह डोली का प्रस्थान कपाट बंद होने के तुरंत बाद, भगवान शिव की चल विग्रह पंचमुखी डोली अपने शीतकालीन प्रवास के लिए प्रस्थान करेगी।   पहला पड़ाव: 23 अक्टूबर को डोली केदारनाथ से प्रस्थान कर रात्रि विश्राम के लिए रामपुर पहुँचेगी। दूसरा पड़ाव: 24 अक्टूबर को गुप्तकाशी पहुँचेगी। शीतकालीन गद्दीस्थल: 25 अक्टूबर को बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह डोली ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुँचेगी। अगले छह महीने तक श्रद्धालु यहीं पर बाबा केदार के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।   चारधाम के कपाट बंद की तिथियां (Dates of Chardham Closing): केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही अन्य प्रमुख धामों की कपाटबंदी की तिथियाँ भी तय हैं:   धाम (Dham) कपाट बंद होने की तिथि समय गंगोत्री धाम 22 अक्टूबर सुबह 11:36 बजे केदारनाथ धाम 23 अक्टूबर सुबह 8:30 बजे यमुनोत्री धाम 23 अक्टूबर दोपहर 12:30 बजे बदरीनाथ धाम 25 नवंबर (तिथि घोषित)   शीतकालीन यात्रा की तैयारी केदारनाथ के कपाट बंद होने के साथ ही उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन (Winter Tourism) की शुरुआत हो जाएगी। अब भक्तों की आस्था का केंद्र ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ रहेगा, जहाँ शीतकालीन यात्रा के दौरान दर्शन किए जा सकेंगे।

Unknown अक्टूबर 22, 2025 0
uttarkashi spitting on naan video viral thook jihad controversy restaurant license cancellation
देवभूमि उत्तरकाशी में शर्मनाक घटना: रेस्टोरेंट कर्मचारी ने नान पर थूका, वीडियो वायरल होते ही 'थूक जिहाद' का आरोप, बवाल तेज

उत्तरकाशी, उत्तराखंड: देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखंड के पवित्र शहर उत्तरकाशी में एक ऐसी शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने लोगों के विश्वास और आस्था को झकझोर कर रख दिया है। यहां के 'जायका रेस्टोरेंट' का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसमें एक कर्मचारी बटर नान बनाने से पहले उस पर थूकता हुआ साफ दिखाई दे रहा है। इस घिनौने कृत्य के सामने आते ही पूरे इलाके में बवाल मच गया है। हिंदू संगठनों ने इसे 'थूक जिहाद' का नाम देते हुए इसे देवभूमि की अस्मिता पर सीधा हमला करार दिया है और कठोरतम कार्रवाई की मांग की है।READ ALSO:-केदारनाथ का सफर अब 9 घंटे नहीं, सिर्फ 40 मिनट में! 16 KM की चढ़ाई से मिलेगी मुक्ति, अडानी ग्रुप बनाएगा 4000 करोड़ का रोपवे।   क्या है पूरा मामला? मामला उत्तरकाशी के 'जायका रेस्टोरेंट' का है। वायरल हुए वीडियो में रेस्टोरेंट का एक कर्मचारी तंदूर में रोटी (बटर नान) डालने से ठीक पहले उस पर थूकता है और फिर उसे पकने के लिए डाल देता है। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई और जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा, लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। यह कृत्य न केवल अमानवीय और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि इसने एक बड़ी सांप्रदायिक बहस को भी जन्म दे दिया है। @khabreelal_news उत्तरकाशी में 'थूक जिहाद' का आरोप: नान पर थूकते वीडियो वायरल, रेस्टोरेंट कर्मचारी पर केस, लाइसेंस रद्द करने की तैयारी 'जायका रेस्टोरेंट' में अमानवीय कृत्य: बटर नान सेंकने से पहले थूकते कर्मचारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, हिंदू संगठनों में भारी रोष। pic.twitter.com/ra5N5NLkIM — MK Vashisth (@vadhisth) October 16, 2025   'थूक जिहाद' पर हिंदू संगठनों का आक्रोश इस घटना पर हिंदू सम्राट दर्शन भारती, विश्व हिंदू बजरंग दल समेत कई धार्मिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। हिंदू सम्राट दर्शन भारती ने कहा, "यह भूमि धर्म, आस्था और पवित्रता की प्रतीक है। ऐसी जिहादी मानसिकता वाले तत्व देवभूमि की गरिमा को कलंकित कर रहे हैं। यदि प्रशासन दोषी पर NSA के तहत मुकदमा दर्ज कर रेस्टोरेंट का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द नहीं करता, तो हम सत्याग्रह आंदोलन करने को मजबूर होंगे।"   वहीं, विश्व हिंदू बजरंग दल के जिला प्रभारी कीर्ति महर ने इसे देवभूमि पर सीधा प्रहार बताते हुए चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।   पुलिस और प्रशासन का एक्शन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया है।   FIR दर्ज: प्रभारी निरीक्षक भावना कैंथोला ने बताया कि शिकायत के आधार पर आरोपी कर्मचारी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(b) (भोजन या पेय को दूषित करना) और 274 (खाद्य पदार्थ में मिलावट) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। लाइसेंस रद्द करने की तैयारी: पुलिस उपाधीक्षक जनक सिंह पवार ने बताया कि जांच गंभीरता से की जा रही है। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा विभाग को भेज दी है, जिसके बाद विभाग ने 'जायका रेस्टोरेंट' का लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।   प्रशासन ने लोगों से सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। स्थानीय नागरिक और संगठन इस जघन्य कृत्य के लिए दोषी को कठोरतम सजा देने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में कोई ऐसी हरकत करने की हिम्मत न कर सके।

Unknown अक्टूबर 17, 2025 0
kedarnath ropeway project awarded to adani group travel time to reduce from 9 hours to 40-minutes
केदारनाथ का सफर अब 9 घंटे नहीं, सिर्फ 40 मिनट में! 16 KM की चढ़ाई से मिलेगी मुक्ति, अडानी ग्रुप बनाएगा 4000 करोड़ का रोपवे।

देहरादून/सोनप्रयाग: उत्तराखंड के चार धामों में से एक, बाबा केदारनाथ धाम की यात्रा करने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने सोनप्रयाग (Sonprayag) से केदारनाथ धाम तक बनने वाले महत्वाकांक्षी रोपवे प्रोजेक्ट का टेंडर अडानी ग्रुप (Adani Group) को सौंप दिया है। इस परियोजना से 16 किलोमीटर की कठिन और थका देने वाली पैदल चढ़ाई का सफर सिमटकर महज 35 से 40 मिनट का रह जाएगा।READ ALSO:-रिश्ते शर्मसार! नानी-धेवता के अवैध संबंध में रोड़ा बना पति; धान के खेत में सोते समय गला घोंटकर की हत्या; पत्नी और प्रेमी गिरफ्तार   परियोजना की लागत, अवधि और निर्माण एजेंसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल यह रोपवे उत्तराखंड में पर्यटन और बुनियादी ढांचे को नई गति देने वाला है। विवरण तथ्य परियोजना का नाम सोनप्रयाग से केदारनाथ रोपवे कुल लंबाई 12.9 किलोमीटर अनुमानित लागत लगभग ₹4,081 करोड़ निर्माण का लक्ष्य 5 से 6 साल निर्माण एजेंसी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) का RMRW डिवीजन संचालन और रख-रखाव निर्माण पूरा होने के बाद अगले 29 वर्षों तक अडानी ग्रुप द्वारा   यह परियोजना भारत सरकार के 'पर्वतमाला योजना' (National Ropeway Development Programme) का एक अहम हिस्सा है और इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है।   9 घंटे की यात्रा 36 मिनट में क्यों? वर्तमान में, श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग या गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक पहुँचने के लिए लगभग 16 किलोमीटर की दुर्गम और खड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है, जिसमें स्वस्थ व्यक्ति को भी 8 से 9 घंटे का समय लगता है। समय की बचत: रोपवे तैयार होने के बाद, यह 12.9 किमी की हवाई दूरी मात्र 36 मिनट में पूरी हो जाएगी। क्षमता: यह रोपवे प्रत्येक दिशा में प्रति घंटे 1,800 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगा। आधुनिक तकनीक: इस परियोजना में अत्याधुनिक मोनोकेबिल डिटैचेबल गोंडोला (Monocable Detachable Gondola) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह भारत का पहला 3S (ट्राइ-कैबल) रोपवे सिस्टम हो सकता है, जो सुरक्षा और स्थिरता के लिए वैश्विक मानकों पर खरा उतरता है।   अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने सोशल मीडिया पर इस प्रोजेक्ट की जानकारी साझा करते हुए कहा कि "केदारनाथ रोपवे सिर्फ एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आस्था और आधुनिकता के बीच का एक पुल होगा।"   श्रद्धालुओं को मिलने वाली बड़ी सुविधाएँ केदारनाथ धाम में सालाना तीर्थयात्रियों की संख्या 15 से 20 लाख तक पहुँच जाती है। रोपवे बनने से यात्रा में कई महत्वपूर्ण सुधार आएंगे: सुरक्षित यात्रा: मानसून के मौसम में भूस्खलन और बारिश के कारण पैदल मार्ग अक्सर जोखिम भरा हो जाता है। रोपवे यात्रा को सुरक्षित और मौसम की बाधाओं से कम प्रभावित बनाएगा। बुजुर्गों को राहत: कठिन चढ़ाई के कारण बुजुर्गों, बच्चों और शारीरिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को सबसे बड़ी राहत मिलेगी, जो अब आसानी से बाबा के दर्शन कर सकेंगे। समय प्रबंधन: यात्रा का समय 9 घंटे से घटकर 36 मिनट होने से श्रद्धालु कम समय में यात्रा पूरी कर सकेंगे, जिससे उन्हें धाम में दर्शन और पूजा के लिए अधिक समय मिलेगा। पर्यटन और रोजगार: यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।   फिलहाल मानसून के दौरान हेलीकॉप्टर सेवा भी अक्सर बंद हो जाती है, ऐसे में रोपवे वर्ष के अधिक महीनों में केदारनाथ धाम तक निरंतर कनेक्टिविटी प्रदान करने का एक स्थायी समाधान साबित होगा।   अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) सवाल 1: केदारनाथ रोपवे कहाँ से कहाँ तक बनेगा? जवाब: यह रोपवे सोनप्रयाग से शुरू होकर सीधे केदारनाथ धाम तक बनेगा। सवाल 2: इस रोपवे प्रोजेक्ट का टेंडर किस कंपनी को मिला है? जवाब: इस परियोजना का टेंडर अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Adani Enterprises Ltd.) को मिला है। सवाल 3: रोपवे बनने के बाद केदारनाथ की यात्रा में कितना समय लगेगा? जवाब: रोपवे तैयार होने के बाद 9 घंटे की पैदल यात्रा केवल 35 से 40 मिनट में पूरी हो जाएगी। सवाल 4: यह रोपवे कितना लंबा होगा और इसकी अनुमानित लागत कितनी है? जवाब: रोपवे की लंबाई 12.9 किलोमीटर होगी और इस पर करीब 4,081 करोड़ रुपये की लागत आएगी। सवाल 5: यह प्रोजेक्ट सरकार की किस योजना का हिस्सा है? जवाब: यह केंद्र सरकार की नेशनल रोपवे डेवलपमेंट प्रोग्राम - पर्वतमाला योजना का एक हिस्सा है। ।

Unknown अक्टूबर 15, 2025 0
Uttarakhand Shake Up Dhami Govt Transfers 44 Officers Including 23 IAS and 11 PCS Ahead of Diwali
उत्तराखंड ब्रेकिंग: दीपावली से ठीक पहले धामी सरकार का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 23 IAS और 11 PCS सहित 44 अधिकारियों के तबादले, नैनीताल समेत 5 जिलों के DM हटे

देहरादून: उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने दीपावली से ठीक पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राज्य की नौकरशाही में नई ऊर्जा भरने का प्रयास किया है। शनिवार देर रात जारी हुई तबादला सूची में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय वन सेवा (IFS), राज्य सिविल सेवा (PCS) और सचिवालय सेवा के कुल 44 अधिकारियों की जिम्मेदारियों में व्यापक बदलाव किया गया है।READ ALSO:-मेरठ को जल्द मिलेगी बड़ी सौगात: भैसाली मेट्रो स्टेशन बनकर तैयार, सदर और थापर नगर के लोगों के लिए होगा सबसे नज़दीकी RRTS केंद्र   इस फेरबदल में 23 IAS, 11 PCS और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जिससे कई महत्वपूर्ण विभागों और जिलों की कमान नए हाथों में चली गई है।   5 जिलों के जिलाधिकारी बदले गए, नैनीताल में बड़ा बदलाव प्रशासनिक फेरबदल का सबसे बड़ा प्रभाव जिला प्रशासन पर पड़ा है, जहाँ पाँच जिलों के जिलाधिकारी (DM) बदल दिए गए हैं।   जिला नए जिलाधिकारी (DM) पूर्व DM (नया पद) नैनीताल ललित मोहन रयाल वंदना सिंह (महानिदेशक कृषि एवं उद्यान, अपर सचिव नियोजन) चमोली गौरव कुमार   पिथौरागढ़ आशीष कुमार भटगाई विनोद गिरि गोस्वामी (अपर सचिव शहरी विकास) बागेश्वर आकांक्षा कोंडे   अल्मोड़ा अंशुल आलोक कुमार पांडे (सीईओ पीएमजीएसवाई)   नैनीताल जिलाधिकारी वंदना सिंह को हटाकर उन्हें महानिदेशक कृषि एवं उद्यान के साथ अपर सचिव नियोजन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।   प्रमुख IAS अधिकारियों के दायित्वों में फेरबदल कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के विभागों में भी अहम बदलाव किए गए हैं, जो सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं:   दिलीप जावलकर: उनसे ग्राम विकास और ग्रामीण निर्माण विभाग की जिम्मेदारी हटा दी गई है। धीराज गर्ब्याल: इन्हें अब ग्राम विकास और ग्रामीण निर्माण विभाग का सचिव बनाया गया है। रणवीर सिंह चौहान: इन्हें आयुक्त खाद्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आलोक कुमार पांडे: अल्मोड़ा जिलाधिकारी पद से हटाकर उन्हें मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीएमजीएसवाई और अपर सचिव सूचना प्रौद्योगिकी तथा आईटीडीए के निदेशक का कार्यभार सौंपा गया है। आईएएस सोनिका: उन्हें उपाध्यक्ष हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी दी गई है।   PCS और सचिवालय सेवा में बदलाव राज्य सिविल सेवा (PCS) और सचिवालय सेवा के अधिकारियों की भूमिकाओं में भी फेरबदल किया गया है, ताकि प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय किया जा सके:   अधिकारी का नाम नया दायित्व सेवा पराग मधुकर (IFS) विशेष सचिव, पंचायती राज IFS गिरधारी सिंह रावत अपर सचिव, कार्मिक एवं सतर्कता PCS चंद्र सिंह धर्मशक्तु निदेशक, मत्स्य PCS ललित नारायण मिश्र मुख्य विकास अधिकारी (CDO), हरिद्वार PCS जय भारत सिंह सीडीओ, उत्तरकाशी PCS युक्ता मिश्र एडीएम, अल्मोड़ा PCS मायावती ढकरियाल अपर सचिव, भाषा एवं निदेशक भाषा संस्थान सचिवालय सेवा संतोष बडोनी निदेशक, सचिवालय प्रशिक्षण संस्थान सचिवालय सेवा   फेरबदल का निहितार्थ और उम्मीदें धामी सरकार का यह व्यापक तबादला उन अधिकारियों पर नकेल कसने का स्पष्ट संकेत है जो फील्ड में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे या लंबे समय से एक ही पद पर थे। यह फेरबदल आगामी त्योहारों और वित्तीय वर्ष के बचे हुए महीनों में विकास परियोजनाओं की निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।   सरकार का यह कदम प्रशासनिक ऊर्जा और नई कार्यशैली के आने की उम्मीद जगाता है, जिससे उत्तराखंड में जन-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आ सके।

Unknown अक्टूबर 12, 2025 0
Kedarnath Yatra: Helicopter Bookings Full Till October 12, Rush Expected for Final Slots
केदारनाथ यात्रा: हेलीकॉप्टर की बुकिंग 12 अक्टूबर तक फुल, अंतिम स्लॉट के लिए इस दिन मचेगी 'मारामारी'

देहरादून/केदारनाथ: बाबा केदारनाथ धाम की यात्रा अपने चरमोत्कर्ष पर है और अब अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। इस साल रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण यात्रा के अंतिम दिनों में भी भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। जो श्रद्धालु हेलीकॉप्टर से बाबा के दर्शन का मन बना रहे हैं, उनके लिए यह सबसे महत्वपूर्ण खबर है। केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा की सभी बुकिंग 12 अक्टूबर तक शत-प्रतिशत फुल हो चुकी हैं।   अब यात्रा के बिल्कुल अंतिम दौर के लिए IRCTC ने फाइनल स्लॉट की बुकिंग तिथि की घोषणा कर दी है, जो इस सीजन का आखिरी मौका होगा।READ ALSO:-डिटेक्टिव एजेंसी ने खोली इंजीनियर पत्नी की करतूत! ऋषिकेश के होटल में प्रेमी संग मिली, पति की हत्या की साजिश का भी पर्दाफाश   बुकिंग का आखिरी मौका: तारीख और समय नोट करें केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले हेलीकॉप्टर से यात्रा का यह अंतिम अवसर होगा। IRCTC द्वारा जारी सूचना के अनुसार: बुकिंग खुलने की तारीख: 8 अक्टूबर 2025, बुधवार बुकिंग खुलने का समय: दोपहर ठीक 12:00 बजे यात्रा की अवधि: इस स्लॉट में 13 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2025 तक की यात्रा के लिए टिकट बुक किए जा सकेंगे। आधिकारिक वेबसाइट: बुकिंग केवल IRCTC की हेली-यात्रा वेबसाइट heliyatra.irctc.co.in पर ही होगी।   यह इस सीजन का अंतिम स्लॉट है, इसके बाद हेली सेवा के लिए कोई नई बुकिंग नहीं खोली जाएगी।   कैसे करें हेलीकॉप्टर की बुकिंग? (Step-by-Step Guide) अंतिम स्लॉट में भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट धीमी हो सकती है, इसलिए पहले से तैयारी करना आवश्यक है: रजिस्ट्रेशन पूरा करें: बुकिंग शुरू होने से पहले ही heliyatra.irctc.co.in पर अपनी लॉगिन आईडी बना लें। यात्रियों की जानकारी तैयार रखें: सभी यात्रियों के आधार कार्ड, पहचान पत्र और वजन की सही जानकारी अपने पास तैयार रखें। तेज इंटरनेट कनेक्शन: सुनिश्चित करें कि आपके पास एक स्थिर और तेज इंटरनेट कनेक्शन हो। समय पर लॉगिन करें: 8 अक्टूबर को 12 बजे से कुछ मिनट पहले ही वेबसाइट पर लॉगिन कर लें। तुरंत भुगतान करें: स्लॉट मिलते ही तुरंत ऑनलाइन भुगतान प्रक्रिया पूरी करें, क्योंकि कार्ट में टिकट होल्ड करने का समय बहुत कम होता है।   यात्रा का समापन और अन्य महत्वपूर्ण तिथियां केदारनाथ कपाट बंद: बाबा केदार के कपाट 23 अक्टूबर 2025 को भैया दूज के दिन शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। हेमकुंड साहिब के कपाट बंद: सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर 2025 को बंद होंगे। इसके लिए बुकिंग 9 अक्टूबर को बंद हो जाएगी।   इस साल चार धाम यात्रा में आस्था का सैलाब उमड़ा है और अब तक 50 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। यदि आप भी इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो 8 अक्टूबर को बुकिंग के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

Unknown अक्टूबर 6, 2025 0
Detective Agency Exposes Engineer Wife’s Affair and Murder Plot
डिटेक्टिव एजेंसी ने खोली इंजीनियर पत्नी की करतूत! ऋषिकेश के होटल में प्रेमी संग मिली, पति की हत्या की साजिश का भी पर्दाफाश

सात महीने पहले विवाह बंधन में बंधे गुरुग्राम के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर जोड़े का रिश्ता उस वक्त तार-तार हो गया, जब पति ने एक निजी जासूसी एजेंसी (डिटेक्टिव एजेंसी) की मदद से अपनी इंजीनियर पत्नी को ऋषिकेश के तपोवन स्थित एक होटल में उसके प्रेमी के साथ आपत्तिजनक हालत में रंगे हाथ पकड़ा। यही नहीं, जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पत्नी अपने पति को रास्ते से हटाने के लिए प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रच रही थी, जिसके लिए उसने ऑनलाइन हथौड़ा तक मंगा लिया था।READ ALSO:-भोजपुरी एक्टर पवन सिंह के फ्लैट पर पत्नी ज्योति सिंह का 'हाई-वोल्टेज ड्रामा', लाइव आकर कहा- 'पवन जी ने FIR की है, पुलिस थाने लेने आई है!'   गुरुग्राम में रहने वाले सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल शुभम चौधरी (बदला हुआ नाम) की गाजियाबाद निवासी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवती से इसी साल फरवरी में शादी हुई थी। दोनों ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और गुरुग्राम की कंपनी में जॉब करते हैं।   शादी के बाद से ही पत्नी फिजिकल रिलेशन बनाने में बहाने बनाने लगी थी। इस व्यवहार से शुभम को गहरा शक हुआ।   संदेह होने पर शुभम ने पत्नी का मोबाइल और अमेज़न अकाउंट चेक किया। मोबाइल पर एक लड़के के साथ सोशल मीडिया चैट मिली। जबकि बीवी ने अमेज़न से ऑनलाइन कंडोम मंगवाए थे और एक हथौड़े की शॉपिंग का पता चला।  चैटिंग में यह भी जानकारी मिली कि पत्नी का प्रेमी कई दिन से शुभम का पीछा कर रहा है। अपनी आशंकाओं की पुष्टि के लिए शुभम ने तुरंत तियांजू इन्वेस्टिगेटिव सर्विस प्राइवेट लिमिटेड नामक जासूसी एजेंसी से संपर्क किया और पत्नी और उसके प्रेमी के संबंधों का पता लगाने को कहा।   ऋषिकेश तक पीछा और मौके पर हंगामा पत्नी को शक हो गया था कि शुभम को उसके बारे में पता चल गया है। इसके बाद उसने प्रेमी के साथ बाहर चलकर आगे की योजना बनाने का फैसला किया। 30 सितंबर को पत्नी अपने प्रेमी के साथ कार से ऋषिकेश पहुंची और तपोवन स्थित एक होटल में ठहरी।   जासूसों ने दी शुभम को सूचना जासूस एजेंसी उनके पीछे-पीछे ऋषिकेश पहुंच गई और शुभम चौधरी को पत्नी के होटल में होने की सटीक जानकारी दी। शुभम ने रात करीब साढ़े 10 बजे डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को बुलाया। सुबह करीब चार बजे, टिहरी के मुनि की रेती थाने की दरोगा लक्ष्मी पंत पुलिस टीम के साथ होटल पहुंची और कमरा नंबर-202 से पत्नी और उसके प्रेमी को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया। इस दौरान होटल में जमकर हंगामा हुआ। जासूसी एजेंसी के निदेशक के अनुसार, उनकी जांच में प्रेमी द्वारा शुभम का पीछा करने की बात सामने आई थी, जिसे पुलिस पूछताछ के दौरान प्रेमी ने कबूल किया। होटल स्टाफ के मुताबिक, पत्नी और प्रेमी को आपत्तिजनक हालत में पकड़ने के बाद भी शुभम आक्रामक नहीं हुए, बल्कि शांति से कहा, "अब ये रिश्ता खत्म, तुम्हें जो करना है करो।" पत्नी ने भी कहा कि "ठीक है, मैं अपनी मर्जी से जा रही हूँ।" इसके बाद वह अपने प्रेमी के साथ चली गई।   जबरन शादी और अफेयर का राज पुलिस की पूछताछ में यह भी पता चला कि शुभम की शादी से पहले ही पत्नी का इस लड़के के साथ लंबे समय से अफेयर चल रहा था और पत्नी के माता-पिता को भी इसकी जानकारी थी।  पत्नी के घरवाले सजातीय न होने के कारण (शुभम और पत्नी जाट हैं, जबकि प्रेमी ब्राह्मण है) दोनों की शादी प्रेमी से नहीं करा पाए और जबरन उसे शुभम के साथ शादी करने के लिए मना लिया। प्रेमी का प्रोफेशन: प्रेमी का गाजियाबाद में कबाड़ का बड़ा कारोबार है।   पुलिस ने नहीं दर्ज की FIR मुनि की रेती कोतवाली प्रभारी प्रदीप चौहान ने बताया कि शुभम ने मौके पर लिखित शिकायत नहीं दी। चूंकि पत्नी और प्रेमी बालिग थे और अपनी मर्जी से होटल में ठहरे हुए थे, इसलिए उन्हें जाने दिया गया।   पुलिस फिलहाल इस पूरे प्रकरण को घरेलू विवाद और व्यक्तिगत स्तर पर सुलझा मामला मान रही है। हालांकि, जासूसी एजेंसी के निदेशक ने हथौड़े के संबंध में हत्या की साजिश की गहन जांच की मांग की है।

Unknown अक्टूबर 6, 2025 0
Char Dham Yatra 2025: Closing Dates Announced, Record Pilgrims This Year
चारधाम यात्रा 2025 समापन की ओर: बद्रीनाथ-केदारनाथ समेत चारों धामों के कपाट बंद होने की तिथियां घोषित, इस साल टूटा श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा, जो हर साल लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनती है, अब अपने समापन की ओर अग्रसर है। शीतकाल के आगमन और हिमालयी क्षेत्र में भारी बर्फबारी की संभावना को देखते हुए, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने दशहरे के पावन अवसर पर चारों धामों के कपाट बंद होने की अंतिम तिथियों की घोषणा कर दी है।Read also:-क्रांति की रफ्तार: मेरठ-दिल्ली का 60 मिनट का सफर अक्टूबर से हकीकत, 'नमो भारत' और 'मेरठ मेट्रो' बदल देगी NCR की तस्वीर   इस वर्ष कब शुरू हुई थी यात्रा? साल 2025 की चारधाम यात्रा का भव्य शुभारंभ 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त पर हुआ था। इसी दिन मां गंगा के धाम गंगोत्री और मां यमुना के धाम यमुनोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। इसके बाद, द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक, बाबा केदारनाथ के द्वार 2 मई को खोले गए और अंत में, भू-वैकुंठ कहलाने वाले भगवान बद्रीनारायण के कपाट 4 मई को दर्शन के लिए खोल दिए गए थे।   श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड तोड़ संख्या यह साल चारधाम यात्रा के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ है। यात्रा के प्रति भक्तों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 45 लाख से अधिक तीर्थयात्री उत्तराखंड के इन पवित्र धामों में शीश नवा चुके हैं। यह आंकड़ा पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को पार कर गया है, जो इस यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता और महत्व को दर्शाता है।   जानिए कब बंद होंगे चारों धामों के कपाट जो श्रद्धालु इस साल दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि किस धाम के कपाट किस तिथि को बंद हो रहे हैं।    * श्री गंगोत्री धाम: मां गंगा को समर्पित गंगोत्री धाम के कपाट दिवाली के अगले दिन, अन्नकूट के अवसर पर 22 अक्टूबर 2025 को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।  * श्री यमुनोत्री धाम: मां यमुना के धाम यमुनोत्री के कपाट भैया दूज के पावन पर्व पर 23 अक्टूबर 2025 को बंद होंगे।  * श्री केदारनाथ धाम: बाबा केदारनाथ के कपाट भी भैया दूज के दिन, 23 अक्टूबर 2025 को विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद बाबा की पंचमुखी डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल            ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करेगी।  * श्री बद्रीनाथ धाम: भगवान विष्णु के अवतार श्री बद्रीनारायण के विशाल मंदिर के कपाट इस यात्रा में सबसे अंत में 25 नवंबर 2025 को दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर बंद किए जाएंगे।   कपाट बंद होने के बाद अगले छह महीनों तक ये सभी धाम बर्फ की सफेद चादर से ढके रहेंगे। इस दौरान इन धामों में देवी-देवताओं की शीतकालीन पूजा उनके RESPECTIVE गद्दीस्थलों जैसे ऊखीमठ, मुखबा और खरसाली में संपन्न होगी, जहाँ श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।

Unknown अक्टूबर 3, 2025 0
देवभूमि में जल प्रलय: चमोली में रात के अंधेरे में फटा बादल, 6 मकान जमींदोज, एक ही परिवार के 4 समेत 10 लोग जिंदा दफन

गोपेश्वर/देहरादून (चमोली): उत्तराखंड की शांत वादियों में बुधवार की रात कुदरत ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया। चमोली जिले के नंदानगर (घाट) ब्लॉक में देर रात पहाड़ी पर बादल फटने से आई भीषण बाढ़ और मलबे ने भारी तबाही मचाई है। रात के अंधेरे में जब लोग गहरी नींद में थे, तब सैलाब और मलबे का एक विशाल दरिया फाली, धुर्मा, कुंतरी और भैंसवाड़ा गांवों पर कहर बनकर टूट पड़ा।   सबसे ज्यादा तबाही फाली गांव में इस आपदा का केंद्र नंदानगर का फाली कुंतरी गांव रहा, जहां बादल फटने के बाद आए भारी मलबे ने छह घरों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया। इन घरों में सो रहे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। अब तक मिली आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस गांव से एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत कुल आठ लोग लापता हैं, जिनके मलबे में दबे होने की आशंका है। वहीं, पास के धुर्मा गांव में भी दो लोगों के लापता होने की खबर है, जबकि पांच भवनों को नुकसान पहुंचा है। कुल मिलाकर, इस आपदा में 10 जिंदगियां लापता हैं।   चीख-पुकार के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन जारी घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। अंधेरे और खराब मौसम की चुनौतियों के बावजूद, SDRF की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया। गुरुवार सुबह NDRF की टुकड़ी ने भी मोर्चा संभाल लिया है। रेस्क्यू टीमों ने अब तक दो लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला है। चमोली की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने जानकारी दी कि मौके पर मेडिकल टीमों के साथ तीन 108 एम्बुलेंस भी भेजी गई हैं।   जिलाधिकारी डॉ. संदीप तिवारी ने ANI को बताया, "नंदानगर घाट इलाके में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। हमारी पहली प्राथमिकता लापता लोगों को खोजना और प्रभावितों तक तत्काल राहत पहुंचाना है।"   देहरादून तक दिखा असर इस अतिवृष्टि का असर सिर्फ चमोली तक सीमित नहीं है। राजधानी देहरादून के रायवाला क्षेत्र में भी बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जहां 200 से अधिक परिवार पानी में घिर गए हैं। SDRF की टीमें वहां भी बचाव कार्य में जुटी हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।     मलबे में दबी जिंदगियां: लापता लोगों की सूची:-     ग्राम कुंतरी लगा फाली: कुंवर सिंह (उम्र 42), पुत्र बलवंत सिंह कांता देवी (उम्र 38), पत्नी कुंवर सिंह विकास (उम्र 10), पुत्र कुंवर सिंह विशाल (उम्र 09), पुत्र कुंवर सिंह नरेन्द्र सिंह (उम्र 40), पुत्र कुताल सिंह जगदम्बा प्रसाद (उम्र 70), पुत्र ख्याली राम भागा देवी (उम्र 65), पत्नी जगदम्बा प्रसाद देवेश्वरी देवी (उम्र 65), पत्नी दिलबर सिंह   ग्राम धुरमा: 9. गुमान सिंह (उम्र 75), पुत्र चन्द्र सिंह 10. ममता देवी (उम्र 38), पत्नी विक्रम सिंह

Khabreelal News सितम्बर 18, 2025 0
‘Water Havoc’ in Hills: Cloudbursts and Landslides Ravage Uttarakhand, Himachal; 19 Dead, Several Missing
पहाड़ों पर 'जल प्रलय': उत्तराखंड और हिमाचल में बादल फटे, लैंडस्लाइड से भारी तबाही, 19 की मौत, कई लापता

उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में मंगलवार का दिन प्रलय बनकर टूटा। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बादल फटने और मूसलाधार बारिश के कारण हुए भूस्खलन और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इन दोनों राज्यों में अब तक कुल 19 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है।READ ALSO:-मसूरी में 'जल प्रलय': सड़कें बहीं, होटल-घर तबाह, सैकड़ों पर्यटक फंसे; देहरादून से संपर्क पूरी तरह कटा   उत्तराखंड: देहरादून बना आपदा का केंद्र, 15 की मौत उत्तराखंड में बारिश का सबसे विनाशकारी रूप राजधानी देहरादून और उसके आसपास के इलाकों में देखने को मिला, जहाँ बादल फटने से अलग-अलग घटनाओं में कुल 13 लोगों की जान चली गई और 16 लोग लापता हैं।   देहरादून में कहाँ-कहाँ हुआ कहर: विकास नगर (8 मौतें, 4 लापता): यहाँ दोपहर के समय टोंस नदी में पानी का बहाव अचानक विकराल हो गया। मजदूरों को ले जा रही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली तेज बहाव की चपेट में आकर नदी में बह गई। इस दर्दनाक हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 4 अभी भी लापता हैं। मालदेवता (4 मौतें, 1 लापता): मालदेवता क्षेत्र में सोंग नदी के उफान में 5 लोग बह गए। बचाव दलों ने 4 लोगों के शव बरामद कर लिए हैं, जबकि एक व्यक्ति की तलाश जारी है। टपकेश्वर महादेव मंदिर (2 लापता): तमसा नदी के किनारे स्थित प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर में बाढ़ का पानी घुस गया, जिससे वहां बनी कई दुकानें बह गईं। इस घटना में 2 लोग लापता बताए जा रहे हैं। कालसी (1 मौत): कालसी क्षेत्र में भी एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है।   देहरादून के अलावा नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों से भी एक-एक मौत की खबर है, जिससे प्रदेश में बारिश से मरने वालों का आंकड़ा 15 तक पहुंच गया है। आपदा के कारण मालदेवता रोड बह गया है, जिससे 500 से अधिक लोग, जिनमें किसान और छात्र शामिल हैं, अलग-अलग जगहों पर फंस गए हैं।   मुख्यमंत्री धामी ने लिया जायजा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के केसरवाला और मालदेवता जैसे आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावितों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और भूस्खलन वाले खतरनाक रास्तों पर पर्यटकों की आवाजाही पर तत्काल रोक लगाने के सख्त निर्देश दिए हैं।   हिमाचल प्रदेश: मंडी में भूस्खलन और बाढ़ का तांडव, 4 की मौत हिमाचल प्रदेश भी भारी बारिश से बेहाल है। मंडी जिले में अलग-अलग हादसों में 4 लोगों की मौत हो गई। मंडी में मकान ढहा (3 मौतें): मंगलवार को मंडी में भूस्खलन के कारण एक मकान ढह गया। मलबे में एक ही परिवार के 5 लोग दब गए। बचाव दलों ने 2 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया, लेकिन 3 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। दरंग में 2 लोग बहे (1 मौत): मंडी के दरंग में सुबह मंदिर जा रहे दो लोग सुमा खड्ड (नदी) के तेज बहाव में बह गए। इनमें से एक का शव मिल गया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। धर्मपुर बस स्टैंड में भरा मलबा: भारी बारिश के बाद धर्मपुर बस स्टैंड पूरी तरह मलबे से भर गया और बाढ़ के पानी में कई बसें बह गईं।   महाराष्ट्र में भी बारिश का असर सोमवार को महाराष्ट्र में भी भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया था। मुंबई में रेलवे ट्रैक और सड़कों पर पानी भर गया था, जबकि बीड जिले में बाढ़ में फंसे 11 ग्रामीणों को बचाने के लिए भारतीय वायुसेना को एयरलिफ्ट ऑपरेशन चलाना पड़ा।  

Unknown सितम्बर 17, 2025 0
‘Water Havoc’ in Mussoorie: Roads Swept Away, Hotels-Houses Destroyed, Hundreds of Tourists Stranded; Dehradun Completely Cut Off
मसूरी में 'जल प्रलय': सड़कें बहीं, होटल-घर तबाह, सैकड़ों पर्यटक फंसे; देहरादून से संपर्क पूरी तरह कटा

पहाड़ों की रानी मसूरी पर कुदरत का कहर। बीती रात हुई मूसलाधार बारिश ने शहर में भारी तबाही मचाई है। मसूरी-देहरादून मुख्य मार्ग दर्जनों जगहों पर भूस्खलन के कारण बंद हो गया है, जिससे शहर का संपर्क पूरी तरह कट गया है। सैकड़ों पर्यटक और स्थानीय निवासी रास्तों में फंसे हुए हैं, और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप हो गई है।Read also:-देहरादून में फटा बादल, टपकेश्वर महादेव मंदिर में घुसा सैलाब, सड़कें बहीं; PM मोदी ने CM धामी से की बात   मसूरी, उत्तराखंड। पहाड़ों की रानी मसूरी इस वक्त प्रकृति के रौद्र रूप का सामना कर रही है। बीती रात हुई प्रलयंकारी बारिश ने शहर को एक टापू में तब्दील कर दिया है। शहर की जीवनरेखा, मसूरी-देहरादून मार्ग, कई स्थानों पर भारी भूस्खलन, सड़क धंसने और मलबा आने के कारण पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। इस आपदा ने न केवल सड़कों को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि कई लोगों के आशियाने, होटल और रेस्टोरेंट भी छीन लिए हैं, जिससे कई परिवार बेघर हो गए हैं।   मुख्य मार्ग हुए ध्वस्त, शहर हुआ कैद मसूरी-देहरादून मार्ग की हालत सबसे चिंताजनक है। आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर सड़क का नामोनिशान मिट गया है: गलोगी के पास: यहां सड़क का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूटकर खाई में समा गया है और गहरी दरारें पड़ गई हैं। शिव मंदिर, कोल्हूखेत, चुनाखाला-झड़ीपानी और पानी वाला बैंड: इन जगहों पर कई टन मलबा और भारी बोल्डर गिरे हैं, जिससे रास्ता पूरी तरह बंद है। अन्य संपर्क मार्ग: भट्टा गांव-बारलोगंज मार्ग और झड़ीपानी-चुनाखाला मार्ग भी धंस गए हैं, जिससे भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है।   इस वजह से दूध, सब्जी और राशन जैसी जरूरी चीजों से लदे वाहन फंसे हुए हैं, जिससे शहर में किल्लत का खतरा मंडराने लगा है। धनोल्टी और जौनपुर से सब्जियां लेकर आ रहे किसानों की फसलें भी गाड़ियों में ही खराब होने की कगार पर हैं।   रात सोए, सुबह दिखा तबाही का खौफनाक मंजर रात के अंधेरे में बरपे इस कहर ने कई जिंदगियों को सड़क पर ला दिया है। सुबह जब लोगों की आंखें खुलीं तो मंजर खौफनाक था: नाग मंदिर के पास: सुनील कठैत का पांच कमरों का पक्का मकान जमीन धंसने और दरारें पड़ने से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। परिवार ने पास के एक मंदिर में शरण ली है। पानी वाला बैंड: यहां सड़क का नक्शा ही बदल गया है। रूपेंद्र सिंह रावत का छह कमरों का रेस्टोरेंट मलबे में दबकर पूरी तरह तबाह हो गया। उनके दो फ्लोर टूट गए और एक कार व स्कूटर भी मलबे में दफन हो गए। आवासीय भवनों पर कहर: पास में ही बबली देवी के घर पर एक भारी पेड़ गिरने से छत टूट गई। जयपाल सिंह थापली के होटल में भी मलबा घुसने से भारी नुकसान हुआ है।   प्रशासन की युद्धस्तर पर कार्रवाई और महत्वपूर्ण अपीलें स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन हरकत में आ गया है। एसडीएम राहुल आनंद और नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों का जायजा लिया।   क्या कदम उठाए जा रहे हैं? सड़क खोलने के लिए सात जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं। गलोगी में पहाड़ काटकर एक नया अस्थायी रास्ता बनाने का काम शुरू होगा। शिव मंदिर के पास टूटे पुल की जगह मौसम साफ होते ही बैली ब्रिज बनाया जाएगा।     एसडीएम राहुल आनंद: "सभी विभागों के अधिकारी मौके पर हैं और युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। मौसम ठीक रहा तो बुधवार तक एक अस्थायी बैली ब्रिज बना दिया जाएगा।" कोतवाल संतोष कुंवर: "मसूरी-देहरादून, मसूरी-धनोल्टी और मसूरी-यमुनाघाटी की सड़कें बंद हैं। पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील है कि वे अनावश्यक यात्रा न करें और सुरक्षित स्थानों पर रुकें।"   होटल एसोसिएशन ने पेश की मानवता की मिसाल इस संकट की घड़ी में मसूरी होटल एसोसिएशन ने आगे आकर फंसे हुए पर्यटकों से अपील की है कि वे जहां हैं, वहीं सुरक्षित रहें। एसोसिएशन अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने सभी होटल संचालकों से आग्रह किया है कि वे फंसे हुए पर्यटकों को बिना किसी शुल्क के रहने की जगह दें।  

Unknown सितम्बर 16, 2025 0
Cloudburst in Dehradun: Flood Hits Tapkeshwar Mahadev Temple, Roads Washed Away
देहरादून में फटा बादल, टपकेश्वर महादेव मंदिर में घुसा सैलाब, सड़कें बहीं; PM मोदी ने CM धामी से की बात

देहरादून/शिमला, मंगलवार। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश ने एक बार फिर कहर बरपाया है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मंगलवार तड़के 5 बजे सहस्त्रधारा के पास बादल फटने से भीषण तबाही हुई है। तमसा और कारलीगाड़ समेत कई नदियां उफान पर हैं, जिससे प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर में सैलाब घुस गया और कई सड़कें बह गईं। 2 लोग लापता बताए जा रहे हैं।READ ALSO:-22 साल बाद यूपी में चलेगा 'महा-अभियान': मतदाता सूची से हटेगा हर 'त्रुटि' का दाग   वहीं, हिमाचल के मंडी में लैंडस्लाइड से एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर हालात का जायजा लिया है।   उत्तराखंड: देहरादून में तड़के 5 बजे आई आफत मंगलवार सुबह करीब 5 बजे सहस्त्रधारा के पास बादल फटने से तमसा नदी में अचानक बाढ़ आ गई। नदी के किनारे बना प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो गया। टपकेश्वर मंदिर में तबाही: मंदिर के पुजारी ने बताया, "सुबह 5 बजे नदी में बाढ़ आई, पूरा मंदिर डूब गया। कई मूर्तियां और दुकानें बह गईं। हालांकि, भगवान का शुक्र है कि गर्भगृह सुरक्षित है।" पानी उतरने के बाद मंदिर में 2 फीट तक मलबा भरा हुआ है। बचाव और राहत कार्य: सहस्त्रधारा, तपोवन, आईटी पार्क और घड़ीकैंट जैसे इलाकों में पानी भर गया है। SDRF और NDRF की टीमें मौके पर हैं। सहस्त्रधारा में 5 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है, जबकि 2 लोग अभी भी लापता हैं जिनकी तलाश जारी है। सीएम और पीएम की नजर: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह ने फोन पर बात कर हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।   हिमाचल प्रदेश: मंडी में बारिश और लैंडस्लाइड का कहर हिमाचल प्रदेश में भी भारी बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। 3 की मौत: मंडी जिले के निहरी में एक घर पर चट्टान गिरने से हुए लैंडस्लाइड में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत हो गई। सड़कें बंद: मंडी के ही धरमपुर बस स्टैंड में मलबा भर गया और कई बसें बाढ़ में बह गईं। प्रदेश में 3 नेशनल हाईवे समेत 493 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं।   महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक... बारिश का अलर्ट सोमवार को महाराष्ट्र के मुंबई में भी भारी बारिश से रेलवे ट्रैक और सड़कें जलमग्न हो गईं, जबकि बीड में वायुसेना ने 11 ग्रामीणों को एयरलिफ्ट किया। इस बीच, मौसम विभाग (IMD) ने मंगलवार के लिए बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र समेत 9 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।  

Unknown सितम्बर 16, 2025 0
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बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और गर्लफ्रेंड सोनाली का 15 मिनट का MMS लीक, कपल ने इसे चोरी और ब्लैकमेलिंग बताया

पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है।     कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप   सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है।   सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है।  ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया।  सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया।   प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है।  ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं।    सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं।   इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया।    बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }

बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई

आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला   मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।   बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।   दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था।   अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी।   बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे।   पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया।   एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी   सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता।   पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है।   आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?

देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।   सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया?   क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है।   पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है।   दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है।   सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?"   असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है।   सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है।   विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है।   विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।"   NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है।   NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।   CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।      आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया।  डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है।     कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं:   1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।   2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है।   सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है:   पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है।   दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।   गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।"   आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए।   सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है।   फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है।     जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; Kidney की बीमारी बनी मौत का कारण

बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है।   चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था।   टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।   फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी।   Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप   किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।   इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।"   Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।   सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।

दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी।   आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:   Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi)   मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी।   रूट मैप (Route Map) और स्टेशन   मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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Unknown जनवरी 21, 2026 0

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