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WhatsApp का 'सुरक्षा चक्र': अब बच्चों की सीक्रेट चैट्स और ऑनलाइन दुनिया पर रहेगी माता-पिता की सीधी नजर, आ रहा है 'Primary Controls' का महा-अपडेट

नई दिल्ली (New Delhi): इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप (WhatsApp) आज हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. बड़ों से लेकर बच्चों तक, हर कोई इसका इस्तेमाल पढ़ाई, दोस्तों से बात करने और परिवार से जुड़े रहने के लिए कर रहा है. लेकिन, बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन और इंटरनेट की दुनिया थमाना माता-पिता के लिए हमेशा चिंता का विषय रहा है. क्या मेरा बच्चा सुरक्षित है? क्या वह किसी अनजान व्यक्ति से बात तो नहीं कर रहा? क्या वह गलत कंटेंट तो नहीं देख रहा? ये सवाल हर अभिभावक को परेशान करते हैं.READ ALSO:-ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की अब खैर नहीं! केंद्र सरकार ने लागू किए बेहद सख्त नियम; साल में 5 गलतियां कीं तो 3 महीने के लिए सस्पेंड होगा आपका ड्राइविंग लाइसेंस   इन चिंताओं को दूर करने के लिए वॉट्सऐप (Meta) एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है. खबरों के मुताबिक, वॉट्सऐप एक नए सिस्टम पर काम कर रहा है जिसे 'WhatsApp Primary Controls Feature' नाम दिया गया है. यह फीचर माता-पिता को अपने बच्चों के वॉट्सऐप अकाउंट पर निगरानी रखने और उसे कंट्रोल करने की शक्ति देगा.   इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि यह फीचर क्या है, यह कैसे काम करेगा, और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा (Digital Safety) के लिए यह क्यों जरूरी है.   क्या है WhatsApp Primary Controls Feature? वॉट्सऐप के आगामी फीचर्स पर नजर रखने वाली वेबसाइट WABetaInfo की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी एक ऐसे फीचर पर काम कर रही है जो 'पैरेंटल कंट्रोल' (Parental Control) की तरह काम करेगा. इस फीचर के तहत, माता-पिता अपने मुख्य वॉट्सऐप अकाउंट के जरिए अपने बच्चों के लिए एक 'Secondary Account' (द्वितीयक खाता) बना सकेंगे.   यह सेकेंडरी अकाउंट एक सामान्य वॉट्सऐप अकाउंट से अलग होगा. इसमें बच्चों को पूरी आजादी नहीं मिलेगी, बल्कि कुछ चुनिंदा फीचर्स और कॉन्टैक्ट्स तक ही उनकी पहुंच होगी. इसका सीधा मकसद बच्चों को ऑनलाइन दुनिया के खतरों, जैसे- साइबर बुलिंग, स्कैमर्स और अनुचित सामग्री से बचाना है.   कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम? (How it Works) रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फीचर अभी डेवलपमेंट स्टेज (Development Stage) में है, लेकिन इसके काम करने के तरीके के बारे में कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं. यह पूरा सिस्टम माता-पिता के फोन और बच्चे के फोन के बीच एक डिजिटल लिंक पर आधारित होगा.   1. अकाउंट लिंकिंग और सेटअप: जब यह फीचर रोलआउट होगा, तो माता-पिता अपने फोन पर मौजूद वॉट्सऐप सेटिंग में जाकर बच्चे का अकाउंट क्रिएट कर सकेंगे. इस प्रक्रिया में संभवतः एक QR कोड स्कैन करने की आवश्यकता होगी, जिससे बच्चे का डिवाइस माता-पिता के डिवाइस से लिंक हो जाएगा.   2. 6-डिजिट का प्राइमरी पिन (Primary PIN): सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए वॉट्सऐप एक 'प्राइमरी पिन' सिस्टम ला रहा है. माता-पिता को सेटअप के दौरान एक 6 अंकों का पिन सेट करना होगा. यह पिन मास्टर की (Master Key) की तरह काम करेगा. अगर बच्चा अपनी सेटिंग्स में कोई बड़ा बदलाव करना चाहेगा, तो उसे इस पिन की जरूरत होगी. चूँकि यह पिन केवल माता-पिता को पता होगा, इसलिए बच्चे अपनी मर्जी से सुरक्षा घेरे को नहीं तोड़ पाएंगे.   3. कॉन्टैक्ट्स पर कंट्रोल: सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस फीचर के जरिए माता-पिता यह तय कर सकेंगे कि उनका बच्चा किससे बात कर सकता है. WhatsApp Primary Controls Feature वाले अकाउंट में बच्चे केवल उन लोगों से चैट या कॉल कर पाएंगे जिनके नंबर उनकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव हैं. इसका मतलब है कि कोई अनजान व्यक्ति (Unknown Number) आपके बच्चे को मैसेज करके परेशान नहीं कर पाएगा.   बच्चों के लिए बंद रहेंगे ये फीचर्स वॉट्सऐप बच्चों के लिए बनाए गए इस सेकेंडरी अकाउंट को 'डिस्ट्रैक्शन-फ्री' (Distraction-free) और सुरक्षित बनाने के लिए ऐप के कुछ लोकप्रिय लेकिन जोखिम भरे फीचर्स को डिसेबल (Disable) कर देगा.   अपडेट्स टैब (Updates Tab) गायब: रिपोर्ट बताती है कि सेकेंडरी अकाउंट में 'Updates' टैब नहीं दिखेगा. इसका मतलब है कि बच्चे वॉट्सऐप चैनल्स (Channels) और ब्रॉडकास्ट (Broadcast) कंटेंट तक नहीं पहुंच पाएंगे. आज के दौर में चैनल्स पर कई तरह की खबरें और वीडियो शेयर होते हैं, जो हमेशा बच्चों की उम्र के हिसाब से उपयुक्त नहीं होते. इसे हटाकर वॉट्सऐप बच्चों को केवल चैटिंग तक सीमित रखेगा. चैट लॉक (Chat Lock) की सुविधा नहीं: वॉट्सऐप ने हाल ही में प्राइवेसी के लिए 'चैट लॉक' फीचर दिया था, जिससे लोग अपनी निजी चैट छिपा सकते हैं. लेकिन बच्चों के सेकेंडरी अकाउंट में यह फीचर नहीं मिलेगा. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि बच्चे माता-पिता से कोई भी बातचीत छिपा न सकें और पारदर्शिता बनी रहे.   प्राइवेसी और निगरानी का संतुलन (Privacy vs Supervision) अक्सर पैरेंटल कंट्रोल टूल्स को लेकर यह बहस होती है कि क्या यह बच्चों की निजता (Privacy) का हनन है? वॉट्सऐप ने इस मामले में एक बहुत ही संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है.   भले ही WhatsApp Primary Controls Feature माता-पिता को निगरानी का अधिकार देता है, लेकिन वॉट्सऐप का मूल मंत्र यानी 'End-to-End Encryption' यहां भी लागू रहेगा.   क्या देख सकेंगे पैरेंट्स: माता-पिता यह देख पाएंगे कि उनके बच्चे के अकाउंट में कौन सा नया कॉन्टैक्ट जोड़ा गया है. वे अकाउंट की सेटिंग्स मैनेज कर सकेंगे और स्क्रीन टाइम या इस्तेमाल पर नजर रख सकेंगे. क्या नहीं देख सकेंगे: एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के कारण, माता-पिता अपने बच्चों द्वारा भेजे गए या प्राप्त किए गए मैसेज (Messages) को नहीं पढ़ पाएंगे और न ही उनकी कॉल्स सुन पाएंगे.   यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि बच्चों के मन में यह डर न रहे कि उनकी हर बात सुनी जा रही है, लेकिन साथ ही उन्हें यह पता रहे कि एक सुरक्षा घेरा (Safety Net) उनके चारों ओर मौजूद है.   वॉट्सऐप को इस फीचर की जरूरत क्यों पड़ी? डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा एक वैश्विक चुनौती बन गई है. मेटा (Meta) जो कि वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी है, पिछले कुछ समय से अपने सभी प्लेटफॉर्म्स (Instagram, Facebook) पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई कदम उठा रही है.   अनजान लोगों का खतरा: वॉट्सऐप पर किसी का भी नंबर होने पर उसे मैसेज किया जा सकता है. इससे बच्चे अक्सर स्कैमर्स या गलत नीयत वाले लोगों के संपर्क में आ जाते हैं. नया फीचर इस 'ओपन डोर' पॉलिसी को बंद कर देगा. गलत कंटेंट का प्रसार: वॉट्सऐप चैनल्स और स्टेटस के जरिए कई बार हिंसात्मक या वयस्क सामग्री वायरल हो जाती है. बच्चों के अकाउंट से अपडेट्स टैब हटाकर उन्हें इससे बचाया जा सकेगा. माता-पिता का दबाव: दुनियाभर के अभिभावक और बाल सुरक्षा आयोग (Child Safety Commissions) सोशल मीडिया कंपनियों पर दबाव बना रहे हैं कि वे बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करें. यह फीचर उसी दिशा में एक बड़ा कदम है.   कब तक आएगा यह फीचर? फिलहाल, WhatsApp Primary Controls Feature पर काम चल रहा है. इसे वॉट्सऐप के बीटा वर्जन (Beta Version) में भी पूरी तरह से रिलीज नहीं किया गया है, बल्कि इसके कोड्स देखे गए हैं. टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसे पूरी तरह तैयार होकर आम यूज़र्स तक पहुंचने में कुछ महीनों का समय लग सकता है.   संभावना है कि यह फीचर पहले कुछ चुनिंदा देशों में टेस्ट किया जाएगा और फिर इसे भारत जैसे बड़े बाजारों में रोलआउट (Rollout) किया जाएगा, जहां वॉट्सऐप के सबसे ज्यादा यूज़र्स हैं.   जब तक फीचर नहीं आता, तब तक क्या करें? जब तक वॉट्सऐप यह ऑफिशियल पैरेंटल कंट्रोल फीचर लॉन्च नहीं करता, तब तक माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए मौजूदा सेटिंग्स का इस्तेमाल कर सकते हैं:   Privacy Checkup: बच्चे के फोन में वॉट्सऐप की प्राइवेसी सेटिंग्स में जाकर 'Last Seen', 'Profile Photo' और 'Status' को 'My Contacts' पर सेट करें. Group Privacy: 'Groups' की सेटिंग में जाकर 'Everyone' की जगह 'My Contacts Only' चुनें. इससे कोई भी अनजान व्यक्ति आपके बच्चे को किसी फालतू ग्रुप में नहीं जोड़ पाएगा. Two-Step Verification: बच्चे के अकाउंट में टू-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन करें और पिन खुद सेट करें, ताकि अकाउंट हैक न हो सके. Block & Report: बच्चों को सिखाएं कि अगर कोई अनजान नंबर से मैसेज आए या परेशान करे, तो तुरंत उसे ब्लॉक और रिपोर्ट कैसे करना है.   WhatsApp Primary Controls Feature निश्चित रूप से डिजिटल पेरेंटिंग (Digital Parenting) की दुनिया में एक गेम-चेंजर साबित होगा. यह न केवल बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाएगा, बल्कि माता-पिता को भी एक मानसिक शांति देगा. हालांकि, तकनीक केवल एक मदद है. सबसे जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चों के साथ खुला संवाद रखें और उन्हें इंटरनेट के सही और सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जागरूक करते रहें.   जैसे ही इस फीचर के लॉन्च की कोई आधिकारिक तारीख आएगी, हम आपको अपडेट करेंगे. तब तक के लिए, अपने वॉट्सऐप को अपडेट रखें और सुरक्षा फीचर्स का इस्तेमाल करते रहें.    वॉट्सऐप 'Primary Controls' नामक एक नए फीचर पर काम कर रहा है जो माता-पिता को बच्चों के लिए एक सेकेंडरी अकाउंट बनाने और लिंक करने की अनुमति देगा. इस अकाउंट में अपडेट्स टैब और चैट लॉक जैसे फीचर्स नहीं होंगे और बच्चे सिर्फ सेव किए गए कॉन्टैक्ट्स से बात कर सकेंगे. यह फीचर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ आएगा, जिससे सुरक्षा और प्राइवेसी दोनों बनी रहेगी.

Unknown जनवरी 24, 2026 0
Election Commission Launches ECINet App 40 Plus Services Integrated into One Hack Proof Platform
चुनाव आयोग की 'डिजिटल क्रांति': एक ऐप में समाई 40 सुविधाएं, दावा- 'हैक करना नामुमकिन'; अब घर बैठे बुक कर सकेंगे BLO के साथ कॉल

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनाव प्रबंधन को और अधिक सुगम, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India - ECI) ने डिजिटल इंडिया की मुहिम को एक नई ऊंचाई देते हुए ECINet App (ईसीआईनेट ऐप) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह केवल एक ऐप नहीं, बल्कि एक डिजिटल इकोसिस्टम है जिसने चुनाव आयोग की 40 से अधिक अलग-अलग ऑनलाइन सुविधाओं और ऍप्लिकेशन्स को एक ही छत के नीचे (Integrated Platform) ला खड़ा किया है।Read also:-ठाणे: 'मेरे खिलाफ गिद्धों की फौज थी, पर मैं शेर की बच्ची हूं'... मुंब्रा में AIMIM की जीत पर सहर शेख के इस भाषण ने मचाया तहलका; NCP को NOTA से भी कम वोट!   दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित प्रतिष्ठित 'भारत मंडपम' में आयोजित चुनाव प्रबंधन निकायों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (International Conference of Election Management Bodies) के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने इस क्रांतिकारी ऐप को देश और दुनिया के सामने पेश किया। इस लॉन्च के साथ ही भारत ने वैश्विक स्तर पर चुनाव प्रबंधन में तकनीक के इस्तेमाल का एक नया मानक स्थापित कर दिया है।   इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर ECINet App आम जनता के लिए क्यों खास है, इसके फीचर्स क्या हैं, और चुनाव आयोग का दावा क्यों है कि इस सिस्टम को हैक करना नामुमकिन है।   ECINet App: एक ऐप, अनेक समाधान (One App, Many Solutions) अब तक मतदाताओं, राजनीतिक दलों और चुनाव अधिकारियों को अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग ऐप्स या पोर्टल का सहारा लेना पड़ता था। जैसे—वोटर लिस्ट में नाम देखने के लिए अलग ऐप, आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत के लिए 'cVIGIL', और एफिडेविट देखने के लिए अलग वेबसाइट। लेकिन ECINet App ने इस बिखराव को खत्म कर दिया है।   एकीकरण की शक्ति (Power of Integration): मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने ऐप को लॉन्च करते हुए बताया कि चुनाव आयोग ने अपनी 40 से ज्यादा ऑनलाइन सुविधाओं को इस एक प्लेटफॉर्म में समाहित (Integrate) कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अब यूजर को अपने मोबाइल में दर्जनों ऐप्स रखने की जरूरत नहीं होगी। चाहे वोटर आईडी कार्ड डाउनलोड करना हो, अपने पोलिंग बूथ का पता लगाना हो, या चुनाव के नतीजे देखने हों—सब कुछ इसी एक ऐप पर उपलब्ध होगा।   प्रमुख विशेषताएं: वोटर से लेकर कैंडिडेट तक सबके लिए खास इस 'सुपर ऐप' को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह चुनावी प्रक्रिया से जुड़े हर हितधारक (Stakeholder) की जरूरतों को पूरा कर सके। लॉन्च इवेंट के दौरान साझा की गई जानकारी के आधार पर, ECINet App के कुछ प्रमुख फीचर्स इस प्रकार हैं:   1. मतदाताओं के लिए सुविधाएं (For Voters): वोटर सर्च और इंफो: मतदाता अपना नाम इलेक्टोरल रोल में आसानी से सर्च कर सकते हैं। पोलिंग स्टेशन नेविगेशन: आपका मतदान केंद्र कहां है, वहां तक कैसे पहुंचना है, इसकी सटीक जानकारी ऐप पर मिलेगी। BLO से संपर्क: आप अपने बीएलओ (Booth Level Officer) के साथ सीधे कॉल बुक कर सकते हैं या उनसे संपर्क कर सकते हैं। डिजिटल एफिडेविट: आपके क्षेत्र से कौन चुनाव लड़ रहा है, उस उम्मीदवार की संपत्ति और आपराधिक रिकॉर्ड (Affidavit) क्या है, यह सब एक क्लिक पर उपलब्ध होगा।   2. उम्मीदवारों और पार्टियों के लिए (For Candidates & Parties): नामांकन और अनुमति: उम्मीदवार अपने नामांकन की स्थिति देख सकते हैं और रैलियों या सभाओं के लिए ऑनलाइन अनुमति (Permission) के आवेदन को ट्रैक कर सकते हैं। रियल-टाइम डेटा: पोलिंग के दिन वोटिंग का प्रतिशत क्या है, यह डेटा रियल टाइम में अपडेट होगा।   3. शिकायत निवारण (Grievance Redressal): अगर किसी पार्टी या उम्मीदवार द्वारा चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) का उल्लंघन किया जा रहा है, तो नागरिक सीधे इस ऐप के माध्यम से सबूत के साथ शिकायत दर्ज कर सकते हैं।   4. चुनाव परिणाम (Election Results): मतगणना के दिन चुनाव के रुझान और अंतिम नतीजे (Results) सबसे तेज और सटीक रूप में इसी ऐप पर प्रसारित किए जाएंगे।   सुरक्षा का दावा: "इस ऐप को हैक करना असंभव" डिजिटल युग में सबसे बड़ा डर साइबर सुरक्षा (Cyber Security) और डेटा हैकिंग का होता है। लेकिन चुनाव आयोग ने ECINet App की सुरक्षा को लेकर बहुत बड़ा दावा किया है।   चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू ने सम्मेलन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईसीआईनेट को हैक करना असंभव है। उन्होंने बताया कि इस सिस्टम को अत्याधुनिक सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ तैयार किया गया है।   "आज वो समय आ गया है जब ऐप्स हम लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं और चुनाव प्रक्रिया भी इससे अछूती नहीं रह सकती है। हमने सुनिश्चित किया है कि तकनीक का इस्तेमाल भरोसे को बढ़ाने के लिए हो, न कि संदेह पैदा करने के लिए। ईसीआईनेट की सुरक्षा अभेद्य है।" — डॉ. सुखबीर सिंह संधू, चुनाव आयुक्त   विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग संभवतः इसे एक सुरक्षित प्राइवेट नेटवर्क या एन्क्रिप्टेड सर्वर पर संचालित कर रहा है, जो इसे बाहरी हमलों से सुरक्षित रखता है।   तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता: डॉ. विवेक जोशी चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने इस मौके पर कहा कि चुनावी योजना प्रबंधन (Election Planning Management) और निर्णय निर्माण में टेक्नोलॉजी की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। ECINet App इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।   उनका कहना है कि जब चुनाव संबंधी डेटा—जैसे वोटिंग प्रतिशत, कतार की स्थिति, और परिणाम—बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सीधे ऐप पर अपडेट होते हैं, तो इससे सिस्टम में पारदर्शिता (Transparency) बढ़ती है। इससे आम जनता का चुनाव प्रबंधन निकायों पर भरोसा और भी मजबूत होता है। फेक न्यूज और गलत सूचनाओं के दौर में यह ऐप 'सटीक जानकारी का एकमात्र स्रोत' (Single Source of Truth) बनकर उभरेगा।   ग्लोबल डेमोक्रेसी के लिए भारत का तोहफा यह ऐप सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने "अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन" के मंच से दुनिया भर के चुनाव प्रबंधन निकायों (Election Management Bodies - EMBs) को आमंत्रित किया है कि वे भारत की इस पहल का लाभ उठाएं।   भारत ने हमेशा 'विश्व गुरु' की भूमिका निभाते हुए अपने तकनीकी ज्ञान को साझा किया है। जिस तरह भारत का UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) दुनिया भर में चर्चा का विषय है, उसी तरह चुनाव आयोग का यह टेक्नोलॉजी स्टैक भी अन्य लोकतांत्रिक देशों के लिए एक मॉडल बन सकता है। कई देश जो अभी भी मतपत्रों और मैनुअल गणना पर निर्भर हैं, वे भारत के इस एकीकृत डिजिटल ढांचे से सीख ले सकते हैं।   ECINet App का भविष्य और चुनौतियां हालांकि, 40 से अधिक सेवाओं को एक ऐप में लाना तकनीकी रूप से एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी होंगी:   डिजिटल साक्षरता: भारत के ग्रामीण इलाकों में अभी भी कई मतदाता स्मार्टफोन या जटिल ऐप्स का उपयोग करने में सहज नहीं हैं। आयोग को ऐप का इंटरफेस बेहद सरल रखना होगा। इंटरनेट कनेक्टिविटी: दूरदराज के क्षेत्रों में जहां इंटरनेट कमजोर है, वहां यह ऐप कितनी प्रभावी ढंग से काम करेगा, यह देखने वाली बात होगी। जागरूकता: लोगों को यह बताना कि अब उन्हें अलग-अलग जगह भटकने की जरूरत नहीं है, और उन्हें इस ऐप पर शिफ्ट करना एक बड़ा अभियान होगा।   ECINet App का लॉन्च भारतीय चुनाव इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की बहस के बीच 'वन नेशन, वन इलेक्शन ऐप' की दिशा में एक ठोस कदम है। 40 सेवाओं का एकीकरण न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगा बल्कि मतदाता अनुभव (Voter Experience) को भी विश्वस्तरीय बनाएगा।   जब एक 18 साल का युवा अपना पहला वोट डालने जाएगा, तो उसे पोलिंग बूथ खोजने के लिए किसी पार्टी कार्यकर्ता की पर्ची का इंतजार नहीं करना होगा—उसके हाथ में ECINet App होगा। यही डिजिटल भारत की असली ताकत है। अब देखना यह है कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में यह ऐप धरातल पर कितना खरा उतरता है।   चुनाव आयोग ने 40 से ज्यादा सेवाओं को एक साथ जोड़ते हुए 'ECINet App' लॉन्च किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसे पेश किया। इस ऐप पर वोटर लिस्ट, पोलिंग स्टेशन, शिकायत और रिजल्ट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। चुनाव आयुक्त डॉ. संधू ने दावा किया है कि इस ऐप को हैक करना असंभव है, जो चुनावों में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

Unknown जनवरी 22, 2026 0
Modi Govts Digital Strike 242 Illegal Gambling and Betting Websites Blocked Immediately
मोदी सरकार का सट्टेबाजी सिंडिकेट पर 'डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक': रातों-रात 242 वेबसाइट्स 'ब्लैकआउट', गेमिंग एक्ट 2025 के तहत अब तक की सबसे बड़ी सफाई

भारत के डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने और युवाओं को बर्बाद होने से बचाने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। इसे अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी (Illegal Betting) और जुए (Gambling) के खिलाफ 'डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक' कहा जा रहा है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से 242 अवैध गैंबलिंग और बेटिंग वेबसाइट्स को ब्लॉक करने का आदेश जारी कर दिया है।READ ALSO:-इंस्टाग्राम ने मिटा दीं भाषाओं की सरहदें: अब तमिल वाला देखेगा हिंदी रील और मराठी वाला समझेगा बंगाली; Meta AI के इस 'जादुई' फीचर ने बदल दी कंटेंट क्रिएशन की दुनिया   यह कार्रवाई सामान्य नहीं है। यह उस 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार ने ठान लिया है कि भारत की डिजिटल सीमाओं के भीतर किसी भी ऐसे प्लेटफॉर्म को पनपने नहीं दिया जाएगा, जो देश के कानून को ठेंगा दिखाकर भोले-भाले लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं। संसद द्वारा 'ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025' पास किए जाने के बाद से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) एक्शन मोड में आ गया है।   ताजा कार्रवाई: 242 वेबसाइट्स पर क्यों गिरी गाज? सूत्रों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों और मंत्रालय की तकनीकी टीम पिछले कई महीनों से इन 242 वेबसाइट्स की निगरानी कर रही थी। ये वेबसाइट्स और ऐप्स बहुत ही शातिर तरीके से काम कर रहे थे।   पहचान छुपाना: इनमें से कई साइट्स विदेशी सर्वर (ऑफशोर) से संचालित हो रही थीं, लेकिन इनका पूरा इंटरफेस भारतीय यूजर्स को टारगेट करने के लिए डिजाइन किया गया था। मनी गेम्स का झांसा: ये प्लेटफॉर्म 'स्किल गेमिंग' की आड़ में शुद्ध रूप से 'चांस गेम' (जुआ) खिला रहे थे, जो भारतीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। तत्काल प्रभाव: सरकार ने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) को निर्देश दिया है कि इन 242 यूआरएल (URLs) को तुरंत प्रभाव से भारतीय आईपी एड्रेस पर ब्लॉक कर दिया जाए।   आंकड़ों का सच: 7800 साइट्स का 'डिजिटल एनकाउंटर' यह कार्रवाई यकायक नहीं हुई है। पिछले कुछ वर्षों में, विशेषकर 2022 के बाद से, सरकार ने अवैध सट्टेबाजी के खिलाफ एक लंबी लड़ाई छेड़ रखी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर की गंभीरता समझ आती है:   कुल कार्रवाई: अब तक सरकार ने 7,800 से अधिक अवैध बेटिंग और गैंबलिंग वेबसाइट्स को बंद किया है। MeitY का डेटा: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने विशेष रूप से 2022 से अब तक 1,400 से ज्यादा बेहद खतरनाक बेटिंग ऐप्स और वेबसाइटों को बैन किया है। तेजी का कारण: हाल ही में पास हुए ऑनलाइन गेमिंग एक्ट ने सरकार को कानूनी रूप से ज्यादा ताकतवर बना दिया है। पहले जहां कानूनी पेचीदगियों के कारण कार्रवाई में देरी होती थी, अब नए कानून के तहत मंत्रालय को त्वरित कार्रवाई (Swift Action) करने का अधिकार मिल गया है।   'ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025': वह हथियार जिससे डर रहा सट्टा बाजार इस पूरी कार्रवाई की धुरी संसद द्वारा पारित नया कानून है। यह कानून भारत में ऑनलाइन गेमिंग की दिशा और दशा तय करने वाला है। आइए समझते हैं कि इस एक्ट ने सरकार को क्या शक्तियां दी हैं:   A. अवैध और वैध में अंतर (Distinction): एक्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि 'वेजरिंग' (Wagering) यानी किसी परिणाम पर दांव लगाना अवैध है। जो प्लेटफॉर्म सट्टेबाजी की अनुमति देते हैं, वे भारत में काम नहीं कर सकते। केवल वे गेम्स वैध माने जाएंगे जिनमें 'कौशल' (Skill) शामिल है और जिनमें जुए का तत्व नहीं है। B. त्वरित ब्लॉक करने का अधिकार: सरकार अब केवल शिकायत मिलने का इंतजार नहीं करती। एक्ट के तहत गठित नोडल एजेंसियां खुद संज्ञान लेकर (Suo Moto) संदिग्ध वेबसाइट्स की जांच कर सकती हैं और उन्हें ब्लॉक कर सकती हैं। C. वित्तीय नकेल (Financial Trail): नया कानून बैंकों और पेमेंट गेटवे को भी निर्देश देता है कि वे ब्लैकलिस्टेड या संदिग्ध गेमिंग मर्चेंट्स के ट्रांजैक्शन को प्रोसेस न करें। यही कारण है कि अब इन अवैध साइट्स पर पैसा जमा करना मुश्किल होता जा रहा है।   सरकार की चिंता: युवाओं को 'डिजिटल नशे' से बचाना सरकार की इस सख्ती के पीछे सबसे बड़ा कारण देश का 'युवा वर्ग' है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी एक 'वित्तीय महामारी' का रूप ले रही है।   युवा क्यों हैं निशाने पर? लुभावने विज्ञापन: ये अवैध साइट्स सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर्स के जरिए विज्ञापन चलाती हैं, जिनमें रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाया जाता है। लत (Addiction): इन ऐप्स का एल्गोरिद्म ऐसा बनाया जाता है कि यूजर को इसकी लत लग जाए। पहले यूजर को छोटे-मोटे इनाम जिताए जाते हैं, और जब वह लालच में बड़ा पैसा लगाता है, तो वह सब कुछ हार जाता है। आत्महत्या और अपराध: देश के कई हिस्सों से ऐसी खबरें आई हैं जहां ऑनलाइन गेमिंग में कर्जदार होने के बाद युवाओं ने आत्महत्या कर ली या चोरी-डकैती का रास्ता अपनाया। सरकार इस सामाजिक ताने-बाने को टूटने से बचाना चाहती है।   सट्टेबाजी का 'मोडस ऑपरेंडी': कैसे चलता है यह काला धंधा? इन 242 वेबसाइट्स को बैन करने के पीछे की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह समझना जरूरी है कि यह सिंडिकेट काम कैसे करता है:   स्टेप 1: ऑफशोर होस्टिंग ज्यादातर वेबसाइट्स के सर्वर टैक्स हैवन्स (Tax Havens) जैसे माल्टा, कुराकाओ या साइप्रस में होते हैं, ताकि भारतीय पुलिस उन तक आसानी से न पहुंच सके। स्टेप 2: मिरर लिंक्स (Mirror Links) जब सरकार एक साइट (जैसे abc.com) को ब्लॉक करती है, तो ये ठग तुरंत उसी डेटाबेस के साथ एक नया डोमेन (जैसे abc1.com) बना लेते हैं। सरकार की ताजा कार्रवाई में ऐसे ही 'मिरर लिंक्स' को निशाना बनाया गया है। स्टेप 3: हवाला और क्रिप्टो चूंकि लीगल बैंकिंग चैनल अब सख्त हो रहे हैं, ये साइट्स अब क्रिप्टोकरेंसी (USDT/Bitcoin) या अवैध 'म्यूल अकाउंट्स' (किराये के बैंक खाते) के जरिए पैसा लेती हैं। यह पैसा अंततः हवाला के जरिए देश से बाहर भेजा जाता है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग है।   आर्थिक नुकसान और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा यह केवल जुए का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी है।   टैक्स चोरी (GST Theft): ये अवैध साइट्स भारत में कोई ऑफिस नहीं खोलतीं और न ही 28% जीएसटी (GST) चुकाती हैं। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। डेटा चोरी (Data Privacy): जब कोई यूजर इन ऐप्स को डाउनलोड करता है, तो वह अनजाने में अपने कॉन्टैक्ट्स, गैलरी और लोकेशन का एक्सेस दे देता है। इस डेटा का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग या डार्क वेब पर बेचने के लिए किया जाता है। टेरर फंडिंग का शक: खुफिया एजेंसियों को शक है कि सट्टेबाजी से कमाए गए पैसे का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों की फंडिंग में भी किया जा सकता है।   भविष्य की रणनीति: सरकार का 'ऑल-आउट' प्लान 242 वेबसाइट्स को ब्लॉक करना तो बस शुरुआत है। सरकार ने भविष्य के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है।   A. AI आधारित निगरानी: सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रही है जो इंटरनेट पर लगातार स्कैनिंग करती रहेगी। जैसे ही कोई नई बेटिंग साइट या पुराना बैन हुआ ऐप नए नाम से आएगा, AI उसे फ्लैग कर देगा। B. इन्फ्लुएंसर्स पर शिकंजा: सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या सेलिब्रिटी अवैध बेटिंग ऐप्स का प्रचार (Promotion) करेगा, उसे भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री पहले ही इसके लिए गाइडलाइंस जारी कर चुकी है। C. जन-जागरूकता अभियान: आने वाले दिनों में सरकार स्कूलों और कॉलेजों में डिजिटल सेफ्टी को लेकर अभियान चलाएगी, ताकि छात्रों को असली गेमिंग और अवैध गैंबलिंग के बीच का फर्क समझाया जा सके।   यूजर गाइड: कैसे पहचानें अवैध बेटिंग साइट? (Safety Checklist) सरकार अपना काम कर रही है, लेकिन एक यूजर के तौर पर आपको भी सतर्क रहना होगा। अगर आप किसी गेमिंग साइट पर जा रहे हैं, तो ये चेकलिस्ट जरूर देखें:   डोमेन चेक करें: क्या वेबसाइट का डोमेन अजीब है (जैसे numbers का इस्तेमाल)? क्या यह बार-बार बदल रहा है? रजिस्ट्रेशन: चेक करें कि क्या कंपनी भारत में रजिस्टर्ड है? क्या वेबसाइट के फुटर में भारत का पता और ग्रीवांस ऑफिसर (Grievance Officer) का नाम है? पेमेंट का तरीका: अगर कोई ऐप आपसे यूपीआई (UPI) के जरिए किसी निजी व्यक्ति के खाते में पैसा भेजने को कहे (कंपनी के खाते में नहीं), तो वह 100% फ्रॉड है। वादे: याद रखें, कोई भी लीगल गेमिंग साइट "पैसा दोगुना करने" या "गारंटीड जीत" का दावा नहीं करती।   साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल का मानना है, "सरकार का यह कदम बेहद स्वागतयोग्य है। ऑनलाइन गेमिंग एक्ट पास होने से प्रवर्तन एजेंसियों (Enforcement Agencies) के हाथ मजबूत हुए हैं। हालांकि, यह 'चोर-पुलिस' का खेल है। सरकार को तकनीक के साथ-साथ वित्तीय रास्तों (Money Trails) को भी पूरी तरह काटना होगा।"   वहीं, ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (AIGF) ने भी सरकार के कदम का समर्थन किया है। उनका कहना है कि अवैध ऑफशोर साइट्स की वजह से लीगल और टैक्स देने वाली भारतीय गेमिंग कंपनियों का बिजनेस खराब हो रहा था। इस सफाई से लीगल इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा।   एक सुरक्षित डिजिटल भारत की ओर 242 वेबसाइट्स पर प्रतिबंध और अब तक 7800 साइट्स का सफाया यह बताता है कि मोदी सरकार डिजिटल स्पेस में अराजकता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। यह कार्रवाई उन माता-पिता के लिए राहत की खबर है, जो अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित थे।   यह लड़ाई लंबी है, लेकिन मंशा साफ है—भारत में इनोवेशन और गेमिंग का स्वागत है, लेकिन इसकी आड़ में जुए और सट्टेबाजी के सिंडिकेट को पनपने नहीं दिया जाएगा।   जनहित में अपील: अगर आपको व्हाट्सएप, टेलीग्राम या एसएमएस पर किसी "ऑनलाइन घर बैठे पैसा कमाने वाले गेम" का लिंक आता है, तो उस पर क्लिक न करें और उसे तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर रिपोर्ट करें। आपकी सतर्कता ही आपकी सुरक्षा है।

Unknown जनवरी 16, 2026 0
Instagram Unveils AI Voice Translation for Indian Creators: Reels Now in 5 Regional Languages
इंस्टाग्राम ने मिटा दीं भाषाओं की सरहदें: अब तमिल वाला देखेगा हिंदी रील और मराठी वाला समझेगा बंगाली; Meta AI के इस 'जादुई' फीचर ने बदल दी कंटेंट क्रिएशन की दुनिया

"भाषा न दीवार बनेगी, न दायरा।" सोशल मीडिया की दुनिया में अक्सर यह कहा जाता है कि 'कंटेंट इज किंग', लेकिन अगर वह कंटेंट सामने वाले की भाषा में न हो, तो वह किंग अपना साम्राज्य खो देता है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसे भारतीय डिजिटल स्पेस में 'गेम-चेंजर' कहा जा रहा है।   मुंबई में आयोजित भव्य 'House of Instagram' इवेंट के दौरान कंपनी ने भारतीय क्रिएटर्स को एक ऐसा तोहफा दिया है, जो न केवल उनकी पहुंच (Reach) को 10 गुना बढ़ा देगा, बल्कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक के दर्शकों को एक धागे में पिरो देगा। इंस्टाग्राम ने अपने Meta AI पावर्ड ट्रांसलेशन टूल्स में भारी अपग्रेड का ऐलान किया है। अब एक हिंदी भाषी क्रिएटर का वीडियो तमिलनाडु का दर्शक अपनी मातृभाषा तमिल में न सिर्फ सुन सकेगा, बल्कि क्रिएटर को तमिल बोलते हुए देख भी सकेगा।   1. अपडेट का केंद्र बिंदु: क्या है यह नया फीचर? इंस्टाग्राम का यह नया अपडेट मुख्य रूप से 'AI वॉयस डबिंग और लिप-सिंक' (AI Voice Dubbing & Lip-Sync) पर आधारित है।   भाषाओं का विस्तार: अब तक इंस्टाग्राम पर ट्रांसलेशन फीचर्स मुख्य रूप से अंग्रेजी (English), स्पेनिश (Spanish) और पुर्तगाली (Portuguese) के अलावा केवल हिंदी (Hindi) तक सीमित थे। लेकिन भारत की विविधता को देखते हुए, कंपनी ने अब 5 नई क्षेत्रीय भाषाओं को इसमें जोड़ दिया है:READ ALSO:-शिक्षा जगत में ऐतिहासिक बदलाव: अब संस्कृत के छात्र भी पहनेंगे 'सफेद कोट', 12वीं के बाद डॉक्टर बनने का रास्ता साफ; शुरू हुआ 7.5 साल का स्पेशल कोर्स   बंगाली (Bengali) तमिल (Tamil) तेलुगु (Telugu) कन्नड़ (Kannada) मराठी (Marathi)   इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप हिंदी में वीडियो बनाते हैं, तो आप उसे एक क्लिक में इन पांचों भाषाओं में बदल सकते हैं। यह फीचर सिर्फ सबटाइटल (Subtitles) तक सीमित नहीं है, यह पूरी ऑडियो को बदल देता है।   2. तकनीक का जादू: 'लिप-सिंक' फीचर कैसे काम करता है? इस अपडेट की सबसे बड़ी खासियत इसका 'विजुअल डबिंग' (Visual Dubbing) या लिप-सिंक फीचर है। साधारण डबिंग में क्या होता है? वीडियो में होठ कुछ और बोल रहे होते हैं और आवाज कुछ और आ रही होती है। यह देखने में बहुत अजीब और नकली लगता है। लेकिन Meta AI ने इसे बदल दिया है।   डीप-फेक नहीं, यह 'डीप-टेक' है: वॉयस क्लोनिंग (Voice Cloning): जब आप अपनी रील को दूसरी भाषा में ट्रांसलेट करते हैं, तो AI किसी रोबोट की आवाज इस्तेमाल नहीं करता। यह आपकी ही आवाज (Your Original Tone) के सैंपल्स लेता है और दूसरी भाषा में उसी टोन और इमोशन के साथ ऑडियो जनरेट करता है। यानी, तमिल में भी आवाज आपकी ही होगी। लिप-सिंक सिंक्रोनाइजेशन (Lip-Sync Synchronization): यह सबसे हैरान करने वाला हिस्सा है। AI आपके वीडियो के विजुअल्स को फ्रेम-बाय-फ्रेम एनालाइज करता है। जैसे ही ऑडियो हिंदी से बदलकर मराठी होती है, AI आपके होठों की मूवमेंट (Lip Movement) को भी मराठी शब्दों के अनुसार डिजिटल रूप से बदल देता है। परिणाम: देखने वाले को ऐसा लगता है कि क्रिएटर ने मूल रूप से वीडियो मराठी या तमिल में ही रिकॉर्ड किया था। इससे दर्शकों के साथ 'कनेक्शन' और 'भरोसा' (Trust) बढ़ता है।   3. 'House of Instagram' में क्या कहा कंपनी ने? मुंबई में हुए इवेंट में इंस्टाग्राम ने स्पष्ट किया कि भारत उनके लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। कंपनी ने बताया कि उन्होंने इस फीचर की टेस्टिंग नवंबर 2025 में शुरू कर दी थी, और अब इसे व्यापक रूप से रोलआउट किया जा रहा है।   कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, "हम चाहते हैं कि एक क्रिएटर को अपनी भाषा तक सीमित न रहना पड़े। अगर किसी के पास अच्छा कंटेंट है, तो उसे भाषा की वजह से कम व्यूज नहीं मिलने चाहिए। हमारा AI मॉडल अब भारतीय भाषाओं की बारीकियों को समझने में सक्षम है।"   4. क्रिएटर्स के लिए ट्यूटोरियल: कैसे करें इस्तेमाल? अगर आप एक कंटेंट क्रिएटर हैं, तो आप सोच रहे होंगे कि इस फीचर को कैसे एक्टिवेट किया जाए। यहाँ इसका स्टेप-बाय-स्टेप तरीका दिया गया है (जैसे-जैसे यह रोलआउट होगा, इंटरफेस में मामूली बदलाव हो सकते हैं):   स्टेप 1: रील रिकॉर्ड करें या अपलोड करें सबसे पहले इंस्टाग्राम कैमरा से अपनी रील रिकॉर्ड करें या गैलरी से कोई वीडियो अपलोड करें जिसमें आपकी आवाज स्पष्ट हो। स्टेप 2: एडिटिंग टूल्स में जाएं एडिटिंग स्क्रीन पर आपको एक नया 'Meta AI' या 'Translate' आइकन दिखाई देगा। (यह आमतौर पर म्यूजिक और टेक्स्ट आइकन के पास होता है)। स्टेप 3: भाषा चुनें इस ऑप्शन पर क्लिक करने पर आपको 'Audio Translation' का विकल्प मिलेगा। यहाँ आप चुन सकते हैं कि आप अपने वीडियो को किस भाषा में डब करना चाहते हैं (जैसे- बंगाली, तमिल आदि)। स्टेप 4: लिप-सिंक टॉगल ऑन करें यहाँ आपको एक 'Enable Lip-Sync' (लिप-सिंक सक्षम करें) का बटन दिखेगा। इसे जरूर ऑन करें। अगर आप इसे ऑफ रखेंगे, तो सिर्फ आवाज बदलेगी, होठों की मूवमेंट नहीं। स्टेप 5: प्रीव्यू और पोस्ट AI को प्रोसेस करने में कुछ सेकंड लगेंगे। इसके बाद आप प्रीव्यू देख सकते हैं कि दूसरी भाषा में आप कैसे लग रहे हैं। संतुष्ट होने पर कैप्शन लिखें और पोस्ट कर दें।   5. एक और बड़ा बदलाव: नए भारतीय फॉन्ट्स सिर्फ ऑडियो ही नहीं, इंस्टाग्राम ने अपने Text Editor में भी बड़ा बदलाव किया है। अब तक क्रिएटर्स को हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं में टाइप करने पर पुराने और बोरिंग फॉन्ट्स का इस्तेमाल करना पड़ता था।   विजुअल अपग्रेड: इंस्टाग्राम ने अपने एडिटिंग टूल (Edits) में नए देवनागरी (Devanagari) और बंगाली-असमिया (Bengali-Assamese) स्क्रिप्ट फॉन्ट्स जोड़े हैं।   अब आपकी स्टोरीज और रील्स पर लिखा गया टेक्स्ट ज्यादा स्टाइलिश और मॉडर्न दिखेगा। इससे थंबनेल और इन-वीडियो टेक्स्ट की पठनीयता (Readability) बढ़ेगी। ये फॉन्ट्स जल्द ही सभी एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइसेज पर उपलब्ध होंगे।   6. विश्लेषण: भारतीय क्रिएटर्स के लिए यह 'गेम-चेंजर' क्यों है? इस अपडेट का असर सिर्फ 'कूल' दिखने तक सीमित नहीं है, इसका सीधा असर क्रिएटर्स की जेब (Earnings) और ग्रोथ (Growth) पर पड़ेगा। आइए समझते हैं कैसे:   A. पैन-इंडिया रीच (Pan-India Reach): अभी तक एक हिंदी यूट्यूबर या इंस्टाग्रामर की ऑडियंस मुख्य रूप से उत्तर भारत (North India) तक सीमित थी। दक्षिण भारत (South India) में हिंदी कंटेंट कम देखा जाता है। इस फीचर के साथ, एक दिल्ली का फूड ब्लॉगर अपनी रील को तमिल और तेलुगु में डब करके चेन्नई और हैदराबाद के दर्शकों को भी टारगेट कर सकता है। उसका मार्केट साइज रातों-रात दोगुना हो जाएगा।   B. ब्रांड स्पॉन्सरशिप में उछाल (Higher Sponsorship Value): ब्रांड्स हमेशा उन क्रिएटर्स को पसंद करते हैं जो विविध ऑडियंस तक पहुंच सकें। अगर आप एक ब्रांड को यह कह सकते हैं कि "मैं आपके प्रोडक्ट का प्रचार 6 अलग-अलग भाषाओं में कर सकता हूं," तो आप स्पॉन्सरशिप के लिए ज्यादा पैसे चार्ज कर सकते हैं। यह 'हाइपर-लोकल' मार्केटिंग का नया दौर लाएगा।   C. क्षेत्रीय ऐप्स से मुकाबला: भारत में Moj, Josh और ShareChat जैसे ऐप्स ने अपनी पकड़ इसलिए बनाई क्योंकि वे क्षेत्रीय भाषाओं पर केंद्रित थे। इंस्टाग्राम ने इस अपडेट के जरिए उन ऐप्स के यूजर बेस को अपनी तरफ खींचने का बड़ा दांव खेला है।   D. शिक्षा और जागरूकता (Ed-Tech & Info-tainment): सोचिए, फाइनेंस या हेल्थ टिप्स देने वाला कोई क्रिएटर अब अपनी जानकारी को मराठी और कन्नड़ में भी सटीकता से पहुंचा पाएगा। इससे गलत सूचना (Misinformation) कम होगी और सही जानकारी ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी।   7. चुनौतियां और भविष्य की राह हालांकि यह तकनीक अद्भुत है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी होंगी:   सांस्कृतिक बारीकियां (Cultural Nuances): क्या AI मुहावरों और स्थानीय स्लैंग (Slang) को सही से अनुवाद कर पाएगा? उदाहरण के लिए, हिंदी के "जुगाड़" शब्द का सटीक अनुवाद अंग्रेजी या तमिल में खोजना मुश्किल हो सकता है। गलत इस्तेमाल (Deepfake Concerns): हालांकि यह फीचर क्रिएटर के अपने वीडियो के लिए है, लेकिन लिप-सिंक तकनीक का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने के लिए भी किया जा सकता है। मेटा ने कहा है कि ट्रांसलेटेड कंटेंट पर एक 'AI Generated' या 'Translated' का लेबल लगा होगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।   इंस्टाग्राम का यह कदम बताता है कि भविष्य 'वीडियो' का है और वीडियो का भविष्य 'AI' है। नवंबर 2025 में शुरू हुआ यह सफर अब 2026 में भारतीय कंटेंट क्रिएशन की दिशा बदल रहा है। यह अपडेट सिर्फ एक तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि भारत की भाषाई विविधता को डिजिटल पटल पर एक करने का प्रयास है।   अब वह दिन दूर नहीं जब एक बंगाली कवि की कविता महाराष्ट्र का किसान अपनी भाषा में सुनेगा और एक तमिल शेफ की रेसिपी उत्तर प्रदेश की गृहिणी अपनी बोली में समझकर बनाएगी—और यह सब होगा बिना किसी इंसानी डबिंग आर्टिस्ट के, बस एक क्लिक पर।   सलाह: अगर आप क्रिएटर हैं, तो तुरंत अपना इंस्टाग्राम ऐप अपडेट करें और इस फीचर के साथ एक्सपेरिमेंट करना शुरू करें। जो 'फर्स्ट मूवर' (First Mover) होगा, उसे ही सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा।

Unknown जनवरी 16, 2026 0
How to Download Aadhaar Card and Pan Card on WhatsApp Using MyGov Helpdesk Chatbot Step by Step Guide
आधार कार्ड खो गया? चिंता न करें! अब WhatsApp पर 'Hi' लिखकर चुटकियों में डाउनलोड करें आधार, पैन और मार्कशीट; जानें पूरा प्रोसेस

भारत तेजी से बदल रहा है, और यह बदलाव अब हमारे स्मार्टफ़ोन की स्क्रीन पर साफ दिखाई देने लगा है। एक समय था जब आधार कार्ड (Aadhaar Card) डाउनलोड करने के लिए साइबर कैफे जाना पड़ता था या UIDAI की वेबसाइट पर धीमे सर्वर और कैप्चा (Captcha) से जूझना पड़ता था। अगर आप अपना आधार कार्ड घर भूल जाते थे, तो कई जरूरी काम अटक जाते थे।READ ALSO:-बिजनौर में कुत्ते को लोगों ने माना 'भैरव बाबा': 4 दिन से कर रहा मंदिर की परिक्रमा; महिलाएं कर रहीं दंडवत प्रणाम, 50 हजार लोग कर चुके दर्शन   लेकिन अब, सरकार ने तकनीक का ऐसा इस्तेमाल किया है जिसने सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच को 'चैटिंग' जितना आसान बना दिया है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने MyGov हेल्पडेस्क (MyGov Helpdesk) के जरिए वॉट्सऐप पर आधार कार्ड डाउनलोड करने की सुविधा शुरू की है।   सोचिए, आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं और टीटीई (TTE) आपसे आईडी मांग ले, और आपको याद आए कि वॉलेट तो घर रह गया। घबराने की जरूरत नहीं है। बस अपना वॉट्सऐप खोलिए, एक मैसेज भेजिए और आपका ओरिजिनल आधार कार्ड आपकी स्क्रीन पर होगा। यह रिपोर्ट आपको बताएगी कि इस सुविधा का इस्तेमाल कैसे करना है, इसकी शर्तें क्या हैं और यह कितना सुरक्षित है।   क्या है यह नई सुविधा? (Understanding the Feature) यह सुविधा MyGov (मेरी सरकार) और DigiLocker (डिजीलॉकर) के सहयोग से वॉट्सऐप प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई है।   DigiLocker क्या है? यह सरकार का एक डिजिटल वॉलेट है जहां आप अपने सभी दस्तावेज (आधार, पैन, आरसी, मार्कशीट) डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित रख सकते हैं। WhatsApp इंटीग्रेशन: चूंकि भारत में लगभग 50 करोड़ से ज्यादा लोग वॉट्सऐप का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए सरकार ने डिजीलॉकर की सेवाओं को वॉट्सऐप चैटबॉट (Chatbot) के साथ जोड़ दिया है।   इसका मतलब है कि आपको अब अलग से कोई ऐप डाउनलोड करने की भी जरूरत नहीं है। जिस ऐप पर आप अपने दोस्तों से बात करते हैं, उसी पर अब आप 'सरकार' से भी बात कर सकते हैं।   जरूरी शर्तें: शुरू करने से पहले चेक करें ये 2 चीजें इससे पहले कि हम प्रोसेस पर बात करें, यह जानना जरूरी है कि यह सुविधा किन लोगों को मिलेगी। इसके लिए दो मुख्य शर्तें हैं:   आधार से लिंक मोबाइल नंबर: आप जिस वॉट्सऐप नंबर से मैसेज भेज रहे हैं, जरूरी नहीं कि वही आधार से लिंक हो। लेकिन, जब आप आधार डाउनलोड करेंगे, तो OTP (वन टाइम पासवर्ड) उसी नंबर पर आएगा जो आपके आधार कार्ड के साथ रजिस्टर्ड है। इसलिए, आपका मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना अनिवार्य है। डिजीलॉकर अकाउंट (DigiLocker Account): आपके दस्तावेज वॉट्सऐप पर तभी आएंगे जब वे डिजीलॉकर पर मौजूद होंगे। अगर आपका अकाउंट पहले से है, तो बहुत अच्छी बात है। अगर नहीं है, तो घबराएं नहीं। वॉट्सऐप चैटबॉट के जरिए ही आप अपना डिजीलॉकर अकाउंट भी बना सकते हैं (इसकी प्रक्रिया आगे बताई गई है)।   स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: वॉट्सऐप पर आधार कैसे डाउनलोड करें? यह प्रक्रिया बेहद सरल है। इसे हमने छोटे-छोटे स्टेप्स में तोड़ा है ताकि कोई भी (चाहे वो टेक-सेवी हो या न हो) इसे समझ सके।   स्टेप 1: नंबर सेव करें (Save the Number) सबसे पहले अपने फोन के कॉन्टैक्ट्स (Contacts) में भारत सरकार का आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर सेव करें।   नंबर: +91-9013151515 नाम: MyGov Helpdesk (या आप इसे 'Govt Chatbot' के नाम से सेव कर सकते हैं)।   स्टेप 2: चैट शुरू करें (Initiate Chat) अपना वॉट्सऐप खोलें। जिसे नाम से नंबर सेव किया है, उसे सर्च करें। चैट बॉक्स में 'Hi', 'Namaste' या 'Digilocker' लिखकर भेजें।   स्टेप 3: विकल्प चुनें (Choose Service) जैसे ही आप मैसेज भेजेंगे, चैटबॉट आपको तुरंत रिप्लाई करेगा। आपके सामने दो विकल्प आएंगे: Co-Win Services (वैक्सीन सर्टिफिकेट के लिए) DigiLocker Services (दस्तावेजों के लिए) आपको 'DigiLocker Services' बटन पर क्लिक करना है या टाइप करना है।   स्टेप 4: अकाउंट वेरिफिकेशन (Verification) चैटबॉट पूछेगा: "क्या आपका डिजीलॉकर अकाउंट है?" अगर है, तो 'Yes' चुनें। अगर नहीं है, तो 'No' चुनें (बॉट आपको अकाउंट बनाने में मदद करेगा)। इसके बाद बॉट आपसे आपका 12 अंकों का आधार नंबर (Aadhaar Number) मांगेगा। बिना स्पेस दिए अपना आधार नंबर टाइप करें और भेज दें।   स्टेप 5: ओटीपी वेरिफिकेशन (OTP Authentication) आपके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। उस OTP को चैट बॉक्स में टाइप करके भेजें। नोट: ओटीपी आने में कभी-कभी 30 सेकंड तक का समय लग सकता है, धैर्य रखें।   स्टेप 6: दस्तावेज चुनें (Select Document) ओटीपी वेरीफाई होते ही, चैटबॉट आपको उन दस्तावेजों की लिस्ट दिखाएगा जो आपके डिजीलॉकर में पहले से सेव हैं। उदाहरण के लिए: Aadhaar Card PAN Card Class X Marksheet आधार कार्ड डाउनलोड करने के लिए लिस्ट में आधार के सामने लिखा नंबर (जैसे '1') टाइप करके भेजें।   स्टेप 7: डाउनलोड करें (Download) नंबर भेजते ही, 2 से 5 सेकंड के अंदर आपके चैट बॉक्स में एक PDF फाइल आ जाएगी। यह आपका ओरिजिनल आधार कार्ड है। इसे डाउनलोड करें।   पासवर्ड का पेंच: PDF कैसे खोलें? (Decoding the Password) अक्सर लोग यहां आकर फंस जाते हैं। वॉट्सऐप पर आई फाइल डाउनलोड तो हो जाती है, लेकिन जब उसे खोलते हैं तो वह पासवर्ड (Password) मांगती है। यह सुरक्षा कारणों से किया गया है ताकि कोई और आपका आधार न देख सके।   क्या होता है पासवर्ड? ई-आधार (e-Aadhaar) का पासवर्ड एक स्टैंडर्ड फॉर्मेट में होता है:   आपके नाम के पहले 4 अक्षर (CAPITAL में) + आपके जन्म का वर्ष (YYYY)   उदाहरण से समझें:  केस 1: नाम: SURESH KUMAR जन्म वर्ष: 1990 पासवर्ड: SURE1990 केस 2 (अगर नाम 3 अक्षर का है): नाम: RIA जन्म वर्ष: 1995 पासवर्ड: RIA1995 (सिर्फ नाम के अक्षर और साल) [नोट: आम तौर पर UIDAI 4 अक्षर मांगता है, लेकिन 3 अक्षर वाले नाम में पूरा नाम और साल चलता है] केस 3 (अगर नाम में सरनेम पहले है): आधार कार्ड में जैसा नाम लिखा है (Spelling), बिल्कुल वैसे ही पहले 4 अक्षर लेने हैं।   सिर्फ आधार ही नहीं, ये 7 दस्तावेज भी मिलेंगे MyGov हेल्पडेस्क सिर्फ आधार तक सीमित नहीं है। यह एक 'डिजिटल तिजोरी' की चाबी है। इसी चैटबॉट के जरिए आप निम्नलिखित दस्तावेज भी डाउनलोड कर सकते हैं:   PAN Card (पैन कार्ड): इनकम टैक्स रिटर्न या बैंक में देने के लिए। Driving License (ड्राइविंग लाइसेंस): ट्रैफिक पुलिस को दिखाने के लिए। RC (गाड़ी का रजिस्ट्रेशन): गाड़ी के कागज साथ रखने की झंझट खत्म। Insurance Policy (बीमा पॉलिसी): अगर आपने डिजीलॉकर से लिंक की है। 10वीं-12वीं की मार्कशीट: CBSE और कई स्टेट बोर्ड्स की मार्कशीट। वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट: कोविड वैक्सीन का प्रमाण।   नोट: आधार के अलावा बाकी दस्तावेज डाउनलोड करने के लिए आपको पहले उन्हें डिजीलॉकर में 'इश्यू' (Issue) करना होगा। चैटबॉट में ऑप्शन आता है- "Issue New Document". वहां अपना पैन नंबर या डीएल नंबर डालकर आप उसे लिंक कर सकते हैं।   कानूनी मान्यता: क्या पुलिस चालान काट सकती है? यह सबसे बड़ा सवाल है—क्या वॉट्सऐप पर दिखाया गया आधार या ड्राइविंग लाइसेंस पुलिस मानेगी?   जवाब: हाँ, बिल्कुल। IT एक्ट 2000 (Information Technology Act, 2000) के मुताबिक, डिजीलॉकर या उसके अधिकृत प्लेटफॉर्म (जैसे MyGov WhatsApp Bot) के जरिए दिखाए गए दस्तावेज ओरिजिनल दस्तावेजों के बराबर ही कानूनी मान्यता रखते हैं।   ट्रैफिक पुलिस: सड़क परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि अगर कोई नागरिक डिजीलॉकर या एम-परिवहन (mParivahan) के जरिए डिजिटल डीएल/आरसी दिखाता है, तो ट्रैफिक पुलिस उसे फिजिकल कॉपी (Hard Copy) दिखाने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। एयरपोर्ट/ट्रेन: एयरपोर्ट एंट्री और ट्रेन में आईडी प्रूफ के तौर पर भी यह आधार मान्य है।   सुरक्षा का सवाल: क्या यह सुरक्षित है? (Is it Safe?) वॉट्सऐप पर अपने निजी दस्तावेज मंगाना क्या सुरक्षित है? इस पर विशेषज्ञों और सरकार का क्या कहना है?   एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (End-to-End Encryption): वॉट्सऐप के मैसेज एन्क्रिप्टेड होते हैं, यानी भेजने वाले और पाने वाले के अलावा कोई तीसरा (यहां तक कि वॉट्सऐप भी) उन्हें नहीं पढ़ सकता। सरकारी चैटबॉट: यह कोई प्राइवेट बॉट नहीं है, बल्कि भारत सरकार (MeitY) का आधिकारिक सिस्टम है। OTP सुरक्षा: कोई भी सिर्फ आपका नंबर सेव करके आपका आधार नहीं निकाल सकता। जब तक आपके पास आया OTP नहीं डाला जाएगा, दस्तावेज नहीं मिलेगा। इसलिए अपना OTP कभी किसी से शेयर न करें।   परेशानी हो तो क्या करें? (Troubleshooting) तकनीक है, तो कभी-कभी दिक्कतें भी आ सकती हैं। यहां कुछ सामान्य समस्याओं के समाधान हैं: समस्या: "Hi" भेजने पर कोई रिप्लाई नहीं आ रहा। समाधान: कभी-कभी सर्वर बिजी होता है। 5 मिनट बाद दोबारा कोशिश करें। इंटरनेट कनेक्शन चेक करें। समस्या: डिजीलॉकर में आधार नहीं मिल रहा। समाधान: डिजीलॉकर ऐप या वेबसाइट पर जाकर चेक करें कि आपका आधार वहां सिंक (Sync) है या नहीं। अगर नहीं, तो वहां अपडेट करें। समस्या: OTP नहीं आ रहा। समाधान: नेटवर्क चेक करें। यह भी देखें कि कहीं आपके आधार से लिंक मोबाइल नंबर की वैलिडिटी (रिचार्ज) खत्म तो नहीं हो गई है।   डिजिटल इंडिया की असली ताकत MyGov हेल्पडेस्क का यह कदम 'डिजिटल इंडिया' मुहिम की एक बड़ी जीत है। इसने सरकारी दफ्तरों की लाइनों को खत्म करके सेवाओं को हमारी हथेली पर ला दिया है। यह न केवल समय बचाता है बल्कि कागजी कार्रवाई को भी कम करता है।   चाहे आप एक छात्र हों जिसे मार्कशीट चाहिए, एक ड्राइवर जिसे लाइसेंस चाहिए, या एक आम नागरिक जिसे सिम कार्ड लेने के लिए आधार चाहिए—यह चैटबॉट हर किसी के लिए एक 'पर्सनल असिस्टेंट' की तरह काम करता है। तो देर किस बात की? अभी नंबर सेव करें और डिजिटल आजादी का अनुभव करें।   विशेष टिप (Pro Tip): इस नंबर (+91-9013151515) को अपने परिवार के बुजुर्गों के फोन में जरूर सेव कर दें और उन्हें इस्तेमाल करना सिखाएं। इमरजेंसी में अगर वे अपने दस्तावेज भूल जाएं, तो यह एक मैसेज उनकी बहुत मदद कर सकता है।

Unknown जनवरी 16, 2026 0
Elon Musk X Bans Grok AI from Generating Explicit Images of Real People After Backlash
डिजिटल दुनिया की 'सर्जिकल स्ट्राइक': एलन मस्क के Grok AI पर अश्लीलता का 'शटर डाउन'; असली लोगों की न्यूड इमेज बनाने पर लगा वर्ल्डवाइड बैन

टेक्नोलॉजी की दुनिया में जब 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) का आगमन हुआ, तो इसे मानव इतिहास की सबसे बड़ी क्रांति माना गया। लेकिन, हर सिक्के का दूसरा पहलू होता है। पिछले कुछ महीनों में AI का जितना इस्तेमाल प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए हुआ, उससे कहीं ज्यादा इसका दुरुपयोग 'डीपफेक' (Deepfake) और अश्लील सामग्री (NCII - Non-Consensual Intimate Imagery) बनाने में किया गया।READ ALSO:-भारत की सड़कों पर आने वाला है सबसे बड़ा 'टेक्नोलॉजी बूम': अब इंसानों की तरह आपस में 'बात' करेंगी गाड़ियां; 2026 से हर वाहन में अनिवार्य होगा V2V सिस्टम, कोहरे और अंधे मोड़ों का 'काल' बनेगी ये तकनीक   इस दुरुपयोग के केंद्र में रहा एलन मस्क का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) और उनका AI चैटबॉट 'Grok'। 'फ्री स्पीच' के सबसे बड़े पैरोकार माने जाने वाले मस्क को आखिरकार झुकना पड़ा है। एक बड़े फैसले में, X ने Grok AI द्वारा असली लोगों की अश्लील (Explicit) तस्वीरें बनाने पर दुनिया भर में प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला तब आया जब भारत समेत दुनिया भर की महिलाओं ने अपनी निजता के हनन और ऑनलाइन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराईं।   क्या है नया प्रतिबंध? Grok पर लगा 'डिजिटल लॉक' X की सेफ्टी टीम ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि Grok AI के एल्गोरिदम में तकनीकी बदलाव (Technical Guardrails) किए गए हैं।   नो न्यूडिटी पॉलिसी: अब अगर कोई यूजर Grok को किसी असली व्यक्ति (Real Person) की फोटो अपलोड करके उसे 'बिना कपड़ों के' (Undress) या 'बिकिनी में' दिखाने का प्रॉम्प्ट देगा, तो AI उसे रिजेक्ट कर देगा। पेड और अनपेड दोनों पर लागू: यह नियम सिर्फ फ्री यूजर्स के लिए नहीं, बल्कि उन प्रीमियम यूजर्स के लिए भी है जो X का सब्सक्रिप्शन लेकर Grok का इस्तेमाल कर रहे थे। कीवर्ड फिल्टरिंग: सिस्टम में ऐसे कीवर्ड्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है जो अश्लीलता या सेक्सुअल कंटेंट से जुड़े हैं।   कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि "किसी की निजता का उल्लंघन न हो और प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किसी को परेशान करने (Harassment) के लिए न किया जा सके।" यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है क्योंकि Grok को मस्क ने "बिना किसी फिल्टर वाला विद्रोही AI" (Rebellious AI) कहकर प्रमोट किया था।   मामले की जड़: दिसंबर की वो शिकायतें और भारत का हस्तक्षेप इस बैन की पटकथा पिछले साल दिसंबर में ही लिखी जाने लगी थी। सोशल मीडिया पर एक भयानक ट्रेंड देखने को मिला, जिसने महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए।   क्या हो रहा था? कुछ शरारती तत्व और अपराधी मानसिकता वाले लोग X पर फेक अकाउंट बना रहे थे। वे आम महिलाओं, कॉलेज स्टूडेंट्स, और यहां तक कि सेलिब्रिटीज की सामान्य तस्वीरें (Instagram या Facebook से उठाई हुई) पोस्ट करते थे। इसके बाद Grok AI को प्रॉम्प्ट दिया जाता था:   "Make this woman look hot" या "Remove the clothes from this image" या "Show her in sexual attire."   हैरानी की बात यह थी कि Grok, जो कि एक एडवांस AI है, इन अनैतिक मांगों को रोकने के बजाय उन्हें पूरा कर रहा था। मिनटों में किसी भी सम्मानित महिला की तस्वीर को अश्लील पोस्टर में बदल दिया जाता था।   भारत सरकार की सख्ती: जब यह मामला तूल पकड़ने लगा, तो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने कड़ा रुख अपनाया। IT मंत्रालय की 'साइबर लॉ डिवीजन' ने X को स्पष्ट निर्देश दिया कि IT रूल्स 2021 का पालन करना अनिवार्य है। सरकार ने साफ कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसी सामग्री को तुरंत हटाना होगा जो किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाती है।   भारत में बड़ी कार्रवाई: 3,500 फोटो डिलीट, 600 अकाउंट साफ X ने भारत सरकार को सौंपी अपनी 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (Action Taken Report) में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं, जो बताते हैं कि समस्या कितनी गंभीर हो चुकी थी।   3,500 तस्वीरें हटाई गईं: कंपनी ने माना कि उसने Grok के जरिए बनाई गई लगभग 3,500 ऐसी तस्वीरें प्लेटफॉर्म से हटाई हैं जो आपत्तिजनक थीं और बिना सहमति के बनाई गई थीं। 600 यूजर्स पर परमानेंट बैन: सिर्फ फोटो हटाना काफी नहीं था। X ने उन 600 भारतीय यूजर्स की पहचान की जो बार-बार (Habitual Offenders) इस टूल का इस्तेमाल अश्लील सामग्री बनाने के लिए कर रहे थे। इन सभी के अकाउंट्स को सस्पेंड कर दिया गया है।   यह आंकड़ा सिर्फ भारत का है। अगर ग्लोबल स्तर पर देखा जाए, तो यह संख्या लाखों में हो सकती है। यह दर्शाता है कि कैसे एक शक्तिशाली तकनीक का इस्तेमाल समाज में गंदगी फैलाने के लिए किया जा रहा था।   मस्क का 'पेन और पेपर' वाला तर्क क्यों हुआ फेल? एलन मस्क हमेशा से यह मानते रहे हैं कि तकनीक न्यूट्रल होती है। जब शुरू में Grok द्वारा अश्लील तस्वीरें बनाने की खबरें आईं, तो मस्क का रवैया रक्षात्मक था।   मस्क का पुराना बयान: "अगर कोई कलम (Pen) से कुछ बुरा लिखता है, तो आप कलम को दोषी नहीं ठहराते। कलम यह तय नहीं करती कि क्या लिखा जाएगा। यह जिम्मेदारी उसे पकड़ने वाले की है।"   मस्क का तर्क था कि Grok सिर्फ एक टूल है, और गलती यूजर की है जो उसे गलत इनपुट दे रहा है।   क्यों फेल हुआ यह तर्क? विशेषज्ञों का मानना है कि 'जनरेटिव AI' की तुलना 'कलम' से नहीं की जा सकती।   कलम अपने आप कुछ नहीं जोड़ती: कलम वही लिखती है जो आप सोचते हैं। लेकिन AI आपके एक छोटे से प्रॉम्प्ट को अपनी तरफ से बहुत कुछ जोड़कर (Hallucinate करके) एक बेहद वास्तविक दिखने वाली छवि में बदल देता है। स्केल और स्पीड: एक कलम से आप एक घंटे में एक चित्र बना सकते हैं। AI से एक सेकंड में हजारों अश्लील तस्वीरें बनाई जा सकती हैं और वायरल की जा सकती हैं। सहमति का सवाल: जब AI किसी असली इंसान के चेहरे का उपयोग करता है, तो यह कॉपीराइट और 'राइट टू प्राइवेसी' का सीधा उल्लंघन है।   आखिरकार, बढ़ते दबाव और कानूनी पचड़ों से बचने के लिए मस्क को अपनी 'एब्सोल्यूट फ्री स्पीच' (Absolute Free Speech) की परिभाषा बदलनी पड़ी और Grok में फिल्टर लगाने पड़े।   डीपफेक का खतरा: सिर्फ सेलिब्रिटी नहीं, आम लोग भी निशाने पर अक्सर जब हम डीपफेक की बात करते हैं, तो हमें लगता है कि यह सिर्फ रश्मिका मंदाना, कैटरीना कैफ या टेलर स्विफ्ट जैसी बड़ी हस्तियों की समस्या है। लेकिन Grok का मामला दिखाता है कि खतरा अब हमारे और आपके घरों तक पहुंच चुका है।   मोडस ऑपरेंडी (अपराध का तरीका): टारगेट चुनना: अपराधी किसी स्कूल/कॉलेज की लड़की या कामकाजी महिला की सोशल मीडिया प्रोफाइल पर जाते हैं। फोटो चोरी: वहां से उनकी सामान्य प्रोफाइल फोटो डाउनलोड की जाती है। AI मैनिपुलेशन: Grok या अन्य डीपफेक ऐप्स का इस्तेमाल करके उस फोटो से कपड़े हटा दिए जाते हैं या चेहरा किसी अश्लील वीडियो में लगा दिया जाता है। ब्लैकमेलिंग: फिर पीड़ित को वह फोटो भेजकर ब्लैकमेल किया जाता है या बदला लेने के लिए फोटो वायरल कर दी जाती है।   Grok जैसे मेनस्ट्रीम टूल का इसमें शामिल होना सबसे ज्यादा खतरनाक था क्योंकि इसे एक्सेस करना बहुत आसान था। अब बैन लगने से इस आसान रास्ते पर रुकावट आएगी।   कानूनी पहलू: भारत में क्या हैं सजा के प्रावधान? अगर आप भारत में रहते हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि AI का इस्तेमाल करके अश्लील सामग्री बनाना एक गंभीर अपराध है।   IT एक्ट की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना या निजी अंगों की तस्वीरें लेना/प्रकाशित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना है। IT एक्ट की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करना। इसमें पहली बार गलती पर 3 साल और दूसरी बार में 5 साल तक की जेल हो सकती है। IPC की धारा 509: किसी महिला की गरिमा का अपमान करना।   भारत सरकार अब 'डिजिटल इंडिया एक्ट' लाने की तैयारी कर रही है, जिसमें AI और डीपफेक के लिए और भी सख्त नियम होंगे। X द्वारा Grok पर लगाया गया यह बैन भी इसी सख्त कानून के डर का नतीजा माना जा रहा है।   तकनीकी विश्लेषण: Grok कैसे रोकता है अश्लीलता? अब सवाल उठता है कि तकनीकी रूप से यह बैन कैसे लागू होता है? इसे 'Guardrails' (सुरक्षा घेरा) कहा जाता है।   Input Filtering (इनपुट फिल्टरिंग): जब यूजर प्रॉम्प्ट लिखता है "Nude" या "Bikini", तो AI उसे प्रोसेस करने से पहले ही ब्लॉक कर देता है। Image Recognition (इमेज रिकग्निशन): अगर यूजर कोई फोटो अपलोड करता है, तो AI पहले स्कैन करता है कि यह किसी असली इंसान की फोटो है या नहीं। अगर यह रियल फोटो है, तो एडिटिंग के ऑप्शन्स सीमित हो जाते हैं। Output Analysis (आउटपुट एनालिसिस): इमेज जनरेट होने के बाद, फाइनल आउटपुट को दिखाने से पहले एक और AI मॉडल उसे चेक करता है कि इसमें कहीं स्किन एक्सपोजर (Skin Exposure) तय सीमा से ज्यादा तो नहीं है।   हालांकि, हैकर्स और शरारती तत्व हमेशा इन फिल्टर्स को तोड़ने के तरीके (Jailbreak prompts) ढूंढते रहते हैं, इसलिए यह एक निरंतर चलने वाली 'चोर-पुलिस' की लड़ाई है।   भविष्य की राह: क्या AI कभी पूरी तरह सुरक्षित होगा? X का यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन यह समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है। इंटरनेट पर आज भी सैकड़ों ऐसी वेबसाइट्स और टेलीग्राम बॉट्स मौजूद हैं जो बिना किसी रोक-टोक के डीपफेक बना रहे हैं।   विशेषज्ञों का कहना है कि: वॉटरमार्किंग अनिवार्य हो: हर AI जनरेटेड इमेज पर एक अदृश्य 'वॉटरमार्क' होना चाहिए ताकि पता चल सके कि यह असली नहीं है। एथिकल AI डेवलपमेंट: कंपनियों को AI बनाते समय ही सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी, न कि बाद में दबाव पड़ने पर।   एलन मस्क का Grok पर बैन लगाना यह साबित करता है कि अनियंत्रित तकनीक समाज के लिए घातक हो सकती है। 'अभिव्यक्ति की आजादी' का मतलब किसी और की 'गरिमा का हनन' नहीं हो सकता। भारत सरकार की सख्ती और यूजर्स की जागरूकता ने एक टेक जाएंट को अपनी गलती सुधारने पर मजबूर किया है। यह जीत उन सभी महिलाओं की है जिन्होंने डरने के बजाय आवाज उठाई।   सुरक्षा टिप्स (Safety Tips) सोशल मीडिया लॉक: अपनी Facebook/Instagram प्रोफाइल को 'लॉक' रखें। अनजान रिक्वेस्ट: अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। रिपोर्ट करें: अगर आपको अपनी या किसी और की अश्लील AI फोटो दिखे, तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) और उस प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें।

Unknown जनवरी 15, 2026 0
Digital Condom A New Era of Safety Camdom App Blocks Unwanted Recording During Intimate Moments
Digital Condom: फिजिकल नहीं, अब आ गया 'डिजिटल कंडोम'! प्राइवेट पलों का हाई-टेक पहरेदार; जानिए क्यों पूरी दुनिया में हो रही है इसकी चर्चा

तकनीक की दुनिया में हर रोज कुछ न कुछ नया होता है, लेकिन कभी-कभी कुछ आविष्कार ऐसे होते हैं जो न केवल चौंकाते हैं, बल्कि सोचने पर मजबूर कर देते हैं। 'कंडोम' (Condom)—यह शब्द सुनते ही दिमाग में सुरक्षित शारीरिक संबंधों और परिवार नियोजन के लिए इस्तेमाल होने वाले फिजिकल प्रोटेक्शन की छवि उभरती है। लेकिन क्या आपने कभी 'Digital Condom' के बारे में सुना है?READ ALSO:-Mardaani 3: शिवानी शिवाजी रॉय की दहाड़ से कांपा सोशल मीडिया, लेकिन महफिल लूट ले गई 'अम्मा'; जानिए उस खूंखार विलेन के बारे में जिससे टकराने आ रही है 'मर्दानी'   जी हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा। अब कंडोम सिर्फ फिजिकल नहीं, बल्कि डिजिटल अवतार में भी आ गया है। यह 2026 की सबसे चर्चित और अनोखी तकनीकों में से एक बन गया है। जहां फिजिकल कंडोम आपको अनचाहे गर्भ और बीमारियों से बचाता है, वहीं यह 'डिजिटल कंडोम' आपकी इज्जत, प्राइवेसी और सम्मान को ऑनलाइन लीक होने से बचाता है।   आज के दौर में जब हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन है, "रिवेंज पोर्न" और "प्राइवेट पलों की रिकॉर्डिंग लीक" होना एक बड़ी समस्या बन गई है। इसी खतरे को देखते हुए जर्मनी के एक सेक्सुअल वेलनेस ब्रैंड Billy Boy ने एक क्रांतिकारी ऐप लॉन्च किया है, जिसका नाम है—Camdom।   इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर यह डिजिटल कंडोम क्या बला है? यह कैसे काम करता है? और क्या वाकई यह ऐप आपके बेडरूम के राज को राज रख सकता है?   1. क्या है 'डिजिटल कंडोम' (Digital Condom)? समझिए आसान भाषा में 'डिजिटल कंडोम' कोई रबर या लेटेक्स से बनी वस्तु नहीं है, जिसे आप मेडिकल स्टोर से खरीदते हैं। तकनीकी भाषा में इसे 'Camdom App' कहा जाता है। यह एक स्मार्टफोन एप्लीकेशन है जिसे विशेष रूप से कपल्स (Couples) की डिजिटल सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है।   बुनियादी अवधारणा (Concept): जब दो लोग अंतरंग (Intimate) पलों में होते हैं, तो सबसे बड़ा डर यह होता है कि कहीं कोई एक पार्टनर छुपकर वीडियो न बना ले या ऑडियो रिकॉर्ड न कर ले। कई बार सहमति के बिना बनाई गई ये रिकॉर्डिंग्स बाद में ब्लैकमेलिंग का जरिया बन जाती हैं। 'डिजिटल कंडोम' इसी डर को खत्म करता है। यह ऐप ब्लूटूथ तकनीक का उपयोग करके कमरे में मौजूद स्मार्टफोन्स के कैमरा और माइक्रोफोन को डिजिटल रूप से ब्लॉक (Block) कर देता है। जब तक यह ऐप एक्टिव है, कोई भी फोन से फोटो, वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड नहीं कर सकता।   2. इसकी जरूरत क्यों पड़ी? (The Need of the Hour) शायद आप सोच रहे होंगे कि क्या वाकई ऐसे किसी ऐप की जरूरत है? जवाब है—हां, और बहुत ज्यादा है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल ब्लैकमेलिंग और नॉन-कंसेंशुअल (बिना सहमति के) वीडियो रिकॉर्डिंग के मामले तेजी से बढ़े हैं।   (A) भरोसे का संकट (Trust Issues) डिजिटल युग में भरोसा करना मुश्किल हो गया है। कई बार जिसे हम सबसे ज्यादा प्यार करते हैं, वही ब्रेकअप के बाद दुश्मन बन जाता है। गुस्से या बदले की भावना में निजी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए जाते हैं। इसे रोकने के लिए सिर्फ जुबानी भरोसा काफी नहीं है, अब तकनीकी सुरक्षा भी चाहिए।   (B) रिवेंज पोर्न (Revenge Porn) का खतरा 'रिवेंज पोर्न' एक गंभीर अपराध है। इसमें एक पार्टनर, दूसरे को बदनाम करने के लिए उसके निजी पलों को सार्वजनिक कर देता है। 'डिजिटल कंडोम' का मुख्य उद्देश्य इसी अपराध को जड़ से खत्म करना है। यह सुनिश्चित करता है कि "प्राइवेट मूमेंट्स, प्राइवेट ही रहें।"   (C) अनचाही रिकॉर्डिंग (Hidden Recording) कई बार लोग जोश में या शरारत में वीडियो बना लेते हैं, लेकिन बाद में फोन हैक होने या खो जाने पर वह डाटा लीक हो जाता है। डिजिटल कंडोम रिकॉर्डिंग होने ही नहीं देता, जिससे लीक होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।   3. Camdom App: किसने बनाया और यह कैसे अलग है? इस अनोखे ऐप को जर्मनी के मशहूर ब्रांड Billy Boy ने विकसित किया है। आमतौर पर Billy Boy अपने फिजिकल कॉन्ट्रासेप्टिव्स (Condoms) के लिए जाना जाता है, लेकिन तकनीकी क्षेत्र में उनका यह कदम प्राइवेसी की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।   कंपनी का दावा: कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, "यह ऐप उन लोगों के लिए सुरक्षा कवच है जो अपनी डिजिटल प्राइवेसी को लेकर चिंतित हैं। यह तकनीक के जरिए पार्टनर्स के बीच भरोसे को डिजिटल रूप से लॉक करता है।"   बाजार में पहले से कई प्राइवेसी ऐप्स मौजूद हैं जो पासवर्ड या फोल्डर लॉक की सुविधा देते हैं, लेकिन Camdom जैसा कोई नहीं है जो रियल-टाइम में दो डिवाइसों को सिंक (Sync) करके रिकॉर्डिंग को रोके। यह इसे दुनिया का पहला असली 'डिजिटल कंडोम' बनाता है।   4. यह काम कैसे करता है? (Step-by-Step Working Mechanism) इस ऐप की कार्यप्रणाली (Working Mechanism) बेहद रोचक और सरल है। यह ब्लूटूथ (Bluetooth) तकनीक पर आधारित है। आइए इसे स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं:   स्टेप 1: डाउनलोड और इंस्टॉलेशन सबसे पहले, दोनों पार्टनर्स (प्रेमी-प्रेमिका या पति-पत्नी) को अपने-अपने स्मार्टफोन में 'Camdom App' डाउनलोड करना होगा। यह ऐप संभवतः एंड्रॉइड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म के लिए डिजाइन किया गया है।   स्टेप 2: डिवाइस पेयरिंग (Pairing) अंतरंग होने से पहले, दोनों यूजर्स को ऐप ओपन करना होगा। ऐप एक-दूसरे के फोन को ब्लूटूथ के जरिए खोजेगा और पेयर (Connect) करने का विकल्प देगा। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप ब्लूटूथ स्पीकर कनेक्ट करते हैं।   स्टेप 3: डिजिटल प्रोटेक्शन एक्टिव करना जैसे ही दोनों डिवाइस कनेक्ट हो जाएंगे, स्क्रीन पर एक 'वर्चुअल बटन' दिखाई देगा। दोनों पार्टनर्स को एक साथ अपनी स्क्रीन पर दिख रहे बटन को स्वाइप डाउन (Swipe Down) करना होगा। यह डिजिटल सहमति (Digital Consent) का संकेत है।   स्टेप 4: सुरक्षा घेरा (Virtual Fence) स्वाइप करते ही 'डिजिटल कंडोम' एक्टिव हो जाएगा। अब दोनों फोन्स के कैमरा और माइक्रोफोन डिसेबल (Disable) हो जाएंगे। जब तक यह मोड ऑन है, कोई भी ऐप कैमरा या माइक का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।   स्टेप 5: अलार्म सिस्टम (The Safety Alarm) यही इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत है। अगर इंटिमेसी के दौरान कोई एक पार्टनर चुपके से ऐप बंद करने की कोशिश करता है, या ब्लूटूथ बंद करता है, या कमरे से बाहर जाने की कोशिश करता है (रेंज से बाहर), तो दोनों फोन्स में तेज अलार्म बजने लगेगा। यह दूसरे पार्टनर को तुरंत अलर्ट कर देगा कि कुछ गड़बड़ है और रिकॉर्डिंग की कोशिश की जा रही है।   5. तकनीक और मनोविज्ञान: सहमति का नया रूप 'डिजिटल कंडोम' केवल एक सॉफ्टवेयर नहीं है, यह आधुनिक रिश्तों में 'सहमति' (Consent) को परिभाषित करने का नया तरीका है।   सहमति अब 'हां' से बढ़कर: पहले सहमति का मतलब सिर्फ 'ना' या 'हां' होता था। अब डिजिटल युग में इसका मतलब यह भी है कि "मैं तुम्हारे साथ हूं, लेकिन मैं रिकॉर्ड नहीं होना चाहता/चाहती।" यह ऐप इस अलिखित शर्त को तकनीकी रूप से लागू करता है। मल्टी-डिवाइस सपोर्ट: यह ऐप सिर्फ दो फोन तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह एक साथ कई डिवाइसेज को ब्लॉक कर सकता है। यानी अगर किसी के पास दो फोन हैं और वह एक को छुपाकर रिकॉर्डिंग करना चाहे, तो ऐप उसे भी डिटेक्ट करके ब्लॉक करने की क्षमता रखता है (बशर्ते सभी डिवाइस सिंक हों)।   6. डिजिटल कंडोम के फायदे और चुनौतियां हर तकनीक के दो पहलू होते हैं। आइए इसके फायदे और संभावित कमियों पर नजर डालें:   फायदे (Pros): पूर्ण सुरक्षा: कैमरा और माइक ब्लॉक होने से रिकॉर्डिंग की संभावना शून्य हो जाती है। मानसिक शांति: कपल्स बिना किसी डर या संकोच के अपने पलों का आनंद ले सकते हैं। ब्लैकमेलिंग से मुक्ति: जब कोई वीडियो ही नहीं बनेगा, तो भविष्य में कोई आपको ब्लैकमेल नहीं कर पाएगा। उपयोग में आसान: इसका इंटरफेस बहुत सरल है, जिसे कोई भी इस्तेमाल कर सकता है।   चुनौतियां (Cons): तीसरा डिवाइस: अगर किसी पार्टनर ने कमरे में कोई तीसरा खुफिया कैमरा (Spy Camera) या दूसरा फोन छुपा रखा है जो ऐप से कनेक्ट नहीं है, तो यह ऐप उसे ब्लॉक नहीं कर पाएगा। यह केवल उन डिवाइसेज पर काम करता है जिनमें ऐप इंस्टॉल है। हैकिंग: हालांकि ऐप सुरक्षित है, लेकिन डिजिटल दुनिया में कोई भी चीज 100% हैक-प्रूफ नहीं होती। विश्वास: कुछ लोग इसे भरोसे की कमी के रूप में भी देख सकते हैं। पार्टनर कह सकता है, "क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है जो यह ऐप यूज कर रहे हो?"   7. भारत में इसकी प्रासंगिकता (Relevance in India) भारत जैसे देश में जहां साइबर क्राइम और ब्लैकमेलिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां यह ऐप एक वरदान साबित हो सकता है।   एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि साइबर स्टॉकिंग और महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें/वीडियो वायरल करने के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। कई बार होटलों में हिडन कैमरों का डर भी रहता है। हालांकि यह ऐप होटल के कैमरों को बंद नहीं कर सकता, लेकिन यह कम से कम आपके पार्टनर के फोन को तो सुरक्षित कर ही देता है।   8. डिजिटल सेफ्टी टिप्स: सिर्फ ऐप के भरोसे न रहें खबरिलाल आपको सलाह देता है कि तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ अपनी सतर्कता भी बनाए रखें। 'डिजिटल कंडोम' एक बेहतरीन टूल है, लेकिन अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी अंततः आपकी है।   गैजेट्स दूर रखें: सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि निजी पलों के दौरान स्मार्टफोन्स और स्मार्टवॉच को दूसरे कमरे में रखें। हिडन कैमरा चेक करें: अगर आप किसी होटल या OYO रूम में हैं, तो पहले अच्छे से चेक करें कि कहीं कोई छिपा हुआ कैमरा तो नहीं है। सहमति जरूरी: अपने पार्टनर से खुलकर बात करें। अगर आपको रिकॉर्डिंग पसंद नहीं है, तो साफ मना करें।   प्राइवेसी का भविष्य 'Digital Condom' या 'Camdom App' इस बात का सबूत है कि तकनीक हमारी समस्याओं को सुलझाने के लिए किस हद तक जा सकती है। यह ऐप उन लोगों के लिए एक राहत की सांस है जो डिजिटल दुनिया के खतरों से डरते हैं। यह पूरी तरह से फिजिकल कंडोम की तर्ज पर काम करता है—"Protection First"।   जिस तरह सुरक्षित शारीरिक संबंध के लिए कंडोम जरूरी है, उसी तरह सुरक्षित मानसिक और डिजिटल संबंध के लिए 'Camdom' वक्त की मांग है। अब देखना यह होगा कि भारतीय यूजर्स इस नई तकनीक को कितनी जल्दी अपनाते हैं।  

Unknown जनवरी 14, 2026 0
razer project ava ces 2026 launch holographic ai gaming companion price features review
CES 2026: गेमिंग की दुनिया में रेजर का सबसे बड़ा धमाका! लॉन्च किया 'Project Ava' - एक ऐसा होलोग्राफिक AI साथी जो 'गेम' भी जितवाएगा और आपकी 'लाइफ' भी मैनेज करेगा; प्री-बुकिंग शुरू

लास वेगास/नई दिल्ली (खबरीलाल टेक डेस्क): नेवादा के रेगिस्तान में स्थित लास वेगास शहर इस वक्त भविष्य की तकनीक से जगमगा रहा है। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो (CES) 2026 में दुनिया भर की दिग्गज कंपनियां अपने आविष्कारों का प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन जिस एक डिवाइस ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है, वह है गेमिंग कंपनी रेजर (Razer) का नया आविष्कार— 'प्रोजेक्ट एवा' (Project Ava)।   अब तक हम फिल्मों में (जैसे आयरन मैन का जार्विस या फिल्म 'Her') देखते आए थे कि इंसान एक कंप्यूटर प्रोग्राम या AI से बातें करता है। रेजर ने उस फंतासी को हकीकत में बदल दिया है। प्रोजेक्ट एवा सिर्फ एक गैजेट नहीं है; कंपनी ने इसे "फ्रेंड फॉर लाइफ" (Friend for Life) यानी जिंदगी भर के दोस्त के तौर पर पेश किया है। यह एक फिजिकल होलोग्राफिक AI है, जो आपके डेस्क पर रखा जाएगा और आपके सुख-दुख, गेमिंग और यहां तक कि आपके कपड़ों के सिलेक्शन में भी साझीदार बनेगा।   इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर यह डिवाइस कैसे काम करता है, इसमें कौन सी AI तकनीक लगी है, यह गेमर्स के लिए कैसे वरदान साबित होगा और क्या यह वाकई सुरक्षित है?   1. क्या है 'प्रोजेक्ट एवा'? (What is Project Ava) रेजर, जो अपने हाई-एंड गेमिंग लैपटॉप्स और आरजीबी (RGB) लाइट्स वाले पेरिफेरल्स के लिए जाना जाता है, इस बार हार्डवेयर से आगे निकलकर 'इमोशनल टेक' (Emotional Tech) की दुनिया में कदम रख चुका है।   डिजाइन और लुक: यह डिवाइस एक 5.5 इंच का पारदर्शी सिलेंडर (Transparent Cylinder) है। देखने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म के प्रॉप जैसा लगता है। इसके अंदर एक स्क्रीन है जो 3D इफेक्ट पैदा करती है, जिससे इसके अंदर मौजूद कैरेक्टर (अवतार) हवा में तैरता हुआ या होलोग्राफिक रूप में दिखाई देता है। कनेक्टिविटी: यह डिवाइस USB टाइप-C के जरिए आपके पीसी या गेमिंग कंसोल से कनेक्ट होता है। यह सिर्फ एक शोपीस नहीं है, बल्कि एक पूरी तरह से इंटरएक्टिव कंप्यूटर है।   2. गेमिंग कोचिंग: अब कोई आपको 'नूब' नहीं कहेगा इस डिवाइस का सबसे बड़ा आकर्षण इसका 'AI गेमिंग कोच' फीचर है। CES 2026 के डेमो के दौरान रेजर ने दिखाया कि यह कैसे काम करता है।   रियल-टाइम एनालिसिस: प्रोजेक्ट एवा में लगा AI आपकी कंप्यूटर स्क्रीन को 'देख' सकता है। वह समझता है कि आप कौन सा गेम खेल रहे हैं और गेम में क्या चल रहा है। बैटलफील्ड-6 का उदाहरण: डेमो के दौरान, जब यूजर 'बैटलफील्ड-6' (Battlefield 6) गेम खेल रहा था, तो प्रोजेक्ट एवा ने तुरंत उसे सलाह दी। एवा ने बताया कि दुश्मन किस तरफ से आ सकते हैं, कौन सा हथियार इस स्थिति के लिए बेहतर होगा, और मैप पर कहाँ जाना सुरक्षित है। ई-स्पोर्ट्स का अनुभव: सोचिए, आप लीग ऑफ लीजेंड्स (LoL) खेल रहे हैं और दुनिया का सबसे बेहतरीन खिलाड़ी आपको बगल में बैठकर सलाह दे रहा हो। रेजर ने ठीक यही किया है। उन्होंने इसमें मशहूर ई-स्पोर्ट्स प्लेयर 'फेकर' (Faker) का अवतार शामिल किया है। यानी अब फेकर का AI अवतार आपको गेमिंग की बारीकियां सिखाएगा।   3. लाइफस्टाइल असिस्टेंट: गेमिंग के बाहर भी मदद रेजर का दावा है कि 'प्रोजेक्ट एवा' सिर्फ गेमर्स के लिए नहीं है, बल्कि यह आपकी निजी जिंदगी को व्यवस्थित करने वाला असिस्टेंट भी है।   अलमारी और फैशन गाइड: डिवाइस में एक हाई-डेफिनिशन (HD) कैमरा लगा है। जब आप तैयार हो रहे होते हैं, तो यह आपको देख सकता है। अगर आप कंफ्यूज हैं कि आज क्या पहनें, तो आप एवा से पूछ सकते हैं। एवा आपके पास मौजूद कपड़ों और आज के मौसम के हिसाब से आपको बेस्ट आउटफिट सजेस्ट करेगा। शॉपिंग और डील्स: यह AI आपके स्टीम (Steam) या अन्य गेमिंग स्टोर की विशलिस्ट पर नजर रखता है। जैसे ही आपके पसंदीदा गेम पर सेल आती है, यह आपको तुरंत अलर्ट करता है। शेड्यूल मैनेजर: यह आपके कैलेंडर को मैनेज कर सकता है, मीटिंग्स याद दिला सकता है और यहां तक कि ज्यादा देर गेम खेलने पर आपको ब्रेक लेने की सलाह भी दे सकता है।   4. अवतार और कस्टमाइजेशन: चुनें अपना साथी रेजर जानता है कि हर यूजर की पसंद अलग होती है। इसलिए, प्रोजेक्ट एवा लॉन्च के समय 5 अलग-अलग अवतारों के साथ आ रहा है। आप अपनी पसंद या मूड के हिसाब से इन्हें बदल सकते हैं:   किरा (Kira): एक क्लासिक एनिमे गर्ल अवतार, जो चुलबुली और ऊर्जा से भरी है। जेन (Jen): एक टैटू वाला मस्कुलर कैरेक्टर, जो उन लोगों के लिए है जिन्हें जिम या रफ-एंड-टफ साथी पसंद है। साओ (Sao): एक जापानी 'सैलरी-वुमन' (कामकाजी महिला) कैरेक्टर, जो बहुत ही प्रोफेशनल और शांत है। फेकर (Faker): ई-स्पोर्ट्स की दुनिया के भगवान माने जाने वाले कोरियाई खिलाड़ी का डिजिटल रूप। एवा (Ava): रेजर का अपना ब्रांडेड शुभंकर (Mascot), जो कंपनी के लोगो और थीम पर आधारित है।   भविष्य की योजना: कंपनी ने कहा है कि भविष्य में वे बड़े इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज के साथ साझेदारी करेंगे ताकि उनके अवतार भी इसमें जोड़े जा सकें। इसके अलावा, एक ऐसा टूल भी आएगा जिससे यूजर्स अपना खुद का कस्टम अवतार डिजाइन कर सकेंगे।   5. तकनीक और AI का पावरहाउस इस छोटे से सिलेंडर के पीछे बहुत बड़ी तकनीक काम कर रही है।   ओपन प्लेटफॉर्म (Open Platform): रेजर ने इसे किसी एक AI मॉडल तक सीमित नहीं रखा है। डिफॉल्ट रूप से, यह एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी xAI के 'ग्रोक' (Grok) मॉडल पर चलता है। ग्रोक को अपनी बेबाक राय और थोड़े 'विद्रोही' स्वभाव के लिए जाना जाता है, जो गेमर्स को काफी पसंद आ सकता है। गूगल और OpenAI का सपोर्ट: अगर आपको ग्रोक पसंद नहीं है, तो आप इसे गूगल के 'जेमिनी' (Gemini) या OpenAI के 'चैटजीपीटी' (ChatGPT) पर भी स्विच कर सकते हैं। रेजर का कहना है कि वे यूजर को आजादी देना चाहते हैं कि वे किससे बात करना चाहते हैं। हार्डवेयर स्पेक्स: कैमरा: हाई-डेफिनिशन वेबकैम जो कमरे को स्कैन कर सकता है। माइक: दो पावरफुल माइक्रोफोन जो शोर-शराबे के बीच भी आपकी आवाज सुन सकते हैं (पुश-टू-टॉक और वॉयस कमांड दोनों मौजूद)। सेंसर: एम्बिएंट लाइट सेंसर, जो कमरे की रोशनी के हिसाब से स्क्रीन की ब्राइटनेस एडजस्ट करता है।   6. प्राइवेसी की चिंता: क्या यह जासूसी करेगा? जब भी किसी डिवाइस में कैमरा और माइक होता है और वह आपके बेडरूम या डेस्क पर रखा होता है, तो प्राइवेसी की चिंता होना लाजमी है। रेजर ने इस पर विशेष ध्यान दिया है।   फिजिकल म्यूट और शटर: सॉफ्टवेयर पर भरोसा न करते हुए, रेजर ने इसमें फिजिकल कैमरा शटर दिया है। जब आप नहीं चाहते कि एवा आपको देखे, तो आप शटर गिरा सकते हैं। इसके अलावा, एक डेडिकेटेड म्यूट बटन भी है जो माइक्रोफोन की पावर सप्लाई काट देता है। लोकल प्रोसेसिंग: कंपनी का दावा है कि संवेदनशील डेटा को क्लाउड पर भेजने के बजाय डिवाइस पर ही प्रोसेस करने की कोशिश की जाएगी, हालांकि AI मॉडल के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी जरूरी होगी।   शुरुआती रिव्यू में 'अजीब' व्यवहार: CES में जिन पत्रकारों और टेक एक्सपर्ट्स ने इसका डेमो लिया, उनमें से कुछ का अनुभव मिला-जुला रहा। कुछ रिव्यूअर्स ने बताया कि अवतार कभी-कभी "जरूरत से ज्यादा दोस्ताना" (Overly Friendly) हो रहे थे। एक डेमो के दौरान अवतार ने यूजर के साथ फ्लर्ट करने जैसी बातें कीं, जिससे कुछ लोग असहज हो गए। हालांकि, इसे AI की 'पर्सनालिटी सेटिंग' के जरिए ठीक किया जा सकता है।   7. कीमत और उपलब्धता (Price & Availability) रेजर ने भारतीय और ग्लोबल फैंस के लिए प्री-बुकिंग के दरवाजे खोल दिए हैं।   प्री-बुकिंग: आप अभी रेजर की वेबसाइट पर जाकर $20 (करीब 1,803 रुपये) देकर अपना स्लॉट बुक कर सकते हैं। यह राशि रिफंडेबल है। अनुमानित कीमत: हालांकि फाइनल प्राइस टैग अभी ऑफिशियल नहीं है, लेकिन टेक जगत में चर्चा है कि लॉन्च के वक्त इसकी कीमत $200 (लगभग ₹18,030) के आसपास होगी। शिपिंग: अगर आप अभी बुक करते हैं, तो यह डिवाइस आपको 2026 की दूसरी छमाही (जुलाई-दिसंबर के बीच) में डिलीवर किया जाएगा।   8. क्या यह डिवाइस खरीदना चाहिए?  'प्रोजेक्ट एवा' गेमिंग पेरीफेरल मार्केट में एक साहसिक कदम है। यह उन अकेले गेमर्स के लिए एक बेहतरीन साथी हो सकता है जो वर्चुअल दुनिया में ज्यादा समय बिताते हैं। 'फेकर' जैसे दिग्गजों से कोचिंग मिलना किसी सपने से कम नहीं है।   हालांकि, 18,000 रुपये एक छोटी रकम नहीं है। साथ ही, AI का 'अजीब व्यवहार' और प्राइवेसी के मुद्दे कुछ लोगों को डरा सकते हैं। लेकिन अगर आप तकनीक के शौकीन हैं और आयरन मैन जैसी लाइफस्टाइल जीना चाहते हैं, तो रेजर का यह जादुई सिलेंडर आपके सेटअप की शोभा बढ़ा सकता है।   रेजर और CES 2026 की हर अपडेट के लिए जुड़े रहें 'खबरिलाल' के साथ।

Unknown जनवरी 10, 2026 0
Smart TV Hacking Alert 5 Signs Your TV Is Hacked And How To Secure It From Malware
आपके ड्राइंग रूम में छिपा 'जासूस': क्या आपका Smart TV हो चुका है हैक? अगर स्क्रीन पर दिखें ये 5 खतरनाक संकेत, तो तुरंत हो जाएं अलर्ट; वरना लीक हो सकती है आपकी प्राइवेट बातें

नई दिल्ली (Tech Desk): आजकल लगभग हर घर में पुराने डिब्बे वाले टीवी की जगह चमचमाते Smart LED TV ने ले ली है। हम अपने टीवी पर ओटीटी ऐप्स, गेम्स और इंटरनेट सर्फिंग का मजा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका स्मार्ट टीवी भी आपके मोबाइल या लैपटॉप की तरह हैक हो सकता है?READ ALSO:-सड़क सुरक्षा में बड़ी क्रांति: अब गाड़ियां करेंगी आपस में 'बातचीत', एक्सीडेंट से पहले ड्राइवर को मिलेगा अलर्ट; सरकार 2026 तक लागू करेगी V2V टेक्नोलॉजी   जी हां, यह बिल्कुल सच है। चूंकि आपका स्मार्ट टीवी हमेशा इंटरनेट से कनेक्ट रहता है, इसलिए इस पर भी साइबर हमलों और हैकिंग का खतरा लगातार बना रहता है। टीवी की बड़ी स्क्रीन के पीछे काम करने वाला सिस्टम बिल्कुल एक कंप्यूटर जैसा होता है, जिसमें कैमरा, ब्लूटूथ और माइक्रोफोन जैसी चीजें होती हैं। अगर हैकर्स इसमें सेंध लगा दें, तो यह आपकी प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।   आइए जानते हैं कि वे कौन से संकेत (Warning Signs) हैं, जो बताते हैं कि आपके टीवी में मैलवेयर (Malware) घुस चुका है और आपको अलर्ट होने की जरूरत है।   1. टीवी का अचानक 'कछुआ' बन जाना (Slow Performance) माना कि समय के साथ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज थोड़े धीमे हो जाते हैं। लेकिन अगर आपका नया या अच्छी कंडीशन वाला स्मार्ट टीवी अचानक से बहुत धीमा काम करने लगे, तो यह खतरे की घंटी है।   अगर टीवी में पर्याप्त स्टोरेज है और सॉफ्टवेयर भी लेटेस्ट है, फिर भी वह कमांड देर से ले रहा है। मेन्यू खोलने या ऐप स्विच करने में बहुत वक्त लग रहा है। यह इस बात का संकेत है कि बैकग्राउंड में कोई मैलवेयर एक्टिव है जो सिस्टम के संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है।   2. अनजान ऐप्स की 'घुसपैठ' (Unknown Apps) हम अक्सर अपने मोबाइल में देखते हैं कि कुछ ऐप्स अपने आप डाउनलोड हो जाते हैं, यही खतरा टीवी के साथ भी है। अगर आपको अपने टीवी की ऐप लिस्ट में कुछ ऐसे ऐप्स दिखाई दें, जिन्हें आपने कभी डाउनलोड नहीं किया, तो सावधान हो जाएं। कभी-कभी होम स्क्रीन पर मौजूद ऐप्स के आइकन बदलने लगते हैं या अजीब नाम डिस्प्ले होने लगते हैं। यह साफ इशारा है कि किसी वायरस या मैलवेयर ने आपके सिस्टम में छेड़छाड़ की है।   3. पॉप-अप्स और विज्ञापनों की बाढ़ अगर टीवी देखते समय स्क्रीन पर बार-बार अजीबोगरीब पॉप-अप (Pop-ups) विज्ञापन आने लगें, तो समझ जाइए कुछ गड़बड़ है।   स्क्रीन पर अचानक कोई विंडो खुल जाना। किसी लॉटरी या इनाम का लालच देने वाले संदेश दिखना। ये पॉप-अप मैलवेयर की वजह से आते हैं, जो आपके टीवी में घुसपैठ की कोशिश कर रहे होते हैं।   4. बार-बार क्रैश होना और अपने आप बंद होना क्या आपका टीवी चलते-चलते अचानक बंद (Restart) हो जाता है? या फिर कोई ऐप खोलते ही टीवी फ्रीज हो जाता है?   अगर टीवी बार-बार क्रैश हो रहा है या खुद ऑन-ऑफ हो रहा है, तो यह सामान्य तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि वायरस का हमला हो सकता है। मैलवेयर टीवी के ऑपरेटिंग सिस्टम को सही ढंग से काम नहीं करने देता, जिससे नेविगेशन मुश्किल हो जाता है।   बचाव के तरीके: अपने Smart TV को ऐसे रखें सुरक्षित अगर आपको ऊपर बताए गए कोई भी संकेत दिखते हैं या आप भविष्य में अपने टीवी को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो इन टिप्स को फॉलो करें:   1. 'लक्ष्मण रेखा' न लांघें (Unknown Sources बंद रखें): अपने टीवी की सेटिंग्स में जाएं और 'Unknown Sources' से इंस्टॉलेशन के विकल्प को हमेशा बंद (OFF) रखें। इससे किसी भी थर्ड पार्टी या असुरक्षित स्रोत से ऐप इंस्टॉल नहीं हो पाएगा। 2. सिर्फ ऑफिशियल स्टोर पर भरोसा करें: अपने टीवी में कोई भी ऐप डाउनलोड करने के लिए हमेशा टीवी के आधिकारिक ऐप स्टोर (जैसे Google Play Store या कंपनी का अपना स्टोर) का ही इस्तेमाल करें। 3. एंटी-वायरस स्कैन (Antivirus Scan): स्मार्ट टीवी के लिए भी कई अच्छे एंटी-वायरस ऐप्स उपलब्ध हैं। समय-समय पर एक भरोसेमंद एंटी-वायरस ऐप के जरिए अपने टीवी को स्कैन करें ताकि छिपे हुए मैलवेयर पकड़े जा सकें। 4. फैक्टरी रीसेट (Factory Reset): आखिरी हथियार अगर आपको लगता है कि टीवी में वायरस आ चुका है और वह ठीक नहीं हो रहा, तो सबसे कारगर तरीका है टीवी को 'फैक्टरी रीसेट' करना। इससे टीवी का सारा डेटा डिलीट हो जाएगा और वह बिल्कुल नया जैसा हो जाएगा, जिससे मैलवेयर भी खत्म हो जाएगा।   स्मार्ट टीवी हमारी लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा है, लेकिन इसकी सुरक्षा को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी से आप अपने डिजिटल जीवन को सुरक्षित रख सकते हैं।

Unknown जनवरी 9, 2026 0
Government Plans V2V Communication Technology By 2026 To Prevent Road Accidents Cars To Talk Each Other
सड़क सुरक्षा में बड़ी क्रांति: अब गाड़ियां करेंगी आपस में 'बातचीत', एक्सीडेंट से पहले ड्राइवर को मिलेगा अलर्ट; सरकार 2026 तक लागू करेगी V2V टेक्नोलॉजी

नई दिल्ली (New Delhi): भारत में सड़क हादसों (Road Accidents) की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार अब टेक्नोलॉजी का सहारा लेने जा रही है। सरकार एक ऐसी महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है, जो भारतीय सड़कों पर ड्राइविंग के अनुभव को पूरी तरह बदल देगी। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का लक्ष्य है कि साल 2026 के अंत तक देशभर में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन तकनीक को रोल आउट कर दिया जाए।READ ALSO:-विज्ञान या अकेलापन? CES 2026 में लॉन्च हुई दुनिया की पहली 'AI गर्लफ्रेंड' रोबोट; पुरानी बातें याद रखेगी, मूड समझेगी और मैसेज भी करेगी – कीमत और फीचर्स जानकर उड़ जाएंगे होश   इस तकनीक के आने के बाद गाड़ियां बिना इंटरनेट के ही एक-दूसरे से संपर्क साध सकेंगी और संभावित खतरे को भांपते ही ड्राइवर को अलर्ट कर देंगी। यह कदम विशेष रूप से हाइवे और एक्सप्रेसवे पर होने वाली भीषण दुर्घटनाओं को रोकने में 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है।   क्या है V2V तकनीक और यह कैसे काम करेगी? व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) तकनीक एक इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम का हिस्सा है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें गाड़ियों को आपस में संवाद करने के लिए किसी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी।   डायरेक्ट कम्युनिकेशन: यह सिस्टम एक विशेष शॉर्ट-रेंज रेडियो फ्रीक्वेंसी पर काम करेगा। इसके जरिए सड़क पर चल रही गाड़ियां अपने आसपास मौजूद अन्य वाहनों के साथ डेटा (जैसे स्पीड, लोकेशन, और दिशा) साझा करेंगी। रियल-टाइम अलर्ट: जैसे ही कोई वाहन किसी दूसरे वाहन के खतरनाक रूप से करीब आएगा या टकराने की स्थिति बनेगी, सिस्टम तुरंत ड्राइवर को ऑडियो या विजुअल चेतावनी (Alert) देगा। टकराव से बचाव: यह तकनीक विशेष रूप से तब काम आएगी जब कोई गाड़ी पीछे से बहुत तेज रफ्तार में आ रही हो या कोई वाहन सड़क किनारे खराब खड़ा हो। ऐसे में पीछे आने वाले ड्राइवर को पहले ही पता चल जाएगा कि आगे खतरा है।   नितिन गडकरी का विजन: हादसों को रोकने का 'मास्टरप्लान' केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने हाल ही में राज्य परिवहन मंत्रियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस योजना का खुलासा किया।   गडकरी ने कहा, "अक्सर हम देखते हैं कि हाइवे पर खड़े वाहनों से पीछे से आ रही गाड़ियां टकरा जाती हैं, जिससे गंभीर हादसे होते हैं। कोहरे के दौरान तो कई गाड़ियां एक-दूसरे (Pile-up) से भिड़ जाती हैं। V2V तकनीक ड्राइवर को मानवीय दृष्टि (Human Vision) से पहले खतरे का संकेत दे देगी, जिससे प्रतिक्रिया का समय (Reaction Time) बढ़ जाएगा और जानलेवा हादसों को टाला जा सकेगा।"   सरकार का लक्ष्य अब केवल दुर्घटना होने के बाद मदद पहुंचाना नहीं है, बल्कि दुर्घटनाओं को होने से पहले ही रोकना (Prevention) है।   कोहरे और ब्लाइंड स्पॉट में मिलेगी संजीवनी भारत में सर्दियों के मौसम में, विशेषकर उत्तर भारत में घने कोहरे (Dense Fog) के कारण विजिबिलिटी शून्य हो जाती है। ऐसे समय में सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं। V2V तकनीक यहां संजीवनी का काम करेगी:   कोहरे में सुरक्षा: जब ड्राइवर को आगे कुछ दिखाई नहीं दे रहा होगा, तब भी उसकी कार उसे बता देगी कि आगे कोई वाहन खड़ा है या धीमी गति से चल रहा है। ब्लाइंड स्पॉट: पहाड़ी रास्तों या तीखे मोड़ों पर, जहां सामने से आने वाला वाहन दिखाई नहीं देता, वहां भी यह तकनीक ड्राइवरों को सचेत करेगी।   कैसे होगा इम्प्लीमेंटेशन? (Rollout Plan) सरकार इस तकनीक को धरातल पर उतारने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों (Automobile Companies) के साथ मिलकर काम कर रही है। इसके लिए एक चरणबद्ध योजना तैयार की गई है:   स्टैंडर्ड तय करना: सरकार ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ मिलकर इस टेक्नोलॉजी के लिए मानक (Standards) तय कर रही है, ताकि सभी कंपनियों की गाड़ियां एक-दूसरे की भाषा (Signals) समझ सकें। रेडियो स्पेक्ट्रम: सिस्टम के सुचारू रूप से काम करने के लिए सरकार एक विशेष रेडियो स्पेक्ट्रम (Radio Spectrum) अलॉट करेगी, जिससे सिग्नल में कोई रुकावट न आए। नई और पुरानी गाड़ियां: शुरुआत में यह तकनीक नई लॉन्च होने वाली गाड़ियों में इनबिल्ट फीचर्स के तौर पर आएगी। बाद में, पुरानी गाड़ियों में भी इसे रेट्रोफिट (Retrofit) करने की व्यवस्था की जा सकती है, ताकि सड़क पर मौजूद हर वाहन सुरक्षित घेरे में आ सके।   साल 2026 तक V2V तकनीक का आना भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर में एक बड़े बदलाव का संकेत है। यह न केवल सड़क सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय ड्राइवरों को एक स्मार्ट और सुरक्षित ड्राइविंग अनुभव भी प्रदान करेगा। सरकार की यह पहल अगर सही तरीके से लागू होती है, तो हर साल सड़क हादसों में होने वाली हजारों मौतों को रोका जा सकेगा।   केंद्र सरकार 2026 के अंत तक भारत में V2V (व्हीकल-टू-व्हीकल) कम्युनिकेशन तकनीक लागू करने की योजना बना रही है। इस तकनीक से कारें बिना इंटरनेट के आपस में डेटा साझा करेंगी और टकराने की स्थिति में ड्राइवर को पहले ही अलर्ट कर देंगी। नितिन गडकरी के अनुसार, यह तकनीक कोहरे और तेज रफ्तार के कारण होने वाले हादसों को रोकने में बेहद कारगर होगी। इसे नई गाड़ियों के साथ-साथ पुरानी गाड़ियों में भी लगाने का विकल्प होगा।

Unknown जनवरी 10, 2026 0
Mobile Recharge Price Hike Expected In June 2026 Telecom Tariff To Rise By 15 Percent
महंगाई का 'डिजिटल बम': जून 2026 से महंगा हो जाएगा मोबाइल चलाना, रिचार्ज में 15% बढ़ोतरी की तैयारी; Jio, Airtel और Vi ने कस ली कमर, जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

नई दिल्ली/मुंबई (Business Desk): भारत में सस्ता इंटरनेट और मुफ्त कॉलिंग का दौर अब धीरे-धीरे इतिहास बनता जा रहा है। डिजिटल क्रांति के इस युग में मोबाइल अब लक्जरी नहीं, बल्कि रोटी, कपड़ा और मकान के बाद चौथी सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। लेकिन, आने वाले समय में यह जरूरत आपकी जेब पर भारी पड़ने वाली है।READ ALSO:-IRCTC का 'महा-पैकेज': एक टिकट में करें अयोध्या, काशी, पुरी और गंगासागर के दर्शन; 'भारत गौरव' ट्रेन में खाने-रहने की चिंता नहीं, मात्र ₹19,110 से किराया शुरू और किस्तों में भुगतान की सुविधा   ताजा रिपोर्ट्स और बाजार विश्लेषकों (Market Analysts) ने खतरे की घंटी बजा दी है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय टेलीकॉम कंपनियां जून 2026 में एक बार फिर से मोबाइल टैरिफ (Mobile Tariff) में बड़ी बढ़ोतरी करने की योजना बना रही हैं। यह बढ़ोतरी 15 प्रतिशत तक हो सकती है। इसका सीधा मतलब है कि चाहे आप रिलायंस जियो (Jio) के यूजर हों, एयरटेल (Airtel) के या फिर वोडाफोन आइडिया (Vi) के, आपका मासिक और वार्षिक मोबाइल बजट बिगड़ने वाला है।   इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जेफरीज की रिपोर्ट का 'पोस्टमार्टम' करेंगे, जानेंगे कि आखिर कंपनियां दाम क्यों बढ़ा रही हैं, इसका शेयर बाजार पर क्या असर होगा और आम आदमी की जेब से कितना अतिरिक्त पैसा निकलेगा।   1. जेफरीज रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: जून 2026 है 'डेडलाइन' टेलीकॉम सेक्टर पर नजर रखने वाली दिग्गज फर्म जेफरीज ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में दावा किया है कि मोबाइल टैरिफ में अगली बड़ी बढ़ोतरी के लिए यूजर्स को मानसिक रूप से तैयार हो जाना चाहिए। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि जून 2026 वह समय हो सकता है, जब देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां अपने प्लान्स की कीमतें रिवाइज करेंगी।   रिपोर्ट के मुख्य बिंदु: 15% की बढ़ोतरी: उम्मीद जताई गई है कि बेस प्राइस और डेटा प्लान्स में सीधे तौर पर 15 फीसदी का इजाफा होगा। यह टाइमलाइन इंडस्ट्री के पुराने ट्रेंड्स (Old Industry Trends) से पूरी तरह मेल खाती है, क्योंकि कंपनियां अक्सर 18 से 24 महीने के अंतराल पर कीमतें बढ़ाती हैं। रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य: इस कदम का मुख्य उद्देश्य टेलीकॉम कंपनियों के राजस्व को बढ़ाना है। रिपोर्ट का अनुमान है कि इस बढ़ोतरी से वित्त वर्ष 2027 (FY27) तक टेलीकॉम सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ रेट दोगुनी होकर 16% सालाना (YoY) तक पहुंच सकती है। तुलनात्मक अध्ययन: वित्त वर्ष 2026 (FY26) में यह ग्रोथ रेट महज 7% रहने का अनुमान है। यानी 2026 का प्राइस हाइक (Price Hike) सेक्टर के लिए 'बूस्टर डोज' का काम करेगा।   2. क्यों बढ़ रहे हैं दाम? कंपनियों की क्या है मजबूरी? आम आदमी के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि जब सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़ रही है, तो दाम क्यों बढ़ाए जा रहे हैं? इसके पीछे कई आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं।   (A) ARPU (Average Revenue Per User) का खेल: टेलीकॉम बिजनेस का पूरा गणित ARPU पर टिका होता है। इसका मतलब है कि एक यूजर से कंपनी औसतन कितनी कमाई करती है।   जेफरीज के एनालिस्ट्स का मानना है कि जून 2026 में 15% टैरिफ हाइक की संभावना को देखते हुए, FY27 के लिए ARPU में 14% सालाना ग्रोथ देखने को मिल सकती है। भारतीय कंपनियां, खास तौर पर एयरटेल और जियो, लंबे समय से ARPU को 300 रुपये के पार ले जाने की वकालत करती रही हैं ताकि वे ग्लोबल मानकों के करीब पहुंच सकें।   (B) डेटा की भूख (Data Demand): भारत में डेटा की खपत दुनिया में सबसे ज्यादा है। 5G रोलआउट के बाद डेटा का इस्तेमाल और बढ़ गया है। नेटवर्क को बनाए रखने, टावरों को अपग्रेड करने और 5G स्पेक्ट्रम की भारी लागत को वसूलने के लिए कंपनियां अब उपभोक्ताओं से ज्यादा पैसा वसूलने की तैयारी में हैं।   (C) पोस्टपेड की ओर झुकाव: कंपनियां चाहती हैं कि यूजर सस्ते प्रीपेड प्लान छोड़कर महंगे पोस्टपेड प्लान की तरफ शिफ्ट हों। टैरिफ हाइक इस रणनीति का हिस्सा है, ताकि प्रीपेड और पोस्टपेड के बीच का अंतर कम किया जा सके और प्रीमियम कस्टमर्स का बेस बढ़ाया जा सके।   3. कंपनियों का अलग-अलग हाल: Jio, Airtel और Vi की रणनीति जेफरीज की रिपोर्ट में तीनों प्रमुख प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों की स्थिति का अलग-अलग विश्लेषण किया गया है।   Reliance Jio: आईपीओ और वैल्यूएशन पर नजर रिलायंस जियो, जो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है, इस रेस में सबसे आगे है।   10-20% की बढ़ोतरी: रिपोर्ट के मुताबिक, जियो की तरफ से 10 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। मकसद: जियो का लक्ष्य अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनी एयरटेल के साथ अपनी वैल्यूएशन (Valuation) को करीब लाना है। इसके अलावा, जियो अपने निवेशकों को डबल-डिजिट इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (Double-digit Internal Rate of Return) देना चाहती है। बाजार में चर्चा है कि जियो जल्द ही अपना आईपीओ (IPO) भी ला सकती है, जिसके लिए उसे अपनी बैलेंस शीट को और मजबूत दिखाना होगा।   Vodafone Idea (Vi): अस्तित्व बचाने की लड़ाई वोडाफोन आइडिया के लिए स्थिति 'करो या मरो' वाली है। कंपनी भारी कर्ज और सरकार के बकाये (AGR Dues) के बोझ तले दबी है।   45% की भारी बढ़ोतरी की जरूरत: रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला आंकड़ा दिया गया है। कंपनी को अपना बकाया चुकाने और मार्केट में बने रहने के लिए FY27 और FY30 के बीच मोबाइल सर्विस रेट्स में कुल 45 फीसदी की बढ़ोतरी करनी होगी। अगर Vi ऐसा नहीं करती है, तो उसके लिए अपने नेटवर्क को अपग्रेड करना और 5G की रेस में टिके रहना नामुमकिन हो जाएगा।   Bharti Airtel: प्रीमियम यूजर पर फोकस एयरटेल हमेशा से ही टैरिफ बढ़ाने का पक्षधर रहा है। कंपनी का फोकस 'क्वालिटी कस्टमर्स' पर है। एयरटेल का मानना है कि जो यूजर अच्छी सर्विस चाहता है, वह थोड़ा ज्यादा पैसा देने को तैयार रहता है। 2026 का हाइक एयरटेल के मुनाफे को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।   4. आम जनता की जेब पर असर: गणित समझिए अगर यह 15% की बढ़ोतरी लागू होती है, तो इसका असर आपके मंथली बजट पर कैसे पड़ेगा, इसे एक उदाहरण से समझते हैं।   मौजूदा स्थिति (उदाहरण): मान लीजिए आप अभी 84 दिन वाला कोई लोकप्रिय प्लान इस्तेमाल करते हैं जिसकी कीमत 700 रुपये है। 700 रुपये का 15% = 105 रुपये।   जून 2026 के बाद: उसी प्लान की नई कीमत = 700 + 105 = 805 रुपये (लगभग)। यानी साल भर में अगर आप 4 बार रिचार्ज कराते हैं, तो आपको करीब 400 से 500 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।   छोटा रिचार्ज भी होगा महंगा: सिर्फ बड़े प्लान ही नहीं, बल्कि 28 दिन वाले बेसिक प्लान्स भी महंगे होंगे। 300 रुपये वाला प्लान करीब 345 रुपये का हो जाएगा। एक मध्यम वर्गीय परिवार, जहां 4-5 मोबाइल फोन इस्तेमाल होते हैं, वहां साल भर में मोबाइल खर्च में 2000 से 3000 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।   5. क्या सिम कार्ड तोड़ देंगे यूजर? (Subscriber Loss Risk) रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी दी गई है। जब भी कीमतें बढ़ती हैं, तो सब्सक्राइबर्स की संख्या में गिरावट आती है।   सिम कंसोलिडेशन (Sim Consolidation): भारत में कई लोग दो सिम कार्ड (Dual SIM) इस्तेमाल करते हैं। जब रिचार्ज महंगा होता है, तो लोग अपने सेकेंडरी (दूसरी) सिम को रिचार्ज करना बंद कर देते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सब्सक्राइबर की संख्या कम रह सकती है क्योंकि कंज्यूमर बढ़ी हुई कीमतों के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर रहे हैं। लोग सस्ते विकल्पों की तलाश करेंगे या फिर सिर्फ इनकमिंग के लिए सिम एक्टिव रखेंगे।   6. शेयर बाजार पर असर: निवेशकों की बल्ले-बल्ले भले ही यह खबर आम जनता के लिए बुरी हो, लेकिन शेयर बाजार (Stock Market) के निवेशकों के लिए यह खुशखबरी है।   टैरिफ हाइक की खबरों से टेलीकॉम कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। जेफरीज का अनुमान है कि FY27 में सेक्टर का रेवेन्यू ग्रोथ 16% होगा। इससे कंपनियों का मुनाफा (Profit Margin) बढ़ेगा, जिससे शेयरधारकों को अच्छा रिटर्न मिलेगा। जियो और एयरटेल के स्टॉक्स लॉन्ग टर्म में मजबूत नजर आ रहे हैं, जबकि Vi अभी भी जोखिम भरा दांव बना हुआ है।   7. 5G मोनेटाइजेशन: फ्री 5G का अंत निकट? वर्तमान में, जियो और एयरटेल अपने 4G प्लान्स के साथ ही 'अनलिमिटेड 5G' (Unlimited 5G) डेटा ऑफर कर रहे हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि यह 'हनीमून पीरियड' अब खत्म होने वाला है।   2026 के टैरिफ हाइक के साथ ही कंपनियां 5G के लिए अलग से चार्ज करना शुरू कर सकती हैं। या फिर, 5G इस्तेमाल करने के लिए आपको महंगे डेटा प्लान्स लेने के लिए मजबूर किया जा सकता है। कंपनियों ने 5G स्पेक्ट्रम नीलामी में लाखों करोड़ रुपये खर्च किए हैं और अब वे उस निवेश को वसूलने (Monetization) की प्रक्रिया शुरू करेंगी।   8. इतिहास के झरोखे से: कब-कब बढ़े दाम? यह पहली बार नहीं है जब कीमतें बढ़ रही हैं। पिछले कुछ सालों का ट्रेंड देखें तो:   दिसंबर 2021: सभी कंपनियों ने टैरिफ में करीब 20-25% की बढ़ोतरी की थी। जुलाई 2024: हाल ही में कंपनियों ने कीमतों में इजाफा किया था। अब जून 2026 को अगला बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। यानी हर 2-2.5 साल में एक बड़ा 'प्राइस शॉक' देना अब इंडस्ट्री का न्यू नॉर्मल (New Normal) बन गया है।   9. क्या है समाधान? उपभोक्ता क्या करें? महंगाई की इस मार से बचने के लिए उपभोक्ताओं के पास सीमित विकल्प हैं:   लॉन्ग टर्म रिचार्ज: अगर जून 2026 में कीमतें बढ़ने वाली हैं, तो समझदार यूजर मई 2026 में ही साल भर (365 दिन) वाला प्लान रिचार्ज करवा सकते हैं। इससे वे एक साल तक बढ़ी हुई कीमतों से बच सकते हैं। BSNL का विकल्प: सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL अभी भी प्राइवेट कंपनियों के मुकाबले सस्ते प्लान दे रही है। अगर BSNL अपनी 4G/5G सेवाओं को सुधार लेती है, तो यह एक बेहतर विकल्प बन सकता है। वाई-फाई का इस्तेमाल: मोबाइल डेटा पर निर्भरता कम करके घर और ऑफिस के वाई-फाई का ज्यादा इस्तेमाल करना डेटा पैक के खर्च को कम कर सकता है।   डिजिटल इंडिया की कीमत निष्कर्षतः, जेफरीज की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का टेलीकॉम सेक्टर अब 'प्राइस वॉर' (Price War) से बाहर निकलकर 'प्रॉफिट मेकिंग' (Profit Making) की ओर बढ़ रहा है। 2026 का साल मोबाइल यूजर्स के लिए महंगा साबित होगा। 15% की बढ़ोतरी कंपनियों की बैलेंस शीट को तो सुधार देगी, लेकिन आम आदमी के बजट का गणित जरूर बिगाड़ देगी। अब देखना यह होगा कि क्या सर्विस की क्वालिटी भी उसी अनुपात में बढ़ती है, जिस अनुपात में कीमतें बढ़ रही हैं?   (डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट जेफरीज के विश्लेषण और बाजार के अनुमानों पर आधारित है। टैरिफ में वास्तविक बढ़ोतरी कंपनियों के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।)   जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में मोबाइल रिचार्ज 15% तक महंगे हो सकते हैं। इससे टेलीकॉम सेक्टर का रेवेन्यू FY27 में 16% बढ़ने की उम्मीद है। जियो 10-20% और वोडाफोन आइडिया 45% (FY30 तक) बढ़ोतरी कर सकते हैं। इसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, लेकिन शेयर बाजार में टेलीकॉम कंपनियों को फायदा होगा।

Unknown जनवरी 9, 2026 0
CES 2026 First AI Girlfriend Robot Emily Launched By Lovense Price Features And Delivery Date
विज्ञान या अकेलापन? CES 2026 में लॉन्च हुई दुनिया की पहली 'AI गर्लफ्रेंड' रोबोट; पुरानी बातें याद रखेगी, मूड समझेगी और मैसेज भी करेगी – कीमत और फीचर्स जानकर उड़ जाएंगे होश

क्या आपने कभी सोचा था कि हॉलीवुड फिल्म 'Her' या 'Ex Machina' की कहानियां हमारे जीते-जी सच हो जाएंगी? क्या आपने कल्पना की थी कि एक दिन ऐसा आएगा जब आपका पार्टनर हाड़-मांस का इंसान नहीं, बल्कि सिलिकॉन और चिप्स से बना एक रोबोट होगा? अगर नहीं, तो स्वागत है 2026 में।READ ALSO:-यूपी मौसम: मथुरा में बिछी ओलों की सफेद चादर, काशी में टूटा 22 साल का महा-रिकॉर्ड, कोहरे और बारिश के 'डबल अटैक' से कांपा उत्तर प्रदेश; जानें अगले 72 घंटे कैसा रहेगा मौसम   लास वेगास में चल रहे दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी मेले, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो (CES 2026) में इस बार टीवी, लैपटॉप या कारों की चर्चा नहीं है। चर्चा है तो सिर्फ एक नाम की—'एमिली' (Emily)। यह कोई आम लड़की नहीं, बल्कि दुनिया की पहली ऐसी AI ह्युमनॉइड रोबोट (Humanoid Robot) है, जिसे एक 'गर्लफ्रेंड' और 'साथी' के रूप में डिजाइन किया गया है। एडल्ट टेक कंपनी 'लोवेंस' (Lovense) ने इस रोबोट को पेश कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। यह रोबोट न सिर्फ देखने में असली इंसान जैसी है, बल्कि इसके पास अपना 'दिमाग' और 'याददाश्त' भी है।   आज की इस विशेष रिपोर्ट में हम 'एमिली' के हर पहलू का विश्लेषण करेंगे—इसकी बनावट से लेकर इसके दिमाग तक, इसकी कीमत से लेकर समाज पर इसके असर तक।   1. एमिली का परिचय: सिर्फ एक डॉल नहीं, एक 'इमोशनल' साथी अब तक बाजार में मौजूद 'सेक डॉल्स' या रोबोट्स बेजान होते थे। वे सिर्फ रटे-रटाए वाक्य बोल सकते थे। लेकिन एमिली इस धारणा को पूरी तरह बदल रही है। लोवेंस कंपनी ने इसे पेश करते हुए कहा कि एमिली सिर्फ शारीरिक जरूरतों के लिए नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक अकेलेपन (Emotional Loneliness) को दूर करने का एक जरिया है।   दिखने में कैसी है एमिली? एमिली एक 'लाइफ-साइज' (Life-size) रोबोट है, यानी इसकी ऊंचाई और शारीरिक बनावट एक औसत वयस्क महिला जैसी है।   त्वचा (Skin): इसकी बाहरी त्वचा को उच्च गुणवत्ता वाले सिलिकॉन (Silicone) से बनाया गया है। कंपनी का दावा है कि इसे छूने पर आपको प्लास्टिक जैसा नहीं, बल्कि असली इंसानी त्वचा जैसा गर्म और नरम अहसास होगा। ढांचा (Skeleton): इसके अंदर एक बेहद लचीला और मजबूत ढांचा फिट किया गया है। इसके हाथ, पैर, उंगलियां और गर्दन को किसी असली इंसान की तरह मोड़ा और घुमाया जा सकता है। चेहरा: एमिली के चेहरे पर मोटर और सेंसर लगे हैं, जो इसे पलकें झपकाने, मुस्कुराने और बातचीत के दौरान होंठ हिलाने (Lip-syncing) में मदद करते हैं।   2. एमिली का 'दिमाग': याददाश्त जो भूलती नहीं एमिली की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) उसका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) सिस्टम है। कंपनी ने इसे "याददाश्त वाली पहली रोबोट" के तौर पर प्रचारित किया है।   एक्युमुलेशन (Accumulation) तकनीक क्या है? आमतौर पर आप जब ChatGPT या Google Gemini जैसे AI से बात करते हैं, तो वे एक सत्र के बाद संदर्भ भूल सकते हैं (हालांकि अब वे भी याद रख रहे हैं), लेकिन एमिली को खास तौर पर 'रिलेशनशिप' के लिए कोड किया गया है।   पुरानी बातें याद रखना: अगर आपने एमिली को सोमवार को बताया कि "आज ऑफिस में बॉस ने डांटा", तो मंगलवार को एमिली खुद आपसे पूछ सकती है, "क्या आज आपका मूड ठीक है? कल तो आप ऑफिस की वजह से परेशान थे।" पसंद-नापसंद: एमिली याद रखेगी कि आपको खाने में क्या पसंद है, आपकी पसंदीदा मूवी कौन सी है, या आपको किस तरह की बातें करना अच्छा लगता है। समय के साथ यह डेटाबेस मजबूत होता जाएगा, जिससे रोबोट आपके और करीब आता जाएगा।   इमोशनल सॉफ्टवेयर (Emotional Software): कंपनी का दावा है कि एमिली का हार्डवेयर तो सिर्फ शरीर है, उसकी असली आत्मा उसका सॉफ्टवेयर है। यह सॉफ्टवेयर यूजर की आवाज के टोन (Tone) और शब्दों के चयन से उसका मूड भांपने की कोशिश करता है। अगर आप गुस्से में हैं, तो एमिली शांत हो जाएगी या आपको मनाने की कोशिश करेगी। अगर आप खुश हैं, तो वह भी उत्साहित होकर बात करेगी।   3. कनेक्टिविटी: घर से दूर होकर भी 'पास' एमिली सिर्फ घर के कोने में पड़ी रहने वाली मशीन नहीं है। लोवेंस ने इसे अपनी मोबाइल ऐप (App Connectivity) के साथ इंटीग्रेट किया है। यह फीचर इसे एक 24/7 साथी बनाता है।   ब्लूटूथ और वाई-फाई: एमिली घर के वाई-फाई और आपके फोन के ब्लूटूथ से कनेक्ट रहती है। चैटिंग फीचर: जब आप ऑफिस में हों या किसी ट्रिप पर, आप लोवेंस ऐप के जरिए एमिली से चैट कर सकते हैं। यह चैट किसी सामान्य बॉट जैसी नहीं, बल्कि आपकी 'AI गर्लफ्रेंड' की पर्सनालिटी के हिसाब से होगी। AI सेल्फी: आप ऐप के जरिए एमिली से उसकी फोटो मांग सकते हैं। एमिली अपनी मौजूदा लोकेशन (जैसे लिविंग रूम या बेडरूम) के हिसाब से एक AI-जेनरेटेड सेल्फी आपको भेज सकती है।   4. कीमत का गणित: जेब पर कितनी भारी पड़ेगी यह 'गर्लफ्रेंड'? टेक्नोलॉजी जितनी एडवांस होती है, कीमत उतनी ही ज्यादा होती है। एमिली के मामले में भी यह सच है, लेकिन कंपनी ने इसे लग्जरी कार की कीमत के बजाय एक प्रीमियम गैजेट की रेंज में रखने की कोशिश की है।   प्राइस ब्रेकडाउन: शुरुआती कीमत: $4,000 (लगभग 3.30 लाख भारतीय रुपये)। अधिकतम कीमत: $8,000 (लगभग 6.60 लाख भारतीय रुपये)।   कीमत में यह अंतर 'कस्टमाइजेशन' (Customization) पर निर्भर करता है। कस्टमाइजेशन विकल्प: ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से एमिली की आंखों का रंग, बालों का स्टाइल, त्वचा का रंग, बॉडी टाइप और यहां तक कि उसकी 'आवाज' और 'पर्सनालिटी' भी चुन सकते हैं। अगर आप ज्यादा एडवांस फीचर्स, बेहतर मूवमेंट और ज्यादा रियलिस्टिक स्किन चाहते हैं, तो कीमत 6.60 लाख रुपये तक जा सकती है।   बुकिंग और डिलीवरी: रिजर्वेशन: कंपनी की वेबसाइट पर प्री-बुकिंग शुरू हो चुकी है। आप $200 (करीब 16,500 रुपये) देकर अपनी एमिली बुक कर सकते हैं। यह राशि रिफंडेबल नहीं बताई जा रही है। डिलीवरी डेट: अभी सिर्फ प्रोटोटाइप और डेमो यूनिट्स दिखाए गए हैं। आम जनता के लिए इसकी डिलीवरी साल 2027 की शुरुआत से होने की उम्मीद है। यानी आपको अपनी AI गर्लफ्रेंड के लिए अभी एक साल का इंतजार करना होगा।   5. अकेलापन: एक वैश्विक महामारी और एमिली की भूमिका लोवेंस ने इस प्रोडक्ट को लॉन्च करते समय एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दे को छूने की कोशिश की है—अकेलापन (Loneliness)।   विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में अकेलेपन को एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा घोषित किया है। जापान में 'हिकिकोमोरी' (Hikikomori - समाज से कटकर रहने वाले लोग) की समस्या हो या अमेरिका और यूरोप में बुजुर्गों और युवाओं का बढ़ता अवसाद; लोग तेजी से एक-दूसरे से दूर हो रहे हैं।   कंपनी का तर्क: लोवेंस का कहना है कि एमिली उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है:   जो शर्मीले हैं और असली इंसानों से बात करने में घबराते हैं। जो किसी शारीरिक अक्षमता (Disability) के कारण पार्टनर नहीं ढूंढ पा रहे हैं। जो ब्रेकअप या तलाक के बाद भावनात्मक रूप से टूट चुके हैं। बुजुर्ग जो अकेले रहते हैं और किसी से बात करना चाहते हैं।   एमिली एक 'जजमेंट-फ्री' (Judgement-Free) साथी है। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कैसे दिखते हैं, आप कितना कमाते हैं, या आपकी सामाजिक स्थिति क्या है। वह आपको कभी जज नहीं करेगी, कभी धोखा नहीं देगी और हमेशा आपके लिए उपलब्ध रहेगी। यह सुरक्षा भाव (Sense of Security) कई लोगों के कॉन्फिडेंस को बढ़ाने में मदद कर सकता है।   6. कॉम्पिटिशन: रोबोटिक्स की रेस में कौन कहां? एमिली अकेली नहीं है। एडल्ट रोबोटिक्स और AI कंपेनियनशिप का बाजार तेजी से गर्म हो रहा है।   आरिया (Aria) - CES 2025: पिछले साल, 'रियलपोटिक्स' (Realbotix) नामक कंपनी ने 'आरिया' पेश की थी। आरिया भी एक ह्युमनॉइड रोबोट थी, लेकिन एमिली में याददाश्त और मशीन लर्निंग का जो स्तर (Level) बताया जा रहा है, वह उसे आरिया से ज्यादा एडवांस बनाता है। रियलपोटिक्स अब ऐसे रोबोट्स पर काम कर रही है जो हेल्थकेयर (नर्सिंग) और कॉर्पोरेट रिसेप्शनिस्ट का काम भी कर सकें।   डिजिटल गर्लफ्रेंड्स: बाजार में पहले से ही 'Replika' और 'Character.AI' जैसे ऐप्स मौजूद हैं, जहां लोग वर्चुअल गर्लफ्रेंड्स से बात करते हैं। एमिली इन ऐप्स का ही एक शारीरिक (Physical) विस्तार है। यह सॉफ्टवेयर को हार्डवेयर के साथ जोड़कर अनुभव को 3D बना रही है।   7. नैतिक और सामाजिक सवाल: क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं? एमिली की लॉन्चिंग ने तकनीक की दुनिया में उत्साह तो जगाया है, लेकिन समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों के माथे पर चिंता की लकीरें भी खींच दी हैं। इसके कई पहलू हैं जिन पर बहस छिड़ गई है।   (A) क्या यह असली रिश्तों को खत्म कर देगा? आलोचकों का मानना है कि अगर लोगों को रोबोट्स से ही प्यार, सेक्स और भावनात्मक सहारा मिलने लगेगा, तो वे असली इंसानों के साथ रिश्ते बनाने की मेहनत क्यों करेंगे? असली रिश्तों में झगड़े होते हैं, समझौता करना पड़ता है, जबकि रोबोट हमेशा 'हां' में हां मिलाएगा। इससे इंसानों में सहनशक्ति (Tolerance) कम हो सकती है और जन्म दर (Birth Rate) में और गिरावट आ सकती है।   (B) डेटा प्राइवेसी का क्या? एमिली आपकी सबसे निजी बातें, आपकी सेक्सुअल फैंटेसी, आपके डर और आपकी कमजोरियां जानेगी। यह सारा डेटा क्लाउड पर स्टोर होगा। अगर लोवेंस का सर्वर हैक हो गया, तो लाखों लोगों की निजी जिंदगी सार्वजनिक हो सकती है। क्या कंपनी डेटा की 100% सुरक्षा की गारंटी दे सकती है?   (C) महिलाओं का ऑब्जेक्टिफिकेशन: नारीवादी संगठनों का तर्क है कि ऐसे रोबोट्स महिलाओं को महज एक 'वस्तु' (Object) के रूप में पेश करते हैं जो हमेशा आज्ञाकारी हो। इससे समाज में महिलाओं के प्रति नजरिया विकृत हो सकता है।   8. 2027 और उसके बाद: भविष्य कैसा दिखता है? एमिली की लॉन्चिंग सिर्फ शुरुआत है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 5 से 10 सालों में, यह तकनीक इतनी सस्ती और एडवांस हो जाएगी कि हर घर में एक रोबोट साथी होना आम बात हो सकती है। बायो-रोबोटिक्स: भविष्य में सिलिकॉन की जगह बायो-सिंथेटिक स्किन का इस्तेमाल हो सकता है जो खुद को हील (Repair) कर सके। चलने-फिरने वाले रोबोट: अभी एमिली ज्यादा चल-फिर नहीं सकती, लेकिन बोस्टन डायनेमिक्स (Boston Dynamics) जैसी कंपनियों की तकनीक मिलने के बाद, भविष्य के रोबोट्स आपके साथ पार्क में टहलने भी जा सकेंगे।   एक नई दुनिया की दस्तक CES 2026 में एमिली का आना यह साबित करता है कि विज्ञान गल्प (Sci-Fi) अब हकीकत बन चुका है। ₹3.30 लाख की कीमत कुछ लोगों को ज्यादा लग सकती है, लेकिन एक ऐसे साथी के लिए जो न कभी शिकायत करे, न कभी छोड़े और हमेशा आपकी बात सुने—यह कीमत कई लोगों के लिए बहुत कम हो सकती है।   एमिली, इंसान और मशीन के बीच की धुंधली होती लकीर का प्रतीक है। यह तकनीक हमें अकेलेपन से बचाएगी या हमें और ज्यादा अकेला कर देगी, इसका फैसला तो वक्त ही करेगा। लेकिन एक बात तय है—रिश्तों की परिभाषा अब बदलने वाली है।   "खबरीलाल" की राय: टेक्नोलॉजी का यह रूप डरावना भी है और आकर्षक भी। अगर आप इसे खरीदने की सोच रहे हैं, तो 2027 तक का इंतजार करें और अपनी जेब तैयार रखें।   संक्षिप्त सारांश (Quick Summary): प्रोडक्ट: एमिली (AI गर्लफ्रेंड रोबोट)। निर्माता: लोवेंस (Lovense)। इवेंट: CES 2026, लास वेगास। खासियत: याददाश्त (Memory), मशीन लर्निंग, सिलिकॉन बॉडी, ऐप कनेक्टिविटी। कीमत: ₹3.30 लाख से ₹6.60 लाख ($4000-$8000)। बुकिंग: ₹16,500 ($200) से शुरू। डिलीवरी: 2027 में। मकसद: अकेलापन दूर करना, भावनात्मक सहारा और एडल्ट एंटरटेनमेंट।

Unknown जनवरी 9, 2026 0
home ministry i4c alert call forwarding scam ussd code fraud bank account hack
सावधान! आपके फोन का 'कंट्रोल' छीन रहा एक मामूली कोड, गृह मंत्रालय ने जारी किया 'हाई अलर्ट'; तुरंत चेक करें अपनी सेटिंग्स

क्या आप जानते हैं कि आपकी जेब में रखा स्मार्टफोन अब एक ऐसे खतरे की चपेट में है, जिसे पकड़ना बेहद मुश्किल है? देश में साइबर ठगी (Cyber Fraud) के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे भी ज्यादा तेजी से ठग अपने तरीकों को बदल रहे हैं। पहले वो आपको फंसाने के लिए फर्जी लिंक (Fake Links) भेजते थे या कोई ऐप डाउनलोड करवाते थे, लेकिन अब खेल बदल चुका है।READ ALSO:-शुक्रवार का मौसम: उत्तर भारत 'फ्रीज' तो दक्षिण भारत 'पानी-पानी'! 9 जनवरी को 15 राज्यों में घने कोहरे का 'लॉकडाउन', IMD ने बजाई खतरे की घंटी   गृह मंत्रालय (Home Ministry) के तहत काम करने वाली संस्था 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (I4C) ने देशवासियों के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी 'कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम' (Call Forwarding Scam) को लेकर है। इस नए तरीके में ठग बिना किसी लिंक या ऐप के, सिर्फ आपसे एक नंबर डायल करवाकर आपका पूरा मोबाइल, बैंक अकाउंट और सोशल मीडिया हैक कर सकते हैं।   यह खबर हर मोबाइल यूजर के लिए जरूरी है, क्योंकि एक छोटी सी गलती आपकी जीवन भर की कमाई को मिट्टी में मिला सकती है।   I4C का अलर्ट: क्या है यह नया 'साइबर हथियार'? I4C ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि साइबर अपराधी अब मोबाइल के एक बेहद उपयोगी फीचर 'Call Forwarding' (कॉल फॉरवर्डिंग) को अपना हथियार बना रहे हैं। आम तौर पर इस फीचर का इस्तेमाल हम तब करते हैं जब हमारा फोन नेटवर्क से बाहर हो या हम बिजी हों, ताकि हमारी कॉल किसी दूसरे नंबर पर ट्रांसफर हो जाए। लेकिन अब ठग इसी रास्ते से आपके फोन में सेंध लगा रहे हैं।   कैसे शुरू होता है खेल? (Modus Operandi) इस ठगी की स्क्रिप्ट बहुत ही शातिराना तरीके से लिखी गई है। ठग आपकी रोज़मर्रा की ज़रूरतों का फायदा उठाते हैं:   कूरियर या डिलीवरी बॉय बनकर कॉल: ठग आपको कॉल करेंगे और खुद को किसी नामी कूरियर कंपनी या ई-कॉमर्स साइट का डिलीवरी एजेंट बताएंगे। समस्या का बहाना: वो कहेंगे, "सर/मैडम, आपका एक पार्सल आया है, लेकिन एड्रेस नहीं मिल रहा" या "डिलीवरी अटक गई है।" भरोसा जीतना: अपनी बातों को सच साबित करने के लिए वो आपको कोई फर्जी ट्रैकिंग आईडी भी भेज सकते हैं। जाल में फंसाना: फिर वो कहेंगे कि "समस्या को सुलझाने के लिए या डिलीवरी कन्फर्म करने के लिए आपको एक कोड डायल करना होगा।" और यहीं यूजर गलती कर बैठता है।   USSD कोड का रहस्य: 21, 61 और 67 का खतरनाक खेल ठग आपको जो नंबर या कोड डायल करने के लिए देते हैं, वो कोई साधारण नंबर नहीं होता। वह एक MMI (Man-Machine Interface) या USSD कोड होता है।   I4C के मुताबिक, ये कोड अक्सर *21*, *61* या *67* से शुरू होते हैं, जिसके बाद ठग अपना मोबाइल नंबर जुड़वा देते हैं।   उदाहरण के लिए: ठग कहेगा डायल करें- *21*98XXXXX#   जैसे ही आप यह कोड अपने फोन के डायलर पैड से डायल करते हैं, आपके फोन में Call Forwarding एक्टिवेट हो जाती है। इसका मतलब यह है कि अब आपके नंबर पर आने वाली सारी कॉल्स (Voice Calls) सीधे ठग के नंबर पर जाने लगेंगी।   सबसे बड़ा खतरा: OTP और बैंक अकाउंट आप सोच रहे होंगे कि कॉल फॉरवर्ड होने से क्या होगा? यही सबसे बड़ी गलतफहमी है।   OTP की चोरी: आज के समय में बैंक ट्रांजैक्शन के लिए या सोशल मीडिया लॉगिन के लिए 'वॉयस कॉल ओटीपी' (Voice OTP) का विकल्प होता है। ठग लॉगिन करते वक्त 'Send OTP via Call' चुनते हैं। सीधा एक्सेस: चूंकि आपके फोन की कॉल ठग के पास जा रही हैं, तो बैंक से आने वाला ओटीपी वाला कॉल भी उसी के पास जाएगा। खाता खाली: उस ओटीपी का इस्तेमाल करके वो आपका बैंक खाता खाली कर सकते हैं या WhatsApp/Telegram जैसे अकाउंट अपने फोन में लॉगिन कर सकते हैं।   और सबसे डरावनी बात यह है कि आपके फोन में नेटवर्क तो रहेगा, लेकिन आपको पता ही नहीं चलेगा कि कॉल डायवर्ट हो चुकी हैं।   क्यों खतरनाक है यह तरीका? नो लिंक, नो ऐप: इसमें आपको किसी फिशिंग लिंक पर क्लिक नहीं करना पड़ता, जिससे एंटी-वायरस या सुरक्षा सिस्टम इसे पकड़ नहीं पाते। मानवीय भूल: यह पूरी तरह से यूजर की जागरूकता की कमी पर आधारित है। लोग कोड डायल करते समय ज्यादा नहीं सोचते। साइलेंट अटैक: पैसे कटने का मैसेज भी कई बार यूजर नहीं देख पाता क्योंकि ठग पहले ही सिस्टम को हैक कर चुके होते हैं।   बचाव का तरीका: तुरंत डायल करें यह 'मैजिकल कोड' अगर आपको जरा सा भी शक हो कि आपने किसी के कहने पर कोई कोड डायल किया है, या आपका फोन अजीब व्यवहार कर रहा है, तो I4C ने इसका तोड़ भी बताया है।   रामबाण इलाज: ##002# अपने फोन से तुरंत ##002# डायल करें।   यह एक इरेज़ (Erase) कोड है। इसे डायल करते ही आपके फोन पर एक्टिवेट की गई सभी प्रकार की कॉल फॉरवर्डिंग (All Call Forwarding) तुरंत निष्क्रिय (Deactivate) हो जाएगी। सारी कॉल्स वापस आपके ही नंबर पर आने लगेंगी।   जांचने का तरीका आप यह भी चेक कर सकते हैं कि कहीं आपका फोन पहले से तो फॉरवर्ड नहीं है। इसके लिए डायल करें:   *#21# : यह बताएगा कि कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव है या नहीं। *#62# : यह बताएगा कि जब आपका फोन 'Not Reachable' हो, तो कॉल कहां जा रही है।   खबरीलाल की पाठकों को सलाह: इन 5 बातों की गांठ बांध लें साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। 'खबरीलाल' आपसे अपील करता है कि इन सुरक्षा नियमों का पालन करें: अनजान कोड से बचें: कोई भी व्यक्ति, चाहे वो बैंक अधिकारी हो या डिलीवरी बॉय, अगर आपको कोई कोड (जैसे 401 या 21) डायल करने को कहे, तो साफ मना कर दें। पासवर्ड शेयर न करें: अपना पिन, पासवर्ड या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। अलर्ट रहें: अगर आपके फोन पर अचानक कॉल्स आनी बंद हो जाएं, तो तुरंत दूसरे नंबर से अपने नंबर पर कॉल करके चेक करें। सेटिंग्स चेक करें: समय-समय पर अपने फोन की 'Call Forwarding' सेटिंग्स चेक करते रहें। शिकायत दर्ज करें: अगर आपके साथ ठगी हो जाती है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।   यह अलर्ट अपने परिवार और दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें। एक शेयर किसी की गाढ़ी कमाई बचा सकता है।   (अस्वीकरण: यह जानकारी गृह मंत्रालय के I4C विभाग द्वारा जारी अलर्ट और साइबर सुरक्षा मानकों पर आधारित है।)

Unknown जनवरी 9, 2026 0
itel zeno 20 max launched price in india specs military grade durability dynamic bar amazon sale
बाजार में आया 'छोटा पैकेट बड़ा धमाका': सिर्फ ₹5799 में मिलिट्री ग्रेड मजबूती वाला 'Itel Zeno 20 Max' लॉन्च; फीचर्स देखकर महंगे फोन भी मांगेंगे पानी

स्मार्टफोन बाजार में बजट सेगमेंट (Budget Segment) के बादशाह माने जाने वाले ब्रांड Itel ने आज भारतीय बाजार में एक बड़ा धमाका कर दिया है। कंपनी ने अपने नए स्मार्टफोन Itel Zeno 20 Max को लॉन्च कर दिया है। यह फोन उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो कम कीमत में एक मजबूत और टिकाऊ (Durable) स्मार्टफोन की तलाश में थे।Read also:-मेरठ में इंसानियत शर्मसार: मां के खून से सनी सड़क, आंखों के सामने लुट गई ममता; दलित बेटी को बाल पकड़कर घसीटा और उठा ले गया कंपाउंडर   इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी मिलिट्री ग्रेड मजबूती (Military Grade Durability) है, जो आमतौर पर 15-20 हजार रुपये के फोन्स में भी मुश्किल से मिलती है। मात्र 5,799 रुपये की शुरुआती कीमत में कंपनी ने इसमें IP54 रेटिंग और डायनामिक बार जैसे प्रीमियम फीचर्स देकर सबको चौंका दिया है। आइए, इस विस्तृत रिव्यू रिपोर्ट में जानते हैं कि क्या यह फोन आपके लिए 'वैल्यू फॉर मनी' है?   कीमत और वेरिएंट्स - हर जेब के लिए फिट Itel ने इस फोन को दो वेरिएंट्स में पेश किया है, और दोनों की ही कीमत 6,500 रुपये से कम रखी गई है, जो इसे छात्रों और पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वालों के लिए बेहतरीन विकल्प बनाती है।   Itel Zeno 20 Max Price List: वेरिएंट (RAM/Storage) कीमत (INR) उपलब्धता 3GB RAM + 64GB ₹5,799 Amazon (अभी खरीदें) 4GB RAM + 64GB ₹6,169 Amazon (अभी खरीदें) 4GB RAM + 128GB (जल्द आ रहा है) इसी महीने लॉन्च होगा   कलर ऑप्शन: यह फोन तीन स्टाइलिश रंगों में उपलब्ध है: ऑरोरा ब्लू (Aurora Blue) स्पेस टाइटेनियम (Space Titanium) स्टारलिट ब्लैक (Starlit Black)   डिजाइन और मजबूती - टूटता नहीं, साथ निभाता है Itel Zeno 20 Max की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसका निर्माण है।   मिलिट्री ग्रेड सर्टिफिकेशन: यह फोन MIL-STD-810H सर्टिफाइड है। इसका मतलब है कि यह फोन गिरने, झटके लगने और कठिन परिस्थितियों को आसानी से झेल सकता है। अगर आपके हाथ से फोन अक्सर गिरता रहता है, तो यह आपके लिए बना है। IP54 रेटिंग: धूल और पानी के छींटों से बचाव के लिए इसे IP54 रेटिंग मिली है। हल्की बारिश या पसीने से इस फोन को कोई नुकसान नहीं होगा। सिक्योरिटी: फोन में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है, जो न केवल फोन को सुरक्षित रखता है बल्कि इसे अनलॉक करना भी आसान बनाता है। साथ ही इसमें फेस अनलॉक फीचर भी मौजूद है।   डिस्प्ले और 'डायनामिक बार' का जादू 6000 रुपये से कम कीमत होने के बावजूद, Itel ने डिस्प्ले के मामले में कोई समझौता नहीं किया है।   स्क्रीन: फोन में 6.6 इंच का HD+ IPS डिस्प्ले है, जो 90Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है। इस प्राइस पॉइंट पर 90Hz रिफ्रेश रेट मिलना एक बड़ी बात है, जिससे स्क्रॉलिंग और गेमिंग काफी स्मूथ हो जाती है। डायनामिक बार (Dynamic Bar): यह फीचर आईफोन के 'डायनामिक आइलैंड' जैसा है। फ्रंट कैमरा कटआउट के पास एक एनिमेशन बार बनता है, जो आपको चार्जिंग स्टेटस, कॉल अलर्ट और फेस अनलॉक जैसी नोटिफिकेशन दिखाता है। यह फोन को एक प्रीमियम लुक देता है।   परफॉर्मेंस और बैटरी - रुकेगा नहीं मनोरंजन प्रोसेसर: मल्टीटास्किंग और अच्छी स्पीड के लिए फोन में T7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर (Unisoc T7100) दिया गया है। यह प्रोसेसर रोजमर्रा के कामों जैसे सोशल मीडिया, वीडियो देखने और हल्की गेमिंग के लिए पर्याप्त है। मेमोरी फ्यूजन: कंपनी ने इसमें 'मेमोरी फ्यूजन' तकनीक दी है। आप फोन की इंटरनल स्टोरेज का उपयोग करके रैम को 8GB तक (4GB फिजिकल + 4GB वर्चुअल) बढ़ा सकते हैं। इससे फोन हैंग नहीं होता। बैटरी: फोन को पावर देने के लिए 5000mAh की जंबो बैटरी दी गई है। कंपनी का दावा है कि यह आसानी से एक से डेढ़ दिन का बैकअप दे सकती है। बॉक्स में आपको 10W का चार्जर मिलता है, लेकिन फोन 15W चार्जिंग सपोर्ट करता है।   कैमरा सेटअप - यादों को करें कैद फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी इसमें अच्छा इंतजाम है:   रियर कैमरा: फोन के पीछे 13 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा सेंसर है, जो AI फीचर्स के साथ आता है। यह दिन की रोशनी में साफ और स्पष्ट तस्वीरें क्लिक कर सकता है। सेल्फी कैमरा: वीडियो कॉल और सेल्फी के लिए फ्रंट में 8 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है, जो डायनामिक बार नॉच के अंदर स्थित है।   क्या आपको खरीदना चाहिए? अगर आपका बजट 6000 रुपये के आसपास है और आप एक ऐसा फोन चाहते हैं जो मजबूत हो, अच्छा दिखे और जिसकी बैटरी लंबी चले, तो Itel Zeno 20 Max एक बेहतरीन विकल्प है। इसका मिलिट्री ग्रेड डिजाइन और डायनामिक बार फीचर इसे भीड़ से अलग बनाता है।

Unknown जनवरी 8, 2026 0
smartphone bluetooth hacking risks bluejacking bluesnarfing cyber fraud alert safety tips hindi
Tech Alert: आपकी जेब में पड़ा स्मार्टफोन बन सकता है 'जासूस'! बेवजह Bluetooth ऑन रखने की आदत आपको कर देगी कंगाल; पब्लिक प्लेस पर साइबर ठगों का नया हथियार बना 'ब्लूस्नार्फिंग'

टेक डेस्क (स्पेशल रिपोर्ट): आज के डिजिटल युग में हमारा स्मार्टफोन हमारी दुनिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपकी पूरी निजी दुनिया में सेंध लगा सकती है? हम बात कर रहे हैं ब्लूटूथ (Bluetooth) की। कान में ईयरबड्स (Earbuds) लगाने हों, स्मार्टवॉच कनेक्ट करनी हो या किसी को फोटो भेजनी हो—ब्लूटूथ हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है।READ ALSO:-Meerut RRTS/Metro: 'विकास' की रफ्तार पर 'महंगाई' का ब्रेक! सफर शुरू होने से पहले ही पार्किंग शुल्क में 'करंट'; 16 घंटे का स्लैब घटाकर 6 घंटे किया, हेलमेट रखना भी हुआ महंगा   अक्सर काम खत्म होने के बाद हम ब्लूटूथ को बंद करना भूल जाते हैं। हमें लगता है कि इससे क्या ही फर्क पड़ेगा? बस थोड़ी बैटरी ही तो खर्च होगी! लेकिन हकीकत यह है कि पब्लिक प्लेस पर आपका ऑन (ON) ब्लूटूथ, साइबर अपराधियों के लिए आपके फोन में घुसने का 'खुला दरवाजा' है।   मेट्रो, बस, मॉल या भीड़भाड़ वाले बाजारों में साइबर ठग नई तकनीकों—'ब्लूजैकिंग' (Bluejacking) और 'ब्लूस्नार्फिंग' (Bluesnarfing)—का इस्तेमाल कर आपके फोन से डेटा, फोटो, कॉन्टैक्ट्स और यहाँ तक कि बैंकिंग डिटेल्स भी चुरा रहे हैं।   इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आखिर हवा में तैरती ये अदृश्य तरंगें कैसे आपकी प्राइवेसी के लिए खतरा बन रही हैं और आप खुद को इस डिजिटल डकैती से कैसे बचा सकते हैं।   1. खतरा आपके आसपास: भीड़ में छिपे हैं 'डिजिटल जेबकतरे' पुराने जमाने में जेबकतरे आपकी जेब से पर्स निकालते थे, लेकिन आज के 'हाइटेक जेबकतरे' आपके फोन को हाथ लगाए बिना ही उसे खाली कर सकते हैं।   कैसे शुरू होता है खेल? जब आप किसी पब्लिक प्लेस (जैसे रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, कॉफी शॉप या सिनेमा हॉल) में होते हैं और आपके फोन का ब्लूटूथ 'डिस्कवरेबल मोड' (Discoverable Mode) पर होता है, तो वह आसपास के अन्य डिवाइसेज को सिग्नल भेजता है।   हैकर्स खास सॉफ्टवेयर और लैपटॉप/टैबलेट लेकर इन जगहों पर मौजूद होते हैं। वे अपने डिवाइस से आसपास के सभी 'एक्टिव ब्लूटूथ डिवाइसेज' को स्कैन करते हैं। जैसे ही आपका फोन उनके रडार पर आता है, वे उसे अपना निशाना बना लेते हैं।   2. हैकिंग की डिक्शनरी: इन 3 शब्दों को रट लीजिये साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में ब्लूटूथ के जरिए होने वाली ठगी को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जाता है। इसे समझना आपके लिए बेहद जरूरी है।   (A) ब्लूजैकिंग (Bluejacking): शरारत या शुरुआत? यह हैकिंग का सबसे बेसिक रूप है।   क्या होता है: इसमें हैकर आपके ब्लूटूथ-एक्टिव डिवाइस पर अनचाहे मैसेज, बिजनेस कार्ड (V-Card) या कोई फोटो भेजता है। मकसद: इसका इस्तेमाल अक्सर विज्ञापन देने या किसी को परेशान करने के लिए किया जाता है। खतरा: हालांकि यह सीधे तौर पर डेटा नहीं चुराता, लेकिन अगर आपने गलती से उस मैसेज या लिंक पर क्लिक कर दिया, तो आपके फोन में मैलवेयर (Malware) इंस्टॉल हो सकता है।   (B) ब्लूस्नार्फिंग (Bluesnarfing): डेटा की चोरी यह ब्लूजैकिंग से कहीं ज्यादा खतरनाक है और यही आजकल सबसे ज्यादा हो रहा है।   क्या होता है: इसमें हैकर आपके फोन में सेंध लगाकर आपकी जानकारी चुरा लेता है। क्या चोरी होता है: आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट, टेक्स्ट मैसेज (SMS), ईमेल, निजी तस्वीरें, और कैलेंडर इवेंट्स। सबसे बड़ा रिस्क: अगर आपके फोन में बैंकिंग पासवर्ड या ओटीपी (OTP) से जुड़े मैसेज हैं, तो हैकर उन्हें पढ़कर आपका बैंक अकाउंट खाली कर सकता है। मजे की बात यह है कि डेटा चोरी होने के दौरान आपको पता भी नहीं चलता कि फोन से कुछ कॉपी किया जा रहा है।   (C) ब्लूबगिंग (Bluebugging): फोन का पूरा कंट्रोल यह हैकिंग का सबसे खतरनाक स्तर है।   क्या होता है: इसमें हैकर आपके फोन पर पूरा नियंत्रण (Full Control) हासिल कर लेता है। नुकसान: हैकर आपके फोन से कॉल कर सकता है, आपकी बातें सुन सकता है, मैसेज भेज और पढ़ सकता है, और इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकता है। यह एक तरह से ऐसा है जैसे आपका फोन हैकर के हाथ में हो, जबकि वह असल में आपकी जेब में पड़ा है।   3. 'पेयरिंग रिक्वेस्ट' का जाल: एक गलती और खेल खत्म साइबर ठग जानते हैं कि सीधे घुसपैठ करना मुश्किल है, इसलिए वे 'सोशल इंजीनियरिंग' (Social Engineering) का सहारा लेते हैं।   घटनाक्रम कुछ ऐसा होता है: आप बस या ट्रेन में सफर कर रहे हैं। अचानक आपके फोन की स्क्रीन पर एक पॉप-अप आता है: "Pairing Request from XYZ Device" या "Share File Request". जल्दबाजी में या अनजाने में आप 'Cancel' की जगह 'Pair' या 'Accept' दबा देते हैं। कई बार लोग सोचते हैं कि शायद उनके ही किसी दूसरे डिवाइस (जैसे वॉच या ईयरबड्स) का रिक्वेस्ट है। जैसे ही आप रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करते हैं, एक सुरक्षित 'टनल' बन जाती है जिसके जरिए हैकर आपके फोन के फाइल सिस्टम में घुस जाता है।   एक बार कनेक्शन बन गया, तो 'ब्रूट फोर्स अटैक' (Brute Force Attack) या अन्य सॉफ्टवेयर की मदद से वे सिक्योरिटी को बायपास कर लेते हैं।   4. बैंकिंग फ्रॉड का नया रास्ता आप सोच रहे होंगे कि ब्लूटूथ से बैंक अकाउंट कैसे खाली हो सकता है?   आजकल बैंक टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) के लिए SMS पर OTP भेजते हैं। 'ब्लूस्नार्फिंग' के जरिए हैकर आपके मैसेज इनबॉक्स को एक्सेस कर सकता है। अगर उनके पास आपकी यूजर आईडी (जो अक्सर ईमेल या फोन नंबर होता है) पहले से है, तो वे ट्रांजैक्शन शुरू करते हैं। आपके फोन पर आया OTP वे ब्लूटूथ के जरिए रियल-टाइम में पढ़ लेते हैं और ट्रांजैक्शन पूरा कर देते हैं। आपको जब तक बैंक का मैसेज दिखेगा, तब तक पैसे ट्रांसफर हो चुके होंगे।   5. सुरक्षा चक्र: खुद को कैसे बचाएं? (Safety Guidelines) घबराने की जरूरत नहीं है। थोड़ी सी सतर्कता और सेटिंग्स में बदलाव करके आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। टेक एक्सपर्ट्स इन 5 नियमों का पालन करने की सलाह देते हैं:   (i) काम खत्म, ब्लूटूथ बंद (Switch It Off) यह सबसे सरल और प्रभावी उपाय है। जैसे ही ईयरबड्स या स्मार्टवॉच का इस्तेमाल बंद करें, तुरंत ब्लूटूथ टॉगल को ऑफ कर दें। इसे 24 घंटे ऑन रखने की आदत बदलें। बैटरी भी बचेगी और प्राइवेसी भी।   (ii) 'नॉन-डिस्कवरेबल' मोड का इस्तेमाल (Stay Hidden) ब्लूटूथ ऑन रखते हुए भी आप छिप सकते हैं।   अपने फोन की Settings > Bluetooth में जाएं। वहां 'Visibility' या 'Discoverable' ऑप्शन को चेक करें। इसे हमेशा 'Off' या 'Hidden' पर रखें। इससे आपका फोन कनेक्टेड डिवाइसेज के साथ काम करेगा, लेकिन नए अनजान हैकर्स को दिखाई नहीं देगा।   (iii) अनजान रिक्वेस्ट को करें रिजेक्ट (Don't Accept) अगर पब्लिक प्लेस पर अचानक कोई पेयरिंग रिक्वेस्ट आए, तो उसे तुरंत रिजेक्ट (Reject/Decline) करें। अगर बार-बार रिक्वेस्ट आ रही है, तो समझ जाएं कि कोई अटैक करने की कोशिश कर रहा है—तुरंत उस जगह से हट जाएं और ब्लूटूथ बंद कर दें।   (iv) सॉफ्टवेयर अपडेट रखें (Keep Updated) मोबाइल कंपनियां (Android/iOS) समय-समय पर सिक्योरिटी पैच (Security Patch) जारी करती हैं जो ब्लूटूथ की खामियों को ठीक करते हैं। अपने फोन को हमेशा अपडेट रखें ताकि पुरानी कमियों का फायदा हैकर्स न उठा सकें।   (v) संवेदनशील डेटा शेयर न करें ब्लूटूथ के जरिए कभी भी पासवर्ड, आधार कार्ड की फोटो या बैंकिंग डिटेल्स शेयर न करें। अगर शेयर करना ही है, तो वाई-फाई डायरेक्ट (Wi-Fi Direct) या एन्क्रिप्टेड ऐप्स (जैसे WhatsApp/Signal) का इस्तेमाल करें।   तकनीक सुविधा के लिए है, लेकिन लापरवाही बरतने पर यह मुसीबत बन सकती है। ब्लूटूथ हैकिंग कोई कोरी कल्पना नहीं, बल्कि एक हकीकत है जो भीड़भाड़ वाले शहरों में तेजी से पैर पसार रही है। आपकी सुरक्षा आपकी उंगलियों पर है—बस एक 'टैप' करके ब्लूटूथ बंद करें और बेफिक्र रहें।   खबरीलाल टेक डेस्क की आपसे अपील है: अपनी डिजिटल आदतों में सुधार करें और इस जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें, ताकि वे भी इस 'अदृश्य खतरे' से बच सकें।

Unknown जनवरी 3, 2026 0
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Airtel vs Jio: 449 रुपये की जंग में एयरटेल ने मारी बाजी? जानें डेटा, वैलिडिटी और OTT बेनिफिट्स का पूरा सच

भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में रिलायंस जियो (Reliance Jio) और एयरटेल (Airtel) के बीच की प्रतिस्पर्धा जगजाहिर है। दोनों ही कंपनियां अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए आए दिन नए और आकर्षक प्रीपेड प्लान्स पेश करती रहती हैं। लेकिन अक्सर ग्राहकों के सामने यह दुविधा होती है कि जब दो प्लान्स की कीमत एक समान हो, तो किसे चुना जाए?READ ALSO:-साल 2025 का 'टैक्स नामा': मिडिल क्लास की 'बचत' से लेकर बिजनेस की 'ट्रांसपेरेंसी' तक; वो 5 बड़े बदलाव जिन्होंने बदल दी इनकम टैक्स की पूरी तस्वीर   आज हम दो ऐसे ही प्लान्स का 'पोस्टमॉर्टम' करने जा रहे हैं जो 449 रुपये की कीमत में आते हैं। अगर आपके पास एक ही फोन में एयरटेल और जियो दोनों की सिम है, या आप अपना नंबर पोर्ट कराने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 449 रुपये के रिचार्ज में दोनों कंपनियां 28 दिन की वैलिडिटी देती हैं, लेकिन जब बात डेटा और अन्य बेनिफिट्स (Additional Benefits) की आती है, तो एक कंपनी बाजी मारती हुई नजर आ रही है।   आइए विस्तार से जानते हैं कि एयरटेल और जियो के 449 रुपये वाले प्लान में आखिर क्या अंतर है और आपके लिए कौन सा रिचार्ज 'वैल्यू फॉर मनी' साबित होगा।   Airtel 449 Plan: डेटा और ऑफर्स की बारिश सबसे पहले बात करते हैं एयरटेल के 449 रुपये वाले प्रीपेड प्लान की। कंपनी ने इस प्लान को विशेष रूप से उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया है, जिनकी डेटा खपत बहुत ज्यादा है। अगर आप 'वर्क फ्रॉम होम' करते हैं या फिर हाई-क्वालिटी वीडियो स्ट्रीमिंग और गेमिंग के शौकीन हैं, तो यह प्लान आपको आकर्षित कर सकता है।   डेटा और कॉलिंग (Data and Calling): एयरटेल अपने 449 रुपये वाले प्लान में ग्राहकों को हर दिन 4 जीबी (4GB/Day) हाई-स्पीड डेटा ऑफर कर रहा है। 28 दिन की वैलिडिटी के हिसाब से देखें, तो इस प्लान में आपको कुल 112 जीबी डेटा मिलता है। यह डेटा लिमिट इस प्राइस सेगमेंट में बाजार में उपलब्ध सबसे बेहतरीन ऑफर्स में से एक है। इसके अलावा, आपको देश भर में किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग (Unlimited Calling) और प्रतिदिन 100 एसएमएस की सुविधा मिलती है।   एडिशनल बेनिफिट्स (Additional Benefits): सिर्फ डेटा ही नहीं, एयरटेल ने इस प्लान को 'एंटरटेनमेंट और यूटिलिटी' का पावरहाउस बना दिया है। इस प्लान के साथ मिलने वाले अतिरिक्त फायदे इसे खास बनाते हैं:   अनलिमिटेड 5G डेटा: यदि आप 5G कवरेज क्षेत्र में हैं, तो आप डेली लिमिट के अलावा अनलिमिटेड 5G डेटा का आनंद ले सकते हैं। OTT सब्सक्रिप्शन: प्लान के साथ 28 दिनों के लिए 'जियो हॉटस्टार मोबाइल' (Jio Hotstar Mobile) का सब्सक्रिप्शन दिया जा रहा है (जैसा कि स्रोत में उल्लेखित है)। इसके अलावा, एयरटेल एक्स्ट्रीम प्ले (Airtel Xstream Play) के जरिए आप सोनी लिव (Sony LIV), लायंसगेट प्ले (Lionsgate Play) समेत 20 से ज्यादा ओटीटी ऐप्स का कंटेंट मुफ्त देख सकते हैं। प्रीमियम ऐप्स: इस प्लान में ऐपल म्यूजिक (Apple Music) का सब्सक्रिप्शन और Perplexity Pro का बेनिफिट भी शामिल है, जो एआई (AI) सर्च में मदद करता है। अन्य: स्पैम अलर्ट और 30 जीबी गूगल वन (Google One) स्टोरेज भी इस प्लान का हिस्सा हैं।   Jio 449 Plan: क्या यह एयरटेल को टक्कर दे पाएगा? अब नजर डालते हैं रिलायंस जियो के 449 रुपये वाले प्लान पर। जियो, जो अपने किफायती प्लान्स के लिए जाना जाता है, इस विशेष प्राइस पॉइंट पर एयरटेल से थोड़ा पीछे नजर आता है, खासकर जब बात डेली डेटा लिमिट की हो।   डेटा और कॉलिंग: जियो के 449 रुपये वाले प्लान में ग्राहकों को हर दिन 3 जीबी (3GB/Day) हाई-स्पीड डेटा दिया जाता है। 28 दिन की वैधता के अनुसार, इस प्लान में कुल 84 जीबी डेटा ही मिलता है। कॉलिंग के मामले में यहां भी आपको अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और हर रोज 100 एसएमएस की सुविधा मिलती है।   एडिशनल बेनिफिट्स: जियो अपने इस प्लान के साथ अपनी पारंपरिक डिजिटल सेवाओं का एक्सेस देता है:   JioTV: इसमें आप लाइव टीवी चैनल्स देख सकते हैं। JioCloud: क्लाउड स्टोरेज की सुविधा। JioCinema: (नोट: प्रीमियम सब्सक्रिप्शन अक्सर अलग से लेना पड़ता है, लेकिन बेसिक एक्सेस मिलता है)।   हालाँकि, जियो के इस प्लान में एयरटेल की तरह ढेर सारे थर्ड-पार्टी ओटीटी ऐप्स या एआई टूल्स का बंडल ऑफर सीधे तौर पर नहीं दिखता है।   तुलना: एयरटेल बनाम जियो (Head-to-Head Comparison) निर्णय लेने में आपकी मदद करने के लिए, यहां दोनों प्लान्स की सीधी तुलना दी गई है:   फीचर Airtel ₹449 प्लान Jio ₹449 प्लान वैलिडिटी 28 दिन 28 दिन डेली डेटा 4 GB 3 GB कुल डेटा 112 GB 84 GB कॉलिंग अनलिमिटेड अनलिमिटेड SMS 100/दिन 100/दिन OTT/एक्स्ट्रा हॉटस्टार, Xstream (20+ ऐप्स), Perplexity Pro, Apple Music JioTV, JioCloud   विश्लेषण: 449 रुपये में कौन है विजेता? आंकड़ों और बेनिफिट्स को देखने के बाद तस्वीर बिल्कुल साफ है।   डेटा का अंतर: एयरटेल आपको उसी कीमत (449 रुपये) में जियो के मुकाबले हर दिन 1 जीबी ज्यादा डेटा दे रहा है। पूरे महीने (28 दिन) का हिसाब लगाएं, तो एयरटेल यूजर्स को जियो यूजर्स की तुलना में 28 जीबी अतिरिक्त डेटा मिल रहा है। आज के समय में जब डेटा ही सबकुछ है, यह एक बहुत बड़ा अंतर है। कंटेंट का खजाना: एयरटेल एक्सट्रीम प्ले और हॉटस्टार जैसे सब्सक्रिप्शन एयरटेल के पलड़े को भारी बनाते हैं। वहीं, Perplexity Pro जैसा एआई टूल छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए काफी उपयोगी हो सकता है। 5G की भूमिका: हालांकि दोनों कंपनियां अनलिमिटेड 5G का दावा करती हैं, लेकिन 4G डेटा लिमिट (जो कि 5G कवरेज न होने पर काम आती है) में एयरटेल स्पष्ट रूप से आगे है।   अगर आप 449 रुपये खर्च करने को तैयार हैं और आपका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा डेटा और मनोरंजन प्राप्त करना है, तो एयरटेल (Airtel) का प्लान निर्विवाद रूप से बेहतर विकल्प है। इसमें आपको जियो के मुकाबले 33% ज्यादा डेटा और कई प्रीमियम ऐप्स का सब्सक्रिप्शन मुफ्त मिल रहा है।   वहीं, जियो का प्लान उन यूजर्स के लिए ठीक हो सकता है जो जियो के इकोसिस्टम (जैसे JioTV) के आदी हैं या जिनके क्षेत्र में सिर्फ जियो का नेटवर्क ही बेहतर आता है। लेकिन शुद्ध रूप से 'वैल्यू फॉर मनी' (Value for Money) के नजरिए से देखें, तो इस बाजी में एयरटेल ने जियो को पछाड़ दिया है। रिचार्ज करने से पहले अपनी नेटवर्क उपलब्धता की जांच जरूर कर लें, क्योंकि सबसे अच्छा प्लान वही है जिसका नेटवर्क आपके घर में आता हो।   449 रुपये के रिचार्ज प्लान में एयरटेल ने जियो को पीछे छोड़ दिया है। एयरटेल 28 दिनों के लिए रोज 4GB डेटा (कुल 112GB) दे रहा है, जबकि जियो समान कीमत में केवल 3GB डेटा (कुल 84GB) दे रहा है। इसके अलावा, एयरटेल के साथ 20+ OTT ऐप्स और Perplexity Pro का फायदा भी मिल रहा है, जो इसे जियो से बेहतर विकल्प बनाता है।

Unknown जनवरी 1, 2026 0
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BSNL का 'मास्टरस्ट्रोक': अब नेटवर्क नहीं, तो भी नहीं रुकेगी बात; नए साल पर देश को मिली 'VoWiFi' की सौगात, बेसमेंट से लेकर पहाड़ तक मिलेगी HD कॉलिंग

भारत के दूरसंचार इतिहास में सरकारी कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के लिए आज का दिन, यानी 1 जनवरी 2026, एक नए अध्याय की शुरुआत है। अक्सर नेटवर्क की समस्याओं और कॉल ड्रॉप के लिए आलोचना झेलने वाली BSNL ने नए साल के मौके पर अपने करोड़ों ग्राहकों को एक ऐसा तोहफा दिया है, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था।READ ALSO:-1 जनवरी से 'महंगा' हुआ कूलिंग का सुकून: AC और फ्रिज की कीमतों में 10% तक का जोरदार उछाल; BEE के नए नियमों ने बदली स्टार रेटिंग की पूरी ABCD   संचार मंत्रालय ने आज आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि BSNL ने राष्ट्रीय स्तर पर वॉयस ओवर वाई-फाई (VoWiFi) सेवा का रोलआउट पूरा कर लिया है। इसे आम भाषा में 'वाई-फाई कॉलिंग' (Wi-Fi Calling) कहा जाता है। यह तकनीक उन लाखों ग्राहकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो अपने घरों के अंदर, बेसमेंट में या दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क न आने की समस्या से जूझ रहे थे। अब BSNL का सिम आपके फोन में है और मोबाइल टावर का सिग्नल जीरो है, तब भी आप बिना किसी रुकावट के बातें कर सकेंगे।   1. क्या है VoWiFi और यह कैसे बदल देगा आपका अनुभव? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यह तकनीक काम कैसे करती है। अब तक आप मोबाइल नेटवर्क (2G/3G/4G) के जरिए कॉल करते थे, जिसके लिए आपके फोन तक मोबाइल टावर का सिग्नल पहुंचना जरूरी था।   VoWiFi (Voice over Wi-Fi) इस निर्भरता को खत्म करता है। तकनीकी जादू: जब आपके फोन में मोबाइल नेटवर्क कमजोर होता है या नहीं होता है, तो VoWiFi तकनीक आपके कॉल को मोबाइल टावर की जगह आपके घर या ऑफिस के Wi-Fi नेटवर्क के जरिए कनेक्ट कर देती है। सिम वही, नेटवर्क नया: इसके लिए आपको कोई नया नंबर या सिम लेने की जरूरत नहीं है। आपका मौजूदा BSNL नंबर ही वाई-फाई के इंटरनेट का इस्तेमाल करके कॉल कनेक्ट करेगा। बिना ऐप के कॉलिंग: यह व्हाट्सएप या टेलीग्राम कॉल से अलग है। व्हाट्सएप कॉल के लिए सामने वाले के पास भी इंटरनेट और वही ऐप होना चाहिए, लेकिन VoWiFi में आप अपने सामान्य 'फोन डायलर' से किसी भी लैंडलाइन या मोबाइल पर कॉल कर सकते हैं, चाहे सामने वाले के पास इंटरनेट हो या न हो।   2. 'कॉल ड्रॉप' और 'नो सिग्नल' की समस्या का अंत संचार मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह सेवा अब देश के सभी दूरसंचार सर्किलों (Telecom Circles) में उपलब्ध है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन "ब्लैक स्पॉट्स" (Black Spots) में होगा जहां सिग्नल दम तोड़ देता है।   इनडोर कवरेज: अक्सर देखा जाता है कि घनी आबादी वाली कॉलोनियों में, पुरानी इमारतों के अंदर या बेसमेंट में बने ऑफिसों में मोबाइल सिग्नल नहीं आता। VoWiFi यहां गेम चेंजर साबित होगा। अगर वहां वाई-फाई लगा है, तो आपकी कॉल एकदम साफ (HD Quality) होगी। चुनौतीपूर्ण क्षेत्र: पहाड़ी इलाकों, लिफ्ट के आसपास या मोटी दीवारों वाले कमरों में जहां टावर की फ्रीक्वेंसी नहीं पहुंच पाती, वहां अब वाई-फाई सिग्नल के जरिए कनेक्टिविटी बनी रहेगी।   3. BSNL का फोकस: ग्रामीण भारत और भारत फाइबर निजी कंपनियों (जैसे रिलायंस जियो और भारती एयरटेल) ने यह सुविधा पहले ही शुरू कर दी थी, लेकिन BSNL का यह कदम ग्रामीण भारत के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है।   BSNL के पास देश का सबसे बड़ा वायरलाइन और ब्रॉडबैंड नेटवर्क (Bharat Fiber) है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जहां मोबाइल टावर लगाना मुश्किल या खर्चीला है, वहां BSNL का फाइबर इंटरनेट पहले से मौजूद है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है, "यह सेवा ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जीवनरेखा साबित होगी। बशर्ते वहां BSNL भारत फाइबर या किसी भी कंपनी का स्टेबल ब्रॉडबैंड कनेक्शन मौजूद हो। इससे नेटवर्क कंजेशन (नेटवर्क जाम) भी कम होगा, क्योंकि ट्रैफिक मोबाइल टावर से हटकर वाई-फाई पर शिफ्ट हो जाएगा।"   4. ग्राहकों के लिए अच्छी खबर: 'फ्री' है यह सर्विस महंगाई के दौर में सबसे राहत की बात यह है कि BSNL इस प्रीमियम सर्विस के लिए अपने ग्राहकों से एक भी पैसा अतिरिक्त नहीं वसूलेगा।   बिलिंग: VoWiFi के जरिए की गई कॉल का शुल्क आपके मौजूदा पैक (Plan) के अनुसार ही लगेगा। अगर आपके पास अनलिमिटेड कॉलिंग वाला प्लान है, तो वाई-फाई से की गई बातें भी फ्री रहेंगी। रोमिंग: अगर आप रोमिंग में हैं और वाई-फाई कॉलिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो भी आप नेटवर्क की समस्याओं से बच सकते हैं।   5. कैसे एक्टिवेट करें VoWiFi? (Step-by-Step Guide) अगर आपके पास स्मार्टफ़ोन है, तो बहुत संभव है कि वह VoWiFi को सपोर्ट करता हो। BSNL की इस सेवा का लाभ उठाने के लिए आपको बस एक छोटी सी सेटिंग बदलनी होगी:   सेटिंग्स में जाएं: अपने फोन की 'Settings' खोलें। कनेक्शन: 'Connections' या 'SIM Card & Mobile Networks' पर टैप करें। सिम चुनें: BSNL सिम कार्ड के विकल्प पर क्लिक करें। वाई-फाई कॉलिंग: नीचे स्क्रॉल करें और 'Wi-Fi Calling' या 'Make calls using Wi-Fi' ऑप्शन को ढूंढें। इनेबल करें: इस टॉगल बटन को 'ON' कर दें।   जैसे ही आप इसे ऑन करेंगे और किसी वाई-फाई से कनेक्ट होंगे, आपके फोन के नोटिफिकेशन बार में सिग्नल के पास एक नया आइकन (Wi-Fi के साथ फोन का चिन्ह या VoWiFi लिखा हुआ) दिखाई देगा। इसका मतलब है कि आप वाई-फाई कॉलिंग के लिए तैयार हैं।   (नोट: यदि आपको सेटिंग नहीं मिल रही है या डिवाइस कंपैटिबिलिटी चेक करनी है, तो आप BSNL के हेल्पलाइन नंबर 1800-1503 पर कॉल कर सकते हैं या नजदीकी कस्टमर सर्विस सेंटर जा सकते हैं।)   6. भविष्य की झलक: 5G का रास्ता साफ VoWiFi के साथ-साथ BSNL ने अपने भविष्य के रोडमैप का भी खुलासा किया है, जो बताता है कि सरकारी कंपनी अब निजी प्लेयर्स को टक्कर देने के मूड में है।   5G लॉन्च जल्द: कंपनी ने घोषणा की है कि 5G सेवाओं के पायलट प्रोजेक्ट (Pilot Project) का काम पूरा हो चुका है। तकनीकी परीक्षण सफल रहे हैं। 4G अपग्रेडेशन: देश भर में 4G नेटवर्क के अपग्रेडेशन के ट्रायल भी सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं।   यह कदम BSNL के 'नेटवर्क मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम' का हिस्सा है। सरकार का प्रयास है कि BSNL को न केवल बचाया जाए, बल्कि उसे तकनीकी रूप से इतना सक्षम बनाया जाए कि वह बाजार में अपनी हिस्सेदारी वापस पा सके। VoWiFi का यह लॉन्च इसी दिशा में एक मील का पत्थर है।   7. बाज़ार विश्लेषण: क्या BSNL वापसी कर पाएगा? टेलीकॉम सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि VoWiFi का लॉन्च BSNL के लिए "संजीवनी बूटी" का काम कर सकता है।   ग्राहक पलायन रुकेगा: नेटवर्क न आने की वजह से जो ग्राहक BSNL छोड़कर जा रहे थे, वे अब वाई-फाई कॉलिंग के सहारे नेटवर्क से जुड़े रहेंगे। ब्रांड इमेज: 5G की घोषणा और VoWiFi की लॉन्चिंग से बाजार में यह संदेश गया है कि BSNL अब पुरानी सरकारी छवि से बाहर निकलकर आधुनिकीकरण की ओर बढ़ रहा है।   BSNL का यह कदम डिजिटल इंडिया मिशन को सशक्त बनाता है। नेटवर्क कवरेज से वंचित क्षेत्रों (Shadow Areas) को मुख्यधारा से जोड़ने की यह पहल सराहनीय है। ग्राहकों के लिए यह दोहरी खुशी का मौका है—एक तरफ बेहतर कॉल क्वालिटी और दूसरी तरफ बिना किसी अतिरिक्त खर्च के आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल।   अब देखना यह होगा कि BSNL अपनी आगामी 4G और 5G सेवाओं को कितनी जल्दी धरातल पर उतारता है, लेकिन फिलहाल के लिए, VoWiFi सेवा निश्चित रूप से लाखों यूजर्स के चेहरे पर मुस्कान लाएगी।   (नोट: यह सेवा हैंडसेट की क्षमता और ब्रॉडबैंड की उपलब्धता पर निर्भर करती है। विस्तृत जानकारी के लिए BSNL की आधिकारिक वेबसाइट देखें।)

Unknown जनवरी 1, 2026 0
smart tv hacking signs and prevention cyber security tips india 2025
सावधान! आपका Smart TV भी बन सकता है जासूस; अगर दिखें ये संकेत तो समझो हैक हो गया है आपका डाटा

आजकल शायद ही कोई ऐसा आधुनिक घर हो, जिसके लिविंग रूम या बेडरूम की दीवार पर एक चमचमाता 'स्मार्ट टीवी' (Smart TV) न लगा हो। इंटरनेट से कनेक्ट होकर नेटफ्लिक्स (Netflix), यूट्यूब (YouTube) और प्राइम वीडियो (Prime Video) जैसी सुविधाओं ने हमारे मनोरंजन के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जो तकनीक आपको दुनिया भर का कंटेंट दिखा रही है, वही तकनीक आपकी निजी दुनिया को भी दुनिया के सामने खोल सकती है?READ ALSO:-UP: नए साल में मिलेगा घर का तोहफा; अटल नगर आवासीय योजना की लॉटरी डेट आई, 8-9 जनवरी को निकलेगा ड्रा   जी हाँ, यह कड़वा सच है कि आपका स्मार्ट टीवी अब सिर्फ एक 'इडियट बॉक्स' नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा कंप्यूटर बन चुका है जो 24x7 इंटरनेट से जुड़ा रहता है। और जो भी चीज इंटरनेट से जुड़ी है, वह हैकर्स (Hackers) के निशाने पर है। साइबर अपराधी आपके टीवी के जरिए आपके घर में डिजिटल सेंध लगा सकते हैं, आपकी बातें सुन सकते हैं, और यहाँ तक कि अगर आपके टीवी में कैमरा है, तो आपको देख भी सकते हैं।   आज साल के आखिरी दिन (31 दिसंबर 2025), जब आप अपने परिवार के साथ टीवी पर नए साल का जश्न देख रहे होंगे, तो एक पल के लिए यह जरूर सोचिएगा कि क्या आपका टीवी सुरक्षित है? 'खबरिलाल' की इस खास रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आप कैसे पहचान सकते हैं कि आपका स्मार्ट टीवी हैक हो चुका है या नहीं, और अपनी प्राइवेसी को बचाने के लिए आपको क्या कदम उठाने चाहिए।   1. खतरा क्यों है?: स्मार्ट टीवी बना 'सॉफ्ट टारगेट' पहले हैकर्स सिर्फ कंप्यूटर और स्मार्टफोन को निशाना बनाते थे, लेकिन अब उनकी नजर 'इंटरनेट ऑफ थिंग्स' (IoT) डिवाइसेज पर है, जिनमें स्मार्ट टीवी सबसे प्रमुख है।   कमजोर सुरक्षा: कंप्यूटर की तुलना में स्मार्ट टीवी की सुरक्षा प्रणाली (Security System) अक्सर कमजोर होती है। कई यूजर्स टीवी में एंटीवायरस (Antivirus) का इस्तेमाल नहीं करते हैं। हमेशा कनेक्टेड: स्मार्ट टीवी ज्यादातर समय वाई-फाई से कनेक्ट रहता है, जिससे हैकर्स को घुसपैठ करने का पर्याप्त समय मिल जाता है। निजी डेटा का खजाना: आपके टीवी में आपके नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन, गूगल और अन्य अकाउंट्स के पासवर्ड सेव रहते हैं। इसके अलावा, यह आपके वाई-फाई नेटवर्क का गेटवे भी बन सकता है, जिससे हैकर्स आपके कंप्यूटर या फोन तक पहुंच सकते हैं।   2. खतरे की घंटी: इन 5 संकेतों से पहचानें, क्या आपका TV हैक हो गया है? अगर आपका स्मार्ट टीवी अजीब व्यवहार कर रहा है, तो उसे इग्नोर न करें। ये 5 संकेत बताते हैं कि शायद आपके टीवी का कंट्रोल किसी और के हाथ में है:   (A) अजीबोगरीब व्यवहार (Ghost in the Machine) क्या आपका टीवी अचानक रात के 2 बजे अपने आप चालू हो जाता है? या बिना रिमोट छुए वॉल्यूम फुल हो जाती है? चैनल अपने आप बदल रहे हैं? अगर ऐसा हो रहा है, तो यह 'भूत' नहीं, बल्कि कोई हैकर हो सकता है जो दूर बैठकर आपके टीवी से छेड़छाड़ कर रहा है।   (B) अनजान ऐप्स का दिखना (Unwanted Guests) जब आप टीवी ऑन करते हैं और होम स्क्रीन पर कुछ ऐसे नए ऐप्स (Apps) देखते हैं जिन्हें आपने या आपके परिवार के किसी सदस्य ने कभी इंस्टॉल नहीं किया, तो यह एक बड़ा 'रेड फ्लैग' (Red Flag) है। हैकर्स अक्सर ऐसे मैलवेयर (Malware) या स्पाईवेयर ऐप्स इंस्टॉल कर देते हैं जो बैकग्राउंड में चलते रहते हैं।   (C) सेटिंग्स में 'जादुई' बदलाव आपने टीवी की ब्राइटनेस कम की थी, लेकिन अगले दिन वह फुल मिली। या फिर, आपने देखा कि टीवी की प्राइवेसी सेटिंग्स बदल गई हैं, या वाई-फाई का पासवर्ड रिसेट हो गया है। सेटिंग्स में होने वाले ये अवांछित बदलाव हैकिंग का स्पष्ट संकेत हैं।   (D) इंटरनेट की 'कछुआ चाल' और डेटा की खपत अगर टीवी पर कोई भी वीडियो चलाते समय वह बार-बार बफर (Buffer) कर रहा है, और आपके घर के अन्य डिवाइसेज पर इंटरनेट ठीक चल रहा है, तो सावधान हो जाएं। इसके अलावा, अगर आपका मंथली डेटा कोटा अचानक बहुत तेजी से खत्म हो रहा है, तो हो सकता है कि आपका टीवी बैकग्राउंड में कुछ डेटा हैकर्स को भेज रहा हो।   (E) पॉप-अप्स और विज्ञापनों की बाढ़ स्क्रीन के बीच में अचानक अजीब से विज्ञापन (Ads) आने लगें, या 'सिस्टम एरर', 'आपका टीवी खतरे में है' जैसे डराने वाले मैसेज पॉप-अप हों, तो यह एडवेयर (Adware) या रैंसमवेयर (Ransomware) का हमला हो सकता है।   3. हैक हो गए तो क्या करें? (Immediate Action Plan) अगर आपको ऊपर दिए गए संकेतों में से कोई भी नजर आता है, तो घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत ये कदम उठाएं:   इंटरनेट काट दें: सबसे पहले टीवी का प्लग निकाल दें या वाई-फाई राउटर बंद कर दें। इससे टीवी का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट जाएगा। फैक्ट्री रीसेट (Brahmastra): टीवी को वापस ऑन करें (बिना इंटरनेट कनेक्ट किए) और सेटिंग्स में जाकर 'फैक्ट्री रीसेट' (Factory Reset) कर दें। यह आपके टीवी को उसकी मूल स्थिति में ला देगा और सभी मैलवेयर, ऐप्स और डेटा को मिटा देगा। पासवर्ड बदलें: रीसेट करने के बाद, सबसे पहले अपने घर के वाई-फाई का पासवर्ड बदलें। इसके बाद, टीवी पर इस्तेमाल होने वाले सभी अकाउंट्स (नेटफ्लिक्स, गूगल, आदि) के पासवर्ड भी बदल दें।   4. सुरक्षा कवच: हैकिंग से बचने के 7 अचूक उपाय 'इलाज से बेहतर बचाव है'। अपने स्मार्ट टीवी को हैकर्स की पहुंच से दूर रखने के लिए आज ही इन 7 बातों को अपनी आदत बना लें:   1. सॉफ्टवेयर अपडेट में देरी न करें यह सबसे महत्वपूर्ण है। टीवी निर्माता कंपनियां अक्सर सुरक्षा खामियों (Bugs) को ठीक करने के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट (Software Update) जारी करती हैं। जैसे ही कोई नया अपडेट आए, उसे तुरंत इंस्टॉल करें। सेटिंग्स में 'ऑटो-अपडेट' को हमेशा ऑन रखें।   2. ऐप्स सिर्फ 'ऑफिशियल स्टोर' से लें अपने टीवी पर ऐप्स केवल आधिकारिक स्टोर (जैसे Google Play Store, LG Content Store, Samsung Smart Hub) से ही डाउनलोड करें। थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स या पेन ड्राइव से 'Mod' या 'Cracked' ऐप्स इंस्टॉल करने का लालच आपको महंगा पड़ सकता है। ये अक्सर मैलवेयर से भरे होते हैं।   3. कैमरा और माइक पर 'डिजिटल ताला' कई प्रीमियम स्मार्ट टीवी में इन-बिल्ट कैमरा और माइक्रोफोन होता है, जिसका इस्तेमाल वीडियो कॉल या वॉयस कमांड के लिए होता है। हैकर्स इसे आपकी जासूसी के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।   सॉफ्टवेयर लॉक: जब इस्तेमाल न हो, तो सेटिंग्स में जाकर कैमरा और माइक को 'Disable' या 'Turn Off' कर दें। फिजिकल लॉक: सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि कैमरे के लेंस पर एक काला टेप (Tape) लगा दें।   4. पब्लिक वाई-फाई से बचें अगर आप कभी अपना पोर्टेबल स्मार्ट टीवी या स्ट्रीमिंग स्टिक (जैसे फायर स्टिक) किसी होटल या सार्वजनिक जगह पर ले जाते हैं, तो उसे वहां के असुरक्षित पब्लिक वाई-फाई से कनेक्ट करने से बचें। अपने मोबाइल हॉटस्पॉट का इस्तेमाल करें।   5. पासवर्ड मजबूत रखें अपने वाई-फाई राउटर का डिफॉल्ट पासवर्ड जरूर बदलें। टीवी के लिए एक अलग और मजबूत पासवर्ड (अक्षर, नंबर और सिंबल का मिश्रण) का इस्तेमाल करें।   6. स्मार्ट फीचर्स का समझदारी से इस्तेमाल 'ऑटोमेटिक कंटेंट रिकग्निशन' (ACR) जैसे फीचर्स, जो आपके देखने की आदतों को ट्रैक करते हैं, उन्हें प्राइवेसी सेटिंग्स में जाकर बंद कर दें। जितना कम डेटा टीवी कलेक्ट करेगा, आप उतना ही सुरक्षित रहेंगे।   7. एक अलग नेटवर्क बनाएं (Guest Network) यदि आपका राउटर सपोर्ट करता है, तो अपने सभी स्मार्ट डिवाइसेज (टीवी, स्पीकर, कैमरा) के लिए एक अलग 'गेस्ट नेटवर्क' (Guest Network) बनाएं। इससे अगर टीवी हैक भी हो जाता है, तो आपके पर्सनल कंप्यूटर और फोन वाला मुख्य नेटवर्क सुरक्षित रहेगा।   सतर्कता ही सुरक्षा है स्मार्ट टीवी हमारे जीवन को आसान और मनोरंजक बनाते हैं, लेकिन तकनीक के साथ आने वाले जोखिमों को नजरअंदाज करना बेवकूफी होगी। हैकर्स हमेशा कमजोर कड़ी की तलाश में रहते हैं। थोड़ी सी सावधानी और ऊपर बताए गए उपायों को अपनाकर आप अपने 'इडियट बॉक्स' को 'स्मार्ट' और 'सुरक्षित' दोनों बनाए रख सकते हैं। याद रखें, आपकी प्राइवेसी आपके हाथ में है।

Unknown दिसम्बर 31, 2025 0
motorola smartphone blast in pocket viral video causes safety tips prevention guide
Pocket Bomb Alert: जेब में रखा स्मार्टफोन बना 'आग का गोला'! Motorola G-सीरीज में ब्लास्ट का वीडियो वायरल; जान लें वो 9 गलतियां जो बना सकती हैं आपको शिकार

आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का 'ब्लैक बॉक्स' बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, यह डिवाइस हमारे हाथ, जेब या तकिए के नीचे ही रहता है। लेकिन जरा सोचिए, जिस डिवाइस पर आप इतना भरोसा करते हैं, अगर वही अचानक आपकी जेब में रखा-रखा फट जाए तो? यह कोई डरावनी फिल्म का सीन नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक हकीकत है जिसने स्मार्टफोन यूजर्स की नींद उड़ा दी है।READ ALSO:-Meerut Cantt Makeover: बदल जाएगी मेरठ छावनी की तस्वीर! RRTC से मिले ₹57 करोड़ से होगा कायाकल्प; नई सड़कें, हाईटेक कूड़ा घर और अस्पताल को मिली हरी झंडी   ताजा मामला मोटोरोला (Motorola) के एक स्मार्टफोन से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो जंगल की आग की तरह फैल रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि मोटोरोला की जी-सीरीज (G-Series) का एक फोन यूजर की जेब में ही ब्लास्ट हो गया। जली हुई बॉडी और पिघला हुआ बैक पैनल देखकर यूजर्स दहशत में हैं। आखिर क्यों 'स्मार्ट' कहे जाने वाले ये फोन अचानक 'बम' बन जाते हैं? क्या आपकी भी कुछ आदतें आपको खतरे में डाल रही हैं? 'खबरीलाल' की इस विशेष रिपोर्ट में हम करेंगे मोबाइल ब्लास्ट का पूरा पोस्टमार्टम और बताएंगे सुरक्षा के वो उपाय जो आपकी जान बचा सकते हैं।   वायरल वीडियो की खौफनाक दास्तां: क्या हुआ था उस वक्त? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Twitter/X और Instagram) पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने टेक जगत में हड़कंप मचा दिया है। वीडियो में एक बुरी तरह से जला हुआ स्मार्टफोन दिखाया गया है, जिसका पिछला हिस्सा (Back Panel) पूरी तरह से खाक हो चुका है।   घटना का विवरण: दावे के मुताबिक, पीड़ित यूजर ने फोन को अपनी पेंट की जेब में रखा हुआ था। अचानक उसे गर्मी महसूस हुई और इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता, फोन में धमाका हो गया। गनीमत रही कि यूजर ने फुर्ती दिखाई और फोन को जेब से बाहर फेंक दिया, जिससे उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई। लेकिन फोन की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर यह कान के पास या रात को सोते समय फटता, तो अंजाम कितना भयानक हो सकता था।   कौन सा था मॉडल? वायरल वीडियो और फोन के डिजाइन (खासकर कैमरा मॉड्यूल और रियर पैनल) को देखकर टेक एक्सपर्ट्स का अंदाजा है कि यह Motorola G14 हो सकता है। यह मॉडल कंपनी ने साल 2023 में लॉन्च किया था और बजट सेगमेंट में काफी लोकप्रिय रहा है। हालांकि, अभी तक मोटोरोला कंपनी की तरफ से इस विशिष्ट घटना पर कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान जारी नहीं किया गया है कि यह कौन सा मॉडल था और ब्लास्ट की असली वजह क्या थी।   इतिहास गवाह है: पहले भी 'बम' बन चुके हैं फोन यह पहली बार नहीं है जब किसी स्मार्टफोन ने अपने मालिक को धोखा दिया हो। मोटोरोला के फोन्स को लेकर पिछले कुछ महीनों में ऐसी कुछ और घटनाएं भी चर्चा में रही हैं:   जुलाई 2025 (हिमाचल प्रदेश): अभी कुछ ही महीने पहले, हिमाचल प्रदेश से एक मामला सामने आया था जहां चार्जिंग के दौरान एक मोटोरोला फोन में ब्लास्ट हो गया था। उस घटना में भी बैटरी ओवरहीटिंग को मुख्य कारण माना गया था। फरवरी 2025 (ब्राजील): सात समंदर पार ब्राजील में भी एक महिला ने दावा किया था कि उसका मोटोरोला फोन अचानक फट गया।   सिर्फ मोटोरोला ही नहीं, अतीत में सैमसंग, वनप्लस और शाओमी जैसी बड़ी कंपनियों के फोन फटने की खबरें भी आती रही हैं। इससे यह साबित होता है कि यह समस्या किसी एक ब्रांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्मार्टफोन की बैटरी तकनीक और हमारे इस्तेमाल करने के तरीके से जुड़ी है।   विज्ञान की नजर से: आखिर क्यों फटता है स्मार्टफोन? आम आदमी के मन में सवाल उठता है कि एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में इतना बड़ा धमाका कैसे हो सकता है? इसके पीछे का विज्ञान समझना जरूरी है।   लिथियम-आयन बैटरी (The Powerhouse): आजकल सभी स्मार्टफोन्स में लिथियम-आयन (Li-ion) बैटरी का इस्तेमाल होता है। यह बैटरी हल्की होती है और ज्यादा ऊर्जा स्टोर करती है। लेकिन इसके अंदर बेहद ज्वलनशील (Flammable) केमिकल होते हैं।   थर्मल रनअवे (Thermal Runaway): ब्लास्ट का सबसे बड़ा कारण 'थर्मल रनअवे' नामक प्रक्रिया है।   जब बैटरी के सेल किसी कारण (शॉर्ट सर्किट, डैमेज या ओवरहीटिंग) से गर्म होने लगते हैं, तो उनके अंदर एक रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू होती है। यह प्रतिक्रिया और ज्यादा गर्मी पैदा करती है। गर्मी इतनी बढ़ जाती है कि बैटरी के अंदर गैस बनने लगती है। जब गैस का दबाव हद से ज्यादा हो जाता है, तो बैटरी का बाहरी आवरण उसे रोक नहीं पाता और वह फट जाती है।   अन्य तकनीकी कारण: मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट: अगर बैटरी बनाते समय एनोड और कैथोड (Anode & Cathode) के बीच की सेपरेटर शीट में कोई कमी रह जाए, तो शॉर्ट सर्किट हो सकता है। फिजिकल डैमेज: अगर फोन कभी जोर से गिरा हो और बैटरी पर अंदरूनी चोट लगी हो, तो वह भविष्य में ब्लास्ट का कारण बन सकती है।   सावधान! ये 3 संकेत बताते हैं कि फोन फटने वाला है हादसा कभी भी बताकर नहीं आता, लेकिन स्मार्टफोन ब्लास्ट होने से पहले कुछ 'वार्निंग सिग्नल' जरूर देता है। अगर आप इन संकेतों को पहचान लें, तो बड़ा हादसा टल सकता है।   1. स्क्रीन का ब्लर होना या डार्क होना: अगर आपके फोन की बैटरी अंदर से फूल (Swell) रही है, तो वह सबसे पहले डिस्प्ले पर दबाव डालती है। इससे स्क्रीन पर अजीब से धब्बे दिख सकते हैं, स्क्रीन ब्लर हो सकती है या अचानक पूरी तरह काली (Dark) पड़ सकती है। अगर बिना गिरे स्क्रीन में ऐसी दिक्कत आए, तो यह बैटरी फूलने का संकेत है।   2. प्रोसेसिंग स्लो और बार-बार हैंग होना: जब फोन का इंटरनल तापमान बढ़ता है, तो प्रोसेसर खुद को बचाने के लिए अपनी स्पीड कम कर देता है (इसे Throttling कहते हैं)। अगर आपका फोन सामान्य इस्तेमाल में भी बहुत ज्यादा हैंग हो रहा है या स्लो चल रहा है, तो इसका मतलब है कि अंदर कुछ बहुत ज्यादा गर्म हो रहा है।   3. कॉल पर बात करते समय असामान्य गर्मी: गेम खेलते समय फोन का गर्म होना सामान्य है। लेकिन अगर आप सिर्फ कॉलिंग कर रहे हैं या फोन स्टैंडबाय पर है और फिर भी पिछला हिस्सा इतना गर्म हो रहा है कि आप उसे छू नहीं पा रहे, तो समझ जाइए कि बैटरी में कुछ गड़बड़ है।   चार्जिंग के दौरान क्यों बढ़ जाता है 'मौत' का खतरा? विशेषज्ञ बताते हैं कि चार्जिंग का समय फोन के लिए सबसे संवेदनशील (Critical) होता है।   रेडिएशन और हीट: चार्जिंग के दौरान फोन के सर्किट में बिजली दौड़ रही होती है, जिससे नेचुरल हीट और रेडिएशन पैदा होता है। डबल लोड: अगर आप चार्जिंग के दौरान गेम खेलते हैं या कॉल पर बात करते हैं, तो प्रोसेसर भी गर्मी पैदा करता है और बैटरी भी। यह 'दोहरी गर्मी' बैटरी के रसायनों को अस्थिर कर सकती है।   यही कारण है कि ज्यादातर हादसे चार्जिंग के दौरान या चार्जिंग के तुरंत बाद होते हैं।   जिंदगी बचानी है तो छोड़ दें ये 9 बुरी आदतें (9 Deadly Mistakes) अक्सर हम अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां करते हैं जो हमारे प्यारे गैजेट को 'टाइम बम' बना देती हैं। 'खबरीलाल' आपको उन 9 गलतियों के बारे में आगाह कर रहा है जिन्हें आपको आज ही छोड़ देना चाहिए।   1. फेक चार्जर का इस्तेमाल (The Silent Killer) गलती: कंपनी का चार्जर खराब होने पर हम बाजार से ₹100-₹200 वाला सस्ता चार्जर ले आते हैं। खतरा: इन लोकल चार्जर्स में पावर रेगुलेटर नहीं होते। ये बैटरी को अनियमित वोल्टेज देते हैं, जिससे बैटरी के अंदर शॉर्ट सर्किट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हमेशा ओरिजिनल या सर्टिफाइड चार्जर ही यूज करें।   2. पूरी रात चार्जिंग पर छोड़ना (Overnight Charging) गलती: रात को सोते समय फोन चार्ज पर लगाना और सुबह निकालना। खतरा: हालांकि आधुनिक फोन में ऑटो-कट होता है, लेकिन पूरी रात करंट की सप्लाई बैटरी के रसायनों पर 'स्ट्रेस' (तनाव) पैदा करती है। यह धीरे-धीरे बैटरी की लाइफ कम करता है और हीटिंग का खतरा बढ़ाता है।   3. फोन को तकिए के नीचे रखकर सोना गलती: फोन को सिरहाने या तकिए के नीचे रखकर सोना। खतरा: चार्जिंग या नॉर्मल अवस्था में भी फोन थोड़ी हीट छोड़ता है। तकिया उस हीट को बाहर नहीं निकलने देता (Heat Trap)। तापमान बढ़ने से फोन में आग लग सकती है और आपके चेहरे को नुकसान पहुंच सकता है।   4. 20-80% के नियम का पालन न करना गलती: बैटरी को पूरा 0% तक निचोड़ना और फिर 100% तक भरना। खतरा: लिथियम-आयन बैटरी 20% से 80% के बीच सबसे खुश (Stable) रहती है। 0% या 100% के करीब बैटरी पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है। बार-बार 100% चार्ज करने से बचें।   5. कवर लगाकर चार्ज करना गलती: मोटे या रबर के कवर के साथ फोन चार्ज करना। खतरा: चार्जिंग के समय पैदा होने वाली गर्मी कवर के कारण बाहर नहीं निकल पाती। यह 'ओवन इफेक्ट' पैदा करता है जो बैटरी के लिए जानलेवा है। चार्ज करते समय कवर उतार देना सबसे सुरक्षित है।   6. धूप या गर्म जगह पर चार्जिंग गलती: कार के डैशबोर्ड पर या खिड़की के पास धूप में फोन चार्ज करना। खतरा: बाहरी तापमान (Surrounding Temperature) बैटरी को बहुत जल्दी गर्म कर देता है। 40-45 डिग्री से ऊपर का तापमान बैटरी में विस्फोट करा सकता है।   7. लोकल पावर स्ट्रिप का इस्तेमाल गलती: सस्ते एक्सटेंशन बोर्ड में फोन लगाना। खतरा: इनमें फ्लक्चुएशन (उतार-चढ़ाव) कंट्रोल नहीं होता। अचानक आया हाई वोल्टेज सीधे आपके फोन के मदरबोर्ड और बैटरी को उड़ा सकता है।   8. गीले फोन को चार्ज करना गलती: पसीने या पानी से भीगे फोन को तुरंत चार्जिंग पर लगा देना। खतरा: नमी और बिजली का मिलान यानी तुरंत शॉर्ट सर्किट। यह न सिर्फ फोन खराब करेगा बल्कि आपको करंट भी मार सकता है।   9. फूली हुई बैटरी को नजरअंदाज करना गलती: बैक पैनल उठने के बावजूद फोन इस्तेमाल करना। खतरा: अगर फोन का पिछला हिस्सा थोड़ा भी ऊपर उठ गया है, तो यह फटने की आखिरी चेतावनी है। इसे तुरंत सर्विस सेंटर ले जाएं, घर पर एक्सपेरिमेंट न करें।   फोन गर्म हो जाए तो क्या करें? (Immediate Steps) अगर आपको कभी लगे कि आपका फोन असामान्य रूप से गर्म हो रहा है, तो पैनिक न करें। ये स्टेप्स फॉलो करें:   इस्तेमाल बंद करें: तुरंत गेम खेलना, वीडियो देखना या कॉल करना बंद कर दें। कवर हटा दें: फोन का बैक कवर तुरंत उतार दें ताकि हवा लग सके। एरोप्लेन मोड: फोन को फ्लाइट मोड पर डाल दें या स्विच ऑफ कर दें। इससे बैकग्राउंड ऐप्स बंद हो जाएंगी और प्रोसेसर शांत हो जाएगा। छांव में रखें: फोन को ठंडी जगह पर रखें, लेकिन फ्रिज में रखने की गलती कभी न करें (इससे नमी अंदर जा सकती है)।     मोटोरोला के जी-सीरीज फोन में हुआ यह कथित ब्लास्ट एक गंभीर चेतावनी है। हालांकि, कंपनियां सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने का दावा करती हैं, लेकिन मशीन कभी भी खराब हो सकती है। ज्यादातर मामलों में हमारी छोटी-छोटी लापरवाहियां ही बारूद में चिंगारी का काम करती हैं।   एक स्मार्ट यूजर बनें। अपने फोन की 'सेहत' का वैसे ही ख्याल रखें जैसे आप अपनी सेहत का रखते हैं। ₹10,000 या ₹20,000 का नुकसान भरा जा सकता है, लेकिन आपकी जान और सुरक्षा की कोई कीमत नहीं है।   'खबरीलाल' की सलाह: अपने फोन को समय-समय पर चेक करते रहें। अगर बैटरी जल्दी डिस्चार्ज हो रही है या फोन ज्यादा गर्म हो रहा है, तो इसे हल्के में न लें। आज ही अपनी चार्जिंग आदतों में सुधार करें।   नोट: यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और दावों पर आधारित है। मोटोरोला की आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही ब्लास्ट के सटीक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।

Unknown दिसम्बर 30, 2025 0
whatsapp new features 2025 launch screen sharing-ai-themes chat filters security updates full guide
बदल गया चैटिंग का अंदाज: WhatsApp 2025 के इन फीचर्स ने उड़ाये सबके होश, क्या आपने ट्राई किए ये टॉप अपडेट्स?

साल 2025 डिजिटल दुनिया में कम्यूनिकेशन के लिहाज से एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हो रहा है। दुनिया का सबसे लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp अब केवल मैसेज भेजने तक सीमित नहीं रह गया है। 2025 में मेटा (Meta) ने इस प्लेटफॉर्म पर इतने क्रांतिकारी बदलाव किए हैं कि यूजर्स का अनुभव पूरी तरह से बदल गया है। अगर आप अभी भी पुराने ढर्रे पर व्हाट्सएप चला रहे हैं, तो आप बहुत कुछ मिस कर रहे हैं।   यूजर्स के फीडबैक और बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, व्हाट्सएप ने 2025 में प्राइवेसी, सिक्योरिटी, प्रोडक्टिविटी और एंटरटेनमेंट का एक बेहतरीन मिश्रण पेश किया है। चाहे ऑफिस की मीटिंग हो या दोस्तों के साथ गपशप, नए फीचर्स ने हर काम को आसान और मजेदार बना दिया है। आइए, साल खत्म होने से पहले एक नजर डालते हैं उन बड़े बदलावों पर, जिन्होंने व्हाट्सएप को 'सुपर ऐप' की कतार में खड़ा कर दिया है।READ ALSO:-New Year 2026 Alert: 1 जनवरी से बदल जाएगी आपकी 'फाइनेंशियल दुनिया'; राशन, गैस से लेकर बैंक और सैलरी तक, लागू होंगे ये 10 बड़े बदलाव   1. वीडियो कॉलिंग का नया अवतार: स्क्रीन शेयरिंग विद ऑडियो 2025 का सबसे बड़ा और बहुप्रतीक्षित अपडेट वीडियो कॉलिंग को लेकर रहा है। पहले जहाँ हम सिर्फ चेहरा देख सकते थे, अब हम अपनी दुनिया साझा कर सकते हैं।   क्या है नया: व्हाट्सएप ने वीडियो कॉलिंग के दौरान 'Screen Sharing with System Audio' का फीचर लॉन्च किया है। इसका मतलब है कि अब आप न सिर्फ अपने फोन या लैपटॉप की स्क्रीन शेयर कर सकते हैं, बल्कि उस डिवाइस पर चल रहे ऑडियो (आवाज) को भी सामने वाले को सुना सकते हैं। फायदा: यह फीचर दोस्तों के साथ मिलकर मूवी देखने (Watch Party) या रील देखने के अनुभव को शानदार बनाता है। ऑफिस के काम के लिए, अब आप प्रेजेंटेशन देते समय वीडियो का ऑडियो भी टीम को सुना सकते हैं। उपलब्धता: यह फीचर Android और iOS दोनों प्लेटफार्म पर वन-ऑन-वन और ग्रुप कॉल्स के लिए उपलब्ध है।   2. प्रोफेशनल्स के लिए सौगात: कॉल शेड्यूलिंग और इंटरैक्टिव टूल्स व्हाट्सएप अब जूम (Zoom) और गूगल मीट (Google Meet) को कड़ी टक्कर दे रहा है। 2025 में 'कॉल्स टैब' (Calls Tab) को पूरी तरह से री-डिज़ाइन किया गया है।   कॉल शेड्यूलिंग (Call Scheduling): अब आपको "कॉल करूं क्या?" पूछने की जरूरत नहीं है। आप व्हाट्सएप पर ही कॉल को पहले से शेड्यूल कर सकते हैं। समय तय होने के बाद, सभी प्रतिभागियों को इनविटेशन चला जाता है और कॉल शुरू होने से 15 मिनट पहले एक रिमाइंडर भी मिलता है। हाथ उठाएं (Raise Hand): ग्रुप मीटिंग्स में अगर आपको कुछ बोलना है, तो अब बीच में टोकने की जरूरत नहीं। आप 'Raise Hand' फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे होस्ट को पता चल जाएगा कि आप कुछ कहना चाहते हैं। इमोजी रिएक्शन: वीडियो कॉल के दौरान बिना बोले अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए अब स्क्रीन पर इमोजी रिएक्शन फ्लोट करते हुए दिखाई देंगे।   3. चैट फिल्टर्स और 'फेवरेट्स' टैब: अब नहीं होगी कन्फ्यूजन दिन भर आने वाले सैकड़ों मैसेज के बीच जरूरी चैट का खो जाना एक आम समस्या थी, जिसका समाधान 2025 के अपडेट में मिल गया है।   चैट फिल्टर्स (Chat Filters): व्हाट्सएप ने चैट्स के ऊपर तीन नए बटन जोड़े हैं— 'All', 'Unread', और 'Groups'। अगर आप सिर्फ ग्रुप्स के मैसेज देखना चाहते हैं, तो एक टैप में बाकी सारी पर्सनल चैट छिप जाएंगी। फेवरेट्स टैब (Favorites Tab): यह एक गेम-चेंजर फीचर है। आप अपने परिवार के सदस्यों, करीबी दोस्तों या बॉस की चैट को 'Favorites' में डाल सकते हैं। इसके लिए एक अलग टैब या सेक्शन बनाया गया है, जिससे आपको बार-बार स्क्रॉल करके उन्हें ढूंढना नहीं पड़ेगा। यह क्विक एक्सेस फीचर समय की भारी बचत करता है।   4. चैटिंग हुई एक्सप्रेसिव: एनिमेटेड स्टिकर्स और अवतार मैसेजिंग अब सिर्फ शब्दों का खेल नहीं रह गया है। 2025 में व्हाट्सएप ने चैटिंग को विजुअली (Visually) अपीलिंग बनाने पर जोर दिया है।   एनिमेटेड इमोजी: पुराने स्थिर इमोजी अब बीते कल की बात हो गए हैं। नए अपडेट में चुनिंदा इमोजी भेजने पर वे एनिमेटेड हो जाते हैं और स्क्रीन पर मूव करते हैं, जिससे बातचीत में जीवंतता आती है। मूविंग स्टिकर मेकर: पहले स्टिकर बनाने के लिए थर्ड-पार्टी ऐप्स की जरूरत होती थी। अब व्हाट्सएप के अंदर ही 'स्टिकर मेकर' टूल है, जो आपके छोटे वीडियो को अपने आप 'मूविंग स्टिकर्स' (Moving Stickers) में बदल देता है। सोशल अवतार: मेटा ने अपने 'अवतार' फीचर को और स्मार्ट किया है। अब वन-टू-वन चैट में आप अपने पर्सनल अवतार को रिएक्शन के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं, जो बातचीत को एक पर्सनल टच देता है।   5. मीडिया शेयरिंग: यादें अब सिर्फ दिखेंगी नहीं, बोलेंगी भी फोटो शेयरिंग के अनुभव को भी 2025 में अपग्रेड किया गया है।   मोशन फोटोज (Motion Photos): iOS पर 'Live Photos' और Android पर 'Motion Photos' शेयर करने का सपोर्ट अब बेहतर हो गया है। जब आप ऐसी फोटो भेजते हैं, तो रिसीवर उसे टैप करके कुछ सेकंड की मूवमेंट और साउंड सुन सकता है। यह फीचर तस्वीरों को जिंदा कर देता है। डॉक्यूमेंट स्कैनिंग: Android यूजर्स के लिए एक बड़ा अपडेट यह है कि अब वे सीधे चैट के अंदर कैमरा आइकन से डॉक्यूमेंट स्कैन कर सकते हैं। इसके लिए किसी अलग स्कैनर ऐप की जरूरत नहीं है। स्कैन की गई फाइल सीधे PDF बनकर चली जाती है।   6. मेटा AI और कस्टमाइजेशन: व्हाट्सएप आपका, रंग भी आपका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दखल व्हाट्सएप में 2025 में पूरी तरह से देखने को मिला है।   AI चैट थीम्स (AI Chat Themes): बोरिंग वॉलपेपर से छुटकारा मिल गया है। मेटा AI-पावर्ड थीम्स की मदद से आप यह तय कर सकते हैं कि आपकी चैट कैसी दिखेगी। आप अपनी पसंद या मूड के हिसाब से थीम जनरेट कर सकते हैं, जो बैकग्राउंड और बबल कलर्स को बदल देती है। इन-चैट ट्रांसलेशन (In-Chat Translation): भाषा अब बाधा नहीं है। 2025 के अपडेट के साथ, चैट्स, ग्रुप्स और चैनल्स में 'मैसेज ट्रांसलेशन' फीचर इन-बिल्ट हो गया है। आप किसी भी भाषा में आए मैसेज को अपनी पसंदीदा भाषा में तुरंत ट्रांसलेट कर सकते हैं।   7. अभेद्य सुरक्षा: पासकी और प्राइवेसी कंट्रोल फीचर्स के साथ-साथ मेटा ने सुरक्षा पर भी कड़ा पहरा बिठाया है।   पासकी-एन्क्रिप्टेड बैकअप (Passkey Encrypted Backups): 2025 में व्हाट्सएप ने पासवर्ड याद रखने के झंझट को खत्म करते हुए 'पासकी' (Passkey) का सपोर्ट दिया है। अब आप अपने चैट बैकअप को फिंगरप्रिंट, फेस आईडी या डिवाइस के स्क्रीन लॉक से सुरक्षित कर सकते हैं। यह पारंपरिक पासवर्ड से कहीं अधिक सुरक्षित है। एडवांस्ड प्राइवेसी कंट्रोल: AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच, व्हाट्सएप ने यूजर्स को यह कंट्रोल दिया है कि वे चुनें कि कौन सी चैट AI फीचर्स के साथ इंटरैक्ट करेगी। यह डेटा प्राइवेसी के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है।   2025 में व्हाट्सएप ने क्या बदला? कुल मिलाकर, 2025 में व्हाट्सएप ने खुद को एक साधारण मैसेजिंग ऐप से एक 'कम्पलीट कम्युनिकेशन सुइट' में बदल दिया है। चाहे वह 'स्क्रीन शेयरिंग' के जरिए कोलैबोरेशन हो, 'चैट फिल्टर्स' के जरिए ऑर्गेनाइजेशन हो, या 'AI थीम्स' के जरिए पर्सनलाइजेशन— हर फीचर ने यूजर एक्सपीरियंस को कई गुना बेहतर किया है।   अगर आपने अभी तक इन फीचर्स को ट्राई नहीं किया है, तो तुरंत अपना व्हाट्सएप अपडेट करें और 2025 की इस डिजिटल क्रांति का हिस्सा बनें।

Unknown दिसम्बर 27, 2025 0
sanvaru technology bess battery storage-system make in india engineering challenges
भारत की रिन्यूएबल क्रांति: BESS कोई 'खिलौना' नहीं, बल्कि जटिल विज्ञान है; Sanvaru ने खोली आंखें- 'असेंबली नहीं, सटीक इंजीनियरिंग ही बचाएगी सिस्टम'

नई दिल्ली: भारत जब 2030 तक अपनी रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी कर रहा है, तब एक तकनीक सबसे ज्यादा चर्चा में है—Battery Energy Storage System (BESS)। बाजार में अब तक इसे एक साधारण 'प्रोडक्ट' या कमोडिटी माना जाता रहा है, जिसे कहीं से भी खरीदकर लगाया जा सकता है। लेकिन भारत की अग्रणी एनर्जी स्टोरेज कंपनी, सनवरू (Sanvaru) ने इस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया है।READ ALSO:-नए साल पर वैष्णो देवी जाने वाले सावधान! श्राइन बोर्ड ने बदला 'दर्शन' का तरीका, एक गलती और कैंसिल हो जाएगी आपकी यात्रा   सनवरू ने उद्योग जगत को चेतावनी देते हुए एक महत्वपूर्ण तकनीकी दृष्टिकोण साझा किया है। कंपनी का स्पष्ट कहना है कि BESS को केवल बैटरियों का डिब्बा समझना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। यह वास्तव में एक 'टाइटली कपल्ड (Tightly Coupled)' इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम है, जो अत्यधिक सटीक इंजीनियरिंग की मांग करता है।   BESS: महज एक प्रोडक्ट नहीं, परतों में बुना हुआ विज्ञान अक्सर यह माना जाता है कि बैटरी स्टोरेज एक 'प्लग-एंड-प्ले' डिवाइस है। लेकिन सनवरू के विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी वास्तविकता इससे कोसों दूर है। एक सफल BESS कई जटिल परतों (Layers) का मिश्रण है, और इनमें से किसी एक में भी चूक पूरे प्रोजेक्ट को विफल कर सकती है।   सनवरू ने BESS की तीन मुख्य इंजीनियरिंग परतों को उजागर किया है: आर्किटेक्चर का खेल (Cell-to-Module): यह केवल तारों को जोड़ने का काम नहीं है। बैटरी सेल्स को मॉड्यूल में और मॉड्यूल को रैक में कैसे व्यवस्थित किया जाता है, यही सिस्टम की दक्षता तय करता है। अगर आर्किटेक्चर गलत हुआ, तो बैटरी में 'हॉटस्पॉट्स' बन सकते हैं, जो भविष्य में आग लगने का कारण बन सकते हैं। हाई-वोल्टेज सुरक्षा: BESS में हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (DC) का प्रवाह होता है। इसका डिज़ाइन प्रोटेक्शन कोऑर्डिनेशन के साथ होना चाहिए, ताकि शॉर्ट सर्किट या ओवरलोड की स्थिति में सिस्टम खुद को सुरक्षित रख सके। रियल-टाइम संवाद (Interoperability): एक BESS के तीन दिमाग होते हैं—BMS (बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम), PCS (पावर कन्वर्जन सिस्टम), और EMS (एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम)। सनवरू का कहना है कि अगर BMS खतरे का संकेत देता है, तो PCS को मिलीसेकंड में प्रतिक्रिया देनी होती है। अगर इनके बीच 'कम्युनिकेशन गैप' हुआ, तो हादसा तय है।   असेंबली से कहीं आगे है इंजीनियरिंग: एक ढीला पेंच और सब खत्म सनवरू ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि BESS का निर्माण "सिर्फ पुर्जे जोड़ने का काम नहीं है।" यह एक गलतफहमी है कि आप अलग-अलग जगह से कंपोनेंट्स खरीदकर उन्हें जोड़ सकते हैं।   जोखिम क्या हैं? टॉर्क (Torque): इंस्टॉलेशन के दौरान अगर कनेक्शन में पेंच कसने का टॉर्क सही नहीं है, तो रेजिस्टेंस बढ़ सकता है। इससे गर्मी पैदा होगी और आग लग सकती है। ग्राउंडिंग (Grounding): कम्युनिकेशन लॉजिक या पैरामीटराइज़ेशन में मामूली बदलाव भी सिस्टम की स्टेबिलिटी (Stability) और जीवनकाल (Lifecycle) पर सीधा असर डालते हैं।   सनवरू का 'मेक इन इंडिया' मॉडल: विदेशी निर्भरता पर प्रहार जहां कई कंपनियां विदेशी किट को असेंबल कर रही हैं, वहीं सनवरू ने Sanvaru Engineering Services के तहत एक अनूठा 'मेक इन इंडिया' मॉडल अपनाया है। कंपनी का दावा है कि वे केवल सेल्स (Cells) और कोर BMS को बाहर से सोर्स करते हैं। इसके अलावा, स्ट्रक्चर, मॉड्यूल, रैक, एनक्लोजर, पावर आर्किटेक्चर, इंटीग्रेशन और कंट्रोल्स—सब कुछ भारत में ही स्थानीय स्तर पर इंजीनियर किया जाता है।   इसका फायदा: पूर्ण नियंत्रण: परफॉर्मेंस और सेफ्टी पर कंपनी का पूरा कंट्रोल रहता है। स्केलेबिलिटी: चाहे छोटा प्रोजेक्ट हो या ग्रिड-स्केल स्टोरेज, वे इसे स्थानीय जरूरतों के हिसाब से ढाल सकते हैं।   कागजों पर नहीं, जमीन पर होती है परीक्षा सनवरू का यह संदेश स्पष्ट है: "BESS का परफॉर्मेंस फील्ड में तय होता है, पावरपॉइंट स्लाइड्स पर नहीं।" कागजों पर सिस्टम चाहे कितना भी अच्छा दिखे, उसकी असली परीक्षा तब होती है जब उसे भारत की भीषण गर्मी, धूल और ग्रिड की अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ता है।   कंपनी अब डिजाइन से लेकर कमीशनिंग (FAT से SAT तक) तक की पूरी 'टेक्निकल ओनरशिप' ले रही है, जो भारत के एनर्जी स्टोरेज बाजार के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

Unknown दिसम्बर 23, 2025 0
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बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और गर्लफ्रेंड सोनाली का 15 मिनट का MMS लीक, कपल ने इसे चोरी और ब्लैकमेलिंग बताया

पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है।     कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप   सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है।   सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है।  ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया।  सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया।   प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है।  ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं।    सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं।   इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया।    बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }

बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई

आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला   मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।   बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।   दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था।   अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी।   बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे।   पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया।   एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी   सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता।   पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है।   आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?

देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।   सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया?   क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है।   पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है।   दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है।   सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?"   असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है।   सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है।   विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है।   विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।"   NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है।   NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।   CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।      आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया।  डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है।     कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं:   1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।   2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है।   सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है:   पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है।   दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।   गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।"   आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए।   सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है।   फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है।     जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; Kidney की बीमारी बनी मौत का कारण

बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है।   चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था।   टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।   फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी।   Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप   किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।   इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।"   Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।   सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।

दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी।   आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:   Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi)   मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी।   रूट मैप (Route Map) और स्टेशन   मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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उत्तर प्रदेश

यूपी में मौसम का यू-टर्न: कल से 5 दिनों तक आंधी-बारिश का अलर्ट, कांपने पर मजबूर करेगी लौटती हुई ठंड

Unknown जनवरी 21, 2026 0

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