बिजनौर: राजधानी लखनऊ के बिजनौर थाना क्षेत्र (Bijnor Thana Area) में रिश्तों को तार-तार कर देने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक पिता ने ही अपनी नाबालिग बेटी की अस्मत लूट ली। रक्षक ही जब भक्षक बन जाए, तो समाज का सिर शर्म से झुक जाता है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी कलयुगी पिता (Kalyugi Pita) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।READ ALSO:-'अंगूठा लगाने' का झंझट होगा खत्म: आधार में होने जा रहा है अब तक का सबसे बड़ा 'Tech-Upgrade', जानें क्या है सरकार का 'विजन 2032' यह घटना समाज में गिरते नैतिक मूल्यों और महिलाओं, विशेषकर बच्चियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या है पूरा मामला? (Bijnor Rape Case Details) एसीपी कृष्णा नगर (ACP Krishna Nagar) रजनीश वर्मा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि घटना बिजनौर थाना क्षेत्र की है। आरोपी पिता पेशे से सब्जी विक्रेता है। पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी की पत्नी (पीड़िता की मां) की करीब 13 वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। घर में मां की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर पिता अपनी ही सगी बेटी पर बुरी नजर रखने लगा। पीड़िता 14 वर्ष की है और कक्षा 8 की छात्रा है। आरोप है कि पिता पिछले काफी दिनों से अपनी नाबालिग बेटी के साथ जबरन दुष्कर्म (Rape) कर रहा था। लोक-लाज और पिता के डर से बच्ची काफी समय तक चुप रही, लेकिन जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो उसने अपनी चुप्पी तोड़ी। चचेरी भाभी ने दर्ज कराई रिपोर्ट बच्ची ने हिम्मत जुटाकर अपनी आपबीती अपनी चचेरी भाभी (Cousin Sister-in-law) को बताई। मासूम की दर्दनाक दास्तां सुनकर भाभी के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने बिना देरी किए पुलिस का दरवाजा खटखटाया। बीती 23 जनवरी को पीड़िता की चचेरी भाभी ने बिजनौर थाने में आरोपी चचिया ससुर के खिलाफ नामजद तहरीर दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और दुष्कर्म की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया और आरोपी की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने बिछाया जाल, चढ़ा हत्थे एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही पुलिस आरोपी की सरगर्मी से तलाश कर रही थी। मुखबिरों का जाल बिछा दिया गया था। शनिवार रात पुलिस को मुखबिर से एक सटीक सूचना मिली। पता चला कि आरोपी बिजनौर थाना क्षेत्र के सरवन नगर (Sarvan Nagar) स्थित गोलू होटल और इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के बीच शंभू नगर रोड के पास मौजूद है और कहीं भागने की फिराक में है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घेराबंदी कर आरोपी को धर दबोचा। पुलिस की मुस्तैदी के चलते आरोपी शहर छोड़कर भागने में नाकाम रहा। नशे में हैवानियत की कबूली बात गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जब आरोपी से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बताया कि वह नशे का आदी है और नशे की हालत में ही उसने अपनी बेटी के साथ कई बार इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए आरोपी को जेल भेज दिया है। समाज के लिए चिंता का विषय यह घटना न केवल एक अपराध है, बल्कि एक सामाजिक त्रासदी भी है। जब घर के भीतर ही बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, तो बाहरी सुरक्षा के दावों पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय (Fast Track Court) और कड़ी सजा ही समाज में एक नजीर पेश कर सकती है। बिजनौर पुलिस (Bijnor Police) की तत्परता से आरोपी पिता सलाखों के पीछे पहुंच गया है, लेकिन 14 साल की मासूम के मन पर जो घाव लगे हैं, उन्हें भरने में शायद पूरा जीवन लग जाए। Lucknow Bijnor Rape Case ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराध और अपराधी की कोई सीमा नहीं होती, यहाँ तक कि खून के रिश्ते भी सुरक्षित नहीं हैं। पुलिस ने आरोपी को जेल भेजकर अपना काम कर दिया है, अब निगाहें न्यायपालिका पर टिकी हैं कि इस 'कलयुगी पिता' को कितनी सख्त सजा मिलती है। सारांश: लखनऊ के बिजनौर थाना क्षेत्र में एक सब्जी विक्रेता पिता ने अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म किया। चचेरी भाभी की शिकायत पर पुलिस ने 23 जनवरी को केस दर्ज किया था। शनिवार रात पुलिस ने सरवन नगर के पास से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने नशे में घटना को अंजाम देने की बात कबूली है। उसे जेल भेज दिया गया है।
नई दिल्ली/बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लिए 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस (16th National Voters' Day) गर्व का क्षण लेकर आया। नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने बिजनौर की जिलाधिकारी (DM) और जिला निर्वाचन अधिकारी जसजीत कौर को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्हें यह सम्मान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Summary Revision) कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण (Training and Capacity Building) में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रदान किया गया।READ ALSO:-Meerut: 'लव जिहाद' अब पुराना हुआ, यूपी में अब 'जिम जिहाद' का नया पैंतरा: बबीता चौहान ने कोबरा और सपोले का जिक्र कर दी बड़ी चेतावनी इस उपलब्धि ने न केवल बिजनौर प्रशासन का मान बढ़ाया है, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता के नए मानक भी स्थापित किए हैं। नई दिल्ली में भव्य सम्मान समारोह भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा आयोजित 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि थीं। इस वर्ष का विषय (Theme) पिछले वर्षों की तरह मतदाताओं को सशक्त और जागरूक बनाना था। इसी मंच पर देश भर के चुनिंदा अधिकारियों को उनकी 'बेस्ट इलेक्टोरल प्रैक्टिसेज' (Best Electoral Practices) के लिए सम्मानित किया गया, जिनमें बिजनौर की डीएम जसजीत कौर का नाम प्रमुखता से शामिल रहा। प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में पेश की मिसाल जिलाधिकारी जसजीत कौर को यह पुरस्कार विशेष रूप से 'प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण' (Training and Capacity Building) श्रेणी में दिया गया है। निर्वाचन आयोग का मानना है कि एक त्रुटिरहित मतदाता सूची (Error-free Electoral Roll) निष्पक्ष चुनाव की नींव होती है। डीएम जसजीत कौर ने इस सम्मान के बाद बताया कि जिला प्रशासन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को त्रुटिरहित ढंग से लागू करने के लिए एक बहुस्तरीय रणनीति अपनाई थी। उन्होंने कहा, "हमने एक मजबूत प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण ढांचा तैयार किया था, जिसमें केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दक्षता सुनिश्चित की गई।" इस प्रक्रिया की सफलता का मुख्य श्रेय उन्होंने 'अंतर-विभागीय समन्वय' (Inter-departmental coordination) और टीम वर्क को दिया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि शिक्षा, राजस्व और अन्य संबंधित विभाग एक साथ मिलकर काम करें ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। बीएलओ (BLO) को बनाया तकनीक-सक्षम मतदाता सूची पुनरीक्षण की रीढ़ बूथ लेवल अधिकारी (BLO) होते हैं। डीएम जसजीत कौर ने जानकारी दी कि बिजनौर में बीएलओ और पर्यवेक्षकों (Supervisors) को पूरी दक्षता के साथ प्रशिक्षित किया गया। शंका समाधान: प्रशिक्षण सत्रों के दौरान बीएलओ की समस्याओं और शंकाओं का मौके पर ही समाधान किया गया, जिससे फील्ड में कार्य करते समय उन्हें किसी बाधा का सामना न करना पड़े। तकनीकी दक्षता: गरुड़ ऐप (Garuda App) और अन्य डिजिटल टूल्स के उपयोग में उन्हें पारंगत बनाया गया। पारदर्शिता: डीएम ने बताया कि मानव क्षमता में इस केंद्रित निवेश के परिणामस्वरूप 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के कार्य में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित हुई। राजनीतिक दलों के साथ निरंतर संवाद लोकतंत्र में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। डीएम जसजीत कौर ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के कार्य को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए राजनीतिक दलों के साथ लगातार संपर्क और बैठकों का आयोजन किया गया। नियमित अंतरालों पर हुई इन बैठकों में राजनीतिक प्रतिनिधियों को मतदाता सूची में जोड़े गए और हटाए गए नामों की जानकारी दी गई, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सभी का विश्वास बना रहा। प्रशासन की इस पहल से आपत्तियों का त्वरित निस्तारण संभव हो सका। बिजनौर के लिए गर्व का विषय जसजीत कौर, जो 2012 बैच की आईएएस अधिकारी हैं, ने जनवरी 2025 में बिजनौर के डीएम का कार्यभार संभाला था। कार्यभार संभालने के बाद से ही उन्होंने प्रशासनिक दक्षता और जनहित के कार्यों में तेजी दिखाई है। राष्ट्रपति के हाथों मिला यह सम्मान उनकी प्रशासनिक पकड़ और निर्वाचन कार्यों के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा बिजनौर डीएम जसजीत कौर को सम्मानित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासन योजनाबद्ध तरीके से और टीम भावना के साथ काम करता है, तो उसके परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर सराहे जाते हैं। Bijnor DM Jasjeet Kaur का यह सम्मान अन्य जिलों के निर्वाचन अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर मिला यह पुरस्कार इस संकल्प को और मजबूत करता है कि "कोई भी मतदाता न छूटे" (No Voter to be Left Behind)। सारांश: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर नई दिल्ली में बिजनौर की डीएम जसजीत कौर को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण में बीएलओ के बेहतरीन प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए दिया गया। डीएम ने इसे टीम वर्क और सटीक कार्ययोजना का परिणाम बताया है।
उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर के थाना शेरकोट क्षेत्र के मोहल्ला हलवाइयान में आज सुबह उस वक्त कोहराम मच गया, जब एक घर में रखा घरेलू गैस सिलेंडर अचानक बम की तरह फट गया। इस भीषण विस्फोट में न केवल घर की दीवारें और छत ताश के पत्तों की तरह ढह गईं, बल्कि घर में मौजूद एक बुजुर्ग ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई, जिससे आसपास के लोग दहशत में आ गए।READ ALSO:-बिजनौर में 'वर्चस्व' की जंग: बीच सड़क पर भिड़े किन्नरों के दो गुट, जमकर हुई मारपीट; गाड़ी के शीशे तोड़े घटना का विस्तृत विवरण: कैसे हुआ हादसा? 1. गैस लीकेज बनी काल का कारण शुरुआती जांच और चश्मदीदों के अनुसार, घर के रसोई घर में गैस सिलेंडर से रिसाव (Leakage) हो रहा था। माना जा रहा है कि रात भर गैस कमरे में भरती रही और सुबह जैसे ही किसी ने आग जलाने की कोशिश की या बिजली का स्विच ऑन किया, पूरी गैस ने आग पकड़ ली और सिलेंडर फट गया। @Shakeel57767846 बिजनौर में मौत बनकर फटा सिलेंडर: शेरकोट में मलबे के ढेर में तब्दील हुआ घर, धमाके की गूंज से सहमा इलाका, एक बुजुर्ग की दर्दनाक मौत pic.twitter.com/ksUsyrpOkU — MK Vashisth (@vadhisth) January 25, 2026 2. मलबे में तब्दील हुआ आशियाना विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस कमरे में सिलेंडर फटा, उसकी छत पूरी तरह उड़ गई और दीवारें ढह गईं। ईंटें और पत्थर काफी दूर तक जाकर गिरे। आसपास के मकानों में भी दरारें आने की सूचना है। 3. बुजुर्ग की दर्दनाक मौत हादसे के वक्त घर में मौजूद बुजुर्ग सदस्य मलबे की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों ने मलबे से उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतक के परिवार में अब मातम छाया हुआ है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही थाना शेरकोट की पुलिस भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। दमकल विभाग की गाड़ियों को भी अलर्ट किया गया। तफ्तीश जारी: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फॉरेंसिक जांच: फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ब्लास्ट सिलेंडर की गुणवत्ता की कमी से हुआ या रेगुलेटर/पाइप की लापरवाही से। आर्थिक सहायता: प्रशासन के अधिकारी मौके पर नुकसान का आकलन कर रहे हैं ताकि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा मिल सके। आखिर क्यों फटते हैं घरेलू सिलेंडर? सिलेंडर का फटना कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि अक्सर मानवीय चूक या तकनीकी खराबी का परिणाम होता है। यहाँ कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं: अवैध रिफिलिंग और पुराने सिलेंडर अक्सर कई घरों में लोग गैस एजेंसी के बजाय बाहर से अवैध तरीके से सिलेंडर भरवाते हैं। ये सिलेंडर मानक के अनुरूप नहीं होते। साथ ही, सिलेंडर की एक एक्सपायरी डेट होती है जिसे नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। पाइप और रेगुलेटर की अनदेखी रसोई में इस्तेमाल होने वाला रबर पाइप (Suraksha Hose) अगर 2 साल से ज्यादा पुराना है, तो उसमें दरारें आ जाती हैं। गैस इन्हीं सूक्ष्म दरारों से निकलकर कमरे में जमा हो जाती है। हवा का संचार (Ventilation) न होना यदि रसोई छोटी है और वहां खिड़की या एग्जॉस्ट फैन नहीं है, तो गैस लीकेज होने पर वह बाहर नहीं निकल पाती। ऐसी स्थिति में एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े धमाके का कारण बनती है। जीवन रक्षा गाइड: गैस सिलेंडर के साथ सुरक्षा कैसे बरतें? इस तरह के हादसों को रोकने के लिए हमें जागरूक होना पड़ेगा। नीचे दी गई सावधानियों को हर गृहणी और परिवार के सदस्य को जानना चाहिए: A. लीकेज का पता कैसे लगाएं? गंध (Smell): एलपीजी में जानबूझकर 'मर्कैप्टन' मिलाया जाता है ताकि उसकी गंध तेज हो। यदि अजीब गंध आए, तो तुरंत सावधान हों। साबुन का झाग: पाइप या जोड़ों पर साबुन का पानी लगाएं, अगर बुलबुले उठें तो समझें गैस लीक हो रही है। B. सिलेंडर लेते समय क्या देखें? सिलेंडर की गर्दन पर तीन लोहे की पट्टियां होती हैं। उन पर A-26, B-25 जैसे कोड लिखे होते हैं। 'A' का मतलब पहली तिमाही (मार्च तक) और '26' का मतलब साल 2026 है। एक्सपायरी डेट चेक करना कभी न भूलें। C. रात को सोते समय सुरक्षा हमेशा रेगुलेटर का नॉब बंद करके सोएं। एक दुखद सबक शेरकोट की यह घटना दिल दहला देने वाली है। एक बुजुर्ग की जान चली गई और एक परिवार बेघर हो गया। यह हादसा हमें सिखाता है कि घर में सुरक्षा उपकरणों (जैसे फायर अलार्म या अच्छी क्वालिटी का रेगुलेटर) पर खर्च करना फिजूलखर्ची नहीं, बल्कि जीवन बीमा है। प्रशासन को भी चाहिए कि वह क्षेत्र में बिक रहे नकली गैस पाइप और रेगुलेटर के खिलाफ अभियान चलाए।
बिजनौर, डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से अपराध की एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पुलिस महकमे की साख पर बट्टा लगा दिया है। अपराध को रोकने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर थी, वही अपराधियों के साथ मिलकर एक सम्मानित व्यापारी को नोचने की साजिश रच रहे थे। थाना कीरतपुर पुलिस ने एक ऐसे हाई-प्रोफाइल 'हनी ट्रैप' (Honey Trap) गैंग का भंडाफोड़ किया है, जिसमें एक शातिर महिला, दो स्थानीय नेता और खुद पुलिस विभाग के दो सिपाही शामिल थे।Read also:-बिजनौर में 'वर्चस्व' की जंग: बीच सड़क पर भिड़े किन्नरों के दो गुट, जमकर हुई मारपीट; गाड़ी के शीशे तोड़े यह गिरोह लोगों को पहले प्रेम के जाल में फंसाता था, फिर शारीरिक संबंध बनाने के बहाने उनका वीडियो रिकॉर्ड करता था और अंत में पुलिसिया रौब और सियासी धौंस दिखाकर लाखों रुपये की वसूली करता था। इस मामले में एक पेट्रोल पंप मालिक की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी सभासद को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, जबकि महिला और दो सिपाहियों समेत चार आरोपी फरार हैं। #BijnorPolice थाना किरतपुर पुलिस द्वारा मु0अ0सं0 18/2026 धारा 3(5)/61(2)/308(6) बी0एन0एस0 से सम्बन्धित अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया । इस संबंध मे क्षेत्राधिकारी नजीबाबाद की बाइट । #UPPolice pic.twitter.com/LT2FMWHKqE — Bijnor Police (@bijnorpolice) January 24, 2026 कैसे बुना गया साजिश का जाल? (The Modus Operandi) इस पूरी घटना की पटकथा किसी फिल्मी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है। शिकार बने पेट्रोल पंप मालिक के अनुसार, साजिश की शुरुआत जनवरी महीने की शुरुआत में हुई थी। यह वह समय था जब फौजिया (मुख्य आरोपी महिला) ने अपना जाल फेंकना शुरू किया। स्टेप 1: डिजिटल इश्क और मीठी बातें आरोपी महिला फौजिया ने सबसे पहले पेट्रोल पंप मालिक से फोन कॉल और मैसेज के जरिए संपर्क साधा। शुरुआत में सामान्य बातचीत हुई, लेकिन धीरे-धीरे महिला ने अपनी बातों में मिठास घोलनी शुरू कर दी। वह व्यापारी को अपने प्रेम जाल में फंसाने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन देने लगी। अनजान नंबर से शुरू हुई यह दोस्ती कब 'अवैध संबंधों' की नींव बन गई, व्यापारी को इसका अंदाजा भी नहीं लगा। स्टेप 2: होटल का कमरा और वो गलती जब बातचीत गहरी हो गई और विश्वास जीत लिया गया, तो फौजिया ने अपना अगला दांव चला। उसने पेट्रोल पंप मालिक को मिलने के लिए बिजनौर बुलाया। व्यापारी, जो अब तक महिला के आकर्षण में पूरी तरह बंध चुका था, उससे मिलने पहुंच गया। दोनों एक होटल में रुके। आरोप है कि यहीं पर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। लेकिन व्यापारी यह नहीं जानता था कि जिस पल को वह निजी समझ रहा है, उसे एक साजिश के तहत रिकॉर्ड किया जा रहा है। महिला ने चुपके से आपत्तिजनक वीडियो बना लिया, जो बाद में ब्लैकमेलिंग का सबसे बड़ा हथियार बना। खाकी और खादी का गठजोड़: जब रक्षक बने लुटेरे आमतौर पर हनी ट्रैप के मामलों में अपराधी अकेले या अपने गिरोह के साथ काम करते हैं, लेकिन बिजनौर का यह मामला इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि इसमें 'खाकी' (पुलिस) और 'खादी' (नेता) दोनों का गठजोड़ सामने आया है। वीडियो बनने के कुछ दिन बाद ही असली खेल शुरू हुआ। महिला ने अचानक अपना रंग बदल लिया। प्यार भरी बातें धमकियों में बदल गईं। उसने व्यापारी को वीडियो वायरल करने और बलात्कार जैसे गंभीर मुकदमे में फंसाने की धमकी देनी शुरू कर दी। और यहीं एंट्री हुई इस साजिश के अन्य किरदारों की। आरोपियों की सूची: फौजिया: मुख्य सूत्रधार, जिसने प्रेम जाल में फंसाया। आदिल जैदी: किसान यूनियन का सदस्य, जो राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर रहा था। शाहवेज: स्थानीय सभासद (गिरफ्तार), जो मामले को सुलझाने (Settlement) के नाम पर दबाव बना रहा था। सिपाही लालू: थाना कीरतपुर में तैनात पुलिसकर्मी। सिपाही पुनीत त्यागी: थाना कीरतपुर में ही तैनात दूसरा पुलिसकर्मी। वर्दी का डर दिखाकर 10 लाख की डिमांड पीड़ित व्यापारी का आरोप है कि ब्लैकमेलिंग के इस खेल में पुलिसकर्मी लालू और पुनीत त्यागी की भूमिका बेहद डराने वाली थी। इन पुलिसकर्मियों ने कानून का रक्षक होने के बजाय ब्लैकमेलर का साथ दिया। उन्होंने व्यापारी को डराया कि अगर उसने महिला की बात नहीं मानी और पैसे नहीं दिए, तो उसके खिलाफ रेप का केस दर्ज कर उसे जेल में सड़ा दिया जाएगा। समाज में बदनामी और जेल जाने के डर से व्यापारी मानसिक रूप से टूट गया। इस पूरे गैंग ने मामले को रफा-दफा करने के लिए 10 लाख रुपये की मांग (Demand) रख दी। यह रकम समझौते के नाम पर मांगी जा रही थी। इसमें सभासद शाहवेज और किसान यूनियन नेता आदिल जैदी भी बिचौलिये की भूमिका निभाते हुए दबाव बना रहे थे। पीड़ित की हिम्मत और पुलिस कप्तान का एक्शन लगातार मिल रही धमकियों और पैसों की डिमांड से परेशान होकर पेट्रोल पंप मालिक ने अंततः साहस जुटाया। उसे समझ आ गया कि अगर उसने आज पैसे दे भी दिए, तो यह सिलसिला कभी नहीं रुकेगा। वह सीधे जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) के पास पहुंचा और अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि कैसे उसे फंसाया गया है और कैसे खुद पुलिस वाले ही उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने तुरंत नजीबाबाद के क्षेत्राधिकारी (CO) नीतीश प्रताप को जांच सौंपी। चूंकि आरोप पुलिसकर्मियों पर भी थे, इसलिए जांच बेहद निष्पक्षता और गोपनीयता से की गई। सीओ नजीबाबाद का बयान: सीओ नीतीश प्रताप ने बताया, "एसपी महोदय के निर्देश पर हमने प्राथमिक जांच की। जांच में पेट्रोल पंप मालिक द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए गए। तकनीकी सर्विलांस और बयानों के आधार पर पुष्टि हुई कि महिला, दोनों पुलिसकर्मी और राजनीतिक व्यक्ति ब्लैकमेलिंग में शामिल थे। इसके बाद थाना कीरतपुर में सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया गया है।" एक गिरफ्तार, चार फरार: पुलिस की दबिश जारी मुकदमा दर्ज होते ही पुलिस एक्शन में आ गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी सभासद शाहवेज को गिरफ्तार कर लिया है। उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। हालांकि, गिरोह के बाकी चार सदस्य—महिला फौजिया, किसान यूनियन नेता आदिल जैदी, और दोनों आरोपी सिपाही (लालू और पुनीत त्यागी)—अभी फरार हैं। विभाग ने अपने ही दागी सिपाहियों पर भी शिकंजा कस दिया है। माना जा रहा है कि जल्द ही इन दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई (Suspension/Dismissal) भी की जाएगी। उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं जो उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि खाकी वर्दी पहनकर अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। हनी ट्रैप: समाज के लिए एक बड़ा खतरा बिजनौर की यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है। हनी ट्रैप (Honey Trap) आज के डिजिटल दौर में एक संगठित अपराध बन चुका है। अपराधी सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स या फोन कॉल्स के जरिए अमीर और प्रतिष्ठित लोगों (व्यापारी, डॉक्टर, अधिकारी) को निशाना बनाते हैं। कैसे बचें ऐसे जाल से? विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों, विशेषकर विपरीत लिंग के आकर्षक प्रोफाइल से आने वाली फ्रेंड रिक्वेस्ट या मैसेज को लेकर बेहद सतर्क रहना चाहिए। अनजान वीडियो कॉल रिसीव न करें (अक्सर न्यूड वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर लिए जाते हैं)। जल्दबाजी में किसी अनजान व्यक्ति से मिलने होटल या एकांत जगह पर न जाएं। अगर कोई ब्लैकमेल कर रहा है, तो डरें नहीं, सीधे साइबर सेल या पुलिस से संपर्क करें। कीरतपुर थाने का यह मामला साबित करता है कि अपराधी चाहे खाकी वर्दी में हों या खादी कुर्ते में, कानून के हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं। पेट्रोल पंप मालिक की सूझबूझ ने न केवल उसे लुटने से बचाया, बल्कि पुलिस विभाग के अंदर छिपे 'काली भेड़ों' को भी बेनकाब कर दिया। अब देखना यह होगा कि फरार पुलिसकर्मी और मुख्य आरोपी महिला कब तक पुलिस की गिरफ्त में आते हैं। फिलहाल, पूरे जिले में इस हाई-प्रोफाइल ब्लैकमेलिंग कांड की चर्चा जोरों पर है। नोट: यह रिपोर्ट पुलिस द्वारा दी गई जानकारी और दर्ज एफआईआर (FIR) पर आधारित है। पुलिस जांच जारी है और अन्य तथ्यों के सामने आने पर अपडेट किया जाएगा।
बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जिले में वर्चस्व की लड़ाई अब सड़कों पर हिंसक रूप लेती जा रही है। शनिवार शाम थाना हीमपुर दीपा क्षेत्र में दो किन्नर गुटों (Transgender Groups) के बीच पुरानी रंजिश और इलाके के बंटवारे को लेकर जमकर बवाल हुआ। आरोप है कि एक गुट ने दूसरे गुट की गाड़ी का पीछा किया, उसे बीच रास्ते में रोका और जमकर तोड़फोड़ की।READ ALSO:-अलर्ट! ट्रैफिक चालान या टोल टैक्स नहीं भरा तो नेशनल हाईवे पर ड्राइविंग भूल जाएं; सरकार कस रही है नकेल, बजट सत्र में आएगा ऐतिहासिक प्रस्ताव इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। गनीमत रही कि इस झड़प में किसी को गंभीर चोट नहीं आई। #BijnorPolice थाना हीमपुर दीपा क्षेत्रान्तर्गत दो पक्षों के मध्य हुई मारपीट की घटना के संबंध में की जा रही पुलिस कार्यवाही के संबंध में क्षेत्राधिकारी चांदपुर जनपद बिजनौर सर की बाइट । #UPPolice pic.twitter.com/eg9Cw0jE8T — Bijnor Police (@bijnorpolice) January 25, 2026 क्या है पूरा मामला? (Incident Details) पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, घटना 24 जनवरी 2026 की शाम करीब 4:00 बजे की है। पीड़ित लता किन्नर ने थाना हीमपुर दीपा में तहरीर देकर बताया कि वह अपने साथियों के साथ गाड़ी से ग्राम उलेढ़ा और छाछी टीप के बीच से गुजर रही थीं। तभी दूसरे गुट की मुस्कान और शबनम ने अपने साथियों के साथ मिलकर उनकी गाड़ी का पीछा करना शुरू कर दिया। आरोप है कि सुनसान जगह देखकर दूसरे पक्ष ने लता किन्नर की गाड़ी को ओवरटेक करके आगे से घेर लिया और जबरन रोक लिया। सड़क पर तांडव: गाली-गलौज और तोड़फोड़ गाड़ी रुकते ही दूसरे गुट के लोगों ने लता किन्नर और उनके साथियों के साथ अभद्रता शुरू कर दी। मारपीट का आरोप: पीड़ित पक्ष का कहना है कि विरोध करने पर उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। गाड़ी में तोड़फोड़: गुस्साए हमलावरों ने लाठी-डंडों या पत्थरों से हमला कर लता किन्नर की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए। गाड़ी को काफी नुकसान पहुंचाया गया है। पुलिस की कार्रवाई और बयान (Police Action) घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हीमपुर दीपा पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई। क्षेत्रीय अधिकारी (CO) चांदपुर, देश दीपक ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया: "दिनांक 24 जनवरी को शाम 4 बजे लता किन्नर द्वारा सूचना दी गई कि उलेढ़ा और छाछी टीप के बीच मुस्कान और शबनम पक्ष ने उनकी गाड़ी रोककर अभद्रता की और शीशे तोड़ दिए। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रथम दृष्टया किसी को गंभीर चोट नहीं आई है। तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।" इलाके में वर्चस्व की लड़ाई स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह विवाद बधाई मांगने के इलाके (Area Distribution) और वर्चस्व को लेकर है। किन्नर समाज में अक्सर अपने-अपने क्षेत्र को लेकर विवाद होते रहते हैं, जो कभी-कभी हिंसक रूप ले लेते हैं। पुलिस अब यह जांच रही है कि इस हमले के पीछे पुराना विवाद क्या था और क्या इसमें कोई बाहरी तत्व भी शामिल था। वर्तमान स्थिति फिलहाल, पुलिस ने घटनास्थल पर शांति व्यवस्था कायम कर ली है। दोनों पक्षों को थाने बुलाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने दोनों गुटों को सख्त हिदायत दी है कि अगर दोबारा शांति भंग करने की कोशिश की गई, तो कड़ी कार्रवाई होगी। बिजनौर में किन्नर गुटों का यह विवाद प्रशासन के लिए चुनौती है। सार्वजनिक सड़कों पर इस तरह की गुंडागर्दी आम लोगों में भय पैदा करती है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन ऐसे विवादों का स्थायी समाधान निकालना जरूरी है ताकि भविष्य में खूनी संघर्ष को रोका जा सके। बिजनौर के हीमपुर दीपा में 24 जनवरी की शाम लता किन्नर और मुस्कान गुट के बीच वर्चस्व को लेकर झड़प हुई। दूसरे पक्ष ने लता किन्नर की गाड़ी रोककर तोड़फोड़ और मारपीट की। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है; फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। अस्वीकरण: यह रिपोर्ट पुलिस द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी और वादी की तहरीर पर आधारित है। जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।)
बिजनौर (Bijnor): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की चांदपुर तहसील (Chandpur Tehsil) के नूरपुर कस्बे में शनिवार को एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने तूल पकड़ लिया। मौत की खबर मिलते ही मृतका के मायके वालों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने नूरपुर पहुंचकर स्योहारा मार्ग पर जाम लगा दिया।READ ALSO:-मेरठ में खौफनाक कदम: पिता की डांट नहीं सह सका 18 साल का बेटा, गुस्से में अवैध तमंचे से पेट में उतार ली गोली; जिंदगी-मौत की जंग जारी परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या की गई है। हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने भारी मशक्कत और कार्रवाई के आश्वासन के बाद किसी तरह जाम खुलवाया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। क्या है पूरा मामला? (The Incident) जानकारी के मुताबिक, मामला नूरपुर कस्बे के मोहल्ला राम नगर (Mohalla Ram Nagar) का है। यहां रहने वाले मनोज उर्फ राहुल की 30 वर्षीय पत्नी सोनम की शनिवार को मुरादाबाद के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। सोनम की मौत की खबर जैसे ही उसके मायके वालों को मिली, वे आक्रोशित हो उठे। बड़ी संख्या में मायके पक्ष के लोग नूरपुर पहुंच गए और ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और गुस्साए परिजनों ने इंसाफ की मांग को लेकर स्योहारा मार्ग (Syohara Road) पर जाम लगा दिया। सड़क पर जाम लगने से वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गला घोंटने का आरोप और 7 दिन का संघर्ष मृतका के पिता सुरेंद्र सिंह, जो थाना क्षेत्र नांगल के गांव अभिपूरा (Abhipura) के निवासी हैं, ने पुलिस को दी अपनी तहरीर में गंभीर आरोप लगाए हैं। सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी सोनम की शादी करीब पांच साल पहले नूरपुर के राम नगर निवासी रमेश के बेटे मनोज उर्फ राहुल के साथ की थी। पिता का आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग सोनम को परेशान करते थे। आरोप है कि बीते 17 जनवरी को ससुराल वालों ने सोनम का गला दबाकर उसे जान से मारने की कोशिश की। गला दबाने की वजह से सोनम की हालत बेहद नाजुक हो गई थी। उसे गंभीर अवस्था में मुरादाबाद (Moradabad) के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वह पिछले एक हफ्ते से जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही थी। शनिवार को उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इन 5 लोगों के खिलाफ दी तहरीर बेटी की मौत से दुखी पिता सुरेंद्र सिंह ने ससुराल पक्ष के पांच लोगों को नामजद करते हुए पुलिस को तहरीर दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह स्वाभाविक मौत नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है। आरोपियों के नाम: मनोज उर्फ राहुल (पति) कलावती (सास) सुबोध (जेठ) बाबू (जेठ) अलका (जेठानी) परिजनों का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, उन्हें चैन नहीं मिलेगा। इसी मांग को लेकर उन्होंने सड़क पर चक्काजाम किया था। पुलिस का आश्वासन और कार्रवाई जाम की सूचना मिलते ही नूरपुर थाना पुलिस (Nurpur Police) मौके पर पहुंची। पुलिस ने आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर शांत करने का प्रयास किया। काफी देर तक चली बातचीत और पुलिस द्वारा निष्पक्ष जांच व सख्त कार्रवाई के आश्वासन के बाद परिजन माने और जाम खोला गया। पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) ने बताया कि मृतका के पिता की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम (Post Mortem) के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों (Strangulation or other causes) की पुष्टि हो पाएगी, जिसके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। दहेज हत्या या घरेलू कलह? चूंकि शादी को अभी 5 साल ही हुए हैं (7 साल से कम), इसलिए यह मामला 'दहेज मृत्यु' (Dowry Death) की धाराओं के तहत भी जांच के दायरे में आ सकता है। भारतीय दंड संहिता (अब भारतीय न्याय संहिता) के तहत यदि शादी के 7 साल के भीतर किसी विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होती है और उसे प्रताड़ित करने के सबूत मिलते हैं, तो पुलिस सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज करती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों परिवारों के बीच पिछले कुछ समय से अनबन चल रही थी, जिसका दुखद अंत आज सोनम की मौत के रूप में हुआ। बिजनौर के नूरपुर में हुई इस घटना ने एक बार फिर महिला सुरक्षा और ससुराल में होने वाले उत्पीड़न पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने भले ही जाम खुलवाकर स्थिति को नियंत्रित कर लिया है, लेकिन अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच पर टिकी हैं। क्या सोनम को न्याय मिल पाएगा? यह आने वाली पुलिसिया कार्रवाई पर निर्भर करेगा। सारांश: बिजनौर के नूरपुर में 30 वर्षीय विवाहिता सोनम की संदिग्ध मौत के बाद परिजनों ने हत्या का आरोप लगाकर स्योहारा रोड जाम कर दिया। पिता सुरेंद्र सिंह ने पति मनोज, सास, जेठ और जेठानी समेत 5 लोगों पर 17 जनवरी को गला दबाने का आरोप लगाया है। पुलिस के आश्वासन के बाद जाम खुला और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर से एक बेहद शर्मनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया है. जिले के शिवाला कला थाना क्षेत्र में एक ट्यूशन टीचर द्वारा अपनी ही छात्रा के साथ दुष्कर्म (Rape) करने का मामला प्रकाश में आया है. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. Bijnor Crime News में इस घटना के सामने आने के बाद से इलाके में हड़कंप मच गया है और अभिभावकों में रोष व्याप्त है.READ ALSO:-सपनों का दुखद अंत: मेरठ में 'अफसर' बनने की तैयारी कर रहे युवक ने बेडरूम में लगाई फांसी, मौत से पहले लिखा- 'पत्नी और ससुराल वालों ने जीना हराम कर दिया...' क्या है पूरा मामला? (The Incident) घटना शिवाला कला थाना क्षेत्र के ग्राम इनायतपुर की है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी की पहचान सुनील के रूप में हुई है, जो उसी गांव का निवासी है. सुनील गांव के बच्चों को उनके घर जाकर ट्यूशन पढ़ाने का काम करता था. पीड़ित छात्रा के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, घटना 21 जनवरी 2026 की है. #BijnorPolice थाना शिवालाकलां पुलिस द्वारा मु0अ0सं0 09/2026 धारा 65(1) बीएनएस व धारा 3/4(2) पॉक्सो एक्ट में वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। इस संबंध मे क्षेत्राधिकारी चांदपुर की बाइट ।@adgzonebareilly@digmoradabad @dgpup @Uppolice#UPPolice pic.twitter.com/Jn9xCxDCTd — Bijnor Police (@bijnorpolice) January 23, 2026 रोजाना की तरह आरोपी सुनील बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने आया था. ट्यूशन का समय खत्म होने के बाद जब अन्य बच्चे अपने-अपने घर चले गए, तो आरोपी ने छात्रा को अकेला पाकर अपनी हवस का शिकार बना लिया. उसने छात्रा के साथ "गलत कार्य" (दुष्कर्म) किया और मौके का फायदा उठाया. इस घिनौनी करतूत ने न केवल परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि समाज में ट्यूशन जैसे भरोसेमंद पेशे पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस ने दिखाई तत्परता (Police Action) घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित परिवार ने बिना देरी किए पुलिस का दरवाजा खटखटाया. 21 जनवरी 2026 को ही पीड़ित पिता ने शिवाला कला थाने में लिखित तहरीर देकर आरोपी सुनील के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. Bijnor Crime News पर नजर रखने वाले अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत मुकदमा दर्ज किया. पुलिस ने आईपीसी और बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी. पुलिस की एक टीम तुरंत आरोपी की तलाश में जुट गई. सटीक मुखबिरी और पुलिस की सक्रियता के चलते घटना के महज दो दिन के भीतर ही आरोपी को दबोच लिया गया. आरोपी सुनील गिरफ्तार (Accused Arrested) पुलिस की जांच और दबिश के आधार पर आज, 23 जनवरी 2026 को शिवाला कला पुलिस ने आरोपी सुनील को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है. पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में मजबूत चार्जशीट दाखिल करेंगे ताकि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके. अधिकारियों का बयान (Official Statement) इस पूरे मामले पर चांदपुर के क्षेत्राधिकारी (CO) देश दीपक ने आधिकारिक बयान जारी किया है. उन्होंने पुष्टि की कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और विधिक कार्यवाही की जा रही है. बाइट: क्षेत्राधिकारी (CO) चांदपुर, देश दीपक ने बताया, "शिवाला कला क्षेत्र में ट्यूशन पढ़ाने वाले एक युवक पर छात्रा से दुष्कर्म का आरोप लगा था. तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी सुनील को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे जेल भेजा जा रहा है. वर्तमान में क्षेत्र में शांति व्यवस्था पूरी तरह से कायम है." अभिभावकों के लिए चेतावनी (Warning for Parents) यह घटना सभी अभिभावकों के लिए एक सबक भी है. Bijnor Crime News के तहत रिपोर्ट की गई यह घटना बताती है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर हम कितने सतर्क हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि घर पर ट्यूशन पढ़ाने आने वाले शिक्षकों का बैकग्राउंड चेक करना बेहद जरूरी है. साथ ही, बच्चों को 'गुड टच' और 'बैड टच' के बारे में जागरूक करना और उन पर नजर रखना अनिवार्य हो गया है, चाहे शिक्षक कितना भी परिचित क्यों न हो. फिलहाल, शिवाला कला पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखा है और क्षेत्र में शांति बनी हुई है. प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि पीड़ित परिवार को पूरा न्याय मिलेगा. शिवाला कला की यह घटना समाज के गिरते नैतिक स्तर का प्रमाण है. एक शिक्षक, जिसे समाज में पिता तुल्य दर्जा प्राप्त है, जब वही भक्षक बन जाए तो विश्वास किस पर किया जाए? पुलिस ने अपनी भूमिका निभाते हुए आरोपी सुनील को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, लेकिन इस घटना ने कई सवाल पीछे छोड़ दिए हैं. उम्मीद है कि कोर्ट से जल्द से जल्द फैसला आएगा और दोषी को सख्त सजा मिलेगी.
Bijnor Police News: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पुलिस महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एसपी अभिषेक झा (SP Abhishek Jha) ने बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करते हुए 23 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया। इस कार्रवाई में जिले के अलग-अलग थानों में तैनात कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक ने इसे प्रशासनिक और जनहित में लिया गया फैसला बताया है।READ ALSO:-कुदरत का कहर: मेरठ के ऐतिहासिक चर्च पर आकाशीय बिजली गिरने से लगी भीषण आग, 45 मिनट तक सांसें थमीं, बाल-बाल बची जान एसपी की बड़ी कार्रवाई से महकमे में खलबली बिजनौर पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा अपनी सख्त कार्यशैली और जीरो टॉलरेंस नीति के लिए जाने जाते हैं। ताजा आदेश के अनुसार, जिले के विभिन्न थानों में तैनात 23 पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन (Police Lines) भेजा गया है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई पुलिसिंग में सुधार और प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से की गई है। सूत्रों की मानें तो इनमें से कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्य में लापरवाही या शिकायतों की बात भी सामने आ रही थी, जिसके बाद 'जनहित' का हवाला देते हुए यह कदम उठाया गया है। किस थाने से कौन हुआ लाइन हाजिर? (List of Transferred Cops) एसपी कार्यालय द्वारा जारी सूची के अनुसार, लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मियों में नजीबाबाद से लेकर रेहड़ और अफजलगढ़ तक के कर्मी शामिल हैं। यहाँ देखें पूरी लिस्ट: 1. नजीबाबाद और मण्डावली (Najibabad & Mandawali): थाना नजीबाबाद से आरक्षी (Constable) अशोक कुमार और सुनील कसाना को लाइन हाजिर किया गया है। वहीं, मण्डावली थाने से जैकी और मोनू मलिक पर गाज गिरी है। 2. नगीना देहात और बढ़ापुर: नगीना देहात थाने से इसरान चौधरी को पुलिस लाइन भेजा गया है। बढ़ापुर थाने में तैनात मुख्य आरक्षी (Head Constable) प्रवेन्द्र कुमार को भी हटा दिया गया है। 3. नूरपुर और शिवाला कलां: नूरपुर थाने से आरक्षी नरेन्द्र कुमार और अंकित तेवतिया को लाइन हाजिर किया गया है। शिवाला कलां थाने से आरक्षी चालक विनोद का नाम भी इस सूची में शामिल है। 4. रेहड़ और अफजलगढ़ (Rehar & Afzalgarh): रेहड़ थाने से सबसे अधिक चार पुलिसकर्मियों को हटाया गया है, जिनमें रिंकू रावल, हरिवंश वर्मा, ललित कुमार और मुख्य आरक्षी पुरुषोत्तम शामिल हैं। अफजलगढ़ थाने से भी चार कर्मियों—शुभम, मनीष कुमार, सचिन डागर और मुख्य आरक्षी पीयूष को लाइन का रास्ता दिखाया गया है। 5. शेरकोट, नहटौर और हल्दौर: शेरकोट थाने से मुख्य आरक्षी संदीप, नहटौर से सुधीर कुमार और हल्दौर थाने से धर्मेन्द्र कुमार को लाइन हाजिर किया गया है। 6. मण्डावर और पेशी: मण्डावर थाने से उपेन्द्र मलिक और विपिन को हटाया गया है। इसके अलावा, सीओ नगीना की हेड पेशी में तैनात मुख्य आरक्षी विजय कुमार को भी लाइन हाजिर किया गया है। पुलिसिंग में कसावट की तैयारी बिजनौर एसपी (Bijnor SP) द्वारा एक साथ 23 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर करना यह संकेत देता है कि जिले में लचर कानून व्यवस्था या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे पहले भी एसपी अभिषेक झा ने कई थाना प्रभारियों और चौकियों में फेरबदल कर महकमे को चुस्त-दुरुस्त करने का प्रयास किया है। इस थोकबंद कार्रवाई से जिले के अन्य पुलिसकर्मियों में भी संदेश गया है कि परफॉरमेंस और आचरण में कमी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई तय है। फिलहाल, इन रिक्त स्थानों पर नई तैनातियों की सूची जल्द ही जारी की जा सकती है ताकि थानों का कामकाज सुचारू रूप से चल सके। सारांश: बिजनौर एसपी अभिषेक झा ने जिले के विभिन्न थानों से 23 कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल को लाइन हाजिर कर दिया है। इसमें नजीबाबाद, अफजलगढ़ और रेहड़ थाने के पुलिसकर्मी मुख्य रूप से शामिल हैं। यह कार्रवाई प्रशासनिक आधार पर की गई है।
रिपोर्टर/डेस्क, बिजनौर (स्योहारा) बिजनौर जिले के स्योहारा थाना क्षेत्र में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब इलाके से गुजरने वाली बड़ी पोषक नहर में एक अज्ञात युवक का शव तैरता हुआ मिला। पानी में उतराते शव को देखकर राहगीरों और आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।READ ALSO:-बिजनौर नगीना मार्ग पर रफ्तार का कहर: मंझेड़ा शकरू के पास दो बाइकों की आमने-सामने भीषण भिड़ंत, पीआरडी जवान और बाप-बेटा गंभीर रूप से घायल घटना की सूचना मिलते ही स्योहारा पुलिस बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंची और स्थानीय गोताखोरों व ग्रामीणों की मदद से शव को नहर से बाहर निकाला। प्रारंभिक जांच में मृतक की उम्र 30 वर्ष के आसपास आंकी गई है, लेकिन शव के कई दिन पुराने होने के कारण चेहरा स्पष्ट नहीं है, जिससे शिनाख्त में भारी कठिनाई आ रही है। पुलिस ने शव का पंचायतनामा भरकर उसे जिला अस्पताल की मोर्चरी (मुर्दाघर) भेज दिया है। #BijnorPolice थाना स्योहारा क्षेत्रान्तर्गत ग्राम जमालपुर महिपत के पास बडी पोषक नहर में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने पर स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में क्षेत्राधिकारी धामपुर जनपद बिजनौर की बाइट ।#UPPolice pic.twitter.com/qxnAjkiHw6 — Bijnor Police (@bijnorpolice) January 22, 2026 घटना का विस्तृत ब्यौरा: कैसे सामने आया मामला? यह पूरा मामला स्योहारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम जमालपुर महिपत के पास का है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दोपहर के समय कुछ ग्रामीण अपने खेतों की ओर जा रहे थे, तभी उनकी नजर बड़ी पोषक नहर के पानी में तैरती हुई एक संदिग्ध वस्तु पर पड़ी। ध्यान से देखने पर पता चला कि वह एक इंसानी शरीर है। इलाके में मची अफरातफरी जैसे ही नहर में शव होने की खबर गांव में फैली, वहां लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। "नहर में लाश मिली है"—यह खबर आग की तरह पूरे जमालपुर महिपत और आसपास के गांवों में फैल गई। ग्रामीण तरह-तरह की आशंकाएं जताने लगे। कोई इसे हत्या बता रहा था, तो कोई इसे हादसा मान रहा था। मौके पर मौजूद भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। शव की स्थिति और पुलिस की प्रारंभिक जांच सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने सबसे पहले भीड़ को किनारे किया और शव को पानी से बाहर निकलवाया। शव को देखने के बाद पुलिस ने जो प्रारंभिक निरीक्षण (Physical Inspection) किया, उसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं: अनुमानित उम्र: मृतक की शारीरिक बनावट को देखते हुए उसकी उम्र करीब 30 वर्ष प्रतीत हो रही है। शव की अवस्था: पुलिस के मुताबिक, शव काफी फूल चुका है और पानी में रहने के कारण गलने लगा है। शव की स्थिति को देखकर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह 5 से 6 दिन पुराना हो सकता है। चोट के निशान: शरीर के बाहरी हिस्से पर प्रथम दृष्टया (Prima Facie) कोई भी जाहिरा चोट (Visible Injury) या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं। पहचान का संकट: मृतक के पास से कोई भी पहचान पत्र, आधार कार्ड या ऐसा दस्तावेज नहीं मिला है जिससे उसकी तुरंत शिनाख्त हो सके। कपड़े भी पानी और कीचड़ में सने होने के कारण पहचान में ज्यादा मददगार साबित नहीं हो पा रहे हैं। पुलिस की कार्यवाही: पंचायतनामा और पोस्टमार्टम स्योहारा पुलिस ने मौके पर ही शव का पंचायतनामा (Inquest Report) भरने की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद शव को सील करके एंबुलेंस के जरिए बिजनौर जिला अस्पताल स्थित मोर्चरी (Postmortem House) भेज दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम क्यों? पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चूंकि शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं है, इसलिए मौत की असल वजह सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही साफ हो पाएगी। जांच के मुख्य बिंदु ये होंगे: मौत का कारण: क्या मौत डूबने (Drowning) से हुई है या मरने के बाद शव को पानी में फेंका गया है? (Ante-mortem vs Post-mortem drowning). समय: मौत का सटीक समय क्या है? क्या यह वाकई 5-6 दिन पुराना है या उससे अधिक? विषाक्त पदार्थ: विसरा जांच से यह पता चलेगा कि क्या युवक को कोई नशीला पदार्थ या जहर तो नहीं दिया गया था। शिनाख्त के प्रयास: पुलिस के सामने बड़ी चुनौती एक अज्ञात शव की पहचान करना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता, खासकर जब शव पानी में रहने के कारण खराब हो चुका हो। स्योहारा पुलिस ने मृतक की पहचान के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं: वायरल मैसेज और फोटो: शव की तस्वीरें (चेहरा धुंधला करके) आसपास के सभी थानों और सोशल मीडिया ग्रुप्स में भेजी जा रही हैं। गुमशुदगी की रिपोर्ट्स: बिजनौर, मुरादाबाद और अमरोहा जैसे सीमावर्ती जिलों के थानों में दर्ज पिछले 10 दिनों की गुमशुदगी (Missing Person) रिपोर्ट्स को खंगाला जा रहा है। ग्राम प्रधानों से संपर्क: नहर के बहाव की दिशा (Upstream) में आने वाले गांवों के प्रधानों और चौकीदारों से संपर्क किया जा रहा है कि क्या उनके गांव से कोई युवक लापता है। पोशाक और हुलिया: मृतक ने जो कपड़े पहने थे, उनका विवरण सार्वजनिक किया जाएगा ताकि अगर कोई परिजन उसे कपड़ों से पहचान सके तो संपर्क करे। हादसे की आशंका या आपराधिक साजिश? अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह मामला आत्महत्या, दुर्घटना या हत्या का है। पुलिस हर पहलू (Angle) से जांच कर रही है। दुर्घटना (Accident): संभव है कि युवक नहर किनारे पैर फिसलने से गिर गया हो और तैरना न आने के कारण डूब गया हो। चूंकि शव 5-6 दिन पुराना है, हो सकता है वह काफी दूर (पीछे से) बहकर आया हो। आत्महत्या (Suicide): पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या किसी व्यक्ति ने घरेलू कलह या तनाव में आकर नहर में छलांग लगाई थी। हत्या (Murder): हालांकि शरीर पर चोट नहीं है, लेकिन गला घोंटने या जहर देने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अपराधी अक्सर सबूत मिटाने के लिए शव को नहर में फेंक देते हैं ताकि वह बहकर दूर चला जाए और मछलियां या पानी उसे नष्ट कर दें। स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था शव मिलने के बाद से जमालपुर महिपत गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्यवाही के चलते मौके पर शांति व्यवस्था सामान्य बनी हुई है। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अगर किसी को इस हुलिए के लापता व्यक्ति की जानकारी है, तो तुरंत थाने में सूचित करें। पुलिस ने नहर के किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क किया है कि अगर उन्हें कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो पुलिस को बताएं। पुलिस की अपील (Public Appeal) स्योहारा पुलिस ने आम जनता से अपील की है: "यदि किसी के परिवार या परिचित का कोई 30 वर्षीय युवक पिछले एक सप्ताह से लापता है, तो वे तत्काल स्योहारा पुलिस स्टेशन या बिजनौर पुलिस कंट्रोल रूम से संपर्क करें। मृतक की शिनाख्त जांच को सही दिशा देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।" फिलहाल, स्योहारा पुलिस की प्राथमिकता मृतक की पहचान करना और पोस्टमार्टम रिपोर्ट हासिल करना है। जैसे ही पीएम रिपोर्ट आएगी, मौत के असली कारणों से पर्दा उठ जाएगा। तब तक पुलिस गुमशुदगी के रिकॉर्ड्स खंगालने में जुटी है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हमारे आसपास सुरक्षा और सतर्कता कितनी जरूरी है। प्रमुख बिंदु (Key Highlights) विवरण जानकारी घटना स्थल बड़ी पोषक नहर, पास ग्राम जमालपुर महिपत, स्योहारा मृतक अज्ञात पुरुष, उम्र करीब 30 वर्ष शव की स्थिति 5-6 दिन पुराना, कोई जाहिरा चोट नहीं कार्यवाही पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम हेतु बिजनौर भेजा गया जांच की दिशा शिनाख्त, गुमशुदगी रिकॉर्ड्स, पीएम रिपोर्ट माहौल मौके पर शांति, जांच जारी नोट: बिजनौर की इस खबर पर हमारी नजर बनी हुई है। जैसे ही मृतक की पहचान होती है या पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कोई नया खुलासा होता है, हम आपको अपडेट करेंगे।
रिपोर्टर/डेस्क, बिजनौर (नगीना) सड़क पर सरपट दौड़ती गाड़ियाँ अक्सर मंजिल तक पहुँचाने के बजाय मौत के मुहाने तक ले जाती हैं, अगर जरा सी भी चूक हो जाए। कुछ ऐसा ही दिल दहला देने वाला मंजर आज बिजनौर जिले के नगीना क्षेत्र में देखने को मिला। यहाँ नगीना-धामपुर मार्ग पर तेज रफ्तार का जुनून और सड़क की बनावट में छिपा एक तीखा मोड़ तीन जिंदगियों पर भारी पड़ गया।Read also:-भारत की अब तक की सबसे 'हाई-टेक' जनगणना का शंखनाद: 2027 में गिना जाएगा हर सिर और हर घर; पहली बार जातियों का भी होगा डेटाबेस, 33 सवालों में कैद होगी देश की तस्वीर मंझेड़ा शकरू गांव के पास दो बाइकों की आमने-सामने की इतनी जबरदस्त भिड़ंत हुई कि देखने वालों की रूह कांप गई। इस दर्दनाक हादसे में कस्तूरबा गांधी विद्यालय में तैनात एक पीआरडी (PRD) जवान और एक पिता-पुत्र की जोड़ी गंभीर रूप से घायल हो गई है। घायलों की हालत इतनी नाज़ुक थी कि स्थानीय डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद हाथ खड़े कर दिए और उन्हें तत्काल जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना का विस्तृत विवरण: कब और कैसे हुआ यह हादसा? यह पूरी घटना नगीना-धामपुर स्टेट हाईवे पर स्थित मंझेड़ा शकरू गांव के समीप की है। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दोपहर के वक्त यातायात सामान्य रूप से चल रहा था। तभी विपरीत दिशाओं से आ रही दो बाइकें अचानक एक तीखे मोड़ (Sharp Turn) पर आमने-सामने आ गईं। तेज रफ्तार बनी काल बताया जा रहा है कि दोनों ही बाइकों की गति सामान्य से काफी अधिक थी। सड़क पर अचानक आए मोड़ के कारण दोनों बाइक चालक अपने वाहनों पर से नियंत्रण खो बैठे। इससे पहले कि वे ब्रेक लगाते या संभल पाते, दोनों बाइकों में जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग और सड़क किनारे मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके की ओर दौड़ पड़े। सड़क पर बिखरे बाइक के परखच्चे, खून के धब्बे और घायलों की चीख-पुकार ने वहां के माहौल को गमगीन कर दिया। दोनों बाइकें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं, जो टक्कर की भयावहता को बयां कर रही थीं। घायलों की पहचान और उनकी स्थिति इस हादसे में कुल तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है: (क) पीर बख्श खान (पीआरडी जवान) पहले घायल की पहचान पीर बख्श खान के रूप में हुई है। पीर बख्श प्रांतीय रक्षक दल (PRD) के जवान हैं और वर्तमान में उनकी तैनाती कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में सुरक्षा गार्ड के रूप में है। बताया जा रहा है कि वे अपने किसी निजी कार्य या ड्यूटी के सिलसिले में बाइक से जा रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। पीर बख्श खान को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। (ख) खुशीराम और विपिन (पिता-पुत्र) दूसरी बाइक पर सवार खुशीराम और उनके युवा पुत्र विपिन थे। यह बाप-बेटे की जोड़ी किसी पारिवारिक काम से निकली थी, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह सफर उनके लिए इतना कष्टकारी साबित होगा। टक्कर में दोनों पिता-पुत्र सड़क पर जा गिरे। विपिन (पुत्र): विपिन की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है। सिर में चोट लगने और अधिक खून बह जाने के कारण उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। खुशीराम (पिता): खुशीराम भी बुरी तरह जख्मी हैं और अचेत अवस्था में अस्पताल पहुंचाए गए। देवदूत बने राहगीर और टोल प्लाजा एंबुलेंस की भूमिका सड़क हादसों में अक्सर देखा जाता है कि लोग वीडियो बनाने में व्यस्त हो जाते हैं, लेकिन नगीना-धामपुर मार्ग पर आज इंसानियत जिंदा दिखाई दी। हादसे के तुरंत बाद वहां से गुजर रहे राहगीरों और मंझेड़ा शकरू गांव के निवासियों ने तमाशबीन बनने के बजाय मदद का हाथ बढ़ाया। त्वरित कार्यवाही (Rapid Response) भीड़ का जुटना: स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को सड़क के बीच से हटाकर किनारे किया ताकि कोई और वाहन उन्हें कुचल न दे। एंबुलेंस को सूचना: राहगीरों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत टोल प्लाजा की एंबुलेंस सेवा और पुलिस को सूचित किया। अस्पताल रवानगी: सूचना मिलते ही टोल प्लाजा की एंबुलेंस मौके पर पहुंची। बिना एक पल गंवाए, तीनों घायलों (पीर बख्श, खुशीराम, और विपिन) को एंबुलेंस में लादा गया और नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया गया। मेडिकल अपडेट: जिला अस्पताल रेफर स्थानीय अस्पताल में डॉक्टरों ने घायलों की प्रारंभिक जांच की। उन्होंने पाया कि चोटें बहुत गहरी हैं और आंतरिक रक्तस्राव (Internal Bleeding) का खतरा है। विशेष रूप से खुशीराम और उनके बेटे विपिन की गिरती पल्स रेट और गंभीर हेड इंजरी को देखते हुए, डॉक्टरों ने उन्हें वहां रखना उचित नहीं समझा। प्राथमिक उपचार (First Aid) देने के बाद, डॉक्टरों ने तीनों घायलों को बिजनौर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। ताजा जानकारी मिलने तक, जिला अस्पताल में उनका इलाज जारी है और वे डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे ईश्वर से अपनों की सलामती की दुआ मांग रहे हैं। हादसे की मुख्य वजह इस दर्दनाक हादसे के पीछे दो प्रमुख कारण निकलकर सामने आ रहे हैं, जो अक्सर इस मार्ग पर दुर्घटनाओं की वजह बनते हैं: (क) ब्लाइंड टर्न (Blind Turn) और सड़क की बनावट मंझेड़ा शकरू गांव के पास सड़क पर एक ऐसा मोड़ है जहां सामने से आ रहा वाहन अक्सर दिखाई नहीं देता। इसे तकनीकी भाषा में 'ब्लाइंड टर्न' कहा जाता है। प्रशासन द्वारा वहां संकेतक (Signboards) लगाए जाने के बावजूद, अक्सर चालक इसे नजरअंदाज कर देते हैं। आज के हादसे में भी यही हुआ—मोड़ पर दृश्यता (Visibility) कम थी और प्रतिक्रिया का समय (Reaction Time) नहीं मिला। (ख) अनियंत्रित रफ्तार (Over-speeding) प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों बाइकों की रफ्तार 60-70 किमी प्रति घंटा से अधिक रही होगी। जब वाहन तेज गति में होता है, तो अचानक ब्रेक लगाने पर वह स्किड (फिसल) कर जाता है। मोड़ पर सेंट्रीफ्यूगल फोर्स (Centrifugal Force) के कारण तेज रफ्तार वाहन अक्सर अपनी लेन छोड़कर दूसरी लेन में चले जाते हैं, जो आज भी आमने-सामने की टक्कर का कारण बना। पीआरडी (PRD) जवानों की भूमिका और जोखिम इस हादसे में एक पीआरडी जवान का घायल होना विभाग के लिए भी चिंता का विषय है। प्रांतीय रक्षक दल (PRD) के जवान पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कानून व्यवस्था और सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। पीर बख्श खान जैसे जवान कस्तूरबा गांधी विद्यालयों जैसे संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा का जिम्मा संभालते हैं। इन जवानों का जीवन अक्सर भागदौड़ भरा होता है। ड्यूटी पर समय से पहुँचने का दबाव और सीमित संसाधनों के बीच वे अपनी सेवाएं देते हैं। इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सड़क पर वर्दी हो या आम आदमी, खतरा सबके लिए बराबर है। नगीना-धामपुर मार्ग: 'एक्सीडेंट जोन' बनता जा रहा है? स्थानीय निवासियों ने बताया कि नगीना और धामपुर के बीच का यह रोड अब हादसों का गढ़ बनता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में यहाँ कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। सड़क की चौड़ाई: कई जगहों पर सड़क की पटरियां टूटी हुई हैं, जिससे वाहनों को पास लेने में दिक्कत होती है। अतिक्रमण: मंझेड़ा जैसे गांवों के पास सड़क किनारे अतिक्रमण भी हादसों को न्योता देता है। जागरूकता की कमी: ग्रामीण क्षेत्रों में हेलमेट न पहनना और ट्रिपलिंग (तीन सवारी) करना आम बात है, हालांकि पुलिस समय-समय पर अभियान चलाती है। प्रशासन और पुलिस की कार्यवाही हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों (बाइकों) को कब्जे में ले लिया है ताकि यातायात बाधित न हो। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या कोई वाहन गलत दिशा (Wrong Side) से आ रहा था। परिजनों को सूचित कर दिया गया है और पुलिस की एक टीम जिला अस्पताल में घायलों के बयान दर्ज करने का प्रयास कर रही है (यदि वे होश में हों)। आगे की विधिक कार्यवाही तहरीर मिलने और जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। सड़क सुरक्षा: सबक और अपील यह हादसा हम सभी के लिए एक चेतावनी है। "सावधानी हटी, दुर्घटना घटी"—यह मुहावरा पुराना जरूर है, लेकिन आज भी उतना ही प्रासंगिक है। इस घटना से हमें निम्नलिखित सबक लेने चाहिए: मोड़ पर गति धीमी रखें: जब भी सड़क पर कोई मोड़ आए, वाहन की गति अनिवार्य रूप से कम करें और हॉर्न का प्रयोग करें। हेलमेट है जीवन रक्षक: दोपहिया वाहन चलाते समय आईएसआई (ISI) मार्क वाला हेलमेट जरूर पहनें। यह सिर की चोट से बचाता है, जो अक्सर जानलेवा साबित होती है। आज अगर घायलों ने अच्छी गुणवत्ता का हेलमेट पहना होता, तो शायद चोट की गंभीरता कम होती। लेन ड्राइविंग (Lane Driving): अपनी ही लेन में चलें, विशेषकर मोड़ पर ओवरटेक करने की कोशिश बिल्कुल न करें। सतर्कता: सड़क पर चलते समय यह मानकर चलें कि सामने वाला गलती कर सकता है, इसलिए आप अपनी सुरक्षा के लिए तैयार रहें। एक दुखद दिन, दुआओं की जरूरत नगीना का यह हादसा एक बार फिर कई सवाल छोड़ गया है। एक तरफ जहां पीर बख्श खान, खुशीराम और विपिन जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। प्रशासन को भी चाहिए कि मंझेड़ा शकरू गांव के पास उस खतरनाक मोड़ पर रंबल स्ट्रिप्स (Rumble Strips) या स्पीड ब्रेकर लगवाए और चेतावनी बोर्ड को और स्पष्ट करे। फिलहाल, पूरा क्षेत्र इन घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहा है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों की टीम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही है। उम्मीद है कि वे जल्द ही खतरे से बाहर होंगे और अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे। प्रमुख बिंदु (Key Highlights at a Glance) विवरण जानकारी घटना स्थल नगीना-धामपुर मार्ग, मंझेड़ा शकरू गांव के पास हादसे का प्रकार दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत घायल (1) पीर बख्श खान (PRD जवान, कस्तूरबा गांधी विद्यालय) घायल (2 & 3) खुशीराम और उनके पुत्र विपिन (हालत गंभीर) वजह तेज रफ्तार और तीखा मोड़ रेस्क्यू राहगीरों और टोल प्लाजा एंबुलेंस द्वारा वर्तमान स्थिति सभी घायल जिला अस्पताल रेफर नोट: बिजनौर और आसपास की हर छोटी-बड़ी खबर सबसे पहले और विस्तार से पढ़ने के लिए हमारे साथ बने रहें। हम घायलों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और जैसे ही कोई नया अपडेट मिलेगा, हम आपको सूचित करेंगे।
बिजनौर (चांदपुर): कहते हैं कि विश्वास किसी भी रिश्ते की नींव होती है, लेकिन जब वही विश्वास धोखे और लालच की भेंट चढ़ जाए, तो परिणाम बेहद खौफनाक होते हैं। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर कस्बे में एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) की स्याह सच्चाई को उजागर कर दिया है।Read also:-बिजनौर एक्सक्लूसिव: शहनाई गूंजने से पहले मातम में बदली खुशियां, दूसरे समुदाय के युवक संग युवती के फरार होने पर सुलग उठा नूरपुर एक फाइनेंस कंपनी के फील्ड ऑफिसर की संदिग्ध मौत, जिसे पहले आत्महत्या बताकर रफा-दफा करने की कोशिश की गई, पुलिस की पैनी नजर और आधुनिक तकनीक के सामने टिक न सकी। मात्र 72 घंटों के भीतर चांदपुर पुलिस ने न केवल इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाई, बल्कि उस चेहरे को भी बेनकाब कर दिया जिसके साथ मृतक ने जीवन बिताने के सपने देखे थे। वह मनहूस तारीख - 18 जनवरी की घटना चांदपुर थाना क्षेत्र के नेहरू चौक स्थित ललता बिल्डिंग। यह वही इमारत है जहां हरिओम सिंह (32 वर्ष) और उसकी लिव-इन पार्टनर शीतल (26 वर्ष) पिछले दो वर्षों से साथ रह रहे थे। बाहर से सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन इमारत की दीवारों के भीतर एक खूनी साजिश को अंजाम दिया जा चुका था। #BijnorPolice थाना चांदपुर पुलिस द्वारा मु0अ0सं0 39/26 धारा 103(1) बीएनएस से संबंधित 01 अभियुक्ता को गिरफ्तार किया गया।#UPPolice @dgpup@Uppolice@adgzonebareilly@digmoradabad pic.twitter.com/dWXdvQcQFX — Bijnor Police (@bijnorpolice) January 21, 2026 18 जनवरी की तारीख। दोपहर का वक्त। अचानक खबर फैलती है कि हरिओम सिंह की तबीयत बहुत खराब है या उसने कुछ कर लिया है। आनन-फानन में उसे गंभीर अवस्था में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) चांदपुर ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों की टीम ने उसकी जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हरिओम की सांसें थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में रोना-धोना मचा था। पहली नजर में यह मामला आत्महत्या (Suicide) का लग रहा था। बताया गया कि हरिओम ने फांसी लगाकर या किसी अन्य तरीके से अपनी जान दी है। आरोपी पार्टनर शीतल वहां मौजूद थी, शायद दुनिया को दिखाने के लिए गमगीन भी थी, लेकिन उसकी आंखों के पीछे का सच कुछ और ही था। संदेह के बीज और पुलिस की एंट्री हर अपराध अपने पीछे कोई न कोई निशान जरूर छोड़ता है। हरिओम की मौत के बाद जब खबर उसके परिजनों तक पहुंची, तो कोहराम मच गया। हरिओम एक सुलझा हुआ इंसान था और एक फाइनेंस कंपनी में फील्ड ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। उसके परिजनों, विशेषकर उसके चचेरे भाई को यह बात हजम नहीं हो रही थी कि हरिओम आत्महत्या कर सकता है। हरिओम के चचेरे भाई ने पुलिस के सामने कुछ अहम सवाल उठाए: हरिओम आत्महत्या क्यों करेगा जब सब कुछ ठीक चल रहा था? उसके शरीर पर मौजूद निशानों का सच क्या है? घटना के वक्त कमरे में सिर्फ शीतल ही क्यों मौजूद थी? इन सवालों ने चांदपुर पुलिस को सोचने पर मजबूर कर दिया। मृतक के भाई की तहरीर पर पुलिस ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू की। यहीं से कहानी ने एक नया मोड़ लिया। जिसे अब तक 'आत्महत्या' माना जा रहा था, वह अब 'हत्या' (Murder) की जांच में तब्दील हो चुका था। 72 घंटे का 'ऑपरेशन ट्रुथ' (Operation Truth) चांदपुर थाना प्रभारी अमित कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया। पुलिस के सामने चुनौती थी—बिना किसी चश्मदीद गवाह के इस केस को सुलझाना। पुलिस के पास सिर्फ एक संदिग्ध महिला थी और एक लाश। पुलिस ने अपनी जांच को तीन प्रमुख दिशाओं में बांटा: फोरेंसिक जांच: घटना स्थल का मुआयना। मेडिकल रिपोर्ट: पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विश्लेषण। डिजिटल सर्विलांस (सबसे अहम कड़ी): मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और चैट हिस्ट्री। डिजिटल सबूतों ने खोली पोल पुलिस ने जब हरिओम और शीतल के मोबाइल फोन को खंगालना शुरू किया, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। कॉल डिटेल्स (CDR): घटना के समय और उससे पहले की कॉल डिटेल्स ने यह इशारा किया कि दोनों के बीच सामान्य बातचीत नहीं, बल्कि तनावपूर्ण स्थिति थी। व्हाट्सएप चैट: पुलिस को दोनों के बीच हुई चैटिंग में झगड़े, पैसों के लेन-देन को लेकर बहस और धमकियों के सबूत मिले। ये चैट इस बात की गवाही दे रहे थे कि उनका रिश्ता पिछले कुछ समय से बेहद जहरीला (Toxic) हो चुका था। लोकेशन ट्रेस: तकनीकी साक्ष्यों ने पुष्टि की कि घटना के वक्त शीतल और हरिओम एक ही स्थान पर थे और वहां कोई तीसरा व्यक्ति मौजूद नहीं था। पूछताछ और कबूलनामा - "हां, मैंने ही मारा है" तकनीकी साक्ष्यों को आधार बनाकर पुलिस ने शीतल को हिरासत में लिया। शुरुआत में शीतल ने पुलिस को गुमराह करने की बहुत कोशिश की। उसने कभी इसे आत्महत्या बताया, तो कभी एक्सीडेंट। वह लगातार अपने बयानों को बदल रही थी, जो पुलिस के शक को यकीन में बदल रहा था। पुलिस ने जब उसके सामने कॉल रिकॉर्ड्स और झगड़े के सबूत रखे, तो वह टूट गई। सख्ती से की गई पूछताछ में शीतल ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। शीतल ने पुलिस को बताया: "हम दोनों के बीच पिछले काफी समय से पैसों को लेकर विवाद चल रहा था। हरिओम और मेरे बीच झगड़े आम हो गए थे। उस दिन भी हमारे बीच भारी विवाद हुआ। गुस्से और आवेश में आकर मैंने यह कदम उठाया और फिर डर के मारे इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की ताकि मैं बच सकूं।" पुलिस ने शीतल की निशानदेही पर दो महंगे मोबाइल फोन भी बरामद किए। इनमें से एक फोन मृतक हरिओम का था जिसे शीतल ने घटना के बाद छिपा दिया था, ताकि पुलिस को कोई सुराग न मिल सके। यह बरामदगी इस केस में सबसे बड़ा सबूत साबित हुई। हत्या की असली वजह - पैसा और विवाद इस हत्याकांड की तह में जाने पर पता चला कि यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं था, बल्कि धीरे-धीरे पनप रही नफरत का परिणाम था। लिव-इन रिलेशनशिप का तनाव: हरिओम और शीतल पिछले दो साल से लिव-इन में थे। शुरू में सब ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे जिम्मेदारियों और उम्मीदों का बोझ रिश्ते को कुचलने लगा। आर्थिक विवाद (Financial Dispute): पुलिस जांच में सामने आया है कि हरिओम एक फाइनेंस कंपनी में था, इसलिए पैसों का लेन-देन उसके जीवन का हिस्सा था। शीतल और हरिओम के बीच कुछ पर्सनल लोन या घरेलू खर्चों को लेकर भारी अनबन चल रही थी। विश्वासघात: आपसी शक और संवाद की कमी ने इस रिश्ते को उस मुकाम पर ला खड़ा किया जहां एक ने दूसरे की जान ले ली। लिव-इन रिलेशनशिप और अपराध का बढ़ता ग्राफ बिजनौर की यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में देश भर में लिव-इन रिलेशनशिप में होने वाले अपराधों में चिंताजनक वृद्धि हुई है। चाहे वह दिल्ली का श्रद्धा वॉल्कर केस हो या निक्की यादव हत्याकांड, इन मामलों ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण: सामाजिक दबाव का अभाव: लिव-इन में रहने वाले जोड़े अक्सर अपने परिवारों से कटे होते हैं। ऐसे में जब उनके बीच विवाद होता है, तो मध्यस्थता करने वाला कोई नहीं होता। हरिओम और शीतल के केस में भी शायद यही हुआ। कानूनी जागरूकता की कमी: कई बार पार्टनर को लगता है कि वे कानून की पकड़ से दूर हैं, लेकिन बिजनौर पुलिस ने 72 घंटे में खुलासा करके यह सिद्ध कर दिया कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। पुलिस की तत्परता और विधिक कार्रवाई इस मामले में बिजनौर पुलिस, विशेषकर थाना चांदपुर की भूमिका सराहनीय रही। त्वरित कार्रवाई: 18 जनवरी को मौत और 21-22 जनवरी तक केस का खुलासा। 72 घंटे के भीतर फाइल क्लोज करना पुलिस की दक्षता दर्शाता है। गिरफ्तारी: थाना प्रभारी अमित कुमार ने पुष्टि की है कि आरोपी शीतल को गिरफ्तार कर लिया गया है। न्यायालय में पेशी: आरोपी को सक्षम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू की गई। धाराएं: पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) या नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें हत्या (302) और साक्ष्य मिटाने (201) जैसी गंभीर धाराएं शामिल हो सकती हैं। क्या सीखा हमने? हरिओम सिंह की मौत सिर्फ एक क्राइम फाइल का नंबर नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है। यह घटना हमें सिखाती है कि: रिश्तों में पारदर्शिता और संयम कितना जरूरी है। क्रोध क्षण भर का होता है, लेकिन उसका परिणाम जीवन भर भुगतना पड़ता है। अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, 'परफेक्ट क्राइम' जैसा कुछ नहीं होता। आज हरिओम इस दुनिया में नहीं है और शीतल सलाखों के पीछे है। दो साल का रिश्ता दो जिंदगियों की बर्बादी पर खत्म हुआ। बिजनौर पुलिस का यह खुलासा उन सभी अपराधियों के लिए एक सबक है जो सोचते हैं कि वे हत्या को आत्महत्या का रूप देकर कानून की आंखों में धूल झोंक सकते हैं। महत्वपूर्ण जानकारी (Key Highlights Box) विवरण जानकारी मृतक का नाम हरिओम सिंह (32 वर्ष) आरोपी का नाम शीतल (26 वर्ष) - लिव-इन पार्टनर स्थान ललता बिल्डिंग, नेहरू चौक, चांदपुर (बिजनौर) पेशा फाइनेंस कंपनी फील्ड ऑफिसर घटना की तारीख 18 जनवरी केस सुलझने का समय 72 घंटे हत्या का कारण आपसी विवाद और पैसों का लेन-देन मुख्य सबूत मोबाइल कॉल डिटेल (CDR), व्हाट्सएप चैट पुलिस स्टेशन थाना चांदपुर, बिजनौर
बिजनौर न्यूज (Bijnor News): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बेहद संवेदनशील और सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के नूरपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव कुंडा खुर्द में बुधवार की सुबह एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। यहां एक युवती अपनी सगाई से ठीक एक दिन पहले संदिग्ध परिस्थितियों में घर से लापता हो गई। बताया जा रहा है कि युवती दूसरे समुदाय (धर्म) के एक युवक के साथ फरार हुई है। मामला दो अलग-अलग धर्मों से जुड़ा होने के कारण गांव में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। घटना से आक्रोशित दलित समाज के लोगों ने सड़क पर उतरकर जाम लगा दिया, जिसके बाद पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।READ ALSO:-मेरठ में 'पूजा' का रहस्य: 17 साल से लापता युवती के पोस्टरों से पटा दिल्ली रोड, 'अरुण बिजनौर' कौन? पुलिस के लिए बनी पहेली यह घटना न केवल एक परिवार की प्रतिष्ठा से जुड़ी है, बल्कि इसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अक्सर देखने को मिलने वाली सांप्रदायिक संवेदनशीलता को भी उजागर कर दिया है। Khabreelal न्यूज की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको घटना की तह तक ले जाएंगे और बताएंगे कि आखिर बुधवार की सुबह कुंडा खुर्द में क्या हुआ था। सगाई से एक दिन पहले टूटे परिवार के सपने घटना की गंभीरता को समझने के लिए इसके समय (Timing) पर गौर करना बेहद जरूरी है। पीड़ित परिवार में खुशियों का माहौल था। घर में शादी के गीत गाए जा रहे थे और रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ था। युवती की सगाई गुरुवार (घटना के अगले दिन) को होनी तय थी। हलवाई से लेकर टेंट तक, सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। लेकिन बुधवार की सुबह, जब परिवार वाले अपनी तैयारियों में व्यस्त थे, तभी उन्हें पता चला कि युवती घर पर नहीं है। काफी खोजबीन के बाद जब युवती का कहीं पता नहीं चला, तो शक की सुई गांव के ही दूसरे समुदाय के एक युवक पर गई, जो उसी समय से गायब था। Knabreelal न्यूज के सूत्रों के अनुसार, परिजनों का आरोप है कि दूसरे धर्म का युवक उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। यह खबर परिवार के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं थी। सगाई के लिए घर में रखे गए गहने, कीमती कपड़े और कुछ नकदी के भी गायब होने की आशंका जताई जा रही है। एक पिता के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है कि जिस दिन घर में बेटी की सगाई की शहनाई बजनी थी, उस दिन पुलिस की गाड़ियां सायरन बजा रही थीं। दलित समाज का फूटा गुस्सा, नूरपुर मार्ग पर चक्का जाम जैसे ही यह खबर गांव में फैली कि मामला "लव जिहाद" या अंतर-धार्मिक (Inter-faith) प्रेम प्रसंग से जुड़ा हो सकता है, लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। पीड़ित परिवार दलित समाज से आता है, इसलिए देखते ही देखते भीम आर्मी और दलित समाज के सैकड़ों लोग एकजुट हो गए। युवती की तत्काल बरामदगी और आरोपी युवक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर भीड़ सड़क पर उतर आई। आक्रोशित ग्रामीणों ने नूरपुर मुख्य मार्ग पर पेड़ की डालियां और पत्थर रखकर जाम लगा दिया। यातायात हुआ ठप: जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्कूल बसें, एम्बुलेंस और आम राहगीर करीब डेढ़ घंटे तक इस जाम में फंसे रहे। नारेबाजी: प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि इलाके में दूसरे समुदाय के युवकों द्वारा हिंदू बेटियों को निशाना बनाया जा रहा है और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। एक प्रदर्शनकारी ने बिजनौर न्यूज से बातचीत में कहा, "हमारी बेटियों की सुरक्षा खतरे में है। कल सगाई थी और आज वह गायब है। पुलिस अगर आज शाम तक उसे ढूंढकर नहीं लाती, तो हम और बड़ा आंदोलन करेंगे। हम चुप नहीं बैठेंगे।" पुलिस की सूझबूझ और डेढ़ घंटे की मशक्कत घटना की सूचना मिलते ही नूरपुर थाना प्रभारी (SHO) अपनी पूरी टीम और भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति को बिगड़ता देख उन्होंने तुरंत उच्चाधिकारियों को सूचित किया और अतिरिक्त पुलिस बल (PAC) की मांग की। पुलिस के लिए यह स्थिति "दोधारी तलवार" पर चलने जैसी थी। एक तरफ आक्रोशित भीड़ थी जिसे शांत करना था, और दूसरी तरफ दो समुदायों के बीच संभावित टकराव को रोकना था। वार्ता का दौर: पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी नेताओं और पीड़ित परिवार के बड़ों से बात की। ठोस आश्वासन: पुलिस ने लिखित और मौखिक आश्वासन दिया कि युवती की तलाश के लिए 'सर्विलांस टीम' और 'स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप' (SOG) की कई टीमें गठित कर दी गई हैं। लोकेशन ट्रेसिंग: पुलिस ने जानकारी दी कि आरोपी और युवती के मोबाइल नंबरों की लोकेशन ट्रेस की जा रही है और पुलिस उनके बेहद करीब है। पुलिस ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि 24 घंटे के भीतर युवती को सुरक्षित बरामद कर लिया जाएगा। पुलिस के इस समझाने-बुझाने और ठोस कार्रवाई के वादे के बाद करीब डेढ़ घंटे बाद जाम खोला गया। गांव बना पुलिस छावनी: वर्तमान स्थिति जाम भले ही खुल गया हो, लेकिन गांव कुंडा खुर्द में तनाव अब भी बरकरार है। किसी भी तरह की अप्रिय घटना, आगजनी या हिंसा को रोकने के लिए गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। LIU सक्रिय: स्थानीय खुफिया इकाई (Local Intelligence Unit) के सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी गांव में हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं ताकि कोई शरारती तत्व अफवाह फैलाकर माहौल खराब न कर सके। फ्लैग मार्च: पुलिस ने शाम को गांव में फ्लैग मार्च भी निकाला ताकि आम जनता में सुरक्षा की भावना बनी रहे और अपराधियों में भय पैदा हो। Khabreelal न्यूज को मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने दोनों समुदायों के प्रबुद्ध और जिम्मेदार नागरिकों के साथ एक शांति समिति की बैठक भी की है। इसमें सभी से अपील की गई है कि वे कानून को अपने हाथ में न लें और पुलिस की जांच पर भरोसा रखें। कानूनी कार्रवाई और पुलिस की रणनीति नूरपुर पुलिस ने पीड़ित पिता की तहरीर पर आरोपी युवक के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया है। चूंकि मामला दलित युवती से जुड़ा है, इसलिए इसमें एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। पुलिस की जांच अब तीन दिशाओं में चल रही है: तकनीकी सर्विलांस: कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और आईपी एड्रेस के जरिए लोकेशन का पता लगाना। रिश्तेदारों से पूछताछ: आरोपी युवक के रिश्तेदारों और दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है ताकि उसके संभावित ठिकानों का पता चल सके। दबिश: पुलिस की टीमें बिजनौर के अलावा आसपास के जिलों जैसे मुरादाबाद और अमरोहा में भी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। सामाजिक पहलू: विश्वास का संकट इस तरह की घटनाएं समाज के सामाजिक ताने-बाने को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। एक तरफ जहां अंतर्जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह कानूनन मान्य हैं, वहीं सामाजिक रूप से, विशेषकर ग्रामीण परिवेश में, इसे स्वीकार करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। जब कोई युवती अपनी सगाई या शादी से ठीक पहले भागती है, तो यह न केवल उसके परिवार के लिए अपमान का कारण बनता है, बल्कि पूरे समाज में अविश्वास की खाई को और गहरा कर देता है। बिजनौर के नूरपुर में हुई यह घटना कानून व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव दोनों के लिए एक परीक्षा की घड़ी है। Khabreelal न्यूज का उद्देश्य इस खबर के माध्यम से आपको न केवल सूचित करना है, बल्कि स्थिति की संवेदनशीलता से भी अवगत कराना है। फिलहाल, पुलिस प्रशासन पूरी मुस्तैदी से युवती की बरामदगी में जुटा हुआ है। सगाई वाले दिन ही घर से भागने का यह फैसला युवती ने अपनी मर्जी से लिया या किसी दबाव में, यह तो पुलिस जांच और युवती के बयान के बाद ही साफ हो पाएगा। लेकिन तब तक, गांव कुंडा खुर्द में शांति बनाए रखना प्रशासन और ग्रामीणों दोनों की जिम्मेदारी है। बुधवार की सुबह बिजनौर के नूरपुर थाना क्षेत्र के गांव कुंडा खुर्द से एक युवती, जिसकी गुरुवार को सगाई होनी थी, दूसरे समुदाय के प्रेमी के साथ फरार हो गई। इससे नाराज दलित समाज ने नूरपुर मार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया और डेढ़ घंटे बाद जाम खुलवाया। फिलहाल गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस फोर्स तैनात है और मामले की जांच जारी है। प्रमुख बिंदु (Key Highlights at a Glance) विवरण जानकारी घटना स्थल ग्राम कुंडा खुर्द, थाना नूरपुर, जिला बिजनौर घटना का समय बुधवार सुबह (सगाई से 24 घंटे पूर्व) आरोप दूसरे समुदाय के युवक द्वारा युवती का अपहरण, जेवर-नकदी चोरी सामाजिक प्रतिक्रिया दलित समाज द्वारा नूरपुर मार्ग पर भीषण जाम पुलिस कार्रवाई FIR दर्ज, टीमें गठित, 24 घंटे का आश्वासन वर्तमान स्थिति तनावपूर्ण शांति, भारी पुलिस बल तैनात अपील: बिजनौर न्यूज़ अपने सभी पाठकों से अपील करता है कि कृपया किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। कानून को अपना काम करने दें और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखें। यदि आपके पास इस मामले से जुड़ी कोई पुख्ता जानकारी है, तो तुरंत नूरपुर पुलिस या 112 पर सूचित करें।
बिजनौर (उत्तर प्रदेश): कहते हैं इश्क न तो मजहब देखता है और न ही उम्र की सीमा। जब प्यार परवान चढ़ता है, तो प्रेमी-प्रेमिका के लिए दुनिया की सारी बंदिशें छोटी पड़ जाती हैं। कुछ ऐसी ही दास्तां उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में देखने को मिली, जो किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं थी। लेकिन यहाँ न तो कोई रिटेक था और न ही कोई डायरेक्टर—यह हकीकत थी नहटौर के इलाबास गांव की 19 वर्षीय सोनी की, जिसने अपने प्यार (सुंदर) को पाने के लिए न केवल अपने परिवार, बल्कि समाज की सदियों पुरानी रूढ़ियों को भी चुनौती दे दी।READ ALSO:-Bijnor GST Scam 2026: बिजनौर में 'करोड़ों' का फर्जीवाड़ा; गरीबों के 'आधार' से सरकार को लगाया 2.24 करोड़ का चूना, 4 गिरफ्तार यह मामला महज एक प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि यह एक बालिग भारतीय नागरिक के संवैधानिक अधिकारों, पितृसत्तात्मक सोच और बदलते सामाजिक परिवेश के बीच के संघर्ष का एक जीवंत दस्तावेज है। आइये, विस्तार से जानते हैं कि उस दिन नहटौर थाने से लेकर कोर्ट रूम तक आखिर क्या हुआ था। थाने में गूंजी एक धमकी जिसने सबको सन्न कर दिया बिजनौर जिले के नहटौर थाने का माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया जब एक 19 साल की युवती, घबराहट और गुस्से से मिश्रित भाव लिए पुलिसकर्मियों के सामने खड़ी हो गई। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन आवाज में गजब की दृढ़ता थी। उसने थानेदार और मौजूद पुलिसकर्मियों से दो टूक शब्दों में कहा, "सर, या तो मैं सुंदर से शादी करूंगी या अपनी जान दे दूंगी। मुझे मेरे घरवाले मार डालेंगे, लेकिन मैं किसी और की नहीं हो सकती।" सोनी (काल्पनिक नाम, सुरक्षा की दृष्टि से) के ये शब्द थाने की चारदीवारी में गूंज गए। पुलिस महकमा, जो अक्सर जमीनी विवादों और चोरी-चकारी के मामलों में उलझा रहता है, इस मामले की संवेदनशीलता को तुरंत भांप गया। मामला दो अलग-अलग धर्मों (हिंदू और मुस्लिम) से जुड़ा था, और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसे मामले अक्सर सांप्रदायिक तनाव का रूप ले लेते हैं। पुलिस सतर्क हो गई। वह खौफनाक पृष्ठभूमि सोनी का कहना था कि उसके घर में उसकी जिंदगी का सौदा किया जा रहा है। उसके माता-पिता और रिश्तेदार उसका निकाह एक ऐसे व्यक्ति से कराना चाहते थे जो उम्र में उससे 10 से 12 साल बड़ा था। सोनी के लिए यह केवल उम्र का फासला नहीं था, बल्कि यह उसकी भावनाओं की हत्या थी। वह गांव के ही सुंदर नाम के युवक को अपना दिल दे चुकी थी। प्यार, परिवार और 'जादू-टोने' का अंधविश्वास जैसे ही पुलिस ने सोनी के परिवार को थाने बुलाया, वहां का नजारा किसी टीवी सीरियल के ड्रामे जैसा हो गया। परिवार वाले अपनी बेटी को घर ले जाने के लिए अड़े थे, जबकि बेटी सुंदर के पास जाने की जिद पर। अंधविश्वास का सहारा जब तर्कों से बात नहीं बनी, तो परिवार ने अंधविश्वास का सहारा लिया। सोनी के परिजनों ने पुलिस के सामने अजीबोगरीब दावा किया। उनका कहना था: "हमारी बेटी ऐसी नहीं थी। सुंदर और उसके परिवार ने इस पर कोई जादू-टोना कर दिया है। इसे वश में कर लिया गया है, इसलिए यह हमारे खिलाफ बोल रही है।" भारतीय समाज में, विशेषकर ग्रामीण परिवेश में, जब भी कोई युवती अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनती है, तो अक्सर परिवार वाले इसे उसकी 'स्वतंत्र सोच' मानने के बजाय 'काला जादू' या 'वशीकरण' का नाम दे देते हैं। यह मानसिकता दरअसल उस पितृसत्तात्मक सोच को दर्शाती है जो यह मानने को तैयार ही नहीं होती कि एक महिला अपने भले-बुरे का फैसला खुद ले सकती है। प्रेमी नदारद, अकेली लड़ी 'वीरांगना' इस पूरे घटनाक्रम में एक बात जो सबसे ज्यादा हैरान करने वाली थी, वह यह थी कि थाने में चले घंटों के ड्रामे के दौरान प्रेमी सुंदर या उसका परिवार वहां मौजूद नहीं था। अक्सर ऐसे मामलों में प्रेमी युगल साथ भागते हैं, लेकिन यहाँ सोनी अकेली थी। वह अकेली ही अपने पिता, भाई और समाज के ठेकेदारों की आंखों में आंखें डालकर अपने अधिकारों की मांग कर रही थी। यह उसकी हिम्मत और अपने प्यार पर भरोसे का सबूत था। पुलिस की दुविधा और कानून का रास्ता नहटौर पुलिस के सामने स्थिति 'सांप-छछूंदर' जैसी थी: एक तरफ: परिवार का भारी दबाव, जो बेटी को साथ ले जाना चाहता था। दूसरी तरफ: कानून, जो कहता है कि एक बालिग युवती को अपनी मर्जी से जाने से नहीं रोका जा सकता। तीसरा कोण: सांप्रदायिक संवेदनशीलता। अगर पुलिस युवती को जबरन परिवार को सौंपती और वह कोई गलत कदम उठा लेती (जैसा उसने आत्महत्या की धमकी दी थी), तो पुलिस प्रशासन पर सवाल उठते। पुलिस ने सूझबूझ से काम लिया। उन्होंने मामले को खुद सुलझाने या 'खाप पंचायत' की तरह फैसला सुनाने के बजाय, इसे कानून की कसौटी पर परखने का निर्णय लिया। मेडिकल और दस्तावेजी सबूत पुलिस ने सबसे पहले यह सुनिश्चित किया कि युवती बालिग है या नहीं। सोनी ने अपने बालिग होने के दस्तावेजी सबूत पेश किए। प्रक्रिया को पुख्ता करने के लिए उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया, ताकि उसकी उम्र और मानसिक स्थिति को लेकर कोर्ट में कोई संदेह न रहे। अदालत का फैसला – "वह बालिग है, वह आजाद है" मामला बिजनौर में अपर सिविल जज (चतुर्थ) की अदालत में पहुंचा। यह वह पल था जब सोनी की किस्मत का फैसला होना था। कोर्ट रूम का माहौल गंभीर था। सोनी का बयान (Section 164 CrPC के तहत) मजिस्ट्रेट के सामने सोनी ने बिना किसी डर के वही बात दोहराई जो उसने थाने में कही थी: "मैं 19 साल की हूं और बालिग हूं।" "मुझ पर किसी का कोई दबाव नहीं है।" "मैं अपने परिवार के साथ नहीं जाना चाहती क्योंकि वे मेरी मर्जी के खिलाफ शादी कराना चाहते हैं।" "मैं अपनी मर्जी से, सुंदर के साथ अपना जीवन बिताना चाहती हूं।" न्याय की जीत भारत का संविधान और कानून स्पष्ट है। मेडिकल रिपोर्ट में सोनी की उम्र बालिग साबित हुई। जज ने मामले के तथ्यों और सोनी के निर्भीक बयान को आधार मानते हुए अपना फैसला सुनाया। फैसला: कोर्ट ने आदेश दिया कि सोनी एक बालिग नागरिक है। उसे भारतीय संविधान के तहत अपनी मर्जी से जीवन जीने और अपना जीवनसाथी चुनने का पूर्ण अधिकार है। उसे किसी के भी साथ जाने या रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट के आदेश के बाद, सोनी ने राहत की सांस ली। वह पुलिस सुरक्षा के बीच, अपने परिवार को पीछे छोड़ते हुए, अपने प्रेमी सुंदर के साथ नई जिंदगी की शुरुआत करने के लिए रवाना हो गई। यह घटना इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? बिजनौर की यह घटना महज एक न्यूज हेडलाइन नहीं है, बल्कि इसके कई गहरे सामाजिक और कानूनी मायने हैं। संविधान के अनुच्छेद 21 की जीत (Article 21) भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को 'जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार' (Right to Life and Personal Liberty) देता है। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट्स ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि "जीवनसाथी चुनने का अधिकार" मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। चाहे समाज, परिवार या खाप पंचायतें कितना भी विरोध करें, दो बालिग लोग अपनी मर्जी से साथ रह सकते हैं। 'लव जिहाद' के शोर के बीच एक अलग कहानी वर्तमान दौर में, जहां अंतरधार्मिक विवाहों (Interfaith Marriages) को अक्सर संदेह की दृष्टि से देखा जाता है और 'लव जिहाद' जैसे नैरेटिव हावी रहते हैं, यह मामला एक अलग तस्वीर पेश करता है। यहाँ एक मुस्लिम युवती ने हिंदू युवक के लिए स्टैंड लिया। यह साबित करता है कि प्रेम का आधार धर्म नहीं, बल्कि आपसी समझ और लगाव होता है। 3. बालिग होने की ताकत यह मामला उन हजारों युवाओं के लिए एक सबक है जो पारिवारिक दबाव में घुट-घुट कर जीते हैं। सोनी ने दिखाया कि अगर आप बालिग हैं और सही हैं, तो कानून (पुलिस और कोर्ट) आपकी मदद के लिए बाध्य है। पुलिस भी बालिग लड़की को उसकी मर्जी के बिना उसके माता-पिता को नहीं सौंप सकती। 4. पितृसत्ता पर चोट परिवार द्वारा 10-12 साल बड़े रिश्तेदार से शादी का दबाव बनाना और इनकार करने पर 'जादू-टोने' का आरोप लगाना, यह दर्शाता है कि लड़कियों को आज भी 'संपत्ति' समझा जाता है। सोनी की जीत उस मानसिकता पर करारा तमाचा है जो सोचती है कि लड़की के जीवन के फैसले लेने का हक़ सिर्फ पुरुषों को है। इश्क की दहलीज और कानून की पहरेदारी बिजनौर के छोटे से गांव इलाबास से उठी यह कहानी दूर तक जाएगी। सोनी ने न सिर्फ सुंदर को पाया, बल्कि उसने अपने आत्मसम्मान और अपने वजूद की लड़ाई भी जीती। हालांकि, कानूनी जीत के बाद भी राह आसान नहीं होती। सामाजिक बहिष्कार और परिवार की नाराजगी जैसी चुनौतियां अब भी उनके सामने खड़ी हो सकती हैं। लेकिन कोर्ट का यह फैसला उन अनगिनत प्रेमियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो धर्म और जाति की दीवारों में कैद होकर दम तोड़ देते हैं। अंत में, यह घटना हमें सिखाती है कि कानून भावनाओं से नहीं, तथ्यों और अधिकारों से चलता है। और जब कोई निडर होकर अपने अधिकार मांगता है, तो न्यायपालिका ढाल बनकर खड़ी हो जाती है। प्रमुख बिंदु (Key Takeaways for Readers) कानूनी अधिकार: अगर आप 18+ (लड़की) या 21+ (लड़का) हैं, तो कोई भी (माता-पिता भी नहीं) आपको शादी के लिए मजबूर नहीं कर सकता। पुलिस की भूमिका: बालिग होने के सबूत (आधार कार्ड, मार्कशीट) होने पर पुलिस आपको सुरक्षा देने के लिए बाध्य है। कोर्ट का रुख: भारतीय अदालतें वयस्कों की सहमति (Consent of Adults) को सर्वोपरि मानती हैं, चाहे धर्म कोई भी हो। अंधविश्वास: जादू-टोने के आरोप कानूनी रूप से मान्य नहीं होते, यह सिर्फ दबाव बनाने का पैंतरा है।
बिजनौर (Bijnor): मुरादाबाद-सहारनपुर रेल मार्ग पर बुधवार को एक बड़ी तकनीकी खामी के चलते रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया। बिजनौर जिले के नगीना (Nagina), धामपुर (Dhampur) और चकराजमल (Chakrajmal) स्टेशन के बीच से गुजर रही एक चलती मालगाड़ी (Goods Train) का इंजन अचानक फेल हो गया। इस घटना के कारण ट्रैक पर ट्रेनों की लंबी कतार लग गई, जिसका सीधा असर देश की प्रीमियम ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) पर भी पड़ा।READ ALSO:-Bijnor GST Scam 2026: बिजनौर में 'करोड़ों' का फर्जीवाड़ा; गरीबों के 'आधार' से सरकार को लगाया 2.24 करोड़ का चूना, 4 गिरफ्तार रेलवे सूत्रों के अनुसार, मालगाड़ी के बीच रास्ते में खड़े हो जाने से वंदे भारत एक्सप्रेस करीब एक घंटा देरी से गंतव्य के लिए रवाना हो सकी, जिससे उसमें सवार यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बीच ट्रैक पर थमी मालगाड़ी, मचा हड़कंप जानकारी के मुताबिक, बुधवार को एक मालगाड़ी मुरादाबाद से नजीबाबाद की ओर जा रही थी। जैसे ही ट्रेन नगीना और धामपुर के बीच चकराजमल इलाके के पास पहुंची, अचानक उसके इंजन में तकनीकी खराबी आ गई और ट्रेन झटके के साथ वहीं खड़ी हो गई। लोको पायलट ने इंजन को दोबारा स्टार्ट करने की काफी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। मालगाड़ी के मुख्य लाइन पर खड़े हो जाने से पीछे से आ रही ट्रेनों के लिए रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया। कंट्रोल रूम को सूचना मिलते ही रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। वंदे भारत और अन्य ट्रेनें हुईं प्रभावित इस घटना का सबसे ज्यादा असर लखनऊ से देहरादून जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस पर पड़ा। चूंकि यह सिंगल लाइन या व्यस्त रूट हो सकता है, इसलिए मालगाड़ी के हटते तक वंदे भारत को पीछे के स्टेशन पर रोकना पड़ा। बाधित ट्रेनें: रिपोर्ट के अनुसार, लगभग आधा दर्जन (6) यात्री और एक्सप्रेस ट्रेनें इस घटना के कारण प्रभावित हुईं। यात्रियों की फजीहत: ट्रेनों के अचानक जंगल और आउटर आउटर पर रुक जाने से यात्रियों में बेचैनी बढ़ गई। पीने के पानी और खाने की कमी के चलते यात्रियों को काफी दिक्कतें हुईं। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया और हेल्पलाइन पर अपनी शिकायतें भी दर्ज कराईं। रेलवे की त्वरित कार्रवाई: भेजा गया दूसरा इंजन मामले की गंभीरता को देखते हुए मुरादाबाद रेल मंडल (Moradabad Division) के अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई की। नजदीकी स्टेशन से एक रिलीफ इंजन (Relief Engine) को मौके पर भेजा गया। तकनीकी टीम ने खराब इंजन को मालगाड़ी से अलग किया और नए इंजन को जोड़कर ट्रेन को धीरे-धीरे ट्रैक से हटाया। ट्रैक क्लियर होने के बाद सबसे पहले वंदे भारत एक्सप्रेस को पास कराया गया ताकि उसका शेड्यूल और ज्यादा न बिगड़े। क्या कहते हैं अधिकारी? स्थानीय रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इंजन फेल होने के कारणों की तकनीकी जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह मैकेनिकल फॉल्ट लग रहा है। फिलहाल रूट को सुचारू कर दिया गया है और सभी ट्रेनें अपने गंतव्य की ओर रवाना हो चुकी हैं। बिजनौर के नगीना-धामपुर रेल सेक्शन पर आज एक मालगाड़ी का इंजन फेल होने से रेल यातायात ठप हो गया। इसके चलते वंदे भारत एक्सप्रेस 1 घंटा लेट हो गई और 6 अन्य ट्रेनें भी प्रभावित हुईं। रेलवे ने दूसरा इंजन भेजकर मालगाड़ी को हटाया, जिसके बाद रूट बहाल हो सका।
बिजनौर (क्राइम डेस्क): डिजिटल भारत के दौर में साइबर अपराधी और जालसाज ठगी के नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पुलिस ने एक ऐसे ही हाई-प्रोफाइल 'व्हाइट कॉलर क्राइम' (White Collar Crime) का पर्दाफाश किया है, जिसके तार न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड तक जुड़े हुए हैं।READ ALSO:-UP RTE Admission 2026-27: प्राइवेट स्कूलों में 'मुफ्त शिक्षा' का सपना होगा सच, 2 फरवरी से शुरू हो रही प्रक्रिया; योगी सरकार ने बदले नियम बुधवार, 21 जनवरी 2026 को बिजनौर पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी जीएसटी (GST) फर्में बनाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने वाले एक गिरोह को ध्वस्त कर दिया है। यह गिरोह भोली-भाली जनता, विशेषकर गरीब तबके के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर उनके दस्तावेज ठगता था और फिर उन दस्तावेजों पर करोड़ों का व्यापार दिखा देता था। पुलिस ने इस मामले में 2.24 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी (Input Tax Credit Fraud) का खुलासा किया है और उत्तराखंड के जसपुर से चार शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। #BijnorPolice जनपद बिजनौर पुलिस की प्रभावी कार्यवाही से फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर फर्जी बिलिंग व आगत कर क्रेडिट के अवैध लाभ कमाने वाले गिरोह का खुलासा, 04 अभियुक्त गिरफ्तार । (1/2) @dgpup @Uppolice @adgzonebareilly @digmoradabad #UPPolice pic.twitter.com/rQaNKwPmrl — Bijnor Police (@bijnorpolice) January 21, 2026 इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको इस पूरे घोटाले की 'मोडस ऑपरेंडी' (कार्यप्रणाली), पुलिस की जांच और गिरफ्तारी की पूरी कहानी विस्तार से बताएंगे। क्या है पूरा मामला? (The Case Overview) यह मामला केवल टैक्स चोरी का नहीं, बल्कि विश्वासघात और गरीबों के शोषण का भी है। राज्य कर विभाग (State Tax Department) और पुलिस के रडार पर यह गिरोह काफी समय से था। कैसे शुरू हुई जांच? राज्य कर विभाग, धामपुर के डिप्टी कमिश्नर संदीप कुमार वर्मा ने थाना शेरकोट (Sherkot Police Station) में कुल 6 एफआईआर (FIR) दर्ज कराई थीं। विभाग की आंतरिक जांच और डेटा विश्लेषण में यह सामने आया था कि क्षेत्र में कुछ ऐसी फर्में सक्रिय हैं जो हकीकत में कोई व्यापार नहीं कर रही हैं, लेकिन कागजों पर करोड़ों रुपये की खरीद-फरोख्त (Transactions) दिखा रही हैं। इन फर्मों का एकमात्र उद्देश्य फर्जी बिल (Fake Invoices) जनरेट करना और सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध रिफंड लेना था। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजनौर के पुलिस अधीक्षक (SP) ने क्राइम ब्रांच और सर्विलांस सेल को सक्रिय किया। अप्पर पुलिस अधीक्षक (नगर) के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, जिसने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों के नेटवर्क के जरिए इस सिंडिकेट की जड़ों को खोदा। ठगी का मास्टरप्लान: शमा परवीन और 'दस्तावेजों' का खेल पुलिस की पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे हैरान करने वाले हैं। इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद व्यवस्थित (Organized) था और इसमें हर सदस्य की भूमिका तय थी। स्टेप 1: शिकार की तलाश (The Bait) इस गिरोह की एक महिला सदस्य है—शमा परवीन उर्फ गुड़िया, जो बिजनौर के शेरकोट की रहने वाली है। शमा का काम 'ग्राउंड वर्क' करना था। वह ग्रामीण इलाकों में जाती और अनपढ़, मजदूर या बेहद गरीब परिवारों को निशाना बनाती। लोगों को भरोसे में लेने के लिए वह कहती कि "सरकार ने नई योजना निकाली है" या "मैं तुम्हें नौकरी दिलवा दूंगी।" इस झांसे में आकर ग्रामीण उसे अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो सौंप देते थे। स्टेप 2: दस्तावेजों की सप्लाई दस्तावेज हाथ लगते ही शमा उन्हें अपने साथी इंद्रजीत (निवासी जसपुर, उत्तराखंड) को सौंप देती थी। इंद्रजीत इस चेन का 'मिडलमैन' था। वह इन दस्तावेजों को आगे जीशान और अजमल तक पहुँचाता था। स्टेप 3: फर्जी फर्म का रजिस्ट्रेशन जीशान और अजमल, जो कंप्यूटर और तकनीकी कार्यों में माहिर थे, इन दस्तावेजों का उपयोग करके जीएसटी पोर्टल पर नई फर्में रजिस्टर करते थे। ये फर्में उन मजदूरों के नाम पर होती थीं जिन्हें पता भी नहीं होता था कि वे करोड़ों की कंपनी के मालिक बन चुके हैं। इन फर्मों के नाम बेहद प्रोफेशनल रखे जाते थे, जैसे—'कामा ट्रेडर्स', 'एमए ट्रेडर्स', 'स्काई एंटरप्राइजेज' आदि। स्टेप 4: फर्मों की बिक्री (The Sale) एक बार फर्म का जीएसटी नंबर (GSTIN) जनरेट हो जाता, तो यह गिरोह उस फर्म के सारे दस्तावेज (लॉगिन आईडी, पासवर्ड) कादिर नाम के व्यक्ति (निवासी जसपुर) को बेच देता था। कीमत: एक फर्म की कीमत महज 50,000 रुपये लगाई जाती थी। कादिर इन फर्मों का इस्तेमाल आगे बड़े स्तर पर फर्जी बिल काटने के लिए करता था। 2.24 करोड़ की चोरी का गणित (The Financial Fraud) इस गिरोह ने सरकारी खजाने को कैसे लूटा, इसे समझने के लिए पुलिस ने कुछ उदाहरण पेश किए हैं। केस स्टडी 1: एमए ट्रेडर्स (MA Traders) यह फर्म एक मजदूर मौ. अफजल के दस्तावेजों पर खोली गई थी। जमीनी हकीकत में अफजल एक दिहाड़ी मजदूर है। कागजों पर उसकी फर्म ने बिना किसी माल की आवाजाही के 1.22 करोड़ रुपये का टर्नओवर दिखाया। इस फर्जी टर्नओवर के आधार पर लगभग 22 लाख रुपये की टैक्स चोरी (ITC Claim) की गई। केस स्टडी 2: करोड़ों की लेयरिंग जांच में पता चला कि गिरोह ने शाहनवाज नाम के व्यक्ति को कुछ फर्में बेचीं। इन फर्मों के जरिए कागजों पर 9.13 करोड़ रुपये की माल सप्लाई दिखाई गई। इस फर्जी सप्लाई के जरिए सरकार को 1.64 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया। कुल मिलाकर, पुलिस ने अभी तक 5 ऐसी प्रमुख फर्मों को ट्रेस किया है, जिनके जरिए 2.24 करोड़ रुपये का नुकसान राजस्व विभाग को पहुँचाया गया है। पुलिस ऑपरेशन: बुधवार को कैसे हुई गिरफ्तारी? बुधवार, 21 जनवरी 2026 को पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना मिली कि इस गिरोह के कुछ सदस्य किसी बड़ी डील या दस्तावेज आदान-प्रदान के लिए इकट्ठा हुए हैं। टीम का गठन: नरेश पाल: प्रभारी निरीक्षक, क्राइम ब्रांच (Crime Branch) सचिन मलिक: प्रभारी, स्वाट टीम (SWAT Team) वीरेंद्र कुमार: थानाध्यक्ष, शेरकोट पुलिस टीम ने जाल बिछाया और चार संदिग्धों को धर दबोचा। ये सभी उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के जसपुर के रहने वाले हैं, जो यूपी सीमा से सटा हुआ है। गिरफ्तार अभियुक्तों की सूची: इंद्रजीत (पुत्र गिरवर): निवासी जसपुर, उत्तराखंड। (दस्तावेज लेकर आगे पास करने वाला)। जीशान (पुत्र रमजानी हुसैन): निवासी जसपुर, उत्तराखंड। (यह गिरोह का तकनीकी दिमाग था, जो फर्जी ई-वे बिल (E-Way Bill) बनाने में एक्सपर्ट है)। मो. अजमल (पुत्र मो. नबी): निवासी जसपुर, उत्तराखंड। (फर्जी रजिस्ट्रेशन कराने में सहायक)। वसीम (पुत्र मो. इकबाल): निवासी जसपुर, उत्तराखंड। (लॉजिस्टिक्स और पैसे का लेनदेन संभालने वाला)। बरामदगी (Recovered Items): 3 कूटरचित (Forged) आधार कार्ड: जिनमें फोटो और नाम में हेरफेर की गई थी। 10 अन्य आईडी प्रूफ: जो निर्दोष ग्रामीणों के हैं। 30 फर्मों के दस्तावेज: ये वो फर्में हैं जो या तो बन चुकी थीं या प्रोसेस में थीं। 3 मोबाइल फोन: जिनमें व्हाट्सएप चैट और जीएसटी पोर्टल के लॉगिन्स मिले हैं। फरार मास्टरमाइंड और आगे की जांच हालांकि पुलिस ने ऑपरेशनल टीम को पकड़ लिया है, लेकिन इस खेल के असली खिलाड़ी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। पुलिस ने तीन मुख्य आरोपियों को 'वांटेड' (Wanted) घोषित किया है: शाहनवाज (Shahnawaz): इसे गिरोह का मुख्य सरगना माना जा रहा है जो पूरे ऑपरेशन को फंड कर रहा था। शमा परवीन उर्फ गुड़िया: वह महिला जो ग्रामीणों को फंसाती थी। पुलिस को शक है कि उसने सैकड़ों लोगों के दस्तावेज चुराए हो सकते हैं। कादिर (Qadir): जो 50,000 रुपये में फर्म खरीदकर आगे करोड़ों का वारा-न्यारा करता था। पुलिस अधीक्षक (SP Bijnor) ने कहा है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें दबिश दे रही हैं और जल्द ही उनकी संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है। क्या है इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) फ्रॉड? आम पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर यह चोरी होती कैसे है। ITC क्या है? जब कोई व्यापारी कच्चा माल खरीदता है, तो वह उस पर टैक्स (GST) चुकाता है। जब वह तैयार माल बेचता है, तो वह ग्राहक से टैक्स वसूलता है। सरकार व्यापारी को सुविधा देती है कि वह खरीदते समय चुकाए गए टैक्स को बेचते समय वसूले गए टैक्स से घटा (Adjust) सकता है। इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट कहते हैं। फ्रॉड कैसे होता है? जालसाज फर्जी फर्म बनाते हैं। वे एक फर्जी बिल (Invoice) बनाते हैं कि उन्होंने 1 करोड़ का माल खरीदा (जबकि कोई माल नहीं खरीदा गया)। इस बिल पर वे दिखाते हैं कि उन्होंने 18 लाख टैक्स चुकाया है। अब वे सरकार से दावा करते हैं कि "चूंकि हमने 18 लाख टैक्स पहले ही दे दिया है, इसलिए हमें टैक्स में छूट दी जाए या रिफंड दिया जाए।" इस तरह वे बिना व्यापार किए सरकार का पैसा लूट लेते हैं। पुलिस की अपील: अपने दस्तावेज़ सुरक्षित रखें बिजनौर पुलिस ने इस खुलासे के बाद एक एडवाइजरी (Advisory) जारी की है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है: सावधान रहें: कोई भी व्यक्ति अगर आपको मुफ्त में सरकारी योजना, लोन या नौकरी दिलाने के नाम पर आपके आधार कार्ड (Aadhar Card) और पैन कार्ड (PAN Card) की ओरिजिनल कॉपी या फोटो मांगे, तो उसे न दें। OTP शेयर न करें: अक्सर ये ठग आपका मोबाइल नंबर रजिस्टर करके ओटीपी मांगते हैं। ओटीपी देते ही आपके नाम पर फर्म रजिस्टर हो जाती है। सत्यापन करें: किसी भी योजना के लिए सीधे सरकारी दफ्तर (ब्लॉक या तहसील) में संपर्क करें, किसी बिचौलिये (Middleman) पर भरोसा न करें। एक बड़ी सफलता बिजनौर पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है। इसने न केवल सरकारी राजस्व को होने वाले नुकसान को रोका है, बल्कि उन गरीब लोगों को भी कानूनी पचड़ों में फंसने से बचाया है जिनके नाम पर ये फर्में चल रही थीं। अगर यह गिरोह नहीं पकड़ा जाता, तो भविष्य में जीएसटी विभाग का नोटिस उन गरीब मजदूरों के घर पहुँचता, जिनका इन फर्मों से कोई लेना-देना नहीं था। यह मामला प्रशासन के लिए भी एक सबक है कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में और अधिक कड़ाई और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की आवश्यकता है। FAQs: इस मामले से जुड़े सवाल Q1: इन आरोपियों पर कौन सी धाराएं लगाई गई हैं? Ans: पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी (420 के समकक्ष), जालसाजी (Forgery), आपराधिक साजिश और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही जीएसटी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई होगी। Q2: जिन गरीबों के नाम पर फर्में खुलीं, क्या उन्हें सजा होगी? Ans: पुलिस जांच का विषय है। यदि जांच में यह साबित होता है कि वे निर्दोष हैं और उनके साथ धोखाधड़ी हुई है, तो उन्हें गवाह (Witness) बनाया जाएगा, आरोपी नहीं। Q3: क्या बिजनौर में और भी ऐसे गिरोह सक्रिय हैं? Ans: पुलिस को संदेह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों में ऐसे और भी सिंडिकेट हो सकते हैं। सर्विलांस टीम डेटा माइनिंग कर रही है। Q4: फर्जी फर्म की पहचान कैसे होती है? Ans: जीएसटी विभाग डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करता है। यदि कोई फर्म बिना बिजली बिल, बिना गोदाम और बिना ई-वे बिल के भारी टर्नओवर दिखाती है, तो वह रडार पर आ जाती है। नोट: यह खबर बिजनौर पुलिस द्वारा 21 जनवरी 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति और मीडिया ब्रीफिंग पर आधारित है।
बिजनौर (Bijnor): भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और इस लोकतंत्र की मजबूती इसके मतदाताओं में निहित है। इसी लोकतांत्रिक ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, बिजनौर जिले में बिजनौर मतदाता सूची पुनरीक्षण (Bijnor Voter List Revision) का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। बुधवार, 21 जनवरी 2026 को बिजनौर की जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर ने कलेक्ट्रेट स्थित अपने कैंप कार्यालय में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विशेष निर्वाचक नामावली पुनरीक्षण (Special Summary Revision - SSR) की प्रगति की समीक्षा करना और राजनीतिक दलों से सक्रिय सहयोग मांगना था।READ ALSO:-Bijnor News: कांशीराम कॉलोनी में दबंगों का कहर, मामूली कहासुनी पर युवक को लोहे की रॉड से पीटा, दोनों पैरों की हड्डियां टूटीं, पुलिस जांच में जुटी बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए मतदाता सूची का त्रुटिहीन होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुपालन में जिला प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और सभी राजनीतिक दलों को भी इसमें अपनी सकारात्मक भूमिका निभानी होगी। विशेष अभियान: 6 फरवरी 2026 तक जारी रहेगा कार्य जिलाधिकारी जसजीत कौर ने बैठक में जानकारी दी कि विशेष निर्वाचक नामावली पुनरीक्षण के तहत दावे और आपत्तियां प्राप्त करने का कार्य 6 जनवरी, 2026 से शुरू होकर 6 फरवरी, 2026 तक चलेगा। यह एक महीने का विशेष अभियान है जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। इस दौरान, प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। जिलाधिकारी ने कहा, "इस कार्य को निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने अतिरिक्त जिला स्तरीय अधिकारियों को नामित किया है। इन अधिकारियों के लिए विभिन्न स्थानों पर केंद्र निर्धारित किए गए हैं, जहां वे जनता और राजनीतिक दलों की आपत्तियों का निस्तारण कर रहे हैं।" बिजनौर में उत्साह: 46 हजार से अधिक नए मतदाताओं ने किया आवेदन बैठक का सबसे सकारात्मक पहलू जिले के युवाओं द्वारा दिखाई गई रुचि रही। बिजनौर मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के तहत अब तक के आंकड़े उत्साहजनक हैं। जिलाधिकारी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार: फॉर्म 6 (नए मतदाता): बिजनौर जिले के आठों विधानसभा क्षेत्रों में अब तक कुल 46,754 आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह दर्शाता है कि युवा अपने लोकतांत्रिक अधिकार के प्रति जागरूक हैं। फॉर्म 7 (वोट कटवाना/निरस्तीकरण): मृत्यु, स्थान परिवर्तन या अन्य कारणों से नाम हटाने के लिए 2,088 आवेदन प्राप्त हुए हैं। फॉर्म 8 (संशोधन): नाम, पता, या अन्य विवरणों में सुधार के लिए 22,333 आवेदन भरे जा चुके हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि बिजनौर की जनता न केवल नए वोट बनवाने के लिए, बल्कि अपनी पुरानी प्रविष्टियों को सुधारने के लिए भी सक्रिय है। (Internal link to related article: बिजनौर के युवाओं में मतदान के प्रति बढ़ता रुझान) राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की भूमिका केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं होती, बल्कि मतदाता सूची को स्वच्छ बनाने में भी उनकी अहम भूमिका होती है। डीएम जसजीत कौर ने बैठक में उपस्थित सभी दलों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे बिजनौर मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने विशेष रूप से 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने कहा, "1 जनवरी, 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके सभी युवा-युवतियों के फॉर्म 6 भरवाना सुनिश्चित करें। यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि कोई भी पात्र युवा मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे।" इसके अलावा, उन्होंने बूथ लेवल अभिकर्ताओं (BLOs) की भूमिका पर भी जोर दिया। राजनीतिक दलों से आग्रह किया गया कि वे अपने-अपने बूथ लेवल एजेंटों (BLA) को सक्रिय करें ताकि वे सरकारी बीएलओ के साथ मिलकर काम कर सकें। इससे न केवल कार्य में तेजी आएगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बनी रहेगी। अधिकारियों और प्रतिनिधियों की उपस्थिति यह बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। प्रशासन की ओर से उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वानिया सिंह और सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी प्रमोद कुमार उपस्थित रहे, जिन्होंने तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला। वहीं, राजनीतिक दलों की ओर से भी वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया: समाजवादी पार्टी (SP): अख़लाक़ अहमद उर्फ पप्पू बहुजन समाज पार्टी (BSP): मुहम्मद सिद्दीक कांग्रेस (Congress): अनिल त्यागी और क़ाज़ी आतिफ़ अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने सुझाव रखे और प्रशासन को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। फॉर्म 6, 7 और 8 का महत्व और प्रक्रिया आम जनता के लिए यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि बिजनौर मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान किन फॉर्म्स का उपयोग कब किया जाता है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जनता को इन फॉर्म्स के बारे में जागरूक करें। फॉर्म 6: लोकतंत्र में प्रवेश का द्वार फॉर्म 6 उन नए मतदाताओं के लिए है जो पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराना चाहते हैं। जैसा कि बैठक में बताया गया, 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले युवा इसके पात्र हैं। बिजनौर में 46,754 युवाओं ने यह फॉर्म भरा है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। फॉर्म 7: मतदाता सूची की शुद्धि अक्सर मतदाता सूची में ऐसे लोगों के नाम रह जाते हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो उस क्षेत्र को छोड़कर जा चुके हैं। ऐसे नामों को हटाने के लिए फॉर्म 7 का उपयोग किया जाता है। यह फर्जी वोटिंग रोकने में सबसे कारगर उपाय है। फॉर्म 8: त्रुटि सुधार यदि आपके वोटर आईडी कार्ड में नाम की स्पेलिंग गलत है, पता बदला है, या फोटो साफ नहीं है, तो फॉर्म 8 के माध्यम से इसमें सुधार किया जा सकता है। 22,000 से अधिक लोगों ने सुधार के लिए आवेदन किया है, जो बताता है कि लोग अपने दस्तावेजों को अपडेट रखना चाहते हैं। प्रशासन की तैयारी और भविष्य की रूपरेखा जिलाधिकारी जसजीत कौर ने स्पष्ट किया है कि बिजनौर मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बीएलओ (BLO) और पदाहित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे घर-घर जाकर सत्यापन करें और यह सुनिश्चित करें कि मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध हो। दावे और आपत्तियों के निस्तारण के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है। 6 फरवरी 2026 के बाद प्राप्त आवेदनों पर इस विशेष अभियान के तहत विचार नहीं किया जाएगा, इसलिए नागरिकों से अपील की गई है कि वे समय रहते अपने आवेदन जमा करें। डिजिटल इंडिया और मतदान प्रक्रिया वर्तमान में चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और सुगम बना दिया है। बिजनौर के नागरिक अब घर बैठे 'वोटर हेल्पलाइन ऐप' (Voter Helpline App) या राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP) के माध्यम से भी अपने आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच और तकनीकी जानकारी के अभाव को देखते हुए, बीएलओ और राजनीतिक दलों के एजेंटों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। जिलाधिकारी ने बैठक में इस बात पर भी जोर दिया कि ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों का सत्यापन भी उतनी ही गंभीरता से किया जाए जितना ऑफलाइन आवेदनों का। बिजनौर में चल रहा बिजनौर मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान लोकतंत्र के उत्सव की पहली सीढ़ी है। जिलाधिकारी जसजीत कौर का नेतृत्व और राजनीतिक दलों का सहयोग यह सुनिश्चित करता है कि आगामी चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी होंगे। 46,000 से अधिक नए युवाओं का जुड़ना यह संकेत देता है कि बिजनौर का भविष्य जागरूक हाथों में है। 6 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस अभियान में अभी भी समय है, और प्रशासन को उम्मीद है कि यह आंकड़ा और भी बढ़ेगा। बिजनौर के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपनी पात्रता की जांच करे और यदि नाम सूची में नहीं है, तो तुरंत आवेदन करे। मजबूत लोकतंत्र के लिए एक शुद्ध और समावेशी मतदाता सूची का होना अनिवार्य है। बिजनौर जिलाधिकारी जसजीत कौर ने राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य की समीक्षा की। 6 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस अभियान में अब तक 46,754 नए युवाओं ने नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया है। प्रशासन ने निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की है और राजनीतिक दलों से सक्रिय सहयोग की अपील की है।
बिजनौर (Bijnor News): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। शहर की घनी आबादी वाली कॉलोनियों में भी अब आम आदमी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है। ताजा मामला शहर कोतवाली क्षेत्र की कांशीराम कॉलोनी (Kanshiram Colony) का है, जहां मंगलवार को एक युवक को मामूली कहासुनी के बाद कुछ दबंगों ने इस कदर पीटा कि वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। हमलावरों ने लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से वार कर युवक के दोनों पैरों की हड्डियां तोड़ दीं।READ ALSO:-देहरादून में 'NCICON 2026' का शंखनाद: स्वास्थ्य की दोहरी चुनौतियों पर मंथन के लिए जुटेंगे देश के शीर्ष वैज्ञानिक और चिकित्सा विशेषज्ञ यह घटना कानून व्यवस्था को सीधे चुनौती देती नजर आ रही है। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन आरोपी घटना को अंजाम देकर फरार हो गए हैं। क्या है पूरा मामला? (The Incident Detail) पुलिस को दी गई तहरीर और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह खौफनाक वारदात मोहल्ला कांशीराम कॉलोनी में घटित हुई। पीड़ित युवक की पहचान दानिश (Danish) के रूप में हुई है, जो इसी कॉलोनी का निवासी है। दानिश ने पुलिस को बताया कि घटना के वक्त वह अपने निजी काम से कॉलोनी के ही एक रास्ते से गुजर रहा था। रात के करीब 8 बज रहे थे। जब वह उजमा (Uzma) नामक महिला के घर के पास पहुंचा, तो वहां पहले से ही कुछ युवक खड़े थे। दानिश को देखते ही इन युवकों ने बिना किसी उकसावे के गाली-गलौज शुरू कर दी। शुरुआत में दानिश ने इसे नजरअंदाज करने की कोशिश की, लेकिन जब गालियों का सिलसिला नहीं रुका, तो उसने इसका विरोध किया। दानिश का विरोध करना वहां मौजूद दबंगों को नागवार गुजरा। देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई और आरोपियों ने दानिश पर हमला बोल दिया। लोहे की रॉड से किया जानलेवा हमला (Brutal Attack) प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर पूरी तैयारी के साथ थे। झड़प शुरू होते ही आरोपियों ने लाठी-डंडे और लोहे की रॉड निकाल लीं। हमलावरों में गुड्डू, इमरान, शाहरुख और खालिद (पुलिस जांच में सामने आए संभावित नाम) शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन लोगों ने दानिश को घेर लिया और जान से मारने की नीयत से उस पर लोहे की रॉड से वार किया। दानिश ने अपना सिर बचाने की कोशिश की, लेकिन रॉड उसके पैरों पर जा लगी। हमला इतना जोरदार था कि दानिश के पैरों की हड्डियां मौके पर ही टूट गईं। वह दर्द से कराहता हुआ जमीन पर गिर पड़ा और लहूलुहान हो गया। सड़क पर खून से लथपथ दानिश को देख हमलावर वहां से भागने की फिराक में थे, लेकिन उनकी हैवानियत यहीं नहीं रुकी। जाते-जाते उन्होंने पीड़ित को पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी। शोर सुनकर मौके पर पहुंचे लोग (Witnesses Intervention) दानिश की चीख-पुकार सुनकर आसपास के घरों से लोग बाहर निकल आए। दानिश के परिचित नबील और फरमान (Nabil and Farman) भी शोर सुनकर मौके पर दौड़े। भीड़ को अपनी तरफ आता देख हमलावर वहां से भाग खड़े हुए। नबील और फरमान ने तुरंत घायल दानिश को संभाला और घटना की सूचना उसके परिजनों को दी। हालत गंभीर होने के कारण उसे आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर (Fracture) की पुष्टि की है। फिलहाल दानिश का इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर लेकिन गंभीर बनी हुई है। पुलिस की कार्रवाई और जांच (Police Action) घटना के बाद पीड़ित परिवार ने शहर कोतवाली पुलिस (City Kotwali Police) को लिखित तहरीर दी है। तहरीर में आरोपियों द्वारा की गई मारपीट और जानलेवा हमले का विस्तार से जिक्र किया गया है। बिजनौर पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि मामले का संज्ञान लिया गया है। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और आसपास के लोगों से पूछताछ की है। कोतवाली प्रभारी ने बताया, "हमें तहरीर प्राप्त हुई है। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है और जल्द ही उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।" कांशीराम कॉलोनी: अपराध का नया केंद्र? (Safety Concerns) बिजनौर की कांशीराम कॉलोनी में मारपीट की यह कोई पहली घटना नहीं है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां आए दिन असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। कुछ महीने पहले भी यहां दो पक्षों में वर्चस्व को लेकर हिंसक झड़प हुई थी। कॉलोनी के लोगों का आरोप है कि पुलिस की गश्त (Patrolling) यहां कम होती है, जिसके कारण बदमाशों के हौसले बुलंद हैं। शाम ढलते ही गलियों में शराब पीकर हंगामा करना और आने-जाने वालों से अभद्रता करना यहां आम बात हो गई है। उजमा के घर के पास हुई यह घटना बताती है कि महिलाएं और बच्चे भी अब सुरक्षित नहीं हैं। कानूनी पहलू: आरोपियों पर क्या धाराएं लग सकती हैं? चूंकि मामला मारपीट और गंभीर चोट पहुंचाने का है, और अब भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हो चुकी है, तो पुलिस आरोपियों पर निम्नलिखित संभावित धाराओं के तहत कार्रवाई कर सकती है: धारा 117/118 (BNS): स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना (Voluntarily causing grievous hurt)। चूंकि दानिश की हड्डियां टूटी हैं, यह गंभीर चोट (Grievous Hurt) की श्रेणी में आता है। इसमें 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। धारा 351 (BNS): आपराधिक धमकी देना (Criminal Intimidation)। आरोपियों ने जाते समय जान से मारने की धमकी दी है। धारा 109 (BNS): हत्या का प्रयास (Attempt to Murder) - यदि मेडिकल रिपोर्ट में सिर पर वार करने की मंशा साबित होती है, तो यह धारा भी जुड़ सकती है। धारा 191 (BNS): दंगा करना (Rioting) - चूंकि हमलावर एक समूह (Group) में थे और घातक हथियारों से लैस थे। कानून के जानकारों का कहना है कि लोहे की रॉड का इस्तेमाल करना यह दर्शाता है कि हमला पूर्व नियोजित (Pre-planned) हो सकता है या फिर हमलावरों की मंशा सिर्फ डराने की नहीं, बल्कि गंभीर नुकसान पहुंचाने की थी। चिकित्सीय नजरिया: रिकवरी में लग सकता है समय दानिश को लगी चोटें गंभीर प्रकृति की हैं। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों (Orthopedic Experts) के अनुसार, लोहे की रॉड से हुए प्रहार के कारण 'कंपाउंड फ्रैक्चर' (Compound Fracture) होने की संभावना रहती है, जिसमें हड्डी मांस को फाड़कर बाहर आ सकती है या अंदर ही कई टुकड़ों में टूट सकती है। ऐसी चोटों से उबरने में मरीज को 6 महीने से लेकर एक साल तक का समय लग सकता है। इसके अलावा, मानसिक आघात (Trauma) से उबरना भी एक लंबी प्रक्रिया होती है। बिजनौर में बढ़ता अपराध का ग्राफ (Rising Crime Graph) बिजनौर जनपद हाल के दिनों में कई आपराधिक घटनाओं के कारण सुर्खियों में रहा है। चाहे वह नजीबाबाद में भरे बाजार में लड़की को बंधक बनाने की घटना हो या फिर ट्रिपल मर्डर केस, जिले में कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। समाजसेवियों का मानना है कि पुलिस को 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनानी होगी। विशेष रूप से रिहायशी कॉलोनियों में बीट पुलिसिंग (Beat Policing) को मजबूत करना समय की मांग है। समाज के लिए चेतावनी यह घटना हमें यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि समाज में सहनशीलता (Tolerance) कितनी कम हो गई है। महज एक मामूली कहासुनी या घूरने जैसी बात पर इंसान दूसरे इंसान की जान लेने पर उतारू हो जाता है। 'बिजनौर न्यूज' अपने पाठकों से अपील करता है कि किसी भी विवाद की स्थिति में संयम बरतें और कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय पुलिस की मदद लें। कांशीराम कॉलोनी में दानिश के साथ हुई यह बर्बरता निंदनीय है। एक युवा, जो अपने काम से जा रहा था, अब अस्पताल के बिस्तर पर अपनी टूटी हड्डियों के जुड़ने का इंतजार कर रहा है। पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। अब यह पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह गुड्डू, इमरान और अन्य आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करे ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए। बिजनौर पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए रखेंगे और जांच में होने वाली प्रगति से अपने पाठकों को अवगत कराते रहेंगे।
बिजनौर/नजीबाबाद (क्राइम रिपोर्टर): रिश्तों की अहमियत और दोस्ती का भरोसा आज के दौर में कितना कमजोर हो चुका है, इसकी एक बानगी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में देखने को मिली। जिले के नजीबाबाद थाना क्षेत्र में एक ऐसी वारदात हुई है जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। यहां खेल-खेल में या यूं कहें कि मामूली बातचीत के दौरान उपजे विवाद ने इतना उग्र रूप ले लिया कि एक दोस्त ही अपने दोस्त का काल बन गया।READ ALSO:-बिजनौर में रफ्तार का कहर: काम से घर लौट रहे प्लाई कारीगर की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत, टक्कर मारकर फरार हुआ वाहन चालक गुस्से में अंधे हुए एक युवक ने अपने ही साथी को डंडे से इतना पीटा कि उसकी जान चली गई। अस्पताल की चौखट पर जिंदगी और मौत से जूझते हुए बालक ने आखिरकार दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से नजीबाबाद के इस्लामनगर इलाके में मातम पसरा हुआ है, वहीं आरोपी वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया है। इस्लामनगर में खूनी खेल: क्या है पूरा मामला? घटना नजीबाबाद थाना क्षेत्र के घनी आबादी वाले इलाके इस्लामनगर (Islamnagar) की है। स्थानीय लोगों और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मृतक बालक और आरोपी दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे और दोस्त थे। दोनों अक्सर साथ में देखे जाते थे। रोज की तरह वे आपस में बातचीत कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इसी दौरान किसी बात को लेकर दोनों में कहासुनी हो गई। यह कहासुनी किसी पुरानी रंजिश की वजह से थी या तात्कालिक मजाक की वजह से, यह अभी जांच का विषय है। लेकिन देखते ही देखते शाब्दिक बहस गाली-गलौज में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद इतना बढ़ा कि आरोपी पक्ष ने अपना आपा खो दिया। पास में ही पड़ा एक भारी-भरकम डंडा (Stick) उठाकर उसने बालक पर हमला बोल दिया। डंडे से किए ताबड़तोड़ वार, नहीं पसीजा दिल आरोपी के सिर पर खून सवार था। उसने बालक को संभलने का मौका तक नहीं दिया और डंडे से उस पर ताबड़तोड़ वार शुरू कर दिए। वार इतने घातक थे कि बालक के सिर और शरीर के नाजुक अंगों पर गंभीर चोटें आईं। वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ा और दर्द से छटपटाने लगा। हैरानी की बात यह है कि जब बालक जमीन पर गिर गया, तब भी आरोपी का गुस्सा शांत नहीं हुआ। आसपास के लोगों ने जब शोर मचाया और मौके की तरफ दौड़े, तब जाकर आरोपी वहां से डंडा फेंककर फरार हो गया। अस्पताल में मौत से जंग और अंत घायल बालक को खून से लथपथ हालत में देख परिजनों और स्थानीय लोगों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में उसे नजीबाबाद के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। बालक की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया। उसके सिर से काफी खून बह चुका था और अंदरूनी चोटें भी गहरी थीं। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद बालक की जान नहीं बचाई जा सकी। इलाज के दौरान कुछ ही देर में उसने अस्पताल के बेड पर दम तोड़ दिया। जैसे ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया, अस्पताल परिसर में मौजूद परिजनों की चीख-पुकार से कोहराम मच गया। एक मां की गोद सूनी हो गई और एक पिता का सहारा छिन गया। पुलिस की कार्रवाई: आरोपी की तलाश तेज घटना की सूचना मिलते ही थाना नजीबाबाद पुलिस (Najibabad Police) हरकत में आई। पुलिस बल तुरंत अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंचा। पोस्टमार्टम: पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और उसे पोस्टमार्टम (Post-mortem) के लिए जिला अस्पताल बिजनौर भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मौत के सही कारणों (सिर की चोट या अंदरूनी रक्तस्राव) की पुष्टि हो पाएगी। दबिश: पुलिस ने परिजनों की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोपी, जो घटना के बाद से फरार है, उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें गठित की गई हैं। पुलिस उसके संभावित ठिकानों और रिश्तेदारों के यहां दबिश दे रही है। पुलिस अधिकारी का बयान: नजीबाबाद थाना प्रभारी ने बताया, "इस्लामनगर में दो पक्षों/दोस्तों के बीच विवाद में मारपीट की सूचना मिली थी। घायल बालक की अस्पताल में मृत्यु हो गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। आरोपी की पहचान कर ली गई है और पुलिस टीमें उसकी तलाश कर रही हैं। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।" सामाजिक चिंता: युवाओं में बढ़ता गुस्सा यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। आखिर आज की युवा पीढ़ी में इतनी असहिष्णुता (Intolerance) क्यों बढ़ रही है कि एक मामूली सी बात पर वे जान लेने पर उतारू हो जाते हैं? नजीबाबाद का यह कांड सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने पर लगा एक धब्बा है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में कलम और खिलौने होने चाहिए, उस उम्र में वे डंडे और हथियार उठा रहे हैं। इस्लामनगर के लोग भी इस घटना से सदमे में हैं। किसी को यकीन नहीं हो रहा कि जिन दो दोस्तों को वे कल तक साथ हंसते-खेलते देखते थे, आज उनमें से एक कफ़न में लिपटा है और दूसरा कानून का मुजरिम बन गया है। कब मिलेगा इंसाफ? फिलहाल मृतक का परिवार गहरे सदमे में है और पुलिस से सिर्फ एक ही मांग कर रहा है—आरोपी को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और सख्त सजा दी जाए। पुलिस का दावा है कि कानून के हाथ लंबे हैं और आरोपी ज्यादा दिन तक भाग नहीं पाएगा।
बिजनौर (Bijnor News): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन हो रहे सड़क हादसों में बेगुनाह लोगों की जान जा रही है। ताजा मामला चांदपुर (Chandpur) क्षेत्र का है, जहां मंगलवार देर शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक बाइक सवार युवक की जान चली गई। चांदपुर–जलीलपुर मार्ग पर एक अज्ञात वाहन ने बाइक सवार को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी चालक वाहन लेकर फरार हो गया। इस घटना से मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है।READ ALSO:-बिजनौर के जंगलों में प्रकृति का 'क्रूर खेल': खूंखार टाइगर ने बनाया हाथी के बच्चे को निवाला, वन विभाग के उड़े होश हादसे की पूरी जानकारी: कब और कैसे हुई घटना? जानकारी के अनुसार, यह हादसा मंगलवार की देर शाम चांदपुर–जलीलपुर मार्ग (Chandpur-Jalilpur Road) पर घटित हुआ। 40 वर्षीय बंटी पुत्र हरिसिंह, जो चांदपुर के मोहल्ला कायस्थान (Mohalla Kayasthan) के निवासी थे, अपनी बाइक पर सवार होकर अपने काम से घर वापस लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बंटी अपनी साइड में चल रहे थे, तभी सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बंटी बाइक समेत सड़क पर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों ने तुरंत घटना की सूचना पुलिस और एंबुलेंस को दी। हादसे के तुरंत बाद अज्ञात वाहन का चालक मौके का फायदा उठाकर वाहन सहित फरार हो गया। अंधेरा होने के कारण आसपास के लोग वाहन का नंबर नोट नहीं कर सके। अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित सूचना मिलते ही 108 एंबुलेंस (108 Ambulance) मौके पर पहुंची। एंबुलेंस कर्मियों ने घायल बंटी को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), चांदपुर पहुंचाया। वहां मौजूद डॉक्टरों की टीम ने बंटी की जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सीएचसी चांदपुर के डॉक्टर जहीर ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया, "हमारे पास एंबुलेंस द्वारा एक सड़क दुर्घटना का केस लाया गया था। मरीज को अस्पताल लाने से पहले ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी। मेडिकल टर्मिनोलॉजी में इसे 'ब्रॉट डेड' (Brought Dead) कहा जाता है। हमने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को मेमो भेजकर दे दी है।" परिवार में छाया मातम: घर का सहारा छिन गया मृतक की पहचान बंटी (40 वर्ष) के रूप में हुई है, जो प्लाई (Plywood) का काम करते थे। परिजनों ने बताया कि बंटी बेहद मिलनसार और मेहनती व्यक्ति थे। वह प्लाई का काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। मंगलवार को भी वह रोज की तरह काम पर गए थे और शाम को काम खत्म करके घर लौट रहे थे। उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। बंटी की मौत की खबर जैसे ही उनके मोहल्ला कायस्थान स्थित घर पहुंची, वहां चीख-पुकार मच गई। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। बंटी परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे, उनके जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस की कार्रवाई और जांच घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस (Chandpur Police) मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजने की तैयारी शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अज्ञात वाहन और उसके चालक की तलाश की जा रही है। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) की फुटेज खंगालने की योजना बना रही है ताकि टक्कर मारने वाले वाहन की पहचान की जा सके। पुलिस ने परिजनों की तहरीर के आधार पर अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बिजनौर में सड़क हादसों का बढ़ता ग्राफ बिजनौर जनपद में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर समस्या बनती जा रही हैं। विशेष रूप से चांदपुर, नजीबाबाद और बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पर आए दिन बड़े हादसे देखने को मिलते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ महीनों में जिले में सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि हुई है। सड़क सुरक्षा (Road Safety) के जानकारों का मानना है कि इन हादसों के पीछे कई प्रमुख कारण हैं: ओवरस्पीडिंग (Overspeeding): खाली सड़कों पर वाहनों की अनियंत्रित गति। सड़क पर अंधेरा: कई मुख्य मार्गों पर स्ट्रीट लाइट की कमी, जैसा कि चांदपुर-जलीलपुर मार्ग के कुछ हिस्सों में देखा गया है। आवारा पशु: रात के समय सड़कों पर अचानक आवारा पशुओं का आ जाना। यातायात नियमों की अनदेखी: बिना हेलमेट बाइक चलाना या गलत दिशा में वाहन चलाना। हिट-एंड-रन कानून: क्या कहता है नया नियम? यह मामला 'हिट-एंड-रन' (Hit and Run) का प्रतीत होता है, जहां चालक टक्कर मारने के बाद घायल को अस्पताल पहुंचाने के बजाय मौके से भाग गया। भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) के तहत ऐसे मामलों में अब कड़े प्रावधान किए गए हैं। अगर कोई चालक लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए किसी की मौत का कारण बनता है और पुलिस या मजिस्ट्रेट को सूचित किए बिना भाग जाता है, तो नए कानूनों के तहत उसे भारी सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन लगातार चालकों से अपील कर रहा है कि दुर्घटना होने पर मानवीय आधार पर घायल की मदद करें, न कि भागने की कोशिश करें। चांदपुर-जलीलपुर मार्ग: डेंजर जोन बनता जा रहा है स्थानीय निवासियों ने बताया कि चांदपुर से जलीलपुर जाने वाला मार्ग संकरा है और यहां वाहनों का दबाव अधिक रहता है। रात के समय भारी वाहन भी इसी रास्ते से गुजरते हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर गति अवरोधक (Speed Breakers) बनाए जाएं और पुलिस गश्त बढ़ाई जाए ताकि तेज रफ्तार वाहनों पर लगाम लगाई जा सके। सड़क सुरक्षा: सावधानी ही बचाव है इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर हमें सड़क सुरक्षा के प्रति सचेत किया है। 'बिजनौर न्यूज' अपने पाठकों से अपील करता है कि वाहन चलाते समय निम्नलिखित सावधानियां जरूर बरतें: हेलमेट का प्रयोग करें: दोपहिया वाहन चलाते समय हमेशा आईएसआई (ISI) मार्क वाला हेलमेट पहनें। यह सिर की चोट से बचाता है, जो अक्सर जानलेवा साबित होती है। गति सीमा का पालन करें: कभी भी निर्धारित गति सीमा से तेज वाहन न चलाएं। याद रखें, घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है। रात में रिफ्लेक्टर का प्रयोग: अगर आप रात में बाइक चला रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपकी बाइक की लाइट और इंडिकेटर सही काम कर रहे हों। कपड़ों पर रिफ्लेक्टर टेप लगाने से भी दूसरे वाहनों को आप दूर से दिखाई दे सकते हैं। शराब पीकर वाहन न चलाएं: नशा सड़क हादसों का एक बड़ा कारण है। चांदपुर में हुआ यह हादसा बेहद दुखद है। एक लापरवाही ने एक हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया। बंटी की मौत न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द फरार चालक को गिरफ्तार करे और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए। साथ ही, जिला प्रशासन को सड़क सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। बिजनौर पुलिस (Bijnor Police) ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी ने मंगलवार शाम चांदपुर-जलीलपुर मार्ग पर किसी संदिग्ध क्षतिग्रस्त वाहन को देखा हो, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। आपकी एक सूचना पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में मदद कर सकती है।
बिजनौर/बढ़ापुर (वन्यजीव डेस्क): प्रकृति का नियम जितना सुंदर है, उतना ही कठोर भी। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के घने जंगलों में जीवन और मृत्यु के इस चक्र का एक दिल दहला देने वाला उदाहरण सामने आया है। यहां के बढ़ापुर वन रेंज (Badhapur Forest Range) में जंगल के दो सबसे ताकतवर प्राणियों—बाघ (Tiger) और हाथी (Elephant)—के बीच एक ऐसा संघर्ष हुआ, जिसका अंत एक मासूम जिंदगी के खात्मे के साथ हुआ।READ ALSO:-मेरठ हाईवे पर खौफनाक मंजर: छुट्टी पर आए फौजी और उसके जिगरी यार को गन्ने से लदे ट्रक ने रौंदा; हेलमेट पहने होने के बाद भी सिर के परखच्चे उड़े बढ़ापुर वन रेंज के अंतर्गत आने वाली ढकरिया बीट (Dhakaria Beat) के घने जंगल में एक हाथी के बच्चे (Calf) का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। सूचना मिलते ही वन विभाग का पूरा अमला, आला अधिकारी और चिकित्सा विशेषज्ञ जंगल की ओर दौड़ पड़े। जांच में यह पुष्टि हुई है कि इस नन्हे गजराज की मौत किसी बीमारी से नहीं, बल्कि जंगल के राजा 'टाइगर' के घातक हमले से हुई है। सन्नाटे में गूंजी मौत की खबर: कैसे हुआ खुलासा? घटना बढ़ापुर वन रेंज के सुदूर इलाक़े ढकरिया बीट की है। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, वनकर्मी अपनी नियमित गश्त (Petrolling) पर थे। जंगल की पगडंडियों से गुजरते हुए उन्हें अचानक दुर्गंध और कुछ संदिग्ध गतिविधियों का आभास हुआ। जब वे मौके पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। जमीन पर हाथी का एक बच्चा मृत अवस्था में पड़ा था। शव के आसपास संघर्ष के निशान साफ दिखाई दे रहे थे। वनकर्मियों ने तुरंत इसकी सूचना वायरलेस के जरिए बढ़ापुर वन रेंज के क्षेत्राधिकारी (Range Officer) को दी। खबर मिलते ही रेंज अधिकारी अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल को सील कर दिया ताकि कोई सबूत नष्ट न हो। अधिकारियों में हड़कंप: मुरादाबाद से पहुंचे वन संरक्षक हाथी, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) के तहत अनुसूची-1 (Schedule-I) का प्राणी है, जिसे बाघ के बराबर ही सुरक्षा दर्जा प्राप्त है। हाथी की मौत की खबर वन विभाग के लिए किसी बड़ी आपदा से कम नहीं होती। मामले की गंभीरता को देखते हुए, बिजनौर के स्थानीय अधिकारियों ने तुरंत उच्च अधिकारियों को अवगत कराया। सूचना पाते ही मुरादाबाद से वन संरक्षक (Conservator of Forests) खुद मौका-ए-वारदात पर पहुंचे। उन्होंने रेंज अधिकारी और गश्ती दल से पूरी जानकारी ली। अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। वहां की मिट्टी पर मिले पंजों के निशान (Pugmarks) और हाथी के शरीर पर मौजूद घाव एक ही कहानी बयां कर रहे थे—यह शिकार का मामला है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट: टाइगर के नाखूनों और दांतों ने ली जान हाथी की मौत का सही कारण जानने के लिए और किसी भी तरह की शिकार (Poaching) या जहर (Poisoning) की आशंका को खारिज करने के लिए, वन विभाग ने कड़े प्रोटोकॉल का पालन किया। नियमों के तहत, तीन पशु चिकित्सकों (Veterinary Doctors) का एक पैनल गठित किया गया। इस टीम ने जंगल के बीच ही हाथी के बच्चे का पोस्टमार्टम किया। डॉक्टरों ने बताया कि: मृतक की उम्र: हाथी के बच्चे की उम्र लगभग ढाई वर्ष (2.5 Years) आंकी गई है। चोट के निशान: बच्चे की गर्दन और पीठ पर गहरे घाव थे। ये घाव किसी धारदार हथियार के नहीं, बल्कि किसी बड़े मांसाहारी जानवर के दांतों और नाखूनों के थे। मौत का कारण: पैनल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि बच्चे की मौत टाइगर के हमले (Tiger Attack) के कारण हुई है। टाइगर ने बच्चे की गर्दन (Windpipe) को दबोच लिया था, जिससे उसका दम घुट गया और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। जंगल की कहानी: कैसे हुआ होगा यह हमला? वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना रात के अंधेरे या अलसुबह की हो सकती है। बिजनौर का जंगल, जो कॉर्बेट नेशनल पार्क और अमानगढ़ टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है, हाथियों और बाघों का गढ़ है। संभावना जताई जा रही है कि हाथियों का एक झुंड ढकरिया बीट से गुजर रहा होगा। हाथी का बच्चा, जो अभी सिर्फ ढाई साल का था, शायद खेलते-खेलते या खाने की तलाश में अपनी मां और झुंड से थोड़ा पीछे छूट गया होगा। इसी मौके की ताक में बैठे एक वयस्क टाइगर ने उस पर हमला बोल दिया होगा। संघर्ष के निशान: मौके पर मौजूद वनकर्मियों ने बताया कि आसपास की झाड़ियां टूटी हुई थीं और जमीन की मिट्टी उखड़ी हुई थी। यह दर्शाता है कि नन्हे हाथी ने अपनी जान बचाने के लिए टाइगर से संघर्ष किया होगा। शायद उसकी चिंघार सुनकर उसकी मां या झुंड के अन्य हाथी वापस भी आए होंगे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। टाइगर अपना काम करके वहां से हट गया होगा, क्योंकि हाथियों के क्रोधित झुंड का सामना करना बाघ के लिए भी जानलेवा होता है। बिजनौर: बाघों और हाथियों का नया कुरुक्षेत्र यह घटना इस बात का प्रमाण है कि बिजनौर के जंगलों में बाघों की संख्या (Tiger Population) में इजाफा हो रहा है और वे अब बड़े शिकार करने से भी नहीं हिचक रहे। आमतौर पर बाघ, हाथियों के बच्चों पर तभी हमला करते हैं जब वे अकेले हों या बीमार हों, क्योंकि एक व्यस्क हाथी से भिड़ना बाघ के लिए भी आसान नहीं होता। वन संरक्षक ने मीडिया को बताया, "यह प्रकृति का चक्र है। जंगल में 'सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट' का नियम चलता है। हमारी जांच में पुष्टि हुई है कि यह आपसी संघर्ष (Animal Conflict) का मामला है। किसी मानवीय हस्तक्षेप या अवैध शिकार का कोई सबूत नहीं मिला है।" अंत्येष्टि और आगे की कार्रवाई पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में ही हाथी के बच्चे के शव का नियमानुसार निस्तारण (अंत्येष्टि) कर दिया गया। शव को दफना दिया गया ताकि उसके अंगों (जैसे दांत या नाखून) की तस्करी न हो सके। इस घटना के बाद बढ़ापुर वन रेंज में गश्त बढ़ा दी गई है। वन विभाग यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि कहीं गुस्साया हुआ हाथियों का झुंड आसपास के गांवों की तरफ न चला जाए। ट्रैकिंग कैमरे लगाए जा रहे हैं ताकि उस टाइगर की मूवमेंट पर नजर रखी जा सके जिसने यह शिकार किया है। जंगल का क्रूर सत्य ढकरिया बीट की यह घटना हमें याद दिलाती है कि जंगल की दुनिया हमारी दुनिया से कितनी अलग है। वहां कोई अदालत नहीं होती, वहां ताकत ही कानून है। ढाई साल के उस हाथी के बच्चे की मौत दुखद जरूर है, लेकिन यह एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) की निशानी भी है, जहां शीर्ष शिकारी (Apex Predator) अपनी भूमिका निभा रहे हैं। फिलहाल, वन विभाग की टीमें जंगल में चौकसी बरत रही हैं और आसपास के ग्रामीणों को भी जंगल के किनारे न जाने की सलाह दी गई है, क्योंकि शिकार करने के बाद या शिकार छिन जाने के बाद बाघ अक्सर आक्रामक हो सकते हैं।
मेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में रफ्तार का कहर एक बार फिर दो हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां निगल गया। मंगलवार सुबह मवाना क्षेत्र में हुए एक हृदयविदारक सड़क हादसे में भारतीय सेना के एक जवान और उनके बचपन के दोस्त की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा इतना भीषण था कि देखने वालों की रूह कांप गई। गन्ने से लदे एक तेज रफ्तार ट्रक ने ओवरटेक करने की कोशिश कर रही बुलेट मोटरसाइकिल को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में बिजनौर जिले के चांदपुर निवासी सेना के जवान शुभम चौधरी और उनके साथी मोहित की मौके पर ही जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में रूह कंपा देने वाली वारदात: लिव-इन पार्टनर ने गला घोंटकर महिला को उतारा मौत के घाट, बच्चों के साथ भी रची थी खौफनाक साजिश इस घटना के बाद से मृतकों के पैतृक गांव में कोहराम मचा हुआ है। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और फरार ट्रक चालक की तलाश शुरू कर दी है। हादसे की आंखों देखी: रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर यह दर्दनाक घटना मवाना खुर्द पुलिस चौकी के पास राफन चौराहे के नजदीक घटी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मंगलवार की दोपहर करीब 11 बजे एक काले रंग की बुलेट मोटरसाइकिल पर दो युवक मेरठ से बिजनौर की ओर जा रहे थे। मोटरसाइकिल की रफ्तार सामान्य थी, लेकिन हाईवे पर गन्ने से लदे वाहनों की कतार और ओवरलोड ट्रकों की आपाधापी ने सड़क को खतरनाक बना दिया था। बताया जा रहा है कि बुलेट सवार युवकों ने आगे चल रहे एक गन्ने से लदे ट्रक को ओवरटेक करने का प्रयास किया। इसी दौरान सामने से आ रहे किसी वाहन से बचने या संतुलन बिगड़ने के कारण उनकी बाइक ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई। टक्कर लगते ही बाइक सड़क पर गिर पड़ी और दोनों युवक ट्रक के पिछले पहियों की चपेट में आ गए। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि मंजर इतना भयावह था कि उसे देखा नहीं जा रहा था। ट्रक का भारी-भरकम पहिया युवकों के सिर के ऊपर से गुजर गया। हेलमेट पहने होने के बावजूद जवान शुभम का सिर बुरी तरह कुचल गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, उनके साथी मोहित का शरीर भी बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया था। सड़क पर करीब 30 मीटर तक मांस के लोथड़े और खून बिखर गया था, जिससे वहां से गुजरने वाले राहगीर भी सहम गए। (Internal link to related article: मेरठ-बिजनौर हाईवे पर बढ़ते हादसे और सुरक्षा के सवाल) मृतकों की पहचान: देश का रक्षक और उसका साथी घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मवाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब जांच शुरू की, तो मृतकों की जेब से मिले दस्तावेजों और ऑनलाइन बाइक नंबर के जरिए उनकी पहचान हो सकी। शुभम चौधरी (सेना का जवान): 28 वर्षीय शुभम चौधरी बिजनौर जिले के चांदपुर थाना क्षेत्र के रुकनपुर (बहमनशोरा) गांव के रहने वाले थे। शुभम भारतीय सेना में कार्यरत थे और देश सेवा का जज्बा रखते थे। जानकारी के मुताबिक, वह 2019 बैच के जवान थे और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में तैनात थे। कुछ रिपोर्ट्स में उनकी तैनाती अरुणाचल प्रदेश भी बताई गई है। शुभम हाल ही में छुट्टी लेकर अपने घर आए थे। मोहित (उर्फ भूरा): 30 वर्षीय मोहित भी उसी गांव (रुकनपुर) के निवासी थे और शुभम के करीबी दोस्त थे। मोहित खेती-बाड़ी का काम संभालते थे और अपने परिवार का सहारा थे। पारिवारिक पृष्ठभूमि: शुभम के पिता का नाम राजवीर सिंह है। शुभम अपने माता-पिता के लाडले थे और दो भाइयों व एक बहन में सबसे छोटे थे। उनकी शादी करीब दो साल पहले हुई थी, लेकिन अभी उनकी कोई संतान नहीं थी। छुट्टी पर आए बेटे की मौत की खबर ने उनकी पत्नी और माता-पिता को तोड़कर रख दिया है। वहीं, मोहित के पिता का नाम ओमराज है। मोहित अविवाहित थे। दोनों दोस्तों की एक साथ मौत से पूरे रुकनपुर गांव में चूल्हे नहीं जले हैं। पुलिस की कार्रवाई और जांच हादसे के बाद ट्रक चालक मौके का फायदा उठाकर ट्रक छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलते ही सीओ मवाना पंकज लवानिया और थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को क्षत-विक्षत हालत में सड़क से हटाया और मोर्चरी भिजवाया। पुलिस ने गन्ने से लदे ट्रक और क्षतिग्रस्त बुलेट मोटरसाइकिल को अपने कब्जे में ले लिया है। एसपी देहात अभिजीत कुमार ने बताया कि ट्रक नंबर के आधार पर मालिक और चालक का पता लगाया जा रहा है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है ताकि हादसे की सटीक वजह का पता चल सके कि क्या बाइक स्लिप हुई थी या ट्रक ने साइड मारी थी। मेरठ-बिजनौर हाईवे: हादसों का 'ब्लैक स्पॉट' मेरठ से बिजनौर को जोड़ने वाला यह मार्ग हाल के दिनों में हादसों का गढ़ बन गया है। जिसे स्थानीय लोग अब 'मौत का हाईवे' भी कहने लगे हैं। गन्ने के ओवरलोड ट्रक: इस सीजन में चीनी मिलें चालू होने के कारण हाईवे पर गन्ने से लदे ट्रकों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की भरमार है। अक्सर ये वाहन क्षमता से अधिक लदे होते हैं और सड़क के बीचोबीच चलते हैं, जिससे पीछे आने वाले दोपहिया वाहनों के लिए जगह नहीं बचती। ओवरटेकिंग की जल्दबाजी: संकरी सड़क और भारी ट्रैफिक के बीच ओवरटेकिंग करना जानलेवा साबित हो रहा है। इस हादसे में भी ओवरटेकिंग के दौरान संतुलन बिगड़ना एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। हेलमेट भी नहीं बचा सका जान: सेना के जवान शुभम ने हेलमेट पहन रखा था, जो एक जिम्मेदार नागरिक और सैनिक होने का प्रमाण है। लेकिन जब भारी वाहन का पहिया ही सिर के ऊपर से गुजर जाए, तो हेलमेट भी बेअसर साबित हो जाता है। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि हेलमेट के साथ-साथ सड़क पर सुरक्षित दूरी और ट्रैफिक नियमों का पालन कितना जरूरी है। मेरठ के मवाना में हुआ यह सड़क हादसा (Road Accident) हमें फिर सचेत करता है कि सड़क पर एक छोटी सी चूक जीवन भर का दर्द दे सकती है। भारतीय सेना ने अपना एक वीर जवान खो दिया, और एक परिवार ने अपना बुढ़ापे का सहारा। प्रशासन को चाहिए कि गन्ने के सीजन में ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराए और ओवरलोड वाहनों पर नकेल कसे। हम अपने पाठकों से अपील करते हैं कि हाईवे पर भारी वाहनों से उचित दूरी बनाकर चलें और ओवरटेक करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। मेरठ के मवाना क्षेत्र में मंगलवार को गन्ने से लदे ट्रक की चपेट में आने से बिजनौर निवासी सेना के जवान शुभम चौधरी और उनके दोस्त मोहित की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों बुलेट मोटरसाइकिल से बिजनौर लौट रहे थे। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और फरार चालक की तलाश जारी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।