मुंबई (Mumbai): साल 2026 की शुरुआत बॉलीवुड के 'भाईजान' यानी सलमान खान (Salman Khan) के फैंस के लिए बेहद खास खबर के साथ हुई है. लंबे समय से जिस फिल्म की चर्चा हो रही थी, अब उसकी पहली झलक संगीत के माध्यम से सामने आ गई है. सलमान खान की मच-अवेटेड फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' (Battle of Galwan) का पहला गाना 'मातृभूमि' (Maatrubhumi Song) रिलीज कर दिया गया है.READ ALSO:-WhatsApp का 'सुरक्षा चक्र': अब बच्चों की सीक्रेट चैट्स और ऑनलाइन दुनिया पर रहेगी माता-पिता की सीधी नजर, आ रहा है 'Primary Controls' का महा-अपडेट इस गाने के रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर तहलका मच गया है. गाने में सलमान खान का फौजी अवतार और अरिजीत सिंह (Arijit Singh) की रूह को छू लेने वाली आवाज ने श्रोताओं की आंखों में आंसू ला दिए हैं. यह गाना न केवल देशभक्ति के जज्बे को सलाम करता है, बल्कि गलवान घाटी के वीरों की शहादत को भी याद दिलाता है. आइए विस्तार से जानते हैं इस गाने की खासियत, फिल्म की कहानी और सलमान खान के इस नए अवतार के बारे में. 'मातृभूमि' ने जगाया देशप्रेम का अलख (Maatrubhumi Song Details) फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' का यह पहला गाना एक इमोशनल और पैट्रियोटिक ट्रैक है. गाने का टाइटल 'मातृभूमि' रखा गया है. इस गाने की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसका संगीत और गायन है. बॉलीवुड के मशहूर म्यूजिक कंपोजर हिमेश रेशमिया (Himesh Reshammiya) ने इस गाने को कंपोज किया है, जबकि सुरों के सरताज अरिजीत सिंह ने इसे अपनी मखमली आवाज दी है. अरिजीत सिंह का साथ दिया है सुरीली आवाज की मल्लिका श्रेया घोषाल (Shreya Ghoshal) और मणि धर्मकोट ने. इन तीनों की जुगलबंदी ने गाने को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया है. दिल को छू लेने वाले बोल: गाने के लिरिक्स मशहूर गीतकार समीर अंजान (Sameer Anjaan) ने लिखे हैं. गाने की शुरुआती पंक्तियां ही रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं: "मातृभूमि आज मैं संकल्प लूं तेरे लिए, मैं जिऊं तेरे लिए और मैं मरूं तेरे लिए… मेरी जान वतन पे जाए तो जीवन सफल हो जाए." ये लाइनें एक सैनिक के अपनी मिट्टी के प्रति समर्पण और बलिदान को खूबसूरती से बयां करती हैं. सोशल मीडिया पर फैंस इस गाने को 'साल 2026 का एंथम' बता रहे हैं. वीडियो में सलमान और चित्रांगदा की केमिस्ट्री वायरल हो रहे इस गाने के वीडियो में सलमान खान एक भारतीय सेना के अधिकारी की वर्दी में बेहद प्रभावशाली लग रहे हैं. उनके चेहरे पर गंभीरता और आंखों में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून साफ देखा जा सकता है. गाने में उनके साथ अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह (Chitrangda Singh) भी नजर आ रही हैं. फिल्म में चित्रांगदा, सलमान खान के किरदार की पत्नी की भूमिका में हैं. वीडियो में एक फौजी की निजी जिंदगी, उसका परिवार से दूर जाना और फर्ज के लिए कुर्बानी देने के जज्बे को दिखाया गया है. सलमान और चित्रांगदा की केमिस्ट्री काफी सोबर और इमोशनल नजर आ रही है, जो गाने के मूड के साथ पूरी तरह न्याय करती है. असली घटना पर आधारित है 'बैटल ऑफ गलवान' जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह फिल्म साल 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प पर आधारित है. यह घटना भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें भारतीय जांबाज सैनिकों ने चीनी घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब दिया था. कर्नल संतोष बाबू के रोल में सलमान: रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलमान खान इस फिल्म में कर्नल बी. संतोष बाबू (Col. B. Santosh Babu) का किरदार निभा रहे हैं. कर्नल संतोष बाबू 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे, जो चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में शहीद हो गए थे. उन्हें मरणोपरांत 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया था. एक रियल लाइफ हीरो का किरदार निभाना सलमान खान के लिए एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी दोनों है. डायरेक्शन और प्रोडक्शन (Production Details) इस फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया (Apoorva Lakhia) ने किया है, जो इससे पहले 'शूटआउट एट लोखंडवाला' जैसी एक्शन फिल्में बना चुके हैं. फिल्म का निर्माण खुद सलमान खान ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी सलमान खान फिल्म्स (Salman Khan Films) के बैनर तले किया है. फिल्म की शूटिंग पिछले साल यानी दिसंबर 2025 में पूरी हो चुकी है और फिलहाल यह पोस्ट-प्रोडक्शन (Post-Production) स्टेज में है. मेकर्स इस फिल्म को बड़े पैमाने पर रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं. खबरों की मानें तो फिल्म अप्रैल 2026 में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है. सलमान खान के लिए क्यों अहम है यह फिल्म? सलमान खान के करियर के लिहाज से 'बैटल ऑफ गलवान' बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. दरअसल, मार्च 2025 में रिलीज हुई उनकी पिछली फिल्म 'सिकंदर' (Sikandar) बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी. 'सिकंदर' के फ्लॉप होने के बाद आलोचकों ने सलमान के स्टारडम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे. ऐसे में, सलमान को एक बड़ी हिट की दरकार है. चूंकि देशभक्ति (Patriotism) एक ऐसा जॉनर है जिसे भारतीय दर्शक हमेशा पसंद करते हैं—जैसे 'बजरंगी भाईजान' या 'टाइगर' सीरीज—इसलिए ट्रेड पंडितों को उम्मीद है कि 'बैटल ऑफ गलवान' सलमान की शानदार वापसी कराएगी. सोशल मीडिया पर फैंस का रिएक्शन Maatrubhumi Song रिलीज होते ही ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर ट्रेंड कर रहा है. फैंस अरिजीत और सलमान के रीयूनियन की तारीफ कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, "अरिजीत सिंह की आवाज और सलमान का स्वैग, यह गाना ब्लॉकबस्टर है." दूसरे यूजर ने कमेंट किया, "हिमेश रेशमिया का संगीत पुराने दिनों की याद दिलाता है. मास्टरपीस!" कुल मिलाकर, 'बैटल ऑफ गलवान' का पहला गाना 'मातृभूमि' दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरा है. अरिजीत सिंह, श्रेया घोषाल और हिमेश रेशमिया की तिकड़ी ने एक ऐसा गाना तैयार किया है जो लंबे समय तक लोगों की जुबां पर रहेगा. अब देखना यह होगा कि अप्रैल में जब यह फिल्म रिलीज होगी, तो क्या सलमान खान बॉक्स ऑफिस पर वही पुराना जादू चला पाएंगे या नहीं. फिलहाल, फैंस इस देशभक्ति तराने का आनंद ले रहे हैं. सारांश: सलमान खान की अपकमिंग फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' का इमोशनल सॉन्ग 'मातृभूमि' रिलीज हो गया है. अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल की आवाज से सजे इस गाने में सलमान खान शहीद कर्नल संतोष बाबू के किरदार में नजर आ रहे हैं. फिल्म 2020 के गलवान संघर्ष पर आधारित है और अप्रैल 2026 में रिलीज होने की संभावना है.
मुंबई (Mumbai)। साल 2026 की शुरुआत बॉलीवुड के लिए धमाकेदार रही है। आज यानी 23 जनवरी को बॉक्स ऑफिस पर मल्टी-स्टारर वॉर फिल्म 'बॉर्डर 2' (Border 2) रिलीज हो चुकी है, जिसे दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। लेकिन इसी बीच, बॉलीवुड के 'भाईजान' यानी सलमान खान (Salman Khan) ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। सलमान ने अपनी मच-अवेटेड फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' (Battle of Galwan) के पहले गाने 'मातृभूमि' (Matrubhumi) का टीजर रिलीज कर फैंस के उत्साह को दोगुना कर दिया है।READ ALSO:-कुदरत का कहर: मेरठ के ऐतिहासिक चर्च पर आकाशीय बिजली गिरने से लगी भीषण आग, 45 मिनट तक सांसें थमीं, बाल-बाल बची जान 'मातृभूमि' टीजर: रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव आज रिलीज किए गए टीजर में देशभक्ति का वो जज्बा देखने को मिल रहा है, जिसके लिए सलमान खान की फिल्में जानी जाती हैं। चंद सेकंड के इस वीडियो में बैकग्राउंड स्कोर और सलमान का इंटेंस लुक रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। विजुअल्स: सलमान खान भारतीय सेना के अधिकारी की वर्दी में नजर आ रहे हैं। उनके चेहरे पर गंभीरता और आंखों में देश के लिए मर मिटने का जुनून साफ झलक रहा है। म्यूजिक: टीजर में सुनाई दे रही धुन (Tune) सीधे दिल में उतरती है और एक 'पैट्रियोटिक वाइब' (Patriotic Vibe) देती है। कल रिलीज होगा पूरा गाना: दिग्गजों का संगम अगर आप टीजर देखकर उत्साहित हैं, तो तैयार हो जाइए क्योंकि पूरा गाना कल यानी 24 जनवरी को रिलीज किया जाएगा। इस गाने को संगीत की दुनिया के दिग्गजों ने सजाया है: गायक: सुरों के बादशाह अरिजीत सिंह (Arijit Singh), अपनी सुरीली आवाज के लिए मशहूर श्रेया घोषाल (Shreya Ghoshal) और मास्टरमानी धर्मकोट ने इस गाने को अपनी आवाज दी है। संगीत: गाने का म्यूजिक हिमेश रेशमिया (Himesh Reshammiya) ने तैयार किया है, जिनकी धुनों में हमेशा एक अलग जोश होता है। बोल: इस गीत के भावुक और जोश भरे बोल प्रसिद्ध गीतकार समीर अनजान (Sameer Anjaan) ने लिखे हैं। फिल्म के बारे में: 2020 की वो रात जिसने इतिहास बदल दिया फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सेना के अदम्य साहस की कहानी है। रिलीज डेट: यह फिल्म आगामी 17 अप्रैल, 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। कहानी: फिल्म की कहानी साल 2020 में भारत और चीन के बीच गलवान घाटी (Galwan Valley) में हुई हिंसक झड़प पर आधारित है। सलमान का किरदार: इस फिल्म में सलमान खान शहीद कर्नल बी. संतोष बाबू (Col. B. Santosh Babu) का किरदार निभा रहे हैं। यह उनके करियर के सबसे गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदारों में से एक माना जा रहा है। कर्नल संतोष बाबू ने ही उस रात चीनी सैनिकों का डटकर मुकाबला किया था और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। डायरेक्शन और कास्ट: फिल्म का निर्देशन अपूर्व लखिया (Apoorva Lakhia) ने किया है। फिल्म में सलमान खान के अपोजिट अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह (Chitrangada Singh) नजर आएंगी। फैंस की प्रतिक्रिया जैसे ही टीजर सोशल मीडिया पर आया, फैंस ने तारीफों के पुल बांधने शुरू कर दिए। एक तरफ लोग सिनेमाघरों में 'बॉर्डर 2' देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ 'बैटल ऑफ गलवान' की चर्चा शुरू हो गई है। रिपब्लिक डे (Republic Day) के हफ्ते में देशभक्ति से लबरेज यह गाना निश्चित रूप से चार्टबस्टर साबित होने वाला है।
मुंबई: भारतीय संगीत जगत के दो दिग्गजों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर बॉलीवुड के गलियारों तक हलचल मचा दी है। ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान (AR Rahman) द्वारा बॉलीवुड में 'सांप्रदायिक भेदभाव' और फिल्म 'छावा' (Chhaava) को लेकर की गई टिप्पणियों पर अब भजन सम्राट अनूप जलोटा (Anup Jalota) ने बेहद तीखी और व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी है।READ ALSO:-मेरठ: सीएम योगी का एक इशारा और 'बैकफुट' पर आए फायरब्रांड नेता संगीत सोम; मंत्री दिनेश खटीक को मिली 'फ्रंट सीट' अनूप जलोटा का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने रहमान के दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें एक ऐसी 'नसीहत' दे डाली है, जिसने विवाद को और हवा दे दी है। जलोटा ने कहा है कि अगर रहमान को लगता है कि मुस्लिम होने की वजह से उन्हें काम नहीं मिल रहा, तो उन्हें "घर वापसी" कर लेनी चाहिए। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर यह पूरा विवाद क्यों शुरू हुआ, रहमान ने क्या कहा था, अनूप जलोटा का तर्क क्या है और फिल्म 'छावा' को लेकर क्यों मचा है घमासान। Anup Jalota: If AR Rahman feels that he is not getting work because he is a Muslim then he should convert and become Hindu again....😂😂😂😂 pic.twitter.com/1NXBg5H2Hs — Incognito (@Incognito_qfs) January 20, 2026 अनूप जलोटा का तंज: 'दोबारा हिंदू बनकर देख लीजिए' भजन गायक अनूप जलोटा ने अपने वीडियो संदेश में सीधे तौर पर एआर रहमान के उस बयान को निशाने पर लिया, जिसमें रहमान ने कहा था कि पिछले कुछ सालों में सत्ता परिवर्तन के कारण माहौल बदला है। जलोटा ने रहमान के अतीत को याद दिलाते हुए कहा कि जब उन्होंने धर्म बदला था, तब भी इंडस्ट्री ने उन्हें सिर आंखों पर बिठाया था। वीडियो में क्या बोले जलोटा? अनूप जलोटा ने अपने वीडियो में कहा, "म्यूजिक डायरेक्टर एआर रहमान पहले हिंदू थे। उनका नाम दिलीप कुमार था। उसके बाद उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया। इंडस्ट्री ने उन्हें बहुत काम दिया, उन्होंने बहुत नाम कमाया और लोगों के दिलों में बहुत अच्छी जगह बनाई। उन्हें ऑस्कर मिला, देश का मान बढ़ाया।" इसके बाद जलोटा ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, "लेकिन अगर आज उन्हें इस बात का विश्वास है या ऐसा लगता है कि हमारे देश में मुस्लिम होने की वजह से उनको फिल्में नहीं मिल रही हैं या संगीत देने के मौके कम हो गए हैं, तो फिर वो दोबारा हिंदू हो जाएं। उनको ये विश्वास होना चाहिए कि हिंदू होने के बाद, धर्म परिवर्तन हो जाने के बाद, उनको फिर से फिल्में मिलनी शुरू हो जाएंगी। अगर यही उनका मतलब है, तो मेरी सलाह है कि वो हिंदू हो जाएं और फिर कोशिश करें कि उनको दोबारा फिल्में मिलती हैं या नहीं।" जलोटा का यह बयान सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। एक धड़ा इसे जलोटा का करारा जवाब मान रहा है, तो दूसरा धड़ा इसे अनावश्यक और भड़काऊ बता रहा है। विवाद की जड़: एआर रहमान का 'सांप्रदायिक' बयान यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब एआर रहमान ने एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में बॉलीवुड के मौजूदा माहौल पर चिंता जताई थी। आमतौर पर विवादों से दूर रहने वाले और कम बोलने वाले रहमान ने इस बार खुलकर अपनी बात रखी थी। 'रचनात्मक लोग सत्ता में नहीं हैं' जब रहमान से पूछा गया कि क्या उन्हें तमिल संगीतकार होने के नाते हिंदी फिल्म उद्योग में भेदभाव का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने कहा, "शायद मुझे कभी इसका पता ही नहीं चला, शायद भगवान ने इसे छुपा रखा था, लेकिन मैंने अपने करियर के शुरुआती दौर में ऐसा कुछ महसूस नहीं किया।" लेकिन, जब उनसे पिछले कुछ वर्षों (खासकर 2014 के बाद) के माहौल के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "पिछले आठ वर्षों में शायद ऐसा हुआ है। क्योंकि सत्ता में बदलाव आया है और अब सत्ता उन लोगों के हाथ में है जो रचनात्मक (Creative) नहीं हैं। यह एक सांप्रदायिक मुद्दा भी हो सकता है। हालांकि, यह मेरे सामने स्पष्ट रूप से नहीं दिखता, लेकिन हवा में इसे महसूस किया जा सकता है।" रहमान का इशारा स्पष्ट रूप से देश के राजनीतिक माहौल और फिल्म उद्योग में आए बदलावों की ओर था, जिसे अनूप जलोटा ने आड़े हाथों लिया। फिल्म 'छावा' पर टिप्पणी और हंगामा रहमान के इंटरव्यू का सबसे विवादास्पद हिस्सा विक्की कौशल स्टारर फिल्म 'छावा' (Chhaava) को लेकर था। यह फिल्म छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है। रहमान ने इस फिल्म के लिए बैकग्राउंड स्कोर तैयार किया था, लेकिन बाद में उन्होंने फिल्म के टोन (Tone) को लेकर असहमति जताई। रहमान ने कहा, "यह एक विभाजनकारी (Divisive) फिल्म है। मुझे लगता है कि इसने देश के विभाजनकारी माहौल का लाभ उठाया है। हालांकि, फिल्म का मूल उद्देश्य बहादुरी दिखाना है, लेकिन जिस तरह से इसे पेश किया जा रहा है, वह समाज में बंटवारा पैदा कर सकता है।" रहमान के इस बयान ने ऐतिहासिक फिल्मों और राष्ट्रवाद की बहस को जन्म दे दिया। आलोचकों का कहना है कि छत्रपति संभाजी महाराज का इतिहास मुगलों के खिलाफ संघर्ष का है, और इसे दिखाना 'विभाजनकारी' कैसे हो सकता है? रहमान की सफाई: 'इरादों को गलत समझा गया' जब रहमान के बयान पर चौतरफा आलोचना शुरू हुई, तो उन्होंने नुकसान की भरपाई (Damage Control) की कोशिश की। उन्होंने एक वीडियो बयान जारी कर सफाई दी और खेद व्यक्त किया। रहमान का स्पष्टीकरण: अपने वीडियो में रहमान ने कहा, "संगीत हमेशा से ही हमारी संस्कृति से जुड़ने, उसका जश्न मनाने और उसका सम्मान करने का मेरा माध्यम रहा है। भारत मेरी प्रेरणा है, मेरा गुरु है और मेरा घर है। मैं समझता हूं कि कभी-कभी शब्दों या इरादों को गलत समझा जा सकता है। लेकिन मेरा उद्देश्य हमेशा से संगीत के माध्यम से लोगों का उत्थान करना, सम्मान देना और सेवा करना रहा है।" उन्होंने आगे कहा, "मैंने कभी किसी को दुख पहुंचाने की इच्छा नहीं रखी और मुझे उम्मीद है कि मेरी ईमानदारी को समझा जा सकेगा। अगर मेरी बातों से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो मुझे इसका खेद है।" अनूप जलोटा बनाम एआर रहमान: विचारधाराओं का टकराव यह विवाद केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि बॉलीवुड में चल रही दो अलग-अलग विचारधाराओं के टकराव का प्रतीक है। अनूप जलोटा का तर्क: अनूप जलोटा, जो अपनी राष्ट्रवादी सोच और सनातन धर्म के प्रति आस्था के लिए जाने जाते हैं, का तर्क यह है कि प्रतिभा का कोई धर्म नहीं होता। उनका कहना है कि रहमान को जो सफलता मिली, वह भारत की धर्मनिरपेक्षता का सबूत है। ऐसे में अब पीड़ित कार्ड (Victim Card) खेलना सही नहीं है। जलोटा का 'घर वापसी' वाला तंज इसी सोच से निकला है कि अगर धर्म ही समस्या है, तो उसे बदलकर देख लें, हकीकत सामने आ जाएगी। एआर रहमान का पक्ष: दूसरी ओर, रहमान का खेमा मानता है कि कलाकार समाज का दर्पण होता है। अगर उसे महसूस हो रहा है कि माहौल में कट्टरता बढ़ रही है, तो उसे बोलने का अधिकार है। रहमान के समर्थकों का कहना है कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। रामायण और रहमान: एक दिलचस्प विरोधाभास इस पूरे विवाद में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि एआर रहमान इस समय भारत की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही 'रामायण' (Ramayana) के लिए संगीत तैयार कर रहे हैं। नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में हैं। विरोधाभास: एक तरफ रहमान कहते हैं कि 'सांप्रदायिक' माहौल है और सत्ता में बैठे लोग रचनात्मक नहीं हैं। हकीकत: दूसरी तरफ, वे उसी दौर में बन रही सबसे बड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक फिल्म (रामायण) का अहम हिस्सा हैं। सहयोग: इस प्रोजेक्ट पर वे ऑस्कर विजेता और हॉलीवुड के दिग्गज संगीतकार हंस जिमर (Hans Zimmer) के साथ काम कर रहे हैं। आलोचक पूछ रहे हैं कि अगर इंडस्ट्री में इतना ही भेदभाव होता, तो क्या 'रामायण' जैसी फिल्म का संगीत एक मुस्लिम संगीतकार को सौंपा जाता? अनूप जलोटा की टिप्पणी इसी विरोधाभास को रेखांकित करती है। सोशल मीडिया पर बंटा बॉलीवुड और फैंस इस मुद्दे पर सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया है। रहमान के समर्थन में: कई यूजर्स ने लिखा कि रहमान ने सिर्फ अपना अनुभव साझा किया है और लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सबको है। कुछ लोगों ने जलोटा के बयान को 'असभ्य' और एक वरिष्ठ कलाकार के लिए अशोभनीय बताया। जलोटा के समर्थन में: एक बड़े वर्ग ने जलोटा की तारीफ की है। उनका कहना है कि रहमान ने भारत की छवि खराब करने की कोशिश की, जबकि इसी देश ने उन्हें 'मोजार्ट ऑफ मद्रास' बनाया। यूजर्स लिख रहे हैं कि "काम नहीं मिल रहा" कहना गलत है क्योंकि रहमान के पास 'रामायण', 'लाहौर 1947' जैसी बड़ी फिल्में हैं। बॉलीवुड में धर्म का इतिहास और वर्तमान अनूप जलोटा ने रहमान के धर्म परिवर्तन का जिक्र किया, जो एक ऐतिहासिक तथ्य है। एआर रहमान का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था और उनका नाम ए.एस. दिलीप कुमार था। 20 साल की उम्र में, पारिवारिक संकट और आध्यात्मिक अनुभवों के बाद, उन्होंने और उनके परिवार ने 1989 में इस्लाम धर्म अपना लिया और वे अल्लाह रक्खा रहमान (A.R. Rahman) बन गए। जलोटा का तर्क यह है कि उनकी सबसे बड़ी सफलताएं (रोजा, बॉम्बे, लगान, स्लमडॉग मिलियनेयर) इस्लाम अपनाने के बाद ही आईं। इसलिए यह कहना कि "मुस्लिम होने के कारण काम नहीं मिल रहा" तथ्यात्मक रूप से गलत है। अनूप जलोटा और एआर रहमान के बीच का यह प्रकरण दिखाता है कि कला और राजनीति अब अलग नहीं रह गए हैं। एआर रहमान जैसे संयमित व्यक्ति का राजनीतिक टिप्पणी करना और अनूप जलोटा जैसे वरिष्ठ गायक का इतना तीखा पलटवार करना, दोनों ही असामान्य घटनाएं हैं। जलोटा की 'घर वापसी' वाली सलाह एक व्यंग्य हो सकती है, लेकिन इसने एक गंभीर बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई टैलेंट को धर्म के चश्मे से देखा जाने लगा है, या यह सिर्फ एक राजनीतिक नरेटिव है? फिलहाल, रहमान ने अपनी सफाई देकर मामले को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन जलोटा के वीडियो ने जिन्न को फिर से बोतल से बाहर निकाल दिया है। अब देखना होगा कि इंडस्ट्री के अन्य दिग्गज इस पर क्या राय रखते हैं। भजन सम्राट अनूप जलोटा ने एआर रहमान के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने बॉलीवुड में सांप्रदायिक माहौल की बात कही थी। जलोटा ने एक वीडियो जारी कर तंज कसा कि अगर रहमान को लगता है कि मुस्लिम होने से काम नहीं मिल रहा, तो वे दोबारा हिंदू बनकर देख लें। यह विवाद फिल्म 'छावा' को रहमान द्वारा 'विभाजनकारी' बताने के बाद शुरू हुआ था।
नई दिल्ली/मुंबई: ओटीटी (OTT) की दुनिया में सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर का जॉनर हमेशा से दर्शकों का पसंदीदा रहा है, लेकिन कभी-कभी कुछ कहानियाँ ऐसी आती हैं जो सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि रूह को कंपा देती हैं। अमेज़न प्राइम वीडियो ने आज, 16 जनवरी को, नए साल का सबसे बड़ा धमाका करते हुए अपनी बहुप्रतीक्षित हिंदी ओरिजिनल सीरीज़ 'दलदल' (Daldal) की रिलीज़ तारीख का ऐलान कर दिया है। यह सीरीज़ 30 जनवरी को दुनिया भर में प्रीमियर के लिए तैयार है।READ ALSO:-यूपी में कुदरत का 'कोहराम': जेट स्ट्रीम हवाओं ने जमाया प्रदेश, बिजनौर में 4.4 डिग्री पहुंचा पारा, विजिबिलिटी जीरो होने से 24 गाड़ियां टकराईं इस घोषणा के साथ ही मेकर्स ने एक ऐसा टीज़र (Teaser) जारी किया है, जिसे देखने के बाद सोशल मीडिया पर सनसनी फैल गई है। खून, कटी हुई कलाइयां और एक सीरियल किलर की विकृत मानसिकता—'दलदल' का टीज़र साफ चेतावनी देता है कि यह शो कमजोर दिल वालों के लिए बिल्कुल नहीं है। बॉलीवुड की पावरहाउस परफॉर्मर भूमि पेडनेकर इस सीरीज़ में एक सख्त और बेबाक पुलिस अधिकारी, डीसीपी रीता फरेरा के रूप में अपनी ओटीटी पारी को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं। 3000 से अधिक शब्दों के इस विशेष कवरेज में, हम 'दलदल' की कहानी, इसकी स्टारकास्ट, जिस किताब पर यह आधारित है, और प्राइम वीडियो की भविष्य की योजनाओं का गहराई से विश्लेषण करेंगे। महा-घोषणा: 30 जनवरी को खुलेगा 'दलदल' का रहस्य प्राइम वीडियो इंडिया ने आज आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि 'दलदल' का प्रीमियर 30 जनवरी को होगा। यह सीरीज़ न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर के 240 से अधिक देशों और क्षेत्रों में एक साथ रिलीज़ की जाएगी। यह ग्लोबल रिलीज़ स्ट्रेटेजी यह दर्शाती है कि अमेज़न को इस कंटेंट पर कितना भरोसा है। अक्सर भारतीय क्राइम सीरीज़ स्थानीय दर्शकों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन 'दलदल' को शुरू से ही एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के थ्रिलर के रूप में पेश किया जा रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण इसकी कहानी का स्रोत है—विष धमिजा (Vish Dhamija) का बेस्टसेलिंग उपन्यास, जिसे भारतीय क्राइम फिक्शन की दुनिया में एक मील का पत्थर माना जाता है। टीज़र ने बढ़ाई धड़कनें आज जारी किया गया टीज़र किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं लगता। यह सामान्य पुलिस procedurals से कोसों दूर है। टीज़र की शुरुआत ही एक भारी और दम घोंटने वाले वातावरण से होती है। वीभत्स दृश्य: टीज़र में दिखाए गए दृश्य विचलित करने वाले हैं। पीड़ितों के शवों को जिस तरह से दिखाया गया है—मुंह में कच्चा मांस ठूंसना, मोबाइल फोन जैसी वस्तुएं शरीर के अंदर डालना—यह एक ऐसे हत्यारे की ओर इशारा करता है जो सिर्फ जान नहीं लेता, बल्कि अपने शिकार को तड़पाता है और पुलिस को चुनौती देता है। मनोवैज्ञानिक डर: विजुअल्स से ज्यादा डरावना वह बैकग्राउंड स्कोर और सन्नाटा है, जो आने वाले तूफान का संकेत देता है। यह हिंसा केवल शारीरिक नहीं है, बल्कि मानसिक आघात (Psychological Trauma) को भी गहराई से दिखाती है। कहानी का केंद्र: डीसीपी रीता फरेरा और उसका अतीत 'दलदल' की कहानी के केंद्र में मुंबई की नवनियुक्त पुलिस उपायुक्त (DCP) रीता फरेरा हैं, जिनका किरदार भूमि पेडनेकर निभा रही हैं। रीता कोई साधारण पुलिसवाली नहीं है। वह एक सुपरकॉप तो है, लेकिन उसके कवच में दरारें हैं। न्याय और पश्चाताप के बीच की जंग सीरीज़ का प्लॉट बताता है कि रीता अपने काम में माहिर है, लेकिन वह अपने अतीत के एक काले साये से जूझ रही है। अतीत का बोझ: रीता से अतीत में कोई ऐसी गलती हुई है, जिसका अपराधबोध (Guilt) उसे आज भी सोने नहीं देता। यह "अंदर का डर" ही शायद उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है और शायद सबसे बड़ी ताकत भी। सीरियल किलर का चैलेंज: कहानी तब करवट लेती है जब मुंबई में एक के बाद एक वीभत्स हत्याएं शुरू होती हैं। यह कोई साधारण गैंगवार नहीं है; यह एक ऐसे सीरियल किलर का काम है जो एक विशेष पैटर्न में हत्याएं कर रहा है। पुरुष प्रधान समाज से लड़ाई: एक महिला डीसीपी के रूप में, रीता को न केवल बाहर के अपराधियों से लड़ना है, बल्कि पुलिस विभाग के भीतर मौजूद पितृसत्तात्मक सोच और लैंगिक पक्षपात (Gender Bias) का भी सामना करना है। उसे अपने ही विभाग में अपनी काबिलियत साबित करनी है, जबकि शहर एक खूनी के खौफ में जी रहा है। मूल स्रोत: 'भेंडी बाज़ार' - विष धमिजा की कलम का जादू 'दलदल' की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी कहानी का आधार है। यह सीरीज़ भारत के मशहूर क्राइम राइटर विष धमिजा की लोकप्रिय किताब 'भेंडी बाज़ार' (Bhendi Bazaar) पर आधारित है। कौन हैं विष धमिजा? विष धमिजा को भारतीय क्राइम फिक्शन का एक बड़ा नाम माना जाता है। अक्सर उन्हें "इंडिया का जॉन ग्रिशम" या "जेफरी आर्चर" कहा जाता है। उनकी कहानियों में कानूनी दांव-पेच, पुलिस की कार्यप्रणाली और अपराधी के मनोविज्ञान का बेहतरीन मिश्रण होता है। किताब बनाम सीरीज़: क्या उम्मीद करें? 'भेंडी बाज़ार' उपन्यास अपनी तेज़ रफ़्तार और मुंबई के अंडरबेली (Underbelly) के चित्रण के लिए जाना जाता है। शीर्षक का अर्थ: 'दलदल' नाम बहुत सोच-समझकर रखा गया है। जैसे दलदल में आप जितना निकलने की कोशिश करते हैं, उतना ही धंसते जाते हैं, वैसे ही इस केस में डीसीपी रीता फरेरा फंसती चली जाती हैं। किताब में भी अपराध का जाल इतना जटिल है कि हर सुराग एक नई मुसीबत की ओर ले जाता है। अडाप्टेशन (Adaptation): सुरेश त्रिवेणी और उनकी लेखकों की टीम (श्रीकांत अग्निस्वरन, रोहन डिसूजा, प्रिया सग्गी, और हुसैन हैदरी) ने किताब को स्क्रीन के लिए कैसे ढाला है, यह देखना दिलचस्प होगा। अक्सर किताबों को फिल्म या सीरीज़ में बदलते समय कहानी में कुछ बदलाव किए जाते हैं ताकि विजुअल ड्रामा बढ़ाया जा सके। टीज़र को देखकर लगता है कि लेखकों ने किताब की डार्क टोन को और गहरा कर दिया है। स्टारकास्ट और परफॉरमेंस: अभिनय का 'दलदल' किसी भी थ्रिलर की सफलता उसके कलाकारों पर निर्भर करती है, और 'दलदल' ने यहाँ बाजी मार ली है। भूमि पेडनेकर: एक नया अवतार भूमि पेडनेकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा (Versatility) के लिए जानी जाती हैं। चाहे 'दम लगा के हईशा' की संध्या हो या 'सोनचिड़िया' की इंदुमती, उन्होंने हर बार खुद को साबित किया है। कॉप यूनिवर्स में एंट्री: हालांकि उन्होंने पहले भी वर्दी पहनी है (जैसे 'भीड़' में), लेकिन 'दलदल' में उनका किरदार एक फुल-फ्लेज्ड एक्शन और इन्वेस्टिगेटिव रोल है। एक डीसीपी की बॉडी लैंग्वेज, उसकी सख्ती और आंखों में छिपा दर्द—भूमि के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण किरदार है। टीज़र के एक शॉट में जब वह बंदूक तानती हैं, तो उनके चेहरे पर जो संकल्प दिखता है, वह बताता है कि उन्होंने इस रोल के लिए कड़ी मेहनत की है। आदित्य रावल: उभरता हुआ सितारा महान अभिनेता परेश रावल के बेटे, आदित्य रावल ने अपनी पिछली परियोजनाओं (जैसे 'बमफाड़' और 'फराज़') में अपनी अभिनय क्षमता की झलक दिखाई है। 'दलदल' में उनका किरदार बेहद अहम माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह इस सीरीज़ में एक जटिल भूमिका में होंगे—हो सकता है कि वह संदिग्ध हों या फिर रीता के साथ काम करने वाले कोई रहस्यमयी सहयोगी। उनका इंटेंस लुक इस थ्रिलर को और वजनदार बनाता है। समारा तिजोरी: नई उम्मीद दीपक तिजोरी की बेटी समारा तिजोरी भी इस सीरीज़ का हिस्सा हैं। 'मासूम' जैसी सीरीज़ में अपने काम के लिए तारीफ बटोर चुकीं समारा यहाँ क्या भूमिका निभाएंगी, इसे अभी गुप्त रखा गया है। लेकिन मुख्य भूमिकाओं में उनका नाम होना बताता है कि उनका किरदार कहानी की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण होगा। निर्देशन और निर्माण: पर्दे के पीछे के जादूगर एक बेहतरीन कहानी को खराब निर्देशन बर्बाद कर सकता है, लेकिन 'दलदल' के पीछे जो नाम हैं, वे भरोसेमंद हैं। निर्माता: एबंडेंशिया एंटरटेनमेंट (Abundantia Entertainment) विक्रम मल्होत्रा के नेतृत्व वाला एबंडेंशिया एंटरटेनमेंट क्वालिटी कंटेंट का पर्याय बन चुका है। 'शेरनी', 'छोरी', 'जलसा', 'राम सेतु' और 'सुखी' जैसी फिल्मों और 'ब्रीद' (Breathe) जैसी सफल सीरीज़ का निर्माण करने वाले इस हाउस को पता है कि थ्रिलर कैसे बनाया जाता है। सुरेश त्रिवेणी (जिन्होंने 'तुम्हारी सुलु' और 'जलसा' बनाई) का क्रिएटिव विजन इस प्रोजेक्ट को खास बनाता है। निर्देशक: अमृत राज गुप्ता अमृत राज गुप्ता, जिन्होंने 'गुल्लक' जैसी दिल को छू लेने वाली सीरीज़ का निर्देशन किया है, अब एक डार्क थ्रिलर का निर्देशन कर रहे हैं। यह उनके लिए एक बड़ा जॉनर शिफ्ट है। 'गुल्लक' में मध्यमवर्गीय परिवार की नोकझोंक को खूबसूरती से दिखाने वाले अमृत, 'दलदल' में मुंबई के अपराध जगत की भयावहता को कैसे दिखाते हैं, यह देखना रोमांचक होगा। 'दलदल' सिर्फ 'किसने किया' (Whodunit) नहीं, बल्कि 'क्यों किया' (Whydunit) की कहानी है क्राइम थ्रिलर दो तरह के होते हैं। एक वो जहाँ अंत तक पता नहीं चलता कि कातिल कौन है, और दूसरे वो जो अपराधी की मानसिकता को कुरेदते हैं। 'दलदल' दूसरे श्रेणी में आती है। मेकर्स का दावा है कि यह सीरीज़ "आघात और नैतिकता की गहन पड़ताल" (Exploration of Trauma and Morality) है। विकृत मानसिकता का अध्ययन: जब टीज़र में पीड़ितों के मुंह में वस्तुएं ठूंसी हुई दिखाई जाती हैं, तो यह सिर्फ हिंसा नहीं है; यह कातिल का एक संदेश है। वह समाज से, पुलिस से या किसी विशेष व्यक्ति से कुछ कहना चाहता है। नैतिक द्वंद्व: डीसीपी रीता फरेरा जब इस कातिल का पीछा करती है, तो उसे अपने ही नैतिक मूल्यों से समझौता करना पड़ सकता है। क्या एक राक्षस को मारने के लिए राक्षस बनना ज़रूरी है? यह सवाल इस सीरीज़ की रीढ़ है। प्राइम वीडियो का 'क्राइम सीज़न': वैश्विक संदर्भ 'दलदल' की रिलीज़ के साथ, अमेज़न प्राइम वीडियो ने अपने 'क्राइम सीज़न' (Crime Season) का आगाज़ किया है। यह एक सोची-समझी रणनीति है जिसके तहत प्लेटफॉर्म बैक-टू-बैक हाई-प्रोफाइल क्राइम और थ्रिलर कंटेंट रिलीज़ करने वाला है। 'दलदल' इस ग्लोबल लाइनअप का भारतीय चेहरा है। आइए नज़र डालते हैं उन अन्य प्रोजेक्ट्स पर जो 'दलदल' के साथ या उसके तुरंत बाद इस वसंत ऋतु (Spring Season) में प्राइम वीडियो पर दस्तक देंगे: (A) क्रॉस - सीज़न 2 (Cross Season 2) एल्डिस हॉज (Aldis Hodge) एलेक्स क्रॉस के रूप में वापसी कर रहे हैं। जेम्स पैटरसन के उपन्यासों पर आधारित यह सीरीज़ दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय है। इसका दूसरा सीज़न और भी अधिक पेचीदा और एक्शन से भरपूर होने का वादा करता है। (B) यंग शर्लक (Young Sherlock) यह शायद इस साल का सबसे बड़ा सरप्राइज़ है। मशहूर निर्देशक गाई रिची (Guy Ritchie), जो अपनी तेज़-तर्रार एडिटिंग और स्टाइल के लिए जाने जाते हैं, दुनिया के सबसे प्रिय जासूस शर्लक होल्म्स की "उत्पत्ति की कहानी" (Origin Story) लेकर आ रहे हैं। यह सीरीज़ बताएगी कि शर्लक वह जीनियस कैसे बना जिसे हम जानते हैं। (C) स्कार्पेटा (Scarpetta) हॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियाँ निकोले किडमैन (Nicole Kidman) और जैमी ली कर्टिस (Jamie Lee Curtis) इस फोरेंसिक मिस्ट्री सीरीज़ में एक साथ आ रही हैं। पैट्रिशिया कॉर्नवेल की किताबों पर आधारित यह शो फोरेंसिक विज्ञान और अपराध की दुनिया का एक परिष्कृत (Sophisticated) चित्रण होगा। (D) 56 डेज (56 Days) कैथरीन रयान हॉवर्ड के बेस्टसेलिंग उपन्यास पर आधारित यह थ्रिलर सीरीज़ एक लॉक-रूम मिस्ट्री जैसी हो सकती है। इसमें डव कैमरून मुख्य भूमिका में हैं। यह कहानी दिखाती है कि कैसे एक रोमांस एक भयानक अपराध में बदल सकता है। (E) चीकटिलो (Cheekatilo) भारतीय संदर्भ में, 'दलदल' के अलावा तेलुगु फिल्म 'चीकटिलो' भी लाइनअप में है, जिसमें शोभिता धुलिपाला मुख्य भूमिका में हैं। शोभिता पहले ही 'मेड इन हेवन' और 'द नाइट मैनेजर' में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकी हैं। ओटीटी पर हिंदी क्राइम थ्रिलर का बदलता स्वरूप 'दलदल' का आना हिंदी वेब सीरीज़ के विकास में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। पाताल लोक और सेक्रेड गेम्स की विरासत: भारत में 'सेक्रेड गेम्स', 'मिर्जापुर' और 'पाताल लोक' ने डार्क क्राइम थ्रिलर के लिए जो मानक (Benchmark) स्थापित किए हैं, दर्शक अब उससे कम कुछ भी स्वीकार नहीं करते। 'दलदल' के टीज़र की क्वालिटी देखकर लगता है कि यह उस विरासत को आगे ले जाने की क्षमता रखती है। महिला प्रधान कॉप ड्रामा: 'दिल्ली क्राइम' में शेफाली शाह और 'दहाड़' में सोनाक्षी सिन्हा के बाद, अब भूमि पेडनेकर पुलिस वर्दी में एक नई कहानी लेकर आ रही हैं। यह ट्रेंड सुखद है कि अब महिला पुलिस अधिकारी सिर्फ साइड रोल में नहीं, बल्कि कहानी को लीड कर रही हैं और वे उतनी ही सख्त और जटिल हैं जितने उनके पुरुष समकक्ष। क्यों 'दलदल' आपकी वॉच-लिस्ट में सबसे ऊपर होनी चाहिए? अगर आप अभी भी सोच रहे हैं कि 30 जनवरी को 'दलदल' देखनी चाहिए या नहीं, तो यहाँ 5 कारण दिए गए हैं: भूमि पेडनेकर का ट्रांसफॉर्मेशन: भूमि ने हमेशा अपने किरदारों में जान फूंकी है। उनका यह हिंसक और गहन रूप देखना एक विजुअल ट्रीट होगा। कहानी में गहराई: यह केवल मार-धाड़ नहीं है। यह एक मनोवैज्ञानिक यात्रा है जो मानवीय डर और आघात को टटोलती है। बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी: टीज़र में मुंबई को जिस तरह दिखाया गया है—अंधेरा, बारिश, संकरी गलियां—वह शहर को खुद एक किरदार बना देता है। मजबूत सोर्स मटेरियल: विष धमिजा की किताब पर आधारित होने के कारण, कहानी में कसावट (Tight Plotting) की पूरी गारंटी है। ग्लोबल अपील: प्राइम वीडियो इसे 240 देशों में रिलीज़ कर रहा है, जिसका मतलब है कि इसकी प्रोडक्शन वैल्यू अंतरराष्ट्रीय मानकों की होगी। 30 जनवरी का इंतज़ार 'दलदल' का ऐलान और टीज़र ने निश्चित रूप से साल की शुरुआत में ही गर्मी बढ़ा दी है। एक तरफ जहाँ दर्शक रोमांस और कॉमेडी देख रहे हैं, वहीं प्राइम वीडियो ने 'क्राइम' का पत्ता फेंककर बाजी पलटने की कोशिश की है। डीसीपी रीता फरेरा की यह लड़ाई सिर्फ एक कातिल से नहीं, बल्कि अपने ही डर से है। क्या रीता उस 'दलदल' से बाहर निकल पाएगी जिसमें कातिल उसे खींचना चाहता है? या वह खुद उस अंधेरे का हिस्सा बन जाएगी? इन सभी सवालों के जवाब 30 जनवरी को मिलेंगे। तब तक, अपने कैलेंडर पर तारीख मार्क कर लें और दरवाज़े बंद रखें—क्योंकि 'दलदल' का डर स्क्रीन से बाहर निकलकर आपके ज़हन में बसने वाला है। संक्षिप्त विवरण (Summary Box) सीरीज़ का नाम: दलदल (Daldal) रिलीज़ डेट: 30 जनवरी, 2026 प्लेटफ़ॉर्म: अमेज़न प्राइम वीडियो जॉनर: क्राइम थ्रिलर / पुलिस प्रोसीजरल कास्ट: भूमि पेडनेकर, समारा तिजोरी, आदित्य रावल निर्देशक: अमृत राज गुप्ता आधारित: 'भेंडी बाज़ार' (उपन्यास) - लेखक विष धमिजा चेतावनी: हिंसा और वीभत्स दृश्यों के कारण 18+ दर्शकों के लिए उपयुक्त।
मुंबई: भारतीय सिनेमा में कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो केवल पर्दे पर नहीं, बल्कि दर्शकों के जेहन में बस जाते हैं। ऐसा ही एक किरदार है— शिवानी शिवाजी रॉय। यश राज फिल्म्स (YRF) की सबसे सफल और दमदार फ्रेंचाइजी 'मर्दानी' का तीसरा अध्याय, यानी 'मर्दानी 3' (Mardaani 3) अब दस्तक देने के लिए तैयार है।READ ALSO:-Railway Good News: ट्रेन का जनरल टिकट हुआ सस्ता! आज से 'RailOne' एप पर 6% तक का 'डबल डिस्काउंट'; लाइन में लगने की छुट्टी और पैसे की बचत बीते सोमवार को फिल्म का बहुप्रतीक्षित ट्रेलर रिलीज किया गया, जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। खाकी वर्दी, आंखों में अंगारे और चेहरे पर वही पुराना रौब—रानी मुखर्जी ने साबित कर दिया है कि पुलिसिया तेवर में उनका कोई सानी नहीं है। लेकिन, इस बार ट्रेलर देखने के बाद चर्चा सिर्फ रानी मुखर्जी की नहीं हो रही है। चर्चा हो रही है उस 'बुराई' की, जिसका खात्मा करने के लिए शिवानी ने कमर कसी है। इस बार फिल्म में विलेन कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि एक महिला है। नाम है—अम्मा। माथे पर बड़ी बिंदी, साधारण साड़ी, लेकिन आंखों में ऐसा क्रूर सन्नाटा जो किसी की भी रूह कंपा दे। ट्रेलर में 'अम्मा' के किरदार में नजर आ रही अभिनेत्री मल्लिका प्रसाद (Mallika Prasad) ने अपनी छोटी सी झलक से ही बता दिया है कि इस बार रानी मुखर्जी के सामने चुनौती पहाड़ जैसी है। आखिर कौन हैं मल्लिका प्रसाद? कहां से आई हैं 'मर्दानी 3' की यह खूंखार विलेन? और क्यों कहा जा रहा है कि यह किरदार मर्दानी फ्रेंचाइजी के पिछले विलेन (ताहिर राज भसीन और विशाल जेठवा) पर भारी पड़ सकता है? आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं। ट्रेलर ब्रेकडाउन: मानव तस्करी के काले साम्राज्य पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' 'मर्दानी' फ्रेंचाइजी हमेशा से ही समाज के उन घिनौने सच को उजागर करने के लिए जानी जाती है, जिन पर अक्सर बात करने से लोग कतराते हैं। पहली फिल्म में चाइल्ड ट्रैफिकिंग और दूसरी में रेप-मर्डर जैसे जघन्य अपराधों के खिलाफ जंग थी। 'मर्दानी 3' इस लड़ाई को एक नए स्तर पर ले जाती है। View this post on Instagram कहानी की झलक ट्रेलर से साफ होता है कि इस बार मुद्दा युवा लड़कियों के अपहरण और मानव तस्करी (Human Trafficking) का है। एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो लड़कियों को उठाता है और उन्हें ऐसे दलदल में धकेल देता है जहां से लौटना नामुमकिन है। इस गिरोह की सरगना है 'अम्मा'। ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे यह गिरोह पुलिस की नाक के नीचे अपना नेटवर्क चला रहा है। रानी का 'रौद्र रूप' रानी मुखर्जी अपने सिग्नेचर अंदाज में वापस लौटी हैं। ट्रेलर के एक दृश्य में वे कहती हैं, "तुमने गलत दरवाजे पर दस्तक दी है।" उनकी डायलॉग डिलीवरी और एक्शन सीन्स ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उम्र उनके लिए महज एक नंबर है। एक पुलिस अफसर की बेबसी, गुस्सा और फिर प्रतिशोध—इन तीनों भावनाओं का मिश्रण रानी के चेहरे पर बखूबी दिखता है। कौन हैं मल्लिका प्रसाद? (The Rise of 'Amma') जब भी 'मर्दानी' फिल्म आती है, तो हीरो से ज्यादा विलेन की चर्चा होती है। 'मर्दानी 1' ने ताहिर राज भसीन को स्टार बनाया, 'मर्दानी 2' ने विशाल जेठवा को पहचान दी। अब बारी मल्लिका प्रसाद की है। लेकिन मल्लिका कोई नया नाम नहीं हैं, वे अभिनय की दुनिया का एक मंझा हुआ खिलाड़ी हैं। (A) NSD की गोल्ड माइंस से निकली हैं मल्लिका मल्लिका प्रसाद अभिनय की उस प्रयोगशाला से निकलकर आई हैं, जिसने देश को नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी और इरफान खान जैसे दिग्गज दिए हैं—यानी नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD)। गंभीर अभिनय: NSD की पूर्व छात्रा होने के नाते, मल्लिका को मेथड एक्टिंग और गंभीर किरदारों को जीने में महारत हासिल है। बहुआयामी प्रतिभा: वे केवल एक अभिनेत्री नहीं हैं। वे एक निर्देशक हैं, एक शिक्षिका हैं और रंगमंच (Theatre) की एक सम्मानित कलाकार भी हैं। (B) बेंगलुरु से बॉलीवुड तक का सफर बेंगलुरु में जन्मीं और पली-बढ़ी मल्लिका ने अपने करियर को बहुत ही धैर्य और समझदारी से गढ़ा है। उन्होंने रातों-रात स्टार बनने की होड़ में शामिल होने के बजाय, अपनी कला को निखारने पर ध्यान दिया। (C) पिछले प्रोजेक्ट्स: जहां छोड़ी अपनी छाप अगर आपको लग रहा है कि मल्लिका का चेहरा जाना-पहचाना है, तो आप गलत नहीं हैं। किलर सूप (Killer Soup): हाल ही में आई समीक्षकों द्वारा सराही गई वेब सीरीज 'किलर सूप' में उन्होंने अभिनय किया था। इसमें उनके साथ कोंकणा सेन शर्मा और मनोज बाजपेयी जैसे दिग्गज थे। इतने भारी-भरकम कलाकारों के बीच अपनी जगह बनाना आसान नहीं होता, लेकिन मल्लिका ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया। ऑलमोस्ट प्यार विद डीजे मोहब्बत: अनुराग कश्यप जैसे निर्देशक की फिल्म में काम करना किसी भी कलाकार के लिए एक उपलब्धि होती है। मल्लिका इस फिल्म का भी हिस्सा रही हैं। पुरस्कृत फिल्ममेकर: कैमरे के पीछे भी उनका हुनर बोलता है। उनकी लघु फिल्म 'फॉर माय एला' (For My Ella) ने 'सुंदरबन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल' और 'लॉस एंजिल्स इंडी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल' में पुरस्कार जीते हैं। 'अम्मा' का किरदार: बुराई का नया चेहरा मल्लिका प्रसाद ने 'मर्दानी 3' में अपने किरदार को लेकर जो बातें साझा की हैं, वे बेहद दिलचस्प हैं। उन्होंने इस रोल को अपने करियर का "सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण अनुभव" बताया है। क्यों खास है 'अम्मा'? फिल्म समीक्षकों का मानना है कि 'अम्मा' का किरदार पारंपरिक विलेन जैसा नहीं है। वह जोर से चिल्लाती नहीं है, वह सिक्स-पैक एब्स नहीं दिखाती। उसका हथियार उसका दिमाग और उसकी क्रूरता है। बुरी आत्मा से प्रेरित: मल्लिका के अनुसार, "अम्मा दुष्ट हैं, लेकिन वे एक बुरी आत्मा से प्रेरित लगती हैं।" यह एक ऐसा किरदार है जिसने मल्लिका को अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकालकर अपने भीतर के अंधकार (Darkness) का सामना करने पर मजबूर कर दिया। ईमानदारी और भावनात्मक साहस: सोशल मीडिया पर अपने अनुभव को साझा करते हुए मल्लिका ने लिखा कि इस भूमिका को निभाने के लिए उन्हें बहुत अधिक भावनात्मक साहस की जरूरत थी। 'अम्मा' बनना आसान नहीं था क्योंकि इसके लिए उन्हें अपनी नैतिकता को किनारे रखकर एक राक्षस की सोच को अपनाना पड़ा। अटकलों से भरा व्यक्तित्व मल्लिका कहती हैं, "अम्मा को सीधे-सादे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वह अटकलों से भरी हुई है। उसमें क्रूरता है, लेकिन एक अजीब सी गहराई भी है। उसमें अंधकार है, लेकिन उसके पीछे एक इतिहास भी है।" यही जटिलता (Complexity) इस किरदार को डरावना बनाती है। यश राज फिल्म्स और आदित्य चोपड़ा का विजन यश राज फिल्म्स (YRF) ने हमेशा 'मर्दानी' फ्रेंचाइजी में विलेन की कास्टिंग पर विशेष ध्यान दिया है। आदित्य चोपड़ा ने मल्लिका प्रसाद को 'अम्मा' के रूप में कास्ट करके एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे टैलेंट को पहचानने में माहिर हैं। मल्लिका ने YRF और आदित्य चोपड़ा को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें 'अम्मा' का किरदार निभाने की पूरी स्वतंत्रता दी गई। उन्हें किसी सीमा में नहीं बांधा गया, जिससे वे इस किरदार में वो 'पागलपन' और 'खौफ' भर सकीं जो ट्रेलर में दिखाई दे रहा है। रानी मुखर्जी vs मल्लिका प्रसाद: अभिनय का महा-मुकाबला 30 जनवरी को जब यह फिल्म रिलीज होगी, तो दर्शकों को दो पावरहाउस परफॉर्मेंस देखने को मिलेंगी। एक तरफ: शिवानी शिवाजी रॉय (रानी मुखर्जी), जो कानून, न्याय और अच्छाई का प्रतीक है। जो उन महिलाओं की आवाज है जो रोज अपराधों से लड़ती हैं। दूसरी तरफ: अम्मा (मल्लिका प्रसाद), जो अराजकता, शोषण और बुराई का चेहरा है। मल्लिका ने रानी मुखर्जी की तारीफ करते हुए कहा कि शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार उन "वास्तविक महिलाओं" का प्रतिनिधित्व करता है जो हर दिन मुसीबत से लड़ती हैं। मल्लिका का मानना है कि 'अम्मा' का अंधकार ही 'शिवानी' के संघर्ष को इतना शक्तिशाली और जरूरी बनाता है। रिलीज डेट और दर्शकों का रिस्पॉन्स फिल्म का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है, जिन्होंने 'मर्दानी 2' का भी निर्देशन किया था। उनकी पकड़ थ्रिलर जॉनर पर बेहद मजबूत मानी जाती है। रिलीज डेट: 'मर्दानी 3' आगामी 30 जनवरी 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। सोशल मीडिया रिएक्शन: ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर #Mardaani3Trailer, #RaniMukerji और #Amma ट्रेंड कर रहे हैं। दर्शकों का कहना है कि वे रानी को वापस देखकर खुश हैं, लेकिन वे यह जानने के लिए ज्यादा उत्सुक हैं कि 'अम्मा' शिवानी को कैसे टक्कर देगी। क्या 'मर्दानी 3' तोड़ेगी पुराने रिकॉर्ड? 'मर्दानी 3' केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक बयान है। यह महिला पुलिस अधिकारियों के साहस को सलाम है। जिस तरह से ट्रेलर को रिस्पॉन्स मिला है और जिस तरह से मल्लिका प्रसाद के किरदार 'अम्मा' ने लोगों में खौफ और उत्सुकता पैदा की है, उसे देखकर लगता है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बना सकती है। अब बस इंतजार है 30 जनवरी का, जब पर्दे पर अच्छाई और बुराई की यह महाजंग छिड़ेगी।
गुवाहाटी: असम की ब्रह्मपुत्र नदी की लहरें आज मानो थोड़ी थम सी गई हैं। जिस राज्य में संगीत हवाओं में घुलता है, वहां आज एक अजीब सी खामोशी है। भारत रत्न और 'सुधा कोंठो' डॉ. भूपेन हजारिका के परिवार से एक और दुखद खबर सामने आई है। भूपेन दा के सबसे छोटे भाई और अपने आप में एक बेहतरीन संगीतकार, समर हजारिका (Samar Hazarika) अब हमारे बीच नहीं रहे।READ ALSO:-Mission Western UP: बजट से पहले गूंजी 'पश्चिमी यूपी' की दहाड़; मेरठ में हाईकोर्ट बेंच और एम्स के लिए आर-पार की लड़ाई, सुरेश खन्ना ने केंद्र के सामने रखा 'मास्टर प्लान' मंगलवार की सुबह गुवाहाटी के लिए एक उदास सुबह साबित हुई। 75 वर्ष की आयु में समर हजारिका ने अपनी अंतिम सांस ली। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और अस्पताल में भर्ती थे। नियति का खेल देखिए कि हाल ही में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी और वह अपने घर लौटे थे, लेकिन शायद ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। उनके निधन से असमिया संगीत जगत के एक सुनहरे अध्याय का अंत हो गया है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब पूरा असम 'माघ बिहू' (Magh Bihu) और 'उरुका' के जश्न की तैयारी कर रहा था। त्योहार की खुशियों के बीच इस खबर ने संगीत प्रेमियों के दिलों को भारी कर दिया है। अंतिम क्षण: निजारापार का वो घर जहाँ थमीं सांसें पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट और पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, समर हजारिका का निधन गुवाहाटी के निजारापार (Nijarapar) इलाके में स्थित उनके पैतृक आवास पर हुआ। यह वही इलाका है जो 'हजारिका परिवार' का गढ़ माना जाता है। यहाँ की पहाड़ियों पर हजारिका परिवार के सभी सदस्य अलग-अलग घरों में रहते हैं, और यह स्थान असमिया संस्कृति का एक केंद्र भी रहा है। मंगलवार को जैसे ही उनके निधन की खबर बाहर आई, उनके आवास के बाहर प्रशंसकों और शुभचिंतकों की भीड़ जमा हो गई। परिवार ने उनकी मृत्यु की पुष्टि करते हुए बताया कि लंबी बीमारी से जूझने के बाद उनका शरीर थक चुका था। बुढ़ापे से जुड़ी बीमारियों और हालिया अस्पताल के चक्करों ने उन्हें कमजोर कर दिया था। जीवन परिचय: 10 भाई-बहनों में सबसे छोटे 'समर' समर हजारिका का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था, जहाँ संगीत ओढ़ना-बिछौना था। वह अपने माता-पिता के 10 संतानों में सबसे छोटे थे। सबसे बड़े भाई डॉ. भूपेन हजारिका थे, जिनकी ख्याति न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में थी। एक वटवृक्ष जैसे बड़े भाई की छाया में अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन समर हजारिका ने यह कर दिखाया। अक्सर देखा जाता है कि महान हस्तियों के भाई-बहन उनकी चमक के पीछे छिप जाते हैं, लेकिन समर हजारिका ने अपनी एक अलग शैली विकसित की। वह शांत स्वभाव के थे, लेकिन उनकी गायकी में एक गहरा ठहराव था। उन्होंने कभी भी अपने भाई की नकल करने की कोशिश नहीं की, बल्कि अपनी खुद की एक संगीतमय पहचान बनाई। संगीत सफर: 1960 के दशक से अब तक समर हजारिका का संगीत करियर पांच दशकों से भी अधिक समय तक चला। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1960 के दशक में की थी, जो असमिया संगीत का स्वर्णिम दौर माना जाता है। पहला एल्बम: उनका पहला एल्बम 'उत्तर कोंवर प्रोतिमा बरुआ देवी' (Uttar Konwar Protima Barua Devi) साल 1968 में रिलीज हुआ था। इस एल्बम ने उन्हें संगीत प्रेमियों के बीच पहचान दिलाई। प्लेबैक सिंगिंग: समर हजारिका ने केवल एल्बम तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने असमिया फिल्म इंडस्ट्री में एक प्लेबैक सिंगर के रूप में भी अपनी छाप छोड़ी। फिल्म 'उपोपथ' फिल्म 'बोवारी' फिल्म 'प्रवती पोखिर गान' इन फिल्मों में गाए उनके गीत आज भी पुराने असमिया गीतों के शौकीनों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं। संगीत निर्देशन: गायन के अलावा, उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स के लिए संगीत (Music Composition) भी तैयार किया। उन्होंने रेडियो के लिए भी अनगिनत गाने गाए, जो उस दौर में मनोरंजन और सूचना का मुख्य साधन हुआ करता था। भूपेन हजारिका की विरासत के संवाहक समर हजारिका के जीवन का एक बड़ा हिस्सा अपने बड़े भाई, भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की विरासत को सहेजने और उसे आगे बढ़ाने में बीता। समारोहों में भागीदारी: भूपेन दा के निधन (2011) के बाद, समर हजारिका अक्सर उन मंचों पर नजर आते थे जो भूपेन हजारिका को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किए जाते थे। प्रसिद्ध गीत: इन कार्यक्रमों में वह अक्सर भूपेन दा का लिखा और गाया हुआ एक विशेष गीत गाते थे - 'मोई बिसारिसु हेजार सोकुट' (Moi Bisarisu Hejar Sokut)। जब भी समर हजारिका मंच पर यह गीत गाते थे, दर्शकों की आंखें नम हो जाती थीं, क्योंकि उनकी आवाज में कहीं न कहीं भूपेन दा की झलक मिलती थी। शताब्दी समारोह: हाल के वर्षों में, भूपेन हजारिका के जन्म शताब्दी समारोहों (Centenary Celebrations) के आयोजन में भी समर हजारिका ने एक अभिभावक की भूमिका निभाई थी। राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं: शोक में डूबा असम समर हजारिका के निधन पर असम के राजनीतिक गलियारों और सामाजिक क्षेत्रों से गहरी संवेदनाएं व्यक्त की गई हैं। 1. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का भावुक संदेश असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा: "समर हजारिका की आवाज में वो जादू था जो हर मौके को खास बना देता था। उन्होंने न केवल असम की संस्कृति में बड़ा योगदान दिया, बल्कि भूपेन हजारिका की विरासत को भी पूरी शिद्दत से आगे बढ़ाया। उनके जाने से असम ने एक और बेहतरीन आवाज खो दी है। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं।" 2. केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की श्रद्धांजलि केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस घटना को सांस्कृतिक जगत के लिए एक बड़ी क्षति बताया। उन्होंने बिहू के त्योहार का जिक्र करते हुए कहा: "आज उरुका (माघ बिहू की पूर्व संध्या) है, और ऐसे पावन दिन पर उनका जाना बेहद दुखद है। उन्होंने अपनी आवाज से दशकों तक लोगों के दिलों को छू लिया। असमिया संगीत में उनके योगदान को पीढ़ियां याद रखेंगी।" 3. अन्य कलाकारों की प्रतिक्रिया जुबीन गर्ग, पापोन और अन्य आधुनिक असमिया कलाकारों ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। संगीत जगत का कहना है कि हजारिका परिवार का मार्गदर्शन अब कम हो गया है। कौन थे डॉ. भूपेन हजारिका? चूंकि समर हजारिका की पहचान उनके बड़े भाई डॉ. भूपेन हजारिका से गहराई से जुड़ी है, इसलिए पाठकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि भूपेन दा कौन थे और उनका कद क्या था। 'सुधा कोंठो' का सफर: जन्म: 8 सितंबर 1926 को असम के सादिया में हुआ। बहुमुखी प्रतिभा: वह केवल गायक नहीं थे; वह एक कवि, संगीतकार, फिल्म निर्माता, लेखक और राजनेता भी थे। उन्हें 'बार्ड ऑफ ब्रह्मपुत्र' (Bard of the Brahmaputra) कहा जाता है। भाषाओं का सेतु: भूपेन हजारिका ने असमिया, हिंदी, बंगाली और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में गीत गाए। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति को मुख्य भूमि भारत (Mainland India) से जोड़ने का काम किया। प्रसिद्ध गीत: असमिया/बंगाली: 'मोइ एति जाजाबोर' (मैं एक बंजारा), 'बिस्तीर्ण पारेरे', 'मानुहे मानुहोर बाबे' (इंसान इंसान के लिए)। हिंदी: फिल्म 'रुदाली' का गाना 'दिल हूम हूम करे', 'ओ गंगा बहती हो क्यों' (जो पॉल रोबसन के 'ओल मैन रिवर' से प्रेरित था)। सम्मान: दादा साहेब फाल्के पुरस्कार: 1992 पद्म विभूषण: 2012 भारत रत्न: 2019 (मरणोपरांत) समर हजारिका इसी महान विरासत के अंतिम स्तंभों में से एक थे। उनके जाने से हजारिका परिवार की उस पीढ़ी का अंत करीब आ गया है जिसने असम को आधुनिक संगीत से परिचित कराया था। असमिया संगीत का एक युग समाप्त 1960 और 70 का दशक असमिया संगीत का 'रेनेसां' (Renaissance) काल था। यह वह दौर था जब भूपेन हजारिका, जयंत हजारिका (एक और भाई जिनका निधन युवावस्था में हो गया था), और खगेन महंत जैसे दिग्गज सक्रिय थे। समर हजारिका इसी दौर के गवाह और भागीदार थे। रेडियो गुवाहाटी (AIR Guwahati) उस समय कलाकारों का घर हुआ करता था। समर हजारिका ने रेडियो पर अनगिनत कार्यक्रम किए। उनके गीतों में असम की मिट्टी, यहाँ की नदियों और यहाँ के आम जनजीवन का दर्द और खुशी झलकती थी। नई पीढ़ी के लिए सीख: आज के दौर में जब संगीत पूरी तरह डिजिटल हो गया है, समर हजारिका जैसे कलाकारों का जीवन नई पीढ़ी को धैर्य और साधना की सीख देता है। उन्होंने कभी भी व्यावसायिक सफलता के लिए अपनी कला से समझौता नहीं किया। वह ताउम्र अपनी जड़ों से जुड़े रहे और गुवाहाटी की उसी पहाड़ी पर रहे जहाँ उनका परिवार दशकों से रहता आया है। खालीपन जो कभी नहीं भरेगा समर हजारिका का जाना केवल एक गायक का जाना नहीं है, यह उस दौर का जाना है जब संगीत में सादगी होती थी। हालांकि वह अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गाए गीत और भूपेन हजारिका के साथ उनकी यादें हमेशा असमिया संस्कृति के इतिहास में दर्ज रहेंगी। खबरीलाल की पूरी टीम की ओर से दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि। तुलनात्मक सारणी: हजारिका बंधुओं का योगदान विशेषता डॉ. भूपेन हजारिका जयंत हजारिका समर हजारिका मुख्य भूमिका विश्वस्तरीय गायक, गीतकार, फिल्मकार क्रांतिकारी गायक, रॉक और फोक का मिश्रण शास्त्रीय और सुगम संगीत, विरासत के संरक्षक प्रसिद्धि का स्तर अंतर्राष्ट्रीय (भारत रत्न) राज्य स्तर पर 'राणा दा' के रूप में मशहूर राज्य स्तर पर प्रतिष्ठित गायक करियर की शुरुआत 1930 का दशक 1960 का दशक 1960 का दशक प्रमुख शैली लोक संगीत, मानवतावादी गीत प्रयोगधर्मी, आधुनिक असमिया संगीत मधुर, भावपूर्ण और पारंपरिक पाठकों के लिए नोट: अगर आप असमिया संगीत के प्रेमी हैं, तो आज का दिन समर हजारिका और उनके परिवार के गीतों को सुनने का दिन है। आप उनके गीतों को यूट्यूब या अन्य स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर सुन सकते हैं और उन्हें याद कर सकते हैं।
मुंबई/दार्जिलिंग: संगीत की दुनिया से रविवार की सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने हर किसी का दिल तोड़ दिया। साल 2007 में अपनी सादगी, मुस्कान और जादुई आवाज से पूरे देश को दीवाना बनाने वाले इंडियन आइडल सीजन 3 (Indian Idol Season 3) के विजेता प्रशांत तमांग (Prashant Tamang) अब हमारे बीच नहीं रहे।READ ALSO:-बिजनौर पुलिस की बड़ी कामयाबी: 'डिजिटल अरेस्ट' का खौफ दिखाकर रिटायर्ड शिक्षिका से 29 लाख ठगने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार मात्र 43 वर्ष की अल्पायु में इस प्रतिभाशाली गायक और अभिनेता ने दुनिया को अलविदा कह दिया। खबरों के मुताबिक, 11 जनवरी 2026 की सुबह उन्हें दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ा, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने उस आवाज को मृत घोषित कर दिया, जिसने कभी करोड़ों भारतीयों के दिलों पर राज किया था। प्रशांत तमांग का जाना सिर्फ एक गायक का जाना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे संघर्ष और सफलता की कहानी का अंत है जिसने लाखों युवाओं को सपने देखने की हिम्मत दी थी। एक साधारण पुलिस कांस्टेबल से लेकर राष्ट्रीय स्तर के 'आइडल' बनने तक का उनका सफर आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। वो काली सुबह: 11 जनवरी को क्या हुआ? साल 2026 की शुरुआत मनोरंजन जगत के लिए एक गहरे सदमे के साथ हुई है। रविवार, 11 जनवरी की सुबह जब प्रशांत तमांग के निधन की खबर फ्लैश हुई, तो पहले किसी को यकीन नहीं हुआ। घटनाक्रम: सूत्रों और करीबी दोस्तों के मुताबिक, प्रशांत तमांग अपनी सामान्य दिनचर्या में थे। सुबह के वक्त अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द (Chest Pain) की शिकायत हुई। परिवार वाले बिना एक पल गंवाए उन्हें नजदीकी अस्पताल लेकर भागे। उम्मीद थी कि यह कोई मामूली समस्या होगी और वे ठीक हो जाएंगे। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, सीपीआर (CPR) दिया गया, लेकिन उनकी धड़कनों ने साथ छोड़ दिया था। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वजह: प्राथमिक रिपोर्ट में मौत की वजह मैसिव कार्डियक अरेस्ट (Massive Cardiac Arrest) बताई जा रही है। 43 साल की उम्र, जो करियर के पीक और अनुभव का समय होता है, उसी उम्र में प्रशांत का यूं चले जाना इस बात का संकेत है कि आजकल की जीवनशैली में 'दिल' कितना कमजोर हो गया है। फ्लैशबैक 2007: जब एक 'कांस्टेबल' ने देश को झुमाया प्रशांत तमांग का नाम सुनते ही साल 2007 का वह दौर याद आ जाता है जब टीवी पर 'इंडियन आइडल' का जादू सिर चढ़कर बोलता था। कोलकाता पुलिस से मुंबई तक: प्रशांत तमांग उस समय कोलकाता पुलिस (Kolkata Police) में एक कांस्टेबल के रूप में कार्यरत थे। वे पुलिस बैंड/ऑर्केस्ट्रा में गाया करते थे। उनके साथियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें ऑडिशन देने के लिए प्रेरित किया। पहाड़ों का समर्थन: जैसे-जैसे प्रशांत शो में आगे बढ़े, पूरा दार्जिलिंग, सिक्किम और नेपाल उनके समर्थन में सड़क पर उतर आया था। लोग पोस्टर लेकर रैलियां निकालते थे। यह सिर्फ एक शो नहीं था, बल्कि 'गोरखा' समुदाय के लिए गौरव का क्षण था। ऐतिहासिक जीत: 23 सितंबर 2007 को जब फिनाले हुआ, तो प्रशांत तमांग ने अमित पॉल को हराकर 'इंडियन आइडल 3' का खिताब अपने नाम किया। उन्हें करोड़ों वोट मिले थे। वह जीत एक आम आदमी की जीत थी। बहुमुखी प्रतिभा: माइक से लेकर कैमरे तक (Acting Career) प्रशांत तमांग ने खुद को सिर्फ गायकी तक सीमित नहीं रखा। इंडियन आइडल जीतने के बाद उन्होंने कई हिंदी और नेपाली फिल्मों में अपनी आवाज दी। उन्होंने कई हिट म्यूजिक एल्बम भी निकाले जो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुए। वेब सीरीज में एंट्री: हैरान करने वाली बात यह है कि प्रशांत के अंदर एक बेहतरीन अभिनेता भी छिपा था। हाल ही में उन्होंने अभिनय की दुनिया में एक बड़ा कदम रखा था। 'पाताल लोक' सीजन 2: अमेज़न प्राइम की सुपरहिट वेब सीरीज 'पाताल लोक' (Paatal Lok) में प्रशांत तमांग ने काम किया था। किरदार: उन्होंने इस सीरीज में एक 'स्नाइपर' (Sniper) की भूमिका निभाई थी। एक पुलिसवाला जो असल जिंदगी में सिंगर बना और फिर रील लाइफ में स्नाइपर बना—यह उनके टैलेंट की रेंज को दर्शाता है। उनके फैंस इस भूमिका में उन्हें देखने के लिए बेहद उत्साहित थे। इसके अलावा, उन्होंने 'गोरखा पलटन' (Gorkha Paltan) जैसी नेपाली फिल्मों में बतौर लीड एक्टर काम किया, जिसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया था। दार्जिलिंग का बेटा: प्रारंभिक जीवन प्रशांत तमांग का जन्म 4 जनवरी, 1983 को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में हुआ था। पृष्ठभूमि: वे एक नेपाली-भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते थे। पहाड़ों की वादियों में ही उनका बचपन बीता और वहीं से उन्हें संगीत की प्रेरणा मिली। स्कूल और सर्विस: उन्होंने अपनी पढ़ाई दार्जिलिंग से की। पिता की मृत्यु के बाद, अनुकंपा के आधार पर वे कोलकाता पुलिस में शामिल हुए थे। पुलिस की सख्त ड्यूटी के बीच भी उन्होंने अपने अंदर के संगीत को मरने नहीं दिया। उनका 43वां जन्मदिन अभी कुछ ही दिन पहले, 4 जनवरी को बीता था। किसे पता था कि यह उनका आखिरी जन्मदिन होगा। इंडस्ट्री में शोक की लहर: हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि प्रशांत तमांग के निधन की खबर जंगल में आग की तरह फैली। सोशल मीडिया पर #RIPPrashantTamang ट्रेंड करने लगा। बॉलीवुड गायकों, इंडियन आइडल के पूर्व जजों और साथी प्रतियोगियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। अनु मलिक (Anu Malik): "मुझे यकीन नहीं हो रहा। प्रशांत एक बहुत ही नेकदिल इंसान और बेहतरीन गायक थे। उनकी मुस्कान आज भी मेरी आंखों के सामने है।" नेपाली फिल्म जगत: नेपाल और दार्जिलिंग में शोक का माहौल है। वहां के स्थानीय कलाकारों ने इसे संगीत जगत की अपूरणीय क्षति बताया है। फैंस का रिएक्शन: सोशल मीडिया पर एक फैन ने लिखा, "मेरा बचपन इंडियन आइडल 3 देखते हुए बीता। मैंने प्रशांत भाई के लिए फोन से वोट किया था। आज ऐसा लग रहा है जैसे मेरे बचपन का एक हिस्सा चला गया।" हार्ट अटैक: युवाओं में बढ़ता जानलेवा ट्रेंड प्रशांत तमांग की मौत ने एक बार फिर उस डरावने सवाल को खड़ा कर दिया है—आखिर 40 से 45 साल के फिट दिखने वाले सेलेब्रिटीज को हार्ट अटैक क्यों आ रहे हैं? सिद्धार्थ शुक्ला, केके (KK), पुनीत राजकुमार और अब प्रशांत तमांग। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अनियमित दिनचर्या, मानसिक तनाव (Stress) और अनदेखी स्वास्थ्य समस्याएं इसके पीछे के मुख्य कारण हो सकते हैं। प्रशांत तमांग की मौत ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जीवन कितना अनिश्चित है। विरासत: जो वो पीछे छोड़ गए प्रशांत तमांग भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत हमेशा जिंदा रहेगी। प्रेरणा: उन्होंने साबित किया कि एक छोटे से शहर का पुलिस कांस्टेबल भी अपनी मेहनत से देश का सुपरस्टार बन सकता है। संगीत: उनके गाए गीत, चाहे वे इंडियन आइडल के मंच पर हों या एल्बम्स में, हमेशा गुनगुनाए जाएंगे। "तुम्हारे सिवा कुछ ना चाहत करेंगे..." जैसे गाने आज भी फैंस की प्लेलिस्ट में हैं। पहचान: उन्होंने पूर्वोत्तर भारत और नेपाली भाषी समुदाय को मुख्यधारा के मीडिया में एक मजबूत पहचान दिलाई। अलविदा प्रशांत! खबरीलाल परिवार प्रशांत तमांग को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। 43 साल की उम्र जाने की नहीं होती। अभी उन्हें बहुत कुछ हासिल करना था, बहुत से गाने गाने थे। लेकिन नियति के आगे किसी की नहीं चलती। दार्जिलिंग की वादियों ने आज अपना सबसे सुरीला बेटा खो दिया है। उनकी आत्मा को शांति मिले। प्रशांत तमांग - एक नजर में (Life at a Glance) विवरण जानकारी नाम प्रशांत तमांग (Prashant Tamang) जन्म 4 जनवरी, 1983 (दार्जिलिंग) निधन 11 जनवरी, 2026 उम्र 43 वर्ष प्रसिद्धि विजेता, इंडियन आइडल सीजन 3 (2007) पूर्व पेशा कांस्टेबल, कोलकाता पुलिस अभिनय पाताल लोक 2 (वेब सीरीज), नेपाली फिल्में निधन का कारण दिल का दौरा (Heart Attack) FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल): Q: प्रशांत तमांग का निधन कैसे हुआ? A: प्रशांत तमांग का निधन 11 जनवरी 2026 की सुबह दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने से हुआ। Q: प्रशांत तमांग कौन थे? A: वे एक भारतीय गायक और अभिनेता थे, जिन्होंने 2007 में इंडियन आइडल सीजन 3 का खिताब जीता था। वे पहले कोलकाता पुलिस में कार्यरत थे। Q: प्रशांत तमांग की उम्र क्या थी? A: निधन के समय उनकी उम्र केवल 43 वर्ष थी। Q: उन्होंने किस वेब सीरीज में काम किया था? A: उन्होंने अमेज़न प्राइम की सीरीज 'पाताल लोक सीजन 2' में एक स्नाइपर का किरदार निभाया था।
मेरठ (स्पेशल डेस्क/खबरीलाल): कहते हैं प्यार अंधा होता है, लेकिन जब यह प्यार हवस और पागलपन की हदों को पार कर जाए, तो यह 'जानलेवा' बन जाता है। मेरठ के इतिहास में दर्ज एक ऐसा हत्याकांड, जिसने न सिर्फ पुलिस महकमे की नींद उड़ाई, बल्कि समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या एक पत्नी इतनी क्रूर हो सकती है? हम बात कर रहे हैं चर्चित 'ब्लू ड्रम कांड' (Blue Drum Case) यानी सौरभ राजपूत हत्याकांड की।READ ALSO:-Meerut School News: मेरठ में 'कोल्ड अटैक', कक्षा 9 तक के सभी स्कूल बंद! प्रशासन ने जारी किया सख्त फरमान, 10वीं-12वीं वालों के लिए बदल गया समय अब यह खौफनाक दास्तां सिर्फ फाइलों में बंद नहीं रहेगी, बल्कि दुनिया के सामने आ रही है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 ने अपनी नई क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज 'हनीमून से हत्या: Why Women Kill' (Honeymoon se Hatya) का ट्रेलर जारी कर दिया है। 9 जनवरी को रिलीज होने वाली इस सीरीज में मेरठ के इस रोंगटे खड़े कर देने वाले केस को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। आइये, आज हम आपको इस वेब सीरीज के ट्रेलर से लेकर उस असली खूनी रात की एक-एक परत खोलकर बताते हैं, जब एक पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति के शरीर को सीमेंट के घोल में दफन कर दिया था। भाग 1: 'हनीमून से हत्या' का ट्रेलर - 49 सेकंड का खौफ मंगलवार को जैसे ही ZEE5 ने इस सीरीज का 49 सेकंड का ट्रेलर जारी किया, सोशल मीडिया पर सनसनी मच गई। यह ट्रेलर किसी साधारण क्राइम शो का प्रोमो नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के खत्म होने का सबूत है। 'काली' का रौद्र रूप ट्रेलर की शुरुआत एक भारी और रहस्यमयी वॉयसओवर के साथ होती है, जो नारी के अलग-अलग रूपों का वर्णन करती है। इसमें कहा गया है कि नारी जननी है, तो वही विनाशक 'काली' भी है। ट्रेलर में खून के छींटे, पुलिस की सायरन, और एक नीले रंग का ड्रम—ये सब संकेत दे रहे हैं कि यह सीरीज दर्शकों को डराने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करेगी। दावा: जो मीडिया ने नहीं दिखाया, वो हम दिखाएंगे मेकर्स का दावा है कि सौरभ राजपूत हत्याकांड (मेरठ ब्लू ड्रम केस) की रिपोर्टिंग के दौरान मीडिया और सोशल मीडिया से कई ऐसे तथ्य छूट गए थे, जो पुलिस जांच का अहम हिस्सा थे। यह वेब सीरीज उन 'अनसुने पन्नों' को पलटेगी। जबरदस्त बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी के जरिए उस डर को स्क्रीन पर उतारने की कोशिश की गई है। भाग 2: देश के 5 'ब्लड स्टेंड' चैप्टर 'हनीमून से हत्या' सीरीज सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं है। इसमें देश के अलग-अलग कोनों में हुए 5 ऐसे जघन्य हत्याकांडों को पिरोया गया है, जहां महिलाओं ने जुर्म की दुनिया में कदम रखा। एपिसोड 1: मेघालय का 'सोनम राजा रघुवंशी केस' सीरीज की शुरुआत मेघालय के हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री से होगी, जिसने पूर्वोत्तर भारत को झकझोर दिया था। एपिसोड 2: मेरठ का 'ब्लू ड्रम केस' (सौरभ राजपूत मर्डर) यह सीरीज का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। कैसे एक एनआरआई (NRI) पति की हत्या कर उसे घर के अंदर ही ड्रम में चुनवा दिया गया। एपिसोड 3: दिल्ली का 'इलेक्ट्रिक शॉक केस' राजधानी दिल्ली की वो घटना, जहां हत्या के लिए करंट (Electric Shock) का इस्तेमाल किया गया। एपिसोड 4: भिवानी (हरियाणा) का 'इन्फ्लुएंसर केस' सोशल मीडिया की चकाचौंध के पीछे छिपा खूनी सच, जो हरियाणा के भिवानी से जुड़ा है। एपिसोड 5: मुंबई का 'टाइल केस' सपनों की नगरी मुंबई का वो केस, जहां लाश को टाइल्स के नीचे छिपाया गया था। भाग 3: फ्लैशबैक - 3 मार्च की वो 'कयामत' वाली रात अब हम आपको ले चलते हैं मेरठ के उस घर में, जहां प्यार का कत्ल हुआ। यह कहानी है लंदन में मर्चेंट नेवी में काम करने वाले सौरभ राजपूत और उनकी पत्नी मुस्कान की। तारीख: 3 मार्च 2024 (घटना की रात) स्थान: इंद्रानगर, मेरठ (किराए का मकान) सौरभ अपनी पत्नी और बच्ची से मिलने लंदन से मेरठ आए हुए थे। उन्हें जरा भी भनक नहीं थी कि जिस घर का किराया वो भर रहे हैं, उसी घर में उनकी कब्र खोदी जा चुकी है। 3 मार्च की रात सौरभ गहरी नींद में सो रहे थे। तभी उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला को घर में बुला लिया। साजिश का खूनी खेल पुलिस चार्जशीट और वेब सीरीज की कहानी के मुताबिक: मुस्कान और साहिल ने पहले सौरभ को नशे की हालत में किया या गहरी नींद का इंतजार किया। इसके बाद बेरहमी से उनकी हत्या कर दी गई। दरिंदगी की हद: हत्या करने के बाद दोनों आरोपी पूरी रात उसी कमरे में लाश के साथ रहे। उन्होंने लाश को वहीं पड़े रहने दिया और अपनी 'साजिश' को अंजाम देने की योजना बनाते रहे। भाग 4: 'ऑपरेशन ब्लू ड्रम' - चाकू, सीमेंट और एक खूनी प्लान अगली सुबह (4 मार्च) सूरज निकला, लेकिन सौरभ की जिंदगी का सूरज डूब चुका था। अब बारी थी लाश को ठिकाने लगाने की। बाजार से खरीदारी कातिल प्रेमी जोड़ा बेखौफ होकर बाजार गया। उन्होंने वहां से तीन चीजें खरीदीं: एक बड़ा धारदार चाकू (Chopper/Knife)। कई बोरी सीमेंट और रेत। एक बड़ा नीला प्लास्टिक का ड्रम। टुकड़ों में काटी जिंदगी घर वापस आकर उन्होंने जो किया, वह किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था। सौरभ के शरीर को 4 हिस्सों में काटा गया। खून को साफ किया गया। कटे हुए अंगों को एक तकिये के गिलाफ (Pillow Cover) में पैक किया गया। फिर इन पैकेट्स को उस नीले ड्रम में डाल दिया गया। सीमेंट का मकबरा लाश की बदबू न फैले और किसी को शक न हो, इसके लिए उन्होंने ड्रम में सीमेंट का गाढ़ा घोल (Mixture) बनाकर भर दिया। उनका प्लान था कि जब सीमेंट जम जाएगा, तो वे इस ड्रम को किसी नदी या नाले में फेंक देंगे। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। सीमेंट और लाश के वजन से ड्रम इतना भारी हो गया कि वे उसे हिला भी नहीं पाए। थक-हारकर उन्होंने ड्रम को घर के एक कोने में छोड़ दिया। भाग 5: हत्या के बाद 'हनीमून' - मनाली की वादियों में जश्न लाश को घर में ही सीमेंट में दफन करने के बाद मुस्कान और साहिल ने जो किया, वह उनकी पत्थरदिली का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने इसे एक 'वेकेशन' या कहें कि हत्या के बाद का 'हनीमून' बना लिया। शिवा ट्रैवल्स और वो कैब 4 मार्च: उन्होंने मेरठ के 'शिवा ट्रैवल्स' से एक कैब बुक की। ड्राइवर: अजब सिंह। डेस्टिनेशन: हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड। 13 दिन की अय्याशी ड्राइवर अजब सिंह ने पुलिस को बताया कि यह जोड़ा बेहद खुश नजर आ रहा था। वे मनाली, शिमला, और कसोल जैसी जगहों पर घूमे। वहां उन्होंने जमकर शॉपिंग की, महंगी शराब और बियर पी। बर्फ (Snow) पर एक-दूसरे के साथ खेलते रहे और फोटो खिंचवाते रहे। उनके चेहरे पर एक पल के लिए भी यह शिकन नहीं थी कि उन्होंने एक इंसान को काटकर ड्रम में बंद किया है। वे 17 मार्च तक पहाड़ों में मजे करते रहे, जबकि मेरठ के बंद कमरे में सौरभ की लाश सड़ रही थी। भाग 6: पाप का घड़ा फूटा - 17 मार्च का सरेंडर कहते हैं कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, एक गलती जरूर करता है। या फिर उसका अंतरात्मा का बोझ (अगर बचा हो) उसे जीने नहीं देता। 17 मार्च को जब वे मेरठ वापस आए, तो मुस्कान शायद डर गई थी कि अब लाश का क्या होगा। ड्रम घर में ही था। उसने अपनी मां कविता को फोन किया और रोते हुए सब सच उगल दिया। मुस्कान के शब्द: "माँ, मैंने सौरभ को मार डाला है। उसकी लाश घर में ही ड्रम में पड़ी है।" यह सुनते ही परिवार के होश उड़ गए। मुस्कान के पिता प्रमोद ने एक जिम्मेदार नागरिक और पिता का फर्ज निभाते हुए बेटी का साथ देने के बजाय उसे कानून के हवाले करने का फैसला किया। वे उसे लेकर थाने पहुंचे। पुलिस ने तुरंत दबिश देकर साहिल को भी गिरफ्तार कर लिया और घर से वह 'नीला ड्रम' बरामद किया, जिसमें सौरभ की लाश थी। भाग 7: एक अधूरी लव स्टोरी जो 'हेट स्टोरी' बनी यह कहानी सिर्फ कत्ल की नहीं, बल्कि विश्वासघात की है। आइये जानते हैं सौरभ और मुस्कान का इतिहास। 2016: बगावत वाला प्यार सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी में थे और अच्छी खासी कमाई करते थे। 2016 में जब वे छुट्टी पर मेरठ आए, तो उनकी मुलाकात मुस्कान रस्तोगी से हुई। मुस्कान को सौरभ का एनआरआई स्टेटस और पर्सनालिटी भा गई। सौरभ के परिवार (पिता मुन्नालाल, मां रेनू, भाई राहुल) ने इस रिश्ते का सख्त विरोध किया था। उन्हें शायद आभास था कि यह लड़की उनके बेटे के लिए सही नहीं है। लेकिन सौरभ प्यार में पागल थे। उन्होंने परिवार से बगावत की, जायदाद छोड़ी और मुस्कान से लव मैरिज कर ली। 2019: वो तीसरा शख्स शादी के बाद सौरभ अपनी नौकरी के सिलसिले में ज्यादातर समय विदेश (लंदन/शिप पर) रहते थे। मुस्कान मेरठ में अपनी बेटी पीहू के साथ अकेली रहती थी। 2019 में मोड़: मुस्कान अपनी बेटी पीहू को प्ले स्कूल छोड़ने जाती थी। वहीं स्कूल के बाहर उसकी मुलाकात साहिल शुक्ला से हुई। सौरभ की गैरमौजूदगी में मुस्कान और साहिल करीब आ गए। 2022 तक यह अवैध संबंध परवान चढ़ चुका था। सौरभ साल में 2-3 महीने ही घर आते थे, बाकी समय मुस्कान साहिल की थी। तलाक नहीं, मौत चाहिए थी साहिल ने मुस्कान के दिमाग में जहर भरा। वह चाहता था कि मुस्कान सौरभ को छोड़ दे। साहिल का प्लान: "तलाक लेने में बहुत पचड़े हैं। सौरभ को मार देते हैं। किसी को पता नहीं चलेगा। हम कह देंगे कि वो लंदन वापस चला गया है और हमारा तलाक हो गया है।" यही वो लालच था जिसने मुस्कान को अपने पति का कातिल बना दिया। भाग 8: कुदरत का अजीब संयोग - पति के जन्मदिन पर बेटी का जन्म इस पूरे घटनाक्रम में कुदरत ने भी एक अजीब खेल खेला है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। सौरभ की हत्या के आरोप में जेल में बंद मुस्कान गर्भवती थी (संभवतः साहिल से)। 24 नवंबर: मेरठ जेल में मुस्कान ने एक बेटी को जन्म दिया। संयोग: जिस सौरभ राजपूत की हत्या मुस्कान ने की थी, उनका जन्मदिन भी 24 नवंबर को ही होता है। लोग इसे 'कर्मों का फल' या 'पुनर्जन्म' का नाम दे रहे हैं। यह मुस्कान की दूसरी बेटी है। बड़ी बेटी पीहू का दर्द: सौरभ और मुस्कान की पहली बेटी पीहू (8 साल) अब अनाथों जैसा जीवन जी रही है। वह अपने नाना-नानी के पास है। कोरोना काल और घर के झगड़ों के कारण उसकी पढ़ाई भी छूट गई और वह अपनी कक्षा से 2 साल पीछे हो गई है। भाग 9: निष्कर्ष - ZEE5 की सीरीज से क्या उम्मीदें? 9 जनवरी को रिलीज होने वाली 'हनीमून से हत्या' वेब सीरीज से उम्मीद की जा रही है कि यह समाज को आईना दिखाएगी। क्यों देखती है दुनिया: क्राइम थ्रिलर का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सतर्क करना भी होता है। यह सीरीज दिखाएगी कि कैसे सोशल मीडिया, अकेलापन और अनैतिक संबंध एक हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर सकते हैं। मेकर्स का नजरिया: मेकर्स ने वादा किया है कि वे सौरभ राजपूत के साथ न्याय करेंगे और दिखाएंगे कि कैसे एक सीधा-साधा इंसान अपनों की साजिश का शिकार हुआ। (क्राइम, सिनेमा और शहर की हर बड़ी खबर के विस्तार से विश्लेषण के लिए पढ़ते रहें 'खबरीलाल'।) Disclaimer: This detailed report is based on the provided inputs regarding the ZEE5 web series trailer and the police records of the Meerut Blue Drum Case. The dates and specific details follow the user's provided context.
कहते हैं हकीकत, फसाने से ज्यादा खौफनाक होती है। मेरठ के जिस 'नीले ड्रम कांड' (Blue Drum Case) ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, अब वही खौफनाक दास्तां आपके स्क्रीन्स पर उतरने जा रही है। एक हंसता-खेलता परिवार, नई शादी, हनीमून के सपने और फिर... एक क्रूर हत्या।READ ALSO:-Meerut: खुर्शीद-इरम केस में आया 'यू-टर्न': पुलिस को 'स्क्रिप्टेड ड्रामा' का शक, SP की खुली चेतावनी- 'झूठ बोला तो जेल जाने की तैयारी रखें' मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड पर आधारित एक नई वेब सीरीज 'हनीमून से हत्या' (Honeymoon Se Hatya) रिलीज होने के लिए तैयार है। यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि उस काली सच्चाई का दस्तावेज़ है, जहाँ सात जन्मों का साथ निभाने का वादा करने वाली पत्नी ही पति की कातिल बन गई। View this post on Instagram ZEE5 ने इस रोंगटे खड़े कर देने वाली 'ऑरिजनल डॉक्यूमेंट्री सीरीज' (Original Documentary Series) की घोषणा कर दी है। इसमें दिखाया जाएगा कि कैसे पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल ने मिलकर अपराध की दुनिया का वो तरीका अपनाया, जिसे सुनकर पुलिस के भी होश फाख्ता हो गए थे। रिलीज डेट और प्लेटफॉर्म: कब और कहां देखें? अगर आप क्राइम थ्रिलर और सच्ची घटनाओं पर आधारित कहानियां देखने के शौकीन हैं, तो तारीख नोट कर लीजिए। सीरीज का नाम: हनीमून से हत्या (Honeymoon Se Hatya) प्लेटफॉर्म: ZEE5 (ज़ी5) रिलीज डेट: 9 जनवरी, 2026 एपिसोड्स: 5 (पांच) भाषा: हिंदी जॉनर: क्राइम डॉक्यूमेंट्री / थ्रिलर फ्लैशबैक: क्या था मेरठ का 'नीला ड्रम कांड'? इस सीरीज को देखने से पहले उस असली घटना को याद करना जरूरी है, जिस पर यह आधारित है। यह कहानी मेरठ के सौरभ राजपूत की है। एक भोला-भाला युवक, जिसकी शादी मुस्कान नाम की युवती से हुई थी। लेकिन मुस्कान के दिल में सौरभ नहीं, बल्कि उसका प्रेमी साहिल बसा था। सीरीज में विस्तार से दिखाया जाएगा कि: साजिश की शुरुआत: कैसे मुस्कान ने शादी के बाद भी अपने प्रेमी साहिल से रिश्ते नहीं तोड़े और सौरभ को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। हत्या की रात: वह काली रात, जब सौरभ को मौत की नींद सुला दिया गया। वो 'नीला ड्रम': हत्या के बाद लाश को ठिकाने लगाने के लिए जो तरीका अपनाया गया, वह शैतानी था। हत्यारों ने सौरभ की लाश को एक बड़े नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में डाला। सीमेंट का घोल: लाश की बदबू बाहर न आए और किसी को शक न हो, इसके लिए उन्होंने ड्रम में सीमेंट और बजरी का घोल भर दिया। लाश को एक तरह से 'कंक्रीट की कब्र' में दफन कर दिया गया और ड्रम को घर में ही रखा गया। डॉक्यूमेंट्री में क्या होगा खास? 'हनीमून से हत्या' कोई काल्पनिक शो नहीं है। यह एक इन्वेस्टिगेटिव डॉक्यूमेंट्री (Investigative Documentary) है। मेकर्स ने इसे प्रामाणिक बनाने के लिए बहुत बारीकी से रिसर्च की है। असली फुटेज और इंटरव्यू: इस सीरीज में घटना से जुड़े असली लोगों, जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों और गवाहों के इंटरव्यू दिखाए जाएंगे। नाटकीय रूपांतरण (Re-enactment): मुस्कान और साहिल ने कैसे इस पूरी घटना को अंजाम दिया, इसे एक्टर्स के जरिए रिक्रिएट किया जाएगा। दर्शक देख पाएंगे कि उस वक्त कमरे के भीतर क्या हुआ था। मनोवैज्ञानिक पहलू: यह सीरीज सिर्फ खून-खराबा नहीं दिखाती, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि आखिर एक पत्नी इतनी क्रूर कैसे हो सकती है? इसमें उन जटिल कारणों की पड़ताल की गई है जो "वैवाहिक हत्याओं" (Marital Murders) का कारण बनते हैं। शादी के पीछे छिपे 'काले सच' का पर्दाफाश ZEE5 की यह सीरीज एक बड़े ट्रेंड की तरफ इशारा करती है—पत्नियों द्वारा पतियों की हत्या। शो का पोस्टर रिलीज हो चुका है, जो काफी सस्पेंस से भरा है। पोस्टर खुद बयां करता है कि कैसे एक खुशहाल दिखने वाली तस्वीर के पीछे खूनी खेल चल रहा होता है। सीरीज का मुख्य फोकस यह दिखाना है कि बाहर से "नॉर्मल" दिखने वाली शादियों में अंदर ही अंदर कितनी नफरत और साजिशें पल सकती हैं। 'हनीमून से हत्या' में सौरभ राजपूत केस के अलावा वैवाहिक जीवन की शुरुआत (हनीमून फेज) से लेकर अपराध तक के सफर को 5 एपिसोड्स में पिरोया गया है। क्यों देखनी चाहिए यह सीरीज? जागरूकता (Awareness): यह सीरीज समाज को आईना दिखाती है कि रिश्तों में अंधा भरोसा कभी-कभी जानलेवा हो सकता है। पुलिस इन्वेस्टिगेशन: दर्शक देखेंगे कि मेरठ पुलिस ने कैसे इस पेचीदा केस को सुलझाया। कैसे उस बंद ड्रम से राज बाहर निकला। सस्पेंस और थ्रिल: सच्ची घटना पर आधारित होने के कारण इसका रोमांच किसी भी काल्पनिक फिल्म से ज्यादा है। 9 जनवरी को खुलेगा राज सौरभ राजपूत की आत्मा को न्याय मिलने की कहानी और मुस्कान-साहिल की हैवानियत, सब कुछ 9 जनवरी 2026 को ZEE5 पर सामने आएगा। मेरठ ही नहीं, पूरे देश की निगाहें इस सीरीज पर टिकी हैं। क्या आप तैयार हैं उस 'नीले ड्रम' का सच जानने के लिए?
एंटरटेनमेंट डेस्क - खबरीलाल: साल 1997... जे.पी. दत्ता की फिल्म 'बॉर्डर' रिलीज होती है और उसका एक गाना "संदेशे आते हैं" पूरे हिंदुस्तान का राष्ट्रगान जैसा बन जाता है। रूप कुमार राठौड़ और सोनू निगम की आवाज ने तब हर आंख नम कर दी थी। आज, करीब 29 साल बाद, इतिहास ने खुद को दोहराया है। बहुप्रतीक्षित फिल्म 'बॉर्डर 2' (Border 2) का पहला गाना 'घर कब आओगे' (Ghar Kab Aaoge) आज रिलीज कर दिया गया है। और जैसा कि उम्मीद थी, इस गाने ने आते ही इंटरनेट पर कब्जा कर लिया है। यह गाना सिर्फ एक मेलोडी नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों भारतीयों के दिलों की धड़कन है, जिनके अपने सरहद पर खड़े होकर हमारी नींद की पहरेदारी करते हैं। चार दिग्गजों की आवाज, एक भावना इस गाने की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी स्टार-स्टडेड सिंगर्स की लिस्ट है। मेकर्स ने इस बार कोई कसर नहीं छोड़ी है और म्यूजिक इंडस्ट्री के 'एवेंजर्स' को एक साथ खड़ा कर दिया है। सोनू निगम (Sonu Nigam): 'बॉर्डर' की पहचान रहे सोनू निगम की वापसी ही इस गाने की सबसे बड़ी जीत है। उनकी आवाज में आज भी वही पुराना दर्द और वही क्लासिक टच है, जो श्रोता को सीधे 1997 में ले जाता है। अरिजीत सिंह (Arijit Singh): वर्तमान दौर के सबसे बड़े गायक अरिजीत सिंह ने अपनी दर्दभरी आवाज से इस गाने में एक नई गहराई जोड़ दी है। उनकी आवाज का भारीपन फौजी की वीरानी को बखूबी बयां करता है। दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh): पंजाब की मिट्टी की खुशबू और एक अलग ही ऊर्जा लेकर आए हैं दिलजीत। उनका हिस्सा गाने को एक रस्टिक और जोशीला फील देता है। विशाल मिश्रा (Vishal Mishra): अपनी दमदार और ऊंची रेंज के लिए मशहूर विशाल मिश्रा ने इस कंपोजिशन को आधुनिक और प्रभावशाली बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। 'नोस्टैल्जिया' का जबरदस्त तड़का जैसे ही गाने के शुरुआती बोल सुनाई देते हैं, बैकग्राउंड में 'संदेशे आते हैं' की वो जानी-पहचानी सिग्नेचर ट्यून बज उठती है। संगीतकार ने पुराने और नए का ऐसा मिश्रण तैयार किया है कि सुनने वाले के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सोशल मीडिया रिएक्शन: गाना रिलीज होते ही ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर ट्रेंड करने लगा। एक यूजर ने लिखा, "सोनू निगम की आवाज सुनते ही मैं रो पड़ा। ऐसा लगा जैसे मेरा बचपन लौट आया हो।" दूसरे यूजर ने कमेंट किया, "अरिजीत और सोनू एक ही गाने में? यह तो साल का सबसे बड़ा सरप्राइज है। इसे कहते हैं असली देशभक्ति गीत।" फिल्म 'बॉर्डर 2' - क्या है खास? यह फिल्म सिर्फ एक सीक्वल नहीं, बल्कि एक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। निर्देशक: जे.पी. दत्ता ने इस बार निर्देशन की कमान अनुराग सिंह (केसरी फेम) को सौंपी है, जो अपनी दमदार स्टोरीटेलिंग के लिए जाने जाते हैं। स्टार कास्ट: सनी देओल: मेजर कुलदीप सिंह के अपने आइकॉनिक किरदार में वापसी कर रहे हैं। वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी: नई पीढ़ी के ये सितारे भी फौजी वर्दी में दुश्मनों के छक्के छुड़ाते नजर आएंगे। रिलीज डेट: देशभक्ति के जज्बे को सलाम करने के लिए यह फिल्म गणतंत्र दिवस सप्ताह में, यानी 23 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। साल का सबसे बड़ा 'एन्थम' 'घर कब आओगे' महज 4-5 मिनट का ऑडियो नहीं है। यह एक फौजी के इंतजार, उसके परिवार की उम्मीद और देशप्रेम का एक दस्तावेज है। सोनू, अरिजीत, दिलजीत और विशाल की चौकड़ी ने यह साबित कर दिया है कि जब सुरों का सही संगम होता है, तो जादू होना तय है। अब बस इंतजार है 23 जनवरी का, जब बड़े पर्दे पर एक बार फिर गूंजेगा- "हिंदुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा!"
कोटा: शिक्षा नगरी कोटा से बॉलीवुड के गलियारों तक हलचल मचा देने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। बॉलीवुड के सुपरस्टार और लाखों दिलों की धड़कन सलमान खान एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंसते नजर आ रहे हैं। मामला उनकी फिल्मों या काले हिरण का नहीं, बल्कि एक पान मसाला के विज्ञापन और कोर्ट में पेश किए गए एक दस्तावेज़ की विश्वसनीयता का है। कोटा के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए सलमान खान को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का फरमान सुनाया है।READ ALSO:-Salman Khan Birthday Special: 60 साल के 'भाईजान' का सबसे बड़ा धमाका; 'बैटल ऑफ गलवान' के टीजर में चीन को ललकारा, डायलॉग सुनकर नस-नस में दौड़ जाएगा हिंदुस्तान आगामी 20 जनवरी का दिन सलमान खान के लिए अहम होने वाला है, क्योंकि कोर्ट ने न सिर्फ उन्हें बुलाया है, बल्कि उनके हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच (Forensic Audit) कराने का भी कड़ा आदेश दिया है। क्या है पूरा मामला? विस्तार से समझें यह पूरा विवाद एक पान मसाला ब्रांड के विज्ञापन से जुड़ा है, जिसका चेहरा सलमान खान हैं। आरोप है कि इस विज्ञापन के जरिए जनता को, विशेषकर युवाओं को गुमराह किया जा रहा है। मामले की जड़ें 27 नवंबर 2025 को दायर किए गए एक परिवाद से जुड़ी हैं। कोटा के निवासी इंद्र मोहन सिंह हनी ने अधिवक्ता रिपुदमन सिंह के माध्यम से उपभोक्ता न्यायालय में एक परिवाद (Complaint) दायर किया था। इस परिवाद में सलमान खान और पान मसाला कंपनी को कटघरे में खड़ा किया गया है। मुख्य आरोप: परिवादी का कहना है कि विज्ञापनों में जिस पान मसाला का प्रचार सलमान खान कर रहे हैं, उसमें 'केसर' (Saffron) होने का दावा किया जाता है। विज्ञापन की टैगलाइन और विजुअल्स में यह दिखाया जाता है कि दाने-दाने में केसर का दम है। लेकिन, हकीकत यह है कि केसर दुनिया के सबसे महंगे मसालों में से एक है, जिसकी कीमत लाखों रुपये प्रति किलोग्राम होती है। वहीं, पान मसाला का एक छोटा पाउच बेहद कम कीमत (चंद रुपयों) में बिकता है। ऐसे में, यह गणितीय और तार्किक रूप से संभव नहीं है कि इतने सस्ते उत्पाद में असली केसर का प्रयोग किया गया हो। परिवादी का तर्क है कि यह सीधा-सीधा उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है और "भ्रामक विज्ञापन" (Misleading Advertisement) की श्रेणी में आता है। इस तरह के विज्ञापनों से युवा पीढ़ी नशे की तरफ आकर्षित हो रही है और भ्रमित हो रही है। मामले में नया मोड़: 'हस्ताक्षर' पर उठे सवाल इस केस में नाटकीय मोड़ तब आया जब सलमान खान की ओर से कोर्ट में जवाब पेश किया गया। सलमान खान इस मामले में प्रतिवादी संख्या-2 (Respondent No. 2) बनाए गए हैं। सलमान की कानूनी टीम द्वारा पेश किए गए जवाब में कहा गया था कि: अभिनेता पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। वे इस मामले की कानूनी पेचीदगियों और आरोपों से भली-भांति परिचित हैं। इस शिकायत को 'क्षेत्राधिकार' (Jurisdiction) के आधार पर चुनौती दी गई थी। सबसे महत्वपूर्ण मांग यह थी कि सलमान खान का नाम प्रतिवादी सूची से हटा दिया जाए (विलोपित करने की मांग)। लेकिन, परिवादी पक्ष ने इस जवाब को स्वीकार करने के बजाय इस पर एक गंभीर आपत्ति दर्ज करा दी। परिवादी इंद्र मोहन सिंह और उनके वकील ने कोर्ट में दावा किया कि जो जवाब सलमान खान की तरफ से पेश किया गया है, उस पर सलमान खान के असली हस्ताक्षर ही नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट को गुमराह करने के लिए किसी और ने हस्ताक्षर किए हैं और यह हस्ताक्षर फर्जी (Forged) हैं। यह आरोप अपने आप में बेहद गंभीर है क्योंकि न्यायालय में फर्जी दस्तावेज पेश करना एक दंडनीय अपराध है। कोर्ट का सख्त रुख: फॉरेंसिक जांच का आदेश उपभोक्ता न्यायालय ने परिवादी की दलीलों को गंभीरता से सुना। कोर्ट ने माना कि यदि हस्ताक्षर की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं, तो इसकी सत्यता की जांच होना अनिवार्य है। न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य: सलमान खान को आदेश दिया गया है कि वे 20 जनवरी को कोटा जिला उपभोक्ता न्यायालय में स्वयं उपस्थित हों। आम तौर पर सेलिब्रिटीज को वकीलों के माध्यम से पेश होने की छूट मिल जाती है, लेकिन हस्ताक्षर के नमूने के लिए उनका खुद आना जरूरी है। हस्ताक्षर का नमूना (Specimen Signature): कोर्ट रूम में जज के सामने सलमान खान को एक सादे कागज पर अपने हस्ताक्षर करने होंगे। इसे 'हस्ताक्षर नमूना' कहा जाता है। फॉरेंसिक लैब में मिलान: सलमान खान द्वारा कोर्ट में दिए गए ताज़ा हस्ताक्षरों और उनके वकील द्वारा पहले पेश किए गए जवाब (वकालतनामा या जवाब-दावा) पर मौजूद हस्ताक्षरों को सील बंद करके फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) भेजा जाएगा। वैज्ञानिक जांच: हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स दोनों हस्ताक्षरों के स्ट्रोक्स, दबाव, प्रवाह और पैटर्न का वैज्ञानिक विश्लेषण करेंगे। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि हस्ताक्षर की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे की सुनवाई और कार्रवाई तय की जाएगी। भ्रामक विज्ञापनों पर सेलिब्रिटीज की जिम्मेदारी: कानून क्या कहता है? यह मामला सिर्फ एक हस्ताक्षर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह "सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट" (Celebrity Endorsement) की जवाबदेही पर एक बड़ी बहस को भी जन्म देता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) के तहत अब सेलिब्रिटीज को भी भ्रामक विज्ञापनों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। कानून के जानकारों के अनुसार: यदि कोई सेलिब्रिटी किसी उत्पाद का विज्ञापन करता है, तो उससे यह अपेक्षा की जाती है कि उसने उस उत्पाद के दावों की बुनियादी जांच-पड़ताल (Due Diligence) की हो। अगर विज्ञापन में किया गया दावा (जैसे पान मसाला में केसर होना) झूठ निकलता है, तो एंडोर्स करने वाले स्टार पर भी जुर्माना लग सकता है और विज्ञापन पर रोक लग सकती है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने भी हाल ही में सरोगेट विज्ञापनों (Surrogate Advertising) और भ्रामक दावों को लेकर सख्त गाइडलाइन्स जारी की हैं। कोटा का यह मामला इसी कड़ी में एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। परिवादी का तर्क यही है कि जब सलमान खान जैसा बड़ा स्टार यह कहता है कि इसमें केसर है, तो आम जनता उस पर आंख मूंदकर भरोसा करती है। इसलिए, अगर केसर नहीं है, तो यह विश्वासघात है। केसर बनाम पान मसाला: कीमतों का गणित परिवाद का सबसे मजबूत आधार आर्थिक तर्क है। बाजार भाव: वर्तमान में अच्छी गुणवत्ता वाले कश्मीरी या ईरानी केसर की कीमत 2.5 लाख से 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक हो सकती है। पान मसाला की कीमत: एक पान मसाला का पाउच 5, 10 या 20 रुपये में मिलता है। सवाल: विनिर्माण लागत, पैकेजिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और टैक्स हटाने के बाद, क्या 5 रुपये के पाउच में असली केसर डालना किसी भी कंपनी के लिए मुनाफे का सौदा हो सकता है? परिवादी का कहना है कि कंपनियां 'केसर' के नाम पर केवल सिंथेटिक फ्लेवर या रंग का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन विज्ञापन में उसे 'शुद्ध केसर' बताती हैं। यह उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत 'अनुचित व्यापार व्यवहार' (Unfair Trade Practice) है। अब आगे क्या होगा? 20 जनवरी का दिन इस हाई-प्रोफाइल ड्रामा का केंद्र बिंदु होगा। अगर हस्ताक्षर असली निकले: यदि फॉरेंसिक जांच में यह साबित होता है कि कोर्ट में पेश जवाब पर सलमान खान के ही हस्ताक्षर थे, तो परिवादी का यह आरोप खारिज हो जाएगा। हालांकि, 'भ्रामक विज्ञापन' वाला मुख्य केस चलता रहेगा। अगर हस्ताक्षर फर्जी निकले: यदि रिपोर्ट में यह आता है कि हस्ताक्षर सलमान के नहीं हैं, तो यह सलमान खान और उनकी लीगल टीम के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन सकता है। कोर्ट में झूठा शपथ पत्र या दस्तावेज देना भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत अपराध है। इसके अलावा, कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) का मामला भी बन सकता है। कोटा कोर्ट परिसर में सुरक्षा की चुनौती सलमान खान की पेशी के आदेश के साथ ही कोटा प्रशासन के लिए भी सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा होगा। सलमान खान की फैन फॉलोइंग को देखते हुए कोर्ट परिसर में भारी भीड़ जमा होने की आशंका है। इसके अलावा, सलमान खान को मिल रही धमकियों के मद्देनजर उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय पुलिस और प्रशासन को पुख्ता इंतजाम करने होंगे। फिलहाल, सभी की निगाहें 20 जनवरी की तारीख पर टिकी हैं। क्या सलमान खान कोटा पहुंचेंगे? क्या पान मसाला विज्ञापनों पर कोर्ट कोई ऐतिहासिक फैसला सुनाएगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस आदेश ने विज्ञापन की दुनिया और बॉलीवुड में खलबली जरूर मचा दी है।
मुंबई: बॉलीवुड के 'सुल्तान' और करोड़ों दिलों की धड़कन सलमान खान (Salman Khan) आज, 27 दिसंबर 2025 को अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर भाईजान ने अपने फैंस को एक ऐसा तोहफा दिया है, जिसका इंतजार वे बेसब्री से कर रहे थे। सलमान खान ने अपनी मचअवेटेड और बहुप्रतीक्षित ;-फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' (Battle of Galwan) का धांसू टीजर रिलीज कर दिया है। यह टीजर न केवल देशभक्ति के जज्बे से भरा हुआ है, बल्कि इसमें सलमान खान का एक ऐसा एंग्री और डेयरिंग अवतार देखने को मिल रहा है, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। टीजर के साथ ही फिल्म की रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया गया है।READ ALSO:-Love Across Borders: अलीगढ़ के 'रांझा' ने पाकिस्तान में काटी एक साल की 'काल-कोठरी'; फेसबुक वाली 'सना' के इश्क में लांघी थी सरहद, अब रिहाई के बाद वतन वापसी का इंतजार 'बैटल ऑफ गलवान' का टीजर: रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव आज दोपहर तीन बजे जैसे ही सलमान खान बैटल ऑफ गलवान टीजर (Salman Khan Battle of Galwan Teaser) ऑनलाइन ड्रॉप हुआ, इंटरनेट पर जैसे बाढ़ आ गई। टीजर की शुरुआत एक बेहद इंटेंस और रोंगटे खड़े कर देने वाले माहौल से होती है। बर्फीली पहाड़ियों के बीच तनावपूर्ण सन्नाटा और फिर सलमान खान की भारी भरकम आवाज में एक दमदार डायलॉग सुनाई देता है। टीजर में सलमान खान अपने साथी जवानों में जोश भरते हुए कहते हैं, "जवानों याद रहे, जख्म लगे तो मेडल समझना और मौत दिखे तो सलाम करना... और कहना, बिरसा मुंडा की जय, बजरंग बली की जय, भारत माता की जय।" इस डायलॉग के बाद स्क्रीन पर जो दृश्य आता है, वह किसी भी भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा करने के लिए काफी है। भारतीय सेना की वर्दी में सलमान खान स्लो मोशन में चलते हुए आ रहे हैं। उनकी आंखों में अंगारे हैं और चेहरे पर दुश्मन को धूल चटाने का दृढ़ संकल्प। बैकग्राउंड में राष्ट्रगान की धुन एक अलग ही जोश पैदा करती है, जो दर्शकों के दिलों में देशभक्ति की लहर दौड़ा देती है। चीन को लाल आंख दिखाते सलमान, लकड़ी के फट्टे से जंग टीजर का सबसे हाई प्वॉइंट वह सीन है जहां सलमान खान निहत्थे ही दुश्मनों के सामने चट्टान बनकर खड़े हो जाते हैं। टीजर के अगले ही पल में सलमान खान चीनी सैनिकों को लाल आंख दिखाते नजर आते हैं। यह सीन गलवान घाटी की उस वास्तविक और भयानक रात की याद दिलाता है, जब हमारे वीर जवानों ने बिना गोली चलाए दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। दृश्य में दिखाया गया है कि सलमान खान के हाथ में कोई अत्याधुनिक हथियार नहीं, बल्कि एक लकड़ी का बड़ा टुकड़ा (फट्टा) है। वे इसे लेकर चीनी आर्मी से भिड़ने की पोजिशन में खड़े हो जाते हैं। उनका यह रौद्र रूप देखकर साफ पता चलता है कि फिल्म में एक्शन और इमोशन का जबरदस्त तड़का लगने वाला है। यह सीन यकीनन सिनेमाघरों में तालियों और सीटियों की बरसात करवाएगा। शहीद कर्नल संतोष बाबू के किरदार में सलमान यह फिल्म केवल एक मसाला एंटरटेनर नहीं है, बल्कि यह भारतीय सेना के अदम्य साहस और बलिदान की एक सच्ची गाथा है। 'बैटल ऑफ गलवान' (Battle of Galwan) 15-16 जून 2020 की दरमियानी रात पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प पर आधारित है। इस फिल्म में सलमान खान, गलवान घाटी झड़प में शहीद हुए भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी और 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर, कर्नल बी. संतोष बाबू (Colonel B. Santosh Babu) की भूमिका निभा रहे हैं। कर्नल संतोष बाबू ने चीनी घुसपैठ का विरोध करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी और उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। सलमान खान के लिए यह रोल उनके करियर के सबसे गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदारों में से एक माना जा रहा है। एक लवर बॉय और एक्शन हीरो की इमेज से इतर, इस बार वे देश के लिए बलिदान देने वाले एक सच्चे सिपाही के रूप में दर्शकों से रूबरू होंगे। टीजर में उनकी बॉडी लैंग्वेज और आंखों का तीखापन बता रहा है कि उन्होंने इस किरदार में ढलने के लिए कितनी मेहनत की है। रिलीज डेट का ऐलान: 17 अप्रैल 2026 को मचेगा गदर टीजर के साथ ही मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट से भी पर्दा उठा दिया है। सलमान खान बैटल ऑफ गलवान टीजर के अंत में बताया गया है कि यह फिल्म अगले साल यानी 17 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यह तारीख इसलिए भी अहम है क्योंकि इसके आसपास बैसाखी और अन्य त्योहारों की छुट्टियां होंगी, जिसका फायदा फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिल सकता है। फिल्म का निर्देशन अपूर्व लखिया (Apoorva Lakhia) ने किया है, जो इससे पहले 'शूटआउट एट लोखंडवाला' जैसी इंटेंस फिल्में बना चुके हैं। फिल्म में सलमान खान के अपोजिट अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह (Chitrangada Singh) अहम भूमिका में नजर आएंगी। सलमान की दहाड़ से डरी 'अल्फा', आलिया भट्ट ने खींचे कदम सलमान खान की बॉक्स ऑफिस पर पकड़ कितनी मजबूत है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 'बैटल ऑफ गलवान' की रिलीज डेट सामने आते ही दूसरी बड़ी फिल्मों ने अपना रास्ता बदलना शुरू कर दिया है। यशराज फिल्म्स (YRF) के स्पाई यूनिवर्स की अगली बड़ी फिल्म 'अल्फा' (Alpha), जिसमें आलिया भट्ट (Alia Bhatt) और शरवरी वाघ (Sharvari Wagh) मुख्य भूमिकाओं में हैं, पहले 17 अप्रैल 2026 को ही रिलीज होने वाली थी। लेकिन अब खबर है कि यशराज फिल्म्स, सलमान खान की इस देशभक्ति से लबरेज फिल्म से बॉक्स ऑफिस पर टकराने के मूड में बिल्कुल नहीं है। ट्रेड पंडितों का मानना है कि सलमान की फिल्म का जो जॉनर है और जिस तरह का इमोशन इससे जुड़ा है, उसके सामने किसी भी दूसरी फिल्म का टिकना मुश्किल होगा। यही वजह है कि 'अल्फा' के मेकर्स ने अपनी फिल्म की रिलीज टालने का फैसला किया है। जल्द ही 'अल्फा' की नई रिलीज डेट की घोषणा की जाएगी। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि 60 साल की उम्र में भी सलमान खान का स्टारडम और बॉक्स ऑफिस पर उनका खौफ बरकरार है। फैंस का रिएक्शन: "ब्लॉकबस्टर लोडिंग" सलमान खान बैटल ऑफ गलवान टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर #SalmanKhan, #BattleOfGalwanTeaser और #HappyBirthdaySalmanKhan ट्रेंड करने लगा है। फैंस टीजर को 'मास्टरपीस' और 'ब्लॉकबस्टर' बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "भाईजान ने 60वें जन्मदिन पर जो तोहफा दिया है, वह अविश्वसनीय है। रोंगटे खड़े हो गए।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "कर्नल संतोष बाबू के रूप में सलमान को देखना गर्व की बात है। यह फिल्म सारे रिकॉर्ड तोड़ेगी।" कुल मिलाकर, अपने 60वें जन्मदिन पर सलमान खान ने साबित कर दिया है कि उम्र उनके लिए सिर्फ एक नंबर है। 'बैटल ऑफ गलवान' के टीजर ने यह साफ कर दिया है कि 2026 में बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी आंधी आने वाली है, जिसका नाम सलमान खान है। अब दर्शकों को 17 अप्रैल का बेसब्री से इंतजार है, जब वे बड़े पर्दे पर अपने चहेते सितारे को देश के दुश्मनों के छक्के छुड़ाते देखेंगे। सलमान खान का 60वां जन्मदिन उनके फैंस के लिए वाकई यादगार बन गया है। सलमान खान बैटल ऑफ गलवान टीजर ने उम्मीदों को आसमान पर पहुंचा दिया है। यह फिल्म न केवल सलमान के करियर के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है, बल्कि यह गलवान के शहीदों को एक सिनेमाई श्रद्धांजलि भी होगी। टीजर में दिखाए गए डायलॉग्स, बैकग्राउंड स्कोर और सलमान का इंटेंस लुक यह वादा करता है कि दर्शकों को एक बेहतरीन देशभक्ति फिल्म देखने को मिलेगी। 'अल्फा' जैसी बड़ी फिल्म का पीछे हटना इस बात का प्रमाण है कि बॉक्स ऑफिस पर 'भाईजान' का जलवा आज भी कायम है।
मुंबई: बॉलीवुड के निर्विवाद 'सुल्तान', बॉक्स ऑफिस के 'टाइगर' और करोड़ों दिलों की धड़कन 'भाईजान' यानी सलमान खान (Salman Khan) एक बहुत बड़े मील के पत्थर तक पहुंचने वाले हैं। 27 दिसंबर को यह सुपरस्टार अपना 60वां जन्मदिन मनाएंगे। हिंदी सिनेमा में तीन दशकों से भी अधिक समय से राज कर रहे सलमान के लिए उम्र वाकई सिर्फ एक आंकड़ा भर है। जहां ज्यादातर लोग 60 की उम्र में रिटायरमेंट की योजना बनाते हैं, वहीं सलमान खान अपनी फिटनेस, ऊर्जा और काम के प्रति जुनून से आज के युवा एक्टर्स को भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं।READ ALSO:-नए साल पर वैष्णो देवी जाने वाले सावधान! श्राइन बोर्ड ने बदला 'दर्शन' का तरीका, एक गलती और कैंसिल हो जाएगी आपकी यात्रा अपने इस बेहद खास जन्मदिन से ठीक कुछ दिन पहले, सुपरस्टार ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा धमाका किया है, जिसकी गूंज हर तरफ सुनाई दे रही है। उन्होंने जिम से अपनी कुछ ताजा तस्वीरें शेयर की हैं, जिन्होंने इंटरनेट का पारा बढ़ा दिया है। इन तस्वीरों में उनकी शानदार फिजिक देखकर फैंस की खुशी का ठिकाना नहीं है, लेकिन जिस चीज ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, वह है इन तस्वीरों के साथ लिखा गया उनका बेहद मजाकिया कैप्शन। 60 की उम्र में 26 का जोश: जिम तस्वीरों ने मचाया तहलका सलमान खान ने रविवार, 22 दिसंबर को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर जिम सेशन की तस्वीरों की एक सीरीज पोस्ट की। इन तस्वीरों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आखिर क्यों उन्हें बॉलीवुड का सबसे बड़ा 'फिटनेस आइकन' और 'रोल मॉडल' माना जाता है। View this post on Instagram मस्कुलर अवतार: एक तस्वीर में, एक्टर अपने बाइसेप्स को फ्लॉन्ट करते हुए नजर आ रहे हैं। उनकी बाजुओं की नसें और गठीला बदन उनकी कड़ी मेहनत और अनुशासन की कहानी बयां कर रहा है। 60 साल की दहलीज पर खड़े किसी व्यक्ति के लिए ऐसी फिटनेस बनाए रखना किसी चमत्कार से कम नहीं है। जिम लुक: तस्वीरों में सलमान अपने जिम के अंदर ब्लैक वेस्ट (बनियान) और ब्लू शॉर्ट्स पहने हुए पोज दे रहे हैं। उनका क्लीन-शेव्ड लुक उनके चेहरे पर एक अलग ही ताजगी ला रहा है। वह पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी मस्कुलर बांहों और टोन्ड पैरों का प्रदर्शन कर रहे हैं। रेस्ट मोड: एक अन्य तस्वीर में, 'बैटल ऑफ गलवान' के एक्टर वर्कआउट के बीच में रेस्ट मोड में नजर आ रहे हैं, लेकिन उनकी आंखों की तीव्रता और शरीर की भाषा बता रही है कि वे अपने अगले मिशन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वो कैप्शन जिसने जीत लिया सबका दिल: सलमान का 'ह्यूमर' अवतार सलमान खान सिर्फ अपनी बॉडी या फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे सेंस ऑफ ह्यूमर (Sense of Humor) के लिए भी जाने जाते हैं। अपनी इन धांसू तस्वीरों के साथ उन्होंने जो कैप्शन लिखा, उसने फैंस को लोटपोट कर दिया। सलमान ने अपनी उम्र पर खुद ही चुटकी लेते हुए मजाकिया अंदाज में लिखा: 'काश मैं 60 साल की उम्र में ऐसा दिख पाता। बस 6 दिन दूर।' यह कैप्शन उनके स्टारडम के बावजूद उनकी जमीन से जुड़ी शख्सियत और खुद पर हंसने की क्षमता को दर्शाता है। यह दिखाता है कि वे अपनी बढ़ती उम्र को लेकर कितने सहज हैं और इसे सेलिब्रेट कर रहे हैं। View this post on Instagram फैंस हुए क्रेजी: कमेंट सेक्शन में आई बाढ़ जैसे ही सलमान ने ये तस्वीरें पोस्ट कीं, सोशल मीडिया पर जैसे तूफान आ गया। कुछ ही मिनटों में तस्वीरें वायरल हो गईं और फैंस ने कमेंट सेक्शन में तारीफों की झड़ी लगा दी। प्रेरणा स्रोत: कई फैंस ने उन्हें अपनी "हमेशा की प्रेरणा" बताया। एक यूजर ने लिखा, "भाईजान, आप 60 के नहीं, 30 के लगते हो।" मजेदार जवाब: उनके कैप्शन पर भी फैंस ने मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक फैन ने लिखा, "टाइगर कभी बूढ़ा नहीं होता।" दूसरे ने कहा, "आपने तो कैलेंडर ही बदल दिया है सर।" जन्मदिन का उत्साह: इन तस्वीरों ने 27 दिसंबर को आने वाले उनके जन्मदिन के लिए उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया है। फैंस अभी से जश्न के मूड में आ गए हैं। वर्क फ्रंट: 'सिकंदर' के बाद अब 'गलवान' की तैयारी सलमान खान सिर्फ जिम में ही पसीना नहीं बहा रहे हैं, बल्कि वे अपने करियर के एक और महत्वपूर्ण पड़ाव की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'सिकंदर' के बाद, वे अब अपने अगले बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। 'बैटल ऑफ गलवान': एक महाकाव्य वॉर ड्रामा सलमान खान की अगली फिल्म का नाम 'बैटल ऑफ गलवान' (Battle of Galwan) है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी वॉर ड्रामा फिल्मों में से एक होने की उम्मीद है। निर्देशक और विषय: इस फिल्म का निर्देशन जाने-माने फिल्ममेकर अपूर्व लाखिया कर रहे हैं। यह फिल्म भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान की कहानी को बड़े पर्दे पर दर्शाएगी। कहानी का आधार: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फिल्म वास्तविक घटनाओं पर आधारित है और इसकी कहानी गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए ऐतिहासिक टकराव के इर्द-गिर्द घूमती है। यह एक संवेदनशील और देशभक्ति से ओत-प्रोत विषय है, जिसे लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्सुकता है। सलमान का किरदार: खबरों की मानें तो सलमान खान इस फिल्म में एक बेहद दमदार और अहम भूमिका में नजर आएंगे। वह 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी संतोष बाबू का किरदार निभा सकते हैं, जिन्होंने गलवान घाटी संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति दी थी। अगर यह सच होता है, तो यह सलमान के करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण और सम्मानजनक भूमिकाओं में से एक होगी। फिल्म का स्टेटस: फैंस को है टीजर का इंतजार फिल्म से जुड़ा सलमान खान का एक कैरेक्टर पोस्टर पहले ही सामने आ चुका है, जिसने फिल्म के लिए टोन सेट कर दिया है। अब फैंस बेसब्री से फिल्म के फर्स्ट लुक पोस्टर और टीजर का इंतजार कर रहे हैं। पोस्ट-प्रोडक्शन: ताजा जानकारी के अनुसार, 'बैटल ऑफ गलवान' अभी पोस्ट-प्रोडक्शन फेज में है। फिल्म की एडिटिंग, वीएफएक्स और साउंड डिजाइन पर बारीकी से काम चल रहा है। प्रमोशनल तैयारी: मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि फिल्म की मार्केटिंग और प्रमोशन के लिए एक बड़ी रणनीति बनाई जा रही है। फिल्म के शुरुआती प्रमोशनल मटेरियल (टीजर, पोस्टर आदि) को फाइनल करने के लिए कई टीमें एक साथ दिन-रात काम कर रही हैं। उम्मीद की जा रही है कि नए साल की शुरुआत में या सलमान के जन्मदिन के आसपास फिल्म से जुड़ा कोई बड़ा धमाका हो सकता है। 60 का 'टाइगर' अभी और दहाड़ेगा सलमान खान का 60वां जन्मदिन सिर्फ एक व्यक्तिगत मील का पत्थर नहीं है, बल्कि यह बॉलीवुड के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है। 35 से अधिक वर्षों के करियर के बाद भी, बॉक्स ऑफिस पर उनकी पकड़ और जनता के बीच उनकी दीवानगी कम नहीं हुई है। उनकी हालिया जिम तस्वीरें इस बात का प्रमाण हैं कि वे रुकने या धीमे पड़ने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। 'बैटल ऑफ गलवान' जैसी फिल्म का चुनाव यह दर्शाता है कि वे अब भी सिनेमाई चुनौतियों का सामना करने और दर्शकों को कुछ नया देने के लिए तैयार हैं। जैसे-जैसे 27 दिसंबर करीब आ रहा है, दुनिया भर के 'सलमानिएक्स' (Salmaniacs) अपने चहेते सितारे के जीवन के इस नए दशक का जश्न मनाने के लिए तैयार हो रहे हैं—एक ऐसा सितारा जिसकी चमक उम्र के साथ और बढ़ती जा रही है।
सस्पेंस और थ्रिलर के शौकीनों के लिए आज का दिन बेहद खास है। #DrishyamDay के मौके पर मेकर्स ने मोस्ट अवेटेड फिल्म 'दृश्यम 3' (Drishyam 3) की आधिकारिक घोषणा कर दी है। विजय सालेगांवकर और उनके परिवार की कहानी अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँचने वाली है। मेकर्स ने स्पष्ट कर दिया है कि यह इस फ्रेंचाइजी का "आखिरी हिस्सा" होगा, जो 2 अक्टूबर 2026 को बड़े पर्दे पर रिलीज होगा। फिल्म की स्टार कास्ट और टीम फिल्म में एक बार फिर पुराने चेहरों के साथ वही जबरदस्त तनाव और रोमांच देखने को मिलेगा: मुख्य कलाकार: अजय देवगन (विजय सालेगांवकर के रूप में), तब्बू, श्रिया सरन, इशिता दत्ता शेठ और रजत कपूर। निर्देशन: अभिषेक पाठक फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं। प्रोडक्शन: कुमार मंगत पाठक, संजीव जोशी, आलोक जैन और अजीत अंधारे इस मेगा प्रोजेक्ट को प्रोड्यूस कर रहे हैं। 2 अक्टूबर का खास कनेक्शन 'दृश्यम' की दुनिया में 2 अक्टूबर की तारीख का बहुत बड़ा महत्व है। फिल्म की पूरी कहानी इसी तारीख के इर्द-गिर्द घूमती है (जब विजय सालेगांवकर सपरिवार पणजी के सत्संग में गए थे)। यही कारण है कि मेकर्स ने फिल्म की रिलीज के लिए 2 अक्टूबर, 2026 को चुना है, ताकि फैंस उस पुराने जुड़ाव को फिर से महसूस कर सकें। क्या होगा 'आखिरी हिस्सा' में? 'दृश्यम 2' के अंत में जिस तरह से कहानी को एक मोड़ पर छोड़ा गया था, उसके बाद से ही फैंस के मन में कई सवाल थे: क्या पुलिस आखिरकार विजय सालेगांवकर को पकड़ पाएगी? क्या दफन किए गए राज हमेशा के लिए दफन रहेंगे? विजय अपने परिवार को बचाने के लिए अब किस हद तक जाएगा? सोशल मीडिया पर "Aakhri hissa baaki hai" टैगलाइन के साथ फिल्म का पोस्टर और टीज़र चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि यह फिल्म पिछले दोनों हिस्सों से कहीं ज्यादा डार्क और सस्पेंस से भरपूर होने वाली है। अजय देवगन की 'दृश्यम' फ्रेंचाइजी ने भारतीय सिनेमा में सस्पेंस थ्रिलर के मायने बदल दिए हैं। अब 2026 में इसके आखिरी भाग के साथ विजय सालेगांवकर के सफर का अंत देखना वाकई दिलचस्प होगा। फिल्म जगत और फैंस के बीच अभी से इस फिल्म को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
बॉलीवुड में जासूसी थ्रिलर्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन जब आमिर खान प्रोडक्शंस (AKP) किसी प्रोजेक्ट पर हाथ लगाता है, तो दर्शकों को उम्मीद होती है कुछ 'हटके' देखने की। दर्शकों का यह इंतजार खत्म करते हुए, मेकर्स ने अपनी आगामी फिल्म ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया है। यह फिल्म सिर्फ एक जासूसी कहानी नहीं है, बल्कि हंसी, मस्ती और पागलपन से भरी एक रोलरकोस्टर राइड है।READ ALSO:-कार्तिक-अनन्या की 'तू मेरी मैं तेरा...' का जादू: ट्रेलर में दिखा रोमांस का नया अवतार, इवेंट में अनन्या ने कार्तिक को कहा 'झूठा'! वीर दास, जो अपनी बेबाक कॉमेडी के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं, इस फिल्म के जरिए न केवल अभिनय कर रहे हैं, बल्कि निर्देशन (Direction) की कमान भी संभाल रहे हैं। ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और फैंस इसे 'एंटरटेनमेंट का फुल डोज' बता रहे हैं। ट्रेलर रिव्यु: एक 'इम्परफेक्ट' जासूस की परफेक्ट कहानी ट्रेलर की शुरुआत ही एक ऐसे नोट पर होती है जो आपको यह बताने के लिए काफी है कि यह कोई गंभीर जेम्स बॉन्ड फिल्म नहीं है। वीर दास का किरदार, जिसका नाम 'हैप्पी पटेल' है, एक ऐसा शख्स है जो खुद को एक एजेंट समझता है, लेकिन असलियत में वह मुसीबतों का चुंबक है। शेफ, एजेंट या सिर्फ एक गलती? ट्रेलर में दिखाया गया है कि हैप्पी पटेल (वीर दास) एक मिशन पर है। वह कभी शेफ की टोपी में नजर आता है, तो कभी एक सीक्रेट एजेंट की तरह भागता हुआ। उसकी जासूसी तकनीकों में कमियां हैं, उसके प्लान्स अक्सर फेल होते हैं, लेकिन उसका कॉन्फिडेंस देखने लायक है। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, हैप्पी एक बड़ी साजिश में फंसता चला जाता है और यहीं से शुरू होता है असली हंगामा। ट्रेलर का ह्यूमर बहुत ही फ्रेश और यंग वाइब वाला है, जो वीर दास की सिग्नेचर स्टाइल को दर्शाता है। मेकर्स ने ट्रेलर शेयर करते हुए जो कैप्शन लिखा, वह फिल्म की पूरी थीम को बयां करता है: "GAONWALONNNNN… वो एक शेफ है, वो एक एजेंट है (थोड़ा-सा), वो एक हीरो है (शायद), और वो है HAPPY PATEL! मिलिए हमारे खतरनाक जासूस से..." स्टारकास्ट: मोना सिंह का 'धाकड़' अवतार और मिथिला का चार्म इस फिल्म की कास्टिंग ही इसकी सबसे बड़ी यूएसपी (USP) नजर आ रही है। ट्रेलर में हर किरदार अपनी एक अलग छाप छोड़ता है। मोना सिंह (The Powerhouse): टीवी की दुनिया से लेकर ओटीटी और फिल्मों तक अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवा चुकीं मोना सिंह इस बार बिल्कुल अलग अंदाज में हैं। ट्रेलर में उनका अवतार बेहद रॉ (Raw) और दमदार है। उन्हें एक्शन करते हुए और वीर दास के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए देखना दर्शकों के लिए एक सरप्राइज पैकेज है। उनका लुक और एटीट्यूड बता रहा है कि वह इस कॉमेडी फिल्म में एक गंभीर और मजबूत पिलर हैं। मिथिला पालकर (The Charm): अपनी चुलबुली और गर्ल-नेक्स्ट-डोर इमेज के लिए मशहूर मिथिला पालकर फिल्म में एक अलग सी मासूमियत लेकर आई हैं। ट्रेलर में उनकी उपस्थिति स्क्रीन पर ताजगी बिखेरती है। वीर दास और मिथिला की केमिस्ट्री कहानी में क्या मोड़ लाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा। आमिर खान (The Surprise Element): ट्रेलर का सबसे बड़ा सरप्राइज आखिर में आता है—आमिर खान। हालांकि, यह पहले ही पता था कि आमिर इस फिल्म से जुड़े हैं, लेकिन ट्रेलर में उनका अनोखा और अजीबोगरीब लुक देखकर हर कोई हैरान है। आमिर खान अपनी फिल्मों में लुक्स के साथ प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं और 'हैप्पी पटेल' में उनका कैमियो कहानी में एक जोरदार तड़का लगाता है। यह देखना रोमांचक होगा कि उनका किरदार हैप्पी पटेल की मदद करता है या उसकी मुश्किलें बढ़ाता है। वीर दास: एक्टर से डायरेक्टर तक का सफर यह फिल्म वीर दास के करियर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। स्टैंड-अप कॉमेडी में वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन करने के बाद, अब वह फिल्म निर्देशन में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। दोहरी जिम्मेदारी: एक ही फिल्म में मुख्य अभिनेता होना और साथ ही उसे निर्देशित करना आसान काम नहीं है, लेकिन ट्रेलर देखकर लगता है कि वीर दास ने दोनों जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है। AKP के साथ वापसी: यह दूसरी बार है जब वीर दास और आमिर खान प्रोडक्शंस साथ आए हैं। इससे पहले दोनों ने कल्ट क्लासिक फिल्म 'डेल्ही बेली' (Delhi Belly) में काम किया था, जो अपने डार्क ह्यूमर के लिए आज भी याद की जाती है। दर्शकों को उम्मीद है कि 'हैप्पी पटेल' भी उसी तरह का एक कल्ट क्लासिक साबित होगी। आमिर खान प्रोडक्शंस: लीक से हटकर कहानियों का घर आमिर खान प्रोडक्शंस (AKP) का इतिहास गवाह है कि वे कभी भी घिसी-पिटी कहानियों पर दांव नहीं लगाते। चाहे वह ऑस्कर के लिए नामांकित 'लगान' हो, शिक्षा प्रणाली पर चोट करती 'तारे जमीन पर', खेल जगत की क्रांति 'दंगल' हो, या फिर सपनों की उड़ान 'सीक्रेट सुपरस्टार'। इस बार उन्होंने 'स्पाय कॉमेडी' (Spy Comedy) जैसे मुश्किल जॉनर को चुना है। बॉलीवुड में अच्छी कॉमेडी फिल्मों का अकाल पड़ा है, और जासूसी कॉमेडी तो न के बराबर बनती हैं। ऐसे में, 'हैप्पी पटेल' एक ताजी हवा के झोंके की तरह लग रही है। आमिर खान का विजन और वीर दास का मॉडर्न ह्यूमर मिलकर बॉक्स ऑफिस पर क्या जादू बिखेरेंगे, इसका इंतजार सबको है। रिलीज़ डेट और बॉक्स ऑफिस उम्मीदें फिल्म के ट्रेलर ने रिलीज की तारीख पर भी मुहर लगा दी है। 'हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस' 16 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। नया साल (2026) शुरू होते ही दर्शकों को एक बड़ी एंटरटेनर फिल्म मिलने वाली है। जनवरी का महीना अक्सर बॉलीवुड के लिए ठंडा रहता है, लेकिन आमिर खान की रणनीति हमेशा अलग होती है। ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर फिल्म का कंटेंट 'डेल्ही बेली' जैसा मजबूत और मनोरंजक हुआ, तो यह फिल्म युवाओं (Youth) को बड़ी संख्या में सिनेमाघरों तक खींचने में कामयाब होगी। क्यों देखनी चाहिए 'हैप्पी पटेल'? कुल मिलाकर, 'हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस' का ट्रेलर वादा करता है कि यह फिल्म आपको अपना दिमाग घर पर रखकर सिनेमा हॉल में आने और खुलकर हंसने का मौका देगी। फ्रेश कॉमेडी: इसमें पुराने जोक्स नहीं, बल्कि वीर दास स्टाइल का नया और स्मार्ट ह्यूमर है। कास्टिंग: मोना सिंह और आमिर खान का अनोखा रूप। निर्देशन: वीर दास का बतौर डायरेक्टर विजन। अब इंतजार है तो बस 16 जनवरी 2026 का, जब यह पता चलेगा कि हैप्पी पटेल अपने मिशन में पास होता है या फेल, लेकिन इतना तय है कि दर्शक मनोरंजन के टेस्ट में इसे पूरे नंबर देने के लिए तैयार हैं।
Tu Meri Main Tera Trailer Release: बॉलीवुड के चॉकलेटी बॉय कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर तहलका मचाने के लिए तैयार है। उनकी आगामी फिल्म ‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ का बहुप्रतीक्षित ट्रेलर आज मुंबई में एक ग्रैंड इवेंट के दौरान रिलीज कर दिया गया। करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी यह फिल्म इस साल क्रिसमस (25 दिसंबर) के मौके पर सिनेमाघरों में दस्तक देगी। ट्रेलर लॉन्च के मौके पर कार्तिक और अनन्या की नोक-झोंक ने सबका ध्यान खींचा, वहीं करण जौहर ने फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को याद करते हुए भावुक बातें कहीं।READ ALSO:-मेरठ: पीवीएस मॉल में 'धुरंधर' फिल्म के शो में मची भगदड़, एक सिगरेट ने उड़ाए सैकड़ों दर्शकों के होश! कैसा है 'तू मेरी मैं तेरा' का ट्रेलर? लगभग 3 मिनट 21 सेकेंड का यह ट्रेलर एक आधुनिक प्रेम कहानी की झलक पेश करता है। फिल्म में कार्तिक आर्यन 'रे मेहरा' का किरदार निभा रहे हैं, जो लॉस एंजिल्स का रहने वाला एक बेफिक्र और चुलबुला युवक है। उसकी मुलाकात रूमी (अनन्या पांडे) से होती है, जो पेशे से एक लेखिका है। ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे एक अनपेक्षित मुलाकात गहरी मोहब्बत में बदल जाती है। फिल्म में रोमांस के साथ-साथ समीर विद्वांस का निर्देशन और विशाल-शेखर का संगीत चार चांद लगा रहा है। जुबिन नौटियाल और लकी अली की आवाज में गाने पहले ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं। फिल्म में नीना गुप्ता, जैकी श्रॉफ और टीकू तलसानिया जैसे दिग्गज कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। कार्तिक की तारीफ को अनन्या ने समझा ताना ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान कार्तिक और अनन्या की केमिस्ट्री देखने लायक थी। जब कार्तिक से अनन्या के साथ काम करने के अनुभव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "हम एक-दूसरे को 6-7 साल से जानते हैं। अनन्या अब पहले से कहीं ज्यादा मैच्योर, डेडिकेटेड और वक्त की पाबंद हो गई हैं।" कार्तिक की इस बात पर अनन्या ने मजाकिया अंदाज में रिएक्ट किया। उन्हें लगा कि कार्तिक उनकी पुरानी आदतों को लेकर उन पर ताना मार रहे हैं। अनन्या ने हंसते हुए जवाब दिया, "झूठा ही सही!" अनन्या ने आगे कहा कि उनके लिए प्यार का मतलब दोस्ती है और यही वजह है कि पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री इतनी नैचुरल नजर आती है। कार्तिक का 'रियल लाइफ रोमांस' पर मजेदार जवाब इवेंट में जब एक पत्रकार ने कार्तिक से उनकी रोमांटिक इमेज और असल जिंदगी के रोमांस के बारे में सवाल किया, तो एक्टर ने चुटकी लेते हुए कहा, "रियल लाइफ में रोमांस मिल नहीं रहा, तो रील लाइफ में ही सही।" उनके इस जवाब पर पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। वहीं अनन्या ने कहा कि उन्हें रोमांटिक-कॉमेडी फिल्में करना बेहद पसंद है और यह फिल्म उनके दिल के करीब है। करण जौहर ने धर्मेंद्र को किया याद फिल्म के प्रोड्यूसर करण जौहर ने इस दौरान फिल्म 'धुरंधर' की सफलता पर टीम को बधाई दी। साथ ही, उन्होंने दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। करण ने कहा, "धर्मेंद्र जी का जाना पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मैं फिल्म 'इक्कीस' देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं, क्योंकि उन्हें आखिरी बार पर्दे पर देखना हम सभी के लिए एक इमोशनल एक्सपीरियंस होगा।" उन्होंने आगे बताया कि साल 2025 का अंत बॉलीवुड के लिए बहुत बड़ा होने वाला है, जिसमें 'अवतार: फायर एंड ऐश' और 'तू मेरी मैं तेरा' जैसी फिल्में दर्शकों का मनोरंजन करेंगी। फिल्म Tu Meri Main Tera Trailer Release के साथ ही यह साफ हो गया है कि इस क्रिसमस दर्शकों को एक बेहतरीन रोमांटिक-कॉमेडी मिलने वाली है। कार्तिक आर्यन का 'लवर बॉय' अवतार और अनन्या पांडे के साथ उनकी बॉन्डिंग फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण है। गूगल पर ट्रेंड कर रही यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्या कमाल दिखाएगी, यह तो 25 दिसंबर को ही पता चलेगा, लेकिन फिलहाल इसके ट्रेलर ने सोशल मीडिया पर कब्जा कर लिया है। 'तू मेरी मैं तेरा' का ट्रेलर रोमांस और मस्ती से भरपूर है। इवेंट में कार्तिक-अनन्या की मस्ती और करण जौहर द्वारा धर्मेंद्र को दी गई श्रद्धांजलि चर्चा का केंद्र रही। फिल्म 25 दिसंबर 2025 को रिलीज हो रही है।
बॉलीवुड की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक, 'Border 2' का दमदार टीज़र आख़िरकार जारी कर दिया गया है। टी-सीरीज़ और जेपी फ़िल्म्स ने विजय दिवस (Vijay Diwas) के पावन अवसर पर इस पावर-पैक टीज़र का अनावरण किया, जो 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाता है।READ ALSO:-यूपी वालों के लिए 'गुड न्यूज़': बिजली कनेक्शन में 'इंस्पेक्टर राज' और घूसखोरी का अंत; पोल-ट्रांसफार्मर का झंझट खत्म, अब जमा करें बस 'फिक्स रकम' टीज़र में एक डायलॉग विशेष रूप से गूंज रहा है, जिसने फैंस के बीच उत्साह बढ़ा दिया है: "आवाज़ कहाँ तक जानी चाहिए? लाहौर तक।" Border 2 स्टार कास्ट और रिलीज़ की तारीख 'बॉर्डर 2' में नई और पुरानी पीढ़ियों के दमदार कलाकारों का मिश्रण देखने को मिलेगा। मुख्य कलाकार: फिल्म में सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ, और अहान शेट्टी मुख्य भूमिकाओं में हैं। रिलीज़ डेट: यह फिल्म 23 जनवरी 2026 को दुनिया भर में रिलीज़ होने के लिए तैयार है। गणतंत्र दिवस कनेक्शन: फिल्म की रिलीज़ डेट को रणनीतिक रूप से गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) के सप्ताहांत (Weekend) को भुनाने के लिए तय किया गया है। निर्माण और निर्देशन फिल्म को बड़े पैमाने पर बनाया गया है और इसके निर्माण से बॉलीवुड के बड़े नाम जुड़े हुए हैं: निर्देशक: फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह कर रहे हैं। निर्माता: इसे भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जे.पी. दत्ता, और निधि दत्ता ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। 'बॉर्डर 2' से दर्शकों को देशभक्ति और हाई-ऑक्टेन एक्शन की जबरदस्त खुराक मिलने की उम्मीद है, ठीक उसी तरह जैसे 1997 की मूल फिल्म 'बॉर्डर' ने दी थी। विजय दिवस पर 'बॉर्डर 2' का टीज़र लॉन्च होना फिल्म के देशभक्ति के विषय को रेखांकित करता है। 23 जनवरी 2026 की रिलीज़ डेट के साथ, यह फिल्म गणतंत्र दिवस के मौके पर बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कोच्चि/तिरुवनंतपुरम (मनोरंजन डेस्क): मलयालम फिल्म इंडस्ट्री (Mollywood) से शनिवार को एक बेहद मनहूस खबर सामने आई, जिसने सिने प्रेमियों और कलाकारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए मशहूर युवा अभिनेता अखिल विश्वनाथ (Akhil Vishwanath) अब हमारे बीच नहीं रहे। मात्र 30 वर्ष की आयु में अखिल अपने घर में मृत पाए गए। पुलिस की शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या (Suicide) का मामला माना जा रहा है।READ ALSO:-UP BJP President: पंकज चौधरी का निर्विरोध चुना जाना तय, CM योगी की मौजूदगी में भरा नामांकन; जानें 2027 के लिए क्या है बीजेपी का 'मास्टरप्लान' अखिल विश्वनाथ को समीक्षकों द्वारा सराही गई फिल्म 'चोला' (Chola) में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता था। एक प्रतिभाशाली अभिनेता का यूं चले जाना इस बात का संकेत है कि चमक-धमक वाली फिल्मी दुनिया के पीछे कितना गहरा अंधेरा छिपा हो सकता है। मां के पैरों तले खिसक गई जमीन घटना कडावूर (Kadavoor) स्थित उनके आवास की है। रिपोर्ट के मुताबिक, अखिल की मां गीता शनिवार की सुबह अपने काम पर जाने के लिए तैयार हो रही थीं। घर में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन जब उन्होंने अखिल के कमरे में झांका, तो वहां का दृश्य देखकर उनकी चीख निकल गई। अखिल का शव फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। मां की चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी इकट्ठा हो गए और पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। बचपन से ही था हुनर का जादूगर (State Award Winner) अखिल विश्वनाथ कोई साधारण कलाकार नहीं थे। उन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया था। चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर शुरुआत: अखिल ने फिल्म 'मंगंडी' (Mangandi) से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपने करियर की शुरुआत की थी। मिला था सर्वोच्च सम्मान: इस फिल्म में उनकी एक्टिंग इतनी दमदार थी कि उन्हें केरल राज्य सरकार की तरफ से 'बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट' (Best Child Artist) का स्टेट अवॉर्ड दिया गया था। खास बात यह है कि इस फिल्म में उनके भाई अरुण भी थे और दोनों भाइयों को यह सम्मान मिला था। 'चोला' ने दिलाई थी अंतरराष्ट्रीय पहचान बड़े होने पर अखिल ने मशहूर निर्देशक सनल कुमार शशिधरन (Sanal Kumar Sasidharan) की फिल्म 'चोला' में लीड रोल निभाया। इस फिल्म में उन्होंने एक प्रेमी का किरदार निभाया था, जिसे दर्शकों और आलोचकों ने खूब सराहा। इस फिल्म ने कई फिल्म फेस्टिवल्स में वाहवाही बटोरी थी। इसके बावजूद, अखिल को इंडस्ट्री में वो मुकाम नहीं मिल पाया जिसके वो हकदार थे। गुमनामी और आर्थिक तंगी का शिकार? कहा जाता है कि रील लाइफ और रियल लाइफ में बहुत फर्क होता है। 'चोला' जैसी फिल्म करने के बाद भी अखिल के पास काम की कमी थी। मोबाइल मैकेनिक का काम: एक्टिंग के ऑफर्स कम होने और घर की जिम्मेदारियों के चलते अखिल को एक मोबाइल फोन की दुकान पर मैकेनिक के तौर पर काम करना पड़ा। पिता का एक्सीडेंट: रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ समय पहले अखिल के पिता का एक गंभीर एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें वे बुरी तरह घायल हो गए थे। उनका इलाज चल रहा था, जिससे घर पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया था। काम से दूरी: बताया जा रहा है कि मानसिक तनाव के चलते अखिल पिछले कुछ दिनों से मोबाइल शॉप पर काम करने भी नहीं जा रहे थे। इंडस्ट्री में शोक की लहर: 'ये तुमने क्या किया अखिल?' अखिल के निधन की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर शोक संदेशों की बाढ़ आ गई है। सनल कुमार शशिधरन: फिल्म 'चोला' के निर्देशक सनल कुमार ने एक लंबा और भावुक नोट लिखकर अपना दुख जताया। उन्होंने लिखा कि अखिल की मौत की खबर ने उन्हें अंदर तक हिला दिया है। मनोज कुमार: इंडस्ट्री से जुड़े मनोज कुमार ने फेसबुक पर लिखा, "ये तुमने क्या कर दिया अखिल? इतनी जल्दी हार मान ली?" पुलिस जांच जारी पुलिस ने अप्राकृतिक मृत्यु (Unnatural Death) का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या अखिल ने कोई सुसाइड नोट छोड़ा था या उनके इस कदम के पीछे कोई और बड़ी वजह थी। फिलहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
नई दिल्ली: बॉलीवुड के 'भाईजान' यानी सलमान खान (Salman Khan) ने अपनी निजता और पहचान की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अभिनेता ने अपने 'पर्सनैलिटी राइट्स' (Personality Rights) की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। सलमान खान इस बात से बेहद नाराज हैं कि उनकी तस्वीर, आवाज और नाम का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना कमर्शियल फायदे के लिए किया जा रहा है।READ ALSO:-Voter List: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का मिल सकता है 'बोनस टाइम', चुनाव आयोग ने यूपी-बंगाल के लिए जारी किए सख्त निर्देश इस मामले की सुनवाई आज यानी गुरुवार (11 दिसंबर, 2025) को जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ के समक्ष होने वाली है। यह कदम तब उठाया गया है जब तकनीकी युग में एआई (AI) और सोशल मीडिया के जरिए सेलेब्रिटीज के चेहरों का दुरुपयोग बढ़ गया है। क्या है सलमान खान की मांग? सलमान खान ने अपनी याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट से सख्त आदेश देने की अपील की है। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, अभिनेता ने मांग की है कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, ई-कॉमर्स वेबसाइट्स और अन्य डिजिटल माध्यमों को उनके नाम, तस्वीरों, आवाज और व्यक्तित्व के किसी भी पहलू का इस्तेमाल करने से रोका जाए। अभिनेता का तर्क है कि उनकी सहमति के बिना उनकी पहचान का उपयोग करके उत्पाद बेचना या प्रचार करना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह उनके कानूनी अधिकारों का हनन भी है। वे चाहते हैं कि कोर्ट उनके Salman Khan Personality Rights को सुरक्षित करे और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करे। क्या होते हैं पर्सनैलिटी राइट्स? आम भाषा में जिसे 'पब्लिसिटी का अधिकार' कहा जाता है, वही कानून की भाषा में पर्सनैलिटी राइट्स है। इसका अर्थ है किसी व्यक्ति का अपनी छवि, नाम, आवाज, हस्ताक्षर या चेहरे की विशेषताओं पर पूर्ण नियंत्रण होना। कोई भी तीसरा पक्ष बिना अनुमति के इनसे पैसा नहीं कमा सकता। आज के दौर में जब डीपफेक (Deepfake) और वॉयस क्लोनिंग जैसी तकनीकें आम हो गई हैं, मशहूर हस्तियां अपने अधिकारों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गई हैं। सलमान खान का यह कदम इसी दिशा में एक प्रयास है। कई एक्टर्स को मिल चुकी है राहत यह पहला मौका नहीं है जब कोई बड़ा सितारा कोर्ट पहुंचा है। हाल ही में बॉलीवुड के कई दिग्गजों को कोर्ट से अंतरिम राहत मिल चुकी है। इनमें शामिल हैं: ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन जया बच्चन और ऋतिक रोशन अजय देवगन और फिल्ममेकर करण जौहर तेलुगु स्टार अक्किनेनी नागार्जुन इसके अलावा, 'आर्ट ऑफ लिविंग' के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर, वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी और मशहूर पॉडकास्टर राज शामानी ने भी हाई कोर्ट का रुख किया था, जहां कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके अधिकारों की रक्षा की थी। NTR जूनियर का मामला भी है पेंडिंग सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, साउथ सिनेमा के दिग्गज भी इस लड़ाई में शामिल हैं। 'आरआरआर' (RRR) फेम तेलुगु अभिनेता एनटीआर राव जूनियर (NTR Jr) ने भी हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनकी याचिका पर कोर्ट का आदेश आना अभी बाकी है। अब सलमान खान के मामले के साथ यह मुद्दा और गरमा गया है। बॉक्स ऑफिस के सुल्तान हैं सलमान सलमान खान की ब्रांड वैल्यू बहुत अधिक है, यही कारण है कि कंपनियां अवैध रूप से उनका चेहरा इस्तेमाल करती हैं। उनके करियर पर नजर डालें तो: बजरंगी भाईजान: यह उनकी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक है, जिसने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। सुल्तान: एक पहलवान की भूमिका में सलमान ने दर्शकों का दिल जीत लिया था और बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े थे। टाइगर जिंदा है: रॉ एजेंट की भूमिका में सलमान का एक्शन अवतार दर्शकों को खूब पसंद आया था। इन फिल्मों की सफलता ने सलमान को एक ग्लोबल आइकन बना दिया है, जिससे उनकी कमर्शियल वैल्यू करोड़ों में है। Salman Khan Personality Rights का यह मामला सेलिब्रिटी सुरक्षा और डिजिटल नैतिकता के लिहाज से बेहद अहम है। आज जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। अगर कोर्ट सलमान के पक्ष में फैसला देता है, तो यह सोशल मीडिया पर चल रहे अनधिकृत विज्ञापनों और एआई जनरेटेड कंटेंट के खिलाफ एक बड़ी नजीर साबित होगा। सलमान खान ने अपनी आवाज और फोटो के बिना इजाजत इस्तेमाल को रोकने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। गुरुवार को इस पर सुनवाई होगी। इससे पहले अमिताभ बच्चन, अजय देवगन और ऐश्वर्या राय जैसे सितारों को भी कोर्ट से अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा मिल चुकी है।
मुंबई (Mumbai): भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के 'पावर स्टार' कहे जाने वाले पवन सिंह (Pawan Singh) की जान पर खतरा मंडरा रहा है। अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) के साथ नजदीकी और बिग बॉस फिनाले में शामिल होना पवन सिंह के लिए मुसीबत बन गया है। खबर है कि कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग (Lawrence Bishnoi Gang) के एक गुर्गे ने पवन सिंह को जान से मारने की खुली धमकी दी है।READ ALSO:-धर्मेंद्र की 90 वीं बर्थ एनिवर्सरी: 'ही-मैन' की याद में डूबा देओल परिवार, सनी का वीडियो तो ईशा का खत कर देगा भावुक; बॉबी बोले- 'मेरे अनमोल पापा' यह धमकी फोन कॉल पर नहीं, बल्कि व्हाट्सऐप (WhatsApp) मैसेज के जरिए दी गई है। धमकी देने वाले ने खुद को 'बब्लू' बताया है और दावा किया है कि वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सक्रिय सदस्य है। इस घटना के बाद से भोजपुरी सिनेमा और पवन सिंह के फैंस में हड़कंप मच गया है। "आज से तेरी उल्टी गिनती शुरू" सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट्स ने सनसनी फैला दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, धमकी देने वाले शख्स ने पवन सिंह के निजी नंबर पर कई वॉयस और टेक्स्ट मैसेज भेजे हैं। मैसेज की भाषा बेहद आक्रामक और डराने वाली है। वायरल चैट में लिखा गया है, "पवन सिंह को बोल देना, मेरा फोन नहीं उठाता है। आज से उसकी उल्टी गिनती शुरू है।" यह धमकी उस वक्त आई है जब पवन सिंह हाल ही में सलमान खान के रियलिटी शो 'बिग बॉस' के फिनाले में नजर आए थे। बताया जा रहा है कि लॉरेंस गैंग, जो पहले से ही सलमान खान के पीछे पड़ा है, को पवन सिंह का सलमान के साथ मंच साझा करना नागवार गुजरा है। "लखनऊ में नहीं छोड़ेंगे धमकी भरे संदेशों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। आरोपी 'बब्लू' ने पवन सिंह को लखनऊ (Lucknow) में निशाना बनाने की बात कही है। एक अन्य मैसेज में लिखा गया, "सलमान खान के साथ काम करता है न, लखनऊ में नहीं छोड़ेंगे उसे। दुनिया की किसी ताकत ने नहीं मिलाया, गोश्त मार देंगे।" धमकी देने वाले ने अपने रसूख और डर को कायम करने के लिए बिहार के दिग्गज नेताओं का भी नाम लिया है। उसने लिखा, "मैं कौन हूँ अगर नहीं पता तो उपेंद्र कुशवाहा और पप्पू यादव से पूछ लेना।" उसने आगे चुनौती देते हुए लिखा कि पवन सिंह बहुत बड़ा हीरो बनता है, उसे बोलो मुझे कॉल करे, भाई का नंबर गूगल पर मिल जाएगा। पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा, ओशिवरा में अलर्ट हालांकि, इतनी गंभीर धमकी मिलने के बावजूद पवन सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और वे सलमान खान के शो में शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, धमकी मिलने के बाद मुंबई पुलिस (Mumbai Police) हरकत में आ गई है। फिलहाल पवन सिंह मुंबई के ओशिवरा स्थित सोरेंटो अपार्टमेंट की 5वीं मंजिल पर रहते हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि एहतियात के तौर पर पवन सिंह की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और उनके आवास के आसपास निगरानी रखी जा रही है। हालांकि, अभी तक पवन सिंह की तरफ से इस मामले में कोई औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन पुलिस को मामले की मौखिक जानकारी दे दी गई है। सलमान खान कनेक्शन और लॉरेंस का नेटवर्क लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम पिछले कुछ सालों में कई हाई-प्रोफाइल हत्याओं और धमकियों में सामने आया है। पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के बाद से यह गैंग लगातार सेलेब्रिटीज को निशाना बना रहा है। सलमान खान को काले हिरण शिकार मामले को लेकर यह गैंग अपना दुश्मन मानता है। ऐसे में जो भी सलमान खान के करीब जाता है या उनका समर्थन करता है, वह इस गैंग के निशाने पर आ जाता है। मैसेज में यह भी लिखा गया है कि "पवन सिंह का सलमान खान संग काम करने का सपना अधूरा रह जाएगा।" यह स्पष्ट करता है कि धमकी का मुख्य कारण सलमान खान के साथ उनकी पेशेवर दोस्ती है। Pawan Singh Death Threat का यह मामला बेहद गंभीर है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे संगठित अपराध अब क्षेत्रीय सिनेमा के कलाकारों को भी अपने निशाने पर ले रहा है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और साइबर सेल उस नंबर को ट्रेस करने की कोशिश में जुटी है जिससे ये मैसेज भेजे गए थे। पवन सिंह के फैंस उनकी सुरक्षा के लिए दुआ मांग रहे हैं। भोजपुरी स्टार पवन सिंह को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कथित सदस्य 'बब्लू' ने व्हाट्सऐप पर जान से मारने की धमकी दी है। धमकी का कारण पवन सिंह का सलमान खान के साथ बिग बॉस फिनाले में शामिल होना बताया जा रहा है। मैसेज में "उल्टी गिनती शुरू" और "लखनऊ में नहीं छोड़ेंगे" जैसी बातें लिखी गई हैं। पुलिस ने एहतियातन पवन सिंह के मुंबई आवास की सुरक्षा बढ़ा दी है।
मुंबई (Mumbai): हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और 'ही-मैन' (He-Man) के नाम से मशहूर धर्मेंद्र (Dharmendra) की आज 8 दिसंबर को बर्थ एनिवर्सरी है। यह पहला मौका है जब देओल परिवार अपने मुखिया के बिना उनका जन्मदिन मना रहा है। बीती 24 नवंबर को 89 साल की उम्र में धर्मेंद्र का निधन हो गया था, जिसके बाद से पूरा परिवार और फैंस गहरे सदमे में हैं। धर्मेंद्र की बर्थ एनिवर्सरी (Dharmendra Birth Anniversary) के मौके पर आज उनके बच्चों- सनी देओल, बॉबी देओल, ईशा देओल और पोते करण देओल ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट शेयर कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। इन संदेशों को पढ़कर फैंस की आंखें भी नम हो गई हैं। View this post on Instagram सनी देओल का छलका दर्द: "लव यू पापा" पिता के सबसे करीब रहने वाले बड़े बेटे सनी देओल (Sunny Deol) ने इस मौके पर एक बेहद खूबसूरत वीडियो शेयर किया है। वीडियो में धर्मेंद्र वादियों के बीच मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। सनी ने अपने पिता को याद करते हुए लिखा, "आज मेरे पापा का जन्मदिन है, पापा हमेशा मेरे साथ हैं, मेरे अंदर हैं, लव यू पापा, मिस यू।" View this post on Instagram वीडियो में सनी अपने पिता से पूछते हैं कि क्या वह एन्जॉय कर रहे हैं? जिस पर धर्मेंद्र अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ जवाब देते हैं, "मैं सच में बहुत एन्जॉय कर रहा हूं मेरे बेटे।" यह वीडियो देखकर फैंस भावुक हो रहे हैं। ईशा देओल: "मैं आपको बहुत याद करती हूं पापा" हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की बेटी ईशा देओल (Esha Deol) ने अपने पिता के लिए एक लंबा और दिल को छू लेने वाला नोट लिखा है। उन्होंने पिता के साथ अपनी अनदेखी तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, "मेरे प्यारे पापा, हमारा बंधन सबसे मजबूत है। चाहे स्वर्ग हो या धरती, हम हमेशा एक हैं। मैंने आपको अपनी यादों में बहुत संभाल कर रखा है।" ईशा ने आगे लिखा, "मैं आपको बहुत याद करती हूं पापा... आपका वो वार्म हग, जो दुनिया का सबसे सुरक्षित कंबल लगता था। मैं वादा करती हूं कि आपकी विरासत को गर्व और सम्मान के साथ आगे बढ़ाऊंगी।" बॉबी देओल: "मेरे अनमोल पापा, आप सबके हीरो हैं" धर्मेंद्र के छोटे बेटे बॉबी देओल (Bobby Deol) ने अपने पिता को 'अनमोल' बताते हुए एक कवितानुमा पोस्ट शेयर किया। बॉबी ने लिखा, "दुनिया में इतना प्यार नहीं जितना आपने हम सभी को दिया। आप ही-मैन हैं सबके, लेकिन बचपन से मेरे हीरो हैं। आपके संस्कार से हम देओल बनेंगे। जन्मदिन मुबारक हो मेरे अनमोल पापा।" बॉबी ने बताया कि कैसे धर्मेंद्र ने पंजाब से लेकर पूरे भारत का नाम रोशन किया। अभय देओल और करण देओल ने भी ताजा की यादें अभय देओल, जिन्हें धर्मेंद्र प्यार से अपने बेटे जैसा मानते थे, ने बचपन की एक तस्वीर शेयर की। उन्होंने लिखा कि कैसे जब वे परेशान होते थे, तो धर्मेंद्र उन्हें 'रोशनी की ओर देखने' के लिए कहते थे। वहीं, पोते करण देओल ने लिखा, "बड़े पापा, मैंने आपको देखकर ही जिंदगी जीना सीखा है। आप जैसा कोई कभी नहीं होगा। मुझे आपकी बहुत याद आती है।" 24 नवंबर को हुआ था निधन, हरिद्वार में हुआ था अस्थि विसर्जन गौरतलब है कि 24 नवंबर को उम्र संबंधी बीमारियों के चलते धर्मेंद्र ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। हाल ही में सनी और बॉबी देओल ने हरिद्वार जाकर पिता की अस्थियों को गंगा में विसर्जित किया था। आज धर्मेंद्र की बर्थ एनिवर्सरी पर न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा बॉलीवुड और उनके करोड़ों चाहने वाले उन्हें नम आंखों से याद कर रहे हैं। View this post on Instagram धर्मेंद्र भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें, उनकी फिल्में और उनकी जिंदादिली हमेशा अमर रहेगी। उनके बच्चों द्वारा शेयर किए गए ये पोस्ट बताते हैं कि एक पिता के रूप में उन्होंने अपने परिवार को कितना प्यार और संस्कार दिया है। हिंदी सिनेमा के इतिहास में 8 दिसंबर का दिन हमेशा इस महान अभिनेता की याद दिलाता रहेगा। View this post on Instagram दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की आज बर्थ एनिवर्सरी है। उनके निधन (24 नवंबर) के बाद यह उनकी पहली जयंती है। इस मौके पर बेटे सनी देओल, बॉबी देओल, बेटी ईशा देओल और परिवार के अन्य सदस्यों ने सोशल मीडिया पर बेहद भावुक पोस्ट शेयर किए हैं। सनी ने जहां पिता का वीडियो शेयर किया, वहीं ईशा और बॉबी ने पिता की सीख और प्यार को याद किया। फैंस भी अपने चहेते सितारे को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।