वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका में बसने और वहां की नागरिकता पाने का सपना देख रहे रईस निवेशकों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने बुधवार को व्हाइट हाउस में एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड' (Trump Gold Card) वीजा कार्यक्रम का आधिकारिक शुभारंभ कर दिया है। इस कार्यक्रम के तहत विदेशी नागरिकों को अमेरिका में स्थायी निवास (Permanent Residency) और नागरिकता हासिल करने का एक 'फास्ट-ट्रैक' रास्ता दिया गया है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी जेब ढीली करनी होगी।READ ALSO:-यूपी में सर्दी का 'Second Attack': पश्चिमी विक्षोभ जाते ही ठिठुरा प्रदेश, 13 जिलों में 'विजिबिलिटी जीरो' का खतरा, देखें अपने शहर का हाल क्या है ट्रम्प गोल्ड कार्ड वीजा? व्हाइट हाउस में व्यापारिक नेताओं की मौजूदगी में इस कार्यक्रम को लॉन्च करते हुए ट्रम्प ने इसे गेम-चेंजर बताया। इस योजना के मुताबिक, कोई भी विदेशी नागरिक लगभग 10 लाख डॉलर (करीब 8.5 करोड़ रुपये) का निवेश करके अमेरिका का स्थायी निवासी बन सकता है। इसके बाद उन्हें अमेरिकी नागरिकता (US Citizenship) प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा। ट्रम्प ने दावा किया कि यह 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड' (Trump Gold Card) पारंपरिक 'ग्रीन कार्ड' से कई मायनों में बेहतर है। उन्होंने कहा, "यह योजना ग्रीन कार्ड जैसी है, लेकिन इसके फायदे उससे कहीं अधिक हैं। इससे हम दुनिया भर के उच्च-मूल्य वाले निवेशकों और प्रतिभाशाली उद्यमियों को अमेरिका ला सकेंगे।" कंपनियों के लिए 20 लाख डॉलर का विकल्प सिर्फ व्यक्तिगत निवेशक ही नहीं, बल्कि बड़ी कंपनियों के लिए भी इस प्रोग्राम में खास प्रावधान किए गए हैं। ट्रम्प ने 'कॉर्पोरेट गोल्ड कार्ड' (Corporate Gold Card) का विकल्प भी पेश किया है। The Department of Homeland Security is working closely with @CommerceGov to facilitate the rollout of President Trump’s Gold Card program. Under this historic initiative, qualified individuals and corporations, who contribute $1 million and $2 million respectively, will receive… pic.twitter.com/10htrjYyxx — Secretary Kristi Noem (@Sec_Noem) December 10, 2025 नियम: यदि कोई अमेरिकी कंपनी किसी विदेशी प्रतिभाशाली कर्मचारी को अमेरिका लाना चाहती है या यहां बनाए रखना चाहती है, तो वह 20 लाख डॉलर (लगभग 17 करोड़ रुपये) का निवेश कर उस कर्मचारी को स्पॉन्सर कर सकती है। फायदा: राष्ट्रपति ने विशेष रूप से एपल (Apple) जैसी दिग्गज टेक कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे वे बेहतरीन टैलेंट को अपने पास रख सकेंगी। उन्होंने कहा, "प्रतिभाशाली लोग देश में आकर काम कर सकेंगे और हमारी इकोनॉमी को मजबूती देंगे।" सीधे अमेरिकी खजाने में जाएगा पैसा इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि निवेश की गई राशि सीधे अमेरिकी सरकार के खजाने में जाएगी। ट्रम्प ने बताया कि इस योजना से अमेरिकी राजस्व में अरबों डॉलर आने की उम्मीद है। ट्रम्प गोल्ड कार्ड वीजा (Trump Gold Card Visa) के लिए आधिकारिक वेबसाइट लाइव हो चुकी है और ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। अमीरों के लिए 'गोल्डन टिकट' या अवसर? हालांकि, इस योजना के लॉन्च होते ही बहस भी छिड़ गई है। आलोचकों का कहना है कि यह वीजा प्रोग्राम केवल अमीरों के लिए है और सामान्य श्रमिकों या मध्यम वर्ग के प्रवासियों के लिए इसमें कोई जगह नहीं है। आलोचना: कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिकता को "बिकाऊ" बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हो सकता है। समर्थन: वहीं, समर्थकों का कहना है कि यह अमेरिका की 'निवेश-आधारित आव्रजन नीति' (Investment-based Immigration) को नया आयाम देगा और देश की अर्थव्यवस्था को बूस्ट करेगा। ग्रीन कार्ड बैकलॉग से मिलेगी मुक्ति? भारत जैसे देशों के हजारों लोग सालों से ग्रीन कार्ड के बैकलॉग में फंसे हैं। ऐसे में जिनके पास पूंजी है, उनके लिए ट्रम्प गोल्ड कार्ड (Trump Gold Card) एक त्वरित समाधान साबित हो सकता है। ट्रम्प ने साफ किया कि उनका उद्देश्य वैश्विक प्रतिभाओं को अमेरिका की ओर आकर्षित करना है, ताकि अमेरिका ग्लोबल रेस में सबसे आगे रहे। डोनाल्ड ट्रम्प का यह कदम अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में एक बड़ा बदलाव है। 10 लाख डॉलर की कीमत वाला यह कार्ड निश्चित रूप से अमीरों के लिए अमेरिका का दरवाजा खोलता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दुनिया भर के निवेशक और भारतीय उद्योगपति इस नई योजना में कितनी रुचि दिखाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड' वीजा लॉन्च किया है। इसके तहत 10 लाख डॉलर (व्यक्तिगत) या 20 लाख डॉलर (कॉर्पोरेट) निवेश करके अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की जा सकती है। आवेदन शुरू हो चुके हैं। इसका उद्देश्य विदेशी निवेश बढ़ाना और टैलेंट को अमेरिका में रोकना है।
इस्लामाबाद/रावलपिंडी (Imran Khan Jail News): पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और PTI प्रमुख इमरान खान की जेल में सुरक्षा और सेहत को लेकर देश में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। अडियाला जेल में बंद इमरान खान को पिछले कई हफ्तों से एकांतवास में रखे जाने के बाद, उनके बेटे कासिम खान ने गुरुवार को सार्वजनिक तौर पर अपने पिता के जिंदा होने का सबूत मांगा है। दूसरी ओर, इमरान खान से मिलने जेल पहुंचे खैबर-पख्तूनख्वा (KP) राज्य के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी पर पुलिस ने कथित तौर पर सेना के आदेश पर हमला कर दिया।READ ALSO:-दामों में आग: सोने-चांदी की कीमतों में आया 'सुनामी उछाल'; 10 ग्राम गोल्ड ₹1,26,666 पर पहुंचा बेटे कासिम खान का सीधा सवाल: पिता ज़िंदा हैं? इमरान खान के बेटे कासिम खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पिता को 845 दिन पहले गिरफ्तार किया गया था और पिछले 6 हफ्तों से उन्हें अकेले 'डेथ सेल' (Death Cell) में रखा गया है। कासिम ने लिखा, "किसी को नहीं पता है कि इमरान खान ज़िंदा हैं या नहीं। उन्हें किसी से मिलने, कोई फोन कॉल या मैसेज करने की इजाज़त नहीं है।" इमरान खान की बहन नोरेन नियाजी ने भी परिवार में डर फैलने की बात कही। उन्होंने बताया कि परिवार को लगातार जेल प्रशासन द्वारा रोका जा रहा है, जिससे उनकी सेहत को लेकर अफवाहें फैल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस को जानबूझकर आदेश दिए गए हैं कि परिवार को रोका जाए और बदसलूकी की जाए। जेल के बाहर मुख्यमंत्री पर हमला: सेना के आदेश का दावा गुरुवार को Imran Khan Jail News के संदर्भ में सबसे बड़ा घटनाक्रम रावलपिंडी की अडियाला जेल के बाहर हुआ, जहां खैबर-पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को पुलिस ने जबरन रोका। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अत्यधिक सुरक्षा और बढ़ती भीड़ के बीच पुलिसकर्मियों ने सीएम अफरीदी को लात-घूंसे मारे और जमीन पर गिरा दिया। पीटीआई ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई पाकिस्तान सेना के आदेश पर की गई। सीएम अफरीदी ने इस हमले को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए, इमरान खान की सही सेहत की जानकारी न दिए जाने पर बड़े विरोध-प्रदर्शन की धमकी दी है। उन्होंने सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर तंज कसते हुए बिगड़ते हालात के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया। मौत की अफवाहों पर जेल प्रशासन की सफाई इमरान खान से लगातार मुलाकात न होने के कारण सोशल मीडिया पर उनकी मौत तक की अफवाहें तेजी से फैलने लगीं। तनाव बढ़ने के बाद, जेल प्रशासन ने एक बयान जारी कर कहा है कि इमरान खान की तबीयत बिल्कुल ठीक है। हालांकि, PTI ने सरकार पर पलटवार करते हुए चेतावनी दी है कि इमरान खान की सुरक्षा, स्वास्थ्य और संवैधानिक अधिकारों की जिम्मेदारी सीधे मौजूदा सरकार पर है। पार्टी ने कहा, "अगर कोई अनहोनी हुई तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" दूसरी ओर, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इमरान की सुविधाओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि इमरान जेल में मखमली बिस्तर पर सोते हैं और उन्हें बाहर से खाना व टीवी जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं। आसिफ ने इन अफवाहों को झूठ बताया। अदालती आदेशों का उल्लंघन जेल प्रशासन की कार्रवाई सीधे तौर पर इस्लामाबाद हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। कोर्ट ने मार्च और अक्टूबर 2025 में इमरान खान को परिवार और वकीलों से नियमित मुलाकात की मंजूरी दी थी, लेकिन जेल प्रशासन ने अब तक उनकी बहनों को मुलाकात की अनुमति नहीं दी है, जिससे उनकी सेहत को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं और उन्हें तोशाखाना व अल-कादिर ट्रस्ट जैसे गंभीर भ्रष्टाचार मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है। अल-कादिर ट्रस्ट केस को पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा स्कैम (50 अरब रुपए) बताया गया है। इमरान खान की जेल में एकांतवास, उनके बेटे द्वारा जिंदा होने का सबूत मांगना और एक मुख्यमंत्री पर हमला, पाकिस्तान में राजनीतिक संकट को नए स्तर पर ले गया है। Imran Khan Jail News लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन और सरकार-सेना पर सीधे लगाए जा रहे आरोपों से साफ है कि पाकिस्तान में तनाव कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है, जिसके गंभीर राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
बांग्लादेश की राजनीति और न्यायपालिका से एक बेहद चौंकाने वाली और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। देश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने हिंसा से जुड़े एक गंभीर मामले में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा (फांसी की सजा) सुनाई है। ट्रिब्यूनल ने हसीना के साथ ही उनके पूर्व गृह मंत्री कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (IG) को भी दोषी करार देते हुए यह कठोर फैसला सुनाया है।READ ALSO:-सऊदी अरब में भीषण सड़क हादसा: मक्का से मदीना जा रही बस और टैंकर की टक्कर, 42 भारतीय तीर्थयात्रियों की मौत की आशंका ICT ने अपने फैसले में कहा कि ये अपराध 'मानवता के खिलाफ अपराध' (Crimes Against Humanity) की श्रेणी में आते हैं और कानून के तहत इसके लिए अधिकतम दंड दिया जाना आवश्यक है। यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में एक भूकंप की तरह आया है, क्योंकि शेख हसीना देश की सबसे प्रभावशाली और लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली राजनेताओं में से एक रही हैं। ट्रिब्यूनल के फैसले के प्रमुख बिंदु इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने अपने विस्तृत फैसले में शेख हसीना और अन्य दोषियों पर लगे आरोपों को सिद्ध पाया। ट्रिब्यूनल ने जिन मुख्य अपराधों के लिए सजा सुनाई है, वे निम्नलिखित हैं: * हत्या के लिए उकसाना: ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को देशव्यापी राजनीतिक हिंसा के दौरान हुई हत्याओं के लिए उकसाने (Incitement) का दोषी माना। * हत्या का आदेश देना: उन्हें सीधे तौर पर हत्या का आदेश देने (Ordering Murder) का दोषी भी ठहराया गया। * मानवता के खिलाफ अपराध: पूर्व गृह मंत्री कमाल और पूर्व IG को भी हिंसा के दौरान मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और मानवता के खिलाफ अपराधों में संलिप्त पाया गया। ट्रिब्यूनल ने सजा सुनाते हुए यह भी आदेश दिया है कि शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री कमाल की बांग्लादेश में मौजूद सभी संपत्तियों को तत्काल प्रभाव से जब्त (Confiscated) कर लिया जाए। मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी प्रक्रिया यह मामला राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ व्यापक और हिंसक कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। ट्रिब्यूनल ने पूर्व में ही कई मामलों में हसीना की पार्टी के नेताओं के खिलाफ जांच शुरू की थी। इस पूरे मुकदमे की कार्यवाही लंबे समय तक चली, जिसमें बड़ी संख्या में गवाहों और सबूतों की जांच की गई। ICT, जिसे 2010 में स्थापित किया गया था, बांग्लादेश में मानवता के खिलाफ अपराधों और युद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए जिम्मेदार है। इस ट्रिब्यूनल द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों को मौत की सजा सुनाया जाना देश के न्यायिक इतिहास में अभूतपूर्व है राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया इस फैसले के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव और अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। शेख हसीना की पार्टी ने इस फैसले को राजनीति से प्रेरित बताया है और इसे ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है। देश भर में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया आने की उम्मीद है। मानवाधिकार संगठनों और राजनयिक समूहों ने हमेशा से बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा की निंदा की है। अब, एक पूर्व प्रधानमंत्री को मिली मौत की सजा के बाद, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा बांग्लादेश पर दबाव बढ़ सकता है। भारत, जिसका बांग्लादेश के साथ गहरा संबंध है, इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखेगा। बांग्लादेश के ICT द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाया जाना एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम है। यह फैसला न केवल हसीना के राजनीतिक करियर का अंत कर सकता है, बल्कि बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता के लिए भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए यह कठोर दंड न्यायिक इतिहास में दर्ज हो गया है, और अब सबकी निगाहें इस फैसले को ऊपरी अदालत में दी जाने वाली चुनौती पर टिकी हैं।
सऊदी अरब से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। उमराह तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस की डीजल टैंकर से भीषण टक्कर के बाद बस में आग लगने से कम से कम 42 भारतीय तीर्थयात्रियों की मौत की आशंका है। यह दर्दनाक हादसा सोमवार (17 नवंबर 2025) तड़के तब हुआ, जब तीर्थयात्री मक्का से मदीना जा रहे थे।Read also:-'राइजिंग स्टार्स' कप में भारत की करारी हार! माज़ सकात के ऑलराउंड 'तूफान' में उड़ी टीम इंडिया, पाकिस्तान ए 8 विकेट से जीता प्रारंभिक मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बस में सवार सभी 42 तीर्थयात्रियों के मारे जाने की आशंका है, जिनमें से अधिकांश लोग तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के रहने वाले थे। हादसे की भीषणता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद बस में तुरंत भीषण आग लग गई, जिससे यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। हादसे की भयावहता और पीड़ितों का विवरण यह दुर्घटना भारतीय समयानुसार लगभग 1:30 बजे मुफरीहात (Mufrihat) के पास हुई। खबरों के मुताबिक, बस में कुल 43 यात्री सवार थे, जिनमें से एक व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है, जिसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाकी सभी 42 लोगों की मौत की आशंका है। मृतकों में शामिल: शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, मरने वालों में 20 महिलाएं और 11 बच्चे शामिल थे। यह आंकड़ा बताता है कि यह तीर्थयात्रियों का एक पूरा परिवार समूह था। यात्रियों की पहचान: अधिकांश भारतीय तीर्थयात्रियों की मौत की आशंका हैदराबाद से है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तत्काल विदेश मंत्रालय (MEA) और रियाद में भारतीय दूतावास से समन्वय स्थापित करें। बचाव कार्य: हादसे की सूचना मिलते ही सऊदी अरब की रेस्क्यू टीमें और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। भीषण आग के कारण बचाव और राहत कार्य तुरंत शुरू करने में बाधा आई। तेलंगाना सरकार और विदेश मंत्रालय का प्रयास इस हृदय विदारक घटना के सामने आने के बाद, तेलंगाना सरकार सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को तत्काल विस्तृत जानकारी जुटाने और प्रभावित परिवारों को सहायता सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। सहायता के लिए तेलंगाना सचिवालय में एक नियंत्रण कक्ष (Control Room) स्थापित किया गया है। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और तत्काल रियाद में भारतीय दूतावास के उप मिशन प्रमुख (DCM) से बात की। उन्होंने केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से अनुरोध किया है कि वे मृतकों के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने और घायलों को समुचित चिकित्सा प्रदान करने के लिए त्वरित कदम उठाएं। उमराह तीर्थयात्रियों की सुरक्षा पर सवाल तीर्थयात्रा के दौरान 42 भारतीय तीर्थयात्रियों की मौत की आशंका ने सड़क सुरक्षा और यात्रा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये सभी तीर्थयात्री मक्का में अपने धार्मिक अनुष्ठान पूरे करने के बाद मदीना जा रहे थे, जब यह हादसा हुआ। यह घटना एक बार फिर लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान सुरक्षा मानकों के सख्त पालन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। सऊदी अरब के स्थानीय अधिकारी इस दुर्घटना के सटीक कारणों की जांच कर रहे हैं, लेकिन डीजल टैंकर से टक्कर के बाद लगी आग को ही इतनी बड़ी जनहानि का मुख्य कारण माना जा रहा है। सऊदी अरब में मक्का-मदीना हाईवे पर हुआ यह सड़क हादसा देश के लिए एक बड़ी त्रासदी है। 42 भारतीय तीर्थयात्रियों की मौत की आशंका एक दुखद क्षति है। भारत सरकार और तेलंगाना सरकार दोनों ही सऊदी अधिकारियों के साथ मिलकर पीड़ितों की पहचान की पुष्टि करने और उनके परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए काम कर रहे हैं। इस मुश्किल घड़ी में, पूरा देश पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता है।
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मंगलवार दोपहर को एक भीषण विस्फोट हुआ है। शहर के सेक्टर G-11 स्थित न्यायिक परिसर के बाहर हुए इस इस्लामाबाद कोर्ट धमाका में कम से कम 12 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हुए हैं। विस्फोट के बाद पूरे कोर्ट परिसर में भगदड़ मच गई और इलाके में दहशत फैल गई। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब देश की सुरक्षा व्यवस्था पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। कोर्ट पार्किंग में विस्फोट: आत्मघाती हमलावर या सिलेंडर? विस्फोट की प्रकृति को लेकर शुरुआती जांच में विरोधाभास सामने आया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धमाका न्यायिक परिसर के मुख्य गेट के पास पार्किंग एरिया में खड़ी एक कार में हुआ। आत्मघाती हमले का संदेह: डॉन और एक्सप्रेस ट्रिब्यून जैसी स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि यह एक आत्मघाती हमला हो सकता है। एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया, जिससे इतनी बड़ी क्षति हुई। गैस सिलेंडर विस्फोट की थ्योरी: हालांकि, स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने प्राथमिक जांच में कहा कि यह कार में लगे गैस सिलेंडर के फटने से हुआ विस्फोट प्रतीत होता है। फिलहाल, फोरेंसिक टीमें घटनास्थल से सबूत जुटा रही हैं ताकि विस्फोट के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके। धमाके की आवाज लगभग छह किलोमीटर दूर तक सुनी गई, जिससे राजधानी के अन्य हिस्सों में भी सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। भारी भीड़ के कारण बढ़ी हताहतों की संख्या यह इस्लामाबाद कोर्ट धमाका उस समय हुआ जब न्यायिक परिसर में वकीलों, मुवक्किलों और आम नागरिकों की भारी भीड़ मौजूद थी। धमाका पार्किंग क्षेत्र में होने के बावजूद, इसके दायरे में कई लोग आ गए। बचाव कार्य: पुलिस और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुँचे और पूरे इलाके को सील कर दिया गया। घायलों को तुरंत नजदीकी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) अस्पताल और अन्य चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है। स्थिति की गंभीरता: घटनास्थल से आई तस्वीरों में सड़क पर शव और घायल लोग बिखरे दिख रहे हैं, जो इस त्रासदी की भयावहता को दर्शाते हैं। VIDEO | Islamabad, Pakistan: At least 12 killed and 20 injured in a suicide attack outside a court. Authorities have launched an investigation and Interior Minister Mohsin Naqvi visited the site of the blast and vowed justice. (Full video available on PTI Videos –… pic.twitter.com/WzxJg9SiLn — Press Trust of India (@PTI_News) November 11, 2025 सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल दिल्ली में हाल ही में हुए आतंकी धमाके (जिसकी जांच अब एनआईए को सौंप दी गई है) और पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हुए आईईडी ब्लास्ट के बाद इस्लामाबाद कोर्ट धमाका ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना बताती है कि न्यायपालिका और सरकारी प्रतिष्ठान अभी भी आतंकवादियों के निशाने पर हैं। सरकार को जल्द ही सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करनी होगी। इस्लामाबाद कोर्ट धमाका एक बेहद दुखद घटना है जिसने पाकिस्तान की राजधानी को एक बार फिर दहशत में डाल दिया है। हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है। पुलिस और फोरेंसिक टीमें विस्फोट के पीछे के सही कारणों की पुष्टि करने और किसी आतंकी समूह की संलिप्तता का पता लगाने के लिए तेजी से काम कर रही हैं। यह आवश्यक है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद के इस खतरे को रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाएं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास हुए भीषण कार धमाके के बाद कई पश्चिमी देशों ने भारत में मौजूद अपने नागरिकों के लिए सख्त ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। संयुक्त राज्य अमेरिका (US), यूनाइटेड किंगडम (UK) और फ्रांस ने अपने दूतावासों के माध्यम से अलर्ट जारी करते हुए नागरिकों से अत्यधिक सतर्कता बरतने की अपील की है। यह दिल्ली धमाका एडवाइजरी स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि विदेशी सरकारें इस घटना को एक गंभीर सुरक्षा जोखिम मान रही हैं। विस्फोट में 12 लोगों की मौत हुई थी, जिसकी जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है।READ ALSO:-दिल्ली धमाके की जांच NIA को सौंपी गई, 6 डॉक्टर हिरासत में, आतंकी मॉड्यूल का मास्टरमाइंड डॉ. उमर अमेरिकी दूतावास की चेतावनी: लाल किले और बाजारों से बचें दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने एक सुरक्षा अलर्ट जारी किया है, जिसमें अपने नागरिकों को स्पष्ट सलाह दी गई है। जगहों से बचने की सलाह: अमेरिकी नागरिकों से लाल किले (Red Fort) के आसपास और चांदनी चौक जैसे दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने को कहा गया है। ये वे स्थान हैं जहाँ अक्सर पर्यटक आते हैं। सतर्कता और निगरानी: दूतावास ने नागरिकों को अपने आस-पास के माहौल के प्रति सजग रहने, स्थानीय मीडिया की खबरों पर नजर रखने और सार्वजनिक परिवहन केंद्रों एवं अन्य भीड़भाड़ वाली जगहों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। संवेदना संदेश: अमेरिकी विदेश विभाग ने विस्फोट से प्रभावित लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और कहा है कि वे स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। UK की सख्त एडवाइजरी: सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों पर प्रतिबंध ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO) ने अपनी दिल्ली धमाका एडवाइजरी को अपडेट किया है, जो काफी व्यापक है। यूके ने अपने नागरिकों को भारत के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में यात्रा न करने की सलाह दी है। सीमावर्ती क्षेत्र: ब्रिटेन ने अपने नागरिकों को भारत-पाकिस्तान सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी है। जम्मू और कश्मीर: FCDO ने जम्मू और कश्मीर (J&K) के सभी क्षेत्रों (श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग को छोड़कर) में किसी भी यात्रा से बचने की सलाह को दोहराया है। पूर्वोत्तर भारत: इसके अलावा, मणिपुर में 2023 से चल रही जातीय झड़पों के कारण वहाँ की राजधानी इम्फाल सहित पूरे राज्य में "आवश्यक यात्रा" को छोड़कर सभी यात्राओं के खिलाफ सलाह दी गई है। फ्रांस और अन्य देशों की प्रतिक्रिया फ्रांस के दूतावास ने भी भारत में मौजूद अपने नागरिकों को भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने और अत्यधिक अलर्ट रहने को कहा है। फ्रांस ने इस त्रासदी पर पीड़ितों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। बांग्लादेश और ईरान सहित कई अन्य देशों ने भी इस आतंकी हमले के बाद शोक और संवेदना व्यक्त की है। यह वैश्विक प्रतिक्रिया दिखाती है कि दिल्ली में सुरक्षा स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है। पर्यटन और व्यापार पर असर विदेशी सरकारों द्वारा जारी की गई दिल्ली धमाका एडवाइजरी का भारत के पर्यटन और व्यापार पर अल्पकालिक नकारात्मक असर पड़ सकता है। लाल किला जैसे प्रमुख पर्यटक स्थलों को सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया है, जिससे विदेशी पर्यटकों के आवागमन में कमी आ सकती है। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और दिल्ली पुलिस स्थिति को सामान्य करने और पर्यटकों का विश्वास बहाल करने के लिए हाई अलर्ट पर हैं। इस आतंकी मॉड्यूल की जांच कर रही एनआईए, जिसे हाल ही में यह केस सौंपा गया है, ने इस मामले में 'व्हाइट कॉलर' आतंकियों सहित कई लोगों को हिरासत में लिया है। दिल्ली धमाके के बाद दिल्ली धमाका एडवाइजरी का जारी होना भारतीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है। US, UK और फ्रांस द्वारा जारी किए गए ट्रैवल अलर्ट इस बात को रेखांकित करते हैं कि भारत को अपनी राजधानी और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। इन देशों की सलाह है कि उनके नागरिक स्थानीय अधिकारियों की सलाह का पालन करें। भारत सरकार को जल्द से जल्द इस आतंकी नेटवर्क का पूरी तरह से पर्दाफाश करके अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सुरक्षा की स्थिति सामान्य होने का विश्वास दिलाना होगा।
जापान के राजनीतिक इतिहास में आज (मंगलवार, 21 अक्टूबर 2025) एक अभूतपूर्व मोड़ आया है। जापान की संसद (नेशनल डाइट) ने लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) की अध्यक्ष साने ताकाइची (Sanae Takaichi) को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री (First Woman Prime Minister) के रूप में चुना है। 64 वर्षीय ताकाइची ने इस शीर्ष पद पर पहुँचकर जापान के कठोर पुरुष-प्रधान राजनीतिक परिदृश्य में 'ग्लास सीलिंग' (Glass Ceiling) को तोड़ दिया है। उनकी यह जीत एक बड़े राजनीतिक संकट के बीच आई है, जिसके बाद उन्होंने देश के पुनर्गठन पर जोर दिया है।READ ALSO:-BREAKING: Goldman Sachs का दावा- RBI साल के अंत तक घटा सकता है रेपो रेट, घटेगी लोन की EMI शिंजो आबे की समर्थक और दक्षिणपंथी विचारधारा साने ताकाइची को पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की समर्थक (Protégé) और एक मुखर दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी (Ultraconservative Nationalist) के रूप में जाना जाता है। शिक्षा और शुरुआती करियर: नारा में जन्मी ताकाइची ने कोबे विश्वविद्यालय से बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की। उन्होंने 1987 में अमेरिकी कांग्रेस में एक फेलो के रूप में काम किया। एंकर से राजनीति तक: जापान लौटने पर, उन्होंने संक्षेप में एक टीवी एंकर के रूप में भी काम किया, जिसके बाद उन्होंने 1993 में एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में संसद में प्रवेश किया। पार्टी की यात्रा: वह 1996 में LDP से जुड़ीं और आबे के करीबी बनकर आंतरिक मामलों की मंत्री और आर्थिक सुरक्षा मंत्री जैसे कई महत्वपूर्ण वरिष्ठ सरकारी पदों पर कार्य किया। संसद में जीत और गठबंधन ताकाइची का प्रधानमंत्री चुना जाना LDP के लिए कठिन चुनाव हारने और गठबंधन टूटने के बाद आया है। संसदीय चुनाव: ताकाइची को संसद के निचले सदन में 237 वोट मिले, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक थे, जिससे उन्होंने सीधे जीत हासिल की। गठबंधन: LDP के पुराने सहयोगी कोमेइटो (Komeito) के गठबंधन तोड़ने के बाद, ताकाइची ने जापान इनोवेशन पार्टी (Japan Innovation Party - JIP) के साथ एक समझौता किया। इस समझौते ने उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता सुनिश्चित कर दिया। मंत्रिमंडल: ताकाइची ने नए मंत्रिमंडल की घोषणा की है, जिसमें पूर्व रक्षा मंत्री मिनोरू किहारा (Minoru Kihara) को मुख्य कैबिनेट सचिव बनाया गया है। उन्होंने सट्सुकी कटायमा को पहली महिला वित्त मंत्री (First Woman Finance Minister) के रूप में भी नियुक्त किया है। 'घोड़े की तरह काम करें' प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले भाषण में साने ताकाइची ने देश में काम करने की संस्कृति पर जोर दिया। कार्य संस्कृति पर रुख: उन्होंने कहा, "मैं खुद वर्क-लाइफ बैलेंस (Work-Life Balance) की हिमायती नहीं हूँ। मैं सभी से कह रही हूँ कि काम कीजिए। एकदम घोड़े की तरह से काम कीजिए।" नीतियों पर फोकस: उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता धीमी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना, बढ़ती कीमतों से निपटना और सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में सुधार करना है। ताकाइची अमेरिका के साथ सुरक्षा गठबंधन को मजबूत करने की समर्थक भी हैं। महिला सशक्तिकरण और चुनौतियाँ साने ताकाइची का पीएम बनना महिला सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक प्रतीक है, लेकिन वह खुद को जेंडर इक्वालिटी की समर्थक नहीं मानती हैं। उन पर धीमी अर्थव्यवस्था और पार्टी के भीतर की गुटबाजी को संभालने की बड़ी चुनौती है। वह जल्द ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगी।
फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित विश्व प्रसिद्ध लूव म्यूजियम (Louvre Museum) में रविवार (19 अक्टूबर 2025) को एक चौंकाने वाली चोरी की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि चोर ने संग्रहालय के भीतर से सम्राट नेपोलियन और महारानी जोसेफिन से जुड़े 9 बेशकीमती गहने महज चार मिनट के अंदर चुरा लिए। यह चोरी दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में से एक की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। चोरी के बाद म्यूजियम को आज (सोमवार) पूरे दिन के लिए बंद रखने का ऐलान किया गया है।Read also:-Delhi NCR AQI: दिवाली पर और जहरीली हुई हवा, Delhi, Meerut और गाज़ियाबाद में AQI 335 के पार नेपोलियन काल के ऐतिहासिक गहने लूव म्यूजियम अपनी ऐतिहासिक कलाकृतियों और आभूषणों के संग्रह के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें मोना लिसा (Mona Lisa) जैसी पेंटिंग्स शामिल हैं। चोरी हुए गहनों का ऐतिहासिक महत्व और मूल्य बहुत अधिक है। चोरी हुए गहने: चोर ने नेपोलियन बोनापार्ट और उनकी पत्नी महारानी जोसेफिन से संबंधित 9 कीमती गहने चुराए हैं। प्रमुख गहना: चोरी हुए गहनों में सबसे खास है 1855 में बना ऐतिहासिक यूजनी क्राउन (Eugénie Crown), जो हजारों कीमती रत्नों से जड़ा हुआ है। यह क्राउन फ्रांस के शाही इतिहास का एक अमूल्य हिस्सा है। महज 4 मिनट में करोड़ों की वारदात पुलिस और म्यूजियम प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि चोर ने इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद इतनी बड़ी चोरी को महज चार मिनट के अंदर कैसे अंजाम दिया। सुरक्षा में सेंध: यह घटना म्यूजियम की सुरक्षा प्रणाली की विफलता को दर्शाती है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। जांच: पेरिस पुलिस ने चोर की पहचान करने और चोरी हुए गहनों को बरामद करने के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। वारदात का समय: चोरी रविवार को म्यूजियम बंद होने के बाद या सुबह जल्दी हुई होगी, जब सुरक्षाकर्मी अपनी शिफ्ट बदल रहे होंगे। म्यूजियम बंद, पुलिस जांच जारी चोरी की घटना के बाद लूव म्यूजियम प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की है। अस्थायी बंद: म्यूजियम ने एक आधिकारिक बयान जारी कर घोषणा की है कि पुलिस जांच और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा के कारण सोमवार को पूरे दिन के लिए म्यूजियम बंद रहेगा। पुलिस का रुख: पेरिस पुलिस ने इसे एक उच्च-प्रोफाइल चोरी मानते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है और जल्द ही चोर को पकड़ने का दावा किया है। वैश्विक आश्चर्य दुनिया भर के कला प्रेमी और इतिहासकार इस चोरी पर आश्चर्य और निराशा व्यक्त कर रहे हैं। लूव म्यूजियम में इस तरह की सेंधमारी की घटना को वैश्विक विरासत के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग म्यूजियम की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा इस चोरी का सीधा असर लूव म्यूजियम की प्रतिष्ठा पर पड़ेगा। माना जा रहा है कि इस घटना के बाद, फ्रांस सरकार और म्यूजियम प्रशासन दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण कला संग्रहों को रखने वाले इस संग्रहालय के सुरक्षा प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा करेंगे।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते तनाव के बीच, तालिबान के डिप्टी होम मिनिस्टर मोहम्मद नबी ओमारी ने पाकिस्तान को खुली और बेहद सख्त चेतावनी दी है। ओमारी ने साफ कहा है कि अगर अफगानिस्तान ने पाकिस्तानी सेना को आक्रमणकारी (Invader) घोषित कर दिया, तो वे 'अल्लाह की कसम' खाते हैं कि पाकिस्तानी सेना को खदेड़ कर भारतीय सीमा तक पहुँचा देंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों ने कतर की राजधानी दोहा में एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद तत्काल सीजफायर (Ceasefire) पर सहमति जताई है।READ ALSO:-Pragya Thakur Controversial Statement: 'बेटी बात न माने तो टांगें तोड़ दो': प्रज्ञा ठाकुर के बयान पर भड़का विवाद, Congress ने घेरा हवाई हमले और क्रिकेटरों की मौत यह तनाव तब भड़का जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में हवाई हमले किए। पाकिस्तान का दावा: पाकिस्तान का दावा है कि ये हमले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और हाफिज गुल बहादुर ग्रुप के गढ़ों पर किए गए, जिन्होंने पाकिस्तान में हमले किए थे। तालिबान का पलटवार: अफगानिस्तान ने इन हमलों की कड़ी निंदा की, जिसमें 3 स्थानीय क्रिकेटरों सहित 8 लोगों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में, अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने नवंबर में पाकिस्तान के साथ होने वाली T20 Tri-Series से भी नाम वापस ले लिया। मोहम्मद नबी ओमारी का 'भारतीय सीमा' वाला बयान तालिबान के वरिष्ठ अधिकारी और डिप्टी होम मिनिस्टर मोहम्मद नबी ओमारी ने पाकिस्तानी सेना पर हमलावर होने का आरोप लगाते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया है। ओमारी की चेतावनी: उन्होंने कहा, "मैं अल्लाह की कसम खाता हूँ कि अगर अफगानिस्तान ने पाकिस्तानी सेना को आक्रमणकारी घोषित कर दिया, तो हम उन्हें खदेड़कर भारतीय सीमा तक पहुँचा देंगे।" अधिकारों का दावा: ओमारी ने यह भी संकेत दिया कि डूरंड रेखा (Durand Line) के पार के कुछ क्षेत्र, जो कभी अफगानिस्तान से अलग हो गए थे, वे आखिरकार अफगान क्षेत्र में वापस आ सकते हैं। आक्रमणकारी का आरोप: उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर भी विदेशी दखल में काम करने का आरोप लगाया और उनकी आलोचना की। दोहा में सीजफायर पर सहमति तल्खी भरे बयानों के बावजूद, बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के उच्च स्तरीय रक्षा प्रतिनिधिमंडलों के बीच एक बैठक हुई। प्रतिनिधिमंडल: तालिबान की ओर से रक्षा मंत्री और खुफिया प्रमुख शामिल थे, जबकि पाकिस्तान की ओर से रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ और आईएसआई प्रमुख (जो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी हैं) ने हिस्सा लिया। सहमति: कतर के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि दोनों पक्ष तत्काल सीजफायर पर सहमत हो गए हैं। अगली बैठक: दोनों पक्ष जल्द ही तुर्की में अगली अनुवर्ती बैठक (Follow-up Meeting) करने पर भी सहमत हुए हैं ताकि स्थायी शांति के तंत्र को मजबूत किया जा सके। भड़काऊ बयान पर हंगामा मोहम्मद नबी ओमारी के भारतीय सीमा तक खदेड़ने वाले बयान ने अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय सोशल मीडिया पर हंगामा खड़ा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इस बयान को पाकिस्तान पर जवाबी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की तालिबान की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। यह बयान दोनों देशों के बीच संबंधों की नाजुकता को दर्शाता है। तनाव में अस्थाई विराम दोहा में सीजफायर पर सहमति तनाव में एक अस्थाई विराम ला सकती है, लेकिन जब तक पाकिस्तान की TTP पर कार्रवाई की मांग और तालिबान की संप्रभुता के उल्लंघन के आरोपों का कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक सीमा पर यह अस्थिरता बनी रहेगी।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहे सीमा तनाव ने अब क्रिकेट जगत को भी प्रभावित किया है। पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में किए गए हवाई हमलों में 3 स्थानीय क्रिकेटरों सहित कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई है। इस हृदय विदारक घटना के बाद, अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने पाकिस्तान के साथ सभी क्रिकेट संबंध तत्काल प्रभाव से तोड़ने का फैसला किया है। इस फैसले के तहत, अफगानी टीम नवंबर में होने वाली आगामी T20 Tri-Series में भी हिस्सा नहीं लेगी। सीजफायर के बाद फिर हुए एयर स्ट्राइक यह घटना तब हुई जब दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने के लिए 48 घंटे के सीजफायर पर सहमति जताई थी। अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत के उरगुन और बरमल जिलों में पाकिस्तान ने देर रात हवाई हमले किए। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने पुष्टि की है कि हमले में 3 स्थानीय क्लब क्रिकेटर्स (कबीर, सिबगतुल्लाह और हारून) और 5 अन्य नागरिकों की मौत हुई है। इसके अलावा, 7 क्रिकेटरों सहित कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। क्रिकेटरों का सफर: ये खिलाड़ी हाल ही में प्रांतीय राजधानी शाराना में एक दोस्ताना क्रिकेट मैच में भाग लेने के बाद अपने घर उरगुन लौट रहे थे, जब उन्हें निशाना बनाया गया। पाकिस्तान का दावा और अफगानिस्तान का इनकार दोनों देशों ने हमले को लेकर अलग-अलग दावे पेश किए हैं, जिससे विवाद और गहरा गया है। पाकिस्तान का कहना है कि यह हमला तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और हाफिज गुल बहादुर ग्रुप के गढ़ों पर किया गया। पाकिस्तान की सेना ने दावा किया है कि इस कार्रवाई में हाफिज गुल बहादुर ग्रुप के 70 सदस्यों को मारा गया है, जिनमें कई शीर्ष कमांडर शामिल हैं। अफगानिस्तान का रुख: AFG ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि हमले में निर्दोष नागरिक और खिलाड़ी मारे गए हैं। ACB का कड़ा फैसला अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने खिलाड़ियों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है और पाकिस्तान के साथ सभी द्विपक्षीय संबंधों को रद्द करने का कड़ा फैसला लिया है। ACB का बयान: "अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड इस दुखद घटना पर गहरा दुख और शोक व्यक्त करता है...हम पाकिस्तान के साथ आगामी टी20 ट्राई-नेशन सीरीज़ से हटने का निर्णय लेते हैं।" कप्तान राशिद खान: AFG टी20 टीम के कप्तान और स्टार क्रिकेटर राशिद खान ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए इसे 'बर्बर' और 'अनैतिक' बताया, और कहा कि इन हमलों में उन युवा क्रिकेटरों की जान चली गई, जो विश्व मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखते थे। क्रिकेट से राजनीति का बहिष्कार अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट बिरादरी और प्रशंसकों ने इस घटना पर दुख और गुस्सा व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर AFG क्रिकेट बोर्ड के इस फैसले की व्यापक रूप से सराहना की जा रही है, क्योंकि यह एक राजनीतिक बयान है जिसे खेल के माध्यम से दिया गया है। AFG ने इस तरह पाकिस्तान के मुंह पर करारा तमाचा मारा है। T20 Tri-Series रद्द अफगानिस्तान के इस फैसले के कारण नवंबर में होने वाली पाकिस्तान और श्रीलंका के साथ प्रस्तावित T20 Tri-Series अब रद्द हो सकती है। यह घटना दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और भी खराब करेगी और सीमा पर हिंसा बढ़ने की आशंका है।
बांग्लादेश महिला क्रिकेट टीम की युवा सनसनी Marufa Akter ने हाल ही में एक भावुक साक्षात्कार में अपने बचपन के संघर्षों को याद किया। 20 वर्षीय इस तेज गेंदबाज की कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, लेकिन उनकी सफलता के पीछे गरीबी और सामाजिक बहिष्कार का गहरा दर्द छिपा है। Marufa Akter अपने परिवार के उन कठिन दिनों को याद करते हुए बीच इंटरव्यू में रो पड़ीं। उनकी यह मार्मिक कहानी आईसीसी महिला विश्व कप 2025 के बीच वायरल हो गई है।READ ALSO:-Ranveer Singh Film: 'धुरंधर' का टाइटल ट्रैक रिलीज़, 12 नवंबर को आएगा ट्रेलर, इस तारीख को आएगी फिल्म Background: गरीबी और सामाजिक अपमान Marufa Akter एक किसान परिवार से आती हैं। उनका बचपन बांग्लादेश के एक ग्रामीण क्षेत्र में बीता, जहां उनके परिवार को हर दिन वित्तीय और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के चरम पर, उन्हें अपने पिता के साथ खेत जोतने के लिए किराए की ज़मीन पर काम करना पड़ता था। उनके गाँव में भी उन्हें कोई खास समर्थन नहीं मिला। भेदभाव का दर्द: मारुफा ने बताया कि सबसे ज्यादा दर्द उन्हें सामाजिक बहिष्कार से मिला। उनके परिवार को किसी भी सामाजिक समारोह या शादी में नहीं बुलाया जाता था। अपमान का कारण: उन्हें सीधे कहा जाता था कि उनके पास 'ढंग के कपड़े नहीं हैं'। समाज के लोग मानते थे कि अगर गरीब परिवार समारोह में शामिल होगा, तो उनकी इज्जत चली जाएगी। Latest Update: ईद पर नए कपड़ों का अभा अपने संघर्ष को याद करते हुए, Marufa Akter भावुक हो गईं और उनकी आँखों से आंसू बहने लगे। उन्होंने अपने दर्द को शब्दों में बयां किया। Marufa Akter ने कहा, "लोग हमें विभिन्न समारोहों में नहीं बुलाते थे, कहते थे कि हमारे पास अच्छे कपड़े नहीं हैं। अगर हम वहां जाएंगे, तो हमारा सम्मान कम हो जाएगा—वे यही कहा करते थे।" त्योहारों का दुख: उन्होंने याद किया कि एक समय ऐसा भी था जब उनके परिवार के पास ईद जैसे धार्मिक त्योहारों के लिए भी नए कपड़े खरीदने के पैसे नहीं होते थे। Official Statements: खेल जगत से मिली सराहना क्रिकेट विशेषज्ञों ने Marufa Akter की स्विंग गेंदबाजी की कला की खूब प्रशंसा की है और उन्हें दक्षिण एशिया की सबसे बेहतरीन तेज गेंदबाजी प्रतिभाओं में से एक माना जा रहा है। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें विश्व कप जैसे बड़े मंच तक पहुंचाया है। परिवार का गौरव: मारुफा आज जिस मुकाम पर हैं, उससे वह बेहद संतुष्ट महसूस करती हैं। उन्होंने कहा, "जिस तरह से मैं अपने परिवार का समर्थन करती हूं, शायद कई लड़के भी ऐसा नहीं कर पाते होंगे। यह मुझे एक खास तरह की शांति देता है।" टीवी पर खुद को देखना: उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जब वह अब खुद को टीवी पर परफॉर्म करते हुए देखती हैं, तो उन्हें आज भी एक अजीब-सी शर्म (awe) महसूस होती है, लेकिन यह सब दर्शकों के प्यार और सराहना के कारण है। Public Reaction or Social Media: प्रेरणा की नई मिसाल Marufa Akter की संघर्ष की कहानी सोशल मीडिया पर लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है। क्रिकेट जगत और आम यूज़र्स ने उनके साहस की सराहना की है। कई फैंस ने टिप्पणी की है कि उनकी यह कहानी उन सभी युवा लड़कियों के लिए एक सबक है, जो रूढ़िवादी सामाजिक माहौल और आर्थिक तंगी के बावजूद खेल में अपना करियर बनाना चाहती हैं। उनकी सफलता, गरीबी और पूर्वाग्रह पर दृढ़ संकल्प की जीत है। Impact & Next Step: महिला क्रिकेट का बढ़ता कद Marufa Akter न केवल बांग्लादेश महिला क्रिकेट टीम की एक प्रमुख खिलाड़ी बन गई हैं, बल्कि वह अपने देश की युवा महिलाओं के लिए उम्मीद का प्रतीक भी हैं। उनकी कहानी दक्षिण एशिया में महिला एथलीटों के सामने आने वाली आर्थिक कठिनाइयों और सामाजिक बाधाओं पर प्रकाश डालती है। Marufa Akter की सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा, दृढ़ता और साहस हर बाधा को पार कर सकता है।
बुधवार को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्र, स्पिन बोल्डक (Spin Boldak), में हवाई हमले किए हैं। इन हवाई हमलों में तालिबान की तीन चौकियों (Taliban Posts) को निशाना बनाया गया। इस घटना से दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव अचानक बढ़ गया है। इन हमलों का सबसे दुखद पहलू यह है कि इनमें चार आम नागरिक मारे गए हैं, जबकि 10 अन्य घायल हुए हैं।READ ALSO:-BJP की दूसरी लिस्ट जारी: मैथिली ठाकुर को मिला टिकट, इन 12 उम्मीदवारों पर दांव सीमा विवाद और हालिया घटनाक्रम पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड रेखा को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद रहा है। हाल के दिनों में सीमा पार से हुई गोलीबारी और घुसपैठ की घटनाओं ने दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ाया है। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि ये हवाई हमले सीमा पार से हो रहे आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए किए गए थे। हालांकि, अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। स्पिन बोल्डक में क्या हुआ? पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमले बुधवार को अफगानिस्तान के स्पिन बोल्डक इलाके में हुए। इस घटना में कुल तीन तालिबान चौकियों को निशाना बनाया गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये हमले अचानक हुए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हमले का मुख्य उद्देश्य उन ठिकानों को निष्क्रिय करना था, जहां से कथित तौर पर सीमा पार आतंकवादी गतिविधियाँ संचालित हो रही थीं। हताहतों की संख्या और आधिकारिक बयान इन हवाई हमलों में हताहत हुए लोगों के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आई है। इस हमले में चार आम नागरिकों की मौत हुई है, जबकि 10 नागरिक घायल हुए हैं। घायलों को तुरंत स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। तालिबान के प्रवक्ता (अपुष्ट) ने एक बयान में कहा, "हम पाकिस्तान के इस आक्रामक कदम को बर्दाश्त नहीं करेंगे। किसी भी देश को हमारी संप्रभुता का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है।" दूसरी ओर, पाकिस्तान की तरफ से इन हमलों को 'आत्मरक्षा' और 'आतंकवाद विरोधी कार्रवाई' के रूप में पेश किया गया है, लेकिन नागरिकों की मौत पर कोई औपचारिक खेद प्रकट नहीं किया गया है। सार्वजनिक प्रतिक्रिया और सीमा पर स्थिति हवाई हमलों की खबर फैलते ही, दोनों देशों की सीमावर्ती आबादी में डर और आक्रोश फैल गया है। अफगानिस्तान के नागरिकों ने पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए हैं। इस घटना के बाद, Spin Boldak सीमा पर सैन्य गतिविधियाँ तेज हो गई हैं, और दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं। आगे क्या? क्षेत्रीय शांति पर गहरा प्रभाव पाकिस्तान के हवाई हमलों से क्षेत्रीय शांति पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव और बढ़ने की आशंका है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से उम्मीद की जा रही है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे, ताकि सीमा पर और हिंसा न भड़के। फिलहाल, Taliban Posts पर हुए इस हमले के बाद यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा संबंधों को जल्द ही कोई बड़ा झटका लग सकता है।
अफगानिस्तान-पाक सीमा पर भीषण जंग अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद ने बुधवार, 15 अक्टूबर 2025 को एक भयावह मोड़ ले लिया। दोनों देशों की सेनाओं के बीच कंधार के स्पिन बोल्डक सीमा गेट पर भीषण खूनी झड़प हुई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। अफगान तालिबान ने दावा किया है कि उनकी जवाबी कार्रवाई इतनी तेज थी कि पाकिस्तानी सैनिकों को महज 15 मिनट की जंग में आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर होना पड़ा। तालिबान ने न सिर्फ पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा किया, बल्कि उनके हथियार और सैन्य टैंक भी जब्त कर लिए। सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसने पाकिस्तान के लिए शर्मनाक स्थिति पैदा कर दी है।READ ALSO:-महाभारत का एक और सितारा अस्त: 'दानवीर कर्ण' का किरदार अमर करने वाले पंकज धीर का 68 साल की उम्र में निधन 🚨🔥👉🔻 The Afghan forces have targeted locations in Pakistan from where threats to Afghanistan originate. Afghan forces will target all Daesh group centers in Pakistan. pic.twitter.com/DpRasPpjLS — Afghanistan Defense (@AFGDefense) October 14, 2025 क्यों बढ़ा सीमा पर तनाव? पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का मुख्य कारण दशकों पुराना 'डूरंड लाइन' (Durand Line) सीमा विवाद है, जिसे तालिबान सरकार मान्यता नहीं देती। हाल के हफ्तों में यह तनाव चरम पर है। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) आतंकवादी समूह द्वारा पाकिस्तान पर हमले करने के लिए किया जा रहा है। इसी बीच, पाकिस्तानी सेना द्वारा कथित तौर पर अफगान क्षेत्र में हवाई हमले किए गए, जिसके जवाब में अफगान बलों ने Spin Boldak और अन्य सीमावर्ती इलाकों में आक्रामक रुख अपनाया। यह ताजा झड़प इसी प्रतिशोध की एक श्रृंखला है। नवीनतम अपडेट: स्पिन बोल्डक पर कब्जा और सैन्य नुकसान बुधवार तड़के शुरू हुई इस लड़ाई में हल्के और भारी दोनों तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया गया। तालिबान का दावा: अफगान सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई के तहत पाकिस्तानी सैनिकों से स्पिन बोल्डक गेट का नियंत्रण पूरी तरह से छीन लिया है। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता ने दावा किया कि उनकी "जवाबी कार्रवाई" में कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और उनकी चौकियाँ और केंद्र पर कब्जा कर लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तानी सेना के टैंक और अन्य सैन्य संपत्ति अफगान बलों के हाथ लगी है। पाकिस्तान का दावा: पाकिस्तानी सेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि अफगान तालिबान ने बलूचिस्तान से सटी चार सीमा चौकियों पर पूर्व-योजनाबद्ध हमला किया था। पाकिस्तान ने दावा किया कि उन्होंने आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए प्रभावी ढंग से पलटवार किया और तालिबान के 6 टैंकों सहित उनकी कई चौकियों को ध्वस्त कर दिया। पाकिस्तान ने तालिबान के 25 से 30 लड़ाकों के मारे जाने का भी दावा किया है। नागरिकों पर असर: अफगान अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना द्वारा आवासीय क्षेत्रों पर की गई गोलाबारी के कारण 12 से अधिक अफगान नागरिक मारे गए हैं और 100 से अधिक घायल हुए हैं। आधिकारिक बयान और आरोप-प्रत्यारोप अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों ने ही एक-दूसरे पर संघर्ष शुरू करने का आरोप लगाया है। अफगान प्रवक्ता (तालिबान): उन्होंने पाकिस्तानी बलों पर फिर से "हल्के और भारी हथियारों" से हमला करने का आरोप लगाया और कहा कि अफगान बल अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पाकिस्तानी सेना: पाकिस्तान ने साफ़ किया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाले आतंकवादियों को बर्दाश्त नहीं करेगा और अपनी आत्मरक्षा के लिए Pakistan-Taliban Clash का जवाब देता रहेगा। सोशल मीडिया और जन प्रतिक्रिया घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जंगल की आग की तरह फैल गए हैं। इन वीडियो में कथित तौर पर तालिबानी लड़ाकों को पाकिस्तानी सैनिकों के जब्त किए गए हथियारों के साथ जश्न मनाते और पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर अफगान झंडा फहराते हुए दिखाया गया है। तालिबान के "15 मिनट में सरेंडर" के दावे ने पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर नाराजगी और चिंता पैदा कर दी है। भारतीय और वैश्विक मीडिया में भी यह Pakistan-Taliban Clash सुर्खियों में छाया रहा, जिसने क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रभाव और आगे की रणनीति यह संघर्ष दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और बिगाड़ सकता है। कतर, सऊदी अरब और ईरान जैसे क्षेत्रीय खिलाड़ियों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो यह डूरंड लाइन के आसपास के व्यापार और नागरिक आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान TTP के मुद्दे पर संतुष्ट नहीं हो जाता और तालिबान डूरंड लाइन पर अपना रुख नहीं बदलता, तब तक सीमा पर यह अस्थिरता बनी रहेगी।
इजराइल और हमास के बीच संघर्ष विराम लागू होने के बावजूद, गाजा पट्टी के भीतर एक बड़ा खूनी खेल देखने को मिला है। स्थानीय नियंत्रण और सत्ता की लड़ाई में, हमास लड़ाकों और शक्तिशाली डोगमुश कबीले के सशस्त्र सदस्यों के बीच भीषण झड़प हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस आंतरिक संघर्ष में दोनों गुटों के लगभग 64 लड़ाके मारे गए हैं। यह घटना गाजा की नाजुक शांति को खतरे में डालती है और क्षेत्र में एक नए 'गृहयुद्ध' की आशंका पैदा करती है।READ ALSO:-TLP चीफ साद रिज़वी की हत्या की अफवाह से भड़की हिंसा, लाहौर में 180 लोगों की मौत का दावा गाजा में भड़का सत्ता संघर्ष सूत्रों के मुताबिक, यह भीषण टकराव गाजा सिटी के सबरा इलाके में हुआ, जब हमास के सुरक्षा बलों ने डोगमुश कबीले के ठिकानों पर छापे मारे (सोर्स: द टाइम्स ऑफ इजरायल, 12 अक्टूबर 2025)। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच भयंकर गोलीबारी हुई। जानकारी के अनुसार, इस झड़प में डोगमुश कबीले के कम से कम 53 सदस्य और हमास के 12 लड़ाके मारे गए हैं। इसके अलावा, कई डोगमुश सदस्यों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। हमास का आरोप है कि कबीले के सदस्य युद्ध के दौरान उसके हथियारों के डिपो को लूटने और इजरायल के साथ सहयोग करने में शामिल थे, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई। सदियों पुराना कबीला और हमास की तकरार डोगमुश कबीला गाजा में सबसे पुराने और सबसे ताकतवर कबीलों में से एक है, जो सदियों पहले तुर्किये (तुर्की) से आकर गाजा में बस गया था। इस कबीले को एक आपराधिक और सशस्त्र गुट 'आर्मी ऑफ इस्लाम' (जैश अल-इस्लाम) से भी जोड़ा जाता रहा है (सोर्स: विकिपीडिया - डॉगमुश क्लैन हिस्ट्री)। 2007 में हमास द्वारा गाजा पर नियंत्रण करने के बाद से ही दोनों के बीच तनाव और झड़पें आम रही हैं। यह कबीला खुले तौर पर हमास के शासन को चुनौती देता रहा है और अक्सर इसे हथियारों की तस्करी और जबरन वसूली जैसे कामों से जोड़ा जाता है। कबीले के एक वरिष्ठ सदस्य ने मुस्लिम भाइयों से अपील की है कि वे आपस में खून न बहाएं, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ। गाजा की आंतरिक राजनीति और भविष्य की चिंताएं इस संघर्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि गाजा की आंतरिक राजनीति जटिल और अस्थिर है। इजरायल के साथ युद्धविराम के बाद हमास अपनी सत्ता और नियंत्रण को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, डोगमुश कबीला जैसे सशस्त्र गुट उसकी सत्ता को चुनौती दे रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी चिंता जताई है कि हमास द्वारा अपने नियंत्रण को फिर से स्थापित करने के लिए किए जा रहे ये प्रयास गाजा के निवासियों को और अधिक दुख और पीड़ा में धकेल सकते हैं (सोर्स: द मीडिया लाइन)। यह आंतरिक संघर्ष हमास की कमजोर होती पकड़ और गाजा में इजरायल विरोधी समूह के अंदर भी गहरी दरार को दिखाता है। यदि ये झड़पें जारी रहती हैं, तो गाजा पट्टी में एक पूर्ण 'गृहयुद्ध' छिड़ने का खतरा बढ़ जाएगा।
पाकिस्तान के लाहौर और मुरीदके शहर में इस समय भारी बवाल मचा हुआ है। तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। यह हिंसा TLP चीफ साद रिज़वी को गोली मारकर पाकिस्तानी सेना द्वारा हत्या किए जाने की अफवाह के बाद भड़की है। कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर जमकर पथराव और आगजनी की है। TLP ने दावा किया है कि इस विरोध-प्रदर्शन में 180 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।READ ALSO:-गोल्ड में रिकॉर्ड उछाल: पुष्य नक्षत्र से पहले सोना ₹2,244 महंगा होकर ₹1.23 लाख के पार, चांदी भी ₹1.52 लाख के ऐतिहासिक स्तर पर; जानें आगे का टारगेट और तेजी के 3 कारण हिंसा की वजह: गाजा शांति योजना और साद रिज़वी की खबर मामले की जड़ में मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं। पहला, अमेरिका की 'ट्रंप की गाजा शांति योजना' को लेकर पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ नागरिकों का भारी विरोध प्रदर्शन। TLP इस योजना का कड़ा विरोध कर रही है। दूसरा, TLP चीफ साद रिज़वी की हत्या की खबर ने कार्यकर्ताओं को भड़का दिया। इस खबर के बाद कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और वे हिंसक हो उठे। 🔥Breaking News🔥 Massive crackdown by Pakistan Security forces against a Pro Palestine rally in Punjab Pakistan , Reports of hundreds of protesters dead and thousands injured and the leader Saad Rizvi shot multiple times and severly injured pic.twitter.com/XqsgS48xyu — L.M (@PGTAnalytics) October 13, 2025 लाहौर और मुरीदके में जबरदस्त हंगामा TLP कार्यकर्ताओं ने लाहौर और उसके आस-पास के शहरों, खासकर मुरीदके में भीषण हिंसा फैलाई है। सड़कों पर वाहनों और सार्वजनिक संपत्ति को आग लगाई गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि शहर की सड़कों पर अफरातफरी का माहौल बन गया। TLP के दावे के अनुसार, सेना और सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में 180 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, पाकिस्तानी सेना या सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर हताहतों की संख्या की पुष्टि नहीं की है। सरकार और सेना पर बढ़ा दबाव यह घटना पाकिस्तान सरकार और सेना पर भारी दबाव डालती है। TLP एक कट्टरपंथी समूह है जिसकी पाकिस्तान की राजनीति में गहरी पैठ है। TLP चीफ की अफवाह भरी हत्या की खबर ने राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ा दिया है। इस विरोध प्रदर्शन ने गाजा जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी देश में गहरा आक्रोश दिखाया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद पाकिस्तान में सेना को सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और जल्द ही सेना की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
काबुल/इस्लामाबाद। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, जिसने पूरे क्षेत्र को एक नए संघर्ष की आग में झोंक दिया है। काबुल पर पाकिस्तानी बमबारी का बदला लेते हुए अफगान तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर एक भीषण सीमा-पार हमला करने का दावा किया है। तालिबान का कहना है कि शनिवार देर रात से शुरू हुए इस "ऑपरेशन इंतकाम" में उन्होंने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है, 30 को घायल किया है और पाकिस्तानी सेना की 25 महत्वपूर्ण चौकियों पर कब्जा कर लिया है।READ ALSO:-अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस विशेष: 'विकसित भारत 2047' की नींव 'बाल विवाह मुक्त भारत' पर टिकी; 30 महीने में 4 लाख से अधिक बाल विवाह रोके गए इस दावे के बाद दोनों परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। अफगानिस्तान ने न केवल सैन्य कार्रवाई की है, बल्कि पाकिस्तान पर ISIS को अपनी जमीन पर पनाह देने और वहीं से दुनिया भर में हमले की साजिश रचने का सनसनीखेज आरोप भी लगाया है। अफगान रक्षा मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस: "हमले का जवाब मिलेगा" हमले के बाद रविवार को अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति संतोषजनक है, लेकिन पाकिस्तानी सेना का एक विशेष गुट हमारे देश में अशांति फैलाने और सुरक्षा को कमजोर करने की लगातार कोशिश कर रहा है।" उन्होंने दावा किया कि यह गुट झूठे प्रचार और सीमा पर हमलों को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन इस्लामी अमीरात (तालिबान सरकार) किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। पाकिस्तान पर ISIS को पनाह देने का सनसनीखेज आरोप रक्षा मंत्री याकूब ने दुनिया को चौंकाते हुए कहा कि पाकिस्तान ने अपनी जमीन पर खूंखार आतंकी संगठन ISIS की मौजूदगी को नजरअंदाज कर रखा है। उन्होंने आरोप लगाया, "जब इस्लामी अमीरात ने अपनी जमीन को 'फित्नागरों' (शरारती तत्वों) से साफ कर दिया, तो उनके लिए पाकिस्तान के पश्तूनख्वा में नए केंद्र बनाए गए। इन ट्रेनिंग सेंटरों में कराची और इस्लामाबाद हवाई अड्डों के रास्ते नए लड़ाके लाए गए।" तालिबान का सबसे बड़ा दावा यह है कि तेहरान और मॉस्को में हुए हालिया आतंकी हमले इन्हीं पाकिस्तानी केंद्रों से प्लान किए गए थे। उन्होंने कहा, "हमारे पास इसके पुख्ता सबूत और रिकॉर्ड मौजूद हैं।" तालिबान की मांग: "पाकिस्तान को वहां छिपे ISIS के अहम सदस्यों को या तो अपनी जमीन से बाहर निकालना चाहिए या उन्हें इस्लामी अमीरात को सौंप देना चाहिए।" राजनीतिक भूचाल: काबुल दौरा रद्द, खुली चेतावनी तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने भी काबुल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पाकिस्तान के हालिया हमलों के कारण, एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की प्रस्तावित काबुल यात्रा को रद्द कर दिया गया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी, "अगर कोई अफगानिस्तान पर हमला करेगा तो उसे निर्णायक और कड़ा जवाब दिया जाएगा। सीमा पर किसी भी तरह की अपमानजनक हरकत या हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान को अपनी हवाई और जमीनी सीमा की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और कोई भी हमला बिना जवाब के नहीं छोड़ा जाएगा।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। काबुल में पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब में, अफगानिस्तान की सेना (तालिबान सीमा बल) ने डूरंड लाइन (Durand Line) पर स्थित पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर भीषण जवाबी हमला शुरू कर दिया है। अफगान मीडिया और सुरक्षा सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि इस हिंसक झड़प में पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ है, जिसमें कई चौकियों को तबाह कर दिया गया है और कम से कम 5 से 12 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबरें हैं। तनाव का केंद्र और स्थिति कुर्रम बॉर्डर के साथ-साथ हेलमंड, पक्तिया, खोस्त और नंगरहार जैसे सीमावर्ती इलाकों में शनिवार देर रात से भी भारी हथियारों से गोलाबारी और विस्फोटों की खबरें सामने आ रही हैं। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि यह कार्रवाई पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में की गई है। तनाव का कारण: पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक सीमा पर इस भयंकर तनाव की शुरुआत गुरुवार रात को हुई थी, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर खोस्त (Khost) और पक्तिका (Paktika) प्रांतों के साथ-साथ काबुल के कुछ इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान का दावा पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने ये हवाई हमले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किए हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP आतंकवादी अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान में हमलों के लिए कर रहे हैं। तालिबान की प्रतिक्रिया तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के इस कदम की कड़ी आलोचना की थी और इसे अफगानिस्तान की संप्रभुता का स्पष्ट उल्लंघन बताया था। तालिबान ने खुले तौर पर घोषणा की थी कि वह इस हमले का बदला लेगा। जवाबी कार्रवाई के रूप में शनिवार रात को अफगान सेना ने पाकिस्तानी चौकियों पर भारी गोलाबारी शुरू कर दी, जिससे सीमा पर अघोषित युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। अफगान सेना का पलटवार और कब्जे का दावा जवाबी कार्रवाई में अफगान सेना के लड़ाकों ने सीधे तौर पर पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाया है। जवाबी कार्रवाई की तीव्रता चौकियों पर हमला: अफगान सीमा बलों ने डूरंड रेखा पर पाकिस्तानी फ्रंटियर कॉपर्स (Frontier Corps) की कम से कम चार चौकियों को निशाना बनाया, जिनमें से कुछ के तबाह होने की खबर है। कब्जे का दावा: अफगान सेना की ओर से यह भी दावा किया गया है कि उन्होंने कंधार के मारुफ जिले में पाकिस्तानी मिलिशिया की सात चौकियों को तबाह कर दिया है और कुछ चौकियों पर कब्जा भी कर लिया है। सैन्य नुकसान: अफगान मीडिया ने प्रारंभिक रिपोर्टों में 5 से 12 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने और कुछ के बंदी बनाए जाने का दावा किया है। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से अभी तक हताहतों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। डूरंड लाइन पर तनाव तेजी से बढ़ता जा रहा है, और दोनों ओर से भारी सैन्य तैनाती की खबरें हैं। पाकिस्तान की अंदरूनी चुनौतियाँ यह सीमा संघर्ष ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान पहले से ही आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है: टीटीपी का आतंक: पाकिस्तान के अंदर TTP के हमलों में तेजी आई है, जिसके कारण पाकिस्तान को मजबूरन अफगानिस्तान में हवाई हमले करने पड़े। आर्थिक संकट: देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। राजनीतिक अस्थिरता: गृहयुद्ध और TTP के आतंकी हमलों को झेल रहे पाकिस्तान के लिए अफगानिस्तान सीमा पर यह संघर्ष एक बड़ा झटका है, जिससे उसकी सुरक्षा और विदेश नीति दोनों पर दबाव बढ़ गया है। अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने डूरंड लाइन को "दुनिया का सबसे खतरनाक बॉर्डर" करार दिया है, जहाँ दोनों देशों के बीच की सदियों पुरानी सीमा रेखा का विवाद और TTP जैसे आतंकी संगठनों की मौजूदगी लगातार अस्थिरता पैदा कर रही है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) सवाल 1: डूरंड लाइन क्या है? जवाब: डूरंड लाइन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की 2,640 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है, जिसे 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश भारत द्वारा खींचा गया था। अफगानिस्तान इसे एक वैध अंतर्राष्ट्रीय सीमा नहीं मानता है। सवाल 2: सीमा पर वर्तमान तनाव का मुख्य कारण क्या है? जवाब: तनाव का मुख्य कारण पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के अंदर किए गए हवाई हमले हैं, जिनका उद्देश्य TTP आतंकवादियों को निशाना बनाना था। तालिबान ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन मानते हुए जवाबी कार्रवाई की है। सवाल 3: किन इलाकों में हिंसक झड़पें होने की खबरें हैं? जवाब: हेलमंड, पक्तिया, खोस्त और नंगरहार जैसे सीमावर्ती इलाकों में तीखी झड़पें होने की खबरें सामने आई हैं। सवाल 4: अफगान सेना ने क्या दावा किया है? जवाब: अफगान सेना (तालिबान सीमा बल) ने पाकिस्तानी चौकियों पर भारी गोलाबारी करने, कुछ चौकियों को तबाह करने और कुछ पर कब्जा करने का दावा किया है। सवाल 5: TTP कौन है? जवाब: TTP या तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान पाकिस्तान स्थित एक आतंकवादी संगठन है, जो पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ हमलों को अंजाम देता है। पाकिस्तान का दावा है कि TTP नेता अफगानिस्तान में शरण लिए हुए हैं।
स्टॉकहोम/ओस्लो: नोबेल पुरस्कार 2025 की घोषणा प्रक्रिया जारी है। अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत पर आधारित यह विश्व का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार उन व्यक्तियों को सम्मानित करता है, जिनकी खोजों और कार्यों ने मानव जाति को सबसे बड़ा लाभ पहुँचाया है।READ ALSO:-नोबेल शांति पुरस्कार 2025 विजेता मारिया कोरिना मचाडो कौन हैं? वेनेजुएला में लोकतंत्र के लिए 'तानाशाही से लोहा लेने वाली' नेता का विस्तृत परिचय सोमवार (6 अक्टूबर) को चिकित्सा के पुरस्कार से शुरू हुई घोषणाओं में अब तक चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति (शुक्रवार को घोषित) के विजेताओं के नाम सामने आ चुके हैं। पेश है अब तक घोषित किए गए नोबेल पुरस्कार 2025 के विजेताओं की पूरी सूची, उनकी अभूतपूर्व खोजों के साथ: 1. शरीर क्रिया विज्ञान या चिकित्सा (Physiology or Medicine) घोषणा की तिथि: 6 अक्टूबर 2025 विजेता का नाम देश/संबद्धता उपलब्धि (Awarded For) मैरी ई. ब्रुनको (Mary E. Brunkow) अमेरिका रेगुलेटरी टी सेल्स की खोज के लिए। फ्रेड राम्सडेल (Fred Ramsdell) अमेरिका शिमोन साकागुची (Shimon Sakaguchi) जापान खोज का महत्व तीनों वैज्ञानिकों को "पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस" (Peripheral Immune Tolerance) से संबंधित उनकी खोजों के लिए सम्मानित किया गया है। उन्होंने रेगुलेटरी टी सेल्स (Regulatory T Cells) की पहचान की, जिन्हें इम्यून सिस्टम का 'सुरक्षा गार्ड' कहा जाता है। ये कोशिकाएँ प्रतिरक्षा प्रणाली को शरीर के अपने स्वस्थ ऊतकों पर हमला करने से रोकती हैं। इस खोज ने ऑटोइम्यून बीमारियों (Autoimmune Diseases) और कैंसर के इलाज के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। 2. भौतिकी (Physics) घोषणा की तिथि: 7 अक्टूबर 2025 विजेता का नाम देश/संबद्धता उपलब्धि (Awarded For) जॉन क्लार्क (John Clarke) ब्रिटेन/अमेरिका मैक्रोस्कोपिक क्वांटम मैकेनिकल टनलिंग और ऊर्जा क्वांटाइजेशन की खोज के लिए। मिशेल एच. डेवोरेट (Michel H. Devoret) फ्रांस/अमेरिका जॉन एम. मार्टिनिस (John M. Martinis) अमेरिका खोज का महत्व इन्हें इलेक्ट्रिकल सर्किट में क्वांटम यांत्रिकी के अभूतपूर्व प्रकटन के लिए सम्मानित किया गया है। इनकी खोजों ने सुपरकंडक्टिंग क्वबिट्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की नींव रखी है, जो भविष्य के सुपर-फास्ट कंप्यूटरों का आधार बन सकती हैं। 3. रसायन विज्ञान (Chemistry) घोषणा की तिथि: 8 अक्टूबर 2025 विजेता का नाम देश/संबद्धता उपलब्धि (Awarded For) सुसुमु कितागावा (Susumu Kitagawa) जापान मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (MOFs) के विकास के लिए। रिचर्ड रॉबसन (Richard Robson) ऑस्ट्रेलिया उमर एम. याघी (Omar M. Yaghi) अमेरिका/जॉर्डन खोज का महत्व तीनों वैज्ञानिकों ने MOFs नामक अभूतपूर्व सामग्री विकसित की। ये क्रिस्टलीय छिद्रपूर्ण पदार्थ (Crystalline porous materials) किसी 'होटल के कमरों' की तरह होते हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में गैसों या अन्य अणुओं को कैद किया जा सकता है। MOFs का उपयोग कार्बन कैप्चर, गैस भंडारण (जैसे हाइड्रोजन), कैटालिसिस और यहाँ तक कि हवा से पानी निकालने जैसी सतत विकास प्रौद्योगिकियों में क्रांति लाने की क्षमता रखता है। 4. साहित्य (Literature) घोषणा की तिथि: 9 अक्टूबर 2025 विजेता का नाम देश/संबद्धता उपलब्धि (Awarded For) लास्जलो क्रास्ज्नाहोरकाई (László Krasznahorkai) हंगरी उनकी दूरदर्शी साहित्यिक रचनाएँ जो "सर्वनाश के आतंक के बीच, कला की शक्ति को पुनर्स्थापित करती हैं"। खोज का महत्व हंगरी के इस महान उपन्यासकार को उनकी गहन और काव्यात्मक गद्य शैली के लिए चुना गया है। उनके लेखन को अक्सर अब्जर्डिज्म (Absurdism) और ग्रोटेस्क एक्सेस्स (Grotesque Excess) की विशेषता वाले मध्य यूरोपीय महाकाव्य परंपरा का हिस्सा माना जाता है। उनकी रचनाएं कला के माध्यम से मानव अस्तित्व के अंधेरे पहलुओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं। 5. शांति पुरस्कार (Peace Prize) घोषणा की तिथि: 10 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) विजेता का नाम देश/संबद्धता उपलब्धि (Awarded For) मारिया कोरिना मचाडो (María Corina Machado) वेनेजुएला वेनेजुएला में लोकतंत्र, मानवाधिकारों और स्वतंत्रता की बहाली के लिए उनके अथक और साहसी संघर्ष के लिए। महत्व मचाडो वेनेजुएला में तानाशाही के खिलाफ सबसे प्रमुख विपक्षी नेता हैं। नोबेल समिति ने उनके संघर्ष को तानाशाही से लोकतंत्र की ओर न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण परिवर्तन प्राप्त करने की दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास बताया है। आगामी घोषणा अर्थशास्त्र (Economic Sciences): 13 अक्टूबर 2025 (सोमवार) को विजेता का ऐलान किया जाएगा। पुरस्कार राशि: प्रत्येक नोबेल पुरस्कार के विजेता या विजेताओं को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग $1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की नकद राशि, एक स्वर्ण पदक और एक डिप्लोमा प्रदान किया जाता है।
ओस्लो/काराकास: नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा नोबेल शांति पुरस्कार 2025 की घोषणा के बाद, पूरा विश्व वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो (María Corina Machado) के बारे में जानने को उत्सुक है। 58 वर्षीय इस जुझारू नेता को यह प्रतिष्ठित सम्मान वेनेजुएला में मानवाधिकारों, स्वतंत्रता और लोकतंत्र की बहाली के लिए उनके दशकों लंबे संघर्ष के लिए दिया गया है।READ ALSO:-ब्रेकिंग न्यूज़: नोबेल शांति पुरस्कार 2025 का ऐलान, वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो ने मारी बाजी; डोनाल्ड ट्रंप का सपना टूटा आइए जानते हैं वेनेजुएला की इस 'आयरन लेडी' के बारे में, जिन्होंने तानाशाही का डटकर मुकाबला किया और लाखों लोगों के लिए उम्मीद की प्रतीक बनीं। मारिया कोरिना मचाडो का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा मारिया कोरिना मचाडो का जन्म 7 अक्टूबर 1967 को वेनेजुएला के काराकास में हुआ था। वह एक प्रतिष्ठित और समृद्ध परिवार से ताल्लुक रखती हैं। विवरण तथ्य जन्म 7 अक्टूबर 1967 (काराकास, वेनेजुएला) शिक्षा औद्योगिक इंजीनियरिंग (कैथोलिक यूनिवर्सिटी एंड्रेस बेल्लो) उच्च शिक्षा फ़ाइनेंस में मास्टर डिग्री (इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़ ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन) अन्य येल विश्वविद्यालय के वर्ल्ड फेलो प्रोग्राम की सदस्य (2009) पेशेवर जीवन राजनीति में आने से पहले औद्योगिक इंजीनियर और फ़ाइनेंस विशेषज्ञ। राजनीति में आने से पहले, उन्होंने काराकास में अनाथ और अपराधी बच्चों की देखभाल के लिए एक फाउंडेशन (फंडासियन एथेना) की स्थापना की थी। राजनीतिक करियर और लोकतंत्र के लिए संघर्ष मचाडो ने वेनेजुएला में सत्तावाद के उदय के साथ ही राजनीति में प्रवेश किया और जल्द ही दिवंगत राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ और वर्तमान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकारों के खिलाफ सबसे प्रमुख आवाजों में से एक बन गईं। 1. 'सुमाते' से शुरुआत (2001) मचाडो ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत नागरिक संगठन 'सुमाते' (Súmate) की सह-संस्थापक और नेता के रूप में की। यह संगठन चुनावों की निगरानी और नागरिकों के अधिकारों के लिए काम करता था। 2. नेशनल असेंबली की सदस्य (2011-2014) 2010 के संसदीय चुनावों में, मचाडो ने नेशनल असेंबली की सदस्य के रूप में चुनाव लड़ा और सभी उम्मीदवारों में सबसे अधिक वोटों के साथ जीत हासिल की। संसद में उन्होंने सत्ताधारी शासन के संस्थागत दुर्व्यवहार, दमन और गंभीर आर्थिक समस्याओं का खुलकर विरोध किया। उन्हें 2014 में पद से मनमाने ढंग से हटा दिया गया था। 3. 'वेंटे वेनेजुएला' पार्टी की स्थापना 2012 में, उन्होंने एक मध्य-दक्षिणपंथी राजनीतिक संगठन 'वेंटे वेनेजुएला' (Vente Venezuela) की स्थापना की और उसकी राष्ट्रीय संयोजक बनीं। 4. तानाशाही के खिलाफ़ दृढ़ संकल्प मचाडो ने लगातार सैन्यीकरण और सत्तावादी शासन के खिलाफ आवाज उठाई। नोबेल समिति ने उनके संघर्ष को 'तात्कालिक और प्रेरणादायक' बताया है। उन्हें जान से मारने की गंभीर धमकियाँ मिलने और अपने राजनीतिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद, वह देश में बनी रहीं। 5. अयोग्य घोषित होने का संघर्ष 2023 में, मचाडो ने विपक्षी प्राथमिक चुनावों में 90% से अधिक वोटों से ऐतिहासिक जीत हासिल की, जिससे वह 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में मादुरो की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बन गईं। हालाँकि, मादुरो सरकार ने उन्हें 15 साल के लिए सार्वजनिक पद धारण करने से अवैध रूप से अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी राजनीतिक गतिविधियों को जारी रखा और विपक्षी उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज उरुटिया के अभियान का नेतृत्व किया, जिन्होंने जुलाई 2024 के चुनाव में जीत हासिल की। अंतरराष्ट्रीय मान्यता और सम्मान नोबेल शांति पुरस्कार से पहले भी, मारिया कोरिना मचाडो को उनके साहस के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है: बीबीसी की 100 सबसे प्रभावशाली महिलाएँ (2018) सैखारोव पुरस्कार (Sakharov Prize, 2024) (यूरोपीय संघ द्वारा दिया जाने वाला मानवाधिकार सम्मान) वाक्लाव हावेल मानवाधिकार पुरस्कार (Václav Havel Human Rights Prize, 2024) नोबेल शांति पुरस्कार 2025 जीतना, वेनेजुएला के लोकतंत्र आंदोलन के लिए एक बड़ी जीत है और यह दुनिया भर के उन लाखों लोगों के लिए एक संदेश है, जो तानाशाही के सामने खड़े होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
ओस्लो/नई दिल्ली: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक, नोबेल शांति पुरस्कार 2025 का ऐलान कर दिया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शुक्रवार (10 अक्टूबर) को ओस्लो में यह घोषणा की कि इस वर्ष का शांति पुरस्कार वेनेजुएला की प्रभावशाली विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो (María Corina Machado) को दिया जाएगा।READ ALSO:-तेजस्वी के 'नौकरी वाले' वादे का X-Ray: 3.5 करोड़ नौकरी, 10 लाख करोड़ का सालाना बोझ... बिहार का खजाना देगा साथ? मचाडो को यह पुरस्कार वेनेजुएला में लोकतंत्र, मानवाधिकारों और स्वतंत्रता की बहाली के लिए उनके अथक संघर्ष के सम्मान में प्रदान किया गया है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो स्वयं को इस पुरस्कार का प्रबल दावेदार बता रहे थे, एक बार फिर खाली हाथ रह गए। मारिया कोरिना मचाडो: संघर्ष और सम्मान नोबेल समिति ने वेनेजुएला की लोकतंत्र समर्थक नेता मारिया कोरिना मचाडो के चुनाव को 'साहस और प्रतिबद्धता की मिसाल' बताया है। पुरस्कार का कारण लोकतंत्र और स्वतंत्रता: मचाडो को वेनेजुएला में तानाशाही से लोकतंत्र की ओर न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण परिवर्तन लाने के लिए संघर्ष करने हेतु सम्मानित किया गया है। अथक संघर्ष: वह कई वर्षों से अपने देश में सत्तावाद और राजनीतिक दमन के खिलाफ एक प्रमुख आवाज रही हैं। नोबेल समिति के अनुसार, वह एक ऐसी महिला हैं जो बढ़ते अंधकार के बीच भी लोकतंत्र की लौ जलाए रखती हैं। एकजुटता: वह लंबे समय तक विभाजित रहे विपक्षी दलों को स्वतंत्र चुनाव और प्रतिनिधि सरकार की मांग पर एकजुट करने वाली प्रमुख शख्सियत रही हैं। प्रेरणास्रोत: पिछले एक साल से उन्हें छिपकर रहना पड़ रहा है, लेकिन जीवन पर गंभीर खतरों के बावजूद उन्होंने देश में रहने का जो चुनाव किया है, उसने लाखों लोगों को प्रेरित किया है। मारिया कोरिना मचाडो को अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में दिए गए शांति पुरस्कार के तीनों मानदंडों पर खरा पाया गया है। डोनाल्ड ट्रंप का टूटा सपना नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से ठीक पहले तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पुरस्कार जीतने की उम्मीद पाले हुए थे। उन्होंने खुद कई बार सार्वजनिक रूप से इस बात पर जोर दिया था कि वह अपने विदेश नीतिगत हस्तक्षेपों, खासकर गाजा संघर्ष में संघर्ष विराम की योजना को मंजूरी देने के कारण इस पुरस्कार के हकदार हैं। ट्रंप की दावेदारी दावे और नामांकन: ट्रंप को कई देशों और रिपब्लिकन सांसदों द्वारा विभिन्न समझौतों और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों के लिए नामांकित किया गया था। यहाँ तक कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सार्वजनिक रूप से उन्हें नोबेल का हकदार बताया था। विशेषज्ञों की राय: हालांकि, नोबेल इतिहास विशेषज्ञों ने पहले ही आशंका व्यक्त की थी कि ट्रंप के जीतने की संभावना कम है। उनका मानना है कि उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' जैसी नीतियां नोबेल पुरस्कार के व्यापक वैश्विक शांति और भाईचारे के आदर्शों के विपरीत हैं। परिणाम: घोषणा होते ही ट्रंप की उम्मीदें चकनाचूर हो गईं। उन्हें इस बार नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला है, जिससे उनका इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने का इंतजार अगले साल तक के लिए बरकरार रहेगा। इस वर्ष शांति पुरस्कार के लिए कुल 338 व्यक्ति या संस्थाओं के नामांकन प्राप्त हुए थे। FAQ: नोबेल शांति पुरस्कार सवाल 1: नोबेल शांति पुरस्कार 2025 किसे मिला है? जवाब: नोबेल शांति पुरस्कार 2025 वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो (María Corina Machado) को मिला है। सवाल 2: उन्हें यह पुरस्कार क्यों दिया गया है? जवाब: उन्हें यह पुरस्कार वेनेजुएला में लोकतंत्र, मानवाधिकारों और स्वतंत्रता की बहाली के लिए उनके अथक संघर्ष और तानाशाही से लोकतंत्र में शांतिपूर्ण परिवर्तन के प्रयासों के लिए दिया गया है। सवाल 3: क्या डोनाल्ड ट्रंप इस बार नामांकित थे? जवाब: हाँ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को विभिन्न देशों और रिपब्लिकन सांसदों द्वारा नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। सवाल 4: नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा कहाँ की जाती है? जवाब: नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा की जाती है। अन्य नोबेल पुरस्कारों की घोषणा स्वीडन के स्टॉकहोम में होती है।
फिलीपींस के दक्षिणी मिनडानाओ द्वीप के पास समुद्र में शुक्रवार सुबह आए 7.6 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद जहाँ सुनामी का खतरा मंडरा रहा था, वहीं अब एक बड़ी राहत मिली है। पेसिफिक सुनामी वॉर्निंग सेंटर ने पुष्टि की है कि सुनामी का खतरा टल गया है और स्थिति अब सामान्य है।Aead also:-40 की उम्र में 'द हीमैन ऑफ इंडिया' को हार्ट अटैक! सलमान खान की फिल्म में दिखे, दुनिया के पहले शाकाहारी PRO बॉडीबिल्डर वरिंदर घुम्मण का दुखद निधन भूकंप के प्रारंभिक आकलन के बाद विनाशकारी सुनामी आने की आशंका जताई गई थी, जिसके चलते मध्य और दक्षिणी फिलीपींस के तटीय शहरों में रहने वाले हजारों लोगों को तत्काल ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा गया था। फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस ने भी लोगों से तट से दूर रहने और ऊंचे स्थानों पर जाने का आग्रह किया था। दावाओ सिटी में सबसे ज्यादा असर, कई आफ्टरशॉक्स जारी 7.6 तीव्रता के इस मुख्य झटके के बाद फिलीपींस की भूकंप विज्ञान एजेंसी ने कई और झटकों (Aftershocks) की चेतावनी दी है। मुख्य झटके के आधे घंटे बाद 5.9 और 5.6 तीव्रता के कई तेज झटके महसूस किए गए। दावाओ सिटी में भूकंप का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। यह शहर मिंडानाओ द्वीप के दावाओ डेल सुर प्रांत का हिस्सा है। सोशल मीडिया पर सामने आए फुटेज में दावाओ सिटी के लोग, जिनमें अस्पताल और स्कूल के कर्मचारी भी शामिल थे, जान बचाने के लिए सड़कों पर लेटे हुए दिखाई दिए। इंडोनेशिया में 'माइनर सुनामी' दर्ज भूकंप के केंद्र के पास स्थित इंडोनेशिया के तटीय इलाकों में भी समुद्र में हलचल दर्ज की गई। इंडोनेशिया के भूकंप और सुनामी केंद्र के प्रमुख ने बताया कि देश के तटीय इलाकों में अधिकतम 17 सेंटीमीटर (करीब 6 इंच) ऊंची लहरें दर्ज की गईं। उन्होंने इसे माइनर सुनामी या छोटी सुनामी बताया, जिसकी ऊंचाई 0.5 मीटर (50 सेंटीमीटर) से कम होती है। पिछले हफ्ते की त्रासदी फिलीपींस लगातार भूकंपों की चपेट में है। इससे पहले, 30 सितंबर को फिलीपींस के सेबू प्रांत में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया था। यह झटका इतना विनाशकारी था कि इसमें 69 लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 150 लोग घायल हुए थे। ⚠️ Video showing the shaking from the M7.4 earthquake that hit the Philippines... 📍 Spring Valley, Brgy. Buhangin proper, Davao City. 📹Arjay Estabayapic.twitter.com/m0y6Ly6jOf — Volcaholic 🌋 (@volcaholic1) October 10, 2025 राष्ट्रपति मार्कोस ने फेसबुक पर लोगों को आश्वासन दिया है कि उनकी सरकार चौबीसों घंटे काम कर रही है ताकि हर प्रभावित व्यक्ति तक मदद पहुँच सके। लोगों को फिलहाल सतर्क रहने और आधिकारिक घोषणा होने तक सुरक्षित स्थानों पर रुकने की सलाह दी गई है।
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।