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Tragedy and Politics: After 41 Dead in Karur Stampede, Actor Vijay Challenges CM; Shock Over Worker’s Suicide Note
मौत, मातम और सियासत! करूर भगदड़ में 41 मौतों के बाद एक्टर विजय की CM को चुनौती- 'बदला लेना है तो मुझसे लो', कार्यकर्ता के सुसाइड नोट से मचा हड़कंप

चेन्नई/करूर, 1 अक्टूबर 2025: तमिलनाडु की धरती पर 41 लोगों की मौत पर अब एक ऐसा "सियासी महाभारत" छिड़ गया है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। करूर में हुई भगदड़ की त्रासदी अब सुपरस्टार एक्टर थलपति विजय और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की सरकार के बीच एक सीधी जंग में तब्दील हो गई है। विजय ने जहां सरकार को ललकारते हुए कहा है कि "हिम्मत है तो मुझे गिरफ्तार करो", वहीं उनकी पार्टी के एक कार्यकर्ता ने अपनी जान देकर एक ऐसा सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसने पूरे प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है।READ ALSO:-बदल गया महीना, बदल गए नियम! गैस सिलेंडर, स्पीड पोस्ट ने दिया झटका, तो UPI-NPS ने दी बड़ी खुशखबरी   विजय की सीधी ललकार: 'बदला मुझसे लो, मेरे लोगों से नहीं' भगदड़ के बाद अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से बौखलाए एक्टर विजय ने एक वीडियो जारी कर आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री स्टालिन को चुनौती देते हुए कहा: "यह बदले की राजनीति है। अगर आपको बदला लेना ही है, तो मुझसे लो। मैं घर पर मिलूंगा, ऑफिस में मिलूंगा। मेरी पार्टी के पदाधिकारियों को क्यों निशाना बना रहे हो? उन्हें तुरंत रिहा करो।" विजय के इस आक्रामक रुख ने तमिलनाडु की राजनीति में तूफान ला दिया है।   सुसाइड नोट का 'लेटर बम': पूर्व मंत्री और पुलिस पर सीधा आरोप इस राजनीतिक जंग का सबसे दर्दनाक और विस्फोटक पहलू TVK कार्यकर्ता अयप्पन की आत्महत्या है। 51 वर्षीय अयप्पन ने भगदड़ से अवसाद में आकर जान दे दी, लेकिन मरने से पहले उन्होंने एक 'लेटर बम' फोड़ दिया। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा: "करूर में विजय के आने पर सुरक्षा नहीं थी। इस हादसे का जिम्मेदार सेंथिल बालाजी है। पुलिस भी इसमें शामिल है। इन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।" एक मृत कार्यकर्ता के इन सीधे आरोपों ने सरकार की लापरवाही के दावों को और गहरा कर दिया है और मामले में एक बड़ी साजिश की ओर इशारा किया है।   सरकार का पलटवार: 'नियम तोड़े गए, दोगुनी भीड़ बुलाई गई' एक्टर विजय के आरोपों के जवाब में स्टालिन सरकार ने भी पलटवार किया है। सरकार ने रैली के कई वीडियो जारी किए हैं, जिसमें यह दिखाने की कोशिश की गई है कि आयोजकों ने नियमों का घोर उल्लंघन किया। सरकार का दावा है कि रैली में अनुमान से दोगुनी भीड़ बुलाई गई और सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे, जो इस भीषण हादसे का असली कारण है।   राजनैतिक बिसात के मोहरे: कार्यकर्ता और पत्रकार पर एक्शन इस सियासी जंग के बीच पुलिस का एक्शन भी जारी है। भगदड़ के मुख्य आरोपी, TVK के जिला सचिव वीपी माथिय्यालगन और उन्हें शरण देने वाले पौनराज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अफवाह फैलाने के आरोप में यूट्यूबर फेलिक्स गेराल्ड को भी गिरफ्तार किया गया है।   विजय के समर्थक इसे सरकार का दमन बता रहे हैं, जबकि सरकार इसे कानून का पालन कह रही है। इस पूरे प्रकरण ने 41 मौतों के दुख को एक जटिल राजनीतिक लड़ाई में उलझा दिया है, जहां हर पक्ष खुद को सही और दूसरे को गलत साबित करने में लगा है।

Unknown अक्टूबर 1, 2025 0
Monsoon Havoc Before Exit: Highways Flooded, 104 Dead
विदाई से पहले मानसून का 'तांडव'! गुजरात में हाईवे डूबा, महाराष्ट्र में 104 मौतें, दशहरे पर UP-दिल्ली में भी बरसेंगे बादल?

देश से मानसून की विदाई की बेला अब प्रलय का पर्याय बन गई है। जाते-जाते मानसून ऐसा रौद्र रूप दिखा रहा है कि गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक हाहाकार मचा है। गुजरात में सड़कें दरिया बन गई हैं और महाराष्ट्र में मौत का आंकड़ा शतक पार कर चुका है। इस आसमानी आफत का असर अब उत्तर भारत पर भी दिखने लगा है, जहाँ दशहरे से पहले मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है।READ ALSO:-Meerut: बीमा के ₹50 करोड़ के लिए बेटे ने मां-पिता-पत्नी की बेरहमी से की हत्या, 39 करोड़ के क्लेम ने खोली तीन मौतों की साजिश की परतें   गुजरात: सड़कें बनीं समंदर, गरबा पंडाल जमींदोज गुजरात में मंगलवार की सुबह प्रलय लेकर आई। तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने वलसाड और नवसारी में भारी तबाही मचाई। सबसे चौंकाने वाली तस्वीरें द्वारका से आईं, जहाँ कल्याणपुर को पोरबंदर से जोड़ने वाला पूरा का पूरा स्टेट हाईवे बाढ़ के पानी में समा गया। पानी के प्रचंड वेग में एक कार के बह जाने से इलाके में दहशत फैल गई। नवरात्रि के उत्साह पर भी बारिश ने पानी फेर दिया; वडोदरा में गरबा के लिए तैयार किए गए भव्य पंडाल ताश के पत्तों की तरह ढह गए। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सौराष्ट्र और कच्छ के लिए अगले 3 दिनों का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।   महाराष्ट्र: मराठवाड़ा में मातम, 3000 गांव जलमग्न महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र इस वक्त सदी की सबसे भीषण बाढ़ त्रासदियों में से एक का सामना कर रहा है। यहां के 8 जिलों के 3,050 से अधिक गांव पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, इस मानसूनी सीजन में अब तक 104 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिसमें सबसे ज्यादा 28 मौतें नांदेड़ जिले में हुई हैं। बाढ़ ने सिर्फ जानें ही नहीं लीं, बल्कि प्रदेश की रीढ़ तोड़ दी है। लगभग 2,701 किलोमीटर सड़कें बह गई हैं और 1,504 पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। 1,000 से ज्यादा स्कूल और सैकड़ों सरकारी इमारतें खंडहर में तब्दील हो गई हैं। छात्रों के भविष्य पर पड़ते असर को देखते हुए महाराष्ट्र बोर्ड को 12वीं के परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर तक बढ़ानी पड़ी है।   UP में बादलों की वापसी, दिल्ली में राहत की फुहारें उत्तर प्रदेश, जो पिछले 8 दिनों से उमस भरी गर्मी झेल रहा था, वहां मानसून ने जोरदार वापसी की है। मंगलवार सुबह कानपुर, गोंडा, नोएडा और हाथरस समेत 10 शहरों में झमाझम बारिश ने मौसम सुहाना कर दिया, लेकिन लोगों के लिए आफत भी लेकर आई। हाथरस में सड़कें लबालब भर गईं, जिससे दफ्तर और स्कूल जाने वालों को भारी परेशानी हुई। सबसे दुखद खबर मथुरा से आई, जहाँ खेत में काम कर रही 52 वर्षीय मीरा देवी की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई। मौसम विभाग ने राज्य के 17 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है, जिससे दशहरे के आयोजनों पर भी असर पड़ने की आशंका है।   वहीं, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी मौसम ने करवट ली है। आसमान में बादल छाए हुए हैं और हल्की बारिश की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।   जाते-जाते क्यों उग्र हुआ मानसून? 15 अक्टूबर की डेडलाइन पर सस्पेंस मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून की इस विनाशलीला के पीछे दो बड़े कारण हैं। एक तरफ गुजरात और अरब सागर के ऊपर एक गहरा निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, तो वहीं बंगाल की खाड़ी में भी एक और सिस्टम सक्रिय हो रहा है। इन दोहरी प्रणालियों के कारण नमी से भरी हवाएं लगातार जमीन की ओर आ रही हैं, जो भारी बारिश करा रही हैं।   हालांकि, मानसून राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से विदा हो चुका है, लेकिन इन नए सिस्टमों के कारण इसकी पूरी तरह विदाई 15 अक्टूबर तक खिंच सकती है। अनुमान है कि अगले सात दिनों तक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और पूर्वी राजस्थान में बारिश का दौर जारी रहेगा।

Unknown सितम्बर 30, 2025 0
Patna to Get Water Metro: Smooth Travel on Ganga, Relief from Traffic Jams
पटना को मिलेगी वाटर मेट्रो की सौगात: मुंबई-गोवा जैसा गंगा की लहरों पर सफर, ट्रैफिक जाम से मिलेगी निजात

पटना। अब बिहार की राजधानी पटना के लोगों को जल्द ही ट्रैफिक जाम के झंझट से मुक्ति मिलने वाली है। मुंबई और गोवा जैसे शहरों की तरह अब पटना भी गंगा की लहरों पर आरामदायक और तेज सफर का अनुभव करने के लिए तैयार है। शहर के सार्वजनिक परिवहन में क्रांति लाने वाली महत्वाकांक्षी वाटर मेट्रो परियोजना का पहला चरण दशहरे से पहले शुरू होने की प्रबल संभावना है। यह न केवल पर्यावरण-अनुकूल परिवहन का एक बेहतरीन विकल्प होगा, बल्कि गंगा पर्यटन को भी नई ऊंचाइयां देगा।READ ALSO:-नोएडा को मिली बड़ी सौगात: दिल्ली, आगरा और देहरादून के लिए AC इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू, सफर होगा आरामदायक   कोलकाता से पटना पहुंचा पहला इलेक्ट्रिक जहाज इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 28 जून, 2025 को की थी। घोषणा के बाद से ही इस पर तेजी से काम चल रहा है। परियोजना का पहला इलेक्ट्रिक जहाज, एमवी गोमधरकुंवर, कोलकाता से अपनी यात्रा पूरी कर पटना के गायघाट स्थित जेटी पर पहुंच चुका है। अधिकारियों के अनुसार, इसी जहाज के साथ दशहरा 2025 से पहले सेवा का शुभारंभ किया जाएगा, जो पटनावासियों के लिए एक तेज, सुरक्षित और टिकाऊ परिवहन का नया अध्याय शुरू करेगा।   क्यों खास है पटना की वाटर मेट्रो? यह परियोजना कोच्चि की बेहद सफल जल मेट्रो से प्रेरित है, जिसने 2023 में अपनी शुरुआत के बाद से 40 लाख से अधिक यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचाया है। पटना में भी इसी सफलता को दोहराने का लक्ष्य है। जाम से मुक्ति: पटना शहर पूर्व-पश्चिम दिशा में गंगा के समानांतर फैला है, जिससे मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव अत्यधिक रहता है। वाटर मेट्रो इन सड़कों का एक शानदार विकल्प बनेगी, जिससे यात्रा का समय घटेगा और लोगों को जाम से राहत मिलेगी। पर्यावरण-अनुकूल: ये फेरी इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड तकनीक पर चलेंगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन न के बराबर होगा। यह शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मददगार साबित होगा। आधुनिक और आरामदायक सफर: इन इलेक्ट्रिक जहाजों का डिजाइन यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें आरामदायक बैठने की व्यवस्था के साथ-साथ 25 से अधिक लोगों के खड़े होकर सफर करने की भी जगह है। इसका डिजाइन दैनिक यात्रियों के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करेगा।   पहले चरण का रूट और लागत यह परियोजना बिहार सरकार और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के बीच ₹908 करोड़ के समझौते का परिणाम है। परियोजना के पहले चरण में दीघा घाट से कंगन घाट तक वाटर मेट्रो सेवा शुरू की जाएगी। इस 21 किलोमीटर लंबे रूट पर गांधी घाट और गायघाट जैसे प्रमुख स्टॉपेज होंगे। शहर में कुल चार संभावित मार्ग और 10 प्रमुख स्थलों का चयन किया गया है, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से जोड़ा जाएगा।   चुनौतियां भी कम नहीं हालांकि यह परियोजना बेहद आकर्षक है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। गंगा नदी में मौसम के अनुसार जल स्तर का उतार-चढ़ाव और गाद का जमाव नौका यातायात के लिए एक बड़ी बाधा बन सकता है। इसके अलावा, मौजूदा नौका सेवाओं को आधुनिक मानकों पर लाने और नए सुरक्षा प्रोटोकॉल स्थापित करने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता होगी।   इन चुनौतियों के बावजूद, पटना वाटर मेट्रो सेवा शहर के परिवहन ढांचे को बदलने की क्षमता रखती है। यह न केवल लाखों दैनिक यात्रियों के लिए जीवन को आसान बनाएगी, बल्कि गंगा के किनारे पर्यटन को एक नया आयाम देकर पटना को एक स्मार्ट शहरी जल परिवहन मॉडल के रूप में स्थापित करेगी।

Unknown सितम्बर 28, 2025 0
Karur Rally Tragedy: TVK Demands CBI Probe, Vijay to Compensate Families ₹20 Lakh Each
तमिलनाडु करूर रैली भगदड़: TVK ने HC में CBI जांच की मांग की, विजय मृतकों के परिजनों को देंगे 20–20 लाख का मुआवजा

तमिलनाडु के करूर में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिझगगा वेतत्री कझगम (TVK) की चुनावी रैली में शनिवार शाम भीषण भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में 39 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।READ ALSO:-'बुलडोजर' बनाम 'विकास': 'आई लव...' की आड़ में लखनऊ की सड़कों पर छिड़ी योगी-अखिलेश की सीधी जंग   घटना 27 सितंबर की शाम करीब 7:40 बजे Veluswamypuram, करूर में उस समय हुई जब विजय का रोड शो चल रहा था। अब तक 38 शवों की पहचान कर ली गई है और उन्हें परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रैली में जुटी अत्यधिक भीड़, निकासी मार्गों की कमी, और अचानक हुए पुलिस लाठीचार्ज की वजह से अफरा-तफरी मच गई। कई लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े, जिससे दम घुटने और चोट लगने से मौतें हुईं।   TVK ने HC में दाखिल की याचिका, CBI जांच की मांग इस घटना को लेकर TVK ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच में याचिका दाखिल की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि: यह हादसा सिर्फ भीड़ बढ़ने की वजह से नहीं हुआ, बल्कि पुलिस की लाठीचार्ज कार्रवाई ने हालात और बिगाड़ दिए। यह राजनीतिक साजिश भी हो सकती है।   जांच CBI या SIT को सौंपी जानी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके। इस याचिका पर कल दोपहर 2:15 बजे सुनवाई होने की संभावना है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट, राज्य ने आयोग गठित किया केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तमिलनाडु सरकार से घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें हादसे के कारणों, राहत एवं बचाव कार्य, और घायलों के इलाज से जुड़ी जानकारी शामिल करने को कहा गया है। वहीं, तमिलनाडु सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय आयोग का गठन किया है। इस आयोग की अध्यक्षता रिटायर्ड जज अरणु जगदीशेन करेंगी।   मुआवजे का ऐलान: TVK, राज्य और केंद्र ने की घोषणा इस दुखद घटना में मारे गए और घायल हुए लोगों के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और TVK पार्टी ने मुआवजे का ऐलान किया है।   TVK (थलापति विजय की पार्टी): मृतकों के परिजनों को ₹20 लाख घायलों को ₹2 लाख तमिलनाडु सरकार: मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख घायलों को ₹1 लाख   केंद्र सरकार: मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख घायलों को ₹50,000   कमल हासन और अन्य नेताओं की संवेदना घटना पर फिल्म स्टार और राजनेता कमल हासन ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा: "भगदड़ की तस्वीरें देख मेरा दिल कांप रहा है। करूर से आ रही खबर सुनकर मुझे बहुत दुख और हैरानी हुई है। भीड़ में फंसे निर्दोष लोगों के परिवारों के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। यह एक ऐसी त्रासदी है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है।"   इसके अलावा तमिलनाडु के कई अन्य राजनीतिक दलों ने भी इस घटना को बड़ी प्रशासनिक चूक बताया है और राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।   TVK नेताओं पर केस दर्ज तमिलनाडु पुलिस ने इस हादसे के बाद TVK के तीन वरिष्ठ नेताओं — Bussy Anand, Nirmal Kumar, और V.P. Mathiyalagan — के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इन नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया और भीड़ को नियंत्रित करने में नाकाम रहे।   करूर बंद और राजनीतिक हलचल इस घटना के विरोध में करूर जिले के व्यापारियों ने जिला बंद का आह्वान किया है। वहीं, विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ DMK सरकार पर सुरक्षा इंतजामों में भारी लापरवाही का आरोप लगाया है।   मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने करूर का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।   पाँच बड़ी वजहें जिनसे भगदड़ मची घटना की प्रारंभिक जांच में पाँच मुख्य कारण सामने आए हैं:   1. भीड़ का अत्यधिक होना — स्थल पर क्षमता से दोगुनी भीड़ मौजूद थी। 2. निकासी मार्गों की कमी — बाहर निकलने के लिए पर्याप्त गेट नहीं थे। 3. पुलिस का अचानक लाठीचार्ज — भीड़ में भगदड़ का सबसे बड़ा कारण। 4. सुरक्षा कर्मियों की कमी — प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक। 5. इवेंट मैनेजमेंट की खराब योजना — भीड़ नियंत्रण और एंट्री-एग्जिट व्यवस्था नाकाफी थी।

Unknown सितम्बर 28, 2025 0
Tamil Nadu: Vijay’s ‘Victory March’ Turns into Mourning, 39 Dead in Karur
तमिलनाडु में विजय की 'विजय यात्रा' बनी 'शोक यात्रा', करूर हादसे में 39 मौतों के पीछे लापरवाही और अनदेखी की पूरी कहानी

करूर, तमिलनाडु | अभिनेता से नेता बने 'थलपति' विजय के राजनीतिक भविष्य का भव्य शक्ति प्रदर्शन, शनिवार शाम को एक ऐसी त्रासदी में बदल गया जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। तमिलनाडु के करूर में उनकी विशाल रैली में मची भगदड़ ने 39 लोगों की जान ले ली, जिनमें 16 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल हैं। 50 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं और ICU में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।READ ALSO:-सौरभ हत्याकांड में अब तक का सबसे बड़ा मोड़: मुस्कान-साहिल ने चली बड़ी चाल, केस लड़ेगा बाहर से आया दिग्गज वकील   कैसे एक अपील मौत का पैगाम बन गई? यह त्रासदी कई घंटों की অব্যবস্থা और लापरवाही का नतीजा थी। पुलिस ने केवल 10,000 लोगों के लिए अनुमति दी थी, लेकिन विजय की लोकप्रियता के कारण लगभग 50,000 से अधिक लोग 1.20 लाख वर्ग फुट के छोटे से मैदान में जमा हो गए। अभिनेता विजय खुद तय समय से 6 घंटे की देरी से पहुंचे, जिससे भीड़ अधीर और बेकाबू हो रही थी। టీవీకే నేత, నటుడు విజయ్ ర్యాలీలో తొక్కిసలాటలో జరిగింది. తమిళనాడులోని కరూర్‌లో శనివారం జరిగిన ఈ ఘటనలో 39 మంది మరణించారు. పదుల సంఖ్యలో గాయపడ్డారు. #TVKVijay #stampede #karur pic.twitter.com/1NoCIKFo54 — BBC News Telugu (@bbcnewstelugu) September 28, 2025   प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब विजय मंच पर थे, तो उन्हें बताया गया कि भीड़ में एक 9 साल की बच्ची खो गई है। उन्होंने मंच से उसे खोजने की अपील की। यही अपील विनाशकारी साबित हुई। बच्ची को खोजने के लिए भीड़ में अचानक हलचल हुई, जिससे भगदड़ मच गई। लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और जो नीचे गिरा, उसे उठने का मौका नहीं मिला। गर्मी, घुटन और हजारों पैरों के नीचे कुचले जाने से बच्चों और महिलाओं समेत 39 लोगों ने दम तोड़ दिया। त्रासदी पर सियासत: स्टालिन मौके पर, विजय रवाना हादसे के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने तत्काल एक उच्च-स्तरीय बैठक की और देर रात ही करूर पहुंच गए। उन्होंने अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की और मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, दूसरी ओर, अभिनेता विजय ने घायलों से मिलना तक जरूरी नहीं समझा। वे सीधे त्रिची हवाई अड्डे पहुंचे और एक चार्टर्ड फ्लाइट से चेन्नई के लिए रवाना हो गए। हालांकि, बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में लिखा, "मेरा दिल टूट गया है। मैं बहुत दर्द और दुःख महसूस कर रहा हूं। मैं करूर में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।" उनके इस रवैये की कड़ी आलोचना हो रही है।   सरकार का एक्शन और 6 बड़ी वजहें मुख्यमंत्री स्टालिन ने मामले की जांच के लिए न्यायमूर्ति अरुणा जगदीसन की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया है। साथ ही, मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और घायलों को 1-1 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है। हादसे की 6 प्रमुख वजहें: भारी देरी: विजय का 6 घंटे देर से पहुंचना। अत्यधिक भीड़: अनुमान से दोगुनी भीड़ का जमा होना। अव्यवस्था: मंच के पास भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस या वॉलंटियर्स का न होना। भगदड़ का क्षण: विजय की बस की ओर भीड़ का बढ़ना और धक्का-मुक्की। घुटन और बेहोशी: गर्मी और भीड़ के कारण कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत हुई। सुबह की घटना से सबक नहीं: उसी दिन सुबह नमक्कल में भी विजय की रैली में भीड़ बेकाबू हुई थी, लेकिन उससे कोई सबक नहीं लिया गया।   एक चेतावनी, जिसे नजरअंदाज किया गया करूर की यह त्रासदी टाली जा सकती थी अगर आयोजकों ने उसी दिन सुबह हुई एक और घटना से सबक लिया होता। शनिवार को विजय की दो रैलियां थीं। पहली रैली नमक्कल में थी, जहां उन्हें सुबह 8:45 बजे पहुंचना था, लेकिन वे दोपहर 2:45 बजे पहुंचे। छह घंटे तक धूप में भूखे-प्यासे इंतजार कर रही भीड़ बेकाबू हो गई, धक्का-मुक्की में कई लोग घायल हुए और कुछ महिलाओं के पैर तक टूट गए। यह एक स्पष्ट चेतावनी थी कि भीड़ प्रबंधन में भारी चूक हो रही है, लेकिन इसे पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया और शाम को करूर में वही लापरवाही 39 मौतों का कारण बन गई।   क्यों हो रही थीं ये रैलियां? अभिनेता विजय ने 2 फरवरी, 2024 को अपनी राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) की स्थापना की थी। उनका लक्ष्य 2026 के विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ DMK के खिलाफ एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरना है। ये रैलियां इसी उद्देश्य का हिस्सा थीं, जिनके जरिए वे जनता को अपनी पार्टी की विचारधारा और एजेंडे से जोड़ना चाहते थे। लेकिन अब यही रैलियां उनकी सबसे बड़ी कमजोरी के रूप में सामने आई हैं।   जब-जब सेलिब्रिटी, तब-तब भगदड़: एक दुखद पैटर्न भारत में यह पहली बार नहीं है जब किसी सेलिब्रिटी के लिए उमड़ी भीड़ मौत का कारण बनी हो। यह एक खतरनाक पैटर्न का हिस्सा है: बेंगलुरु (जुलाई 2025): RCB की IPL जीत के जश्न में विराट कोहली को देखने आई भीड़ में भगदड़ से 11 की मौत। हैदराबाद (दिसंबर 2024): अल्लू अर्जुन को 'पुष्पा 2' की स्क्रीनिंग पर देखने आई भीड़ में भगदड़ से एक महिला की मौत। केरल (अगस्त 2018): एक्टर दुलकर सलमान के मॉल उद्घाटन में मची भगदड़ में एक व्यक्ति की जान गई। तेलंगाना (मार्च 2013): जूनियर एनटीआर के फिल्म म्यूजिक रिलीज पर मची भगदड़ में एक प्रशंसक की मौत।   एक विरोधाभास: जब राजनीति से दूर भागते थे विजय आज जो विजय तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज होने के लिए रैलियां कर रहे हैं, एक समय था जब वे राजनीति से सख्त परहेज करते थे। उन्होंने अपने ही पिता एस. ए. चंद्रशेखर समेत 11 लोगों पर मुकदमा कर दिया था, क्योंकि उनके पिता ने 'ऑल इंडिया थलपति विजय मक्कल इयक्कम' नाम से एक राजनीतिक पार्टी बना ली थी और उसमें विजय के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह विरोधाभास आज की तारीख में उनके राजनीतिक सफर पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है।

Unknown सितम्बर 28, 2025 0
Stampede Turns Fatal in Tamil Nadu: 36 Dead at Actor Vijay’s Rally
चीखें, आंसू और मातम... तमिलनाडु के करूर में थमी 36 सांसें, थलापति विजय की रैली में आई भीड़ अपने ही लोगों के लिए बनी काल

करूर, तमिलनाडु | राजनीति के मंच पर अपने पहले बड़े कदम के साथ ही सुपरस्टार से नेता बने अभिनेता विजय को एक ऐसी त्रासदी का सामना करना पड़ा है, जिसने पूरे तमिलनाडु को झकझोर कर रख दिया है। शनिवार, 27 सितंबर, 2025 की शाम, जो उनकी राजनीतिक ताकत का एक और भव्य प्रदर्शन होने वाली थी, वह देखते ही देखते मातम और चीख-पुकार के एक अंतहीन सिलसिले में तब्दील हो गई। करूर के वेलुचामिपुरम में उनकी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) पार्टी की रैली में हुई भीषण भगदड़ में कम से कम 36 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हो गए।READ ALSO:-तमिलनाडु करूर: थलापति विजय की रैली में भीषण भगदड़, 31 की मौत, कई महिलाएं और बच्चे घायल, CM स्टालिन मौके पर पहुंचे   कैसे जश्न का माहौल मातम में बदला? 2026 के विधानसभा चुनावों में तमिलनाडु की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने का सपना देख रहे विजय, पिछले कुछ हफ्तों से हर शनिवार को राज्य के विभिन्न जिलों में रैलियां कर रहे थे। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि हर जगह लाखों की भीड़ उमड़ रही थी। करूर में भी यही हुआ। शाम होते-होते वेलुचामिपुरम का मैदान इंसानी सिरों के एक विशाल समंदर जैसा दिख रहा था। लोग अपने 'थलपति' (कमांडर) की एक झलक पाने और उनके भाषण को सुनने के लिए बेताब थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मैदान खचाखच भरा था और तिल रखने तक की जगह नहीं थी। इसी बीच, कथित तौर पर भीड़ में एक नौ साल की बच्ची के खो जाने की अफवाह फैली। घबराए हुए परिजन और आसपास के लोग उसे खोजने के लिए एक दिशा में भागे, जिससे एक भयावह चेन रिएक्शन शुरू हो गया। संतुलन बिगड़ा, लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और कुछ ही पलों में हजारों की भीड़ एक-दूसरे को कुचलते हुए भागने लगी। जो नीचे गिरा, उसे फिर उठने का मौका नहीं मिला। Deeply saddened by the tragic incident at a political rally in Karur, Tamil Nadu, that has taken so many precious lives. My heart goes out to their loved ones, and I wish a swift recovery to all those injured. I urge Congress workers and leaders to extend every possible support… — Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 27, 2025   प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल इस महा-त्रासदी ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि जब यह पता था कि विजय की रैलियों में अप्रत्याशित भीड़ आ रही है, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए? भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए उचित योजना का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। त्रासदी के बाद का मंज़र घटना के बाद का दृश्य दिल दहला देने वाला था। मैदान में चारों तरफ चप्पलें, जूते, फटे कपड़े और लोगों का सामान बिखरा पड़ा था। एम्बुलेंस के सायरन और घायलों की चीख-पुकार ने पूरे माहौल को भयावह बना दिया था। घायलों को करूर के सरकारी और निजी अस्पतालों में ले जाया गया, जहां आपातकालीन वार्ड भर गए। अस्पतालों के बाहर अपने प्रियजनों की तलाश में भटकते लोगों का तांता लग गया, जिससे वहां भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।   राजनीतिक प्रतिक्रिया और जांच के आदेश तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे "अत्यंत दुखद और हृदय विदारक" बताया। उन्होंने तत्काल मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए, मद्रास उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया है, जो पूरी घटना के कारणों और किसी भी संभावित लापरवाही की जांच करेगा। VIDEO | Chennai: Tamil Nadu CM MK Stalin (@mkstalin) arrives to hold urgent meeting over stampede-like incident that happened in Karur. (Source: Third Party)#Karur #TamilNadu pic.twitter.com/nAmRvPj8UT — Press Trust of India (@PTI_News) September 27, 2025   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी और अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं ने भी इस हादसे पर दुख जताया है। हालांकि, इस खबर के लिखे जाने तक, अभिनेता विजय या उनकी पार्टी TVK की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। #WATCH | Tamil Nadu: A large number of people attended the campaign of TVK (Tamilaga Vettri Kazhagam) chief and actor Vijay in Karur A stampede-like situation reportedly occurred here. Several people fainted and were taken to a nearby hospital. More details are awaited.… pic.twitter.com/4f2Gyrp0v5 — ANI (@ANI) September 27, 2025   यह घटना विजय के राजनीतिक करियर के शुरुआती चरण में एक बड़ा झटका है, जो अब तक DMK, AIADMK और BJP पर तीखे हमले कर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे थे। इस त्रासदी ने उनकी विजय यात्रा पर एक गहरा और दुखद प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

Unknown सितम्बर 27, 2025 0
Tamil Nadu Tragedy: 31 Dead in Stampede at Thalapathy Vijay’s Rally
तमिलनाडु करूर: थलापति विजय की रैली में भीषण भगदड़, 31 की मौत, कई महिलाएं और बच्चे घायल, CM स्टालिन मौके पर पहुंचे

तमिलनाडु के करूर जिले में शनिवार देर शाम अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्टी कड़गम (TVK) की चुनावी रैली में बड़ा हादसा हो गया। करूर के वेलुसामीपुरम में आयोजित इस रैली के दौरान अचानक मची भगदड़ में 31 लोगों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। वहीं, 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।READ ALSO;-'I Love Muhammad' विवाद पर जमीयत का बड़ा बयान- "पोस्टरबाजी ठीक नहीं, माहौल खराब करने वालों पर हो एक्शन" हादसे की वजह: भीड़ और बिजली गुल होना प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना उस समय हुई जब विजय मंच से भीड़ को संबोधित कर रहे थे। अत्यधिक भीड़: अनुमानित संख्या से कहीं ज्यादा लोग रैली में पहुंचे, जिससे मैदान खचाखच भर गया और लोगों को हिलने-डुलने की जगह भी नहीं मिल रही थी। अचानक बिजली गुल: सभा के दौरान अचानक बिजली चली गई, जिससे पूरे मैदान में अंधेरा छा गया। घबराहट और भगदड़: अंधेरे में मंच की ओर बढ़ती भीड़ में अफरा-तफरी मच गई। धक्का-मुक्की के बीच कई लोग गिर पड़े और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।   इस दौरान कई बच्चे अपने माता-पिता से बिछड़ गए और कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। जैसे ही स्थिति बिगड़ी, विजय ने तुरंत अपना भाषण रोक दिया और पुलिस व स्वयंसेवकों से मदद की अपील की। #WATCH | Tamil Nadu: A large number of people attended the campaign of TVK (Tamilaga Vettri Kazhagam) chief and actor Vijay in Karur A stampede-like situation reportedly occurred here. Several people fainted and were taken to a nearby hospital. More details are awaited.… pic.twitter.com/4f2Gyrp0v5 — ANI (@ANI) September 27, 2025 करूर अस्पताल में चल रहा इलाज करूर सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि 31 मृतकों में छह बच्चे भी शामिल हैं। घायल लोगों में कई की हालत नाजुक बनी हुई है और उन्हें ICU में भर्ती कराया गया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का बयान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया और तत्काल राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी व स्वास्थ्य मंत्री एम.ए. सुब्रमण्यम को मौके पर भेजा है ताकि राहत और बचाव कार्यों की निगरानी की जा सके। स्टालिन ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है और घायलों को सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।   The unfortunate incident during a political rally in Karur, Tamil Nadu, is deeply saddening. My thoughts are with the families who have lost their loved ones. Wishing strength to them in this difficult time. Praying for a swift recovery to all those injured. — Narendra Modi (@narendramodi) September 27, 2025 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेताओं ने जताया दुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई केंद्रीय और राज्य स्तर के नेताओं ने इस हादसे पर दुख व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।   सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल इस हादसे ने बड़े राजनीतिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन ने इस घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की बात कही है। #WATCH | Karur, Tamil Nadu: Visuals from the Government Medical College and Hospital in Karur, where the injured have been brought after a stampede during a public event of TVK (Tamilaga Vettri Kazhagam) chief and actor Vijay Former Tamil Nadu Minister and DMK leader V Senthil… pic.twitter.com/vfmScORiN8 — ANI (@ANI) September 27, 2025   निष्कर्ष: तमिलनाडु के करूर में थलापति विजय की रैली में हुआ यह हादसा पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। अब सभी की निगाहें सरकार और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

Khabreelal News सितम्बर 28, 2025 0
Major Aadhaar Rule from October 1: 10-Year-Old Cards Must Be Updated; Good News for Children
आधार कार्ड में 1 अक्टूबर से बड़ा नियम लागू! 10 साल पुराने कार्ड धारक हो जाएं सावधान, बच्चों के लिए खुशखबरी

नई दिल्ली: अगर आपके पास आधार कार्ड है, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है! यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) 1 अक्टूबर 2025 से आधार से जुड़ा एक बड़ा नियम लागू करने जा रहा है। यह नियम न सिर्फ 10 साल पुराने कार्ड धारकों के लिए अनिवार्य है, बल्कि बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेशन को भी प्रभावित करेगा।READ ALSO:-दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख   1 अक्टूबर से लागू होने वाले दो बड़े नियम 10 साल पुराने आधार कार्ड का अपडेशन अनिवार्य: नियम: 1 अक्टूबर 2025 से जिन भी आधार कार्डों को बने 10 साल या उससे अधिक का समय हो गया है, उन्हें अपडेट कराना अनिवार्य होगा। क्यों जरूरी: अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपको कई सरकारी और निजी सेवाओं का लाभ उठाने में परेशानी हो सकती है, और आपका आधार कार्ड अवैध माना जा सकता है। प्रक्रिया: आप UIDAI की वेबसाइट (uidai.gov.in) या mAadhaar ऐप के जरिए ऑनलाइन रिक्वेस्ट सबमिट कर सकते हैं। इसके बाद नजदीकी सेंटर पर ₹50 (बायोमेट्रिक) और ₹30 (डेमोग्राफिक) की फीस देकर अपडेट करा सकते हैं। बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेशन पर फीस खत्म: बदलाव: 1 अक्टूबर 2025 से 5 से 7 साल के बच्चे और 15 से 17 साल के किशोरों को आधार कार्ड में बायोमेट्रिक अपडेशन कराने पर कोई फीस नहीं देनी होगी। फायदा: पहले लगने वाली ₹50 की फीस अब माफ हो जाएगी, चाहे वे नया आधार रजिस्ट्रेशन कराएं या बायोमेट्रिक अपडेट। हालांकि, अपडेशन कराना अनिवार्य रहेगा।   जनवरी से सितंबर 2025 तक हुए 5 बड़े बदलाव UIDAI ने 2025 के दौरान आधार में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिनका उद्देश्य प्राइवेसी बढ़ाना और फर्जीवाड़े को रोकना है: पिता/पति का नाम हटाना (15 अगस्त): 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों के नए आधार कार्ड पर अब पिता या पति का नाम डिस्प्ले नहीं होगा। यह जानकारी केवल UIDAI के इंटरनल रिकॉर्ड में दर्ज रहेगी, जिससे प्राइवेसी बनी रहेगी। जन्म तिथि का फॉर्मेट बदला (15 अगस्त): नए आधार कार्ड पर अब पूरी जन्म तिथि (Date of Birth) की बजाय केवल जन्म का वर्ष ही नजर आएगा। पूरी जन्मतिथि भी इंटरनल रिकॉर्ड में सुरक्षित रहेगी। 'केयर ऑफ' कॉलम हटाया गया (15 अगस्त): नए जारी होने वाले आधार कार्ड से केयर ऑफ (C/o) का कॉलम हटा दिया गया है। अब कार्ड पर केवल नाम, उम्र और पता ही दिखाई देगा। एड्रेस अपडेशन के लिए डॉक्यूमेंट बदले (जनवरी): आधार में पता बदलने के लिए अब बैंक स्टेटमेंट या यूटिलिटी बिल ही अनिवार्य डॉक्यूमेंट होंगे। अन्य अपडेशन के लिए पैन कार्ड, वोटर आईडी और बर्थ सर्टिफिकेट को अनिवार्य किया गया है। डिजिटल अपडेशन प्रोसेस (1 अक्टूबर से पूरी तरह): अपडेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाएगा। लोग आधार ऐप या वेबसाइट पर रिक्वेस्ट सबमिट करके नजदीकी सेंटर पर जाकर डॉक्यूमेंट वेरिफाई कराकर ऑनलाइन अपडेशन करा सकेंगे।   यह साफ है कि UIDAI आधार कार्ड को और अधिक सुरक्षित और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। सभी आधार धारकों को इन बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और समय पर अपना कार्ड अपडेट करा लेना चाहिए।

Unknown सितम्बर 26, 2025 0
Supreme Court: Children Lose Right to Parents’ Property
मां-बाप की जायदाद पर बच्चों का हक खत्म! सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश पलटा

देश में संपत्ति के अधिकार को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जो बच्चे अपने बूढ़े माता-पिता की देखभाल नहीं करते हैं, उन्हें उनकी संपत्ति से कभी भी बेदखल किया जा सकता है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने एक 80 वर्षीय बुजुर्ग के मामले में यह फैसला सुनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्णय को पलट दिया और बेटों को पैतृक संपत्ति खाली करने का आदेश दिया।READ ALSO:-बरेली में I Love Mohommad पर बवाल : जुमे की नमाज के बाद सड़कों पर उतरी भीड़ ने किया पथराव; पुलिस ने किया लाठीचार्ज   क्या था पूरा मामला? अभागे पिता की गुहार: इस मामले में एक 80 साल के बुजुर्ग ने कोर्ट का रुख किया था। उनके बेटे ने उनकी पैतृक जायदाद पर कब्जा कर लिया था और उन्हें खुद उसी घर में रहने की इजाजत नहीं दे रहा था। ट्रिब्यूनल का फैसला: बुढ़ापे में देखभाल न करने के कारण बुजुर्ग ने 'भरण-पोषण एवं कल्याण एक्ट 2007' के तहत गठित ट्रिब्यूनल में अपील की थी। ट्रिब्यूनल ने बुजुर्ग के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके बेटे को संपत्ति से बेदखल करने का आदेश दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्णय: लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस फैसले को अमान्य करार दिया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि 'भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007' का मुख्य उद्देश्य वृद्ध व्यक्तियों की दुर्दशा को दूर करना और उनकी देखभाल व सुरक्षा सुनिश्चित करना है।   बेदखली का अधिकार: कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह कानून माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को अपनी संपत्ति से ऐसे बच्चों को बेदखल करने का अधिकार देता है, जो उनकी रहने-खाने की जिम्मेदारी से भागते हैं। अधिकारों की पुष्टि: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि माता-पिता के पास अपनी संपत्ति का पूर्ण मालिकाना हक है और वे अपने बच्चों को कभी भी उस जायदाद से बेदखल कर सकते हैं।   यह फैसला उन लाखों बुजुर्गों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है, जो अपने ही घर में अपने बच्चों द्वारा प्रताड़ित किए जाते हैं। यह कानून और न्यायपालिका की ओर से एक मजबूत संदेश है कि माता-पिता की सेवा और देखभाल करना बच्चों का सिर्फ कर्तव्य नहीं, बल्कि एक कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी भी है।

Unknown सितम्बर 26, 2025 0
After Leh Violence: Govt Gets Tough, Sonam Wangchuk Arrested, NGO’s FCRA License Cancelled
लेह हिंसा के बाद सरकार के सख़्त तेवर: सोनम वांगचुक गिरफ्तार, NGO का FCRA लाइसेंस रद्द

लद्दाख में पूर्ण राज्य के दर्जे और संविधान की छठी अनुसूची के विस्तार की मांग को लेकर दो दिन पहले हुई हिंसा के बाद केंद्र सरकार ने कड़े तेवर दिखाए हैं। इस हिंसा के सिलसिले में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे एक दिन पहले ही, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनके एनजीओ स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का FCRA लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था।Read also:-'यहीं दफना दिया जाएगा…' – महाराष्ट्र के बीड में 'आई लव मोहम्मद' कार्यक्रम के मंच से सीएम योगी को मौलाना की खुली धमकी, शिवसेना भड़की   सोनम वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप गिरफ्तारी का कारण: वांगचुक की गिरफ्तारी लेह हिंसा के मामले में की गई है। सरकार ने उन्हें इस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया है। NGO लाइसेंस रद्द: गृह मंत्रालय ने SECMOL के खातों में कथित विसंगतियाँ पाए जाने के बाद उसका विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) लाइसेंस रद्द कर दिया। इन विसंगतियों में स्वीडन से धन अंतरण भी शामिल था, जिसे मंत्रालय ने 'राष्ट्रीय हित के खिलाफ' पाया।   हिंसा और कर्फ्यू का माहौल घटना: लेह एपेक्स बॉडी (LAB) की ओर से बुधवार को बुलाए गए बंद के दौरान विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसा में बदल गया। क्षति: इस हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई और 90 लोग घायल हो गए थे। कार्रवाई: हिंसा के सिलसिले में अब तक करीब 50 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। स्थिति: कल गुरुवार को लेह शहर में तनावपूर्ण शांति बनी रही और पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों ने सख्ती से कर्फ्यू लागू किया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि कर्फ्यू वाले इलाकों में स्थिति नियंत्रण में है। शैक्षणिक संस्थान बंद: लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने हिंसा के बाद अगले दो दिनों (शुक्रवार से) के लिए सभी सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने का आदेश दिया।   वांगचुक की भूख हड़ताल टूटी लेह में हिंसा बढ़ने के कारण जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अपनी पखवाड़े भर से चल रही भूख हड़ताल को बीच में ही छोड़ना पड़ा। उन्होंने हिंसा की निंदा करते हुए कहा, "यह लद्दाख के लिए सबसे दुखद दिन है। पिछले पांच सालों से हम जिस रास्ते पर चल रहे थे, वह शांतिपूर्ण था।"   फिलहाल, पुलिस दोनों पक्षों (LAB और सरकार) से जुड़े लोगों पर कड़ी नजर रख रही है और आगे की कार्रवाई जारी है।

Unknown सितम्बर 26, 2025 0
‘Will Be Buried Here…’ – Maulana Threatens CM Yogi from ‘I Love Mohammed’ Event Stage in Beed, Maharashtra; Shiv Sena Outraged
'यहीं दफना दिया जाएगा…' – महाराष्ट्र के बीड में 'आई लव मोहम्मद' कार्यक्रम के मंच से सीएम योगी को मौलाना की खुली धमकी, शिवसेना भड़की

महाराष्ट्र के बीड जिले में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। माजलगांव में आयोजित 'आई लव मोहम्मद' कार्यक्रम के मंच से मौलाना अशफाक निसार शेख ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर बेहद भड़काऊ और आपत्तिजनक बयान दिया है। मौलाना ने खुलेआम मंच से सीएम योगी को दफनाने की धमकी दी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।READ ALSO:-दिल्ली-NCR में पटाखों के निर्माण की इजाजत, पर बिक्री पर रोक: सुप्रीम कोर्ट बोला- 'पूरी तरह बैन संभव नहीं'   मौलाना ने दी खुली चुनौती मौलाना अशफाक निसार शेख ने मंच से बोलते हुए सीएम योगी को माजलगांव की मुस्तफा मस्जिद आने की खुली चुनौती दी। उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि अगर सीएम योगी वहां आएं तो "उन्हें यहीं दफना दिया जाएगा।" इस तरह की आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल से राजनीतिक और सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका है।   शिवसेना की कड़ी मांग मौलाना के इस भड़काऊ भाषण पर शिवसेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने पुलिस से मांग की है कि मौलाना के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जाए। हेगड़े ने कहा कि ऐसी चीजें दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश हैं और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, खबर लिखे जाने तक माजलगांव पुलिस थाने में इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी।   क्या है 'आई लव मोहम्मद' अभियान? यह अभियान उत्तर प्रदेश के कानपुर से शुरू हुआ था और देश के कई हिस्सों में फैल गया है। कानपुर की शुरुआत: इसी साल सितंबर की शुरुआत में बारावफात के जुलूस के दौरान मुस्लिम युवाओं ने 'आई लव मोहम्मद' नारे वाले पोस्टर और बैनर लगाए थे। विरोध और कार्रवाई: स्थानीय हिंदू संगठनों ने इसे नई परंपरा बताते हुए इसका विरोध किया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए पोस्टर हटवाए और कुल 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, जिसमें सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और धार्मिक भावनाएं भड़काने जैसी धाराएं लगाई गईं थीं। आंदोलन का रूप: कानपुर की इस घटना के बाद मुस्लिम संगठनों ने इसे एक आंदोलन का रूप दे दिया और शुक्रवार की नमाज के बाद कई मस्जिदों के बाहर प्रदर्शन किए। आयोजकों का आरोप: बीड समेत अन्य जगहों पर कार्यक्रम आयोजित करने वाले आयोजकों का कहना है कि कानपुर में पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई अनुचित थी, जिससे सांप्रदायिक माहौल बिगड़ा और निर्दोष नागरिकों के अधिकारों का हनन हुआ।   माजलगांव के आयोजकों का कहना है कि कानपुर में पोस्टर लगाने वालों पर की गई कार्रवाई अनुचित थी और इससे न केवल सांप्रदायिक माहौल बिगड़ा, बल्कि निर्दोष नागरिकों के अधिकारों का हनन भी हुआ। हालाँकि, मौलाना का भड़काऊ बयान अब पूरे मामले को एक नया और गंभीर मोड़ दे चुका है।

Unknown सितम्बर 26, 2025 0
Delhi-NCR: Firecracker Manufacturing Allowed, Sales Banned; SC Says ‘Complete Ban Not Possible’
दिल्ली-NCR में पटाखों के निर्माण की इजाजत, पर बिक्री पर रोक: सुप्रीम कोर्ट बोला- 'पूरी तरह बैन संभव नहीं'

सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से ठीक पहले दिल्ली-NCR में पटाखों के निर्माण और बिक्री से जुड़े मामले में एक सशर्त आदेश दिया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने पटाखा बनाने की इजाजत तो दे दी है, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली-NCR में इनकी बिक्री पर रोक जारी रहेगी।READ ALSO:-राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका: सिखों पर बयान मामले में सुनवाई का रास्ता साफ   जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि जिन मैन्युफैक्चरर्स के पास ग्रीन क्रैकर्स बनाने के लिए NEERI (राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान) और PESO (पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन) का परमिट है, वे ही निर्माण कार्य कर सकते हैं।   निर्माण की अनुमति, पर बिक्री पर बैन कोर्ट ने पटाखा निर्माताओं के लिए एक मुख्य शर्त रखी है: शर्त: मैन्युफैक्चरर्स कोर्ट के अगले आदेश तक NCR में कोई भी पटाखा नहीं बेचेंगे। अगली सुनवाई: इस मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होनी है।   सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया व्यावहारिक समाधान लाने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने पटाखा बैन को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि:"पटाखों पर पूरी तरह बैन न तो संभव है, न ही यह सही है। हम केंद्र से आग्रह करते हैं कि वह दिल्ली सरकार, पटाखा बनाने और बेचने वालों सहित सभी हितधारकों से बातचीत करके पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध को संशोधित करने का एक प्रस्ताव लेकर आएं। एक व्यावहारिक समाधान लेकर आएं, जिसे सभी स्वीकार करें।"   कोर्ट रूम में हुई सुनवाई और मुख्य टिप्पणियाँ सुनवाई का मुख्य बिंदु जानकारी CAQM को नोटिस बेंच ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। लाइसेंस रद्द करने पर रोक पटाखा कंपनियों के वकील की चिंता पर कोर्ट ने कहा कि फिलहाल पटाखों के लाइसेंस रद्द करने के मामले में यथास्थिति (status quo) बनी रहेगी। ग्रीन क्रैकर्स की जाँच केंद्र की ओर से बताया गया कि NEERI यह जांच कर रहा है कि क्या ग्रीन पटाखों से प्रदूषण कम हो सकता है या नहीं। पुरानी टिप्पणी इससे पहले, कोर्ट ने कहा था कि प्रतिबंध को कुछ महीनों तक सीमित करने से मकसद पूरा नहीं होगा, क्योंकि लोग बैन हटने पर बेचने के लिए पूरे साल पटाखे जमा करेंगे।   दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति: GRAP-1 लागू सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है: GRAP-1 लागू: दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI 200 पार होने के बाद 14 अक्टूबर को GRAP-1 लागू कर दिया गया था। प्रतिबंध: इसके तहत होटलों और रेस्तरां में कोयला और जलाऊ लकड़ी के उपयोग पर बैन है। मॉनिटरिंग: एजेंसियों को पुराने पेट्रोल और डीजल गाड़ियों (BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल) के संचालन पर सख्त निगरानी के आदेश दिए गए हैं।   AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) का स्तर 200-300 के बीच भी खराब माना जाता है, लेकिन राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में यह 300 के ऊपर जा चुका है, जो गंभीर स्वास्थ्य खतरे का संकेत है।

Unknown सितम्बर 26, 2025 0
Big Blow to Rahul Gandhi: Allahabad HC Clears Way for Hearing on Sikh Remarks Case
राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका: सिखों पर बयान मामले में सुनवाई का रास्ता साफ

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सिखों पर दिए गए उनके बयान से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने वाराणसी की विशेष अदालत (एमपी/एमएलए) के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति समीर जैन ने दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।READ ALSO:-ब्रेकिंग: ट्रम्प का फार्मा 'टैरिफ बम'! 1 अक्टूबर से ब्रांडेड दवाओं पर 100% ड्यूटी   इस आदेश के बाद, वाराणसी की विशेष अदालत (MP/MLA) में राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मुकदमे की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।   क्या था पूरा मामला? विवादित बयान: मामला सितंबर 2024 का है, जब राहुल गांधी ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर कहा था कि भारत में सिखों के लिए माहौल अच्छा नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया था, "क्या सिख पगड़ी पहन सकते हैं, कड़ा रख सकते हैं और गुरुद्वारे जा सकते हैं?" शिकायत: इस बयान को भड़काऊ और समाज में विभाजनकारी बताते हुए नागेश्वर मिश्र ने सारनाथ थाने में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। मजिस्ट्रेट कोर्ट से खारिज: एफआईआर दर्ज न होने पर मिश्र ने न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय वाराणसी की अदालत में अर्जी दी, लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि केंद्र सरकार की अनुमति के बिना ऐसी अर्जी पोषणीय नहीं है। विशेष अदालत का आदेश: इस आदेश के विरुद्ध विशेष अदालत (MP/MLA) में पुनरीक्षण अर्जी दी गई। विशेष अदालत ने मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द कर दिया और नए सिरे से विचार कर आदेश करने के लिए प्रकरण वापस न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेज दिया। राहुल गांधी ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।   हाईकोर्ट में राहुल गांधी की दलीलें राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी ने तर्क दिया कि: आरोप निराधार हैं, और घटना की तारीख तक का कोई उल्लेख नहीं है। सिर्फ खबरों के आधार पर अर्जी दी गई है और याची के खिलाफ कोई आपराधिक केस नहीं बनता। विशेष अदालत ने कानूनी प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर विचार किए बिना आदेश दिया।   सरकार और वादी पक्ष का तर्क प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और वादी के वकील सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी व अमन सिंह बिसेन ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा। याचिका समय पूर्व: उन्होंने कहा कि अभी तक कोई एफआईआर दर्ज भी नहीं हुई है, और विशेष अदालत ने सिर्फ मजिस्ट्रेट को गुण-दोष के आधार पर विचार करने के लिए केस वापस भेजा है, इसलिए याचिका समय पूर्व दाखिल की गई है। विवेचना से स्पष्टता: वादी पक्ष ने तर्क दिया कि अपराध बनता है या नहीं, यह विवेचना (जांच) से स्पष्ट होगा, जिसके लिए साक्ष्य एकत्र किए जाएंगे। अवैधानिकता नहीं: अपर महाधिवक्ता गोयल ने कहा कि विशेष अदालत का मजिस्ट्रेट कोर्ट को विवेक से फैसला लेने के लिए प्रकरण वापस भेजना कानून के मुताबिक सही है, क्योंकि पुनरीक्षण अदालत सीधे मजिस्ट्रेट की शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकती।   कोर्ट ने इस पूरे मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है। कोर्ट के इस फैसले से अब वाराणसी की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत पर आगे की सुनवाई का रास्ता खुल गया है।

Unknown सितम्बर 26, 2025 0
ECI Changes Counting Rules: EVM-VVPAT Tally Only After Ballot Paper Count for More Transparency
EVM-VVPAT की गिनती अब बैलेट पेपर की गणना के बाद ही पूरी होगी: चुनाव आयोग ने मतगणना के नियम बदले, पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली/पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले, चुनाव आयोग (Election Commission of India - ECI) ने मतदान और मतगणना प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और एकरूपता लाने के मकसद से एक बड़ा बदलाव किया है।READ ALSO:-लखनऊ में 9वीं के छात्र पर FIR, स्कूल से भी सस्पेंड; सोशल मीडिया पर धर्म विशेष पर की थी आपत्तिजनक पोस्ट   अब नई व्यवस्था के तहत, ईवीएम (EVM) या वीवीपीएटी (VVPAT) की दूसरे अंतिम चरण (Second Last Round) की गिनती तभी शुरू होगी, जबकि पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी हो जाए।   क्या था नियम में बदलाव का कारण? पहले, मतगणना वाले दिन पोस्टल बैलेट की गिनती सुबह 8 बजे और ईवीएम की गिनती सुबह 8:30 बजे शुरू होती थी। पुराने निर्देशों के तहत, सैद्धांतिक रूप से ईवीएम की गिनती पोस्टल बैलेट की गिनती से पहले पूरी हो सकती थी, जिससे परिणामों को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती थी।   बढ़ते पोस्टल बैलेट: चुनाव आयोग ने पिछले कुछ सालों में दिव्यांगजनों और 85 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर से मतदान की पहल की है, जिसके कारण पोस्टल बैलेट की संख्या में खासी वृद्धि हुई है। ईवीएम और पोस्टल बैलेट की गिनती में सामंजस्य स्थापित करने और प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता लाने के मकसद से आयोग ने यह कदम उठाया है।   बिहार चुनाव से लागू होगी नई व्यवस्था चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह नई प्रक्रिया सबसे पहले बिहार विधानसभा चुनाव में लागू की जाएगी, जहाँ नवंबर में चुनाव होने हैं।   आयोग ने रिटर्निंग अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि जिन मामलों में पोस्टल बैलेट की संख्या बहुत अधिक है, वहाँ यह सुनिश्चित किया जाए कि पर्याप्त संख्या में टेबल और मतगणना कर्मचारी उपलब्ध हों, ताकि गिनती में कोई देरी न हो।   चुनाव आयोग की ओर से यह कदम चुनावी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और बेहतर बनाने के लिए पिछले छह महीनों में की गई 30वीं पहल है। आयोग ने पहले ही वेबकास्टिंग और टेक्नोलॉजी के बेहतर उपयोग जैसे कई उपाय लागू किए हैं।

Unknown सितम्बर 25, 2025 0
CBSE Releases Tentative Datesheet for 2026 Class 10th & 12th Board Exams
CBSE ने जारी की 10वीं और 12वीं परीक्षा 2026 की टेंटेटिव डेट शीट: जानें कब होंगे एग्जाम

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। बोर्ड ने 2026 में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं की टेंटेटिव (संभावित) डेट शीट जारी कर दी है, जिससे लाखों छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।Read also:-₹60 करोड़ की ज़मीन से खत्म होगा मेरठ का 'दिल्ली रोड' जाम: रैपिड रेल कॉरिडोर के चलते 70 दुकानें और भवन हटेंगे   डेट शीट के अनुसार, 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी, 2026 से 15 जुलाई, 2026 के बीच आयोजित की जा सकती हैं। यह घोषणा छात्रों को अपनी तैयारी के लिए पर्याप्त समय देने के उद्देश्य से की गई है, ताकि वे बिना किसी तनाव के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।   टेंटेटिव डेट शीट का क्या मतलब है? टेंटेटिव डेट शीट का मतलब है कि यह परीक्षा की अंतिम समय सारिणी नहीं है। यह केवल एक संभावित शेड्यूल है जो छात्रों को परीक्षा की शुरुआत और समाप्ति की अवधि के बारे में बताता है। यह छात्रों को अपने सिलेबस को पूरा करने और रिविजन की योजना बनाने में मदद करता है। CBSE आमतौर पर फाइनल डेट शीट परीक्षा से कुछ महीने पहले जारी करता है, जिसमें विषयवार तारीखें और समय का उल्लेख होता है।   45 लाख से अधिक छात्र होंगे शामिल CBSE के अनुसार, साल 2026 में होने वाली 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में 45 लाख से ज्यादा छात्र शामिल होंगे। इनमें से करीब 22 लाख छात्र 10वीं कक्षा के और 23 लाख छात्र 12वीं कक्षा के हैं। बोर्ड द्वारा यह शुरुआती घोषणा छात्रों की संख्या को देखते हुए एक अच्छा कदम है ताकि सभी को समय पर तैयारी का मौका मिल सके।   छात्रों के लिए तैयारी की रणनीति छात्रों को अब अंतिम डेट शीट का इंतजार नहीं करना चाहिए और इस संभावित शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए अपनी पढ़ाई शुरू कर देनी चाहिए। इस डेट शीट के अनुसार अपने विषयों का प्लान बनाएं, खासकर उन विषयों को प्राथमिकता दें जिनमें अधिक समय लगता है। आधिकारिक वेबसाइट: छात्र और अभिभावक cbse.gov.in पर जाकर टेंटेटिव डेट शीट को डाउनलोड कर सकते हैं। यह कदम छात्रों को मानसिक रूप से तैयार होने में मदद करेगा और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करेगा।

Unknown सितम्बर 24, 2025 0
"Delhi College Principal Accused of Sexual Harassment by 17 Students"
दिल्ली कॉलेज प्रमुख पर यौन शोषण का आरोप: 17 छात्राओं ने लगाए गंभीर इल्जाम - 'अश्लील मैसेज भेजे, जबरन छूता था'

नई दिल्ली: दिल्ली के वसंत कुंज स्थित प्रतिष्ठित श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट के पूर्व प्रमुख स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ ​​पार्थ सारथी पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे हैं। EWS स्कॉलरशिप के तहत PGDM कर रही 17 छात्राओं ने उन पर अश्लील मैसेज भेजने, गंदी भाषा का इस्तेमाल करने और जबरन छूने का आरोप लगाया है। यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।READ ALSO:-नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ का आरोपी बिजनौर में गिरफ्तार: POCSO एक्ट के तहत जेल भेजा गया   फैकल्टी पर भी लगे गंभीर आरोप पीड़ित छात्राओं का दावा है कि चैतन्यानंद सरस्वती की इन हरकतों में इंस्टीट्यूट की कुछ महिला फैकल्टी और अन्य कर्मचारी भी अप्रत्यक्ष रूप से शामिल थीं। छात्राओं का आरोप है कि ये फैकल्टी और कर्मचारी उन पर आरोपी की बातें मानने और उसके कहने पर काम करने के लिए दबाव डालती और उकसाती थीं। यह आरोप मामले को और भी गंभीर बना देता है, क्योंकि यह संस्थान के भीतर एक बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करता है।   पुलिस कार्रवाई और आरोपी फरार FIR दर्ज: चैतन्यानंद के खिलाफ 4 अगस्त को FIR दर्ज की गई थी। पद से हटाया गया: आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, 9 अगस्त को उसे अपने पद से हटा दिया गया। फरार आरोपी: वर्तमान में चैतन्यानंद फरार है, लेकिन पुलिस को उसकी लोकेशन उत्तर प्रदेश के आगरा के पास मिली है। फर्जी कार: पुलिस ने उसकी एक वॉल्वो कार जब्त की है, जिस पर फर्जी यूनाइटेड नेशन (39 UN 1) का नंबर प्लेट लगा हुआ था, जिससे उसकी संदिग्ध गतिविधियों का पता चलता है।   छात्राओं के बयान और जाँच का दायरा दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 4 अगस्त को मठ और उसकी संपत्तियों के एडमिनिस्ट्रेटर पी.ए. मुरली ने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। जाँच के दौरान, कुल 32 छात्राओं के बयान दर्ज किए गए, जिनमें से 17 ने चैतन्यानंद पर सीधे तौर पर यौन शोषण के आरोप लगाए। छात्राओं ने यह भी बताया कि इंस्टीट्यूट में काम करने वाले कुछ वार्डन ने ही उन्हें आरोपी से मिलवाया था।   वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(2)/79/351(2) के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।   वॉल्वो कार जब्त और इंस्टीट्यूट का बयान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आरोपी के ठिकानों पर कई जगह छापे मारे। इसी दौरान, श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट के बेसमेंट से वह वॉल्वो कार मिली, जिसका इस्तेमाल चैतन्यानंद करता था। फर्जी राजनयिक नंबर प्लेट वाली इस कार को पुलिस ने जब्त कर लिया है।   इंस्टीट्यूट का संचालन करने वाली कर्नाटक के श्रृंगेरी की संस्था, दक्षिणाम्नॉय श्री शारदा पीठ ने इस पूरे मामले पर बयान जारी करते हुए कहा है कि स्वामी चैतन्यानंद का आचरण और गतिविधियां अवैध हैं और पीठ के हितों के खिलाफ हैं, इसलिए पीठ का उससे कोई संबंध नहीं है।   यह मामला शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और ऐसे पदों पर बैठे व्यक्तियों के कदाचार पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिस पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।  

Unknown सितम्बर 24, 2025 0
FIR Ordered Against Ranbir Kapoor & Aryan Khan’s Show ‘The Bads of Bollywood’: NHRC Objects to E-Cigarette Scene
रणबीर कपूर और आर्यन खान के शो 'द बैड्स ऑफ बॉलीवुड' पर FIR का आदेश: ई-सिगरेट सीन पर NHRC का कड़ा रुख

मुंबई: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मुंबई पुलिस को आदेश दिया है कि वह अभिनेता रणबीर कपूर, आर्यन खान की वेब सीरीज 'द बैड्स ऑफ बॉलीवुड' के मेकर्स और नेटफ्लिक्स के खिलाफ FIR दर्ज करे। यह आदेश शो में ई-सिगरेट के इस्तेमाल वाले सीन को लेकर दिया गया है, जिस पर 'इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019' का उल्लंघन करने का आरोप है।TRAD ALSO:-सुप्रीम कोर्ट की पुलिस को नसीहत: सिविल और आपराधिक मामलों का अंतर समझें, वसूली के लिए गिरफ्तारी का दुरुपयोग ठीक नहीं   क्या है पूरा मामला? विनय जोशी नामक व्यक्ति ने NHRC में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कहा गया था कि 'द बैड्स ऑफ बॉलीवुड' के सातवें एपिसोड में रणबीर कपूर ई-सिगरेट का इस्तेमाल करते हुए दिखाई दिए, लेकिन इस दौरान किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य चेतावनी या डिस्क्लेमर नहीं दिया गया।   इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए, NHRC ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भी नोटिस भेजा है। आयोग ने मंत्रालय से ऐसे कंटेंट को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है, क्योंकि इस तरह के दृश्य युवा दर्शकों पर गलत प्रभाव डाल सकते हैं। इसके अलावा, मुंबई पुलिस कमिश्नर को भी जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें ई-सिगरेट बनाने और आयात करने वाले लोगों की भूमिका की जांच करने को कहा गया है।   'इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019' क्या है? यह कानून भारत में ई-सिगरेट और इससे जुड़े सभी उपकरणों के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, ट्रांसपोर्ट, बिक्री, वितरण, स्टोरेज और विज्ञापन पर पूरी तरह से रोक लगाता है। इस एक्ट में ई-सिगरेट को इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS), हीट-नॉट-बर्न प्रोडक्ट्स और ई-हुक्के जैसे उपकरणों के रूप में परिभाषित किया गया है। कानून का उल्लंघन करने पर जेल और जुर्माने की सजा का प्रावधान है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह कानून लोगों को इन उत्पादों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों से बचाने के लिए लाया गया था।   परिभाषा: इस एक्ट में ई-सिगरेट को इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) और ई-हुक्के जैसे उपकरणों के रूप में परिभाषित किया गया है। सजा का प्रावधान: इस कानून का उल्लंघन करने पर जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। बार-बार उल्लंघन करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है।     रणबीर कपूर ने आर्यन खान की डायरेक्टोरियल डेब्यू सीरीज 'द बैड्स ऑफ बॉलीवुड' के सातवें और आखिरी एपिसोड में कैमियो किया था, जिसमें वह धर्मा प्रोडक्शंस के ऑफिस में सान्या (अन्या सिंह) से मिलते हैं और उससे वैप मांगकर स्मोक करते हैं। यह सीरीज रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी है और नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है।  

Unknown सितम्बर 23, 2025 0
Supreme Court to Police: Understand Difference Between Civil and Criminal Cases, Prevent Misuse of Criminal Law
सुप्रीम कोर्ट की पुलिस को नसीहत: सिविल और आपराधिक मामलों का अंतर समझें, वसूली के लिए गिरफ्तारी का दुरुपयोग ठीक नहीं

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को सिविल और आपराधिक मामलों के बीच अंतर को समझने के लिए विवेक का प्रयोग करने की कड़ी सलाह दी है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि आपराधिक कानून का दुरुपयोग न्याय प्रणाली के लिए एक गंभीर खतरा बन रहा है, जिसे रोकने की सख्त जरूरत है।READ ALSO:-Paytm यूजर्स ध्यान दें! 31 अक्टूबर है आखिरी मौका, वरना रुक जाएंगे आपके सारे ऑटोमैटिक पेमेंट   सिविल विवादों को आपराधिक मामलों में बदलने की प्रवृत्ति पर चिंता जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने हाल ही में सामने आ रहे उस चलन पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिसमें लोग अपने सिविल विवादों को आपराधिक मामलों में बदल देते हैं ताकि उनकी शिकायतों का तेजी से निपटान हो सके या बकाया राशि वसूली जा सके।   पीठ ने सोमवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया: अदालतें वसूली एजेंट नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतें वसूली एजेंट के रूप में कार्य नहीं कर सकती हैं। हाल के दिनों में, यह देखा गया है कि लोग शुद्ध रूप से दीवानी विवादों में धन की वसूली के लिए आपराधिक मामले दर्ज करा रहे हैं। गिरफ्तारी की धमकी स्वीकार्य नहीं: पीठ ने जोर देकर कहा कि बकाया राशि की वसूली के लिए गिरफ्तारी की धमकी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।   पुलिस की दुविधा और सुप्रीम कोर्ट का सुझाव उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज ने पीठ को बताया कि पुलिस ऐसे मामलों से जूझ रही है। अगर पुलिस संज्ञेय अपराध का आरोप होने पर मामला दर्ज नहीं करती है, तो उसे अदालत की आलोचना का सामना करना पड़ता है, और अगर दर्ज करती है तो पक्षपात का आरोप लगता है। इन टिप्पणियों के बाद, पीठ ने एक आपराधिक मामले की सुनवाई करते हुए (जिसमें धन वसूली विवाद में एक व्यक्ति पर अपहरण का आरोप लगाया गया था) कहा:   विवेक का प्रयोग: पुलिस को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले यह सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए कि मामला दीवानी प्रकृति का है या फौजदारी। न्याय व्यवस्था के लिए खतरा: आपराधिक कानून का ऐसा दुरुपयोग न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।   पीठ ने पुलिस के सामने आने वाली कठिनाइयों को स्वीकार किया, खासकर ललिता कुमार मामले (2013) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करने के दबाव को देखते हुए, जिसमें संज्ञेय अपराध पर FIR दर्ज करना अनिवार्य है।   नोडल अधिकारी की नियुक्ति का सुझाव इस समस्या के समाधान के लिए, पीठ ने सुझाव दिया कि राज्य प्रत्येक जिले के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर सकते हैं, अधिमानतः एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश। पुलिस इन नोडल अधिकारियों से परामर्श कर यह तय कर सकती है कि कोई मामला दीवानी है या आपराधिक, और फिर कानून के अनुसार आगे बढ़ सकती है।   शीर्ष अदालत ने एएसजी से इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने और दो सप्ताह के भीतर अदालत को सूचित करने को कहा है।  

Unknown सितम्बर 23, 2025 0
Supreme Court: Time to Decriminalize Defamation
मानहानि पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: "अब समय आ गया है कि इसे अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाए"

नई दिल्ली, 22 सितंबर, 2025: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मानहानि (Defamation) से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि "अब समय आ गया है कि इन सभी मामलों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया जाए।" यह टिप्पणी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की पूर्व प्रोफेसर अमिता सिंह द्वारा 2016 में दायर एक मानहानि मामले पर की गई है।READ ALSO:-बेंगलुरु से बनारस आ रही फ्लाइट में हड़कंप: यात्रियों ने कॉकपिट खोलने की कोशिश की, हाईजैक की आशंका से पायलट ने गेट किया लॉक   क्या है पूरा मामला? यह मामला एक पोर्टल द्वारा 2016 में प्रकाशित एक रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसमें JNU को एक 'ऑर्गनाइज्ड सेक्स रैकेट' का अड्डा बताया गया था। प्रोफ़ेसर अमिता सिंह ने इस रिपोर्ट के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया था। उनकी याचिका में दलील दी गई थी कि बिना किसी सत्यापन के इस तरह की रिपोर्ट प्रकाशित करना उनकी प्रतिष्ठा को सीधा नुकसान पहुंचाता है और यह व्यावसायिक लाभ उठाने का एक प्रयास है।   इस मामले में, फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्हें जारी समन को रद्द करने की मांग की गई है। कोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी किया है।   केस की समयरेखा 2023: दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में पोर्टल और रिपोर्टर को जारी समन रद्द कर दिया था। 2024: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को पलट दिया और मामले को दोबारा विचार के लिए मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया। मई 2025: दिल्ली हाई कोर्ट ने दूसरे समन को चुनौती देने वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि चूंकि शिकायत 2016 में दर्ज की गई थी, इसलिए नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNSS) के प्रावधान इस पर लागू नहीं होंगे।   सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी मानहानि कानून को लेकर एक बड़ी बहस को फिर से शुरू कर सकती है। इस मामले में, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी सुप्रीम कोर्ट के विचार से सहमति जताई है।   आगे क्या हो सकता है? यह सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी है, कोई फैसला नहीं. लेकिन यह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में आपराधिक मानहानि से जुड़े कानून में बदलाव देखने को मिल सकते हैं. अगर कोर्ट इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो इससे भारत में मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech and Expression) को बढ़ावा मिलेगा.  

Unknown सितम्बर 22, 2025 0
GST 2.0 to Bring Direct Relief, Shops Face Raids from Sept 22
जीएसटी 2.0 से जनता को मिलेगी सीधी राहत! सरकार की नई रणनीति, दाम नहीं घटाए तो दुकानदारों की खैर नहीं, 22 सितंबर से बाजारों में होगी छापेमारी

केंद्र सरकार ने हाल ही में जीएसटी दरों में जो कटौती की है, उसका सीधा फायदा आम जनता तक पहुंचाने के लिए एक सख्त योजना बनाई गई है। 22 सितंबर से नई दरें लागू होने के बाद, केंद्रीय और राज्य जीएसटी विभाग के अधिकारी बाजारों में अचानक निरीक्षण करेंगे। अगर दुकानदारों ने टैक्स कटौती के हिसाब से कीमतें कम नहीं कीं, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।READ ALSO:-वेस्ट यूपी में दहका 'हाई कोर्ट बेंच' आंदोलन! 22 जिलों में न्यायिक कार्य ठप, मेरठ में सड़कों पर उतरी जनता, बेगमपुल जाम   कैसे काम करेगी सरकार की यह 'सख्ती'? जीएसटी विभाग के फील्ड अधिकारी उन 54 वस्तुओं की सूची लेकर बाजारों में जाएंगे, जिन पर टैक्स घटाया गया है। वे खुद उन चीजों को खरीदेंगे और जांच करेंगे कि क्या वाकई कीमतें कम हुई हैं। अगर दुकानदार ने टैक्स कटौती का लाभ ग्राहकों को नहीं दिया है, तो उसका टैक्स क्रेडिट ब्लॉक कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि दुकानदार अपनी खरीद पर दिए गए जीएसटी को अपनी बिक्री पर लगने वाले टैक्स से समायोजित नहीं कर पाएगा, जिससे उसे ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि व्यापारी सिर्फ मुनाफाखोरी न करें।   54 वस्तुओं की 'मॉनिटरिंग लिस्ट' तैयार सेंट्रल जीएसटी विभाग ने इस निगरानी के लिए एक विस्तृत सूची तैयार की है। इस सूची में 54 ऐसी वस्तुएं शामिल हैं, जिन्हें एक ही जगह पर वर्गीकृत किया गया है (जैसे सभी तरह के सूखे मेवे, स्टेशनरी और घरेलू बर्तन)। अधिकारियों को 22 सितंबर से पहले इन सभी वस्तुओं के मौजूदा दाम पता करने को कहा गया है। इसके बाद, उन्हें नई दरों के बाद के दाम अंकित करने होंगे। यह निगरानी हर शहर और कस्बे में की जाएगी, ताकि कोई भी दुकानदार ग्राहकों को ठग न सके।   कंपनियों पर सरकार का 'भरोसा और निगरानी' पूर्व CBIC चेयरमैन विवेक जौहरी ने बताया कि सरकार कंपनियों पर भरोसा कर रही है कि वे जीएसटी कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाएंगी। यही वजह है कि सरकार टैक्स रिफंड बहुत तेजी से कर रही है। हालांकि, सरकार अपनी निगरानी भी जारी रखेगी। अगर दो-तीन हफ्तों के भीतर ग्राहकों से शिकायतें मिलती हैं या खुद की जांच में पता चलता है कि लाभ नहीं पहुंचाया गया है, तो उन कंपनियों का स्पेशल ऑडिट कराया जा सकता है।   ग्राहक चाहते हैं 'जवाबदेही' लोकलसर्कल्स के एक हालिया सर्वे से पता चला है कि 2018-19 में हुई जीएसटी कटौती का फायदा केवल 10 में से 2 उपभोक्ताओं तक ही पहुंच पाया था। सर्वे में शामिल 78% लोगों ने यह राय दी कि ब्रांड्स को खुद ही एक ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए, जिससे रिटेलर यह सुनिश्चित करें कि ग्राहकों को रेट में कटौती का लाभ मिले। फिलहाल, भारत में कोई एंटी-प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी नहीं है, और इस वजह से यह जिम्मेदारी ब्रांड्स पर ही आ जाती है। सरकार का यह नया कदम इसी जवाबदेही को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

Unknown सितम्बर 20, 2025 0
Rahul Gandhi again attacks the Election Commission: "The election watchman remained awake, watching the theft," and alleges "vote deletion."
राहुल का फिर चुनाव आयोग पर हमला: 'चुनाव का चौकीदार जागता रहा, चोरी देखता रहा', 'वोट हटाने' का लगाया आरोप

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' और 'वोट हटाने' का गंभीर आरोप लगाया है। शुक्रवार को उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, "चुनाव का चौकीदार जागता रहा, चोरी देखता रहा, चोरों को बचाता रहा।" यह लगातार दूसरा दिन है जब राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को सीधे तौर पर घेरा है। उन्होंने कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां कांग्रेस समर्थकों के नाम योजनाबद्ध तरीके से हटाए गए।READ ALSO:-मेरठ में मामूली कहासुनी पर खूनी संघर्ष: रास्ता न देने पर चला विवाद, 20 हमलावरों ने की ताबड़तोड़ फायरिंग   क्या है 'वोट चोरी' का पूरा मामला? गुरुवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र को खत्म करने वालों और 'वोट चोरों' को बचा रहे हैं। उन्होंने आरोपों के समर्थन में कुछ ऐसे मतदाताओं को भी पेश किया, जिनके नाम हटाने की कोशिश की गई थी। राहुल ने अपनी प्रजेंटेशन में दावा किया कि इन वोटरों के नाम हटाने के लिए दूसरे राज्यों के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया था।   बीजेपी ने दिया करारा जवाब राहुल के आरोपों के बाद बीजेपी नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला है: गिरिराज सिंह: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी हताशा में हैं और 'शहरी नक्सल' बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल कभी मोदी की नकल करते हैं तो कभी 'Gen-Z' की बात करते हैं। निशिकांत दुबे: सांसद निशिकांत दुबे ने कटाक्ष करते हुए कहा कि वे आलंद चुनाव के इंचार्ज थे और उन्हें यकीन था कि भाजपा यह सीट जीतेगी। उन्होंने कहा कि अगर वाकई वोट चोरी हुई है तो कांग्रेस को चुनाव आयोग का धन्यवाद करना चाहिए, क्योंकि आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस यह सीट जीत पाई है। देवेंद्र फडणवीस: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ये वोट चोरी का मामला नहीं है, बल्कि राहुल गांधी का दिमाग चोरी हो गया है। उन्होंने कहा कि राहुल की संविधान में कोई आस्था नहीं है और वह 'शहरी माओवादी' वाली भाषा बोल रहे हैं।   चुनाव आयोग ने आरोपों को बताया 'निराधार' चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के सभी आरोपों को गलत और निराधार बताया है। आयोग ने कहा है कि कोई भी आम नागरिक ऑनलाइन किसी का वोट नहीं हटा सकता। किसी भी वोटर का नाम हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाता है।   CRPF ने राहुल की सुरक्षा पर भी उठाए सवाल एक अलग मामले में, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर राहुल गांधी पर सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया है। सीआरपीएफ ने कहा है कि पिछले 9 महीनों में राहुल गांधी बिना सूचना दिए 6 बार विदेश यात्रा कर चुके हैं, जिनमें इटली, वियतनाम, दुबई, कतर, लंदन और मलेशिया शामिल हैं।

Unknown सितम्बर 19, 2025 0
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बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और गर्लफ्रेंड सोनाली का 15 मिनट का MMS लीक, कपल ने इसे चोरी और ब्लैकमेलिंग बताया

पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है।     कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप   सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है।   सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है।  ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया।  सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया।   प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है।  ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं।    सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं।   इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया।    बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }

बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई

आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला   मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।   बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।   दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था।   अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी।   बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे।   पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया।   एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी   सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता।   पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है।   आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?

देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।   सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया?   क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है।   पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है।   दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है।   सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?"   असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है।   सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है।   विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है।   विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।"   NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है।   NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।   CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।      आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया।  डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है।     कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं:   1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।   2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है।   सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है:   पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है।   दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।   गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।"   आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए।   सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है।   फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है।     जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; Kidney की बीमारी बनी मौत का कारण

बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है।   चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था।   टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।   फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी।   Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप   किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।   इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।"   Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।   सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।

दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी।   आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:   Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi)   मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी।   रूट मैप (Route Map) और स्टेशन   मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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यूपी में मौसम का यू-टर्न: कल से 5 दिनों तक आंधी-बारिश का अलर्ट, कांपने पर मजबूर करेगी लौटती हुई ठंड

Unknown जनवरी 21, 2026 0

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