दिल्ली

Delhi NCR Weather Update Temperature to Drop Further IMD Issues Alert for Dense Fog and Rain on January 27
दिल्ली-NCR पर कुदरत का 'डबल अटैक': बारिश के बाद अब हड्डियां जमा देने वाली ठंड, पारा 4 डिग्री तक लुढ़कने का अलर्ट

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश ने जहां प्रदूषण से थोड़ी राहत दी थी, वहीं अब यह बारिश कड़ाके की ठंड (Cold Wave) का कारण बनने जा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों के लिए नया अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में दिल्ली वालों को हाड़ कंपाने वाली सर्दी का सामना करना पड़ सकता है। 27 जनवरी को दोबारा बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।READ ALSO:-यूपी बोर्ड 2026: प्रैक्टिकल परीक्षा की तारीखों में बड़ा फेरबदल! 29-30 जनवरी को भी होंगे एग्जाम, सचिव ने जारी किया 'अर्जेंट' आदेश   दिल्ली और इसके आसपास के शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में रहने वाले लोगों के लिए यह सप्ताह मौसम के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव के चलते मौसम में यह अस्थिरता बनी हुई है।   बारिश के बाद अब शीतलहर का प्रकोप दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में हुई बारिश के बाद अब कड़ाके की ठंड का नया दौर शुरू होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक, अगले एक हफ्ते तक तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जाएगी। दिन में भले ही धूप-छांव का खेल चलता रहे, लेकिन रात होते ही ठिठुरन काफी बढ़ जाएगी।   मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादलों के छंटते ही बर्फीली हवाएं मैदानी इलाकों का रुख करेंगी। इससे रात का पारा तेजी से नीचे गिरेगा। अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस (4°C) तक लुढ़क सकता है। यह इस सीजन की सबसे सर्द रातों में से एक हो सकता है।   दिन के समय अधिकतम तापमान 18 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है, जो सामान्य से थोड़ा कम है। लेकिन असली मुसीबत रात की सर्दी होगी। आने वाले दिनों में सर्दी का सितम ऐसा होगा कि लोगों को दिन में भी भारी जैकेट और अलाव का सहारा लेना पड़ेगा। विशेषकर सुबह और शाम के समय दोपहिया वाहन चालकों को संभलकर रहने की जरूरत है।   27 जनवरी को फिर बारिश और आंधी का अलर्ट मौसम विभाग ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। 25 और 26 जनवरी को मौसम के शुष्क रहने के बाद, 27 जनवरी को फिर से मौसम करवट लेगा। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के चलते 27 जनवरी को दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।   सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि इस दौरान तेज हवाएं भी चलेंगी। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 27 जनवरी को करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं (Gusty Winds) चल सकती हैं। ये हवाएं बर्फीली ठंडक लेकर आएंगी, जिससे ठिठुरन और बढ़ जाएगी। बारिश की यह गतिविधि ठंड को लंबे समय तक खींच सकती है।   28 जनवरी के बाद भले ही बारिश रुक जाए, लेकिन हवाओं में नमी (Moisture) और ठंडक बरकरार रहेगी। यह बदलता मौसम फरवरी की शुरुआत तक सर्दी के तेवर तीखे बनाए रख सकता है। इसलिए, जो लोग सोच रहे थे कि सर्दी अब जाने वाली है, उनके लिए यह चेतावनी है कि अभी गर्म कपड़ों को पैक करने की जल्दबाजी न करें।   कोहरे और बादलों का डेरा: 24 से 30 जनवरी का पूर्वानुमान कोहरा दिल्ली की सर्दी का एक अभिन्न हिस्सा है, और आने वाले दिनों में यह और घना होने वाला है। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, 24 से 30 जनवरी के बीच पूरे एनसीआर इलाके में आसमान में बादल छाए रहेंगे और सुबह के समय घना कोहरा (Dense Fog) देखने को मिलेगा।   विजिबिलिटी पर असर: घने कोहरे की वजह से विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम हो सकती है। कई इलाकों में विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम रह सकती है। इसका सीधा असर सड़क, रेल और हवाई यातायात पर पड़ेगा।   सड़क यातायात: कोहरे की वजह से गाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है। यमुना एक्सप्रेसवे और अन्य हाईवे पर चालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। रेल यातायात: कोहरे के कारण लंबी दूरी की ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चल सकती हैं। हवाई उड़ानें: विजिबिलिटी कम होने पर आईजीआई एयरपोर्ट (IGI Airport) से उड़ानों के संचालन में भी बाधा आ सकती है।   हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि 28 से 30 जनवरी के बीच मौसम थोड़ा सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन हल्का कोहरा और बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। सुबह के वक्त घर से निकलने वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि ठंडी हवाएं सीधे सेहत पर असर डाल सकती हैं।   26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) पर कैसा रहेगा मौसम? 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस (Republic Day) के अवसर पर कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड को देखने के लिए हजारों लोग इकट्ठा होते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 26 जनवरी को सुबह के समय हल्का कोहरा रह सकता है, लेकिन दिन में आसमान साफ रहने या आंशिक रूप से बादल छाए रहने की उम्मीद है। बारिश की संभावना 26 जनवरी को कम है, जो कि एक राहत की खबर है। हालांकि, सुबह की ठंड काफी तेज होगी, इसलिए परेड देखने जाने वाले दर्शकों को पूरी तरह से गर्म कपड़ों में लिपटे रहने की सलाह दी जाती है। न्यूनतम तापमान 6 डिग्री के आसपास रहने की उम्मीद है।   पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) क्या है और इसका असर दिल्ली के मौसम में आए इस बदलाव का मुख्य कारण 'पश्चिमी विक्षोभ' है। यह भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठने वाला एक तूफान है जो ईरान, इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में पहुंचता है।   जब यह सिस्टम पहाड़ों (हिमालय) से टकराता है, तो वहां भारी बर्फबारी होती है। जब यह मैदानी इलाकों (जैसे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा) से गुजरता है, तो यहां बारिश और ठंडी हवाएं लाता है।   फिलहाल, पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ रहा है। वहां से आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाएं (North-Westerly Winds) दिल्ली के तापमान को गिरा रही हैं।   स्वास्थ्य के लिए चेतावनी: बच्चों और बुजुर्गों का रखें ख्याल तापमान में अचानक गिरावट और नमी का बढ़ना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। डॉक्टरों ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सतर्क रहने को कहा है।   हृदय रोगी (Heart Patients): अत्यधिक ठंड में नसों के सिकुड़ने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा रहता है। बुजुर्गों को सलाह दी गई है कि वे सुबह बहुत जल्दी सैर पर जाने से बचें। धूप निकलने के बाद ही बाहर निकलें। सांस की बीमारी: कोहरा और प्रदूषण मिलकर 'स्मॉग' (Smog) बनाते हैं, जो अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए खतरनाक है। बारिश के बाद नमी बढ़ने से सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। वायरल इन्फेक्शन: मौसम में उतार-चढ़ाव (कभी बारिश, कभी धूप, कभी ठंड) से वायरल बुखार, खांसी और जुकाम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।   बचाव के उपाय: बाहर निकलते समय सिर और कान को ढककर रखें। लेयरिंग (Layering) करें: एक मोटे जैकेट की जगह दो-तीन पतले गर्म कपड़े पहनना ज्यादा बेहतर होता है। गर्म पानी और ताजा भोजन का सेवन करें। विटामिन सी (Vitamin C) युक्त फल खाएं ताकि इम्यूनिटी बनी रहे।   यातायात एडवाइजरी: कोहरे में ड्राइविंग के नियम आने वाले दिनों में घने कोहरे को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने वाहन चालकों के लिए कुछ सुझाव दिए हैं:   फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करें: अपनी गाड़ी में फॉग लाइट्स हमेशा ठीक रखें और कोहरे में लो बीम (Low Beam) पर गाड़ी चलाएं। हाई बीम पर रोशनी कोहरे से परावर्तित होकर वापस आपकी आंखों में लगती है, जिससे कुछ दिखाई नहीं देता। धीमी गति: कोहरे में दृश्यता का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है, इसलिए गति सीमा के भीतर ही वाहन चलाएं। सड़क पर पट्टियों का पालन करें: अगर आगे कुछ दिखाई न दे, तो सड़क के किनारे बनी सफेद या पीली पट्टियों को देखते हुए गाड़ी चलाएं। इंडिकेटर का प्रयोग: लेन बदलते समय या मुड़ते समय इंडिकेटर का इस्तेमाल जरूर करें और अपनी गाड़ी के इमरजेंसी इंडिकेटर (Hazard lights) का उपयोग तभी करें जब गाड़ी खड़ी हो या बहुत खतरनाक स्थिति हो।   नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम का हाल दिल्ली से सटे इलाकों का हाल भी कमोबेश एक जैसा ही है।   नोएडा और गाजियाबाद: यहां ऊंची इमारतों के कारण हवा का प्रवाह कई बार रुक जाता है, जिससे कोहरा ज्यादा देर तक बना रह सकता है। 27 तारीख की बारिश से यहाँ की सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है। गुरुग्राम और फरीदाबाद: अरावली की पहाड़ियों के नजदीक होने के कारण गुरुग्राम में रात का तापमान दिल्ली से भी 1-2 डिग्री कम दर्ज किया जा सकता है। यहाँ शीत लहर (Cold Wave) का असर ज्यादा महसूस होगा।   फरवरी की शुरुआत तक कैसी रहेगी सर्दी? आमतौर पर जनवरी के अंत तक सर्दी कम होने लगती है, लेकिन इस बार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता ने सर्दी को बढ़ा दिया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि फरवरी के पहले सप्ताह तक सुबह और शाम की ठंडक बरकरार रहेगी। 27 जनवरी की बारिश के बाद जब आसमान साफ होगा, तो 'रेडिएशन कूलिंग' (Radiation Cooling) के कारण रातें और ठंडी हो जाएंगी।   फरवरी में दिन का तापमान धीरे-धीरे बढ़ेगा और धूप में तेजी आएगी, लेकिन सुबह की सैर करने वालों को फरवरी के मध्य तक जैकेट की जरूरत महसूस होगी।   कुल मिलाकर, दिल्ली-एनसीआर के लोगों को अभी सर्दी से राहत मिलती नहीं दिख रही है। 27 जनवरी को होने वाली बारिश और उसके साथ चलने वाली 40 किमी/घंटा की हवाएं ठंड को चरम पर पहुंचा देंगी। 4 डिग्री तक गिरता पारा और घना कोहरा जनजीवन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप मौसम विभाग के अलर्ट को गंभीरता से लें। घर से बाहर निकलते समय मौसम का हाल जरूर देख लें और अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखें। यह सर्दी का 'फिनाले' हो सकता है, लेकिन यह जाते-जाते अपना असर जरूर दिखाएगा।

Unknown जनवरी 25, 2026 0
delhi ncr weather alert heavy rain snowfall cold wave western disturbance january 23 2026
उत्तर भारत पर कुदरत का 'डबल अटैक': दिल्ली-NCR में कल होगी झमाझम बारिश और 40kmph की रफ्तार से चलेंगी बर्फीली हवाएं; पहाड़ों पर 'सफेद आफत' का अलर्ट

नई दिल्ली: उत्तर भारत के मौसम (North India Weather) में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कड़ाके की ठंड और कोहरे की मार झेल रहे दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के लोगों के लिए शुक्रवार का दिन मुश्किल भरा हो सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि एक सक्रिय और तीव्र पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के चलते मैदानी इलाकों में बारिश और पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी होने की संभावना है। यह मौसम प्रणाली आज रात से ही अपना असर दिखाना शुरू कर देगी, जिससे तापमान में गिरावट और ठिठुरन बढ़ने के आसार हैं।READ ALSO:-भारत की अब तक की सबसे 'हाई-टेक' जनगणना का शंखनाद: 2027 में गिना जाएगा हर सिर और हर घर; पहली बार जातियों का भी होगा डेटाबेस, 33 सवालों में कैद होगी देश की तस्वीर   इस विस्तृत मौसम रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आने वाले 24 से 48 घंटे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और पहाड़ी राज्यों के लिए कैसे रहेंगे। साथ ही, 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के आसपास मौसम का मिजाज कैसा रहेगा, इस पर भी नजर डालेंगे।   सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ: मौसम बिगड़ने की असली वजह #Rain and #hailstorm in #Amritsar. Rain in #Sikar #Ganganagar & #Hanumangarh. Parts of #Haryana #Rajasthan #Punjab and #Delhi to get rain by early morning. #DelhiRains @SkymetWeather @JATINSKYMEThttps://t.co/6X91agewSo pic.twitter.com/qgjuwRmpvk — Mahesh Palawat (@Mpalawat) January 22, 2026 मौसम विभाग के अनुसार, एक बेहद मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance - WD) उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे सही मायनों में 'तीव्र पश्चिमी विक्षोभ' कहा जा सकता है। यह सिस्टम आज (22 जनवरी) रात तक उत्तर भारत में दस्तक दे देगा।   क्या होता है असर? जब भी कोई पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है, तो वह भूमध्य सागर से नमी लेकर आता है। इसके टकराने से पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है। इस बार का सिस्टम इतना मजबूत है कि इसका असर जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली और राजस्थान तक दिखाई देगा।   दिल्ली-NCR: शुक्रवार को बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट  देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है।   शुक्रवार (23 जनवरी) का पूर्वानुमान: मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि 23 जनवरी यानी शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में आसमान में दिन भर बादल छाए रहेंगे। बारिश और हवाएं: केवल बादल ही नहीं, बल्कि हल्की से मध्यम बारिश (Light to Moderate Rain) होने की भी पूरी संभावना है। इसके साथ ही 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। तापमान में गिरावट: बारिश और ठंडी हवाओं के चलते दिन के तापमान में गिरावट आएगी, जिससे 'कोल्ड डे' (Cold Day) जैसी स्थिति बन सकती है। ठंड और ठिठुरन एक बार फिर लोगों को परेशान करेगी।   Delhi NCR Weather Update पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश प्रदूषण के स्तर को थोड़ा कम कर सकती है, लेकिन ठंड को बढ़ा देगी।   पहाड़ों पर कुदरत का रौद्र रूप: भारी बर्फबारी की चेतावनी मैदानी इलाकों में जहां बारिश होगी, वहीं पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी (Heavy Snowfall) का अलर्ट जारी किया गया है। सैलानियों और स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।   1. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख: मौजूदा पश्चिमी विक्षोभ का सबसे ज्यादा असर यहीं देखने को मिलेगा। 22 और 23 जनवरी को यहां काफी व्यापक से लेकर व्यापक बारिश और बर्फबारी होने की आशंका है। ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी से रास्ते बंद हो सकते हैं।   2. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: इन दोनों राज्यों में भी 23 जनवरी की रात तक मौसम खराब रहेगा।   शिमला, मनाली और नैनीताल: इन पर्यटन स्थलों पर भी बर्फबारी देखने को मिल सकती है। शीत दिवस (Cold Day): 23 जनवरी को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में 'शीत दिवस' रहने की संभावना जताई गई है। चेतावनी: प्रशासन ने भूस्खलन (Landslide) और फिसलन को लेकर ड्राइवरों को सतर्क रहने को कहा है।   पंजाब, हरियाणा और राजस्थान: गरज-चमक के साथ बौछारें पश्चिमी विक्षोभ का दायरा केवल दिल्ली या पहाड़ों तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरे उत्तर-पश्चिम भारत पर पड़ेगा।   पंजाब और हरियाणा: 22 और 23 जनवरी को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर बिजली कड़कने (Lightning) और ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी संभावना है। राजस्थान और पश्चिमी यूपी: उत्तरी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों (मेरठ, मुजफ्फरनगर, आगरा आदि) में भी गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं। तेज हवाएं: इन राज्यों में 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जो आंधी-तूफान का रूप भी ले सकती हैं।   किसानों के लिए यह बारिश दोधारी तलवार साबित हो सकती है। जहां गेहूं की फसल के लिए हल्की बारिश फायदेमंद है, वहीं ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हो सकता है।   26 जनवरी तक कैसा रहेगा मौसम? (Forecast till Republic Day) मौसम विभाग ने केवल 23 जनवरी तक ही नहीं, बल्कि आगे के दिनों के लिए भी अपडेट जारी किया है। 1. कोहरे की वापसी: बारिश के बाद हवा में नमी बढ़ जाएगी, जिसके चलते कोहरा (Fog) वापसी करेगा।   24 और 25 जनवरी: पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ इलाकों में सुबह और रात के समय घना से 'बहुत घना कोहरा' (Very Dense Fog) छाने की संभावना है। दृश्यता (Visibility): कोहरे के कारण विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम हो सकती है, जिससे यातायात प्रभावित होगा।   2. अगला पश्चिमी विक्षोभ: राहत की उम्मीद कम है क्योंकि एक और पश्चिमी विक्षोभ कतार में है। मौसम विभाग के मुताबिक, एक और तेज पश्चिमी विक्षोभ 26 से 28 जनवरी तक उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। इसका मतलब है कि गणतंत्र दिवस (Republic Day) के आसपास भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।   नागरिकों के लिए सलाह (Advisory) इस बदलते मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन ने कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है:   गर्म कपड़े: घर से बाहर निकलते समय पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें, खासकर शुक्रवार को जब तेज हवाएं चलेंगी। वाहन चालन: बारिश और गीली सड़कों पर गाड़ी सावधानी से चलाएं। 24-25 जनवरी को कोहरे के दौरान फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करें। पर्यटक: अगर आप पहाड़ों पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो मौसम का अपडेट चेक करके ही निकलें। भारी बर्फबारी में फंसने से बचें। सेहत: बदलते मौसम में वायरल फीवर और सर्दी-जुकाम का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए खान-पान का ध्यान रखें।   कुल मिलाकर, Delhi NCR Weather Update यह है कि अगले 48 घंटे उत्तर भारत के लिए मौसम के लिहाज से काफी हलचल भरे रहने वाले हैं। शुक्रवार को बारिश और तेज हवाओं का 'डबल अटैक' ठंड को बढ़ाएगा, जबकि पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर जारी रहेगा। 26 जनवरी तक मौसम के साफ होने के आसार कम हैं, क्योंकि एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे रहे हैं।   ऐसे में जरूरी है कि आप मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखें और सुरक्षित रहें।   शुक्रवार (23 जनवरी) को दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा और यूपी में बारिश के साथ तेज हवाएं चलेंगी। पहाड़ों (J&K, हिमाचल, उत्तराखंड) में भारी बर्फबारी का अलर्ट है। यह सब एक तीव्र पश्चिमी विक्षोभ के कारण हो रहा है। 24 जनवरी से घना कोहरा छाने और 26 जनवरी से एक और नए विक्षोभ के आने की संभावना है।

Unknown जनवरी 22, 2026 0
Delhi NCR Breaths Easy CAQM Revokes GRAP Stage III Restrictions as AQI Improves Construction Activities to Resume
दिल्ली-NCR के लिए 'सांस' लेने वाली खबर: हवा सुधरते ही हटा GRAP-3, अब फिर शुरू हो सकेंगे निर्माण कार्य; लेकिन अभी टला नहीं है पूरा खतरा!

नई दिल्ली/गाजियाबाद: कड़ाके की ठंड के बीच दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के लोगों और कारोबारियों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने क्षेत्र में सुधरती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज-III (Stage-III) की पाबंदियों को हटाने का फैसला किया है। यह फैसला 22 जनवरी, 2026 को हुई उप-समिति की समीक्षा बैठक के बाद लिया गया।READ ALSO:-मेरठ: स्कूटी से आया, घर पर चिपका नोटिस देखा और उड़ गए होश... अलकायदा का 'ब्रेनवॉश एक्सपर्ट' उजैद कुरैशी ऐसे हुआ फरार, इंडियन आर्मी थी निशाने पर   हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि भले ही ग्रैप-3 हट गया हो, लेकिन GRAP स्टेज-I और स्टेज-II की पाबंदियां अभी भी सख्ती से लागू रहेंगी। इसका मतलब है कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, बस थोड़ी ढील दी गई है।   क्यों लिया गया GRAP-3 हटाने का फैसला? CAQM की सब-कमेटी ने आज (22 जनवरी) दिल्ली-एनसीआर में एयर क्वालिटी के हालात और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान (Forecast) का विस्तृत रिव्यू किया।   AQI में सुधार: आंकड़ों के मुताबिक, आज दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 322 रिकॉर्ड किया गया, जो 'बेहद खराब' (Very Poor) श्रेणी के निचले स्तर पर है। मौसम का साथ: मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में हवा की गति और मौसम की स्थिति अनुकूल रहने की संभावना है। पूर्वानुमान है कि AQI 'गंभीर' (Severe - 400+) श्रेणी में नहीं जाएगा, बल्कि यह 'मॉडरेट' से 'खराब' या 'बेहद खराब' के बीच बना रहेगा। 16 जनवरी का आदेश वापस: सुधरते हालात को देखते हुए CAQM ने 16 जनवरी 2026 को लागू किए गए GRAP-3 के आदेश को वापस ले लिया है।   GRAP-3 हटने से क्या मिली राहत? ग्रैप-3 हटने का सबसे बड़ा असर निर्माण क्षेत्र (Real Estate & Construction) और परिवहन पर पड़ेगा। इससे आर्थिक गतिविधियों को फिर से रफ्तार मिलेगी।   निर्माण कार्यों को हरी झंडी: ग्रैप-3 के तहत निर्माण और तोड़फोड़ (Construction and Demolition) गतिविधियों पर लगा पूर्ण प्रतिबंध हटा लिया गया है। अब बिल्डर्स और ठेकेदार अपना काम फिर से शुरू कर सकते हैं। स्टोन क्रशर और माइनिंग: एनसीआर में स्टोन क्रशर जोन और खनन गतिविधियों पर लगी रोक भी हट गई है। BS-III और BS-IV वाहनों को राहत: आमतौर पर ग्रैप-3 लागू होने पर BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार पहिया वाहनों पर रोक लग जाती है। ग्रैप-3 हटने से इन वाहन मालिकों को भी सड़कों पर गाड़ी चलाने की अनुमति मिल जाएगी (बशर्ते राज्य सरकार ने कोई अलग आदेश न दिया हो)।   सावधान! अभी भी लागू रहेंगे ये नियम (Stage-I & II Active) आयोग ने साफ किया है कि Delhi GRAP-3 Restrictions Lifted होने का मतलब यह नहीं है कि प्रदूषण नियमों की अनदेखी की जाए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि AQI दोबारा 'गंभीर' श्रेणी में न पहुंचे, स्टेज-1 और स्टेज-2 के तहत निम्नलिखित कार्रवाई जारी रहेगी:   धूल नियंत्रण: निर्माण साइटों पर धूल उड़ने से रोकने के उपाय (C&D Waste Management Rules) करने होंगे। पानी का छिड़काव: सड़कों पर मशीनीकृत स्वीपिंग और पानी का छिड़काव तेज किया जाएगा। होटल/ढाबों पर तंदूर: कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक जारी रहेगी। जनरेटर का इस्तेमाल: डीजल जनरेटर सेट्स (DG Sets) के इस्तेमाल पर पाबंदियां रेगुलेटेड तरीके से लागू रहेंगी। कड़ी निगरानी: जिन निर्माण स्थलों को प्रदूषण नियमों के उल्लंघन के कारण विशेष रूप से बंद (Specific Closure Order) कराया गया था, वे तब तक नहीं खुलेंगे जब तक उन्हें आयोग या संबंधित एजेंसी से 'क्लीन चिट' नहीं मिल जाती।   नागरिकों से अपील: चार्टर का पालन करें CAQM ने सर्दियों के मौसम की नाजुकता को देखते हुए नागरिकों से 'सिटीजन चार्टर' (Citizen Charter) का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया है।   पब्लिक ट्रांसपोर्ट: लोग निजी गाड़ियों की जगह मेट्रो या बस का इस्तेमाल करें। कूड़ा न जलाएं: खुले में कूड़ा या बायोमास जलाने की घटनाओं की रिपोर्ट करें। वाहन प्रदूषण: अपनी गाड़ियों का PUC अपडेट रखें और रेड लाइट पर इंजन बंद करें।   दिल्ली-एनसीआर में GRAP-3 का हटना निश्चित रूप से राहत की खबर है, खासकर दिहाड़ी मजदूरों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए। 22 जनवरी को AQI का 322 पर आना मौसम में सुधार का संकेत है। हालांकि, प्रशासन और जनता दोनों को यह याद रखना होगा कि खतरा अभी टला नहीं है। स्टेज-1 और 2 का कड़ाई से पालन ही हमें दोबारा जहरीली हवा में सांस लेने से बचा सकता है।   CAQM ने 22 जनवरी 2026 को दिल्ली-NCR से GRAP स्टेज-3 की पाबंदियां हटा ली हैं। AQI में सुधार (322) को देखते हुए अब निर्माण कार्य फिर से शुरू हो सकेंगे। हालांकि, GRAP स्टेज-1 और 2 के नियम लागू रहेंगे। प्रशासन ने लोगों से प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग की अपील की है।

Unknown जनवरी 22, 2026 0
dry days list 2026 liquor ban january march hotel rules penalty
ड्राई डे अलर्ट: अगले 3 महीनों में इन 5 बड़े मौकों पर नहीं मिलेगी शराब, नोट कर लें तारीखें; होटलों के लिए भी गाइडलाइन जारी

नई दिल्ली (New Delhi): वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही आबकारी विभाग (Excise Department) ने शराब के शौकीनों और होटल व्यवसायियों के लिए एक महत्वपूर्ण कैलेंडर जारी किया है। यदि आप आने वाले महीनों में किसी पार्टी या समारोह की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। दिल्ली आबकारी विभाग ने जनवरी से मार्च 2026 तक के लिए 'ड्राई डे' (Dry Days) की आधिकारिक सूची घोषित कर दी है।READ ALSO:-मेरठ में खौफ का तांडव: 6 बदमाशों ने कारोबारी के परिवार को बनाया बंधक, कटर से काटकर उतारे महिलाओं के गहने; 10 लाख की सनसनीखेज डकैती   इस आदेश के मुताबिक, अगले तीन महीनों में कुल 5 दिन ऐसे होंगे जब शराब की दुकानें (Liquor Shops), बार और ठेके पूरी तरह बंद रहेंगे। प्रशासन ने इन तारीखों पर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।   इन तारीखों को डायरी में नोट कर लें (Dry Days List 2026) आबकारी विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राष्ट्रीय पर्व और प्रमुख धार्मिक त्योहारों के सम्मान में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। जनवरी से मार्च 2026 के बीच निम्नलिखित तारीखों पर 'ड्राई डे' रहेगा:   26 जनवरी (सोमवार): गणतंत्र दिवस (Republic Day) 15 फरवरी (रविवार): महाशिवरात्रि (Mahashivratri) 21 मार्च (शनिवार): ईद-उल-फितर (Eid-ul-Fitr) 26 मार्च (गुरुवार): राम नवमी (Ram Navami) 31 मार्च (मंगलवार): महावीर जयंती (Mahavir Jayanti)   इन दिनों पर शराब की खुदरा बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। इसका उद्देश्य त्योहारों और राष्ट्रीय पर्वों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना है।   होटलों के लिए क्या हैं विशेष नियम? (L-15 License Rules) इस बार के आदेश में एक महत्वपूर्ण बिंदु होटलों के संचालन को लेकर है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 'ड्राई डे' के दौरान होटलों को कुछ शर्तों के साथ आंशिक राहत दी गई है, लेकिन नियम बेहद सख्त हैं।   आदेश के अनुसार, जिन होटलों के पास L-15 (L-15 License) श्रेणी का लाइसेंस है, उन्हें अपने विदेशी मेहमानों और होटल में रुके हुए निवासियों (In-house guests) को शराब परोसने की अनुमति होगी।   क्या अनुमति है: L-15 लाइसेंस प्राप्त होटल अपने कमरों (Rooms) में रुके हुए मेहमानों को शराब सर्व कर सकते हैं। क्या अनुमति नहीं है: होटल के बार, रेस्टोरेंट या सार्वजनिक क्षेत्र में बाहर से आने वाले किसी भी ग्राहक (Outsiders) को शराब बेचने या परोसने की अनुमति बिल्कुल नहीं होगी। यदि कोई होटल बाहरी ग्राहकों को शराब परोसता पाया गया, तो इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।   यह नियम यह सुनिश्चित करता है कि पर्यटन प्रभावित न हो, लेकिन साथ ही ड्राई डे की पवित्रता और उद्देश्य भी बना रहे।   नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई (Penalty for Violations) आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन इस बार ड्राई डे को लेकर बेहद सतर्क है। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि यदि कोई भी शराब की दुकान (Liquor Vend), बार या क्लब चोरी-छिपे शराब बेचता (Black Marketing) पाया गया, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।   सजा के तौर पर: संबंधित प्रतिष्ठान का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किया जा सकता है। दुकान मालिक पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। दोषियों के खिलाफ कानूनी मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।   पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें इन विशेष दिनों पर शहर भर में औचक निरीक्षण (Surprise Checks) करेंगी और निगरानी रखेंगी।   ड्राई डे का महत्व और उद्देश्य भारत में ड्राई डे घोषित करने के पीछे मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक शांति और सौहार्द बनाए रखना है।   26 जनवरी (गणतंत्र दिवस): यह एक राष्ट्रीय पर्व है और इस दिन देश के संविधान के सम्मान में नशामुक्ति को बढ़ावा दिया जाता है। महाशिवरात्रि और राम नवमी: ये हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहार हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-पाठ करते हैं। ईद-उल-फितर और महावीर जयंती: ये दिन क्रमशः मुस्लिम और जैन समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। अहिंसा और संयम के संदेश को ध्यान में रखते हुए इन दिनों शराबबंदी लागू की जाती है।   आम जनता के लिए सलाह शराब के शौकीनों को सलाह दी जाती है कि वे इन तारीखों को ध्यान में रखते हुए अपना स्टॉक पहले ही खरीद लें, ताकि अंतिम समय में उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही, नागरिकों से अपील है कि वे ड्राई डे के नियमों का सम्मान करें और अवैध रूप से शराब खरीदने या बेचने की कोशिश न करें। प्रशासन का सहयोग करना एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।   संक्षिप्त सारांश: दिल्ली आबकारी विभाग ने जनवरी से मार्च 2026 के लिए ड्राई डे की सूची जारी कर दी है। 26 जनवरी, 15 फरवरी, 21 मार्च, 26 मार्च और 31 मार्च को शराब की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। हालांकि, L-15 लाइसेंस वाले होटल अपने कमरों में रुके मेहमानों को शराब परोस सकेंगे, लेकिन बाहरी ग्राहकों के लिए प्रतिबंध लागू रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Unknown जनवरी 21, 2026 0
north india cold wave dense fog alert delhi up punjab weather forecast 18 january 2026
उत्तर भारत में 'कोल्ड अटैक': दिल्ली से यूपी तक घने कोहरे और शीतलहर का रेड अलर्ट, माइनस में जाएगा पहाड़ों का पारा, जानें कल कैसा रहेगा मौसम?

नई दिल्ली/लखनऊ/चंडीगढ़। पूरा उत्तर भारत इस समय कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाओं की चपेट में है। जनवरी का महीना अपने मध्य पड़ाव को पार कर चुका है, लेकिन सर्दी के तेवर नरम होने के बजाय और तीखे होते जा रहे हैं। शनिवार (17 जनवरी) को भी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और बिहार के करोड़ों लोग कोहरे और गलन वाली सर्दी से जूझते नजर आए।READ ALSO:-गाजियाबाद-जेवर RRTS: रूट में कोई बदलाव नहीं, 72 किमी लंबे कॉरिडोर पर ही दौड़ेगी रैपिड रेल, गुरुग्राम लिंक पर आया नया अपडेट   भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्पष्ट कर दिया है कि राहत की उम्मीद अभी बेमानी है। मौसम विभाग ने रविवार, 18 जनवरी 2026 के लिए दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में भीषण शीतलहर (Severe Cold Wave) और घने कोहरे (Dense Fog) का अलर्ट जारी किया है। हालात यह हैं कि सुबह के वक्त विजिबिलिटी (दृश्यता) कई जगहों पर 50 मीटर से भी कम रह गई है, जिससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है।   दिल्ली-NCR: धुंध की चादर और 5 डिग्री का टॉर्चर देश की राजधानी दिल्ली में सर्दी का सितम जारी है। मौसम विभाग के अनुसार, रविवार (18 जनवरी) को भी दिल्लीवासियों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ेगा।   तापमान: दिल्ली में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों की तुलना में तापमान में मामूली सुधार (दशमलव में) देखा गया है, लेकिन बर्फीली हवाओं ने इस राहत को नाकाफी साबित कर दिया है। कोहरा: दिल्ली और एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद) में सुबह और रात के समय 'बहुत घना कोहरा' (Very Dense Fog) छाने की आशंका है। इससे सुबह काम पर जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। प्रदूषण: कोहरे के साथ-साथ प्रदूषण के कण मिलकर 'स्मॉग' (Smog) का निर्माण कर रहे हैं, जिससे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है।   उत्तर प्रदेश: गलन वाली सर्दी और बारिश के संकेत उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज दोरंगा बना हुआ है। रात और सुबह के वक्त हाड़ कंपाने वाली ठंड है, तो दिन में धूप निकलने से थोड़ी राहत मिल रही है।   गलन का प्रकोप: राज्य के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में बर्फीली हवाओं ने लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया है। सुबह के समय 'गलन' इतनी ज्यादा है कि अलाव ही एकमात्र सहारा नजर आ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ का असर: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे ठंड से थोड़ी राहत मिलेगी। बारिश की भविष्यवाणी: मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 22 जनवरी के आसपास पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। यह बारिश ठंड को और बढ़ा सकती है।   बिहार: धूप खिली पर कोहरा बरकरार बिहार में भी कमोबेश यूपी जैसे ही हालात हैं। राज्य के अधिकतर हिस्सों में दिन में तेज धूप निकल रही है, जिससे अधिकतम तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन तराई वाले इलाकों (नेपाल सीमा से सटे जिले) में कोहरा अब भी बरकरार है। मौसम विभाग ने बिहार में अगले सात दिनों तक मौसम शुष्क रहने की बात कही है, लेकिन सुबह और शाम की कनकनी बरकरार रहेगी।   पंजाब और हरियाणा: उत्तर भारत का 'कोल्ड स्टोर' इस समय मैदानी इलाकों में पंजाब और हरियाणा ठंड का केंद्र बने हुए हैं।   हरियाणा का हाल: हरियाणा का नारनौल इलाका सबसे ठंडा दर्ज किया गया है, जहां पारा गिरकर 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। हिसार और अंबाला में भी तापमान सामान्य से काफी नीचे है। पंजाब की स्थिति: पंजाब के अमृतसर में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। कोल्ड डे (Cold Day): मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक इन दोनों राज्यों के कई हिस्सों में 'शीत दिवस' (Cold Day) की स्थिति बनी रहेगी। इसका मतलब है कि दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से काफी नीचे रहेगा। बारिश का अलर्ट: पंजाब में 18 और 19 जनवरी को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय हो सकती है।   पहाड़ों का हाल: बर्फबारी से बढ़ी मैदानी ठंड मैदानी इलाकों में पड़ रही इस भीषण ठंड का सीधा कनेक्शन पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी से है।   बर्फबारी: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी (Snowfall) का दौर जारी है। माइनस में पारा: पर्यटन स्थल मनाली और कश्मीर की घाटियों में न्यूनतम तापमान शून्य से 7 डिग्री नीचे (-7°C) तक लुढ़क सकता है। मैदानों पर असर: पहाड़ों से होकर आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाएं (Northerly Winds) ही मैदानी इलाकों में ठिठुरन बढ़ा रही हैं।   यातायात पर कोहरे की मार: ट्रेनें लेट, उड़ानें प्रभावित घने कोहरे का सबसे बुरा असर यातायात सेवाओं पर पड़ा है।   रेल सेवा: उत्तर भारत से गुजरने वाली दर्जनों ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 2 से 8 घंटे की देरी से चल रही हैं। नई दिल्ली, कानपुर और लखनऊ स्टेशनों पर यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। हवाई सेवा: कम विजिबिलिटी के कारण दिल्ली एयरपोर्ट समेत अन्य हवाई अड्डों पर उड़ानों में देरी हो रही है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक करें। सड़क यातायात: यमुना एक्सप्रेसवे और अन्य हाईवे पर विजिबिलिटी बेहद कम है। पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर वाहन चालकों को फॉग लाइट्स (Fog Lights) का इस्तेमाल करने और धीमी गति से गाड़ी चलाने की सलाह दी है।   महानगरों का मौसम: मुंबई-बेंगलुरु में राहत जहां उत्तर भारत कांप रहा है, वहीं देश के अन्य हिस्सों में मौसम सुहावना है।   मुंबई और बेंगलुरु: यहां न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, जो काफी सुखद है। कोलकाता और रांची: पूर्वी भारत के इन शहरों में सुबह के समय हल्की ठंड महसूस की जा रही है, लेकिन दिन का मौसम साफ है।   आने वाले दिनों का पूर्वानुमान: क्या 21 जनवरी से बढ़ेगी ठंड? IMD के दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद 21 जनवरी से उत्तर भारत में एक बार फिर सर्दी की जोरदार वापसी हो सकती है। हवा की दिशा बदलते ही तापमान में फिर से गिरावट दर्ज की जाएगी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले पांच दिनों तक उत्तर-पश्चिमी भारत में कोहरे का असर बना रहेगा।   हेल्थ एडवाइजरी: सावधानी ही बचाव है भीषण ठंड को देखते हुए डॉक्टरों और प्रशासन ने विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं:   हृदय रोगी (Heart Patients): ठंड में खून की नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। बीपी के मरीज अपनी दवाएं समय पर लें और सुबह बहुत जल्दी वॉक पर जाने से बचें। बच्चे और बुजुर्ग: इन्हें ठंड से सबसे ज्यादा खतरा है। सिर और कान को अच्छे से ढककर रखें। खान-पान: शरीर को गर्म रखने के लिए गुड़, तिल, सूप और गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें। वाहन चलाना: कोहरे में लो-बीम पर हेडलाइट रखें और इंडिकेटर का प्रयोग करें।   उत्तर भारत में सर्दी का यह 'स्पेल' अभी लंबा चलने वाला है। 18 जनवरी का दिन भी ठंड और कोहरे के नाम रहेगा। ऐसे में, रजाई और अलाव ही आपके सबसे अच्छे साथी हैं। मौसम की मार से बचने के लिए सतर्क रहें और मौसम विभाग के अपडेट्स पर नजर बनाए रखें।

Unknown जनवरी 17, 2026 0
Instruction: Please create a professional news image relevant to this report.  Subject: A split-screen composition representing Delhi's Pollution Crisis and GRAP-4 restrictions.  Left Side: A hazy, smog-filled view of India Gate or Delhi traffic, sho
Delhi Pollution: दिल्ली की हवा हुई जहरीली, GRAP-4 की सख्त पाबंदियां लागू, ट्रकों की एंट्री बंद और स्कूलों पर आया ये बड़ा फैसला

नई दिल्ली/गाजियाबाद/नोएडा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर (NCR) के इलाकों में एक बार फिर प्रदूषण का जिन बोतल से बाहर आ गया है। सर्दियों के मौसम में हवा की गुणवत्ता (Air Quality) को लेकर चल रही जद्दोजहद के बीच 17 जनवरी का दिन दिल्लीवासियों के लिए भारी गुजरा। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में आए अचानक और तीव्र उछाल ने प्रशासन के हाथ-पांव फूला दिए हैं।READ ALSO:-SBI New Charges 2026: देश के करोड़ों ग्राहकों को झटका! 15 फरवरी से बदल रहे हैं ATM और IMPS के नियम, जानें अब कितना देना होगा टैक्स   हालात की गंभीरता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM - Commission for Air Quality Management) ने तत्काल प्रभाव से दिल्ली और एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चौथे और सबसे सख्त चरण, यानी स्टेज-IV (Stage-IV) को लागू करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब दिल्ली की हवा 'गंभीर' (Severe) श्रेणी को पार करते हुए खतरनाक स्तर पर पहुंच गई।   इस आदेश के बाद से दिल्ली में कई तरह की सख्त पाबंदियां लागू हो गई हैं, जिनका सीधा असर आम जनजीवन, यातायात, स्कूल और दफ्तरों पर पड़ने वाला है।   17 जनवरी का घटनाक्रम: कैसे बिगड़े हालात? शुक्रवार, 17 जनवरी को दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर तेजी से बदलता हुआ देखा गया। सीएक्यूएम (CAQM) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदूषण का ग्राफ कुछ ही घंटों में चिंताजनक रूप से ऊपर चढ़ गया।   शाम 4 बजे: दिल्ली का औसत AQI 400 रिकॉर्ड किया गया था। यह स्तर पहले से ही 'बहुत खराब' श्रेणी के उच्चतम स्तर पर था। रात 8 बजे: महज चार घंटे के भीतर, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण AQI उछलकर 428 पर पहुंच गया।   प्रदूषण बढ़ने की वजह (Scientific Reason): सीएक्यूएम के मुताबिक, इस अचानक बढ़ोतरी के पीछे कई मौसम संबंधी कारक जिम्मेदार हैं:   पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): मौसम में आए बदलाव और पश्चिमी विक्षोभ के चलते हवा की गति प्रभावित हुई है। मौसम संबंधी प्रतिकूल स्थितियां: तापमान में गिरावट और हवा की धीमी गति ने प्रदूषकों (Pollutants) को वातावरण में कैद कर लिया है। फैलाव की कमी (Lack of Dispersion): आमतौर पर हवा चलने से प्रदूषक कण बिखर जाते हैं, लेकिन मौजूदा स्थितियों में प्रदूषकों का फैलाव नहीं हो पा रहा है, जिससे वे सतह के पास जमा हो गए हैं और हवा जहरीली हो गई है।   CAQM का एक्शन: सर्वसम्मति से लिया गया फैसला जैसे ही एक्यूआई 428 पर पहुंचा, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की उप-समिति ने आपातकालीन बैठक की। समिति ने हवा की गुणवत्ता के मौजूदा ट्रेंड और भविष्य की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि अब ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है।   आयोग ने स्पष्ट किया कि यद्यपि तकनीकी रूप से GRAP-4 तब लागू होता है जब AQI 450 के पार जाता है, लेकिन वर्तमान में AQI 428 होने और स्थितियों के और बिगड़ने की प्रबल संभावना को देखते हुए, यह सक्रिय उपाय (Proactive Measure) के रूप में लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थिति को 'अति गंभीर' (Severe+) होने से पहले ही नियंत्रित करना है।   सीएक्यूएम ने एनसीआर प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (NCR Pollution Control Boards) और अन्य संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता को और खराब होने से रोकने के लिए उपायों को तुरंत बढ़ा दें।   GRAP-4: किन चीजों पर रहेगा अब पूर्ण प्रतिबंध? GRAP का चौथा चरण, जिसे 'गंभीर+' (Severe+) स्थितियों के लिए बनाया गया है, सबसे कड़े प्रतिबंधों को लागू करता है। ये पाबंदियां पहले से लागू GRAP स्टेज I, II और III के उपायों के अतिरिक्त होंगी। आइए विस्तार से जानते हैं कि अब दिल्ली में क्या-क्या बदलेगा:   1. ट्रकों की एंट्री पर 'नो एंट्री' (Truck Entry Ban) प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सबसे बड़ा प्रहार डीजल वाहनों पर किया गया है।   दिल्ली में प्रवेश बंद: दिल्ली की सीमाओं पर ट्रकों की एंट्री पूरी तरह से बैन कर दी गई है। छूट: केवल आवश्यक वस्तुओं (Essential Commodities) को लाने-ले जाने वाले ट्रकों और सीएनजी (CNG) या इलेक्ट्रिक (Electric) ट्रकों को ही दिल्ली में प्रवेश की अनुमति होगी। बाकी सभी भारी वाहनों को दिल्ली के बाहर ही रोक दिया जाएगा या डायवर्ट कर दिया जाएगा।   2. कंस्ट्रक्शन पर पूर्ण विराम (Construction Ban) धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए निर्माण कार्यों पर सबसे सख्त कदम उठाया गया है।   सरकारी और निजी दोनों बंद: अब तक कुछ सरकारी परियोजनाओं को छूट मिल सकती थी, लेकिन GRAP-4 लागू होने के बाद सरकारी और गैर-सरकारी (प्राइवेट) दोनों तरह के निर्माण कार्यों (Construction and Demolition activities) पर सख्ती से पाबंदी रहेगी। सड़क, फ्लाईओवर निर्माण ठप: इसमें राजमार्ग, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, पावर ट्रांसमिशन, और पाइपलाइन बिछाने जैसी बड़ी रैखिक (Linear) सार्वजनिक परियोजनाएं भी शामिल हो सकती हैं, जिन पर GRAP-3 तक आंशिक छूट हो सकती थी।   3. स्कूलों के लिए निर्देश (Schools Guidelines) बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा विभाग के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है।   हाइब्रिड मोड: स्कूलों को हाइब्रिड मोड (Hybrid Mode) पर चलाने की हिदायत दी गई है। इसका मतलब है कि स्कूल ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्पों पर विचार कर सकते हैं, ताकि बच्चों को जहरीली हवा में घर से बाहर न निकलना पड़े। कक्षाएं बंद करने का विकल्प: राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे छोटी कक्षाओं (जैसे प्राइमरी तक) के लिए शारीरिक कक्षाएं (Physical Classes) बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई का निर्णय ले सकती हैं। 4. दफ्तरों के लिए एडवाइजरी (Work From Home) वाहनों की संख्या कम करने के लिए ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए भी नियम सुझाए गए हैं। वर्क फ्रॉम होम (WFH): केंद्र सरकार, राज्य सरकार और निजी कंपनियों (Private Companies) को सलाह दी गई है कि वे अपने कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) की सुविधा लागू करें। 50% क्षमता: कई बार इस चरण में कार्यालयों को 50% क्षमता के साथ काम करने और बाकी कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देने का निर्देश दिया जाता है।   समझें GRAP का गणित: कब कौन सा चरण होता है लागू? ग्रैप (Graded Response Action Plan) दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की गंभीरता के हिसाब से लागू होने वाला एक आपातकालीन प्लान है। सीएक्यूएम द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार, इसे चार चरणों में बांटा गया है। मौजूदा स्थिति को समझने के लिए इन आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है:   GRAP स्टेज-1 (खराब / Poor): AQI रेंज: 201 से 300 कार्रवाई: धूल उड़ने से रोकना, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन, पीयूसी (PUC) की जांच, और खुले में कूड़ा जलाने पर रोक। GRAP स्टेज-2 (बहुत खराब / Very Poor): AQI रेंज: 301 से 400 कार्रवाई: डीजल जनरेटर सेट (DG Sets) पर पाबंदी, तंदूर में कोयले/लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक, पार्किंग फीस बढ़ाना ताकि लोग निजी वाहन कम इस्तेमाल करें। GRAP स्टेज-3 (गंभीर / Severe): AQI रेंज: 401 से 450 कार्रवाई: निर्माण और तोड़फोड़ (Construction & Demolition) पर रोक (कुछ सरकारी प्रोजेक्ट्स को छोड़कर), BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार पहिया वाहनों पर रोक। नोट: यह चरण दिल्ली में पहले से प्रभावी था। GRAP स्टेज-4 (अति गंभीर / Severe+): AQI रेंज: 450 से ऊपर (या 428+ पर सक्रिय उपाय के तौर पर, जैसा अभी हुआ) कार्रवाई: ट्रकों की एंट्री बैन, निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध, स्कूलों को बंद करना, और ऑड-ईवन (Odd-Even) जैसे कड़े फैसले।   जनता पर प्रभाव: क्या करें और क्या न करें? GRAP-4 लागू होने का मतलब है कि स्थिति स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इसे 'मेडिकल इमरजेंसी' के करीब माना जा सकता है।   स्वास्थ्य जोखिम: 400 से ऊपर का AQI स्वस्थ लोगों के लिए भी हानिकारक है और जिन्हें पहले से सांस या दिल की बीमारी है, उनके लिए यह जानलेवा हो सकता है। आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ आम समस्याएं हैं। नागरिकों से अपील: प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। सार्वजनिक परिवहन (मेट्रो, बस) का अधिक से अधिक उपयोग करें और निजी वाहनों का प्रयोग कम करें। मास्क का प्रयोग: घर से बाहर निकलते समय N95 मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है।   प्रशासन की तैयारी और निगरानी सीएक्यूएम ने एनसीआर के सभी संबंधित नोडल अधिकारियों को GRAP-4 के प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्माण स्थलों, औद्योगिक इकाइयों और ट्रैफिक का औचक निरीक्षण करने को कहा गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।   दिल्ली की सीमाओं पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि प्रतिबंधित ट्रकों को शहर में प्रवेश करने से रोका जा सके। इसके अलावा, सड़कों पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन (Anti-Smog Guns) का इस्तेमाल बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।   कब मिलेगी राहत? फिलहाल मौसम विभाग के अनुमान और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव को देखते हुए अगले कुछ दिनों तक राहत के आसार कम नजर आ रहे हैं। GRAP-4 की पाबंदियां तब तक जारी रहेंगी जब तक कि AQI में सुधार होकर वह निचले स्तर (स्टेज-3 या उससे कम) पर नहीं आ जाता।   प्रशासन की सख्ती और मौसम के मिजाज के बीच, दिल्लीवासियों को एक बार फिर अपनी जीवनशैली में बदलाव करना होगा। यह समय न केवल नियमों के पालन का है, बल्कि अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने का भी है।

Unknown जनवरी 17, 2026 0
Delhi Air Quality Remains Very Poor with AQI 343 Severe Conditions in Pusa and Okhla Forecast Predicts No Relief for 48 Hours
दिल्ली बनी 'गैस चैंबर': हवाओं की रफ्तार थमते ही राजधानी का दम घुटा, AQI 343 के पार; अगले 48 घंटे 'रेड अलर्ट' जैसी स्थिति!

देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर प्रदूषण की उस काली चादर में लिपट गई है, जिसने पिछले कई वर्षों से यहाँ की सर्दियों को डरावना बना रखा है। गुरुवार को दिल्ली का माहौल धूसर और भारी नजर आया। आंखों में जलन और गले में खराश के साथ दिल्लीवासियों के दिन की शुरुआत हुई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी आंकड़ों ने उन आशंकाओं की पुष्टि कर दी, जो आसमान में छाई धुंध को देखकर जताई जा रही थीं। गुरुवार को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 343 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' (Very Poor) श्रेणी में आता है।READ ALSO:-बिजनौर में कुत्ते को लोगों ने माना 'भैरव बाबा': 4 दिन से कर रहा मंदिर की परिक्रमा; महिलाएं कर रहीं दंडवत प्रणाम, 50 हजार लोग कर चुके दर्शन   हालांकि, आंकड़ों में मामूली गिरावट देखी गई है, लेकिन यह गिरावट "ऊंट के मुंह में जीरा" समान है। बुधवार को जहाँ AQI 353 था, वहीं गुरुवार को यह 10 अंक गिरकर 343 पर आया। लेकिन विज्ञान और स्वास्थ्य के नजरिए से देखें तो 300 से ऊपर का कोई भी आंकड़ा मानव शरीर के लिए धीमे जहर का काम करता है।   हवा की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली संस्थाओं और मौसम वैज्ञानिकों ने जो चेतावनी जारी की है, वह और भी चिंताजनक है। 'एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम' (Air Quality Early Warning System) का स्पष्ट कहना है कि अगले दो दिनों तक दिल्लीवासियों को इस जहरीली हवा से कोई राहत नहीं मिलने वाली है। वजह साफ है—हवा की धीमी गति। प्रकृति इस समय दिल्ली का साथ नहीं दे रही है, और इंसानी गतिविधियों ने हवा को पहले ही दूषित कर रखा है।   आंकड़ों का विश्लेषण - कहाँ कितना खतरा? प्रदूषण को समझने के लिए आंकड़ों की गहराई में जाना जरूरी है। CPCB का 'समीर' (SAMEER) ऐप, जो हर पल की खबर रखता है, गुरुवार को लाल रंग (Red Warning) में रंगा नजर आया।   दिल्ली का औसत AQI: 343 (बहुत खराब) दिल्ली में कुल मिलाकर 39 मॉनिटरिंग स्टेशन हैं। इनमें से गुरुवार को 34 स्टेशनों ने हवा की गुणवत्ता को 'बहुत खराब' श्रेणी में दिखाया, जबकि 5 स्टेशनों पर यह 'खराब' श्रेणी में थी। राहत की बात यह है कि कोई भी स्टेशन 'अच्छी' या 'संतोषजनक' स्थिति में नहीं था।   हॉटस्पॉट बने ये इलाके (Hotspots of Pollution): दिल्ली के कुछ इलाके ऐसे हैं जहाँ स्थिति औसत से भी बदतर है। ये इलाके अब 'गंभीर' (Severe) श्रेणी की दहलीज पर खड़े हैं या उसे पार कर चुके हैं। यहाँ सांस लेना एक स्वस्थ व्यक्ति को भी बीमार बनाने के लिए काफी है।   स्थान (Location) AQI (गुरुवार) श्रेणी (Category) संभावित स्वास्थ्य प्रभाव नेहरू नगर 388 गंभीर (Severe) फेफड़ों और हृदय पर घातक असर पूसा (Pusa) 386 गंभीर (Severe) सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई ओखला फेज-2 384 गंभीर (Severe) आंखों में जलन, अस्थमा का खतरा विवेक विहार 383 गंभीर (Severe) बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक आरके पुरम 381 गंभीर (Severe) लंबे समय तक संपर्क हानिकारक   ये आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं है। चाहे वह पॉश इलाका आरके पुरम हो या औद्योगिक क्षेत्र ओखला, हवा हर जगह जहरीली हो चुकी है।   क्यों नहीं मिल रही राहत? (वैज्ञानिक कारण) खबरीलाल ने मौसम विशेषज्ञों से बात की और यह समझने की कोशिश की कि आखिर क्यों तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदूषण का स्तर नीचे नहीं आ रहा है। इसके पीछे तीन प्रमुख वैज्ञानिक कारण सामने आए हैं:   1. हवा की मंद गति (Low Wind Speed): प्रदूषण कम होने के लिए सबसे जरूरी कारक है तेज हवा। जब हवा तेज चलती है, तो वह अपने साथ धूल और धुएं के कणों (PM 2.5 और PM 10) को उड़ा ले जाती है, जिससे प्रदूषक एक जगह जमा नहीं होते।   'एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम' की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में दिल्ली में सतह पर चलने वाली हवाओं की गति 10 किलोमीटर प्रति घंटे से भी कम है। कई इलाकों में तो हवा लगभग स्थिर (Calm) है। इस कारण वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और अन्य प्रदूषक वातावरण की निचली सतह में ही फंसे रह गए हैं। इसे 'लॉकिंग इफेक्ट' कहा जाता है।   2. तापमान में गिरावट (Drop in Temperature): जनवरी का मध्य चल रहा है और ठंड अपने चरम पर है। विज्ञान का नियम है कि ठंडी हवा भारी होती है और वह ऊपर नहीं उठ पाती। इसके विपरीत, गर्म हवा हल्की होती है और प्रदूषकों को लेकर ऊपर वायुमंडल में चली जाती है। ठंड के कारण 'मिक्सिंग हाइट' (Mixing Height) कम हो गई है। मिक्सिंग हाइट वह ऊंचाई है जहाँ तक हवा और प्रदूषक मिल सकते हैं। इसके कम होने का मतलब है कि प्रदूषण को फैलने के लिए बहुत कम जगह मिल रही है, जिससे सांद्रता (Concentration) बढ़ रही है।   3. वेंटिलेशन इंडेक्स (Ventilation Index): मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली का वेंटिलेशन इंडेक्स इस समय काफी कम है। यह इंडेक्स हवा की गति और मिक्सिंग हाइट का गुणा होता है। जब यह इंडेक्स 6000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से कम होता है, तो प्रदूषकों का बिखराव बहुत मुश्किल हो जाता है। अगले दो दिनों तक इसके सुधरने के आसार नहीं हैं।   जमीन पर हालात - पर्यटकों से लेकर आम आदमी तक प्रदूषण का यह स्तर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, इसका सीधा असर दिल्ली की सड़कों और पर्यटन स्थलों पर देखने को मिल रहा है। कर्तव्य पथ का नजारा:   दिल्ली की शान 'कर्तव्य पथ' (India Gate) पर जहाँ आम दिनों में पर्यटकों का हुजूम साफ हवा का आनंद लेता था, वहाँ गुरुवार को नजारा बदला हुआ था। धुंध (Smog) की वजह से इंडिया गेट की दृश्यता (Visibility) कम थी। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि विदेशी पर्यटक, जो भारत की सुंदरता देखने आए हैं, वे अपने चेहरों पर मास्क लगाए नजर आए।   लंदन से आए एक पर्यटक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "मैंने सुना था कि दिल्ली सुंदर है, लेकिन यहाँ उतरते ही मुझे गले में खराश महसूस होने लगी। मेरी ट्रेवल एजेंसी ने मुझे N-95 मास्क पहनने की सलाह दी है। यह थोड़ा निराशाजनक है।"   यह स्थिति भारत की वैश्विक छवि के लिए भी चिंता का विषय है। पर्यटन सीजन के पीक पर प्रदूषण का यह हाल पर्यटकों को डरा रहा है।   सुबह की सैर हुई बंद: लोधी गार्डन और नेहरू पार्क जैसे स्थानों पर, जहाँ सुबह हजारों लोग योग और सैर के लिए आते थे, अब सन्नाटा पसरने लगा है। डॉक्टरों की सख्त हिदायत है कि 'बहुत खराब' AQI में सुबह की सैर फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती है। जो लोग आ भी रहे हैं, वे मजबूरी में आ रहे हैं या फिर उन्हें खतरे का अंदाजा नहीं है।   स्वास्थ्य पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' (Health Impact Analysis) AQI 343 का मतलब क्या है? इसे हल्के में लेना भारी भूल हो सकती है। खबरीलाल ने वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ों के विशेषज्ञ) से बात कर यह समझा कि यह हवा शरीर के अंदर क्या तांडव मचाती है।   PM 2.5: अदृश्य हत्यारा इस प्रदूषण में सबसे खतरनाक तत्व है PM 2.5 (Particulate Matter 2.5)। ये कण इतने सूक्ष्म होते हैं (बाल की चौड़ाई से 30 गुना छोटे) कि ये न केवल हमारे फेफड़ों में गहराई तक घुस जाते हैं, बल्कि ये रक्तप्रवाह (Bloodstream) में भी शामिल हो सकते हैं।   तत्कालिक प्रभाव (Immediate Effects): आंखों में जलन और पानी आना। गले में लगातार खराश और सूखी खांसी। सांस फूलना, खासकर सीढ़ियां चढ़ते वक्त। सिरदर्द और थकान महसूस होना। दीर्घकालिक प्रभाव (Long-term Effects): हृदय रोग: जब प्रदूषक खून में मिलते हैं, तो वे धमनियों में सूजन पैदा कर सकते हैं, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 20-30% बढ़ जाता है। फेफड़ों का कैंसर: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वायु प्रदूषण को कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाला) घोषित किया है। बच्चों पर असर: दिल्ली में पल रहे बच्चों के फेफड़े पूरी क्षमता तक विकसित नहीं हो पा रहे हैं। एक रिसर्च के मुताबिक, दिल्ली के बच्चों के फेफड़े अमेरिका के बच्चों की तुलना में 10% कमजोर हैं।   डॉक्टरों की राय: एम्स (AIIMS) के पूर्व निदेशक और वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया अक्सर यह चेतावनी देते रहे हैं कि प्रदूषण के दिनों में ओपीडी में सांस के मरीजों की संख्या 20 से 30 प्रतिशत बढ़ जाती है। नेबुलाइज़र की मांग बढ़ जाती है और अस्थमा के मरीजों को अटैक आने का खतरा दोगुना हो जाता है।   क्या है AQI के पैमाने? (Understanding the Scale) अपने पाठकों की जानकारी के लिए हम बता दें कि AQI को कैसे समझा जाए:   0-50 (अच्छा): यह सबसे आदर्श स्थिति है। 51-100 (संतोषजनक): संवेदनशील लोगों को थोड़ी दिक्कत हो सकती है। 101-200 (मध्यम): अस्थमा और हृदय रोगियों के लिए ठीक नहीं। 201-300 (खराब): लंबे समय तक संपर्क में रहने पर किसी को भी सांस की तकलीफ हो सकती है। 301-400 (बहुत खराब - वर्तमान स्थिति): लंबे समय तक संपर्क में रहने पर सांस की बीमारी हो सकती है। 401-500 (गंभीर): स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार पड़ सकता है, बीमारों की जान को खतरा।   गुरुवार को दिल्ली 343 पर थी, यानी हम 'गंभीर' श्रेणी से बहुत दूर नहीं हैं। कुछ इलाके जैसे नेहरू नगर (388) तो पहले ही गंभीर स्थिति के करीब हैं।   प्रशासन के कदम और GRAP की स्थिति   दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया जाता है। वर्तमान में AQI 'बहुत खराब' श्रेणी में होने के कारण GRAP के चरण-1 और चरण-2 के कई प्रतिबंध लागू हैं।   क्या-क्या है प्रतिबंधित? तंदूर पर रोक: होटलों और रेस्तरां में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक है। डीजल जनरेटर: आवश्यक सेवाओं को छोड़कर डीजल जनरेटर सेट (DG Sets) चलाने पर पाबंदी है। धूल नियंत्रण: निर्माण स्थलों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए कड़े नियम लागू हैं। एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल अनिवार्य है। सफाई: सड़कों पर मशीनीकृत सफाई (Mechanical Sweeping) और पानी के छिड़काव को बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं।   हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या ये कदम पर्याप्त हैं? जमीन पर नियमों का उल्लंघन अब भी जारी है। कई जगहों पर खुले में कूड़ा जलाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जो प्रदूषण में 'आग में घी' का काम करती हैं।   खबरीलाल विशेष - पाठकों के लिए 'सर्वाइवल गाइड' इस जहरीले माहौल में आपको अपना और अपने परिवार का बचाव कैसे करना है? यहाँ कुछ विशेषज्ञ प्रमाणित उपाय दिए जा रहे हैं:   1. घर के अंदर की सुरक्षा: खिड़कियाँ और दरवाजे मुख्य रूप से सुबह और शाम के समय बंद रखें, जब प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है। अगर संभव हो तो HEPA फिल्टर वाले एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। घर के अंदर अगरबत्ती या धूपबत्ती जलाने से बचें, यह भी पीएम 2.5 का स्रोत है।   2. बाहर निकलते समय: कपड़े के साधारण मास्क या रूमाल का प्रयोग न करें, ये प्रदूषण के सूक्ष्म कणों को नहीं रोक पाते। केवल N-95 या N-99 मास्क का ही प्रयोग करें। अपनी आंखों को धूल और धुएं से बचाने के लिए चश्मा पहनें। ट्रैफिक सिग्नल्स पर अपनी गाड़ी का इंजन बंद कर दें (Red Light On, Gaadi Off)।   3. खान-पान में बदलाव: गुड़ का सेवन: अपने भोजन के बाद थोड़ा गुड़ खाएं। यह फेफड़ों से प्रदूषकों को बाहर निकालने में मदद करता है। विटामिन सी: संतरा, आंवला और नींबू जैसे खट्टे फलों का सेवन बढ़ा दें। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाते हैं। पानी: दिन भर में खूब पानी पिएं ताकि शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें।   4. विशेष सावधानी: छोटे बच्चों को आउटडोर गेम्स (जैसे क्रिकेट, फुटबॉल) खेलने के लिए पार्क न भेजें। उन्हें इनडोर गेम्स खेलने के लिए प्रेरित करें। बुजुर्गों का ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल नियमित चेक करते रहें।   एक सामूहिक जिम्मेदारी दिल्ली का प्रदूषण अब केवल सरकार की समस्या नहीं रह गया है, यह एक 'जन स्वास्थ्य आपातकाल' (Public Health Emergency) है। गुरुवार का 343 का AQI एक चेतावनी है कि अगर अब भी नहीं संभले, तो भविष्य और भी धुंधला होगा।   अगले दो दिन दिल्लीवासियों के लिए कठिन होने वाले हैं। हवा नहीं चलेगी, इसलिए प्रदूषक जमे रहेंगे। ऐसे में बचाव ही एकमात्र इलाज है। हम, खबरीलाल की टीम, आपसे अपील करते हैं कि नियमों का पालन करें, वाहन कम चलाएं और सुरक्षित रहें।   जब तक कुदरत मेहरबान नहीं होती और तेज हवाएं या बारिश नहीं आती, तब तक अपनी सुरक्षा अपने हाथ में है।

Unknown जनवरी 16, 2026 0
Delhi Dehradun Economic Corridor 99 Percent Complete Set to Open in February Travel Time Cut to 2 5 Hours
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: पहाड़ों का सफर अब 'हवा' से बातें! ना जाम, ना थकान... सिर्फ 2.5 घंटे में पहुंचेंगे दून, फरवरी में खुलने जा रहा है उत्तर भारत का 'ग्रोथ इंजन'

नई दिल्ली/देहरादून: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप दिल्ली में अपने घर पर सुबह का नाश्ता करें और दोपहर का खाना देहरादून की वादियों या मसूरी की पहाड़ियों में खाएं? कुछ साल पहले तक यह ख्याल किसी सपने जैसा लगता था, क्योंकि दिल्ली से देहरादून का सफर मतलब—मेरठ का जाम, मुजफ्फरनगर की भीड़भाड़ और टूटी सड़कों की थकान। लेकिन, अब यह सपना हकीकत में बदलने वाला है।Read also:-मेरठ: भीषण ठंड का टॉर्चर, कक्षा 9 तक के स्कूल दो दिन के लिए बंद, 10वीं-12वीं का समय बदला, DIOS का आदेश जारी   उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को नया आयाम देने वाला दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (Delhi-Dehradun Economic Corridor) बनकर लगभग तैयार है। 210 किलोमीटर लंबी यह परियोजना सिर्फ डामर और कंक्रीट से बनी सड़क नहीं है, बल्कि यह विकास की एक नई रेखा है जो दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को एक सूत्र में पिरोने जा रही है। सूत्रों की मानें तो फरवरी के पहले हफ्ते के बाद किसी भी दिन इसका उद्घाटन हो सकता है।   एक नए युग की शुरुआत: 'एक्सप्रेसवे' या 'सुपर हाईवे'? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इसे तकनीकी रूप से 'एक्सेस-कंट्रोल हाईवे' (Access-Controlled Highway) क्यों कहा जा रहा है, जबकि आम बोलचाल में नेता और जनता इसे 'एक्सप्रेसवे' कह रहे हैं।   यह कॉरिडोर पारंपरिक एक्सप्रेसवे से थोड़ा अलग लेकिन सुविधाओं में उससे कहीं आगे है।   एक्सेस कंट्रोल: इसका मतलब है कि इस सड़क पर कोई भी, कहीं से भी नहीं चढ़ सकता। इसके लिए निश्चित एंट्री और एग्जिट प्वाइंट (Interchanges) बनाए गए हैं। इससे मवेशियों, ट्रैक्टरों या स्थानीय ट्रैफिक के अचानक सड़क पर आने का खतरा खत्म हो जाता है। रफ्तार: इस कॉरिडोर को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है। सुविधाएं: बेहतर राइड क्वालिटी, सुरक्षित अंडरपास, इंटरचेंज, स्मार्ट टोल प्लाजा और हर थोड़ी दूरी पर सुविधाजनक 'पिट स्टॉप' (Rest Areas) इसे देश के चुनिंदा हाई-स्पीड कॉरिडोर में शामिल करते हैं।   सफरनामा: अक्षरधाम से दून तक का सफर कैसा होगा? इस कॉरिडोर का सफर दिल्ली के दिल अक्षरधाम से शुरू होता है। लेकिन क्या शुरुआत से ही सफर सुहाना होगा? ग्राउंड रिपोर्ट कुछ और ही बयां करती है।   दिल्ली से लोनी: शुरुआती बाधाएं इस कॉरिडोर की शुरुआत अक्षरधाम मंदिर के पास से होती है। यह इलाका पहले से ही दिल्ली के सबसे व्यस्त ट्रैफिक प्वाइंट्स में से एक है।   चोक प्वाइंट्स: अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन और उसके आसपास का ट्रैफिक अभी भी एक चुनौती है। शुरुआती कुछ किलोमीटर में आपको दोपहिया, तिपहिया और रोंग साइड (Wrong Side) चलने वाले वाहनों का सामना करना पड़ सकता है। फिनिशिंग टच: दिल्ली से यूपी बॉर्डर (लोनी) तक के हिस्से में अभी भी कई जगह अंतिम चरण का काम चल रहा है। कहीं सड़कों के किनारे 'शोल्डर' भरे जा रहे हैं, तो कहीं स्ट्रक्चर को अंतिम मजबूती दी जा रही है। मजदूर दिन-रात एक करके इसे डेडलाइन तक पूरा करने में जुटे हैं।   लोनी के बाद: असली रफ्तार जैसे ही आप गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर को पार करेंगे, तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। यहां से 6-लेन की चौड़ी और सपाट सड़क आपका स्वागत करेगी। लोनी के बाद का सफर 'मक्खन' जैसा है। यहां आपको न तो गड्ढे मिलेंगे और न ही बेवजह के ब्रेकर। यह हिस्सा पूरी तरह से 'एक्सेस कंट्रोल' है, यानी आपको बीच में कोई रुकावट नहीं मिलेगी।   किसानों का संघर्ष और सरकार का लचीलापन: कैसे बदला डिजाइन? इस एक्सप्रेसवे का निर्माण आसान नहीं था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जो किसान आंदोलनों का गढ़ माना जाता है, वहां जमीन अधिग्रहण और निर्माण कार्य में कई चुनौतियां आईं। विशेष रूप से इस प्रोजेक्ट के दूसरे चरण (Phase 2) में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले।   गन्ना किसानों की मांग और ऊंचे अंडरपास लगभग 13,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना में सरकार को कई बार अपने ब्लूप्रिंट (Design) में बदलाव करना पड़ा।   मुजफ्फरनगर का मामला: मुजफ्फरनगर के करौंदा महाजन इलाके में किसानों ने निर्माण कार्य रोक दिया था। उनकी समस्या व्यावहारिक थी—इस क्षेत्र में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है। किसानों का कहना था कि गन्ने से लदे उनके ट्रैक्टर और ट्रॉलियां सामान्य ऊंचाई के अंडरपास से नहीं निकल पाएंगे। सरकार का फैसला: NHAI ने किसानों की बात मानी और अंडरपास की ऊंचाई को मानक से बढ़ाकर 5.5 मीटर करने का फैसला किया। इसके लिए सड़क के लेवल को 1 मीटर और ऊपर उठाना पड़ा। यह दिखाता है कि विकास और स्थानीय जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाया गया।   सहारनपुर और शामली का विरोध बादगांव इंटरचेंज: सहारनपुर के बादगांव में भी स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। उनकी मांग थी कि एक्सप्रेसवे उनके इलाके से गुजर रहा है, तो उन्हें इसका फायदा भी मिलना चाहिए। इसके बाद वहां एक अतिरिक्त इंटरचेंज (Interchange) बनाया गया, ताकि स्थानीय लोग एक्सप्रेसवे पर चढ़ और उतर सकें। बिराल का पुल: मुजफ्फरनगर के बिराल इलाके में एक सिंचाई परियोजना आड़े आ रही थी, जिसके कारण एक महत्वपूर्ण पुल के निर्माण में देरी हुई। अब यह पुल लगभग तैयार है। इसके अलावा, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन की हाई-टेंशन लाइनों को शिफ्ट करना भी एक बड़ा सिरदर्द था, जिसे अब सुलझा लिया गया है।   इंजीनियरिंग का चमत्कार: 99% काम पूरा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार, कॉरिडोर के चारों चरणों का औसतन 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।   डेडलाइन: जो 1% काम बचा है, वह मुख्य रूप से पेंटिंग, साइनेज (Signage), और सौंदर्यीकरण का है। इसे अगले 7-10 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। राइड क्वालिटी (Ride Quality): जो लोग दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे या ईस्टर्न पेरिफेरल पर सफर कर चुके हैं, वे जानते हैं कि कई बार जल्दी में बनाई गई सड़कों पर गाड़ी उछलती है। लेकिन इस कॉरिडोर पर ऐसा नहीं होगा। NHAI ने समझदारी दिखाते हुए सड़क की 'लेइंग' (Laying) पिछले मॉनसून से पहले ही कर दी थी। इससे सड़क को सेट होने (Settling) का पूरा समय मिल गया। अब इस पर गाड़ी चलाने का अनुभव बेहद स्मूथ होगा।   चार चरणों (Phases) का पूरा ब्यौरा यह पूरा कॉरिडोर चार अलग-अलग चरणों में बांटा गया है, जो अलग-अलग चुनौतियों और विशेषताओं के साथ आते हैं:   चरण 1 (दिल्ली से EPE): यह हिस्सा अक्षरधाम से शुरू होकर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (बागपत के पास) तक जाता है। यह 31.6 किलोमीटर लंबा है। यह एक 'ब्राउनफील्ड' (Brownfield) प्रोजेक्ट है, यानी पुरानी सड़क को ही सुधारकर और एलिवेटेड बनाकर इसे 6-लेन किया गया है। चरण 2 (बागपत से सहारनपुर): यह सबसे लंबा हिस्सा है—करीब 120 किलोमीटर। यह बागपत के EPE इंटरचेंज से शुरू होकर सहारनपुर बाईपास तक जाता है। यह पूरी तरह से 'ग्रीनफील्ड' (Greenfield) है, यानी खेतों के बीच से नई सड़क निकाली गई है। यह शामली और मुजफ्फरनगर के जिलों से होकर गुजरता है। चरण 3 (सहारनपुर से गणेशपुर): यह 42 किलोमीटर का हिस्सा सहारनपुर बाईपास से उत्तराखंड के गणेशपुर तक जाता है। यह हिस्सा पूरी तरह बनकर तैयार है और ट्रायल के लिए फिट है। चरण 4 (गणेशपुर से देहरादून): यह सबसे महत्वपूर्ण और सुंदर हिस्सा है। 20 किलोमीटर के इस हिस्से में राजाजी नेशनल पार्क का क्षेत्र आता है। इसमें से लगभग 15-16 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड है और बाकी टनल (सुरंग) के रूप में है।   राजाजी नेशनल पार्क: वन्यजीवों के लिए एशिया का सबसे लंबा कॉरिडोर इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरणीय संवेदनशीलता के साथ तालमेल है। कॉरिडोर का अंतिम हिस्सा उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से होकर गुजरता है, जो हाथियों, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों का घर है।   इंजीनियरिंग और पर्यावरण का संतुलन 12 किमी लंबा एलिवेटेड रोड: जानवरों के मुक्त आवागमन (Free Movement) को सुनिश्चित करने के लिए यहां 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड (खंभों पर टिकी सड़क) बनाया गया है। यह एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर एलिवेटेड रोड माना जा रहा है। नीचे जंगल, ऊपर सड़क: सड़क को ऊपर उठाने का मकसद यह है कि नीचे हाथी और अन्य जानवर अपने प्राकृतिक रास्तों (Animal Corridors) से बिना किसी डर के गुजर सकें। रात का अनुशासन: वन्यजीवों को गाड़ियों की हेडलाइट से परेशानी न हो, इसके लिए विशेष नॉइस बैरियर (Noise Barriers) और लाइट बैरियर लगाए गए हैं। निर्माण की शर्तें: नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ ने सख्त निर्देश दिए थे कि सूरज ढलने के बाद और सूरज उगने से पहले निर्माण कार्य नहीं होगा। इसके अलावा, मॉनसून में नदी के तेज बहाव के कारण काम रोका गया। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद, NHAI ने इसे समय पर पूरा किया है।   टोल टैक्स का गणित: सस्ता या महंगा? एक्सप्रेसवे के खुलने की खबर के साथ ही लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल 'टोल टैक्स' को लेकर है। क्या यह सफर जेब पर भारी पड़ेगा?   फास्टैग (FASTag) और एनुअल पास: अगर आप इस रूट पर नियमित यात्री हैं और आपके पास FASTag का एनुअल पास (Local Pass) है, तो यह सफर आपके लिए बेहद सस्ता होगा। चार टोल प्लाजा पार करने का खर्च महज 60 रुपये (अनुमानित पास धारकों के लिए प्रति ट्रिप औसत) आ सकता है। आम यात्री: जिनके पास पास नहीं है, उन्हें दिल्ली से देहरादून तक के सफर के लिए एक तरफ का लगभग 500 से 550 रुपये टोल चुकाना पड़ सकता है। तुलना: वर्तमान में भी अगर आप मेरठ-मुजफ्फरनगर-रूडकी वाले पुराने रास्ते से जाते हैं, तो भी आपको कई जगह टोल देना पड़ता है। नए कॉरिडोर पर समय और ईंधन की बचत को देखते हुए यह टोल वसूलने लायक लगेगा।   आर्थिक प्रभाव: पर्यटन, कृषि और रियल एस्टेट यह कॉरिडोर सिर्फ एक 'रास्ता' नहीं, बल्कि 'अर्थव्यवस्था का इंजन' साबित होगा।   पर्यटन (Tourism) को बूस्ट वीकेंड डेस्टिनेशन: अभी तक दिल्ली के लोगों को देहरादून या मसूरी जाने के लिए कम से कम 3 दिन की छुट्टी चाहिए होती थी (आने-जाने में ही 12-14 घंटे खराब होते थे)। अब 2.5 घंटे के सफर का मतलब है कि लोग शनिवार सुबह जाकर रविवार शाम को वापस आ सकते हैं। नए डेस्टिनेशन: हरिद्वार, ऋषिकेश, राजाजी पार्क और चकराता जैसे पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की बाढ़ आने वाली है। होटल और होम-स्टे बिजनेस में उछाल आएगा।   कृषि और व्यापार (Agriculture & Trade) गन्ना बेल्ट: पश्चिमी यूपी (बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर) गन्ने और सब्जियों का बड़ा उत्पादक है। अब किसान अपनी उपज को महज 1-2 घंटे में दिल्ली की आजादपुर मंडी या गाजियाबाद तक पहुंचा सकेंगे। ताजी सब्जियों के अच्छे दाम मिलेंगे। वुड कार्विंग (काष्ठ कला): सहारनपुर अपनी लकड़ी की नक्काशी के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। बेहतर कनेक्टिविटी से यहां के निर्यातकों को अपना माल दिल्ली एयरपोर्ट या पोर्ट तक पहुंचाने में आसानी होगी।   रियल एस्टेट (Real Estate) देहरादून, हरिद्वार और सहारनपुर में जमीन के दाम पहले ही बढ़ने लगे हैं। दिल्ली के लोग अब देहरादून में 'सेकंड होम' या 'हॉलिडे होम' लेने में अधिक रुचि दिखाएंगे, क्योंकि अब वहां पहुंचना गुड़गांव या नोएडा के किसी दूरदराज इलाके में जाने जैसा आसान हो गया है।   भविष्य की योजनाएं: कनेक्टिविटी का विस्तार NHAI यहीं रुकने वाला नहीं है। इस कॉरिडोर को आधार बनाकर आगे की कनेक्टिविटी को भी सुधारा जा रहा है।   मसूरी कनेक्टिविटी: देहरादून तक पहुंचने के बाद, मसूरी जाने वाले जाम से बचने के लिए एक नई टनल और बाईपास की योजना पर काम चल रहा है। पांवटा साहिब और हिमाचल: इस कॉरिडोर को हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब और नाहन से जोड़ने के लिए भी नई सड़कों का खाका तैयार किया जा रहा है। इसका मतलब है कि आने वाले सालों में हिमाचल जाना भी दिल्लीवालों के लिए आसान हो जाएगा।   यात्रा की सोच बदलने वाला प्रोजेक्ट दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की एक जीती-जागती मिसाल है। यह परियोजना बताती है कि अगर सही नीयत और तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, तो विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं। किसानों की नाराजगी को सुलझाना, वन्यजीवों के लिए रास्ता छोड़ना और रिकॉर्ड समय में निर्माण पूरा करना—यह सब काबिले तारीफ है।   फरवरी में जब पहली गाड़ी इस एक्सप्रेसवे पर सरपट दौड़ेगी, तो वह सिर्फ एक गाड़ी नहीं होगी, बल्कि वह एक बदलते हुए भारत की तस्वीर होगी—जहाँ दूरियां सिमट रही हैं और संभावनाएं फैल रही हैं।   तो अपनी गाड़ियों में तेल भरवा लीजिए और फास्टैग रिचार्ज कर लीजिए, क्योंकि पहाड़ अब आपको बुला रहे हैं—और इस बार वे ज्यादा दूर नहीं हैं!   तुलनात्मक विश्लेषण: पुराना रास्ता बनाम नया कॉरिडोर विशेषता पुराना रूट (वाया मेरठ-मुजफ्फरनगर-रूडकी) नया कॉरिडोर (इकोनॉमिक कॉरिडोर) दूरी लगभग 235 - 250 किमी 210 किमी समय 6 से 7 घंटे (जाम मिलने पर 8 घंटे) 2.5 से 3 घंटे ट्रैफिक भारी (ट्रक, ट्रैक्टर, स्थानीय वाहन) एक्सेस कंट्रोल (सिर्फ तेज वाहन) सड़क प्रकार मिक्स (हाइवे + शहरी सड़कें) 6-लेन/12-लेन एलिवेटेड बाधाएं मोदीनगर, खतौली, रूडकी का जाम कोई जाम नहीं (नॉन-स्टॉप) वन्यजीव सुरक्षा नगण्य (दुर्घटना का खतरा) एलिवेटेड रोड और अंडरपास   महत्वपूर्ण तथ्य एक नजर में (Fast Facts) कुल लागत: लगभग 13,000 करोड़ रुपये। शुरुआत: अक्षरधाम, दिल्ली। अंत: देहरादून, उत्तराखंड। गति सीमा: कार - 100 किमी/घंटा, भारी वाहन - 80 किमी/घंटा। खासियत: एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर (12 किमी)। लाभान्वित राज्य: दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड।

Unknown जनवरी 12, 2026 0
Delhi Cold Wave Mercury Dips to 3 Degrees Palam Breaks 13 Year Record as Capital Shivers
दिल्ली बनी 'शिमला': 3 डिग्री पारा, नसों को जमा देने वाली शीतलहर और कोहरे का अटैक... कड़ाके की ठंड ने तोड़े कई सालों के रिकॉर्ड

नई दिल्ली/गाजियाबाद/नोएडा: देश की राजधानी दिल्ली और पूरा एनसीआर (NCR) इस समय कुदरत के 'शीत प्रहार' से जूझ रहा है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों में दिख रहा है। हालत यह है कि दिल्ली की रातें अब 'सजा' बन गई हैं और सुबह की शुरुआत 'बर्फीली हवाओं' के साथ हो रही है। सोमवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने पिछले दो सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वहीं, एनसीआर के रेवाड़ी में तो ठंड ने ऐसा कहर बरपाया कि पारा माइनस 0.6 डिग्री (शून्य से नीचे) दर्ज किया गया।READ ALSO:-मुरादाबाद EXCLUSIVE: रशियन बार-बालाएं, शराब का समंदर और 'मंत्रमुग्ध' माननीय... वायरल वीडियो ने उधेड़ दी शहर के 'सफेदपोशों' की बखिया   मौसम विभाग (IMD) ने कड़ाके की ठंड को देखते हुए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। लोग अलाव और हीटर के सहारे दिन काटने को मजबूर हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं कि दिल्ली में सर्दी का यह सितम कब तक जारी रहेगा और मौसम विभाग की ताजा भविष्यवाणी क्या है।   3 डिग्री का टॉर्चर: कांप उठी दिल्ली, आयानगर रहा सबसे ठंडा सोमवार की सुबह दिल्लीवालों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं थी। जब लोग सोकर उठे, तो बाहर का मंजर किसी हिल स्टेशन जैसा था।   सफदरजंग: दिल्ली के मानक मौसम केंद्र सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह इस सीजन का सबसे कम तापमान है और सामान्य से लगभग 4 डिग्री कम है। आयानगर: दिल्ली का आयानगर इलाका सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान गिरकर 2.9 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। रिग और पालम: पालम और रिज क्षेत्र में भी तापमान 4.0 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया, जिससे भीषण शीतलहर की स्थिति बनी रही।   मौसम विभाग के अनुसार, जब मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है, तो उसे भीषण शीतलहर (Severe Cold Wave) की श्रेणी में रखा जाता है। दिल्ली में यह लगातार दूसरा दिन है जब 'कोल्ड वेव' दर्ज की गई है।   NCR का हाल: रेवाड़ी में जम गया पानी, पारा माइनस में सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि आसपास के एनसीआर के इलाकों में भी ठंड ने विकराल रूप धारण कर लिया है।   हरियाणा से सटे रेवाड़ी में ठंड का प्रकोप सबसे ज्यादा देखने को मिला। यहां न्यूनतम तापमान माइनस 0.6 डिग्री (-0.6°C) दर्ज किया गया। खेतों में ओस की बूंदें बर्फ बन गईं और गाड़ियों की विंडशील्ड पर पाले की सफेद चादर बिछी नजर आई। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी न्यूनतम तापमान 3 से 4 डिग्री के बीच बना हुआ है। गलन इतनी ज्यादा है कि दिन में धूप निकलने के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिल रही है।   हवा में नमी 100%, गलन ने बढ़ाई मुश्किलें मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को हवा में नमी का स्तर 100 प्रतिशत से 53 प्रतिशत के बीच रिकॉर्ड किया गया। हवा में ज्यादा नमी और कम तापमान का यह कॉम्बिनेशन बेहद खतरनाक होता है। इसी वजह से 'विजिबिलिटी' (दृश्यता) कम हो रही है और कोहरा घना होता जा रहा है। सुबह के समय घने कोहरे के कारण सड़कों पर गाड़ियां रेंगती नजर आईं, वहीं ट्रेनों और उड़ानों पर भी इसका असर पड़ना शुरू हो गया है।   पहाड़ों की बर्फबारी ने बढ़ाई मैदानी इलाकों की मुसीबत दिल्ली में इस 'हड्डी तोड़' ठंड की मुख्य वजह उत्तर भारत के पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी है।   उत्तराखंड और हिमाचल: इन राज्यों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बर्फबारी हो रही है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, औली, मनाली और शिमला सफेद चादर में लिपटे हुए हैं। बर्फीली हवाएं: वहां से होकर आने वाली उत्तर-पश्चिमी (North-Westerly) हवाएं सीधी दिल्ली और एनसीआर की तरफ आ रही हैं। ये हवाएं अपने साथ पहाड़ों की ठंडक लेकर आ रही हैं, जिससे मैदानी इलाकों में तापमान तेजी से गिर रहा है।   इतिहास के पन्नों में दिल्ली की सर्दी: जब जम गई थी राजधानी दिल्ली की सर्दी का इतिहास भी काफी रोचक और डरावना रहा है। सोमवार को सफदरजंग में दर्ज 3 डिग्री तापमान ने पिछले दो सालों का रिकॉर्ड तोड़ा है, लेकिन इतिहास में इससे भी भयंकर ठंड पड़ चुकी है।   पालम का रिकॉर्ड (1967 में माइनस 2.2 डिग्री) बीते रविवार को पालम में 3 डिग्री तापमान दर्ज हुआ, जो पिछले 13 सालों में सबसे कम था। इससे पहले 7 जनवरी 2013 को पालम में 2.6 डिग्री तापमान दर्ज हुआ था। अगर इतिहास के पन्नों को पलटें, तो 11 जनवरी 1967 को पालम में तापमान माइनस 2.2 डिग्री (-2.2°C) तक गिर गया था, जो अब तक का सर्वकालिक रिकॉर्ड है।   सफदरजंग का रिकॉर्ड (1935 में माइनस 0.6 डिग्री) सफदरजंग केंद्र पर 16 जनवरी 1935 को न्यूनतम तापमान माइनस 0.6 डिग्री दर्ज किया गया था। मौसम विभाग का कहना है कि अगर हवाओं की दिशा नहीं बदली, तो आने वाले दिनों में हम फिर से ऐसे रिकॉर्ड के करीब पहुंच सकते हैं।   कब मिलेगी राहत? मौसम विभाग की बड़ी भविष्यवाणी ठंड से ठिठुर रहे लोगों के मन में बस एक ही सवाल है- "आखिर यह ठंड कब जाएगी?" मौसम विभाग (IMD) ने इसको लेकर एक विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है।   अगले 2-3 दिन: अगले दो से तीन दिनों तक (मंगलवार और बुधवार) दिल्लीवासियों को राहत की कोई उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभी तापमान 3 से 4 डिग्री के आसपास ही बना रहेगा। शीतलहर जारी रहेगी और सुबह के समय घना कोहरा छाया रहेगा। मंगलवार को सफदरजंग में तापमान 3 डिग्री या उससे भी नीचे जा सकता है, जिससे शीतलहर की 'हैट्रिक' पूरी हो जाएगी।   16-17 जनवरी से मिलेगी राहत: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 16 और 17 जनवरी के आसपास मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।   पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत की तरफ बढ़ रहा है। इसके असर से हवाओं की दिशा बदलेगी। हवा की दिशा: अभी चल रही बर्फीली उत्तर-पश्चिमी हवाओं की जगह दक्षिण-पूर्वी हवाएं ले सकती हैं। ये हवाएं अपेक्षाकृत गर्म होती हैं। इससे न्यूनतम तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी होगी और शीतलहर का प्रकोप कम होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ठंड खत्म हो जाएगी, लेकिन 'प्रचंड ठंड' से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी।   डॉक्टर्स की चेतावनी: 'हार्ट और बीपी' के मरीज रहें सावधान भीषण ठंड को देखते हुए दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों के डॉक्टर्स ने हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। 3 डिग्री तापमान शरीर के लिए, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए घातक हो सकता है।   ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा: कड़ाके की ठंड में नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। एम्स (AIIMS) और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर्स ने बुजुर्गों को सुबह की सैर (Morning Walk) से बचने की सलाह दी है। हाइपोथर्मिया: अगर शरीर का तापमान सामान्य से बहुत कम हो जाए तो हाइपोथर्मिया हो सकता है। इसमें कंपकंपी, सांस लेने में दिक्कत और बेहोशी आ सकती है। खान-पान: शरीर को गर्म रखने के लिए गुड़, तिल, मूंगफली, ड्राई फ्रूट्स और गर्म सूप का सेवन करें। खाली पेट घर से बाहर न निकलें।   जनजीवन अस्त-व्यस्त: रैन बसेरों में भीड़, सड़कों पर सन्नाटा शीतलहर का सबसे बुरा असर बेघर और गरीब लोगों पर पड़ रहा है। दिल्ली सरकार द्वारा बनाए गए रैन बसेरों (Shelter Homes) में भीड़ बढ़ गई है। सड़कों के किनारे सोने वाले लोग अलाव के सहारे रात गुजारने को मजबूर हैं। प्रशासन ने लोगों को कंबल बांटने और अलाव की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।   स्कूलों के समय में भी बदलाव किया गया है, और कई प्राइवेट स्कूलों ने छोटे बच्चों के लिए विंटर ब्रेक को आगे बढ़ा दिया है। बाजारों में भी शाम होते ही सन्नाटा पसरने लगा है। लोग जल्दी घर लौटने की कोशिश कर रहे हैं।   अभी और सताएगी सर्दी कुल मिलाकर, दिल्ली और एनसीआर वालों को अभी कुछ दिन और 'दांत किटकिटाने' वाली सर्दी का सामना करना पड़ेगा। यह मौसम का वह दौर है जब आपको अपनी सेहत का सबसे ज्यादा ख्याल रखने की जरूरत है। गर्म कपड़े पहनें, जरूरत हो तभी बाहर निकलें और मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर बनाए रखें।   ख़बरीलाल की टीम मौसम के हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है। जैसे ही कोई नया अलर्ट आएगा, हम आप तक पहुंचाएंगे।

Unknown जनवरी 12, 2026 0
Namo Bharat and Delhi Metro Launch Single Point Security Check Trial at New Ashok Nagar Station for Seamless Travel
Namo Bharat और Delhi Metro के बीच अब अलग-अलग चेकिंग नहीं: न्यू अशोक नगर में 'सिंगल सिक्योरिटी चेक' का ट्रायल शुरू; गाजियाबाद में भी मिली सीधी कनेक्टिविटी

नई दिल्ली/मेरठ (स्पेशल डेस्क): भारत की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के शहरों (एनसीआर) में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की परिभाषा तेजी से बदल रही है। एक तरफ दिल्ली मेट्रो का विशाल नेटवर्क है, तो दूसरी तरफ रफ़्तार का नया बादशाह 'नमो भारत' (RRTS)। अब तक इन दोनों सिस्टम्स को अलग-अलग देखा जाता था, लेकिन रविवार को नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो भविष्य में शहरी यातायात का मॉडल बनेगा।READ ALSO:-मेरठ स्कूल अपडेट: कड़ाके की ठंड पर प्रशासन का बड़ा फैसला, 9वीं तक बढ़ाई गई छुट्टियां, बोर्ड छात्रों के लिए बदला गया समय   यात्रियों की सबसे बड़ी सिरदर्दी—'सिक्योरिटी चेकिंग की लंबी कतारें'—को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा ट्रायल शुरू किया गया है। न्यू अशोक नगर स्टेशन पर नमो भारत और दिल्ली मेट्रो के बीच 'सिंगल-पॉइंट सिक्योरिटी चेक' (Single-Point Security Check) की शुरुआत कर दी गई है। इसका सीधा मतलब है कि अगर आप मेरठ से नमो भारत में बैठकर आए हैं और न्यू अशोक नगर से मेट्रो पकड़कर नोएडा जाना चाहते हैं, तो आपको दोबारा जांच नहीं करानी होगी।   यह खबर केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि समय प्रबंधन और 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) की दिशा में एक बड़ी छलांग है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह नया सिस्टम कैसे काम करेगा, गाजियाबाद में क्या बदलाव हुए हैं और मेरठ के लोगों को इससे कितना फायदा होगा।   क्या है 'सिंगल-पॉइंट सिक्योरिटी चेक' सिस्टम? किसी भी मास ट्रांजिट सिस्टम (Mass Transit System) में सुरक्षा सबसे अहम होती है, लेकिन यही सुरक्षा जांच अक्सर यात्रा में देरी का कारण बन जाती है। अब तक की व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई यात्री एक ट्रांसपोर्ट मोड (जैसे रेलवे या बस) से उतरकर मेट्रो में जाता था, तो उसे दोबारा मेटल डिटेक्टर और फ्रिस्किंग (Frisking) की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।   न्यू अशोक नगर मॉडल: निर्बाध यात्रा की शुरुआत न्यू अशोक नगर वह जगह है जहां दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन (जो द्वारका से नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी जाती है) और नमो भारत (जो दिल्ली से मेरठ जाती है) का मिलन होता है।   NCRTC द्वारा रविवार को दी गई जानकारी के अनुसार: डेडिकेटेड पाथवे: दोनों स्टेशनों को जोड़ने के लिए एक विशेष फुटब्रिज (FOB) बनाया गया है। सिक्योर जोन: यह फुटब्रिज एक 'सिक्योर जोन' के अंदर आता है। यानी, अगर आपने एक बार नमो भारत स्टेशन पर चेक-इन कर लिया, तो आप तकनीकी रूप से एक सुरक्षित क्षेत्र में हैं। सीधा प्रवेश: जब आप नमो भारत ट्रेन से उतरकर मेट्रो स्टेशन की तरफ बढ़ेंगे, तो आपको दोबारा सुरक्षा जांच नहीं करानी होगी। आप सीधे मेट्रो के कॉनकोर्स लेवल पर पहुंचेंगे और अपनी यात्रा जारी रख सकेंगे।   किसे मिलेगा फायदा? मेरठ से नोएडा जाने वाले: मेरठ से आने वाले हजारों लोग जो नोएडा में नौकरी करते हैं, वे न्यू अशोक नगर उतरते हैं। अब वे बिना रुके सीधे ब्लू लाइन मेट्रो में बैठ सकेंगे। नोएडा से मेरठ जाने वाले: इसी तरह, नोएडा से आने वाले यात्री ब्लू लाइन से उतरकर सीधे नमो भारत के प्लेटफॉर्म की तरफ जा सकेंगे।   NCRTC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "हमारा लक्ष्य यात्रा के समय को कम करना है। अगर किसी यात्री को इंटरचेंज में 10-15 मिनट सुरक्षा जांच में ही लग जाते हैं, तो रैपिड रेल की हाई-स्पीड का कोई मतलब नहीं रह जाता। यह पहल उसी समय को बचाने के लिए है।"   गाजियाबाद स्टेशन - रेड लाइन से सीधा जुड़ाव न्यू अशोक नगर के अलावा, गाजियाबाद में भी कनेक्टिविटी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। गाजियाबाद नमो भारत स्टेशन, जो कि शहर के सबसे व्यस्त इलाके में स्थित है, अब दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन (रिठाला-शहीद स्थल) से पूरी तरह जुड़ गया है।   फुटब्रिज और ट्रैवललेटर का प्लान गाजियाबाद नमो भारत स्टेशन और दिल्ली मेट्रो के 'शहीद स्थल न्यू बस अड्डा' स्टेशन के बीच एक डेडिकेटेड फुटब्रिज चालू कर दिया गया है।   कनेक्टिविटी: यात्री अब नमो भारत स्टेशन से उतरकर सीधे रेड लाइन मेट्रो स्टेशन में प्रवेश कर सकते हैं। उन्हें सड़क पर उतरकर भीड़भाड़ और ट्रैफिक का सामना नहीं करना पड़ेगा। भविष्य की तैयारी (Travelators): चूंकि यह फुटब्रिज थोड़ा लंबा है और गाजियाबाद स्टेशन पर यात्रियों का भारी दबाव रहता है, NCRTC ने भविष्य में यहां ट्रैवललेटर (Travelator) लगाने की योजना बनाई है। यह हवाई अड्डों पर चलने वाली वो स्वचालित पट्टियां होती हैं जिन पर खड़े होकर यात्री बिना चले दूरी तय कर सकते हैं। यह बुजुर्गों, बच्चों और भारी सामान के साथ यात्रा करने वालों के लिए वरदान साबित होगा।   समय की बचत का गणित (Time Management Analysis) इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा पहलू 'समय की बचत' है। आइए एक उदाहरण से समझते हैं कि एक यात्री का कितना समय बचेगा।   पुरानी स्थिति (Hypothetical Scenario): मान लीजिए एक यात्री मेरठ साउथ से सुबह 9 बजे निकलता है।   मेरठ साउथ से न्यू अशोक नगर का सफर: 35-40 मिनट। स्टेशन से बाहर निकलना और मेट्रो स्टेशन तक पैदल चलना: 5 मिनट। मेट्रो स्टेशन पर सिक्योरिटी लाइन में लगना (पीक आवर में): 10-15 मिनट। मेट्रो पकड़ना।   कुल बर्बाद समय (इंटरचेंज में): लगभग 15 से 20 मिनट।   नई स्थिति (Current Scenario): मेरठ साउथ से न्यू अशोक नगर: 35-40 मिनट। इंटरचेंज (बिना चेकिंग के): 2-3 मिनट।   कुल बचत: लगभग 12 से 15 मिनट हर ट्रिप पर।   अगर कोई व्यक्ति महीने में 25 दिन ऑफिस जाता है, तो वह महीने में लगभग 10 से 12 घंटे केवल सिक्योरिटी चेक की लाइनों में लगने से बचा लेगा। साल भर में यह बचत 5 से 6 दिन के बराबर हो सकती है। यही नमो भारत का असली उद्देश्य है—जीवन की गुणवत्ता में सुधार।   टिकटिंग में एकीकरण - एक QR, दो सफर सिर्फ सिक्योरिटी चेक ही नहीं, बल्कि टिकटिंग को भी इंटीग्रेट (Integrate) किया गया है। यात्रा को 'सीमलेस' (Seamless) बनाने के लिए NCRTC और DMRC ने मिलकर QR टिकटिंग सिस्टम को भी साझा किया है।   कैसे काम करता है यह सिस्टम? RRTS Connect App: अगर आप 'RRTS कनेक्ट' ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो आप वहीं से दिल्ली मेट्रो का टिकट भी बुक कर सकते हैं। DMRC App: इसी तरह, दिल्ली मेट्रो के ऐप से नमो भारत का टिकट बुक किया जा सकता है। NCMC कार्ड: 'वन नेशन, वन कार्ड' (NCMC) तो पहले से ही दोनों जगह मान्य है।   इसका मतलब है कि आपको लाइन में लगकर टोकन खरीदने या अलग-अलग ऐप खोलने की जरूरत नहीं है। मोबाइल पर जेनरेट हुआ एक QR कोड आपको मेरठ से दिल्ली और फिर दिल्ली में कहीं भी मेट्रो से ले जा सकता है।   मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन (MMI) - भविष्य की तस्वीर केंद्र सरकार की पीएम गतिशक्ति योजना के तहत 'मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन' (Multi-Modal Integration) पर बहुत जोर दिया जा रहा है। इसका अर्थ है परिवहन के विभिन्न साधनों (रेल, मेट्रो, बस, टैक्सी) को एक साथ जोड़ना। नमो भारत प्रोजेक्ट इसी सिद्धांत का सबसे बेहतरीन उदाहरण बनकर उभर रहा है।   अन्य स्टेशनों पर भी होगी ऐसी सुविधा न्यू अशोक नगर और गाजियाबाद तो बस शुरुआत हैं। आने वाले समय में दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के अन्य स्टेशनों पर भी ऐसी ही सुविधा देखने को मिलेगी:   आनंद विहार (Anand Vihar): यह एनसीआर का सबसे बड़ा ट्रांसपोर्ट हब बनेगा। यहां नमो भारत, दिल्ली मेट्रो (ब्लू और पिंक लाइन), भारतीय रेलवे (आनंद विहार टर्मिनल) और आईएसबीटी (ISBT) बस अड्डा—चारों एक ही परिसर में होंगे। यहां भी सिंगल-पॉइंट चेकिंग और इंटरचेंज की सुविधा होगी। सराय काले खां (Sarai Kale Khan): यह नमो भारत के तीनों कॉरिडोर (मेरठ, अलवर, पानीपत) का जंक्शन होगा और यहां से हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन और पिंक लाइन मेट्रो की कनेक्टिविटी होगी।   मेरठ के लोगों के लिए इसके मायने मेरठ के निवासियों के लिए यह खबर किसी सपने के सच होने जैसी है।   नौकरीपेशा वर्ग: हजारों लोग जो मेरठ में रहते हैं और नोएडा या गुड़गांव में काम करते हैं, उनके लिए डेली अप-डाउन करना अब थका देने वाला नहीं होगा। वे सुबह घर से निकलकर फ्रेश मूड में ऑफिस पहुंच सकेंगे। छात्र: मेरठ के छात्र जो दिल्ली यूनिवर्सिटी या अन्य संस्थानों में पढ़ते हैं, वे सुरक्षित और तेजी से अपने कॉलेज पहुंच सकेंगे। रियल एस्टेट बूम: कनेक्टिविटी बढ़ने से मेरठ के रियल एस्टेट सेक्टर में उछाल आ रहा है। लोग अब दिल्ली की भीड़भाड़ छोड़कर मेरठ में रहना पसंद करेंगे क्योंकि वहां से दिल्ली पहुंचना अब बेहद आसान है।   चुनौतियां और समाधान हालांकि यह पहल शानदार है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं, जिनका ध्यान NCRTC को रखना होगा।   भीड़ प्रबंधन (Crowd Management): पीक आवर्स में जब नमो भारत और मेट्रो दोनों की भीड़ एक साथ इंटरचेंज ब्रिज पर आएगी, तो वहां भगदड़ जैसी स्थिति न हो, इसके लिए पर्याप्त चौड़ाई और साइनेज (Signage) की जरूरत होगी। तकनीकी खामियां: QR कोड स्कैनिंग में देरी या सर्वर डाउन होने की समस्या से यात्रियों को परेशानी हो सकती है। इसके लिए बैकअप सिस्टम तैयार रखना होगा। जागरूकता: अभी भी कई यात्रियों को इस नई सुविधा के बारे में पता नहीं है। स्टेशनों पर अनाउंसमेंट और हेल्प डेस्क के जरिए लोगों को जागरूक करना जरूरी है।   दिल्ली-मेरठ की दूरी अब सिर्फ नक्शे पर नमो भारत और दिल्ली मेट्रो का यह एकीकरण बताता है कि भारत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट अब वैश्विक स्तर (Global Standards) को छू रहा है। लंदन, पेरिस या टोक्यो की तर्ज पर अब भारत में भी अलग-अलग ट्रेनों के बीच बदलना आसान हो रहा है।   न्यू अशोक नगर में शुरू हुआ यह ट्रायल सफल होना तय माना जा रहा है। यह न केवल यात्रियों के पसीने छुड़ाने वाली गर्मी और लंबी लाइनों से राहत देगा, बल्कि यह साबित करेगा कि अगर प्लानिंग सही हो, तो इंफ्रास्ट्रक्चर आम आदमी की जिंदगी बदल सकता है। अब वह दिन दूर नहीं जब मेरठ का व्यक्ति दिल्ली के कनॉट प्लेस में कॉफी पीकर उतनी ही देर में घर वापस आ जाएगा, जितना समय दिल्ली के ही एक कोने से दूसरे कोने में जाने में लगता है।   Khabreelal की टीम इस ट्रायल पर नजर बनाए हुए है। जैसे ही यह सुविधा पूरी तरह से अन्य स्टेशनों पर लागू होगी, हम सबसे पहले आपको सूचित करेंगे।   महत्वपूर्ण तथ्य एक नज़र में (Key Highlights) सुविधा विवरण स्थान न्यू अशोक नगर (New Ashok Nagar) जुड़ाव नमो भारत (RRTS) + दिल्ली मेट्रो (Blue Line) नई व्यवस्था सिंगल-पॉइंट सिक्योरिटी चेक (No Re-frisking) गाजियाबाद अपडेट नमो भारत से रेड लाइन मेट्रो (शहीद स्थल) तक फुटब्रिज चालू भविष्य की योजना गाजियाबाद फुटब्रिज पर ट्रैवललेटर (Travelators) टिकटिंग इंटीग्रेटेड QR कोड और NCMC कार्ड मान्य फायदा यात्रा के समय में 15-20 मिनट की बचत

Unknown जनवरी 12, 2026 0
Delhi Schools Closed Winter Vacation Extended for Nursery to Class 8 till January 15 Due to Severe Cold and Fog
दिल्ली-NCR में ठंड का 'लॉकडाउन', नर्सरी से 8वीं तक के स्कूल 15 जनवरी तक बंद; पैरेंट्स की शिकायत पर सरकार सख्त

नई दिल्ली/नोएडा: देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम) इस समय कुदरत के दोहरे प्रहार का सामना कर रहे हैं। एक तरफ आसमान से बरसती बर्फीली हवाएं (Cold Wave) हड्डियों को गला रही हैं, तो दूसरी तरफ घने कोहरे (Dense Fog) की सफेद चादर ने पूरे शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।READ ALSO:-Ganga Expressway Inauguration: कार नहीं, राफेल से होगी एंट्री; पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, 5 लड़ाकू विमानों की लैंडिंग से गूंजेगा आकाश   हालात की गंभीरता को देखते हुए, दिल्ली शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education - DoE) ने एक अहम फैसला लेते हुए शीतकालीन अवकाश (Winter Vacation) को आगे बढ़ा दिया है। अब दिल्ली के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी (प्राइवेट) स्कूल 15 जनवरी 2026 तक बंद रहेंगे। यह आदेश विशेष रूप से नर्सरी से 8वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए सख्ती से लागू किया गया है।   उत्तर प्रदेश प्रशासन ने भी गौतम बुद्ध नगर (नोएडा/ग्रेटर नोएडा) और गाजियाबाद में इसी तरह के आदेश जारी किए हैं। हालांकि, इस 'विंटर लॉकडाउन' के बीच एक नया विवाद भी जन्म ले चुका है। कई प्राइवेट स्कूल सरकारी आदेशों को दरकिनार कर स्कूल खोलने की जिद पर अड़े हैं, जिससे अभिभावकों (Parents) का गुस्सा सातवें आसमान पर है।   खबरीलाल आपके लिए लाया है इस पूरे मामले की विस्तृत 360-डिग्री रिपोर्ट, जिसमें हम बताएंगे मौसम का हाल, स्कूलों के नियम, बोर्ड एग्जाम्स का पेच और पैरेंट्स की नाराजगी की असली वजह।   मौसम का 'कोल्ड-स्ट्राइक': दिल्ली बनी शिमला दिल्ली-एनसीआर में ठंड का यह दौर सामान्य नहीं है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राजधानी के कई इलाकों में 'येलो अलर्ट' और कुछ जगहों पर 'कोल्ड डे' (Cold Day) घोषित किया है।   ताजा तापमान (Current Temperature Update): रविवार (11 जनवरी) की सुबह दिल्ली के कुछ इलाकों में तापमान ने पिछले कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया।   आयानगर (Aya Nagar): यहाँ न्यूनतम तापमान गिरकर 2.9°C तक पहुंच गया, जो सामान्य से 4 डिग्री कम है। पालम और रिज (Ridge): यहाँ भी तापमान 3°C से 4°C के बीच दर्ज किया गया, जिससे लोगों की कंपकंपी छूट गई। सफदरजंग: दिल्ली की मानक वेधशाला सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 4.8°C रहा।   कोहरे का कोहराम: सिर्फ ठंड ही नहीं, कोहरे ने भी मुसीबत बढ़ा दी है। विजिबिलिटी (दृश्यता) कई जगहों पर 50 मीटर से भी कम रह गई है। सुबह के समय स्कूल बसों के लिए सड़क पर चलना किसी खतरे से खाली नहीं है। मौसम विभाग ने अगले 5 दिनों तक (15 जनवरी तक) घने कोहरे की चेतावनी जारी की है।   स्कूल बंदी का आदेश: कहां, कब तक और किसके लिए? बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने छुट्टियों का एलान किया है। यहाँ अलग-अलग क्षेत्रों का अपडेट है:   (A) दिल्ली (Delhi) दिल्ली शिक्षा निदेशालय (DoE) ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के छात्रों के लिए कोई भी भौतिक कक्षाएं (Physical Classes) आयोजित नहीं की जाएंगी।   अवधि: 15 जनवरी 2026 तक स्कूल पूरी तरह बंद रहेंगे। नियम: यह आदेश दिल्ली के सभी सरकारी, एमसीडी, एनडीएमसी और प्राइवेट स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। कारण: छोटे बच्चे सुबह की कड़ाके की ठंड और प्रदूषण (AQI) के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। सुबह कोहरे के कारण सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी अधिक होता है।   (B) नोएडा और ग्रेटर नोएडा (Noida & Greater Noida) उत्तर प्रदेश सरकार के आदेशानुसार, गौतम बुद्ध नगर के जिला प्रशासन ने भी स्कूलों को बंद रखने का निर्देश दिया है।   कक्षाएं: नर्सरी से 8वीं तक। अवधि: 15 जनवरी 2026 तक। ऑनलाइन विकल्प: नोएडा के कई प्राइवेट स्कूलों ने पढ़ाई का नुकसान रोकने के लिए 8 जनवरी से 15 जनवरी तक ऑनलाइन क्लासेस (Online Classes) चलाने का फैसला किया है।   (C) गाजियाबाद और गुरुग्राम (Ghaziabad & Gurugram) गाजियाबाद में भी 8वीं तक के स्कूल बंद हैं। वहीं, हरियाणा सरकार ने भी पूरे राज्य (जिसमें गुरुग्राम और फरीदाबाद शामिल हैं) में 15 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश घोषित किया हुआ है।   पैरेंट्स vs प्राइवेट स्कूल: क्यों मचा है घमासान? सरकार के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, दिल्ली के कई अभिभावक सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ 'बड़े' प्राइवेट स्कूल मनमानी कर रहे हैं।   अभिभावकों की शिकायतें: चोरी-छिपे कक्षाएं: साकेत (Saket), विकासपुरी (Vikaspuri) और पश्चिमी दिल्ली के कुछ प्राइवेट स्कूलों पर आरोप है कि वे "एक्स्ट्रा क्लास" या "डाउट सेशन" के नाम पर बच्चों को स्कूल बुला रहे हैं। यूनिफॉर्म की दिक्कत: पैरेंट्स का कहना है कि स्कूल प्रशासन बच्चों को ब्लेज़र और स्कूल यूनिफॉर्म में ही आने का दबाव डालता है, जबकि इतनी ठंड में लेयरिंग (Thermals/Jackets) बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य का खतरा: एक अभिभावक ने सोशल मीडिया पर लिखा, "सरकार आदेश देती है, लेकिन प्राइवेट स्कूल उसे मानते नहीं। क्या हमारे बच्चों की सेहत की कोई कीमत नहीं है? सुबह 7 बजे बस स्टॉप पर खड़े बच्चे कांपते रहते हैं।"।   सरकार का रुख: दिल्ली सरकार ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसकी शिकायत तुरंत शिक्षा निदेशालय में करें। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।   9वीं से 12वीं (बोर्ड क्लासेस) का क्या होगा? सबसे बड़ा असमंजस 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच है। चूंकि फरवरी-मार्च में बोर्ड परीक्षाएं (CBSE Board Exams 2026) शुरू होनी हैं, इसलिए इन कक्षाओं के लिए नियम थोड़े अलग हैं।   रियायत (Relaxation): 9वीं से 12वीं तक की कक्षाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। स्कूलों को स्वायत्तता दी गई है कि वे एक्स्ट्रा क्लासेस (Remedial Classes) या प्रैक्टिकल एग्जाम्स के लिए छात्रों को बुला सकते हैं। समय में बदलाव: हालांकि, अधिकांश स्कूलों ने टाइमिंग बदल दी है। अब स्कूल सुबह 8:00 या 8:30 बजे के बजाय सुबह 9:30 या 10:00 बजे से खुल रहे हैं ताकि कोहरा छंट जाए। ऑनलाइन जोर: शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को सलाह दी है कि जहां संभव हो, वहाँ ऑनलाइन क्लासेस (Online Mode) का विकल्प चुना जाए ताकि छात्रों को ठंड में बाहर न निकलना पड़े।   छात्रों पर दबाव: बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के चलते 10वीं और 12वीं के छात्र भारी दबाव में हैं। ठंड के कारण उनकी पढ़ाई की रफ्तार धीमी हो रही है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समय 'हाइब्रिड मॉडल' (Hybrid Model) सबसे बेहतर विकल्प है।   एक्सपर्ट्स की राय: ठंड बच्चों के लिए क्यों है जानलेवा? मेडिकल एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स का कहना है कि यह फैसला केवल आराम के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य आपातकाल (Health Emergency) से बचने के लिए जरूरी था।   सांस की बीमारी (Respiratory Issues): सुबह के समय तापमान कम होने से हवा भारी हो जाती है और प्रदूषक तत्व (PM 2.5) निचली सतह पर आ जाते हैं। इससे बच्चों में अस्थमा और ब्रोंकाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। हाइपोथर्मिया (Hypothermia): छोटे बच्चों के शरीर का तापमान विनियमन तंत्र (Temperature Regulation System) वयस्कों जितना मजबूत नहीं होता। 4 डिग्री से कम तापमान में उन्हें ठंड लगने या 'कोल्ड स्ट्रोक' का खतरा रहता है। वायरल इन्फेक्शन: इस मौसम में फ्लू और वायरल बुखार तेजी से फैलता है। स्कूलों जैसी बंद जगहों पर एक बच्चे से दूसरे बच्चे में संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।   अन्य राज्यों का हाल: पूरा उत्तर भारत 'लॉक' सिर्फ दिल्ली ही नहीं, पूरा उत्तर भारत शीत लहर की चपेट में है। पड़ोसी राज्यों ने भी कड़े कदम उठाए हैं:   पंजाब (Punjab): राज्य सरकार ने भीषण ठंड को देखते हुए 13 जनवरी तक सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया है। हरियाणा (Haryana): 1 से 15 जनवरी तक राज्यव्यापी शीतकालीन अवकाश घोषित है। राजस्थान (Rajasthan): जयपुर में 5वीं तक के स्कूल 10 जनवरी तक बंद थे, जबकि 6वीं से 8वीं तक के लिए समय में बदलाव किया गया है। झारखंड (Jharkhand): रांची में 8वीं तक के स्कूल 10 जनवरी तक बंद कर दिए गए थे। बिहार (Bihar): पटना में 8वीं तक के स्कूल 11 जनवरी तक बंद थे, जबकि बड़ी कक्षाओं का समय 10:30 बजे से 3:30 बजे तक कर दिया गया है।   ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट: कोहरे ने रोकी रफ्तार अगर आप ऑफिस जाने वाले पैरेंट हैं, तो यह जानकारी आपके लिए भी अहम है। कोहरे का असर सिर्फ स्कूलों पर नहीं, बल्कि यातायात पर भी पड़ा है।   ट्रेनें लेट: नई दिल्ली, आनंद विहार और निजामुद्दीन स्टेशन आने वाली 50 से अधिक ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 4 से 10 घंटे की देरी से चल रही हैं। फ्लाइट्स पर असर: आईजीआई एयरपोर्ट (IGI Airport) पर लो-विजिबिलिटी प्रक्रियाओं (LVP) को लागू किया गया है। कई उड़ानें देरी से उड़ान भर रही हैं। सड़क सुरक्षा: यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर कोहरे के कारण कई वाहनों के टकराने (Pile-up) की खबरें आ चुकी हैं। इसलिए, बच्चों को स्कूल बस से भेजने में पैरेंट्स को डर लग रहा है।   सुरक्षा ही प्राथमिकता फिलहाल 15 जनवरी तक राहत की उम्मीद कम है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले कुछ दिनों में शीतलहर और तेज हो सकती है। ऐसे में, स्कूलों को बंद रखने का निर्णय समय की मांग है।   खबरीलाल की सलाह: बच्चों को घर के अंदर रखें। अगर वे 9वीं-12वीं में हैं और स्कूल जा रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वे पूरी तरह से ऊनी कपड़ों से ढके हों। मास्क का प्रयोग करें, क्योंकि ठंड के साथ-साथ प्रदूषण भी एक मूक कातिल है। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान स्क्रीन टाइम का ध्यान रखें और उनकी डाइट में गर्म चीजें (सूप, बादाम, हल्दी वाला दूध) शामिल करें।   दिल्ली-एनसीआर स्कूल छुट्टी एक नज़र में विवरण स्थिति (Status) राज्य/क्षेत्र दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम प्रभावित कक्षाएं नर्सरी से कक्षा 8 तक (अनिवार्य छुट्टी) अवधि 15 जनवरी 2026 तक कक्षा 9 से 12 खुली रह सकती हैं (समय 9:30/10:00 बजे के बाद) / ऑनलाइन विकल्प कारण भीषण शीतलहर, घना कोहरा और प्रदूषण आदेश जारीकर्ता शिक्षा निदेशालय (DoE) और जिला प्रशासन (DM) पुनः खुलने की तारीख 16 जनवरी 2026 (संभावित)   FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल): Q: क्या 15 जनवरी के बाद स्कूल खुलेंगे? A: यह मौसम के हालात पर निर्भर करेगा। अगर ठंड और कोहरा बरकरार रहता है, तो छुट्टियां और आगे बढ़ाई जा सकती हैं। प्रशासन 14 या 15 जनवरी को नई समीक्षा बैठक करेगा। Q: क्या टीचर्स को भी छुट्टी मिलेगी? A: नहीं, अधिकांश सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों (Teachers) को स्कूल आने का निर्देश दिया गया है ताकि वे प्रशासनिक कार्य निपटा सकें या स्कूल परिसर से ही ऑनलाइन कक्षाएं ले सकें। Q: अगर मेरा स्कूल जबरदस्ती बुला रहा है तो मैं क्या करूँ?  A: आप दिल्ली शिक्षा निदेशालय की वेबसाइट पर या अपने जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) से शिकायत कर सकते हैं। सरकार ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

Unknown जनवरी 11, 2026 0
delhi pollution crackdown transport department seizes buses suspends 28 puc centers grap rules
Delhi Pollution Crackdown: 'जहरीली हवा' पर सरकार का 'हंटर'; 24 घंटे में 4900 गाड़ियां चेक, 100 बसें जब्त और 28 PUC सेंटर्स पर लटका ताला

पिछले 24 घंटों में दिल्ली की सड़कों पर जो हुआ, उसने नियम तोड़ने वालों के पसीने छुड़ा दिए हैं। एनफोर्समेंट एजेंसियों ने पूरी दिल्ली में एक साथ 'सघन चेकिंग अभियान' (Intensive Checking Drive) चलाया, जिसमें हजारों गाड़ियों की जांच की गई और बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। सिर्फ गाड़ियां ही नहीं, बल्कि फर्जीवाड़ा करने वाले प्रदूषण जांच केंद्रों (PUC Centers) पर भी गाज गिरी है।READ ALSO:-UP Gas Chamber Alert: कड़ाके की ठंड में 'जहरीली' हुई सांसें; नोएडा-गाजियाबाद में AQI 400 पार, डॉक्टर बोले- सिर्फ खांसी नहीं, अब ब्रेन स्ट्रोक और स्किन कैंसर का भी खतरा   परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने साफ कर दिया है कि दिल्ली की हवा को साफ रखना उनकी सरकार की पहली प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।   24 घंटे का 'मेगा एक्शन': आंकड़ों की जुबानी दिल्ली ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट और ट्रैफिक पुलिस ने मिलकर जो कार्रवाई की है, उसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यह कार्रवाई बताती है कि दिल्ली की सड़कों पर अभी भी बड़ी संख्या में प्रदूषण फैलाने वाले वाहन दौड़ रहे हैं।   चेकिंग और चालान का रिपोर्ट कार्ड: कुल गाड़ियों की जांच: महज 24 घंटे के भीतर एनफोर्समेंट टीमों ने 4,927 वाहनों की सख्ती से जांच की। PUCC चालान (ट्रैफिक पुलिस): दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट (PUCC) न होने पर 2,390 चालान काटे। PUCC चालान (ट्रांसपोर्ट विभाग): ट्रांसपोर्ट एनफोर्समेंट विंग ने PUCC उल्लंघन के लिए 285 चालान जारी किए। ANPR कैमरों का कमाल: ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों ने भी 1,114 उल्लंघनकर्ताओं को पकड़ा और चालान घर भेजा। GRAP उल्लंघन: ग्रैप (GRAP - Graded Response Action Plan) नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले 11 वाहनों पर ट्रांसपोर्ट विभाग ने और 170 वाहनों पर ट्रैफिक पुलिस ने जुर्माना लगाया।   इसके अलावा, जांच के दौरान 238 वाहनों को सख्त हिदायत और अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देशों के साथ वापस भेजा गया।   बसों पर बड़ी कार्रवाई: 100 बसें जब्त प्रदूषण में भारी वाहनों, खासकर बसों की भूमिका को देखते हुए विभाग ने विशेष अभियान चलाया है। एक दिन का हाल: सिर्फ एक दिन में इंटरस्टेट (अंतरराज्यीय) और सामान ले जा रही 28 बसों को जब्त (Impound) किया गया है। दिसंबर का आंकड़ा: 1 दिसंबर से लेकर अब तक प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने पर लगभग 100 बसों को जब्त कर कार्रवाई की गई है। ये बसें न सिर्फ नियमों को तोड़ रही थीं, बल्कि दिल्ली की हवा में जहर भी घोल रही थीं।   फर्जी PUC सेंटर्स का भंडाफोड़: 28 सस्पेंड, 2 कैंसिल सिर्फ वाहन मालिकों पर ही नहीं, बल्कि उन प्रदूषण जांच केंद्रों (PUC Centers) पर भी शिकंजा कसा गया है जो चंद पैसों के लिए फर्जी सर्टिफिकेट बांट रहे थे या मशीनों में छेड़छाड़ कर रहे थे।   सस्पेंशन: अनियमितता बरतने वाले 28 PUC सेंटर्स को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। लाइसेंस रद्द: गंभीर गड़बड़ी पाए जाने पर 2 सेंटर्स का लाइसेंस हमेशा के लिए कैंसिल (Cancel) कर दिया गया है। FIR दर्ज: गोकुलपुरी (Gokalpuri) थाने में एक PUC सेंटर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है। उस पर आरोप है कि वह पीयूसी सर्टिफिकेट जारी करने में बड़ी धांधली कर रहा था। निगरानी: दो अन्य सेंटर्स के खिलाफ भी जांच और कार्रवाई शुरू कर दी गई है।   मंत्री का निर्देश: 'अधिकारी खुद फील्ड में उतरें' दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने इस अभियान की कमान खुद संभाल ली है। उन्होंने एसी कमरों में बैठे अधिकारियों को सड़कों पर उतरने का निर्देश दिया है।   मंत्री के 3 बड़े निर्देश: निजी दौरा: ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारी पूरी दिल्ली के PUC सेंटर्स का व्यक्तिगत रूप से (Personally) दौरा करें और वहां की कार्यप्रणाली देखें। जनता को न हो परेशानी: अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि ईमानदार वाहन मालिकों को PUC सर्टिफिकेट बनवाने में लंबी लाइनों या किसी अन्य परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। त्वरित रिपोर्टिंग: अगर कहीं कोई कमी या गड़बड़ी मिलती है, तो उसकी सूचना तुरंत मंत्री कार्यालय को दी जाए ताकि 'ऑन द स्पॉट' एक्शन लिया जा सके।   डॉ. पंकज कुमार सिंह का बयान: "प्रदूषण के खिलाफ हमारी लड़ाई में प्रवर्तन (Enforcement) की सख्ती जरूरी है, लेकिन नागरिकों की सुविधा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। हम चाहते हैं कि दिल्ली को साफ हवा मिले और लोगों को सरकारी सेवाएं बिना किसी रिश्वत या परेशानी के मिलें। यह हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।"   पड़ोसी राज्यों से अपील: 'फर्जीवाड़ा रोकें' दिल्ली सरकार ने पाया है कि दूसरे राज्यों (विशेषकर यूपी और हरियाणा) से आने वाली गाड़ियों के पास अक्सर फर्जी पीयूसीसी (Fake PUCC) होते हैं।   अपील: दिल्ली ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के परिवहन विभागों से अपील की है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में ऐसे फर्जी सेंटर्स और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। साझा अभियान: दिल्ली परिवहन विभाग ने दोहराया है कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर GRAP नियमों के तहत यह संयुक्त अभियान आगे भी जारी रहेगा।   दिल्ली सरकार का यह आक्रामक रुख बताता है कि प्रदूषण अब सिर्फ एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक चुनौती बन गया है। 4900 गाड़ियों की जांच और 100 बसों की जब्ती यह संकेत देती है कि नियम तोड़ने वालों के लिए अब दिल्ली की सड़कों पर कोई जगह नहीं है। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पड़ोसी राज्य इस मुहिम में दिल्ली का कितना साथ देते हैं, क्योंकि हवा सरहदों को नहीं मानती।

Unknown दिसम्बर 26, 2025 0
new delhi railway station parking drop off charges slashed commercial vehicle fee rules dec 26 2025
NDLS Good News: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाना हुआ सस्ता! पार्किंग चार्ज में 'बंपर कटौती', लेकिन 60 मिनट की 'डेडलाइन' क्रॉस की तो गाड़ी हो जाएगी जब्त

नई दिल्ली (रेलवे डेस्क): देश की राजधानी और सबसे व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में से एक, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) पहुंचने वाले यात्रियों और उन्हें छोड़ने आने वाले परिजनों के लिए नए साल से पहले एक बड़ी खुशखबरी आई है। अगर आप अपनी गाड़ी से स्टेशन जा रहे हैं, तो अब आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली नहीं करनी पड़ेगी।READ ALSO:-Income Tax Revolution: 1 अप्रैल से डस्टबिन में जाएगा 64 साल पुराना कानून! अब ₹12.75 लाख तक की कमाई पर 'Zero Tax', मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला   उत्तर रेलवे (Northern Railway) ने स्टेशन परिसर में लगने वाले भीषण जाम और यात्रियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पार्किंग और 'ड्रॉप-ऑफ' (Drop-off) व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। 26 दिसंबर 2025 से लागू हुई नई दरों के मुताबिक, पार्किंग शुल्क को न सिर्फ तर्कसंगत (Rationalize) बनाया गया है, बल्कि यात्रियों को भारी वित्तीय राहत भी दी गई है।   जहां एक तरफ निजी वाहन मालिकों (Private Vehicle Owners) के लिए नियम आसान किए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ कैब और कमर्शियल वाहनों के लिए थोड़ी सख्ती बरती गई है ताकि स्टेशन पर 'पिकनिक' जैसा माहौल न बने और ट्रैफिक चलता रहे।   क्या है नई व्यवस्था? निजी और कमर्शियल का पूरा गणित उत्तर रेलवे ने इस बार 'एक्सेस कंट्रोल पार्किंग सिस्टम' में जो बदलाव किए हैं, वे सीधे तौर पर आम आदमी की जेब को प्रभावित करते हैं। आइए समझते हैं कि किसके लिए क्या बदला है।   1. निजी वाहनों (Private Cars) के लिए 'बड़ी राहत' अगर आप अपनी कार से अपने परिवार को छोड़ने स्टेशन जा रहे हैं, तो आपके लिए राहत बरकरार है।   0 से 8 मिनट (फ्री): रेलवे ने पुरानी सुविधा को जारी रखा है। अगर आप स्टेशन परिसर में प्रवेश करते हैं, यात्री को उतारते हैं और 8 मिनट के भीतर बाहर निकल जाते हैं, तो आपसे कोई शुल्क नहीं (Free) लिया जाएगा। यह नियम सिर्फ निजी वाहनों पर लागू है।   2. कमर्शियल वाहनों (Commercial/Cabs) पर 'एंट्री टैक्स' ओला, उबर या काली-पीली टैक्सी से आने वालों के लिए नियम थोड़े सख्त हुए हैं।   पहले 8 मिनट: अब कमर्शियल वाहनों को स्टेशन में घुसते ही 30 रुपये का एंट्री चार्ज/एक्सेस शुल्क देना होगा, भले ही वे 8 मिनट के भीतर बाहर निकल जाएं। क्यों किया गया ऐसा? रेलवे का तर्क है कि कमर्शियल वाहन अक्सर सवारी के इंतजार में लेन को ब्लॉक करके रखते हैं, जिससे जाम लगता है। यह शुल्क उन्हें जल्दी निकलने के लिए प्रेरित करेगा।   जेब को सुकून: 15 से 60 मिनट रुकने पर भारी डिस्काउंट अक्सर ऐसा होता है कि ट्रेन लेट होने पर या बुजुर्ग यात्रियों को चढ़ाने में 8 मिनट से ज्यादा का समय लग जाता है। पहले इसके लिए भारी जुर्माना भरना पड़ता था, लेकिन अब रेलवे ने दिल खोलकर डिस्काउंट दिया है।   संशोधित दरों की तुलना (Old vs New Rates): 15 से 30 मिनट का स्लैब: पहले: अगर आप 15 मिनट से एक मिनट भी ज्यादा रुकते थे, तो आपको 200 रुपये देने पड़ते थे। अब: इसे घटाकर 150 रुपये कर दिया गया है। बचत: सीधे 50 रुपये का फायदा। 30 से 60 मिनट का स्लैब (सबसे बड़ी राहत): पहले: यह सबसे महंगा स्लैब था। 30 मिनट से ऊपर होते ही 500 रुपये का फ्लैट रेट लगता था, जो किसी जुर्माने जैसा था। अब: रेलवे ने इसे घटाकर मात्र 200 रुपये कर दिया है। बचत: यहाँ यात्रियों को सीधे 300 रुपये की भारी बचत हो रही है।   सावधान! 60 मिनट की 'लक्ष्मण रेखा' पार की तो... जहां रेलवे ने रेट कम किए हैं, वहीं अनुशासन को लेकर बेहद सख्त नियम भी बनाए हैं। यह नियम उन लोगों के लिए है जो ड्रॉप-ऑफ लेन में गाड़ी खड़ी करके गायब हो जाते हैं।   60 मिनट की लिमिट: स्टेशन के 'पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ' लेन में किसी भी वाहन को 60 मिनट (1 घंटा) से ज्यादा रुकने की अनुमति नहीं होगी। सख्त कार्रवाई: अगर कोई वाहन 60 मिनट से ज्यादा खड़ा पाया गया, तो उसे पार्किंग शुल्क के साथ नहीं छोड़ा जाएगा। गाड़ी को तत्काल टो (Tow) कर लिया जाएगा। गाड़ी छुड़ाने के लिए पार्किंग चार्ज के अलावा 300 रुपये का टोइंग शुल्क (Towing Charge) अलग से देना होगा।   यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि लोग स्टेशन को 'पार्किंग लॉट' न समझें। स्टेशन सिर्फ यात्रियों को चढ़ाने और उतारने के लिए है, लंबी अवधि की पार्किंग के लिए नहीं।   क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत? रेलवे का तर्क उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) हिमांशु उपाध्याय ने इस बदलाव के पीछे की मंशा स्पष्ट की है। उन्होंने कहा:   "इन संशोधित दरों का मुख्य उद्देश्य पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ जोन में वाहनों के अनावश्यक और लंबी अवधि के ठहराव को हतोत्साहित (Discourage) करना है। अक्सर देखा गया है कि वाहन चालक लेन में गाड़ी खड़ी करके चले जाते हैं, जिससे पीछे आने वाले यात्रियों को जाम का सामना करना पड़ता है। नई दरों से जगह का सुचारू उपयोग होगा और यात्रियों को ट्रेन पकड़ने या बाहर निकलने में देरी नहीं होगी।"   प्रमुख कारण: पहाड़गंज और अजमेरी गेट पर जाम: पीक आवर्स में स्टेशन के दोनों तरफ किलोमीटर लंबा जाम लग जाता था। लड़ाई-झगड़े: ज्यादा चार्ज (500 रुपये) होने की वजह से पार्किंग स्टाफ और जनता के बीच अक्सर नोकझोंक होती थी। 200 रुपये का चार्ज तार्किक होने से विवाद कम होंगे। एयरपोर्ट मॉडल: रेलवे अब एयरपोर्ट की तर्ज पर 'मूविंग ट्रैफिक' (Moving Traffic) पर जोर दे रहा है।   यात्रियों और टैक्सी चालकों पर असर आम यात्री: यह फैसला मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बहुत राहत भरा है। कई बार बुजुर्ग माता-पिता या भारी सामान के साथ 8 मिनट में वापस आना संभव नहीं होता। अब अगर वे आधा घंटा भी रुकते हैं, तो उन्हें 500 रुपये की भारी भरकम राशि नहीं देनी होगी। 150-200 रुपये एक वाजिब रकम है। कैब ड्राइवर्स: कमर्शियल वाहनों पर लगे 30 रुपये के शुल्क का बोझ अंततः यात्रियों पर ही आ सकता है। कैब एग्रीगेटर्स (Ola/Uber) इसे 'पार्किंग/एंट्री चार्ज' के रूप में बिल में जोड़ सकते हैं। हालांकि, ट्रैफिक साफ मिलने से उनका ईंधन और समय दोनों बचेगा।   'खबरीलाल' की सलाह: स्टेशन जा रहे हैं तो इन बातों का रखें ध्यान अगर आप नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जा रहे हैं, तो स्मार्ट पार्किंग के लिए इन टिप्स को फॉलो करें:   स्टॉपवॉच का इस्तेमाल करें: अगर आप निजी वाहन से हैं, तो कोशिश करें कि ड्रॉप-ऑफ लेन में 8 मिनट के अंदर ही अपना काम निपटा लें। यह पूरी तरह मुफ्त है। पहले से तैयारी: यात्री को उतारने से पहले ही सामान तैयार रखें। विदाई की लंबी बातें गाड़ी के अंदर न करें। लंबी पार्किंग के लिए: अगर आपको यात्री को प्लेटफॉर्म तक छोड़ने जाना है और 1 घंटे से ज्यादा का समय लग सकता है, तो ड्रॉप-ऑफ लेन का इस्तेमाल न करें। गाड़ी को 'डेजिग्नेटेड पार्किंग लॉट' (Designated Parking Lot) में ही खड़ी करें, वहां के रेट अलग और सुरक्षित हैं। 60 मिनट का अलार्म: गलती से भी ड्रॉप-ऑफ लेन में 60 मिनट से ज्यादा न रुकें, वरना गाड़ी टो हो जाएगी और बेवजह की परेशानी झेलनी पड़ेगी।   रेलवे का यह कदम स्वागत योग्य है। 500 रुपये का दंडनात्मक शुल्क हटाकर 200 रुपये करना एक व्यावहारिक सोच है। इससे न केवल यात्रियों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि स्टेशन परिसर में वाहनों की आवाजाही भी तेज होगी। उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से नई दिल्ली स्टेशन पर लगने वाले जाम से दिल्लीवासियों को मुक्ति मिलेगी।

Unknown दिसम्बर 26, 2025 0
delhi ncr air pollution update caqm removes grap 4 restrictions grap 1 2 3 continue aqi improves
दिल्ली-NCR की सांसों पर 'लॉकडाउन' में ढील: GRAP-4 की बेड़ियाँ टूटीं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं; स्टेज 1, 2 और 3 का पहरा रहेगा और सख्त!

नई दिल्ली (स्पेशल डेस्क): "सांसों पर पहरा कुछ कम हुआ है, लेकिन खत्म नहीं।" दिल्ली-एनसीआर के करोड़ों निवासियों के लिए बुधवार की सुबह एक मिली-जुली खबर लेकर आई। पिछले कई दिनों से जहरीली हवा (Toxic Air) के चैंबर में कैद राजधानी को आखिरकार थोड़ी राहत मिली है। वायु गुणवत्ता में आए मामूली सुधार को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने तत्काल प्रभाव से ग्रैप-4 (GRAP-4) की सख्त पाबंदियों को हटाने का फैसला किया है।READ ALSO:-विधानसभा में 'महाराज' की हुंकार: सीएम योगी ने सपा से पूछा- 'काफिला क्यों लुटा?', कहा- 'कब्जा करने वालों को पाताल से भी ढूंढ निकालूंगा'   लेकिन खुश होने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि यह राहत पूरी नहीं है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण का स्तर अभी भी 'खराब' श्रेणी में है, इसलिए GRAP-1, GRAP-2 और GRAP-3 की पाबंदियां पहले की तरह, बल्कि और भी ज्यादा सख्ती से लागू रहेंगी।READ ALSO:-विधानसभा में 'महाराज' की हुंकार: सीएम योगी ने सपा से पूछा- 'काफिला क्यों लुटा?', कहा- 'कब्जा करने वालों को पाताल से भी ढूंढ निकालूंगा'   क्यों लिया गया GRAP-4 हटाने का फैसला? बीते पखवाड़े से दिल्ली-एनसीआर की हवा 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में बनी हुई थी, जिसने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए थे। 13 दिसंबर को हालात बेकाबू होते देख CAQM ने आनन-फानन में ग्रैप का सबसे सख्त चरण (स्टेज-4) लागू कर दिया था।   बुधवार (24 दिसंबर) को CAQM की उप-समिति (Sub-Committee) ने एक आपात समीक्षा बैठक की। इस बैठक में आईएमडी (IMD) और आईआईटी-मद्रास (IITM) के मौसम वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट पेश की। आंकड़ों में पाया गया:   AQI में सुधार: 24 दिसंबर को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 271 दर्ज किया गया, जो 'खराब' (Poor) श्रेणी में आता है। यह पिछले हफ्तों के 450+ के आंकड़े से काफी बेहतर है। हवा की मेहरबानी: मौसम विभाग ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से चलने वाली तेज हवाओं और धूप खिलने के कारण प्रदूषक तत्व (Pollutants) बिखर गए हैं, जिससे स्मॉग की चादर थोड़ी छंटी है।   CAQM ने अपने आदेश में कहा, "चूंकि एक्यूआई अब 'गंभीर' श्रेणी (450 से ऊपर) से नीचे आ गया है और मौसम के पूर्वानुमान भी अनुकूल हैं, इसलिए GRAP-4 के तहत लगाए गए अतिरिक्त प्रतिबंधों को हटाया जा रहा है।"   क्या बदला और क्या नहीं? (Know What Changed) GRAP-4 हटने का मतलब यह नहीं है कि सब कुछ सामान्य हो गया है। आम जनता के मन में यह सवाल है कि अब उन्हें किन नियमों का पालन करना होगा। आइए विस्तार से समझते हैं:   अब क्या अनुमति मिल गई है? (Relief under GRAP-4 Removal) GRAP-4 हटने से सबसे बड़ी राहत कमर्शियल ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई को मिली है:   ट्रकों की एंट्री: दिल्ली में ट्रकों की एंट्री पर लगा पूर्ण प्रतिबंध (Essential Goods को छोड़कर) अब हटा लिया गया है। अब डीजल के भारी वाहन भी दिल्ली में प्रवेश कर सकेंगे, बशर्ते वे GRAP-3 के नियमों का उल्लंघन न करें। मध्यम माल वाहक (MGV) और भारी माल वाहक (HGV): जो बीएस-4 और उससे नीचे के डीजल संचालित वाहन दिल्ली में रजिस्टर्ड हैं, उन पर लगी रोक हट सकती है (अधिसूचना के विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता)। निर्माण कार्य: रैखिक सार्वजनिक परियोजनाओं (Linear Public Projects) जैसे राजमार्ग, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, पावर ट्रांसमिशन, और पाइपलाइन बिछाने के काम पर लगी रोक हट गई है।   क्या अभी भी प्रतिबंधित रहेगा? (Restrictions under GRAP-3 Continue) चूंकि GRAP-3 अभी भी लागू है, इसलिए आम आदमी पर पाबंदियां जारी रहेंगी:   BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारें: अगर आपके पास BS-3 पेट्रोल या BS-4 डीजल वाली निजी कार है, तो उसे अभी भी गैराज में ही रखें। इन गाड़ियों को चलाने पर 20,000 रुपये का भारी भरकम जुर्माना जारी रहेगा। निजी निर्माण पर रोक: निजी निर्माण कार्यों, तोड़फोड़ (Demolition), खुदाई, और बोरिंग जैसे कार्यों पर सख्त प्रतिबंध जारी रहेगा। सिर्फ सरकारी और अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े निर्माण ही हो सकेंगे। औद्योगिक प्रतिबंध: एनसीआर में उन उद्योगों पर सख्ती जारी रहेगी जो पीएनजी (PNG) या अन्य स्वच्छ ईंधन पर शिफ्ट नहीं हुए हैं। तंदूर पर रोक: होटलों और ढाबों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक जारी रहेगी।   मौसम विभाग की चेतावनी: अभी जश्न का समय नहीं भले ही आज एक्यूआई 271 है, लेकिन मौसम विभाग (IMD) ने आगाह किया है कि आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।   हवा की गति: विभाग के अनुसार, अगले दो-तीन दिनों में हवा की गति फिर से कम हो सकती है। सर्दियों में 'विंड स्पीड' कम होते ही प्रदूषक तत्व सतह पर जमने लगते हैं (Lock-in effect)। तापमान: जैसे-जैसे तापमान गिरेगा, कोहरा बढ़ेगा और यह धुएं के साथ मिलकर 'स्मॉग' बनाएगा।   सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया है कि एजेंसियां ढिलाई न बरतें। ग्रैप-1, 2 और 3 के नियमों को पहले से ज्यादा आक्रामकता (Aggressively) के साथ लागू किया जाए। सड़कों पर पानी का छिड़काव, मैकेनाइज्ड स्वीपिंग और डस्ट कंट्रोल उपायों को दोगुना करने का निर्देश दिया गया है।   पिछले एक महीने का 'प्रदूषण कैलेंडर' दिल्ली वालों ने पिछले कुछ महीनों में प्रदूषण के अलग-अलग चरणों को झेला है। एक नजर डालते हैं कि प्रशासन ने कब क्या कदम उठाए:   14 अक्टूबर 2025: सर्दियों की आहट के साथ ही प्रदूषण बढ़ने पर GRAP-1 लागू किया गया। इसमें धूल उड़ने से रोकने और पीयूसी (PUC) चेक करने जैसे नियम थे। 19 अक्टूबर 2025: हवा 'बहुत खराब' होने पर GRAP-2 लागू हुआ। इसमें जेनरेटर चलाने पर रोक और तंदूर के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई गई। नवंबर और दिसंबर: जैसे ही एक्यूआई 400 के पार गया, GRAP-3 लगाया गया, जिसने बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल गाड़ियों के पहिए थाम दिए। 13 दिसंबर 2025: स्थिति 'गंभीर' (450+) होने पर GRAP-4 लगाया गया था, जो आज 24 दिसंबर को हटाया गया है।   GRAP क्या है और यह कैसे काम करता है? हमारे पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि GRAP (Graded Response Action Plan) दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए बनाया गया एक आपातकालीन प्लान है। इसे हवा की गुणवत्ता (AQI) के आधार पर चार चरणों में बांटा गया है:   स्टेज-1 (AQI 201-300 - खराब): निर्माण कार्यों में धूल उड़ने से रोकना, सड़कों की सफाई, और पुराने वाहनों पर नजर। स्टेज-2 (AQI 301-400 - बहुत खराब): डीजल जेनरेटर पर रोक, कोयले/लकड़ी के इस्तेमाल पर पाबंदी, पार्किंग फीस बढ़ाना ताकि लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। स्टेज-3 (AQI 401-450 - गंभीर): BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारों पर रोक, निर्माण कार्यों (प्राइवेट) पर पूर्ण प्रतिबंध, और ईंट भट्ठों पर रोक। स्टेज-4 (AQI 450+ - अत्यंत गंभीर): ट्रकों की एंट्री बैन, स्कूलों को बंद करना, ऑड-ईवन लागू करना, और सरकारी/प्राइवेट ऑफिस में 50% वर्क फ्रॉम होम।   आम जनता पर इसका असर: स्कूल और ऑफिस GRAP-4 हटने का एक बड़ा असर स्कूलों और दफ्तरों पर पड़ सकता है।   स्कूल: GRAP-4 के तहत राज्य सरकारों को अधिकार था कि वे फिजिकल क्लास बंद कर ऑनलाइन क्लास चलाएं। अब जब यह स्टेज हट गई है, तो जिन स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेज चल रही थीं (विशेषकर छोटी कक्षाओं के लिए), वहां अब फिर से बच्चों को स्कूल जाना पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय राज्य सरकारों (दिल्ली, यूपी, हरियाणा) पर निर्भर करेगा। ऑफिस: वर्क फ्रॉम होम के सुझाव अब बाध्यकारी नहीं रहेंगे।   स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय: मास्क अभी न उतारें भले ही सरकारी फाइलों में पाबंदियां कम हो गई हों, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि AQI 271 भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। एम्स (AIIMS) और मेदांता के पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ों के डॉक्टर) चेतावनी देते हैं कि 'खराब' श्रेणी की हवा भी अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोगियों के लिए खतरनाक है।   सुबह की सैर (Morning Walk) से बचें, क्योंकि सुबह के समय प्रदूषण के कण सबसे नीचे होते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को बाहर कम निकलने दें। मास्क का प्रयोग जारी रखें।   निष्कर्ष: सुधरती हवा या तूफ़ान से पहले की शांति? दिल्ली में GRAP-4 का हटना निश्चित रूप से प्रशासन और जनता के लिए राहत की सांस है, लेकिन यह लड़ाई अभी लंबी है। 271 का AQI भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों से कई गुना ज्यादा खराब है। सीएक्यूएम का निर्णय तकनीकी आंकड़ों पर आधारित है, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि दिल्ली अभी भी 'गैस चैंबर' बनने की कगार पर खड़ी है।   अब यह देखना होगा कि ग्रैप-3 के प्रतिबंधों का पालन कितनी सख्ती से होता है और क्या दिल्लीवासी नए साल का स्वागत साफ हवा में करेंगे या फिर से धुंध की चादर में लिपटे हुए।   प्रमुख बिंदु (Key Highlights): निर्णय: CAQM ने दिल्ली-एनसीआर से GRAP-4 हटाया। कारण: AQI सुधरकर 271 (खराब श्रेणी) पर पहुंचा। क्या रहेगा लागू: GRAP-1, 2 और 3 के नियम सख्ती से जारी रहेंगे। वाहन: BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल निजी कारों पर प्रतिबंध जारी। निर्माण: रैखिक सरकारी परियोजनाओं को छूट, निजी निर्माण बंद रहेंगे। चेतावनी: मौसम विभाग ने हवा की गति कम होने की आशंका जताई है।

Unknown दिसम्बर 24, 2025 0
delhi pollution control no puc no fuel policy continued after grap 4 manjinder singh sirsa
दिल्ली वालों सावधान! पेट्रोल पंप जाने से पहले चेक कर लें 'यह' कागज, वरना खाली टंकी लौटना पड़ेगा घर; सरकार ने जारी किया सख्त फरमान

दिल्ली की जहरीली हवा को साफ करने के लिए सरकार अब 'एक्शन मोड' में आ गई है। अगर आप सोच रहे थे कि हवा थोड़ी साफ होने या ग्रैप-4 (GRAP-4) की पाबंदियां हटने के बाद नियमों में ढील मिल जाएगी, तो आप गलतफहमी में हैं। दिल्ली सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लंबी चलेगी और नियमों का पालन न करने वालों पर सख्ती अब और बढ़ाई जाएगी।READ ALSO:-मेरठ: 'मिस्ड कॉल' वाली माशूका और मौत का मकान! 7 दिन के 'प्यार' के बाद व्यापारी को मिली खौफनाक सजा   मंगलवार को दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक अहम घोषणा करते हुए कहा कि राजधानी में 'PUC नहीं तो तेल नहीं' (No PUC, No Fuel) का नियम बदस्तूर जारी रहेगा। यानी, अगर आपकी गाड़ी का प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र (PUC) एक्सपायर हो चुका है, तो आपको पेट्रोल पंप से ईंधन नहीं मिलेगा।   ग्रैप-4 हटे या रहे, सख्ती रहेगी बरकरार प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली सरकार द्वारा उठाए जा रहे सख्त कदमों की जानकारी दी। उन्होंने साफ कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय केवल ग्रैप के चरणों तक सीमित नहीं हैं।   स्थायी सख्ती: मंत्री ने कहा, "दिल्ली में ग्रैप-4 (GRAP-4) हटने के बाद भी एंटी-पलूशन उपाय जारी रखे जाएंगे। हमने फैसला किया है कि वैध PUC सर्टिफिकेट के बिना किसी भी वाहन को दिल्ली की सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं मिलेगी और न ही उन्हें फ्यूल दिया जाएगा।" पेट्रोल पंपों को निर्देश: सरकार ने सभी पेट्रोल पंप मालिकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे फ्यूल नोजल उठाने से पहले वाहन चालक का PUC सर्टिफिकेट जरूर चेक करें।   फर्जीवाड़ा करने वाले 12 सेंटर्स सस्पेंड सरकार की नजर सिर्फ वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि उन केंद्रों पर भी है जो प्रदूषण जांच के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं। मंत्री ने बताया कि हाल ही में किए गए औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।   खराब उपकरण: जांच में पाया गया कि कई PUC प्रमाण पत्र केंद्र सही ढंग से संचालित नहीं हो रहे थे। कार्रवाई: करीब 12 केंद्रों में प्रदूषण जांचने वाले उपकरण खराब पाए गए। इन सभी 12 केंद्रों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सरकार का संदेश साफ है—सिस्टम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।   क्यों जरूरी है यह फैसला? दिल्ली में वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। कई पुरानी और अनफिट गाड़ियां बिना वैलिड पीयूसी के सड़कों पर दौड़ रही हैं। 'PUC नहीं तो तेल नहीं' नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वही गाड़ियां सड़क पर चलें जो प्रदूषण मानकों को पूरा करती हों।   वाहन चालकों के लिए जरूरी सलाह अगर आप दिल्ली-एनसीआर में गाड़ी चलाते हैं, तो किसी भी परेशानी से बचने के लिए आज ही ये काम करें:   PUC डेट चेक करें: अपनी गाड़ी के दस्तावेजों या mParivahan ऐप पर चेक करें कि आपका PUC वैलिड है या नहीं। रिन्यू कराएं: अगर सर्टिफिकेट एक्सपायर हो गया है, तो तुरंत किसी अधिकृत केंद्र से इसे रिन्यू कराएं। हार्ड कॉपी साथ रखें: पेट्रोल पंप पर विवाद से बचने के लिए सर्टिफिकेट की कॉपी या डिजिटल प्रूफ तैयार रखें।   याद रखें, बिना PUC गाड़ी चलाने पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 10,000 रुपये तक के चालान का भी प्रावधान है। अब पेट्रोल न मिलने की सख्ती दोहरी मार साबित हो सकती है।

Unknown दिसम्बर 23, 2025 0
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Delhi Pollution: सीएम रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला! अब माफ नहीं होगा 10,000 का PUC चालान, ओला-उबर के साथ मिलकर चलेंगी E-बसें

देश की राजधानी दिल्ली, जो हर साल सर्दियों में 'गैस चैंबर' में तब्दील हो जाती है, उसकी हवा को शुद्ध करने के लिए नव-नियुक्त मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने कमर कस ली है। प्रदूषण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक लड़ाई का ऐलान करते हुए सीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति पर काम करेगी।READ ALSO:-महामना की जयंती पर मेरठ में बहेगी संस्कारों की बयार: युवा ब्राह्मण समाज ने कसी कमर, 28 दिसंबर को होगा ऐतिहासिक आयोजन   सोमवार को दिल्ली सचिवालय में हुई एक मैराथन उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कई ऐसे कड़े फैसले लिए हैं, जिनका सीधा असर दिल्लीवालों की जेब और सड़क पर चलने वाले वाहनों पर पड़ेगा। बैठक में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) समेत परिवहन विभाग, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), लोक निर्माण विभाग (PWD) और ट्रैफिक पुलिस के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे।   आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बैठक में क्या बड़े फैसले लिए गए और यह आम जनता को कैसे प्रभावित करेंगे।   1. अब 'जुगाड़' से नहीं हटेगा PUC चालान (No Waiver on PUC Challan) दिल्ली में अब तक वाहन चालक प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र (PUC) न होने पर कटने वाले चालान को लेकर बेफिक्र रहते थे। 10,000 रुपये का चालान कटने पर भी लोग लोक अदालतों (Lok Adalats) का सहारा लेकर उसे नाममात्र की राशि पर सेटल करवा लेते थे। लेकिन अब सीएम रेखा गुप्ता ने इस 'चोर दरवाजे' को बंद करने का आदेश दे दिया है।   सख्त निर्देश: मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में अधिकारियों से कहा, "प्रदूषण फैलाने वालों के लिए कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। अगर किसी गाड़ी का PUC नहीं है, तो उसका चालान किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा।" कोर्ट जाने की तैयारी: सीएम ने यहां तक कह दिया है कि अगर चालान माफी को रोकने के लिए सरकार को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा, तो वह पीछे नहीं हटेंगी। मकसद: सरकार का उद्देश्य राजस्व वसूलना नहीं, बल्कि लोगों में कानून का भय पैदा करना है ताकि वे अपनी गाड़ियों की समय पर जांच कराएं और दिल्ली की हवा को जहरीला न बनाएं।   2. ओला-उबर के साथ पब्लिक ट्रांसपोर्ट में क्रांति (Ola-Uber & E-Buses) प्रदूषण कम करने का सबसे कारगर तरीका है सड़कों से निजी वाहनों को कम करना। इसके लिए दिल्ली सरकार एक अनूठी पहल करने जा रही है। सरकार अब ऐप-आधारित एग्रीगेटर्स जैसे ओला (Ola) और उबर (Uber) के साथ हाथ मिलाने की तैयारी में है।   पूल और शेयरिंग मॉडल: सरकार इन कंपनियों के साथ मिलकर दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में 'पूल' और 'शेयर' आधार पर ई-बसें (E-Buses) चलाने की संभावना तलाश रही है। प्रीमियम बस सेवा: यह सेवा उन लोगों को टारगेट करेगी जो अपनी कार छोड़कर बस में सफर करना चाहते हैं लेकिन उन्हें आरामदायक सीट और टाइमिंग की गारंटी चाहिए। अगर ओला-उबर इस क्षेत्र में आती हैं, तो ऐप के जरिए सीट बुकिंग होगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन हाई-टेक और सुविधाजनक बनेगा। जीरो कार्बन उत्सर्जन: शर्त यह होगी कि ये बसें पूरी तरह इलेक्ट्रिक या प्रदूषण मुक्त ईंधन पर आधारित हों।   3. ई-रिक्शा का 'मकड़जाल' होगा खत्म (New Guidelines for E-Rickshaws) दिल्ली की लाइफलाइन बन चुके ई-रिक्शा अब जाम का बड़ा कारण भी बन गए हैं। मेट्रो स्टेशनों के बाहर बेतरतीब खड़े ई-रिक्शा और मुख्य सड़कों पर रेंगते हुए ये वाहन ट्रैफिक की रफ्तार को धीमा करते हैं। ट्रैफिक जाम का मतलब है—गाड़ियों का ईंधन ज्यादा जलना और प्रदूषण का बढ़ना।   इस समस्या के समाधान के लिए सीएम रेखा गुप्ता ने नई 'ई-रिक्शा गाइडलाइन' लाने की घोषणा की है:   रूट निर्धारण: अब ई-रिक्शा अपनी मर्जी से कहीं भी नहीं दौड़ सकेंगे। उनके लिए विशेष जोन और रूट तय किए जाएंगे। नो-एंट्री जोन: भीड़भाड़ वाले मुख्य मार्गों पर ई-रिक्शा के प्रवेश को नियंत्रित किया जाएगा ताकि ट्रैफिक सुचारू रूप से चल सके।   4. DTC बसों की 'लास्ट माइल कनेक्टिविटी' (DTC Route Rationalization) सरकार का मानना है कि लोग अपनी कार तभी छोड़ेंगे जब बस उनके घर के पास तक पहुंचेगी। इसके लिए दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के रूटों को पूरी तरह से बदला और व्यवस्थित (Rationalize) किया जाएगा।   वैज्ञानिक अप्रोच: बसों के रूट का निर्धारण अब वैज्ञानिक तरीके से होगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दिल्ली की हर कॉलोनी, हर गली तक बस सेवा की पहुंच हो। कनेक्टिविटी: मेट्रो और बस नेटवर्क को आपस में इस तरह जोड़ा जाएगा कि यात्री को गंतव्य तक पहुंचने के लिए भटकना न पड़े।   5. 'गुड न्यूज': नई EV पॉलिसी में मिडिल क्लास को तोहफा (New EV Policy Draft) सख्ती के साथ-साथ सरकार राहत देने का भी प्लान बना रही है। सूत्रों के मुताबिक, जनवरी के पहले हफ्ते में दिल्ली सरकार अपनी नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी का ड्राफ्ट पेश कर सकती है। इस बार फोकस 'आम आदमी' और 'मिडिल क्लास' पर होगा।   दो पहिया वाहनों पर सब्सिडी: अगर आप अपना पेट्रोल स्कूटर छोड़कर इलेक्ट्रिक स्कूटर लेते हैं, तो सरकार आपको 35,000 से 40,000 रुपये तक की भारी सब्सिडी दे सकती है। यह अब तक की सबसे बड़ी राहत होगी। कार खरीदारों को राहत: 20 लाख रुपये तक की कीमत वाली पेट्रोल-डीजल कार चलाने वाले लोग अगर EV में शिफ्ट होते हैं, तो उन्हें भी सरकार की तरफ से आकर्षक सब्सिडी मिलेगी। इसका सीधा फायदा मध्यम वर्गीय परिवारों को होगा जो बजट के कारण इलेक्ट्रिक कार नहीं खरीद पा रहे थे।   मुख्यमंत्री का संदेश: "हवा साफ करने के लिए कड़े फैसलों से गुरेज नहीं" बैठक के समापन पर सीएम रेखा गुप्ता ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय (Coordination) के साथ काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि फैसले फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने चाहिए।   "हम दिल्ली को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह लड़ाई सिर्फ सरकार की नहीं, हर नागरिक की है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई होगी, क्योंकि साफ हवा पर सबका अधिकार है।" - रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री, दिल्ली   मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा उठाए गए ये कदम बताते हैं कि दिल्ली सरकार अब प्रदूषण को लेकर केवल 'प्रबंधन' नहीं, बल्कि 'समाधान' की दिशा में बढ़ रही है। जहां एक तरफ 10,000 रुपये के चालान पर सख्ती दिखाकर नियम तोड़ने वालों को चेतावनी दी गई है, वहीं दूसरी तरफ ओला-उबर के साथ साझेदारी और नई ईवी पॉलिसी के जरिए भविष्य का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। अब देखना होगा कि जनवरी में आने वाली नई पॉलिसी और सड़कों पर होने वाली सख्ती का दिल्ली की आबोहवा पर कितना सकारात्मक असर पड़ता है।   FAQ: आम जनता के सवाल प्रश्न: क्या अब PUC चालान लोक अदालत में कम नहीं होगा? उत्तर: जी नहीं, मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार अब सरकार PUC न होने पर कटने वाले 10,000 रुपये के चालान को माफ या कम नहीं करेगी। आपको पूरा जुर्माना भरना होगा। प्रश्न: नई EV पॉलिसी कब आ रही है? उत्तर: सूत्रों के अनुसार, नई पॉलिसी का ड्राफ्ट जनवरी 2026 के पहले हफ्ते में आ सकता है। प्रश्न: ओला-उबर बस सेवा क्या है? उत्तर: सरकार निजी कंपनियों के साथ मिलकर 'ऐप-आधारित प्रीमियम बस सेवा' शुरू करने की योजना बना रही है, जिसमें आप ऐप से अपनी सीट बुक कर सकेंगे। प्रश्न: ई-रिक्शा वालों के लिए क्या बदलेगा? उत्तर: जल्द ही नई गाइडलाइन आएगी जिसके तहत ई-रिक्शा के चलने के रूट और जोन तय कर दिए जाएंगे, ताकि वे जाम का कारण न बनें।

Unknown दिसम्बर 22, 2025 0
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'दिसंबर का टॉर्चर' शुरू: 20 तारीख बनी साल का सबसे ठंडा दिन, पहली 'शीतलहर' से ठिठुरी दिल्ली; सूरज हुआ गायब, कोहरे के 'सफेद लॉकडाऊन' ने थामी रफ्तार

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) में जिसका डर था, आखिरकार वही हुआ। दिसंबर का महीना आधा बीत जाने के बाद, सर्दी ने अब अपना असली और खौफनाक रंग दिखाना शुरू कर दिया है। शनिवार, 20 दिसंबर 2025, इस साल के मौसम के इतिहास में दर्ज हो गया है—आज का दिन इस सीजन का अब तक का 'सबसे ठंडा दिन' (Coldest Day) रिकॉर्ड किया गया।   सुबह से ही दिल्ली-एनसीआर के आसमान पर कोहरे (Fog) और धुंध की ऐसी मोटी चादर लिपटी रही कि सूरज देवता के दर्शन दुर्लभ हो गए। दिन भर लोग ठिठुरते रहे और अलाव या हीटर का सहारा ढूंढते नजर आए। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि दिल्ली ने आज सीजन की अपनी 'पहली शीतलहर' (First Cold Wave) का सामना किया है। हालात यह रहे कि दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री से भी ज्यादा नीचे लुढ़क गया।READ ALSO:-UP School Closed: यूपी में ठंड का 'प्रचंड' प्रहार; 16 जिलों में स्कूलों पर जड़ा ताला, बच्चों को मिली बड़ी राहत, देखें पूरी लिस्ट   इस 'सफेद आफत' का असर सिर्फ लोगों की कंपकंपी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने दिल्ली की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया। हवाई यात्रा से लेकर रेल यातायात तक, सब कुछ कोहरे के आगे बेबस नजर आया। आज 'खबरीलाल' की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि दिल्ली में ठंड का यह यू-टर्न कैसे आया, आज दिन भर क्या-क्या हुआ और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए क्या चेतावनी जारी की है।   आंकड़ों में देखें ठंड का 'प्रहार' (The Cold Statistics) शनिवार को दिल्ली का मौसम पूरी तरह से बदल गया। जो लोग अब तक हल्की जैकेट में काम चला रहे थे, उन्हें आज मोटे ऊनी कपड़े निकालने पड़ गए।   तापमान में भारी गिरावट: मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में आज अधिकतम तापमान (Maximum Temperature) गिरकर महज 16.9 डिग्री सेल्सियस रह गया। यह इस मौसम के सामान्य औसत तापमान से पूरे 5.3 डिग्री सेल्सियस कम है। जब दिन का तापमान इतना गिर जाता है, तो उसे तकनीकी रूप से 'कोल्ड डे' (Cold Day) की स्थिति माना जाता है, खासकर जब न्यूनतम तापमान भी 10 डिग्री से नीचे हो। यहां दर्ज हुई शीतलहर: दिल्ली के मौसम को मॉनिटर करने वाले प्रमुख केंद्रों—पालम (Palam) और सफदरजंग (Safdarjung)—में शीतलहर के आधिकारिक आंकड़े दर्ज किए गए। आईएमडी के अनुसार, पांच में से इन दो महत्वपूर्ण निगरानी केंद्रों ने पुष्टि की कि शहर शीतलहर की चपेट में है। सूरज का 'वनवास': ठंड के इतना बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यह रहा कि दिन भर घने बादल और कोहरा छाया रहा। सूर्य की किरणें धरती तक पहुंच ही नहीं पाईं, जिससे 'दिन की गर्माहट' (Diurnal Warming) पूरी तरह गायब रही और गलन बढ़ती चली गई।   कोहरे का 'कोहराम': थम गई दिल्ली की रफ्तार शीतलहर के साथ-साथ घने कोहरे ने दिल्ली-एनसीआर में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। यह कोहरा सिर्फ सुबह तक सीमित नहीं था, बल्कि दिन चढ़ने के साथ भी कई इलाकों में इसका असर बना रहा।   1. हवाई यात्रियों की फजीहत: दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI Airport), जो देश का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है, आज कोहरे के कारण बुरी तरह प्रभावित रहा। फ्लाइट्स लेट: जीरो विजिबिलिटी या लो विजिबिलिटी (Low Visibility) के चलते फ्लाइट्स का संचालन बेहद मुश्किल हो गया। ताजा जानकारी के मुताबिक, आज दिन भर में लगभग 130 फ्लाइट्स अपने निर्धारित समय से देरी से उड़ीं या लैंड हुईं। यात्री परेशान: हजारों यात्री एयरपोर्ट पर घंटों फंसे रहे। कई फ्लाइट्स को डायवर्ट भी करना पड़ा। एयरलाइंस ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक करें। 2. ट्रेनों का बुरा हाल: भारतीय रेलवे पर भी कोहरे की जबरदस्त मार पड़ी है। उत्तर भारत से दिल्ली आने वाली और यहां से जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों पीछे चल रही हैं। 13 घंटे तक की देरी: रिपोर्ट के मुताबिक, कई प्रमुख ट्रेनें 13 घंटे तक की देरी से चल रही हैं। जो यात्री सुबह दिल्ली पहुंचने वाले थे, वे शाम या रात तक पहुंच पा रहे हैं। स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ और अव्यवस्था का आलम है।   पूरे उत्तर भारत में 'सफेद लॉकडाऊन' यह सिर्फ दिल्ली का हाल नहीं है। पूरा उत्तर भारत इस समय कड़ाके की ठंड और कोहरे की गिरफ्त में है। मौसम विभाग के सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तर-उत्तरपूर्वी राजस्थान और उत्तरी मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से में घना कोहरा छाया हुआ है।   एनसीआर में खतरा बढ़ा: चिंता की बात यह है कि इन पड़ोसी राज्यों से घना कोहरा तेजी से दिल्ली-एनसीआर की तरफ बढ़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ घंटों में (जब आप यह खबर पढ़ रहे होंगे), यह कोहरा दिल्ली के साथ-साथ गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद के इलाकों को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लेगा।   रात के लिए रेड अलर्ट जैसी स्थिति: मौसम विभाग का अनुमान है कि आज रात 12 बजे से लेकर देर रात 1 बजे के बीच विजिबिलिटी (दृश्यता) घटकर 0 से 100 मीटर के बीच रह सकती है। यह वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक स्थिति है।   सलाह: IMD ने वाहन चालकों को सख्त सलाह दी है कि यदि बहुत जरूरी न हो तो रात में यात्रा से बचें। यदि निकलना ही पड़े, तो गाड़ी धीमी चलाएं और हाई बीम की जगह फॉग लैंप (Fog Lamps) या लो बीम का इस्तेमाल करें। इंडिकेटर जलाकर रखें और सड़क पर सफेद पट्टी को फॉलो करें।   कल कैसा रहेगा मौसम? IMD का 'ऑरेंज अलर्ट' अगर आपको लग रहा है कि आज ठंड बहुत थी, तो कल के लिए तैयार हो जाइए। मौसम विभाग की भविष्यवाणी डराने वाली है।   21 दिसंबर का पूर्वानुमान: ऑरेंज अलर्ट जारी: मौसम विभाग ने दिल्ली में कल, यानी 21 दिसंबर के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' (Orange Alert) जारी किया है। इसका मतलब है कि मौसम 'खतरनाक' स्तर तक खराब हो सकता है और लोगों को 'तैयार' रहने की जरूरत है। कड़ाके की सर्दी: IMD का कहना है कि कल भी कड़ाके की सर्दी पड़ेगी। न्यूनतम तापमान में और गिरावट आ सकती है और शीतलहर का प्रकोप जारी रहेगा। कोहरा अभी और सताएगा: आने वाले दो दिनों तक दिल्ली-एनसीआर में सुबह और रात के समय 'घने से बहुत घना कोहरा' छाए रहने की संभावना है। विजिबिलिटी कम रहने से यातायात पर असर जारी रहेगा। सूरज के निकलने पर संशय: कल भी सूरज निकलने की संभावना कम है, जिससे दिन में भी ठिठुरन बनी रहेगी।   सेहत का रखें खास ख्याल मौसम में आए इस अचानक और तीखे बदलाव का सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ सकता है। 'खबरीलाल' अपने पाठकों से अपील करता है कि वे इस मौसम में लापरवाही न बरतें।   लेयरिंग करें: ठंड से बचने के लिए एक मोटे कपड़े की जगह, पतले-पतले कई कपड़े (लेयरिंग) पहनें। यह शरीर की गर्मी को रोकने में ज्यादा कारगर होता है। बुजुर्गों और बच्चों का ध्यान रखें: इस मौसम में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। बुजुर्गों को सुबह की सैर (Morning Walk) से बचना चाहिए जब तक कि धूप न निकल आए। बच्चों को भी अच्छी तरह ढककर ही बाहर निकालें। गर्म चीजें लें: अपने खानपान में गर्म सूप, अदरक वाली चाय, गुड़ और मेवे शामिल करें। गुनगुना पानी पिएं।   सर्दी का 'असली खेल' शुरू 20 दिसंबर 2025 का दिन दिल्ली वालों के लिए यह अहसास लेकर आया है कि 'असली सर्दी' अब शुरू हुई है। अभी तक जो मौसम था, वह तो सिर्फ ट्रेलर था। आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं, खासकर सुबह ऑफिस जाने वालों और रात में सफर करने वालों के लिए। प्रशासन को भी रैन बसेरों और अलाव की व्यवस्था को चाक-चौबंद करना होगा क्योंकि सड़कों पर रहने वालों के लिए यह समय सबसे कठिन होता है।   दिल्ली के मौसम का पल-पल का अपडेट, फ्लाइट-ट्रेन की स्थिति और IMD की हर चेतावनी सबसे पहले जानने के लिए जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ।

Unknown दिसम्बर 21, 2025 0
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दिल्ली की 'जहरीली हवा' पर संसद में संग्राम: क्या आधी हो चुकी है दिल्लीवालों के फेफड़ों की ताकत? सरकार ने मानी खतरे की बात, लेकिन आंकड़ों पर फंसा पेच

देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास का इलाका (NCR) एक बार फिर 'गैस चेंबर' में तब्दील हो चुका है। यहां सांस लेना अब महज एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बीमारियों को न्योता देना बन गया है। हवा में घुला जहर न केवल दमा और अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ा रहा है, बल्कि अब फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) और कार्यक्षमता में कमी (Reduced Lung Function) जैसे जानलेवा खतरे भी पैदा कर रहा है।READ ALSO:-नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?   इस गंभीर मुद्दे की गूंज अब संसद के गलियारों तक पहुंच गई है। राज्यसभा में प्रदूषण और उससे होने वाली बीमारियों को लेकर तीखे सवाल पूछे गए, जिस पर केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखा है। सरकार ने यह तो माना है कि वायु प्रदूषण श्वसन संबंधी रोगों का एक बड़ा कारण है, लेकिन एक्यूआई (AQI) और बीमारियों के सीधे संबंध (Direct Correlation) वाले आंकड़ों को लेकर सरकार ने एक अलग ही तस्वीर पेश की है।   आइए जानते हैं कि आखिर संसद में क्या सवाल पूछे गए, मंत्री ने क्या जवाब दिया और दिल्ली की हवा वास्तव में आपके शरीर के साथ क्या खेल खेल रही है।   राज्यसभा में क्या हुआ? (The Parliament Debate) संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के स्तर और स्वास्थ्य पर इसके विनाशकारी प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई। भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने पर्यावरण और स्वास्थ्य मंत्रालय से सीधे सवाल पूछे। उनका सवाल न केवल तीखा था, बल्कि उन मेडिकल रिपोर्ट्स की ओर इशारा कर रहा था जो दावा करती हैं कि दिल्ली के लोगों के फेफड़े समय से पहले बूढ़े हो रहे हैं।   सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने पूछा: क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि कई स्टडीज और मेडिकल टेस्ट्स में यह पुष्टि हुई है कि दिल्ली-एनसीआर में खतरनाक एक्यूआई (AQI) स्तर के लंबे संपर्क में रहने से लोगों को 'पल्मोनरी फाइब्रोसिस' (Pulmonary Fibrosis) हो रहा है? क्या यह सच है कि दिल्ली-एनसीआर के नागरिकों के फेफड़ों की लोच (Elasticity) या फैलने-सिकुड़ने की क्षमता, साफ हवा वाले शहरों में रहने वाले लोगों की तुलना में करीब 50 प्रतिशत तक कम हो गई है? क्या सरकार के पास इन बीमारियों (सीओपीडी, एम्फीसेमा, घटती कार्यक्षमता) से बचाने का कोई ठोस समाधान है?   ये सवाल सीधे तौर पर दिल्ली के करोड़ो निवासियों की जिंदगी से जुड़े थे।   सरकार का जवाब: "प्रदूषण कारण है, पर ठोस आंकड़े नहीं" सांसद बाजपेयी के इन सवालों का लिखित जवाब पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने दिया। मंत्री का जवाब मिला-जुला रहा। उन्होंने समस्या को स्वीकार किया लेकिन आंकड़ों की पुष्टि करने से बचते नजर आए।   1. आंकड़ों पर सरकार का स्टैंड: मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि सरकार के पास ऐसे कोई "ठोस आंकड़े" (Conclusive Data) नहीं हैं जो यह साबित करते हों कि उच्च एक्यूआई स्तर और फेफड़ों की बीमारियों (जैसे 50% क्षमता कम होना) के बीच सीधा और एकमात्र संबंध है। सरकार का मानना है कि स्वास्थ्य पर प्रभाव के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।   2. खतरे की स्वीकारोक्ति: हालांकि, मंत्री ने यह स्पष्ट रूप से माना कि वायु प्रदूषण श्वसन संबंधी रोगों और उनसे जुड़ी अन्य बीमारियों को बढ़ाने वाले या ट्रिगर करने वाले प्रमुख कारकों (Key Factors) में से एक है। उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया कि खराब हवा स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है।   प्रदूषण से होने वाली बीमारियां: क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? भले ही सरकार ठोस आंकड़ों की बात कर रही हो, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स और पल्मोनोलॉजिस्ट्स की राय बेहद डराने वाली है। मंत्री के जवाब में जिन बीमारियों का जिक्र किया गया, वे बेहद गंभीर हैं:   पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary Fibrosis): प्रदूषित हवा में मौजूद महीन कण (PM 2.5) फेफड़ों के ऊतकों को क्षतिग्रस्त कर देते हैं। इससे फेफड़ों में घाव या निशान (Scarring) बन जाते हैं। इस वजह से फेफड़े सख्त हो जाते हैं और ठीक से काम नहीं कर पाते। इसे ही फाइब्रोसिस कहते हैं। फेफड़ों की लोच (Lung Elasticity) में कमी: स्वस्थ फेफड़े गुब्बारे की तरह होते हैं जो सांस लेने पर फूलते हैं और छोड़ने पर पिचकते हैं। प्रदूषण इस लोच को खत्म कर देता है। सांसद का दावा था कि दिल्लीवालों में यह क्षमता 50% कम हो गई है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। सीओपीडी (COPD): क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें सांस की नली में सूजन आ जाती है और हवा का प्रवाह रुकने लगता है। कैंसर का जोखिम: लंबे समय तक जहरीली हवा में रहने से नॉन-स्मोकर्स (धूम्रपान न करने वालों) में भी लंग कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ गया है।   सरकार की तैयारी: समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए? मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने अपने जवाब में बताया कि सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है। प्रदूषण से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति (Multi-pronged Strategy) अपनाई जा रही है।   1. हेल्थकेयर वर्कर्स की ट्रेनिंग सरकार ने वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों को पहचानने और इलाज करने के लिए एक विशेष 'ट्रेनिंग मॉड्यूल' तैयार किया है। इसके तहत:   डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं और नर्सों जैसी फ्रंटलाइन वर्कर्स को ट्रेंड किया जा रहा है ताकि वे ग्रामीण और शहरी इलाकों में शुरुआती लक्षणों की पहचान कर सकें।   2. संवेदनशील समूहों की सुरक्षा सरकार ने उन लोगों के लिए विशेष योजनाएं बनाई हैं जो प्रदूषण के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील (Vulnerable) हैं:   ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम कर्मी: ये लोग दिन भर सड़कों पर धूल और धुएं के बीच रहते हैं। इनके लिए स्वास्थ्य जांच और जागरूकता के विशेष निर्देश हैं। बच्चे और बुजुर्ग: स्कूलों और समुदायों के माध्यम से इन्हें जागरूक किया जा रहा है।   3. जागरूकता अभियान (IEC Material) मंत्री ने बताया कि सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) के तहत हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री तैयार की गई है। इसका मकसद लोगों को यह बताना है कि प्रदूषण बढ़ने पर उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCCHH) भी इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहा है।   4. पूर्वानुमान और अलर्ट सिस्टम मौसम विभाग (IMD) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब केवल डेटा नहीं देते, बल्कि चेतावनी (Alerts) भी जारी करते हैं। राज्यों और शहरों को पहले ही बता दिया जाता है कि अगले कुछ दिनों में हवा कितनी खराब होने वाली है, ताकि अस्पताल और प्रशासन अपनी तैयारी कर सकें।   स्वच्छ भारत और उज्ज्वला योजना का 'प्रदूषण एंगल' मंत्री ने अपने जवाब में दो प्रमुख केंद्रीय योजनाओं को भी प्रदूषण नियंत्रण से जोड़ा:   प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PM Ujjwala Yojana): अक्सर हम बाहरी प्रदूषण की बात करते हैं, लेकिन घर के अंदर का प्रदूषण (Indoor Pollution) भी महिलाओं और बच्चों के लिए जानलेवा होता है। मंत्री ने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी (LPG) सिलेंडर देकर सरकार ने लकड़ी और कोयले के चूल्हे से होने वाले धुएं को कम किया है, जिससे लाखों महिलाओं के फेफड़ों की रक्षा हुई है। स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission): सड़कों और गलियों में जमा धूल (Road Dust) प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरों, कस्बों और बुनियादी ढांचे की नियमित सफाई सुनिश्चित की जा रही है, जिससे हवा में उड़ने वाले कणों (PM 10) की मात्रा कम हो सके।   खतरा बड़ा है, सावधानी ही बचाव है संसद में सरकार का जवाब तकनीकी रूप से भले ही आंकड़ों की कमी की बात करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दिल्ली की हवा बीमार बना रही है। जब सरकार खुद मान रही है कि प्रदूषण श्वसन रोगों का 'कारक' है, तो यह नागरिकों के लिए एक अलार्म बेल है।   चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह है कि जब AQI खराब स्तर पर हो, तो: सुबह और शाम की सैर से बचें। घर से बाहर निकलते समय N95 मास्क का प्रयोग करें। घर के अंदर एयर प्यूरिफायर या हवा साफ करने वाले पौधों का इस्तेमाल करें। फेफड़ों की मजबूती के लिए प्राणायाम और सांस के व्यायाम करें।   राज्यसभा में सरकार का जवाब यह दर्शाता है कि प्रदूषण और स्वास्थ्य के बीच के संबंध को लेकर अभी भी डेटा कलेक्शन और रिसर्च में एक बड़ा गैप है। हालांकि, सरकार ने खतरे को पूरी तरह नकारा नहीं है और बचाव के उपायों पर जोर दिया है। दिल्लीवासियों के लिए यह एक चेतावनी है कि वे सरकारी आंकड़ों का इंतजार न करें, बल्कि मास्क का प्रयोग करें और प्रदूषण से बचाव के हर संभव उपाय अपनाएं, क्योंकि हवा में जहर तो घुला ही हुआ है।   सरकार ने राज्यसभा में माना है कि वायु प्रदूषण सांस की बीमारियों का एक कारक है, लेकिन एक्यूआई और बीमारियों के सीधे संबंध के ठोस आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। सरकार ने बचाव के लिए उज्ज्वला योजना, स्वास्थ्य कर्मियों की ट्रेनिंग और अलर्ट सिस्टम जैसे उपायों का हवाला दिया है।

Unknown दिसम्बर 20, 2025 0
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दिल्ली में 'सांसों' का आपातकाल: बिना PUC पेट्रोल पंप गए तो खाली टंकी लौटना पड़ेगा घर; क्या जब्त होगी आपकी गाड़ी? पढ़ें 18 दिसंबर से बदले नियमों की पूरी A-to-Z रिपोर्ट

नई दिल्ली (20 दिसंबर 2025): देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर प्रदूषण के जहरीले धुएं में लिपटी हुई है। स्मॉग की मोटी चादर ने सूरज को ढक लिया है और एक्यूआई (AQI) का स्तर 'गंभीर' श्रेणी में बना हुआ है। इस 'मेडिकल इमरजेंसी' जैसे हालात से निपटने के लिए दिल्ली सरकार और प्रशासन ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है।READ ALSO:-यूपी में 'कोल्ड अटैक': 50 जिलों में रेड अलर्ट, कोहरे ने लगाया 'लॉकडाउन'; 12 करोड़ लोगों को फोन पर मिली चेतावनी, अगले 72 घंटे बेहद खतरनाक   18 दिसंबर से दिल्ली में 'No PUC, No Fuel' (प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र नहीं, तो ईंधन नहीं) का नियम पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। यह फैसला उन वाहन चालकों के लिए किसी झटके से कम नहीं है जो अब तक PUC रिन्यू कराने में लापरवाही बरत रहे थे। अब पेट्रोल पंप पर नोजल तब तक आपकी गाड़ी की टंकी में नहीं जाएगा, जब तक आप वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं दिखा देते। लेकिन इस नए नियम के साथ जनता के मन में कई सवाल और डर भी हैं—खासकर गाड़ी जब्त होने को लेकर।   18 दिसंबर से क्या बदला? 'No PUC, No Fuel' का जमीनी सच दिल्ली सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब प्रदूषण फैलाने वालों के लिए कोई 'रियायत' नहीं होगी।   पेट्रोल पंप बने चेकपॉइंट: अब दिल्ली के हर पेट्रोल पंप पर फ्यूल अटेंडेंट (कर्मचारी) सबसे पहले आपसे PUC सर्टिफिकेट मांगेंगे। यह सर्टिफिकेट डिजिटल (mParivahan ऐप पर) या हार्ड कॉपी में हो सकता है। ईंधन देने से मनाही: अगर आपका PUC एक्सपायर हो चुका है या आपके पास वैलिड सर्टिफिकेट नहीं है, तो कर्मचारी आपको पेट्रोल, डीजल या सीएनजी देने से साफ मना कर देंगे। पंप मालिकों को सख्त निर्देश हैं कि वे बिना जांच के किसी को भी ईंधन न दें। पुलिस की तैनाती: विवाद की स्थिति से निपटने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर 500 से अधिक ट्रैफिक पुलिसकर्मी और सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स तैनात किए गए हैं।   सबसे बड़ा सवाल: क्या बिना PUC गाड़ी जब्त (Seize) हो जाएगी? इस नियम के लागू होने के बाद वाहन मालिकों में सबसे बड़ा डर गाड़ी जब्त होने का है। क्या पेट्रोल पंप पर PUC न होने पर पुलिस आपकी गाड़ी छीन लेगी? आइए, इस नियम की बारीकियों को समझते हैं।   1. पहली गलती पर जब्ती नहीं, लेकिन इनकार तय परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि आप पेट्रोल पंप पर बिना PUC के पाए जाते हैं, तो प्राथमिक कार्रवाई 'ईंधन न देना' (Denial of Fuel) है। यानी आपको वहां से खाली टंकी वापस भेजा जाएगा। पंप पर गाड़ी तुरंत जब्त करने का प्रावधान प्राथमिक चरण में नहीं है।   2. चालान का प्रावधान (The Fine) हालांकि, अगर वहां तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी या परिवहन विभाग की टीम आपके वाहन का नंबर चेक करती है और सिस्टम में PUC फेल मिलता है, तो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ₹10,000 का चालान कटना तय है। यह चालान ऑनलाइन आपके घर पहुंच जाएगा।   3. गाड़ी जब्त कब होगी? गाड़ी जब्त (Impound) होने की नौबत इन परिस्थितियों में आ सकती है:   बार-बार उल्लंघन (Repeat Offender): यदि आप कई बार बिना PUC के पकड़े गए हैं और चालान नहीं भर रहे हैं। 10 या 15 साल पुरानी गाड़ी: अगर आपकी गाड़ी पेट्रोल (15 साल) या डीजल (10 साल) की समय सीमा पार कर चुकी है और आप उसे सड़क पर चला रहे हैं, तो PUC हो या न हो, गाड़ी तुरंत जब्त करके स्क्रैप (Scrap) के लिए भेज दी जाएगी। GRAP-4 का उल्लंघन: अगर आप प्रतिबंधित श्रेणी (जैसे BS-3 पेट्रोल या BS-4 डीजल) की गाड़ी लेकर सड़क पर निकले हैं, तो भी जब्ती की कार्रवाई हो सकती है।   GRAP-4 का शिकंजा: गैर-BS6 वाहनों की 'नो एंट्री' प्रदूषण के स्तर को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का चौथा चरण (Stage-4) लागू है। यह सबसे सख्त चरण होता है।   प्रतिबंधित वाहन: दिल्ली के बाहर से आने वाले गैर-BS6 (Non-BS6) डीजल वाहनों, हल्के कमर्शियल वाहनों (LCVs) और ट्रकों की एंट्री पर पूरी तरह बैन है। केवल आवश्यक वस्तुओं (दूध, सब्जी, दवा) वाले वाहनों को छूट है। दिल्ली के भीतर: दिल्ली के अंदर पंजीकृत BS-4 डीजल और BS-3 पेट्रोल कारों पर भी रोक जारी है। जुर्माना: GRAP-4 के नियमों का उल्लंघन करने पर मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 194(1) के तहत ₹20,000 का भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। यह सामान्य चालान से दोगुना है।   निगरानी का 'हाई-टेक' जाल: आप बच नहीं पाएंगे अगर आप सोच रहे हैं कि पुलिस की नजर बचाकर निकल जाएंगे, तो आप गलतफहमी में हैं। दिल्ली को एक डिजिटल किले में तब्दील कर दिया गया है।   1. ANPR कैमरे (Automatic Number Plate Recognition) दिल्ली की प्रमुख सड़कों, पेट्रोल पंपों के एंट्री पॉइंट्स और बॉर्डर इलाकों पर ANPR कैमरे लगे हैं। ये कैमरे आपकी नंबर प्लेट स्कैन करते ही डेटाबेस से चेक कर लेते हैं कि गाड़ी का PUC वैध है या नहीं, या गाड़ी प्रतिबंधित श्रेणी की तो नहीं है। उल्लंघन मिलते ही ई-चालान जनरेट हो जाता है।   2. 126 चेकपॉइंट्स पूरी दिल्ली में 126 सामरिक चेकपॉइंट्स (Strategic Checkpoints) बनाए गए हैं। यहाँ परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त टीमें तैनात हैं। ये टीमें रैंडम चेकिंग कर रही हैं।   3. ऑडियो अलर्ट सिस्टम पेट्रोल पंपों पर ऑडियो सिस्टम लगाए गए हैं जो लगातार घोषणा कर रहे हैं कि "बिना PUC ईंधन नहीं मिलेगा"। यह मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए किया गया है।   क्यों पड़ी इसकी जरूरत? (The Why) कई लोग इसे सरकार की मनमानी मान रहे हैं, लेकिन आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति भयावह है।   विजिबिलिटी: दिल्ली में सुबह के समय विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम रह गई है। सेहत पर वार: डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान हवा में सांस लेना दिन भर में 20-30 सिगरेट पीने के बराबर है। वाहन प्रदूषण: दिल्ली के प्रदूषण में वाहनों के धुएं का योगदान करीब 40% है। बिना PUC वाली गाड़ियां मानक से कई गुना ज्यादा जहरीला धुआं छोड़ती हैं। इसलिए, यह कड़ा कदम उठाना मजबूरी बन गया था।   क्या करें वाहन चालक? (Expert Advice) इस सख्ती के बीच परेशानी से बचने के लिए 'खबरिलाल' आपको कुछ जरूरी सलाह देता है:   PUC स्टेटस चेक करें: घर से निकलने से पहले mParivahan ऐप या परिवहन विभाग की वेबसाइट पर अपनी गाड़ी का PUC स्टेटस चेक करें। तुरंत रिन्यू कराएं: अगर PUC एक्सपायर है, तो सबसे पहले नजदीकी प्रदूषण जांच केंद्र जाएं। वहां फ्यूल नहीं मिलेगा, लेकिन जांच केंद्र पर सर्टिफिकेट बन जाएगा। दस्तावेज साथ रखें: हार्ड कॉपी के साथ-साथ डिजिलॉकर या एम-परिवहन में सॉफ्ट कॉपी जरूर रखें। प्रतिबंधित गाड़ी न निकालें: अगर आपके पास पुरानी डीजल/पेट्रोल गाड़ी है या BS-3/BS-4 मॉडल है, तो GRAP-4 हटने तक उसे गैराज में ही रखें। ₹20,000 का चालान और गाड़ी जब्त होने का रिस्क न लें।   सहयोग में ही समाधान दिल्ली सरकार का यह कदम कठोर जरूर है, लेकिन यह वक्त की मांग है। 'No PUC, No Fuel' नियम का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि उस हवा को साफ करना है जिसमें हम और हमारे बच्चे सांस ले रहे हैं। 18 दिसंबर से शुरू हुई यह सख्ती आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है।   इसलिए, एक जिम्मेदार नागरिक बनें। अपनी गाड़ी का PUC अपडेट रखें और प्रशासन का सहयोग करें। याद रखें, गाड़ी जब्त होने से ज्यादा बड़ा खतरा आपकी सेहत का खराब होना है।

Unknown दिसम्बर 20, 2025 0
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Delhi Pollution News: 24 घंटे में 11,776 चालान, सड़कों पर उतरी टीमें; मंत्री सिरसा बोले- 'यह तात्कालिक नहीं, स्थायी सुधार की जंग है'

राजधानी दिल्ली, जो अक्सर सर्दियों में 'गैस चैंबर' बनने के लिए बदनाम रही है, वहां अब हालात बदलने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण (Air Pollution) से निपटने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और समन्वित अभियान छेड़ा है। सरकार अब केवल कागजी आदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों पर उतरकर 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपना रही है।READ ALSO:-सट्‌टेबाजी ऐप का प्रमोशन पड़ा भारी: ED ने जब्त की युवराज-सोनू सूद की संपत्ति; 1000 करोड़ के घोटाले में कई बड़े नाम फंसे   बीते 24 घंटों के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि प्रशासन किस कदर सख्त है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) की निगरानी में विभिन्न विभागों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए हजारों वाहनों पर जुर्माना लगाया है और धूल नियंत्रण के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू किया है।   24 घंटे का रिपोर्ट कार्ड: 11,776 चालान और सख्त निगरानी दिल्ली सरकार द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एक दिन में इतनी बड़ी कार्रवाई शायद ही पहले कभी देखी गई हो।   वाहनों पर शिकंजा प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत माने जाने वाले वाहनों पर सबसे ज्यादा सख्ती बरती गई है।   चालान की संख्या: बीते 24 घंटों में कुल 11,776 वाहनों के चालान काटे गए हैं। इनमें बिना पीयूसी (PUC), पुराने डीजल-पेट्रोल वाहन और ओवरलोडिंग करने वाले वाहन शामिल हैं। ट्रकों की 'नो-एंट्री': प्रदूषण के स्तर को बढ़ने से रोकने के लिए भारी वाहनों की एंट्री पर खास नजर रखी जा रही है। 24 घंटों में 542 ऐसे ट्रकों को बॉर्डर से ही वापस भेज दिया गया जो गैर-निर्धारित मार्गों से दिल्ली में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे या जिनके पास जरूरी परमिट नहीं थे। ट्रैफिक जाम से मुक्ति: गाड़ियां जब जाम में फंसती हैं और इंजन चालू रहता है, तो प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ जाता है। इसे रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन ने शहर के 34 प्रमुख ट्रैफिक जाम वाले पॉइंट्स (Choke Points) पर विशेष अभियान चलाकर यातायात को सुगम बनाया।   धूल के खिलाफ जंग: मशीनों से धुलाई और छिड़काव दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 (PM 2.5) और पीएम 10 (PM 10) के कणों को कम करने के लिए धूल नियंत्रण (Dust Control) पर पूरा जोर दिया जा रहा है। सड़कों पर उड़ती धूल सांसों के जरिए सीधे फेफड़ों में जाती है, जिसे रोकने के लिए एमसीडी (MCD) और पीडब्ल्यूडी (PWD) ने मिलकर मोर्चा संभाला है।   आंकड़े जो कहानी कहते हैं: कचरा हटाना: नगर निगम की एजेंसियों ने शहर के अलग-अलग इलाकों से रिकॉर्ड 12,164.88 मीट्रिक टन कचरा और मलबा (C&D Waste) उठाया है। यह कचरा अगर सड़कों पर रहता तो धूल का बड़ा कारण बनता। मैकनाइज्ड स्वीपिंग: झाड़ू लगाने से धूल उड़ती है, इसलिए मशीनों का इस्तेमाल किया गया। कुल 2,068.81 किलोमीटर लंबी सड़कों की मशीनों से सफाई (Mechanized Sweeping) की गई। पानी का छिड़काव: धूल को बैठाने के लिए 1,830 किलोमीटर सड़कों पर पानी का छिड़काव किया गया। एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल: आसमान में पानी की बौछार करने के लिए एंटी-स्मॉग गन का व्यापक इस्तेमाल हुआ। 5,528 किलोमीटर क्षेत्र को इन मशीनों ने कवर किया। इसके अलावा, निर्माण स्थलों (Construction Sites) पर धूल उड़ने से रोकने के लिए 160 एंटी-स्मॉग गन परमानेंट तैनात की गई हैं।   कचरा प्रबंधन: पुराने पहाड़ों का वैज्ञानिक इलाज दिल्ली के लिए कचरे के पहाड़ हमेशा से मुसीबत रहे हैं। पर्यावरण मंत्री ने बताया कि अब कचरा प्रबंधन (Waste Management) को लेकर भी सरकार गंभीर है।   लिगेसी वेस्ट (Legacy Waste): पिछले 24 घंटों में औसतन 30,000 मीट्रिक टन से अधिक पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान (Scientific Disposal) किया गया है। यह वह कचरा है जो सालों से लैंडफिल साइट्स पर पड़ा सड़ रहा था और मीथेन गैस व आग लगने का कारण बनता था।   मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का बयान: "यह लड़ाई लंबी है" पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इन आंकड़ों को साझा करते हुए सरकार की भविष्य की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने साफ किया कि सरकार अब केवल 'फायर फाइटिंग' (आग बुझाने जैसा काम) नहीं कर रही, बल्कि समस्या की जड़ पर प्रहार कर रही है।   तात्कालिक नहीं, स्थायी नीति सिरसा ने कहा, "हमारा मकसद सिर्फ आज या कल के लिए प्रदूषण कम करना नहीं है। सरकार पूरे साल लागू रहने वाली नीतियों (Year-long Policies) पर काम कर रही है। हम वैज्ञानिक आधार पर तैयार किए गए एक्शन प्लान को जमीन पर उतार रहे हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार सर्दियों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में थोड़ा सुधार देखने को मिला है।"   उन्होंने कहा कि सरकार की नीति अब 'रिऐक्टिव' (प्रतिक्रियावादी) के बजाय 'प्रोऐक्टिव' (सक्रिय) हो गई है। यानी प्रदूषण बढ़ने का इंतजार करने के बजाय उसे बढ़ने से पहले ही रोकने के उपाय किए जा रहे हैं।   जनता की भागीदारी: शिकायत और समाधान प्रदूषण के खिलाफ इस लड़ाई में तकनीक और जनता की भागीदारी भी अहम भूमिका निभा रही है।   ग्रीन दिल्ली ऐप: सरकार ने दावा किया है कि वह जनता की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई कर रही है। '311 ऐप', 'ग्रीन दिल्ली ऐप' (Green Delhi App), 'समीर ऐप' और सोशल मीडिया के जरिए मिली 57 शिकायतों का 24 घंटे के भीतर समाधान किया गया। यह दर्शाता है कि सिस्टम अब रिस्पॉन्सिव हो चुका है।   "साफ हवा सबका हक, सबकी जिम्मेदारी" पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अंत में नागरिकों, संस्थानों और वाहन चालकों से एक भावुक अपील की। उन्होंने कहा, "प्रदूषण का जहर अमीर-गरीब, बच्चे-बुजुर्ग किसी में फर्क नहीं करता। यह लड़ाई केवल सरकार अकेले नहीं जीत सकती। सभी विभाग दिन-रात सतर्क हैं, लेकिन दिल्ली को साफ हवा देने के लिए जनता का सहयोग (Public Participation) सबसे जरूरी है।"   सरकार की यह सख्ती बता रही है कि आने वाले दिनों में नियमों का पालन न करने वालों की खैर नहीं होगी। चाहे वह गाड़ी का प्रदूषण हो, निर्माण स्थल की धूल हो या सड़क पर फेंका गया कचरा—हर गलती पर अब भारी जुर्माना तय है। 11,776 चालान सिर्फ एक शुरुआत है, संदेश साफ है—नियम मानिए या भुगतान कीजिए।

Unknown दिसम्बर 19, 2025 0
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ओला-उबर के दिन लदे! 1 जनवरी से दिल्ली की सड़कों पर दौड़ेगी 'भारत टैक्सी', न सर्ज प्राइसिंग का झंझट, न कैंसिलेशन का डर

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के करोड़ों यात्रियों के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी राहत के साथ होने जा रही है। लंबे समय से ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) जैसी निजी कंपनियों की मनमानी, भारी-भरकम 'सर्ज प्राइसिंग' और ड्राइवरों द्वारा राइड कैंसिल करने की समस्या झेल रहे यात्रियों के लिए अब एक सरकारी विकल्प तैयार है। केंद्र सरकार की पहल पर विकसित की गई देश की पहली कोऑपरेटिव टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी’ (Bharat Taxi) आगामी 1 जनवरी 2026 से दिल्ली में अपनी सेवाएं शुरू करने जा रही है।READ ALSO:-उत्तर प्रदेश में हाड़ कंपाने वाली ठंड का 'कंट्रोल': लखनऊ-मेरठ समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदली, 50 जिलों में घने कोहरे का रेड अलर्ट   क्यों खास है 'भारत टैक्सी' ऐप? भारत टैक्सी को केवल एक ऐप के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे इकोसिस्टम के तौर पर तैयार किया गया है जो यात्री और ड्राइवर—दोनों के लिए 'विन-विन' स्थिति पैदा करे।   सर्ज प्राइसिंग से मुक्ति: अक्सर बारिश या दफ्तर जाने के समय (Peak Hours) निजी कंपनियां किराया दो से तीन गुना बढ़ा देती हैं। भारत टैक्सी में किराया दरें स्थिर और पारदर्शी होंगी। ड्राइवरों की बेहतर कमाई: निजी एग्रीगेटर्स जहां ड्राइवरों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा कमीशन के रूप में काट लेते हैं, वहीं भारत टैक्सी में ड्राइवरों को कुल किराए का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मिलेगा। ऑटो, बाइक और कार का विकल्प: यूजर्स अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से एक ही ऐप पर बाइक टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और कार बुक कर सकेंगे। मजबूत सुरक्षा तंत्र: ऐप में रियल-टाइम व्हीकल ट्रैकिंग, केवल सत्यापित (Verified) ड्राइवरों की भर्ती और 24×7 कस्टमर सपोर्ट जैसे फीचर्स दिए गए हैं।   ड्राइवरों का जबरदस्त रिस्पांस: 56,000 रजिस्ट्रेशन इस नई सेवा के प्रति दिल्ली के ड्राइवरों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। अब तक करीब 56 हजार ड्राइवर इस प्लेटफॉर्म पर अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। ड्राइवरों का मानना है कि कमीशन कम होने और सरकारी संरक्षण मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, जिसका सीधा असर यात्रियों को मिलने वाली बेहतर सर्विस के रूप में दिखेगा।   तकनीक और पारदर्शिता का संगम भारत टैक्सी ऐप को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। यह ऐप न केवल हिंदी और अंग्रेजी, बल्कि कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। यात्रियों के पास कैश और डिजिटल (UPI/Card) दोनों माध्यमों से भुगतान करने की सुविधा होगी। साथ ही, बिलिंग को पूरी तरह पारदर्शी रखा गया है ताकि यात्री को पता हो कि वह किस चीज के पैसे दे रहा है।   मौजूदा कंपनियों के लिए कड़ी चुनौती दिल्ली में कैब सेवाओं का फोकस मुख्य रूप से फैमिली ट्रैवलर्स, कॉरपोरेट ऑफिस जाने वालों और पर्यटकों पर रहता है। ओला और उबर के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों में यात्रियों और ड्राइवरों की ढेरों शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में सरकारी भरोसे वाली 'भारत टैक्सी' एक मजबूत विकल्प बनकर उभर सकती है। यदि दिल्ली में यह मॉडल सफल रहता है, तो सरकार इसे मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे अन्य महानगरों में भी विस्तार देने की योजना बना रही है।

Unknown दिसम्बर 18, 2025 0
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बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और गर्लफ्रेंड सोनाली का 15 मिनट का MMS लीक, कपल ने इसे चोरी और ब्लैकमेलिंग बताया

पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है।     कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप   सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है।   सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है।  ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया।  सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया।   प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है।  ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं।    सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं।   इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया।    बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }

बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई

आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला   मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।   बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।   दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था।   अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी।   बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे।   पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया।   एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी   सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता।   पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है।   आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?

देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।   सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया?   क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है।   पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है।   दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है।   सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?"   असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है।   सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है।   विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है।   विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।"   NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है।   NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।   CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।      आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया।  डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है।     कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं:   1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।   2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है।   सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है:   पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है।   दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।   गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।"   आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए।   सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है।   फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है।     जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; Kidney की बीमारी बनी मौत का कारण

बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है।   चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था।   टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।   फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी।   Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप   किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।   इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।"   Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।   सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।

दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी।   आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:   Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi)   मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी।   रूट मैप (Route Map) और स्टेशन   मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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यूपी में मौसम का यू-टर्न: कल से 5 दिनों तक आंधी-बारिश का अलर्ट, कांपने पर मजबूर करेगी लौटती हुई ठंड

Unknown जनवरी 21, 2026 0

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