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सोना-चांदी भाव: 1 जनवरी 2026 को बड़ी गिरावट, जानें आज के रेट

Gold-Silver Price 2026: नए साल का 'गोल्डन' तोहफा; पहले ही दिन 2500 रुपये लुढ़की चांदी, सोने के तेवर भी पड़े ढीले, खरीदारी से पहले पढ़ें बाज़ार की पूरी कुंडली

Unknown जनवरी 1, 2026 0
gold silver price drop 1 january 2026 ibja rates market analysis prediction
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नई दिल्ली/मुंबई (बिज़नेस डेस्क): नया साल यानी 2026 की शुरुआत आम आदमी और निवेशकों के लिए राहत की खबर के साथ हुई है। अगर आप नए साल में सोना या चांदी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आज का दिन आपके लिए थोड़ा सुकून देने वाला है। भारतीय सर्राफा बाज़ार में साल के पहले दिन, यानी 1 जनवरी 2026 को भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। लगातार तीसरे दिन सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।READ ALSO:-मेरठ: IIMT कॉलेज बना 'जंग का मैदान', कैंटीन के बाहर छात्राओं में हाईवोल्टेज ड्रामा; बॉयफ्रेंड-भाई के चक्कर में सरेआम नोचे बाल, वीडियो ने खोली अनुशासन की पोल

 

खासकर चांदी के खरीदारों के लिए आज का दिन अच्छा है, क्योंकि इसकी कीमतों में भारी कटौती हुई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की चमक आज फीकी पड़ी है और सोना भी अपने उच्चतम स्तर से नीचे फिसला है। हालांकि, यह गिरावट मुनाफावसूली (Profit Booking) का नतीजा मानी जा रही है, क्योंकि 2025 में इन दोनों धातुओं ने निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न दिया है।

 

आज का भाव: कहां पहुंचा सोना और चांदी?

बाज़ार खुलने के साथ ही कमोडिटी मार्केट में नरमी के संकेत मिले।

 

  • सोना (Gold): इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, आज 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 44 रुपये गिरकर 1,33,151 रुपये पर आ गया है। कल यानी 31 दिसंबर 2025 को बाज़ार बंद होते समय यह भाव 1,33,195 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
  • चांदी (Silver): चांदी में आज बड़ी गिरावट देखने को मिली। एक किलो चांदी की कीमत 2,520 रुपये टूटकर 2,27,900 रुपये पर आ गई है। कल इसकी कीमत 2,30,420 रुपये प्रति किलोग्राम थी।

 

यह लगातार तीसरा दिन है जब लाल निशान में कारोबार हो रहा है। इससे पहले 29 दिसंबर 2025 को बाज़ार ने अपना ऑल टाइम हाई (All Time High) छुआ था। उस दिन सोने की कीमत 1,38,161 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2,43,483 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। उस शिखर से तुलना करें तो आज भाव काफी नीचे आ चुके हैं।

 

फ्लैशबैक 2025: जब सोने-चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

साल 2025 को इतिहास में 'गोल्डन ईयर' के तौर पर याद रखा जाएगा। निवेशकों के लिए यह साल किसी लॉटरी से कम नहीं था। आंकड़ों पर नज़र डालें तो पैरों तले ज़मीन खिसक जाएगी।

 

  1. सोने की चाल: साल 2025 में सोने की कीमतों में 57,033 रुपये की भारी भरकम तेजी आई। प्रतिशत में देखें तो यह 75% का उछाल है। 31 दिसंबर 2024 को जो सोना महज 76,162 रुपये (10 ग्राम) का था, वह साल खत्म होते-होते 1.33 लाख के पार चला गया।
  2. चांदी की छलांग: चांदी ने तो 2025 में सारे अनुमान गलत साबित कर दिए। इसमें 167% की ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई। 31 दिसंबर 2024 को चांदी 86,017 रुपये किलो थी, जो 2025 के आखिरी दिन 2.30 लाख रुपये के स्तर को छू गई। यानी एक साल में चांदी 1,44,403 रुपये महंगी हुई।

 

क्यों अलग होते हैं आपके शहर के रेट?

अक्सर लोग यह शिकायत करते हैं कि अखबार में छपा रेट और सुनार की दुकान के रेट में अंतर है। इसे समझना जरूरी है। IBJA द्वारा जारी किए गए रेट 24 कैरेट शुद्ध सोने के होते हैं और इसमें GST (Goods and Services Tax) और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होते। जब आप ज्वेलरी खरीदते हैं, तो:

 

  • सोने के बेस प्राइस पर 3% GST जुड़ता है।
  • इसके ऊपर ज्वेलर्स अपना मेकिंग चार्ज (10% से 30%) जोड़ते हैं।
  • यही कारण है कि दिल्ली, मुंबई, मेरठ या लखनऊ में सोने के फाइनल रेट में 2000 से 5000 रुपये तक का अंतर आ सकता है।

 

सोने में तेजी के 3 बड़े 'ग्लोबल' कारण

भले ही आज भाव गिरे हों, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रेंड अभी भी 'बुलिश' (तेजी का) है। इसके पीछे तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण हैं:

 

  1. कमजोर होता डॉलर: अमेरिका में ब्याज दरें घटने का सिलसिला शुरू हो चुका है। जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें घटाता है, तो डॉलर इंडेक्स कमजोर होता है। डॉलर कमजोर होने से सोने की 'होल्डिंग कॉस्ट' कम हो जाती है और दुनिया भर के निवेशक डॉलर छोड़कर सोने में पैसा लगाने लगते हैं।
  2. जियोपॉलिटिकल तनाव (Geopolitics): रूस-यूक्रेन जंग अभी थमी नहीं है और मिडिल ईस्ट में भी तनाव बरकरार है। जब भी दुनिया में युद्ध या अस्थिरता का माहौल होता है, सोना सबसे 'सुरक्षित निवेश' (Safe Haven Asset) माना जाता है। डर के माहौल में लोग शेयर बाज़ार से पैसा निकालकर सोने में डालते हैं।
  3. सेंट्रल बैंकों की अंधाधुंध खरीदारी: चीन का पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) और अन्य देशों के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन जैसे देशों ने पिछले साल 900 टन से ज्यादा सोना खरीदा है ताकि वे डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर सकें। जब बड़े देश ही ग्राहक बन जाएं, तो दाम बढ़ना तय है।

 

चांदी क्यों बन रही है 'नया सोना'?

चांदी की कीमतों में आई 167% की तेजी सिर्फ सट्टेबाजी नहीं है, इसके पीछे ठोस 'फंडामेंटल' कारण हैं। चांदी अब सिर्फ पायल या बर्तन बनाने वाली धातु नहीं रही, यह एक जरूरी इंडस्ट्रियल कमोडिटी बन गई है।

 

  • इंडस्ट्रियल डिमांड: सोलर पैनल बनाने में चांदी का भारी इस्तेमाल होता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), 5G टेक्नोलॉजी और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी की खपत कई गुना बढ़ गई है।
  • ट्रंप का 'टैरिफ डर': अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और टैरिफ (आयात शुल्क) के डर से अमेरिकी कंपनियों ने चांदी का भारी स्टॉक जमा (Stockpiling) करना शुरू कर दिया है। उन्हें डर है कि भविष्य में सप्लाई चेन टूट सकती है।
  • मैन्युफैक्चरिंग होड़: ग्लोबल सप्लाई में कमी है और डिमांड ज्यादा है। प्रोडक्शन रुकने के डर से बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां पहले से ही माल खरीदकर रख रही हैं, जिससे बाज़ार में कृत्रिम कमी (Shortage) पैदा हो गई है और दाम आसमान छू रहे हैं।

 

भविष्यवाणी 2026: क्या 3 लाख पार जाएगी चांदी?

आज की गिरावट को देखकर अगर आप सोच रहे हैं कि मंदी आ गई है, तो आप गलत हो सकते हैं। बाज़ार के जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक छोटा 'करेक्शन' है।

 

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का विश्लेषण बेहद चौंकाने वाला है:

 

"चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड में कोई कमी नहीं आने वाली है। ग्रीन एनर्जी और सोलर सेक्टर बूम पर हैं। हमारा अनुमान है कि अगले 1 साल में चांदी 2.75 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को छू सकती है। वहीं, इस साल (2026) के अंत तक चांदी के 2.10 लाख रुपये के आसपास रहने की उम्मीद है (अगर बीच में बड़ा करेक्शन आता है)। सोने की बात करें तो इसकी चमक भी फीकी नहीं पड़ेगी। अगले साल तक सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के जादुई आंकड़े को पार कर सकता है।"

 

निवेशकों के लिए सलाह: क्या करें, क्या न करें?

  1. SIP करें: अगर आप एक साथ बड़ा निवेश नहीं कर सकते, तो गोल्ड या सिल्वर ETF के जरिए हर महीने थोड़ा-थोड़ा निवेश करें।
  2. गिरावट पर खरीदें: बाज़ार के एक्सपर्ट्स की सलाह है कि आज जैसी गिरावट (Dip) खरीदारी का अच्छा मौका होती है। लंबी अवधि (Long Term) के लिए सोना-चांदी अभी भी मुनाफे का सौदा है।
  3. शुद्धता का ध्यान रखें: फिजिकल गोल्ड खरीदते समय हॉलमार्किंग (Hallmark) जरूर चेक करें। बिना हॉलमार्क वाला सोना बेचना मुश्किल होता है और आपको सही दाम नहीं मिलते।

 

बाज़ार पर रखें पैनी नज़र

नए साल का पहला दिन भले ही गिरावट के साथ शुरू हुआ हो, लेकिन 2026 कमोडिटी बाज़ार के लिए बेहद रोमांचक रहने वाला है। 1.33 लाख का सोना और 2.27 लाख की चांदी यह बता रही है कि महंगाई और आर्थिक बदलावों के इस दौर में 'पीली धातु' और 'चमकीली धातु' ही निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई हैं।

 

अगर आप शादी-ब्याह के लिए जेवर बनवाने की सोच रहे हैं, तो अभी की कीमतों पर बुकिंग करना समझदारी हो सकती है, क्योंकि एक्सपर्ट्स की मानें तो आने वाले महीनों में ग्राफ ऊपर की तरफ ही जाएगा।

 

(नोट: निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय जरूर लें। कमोडिटी बाज़ार जोखिमों के अधीन है।)
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बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई

आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला   मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।   बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।   दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था।   अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी।   बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे।   पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया।   एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी   सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता।   पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है।   आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?

देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।   सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया?   क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है।   पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है।   दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है।   सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?"   असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है।   सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है।   विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है।   विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।"   NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है।   NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।   CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।      आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया।  डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है।     कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं:   1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।   2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है।   सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है:   पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है।   दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।   गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।"   आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए।   सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है।   फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है।     जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; Kidney की बीमारी बनी मौत का कारण

बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है।   चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था।   टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।   फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी।   Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप   किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।   इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।"   Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।   सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।

दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी।   आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:   Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi)   मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी।   रूट मैप (Route Map) और स्टेशन   मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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खबरीलाल डेस्क

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Republic Day Gold and silver break all records
गणतंत्र दिवस पर 'गोल्डन' विस्फोट: सोना ₹1.60 लाख के पार, चांदी ने भी तोड़े इतिहास के सारे रिकॉर्ड; जानें क्या है आपके शहर का ताजा भाव

नई दिल्ली/मुंबई | बिजनेस डेस्क वर्ष 2026 का गणतंत्र दिवस भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है, लेकिन खरीदारों के लिए यह किसी झटके से कम नहीं है। वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने और चांदी की कीमतों (Gold-Silver Prices) ने अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।READ ALSO:-'अंगूठा लगाने' का झंझट होगा खत्म: आधार में होने जा रहा है अब तक का सबसे बड़ा 'Tech-Upgrade', जानें क्या है सरकार का 'विजन 2032'   सोना, जिसे संकट का साथी माना जाता है, ने अपनी चमक से निवेशकों की आंखों को चौंधिया दिया है। जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने $5,000 प्रति औंस का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं घरेलू बाजार में यह ₹1,60,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ते हुए नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। चांदी की चमक भी कम नहीं हुई है और यह ₹3.34 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर को छू रही है। हालांकि, आज दिल्ली के बाजार में मामूली सी सुस्ती देखी गई, लेकिन पिछले एक हफ्ते की तेजी ने बाजार का पूरा गणित बदल कर रख दिया है।   महा-विस्फोट: क्यों लगी है कीमतों में यह आग? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण 'वैश्विक अनिश्चितता' (Global Uncertainty) है। जब भी दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव या आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक शेयर बाजार या मुद्रा बाजार से पैसा निकालकर 'सुरक्षित हेवन' (Safe Haven Assets) मानी जाने वाली संपत्तियों में लगाते हैं। सोना और चांदी सदियों से निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते रहे हैं।   आज के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली है: अंतरराष्ट्रीय बाजार: सोने ने पहली बार $5,000 प्रति औंस का ऐतिहासिक स्तर पार किया है। यह एक ऐसा मनोवैज्ञानिक बैरियर था, जिसके टूटने की कल्पना विश्लेषक साल के अंत तक कर रहे थे, लेकिन यह जनवरी में ही संभव हो गया। घरेलू बाजार (भारत): भारत में 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव ₹1,60,250 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी ने भी लंबी छलांग लगाते हुए ₹3,34,900 प्रति किलोग्राम का स्तर छू लिया है।   यह उछाल केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि निवेशकों का भरोसा कागजी मुद्रा (Currency) के मुकाबले ठोस धातुओं (Hard Assets) पर बढ़ रहा है।   राजधानी दिल्ली का हाल: रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर आज ₹10 की मामूली राहत देश की राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज कीमतों में एक बेहद मामूली सुधार देखने को मिला, जिसे 'ऊंट के मुंह में जीरा' कहा जा सकता है। ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद, आज यानी 26 जनवरी को सोने के भाव में मात्र ₹10 की गिरावट दर्ज की गई।   24 कैरेट सोना (दिल्ली): आज ₹10 सस्ता होकर ₹1,60,040 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। 22 कैरेट सोना (दिल्ली): आभूषण बनाने में इस्तेमाल होने वाला यह सोना भी ₹10 टूटकर ₹1,47,040 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।   हालांकि, यह गिरावट खरीदारों को कोई खास राहत देने वाली नहीं है, क्योंकि कीमतें अभी भी ₹1.60 लाख के स्तर के ऊपर बनी हुई हैं। यह गिरावट तकनीकी रूप से 'प्रोफिट बुकिंग' (Profit Booking) का नतीजा मानी जा सकती है, जहाँ निवेशक ऊंचे दामों पर थोड़ा मुनाफा वसूलते हैं।   बीते हफ्ते की तूफानी तेजी: 7 दिनों में बदला पूरा मंजर आज की ₹10 की गिरावट को समझने के लिए हमें पिछले एक हफ्ते (19 जनवरी से 25 जनवरी) के आंकड़ों को देखना होगा। यह हफ्ता सोने के लिए किसी 'रॉकेट' से कम नहीं था।   24 कैरेट में उछाल: केवल 7 दिनों के भीतर 24 कैरेट सोने की कीमतों में ₹16,480 प्रति 10 ग्राम की भारी भरकम तेजी दर्ज की गई। 22 कैरेट में उछाल: ज्वैलरी गोल्ड यानी 22 कैरेट सोने में भी लगभग ₹15,100 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई।   इतनी कम अवधि में इतना बड़ा उछाल बताता है कि बाजार में 'पैनिक बाइंग' (Panic Buying) की स्थिति बनी हुई थी।   देश के 10 बड़े शहरों का 'गोल्ड मीटर': जानें कहाँ क्या है भाव आज देश के प्रमुख महानगरों में सोने के भाव लगभग एक सीमित दायरे में बने हुए हैं, लेकिन कुछ शहरों में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है। मुंबई और कोलकाता, जो सर्राफा व्यापार के बड़े केंद्र हैं, वहां भाव अपने चरम पर हैं।   नीचे दी गई तालिका में आप अपने शहर के अनुसार आज (26 जनवरी) के सोने के भाव देख सकते हैं:   शहर (City) 24 कैरेट (10 ग्राम) 22 कैरेट (10 ग्राम) 18 कैरेट (10 ग्राम) दिल्ली ₹1,60,040 ₹1,47,040 ₹1,20,330 मुंबई ₹1,60,250 ₹1,46,890 ₹1,20,180 कोलकाता ₹1,60,250 ₹1,46,890 ₹1,20,180 चेन्नई ₹1,59,480 ₹1,47,490 ₹1,22,990 बेंगलुरु ₹1,60,250 ₹1,46,890 ₹1,20,180 हैदराबाद ₹1,60,250 ₹1,46,890 ₹1,20,180 लखनऊ ₹1,60,040 ₹1,47,040 ₹1,20,330 पटना ₹1,60,300 ₹1,46,940 ₹1,20,230 जयपुर ₹1,60,040 ₹1,47,040 ₹1,20,330 अहमदाबाद ₹1,60,300 ₹1,46,940 ₹1,20,230   विश्लेषण: सबसे महंगा सोना: पटना और अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना ₹1,60,300 के स्तर पर है, जो दिल्ली से थोड़ा अधिक है। चेन्नई में विरोधाभास: चेन्नई में 24 कैरेट सोना अन्य महानगरों के मुकाबले थोड़ा सस्ता (₹1,59,480) है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वहां 22 कैरेट सोने का भाव (₹1,47,490) दिल्ली और मुंबई से भी ज्यादा है। यह वहां की स्थानीय मांग और ज्वैलरी मेकिंग चार्जेज की संरचना के कारण हो सकता है। समानता: मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में भाव एक समान ₹1,60,250 पर चल रहे हैं, जो एक एकीकृत बाजार धारणा (Market Sentiment) का संकेत देता है।   चांदी की चाल: ₹3.34 लाख के पार, लेकिन आज थोड़ी नरमी सोने की तरह चांदी भी निवेशकों की पसंदीदा बनी हुई है। औद्योगिक मांग और निवेश मांग के दोहरे इंजन ने चांदी की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है।   आज की स्थिति: एक दिन की स्थिरता के बाद आज चांदी की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है।   दिल्ली, मुंबई और कोलकाता: यहाँ चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹3,34,900 प्रति किलोग्राम पर बिक रही है। चेन्नई का हाल: दक्षिण भारत में चांदी की चमक सबसे ज्यादा है। चेन्नई में चांदी का भाव ₹3,64,900 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया है, जो उत्तर भारत के मुकाबले करीब ₹30,000 अधिक है।   साप्ताहिक प्रदर्शन (The Weekly Rally): चांदी ने पिछले कारोबारी हफ्ते (19-25 जनवरी) में जिस तरह की तेजी दिखाई, उसने विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया।   ₹40,000 की छलांग: केवल एक हफ्ते के उतार-चढ़ाव के दौरान चांदी की कीमतों में करीब ₹40,000 प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई। कारण: मजबूत रिटेल मांग (Strong Retail Demand), मोमेंटम आधारित निवेश (Momentum Trading) और फिजिकल मार्केट में सप्लाई की कमी (Supply Shortage) ने चांदी को रॉकेट बना दिया। विशेष रूप से ईवी (EV) सेक्टर और ग्रीन एनर्जी में चांदी के बढ़ते उपयोग ने इसकी औद्योगिक मांग को मजबूत किया है।   निवेशकों के लिए क्या है संकेत? बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा दौर 'सोने की नई महामंदी' का नहीं, बल्कि 'महा-तेजी' (Super Cycle) का है। ₹1.60 लाख का स्तर पार करना भारतीय रुपये के कमजोर होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मजबूती दोनों का परिणाम है।   शादियों का सीजन: भारत में शादियों का सीजन चल रहा है। ऐसे में 22 कैरेट सोने का ₹1.47 लाख के पार जाना आम आदमी के बजट को बुरी तरह बिगाड़ सकता है। पोर्टफोलियो में बदलाव: जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में सोना था, उन्हें जबरदस्त रिटर्न मिला है। 18 कैरेट सोना, जो डायमंड ज्वैलरी में इस्तेमाल होता है, वह भी ₹1.20 लाख के पार है, जिससे डायमंड ज्वैलरी भी महंगी हो जाएगी।   आगे क्या? सोने और चांदी की यह ऐतिहासिक तेजी यह बताती है कि दुनिया अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। ₹10 या ₹100 की दैनिक गिरावट महज एक छोटा सा सुधार है, लेकिन दीर्घकालिक ट्रेंड (Long-term Trend) अभी भी बेहद मजबूत और ऊपर की ओर (Bullish) बना हुआ है। खरीदारों के लिए यह 'देखो और इंतजार करो' (Wait and Watch) की स्थिति हो सकती है, लेकिन निवेशकों के लिए यह अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने का एक प्रमाण है।   अगले कुछ दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सोना ₹1.60 लाख के इस नए आधार (Base) को बनाए रखता है या यहां से कुछ मुनाफावसूली हावी होती है।   (नोट: ऊपर दिए गए सोने और चांदी के रेट सांकेतिक हैं और इनमें जीएसटी (GST) या मेकिंग चार्जेज शामिल नहीं हैं। सटीक भाव के लिए कृपया अपने स्थानीय ज्वैलर से संपर्क करें।)

Unknown जनवरी 26, 2026 0
silver price historic record january 2026 mcx global market-surpasses 100 dollar mark

चांदी का 'तांडव': 2026 की शुरुआत में ही टूटा सदियों का रिकॉर्ड, भाव पहुंचा 3.40 लाख के करीब; दुनिया रह गई दंग

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Finance Ministry Approves Wage Revision for RBI NABARD and Insurance Employees

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Rupee vs Dollar INR Hits All Time Low of 91 99 Experts Blame Global Tension and FPI Selling
अर्थव्यवस्था में भूचाल: 'पाताल' में पहुंचा रुपया, डॉलर के मुकाबले 91.99 के रिकॉर्ड लो पर क्लोजिंग, 20 दिनों में ही ध्वस्त हुआ भारतीय करेंसी का किला

नई दिल्ली/मुंबई (बिज़नेस डेस्क)। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए साल 2026 की शुरुआत किसी बुरे सपने से कम नहीं रही है। शुक्रवार को विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Forex Market) में जो हुआ, उसने सरकार, रिज़र्व बैंक और आम निवेशकों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं। भारतीय रुपया (Indian Rupee) डॉलर के मुकाबले अपने इतिहास के अब तक के सबसे निचले स्तर यानी 91.99 पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद अहम 92 रुपये के स्तर से महज कुछ पैसे दूर है।READ ALSO:-8th Pay Commission: अगर फिटमेंट फैक्टर हुआ 3.25, तो क‍ितनी होगी सैलरी? 60 पन्नों के ज्ञापन में छिपा है आपकी तरक्की का पूरा रोडमैप   बाजार खुलने के साथ ही रुपये पर दबाव साफ देखा जा सकता था। आयातकों (Importers) की ओर से डॉलर की भारी मांग और विदेशी फंड्स की निकासी ने रुपये को संभलने का कोई मौका नहीं दिया। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, दिन के कारोबार के अंत तक रुपया रसातल में जा चुका था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल एक दिन की कहानी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक और घरेलू कारकों का एक जटिल जाल है।   गिरावट की टाइमलाइन: 90 से 92 का सफर (The Timeline of Collapse) रुपये की यह गिरावट अचानक नहीं हुई है, बल्कि यह पिछले कुछ महीनों से जारी दबाव का नतीजा है।   दिसंबर 2025: यह वह समय था जब रुपये ने पहली बार 90 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार किया था। उस समय इसे एक बड़ी आर्थिक घटना माना गया था और उम्मीद थी कि आरबीआई (RBI) के हस्तक्षेप से स्थिति सुधरेगी। जनवरी 2026 (शुरुआत): नया साल नई चुनौतियां लेकर आया। साल की शुरुआत से ही रुपया दबाव में रहा। 23 जनवरी 2026: महज 20-22 दिनों के भीतर रुपया 91 के स्तर को पार करते हुए 91.99 तक लुढ़क गया। इतनी कम समय सीमा में लगभग 2 रुपये की गिरावट किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है।   रुपये की कमर तोड़ने वाले 3 बड़े 'विलन' बाजार के दिग्गजों और अर्थशास्त्रियों ने इस ऐतिहासिक गिरावट के लिए मुख्य रूप से तीन बड़े कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। आइये इन्हें विस्तार से समझते हैं:   1. विदेशी निवेशकों (FPI) की रिकॉर्ड बिकवाली: बाजार से मोहभंग भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) की रीढ़ माने जाने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) अब भारतीय बाजार से अपना पैसा तेजी से निकाल रहे हैं।   आंकड़े क्या कहते हैं? जनवरी 2026 के पहले 22 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो FPI ने भारतीय बाजार से कुल ₹36,500 करोड़ की बिकवाली की है। यह एक महीने में होने वाली सबसे बड़ी निकासियों में से एक है। रुपये पर असर: अर्थशास्त्र का सीधा नियम है—जब विदेशी निवेशक भारत में शेयर बेचते हैं, तो उन्हें भुगतान रुपये में मिलता है। वे इस रुपये को अपने देश वापस ले जाने के लिए 'डॉलर' में बदलते हैं। इससे बाजार में रुपये की बिकवाली बढ़ती है और डॉलर की मांग (Demand) में उछाल आता है। परिणाम—रुपया कमजोर हो जाता है। वजह: भारतीय बाजारों का महंगा वैल्यूएशन और चीन जैसे बाजारों में सस्ते विकल्प मिलने के कारण FPI अपना पैसा शिफ्ट कर रहे हैं।   2. ट्रम्प की नीतियां और 'ग्रीनलैंड' विवाद: जियोपॉलिटिकल टेंशन अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के बाद की स्थितियों और डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) की वापसी ने वैश्विक व्यापार समीकरणों को बदल दिया है।   ग्रीनलैंड विवाद (Greenland Dispute): हाल ही में उभरे 'ग्रीनलैंड' विवाद ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच तनाव पैदा कर दिया है। ट्रम्प प्रशासन द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों और रणनीतिक चालों ने दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता (Uncertainty) का माहौल बना दिया है। टैरिफ वॉर: ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत लगाए जा रहे नए टैरिफ ने ग्लोबल ट्रेड को डरा दिया है। सुरक्षित निवेश (Safe Haven): जब भी दुनिया में युद्ध या तनाव का माहौल बनता है, निवेशक जोखिम भरे बाजारों (जैसे भारत, ब्राजील) से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले 'अमेरिकी डॉलर' या 'सोने' (Gold) में लगाते हैं। यही कारण है कि डॉलर इंडेक्स (DXY) लगातार मजबूत हो रहा है।   अमेरिका की 'सुपरपावर' इकोनॉमी और ब्याज दरें तीसरा और सबसे अहम तकनीकी कारण है अमेरिका की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन।   बेरोजगारी दर में कमी: अमेरिका से आ रहे ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, वहां बेरोजगारी की दर घटी है और जॉब मार्केट मजबूत हुआ है। इसका मतलब है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी से कोसों दूर है। ब्याज दरों का गणित: मजबूत इकोनॉमी का मतलब है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) ब्याज दरों में कटौती करने की जल्दबाजी नहीं करेगा। निवेशकों का लालच: अगर अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहेंगी, तो पूरी दुनिया के निवेशक अपना पैसा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स (Treasury Bonds) में लगाएंगे क्योंकि वहां बिना जोखिम के अच्छा रिटर्न मिल रहा है। इस 'रिवर्स फ्लो' के कारण भारत जैसे देशों से डॉलर का बहिर्वाह (Outflow) हो रहा है।   क्या है रिकवरी का रास्ता? इस घबराहट के बीच निवेशकों को थोड़ी उम्मीद भी दिखाई दे रही है। CR फॉरेक्स एडवाइजर्स (CR Forex Advisors) के प्रबंध निदेशक अमित पाबारी (Amit Pabari) ने तकनीकी चार्ट्स के आधार पर स्थिति का विश्लेषण किया है।   अमित पाबारी का बयान: "रुपया फिलहाल एक 'फ्री फॉल' (मुक्त गिरावट) की स्थिति में है, लेकिन 92.00 का स्तर तकनीकी रूप से एक बहुत मजबूत रेजिस्टेंस (Resistance) है। बाजार की मनोविज्ञान को देखते हुए, यहाँ से डॉलर में मुनाफावसूली आ सकती है। अगर वैश्विक मोर्चे पर तनाव थोड़ा भी कम होता है, तो हम रुपये में एक 'पुलबैक' देख सकते हैं। यह वापस सुधरकर 90.50 से 90.70 की रेंज में आ सकता है। लेकिन अगर 92 का स्तर भी टूट गया, तो अगली गिरावट और भी भयावह हो सकती है।"   आम आदमी पर असर: आपकी जेब पर डकैती आप सोच रहे होंगे कि अगर डॉलर महंगा हुआ तो आम आदमी को क्या फर्क पड़ता है? फर्क पड़ता है, और बहुत गहरा पड़ता है:   पेट्रोल-डीजल: भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल (Crude Oil) आयात करता है, जिसका भुगतान डॉलर में होता है। महंगा डॉलर मतलब महंगा तेल। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे और माल ढुलाई महंगी होगी। महंगाई (Inflation): जब डीजल महंगा होगा, तो सब्जी से लेकर दूध तक, हर चीज की कीमत बढ़ेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स: मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी जैसे गैजेट्स, जिनके पार्ट्स आयात होते हैं, उनकी कीमतें बढ़ सकती हैं। विदेश में पढ़ाई और यात्रा: जिन माता-पिता के बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं, उन पर सबसे ज्यादा मार पड़ेगी। फीस और खर्च के लिए अब उन्हें ज्यादा रुपये भेजने होंगे। विदेश घूमने जाने वालों का बजट भी 10-15% तक बिगड़ सकता है।   रुपये की यह गिरावट भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को बढ़ा सकती है। अब सभी की निगाहें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) पर टिकी हैं। क्या RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) का उपयोग करके डॉलर बेचेगा और रुपये को संभालेगा? या फिर वह रुपये को वैश्विक हवा के रुख के साथ बहने देगा?   आने वाले कुछ दिन भारतीय बाजार के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं। अगर आप निवेशक हैं, तो फिलहाल करेंसी रिस्क को हेज (Hedge) करके चलना ही समझदारी होगी।

Unknown जनवरी 23, 2026 0
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बाज़ार में हाहाकार: सोना ₹1.55 लाख के 'ऑल टाइम हाई' पर, चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड; 23 दिनों में ₹22 हजार महंगा हुआ पीली धातु, जानें ₹4 लाख तक कब पहुंचेगी चांदी?

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क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट: क्या बिल न भरने पर खानी पड़ सकती है जेल की हवा? जानिए कानून, डर और हकीकत का पूरा सच

नई दिल्ली: आज के डिजिटल दौर में क्रेडिट कार्ड (Credit Card) हमारी जीवनशैली का एक अभिन्न अंग बन चुका है। 'अभी खरीदें, बाद में चुकाएं' (Buy Now, Pay Later) की सुविधा, आकर्षक रिवॉर्ड पॉइंट्स और कैशबैक के लालच में हम अक्सर अपनी चादर से बाहर पैर पसार लेते हैं। शॉपिंग मॉल हो या ऑनलाइन सेल, क्रेडिट कार्ड स्वाइप करना बेहद आसान लगता है। लेकिन असली समस्या तब शुरू होती है जब महीने के अंत में भारी-भरकम बिल सामने आता है।Read also:-जम्मू-कश्मीर: डोडा में बड़ा हादसा, 200 फीट गहरी खाई में गिरी सेना की गाड़ी, 10 जवान शहीद; रेस्क्यू ऑपरेशन में एयरलिफ्ट किए गए घायल   कई बार नौकरी जाने, मेडिकल इमरजेंसी या खराब फाइनेंशियल प्लानिंग की वजह से लोग समय पर बिल नहीं भर पाते। ऐसे में एक डर जो हर आम आदमी को सबसे ज्यादा सताता है, वह यह है कि "क्या क्रेडिट कार्ड का बिल न भरने पर पुलिस घर आ सकती है? क्या मुझे जेल हो सकती है?" यह सवाल न केवल डराता है बल्कि मानसिक तनाव का भी बड़ा कारण बनता है। आज हम आपको इस डर के पीछे का सच, भारतीय कानून के नियम और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से बताएंगे।   कानूनी हकीकत: क्या वाकई जेल हो सकती है? सबसे पहले और सबसे अहम बात जो आपको जाननी चाहिए, वह यह है कि क्रेडिट कार्ड का बिल न चुका पाना भारतीय कानून की नजर में 'सिविल डिस्प्यूट' (Civil Dispute) यानी नागरिक विवाद माना जाता है। यह कोई आपराधिक कृत्य (Criminal Offense) नहीं है।   कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, कर्ज न चुका पाना अपराध की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए: पुलिस आपको गिरफ्तार नहीं कर सकती। आपके खिलाफ सीधे तौर पर कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की जा सकती। बैंक या रिकवरी एजेंट पुलिस को लेकर आपके घर नहीं आ सकते।   भारतीय संविधान और कानून किसी भी व्यक्ति को केवल कर्ज न चुका पाने के कारण जेल भेजने की अनुमति नहीं देते, बशर्ते इसमें कोई आपराधिक साजिश न हो।   बैंक वसूली के लिए क्या प्रक्रिया अपनाते हैं? भले ही आपको जेल का डर न हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बिल न भरने पर आप निश्चिंत हो जाएं। बैंक अपना पैसा वसूलने के लिए एक सख्त और चरणबद्ध प्रक्रिया का पालन करते हैं, जो किसी भी व्यक्ति के लिए मानसिक रूप से परेशान करने वाली हो सकती है।   रिमाइंडर और अलर्ट (Reminders): ड्यू डेट (Due Date) निकलने के तुरंत बाद बैंक आपको एसएमएस और ईमेल के जरिए अलर्ट भेजता है। साथ ही लेट फीस और ब्याज जुड़ना शुरू हो जाता है। कार्ड ब्लॉक करना: कुछ दिनों तक भुगतान न होने पर बैंक आपके कार्ड को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर सकता है, जिससे आप आगे कोई ट्रांजेक्शन नहीं कर पाएंगे। रिकवरी एजेंट (Recovery Agents): अगर आप 90 दिनों तक (NPA घोषित होने से पहले) भुगतान नहीं करते हैं, तो बैंक रिकवरी एजेंटों को आपका केस सौंप देता है। ये एजेंट आपको कॉल कर सकते हैं या घर आ सकते हैं। कानूनी नोटिस (Legal Notice): जब रिकवरी एजेंटों से भी बात नहीं बनती, तो बैंक आपको वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भेजता है। इसमें आपको एक निश्चित समय के भीतर पैसा चुकाने या कोर्ट में जवाब देने के लिए कहा जाता है।   सावधान: जेल कब हो सकती है? (The Wilful Defaulter Trap) अब सवाल यह है कि क्या किसी भी सूरत में जेल नहीं हो सकती? यहीं पर पेंच फंसा है। सामान्यतः बिल न भरने पर जेल नहीं होती, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में यह मामला 'सिविल' से 'क्रिमिनल' बन सकता है।   1. विलफुल डिफॉल्टर (Willful Defaulter): अगर बैंक कोर्ट में यह साबित कर दे कि आपके पास पैसे चुकाने की क्षमता (Capacity to Pay) है, लेकिन आप जानबूझकर भुगतान नहीं कर रहे हैं, तो आप 'विलफुल डिफॉल्टर' की श्रेणी में आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में कोर्ट सख्त कार्रवाई कर सकता है।   2. धोखाधड़ी (Fraud): अगर आपने क्रेडिट कार्ड लेते समय फर्जी दस्तावेज दिए थे, या बैंक को धोखा देने की नीयत से खर्च किया है, तो बैंक आपके खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज करा सकता है। इसमें जेल जाने की नौबत आ सकती है।   3. चेक बाउंस (Cheque Bounce): अक्सर लोग क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने के लिए चेक दे देते हैं। अगर वह चेक बाउंस हो जाता है, तो यह नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध है। इसमें आपको 2 साल तक की जेल या चेक की राशि का दोगुना जुर्माना भरना पड़ सकता है।   डिफॉल्ट का असली नुकसान: भविष्य पर ताला जेल जाने से ज्यादा बड़ा नुकसान आपके वित्तीय भविष्य को होता है। एक बार डिफॉल्ट करने पर आपको कई साल तक इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।   CIBIL स्कोर धड़ाम: क्रेडिट कार्ड का भुगतान चूकने पर आपका क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) तेजी से गिरता है। 750 से कम स्कोर होने पर भविष्य में कोई भी बैंक आपको होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन नहीं देगा। ब्लैकलिस्ट: बैंक आपको अपनी इंटरनल ब्लैकलिस्ट में डाल सकते हैं। भारी ब्याज: क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दरें दुनिया में सबसे ज्यादा (36% से 48% सालाना) होती हैं। डिफॉल्ट करने पर ब्याज पर ब्याज (Compound Interest) लगता है, जिससे छोटी सी रकम भी कुछ ही महीनों में लाखों में बदल सकती है।   बचाव का मंत्र: 30% का गोल्डन रूल वित्तीय जानकारों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड 'दोधारी तलवार' है। अगर इसका सही इस्तेमाल हो तो फायदा, वरना गहरा नुकसान। कर्ज के जाल (Debt Trap) से बचने के लिए विशेषज्ञों ने '30% का नियम' सुझाया है।   क्या है 30% का नियम? आपकी क्रेडिट लिमिट चाहे कितनी भी हो, आपको उसका केवल 30% से 40% हिस्सा ही इस्तेमाल करना चाहिए।   उदाहरण: अगर आपकी क्रेडिट लिमिट 1 लाख रुपये है, तो कोशिश करें कि आपका महीने का खर्च 30,000 रुपये से ज्यादा न हो। फायदा: इससे दो फायदे होते हैं। पहला, बिल चुकाने में आसानी रहती है। दूसरा, क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो (Credit Utilization Ratio) कम रहने से आपका सिबिल स्कोर तेजी से बढ़ता है।   RBI के नियम: रिकवरी एजेंट की मनमानी नहीं चलेगी अक्सर देखा गया है कि रिकवरी एजेंट ग्राहकों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसके लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं:   रिकवरी एजेंट आपको सुबह 7 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद कॉल नहीं कर सकते। वे आपके परिवार या दोस्तों को धमका नहीं सकते। अभद्र भाषा या शारीरिक हिंसा का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। अगर कोई एजेंट ऐसा करता है, तो आप पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं और बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) से संपर्क कर सकते हैं।   अगर फंस गए हैं कर्ज में, तो क्या करें? अगर आप ऐसी स्थिति में हैं जहां बिल चुकाना नामुमकिन लग रहा है, तो भागें नहीं, बल्कि सामना करें:   बैंक से बात करें: बैंक से संपर्क करें और अपनी स्थिति बताएं। कई बार बैंक आपको EMI में बिल चुकाने का विकल्प (Restructuring) दे देते हैं। सेटलमेंट (One Time Settlement): अगर स्थिति बहुत खराब है, तो आप 'वन टाइम सेटलमेंट' के लिए बात कर सकते हैं। इसमें बैंक कुछ राशि माफ करके खाता बंद कर देता है (ध्यान रहे, इससे सिबिल स्कोर पर 'Settled' लिखा आएगा जो भविष्य के लिए अच्छा नहीं है)। क्रेडिट काउंसलर: किसी पेशेवर वित्तीय सलाहकार से मदद लें।   क्रेडिट कार्ड का बिल न भरना आपको सीधे जेल नहीं पहुंचाता, लेकिन यह आपको आर्थिक जेल में जरूर कैद कर सकता है। पुलिस का डर मन से निकाल दें, लेकिन सिविल कोर्ट और सिबिल स्कोर के डर को हमेशा याद रखें। समझदारी इसी में है कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल डेबिट कार्ड की तरह करें—यानी उतना ही खर्च करें जितना आपके बैंक खाते में मौजूद हो। क्रेडिट कार्ड बिल डिफॉल्ट एक सिविल मामला है, इसमें पुलिस गिरफ्तार नहीं करती। हालांकि, अगर चेक बाउंस हो या जानबूझकर धोखाधड़ी (Willful Default) साबित हो, तो जेल हो सकती है। इससे बचने के लिए अपनी क्रेडिट लिमिट का सिर्फ 30% इस्तेमाल करें और रिकवरी एजेंटों के उत्पीड़न के खिलाफ RBI के नियमों को जानें।

Unknown जनवरी 22, 2026 0
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