
Deeply saddened by the tragic incident at a political rally in Karur, Tamil Nadu, that has taken so many precious lives. My heart goes out to their loved ones, and I wish a swift recovery to all those injured.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 27, 2025
I urge Congress workers and leaders to extend every possible support…

VIDEO | Chennai: Tamil Nadu CM MK Stalin (@mkstalin) arrives to hold urgent meeting over stampede-like incident that happened in Karur.
— Press Trust of India (@PTI_News) September 27, 2025
(Source: Third Party)#Karur #TamilNadu pic.twitter.com/nAmRvPj8UT
#WATCH | Tamil Nadu: A large number of people attended the campaign of TVK (Tamilaga Vettri Kazhagam) chief and actor Vijay in Karur
— ANI (@ANI) September 27, 2025
A stampede-like situation reportedly occurred here. Several people fainted and were taken to a nearby hospital. More details are awaited.… pic.twitter.com/4f2Gyrp0v5
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।
नई दिल्ली/शिमला: देश भर में जब 77वें गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) का जश्न मनाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, वहीं मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 जनवरी 2026 के लिए उत्तर भारत, विशेषकर पहाड़ी राज्यों के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Active Western Disturbance) के चलते मौसम विभाग ने 'ऑरेंज अलर्ट' (Orange Alert) जारी किया है, जिसका सीधा असर गणतंत्र दिवस समारोहों और लंबी छुट्टी पर निकले पर्यटकों पर पड़ने वाला है।READ ALSO:-मेरठ में यूजीसी के नए फरमान के खिलाफ बिगुल: 'समानता सर्वेक्षण' या सामाजिक विभाजन? युवा ब्राह्मण समाज ने विनियमन-2026 को बताया शिक्षा जगत के लिए 'काला अध्याय' हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की ऊंची चोटियों पर भारी बर्फबारी (Heavy Snowfall) की चेतावनी दी गई है, जबकि मैदानी इलाकों में बारिश और शीतलहर का प्रकोप देखने को मिलेगा। इस बीच, प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए होटलों और टैक्सी संचालकों के लिए एक विशेष और सख्त एडवाइजरी जारी की है, जिसका मूल मंत्र है—"मुनाफा नहीं, मदद"। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि 26 जनवरी को आपके शहर का मौसम कैसा रहेगा, पर्यटकों के लिए क्या निर्देश हैं और आने वाले 2-3 दिनों में मौसम क्या गुल खिलाने वाला है। गणतंत्र दिवस पर कुदरत का 'कोल्ड स्ट्राइक' Mausam Update 26 January 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 26 जनवरी का दिन उत्तर भारत के लिए हड्डियों को जमा देने वाली ठंड लेकर आ रहा है। IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा। इसका प्रभाव 25 जनवरी की रात से ही दिखना शुरू हो जाएगा, लेकिन 26 जनवरी को इसकी तीव्रता चरम पर होगी। पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी का दौर शुरू होने के साथ ही मैदानी इलाकों, विशेषकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर में बर्फीली हवाएं (Icy Winds) ठिठुरन बढ़ाएंगी। मौसम विभाग का कहना है कि यह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस इस सीजन का सबसे मजबूत सिस्टम हो सकता है। हिमाचल प्रदेश: -18°C तक लुढ़केगा पारा, तूफानी हवाओं का अलर्ट हिमाचल प्रदेश में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर रहने का अनुमान है। IMD के आंकड़ों के अनुसार, 26 जनवरी को राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में दिन के समय 45% और रात के समय 75% तक बर्फबारी की संभावना है। यह आंकड़ा बताता है कि गणतंत्र दिवस की रात पहाड़ पूरी तरह सफेद चादर में लिपट जाएंगे। तापमान में भारी गिरावट: राज्य के ऊपरी इलाकों में अधिकतम तापमान -13°C (माइनस 13 डिग्री) और न्यूनतम तापमान -18°C (माइनस 18 डिग्री) तक गिरने का अनुमान है। यह तापमान इतना कम है कि पानी की पाइपलाइन जमने और सड़कों पर 'ब्लैक आइस' (Black Ice) बनने का खतरा पैदा हो गया है। तेज हवाएं और बिजली: केवल बर्फबारी ही नहीं, बल्कि मौसम विभाग ने 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी है। हवा की दिशा दक्षिण-पूर्व (South-East) से रहेगी और इसकी गति 4 mph तक सामान्य रह सकती है लेकिन झोंके तेज होंगे। इसके साथ ही कई स्थानों पर बिजली गिरने (Lightning) की भी आशंका जताई गई है। पर्यटकों के लिए सख्त एडवाइजरी: 'मुनाफा नहीं, मदद' पहाड़ों पर खराब मौसम को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एक सराहनीय और सख्त कदम उठाया है। आपदा प्रबंधन और पर्यटन विभाग ने संयुक्त रूप से होटलों, होम-स्टे और टैक्सी यूनियनों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी का थीम है—'मुनाफा नहीं, मदद' (Profit not, Help)। प्रशासन के निर्देशों के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं: जबरन चेक-आउट पर रोक: होटलों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि भारी बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो जाती हैं, तो किसी भी पर्यटक को होटल से चेक-आउट (Check-out) करने के लिए मजबूर न किया जाए। पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। किराए में वृद्धि पर प्रतिबंध: आपदा या खराब मौसम को 'अवसर' मानकर पर्यटकों को लूटने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। होटल, टैक्सी या रेस्तरां संचालक तय दरों से अधिक किराया या सेवा शुल्क (Service Charge) नहीं वसूल सकेंगे। यदि कोई ऐसा करता पाया गया, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। यात्रा न करने की सलाह: प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे 26 और 27 जनवरी को अनावश्यक यात्रा से बचें। विशेषकर उन रास्तों पर जहां बर्फबारी के कारण सड़क संपर्क टूटने (Road Connectivity issues) का खतरा है। हेल्पलाइन नंबर: प्रशासन ने पर्यटकों की सहायता के लिए 24x7 कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं। यह एडवाइजरी उस समय आई है जब 26 जनवरी की लंबी छुट्टी (Long Weekend) के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक हिमाचल और कश्मीर का रुख कर रहे हैं। मैदानी इलाकों का हाल: कोहरा और शीतलहर पहाड़ों पर बर्फबारी का सीधा असर मैदानी राज्यों पर पड़ेगा। Mausam Update 26 January 2026 के अनुसार: पंजाब और हरियाणा: 26 जनवरी की सुबह पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में 'घने से बहुत घना कोहरा' (Dense to Very Dense Fog) छाया रहेगा। इससे विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम हो सकती है, जिससे गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों में खलल पड़ सकता है और यातायात प्रभावित होगा। शीतलहर (Cold Wave): राजस्थान के उत्तरी हिस्सों (चूरू, सीकर, बीकानेर) और हरियाणा में शीतलहर चलने की संभावना है। दिन का तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री नीचे रह सकता है। दिल्ली-NCR: राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी को आसमान में बादल छाए रहेंगे और ठंडी हवाएं चलेंगी। हालांकि, बारिश की मुख्य गतिविधि 27 जनवरी से शुरू होगी, लेकिन 26 तारीख को भी मौसम ठंडा और नम रहेगा। 27-28 जनवरी: बारिश और ओलावृष्टि का दौर मौसम विभाग ने केवल 26 जनवरी ही नहीं, बल्कि अगले दो दिनों के लिए भी चेतावनी जारी की है। 26 जनवरी को पहाड़ों पर शुरू हुआ यह सिस्टम 27 और 28 जनवरी को मैदानी इलाकों में अपनी ताकत दिखाएगा। दिल्ली-NCR में बारिश: IMD के मुताबिक, 27 जनवरी को दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में गरज के साथ बारिश (Thunderstorm with Rain) होने के आसार हैं। यह बारिश पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ने के कारण होगी। बारिश के कारण दिन के तापमान में 4°C से 8°C तक की भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे 'कोल्ड डे' (Cold Day) जैसी स्थिति बन सकती है। हिमाचल के इन जिलों में रेड अलर्ट: 27 जनवरी को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में भारी से बहुत भारी बर्फबारी का अनुमान है। यह वह समय होगा जब अटल टनल (Atal Tunnel) और रोहतांग दर्रा जैसे मार्ग पूरी तरह बंद हो सकते हैं। किसान और कृषि पर प्रभाव इस बेमौसम बारिश और बर्फबारी का मिश्रित प्रभाव कृषि पर पड़ेगा: फायदेमंद: गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए हल्की बारिश और पहाड़ों पर बर्फबारी अमृत समान है। इससे जमीन में नमी बनी रहेगी और तापमान कम होने से गेहूं की पैदावार अच्छी होगी। नुकसान: यदि मैदानी इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorm) होती है या बहुत तेज हवाएं चलती हैं, तो खड़ी फसलों के बिछने (Lodging) का खतरा है, जिससे किसानों को नुकसान हो सकता है। बागवानी किसानों, विशेषकर सेब उत्पादकों के लिए यह बर्फबारी 'व्हाइट गोल्ड' साबित होगी क्योंकि सेब की फसल के लिए 'चिलिंग आवर्स' (Chilling Hours) की जरूरत होती है। स्वास्थ्य और सुरक्षा सावधानियां मौसम में आ रहे इस बदलाव को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी सलाह जारी की है। तापमान में अचानक 4 से 8 डिग्री की गिरावट बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक हो सकती है। गणतंत्र दिवस परेड देखने जाने वाले: जो लोग सुबह परेड देखने खुले में जा रहे हैं, वे थ्री-लेयर वूलन (Three-layer woolens) पहनें। सिर और कान को ढककर रखें। हृदय रोगी: अत्यधिक ठंड खून को गाढ़ा करती है और ब्लड प्रेशर बढ़ाती है। दिल के मरीजों को सुबह की सैर (Morning Walk) से बचने और घर के अंदर रहने की सलाह दी गई है। ड्राइविंग: कोहरे के कारण दृश्यता कम रहेगी, इसलिए गाड़ियों में फॉग लैंप का इस्तेमाल करें और गति सीमा का पालन करें। जश्न के साथ सतर्कता भी जरूरी 26 जनवरी 2026 का गणतंत्र दिवस मौसम के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। एक तरफ जहां पहाड़ों पर बर्फबारी पर्यटकों को लुभा रही है, वहीं प्रशासन की 'मुनाफा नहीं, मदद' की अपील यह याद दिलाती है कि प्रकृति के आगे सुरक्षा ही सबसे बड़ा उपाय है। Mausam Update 26 January 2026 स्पष्ट करता है कि अगले 48 से 72 घंटे उत्तर भारत के लिए मौसम के लिहाज से उथल-पुथल भरे रहेंगे। पर्यटकों से अनुरोध है कि वे स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहें और मौसम विभाग के अपडेट्स को नजरअंदाज न करें। अगर आप पहाड़ों की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो सड़क की स्थिति जांच कर ही घर से निकलें। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 जनवरी 2026 के लिए पहाड़ी राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी और तापमान -18°C तक गिरने का अनुमान है। प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए होटलों को "मुनाफा नहीं, मदद" की नीति अपनाने और जबरन चेक-आउट न कराने का निर्देश दिया है। वहीं, 27-28 जनवरी को दिल्ली-NCR और पंजाब-हरियाणा में बारिश और तापमान में भारी गिरावट की संभावना है।
डोडा (जम्मू-कश्मीर): जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से गुरुवार को एक हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है। डोडा जिले के भद्रवाह-चंबा इंटरस्टेट रोड पर सेना का एक वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। इस भीषण सड़क हादसे में भारतीय सेना के 10 जवान शहीद हो गए हैं। वहीं, कई अन्य जवानों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।READ ALSO:-मेरठ: स्कूटी से आया, घर पर चिपका नोटिस देखा और उड़ गए होश... अलकायदा का 'ब्रेनवॉश एक्सपर्ट' उजैद कुरैशी ऐसे हुआ फरार, इंडियन आर्मी थी निशाने पर यह घटना 22 जनवरी, 2026 की दोपहर को हुई जब सेना का एक काफिला अपनी नियमित गश्त पर था। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और रेस्क्यू के लिए हेलीकॉप्टर की मदद लेनी पड़ी। खानी टॉप के पास कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा? सैन्य अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, यह दुर्घटना डोडा जिले के भद्रवाह सब-डिवीजन स्थित खानी टॉप (Khani Top) इलाके के पास हुई। घटनास्थल: भद्रवाह-चंबा रोड, जो अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और तीखे मोड़ों के लिए जाना जाता है। वाहन: दुर्घटनाग्रस्त वाहन सेना का एक 'बुलेट प्रूफ' (Bullet Proof) ट्रक था। खबरों के मुताबिक, इसमें कुल 17 जवान सवार थे। वजह: प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वाहन एक ऊंची पहाड़ी पोस्ट की तरफ जा रहा था। इसी दौरान एक तीखे मोड़ पर ड्राइवर ने गाड़ी पर से नियंत्रण खो दिया। सड़क पर फिसलन और घुमावदार रास्ता होने के कारण वाहन सीधे सड़क से नीचे लुढ़क गया। गाड़ी करीब 200 फीट गहरी खाई में जा गिरी। खाई इतनी गहरी थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और जवानों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। रेस्क्यू ऑपरेशन: घायलों को एयरलिफ्ट कर उधमपुर भेजा गया हादसे की सूचना मिलते ही सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला और संयुक्त रूप से एक व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कठिन रेस्क्यू: घटनास्थल पर गहरी खाई और दुर्गम रास्ता होने के बावजूद, बचाव दल ने रस्सियों के सहारे नीचे उतरकर जवानों को बाहर निकाला। शहादत: दुर्भाग्यवश, घटनास्थल पर ही कुछ जवानों के शहीद होने की पुष्टि हो गई थी। बाद में गंभीर चोटों के कारण शहीदों की संख्या बढ़कर 10 हो गई। घायलों का इलाज: हादसे में घायल हुए जवानों को मलबे से निकालकर प्राथमिक उपचार दिया गया। गंभीर रूप से घायल जवानों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा एयरलिफ्ट किया गया और उधमपुर स्थित कमांड हॉस्पिटल (Command Hospital, Udhampur) भेजा गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। उपराज्यपाल ने जताया गहरा शोक इस त्रासदी पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट साझा करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। एलजी मनोज सिन्हा ने कहा, "डोडा में एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना में हमारे 10 बहादुर भारतीय सेना के जवानों की जान जाने से गहरा दुख हुआ। हम हमेशा अपने बहादुर सैनिकों की उत्कृष्ट सेवा और सर्वोच्च बलिदान को याद रखेंगे। मेरी गहरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।" उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वरिष्ठ अधिकारियों को घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे डोडा और किश्तवाड़ जैसे पहाड़ी जिलों की सड़कें बेहद खतरनाक मानी जाती हैं। यहां अक्सर तीखे मोड़ और गहरी खाइयां ड्राइवरों के लिए चुनौती पेश करती हैं। कुछ समय पहले ही पुंछ-राजौरी सेक्टर में भी सेना के वाहनों के साथ दुर्घटनाएं हुई थीं। जनवरी की शुरुआत में ही गुलमर्ग सेक्टर में भी एक हादसे में सेना के पोर्टर्स की जान गई थी। इन घटनाओं ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सैन्य वाहनों की आवाजाही और सड़क सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, सेना के ड्राइवर अत्यधिक प्रशिक्षित होते हैं, लेकिन कई बार मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी घटनाओं का कारण बन जाती हैं। डोडा में हुआ यह हादसा देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। 10 जांबाज सैनिकों का जाना उनके परिवारों और पूरे राष्ट्र के लिए एक गहरा आघात है। फिलहाल, पूरा देश नम आंखों से अपने वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दे रहा है और अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे घायल जवानों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है। सेना ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (Court of Inquiry) के आदेश दे दिए हैं ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। 22 जनवरी 2026 को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भद्रवाह-चंबा रोड पर सेना का वाहन 200 फीट गहरी खाई में गिर गया। इस हादसे में 10 जवान शहीद हो गए हैं, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हैं जिन्हें उधमपुर एयरलिफ्ट किया गया है। एलजी मनोज सिन्हा ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
भारत के सरकारी महकमे में इस समय केवल एक ही चर्चा है— '8वां वेतन आयोग' (8th Pay Commission)। केंद्र सरकार के 50 लाख से अधिक कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए यह खबर किसी उत्सव से कम नहीं है। अक्टूबर 2025 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) को अपनी आधिकारिक मंजूरी दी, तभी से यह स्पष्ट हो गया था कि सरकार अब नए वेतन ढांचे की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। यह रिपोर्ट न केवल वेतन वृद्धि की बात करती है, बल्कि उस 'मेगा एरियर' का भी विश्लेषण करती है जो भविष्य में कर्मचारियों के बैंक खातों में एकमुश्त जमा होने वाला है।READ ALSO:-भारतीय रेलवे का 'सूर्योदय': पटरी पर उतरा 5-स्टार होटल जैसा सफर, देश को मिली पहली 'वंदे भारत स्लीपर' की सौगात 8वें वेतन आयोग का सफर: अब तक क्या हुआ और आगे क्या? वेतन आयोग का गठन एक जटिल प्रक्रिया है। यह केवल सैलरी बढ़ाना नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई दर (Inflation) और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ का संतुलन बनाना है। ToR को मंजूरी: अक्टूबर 2025 में 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' को मंजूरी मिलना सबसे बड़ी उपलब्धि रही। इसमें आयोग के कार्यक्षेत्र और शर्तों को निर्धारित किया गया है। आयोग का कार्य: अब आयोग देश भर के विभिन्न कर्मचारी संगठनों, मंत्रालयों और आर्थिक विशेषज्ञों के साथ बैठकें करेगा। आयोग यह देखेगा कि क्या मौजूदा 'पे मैट्रिक्स' महंगाई को मात देने में सक्षम है? रिपोर्ट सौंपने की प्रक्रिया: आमतौर पर आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में 12 से 18 महीने का समय लगता है। प्रभावी तिथि: 1 जनवरी 2026 ही क्यों? भारत में हर 10 साल के अंतराल पर वेतन आयोग लागू करने की एक अनकही परंपरा रही है। ऐतिहासिक संदर्भ: * 6ठा वेतन आयोग: 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ। 7वां वेतन आयोग: 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ। तार्किक आधार: इसी 10 साल के चक्र (Cycle) को देखते हुए यह लगभग तय है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी मानी जाएंगी। भले ही सरकार इसकी घोषणा 2026 के मध्य में या 2027 में करे, लेकिन इसका लाभ पिछली तारीख (Retrospective Effect) से ही मिलेगा। एरियर (Arrears) का 'करोड़पति' गणित: कैसे बरसेगा पैसा? कर्मचारियों के मन में सबसे ज्यादा उत्साह 'एरियर' को लेकर है। सरकारी प्रक्रिया अक्सर धीमी होती है, और यही 'धीमापन' कर्मचारियों के लिए एकमुश्त मोटी रकम (Bulk Amount) का जरिया बनता है। एरियर क्या है? जब सरकार किसी वेतन वृद्धि को पिछली तारीख से लागू करती है, तो उस तारीख से लेकर वर्तमान तक के अंतर की राशि को 'एरियर' कहा जाता है। विस्तृत कैलकुलेशन (Case Study): मान लीजिए एक केंद्रीय कर्मचारी (जैसे रेलवे या डाक विभाग) की वर्तमान बेसिक सैलरी ₹40,000 है। अनुमानित सैलरी वृद्धि: विशेषज्ञ मान रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बढ़ने के बाद न्यूनतम सैलरी में 25% से 30% का इजाफा हो सकता है। नई बेसिक सैलरी (अनुमानित): ₹40,000 का 25% बढ़कर यह ₹50,000 हो सकती है। मासिक अंतर: ₹10,000 का सीधा फायदा। देरी का परिदृश्य: मान लीजिए सरकार मई 2027 में एरियर के साथ नई सैलरी देना शुरू करती है। कुल महीनों का अंतर: जनवरी 2026 से मई 2027 = 16 महीने। कुल एरियर राशि: ₹10,000 (मासिक वृद्धि) x 16 (महीने) = ₹1,60,000। यह तो केवल बेसिक सैलरी का अंतर है। इसके साथ ही DA (महंगाई भत्ता), HRA (मकान किराया भत्ता) और TA (यात्रा भत्ता) पर मिलने वाले बढ़े हुए एरियर को जोड़ दें, तो यह राशि ₹2 लाख से ₹2.5 लाख के पार जा सकती है। फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor): सैलरी वृद्धि की असली चाबी 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था। कर्मचारी संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि इसे बढ़ाकर 3.68 किया जाए। यदि फिटमेंट फैक्टर 3.00 होता है: तो न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹26,000 के आसपास पहुँच सकता है। यदि फिटमेंट फैक्टर 3.68 होता है: तो न्यूनतम वेतन सीधे ₹30,000 के पार जा सकता है। यह फिटमेंट फैक्टर ही तय करेगा कि 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की सैलरी में 15% का इजाफा होगा या 40% का। पेंशनभोगियों के लिए 'वरदान' साबित होगा 8वां वेतन आयोग देश के 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए भी यह एक बड़ी राहत है। 8वें वेतन आयोग के लागू होने से: पेंशन में वृद्धि: जिस अनुपात में सेवारत कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी, उसी अनुपात में पेंशन में भी वृद्धि होगी। ग्रैच्युटी और अन्य लाभ: रिटायरमेंट के समय मिलने वाले लाभों की सीमा (Capping) में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। वर्तमान में ग्रैच्युटी की सीमा ₹25 लाख है (DA 50% होने के बाद), जिसे 8वें आयोग में और बढ़ाया जा सकता है। आर्थिक प्रभाव: क्या सरकार पर पड़ेगा बोझ? यह सच है कि 8वां वेतन आयोग लागू करने से सरकारी खजाने पर सालाना ₹1 लाख करोड़ से ₹1.5 लाख करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा। लेकिन इसके सकारात्मक पहलू भी हैं: बाजार में डिमांड: जब 1 करोड़ से अधिक लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा, तो बाजार में खर्च बढ़ेगा, जिससे ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और रिटेल सेक्टर को मजबूती मिलेगी। जीडीपी को बूस्ट: कर्मचारियों द्वारा किया गया खर्च अंततः देश की जीडीपी में योगदान देता है। टैक्स रेवेन्यू: बढ़ी हुई सैलरी के साथ कर्मचारी अधिक इनकम टैक्स भी चुकाएंगे, जो सरकार के पास वापस आएगा। चुनौतियां और कर्मचारी संगठनों का रुख रेलवे और अन्य कर्मचारी संगठनों ने पहले ही सरकार को ज्ञापन सौंपे हैं। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं: न्यूनतम वेतन में भारी वृद्धि। पेंशन के लिए 'पुरानी पेंशन योजना' (OPS) जैसा सुरक्षा जाल। समय पर भुगतान और एरियर में पारदर्शिता। आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी— वेतन विसंगतियों (Salary Anomalies) को दूर करना। अक्सर देखा गया है कि निचले स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन वृद्धि के अनुपात में अंतर होता है, जिसे इस बार संतुलित करने की मांग है। सब्र का फल होगा मीठा अंततः, 8वां वेतन आयोग केवल एक वित्तीय अपडेट नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों के जीवन स्तर को सुधारने का जरिया है जो देश की प्रशासनिक व्यवस्था को चलाते हैं। हालाँकि सरकार ने अभी '1 जनवरी 2026' की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' की मंजूरी इस बात का प्रमाण है कि प्रक्रिया सही दिशा में है। कर्मचारियों के लिए सलाह है कि वे अपनी वर्तमान वित्तीय योजना को 2026-27 के 'एरियर' को ध्यान में रखकर बना सकते हैं। यह एकमुश्त राशि भविष्य के लिए एक बेहतरीन फिक्स्ड डिपॉजिट या घर बनाने के सपने को पूरा करने में सहायक हो सकती है। संक्षिप्त डेटा टेबल: 8वें वेतन आयोग की एक झलक विवरण संभावित जानकारी प्रभावी तिथि 1 जनवरी 2026 अनुमानित फिटमेंट फैक्टर 2.86 से 3.68 के बीच न्यूनतम सैलरी (अनुमानित) ₹26,000 - ₹30,000 लाभार्थी 1.19 करोड़ (कर्मचारी + पेंशनर) संभावित एरियर राशि ₹1,50,000+ (पदों के अनुसार) घोषणा का समय साल 2026 के अंत तक अस्वीकरण: यह न्यूज़ रिपोर्ट वर्तमान रुझानों, ऐतिहासिक डेटा और आर्थिक विश्लेषण पर आधारित है। अंतिम निर्णय और आधिकारिक आंकड़े केंद्र सरकार द्वारा ही जारी किए जाएंगे।