उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र से एक बेहद मर्माहत करने वाली और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक मामूली सी बात पर, मां की डांट से नाराज होकर 20 साल के एक युवक ने मौत को गले लगा लिया। मृतक पेशे से एक डिलीवरी बॉय था और उसने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने से पहले सोशल मीडिया पर अपने दर्द का इजहार किया और एक लंबा सुसाइड नोट भी छोड़ा।READ ALSO:-बिजनौर में 'वर्चस्व' की जंग: बीच सड़क पर भिड़े किन्नरों के दो गुट, जमकर हुई मारपीट; गाड़ी के शीशे तोड़े यह घटना न केवल एक परिवार के उजड़ने की कहानी है, बल्कि आज के युवाओं में कम होती सहनशक्ति और सोशल मीडिया पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की प्रवृत्ति का भी एक दुखद उदाहरण है। 4 पेज के सुसाइड नोट और इंस्टाग्राम पर लगाई गई 5 स्टोरी ने इस घटना को और भी ज्यादा भावुक बना दिया है। शनिवार की वो काली रात: कैसे शुरू हुआ विवाद? घटना ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के रहमतगंज इलाके की है। मृतक की पहचान 20 वर्षीय हिमांशु शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस और परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना की शुरुआत शनिवार की रात को हुई। हिमांशु जब रात में अपने काम से घर लौटा, तो वह शराब के नशे में था। एक मां के लिए अपने बेटे को नशे की हालत में देखना तकलीफदेह था। हिमांशु की मां, रश्मि पाल ने उसे शराब पीकर घर आने पर डांट दिया। यह एक सामान्य पारिवारिक घटना हो सकती थी, जहां एक मां अपने बेटे की भलाई के लिए उसे समझा रही थी। लेकिन, शराब के नशे में धुत हिमांशु को मां की यह डांट बर्दाश्त नहीं हुई। वह गुस्से में आ गया और घर छोड़कर चले जाने की बात करने लगा। मां ने रोका रास्ता, तो छत से कूदकर भागा बेटा हिमांशु का गुस्सा देख मां घबरा गई। बेटे को घर से जाने से रोकने के लिए मां रश्मि पाल ने मुख्य दरवाजा बंद कर दिया। उन्हें लगा कि दरवाजा बंद होने पर बेटा शांत हो जाएगा और घर में ही रहेगा। लेकिन हिमांशु के सिर पर तो जैसे खून सवार था। दरवाजा बंद देख वह घर की छत पर चढ़ गया और वहां से कूदकर घर से बाहर निकल गया। उस वक्त किसी को अंदाजा भी नहीं था कि हिमांशु घर से नहीं, बल्कि हमेशा के लिए दुनिया से जाने की तैयारी कर रहा है। फैजुल्लागंज का वो सन्नाटा और दोस्तों को आखिरी कॉल घर से निकलने के बाद हिमांशु सीधे फैजुल्लागंज इलाके की तरफ गया। इस दौरान उसके दिमाग में क्या चल रहा था, यह शायद उसकी आखिरी इंस्टाग्राम स्टोरीज और सुसाइड नोट से समझा जा सकता है। घर से निकलने के कुछ ही समय बाद उसने अपने करीबी दोस्तों को फोन किया। फोन पर उसकी आवाज लड़खड़ा रही थी। उसने दोस्तों से कहा, "मैंने जहर खा लिया है।" यह सुनते ही दोस्तों के पैरों तले जमीन खिसक गई। अनहोनी की आशंका से घबराए दोस्त पागलों की तरह उसे ढूंढने निकले। लोकेशन ट्रेस करते हुए जब वे फैजुल्लागंज पहुंचे, तो वहां का नजारा देख उनकी रूह कांप गई। हिमांशु वहां बेहोशी की हालत में पड़ा था। जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष दोस्तों ने तुरंत इसकी सूचना परिजनों को दी। बदहवास परिजन और दोस्त उसे लेकर आनन-फानन में ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, इलाज शुरू किया गया, लेकिन जहर शरीर में पूरी तरह फैल चुका था। जिंदगी और मौत के बीच चले कुछ घंटों के संघर्ष के बाद हिमांशु ने दम तोड़ दिया। एक हंसता-खेलता युवक, जो दिन भर लोगों के घर खुशियां (पार्सल) डिलीवर करता था, वह अपने ही घर में मातम डिलीवर कर गया। 4 पेज का सुसाइड नोट: हर शब्द में छिपा दर्द और पश्चाताप पुलिस को जांच के दौरान हिमांशु के पास से 4 पेज का एक विस्तृत सुसाइड नोट मिला है। इस नोट का हर एक शब्द पढ़ने वाले की आंखों में आंसू ला दे रहा है। नोट में उसने अपने माता-पिता से माफी मांगी है और अपने दोस्तों को आखिरी संदेश दिया है। सुसाइड नोट के प्रमुख अंश: हिमांशु ने लिखा, "सॉरी मम्मी-पापा। अब मैं इस दुनिया में जीने के लायक नहीं हूं। मैं जानता हूं कि आप हमसे बहुत प्यार करते हैं। मैं अपने आप से आत्महत्या कर रहा हूं। इसमें मेरे किसी दोस्त का हाथ नहीं है। ना ही मेरे किसी परिवार वालों का हाथ है।" उसने आगे अपनी मां के प्रति प्रेम व्यक्त करते हुए लिखा, "मम्मी आई लव यू टू। अपना और तनु (छोटी बहन) का ख्याल रखना। पापा का भी ख्याल रखना।" दोस्तों के नाम आखिरी पैगाम: अपने जिगरी दोस्त विशाल के लिए उसने लिखा, "विशाल मेरी जान, मेरे मम्मी-पापा का ख्याल रखना। प्रियांशु तुमसे भी बोल रहे हैं। दोस्त मेरे परिवार का ध्यान रखना।" आर्थिक जिम्मेदारियों का जिक्र: हैरानी की बात यह है कि मौत के मुहाने पर खड़े होकर भी उसे अपनी कुछ जिम्मेदारियों का अहसास था। उसने अपनी मामी के बारे में लिखा, "मामी आपके खाते से एलआईसी (LIC) की किस्त कट रही है। उसके सारे पैसे मम्मी को दे दीजिएगा।" साथ ही उसने एक चांदी की चेन को लेकर पापा से बोले गए झूठ का भी जिक्र किया और स्पष्ट किया कि वह चेन उसके दोस्त विशाल के पास नहीं है। नोट के अंत में उसने अपने सभी दोस्तों को याद किया: "आई लव यू विशाल, आई लव यू प्रत्यूष, आई लव यू करण, आई लव यू पवन, आई लव यू, सौरभ भाई ठाकुरगंज।" इंस्टाग्राम पर 'हैप्पी एंडिंग' की दास्तां आजकल की युवा पीढ़ी अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेती है। हिमांशु ने भी यही किया। आत्महत्या जैसा कदम उठाने से ठीक पहले उसने इंस्टाग्राम पर एक के बाद एक 5 स्टोरी अपडेट कीं। ये स्टोरी अब उसके जाने के बाद उसके दर्द की गवाही दे रही हैं। पहली स्टोरी: बैकग्राउंड में एक बेहद दर्द भरा डॉयलाग चल रहा था- "पता नहीं किस कलम से किस्मत लिखी है मेरी, जब-जब खुश रहने की कोशिश करता हूं, तब-तब एक नया गम मिलता है।" यह लाइन बता रही थी कि वह मानसिक रूप से कितना परेशान था। दूसरी स्टोरी: यह स्टोरी सबसे ज्यादा विचलित करने वाली थी। इसमें डॉयलाग था- "जब हम दुनिया से जायेंगे तो लोग खुश होंगे, हैप्पी एंडिंग करके जाएंगे।" शायद हिमांशु को लगा कि उसके जाने से सब ठीक हो जाएगा, लेकिन वह यह नहीं समझ पाया कि उसकी यह 'हैप्पी एंडिंग' उसके परिवार के लिए कभी न खत्म होने वाला दुख बन जाएगी। 10 दिन बाद घर लौटे पिता, खुशियां मातम में बदलीं इस घटना का एक और दुखद पहलू यह है कि हिमांशु के पिता अजय पाल, जो प्राइवेट बस चलाते हैं, घटना के समय करीब 10 दिनों के बाद घर लौटे थे। परिवार सोच रहा था कि पिता के आने पर सब साथ मिलकर समय बिताएंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पिता के घर लौटने की खुशी बेटे की मौत के मातम में बदल गई। परिवार में अब मां रश्मि पाल और छोटी बहन तनु बची हैं। मां का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्हें बार-बार यही पछतावा हो रहा है कि काश उन्होंने उस रात उसे डांटा न होता, या काश दरवाजा बंद करने के बजाय उसे प्यार से समझा लिया होता। लेकिन समय अब वापस नहीं आ सकता। पुलिस की कार्रवाई और जांच घटना की सूचना मिलते ही ठाकुरगंज पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला है, जिसकी पुष्टि सुसाइड नोट और दोस्तों के बयानों से होती है। फिर भी पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या हिमांशु किसी और तनाव में भी था। एक चेतावनी और एक सबक हिमांशु की मौत सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है। क्षणिक आवेश और गुस्से में उठाया गया कदम कैसे पूरे परिवार को बर्बाद कर सकता है, यह घटना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि माता-पिता की डांट में उनका प्यार और चिंता छिपी होती है। वहीं, सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाने वाली उदास शायरी और स्टेटस को भी दोस्तों और परिजनों द्वारा गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है, ताकि समय रहते किसी की जान बचाई जा सके। फिलहाल, ठाकुरगंज के रहमतगंज इलाके में सन्नाटा पसरा है और हर आंख नम है। नोट: अगर आप या आपका कोई परिचित तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया अकेले न रहें। अपने दोस्तों या परिवार से बात करें। जीवन अनमोल है।
लखनऊ: प्यार, जुनून, धोखा और फिर एक खौफनाक मौत। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आलमनगर (Alamnagar) इलाके में शनिवार की दोपहर जो हुआ, उसने देखने वालों की रूह कंपा दी। एक 40 साल का शादीशुदा मर्द और उसकी 25 साल की कुंवारी प्रेमिका। दोनों ने जिंदगी की उलझनों को सुलझाने के बजाय मौत का रास्ता चुना।READ ALSO:-Meerut Kapsad Murder Case: रुड़की स्टेशन पर 'द एंड' हुआ पारस सोम का खेल, 3 दिन, 4 शहर और एक कॉल ने ऐसे पहुंचाया सलाखों के पीछे हाथों में हाथ डालकर नहीं, बल्कि ट्रेन की पटरी पर अपनी गर्दन रखकर दोनों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना जितनी दर्दनाक है, उससे कहीं ज्यादा पेचीदा है इसके पीछे की कहानी। घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट्स (Suicide Notes) ने इस मामले को और भी भावुक और रहस्यमयी बना दिया है। दीपाली ने अपने प्रेमी सूर्यकांत को अपना 'कान्हा' (भगवान कृष्ण) बताया, तो वहीं मरने से पहले सूर्यकांत ने अपनी पत्नी से माफी मांगते हुए उसे ही अपना 'पहला प्यार' बताया। 'खबरीलाल' आपके लिए लाया है इस घटना की 360-डिग्री विस्तृत रिपोर्ट, जिसमें हम आपको बताएंगे कि आखिर उस दोपहर क्या हुआ था और कैसे एक हंसता-खेलता परिवार इस त्रासदी का शिकार हो गया। शनिवार, दोपहर 1:45 बजे: मौत की वो 'वंदे भारत' एक्सप्रेस घटना आलमनगर रेलवे स्टेशन के पास जलालपुर फाटक (Jalalpur Crossing) की है। शनिवार का दिन था, स्टेशन पर रोज जैसी ही चहल-पहल थी। प्रत्यक्षदर्शी का आँखों देखा हाल: राजाजीपुरम डी-ब्लॉक के रहने वाले विकास कुमार, जो घटना के वक्त वहीं मौजूद थे, ने पुलिस को बताया कि यह जोड़ा अचानक वहां नहीं आया था। "वे दोनों करीब ढाई घंटे (2.5 Hours) से स्टेशन और ट्रैक के आसपास टहल रहे थे। उनके चेहरों पर एक अजीब सी बेचैनी थी। वे आपस में बातें करते, फिर चुप हो जाते। उनके पास बैग भी थे, जैसे वे कहीं जाने की तैयारी में हों।" दोपहर के करीब 1 बजकर 45 मिनट का वक्त था। पटरियों में कंपन शुरू हुआ और दूर से 'वंदे भारत एक्सप्रेस' (Vande Bharat Express) के आने का सिग्नल हुआ। ट्रेन अपनी पूरी रफ़्तार में स्टेशन की तरफ बढ़ रही थी। जैसे ही ट्रेन करीब आई, सूर्यकांत और दीपाली ने आव देखा न ताव, वे दौड़कर ट्रैक पर पहुंचे। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता या उन्हें रोक पाता, दोनों ने पटरी के ऊपर अपनी गर्दन रख दी। लोको पायलट ने हॉर्न बजाया, लोगों ने शोर मचाया, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। अगले ही पल, ट्रेन उनके ऊपर से गुजर गई। मंजर इतना वीभत्स था कि देखने वालों ने अपनी आंखें बंद कर लीं। दीपाली का सिर धड़ से कटकर दूर जा गिरा, वहीं सूर्यकांत का सिर और दोनों हाथ शरीर से अलग हो गए। मौके पर ही दोनों की दर्दनाक मौत हो गई। पहचान और 'सिंदूर' का राज: सुहागन बनकर मरी दीपाली जीआरपी (GRP) और तालकटोरा पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो शव क्षत-विक्षत हालत में थे। पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो कई चौंकाने वाली चीजें सामने आईं। पहचान: मृतक की पहचान सूर्यकांत (40) निवासी नीलमथा और युवती की पहचान दीपाली (25) निवासी शाहखेड़ा, अर्जुनगंज के रूप में हुई। दीपाली की मांग में सिंदूर: दीपाली कुंवारी थी, लेकिन मरने के वक्त उसकी मांग में गहरा सिंदूर भरा हुआ था। पुलिस का मानना है कि सुसाइड से ठीक पहले या भागने के दौरान दोनों ने मंदिर में या खुद से शादी कर ली थी। वह सुहागन बनकर दुनिया से जाना चाहती थी। सामान की बरामदगी: घटनास्थल से पुलिस को दो भारी बैग मिले, जिनमें कई जोड़ी कपड़े थे। इसके अलावा: दो मोबाइल फोन। आधार कार्ड (जिससे पहचान हुई)। कुछ दस्तावेज और नकद रुपये। दो अलग-अलग सुसाइड नोट। सुसाइड नोट: "मम्मी-पापा माफ करना, मुझे कान्हा मिल गया" इस पूरी घटना का सबसे भावुक पहलू वे दो चिट्ठियां हैं जो पुलिस को मिलीं। इन चिट्ठियों में दोनों ने अपने दिल का आखिरी हाल बयां किया। दीपाली का खत (Deepali's Note): दीपाली ने अपने माता-पिता के नाम लिखे भावुक पत्र में अपनी मजबूरी और अपने इश्क का इजहार किया। उसने लिखा: "मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना। मैं आप लोगों को हर्ट (दुखी) नहीं करना चाहती थी, लेकिन मैं मजबूर थी। मुझे मेरा 'कान्हा' (सूर्यकांत) मिल गया है। मैं उनके बिना नहीं जी सकती। मैं जा रही हूँ।" उसने सूर्यकांत को अपना भगवान, अपना सबकुछ मान लिया था। सूर्यकांत का खत (Suryakant's Note): वहीं, 40 वर्षीय सूर्यकांत, जो पहले से शादीशुदा था और एक बच्चे का पिता था, उसने अपनी पत्नी सविता के लिए एक अजीब कशमकश वाला संदेश छोड़ा। उसने लिखा: "सविता, मुझे माफ कर देना। मैंने तुम्हारे साथ गलत किया। लेकिन सच यही है कि मेरा पहला प्यार तुम ही हो और हमेशा रहोगी।" यह लाइन मनोवैज्ञानिकों के लिए भी एक पहेली है। एक तरफ वह अपनी प्रेमिका के साथ जान दे रहा था, और दूसरी तरफ अपनी पत्नी को अपना पहला प्यार बता रहा था। शायद यह अपराधबोध (Guilt) था जो उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा था। लव स्टोरी का फ्लैशबैक: ऑफिस, अफेयर और 15 साल का फासला पुलिस की शुरूआती जांच में पता चला है कि यह प्रेम कहानी सदर (Sadar) स्थित एक ऑफिस में शुरू हुई थी। दफ्तर का रोमांस: सूर्यकांत और दीपाली दोनों सदर के एक ही ऑफिस में काम करते थे। साथ काम करते-करते दोनों में नजदीकियां बढ़ीं। उम्र का अंतर: सूर्यकांत 40 साल का परिपक्व मर्द था, जबकि दीपाली 25 साल की युवा लड़की। 15 साल का यह फासला उनके प्यार के आड़े नहीं आया। सूर्यकांत का अतीत: सूर्यकांत की शादी 10 साल पहले सविता से हुई थी। यह भी एक लव मैरिज थी। दोनों का 3 साल तक अफेयर चला था, जिसके बाद परिवार की रजामंदी से शादी हुई थी। उनका 7 साल का एक बेटा कृष्णकांत (उर्फ अरमान) भी है। इसके बावजूद, सूर्यकांत दीपाली के प्यार में पड़ गया। शायद रोजमर्रा की जिंदगी की नीरसता या कुछ नया पाने की चाहत उसे इस मोड़ पर ले आई। आखिरी 3 दिन: 'अंसल सिटी' में साथ रहे, पत्नी को मायके भेजा आत्महत्या से पहले के 72 घंटे बेहद अहम थे। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि दोनों ने पूरी प्लानिंग के साथ यह कदम उठाया था। 8 जनवरी (साजिश की शुरुआत): सूर्यकांत ने सबसे पहले अपने रास्ते के 'कांटे' यानी अपनी पत्नी और बच्चे को हटाया। वह 8 जनवरी को अपनी पत्नी सविता और बेटे को निशातगंज स्थित उसकी ससुराल (मायके) छोड़ आया। उसने बहाना बनाया कि उसे ऑफिस के काम से बाहर जाना है। फरारी: इसके बाद सूर्यकांत और दीपाली 3 दिन पहले अपने-अपने घरों से गायब हो गए। लिव-इन (Live-in): दोनों ने लखनऊ के पॉश इलाके अंसल सिटी (Ansal City) में एक कमरा किराए पर लिया। जांच में पता चला कि सूर्यकांत ने कमरे का किराया एडवांस में दिया था। ये तीन दिन वे पति-पत्नी की तरह साथ रहे। शायद यही वह वक्त था जब दीपाली ने अपनी मांग में सिंदूर भरा और उन्होंने शादी की रस्में निभाईं। बैग में कपड़े: उनके बैग में मिले ढेर सारे कपड़े यह इशारा करते हैं कि उनका प्लान कहीं दूर भागकर नई जिंदगी शुरू करने का था। वे आलमनगर स्टेशन भी ट्रेन पकड़ने ही आए थे। लेकिन फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने ट्रेन पकड़ने के बजाय ट्रेन के नीचे आने का फैसला किया? यह अभी भी एक राज है। क्या उन्हें पकड़े जाने का डर था? या लोक-लाज का खौफ? पुलिस एक्शन और परिवार का हाल घटना के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। गुमशुदगी दर्ज थी: दीपाली के परिजनों ने गुरुवार को ही सुशांत गोल्फ सिटी थाने (Sushant Golf City Thana) में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इंस्पेक्टर राजीव रंजन उपाध्याय के मुताबिक, पुलिस की दो टीमें सर्विलांस के जरिए उनकी तलाश कर रही थीं। लोकेशन ट्रेस की जा रही थी, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही मौत उन तक पहुंच गई। पत्नी सविता का बुरा हाल: सूर्यकांत की पत्नी सविता, जो घर पर सिलाई का काम करके गृहस्थी में हाथ बंटाती थी, उसे जब इस खबर का पता चला तो वह बेसुध हो गई। उसे विश्वास ही नहीं हो रहा कि जिस पति ने 10 साल पहले उससे लव मैरिज की थी, वह किसी और के लिए उसे और उनके 7 साल के बेटे को अनाथ छोड़ गया। वह बार-बार सूर्यकांत के आखिरी खत की रट लगाए बैठी है—"अगर मैं पहला प्यार थी, तो मुझे क्यों छोड़ा?" अधिकारियों का बयान: एडीसीपी (ADCP) धनंजय कुशवाहा ने बताया: "युवक और युवती दोनों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रथम दृष्टया यह प्रेम प्रसंग में आत्महत्या का मामला है। दोनों के पास से सुसाइड नोट और मोबाइल मिले हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। कॉल डिटेल्स (CDR) से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मरने से ठीक पहले उन्होंने किससे बात की थी।" सामाजिक विश्लेषण: क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले? यह घटना समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करती है। एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर (Extramarital Affairs): ऑफिस कल्चर में बढ़ते तनाव और साथ बिताए जाने वाले समय के कारण ऐसे रिश्ते पनप रहे हैं। लेकिन इनका अंजाम अक्सर परिवारों की बर्बादी होता है। डिप्रेशन और पलायनवाद: समस्याओं का सामना करने के बजाय जीवन समाप्त कर लेना एक खतरनाक प्रवृत्ति बनती जा रही है। सूर्यकांत के पास एक बेटा था, एक पत्नी थी, लेकिन उसने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया। उम्र का फासला: 40 और 25 का यह रिश्ता भावनात्मक अपरिपक्वता का भी शिकार हो सकता है। पटरियों पर बिखरे सपने आलमनगर रेलवे ट्रैक पर अब खून के धब्बे सूख चुके हैं, ट्रेनें फिर से अपनी रफ़्तार से दौड़ रही हैं। लेकिन सविता की जिंदगी और दीपाली के माता-पिता का बुढ़ापा हमेशा के लिए थम गया है। सूर्यकांत और दीपाली को शायद लगा होगा कि मौत उन्हें मिला देगी, लेकिन वे पीछे छोड़ गए हैं कभी न खत्म होने वाले आंसू और सवाल। दीपाली को उसका 'कान्हा' मिला या नहीं, यह तो कोई नहीं जानता, लेकिन इस 'कान्हा' के चक्कर में कई जिंदगियां 'महाभारत' बनकर रह गईं। Khabreelal की अपील: जिंदगी अनमोल है। कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं होती कि उसके लिए जान दे दी जाए। अगर आप किसी मानसिक तनाव या रिश्ते की उलझन से गुजर रहे हैं, तो कृपया बात करें, काउंसलिंग लें। आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं है।
लखनऊ: अपराध की दुनिया अब बदल चुकी है। अब डकैत घोड़ों पर सवार होकर या बंदूक लेकर बैंक नहीं लूटते; वे हजारों किलोमीटर दूर किसी एसी कमरे में बैठकर, आपके मोबाइल स्क्रीन के जरिए आपके दिमाग को बंधक बनाते हैं और आपकी जिंदगी भर की कमाई लूट ले जाते हैं। इसे तकनीकी भाषा में 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) कहा जाता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मामा चौराहे स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा में पिछले दिनों जो हुआ, वह किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की कहानी जैसा लगता है। लेकिन यह हकीकत है। एक बुजुर्ग महिला, डरी-सहमी, अपनी 1.13 करोड़ रुपये की जीवन भर की जमा पूंजी ठगों के हवाले करने ही वाली थीं। ठगों ने उन्हें यकीन दिला दिया था कि उनका परिवार आतंकवादियों से जुड़ा है। लेकिन बैंक के एक सतर्क मैनेजर और उनकी टीम ने 3 घंटे की जद्दोजहद के बाद न सिर्फ पैसा बचाया, बल्कि एक बड़े गिरोह के मंसूबों पर पानी फेर दिया। आज 'खबरीलाल' आपको इस घटना की एक-एक परत खोलकर बताएगा कि कैसे शिकार को फंसाया गया और कैसे आखिरी मौके पर बाजी पलटी। सीन 1: बैंक में बुजुर्ग महिला की एंट्री और 12 एफडी दोपहर का वक्त था। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा में कामकाज सामान्य रूप से चल रहा था। तभी एक बुजुर्ग महिला (Senior Citizen) बैंक में दाखिल होती हैं। उनके हाथ में फाइलों का एक पुलिंदा था और चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं। वह सीधे काउंटर पर पहुंचीं और एक ऐसा अनुरोध किया जिससे क्लर्क भी चौंक गया। महिला ने कंपकंपाती आवाज में कहा, "बेटा, मेरी ये सारी 12 फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) अभी के अभी तोड़ दो। मुझे पेनल्टी से कोई मतलब नहीं, बस मेरा सारा पैसा इस अकाउंट नंबर पर आरटीजीएस (RTGS) कर दो।" क्लर्क ने जब सिस्टम में एफडी की वैल्यू चेक की, तो उसकी आंखें फटी रह गईं। मूलधन और ब्याज मिलाकर कुल रकम करीब 1.13 करोड़ रुपये बन रही थी। एक सीनियर सिटीजन द्वारा मेच्योरिटी से पहले अपनी सारी एफडी तुड़वाना और वह भी इतनी बड़ी रकम—यह बैंकिंग नियमों के हिसाब से 'रेड फ्लैग' (Red Flag) था। सीन 2: मैनेजर का केबिन और 3 घंटे का 'सस्पेंस' क्लर्क ने तुरंत मामला ब्रांच मैनेजर के पास भेजा। मैनेजर ने महिला की घबराहट को भांप लिया था। उन्हें एहसास हो गया था कि यह सामान्य ट्रांजैक्शन नहीं है। मैनेजर का पहला सवाल: "माताजी, इतनी बड़ी रकम आप एफडी तोड़कर क्यों निकाल रही हैं? आपको भारी नुकसान होगा।" महिला का जवाब: "मुझे पैसों की सख्त जरूरत है, मेरे बच्चों को काम है।" मैनेजर ने उन्हें पानी पिलाया और बातचीत में उलझाना शुरू किया। उनका मकसद महिला को रोकना था। मैनेजर ने सुझाव दिया, "अगर पैसों की जरूरत है, तो आप एफडी मत तोड़िए, हम आपको इस पर ओवरड्राफ्ट (OD) दे देते हैं। इससे आपका ब्याज नहीं मरेगा।" लेकिन महिला कुछ सुनने को तैयार नहीं थीं। वह बार-बार घड़ी देख रही थीं और कह रही थीं, "नहीं, मुझे अभी ट्रांसफर करना है, वरना बहुत देर हो जाएगी।" यह 'देर हो जाएगी' वाला वाक्य बैंक मैनेजर के कान में खटक गया। साइबर फ्रॉड में अक्सर 'Urgency' (जल्दबाजी) ही सबसे बड़ा हथियार होता है। सीन 3: वो फोन कॉल जिसने खोली पोल जब महिला किसी भी तर्क को मानने को तैयार नहीं हुईं, तो बैंक स्टाफ ने प्रोटोकॉल के तहत उनके नॉमिनी (Nominee) से बात करने का फैसला किया। महिला ने अपने बेटे का नंबर देने से साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा, "बेटे को डिस्टर्ब मत करो।" लेकिन बैंक के सिस्टम में बेटे का नंबर दर्ज था। मैनेजर ने चुपके से स्टाफ को इशारा किया और नंबर डायल करवाया। बेटे से बातचीत: बैंक अधिकारी ने बेटे से पूछा, "सर, आपकी माताजी 1.13 करोड़ की एफडी तोड़कर किसी फर्म में पैसा भेज रही हैं, क्या आपको जानकारी है?" बेटे का जवाब: बेटा हैरान रह गया। उसने कहा, "हां, हम एक कार लेने की सोच रहे थे, लेकिन उसके लिए इतने करोड़ रुपयों की क्या जरूरत? और मां तो कह रही थीं कि किसी फर्म में डालना है। मुझे इतनी रकम नहीं चाहिए।" यहीं पर झूठ पकड़ा गया। मां कह रही थी 'बेटे को चाहिए' और बेटा कह रहा था 'मुझे नहीं चाहिए'। सीन 4: 'बेटे की फर्म' का झूठ और मोबाइल की जांच बैंक स्टाफ ने उस अकाउंट नंबर की जांच (Due Diligence) की जिसमें महिला पैसा भेजना चाहती थीं। महिला ने दावा किया था कि वह उनके बेटे की फर्म का खाता है। लेकिन सिस्टम में चेक करने पर वह खाता किसी अनजान कंपनी का निकला, जिसका उनके परिवार से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था। बैंक मैनेजर समझ चुके थे कि महिला किसी के दबाव में हैं। उन्होंने एक चाल चली। उन्होंने महिला से कहा, "मैम, जिस खाते में आप पैसा भेज रही हैं, उसका IFSC कोड गलत लग रहा है। हमें वेरीफाई करना होगा। क्या आप अपना फोन दिखाएंगी, शायद उसमें सही डिटेल हो?" जैसे ही महिला ने अपना फोन बैंककर्मी के हाथ में दिया, स्क्रीन पर जो दिखा, उसने पूरे बैंक स्टाफ के रोंगटे खड़े कर दिए। व्हाट्सएप पर धमकियां: एक अनजान नंबर से लगातार मैसेज आ रहे थे—"पैसा ट्रांसफर हुआ या नहीं?", "जल्दी करो, अधिकारी इंतजार कर रहे हैं।" फर्जी दस्तावेज: चैट में सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट के फर्जी नोटिस पड़े थे। वॉयस नोट्स: एक वॉयस नोट में डरावनी आवाज थी, "अगर चालाकी की तो पुलिस की टीम घर पहुंच जाएगी।" बैंक मैनेजर ने तुरंत महिला को सुरक्षित घेरे में लिया और स्थानीय पुलिस को सूचना दी। फ्लैशबैक: 11 दिसंबर की वो मनहूस शाम पुलिस के आने के बाद महिला थोड़ी सामान्य हुईं और उन्होंने रोते हुए पिछले 4 दिनों की जो दास्तां सुनाई, वह किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी थी। यह कहानी 11 दिसंबर को शुरू हुई थी। स्टेप 1: जाल बिछाना (The Trap) महिला को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने कहा, "हम टेलीकॉम डिपार्टमेंट से बोल रहे हैं। आपके नाम पर जारी एक सिम कार्ड से गैरकानूनी गतिविधियां हो रही हैं। यह नंबर आपके दिवंगत पति के नाम पर भी लिंक है।" पति का नाम सुनते ही महिला भावुक हो गईं और जाल में फंस गईं। स्टेप 2: पुलिस और टेरर फंडिंग का डर अगली कॉल कथित 'मुंबई पुलिस' से आई। उन्होंने कहा, "आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल करके 300 बैंक खाते खोले गए हैं। इन खातों से 50 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। यह पैसा आतंकवादी संगठन (Terrorist Organization) को भेजा गया है, जिसका इस्तेमाल कश्मीर और दिल्ली में धमाकों के लिए हुआ है।" एक बुजुर्ग महिला के लिए 'आतंकवादी' शब्द सुनना ही दिल का दौरा पड़ने जैसा था। स्टेप 3: डिजिटल अरेस्ट (The Digital Arrest) ठगों ने कहा कि मामला देश की सुरक्षा का है, इसलिए इसे सीबीआई (CBI) को सौंपा जा रहा है। उन्होंने महिला को स्काइप (Skype) या व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर कनेक्ट किया। दृश्य: वीडियो में सामने वर्दी पहने 'अफसर' बैठे थे। पीछे पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप था, वॉकी-टॉकी की आवाजें आ रही थीं। आदेश: महिला को कहा गया, "आप 'डिजिटल कस्टडी' में हैं। आप न तो फोन काट सकती हैं, न घर से बाहर जा सकती हैं और न ही किसी परिवार वाले को बता सकती हैं। अगर बताया, तो आपके बेटे को भी उठा लिया जाएगा।" स्टेप 4: पैसे की मांग (The Extraction) चार दिन तक महिला को इसी तरह मानसिक रूप से प्रताड़ित (Brainwash) किया गया। अंत में एक 'समाधान' दिया गया। कहा गया, "आपकी संपत्ति की जांच होनी है। अपनी सारी एफडी तुड़वाकर हमारे 'सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट' (Secret Supervision Account) में जमा कर दें। अगर पैसा सही पाया गया, तो 24 घंटे में वापस कर दिया जाएगा।" यही वह पैसा था जिसे ट्रांसफर करने के लिए महिला बैंक पहुंची थीं। क्या है 'डिजिटल अरेस्ट' और यह इतना खतरनाक क्यों है? इस घटना ने एक बार फिर 'डिजिटल अरेस्ट' के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। यह साइबर अपराध का एक नया और बेहद खतरनाक ट्रेंड है। मनोवैज्ञानिक खेल: इसमें अपराधी पीड़ित को शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से कैद करते हैं। वे वीडियो कॉल के जरिए 24x7 निगरानी का नाटक करते हैं, जिससे पीड़ित को लगता है कि वह सचमुच पुलिस की गिरफ्त में है। सरकारी तंत्र की नकल: अपराधी असली पुलिस स्टेशन जैसा सेट, वर्दी, और यहां तक कि फर्जी आईडी कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। वे सुप्रीम कोर्ट के फर्जी वारंट भेजते हैं, जिससे पढ़े-लिखे लोग भी धोखा खा जाते हैं। आइसोलेशन (Isolation): वे सबसे पहले पीड़ित को उसके परिवार से काट देते हैं। 'गोपनीयता' और 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का हवाला देकर उन्हें किसी से बात नहीं करने दिया जाता। बैंक की भूमिका: एक मिसाल इस मामले में पीएनबी (PNB) लखनऊ की टीम ने जो किया, वह हर बैंकर के लिए एक मिसाल है। अगर बैंककर्मी सिर्फ अपना 'टार्गेट' और 'काम' देखते, तो वे चुपचाप एफडी तोड़ देते। लेकिन उन्होंने 'Know Your Customer' (KYC) के असली मतलब को समझा—अपने ग्राहक की सुरक्षा। तीन घंटे तक महिला को उलझाए रखना और उनके गुस्से को झेलना आसान नहीं था, लेकिन यही धैर्य 1.13 करोड़ रुपये बचाने में काम आया। खबरीलाल की विशेष एडवाइजरी: नकली 'खाकी' से कैसे बचें? साइबर अपराधी कितने भी स्मार्ट क्यों न हों, वे एक ही स्क्रिप्ट का इस्तेमाल करते हैं। अगर आप इन बातों का ध्यान रखें, तो आप और आपका परिवार सुरक्षित रह सकता है। 1. वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं होती: भारत का कानून स्पष्ट है—कोई भी जांच एजेंसी (पुलिस, सीबीआई, ईडी, कस्टम) व्हाट्सएप, स्काइप या वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ नहीं करती और न ही 'अरेस्ट' करती है। अगर कोई वीडियो कॉल पर वर्दी में दिखे, तो समझ जाएं वह ठग है। 2. पैसे की मांग = 100% फ्रॉड: जांच एजेंसियां कभी भी आपके पैसे की 'जांच' करने के लिए उसे किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर करने को नहीं कहतीं। सरकारी काम में पैसे का लेन-देन इस तरह नहीं होता। 3. गोपनीयता का झांसा: अगर कोई कहे कि "परिवार को मत बताना वरना जेल हो जाएगी", तो यह सबसे बड़ा रेड फ्लैग है। असली पुलिस हमेशा परिवार को सूचित करने का अधिकार देती है। 4. 1930 डायल करें: अगर आपको ऐसा कोई कॉल आए, तो घबराएं नहीं। फोन काटें और तुरंत 1930 (नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें। साथ ही www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। लखनऊ की यह बुजुर्ग महिला किस्मत वाली थीं कि उन्हें बैंक में ईमानदार और सतर्क कर्मचारी मिल गए। लेकिन हर बार किस्मत साथ नहीं देती। यह खबर अपने घर के बड़े-बुजुर्गों को जरूर बताएं, क्योंकि 'डिजिटल डकैत' सबसे ज्यादा उन्हीं को निशाना बना रहे हैं। जागरूकता ही इस डिजिटल युग में आपकी सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है।
लखनऊ (Lucknow News): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के जानकीपुरम इलाके में हुए इंजीनियर सूर्य प्रताप सिंह हत्याकांड (Lucknow Engineer Murder) में पुलिस ने रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा किया है। लिव-इन में रह रही गर्लफ्रेंड रत्ना और उसकी दो नाबालिग बेटियों ने मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस की 20 घंटे की कड़ी पूछताछ में तीनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।READ ALSO:-बिजनौर: गले में ढोलक टांग खेल रहे मासूम पर कुत्ते का 'जानलेवा' हमला, जबड़ा फाड़ा; 50 टांके देख कांप उठी रूह हत्या की वजह इंजीनियर द्वारा बड़ी बेटी के साथ 'बैड टच' (Bad Touch) करना और मारपीट बताई गई है। पुलिस ने आरोपी महिला रत्ना को जेल और दोनों नाबालिग बेटियों को बाल सुधार गृह भेज दिया है। 'बैड टच' और मारपीट बनी कत्ल की वजह पुलिस पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह हैरान करने वाली है। आरोपियों ने बताया कि इंजीनियर सूर्य प्रताप सिंह दोनों बेटियों को घर में कैद रखता था और अक्सर मारपीट करता था। हद तब हो गई जब उसने बड़ी बेटी पर बुरी नजर रखनी शुरू कर दी। 7 दिसंबर की काली रात: शाम को घर लौटने पर सूर्य प्रताप ने बड़ी बेटी का फोन चेक किया। मोबाइल में किसी लड़के का फोटो देख वह आगबबूला हो गया। उसने बड़ी बेटी को बेरहमी से पीटा और घसीटते हुए कमरे में ले गया। आरोप है कि वहां उसने बेटी के साथ 'बैड टच' (यौन शोषण का प्रयास) किया। किसी तरह मां और छोटी बहन ने उसे बचाया। रात भर बनी प्लानिंग, सुबह 5 बजे खूनी खेल उस रात बड़ी बेटी के रोने और इंजीनियर की हरकतों से तंग आकर मां रत्ना ने खौफनाक फैसला लिया। उसने अपनी बेटियों से कहा कि रोज-रोज के इस नर्क से अच्छा है कि कहानी ही खत्म कर दी जाए। बेटियां भी मां का साथ देने को तैयार हो गईं। पूरी रात तीनों ने जागकर हत्या का प्लान बनाया। 8 दिसंबर की सुबह करीब 5 बजे, जब सूर्य गहरी नींद में था, रत्ना किचन से चाकू ले आई। बेटियों ने पकड़े हाथ-पैर: प्लान के मुताबिक, एक बेटी ने इंजीनियर के पैर पकड़े और दूसरी ने हाथ। मां ने रेता गला: रत्ना ने चाकू से सोते हुए सूर्य के गले पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। वह छटपटाता रहा, लेकिन तीनों ने उसे नहीं छोड़ा। हत्या के बाद 4 घंटे लाश के पास बैठी रहीं इंजीनियर की सांसें थमने के बाद तीनों बाथरूम गईं, हाथ-मुंह धोया और खून के धब्बे साफ किए। इसके बाद तीनों करीब 4 घंटे तक घर के दरवाजे पर लाश के पास ही बैठी रहीं। सुबह 9 बजे रत्ना ने खुद पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर हत्या की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के वक्त और जेल जाते समय रत्ना के चेहरे पर रत्ती भर भी पछतावा नहीं था। पिता का आरोप- जायदाद के लिए मारा इंजीनियर सूर्य प्रताप के पिता नरेंद्र सिंह का कहना है कि उनका बेटा निर्दोष था। उन्होंने आरोप लगाया कि रत्ना और उसकी बेटियों ने मकान हड़पने के लिए उनके बेटे को मारा है। पिता ने रोते हुए बताया, "मेरे बेटे की शादी की बात चल रही थी, वह हट्टा-कट्टा था। मैं उसकी शादी की तैयारी कर रहा था और आज उसकी चिता जला रहा हूं।" पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सूर्य के गले पर चाकू के तीन गहरे घाव और सीने-हाथ पर चोट के निशान मिले हैं। ट्यूशन पढ़ाते-पढ़ाते शुरू हुआ था रिश्ता सूर्य प्रताप और रत्ना की कहानी 2012 में शुरू हुई थी। तब सूर्य पॉलिटेक्निक का छात्र था और रत्ना की बेटियों को ट्यूशन पढ़ाता था। रत्ना का पति शराबी था और 2014 में उसकी मौत हो गई। इसके बाद सूर्य ने रत्ना का सहारा दिया और दोनों लिव-इन में रहने लगे। करीब 2 साल पहले ही सूर्य ने ग्रीन सिटी, सालारगंज में मकान बनवाया था, जहां यह खूनी वारदात हुई। लखनऊ इंजीनियर हत्याकांड (Lucknow Engineer Murder) ने लिव-इन रिलेशनशिप के एक भयानक पहलू को उजागर किया है। एक तरफ 'बैड टच' और शोषण के गंभीर आरोप हैं, तो दूसरी तरफ एक पिता का दावा है कि यह संपत्ति का लालच था। फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई पूरी कर ली है। लखनऊ में इंजीनियर सूर्य प्रताप सिंह की हत्या उसकी लिव-इन पार्टनर रत्ना और दो नाबालिग बेटियों ने मिलकर की। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि इंजीनियर बड़ी बेटी के साथ 'बैड टच' और मारपीट करता था। 8 दिसंबर की सुबह 5 बजे गला रेतकर हत्या की गई। पुलिस ने मां को जेल और बेटियों को बाल सुधार गृह भेजा है।
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक दिल दहला देने वाली और बेहद दुखद घटना सामने आई है। शहर के प्रतिष्ठित मोंटफोर्ट इंटर कॉलेज (Montfort Inter College) में परीक्षा दे रहे कक्षा 6 के एक छात्र की हार्ट अटैक (Heart Attack) से मौत हो गई। महज 11 साल की उम्र में छात्र की मौत ने न केवल उसके परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि स्कूल के अन्य बच्चों और अभिभावकों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है।READ ALSO:-यूपी में बनेंगे 'हाईटेक' डिटेंशन सेंटर: 15 हजार की क्षमता, बायोमेट्रिक एंट्री और ट्रिपल लेयर सिक्योरिटी; सीएम योगी का बड़ा एक्शन प्लान मृतक छात्र की पहचान अमेय सिंह उर्फ आरव के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में डॉक्टरों ने इसे 'कार्डियक अरेस्ट' (Cardiac Arrest) बताया है। यह घटना एक बार फिर बच्चों में बढ़ते तनाव और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की ओर इशारा कर रही है। एग्जाम हॉल में क्या हुआ था? घटना सुबह करीब 10:45 बजे की है। स्कूल में परीक्षाएं चल रही थीं और आरव अपनी सीट पर बैठकर पेपर लिख रहा था। क्लास में सब कुछ सामान्य था, तभी अचानक आरव को झटका लगा और वह अपनी सीट से फर्श पर औंधे मुंह गिर पड़ा। उसके गिरते ही क्लास टीचर और अन्य छात्र उसकी तरफ दौड़े। टीचर ने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन उसके शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी। आरव अचेत हो चुका था। स्कूल प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एंबुलेंस बुलाई और उसे नजदीकी भाऊराव देवरस अस्पताल (Bhaurao Deoras Hospital) ले जाया गया। 30 मिनट तक चली बचाने की जंग अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे को सुबह 11:05 बजे बेहोशी की हालत में लाया गया था। इमरजेंसी टीम ने बिना समय गंवाए उसका इलाज शुरू किया। डॉक्टरों ने उसे सीपीआर (CPR) दिया और तमाम लाइफ-सेविंग तकनीकों का इस्तेमाल किया। करीब 30 मिनट तक मेडिकल टीम उसकी सांसें वापस लाने की कोशिश करती रही, लेकिन अफसोस कि आरव को बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह कार्डियक अरेस्ट का मामला लग रहा है, लेकिन मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल आरव का परिवार लखनऊ के जानकीपुरम इलाके में रहता है। जैसे ही बेटे की तबीयत बिगड़ने की खबर मिली, परिवार बदहवास हालत में अस्पताल पहुंचा। वहां बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां-बाप पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां का रो-रोकर बुरा हाल है, उनकी हालत देख अस्पताल का स्टाफ भी भावुक हो गया। स्कूल में परीक्षाएं रोकी गईं इस दुखद घटना के बाद मोंटफोर्ट कॉलेज प्रशासन ने दिनभर की बाकी परीक्षाएं स्थगित कर दीं। आरव के क्लासमेट्स और स्कूल के अन्य बच्चे इस घटना से गहरे सदमे में हैं। स्कूल प्रशासन ने बच्चों को इस मानसिक आघात से उबारने के लिए उनकी काउंसलिंग (Counseling) शुरू करवाई है, ताकि वे इस डर से बाहर निकल सकें। क्यों थम रही हैं बच्चों की सांसें? बीते कुछ महीनों में भारत में कम उम्र के बच्चों और युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं: बढ़ता तनाव (Stress): पढ़ाई और एग्जाम का प्रेशर बच्चों के दिल पर असर डाल रहा है। लाइफस्टाइल: जंक फूड और फिजिकल एक्टिविटी की कमी। स्क्रीन टाइम: मोबाइल और टीवी पर ज्यादा समय बिताना। जेनेटिक फैक्टर: परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास होना। पोस्ट-कोविड असर: कई शोधों में कोविड के बाद हार्ट संबंधी समस्याओं में बढ़ोतरी की बात कही गई है। लखनऊ की यह घटना हर माता-पिता के लिए एक चेतावनी है। 11 साल के आरव की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जरूरी है कि हम बच्चों के मानसिक तनाव और स्वास्थ्य पर बारीकी से नजर रखें। इस मुश्किल घड़ी में हमारी संवेदनाएं आरव के परिवार के साथ हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) के पॉश इलाके गोमती नगर में सोमवार को एक सनसनीखेज वारदात सामने आई थी। यहां एक रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारी के घर के बाहर संदिग्ध परिस्थितियों में एक महिला का शव मिला था। पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझा लिया है।READ ALSO:-मेरठ: 'अफसरों का कोई दबाव नहीं था, नींद न आने से था तनाव'; जहर खाने वाले BLO मोहित चौधरी ने दी सफाई, साथियों से की भावुक अपील बुधवार को पुलिस ने हत्या के आरोप में दो युवकों को विनीत खंड इलाके से गिरफ्तार किया। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासा किया है, वह बेहद चौंकाने वाला है। आरोपियों ने कबूला है कि उन्होंने पहले महिला को शराब पिलाई, फिर उसके साथ शारीरिक संबंध (Sex) बनाए और बाद में पैसों के लेनदेन को लेकर हुए विवाद में उसकी हत्या कर दी। शराब, सेक्स और फिर खौफनाक मौत गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवेंद्र सिंह (कानपुर निवासी) और सूरज पाल (गोमती नगर, विशाल खंड-2 निवासी) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, यह मामला Lucknow Murder Case की फाइलों में एक ब्लाइंड केस की तरह दर्ज हुआ था, लेकिन सीसीटीवी फुटेज ने सारे राज खोल दिए। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि घटना वाली रात करीब 8 बजे देवेंद्र अपने ई-रिक्शा से नवाब पुरवा ठेके पर शराब लेने गया था। गोमती नगर रेलवे स्टेशन के पास उसे 45 वर्षीय पीड़िता मिली। महिला ने ई-रिक्शा को हाथ देकर रोका और उसमें बैठ गई। देवेंद्र ने कबूल किया, "रास्ते में महिला ने शारीरिक संबंध बनाने की बात कही और शर्त रखी कि अगर हम उसे शराब पिलाएंगे, तो वह साथ चलेगी। मैंने तुरंत अपने दोस्त सूरज को फोन किया और उसे अपनी झोपड़ी (विशाल खंड-2) पर ले गया।" 200 रुपए के लिए ले ली जान? झोपड़ी में तीनों ने साथ बैठकर शराब पी। इसके बाद दोनों आरोपियों ने महिला के साथ संबंध बनाए। विवाद तब शुरू हुआ जब महिला ने सेक्स के बदले पैसों की मांग कर दी। आरोपियों का कहना है कि पैसों के लेनदेन की पहले कोई बात नहीं हुई थी। आरोपी सूरज ने पुलिस को बताया, "जब हमने पैसे देने से मना किया, तो वह हंगामा करने लगी। पास में ही पॉश रिहायशी इलाका था, हमें डर लगा कि कोई सुन लेगा। हमने उसे चुप कराने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी। गुस्से में हमने उसे जोर से धक्का दिया। उसका सिर पीछे रखे लकड़ी के तखत से टकरा गया और वह बेहोश होकर गिर पड़ी।" लाश को जिंदा समझकर दीवार के सहारे बैठाया सिर पर गहरी चोट लगने के बाद महिला काफी देर तक नहीं उठी। आरोपी डर गए और रात के अंधेरे का इंतजार करने लगे। रात करीब 3 बजे जब उन्होंने महिला को हिलाकर देखा तो शरीर में कोई हरकत नहीं थी। डर के मारे दोनों ने महिला के शव को ई-रिक्शा में डाला और वहां से करीब 200 मीटर दूर रिटायर्ड आईएएस के घर के पास ले गए। उन्होंने शव को नाली के पास दीवार के सहारे ऐसे बैठा दिया जैसे कोई जिंदा इंसान बैठा हो। देवेंद्र ने पुलिस को बताया, "हम दोनों बहुत नशे में थे। हमें लगा कि वह सिर्फ बेहोश है और सुबह होश आने पर खुद घर चली जाएगी। लेकिन अगले दिन जब उसकी मौत की खबर टीवी और अखबारों में देखी, तो हम घबराकर फरार हो गए।" CCTV ने पहुंचाया सलाखों के पीछे सोमवार को जब दोपहर तक महिला अपनी जगह से नहीं हिली, तो राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव की शिनाख्त अलीगंज सेक्टर-बी निवासी एक 45 वर्षीय महिला के रूप में की। शरीर पर घसीटने और चोट के निशान थे। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में ई-रिक्शा और दोनों संदिग्ध कैद हो गए थे, जिसके आधार पर पुलिस ने बुधवार को विनीत खंड से उन्हें दबोच लिया। फिलहाल पुलिस ने दोनों के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया है। लखनऊ के गोमती नगर में हुई इस वारदात ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और अनैतिक गतिविधियों के अंजाम को उजागर किया है। शराब के नशे और पैसों के विवाद ने एक महिला की जान ले ली। पुलिस की तत्परता और तकनीकी जांच (CCTV) की बदौलत आरोपी अब सलाखों के पीछे हैं।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के मुख्यालय शक्ति भवन के बाहर आज (बुधवार, 26 नवंबर 2025) सुबह से ही सैकड़ों निविदा/संविदा कर्मचारी विशाल प्रदर्शन के लिए जमा हो गए। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए इन कर्मचारियों ने अपनी ज्वलंत मांगों को लेकर सड़क पर कारपेट बिछाकर पूरा मार्ग जाम कर दिया, जिससे शक्ति भवन से जीएसटी ऑफिस की ओर जाने वाला यातायात पूरी तरह से ठप हो गया।READ ALSO:-दिल्ली BREAKING: कमला पसंद और राजश्री पान मसाला ग्रुप के मालिक की बहू ने की खुदकुशी, सुसाइड नोट में किया रिश्ते में भरोसे की कमी का ज़िक्र प्रदर्शनकारियों ने सरकार और विभाग के खिलाफ 'इंकलाब जिंदाबाद' और 'तानाशाही नहीं चलेगी' जैसे जोरदार नारे लगाए। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रही है। कम वेतन और छंटनी का खतरा: 'व्यवस्था हम संभालते हैं...' प्रदर्शन कर रहे लखनऊ बिजली कर्मचारी प्रदर्शन (Lucknow Bijli Karmchari Pradarshan) का मुख्य कारण वेतन विसंगतियां और नौकरी से हटाए जाने का बढ़ता खतरा है। कर्मचारियों का कहना है कि आउटसोर्सिंग और निविदा आधार पर काम करने वाले कर्मचारी बेहद कम, यानी मात्र ₹10,000 से ₹11,000 की मासिक तनख्वाह पर कठिन ड्यूटी करते हैं, लेकिन अब विभाग उन्हें हटाने की तैयारी कर रहा है। निविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद खालिद ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "पावर कॉरपोरेशन में कमीशनखोरी की वजह से निविदा कर्मचारियों को हटाने की कवायद चल रही है।" उन्होंने आगे कहा, "प्रदेश में बिजली व्यवस्था सुधारने में सबसे ज्यादा मेहनत आउटसोर्सिंग और निविदा कर्मचारी करते हैं। सिस्टम हम संभालते हैं और सजा हमें मिल रही है। ₹11,000 की तनख्वाह पर काम करने वालों को हटाना सरासर गलत है।" ₹18,000 न्यूनतम वेतन का आदेश, पर लागू नहीं कर्मचारियों की एक प्रमुख मांग यह है कि उनके लिए ₹18,000 का न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जाए, जैसा कि पहले किए गए प्रदर्शनों के बाद आश्वासन दिया गया था। प्रदेश महामंत्री देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने बताया कि पूर्व में हुए प्रदर्शन के बाद ₹18,000 न्यूनतम वेतन तय करने का आदेश तो जारी हुआ, लेकिन आज तक इसे लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा, कर्मचारी वर्टिकल व्यवस्था को लागू करने के विरोध में भी हैं, जिसका मानना है कि इससे बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी होगी, खासकर स्मार्ट मीटर लगने की स्थिति में मीटर रीडरों का समायोजन ठीक से नहीं हो पाएगा। मार्ग बाधित और भारी पुलिस बल तैनात जमकर हंगामे और मार्ग जाम की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। शक्ति भवन के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। प्रदर्शन के कारण शक्ति भवन से जीएसटी ऑफिस की ओर जाने वाला रास्ता पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। अधिकारियों की टीमें लगातार मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों को समझाने और वार्ता के माध्यम से गतिरोध खत्म करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर डटे हुए हैं और मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। लखनऊ बिजली कर्मचारी प्रदर्शन न केवल वेतन बल्कि नौकरी की सुरक्षा के गंभीर मुद्दे को भी उठाता है, जो उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में एक लंबे समय से चला आ रहा विवाद है। लखनऊ के शक्ति भवन के बाहर निविदा बिजली कर्मचारियों का यह विशाल प्रदर्शन उनकी कम तनख्वाह, वेतन विसंगतियों और जॉब सिक्योरिटी के गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। सड़क पर कारपेट बिछाकर किए गए इस प्रदर्शन से शहर के एक महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है। ₹18,000 न्यूनतम वेतन और छंटनी रोकने की मांग को लेकर लखनऊ बिजली कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं, और पुलिस बल की मौजूदगी में अधिकारियों की कर्मचारियों से बातचीत जारी है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र में रविवार को एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। शादी से इनकार करने पर एक युवक ने घर में घुसकर बीएससी की छात्रा प्रियांशी रावत (19) की गला रेतकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी युवक बाइक से फरार हो गया। गंभीर रूप से घायल प्रियांशी करीब 10 मिनट तक जमीन पर पड़ी तड़पती रही और फिर घर के दरवाजे पर ही उसने दम तोड़ दिया।READ ALSO:-यूपी में नहीं लगेगा 'महंगाई का करंट': सीएम योगी का बड़ा तोहफा, लगातार छठे साल बिजली के दाम बढ़ाने से इनकार; 3.5 करोड़ परिवारों को राहत सूचना मिलते ही मोहनलालगंज पुलिस और फोरेंसिक टीम धर्मावतखेड़ा गांव स्थित घटनास्थल पर पहुंची और जांच पड़ताल शुरू की। यह सनसनीखेज वारदात लखनऊ प्रेमिका की हत्या के रूप में पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्या थी वारदात की वजह? मृतका प्रियांशी रावत के परिजनों ने गला रेतने का आरोप आलोक नामक युवक पर लगाया है। प्रियांशी की मां पूनम ने बताया कि करीब तीन साल पहले उन्होंने अपनी बेटी का रिश्ता आलोक से तय किया था। शादी तोड़ने का कारण: मां पूनम ने खुलासा किया, "एक साल पहले हमें पता चला कि आलोक बहुत ज्यादा शराब पीने का आदी है और जुआ भी खेलता है। इस पर हमने उसके पिता से शादी करने से इनकार कर दिया।" आलोक की धमकी: जब यह बात आलोक को पता चली, तो उसने नशा छोड़ने का वादा किया, लेकिन प्रियांशी के परिवार ने यह कहते हुए शादी से मना कर दिया कि वे अपनी बेटी की जिंदगी बर्बाद नहीं करेंगे। इसके बाद आलोक के घरवाले तो बात मान गए थे, लेकिन आलोक इस रिश्ते को टूटने नहीं देना चाहता था। छोटी बहन ने देखा पूरा घटनाक्रम हत्या के समय घर में प्रियांशी (19) और उसकी छोटी बहन महक ही मौजूद थीं, क्योंकि उनकी मां पूनम पीजीआई इलाके में काम पर गई हुई थीं। महक ने पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी: "आलोक घर से करीब 100 मीटर दूर बाइक खड़ी करके आया। उसने पूछा कि दीदी कहां हैं, तो हमने बताया कि वह सो रही हैं। वह ऊपर गया और दीदी को बुलाने को कहा। जब दीदी ऊपर गईं, तो आलोक ने पूछा, 'मुझसे शादी करोगी या नहीं?' दीदी ने मना कर दिया। इसके बाद आलोक ने जेब से चाकू निकाला और दीदी का गला काट दिया।" महक की चीख सुनकर जब वह ऊपर भागी, तो आलोक दौड़कर नीचे आया और बाइक से भाग गया। प्रियांशी सीढ़ियों से नीचे आ रही थी, उसके गले से खून बह रहा था। छोटी बहन ने बताया कि प्रियांशी ने लगभग 10 मिनट तक तड़पकर दम तोड़ दिया। परिजनों का हंगामा, गिरफ्तारी की मांग बेटी की हत्या के बाद गांव में तनाव फैल गया। परिजनों ने पुलिस को पोस्टमार्टम के लिए शव ले जाने से रोक दिया और आरोपी आलोक की तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। हालांकि, मोहनलालगंज पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच और शीघ्र गिरफ्तारी के आश्वासन के बाद ही परिजन शांत हुए और पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जा सकी। पुलिस टीमें अब आरोपी आलोक की तलाश में जुट गई हैं। थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगाई गई हैं। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और प्रियांशी के आलोक के साथ आखिरी रिश्तों की गहनता से जांच कर रही है। घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। लखनऊ प्रेमिका की हत्या के इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। लखनऊ के मोहनलालगंज में शादी से इनकार करने पर प्रेमी आलोक ने घर में घुसकर बीएससी की छात्रा प्रियांशी रावत का गला रेतकर हत्या कर दी। आरोपी नशे का आदी था, जिसके कारण प्रियांशी के परिवार ने रिश्ता तोड़ दिया था। छोटी बहन की मौजूदगी में हुई इस जघन्य वारदात के बाद परिजनों ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए हंगामा किया। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी आलोक की तलाश में दबिश दे रही है।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: राजधानी लखनऊ में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका अंदाजा इंदिरा नगर इलाके में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना से लगाया जा सकता है। यहां बुधवार देर रात एक 24 वर्षीय युवक की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मृतक एक निजी कंपनी में रिकवरी एजेंट के तौर पर काम करता था। लखनऊ में रिकवरी एजेंट की हत्या (Recovery Agent Murder in Lucknow) का यह मामला इंदिरा नगर के सेक्टर-8 का है, जहां एक खाली प्लॉट में युवक का खून से लथपथ शव बरामद हुआ।READ ALSO:-बदायूं में खौफनाक मंजर: छात्र को घेरकर बेरहमी से पीटा, वीडियो में गूंजी आवाज- 'जान से मार दो', मरणासन्न हालत में छोड़कर भागे आरोपी पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि हत्यारे कोई और नहीं बल्कि मृतक के परिचित हो सकते हैं, क्योंकि उसे एक फोन कॉल के जरिए घर से बाहर बुलाया गया था। इस घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक फोन कॉल और मौत का बुलावा मृतक की पहचान शशि प्रकाश उपाध्याय (24) के रूप में हुई है। वह अपने पिता चंद्रभूषण और परिवार के साथ इंदिरा नगर के सेक्टर-8 स्थित रघुराजनगर में एक किराए के मकान में रहता था। शशि 'विष्णु एंड कंपनी' नामक फर्म के लिए लोन रिकवरी का काम करता था। घटनाक्रम के बारे में मृतक के भाई रवि ने बताया कि बुधवार रात करीब 10 बजे शशि के मोबाइल पर किसी का कॉल आया था। फोन पर बात करते हुए वह घर से बाहर टहलने के लिए निकला था। परिजनों को लगा कि वह पास में ही कहीं गया होगा और थोड़ी देर में वापस आ जाएगा। लेकिन, वह वापस नहीं लौटा। देर रात पुलिस ने परिवार को सूचना दी कि शशि की तबीयत खराब है और वह डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती है। खबर मिलते ही बदहवास परिजन अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने बताया कि शशि की मौत हो चुकी है। लखनऊ में रिकवरी एजेंट की हत्या की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। खाली प्लॉट में मिली खून से सनी लाश पुलिस के मुताबिक, शशि का शव घर से कुछ दूरी पर स्थित एक खाली प्लॉट में पड़ा मिला था। शव बुरी तरह से खून से लथपथ था और शरीर पर चोट के गहरे निशान थे, जिससे यह साफ होता है कि उसे बड़ी बेरहमी से पीटा गया था। प्रत्यक्षदर्शियों और आसपास के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ लोगों ने उसे घेरकर मारा है। गाजीपुर थाना प्रभारी (Inspector Gazipur) ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया। जिस तरह से इस लखनऊ में रिकवरी एजेंट की हत्या को अंजाम दिया गया, उससे साफ जाहिर होता है कि हमलावरों का इरादा सिर्फ मारपीट करना नहीं, बल्कि जान लेना ही था। किसी परिचित का हो सकता है हाथ इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। डीसीपी पूर्वी (DCP East) शशांक सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि हत्या के पीछे किसी परिचित का हाथ होने की प्रबल संभावना है। डीसीपी ने कहा, "प्रथम दृष्टया यह रंजिश का मामला लग रहा है। जिस तरह उसे फोन करके बुलाया गया, उससे लगता है कि वह हत्यारों को जानता था। लखनऊ में रिकवरी एजेंट की हत्या के इस मामले के खुलासे के लिए क्राइम ब्रांच समेत कुल चार टीमें गठित की गई हैं। हमने कुछ संदिग्धों को चिह्नित किया है और उनकी तलाश जारी है।" लोन रिकवरी का काम और रंजिश का शक शशि प्रकाश लोन रिकवरी का काम करता था, जो अक्सर विवादों से भरा होता है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या हाल ही में किसी से लोन वसूली को लेकर उसका झगड़ा हुआ था। रिकवरी एजेंट्स को अक्सर कर्जदारों के गुस्से का सामना करना पड़ता है। हालांकि, भाई रवि और परिवार का आरोप है कि यह एक सोची-समझी साजिश थी। लखनऊ में रिकवरी एजेंट की हत्या ने एक बार फिर शहर में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है ताकि उस आखिरी कॉलर का पता लगाया जा सके जिसने शशि को मौत के मुंह में धकेला। लखनऊ के इंदिरा नगर में 24 वर्षीय शशि प्रकाश उपाध्याय की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। एक फोन कॉल पर घर से निकलने के बाद उसका शव खाली प्लॉट में मिला। पुलिस को शक है कि लखनऊ में रिकवरी एजेंट की हत्या में उसके किसी परिचित का हाथ है। मामले की जांच के लिए 4 टीमें लगाई गई हैं और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल (Balrampur Hospital) से चिकित्सा जगत का एक हैरान करने वाला, लेकिन राहत भरा मामला सामने आया है। यहां डॉक्टरों की एक टीम ने डेढ़ साल के एक मासूम बच्चे की पीठ पर उग आई 14 सेंटीमीटर लंबी पूंछ (Human Tail) को हटाकर उसे दर्द से मुक्ति दिलाई है। बच्चे की पूंछ की सर्जरी (Bachche Ki Poonch Ki Surgery) बेहद जटिल थी, क्योंकि यह पूंछ केवल बाहरी मांस का टुकड़ा नहीं थी, बल्कि यह बच्चे की रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) की गहराई से जुड़ी हुई थी।READ ALSO:-मेरठ में घर का सपना होगा पूरा: MDA नीलाम करेगा 974 प्लॉट, नमो भारत ट्रेन के पास जमीन खरीदने का मौका इस सफल ऑपरेशन के बाद बच्चे की हालत में अब तेजी से सुधार हो रहा है और उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। इस दुर्लभ सर्जरी की चर्चा पूरे शहर में हो रही है। रीढ़ की गहराई से जुड़ी थी 14 सेमी लंबी पूंछ बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे को जन्म से ही पीठ के निचले हिस्से में एक उभार था, जो समय के साथ एक पूंछ की शक्ल ले चुका था। मेडिकल भाषा में इसे 'ह्यूमन टेल' या 'सूडो टेल' (Pseudo Tail) कहा जा सकता है। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि यह पूंछ 14 सेंटीमीटर तक लंबी हो गई थी और इसमें संवेदना (Sensation) भी थी। बच्चे की पूंछ की सर्जरी करने वाले वरिष्ठ पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने बताया कि यह पूंछ रीढ़ की हड्डियों (वर्टिब्रा) के बीच स्पाइनल कॉर्ड की झिल्लियों से गहराई से जुड़ी हुई थी। इस वजह से बच्चे को लेटने, करवट बदलने और यहां तक कि चलने की कोशिश करने पर भी असहनीय दर्द होता था। पूंछ में खिंचाव होने पर बच्चा रोने लगता था। डेढ़ घंटे चला जटिल ऑपरेशन बच्चे की तकलीफ को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी का फैसला किया। हालांकि, यह फैसला आसान नहीं था। पूंछ का कनेक्शन स्पाइनल कॉर्ड के संवेदनशील हिस्से से होने के कारण जरा सी चूक बच्चे को हमेशा के लिए अपंग बना सकती थी। गुरुवार को बच्चे को भर्ती करने के बाद एमआरआई (MRI) और अन्य जरूरी जांचें की गईं। अगले दिन, शुक्रवार को डॉ. अखिलेश कुमार और उनकी टीम ने लगभग डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद बच्चे की पूंछ की सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। डॉक्टरों ने बेहद एहतियात बरतते हुए स्पाइन को नुकसान पहुंचाए बिना पूंछ को जड़ से अलग किया। अंधविश्वास और भ्रम में फंसा था परिवार अक्सर भारत में ऐसे मामलों को लोग चमत्कार या 'हनुमान जी का अवतार' मानकर इलाज से बचते हैं, या फिर झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं। इस मामले में भी परिजनों के मन में कई तरह के भ्रम थे। डॉक्टरों ने सबसे पहले माता-पिता की काउंसिलिंग की और उन्हें समझाया कि यह कोई दैवीय चमत्कार नहीं, बल्कि एक मेडिकल कंडिशन (विकृति) है, जिसे 'स्पाइना बिफिडा ऑक्ल्टा' (Spina Bifida Occulta) से जोड़कर देखा जा सकता है। अगर समय रहते बच्चे की पूंछ की सर्जरी नहीं की गई, तो भविष्य में बच्चे को गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। काउंसिलिंग के बाद परिजन ऑपरेशन के लिए राजी हुए। स्थानीय डॉक्टरों ने खड़े कर दिए थे हाथ बच्चे के पिता सुशील कुमार ने बताया कि वे अपने बेटे की तकलीफ को लेकर बेहद परेशान थे। उन्होंने अपने क्षेत्र के कई निजी अस्पतालों और स्थानीय डॉक्टरों से संपर्क किया, लेकिन मामला इतना जटिल था कि किसी ने भी ऑपरेशन करने की हिम्मत नहीं जुटाई। हर जगह से निराश होने के बाद वे लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल की ओपीडी (OPD) में पहुंचे। यहां अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता आर्या और सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने केस की गंभीरता को समझा और चुनौती स्वीकार की। आखिरकार, सरकारी अस्पताल में हुई इस बच्चे की पूंछ की सर्जरी ने साबित कर दिया कि यहां की चिकित्सा सुविधाएं किसी कॉर्पोरेट अस्पताल से कम नहीं हैं। डॉक्टरों की इस टीम ने किया कमाल इस दुर्लभ और सफल सर्जरी का श्रेय बलरामपुर अस्पताल की पूरी टीम को जाता है। सर्जन: डॉ. अखिलेश कुमार (पीडियाट्रिक सर्जन) एनेस्थीसिया टीम: डॉ. एस.ए. मिर्जा, डॉ. एम.पी. सिंह नर्सिंग स्टाफ: निर्मला मिश्रा, अंजना सिंह सहयोगी: डॉ. मनीष वर्मा (इंटर्न) और वार्ड ब्यॉय राजू सर्जरी के बाद बच्चे को कुछ दिन आईसीयू (ICU) में निगरानी में रखा गया था। अब वह पूरी तरह खतरे से बाहर है। लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में हुई बच्चे की पूंछ की सर्जरी न केवल चिकित्सा विज्ञान की जीत है, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक सबक है जो शारीरिक विकृतियों को अंधविश्वास से जोड़ते हैं। 14 सेमी लंबी पूंछ से मुक्ति पाने के बाद अब यह बच्चा एक सामान्य और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेगा। डॉक्टरों की सूझबूझ ने एक मासूम को नया जीवन दिया है।
लखनऊ: राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI - Directorate of Revenue Intelligence) ने मंगलवार को लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 21.77 करोड़ रुपये की हेरोइन जब्त की है। डीआरआई ने दो महिला यात्रियों को मौके पर ही गिरफ्तार किया, जो मादक पदार्थों की इस बड़ी खेप को न्यू जलपाईगुड़ी से दिल्ली की ओर ले जा रही थीं।READ ALSO:-मेरठ सौरभ हत्याकांड: कैब ड्राइवर ने कोर्ट में साहिल-मुस्कान को पहचाना, बोला- 'लुक बदल गया है'; 21 नवंबर को जिरह यह कार्रवाई डीआरआई को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसके बाद अधिकारियों ने चारबाग स्टेशन पर तुरंत निगरानी शुरू कर दी। यह सफलता भारत में मादक पदार्थों के अवैध व्यापार पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 3.1 किलो हेरोइन जब्त, ₹21.77 करोड़ आंकी गई कीमत सूचना के आधार पर, डीआरआई अधिकारियों ने संदिग्ध ट्रेन के आगमन पर दोनों महिला यात्रियों की पहचान की। तलाशी के दौरान, उनके बैगों से कई पैकेट बरामद हुए, जिन्हें बेहद सावधानीपूर्वक छिपाकर रखा गया था। पदार्थ की पुष्टि: अधिकारियों ने मौके पर ही एनडीपीएस (NDPS) फील्ड टेस्टिंग किट का उपयोग करके परीक्षण किया, जिसमें बरामद सफेद पाउडरनुमा पदार्थ हेरोइन पाया गया। वजन और कीमत: बरामद हेरोइन का कुल वजन 3.110 किलोग्राम निकला। अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इस जब्त मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत लगभग ₹21.77 करोड़ आंकी गई है। (External link: DRI India Official Website URL) पूछताछ में पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच हेरोइन एक अत्यंत घातक नशीला पदार्थ है, जिसका अवैध व्यापार समाज में गंभीर स्वास्थ्य और सामाजिक संकट पैदा करता है। लखनऊ हेरोइन तस्करी (Lucknow Heroin Taskari) में शामिल इन दोनों महिला यात्रियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड सायकोट्रोपिक सब्स्टेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस तस्करी के पीछे कौन से बड़े नेटवर्क सक्रिय हैं और यह खेप दिल्ली में किसे पहुंचाई जानी थी। डीआरआई ने स्पष्ट किया कि समाज को नशे की इस घातक कड़ी से सुरक्षित रखने के लिए ऐसे अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे। महिलाओं पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज डीआरआई की कार्रवाई में गिरफ्तार हुईं दोनों महिला तस्करों पर एनडीपीएस एक्ट की सख्त धाराएं लगाई गई हैं, जिसके तहत सख्त दंड का प्रावधान है। यह मामला दिखाता है कि मादक पदार्थों के तस्करों द्वारा कैसे महिलाओं का इस्तेमाल कोरियर के रूप में किया जाता है, ताकि सुरक्षा जांच के दौरान वे आसानी से बच सकें। यह खेप न्यू जलपाईगुड़ी से शुरू हुई थी, जो बताता है कि यह तस्करी नेटवर्क पूर्वी और उत्तरी भारत के राज्यों में फैला हुआ है। जांच में इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है कि क्या ये महिलाएं किसी अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल का हिस्सा हैं। डीआरआई ने लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए लखनऊ हेरोइन तस्करी के आरोप में दो महिला यात्रियों को गिरफ्तार किया। उनके पास से बरामद 3.1 किलो हेरोइन की कीमत अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में लगभग ₹21.77 करोड़ है। दोनों महिलाओं के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उनके नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के एक IPL खिलाड़ी पर हैदराबाद की एक महिला क्रिकेटर ने शादी का झांसा देकर रेप और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संवेदनशील मामले में कार्रवाई न होने पर पीड़िता पहले नोएडा थाने से लखनऊ पुलिस मुख्यालय पहुंची और वरिष्ठ पुलिस अफसरों से न्याय की गुहार लगाई। उधर, मामले ने नया मोड़ तब लिया जब आरोपी IPL खिलाड़ी ने भी महिला क्रिकेटर के खिलाफ ब्लैकमेल और धमकी देने की FIR दर्ज करा दी। इस तरह अब दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।READ ALSO:-एस्ट्रो स्कैम अलर्ट! 'मेरा एक्स कब वापस आएगा?' पूछने के ले रहे ₹250/मिनट, फर्जी लिंक से कर रहे खाता साफ सोशल मीडिया पर हुई थी मुलाकात पीड़िता हैदराबाद की रहने वाली है और नोएडा के एक पीजी (PG) में रहती है। पीड़िता के बयान के अनुसार, दोनों की मुलाकात सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। मुलाकात: मई 2025 में पीड़िता की मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए आईपीएल खिलाड़ी विपराज निगम से हुई थी। संबंध की शुरुआत: बातचीत के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और खिलाड़ी ने उसे शादी का वादा किया। पीड़िता का दावा है कि जून 2025 से दोनों रिलेशन में थे। शादी का झांसा देकर रेप और धमकी महिला क्रिकेटर का आरोप है कि आरोपी IPL खिलाड़ी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। रेप का आरोप: पीड़िता का आरोप है कि 29 जुलाई 2025 को आरोपी खिलाड़ी ने उसे नोएडा सेक्टर-135 स्थित एक होटल में बुलाया और शादी का झांसा देकर उसके साथ रेप किया। मारपीट: जब पीड़िता ने शादी के विषय में बात की तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट की और उसे होटल से बाहर निकाल दिया। धमकी: पीड़िता ने बताया कि 30 जुलाई को उसे एक महिला का फोन आया, जिसने खुद को उस IPL खिलाड़ी की प्रेमिका बताया। फोन करने वाली महिला ने पीड़िता को जान से मारने और उसकी निजी तस्वीरें व वीडियो वायरल करने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता को कई बार अज्ञात नंबरों से भी धमकी भरे कॉल आए। लखनऊ मुख्यालय पहुंची पीड़िता पीड़िता ने इस पूरे मामले की शिकायत सबसे पहले 13 अक्टूबर 2025 को नोएडा पुलिस से की थी। शिकायत का स्थान: नोएडा पुलिस से कोई ठोस कार्रवाई न होने पर, पीड़िता लखनऊ पुलिस मुख्यालय पहुंची और अधिकारियों से जांच में तेजी लाने की मांग की। दोनों पर FIR: वहीं, दूसरी ओर, IPL खिलाड़ी विपराज निगम ने 8 नवंबर 2025 को बाराबंकी कोतवाली में महिला क्रिकेटर के खिलाफ ब्लैकमेल और धमकी देने का मामला दर्ज कराया। मामले में दोनों ओर से आरोप इस संवेदनशील मामले में दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर FIR दर्ज कराने से नया मोड़ आ गया है। सोशल मीडिया पर लोग इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, क्योंकि एक तरफ एक महिला क्रिकेटर है जिसने रेप का गंभीर आरोप लगाया है, वहीं दूसरी तरफ एक IPL खिलाड़ी है जिसने ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया है। पुलिस कर रही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की जांच पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है और घटना से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (Electronic Evidence) जैसे कॉल रिकॉर्ड्स, मैसेज और होटल रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की गहन जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर पुलिस (J&K Police) ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए, लखनऊ की महिला डॉक्टर शाहीन शाहिद को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया है। सोमवार को हुई यह गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर मामले की ओर इशारा करती है। शाहीन पर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े होने के आरोप हैं। गिरफ्तारी के बाद J&K पुलिस उसे अपने साथ लेकर चली गई है।READ ALSO:-दिल्ली धमाके के बाद UP में High Alert! CM योगी ने दिए सख्त निर्देश फरीदाबाद और सहारनपुर कनेक्शन डॉक्टर शाहीन शाहिद, लखनऊ के लालबाग इलाके की निवासी हैं, और वह फरीदाबाद से गिरफ्तार हुए आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल शकील की करीबी सहयोगी और गर्लफ्रेंड थी। मुजम्मिल शकील की गिरफ्तारी सहारनपुर (यूपी) से गिरफ्तार किए गए एक अन्य डॉक्टर आदिल अहमद (अदील) से पूछताछ के बाद हुई थी। यह पूरा आतंकी मॉड्यूल अब चार राज्यों—उत्तर प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली—से जुड़ता नज़र आ रहा है। मुजम्मिल शकील: पुलवामा के कोइल का रहने वाला मुजम्मिल, फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था। डॉक्टर आदिल: 7 नवंबर को सहारनपुर से गिरफ्तार हुआ, यह अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रैक्टिस करता था और श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगाते हुए सीसीटीवी फुटेज में पकड़ा गया था। डॉक्टर शाहीन की कार से AK-47 बरामद डॉक्टर शाहीन शाहिद की गिरफ्तारी तब हुई जब जांच एजेंसियों को पता चला कि वह गिरफ्तार आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल शकील की कार का इस्तेमाल कर रही थी। बरामदगी: शाहीन की कार से एक AK-47 राइफल, जिंदा कारतूस और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद हुई हैं। टेरर मॉड्यूल की साजिश: पुलिस का दावा है कि यह आतंकी मॉड्यूल भारत के विभिन्न हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रच रहा था। गिरफ्तारी की संख्या: अब तक इस मॉड्यूल से जुड़े सात लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनसे कुल 2900 किलो IED (अमोनियम नाइट्रेट-आधारित विस्फोटक) भी जब्त किया गया है। ऑपरेशन जारी, उच्च सतर्कता आईजी लॉ एंड ऑर्डर एलआर कुमार ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील बताया है। पुलिस का बयान: आईजी कुमार का कहना है कि शाहीन के बारे में जम्मू-कश्मीर पुलिस से विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने पुष्टि की कि AK-47 और अन्य विस्फोटक सामग्री की बरामदगी हुई है। मुजम्मिल के ठिकाने से: मुजम्मिल शकील ने फरीदाबाद के धौज गांव में तीन महीने पहले जो कमरा किराए पर लिया था, वहां से करीब 360 किलो विस्फोटक (अमोनियम नाइट्रेट हो सकता है), 20 टाइमर्स, बैटरी और असॉल्ट राइफल, 3 मैगजीन, 83 कारतूस और एक पिस्टल बरामद हुई है। गोपनीयता: पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए ऑपरेशन की ज्यादा डिटेल्स अभी जारी नहीं की हैं, क्योंकि जांच जारी है और नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना बाकी है। सुरक्षा पर सवाल पेशे से डॉक्टर और समाज के सम्मानित वर्ग से जुड़े लोगों के आतंकी संगठनों से जुड़ने की खबर से जनता में गहरा आश्चर्य और चिंता है। यह घटना सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता पर सवाल उठ रहे हैं। लोग इस बात पर आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं कि AK-47 जैसे हथियार और 2900 किलो विस्फोटक विभिन्न राज्यों से होकर मॉड्यूल तक कैसे पहुंचे। नेटवर्क की गहराई तक जांच जांच एजेंसियां अब डॉक्टर शाहीन शाहिद के मोबाइल डेटा, बैंकिंग रिकॉर्ड और विदेशी कॉल डिटेल्स खंगाल रही हैं। उसका संपर्क कई संदिग्ध नेटवर्क से था, जिनकी डोर सीधे पाकिस्तान में बैठे आतंकियों से जुड़ी है। इसके अलावा, अल-फलाह यूनिवर्सिटी में उसकी भूमिका की भी जांच हो रही है कि क्या किसी तरह का आतंकी फंडिंग नेटवर्क शिक्षण संस्थानों के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। इस मॉड्यूल के भंडाफोड़ से एक बड़े आतंकी खतरे को टाला गया है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए आज, 3 नवंबर 2025 से एक महीने तक चलने वाले 'यातायात माह' (Traffic Month) की शुरुआत हो गई है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य न केवल लोगों को जागरूक करना है, बल्कि सख्त कार्रवाई के माध्यम से नियमों का पालन करवाना भी है। इस संबंध में एक बड़ी और सख्त चेतावनी जारी की गई है।READ ALSO:-मेरठ का अनोखा मामला: पत्नी की मोहब्बत के लिए पति ने दिया तलाक, अब खुद करवाएगा प्रेमी से निकाह! जागरूकता और सुरक्षित ड्राइविंग का लक्ष्य इस एक महीने के अभियान का मुख्य फोकस सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और आम जनता को सुरक्षित ड्राइविंग के महत्व के बारे में शिक्षित करना है। उद्देश्य: अभियान का उद्देश्य लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना और उन्हें सड़क सुरक्षा के महत्व के बारे में शिक्षित करना है। शुभारंभ: लखनऊ पुलिस लाइन में जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। ये वाहन शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लोगों को नियमों के बारे में जागरूक करेंगे। भागीदारी: इस कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने भी हिस्सा लिया, जिससे उन्हें बचपन से ही नियमों का महत्व पता चले। 5-6 चालान पर लाइसेंस निरस्त इस 'यातायात माह' के शुभारंभ के दौरान जेसीपी बबलू कुमार ने एक बड़ा और कड़ा फरमान जारी किया है, जिसका सीधा असर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पड़ेगा। लाइसेंस रद्द: जेसीपी बबलू कुमार ने स्पष्ट रूप से बताया कि अब जिन वाहनों पर 5 या 6 चालान बकाया (Pending Challan) हैं, उनके ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) निरस्त किए जाएंगे। हेलमेट अनिवार्यता: उन्होंने दो पहिया वाहन चालकों को भी सख्त चेतावनी दी। अब दो पहिया वाहन पर आगे और पीछे, दोनों सीटों पर बैठे व्यक्तियों के लिए हेलमेट पहनना जरूरी होगा। नो योर पुलिस: इस अभियान के साथ-साथ 'नो योर पुलिस' (Know Your Police) अभियान भी चलाया जाएगा, जिसका उद्देश्य जनता और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। नियमों के प्रति सख्त रुख जेसीपी बबलू कुमार ने कहा कि ये कड़े कदम लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करेंगे और सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद करेंगे। प्रेरणा: इस तरह की कार्रवाई से लोगों को अपने बकाया चालान तुरंत भरने की प्रेरणा मिलेगी, अन्यथा उनके लाइसेंस जब्त हो जाएंगे। सम्मान: जेसीपी बबलू कुमार को इस पहल के लिए 'सुगम रास्ते और सुरक्षित यात्रा' का स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया गया। सख्ती पर प्रतिक्रिया लखनऊ के लोगों में ट्रैफिक पुलिस की इस नई सख्ती को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जिन लोगों के वाहनों पर कई चालान लंबित हैं, उनमें लाइसेंस रद्द होने के डर से हलचल मच गई है। सोशल मीडिया पर भी पुलिस की इस कार्रवाई का कुछ लोगों ने समर्थन किया है, तो कुछ ने इतने सारे चालान होने पर सीधे लाइसेंस रद्द करने के नियम पर सवाल उठाए हैं। सुरक्षित यातायात की ओर यह अभियान एक महीने तक चलेगा और ट्रैफिक पुलिस द्वारा शहर भर में विशेष चेकिंग और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। लाइसेंस निरस्त करने की यह कार्रवाई लखनऊ में सुरक्षित यातायात और नियमों के पालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ 24 जनवरी 2026 को यूपी दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की मेजबानी करने के लिए तैयार है। केडी सिंह बाबू स्टेडियम में 'रणभूमि 1.0: क्लैश ऑफ बाहुबलीज' (Ranbhoomi 1.0: Clash of Bahubalis) नामक भारत का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय फ्रीस्टाइल रेसलिंग शो आयोजित किया जाएगा। रेसलिंग वर्ल्ड ऑफ भारत (WWB) द्वारा संचालित इस इवेंट में दुनिया भर के दिग्गज पहलवान और भारत के शीर्ष रेसलर्स आमने-सामने होंगे। लखनऊ में होने वाला यह शो कुश्ती प्रेमियों के लिए एक बड़ा तोहफा साबित होगा।READ ALSO:-UP Pollution: सर्दी के साथ मेरठ बना सबसे प्रदूषित शहर, AQI 300 के पार 'बेहद खराब' श्रेणी में; Delhi NCR के 6 जिलों में जहरीली हुई हवा कुश्ती की प्राचीन परंपरा का आधुनिक रूप इस मेगा इवेंट की घोषणा लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई, जिसमें मुख्य आयोजक राज सिंह और भारतीय पहलवान टाइगर राप्ता समेत कई हस्तियां मौजूद रहीं। इस आयोजन का उद्देश्य भारत की कुश्ती की समृद्ध और प्राचीन परंपरा को एक आधुनिक, प्रोफेशनल रूप देना है, जैसा कि पश्चिमी देशों में देखा जाता है। यह इवेंट WWB द्वारा संचालित है, जिसके चेयरमैन मार्क बील हैं। अंतरराष्ट्रीय सितारों की भरमार 'रणभूमि 1.0' में दुनिया के कई नामी-गिरामी अंतर्राष्ट्रीय पहलवान हिस्सा लेंगे, जो इस शो को और भी भव्य बना देंगे: अमेरिका: क्रिस मास्टर्स और काउबॉय जे. स्टॉर्म। कनाडा: जो ई. लीजेंड। समोआ-अमेरिका: ग्रेट अलोफा। प्यूर्टो रिको: कार्लिटो। दक्षिण अफ्रीका: जुबरी और टीजे. ट्रेमर। भारत की ओर से भी कई जाने-माने पहलवान मैदान में उतरेंगे, जिनका मार्गदर्शन टाइगर राप्ता करेंगे। मुख्य आयोजक राज सिंह और सह-संस्थापक अनिता सिंह के नेतृत्व में इवेंट की तैयारियां जोरों पर हैं। मनोरंजन और खेल का मिश्रण मुख्य आयोजक राज सिंह ने इस शो के महत्व पर प्रकाश डाला। राज सिंह का बयान: उन्होंने कहा कि यह आयोजन मनोरंजन और खेल का मिला-जुला रूप है। उन्होंने प्रोफेशनल कुश्ती पर अक्सर उठने वाले 'असली या नकली' के सवाल का जवाब देते हुए कहा, "निश्चित तौर पर यह आरोप प्रोफेशनल कुश्ती पर लगाया जाता है। मैं तो यह कहूंगा कि यह इंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स का मिला-जुला रूप है। यहां भी खिलाड़ियों को चोट लगती है। यहां भी वर्कआउट करते हैं। हमारे यहां भी खिलाड़ियों की सर्जरी होती है।" मार्क बील की सराहना: दक्षिण अफ्रीका के WWP/WAW चेयरमैन मार्क बील ने भारत की खेल संस्कृति की तारीफ की और पहलवान टाइगर राप्ता को देश के गौरव का प्रतीक बताया। युवाओं में जबरदस्त उत्साह लखनऊ में इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के रेसलिंग शो की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। 'रणभूमि 1.0' और WWB जैसे कीवर्ड्स वायरल हो रहे हैं। दर्शकों को उम्मीद है कि उन्हें लाइव एरिना में अंतर्राष्ट्रीय रेसलिंग का रोमांचक अनुभव मिलेगा। टिकटों की बिक्री जल्द शुरू होने की उम्मीद है, जिसके लिए फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। फ्रीस्टाइल रेसलिंग इंस्टीट्यूट की योजना यह आयोजन न केवल खेल प्रेमियों के लिए एक ट्रीट होगा, बल्कि इसका दूरगामी प्रभाव भी होगा। संस्थान की स्थापना: राज सिंह और अनिता सिंह की योजना लखनऊ में एक फ्रीस्टाइल प्रोफेशनल रेसलिंग इंस्टीट्यूट स्थापित करने की भी है। युवाओं को अवसर: इस संस्थान से भारत के युवा रेसलिंग को करियर के तौर पर अपना सकेंगे और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रेनिंग और प्रदर्शन के नए अवसर मिलेंगे। शहर का गौरव: यूपी दिवस पर यह शो आयोजित होने से लखनऊ को वैश्विक खेल मानचित्र पर एक विशेष पहचान मिलेगी। लखनऊ में खुलेगी रेसलिंग इंस्टीट्यूट मुख्य आयोजक राज सिंह ने कहा कि यह आयोजन कुश्ती की प्राचीन परंपरा को आधुनिक रूप देने का एक प्रयास है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि लखनऊ में एक फ्रीस्टाइल प्रोफेशनल रेसलिंग इंस्टीट्यूट स्थापित करना भी है, ताकि प्रदेश के युवाओं को इस क्षेत्र में नए अवसर मिल सकें। इवेंट के टिकटों की बिक्री जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके हजरतगंज में शनिवार देर रात एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई। यहां एक युवक ने अपनी कार को अंदर से लॉक कर कनपटी पर रिवाल्वर रखकर खुद को गोली मार ली, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। कार स्टार्ट हालत में थी और अंदर से लॉक थी, जिसके चलते पुलिस को मैकेनिक बुलाकर गेट खुलवाना पड़ा।Read also:-छठ पूजा पर बड़ा ऐलान: लखनऊ में 28 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश, DM का आदेश जारी; स्कूल-कॉलेज, दफ्तर सब बंद स्टार्ट कार में मिला शव घटना हजरतगंज थाना क्षेत्र स्थित हरिओम मंदिर के पास की है। पुलिस को शनिवार देर रात सूचना मिली कि एक होंडा बीआरवी (Honda BRV) कार (नंबर UP32KE8099) काफी देर से स्टार्ट खड़ी है और अंदर एक युवक अचेत अवस्था में है। सूचना पर हजरतगंज थाने की पुलिस और फोरेंसिक टीम तत्काल मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने पाया कि कार अंदर से लॉक थी। बाहर से खटखटाने पर जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो पुलिस ने तुरंत एक मैकेनिक को बुलाकर कार का गेट खुलवाया। हाथ में रिवाल्वर, पास में कारतूस पुलिस ने जैसे ही गेट खोला, अंदर का दृश्य देखकर सन्न रह गई। ड्राइवर सीट पर बैठे युवक ने खुद को कनपटी पर गोली मारी थी और उसका शव सीट पर लुढ़का हुआ था। उसके दाहिने हाथ में एक रिवाल्वर फंसी हुई थी। पुलिस को कार के अंदर से छोटी पन्नी में 4 जिंदा कारतूस और 1 खाली खोखा मिला। इसके अतिरिक्त, जांच में 5 और जिंदा कारतूस बरामद हुए। इस तरह मौके से कुल 9 जिंदा कारतूस मिले हैं। पर्स से हुई मृतक की पहचान पुलिस को मृतक के पास मिले पर्स से उसकी पहचान 38 वर्षीय ईशान गर्ग पुत्र पराग गर्ग के रूप में हुई, जो लखनऊ के राजाजीपुरम (थाना तालकटोरा) का निवासी था। पर्स से मृतक के नाम का वैध रिवाल्वर लाइसेंस भी बरामद हुआ है। पुलिस ने तत्काल घटना की सूचना मृतक के परिजनों को दी और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया। शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। हालांकि, ईशान ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया, इस बात का खुलासा अभी नहीं हो पाया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
लखनऊ: छठ महापर्व को लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बड़ी घोषणा की गई है। योगी सरकार द्वारा छठ पर्व के मौके पर 28 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने के बाद, अब लखनऊ जिलाधिकारी कार्यालय ने भी राजधानी के लिए आधिकारिक अवकाश का ऐलान कर दिया है।READ ALSO:-Yashoda Medicity का राष्ट्रपति ने किया उद्घाटन: CM Yogi बोले- UP के लिए यह बड़ा Investment, राजनाथ ने बताया- 'व्यक्तिगत पीड़ा से बड़ी यात्रा' जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर की तरफ से इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया गया है। आदेश के अनुसार, मंगलवार (28 अक्टूबर) को छठ पर्व के मुख्य अर्घ्य के दिन लखनऊ में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस अवकाश के दौरान राजधानी के सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी कार्यालय, स्कूल और कॉलेज पूरी तरह बंद रहेंगे। योगी सरकार ने पहले ही की थी घोषणा पूरे देश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी छठ पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व तीन दिनों तक चलता है, जिसमें 28 अक्टूबर को मुख्य पर्व (उगते सूर्य को अर्घ्य) है। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही 28 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की थी। अब उसी क्रम में, जिलों के जिलाधिकारियों को दिए गए अधिकार का प्रयोग करते हुए, लखनऊ के डीएम ने भी जिले में छुट्टी का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। प्रशासन ने सभी शैक्षणिक संस्थानों, दफ्तरों और सरकारी कार्यालयों को इस अवकाश का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। लखनऊ में घाटों पर विशेष तैयारी लखनऊ में छठ पर्व का त्यौहार बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। मुख्य रूप से झारखंड, बिहार और पूर्वांचल से जुड़े लोग इस पर्व को विशेष आस्था से मनाते हैं, और लखनऊ में इनकी एक बड़ी आबादी रहती है। इस पर्व के दौरान, हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए घाटों पर उमड़ते हैं। इसे देखते हुए लखनऊ नगर निगम और जिला प्रशासन पिछले कई दिनों से गोमती तट, झूलेलाल घाट, गिलौला झील, कठौता झील और वॉटर फ्रंट जैसे प्रमुख स्थानों पर छठ घाटों का निर्माण, साफ-सफाई और प्रकाश की व्यवस्था करने में जुटा है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम नगर निगम की तरफ से सभी घाटों पर विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई दिक्कत न हो। सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है और प्रमुख घाटों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। यह पर्व भगवान सूर्य की उपासना का प्रतीक है। इसमें महिलाएं 36 घंटे का कठिन निर्जला (बिना पानी के) व्रत रखकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। सरकार भी व्रती महिलाओं और उनके परिवारों की आस्था का सम्मान करते हुए इस दिन अवकाश घोषित करती है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस के सामने शनिवार (25 अक्टूबर 2025) को कानून व्यवस्था को सीधी चुनौती देने वाली बड़ी घटना हुई है। सुशांत गोल्फ सिटी थाने (Sushant Golf City Police Station) में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब गुस्साई भीड़ ने थाने में घुसकर पुलिसवालों पर हमला कर दिया। यह बवाल एक सफाईकर्मी की मौत के मामले में हिरासत में लिए गए आरोपी को पुलिस द्वारा कथित तौर पर छोड़ दिए जाने के बाद शुरू हुआ।READ ALSO:-अलीगढ़ में तनाव: चार मंदिरों की दीवारों पर लिखा गया 'आई लव मोहम्मद', करणी सेना कार्यकर्ता की पिटाई पर ग्रामीणों का हंगामा सफाईकर्मी की संदिग्ध मौत और आक्रोश मौत का मामला: यह पूरा विवाद शहीद पथ स्थित एक गेस्ट हाउस में सफाईकर्मी अरुण रावत (48 वर्ष) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से जुड़ा है। परिजनों ने इसे हत्या का मामला बताते हुए प्रदर्शन किया था। पुलिस की कार्रवाई: पुलिस ने परिजनों के दबाव और पोस्टमार्टम रिपोर्ट (जिसमें दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई थी) के बाद कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया था। बवाल का कारण: आक्रोशित लोगों का आरोप है कि सुशांत गोल्फ सिटी थाने की पुलिस ने गेस्ट हाउस के कमरे में मृत मिले सफाईकर्मी की मौत के मामले में हिरासत में लिए गए आरोपी को जल्द ही छोड़ दिया, जिससे नाराज भीड़ ने थाने पर धावा बोल दिया। पुलिस पर जानलेवा हमला और लाठीचार्ज गुस्साई भीड़ ने थाने पर पत्थरबाजी शुरू कर दी और जबरन थाने में घुसकर पुलिसवालों पर जानलेवा हमला कर दिया। हताहत: इस हिंसक झड़प में लगभग 10 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए, जिनमें कुछ पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस का एक्शन: स्थिति को बेकाबू होते देखकर लखनऊ पुलिस ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मजबूरन लाठी चार्ज करना पड़ा। नियंत्रण: पुलिस ने भीड़ को दौड़ाकर लाठियों से पीटा, जिसके बाद जाकर स्थिति नियंत्रित हुई और भीड़ तितर-बितर हुई। फोर्स तैनात: UP Police के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। आसपास के थानों की भारी फोर्स को सुशांत गोल्फ सिटी थाने के पास तैनात कर दिया गया है ताकि स्थिति सामान्य बनी रहे। आरोपी को छुड़ाने की कोशिश पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हमलावर भीड़ हिरासत में लिए गए आरोपी को जबरन छुड़ाने की मंशा से आई थी। जांच: लखनऊ पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि पुलिस पर हमला करने वालों में कौन-कौन शामिल थे और क्या यह हमला किसी राजनीतिक या आपराधिक साजिश का हिस्सा था। पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एसपी का रुख: वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कानून को हाथ में लेने और पुलिसवालों पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल राजधानी लखनऊ के एक थाने में घुसकर पुलिस पर जानलेवा हमला होना उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटना से यह साफ होता है कि जनता का एक हिस्सा अभी भी कानून और पुलिस प्रशासन पर भरोसा नहीं कर रहा है। पुलिस के लिए जल्द से जल्द सफाईकर्मी की मौत मामले का खुलासा करना और हमलावरों को गिरफ्तार करना एक बड़ी चुनौती है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक सनसनीखेज अपराध का मामला सामने आया है। थाना विभूतिखंड क्षेत्र में इंस्टाग्राम (Instagram) पर हुई दोस्ती के बाद 32 वर्षीय एक विवाहित युवक ने इंटर की छात्रा को होटल में बुलाकर कथित तौर पर रेप किया। यह घटना 22 अक्टूबर की देर रात की है। लड़की के पिता की सूझबूझ से आरोपी युवक को होटल में ही रंगे हाथ पकड़ लिया गया। इस घटना से पूरे शहर में cyber crime के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी पर चिंता बढ़ गई है।READ ALSO:-सुप्रीम कोर्ट का 'हथौड़ा'! मेरठ सेंट्रल मार्केट में 22 दुकानों वाला कांप्लेक्स 25 अक्टूबर को होगा ध्वस्त, व्यापारी खाली कर रहे दुकानें सोशल मीडिया से शुरू हुई थी दोस्ती किशोरी और आरोपी तौकीर आलम की दोस्ती सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए शुरू हुई थी। आरोपी तौकीर alam, जो इंदिरानगर सेक्टर-10 का रहने वाला है, विवाहित है और एक बच्ची का पिता भी है। वह शेयर मार्केट का काम करता है। घटना का दिन: बुधवार, 22 अक्टूबर को दोस्ती का हवाला देकर तौकीर ने किशोरी को विभूतिखंड स्थित डीएलएफ माई पैड (DLF My Pad) में मिलने बुलाया। पार्टी और बेहोशी: घटना वाले दिन तौकीर पहले किशोरी को गोमतीनगर स्थित एक क्लब में लेकर गया, जहाँ दोनों ने पार्टी की। उसके बाद रात करीब 1 बजे उसने डीएलएफ माय पैड होटल में कमरा बुक किया। नशीला पदार्थ पिलाकर किया रेप पुलिस की शिकायत के अनुसार, होटल के कमरे में तौकीर ने किशोरी को कुछ नशीला पदार्थ (Drugged Substance) पिला दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। रेप की वारदात: किशोरी के बेहोश होने के बाद तौकीर ने उसके साथ रेप किया। पिता की सूझबूझ: किशोरी सुबह पिता से कहासुनी के बाद घर से निकली थी, जिसके बाद पिता ने उसकी लोकेशन ट्रेस करनी शुरू कर दी। लोकेशन ट्रेस करते हुए पिता क्लब पहुंचे और फिर होटल, जहाँ उन्होंने आरोपी को अपनी बेटी के पास बेहोश हालत में पाया और उसे मौके पर ही पकड़ लिया। पुलिस को सूचना: पिता ने तत्काल 112 पर कॉल कर घटना की जानकारी दी। मौके पर पहुंची पुलिस आरोपी युवक को थाने ले आई। आरोपी गिरफ्तार और पॉक्सो एक्ट किशोरी को होश में आने पर परिजन उसे लेकर विभूतिखंड थाने पहुंचे, जहाँ घटना की पूरी शिकायत दर्ज कराई गई। इंस्पेक्टर का बयान: इंस्पेक्टर अमर सिंह ने बताया कि किशोरी के पिता की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। धाराएं: आरोपी तौकीर आलम के खिलाफ रेप और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है। आगे की कार्यवाही: पुलिस ने बताया कि जल्द ही पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया जाएगा। सोशल मीडिया फ्रॉड पर चिंता इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर होने वाली दोस्ती के खतरों को उजागर किया है। विशेष रूप से कम उम्र की लड़कियों को इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए फंसाने और धोखाधड़ी करने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। Lucknow Police ने युवाओं को सोशल मीडिया पर अंजान लोगों से दोस्ती करने और मिलने-जुलने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक बेहद अमानवीय और शर्मनाक घटना से हिल गई है। यहाँ काकोरी थाना क्षेत्र स्थित शीतला माता मंदिर की सीढ़ियों पर पेशाब छूट जाने के कारण एक दबंग व्यक्ति ने दलित समुदाय के एक बीमार बुजुर्ग को पेशाब चाटने के लिए मजबूर किया। इस घटना के बाद, बुजुर्ग ने अपमान सहते हुए पेशाब चाटी और पूरा मंदिर पानी से धोया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामले के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना समाज के संवेदनशील तबके के साथ हुए अमानवीय दुर्व्यवहार को दर्शाती है।READ ALSO:-दिवाली पर आतिशबाजी, मेरठ, नोएडा और गाजियाबाद में सांस लेना मुश्किल: AQI 300 पार, प्रदूषण से धुंध नजर आई बीमारी और मजबूरी का फायदा पीड़ित बुजुर्ग, रामपाल, गोवर्धन की रहने वाली हैं और सांस की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। घटना का विवरण: पीड़ित रामपाल ने बताया कि वह सोमवार (20 अक्टूबर 2025) की रात करीब 8 बजे घर की ओर आ रहे थे। सांस फूलने और अत्यधिक थकान के कारण वे शीतला माता मंदिर की सीढ़ियों पर आराम करने बैठ गए। असुविधा: इसी दौरान, बीमारी की हालत में उनकी पेशाब छूट गई और मंदिर की सीढ़ियाँ गीली हो गईं। पोते का बयान: उनके पोते मुकेश कुमार ने पुष्टि की कि बाबा को सांस और हाँफने की समस्या है, जिसके कारण थकान होने पर वे अक्सर कहीं भी रुक जाते हैं। दबंग बोला— 'मंदिर अपवित्र किया, अब पेशाब चाटो' यह घटना तब हुई जब मंदिर के ठीक सामने ज्वैलरी शॉप चलाने वाला आरोपी स्वामी कांत उर्फ पम्मू (Swami Kant alias Pammu) वहाँ पहुँचा। अपमानजनक कृत्य: पम्मू ने बुजुर्ग की मजबूरी पूछे बिना उन्हें भद्दी-भद्दी गालियाँ दीं और चीखकर कहा, "तुमने पूरा मंदिर गंदा कर दिया। अब तुम्हें अपनी पेशाब चाटनी होगी, तभी मंदिर की शुद्धि होगी।" पेशाब चटवाई: अपमानित और बीमार बुजुर्ग को आरोपी के गुस्से के आगे झुकना पड़ा और उन्होंने मजबूरी में अपनी पेशाब चाटी। दुर्व्यवहार: इतना ही नहीं, पम्मू ने बुजुर्ग को पूरा मंदिर पानी से धुलवाया और उन्हें वहाँ से भाग जाने के लिए लात भी मारी। गिरफ्तारी: मंगलवार सुबह पीड़ित परिवार ने काकोरी थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर Police ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी स्वामी कांत उर्फ पम्मू को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी RSS कार्यकर्ता? पीड़ित रामपाल के परिजनों ने आरोप लगाया है कि आरोपी स्वामीकांत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का कार्यकर्ता है। इस बीच, ACP काकोरी शकील अहमद ने मामले की पुष्टि की है। ACP का बयान: उन्होंने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। पीड़ित की मांग: बुजुर्ग रामपाल ने न्याय की मांग करते हुए कहा, "मुझे न्याय चाहिए। जैसे मुझसे पेशाब चटवाई है, वैसे ही पम्मू भी पेशाब चाटे।" कड़ी निंदा और न्याय की मांग इस अमानवीय घटना की स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी निंदा की है। इस खबर के वायरल होने के बाद, प्रशासन से मांग की गई है कि आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में इस तरह के जातिगत और अमानवीय दुर्व्यवहार को रोका जा सके। SC/ST एक्ट के तहत केस आरोपी स्वामीकांत के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। Police इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई कर रही है, ताकि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में दीपावली के त्योहार से ठीक पहले एक बड़ा हादसा हो गया है। आज दोपहर करीब 12:45 बजे फतेहपुर के एमजी कॉलेज ग्राउंड में लगी पटाखा मंडी में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज़ी से फैली कि देखते ही देखते लगभग 70 दुकानें और 50 से अधिक बाइकें जलकर राख हो गईं। इस दौरान मंडी में भारी भीड़ थी, जिससे मौके पर भगदड़ और अफरा-तफरी मच गई। शॉर्ट सर्किट से शुरू हुआ तांडव यह दुर्घटना ऐसे समय में हुई है जब दीपावली के कारण पटाखा मंडी में बड़ी संख्या में लोग पटाखे और आतिशबाजी खरीदने पहुंचे हुए थे। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, आग लगने की शुरुआत शॉर्ट सर्किट से हुई। एक दुकान में आग लगने के बाद, पटाखों के कारण यह तुरंत बेकाबू हो गई और आसपास की दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। आग की चपेट में आने से 70 दुकानें और 50 से अधिक दोपहिया वाहन पूरी तरह से जलकर नष्ट हो गए हैं। व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। Read Also : AI Cyber Crime Alert: यूपी के बिजनौर में AI से बनी युवती की अश्लील वीडियो वायरल, ब्लैकमेलिंग के आरोप में 3 गिरफ्तार बचाव कार्य और घायलों की स्थिति आग लगने की खबर मिलते ही मंडी में भगदड़ मच गई। कई लोग खुद को बचाने के प्रयास में घायल हुए हैं, और कुछ लोगों के आग के बीच फंसे होने की भी आशंका है। पुलिस और प्रशासन की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं। फायर ब्रिगेड को बुलाकर युद्ध स्तर पर आग बुझाने का काम शुरू किया गया। आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन हताहतों की सही संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया है। प्रशासन ने घटना के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है, हालांकि प्रथम दृष्टया कारण शॉर्ट सर्किट ही बताया गया है। प्रशासन की तत्परता स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के बाद लोगों को मंडी से बाहर निकालने का काम प्राथमिकता पर किया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें आग की लपटें और धुएं का गुबार साफ देखा जा सकता है। यह घटना एक बार फिर सुरक्षा नियमों के पालन और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पटाखा मंडी लगाने की अनुमति देने पर गंभीर सवाल उठाती है। लोगों ने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। इस आगजनी से उन छोटे व्यापारियों का भारी नुकसान हुआ है, जिन्होंने दीपावली के लिए भारी मात्रा में पटाखे खरीदे थे। प्रशासन ने नुकसान का आकलन करने और प्रभावित व्यापारियों के लिए संभावित मुआवजे पर विचार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।