मेरठ

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मेरठ: बसंत पंचमी की खुशियां मातम में बदलीं; दोस्तों के सामने मां ने पतंग उड़ाने से रोका, तो 9वीं के छात्र ने लगा ली फांसी

कहते हैं कि बच्चों का मन कांच की तरह नाजुक होता है, जरा सी ठेस लगे तो बिखर जाता है। लेकिन कभी-कभी यह बिखराव इतना भयानक होता है कि पूरा परिवार हमेशा के लिए टूट जाता है। उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी ही खबर सामने आई है, जिसने हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहाँ एक मां का अपने बेटे को पढ़ाई के लिए टोकना और दोस्तों के सामने डांटना इतना भारी पड़ गया कि 14 साल के बेटे ने अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर ली।Read also:-UGC के 'नए कानून' से सुलग उठा उत्तर भारत: सवर्णों ने भाजपाइयों के लिए टांगे 'नो एंट्री' के बोर्ड, करणी सेना ने फूंका आंदोलन का बिगुल   आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगे, दोस्तों का शोर और बसंत का उल्लास—सब कुछ एक पल में सन्नाटे में बदल गया। शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि आज की पीढ़ी के घटते धैर्य और बढ़ते गुस्से का एक खौफनाक उदाहरण है।   आइये, इस पूरे मामले की गहराई में जाते हैं और समझते हैं कि आखिर उस डेढ़ घंटे में ऐसा क्या हुआ जिसने हंसते-खेलते अनंत को मौत के गले लगाने पर मजबूर कर दिया।   घटनाक्रम: वह काली दोपहर यह घटना मेरठ के नौचंदी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पॉश इलाके शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की है। तारीख थी 26 जनवरी, यानी गणतंत्र दिवस। पूरा देश जश्न में डूबा था और बसंत पंचमी के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पतंगबाजी का जोर था।   अनंत चौहान (14 वर्ष), जो विद्या मंदिर स्कूल में कक्षा 9 का होनहार छात्र था, पिछले तीन दिनों से लगातार पतंगबाजी का लुत्फ उठा रहा था। उसके पिता, विनय चौहान, जो पेशे से ड्राइवर हैं, अपनी मेहनत से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार की तरह उनकी भी अपने बेटे से यही उम्मीद थी कि वह पढ़-लिखकर कुछ बड़ा करे।   समय: सुबह 11:00 बजे अनंत अपने घर की छत पर दोस्तों के साथ मौजूद था। पिछले दो दिनों से बारिश और मौसम खराब होने के बावजूद उसका पतंग उड़ाने का जुनून कम नहीं हुआ था। 26 जनवरी की छुट्टी होने के कारण वह सुबह ही छत पर चढ़ गया था। इसी दौरान उसकी मां छत पर पहुंची। बेटे को लगातार तीसरे दिन पढ़ाई छोड़कर पतंग उड़ाते देख उनका सब्र जवाब दे गया।   मां ने स्वाभाविक गुस्से में, जैसा कि हर भारतीय घर में होता है, अनंत को डांट दिया। लेकिन यहाँ एक गलती हो गई—डांट अकेले में नहीं, बल्कि उसके दोस्तों के सामने पड़ी। मां ने कहा, "अब पतंग नहीं उड़ाओ, जाकर पढ़ाई करो। पिछले 3 दिन से तो पतंग ही उड़ा रहे हो।"   समय: दोपहर 11:15 बजे से 12:30 बजे के बीच मां की यह बात अनंत के दिल पर तीर की तरह लगी। दोस्तों के सामने अपमानित महसूस कर वह गुस्से में तमतमाता हुआ छत से नीचे आया और सीधे मकान की दूसरी मंजिल पर बने अपने कमरे में चला गया। उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।   नीचे घर में किसी को अंदाजा नहीं था कि ऊपर कमरे में अनंत क्या सोच रहा है। मां को लगा कि बेटा गुस्से में है, थोड़ी देर में शांत हो जाएगा और पढ़ने लगेगा। पिता अपने काम में व्यस्त थे या घर के अन्य सदस्यों को लगा कि यह सामान्य 'टीनेज टेंट्रम' (किशोरावस्था का नखरा) है। लेकिन कमरे के अंदर अनंत जिंदगी और मौत का फैसला ले रहा था।   समय: दोपहर 12:30 बजे करीब डेढ़ घंटे बीत चुके थे। छत पर अनंत के दोस्त अभी भी पतंग उड़ा रहे थे। जब अनंत काफी देर तक वापस नहीं आया, तो उसके दोस्तों को चिंता हुई। वे पतंग समेटकर नीचे उतरे और अनंत को खोजते हुए उसके कमरे की तरफ गए।   दरवाजा या तो खुला था या दोस्तों ने खिड़की से झांका—दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अनंत का शरीर दुपट्टे के सहारे पंखे/हुक से लटका हुआ था।   चीख-पुकार और अस्पताल की दौड़ दोस्तों की चीख ने पूरे घर को हिला दिया। उनकी आवाज सुनकर अनंत के माता-पिता और अन्य परिजन बदहवास होकर दौड़ते हुए दूसरी मंजिल पर पहुंचे। सामने का मंजर देखकर मां वहीं बेसुध होने लगीं। जिस बेटे को अभी डेढ़ घंटे पहले पढ़ाई के लिए डांटा था, वह अब शांत हो चुका था।   आनन-फानन में पड़ोसियों की मदद से अनंत को फंदे से नीचे उतारा गया। उम्मीद की एक धुंधली किरण बाकी थी कि शायद सांसें चल रही हों। परिजन उसे लेकर तुरंत पास के लोकप्रिय अस्पताल भागे।   अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में डॉक्टरों ने अनंत की जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एक 14 साल का बच्चा, जो सुबह तक आसमान में पेंच लड़ा रहा था, अब दुनिया छोड़ चुका था।   पुलिस कार्यवाही और परिवार का इनकार घटना की सूचना मिलते ही नौचंदी थाने की पुलिस मौके पर और अस्पताल पहुंची। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत शव का पंचनामा भरने और पोस्टमार्टम कराने की बात कही। यह एक मानक प्रक्रिया है ताकि मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सके।   हालांकि, अनंत के परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि यह एक दुर्घटना है और वे अपने बेटे के शरीर की चीर-फाड़ नहीं चाहते। वे पहले से ही गहरे सदमे में थे और कानूनी पचड़ों में नहीं पड़ना चाहते थे।   चूंकि मामला आत्महत्या का था और परिवार की तरफ से कोई संदिग्ध परिस्थिति या किसी के खिलाफ शिकायत नहीं जताई गई, पुलिस ने परिजनों की भावनाओं और कानूनी प्रावधानों का सम्मान करते हुए शव को बिना पोस्टमार्टम के उन्हें सौंप दिया।   "दोस्तों के सामने बेइज्जती": एक जानलेवा ट्रिगर इस पूरी घटना में जो सबसे महत्वपूर्ण पहलू उभरकर आया है, वह है—"दोस्तों के सामने डांटना"।   मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, 13 से 18 वर्ष की उम्र (किशोरावस्था) में बच्चों के लिए उनका 'पीयर ग्रुप' (दोस्तों का समूह) सबसे ज्यादा अहम होता है। इस उम्र में बच्चों के अंदर 'Self-Identity' (आत्म-पहचान) बन रही होती है। उनके लिए दोस्तों के बीच उनकी छवि, उनके माता-पिता की राय से भी ज्यादा मायने रखती है।   अहंकार (Ego) की चोट: जब मां ने दोस्तों के सामने अनंत को डांटा, तो उसे अपनी 'इमेज' खराब होती महसूस हुई। उसे लगा कि अब दोस्त उसका मजाक उड़ाएंगे। आवेग (Impulse): किशोरावस्था में दिमाग का 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (जो निर्णय लेने और भावनाओं को नियंत्रित करने का काम करता है) पूरी तरह विकसित नहीं होता। यही कारण है कि किशोर गुस्से में बिना परिणाम सोचे घातक कदम उठा लेते हैं। अनंत के साथ भी यही हुआ। वह गुस्सा बर्दाश्त नहीं कर पाया।   क्या सिर्फ एक डांट वजह थी? सतही तौर पर देखने पर लगता है कि मां की डांट की वजह से बच्चे ने जान दे दी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदम के पीछे कई परतें होती हैं:   एग्जाम का दबाव: जनवरी का अंत और फरवरी की शुरुआत बच्चों के लिए तनावपूर्ण होती है क्योंकि फाइनल एग्जाम (Final Exams) सिर पर होते हैं। हो सकता है अनंत के मन में पढ़ाई को लेकर पहले से ही तनाव हो, और मां की डांट ने उस तनाव को 'ट्रिगर' कर दिया हो। संवाद की कमी: क्या अनंत अपनी बातें अपने माता-पिता से शेयर करता था? अक्सर जब बच्चों और पेरेंट्स के बीच 'दोस्ताना संवाद' की कमी होती है, तो बच्चे अपनी हताशा जाहिर नहीं कर पाते और उसे अंदर ही अंदर घोंटते रहते हैं। सहनशीलता की कमी (Low Tolerance): आज की पीढ़ी में 'ना' सुनने की आदत या अपमान सहने की शक्ति कम होती जा रही है। डिजिटल युग में 'इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन' (तुरंत संतुष्टि) की आदत ने धैर्य को कम कर दिया है।   अभिभावकों के लिए वेक-अप कॉल: क्या करें, क्या न करें?  मेरठ की यह घटना हर उस माता-पिता के लिए एक चेतावनी है जिनके घर में बढ़ते बच्चे (Teenagers) हैं। परवरिश अब सिर्फ खाना खिलाने और स्कूल भेजने तक सीमित नहीं है, यह एक मनोवैज्ञानिक जिम्मेदारी बन गई है।   विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई 5 महत्वपूर्ण बातें: सार्वजनिक रूप से न डांटें (No Public Shaming): सबसे महत्वपूर्ण नियम—अपने बच्चे को कभी भी उसके दोस्तों, रिश्तेदारों या पड़ोसियों के सामने न डांटें। अगर आपको उसकी गलती बतानी है, तो उसे अकेले में ले जाकर समझाएं। सार्वजनिक डांट बच्चे के आत्म-सम्मान को कुचल देती है। गुस्से को पहचानें: अगर आपका बच्चा डांटने पर बहुत ज्यादा आक्रामक हो रहा है या बिल्कुल चुप हो गया है, तो इसे नजरअंदाज न करें। अनंत कमरे में गया और डेढ़ घंटे तक बाहर नहीं आया। अगर उसी समय मां या पिता जाकर उससे बात कर लेते, उसके सिर पर हाथ फेर देते, तो शायद यह घटना नहीं होती। तुलना न करें: "शर्मा जी के बेटे को देखो", "तुम्हारे दोस्त कितना पढ़ रहे हैं"—ऐसी तुलना बच्चों को डिप्रेशन में डाल देती है। हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। हॉबीज का सम्मान करें: अनंत को पतंग उड़ाना पसंद था। पढ़ाई जरूरी है, लेकिन अगर साल में एक-दो दिन त्योहार पर बच्चा खेल रहा है, तो उसे थोड़ी छूट दी जा सकती है। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाने में उसकी मदद करें, उसे रोके नहीं। कम्युनिकेशन गैप खत्म करें: अपने बच्चों से रोज कम से कम 20 मिनट बिना किसी उपदेश के बात करें। उनकी सुनें, अपनी सुनाएं। ताकि जब वे मुसीबत में हों, तो कमरे का दरवाजा बंद करने के बजाय आपके पास आएं।   पड़ोस और स्कूल में पसरा मातम शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की उस गली में अब सन्नाटा है जहाँ कल तक शोर था। अनंत के दोस्तों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार यही कह रहे हैं, "अगर हमें पता होता कि वो ऐसा कर लेगा, तो हम उसे डांट पड़ने ही नहीं देते, या हम उसे अकेला नहीं छोड़ते।"   विद्या मंदिर स्कूल में, जहाँ अनंत पढ़ता था, वहां भी शोक की लहर है। शिक्षकों और सहपाठियों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि उनकी क्लास का एक छात्र अब कभी वापस नहीं आएगा। स्कूल प्रशासन भी अब विचार कर रहा है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' पर काउंसलिंग सेशन आयोजित किए जाएं।   सामाजिक परिदृश्य: पतंगबाजी का जुनून और जोखिम पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मेरठ, हापुड़ और मुजफ्फरनगर में बसंत पंचमी और स्वतंत्रता/गणतंत्र दिवस पर पतंगबाजी का एक अलग ही जुनून होता है। यह संस्कृति का हिस्सा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह जुनून जानलेवा होता जा रहा है।   कभी चाइनीज मांझे से राहगीरों की गर्दन कटने की खबरें आती हैं। कभी छत से गिरकर बच्चों की मौत होती है। और अब, पतंग उड़ाने से रोकने पर आत्महत्या जैसा कदम। यह दर्शाता है कि मनोरंजन का एक साधन कैसे जीवन और मरण का प्रश्न बन गया है। समाज को भी यह सोचना होगा कि त्योहारों को उत्सव की तरह कैसे मनाया जाए, न कि उन्माद की तरह।   एक अधूरा सपना अनंत के पिता विनय चौहान एक ड्राइवर हैं। उन्होंने अपने बेटे के लिए न जाने कितने सपने देखे होंगे। वे शायद धूप और बारिश में गाड़ी चलाते वक्त यही सोचते होंगे कि मेरा बेटा पढ़-लिखकर अफ़सर बनेगा, एसी कमरे में बैठेगा। लेकिन एक क्षण के आवेग ने उन सपनों की डोरी हमेशा के लिए काट दी।   यह घटना हमें सिखाती है कि जिंदगी किसी भी परीक्षा, किसी भी पतंग और किसी भी डांट से कहीं ज्यादा कीमती है।   हमें अपने बच्चों को यह सिखाना होगा कि "विफलता" या "डांट" जीवन का अंत नहीं है। और हमें खुद को यह सिखाना होगा कि बच्चों को पालना, कांच के बर्तन को संभालने जैसा है—बहुत सावधानी, बहुत प्यार और बहुत समझदारी की जरूरत है।   अनंत तो चला गया, लेकिन अनंत सवाल छोड़ गया है। उम्मीद है कि मेरठ की इस घटना से हम सब सबक लेंगे ताकि किसी और घर का चिराग इस तरह न बुझे।   संक्षिप्त सारणी (Quick Summary) विवरण जानकारी मृतक का नाम अनंत चौहान उम्र/कक्षा 14 वर्ष, कक्षा 9 पिता का नाम विनय चौहान (पेशा: ड्राइवर) घटना स्थल शास्त्रीनगर सेक्टर-3, मेरठ घटना की तारीख 26 जनवरी (सोमवार) वजह मां द्वारा दोस्तों के सामने डांटना मृत्यु का कारण फांसी (आत्महत्या) पुलिस थाना नौचंदी थाना   (नोट: यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया अकेले न रहें। अपने परिवार से बात करें या हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। जीवन अमूल्य है।)

Unknown जनवरी 26, 2026 0
Regarding the Mirzapur incident, Babita Chauhan described it as gym jihad
Meerut: 'लव जिहाद' अब पुराना हुआ, यूपी में अब 'जिम जिहाद' का नया पैंतरा: बबीता चौहान ने कोबरा और सपोले का जिक्र कर दी बड़ी चेतावनी

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने मिर्जापुर की हालिया घटना को लेकर एक बेहद गंभीर और बड़ा बयान दिया है। रविवार को मिर्जापुर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अब लव जिहाद का स्वरूप बदल गया है। मिर्जापुर में जो हुआ, वह केवल लव जिहाद नहीं है, बल्कि अगर इसे 'जिम जिहाद' (Gym Jihad) कहा जाए, तो यह कतई गलत नहीं होगा।READ ALSO:-आगरा का 'संजय प्लेस हॉरर': ऑफिस के सन्नाटे में प्यार का खूनी अंत, प्रेमी ने प्रेमिका के सिर-पैर काटे, यमुना पुल पर खुले बोरे ने उगला मौत का सच   बबीता चौहान का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने न केवल जिम संचालकों और ट्रेनरों की मंशा पर सवाल उठाए, बल्कि बुर्के की आड़ में होने वाली गतिविधियों और अभिभावकों की जिम्मेदारी पर भी खुलकर बात की।   इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर बबीता चौहान ने जिम जिहाद को लेकर क्या तर्क दिए, मिर्जापुर का वह कौन सा मामला है जिसने इस बहस को जन्म दिया, और महिला सुरक्षा को लेकर आयोग अब क्या कदम उठाने जा रहा है।   क्या है 'जिम जिहाद' (Gym Jihad)? बबीता चौहान का तर्क बबीता चौहान ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि धर्म विशेष के युवकों द्वारा नाम बदलकर या अपनी पहचान छिपाकर हिंदू युवतियों को प्रेम जाल में फंसाना अब पुराने तरीके (लव जिहाद) से आगे बढ़कर 'संस्थानिक जिहाद' का रूप ले रहा है। उन्होंने विशेष रूप से जिम (Gym) का उल्लेख करते हुए इसे जिम जिहाद की संज्ञा दी।   उन्होंने कहा, "मिर्जापुर की घटना अब केवल लव जिहाद नहीं रही है। अगर इसे जिम जिहाद कहा जाए तो कतई गलत नहीं होगा। जिम में अब जितना जिहाद चल रहा है, उतना कहीं और नहीं चल रहा।"   उनके अनुसार, जिम एक ऐसी जगह है जहाँ युवा लड़कियां अपनी फिटनेस और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जाती हैं। वहां वे अपने ट्रेनर पर भरोसा करती हैं। इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ ट्रेनर, जिनकी मानसिकता दूषित है, उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं। बबीता चौहान ने कहा कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र जैसा प्रतीत होता है, जहाँ शारीरिक प्रशिक्षण की आड़ में मानसिक ब्रेनवॉश किया जा रहा है।   मिर्जापुर कांड और रमीज का कनेक्शन बबीता चौहान का यह बयान मिर्जापुर में हुई एक विशिष्ट घटना के संदर्भ में आया है। दरअसल, मिर्जापुर में एक जिम ट्रेनर रमीज (Rameez) पर आरोप है कि उसने एक युवती को अपने प्रेम जाल में फंसाया। आरोप है कि जिम ट्रेनिंग के दौरान नजदीकी बढ़ाई गई और बाद में युवती का शोषण किया गया।   बबीता चौहान ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि "लव जिहाद को बढ़ावा देने वाला वह शख्स कोबरा सांप था। यह जो जिम जिहाद में शामिल रमीज जैसे लोग हैं, यह उसी के पैदा किए गए सपोले हैं।"   उन्होंने प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार सख्त है। जिम जिहाद के मामले सामने आने के बाद कई लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं और जो बचे हैं, उन्हें भी जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।   महिला ट्रेनर की अनिवार्यता पर जोर एक साल पहले उत्तर प्रदेश महिला आयोग ने एक प्रस्ताव रखा था कि महिलाओं के जिम और योग केंद्रों में महिला ट्रेनर का होना अनिवार्य किया जाए। अपने इस पुराने बयान को याद करते हुए बबीता चौहान ने कहा, "मुझे अपनी एक साल पुरानी वह बात याद आ रही है जिसमें मैंने जिम में महिला ट्रेनरों को शामिल किए जाने और बड़े ब्यूटी पार्लर व बुटीक में महिलाओं को अवश्य स्थान दिए जाने पर जोर दिया था।"   उनका मानना है कि: सुरक्षा: अगर महिला जिम में महिला ट्रेनर होंगी, तो 'बैड टच' या गलत नीयत से छूने की घटनाओं पर लगाम लगेगी। रोजगार: इससे महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा। बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। विश्वास: परिवार वाले अपनी बेटियों को जिम भेजने में सुरक्षित महसूस करेंगे।   आयोग का मानना है कि जिम, बुटीक और टेलरिंग की दुकानों पर जहां माप लेने का काम होता है, वहां पुरुषों के बजाय महिलाओं की नियुक्ति से 'जिम जिहाद' जैसे अपराधों को काफी हद तक रोका जा सकता है।   "झांगुर बाबा" और जिहादी जाल पत्रकारों से वार्ता के दौरान बबीता चौहान ने एक स्थानीय संदर्भ या प्रतीकात्मक रूप में "झांगुर बाबा" का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सब उसी झांगुर का फैलाया हुआ जाल है। यह शब्दावली इस बात की ओर इशारा करती है कि वे इसे किसी एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह या मानसिकता (इकोसिस्टम) का हिस्सा मानती हैं।   उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "इनसे बचने के लिए हमें सजग रहना होगा। क्योंकि जिम, बुटीक व ब्यूटी पार्लर जैसे स्थान उनके निशाने पर हैं।"   बुर्के पर विवादास्पद और सीधा बयान बबीता चौहान ने बुर्के को लेकर भी अपनी बेबाक राय रखी। जब उनसे बुर्के को लेकर उनके पुराने बयानों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "आज बुर्के के पीछे क्या नहीं हो रहा, यह सब जानते हैं।"   उनके प्रमुख बिंदु इस प्रकार थे: पहचान छिपाना: उनका कहना है कि बुर्के की आड़ में कई बार अपराधी अपनी पहचान छिपा लेते हैं। सुरक्षा का प्रश्न: उन्होंने उदाहरण दिया कि कई ज्वेलर्स ने सुरक्षा कारणों से अपनी दुकानों में बुर्का पहनकर आने वाली महिलाओं को प्रतिबंधित कर दिया है, ताकि चोरी या डकैती की वारदातों को रोका जा सके। सुनवाई के दौरान: उन्होंने बताया कि जब वे आयोग में सुनवाई करती हैं, तब भी कई महिलाएं बुर्का पहनकर आती हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "सवाल यह है उनके सामने बुर्का पहन के आने की क्या जरूरत है?" 6 साल की बच्ची का उदाहरण: अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने एक दर्दनाक घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "6 साल की बच्ची के साथ बुर्के में मौजूद हैवान ने गलत हरकत की, यह घटना किसी से छिपी नहीं है।"   यह बयान स्पष्ट करता है कि महिला आयोग अध्यक्ष के अनुसार, परिधान की आड़ में सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और पहचान सुनिश्चित करना अनिवार्य है। अभिभावकों के लिए सलाह: "बच्चियों से संवाद बढ़ाएं"   बबीता चौहान ने इस समस्या का एक बड़ा कारण परिवारों में बढ़ती दूरियों को बताया। उन्होंने कहा कि जिम जिहाद या लव जिहाद जैसे मामलों में फंसने का एक कारण यह भी है कि युवतियां अपने माता-पिता से कटी हुई हैं।   उन्होंने अभिभावकों और महिलाओं को निम्नलिखित सलाह दी: बैकग्राउंड चेक: महिलाएं अपना दिमाग खोलकर किसी भी काम में शामिल हों। जिससे मिल रही हैं या जिससे दोस्ती कर रही हैं, उसकी पृष्ठभूमि (Background) जरूर देख लें। संवादहीनता खत्म करें: घरों के भीतर अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहने की जो प्रथा शुरू हो गई है, उसे खत्म करना होगा। माता-पिता को अपने बच्चों से बात करनी चाहिए ताकि वे बाहर की समस्याओं को घर पर साझा कर सकें। सुरक्षा ऑडिट: माता-पिता यह ध्यान रखें कि उनके बच्चे जिस जिम या सेंटर में जा रहे हैं, वह उनके लिए सुरक्षित है या नहीं।   आयोग का एक्शन प्लान: जागरूकता अभियान उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग केवल बयानों तक सीमित नहीं है। अध्यक्ष बबीता चौहान ने बताया कि आयोग ने ऐसे प्रकरणों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने एक विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की है।   जागरूकता: आयोग स्कूल, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जाकर महिला वर्ग को जागरूक करेगा। निगरानी: जिम और योगा सेंटर्स की निगरानी के लिए प्रशासन के साथ मिलकर काम किया जाएगा। पुलिस की भूमिका: उन्होंने कहा कि "जिहादियों के पीछे पुलिस पड़ चुकी है।" यूपी पुलिस मिशन शक्ति और अन्य अभियानों के तहत महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।   जिम जिहाद: एक सामाजिक चुनौती बबीता चौहान का "जिम जिहाद" शब्द का प्रयोग करना दर्शाता है कि प्रशासन अब अपराध के बदलते तरीकों को डिकोड कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जिम एक ऐसा स्थान है जहाँ शारीरिक आकर्षण और स्वास्थ्य चर्चा के बीच भावनात्मक संबंध बनाना आसान होता है। इसी मनोवैज्ञानिक पहलू का फायदा उठाकर कुछ अपराधी प्रवृति के लोग युवतियों का शोषण करते हैं।   आयोग का मानना है कि जब तक जिम संचालक पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराते और महिला ट्रेनर्स की नियुक्ति नहीं करते, तब तक यह खतरा बना रहेगा।   उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान का बयान यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार और आयोग महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है। मिर्जापुर की घटना को जिम जिहाद (Gym Jihad) का नाम देकर उन्होंने समाज को एक नए खतरे के प्रति आगाह किया है।   चाहे वह बुर्के के पीछे की संदिग्ध गतिविधियों का मुद्दा हो या जिम और ब्यूटी पार्लर में पुरुष कर्मचारियों द्वारा शोषण का, आयोग ने साफ कर दिया है कि अब "आंख मूंदकर भरोसा करने का जमाना नहीं है।" बबीता चौहान के अनुसार, पुलिस की सख्ती के साथ-साथ पारिवारिक जागरूकता ही इस 'जाल' को काट सकती है। आने वाले दिनों में यूपी में जिम और योग सेंटर्स के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश देखने को मिल सकते हैं।   यूपी महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने मिर्जापुर दौरे के दौरान कहा कि अब लव जिहाद का तरीका बदलकर 'जिम जिहाद' हो गया है। उन्होंने जिम ट्रेनर रमीज के मामले का हवाला देते हुए जिम और ब्यूटी पार्लर्स में महिला कर्मचारियों की अनिवार्यता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने बुर्के की आड़ में हो रहे अपराधों और अभिभावकों की सतर्कता पर भी बेबाक राय रखी।

Unknown जनवरी 26, 2026 0
Kacha Badam Fame Anjali Aroras Boyfriend Akash Sansanwal Arrested in Meerut for Using Fake MLA Pass
Meerut: 'कच्चा बादाम' गर्ल अंजलि अरोड़ा के मंगेतर आकाश संसनवाल गिरफ्तार; सांसद का फर्जी पास लगाकर दिखा रहे थे 'भौकाल', मेरठ पुलिस ने टोल प्लाजा पर दबोचा

मेरठ (Meerut): उत्तर प्रदेश पुलिस, विशेषकर मेरठ पुलिस ने वीआईपी कल्चर (VIP Culture) और नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में रविवार को मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर एक हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी हुई जिसने सोशल मीडिया जगत में हलचल मचा दी है। मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और 'कच्चा बादाम' (Kacha Badam) गाने पर रील्स बनाकर रातों-रात स्टार बनीं अंजलि अरोड़ा (Anjali Arora) के मंगेतर (बॉयफ्रेंड) आकाश संसनवाल (Akash Sansanwal) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।READ ALSO:-UP Weather Alert: यूपी में मौसम का 'डबल अटैक', पहाड़ों की बर्फबारी के बाद अब बारिश बढ़ाएगी मुसीबत; 27 से 29 जनवरी तक महा-अलर्ट जारी   यह गिरफ्तारी किसी साधारण यातायात नियम के उल्लंघन के लिए नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध के लिए की गई है। आकाश संसनवाल अपनी स्कॉर्पियो कार पर सांसद (MP) का फर्जी पास लगाकर घूम रहे थे। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के मद्देनजर चल रही हाई-अलर्ट चेकिंग के दौरान काशी टोल प्लाजा पर पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। पुलिस ने न केवल आकाश को हिरासत में लिया, बल्कि उनकी गाड़ी को भी सीज कर दिया है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मेरठ पुलिस द्वारा जनपद में सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत टोल प्लाजा एवं प्रमुख स्थलों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। #UPPolice #MeerutPolice@adgzonemeerut@Uppolice@dgp@digrangemeerut pic.twitter.com/mfyswlEXro — MEERUT POLICE (@meerutpolice) January 25, 2026   घटनास्थल का आँखों देखा हाल: काशी टोल प्लाजा पर क्या हुआ? रविवार का दिन पुलिस प्रशासन के लिए बेहद व्यस्त और संवेदनशील था। 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के उपलक्ष्य में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी। खुफिया इनपुट और सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते दिल्ली से सटे सभी बॉर्डर्स और टोल प्लाजा पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। सीओ ब्रह्मपुरी का नेतृत्व: मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे (Meerut-Delhi Expressway) स्थित काशी टोल प्लाजा पर सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना (CO Saumya Asthana) के नेतृत्व में पुलिस टीम तैनात थी। हर आने-जाने वाली गाड़ी, विशेषकर जिन पर काली फिल्म, हूटर या वीआईपी पास लगे थे, उनकी बारीकी से जांच की जा रही थी। फर्जी पास का भंडाफोड़: दोपहर के समय दिल्ली की तरफ से एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो कार तेज गति से मेरठ की ओर आ रही थी। कार के शीशे पर 'सांसद' (Member of Parliament) का पास और स्टीकर लगा हुआ था। सामान्यतः पुलिस वीआईपी पास देखकर गाड़ियां छोड़ देती है, लेकिन सीओ सौम्या अस्थाना की मुस्तैदी ने ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने गाड़ी को रुकवाया और पास की वैधता की जांच की।   जांच में पाया गया कि कार के विंडशील्ड पर चिपका हुआ पास पूरी तरह से फर्जी (Fake) था। कार चालक कोई सांसद या विधायक नहीं, बल्कि दिल्ली के कटवारिया सराय निवासी आकाश संसनवाल थे। पूछताछ में आकाश संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल प्रभाव से उन्हें हिरासत में ले लिया और परतापुर थाने भेज दिया।   कौन हैं आकाश संसनवाल? (Profile of the Accused) गिरफ्तारी की खबर आते ही लोगों में यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई कि आखिर आकाश संसनवाल कौन हैं।   पहचान: आकाश संसनवाल मुख्य रूप से दिल्ली के किशनगढ़ थाना क्षेत्र के कटवारिया सराय के रहने वाले हैं। सेलिब्रिटी कनेक्शन: आकाश की चर्चा मुख्य रूप से अंजलि अरोड़ा के साथ उनके संबंधों को लेकर होती रही है। वे अंजलि अरोड़ा के बॉयफ्रेंड बताए जाते हैं और कई मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें अंजलि का मंगेतर भी बताया गया है। सोशल मीडिया उपस्थिति: आकाश अक्सर अंजलि अरोड़ा के साथ उनके व्लॉग्स (Vlogs) और इंस्टाग्राम रील्स में नजर आते रहते हैं। दोनों की केमिस्ट्री को फैंस काफी पसंद करते हैं। आरोप: उन पर आरोप है कि उन्होंने टोल टैक्स बचाने और पुलिस का रौब झाड़ने के लिए अपनी निजी गाड़ी पर फर्जी तरीके से जनप्रतिनिधि का पास लगाया था।   अंजलि अरोड़ा: एक नजर (The Celebrity Context) इस खबर के वायरल होने की मुख्य वजह अंजलि अरोड़ा का नाम जुड़ना है। अंजलि अरोड़ा आज के दौर की एक बड़ी डिजिटल स्टार हैं।   वायरल फेम: अंजलि को सबसे ज्यादा लोकप्रियता 'कच्चा बादाम' गाने पर डांस रील बनाने से मिली थी। उनकी वह रील इतनी वायरल हुई कि वे इंटरनेट सेंसेशन बन गईं। रियलिटी शो: इसके बाद उन्होंने कंगना रनौत के रियलिटी शो 'लॉक-अप' (Lock Upp) में हिस्सा लिया, जहां मुनव्वर फारुकी के साथ उनकी दोस्ती और गेम ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। फैन फॉलोइंग: इंस्टाग्राम पर उनके करोड़ों फॉलोअर्स हैं। अपने पार्टनर की गिरफ्तारी की खबर से उनके फैंस भी हैरान हैं।   पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन': 16 चालकों पर एक्शन, 5 गाड़ियां सीज रविवार को हुई यह कार्रवाई केवल आकाश संसनवाल तक सीमित नहीं थी। मेरठ पुलिस ने वीआईपी कल्चर का दुरुपयोग करने वाले कई लोगों को सबक सिखाया। पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाकर ऐसे लोगों को चिह्नित किया जो फर्जी पहचान के सहारे कानून को ठेंगा दिखा रहे थे।   अन्य आरोपी और गिरफ्तारियां: पुलिस ने कुल 5 अलग-अलग कार चालकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उनकी गाड़ियां सीज की हैं। ये सभी अपनी गाड़ियों पर विधायक (MLA) या सांसद (MP) का फर्जी स्टीकर लगाकर घूम रहे थे। आकाश के अलावा अन्य आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:   आशीष: निवासी ग्राम नंगला हुकमसिंह, थाना गौतमबुधनगर। कपिल प्रजापति: निवासी विजय विहार, रोहिणी, दिल्ली। दानिश चौधरी: निवासी थाना मसूरी, गाजियाबाद। कर्मवीर सिंह: निवासी दयालपुरा कॉलोनी, खतौली।   इन सभी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि कानून के सामने कोई वीआईपी नहीं है, और फर्जीवाड़ा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।   16 वाहनों का चालान: इसके अलावा, पुलिस ने यातायात नियमों के उल्लंघन पर भी शिकंजा कसा।   ब्लैक फिल्म (Black Film): कई गाड़ियों पर काली फिल्म चढ़ी मिली, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। हूटर और सायरन: निजी वाहनों पर पुलिस सायरन या हूटर का इस्तेमाल करने वालों पर भी कार्रवाई की गई। कुल 16 वाहन चालकों के खिलाफ चालान और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की गई।   क्यों गंभीर है यह मामला? (Legal and Security Implications) गणतंत्र दिवस (Republic Day) भारत का राष्ट्रीय पर्व है और इस मौके पर आतंकी गतिविधियों की आशंका के चलते सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर रहती हैं। ऐसे संवेदनशील समय में फर्जी पास लगाकर घूमना केवल एक यातायात उल्लंघन नहीं, बल्कि एक गंभीर सुरक्षा चूक (Security Breach) का प्रयास माना जाता है।   सुरक्षा को खतरा: फर्जी पास लगी गाड़ियां अक्सर पुलिस चेकपोस्ट से बिना चेकिंग के निकल जाती हैं। अगर ऐसी गाड़ी में कोई संदिग्ध व्यक्ति या सामग्री हो, तो यह देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। धोखाधड़ी और जालसाजी: किसी संवैधानिक पद (जैसे सांसद या विधायक) के प्रतीक का फर्जी इस्तेमाल करना भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत धोखाधड़ी और प्रतिरूपण (Impersonation) का अपराध है। टोल टैक्स की चोरी: अक्सर लोग टोल टैक्स बचाने के लिए ऐसे हथकंडे अपनाते हैं, जो राजस्व की हानि है।   पुलिस अधिकारी का बयान: सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा, "26 जनवरी की सुरक्षा को देखते हुए हम जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं। चेकिंग के दौरान एक स्कॉर्पियो समेत 5 गाड़ियां ऐसी मिलीं जिन पर जनप्रतिनिधियों के फर्जी पास लगे थे। आकाश संसनवाल और अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर वाहनों को सीज कर दिया गया है। जांच जारी है कि ये पास उन्होंने कहां से बनवाए थे।"   वीआईपी कल्चर और 'भौकाल' की सनक पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP) और दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में गाड़ियों पर जातिसूचक शब्द लिखवाना, हूटर लगवाना, या फर्जी पुलिस/विधायक का स्टीकर लगवाना एक फैशन बन गया है। इसे स्थानीय भाषा में 'भौकाल' (रौब जमाना) कहा जाता है।   युवा अक्सर सोशल मीडिया पर रील्स बनाने या समाज में अपना रसूख दिखाने के लिए ऐसे गैरकानूनी काम करते हैं। आकाश संसनवाल का मामला भी इसी 'दिखावे की संस्कृति' का परिणाम प्रतीत होता है। एक सेलिब्रिटी से जुड़े होने के बावजूद, कानून का पालन न करना अब उन पर भारी पड़ गया है।   मेरठ पुलिस की यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो फर्जी पहचान या रसूख के दम पर कानून से ऊपर उठने की कोशिश करते हैं। अंजलि अरोड़ा के मंगेतर की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस की नजरों से कोई नहीं बच सकता, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। 26 जनवरी के मद्देनजर पुलिस की यह सख्ती न केवल सराहनीय है बल्कि नागरिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य भी है।   नोट: यह समाचार उपलब्ध जानकारी और पुलिस रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। यातायात नियमों का पालन करें और फर्जीवाड़े से बचें।

Unknown जनवरी 26, 2026 0
Yuva Brahman Samaj Protests Against UGC Equality Survey Regulation 2026 in Meerut
मेरठ में यूजीसी के नए फरमान के खिलाफ बिगुल: 'समानता सर्वेक्षण' या सामाजिक विभाजन? युवा ब्राह्मण समाज ने विनियमन-2026 को बताया शिक्षा जगत के लिए 'काला अध्याय'

मेरठ (ब्यूरो रिपोर्ट) - 25 जनवरी, 2026: देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता और सुधार के दावों के बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का एक नया प्रस्ताव विवादों के घेरे में आ गया है। साल की शुरुआत के साथ ही UGC द्वारा प्रस्तावित "उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता सर्वेक्षण हेतु विनियमन-2026" (Regulation for Equality Survey in Higher Education Institutions - 2026) ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की छात्र और सामाजिक राजनीति में भूचाल ला दिया है।READ ALSO:-बार्डर-2 की रिलीज के साथ ही मेरठ में भूचाल: दलित स्वाभिमान पर चोट या सिनेमाई चूक? 3 घंटे 19 मिनट की फिल्म के 27वें मिनट ने खड़ा किया बड़ा बखेड़ा   मेरठ, जो हमेशा से क्रांतियों की धरा रही है, वहां से इस विनियमन के खिलाफ विरोध का पहला बड़ा स्वर फूट पड़ा है। युवा ब्राह्मण समाज संगठन (ट्रस्ट), मेरठ मण्डल ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे समाज को बांटने वाली साजिश करार दिया है। संगठन ने रविवार को एक आपात बैठक कर इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।   25 जनवरी: विरोध की पहली चिंगारी आज, रविवार को मेरठ के बी.एच. इंटर कॉलेज (B.H. Inter College) प्रांगण में युवा ब्राह्मण समाज संगठन के बैनर तले एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष जितेन्द्र गौतम ने की। इस बैठक में मेरठ मण्डल के प्रबुद्ध जनों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने हिस्सा लिया।   माहौल में भारी आक्रोश था। वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा के मंदिरों में 'समानता' के नाम पर 'जातिगत और सामाजिक विभाजन' का जो बीज बोने की कोशिश की जा रही है, उसका परिणाम भविष्य में घातक होगा। बैठक के अंत में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर सरकार और यूजीसी को चेतावनी दी गई कि यदि इस विनियमन को रद्द नहीं किया गया, तो सड़कों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।   क्या है विवाद की जड़? संगठन के अनुसार, UGC का नया ड्राफ्ट "समानता सर्वेक्षण" (Equality Survey) के नाम पर शिक्षण संस्थानों में छात्रों और कर्मचारियों की सामाजिक पृष्ठभूमि, जाति और वर्ग का डेटाबेस तैयार करने की बात करता है। युवा ब्राह्मण समाज का तर्क है कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान का प्रसार और अनुसंधान होना चाहिए, न कि यह गिनना कि किस जाति के कितने छात्र किस बेंच पर बैठे हैं।   संगठन द्वारा उठाई गई 4 प्रमुख आपत्तियां:   1. सामाजिक विभाजन का खतरा (Social Division) बैठक में अध्यक्ष जितेन्द्र गौतम ने कहा, "यह विनियमन समानता लाने के बजाय असमानता की खाई को और चौड़ा करेगा। जब आप क्लासरूम में बैठे छात्र को उसकी मेधा के बजाय उसकी सामाजिक पहचान से तौलेंगे, तो वहां शिक्षा नहीं, राजनीति होगी। इससे छात्रों के बीच आपसी वैमनस्य बढ़ेगा।"   2. दुरुपयोग की प्रबल आशंका (Potential for Misuse) पत्र में एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया गया है कि इस नियम का दुरुपयोग केवल सामान्य वर्ग के खिलाफ ही नहीं, बल्कि दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के हितों के खिलाफ भी हो सकता है। डेटा का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए "सॉफ्ट टारगेटिंग" के रूप में किया जा सकता है।   3. शैक्षिक वातावरण का विनाश (Destruction of Academic Environment) संगठन का मानना है कि विश्वविद्यालयों का माहौल पहले ही छात्र राजनीति के कारण संवेदनशील रहता है। ऐसे में यह सर्वेक्षण शिक्षण संस्थानों को 'अखाड़ों' में तब्दील कर देगा। पढ़ाई और रिसर्च पीछे छूट जाएंगे और 'सर्वेक्षण और तुष्टिकरण' मुख्य मुद्दा बन जाएगा।   4. अव्यावहारिक मूल्यांकन (Lack of Practical Assessment) विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यह नियम वातानुकूलित कमरों में बैठकर बनाया गया है। इसमें भारतीय समाज की जटिल संरचना और जमीनी हकीकत (Ground Reality) का कोई वैज्ञानिक आकलन नहीं किया गया है।   "शिक्षा में रिसर्च चाहिए, सर्वे नहीं": संगठन का विजन युवा ब्राह्मण समाज ने सिर्फ विरोध नहीं किया है, बल्कि शिक्षा सुधार के लिए एक सकारात्मक खाका (Roadmap) भी पेश किया है। संगठन के वरिष्ठ सदस्य श्री कुलदीप शर्मा और श्री राजीव नरहरी ने संयुक्त रूप से कहा कि भारत को यदि विश्वगुरु बनना है, तो उसे 'जाति' से ऊपर उठकर 'ज्ञान' की बात करनी होगी।   संगठन ने सरकार के सामने 5 सूत्रीय मांगें रखी हैं:   अनुसंधान-केंद्रित शिक्षा (Research-Centric Education): उच्च शिक्षा का पूरा फोकस रटने या डिग्री बांटने के बजाय रिसर्च पर होना चाहिए। विश्वस्तरीय प्रयोगशालाएं (World-Class Labs): यूजीसी का फंड सर्वे पर खर्च करने के बजाय कॉलेजों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की लैब बनाने पर खर्च हो। ब्रेन ड्रेन पर रोक (Stop Brain Drain): भारत की प्रतिभाएं विदेश क्यों जा रही हैं? उन्हें रोकने के लिए भारत में ही आकर्षक पैकेज और सुविधाएं दी जाएं। इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट: सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर आधुनिक शोध के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करें। स्टार्टअप और इनोवेशन: छात्रों को जातिगत आंकड़ों में उलझाने के बजाय स्टार्टअप और सामाजिक प्रभाव वाली परियोजनाओं (Social Impact Projects) के लिए प्रोत्साहित किया जाए।   "हम चाहते हैं कि हमारा युवा यह न सोचे कि वह किस जाति का है, बल्कि यह सोचे कि वह देश के लिए क्या आविष्कार कर सकता है। यूजीसी का यह नियम युवाओं को पीछे धकेलने वाला है।" - ललित शर्मा, वरिष्ठ सदस्य   28 जनवरी को आर-पार की रणनीति आज की बैठक तो महज एक शुरुआत थी। युवा ब्राह्मण समाज ने आंदोलन को तेज करने का ऐलान कर दिया है। संगठन ने मीडिया को जानकारी दी है कि 28 जनवरी, 2026 (बुधवार) को एक बड़ी रणनीति बैठक बुलाई गई है।   तिथि: 28 जनवरी, 2026 समय: दोपहर 3:00 बजे स्थान: मीटिंग हॉल, एन.ए.एस. इंटर कॉलेज (N.A.S. Inter College), मेरठ।   इस बैठक में मेरठ मण्डल के अलावा आसपास के जिलों से भी युवा प्रतिनिधियों को बुलाया गया है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में "विनियमन वापसी" के लिए चरणबद्ध आंदोलन, धरना प्रदर्शन और यूजीसी चेयरमैन के नाम ज्ञापन सौंपने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।   उपस्थित गणमान्य आज बी.एच. इंटर कॉलेज में हुई बैठक में संगठन की मजबूती साफ दिखाई दी। मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे:   जितेन्द्र गौतम (अध्यक्ष) - जिनके हस्ताक्षर से पत्र जारी किया गया। श्री कुलदीप शर्मा श्री राजीव नरहरी श्री ललित शर्मा  श्री पुनीत शर्मा  श्री सौरव दिवाकर शर्मा  श्री सुरेंद्र शर्मा  श्री रमाकांत पंचोरी  डॉ पंकज शर्मा  श्री गणेश दत्त शर्मा  श्री संजय वाजपई  श्री भूषण शर्मा  सही अंकुर शर्मा तथा अन्य सक्रिय कार्यकर्ता।   शिक्षा या राजनीति? यूजीसी का "समानता सर्वेक्षण-2026" अभी लागू होने की प्रक्रिया में है, लेकिन इसका विरोध यह दर्शाता है कि शिक्षा नीति में किसी भी तरह का सामाजिक हस्तक्षेप अब आसानी से स्वीकार नहीं किया जाएगा। जहां एक तरफ सरकार समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ युवा संगठन इसे 'फूट डालो और राज करो' की नीति के रूप में देख रहे हैं।   28 जनवरी की बैठक पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं। क्या यह विरोध मेरठ तक सीमित रहेगा या यह आग पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निकलकर दिल्ली तक पहुंचेगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।  

Unknown जनवरी 26, 2026 0
Controversy Erupts Over Border 2 in Meerut Complaint Filed Alleging Dalit Insult
बार्डर-2 की रिलीज के साथ ही मेरठ में भूचाल: दलित स्वाभिमान पर चोट या सिनेमाई चूक? 3 घंटे 19 मिनट की फिल्म के 27वें मिनट ने खड़ा किया बड़ा बखेड़ा

मेरठ (स्पेशल रिपोर्ट): भारतीय सिनेमा में देशभक्ति का ज्वार उठाने वाली फिल्मों की जब भी बात होती है, तो जेपी दत्ता की 'बार्डर' का नाम सबसे ऊपर आता है। दशकों बाद जब इस फिल्म का सीक्वल 'बार्डर-2' (Border 2) रिलीज हुआ, तो दर्शकों को उम्मीद थी कि यह फिल्म भी उसी गौरवशाली इतिहास को दोहराएगी। लेकिन, मेरठ में फिल्म की रिलीज के साथ ही स्क्रीन पर दिखाई गई देशभक्ति की जगह एक विवाद ने ले ली है। यह विवाद इतना गहरा गया है कि मामला पुलिस थाने की चौखट तक जा पहुंचा है।Read also:-बिजनौर में मौत बनकर फटा सिलेंडर: शेरकोट में मलबे के ढेर में तब्दील हुआ घर, धमाके की गूंज से सहमा इलाका, एक बुजुर्ग की दर्दनाक मौत   फिल्म में इस्तेमाल किए गए एक संवाद और दृश्य ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दलित समाज को उद्वेलित कर दिया है। आरोप है कि फिल्म निर्माताओं ने मनोरंजन की आड़ में एक विशेष समुदाय की भावनाओं को कुचलने का प्रयास किया है।   फ्लैशबैक: क्या है पूरा मामला? रविवार का दिन मेरठ के परतापुर इलाके के लिए गहमागहमी भरा रहा। बहुजन जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल खोड़ावाल अपने समर्थकों के साथ परतापुर थाने पहुंचे। उनके हाथों में संगठन का लेटर पैड था और चेहरे पर भारी आक्रोश। मामला हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'बार्डर-2' से जुड़ा था।   विवादित दृश्य का 'पोस्टमार्टम' अतुल खोड़ावाल और उनकी लीगल टीम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, फिल्म की कुल अवधि 3 घंटा 19 मिनट है। फिल्म अपनी रफ्तार से चल रही होती है, लेकिन ठीक 27 मिनट 37 सेकेंड पर एक ऐसा दृश्य आता है, जिसने इस पूरे बखेड़े को जन्म दिया।   दृश्य की पृष्ठभूमि: यह सीन एक सैन्य शिविर का है। सैनिक खाली समय में अपने काम कर रहे हैं। पात्रों की भूमिका: एक कलाकार, जो सैनिक का किरदार निभा रहा है, बैठकर अपने जूते पॉलिश कर रहा है। यह एक सामान्य दिनचर्या का हिस्सा लगता है। संवाद और आपत्ति: तभी दूसरा सैनिक वहां पहुंचता है और जूते पॉलिश कर रहे जवान से बात करना शुरू करता है। बातचीत हंसी-मजाक के लहजे में शुरू होती है। पॉलिश कर रहा सैनिक जवाब भी देता है, लेकिन इसी दौरान दूसरा सैनिक उसे संबोधित करने के लिए अनुसूचित जाति से जुड़े एक बेहद आपत्तिजनक शब्द (गाली/स्लर) का प्रयोग करता है।   शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह शब्द अनायास नहीं निकला है, बल्कि इसे स्क्रिप्ट का हिस्सा बनाया गया है, जो सीधे तौर पर जातिगत भेदभाव और एक समाज विशेष को नीचा दिखाने की मानसिकता को दर्शाता है।   शिकायतकर्ता का पक्ष: "कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं निर्माता" परतापुर थाने में मीडिया से बात करते हुए बहुजन जनता दल के अध्यक्ष अतुल खोड़ावाल ने फिल्म के निर्माता और निर्देशक पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड के निर्माता अक्सर 'रचनात्मक स्वतंत्रता' (Creative Liberty) की आड़ में दलित और पिछड़े समाज का अपमान करते आए हैं, लेकिन अब समाज जागरूक हो चुका है और इस तरह के कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।   "जूता पॉलिश करते हुए सैनिक को दिखाना और फिर उसे जातिसूचक शब्द से संबोधित करना, यह संयोग नहीं प्रयोग है। यह दर्शाता है कि फिल्म बनाने वालों के दिमाग में जातिवाद का कीड़ा कितना गहरा बैठा है। क्या सेना जैसे पवित्र संस्थान में, जहां सिर्फ 'भारतीय' होते हैं, वहां ऐसी जातिगत गंदगी दिखाना सेना का अपमान नहीं है?" - अतुल खोड़ावाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बहुजन जनता दल   खोड़ावाल ने आगे कहा कि देश में एससी-एसटी एक्ट (SC/ST Act) और नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के कड़े प्रावधान होने के बावजूद, निर्माता-निर्देशकों ने कानून को ठेंगा दिखाने का काम किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि सेंसर बोर्ड की कैंची इस शब्द पर क्यों नहीं चली? क्या यह जानबूझकर विवाद पैदा करने के लिए रखा गया था?   कानूनी पेंच: BNS और SC/ST एक्ट की धाराओं का चक्रव्यूह अतुल खोड़ावाल ने अपनी लिखित तहरीर में सिर्फ माफी की मांग नहीं की है, बल्कि इसे एक गंभीर आपराधिक कृत्य मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) और SC/ST एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।   आइये समझते हैं कि शिकायत में जिन धाराओं का जिक्र किया गया है, वे कितनी गंभीर हैं और यदि पुलिस इन पर एफआईआर (FIR) दर्ज करती है, तो फिल्म के निर्देशक अनुराग सिंह और निर्माता भूषण कुमार के लिए कितनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।   1. BNS धारा 196 (पुराने IPC की धारा 153A के समतुल्य) यह धारा धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सद्भाव बनाए रखने के प्रतिकूल कार्य करने से संबंधित है।   आरोप: फिल्म में जातिसूचक शब्द का प्रयोग समाज में वैमनस्यता फैला सकता है। प्रावधान: इसमें 3 साल तक की कैद और जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।   2. BNS धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर कोई ऐसा कार्य करता है जिससे दंगा भड़कने की आशंका हो।   आरोप: दलित समाज की भावनाओं को आहत करके उन्हें उग्र प्रतिक्रिया देने के लिए उकसाना।   3. BNS धारा 299 (धार्मिक/जातिगत भावनाओं को ठेस पहुँचाना) यह धारा किसी भी वर्ग की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से अपमानित करने से संबंधित है।   आरोप: फिल्म का दृश्य सीधे तौर पर दलित अस्मिता पर प्रहार है।   4. BNS धारा 353 (2) (गलत जानकारी या अफवाह फैलाना) यह धारा उन बयानों या दृश्यों पर लागू होती है जो विभिन्न समुदायों के बीच नफरत या घृणा पैदा करते हैं।   5. SC/ST एक्ट (अत्याचार निवारण अधिनियम) यह सबसे गंभीर पहलू है। यदि किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति को (भले ही वह फिल्म का पात्र हो, लेकिन वह प्रतिनिधित्व पूरे समाज का कर रहा है) जाति के आधार पर अपमानित किया जाता है, तो यह गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आ सकता है।   नामजद आरोपी: बॉलीवुड के दिग्गजों पर लटकी तलवार शिकायत में किसी अज्ञात व्यक्ति को नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण से जुड़े शीर्ष नामों को आरोपी बनाने की मांग की गई है। तहरीर में निम्नलिखित नाम शामिल हैं:   अनुराग सिंह (निर्देशक): फिल्म के कैप्टन के रूप में, स्क्रीन पर जो भी दिखाया जाता है, उसकी अंतिम जिम्मेदारी निर्देशक की मानी जाती है। भूषण कुमार (टी-सीरीज - निर्माता): फिल्म के फाइनेंसर और प्रोड्यूसर होने के नाते वे भी इस कानूनी दायरे में आते हैं। जेपी दत्ता (निर्माता/प्रेजेंटर): 'बार्डर' फ्रैंचाइज़ी के जनक। निधि दत्ता (निर्माता): फिल्म निर्माण टीम का हिस्सा। संबंधित कलाकार: वह अभिनेता जिसने स्क्रीन पर उस आपत्तिजनक शब्द का उच्चारण किया।   मेरठ का सामाजिक समीकरण और फिल्म का विरोध मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश दलित राजनीति और सामाजिक चेतना का केंद्र रहा है। यहाँ से उठने वाली आवाज अक्सर दिल्ली और मुंबई तक असर करती है। 'बार्डर-2' जैसी बड़ी बजट की फिल्म के खिलाफ यहाँ विरोध शुरू होना फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के लिए खतरे की घंटी हो सकता है।   सेंसर बोर्ड (CBFC) पर भी उठे सवाल इस विवाद ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।   एक तरफ सेंसर बोर्ड फिल्मों में छोटी-छोटी गालियों पर 'बीप' लगा देता है। दूसरी तरफ, 3 घंटे 19 मिनट की फिल्म में एक जातिसूचक शब्द (Caste Slur) कैसे पास हो गया? क्या स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्यों ने इस शब्द को नजरअंदाज किया, या उन्हें इसका सामाजिक प्रभाव समझ नहीं आया?   अतुल खोड़ावाल का कहना है कि यह "सिर्फ एक शब्द" नहीं है, यह सदियों के दंश को कुरेदने जैसा है। उन्होंने मांग की है कि जब तक यह सीन फिल्म से नहीं हटाया जाता और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका संगठन चुप नहीं बैठेगा।   क्या होगा अगला कदम? परतापुर थाने में दी गई तहरीर के बाद अब पुलिस की भूमिका अहम हो गई है। प्रक्रिया के अनुसार:   जांच (Preliminary Inquiry): पुलिस सबसे पहले फिल्म के उस क्लिप की जांच करेगी। कानूनी राय: पुलिस अभियोजन अधिकारियों से राय ले सकती है कि क्या फिल्मी दृश्य पर SC/ST एक्ट सीधे लागू होता है। FIR दर्ज करना: यदि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) आरोप सही पाए जाते हैं, तो पुलिस को FIR दर्ज करनी होगी।   मांगें स्पष्ट हैं: तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज हो। फिल्म से 27:37 मिनट वाला दृश्य काटा जाए। निर्माता सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।   सिनेमा और जातिवाद: एक पुराना संघर्ष बॉलीवुड का दलित प्रतिनिधित्व के साथ रिश्ता हमेशा से खट्टा-मीठा रहा है। पहले फिल्मों में दलित पात्रों को अक्सर पीड़ित या लाचार दिखाया जाता था। हालाँकि, 'आर्टिकल 15', 'जय भीम' और 'मसान' जैसी फिल्मों ने इस नैरेटिव को बदला है। लेकिन 'बार्डर-2' जैसी मसाला और मेनस्ट्रीम फिल्म में इस तरह की चूक (या जानबूझकर किया गया कृत्य) यह साबित करती है कि संवेदनशीलता के मामले में अभी भी बॉलीवुड को लंबा सफर तय करना है। अतुल खोड़ावाल के शब्दों में, "सैनिक सिर्फ सैनिक होता है, उसकी कोई जाति नहीं होती। उसे जाति के चश्मे से दिखाना देश की सुरक्षा में लगे जवानों का मनोबल तोड़ने जैसा है।" निष्कर्ष: विवाद सुलझेगा या और भड़केगा? 'बार्डर-2' अभी सिनेमाघरों में नई है। मेरठ से उठी यह चिंगारी अगर अन्य राज्यों तक फैलती है, तो फिल्म के निर्माताओं के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। फिलहाल, परतापुर पुलिस की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। क्या पुलिस बॉलीवुड के बड़े नामों के खिलाफ FIR दर्ज करने का साहस दिखाएगी? या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?   यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म निर्माण कंपनी 'टी-सीरीज' और निर्देशक अनुराग सिंह इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्या वे दृश्य हटाकर विवाद खत्म करेंगे, या फिर यह मामला कोर्ट की दहलीज तक जाएगा?   प्रमुख बिंदु (Key Highlights for Quick Reading) विवाद का केंद्र: फिल्म 'बार्डर-2' (Border 2)। अवधि: 3 घंटे 19 मिनट। आपत्तिजनक दृश्य का समय: 27 मिनट 37 सेकेंड। स्थान: परतापुर थाना, मेरठ। शिकायतकर्ता: अतुल खोड़ावाल (राष्ट्रीय अध्यक्ष, बहुजन जनता दल)। आरोपी: भूषण कुमार, अनुराग सिंह, जेपी दत्ता, निधि दत्ता और कलाकार। मुख्य धाराएं: BNS 196, 192, 299, 353(2) और SC/ST एक्ट। दृश्य का विवरण: एक सैनिक जूता पॉलिश कर रहा है, दूसरा उसे जातिसूचक शब्द बोलता है। मांग: FIR दर्ज हो और सीन फिल्म से हटाया जाए।  

Unknown जनवरी 25, 2026 0
Meerut Wife Murder Husband Arrested
मेरठ: 'शक' का खूनी खेल; 5 साल के साथ को 5 मिनट में मिटा दिया, बच्चों ने बिस्तर पर देखी मां की लाश

उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई थी, जिसने रिश्तों की मर्यादा और विश्वास को तार-तार कर दिया था। एक हंसता-खेलता परिवार महज 'शक' (Suspicion) की आग में जलकर खाक हो गया। मेडिकल थाना क्षेत्र में हुई चित्रा नाम की महिला की हत्या की गुत्थी को सुलझाते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी और उसके पार्टनर विशु वाल्मीकि को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है।READ ALSO:-यूपी में कुदरत का डबल अटैक: पहाड़ों जैसी ठंड और आसमान से बरसती आफत; अंगीठी की 'जहरीली गर्मी' ने ली दो जान   वारदात के बाद से आरोपी पिछले 6 दिनों से पुलिस को चकमा दे रहा था। शनिवार की रात पुलिस ने सटीक मुखबिरी के आधार पर उसे जागृति विहार एक्सटेंशन से दबोच लिया। पुलिस की पूछताछ में जो कहानी सामने आ रही है, वह समाज में बढ़ते अविश्वास और लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) में पनप रहे अपराधों की ओर इशारा करती है।   इस विशेष रिपोर्ट में पढ़िए कि कैसे एक विधवा महिला ने नई जिंदगी की शुरुआत की थी, लेकिन उसे क्या मालूम था कि जिसे वह सहारा मान रही है, वही उसका काल बन जाएगा।   गिरफ्तारी और पुलिस का एक्शन:-   6 दिन की लुका-छिपी का अंत 19 जनवरी को हुई इस वारदात के बाद से आरोपी विशु वाल्मीकि फरार था। मेरठ पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में दबिश दे रही थीं। मेडिकल थाना प्रभारी सतवीर सिंह अत्री ने बताया कि सर्विलांस और मुखबिरों के जाल के जरिए पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी जागृति विहार एक्सटेंशन इलाके में छिपा हुआ है और कहीं भागने की फिराक में है।   बिना वक्त गंवाए पुलिस टीम ने शनिवार रात इलाके की घेराबंदी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। अब उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेजने की तैयारी की जा रही है। पुलिस हत्या में इस्तेमाल किए गए तरीकों और अन्य सबूतों को जुटाने के लिए रिमांड की मांग भी कर सकती है।   फ्लैशबैक - प्रेम, पुनर्विवाह और फिर नफरत:-   चित्रा का संघर्षपूर्ण अतीत मूल रूप से बुलंदशहर (Bulandshahr) जिले के टांडा गांव की रहने वाली चित्रा जाटव की जिंदगी दुखों से भरी थी।   पहला झटका: चित्रा के पहले पति की मृत्यु कुछ साल पहले हो गई थी। पति की मौत के बाद वह अकेली पड़ गई थीं। उनके दो बच्चे थे - बेटी परी और बेटा हर्ष। नई उम्मीद: पति के जाने के बाद बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी चित्रा के कंधों पर थी। इसी दौरान, करीब 5 साल पहले उनकी मुलाकात रोहटा रोड, मेरठ के रहने वाले विशु वाल्मीकि से हुई। लिव-इन और उम्मीदें: दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे साथ रहने लगे। समाज की नजर में यह एक लिव-इन रिलेशनशिप या दूसरा विवाह था। वे मेरठ के शास्त्री नगर न्यू के-ब्लॉक में किराए के मकान में रह रहे थे।   वह एक साल, जिसने सब बदल दिया पुलिस जांच में सामने आया है कि पिछले 5 साल सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन बीते एक साल से दोनों के रिश्तों में खटास आ गई थी।   विवाद की जड़: बताया जा रहा है कि विशु को चित्रा पर 'शक' था। यह शक किस बात को लेकर था, अभी पुलिस इसकी विस्तृत जांच कर रही है, लेकिन इसी शक ने रोजमर्रा के झगड़ों को जन्म दिया। दहेज का आरोप: चित्रा के भाई रिंकू जाटव ने जो एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है, उसमें दहेज हत्या का आरोप लगाया गया है। परिजनों का कहना है कि विशु अक्सर चित्रा को प्रताड़ित करता था।   जनवरी की वो काली शाम घटना वाले दिन यानी 19 जनवरी को जो हुआ, वह किसी भी पत्थर दिल इंसान को पिघला देने के लिए काफी है। इस अपराध में सबसे ज्यादा नुकसान उन दो मासूम बच्चों (परी और हर्ष) का हुआ है, जिन्होंने अपनी मां को खो दिया और सौतेले पिता को जेल जाते देखेंगे।   साजिश या आवेश? पुलिस थ्योरी के मुताबिक, घटना वाले दिन विशु ने एक खौफनाक योजना बनाई या फिर गुस्से में ऐसा कदम उठाया:   बच्चों को हटाया: विशु ने बड़ी चालाकी से चित्रा के दोनों बच्चों (परी और हर्ष) को घर से बाहर भेज दिया या मकान के पास छोड़ दिया, ताकि वे घर के अंदर न रहें। वारदात: अकेलेपन का फायदा उठाकर उसने चित्रा की हत्या कर दी। हत्या कैसे की गई (गला दबाकर या किसी हथियार से), इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट होगा। फरारी: हत्या करने के बाद विशु वहां से फरार हो गया।   मासूमों का दर्द जब बच्चे खेल-कूद कर वापस घर लौटे, तो उन्होंने जो मंजर देखा, वह उनकी रूह कंपाने वाला था। उनकी मां बिस्तर पर पड़ी थीं, लेकिन कोई हलचल नहीं हो रही थी। बच्चों के रोने की आवाज सुनकर पड़ोसी इकट्ठा हुए, लेकिन तब तक चित्रा की सांसे थम चुकी थीं।   कानूनी पेच और धाराएं इस मामले में पुलिस ने चित्रा के भाई रिंकू की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया है।   लगाई गई धाराएं: पुलिस ने दहेज हत्या (Dowry Death) और हत्या की धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस का बयान: थाना प्रभारी सतवीर सिंह अत्री ने कहा, "आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। हम उससे पूछताछ कर रहे हैं कि हत्या के पीछे का तात्कालिक कारण (Immediate Provocation) क्या था। क्या उस दिन कोई बड़ा झगड़ा हुआ था या यह प्री-प्लांड मर्डर था।"   सामाजिक विश्लेषण (Crime Analysis) मेरठ की यह घटना हमारे समाज में बढ़ते 'इंटीमेट पार्टनर वायलेंस' (Intimate Partner Violence) का एक और उदाहरण है।   शक का इलाज नहीं: अपराध विज्ञान (Criminology) के अनुसार, वैवाहिक या लिव-इन रिश्तों में होने वाली हत्याओं में 'चरित्र पर शक' एक बहुत बड़ा कारण है। यह एक ऐसा मानसिक विकार बन जाता है जहां तर्क काम नहीं करता। बच्चों का भविष्य: इस घटना ने परी और हर्ष को अनाथ कर दिया है। पहले पिता का साया उठा और अब मां की हत्या हो गई। ऐसे मामलों में बच्चों की काउंसलिंग और पुनर्वास (Rehabilitation) पुलिस और बाल कल्याण समिति (CWC) के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। किराएदारों का सत्यापन: यह घटना मकान मालिकों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे अपने किराएदारों के बीच हो रहे झगड़ों को नजरअंदाज न करें। अक्सर घरेलू हिंसा की आवाजें अनसुनी कर दी जाती हैं, जो बाद में हत्या में बदल जाती हैं।   मेरठ पुलिस ने 6 दिन के भीतर आरोपी को पकड़कर अपनी तत्परता दिखाई है, लेकिन चित्रा को अब वापस नहीं लाया जा सकता। यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि रिश्तों में संवादहीनता और शक किस हद तक घातक हो सकता है। पुलिस अब चार्जशीट दाखिल कर आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की कोशिश करेगी।   आगे की अपडेट: पुलिस की पूछताछ में विशु क्या नए खुलासे करता है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की असली वजह क्या आती है, इस पर हमारी नजर बनी रहेगी।   (नोट: यदि आप या आपके आसपास कोई घरेलू हिंसा का शिकार हो रहा है, तो कृपया पुलिस हेल्पलाइन 112 या महिला हेल्पलाइन 1090 पर तुरंत संपर्क करें। आपकी एक कॉल किसी की जान बचा सकती है।)

Unknown जनवरी 25, 2026 0
Meerut Pollution Control Plan E Buses and New Plants
मेरठ में वायु प्रदूषण: 2026 तक सांस लेना होगा आसान, 540 इलेक्ट्रिक बसों और कचरा निस्तारण का मेगा प्लान तैयार

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा होने के नाते, मेरठ लंबे समय से विकास की दौड़ में तो आगे रहा है, लेकिन प्रदूषण के मामले में भी यह शहर अक्सर गंभीर श्रेणी में गिना जाता रहा है। सर्दियों में स्मॉग की चादर और गर्मियों में उड़ती धूल ने यहाँ की आबोहवा को जहरीला बना दिया था। लेकिन अब, मेरठ नगर निगम और प्रशासन ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदलने का संकल्प लिया है।Read also:-आधार-LPG लिंक: आधार-LPG गैस ल‍िंक नहीं करने वालों को होगा बड़ा नुकसान; Online पूरा कर लें ये काम   मेरठ शहर को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और स्मार्ट बनाने के लिए एक व्यापक और महत्त्वाकांक्षी 'एक्शन प्लान' तैयार किया गया है। यह केवल कागजी घोड़ा नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरने वाली एक ठोस रणनीति है। लखनऊ में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने जो खाका (Blue Print) पेश किया है, वह बताता है कि 2026 तक मेरठ की हवा में 20 से 30 प्रतिशत तक का सुधार देखने को मिलेगा। इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से लेकर मलबे के वैज्ञानिक निस्तारण तक, हर मोर्चे पर काम शुरू होने वाला है।   लखनऊ में मंथन - अधिकारियों ने तय किया रोडमैप प्रदूषण नियंत्रण की इस महायोजना को अंतिम रूप देने के लिए लखनऊ में एक निर्णायक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक सामान्य नहीं थी, क्योंकि इसमें नीति निर्धारण करने वाले शीर्ष अधिकारी मौजूद थे।   कौन-कौन था मौजूद? शुक्रवार को हुई इस बैठक में निम्नलिखित दिग्गजों ने हिस्सा लिया: राजीव वर्मा: चेयरमैन, कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) इन नेशनल कैपिटल रीजन एंड एडज्वाइनिंग एरियाज। (इनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार मेरठ के प्रदूषण को लेकर कितनी गंभीर है।) पी. गुरु प्रसाद: प्रमुख सचिव, नगर विकास। अनिल कुमार तृतीय: प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण। सौरभ गंगवार: नगर आयुक्त, मेरठ (जिन्होंने शहर का पक्ष और योजना प्रस्तुत की)।   इस बैठक में नगर आयुक्त ने मेरठ शहर की वायु गुणवत्ता सुधार का 'वार्षिक एक्शन प्लान' (Annual Action Plan) प्रस्तुत किया। इस प्लान का मुख्य उद्देश्य केवल प्रदूषण कम करना नहीं, बल्कि शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य की जरूरतों (Future Ready) के हिसाब से तैयार करना है।   पब्लिक ट्रांसपोर्ट में क्रांति - इलेक्ट्रिक बसों का युग परिवहन (Transport) किसी भी शहर में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारक होता है। पेट्रोल और डीजल के वाहन न केवल कार्बन उत्सर्जन करते हैं, बल्कि पीएम 2.5 (PM 2.5) कणों के स्तर को भी बढ़ाते हैं। मेरठ प्रशासन ने इस समस्या की जड़ पर प्रहार करने का फैसला किया है।   लक्ष्य 2030: 540 ई-बसों का बेड़ा एक्शन प्लान के अनुसार, मेरठ में कार्बन उत्सर्जन को शून्य (Zero Emission) की तरफ ले जाने के लिए डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।   दीर्घकालिक लक्ष्य: वर्ष 2030 तक शहर में कुल 540 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की आवश्यकता का आकलन किया गया है। तात्कालिक लक्ष्य (2026): पीएम ई-बस सेवा स्कीम (PM E-Bus Sewa Scheme) के तहत, वर्ष 2026 में 100 नई ई-बसों का प्रस्ताव दिया गया है।   वर्तमान स्थिति और चुनौतियां फिलहाल शहर में 50 ई-बसें संचालित हो रही हैं। ये बसें प्रदूषण रहित तो हैं ही, साथ ही यात्रियों को आरामदायक सफर भी मुहैया करा रही हैं। लेकिन शहर की आबादी और विस्तार को देखते हुए यह संख्या 'ऊंट के मुंह में जीरा' समान है। 100 नई बसों के आने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम मजबूत होगा और लोग निजी वाहनों (कार/बाइक) को छोड़कर बसों में सफर करने के लिए प्रेरित होंगे।   इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास: चार्जिंग और पार्किंग  केवल बसें खरीदना काफी नहीं है, उन्हें चलाने के लिए बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है।   चार्जिंग स्टेशन: ई-बसों की संख्या बढ़ाने के साथ ही शहर में 22 ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (EV Charging Stations) तैयार किए जाएंगे। इससे न केवल बसों को बल्कि निजी इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को भी फायदा होगा। पार्किंग प्रबंधन: शहर में जाम की समस्या प्रदूषण को बढ़ाती है। फिलहाल सरकारी और प्राइवेट मिलाकर कुल 21 पार्किंग स्थल हैं, जिनकी क्षमता 1050 वाहनों की है। नई पार्किंग योजना: सीएम ग्रिड योजना (CM Grid Scheme) के तहत बनी सड़कों पर 15 नई सरफेस पार्किंग बनाई जा रही हैं। इसके अलावा, एक मल्टीलेवल कार पार्किंग का निर्माण भी प्रगति पर है। इससे सड़कों पर खड़े वाहनों से लगने वाला जाम खत्म होगा और ईंधन की बर्बादी रुकेगी।   'डस्ट-फ्री मेरठ' - धूल के खिलाफ जंग विशेषज्ञों का मानना है कि एनसीआर में प्रदूषण का एक बड़ा कारण 'रोड डस्ट' (Road Dust) यानी सड़कों से उड़ने वाली धूल है। जब गाड़ियां चलती हैं, तो सड़क किनारे पड़ी धूल हवा में मिल जाती है और पीएम 10 (PM 10) का स्तर खतरनाक हो जाता है।   890 किमी सड़कों का कायाकल्प नगर निगम ने शहर के रोड नेटवर्क का विस्तृत सर्वे कराया है।   कुल रोड नेटवर्क: 2967 किलोमीटर। अच्छी स्थिति में: 2076 किलोमीटर। धूल मुक्त बनाने का लक्ष्य: 890 किलोमीटर सड़कें ऐसी हैं जिन्हें 'डस्ट-फ्री' बनाने की आवश्यकता है।   कैसे बनेंगी सड़कें धूल रहित? केवल झाड़ू लगाने से धूल खत्म नहीं होगी। इसके लिए इंजीनियरिंग आधारित समाधान अपनाए जाएंगे:   वॉल-टू-वॉल पेविंग (Wall-to-Wall Paving): सड़कों के किनारे बची हुई कच्ची जमीन (Side Berms) को पक्का किया जाएगा। इंटरलॉकिंग टाइल्स: फुटपाथों और पटरियों पर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाई जाएंगी ताकि मिट्टी खुली न रहे। ग्रीन बेल्ट: जहाँ जगह होगी, वहां हरियाली विकसित की जाएगी ताकि धूल न उड़े। बजट: इस काम के लिए 1300 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि की जरूरत है। फिलहाल निगम के पास इस मद में 103 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं, बाकी फंड के लिए सरकार से मांग की जाएगी।   कचरा प्रबंधन (Waste Management) - जीरो वेस्ट सिटी का सपना कूड़ा जलाना और कूड़े के पहाड़ों से निकलने वाली मीथेन गैस प्रदूषण का बड़ा कारण है। मेरठ नगर निगम ने अब 'कचरे से कंचन' (Waste to Wealth) की नीति अपना ली है। गाँवड़ी (Gawdi) अब शहर का डंपिंग ग्राउंड नहीं, बल्कि 'प्रोसेसिंग हब' बनेगा।   1. सी एंड डी (C&D) वेस्ट प्लांट: मलबे का समाधान निर्माण और तोड़फोड़ (Construction and Demolition) से निकलने वाला मलबा हवा में धूल के कण घोलता है।   स्थान: गाँवड़ी। क्षमता: 100 टन प्रतिदिन। समय सीमा: अक्टूबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य। लागत: 5.51 करोड़ रुपये। प्रक्रिया: इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। इस प्लांट में मकानों के मलबे को रिसाइकिल करके ईंटें, टाइल्स और अन्य निर्माण सामग्री बनाई जाएगी। इससे न केवल मलबा खत्म होगा, बल्कि निर्माण सामग्री भी मिलेगी।   2. ताजे कूड़े का 100% निस्तारण शहर से रोज निकलने वाले कचरे को अब डंप नहीं किया जाएगा, बल्कि उसी दिन प्रोसेस किया जाएगा।   कुल क्षमता: 900 टन प्रतिदिन। तकनीक: बैलेस्टिक सेपरेटर प्लांट (Ballistic Separator Plant)। 30 टन प्रति घंटे का एक प्लांट पहले से चल रहा है। लोहिया नगर से 60 टन प्रति घंटे का प्लांट शिफ्ट किया गया है। दोनों प्लांट 10 घंटे चलने पर 900 टन कूड़ा निपटाएंगे। परिणाम: कूड़े से आरडीएफ (Refuse Derived Fuel), कंपोस्ट (खाद) और ईंट-पत्थर अलग किए जाएंगे। RDF: बेचा जाएगा (ऊर्जा उत्पादन के लिए)। कंपोस्ट: किसानों को सस्ती दर पर दी जाएगी। निष्क्रिय कचरा: भराव (Landfilling) में उपयोग होगा। एजेंसी: ब्रिजेंद्रा एनर्जी कंपनी (Brijendra Energy Company) का चयन हो गया है। निस्तारण की दर लगभग 190 रुपये प्रति टन तय की गई है।   3. वेस्ट टू चारकोल (Waste to Charcoal) - भविष्य की तकनीक यह मेरठ के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।   प्रस्ताव: 900 टन क्षमता का वेस्ट टू चारकोल प्लांट। अनुबंध: एनटीपीसी (NTPC) के साथ समझौता हुआ है। फायदा: इस तकनीक से कचरे को 'टोरिफाइड चारकोल' (Torrefied Charcoal) में बदला जाएगा, जिसका उपयोग बिजली संयंत्रों में कोयले के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। यह पूर्णतः पर्यावरण अनुकूल तकनीक है।   4. लीगेसी वेस्ट (पुराना कूड़ा) का सफाया शहर में सालों से जमा कूड़े के पहाड़ों (Legacy Waste) को भी हटाया जा रहा है।   लोहिया नगर: यहाँ डीसीसी कंपनी ने प्लांट लगाया है। मई 2027 तक यहाँ का पूरा कूड़ा खत्म करने का लक्ष्य है। मंगतपुरम: यहाँ सितंबर 2026 तक कूड़े का निस्तारण पूरा कर लिया जाएगा।   वित्तीय प्रबंधन - कहाँ से आएगा पैसा? प्रदूषण नियंत्रण के उपाय महंगे होते हैं। मेरठ को इसके लिए 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission) से मदद मिल रही है।   कुल आवंटन: वायु गुणवत्ता सुधार के लिए 187 करोड़ रुपये मिले थे। खर्च: अब तक 166 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं। शेष राशि: 88 करोड़ रुपये अभी भी शेष हैं, जिनका उपयोग आगामी परियोजनाओं में किया जाएगा।   लक्ष्य 2026 - आंकड़ों की जुबानी नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने जो एक्शन प्लान पेश किया है, उसमें हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए स्पष्ट संख्यात्मक लक्ष्य (Quantitative Targets) निर्धारित किए गए हैं। यह अस्पष्ट वादे नहीं, बल्कि मापने योग्य लक्ष्य हैं।   पैरामीटर (Parameter) लक्ष्य (2026 तक) सुधार का प्रतिशत AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 117 (वार्षिक औसत) 20-30% सुधार PM 2.5 (सूक्ष्म कण) 49 (वार्षिक औसत) महत्वपूर्ण कमी PM 10 (धूल कण) 119 (वार्षिक औसत) महत्वपूर्ण कमी   वैज्ञानिक आधार: ई-बसें 'जीरो इमिशन' (शून्य उत्सर्जन) करती हैं, जो सीधे तौर पर PM 2.5 को कम करती हैं। सी एंड डी प्लांट और पक्की सड़कें PM 10 (मोटे धूल कण) को नियंत्रित करती हैं। अनुमान है कि शहर के कुल प्रदूषण में 40% योगदान ट्रांसपोर्ट और धूल का है। इन दोनों पर प्रहार करके ही लक्ष्य हासिल किया जाएगा।   एक नई सुबह की उम्मीद मेरठ नगर निगम का यह एक्शन प्लान केवल सरकारी फाइल का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह शहर के लाखों नागरिकों के स्वास्थ्य का सुरक्षा कवच है। अगर 2026 तक:   सड़कें गड्ढा मुक्त और धूल मुक्त हो जाती हैं, गाँवड़ी और लोहिया नगर से कूड़े के पहाड़ गायब हो जाते हैं, और सड़कों पर 100 से ज्यादा ई-बसें दौड़ती हैं,   तो निश्चित रूप से मेरठ की हवा सांस लेने लायक हो जाएगी। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार का यह कथन कि "वार्षिक एक्शन प्लान के अनुसार निगम अपनी कार्य योजना पर अमल करेगा" एक सकारात्मक संकेत है। अब जरूरत है तो बस समयबद्ध कार्यान्वयन (Timely Execution) और जनता के सहयोग की।   मेरठ अब बदलाव की राह पर है। दिल्ली का पड़ोसी होने का नुकसान झेलने वाला यह शहर अब प्रदूषण नियंत्रण में एनसीआर के लिए एक 'मॉडल सिटी' बनने की ओर अग्रसर है।

Unknown जनवरी 25, 2026 0
Meerut Metro Update13 Stations Ready from Meerut South to Modipuram Operations to Start Soon
मेरठ का 'महासफर': साउथ से मोदीपुरम तक तैयार हुए 13 हाईटेक स्टेशन, दिल्ली अब बस एक झपकी की दूरी पर, स्टेशनों पर जड़े ताले खुलने का जनता को बेसब्री से इंतजार

पश्चिम उत्तर प्रदेश के सबसे प्रमुख शहरों में से एक, मेरठ, अब एक ऐतिहासिक परिवहन क्रांति की दहलीज पर खड़ा है। वर्षों का इंतजार, धूल-मिट्टी और ट्रैफिक जाम की समस्याओं को झेलने के बाद, मेरठवासियों के लिए वह घड़ी अब बेहद करीब आ गई है, जिसका सपना दशकों से देखा जा रहा था। मेरठ साउथ (Meerut South) से लेकर मोदीपुरम (Modipuram) तक का 27 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर अब पूरी तरह से बनकर तैयार है। यह केवल पटरियों और स्टेशनों का निर्माण नहीं है, बल्कि यह मेरठ की जीवनशैली, अर्थव्यवस्था और दिल्ली-एनसीआर (NCR) के साथ उसकी कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदलने वाला एक महा-प्रोजेक्ट है।Read also:-यूपी बोर्ड 2026: प्रैक्टिकल परीक्षा की तारीखों में बड़ा फेरबदल! 29-30 जनवरी को भी होंगे एग्जाम, सचिव ने जारी किया 'अर्जेंट' आदेश   ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस रूट पर सभी 13 मेट्रो स्टेशन अपनी पूरी भव्यता के साथ तैयार हो चुके हैं। स्टेशनों पर अंतिम फिनिशिंग टच दिया जा चुका है, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और वाहन पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है। अब केवल उस पल का इंतजार है जब इस हाई-स्पीड ट्रैक पर 'नमो भारत' (Namo Bharat) और 'मेरठ मेट्रो' (Meerut Metro) एक साथ हवा से बातें करती नजर आएंगी।   प्रोजेक्ट का विहंगम दृश्य: 27 किमी, 13 स्टेशन और दोहरी ताकत मेरठ का यह प्रोजेक्ट पूरे देश में अपने आप में अनूठा है। भारत में पहली बार ऐसा हो रहा है कि एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर (ट्रैक और सिग्नलिंग सिस्टम) पर दो तरह की ट्रेनें चलेंगी। पहली, आरआरटीएस (RRTS) यानी नमो भारत, जो लंबी दूरी (दिल्ली से मेरठ) तय करेगी, और दूसरी मेरठ मेट्रो (MRTS), जो शहर के स्थानीय यात्रियों को एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचाएगी।   तैयार हुए 13 स्टेशनों की सूची और स्थिति मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक के इस कॉरिडोर पर काम लगभग 100% पूरा हो चुका है। आइए एक नजर डालते हैं इन स्टेशनों की मौजूदा स्थिति पर:   मेरठ साउथ (Meerut South): यह स्टेशन पहले से ही आंशिक रूप से संचालित है और अब मोदीपुरम तक कनेक्टिविटी के लिए तैयार है। परतापुर (Partapur): औद्योगिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण, यहाँ काम कई महीने पहले पूरा हो चुका है। रिठानी (Rithani): फिनिशिंग का काम पूरा हो चुका है। शताब्दी नगर (Shatabdi Nagar): यह एक प्रमुख हब है। यहाँ टिकट काउंटर, प्रवेश-निकास द्वार और पार्किंग तैयार है। ब्रह्मपुरी (Brahmpuri): घनी आबादी वाले क्षेत्र को जोड़ने वाला यह स्टेशन चमकने लगा है। मेरठ सेंट्रल (Meerut Central): शहर के मध्य में स्थित, यहाँ भी निर्माण कार्य संपन्न हो चुका है। भैसाली (Bhaisali): ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से सबसे सुंदर स्टेशन। बेगमपुल (Begumpul): मेरठ का सबसे व्यस्त चौराहा और सबसे बड़ा भूमिगत (Underground) स्टेशन। एमईएस कॉलोनी (MES Colony): गांधी बाग से आगे, सेना क्षेत्र और रिहायशी इलाकों के लिए। डौरली (Daurli): निर्माण कार्य पूरा। मेरठ नॉर्थ (Meerut North): संरचनात्मक कार्य संपन्न। मोदीपुरम (Modipuram): कॉरिडोर का अंतिम स्टेशन, पूरी तरह तैयार। मोदीपुरम डिपो (Modipuram Depot): (नोट: डिपो का काम अभी अंतिम चरण में है)।   स्टेशन-वार विस्तृत रिपोर्ट: कहाँ क्या है खास? इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हर स्टेशन को वहां की स्थानीय जरूरतों और संस्कृति को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।   1. भैसाली स्टेशन: संस्कृति और आधुनिकता का संगम शहीद स्मारक के पास स्थित भैसाली मेट्रो स्टेशन केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह मेरठ की कला और संस्कृति का प्रतिबिंब है। यहाँ की दीवारों पर शास्त्रीय संगीत पर आधारित चित्रकारी की गई है, जो यात्रियों का मन मोह लेती है। जब यात्री यहाँ उतरेंगे, तो उन्हें आधुनिकता के साथ-साथ अपनी विरासत की भी झलक मिलेगी। इसे बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया है, जो इसे रूट के सबसे आकर्षक स्टेशनों में से एक बनाता है।   2. बेगमपुल: इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना बेगमपुल स्टेशन मेरठ मेट्रो प्रोजेक्ट का सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यह एक भूमिगत (Underground) स्टेशन है। शहर के सबसे व्यस्त बाजार और चौराहे के नीचे सुरंग बनाना और इतना विशाल स्टेशन तैयार करना इंजीनियरिंग का एक नायाब उदाहरण है।   मौजूदा स्थिति: स्टेशन के अंदर का काम (प्लेटफॉर्म, ट्रैक, लाइटिंग, एस्केलेटर) पूरा हो चुका है। फिलहाल, स्टेशन के बाहर सड़क के ऊपर का काम (Restoration of Road) चल रहा है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा ताकि सामान्य यातायात सुचारू हो सके।   3. शताब्दी नगर और परतापुर: औद्योगिक और रिहायशी लाइफलाइन शताब्दी नगर स्टेशन पर विशेष ध्यान दिया गया है क्योंकि यह एक बड़ा रिहायशी और कमर्शियल हब बनने की क्षमता रखता है। यहाँ टिकट काउंटर से लेकर ऑटोमेटेड फेयर कलेक्शन (AFC) गेट्स तक सब कुछ टेस्ट किया जा चुका है। पार्किंग की व्यवस्था इतनी सुदृढ़ की गई है कि लोग अपने वाहन यहाँ पार्क करके मेट्रो से दिल्ली या मोदीपुरम जा सकें। परतापुर और रिठानी स्टेशनों पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती यह संकेत देती है कि ये स्टेशन संचालन के लिए 'ग्रीन सिग्नल' का इंतजार कर रहे हैं।   सुरक्षा और सुविधा: विश्वस्तरीय मानक एनसीआरटीसी (NCRTC) ने सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया है। रिपोर्ट के अनुसार, चूंकि अभी पब्लिक के लिए संचालन शुरू नहीं हुआ है, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से सभी स्टेशनों के प्रवेश द्वारों पर ताले लगाए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई अनधिकृत व्यक्ति या जानवर ट्रैक पर न पहुंच जाए, जिससे टेस्टिंग या हाई-स्पीड ट्रायल में बाधा उत्पन्न हो।   निगरानी: हर स्टेशन पर 24x7 सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। सीसीटीवी नेटवर्क: पूरा कॉरिडोर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में है। प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स (PSD): यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर स्टेशन पर प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स लगाए गए हैं, जो ट्रेन के रुकने पर ही खुलेंगे। दिव्यांगजन अनुकूल: सभी स्टेशनों को व्हीलचेयर और दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए सुगम बनाया गया है।   परिवहन व्यवस्था पर प्रभाव: भारतीय रेल और बसों को मिलेगी चुनौती मोदीपुरम से मेरठ साउथ के बीच मेट्रो और नमो भारत का संचालन शुरू होते ही शहर की परिवहन व्यवस्था में एक 'पैराडाइम शिफ्ट' (Paradigm Shift) देखने को मिलेगा।   क्यों पिछड़ जाएंगी बसें और सामान्य ट्रेनें? समय की बचत: जहाँ रोडवेज की बसें या सिटी बसें ट्रैफिक जाम के कारण मोदीपुरम से परतापुर पहुँचने में घंटों लगा देती हैं, वहीं मेट्रो यह दूरी मिनटों में तय करेगी। सुविधा: भारतीय रेल की पैसेंजर ट्रेनों में भीड़ और लेटलतीफी आम है। इसके विपरीत, नमो भारत और मेट्रो पूरी तरह से वातानुकूलित (AC), धूल-मुक्त और शोर-मुक्त यात्रा का अनुभव देंगी। विश्वसनीयता: मेट्रो की आवृत्ति (Frequency) बहुत अधिक होगी (हर 5-10 मिनट में ट्रेन), जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।   विशेषज्ञों का मानना है कि शहर के भीतर ऑटो-रिक्शा और ई-रिक्शा अब 'फीडर' की भूमिका निभाएंगे, जो यात्रियों को घर से मेट्रो स्टेशन तक लाएंगे, लेकिन लंबी दूरी की यात्रा के लिए मेट्रो ही पहली पसंद बनेगी।   'दिल्ली अब दूर नहीं': 82 किमी का सफर, 60 मिनट से कम इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण दिल्ली से कनेक्टिविटी है। दिल्ली के सराय काले खां से मोदीपुरम तक का पूरा आरआरटीएस कॉरिडोर 82 किलोमीटर लंबा है।   वर्तमान स्थिति: दिल्ली (अशोक नगर) से मेरठ साउथ (55 किमी) तक नमो भारत ट्रेनें पहले से ही जनता के लिए चल रही हैं और हजारों लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। आगामी बदलाव: जैसे ही मेरठ साउथ से मोदीपुरम (27 किमी) का हिस्सा जुड़ेगा, पूरा कॉरिडोर एक साथ एक्टिव हो जाएगा। कनेक्टिविटी: इसके बाद मेरठ से गाजियाबाद, साहिबाबाद, आनंद विहार और सराय काले खां (जहाँ से आप दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन या रेलवे स्टेशन जा सकते हैं) जाना बेहद आसान हो जाएगा। जो सफर पहले 3 से 4 घंटे लेता था, वह अब एक घंटे से भी कम समय में पूरा होगा।   मोदीपुरम डिपो: अंतिम बाधा और समाधान हालांकि 13 स्टेशन तैयार हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार मोदीपुरम डिपो का काम अभी थोड़ा अधूरा पाया गया है। डिपो किसी भी रेल सिस्टम का 'हृदय' होता है, जहाँ ट्रेनों की पार्किंग, रखरखाव, सफाई और तकनीकी जाँच होती है। एनसीआरटीसी (NCRTC) युद्धस्तर पर डिपो का काम पूरा कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि डिपो का काम खत्म होते ही पूरे कॉरिडोर पर कमर्शियल रन (Commercial Run) शुरू कर दिया जाएगा।   मेट्रो चलने के बाद मेरठ की बदलती तस्वीर जब शहर के अंदर मेट्रो दौड़ती है, तो वह केवल एक ट्रेन नहीं होती, बल्कि विकास का इंजन होती है। मेरठ में इसके दूरगामी परिणाम होंगे:   1. रियल एस्टेट में बूम मेट्रो रूट के आसपास, विशेषकर शताब्दी नगर, मोदीपुरम और मेरठ साउथ के इलाकों में प्रॉपर्टी के दामों में उछाल आने की संभावना है। दिल्ली में काम करने वाले लोग अब मेरठ में रहना पसंद करेंगे क्योंकि यहाँ घर सस्ते हैं और आवागमन आसान है।   2. प्रदूषण और ट्रैफिक में कमी मेरठ शहर अपनी संकरी गलियों और बेतहाशा ट्रैफिक के लिए जाना जाता है। बेगमपुल, भैसाली और दिल्ली रोड पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी। जब हजारों लोग निजी कारों और बाइकों को छोड़कर मेट्रो का इस्तेमाल करेंगे, तो प्रदूषण का स्तर भी काफी नीचे आएगा।   3. रोजगार के अवसर स्टेशनों के संचालन, सुरक्षा, हाउसकीपिंग और आसपास खुलने वाली दुकानों/रेस्तरां के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के सैकड़ों नए अवसर पैदा होंगे।   नमो भारत और मेरठ मेट्रो में क्या होगा अंतर? आम जनता के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि जब ट्रैक एक ही है, तो दो ट्रेनें कैसे?   नमो भारत (RRTS): यह लंबी दूरी की ट्रेन है। यह केवल प्रमुख स्टेशनों (जैसे मेरठ साउथ, बेगमपुल, मोदीपुरम) पर रुकेगी। इसकी रफ्तार बहुत तेज (160-180 किमी/घंटा) होगी। इसका किराया थोड़ा अधिक हो सकता है। मेरठ मेट्रो (MRTS): यह एक स्थानीय सेवा है। यह 13 के 13 स्टेशनों पर रुकेगी। इसकी रफ्तार मेट्रो मानकों (80-100 किमी/घंटा) के अनुसार होगी और इसका किराया शहर के भीतर यात्रा करने वाले आम आदमी की जेब के अनुकूल होगा।   एक नए सवेरे का इंतजार मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक स्टेशनों का तैयार होना इस बात का प्रमाण है कि विकास अब कागजों से उतरकर धरातल पर आ चुका है। भैसाली की कलाकारी हो या बेगमपुल की अंडरग्राउंड टनल, या फिर मोदीपुरम का विशाल विस्तार—हर पहलू यह बता रहा है कि मेरठ अब एक 'स्मार्ट सिटी' बनने की दिशा में सबसे बड़ी छलांग लगा चुका है।   प्रशासन और एनसीआरटीसी की तैयारी पूरी है। सुरक्षा घेरा सख्त है, और सिस्टम टेस्ट किए जा रहे हैं। अब बस एक हरी झंडी का इंतजार है, जिसके बाद मेरठ की रफ्तार, दिल्ली की रफ्तार से कदमताल करती नजर आएगी। मेरठवासियों के लिए सलाह है कि वे तैयार रहें, क्योंकि उनके शहर का भूगोल और इतिहास, दोनों बदलने वाला है।   (यह लेख उपलब्ध नवीनतम जानकारी और प्रोजेक्ट अपडेट्स पर आधारित है। संचालन की अंतिम तिथि की घोषणा एनसीआरटीसी द्वारा की जाएगी।)

Unknown जनवरी 25, 2026 0
Meerut Cop Sustains Severe Injuries from Chinese Manjha Receives 17 Stitches
मेरठ में 'खूनी मांझे' का कहर: ड्यूटी जा रहे दरोगा का चेहरा चीरा, 17 टांके आने से हड़कंप; प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रही 'मौत'

मेरठ (Meerut): बसंत पंचमी (Basant Panchami) का त्योहार नजदीक आते ही मेरठ के आसमान में पतंगों का रोमांच दिखने लगा है, लेकिन इसके साथ ही सड़कों पर 'मौत का धागा' यानी प्रतिबंधित चाइनीज मांझा (Banned Chinese Manjha) भी अपना कहर बरपाने लगा है। प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद, इस जानलेवा मांझे की बिक्री और इस्तेमाल धड़ल्ले से जारी है।READ ALSO:-मेरठ: 77वें गणतंत्र दिवस की तैयारियों के बीच जवाहर इंटर कॉलेज पर 'गंदगी' का ग्रहण; दबंगों ने गेट पर खोदा 3 फीट गहरा अवैध नाला, सीएम दरबार पहुंची शिकायत   ताजा मामला मेरठ के लोहिया नगर थाना क्षेत्र का है, जहां शनिवार को चाइनीज मांझे की चपेट में आने से एक दरोगा (Sub-Inspector) गंभीर रूप से घायल हो गए। मांझे की धार इतनी तेज थी कि दरोगा के चेहरे और गर्दन पर गहरे जख्म हो गए, जिसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों को उनके घावों को भरने के लिए 17 टांके लगाने पड़े हैं।   ड्यूटी जाते समय हुआ हादसा (The Incident) जानकारी के मुताबिक, घायल दरोगा की पहचान ऋषभ गुप्ता (SI Rishabh Gupta) के रूप में हुई है, जो लोहिया नगर थाना क्षेत्र की जाकिर कॉलोनी चौकी के इंचार्ज हैं। शनिवार को वह अपनी बाइक से ड्यूटी पर जा रहे थे। जैसे ही वह लोहिया नगर क्षेत्र से गुजर रहे थे, अचानक कहीं से कटी हुई पतंग का चाइनीज मांझा उनके सामने आ गया।   जब तक वह कुछ समझ पाते या अपनी बाइक रोक पाते, मांझा उनके हेलमेट और गर्दन के बीच उलझ गया। मांझे की पकड़ इतनी मजबूत और धारदार थी कि उसने हेलमेट के नीचे के हिस्से को पार करते हुए दरोगा की ठोड़ी (Chin) और गाल को बुरी तरह काट दिया।   सड़क पर गिरे, 17 टांके आए (Severe Injuries) मांझे के उलझते ही ऋषभ गुप्ता संतुलन खो बैठे और बाइक समेत सड़क पर गिर पड़े। खून से लथपथ हालत में उन्हें देखकर राहगीर मदद के लिए दौड़े। स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में उन्हें पास के एक निजी अस्पताल (Private Hospital) में भर्ती कराया।   डॉक्टरों के मुताबिक, मांझे की वजह से दरोगा ऋषभ गुप्ता की ठोड़ी और गाल पर गहरा घाव हो गया है। खून को रोकने और घाव को भरने के लिए डॉक्टरों को 17 टांके (17 Stitches) लगाने पड़े। गनीमत रही कि मांझा उनकी मुख्य नस (Jugular Vein) तक नहीं पहुंचा, वरना यह हादसा जानलेवा भी हो सकता था। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन वह अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।   प्रशासनिक दावों की खुली पोल इस घटना ने एक बार फिर मेरठ पुलिस और प्रशासन के उन दावों की पोल खोल दी है, जिनमें चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की बात कही जाती है। युवा समाजसेवी प्रशांत वर्मा (Prashant Verma) ने इस घटना पर गहरा रोष व्यक्त किया है।   प्रशांत वर्मा का आरोप है कि, "अधिकारी सिर्फ बसंत पंचमी के नाम पर रस्म अदायगी कर रहे हैं। जमीनी स्तर पर चाइनीज मांझे की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। अगर पुलिस ने समय रहते सख्त कार्रवाई की होती, तो आज एक पुलिस अधिकारी को ही इसका शिकार नहीं होना पड़ता।"   यह विडंबना ही है कि जो पुलिस आम जनता को चाइनीज मांझे से बचाने का जिम्मा संभालती है, आज उसी विभाग का एक जिम्मेदार अधिकारी इस अवैध कारोबार का शिकार बन गया।   पुलिस का बयान: कार्रवाई जारी है (Police Statement) घटना के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह (SP City Ayush Vikram Singh) ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि एसआई ऋषभ गुप्ता का इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर है।   एसपी सिटी ने कहा, "हम लगातार चाइनीज मांझा बेचने वालों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। लोहिया नगर और आसपास के इलाकों में छापेमारी की जा रही है। ऐसे दुकानदारों को चिह्नित किया जा रहा है जो चोरी-छिपे यह प्रतिबंधित मांझा बेच रहे हैं। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"   क्यों जानलेवा है चाइनीज मांझा? (Why is Chinese Manjha Dangerous?) चाइनीज मांझा पारंपरिक सूती मांझे से बिल्कुल अलग होता है। इसे बनाने में नायलॉन (Nylon) या प्लास्टिक के तारों का इस्तेमाल होता है, जिस पर कांच का बुरादा और धातुओं का लेप चढ़ाया जाता है।   ना टूटने वाला: यह मांझा इतना मजबूत होता है कि आसानी से हाथ से नहीं टूटता। धारदार: कांच और धातु के लेप के कारण यह किसी ब्लेड की तरह काम करता है। कंडक्टर: कई बार इसमें धातु का प्रयोग होने के कारण यह बिजली का सुचालक (Conductor) बन जाता है, जिससे करंट लगने का खतरा भी रहता है। पर्यावरण को नुकसान: यह मांझा नष्ट नहीं होता (Non-biodegradable), जिससे यह सालों तक पेड़ों और खंभों पर लटका रहता है और पक्षियों की जान लेता रहता है।   बसंत पंचमी और सुरक्षा उपाय (Safety Precaution) मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसंत पंचमी पर पतंगबाजी का विशेष महत्व है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चाइनीज मांझे ने इस त्योहार के उत्साह को खौफ में बदल दिया है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक है।   बचाव के तरीके: मफलर या स्कार्फ: दोपहिया वाहन चलाते समय अपनी गर्दन को मफलर या मोटे कपड़े से पूरी तरह ढक कर रखें। सेफ्टी रॉड (Safety Rod): अपनी बाइक पर यू-शेप (U-Shape) की लोहे की तार या सेफ्टी रॉड लगवाएं, जिससे मांझा आपके शरीर तक न पहुंचे। धीरे चलें: फ्लाईओवर और पतंगबाजी वाले इलाकों में गाड़ी की गति धीमी रखें। हेलमेट: फुल फेस हेलमेट का प्रयोग करें और वाइजर (Visor) हमेशा बंद रखें।   कानून क्या कहता है? (Legal Aspect) नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 2017 में ही पूरे देश में चाइनीज मांझे (नायलॉन या सिंथेटिक मांझा) की बिक्री, निर्माण और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (Environment Protection Act) के तहत:   चाइनीज मांझा बेचना या इस्तेमाल करना दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।   मेरठ में SI Rishabh Gupta के साथ हुई यह घटना प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी है। केवल रस्म अदायगी या त्योहारों के समय छापेमारी करने से यह समस्या खत्म नहीं होगी। पुलिस को जहां इसके स्रोतों (Sources) पर प्रहार करना होगा, वहीं आम जनता और अभिभावकों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके बच्चे खूनी चाइनीज मांझे का इस्तेमाल न करें। अगर एक दरोगा सुरक्षित नहीं है, तो आम राहगीर की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है।   मेरठ के लोहिया नगर में ड्यूटी जाते समय दरोगा ऋषभ गुप्ता प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी ठोड़ी और गाल पर 17 टांके लगाए गए हैं। समाजसेवियों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं, जबकि एसपी सिटी ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। बसंत पंचमी से पहले हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

Unknown जनवरी 24, 2026 0
Chota Mawana School Faces Drain Issue Preps for R Day
मेरठ: 77वें गणतंत्र दिवस की तैयारियों के बीच जवाहर इंटर कॉलेज पर 'गंदगी' का ग्रहण; दबंगों ने गेट पर खोदा 3 फीट गहरा अवैध नाला, सीएम दरबार पहुंची शिकायत

मेरठ (छोटा मवाना): शिक्षा के मंदिर के ठीक सामने अवैध निर्माण और मनमानी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छोटा मवाना स्थित ऐतिहासिक जवाहर इंटर कॉलेज (Jawahar Inter College Chota Mawana) के मुख्य द्वार के सामने कुछ दबंगों द्वारा अवैध रूप से नाला खोदे जाने के कारण विद्यालय परिसर में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई है।READ ALSO:-बच्चों के स्वास्थ्य का 'सुरक्षा कवच': DM ने रवाना की 'टीका मित्र वैन', मेरठ में अब घर-घर पहुंचेगा '5 साल में 7 बार' टीकाकरण का मंत्र   स्कूल के खेल के मैदान में जमा हो रहा गंदा पानी न केवल विद्यालय की 84 साल पुरानी इमारत के लिए खतरा बन गया है, बल्कि यहां पढ़ने वाले सैकड़ों छात्रों के स्वास्थ्य पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता पुनीत शर्मा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है।   ऐतिहासिक धरोहर पर संकट: 1942 से संचालित है विद्यालय सबसे पहले इस विद्यालय के महत्व को समझना आवश्यक है। जवाहर इंटर कॉलेज (छोटा मवाना) कोई साधारण स्कूल नहीं है। यह एक अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय है, जो सन् 1942 से संचालित है। जिस दौर में देश में 'भारत छोड़ो आंदोलन' की गूंज थी, उस समय से यह संस्था क्षेत्र में शिक्षा का प्रकाश फैला रही है।   शिकायतकर्ता पुनीत शर्मा (निवासी बेगम पुल, मेरठ) द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, स्कूल की दीवार के ठीक पास 3 फुट गहरा अवैध नाला (Illegal Drainage) कुछ स्थानीय लोगों द्वारा खुदवा दिया गया है। यह निर्माण न केवल विद्यालय की संपत्ति का अतिक्रमण है, बल्कि यह ऐतिहासिक ढांचे के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।   क्या है पूरा मामला? (The Complete Incident) घटनाक्रम के अनुसार, कुछ अज्ञात या स्थानीय दबंग लोगों ने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के स्कूल की बाउंड्री वॉल के पास खुदाई शुरू कर दी। देखते ही देखते वहां एक 3 फुट गहरा नाला खोद दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इस नाले का निर्माण तकनीकी रूप से पूरी तरह गलत है।   निकासी (Outlet) नदारद: किसी भी ड्रेनेज सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उसका 'आउटलेट' या निकास होता है, जहां से पानी बड़े नाले या सीवर लाइन में जाता है। लेकिन, यहां खोदे गए नाले का किसी भी बड़े मुख्य नाले से मिलान नहीं किया गया है। उल्टा ढलान: नाले का ढलान (Slope) वैज्ञानिक तरीके से नहीं बनाया गया है। परिणाम: निकासी न होने के कारण, नाले में आने वाला गंदा पानी आगे बहने के बजाय ओवरफ्लो होकर स्कूल के खेल के मैदान (Playground) में जमा हो रहा है।   छात्रों के स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा (Health Hazards) विद्यालय में जमा गंदा पानी केवल गंदगी की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल (Health Emergency) का संकेत है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, रुका हुआ गंदा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए सबसे उपयुक्त स्थान होता है।   बीमारियों का खतरा: डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे जानलेवा बुखार फैलाने वाले मच्छर ऐसे ही पानी में पनपते हैं। संक्रमण: स्कूल के मैदान में गंदे पानी के संपर्क में आने से बच्चों को त्वचा संबंधी रोग (Skin Diseases) होने का खतरा है। दुर्गंध: गंदे पानी से उठने वाली दुर्गंध के कारण कक्षाओं में पढ़ाई करना दूभर हो गया है।   सामाजिक कार्यकर्ता पुनीत शर्मा ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि "बच्चों के स्वास्थ्य, विद्यालय व सामाजिक सरोकार को दृष्टिगत रखते हुए" इस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।   प्रशासनिक अमले पर गंभीर सवाल यह मामला सिर्फ एक नाले का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी है। शिकायतकर्ता ने अपने पत्र में बहुत ही तार्किक प्रश्न उठाए हैं जो सीधे तौर पर नगर पंचायत, ग्राम सभा और नगर निगम की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हैं।   "ऐसे में कोई भी व्यक्ति/समूह कैसे कोई सार्वजनिक नाला सड़क के किनारे बना सकता है? यह प्रशासनिक अमले के लिए प्रश्न चिह्न है। ऐसे तो कोई भी अपनी मर्जी से किसी भी जगह नाले-नाली खोदने लगेंगे। नगर पंचायत, ग्राम सभा, नगर निगम, विकास प्राधिकरण की तो आवश्यकता ही नहीं है। कोई भी कहीं भी कुछ भी निर्माण कर दें?" - (शिकायत पत्र का अंश)   यह सवाल जायज है। उत्तर प्रदेश में जहां सरकार अवैध निर्माण और भू-माफियाओं (Land Mafia) के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रही है, वहां दिनदहाड़े एक इंटर कॉलेज के सामने अवैध खुदाई कैसे हो गई? क्या स्थानीय पुलिस और लेखपाल को इसकी भनक नहीं लगी?   तकनीकी पहलू: सरकारी नक्शे में नाले का कोई वजूद नहीं शिकायत में एक और चौंकाने वाला दावा किया गया है। पत्र के मुताबिक, "आज तक भी किसी नक्शे में नाला/नाली तस्दीक नहीं है।" यानी, राजस्व विभाग (Revenue Department) या नगर निकाय के रिकॉर्ड में इस जगह पर किसी नाले का प्रस्ताव ही नहीं है।   जब कोई निर्माण सरकारी नक्शे में नहीं होता, तो उसे अवैध अतिक्रमण (Illegal Encroachment) की श्रेणी में रखा जाता है। सार्वजनिक सड़क या सरकारी स्कूल की जमीन के पास बिना अनुमति के खुदाई करना 'सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम' (Prevention of Damage to Public Property Act) के तहत दंडनीय अपराध हो सकता है।   सीएम योगी और अधिकारियों से की गई मांगें 22 जनवरी 2026 को भेजे गए इस शिकायती पत्र में पुनीत शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी प्रतिलिपियाँ न केवल मुख्यमंत्री को, बल्कि प्रमुख सचिव (उत्तर प्रदेश शासन), मंडलायुक्त (मेरठ मंडल), जिलाधिकारी (मेरठ) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को भी भेजी हैं।   प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं: उच्च स्तरीय जांच: मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए कि आखिर किसके आदेश या शह पर यह अवैध निर्माण किया गया। वैज्ञानिक निर्माण (यदि आवश्यक हो): शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि वास्तव में वहां जल निकासी के लिए नाले की आवश्यकता है, तो उसका विरोध नहीं है। लेकिन, यह निर्माण सरकारी विभाग (PWD या नगर निगम) द्वारा सही मापदंड, नक्शे और ढलान के साथ किया जाना चाहिए ताकि पानी स्कूल में न भरे। तत्काल कार्रवाई: यदि यह निर्माण अनावश्यक है, तो इसे तुरंत बंद कराया जाए। दोषियों पर एक्शन: जिन लोगों ने अवैध रूप से यह नाला खुदवाया है, उनके विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।   अभिभावकों में रोष इस घटना को लेकर स्थानीय अभिभावकों और छात्रों में भी दबी जुबान में रोष है। एक ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान, जहां हजारों बच्चों का भविष्य संवरता है, वहां इस तरह की अव्यवस्था प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है। खेल का मैदान बच्चों के शारीरिक विकास के लिए होता है, न कि मोहल्ले का गंदा पानी जमा करने के लिए।   Jawahar Inter College Chota Mawana का यह प्रकरण केवल एक नाले की समस्या नहीं, बल्कि नियम-कानूनों की अनदेखी का उदाहरण है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय या मेरठ के जिलाधिकारी इस पत्र पर क्या संज्ञान लेते हैं। क्या प्रशासन का बुलडोजर इस अवैध निर्माण पर चलेगा, या फिर नौनिहालों को गंदे पानी और बीमारियों के बीच ही अपनी पढ़ाई जारी रखनी पड़ेगी?   यह उम्मीद की जाती है कि प्रशासन बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द इस अवैध नाले को बंद कराएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगा।   मेरठ के छोटा मवाना स्थित जवाहर इंटर कॉलेज के मुख्य द्वार पर अवैध नाला खोदने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। 22 जनवरी 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता पुनीत शर्मा ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर शिकायत की है कि निकासी न होने के कारण नाले का गंदा पानी स्कूल के खेल के मैदान में भर रहा है। इससे छात्रों में बीमारी फैलने का खतरा है। पत्र में अवैध निर्माण करने वालों पर कार्रवाई और नाले को बंद करने की मांग की गई है।   Disclaimer: यह समाचार सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा की गई शिकायत और स्कूल प्रशासन द्वारा जारी विज्ञप्ति पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा।  

Unknown जनवरी 24, 2026 0
dm-flags off tika mitra van vaccination awareness campaign 11 diseases child health
बच्चों के स्वास्थ्य का 'सुरक्षा कवच': DM ने रवाना की 'टीका मित्र वैन', मेरठ में अब घर-घर पहुंचेगा '5 साल में 7 बार' टीकाकरण का मंत्र

बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है. "एक भी बच्चा छूटा, सुरक्षा चक्र टूटा" के संकल्प को साकार करने के लिए जिलाधिकारी (DM) डॉ. विजय कुमार सिंह ने कलेक्ट्रेट परिसर से 'टीका मित्र वैन' (Tika Mitra Van) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.READ ALSO:-मेरठ में खौफनाक कदम: पिता की डांट नहीं सह सका 18 साल का बेटा, गुस्से में अवैध तमंचे से पेट में उतार ली गोली; जिंदगी-मौत की जंग जारी   यह वैन केवल एक वाहन नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता जागरूकता केंद्र है, जो जनपद के सुदूर ग्रामीण अंचलों से लेकर शहर की तंग गलियों तक जाकर लोगों को टीकाकरण के महत्व के प्रति जागरूक करेगी. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को 11 जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित करना है.   इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि 'टीका मित्र वैन' कैसे काम करेगी, बच्चों के लिए कौन-कौन से टीके (Vaccines) जरूरी हैं, और स्वास्थ्य विभाग की इस मुहिम का आम जनता को कैसे लाभ मिलेगा.   जागरूकता का रथ: क्या है 'टीका मित्र वैन'? टीकाकरण को लेकर आज भी समाज के कई वर्गों में भ्रांतियां और जागरूकता की कमी देखने को मिलती है. कई बार अभिभावक काम की व्यस्तता या जानकारी के अभाव में बच्चों के नियमित टीके लगवाना भूल जाते हैं. इसी समस्या के समाधान के लिए 'टीका मित्र वैन' की शुरुआत की गई है.   जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने वैन को रवाना करते हुए कहा, "स्वस्थ बच्चे ही स्वस्थ राष्ट्र की नींव रखते हैं. हमारा उद्देश्य है कि जनपद का कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे. यह वैन घर-घर जाकर यह संदेश देगी कि बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी, सुरक्षित और आसान तरीका केवल टीकाकरण ही है."   वैन की मुख्य विशेषताएं: ऑडियो-विजुअल प्रचार: वैन में लाउडस्पीकर और प्रचार सामग्री के माध्यम से टीकाकरण के लाभ बताए जाएंगे. कैलेंडर का प्रदर्शन: वैन के बाहरी हिस्से पर बच्चों के टीकाकरण का 'आयु अनुसार कैलेंडर' (Immunization Schedule) प्रदर्शित किया गया है. इससे अभिभावक आसानी से समझ सकेंगे कि किस उम्र में कौन सा टीका लगवाना है. भ्रांतियों का निवारण: वैन के साथ चल रहे स्वास्थ्य कर्मी लोगों के मन में टीकों को लेकर चल रहे डर और गलतफहमियों को दूर करेंगे.   '5 साल, 7 बार': यह फार्मूला क्यों है जरूरी? इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग ने एक बहुत ही सरल और स्पष्ट संदेश दिया है— "5 साल तक 7 बार टीकाकरण अनिवार्य है."   अक्सर देखा गया है कि माता-पिता जन्म के समय के टीके तो लगवा लेते हैं, लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वे फॉलो-अप टीके (Booster Doses) लगवाना भूल जाते हैं. 'टीका मित्र वैन' इसी बात पर जोर देगी कि एक भी टीका छूटने पर बच्चे का सुरक्षा चक्र कमजोर हो सकता है.   टीकाकरण का महत्व: टीके बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) विकसित करते हैं. यह शरीर को भविष्य में होने वाले संक्रमणों से लड़ने के लिए तैयार करते हैं. यदि कोई बच्चा टीकाकरण से चूक जाता है, तो उसे गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जो कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकती हैं या स्थायी विकलांगता का कारण बन सकती हैं.   इन 11 जानलेवा बीमारियों से मिलेगी सुरक्षा 'टीका मित्र वैन' का मुख्य फोकस उन 11 गंभीर बीमारियों पर है, जो बच्चों के लिए बेहद घातक मानी जाती हैं. नियमित टीकाकरण से इन सभी बीमारियों की रोकथाम संभव है. ये 11 बीमारियां हैं:   डिप्थीरिया (Diphtheria): यह गले का एक गंभीर संक्रमण है जो सांस लेने में कठिनाई पैदा कर सकता है. काली खांसी (Pertussis): इसे 'कुकर खांसी' भी कहा जाता है, जो बच्चों के फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित करती है. टेटनस (Tetanus): यह मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन पैदा करता है और जानलेवा हो सकता है. पोलियो (Polio): यह बीमारी बच्चे को हमेशा के लिए विकलांग बना सकती है. भारत पोलियो मुक्त हो चुका है, लेकिन सुरक्षा बनाए रखने के लिए टीकाकरण जरूरी है. टीबी (Tuberculosis): यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों में भी फैल सकती है. (BCG का टीका इससे बचाता है). खसरा (Measles): यह एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है. रूबेला (Rubella): इसे जर्मन खसरा भी कहते हैं. हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B): यह लीवर को नुकसान पहुंचाने वाला गंभीर संक्रमण है. निमोनिया (Pneumonia): न्यूमोकोकल वैक्सीन इससे बचाव करती है. मेनिन्जाइटिस (Meningitis): दिमागी बुखार, जिससे जान जाने का खतरा रहता है. गलाघोंटू: और रोटावायरस डायरिया जैसी बीमारियों से भी बचाव शामिल है.   जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (DIO) डॉ. प्रवीण गौतम ने बताया, "हमारी अपील है कि अभिभावक इन बीमारियों की गंभीरता को समझें. ये बीमारियां न केवल बच्चे को कष्ट देती हैं बल्कि परिवार पर आर्थिक और मानसिक बोझ भी डालती हैं. दो बूंद दवा और एक छोटा सा टीका आपके बच्चे को जीवनदान दे सकता है."   निःशुल्क सुविधा और MCP कार्ड की अहमियत जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे नियमित टीकाकरण सत्रों (Routine Immunization Sessions) में ये सभी टीके पूर्णतः निःशुल्क (Free of Cost) लगाए जाते हैं. यह सुविधा जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और गांव स्तर पर आंगनवाड़ी केंद्रों में आयोजित सत्रों में उपलब्ध है.   मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड (MCP Card): डीएम ने अभिभावकों से एक विशेष आग्रह किया है. उन्होंने कहा, "टीकाकरण के बाद एएनएम (ANM) या स्वास्थ्य कर्मी से 'मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड' (MCP Card) जरूर मांगें और उसे संभाल कर रखें. यह कार्ड आपके बच्चे के स्वास्थ्य का पासपोर्ट है. इसमें बच्चे के अगले टीके की तारीख और अब तक लगे टीकों का पूरा रिकॉर्ड होता है."   जिला प्रतिरक्षण अधिकारी की अपील: "जागरूक बनें, जिम्मेदारी निभाएं" वैन रवानगी के दौरान जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रवीण गौतम ने जनसामान्य से भावुक अपील की. उन्होंने कहा कि 0 से 5 वर्ष की आयु बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है. इस दौरान उनकी इम्युनिटी कमजोर होती है, इसलिए उन्हें बाहरी सुरक्षा (Vaccines) की सख्त जरूरत होती है.   डॉ. गौतम ने कहा, "टीका मित्र वैन आपके दरवाजे तक दस्तक दे रही है. अगर आपके घर में या आस-पड़ोस में कोई ऐसा बच्चा है जिसका टीकाकरण अधूरा है, तो तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें. आशा (ASHA) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता इसमें आपकी पूरी मदद करेंगी."   टीकाकरण में कोताही के परिणाम विशेषज्ञों के अनुसार, जो बच्चे बिना टीकाकरण के रह जाते हैं, वे न केवल खुद जोखिम में होते हैं बल्कि समुदाय के अन्य बच्चों के लिए भी खतरा बन सकते हैं.   बीमारी का प्रसार: बिना टीका लगा बच्चा वायरस का वाहक (Carrier) बन सकता है. इलाज का खर्च: इन बीमारियों के इलाज का खर्च टीकाकरण की तुलना में बहुत अधिक होता है. शैक्षिक नुकसान: बार-बार बीमार पड़ने से बच्चे की पढ़ाई और विकास बाधित होता है.   प्रशासन की तैयारी और भविष्य की योजना 'टीका मित्र वैन' के संचालन के लिए एक विस्तृत रूट चार्ट (Route Chart) तैयार किया गया है. यह वैन उन क्षेत्रों में प्राथमिकता से जाएगी जिन्हें 'हाई रिस्क एरिया' (High Risk Areas) माना जाता है या जहां टीकाकरण का प्रतिशत (Immunization Coverage) कम है. इसमें ईंट-भट्ठे, निर्माण स्थल, और दूरदराज के गांव शामिल हैं.   स्वास्थ्य विभाग की टीमें वैन के साथ-साथ चलेंगी और मौके पर ही छूटे हुए बच्चों की सूची (Due List) तैयार करेंगी ताकि अगले सत्र में उन्हें टीका लगाया जा सके.   जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह और स्वास्थ्य विभाग की यह पहल 'टीका मित्र वैन' निश्चित रूप से एक सराहनीय कदम है. लेकिन, यह अभियान तभी सफल होगा जब जनता इसमें भागीदारी निभाएगी. सरकार संसाधन उपलब्ध करा सकती है, वैन चला सकती है, लेकिन बच्चे को टीकाकरण केंद्र तक ले जाने की जिम्मेदारी माता-पिता की है.   आइए संकल्प लें कि हम अपने बच्चों को इन 11 जानलेवा बीमारियों से बचाएंगे और उन्हें एक स्वस्थ बचपन का उपहार देंगे. याद रखें, "टीकाकरण है सुरक्षा का वादा, स्वस्थ बच्चा, सशक्त इरादा."   जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने कलेक्ट्रेट से 'टीका मित्र वैन' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह वैन शहर और गांवों में घूमकर लोगों को बताएगी कि 0 से 5 साल तक के बच्चों का 7 बार टीकाकरण क्यों जरूरी है. यह अभियान बच्चों को पोलियो, खसरा, टीबी और निमोनिया जैसी 11 जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए चलाया जा रहा है. सभी सरकारी केंद्रों पर यह टीकाकरण मुफ्त उपलब्ध है.

Unknown जनवरी 24, 2026 0
Meerut News18 Year Old Youth Shoots Himself After Dispute with Father in Bahsuma Condition Critical
मेरठ में खौफनाक कदम: पिता की डांट नहीं सह सका 18 साल का बेटा, गुस्से में अवैध तमंचे से पेट में उतार ली गोली; जिंदगी-मौत की जंग जारी

मेरठ (Meerut): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां बहसूमा थाना क्षेत्र (Bahsuma Police Station Area) के अकबरपुर सादात गांव में पारिवारिक कलह ने एक भयानक मोड़ ले लिया. शनिवार सुबह पिता से हुए विवाद के बाद एक 18 वर्षीय युवक ने गुस्से में आकर खुद को गोली मार ली.READ ALSO:-मुरादाबाद: हिंदू छात्रा को जबरन बुर्का और धर्मांतरण का दबाव? वायरल वीडियो से बिलारी में तनाव, 5 छात्राओं पर FIR   गोली युवक के पेट में लगी है, जिससे उसकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है. आनन-फानन में परिजनों ने उसे मेरठ के संस्कार हॉस्पिटल (Sanskar Hospital) में भर्ती कराया, जहां वह जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और अवैध हथियार (Illegal Weapon) के स्रोत का पता लगा रही है.   क्या है पूरा मामला? घटना शनिवार, 24 जनवरी 2026 की सुबह की है. अकबरपुर सादात गांव के निवासी शौकत के 18 वर्षीय बेटे तहसीन (Tahseen) का अपने पिता से किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया था. बताया जा रहा है कि विवाद इतना बढ़ गया कि तहसीन आवेश में आ गया. उसने घर में रखे 315 बोर के तमंचे (Country-made Pistol) से अपने पेट में गोली मार ली.   गोली चलने की आवाज सुनते ही घर में कोहराम मच गया. परिजन दौड़कर मौके पर पहुंचे तो देखा कि तहसीन खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था.   अस्पताल में चल रहा है उपचार घायल तहसीन को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसे मेरठ के संस्कार हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया. चिकित्सकों के मुताबिक, गोली पेट में काफी अंदर तक धंस गई है, जिससे काफी खून बह गया है. युवक की हालत अभी भी नाजुक (Critical) बनी हुई है और उसे डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है.   पुलिस की जांच और अवैध हथियार पर सवाल घटना की सूचना मिलते ही बहसूमा थाना पुलिस मौके पर पहुंची. थाना प्रभारी प्रतिभा सिंह (Pratibha Singh) ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला घरेलू विवाद का लग रहा है. पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया है.   पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि 18 साल के युवक के पास अवैध तमंचा कहां से आया. पुलिस इस बिंदु पर गंभीरता से जांच कर रही है. थाना प्रभारी ने कहा, "हम मामले की जांच कर रहे हैं. पारिवारिक विवाद के साथ-साथ यह भी पता लगाया जा रहा है कि अवैध हथियार घर में कैसे आया. जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी."     अकबरपुर सादात में पहले भी हो चुकी हैं वारदातें अकबरपुर सादात गांव पहले भी सुर्खियों में रहा है. इससे पहले यहां एक महिला द्वारा प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या करने और उसे सांप से कटवाने का मामला सामने आया था. अब इस गोलीकांड ने एक बार फिर गांव में सनसनी फैला दी है. गांव के लोग दबी जुबान में अवैध हथियारों की आसान उपलब्धता पर भी सवाल उठा रहे हैं.   फिलहाल, पुलिस तहसीन के होश में आने का इंतजार कर रही है ताकि उसका बयान दर्ज किया जा सके. वहीं, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि कैसे क्षण भर का गुस्सा पूरे परिवार को संकट में डाल सकता है और घर में अवैध हथियारों का होना कितना घातक साबित हो सकता है.   सारांश: मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव में शनिवार सुबह 18 वर्षीय तहसीन ने पिता से विवाद के बाद खुद को गोली मार ली. उसे गंभीर हालत में मेरठ के संस्कार अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है और अवैध हथियार के स्रोत का पता लगा रही है.

Unknown जनवरी 24, 2026 0
Mawana Police Bests Inter State Gang Targeting Women Leader Arrested with Stolen Gold Jewelry One Absconding
खाकी की आड़ में 'पाप' का अंत: मवाना पुलिस ने दबोचा महिलाओं के जेवर उतरवाने वाला 'नटवरलाल'; 'सम्मोहन' और 'डर' का कॉकटेल बनाकर करता था ठगी

मवाना (मेरठ): पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महिलाओं, विशेषकर बुजुर्ग महिलाओं को निशाना बनाकर ठगी और लूट की वारदातों को अंजाम देने वाले एक कुख्यात और शातिर गिरोह का मवाना पुलिस (Mawana Police) ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने त्वरित और सटीक कार्रवाई करते हुए इस अंतर्राज्यीय गिरोह के सरगना को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। गिरफ्तार अभियुक्त के पास से पुलिस ने ठगी किए गए सोने के आभूषण, मोबाइल फोन और अन्य कीमती सामान बरामद किया है।READ ALSO:-Meerut News: सिस्टम की 'काली करतूत' ने ली जान! नाले में समाया ई-रिक्शा, 30 मिनट तक तड़पते चालक की दर्दनाक मौत; नोएडा जैसा खौफनाक मंजर   इस गिरफ्तारी से न केवल मवाना बल्कि आसपास के जिलों में भी सक्रिय ठगों के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है।   19 जनवरी की घटना: विश्वास में लेकर लूटे थे जेवर यह पूरा मामला 19 जनवरी 2026 का है, जब मवाना कस्बा क्षेत्र में दिनदहाड़े एक सनसनीखेज वारदात हुई थी। एक महिला अपने घरेलू काम से बाजार जा रही थी, तभी रास्ते में उसे दो अज्ञात युवकों ने रोक लिया। थाना मवाना पुलिस द्वारा महिला के साथ ठगी करने वाले अन्तर्राज्यीय ठग गिरोह के सरगना शातिर अभियुक्त गिरफ्तार, कब्जे से ठगी का माल बरामद ।#UPPolice #Meerutpolice@Uppolice @dgpup@digrangemeerut@adgzonemeerut pic.twitter.com/SPdkEhzker — MEERUT POLICE (@meerutpolice) January 23, 2026   ठगी का तरीका (Modus Operandi): इन शातिर ठगों का तरीका बेहद पेशेवर था। उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर या फिर किसी और बहाने से महिला को अपनी बातों में उलझा लिया। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने महिला को डराया कि "आगे चेकिंग चल रही है" या "माहौल खराब है, आप अपने जेवर उतारकर पर्स में रख लीजिए।" महिला उनके झांसे में आ गई और उसने अपने सोने के कंगन और ईयररिंग्स उतारकर उन्हें दे दिए। ठगों ने बड़ी चालाकी से असली जेवर अपनी जेब में रख लिए और महिला को कागज की पुड़िया या नकली जेवर थमाकर वहां से रफूचक्कर हो गए। जब महिला को ठगी का एहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।   पीड़िता ने तुरंत मवाना थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू कर दी।   पुलिस का एक्शन: 72 घंटे में सुलझाई गुत्थी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मेरठ और पुलिस अधीक्षक ग्रामीण (SP Rural) के निर्देश पर मवाना पुलिस ने इस घटना को चुनौती के रूप में लिया। क्षेत्राधिकारी मवाना (CO Mawana) के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी ने घटना के खुलासे के लिए दो विशेष टीमों का गठन किया:   सर्विलांस टीम: जिसका काम इलाके के मोबाइल डंप डेटा और संदिग्ध नंबरों की ट्रेसिंग करना था। क्राइम ब्रांच व स्थानीय पुलिस टीम: जिसका काम सीसीटीवी फुटेज खंगालना और मुखबिरों को सक्रिय करना था।   सीसीटीवी बना अहम सुराग: पुलिस ने घटना स्थल और उसके आसपास के करीब 50 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में दो संदिग्ध युवक एक बाइक पर जाते हुए दिखाई दिए। हुलिए और बाइक के नंबर के आधार पर पुलिस ने उनकी पहचान सुनिश्चित की।   गिरफ्तारी: 22 जनवरी को दबोचा गया सरगना मुखबिर की सटीक सूचना और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से पुलिस को पता चला कि घटना का मुख्य आरोपी इलाके से भागने की फिराक में है। 22 जनवरी 2026 को पुलिस ने घेराबंदी करते हुए मुख्य आरोपी खुर्शीद पुत्र फजलुद्दीन को हिरासत में ले लिया।   अभियुक्त का विवरण: नाम: खुर्शीद पिता का नाम: फजलुद्दीन निवासी: (पुलिस द्वारा विस्तृत पता सत्यापित किया जा रहा है, लेकिन वह एक बाहरी जिले का निवासी बताया जा रहा है) अपराधिक इतिहास: खुर्शीद एक पेशेवर अपराधी है और उस पर पहले भी कई शहरों में ठगी और चोरी के मुकदमे दर्ज होने की आशंका है।   बरामदगी: शत-प्रतिशत माल रिकवर पुलिस के लिए यह एक बड़ी सफलता रही क्योंकि उन्होंने आरोपी की निशानदेही पर ठगी गया लगभग पूरा सामान बरामद कर लिया है। अमूमन ऐसे मामलों में माल रिकवर करना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि ठग तुरंत उसे बेच देते हैं।   बरामद सामान की सूची: 2 सोने के कंगन (Gold Kangan): जिनका वजन काफी ज्यादा बताया जा रहा है। 2 सोने के ईयररिंग्स (Earrings): जो पीड़िता के थे। 1 एटीएम कार्ड: जो संभवतः महिला के पर्स से निकाला गया था। 1 ओप्पो (OPPO) मोबाइल फोन: जिसे आरोपी इस्तेमाल कर रहा था या चोरी का था। 1 पर्स: जिसमें कुछ नकदी और दस्तावेज थे।   पूछताछ में खुलासा: अंतर्राज्यीय नेटवर्क का हिस्सा पुलिस पूछताछ में आरोपी खुर्शीद ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि वह और उसका साथी अलग-अलग शहरों में घूमकर वारदातों को अंजाम देते हैं। ठगी का पैटर्न: ये लोग अक्सर सुबह या दोपहर के वक्त सुनसान इलाकों या बाजारों के बाहरी हिस्सों में शिकार ढूंढते हैं। उनका मुख्य टारगेट अकेली महिलाएं या बुजुर्ग होते हैं। ये लोग कभी 'पुलिस चेकिंग' का बहाना बनाते हैं, तो कभी 'जेवर चमकाने' का पाउडर बेचने वाले बनकर घरों में घुसते हैं। कभी-कभी ये लोग 'सम्मोहन' (Hypnotism) जैसी ट्रिक्स का इस्तेमाल करने का भी दावा करते हैं, हालांकि पुलिस इसे 'कॉन्फिडेंस ट्रिक' (Confidence Trick) मानती है।   साथी अभी भी फरार, दबिश जारी पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वारदात के वक्त खुर्शीद के साथ उसका एक और साथी भी मौजूद था। वह बाइक चलाने और आसपास नजर रखने का काम करता था। पुलिस की दबिश के दौरान वह अंधेरे या भीड़ का फायदा उठाकर भागने में कामयाब हो गया। मवाना थाना प्रभारी ने बताया, "फरार आरोपी की पहचान कर ली गई है। हमारी टीमें उसके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। उसे भी जल्द ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।"   स्थानीय लोगों ने ली राहत की सांस मवाना और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से टप्पेबाजी और ठगी की घटनाओं ने लोगों में डर का माहौल पैदा कर दिया था। इस गिरफ्तारी से स्थानीय नागरिकों, खासकर महिलाओं ने राहत की सांस ली है। स्थानीय व्यापार मंडल और नागरिक संगठनों ने मवाना पुलिस की इस तत्परता की सराहना की है।   पुलिस की अपील: सावधान रहें, सुरक्षित रहें इस घटना के बाद मेरठ पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी करते हुए आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि नागरिक निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:   अनजान पर भरोसा न करें: अगर कोई अनजान व्यक्ति सड़क पर रोककर आपसे बात करने की कोशिश करे, तो सतर्क हो जाएं। पुलिस चेकिंग के नियम: पुलिस कभी भी सड़क पर किसी के जेवर नहीं उतरवाती। अगर कोई सिविल ड्रेस में खुद को पुलिस बताकर ऐसा करने को कहे, तो तुरंत 112 नंबर पर कॉल करें या शोर मचाएं। जेवर पहनकर सावधानी: सुनसान रास्तों पर कीमती जेवर पहनकर अकेले जाने से बचें। संदिग्ध गतिविधि: अगर आपके मोहल्ले में कोई संदिग्ध व्यक्ति या बाइक बार-बार घूमती दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।   मवाना पुलिस की यह कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है। 19 जनवरी की घटना का मात्र 3 दिनों के भीतर खुलासा करना और शत-प्रतिशत माल बरामद करना पुलिस की कार्यकुशलता को दर्शाता है। खुर्शीद जैसे शातिर अपराधी की गिरफ्तारी से भविष्य में होने वाली कई वारदातों पर रोक लगेगी। हालांकि, पुलिस के लिए चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। फरार साथी की गिरफ्तारी और इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना अभी बाकी है। उम्मीद है कि मवाना पुलिस अपनी इस मुहिम को जारी रखेगी और क्षेत्र को अपराध मुक्त बनाने में सफल होगी।   मवाना पुलिस ने 19 जनवरी को हुई ठगी की घटना का खुलासा करते हुए 22 जनवरी 2026 को अंतर्राज्यीय गिरोह के सरगना खुर्शीद को गिरफ्तार किया। आरोपी ने महिला को बातों में उलझाकर उसके सोने के कंगन और ईयररिंग्स ठग लिए थे। पुलिस ने सारा माल बरामद कर लिया है और फरार साथी की तलाश जारी है।

Unknown जनवरी 24, 2026 0
E Rickshaw Driver Dies in Open Drain as Police Arrive Late Reminiscent of Noidas Yuvraj Case(AI generated images)
Meerut News: सिस्टम की 'काली करतूत' ने ली जान! नाले में समाया ई-रिक्शा, 30 मिनट तक तड़पते चालक की दर्दनाक मौत; नोएडा जैसा खौफनाक मंजर

मेरठ (ब्यूरो): उत्तर प्रदेश के शहरों में 'स्मार्ट सिटी' का सपना तो दिखाया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि यहाँ की सड़कें और खुले नाले 'मौत के कुएं' में तब्दील हो चुके हैं। अभी नोएडा में खुले नाले की वजह से इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि मेरठ में सिस्टम की घोर लापरवाही ने एक और हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं।READ ALSO:-मेरठ में हाई-वोल्टेज ड्रामा: सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति ने 'लाइव लोकेशन' से बेनकाब की बेवफा पत्नी, होटल के कमरे में प्रेमी संग मिली इंश्योरेंस मैनेजर   मेरठ के पॉश इलाके आबूलेन के पास काठ के पुल पर शुक्रवार की शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहाँ एक ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर गहरे और खुले नाले में जा गिरा। करीब 30 मिनट तक चालक नाले के गंदे पानी और कीचड़ में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ता रहा, लेकिन अफसोस कि जब तक मदद (पुलिस) पहुंची, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।   घटना का आँखों देखा हाल: खौफनाक था वह मंजर शुक्रवार शाम करीब 5 बजे का वक्त था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और मौसम अचानक खराब हो गया था। सदर बाजार के रजबन, खटीक कॉलोनी का रहने वाला 42 वर्षीय सनी (पुत्र गुरदीप सिंह) अपने ई-रिक्शे के साथ घर की ओर लौट रहा था। वह दिन भर की मेहनत-मजदूरी के बाद अपनी थकान मिटाने घर जा रहा था, लेकिन उसे क्या पता था कि रास्ते में मौत उसका इंतजार कर रही है।   तीखी ढलान और मौत की छलांग प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सनी बेगमपुल से सवारी उतारकर खाली ई-रिक्शा लेकर काठ के पुल के रास्ते रजबन की तरफ जा रहा था। काठ के पुल से आगे रजबन की ओर जाने वाली सड़क पर एक तीखी ढलान है। बारिश की वजह से सड़क पर फिसलन थी। ढलान पर उतरते वक्त अचानक ई-रिक्शा अनियंत्रित हो गया।   चूंकि नाले के किनारे कोई सुरक्षा दीवार (Boundary Wall) नहीं थी, इसलिए अनियंत्रित रिक्शा सीधा नाले में जा पलटा। रिक्शा पलटते ही सनी उसके नीचे दब गया। नाला गहरा था और उसमें गंदा पानी व गाद (कीचड़) भरा हुआ था। भारी-भरकम ई-रिक्शे के नीचे दबने के कारण सनी को संभलने या बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।   तमाशबीन भीड़ और पुलिस की लेटलतीफी इस हादसे का सबसे दुखद पहलू समाज की संवेदनहीनता और पुलिस प्रशासन की सुस्ती रही।   भीड़ ने वीडियो बनाया, हाथ नहीं बढ़ाया: हादसे के तुरंत बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। लोग नाले के किनारे खड़े होकर नीचे झांकते रहे, आपस में बातें करते रहे, लेकिन किसी ने भी नीचे उतरकर सनी को बचाने की हिम्मत नहीं दिखाई। अगर भीड़ में मौजूद कुछ लोग हिम्मत दिखाते, तो शायद रिक्शा हटाकर सनी का सिर पानी से बाहर निकाला जा सकता था। 30 मिनट बाद पहुंची 'मित्र पुलिस': स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। घटनास्थल सदर थाने से बहुत दूर नहीं है, इसके बावजूद पुलिस को मौके पर पहुंचने में 30 मिनट लग गए। यह 30 मिनट सनी के जीवन के लिए सबसे भारी पड़े। रेस्क्यू और अस्पताल: आधे घंटे बाद जब सदर बाजार पुलिस मौके पर पहुंची, तब जाकर स्थानीय लोगों की मदद से रस्से और अन्य उपकरणों के सहारे ई-रिक्शे को सीधा किया गया और सनी को बाहर निकाला गया। पुलिस उसे आनन-फानन में प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल (PL Sharma District Hospital) लेकर भागी, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।   नोएडा पार्ट-2: इंजीनियर युवराज जैसी लापरवाही यह घटना अनायास ही नोएडा के उस हालिया हादसे की याद दिलाती है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। नोएडा के सेक्टर-150 में एक खुले नाले ने इंजीनियर युवराज मेहता की जान ले ली थी। वह भी घंटों मदद का इंतजार करते रहे थे।   मेरठ का यह हादसा साबित करता है कि प्रशासन ने पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं लिया है। समानता 1: दोनों जगहों पर नाले खुले थे। कोई बैरिकेडिंग या बाउंड्री वॉल नहीं थी। समानता 2: दोनों मामलों में रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी हुई। समानता 3: दोनों ही मामलों में 'सिस्टम' की लापरवाही का खामियाजा आम आदमी को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।   स्थानीय निवासियों का कहना है कि कैंट बोर्ड (Cantonment Board) की लापरवाही के कारण आए दिन यहाँ हादसे होते रहते हैं। नाले के किनारे बाउंड्री न होना एक आपराधिक लापरवाही है।   परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ मृतक सनी (42 वर्ष) अपने परिवार का एक अहम सहारा था। वह ई-रिक्शा चलाकर अपने बूढ़े माता-पिता और परिवार का भरण-पोषण करता था।   परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल: जैसे ही रजबन में सनी की मौत की खबर पहुंची, कोहराम मच गया। परिजन बदहवास हालत में अस्पताल दौड़े। उनका रोना देखकर अस्पताल में मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। दौरे पड़ने की बात: सीओ कैंट नवीना शुक्ला ने बताया कि मृतक के भाई गुलशन ने पुलिस को जानकारी दी है कि सनी को मिर्गी या दौरे (Seizures) पड़ने की बीमारी थी। आशंका जताई जा रही है कि ढलान पर उतरते वक्त शायद उसे दौरा पड़ा हो, जिससे वह संतुलन खो बैठा। हालांकि, यह जांच का विषय है। पोस्टमार्टम से इनकार: परिजनों ने इस मामले में कोई भी कानूनी कार्रवाई करने या शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा भरकर शव परिजनों को सौंप दिया।   आखिर कौन है असली गुनहगार? भले ही परिजनों ने कानूनी कार्रवाई से इनकार कर दिया हो, लेकिन यह हादसा कई गंभीर सवाल खड़े करता है जिनका जवाब मेरठ प्रशासन को देना ही होगा।   (A) कैंट बोर्ड की आपराधिक चुप्पी आबूलेन और रजबन का यह इलाका मेरठ कैंटोनमेंट बोर्ड के अंतर्गत आता है। सवाल यह है कि:   घनी आबादी वाले इलाके में नाला खुला क्यों था? तीखी ढलान के पास सुरक्षा दीवार (Railing) क्यों नहीं बनाई गई? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था?   (B) ई-रिक्शा की बनावट और सुरक्षा ई-रिक्शा आज शहर की लाइफलाइन बन चुके हैं, लेकिन इनकी बनावट (Design) बेहद हल्की होती है।   थोड़ा सा संतुलन बिगड़ने पर ये तुरंत पलट जाते हैं। इनमें ड्राइवर के लिए कोई सुरक्षा बेल्ट या केबिन नहीं होता। अगर सनी किसी कार या भारी वाहन में होता, तो शायद नाले में गिरने के बावजूद उसकी जान बच जाती।   (C) आपातकालीन प्रतिक्रिया (Emergency Response) शहर के बीचों-बीच पुलिस को पहुंचने में 30 मिनट क्यों लगे? क्या हमारे पास त्वरित प्रतिक्रिया टीम (Quick Response Team) नहीं है जो 5-10 मिनट में मौके पर पहुंच सके? मेडिकल इमरजेंसी में हर एक सेकंड कीमती होता है।   भविष्य की चेतावनी: अगर अब भी नहीं जागे, तो... यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक 'चेतावनी' है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक यूपी में बारिश और खराब मौसम का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में खुले नाले मौत का सबब बन सकते हैं।   प्रशासन को तुरंत ये कदम उठाने चाहिए: कवरिंग: शहर के सभी प्रमुख खुले नालों को स्लैब डालकर ढका जाए। बैरिकेडिंग: जहाँ नाले ढकना संभव न हो, वहां लोहे की मजबूत रेलिंग या दीवार बनाई जाए। चेतावनी बोर्ड: तीखी ढलान और खतरनाक मोड़ों पर 'दुर्घटना संभावित क्षेत्र' के बोर्ड लगाए जाएं। लाइटिंग: रात के वक्त ऐसे इलाकों में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था हो।   नागरिकों के लिए विशेष अपील (Safety Advisory) 'खबरीलाल' अपने पाठकों से अपील करता है कि खराब मौसम और बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतें:   किनारे से बचें: पैदल चलते या गाड़ी चलाते समय खुले नालों और गड्ढों से उचित दूरी बनाकर रखें। रफ्तार कम रखें: बारिश में सड़क पर फिसलन होती है, विशेषकर दोपहिया और तिपहिया वाहन चालक गति सीमित रखें। हेल्पिंग हैंड बनें: अगर आपके सामने कोई हादसा होता है, तो वीडियो बनाने के बजाय पीड़ित की मदद करें या तुरंत पुलिस/एंबुलेंस को कॉल करें। आपकी थोड़ी सी हिम्मत किसी की जान बचा सकती है। एक और फाइल बंद, एक और जान गुम सनी की मौत के साथ पुलिस की फाइलों में एक और पंचनामा दर्ज हो गया। परिवार ने पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया, शायद इसलिए कि वे पुलिसिया पचड़ों में नहीं फंसना चाहते थे या वे इसे अपनी किस्मत मान बैठे हैं। लेकिन सवाल वही है—क्या सनी की मौत सिर्फ एक 'हादसा' थी या 'सिस्टम द्वारा की गई हत्या'?   जब तक खुले नाले ढके नहीं जाएंगे और अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक कभी नोएडा का युवराज तो कभी मेरठ का सनी इसी तरह बेमौत मारे जाते रहेंगे।   मेरठ और आसपास की खबरों के लिए जुड़े रहें हमारे साथ।   खुले नाले और शहरी नियोजन की विफलता (Extended Analysis) उत्तर प्रदेश में खुले नालों का इतिहास उत्तर प्रदेश के कई बड़े शहर—चाहे वह लखनऊ हो, कानपुर, गाजियाबाद या मेरठ—ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली से जूझ रहे हैं। अंग्रेजों के जमाने के बने नाले अब आबादी के दबाव में 'मौत के जाल' बन चुके हैं। शहरी नियोजन (Urban Planning) के मानकों के अनुसार, रिहायशी इलाकों में कोई भी ड्रेनेज खुला नहीं होना चाहिए। खुले नाले न केवल दुर्घटनाओं को न्योता देते हैं, बल्कि बीमारियों का घर भी होते हैं।   ई-रिक्शा: सुविधा या दुविधा? मेरठ शहर में हजारों ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। यह सस्ता और प्रदूषण मुक्त यातायात का साधन जरूर है, लेकिन इसके विनियमन (Regulation) की सख्त जरूरत है।   प्रशिक्षण का अभाव: अधिकतर ई-रिक्शा चालकों के पास उचित ड्राइविंग ट्रेनिंग नहीं होती। ओवरलोडिंग: कई बार क्षमता से अधिक सवारियां भरने से रिक्शा का संतुलन बिगड़ जाता है। (गनीमत रही कि हादसे के वक्त सनी के रिक्शे में कोई सवारी नहीं थी, अन्यथा जनहानि बड़ी हो सकती थी।) इंश्योरेंस और मुआवजा: ऐसे हादसों में अक्सर देखा गया है कि गरीब ई-रिक्शा चालकों का न तो बीमा होता है और न ही उन्हें सरकार से कोई उचित मुआवजा मिल पाता है।   हादसे के बाद क्या करें? (Life-Saving Tips) अगर आप कभी ऐसी स्थिति देखें जहाँ कोई वाहन पानी में गिर गया हो:   शोर मचाएं: तुरंत आसपास के लोगों को इकट्ठा करें। रस्सी या कपड़ा: अगर तैरना नहीं आता, तो अपनी शर्ट, बेल्ट या रस्सी फेंककर डूबते व्यक्ति को पकड़ने को कहें। वाहन को सीधा करें: अगर व्यक्ति वाहन के नीचे दबा है, तो प्राथमिकता वाहन को हटाने की होनी चाहिए, क्योंकि पानी में दबे होने पर सांस कुछ ही मिनटों में रुक सकती है। CPR दें: बाहर निकालते ही अगर सांस न चल रही हो, तो तुरंत सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) देना शुरू करें और एंबुलेंस का इंतजार न करें, निजी वाहन से अस्पताल भागें।   मेरठ प्रशासन से सवाल इस घटना के बाद अब उम्मीद है कि मेरठ प्रशासन, विशेषकर कैंट बोर्ड, नींद से जागेगा। शहर के कई अन्य इलाके जैसे—बेगमपुल, पीएल शर्मा रोड, और दिल्ली रोड पर भी कई जगह नाले खतरनाक स्थिति में हैं। क्या प्रशासन अगले हादसे का इंतजार करेगा या सनी की मौत से सबक लेकर इन डेथ-स्पॉट्स (Death Spots) को ठीक करेगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

Unknown जनवरी 24, 2026 0
Panic in Meerut as Sirens Wail Successful Blackout Mock Drill Conducted at DN College
Meerut Blackout Drill: सायरन की गूंज, गहरा अंधेरा और 'आसमान से बरसे बम'! मेरठ में 10 मिनट तक चली 'जिंदगी और मौत' की रिहर्सल

मेरठ: अक्सर हम फिल्मों में देखते हैं कि कैसे युद्ध के सायरन बजते ही शहर की बत्तियां गुल हो जाती हैं, लोग बंकरों की तरफ भागते हैं और आसमान से मौत बरसती है। लेकिन, उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में यह नजारा हकीकत के बेहद करीब दिखाई दिया। मौका था 'ब्लैकआउट मॉक ड्रिल' (Blackout Mock Drill) का, जिसने कुछ पलों के लिए देखने वालों की सांसें थाम दीं।READ ALSO:-मेरठ में हाई-वोल्टेज ड्रामा: सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति ने 'लाइव लोकेशन' से बेनकाब की बेवफा पत्नी, होटल के कमरे में प्रेमी संग मिली इंश्योरेंस मैनेजर   नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती और उत्तर प्रदेश दिवस (UP Diwas) के अवसर पर शासन के कड़े निर्देशों के तहत, मेरठ के ऐतिहासिक डीएन इंटर कॉलेज (DN Inter College) के मैदान में एक व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य जनता को यह सिखाना था कि अगर कभी देश पर हवाई हमला (Air Strike) हो जाए या युद्ध जैसी आपातकालीन स्थिति बन जाए, तो नागरिक अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा कैसे करें। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको इस ड्रिल के एक-एक पल का आंखों देखा हाल बताएंगे, साथ ही जानेंगे कि प्रशासन, पुलिस और सिविल डिफेंस ने मिलकर इस 'युद्ध' को कैसे जीता। इसके अलावा, इस लेख के अंत में हम आपको उन जीवन रक्षक उपायों के बारे में विस्तार से बताएंगे जो ऐसी किसी भी आपदा में आपके काम आ सकते हैं।   वो 10 मिनट: जब थम गई शहर की रफ्तार दोपहर का वक्त था, डीएन कॉलेज का मैदान छात्रों, एनसीसी कैडेट्स, पुलिस अधिकारियों और आम जनता से भरा हुआ था। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन तभी फिजा में एक तीखी और डरावनी आवाज गूंजी— 'हवाई हमले का सायरन'।   सायरन बजते ही क्या हुआ? जैसे ही सायरन की ऊंची-नीची आवाज (Wailing Sound) गूंजी, मानो पूरे क्षेत्र में करंट दौड़ गया। यह खतरे का संकेत था। अंधेरा (Blackout): सायरन बजते ही बिजली विभाग ने पूरे इलाके की बिजली काट दी। दिन के उजाले में भी एक प्रतीकात्मक अंधेरा और सन्नाटा छा गया। भगदड़ और बचाव: जो लोग मैदान में खड़े थे, वे तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। निर्देशों का पालन करते हुए, कई लोग वहीं जमीन पर पेट के बल लेट गए और अपने हाथों से सिर को ढक लिया। यह बम धमाकों से बचने की सबसे प्राथमिक तकनीक है। हवाई हमले का सिमुलेशन: ड्रिल को वास्तविक रूप देने के लिए 'हवाई जहाज से बम गिराने' जैसे साउंड इफेक्ट्स और नियंत्रित विस्फोटों का इस्तेमाल किया गया। धमाकों की आवाज ने वहां मौजूद लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए।   यह पूरा दृश्य इतना जीवंत था कि अगर किसी को मॉक ड्रिल की जानकारी न होती, तो वह इसे असली हमला समझ बैठता।   बचाव कार्य: जब रक्षक बने देवदूत जैसे ही 'बमबारी' रुकी और सायरन की आवाज थमी, दूसरा चरण शुरू हुआ— रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue Operation)। यह वह समय था जब सिविल डिफेंस (नागरिक सुरक्षा), दमकल विभाग (Fire Department), स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के जवानों ने अपनी फुर्ती दिखाई।   बिल्डिंग से रेस्क्यू मॉक ड्रिल का सबसे रोमांचक हिस्सा वह था जब 'बमबारी' के कारण एक इमारत में प्रतीकात्मक आग लग गई और कुछ लोग ऊपरी मंजिल पर फंस गए।   दमकल की एंट्री: सायरन बजाते हुए दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। चंद मिनटों में पानी की बौछारें शुरू हो गईं। स्लाइडिंग रेस्क्यू: सिविल डिफेंस और फायर ब्रिगेड के जवानों ने रस्सियों और सीढ़ियों की मदद से बिल्डिंग में फंसे 'घायलों' (डमी और वॉलंटीयर्स) को सुरक्षित नीचे उतारा। स्ट्रेचर का प्रदर्शन: एनसीसी कैडेट्स और स्वास्थ्य कर्मियों ने दिखाया कि कैसे मलबे के बीच से घायलों को स्ट्रेचर पर लिटाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया जाता है।   इंप्रोवाइज्ड स्ट्रेचर (जुगाड़ से जीवन रक्षा) इस ड्रिल में एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी दी गई— 'इंप्रोवाइज्ड स्ट्रेचर' बनाना। अधिकारियों ने दिखाया कि अगर इमरजेंसी में स्ट्रेचर न हो, तो कैसे दो शर्ट (Shirts) और दो डंडों (Bamboo sticks) की मदद से तुरंत एक मजबूत स्ट्रेचर तैयार किया जा सकता है। यह तकनीक आपदा के समय किसी की जान बचा सकती है।   अधिकारियों की मौजूदगी और शासन का संदेश इस महत्वपूर्ण आयोजन की निगरानी जिले के शीर्ष अधिकारी कर रहे थे। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता था कि तैयारी में कोई कमी न रहे।   मौजूद दिग्गज अधिकारी: एडीएम फाइनेंस: सूर्यकांत त्रिपाठी (नोडल अधिकारी) एडीएम सिटी: बृजेश कुमार सिंह एसपी ट्रैफिक: राघवेंद्र कुमार मिश्र मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO): डॉ. अशोक कटारिया सिटी मजिस्ट्रेट: नवीन श्रीवास्तव   इसके अलावा सिविल डिफेंस के वरिष्ठ पदाधिकारी और वार्डन भी अपनी पूरी वर्दी में मुस्तैद दिखे।   क्या कहा अधिकारियों ने?   एडीएम फाइनेंस सूर्यकांत त्रिपाठी, जो इस कार्यक्रम के नोडल अधिकारी भी थे, ने बताया: "शासन के निर्देश पर आयोजित यह ब्लैकआउट मॉक ड्रिल पूरी तरह सफल रही। इसका मुख्य उद्देश्य जनता को सजग करना है। युद्ध या आपदा बताकर नहीं आती, लेकिन हमारी तैयारी ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है। आज हमने देखा कि कैसे विभिन्न विभाग—पुलिस, स्वास्थ्य, फायर और बिजली विभाग—एक साथ मिलकर काम करते हैं।"   आखिर क्या होता है 'ब्लैकआउट'? (What is a Blackout?) आम जनता के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि युद्ध के समय लाइटें क्यों बंद की जाती हैं। इस ड्रिल के दौरान एसपी ट्रैफिक राघवेंद्र कुमार मिश्र ने इसे बहुत सरल शब्दों में समझाया।   तकनीकी पहलू: ब्लैकआउट एक आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल है। जब दुश्मन देश के लड़ाकू विमान (Fighter Jets) या ड्रोन रात के समय हमला करने आते हैं, तो वे शहर की रोशनी (Lights) को निशाना बनाते हैं। रोशनी से उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों, पुलों, कारखानों और सरकारी इमारतों की पहचान करने में मदद मिलती है।   ब्लैकआउट के फायदे: कैमफ्लाज (Camouflage): पूरा शहर अंधेरे में डूब जाने से ऊपर से (आसमान से) कुछ भी दिखाई नहीं देता। भ्रम: दुश्मन के पायलट भ्रमित हो जाते हैं और सटीक निशाना नहीं लगा पाते। जनहानि में कमी: बम आबादी वाले इलाकों के बजाय खाली मैदानों में गिरने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे जान-माल का नुकसान कम होता है।   हवाई हमले के दौरान क्या करें: एडीएम सिटी की 6 सूत्रीय गाइडलाइन मॉक ड्रिल का असली मकसद सिर्फ प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि जन-जागरूकता (Public Awareness) था। एडीएम सिटी बृजेश कुमार सिंह ने वहां मौजूद लोगों और मीडिया के माध्यम से पूरी जनता को एक 'सेफ्टी प्रोटोकॉल' समझाया। यह जानकारी हर नागरिक के लिए बेहद कीमती है।   यहाँ विस्तार से उन निर्देशों को समझाया गया है:   (1) पूर्ण अंधेरा (Total Darkness) निर्देश: सायरन बजते ही अपने घर, दुकान या प्रतिष्ठान की हर छोटी-बड़ी लाइट तुरंत बंद कर दें। क्यों: एक जलता हुआ बल्ब भी कई किलोमीटर ऊपर से दुश्मन के लिए 'टारगेट' बन सकता है। यहाँ तक कि मोबाइल की टॉर्च भी बाहर इस्तेमाल न करें।   (2) खिड़कियों और दरवाजों को ढकना निर्देश: अपने घरों के शीशे वाली खिड़कियों और दरवाजों को मोटे काले परदों या चादरों से पूरी तरह ढक लें। सावधानी: अगर कांच की खिड़कियां हैं, तो उन पर टेप (Tape) चिपका दें ताकि धमाके की कंपन (Shockwave) से कांच टूटकर आपको घायल न करे।   (3) आपातकालीन प्रकाश (Emergency Light) निर्देश: केवल बहुत जरूरी होने पर ही घर के अंदर बहुत धीमी रोशनी (जैसे मोमबत्ती या ढकी हुई टॉर्च) का इस्तेमाल करें। शर्त: यह रोशनी किसी भी हाल में घर से बाहर नहीं दिखनी चाहिए।   (4) सुरक्षित कमरा (Safe Room) निर्देश: परिवार के सभी सदस्य घर के सबसे सुरक्षित और अंदरूनी कमरे में इकट्ठे हो जाएं। टिप: बेसमेंट सबसे सुरक्षित जगह होती है। अगर बेसमेंट नहीं है, तो सीढ़ियों के नीचे या घर के बीच वाले कमरे में शरण लें। छतों और बालकनी से दूर रहें।   (5) वाहन चालकों के लिए नियम निर्देश: अगर आप सड़क पर गाड़ी चला रहे हैं और सायरन बज जाए, तो तुरंत गाड़ी को सड़क किनारे खड़ा कर दें। कड़ी चेतावनी: गाड़ी की हेडलाइट और टेललाइट तुरंत बंद कर दें। गाड़ी के अंदर भी लाइट न जलाएं। गाड़ी से बाहर निकलकर किसी सुरक्षित स्थान (गड्ढे या इमारत की ओट) में छिप जाएं।   (6) आधिकारिक सूचना का पालन निर्देश: अफवाहों पर ध्यान न दें। सिविल डिफेंस, पुलिस या प्रशासन द्वारा लाउडस्पीकर या रेडियो पर दिए जा रहे निर्देशों का ही पालन करें। जब तक 'ऑल क्लियर' (All Clear) का सायरन न बजे, बाहर न निकलें।   सिविल डिफेंस: वो 'अनसंग हीरोज' जो आपदा में सबसे पहले आते हैं मेरठ के डीएन कॉलेज में हुई इस ड्रिल में सिविल डिफेंस (नागरिक सुरक्षा) के स्वयंसेवकों की भूमिका सबसे अहम थी। सफेद वर्दी और पीली हेलमेट पहने ये वॉलंटीयर्स आपदा प्रबंधन की रीढ़ माने जाते हैं।   क्या है सिविल डिफेंस? यह नागरिकों का एक ऐसा संगठन है जो युद्ध या आपदा के समय प्रशासन की मदद करता है। इनका काम हथियार चलाना नहीं, बल्कि: घायलों को प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) देना। आग बुझाना। मलबे में दबे लोगों को निकालना। लोगों के मन से डर और दहशत को निकालना (Psychological Support)।   इस ड्रिल के दौरान उन्होंने दिखाया कि कैसे सीमित संसाधनों में भी धैर्य और तकनीक से जान बचाई जा सकती है।   चिकित्सा और आग से सुरक्षा: ड्रिल के अन्य प्रमुख पहलू सिर्फ ब्लैकआउट ही नहीं, ड्रिल में बम धमाकों के बाद की स्थितियों से निपटने का भी प्रशिक्षण दिया गया।   फायर सेफ्टी (Fire Safety): बम गिरने से अक्सर आग लग जाती है। दमकल विभाग ने दिखाया कि: तेल (Oil) से लगी आग पर पानी नहीं डालना चाहिए। गैस सिलेंडर की आग को गीले बोरे से कैसे बुझाएं। भीड़भाड़ वाले इलाके में लगी आग को कैसे नियंत्रित करें।   मेडिकल इमरजेंसी (Medical Emergency): मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कटारिया की टीम ने 'ट्राज' (Triage) का प्रदर्शन किया। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें घायलों को उनकी चोट की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग किया जाता है—किसे पहले इलाज चाहिए और किसे बाद में। यह युद्ध के समय अस्पतालों में अफरा-तफरी रोकने के लिए बहुत जरूरी है।   तैयारी ही बचाव है मेरठ में आयोजित यह मॉक ड्रिल महज एक रस्म अदायगी नहीं थी, बल्कि यह बदलते दौर की चुनौतियों के प्रति एक चेतावनी और तैयारी थी। आज की दुनिया में जिओ-पॉलिटिकल तनाव (Geo-political tension) और आतंकी हमलों के खतरे को देखते हुए, हर नागरिक का प्रशिक्षित होना जरूरी है।   डीएन कॉलेज के मैदान से उठा सायरन का शोर अब शांत हो चुका है, लेकिन उसका संदेश स्पष्ट है— "सावधान रहें, सुरक्षित रहें और प्रशासन के साथ सहयोग करें।" प्रशासन की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है, जिसने न केवल सरकारी तंत्र की जंग लगी मशीनरी को तेल-पानी देकर दुरुस्त किया, बल्कि आम जनता के अंदर भी सुरक्षा का आत्मविश्वास जगाया।   अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) Q1: ब्लैकआउट मॉक ड्रिल क्यों की जाती है? Ans: यह जनता और प्रशासन को हवाई हमलों या युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार करने के लिए की जाती है, ताकि आपातकाल में घबराहट (Panic) न हो और जान-माल का नुकसान कम से कम हो। Q2: हवाई हमले का सायरन कैसा होता है? Ans: हवाई हमले का सायरन आमतौर पर लहरदार (Wailing tone) होता है, जो 2-3 मिनट तक ऊंची और नीची आवाज में बजता है। 'ऑल क्लियर' का सायरन एक सीधी सपाट टोन (Flat tone) में बजता है। Q3: अगर मैं घर से बाहर हूँ और सायरन बज जाए तो क्या करूँ? Ans: तुरंत निकटतम इमारत में शरण लें। अगर खुले मैदान में हैं, तो जमीन पर पेट के बल लेट जाएं और हाथों से सिर को ढक लें। दौड़ें नहीं, क्योंकि इससे आप गिर सकते हैं या भगदड़ मच सकती है। Q4: ब्लैकआउट के दौरान घर में क्या सावधानियां बरतें? Ans: सभी लाइटें बंद करें, गैस रेगुलेटर बंद कर दें, कांच की खिड़कियों से दूर रहें और रेडियो पर समाचार सुनें। Q5: क्या यह ड्रिल असली खतरे के कारण हुई थी? Ans: नहीं, यह 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती' और 'यूपी दिवस' के अवसर पर शासन के निर्देशानुसार आयोजित एक पूर्व-नियोजित (Pre-planned) अभ्यास था। वर्तमान में कोई प्रत्यक्ष खतरा नहीं है।

Unknown जनवरी 24, 2026 0
Software Engineer Tracks Wife via GPS Catches Her in Hotel with Lover in Meerut
मेरठ में हाई-वोल्टेज ड्रामा: सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति ने 'लाइव लोकेशन' से बेनकाब की बेवफा पत्नी, होटल के कमरे में प्रेमी संग मिली इंश्योरेंस मैनेजर

मेरठ: कहते हैं तकनीक ने दूरियां मिटा दी हैं, लेकिन मेरठ में तकनीक ने रिश्तों के बीच की एक ऐसी खाई को पाटा, जिसने एक नवविवाहित जोड़े की जिंदगी में भूचाल ला दिया। स्मार्टफोंस और जीपीएस टेक्नोलॉजी के इस दौर में बेवफाई छिपानी अब आसान नहीं रही। इसका जीता जागता उदाहरण मेरठ के आबूलेन स्थित एक होटल में देखने को मिला, जहां गुरुग्राम में काम करने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति ने अपनी 'टेकी' स्किल्स का इस्तेमाल करते हुए अपनी पत्नी को उसके प्रेमी के साथ रंगे हाथ पकड़ लिया।READ ALSO:-सपनों का दुखद अंत: मेरठ में 'अफसर' बनने की तैयारी कर रहे युवक ने बेडरूम में लगाई फांसी, मौत से पहले लिखा- 'पत्नी और ससुराल वालों ने जीना हराम कर दिया...'   यह मामला सिर्फ पति-पत्नी और वो का नहीं, बल्कि भरोसे के कत्ल, डिजिटल जासूसी, होटल में फर्जीवाड़े और थाने तक पहुंचे हाईवोल्टेज ड्रामे का है। शादी के महज तीन महीने बाद ही सामने आई इस सच्चाई ने दो परिवारों को झकझोर कर रख दिया है।   इस विस्तृत रिपोर्ट में, हम आपको बताएंगे कि कैसे एक शक ने पति को जासूस बना दिया, होटल के कमरे नंबर तक पहुंचने का क्लाइमेक्स क्या था, और पुलिसिया कार्रवाई के बीच कानूनी पेचीदगियां क्या सामने आईं।   शक की बुनियाद: नई शादी और पुराना यार इस पूरी कहानी की शुरुआत नौचंदी थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर से होती है। यहां रहने वाले एक युवक, जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और गुरुग्राम (गुरुग्राम) की एक प्रतिष्ठित कंपनी में काम करता है, की शादी महज तीन महीने पहले ही हुई थी। उसकी पत्नी भी कामकाजी महिला है और मेरठ में ही एक इंश्योरेंस कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत है।   बाहर से देखने पर यह एक आदर्श, आधुनिक और कामकाजी जोड़ा लगता था। लेकिन शादी के कुछ हफ्तों बाद ही पति को एहसास होने लगा कि सब कुछ सामान्य नहीं है।   सिक्स सेंस और फोन की घंटी: सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति को अपनी पत्नी के व्यवहार में बदलाव नजर आने लगे। पुलिस पूछताछ और पति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पत्नी अक्सर फोन पर व्यस्त रहती थी। जब पति घर पर होता, तब भी वह घंटों किसी से बातें करती या मैसेजिंग में लगी रहती। जब पति इस बारे में पूछता, तो वह बात टाल देती या फिर झगड़ा करने लगती।   पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि महिला की दोस्ती तोपचीवाड़ा निवासी साफेज से थी। साफेज दिल्ली रोड स्थित कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) में सेल्स मैनेजर है। दोनों एक-दूसरे को पिछले 6 सालों से जानते थे। शादी के बाद भी यह पुराना रिश्ता खत्म नहीं हुआ था, बल्कि छिपकर परवान चढ़ रहा था। पति का शक यकीन में तब बदलने लगा जब छोटी-छोटी बातों पर घर में क्लेश होने लगा और पत्नी का पूरा ध्यान अपने मोबाइल फोन पर सिमट गया।   'डिजिटल जासूसी': जब पति बना डिटेक्टिव शक का इलाज सच्चाई होती है, और एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के लिए सच्चाई का पता लगाने का सबसे आसान तरीका तकनीक थी। जब सीधे पूछने पर पत्नी ने कुछ नहीं बताया और लड़ाई-झगड़ा बढ़ता गया, तो पति ने एक बड़ा कदम उठाया।   उसने अपनी पत्नी के स्मार्टफोन की 'लाइव लोकेशन' (Live Location) का एक्सेस अपने मोबाइल पर ले लिया। यह एक ऐसा कदम था जिसने निजता और शक के बीच की लकीर को मिटा दिया, लेकिन पति के लिए सच्चाई जानना मजबूरी बन चुका था। वह गुरुग्राम में बैठकर या मेरठ में रहकर, हर पल यह देख सकता था कि उसकी पत्नी कहां है।   यह डिजिटल निगरानी कई दिनों तक चलती रही, लेकिन शुक्रवार का दिन इस रिश्ते के लिए 'ब्लैक फ्राइडे' साबित होने वाला था।   क्लाइमेक्स: शुक्रवार, शाम 5 बजे, लोकेशन - एमडी डीलक्स होटल शुक्रवार की शाम करीब 5 बजे। सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति ने आदतन अपने मोबाइल पर पत्नी की लाइव लोकेशन चेक की। उसे उम्मीद थी कि पत्नी या तो इंश्योरेंस कंपनी के दफ्तर में होगी या घर के रास्ते में।   लेकिन, मोबाइल स्क्रीन पर जो लोकेशन फ्लैश हो रही थी, उसने उसके पैरों तले से जमीन खिसका दी। लोकेशन किसी दफ्तर की नहीं, बल्कि मेरठ के पॉश इलाके आबूलेन स्थित 'एमडी डीलक्स होटल' (MD Deluxe Hotel) की थी।   एक कामकाजी महिला का शाम के वक्त ऑफिस छोड़कर होटल में होना किसी भी पति के लिए खतरे की सबसे बड़ी घंटी थी। बिना एक पल गंवाए, पति ने होटल की तरफ दौड़ लगा दी। उसका शक अब यकीन के मुहाने पर खड़ा था, बस आंखों देखा सबूत मिलना बाकी था।   होटल में हंगामा: 'नजमा' कौन है? आगबबूला पति एमडी डीलक्स होटल पहुंचा। वह सीधे रिसेप्शन पर गया और अपनी पत्नी का नाम बताकर जानकारी मांगी कि वह किस कमरे में है।   होटल रिकॉर्ड का झोल: यहां कहानी में एक और ट्विस्ट आया। होटल के कर्मचारियों ने रजिस्टर चेक किया और बताया कि इस नाम की कोई भी महिला होटल में चेक-इन नहीं है। पति को अपनी तकनीक पर पूरा भरोसा था, लोकेशन वहीं की थी। उसे समझ आ गया कि यहां कुछ गड़बड़ है।   फोन कॉल ने खोला राज: जब सीधी उंगली से घी नहीं निकला, तो पति ने दूसरा तरीका अपनाया। वह होटल की लॉबी में ही खड़ा रहा और उसने अपनी पत्नी के मोबाइल नंबर पर कॉल मिला दी। होटल शांत था। जैसे ही कॉल लगी, एक कमरे के अंदर से फोन की घंटी बजने की आवाज बाहर तक आई।   पति उस आवाज की दिशा में दौड़ा। उसने उस कमरे का दरवाजा खटखटाया, बल्कि पिटना शुरू कर दिया। काफी देर बाद दरवाजा खुला।   आमना-सामना: दरवाजा खुलते ही जो नजारा सामने था, उसने पति के सबसे बुरे डर को सच साबित कर दिया। कमरे के अंदर उसकी पत्नी और उसका प्रेमी साफेज (बैंक मैनेजर) मौजूद थे।   पति ने तुरंत होटल स्टाफ को बुलाया और हंगामा खड़ा कर दिया। उसने सवाल किया कि जब उसकी पत्नी के नाम से कोई एंट्री नहीं है, तो वह कमरे में कैसे है?   फर्जी आईडी का खुलासा: होटल कर्मियों ने जब दोबारा और कड़ाई से रिकॉर्ड चेक किया, तो एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया। प्रेमी साफेज ने होटल में कमरा लेते समय महिला की जो आईडी (पहचान पत्र) दी थी, वह फर्जी थी। उसने अपनी प्रेमिका (सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पत्नी) की आईडी 'नजमा' के नाम से लगाई थी, ताकि किसी को भनक न लगे। यह अपने आप में एक गंभीर अपराध था।   दंगल: गालियां, हाथापाई और जान से मारने की कोशिश आमतौर पर ऐसी रंगे हाथ पकड़े जाने वाली स्थितियों में आरोपी पक्ष शर्मिंदा होता है या माफी मांगता है, लेकिन यहां नजारा बिल्कुल उल्टा था।   पीड़ित सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति के अनुसार, जैसे ही उसने अपनी पत्नी से यह सवाल किया कि वह इस आदमी के साथ होटल के बंद कमरे में क्या कर रही है, पत्नी शर्मिंदा होने के बजाय आगबबूला हो गई।   पति का आरोप: पति ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया, "मुझे होटल में देखते ही मेरी पत्नी भड़क गई। वह मुझे गंदी-गंदी गालियां देने लगी। मैं हैरान था। इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, उसके प्रेमी साफेज ने भी मुझे गालियां देनी शुरू कर दीं।"   मामला सिर्फ जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहा। पति का गंभीर आरोप है कि "दोनों ने मिलकर जान से मारने की नीयत से मेरे ऊपर हमला कर दिया। उन्होंने दोनों हाथों से मेरा गला दबाने की कोशिश की और मेरे साथ बुरी तरह मारपीट की।"   होटल में चीख-पुकार और मारपीट की आवाजें सुनकर अफरा-तफरी मच गई।   पुलिस की एंट्री और कानूनी पेंच होटल में हाईवोल्टेज ड्रामे की सूचना मिलते ही सदर बाजार थाने (Sadar Bazar Police Station) की पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने देखा कि वहां भारी हंगामा हो रहा है। पुलिस तुरंत प्रेमी साफेज और महिला (सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पत्नी) को हिरासत में लेकर थाने ले आई। पीड़ित पति भी थाने पहुंचा।   थाने में घंटों तक गहमागहमी का माहौल रहा। दोनों पक्षों के परिवार वाले भी वहां पहुंच गए।   कानूनी पेचीदगी (Legal Complexity): यह मामला पुलिस के लिए भी थोड़ा पेचीदा था। भारत में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद से व्यभिचार (Adultery) अब एक आपराधिक अपराध (Criminal Offense) नहीं है। यानी, अगर दो बालिग लोग अपनी मर्जी से संबंध बनाते हैं, भले ही वे शादीशुदा हों, तो पुलिस उन्हें सिर्फ इस आधार पर गिरफ्तार नहीं कर सकती।   पत्नी का बयान: पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) नवीना शुक्ला ने बताया कि महिला ने पुलिस को लिखित में बयान दिया है। महिला ने स्पष्ट कहा कि "मैं बालिग हूं और अपनी स्वेच्छा से होटल गई थी।" इस बयान ने पुलिस के हाथ एक हद तक बांध दिए थे।   प्रेमी की गिरफ्तारी का आधार: तो फिर प्रेमी साफेज की गिरफ्तारी क्यों हुई? इसका जवाब पति द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में है। पुलिस ने व्यभिचार के लिए नहीं, बल्कि पति के साथ की गई मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोपों के आधार पर कार्रवाई की।   सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति की लिखित शिकायत पर पुलिस ने आरोपी साफेज (निवासी तोपचीवाड़ा) के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।   होटल मालिक को चेतावनी: इस पूरे मामले में होटल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही भी सामने आई। फर्जी आईडी पर कमरा देना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा है। पुलिस ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए होटल मालिक को कड़ी चेतावनी देकर छोड़ा है कि भविष्य में बिना वैरिफिकेशन के किसी को कमरा न दिया जाए, अन्यथा होटल का लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है।   तकनीक, विश्वास और आधुनिक रिश्ते मेरठ की यह घटना आधुनिक समाज में रिश्तों के बदलते ताने-बाने और तकनीक के दखल का एक कड़वा उदाहरण है।   भरोसे का संकट: शादी के महज तीन महीने के भीतर इस तरह की घटना का सामने आना यह दर्शाता है कि रिश्तों में विश्वास की नींव कितनी कमजोर हो चुकी है। 6 साल पुराना अफेयर शादी के बाद भी जारी रहना, नए रिश्ते के प्रति असम्मान को दर्शाता है। तकनीक: वरदान या अभिशाप? सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति के लिए तकनीक एक वरदान साबित हुई, जिसने उसे अंधेरे में रहने से बचाया। लेकिन, यह एक बहस का विषय भी है कि क्या जीवनसाथी की जासूसी करना नैतिक है? हालांकि, इस मामले में, अगर पति ने यह कदम नहीं उठाया होता, तो शायद वह लंबे समय तक धोखे में रहता। समाज पर असर: ऐसी घटनाएं समाज में विवाह संस्था के प्रति संदेह पैदा करती हैं। यह कामकाजी जोड़ों के बीच भी असुरक्षा की भावना को बढ़ाती हैं, जहां पार्टनर ऑफिस के काम से देर तक बाहर रहते हैं।   फिलहाल, बैंक मैनेजर प्रेमी जेल की सलाखों के पीछे है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति का तीन महीने पुराना रिश्ता चौराहे पर खड़ा है, और एक कामकाजी महिला के दामन पर बेवफाई का दाग लग चुका है। यह घटना सिर्फ एक अपराध की खबर नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है कि झूठ और धोखे की उम्र लंबी नहीं होती, खासकर आज के डिजिटल दौर में जहां हर कदम का एक 'फुटप्रिंट' मौजूद होता है। मेरठ का यह हाईवोल्टेज ड्रामा अब अदालती फाइलों में दर्ज हो चुका है, लेकिन इसके सामाजिक और भावनात्मक परिणाम लंबे समय तक महसूस किए जाएंगे।

Unknown जनवरी 24, 2026 0
Meerut Civil Services Aspirant Commits Suicide: Blames Wife and In Laws in Note
सपनों का दुखद अंत: मेरठ में 'अफसर' बनने की तैयारी कर रहे युवक ने बेडरूम में लगाई फांसी, मौत से पहले लिखा- 'पत्नी और ससुराल वालों ने जीना हराम कर दिया...'

मेरठ (Meerut)। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने समाज में बढ़ते पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव की ओर फिर से इशारा किया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र (Civil Lines Police Station) के पॉश इलाके सुभाष नगर में रहने वाले एक होनहार युवक, जो अपनी आंखों में प्रशासनिक अधिकारी (Civil Officer) बनने का सपना संजोए हुए था, ने शुक्रवार की सुबह मौत को गले लगा लिया।READ ALSO:-मेरठ में 'मजार' पर महासंग्राम: सड़क पर बनी दो मजारें क्षतिग्रस्त होने से उबाल, सचिन सिरोही बोले- 'सीएम योगी पूरे शहर से हटाएं अतिक्रमण', काजी ने मांगी कार्रवाई   मृतक की पहचान जितेंद्र कुमार (Jitendra Kumar) के रूप में हुई है, जो पेशे से एक डेयरी संचालक थे और साथ ही सिविल सर्विसेज (Civil Services) जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। घटना स्थल से पुलिस को एक सुसाइड नोट (Suicide Note) बरामद हुआ है, जिसने इस आत्महत्या को एक गंभीर आपराधिक मामले की ओर मोड़ दिया है। इस नोट में युवक ने अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष के लोगों पर गंभीर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं।   घटना का विस्तृत विवरण: शुक्रवार की वो खौफनाक सुबह यह घटना शुक्रवार सुबह की है। सुभाष नगर स्थित आवास पर रोज की तरह दिन की शुरुआत हुई थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि आज इस घर में मातम पसरने वाला है।   सुबह का मंजर: जितेंद्र कुमार मूल रूप से मेरठ के मुंडाली (Mundali) के रहने वाले थे और वर्तमान में अपने परिवार के साथ सिविल लाइन थाना क्षेत्र के सुभाष नगर में रह रहे थे। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह जब काफी देर तक जितेंद्र अपने कमरे से बाहर नहीं आए, तो उनकी पत्नी सोनम उन्हें उठाने के लिए कमरे की तरफ गईं।   सोनम ने कमरे का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। दरवाजा अंदर से लॉक था। अनहोनी की आशंका के चलते सोनम ने कमरे की खिड़की से अंदर झांकने की कोशिश की। जैसे ही उनकी नजर अंदर पड़ी, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जितेंद्र का शव पंखे के सहारे दुपट्टे से लटका हुआ था।   चीख-पुकार और कोहराम: पति को फांसी के फंदे पर झूलता देख सोनम की चीख निकल गई और वह वहीं गश खाकर गिर पड़ीं। शोर सुनकर घर के अन्य सदस्य और आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। आनन-फानन में कमरे का दरवाजा तोड़ा गया। परिजनों ने जितेंद्र को फंदे से नीचे उतारा, इस उम्मीद में कि शायद सांसें बची हों, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जितेंद्र कुमार इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे।   सुसाइड नोट: 'जेब में छिपा था मौत का कारण' सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाने के इंस्पेक्टर सौरभ शुक्ला (Inspector Saurabh Shukla) पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल शव को अपने कब्जे में लिया और घटनास्थल की बारीकी से जांच शुरू की।   तलाशी के दौरान पुलिस को मृतक जितेंद्र की जेब से एक कागज का टुकड़ा मिला। यह एक सुसाइड नोट था, जिसमें महज तीन लाइनों में जितेंद्र ने अपनी मौत की वजह और अपना दर्द बयां किया था।   क्या लिखा था सुसाइड नोट में? सुसाइड नोट की लिखावट में एक गहरे अवसाद और लाचारी की झलक थी। जितेंद्र ने लिखा था:   "मेरी पत्नी, उसके मम्मी और पापा ने मुझे बहुत परेशान कर दिया है। इनके द्वारा दी जा रही मानसिक प्रताड़ना की वजह से मैं अब इस दुनिया में नहीं रहना चाहता हूं। मैं अपनी जान दे रहा हूं। मेरे इस कृत्य के लिए मुझे माफ कर देना।"   पुलिस ने इस नोट को सील कर दिया है और इसे जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। यह नोट साबित करता है कि जितेंद्र किसी बाहरी दबाव नहीं, बल्कि अपने ही घर के भीतर चल रहे शीतयुद्ध और कलह का शिकार हुए।   मृतक का प्रोफाइल: संघर्ष और सपने के बीच फंसा जीवन जितेंद्र कुमार कोई साधारण युवक नहीं थे। वे एक जिम्मेदार पिता, एक मेहनती बेटे और एक महत्वाकांक्षी छात्र थे।   डेयरी संचालक: जितेंद्र अपने पिता के साथ मिलकर दूध की डेयरी (Milk Dairy) का संचालन करते थे। वे सुबह जल्दी उठकर काम में हाथ बंटाते थे, जिससे पता चलता है कि वे आर्थिक रूप से अपने परिवार को संभालने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे। सिविल सर्विसेज एस्पिरेंट: डेयरी के काम के बाद जो समय मिलता था, उसे वे अपनी पढ़ाई में लगाते थे। उनका सपना सिविल सर्विसेज क्रैक करके अधिकारी बनने का था। सुभाष नगर जैसे इलाके में रहकर वे अपनी तैयारी को धार दे रहे थे। पिता की जिम्मेदारी: जितेंद्र का विवाह सोनम के साथ हुआ था और उनका दो साल का एक छोटा बेटा भी है। इस आत्महत्या ने उस मासूम बच्चे के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए छीन लिया है, जिसे अभी दुनिया की समझ भी नहीं है।   आरोप: ससुराल पक्ष का हस्तक्षेप और प्रताड़ना मृतक के परिजनों और सुसाइड नोट के आधार पर यह स्पष्ट हो रहा है कि जितेंद्र और उनकी पत्नी सोनम के बीच रिश्ते सामान्य नहीं थे। सुसाइड नोट में न केवल पत्नी, बल्कि सास और ससुर (पत्नी के माता-पिता) का जिक्र होना इस बात की ओर इशारा करता है कि जितेंद्र के वैवाहिक जीवन में ससुराल पक्ष का अत्यधिक हस्तक्षेप था।   अक्सर देखा गया है कि जब किसी व्यक्ति को उसके ससुराल पक्ष द्वारा लगातार अपमानित या प्रताड़ित किया जाता है, तो वह गहरे डिप्रेशन में चला जाता है। पुलिस अब इस एंगल से जांच कर रही है कि आखिर वो कौन सी बातें या घटनाएं थीं, जिन्होंने एक पढ़े-लिखे और समझदार युवक को आत्महत्या जैसा चरम कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। क्या कोई पैसों की मांग थी? या फिर जितेंद्र के काम और पढ़ाई को लेकर ताने मारे जाते थे? यह सब जांच का विषय है।   पुलिस की कार्रवाई और कानूनी पहलू इंस्पेक्टर सौरभ शुक्ला ने बताया कि शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमॉर्टम (Post-mortem) के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं।   कानूनी धाराएं: सुसाइड नोट में नामजद आरोप होने के कारण पुलिस अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई कर सकती है।   आत्महत्या के लिए उकसाना (Abetment to Suicide): यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो पत्नी और सास-ससुर के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज हो सकता है। कानून के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति किसी को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित कर दे कि उसके पास मरने के अलावा कोई विकल्प न बचे, तो यह एक गंभीर अपराध है। जांच की दिशा: पुलिस अब जितेंद्र और उनकी पत्नी के मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) खंगालेगी। साथ ही पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की जाएगी कि पिछले कुछ दिनों से घर का माहौल कैसा था।   समाज के लिए एक चेतावनी: पुरुषों का मानसिक स्वास्थ्य मेरठ की यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक सामाजिक त्रासदी भी है। अक्सर समाज में यह धारणा है कि घरेलू हिंसा या प्रताड़ना केवल महिलाओं के साथ होती है। लेकिन जितेंद्र कुमार का केस बताता है कि पुरुष भी घरेलू कलह और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होते हैं।   चुपचाप सहना: पुरुष अक्सर अपनी पारिवारिक समस्याओं को किसी से साझा नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे समाज में उनकी छवि खराब होगी। डिप्रेशन: सिविल सर्विसेज जैसी परीक्षा की तैयारी का दबाव और ऊपर से घरेलू कलह, यह "डबल प्रेशर" किसी भी इंसान को तोड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जितेंद्र ने समय रहते किसी दोस्त या काउंसलर से बात की होती, तो शायद यह नौबत न आती।   न्याय की आस फिलहाल, जितेंद्र का परिवार गहरे सदमे में है। दो साल का मासूम बेटा बार-बार अपने पिता को ढूंढ रहा है, लेकिन उसे नहीं पता कि अब वे कभी नहीं आएंगे। जितेंद्र के पिता, जिन्होंने अपने बुढ़ापे का सहारा और डेयरी के काम का साथी खो दिया है, अब पुलिस से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।   पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। सुसाइड नोट में लिखी वो तीन लाइनें अब जितेंद्र के परिवार के लिए न्याय की लड़ाई का आधार बनेंगी। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि रिश्तों में संवाद और समझदारी कितनी जरूरी है, ताकि किसी और जितेंद्र को ऐसा कदम न उठाना पड़े।

Unknown जनवरी 23, 2026 0
Meerut Mazar Controversy Sachin Sirohi Demands Removal of Illegal Shrines
मेरठ में 'मजार' पर महासंग्राम: सड़क पर बनी दो मजारें क्षतिग्रस्त होने से उबाल, सचिन सिरोही बोले- 'सीएम योगी पूरे शहर से हटाएं अतिक्रमण', काजी ने मांगी कार्रवाई

Meerut Mazar Vivad: उत्तर प्रदेश के मेरठ में धार्मिक स्थलों को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। लालकुर्ती क्षेत्र में सड़क किनारे बनी दो पुरानी मजारों के क्षतिग्रस्त होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जहां एक तरफ मुस्लिम पक्ष और नायब शहर काजी ने इस घटना पर रोष जताते हुए दोबारा निर्माण की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही (Sachin Sirohi) ने इसे सही ठहराते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बड़ी अपील कर दी है।READ ALSO:-कुदरत का कहर: मेरठ के ऐतिहासिक चर्च पर आकाशीय बिजली गिरने से लगी भीषण आग, 45 मिनट तक सांसें थमीं, बाल-बाल बची जान   लालकुर्ती में क्या हुआ था?  दरअसल, यह पूरा मामला गुरुवार सुबह का है। मेरठ के लालकुर्ती क्षेत्र में कचहरी से दयानंद नर्सिंग होम जाने वाले रास्ते पर स्थित दो बेहद पुरानी मजारें क्षतिग्रस्त अवस्था में मिलीं। मजारों के टूटने की खबर फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।   इस घटना के विरोध में मेरठ व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष जीतू सिंह नागपाल और एडवोकेट उमा शंकर खटीक भी मौके पर पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस ने आनन-फानन में मोर्चा संभाला और लोगों को शांत कराया। पुलिस द्वारा मजारों को दोबारा बनवाने के आश्वासन के बाद ही भीड़ वहां से हटी।   शहर काजी ने लिखा पत्र, जताई नाराजगी इस घटना ने शहर के सांप्रदायिक माहौल में हलचल पैदा कर दी है। नायब शहर काजी और अखिल भारतीय कौमी एकता एवं सद्भावना समिति के अध्यक्ष काजी जैनुर राशिदीन ने एक पत्र जारी कर घटना की कड़ी निंदा की है।   उन्होंने कहा कि, "कुछ असामाजिक तत्व शहर की फिजा और शांति बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।" काजी ने मेरठ के डीएम (DM) और एसएसपी (SSP) से मांग की है कि ऐसे तत्वों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और मजारों का पुनर्निर्माण तत्काल प्रभाव से कराया जाए।   सचिन सिरोही की एंट्री और सीएम योगी से मांग मुस्लिम पक्ष की प्रतिक्रिया के बाद अब हिंदू संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है। अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने मजारों के टूटने को 'अतिक्रमण हटाओ' अभियान का हिस्सा बताते हुए इसका समर्थन किया है।   सचिन सिरोही ने कहा कि सड़क पर हुए अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से सीधी अपील करते हुए कहा, "शहर में सड़क किनारे और भी कई ऐसे अवैध निर्माण हैं, जिन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए ताकि रास्ता साफ हो सके।" उन्होंने डीएम और एसएसपी को भी निर्देशित करने की मांग की है कि जहां भी इस तरह के अवैध धार्मिक स्थल रास्तों को रोक रहे हैं, उन्हें हटाया जाए।   भैंसाली डिपो और सिटी स्टेशन का जिक्र सचिन सिरोही ने अपने बयान में सिर्फ लालकुर्ती ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य इलाकों का भी जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से भैंसाली मेट्रो स्टेशन (Bhaisali Metro Station) के पास स्थित मजार का मुद्दा उठाया।   सिरोही का कहना है, "भैंसाली डिपो के पास मजार के कारण रास्ता अनावश्यक रूप से घुमावदार हो गया है, जिससे वहां हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है। इसी तरह सिटी स्टेशन के पास भी अवैध निर्माण है जिसे हटाया जाना जनहित में जरूरी है।"   फिलहाल Meerut Mazar Vivad ने प्रशासन के सामने धर्म और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की चुनौती पेश कर दी है। एक तरफ जहां आस्था और परंपरा का हवाला देकर मजारों के संरक्षण की मांग हो रही है, वहीं दूसरी तरफ हिंदू संगठन इसे 'लैंड जिहाद' और अतिक्रमण बताकर सीएम योगी की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत कार्रवाई चाहते हैं। देखना होगा कि जिला प्रशासन इस दोहरे दबाव से कैसे निपटता है।   सारांश: मेरठ के लालकुर्ती में दो मजारों के क्षतिग्रस्त होने के बाद विवाद बढ़ गया है। नायब शहर काजी ने इसे असामाजिक तत्वों की करतूत बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं, हिंदू नेता सचिन सिरोही ने इसका विरोध करते हुए सीएम योगी से शहर की सभी सड़कों से अवैध मजारों को हटाने की मांग की है।

Unknown जनवरी 23, 2026 0
Meerut Church Fire Lightning Strike Causes Blaze at Central Methodist Church Fire Controlled in 45 Minutes
कुदरत का कहर: मेरठ के ऐतिहासिक चर्च पर आकाशीय बिजली गिरने से लगी भीषण आग, 45 मिनट तक सांसें थमीं, बाल-बाल बची जान

मेरठ (Meerut)। शहर के सबसे शांत और सुरक्षित माने जाने वाले कैंट (Cantt) इलाके में आज दोपहर उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया। लालकुर्ती थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च (Central Methodist Church) पर अचानक आकाशीय बिजली (Lightning Strike) गिरने से भीषण आग लग गई। गड़गड़ाहट की तेज आवाज के साथ गिरी बिजली ने चर्च परिसर में मौजूद लोगों को दहला दिया। देखते ही देखते चर्च का एक हिस्सा धुएं और लपटों से घिर गया। यह घटना न केवल डरावनी थी, बल्कि इसने शहर की फायर सेफ्टी और आपातकालीन प्रतिक्रिया की भी परीक्षा ली।Read also:-सावधान मेरठ: आज शाम 6 बजे सायरन बजते ही अंधेरे में डूब जाएगा पूरा शहर; 10 मिनट के लिए थम जाएगी जिंदगी, जानें प्रशासन के 'ब्लैकआउट' मॉक ड्रिल का पूरा प्लान   घटना का आंखों देखा हाल: दोपहर की शांति और अचानक विस्फोट यह घटना दोपहर के समय घटी जब चर्च परिसर में सामान्य दिनों की तरह शांति थी। आसमान में बादल छाए हुए थे और मौसम का मिजाज बदला हुआ था। अचानक, एक तेज धमाके के साथ आकाशीय बिजली चर्च की इमारत के एक हिस्से पर गिरी। यह बिजली प्रार्थना सभा (Prayer Hall) के ठीक बराबर में बने एक स्टोर रूम पर गिरी।   बिजली गिरते ही स्टोर रूम के अंदर रखे सामान ने आग पकड़ ली। चूंकि स्टोर रूम में अक्सर पुरानी लकड़ियां, कागज और अन्य ज्वलनशील सामग्री होती है, इसलिए आग ने पल भर में ही विकराल रूप धारण कर लिया। चंद मिनटों के अंदर, खिड़कियों और रोशनदानों से काले धुएं का गुबार निकलने लगा, जिसने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया।   चौकीदार रोहित की सूझबूझ: एक फोन कॉल जो नहीं लगा और एक दौड़ जिसने बचाई जान इस पूरी घटना में अगर किसी की भूमिका सबसे अहम रही, तो वह हैं चर्च के चौकीदार रोहित। जब आग लगी, तो सबसे पहले रोहित की नजर धुएं पर पड़ी। लपटें तेजी से बाहर निकल रही थीं। रोहित ने बिना एक पल गंवाए शोर मचाना शुरू कर दिया, जिससे चर्च के अन्य कर्मचारी और आसपास से गुजर रहे लोग वहां इकट्ठा हो गए।   संकट की इस घड़ी में अक्सर हाथ-पांव फूल जाते हैं, लेकिन रोहित ने संयम नहीं खोया। उन्होंने तत्काल पुलिस और फायर ब्रिगेड के कंट्रोल रूम को फोन मिलाने का प्रयास किया। लेकिन, इसे दुर्भाग्य कहें या तकनीकी खामी, कंट्रोल रूम का नंबर नहीं मिल सका।   यहीं पर रोहित की त्वरित निर्णय क्षमता (Quick Decision Making) काम आई। वे फोन के भरोसे बैठकर इंतजार करने के बजाय, अपने एक साथी को साथ लेकर मोटरसाइकिल से सीधे पुलिस लाइन फायर ऑफिस की ओर दौड़ पड़े। उनकी यह तत्परता ही थी कि सूचना समय पर विभाग तक पहुंच सकी। यदि वे फोन मिलाते रहते और इंतजार करते, तो शायद आग मुख्य प्रार्थना भवन तक फैल सकती थी और नुकसान का आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता था।   रेस्क्यू ऑपरेशन: फायर ब्रिगेड का 45 मिनट का संघर्ष रोहित द्वारा दी गई सटीक सूचना पर फायर ब्रिगेड ने तुरंत एक्शन लिया। पुलिस लाइन फायर स्टेशन से सायरन बजाती हुई दो बड़ी दमकल गाड़ियां तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना कर दी गईं।   जब तक दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, आग अपनी चरम सीमा पर थी। स्टोर रूम पूरी तरह से लपटों में घिरा हुआ था और आग के फैलने का खतरा बना हुआ था। चर्च का क्षेत्र होने के कारण वहां लकड़ी का फर्नीचर और अन्य कीमती सामान भी था, जिसे बचाना एक चुनौती थी।   दमकल कर्मियों ने बिना समय गंवाए पाइपलाइन बिछाई और आग पर पानी की बौछार शुरू कर दी। आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि उसे बुझाने में पसीने छूट गए। करीब 45 मिनट की लगातार मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका। फायर फाइटर्स ने न केवल आग बुझाई बल्कि कूलिंग प्रोसेस भी तुरंत शुरू किया ताकि सुलगती हुई चिंगारियां दोबारा आग न पकड़ सकें।   नुकसान का आकलन और राहत की खबर आग बुझने के बाद जब धुएं का गुबार छटा, तो नुकसान का मंजर सामने आया। स्टोर रूम में रखा काफी सामान जलकर खाक हो चुका था। दीवारें काली पड़ चुकी थीं और बिजली की फिटिंग पिघल गई थी।   हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी राहत की खबर यह रही कि कोई जनहानि (Casualty) नहीं हुई। जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय स्टोर रूम के अंदर कोई मौजूद नहीं था और आग प्रार्थना सभा हॉल तक पहुंचने से पहले ही रोक दी गई। चर्च के पादरी और स्टाफ ने ईश्वर का धन्यवाद किया कि एक बड़ा हादसा टल गया। मौके पर पहुंचे आसपास के लोगों ने भी प्रशासन की मुस्तैदी और चौकीदार की हिम्मत की सराहना की।   आकाशीय बिजली और सुरक्षा (Background & Analysis)   क्यों गिरती है इमारतों पर बिजली? ऊंची इमारतें, मीनारें और चर्च के गुंबद अक्सर आकाशीय बिजली के निशाने पर होते हैं। विज्ञान के अनुसार, बिजली हमेशा पृथ्वी तक पहुंचने के लिए सबसे छोटा और सुगम रास्ता तलाशती है। चर्च या मंदिरों के शिखर (Spires) नुकीले और ऊंचे होते हैं, जो बादलों में बने आवेश (Charge) को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि ऐतिहासिक इमारतों पर 'लाइटनिंग कंडक्टर' (तड़ित चालक) लगाना अनिवार्य माना जाता है। इस घटना के बाद यह जांच का विषय है कि क्या चर्च में लगा तड़ित चालक ठीक से काम कर रहा था या नहीं।   ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा: एक बड़ा सवाल मेरठ का कैंट क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक इमारतों और पुराने चर्चों के लिए प्रसिद्ध है। सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च भी इसी विरासत का हिस्सा है। इस घटना ने एक बार फिर पुरानी इमारतों की 'फायर सेफ्टी ऑडिट' (Fire Safety Audit) की आवश्यकता को रेखांकित किया है।   पुरानी वायरिंग: कई पुरानी इमारतों में वायरिंग दशकों पुरानी होती है, जो आग पकड़ने में सहायक बन जाती है। लकड़ी का इस्तेमाल: पुराने आर्किटेक्चर में लकड़ी का भरपूर इस्तेमाल होता है, जो आग के लिए ईंधन का काम करती है। आपातकालीन निकास: संकरी गलियां और पुराने दरवाजे कई बार रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा बनते हैं।   आपातकाल में क्या करें? (विशेषज्ञ की राय) फायर ऑफिसर (मेरठ) के अनुसार, ऐसी घटनाओं के दौरान समय सबसे कीमती होता है।   तुरंत सूचना दें: आग देखते ही सबसे पहले 101 या 112 डायल करें। बिजली बंद करें: मेन स्विच से बिजली की सप्लाई काट दें ताकि शॉर्ट सर्किट से आग न फैले। खुले में आएं: इमारत से बाहर निकलकर खुले स्थान पर जमा हो जाएं। धुएं से बचें: आग से ज्यादा खतरनाक धुआं होता है। यदि आप फंस गए हैं, तो जमीन पर लेटकर रेंगते हुए बाहर निकलें क्योंकि धुआं ऊपर की ओर उठता है।   सबक और सराहना मेरठ के चर्च में हुई यह घटना एक चेतावनी भी है और एक मिसाल भी। चेतावनी इस बात की कि मौसम के बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए, और मिसाल चौकीदार रोहित की, जिन्होंने साबित किया कि सूझबूझ और तत्काल कार्रवाई से बड़े से बड़े संकट को टाला जा सकता है। पुलिस और दमकल विभाग की तत्परता ने भी यह सुनिश्चित किया कि मेरठ की एक ऐतिहासिक धरोहर को बड़ा नुकसान होने से बचा लिया गया।   फिलहाल, चर्च प्रशासन स्टोर रूम की मरम्मत और मलबे को हटाने के काम में जुट गया है। स्थानीय पुलिस ने घटना की रोजनामचा (Daily Diary) में एंट्री कर ली है और स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है।

Unknown जनवरी 23, 2026 0
Meerut to Observe Blackout Mock Drill Today at 6 PM Sirens to Ring City to Go Dark for 10 Minutes
सावधान मेरठ: आज शाम 6 बजे सायरन बजते ही अंधेरे में डूब जाएगा पूरा शहर; 10 मिनट के लिए थम जाएगी जिंदगी, जानें प्रशासन के 'ब्लैकआउट' मॉक ड्रिल का पूरा प्लान

मेरठ: क्रांतिधरा मेरठ (Meerut) में आज यानी 23 जनवरी की शाम एक विशेष घटनाक्रम देखने को मिलेगा. अगर आज शाम ठीक 6 बजे आपके घर की बत्ती गुल हो जाए और बाहर जोर-जोर से सायरन बजने लगे, तो आपको घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. यह कोई वास्तविक आपदा या हवाई हमला नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और सिविल डिफेंस (Civil Defense) द्वारा आयोजित एक मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल (Meerut Blackout Mock Drill) है.READ ALSO:-Badrinath Dham Kapat Opening Date 2026: 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, वसंत पंचमी पर हुआ तिथियों का ऐलान—जानें पूरी डिटेल   नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती (पराक्रम दिवस) और उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर शासन ने प्रदेश के कई जनपदों में हवाई हमले से बचाव की तैयारियों को परखने के लिए इस मॉक ड्रिल के निर्देश दिए हैं. मेरठ में आज शाम 6 बजे से 6:10 बजे तक, यानी कुल 10 मिनट के लिए पूरे शहर की विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी और ब्लैकआउट का अभ्यास किया जाएगा.   इस महत्वपूर्ण आयोजन का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों, विशेषकर युद्ध या हवाई हमले के दौरान जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. आइए विस्तार से जानते हैं कि आज शाम मेरठ में क्या होने वाला है, मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल के नियम क्या हैं और एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए.   आज शाम 6 बजे क्या होगा? जिला प्रशासन और नागरिक सुरक्षा विभाग (Civil Defense) ने इस ड्रिल की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है.   समय: शाम 6:00 बजे. संकेत: शहर में लगे सिविल डिफेंस के सायरन बजना शुरू होंगे. कार्रवाई: सायरन बजते ही बिजली विभाग (Electricity Department) शहर की स्ट्रीट लाइट्स और घरेलू सप्लाई बंद कर देगा. अवधि: यह अंधेरा ठीक 10 मिनट तक रहेगा. समापन: 10 मिनट बाद एक लंबा सायरन (ऑल क्लियर) बजेगा, जिसके बाद बिजली बहाल कर दी जाएगी.   डीएन इंटर कॉलेज (DN Inter College) को इस मॉक ड्रिल का मुख्य केंद्र बनाया गया है, जहाँ से अधिकारी पूरी गतिविधि की निगरानी करेंगे. सायरन की आवाज 'ऊंची-नीची' (Wailing Sound) होगी, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवाई हमले की चेतावनी (Air Raid Warning) का संकेत मानी जाती है.   ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का उद्देश्य क्या है? अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि शांति काल में इस तरह के मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल की क्या आवश्यकता है? एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने इस पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ब्लैकआउट एक महत्वपूर्ण 'आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था' है.   हवाई हमलों से बचाव: युद्ध की स्थिति में दुश्मन के लड़ाकू विमान रात के समय रोशनी को निशाना बनाकर हमला करते हैं. शहरों की रोशनी (City Lights) उनके लिए टारगेट पहचानना आसान बना देती है. ब्लैकआउट करके शहर को अंधेरे में छिपा दिया जाता है ताकि दुश्मन सटीक निशाना न लगा सके. तैयारियों का जायजा: इस ड्रिल के जरिए प्रशासन यह परखना चाहता है कि सायरन बजने के कितनी देर बाद शहर अंधेरे में डूबता है और जनता की प्रतिक्रिया (Response Time) क्या रहती है. जागरूकता: नई पीढ़ी को यह पता होना चाहिए कि अगर कभी वास्तव में ऐसी स्थिति बनी, तो उन्हें पैनिक करने के बजाय क्या कदम उठाने चाहिए.   जनता के लिए गाइडलाइंस: ब्लैकआउट के दौरान क्या करें? मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल की सफलता पूरी तरह से आम जनता के सहयोग पर निर्भर करती है. प्रशासन ने नागरिकों के लिए कुछ विशेष निर्देश (Dos and Don'ts) जारी किए हैं. शाम 6 बजे सायरन बजते ही आपको निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:   1. घर की लाइटें तुरंत बंद करें जैसे ही सायरन की आवाज सुनाई दे, अपने घर, दुकान या प्रतिष्ठान की सभी लाइटें तुरंत बंद कर दें. स्विच ऑफ करने में देरी न करें. याद रखें, एक छोटी सी लाइट भी अंधेरे में दुश्मन के लिए 'गाइड' का काम कर सकती है (ड्रिल में यह अनुशासन का प्रतीक है).   2. खिड़कियों को ढक लें अगर आपको घर के अंदर किसी बहुत जरूरी काम के लिए मोमबत्ती या टॉर्च जलानी भी पड़े, तो यह सुनिश्चित करें कि रोशनी बाहर न जाए. इसके लिए अपनी खिड़कियों और दरवाजों को मोटे पर्दों (Curtains) या काले कागज से पूरी तरह ढक दें. इसे 'लाइट अनुशासन' कहा जाता है.   3. वाहन चालक दें विशेष ध्यान अगर आप शाम 6 बजे सड़क पर गाड़ी चला रहे हैं और मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का सायरन बज जाए, तो:   अपनी गाड़ी को तुरंत सड़क के किनारे सुरक्षित स्थान पर रोक दें. गाड़ी की हेडलाइट (Headlight) और टेललाइट तुरंत बंद कर दें. सड़क के बीच में गाड़ी न रोकें ताकि इमरजेंसी वाहनों (एम्बुलेंस/फायर ब्रिगेड) को रास्ता मिल सके.   4. अफवाहों से बचें यह केवल एक अभ्यास (Drill) है. इसलिए डरने या घबराने की जरूरत नहीं है. सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की अफवाह न फैलाएं कि "शहर पर हमला हो गया है" या "बिजली संकट आ गया है". अपने आस-पास के लोगों, विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों को समझाएं कि यह एक सुरक्षा ड्रिल है.   प्रशासन की तैयारियां: नोडल अधिकारी का बयान मेरठ में इस ब्लैकआउट मॉक ड्रिल के सफल संचालन के लिए एडीएम (वित्त एवं राजस्व) सूर्यकांत त्रिपाठी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है. उन्होंने बताया कि तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.   एडीएम सूर्यकांत त्रिपाठी ने कहा, "यह मॉक ड्रिल शासन के निर्देशों पर की जा रही है. इसमें सिविल डिफेंस के साथ-साथ दमकल विभाग (Fire Brigade), स्वास्थ्य विभाग (Health Department), पुलिस और विद्युत विभाग का समन्वय रहेगा. हमारा उद्देश्य है कि रिस्पांस टाइम को न्यूनतम किया जाए. डीएन इंटर कॉलेज में कंट्रोल रूम बनाया गया है."   विभागों की भूमिका: विद्युत विभाग: सायरन बजते ही ग्रिड से सप्लाई काटेगा. सिविल डिफेंस: वार्डन सड़कों पर घूमकर लोगों को लाइट बंद करने के लिए प्रेरित करेंगे और हूटर बजाएंगे. पुलिस: ट्रैफिक व्यवस्था संभालेगी ताकि अंधेरे का फायदा उठाकर कोई अप्रिय घटना न हो. अस्पताल: अस्पतालों को अपनी इमरजेंसी लाइट और जनरेटर को 'ब्लैकआउट मोड' (पर्दे लगाकर) में चलाने का अभ्यास करना होगा.   ब्लैकआउट का इतिहास और महत्व भारत में ब्लैकआउट का अभ्यास नया नहीं है. 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान मेरठ समेत उत्तर भारत के कई शहरों ने हफ्तों तक 'ब्लैकआउट' का जीवन जिया है. उस समय लोग अपनी खिड़कियों के शीशों पर काला पेंट कर दिया करते थे और गाड़ियों की हेडलाइट के ऊपरी आधे हिस्से को काले रंग से रंग दिया जाता था.   आज के दौर में भले ही युद्ध की तकनीक बदल गई हो और रडार सिस्टम आ गए हों, लेकिन 'विजुअल टारगेटिंग' (Visual Targeting) से बचने के लिए ब्लैकआउट आज भी एक कारगर रणनीति मानी जाती है. मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल हमें उस अनुशासन की याद दिलाता है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है.   सायरन के प्रकार और उनका अर्थ आम जनता को सायरन की आवाज के फर्क को समझना चाहिए. मॉक ड्रिल में दो तरह के सायरन बज सकते हैं:   चेतावनी सायरन (Warning Siren): यह रुक-रुक कर, ऊंची-नीची आवाज में बजता है. इसका मतलब है 'खतरा है' या 'हमला होने वाला है'. आज शाम 6 बजे यही सायरन बजेगा. ऑल क्लियर सायरन (All Clear): यह एक लंबी और सपाट आवाज होती है जो बिना रुके बजती है. इसका मतलब है 'खतरा टल गया है'. यह ड्रिल खत्म होने (6:10 बजे) पर बजाया जाएगा.   नेताजी सुभाष चंद्र बोस और सिविल डिफेंस आज का दिन इसलिए चुना गया है क्योंकि आज 'पराक्रम दिवस' है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन कर देश को सैन्य अनुशासन का पाठ पढ़ाया था. सिविल डिफेंस का मोटो भी "सर्व जन हिताय" और राष्ट्र की रक्षा है. मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल एक तरह से नेताजी को श्रद्धांजलि भी है, जो यह संदेश देती है कि हम अपनी सुरक्षा के लिए सदैव सतर्क हैं.   नागरिकों से अपील मेरठ प्रशासन ने सभी व्यापार संगठनों, आरडब्ल्यूए (RWA) और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इस मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल को सफल बनाने में सहयोग करें.   दुकानदार अपनी दुकानों के शटर गिरा दें या लाइट बंद रखें. फैक्ट्री मालिक 10 मिनट के लिए भारी मशीनरी और रोशनी बंद रखें. सोसाइटी के गार्ड्स सीटी बजाकर निवासियों को अलर्ट करें.   सुरक्षा केवल सेना या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक प्रयास है. आज शाम होने वाला मेरठ ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आपकी और हमारी जागरूकता की परीक्षा है. 10 मिनट का यह अंधेरा हमारे भविष्य को सुरक्षित रखने की तैयारी का हिस्सा है. तो याद रखें, आज शाम 6 बजे जैसे ही सायरन गूंजे, अपनी उंगलियां स्विच बोर्ड की तरफ बढ़ाएं और अंधेरा करके यह साबित करें कि मेरठ का हर नागरिक देश की सुरक्षा व्यवस्था के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है.   मेरठ में आज (23 जनवरी) शाम 6:00 बजे से 6:10 बजे तक 'ब्लैकआउट मॉक ड्रिल' आयोजित की जाएगी. नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर आयोजित इस ड्रिल के दौरान पूरे शहर की बिजली काट दी जाएगी और सायरन बजाए जाएंगे. प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस दौरान अपने घरों की लाइटें बंद रखें, वाहनों को सुरक्षित स्थान पर रोकें और घबराएं नहीं.

Unknown जनवरी 23, 2026 0
UP Weather Update Rain Returns to Western UP due to Western Disturbance; Wheat Farmers Happy Sugarcane Crushing Affected
यूपी मौसम अपडेट: पश्चिमी विक्षोभ से मेरठ-सहारनपुर में झमाझम बारिश, गेहूं के लिए 'अमृत' तो गन्ना किसानों की बढ़ी धड़कनें

[मेरठ/मुजफ्फरनगर/सहारनपुर, डेस्क रिपोर्ट] उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से (Western UP) में मौसम ने एक बार फिर नाटकीय करवट ली है। पिछले कुछ दिनों से खिली धूप और चढ़ते पारे के कारण जहाँ लोगों को लग रहा था कि सर्दी अब विदाई की ओर है, वहीं पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की सक्रियता ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, बागपत और शामली समेत कई जिलों में गुरुवार देर रात और शुक्रवार सुबह से हो रही रुक-रुक कर बारिश ने ठंड की जोरदार वापसी कराई है।READ ALSO:-UP Weather Alert: यूपी में कुदरत का 'कोल्ड अटैक', 18 जिलों में ओले और आंधी की चेतावनी; जानें बारिश से गलन और फसलों का पूरा गणित   यह बारिश केवल मौसम का बदलाव नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था यानी खेती-किसानी पर भी पड़ रहा है। जहाँ रबी की फसलों (विशेषकर गेहूं) के लिए यह पानी 'अमृत' माना जा रहा है, वहीं गन्ना किसानों और शहर की व्यवस्थाओं के लिए यह बारिश नई चुनौतियां लेकर आई है। सड़कों पर सन्नाटा है, लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं और पारे में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।   आइए, विस्तार से जानते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इस मौसमी बदलाव का कैसा असर रहा है और आने वाले दिनों के लिए मौसम विभाग का क्या पूर्वानुमान है।   मेरठ: 100 दिन बाद भीगी धरती, प्रदूषण धुला, गलन बढ़ी क्रांतिधरा मेरठ में मौसम का मिजाज सबसे अधिक बदला हुआ नजर आया। पिछले साल 8 अक्टूबर को हुई बारिश के बाद से शहर और देहात क्षेत्र सूखा पड़ा था। लगभग तीन महीने से अधिक समय बाद हुई इस बारिश ने शहर की फिजा बदल दी है।   तापमान में भारी गिरावट परिदृश्य: गुरुवार को शहर का अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के पार था, जिससे दिन में गर्मी का अहसास होने लगा था। लेकिन शुक्रवार को हुई बारिश ने स्थिति पलट दी। पूर्वानुमान: मौसम विभाग के अनुसार, बारिश और ठंडी हवाओं के कारण दिन का अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे जा सकता है। यानी 24 घंटे के भीतर तापमान में करीब 9-10 डिग्री की गिरावट। बारिश का आंकड़ा: शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक शहर में 5 मिमी (mm) बारिश दर्ज की जा चुकी थी। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह आंकड़ा 6 मिमी तक जा सकता है।   प्रदूषण से राहत लंबे समय से शुष्क मौसम के कारण मेरठ की हवा में धूल और प्रदूषण के कण जमा हो गए थे। "स्मॉग" की एक परत ने शहर को ढक रखा था। इस रिमझिम बारिश ने 'प्राकृतिक एयर प्यूरीफायर' का काम किया है। वातावरण में छाई प्रदूषण की कालिमा धुल गई है और हवा की गुणवत्ता (AQI) में सुधार होने की उम्मीद है।   जनजीवन पर असर शुक्रवार की सुबह हल्की बूंदाबांदी रिमझिम बरसात में बदल गई। इसके चलते शहर की रफ्तार थम गई। जो सड़कें सुबह के वक्त स्कूल बसों और दफ्तर जाने वालों से भरी रहती थीं, वहां सन्नाटा पसरा रहा। लोग बहुत जरूरी काम होने पर ही रेनकोट या छाता लेकर घरों से बाहर निकले।   मुजफ्फरनगर: सूने पड़े पार्क, सुबह की सैर पर लगा ब्रेक मुजफ्फरनगर में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर व्यापक रूप से देखने को मिला। यहाँ मौसम बदलने का तरीका थोड़ा ज्यादा आक्रामक रहा।   गरज-चमक के साथ शुरुआत शुक्रवार सुबह लगभग 6 बजे, जब शहर के लोग अपनी दिनचर्या शुरू कर रहे थे, तभी आसमान में तेज गड़गड़ाहट शुरू हो गई। देखते ही देखते बूंदाबांदी तेज हो गई।   सैर-सपाटे पर ताला मुजफ्फरनगर के लोगों की सुबह की शुरुआत अक्सर मेरठ रोड स्थित कंपनी बाग और महावीर चौक के पास जीआईसी (GIC) मैदान में सैर के साथ होती है। आम दिनों में यहाँ सैकड़ों लोग योग और व्यायाम करते नजर आते हैं।   आज का हाल: शुक्रवार की सुबह बारिश के चलते ये दोनों प्रमुख स्थान पूरी तरह खाली नजर आए। लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल सके।   तापमान का गणित पिछले 24 घंटे: गुरुवार को यहाँ अधिकतम तापमान 24.7°C और न्यूनतम तापमान 4.8°C दर्ज किया गया था। बदलाव: शुक्रवार को बारिश के बाद अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले तीन दिनों से जो गर्मी बढ़ रही थी, उस पर अब ब्रेक लग गया है। ठंड का असर फिर से तीखा हो गया है।   सहारनपुर: किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान पश्चिमी यूपी के सीमावर्ती जिले सहारनपुर में मौसम का बदलाव किसानों के लिए खुशखबरी लेकर आया है।   सुबह 4 बजे से बदला मौसम यहाँ शुक्रवार तड़के 4:00 बजे से ही मौसम बदल गया था। आसमान में बादल कड़कने लगे और बूंदाबांदी का दौर शुरू हो गया। पिछले चार दिनों से यहाँ एक अजीब स्थिति बनी हुई थी—सुबह और शाम को ठंड होती थी, लेकिन दोपहर में धूप इतनी तेज होती थी कि गर्मी लगने लगती थी। इस बारिश ने मौसम को संतुलित कर दिया है।   किसान खुश क्यों हैं? हल्की बूंदाबांदी को 'गोल्डन ड्रॉप्स' माना जा रहा है।   गेहूं की फसल: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह समय गेहूं की फसल की बढ़वार का है। इस समय आसमान से गिरने वाला पानी फसल में प्राकृतिक यूरिया का काम करता है। खुशी की लहर: बारिश को देखकर किसानों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आ रही है, क्योंकि इससे उनकी सिंचाई की लागत बचेगी और उत्पादन बेहतर होगा।   बागपत: गन्ना किसानों की बढ़ी धड़कनें, मिलों पर संकट के बादल जहाँ गेहूं किसानों के लिए यह बारिश वरदान है, वहीं बागपत जिले से गन्ना किसानों के लिए चिंताजनक खबरें आ रही हैं। यहाँ मौसम का दोहरी मार वाला चरित्र देखने को मिला।   तेज हवा और बारिश गुरुवार रात को ही यहाँ तेज हवाएं चलने लगी थीं। शुक्रवार तड़के शुरू हुई बारिश ने ठंड तो बढ़ाई, लेकिन साथ ही खेतों में कीचड़ कर दिया।   तापमान: न्यूनतम 5°C और अधिकतम 19°C रिकॉर्ड किया गया।   गन्ना कटाई और ढुलाई ठप बारिश के कारण खेतों में मिट्टी गीली हो गई है, जिससे गन्ना कटाई का काम लगभग थम गया है।   ट्रांसपोर्ट की समस्या: गीले खेतों से गन्ने से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को बाहर निकालना मुश्किल हो रहा है। रास्ते कीचड़ से भर गए हैं। चीनी मिलों पर असर: गन्ने की आपूर्ति (Supply) बाधित होने से चीनी मिलों के सामने 'नो केन' (No Cane) की स्थिति बन सकती है। यानी गन्ने की कमी के कारण मिलों का पेराई सत्र कुछ समय के लिए रुक सकता है, जो मिल और किसान दोनों के लिए आर्थिक नुकसान का सौदा है।   अधिकारी का बयान बागपत के जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया:   "यह बारिश गेहूं तथा सब्जियों की फसल के लिए बेहद अच्छी मानी जा रही है। बारिश से जहां गेहूं की फसल को पानी मिलेगा, वहीं ठंड बढ़ने से गेहूं के पौधों की ग्रोथ (बढ़वार) बढ़ेगी। हालांकि, गन्ना कटाई में कुछ बाधा आ सकती है।"   बिजनौर: तीन माह का सूखा खत्म, हवा के तेज झोंकों ने घेरा बिजनौर जिले में मौसम का यह बदलाव लंबे इंतजार के बाद आया है। यहाँ पिछले तीन महीनों से बारिश की एक बूंद नहीं गिरी थी।   मौसम का घटनाक्रम गुरुवार: दिन भर मौसम साफ था। गुरुवार मध्यरात्रि: अचानक काले बादल छा गए और हवा के तेज झोंकों ने जिले को अपनी चपेट में ले लिया। शुक्रवार: कहीं-कहीं बूंदाबांदी हुई, लेकिन घने बादलों को देखकर अनुमान है कि अगले एक-दो दिनों में तेज बारिश हो सकती है।   फसलों को संजीवनी बिजनौर एक कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहाँ की मुख्य फसलें गन्ना, गेहूं और चारा हैं।   फायदा: कृषि जानकारों के मुताबिक, यह बारिश गन्ने, चारे और सब्जी की फसलों के लिए बहुत मुफीद (लाभदायक) है। मौसम का चक्र: कोहरे और शीतलहर का दौर खत्म हो चुका था, लेकिन इस बारिश ने सर्दी के सीजन को थोड़ा और लंबा खींच दिया है।   शामली: जलभराव का खतरा, व्यवस्था की खुली पोल शामली जिले में मौसम का बदलाव अपने साथ प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीरें भी लेकर आया है। यहाँ सुबह 4 बजे से शुरू हुई बारिश ने ठंड तो बढ़ाई ही, साथ ही शहर की बदइंतजामी को भी उजागर कर दिया।   जलभराव (Waterlogging) का संकट रुक-रुक कर हो रही लगातार वर्षा ने शामली नगरपालिका और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नाले जाम: शहर के मुख्य नालों की समय पर सफाई न होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। सड़कों पर जलभराव का खतरा मंडरा रहा है। अंडरपास बने तालाब: जिले के आठ रेलवे अंडरपास में पानी भरना शुरू हो गया है। अगर दिन भर बारिश जारी रही, तो ये अंडरपास तालाब में तब्दील हो जाएंगे, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो सकता है।   कृषि विश्लेषण: लाभ और हानि का तराजू इस बेमौसम बरसात (जिसे स्थानीय भाषा में 'मावठ' कहा जाता है) का कृषि पर मिश्रित प्रभाव पड़ रहा है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:   लाभ (Benefits) गेहूं (Wheat): गेहूं एक ठंडी जलवायु की फसल है। इस समय तापमान में गिरावट और प्राकृतिक वर्षा से पौधों में 'फूटान' (Tillering - एक बीज से कई तने निकलना) अच्छी होगी। दाना मोटा और चमकदार बनेगा। सरसों (Mustard): अगर बारिश के साथ ओले नहीं गिरते हैं, तो यह सरसों के लिए भी फायदेमंद है। फलियों में दाना भरने की प्रक्रिया में नमी मदद करेगी। सिंचाई की बचत: किसानों को डीजल या बिजली खर्च करके पलेवा (सिंचाई) नहीं करनी पड़ेगी। इससे खेती की लागत कम होगी। सब्जियां: पत्तेदार सब्जियों और मटर के लिए यह मौसम अनुकूल है।   चुनौतियां (Challenges) गन्ना (Sugarcane): जैसा कि बागपत और शामली में देखा गया, कीचड़ के कारण कटाई और ढुलाई मुश्किल हो जाती है। मिलों तक गन्ना न पहुंचने से पर्चियों (Supply Tickets) का शेड्यूल बिगड़ सकता है। आलू (Potato): अगर बारिश ज्यादा हुई और खेतों में पानी रुका, तो आलू में 'झुलसा रोग' (Late Blight) लगने का खतरा बढ़ जाता है। नमी फंगस को जन्म देती है। जलभराव: निचले इलाकों के खेतों में पानी भरने से छोटी फसलें गल सकती हैं।   मौसम विभाग का पूर्वानुमान (Weather Forecast) मौसम विभाग (IMD) ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अगले 24 घंटों का अलर्ट जारी रखा है।   वर्षा की स्थिति: शाम तक कहीं रुक-रुक कर और कहीं लगातार बारिश जारी रहने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): यह सिस्टम अभी सक्रिय है। पहाड़ी इलाकों (उत्तराखंड, हिमाचल) में हो रही बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों की हवाओं पर पड़ रहा है। आगामी दिन: बारिश थमने के बाद आसमान साफ होगा, जिससे रात के तापमान में और गिरावट आएगी। सुबह के समय घना कोहरा (Dense Fog) फिर से वापसी कर सकता है। विजिबिलिटी 50 मीटर से कम रहने की आशंका है।   नागरिकों के लिए सलाह (Advisory) बदलते मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से कुछ सावधानियां बरतना आवश्यक है:   स्वास्थ्य: तापमान में अचानक गिरावट से वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम और हार्ट के मरीजों को समस्या हो सकती है। बुजुर्गों और बच्चों को गर्म कपड़ों में रखें। यात्रा: बारिश के कारण सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं। कीचड़ और जलभराव वाले रास्तों (विशेषकर शामली और बागपत में) पर वाहन सावधानी से चलाएं। किसान: खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करें। यदि आलू की फसल है, तो मौसम साफ होते ही फफूंदनाशक दवा का छिड़काव करने के लिए कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें।   पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम का यह बदलाव किसानों के लिए उम्मीद और चिंता दोनों लेकर आया है। जहाँ गेहूं की फसल लहलहाने की उम्मीद है, वहीं गन्ना किसानों को थोड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है। आम लोगों के लिए यह सर्दी का 'सेकंड इनिंग' है। अगले कुछ दिनों तक छाता और रेनकोट आपके सबसे अच्छे साथी साबित होंगे।  

Unknown जनवरी 23, 2026 0
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बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और गर्लफ्रेंड सोनाली का 15 मिनट का MMS लीक, कपल ने इसे चोरी और ब्लैकमेलिंग बताया

पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है।     कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप   सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है।   सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है।  ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया।  सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया।   प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है।  ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं।    सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं।   इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया।    बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }

बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई

आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला   मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।   बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।   दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था।   अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी।   बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे।   पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया।   एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी   सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता।   पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है।   आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?

देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।   सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया?   क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है।   पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है।   दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है।   सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?"   असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है।   सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है।   विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है।   विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।"   NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है।   NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।   CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।      आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया।  डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है।     कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं:   1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।   2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है।   सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है:   पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है।   दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।   गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।"   आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए।   सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है।   फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है।     जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; Kidney की बीमारी बनी मौत का कारण

बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है।   चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था।   टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।   फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी।   Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप   किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।   इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।"   Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।   सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।

दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी।   आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:   Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi)   मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी।   रूट मैप (Route Map) और स्टेशन   मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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Unknown जनवरी 21, 2026 0

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