गाजियाबाद

Golden Temple Sacrilege Accused Caught in Ghaziabad
अमृतसर से गाजियाबाद तक हड़कंप: गोल्डन टेंपल के सरोवर में 'कुल्ला' करने वाले युवक का निहंगों ने किया 'हिसाब', कैमरे पर जड़ा थप्पड़; अब पुलिस के हवाले

गाजियाबाद/अमृतसर: सिख धर्म के सर्वोच्च धार्मिक स्थल सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल) की मर्यादा भंग करने और पवित्र सरोवर में कुल्ला (Rinsing Mouth) करने के मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अमृतसर में बेअदबी की घटना को अंजाम देकर फरार हुए आरोपी मुस्लिम युवक को शनिवार को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में निहंग सिखों ने धर दबोचा।READ ALSO:-मेरठ: 77वें गणतंत्र दिवस की तैयारियों के बीच जवाहर इंटर कॉलेज पर 'गंदगी' का ग्रहण; दबंगों ने गेट पर खोदा 3 फीट गहरा अवैध नाला, सीएम दरबार पहुंची शिकायत   आरोपी युवक, जिसकी पहचान सुब्हान रंगरीज के रूप में हुई है, को निहंगों ने गाजियाबाद पुलिस के हवाले कर दिया है। इससे पहले, निहंगों द्वारा युवक की पिटाई का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह निहंग विक्की थॉमस के साथ नजर आ रहा है। यह मामला अब दो राज्यों की पुलिस और धार्मिक संगठनों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है।   गाजियाबाद में क्या हुआ? (The Ghaziabad Incident) रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोल्डन टेंपल में कुल्ला करने का वीडियो वायरल होने के बाद से ही सिख समुदाय और निहंग सिंहों में भारी रोष था। निहंग विक्की थॉमस और उनके साथियों ने आरोपी सुब्हान को गाजियाबाद के लोनी इलाके (अंकुर विहार थाना क्षेत्र) में ट्रैक किया।   वायरल हुए ताजा वीडियो में देखा जा सकता है कि निहंग सिंहों ने युवक को पकड़ रखा है। इस दौरान उसके साथ बैठे एक निहंग ने उसे जोरदार थप्पड़ जड़ा। वीडियो में कुल्ला करने वाला युवक (सुब्हान) और उसका वीडियो बनाने वाला साथी, दोनों हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए नजर आ रहे हैं। निहंगों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कानून को हाथ में लेने के बजाय आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंपने का काम किया है, ताकि न्याय हो सके। गाजियाबाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और वैधानिक कार्रवाई के बाद उसे अमृतसर पुलिस (Amritsar Police) को सौंपने की तैयारी की जा रही है।   गोल्डन टेंपल में कुल्ला: क्या है पूरा मामला? यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक रील (Reel) तेजी से वायरल हुई। इस वीडियो में एक युवक सिर पर टोपी पहने हुए गोल्डन टेंपल के पवित्र सरोवर (Holy Sarovar) की सीढ़ियों पर बैठा है।   मर्यादा का उल्लंघन: वीडियो में युवक सरोवर के पवित्र जल को मुंह में भरता है, कुल्ला करता है और उस पानी को वापस सरोवर में थूक देता है। आपत्तिजनक कैप्शन: इस वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड करते समय 'मुस्लिम शेर' का कैप्शन दिया गया था, जिससे यह प्रतीत होता है कि यह कृत्य जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए किया गया था। उंगली उठाने का इशारा: वीडियो के अंत में युवक गोल्डन टेंपल की ओर उंगली उठाकर इशारा करता है, जिसे सिख समुदाय ने चुनौती के रूप में देखा।   एक अन्य वीडियो में वह यह कहता हुआ भी सुनाई दिया, "यहां सब पगड़ी वाले हैं, सिर्फ मैं टोपी पहनकर आया हूं लेकिन मुझे किसी ने कुछ नहीं कहा।" SGPC की जांच और CCTV फुटेज का खुलासा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। SGPC के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मनन ने बताया कि समिति ने अपने स्तर पर सीसीटीवी फुटेज की जांच की है, जिसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।   20 मिनट तक रुका, माथा नहीं टेका: जांच में पता चला कि आरोपी युवक करीब 20 मिनट तक गोल्डन टेंपल परिसर में रहा। इस दौरान उसने न तो परिक्रमा की और न ही श्री दरबार साहिब के भीतर जाकर माथा टेका। बेअदबी की नीयत: SGPC का दावा है कि युवक का व्यवहार और बॉडी लैंग्वेज यह स्पष्ट करती है कि वह श्रद्धा भाव से नहीं, बल्कि बेअदबी (Sacrilege) और माहौल खराब करने की नीयत से ही वहां आया था।   SGPC ने अमृतसर पुलिस के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और मांग की है कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने (IPC Section 295A) के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।   माफी मांगने के तरीके पर विवाद (Controversy Over Apology) घटना का वीडियो वायरल होने और विवाद बढ़ने के बाद, आरोपी सुब्हान रंगरीज ने सोशल मीडिया पर दो माफीनामे (Apology Videos) जारी किए, लेकिन सिख समुदाय ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।   पहली माफी: पहले वीडियो में सुब्हान ने कहा, "भाइयों, मैं 3 दिन पहले श्री दरबार साहिब गया था... मुझे वहां की मर्यादा के बारे में नहीं पता था। मैंने सरोवर के पानी से वजू किया था, धोखे से मेरे मुंह से पानी निकलकर उसमें गिर गया। मैं पूरी सिख कम्युनिटी को सॉरी बोलता हूं।"   विवाद: इस वीडियो में आरोपी के हाथ उसकी जेब में थे, जिसे निहंगों और सिख संगत ने अहंकार और अपमानजनक माना।   दूसरी माफी: विवाद न थमता देख उसने 17 सेकंड का दूसरा वीडियो जारी किया। इसमें उसने कहा, "जब मैं दरबार साहिब गया था, तब मुझसे एक बड़ी गलती हो गई... आप मुझे अपना बेटा समझकर माफ कर दीजिए।"   विवाद: इस बार उसने सिर्फ एक बार हाथ जोड़ा, जिसे भी नाकाफी माना गया। निहंगों का कहना था कि माफी "सिख मर्यादा" के अनुसार सार्वजनिक रूप से और विनम्रता के साथ मांगी जानी चाहिए।   निहंगों की चेतावनी और कार्रवाई इस मामले में पुलिस कार्रवाई में देरी और SGPC की शुरूआती चुप्पी पर निहंग संगठनों ने नाराजगी जताई थी। निहंगों का कहना था कि गुजरात की अर्चना मकवाना (Archana Makwana) द्वारा योग करने के मामले में तो तुरंत FIR दर्ज हो गई थी, लेकिन इस गंभीर बेअदबी पर प्रशासन ढीला क्यों है?   निहंग विक्की थॉमस ने पहले ही चेतावनी दी थी कि उनके पास युवक की पूरी जानकारी (लोकेशन, परिवार, पता) मौजूद है। उन्होंने कहा, "सिख समुदाय पर अक्सर कानून हाथ में लेने के आरोप लगते हैं, इसलिए हम सबसे पहले कानून के दायरे में रहकर पुलिस के पास आए हैं। हम चाहते हैं कि वह सार्वजनिक रूप से आकर माफी मांगे।" जब युवक ने ऐसा नहीं किया, तो निहंगों ने उसे गाजियाबाद में ढूंढ निकाला।   धार्मिक महत्व और मर्यादा (Significance & Maryada) गोल्डन टेंपल का सरोवर (Amrit Sarovar) सिखों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस जल में स्नान करने से पाप धुलते हैं और रोगों का नाश होता है।   नियम: सरोवर में साबुन का प्रयोग, कुल्ला करना, या किसी भी प्रकार की गंदगी फैलाना सख्त वर्जित है। वजू vs स्नान: आरोपी ने जिस तरह 'वजू' (इस्लामिक शुद्धिकरण प्रक्रिया) की तरह कुल्ला किया, वह सिख मर्यादा के पूरी तरह खिलाफ है। गुरुद्वारा परिसर में किसी अन्य धर्म की पूजा पद्धति को थोपना या प्रदर्शित करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।   प्रशासनिक चूक और सुरक्षा पर सवाल यह घटना स्वर्ण मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।   सेवादार कहां थे? जब युवक वीडियो बना रहा था, कुल्ला कर रहा था और रील रिकॉर्ड कर रहा था, तब परिक्रमा मार्ग पर तैनात सेवादार और टास्क फोर्स के सदस्य कहां थे? मोबाइल पर प्रतिबंध: SGPC ने पहले ही परिक्रमा मार्ग में रील और टिकटॉक वीडियो बनाने पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं।   SGPC के मुख्य सचिव ने कहा है कि उस समय ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भी जवाबदेही तय की जाएगी कि आखिर उनकी नाक के नीचे यह वीडियो कैसे शूट हुआ।   कानूनी पहलू (Legal Action) गाजियाबाद पुलिस ने आरोपी को अंकुर विहार थाने में रखा है। चूंकि अपराध स्थल (Crime Scene) अमृतसर है, इसलिए गाजियाबाद पुलिस जीरो एफआईआर (Zero FIR) या ट्रांजिट रिमांड के जरिए उसे पंजाब पुलिस को सौंपेगी। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत धार्मिक भावनाओं को आहत करने, धार्मिक स्थल को अपवित्र करने और दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने का मामला दर्ज किया जा सकता है।   Golden Temple Kulla Incident ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों की मर्यादा और सोशल मीडिया के दुरुपयोग की बहस को छेड़ दिया है। जहां एक ओर SGPC और सिख समुदाय इसे सोची-समझी साजिश बता रहा है, वहीं दूसरी ओर निहंगों द्वारा आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंपना यह दर्शाता है कि समुदाय अब बेअदबी की घटनाओं को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। अब देखना होगा कि अमृतसर पुलिस इस मामले में क्या कानूनी कार्रवाई करती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए SGPC कोई ठोस कदम उठाती है।   अमृतसर के गोल्डन टेंपल में पवित्र सरोवर में कुल्ला करने और उसका वीडियो वायरल करने वाले मुस्लिम युवक सुब्हान रंगरीज को निहंगों ने गाजियाबाद से पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है। SGPC की जांच में पाया गया है कि युवक बेअदबी की नीयत से ही गुरुद्वारा साहिब आया था। आरोपी द्वारा पहले मांगी गई माफियों को सिख समुदाय ने खारिज कर दिया था। अब उसे अमृतसर पुलिस के सुपुर्द किया जाएगा।

Unknown जनवरी 24, 2026 0
shocking in ghaziabad wife bites off husbands tongue over reels and alcohol dispute arrested
गाजियाबाद में 'खूनी इश्क': रील और नशे की लत में पत्नी बनी हैवान, प्यार का नाटक कर जड़ से काट दी पति की जीभ

गाजियाबाद के मोदीनगर थाना क्षेत्र से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को शर्मसार कर दिया है। सोशल मीडिया पर रील बनाने का नशा और शराब की लत ने एक हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर दिया। यहां एक पत्नी ने अपने पति को सिर्फ इसलिए जीवन भर के लिए अपंग बना दिया क्योंकि उसने अंडा करी खाने से मना किया था और उसे नशा करने से रोका था।READ ALSO:-यूपी में मौसम का यू-टर्न: कल से 5 दिनों तक आंधी-बारिश का अलर्ट, कांपने पर मजबूर करेगी लौटती हुई ठंड   सोमवार की रात एक बंद कमरे में जो हुआ, वह किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था। पत्नी ने पहले पति से झगड़ा किया, फिर सुलह करने और प्यार जताने के बहाने उसे पास बुलाया। जैसे ही पति करीब आया, पत्नी ने 'किस' (Kiss) करने के बहाने उसकी जीभ अपने दांतों के बीच दबाई और पूरी ताकत से काट दी। डेढ़ इंच जीभ का टुकड़ा कटकर अलग गिर गया और पति के मुंह से खून का फव्वारा फूट पड़ा।   पुलिस ने आरोपी पत्नी ईशा को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, थाने में भी उसके तेवर कम नहीं हुए। उसने महिला पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की और साफ शब्दों में कहा, "मैंने शादी के बाद ही बता दिया था कि मैं अपनी शर्तों पर जिऊंगी। वो बीच में आया, इसलिए सजा मिली।"   वारदात वाली काली रात: सोमवार, रात 8 बजे से 1 बजे तक का घटनाक्रम यह पूरी घटना गाजियाबाद के संजयपुरी, गली नंबर बेगमाबाद की है। पीड़ित विपिन और आरोपी ईशा की शादी इसी साल जून (2025) में हुई थी। शादी को अभी मात्र 7 महीने ही बीते थे।   रात 8:00 बजे: अंडे की सब्जी पर विवाद सोमवार की रात ईशा ने रात के खाने में अंडा करी बनाई थी। विपिन जब फैक्ट्री से काम करके थका-हारा घर लौटा, तो उसने खाने की मेज पर अंडे की सब्जी देखी। विपिन ने सामान्य तौर पर कहा, "मैं रोज-रोज अंडे नहीं खा सकता। मेरा मन नहीं है।" बस इतनी सी बात पर ईशा का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने चिल्लाते हुए कहा, "अगर नहीं खाना है, तो अपने और मेरे लिए बाहर से चिकन ऑर्डर कर दो।"   रात 9:00 बजे: पलंग के नीचे से निकली शराब की बोतल विवाद के बीच ईशा ने अपने बेडरूम में पलंग के नीचे छिपाई हुई शराब की बोतल निकाल ली। यह देखकर विपिन आग-बबूला हो गया। उसने ईशा को शराब पीने से रोका और कहा कि "तुम शादीशुदा हो, घर में बुजुर्ग मां-बाप हैं, यह सब शोभा नहीं देता।" लेकिन ईशा सुनने को तैयार नहीं थी। उसने विपिन के सामने ही शराब पीनी शुरू कर दी।   रात 11:00 बजे: गाली-गलौज और मारपीट रात गहराते ही नशा ईशा के सिर चढ़कर बोलने लगा। दोनों के बीच कहासुनी गाली-गलौज में बदल गई। विपिन ने जब उसे समझाने की कोशिश की, तो ईशा ने उस पर हाथ उठा दिया। अगले दो घंटे तक बंद कमरे में पति-पत्नी के बीच हाथापाई होती रही। विपिन ने पुलिस को बताया कि उस रात ईशा ने उसे कई थप्पड़ मारे।   रात 1:00 बजे: प्यार का नाटक और खौफनाक अंत लड़ाई के बाद जब विपिन थककर बैठ गया, तो ईशा का व्यवहार अचानक बदल गया। उसने रोने का नाटक किया और विपिन से माफी मांगने लगी। उसने विपिन को प्यार करने के बहाने पास बुलाया। विपिन को लगा कि पत्नी का गुस्सा शांत हो गया है। जैसे ही विपिन ने उसे गले लगाया और किस करने की कोशिश की, ईशा ने उसकी जीभ अपने दांतों में जकड़ ली। इससे पहले कि विपिन कुछ समझ पाता, ईशा ने पूरी ताकत से जबड़ा भींच दिया। एक जोर की 'कटक' आवाज के साथ विपिन की जीभ का अगला हिस्सा कटकर अलग हो गया।   मां के सामने हथेली पर जीभ लेकर पहुंचा बेटा दर्द से तड़पता विपिन खून से लथपथ हालत में सीढ़ियों से नीचे भागा। उसका मुंह खून से भरा था और वह कुछ बोल नहीं पा रहा था। नीचे सो रही मां गीता ने जब बेटे की हालत देखी तो उनकी चीख निकल गई। विपिन ने अपनी हथेली पर कटी हुई जीभ का टुकड़ा रखा हुआ था और इशारों में बता रहा था कि उसकी जुबान कट गई है। शुरुआत में मां को लगा कि शायद बहू ने चाकू से वार किया है। शोर सुनकर जब मोहल्ले की महिलाएं इकट्ठी हुईं और ईशा को पकड़ लिया, तब उसने हंसते हुए कबूला, "चाकू नहीं, मैंने अपने दांतों से काटा है।"   फ्लैशबैक: 7 महीने की शादी और 10 बार पिटाई पीड़ित की मां गीता ने थाने में जो आपबीती सुनाई, वह हैरान करने वाली है।   जून 2025 में शादी: मेरठ के मलियाना की रहने वाली ईशा की शादी गाजियाबाद के विपिन से जून 2025 में हुई थी। राम अवतार (ससुर) और गीता (सास) को लगा था कि घर में लक्ष्मी आई है। एक महीने बाद खुला राज: शादी के महज एक महीने बाद ही ससुराल वालों को पता चल गया कि ईशा को सिगरेट और शराब की बुरी लत है। वह बाथरूम में छिपकर स्मोकिंग करती थी। इंस्टाग्राम रील का नशा: ईशा दिन भर घर के काम करने के बजाय इंस्टाग्राम पर रील बनाती रहती थी। जब विपिन या सास उसे रोकते, तो वह घर में क्लेश करती। प्रेग्नेंसी का भी लिहाज नहीं: विपिन ने कई बार ईशा को समझाया कि भविष्य में अगर वह प्रेग्नेंट हुई, तो इन नशों का बच्चे पर बुरा असर पड़ेगा। लेकिन ईशा कहती थी, "मेरी लाइफ, मेरे रूल्स।" हिंसक प्रवृत्ति: ईशा का व्यवहार बेहद आक्रामक था। विपिन ने पुलिस को बताया कि पिछले 6 महीनों में ईशा ने उसे 8 से 10 बार बुरी तरह पीटा था। लोकलाज के डर से विपिन चुप रह जाता था।   थाने में हाई-वोल्टेज ड्रामा: पुलिस से भिड़ी आरोपी मोदीनगर पुलिस जब ईशा को गिरफ्तार कर थाने लाई, तो वहां भी उसका ड्रामा जारी रहा। लॉकअप में जाते समय वह महिला पुलिसकर्मियों से भिड़ गई और उन्हें धक्का देने की कोशिश की। उसने पुलिस के सामने बिना किसी पछतावे के कहा:   "हाँ, मैंने शराब पी रखी थी। वो (विपिन) मुझे अंडा करी बनाने पर ताने दे रहा था। फिर उसने मुझे डांटा। मुझे गुस्सा आया तो मैंने उसकी जीभ काट दी। वो मुझे रील बनाने से भी रोकता था। मैं क्यों सुनूं उसकी?"   ईशा ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी सास ने मोहल्ले की महिलाओं से उसे पिटवाया है, जबकि पुलिस जांच में यह सामने आया कि मोहल्ले की महिलाओं ने उसे भागने से रोकने के लिए पकड़ा था।   डॉक्टरों का जवाब- अब कभी साफ नहीं बोल पाएगा विपिन घायल विपिन को तुरंत मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां के डॉक्टरों ने जो बताया, उसने परिवार की उम्मीदें तोड़ दीं। सर्जरी असफल: डॉक्टरों का कहना है कि जीभ का जो हिस्सा कटा है (करीब 2.5 सेमी), उसे दोबारा जोड़ा नहीं जा सकता क्योंकि वह पूरी तरह से शरीर से अलग हो चुका था और उसमें संक्रमण का खतरा था। प्लास्टिक सर्जरी विकल्प: डॉक्टर अब रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी (प्लास्टिक सर्जरी) के जरिए जीभ को आकार देने की कोशिश करेंगे, लेकिन विपिन की आवाज अब पहले जैसी नहीं रहेगी। वह ताउम्र तोतलाकर बोलेगा या साफ शब्दों का उच्चारण नहीं कर पाएगा। स्वाद ग्रंथियां (Taste Buds) भी नष्ट हो चुकी हैं।   कानूनी शिकंजा: 15 साल तक की हो सकती है सजा गाजियाबाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी ईशा के खिलाफ 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की बेहद सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। गाजियाबाद के एडिशनल पुलिस कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी ने पुष्टि की है कि मामला दर्ज कर लिया गया है।   सीनियर एडवोकेट सौरभ डागर के अनुसार, आरोपी पर निम्नलिखित धाराएं लगाई गई हैं:   BNS धारा 118(2) (स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना): चूंकि जीभ शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है और इसे स्थायी नुकसान पहुंचा है, यह 'Grievous Hurt' की श्रेणी में आता है। इसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। BNS धारा 115(2): स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के लिए। BNS धारा 352: जानबूझकर अपमानित करने और शांति भंग करने के लिए। BNS धारा 351(3): जान से मारने की धमकी देने के लिए (Criminal Intimidation). कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि पीड़ित को स्थायी विकलांगता (Permanent Disability) दी गई है, इसलिए अदालत इसमें अधिकतम सजा (10-15 साल) सुना सकती है।   समाज के लिए चेतावनी: टॉक्सिक होते रिश्ते यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज में गहराती एक मानसिक बीमारी का संकेत है।   सोशल मीडिया का अंधापन: रील और लाइक्स की दुनिया में लोग असल जिंदगी के रिश्तों की अहमियत भूल रहे हैं। ईशा का रील बनाने से रोके जाने पर इतना हिंसक हो जाना, 'डिजिटल एडिक्शन' का चरम रूप है। घरेलू हिंसा (पुरुषों के खिलाफ): अक्सर घरेलू हिंसा को सिर्फ महिलाओं के साथ जोड़कर देखा जाता है। लेकिन विपिन जैसे मामले बताते हैं कि पुरुष भी टॉक्सिक और अपमानजनक रिश्तों में घुट रहे हैं। विपिन ने 6 महीने में 10 बार मार खाई, लेकिन समाज क्या कहेगा, इस डर से चुप रहा। अगर उसने पहली बार में ही आवाज उठाई होती, तो शायद आज यह नौबत नहीं आती।   फिलहाल विपिन अस्पताल के बिस्तर पर है, जहां वह दर्द से कराह रहा है और अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। वहीं, 'आधुनिकता' और 'स्वतंत्रता' की गलत परिभाषा गढ़ने वाली उसकी पत्नी सलाखों के पीछे है। यह घटना हर उस परिवार के लिए सबक है जो नशें और सोशल मीडिया की लत को नजरअंदाज कर रहा है।   पुलिस का कहना है कि चार्जशीट जल्द दाखिल की जाएगी और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए आरोपी को सजा दिलाने की कोशिश होगी, ताकि समाज में कड़ा संदेश जाए।   नोट: घरेलू हिंसा किसी भी लिंग के साथ हो सकती है। अगर आप या आपके आसपास कोई पुरुष या महिला घरेलू हिंसा का शिकार हो रहा है, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 112 पर संपर्क करें। चुप्पी साधना कभी भी समाधान नहीं होता।

Unknown जनवरी 21, 2026 0
Wife cuts off husband tongue in Ghaziabad over food dispute
गाजियाबाद में 'खूनी डिनर': खाने के स्वाद पर शुरू हुई तकरार, पत्नी ने सब्जी काटने वाले चाकू से काटकर अलग कर दी पति की जुबान

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले का मोदीनगर कस्बा। यहां की संजयपुरी कॉलोनी आम दिनों में शांत रहती है, लेकिन सोमवार की रात और मंगलवार की सुबह के बीच यहां जो घटा, उसने न केवल इस कॉलोनी को, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक घर की चारदीवारी के भीतर पति-पत्नी के बीच प्यार और तकरार का रिश्ता कब 'खूनी जंग' में तब्दील हो गया, इसका अंदाजा उस बुजुर्ग मां को भी नहीं लगा जो नीचे के कमरे में सो रही थी।READ ALSO:-मेरठ में रूह कंपा देने वाली वारदात: लिव-इन पार्टनर ने गला घोंटकर महिला को उतारा मौत के घाट, बच्चों के साथ भी रची थी खौफनाक साजिश   महज खाने के स्वाद को लेकर शुरू हुई एक बहस का अंत इतना भयावह होगा, यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। एक पत्नी, जिसे हिंदू धर्म में 'अन्नपूर्णा' का दर्जा दिया जाता है, उसी ने सब्जी काटने वाले चाकू से अपने सुहाग, अपने पति की जीभ काटकर उसे जीवन भर के लिए खामोश करने की कोशिश की। घटना इतनी वीभत्स है कि सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो रहे हैं। बेड पर पड़ा जीभ का मांस का टुकड़ा और फर्श पर बिखरा खून इस बात की गवाही दे रहा है कि गुस्से का आवेग इंसान को किस हद तक हैवान बना सकता है।   वह 'काली रात' और खाने की मेज का विवाद सोमवार, 20 जनवरी 2026। सर्दियों की रात थी। संजयपुरी कॉलोनी में रहने वाला विपिन (26 वर्ष) अपनी फैक्ट्री की शिफ्ट खत्म करके थका-हारा घर लौटा था। विपिन, जो अपनी मेहनत-मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण करता है, उम्मीद कर रहा था कि घर पहुंचकर सुकून की रोटी मिलेगी। घर में उसकी पत्नी ईशा और मां गीता उसका इंतजार कर रहे थे।   करीब 10 महीने पहले, मार्च 2025 में विपिन और ईशा की शादी बड़े धूमधाम से हुई थी। ईशा मेरठ के मलियाना की रहने वाली है। शादी के शुरुआती दिन अच्छे बीते, लेकिन धीरे-धीरे छोटी-मोटी बातों पर किचकिच शुरू हो गई थी। फिर भी, किसी को अंदाजा नहीं था कि नफरत इस स्तर तक पहुंच जाएगी।   रात के करीब 9 बजे विपिन घर पहुंचा। मां गीता ने बताया कि घर का माहौल सामान्य था। ईशा ने खाना बनाया था। सास, बेटे और बहू ने एक साथ बैठकर कुछ देर बातें कीं। यह वह समय था जब सब कुछ ठीक लग रहा था। मां गीता खाना खाकर अपने कमरे में सोने चली गईं, यह सोचकर कि बेटा-बहू अब आराम करेंगे।   विवाद की चिंगारी: विपिन और ईशा अपने कमरे में (ऊपर की मंजिल पर) चले गए। रात करीब 11 बजे दोनों ने खाना खाना शुरू किया। खाने का पहला निवाला मुंह में डालते ही विपिन के चेहरे के भाव बदल गए। शायद सब्जी में नमक कम था या मसाला ज्यादा, या फिर वह स्वाद नहीं था जिसकी विपिन को उम्मीद थी। विपिन ने सहज भाव से या शायद थोड़ी झुंझलाहट में कह दिया, "तुम खाना अच्छा नहीं बना पाती हो। आज भी खाने में कोई स्वाद नहीं है। दिनभर घर में रहती हो, कम से कम खाना तो ढंग का बना लिया करो।"   विपिन का यह वाक्य बारूद के ढेर पर चिंगारी जैसा साबित हुआ। ईशा, जो शायद पहले से किसी बात को लेकर मानसिक तनाव या गुस्से में थी, इस आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर सकी। उसने पलटकर जवाब दिया, "मैं दिनभर तुम्हारी और तुम्हारी मां की गुलामी करती हूं, फिर भी तुम्हें कमी ही दिखती है। खुद बनाकर खा लिया करो।"   देखते ही देखते, खाने की थाली एक तरफ रह गई और दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। आवाजें ऊंची होने लगीं। बहस गालियों में और फिर हाथापाई में बदल गई। नीचे के कमरे में सो रही मां गीता की नींद खुल गई। उन्होंने नीचे से ही आवाज लगाकर डांटा, "अरे, रात को क्यों लड़ रहे हो? सो जाओ, सुबह बात करना।"   मां की डांट सुनकर थोड़ी देर के लिए ऊपर सन्नाटा छा गया। मां को लगा कि मामला शांत हो गया है और वे दोबारा सो गईं। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि ऊपर कमरे में ईशा का गुस्सा शांत नहीं हुआ है, बल्कि वह एक ज्वालामुखी की तरह अंदर ही अंदर धधक रहा है।   प्रतिशोध की आग और वह खूनी हमला रात के 1 बज चुके थे। कॉलोनी में गहरा सन्नाटा था। विपिन और ईशा के कमरे में भी चुप्पी थी, लेकिन यह तूफान से पहले की शांति थी। पुलिस सूत्रों और विपिन के इशारों (क्योंकि वह बोल नहीं पा रहा है) के आधार पर जो कहानी सामने आई है, वह रूह कंपाने वाली है।   झगड़े के बाद विपिन शायद बेड पर लेट गया था या कमरे में बैठा था। ईशा उठी और कमरे से बाहर निकली। विपिन को लगा कि वह पानी पीने या वॉशरूम जा रही है। लेकिन ईशा सीधे किचन की तरफ गई। वहां स्लैब पर रखा वह चाकू, जिससे कुछ घंटे पहले उसने सब्जी काटी थी, उसकी नजर उस पर पड़ी। उसने उस धारदार चाकू को उठाया। उसकी आंखों में अब पत्नी का प्रेम नहीं, बल्कि प्रतिशोध की आग थी।   चाकू हाथ में लिए ईशा वापस कमरे में लौटी। विपिन कुछ समझ पाता, इससे पहले ही ईशा ने उस पर हमला बोल दिया। बताया जा रहा है कि ईशा ने विपिन के ऊपर हावी होकर उसे दबोच लिया। विपिन ने बचाव की कोशिश की, लेकिन ईशा ने पूरी ताकत से उसका जबड़ा पकड़ा।   उस वक्त ईशा ने जो शब्द कहे, वे अब इस केस की सबसे खौफनाक गवाही बन गए हैं। उसने कहा, "तुम्हारी जुबान बहुत चलती है न? मेरे खाने की बुराई करती है... आज मैं इस जुबान को ही काट दूंगी। न रहेगी जुबान, न तुम कुछ बोल पाओगे।"   क्रूरता की हद: इसके बाद जो हुआ, वह किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था। ईशा ने जबरदस्ती विपिन का मुंह खोला। विपिन छटपटाता रहा, लेकिन गुस्से में पागल पत्नी ने सब्जी काटने वाले चाकू को उसके मुंह में डाला और उसकी जीभ (Tongue) को पकड़कर रेत दिया। एक ही झटके में जीभ का आगे का मांसल हिस्सा कटकर अलग हो गया।   खून का एक तेज फव्वारा विपिन के मुंह से निकला। बिस्तर, चादर और ईशा के हाथ खून से सन गए। जीभ का वह कटा हुआ टुकड़ा, जिससे विपिन कुछ पल पहले स्वाद की शिकायत कर रहा था, अब बेजान होकर बेड पर गिर पड़ा था।   "आं... आं..." - एक बेटे की बेबस चीख और मां का दर्द जीभ कटते ही विपिन की आवाज चली गई। वह दर्द से तड़प उठा, लेकिन उसके गले से सिर्फ "आं... आं..." और घुरघुराने की आवाजें निकल रही थीं। मुंह से बहते खून को हाथों से रोकने की नाकाम कोशिश करते हुए वह कमरे से बाहर भागा। वह सीढ़ियों से गिरते-पड़ते नीचे अपनी मां के कमरे की तरफ दौड़ा।   मां गीता, जो दोबारा सोने की कोशिश कर रही थीं, ने दरवाजे पर भारी धक-धक सुनी। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, सामने का दृश्य देखकर उनकी चीख निकल गई। उनका जवान बेटा खून से लथपथ खड़ा था। उसकी शर्ट पूरी तरह लाल हो चुकी थी और वह अपने मुंह की तरफ इशारा कर रहा था।   मां ने घबराते हुए पूछा, "बेटा, क्या हुआ? ये खून कैसा?" विपिन बोल नहीं पा रहा था। उसने अपना मुंह खोलकर दिखाया। अंदर का दृश्य देखकर मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। मुंह के अंदर जीभ की जगह सिर्फ मांस का लोथड़ा और बहता खून था।   गीता ने बदहवास होकर शोर मचाना शुरू कर दिया। "बचाओ! बचाओ! मेरे बेटे को मार डाला!" उनकी आवाज रात के सन्नाटे को चीरती हुई दूर तक गई।   दरवाजा बंद, बाहर तड़पता पति इधर, वारदात को अंजाम देने के बाद ईशा ने तुरंत अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। उसने खुद को उसी कमरे में कैद कर लिया जहां उसने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था। शायद उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, या फिर वह पुलिस और भीड़ के डर से छिप गई।   गीता की चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी जाग गए। संजयपुरी कॉलोनी के लोग भागते हुए विपिन के घर पहुंचे। वहां का मंजर देखकर हर कोई सन्न रह गया। पड़ोसियों ने तुरंत सूझबूझ दिखाई। उन्होंने विपिन को संभाला और एक वाहन का इंतजाम किया।   पड़ोसी लगातार ऊपर के कमरे का दरवाजा पीटते रहे। "ईशा, दरवाजा खोल! ये तूने क्या कर दिया?" लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई। ईशा ने पूरी रात दरवाजा नहीं खोला। वह अंधेरे कमरे में बैठी रही।   अस्पताल की दौड़ और मेडिकल स्थिति पड़ोसी और परिजन विपिन को लेकर तुरंत मोदीनगर के जीवन अस्पताल पहुंचे। वहां के डॉक्टरों ने जब विपिन के मुंह की स्थिति देखी तो वे भी हैरान रह गए। खून का रिसाव बहुत ज्यादा था। जीभ का एक बड़ा हिस्सा (Anterior part of the tongue) कट चुका था।   प्राथमिक उपचार देकर खून रोकने की कोशिश की गई, लेकिन मामला गंभीर था। जीभ एक अत्यंत संवहनी अंग (highly vascular organ) है, जिसमें रक्त वाहिकाओं का जाल होता है। वहां चोट लगने पर भारी रक्तस्राव (Hemmorhage) होता है जिससे मरीज की जान भी जा सकती है और खून फेफड़ों में जाने (Aspiration) का खतरा भी रहता है।   मोदीनगर के डॉक्टरों ने रिस्क न लेते हुए विपिन को तुरंत मेरठ के सुभारती अस्पताल (Subharti Medical College) के लिए रेफर कर दिया। परिजन समझदारी दिखाते हुए बेड पर पड़े जीभ के कटे हुए टुकड़े को भी बर्फ में रखकर साथ ले गए, इस उम्मीद में कि शायद प्लास्टिक सर्जरी के जरिए उसे वापस जोड़ा जा सके।   वर्तमान मेडिकल स्थिति: ताजा जानकारी के अनुसार, सुभारती अस्पताल में विपिन का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी की गई है, लेकिन जीभ का जुड़ना और उसका वापस सामान्य रूप से काम करना (Functionality) बहुत मुश्किल है। विपिन की बोलने की क्षमता (Speech) हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती है। उसे स्वाद (Taste) का अनुभव भी शायद अब पहले जैसा न हो। फिलहाल उसकी हालत स्थिर लेकिन गंभीर बनी हुई है।   सुबह होते ही 'मॉब जस्टिस' (भीड़ का न्याय) रात भर विपिन का परिवार और कुछ पड़ोसी अस्पताल में थे, जबकि कुछ लोग घर पर ही ईशा की निगरानी कर रहे थे। मंगलवार की सुबह होते-होते यह खबर जंगल की आग की तरह पूरे मोदीनगर में फैल गई। "एक पत्नी ने पति की जीभ काट दी" - यह सुनते ही लोगों का हुजूम विपिन के घर के बाहर जमा हो गया।   सुबह करीब 8-9 बजे, जब ईशा ने कमरे का दरवाजा खोला और बाहर आई, तो उसे सहानुभूति की जगह नफरत का सामना करना पड़ा। वहां मौजूद महिलाओं और पुरुषों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। भीड़ ने कानून का इंतजार नहीं किया।   महिलाओं ने ईशा को घेर लिया। उसे बालों से पकड़कर खींचा गया, थप्पड़ मारे गए और गालियां दी गईं। ईशा रोती रही, हाथ जोड़ती रही, लेकिन भीड़ का गुस्सा शांत नहीं हुआ। इस बीच, खबर पाकर ईशा के मायके (मलियाना, मेरठ) से उसका एक रिश्तेदार भी वहां पहुंचा था। भीड़ ने उसे भी नहीं बख्शा। लोगों का आरोप था कि मायके वालों ने ही लड़की को ऐसे संस्कार दिए हैं या उसे शह दी है। उस रिश्तेदार की भी भीड़ ने जमकर पिटाई कर दी।   पुलिस का आगमन और कानूनी पेंच हंगामे की सूचना मिलते ही मोदीनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। एसएचओ (SHO) आनंद प्रकाश ने अपनी टीम के साथ भीड़ को तितर-बितर किया और ईशा को हिरासत में लिया। पुलिस ने उसे भीड़ के गुस्से से बचाया।   ईशा का बयान: पुलिस हिरासत में और भीड़ की मार खाने के बाद ईशा ने अपना बचाव करने की कोशिश की। रोते हुए उसने कहा, "मैं कोई राक्षस नहीं हूं। मैं सुबह से शाम तक घर का काम करती हूं। ये लोग मुझे दासी समझते हैं। विपिन आए दिन मेरे साथ शराब पीकर मारपीट करता था (हालांकि शराब की पुष्टि अभी नहीं हुई है)। कल रात भी उसने मेरे हाथ के खाने को फेंक दिया और मुझे बहुत मारा। मुझे भी गुस्सा आ गया और यह सब हो गया।"   हालांकि, पुलिस का कहना है कि आत्मरक्षा (Self Defense) और जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने (Grievous Hurt) में अंतर होता है। विपिन निहत्था था और उस वक्त खाना खा रहा था, जबकि ईशा विशेष रूप से किचन से चाकू लेकर आई थी, जो 'इरादे' (Intent) को दर्शाता है।   कानूनी धाराएं (BNS - भारतीय न्याय संहिता): पुलिस के अनुसार, अभी तक विपिन के परिवार की ओर से औपचारिक लिखित शिकायत (Tahrir) नहीं मिली है क्योंकि वे अस्पताल में व्यस्त हैं। जैसे ही तहरीर मिलेगी, निम्नलिखित धाराओं में मामला दर्ज हो सकता है:   धारा 118 (1) BNS: स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना (Voluntarily causing grievous hurt)। जीभ काटना 'स्थायी विरूपण' (Permanent disfiguration) की श्रेणी में आता है, जिसके लिए आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। धारा 109 BNS: हत्या का प्रयास (Attempt to Murder) - यदि यह साबित होता है कि चोट से जान जा सकती थी। घरेलू हिंसा अधिनियम: विपिन की तरफ से भी घरेलू हिंसा का मामला बन सकता है।   पुलिस ने उस चाकू को बरामद कर लिया है जिससे वार किया गया था। फॉरेंसिक टीम ने बेड से खून के नमूने और चादर भी जब्त कर ली है।   सामाजिक विश्लेषण - आखिर क्यों टूट रहा है सब्र का बांध? गाजियाबाद की यह घटना कोई सामान्य अपराध नहीं है, यह हमारे समाज के गिरते मानसिक स्वास्थ्य और सहनशीलता (Tolerance) की कमी का एक भयावह उदाहरण है। घरेलू हिंसा का दूसरा पहलू: हम अक्सर मानते हैं कि घरेलू हिंसा केवल महिलाओं के साथ होती है। लेकिन एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़े और ऐसी घटनाएं बताती हैं कि पुरुष भी घरेलू हिंसा के शिकार हो रहे हैं। विपिन का केस इसका प्रमाण है। एक पुरुष, जो शारीरिक रूप से पत्नी से ज्यादा ताकतवर हो सकता था, वह एक अचानक हुए हमले में असहाय हो गया। गुस्सा नियंत्रण (Anger Management): क्या 'खाने में स्वाद न होना' जीभ काटने का कारण हो सकता है? नहीं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह गुस्सा उस एक पल का नहीं था। यह महीनों से जमा हो रहा कुंठा (Frustration) और संवादहीनता (Lack of Communication) का परिणाम था। 10 महीने की शादी में अगर बात यहां तक पहुंची, तो इसका मतलब है कि उनके बीच भावनात्मक जुड़ाव पूरी तरह खत्म हो चुका था। विवाह संस्था पर संकट: यह घटना अरेंज मैरिज और लव मैरिज दोनों ही व्यवस्थाओं में कपल्स के बीच बढ़ते तनाव (Stress) और एडजस्टमेंट (Adjustment) की कमी को दर्शाती है। छोटी-छोटी बातें अब जानलेवा साबित हो रही हैं।   एक जीभ कटी, पर गूंगा हुआ पूरा समाज आज मोदीनगर के उस घर में सन्नाटा है, लेकिन अस्पताल में विपिन की खामोश चीखें बहुत कुछ कह रही हैं। विपिन की जीभ शायद डॉक्टरों की कोशिशों से थोड़ी बहुत ठीक हो जाए, लेकिन इस रिश्ते का जो कत्ल हुआ है, उसे दुनिया का कोई डॉक्टर नहीं जोड़ सकता।   ईशा अब सलाखों के पीछे जाएगी, उसका जीवन भी बर्बाद हो चुका है। विपिन की मां, जिन्होंने बुढ़ापे में बेटे की शादी के सपने देखे थे, अब कोर्ट-कचहरी और अस्पताल के चक्कर काटेंगी।   यह घटना हर उस दंपती के लिए एक चेतावनी है जो गुस्से के आवेश में अपने साथी को चोट पहुंचाने से पहले परिणाम नहीं सोचते। एक पल का गुस्सा, पूरी जिंदगी की बर्बादी। फिलहाल, पुलिस विपिन के होश में आने और उसके लिखित बयान का इंतजार कर रही है, जिसके बाद इस 'कलयुगी पत्नी' पर कानून का शिकंजा कसा जाएगा।

Unknown जनवरी 20, 2026 0
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गाजियाबाद में कोहराम: सड़क के एक 'जानलेवा' गड्ढे ने उजाड़ दी हंसती-खेलती दुनिया; LPG ट्रक ने दंपती और मासूम को रौंदा, 7 साल का बेटा अब दुनिया में अकेला

सड़क पर बना एक छोटा सा गड्ढा किसी की पूरी दुनिया उजाड़ सकता है, यह सुनना जितना अजीब लगता है, हकीकत में यह उससे कहीं ज्यादा खौफनाक है। रविवार की शाम गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर इलाके में एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। एक लापरवाही, एक तेज रफ्तार ट्रक और सड़क का एक गड्ढा—इन तीनों ने मिलकर एक हंसते-खेलते परिवार को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।READ ALSO:-Vande Bharat Sleeper: टिकट कैंसिल किया तो डूब जाएगा पूरा पैसा! रेलवे ने बंद की ‘आधी सीट’ वाली सुविधा; बुकिंग से पहले जान लें ये सख्त नियम   हादसे में पति, पत्नी और उनके 10 साल के बेटे की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 7 साल का छोटा बेटा अब इस दुनिया में अपने माता-पिता और भाई के बिना अकेला रह गया है। उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है, लेकिन जो घाव उसके मन पर लगा है, शायद वह कभी नहीं भर पाएगा।   वह मनहूस शाम: कब और कैसे हुआ हादसा? घटना रविवार शाम करीब 4:17 बजे की है। दिल्ली के बुराड़ी इलाके के रहने वाले ललित (37 वर्ष) अपनी पत्नी पिंकी (37 वर्ष) और दो बेटों—आरव (10 वर्ष) और नीरव (7 वर्ष) के साथ बाइक पर सवार होकर घर लौट रहे थे।   यह परिवार गाजियाबाद के लोनी इलाके में अपने एक रिश्तेदार के यहां गया हुआ था। दिन भर परिवार और रिश्तेदारों के साथ हंसी-खुशी बिताने के बाद, वे वापस दिल्ली के लिए निकले थे। उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।   जैसे ही उनकी बाइक कोयल एनक्लेव (Koyal Enclave) के पास पहुंची, सड़क पर अचानक एक गहरा गड्ढा आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ललित ने गड्ढे को देख लिया था। एक जिम्मेदार चालक की तरह, उन्होंने अपनी बाइक की रफ्तार धीमी की और गड्ढे से बचाने के लिए बाइक को थोड़ा बाईं ओर (Left Side) मोड़ा।   यही वह पल था जब काल बनकर पीछे से एक तेज रफ्तार ट्रक आ गया। ट्रक में LPG सिलेंडर लदे हुए थे। ट्रक की रफ्तार इतनी तेज थी कि ड्राइवर उसे नियंत्रित नहीं कर पाया और उसने बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।   10 मीटर तक घिसटती गई जिंदगी टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार चारों लोग सड़क पर जा गिरे। इसके बाद जो हुआ, वह रूह कंपा देने वाला था।   रौंदता हुआ पहिया: गिरने के बाद ट्रक का अगला भारी-भरकम पहिया ललित, उनकी पत्नी पिंकी और बड़े बेटे आरव के ऊपर से गुजर गया। घिसटती बाइक: ट्रक की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद बाइक ट्रक के पहिए में फंस गई और करीब 10 मीटर तक सड़क पर घिसटती चली गई। चकनाचूर हेलमेट: ललित ने हेलमेट पहन रखा था, लेकिन टक्कर और टायरों का दबाव इतना ज्यादा था कि हेलमेट भी टूटकर दूर जा गिरा। सड़क पर बिखरे हेलमेट के टुकड़े इस हादसे की भयावहता की गवाही दे रहे थे।   मौके पर चीख-पुकार और मातम हादसे के तुरंत बाद कोयल एनक्लेव वाली सड़क पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग और राहगीर दौड़कर मौके पर पहुंचे। सड़क खून से लाल हो चुकी थी। लोगों ने आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी और पीड़ितों को संभालने की कोशिश की। खून से लथपथ ललित, पिंकी और आरव को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के पास उन्हें मृत घोषित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। तीनों की मौके पर ही या अस्पताल ले जाते वक्त मौत हो चुकी थी।   अकेला बचा 7 साल का नीरव इस पूरे हादसे में कुदरत का करिश्मा कहिए या क्रूर मजाक, 7 साल का छोटा बेटा नीरव बच गया। वह भी बाइक पर ही था और टक्कर लगने से दूर छिटक कर गिरा था।   गंभीर चोटें: नीरव के पैर की हड्डी टूट गई है और शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें आई हैं। गहरा सदमा: शारीरिक चोटों का इलाज डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है, लेकिन इस मासूम ने अपनी आंखों के सामने अपने माता-पिता और बड़े भाई को दम तोड़ते देखा है। जब उसे होश आएगा और उसे पता चलेगा कि अब वह अनाथ हो चुका है, तो उस दर्द की कल्पना करना भी मुश्किल है।   पुलिस की कार्रवाई और ड्राइवर की फरारी हादसे के बाद ट्रक ड्राइवर मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। उसने ट्रक को वहीं सड़क पर छोड़ दिया। ACP (लोनी) अतुल कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया:   "पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। LPG सिलेंडरों से लदे ट्रक को कब्जे में ले लिया गया है।" "शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मृतकों की पहचान उनकी जेब से मिले आधार कार्ड के जरिए हुई, जिसके बाद दिल्ली के बुराड़ी में उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है।" "ड्राइवर की तलाश के लिए टीमें लगा दी गई हैं और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।"   सड़क के गड्ढे: आखिर कब तक लेंगे जान? (Analysis) यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि 'सिस्टम की हत्या' है। प्रत्यक्षदर्शियों ने साफ कहा कि अगर सड़क पर वह गड्ढा नहीं होता, तो ललित को अपनी बाइक धीमी नहीं करनी पड़ती और शायद आज यह परिवार जिंदा होता।   एनसीआर (NCR) की सड़कों पर जगह-जगह बने गड्ढे मौत के मुंह की तरह खुले हुए हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं।   संतुलन बिगड़ना: गड्ढे को बचाने के चक्कर में अक्सर बाइक का संतुलन बिगड़ता है। पीछे से टक्कर: जब कोई वाहन गड्ढे के कारण धीमा होता है, तो पीछे से आ रहे तेज रफ्तार वाहन (विशेषकर भारी वाहन) अक्सर ब्रेक नहीं लगा पाते, जैसा कि इस केस में हुआ।   भारी वाहनों का आतंक रिहायशी इलाकों या कनेक्टिंग रोड्स पर भारी वाहनों, विशेषकर गैस सिलेंडर और डंपर ट्रकों की तेज रफ्तार एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कोयल एनक्लेव जैसे इलाकों में जहां आबादी और ट्रैफिक दोनों है, वहां ऐसे भारी वाहनों की गति सीमा पर कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा है।   एक परिवार का अंत दिल्ली के बुराड़ी की गलियों में आज सन्नाटा है। ललित का घर, जहां कल तक बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, अब वहां मातम पसरा है।   ललित: परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य, जो अपने बच्चों के भविष्य के सपने बुन रहा था। पिंकी: एक गृहिणी, जिसने अपना पूरा जीवन परिवार को संभालने में लगा दिया। आरव (10 वर्ष): जो अभी दुनिया को समझने ही लगा था।   अब परिवार में सिर्फ नीरव बचा है, जिसके भविष्य की जिम्मेदारी अब रिश्तेदारों और समाज पर आ गई है।   प्रशासन को जागना होगा गाजियाबाद का यह हादसा एक चेतावनी है। प्रशासन को सड़कों की मरम्मत और भारी वाहनों की गति नियंत्रण पर सख्त कदम उठाने होंगे। हम एक और नीरव को अनाथ होते नहीं देख सकते। 'खबरिलाल' की ओर से हम मांग करते हैं कि प्रशासन तत्काल प्रभाव से उस जानलेवा गड्ढे को भरे और फरार ड्राइवर को सख्त से सख्त सजा दिलवाए।   क्विक हाइलाइट्स (Key Takeaways) स्थान: कोयल एनक्लेव, लोनी बॉर्डर, गाजियाबाद। मृतक: ललित (37), पिंकी (37), आरव (10)। घायल: नीरव (7) - पैर फैक्चर। वजह: सड़क का गड्ढा और तेज रफ्तार LPG ट्रक। स्थिति: ट्रक जब्त, ड्राइवर फरार, पुलिस जांच जारी।   सड़क सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है। कृपया वाहन चलाते समय सतर्क रहें और प्रशासन से भी अपील है कि सड़कों को 'मौत का कुआं' न बनने दें। (इस दुखद घटना पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए कमेंट करें।)

Unknown जनवरी 18, 2026 0
ghaziabad jewar rrts alignment unchanged yeida confirms 72km corridor connectivity plan
गाजियाबाद-जेवर RRTS: रूट में कोई बदलाव नहीं, 72 किमी लंबे कॉरिडोर पर ही दौड़ेगी रैपिड रेल, गुरुग्राम लिंक पर आया नया अपडेट

नोएडा/ग्रेटर नोएडा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में कनेक्टिविटी की नई इबारत लिखने जा रहे 'गाजियाबाद-जेवर रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम' (RRTS) को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने विराम लगा दिया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि गाजियाबाद को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से जोड़ने वाले प्रस्तावित 72 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के अलाइनमेंट (रूट) में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट अपने मूल स्वरूप में ही आगे बढ़ेगा, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है।READ ALSO:-बिजनौर मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026: 18 जनवरी को लगेगा विशेष कैंप, डीएम जसजीत कौर ने दी जानकारी, जानें नाम जुड़वाने का पूरा तरीका   यह स्पष्टीकरण उन खबरों के बीच आया है जिनमें कहा जा रहा था कि गुरुग्राम और फरीदाबाद से आने वाली लाइन के कारण गाजियाबाद वाले रूट में बदलाव हो सकता है। लेकिन 29 दिसंबर को हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद अधिकारियों ने साफ कर दिया कि यह कॉरिडोर न केवल तकनीकी रूप से फाइनल है, बल्कि यह क्षेत्र के विकास की रीढ़ भी है।   क्यों उठी थीं बदलाव की बातें? (The Confusion) दरअसल, एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) एक और कॉरिडोर पर काम कर रहा है, जो गुरुग्राम के इफको चौक से फरीदाबाद होते हुए सूरजपुर तक आएगा। यह लगभग 60 किलोमीटर लंबी अलग लाइन है। लोगों को भ्रम था कि शायद इस लाइन को मुख्य लाइन बनाकर गाजियाबाद वाले रूट को बदला जा सकता है।   YEIDA का स्पष्टीकरण: अधिकारियों ने साफ किया कि: पूरक, न कि विकल्प: गुरुग्राम-फरीदाबाद-सूरजपुर कॉरिडोर का उद्देश्य दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी देना है। यह गाजियाबाद-जेवर लाइन का विकल्प नहीं, बल्कि एक पूरक (Complementary) लिंक है। दो अलग प्रोजेक्ट: गाजियाबाद-जेवर लाइन पूर्वी एनसीआर (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेनो वेस्ट) को संभालेगी, जबकि दूसरी लाइन हरियाणा और दक्षिणी दिल्ली के ट्रैफिक को। कोई रि-डिजाइन नहीं: वर्तमान में गाजियाबाद-जेवर अलाइनमेंट को बदलने या रि-डिजाइन करने का कोई प्रस्ताव मेज पर नहीं है।   प्रोजेक्ट की रूपरेखा: 72.44 किमी का सफर, 22 स्टेशन नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के अनुसार, यह कॉरिडोर आधुनिक इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना होगा। यह 'इंटीग्रेटेड RRTS-कम-मेट्रो' लाइन होगी, यानी इस पर रैपिड रेल और मेट्रो दोनों तरह की सेवाएं संचालित हो सकेंगी।   प्रमुख तकनीकी बिंदु: कुल लंबाई: 72.44 किलोमीटर। प्रकृति: अधिकांश हिस्सा एलिवेटेड (जमीन से ऊपर) होगा। अंडरग्राउंड सेक्शन: एयरपोर्ट क्षेत्र के भीतर करीब 1.1 किलोमीटर का हिस्सा जमीन के नीचे (Underground) होगा ताकि विमानों के संचालन में कोई बाधा न आए। स्टेशन: कुल 22 स्टेशन प्रस्तावित हैं। 11 स्टेशन: ये इंटीग्रेटेड होंगे (जहां RRTS और लोकल मेट्रो दोनों रुकेंगी)। 11 स्टेशन: ये केवल मेट्रो सेवाओं के लिए होंगे (जहां रैपिड रेल नहीं रुकेगी, यह लोकल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देंगे)। भविष्य की तैयारी: भविष्य की मांग को देखते हुए रूट पर 12 अतिरिक्त स्टेशनों के लिए जगह छोड़ी गई है।   रूट मैप: कहां से गुजरेगी ट्रेन? (The Alignment) यह कॉरिडोर उन इलाकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो अब तक अच्छी पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी से अछूते थे। इसका अलाइनमेंट गाजियाबाद के घनी आबादी वाले इलाकों से शुरू होकर यमुना एक्सप्रेसवे के औद्योगिक सेक्टरों तक जाएगा:   शुरुआत: सिद्धार्थ विहार (गाजियाबाद) - यहां यह दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल से इंटीग्रेट होगी। ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन): यह सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। ट्रेन चार मूर्ति चौक (किसान चौक) से गुजरेगी, जिससे लाखों फ्लैट खरीदारों को राहत मिलेगी। नॉलेज हब: इसके बाद यह नॉलेज पार्क-5 और पुलिस लाइंस होते हुए आगे बढ़ेगी। सूरजपुर व परी चौक: सूरजपुर और अल्फा-1 (ग्रेटर नोएडा) होते हुए यह यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ मुड़ेगी। यमुना सिटी: यहां से यह सेक्टर 18 और 21 होते हुए सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल तक पहुंचेगी।   मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी: एक टिकट, कई मंजिलें इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत इसका 'मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन' है। यानी यात्री एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम में आसानी से स्विच कर सकेंगे:   गाजियाबाद (सिद्धार्थ विहार): यहां यात्री दिल्ली-मेरठ RRTS और रेड लाइन मेट्रो पकड़ सकेंगे। चार मूर्ति चौक: यहां प्रस्तावित नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन एक्सटेंशन से जुड़ाव होगा। अल्फा-1: यहां मौजूदा एक्वा लाइन मेट्रो का स्टेशन है, जिससे यात्री ग्रेटर नोएडा के अन्य हिस्सों में जा सकेंगे। सूरजपुर: यहां भविष्य में बनने वाली गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा RRTS लाइन आकर मिलेगी। जेवर एयरपोर्ट: यहां एयरपोर्ट टर्मिनल, पार्किंग, बस डिपो और प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) नेटवर्क का हब बनेगा।   समय और लागत: 20 हजार करोड़ का निवेश इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 20,360 करोड़ रुपये है। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे पूरा करने में लगभग 5 वर्ष का समय लगेगा।   रफ्तार का रोमांच: DPR के मुताबिक, एक बार यह पूरा नेटवर्क (गाजियाबाद और गुरुग्राम दोनों लाइनों के साथ) तैयार हो जाने पर, IGI एयरपोर्ट (T3) से जेवर एयरपोर्ट के बीच का यात्रा समय घटकर मात्र 60 से 70 मिनट रह जाएगा। सड़क मार्ग से ट्रैफिक के दौरान इसमें 2 से 3 घंटे लगते हैं। यह न केवल यात्रियों का समय बचाएगा बल्कि प्रदूषण कम करने में भी मदद करेगा।   वर्तमान स्थिति: गेंद अब केंद्र के पाले में गाजियाबाद-जेवर RRTS की संशोधित DPR को उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 8 दिसंबर 2025 को अपनी मंजूरी दे दी थी। राज्य सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद, अब फाइल अंतिम स्वीकृति और फंडिंग के लिए केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के पास भेजी गई है।   अधिकारियों का कहना है कि मूल अलाइनमेंट पर अडिग रहने का एक बड़ा कारण यह भी है कि अगर अब रूट में बदलाव किया गया, तो डीपीआर दोबारा बनानी पड़ेगी, जिससे प्रोजेक्ट 2-3 साल पीछे चला जाएगा। भूमि अधिग्रहण, स्टेशन प्लानिंग और नेटवर्क इंटीग्रेशन को समय पर पूरा करने के लिए मौजूदा प्लान ही सबसे सटीक है।   गाजियाबाद-जेवर RRTS कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदलने वाला प्रोजेक्ट है। YEIDA द्वारा अलाइनमेंट को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के बाद अब निवेशकों, घर खरीदारों और आम जनता में छाया संशय दूर हो गया है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि कब इस प्रोजेक्ट को फाइनल अप्रूवल मिलता है और कब जमीन पर पिलर खड़े होने शुरू होते हैं।

Unknown जनवरी 17, 2026 0
Ghaziabad Businessman Run Over by Car Beaten with Pistol Butts Attackers Flee Leaving Car Behind
गाजियाबाद की सड़कों पर 'रक्तचरित': मूंगफली खरीद रहे व्यापारी को कार से रौंदा, 10 फीट घसीटा और फिर तमंचे की बट से तोड़ डालीं दोनों टांगें

गाजियाबाद (Ghaziabad): राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का अहम हिस्सा गाजियाबाद, जो अपनी तरक्की और हाईराइज इमारतों के लिए जाना जाता है, मंगलवार की रात एक खौफनाक वारदात का गवाह बना। यहाँ कानून का इकबाल किस कदर कमजोर पड़ता दिख रहा है, इसकी बानगी गोविंदपुरम (Govindpuram) इलाके में देखने को मिली। एक हंसता-खेलता परिवार, एक युवा व्यापारी और एक सामान्य सी शाम—सब कुछ चंद मिनटों में चीख-पुकार और खून-खराबे में बदल गया।READ ALSO:-UP के विकास का 'सुपरवे': 12 जिलों की तकदीर बदलने आ रहा है गंगा एक्सप्रेसवे, फरवरी में PM मोदी करेंगे उद्घाटन; अब सुबह मेरठ में नाश्ता, दोपहर में संगम नगरी में लंच!   गोविंदपुरम के एनडीआरएफ रोड (NDRF Road) पर सरेआम गुंडagardi का नंगा नाच हुआ। एक कार सवार ने पहले एक व्यापारी को निशाना बनाया, उसे कार से टक्कर मारी, और जब वह गिर गया तो उसे गाड़ी के नीचे 10 फीट तक घसीटते हुए ले गए। दरिंदगी यहीं खत्म नहीं हुई। गाड़ी से उतरकर तीन युवकों ने अधमरे व्यापारी पर लाठी-डंडों और तमंचे की बट (Pistol Butt) से तब तक वार किए जब तक कि उसकी हड्डियां नहीं टूट गईं। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम के मुंह पर एक तमाचा है।   घटना का पूरा ब्यौरा (The Incident Details) वह काली रात: मंगलवार की शाम कविनगर थाना क्षेत्र के कैलाशपुरम में रहने वाले राजेश कुमार का रईसपुर के पास जैविक खाद (Organic Fertilizer) बनाने का बड़ा प्लांट है। उनके बेटे ऋषि चौहान, जो उनके साथ ही कारोबार संभालते हैं, मंगलवार की रात अपने घर की तरफ लौट रहे थे।   सर्दियों की रात थी। ऋषि चौहान गोविंदपुरम के पास एनडीआरएफ रोड पर अपनी गाड़ी रोककर सड़क किनारे एक रेहड़ी से मूंगफली खरीद रहे थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि अगले ही पल मौत उनके सामने आकर खड़ी हो जाएगी।   मौत बनकर आई तेज रफ्तार कार तभी अचानक एक तेज रफ्तार कार वहां पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार की गति सामान्य से बहुत ज्यादा थी और ऐसा लग रहा था कि ड्राइवर का इरादा सिर्फ डराना नहीं, बल्कि जान लेना था। कार ने सीधे ऋषि चौहान को निशाना बनाया और जोरदार टक्कर मार दी।   10 फीट तक घिसटता रहा शरीर टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ऋषि सड़क पर गिर पड़े। लेकिन ड्राइवर ने ब्रेक नहीं लगाया। कार ऋषि को अपनी चपेट में लेते हुए करीब 10 फीट तक घसीटती हुई आगे बढ़ी। सड़क पर घिसटने से ऋषि के कपड़े फट गए और शरीर की चमड़ी छिल गई।   दरिंदगी की हदें पार (The Brutality) आमतौर पर हिट-एंड-रन (Hit and Run) के मामलों में ड्राइवर एक्सीडेंट के बाद भागने की कोशिश करता है। लेकिन यहाँ मामला एक्सीडेंट का नहीं, बल्कि साजिश और हत्या (Premeditated Murder Attempt) का था।   गाड़ी रुकी, हथियार निकले ऋषि को कुचलने के बाद कार रुकी। उसमें से तीन युवक नीचे उतरे। उनके हाथों में लाठी-डंडे और तमंचे थे। मुख्य आरोपी की पहचान आयुष तेवतिया (निवासी सदरपुर) के रूप में हुई है।   तमंचे की बट से तोड़ी हड्डियां सड़क पर तड़प रहे ऋषि को अस्पताल ले जाने के बजाय, आरोपियों ने उसे घेर लिया। पहले लाठी-डंडों से पीटा। फिर तमंचे की बट (हैंडल) से उसके पैरों और कमर पर ताबड़तोड़ वार किए। हमलावरों का मकसद उसे जान से मारना या हमेशा के लिए अपाहिज कर देना था।   डॉक्टरों के मुताबिक, ऋषि के दोनों पैरों और कमर में कुल 5 जगह हड्डियां टूटी (Fractures) हैं। यह चोटें बताती हैं कि हमला कितना बर्बर था।   खौफनाक बयान और धमकी (The Threat) हमला करते वक्त आरोपी लगातार चिल्ला रहे थे। वहां मौजूद लोगों ने जो सुना, वह गाजियाबाद की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। आरोपियों ने ऋषि को पीटते हुए कहा: "गाजियाबाद में दादागिरी हमारी चलती है। आज तो तू बच गया, लेकिन अबकी बार समझ लेना कि दोबारा बचने का मौका नहीं मिलेगा। हम हत्या करके ही मानेंगे।" यह बयान दर्शाता है कि आरोपियों के मन में पुलिस या कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं था। वे सरेआम हत्या की घोषणा कर रहे थे। भीड़ का पलटवार और आरोपियों का फरार होना चीख-पुकार और मारपीट देखकर आसपास के लोग और राहगीर हिम्मत जुटाकर मौके की तरफ दौड़े। भीड़ को अपनी तरफ आता देख बदमाशों के हौसले पस्त होने लगे। कार छोड़ी, तमंचा लहराया बदमाशों ने जब देखा कि वे घिर सकते हैं, तो उन्होंने अपनी कार (जिससे उन्होंने टक्कर मारी थी) को मौके पर ही छोड़ दिया। भीड़ को डराने के लिए उन्होंने हवा में तमंचे लहराए और पैदल ही गलियों के रास्ते फरार हो गए।   गुस्साई भीड़ का रिएक्शन आरोपियों के भागने के बाद, आक्रोशित भीड़ ने मौके पर खड़ी उनकी कार को घेर लिया। गुस्से में लोगों ने कार के शीशे तोड़ दिए और उसमें तोड़फोड़ की। हालांकि, कुछ समझदार लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी ताकि कार के अंदर मौजूद सबूतों को सुरक्षित रखा जा सके।   पुलिस जांच और बरामदगी (Investigation & Evidence) सूचना मिलते ही गोविंदपुरम पुलिस चौकी (Govindpuram Police Chowki) की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को संभाला और घायल ऋषि को तुरंत निजी अस्पताल भेजा। कार की तलाशी में मिले अहम सबूत पुलिस ने हमलावरों द्वारा छोड़ी गई कार को अपने कब्जे में ले लिया। जब कार की तलाशी ली गई, तो उसके अंदर का नजारा यह बताने के लिए काफी था कि आरोपी किस हालत में थे।   शराब की बोतल: कार के अंदर शराब की बोतल मिली, जिससे आशंका है कि आरोपी नशे में धुत थे। हथियार: कार से 2 मोटे डंडे बरामद हुए हैं, जिनका इस्तेमाल मारपीट में किया गया था। दस्तावेज: गाड़ी के नंबर और दस्तावेजों के आधार पर पुलिस अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है।   अधिकारियों का बयान ACP कविनगर सूर्यबली मौर्य ने मीडिया को बताया: "घायल ऋषि के चाचा शैलेश की तहरीर (शिकायत) पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC/BNS) की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। जिस कार से हमला हुआ, उसे जब्त कर लिया गया है। मुख्य आरोपी आयुष तेवतिया की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं। यह पुरानी रंजिश का मामला प्रतीत होता है, लेकिन जिस तरह से घटना को अंजाम दिया गया, वह अक्षम्य है।"   रंजिश की कहानी (The Background) पुलिस जांच और परिवार के बयानों से पता चला है कि यह हमला अचानक नहीं हुआ था, बल्कि इसके पीछे पुरानी रंजिश थी।   कौन है आयुष तेवतिया? आरोपी आयुष तेवतिया, जो सदरपुर का रहने वाला है, इलाके में अपनी दबंगई के लिए बदनाम बताया जा रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि आयुष पहले भी कई बार ऋषि और उसके पिता राजेश कुमार को धमका चुका है।   बिजनेस रंजिश या वर्चस्व? जैविक खाद के प्लांट को लेकर या किसी स्थानीय विवाद को लेकर दोनों पक्षों में पहले भी कहासुनी हो चुकी है। धमकियों का दौर: ऋषि ने पहले भी घर पर बताया था कि कुछ लड़के उसका पीछा करते हैं और देख लेने की धमकी देते हैं, लेकिन परिवार ने नहीं सोचा था कि वे इस हद तक गिर जाएंगे।   पीड़ित परिवार का दर्द और डर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे ऋषि के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।   पिता राजेश कुमार: "मेरा बेटा सिर्फ मूंगफली खरीद रहा था। उसने किसी का क्या बिगाड़ा था? वे लोग उसे जान से मारने आए थे। अगर भीड़ न आती, तो आज मेरा बेटा जिंदा नहीं होता।" चाचा शैलेश: "हमें पुलिस पर भरोसा है, लेकिन हमें अपनी सुरक्षा का भी डर है। जाते-जाते वे हत्या की धमकी देकर गए हैं। अगर वे जमानत पर बाहर आ गए, तो वे फिर हमला करेंगे।" वायरल वीडियो: घटना के बाद घायल ऋषि का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें वह सड़क पर दर्द से तड़प रहा है और लोग उसे सांत्वना दे रहे हैं। यह वीडियो विचलित करने वाला है।   कानून की धाराएं (Legal Analysis) इस मामले में पुलिस आरोपियों पर बेहद सख्त धाराएं लगा सकती है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला सिर्फ मारपीट का नहीं है:   Attempt to Murder (हत्या का प्रयास): चूंकि आरोपियों ने कार से कुचला और फिर यह कहा कि "हत्या करके मानेंगे", इसलिए धारा 307 (IPC) या धारा 109 (BNS - भारतीय न्याय संहिता) का मामला बनता है। Rash Driving (तेज रफ्तार वाहन): लापरवाही से गाड़ी चलाना और जान को खतरे में डालना। Voluntarily Causing Grievous Hurt (गंभीर चोट पहुँचाना): डंडों और बट से मारकर हड्डियां तोड़ना। Criminal Intimidation (जान से मारने की धमकी): धारा 506 (IPC) या BNS की संबंधित धारा। Arms Act (आर्म्स एक्ट): अवैध तमंचा रखने और लहराने के लिए आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।   समाज और सुरक्षा पर सवाल (Impact on Society) गाजियाबाद के पॉश इलाकों में शुमार गोविंदपुरम में ऐसी घटना होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:   पुलिस की गश्त (Patrolling): एनडीआरएफ रोड जैसी व्यस्त जगह पर आरोपी हथियार लेकर घूम रहे थे और पुलिस को भनक तक नहीं लगी? युवाओं में अपराध (Youth Crime): कार, शराब और हथियार—यह कॉकटेल आज के युवाओं को अपराध के दलदल में धकेल रहा है। "दादागिरी" का नशा युवाओं को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा रहा है। सड़क सुरक्षा: क्या सड़क किनारे खड़े होकर मूंगफली खरीदना भी अब सुरक्षित नहीं है?   न्याय की आस ऋषि चौहान का इलाज चल रहा है, डॉक्टरों के मुताबिक उनकी सर्जरी करनी पड़ेगी और उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने में महीनों लग सकते हैं। वहीं, गाजियाबाद पुलिस के लिए यह एक चुनौती है। आयुष तेवतिया और उसके साथियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी ही पुलिस के इकबाल को बहाल कर सकती है।   खबरीलाल अपने पाठकों से अपील करता है कि सड़क पर ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। अपराध को सहना भी अपराध को बढ़ावा देना है।

Unknown जनवरी 14, 2026 0
Ghaziabad Schools Closed Winter Vacation Extended for Nursery to Class 5 till January 15 Timings Changed for Senior Classes
Ghaziabad School News: गाजियाबाद में ठंड का कहर, नर्सरी से 5वीं तक के स्कूल 15 जनवरी तक बंद; 12वीं तक का समय भी बदला

गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), 11 जनवरी 2026। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का अहम हिस्सा और उत्तर प्रदेश का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला गाजियाबाद इस समय कड़ाके की ठंड की चपेट में है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का सीधा असर अब मैदानी इलाकों में दिखने लगा है। हाड़ कंपा देने वाली सर्दी, घने कोहरे की चादर और बर्फीली हवाओं (Ice Cold Winds) ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है।READ ALSO:-Bijnor Winter Alert: शीतलहर से ठिठुरा बिजनौर; प्रशासन का 'विंटर लॉक', 12 और 13 जनवरी को बंद रहेंगे 8वीं तक के स्कूल   इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए और नौनिहालों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए गाजियाबाद जिला प्रशासन ने रविवार को एक अहम और बड़ा फैसला लिया है। जिलाधिकारी (DM) रविंद्र मांदड़ ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्कूलों के संचालन के समय में भारी बदलाव और छोटे बच्चों के लिए अवकाश की घोषणा कर दी है।   आदेश का पूरा विवरण: किसे राहत, किसके लिए बदला नियम? गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ के निर्देशों के अनुपालन में, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने रविवार को तत्काल प्रभाव से एक नया आदेश जारी किया है। अभिभावकों और छात्रों के लिए इस आदेश को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसे दो अलग-अलग वर्गों में बांटा गया है।   (A) कक्षा नर्सरी से 5वीं तक: पूर्ण अवकाश (Complete Holiday) सबसे ज्यादा राहत छोटे बच्चों को दी गई है। चिकित्सकों और मौसम विशेषज्ञों की राय को मानते हुए प्रशासन ने तय किया है कि:   कौन सी कक्षाएं: प्री-प्राइमरी (प्ले स्कूल), नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी से लेकर कक्षा 5 तक। कब तक: यह अवकाश 15 जनवरी 2026 तक प्रभावी रहेगा। नियम: इन कक्षाओं के बच्चों को स्कूल जाने की आवश्यकता नहीं है। स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे छोटे बच्चों को स्कूल न बुलाएं।   (B) कक्षा 6 से 12वीं तक: समय में बदलाव (Timing Change) बड़ी कक्षाओं के छात्रों, विशेषकर जो बोर्ड परीक्षाओं (Board Exams) की तैयारी कर रहे हैं, उनकी पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए स्कूल बंद नहीं किए गए हैं, लेकिन उन्हें ठंड से बचाने के लिए समय बदल दिया गया है।   नया समय: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 03:00 बजे तक। फायदा: अब छात्रों को सुबह 7 या 8 बजे की कड़ाके की ठंड और घने कोहरे में घर से नहीं निकलना पड़ेगा। 10 बजे तक कोहरा छंटने और हल्की धूप निकलने की संभावना रहती है, जिससे यात्रा सुरक्षित होगी।   किन-किन स्कूलों पर लागू होगा यह 'महा-आदेश'? अक्सर अभिभावकों के मन में यह संशय रहता है कि क्या यह आदेश प्राइवेट स्कूलों, कॉन्वेंट स्कूलों या इंटरनेशनल स्कूलों पर भी लागू होगा? जिला प्रशासन ने इस बार आदेश में कोई भी लूपहोल (Loophole) नहीं छोड़ा है। आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि यह नियम जिले की सीमा में आने वाले हर एक विद्यालय पर लागू होगा।   इस दायरे में शामिल हैं: उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद: सभी सरकारी प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल। सीबीएसई (CBSE): केंद्रीय विद्यालय, पब्लिक स्कूल और सभी प्राइवेट स्कूल। आईसीएसई (ICSE): सभी कॉन्वेंट और मिशनरी स्कूल। यूपी बोर्ड (UP Board): सभी एडेड (सहायता प्राप्त) और वित्तविहीन विद्यालय। मदरसा बोर्ड: जिले के सभी मदरसे भी इस आदेश का पालन करेंगे। संस्कृत विद्यालय: सभी संस्कृत माध्यम के विद्यालय।   प्रधानाचार्यों को चेतावनी: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने आदेश में सख्त लहजे में कहा है कि यदि कोई भी स्कूल (चाहे वह कितना भी प्रतिष्ठित क्यों न हो) 15 जनवरी से पहले कक्षा 5 तक के बच्चों को बुलाता है या कक्षा 6-12 का समय सुबह 10 बजे से पहले रखता है, तो इसे "आदेश की अवहेलना" माना जाएगा और स्कूल के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।   मौसम का 'पोस्टमॉर्टम': क्यों कांप रहा है गाजियाबाद? प्रशासन को यह फैसला यूं ही नहीं लेना पड़ा। रविवार (11 जनवरी) को गाजियाबाद के मौसम ने अपने तेवर दिखा दिए। मौसम विभाग (IMD) के आंकड़े डराने वाले हैं।   आज का मौसम हाल:   न्यूनतम तापमान (Minimum Temp): रविवार सुबह पारा लुढ़ककर 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह इस सीजन के सबसे ठंडे दिनों में से एक है। विंड चिल फैक्टर (Wind Chill): तापमान 6 डिग्री है, लेकिन शरीर को यह 3 या 4 डिग्री जैसा महसूस हो रहा है। इसका कारण है 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही सर्द हवाएं। कोहरा (Fog): सुबह के समय दृश्यता (Visibility) 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई।   बर्फीली हवाओं का असर: मौसम विज्ञानियों के अनुसार, "पछुआ हवाओं (Westerlies) ने गलन बढ़ा दी है। हिमालयी क्षेत्रों से आ रही ये सीधी हवाएं मैदानी इलाकों में 'कोल्ड डे' (Cold Day) की स्थिति पैदा कर रही हैं। दिन में हल्की धूप निकल रही है, लेकिन वह 'बेअसर' है क्योंकि हवा की गति (Speed) धूप की गर्मी को टिकने नहीं दे रही।"   आने वाले दिनों का पूर्वानुमान: मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कल यानी 12 जनवरी से तापमान में और गिरावट आ सकती है। 14 और 15 जनवरी (मकर संक्रांति) के आसपास घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन का 15 जनवरी तक स्कूल बंद करने का फैसला बेहद सटीक और दूरदर्शी है।   स्वास्थ्य अलर्ट: बच्चों के लिए 'लाइफ सेविंग' गाइडलाइन स्कूल बंद होने का मतलब यह नहीं है कि खतरा टल गया है। ठंड घर के अंदर भी असर कर सकती है। गाजियाबाद के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ए.के. शर्मा (काल्पनिक नाम/उदाहरण) के अनुसार, इस मौसम में बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत है।   अभिभावक इन 5 बातों का रखें खास ख्याल: लेयरिंग (Layering) है जरूरी: बच्चों को एक मोटे जैकेट के बजाय 3-4 पतले ऊनी कपड़े पहनाएं। कपड़ों की परतों (Layers) के बीच हवा रुकती है जो शरीर को ज्यादा गर्म रखती है। सिर और पैर ढके रहें: शरीर की गर्मी सबसे ज्यादा सिर और तलवों से बाहर निकलती है। बच्चों को मोज़े और टोपी (Woolen Cap) पहनाकर रखें। हाइड्रेशन (Hydration): ठंड में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को पानी की जरूरत होती है। बच्चों को गुनगुना पानी, सूप या हल्दी वाला दूध थोड़ी-थोड़ी देर में देते रहें। ताजी हवा नहीं, गर्म हवा: सुबह-सुबह खिड़कियां खोलने से बचें। जब तक धूप न निकले, बच्चों को बाहर पार्क में खेलने न भेजें। लक्षणों को पहचानें: यदि बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो, होंठ नीले पड़ रहे हों, या लगातार कंपकंपी हो रही हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह 'हाइपोथर्मिया' (Hypothermia) के लक्षण हो सकते हैं। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।   ट्रैफिक एडवाइजरी: कोहरे में 'यमराज' से बचें गाजियाबाद एनसीआर का ट्रैफिक हब है। स्कूल टाइमिंग बदलने (10 बजे) के कारण सड़कों पर ट्रैफिक पैटर्न भी बदलेगा। लेकिन सुबह के कोहरे में अभिभावकों और स्कूल बस ड्राइवरों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।   यातायात पुलिस की सलाह: फॉग लाइट्स (Fog Lights): अपनी गाड़ी या स्कूल वैन की फॉग लाइट्स सही रखें। लो-बीम (Low Beam) पर गाड़ी चलाएं, हाई-बीम पर कोहरा रिफ्लेक्ट होकर वापस आंखों पर लगता है। इमरजेंसी इंडिकेटर्स: कोहरे में चलते समय चारों इंडिकेटर (Hazard Lights) जलाकर न चलें, इससे पीछे वाले को कन्फ्यूजन होता है कि आप मुड़ रहे हैं या खड़े हैं। इनका इस्तेमाल सिर्फ सड़क किनारे रुकते वक्त करें। रफ्तार पर लगाम: दृश्यता कम होने पर स्पीड 20-30 किमी/घंटा रखें। लेन ड्राइविंग: अपनी लेन में ही चलें। बार-बार ओवरटेक करना जानलेवा हो सकता है।   बोर्ड परीक्षार्थियों (Class 10th & 12th) के लिए टिप्स कक्षा 10 और 12 के छात्रों के लिए समय बहुत कीमती है। स्कूल का समय 10 से 3 बजे होने का मतलब है कि उन्हें सुबह पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।   कैसे करें समय का सदुपयोग? सुबह 6 से 9 बजे (गोल्डन टाइम): चूंकि स्कूल 10 बजे जाना है, आप सुबह 6 बजे उठकर 3 घंटे की ठोस पढ़ाई कर सकते हैं। सुबह का समय याद करने (Learning) के लिए सबसे अच्छा होता है। धूप का आनंद: स्कूल में लंच ब्रेक के दौरान कोशिश करें कि क्लासरूम से बाहर निकलकर 15-20 मिनट धूप में बिताएं। इससे विटामिन डी मिलेगा और सुस्ती दूर होगी। ऑनलाइन मदद: अगर ठंड के कारण किसी दिन स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, तो 'दीक्षा ऐप' (Diksha App) या 'स्वयं प्रभा' (Swayam Prabha) चैनल के माध्यम से अपनी पढ़ाई जारी रखें।   पड़ोसी जिलों का हाल: पूरा एनसीआर ठिठुरा गाजियाबाद ही नहीं, पूरा एनसीआर (NCR) ठंड से कांप रहा है।   नोएडा (Gautam Buddha Nagar): वहां भी प्रशासन ने स्कूलों के समय में बदलाव किया है और ऑनलाइन क्लासेस पर जोर दिया है। हापुड़ और मेरठ: यहां भी 8वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया जा चुका है। दिल्ली: राजधानी में भी सर्दी का 'येलो अलर्ट' जारी है और स्कूलों के लिए विंटर वेकेशन को लेकर नई एडवाइजरी जारी की गई है।   यह सामूहिक निर्णय दर्शाता है कि पूरा क्षेत्र एक गंभीर मौसम प्रणाली (Weather System) की चपेट में है।   अभिभावकों की प्रतिक्रिया: "राहत तो मिली, लेकिन..." प्रशासन के इस आदेश पर अभिभावकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है। राज नगर एक्सटेंशन निवासी सुनीता वर्मा कहती हैं, "छोटे बच्चों के लिए छुट्टी बहुत जरूरी थी। सुबह बस स्टॉप पर खड़े होकर बस का इंतजार करना बहुत मुश्किल हो रहा था। डीएम साहब का धन्यवाद।"   वहीं, इंदिरापुरम के रहने वाले राकेश सिंह का कहना है, "6वीं से 12वीं का समय बदलना अच्छा है, लेकिन वापसी 3 बजे होगी, तब तक शाम होने लगती है। जाम की समस्या बढ़ सकती है। हालांकि, सुबह की ठंड से बचना ज्यादा जरूरी है।"   सुरक्षा ही प्राथमिकता अंत में, गाजियाबाद प्रशासन का यह कदम सराहनीय है। पढ़ाई जरूरी है, लेकिन 'जान है तो जहान है'। 15 जनवरी तक का यह 'मिनी लॉकडाउन' (स्कूलों के लिए) बच्चों को सर्दी के सितम से बचाएगा।   हम अपने पाठकों से अपील करते हैं कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें। व्हाट्सएप पर वायरल होने वाली फर्जी खबरों से बचें। 'खबरीलाल' (Khabreelal.com) हमेशा आपको सबसे सटीक और सत्यापित खबरें सबसे पहले पहुंचाता रहेगा।   महत्वपूर्ण तिथियां एक नजर में: अवकाश (नर्सरी से 5वीं): 11 जनवरी से 15 जनवरी 2026 तक। स्कूल खुलने की तारीख (संभावित): 16 जनवरी 2026 (मौसम के अनुसार बदलाव संभव)। बदला हुआ समय (6वीं से 12वीं): सुबह 10:00 बजे से दोपहर 03:00 बजे तक।

Unknown जनवरी 11, 2026 0
Ghaziabad International Cricket Stadium Morti Rajnagar Extension GDA Approval Project Details
Ghaziabad News: दिल्ली-एनसीआर के क्रिकेट प्रेमियों को अब तक का सबसे बड़ा तोहफा! गाजियाबाद में बनेगा 55,000 क्षमता वाला 'इंटरनेशनल स्टेडियम'; GDA की मुहर के बाद जानें कब सजेगी पिच?

गाजियाबाद (Khabreelal News Desk): उत्तर प्रदेश के 'प्रवेश द्वार' कहे जाने वाले गाजियाबाद (Ghaziabad) के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाला है। पिछले एक दशक से फाइलों में धूल फांक रहा गाजियाबाद का सबसे महत्वाकांक्षी सपना अब हकीकत की जमीन पर उतरने जा रहा है।READ ALSO:-यूपी के इस शहर में ज्वैलर्स का कड़ा फरमान: 'चेहरा दिखाओ, तभी मिलेगी एंट्री', बुर्का और घूंघट पर लगाई शर्त; चोरी रोकने के लिए उठाया कदम   गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने राजनगर एक्सटेंशन के पास मोर्टी गांव (Morti Village) में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के नक्शे को आधिकारिक रूप से हरी झंडी दे दी है। यह सिर्फ एक खेल का मैदान नहीं, बल्कि गाजियाबाद की इकोनॉमी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और पहचान को बदलने वाला 'गेम चेंजर' प्रोजेक्ट साबित होगा।   इस विस्तृत मेगा रिपोर्ट में हम आपको इस स्टेडियम की एक-एक ईंट का हिसाब देंगे। जानेंगे कि 450 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट कैसे बनेगा, 32 एकड़ में क्या-क्या सुविधाएं होंगी और सबसे महत्वपूर्ण बात— क्या अब आईपीएल (IPL) और वर्ल्ड कप के मैच हमारे गाजियाबाद में होंगे?   1. 'मोर्टी' बनेगा नया मोहाली: प्रोजेक्ट की 'बिग पिक्चर' (The Big Picture) दिल्ली-एनसीआर में अब तक फिरोजशाह कोटला (अरुण जेटली स्टेडियम) का ही दबदबा था, लेकिन अब गाजियाबाद उसे कड़ी टक्कर देने को तैयार है। जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रोजेक्ट की बाधाओं को दूर कर दिया गया है।   स्टेडियम का 'फैक्ट फाइल' (Fact File): स्थान: मोर्टी गांव, राजनगर एक्सटेंशन, गाजियाबाद। कुल क्षेत्रफल: 31 से 32 एकड़। दर्शक क्षमता: 55,000 (शुरुआती), जिसे भविष्य में बढ़ाया जा सकता है। अनुमानित लागत: ₹450 करोड़ (निर्माण) + ₹70 करोड़ (जमीन)। डेवलपर: उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) और निजी क्षेत्र (PPP मॉडल)। पार्किंग क्षमता: 2,510 वाहन (कार और बसें)। जीडीए का विजन: "इस स्टेडियम के बनने से गाजियाबाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। यह शहर के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।" — नंद किशोर कलाल (VC, GDA)   2. 11 साल का वनवास: क्यों अटका था प्रोजेक्ट? (The Timeline) इस खुशखबरी का महत्व समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे मुड़कर देखना होगा। गाजियाबाद में क्रिकेट स्टेडियम का सपना आज का नहीं, बल्कि 2014 का है।   अड़चनों की कहानी: जमीन विवाद: शुरुआत में जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी। FAR का पेंच: फ्लोर एरिया रेश्यो (FAR) और लैंड यूज (Land Use) को लेकर पेंच फंसा हुआ था। पुराने नियमों के मुताबिक, खेल के मैदान के लिए उतनी निर्माण अनुमति नहीं मिल रही थी जितनी एक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम को चाहिए होती है। बिल्डिंग बायलॉज: यूपीसीए और जीडीए के बीच नक्शे को लेकर लंबी खींचतान चली।   अब रास्ता कैसे साफ हुआ? राज्य सरकार द्वारा नए 'बिल्डिंग बायलॉज' (Building Bylaws) लागू करने के बाद एफएआर और लैंड यूज का विवाद खत्म हो गया। जीडीए ने नियमों में लचीलापन दिखाते हुए यूपीसीए द्वारा तैयार किए गए 'रफ मैप' को मंजूरी दे दी है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जीडीए इस प्रोजेक्ट को 'फास्ट ट्रैक' पर लाने के लिए लैंड कन्वर्जन चार्ज और मैप अप्रूवल चार्ज में भारी छूट देने पर भी विचार कर रहा है।   3. 55,000 की क्षमता: लखनऊ के 'इकाना' को देगा टक्कर? उत्तर प्रदेश अब क्रिकेट का नया 'पावरहाउस' बन रहा है। कानपुर के ऐतिहासिक 'ग्रीन पार्क' और लखनऊ के अत्याधुनिक 'इकाना स्टेडियम' (अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम) के बाद गाजियाबाद यूपी का तीसरा और एनसीआर का दूसरा सबसे बड़ा क्रिकेट सेंटर बनने जा रहा है।   तुलनात्मक अध्ययन (Stadium Comparison): स्टेडियम स्थान क्षमता नरेंद्र मोदी स्टेडियम अहमदाबाद 1,32,000 (दुनिया का सबसे बड़ा) ईडन गार्डन्स कोलकाता 66,000 इकाना स्टेडियम लखनऊ 50,000 अरुण जेटली स्टेडियम दिल्ली 41,000 प्रस्तावित स्टेडियम गाजियाबाद 55,000   आंकड़े बताते हैं कि क्षमता के मामले में गाजियाबाद का यह स्टेडियम दिल्ली के कोटला स्टेडियम से भी बड़ा होगा और लखनऊ के इकाना स्टेडियम को टक्कर देगा। इसका मतलब साफ है—भविष्य में यहां आईपीएल के बड़े मुकाबले और अंतरराष्ट्रीय वनडे/टी-20 मैच आयोजित किए जा सकेंगे।   4. 450 करोड़ का निवेश: सुविधाओं का अंबार (Facilities) यूपीसीए (UPCA) ने साफ कर दिया है कि वे केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं खड़ा करेंगे, बल्कि इसे वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस किया जाएगा।   क्या-क्या होगा खास? हाई-टेक फ्लडलाइट्स: डे-नाइट मैचों के लिए अत्याधुनिक एलईडी फ्लडलाइट्स लगेंगी जो कम बिजली में दूधिया रोशनी देंगी। ड्रेनेज सिस्टम: बारिश होने के आधे घंटे के अंदर मैच दोबारा शुरू हो सके, इसके लिए सब-सॉइल ड्रेनेज सिस्टम (Sub-soil Drainage System) लगाया जाएगा। कॉर्पोरेट बॉक्स: VVIP मेहमानों और कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए लग्जरी बॉक्स बनाए जाएंगे। क्लब हाउस: खिलाड़ियों के ठहरने के लिए 5-स्टार सुविधाओं वाला क्लब हाउस, जिम, स्विमिंग पूल और इंडोर प्रैक्टिस एरिया होगा। मीडिया सेंटर: अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज के लिए हाई-स्पीड इंटरनेट से लैस भव्य मीडिया बॉक्स।   5. सबसे बड़ी समस्या का हल: 2510 गाड़ियों की पार्किंग दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में मैच देखने जाने वाले लोग जानते हैं कि वहां पार्किंग की कितनी बड़ी समस्या है। गाजियाबाद के मोर्टी स्टेडियम में इस गलती को सुधारा गया है।   नक्शे के मुताबिक, स्टेडियम परिसर के अंदर और बाहर 2,510 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है।   बेसमेंट पार्किंग। सरफेस पार्किंग। बस और वीआईपी गाड़ियों के लिए अलग लेन।   इसके अलावा, मैच के दिनों के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान अभी से तैयार किया जा रहा है ताकि राजनगर एक्सटेंशन एलिवेटेड रोड और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर जाम न लगे।   6. रियल एस्टेट पर 'बूम': राजनगर एक्सटेंशन बनेगा 'गोल्डन हब' जैसे ही जीडीए की मंजूरी की खबर आई, राजनगर एक्सटेंशन और आसपास के इलाकों में प्रॉपर्टी डीलर और निवेशकों के चेहरे खिल गए।   इकोनॉमिक इम्पैक्ट (Economic Impact): प्रॉपर्टी के दाम: रियल एस्टेट जानकारों का मानना है कि स्टेडियम का निर्माण शुरू होते ही मोर्टी और राजनगर एक्सटेंशन में घरों और जमीन की कीमतों में 20% से 30% तक का उछाल आ सकता है। होटल इंडस्ट्री: मैच देखने आने वाले दर्शकों और टीमों के लिए होटलों की जरूरत होगी। ऐसे में इस इलाके में 3-स्टार और 5-स्टार होटलों की मांग बढ़ेगी। कमर्शियल स्पेस: रेस्तरां, स्पोर्ट्स शॉप्स और मॉल के लिए कमर्शियल स्पेस की डिमांड में तेजी आएगी।   "राजनगर एक्सटेंशन पहले से ही एक आवासीय हब है, लेकिन यह स्टेडियम इसे एक 'प्रीमियम लोकेशन' में बदल देगा। जिन लोगों ने यहां निवेश किया है, उनकी लॉटरी लगने वाली है।" — स्थानीय रियल एस्टेट एक्सपर्ट   7. कनेक्टिविटी: दिल्ली से सिर्फ 20 मिनट दूर इस स्टेडियम की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी लोकेशन और कनेक्टिविटी है।   दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे: यह स्टेडियम एक्सप्रेसवे के बेहद करीब है, जिससे दिल्ली के लोग बिना जाम में फंसे सीधे मैच देखने आ सकते हैं। रैपिड रेल (Namo Bharat): नमो भारत ट्रेन का स्टेशन (गुलधर और दुहाई) यहां से कुछ ही दूरी पर है। मेरठ और दिल्ली के दर्शक रैपिड रेल से आसानी से यहां पहुंच सकेंगे। एलिवेटेड रोड: यूपी गेट से राजनगर एक्सटेंशन एलिवेटेड रोड सीधे स्टेडियम की राह आसान बनाती है। हिंडन एयरपोर्ट: चार्टर्ड प्लेन से आने वाले वीआईपी और क्रिकेट टीमें हिंडन एयरपोर्ट (जो पास ही है) पर उतर सकती हैं।   8. अगला कदम: कब शुरू होगा काम? (What Next?) जीडीए की मंजूरी मिलने के बाद अब प्रक्रिया आखिरी चरण में है।   औपचारिक आवेदन: यूपीसीए अगले 10 दिनों के भीतर नक्शा स्वीकृति के लिए औपचारिक ऑनलाइन आवेदन करेगा। फीस जमा: शुल्क जमा होने के बाद जीडीए फाइनल एनओसी (NOC) जारी करेगा। भूमि पूजन: उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2026 के मध्य तक इस स्टेडियम का भव्य भूमि पूजन हो सकता है। निर्माण अवधि: ऐसे बड़े स्टेडियम को बनने में आमतौर पर 2.5 से 3 साल का समय लगता है। यानी अगर सब कुछ ठीक रहा, तो 2029-30 तक हम यहां पहला छक्का लगते हुए देख सकते हैं।   9. क्रिकेट प्रेमियों की प्रतिक्रिया (Public Reaction) इस खबर के बाद सोशल मीडिया पर गाजियाबाद के युवाओं में जबरदस्त उत्साह है।   रोहित (क्रिकेट प्रेमी, कविनगर): "हमें आईपीएल मैच देखने के लिए दिल्ली के ट्रैफिक में फंसना पड़ता था। अब अपने शहर में विराट कोहली और धोनी को खेलते देख पाएंगे, यह सपना सच होने जैसा है।" सिमरन (छात्र, राजनगर): "इससे हमारे क्षेत्र का विकास होगा। स्टेडियम के आसपास स्पोर्ट्स एकैडमी खुलेंगी, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को भी मौका मिलेगा।"   गाजियाबाद के लिए 'गेम चेंजर' यह केवल एक स्टेडियम नहीं, बल्कि गाजियाबाद की छवि बदलने का एक अभियान है। अब तक गाजियाबाद को केवल एक औद्योगिक शहर या आवासीय शहर के रूप में देखा जाता था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के बनने के बाद यह भारत के 'स्पोर्ट्स मैप' (Sports Map) पर चमकता हुआ सितारा बनकर उभरेगा।   FAQ: गाजियाबाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम से जुड़े सवाल प्रश्न 1: यह स्टेडियम ठीक-ठीक कहां बन रहा है? उत्तर: यह स्टेडियम गाजियाबाद के मोर्टी गांव में बनेगा, जो राजनगर एक्सटेंशन और हिंडन नदी के पास स्थित है। प्रश्न 2: इसे कौन बना रहा है? उत्तर: इसका निर्माण उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) द्वारा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत किया जाएगा। प्रश्न 3: क्या यहां आईपीएल मैच होंगे? उत्तर: जी हां, अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का दर्जा मिलने और 55,000 की क्षमता होने के कारण, भविष्य में यह आईपीएल (IPL) की किसी फ्रेंचाइजी का होम ग्राउंड बन सकता है। प्रश्न 4: स्टेडियम कब तक बनकर तैयार होगा? उत्तर: निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे पूरा होने में लगभग 3 साल लगने का अनुमान है।   (डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट जीडीए की हालिया बैठक और मीडिया सूत्रों पर आधारित है। प्रोजेक्ट की अंतिम समयसीमा और लागत में भविष्य में बदलाव संभव है।)

Unknown जनवरी 5, 2026 0
ghaziabad rajnagar extension firing thar jeep attack mobile businessman cctv footage pankaj jat gang
गाजियाबाद में 'गैंगवार' जैसा सीन: थार सवार बदमाशों ने दिनदहाड़े मोबाइल कारोबारी पर की फायरिंग; पीछा करने पर हवा में गोलियां दागते हुए फरार

गाजियाबाद/क्राइम डेस्क (स्पेशल रिपोर्ट): दिल्ली से सटे गाजियाबाद (Ghaziabad) का पॉश इलाका माना जाने वाला राजनगर एक्सटेंशन शनिवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। यहाँ की सड़कों पर बॉलीवुड फिल्म के किसी एक्शन सीन जैसा नजारा देखने को मिला, लेकिन फर्क सिर्फ इतना था कि यहाँ चलने वाली गोलियां असली थीं और निशाना एक मोबाइल कारोबारी था।READ ALSO:-UP School Big Update: यूपी में छात्रों और शिक्षकों के लिए 'डबल खबर'; सीएम योगी ने 5 जनवरी तक लगाई स्कूलों पर 'ताला', उधर 2026 के लिए छुट्टियों का 'पिटारा' खुला   शनिवार दोपहर करीब 3 बजे, एक काले रंग की महिंद्रा थार (Thar) ने सड़क किनारे खड़ी लाल रंग की बलेनो कार को निशाना बनाया। थार सवार बदमाशों ने बिना किसी खौफ के पिस्टल निकालकर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गनीमत रही कि कार में बैठे कारोबारी को गोली नहीं लगी, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।   यह हमला कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसके तार 1 जनवरी (नए साल) की रात को हुए एक झगड़े और शनिवार सुबह मिली "मौत की धमकी" से जुड़े हैं।   1. CCTV में कैद हुआ खौफनाक मंजर: 30 सेकंड का वो सच इस पूरी वारदात का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सामने आया है, जो अब पुलिस की जांच का सबसे अहम हिस्सा है। फुटेज में घटनाक्रम कुछ इस तरह दिखाई देता है:   दोपहर 03:00 बजे: सड़क किनारे एक लाल रंग की बलेनो कार शांति से खड़ी है। इसमें मोबाइल कारोबारी हर्ष कुमार बैठे हैं। 03:01 बजे: फ्रेम में एक काले रंग की थार (Black Thar) एंट्री लेती है। इस गाड़ी पर कोई नंबर प्लेट नहीं है। एक्शन: थार, बलेनो कार के बिल्कुल बराबर में आकर धीमी होती है और फिर रुक जाती है। ड्राइवर सीट पर बैठा युवक शीशा नीचे करता है और पलक झपकते ही पिस्टल निकालकर सीधे बलेनो पर फायर झोंक देता है। गोलियों के निशान: बदमाशों की फायरिंग से बलेनो कार के दरवाजों और शीशों पर 3 गोलियां लगती हैं। पीड़ित की हिम्मत: गोली चलने के बाद बलेनो सवार हर्ष कुमार डरकर दुबकने के बजाय अपनी गाड़ी आगे बढ़ाते हैं और यू-टर्न लेकर हमलावरों का पीछा करने की कोशिश करते हैं। फरार: खुद को घिरता देख थार सवार बदमाश हवा में फायरिंग करते हुए गाड़ी भगा ले जाते हैं।   2. फ्लैशबैक: 1 जनवरी की रात शुरू हुई थी रंजिश इस गोलीबारी की स्क्रिप्ट 1 जनवरी, 2026 की रात को ही लिख दी गई थी। पीड़ित हर्ष कुमार (निवासी सिकरोड) ने पुलिस को बताया कि उनकी मेन रोड पर मोबाइल की दुकान है। नए साल के जश्न के दौरान, उनका छोटा भाई लक्की अपने एक दोस्त के साथ राजनगर एक्सटेंशन की एक वीवीआईपी सोसाइटी (VVIP Society) गया था। वहां लक्की की कार की टक्कर एक दूसरी गाड़ी से हो गई। यह एक सामान्य एक्सीडेंट हो सकता था, लेकिन सामने वाले पक्ष ने इसे रंजिश बना लिया। हर्ष के मुताबिक, आरोपी अमित काजरा, पंकज चौधरी, शाहिल, एकलव्य पाठक और दो अन्य युवकों ने लक्की को घेर लिया। उसके साथ बुरी तरह मारपीट की गई और जाते-जाते उसे जान से मारने की धमकी दी गई। लक्की ने उसी वक्त मोरटा पुलिस चौकी में इसकी सूचना भी दी थी, लेकिन शायद बदमाशों के हौसले बुलंद थे।   3. 'तुझे ऐसी मौत देंगे कि लाश कोई पहचान नहीं पाएगा' शनिवार (3 जनवरी) की सुबह बदमाशों ने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। हर्ष कुमार ने बताया कि सुबह करीब 10:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई।   कॉल की ट्रांसक्रिप्ट (पीड़ित के अनुसार): कॉलर: क्या हर्ष बोल रहे हो? हर्ष: हां, बोल रहा हूं। कॉलर: तू हमारे खिलाफ पुलिस में शिकायत करेगा? तुझे अपनी जिंदगी प्यारी नहीं है क्या? आज तुझे जीवन से मुक्ति देंगे। ऐसी मौत देंगे कि तेरी लाश कोई पहचान नहीं पाएगा। जो भी तेरी लाश देखेगा, हमारे नाम का ऐसा खौफ खाएगा कि फिर कभी कोई पुलिस में शिकायत करने की हिम्मत नहीं करेगा।   यह धमकी देकर फोन काट दिया गया।   4. गलत पहचान (Mistaken Identity): 10 मिनट बाद भाई पर तानी पिस्टल धमकी भरे कॉल के महज 10 मिनट बाद ही बदमाशों की थार दुकान के बाहर पहुंच गई। उस वक्त हर्ष दुकान पर नहीं थे, लेकिन उनका दूसरा भाई शुभम बाहर खड़ा था।   बिना नंबर की काली थार शुभम के पास रुकी। गाड़ी के शीशे पर बड़े अक्षरों में "पंकज जाट 008" लिखा हुआ था। थार सवार एक युवक ने शुभम की कनपटी पर पिस्टल सटा दी और उसे गाड़ी में खींचने की कोशिश की। तभी गाड़ी में बैठे दूसरे साथी ने कहा, "छोड़ इसे, यह हर्ष नहीं है, यह उसका भाई है।" इसके बाद वे वहां से चले गए।   5. दोपहर 3 बजे हुआ 'फाइनल अटैक' सुबह की धमकी और भाई पर हमले के बाद हर्ष सतर्क थे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि बदमाश दिनदहाड़े फायरिंग कर देंगे। दोपहर 3 बजे जब हर्ष अपनी बलेनो कार में दुकान के पास बैठे थे, तभी वही थार वापस आई। इस बार बदमाशों ने बात करने के बजाय सीधे ट्रिगर दबा दिया।   हर्ष ने बताया, "गोली मेरी कार की बॉडी को चीरती हुई निकली। अगर मैं थोड़ा भी इधर-उधर होता तो गोली सीधे मुझे लगती। जान बचाने के लिए मैंने कार भगाई और उनका पीछा भी किया, लेकिन वे हवाई फायरिंग करते हुए निकल गए।"   6. पुलिस का एक्शन और कानून व्यवस्था पर सवाल घटना की सूचना मिलते ही एसीपी (सिहानी गेट) उपासना पांडेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने घटनास्थल से गोलियों के खोखे बरामद किए हैं और सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में ले लिया है।   एसीपी का बयान: "मैं अभी सरकारी काम से बाहर हूं, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम लगा दी गई है। पीड़ित की तहरीर के आधार पर नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज में गाड़ी और आरोपियों की पहचान स्पष्ट हो रही है। जल्द ही सभी सलाखों के पीछे होंगे।"   क्राइम फाइल एनालिसिस: NCR में 'थार कल्चर' और रोड रेज यह घटना गाजियाबाद में बढ़ते 'गन कल्चर' और रोड रेज की खतरनाक स्थिति को दर्शाती है।   नंबर प्लेट का न होना: अपराधी बेखौफ होकर बिना नंबर प्लेट की गाड़ियां चला रहे हैं, जो पुलिस की चेकिंग व्यवस्था पर सवाल उठाता है। स्टिकर वाली गाड़ियां: गाड़ी पर 'जाट', 'गुर्जर' या किसी जाति विशेष का नाम और '008' जैसे कोड वर्ड लिखना एनसीआर में बदमाशों का स्टेटस सिंबल बन गया है। भीड़भाड़ में फायरिंग: राजनगर एक्सटेंशन जैसा इलाका, जहां हजारों परिवार रहते हैं, वहां दिनदहाड़े फायरिंग होना बताता है कि बदमाशों में पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है।   फिलहाल, पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं। हर्ष और उनके परिवार को सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

Unknown जनवरी 3, 2026 0
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Ghaziabad High Voltage Drama: "सब्जी की तरह बांटी तलवारें..." हिंदू रक्षा दल के 'शक्ति प्रदर्शन' पर पुलिस का कड़ा प्रहार; पिंकी चौधरी फरार, 10 गिरफ्तार

गाजियाबाद (Ghaziabad News): उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में सोमवार को कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया। यहां शालीमार गार्डन (Shalimar Garden) क्षेत्र में हिंदू रक्षा दल (Hindu Raksha Dal) के कार्यकर्ताओं ने खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए शक्ति प्रदर्शन किया। संगठन ने बाकायदा एक स्टॉल लगाकर वहां तलवार, फरसा और गड़ासा जैसे घातक हथियारों का प्रदर्शन किया और उन्हें आम लोगों में वितरित किया।READ ALSO:-Ghaziabad Shame: "भैया मैं हिंदू हूं, मेरा नाम लक्ष्य है..." गिड़गिड़ाता रहा युवक, फिर भी प्रेमी-प्रेमिका को बेरहमी से पीटते रहे 'कार्यकर्ता'; वीडियो वायरल   इस दौरान संगठन द्वारा भड़काऊ बयानबाजी भी की गई। कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का हवाला देते हुए स्थानीय लोगों को "जिहादियों" से निपटने के लिए हथियार रखने की सलाह दी। सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। तीन थानों की पुलिस ने मौके पर छापेमारी की, जिससे वहां भगदड़ मच गई। पुलिस ने मौके से 10 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी (Pinky Chaudhary) समेत कई अन्य के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। ‘हिंसक विचार’ से लेकर ‘हिंसक हथियार’ तक लोगों के घरों तक पहुँचानेवाले, देश की एकता और सामाजिक सौहार्द के दुश्मनों के ख़िलाफ़ कोई संज्ञान लेनेवाला है क्या? हिंसा असभ्यों की निशानी होती है और कमज़ोर होती सत्ता की भी। pic.twitter.com/6IKCOL1MSm — Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) December 30, 2025   शालीमार गार्डन में सजी हथियारों की दुकान घटना साहिबाबाद और शालीमार गार्डन थाना क्षेत्र के बीच की है। सोमवार दोपहर हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने शालीमार गार्डन स्थित अपने कार्यालय के बाहर एक शामियाना और स्टॉल लगाया। यह नजारा किसी सब्जी मंडी या किराने की दुकान का नहीं, बल्कि घातक हथियारों की प्रदर्शनी का था। मेज पर नंगी तलवारें, धारदार फरसे और गड़ासे सजाकर रखे गए थे।   प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, संगठन के पदाधिकारी वहां से गुजरने वाले हिंदुओं को रोककर उन्हें तलवारें सौंप रहे थे। साथ ही, वे लोगों को यह समझा रहे थे कि इन हथियारों का इस्तेमाल कैसे करना है। इस पूरी गतिविधि के दौरान वहां लाउडस्पीकर पर नारेबाजी होती रही और माहौल को तनावपूर्ण बनाने का प्रयास किया गया।   तर्क: "जिहादियों से बहन-बेटियों को बचाना है" हथियार बांटते समय हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने जो तर्क दिए, वे बेहद भड़काऊ थे। उन्होंने हाल ही में बांग्लादेश (Bangladesh) में हुई हिंसा और दीपू दास नामक व्यक्ति समेत अन्य हिंदुओं की हत्या का उदाहरण दिया। कार्यकर्ताओं ने लोगों से कहा, "बांग्लादेश जैसी मानसिकता के जिहादी यहां भी घूम रहे हैं। सरकार लाइसेंस नहीं दे रही, इसलिए हम अपनी सुरक्षा खुद करेंगे। हर घर में तलवार होनी चाहिए। अगर कोई बहन या बेटी पर बुरी नजर डाले, तो इसका प्रयोग करने से पीछे न हटें।"   इस तरह के बयानों ने क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल पैदा कर दिया। सरेआम हिंसा के लिए उकसाना और अवैध रूप से हथियार बांटना कानून के शासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया।   पुलिस का एक्शन: तीन थानों की फोर्स और भगदड़ जैसे ही इस "तलवार वितरण समारोह" की भनक गाजियाबाद पुलिस के आला अधिकारियों को लगी, वे हरकत में आ गए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसीपी शालीमार गार्डन, एसीपी साहिबाबाद, एसएचओ लिंक रोड, एसएचओ शालीमार गार्डन और एसएचओ टीला मोड़ भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। आज दिनांक 29.12.2025 को सोशल मीड़िया के माध्यम से थाना शालीमार गार्डन को सूचना प्राप्त हुई कि हिन्दु रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी द्वारा तलवार वितरण किया जा रहा है । सूचना का त्वरित संज्ञान लेकर थाना शालीमार गार्डन में उक्त प्रकरण में 16 नामजद व 25-30 अज्ञात लोगो के… pic.twitter.com/MET7NhqSdg — POLICE COMMISSIONERATE GHAZIABAD (@ghaziabadpolice) December 29, 2025   पुलिस की गाड़ियों और हूटर की आवाज सुनते ही वहां मौजूद कार्यकर्ताओं में अफरा-तफरी मच गई। जो लोग थोड़ी देर पहले "शक्ति प्रदर्शन" कर रहे थे, वे पुलिस को देखते ही गलियों में भागने लगे। मौके पर भगदड़ की स्थिति बन गई। पुलिस ने घेराबंदी करते हुए भाग रहे 10 कार्यकर्ताओं को मौके पर ही दबोच लिया। घटनास्थल से पुलिस ने भारी मात्रा में तलवारें और अन्य धारदार हथियार बरामद किए हैं।   पिंकी चौधरी फरार, 16 नामजद एसपी (SP) अतुल सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। पुलिस ने सेवन क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट (7 Criminal Law Amendment Act) और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।   कुल आरोपी: एफआईआर में 16 लोगों को नामजद किया गया है और 25-30 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। मुख्य आरोपी: हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी (भूपेंद्र तोमर) को मुख्य आरोपी बनाया गया है। गिरफ्तारी: अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है, जबकि पिंकी चौधरी और अन्य फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।   पिंकी चौधरी का दावा: 250 घरों में पहुंचाई तलवारें हालांकि पुलिस ने छापेमारी की, लेकिन हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी, जो मौके पर मौजूद नहीं थे, ने इस कृत्य की पूरी जिम्मेदारी ली है। एक मीडिया बयान में उन्होंने कहा, "बांग्लादेश में पागलों का झुंड हिंदुओं को मार रहा है। हम नहीं चाहते कि भारत में ऐसी स्थिति हो। सरकार हमें शस्त्र लाइसेंस नहीं दे रही है, इसलिए हम अपनी तरफ से हिंदू परिवारों को आत्मरक्षा के लिए तलवारें बांट रहे हैं।"   चौधरी ने दावा किया कि पुलिस के आने से पहले ही उन्होंने करीब 250 तलवारें अलग-अलग घरों में वितरित कर दी थीं। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि आगे भी संगठन की हर शाखा में तलवार बांटने का काम जारी रहेगा और वे पुलिस की कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।   "जिम की तरह सिखाएंगे तलवार चलाना" संगठन की योजना सिर्फ हथियार बांटने तक सीमित नहीं है। हिंदू रक्षा दल के प्रदेश संगठन मंत्री अमित प्रजापति ने एक और विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा, "यह एक साधारण मैसेज है। हम हिंदुओं से कह रहे हैं कि अपने घरों में शस्त्र रखो और उसे चलाना सीखो। जैसे लोग शरीर बनाने के लिए जिम (Gym) जाते हैं, वैसे ही हम शस्त्र चलाने की ट्रेनिंग देंगे। आपकी मदद के लिए पुलिस या सरकार बाद में आएगी, पहले आपको अपनी रक्षा खुद करनी होगी।"   कानूनी पहलू और 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट पुलिस ने आरोपियों पर 'सेवन क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट' लगाया है। यह धारा तब लगाई जाती है जब कोई व्यक्ति या समूह किसी को डराने, धमकाने या सार्वजनिक शांति भंग करने का प्रयास करता है। इसके अलावा, बिना लाइसेंस के धारदार हथियारों का प्रदर्शन और वितरण आर्म्स एक्ट (Arms Act) का भी उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि आत्मरक्षा के नाम पर भीड़ को हथियार बांटना और कानून हाथ में लेने के लिए उकसाना समाज में अराजकता फैला सकता है। यदि ऐसे कार्यक्रमों पर रोक नहीं लगाई गई, तो स्थिति अनियंत्रित हो सकती है।   गाजियाबाद के शालीमार गार्डन में हुई यह घटना प्रशासन और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है। एक तरफ जहां सरकार 'जीरो टॉलरेंस' की बात करती है, वहीं राजधानी से सटे इलाके में खुलेआम तलवारें बांटना पुलिस के इकबाल पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 10 लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी पिंकी चौधरी की गिरफ्तारी अब पुलिस के लिए चुनौती है। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि सुरक्षा के नाम पर अराजकता फैलाने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।   गाजियाबाद के शालीमार गार्डन में हिंदू रक्षा दल ने "आत्मरक्षा" के नाम पर खुलेआम तलवार और फरसे बांटने का स्टॉल लगाया। कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश हिंसा का हवाला देकर लोगों को हथियार रखने के लिए उकसाया। सूचना मिलते ही तीन थानों की पुलिस ने मौके पर छापा मारा, जिससे भगदड़ मच गई। पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है और संगठन अध्यक्ष पिंकी चौधरी समेत 16 नामजद व 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। पिंकी चौधरी फिलहाल फरार हैं।

Unknown दिसम्बर 30, 2025 0
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Ghaziabad Shame: "भैया मैं हिंदू हूं, मेरा नाम लक्ष्य है..." गिड़गिड़ाता रहा युवक, फिर भी प्रेमी-प्रेमिका को बेरहमी से पीटते रहे 'कार्यकर्ता'; वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से कथित 'मोरल पुलिसिंग' (Moral Policing) के नाम पर गुंडई का एक बेहद शर्मनाक वीडियो सामने आया है। मोदीनगर इलाके के एक रेस्टोरेंट में हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने कानून को अपने हाथ में लेते हुए एक प्रेमी युगल (Couple) के साथ जमकर मारपीट की। हद तो तब हो गई जब भीड़ ने अर्धनग्न हालत में युवती के साथ भी गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की।READ ALSO:-"न्यू ईयर पर हुड़दंग मचाया तो साल की पहली सुबह लॉकअप में होगी..." मेरठ SSP ने तैयार किया 'चक्रव्यूह'; ड्रोन, LIU और 300 एक्स्ट्रा पुलिसकर्मी संभालेंगे कमान   हैरान करने वाली बात यह है कि पिटने वाला युवक बार-बार खुद को हिंदू बताता रहा, अपना नाम और पहचान भी बताता रहा, लेकिन 'धर्म के रक्षक' बने गुंडों ने उसकी एक न सुनी और उसे मुस्लिम बताकर पीटते रहे।   वायरल वीडियो की खौफनाक हकीकत सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो 1 मिनट 37 सेकेंड का है। यह वीडियो मोदीनगर में मेरठ रोड स्थित 'पिज्जा क्लासिक रेस्टोरेंट' (Pizza Classic Restaurant) का बताया जा रहा है, जो निवाड़ी रोड पर है।   वीडियो में क्या दिखा? धावा: वीडियो में 6 से 7 लोग रेस्टोरेंट के एक निजी केबिन/कमरे का दरवाजा जबरन खोलते दिखाई दे रहे हैं। मारपीट: भीड़ अंदर से एक युवक को शर्ट का कॉलर पकड़कर घसीटते हुए बाहर निकालती है और उसे थप्पड़ मारना शुरू कर देती है। अभद्रता: इसके बाद कमरे के अंदर से युवती को भी आपत्तिजनक (अर्धनग्न) हालत में बाहर निकाला जाता है। युवक अपनी प्रेमिका को बचाने और छिपाने की कोशिश करता है, लेकिन भीड़ उस पर भी टूट पड़ती है। भीड़ युवती को गालियां देती है और कपड़े पहनकर बाहर आने का हुक्म देती है।   "रिषभ भैया मत मारो... मैं लक्ष्य हूं" इस पूरी घटना का सबसे विचलित करने वाला पहलू युवक की लाचारी है। वह भीड़ में शामिल कुछ लोगों को नाम से जानता था। पिटते वक्त वह लगातार रहम की भीख मांगता रहा। वीडियो में युवक की आवाज साफ सुनाई दे रही है:   "भैया क्या कर रहे हो... मैं हिंदू हूं। भैया मैं आप लोगों को जानता हूं। मेरा नाम लक्ष्य है। मुझे छोड़ दो। रिषभ भैया रुक जाओ... मत मारो।"   बावजूद इसके, कार्यकर्ताओं ने उसकी दलीलें अनसुनी कर दीं। वे बार-बार उससे उसका नाम पूछते रहे और जवाब देने पर भी थप्पड़ बरसाते रहे। आरोप है कि भीड़ उसे जबरन दूसरे समुदाय का बताकर पीटने पर आमादा थी।   पुलिस का दावा: 2 महीने पुराना है वीडियो सोमवार को वीडियो वायरल होने के बाद गाजियाबाद पुलिस हरकत में आई। हालांकि, पुलिस की शुरुआती जांच में यह मामला पुराना बताया जा रहा है। मौसम का तर्क: वीडियो में नजर आ रहे लोगों ने गर्म कपड़े (स्वेटर/जैकेट) नहीं पहने हैं, जबकि अभी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इस आधार पर पुलिस का मानना है कि यह वीडियो करीब 2 महीने पुराना (अक्टूबर-नवंबर के आसपास) हो सकता है। SHO का बयान: मोदीनगर के SHO आनंद मिश्रा ने बताया, "यह वीडियो मेरे चार्ज लेने से पहले का प्रतीत हो रहा है। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। रेस्टोरेंट मालिक से पूछताछ की जाएगी और वीडियो में दिख रहे चेहरों की पहचान कर सख्त कार्रवाई होगी।"   रेस्टोरेंट मालिक ने की पुष्टि रेस्टोरेंट के मालिक, कार्तिक ने पुष्टि की है कि वायरल वीडियो उनके ही प्रतिष्ठान का है। उन्होंने कहा, "यह वीडियो हमारे यहां निवाड़ी रोड पर स्थित पिज्जा क्लासिक रेस्टोरेंट का है। मेरे पिता अभी शहर से बाहर हैं, पूरी घटना की जानकारी वही दे पाएंगे, लेकिन जगह हमारी ही है।"   सवाल जो उठ रहे हैं? यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है: क्या किसी संगठन के कार्यकर्ताओं को रेस्टोरेंट में घुसकर आईडी चेक करने और मारपीट करने का अधिकार है? अगर वीडियो 2 महीने पुराना है, तो तब पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या पीड़ित पक्ष ने डर के मारे शिकायत नहीं की? 'लव जिहाद' या धर्म के नाम पर हो रही इस गुंडई पर लगाम कब लगेगी?   फिलहाल पुलिस वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।   नोट: Khabreelal इस वायरल वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है, यह रिपोर्ट पुलिस और वायरल वीडियो के आधार पर तैयार की गई है।

Unknown दिसम्बर 30, 2025 0
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गाजियाबाद न्यूज: विजयनगर में 16 साल की छात्रा से एक साल तक दरिंदगी, वीडियो वायरल करने की धमकी देकर किया रेप; गर्भवती होने पर खुला राज

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा और यूपी का शो-विंडो कहे जाने वाले गाजियाबाद (Ghaziabad) में मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक 16 साल की मासूम छात्रा न सिर्फ विश्वासघात का शिकार हुई, बल्कि एक साल तक डर और बदनामी के साये में 'हवस का शिकार' बनती रही। विजयनगर थाना क्षेत्र (Vijaynagar Police Station) की एक सोसायटी में रहने वाली इस नाबालिग के साथ जो हुआ, वह किसी भी अभिभावक की रूह कंपाने के लिए काफी है।READ ALSO:-Dhampur Breaking: बांग्लादेश की 'बर्बरता' पर धामपुर में 'विस्फोट'! दीपांकर शर्मा की हत्या से उबल पड़े रामभक्त; नगीना चौक पर धू-धू कर जला डॉ. यूनुस का पुतला   आरोपी ने पहले प्यार का नाटक रचा, फिर धोखे से वीडियो बनाया और उसी वीडियो को हथियार बनाकर छात्रा की अस्मत लूटता रहा। हद तो तब हो गई जब इस दरिंदगी के परिणामस्वरुप छात्रा गर्भवती हो गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मयंक उर्फ ऋतिक को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, लेकिन इस घटना ने समाज की सुरक्षा व्यवस्था और डिजिटल युग के खतरों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।   दहशत की दास्तां: कैसे शुरू हुआ 'शिकार' का खेल? (The Modus Operandi) पुलिस की शुरूआती जांच और पीड़िता के बयान से जो कहानी सामने आई है, वह आजकल के 'ग्रूमिंग गैंग' (Grooming Gangs) के पैटर्न से काफी मिलती-जुलती है।   लव ट्रैप (Love Trap): 16 वर्षीय छात्रा अपनी सोसायटी से कॉलेज पढ़ने जाया करती थी। इसी दौरान उसके रास्ते में मयंक उर्फ ऋतिक नामक युवक आने लगा। उसने धीरे-धीरे छात्रा का पीछा करना शुरू किया और फिर बातों ही बातों में जान-पहचान बढ़ा ली। आरोपी ने छात्रा को अपने विश्वास में लिया और एक झूठे प्रेम जाल में फंसा लिया। धोखे का वीडियो: जान-पहचान गहरी होने पर एक दिन आरोपी मयंक ने छात्रा को धोखे से अपनी कार में बैठा लिया। आरोप है कि वहां उसने छात्रा का एक आपत्तिजनक वीडियो (Objectionable Video) बना लिया। यही वह पल था जब छात्रा की जिंदगी नर्क बन गई।   ब्लैकमेलिंग का नंगा नाच: "वीडियो वायरल कर दूंगा..." वीडियो हाथ में आते ही आरोपी मयंक का असली चेहरा सामने आ गया। उसने प्यार का नाटक खत्म कर दिया और ब्लैकमेलिंग का घिनौना खेल शुरू कर दिया।   धमकी: आरोपी ने छात्रा को वह अश्लील वीडियो दिखाया और धमकी दी कि अगर उसने उसकी बात नहीं मानी, तो वह यह वीडियो उसके स्कूल, कॉलेज और रिश्तेदारों में वायरल कर देगा। कार में दरिंदगी: बदनामी के डर से सहमी छात्रा ने घुटने टेक दिए। इसका फायदा उठाकर आरोपी ने कार में ही उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। एक साल का नर्क: यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। जब भी छात्रा विरोध करती, आरोपी उसे वही वीडियो वायरल करने और जान से मारने की धमकी देता। एक साल तक यह दरिंदा नाबालिग छात्रा का यौन शोषण करता रहा। वह डर के मारे न तो पुलिस के पास जा सकी और न ही अपने माता-पिता को कुछ बता सकी।   मेडिकल मिस्ट्री: वजन बढ़ा, तो लगा हार्मोंस का खेल है इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दुखद पहलू यह है कि छात्रा गर्भवती हो गई, लेकिन परिजनों को इसकी भनक तक नहीं लगी।   शारीरिक बदलाव: पिछले कुछ महीनों से छात्रा का वजन तेजी से बढ़ रहा था। शरीर में सूजन आ रही थी। डॉक्टरों की चूक: चिंतित परिजन उसे लेकर स्थानीय डॉक्टर के पास गए। डॉक्टर ने इसे सामान्य मानते हुए कहा कि किशोरावस्था में अक्सर हार्मोंस में बदलाव (Hormonal Imbalance) आते हैं, जिससे वजन बढ़ता है। डॉक्टर ने कुछ दवाइयां दीं और 10 दिन बाद फिर आने को कहा। खून की जांच: जब दवाइयों से असर नहीं हुआ, तो खून की जांच कराई गई। वहां भी रिपोर्ट में हार्मोंस असंतुलन की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया गया। किसी ने भी यह नहीं सोचा कि 16 साल की बच्ची गर्भवती हो सकती है।   वो काली रात: जब फूटा सच का गुब्बारा बीते दिनों अचानक रात में छात्रा के पेट में असहनीय दर्द (Severe Stomach Pain) हुआ। परिजन घबरा गए और उसे तुरंत अस्पताल लेकर भागे।   अल्ट्रासाउंड ने उड़ाए होश: अस्पताल में डॉक्टरों ने जब छात्रा की गहनता से जांच की और अल्ट्रासाउंड किया, तो रिपोर्ट देखकर वे भी सन्न रह गए। डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि उनकी बेटी गर्भवती है। पैरों तले खिसकी जमीन: यह सुनते ही माता-पिता के होश फाख्ता हो गए। जिस बेटी को वे पढ़ने-लिखने भेज रहे थे, वह एक साल से किस नर्क से गुजर रही थी, इसका उन्हें अंदाजा भी नहीं था।   माँ के सामने छलका दर्द: "माँ, उसने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी" अस्पताल से घर लौटने के बाद जब माँ ने बेटी को विश्वास में लेकर पूछताछ की, तो छात्रा का सब्र का बांध टूट गया। वह फफक-फफक कर रो पड़ी।   पीड़िता का बयान: उसने रोते हुए बताया, "माँ, स्कूल के पास मयंक उर्फ ऋतिक मिलता था। उसने धोखे से कार में बैठाया, वीडियो बनाया और फिर ब्लैकमेल करके रेप करता रहा। कहता था कि किसी को बताया तो वीडियो नेट पर डाल दूंगा और तुम्हें जान से मार दूंगा।"   बेटी की आपबीती सुनकर परिवार का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने तुरंत विजयनगर थाने (Vijaynagar Police Station) का रुख किया।   पुलिस का एक्शन: आरोपी सलाखों के पीछे मामले की गंभीरता को देखते हुए गाजियाबाद पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया।   FIR दर्ज: विजयनगर थाना प्रभारी (SHO) धर्मपाल सिंह ने बताया कि पीड़ित परिवार की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी: पुलिस टीम ने त्वरित दबिश देकर आरोपी मयंक उर्फ ऋतिक को गिरफ्तार कर लिया है। न्यायिक हिरासत: आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी के मोबाइल को भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि उस वीडियो को रिकवर किया जा सके और ब्लैकमेलिंग के सबूत पुख्ता हो सकें।   समाज और अभिभावकों के लिए खतरे की घंटी यह घटना सिर्फ एक क्राइम रिपोर्ट नहीं है, बल्कि यह हर उस घर के लिए एक चेतावनी है जहां किशोर बच्चे पल रहे हैं।   1. डिजिटल युग का काला सच (Digital Trap) आजकल अपराधी हथियार के बजाय 'स्मार्टफोन' और 'वीडियो' को अपना हथियार बना रहे हैं। बच्चों को यह समझाना बेहद जरूरी है कि कोई भी गलती इतनी बड़ी नहीं होती कि उसके लिए अपनी जिंदगी और अस्मिता दांव पर लगा दी जाए। अगर कोई ब्लैकमेल करे, तो डरो मत, सीधे माता-पिता या पुलिस को बताओ।   2. संवाद की कमी (Communication Gap) छात्रा एक साल तक शोषण सहती रही, लेकिन घर में नहीं बता पाई। यह दर्शाता है कि बच्चों और माता-पिता के बीच कहीं न कहीं संवाद की कमी है। अभिभावकों को अपने बच्चों से इतना दोस्त बनकर रहना चाहिए कि बच्चा डर के बजाय भरोसे के साथ अपनी परेशानी साझा कर सके।   3. शारीरिक बदलावों पर नजर (Monitor Health Changes) परिजनों ने छात्रा के बढ़ते वजन को बीमारी समझा। अगर समय रहते सही दिशा में जांच होती या बेटी के व्यवहार (Behavior) में आए बदलावों (जैसे चुप रहना, डरे रहना, फोन छिपाना) पर गौर किया जाता, तो शायद इस दरिंदगी को पहले रोका जा सकता था।   4. कानून क्या कहता है? (Legal Aspect) पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) बेहद सख्त कानून है। इसमें नाबालिग के साथ सहमति से बनाया गया संबंध भी रेप की श्रेणी में आता है। ब्लैकमेलिंग और वीडियो वायरल करने की धमकी देना भी गंभीर अपराध है। पुलिस को चाहिए कि इस केस में 'फास्ट ट्रैक कोर्ट' के जरिए जल्द से जल्द सजा दिलाए ताकि एक नजीर पेश हो सके।   अभिभावकों के लिए 'खबरीलाल' की सलाह (Safety Tips) व्यवहार पर नजर रखें: अगर आपका बच्चा अचानक गुमसुम रहने लगे, खाना कम कर दे या चिड़चिड़ा हो जाए, तो इसे नजरअंदाज न करें। नेट मॉनिटरिंग: देखें कि बच्चा सोशल मीडिया पर किन लोगों से जुड़ा है। भरोसा जीतें: बच्चों को विश्वास दिलाएं कि मुसीबत कैसी भी हो, आप उनके साथ खड़े हैं। "लोग क्या कहेंगे" (Badnami) का डर ही अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार होता है, इस डर को खत्म करें।   गाजियाबाद पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया है, लेकिन 16 साल की उस बच्ची के मन पर लगे घाव भरने में लंबा वक्त लगेगा। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने बच्चों को कैसी सुरक्षा और संस्कार दे रहे हैं। न्याय की असली जीत तब होगी जब आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी और समाज ऐसे दरिंदों का बहिष्कार करेगा।

Unknown दिसम्बर 25, 2025 0
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हवस का 'तांडव': गाजियाबाद में डांस टीचर ने गुरु-शिष्य के रिश्ते को किया शर्मसार; बंद कमरे में छात्रा के उतरवाए कपड़े, बोला- 'होटल चलो वरना मां-बाप को मार डालूंगा'

गाजियाबाद (Ghaziabad) के लिंकरोड थाना क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल शिक्षा जगत को शर्मसार किया है, बल्कि हर उस माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है जो अपनी बेटियों को कुछ नया सीखने के लिए कोचिंग या एकेडमी भेजते हैं। कला और संस्कृति का मंदिर माने जाने वाले एक डांस स्कूल में एक 'गुरु' ने अपनी मर्यादाओं को तार-तार करते हुए अपनी ही 17 वर्षीय शिष्या (नाबालिग छात्रा) के साथ जो किया, उसे सुनकर किसी का भी खून खौल उठेगा।READ ALSO:-मेरठ में 'खाकी' शर्मसार, मॉब लिंचिंग जैसा हमला: गोकशी की रेड पर गई पुलिस टीम को भीड़ ने घेरा; सिपाही को नंगा कर पीटा, पिस्टल लूट ले गए दबंग   आरोप है कि डांस टीचर ने प्रैक्टिस के दौरान नाबालिग छात्रा के कपड़े उतरवाए, उसके साथ अश्लील हरकतें कीं और उसे होटल के कमरे में ले जाकर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है।   10 नवंबर से शुरू हुई थी 'साजिश' की क्लास प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता 17 वर्ष की है और वह एक प्रतिष्ठित इंटर कॉलेज की छात्रा है। वह अपने माता-पिता और छोटे भाई के साथ गाजियाबाद के लिंकरोड थाना क्षेत्र स्थित एक पॉश हाउसिंग सोसायटी में रहती है। उसे डांस का शौक था, जिसे पूरा करने के लिए माता-पिता ने इलाके की ही एक डांस एकेडमी में उसका एडमिशन करवाया था।   पीड़िता की मां ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि उनकी बेटी ने बीते 10 नवंबर से डांस क्लासेस जाना शुरू किया था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उस डांस टीचर की नीयत खराब होने लगी। वह डांस के स्टेप्स सिखाने की आड़ में छात्रा को गलत तरीके से छूने लगा था। छात्रा को लगा कि शायद गलती से ऐसा हुआ होगा, लेकिन टीचर की हिम्मत बढ़ती गई।   वहशीपन की हदें पार: प्रैक्टिस के बहाने अश्लील खेल पीड़ित छात्रा द्वारा पुलिस और अपनी मां को दिए गए बयान बेहद विचलित करने वाले हैं। छात्रा ने बताया कि डांस सिखाने के दौरान टीचर अक्सर कमरे का दरवाजा बंद कर लेता था।   छात्रा ने रोते हुए बताया, "वह (टीचर) मुझे कहता था कि डांस के लिए शरीर का खुला होना जरूरी है और इसी बहाने वह मेरे कपड़े उतरवा देता था। वह मेरे प्राइवेट पार्ट्स को गलत तरीके से पकड़ता था और खुद भी कई बार न्यूड (नग्न) होकर मेरे सामने अश्लील हरकतें करता था। मैं शर्म और डर के मारे कुछ बोल नहीं पाती थी।"   यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा। आरोपी टीचर लगातार छात्रा का मानसिक और शारीरिक शोषण (Physical Torture) कर रहा था। वह उसे 'गुरु' के पद का रौब दिखाकर चुप रहने पर मजबूर करता रहा।   20 दिसंबर: वह काली तारीख और होटल का दबाव दिसंबर आते-आते आरोपी टीचर का दुस्साहस सातवें आसमान पर पहुंच गया। 20 दिसंबर को जब छात्रा डांस क्लास पहुंची, तो आरोपी ने सारी हदें पार कर दीं। पीड़िता के मुताबिक, "उस दिन सर ने मुझसे कहा कि मैंने एक होटल में कमरा बुक करा दिया है। तुम्हें मेरे साथ वहां चलना होगा और हम वहां फिजिकल रिलेशन बनाएंगे। जब मैंने सख्ती से मना किया और वहां से जाने की कोशिश की, तो उन्होंने मुझे पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि अगर मेरी बात नहीं मानी तो अंजाम बुरा होगा।"   आरोपी ने छात्रा को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उसने कहा, "अगर तुमने किसी को कुछ भी बताया या पुलिस में शिकायत की, तो मैं तुम्हें पूरे समाज में बदनाम कर दूंगा। तुम्हारा करियर बर्बाद कर दूंगा और तुम्हारे मम्मी-पापा को जान से मार दूंगा।"   माता-पिता की जान खतरे में होने की बात सुनकर 17 साल की मासूम बच्ची बुरी तरह डर गई। वह चुपचाप घर लौट आई और किसी से कुछ नहीं कहा।   मां की 'ममता' ने भांप लिया खतरा इस घटना के बाद से छात्रा बेहद गुमसुम रहने लगी थी। जो लड़की पहले हंसती-खेलती रहती थी, वह अचानक अपने कमरे में बंद रहने लगी। वह न ठीक से खाना खा रही थी और न ही किसी से बात कर रही थी।   यह सिलसिला करीब 3-4 दिनों तक चला। एक मां से अपनी बेटी का यह बदलता हुआ व्यवहार छिपा नहीं रह सका। पीड़िता की मां ने बताया, "उसको इतना परेशान और डरा हुआ देखकर मेरे मन में अजीब से डर पैदा हो गए थे। मुझे लगा कि जरूर कोई बड़ी बात है। मैंने कई बार उससे पूछा, लेकिन वह टाल गई। आखिर में मैंने उसे बहुत प्यार से और विश्वास दिलाकर पूछा कि बेटा, डरो मत, मुझे बताओ क्या हुआ है?"   मां का प्यार और भरोसा मिलते ही बेटी के सब्र का बांध टूट गया। वह फफक-फफक कर रो पड़ी और हिचकियों के बीच अपनी आपबीती सुनाई। बेटी के मुंह से डांस टीचर की दरिंदगी की कहानी सुनकर मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह सन्न रह गईं कि जिस गुरु पर भरोसा करके उन्होंने अपनी बेटी को सौंपा था, वह असल में एक भेड़िया निकला।   पुलिस एक्शन: एफआईआर दर्ज, जांच तेज बेटी के खुलासे के बाद परिवार ने एक पल की भी देरी नहीं की। वे तुरंत अपनी बेटी को लेकर गाजियाबाद के लिंकरोड थाने पहुंचे। वहां पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी गई और आरोपी डांस टीचर के खिलाफ लिखित शिकायत दी गई।   मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। एडिशनल पुलिस कमिश्नर (Additional CP) आलोक प्रियदर्शी ने मीडिया से बातचीत में पुष्टि की है। उन्होंने कहा, "पीड़ित परिवार की तरफ से शिकायत मिली है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सुसंगत धाराओं में मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही उसकी गिरफ्तारी की जाएगी।"   सूत्रों के मुताबिक, पुलिस उस डांस एकेडमी के सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) खंगालने की तैयारी कर रही है और वहां मौजूद अन्य स्टाफ या छात्रों से भी पूछताछ कर सकती है। चूंकि मामला नाबालिग से जुड़ा है, इसलिए इसमें पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत भी कार्रवाई होने की प्रबल संभावना है।   कोचिंग सेंटर्स और माता-पिता के लिए खतरे की घंटी गाजियाबाद की यह घटना कोई पहली घटना नहीं है। दिल्ली-एनसीआर में कोचिंग सेंटर्स, डांस क्लास या ट्यूशन सेंटर्स में नाबालिगों के साथ छेड़छाड़ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यह घटना समाज और अभिभावकों के लिए एक 'केस स्टडी' है कि हमें कहां सतर्क रहने की जरूरत है।   1. बच्चों के व्यवहार पर नजर रखें (Parental Alertness) इस मामले में सबसे बड़ी बात यह थी कि बच्ची 3-4 दिन तक चुप रही। यह मां की सतर्कता थी कि मामला खुल गया। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अगर आपका बच्चा अचानक:   गुमसुम रहने लगे। अकेले में रोए या डरा हुआ दिखे। कोचिंग या क्लास जाने से कतराने लगे। भूख-प्यास खो दे। तो इसे सामान्य न समझें। यह किसी गहरे आघात या शोषण का संकेत हो सकता है। बच्चे से दोस्त बनकर बात करें।   2. ब्लैकमेलिंग का हथियार: 'बदनामी और धमकी' ज्यादातर मामलों में आरोपी बच्चों को दो ही चीजों से डराते हैं- "तुम्हें बदनाम कर देंगे" या "तुम्हारे माता-पिता को मार देंगे।" बच्चों को बचपन से ही यह सिखाना जरूरी है कि अगर कोई उन्हें डराता है, तो सबसे पहले आकर माता-पिता को बताएं। माता-पिता बच्चों के सबसे बड़े रक्षक (Protector) हैं।   3. एकेडमी का चयन और निगरानी (Choosing Safe Centers) किसी भी डांस, म्यूजिक या कोचिंग एकेडमी में बच्चे का एडमिशन कराने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:   क्या वहां सीसीटीवी कैमरे लगे हैं? और क्या उनकी रिकॉर्डिंग चेक की जाती है? क्या क्लासरूम के दरवाजे पारदर्शी (Glass Doors) हैं या पूरी तरह बंद रहते हैं? टीचर का बैकग्राउंड क्या है? क्या उसका पुलिस वेरिफिकेशन हुआ है? कोशिश करें कि क्लास के दौरान अभिभावक भी बीच-बीच में विजिट करें।   4. 'गुरु' पर अंधा विश्वास न करें भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है, लेकिन कलयुग में कुछ लोगों ने इस पवित्र पेशे को अपनी हवस का अड्डा बना लिया है। इसलिए, चाहे वह होम ट्यूटर हो या किसी एकेडमी का टीचर, बच्चे के साथ उसे अकेले छोड़ने से पहले पूरी तसल्ली कर लें।   आरोपी को मिले सख्त सजा इस घटना ने पूरे गाजियाबाद में रोष का माहौल पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों की मांग है कि आरोपी डांस टीचर को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सख्त से सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी की बेटी की तरफ गंदी नजर से देखने की हिम्मत न कर सके।   फिलहाल, पुलिस अपनी जांच कर रही है और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं और आरोपी जल्द ही सलाखों के पीछे होगा।   अपील: 'खबरीलाल ' अपने पाठकों से अपील करता है कि अपने बच्चों से खुलकर बात करें। उन्हें 'गुड टच और बैड टच' के बारे में बताएं। अगर आपके आसपास ऐसी कोई गतिविधि दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। आपकी सतर्कता किसी बच्चे का जीवन बचा सकती है।

Unknown दिसम्बर 25, 2025 0
ghaziabad police corruption si priya singh head constable shahid arrested by anti corruption team
Ghaziabad Police Shame: वर्दी का 'सौदागर' बनी पिंक बूथ प्रभारी; 50 हजार की रिश्वत लेते महिला दरोगा और हेड कॉन्स्टेबल 'रंगे हाथों' गिरफ्तार, घसीटते हुए ले गई टीम

उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि को सुधारने के लिए जहां एक तरफ डीजीपी से लेकर मुख्यमंत्री तक सख्त निर्देश जारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ पुलिसकर्मी वर्दी की आड़ में भ्रष्टाचार की दुकान चला रहे हैं। गाजियाबाद के मुरादनगर थाने में शनिवार को जो हुआ, उसने पूरे पुलिस महकमे को शर्मसार कर दिया है। खाकी पर दाग लगाने वाले कोई और नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए तैनात 'पिंक बूथ' (Pink Booth) की प्रभारी महिला दरोगा और थाने का 'सिस्टम' चलाने वाला एक हेड कॉन्स्टेबल था।READ ALSO:-UP Police Digital Strike: यूपी में अब 'मुखबिर' बनने से नहीं लगेगा डर, व्हाट्सएप बॉट 'पुलिस सतर्क मित्र' लॉन्च; आपकी पहचान रहेगी 'टॉप सीक्रेट'   मेरठ से आई एंटी करप्शन (Anti-Corruption) टीम ने एक फिल्मी ड्रामे की तरह जाल बिछाकर महिला सब-इंस्पेक्टर (SI) प्रिया सिंह और हेड कॉन्स्टेबल शाहिद अली को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। गिरफ्तारी का मंजर इतना खौफनाक था कि टीम को आरोपियों को घसीटते हुए गाड़ी तक ले जाना पड़ा। इस कार्रवाई की भनक लगते ही थाने में मौजूद एक अन्य भ्रष्ट दरोगा मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया।   यह पूरा मामला दहेज उत्पीड़न के एक केस (Dowry Harassment Case) से जुड़ा है, जिसमें निर्दोष माता-पिता का नाम निकालने के बदले 'खाकी के सौदागरों' ने 2 लाख रुपये की डिमांड की थी। केमिकल वाले नोट और 'लाल' पानी का सच इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी की पटकथा मेरठ एंटी करप्शन यूनिट ने बेहद गोपनीय तरीके से लिखी थी। टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर कृष्णापाल सिंह और इंस्पेक्टर अर्चना कर रही थीं। योजना के मुताबिक, पीड़ित रजनीश त्यागी को केमिकल (Phenolphthalein Powder) लगे नोटों की गड्डी दी गई थी।   जैसे ही रजनीश मुरादनगर थाने पहुंचा और डील के मुताबिक 50 हजार रुपये महिला दरोगा प्रिया सिंह और हेड कॉन्स्टेबल शाहिद के हाथों में थमाए, वैसे ही सादे कपड़ों में पहले से तैनात एंटी करप्शन टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।   सबूत का वैज्ञानिक परीक्षण: गिरफ्तारी के तुरंत बाद टीम ने मौके पर ही 'वॉश टेस्ट' कराया। जैसे ही दरोगा और सिपाही के हाथ पानी के जग में डलवाए गए, पानी का रंग गहरा लाल (Pink/Red) हो गया। यह इस बात का वैज्ञानिक प्रमाण था कि उन्होंने केमिकल लगे नोटों को अपने हाथों से छुआ और स्वीकार किया है। थाने में अफरा-तफरी: अपनी ही पुलिस को गिरफ्तार होते देख थाने में हड़कंप मच गया। एंटी करप्शन टीम ने बिना समय गंवाए दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया और उन्हें खींचते हुए अपनी गाड़ियों में बैठाकर मोदीनगर थाने ले गई, जहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया।   फ्लैशबैक: क्या था पूरा मामला? भ्रष्टाचार की इस कहानी की शुरुआत हापुड़ जिले के खड़खड़ी गांव से होती है। यहां के रहने वाले रजनीश त्यागी की शादीशुदा जिंदगी में विवाद चल रहा था।   12 अक्टूबर की FIR: रजनीश त्यागी के खिलाफ उसकी पत्नी ने मुरादनगर थाने में 12 अक्टूबर को दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना का खेल: इस केस की विवेचना (Investigation) मुरादनगर थाने की पिंक बूथ प्रभारी, सब-इंस्पेक्टर प्रिया सिंह के पास थी। आरोप है कि विवेचना के नाम पर प्रिया सिंह ने रजनीश और उसके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। जेल भेजने का डर: प्रिया सिंह ने रजनीश पर दबाव बनाया कि अगर उसने पैसे नहीं दिए, तो वह उसके बूढ़े माता-पिता (मां कुसुम त्यागी और पिता संजीव त्यागी) को भी जेल भेज देगी। सौदा 2 लाख का: माता-पिता का नाम चार्जशीट से हटाने (Clean Chit) के लिए दरोगा ने सीधे 2 लाख रुपये की मांग की। रजनीश ने हाथ-पैर जोड़े, लेकिन वर्दी का नशा सिर चढ़कर बोल रहा था।   हेड कॉन्स्टेबल शाहिद: थाने का 'अघोषित ठेकेदार' इस पूरे खेल में महिला दरोगा अकेली नहीं थी। उसके साथ डील को अंजाम देने वाला मुख्य किरदार था हेड कॉन्स्टेबल शाहिद अली।   2006 बैच का सिपाही: शाहिद अली मूल रूप से बुलंदशहर के गुलावठी थाना क्षेत्र के सोहनपुर गांव का निवासी है। वह 2006 में पुलिस में भर्ती हुआ था और प्रमोशन पाकर हेड कॉन्स्टेबल बना था। थाने में रसूख: स्थानीय सूत्रों और पुलिसकर्मियों की मानें तो मुरादनगर थाने में शाहिद अली का सिक्का एकतरफा चलता था। थाने में कौन सा केस दर्ज होगा, किसे पकड़ना है और किसे छोड़ना है—यह सब शाहिद की मर्जी से तय होता था। वह थाने में एक पुलिसकर्मी कम और 'ठेकेदार' की तरह ज्यादा काम करता था। इस रिश्वत कांड में भी पैसों की नेगोशिएशन (मोलभाव) शाहिद ही कर रहा था। 50 हजार में फिक्स हुई डील: काफी मिन्नतों के बाद, शाहिद और प्रिया सिंह 2 लाख से घटकर 50 हजार रुपये एडवांस लेने पर राजी हुए।   दरोगा प्रिया सिंह: नई नौकरी, पुरानी आदतें गिरफ्तार महिला दरोगा प्रिया सिंह की प्रोफाइल देखकर हर कोई हैरान है। वह अभी पुलिस महकमे में बिल्कुल नई थीं, लेकिन भ्रष्टाचार के तौर-तरीकों में वह किसी पुराने खिलाड़ी से कम नहीं थीं।   प्रोफाइल: 28 वर्षीय प्रिया सिंह फिरोजाबाद जिले के गांव गढ़ी हट्टी की रहने वाली हैं। बैच: वह 2023 बैच की दरोगा हैं। यानी उनकी सर्विस को अभी बमुश्किल 2 साल भी पूरे नहीं हुए हैं। पोस्टिंग: मेरठ में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 13 मार्च 2023 को उनकी पहली पोस्टिंग गाजियाबाद में हुई थी। उनकी तेज-तर्रार छवि को देखते हुए उन्हें मुरादनगर थाने के महत्वपूर्ण 'पिंक बूथ' का प्रभारी बनाया गया था। पिंक बूथ बनाने का मकसद महिलाओं को सुरक्षा देना था, लेकिन यहां रक्षक ही भक्षक बन बैठे।   "वॉट्सऐप कॉल ओनली": बचने का शातिर तरीका आरोपी पुलिसकर्मी कितने शातिर थे, इसका अंदाजा उनके बातचीत के तरीके से लगाया जा सकता है।   सर्विलांस का डर: प्रिया सिंह और शाहिद अली जानते थे कि नॉर्मल कॉल रिकॉर्ड की जा सकती है या सर्विलांस पर ली जा सकती है। इसलिए वे कभी भी नॉर्मल कॉल पर पैसों की बात नहीं करते थे। टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग: रजनीश त्यागी ने बताया कि जब भी वह उन्हें नॉर्मल कॉल करता, वे उसे काट देते और पलटकर WhatsApp Call करते थे। शनिवार को भी प्रिया सिंह ने वॉट्सऐप कॉल पर ही रजनीश को धमकाया था। धमकी: गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले प्रिया सिंह ने वॉट्सऐप कॉल पर रजनीश से कहा था, "तुम मिलने में देरी कर रहे हो, इसमें नुकसान तुम्हारा ही होगा। अगर आज पैसे नहीं आए तो माता-पिता का नाम केस में डाल दूंगी।" यही कॉल उनकी गिरफ्तारी का आधार बनी।   इंस्पेक्टर अर्चना का 'मास्टरस्ट्रोक' इस पूरे ऑपरेशन की कामयाबी के पीछे मेरठ एंटी करप्शन यूनिट की इंस्पेक्टर अर्चना की सूझबूझ थी। जब रजनीश ने एंटी करप्शन विभाग में शिकायत की, तो इंस्पेक्टर अर्चना ने पहले मामले की गोपनीय जांच की। जब यह पुष्टि हो गई कि रिश्वत मांगी जा रही है, तो उन्होंने जाल बिछाया।   सादे कपड़ों में टीम: इंस्पेक्टर अर्चना और उनकी टीम मुरादनगर थाने के आसपास सादे कपड़ों में आम पब्लिक बनकर टहल रही थी। किसी को भनक नहीं लगी कि चाय की दुकान पर खड़ा व्यक्ति या फाइल लिए खड़ा शख्स एंटी करप्शन का अधिकारी हो सकता है। भगोड़ा दरोगा: कार्रवाई के दौरान एक दिलचस्प लेकिन चिंताजनक वाकया हुआ। जब एंटी करप्शन टीम ने प्रिया और शाहिद को दबोचा, तो वहां मौजूद एक अन्य दरोगा को माजरा समझ आ गया। वह तुरंत मौके से पैदल ही भाग निकला। एंटी करप्शन टीम अब उस तीसरे दरोगा की भूमिका की भी जांच कर रही है।   आगे क्या होगा? (Legal Consequences) रिश्वतखोरी में रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद अब इन पुलिसकर्मियों का करियर लगभग खत्म माना जा रहा है।   निलंबन (Suspension): गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट द्वारा दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाएगा। जेल: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं (7, 13(1)(d), 13(2)) के तहत उन्हें जेल भेजा जाएगा। ये धाराएं गैर-जमानती होती हैं। बर्खास्तगी (Dismissal): विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू होगी। चूंकि सबूत (केमिकल वाले हाथ, नोटों की बरामदगी) पुख्ता हैं, इसलिए सेवा से बर्खास्तगी की प्रबल संभावना है। संपत्ति की जांच: एंटी करप्शन यूनिट अब इनकी आय से अधिक संपत्ति की भी जांच कर सकती है।   खाकी पर बड़ा सवाल यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है:   क्या नए भर्ती होने वाले पुलिसकर्मियों को नैतिकता का पाठ नहीं पढ़ाया जा रहा? 2023 बैच की दरोगा का इतना जल्दी भ्रष्ट हो जाना ट्रेनिंग प्रक्रिया पर सवाल है। क्या थानों में 'पिंक बूथ' सिर्फ दिखावे के लिए रह गए हैं? जिस जगह पर पीड़ित महिलाएं न्याय की उम्मीद लेकर आती हैं, वहां का प्रभारी ही अगर रिश्वतखोर हो, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? हेड कॉन्स्टेबल शाहिद जैसे लोग सालों से एक ही थाने में कैसे टिके रहते हैं और पूरा 'सिस्टम' कंट्रोल करते हैं?   फिलहाल, गाजियाबाद में इस कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। एंटी करप्शन टीम ने साफ संदेश दिया है कि वर्दी का रौब दिखाकर जनता को लूटने वालों की जगह अब सिर्फ सलाखों के पीछे है।

Unknown दिसम्बर 21, 2025 0
ghaziabad love jihad case danish posed as deepak raped orphan girl forced abortion
गाजियाबाद का 'दीपक' निकला 'दानिश': कलावा बांधकर अनाथ युवती को फंसाया, होटल में रेप और 5 महीने का गर्भपात; नमाज पढ़ते देख खुला लव जिहाद का राज

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad) जिले में इंसानियत को शर्मसार करने वाला और भरोसे का कत्ल करने वाला एक बेहद संगीन मामला सामने आया है। यहां लोनी क्षेत्र में 'लव जिहाद' (Love Jihad) का एक ऐसा खौफनाक चेहरा देखने को मिला है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। एक 22 वर्षीय युवती, जिसके सिर से माता-पिता का साया पहले ही उठ चुका था, उसे एक युवक ने अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर प्रेम जाल में फंसाया। आरोपी हाथ में कलावा बांधता था और अपना नाम 'दीपक' बताता था, जबकि असल में वह विशेष समुदाय का 'दानिश' निकला।READ ALSO:-Bijnor Crime: धामपुर में खाकी वर्दीधारी का शव मिलने से सनसनी; के.एम. इंटर कॉलेज बना 'क्राइम सीन', ई-रिक्शा गायब होने से गहराया मौत का रहस्य   आरोप है कि युवक ने शादी का झांसा देकर युवती के साथ कई बार दुष्कर्म किया, उसका अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया और जब वह 5 महीने की गर्भवती हो गई, तो जबरन उसका गर्भपात (Abortion) करा दिया। इस मामले में अब हिंदू संगठनों ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।   क्या है पूरा मामला? (The Incident in Detail) घटना गाजियाबाद के अंकुर विहार थाना क्षेत्र की है। 22 वर्षीय पीड़िता अशोक विहार कॉलोनी में किराए के मकान में रहती है। पीड़िता का जीवन पहले से ही संघर्षों से भरा रहा है, क्योंकि उसके माता-पिता का देहांत हो चुका है और दुनिया में उसका अपना कहने वाला कोई नहीं है। इसी अकेलेपन का फायदा उठाकर आरोपी ने उसे अपने जाल में फंसाया।   पीड़िता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत और मीडिया को बताया कि मार्च 2025 में उसकी मुलाकात लोनी क्षेत्र के रहने वाले एक युवक से हुई थी। युवक ने अपना नाम 'दीपक' बताया। उसने अपनी कलाई पर हिंदू धर्म का पवित्र 'कलावा' बांध रखा था और वह बातचीत में खुद को पूरी तरह सनातनी हिंदू जाहिर करता था। अनाथ होने के कारण युवती को सहारे की तलाश थी और आरोपी ने हमदर्दी दिखाकर उससे दोस्ती कर ली। धीरे-धीरे यह दोस्ती नजदीकी में बदल गई।   शादी का झांसा और होटल में दरिंदगी पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने उसका विश्वास जीतने के बाद उसे शादी का प्रस्ताव दिया। जब युवती ने कहा कि वह शादी के बिना किसी भी तरह के शारीरिक संबंध में नहीं रहना चाहती, तो आरोपी ने उसे झूठा आश्वासन दिया कि वह जल्द ही उससे विधि-विधान से विवाह करेगा।   आरोप है कि इसके बाद आरोपी उसे एक होटल में ले गया। वहां उसने शादी का वादा दोहराते हुए युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाए। इतना ही नहीं, आरोपी ने धोखे से युवती का न्यूड वीडियो (Nude Video) भी बना लिया। यही वीडियो बाद में पीड़िता की बेबसी का सबसे बड़ा कारण बन गया।   ब्लैकमेलिंग का गंदा खेल (Modus Operandi) वीडियो बनाने के बाद आरोपी का रवैया पूरी तरह बदल गया। पीड़िता ने बताया, "उसने मेरी न्यूड वीडियो क्लीपिंग के जरिए मुझे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। वह लगातार मेरा यौन शोषण करता रहा। जब भी मैं शादी की बात करती, वह मुझे एक महीने बाद, दो महीने बाद का बहाना बनाकर टाल देता। मुझे डर था कि कहीं वह वीडियो वायरल न कर दे, इसलिए मैं चुपचाप उसका जुल्म सहती रही।"   पीड़िता का आरोप है कि आरोपी उसे नशीली गोलियां खिलाकर भी उसके साथ दरिंदगी करता था। इस दौरान वह गर्भवती हो गई।   5 महीने का गर्भ और अवैध गर्भपात मामले का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि आरोपी ने न केवल युवती की अस्मत लूटी बल्कि उसकी कोख भी उजाड़ दी। पीड़िता जब 5 महीने की गर्भवती हो गई, तो उसने शादी का दबाव बनाया। लेकिन आरोपी ने शादी करने से साफ इनकार कर दिया और गर्भपात कराने का दबाव बनाने लगा।   युवती के मना करने के बावजूद, आरोपी उसे लोनी के एक निजी अस्पताल (Private Hospital) में ले गया। पीड़िता ने बताया कि अस्पताल के दस्तावेजों में भी आरोपी ने अपना नाम 'दीपक' ही लिखवाया ताकि उसकी असली पहचान छिपी रहे। वहां डॉक्टरों की मिलीभगत से 5 महीने के विकसित भ्रूण का गर्भपात करा दिया गया। मेडिकल साइंस और कानून के मुताबिक, विशेष परिस्थितियों के बिना 24 सप्ताह (लगभग 6 महीने) के करीब का गर्भपात कराना गैर-कानूनी और जानलेवा हो सकता है, लेकिन निजी अस्पताल ने चंद पैसों के लिए नियमों को ताक पर रख दिया। इसके बाद युवती की शारीरिक हालत भी बिगड़ने लगी।   नमाज पढ़ते देख उड़ गए होश: ऐसे खुला राज पीड़िता को आरोपी पर शक तब हुआ जब उसने एक दिन आरोपी की एक हरकत चोरी-छिपे देख ली। पीड़िता ने बताया, "एक दिन शाम के वक्त मैंने उसे चोरी से नमाज पढ़ते हुए देख लिया। मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। जो लड़का खुद को दीपक बताता था, हाथ में कलावा बांधता था, वह नमाज पढ़ रहा था। मुझे समझ आ गया कि वह हिंदू नहीं है।"   जब युवती ने इस बात का विरोध किया और सख्ती से पूछताछ की, तो आरोपी ने अपना असली चेहरा दिखा दिया। उसने कबूल किया कि वह हिंदू नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय से है और उसका असली नाम 'दीपक' नहीं बल्कि 'दानिश' है। उसने यह भी स्वीकार किया कि हाथ में कलावा उसने सिर्फ उसे फंसाने के लिए बांधा था।   हिंदू युवा वाहिनी का हस्तक्षेप और पुलिस कार्रवाई पीड़िता ने खुद को ठगा महसूस करने के बाद हिम्मत जुटाकर अंकुर विहार थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी दानिश को गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया, लेकिन पीड़िता और हिंदू संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए धाराएं नहीं लगाईं। पुलिस ने हल्की धाराओं में केस दर्ज किया है, जिससे आरोपी को जल्द जमानत मिल सकती है।   इस मामले की जानकारी मिलते ही हिंदू युवा वाहिनी (Hindu Yuva Vahini) के पदाधिकारी सक्रिय हो गए। संगठन के जिला महामंत्री शुभम कुमार ने पीड़िता से मुलाकात की और उसे न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया।   शुभम कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "यह स्पष्ट रूप से 'लव जिहाद' का मामला है। एक सुनियोजित साजिश के तहत अनाथ हिंदू बेटी को निशाना बनाया गया। आरोपी ने अपनी धार्मिक पहचान छिपाई, कलावा बांधा और नाम बदलकर रेप किया। यह अक्षम्य अपराध है।"   डॉक्टरों और अस्पताल पर भी गिरेगी गाज? हिंदू युवा वाहिनी ने न केवल आरोपी दानिश पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, बल्कि उस निजी अस्पताल को भी कटघरे में खड़ा किया है जहां अवैध रूप से गर्भपात किया गया।   सीएमओ को पत्र: शुभम कुमार ने बताया कि उन्होंने गाजियाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को पत्र लिखा है। मांग: पत्र में मांग की गई है कि उस अस्पताल का लाइसेंस रद्द किया जाए और उन डॉक्टरों के खिलाफ भी आपराधिक मुकदमा दर्ज हो जिन्होंने बिना पुलिस सूचना और कानूनी प्रक्रिया के 5 महीने का गर्भपात किया। पुलिस अधिकारियों से मुलाकात: संगठन जल्द ही इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिलकर आरोपी पर रासुका (NSA) या गैंगस्टर एक्ट जैसी सख्त कार्रवाई की मांग करेगा।   समाज के लिए चेतावनी (Warning Sign) गाजियाबाद की यह घटना समाज के लिए एक बड़ा अलार्म है। यह दर्शाता है कि कैसे अपराधी तत्व पहचान बदलकर महिलाओं की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।   पहचान की पुष्टि: जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया या नई मुलाकातों में किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा न करें। आधार कार्ड या अन्य दस्तावेजों के जरिए पहचान की पुष्टि करना आज के दौर में जरूरी हो गया है। अकेलापन बना कमजोरी: आरोपी अक्सर उन युवतियों को निशाना बनाते हैं जो या तो परिवार से दूर हैं या अनाथ हैं। ऐसे में आस-पड़ोस और समाज की जिम्मेदारी बनती है कि वे सतर्क रहें। कानूनी जागरूकता: ब्लैकमेलिंग से डरकर चुप रहने से अपराधी का हौसला बढ़ता है। पुलिस के पास साइबर सेल और महिला थाने हैं जहां पहचान गुप्त रखकर शिकायत की जा सकती है।   न्याय की आस में पीड़िता फिलहाल आरोपी दानिश सलाखों के पीछे है, लेकिन पीड़िता का सब कुछ लुट चुका है। एक तरफ माता-पिता की कमी, दूसरी तरफ शरीर और आत्मा पर लगे जख्म। पीड़िता अब प्रशासन से गुहार लगा रही है कि उसके गुनहगार को ऐसी सजा मिले जो नजीर बने। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की जांच पर भी सभी की नजरें टिकी हैं कि क्या उस अस्पताल पर ताला लगेगा जिसने चंद पैसों के लिए एक अजन्मे शिशु की हत्या में साथ दिया?   गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने मामले की जांच तेज कर दी है और आश्वासन दिया है कि साक्ष्यों के आधार पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Unknown दिसम्बर 20, 2025 0
ghaziabad raj nagar extension murder woman killed by tenants rent dispute
गाजियाबाद में दरिंदगी की हदें पार! किराया मांगने गई मकान मालकिन की बेरहमी से हत्या; पति-पत्नी ने कुकर से वार कर लिए जान, शव के टुकड़े कर सूटकेस में भरा

Ghaziabad Murder Case: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। राजनगर एक्सटेंशन की औरा चिमेरा सोसाइटी में किराए पर रह रहे एक दंपति ने 6 महीने का बकाया किराया मांगने आई अपनी फ्लैट मालकिन दीपशिखा शर्मा (40) की बेरहमी से हत्या कर दी। इतना ही नहीं, शव को ठिकाने लगाने के लिए उन्होंने निर्ममता से उसके टुकड़े कर सूटकेस में भरे और बेड बॉक्स में छिपा दिया। पुलिस ने आरोपी पति-पत्नी अजय गुप्ता और आकृति गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है।READ ALSO:-सावधान! उत्तर भारत पर ठंड और कोहरे का 'डबल अटैक': यूपी-हरियाणा में शून्य विजिबिलिटी का खतरा, पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में बारिश का अलर्ट   किराया मांगने गई थी, लौटी लाश बनकर पुलिस के अनुसार, उमेश शर्मा फरीदाबाद में इंजीनियर हैं और उनकी पत्नी दीपशिखा शर्मा (40) गृहिणी थीं। उनका एक फ्लैट औरा चिमेरा सोसाइटी में था, जिसे उन्होंने जुलाई 2025 में अजय गुप्ता और उसकी पत्नी आकृति गुप्ता को किराए पर दिया था। पिछले 6 महीने से फ्लैट का किराया (₹18,000 प्रति माह) बकाया था।   17 दिसंबर की शाम को दीपशिखा बकाया किराया मांगने के लिए अपने फ्लैट पर गईं। रात 11:20 बजे तक जब वह घर नहीं लौटीं, तो परिजनों को चिंता हुई। उन्होंने तलाश शुरू की और सीधे बिल्डिंग में पहुँचे।  दिनांक 17.12.2025 समय करीब 11.15 बजे थाना नंदग्राम पर पीआरवी द्वारा सूचना प्राप्त हुई कि ओरा सुमेरा सोसायटी मे एक मर्डर हो गया है। थाना नंदग्राम पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर जाँच एवं पूछताछ से पाया गया कि उमेश शर्मा कि पत्नी दीपशिखा शर्मा निवासी एम-105 ओरा सुमेरा सोसायटी राजनगर… pic.twitter.com/6gKGnjRVfb — POLICE COMMISSIONERATE GHAZIABAD (@ghaziabadpolice) December 18, 2025   CCTV फुटेज से खुला राज, फिर पकड़ा गया आरोपी परिजनों ने सोसाइटी के गार्ड रूम से CCTV फुटेज चेक किए। फुटेज में दीपशिखा को अजय गुप्ता के फ्लैट में जाते हुए देखा गया, लेकिन वह बाहर आती हुई कहीं दिखाई नहीं दीं। शक गहराने पर परिवार के लोग सीधे अजय गुप्ता के फ्लैट पर पहुँचे और दरवाजा खटखटाया। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला तो पड़ोसियों की मदद से हंगामा हुआ। जब दरवाजा खुला, तो अंदर मौजूद अजय और आकृति भीड़ देखकर भागने लगे, लेकिन लोगों ने उन्हें पकड़ लिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और दंपति को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पहले तो दोनों ने गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती बरतने पर उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।    कुकर से हमला और लाश के टुकड़े आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे पिछले 6 महीने से किराया नहीं दे पा रहे थे। दीपशिखा बार-बार किराया मांग रही थीं, जिससे वे परेशान हो गए थे। 5 दिन पहले ही उन्होंने दीपशिखा की हत्या की योजना बना ली थी।   हमला: 17 दिसंबर की शाम जब दीपशिखा फ्लैट पर आईं, तो किराएदारों ने उन्हें कमरे में बंद कर दिया। दीपशिखा के चिल्लाने पर अजय और आकृति ने मिलकर उनके सिर पर कुकर से ताबड़तोड़ वार किए। गला घोंटकर हत्या: पिटाई के बाद उन्होंने दीपशिखा का दुपट्टे से गला घोंट दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। शव के टुकड़े: लाश को ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने दीपशिखा के शव को चाकू से काटकर छोटे-छोटे टुकड़े किए। छिपाने का तरीका: इन टुकड़ों को एक लाल सूटकेस में भरकर बेड बॉक्स में छिपा दिया।   पुलिस के अनुसार, उनकी योजना थी कि रात के अंधेरे में सूटकेस को मुरादनगर गंग नहर में बहा दिया जाएगा, लेकिन इससे पहले ही वे पकड़े गए।   पुलिस जांच जारी, परिजन सदमे में एसीपी नंदग्राम उपासना पांडे ने बताया कि PRV पर सूचना मिलते ही पुलिस टीम हरकत में आई। आरोपियों की निशानदेही पर फ्लैट के अंदर बेड बॉक्स से सूटकेस में बंद दीपशिखा का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया। शव देखते ही मृतका के परिजन सदमे में आ गए और चीख-पुकार मच गई। पुलिस ने उन्हें समझाकर शांत कराया।   पुलिस ने आरोपी पति-पत्नी अजय गुप्ता और आकृति गुप्ता के खिलाफ हत्या और शव को ठिकाने लगाने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। मामले में आगे की छानबीन जारी है और पुलिस अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।   गाजियाबाद में हुई इस हृदय विदारक घटना ने एक बार फिर किराएदार-मालिक संबंधों में सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर दिया है। महज किराए के विवाद को लेकर की गई यह निर्मम हत्या बताती है कि किस तरह छोटे-छोटे मुद्दे बड़े अपराधों में बदल सकते हैं। Ghaziabad Murder Case की गंभीरता को देखते हुए पुलिस जल्द से जल्द सभी दोषियों को सजा दिलाने का प्रयास कर रही है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।   गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में किराएदारों ने 6 महीने का बकाया किराया मांगने आई फ्लैट मालकिन दीपशिखा शर्मा की कुकर से हमला कर और गला घोंटकर हत्या कर दी। आरोपियों ने शव के टुकड़े कर सूटकेस में छिपा दिए थे। पुलिस ने आरोपी पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है।

Unknown दिसम्बर 18, 2025 0
unnao agra lucknow expressway accident fortuner crash 4dead op rajbhar relative ashok agrawal
उन्नाव में 'मौत' की रफ्तार 100 पार: एक्सप्रेस-वे पर फॉर्च्यूनर की छत उड़ी, सुभासपा नेता समेत 4 के शरीर के उड़ गए चिथड़े; ओपी राजभर के समधी थे मृतक

क्राइम डेस्क, उन्नाव/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उन्नाव (Unnao) जिले से गुजरने वाले आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार की सुबह कोहरे के बीच एक ऐसा भयानक हादसा हुआ, जिसने देखने वालों की रूह कांप दी। बांगरमऊ क्षेत्र में किलोमीटर संख्या-241 के पास तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर कार (Fortuner) मौत का गोला बन गई। 100 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा की रफ्तार से दौड़ रही कार का अचानक टायर फट गया, जिससे वह अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार सभी 4 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के कद्दावर नेता और ओपी राजभर के करीबी रिश्तेदार अशोक अग्रवाल भी शामिल हैं।READ ALSO:-यमुना एक्सप्रेसवे पर मौत का तांडव: कोहरे के कारण आपस में भिड़ीं बसें और कारें, 13 लोगों की जलकर मौत, 70 से ज्यादा घायल   छत उड़ गई, बोनट पिचक कर सीट तक पहुंचा हादसा सुबह करीब 5 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के मुताबिक, एक्सीडेंट की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फॉर्च्यूनर (UP14 GB 2220) की छत (Roof) हवा में उड़ गई। कार का अगला हिस्सा पूरी तरह खत्म हो गया और बोनट पिचक कर ड्राइविंग सीट तक घुस गया। हादसे का मंजर बेहद वीभत्स था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मृतकों में से एक के चेहरे के दो टुकड़े हो गए थे, जबकि ड्राइविंग सीट के बगल में बैठे युवक की गर्दन टूट चुकी थी। कार के सभी एयरबैग्स (Airbags) खुले, लेकिन टक्कर इतनी भीषण थी कि वे भी जान नहीं बचा सके। क्रेन की मदद से मलबे को काटकर शवों को बाहर निकालना पड़ा।   गाजियाबाद से लखनऊ जा रहे थे सभी मृतकों की पहचान अशोक अग्रवाल (55), उनके भतीजे अभिनव अग्रवाल (20), आकाश गुप्ता (32) और अवनीश कुशल (26) के रूप में हुई है। ये सभी गाजियाबाद के रहने वाले थे। पुलिस को गाड़ी से सुभासपा (SBSP) के झंडे और कुछ गत्ते मिले हैं, जिनमें मोमेंटो रखे थे। जानकारी के मुताबिक, ये सभी लखनऊ में आयोजित पार्टी के एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। अशोक अग्रवाल सुभासपा के व्यापार प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और गाजियाबाद में 'विपिन काला नमक फैक्ट्री' के मालिक भी थे।   ओपी राजभर की आंखें हुईं नम हादसे की खबर मिलते ही सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर (OP Rajbhar) तुरंत उन्नाव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अशोक अग्रवाल उनके पारिवारिक रिश्तेदार (समधी) बताए जा रहे हैं। राजभर ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा, "अशोक जी से मेरे पारिवारिक रिश्ते थे। यह घटना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि परिवार को यह दुख सहने की शक्ति दे।" राजभर खुद पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए मोदीनगर ले जाने की व्यवस्था में जुटे दिखे।   नींद की झपकी या दूसरी गाड़ी की टक्कर? हादसे की वजह को लेकर दो थ्योरी सामने आ रही हैं:   सीओ का बयान: बांगरमऊ के सीओ संतोष सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि ड्राइवर को नींद की झपकी आ गई, जिससे कार बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई। टायरों के निशान: मौके पर मौजूद टायरों के रगड़ने के निशान (Skid Marks) और क्षतिग्रस्त कार की स्थिति को देखकर आशंका जताई जा रही है कि शायद किसी अज्ञात वाहन ने फॉर्च्यूनर को टक्कर मारी हो या उसे बचाने के चक्कर में यह हादसा हुआ। पुलिस एक्सप्रेस-वे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि सच सामने आ सके।   कौन थे मृतक? (Profile) अशोक अग्रवाल (55): सुभासपा नेता और बड़े व्यापारी। मोदीनगर में उनकी नमक की फैक्ट्री और गोदाम है। अभिनव अग्रवाल (20): अशोक अग्रवाल का भतीजा और बीबीए फाइनल ईयर का छात्र। उसने हाल ही में एक न्यूज़ चैनल शुरू किया था। आकाश गुप्ता (32): पेशे से कंप्यूटर इंजीनियर। इनके पिता बिजली विभाग में ठेकेदार हैं। आकाश की डेढ़ साल की एक बेटी है। अवनीश कुशल (29): लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के दिल्ली प्रदेश महासचिव। वह परिवार का इकलौता बेटा था।   गाड़ी में मिले राजनीतिक सुराग पुलिस को क्षतिग्रस्त कार से सुभासपा का झंडा और गत्ते में रखे कई मोमेंटो (स्मृति चिन्ह) मिले हैं। इससे पुष्टि हुई कि ये सभी किसी समारोह में भाग लेने जा रहे थे। पार्टी कार्यालय में भी गाड़ी नंबर के जरिए ही मृतकों की शिनाख्त की गई।   यह हादसा एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर ओवर speeding और टायरों की स्थिति (Tyre Maintenance) को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।   इस हादसे ने एक बार फिर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर तेज रफ्तार और टायर फटने से होने वाली मौतों की ओर ध्यान खींचा है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और जांच जारी है।

Unknown दिसम्बर 16, 2025 0
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नैनीताल कार हादसा: मुक्तेश्वर से लौट रहे गाजियाबाद के परिवार की XUV खाई में गिरी; मामा-भांजी की मौत, 6 जिंदगी और मौत के बीच

नैनीताल (Nainital News): उत्तराखंड की हसीन वादियों में घूमने आया गाजियाबाद का एक हंसता-खेलता परिवार दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया। नैनीताल जिले के रामगढ़ (Ramgarh) क्षेत्र में पर्यटकों से भरी एक तेज रफ्तार XUV कार अनियंत्रित होकर 70 मीटर गहरी खाई में जा गिरी।READ ALSO:-मेरठ में 40% बढ़े सांस और निमोनिया के मरीज; डॉक्टर बोले- कोहरे में मॉर्निंग वॉक जानलेवा, घर में लगाएं ये 'एयर प्यूरीफायर' पौधे   इस भीषण नैनीताल कार हादसे (Nainital Car Accident) में मामा और उनकी 12 साल की भांजी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार के 6 अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों में बच्चे और महिलाएं शामिल हैं। चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंची पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और घायलों को खाई से निकालकर अस्पताल पहुंचाया।   मुक्तेश्वर से वापस लौट रहा था परिवार पुलिस के मुताबिक, यह हादसा मंगलवार (9 दिसंबर) की देर रात करीब 11:46 बजे मल्ला रामगढ़ में गागर (Gagar) के पास हुआ। गाजियाबाद के विजय नगर, शिवपुरी सेक्टर के रहने वाले सचिन अपने भाई और बहन के परिवार के साथ उत्तराखंड घूमने आए थे। वे लोग मुक्तेश्वर (Mukteshwar) की सैर कर वापस लौट रहे थे।   कार (XUV-700, नंबर UP 14 FK 1616) खुद सचिन चला रहे थे। गाड़ी में कुल 8 लोग सवार थे। बताया जा रहा है कि गागर के पास एक तीखे मोड़ पर सचिन कार से नियंत्रण खो बैठे। उन्होंने ब्रेक लगाकर गाड़ी रोकने की कोशिश की, लेकिन रफ्तार और ढलान के कारण कार सीधे गहरी खाई में समा गई।   मामा-भांजी ने तोड़ा दम, 6 घायल हादसा इतना भयानक था कि कार के परखच्चे उड़ गए। खाई में गिरने की आवाज और यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े। सूचना मिलते ही भवाली कोतवाली पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची।   रेस्क्यू टीम ने घायलों को रामगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया। दुर्भाग्यवश, अस्पताल पहुंचने से पहले ही कार चला रहे सचिन और उनकी 12 वर्षीय भांजी लक्ष्मी ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।   घायलों की स्थिति नाजुक, हल्द्वानी रेफर हादसे में घायल हुए अन्य 6 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। प्राथमिक उपचार के बाद बुधवार सुबह तीन लोगों की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल (STH) रेफर कर दिया गया है।   घायलों की सूची: नितिन (32 वर्ष) - सचिन के भाई रुचि (35 वर्ष) - सचिन की बहन कंचन (26 वर्ष) - नितिन की पत्नी शमा (8 वर्ष) - नितिन की बेटी निष्ठा (14 वर्ष) - विकास की बेटी लवीया (7 वर्ष)   रात के अंधेरे में रेस्क्यू ऑपरेशन भवाली कोतवाल प्रेम मेहरा ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ पोस्ट नैनीताल से एसआई मनीष भाकुनी के नेतृत्व में टीम रवाना की गई थी। रात का समय और गहरी खाई होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतें आईं, लेकिन जवानों ने तत्परता दिखाते हुए सभी को बाहर निकाला।   पहाड़ों पर रात का सफर जानलेवा यह नैनीताल कार हादसा एक बार फिर पहाड़ों पर रात में ड्राइविंग के खतरों को उजागर करता है। पुलिस अक्सर पर्यटकों को सलाह देती है कि पहाड़ी रास्तों पर रात के समय सफर करने से बचें, क्योंकि कोहरा और तीखे मोड़ दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। मुक्तेश्वर से लौटते समय यह परिवार रात के अंधेरे में सफर कर रहा था, जो उनके लिए काल बन गया।   फिलहाल पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और गाजियाबाद में उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है। इस घटना से विजय नगर इलाके में शोक की लहर है।   नैनीताल के रामगढ़ में मंगलवार रात हुए एक भीषण कार हादसे में गाजियाबाद के दो पर्यटकों (मामा-भांजी) की मौत हो गई। मुक्तेश्वर से लौटते समय उनकी XUV कार अनियंत्रित होकर 70 मीटर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में 6 लोग घायल हैं, जिन्हें हल्द्वानी रेफर किया गया है।

Unknown दिसम्बर 10, 2025 0
ghaziabad mother throws newborn daughter from roof killed due to son preference
गाजियाबाद में ममता का 'कत्ल': बेटा चाहिए था, तो 45 मिनट की नवजात बेटी को छत से नीचे फेंका; सिर की हड्डी के हुए दो टुकड़े

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad) जिले से एक दिल दहला देने वाली और ममता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां एक कलयुगी मां ने अपनी ही कोख से जन्मी फूल जैसी बच्ची को सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया क्योंकि उसे बेटा चाहिए था। सिहानी गेट थाना क्षेत्र के नेहरूनगर इलाके में हुई इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। गाजियाबाद में मां ने नवजात बच्ची को फेंका और उसकी निर्मम हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ में महिला ने जो खुलासे किए हैं, वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं।READ ALSO:-मेरठ में गरजा निगम का एक्शन: हापुड़ अड्डे से गोला कुआं तक सड़क हुई 'साफ', व्यापारियों के विरोध के बीच जब्त किया गया सामान   45 मिनट की जिंदगी और दर्दनाक मौत घटना 5 दिसंबर की सुबह की है। मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली झरना (19 वर्ष) ने अपनी बहन के घर पर एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची का जन्म सुबह करीब 6 बजे हुआ था। लेकिन दुनिया में आंखें खोलने के महज 45 मिनट बाद ही उसकी सगी मां ने उसे छत से नीचे फेंक दिया।   आरोपी मां ने पुलिस को बताया कि वह बच्ची को घर के पीछे खाली प्लॉट में फेंकना चाहती थी ताकि किसी को पता न चले। लेकिन उसका निशाना चूक गया और 20 फीट दूर पड़ोसी विनय रावत की छत पर जा गिरी। विनय रावत जब सुबह छत पर गए तो वहां पानी की टंकी के पीछे पॉलीथिन में लिपटी नवजात की लाश देखकर सन्न रह गए। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी।   पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खोली मां के झूठ की पोल पुलिस जब मौके पर पहुंची तो शक की सुई घर में मौजूद झरना पर घूमी। शुरुआत में झरना ने पुलिस को गुमराह करने की पूरी कोशिश की। उसने झूठी कहानी गढ़ते हुए कहा, "बेटी जब पैदा हुई तो उसकी सांस नहीं चल रही थी, वह मरी हुई थी। मुझे समझ नहीं आया तो मैंने उसे फेंकने की कोशिश की।"   लेकिन जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई, तो मां का झूठ टिक नहीं सका। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि बच्ची को पैदा होने के 1 घंटे के अंदर मार दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, गिरने की वजह से बच्ची के सिर की हड्डी दो टुकड़ों में बंट गई थी और हाथ-पैर की हड्डियों में भी फ्रैक्चर था। डॉक्टर ने साफ कहा कि जब बच्ची को फेंका गया, तब वह जिंदा थी और सांस ले रही थी।   बेटे की चाहत में बनी हत्यारन एसीपी (ACP) नंदग्राम उपासना पांडेय ने बताया कि कड़ाई से पूछताछ करने पर झरना ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसकी शादी डेढ़ साल पहले बिहार के दरभंगा निवासी बादल से हुई थी। वह और उसका पति बेटा चाहते थे।   हैरान करने वाली बात यह है कि झरना ने 5 महीने पहले दरभंगा में अवैध रूप से भ्रूण लिंग जांच (Gender Test) करवाई थी। जब उसे पता चला कि गर्भ में बेटी है, तो उसने गर्भपात (Abortion) कराने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों ने मना कर दिया। इसके बाद उसने देसी दवाइयां खाईं, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह अपनी बहन के पास गाजियाबाद आ गई।   पुलिस की कार्रवाई और सवाल आरोपी मां ने स्वीकार किया कि वह बेटी को किसी भी कीमत पर नहीं पालना चाहती थी। इसीलिए उसने योजना बनाई कि बच्ची को पैदा होते ही फेंक देगी ताकि सबको लगे कि वह गायब हो गई या मरी हुई पैदा हुई थी। पुलिस ने आरोपी मां झरना के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 91 (शिशु की हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।   पुलिस अब आरोपी महिला और बच्ची का डीएनए टेस्ट (DNA Test) भी कराएगी ताकि वैज्ञानिक रूप से भी रिश्ता साबित हो सके। साथ ही, महिला के पति और बहनोई से भी पूछताछ की तैयारी चल रही है।   गाजियाबाद में मां ने नवजात बच्ची को फेंका - यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे समाज के माथे पर लगा कलंक है। आज जब हम 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की बात करते हैं, तब बेटे की चाहत में एक मां का ऐसा क्रूर कदम उठाना बताता है कि सामाजिक मानसिकता में अभी भी बहुत बदलाव की जरूरत है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया, लेकिन उस मासूम बच्ची को न्याय दिलाने के लिए समाज को भी जागना होगा।

Unknown दिसम्बर 7, 2025 0
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Ghaziabad Crime: "हत्या नहीं करनी थी, लेकिन हाथ नहीं रुका": 12 सेकंड में ज्वेलर पर किए 10 वार; MBA पास युवक ने 'क्राइम पेट्रोल' देख रची थी खौफनाक साजिश

Modinagar Jeweler Murder: गाजियाबाद के मोदीनगर में हुए दिल दहला देने वाले गिरधारी लाल ज्वैलर्स हत्याकांड में पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे किए हैं। आरोपी अंकित गुप्ता, जो एक MBA ग्रेजुएट है, ने पुलिस कस्टडी में अपना गुनाह कबूल करते हुए कहा, "मैं सिर्फ लूटने गया था, इरादा हत्या का नहीं था, लेकिन खून देखते ही मैं रुक नहीं पाया और 12 सेकंड में 10 वार कर दिए।"READ ALSO:-मेरठ में खाकी का 'काला कारनामा': पंचनामा से बचने के लिए पुलिसवालों ने ई-रिक्शा में लादकर दूसरे इलाके में फेंकी लाश; CCTV ने खोला राज, दरोगा-सिपाही सस्पेंड   यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि ऑनलाइन ट्रेडिंग (Online Trading) की लत और कर्ज के जाल में फंसकर एक पढ़े-लिखे युवा के अपराधी बनने की कहानी है।   MBA से कातिल बनने तक का सफर पुलिस पूछताछ में अंकित ने बताया कि उसने IMR कॉलेज से MBA किया था और सालाना 6 लाख रुपये के पैकेज पर नौकरी कर रहा था। उसकी जिंदगी पटरी पर थी, लेकिन एक दोस्त की सलाह पर उसने 'बीनोमो ऐप' (Binomo App) और बिटकॉइन (Bitcoin) में निवेश करना शुरू किया।   शुरुआत में मुनाफा हुआ, लेकिन बाद में उसे भारी नुकसान झेलना पड़ा। 50 लाख का कर्ज: महज 10 दिनों में उस पर 50 लाख रुपये का कर्ज हो गया। मकान बिका: परिवार ने कर्ज चुकाने के लिए सचेतपुरी का मकान 20 लाख में बेचा। बैंक लोन: अंकित ने खुद अलग-अलग बैंकों से 30 लाख का लोन लिया, जिसके बोझ तले वह दबता चला गया।   Crime Patrol और YouTube से सीखा 'जुर्म' कर्ज से परेशान अंकित ने 2 महीने पहले लूट की योजना बनाई। उसने गोविंदपुरी मार्केट में बुजुर्ग ज्वैलर गिरधारी लाल (75) की दुकान की रेकी की। उसे पता था कि वहां सिक्योरिटी नहीं होती।   पुलिस से बचने के लिए उसने YouTube और Crime Patrol के कई एपिसोड देखे। फिंगरप्रिंट न आए: इसके लिए उसने अपनी उंगलियों पर टेप चढ़ा लिया था। मिर्च का वार: यूट्यूब पर उसने देखा कि आंखों में मिर्च झोंकने से इंसान कुछ देर के लिए अंधा हो जाता है। इसलिए उसने ब्लिंकिट (Blinkit) ऐप से चाकू, मिर्च पाउडर और कैंची मंगवाई।   12 सेकंड, 10 वार और खौफनाक मंजर 3 दिसंबर को अंकित पूरी तैयारी के साथ शोरूम में घुसा। उसने ज्वैलर गिरधारी लाल की आंखों में मिर्च पाउडर झोंका। जब उन्होंने विरोध किया, तो उसने चापड़ से हमला कर दिया।   अंकित ने बयान में कहा, "जैसे ही पहला वार किया, खून निकलने लगा। इसके बाद मैं खुद को रोक नहीं पाया और ताबड़तोड़ वार करता गया।" पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, ज्वैलर के शरीर पर गहरे घाव थे और ज्यादा खून बहने से उनकी मौत हुई।   बेटे की हिम्मत से पकड़ा गया कातिल आरोपी ने भागने का पूरा रूट मैप तैयार किया था, लेकिन ऐन वक्त पर ज्वैलर का बेटा रुपेंद्र वहां आ गया और उसने भागने का रास्ता ब्लॉक कर दिया। अंकित ने रुपेंद्र पर भी हमला किया, लेकिन शोर सुनकर भीड़ जमा हो गई और उसे पकड़ लिया गया। भीड़ ने उसकी जमकर पिटाई की और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया।   अंकित ने पुलिस से कहा, "मुझे डर था कि मेरा एनकाउंटर हो जाएगा, इसलिए मैं रातभर भगवान से प्रार्थना करता रहा। अब मैं जेल जाना चाहता हूं।"   मार्केट में व्यापारियों का गुस्सा इस जघन्य हत्याकांड के बाद गोविंदपुरी मार्केट 6 घंटे तक बंद रहा। व्यापारियों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। गोविंदपुरी मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र चौधरी ने कहा कि थाने से महज 200 मीटर दूर इतनी बड़ी वारदात होना पुलिस का फेल्योर है।   मोदीनगर में ज्वैलर गिरधारी लाल की हत्या एक MBA पास युवक अंकित गुप्ता ने ट्रेडिंग के कर्ज (Debt) को चुकाने के लिए की थी। आरोपी ने क्राइम पेट्रोल देखकर पूरी प्लानिंग की थी, लेकिन मौके पर पकड़ा गया। यह घटना ऑनलाइन ट्रेडिंग के खतरों और युवाओं में बढ़ते अपराध की ओर इशारा करती है।  

Unknown दिसम्बर 6, 2025 0
ghaziabad modinagar bullion trader murdered online gaming debt msc student arrested
Ghaziabad News: मोदीनगर में सर्राफा कारोबारी की 12 वार कर निर्मम हत्या, ऑनलाइन गेमिंग के कर्ज ने MSc पास युवक को बनाया कातिल

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। यहां मोदीनगर (Modinagar) इलाके में दिनदहाड़े एक बुजुर्ग सर्राफा कारोबारी की दुकान के अंदर घुसकर निर्मम हत्या कर दी गई। हत्यारा कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि एमएससी (MSc) पास एक शिक्षित युवक निकला, जो ऑनलाइन गेमिंग के कर्ज में डूबकर कातिल बन गया।READ ALSO:-बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई   घटना के वक्त मृतक का बेटा दुकान से महज कुछ पल के लिए बाहर गया था। वापस लौटते ही उसने पिता को खून से लथपथ और हमलावर को भागते हुए देखा। बेटे ने अदम्य साहस दिखाते हुए हथियारबंद बदमाश को मौके पर ही दबोच लिया। यह पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई है।   मिर्ची पाउडर, चापड़ और 12 वार: खौफनाक मंजर मोदीनगर की गोविंदपुरी कॉलोनी निवासी गिरधारी लाल वर्मा (Girdhari Lal Verma) पिछले 50 सालों से ज्वेलरी का कारोबार कर रहे थे। 'गिरधारी लाल एंड संस' नाम से उनकी दुकान इलाके में काफी मशहूर है। घटना गुरुवार सुबह करीब 9:15 बजे की है। गिरधारी लाल अपने बेटे उपेंद्र के साथ दुकान पहुंचे थे। उपेंद्र टॉयलेट के लिए दुकान से बाहर निकला, तभी मौका पाकर पड़ोस में रहने वाला आरोपी अंकित गुप्ता दुकान में घुस गया।   अंकित ने पहले गिरधारी लाल के चेहरे पर मिर्ची पाउडर फेंका। बुजुर्ग व्यापारी कुछ समझ पाते, उससे पहले ही आरोपी ने चापड़ (धारदार हथियार) और कैंची से उन पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आरोपी ने बुजुर्ग के सीने और गर्दन पर करीब 12 बार वार किए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।   बेटे ने जान पर खेलकर आरोपी को पकड़ा पिता की चीख सुनकर उपेंद्र जब दुकान की तरफ दौड़ा, तो उसने देखा कि हमलावर भागने की फिराक में है। उपेंद्र ने अपनी जान की परवाह किए बिना अंकित को पीछे से पकड़ लिया। खुद को घिरता देख अंकित ने अपनी जेब से तमंचा (पिस्टल) निकाल लिया और उपेंद्र पर तान दिया। दोनों के बीच काफी देर तक हाथापाई हुई। शोर सुनकर आसपास के दुकानदार भी आ गए और आरोपी को पकड़कर बुरी तरह पीटा, फिर पुलिस के हवाले कर दिया।   ऑनलाइन गेमिंग का जाल: 20 लाख हारे, 10 लाख का कर्ज पुलिस पूछताछ में मोदीनगर में सर्राफा व्यापारी की हत्या (Modinagar Jeweler Murder) के पीछे की वजह बेहद चौंकाने वाली निकली। आरोपी अंकित गुप्ता (Ankit Gupta) ने एमएससी तक पढ़ाई की है।   कर्ज का बोझ: अंकित को ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming Addiction) की बुरी लत थी। वह अब तक करीब 20 लाख रुपये हार चुका था। दबाव: उसके ऊपर लोगों का करीब 10 लाख रुपये का कर्ज हो गया था। लेनदार उसे परेशान कर रहे थे। लूट का प्लान: कर्ज चुकाने के लिए उसने अपने पड़ोसी अमीर ज्वेलर गिरधारी लाल को लूटने की योजना बनाई। वह जानता था कि सुबह के वक्त दुकान में कैश और जेवर ज्यादा होते हैं।   पुलिस से बचने के लिए 'दृश्यम' जैसा प्लान आरोपी ने वारदात को अंजाम देने के लिए शातिर दिमाग का इस्तेमाल किया था। उसने अपनी उंगलियों के पोरों पर टेप (Tape) चिपका रखा था, ताकि दुकान में या हथियार पर उसके फिंगरप्रिंट (Fingerprints) न आएं। पुलिस ने उसके पास से मिर्ची पाउडर, खून से सना चापड़, एक कैंची और तमंचा बरामद किया है।   पड़ोसी ही निकला कातिल हैरानी की बात यह है कि आरोपी अंकित का घर मृतक गिरधारी लाल के घर से महज 50 मीटर की दूरी पर है। वह बचपन से उन्हें जानता था, इसलिए उसे उनकी दिनचर्या की पूरी जानकारी थी। उसे पता था कि किस वक्त दुकान पर भीड़ कम होती है।   पुलिस का बयान: एसीपी मोदीनगर ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। आरोपी ने लूट के इरादे से हत्या की बात कबूल कर ली है। ऑनलाइन गेमिंग के एंगल की भी जांच की जा रही है।   गाजियाबाद में हुई इस घटना ने साफ कर दिया है कि ऑनलाइन गेमिंग की लत युवाओं को किस कदर अपराध की दुनिया में धकेल रही है। एक पढ़े-लिखे युवक ने चंद रुपयों के लिए एक बुजुर्ग की जान ले ली और अपना भविष्य भी बर्बाद कर लिया। व्यापारी के बेटे उपेंद्र की बहादुरी की पूरे शहर में चर्चा हो रही है, जिसने न केवल हत्यारे को पकड़ा बल्कि शायद बड़ी लूट को भी नाकाम कर दिया।

Unknown दिसम्बर 5, 2025 0
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पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है।     कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप   सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है।   सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है।  ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया।  सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया।   प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है।  ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं।    सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं।   इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया।    बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }

बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई

आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला   मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।   बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।   दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था।   अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी।   बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे।   पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया।   एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी   सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता।   पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है।   आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?

देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।   सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया?   क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है।   पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है।   दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है।   सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?"   असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है।   सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है।   विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है।   विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।"   NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है।   NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।   CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।      आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया।  डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है।     कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं:   1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।   2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है।   सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है:   पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है।   दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।   गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।"   आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए।   सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है।   फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है।     जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; Kidney की बीमारी बनी मौत का कारण

बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है।   चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था।   टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।   फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी।   Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप   किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।   इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।"   Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।   सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।

दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी।   आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:   Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi)   मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी।   रूट मैप (Route Map) और स्टेशन   मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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Unknown जनवरी 21, 2026 0

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