प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज में चल रहे माघ मेले (Magh Mela) की आस्था पर गुरुवार की देर रात एक दर्दनाक हादसे का ग्रहण लग गया। मेला क्षेत्र के सेक्टर-5 स्थित अन्नपूर्णा मार्ग पर एक टेंट में अचानक आग लगने (Prayagraj Magh Mela Fire) से वहां सो रहे एक 22 वर्षीय युवक की झुलसकर मौत हो गई। मृतक की पहचान मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी (DM) उमेश मिश्रा के रिश्तेदार के रूप में हुई है।READ ALSO:-ओला-उबर की 'दादागिरी' होगी खत्म: सरकार का बड़ा दांव, 'सहकार टैक्सी' में 0% कमीशन और ड्राइवर को 100% मुनाफा; यूपी वालों को जल्द मिलेगा तोहफा यह हादसा इतना भयानक था कि युवक को भागने का मौका तक नहीं मिला और वह 90 प्रतिशत तक जल गया। स्वरूपरानी नेहरू (SRN) अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। वहीं, शहर के पॉश इलाके मंफोर्डगंज में भी एक बड़ी आगजनी की घटना हुई, जहां एसीएम (ACM) के सरकारी आवास में आग लग गई, जिसने ऊपर की मंजिल पर रह रहे जज के परिवार को भी संकट में डाल दिया। गुरुवार की रात प्रयागराज पुलिस और दमकल विभाग के लिए चुनौती भरी रही। आइए जानते हैं दोनों घटनाओं का पूरा विवरण विस्तार से। सेक्टर-5 में 'लाक्षागृह' बना टेंट: सोता रह गया मानस माघ मेले में कल्पवास और पुण्य कमाने आए श्रद्धालुओं के लिए गुरुवार की रात काली रात साबित हुई। सेक्टर-5 के अन्नपूर्णा मार्ग पर लगे एक टेंट में रात करीब 9:30 बजे अचानक लपटें उठने लगीं। मृतक की पहचान: हादसे का शिकार हुए युवक की पहचान मानस मिश्रा (22) पुत्र अजय मिश्रा के रूप में हुई है। वह प्रयागराज के ही सरायइनायत थाना क्षेत्र के लीलापुर कलां का रहने वाला था। सूत्रों के मुताबिक, मानस मुजफ्फरनगर के डीएम उमेश मिश्रा (DM Umesh Mishra) का रिश्ते में भतीजा लगता था। वह मेले में कल्पवास या स्नान के सिलसिले में रुका हुआ था। आंख झपकते ही विकराल हुई आग: प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने की घटना इतनी तेजी से हुई कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। रात का समय होने के कारण मानस टेंट के भीतर गहरी नींद में सो रहा था। कड़ाके की ठंड से बचने के लिए टेंट चारों तरफ से बंद था। जैसे ही आग भड़की, सिंथेटिक कपड़े और अंदर रखे सामान ने आग पकड़ ली और पूरा टेंट आग के गोले में तब्दील हो गया। 90 फीसदी झुलसा शरीर, अस्पताल में तोड़ा दम आग की लपटें देखकर मेला क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के कल्पवासियों और सुरक्षाकर्मियों ने शोर मचाया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग (Fire Brigade) की टीम मौके पर पहुंची। फायर फाइटर्स ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और मानस को बाहर निकाला। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आग की लपटों में घिरा मानस बुरी तरह झुलस चुका था। पुलिस ने उसे तत्काल एम्बुलेंस से स्वरूपरानी नेहरू (SRN) अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों का बयान: अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल लाते समय मानस का शरीर 90 प्रतिशत तक जल चुका था। उसकी हालत बेहद नाजुक थी। आईसीयू में रखकर उसे बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन घटना के करीब 2 से 3 घंटे बाद उसने दम तोड़ दिया। पुलिस अधीक्षक का बयान: माघ मेला पुलिस अधीक्षक (SP Magh Mela) नीरज कुमार पांडेय ने घटना की पुष्टि की है। उन्होंने मीडिया को बताया, "देर रात सेक्टर-5 में आग लगने की सूचना प्राप्त हुई थी। रेस्क्यू टीम ने युवक को बाहर निकाला, लेकिन वह गंभीर रूप से झुलस चुका था। इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और परिजनों को सूचित कर दिया गया है।" आग का कारण: शॉर्ट सर्किट या अलाव? अभी तक आग लगने की असली वजह साफ नहीं हो पाई है, लेकिन पुलिस और फायर विभाग दो पहलुओं पर जांच कर रहे हैं: शॉर्ट सर्किट (Short Circuit): टेंट में बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट होने की आशंका जताई जा रही है। अक्सर अस्थाई कनेक्शन में तारों के ढीले होने या हीटर के लोड से स्पार्किंग हो जाती है। अलाव (Bonfire/Heater): ठंड से बचने के लिए टेंट के अंदर हीटर या अलाव का इस्तेमाल भी हादसे की वजह हो सकता है। बंद टेंट में ऑक्सीजन की कमी और ज्वलनशील पदार्थों की मौजूदगी इसे जानलेवा बना देती है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया है और सबूत जुटाए हैं ताकि आग के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। दूसरी घटना: ACM के घर सुलगी आग, जज के परिवार की जान पर बन आई माघ मेले की घटना की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि शहर के मंफोर्डगंज इलाके में एक और वीआईपी आवास आग की चपेट में आ गया। यह आग एसीएम (प्रथम) अरुण कुमार यादव के सरकारी आवास पर लगी। गोदाम हुआ खाक, ऊपर तक पहुंची लपटें: अरुण कुमार यादव के आवास के नीचे वाले हिस्से में स्थित गोदाम (Store Room) में शॉर्ट सर्किट से चिंगारी उठी और देखते ही देखते उसने विकराल रूप ले लिया। आग इतनी भीषण थी कि लपटें पहली मंजिल तक पहुंच गईं। जज योगेश जैन के घर नुकसान: उसी इमारत की ऊपरी मंजिल पर जज योगेश जैन अपने परिवार के साथ रहते हैं। आग की तपिश से जज के घर की खिड़कियों के शीशे चटक गए। बालकनी में रखे गमले और पौधे जलकर राख हो गए। खिड़कियां टूट गईं और घर में धुआं भर गया। भागकर बचाई जान: आग का भयावह रूप देखकर जज योगेश जैन और उनके परिवार ने तत्काल घर से बाहर भागकर अपनी जान बचाई। गनीमत रही कि दमकल की 2 गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर समय रहते आग पर काबू पा लिया, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। एसीएम के गोदाम में रखा सारा सरकारी और निजी सामान जलकर खाक हो गया। प्रशासन के लिए अलार्म बेल (Alarm Bell for Administration) एक ही रात में दो बड़ी आगजनी की घटनाएं प्रयागराज प्रशासन और माघ मेला प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े करती हैं। माघ मेला, जिसे दुनिया के सबसे बड़े अस्थायी शहरों में गिना जाता है, वहां फायर सेफ्टी हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। मेला क्षेत्र में जोखिम क्यों? फूस और कपड़े के टेंट: मेला क्षेत्र में लाखों टेंट लगते हैं जो ज्वलनशील पदार्थों से बने होते हैं। बिजली का जाल: हर टेंट में बिजली के अस्थायी कनेक्शन होते हैं। गैस और चूल्हे: कल्पवासी टेंट में ही खाना बनाते हैं, जिससे गैस सिलेंडर या चूल्हे से आग लगने का खतरा बना रहता है। प्रशासन का दावा है कि मेले में दर्जनों फायर स्टेशन बनाए गए हैं और हर सेक्टर में दमकल गाड़ियां मौजूद हैं। सेक्टर-5 की घटना में भी दमकल समय पर पहुंची, लेकिन आग की तीव्रता ने युवक को बचने का मौका नहीं दिया। सुरक्षा अपील: टेंट में बरतें ये सावधानियां इस दुखद घटना से सबक लेते हुए, मेला प्रशासन और विशेषज्ञों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे टेंट में रहते समय विशेष सावधानी बरतें: हीटर का प्रयोग सावधानी से करें: सोते समय हीटर या ब्लोअर चालू करके न छोड़ें। अलाव टेंट के बाहर जलाएं: टेंट के भीतर कभी भी कोयले या लकड़ी का अलाव न जलाएं। इससे आग लगने के साथ-साथ दम घुटने (Asphyxia) का भी खतरा रहता है। वायरिंग चेक करें: अगर टेंट में कोई तार कटा है या स्पार्किंग हो रही है, तो तुरंत बिजली विभाग को सूचित करें। ज्वलनशील पदार्थ दूर रखें: पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाला कपूर, घी और तेल सुरक्षित स्थान पर रखें। मानस मिश्रा की मौत ने माघ मेले के उल्लास को गम में बदल दिया है। मुजफ्फरनगर डीएम के रिश्तेदार होने के चलते प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, एसीएम आवास में लगी आग ने वीआईपी सुरक्षा और सरकारी आवासों के मेंटेनेंस पर ध्यान खींचने का काम किया है। प्रशासन को चाहिए कि वे मेला क्षेत्र में फायर सेफ्टी ऑडिट को और सख्त करें ताकि भविष्य में किसी और 'मानस' को अपनी जान न गंवानी पड़े। हम मृतात्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।
सर्दी की ठिठुरन भरी शाम जब लोग अपने घरों में गर्माहट की तलाश में दुबके हुए थे, तब मुजफ्फरनगर के पॉश इलाके में एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। सोमवार की शाम नई मंडी कोतवाली क्षेत्र (New Mandi Kotwali Area) के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। यहां स्थित वसुंधरा रेजिडेंसी (Vasundhara Residency) में एक मकान के भीतर हुए भीषण सिलेंडर ब्लास्ट और आगजनी ने पल भर में एक हंसते-खेलते परिवार को खत्म कर दिया।Read also:-मेरठ में 'प्यार का खूनी अंत': "प्लीज बाबू, मेरे प्यार को मत ठुकराओ, मैं मर जाऊंगा..."; प्रेमिका के इनकार पर रेलवे सुपरवाइजर ने बाग में लगाई फांसी, भाई ने खोला 'ब्लैकमेलिंग' का काला राज इस भयावह हादसे में राजस्व विभाग के एक कानूनगो (Kanoongo), उनकी बुजुर्ग मां और उनके छोटे भाई की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई। आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि उन्हें बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। हालांकि, कुदरत का करिश्मा कहिए या पालतू जानवर की वफादारी, कानूनगो की पत्नी और दो बेटियों की जान सिर्फ इसलिए बच गई क्योंकि वे हादसे के वक्त अपने पालतू कुत्ते (Dog) को टहलाने के लिए घर से बाहर निकली हुई थीं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस घटना ने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सिलेंडर और अंगीठी के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि उस खौफनाक शाम को आखिर हुआ क्या था, कैसे एक अंगीठी काल बन गई और चश्मदीदों ने उस मंजर के बारे में क्या बताया। 1. सोमवार की शाम: 5:30 बजे, जब धमाकों से दहल उठी कॉलोनी घटना सोमवार शाम करीब 5:30 बजे की है। वसुंधरा रेजिडेंसी के फेज-3 में रहने वाले लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे। तभी अचानक एक मकान की दूसरी मंजिल से जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी। यह धमाका इतना तेज था कि आसपास के कई मकान हिल गए और लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाके के साथ ही अमित गौड़ के फ्लैट से आग की ऊंची-ऊंची लपटें और काला धुआं निकलता दिखाई दिया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, एक के बाद एक दो सिलेंडर फटने (Cylinder Blast) की आवाजें आईं। इन धमाकों ने आग को और विकराल बना दिया और पूरे घर को एक भट्ठी में तब्दील कर दिया। कॉलोनी में अफरा-तफरी मच गई। लोग बाल्टियों में पानी लेकर दौड़े, लेकिन आग की तपिश इतनी ज्यादा थी कि कोई भी घर के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। चीख-पुकार और सायरन की आवाजों ने शाम की शांति को मातम में बदल दिया। 2. तीन पीढ़ियों का अंत: जो घर में थे, वो राख हो गए इस हादसे ने एक ही झटके में परिवार के तीन अहम सदस्यों को छीन लिया। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है: अमित गौड़ (50 वर्ष): ये सहारनपुर की देवबंद तहसील में कानूनगो के पद पर तैनात थे और परिवार के मुखिया थे। सुशीला देवी (68 वर्ष): अमित गौड़ की बुजुर्ग मां। नितिन गौड़ (45 वर्ष): अमित के छोटे भाई। कैसे हुआ हादसा? शुरुआती जांच और परिजनों के बयानों से जो तस्वीर साफ हुई है, वह बेहद दर्दनाक है। बताया जा रहा है कि अमित की पत्नी रिचा ने बताया कि घर में उनकी सास (सुशीला देवी) ठंड से बचने के लिए अंगीठी (Brazier) जलाकर बैठी थीं। अमित अपने कमरे में टीवी देख रहे थे और उनके छोटे भाई नितिन दूसरे कमरे में आराम कर रहे थे। आशंका जताई जा रही है कि अंगीठी की चिंगारी किसी ज्वलनशील पदार्थ पर गिरी होगी, जिससे कमरे में आग लग गई। आग ने पास रखे रसोई गैस सिलेंडर को अपनी चपेट में ले लिया। सिलेंडर के गर्म होने से उसमें भीषण विस्फोट हुआ, जिसने पूरे घर की छत और दीवारों को हिला दिया। आग इतनी तेजी से फैली कि घर के अंदर मौजूद तीनों लोगों को संभलने या भागने का कोई मौका नहीं मिला और वे वहीं फंसकर रह गए। 3. 'कुत्ते' ने बचाई तीन जानें: कुदरत का करिश्मा जहाँ एक तरफ आग ने तीन जिंदगियां लील लीं, वहीं दूसरी तरफ परिवार के बाकी सदस्यों का बचना किसी चमत्कार से कम नहीं लगता। हादसे के वक्त अमित की पत्नी रिचा और उनकी दो बेटियां—अक्षिका और आराध्या घर में नहीं थीं। रिचा ने रोते-बिलखते हुए बताया कि वे शाम को करीब 4 बजे अपनी बेटियों के साथ अपने पालतू कुत्ते (Dog) को टहलाने के लिए घर से नीचे पार्क में गई थीं। इसके अलावा, शाम 5 बजे उन्हें डॉक्टर के पास भी जाना था, क्योंकि वे डिप्रेशन का इलाज करवा रही थीं। रिचा ने बताया: "हम जल्दी घर वापस आ ही रहे थे कि कॉलोनी में शोर मचा। जब हम घर के पास पहुंचे तो देखा कि वहां भयंकर आग लगी है। सब कुछ जल रहा था। अगर हम उस वक्त घर के अंदर होते, तो शायद हम भी जिंदा नहीं बचते। हमारे डॉगी को टहलाने की आदत ने आज मेरी और मेरी बच्चियों की जान बचा ली, लेकिन मेरा सब कुछ उजड़ गया।" यह संयोग ही था कि डॉग को घुमाने की दिनचर्या ने मां और बेटियों को मौत के मुंह से बाहर खींच लिया, लेकिन जब वे लौटीं तो उनके पास रोने के सिवाय कुछ नहीं बचा था। 4. रेस्क्यू ऑपरेशन: 30 मिनट की जद्दोजहद धमाकों की आवाज सुनकर पड़ोसियों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचित किया। सूचना मिलते ही एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति (SP City Satyanarayan Prajapati), सीओ नई मंडी और फायर विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू: फायर ब्रिगेड के जवानों ने जान पर खेलकर पानी की बौछारें शुरू कीं। संकरी सीढ़ियां और दूसरी मंजिल पर आग होने के कारण रेस्क्यू में दिक्कतें आईं, लेकिन करीब 30 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। शवों की बरामदगी: जब आग बुझी और धुआं छटा, तो पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई। अंदर का मंजर रोंगटे खड़े करने वाला था। घर का सारा सामान जलकर खाक हो चुका था। पुलिस को तीन शव बुरी तरह जली हुई हालत में मिले। घायल: रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना की तपिश और बचाव कार्य के दौरान करीब 4 लोग झुलस गए या घायल हुए, जिनमें परिवार की महिलाएं (जो बाद में वहां पहुंचीं) और कुछ मदद करने वाले लोग शामिल हो सकते हैं। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। 5. जांच और पुलिस का बयान एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति ने घटना स्थल का मुआयना करने के बाद मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने कहा: "कंट्रोल रूम के जरिए पुलिस को सूचना मिली थी कि वसुंधरा रेजिडेंसी के फेज-3 में एक मकान में आग लगी है। पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। मकान के अंदर से 3 लोगों के शव बरामद हुए हैं। प्राथमिक जांच में पता चला है कि घर में अंगीठी जल रही थी, जिससे आग लगने की आशंका है। मौके पर दो सिलेंडर फटे हुए मिले हैं। फॉरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।" पुलिस ने बताया कि स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। यह भी जांच की जा रही है कि क्या सिलेंडरों में कोई लीकेज थी या अंगीठी की लापरवाही ही मुख्य वजह बनी। 6. शामली का रहने वाला था परिवार पीड़ित परिवार मूल रूप से शामली (Shamli) के बड़ा बाजार का रहने वाला था। अमित गौड़ सरकारी नौकरी के चलते मुजफ्फरनगर में रह रहे थे। वे यहां वसुंधरा कॉलोनी में किराए के मकान में सेकेंड फ्लोर पर रहते थे, जबकि उनका पुश्तैनी जुड़ाव शामली से था। अमित गौड़ एक सम्मानित सरकारी कर्मचारी थे और देवबंद तहसील में उनकी अच्छी साख थी। उनकी मौत की खबर से देवबंद तहसील और शामली में भी शोक की लहर दौड़ गई है। उनके सहकर्मी और रिश्तेदार इस खबर पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं। 7. चश्मदीदों की जुबानी: "ऐसा लगा जैसे बम फटा हो" घटना के वक्त मौके पर मौजूद पड़ोसी शिव कुमार वर्मा ने बताया कि मंजर कितना भयानक था। उन्होंने कहा: "हम अपने घरों में थे तभी जोर का धमाका हुआ। ऐसा लगा जैसे कोई बम फटा हो। हम बाहर भागे तो देखा अमित जी के घर से आग निकल रही थी। आग बहुत भयंकर थी। हमें पता था कि घर में 3 लोग हैं, लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई अंदर जाने की हिम्मत नहीं कर सका। फिर एक और सिलेंडर फटने की आवाज आई। थोड़ी ही देर में सब कुछ खत्म हो गया। बाकी 3 लोग (पत्नी और बेटियां) बाहर थे, शायद वो कुत्ता घुमाने गए थे, इसलिए बच गए।" अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पहले घर से धुआं निकला और फिर आग की लपटें दिखीं। शोर सुनकर जब लोग इकट्ठा हुए, तब सिलेंडरों के ब्लास्ट हुए। इससे यह आशंका पुख्ता होती है कि आग पहले लगी और सिलेंडर बाद में इसकी चपेट में आए। 8. सर्दियों में 'अंगीठी' बनी काल: सुरक्षा सबक मुजफ्फरनगर का यह हादसा हम सभी के लिए एक गंभीर चेतावनी है। सर्दियों में बंद कमरों में हीटर, ब्लोअर और अंगीठी का इस्तेमाल आम है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों की राय और सुरक्षा नियम: वेंटिलेशन जरूरी: अंगीठी जलाते समय कमरे में हवा के आने-जाने का रास्ता (Ventilation) जरूर रखें। अंगीठी से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड (Carbon Monoxide) जहरीली होती है और नींद में ही जान ले सकती है। दूरी बनाए रखें: हीटर या अंगीठी को पर्दों, बिस्तरों, सोफे या ज्वलनशील पदार्थों (जैसे गैस सिलेंडर) के पास कभी न रखें। इस हादसे में अंगीठी और सिलेंडर की समीपता ही ब्लास्ट का कारण बनी। सोते समय बंद करें: सोने से पहले अंगीठी या हीटर को बुझाना न भूलें। गैस लीकेज: समय-समय पर गैस पाइप और रेगुलेटर की जांच करें। सर्दियों में पाइप कड़क हो जाते हैं और लीक होने का खतरा बढ़ जाता है। मुजफ्फरनगर के वसुंधरा रेजिडेंसी में हुए इस अग्निकांड ने कई सवाल पीछे छोड़ दिए हैं। एक छोटी सी चूक—अंगीठी को सिलेंडर या ज्वलनशील चीजों के पास रखना—तीन जिंदगियों पर भारी पड़ गई। अमित गौड़ का परिवार अब कभी पूरा नहीं हो पाएगा। रिचा और उनकी बेटियों के सिर से पिता और पति का साया उठ गया है। प्रशासन ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कानूनी कार्रवाई जारी है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। हम सभी को इससे सबक लेते हुए अपने घरों में आग से बचाव के उपायों पर ध्यान देना चाहिए। घटनाक्रम एक नजर में (Timeline of Tragedy) शाम 4:00 बजे: अमित की पत्नी रिचा और बेटियां कुत्ते को टहलाने घर से निकलीं। शाम 5:00 बजे: घर में सास अंगीठी जलाकर बैठी थीं, अमित टीवी देख रहे थे। शाम 5:30 बजे: घर में आग लगी, संभवतः अंगीठी से। शाम 5:35 बजे: आग फैलने से सिलेंडर में जोरदार धमाका हुआ। शाम 5:40 बजे: पड़ोसियों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। शाम 6:00 बजे: फायर ब्रिगेड ने पहुंचकर आग बुझाना शुरू किया। शाम 6:30 बजे: आग पर काबू पाया गया, 3 शव बरामद हुए। FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) Q1: मुजफ्फरनगर में आग कहां लगी थी? Ans: आग नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के वसुंधरा रेजिडेंसी (Vasundhara Residency) फेज-3 स्थित एक मकान की दूसरी मंजिल पर लगी थी। Q2: हादसे में कितने लोगों की मौत हुई? Ans: इस हादसे में 3 लोगों की मौत हुई—कानूनगो अमित गौड़, उनकी मां सुशीला और भाई नितिन। Q3: आग लगने का कारण क्या था? Ans: प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आग घर में जल रही अंगीठी से लगी, जिसके बाद वहां रखे गैस सिलेंडरों में विस्फोट हो गया। Q4: परिवार के बाकी सदस्य कैसे बचे? Ans: अमित की पत्नी रिचा और उनकी दोनों बेटियां घटना के वक्त अपने पालतू कुत्ते को टहलाने के लिए घर से बाहर गई हुई थीं, इसलिए उनकी जान बच गई। Q5: मृतक अमित गौड़ कहां तैनात थे? Ans: मृतक अमित गौड़ सहारनपुर जिले की देवबंद तहसील में कानूनगो (राजस्व निरीक्षक) के पद पर तैनात थे।
रिपोर्ट: सिटी डेस्क मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) उत्तर प्रदेश का मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) जिला इस समय मौसम की सबसे कठिन परीक्षा से गुजर रहा है। एक तरफ हाड़ कंपा देने वाली सर्दी (Cold Wave) ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया है, तो दूसरी तरफ बढ़ते प्रदूषण (Pollution) ने सांस लेना दूभर कर दिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए कक्षा 8 तक के सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया है।READ ALSO:-Bijnor News: जब आधी रात को 'सिंघम' अंदाज में सड़कों पर उतरीं DM जसजीत कौर; रैन बसेरों की हकीकत जांची, गरीबों को उढ़ाया 'उम्मीद' का कंबल सोमवार को शहर में मौसम का एक अजीब मिजाज देखने को मिला। कोहरे की चादर थोड़ी झीनी जरूर हुई, लेकिन ठंडी हवाओं ने सिहरन और बढ़ा दी। दिन भर सूर्य देवता के दर्शन दुर्लभ रहे और लोग ठंड से बचने के लिए जद्दोजहद करते नजर आए। बड़ा फैसला: बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल बंद लगातार गिरते तापमान और खतरनाक स्तर पर पहुंचे प्रदूषण को देखते हुए जिला प्रशासन ने नौनिहालों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। ठंड और कोहरे के कारण सुबह के समय दृश्यता कम होने और बच्चों के बीमार पड़ने के खतरे को देखते हुए कक्षा नर्सरी से 8वीं तक के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। अभिभावकों ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस गलन भरी सर्दी और प्रदूषण में बच्चों को स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं था। फिलहाल, यह आदेश आगामी निर्देशों तक प्रभावी रहेगा। मौसम का हाल: पारा चढ़ा, पर हवा ने बिगाड़ा खेल सोमवार को मौसम के आंकड़ों ने थोड़ी राहत के संकेत दिए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही रही। तापमान में वृद्धि: मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस था, जो सोमवार को बढ़कर 13 डिग्री सेल्सियस हो गया। आंकड़ों में यह 4 डिग्री की राहत थी। हवा की रफ्तार: तापमान बढ़ने के बावजूद ठंड कम नहीं हुई, इसका मुख्य कारण हवा की गति रही। रविवार को हवा 3 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही थी, जो सोमवार को दोगुनी होकर 6 किमी/घंटा हो गई। इन तेज सर्द हवाओं ने 'विंड चिल फैक्टर' (Wind Chill Factor) को बढ़ा दिया, जिससे तापमान 13 डिग्री होने के बावजूद लोगों को 7-8 डिग्री जैसी ठंड महसूस हुई। कोहरे और प्रदूषण का 'कॉकटेल' मुजफ्फरनगर में ठंड के साथ-साथ प्रदूषण भी लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। कोहरा और धुआं मिलकर 'स्मॉग' (Smog) की परत बना रहे हैं। सोमवार को दृश्यता (Visibility) में थोड़ा सुधार जरूर हुआ। रविवार को जहां दृश्यता शून्य (Zero) थी, वहीं सोमवार को यह बढ़कर 50 से 100 मीटर तक पहुंच गई। इससे सड़कों पर रेंगते वाहनों की गति में मामूली सुधार आया, लेकिन खतरा बरकरार है। वाहन चालक दिन में भी हेडलाइट्स और इंडिकेटर जलाकर चलते नजर आए। प्रदूषण के कारण कई लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत भी हो रही है। दिन भर छाया रहेगा 'कोल्ड डे' मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अधिकतम तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है। लेकिन, कोहरे की परत और धूप न निकलने के कारण दिन भर गलन बनी रहेगी। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण आने वाले दिनों में कोहरा फिर से घना हो सकता है। यह राहत महज कुछ घंटों की हो सकती है, इसलिए अभी सर्दी से पूरी तरह निजात मिलने के आसार नहीं हैं। अन्नदाता परेशान: रबी की फसल पर संकट किसानों के लिए यह मौसम दोहरी चिंता लेकर आया है। एक तरफ वे खुद कड़ाके की ठंड में खेतों में काम करने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ उनकी फसल पर भी खतरा मंडरा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि: फंगस का खतरा: लगातार कोहरा और धूप की कमी से वातावरण में नमी बढ़ गई है। इससे आलू, सरसों और गेहूं की फसल में फंगस (Fungus) लगने का डर है। बढ़त रुकी: धूप न मिलने से पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे फसलों की ग्रोथ रुक सकती है। स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी: 'सांस के मरीज रहें सतर्क' ठंड और प्रदूषण के इस खतरनाक मिश्रण को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। बुजुर्ग और बच्चे: इन्हें सुबह और देर शाम घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। सांस के मरीज: अस्थमा और सीओपीडी (COPD) के मरीजों के लिए यह मौसम जानलेवा हो सकता है। उन्हें इन्हेलर साथ रखने और मास्क पहनने की हिदायत दी गई है। हार्ट पेशेंट्स: अत्यधिक ठंड में नसों के सिकुड़ने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए छाती में दर्द या भारीपन को नजरअंदाज न करें। मुजफ्फरनगर फिलहाल सर्दी, कोहरे और प्रदूषण के 'ट्रिपल अटैक' का सामना कर रहा है। स्कूलों की छुट्टी से बच्चों को तो राहत मिल गई है, लेकिन आम जनजीवन अभी भी पटरी पर नहीं लौटा है। आने वाले दिनों में मौसम के और बिगड़ने के आसार हैं, ऐसे में प्रशासन और आम जनता दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है। FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) Q1: मुजफ्फरनगर में स्कूल क्यों बंद किए गए हैं? Ans: कड़ाके की ठंड, घने कोहरे और बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कक्षा 8 तक के स्कूल बंद किए गए हैं। Q2: सोमवार को मौसम में क्या बदलाव देखा गया? Ans: सोमवार को दृश्यता 50-100 मीटर तक सुधरी और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री हुआ, लेकिन हवा की गति 6 किमी/घंटा होने से ठंड बढ़ गई। Q3: क्या आगे और ठंड बढ़ने की संभावना है? Ans: हाँ, मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के कारण आने वाले दिनों में कोहरा और घना हो सकता है। Q4: इस मौसम में किन लोगों को ज्यादा खतरा है? Ans: बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी बीमारियों (दमा, अस्थमा) से पीड़ित लोगों को ठंड और प्रदूषण से सबसे ज्यादा खतरा है।
मुजफ्फरनगर/बाराबंकी, क्राइम डेस्क। सोशल मीडिया पर अनजान चेहरों से दोस्ती और रातों-रात अमीर बनने की चाहत किस तरह जिंदगी भर की कमाई डुबो सकती है, इसका जीता-जागता उदाहरण मुजफ्फरनगर में सामने आया है। यहाँ साइबर ठगों ने फेसबुक पर दोस्ती की आड़ में एक व्यक्ति से 3 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर ली।READ ALSO:-मेरठ में खाकी दागदार: एंटी करप्शन ने बिछाया जाल, 4 लाख की रिश्वत लेते इंस्पेक्टर रंगे हाथों गिरफ्तार मंगलवार को मुजफ्फरनगर की थाना साइबर क्राइम पुलिस को इस मामले में एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी। पुलिस ने करोड़ों रुपये की इस ठगी को अंजाम देने वाले हाई-प्रोफाइल गिरोह के तीसरे और अहम सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी के पास से आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद हुए हैं, जिनका इस्तेमाल वह लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए करता था। क्या है पूरा मामला? (The Case File) घटना की शुरुआत 09 अक्टूबर 2025 को हुई थी। मुजफ्फरनगर के नई मंडी क्षेत्र के निवासी सचिन कुमार ने साइबर क्राइम थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। फेसबुक फ्रेंडशिप बनी मुसीबत: सचिन कुमार ने पुलिस को बताया कि फेसबुक के जरिए उनकी दोस्ती एक अज्ञात व्यक्ति से हुई थी। शुरू में सामान्य बातचीत हुई, जिससे सचिन का भरोसा जीता गया। इसके बाद उस 'वर्चुअल दोस्त' ने सचिन को शेयर बाजार और ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश कर मोटा मुनाफा (High Return on Investment) कमाने का लालच दिया। 3 करोड़ 9 लाख की चपत: ठगों की बातों में आकर सचिन ने अलग-अलग तारीखों में, अलग-अलग बैंक खातों में कुल 3 करोड़ 09 लाख 22 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब मुनाफा तो दूर, मूल रकम भी वापस नहीं मिली और संपर्क टूट गया, तब सचिन को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। पुलिस का एक्शन: अब तक 3 गिरफ्तार एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ के नेतृत्व में साइबर सेल ने इस मामले को गंभीरता से लिया। पैसों के डिजिटल फुटप्रिंट (Digital Footprint) का पीछा करते हुए पुलिस ने गिरोह की परतें खोलनी शुरू कीं। पहली सफलता (07 दिसंबर 2025): पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए इसी महीने की शुरुआत में दो मुख्य आरोपियों—मौहम्मद माज और अम्बरीश मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। ताजा गिरफ्तारी (मंगलवार): पूछताछ और सर्विलांस से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने अब गिरोह के तीसरे साथी खालिद (पुत्र इनामूलहक) को गिरफ्तार किया है। खालिद मूल रूप से साईपुरम बस्ती, थाना कोतवाली नगर, बाराबंकी का रहने वाला है। बरामदगी: गिरफ्तार अभियुक्त खालिद के कब्जे से पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण बरामद किए हैं: 2 स्मार्टफोन (जिनसे सोशल मीडिया हैंडल ऑपरेट होते थे)। 1 लैपटॉप (जिससे ट्रांजेक्शन और फर्जी डॉक्यूमेंट बनाए जाते थे)। 1 वाईफाई राउटर। बेरोजगारी ने बनाया साइबर अपराधी: खालिद की कहानी पुलिस पूछताछ में आरोपी खालिद ने जो खुलासा किया, वह आज के युवाओं के लिए एक सबक है। खालिद ने बताया कि वह बेरोजगार था और नौकरी की तलाश में भटक रहा था। पैसों की तंगी के चलते वह जल्द से जल्द अमीर बनना चाहता था। इसी दौरान वह साइबर फ्रॉड करने वाले एक बड़े नेटवर्क के संपर्क में आया। मोडस ऑपरेंडी (अपराध का तरीका): फर्जी सोशल मीडिया पेज: खालिद और उसके साथी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी प्रोफाइल और पेज बनाते थे, जो दिखने में बिल्कुल असली और प्रोफेशनल लगते थे। 50 खातों का मायाजाल: पुलिस के मुताबिक, खालिद ने अब तक 50 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने (Layering) के लिए किया है। ये खाते अक्सर फर्जी दस्तावेजों पर या गरीब लोगों को कमीशन का लालच देकर खुलवाए जाते थे। नेटवर्क का रोल: खालिद का काम शिकार को फंसाना और पैसों के ट्रांजेक्शन को मैनेज करना था। राहत की खबर: 50 लाख रुपये होंगे वापस साइबर क्राइम पुलिस की त्वरित कार्रवाई का ही नतीजा है कि पीड़ित सचिन कुमार के लिए राहत की उम्मीद जगी है। पुलिस ने बताया कि ठगी गई रकम में से लगभग 50 लाख रुपये विभिन्न खातों में फ्रीज (Freeze) करा दिए गए हैं। कोर्ट की प्रक्रिया के जरिए यह रकम जल्द ही पीड़ित को वापस दिलाने की कार्रवाई चल रही है। गहराई से विश्लेषण: कैसे काम करता है यह 'इनवेस्टमेंट स्कैम'? मुजफ्फरनगर का यह मामला 'पिग बुचरिंग स्कैम' (Pig Butchering Scam) या इन्वेस्टमेंट फ्रॉड का क्लासिक उदाहरण है। पाठकों को इससे सावधान रहने की जरूरत है। ठग आमतौर पर 4 चरणों में काम करते हैं: संपर्क और विश्वास (Building Trust): सोशल मीडिया (Facebook/Whatsapp) पर दोस्ती करना। ये अक्सर अमीर लाइफस्टाइल दिखाते हैं। छोटा मुनाफा (The Bait): शुरू में पीड़ित से छोटी रकम (जैसे 5-10 हजार) निवेश करवाई जाती है और तुरंत उन्हें अच्छा मुनाफा वापस दे दिया जाता है। इससे पीड़ित को लगता है कि प्लेटफार्म असली है। बड़ी रकम (The Trap): विश्वास जीतने के बाद, वे पीड़ित को 50 लाख या 1 करोड़ जैसी बड़ी रकम लगाने को कहते हैं। गायब होना (The Ghosting): जैसे ही बड़ी रकम ट्रांसफर होती है, ऐप या वेबसाइट पर पैसा तो दिखता है लेकिन उसे निकाला (Withdraw) नहीं जा सकता। टैक्स या फीस के नाम पर और पैसे मांगे जाते हैं और अंत में ठग गायब हो जाते हैं। एसपी क्राइम की अपील: बचाव ही सुरक्षा है एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति के निवेश प्रस्तावों पर भरोसा न करें। साइबर सुरक्षा के 5 सुनहरे नियम: अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट: फेसबुक या इंस्टाग्राम पर अनजान लोगों, विशेषकर जो विदेशी होने का दावा करें या अमीर दिखें, उनकी फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से बचें। SEBI रजिस्ट्रेशन: शेयर बाजार में निवेश करने से पहले चेक करें कि सलाहकार या ऐप SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) से रजिस्टर्ड है या नहीं। अवास्तविक मुनाफा: याद रखें, अगर कोई स्कीम 'बहुत कम समय में बहुत ज्यादा मुनाफे' का वादा कर रही है, तो 99% वह फ्रॉड है। अकाउंट की जाँच: किसी के कहने पर निजी बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर न करें। हेल्पलाइन 1930: अगर आपके साथ साइबर ठगी हो जाए, तो तुरंत 1930 डायल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। 'गोल्डन ऑवर' (शुरुआती 1-2 घंटे) में शिकायत करने से पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। मुजफ्फरनगर पुलिस की यह कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है, जिसने न केवल एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है, बल्कि डिजिटल अपराधियों को यह संदेश भी दिया है कि कानून के हाथ उनकी सोच से भी ज्यादा लंबे हैं।
मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar News) से कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक मस्जिद के मुअज्जिन (अजान देने वाले) ने सरेआम पुलिस दारोगा की गर्दन काटने की धमकी दे डाली। धमकी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और उसकी तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है।READ ALSO:-'फिल्मी' स्टाइल में खौफनाक धमकी: बिजनौर में दूल्हे को शादी से पहले और बाद में मिले जानलेवा खत; लिखा- 'सिक्योरिटी हटेगी तो घर में घुसकर मारेंगे' यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है, जहां कानून के रखवालों को ही जान से मारने की धमकी दी गई है। यह घटना तब घटी जब आरोपी मुअज्जिन अपनी शिकायत लेकर संगठन के लोगों के साथ अधिकारियों के पास पहुंचा था। अजान और लाउडस्पीकर को लेकर हुआ था विवाद जानकारी के मुताबिक, यह पूरा विवाद दो दिन पहले शुरू हुआ था। मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar News) के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के मदीना चौक स्थित मदीना मस्जिद के मुअज्जिन मोहम्मद इरफान ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। इरफान का कहना था कि कच्ची सड़क चौकी इंचार्ज विनोद चौधरी ने अजान के दौरान लाउडस्पीकर की आवाज तेज होने की बात कहकर उसके साथ बदसलूकी और मारपीट की। इस घटना के विरोध में गुरुवार को 'जमीयत उलेमा-ए-हिंद' (Jamiat Ulema-e-Hind) के कार्यकर्ता और मुअज्जिन इरफान एक ज्ञापन सौंपने के लिए एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। वे पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। कैमरे के सामने खोया आपा, दी 'गर्दन काटने' की धमकी एसएसपी कार्यालय के बाहर या किसी सार्वजनिक स्थान पर जब इरफान जमीयत के कार्यकर्ताओं और मीडिया के कैमरों के सामने अपनी आपबीती सुना रहा था, तभी वह जोश में होश खो बैठा। अपनी शिकायत बताते-बताते वह अचानक आक्रामक हो गया और उसने दारोगा विनोद चौधरी के लिए बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। वायरल वीडियो में आरोपी मुअज्जिन को साफ तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह दारोगा की "गर्दन काट देगा"। यह वीडियो किसी ने रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (Twitter) और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर अपलोड कर दिया। वीडियो के वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आ गया। पुलिस ने दर्ज की FIR, आरोपी फरार वीडियो के संज्ञान में आते ही मुजफ्फरनगर पुलिस (Muzaffarnagar News) ने कड़ा रुख अपनाया है। धमकी देने वाले वीडियो की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने आरोपी मुअज्जिन मोहम्मद इरफान के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। सीओ सिटी (CO City) मुजफ्फरनगर, सिद्धार्थ के. मिश्रा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया: "सोशल मीडिया और एक्स के माध्यम से पुलिस को एक वीडियो प्राप्त हुआ था। इस वीडियो में एक व्यक्ति दारोगा के संबंध में हिंसक टिप्पणी करते हुए और गर्दन काटने की धमकी देते हुए नजर आ रहा है। वीडियो का संज्ञान लेते हुए आरोपी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस की टीमें आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही हैं, वह फिलहाल फरार है।" सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश? पुलिस इस मामले को केवल एक धमकी के तौर पर नहीं, बल्कि माहौल खराब करने की कोशिश के तौर पर भी देख रही है। मुजफ्फरनगर एक संवेदनशील जिला माना जाता है, ऐसे में पुलिसकर्मी को सरेआम काटने की धमकी देना कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए। फिलहाल, आरोपी मुअज्जिन अपने घर से फरार बताया जा रहा है और पुलिस उसकी लोकेशन ट्रेस करने में जुटी है। मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar News) की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो कितनी जल्दी कानून व्यवस्था के लिए खतरा बन सकते हैं। एक तरफ जहां मुअज्जिन ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया था, वहीं अब खुद दारोगा को जान से मारने की धमकी देकर वह कानून के शिकंजे में बुरी तरह फंस गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जल्द गिरफ्तारी का दावा कर रही है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में आयोजित सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए 11 महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। रविवार (16 नवंबर 2025) को हुई इस पंचायत में उत्तर प्रदेश समेत कई पड़ोसी राज्यों से लगभग 15 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। पंचायत ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और आधुनिक जीवनशैली के कथित दुष्प्रभावों पर विचार करते हुए कई परंपराओं को बदलने और नए सामाजिक नियम लागू करने की घोषणा की है।READ ALSO:-बिजनौर में मतदाता सूची महाअभियान: 25 नवंबर तक का अल्टीमेटम, DM जसजीत कौर ने BLO को दिए 'मिशन मोड' में काम करने के निर्देश इन फैसलों में सबसे बड़े बदलाव मृत्यु के बाद किए जाने वाले भोज 'तेरहवीं' पर रोक लगाने और प्रेम विवाह (Love Marriage) तथा लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सख्त नियम बनाने से संबंधित हैं। 'तेरहवीं' पर पूर्ण प्रतिबंध: एक बड़ा सामाजिक सुधार पंचायत द्वारा लिया गया सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला तेरहवीं (Terahvin) की प्रथा को समाप्त करने से संबंधित है। फैसला: सर्वखाप पंचायत ने घोषणा की है कि अब से, किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर 13वें दिन या किसी अन्य दिन होने वाला सामुदायिक भोज (सामूहिक भोजन/तेरहवीं) नहीं होगा। उद्देश्य: इस परंपरा को बंद करने के पीछे मुख्य उद्देश्य गरीबी और आर्थिक बोझ को कम करना है। अक्सर गरीब परिवारों को भी दिखावे या सामाजिक दबाव के कारण तेरहवीं के आयोजन पर भारी खर्च करना पड़ता है, जिससे वे कर्ज में डूब जाते हैं। विकल्प: पंचायत ने सुझाव दिया है कि मृतक के परिवार को यदि कुछ करना है, तो वे केवल परिवार के सदस्यों के लिए एक छोटा सा शांति पाठ या हवन कर सकते हैं। इस कदम को समाज के कई वर्गों ने एक प्रगतिशील सामाजिक सुधार (Social Reform) बताया है, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय स्थिरता लाने में मदद करेगा। लिव-इन और लव मैरिज पर सख्त नियम पंचायत ने लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) और प्रेम विवाह (Love Marriage) की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसे पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया। 1. लिव-इन रिलेशनशिप का विरोध मांग: पंचायत ने केंद्र सरकार से मांग की है कि लिव-इन रिलेशनशिप को दी गई कानूनी मान्यता तत्काल समाप्त की जाए। कारण: खाप नेताओं का तर्क है कि लिव-इन रिलेशनशिप से समाज में अराजकता और नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है, और महिलाओं तथा बच्चों के भविष्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। (External link: Legal analysis of Live-in Relationship laws in India) 2. लव मैरिज के लिए अनिवार्य अनुमति नया नियम: पंचायत ने फैसला किया है कि अब से, किसी भी युवक या युवती को लव मैरिज या कोर्ट मैरिज करने के लिए अपने माता-पिता की लिखित परमिशन और उनकी मौजूदगी अनिवार्य होगी। तर्क: पंचायत का कहना है कि माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों की गैरमौजूदगी में किए गए विवाह अक्सर परिवारों और समाज में गंभीर विरोध, अलगाव और झगड़े पैदा करते हैं। माता-पिता की सहमति से विवाह होने पर दोनों परिवारों में सामंजस्य बना रहता है। अन्य 11 बड़े फैसलों की सूची तेरहवीं और लिव-इन नियमों के अलावा, सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत ने 11 सूत्रीय एजेंडे के तहत कई अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक निर्णय लिए: नशाबंदी: ग्रामीण क्षेत्रों में शराब और नशे के बढ़ते चलन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। शादियों में खर्च सीमित: शादियों में होने वाले दिखावे और फिजूलखर्ची को नियंत्रित किया जाएगा। दहेज के लेन-देन पर भी सख्ती से रोक लगाई जाएगी। खाप का विस्तार: युवाओं को खाप पंचायत से जुड़ने और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा। शिक्षा पर ज़ोर: लड़कियों की शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी समुदायों को एकजुट होने का आह्वान किया गया है। आपसी भाईचारा: सांप्रदायिक सद्भाव और अंतर-सामुदायिक भाईचारे को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। मुजफ्फरनगर की सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत के 11 बड़े फैसले, विशेष रूप से तेरहवीं बंद करने और लव मैरिज में माता-पिता की अनुमति अनिवार्य करने से संबंधित, उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ये निर्णय सामाजिक दबाव और आधुनिकता के बीच संतुलन साधने की खाप पंचायतों की कोशिश को दर्शाते हैं। अब देखना होगा कि इन फैसलों को ग्रामीण और शहरी समाज में कितनी व्यापकता और सख्ती से लागू किया जाता है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के डीएवी कॉलेज में फीस विवाद के चलते आत्मदाह का प्रयास करने वाले छात्र उज्ज्वल राणा की रविवार देर शाम दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दुखद मौत हो गई। इस घटना ने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। मुजफ्फरनगर में छात्र की आत्मदाह के बाद मौत से आक्रोशित सैकड़ों छात्र-छात्राएं, परिजन और किसान नेता सोमवार को कॉलेज परिसर में सड़क पर उतरे और विरोध प्रदर्शन किया। भारी हंगामे के बाद जिला प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर आरोपी प्रिंसिपल, पीटीआई और दोषी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है।READ ALSO:-AK-47 लेकर चलती थी लखनऊ की 'लेडी डॉक्टर'! आतंकी डॉ. मुजम्मिल की गर्लफ्रेंड शाहीन फरीदाबाद से अरेस्ट, J&K पुलिस साथ ले गई आर्थिक तंगी और अपमान का दर्द मृतक छात्र उज्ज्वल राणा मूल रूप से बागपत के भड़ल गांव का रहने वाला था और डीएवी कॉलेज में बी.ए. के तीसरे सेमेस्टर का छात्र था। उसका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। फीस विवाद: उज्ज्वल की 7,000 रुपये फीस में से केवल 1,750 रुपये जमा हो पाए थे, जबकि बकाया 5,250 रुपये था। बकाया फीस के लिए कॉलेज प्रबंधन लगातार उस पर दबाव बना रहा था। आत्मदाह का कारण: परिजनों के अनुसार, प्रिंसिपल ने उसे सबके सामने बेइज्जत किया था। अपमान से आहत होकर उसने कॉलेज परिसर में पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया था, जिसमें वह गंभीर रूप से झुलस गया। प्रदर्शनकारियों का धरना और टिकैत का बयान उज्ज्वल राणा की मौत के बाद उसके शव को तिरंगे में लपेटकर सोमवार को डीएवी कॉलेज के गेट पर रखकर सैकड़ों छात्र-छात्राओं, खाप चौधरी, सामाजिक और किसान संगठनों ने धरना प्रदर्शन किया। किसान नेता का आरोप: भाकियू नेता राकेश टिकैत भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया, "उज्ज्वल राणा को सिस्टम ने मरवाया। वह तीन दिन तक पुलिस-प्रशासन और कॉलेज के प्राचार्य के चक्कर काटता रहा, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। आखिर में उसने जान दे दी।" आत्मदाह का वायरल वीडियो: सोशल मीडिया पर उज्ज्वल राणा के क्लास रूम का एक भावुक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उसने आत्मदाह से ठीक पहले अपनी आपबीती सुनाई थी और कॉलेज प्रिंसिपल प्रदीप कुमार, पीटीआई और दोषी पुलिसकर्मियों पर मारपीट और गाली-गलौज का सीधा आरोप लगाया था। प्रशासन का आश्वासन और कार्रवाई सोमवार को करीब 4 घंटे चले प्रदर्शन के बाद एडीएम प्रशासन एफ गजेंद्र पाल सिंह मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बात की। गिरफ्तारी का वादा: घंटों की बातचीत के बाद, प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि 48 घंटे के भीतर आरोपी कॉलेज प्रधानाचार्य, पीटीआई, और दोषी पुलिसकर्मियों (जिनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज है) की गिरफ्तारी की जाएगी। अन्य मांगें: एडीएम ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच, परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। परिजन सहमत: प्रशासन के आश्वासन के बाद ही मृतक छात्र के परिजन और संगठन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। सख्त कार्रवाई की मांग प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे में गिरफ्तारी नहीं होती है, तो सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जिला प्रशासन के सामने मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी, और कॉलेज परिसर में मृतक छात्र की प्रतिमा लगाए जाने की भी मांगें रखी हैं। उज्ज्वल के चाचा सचिन राणा ने कहा कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, उन्हें संतुष्टि नहीं मिलेगी। यह घटना उत्तर प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में फीस के नाम पर उत्पीड़न और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव के गंभीर मुद्दे को उजागर करती है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र स्थित डीएवी कॉलेज (DAV College) में बीए थर्ड सेमेस्टर के एक छात्र उज्जवल राणा ने फीस विवाद के चलते कॉलेज परिसर में पेट्रोल छिड़ककर खुद को आग लगा ली। यह घटना शनिवार दोपहर को हुई, जिससे पूरे कॉलेज में हड़कंप मच गया। साथी छात्रों ने मुश्किल से अपने स्कूल बैग की मदद से आग बुझाई, लेकिन तब तक छात्र गंभीर रूप से झुलस चुका था। पुलिस ने छात्र को अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसे गंभीर हालत में मेरठ रेफर कर दिया गया है।READ ALSO:-बिजनौर में हैवानियत: किरतपुर थाना क्षेत्र में पिता ने मासूम बच्ची से किया रेप, आरोपी फरार; Bijnor Police तलाश में जुटी ₹5250 की फीस बनी विवाद की जड़ घायल छात्र उज्जवल राणा का थर्ड सेमेस्टर चल रहा था। विवाद का मुख्य कारण बकाया फीस और परीक्षा फॉर्म जमा न करना था। फीस विवाद: छात्र को कॉलेज में कुल ₹7,000 फीस जमा करनी थी, जिसमें से उसने ₹1,750 जमा कर दिए थे। बाकी बकाया ₹5,250 को लेकर कॉलेज प्रशासन लगातार उस पर दबाव बना रहा था। परीक्षा फॉर्म रोका: छात्र के फीस जमा न कर पाने की स्थिति में, कॉलेज ने उसका परीक्षा फॉर्म जमा करने से इनकार कर दिया और कथित तौर पर उसके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया। इसी प्रताड़ना से व्यथित होकर युवक ने यह आत्मघाती कदम उठाया। वायरल वीडियो: घटना से एक दिन पहले, छात्र उज्जवल राणा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी जारी किया था, जिसमें उसने कॉलेज प्रिंसिपल और कुछ पुलिसकर्मियों पर मारपीट और गाली-गलौज करने का गंभीर आरोप लगाया था। प्रिंसिपल और पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप आत्मदाह के प्रयास के बाद पुलिस की कार्रवाई और छात्र के बयान सामने आए हैं। छात्र का आरोप: वायरल वीडियो में उज्जवल राणा ने कहा था कि अगर वह परेशान होकर आत्महत्या करता है या उसे कुछ होता है, तो उसके जिम्मेदार कॉलेज प्रिंसिपल प्रदीप कुमार और कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मी होंगे। घटना का दृश्य: घटना के समय कुछ छात्रों ने क्लासरूम में आग की लपटों से लिपटे छात्र का वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर लिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। परिजनों का धरना: छात्र की हालत गंभीर होने के कारण परिजन ग्रामीणों के साथ मिलकर कॉलेज के गेट पर धरने पर बैठ गए हैं और आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने दी कार्रवाई की जानकारी सीओ बुढ़ाना, गजेंद्र पाल सिंह ने मामले की पुष्टि की और पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी। सीओ का बयान: सीओ ने बताया कि छात्र के कॉलेज प्रिंसिपल के साथ फीस के पैसों को लेकर विवाद था। इसी विवाद से व्यथित होकर छात्र ने अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। तत्काल मदद: पुलिस ने तुरंत छात्र को सीएचसी बुढ़ाना पहुंचाया, जहां से उसे गंभीर हालत के चलते मेरठ रेफर किया गया। डॉक्टरों की राय: डॉक्टरों ने बताया है कि छात्र अब खतरे से बाहर है। उकसाने वालों पर कार्रवाई: सीओ ने आश्वस्त किया है कि छात्र को आत्महत्या की कोशिश के लिए उकसाने में जो भी लोग शामिल हैं, उनके खिलाफ कठोर जांच के बाद आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रताड़ना के आरोपों की जांच कॉलेज परिसर में हुई इस घटना ने फीस विवाद और शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Muzaffarnagar Police अब प्रिंसिपल और कथित पुलिसकर्मियों पर लगाए गए प्रताड़ना के आरोपों की गहन जांच करेगी। प्रशासन को इस बात का पता लगाना होगा कि क्या कॉलेज प्रशासन द्वारा फीस के लिए दबाव बनाने की प्रक्रिया सही थी या नहीं।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस के एक चौंकाने वाले कारनामे से हड़कंप मच गया। यहाँ गांधी कॉलोनी चौकी पर पुलिस ने एक स्कूटी सवार का चालान ₹20 लाख 74 हजार का काट दिया। स्कूटी मालिक अनमोल सिंघल को जब यह भारी-भरकम चालान थमाया गया, तो उनके होश उड़ गए। यह विवादित चालान सोशल मीडिया पर वायरल होते ही, पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया, जिसके बाद आनन-फानन में पुलिस ने इस चालान को सही कर ₹4 हजार का कर दिया।READ ALSO:-PM-AJAY योजना: 50 हजार का अनुदान, खुद का कारोबार शुरू करने का सुनहरा मौका; 10 नवंबर है लास्ट डेट, ऐसे करें अप्लाई बिना कागज और लाइसेंस के पकड़ी गई स्कूटी यह मामला बीती 4 नवंबर का है, जब नई मंडी कोतवाली क्षेत्र स्थित गांधी कॉलोनी चौकी पर वाहन चेकिंग की जा रही थी। स्कूटी सवार: अनमोल सिंघल नामक स्कूटी सवार को चेकिंग के दौरान रोका गया। उल्लंघन: चालान में यह हवाला दिया गया था कि स्कूटी सवार ने न तो हेलमेट लगाया हुआ था, न उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस (DL) था, और न ही स्कूटी के वैध कागजात थे। कार्रवाई: इन सभी उल्लंघनों के चलते स्कूटी को पुलिस द्वारा जब्त (Seized) कर लिया गया था। 207 MV Act की जगह, 20 लाख का जुर्माना स्कूटी मालिक अनमोल सिंघल ने जब इस चालान की रसीद सोशल मीडिया पर वायरल की, तो मुजफ्फरनगर पुलिस हरकत में आई। गड़बड़ी: अधिकारियों की जांच में सामने आया कि यह गलती एक सब इंस्पेक्टर की टाइपिंग मिस्टेक थी। एसपी ट्रैफिक का स्पष्टीकरण: एसपी ट्रैफिक अतुल चौबे ने बताया कि वाहन चेकिंग के दौरान स्कूटी पर मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) की धारा 207 MV लगनी थी। लेकिन चालान काटने वाले सब इंस्पेक्टर द्वारा '207 MV' लिखना भूल गए। मिनिमम जुर्माना हुआ अटैच: गलती से जो मिनिमम जुर्माना (Minimum Fine) भरा जाता है, वह राशि और 207 संख्या आपस में जुड़ गईं, जिसके कारण यह चालान ₹20 लाख 74 हजार का हो गया। गलती सुधारी गई, होगी वैधानिक कार्रवाई पुलिस ने तत्काल इस गलती को सुधारा और स्कूटी के जुर्माने की राशि को घटाकर ₹4,000 कर दिया गया। जुर्माना: एसपी ट्रैफिक अतुल चौबे ने बताया कि स्कूटी सीज है, जिसके लिए ₹4,000 का मिनिमम जुर्माना भरा गया है। हालांकि, अंतिम जुर्माना न्यायालय द्वारा तय किया जाएगा। जांच: एसपी चौबे ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह केवल लिखने (टाइपिंग) की गलती है, जिसकी आगे जांच कराई जाएगी और सब इंस्पेक्टर के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की लापरवाही पर मीम्स इस भारी भरकम चालान की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और लोगों ने पुलिस की इस लापरवाही पर तरह-तरह के मीम्स (Memes) और हास्य टिप्पणियाँ कीं। यूजर्स ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी रकम का चालान कैसे काटा जा सकता है, जो स्कूटी की कीमत से भी कई गुना अधिक है। डिजिटल चालान में सावधानी की जरूरत यह घटना मुजफ्फरनगर पुलिस के लिए डिजिटल चालान प्रणाली में अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता को उजागर करती है। टाइपिंग मिस्टेक के कारण हुई इस गलती ने न केवल स्कूटी मालिक को परेशान किया, बल्कि पूरे पुलिस विभाग की छवि पर भी सवाल खड़े किए।
मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में रिश्तों को तार-तार करने वाली एक खौफनाक वारदात सामने आई है। यहाँ एक पिता ने 'देखभाल नहीं करने' से नाराज होकर अपने इकलौते बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी। उसने अपनी बहू पर भी गोली चलाई, जो गंभीर रूप से घायल है और उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है।Read also:-मुरादाबाद: मदरसे का शर्मनाक फरमान! 7वीं की छात्रा से 8वीं में एडमिशन के लिए मांगा 'वर्जिनिटी सर्टिफिकेट' वारदात के बाद आरोपी पिता मौके से फरार नहीं हुआ। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है और लाइसेंसी बंदूक भी बरामद कर ली है। यह दिल दहला देने वाली घटना शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे भोपा थाना क्षेत्र के मोहल्ला चौक में हुई। घायल बहू ने बताई खौफनाक आपबीती जिला अस्पताल में भर्ती घायल बहू रविता ने पूरी घटना की जानकारी दी। उसने बताया कि आरोपी ससुर ब्रजवीर सिंह (55) खेती-किसानी करते हैं और उनके पास 22 बीघा खेती है। रविता ने बताया, "आज सुबह करीब 11 बजे घर में झगड़ा हुआ। थोड़ी देर बाद मेरे ससुर ब्रजवीर सिंह ने अपनी लाइसेंसी 12 बोर की बंदूक निकाल ली और हम दोनों (पति-पत्नी) पर गोली चला दी।" रविता ने रोते हुए कहा, "पहली गोली पति (रॉबिन) को लगी, गोली उनके पेट में लगी और वे जमीन पर गिर पड़े। मैं बचने के लिए भागी तो ससुर ने सामने आकर मुझे भी गोली मार दी। जैसे ही उन्होंने फायर किया, मैंने बंदूक पकड़ ली, इससे गोली (बुलेट) मेरे हाथ में लग गई।" फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास के लोग और पड़ोसी दौड़कर मौके पर पहुंचे। पुलिस को सूचना दी गई और घायल पति-पत्नी को तुरंत कार से सीएचसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने रविता के पति रॉबिन को मृत घोषित कर दिया। 5 साल पहले हो चुकी है पत्नी की मौत पड़ोसियों ने बताया कि आरोपी ब्रजवीर की पत्नी की 5 साल पहले मौत हो चुकी है। घर में इकलौता बेटा रॉबिन और बहू रविता ही थे, जो उसकी सेवा करते थे। रॉबिन के दो बच्चे हैं- बेटा आकर्ष (16) जो 12वीं में है और बेटी अक्षि (9) जो कक्षा 4 में पढ़ती है। पड़ोसी ओमबीर ने बताया कि ब्रजवीर का बेटे-बहू से सेवा और देखभाल को लेकर पहले भी लड़ाई-झगड़ा होता रहता था। आज भी इसी बात पर विवाद बढ़ा और ब्रजवीर ने यह खौफनाक कदम उठा लिया। एसएसपी मौके पर पहुंचे वारदात की सूचना मिलते ही एसएसपी संजय कुमार और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सबूत जुटाए। एसएसपी संजय कुमार ने बताया, "आरोपी ने देखभाल नहीं करने के विवाद में लाइसेंसी बंदूक से बेटे और बहू को गोली मारी है। बेटे की मौत हो गई है और बहू घायल है। आरोपी पिता को हिरासत में ले लिया गया है, उससे पूछताछ की जाएगी। बहू का भी बयान दर्ज किया गया है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।"
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के चरथावल थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ मोहम्मद आरिफ (30) नामक एक युवक ने अपनी पत्नी और ससुराल वालों से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। आरिफ ने मरने से ठीक पहले एक वीडियो बनाया, जिसमें उसने अपनी पत्नी और सास-ससुर पर रोज़ाना टॉर्चर करने का आरोप लगाया है। ढाई महीने पहले ही आरिफ की शादी हुई थी। मुजफ्फरनगर सुसाइड के इस मामले में पुलिस को आरिफ के मोबाइल से सुसाइड वीडियो बरामद हुआ है।READ ALSO:-UP एक्सप्रेस-वे पर सफर होगा हाईटेक और सेफ! CM योगी का बड़ा फैसला, हर 100KM पर खुलेगी फायर चौकी, आग लगते ही 'गोल्डन ऑवर' में पहुंचेगी टीम पत्नी से अनबन और मायके रहने का दबाव मृतक मो. आरिफ मुजफ्फरनगर की एक फैक्ट्री में काम करते थे। उनके पिता सरताज ने पुलिस को बताया कि आरिफ की शादी ढाई महीने पहले नई मंडी थाना के सरवट गांव की फरीन (27) से हुई थी। अनबन की शुरुआत: शादी के तुरंत बाद से ही फरीन और आरिफ में अनबन शुरू हो गई थी। फरीन अक्सर अपने मायके चली जाती थी और आरिफ पर भी साथ चलने का दबाव बनाती थी। पिता का आरोप: पिता सरताज का दावा है कि उनकी बहू फरीन चाहती थी कि आरिफ अपने माता-पिता को छोड़कर उसके मायके में रहे, जिसके लिए आरिफ तैयार नहीं था। आरिफ के इनकार करने पर फरीन झगड़ा करती थी और उसे प्रताड़ित किया जाता था। टहलने के बहाने घर से निकले और खाया जहर मंगलवार की शाम ड्यूटी से लौटने के बाद आरिफ ने घर पर बताया कि वह टहलने जा रहा है। घटना: जब एक घंटे तक आरिफ वापस नहीं लौटे और घरवालों ने उन्हें खाना खाने के लिए फोन किया, तो आरिफ ने केवल 'कुछ देर में आता हूं' कहकर तत्काल फोन काट दिया। खोजबीन: शक होने पर घरवाले खोजने निकले। घर से लगभग 500 मीटर दूर एक खेत में आरिफ बेहोश पाए गए। डॉक्टरों की पुष्टि: परिजन उन्हें तत्काल बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज ले गए, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने आरिफ के जहर खाने की पुष्टि की है। वीडियो में क्या कहा: पीड़ित के अंतिम शब्द पुलिस को मौके से आरिफ का मोबाइल फोन मिला, जिसमें आत्महत्या से पहले बनाया गया वीडियो सुरक्षित था। वीडियो में आरिफ ने अपने दर्द को हूबहू बयां किया है: "मेरा नाम मोहम्मद आरिफ है। मैं अपनी जिंदगी से तंग आ गया हूं, अपनी सास-ससुर और घरवाली से परेशान हूं। रोज का टॉर्चर अब बर्दाश्त नहीं होता। मेरे सास-ससुर ने मुझे परेशान करके रख दिया है। मेरे मां-बाप और भाइयों का ख्याल रखना। भाई, बहुत परेशान हो गया हूं... बस इतनी ही जिंदगी थी, मुझे माफ कर दो।" सीओ बोले- जांच कर एक्शन लेंगे इस घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराया है और मामला दर्ज कर लिया है। सीओ सदर का बयान: सीओ सदर डॉ. रविशंकर मिश्रा ने बताया कि युवक ने अपनी पत्नी और ससुरालियों पर प्रताड़ना (Torture) का आरोप लगाया है। पुलिस इस मामले के हर एंगल पर गहन जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद कानूनी एक्शन लिया जाएगा। सोशल मीडिया पर न्याय की मांग इस घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों को झकझोर कर रख दिया है। सुसाइड वीडियो के वायरल होने के बाद लोग आरिफ के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं और पत्नी तथा ससुराल वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रताड़ना के आरोपों की जांच यह मामला वैवाहिक संबंधों में पुरुष प्रताड़ना (Male Torture) और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर मुद्दे को सामने लाता है। पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि आरिफ ने वीडियो में जिन लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है, उनके खिलाफ क्या साक्ष्य मौजूद हैं।
मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक आशिक मिजाज युवक अपनी प्रेमिका से मिलने की जिद पर एक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। युवक की मांग थी कि जब तक उसकी प्रेमिका को मौके पर नहीं बुलाया जाता, वह नीचे नहीं उतरेगा। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमों के हाथ-पांव फूल गए। घंटों की कड़ी मशक्कत और मान-मनौव्वल के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतारा जा सका।READ ALSO:-भरोसे का 'कसाई'! ड्राइवर ने मालिक का ट्रक 'काट' डाला, पुर्जे-पुर्जे बेचकर बना रहा था जनरेटर क्या है पूरा मामला? यह ঘটনা नई मंडी कोतवाली क्षेत्र का है, जहां रामलीला ग्राउंड के पीछे स्थित एक टावर पर आज एक युवक चढ़ गया। पुलिस जांच में युवक की पहचान खतौली थाना क्षेत्र के चांदपुरी गांव निवासी राजकुमार के रूप में हुई। दरअसल, राजकुमार का अपने पड़ोस के गांव की एक युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था। जब युवती के परिजनों को इस रिश्ते के बारे में पता चला, तो उन्होंने इसका विरोध किया और अपनी बेटी को कहीं दूर रिश्तेदारी में भेज दिया। प्रेमिका से जुदाई बनी टावर पर चढ़ने की वजह अपनी प्रेमिका से दूर होकर आहत हुए राजकुमार ने यह खतरनाक कदम उठा लिया। वह टावर पर चढ़ गया और अपनी प्रेमिका को वापस बुलाने और उससे मिलने की गुहार लगाने लगा। टावर पर चढ़े युवक को देखकर आसपास भारी भीड़ जमा हो गई। घंटों चली मान-मनौव्वल, तब उतरा 'वीरू' मामले की सूचना मिलते ही सीओ नई मंडी राजू साव पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने युवक को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह अपनी मांग पर अड़ा रहा। घंटों की मशक्कत के बाद, पुलिस टीम, फायर ब्रिगेड और नगर पालिका की टीम ने लगातार बातचीत कर उसे भरोसा दिलाया, जिसके बाद वह सुरक्षित नीचे उतरने को राजी हुआ। पुलिस ने क्या कहा? सीओ नई मंडी राजू साव ने बताया, "सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति टावर पर चढ़ गया है। टीम मौके पर पहुंची। पता चला कि युवक का नाम राजकुमार है और वह खतौली के चांदपुरी का रहने वाला है। एक युवती के साथ प्रेम प्रसंग का मामला था, युवती के कहीं चले जाने पर युवक की मांग थी कि उसे उसके साथ रहने दिया जाए और बात कराई जाए। बातचीत के बाद उसे सुरक्षित उतार लिया गया है। थाने पर उसकी काउंसलिंग की जा रही है और परिजनों को सौंप दिया गया है।" पुलिस ने मामले में युवक के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
मुजफ्फरनगर। सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माने जाने वाले मुजफ्फरनगर शहर में एक बार फिर माहौल तनावपूर्ण हो गया है। शहर के मुस्लिम बाहुल्य इलाके मीनाक्षी चौक पर कुछ तथाकथित हिंदूवादी संगठनों द्वारा रातों-रात "महर्षि वाल्मीकि चौक" का बोर्ड लगा दिए जाने से विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब खुद वाल्मीकि समाज ने ही इस कदम का पुरजोर विरोध करते हुए इसे समाज को बांटने और अपने त्योहार का अपमान करने की साजिश करार दिया।READ ALSO:-मेरठ में सनसनीखेज वारदात: ससुर पहुंचा थाने, बोला- 'पुत्रवधू को मार डाला', घर में लहूलुहान मिली महिला वाल्मीकि समाज ने ही खोला मोर्चा इस घटना के खिलाफ वाल्मीकि क्रांति दल के अध्यक्ष दीपक गंभीर ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मीनाक्षी चौक का महर्षि वाल्मीकि या हमारे समाज से कोई लेना-देना नहीं है। यह कुछ राजनीतिक लोगों की सोची-समझी साजिश है जो महर्षि वाल्मीकि जयंती के पवित्र अवसर पर शहर का माहौल खराब करना चाहते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "हम शांति और भाईचारे से अपना पर्व मनाना चाहते हैं, लेकिन हमारे आराध्य के नाम पर इस तरह की राजनीति और नफरत फैलाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन को इन شرارتی (शरारती) तत्वों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।" शहर में अन्य जगहों पर भी आपत्तिजनक पोस्टर यह विवाद सिर्फ मीनाक्षी चौक तक ही सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, हिंदू युवा वाहिनी के कुछ कार्यकर्ताओं ने शहर के खालापार और सिविल लाइन जैसे अन्य इलाकों में भी उत्तेजक और आपत्तिजनक भाषा वाले पोस्टर लगाए हैं, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों में गुस्सा, प्रशासन अलर्ट पर इस नाम बदलने की कोशिश को स्थानीय लोग "सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की सुनियोजित साजिश" बता रहे हैं। मीनाक्षी चौक के एक निवासी ने कहा, "यह चौक हमेशा से हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक रहा है। ऐसे नाम बदलने से सिर्फ नफरत फैलेगी।" मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। हालांकि, कोई आधिकारिक बयान अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि विवादित होर्डिंग को हटाने और आपत्तिजनक पोस्टरों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। दीपक गंभीर ने जिलाधिकारी और एसएसपी से मिलकर समाज में नफरत फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
मुजफ्फरनगर/बिजनौर। दिल्ली से अपने घर बिजनौर लौट रहे एक परिवार के लिए सोमवार की सुबह काल बनकर आई। मुजफ्फरनगर के जानसठ क्षेत्र में एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पहले पुल की रेलिंग से और फिर एक ट्रक से जा टकराई। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार एक ही परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक सदस्य जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। इस पूरी घटना का खौफनाक वीडियो पास लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है।READ ALSO:-मेरठ में सनसनीखेज वारदात: ससुर पहुंचा थाने, बोला- 'पुत्रवधू को मार डाला', घर में लहूलुहान मिली महिला CCTV में कैद हुआ मौत का मंजर सामने आए सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि एक तेज रफ्तार कार अचानक अनियंत्रित होती है, पुल की रेलिंग से टकराती है और फिर घूमकर बिजनौर की ओर से आ रहे एक ट्रक के सामने आ जाती है। ट्रक चालक के पास संभलने का कोई मौका नहीं था और सीधी टक्कर हो गई। यह वीडियो दिल दहला देने वाला है। कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा? बिजनौर की इंद्रलोक कॉलोनी के रहने वाले मयंक सोमवार सुबह अपनी पत्नी रिया, छोटे भाई लक्ष्य (28) और साली प्रियंका (25) के साथ दिल्ली से घर लौट रहे थे। कार को उनका भाई लक्ष्य चला रहा था। बिजनौर से महज 12 किलोमीटर पहले, रामराज क्षेत्र के देवल गांव के पास मध्यगंगनहर पुल पर अचानक लक्ष्य ने कार से नियंत्रण खो दिया। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि ड्राइवर लक्ष्य को नींद की झपकी आ गई थी, जो इस जानलेवा हादसे का कारण बनी। एक के बाद एक थमीं तीन सांसें टक्कर इतनी भयानक थी कि कार चला रहे लक्ष्य की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कार से बाहर निकाला और बिजनौर जिला अस्पताल भिजवाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने प्रियंका को मृत घोषित कर दिया। गंभीर रूप से घायल रिया ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मयंक की हालत भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है और डॉक्टर उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। परिवार में मचा कोहराम लक्ष्य और प्रियंका, दोनों दिल्ली में नौकरी करते थे और परिवार के साथ घर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में ही मौत ने उन्हें छीन लिया। क्षेत्राधिकारी जानसठ, यतेंद्र सिंह ने बताया कि तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है, जिसके बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटाकर यातायात बहाल कर दिया है और मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश में 'आई लव मोहम्मद' पोस्टर को लेकर जारी विवाद ने उस समय एक खतरनाक मोड़ ले लिया, जब मुजफ्फरनगर के एक युवक ने मुंबई में बैठकर एक भड़काऊ वीडियो जारी कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस रील में युवक धमकी भरे अंदाज में कह रहा है, "आई लव मोहम्मद के ऊपर हम सिर काट भी सकते हैं और सिर कटवा भी सकते हैं।"READ ALSO:-दोस्त ही बना 'जल्लाद': शराब के नशे में चॉपर से काटा दोस्त का गला, 3 महीने पुरानी रंजिश में लिया बदला इस बेहद आपत्तिजनक वीडियो के सामने आते ही मुजफ्फर-नगर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए न केवल आरोपी युवक की पहचान की, बल्कि उसके खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा भी दर्ज कर लिया है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है जो उसे पकड़ने के लिए मुंबई रवाना होगी। क्या है पूरा मामला? मामला मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र से जुड़ा है। यहां के निवासी शमशाद के बेटे नदीम ने यह विवादित वीडियो बनाया है। पुलिस जांच में पता चला है कि नदीम पिछले कुछ समय से काम के सिलसिले में मुंबई में रह रहा है। उत्तर प्रदेश में चल रहे 'आई लव मोहम्मद' पोस्टर विवाद पर उसने वहीं से यह भड़काऊ रील बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी। कुछ ही घंटों में यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और शांति व्यवस्था के लिए एक चुनौती बन गया। पुलिस का त्वरित एक्शन, गंभीर धाराओं में केस दर्ज वीडियो के वायरल होते ही मुजफ्फरनगर पुलिस के साइबर सेल और स्थानीय खुफिया तंत्र सक्रिय हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ग्रामीण, आदित्य बंसल ने खुद कमान संभाली। उन्होंने बताया, "सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें एक युवक सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली और धमकी भरी बातें कह रहा था। इसका तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी नदीम के खिलाफ बुढ़ाना थाने में आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।" मुंबई जाएगी पुलिस, गिरफ्तारी की तैयारी एसपी आदित्य बंसल ने पुष्टि की कि आरोपी नदीम की मौजूदा लोकेशन मुंबई में है। उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए एक पुलिस टीम का गठन कर दिया गया है। यह टीम जल्द ही मुंबई जाकर स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को गिरफ्तार करने का प्रयास करेगी। पुलिस ने इस कार्रवाई के जरिए एक कड़ा संदेश दिया है। एसपी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "कोई भी व्यक्ति यदि सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। ऐसे लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।"
मुजफ्फरनगर: एक परिवार जो अपने प्रियजन की अंतिम क्रिया पूरी कर उन्हें श्रद्धांजलि देने जा रहा था, उसे क्या पता था कि यह सफर उनका खुद का आखिरी सफर बन जाएगा। बुधवार की सुबह हरियाणा के करनाल से हरिद्वार के लिए निकला एक परिवार मुजफ्फरनगर में एक भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गया, जिसने 6 जिंदगियों को हमेशा के लिए छीन लिया। पानीपत-खटीमा हाईवे पर तितावी गांव के पास सड़क किनारे खड़े एक ट्रक में उनकी तेज रफ्तार कार जा घुसी। टक्कर इतनी भयावह थी कि कार लोहे के ढेर में तब्दील हो गई और उसमें सवार 7 लोगों में से 6 ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।READ ALSO:-जिसने की थी हत्या, उसी का हो गया 'गेम ओवर'! मेरठ में मर्डर के आरोपी की गला रेतकर बेरहमी से हत्या पिता का कर्मकांड करने निकला था परिवार जानकारी के अनुसार, करनाल के फरीदपुर गांव निवासी महेंद्र जुनेजा का हाल ही में कैंसर की बीमारी के कारण निधन हो गया था। बुधवार को उनका परिवार, जिसमें उनके बेटे, पत्नी, भाई और अन्य रिश्तेदार शामिल थे, महेंद्र जी की अस्थियों को गंगा में विसर्जित करने के लिए कार से हरिद्वार के लिए निकला था। कार में महेंद्र के बेटे पीयूष, पत्नी मोहनी, बेटी अंजू, भाई राजेंद्र, भतीजा विक्की और ड्राइवर शिवा सवार थे। महेंद्र का दूसरा बेटा हार्दिक भी कार में मौजूद था। सुबह करीब 7 बजे, जब उनकी कार तितावी इलाके से गुजर रही थी, तो सड़क पर खड़े एक ट्रक को ड्राइवर देख नहीं पाया और तेज रफ्तार कार सीधे ट्रक के पिछले हिस्से में जा घुसी। हादसा होते ही चीख-पुकार मच गई। आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग और ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। कार का मंजर इतना खौफनाक था कि उसे देखकर लोगों की रूह कांप गई। प्रशासनिक अमला मौके पर, मुख्यमंत्री ने जताया शोक हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों की मदद से गैस कटर और अन्य उपकरणों से कार के हिस्सों को काटकर शवों को बाहर निकाला गया। तब तक हार्दिक को छोड़कर बाकी सभी 6 लोगों की सांसे थम चुकी थीं। पुलिस ने एकमात्र घायल हार्दिक को तुरंत जिला अस्पताल भिजवाया, जहां उसकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और एसएसपी संजय कुमार वर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचे। एसएसपी ने बताया, "यह एक बहुत ही दुखद घटना है। प्रथम दृष्टया, सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े ट्रक के कारण यह हादसा हुआ है। ट्रक चालक की तलाश की जा रही है और उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।" इस दर्दनाक हादसे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और अधिकारियों को घायल हार्दिक के सर्वोत्तम इलाज को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। मृतकों की सूची: पीयूष जुनेजा (मृतक महेंद्र के बेटे) मोहनी जुनेजा (मृतक महेंद्र की पत्नी) अंजू जुनेजा (मृतक महेंद्र की बेटी) राजेंद्र जुनेजा (मृतक महेंद्र के भाई) विक्की (भतीजा) शिवा (ड्राइवर) घायल: हार्दिक जुनेजा (मृतक महेंद्र के बेटे) पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और करनाल में उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया।
मुजफ्फरनगर। शुक्रवार की शाम जब ढल रही थी, तब मुजफ्फरनगर की धरती पर एक कुख्यात अपराधी के आतंक का सूरज भी हमेशा के लिए अस्त हो रहा था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हत्या और लूट की अनगिनत वारदातों से दहशत फैलाने वाला, 1 लाख का इनामी बदमाश नईम कुरैशी पुलिस के साथ हुई एक भीषण मुठभेड़ में मारा गया। मीरापुर थाना क्षेत्र के एक खंडहर में करीब आधे घंटे तक चली गोलियों की बौछार के बाद पुलिस ने उस अपराधी को ढेर कर दिया, जिसके नाम से 35 से ज्यादा संगीन मुकदमे दर्ज थे। इस साहसिक ऑपरेशन में एक हेड कांस्टेबल भी गोली लगने से घायल हुआ है।READ ALSO:-मुरादाबाद में 8 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाला शैतान एनकाउंटर में ढेर, पुलिस ने पैर में गोली मारकर दबोचा नहर किनारे आखिरी आमना-सामना कहानी की शुरुआत हुई कुतुबपुर झाल नहर की पटरी से। एसएसपी संजय वर्मा के निर्देशन में मीरापुर थाना प्रभारी बबलू सिंह वर्मा अपनी टीम के साथ रूटीन चेकिंग पर थे। तभी दो बाइकें तेज रफ्तार से आती दिखीं। पुलिस ने जब उन्हें रुकने का इशारा किया, तो वे मौत के सौदागरों की तरह बाइकें मोड़कर भूम्मा चौकी की तरफ भागने लगे। पुलिस ने तुरंत पीछा किया, यह जानते हुए कि उनका सामना किसी मामूली चोर से नहीं, बल्कि जुर्म की दुनिया के बड़े नाम से होने वाला है। आधे घंटे तक गूंजती रहीं गोलियां पुलिस को पीछे आते देख दोनों बदमाश भूम्मा चौकी से पहले एक पुराने खंडहर में जा घुसे और वहीं से पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले ने शाम के सन्नाटे को चीर दिया। लेकिन पुलिस भी पूरी तैयारी में थी। आत्मरक्षा में की गई जवाबी फायरिंग ने इस खंडहर को एक वॉर-जोन में बदल दिया। दोनों तरफ से गोलियां चलती रहीं। करीब आधे घंटे के इस एक्शन-पैक्ड एनकाउंटर के बाद बदमाशों की तरफ से फायरिंग शांत हुई। पुलिस जब अंदर दाखिल हुई तो एक बदमाश सीने में गोली लगने से जमीन पर पड़ा तड़प रहा था, जबकि दूसरा अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला। इस गोलीबारी में हेड कांस्टेबल कालूराम यादव के बाजू में भी एक गोली लगी।Read also:-जिला पंचायत अध्यक्ष और भाजपा नेत्री की मामी का ICU में मिला शव, पति बोला- 'तबीयत खराब है' और अस्पताल से हो गया फरार कौन था आतंक का दूसरा नाम 'नईम कुरैशी'? अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने घायल बदमाश को मृत घोषित कर दिया। उसकी पहचान पश्चिमी यूपी के सबसे खूंखार अपराधियों में से एक, नईम कुरैशी पुत्र युसुफ, निवासी दक्षिणी खालापार के रूप में हुई। पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम 35 से ज्यादा बार दर्ज था, जिसमें हत्या के 6 और लूट के 20 जघन्य मामले शामिल थे। वह कुख्यात नफीस कालिया गैंग का सदस्य भी रह चुका था और लंबे समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। SSP ने ठोकी टीम की पीठ एनकाउंटर का नेतृत्व कर रहे एसएसपी संजय वर्मा ने इसे पुलिस के लिए एक बहुत बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने घायल कांस्टेबल के बेहतर इलाज का आश्वासन देते हुए पूरी टीम को इस बहादुरी के लिए पुरस्कृत करने की घोषणा की है। पुलिस को मौके से एक पिस्टल और बाइक बरामद हुई है। अब पुलिस की टीमें नईम के फरार साथी की तलाश में खाक छान रही हैं, ताकि इस गैंग का पूरी तरह से सफाया किया जा सके।
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर के खालापार क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। यहां बाइक स्टंट करने से टोकने पर एक युवक की बेरहमी से चाकू मारकर हत्या कर दी गई। हत्या का आरोप वार्ड 48 के मौजूदा सभासद के भतीजे पर लगा है। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया है और पुलिस आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।READ ALSO:-मेरठ में हैवानियत: अवैध संबंध के शक में पति ने पत्नी को बेरहमी से पीटा, हाथ-पैर बांधकर गंजा कर दिया क्या है पूरा मामला? मंगलवार देर शाम खालापार क्षेत्र के फिरदौस नगर मुहल्ले में 22 वर्षीय युवक अफसार ने सभासद अन्नू कुरैशी के भतीजे साहिल को तेज रफ्तार से बाइक दौड़ाने और स्टंट करने से रोका। इस बात पर दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। हालांकि, आसपास के लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों को शांत करा दिया था। आरोप है कि देर रात करीब 12:30 बजे साहिल हाथ में चाकू लेकर आया और घर के बाहर बैठे अफसार के सीने में घोंप दिया। अफसार की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सभासद और दो भतीजों पर FIR दर्ज मृतक अफसार के परिजनों ने सभासद अन्नू कुरैशी, और उनके दो भतीजों साहिल और आवेश के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। इस घटना से स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है, जिसके चलते क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।