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दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर: फरवरी में ओपनिंग, 2.5 घंटे में सफर

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: पहाड़ों का सफर अब 'हवा' से बातें! ना जाम, ना थकान... सिर्फ 2.5 घंटे में पहुंचेंगे दून, फरवरी में खुलने जा रहा है उत्तर भारत का 'ग्रोथ इंजन'

Unknown जनवरी 12, 2026 0
Delhi Dehradun Economic Corridor 99 Percent Complete Set to Open in February Travel Time Cut to 2 5 Hours
Delhi Dehradun Economic Corridor 99 Percent Complete Set to Open in February Travel Time Cut to 2 5 Hours
नई दिल्ली/देहरादून:
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप दिल्ली में अपने घर पर सुबह का नाश्ता करें और दोपहर का खाना देहरादून की वादियों या मसूरी की पहाड़ियों में खाएं? कुछ साल पहले तक यह ख्याल किसी सपने जैसा लगता था, क्योंकि दिल्ली से देहरादून का सफर मतलब—मेरठ का जाम, मुजफ्फरनगर की भीड़भाड़ और टूटी सड़कों की थकान। लेकिन, अब यह सपना हकीकत में बदलने वाला है।Read also:-मेरठ: भीषण ठंड का टॉर्चर, कक्षा 9 तक के स्कूल दो दिन के लिए बंद, 10वीं-12वीं का समय बदला, DIOS का आदेश जारी

 

उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को नया आयाम देने वाला दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (Delhi-Dehradun Economic Corridor) बनकर लगभग तैयार है। 210 किलोमीटर लंबी यह परियोजना सिर्फ डामर और कंक्रीट से बनी सड़क नहीं है, बल्कि यह विकास की एक नई रेखा है जो दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को एक सूत्र में पिरोने जा रही है। सूत्रों की मानें तो फरवरी के पहले हफ्ते के बाद किसी भी दिन इसका उद्घाटन हो सकता है।

 

एक नए युग की शुरुआत: 'एक्सप्रेसवे' या 'सुपर हाईवे'?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इसे तकनीकी रूप से 'एक्सेस-कंट्रोल हाईवे' (Access-Controlled Highway) क्यों कहा जा रहा है, जबकि आम बोलचाल में नेता और जनता इसे 'एक्सप्रेसवे' कह रहे हैं।

 

यह कॉरिडोर पारंपरिक एक्सप्रेसवे से थोड़ा अलग लेकिन सुविधाओं में उससे कहीं आगे है।

 

  • एक्सेस कंट्रोल: इसका मतलब है कि इस सड़क पर कोई भी, कहीं से भी नहीं चढ़ सकता। इसके लिए निश्चित एंट्री और एग्जिट प्वाइंट (Interchanges) बनाए गए हैं। इससे मवेशियों, ट्रैक्टरों या स्थानीय ट्रैफिक के अचानक सड़क पर आने का खतरा खत्म हो जाता है।
  • रफ्तार: इस कॉरिडोर को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है।
  • सुविधाएं: बेहतर राइड क्वालिटी, सुरक्षित अंडरपास, इंटरचेंज, स्मार्ट टोल प्लाजा और हर थोड़ी दूरी पर सुविधाजनक 'पिट स्टॉप' (Rest Areas) इसे देश के चुनिंदा हाई-स्पीड कॉरिडोर में शामिल करते हैं।

 

सफरनामा: अक्षरधाम से दून तक का सफर कैसा होगा?

इस कॉरिडोर का सफर दिल्ली के दिल अक्षरधाम से शुरू होता है। लेकिन क्या शुरुआत से ही सफर सुहाना होगा? ग्राउंड रिपोर्ट कुछ और ही बयां करती है।

 

दिल्ली से लोनी: शुरुआती बाधाएं

इस कॉरिडोर की शुरुआत अक्षरधाम मंदिर के पास से होती है। यह इलाका पहले से ही दिल्ली के सबसे व्यस्त ट्रैफिक प्वाइंट्स में से एक है।

 

  • चोक प्वाइंट्स: अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन और उसके आसपास का ट्रैफिक अभी भी एक चुनौती है। शुरुआती कुछ किलोमीटर में आपको दोपहिया, तिपहिया और रोंग साइड (Wrong Side) चलने वाले वाहनों का सामना करना पड़ सकता है।
  • फिनिशिंग टच: दिल्ली से यूपी बॉर्डर (लोनी) तक के हिस्से में अभी भी कई जगह अंतिम चरण का काम चल रहा है। कहीं सड़कों के किनारे 'शोल्डर' भरे जा रहे हैं, तो कहीं स्ट्रक्चर को अंतिम मजबूती दी जा रही है। मजदूर दिन-रात एक करके इसे डेडलाइन तक पूरा करने में जुटे हैं।

 

लोनी के बाद: असली रफ्तार

जैसे ही आप गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर को पार करेंगे, तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। यहां से 6-लेन की चौड़ी और सपाट सड़क आपका स्वागत करेगी। लोनी के बाद का सफर 'मक्खन' जैसा है। यहां आपको न तो गड्ढे मिलेंगे और न ही बेवजह के ब्रेकर। यह हिस्सा पूरी तरह से 'एक्सेस कंट्रोल' है, यानी आपको बीच में कोई रुकावट नहीं मिलेगी।

 

किसानों का संघर्ष और सरकार का लचीलापन: कैसे बदला डिजाइन?

इस एक्सप्रेसवे का निर्माण आसान नहीं था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जो किसान आंदोलनों का गढ़ माना जाता है, वहां जमीन अधिग्रहण और निर्माण कार्य में कई चुनौतियां आईं। विशेष रूप से इस प्रोजेक्ट के दूसरे चरण (Phase 2) में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले।

 

गन्ना किसानों की मांग और ऊंचे अंडरपास

लगभग 13,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना में सरकार को कई बार अपने ब्लूप्रिंट (Design) में बदलाव करना पड़ा।

 

  • मुजफ्फरनगर का मामला: मुजफ्फरनगर के करौंदा महाजन इलाके में किसानों ने निर्माण कार्य रोक दिया था। उनकी समस्या व्यावहारिक थी—इस क्षेत्र में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है। किसानों का कहना था कि गन्ने से लदे उनके ट्रैक्टर और ट्रॉलियां सामान्य ऊंचाई के अंडरपास से नहीं निकल पाएंगे।
  • सरकार का फैसला: NHAI ने किसानों की बात मानी और अंडरपास की ऊंचाई को मानक से बढ़ाकर 5.5 मीटर करने का फैसला किया। इसके लिए सड़क के लेवल को 1 मीटर और ऊपर उठाना पड़ा। यह दिखाता है कि विकास और स्थानीय जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाया गया।

 

सहारनपुर और शामली का विरोध

  • बादगांव इंटरचेंज: सहारनपुर के बादगांव में भी स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। उनकी मांग थी कि एक्सप्रेसवे उनके इलाके से गुजर रहा है, तो उन्हें इसका फायदा भी मिलना चाहिए। इसके बाद वहां एक अतिरिक्त इंटरचेंज (Interchange) बनाया गया, ताकि स्थानीय लोग एक्सप्रेसवे पर चढ़ और उतर सकें।
  • बिराल का पुल: मुजफ्फरनगर के बिराल इलाके में एक सिंचाई परियोजना आड़े आ रही थी, जिसके कारण एक महत्वपूर्ण पुल के निर्माण में देरी हुई। अब यह पुल लगभग तैयार है। इसके अलावा, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन की हाई-टेंशन लाइनों को शिफ्ट करना भी एक बड़ा सिरदर्द था, जिसे अब सुलझा लिया गया है।

 

इंजीनियरिंग का चमत्कार: 99% काम पूरा

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार, कॉरिडोर के चारों चरणों का औसतन 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

 

  • डेडलाइन: जो 1% काम बचा है, वह मुख्य रूप से पेंटिंग, साइनेज (Signage), और सौंदर्यीकरण का है। इसे अगले 7-10 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।
  • राइड क्वालिटी (Ride Quality): जो लोग दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे या ईस्टर्न पेरिफेरल पर सफर कर चुके हैं, वे जानते हैं कि कई बार जल्दी में बनाई गई सड़कों पर गाड़ी उछलती है। लेकिन इस कॉरिडोर पर ऐसा नहीं होगा। NHAI ने समझदारी दिखाते हुए सड़क की 'लेइंग' (Laying) पिछले मॉनसून से पहले ही कर दी थी। इससे सड़क को सेट होने (Settling) का पूरा समय मिल गया। अब इस पर गाड़ी चलाने का अनुभव बेहद स्मूथ होगा।

 

चार चरणों (Phases) का पूरा ब्यौरा
यह पूरा कॉरिडोर चार अलग-अलग चरणों में बांटा गया है, जो अलग-अलग चुनौतियों और विशेषताओं के साथ आते हैं:

 

  • चरण 1 (दिल्ली से EPE): यह हिस्सा अक्षरधाम से शुरू होकर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (बागपत के पास) तक जाता है। यह 31.6 किलोमीटर लंबा है। यह एक 'ब्राउनफील्ड' (Brownfield) प्रोजेक्ट है, यानी पुरानी सड़क को ही सुधारकर और एलिवेटेड बनाकर इसे 6-लेन किया गया है।
  • चरण 2 (बागपत से सहारनपुर): यह सबसे लंबा हिस्सा है—करीब 120 किलोमीटर। यह बागपत के EPE इंटरचेंज से शुरू होकर सहारनपुर बाईपास तक जाता है। यह पूरी तरह से 'ग्रीनफील्ड' (Greenfield) है, यानी खेतों के बीच से नई सड़क निकाली गई है। यह शामली और मुजफ्फरनगर के जिलों से होकर गुजरता है।
  • चरण 3 (सहारनपुर से गणेशपुर): यह 42 किलोमीटर का हिस्सा सहारनपुर बाईपास से उत्तराखंड के गणेशपुर तक जाता है। यह हिस्सा पूरी तरह बनकर तैयार है और ट्रायल के लिए फिट है।
  • चरण 4 (गणेशपुर से देहरादून): यह सबसे महत्वपूर्ण और सुंदर हिस्सा है। 20 किलोमीटर के इस हिस्से में राजाजी नेशनल पार्क का क्षेत्र आता है। इसमें से लगभग 15-16 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड है और बाकी टनल (सुरंग) के रूप में है।

 

राजाजी नेशनल पार्क: वन्यजीवों के लिए एशिया का सबसे लंबा कॉरिडोर

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरणीय संवेदनशीलता के साथ तालमेल है। कॉरिडोर का अंतिम हिस्सा उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से होकर गुजरता है, जो हाथियों, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों का घर है।

 

इंजीनियरिंग और पर्यावरण का संतुलन

  • 12 किमी लंबा एलिवेटेड रोड: जानवरों के मुक्त आवागमन (Free Movement) को सुनिश्चित करने के लिए यहां 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड (खंभों पर टिकी सड़क) बनाया गया है। यह एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर एलिवेटेड रोड माना जा रहा है।
  • नीचे जंगल, ऊपर सड़क: सड़क को ऊपर उठाने का मकसद यह है कि नीचे हाथी और अन्य जानवर अपने प्राकृतिक रास्तों (Animal Corridors) से बिना किसी डर के गुजर सकें।
  • रात का अनुशासन: वन्यजीवों को गाड़ियों की हेडलाइट से परेशानी न हो, इसके लिए विशेष नॉइस बैरियर (Noise Barriers) और लाइट बैरियर लगाए गए हैं।
  • निर्माण की शर्तें: नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ ने सख्त निर्देश दिए थे कि सूरज ढलने के बाद और सूरज उगने से पहले निर्माण कार्य नहीं होगा। इसके अलावा, मॉनसून में नदी के तेज बहाव के कारण काम रोका गया। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद, NHAI ने इसे समय पर पूरा किया है।

 

टोल टैक्स का गणित: सस्ता या महंगा?

एक्सप्रेसवे के खुलने की खबर के साथ ही लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल 'टोल टैक्स' को लेकर है। क्या यह सफर जेब पर भारी पड़ेगा?

 

  • फास्टैग (FASTag) और एनुअल पास: अगर आप इस रूट पर नियमित यात्री हैं और आपके पास FASTag का एनुअल पास (Local Pass) है, तो यह सफर आपके लिए बेहद सस्ता होगा। चार टोल प्लाजा पार करने का खर्च महज 60 रुपये (अनुमानित पास धारकों के लिए प्रति ट्रिप औसत) आ सकता है।
  • आम यात्री: जिनके पास पास नहीं है, उन्हें दिल्ली से देहरादून तक के सफर के लिए एक तरफ का लगभग 500 से 550 रुपये टोल चुकाना पड़ सकता है।
  • तुलना: वर्तमान में भी अगर आप मेरठ-मुजफ्फरनगर-रूडकी वाले पुराने रास्ते से जाते हैं, तो भी आपको कई जगह टोल देना पड़ता है। नए कॉरिडोर पर समय और ईंधन की बचत को देखते हुए यह टोल वसूलने लायक लगेगा।

 

आर्थिक प्रभाव: पर्यटन, कृषि और रियल एस्टेट

यह कॉरिडोर सिर्फ एक 'रास्ता' नहीं, बल्कि 'अर्थव्यवस्था का इंजन' साबित होगा।

 

पर्यटन (Tourism) को बूस्ट

  • वीकेंड डेस्टिनेशन: अभी तक दिल्ली के लोगों को देहरादून या मसूरी जाने के लिए कम से कम 3 दिन की छुट्टी चाहिए होती थी (आने-जाने में ही 12-14 घंटे खराब होते थे)। अब 2.5 घंटे के सफर का मतलब है कि लोग शनिवार सुबह जाकर रविवार शाम को वापस आ सकते हैं।
  • नए डेस्टिनेशन: हरिद्वार, ऋषिकेश, राजाजी पार्क और चकराता जैसे पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की बाढ़ आने वाली है। होटल और होम-स्टे बिजनेस में उछाल आएगा।

 

कृषि और व्यापार (Agriculture & Trade)

  • गन्ना बेल्ट: पश्चिमी यूपी (बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर) गन्ने और सब्जियों का बड़ा उत्पादक है। अब किसान अपनी उपज को महज 1-2 घंटे में दिल्ली की आजादपुर मंडी या गाजियाबाद तक पहुंचा सकेंगे। ताजी सब्जियों के अच्छे दाम मिलेंगे।
  • वुड कार्विंग (काष्ठ कला): सहारनपुर अपनी लकड़ी की नक्काशी के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। बेहतर कनेक्टिविटी से यहां के निर्यातकों को अपना माल दिल्ली एयरपोर्ट या पोर्ट तक पहुंचाने में आसानी होगी।

 

रियल एस्टेट (Real Estate)

देहरादून, हरिद्वार और सहारनपुर में जमीन के दाम पहले ही बढ़ने लगे हैं। दिल्ली के लोग अब देहरादून में 'सेकंड होम' या 'हॉलिडे होम' लेने में अधिक रुचि दिखाएंगे, क्योंकि अब वहां पहुंचना गुड़गांव या नोएडा के किसी दूरदराज इलाके में जाने जैसा आसान हो गया है।

 

भविष्य की योजनाएं: कनेक्टिविटी का विस्तार

NHAI यहीं रुकने वाला नहीं है। इस कॉरिडोर को आधार बनाकर आगे की कनेक्टिविटी को भी सुधारा जा रहा है।

 

  • मसूरी कनेक्टिविटी: देहरादून तक पहुंचने के बाद, मसूरी जाने वाले जाम से बचने के लिए एक नई टनल और बाईपास की योजना पर काम चल रहा है।
  • पांवटा साहिब और हिमाचल: इस कॉरिडोर को हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब और नाहन से जोड़ने के लिए भी नई सड़कों का खाका तैयार किया जा रहा है। इसका मतलब है कि आने वाले सालों में हिमाचल जाना भी दिल्लीवालों के लिए आसान हो जाएगा।

 

यात्रा की सोच बदलने वाला प्रोजेक्ट

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की एक जीती-जागती मिसाल है। यह परियोजना बताती है कि अगर सही नीयत और तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, तो विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं। किसानों की नाराजगी को सुलझाना, वन्यजीवों के लिए रास्ता छोड़ना और रिकॉर्ड समय में निर्माण पूरा करना—यह सब काबिले तारीफ है।

 

फरवरी में जब पहली गाड़ी इस एक्सप्रेसवे पर सरपट दौड़ेगी, तो वह सिर्फ एक गाड़ी नहीं होगी, बल्कि वह एक बदलते हुए भारत की तस्वीर होगी—जहाँ दूरियां सिमट रही हैं और संभावनाएं फैल रही हैं।

 

तो अपनी गाड़ियों में तेल भरवा लीजिए और फास्टैग रिचार्ज कर लीजिए, क्योंकि पहाड़ अब आपको बुला रहे हैं—और इस बार वे ज्यादा दूर नहीं हैं!

 

तुलनात्मक विश्लेषण: पुराना रास्ता बनाम नया कॉरिडोर

विशेषता
पुराना रूट (वाया मेरठ-मुजफ्फरनगर-रूडकी)
नया कॉरिडोर (इकोनॉमिक कॉरिडोर)
दूरी
लगभग 235 - 250 किमी
210 किमी
समय
6 से 7 घंटे (जाम मिलने पर 8 घंटे)
2.5 से 3 घंटे
ट्रैफिक
भारी (ट्रक, ट्रैक्टर, स्थानीय वाहन)
एक्सेस कंट्रोल (सिर्फ तेज वाहन)
सड़क प्रकार
मिक्स (हाइवे + शहरी सड़कें)
6-लेन/12-लेन एलिवेटेड
बाधाएं
मोदीनगर, खतौली, रूडकी का जाम
कोई जाम नहीं (नॉन-स्टॉप)
वन्यजीव सुरक्षा
नगण्य (दुर्घटना का खतरा)
एलिवेटेड रोड और अंडरपास

 

महत्वपूर्ण तथ्य एक नजर में (Fast Facts)

  • कुल लागत: लगभग 13,000 करोड़ रुपये।
  • शुरुआत: अक्षरधाम, दिल्ली।
  • अंत: देहरादून, उत्तराखंड।
  • गति सीमा: कार - 100 किमी/घंटा, भारी वाहन - 80 किमी/घंटा।
  • खासियत: एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर (12 किमी)।
  • लाभान्वित राज्य: दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड।
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पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है।     कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप   सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है।   सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है।  ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया।  सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया।   प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है।  ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं।    सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं।   इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया।    बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }

बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई

आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला   मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।   बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।   दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था।   अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी।   बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे।   पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया।   एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी   सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता।   पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है।   आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?

देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।   सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया?   क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है।   पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है।   दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है।   सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?"   असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है।   सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है।   विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है।   विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।"   NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है।   NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।   CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।      आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया।  डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है।     कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं:   1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।   2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है।   सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है:   पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है।   दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।   गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।"   आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए।   सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है।   फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है।     जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; Kidney की बीमारी बनी मौत का कारण

बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है।   चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था।   टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।   फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी।   Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप   किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।   इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।"   Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।   सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।

दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी।   आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:   Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi)   मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी।   रूट मैप (Route Map) और स्टेशन   मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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खबरीलाल डेस्क

दिल्ली

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Delhi NCR Weather Update Temperature to Drop Further IMD Issues Alert for Dense Fog and Rain on January 27
दिल्ली-NCR पर कुदरत का 'डबल अटैक': बारिश के बाद अब हड्डियां जमा देने वाली ठंड, पारा 4 डिग्री तक लुढ़कने का अलर्ट

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश ने जहां प्रदूषण से थोड़ी राहत दी थी, वहीं अब यह बारिश कड़ाके की ठंड (Cold Wave) का कारण बनने जा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों के लिए नया अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में दिल्ली वालों को हाड़ कंपाने वाली सर्दी का सामना करना पड़ सकता है। 27 जनवरी को दोबारा बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।READ ALSO:-यूपी बोर्ड 2026: प्रैक्टिकल परीक्षा की तारीखों में बड़ा फेरबदल! 29-30 जनवरी को भी होंगे एग्जाम, सचिव ने जारी किया 'अर्जेंट' आदेश   दिल्ली और इसके आसपास के शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में रहने वाले लोगों के लिए यह सप्ताह मौसम के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव के चलते मौसम में यह अस्थिरता बनी हुई है।   बारिश के बाद अब शीतलहर का प्रकोप दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में हुई बारिश के बाद अब कड़ाके की ठंड का नया दौर शुरू होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक, अगले एक हफ्ते तक तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जाएगी। दिन में भले ही धूप-छांव का खेल चलता रहे, लेकिन रात होते ही ठिठुरन काफी बढ़ जाएगी।   मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादलों के छंटते ही बर्फीली हवाएं मैदानी इलाकों का रुख करेंगी। इससे रात का पारा तेजी से नीचे गिरेगा। अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस (4°C) तक लुढ़क सकता है। यह इस सीजन की सबसे सर्द रातों में से एक हो सकता है।   दिन के समय अधिकतम तापमान 18 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है, जो सामान्य से थोड़ा कम है। लेकिन असली मुसीबत रात की सर्दी होगी। आने वाले दिनों में सर्दी का सितम ऐसा होगा कि लोगों को दिन में भी भारी जैकेट और अलाव का सहारा लेना पड़ेगा। विशेषकर सुबह और शाम के समय दोपहिया वाहन चालकों को संभलकर रहने की जरूरत है।   27 जनवरी को फिर बारिश और आंधी का अलर्ट मौसम विभाग ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। 25 और 26 जनवरी को मौसम के शुष्क रहने के बाद, 27 जनवरी को फिर से मौसम करवट लेगा। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के चलते 27 जनवरी को दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।   सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि इस दौरान तेज हवाएं भी चलेंगी। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 27 जनवरी को करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं (Gusty Winds) चल सकती हैं। ये हवाएं बर्फीली ठंडक लेकर आएंगी, जिससे ठिठुरन और बढ़ जाएगी। बारिश की यह गतिविधि ठंड को लंबे समय तक खींच सकती है।   28 जनवरी के बाद भले ही बारिश रुक जाए, लेकिन हवाओं में नमी (Moisture) और ठंडक बरकरार रहेगी। यह बदलता मौसम फरवरी की शुरुआत तक सर्दी के तेवर तीखे बनाए रख सकता है। इसलिए, जो लोग सोच रहे थे कि सर्दी अब जाने वाली है, उनके लिए यह चेतावनी है कि अभी गर्म कपड़ों को पैक करने की जल्दबाजी न करें।   कोहरे और बादलों का डेरा: 24 से 30 जनवरी का पूर्वानुमान कोहरा दिल्ली की सर्दी का एक अभिन्न हिस्सा है, और आने वाले दिनों में यह और घना होने वाला है। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, 24 से 30 जनवरी के बीच पूरे एनसीआर इलाके में आसमान में बादल छाए रहेंगे और सुबह के समय घना कोहरा (Dense Fog) देखने को मिलेगा।   विजिबिलिटी पर असर: घने कोहरे की वजह से विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम हो सकती है। कई इलाकों में विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम रह सकती है। इसका सीधा असर सड़क, रेल और हवाई यातायात पर पड़ेगा।   सड़क यातायात: कोहरे की वजह से गाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है। यमुना एक्सप्रेसवे और अन्य हाईवे पर चालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। रेल यातायात: कोहरे के कारण लंबी दूरी की ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चल सकती हैं। हवाई उड़ानें: विजिबिलिटी कम होने पर आईजीआई एयरपोर्ट (IGI Airport) से उड़ानों के संचालन में भी बाधा आ सकती है।   हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि 28 से 30 जनवरी के बीच मौसम थोड़ा सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन हल्का कोहरा और बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। सुबह के वक्त घर से निकलने वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि ठंडी हवाएं सीधे सेहत पर असर डाल सकती हैं।   26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) पर कैसा रहेगा मौसम? 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस (Republic Day) के अवसर पर कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड को देखने के लिए हजारों लोग इकट्ठा होते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 26 जनवरी को सुबह के समय हल्का कोहरा रह सकता है, लेकिन दिन में आसमान साफ रहने या आंशिक रूप से बादल छाए रहने की उम्मीद है। बारिश की संभावना 26 जनवरी को कम है, जो कि एक राहत की खबर है। हालांकि, सुबह की ठंड काफी तेज होगी, इसलिए परेड देखने जाने वाले दर्शकों को पूरी तरह से गर्म कपड़ों में लिपटे रहने की सलाह दी जाती है। न्यूनतम तापमान 6 डिग्री के आसपास रहने की उम्मीद है।   पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) क्या है और इसका असर दिल्ली के मौसम में आए इस बदलाव का मुख्य कारण 'पश्चिमी विक्षोभ' है। यह भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठने वाला एक तूफान है जो ईरान, इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में पहुंचता है।   जब यह सिस्टम पहाड़ों (हिमालय) से टकराता है, तो वहां भारी बर्फबारी होती है। जब यह मैदानी इलाकों (जैसे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा) से गुजरता है, तो यहां बारिश और ठंडी हवाएं लाता है।   फिलहाल, पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ रहा है। वहां से आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाएं (North-Westerly Winds) दिल्ली के तापमान को गिरा रही हैं।   स्वास्थ्य के लिए चेतावनी: बच्चों और बुजुर्गों का रखें ख्याल तापमान में अचानक गिरावट और नमी का बढ़ना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। डॉक्टरों ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सतर्क रहने को कहा है।   हृदय रोगी (Heart Patients): अत्यधिक ठंड में नसों के सिकुड़ने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा रहता है। बुजुर्गों को सलाह दी गई है कि वे सुबह बहुत जल्दी सैर पर जाने से बचें। धूप निकलने के बाद ही बाहर निकलें। सांस की बीमारी: कोहरा और प्रदूषण मिलकर 'स्मॉग' (Smog) बनाते हैं, जो अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए खतरनाक है। बारिश के बाद नमी बढ़ने से सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। वायरल इन्फेक्शन: मौसम में उतार-चढ़ाव (कभी बारिश, कभी धूप, कभी ठंड) से वायरल बुखार, खांसी और जुकाम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।   बचाव के उपाय: बाहर निकलते समय सिर और कान को ढककर रखें। लेयरिंग (Layering) करें: एक मोटे जैकेट की जगह दो-तीन पतले गर्म कपड़े पहनना ज्यादा बेहतर होता है। गर्म पानी और ताजा भोजन का सेवन करें। विटामिन सी (Vitamin C) युक्त फल खाएं ताकि इम्यूनिटी बनी रहे।   यातायात एडवाइजरी: कोहरे में ड्राइविंग के नियम आने वाले दिनों में घने कोहरे को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने वाहन चालकों के लिए कुछ सुझाव दिए हैं:   फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करें: अपनी गाड़ी में फॉग लाइट्स हमेशा ठीक रखें और कोहरे में लो बीम (Low Beam) पर गाड़ी चलाएं। हाई बीम पर रोशनी कोहरे से परावर्तित होकर वापस आपकी आंखों में लगती है, जिससे कुछ दिखाई नहीं देता। धीमी गति: कोहरे में दृश्यता का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है, इसलिए गति सीमा के भीतर ही वाहन चलाएं। सड़क पर पट्टियों का पालन करें: अगर आगे कुछ दिखाई न दे, तो सड़क के किनारे बनी सफेद या पीली पट्टियों को देखते हुए गाड़ी चलाएं। इंडिकेटर का प्रयोग: लेन बदलते समय या मुड़ते समय इंडिकेटर का इस्तेमाल जरूर करें और अपनी गाड़ी के इमरजेंसी इंडिकेटर (Hazard lights) का उपयोग तभी करें जब गाड़ी खड़ी हो या बहुत खतरनाक स्थिति हो।   नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम का हाल दिल्ली से सटे इलाकों का हाल भी कमोबेश एक जैसा ही है।   नोएडा और गाजियाबाद: यहां ऊंची इमारतों के कारण हवा का प्रवाह कई बार रुक जाता है, जिससे कोहरा ज्यादा देर तक बना रह सकता है। 27 तारीख की बारिश से यहाँ की सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है। गुरुग्राम और फरीदाबाद: अरावली की पहाड़ियों के नजदीक होने के कारण गुरुग्राम में रात का तापमान दिल्ली से भी 1-2 डिग्री कम दर्ज किया जा सकता है। यहाँ शीत लहर (Cold Wave) का असर ज्यादा महसूस होगा।   फरवरी की शुरुआत तक कैसी रहेगी सर्दी? आमतौर पर जनवरी के अंत तक सर्दी कम होने लगती है, लेकिन इस बार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता ने सर्दी को बढ़ा दिया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि फरवरी के पहले सप्ताह तक सुबह और शाम की ठंडक बरकरार रहेगी। 27 जनवरी की बारिश के बाद जब आसमान साफ होगा, तो 'रेडिएशन कूलिंग' (Radiation Cooling) के कारण रातें और ठंडी हो जाएंगी।   फरवरी में दिन का तापमान धीरे-धीरे बढ़ेगा और धूप में तेजी आएगी, लेकिन सुबह की सैर करने वालों को फरवरी के मध्य तक जैकेट की जरूरत महसूस होगी।   कुल मिलाकर, दिल्ली-एनसीआर के लोगों को अभी सर्दी से राहत मिलती नहीं दिख रही है। 27 जनवरी को होने वाली बारिश और उसके साथ चलने वाली 40 किमी/घंटा की हवाएं ठंड को चरम पर पहुंचा देंगी। 4 डिग्री तक गिरता पारा और घना कोहरा जनजीवन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप मौसम विभाग के अलर्ट को गंभीरता से लें। घर से बाहर निकलते समय मौसम का हाल जरूर देख लें और अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखें। यह सर्दी का 'फिनाले' हो सकता है, लेकिन यह जाते-जाते अपना असर जरूर दिखाएगा।

Unknown जनवरी 25, 2026 0
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उत्तर भारत में 'कोल्ड अटैक': दिल्ली से यूपी तक घने कोहरे और शीतलहर का रेड अलर्ट, माइनस में जाएगा पहाड़ों का पारा, जानें कल कैसा रहेगा मौसम?

नई दिल्ली/लखनऊ/चंडीगढ़। पूरा उत्तर भारत इस समय कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाओं की चपेट में है। जनवरी का महीना अपने मध्य पड़ाव को पार कर चुका है, लेकिन सर्दी के तेवर नरम होने के बजाय और तीखे होते जा रहे हैं। शनिवार (17 जनवरी) को भी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और बिहार के करोड़ों लोग कोहरे और गलन वाली सर्दी से जूझते नजर आए।READ ALSO:-गाजियाबाद-जेवर RRTS: रूट में कोई बदलाव नहीं, 72 किमी लंबे कॉरिडोर पर ही दौड़ेगी रैपिड रेल, गुरुग्राम लिंक पर आया नया अपडेट   भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्पष्ट कर दिया है कि राहत की उम्मीद अभी बेमानी है। मौसम विभाग ने रविवार, 18 जनवरी 2026 के लिए दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में भीषण शीतलहर (Severe Cold Wave) और घने कोहरे (Dense Fog) का अलर्ट जारी किया है। हालात यह हैं कि सुबह के वक्त विजिबिलिटी (दृश्यता) कई जगहों पर 50 मीटर से भी कम रह गई है, जिससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है।   दिल्ली-NCR: धुंध की चादर और 5 डिग्री का टॉर्चर देश की राजधानी दिल्ली में सर्दी का सितम जारी है। मौसम विभाग के अनुसार, रविवार (18 जनवरी) को भी दिल्लीवासियों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ेगा।   तापमान: दिल्ली में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों की तुलना में तापमान में मामूली सुधार (दशमलव में) देखा गया है, लेकिन बर्फीली हवाओं ने इस राहत को नाकाफी साबित कर दिया है। कोहरा: दिल्ली और एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद) में सुबह और रात के समय 'बहुत घना कोहरा' (Very Dense Fog) छाने की आशंका है। इससे सुबह काम पर जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। प्रदूषण: कोहरे के साथ-साथ प्रदूषण के कण मिलकर 'स्मॉग' (Smog) का निर्माण कर रहे हैं, जिससे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है।   उत्तर प्रदेश: गलन वाली सर्दी और बारिश के संकेत उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज दोरंगा बना हुआ है। रात और सुबह के वक्त हाड़ कंपाने वाली ठंड है, तो दिन में धूप निकलने से थोड़ी राहत मिल रही है।   गलन का प्रकोप: राज्य के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में बर्फीली हवाओं ने लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया है। सुबह के समय 'गलन' इतनी ज्यादा है कि अलाव ही एकमात्र सहारा नजर आ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ का असर: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे ठंड से थोड़ी राहत मिलेगी। बारिश की भविष्यवाणी: मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 22 जनवरी के आसपास पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। यह बारिश ठंड को और बढ़ा सकती है।   बिहार: धूप खिली पर कोहरा बरकरार बिहार में भी कमोबेश यूपी जैसे ही हालात हैं। राज्य के अधिकतर हिस्सों में दिन में तेज धूप निकल रही है, जिससे अधिकतम तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन तराई वाले इलाकों (नेपाल सीमा से सटे जिले) में कोहरा अब भी बरकरार है। मौसम विभाग ने बिहार में अगले सात दिनों तक मौसम शुष्क रहने की बात कही है, लेकिन सुबह और शाम की कनकनी बरकरार रहेगी।   पंजाब और हरियाणा: उत्तर भारत का 'कोल्ड स्टोर' इस समय मैदानी इलाकों में पंजाब और हरियाणा ठंड का केंद्र बने हुए हैं।   हरियाणा का हाल: हरियाणा का नारनौल इलाका सबसे ठंडा दर्ज किया गया है, जहां पारा गिरकर 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। हिसार और अंबाला में भी तापमान सामान्य से काफी नीचे है। पंजाब की स्थिति: पंजाब के अमृतसर में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। कोल्ड डे (Cold Day): मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक इन दोनों राज्यों के कई हिस्सों में 'शीत दिवस' (Cold Day) की स्थिति बनी रहेगी। इसका मतलब है कि दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से काफी नीचे रहेगा। बारिश का अलर्ट: पंजाब में 18 और 19 जनवरी को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय हो सकती है।   पहाड़ों का हाल: बर्फबारी से बढ़ी मैदानी ठंड मैदानी इलाकों में पड़ रही इस भीषण ठंड का सीधा कनेक्शन पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी से है।   बर्फबारी: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी (Snowfall) का दौर जारी है। माइनस में पारा: पर्यटन स्थल मनाली और कश्मीर की घाटियों में न्यूनतम तापमान शून्य से 7 डिग्री नीचे (-7°C) तक लुढ़क सकता है। मैदानों पर असर: पहाड़ों से होकर आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाएं (Northerly Winds) ही मैदानी इलाकों में ठिठुरन बढ़ा रही हैं।   यातायात पर कोहरे की मार: ट्रेनें लेट, उड़ानें प्रभावित घने कोहरे का सबसे बुरा असर यातायात सेवाओं पर पड़ा है।   रेल सेवा: उत्तर भारत से गुजरने वाली दर्जनों ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 2 से 8 घंटे की देरी से चल रही हैं। नई दिल्ली, कानपुर और लखनऊ स्टेशनों पर यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। हवाई सेवा: कम विजिबिलिटी के कारण दिल्ली एयरपोर्ट समेत अन्य हवाई अड्डों पर उड़ानों में देरी हो रही है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक करें। सड़क यातायात: यमुना एक्सप्रेसवे और अन्य हाईवे पर विजिबिलिटी बेहद कम है। पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर वाहन चालकों को फॉग लाइट्स (Fog Lights) का इस्तेमाल करने और धीमी गति से गाड़ी चलाने की सलाह दी है।   महानगरों का मौसम: मुंबई-बेंगलुरु में राहत जहां उत्तर भारत कांप रहा है, वहीं देश के अन्य हिस्सों में मौसम सुहावना है।   मुंबई और बेंगलुरु: यहां न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, जो काफी सुखद है। कोलकाता और रांची: पूर्वी भारत के इन शहरों में सुबह के समय हल्की ठंड महसूस की जा रही है, लेकिन दिन का मौसम साफ है।   आने वाले दिनों का पूर्वानुमान: क्या 21 जनवरी से बढ़ेगी ठंड? IMD के दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद 21 जनवरी से उत्तर भारत में एक बार फिर सर्दी की जोरदार वापसी हो सकती है। हवा की दिशा बदलते ही तापमान में फिर से गिरावट दर्ज की जाएगी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले पांच दिनों तक उत्तर-पश्चिमी भारत में कोहरे का असर बना रहेगा।   हेल्थ एडवाइजरी: सावधानी ही बचाव है भीषण ठंड को देखते हुए डॉक्टरों और प्रशासन ने विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं:   हृदय रोगी (Heart Patients): ठंड में खून की नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। बीपी के मरीज अपनी दवाएं समय पर लें और सुबह बहुत जल्दी वॉक पर जाने से बचें। बच्चे और बुजुर्ग: इन्हें ठंड से सबसे ज्यादा खतरा है। सिर और कान को अच्छे से ढककर रखें। खान-पान: शरीर को गर्म रखने के लिए गुड़, तिल, सूप और गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें। वाहन चलाना: कोहरे में लो-बीम पर हेडलाइट रखें और इंडिकेटर का प्रयोग करें।   उत्तर भारत में सर्दी का यह 'स्पेल' अभी लंबा चलने वाला है। 18 जनवरी का दिन भी ठंड और कोहरे के नाम रहेगा। ऐसे में, रजाई और अलाव ही आपके सबसे अच्छे साथी हैं। मौसम की मार से बचने के लिए सतर्क रहें और मौसम विभाग के अपडेट्स पर नजर बनाए रखें।

Unknown जनवरी 17, 2026 0
Instruction: Please create a professional news image relevant to this report.  Subject: A split-screen composition representing Delhi's Pollution Crisis and GRAP-4 restrictions.  Left Side: A hazy, smog-filled view of India Gate or Delhi traffic, sho

Delhi Pollution: दिल्ली की हवा हुई जहरीली, GRAP-4 की सख्त पाबंदियां लागू, ट्रकों की एंट्री बंद और स्कूलों पर आया ये बड़ा फैसला

Delhi Air Quality Remains Very Poor with AQI 343 Severe Conditions in Pusa and Okhla Forecast Predicts No Relief for 48 Hours

दिल्ली बनी 'गैस चैंबर': हवाओं की रफ्तार थमते ही राजधानी का दम घुटा, AQI 343 के पार; अगले 48 घंटे 'रेड अलर्ट' जैसी स्थिति!

Delhi Dehradun Economic Corridor 99 Percent Complete Set to Open in February Travel Time Cut to 2 5 Hours

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: पहाड़ों का सफर अब 'हवा' से बातें! ना जाम, ना थकान... सिर्फ 2.5 घंटे में पहुंचेंगे दून, फरवरी में खुलने जा रहा है उत्तर भारत का 'ग्रोथ इंजन'

Delhi Cold Wave Mercury Dips to 3 Degrees Palam Breaks 13 Year Record as Capital Shivers
दिल्ली बनी 'शिमला': 3 डिग्री पारा, नसों को जमा देने वाली शीतलहर और कोहरे का अटैक... कड़ाके की ठंड ने तोड़े कई सालों के रिकॉर्ड

नई दिल्ली/गाजियाबाद/नोएडा: देश की राजधानी दिल्ली और पूरा एनसीआर (NCR) इस समय कुदरत के 'शीत प्रहार' से जूझ रहा है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों में दिख रहा है। हालत यह है कि दिल्ली की रातें अब 'सजा' बन गई हैं और सुबह की शुरुआत 'बर्फीली हवाओं' के साथ हो रही है। सोमवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने पिछले दो सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वहीं, एनसीआर के रेवाड़ी में तो ठंड ने ऐसा कहर बरपाया कि पारा माइनस 0.6 डिग्री (शून्य से नीचे) दर्ज किया गया।READ ALSO:-मुरादाबाद EXCLUSIVE: रशियन बार-बालाएं, शराब का समंदर और 'मंत्रमुग्ध' माननीय... वायरल वीडियो ने उधेड़ दी शहर के 'सफेदपोशों' की बखिया   मौसम विभाग (IMD) ने कड़ाके की ठंड को देखते हुए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। लोग अलाव और हीटर के सहारे दिन काटने को मजबूर हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं कि दिल्ली में सर्दी का यह सितम कब तक जारी रहेगा और मौसम विभाग की ताजा भविष्यवाणी क्या है।   3 डिग्री का टॉर्चर: कांप उठी दिल्ली, आयानगर रहा सबसे ठंडा सोमवार की सुबह दिल्लीवालों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं थी। जब लोग सोकर उठे, तो बाहर का मंजर किसी हिल स्टेशन जैसा था।   सफदरजंग: दिल्ली के मानक मौसम केंद्र सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह इस सीजन का सबसे कम तापमान है और सामान्य से लगभग 4 डिग्री कम है। आयानगर: दिल्ली का आयानगर इलाका सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान गिरकर 2.9 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। रिग और पालम: पालम और रिज क्षेत्र में भी तापमान 4.0 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया, जिससे भीषण शीतलहर की स्थिति बनी रही।   मौसम विभाग के अनुसार, जब मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है, तो उसे भीषण शीतलहर (Severe Cold Wave) की श्रेणी में रखा जाता है। दिल्ली में यह लगातार दूसरा दिन है जब 'कोल्ड वेव' दर्ज की गई है।   NCR का हाल: रेवाड़ी में जम गया पानी, पारा माइनस में सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि आसपास के एनसीआर के इलाकों में भी ठंड ने विकराल रूप धारण कर लिया है।   हरियाणा से सटे रेवाड़ी में ठंड का प्रकोप सबसे ज्यादा देखने को मिला। यहां न्यूनतम तापमान माइनस 0.6 डिग्री (-0.6°C) दर्ज किया गया। खेतों में ओस की बूंदें बर्फ बन गईं और गाड़ियों की विंडशील्ड पर पाले की सफेद चादर बिछी नजर आई। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी न्यूनतम तापमान 3 से 4 डिग्री के बीच बना हुआ है। गलन इतनी ज्यादा है कि दिन में धूप निकलने के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिल रही है।   हवा में नमी 100%, गलन ने बढ़ाई मुश्किलें मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को हवा में नमी का स्तर 100 प्रतिशत से 53 प्रतिशत के बीच रिकॉर्ड किया गया। हवा में ज्यादा नमी और कम तापमान का यह कॉम्बिनेशन बेहद खतरनाक होता है। इसी वजह से 'विजिबिलिटी' (दृश्यता) कम हो रही है और कोहरा घना होता जा रहा है। सुबह के समय घने कोहरे के कारण सड़कों पर गाड़ियां रेंगती नजर आईं, वहीं ट्रेनों और उड़ानों पर भी इसका असर पड़ना शुरू हो गया है।   पहाड़ों की बर्फबारी ने बढ़ाई मैदानी इलाकों की मुसीबत दिल्ली में इस 'हड्डी तोड़' ठंड की मुख्य वजह उत्तर भारत के पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी है।   उत्तराखंड और हिमाचल: इन राज्यों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बर्फबारी हो रही है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, औली, मनाली और शिमला सफेद चादर में लिपटे हुए हैं। बर्फीली हवाएं: वहां से होकर आने वाली उत्तर-पश्चिमी (North-Westerly) हवाएं सीधी दिल्ली और एनसीआर की तरफ आ रही हैं। ये हवाएं अपने साथ पहाड़ों की ठंडक लेकर आ रही हैं, जिससे मैदानी इलाकों में तापमान तेजी से गिर रहा है।   इतिहास के पन्नों में दिल्ली की सर्दी: जब जम गई थी राजधानी दिल्ली की सर्दी का इतिहास भी काफी रोचक और डरावना रहा है। सोमवार को सफदरजंग में दर्ज 3 डिग्री तापमान ने पिछले दो सालों का रिकॉर्ड तोड़ा है, लेकिन इतिहास में इससे भी भयंकर ठंड पड़ चुकी है।   पालम का रिकॉर्ड (1967 में माइनस 2.2 डिग्री) बीते रविवार को पालम में 3 डिग्री तापमान दर्ज हुआ, जो पिछले 13 सालों में सबसे कम था। इससे पहले 7 जनवरी 2013 को पालम में 2.6 डिग्री तापमान दर्ज हुआ था। अगर इतिहास के पन्नों को पलटें, तो 11 जनवरी 1967 को पालम में तापमान माइनस 2.2 डिग्री (-2.2°C) तक गिर गया था, जो अब तक का सर्वकालिक रिकॉर्ड है।   सफदरजंग का रिकॉर्ड (1935 में माइनस 0.6 डिग्री) सफदरजंग केंद्र पर 16 जनवरी 1935 को न्यूनतम तापमान माइनस 0.6 डिग्री दर्ज किया गया था। मौसम विभाग का कहना है कि अगर हवाओं की दिशा नहीं बदली, तो आने वाले दिनों में हम फिर से ऐसे रिकॉर्ड के करीब पहुंच सकते हैं।   कब मिलेगी राहत? मौसम विभाग की बड़ी भविष्यवाणी ठंड से ठिठुर रहे लोगों के मन में बस एक ही सवाल है- "आखिर यह ठंड कब जाएगी?" मौसम विभाग (IMD) ने इसको लेकर एक विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है।   अगले 2-3 दिन: अगले दो से तीन दिनों तक (मंगलवार और बुधवार) दिल्लीवासियों को राहत की कोई उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभी तापमान 3 से 4 डिग्री के आसपास ही बना रहेगा। शीतलहर जारी रहेगी और सुबह के समय घना कोहरा छाया रहेगा। मंगलवार को सफदरजंग में तापमान 3 डिग्री या उससे भी नीचे जा सकता है, जिससे शीतलहर की 'हैट्रिक' पूरी हो जाएगी।   16-17 जनवरी से मिलेगी राहत: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 16 और 17 जनवरी के आसपास मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।   पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत की तरफ बढ़ रहा है। इसके असर से हवाओं की दिशा बदलेगी। हवा की दिशा: अभी चल रही बर्फीली उत्तर-पश्चिमी हवाओं की जगह दक्षिण-पूर्वी हवाएं ले सकती हैं। ये हवाएं अपेक्षाकृत गर्म होती हैं। इससे न्यूनतम तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी होगी और शीतलहर का प्रकोप कम होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ठंड खत्म हो जाएगी, लेकिन 'प्रचंड ठंड' से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी।   डॉक्टर्स की चेतावनी: 'हार्ट और बीपी' के मरीज रहें सावधान भीषण ठंड को देखते हुए दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों के डॉक्टर्स ने हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। 3 डिग्री तापमान शरीर के लिए, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए घातक हो सकता है।   ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा: कड़ाके की ठंड में नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। एम्स (AIIMS) और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर्स ने बुजुर्गों को सुबह की सैर (Morning Walk) से बचने की सलाह दी है। हाइपोथर्मिया: अगर शरीर का तापमान सामान्य से बहुत कम हो जाए तो हाइपोथर्मिया हो सकता है। इसमें कंपकंपी, सांस लेने में दिक्कत और बेहोशी आ सकती है। खान-पान: शरीर को गर्म रखने के लिए गुड़, तिल, मूंगफली, ड्राई फ्रूट्स और गर्म सूप का सेवन करें। खाली पेट घर से बाहर न निकलें।   जनजीवन अस्त-व्यस्त: रैन बसेरों में भीड़, सड़कों पर सन्नाटा शीतलहर का सबसे बुरा असर बेघर और गरीब लोगों पर पड़ रहा है। दिल्ली सरकार द्वारा बनाए गए रैन बसेरों (Shelter Homes) में भीड़ बढ़ गई है। सड़कों के किनारे सोने वाले लोग अलाव के सहारे रात गुजारने को मजबूर हैं। प्रशासन ने लोगों को कंबल बांटने और अलाव की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।   स्कूलों के समय में भी बदलाव किया गया है, और कई प्राइवेट स्कूलों ने छोटे बच्चों के लिए विंटर ब्रेक को आगे बढ़ा दिया है। बाजारों में भी शाम होते ही सन्नाटा पसरने लगा है। लोग जल्दी घर लौटने की कोशिश कर रहे हैं।   अभी और सताएगी सर्दी कुल मिलाकर, दिल्ली और एनसीआर वालों को अभी कुछ दिन और 'दांत किटकिटाने' वाली सर्दी का सामना करना पड़ेगा। यह मौसम का वह दौर है जब आपको अपनी सेहत का सबसे ज्यादा ख्याल रखने की जरूरत है। गर्म कपड़े पहनें, जरूरत हो तभी बाहर निकलें और मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर बनाए रखें।   ख़बरीलाल की टीम मौसम के हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है। जैसे ही कोई नया अलर्ट आएगा, हम आप तक पहुंचाएंगे।

Unknown जनवरी 12, 2026 0
Namo Bharat and Delhi Metro Launch Single Point Security Check Trial at New Ashok Nagar Station for Seamless Travel

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Unknown जनवरी 21, 2026 0

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