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आखिरी मौका: केंद्र, राज्य और अन्य सरकारी सेवाओं के सभी पेंशनभोगी 30 नवंबर तक अनिवार्य रूप से जमा करें जीवन प्रमाण पत्र।

पेंशनधारकों के लिए सबसे बड़ी खबर: 30 नवंबर तक जमा करें 'जीवन प्रमाण पत्र', वरना रुक जाएगी पेंशन!

Unknown अक्टूबर 6, 2025 0
Big News for Pensioners: Submit ‘Life Certificate’ by November 30 or Pension Will Stop
Big News for Pensioners: Submit ‘Life Certificate’ by November 30 or Pension Will Stop
केंद्र, राज्य और अन्य शासकीय सेवाओं से सेवानिवृत्त हुए लाखों पेंशनभोगियों के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना है। यदि आप चाहते हैं कि आपकी मासिक पेंशन बिना किसी रुकावट के जारी रहे, तो 30 नवंबर 2025 की समय सीमा से पहले अपना जीवन प्रमाण पत्र (Life Certificate) अनिवार्य रूप से जमा कर दें। सरकार ने इस प्रक्रिया को अब पूरी तरह से डिजिटल और बेहद आसान बना दिया है, ताकि बुजुर्गों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।READ ALSO:-UP Scholarship पर सबसे बड़ी खबर: 1 लाख छात्रों को दिवाली का तोहफा! दोबारा खुलेगा पोर्टल, जानें कब खाते में आएंगे पैसे

 

हर साल की तरह, पेंशन पाने वाले लाभार्थियों को यह प्रमाण देना होता है कि वे जीवित हैं। ऐसा न करने पर दिसंबर माह से पेंशन की राशि रोकी जा सकती है।
 

क्या है जीवन प्रमाण पत्र और क्यों है जरूरी?
जीवन प्रमाण पत्र एक डिजिटल सर्टिफिकेट है जो पेंशनधारक के जीवित होने का प्रमाण देता है। पेंशन वितरण एजेंसियां (बैंक, पोस्ट ऑफिस, आदि) इसी प्रमाण के आधार पर पेंशन का भुगतान जारी रखती हैं। 
 
  • उद्देश्य: पेंशन प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना कि पेंशन केवल सही लाभार्थियों को ही मिल रही है।
  • समय सीमा: आमतौर पर, हर साल 1 नवंबर से 30 नवंबर के बीच इसे जमा करना होता है।

 

80 साल से ऊपर के पेंशनधारक विशेष ध्यान दें
80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ पेंशनधारकों के लिए यह प्रक्रिया 1 अक्टूबर 2025 से ही शुरू हो गई है। ऐसे पेंशनर्स 30 नवंबर 2025 तक अपना प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। हालांकि, सभी के लिए अंतिम तिथि 30 नवंबर ही है।

 

पेंशन रुकने का खतरा:-
 
समय पर काम न करने का असर
  • अगर कोई पेंशनधारक 30 नवंबर 2025 तक अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा नहीं करता है, तो इसका सीधा असर उसकी मासिक पेंशन पर पड़ेगा।
  • पेंशन पर रोक: दिसंबर 2025 से पेंशन वितरण एजेंसी आपकी पेंशन रोक सकती है।
  • पुनः शुरुआत : एक बार प्रमाण पत्र जमा हो जाने के बाद ही रुकी हुई पेंशन बहाल की जाएगी और बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा।

 

डिजिटल सुविधा से मिली बड़ी राहत
 
 
घर बैठे ऐसे जमा करें सर्टिफिकेट
सरकार ने पेंशनधारकों की सुविधा के लिए इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है, जिसे 'जीवन प्रमाण' (Jeevan Pramaan) नाम दिया गया है। अब पेंशनधारक कई आसान तरीकों से अपना प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं।

 

जीवन प्रमाण पोर्टल/ऐप:
Jeevan Pramaan ऐप या पोर्टल पर जाकर आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन या बायोमेट्रिक स्कैनर (फिंगरप्रिंट/आइरिस) के माध्यम से डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) जेनरेट किया जा सकता है।

 

 फेस ऑथेंटिकेशन : यह सबसे आसान तरीका है। पेंशनधारक अपने एंड्रॉइड स्मार्टफोन पर 'AadhaarFaceRd' और 'Jeevan Pramaan App' डाउनलोड करके घर बैठे सेल्फी के जरिए यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

 

बैंक/डाकघर
  • पेंशनधारक अपने बैंक की शाखा या डाकघर जाकर भी यह प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं।
  • भारतीय डाक विभाग (India Post) ने डाकिया (Postman) के माध्यम से घर पर DLC जमा करने की भी सुविधा शुरू की है, जो बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए बड़ी राहत है।
  • कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) /जीवन प्रमाण सेंटर:
  • देशभर में स्थापित नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या जीवन प्रमाण सेंटर जाकर भी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण कराया जा सकता है।
 
 
सरकारी पहल: DLC कैंपेन 4.0 की तैयारी
पेंशन और पेंशनर कल्याण विभाग (DoPPW) ने हाल ही में देशव्यापी डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) कैंपेन 4.0 चलाने की घोषणा की है।

 

  • लक्ष्य: 1 नवंबर से 30 नवंबर 2025 के दौरान ज्यादा से ज्यादा पेंशनभोगियों को डिजिटल माध्यम से जोड़ने का लक्ष्य है।
  • घर-घर सुविधा: इस कैंपेन के तहत, बैंक और डाक विभाग के कर्मचारी, खासकर बुजुर्ग और दिव्यांग पेंशनभोगियों के लिए, घर-घर जाकर जीवन प्रमाण पत्र जमा करने में मदद करेंगे।
  • बड़ा डेटा: सरकार का लक्ष्य है कि इस वर्ष 2 करोड़ से अधिक पेंशनभोगियों को DLC सुविधा से जोड़ा जाए, जिससे उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

 

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
 
जीवन प्रमाण पत्र कब तक वैध रहता है?
एक बार जमा किया गया जीवन प्रमाण पत्र, जमा करने की तारीख से अगले 12 महीने तक वैध रहता है। 
आधार कार्ड अनिवार्य है क्या?
  डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है, क्योंकि यह बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए जरूरी है।
क्या पेंशनर्स को हर साल नवंबर में ही जमा करना होता है? 
 आमतौर पर हां, हालांकि यह आपकी पिछली जमा करने की तारीख पर भी निर्भर करता है। फिर भी, नवंबर का महीना सबसे सामान्य समय होता है।
पेंशन रुकी तो क्या करें?
  तत्काल अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा करें। प्रमाण पत्र जमा होते ही, अगले महीने की पेंशन के साथ रुकी हुई राशि भी जारी कर दी जाएगी।
डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट कैसे चेक करें? 
आप Jeevan Pramaan पोर्टल पर जाकर अपना 'प्रमाण आईडी' और अन्य विवरण दर्ज करके अपने प्रमाण पत्र का स्टेटस चेक कर सकते हैं। 
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बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई

आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला   मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।   बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।   दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था।   अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी।   बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे।   पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया।   एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी   सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता।   पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है।   आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?

देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।   सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया?   क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है।   पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है।   दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है।   सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?"   असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है।   सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है।   विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है।   विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।"   NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है।   NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।   CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।      आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया।  डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है।     कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं:   1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।   2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है।   सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है:   पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है।   दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।   गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।"   आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए।   सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है।   फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है।     जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; Kidney की बीमारी बनी मौत का कारण

बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है।   चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था।   टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।   फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी।   Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप   किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।   इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।"   Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।   सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।

दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी।   आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:   Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi)   मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी।   रूट मैप (Route Map) और स्टेशन   मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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खबरीलाल डेस्क

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Aadhaar Vision 2032 Identification will now be done through facial recognition
'अंगूठा लगाने' का झंझट होगा खत्म: आधार में होने जा रहा है अब तक का सबसे बड़ा 'Tech-Upgrade', जानें क्या है सरकार का 'विजन 2032'

भारत की डिजिटल पहचान 'आधार' (Aadhaar) जल्द ही एक नए और हाई-टेक अवतार में नजर आने वाला है। सरकार ने आधार के तकनीकी ढांचे को पूरी तरह से बदलने के लिए 'आधार विजन 2032' (Aadhaar Vision 2032) दस्तावेज तैयार कर लिया है। इस नए विजन का उद्देश्य आधार को न केवल तेज और सुरक्षित बनाना है, बल्कि इसे फ्रॉड-फ्री (धोखाधड़ी मुक्त) भी करना है। सबसे बड़ा बदलाव बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन में देखने को मिलेगा, जहां फिंगरप्रिंट की जगह अब फेशियल रिकग्निशन (Facial Recognition) यानी चेहरे से पहचान को प्राथमिकता दी जाएगी।READ ALSO:-अलर्ट! ट्रैफिक चालान या टोल टैक्स नहीं भरा तो नेशनल हाईवे पर ड्राइविंग भूल जाएं; सरकार कस रही है नकेल, बजट सत्र में आएगा ऐतिहासिक प्रस्ताव   यूआईडीएआई (UIDAI) के सीईओ भुवनेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि भले ही लक्ष्य 2032 का है, लेकिन तैयारियां भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों को ध्यान में रखकर अभी से शुरू कर दी गई हैं।   फेशियल रिकग्निशन: सुरक्षा और सुविधा का नया स्तर अब तक आधार वेरिफिकेशन के लिए मुख्य रूप से फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल होता आया है, लेकिन अक्सर तकनीकी खामियों या उंगलियों के निशान मिटने (खासकर बुजुर्गों और मजदूरों में) के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 'आधार विजन 2032' के तहत सरकार का लक्ष्य इस निर्भरता को खत्म करना है।   100 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन का लक्ष्य: वर्तमान में रोजाना लगभग 9 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन होते हैं, जिनमें से करीब 1 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए किए जा रहे हैं। सरकार ने इसे बढ़ाकर हर महीने 100 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन करने का लक्ष्य रखा है। एआई का इस्तेमाल: नई व्यवस्था में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम समय-समय पर यूजर के फेशियल डेटा को ऑटोमैटिकली अपडेट करेगा। इसका फायदा यह होगा कि लोगों को बार-बार आधार केंद्र जाकर अपना बायोमेट्रिक अपडेट नहीं कराना पड़ेगा।   क्वांटम कंप्यूटिंग और ब्लॉकचेन से अभेद्य होगी सुरक्षा डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए यूआईडीएआई तकनीकी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। नए रोडमैप में क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum Computing) और ब्लॉकचेन (Blockchain) जैसी तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की गई है।   क्वांटम कंप्यूटिंग के जरिए आधार के डेटा को इतना सुरक्षित बनाया जाएगा कि भविष्य के सुपरकंप्यूटर भी इसकी एन्क्रिप्शन (Encryption) को तोड़ न सकें। वहीं, ब्लॉकचेन तकनीक डेटा में पारदर्शिता लाएगी और किसी भी तरह की छेड़छाड़ को असंभव बना देगी। यूआईडीएआई का मौजूदा तकनीकी अनुबंध 2027 में समाप्त हो रहा है, जिसके बाद 2032 तक के लिए नया और उन्नत तकनीकी ढांचा लागू किया जाएगा।   विशेषज्ञ समिति ने तैयार किया रोडमैप इस महत्वकांक्षी दस्तावेज को तैयार करने के लिए पिछले साल अक्टूबर में यूआईडीएआई के चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। समिति अपने प्रस्ताव को अगले महीने अंतिम रूप देगी और मार्च तक इसे यूआईडीएआई को सौंप दिया जाएगा।   समिति में देश-विदेश के दिग्गज तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं: विवेक राघवन (सह-संस्थापक, सर्वम् एआई) धीरज पांडेय (संस्थापक, न्यूटनिक्स) डॉ. पी. पूर्णचंद्रन (अमृता यूनिवर्सिटी) प्रो. अनिल जैन (मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी) मयंक वत्स (आईआईटी जोधपुर)   बच्चों और किशोरों के लिए विशेष राहत सरकार ने बच्चों और किशोरों के आधार अपडेट को लेकर भी बड़ी जानकारी साझा की है। दिसंबर तक करीब 5 करोड़ बच्चों और किशोरों का बायोमेट्रिक अपडेट पूरा कर लिया गया है। आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि बायोमेट्रिक अपडेट की यह प्रक्रिया सितंबर 2026 तक मुफ्त जारी रहेगी। इससे अभिभावकों को अपने बच्चों के आधार को अपडेट रखने में आसानी होगी और उन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।   'आधार विजन 2032' भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग का समावेश न केवल डेटा सुरक्षा को मजबूती देगा, बल्कि आम आदमी के लिए सेवाओं का लाभ उठाना और भी आसान बना देगा। फेशियल रिकग्निशन की तरफ बढ़ता यह कदम बताता है कि भारत अब डिजिटल पहचान के मामले में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।   सरकार 'आधार विजन 2032' के जरिए आधार को हाई-टेक बना रही है। इसमें फिंगरप्रिंट की जगह फेशियल रिकग्निशन पर जोर होगा और सुरक्षा के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। बच्चों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट सितंबर 2026 तक फ्री रहेगा।

Unknown जनवरी 26, 2026 0
No Challan Payment No Highway Entry

अलर्ट! ट्रैफिक चालान या टोल टैक्स नहीं भरा तो नेशनल हाईवे पर ड्राइविंग भूल जाएं; सरकार कस रही है नकेल, बजट सत्र में आएगा ऐतिहासिक प्रस्ताव

No RAC in Amrit Bharat Express from 2026

भारतीय रेलवे का ऐतिहासिक फैसला: अब 'अमृत भारत' में नहीं करना होगा सीट साझा, RAC का झंझट हमेशा के लिए खत्म!

Link Aadhaar to LPG Avoid Subsidy Loss

आधार-LPG लिंक: आधार-LPG गैस ल‍िंक नहीं करने वालों को होगा बड़ा नुकसान; Online पूरा कर लें ये काम

New Traffic Rules License Suspension for 5 Violations and Strict Toll Norms
ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की अब खैर नहीं! केंद्र सरकार ने लागू किए बेहद सख्त नियम; साल में 5 गलतियां कीं तो 3 महीने के लिए सस्पेंड होगा आपका ड्राइविंग लाइसेंस

नई दिल्ली: भारतीय सड़कों पर फर्राटा भरने वालों और ट्रैफिक नियमों (Traffic Rules) को अपनी जेब में रखने वालों के लिए अब खतरे की घंटी बज चुकी है। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो रेड लाइट (Red Light) को सजावट समझते हैं या हेलमेट (Helmet) को सिर का बोझ, तो संभल जाइए। केंद्र सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है।READ ALSO:-Bijnor Crime News: शिक्षा का मंदिर हुआ शर्मसार, शिवाला कला में छात्रा से दुष्कर्म करने वाला ट्यूशन टीचर गिरफ्तार   1 जनवरी 2026 से मोटर वाहन नियमों में हुए ऐतिहासिक बदलावों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब गलती करने पर सिर्फ आपकी जेब ढीली नहीं होगी, बल्कि आपकी गाड़ी चलाने की आजादी भी छिन सकती है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने नियमों में जो संशोधन किए हैं, उनका सीधा मकसद सड़कों पर अनुशासन लाना और हादसों को रोकना है।   इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि यह नया "5 स्ट्राइक नियम" क्या है, टोल टैक्स को लेकर क्या पेंच फंसा है, और दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में कैसे आपकी हर हरकत पर नजर रखी जा रही है।   नया नियम: '5 गलतियां और आप आउट' (The 5-Strike Rule) सड़क परिवहन मंत्रालय ने क्रिकेट की तरह ही अब सड़कों के लिए भी कड़े नियम तय कर दिए हैं। जैसे 3 स्टंप उखड़ने पर खिलाड़ी आउट होता है, वैसे ही अब 5 ट्रैफिक उल्लंघन (Traffic Violations) करने पर आप 'ड्राइवर सीट' से आउट हो जाएंगे।   क्या है यह नियम? मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यदि कोई वाहन चालक एक कैलेंडर वर्ष (1 जनवरी से 31 दिसंबर) के भीतर 5 या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License - DL) तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया जाएगा।   सस्पेंशन की अवधि: ड्राइविंग लाइसेंस 3 महीने के लिए निलंबित किया जाएगा। प्रभावी तारीख: यह प्रावधान 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में लागू हो चुका है।   कौन सी गलतियाँ पड़ेंगी भारी? अक्सर लोग सोचते हैं कि लाइसेंस सस्पेंड सिर्फ बड़े अपराधों जैसे 'ड्रंकन ड्राइविंग' (शराब पीकर गाड़ी चलाना) या 'हिट एंड रन' में होता है। लेकिन नए नियमों ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। अब 'छोटी' मानी जाने वाली गलतियां भी आपके रिकॉर्ड में 'ब्लैक मार्क' बनेंगी:   हेलमेट न पहनना: अगर आप दोपहिया वाहन बिना हेलमेट चला रहे हैं। सीट बेल्ट की अनदेखी: कार चलाते समय सीट बेल्ट न लगाना। रेड लाइट जंप करना: लाल बत्ती पार करना। स्टॉप लाइन क्रॉस करना: जेब्रा क्रॉसिंग या स्टॉप लाइन के ऊपर गाड़ी रोकना। मोबाइल का प्रयोग: ड्राइविंग के दौरान फोन पर बात करना।   यदि साल भर में इन गलतियों का कुल योग 5 तक पहुँच गया, तो समझ लीजिए कि अगले 3 महीने आप पैदल चलने वाले हैं।   विशेष नोट: "पुराने चालान (2025 या उससे पहले के) इस गिनती में शामिल नहीं होंगे। हर साल 1 जनवरी से आपका रिकॉर्ड 'रीसेट' (Reset) होगा और नई गिनती शुरू होगी। यह चालकों को सुधरने का एक मौका देने जैसा है।"   पहले सिर्फ चालान, अब लाइसेंस पर वार: क्यों बदला कानून? अब तक की व्यवस्था में, अगर आप हेलमेट नहीं पहनते थे तो 1000 रुपये का चालान कटता था। अगर आप अमीर हैं, तो आप चालान भरते थे और अगली बार फिर वही गलती करते थे। इसे 'आदतन अपराधी' (Habitual Offenders) की श्रेणी में रखा जाता है।   सरकार की सोच: सरकार ने पाया कि सिर्फ आर्थिक दंड (Fine) लोगों के व्यवहार में बदलाव नहीं ला रहा है। लोग चालान को 'फीस' समझकर भर देते हैं और नियम तोड़ना जारी रखते हैं।   मनोवैज्ञानिक असर: लाइसेंस सस्पेंड होने का डर पैसे जाने के डर से कहीं ज्यादा बड़ा होता है। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह नौकरीपेशा हो या व्यवसायी, 3 महीने तक बिना गाड़ी के रहने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगा। दुर्घटनाओं में कमी: सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल लाखों लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं। इनमें से अधिकतर हादसे रेड लाइट जंपिंग और ओवरस्पीडिंग के कारण होते हैं। इस सख्त नियम का उद्देश्य इन आंकड़ों को नीचे लाना है।   ड्राइवर को मिलेगा अपना पक्ष रखने का 'पूरा मौका' लोकतंत्र में किसी को भी बिना सुनवाई के सजा नहीं दी जा सकती। नए मोटर वाहन नियमों में 'प्राकृतिक न्याय' (Natural Justice) के सिद्धांत का पूरा पालन किया गया है।   सस्पेंशन की प्रक्रिया (Process of Suspension): ऐसा नहीं है कि 5वां चालान कटते ही उसी वक्त पुलिस आपका लाइसेंस छीन लेगी। इसकी एक विधि सम्मत प्रक्रिया होगी:   नोटिस (Show Cause Notice): जब सिस्टम (सॉफ्टवेयर) देखेगा कि आपके नाम पर इस साल 5 चालान हो चुके हैं, तो आरटीओ (RTO) आपको एक 'कारण बताओ नोटिस' भेजेगा। सुनवाई (Hearing): आपको अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। हो सकता है कि कोई चालान गलती से कटा हो, या उस वक्त गाड़ी कोई और चला रहा हो। फैसला: अगर आप संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं या यह साबित हो जाता है कि गलतियां आपने ही की हैं, तभी सस्पेंशन ऑर्डर जारी होगा।   अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि "बिना सुनवाई के कोई भी एकतरफा कार्रवाई न की जाए।" यह सुनिश्चित करता है कि सिस्टम का दुरुपयोग न हो।   टोल टैक्स चोरों की खैर नहीं: गाड़ी बेचना होगा नामुमकिन! नियमों में दूसरा सबसे बड़ा बदलाव टोल टैक्स (Toll Tax) और वाहनों की खरीद-फरोख्त को लेकर किया गया है। यह बदलाव सीधे तौर पर उन लोगों पर असर डालेगा जो फास्टैग (FASTag) में बैलेंस न होने पर टोल लेन में घुस जाते हैं या टोल देने से बचते हैं।   नया 'टोल-लिंक' सिस्टम: अब आपके वाहन का 'टोल पेमेंट हिस्ट्री' सीधे 'वाहन पोर्टल' (Vahan Portal) से जुड़ गया है।   बकाया टोल का असर: यदि किसी गाड़ी पर कोई टोल टैक्स बकाया (Pending) है, तो उस गाड़ी के साथ निम्नलिखित चीजें नहीं की जा सकेंगी: गाड़ी बेचना (Transfer of Ownership): आप अपनी कार या बाइक किसी दूसरे को बेच नहीं पाएंगे क्योंकि आरटीओ में ट्रांसफर ही नहीं होगा। फिटनेस सर्टिफिकेट (Fitness Certificate): कमर्शियल वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू नहीं होगा। NOC: दूसरे राज्य में जाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी नहीं किया जाएगा।   डिजिटल ट्रैकिंग और फ्री-फ्लो टोलिंग की नींव एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह नियम भारत में आने वाले GPS आधारित टोल सिस्टम (GNSS) की तैयारी है। सरकार बैरियर-लेस टोलिंग (बिना रुकावट के टोल) लाना चाहती है।   जब बैरियर नहीं होंगे, तो टोल अपने आप कटेगा। अगर किसी के खाते में पैसे नहीं हुए, तो वह 'बकाया' माना जाएगा। उस बकाया को वसूलने के लिए सरकार ने यह 'गाड़ी न बिकने' वाला लॉक सिस्टम लगाया है। इससे राजस्व (Revenue) का घाटा रुकेगा।   दिल्ली-मुंबई में 'तीसरी आँख' का पहरा: टेक्नोलॉजी का खेल अगर आप सोच रहे हैं कि पुलिस तो हर जगह खड़ी नहीं होती, तो हम बच निकलेंगे, तो आप गलतफहमी में हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और नोएडा जैसे महानगरों में अब ITMS (Intelligent Traffic Management System) ने कमान संभाल ली है।   कैसे पकड़े जाएंगे आप? CCTV चालान: चौराहों पर लगे हाई-डेफिनिशन कैमरे अब न सिर्फ नंबर प्लेट पढ़ते हैं, बल्कि यह भी देख लेते हैं कि ड्राइवर ने सीट बेल्ट बांधी है या नहीं। ऑटोमैटिक डेटाबेस अपडेट: जैसे ही कैमरा आपको नियम तोड़ते हुए पकड़ेगा, वह तुरंत ई-चालान (E-Challan) जनरेट करेगा। यह चालान सीधे केंद्रीय डेटाबेस में जाएगा और आपकी '5 गलतियों' वाली लिस्ट में जुड़ जाएगा। कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं: इसमें सिफारिश नहीं चलेगी। कंप्यूटर ने अगर 5वीं गलती दर्ज कर ली, तो नोटिस अपने आप जनरेट हो जाएगा।   आंकड़े गवाह हैं: दिल्ली पुलिस ने पिछले साल ही लाखों चालान सिर्फ कैमरों की मदद से काटे थे। अब 2026 में इनकी संख्या और बढ़ने वाली है क्योंकि निगरानी बढ़ा दी गई है।   नए नियमों का आम आदमी पर असर: कुछ उदाहरण आइए समझते हैं कि यह नियम आम जिंदगी को कैसे प्रभावित करेगा:   परिस्थिति 1: ऑफिस जाने वाला व्यक्ति राहुल रोज अपनी बाइक से ऑफिस जाता है। उसे जल्दबाजी रहती है।   जनवरी में: उसने रेड लाइट जंप की (1 स्ट्राइक)। फरवरी में: हेलमेट घर भूल गया (2 स्ट्राइक)। मार्च में: गलत दिशा (Wrong Side) में गाड़ी चलाई (3 स्ट्राइक)। मई में: फिर से रेड लाइट जंप की (4 स्ट्राइक)। जून में: राहुल ने फिर गलती की। नतीजा: जून में राहुल का लाइसेंस सस्पेंड हो जाएगा। अब जुलाई, अगस्त और सितंबर में वह अपनी बाइक नहीं चला पाएगा। उसे कैब या मेट्रो से जाना होगा, जिससे उसका खर्च बढ़ेगा।   परिस्थिति 2: ट्रक ड्राइवर एक ट्रक ड्राइवर का टोल बकाया है। वह सोचता है कि बाद में देख लेंगे। जब साल के अंत में मालिक ट्रक का फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू कराने जाएगा, तो सिस्टम मना कर देगा। जब तक पुराना टोल नहीं भरा जाता, ट्रक सड़क पर नहीं उतर पाएगा। इससे बिजनेस का नुकसान होगा।   सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों की राय सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ (Road Safety Experts) इस कदम को भारत के ट्रैफिक सुधार में 'गेम चेंजर' मान रहे हैं।   "अभी तक भारत में ड्राइविंग लाइसेंस को एक 'अधिकार' माना जाता था, जबकि यह एक 'विशेषाधिकार' (Privilege) है। अगर आप नियमों का पालन नहीं कर सकते, तो आपको सड़क पर गाड़ी चलाने का कोई हक नहीं है। 5 चालान की सीमा बहुत तार्किक है। एक साल में 5 बार गलती करना यह दिखाता है कि ड्राइवर लापरवाह है।"   वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि टोल को फिटनेस और ट्रांसफर से जोड़ने से NHAI (National Highways Authority of India) को करोड़ों रुपये के डूबे हुए राजस्व की वसूली में मदद मिलेगी।   8. चालान और सस्पेंशन से कैसे बचें? (Tips to Avoid Trouble) नए नियमों के डर के बीच, बचने का रास्ता बहुत सीधा और सरल है—नियमों का पालन। यहाँ कुछ टिप्स दिए गए हैं:   DigiLocker का इस्तेमाल करें: अपने डॉक्यूमेंट्स हमेशा डिजिटल फॉर्म में साथ रखें ताकि 'दस्तावेज न होने' का चालान न कटे। ई-चालान स्टेटस चेक करें: महीने में एक बार parivahan.gov.in पर जाकर अपनी गाड़ी का चालान स्टेटस चेक करें। अगर कोई पेंडिंग चालान है, तो उसे तुरंत भरें (हालांकि 5 की गिनती में भुगतान करने से स्ट्राइक कम नहीं होगी, लेकिन रिकॉर्ड साफ रहेगा)। मोबाइल होल्डर का प्रयोग: अगर नेविगेशन देखना है, तो मोबाइल हाथ में न पकड़ें, होल्डर का इस्तेमाल करें। स्टॉप लाइन का सम्मान: रेड लाइट पर हमेशा सफेद पट्टी से पीछे गाड़ी रोकें। कैमरे अक्सर इसी गलती को पकड़ते हैं।   सुधार का मौका या जेब पर डाका? सरकार का यह कदम सख्त जरूर है, लेकिन सड़कों पर बहते खून को रोकने के लिए शायद यही कड़वी दवा जरूरी थी। 1 जनवरी 2026 से शुरू हुआ यह नया अध्याय भारतीय ड्राइवरों की मानसिकता को बदलने का काम करेगा।   यह सिर्फ राजस्व या चालान का मामला नहीं है, यह मामला है 'जीवन रक्षा' का। अगर यह डर कि "मेरा लाइसेंस छिन जाएगा" किसी को हेलमेट पहनने पर मजबूर करता है, तो यह कानून सफल माना जाएगा।   अब गेंद आपकी पाले में है। क्या आप 2026 में एक जिम्मेदार नागरिक की तरह गाड़ी चलाएंगे, या फिर 3 महीने के लिए पैदल चलने की तैयारी करेंगे? फैसला आपका है।   FAQs: पाठकों के मन में उठने वाले सवाल Q1: क्या पिछले साल के पेंडिंग चालान भी 5 की लिमिट में गिने जाएंगे? Ans: नहीं, यह नियम 1 जनवरी 2026 से लागू हुआ है और हर साल 1 जनवरी को मीटर रीसेट होगा। पिछले साल के चालान इसमें नहीं जुड़ेंगे। Q2: अगर मेरा लाइसेंस सस्पेंड हो गया, तो क्या मैं गाड़ी चला सकता हूँ? Ans: बिल्कुल नहीं। सस्पेंशन के दौरान गाड़ी चलाते पकड़े जाने पर भारी जुर्माना (10,000 रुपये तक) और जेल की सजा का प्रावधान है। Q3: क्या मैं सस्पेंशन के खिलाफ अपील कर सकता हूँ? Ans: हाँ, लाइसेंस सस्पेंड करने से पहले आपको सुनवाई का मौका मिलेगा। आप आरटीओ या न्यायालय में अपील कर सकते हैं। Q4: टोल टैक्स बकाया कैसे चेक करें? Ans: आप अपने फास्टैग ऐप या संबंधित बैंक के पोर्टल पर जाकर अपना बैलेंस और बकाया चेक कर सकते हैं। Q5: क्या यह नियम सिर्फ दिल्ली-मुंबई में लागू है? Ans: नहीं, मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) एक केंद्रीय कानून है। यह नियम पूरे भारत में लागू है, हालांकि बड़े शहरों में कैमरों की वजह से इसे लागू करना ज्यादा आसान है।   (अस्वीकरण: यह लेख उपलब्ध जानकारी और सरकारी अधिसूचनाओं के विश्लेषण पर आधारित है। ट्रैफिक नियमों की नवीनतम और सटीक जानकारी के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें।)

Unknown जनवरी 24, 2026 0
atal pension yojana extended till 2030 31 cabinet approval benefits eligibility

Atal Pension Yojana 2026: मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, 2030-31 तक बढ़ाई गई स्कीम; 60 के बाद मिलेगी ₹5,000 की गारंटीड पेंशन

Nationwide Toll Plazas to Go Fully Cashless from April 1 No Cash Accepted FASTag and UPI Mandatory

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Is Government Banning 500 Rupee Notes PIB Fact Check Reveals Truth

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vande bharat sleeper train cancellation refund rules rac removed howrah kamakhya
Vande Bharat Sleeper: टिकट कैंसिल किया तो डूब जाएगा पूरा पैसा! रेलवे ने बंद की ‘आधी सीट’ वाली सुविधा; बुकिंग से पहले जान लें ये सख्त नियम

भारतीय रेलवे ने देश की प्रीमियम ट्रेन सेवा 'वंदे भारत' के स्लीपर वर्जन को लॉन्च कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हावड़ा और कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच चलने वाली देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। सुविधाओं, स्पीड और लग्जरी के मामले में यह ट्रेन हवाई जहाज को टक्कर देने के लिए तैयार है। लेकिन, इस लग्जरी सफर का आनंद लेने की योजना बना रहे यात्रियों के लिए एक बेहद जरूरी और चौंकाने वाली खबर है।READ ALSO:-भविष्य का 'ब्रह्मास्त्र': बच्चों के नाम आज से जोड़ें ₹28 रोज, बुढ़ापे तक वो बनेंगे ₹11 करोड़ के मालिक; जानें NPS वात्सल्य स्कीम का जादुई गणित   रेलवे बोर्ड ने इस प्रीमियम ट्रेन के लिए रिफंड और कैंसिलेशन (Refund and Cancellation) के जो नए नियम जारी किए हैं, वे सामान्य ट्रेनों के मुकाबले बेहद सख्त हैं। अगर आपने टिकट बुक करने में जल्दबाजी दिखाई या बाद में यात्रा का प्लान बदला, तो आपको भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। नए नियमों के मुताबिक, एक निश्चित समय सीमा के बाद टिकट कैंसिल कराने पर आपका पूरा पैसा डूब सकता है।   जेब पर भारी मार: टिकट कैंसिलेशन का नया गणित रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नए नोटिफिकेशन ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। अब तक हम सामान्य ट्रेनों में चार्ट बनने तक टिकट कैंसिल कराकर कुछ रिफंड की उम्मीद रखते थे, लेकिन वंदे भारत स्लीपर में यह नियम पूरी तरह बदल दिया गया है।   1. 8 घंटे वाला 'डेडलाइन' नियम (The 8-Hour Rule): सबसे बड़ा झटका उन यात्रियों के लिए है जो आखिरी वक्त में प्लान बदलते हैं। नए नियम के अनुसार, यदि आप ट्रेन छूटने के निर्धारित समय से 8 घंटे पहले तक अपना कन्फर्म टिकट कैंसिल नहीं कराते हैं, तो आपको रिफंड के तौर पर एक रुपया भी वापस नहीं मिलेगा।   यानी 8 घंटे की समय सीमा के भीतर टिकट कैंसिल करने पर 100% किराया डूब जाएगा।   2. 72 घंटे से 8 घंटे के बीच का नियम: यदि आप ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले तो नहीं, लेकिन 72 घंटे के भीतर टिकट कैंसिल करते हैं, तो भी आपको बड़ा नुकसान होगा। इस समय सीमा (72 घंटे से 8 घंटे) के बीच कैंसिलेशन कराने पर किराए का 50% हिस्सा काट लिया जाएगा। यानी आपको अपनी जेब से दी गई रकम का सिर्फ आधा हिस्सा ही वापस मिलेगा।   3. 72 घंटे से पहले का नियम: अगर आप यात्रा की तारीख से काफी पहले (ट्रेन छूटने के 72 घंटे से ज्यादा समय पहले) टिकट कैंसिल कराते हैं, तो भी पूरा पैसा वापस नहीं मिलेगा।   इस स्थिति में रेलवे किराए का 25% हिस्सा कैंसिलेशन चार्ज के रूप में काट लेगा। बाकी 75% राशि ही यात्री को रिफंड की जाएगी।   अब नहीं मिलेगी 'आधी सीट': RAC सुविधा पूरी तरह खत्म भारतीय रेल यात्रियों के लिए 'आरएसी' (RAC - Reservation Against Cancellation) एक बड़ी राहत होती थी। जब कन्फर्म टिकट नहीं मिलता था, तो आरएसी के जरिए कम से कम ट्रेन में चढ़ने की अनुमति और बैठने के लिए 'आधी सीट' मिल जाती थी।   लेकिन, वंदे भारत स्लीपर में रेलवे ने RAC की सुविधा को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।   इसका मतलब है कि इस ट्रेन में या तो आपका टिकट 'कन्फर्म' (CNF) होगा या फिर 'वेटिंग' (WL)। बीच की वह स्थिति जिसमें दो यात्री एक सीट साझा करते थे, अब इस प्रीमियम ट्रेन में मान्य नहीं होगी। यह फैसला यात्रियों को आरामदायक और भीड़-भाड़ मुक्त यात्रा अनुभव देने के लिए लिया गया है।   कोटा सिस्टम पर भी चला रेलवे का डंडा वंदे भारत स्लीपर को लेकर रेलवे ने कोटा सिस्टम (Quota System) में भी बड़े बदलाव किए हैं। सामान्य ट्रेनों में चलने वाले कई तरह के कोटे इस ट्रेन में लागू नहीं होंगे।   क्या लागू नहीं होगा: इस ट्रेन में किसी भी प्रकार का वीआईपी (VIP) कोटा या सामान्य कोटा नहीं चलेगा। क्या मान्य होगा: मौजूदा निर्देशों के अनुसार, सिर्फ निम्नलिखित श्रेणियों के लिए कोटा सुविधा उपलब्ध होगी: महिलाएं (Ladies Quota) दिव्यांगजन (Divyangjan) सीनियर सिटीजन (Senior Citizens) ड्यूटी पास (Duty Pass)   न्यूनतम 400 किलोमीटर का किराया देना होगा रेलवे ने इस प्रीमियम सर्विस को छोटी दूरी की यात्रा के लिए हतोत्साहित करने के उद्देश्य से एक और नियम जोड़ा है। इस ट्रेन में न्यूनतम किराया दूरी (Minimum Chargeable Distance) 400 किलोमीटर तय की गई है।   इसका मतलब: यदि आप इस ट्रेन में 400 किलोमीटर से कम दूरी (जैसे 100 या 200 किमी) का सफर भी करते हैं, तो भी आपको किराया पूरे 400 किलोमीटर का ही देना होगा। यह नियम स्पष्ट करता है कि यह ट्रेन लंबी दूरी की 'ओवरनाइट जर्नी' (Overnight Journey) के लिए डिजाइन की गई है।   हवाई जहाज जैसी सुविधाएं और रणनीति हावड़ा-गुवाहाटी रूट पर शुरू हुई यह ट्रेन पूरी तरह से वातानुकूलित (Fully AC) है। रेलवे का प्रयास है कि यात्रियों को किफायती किराए में एयरलाइन जैसा अनुभव दिया जाए।   समय की बचत: यह ट्रेन इस रूट पर यात्रा के समय को करीब ढाई घंटे तक कम कर देगी। एयरलाइन तर्ज पर नियम: जिस तरह एयरलाइन्स में प्रस्थान के समय के करीब टिकट कैंसिल कराने पर भारी चार्ज लगता है और रिफंड नाममात्र का मिलता है, ठीक उसी मॉडल को वंदे भारत स्लीपर में अपनाया गया है। इसका उद्देश्य सीटों की बर्बादी को रोकना और केवल गंभीर यात्रियों (Serious Travelers) को ही बुकिंग के लिए प्रोत्साहित करना है।   बुकिंग से पहले हो जाएं सतर्क वंदे भारत स्लीपर निश्चित रूप से भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन, इसके सख्त नियम यह संकेत देते हैं कि अब ट्रेन यात्रा के लिए भी आपको हवाई यात्रा जैसी ही 'प्लानिंग' और 'अनुशासन' की जरूरत होगी। "चलो टिकट करा लेते हैं, नहीं गए तो कैंसिल करा देंगे"—वाली सोच अब आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है।   क्विक हाइलाइट्स (Key Takeaways) रूट: हावड़ा से कामाख्या (गुवाहाटी)। नो रिफंड: ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल कराने पर 0% वापसी। 50% कटौती: 72 से 8 घंटे के बीच कैंसिलेशन पर आधा किराया कटेगा। RAC खत्म: अब नहीं मिलेगी शेयरिंग सीट की सुविधा। मिनिमम किराया: कम से कम 400 किलोमीटर का चार्ज लगेगा।   नोट: यात्री अपनी यात्रा प्लान करते समय इन नियमों का विशेष ध्यान रखें। रेलवे के नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव है, इसलिए बुकिंग के वक्त आधिकारिक वेबसाइट पर शर्तों को जरूर पढ़ें।

Unknown जनवरी 18, 2026 0
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Unknown जनवरी 21, 2026 0

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