देश की प्रमुख एसयूवी निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) ने नए साल की शुरुआत धमाकेदार अंदाज में की है। भारतीय बाजार में अपनी बेहद लोकप्रिय 5-डोर एसयूवी 'थार रॉक्स' (Thar Roxx) का एक नया और एक्सक्लूसिव अवतार 'Mahindra Thar Roxx Star Edition' लॉन्च कर दिया गया है।Read also:-Meerut News: सिस्टम की 'काली करतूत' ने ली जान! नाले में समाया ई-रिक्शा, 30 मिनट तक तड़पते चालक की दर्दनाक मौत; नोएडा जैसा खौफनाक मंजर अगर आप थार रॉक्स खरीदने का प्लान बना रहे थे लेकिन इसके लाइट कलर वाले इंटीरियर के गंदा होने की चिंता आपको सता रही थी, तो यह खबर आपके लिए ही है। कंपनी ने ग्राहकों की डिमांड को सुनते हुए इस नए स्पेशल एडिशन में बड़े कॉस्मेटिक बदलाव किए हैं। यह नया एडिशन टॉप-एंड AX7L ट्रिम पर आधारित है, जो इसे फीचर्स के मामले में भी 'स्टार' बनाता है। इस नए एडिशन की सबसे बड़ी खासियत इसका नया 'सिट्रीन यलो' (Citrine Yellow) कलर और पूरी तरह से ब्लैक-आउट केबिन थीम है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस नई एसयूवी में क्या कुछ खास है और इसकी कीमत आपके शहर में कितनी हो सकती है। कीमत और वैरिएंट्स: ₹16.85 लाख से शुरू महिंद्रा ने थार रॉक्स स्टार एडिशन को बहुत ही आक्रामक कीमत पर उतारा है। इसे पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन विकल्पों में पेश किया गया है, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह केवल रियर-व्हील ड्राइव (RWD) में उपलब्ध होगी। कीमतों की सूची (एक्स-शोरूम): वैरिएंट (RWD) इंजन ट्रांसमिशन कीमत (Ex-Showroom) Star Edition Diesel 2.2L डीजल मैनुअल (MT) ₹16.85 लाख Star Edition Petrol 2.0L पेट्रोल ऑटोमैटिक (AT) ₹17.85 लाख Star Edition Diesel 2.2L डीजल ऑटोमैटिक (AT) ₹18.35 लाख यह स्पेशल एडिशन अब कंपनी की सभी आधिकारिक डीलरशिप पर बुकिंग के लिए उपलब्ध है। इसकी डिलीवरी भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है। एक्सटीरियर: बोल्ड लुक और नया 'सिट्रीन यलो' कलर ऑफ-रोडिंग और लाइफस्टाइल एसयूवी के दीवानों के लिए थार रॉक्स का लुक्स हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है। स्टार एडिशन में कंपनी ने इसे और भी ज्यादा स्पोर्टी बनाने की कोशिश की है। नया कलर ऑप्शन: स्टार एडिशन के साथ एक बिल्कुल नया रंग 'सिट्रीन यलो' (Citrine Yellow) पेश किया गया है। यह ब्राइट कलर सड़क पर इस गाड़ी की मौजूदगी को और भी दमदार बनाता है। इसके अलावा, ग्राहक इसे टैंगो रेड, एवरेस्ट वाइट और स्टेल्थ ब्लैक रंगों में भी खरीद सकते हैं। ग्लॉस-ब्लैक ग्रिल: रेगुलर थार रॉक्स में बॉडी कलर की ग्रिल आती थी, जिसे लेकर कई लोगों की मिली-जुली राय थी। स्टार एडिशन में इसे बदलकर प्रीमियम 'ग्लॉस-ब्लैक' (Piano Black) फिनिश दिया गया है, जो गाड़ी के फ्रंट लुक को एग्रेसिव बनाता है। ब्लैक अलॉय व्हील्स: इसके 19-इंच के अलॉय व्हील्स अब डुअल-टोन की जगह पूरी तरह से ब्लैक पेंट स्कीम में दिए गए हैं। स्पेशल बैजिंग: इस एडिशन की पहचान के लिए गाड़ी के C-पिलर और फेंडर पर 'Star Edition' का खास बैज लगाया गया है। इंटीरियर: सबसे बड़ा बदलाव - अब मिलेगी 'ऑल-ब्लैक थीम' जब थार रॉक्स पहली बार लॉन्च हुई थी, तो इसके वाइट (White/Ivory) इंटीरियर की काफी चर्चा हुई थी। हालांकि, भारतीय सड़कों और धूल-मिट्टी को देखते हुए कई ग्राहकों ने इसके गंदे होने की शिकायत की थी। महिंद्रा ने इस फीडबैक पर काम करते हुए Thar Roxx Star Edition में केबिन को पूरी तरह से ब्लैक थीम में बदल दिया है। सीट्स: इसमें अब प्रीमियम ब्लैक लेदरेट अपहोल्स्ट्री दी गई है। सीटों पर स्वेड (Suede) एक्सेंट्स का इस्तेमाल किया गया है जो इसे लग्जरी फील देते हैं। डैशबोर्ड: डैशबोर्ड और डोर पैड्स भी अब डार्क थीम में हैं, जिससे केबिन स्पोर्टी नजर आता है और इसे साफ रखना भी आसान होगा। लेआउट: डैशबोर्ड का डिजाइन और लेआउट AX7L ट्रिम जैसा ही रखा गया है, जो काफी मॉडर्न और प्रैक्टिकल है। फीचर्स: लग्जरी और टेक्नोलॉजी का संगम चूंकि यह एडिशन टॉप मॉडल AX7L पर आधारित है, इसलिए इसमें फीचर्स की कोई कमी नहीं है। कंपनी ने इसे एक कम्प्लीट फैमिली एसयूवी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। दो बड़ी स्क्रीन: डैशबोर्ड पर 10.25-इंच की दो एचडी स्क्रीन दी गई हैं। एक इंफोटेनमेंट सिस्टम के लिए और दूसरी डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर के लिए। कनेक्टिविटी: इंफोटेनमेंट सिस्टम में वायरलेस एपल कारप्ले (Apple CarPlay) और एंड्रॉइड ऑटो (Android Auto) का सपोर्ट मिलता है। म्यूजिक सिस्टम: बेहतरीन साउंड क्वालिटी के लिए इसमें 9-स्पीकर वाला हरमन कार्डन (Harman Kardon) का प्रीमियम ऑडियो सिस्टम लगा है। पैनोरमिक सनरूफ: भारतीयों की पसंदीदा फीचर 'पैनोरमिक सनरूफ' (Panoramic Sunroof) भी इसमें मौजूद है, जो केबिन को हवादार और बड़ा महसूस कराती है। वेंटिलेटेड सीट्स: गर्मियों के लिए इसमें फ्रंट वेंटिलेटेड सीट्स दी गई हैं। इंजन और परफॉर्मेंस: सिर्फ RWD का विकल्प क्यों? महिंद्रा ने स्टार एडिशन को उन ग्राहकों के लिए डिजाइन किया है जो मुख्य रूप से शहर में गाड़ी चलाते हैं और जिन्हें हार्डकोर ऑफ-रोडिंग (4x4) की जरूरत कम पड़ती है। इसीलिए यह एडिशन सिर्फ रियर-व्हील ड्राइव (RWD) कॉन्फ़िगरेशन में आता है। इंजन स्पेसिफिकेशन्स: पेट्रोल इंजन: 2.0-लीटर mStallion टर्बो-पेट्रोल इंजन। पावर: 177 hp टॉर्क: 380 Nm यह इंजन सिर्फ 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ उपलब्ध है। डीजल इंजन: 2.2-लीटर mHawk डीजल इंजन। पावर: 175 hp टॉर्क: 400 Nm (ऑटोमैटिक में) इसमें 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड ऑटोमैटिक दोनों गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है। भले ही इसमें 4x4 नहीं है, लेकिन महिंद्रा ने इसमें 'स्नो', 'सैंड' और 'मड' जैसे टेरेन मोड्स (Terrain Modes) दिए हैं, जो खराब रास्तों पर पकड़ बनाने में मदद करते हैं। सेफ्टी: ADAS और 6 एयरबैग्स का सुरक्षा चक्र सुरक्षा के मामले में महिंद्रा ने कोई समझौता नहीं किया है। थार रॉक्स स्टार एडिशन में लेवल-2 ADAS (Advanced Driver Assistance Systems) दिया गया है, जो इसे अपने सेगमेंट में सबसे सुरक्षित गाड़ियों में से एक बनाता है। प्रमुख सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग्स (स्टैण्डर्ड) 360-डिग्री कैमरा (पार्किंग और तंग गलियों के लिए बेहद उपयोगी) इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) ऑटो होल्ड के साथ इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक सभी पहियों पर डिस्क ब्रेक ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट्स क्या आपको यह खरीदना चाहिए? महिंद्रा थार रॉक्स का यह 'स्टार एडिशन' उन लोगों के लिए एक बेहतरीन पैकेज है जो थार का रफ-एंड-टफ लुक चाहते हैं लेकिन प्रीमियम इंटीरियर और कम मेंटेनेंस (ब्लैक कलर के कारण) की तलाश में थे। ₹16.85 लाख की शुरुआती कीमत पर, यह क्रेटा, सेल्टोस और ग्रैंड विटारा जैसी कॉम्पैक्ट एसयूवी के मुकाबले एक भारी-भरकम और रोड प्रेजेंस वाली गाड़ी का विकल्प देती है। अगर आपका ज्यादा काम शहर और हाईवे पर है और आप ऑफ-रोडिंग के लिए 4x4 की सख्त जरूरत महसूस नहीं करते, तो Thar Roxx Star Edition आपके गैराज की शान बन सकती है। महिंद्रा ने थार रॉक्स का 'स्टार एडिशन' लॉन्च किया है, जिसकी कीमत ₹16.85 लाख से ₹18.35 लाख तक है। इसमें नया सिट्रीन यलो कलर, ब्लैक फ्रंट ग्रिल और ग्राहकों की डिमांड पर 'ऑल-ब्लैक इंटीरियर' दिया गया है। यह केवल रियर-व्हील ड्राइव (RWD) में उपलब्ध है और इसमें ADAS, पैनोरमिक सनरूफ और वेंटिलेटेड सीट्स जैसे प्रीमियम फीचर्स मिलते हैं।
नई दिल्ली: अगर आप नए साल की शुरुआत में हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) की कोई नई बाइक खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपको थोड़ा निराश कर सकती है। दुनिया की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने भारतीय बाजार में अपनी कम्यूटर मोटरसाइकिल रेंज (Commuter Bike Range) की कीमतों में चुपचाप बढ़ोतरी कर दी है। यह बढ़ोतरी कंपनी की सबसे ज्यादा बिकने वाली बाइक Hero Splendor Plus से लेकर एंट्री-लेवल Hero HF 100 तक लागू की गई है।READ ALSO:-बजाज पल्सर 125 का 'धमाकेदार' अवतार: नए LED फीचर्स और किलर लुक के साथ हुई लॉन्च, लेकिन कीमत सुनकर झूम उठेंगे आप हीरो मोटोकॉर्प ने बिना किसी बड़े शोर-शराबे के यह कदम उठाया है, जो सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर असर डालेगा। हालांकि, कंपनी ने कीमतों में बहुत भारी इजाफा नहीं किया है, लेकिन इनपुट कॉस्ट और महंगाई का हवाला देते हुए दाम बढ़ाए गए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि अब आपको अपनी पसंदीदा बाइक के लिए कितने पैसे ज्यादा चुकाने होंगे। कितनी बढ़ीं कीमतें? (Price Hike Details) रिपोर्ट्स के मुताबिक, हीरो मोटोकॉर्प ने अपने अलग-अलग मॉडल्स पर 250 रुपये से लेकर 750 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। यह बढ़ोतरी मॉडल और वेरिएंट के आधार पर अलग-अलग है। Hero Splendor Plus: देश की सबसे भरोसेमंद बाइक मानी जाने वाली स्प्लेंडर प्लस की कीमत में लगभग 250 रुपये का इजाफा किया गया है। Hero Passion Plus: इस स्टाइलिश कम्यूटर बाइक के दाम भी 250 रुपये बढ़ाए गए हैं। Hero HF Series: एंट्री-लेवल सेगमेंट की Hero HF 100 और Hero HF Deluxe के खरीदारों को अब 750 रुपये तक ज्यादा देने होंगे। यह प्राइस हाइक ऑटो कंपनी के सालाना प्राइस रिविजन (Annual Price Revision) का हिस्सा माना जा रहा है। आमतौर पर जनवरी महीने में ऑटो कंपनियां कच्चे माल की लागत और अन्य खर्चों को समायोजित करने के लिए कीमतें बढ़ाती हैं। नई प्राइस लिस्ट: अब क्या हैं नए दाम? कीमतों में बदलाव के बाद शोरूम में गाड़ियों के दाम बदल गए हैं। नीचे दी गई सूची से आप समझ सकते हैं कि किस बाइक के लिए अब आपको कितनी एक्स-शोरूम कीमत (Ex-Showroom Price) चुकानी होगी: मॉडल (Model) पुरानी कीमत (Old Price) नई कीमत (New Price) बढ़ोतरी (Hike) Hero HF 100 ₹58,739 ₹59,489 ₹750 Hero HF Deluxe ₹55,992 - ₹68,482 ₹56,742 - ₹69,235 ₹750 Hero Passion Plus ₹76,691 - ₹78,074 ₹76,941 - ₹78,324 ₹250 Hero Splendor Plus ₹74,152 - ₹80,721 ₹74,152 - ₹80,721 ₹250 (नोट: ऊपर दी गई सभी कीमतें एक्स-शोरूम हैं। आपके शहर में ऑन-रोड कीमत में अंतर हो सकता है।) क्यों बढ़ाई गई कीमतें? हीरो मोटोकॉर्प ने कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से इनपुट कॉस्ट (Input Cost) में वृद्धि को जिम्मेदार ठहराया है। स्टील, प्लास्टिक और अन्य कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सामान्य महंगाई (Inflation) के कारण उत्पादन लागत बढ़ गई है। मार्जिन को बनाए रखने और कंपनी की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ रखने के लिए यह मामूली बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 250 से 750 रुपये की बढ़ोतरी इतनी ज्यादा नहीं है कि यह ग्राहक के खरीदने के फैसले को बदल सके। खासकर तब, जब हीरो की बाइक्स अपनी रीसेल वैल्यू और माइलेज के लिए जानी जाती हैं। दिसंबर में हीरो की रिकॉर्ड बिक्री भले ही कीमतें बढ़ी हों, लेकिन हीरो मोटोकॉर्प के लिए पिछला महीना यानी दिसंबर 2025 शानदार रहा है। कंपनी ने अपनी सेल्स रिपोर्ट में जबरदस्त आंकड़ों का खुलासा किया है। कुल बिक्री: दिसंबर 2025 में हीरो मोटोकॉर्प की थोक बिक्री (Wholesale Sales) 40 फीसदी बढ़कर 4,56,479 यूनिट हो गई। जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 3,24,906 यूनिट था। घरेलू बाजार: भारत के भीतर कंपनी ने पिछले महीने 4,19,243 यूनिट्स बेचीं, जो पिछले साल की समान अवधि में 2,94,152 यूनिट्स थी। मोटरसाइकिल vs स्कूटर: दिसंबर 2025 में मोटरसाइकिलों की बिक्री 4,02,374 यूनिट रही, जबकि स्कूटरों की बिक्री लगभग दोगुनी होकर 54,105 यूनिट पर पहुंच गई। कंपनी ने अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि त्योहारों के सीजन का असर, नए लॉन्च और पेट्रोल व ईवी स्कूटर पोर्टफोलियो (Vida Series) के अच्छे प्रदर्शन के कारण मांग में यह उछाल आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मांग में सुधार होना भी कंपनी के लिए एक सकारात्मक संकेत है। क्या Splendor का जलवा रहेगा कायम? Hero Splendor Plus भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली मोटरसाइकिल है। इसकी रग्डनेस, कम मेंटेनेंस और शानदार माइलेज इसे मध्यम वर्गीय परिवारों की पहली पसंद बनाती है। 250 रुपये की बढ़ोतरी के बावजूद, यह बाइक अपने सेगमेंट में टीवीएस रेडियॉन (TVS Radeon) और होंडा शाइन 100 (Honda Shine 100) जैसी बाइक्स को कड़ी टक्कर देती रहेगी। वहीं, Hero HF Deluxe ग्रामीण भारत की 'लाइफलाइन' मानी जाती है। 750 रुपये की बढ़ोतरी से इसकी ऑन-रोड कीमत में थोड़ा अंतर जरूर आएगा, लेकिन इसके 100cc इंजन की विश्वसनीयता इसे अभी भी एक वैल्यू-फॉर-मनी प्रोडक्ट बनाती है। हीरो मोटोकॉर्प द्वारा किया गया यह प्राइस हाइक (Price Hike) एक रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा है। ₹250 से ₹750 की वृद्धि से ईएमआई (EMI) पर बहुत मामूली फर्क पड़ेगा। हालांकि, बढ़ती महंगाई के दौर में हर एक रुपये की बढ़ोतरी आम आदमी को चुभती है। अब देखना यह होगा कि क्या नए साल में हीरो मोटोकॉर्प कुछ नए फीचर्स या अपडेट्स के साथ इस बढ़ोतरी को सही ठहराती है या नहीं। अगर आप बाइक लेने की सोच रहे हैं, तो यह सही समय हो सकता है इससे पहले कि कीमतें और बढ़ें। हीरो मोटोकॉर्प ने इनपुट कॉस्ट बढ़ने के कारण अपनी कम्यूटर बाइक्स Splendor Plus, Passion Plus (₹250 की बढ़ोतरी) और HF Deluxe, HF 100 (₹750 की बढ़ोतरी) के दाम बढ़ा दिए हैं। इसके बावजूद दिसंबर 2025 में कंपनी की बिक्री में 40% का भारी उछाल दर्ज किया गया है।
भारतीय टू-व्हीलर बाजार के कम्यूटर सेगमेंट में एक बार फिर जबरदस्त हलचल मच गई है। देश की प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी बजाज ऑटो (Bajaj Auto) ने अपनी सबसे लोकप्रिय बाइक्स में से एक, Bajaj Pulsar 125 को बिल्कुल नए अंदाज में लॉन्च कर दिया है। अक्सर देखा जाता है कि जब कोई कंपनी अपनी गाड़ी में नए फीचर्स जोड़ती है या उसे अपडेट करती है, तो उसकी कीमत में बढ़ोतरी होती है। लेकिन बजाज ने इस बार ट्रेंड को पलटते हुए ग्राहकों को दोहरा तोहफा दिया है।READ ALSO:-कार खरीदारों के लिए बड़ी खबर: अब खत्म होगा 'माइलेज का धोखा', 2026 से AC ऑन करके होगी टेस्टिंग; सरकार ने तैयार किया नया रोडमैप नई पल्सर 125 न केवल पहले से ज्यादा स्टाइलिश और हाई-टेक हो गई है, बल्कि हैरानी की बात यह है कि इतने अपडेट्स के बाद भी कंपनी ने बाइक की कीमत पहले के मुकाबले कम कर दी है। अपनी नई LED लाइटिंग, फ्रेश ग्राफिक्स और स्पोर्टी लुक के साथ यह बाइक अब अपने सेगमेंट में 'वैल्यू फॉर मनी' (Value for Money) का सबसे बेहतरीन उदाहरण बन गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि नई बजाज पल्सर 125 में क्या कुछ बदला है, इंजन में कितनी जान है और आपकी जेब पर इसका कितना असर पड़ेगा। Bajaj Pulsar 125: क्या है नया? (What's New) बजाज ने इस बार बाइक के एस्थेटिक्स (दिखावट) और प्रैक्टिकालिटी (उपयोगिता) दोनों पर काम किया है। 1. ऑल-LED लाइटिंग: अंधेरे में भी दिन जैसा उजाला इस अपडेट का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी नई लाइटिंग व्यवस्था है। LED हेडलाइट: नई बजाज पल्सर 125 में अब हैलोजन बल्ब की जगह नई LED हेडलाइट दी गई है। यह न केवल बाइक को प्रीमियम लुक देती है, बल्कि रात के समय राइडिंग को ज्यादा सुरक्षित बनाती है क्योंकि इससे विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी बेहतर हो जाती है। डिजाइन प्रेरणा: दिलचस्प बात यह है कि इस नई हेडलाइट का डिजाइन हाल ही में अपडेट हुई बड़ी बाइक Pulsar 150 से लिया गया है, जो इस छोटी पल्सर को भी एक बड़े और भारी-भरकम होने का अहसास कराता है। LED इंडिकेटर्स: हेडलाइट के साथ-साथ इसमें अब LED टर्न इंडिकेटर्स भी जोड़े गए हैं, जो इसे मॉडर्न टच देते हैं। 2. नए कलर और फ्रेश ग्राफिक्स: युवाओं के लिए स्पोर्टी लुक लुक और फील के मामले में भी बाइक को अपग्रेड किया गया है ताकि यह युवाओं को आकर्षित कर सके। ग्राफिक्स अपडेट: अपडेटेड पल्सर 125 के फ्यूल टैंक (Fuel Tank), साइड पैनल (Side Panel) और इंजन काउल (Engine Cowl) पर बिल्कुल नए ग्राफिक्स देखने को मिलते हैं। फ्रेश अपील्स: ये नए ग्राफिक्स और स्टीकर्स बाइक को पुराने मॉडल की तुलना में कहीं ज्यादा स्पोर्टी और फ्रेश लुक प्रदान करते हैं। कंपनी ने नए कलर ऑप्शन्स को विशेष रूप से युवाओं की पसंद को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है। कीमत में भारी कटौती: ग्राहकों के लिए 'गुड न्यूज' आमतौर पर फेसलिफ्ट मॉडल महंगे होते हैं, लेकिन बजाज ने यहाँ बाजी पलट दी है। नई पल्सर 125 के कार्बन वेरिएंट्स की कीमतों में कटौती की गई है। Carbon Single Seat: इस वेरिएंट की नई कीमत अब 89,910 रुपये तय की गई है। Carbon Split Seat: स्पोर्टी लुक वाली स्प्लिट सीट वेरिएंट की कीमत 92,046 रुपये है। कितनी हुई बचत: रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ही वेरिएंट पुराने मॉडल की तुलना में 2,400 रुपये सस्ते कर दिए गए हैं। यह कटौती उन ग्राहकों के लिए बहुत बड़ी खबर है जो बजट के कारण पल्सर खरीदने से हिचकिचा रहे थे। कम दाम में बेहतर फीचर्स मिलने से यह बाइक अब सीधे तौर पर 125cc सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करेगी। इंजन और परफॉर्मेंस: वही पुराना भरोसा बजाज ने बाइक के कॉस्मेटिक (बाहरी) बदलावों पर तो खूब काम किया है, लेकिन इसके दिल यानी इंजन के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की है। कंपनी ने अपने परखे हुए इंजन को ही बरकरार रखा है। इंजन: इसमें वही 124.4cc का एयर-कूल्ड, सिंगल-सिलेंडर इंजन मिलता है। पावर और टॉर्क: यह इंजन 11.8hp की अधिकतम पावर और 10.8Nm का पीक टॉर्क जनरेट करने में सक्षम है। गियरबॉक्स: इंजन को 5-स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। यह सेटअप शहर के ट्रैफिक में चलाने और हाईवे पर क्रूज करने, दोनों ही स्थितियों के लिए एक संतुलित परफॉर्मेंस प्रदान करता है। जरूरी सूचना: Neon वेरिएंट वालों के लिए चेतावनी अगर आप पल्सर 125 का Neon वेरिएंट खरीदने का मन बना रहे हैं, तो रुकिए और इस जानकारी को ध्यान से पढ़ें। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऊपर बताए गए सभी नए अपडेट्स—जैसे कि LED हेडलाइट, LED इंडिकेटर्स और नए ग्राफिक्स—सिर्फ Carbon वेरिएंट तक ही सीमित हैं। Neon वेरिएंट में ये अपडेट्स नहीं दिए गए हैं। इसलिए शोरूम पर बुकिंग करते समय वेरिएंट का चयन सावधानी से करें। Pulsar 125 vs Pulsar 150: क्या है फर्क? बजाज ने हाल ही में 2026 Pulsar 150 ट्विन डिस्क मॉडल को भी बाजार में रखा है। ऐसे में पल्सर 125 और 150 के बीच का अंतर समझना जरूरी है। फीचर्स का अंतर: Pulsar 150 का ट्विन डिस्क वेरिएंट कंपनी का सबसे महंगा और फीचर-लोडेड मॉडल है। इसमें आगे और पीछे दोनों टायरों में डिस्क ब्रेक (Twin Disc) की सुविधा मिलती है, जो जबरदस्त स्टॉपिंग पावर देती है। Pulsar 125 की कमी: पल्सर 125 का स्प्लिट सीट वेरिएंट भले ही देखने में काफी पॉपुलर और स्पोर्टी हो, लेकिन इसमें रियर डिस्क ब्रेक (Rear Disc Brake) की कमी खलती है, जो Pulsar 150 में मौजूद है। समानता: हालाँकि, स्प्लिट सीट, स्प्लिट रियर ग्रैब रेल और ओवरऑल स्पोर्टी डिजाइन लैंग्वेज के मामले में पल्सर 125 भी अपने बड़े भाई (Pulsar 150) जैसा ही प्रीमियम फील देती है। क्या आपको यह बाइक खरीदनी चाहिए? अगर आप 125cc सेगमेंट में एक ऐसी बाइक तलाश रहे हैं जो न सिर्फ दिखने में भारी-भरकम और स्टाइलिश हो, बल्कि जिसमें मॉडर्न फीचर्स (जैसे LED लाइट्स) भी हों, तो नई Bajaj Pulsar 125 एक शानदार विकल्प है। सोने पर सुहागा यह है कि अब इसके लिए आपको पहले से कम कीमत चुकानी पड़ेगी। 2400 रुपये की बचत और नए फीचर्स का जुड़ना इसे इस समय बाजार की सबसे 'वैल्यू फॉर मनी' बाइक बनाता है।
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में कार खरीदते समय ग्राहक सबसे पहले सेल्समैन से एक ही सवाल पूछता है— "भैया, ये गाड़ी माइलेज (औसत) कितना देती है?" कंपनी के ब्रोशर और विज्ञापनों में 20 से 25 किलोमीटर प्रति लीटर का दावा देखकर ग्राहक खुश हो जाता है, लेकिन जब वह गाड़ी को सड़क पर उतारता है, तो हकीकत कुछ और ही निकलती है। एसी (Air Conditioner) ऑन करते ही माइलेज का आंकड़ा धड़ाम से नीचे गिर जाता है। सालों से चली आ रही ग्राहकों की इस टीस और शिकायत को अब सरकार ने गंभीरता से लिया है।READ ALSO:-Atal Pension Yojana 2026: मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, 2030-31 तक बढ़ाई गई स्कीम; 60 के बाद मिलेगी ₹5,000 की गारंटीड पेंशन केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने कार कंपनियों की मनमानी और लैब टेस्टिंग के पुराने तरीकों को बदलने का प्रस्ताव रखा है। अब माइलेज टेस्टिंग 'आदर्श स्थितियों' में नहीं, बल्कि 'वास्तविक स्थितियों' में होगी। इसका सीधा मतलब है कि अब कार का माइलेज टेस्ट एसी चलाकर किया जाएगा। यह नियम 2026 से लागू होने की उम्मीद है, जो भारतीय ऑटो सेक्टर में पारदर्शिता का एक नया अध्याय लिखेगा। सिर्फ माइलेज ही नहीं, बल्कि सुरक्षा (Safety) को लेकर भी सरकार ने कमर कस ली है। भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (Bharat NCAP) के अगले चरण में पैदल चलने वालों की सुरक्षा को भी रेटिंग का हिस्सा बनाया जाएगा। आइए, इस पूरी खबर को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि इसका आप पर क्या असर पड़ेगा। माइलेज टेस्टिंग में ऐतिहासिक बदलाव: अब मिलेगी 'सच्ची' जानकारी अब तक भारत में गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी (Fuel Efficiency) या माइलेज की टेस्टिंग जिन मानकों पर होती थी, वे यूरोपीय मानकों से प्रेरित थे, लेकिन उनमें एक बड़ी खामी थी। टेस्ट के दौरान गाड़ी का एयर कंडीशनर (AC) बंद रखा जाता था। भारत जैसे गर्म देश में, जहां साल के 8-9 महीने एसी के बिना गाड़ी चलाना लगभग नामुमकिन है, वहां एसी बंद करके निकाले गए माइलेज के आंकड़े ग्राहकों को गुमराह करने वाले साबित होते थे। क्या है नया प्रस्ताव? यूनियन रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री द्वारा जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार: लागू होने की तारीख: 1 अक्टूबर 2026। नया नियम: भारत में बिकने वाली सभी M1 कैटेगरी (पैसेंजर गाड़ियां) का माइलेज टेस्ट अब गाड़ी का एसी (AC) ऑन करके किया जाएगा। मानक (Standard): यह टेस्टिंग नए AIS 213 (Automotive Industry Standards) के तहत की जाएगी। क्यों पड़ी इसकी जरूरत? अक्सर देखा गया है कि अगर कोई कंपनी दावा करती है कि उनकी कार 20 kmpl का माइलेज देती है, तो शहर के ट्रैफिक में एसी चलाने पर वह घटकर 12-14 kmpl रह जाता है। यह अंतर इतना बड़ा होता है कि ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस करता है। लैब बनाम सड़क: वर्तमान में टेस्टिंग लैब के अंदर डायनोमोमीटर (Dynamometer) पर नियंत्रित वातावरण में होती है, जहां हवा का प्रतिरोध नहीं होता और एसी बंद रहता है। भारतीय मौसम: भारत में ड्राइविंग के दौरान एसी का इस्तेमाल अनिवार्य सा हो गया है। एसी कंप्रेसर इंजन पर लोड डालता है, जिससे ईंधन की खपत 10% से 15% तक बढ़ जाती है। नए नियम इसी अंतर को खत्म करेंगे। कंपनियों पर बढ़ेगी जवाबदेही, खत्म होंगे झूठे दावे इस नियम के लागू होने के बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी को बड़ा झटका लग सकता है। अब वे ग्राहकों को लुभाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े पेश नहीं कर पाएंगी। पारदर्शिता (Transparency): जब टेस्टिंग एसी ऑन करके होगी, तो जो आंकड़े सर्टिफिकेट पर आएंगे, वे ग्राहक को मिलने वाले असली माइलेज के बेहद करीब होंगे। भरोसा: इससे ब्रांड और ग्राहक के बीच भरोसे का रिश्ता मजबूत होगा। ग्राहक को गाड़ी खरीदते वक्त ही पता होगा कि उसकी जेब पर ईंधन का कितना बोझ पड़ने वाला है। तकनीकी सुधार: जानकारों का मानना है कि अपना माइलेज गिरने से बचाने के लिए कंपनियां अब इंजन तकनीक और एसी कंप्रेसर की एफिशिएंसी को सुधारने पर काम करेंगी, जिसका अंतिम फायदा ग्राहक को ही मिलेगा। सरकार ने इस ड्राफ्ट पर हितधारकों (कंपनियों और आम जनता) से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। भारत NCAP 2: सुरक्षा के मोर्चे पर भी सख्त तैयारी माइलेज के साथ-साथ सरकार ने सुरक्षा मानकों को भी ग्लोबल लेवल पर ले जाने की तैयारी कर ली है। भारत में हाल ही में लॉन्च हुए Bharat NCAP (New Car Assessment Program) को अपग्रेड करके Bharat NCAP 2 लाने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित तारीख: नए सुरक्षा नियम 1 अक्टूबर 2027 से लागू करने की योजना है। मकसद: सिर्फ गाड़ी के अंदर बैठे यात्रियों की जान बचाना ही नहीं, बल्कि गाड़ी की टक्कर से सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों को सुरक्षित रखना भी है। अभी तक गाड़ियों की स्टार रेटिंग मुख्य रूप से क्रैश टेस्ट (टक्कर होने पर गाड़ी का ढांचा कितना सुरक्षित है) पर आधारित होती थी। लेकिन नई व्यवस्था में इसे व्यापक बनाया जा रहा है। अब 5 पैमानों पर होगी सेफ्टी रेटिंग: पैदल यात्रियों का रखा जाएगा खास ख्याल नया प्रस्ताव सुरक्षा रेटिंग को पूरी तरह बदल देगा। अब सिर्फ मजबूत लोहा होना काफी नहीं होगा, बल्कि गाड़ी में एक्सीडेंट रोकने की तकनीक का होना भी जरूरी होगा। नई रेटिंग व्यवस्था इन पांच स्तंभों पर टिकी होगी: (i) क्रैश प्रोटेक्शन (Crash Protection): यह मौजूदा मानक है। इसमें देखा जाएगा कि टक्कर होने पर एयरबैग, सीटबेल्ट और गाड़ी की बॉडी यात्रियों को कितना सुरक्षित रखती है। (ii) पैदल यात्रियों की सुरक्षा (Pedestrian Protection): यह सबसे बड़ा बदलाव है। भारतीय सड़कों पर हर साल हजारों पैदल यात्री और साइकिल सवार गाड़ियों की चपेट में आते हैं। VRU (Vulnerable Road Users): नई रेटिंग में पैदल चलने वालों और दोपहिया सवारों (VRU) की सुरक्षा को कुल स्कोर में 20 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। इसका मतलब है कि गाड़ियों के बोनट और बंपर का डिजाइन ऐसा होना चाहिए कि अगर कोई पैदल यात्री गाड़ी से टकराए, तो उसे कम से कम चोट लगे। (iii) सेफ ड्राइविंग फीचर्स (Safe Driving Features): इसमें यह देखा जाएगा कि गाड़ी में ऐसे कौन से फीचर्स हैं जो ड्राइवर को सुरक्षित गाड़ी चलाने में मदद करते हैं। जैसे—स्पीड अलर्ट, सीट बेल्ट रिमाइंडर, और ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग। (iv) क्रैश अवॉयडेंस (Crash Avoidance): यह एडवांस तकनीक से जुड़ा है। इसमें ADAS (Advanced Driver Assistance Systems) जैसे फीचर्स की जांच होगी। क्या गाड़ी खुद ब्रेक लगा सकती है? क्या वह लेन से भटकने पर चेतावनी देती है? यानी हादसा होने से पहले ही उसे रोकने की क्षमता। (v) हादसे के बाद की सुरक्षा (Post-Crash Safety): एक्सीडेंट हो जाने के बाद गाड़ी कितनी सुरक्षित है? क्या दरवाजे आसानी से खुल रहे हैं ताकि यात्रियों को बाहर निकाला जा सके? क्या ईंधन लीक होकर आग लगने का खतरा तो नहीं है? इलेक्ट्रिक गाड़ियों के मामले में बैटरी की सुरक्षा को भी इसमें परखा जाएगा। 'हवा-हवाई' दावों का दौर क्यों था अब तक? आपके मन में सवाल उठ सकता है कि सरकार ने यह फैसला अब क्यों लिया, और अब तक हमें गलत माइलेज क्यों बताया जा रहा था? पुराना ढर्रा: अब तक भारत में ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) जो टेस्टिंग करता था, वह पुराने मापदंडों पर आधारित थी। इसमें गाड़ी को एक रोलर (Roller) पर खड़ा करके दौड़ाया जाता था, जहां न तो हवा का दबाव होता था, न ही सड़क के गड्ढे और न ही एसी का लोड। यूरोपीय मानक: भारत ने काफी हद तक यूरोपीय मानकों को अपनाया था। यूरोप में मौसम ठंडा रहता है, इसलिए वहां एसी के बिना टेस्टिंग करना व्यावहारिक था। लेकिन भारत की भीषण गर्मी (45-48 डिग्री सेल्सियस) में यह मानक पूरी तरह फेल साबित हो रहा था। कंपनियों का दबाव: कंपनियां हमेशा बेहतर आंकड़े दिखाना चाहती हैं। एसी बंद करके टेस्ट करने से माइलेज 15-20% ज्यादा दिखता है, जो मार्केटिंग के लिए अच्छा होता है। लेकिन अब उपभोक्ता मंत्रालय और परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत की "जमीनी हकीकत" को ध्यान में रखकर ही नियम बनेंगे। इस बदलाव का आम आदमी पर क्या असर होगा? यह बदलाव सीधे तौर पर आपकी कार खरीदने की योजना और जेब को प्रभावित करेगा। फायदे (Pros): सटीक बजटिंग: आपको गाड़ी खरीदते समय पता होगा कि महीने का पेट्रोल/डीजल खर्च कितना आएगा। धोखाधड़ी से बचाव: '25 का माइलेज' बोलकर '15 का माइलेज' देने वाली कारों की पोल खुल जाएगी। सुरक्षित सड़कें: नई सेफ्टी रेटिंग से भारतीय सड़कों पर पैदल चलने वालों की जान ज्यादा सुरक्षित होगी। बेहतर तकनीक: मजबूरन कंपनियों को बेहतर इंजन और सेफ्टी फीचर्स देने होंगे। चुनौतियां (Cons): गाड़ियां महंगी हो सकती हैं: सेफ्टी फीचर्स और माइलेज सुधारने के लिए नई तकनीक लगाने से कारों की लागत बढ़ सकती है। माइलेज के आंकड़े कम दिखेंगे: 2026 के बाद नई कारों के ब्रोशर पर माइलेज के आंकड़े मौजूदा आंकड़ों से कम नजर आएंगे, जिससे ग्राहकों को मानसिक रूप से तैयार होना होगा कि यह "कम" नहीं बल्कि "सच" है। भारतीय ऑटो बाजार का परिपक्व होता दौर भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है। ऐसे में, हमारे नियम भी विश्वस्तरीय होने चाहिए। सरकार द्वारा प्रस्तावित ये नए नियम—चाहे वह एसी के साथ माइलेज टेस्टिंग हो या पैदल यात्रियों की सुरक्षा—यह दर्शाते हैं कि भारतीय बाजार अब परिपक्व हो रहा है। अब वह दौर बीत रहा है जब सिर्फ "सस्ती और टिकाऊ" गाड़ी की मांग होती थी। आज का भारतीय ग्राहक "सुरक्षित और पारदर्शी" सौदा चाहता है। 2026 और 2027 में लागू होने वाले ये नियम निश्चित रूप से कार कंपनियों के लिए चुनौती होंगे, लेकिन अंततः जीत 'उपभोक्ता' की ही होगी। अब शोरूम की चमक-दमक के पीछे 'असली सच' छिप नहीं पाएगा। नोट: यह नियम अभी ड्राफ्ट चरण में हैं। सरकार ने सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी। ऑटो जगत की ऐसी ही बारीक और महत्वपूर्ण खबरों के लिए हमारे साथ बने रहें।
भारत की सड़कों को सुरक्षित बनाने और ड्राइविंग लाइसेंस (DL) प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) में अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक बदलाव करने जा रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मसौदे के अनुसार, आगामी बजट सत्र में 'मोटर वाहन अधिनियम संशोधन 2025' का प्रस्ताव रखा जाएगा।Read also:-Expressway Update: 1 अप्रैल से देश भर के टोल प्लाजा होंगे 100% कैशलेस; अब सिर्फ FASTag और UPI से होगा भुगतान, लंबी कतारों से मिलेगी आजादी इस नए संशोधन का उद्देश्य केवल नियमों को सख्त करना नहीं है, बल्कि तकनीक के बदलते दौर में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को मुख्यधारा में लाना और वरिष्ठ नागरिकों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई से राहत देना भी है। हालांकि, कमर्शियल ड्राइवरों के लिए यह नया कानून किसी 'अग्निपरीक्षा' से कम नहीं होगा। आइए, विस्तार से जानते हैं कि ये बदलाव क्या हैं, इनका आम जनता पर क्या असर होगा और नए नियम कब से लागू हो सकते हैं। 16 साल के किशोरों के लिए खुशखबरी: अब चला सकेंगे इलेक्ट्रिक वाहन पिछले कुछ वर्षों में भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार से 50 सीसी (50cc) क्षमता वाले वाहनों का निर्माण लगभग बंद हो गया है। पुराने मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 16 से 18 वर्ष के किशोरों को केवल 50 सीसी तक के बिना गियर वाले वाहन चलाने का लाइसेंस मिलता था। चूंकि बाजार में ऐसे वाहन उपलब्ध ही नहीं थे, इसलिए व्यावहारिक रूप से 16-18 साल के बच्चों का लाइसेंस बनना बंद हो गया था। लेकिन, अब इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की क्रांति ने सरकार को नियम बदलने पर मजबूर कर दिया है। नया नियम क्या कहता है? प्रस्तावित संशोधन के अनुसार: आयु सीमा: 16 से 18 वर्ष के किशोर अब वैध रूप से लर्नर लाइसेंस (Learner License) बनवा सकेंगे। वाहन की श्रेणी: यह लाइसेंस केवल 1500 वॉट (1500 Watt) तक की मोटर क्षमता वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए मान्य होगा। उद्देश्य: अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता स्कूल या कोचिंग जाने के लिए नाबालिग बच्चों को ई-स्कूटी या बाइक थमा देते हैं। बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाना गैर-कानूनी है और बीमा क्लेम में भी दिक्कत आती है। इस नए नियम से किशोर वैध तरीके से वाहन चला सकेंगे और उन्हें यातायात नियमों का प्रशिक्षण भी मिलेगा। बाजार पर प्रभाव इस फैसले से ई-स्कूटर कंपनियों को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अभी तक हाई-स्पीड ई-स्कूटर के लिए 18 साल की उम्र अनिवार्य थी, लेकिन अब 1500 वॉट तक की श्रेणी में 16 साल के बच्चों के लिए विशेष मॉडल लॉन्च किए जा सकते हैं। भारी वाहन लाइसेंस (Heavy License): 4 साल की लंबी तपस्या सबसे बड़ा और कड़ा बदलाव कमर्शियल और भारी वाहन (Heavy Motor Vehicle - HMV) चालकों के लिए किया जा रहा है। परिवहन मंत्री के बयानों के मुताबिक, भारत में भारी वाहन का लाइसेंस बनवाना बहुत आसान है, जो सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है। अब इस प्रक्रिया को चरणबद्ध (Step-by-step) बनाया जाएगा। मौजूदा व्यवस्था बनाम नई व्यवस्था अभी तक, एक बार लाइट मोटर व्हीकल (LMV) लाइसेंस बनने के एक साल बाद कोई भी व्यक्ति सीधे भारी वाहन लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकता था। लेकिन नई व्यवस्था में इसे पूरी तरह बदल दिया जाएगा। 4 चरणों वाला नया 'स्टेप-लैडर' सिस्टम: पहला चरण (Year 1): सबसे पहले आवेदक को सामान्य चार पहिया (Private Car) का लाइसेंस बनवाना होगा। इसे कम से कम एक वर्ष तक होल्ड करना अनिवार्य होगा। दूसरा चरण (Year 2): एक वर्ष के अनुभव के बाद, आवेदक 'सामान्य व्यावसायिक वाहन' (General Commercial License) के लिए आवेदन कर सकेगा। यह एंट्री-लेवल कमर्शियल लाइसेंस होगा। तीसरा चरण (Year 3): कमर्शियल लाइसेंस पर एक वर्ष का अनुभव पूरा होने के बाद, आवेदक को 'मीडियम भार वाहन' (Medium Goods/Passenger Vehicle) का लाइसेंस दिया जाएगा। चौथा चरण (Year 4 - Final): मीडियम लाइसेंस के साथ एक वर्ष का अनुभव पूरा करने के बाद ही अंततः 'हैवी मोटर व्हीकल' (Heavy Motor Vehicle) का लाइसेंस जारी किया जाएगा। एक नए ड्राइवर को अब भारी ट्रक या बस का स्टीयरिंग थामने का कानूनी अधिकार पाने के लिए कम से कम 4 साल का समय और अनुभव देना होगा। राहत: जिनके पास पहले से ही मीडियम या हैवी लाइसेंस मौजूद है, उन्हें इस नई प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। यह नियम केवल नए आवेदकों पर लागू होगा। लाइसेंस की नई श्रेणियां: LMV 1 और LMV 2 व्यावसायिक वाहनों की दुनिया में स्पष्टता लाने के लिए लाइसेंस की श्रेणियों (Categories) को भी पुनर्गठित किया जा रहा है। यह वर्गीकरण वाहन के सकल भार (Gross Vehicle Weight) पर आधारित होगा। LMV 1 (लाइट मोटर व्हीकल - श्रेणी 1): यह लाइसेंस उन चालकों को जारी किया जाएगा जो 3,500 किलोग्राम तक के भार वाले वाहन (जैसे छोटी पिकअप वैन, टाटा ऐस, आदि) चलाते हैं। LMV 2 (लाइट मोटर व्हीकल - श्रेणी 2): यह श्रेणी 7,500 किलोग्राम तक के भार वाले वाहनों के लिए होगी। इस वर्गीकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ड्राइवर को उस विशिष्ट भार वर्ग के वाहन को संभालने का तकनीकी ज्ञान और कौशल हो। मेडिकल सर्टिफिकेट: 40 पार वालों को राहत, 60 पार वालों पर सख्ती लाइसेंस रिन्यूअल (नवीनीकरण) के दौरान मेडिकल फिटनेस को लेकर नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। यह बदलाव वरिष्ठ नागरिकों और मध्यम आयु वर्ग दोनों को प्रभावित करेगा। 40 से 60 वर्ष के लोगों के लिए बड़ी राहत वर्तमान नियम: अभी तक, 40 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद जब भी आप लाइसेंस रिन्यू करवाते हैं, तो आपको एक पंजीकृत चिकित्सक से मेडिकल सर्टिफिकेट (Form 1A) जमा करना अनिवार्य होता है। नया नियम: सरकार ने माना है कि 40 से 60 वर्ष की आयु में व्यक्ति आमतौर पर स्वस्थ रहता है। इसलिए, अब 60 वर्ष की आयु पूरी करने तक लाइसेंस रिन्यूअल के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को समाप्त करने का प्रस्ताव है। इससे करोड़ों लोगों को आरटीओ (RTO) और डॉक्टरों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी। 60 वर्ष के बाद अनिवार्य मेडिकल चेकअप जैसे ही कोई व्यक्ति 60 वर्ष की आयु सीमा पार करेगा, उसके बाद हर रिन्यूअल पर मेडिकल सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होगा। यह सुनिश्चित करने के लिए है कि दृष्टि (Vision) और शारीरिक रिफ्लेक्स (Reflexes) वाहन चलाने के लिए उपयुक्त हैं। 75 साल के बाद ड्राइविंग: हर साल अग्निपरीक्षा बुजुर्ग ड्राइवरों और सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, 75 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए नियम बेहद सख्त किए जा रहे हैं। ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य: 75 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद, यदि कोई अपना लाइसेंस रिन्यू कराना चाहता है, तो उसे केवल मेडिकल सर्टिफिकेट देने से काम नहीं चलेगा। उसे आरटीओ में जाकर दोबारा ड्राइविंग टेस्ट पास करना होगा। वैधता केवल 1 वर्ष: 75 वर्ष के बाद लाइसेंस 5 साल के लिए रिन्यू नहीं होगा। अब इसे केवल 1 वर्ष के लिए रिन्यू किया जाएगा। यानी, 75 साल के ऊपर के बुजुर्गों को गाड़ी चलाने का अधिकार पाने के लिए हर साल टेस्ट और रिन्यूअल प्रक्रिया से गुजरना होगा। परिवहन मंत्री का विजन: "कुशल ड्राइवर ही बचाएंगे जान" उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और केंद्रीय मंत्रालय के अधिकारियों ने इन बदलावों के पीछे की सोच को स्पष्ट किया है। एक हालिया कार्यक्रम में उन्होंने कहा: "विश्व के तमाम विकसित देशों में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करना एक कठिन प्रक्रिया है, जबकि भारत में, और विशेषकर उत्तर प्रदेश में, यह बेहद आसानी से बन जाता है। इसी कारण हमारी सड़कों पर अकुशल ड्राइवरों की भरमार है।" मंत्री ने जोर देकर कहा कि 16 साल के बच्चों के पास जब वाहन हैं, तो उन्हें कानून के दायरे में लाना जरूरी है। वहीं, भारी वाहन चलाना एक जिम्मेदारी का काम है, जिसे अनुभव के बिना नहीं सौंपा जा सकता। सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े: भारत में हर साल लगभग 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा भारी वाहनों और तेज रफ्तार दोपहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं का है। नए मोटर वाहन अधिनियम का लक्ष्य इन आंकड़ों में भारी कमी लाना है। क्या होगा असर? (Impact Analysis):- ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर: पॉजिटिव: 1500 वॉट तक के इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बिक्री में उछाल आएगा। कंपनियां इस नए 'टीनेज डेमोग्राफिक' (Teenage Demographic) को टारगेट करते हुए नए मॉडल लॉन्च करेंगी। नेगेटिव: कमर्शियल वाहनों के लिए ड्राइवर मिलने में शुरुआत में कमी आ सकती है, क्योंकि नया लाइसेंस बनने में 4 साल का समय लगेगा। ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर: शुरुआत में भारी वाहन चालकों की कमी (Driver Shortage) का संकट गहरा सकता है। लंबी अवधि में, हमें अधिक प्रशिक्षित और परिपक्व ड्राइवर मिलेंगे, जिससे लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन सुरक्षित होगा। आम जनता पर: 40-60 वर्ष के लोगों का समय और पैसा बचेगा। अभिभावकों को अपने 16-18 साल के बच्चों के लिए वैध ई-स्कूटर खरीदने का विकल्प मिलेगा, जिससे चालान का डर खत्म होगा। आगामी प्रक्रिया: कब लागू होंगे नियम? यह प्रस्ताव बजट सत्र (संभवतः फरवरी-मार्च 2025) में संसद में रखा जाएगा। संसद में पेश: संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में पेश किया जाएगा। चर्चा और पारित: वहां चर्चा और अनुमोदन के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अधिसूचना: राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद, सड़क परिवहन मंत्रालय आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी करेगा। लागू होना: उम्मीद की जा रही है कि 2025 के मध्य तक या साल के अंत तक ये नियम पूरे देश में लागू हो जाएंगे। मोटर वाहन अधिनियम संशोधन 2025 भारत में यातायात नियमों के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। जहाँ एक ओर यह किशोरों की आकांक्षाओं और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को स्वीकार करता है, वहीं दूसरी ओर यह भारी वाहनों के लिए "कौशल और अनुभव" (Skill and Experience) को प्राथमिकता देता है। 75 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए वार्षिक टेस्ट और भारी वाहनों के लिए 4 साल का इंतजार यह दर्शाता है कि सरकार अब "लाइसेंस फॉर ऑल" (License for all) के बजाय "लाइसेंस फॉर द डिजर्विंग" (License for the deserving) की नीति पर चल रही है। अगला कदम: यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य 16-18 वर्ष का है, या आप कमर्शियल ड्राइविंग में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो इन बदलावों पर कड़ी नज़र रखें। बजट सत्र के दौरान इन नियमों की अंतिम रूपरेखा स्पष्ट हो जाएगी। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) Q1: क्या 16 साल का बच्चा पेट्रोल वाली बाइक चला सकता है? उत्तर: नहीं। नए नियम के तहत 16 से 18 वर्ष के किशोर केवल 1500 वॉट तक की क्षमता वाले इलेक्ट्रिक वाहन ही चला सकेंगे। गियर वाली पेट्रोल बाइक या 50 सीसी से ऊपर के स्कूटर के लिए 18 वर्ष की आयु अनिवार्य ही रहेगी। Q2: मेरे पास पहले से हैवी लाइसेंस है, क्या मुझे दोबारा टेस्ट देना होगा? उत्तर: नहीं। यदि आपके पास पहले से वैध भारी वाहन लाइसेंस है, तो आपको नई 4-वर्षीय प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। यह नियम केवल नए आवेदकों के लिए है। Q3: 40 साल की उम्र में लाइसेंस रिन्यू कराने पर मेडिकल देना होगा? उत्तर: प्रस्तावित नियमों के अनुसार, अब 40 वर्ष पर मेडिकल सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होगी। यह अनिवार्यता अब 60 वर्ष की आयु के बाद लागू होगी। Q4: क्या नए नियम पूरे भारत में लागू होंगे? उत्तर: जी हाँ, मोटर वाहन अधिनियम एक केंद्रीय कानून है, इसलिए संशोधन पास होने के बाद यह उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र सहित पूरे भारत में समान रूप से लागू होगा। Q5: हेवी लाइसेंस के लिए 4 साल का इंतजार क्यों? उत्तर: सरकार का मानना है कि भारी वाहन सड़क पर सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए ड्राइवर को चरण-दर-चरण (LMV -> Commercial -> Medium -> Heavy) अनुभव प्राप्त करना चाहिए ताकि वह सड़क की परिस्थितियों को बेहतर समझ सके। (यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और प्रस्तावित संशोधनों पर आधारित है। अंतिम नियम संसद द्वारा पारित अधिनियम की अधिसूचना के बाद ही मान्य होंगे।)
नई दिल्ली (ट्रांसपोर्ट डेस्क): सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने देश भर के करोड़ों वाहन मालिकों, विशेषकर कमर्शियल गाड़ी चलाने वालों और टोल टैक्स बचाकर निकलने वालों के लिए अब तक का सबसे सख्त फरमान जारी कर दिया है। अगर आप भी हाइवे पर टोल प्लाजा से गुजरते वक्त टैक्स देने में आनाकानी करते हैं या सिस्टम की खामी का फायदा उठाकर बिना पैसा दिए निकल जाते हैं, तो सावधान हो जाइए।READ ALSO:-Expressway Update: 1 अप्रैल से देश भर के टोल प्लाजा होंगे 100% कैशलेस; अब सिर्फ FASTag और UPI से होगा भुगतान, लंबी कतारों से मिलेगी आजादी केंद्र सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन (दूसरा संशोधन) नियम, 2026 (Central Motor Vehicles (Second Amendment) Rules, 2026) को लागू कर दिया है। इस नए कानून के तहत, टोल टैक्स का बकाया (Unpaid Toll) अब आपकी गाड़ी को कानूनी रूप से अपंग बना सकता है। सरल शब्दों में कहें तो, अगर टोल का पैसा बाकी है, तो आपकी गाड़ी का न तो फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू होगा, न ही आपको नेशनल परमिट मिलेगा और न ही आप अपनी गाड़ी किसी और को बेच पाएंगे (NOC नहीं मिलेगी)। सरकार का यह कदम नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की कमाई बढ़ाने, टोल चोरी रोकने और भविष्य की हाई-टेक टोलिंग व्यवस्था की नींव रखने के लिए उठाया गया है। क्या है नया नियम? समझिए आसान भाषा में अभी तक अगर कोई वाहन चालक टोल प्लाजा पर बिना टैक्स दिए झगड़ा करके या किसी जुगाड़ से निकल जाता था, तो ज्यादा से ज्यादा उसे अगले टोल पर दोगुना टैक्स देना पड़ता था। लेकिन अब सिस्टम पूरी तरह बदल गया है। केंद्रीय मोटर वाहन (दूसरा संशोधन) नियम, 2026 के अनुसार, अब वाहनों के दस्तावेजों (Documents) को टोल पेमेंट सिस्टम से जोड़ दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि "अदा न किया गया यूजर शुल्क" (Unpaid User Fee) अब एक बड़ी बाधा बन जाएगा। गाड़ी का ट्रांसफर रुकेगा (No NOC): अगर आप अपनी कार या ट्रक बेचना चाहते हैं या उसे एक राज्य से दूसरे राज्य (जैसे दिल्ली से यूपी) ट्रांसफर करना चाहते हैं, तो आपको RTO से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) चाहिए होता है। नए नियम के मुताबिक, अगर सिस्टम में आपकी गाड़ी पर 1 रुपया भी टोल बकाया दिखा, तो RTO आपको NOC जारी नहीं करेगा। फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा: कमर्शियल वाहनों (ट्रक, बस, टैक्सी) के लिए हर साल फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है। अब फिटनेस टेस्ट पास करने के बावजूद, अगर टोल बकाया है, तो सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा। बिना फिटनेस के गाड़ी सड़क पर चलाना गैरकानूनी है, जिस पर भारी जुर्माना और जब्ती का प्रावधान है। नेशनल परमिट अटक जाएगा: ट्रकों को देश भर में सामान ढोने लिए नेशनल परमिट की जरूरत होती है। नए नियमों ने साफ कर दिया है कि टोल डिफाल्टर्स को परमिट जारी या रिन्यू नहीं किया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि ट्रांसपोर्ट का धंधा ठप हो सकता है। 'अदा न किया गया यूजर शुल्क': नई परिभाषा और इसका मतलब सरकार ने कानून में संशोधन करके "बकाया टोल" की परिभाषा को बहुत स्पष्ट कर दिया है। इसे तकनीकी भाषा में 'Unpaid User Fee' कहा गया है। इसका मतलब है कि अगर आपकी गाड़ी किसी नेशनल हाईवे, पुल या सुरंग से गुजरी है, जहां टोल (User Fee) लागू है, और वह पैसा किसी भी कारण से इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम (जैसे FASTag या GNSS) के जरिए जमा नहीं हो पाया है, तो उसे 'बकाया' माना जाएगा। पहले लोग फास्टैग में बैलेंस न होने पर कैश लेन में बहस करते थे या बिना दिए भागने की कोशिश करते थे। अब अगर आपकी गाड़ी का नंबर टोल प्लाजा के कैमरे ने कैप्चर कर लिया और पेमेंट नहीं हुआ, तो वह डेटा सीधे 'वाहन' (VAHAN) पोर्टल पर अपडेट हो जाएगा। जैसे ही आप RTO में किसी काम के लिए जाएंगे, कंप्यूटर स्क्रीन पर 'RED FLAG' (लाल निशान) आ जाएगा कि इस गाड़ी पर टोल बकाया है। फॉर्म-28 में हुआ बड़ा बदलाव: अब छिप नहीं पाएगी चोरी इस नियम को सख्ती से लागू करने के लिए सरकार ने कागजी कार्रवाई में भी बदलाव किया है। गाड़ी का NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लेने के लिए जो फॉर्म-28 (Form-28) भरा जाता है, उसमें अब एक नया कॉलम जोड़ा गया है। अब वाहन मालिक को फॉर्म में यह घोषित करना होगा कि उसकी गाड़ी पर कोई टोल टैक्स बकाया नहीं है। यह सिर्फ एक घोषणा नहीं होगी, बल्कि RTO अधिकारी इसे NHAI के डेटाबेस से क्रॉस-चेक करेंगे। यह प्रक्रिया अब ऑनलाइन होगी, जिससे मानवीय हस्तक्षेप (Human Intervention) कम होगा और घूस देकर काम कराने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। सरकार आखिर इतना सख्त क्यों हुई? (The Why) इस सख्त फैसले के पीछे सरकार के तीन बड़े मकसद हैं: 1. भविष्य का टोल सिस्टम (MLFF & GNSS) सरकार देश में मल्टी-लेन फ्री-फ्लो (MLFF) और सैटेलाइट आधारित टोलिंग (GNSS) सिस्टम लागू करने जा रही है। इस सिस्टम में टोल प्लाजा पर कोई बैरियर (डंडा) नहीं होगा। गाड़ियां 100 की स्पीड में निकल जाएंगी और कैमरा/सैटेलाइट से पैसा कटेगा। समस्या यह थी कि अगर बैरियर नहीं होगा, तो लोग बिना पैसा दिए भागेंगे और उन्हें रोकेगा कौन? इसी समस्या का हल यह नया नियम है। अब गाड़ी रोकी नहीं जाएगी, लेकिन अगर पैसा नहीं चुकाया, तो गाड़ी के कागज (NOC, फिटनेस) रोक दिए जाएंगे। यानी, सड़क पर चलने की आजादी, लेकिन कागज रिन्यू कराने की नहीं। 2. NHAI का राजस्व बढ़ाना नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) हर साल हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाती है क्योंकि कई वाहन बिना टोल दिए निकल जाते हैं या लोकल होने का फर्जी दावा करते हैं। इस नियम से टोल वसूली 100% सुनिश्चित होगी। जब लोगों को पता होगा कि 500 रुपये का टोल बचाने के चक्कर में उनकी 15 लाख की गाड़ी की री-सेल वैल्यू खत्म हो जाएगी, तो वे टोल जरूर देंगे। 3. पारदर्शिता (Transparency) अब तक यह पता करना मुश्किल था कि किस गाड़ी पर कितना टोल बाकी है। नए डिजिटल सिस्टम से वाहन पोर्टल पर एक क्लिक में सारी हिस्ट्री सामने आ जाएगी। इससे पुरानी कार खरीदते समय खरीदार भी चेक कर सकेगा कि कहीं वह टोल बकाये वाली गाड़ी तो नहीं खरीद रहा। आम आदमी और ट्रांसपोर्टर्स पर क्या होगा असर? यह फैसला मिश्रित प्रतिक्रियाएं लेकर आया है। जहां एक तरफ यह ईमानदारी से टैक्स भरने वालों के लिए अच्छा है, वहीं दूसरी तरफ ट्रांसपोर्ट सेक्टर में इससे हड़कंप मच सकता है। ट्रांसपोर्टर्स की चिंता: ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) जैसे संगठनों का मानना है कि कई बार फास्टैग सिस्टम की तकनीकी खराबी (Technical Glitch) के कारण पैसा नहीं कटता। ऐसे में अगर उसे 'बकाया' मानकर परमिट रोक दिया गया, तो ट्रक मालिकों को भारी नुकसान होगा। सरकार को एक 'विवाद निवारण तंत्र' (Dispute Resolution Mechanism) भी बनाना होगा ताकि गलत तरीके से दिखाए गए बकाये को हटाया जा सके। पुरानी कार बाजार पर असर: अब पुरानी कार खरीदते समय मैकेनिक से इंजन चेक कराने के साथ-साथ आपको RTO वेबसाइट पर यह भी चेक करना होगा कि गाड़ी पर कोई भारी-भरकम टोल बकाया तो नहीं है। वरना, कार आपके नाम ट्रांसफर ही नहीं होगी और वह देनदारी आपके सिर आ जाएगी। डिजिटल भारत की सख्त राह केन्द्रीय मोटर वाहन नियम 2026 यह साफ संदेश देता है कि भारत अब टोल कलेक्शन में विकसित देशों की तरह सख्त प्रणाली अपना रहा है। "चलता है" वाला रवैया अब नहीं चलेगा। अब टोल देना स्वैच्छिक नहीं, बल्कि गाड़ी के अस्तित्व के लिए अनिवार्य हो गया है। वाहन मालिकों के लिए सलाह यही है कि वे अपने फास्टैग अकाउंट को अपडेट रखें और अगर कोई पुराना बकाया है, तो उसे तुरंत क्लियर करें। क्योंकि आने वाले दिनों में, RTO का कंप्यूटर 'एक्सेप्ट' का बटन तभी दबाएगा, जब टोल का खाता 'निल' (Nil) होगा।
नई दिल्ली (ऑटो डेस्क): जापानी कार निर्माता दिग्गज टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (Toyota Kirloskar Motor) ने भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक नए युग की शुरुआत करते हुए अपनी बहुप्रतीक्षित पहली इलेक्ट्रिक कार से पर्दा उठा दिया है। कंपनी ने अपनी इस मिड-साइज इलेक्ट्रिक एसयूवी को 'अर्बन क्रूजर एबेला' (Urban Cruiser Abella) नाम दिया है। भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग और प्रतिस्पर्धा के बीच टोयोटा की यह एंट्री बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।READ ALSO:-Expressway Update: 1 अप्रैल से देश भर के टोल प्लाजा होंगे 100% कैशलेस; अब सिर्फ FASTag और UPI से होगा भुगतान, लंबी कतारों से मिलेगी आजादी कंपनी का दावा है कि यह नई इलेक्ट्रिक एसयूवी रेंज के मामले में नए मानक स्थापित करेगी और एक बार फुल चार्ज होने पर 500 किलोमीटर से भी ज्यादा की दूरी तय करने में सक्षम होगी। मारुति सुजुकी के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए, टोयोटा ने इस एसयूवी को मारुति की अपकमिंग 'इलेक्ट्रिक विटारा' (e Vitara) के प्लेटफॉर्म पर ही तैयार किया है। आइए विस्तार से जानते हैं टोयोटा अर्बन क्रूजर एबेला के डिजाइन, पावरट्रेन, रेंज, फीचर्स और संभावित कीमत के बारे में: डिजाइन और लुक्स: मारुति से अलग, टोयोटा का मस्कुलर अंदाज हालांकि 'अर्बन क्रूजर एबेला' मारुति ई-विटारा के प्लेटफॉर्म पर आधारित है और इसका ओवरऑल प्रोफाइल काफी हद तक उससे मिलता-जुलता है, लेकिन टोयोटा ने इसे एक अलग पहचान देने के लिए इसके डिजाइन में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। फ्रंट प्रोफाइल: कार के फ्रंट डिजाइन को विशेष रूप से टोयोटा की अपनी डिजाइन भाषा के अनुरूप ढाला गया है। इसमें आपको मारुति से अलग, स्लीक डिजाइन वाली नई LED हेडलाइट्स देखने को मिलेंगी जो इसे एक शार्प और आधुनिक लुक देती हैं। इसके अलावा, इसका फ्रंट बंपर काफी मस्कुलर और आक्रामक बनाया गया है, जो एसयूवी को सड़क पर एक दमदार उपस्थिति प्रदान करता है। साइड और रियर प्रोफाइल: साइड प्रोफाइल की बात करें तो, एबेला में 18-इंच के बड़े एयरो-ऑप्टिमाइज्ड अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। ये व्हील्स न केवल देखने में आकर्षक हैं, बल्कि हवा के प्रतिरोध को कम करके रेंज बढ़ाने में भी मदद करते हैं। कार के चारों ओर दी गई ब्लैक बॉडी क्लैडिंग इसे एक रफ-एंड-टफ और एडवेंचरस लुक देती है। पीछे की तरफ, एसयूवी में कनेक्टेड LED टेललैंप्स दिए गए हैं जो पूरी चौड़ाई में फैले हुए हैं, यह आजकल के प्रीमियम कारों का एक प्रमुख डिजाइन एलिमेंट है। इसके साथ ही एक रूफ स्पॉइलर भी मिलता है जो इसके स्पोर्टी लुक को पूरा करता है। डायमेंशन और स्पेस: टोयोटा अर्बन क्रूजर एबेला की लंबाई 4,285mm है, जो इसे एक उचित मिड-साइज एसयूवी की श्रेणी में रखती है। इसका व्हीलबेस 2,700mm का है। लंबे व्हीलबेस का सीधा मतलब है कि कार के अंदर यात्रियों के लिए, खासकर पीछे की सीट पर बैठने वालों के लिए, काफी अच्छा लेगस्पेस और केबिन स्पेस मिलेगा। पावरट्रेन और परफॉर्मेंस: दो बैटरी विकल्प और दमदार रेंज टोयोटा ने अपनी इस पहली इलेक्ट्रिक एसयूवी को विभिन्न प्रकार के ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दो अलग-अलग बैटरी पैक विकल्पों के साथ पेश किया है। कंपनी ने रेंज और परफॉर्मेंस पर विशेष ध्यान दिया है। 1. 49kWh बैटरी पैक (स्टैंडर्ड रेंज): पहला विकल्प 49kWh का बैटरी पैक है। यह बैटरी पैक 144hp की अधिकतम पावर जनरेट करने में सक्षम है। यह उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है जो मुख्य रूप से शहर के भीतर ड्राइविंग करते हैं। 2. 61kWh बैटरी पैक (लॉन्ग रेंज): दूसरा और बड़ा विकल्प 61kWh का बैटरी पैक है। यह उन ग्राहकों के लिए है जो लंबी दूरी की यात्रा करना पसंद करते हैं या जिन्हें बार-बार चार्ज करने की झंझट नहीं चाहिए। यह बड़ा बैटरी पैक 174hp की दमदार पावर देता है। टॉर्क और ड्राइवट्रेन: दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही बैटरी पैक मॉडल 189Nm का समान टॉर्क जनरेट करते हैं। इसके अलावा, एक बड़ी खासियत यह है कि टोयोटा अर्बन क्रूजर एबेला को फ्रंट व्हील ड्राइव (FWD) के साथ-साथ ऑल व्हील ड्राइव (AWD) विकल्पों में भी उतारा जाएगा। AWD का विकल्प इसे खराब रास्तों और ऑफ-रोडिंग के शौकीनों के लिए भी एक आकर्षक विकल्प बनाएगा। रेंज का बादशाह: रेंज के मामले में टोयोटा ने बड़ा दावा किया है। कंपनी के अनुसार, इसके बड़े 61kWh बैटरी पैक के साथ यह एसयूवी एक बार फुल चार्ज होने पर 543 किलोमीटर (ARAI सर्टिफाइड) तक की दूरी तय कर सकेगी। यह रेंज इसे भारतीय बाजार में मौजूदा कई इलेक्ट्रिक कारों से आगे खड़ा करती है और रेंज की चिंता (Range Anxiety) को काफी हद तक कम करती है। इंटीरियर और फीचर्स: लग्जरी और तकनीक का संगम टोयोटा अर्बन क्रूजर एबेला का केबिन बेहद आधुनिक और प्रीमियम है। कंपनी ने इसमें लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और आरामदेह फीचर्स का भरपूर इस्तेमाल किया है। डुअल स्क्रीन सेटअप: डैशबोर्ड का मुख्य आकर्षण दो बड़ी स्क्रीन हैं। इसमें इंफोटेनमेंट सिस्टम के लिए 10.25-इंच का टचस्क्रीन डिस्प्ले दिया गया है, जो कार के विभिन्न फंक्शन्स को कंट्रोल करने के काम आएगा। इसके ठीक बगल में, ड्राइवर के लिए भी 10.25-इंच का ही एक डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले (इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर) दिया गया है, जो ड्राइविंग से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां स्पष्ट रूप से दिखाता है। प्रीमियम फीचर्स की भरमार: लग्जरी का अहसास कराने के लिए कार में पैनोरमिक सनरूफ दिया गया है, जो केबिन को हवादार और खुला-खुला महसूस कराता है। इसके अलावा, इसमें वायरलेस चार्जिंग की सुविधा है, जिससे आप बिना केबल के अपना स्मार्टफोन चार्ज कर सकते हैं। भारतीय गर्मियों को ध्यान में रखते हुए, वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स का फीचर भी दिया गया है। केबिन के माहौल को बेहतर बनाने के लिए एम्बिएंट लाइटिंग और यात्रियों के अलग-अलग तापमान की जरूरतों के लिए डुअल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल जैसे फीचर्स भी मौजूद हैं। ड्राइवर की सुविधा और प्रीमियम अहसास को बढ़ाने के लिए पारंपरिक गियर लीवर की जगह एक रोटरी डायल गियर सिलेक्टर और एक मॉडर्न टू-स्पोक स्टीयरिंग व्हील दिया गया है। सेफ्टी फीचर्स: सुरक्षा से कोई समझौता नहीं टोयोटा हमेशा से अपनी कारों में सुरक्षा को प्राथमिकता देती रही है, और अर्बन क्रूजर एबेला में भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। लेवल-2 ADAS: यह इलेक्ट्रिक एसयूवी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) के लेवल-2 फीचर्स से लैस है। इसमें अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल शामिल है, जो हाईवे पर ड्राइविंग को आसान और सुरक्षित बनाता है। इसके अलावा, लेन कीप असिस्ट जैसे फीचर्स भी हैं जो ड्राइवर को सुरक्षित रूप से अपनी लेन में बने रहने में मदद करते हैं। स्टैंडर्ड सेफ्टी फीचर्स: इसके अलावा, कार में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 6 एयरबैग्स, एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) के साथ इलेक्ट्रॉनिक ब्रेकफोर्स डिस्ट्रीब्यूशन (EBD) दिया गया है। तंग जगहों पर पार्किंग और मनेवरिंग को आसान बनाने के लिए 360-डिग्री कैमरा भी मिलता है। वाहन की स्थिरता बनाए रखने के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) और टायरों में हवा के दबाव की निगरानी के लिए टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) जैसे महत्वपूर्ण सेफ्टी फीचर्स स्टैंडर्ड तौर पर मिल सकते हैं। मुकाबला और बाजार में स्थिति भारत के मिड-साइज इलेक्ट्रिक एसयूवी सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। टोयोटा अर्बन क्रूजर एबेला का भारतीय बाजार में सीधा मुकाबला पहले से मौजूद और लोकप्रिय टाटा कर्व ईवी (Tata Curvv EV) और एमजी जेडएस ईवी (MG ZS EV) से होगा। इसके अलावा, हुंडई भी जल्द ही अपनी लोकप्रिय क्रेटा का इलेक्ट्रिक अवतार (Upcoming Hyundai Creta Electric) लॉन्च करने वाली है, जिससे एबेला की सीधी टक्कर होगी। 543 किलोमीटर की अपनी दावाकृत रेंज के साथ, टोयोटा इन प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी चुनौती देने के लिए तैयार है। लॉन्चिंग, संभावित कीमत और ऑफर्स टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने अभी तक अर्बन क्रूजर एबेला की आधिकारिक कीमतों का ऐलान नहीं किया है। हालांकि, इंडस्ट्री रिपोर्ट्स और जानकारों के मुताबिक, इसकी एक्स-शोरूम कीमत 18 लाख रुपए से 25 लाख रुपए के बीच हो सकती है। लॉन्चिंग टाइमलाइन की बात करें तो, इस एसयूवी को 2026 की शुरुआत में शोरूम्स में देखे जाने की उम्मीद है। ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए, टोयोटा इसके साथ कुछ आकर्षक ऑफर्स भी पेश कर सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी इस इलेक्ट्रिक कार पर 8 साल की बैटरी वारंटी और एक निश्चित अवधि के बाद 60% एश्योर्ड बायबैक (वापस खरीदने की गारंटी) जैसे ऑफर्स भी दे सकती है, जो इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में संकोच कर रहे खरीदारों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन हो सकता है। कुल मिलाकर, टोयोटा अर्बन क्रूजर एबेला अपनी लंबी रेंज, प्रीमियम फीचर्स, मस्कुलर डिजाइन और टोयोटा के भरोसे के साथ भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरने के लिए तैयार है।
भारत के सड़क परिवहन इतिहास में साल 2026 एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। अगर आप अक्सर अपनी कार से नेशनल हाईवे पर सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। "भैया, खुल्ले नहीं हैं" या "कैश ले लो" जैसे वाक्य अब टोल प्लाजा पर सुनाई नहीं देंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने टोल कलेक्शन सिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव करने का फैसला किया है।Read also:-यूपी में कुदरत का 'श्वेत प्रहार': कोहरे के आगोश में समाया आधा उत्तर प्रदेश, 5 जिलों में 'डीप फ्रीज' जैसे हालात; शून्य हुई दृश्यता मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से देश के सभी टोल प्लाजा पूरी तरह से 'कैशलेस' (Cashless) हो जाएंगे। यानी, नकद लेन-देन (Cash Transaction) को 100% बंद कर दिया जाएगा। अब टोल बैरियर पर सिर्फ डिजिटल मोड यानी फास्टैग (FASTag) या यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए ही टैक्स वसूला जाएगा। इसके साथ ही, वाहन मालिकों को कागजी कार्रवाई से राहत देते हुए 1 फरवरी 2026 से फास्टैग जारी करने के लिए अनिवार्य KYV (Know Your Vehicle) प्रक्रिया को भी खत्म करने का बड़ा ऐलान किया गया है। 'मिशन कैशलेस' - 1 अप्रैल से क्या और क्यों बदल रहा है? केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने हाल ही में 'आज तक' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में इस नई व्यवस्था की पुष्टि की है। सरकार का विजन स्पष्ट है—हाईवे पर गाड़ियों के पहिए थमने नहीं चाहिए। 1. नकद लेन-देन पर पूर्ण प्रतिबंध (Total Ban on Cash) अभी तक नियम यह था कि अगर किसी गाड़ी में फास्टैग नहीं है या फास्टैग काम नहीं कर रहा है, तो वह दोगुनी राशि नकद देकर निकल सकता था। लेकिन 1 अप्रैल से यह विकल्प खत्म होने जा रहा है। नई व्यवस्था: अब हर लेन 'फास्टैग लेन' होगी। अगर आपके पास टैग नहीं है, तो आपको मौके पर ही डिजिटल भुगतान (UPI/QR Code) करना होगा। जुर्माना: यद्यपि जुर्माने की नई दरों का नोटिफिकेशन आना बाकी है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बिना डिजिटल भुगतान के बैरियर पार करने की कोशिश करने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा या गाड़ी को यू-टर्न लेने पर मजबूर किया जाएगा। 2. पायलट प्रोजेक्ट: 25 टोल प्लाजा पर ट्रायल शुरू सरकार ने इसे रातों-रात लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से शुरू किया है। वर्तमान में देश के 25 प्रमुख टोल प्लाजा पर इस 'नो-स्टॉप' और 'नो-कैश' सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट (Pilot Project) चल रहा है। यहाँ से मिल रहे फीडबैक के आधार पर ही 1 अप्रैल को इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। 3. सरकार के 3 बड़े लक्ष्य (The 3 Core Objectives) वी. उमाशंकर के अनुसार, इस फैसले के पीछे सरकार के तीन मुख्य उद्देश्य हैं: A. ईंधन की महाबचत (Fuel Conservation): एक रिपोर्ट के मुताबिक, टोल प्लाजा पर गाड़ियों के रुकने, इंजन चालू रखने और फिर रेंगते हुए आगे बढ़ने में सालाना हजारों करोड़ रुपये का डीजल और पेट्रोल बर्बाद होता है। कैशलेस सिस्टम से गाड़ियां फर्राटे से निकलेंगी, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार (जो तेल आयात में जाता है) बचेगा। B. पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम (Transparency): नकद लेन-देन में अक्सर हेराफेरी की गुंजाइश रहती थी। कई बार टोल ऑपरेटर बिना रसीद दिए कम पैसे लेकर गाड़ी निकाल देते थे। 100% डिजिटल होने से हर एक रुपये का हिसाब कंप्यूटर में दर्ज होगा, जिससे राजस्व चोरी रुकेगी। C. समय की बचत (Seamless Travel): छुट्टे पैसों (Change) के चक्कर में होने वाली बहस और मैनुअल रसीद काटने में लगने वाला समय अब बीते कल की बात हो जाएगी। इससे लॉजिस्टिक्स (ट्रक और ट्रांसपोर्ट) सेक्टर की रफ्तार बढ़ेगी, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी है। फास्टैग यूजर्स के लिए खुशखबरी - 1 फरवरी से KYV खत्म जहाँ एक तरफ नियमों को सख्त किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रक्रिया को आसान भी बनाया जा रहा है। नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने 1 फरवरी 2026 से KYV (Know Your Vehicle) प्रोसेस को खत्म करने का निर्णय लिया है। यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है? अभी तक जब आप नई गाड़ी के लिए फास्टैग खरीदते थे या पुराने को अपडेट करते थे, तो आपको गाड़ी की आरसी (RC), चेसिस नंबर की फोटो और मालिक की आईडी बार-बार अपलोड करनी पड़ती थी। इसे बैंक वेरीफाई करते थे, जिसमें 24 से 48 घंटे लग जाते थे। नया सिस्टम: अब बैंक और फास्टैग जारी करने वाली एजेंसियां सीधे 'वाहन' (VAHAN) डेटाबेस से जुड़ी होंगी। ऑटो-वेरिफिकेशन: जैसे ही आप गाड़ी का नंबर डालेंगे, सिस्टम सरकारी रिकॉर्ड से खुद सारी जानकारी (मालिक का नाम, गाड़ी का प्रकार) उठा लेगा। आपको मैन्युअली कागज अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी। पुराने यूजर्स: जिनके पास पहले से फास्टैग है, उन्हें भी अब बार-बार रूटीन वेरिफिकेशन के मैसेज नहीं आएंगे। बैरियर-मुक्त भारत (Barrier-Free Tolling) की ओर पहला कदम 1 अप्रैल का यह बदलाव अंतिम मंजिल नहीं है, बल्कि एक बड़ी यात्रा की शुरुआत है। सरकार का अंतिम लक्ष्य भारत में 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' (MLFF) सिस्टम लागू करना है। भविष्य की तकनीक: सरकार सैटेलाइट आधारित टोलिंग (GNSS - Global Navigation Satellite System) और ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरों पर काम कर रही है। इसका मतलब है कि भविष्य में टोल प्लाजा ही हटा दिए जाएंगे। गाड़ियां हाईवे पर चलती रहेंगी और जीपीएस या कैमरों की मदद से अदृश्य रूप से टोल कट जाएगा। कैशलेस सिस्टम इसी दिशा में बढ़ाया गया पहला कदम है, ताकि लोगों को डिजिटल भुगतान की आदत पड़ जाए। आम जनता के लिए गाइड - 1 अप्रैल के लिए कैसे तैयार हों? 1 अप्रैल 2026 आने में अब ज्यादा वक्त नहीं है। अंतिम समय की भागदौड़ और जुर्माने से बचने के लिए आपको आज ही ये काम कर लेने चाहिए: 1. फास्टैग केवाईसी (KYC) चेक करें: ध्यान दें, सरकार ने KYV (गाड़ी का वेरिफिकेशन) हटाया है, KYC (ग्राहक का वेरिफिकेशन) नहीं। सुनिश्चित करें कि आपका फास्टैग वॉलेट आपके आधार/पैन से लिंक है और 'Active' स्टेटस में है। 2. UPI को बैकअप बनाएं: अगर किसी तकनीकी कारण से फास्टैग स्कैनर काम नहीं करता, तो आपके पास BHIM, PhonePe, Google Pay या Paytm जैसे UPI ऐप्स तैयार होने चाहिए। टोल प्लाजा पर अब क्यूआर कोड (QR Code) लगे होंगे, जिन्हें स्कैन करके आप तुरंत भुगतान कर सकेंगे। 3. 'ब्लैकलिस्ट' होने से बचें: अगर आपके फास्टैग में पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो वह ब्लैकलिस्ट हो सकता है। ऐसे में टोल प्लाजा का बूम बैरियर नहीं खुलेगा और पीछे लगी गाड़ियों की कतार में आप जाम का कारण बनेंगे। हमेशा 'ऑटो-रिचार्ज' (Auto-Recharge) का विकल्प ऑन रखें। प्रभाव विश्लेषण (Impact Analysis) - किसे फायदा, किसे नुकसान? फायदा (Pros): आम यात्री: लंबी लाइनों से मुक्ति, ईंधन की बचत और तनावमुक्त सफर। लॉजिस्टिक्स सेक्टर: ट्रकों का टर्नअराउंड टाइम (Turnaround Time) कम होगा। सामान जल्दी पहुंचेगा, जिससे मालभाड़ा कम हो सकता है। सरकार: टोल कलेक्शन बढ़ेगा, जिसका इस्तेमाल बेहतर सड़कें बनाने में होगा। चुनौतियां (Cons): तकनीकी खामियां: भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्कैनर की गुणवत्ता अभी भी कई जगहों पर चिंता का विषय है। अगर सर्वर डाउन हुआ, तो कैश न होने पर लंबा जाम लग सकता है। ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण इलाकों के ड्राइवर जो तकनीक से ज्यादा परिचित नहीं हैं, उन्हें शुरुआत में UPI इस्तेमाल करने में दिक्कत आ सकती है। एक नए युग की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 का सूर्योदय भारतीय राजमार्गों के लिए एक नई सुबह लेकर आएगा। कैशलेस टोल प्लाजा न केवल 'डिजिटल इंडिया' की ताकत को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि भारत अब दुनिया के विकसित देशों की तर्ज पर अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को स्मार्ट बना रहा है। हालांकि, इस बदलाव के शुरुआती दिनों में कुछ हिचकोले (Teething Issues) आ सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि में यह देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों के लिए एक सुखद यात्रा साबित होगी। तो अगली बार जब आप हाईवे पर निकलें, तो अपनी जेब में नकदी भले ही न रखें, लेकिन मोबाइल की बैटरी और फास्टैग का बैलेंस फुल जरूर रखें! FAQ: आपके मन में उठने वाले सवाल प्रश्न 1: अगर मेरे पास स्मार्टफोन या फास्टैग नहीं है, तो मैं टोल कैसे दूंगा? उत्तर: 1 अप्रैल से यह अनिवार्य है। अगर आप बिना डिजिटल माध्यम के पाए जाते हैं, तो आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है और भविष्य में बिना फास्टैग/UPI के हाईवे पर प्रवेश वर्जित हो सकता है। प्रश्न 2: क्या पुरानी गाड़ियों के लिए भी KYV खत्म हो गया है? उत्तर: हाँ, 1 फरवरी से पुरानी और नई दोनों गाड़ियों के लिए रूटीन KYV प्रक्रिया खत्म हो जाएगी, जब तक कि डेटा में कोई विसंगति (Mismatch) न हो। प्रश्न 3: अगर फास्टैग स्कैनर खराब हो तो? उत्तर: नियम के मुताबिक, अगर स्कैनर खराब है और आपके पास वैध फास्टैग है, तो आपको बिना टोल दिए जाने की अनुमति मिलनी चाहिए (जीरो ट्रांजैक्शन)। हालांकि, UPI बैकअप रखना समझदारी है।
भारत की सड़कों पर हर साल लाखों जिंदगियां सड़क हादसों की भेंट चढ़ जाती हैं। कोहरा, तेज रफ्तार, अंधे मोड़ और मानवीय भूल—ये वो कारण हैं जो अक्सर परिवारों को उजाड़ देते हैं। लेकिन अब, भारत सरकार सड़क सुरक्षा के इतिहास में सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव करने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक ऐसा विजन पेश किया है, जो सुनने में किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन जल्द ही यह हकीकत बनने वाला है।READ ALSO:-शेयर बाजार अपडेट: आज दलाल स्ट्रीट पर पसरा सन्नाटा, 15 जनवरी को NSE-BSE में 'नो ट्रेडिंग'; जानें अब कब खुलेगा बाजार और क्या शाम को कर पाएंगे कमाई? सरकार ने साल 2026 के अंत तक देश में 'व्हीकल-टू-व्हीकल' (Vehicle-to-Vehicle - V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को अनिवार्य करने की योजना बनाई है। यह सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि एक 'सुरक्षा कवच' है जो गाड़ियों को एक्सीडेंट होने से पहले ही आगाह कर देगा। क्या है V2V टेक्नोलॉजी? (आसान भाषा में समझें) सरल शब्दों में कहें तो, यह तकनीक गाड़ियों को एक-दूसरे से "बात" करने की क्षमता देती है। अभी तक ड्राइवर सड़क पर अपनी आंखों और समझ पर भरोसा करता है। लेकिन V2V तकनीक गाड़ियों को एक 'डिजिटल छठी इंद्री' (Digital Sixth Sense) प्रदान करती है। नितिन गडकरी ने 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों की बैठक के बाद बताया कि यह सिस्टम ठीक वैसे ही काम करेगा, जैसे आसमान में उड़ते दो हवाई जहाज या फाइटर जेट्स आपस में रडार और रेडियो के जरिए संपर्क में रहते हैं। यह कैसे काम करता है? हर वाहन में एक 'ऑन-बोर्ड यूनिट' (OBU) फिट की जाएगी। यह एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होगा जो लगातार रेडियो सिग्नल्स भेजता और प्राप्त करता रहेगा। यह डिवाइस आस-पास (लगभग 300 मीटर के दायरे में) मौजूद अन्य गाड़ियों को निम्नलिखित जानकारी भेजेगा: गाड़ी की सटीक लोकेशन (GPS)। गाड़ी की स्पीड और दिशा। ब्रेक लगाने की स्थिति (Hard Braking)। स्टीयरिंग का घुमाव। जब दो गाड़ियां एक-दूसरे के करीब आ रही होंगी और सिस्टम को लगेगा कि टक्कर होने की संभावना है (जैसे एक ही लेन में आमने-सामने होना, या चौराहे पर क्रॉसिंग), तो ड्राइवर को तुरंत ऑडियो और विजुअल अलर्ट मिल जाएगा। कोहरे और 'ब्लाइंड स्पॉट्स' का परमानेंट इलाज भारत में सर्दियों के दौरान, विशेषकर उत्तर भारत (दिल्ली, यूपी, पंजाब, हरियाणा) में कोहरा सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण बनता है। यमुना एक्सप्रेसवे या आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर आए दिन दर्जनों गाड़ियों के आपस में टकराने (Pile-ups) की खबरें आती हैं। V2V तकनीक का सबसे बड़ा फायदा इन्हीं हालातों में होगा। अदृश्य को देखने की शक्ति: कोहरा (Fog): मान लीजिए घने कोहरे में विजिबिलिटी जीरो है। आप 60 की स्पीड पर चल रहे हैं। आपके आगे 100 मीटर दूर एक गाड़ी ने अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगाए। कोहरे के कारण आपको वह गाड़ी नहीं दिख रही, न ही आपकी गाड़ी के कैमरे उसे देख पा रहे हैं। लेकिन V2V सिस्टम को उस आगे वाली गाड़ी से सिग्नल मिल जाएगा कि "मैंने हार्ड ब्रेक लगाए हैं"। आपकी गाड़ी तुरंत आपको बीप अलार्म देगी—"CAUTION! BREAKING AHEAD"। इससे आप समय रहते ब्रेक लगा सकेंगे। अंधे मोड़ (Blind Curves): पहाड़ों पर अक्सर तीखे मोड़ों पर सामने से आ रही गाड़ी नहीं दिखती। V2V सिस्टम पहाड़ के पीछे से आ रही गाड़ी का सिग्नल भी कैच कर लेगा और आपको बता देगा कि मोड़ पर कोई गाड़ी आ रही है, अपनी स्पीड कम करें। इंटरसेक्शन मूवमेंट: शहर के चौराहों पर जहां रेड लाइट जंप करने से हादसे होते हैं, वहां यह तकनीक क्रॉस ट्रैफिक को भांप लेगी। ADAS और V2V में अंतर: क्यों यह तकनीक बेहतर है? आजकल कई प्रीमियम कारों (जैसे XUV700, Harrier, Honda City) में ADAS (Advanced Driver Assistance Systems) आ रहा है। लोग अक्सर V2V को ADAS ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। फीचर ADAS (मौजूदा तकनीक) V2V (आने वाली तकनीक) काम करने का तरीका कैमरा, रडार और LiDAR सेंसर पर निर्भर। वायरलेस रेडियो तरंगों (Short Range Communication) पर निर्भर। दृष्टि (Vision) "Line of Sight"—जो कैमरे को सामने दिखेगा, सिर्फ वही डिटेक्ट होगा। "Non-Line of Sight"—यह दीवारों, ट्रकों और इमारतों के आर-पार भी सिग्नल पकड़ सकता है। रेंज सीमित (जो सामने है)। 300 से 500 मीटर तक का दायरा (360 डिग्री)। उदाहरहण अगर आपके आगे एक बड़ा ट्रक है, तो ADAS ट्रक के आगे की कार को नहीं देख सकता। V2V सिग्नल ट्रक के आर-पार जाकर आगे वाली कार की जानकारी आपको दे देगा। गडकरी का जोर V2V पर इसलिए है क्योंकि भारतीय सड़कों पर ट्रैफिक इतना अव्यवस्थित (Chaotic) है कि सिर्फ कैमरे पर आधारित ADAS पूरी तरह सफल नहीं हो सकता। हमें एक ऐसे सिस्टम की जरूरत है जो भीड़भाड़ में भी 'अदृश्य' खतरों को पहचान सके। जेब पर असर: क्या महंगी होंगी गाड़ियां? सुरक्षा अनमोल है, लेकिन तकनीक की एक कीमत होती है। सरकार इस प्रोजेक्ट पर खुद करीब 5,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है, लेकिन उपभोक्ता के तौर पर इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। OBU की कीमत: गाड़ियों में लगने वाली ऑन-बोर्ड यूनिट की अनुमानित लागत 5,000 से 7,000 रुपये के बीच आंकी गई है। गाड़ियों के दाम: जब 2026 में यह अनिवार्य होगा, तो कार निर्माता कंपनियां इस लागत को गाड़ी की एक्स-शोरूम कीमत में जोड़ेंगी। यानी कारें 7-10 हजार रुपये तक महंगी हो सकती हैं। पुरानी गाड़ियों का क्या? शुरुआत में यह नियम केवल नई मैन्युफैक्चर होने वाली कारों, बसों और ट्रकों के लिए होगा। बाद में, सरकार पुरानी गाड़ियों के लिए 'रेट्रोफिटिंग' (Retrofitting) किट ला सकती है, जिसे आप अपनी पुरानी कार में लगवाकर उसे 'स्मार्ट' बना सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही गाड़ी की कीमत बढ़े, लेकिन इससे एक्सीडेंट कम होंगे, जिससे इंश्योरेंस क्लेम कम होंगे। भविष्य में बीमा कंपनियां V2V वाली गाड़ियों के प्रीमियम में छूट भी दे सकती हैं, जिससे बढ़ा हुआ खर्च वसूल हो जाएगा। स्पेक्ट्रम की जंग और तकनीकी तैयारी किसी भी वायरलेस कम्युनिकेशन के लिए 'स्पेक्ट्रम' (रेडियो फ्रीक्वेंसी) सबसे जरूरी है। गाड़ियां आपस में बात करने के लिए किस फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करेंगी, यह तय करना सबसे बड़ी चुनौती थी। दूरसंचार विभाग से समझौता: नितिन गडकरी ने पुष्टि की है कि सड़क परिवहन मंत्रालय और दूरसंचार विभाग (DoT) के बीच सहमति बन गई है। DoT ने 5.875-5.905 GHz बैंड में 30 MHz स्पेक्ट्रम अलॉट करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह बैंड विशेष रूप से "Intelligent Transportation Systems" (ITS) के लिए सुरक्षित रखा गया है। स्टैंडर्ड्स: सड़क परिवहन सचिव वी. उमाशंकर के मुताबिक, ऑटोमोबाइल कंपनियों (Maruti, Tata, Mahindra, Hyundai आदि) के साथ मिलकर तकनीकी मानकों को फाइनल किया जा रहा है। मकसद यह है कि टाटा की गाड़ी मारुति की गाड़ी से बात कर सके—भाषा (प्रोटोकॉल) एक ही होनी चाहिए। चुनौतियां: 2026 का लक्ष्य कितना हकीकत? सरकार का लक्ष्य बहुत महत्वाकांक्षी है, लेकिन भारत जैसे देश में इसे लागू करना आसान नहीं होगा। मिक्स ट्रैफिक: भारत की सड़कों पर बैलगाड़ी, साइकिल, ई-रिक्शा और पैदल चलने वाले भी होते हैं। V2V सिस्टम केवल गाड़ियों को ट्रैक कर सकता है, साइकिल वालों को नहीं। इसलिए पूरी तरह से एक्सीडेंट प्रूफ सिस्टम बनाना मुश्किल है। इंफ्रास्ट्रक्चर: V2V के साथ V2I (Vehicle-to-Infrastructure) की भी जरूरत होती है, यानी गाड़ियां ट्रैफिक लाइट और रोड साइन से भी बात करें। इसके लिए सड़कों को स्मार्ट बनाना होगा, जिसमें हजारों करोड़ का खर्च आएगा। ग्लोबल उदाहरण: अमेरिका ने 1999 में ही इसके लिए स्पेक्ट्रम अलग कर दिया था, लेकिन वहां भी यह अभी तक पूरी तरह अनिवार्य नहीं हो पाया है। यूरोप और जापान में यह तकनीक है, लेकिन वहां ट्रैफिक अनुशासित है। भारत की अराजक सड़कों पर सेंसर्स का सही काम करना एक बड़ी तकनीकी चुनौती होगी। भविष्य की तस्वीर: 2030 तक का रोडमैप नितिन गडकरी ने साफ किया है कि उनका लक्ष्य 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50% तक कम करना है। वर्तमान में भारत में हर साल लगभग 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में मारे जाते हैं। अगर V2V तकनीक 2026 में लागू हो जाती है, तो अगले 4-5 सालों में जब सड़कों पर 40-50% गाड़ियां इस तकनीक से लैस होंगी, तो इसका नेटवर्क इफेक्ट (Network Effect) दिखेगा। जब ज्यादा गाड़ियां आपस में जुड़ी होंगी, तो सुरक्षा का घेरा उतना ही मजबूत होगा। यह तकनीक भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक 'गेम चेंजर' साबित होगी। अभी तक हम सीटबेल्ट और एयरबैग को ही सुरक्षा मानते थे, जो एक्सीडेंट होने के बाद जान बचाते हैं। V2V तकनीक एक्सीडेंट होने से पहले ही उसे रोकने की क्षमता रखती है। 5000 रुपये का खर्च अगर किसी परिवार के चिराग को बुझने से बचा सकता है, तो यह सौदा महंगा नहीं है। अब देखना यह होगा कि भारतीय कार कंपनियां और आम जनता इस बदलाव को कितनी जल्दी अपनाती है। ख़बरीलाल विशेष टिप: अगर आप आने वाले समय में नई गाड़ी खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो सुरक्षा मानकों (Safety Ratings) पर विशेष ध्यान दें। तकनीक अपनी जगह है, लेकिन सतर्क ड्राइविंग का कोई विकल्प नहीं है।
"सावधानी हटी, दुर्घटना घटी"—यह कहावत हम बचपन से सुनते आ रहे हैं, लेकिन जब बात रात में हाईवे पर गाड़ी चलाने की होती है, तो यह कहावत चेतावनी नहीं, बल्कि जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन जाती है।READ ALSO:-Railway Good News: ट्रेन का जनरल टिकट हुआ सस्ता! आज से 'RailOne' एप पर 6% तक का 'डबल डिस्काउंट'; लाइन में लगने की छुट्टी और पैसे की बचत सूरज ढलते ही देश के चमचमाते हाईवे अक्सर 'खतरे के जोन' में तब्दील हो जाते हैं। आंकड़े गवाह हैं कि दिन के मुकाबले रात में होने वाले सड़क हादसे ज्यादा जानलेवा होते हैं। इसकी वजह साफ है—कम रोशनी (Low Visibility), थके हुए ड्राइवर, आंखों को अंधा करती सामने वाली गाड़ियों की लाइटें और अचानक सड़क पर आ जाने वाले आवारा जानवर। अगर आप भी अक्सर रात में लॉन्ग ड्राइव पर निकलते हैं या हाईवे पर सफर करते हैं, तो आज की यह रिपोर्ट आपके लिए 'लाइफ सेवर' साबित हो सकती है। हम आपको बताने जा रहे हैं प्रो-ड्राइविंग के वो तरीके, जिन्हें अपनाकर आप रात के सफर को सुरक्षित और सुहाना बना सकते हैं। 1. विजिबिलिटी का खेल: हेडलाइट और विंडस्क्रीन की सफाई है जरूरी रात में ड्राइविंग का सबसे पहला नियम है— 'साफ देखो, सुरक्षित रहो'। अक्सर ड्राइवर कार के इंजन और टायर्स पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन शीशों और लाइट्स को नजरअंदाज कर देते हैं। गंदी हेडलाइट्स का खतरा: धूल और कीचड़ जमी हेडलाइट्स रोशनी की बीम (Beam) की क्षमता को 50% तक कम कर सकती हैं। इससे आपको सड़क पर पड़े गड्ढे या दूर खड़ा कोई जानवर दिखाई नहीं देगा। समाधान: सफर शुरू करने से पहले, खासकर शाम होने से पहले हेडलाइट्स के लेंस को अच्छे से साफ करें। अगर बल्ब पुराने हो गए हैं और रोशनी पीली पड़ गई है, तो उन्हें तुरंत बदल दें। विंडस्क्रीन की धुंध: केवल बाहर से ही नहीं, विंडस्क्रीन को अंदर से साफ करना भी उतना ही जरूरी है। अंदर की तरफ जमी बारीक धूल रात में सामने से आने वाली लाइट को फैला (Scatter) देती है, जिससे कुछ पलों के लिए आपको कुछ दिखाई नहीं देता। 2. हाई बीम vs लो बीम: कब और कैसे इस्तेमाल करें? भारतीय सड़कों पर ड्राइविंग का सबसे बड़ा 'सिरदर्द' हाई बीम का गलत इस्तेमाल है। यह न केवल सामने वाले के लिए खतरनाक है, बल्कि आपके लिए भी मुसीबत बन सकता है। कब करें हाई बीम का प्रयोग: जब आप बिल्कुल खाली और अंधेरी सड़क पर चल रहे हों, जहां कोई स्ट्रीट लाइट न हो, तब हाई बीम का इस्तेमाल करें। यह 200 मीटर तक का रास्ता साफ दिखाती है। कब करें लो बीम (Dipper): जैसे ही आपको सामने से कोई गाड़ी आती दिखे, तुरंत अपनी लाइट 'लो बीम' पर कर लें। हाई बीम सामने वाले ड्राइवर की आंखों को चकाचौंध (Blind) कर देती है, जिससे वह संतुलन खोकर आपकी गाड़ी से टकरा सकता है। शहरी क्षेत्र: शहर के अंदर या जहां सोडियम लाइट्स (Street Lights) लगी हों, वहां हमेशा लो बीम पर ही गाड़ी चलाएं। 3. स्पीड और दूरी का गणित: '3 सेकेंड रूल' को भूल जाइए दिन में ड्राइविंग के नियम रात में लागू नहीं होते। रात में आपकी प्रतिक्रिया देने की क्षमता (Reaction Time) कम हो जाती है और खतरे देर से दिखाई देते हैं। स्पीड कम करें: अगर दिन में आप 100 kmph की रफ्तार से चलते हैं, तो रात में उसे घटाकर 80 kmph कर दें। याद रखें, रात में 80 की स्पीड पर अचानक ब्रेक लगाने पर भी गाड़ी रुकने से पहले काफी दूर तक घिसट सकती है। दूरी दोगुनी करें: दिन में हम आगे वाली गाड़ी से 2-3 सेकेंड की दूरी रखते हैं। रात में इसे बढ़ाकर 4 से 5 सेकेंड कर दें। इससे अगर आगे वाली गाड़ी अचानक ब्रेक मारती है या कोई जानवर सामने आता है, तो आपके पास ब्रेक लगाने और गाड़ी को संभालने के लिए पर्याप्त समय और जगह होगी। 4. सबसे बड़ा दुश्मन: थकान और नींद की झपकी रात के सन्नाटे और हाईवे की एक जैसी सड़क (Monotonous Road) अक्सर ड्राइवरों को 'हाईवे हिप्नोसिस' (Highway Hypnosis) का शिकार बना देती है। नींद की एक छोटी सी झपकी भी पूरे परिवार को खत्म कर सकती है। नींद से लड़ें नहीं: अगर आंखें भारी हो रही हैं, तो जबरदस्ती गाड़ी न चलाएं। यह बहादुरी नहीं, बेवकूफी है। उपाय: हर दो घंटे में 5-10 मिनट का ब्रेक लें। गाड़ी रोककर बाहर टहलें, चाय-कॉफी पिएं या मुंह पर पानी के छींटे मारें। माहौल बदलें: कार के अंदर का तापमान (AC) थोड़ा कम रखें (ठंडा), ताकि नींद न आए। तेज म्यूजिक सुनने के बजाय किसी से बात करते रहें। 5. चकाचौंध (Glare) से बचने का 'प्रो टिप' आजकल गाड़ियों में तेज LED लाइट्स आ रही हैं। जब सामने से ऐसी गाड़ी आती है, तो कुछ सेकंड के लिए आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। इसे 'अस्थायी अंधापन' कहते हैं। क्या करें: ऐसी स्थिति में सामने वाली गाड़ी की हेडलाइट्स को सीधे न देखें। अपनी नजरें थोड़ी देर के लिए सड़क की बाईं ओर (Left Side) बनी सफेद पट्टी (White Line) या किनारे पर रखें। इससे आपकी आंखों को रोशनी का सीधा झटका नहीं लगेगा और आप सड़क की दिशा भी नहीं भटकेंगे। 6. अडवांस स्कैनिंग: 15 सेकंड आगे की सोचें रात में आपकी निगाहें सिर्फ बंपर तक सीमित नहीं होनी चाहिए। स्कैनिंग: अपनी नजरों को सड़क पर दूर तक दौड़ाएं (करीब 10-15 सेकंड आगे की दूरी)। इससे आप सड़क पर खड़े बिना लाइट वाले ट्रक, साइकिल सवार या जानवरों को समय रहते देख पाएंगे। मिरर्स का इस्तेमाल: केवल सामने ही नहीं, अपने रियर व्यू मिरर (Rear View Mirror) और साइड मिरर्स को भी हर 5-10 सेकंड में चेक करते रहें। टेक्नोलॉजी: Google Maps जैसे ऐप्स का इस्तेमाल करें, जो आपको आगे आने वाले तीखे मोड़ या ट्रैफिक जाम के बारे में पहले ही आगाह कर देते हैं। कोहरे या बारिश में 'हैजार्ड लाइट्स' (Hazard Lights) जलाकर चलें। घर पर कोई इंतजार कर रहा है रात का सफर रोमांचक हो सकता है, लेकिन यह चुनौतियों से भरा भी है। आपकी जरा सी लापरवाही न केवल आपकी, बल्कि दूसरों की जान भी ले सकती है। अगली बार जब आप रात में स्टीयरिंग थामें, तो इन 5 नियमों को जरूर याद रखें। याद रखें, घर पर कोई आपका बेसब्री से इंतजार कर रहा है। देर से पहुंचना, कभी न पहुंचने से हमेशा बेहतर होता है। सावधान रहें, सुरक्षित चलें!
नई दिल्ली (Khabreelal News Desk): देश की राजधानी दिल्ली में अगर आप पुरानी गाड़ी के मालिक हैं, तो आपके लिए एक राहत भरी खबर है। प्रदूषण (Pollution) और एनजीटी (NGT) के सख्त नियमों के चलते जो लोग अपनी प्यारी पुरानी कार को स्क्रैप (कबाड़) में देने को मजबूर थे, उनके लिए उम्मीद की एक नई किरण जगी है।READ ALSO:-UP Police Bharti: सीएम योगी का 'मास्टरस्ट्रोक'! युवाओं को दिया नए साल का सबसे बड़ा तोहफा; खाकी का सपना देखने वालों को मिली 3 साल की 'संजीवनी' दिल्ली सरकार अपनी बहुप्रतीक्षित 'इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2.0' (Delhi EV Policy 2.0) में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, अब पुरानी पेट्रोल और डीजल कारों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने, यानी 'रेट्रोफिटिंग' (Retrofitting) कराने पर सरकार मालिकों को नकद सब्सिडी (Subsidy) देगी। इस विस्तृत विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि सरकार का यह प्रस्ताव क्या है, रेट्रोफिटिंग क्या बला है, इसमें कितना खर्च आता है, और क्या अपनी पुरानी खटारा गाड़ी को इलेक्ट्रिक बनाना समझदारी है या घाटे का सौदा? 1. क्या है सरकार का नया 'मेगा प्लान'? (The Government Proposal) दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर कम करने के उद्देश्य से केजरीवाल सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा दे रही है। इसी कड़ी में पुरानी गाड़ियों को सड़क से हटाने के बजाय उन्हें 'इको-फ्रेंडली' बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रस्ताव की मुख्य बातें: सब्सिडी की राशि: सरकार रेट्रोफिटिंग कराने वालों को आर्थिक सहायता के रूप में इंसेंटिव देगी। प्रस्ताव के अनुसार, पहले 1,000 वाहनों के लिए ₹50,000 तक की सब्सिडी दी जा सकती है। किसे मिलेगा लाभ: यह कदम उन कार मालिकों के लिए उठाया गया है जो अपनी कार को स्क्रैप (Scrap) करने के बजाय उसे इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट कराना चाहते हैं। वर्तमान स्थिति: यह प्रस्ताव अभी कैबिनेट (Cabinet) की मंजूरी के लिए रखा गया है। कैबिनेट की मुहर लगने के बाद इसे 'पब्लिक डोमेन' में रखा जाएगा, ताकि आम जनता और स्टेकहोल्डर्स (हितधारक) अपनी राय दे सकें। सरकार का विजन: "हमारा उद्देश्य पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलना आसान और सस्ता बनाना है, ताकि अधिक लोग EV की ओर आकर्षित हों और दिल्ली की हवा साफ हो सके।" 2. आखिर क्या है 'रेट्रोफिटिंग'? (What is Retrofitting?) आम भाषा में समझें तो रेट्रोफिटिंग का मतलब है— "गाड़ी वही, दिल नया"। तकनीकी रूप से, रेट्रोफिटिंग वह प्रक्रिया है जिसके तहत किसी पुरानी पेट्रोल या डीजल इंजन वाली गाड़ी (ICE Vehicle) के इंटरनल कम्बशन इंजन (इंजन, फ्यूल टैंक, साइलेंसर) को निकालकर उसकी जगह एक इलेक्ट्रिक पावरट्रेन (Electric Powertrain) फिट कर दी जाती है। इस प्रक्रिया में गाड़ी में क्या बदलता है? इंजन बाहर: सबसे पहले गाड़ी का पुराना इंजन, गियरबॉक्स (कुछ मामलों में), फ्यूल टैंक और एग्जॉस्ट सिस्टम निकाल दिया जाता है। मोटर अंदर: इंजन की जगह एक इलेक्ट्रिक मोटर लगाई जाती है जो पहियों को घुमाती है। बैटरी पैक: गाड़ी की डिक्की या चेसिस के नीचे लिथियम-आयन बैटरी पैक (Lithium-ion Battery Pack) फिट किया जाता है। कंट्रोलर: यह दिमाग की तरह काम करता है, जो बैटरी से मोटर तक बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करता है। नतीजा यह होता है कि बाहर से आपकी गाड़ी पुरानी मारुति 800 या वैगन-आर ही दिखती है, लेकिन अंदर से वह टेस्ला की तरह एक इलेक्ट्रिक गाड़ी बन जाती है, जो न धुआं छोड़ती है और न शोर करती है। 3. दिल्ली में यह पॉलिसी क्यों जरूरी है? (The Need for Retrofitting) दिल्ली-एनसीआर के कार मालिकों के सिर पर हमेशा एक तलवार लटकी रहती है— 10 साल और 15 साल का नियम। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, दिल्ली में: 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियां चलाना प्रतिबंधित है। 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियां चलाना प्रतिबंधित है। अगर आपकी गाड़ी की फिटनेस बहुत अच्छी है, आपने उसे बहुत प्यार से रखा है, तब भी यह नियम लागू होता है। ऐसे में लाखों गाड़ियां कबाड़ बन जाती हैं। रेट्रोफिटिंग ही एकमात्र कानूनी रास्ता है जिससे आप अपनी 15 साल पुरानी कार को दिल्ली की सड़कों पर 5-10 साल और दौड़ा सकते हैं, क्योंकि इलेक्ट्रिक में बदलने के बाद वह 'जीरो एमिशन' व्हीकल बन जाती है और उस पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होता। 4. सब्सिडी का गणित: क्या ₹50,000 काफी हैं? (Cost Analysis) सरकार द्वारा प्रस्तावित ₹50,000 की सब्सिडी स्वागत योग्य है, लेकिन क्या यह आम आदमी के लिए काफी है? आइए रेट्रोफिटिंग के असली खर्च पर नजर डालते हैं। बाजार में रेट्रोफिटिंग का खर्च: वर्तमान में, एक अच्छी गुणवत्ता वाली और ARAI (Automotive Research Association of India) से प्रमाणित किट लगवाने का खर्च काफी ज्यादा है। छोटी कार (Hatchback): ₹3 लाख से ₹5 लाख तक। बड़ी कार (Sedan/SUV): ₹5 लाख से ₹8 लाख तक। खर्च क्यों ज्यादा है? इस खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा बैटरी (Battery) का होता है। एक अच्छी रेंज (100-150 किमी) देने वाली लिथियम-आयन बैटरी की कीमत ही ₹2-3 लाख होती है। इसके अलावा मोटर, कंट्रोलर और इंस्टॉलेशन चार्ज अलग हैं। सब्सिडी का असर: अगर आपकी किट ₹4 लाख की है और सरकार ₹50,000 देती है, तो भी आपको अपनी जेब से ₹3.5 लाख खर्च करने होंगे। हालांकि, सरकार का तर्क है कि वह रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में निवेश करेगी ताकि किट की कीमतें कम हों। 5. रेट्रोफिटिंग vs नई EV: क्या है फायदे का सौदा? यह सवाल हर किसी के मन में है—क्या पुरानी कार पर 4-5 लाख रुपये लगाना सही है, या थोड़ी और रकम डालकर नई EV ले लेनी चाहिए? आइए तुलना करते हैं: विकल्प A: नई EV खरीदना लागत: ₹8 लाख से शुरू (जैसे Tata Tiago EV)। फायदे: नई टेक्नोलॉजी, बेहतर सुरक्षा फीचर्स, कंपनी वारंटी, ज्यादा रेंज, फास्ट चार्जिंग। नुकसान: भारी शुरुआती निवेश। विकल्प B: पुरानी कार की रेट्रोफिटिंग लागत: ₹3 लाख से ₹5 लाख (सब्सिडी के बाद और कम)। फायदे: नई गाड़ी खरीदने के मुकाबले आधा खर्च। पुरानी गाड़ी से भावनात्मक जुड़ाव है तो उसे रख सकते हैं। गाड़ी की लाइफ (RC) 5 से 10 साल बढ़ जाती है। रनिंग कॉस्ट (Running Cost) पेट्रोल के ₹8-10 प्रति किमी के मुकाबले घटकर ₹1 प्रति किमी हो जाती है। नुकसान: रेंज कम मिलती है (आमतौर पर 80-120 किमी)। फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिलना मुश्किल होता है। पुरानी गाड़ी की बॉडी और सस्पेंशन पुराने ही रहते हैं। अगर आपकी गाड़ी की बॉडी कंडीशन (Body Shell) बहुत अच्छी है और आपका बजट कम है, तो रेट्रोफिटिंग एक शानदार विकल्प है। 6. कैसे कराएं अपनी गाड़ी को कन्वर्ट? (Step-by-Step Process) अगर आप सरकार की इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं या अपनी गाड़ी को इलेक्ट्रिक बनाना चाहते हैं, तो इसकी एक कानूनी प्रक्रिया है। आप किसी भी मैकेनिक से मोटर नहीं लगवा सकते। स्टेप 1: अप्रूव्ड किट चुनें (Choose Approved Kit) आपको केवल वही 'रेट्रोफिटिंग किट' लगवानी होगी जिसे भारत सरकार की टेस्टिंग एजेंसियों (जैसे ARAI या ICAT) ने आपकी कार के मॉडल के लिए पास किया हो। हर गाड़ी के लिए किट अलग होती है। (जैसे Swift की किट Alto में नहीं लगेगी)। स्टेप 2: अधिकृत वर्कशॉप जाएं (Certified Workshop) किट लगवाने के लिए आपको सरकार द्वारा अधिकृत रेट्रोफिटिंग सेंटर पर जाना होगा। दिल्ली सरकार ने कई सेंटर्स को इसके लिए पैनल में शामिल किया है। स्टेप 3: इंस्टॉलेशन और टेस्टिंग वर्कशॉप में इंजन हटाकर इलेक्ट्रिक किट लगाई जाएगी। इसके बाद गाड़ी की टेस्टिंग होगी। स्टेप 4: RTO में अपडेशन (Legal Paperwork) यह सबसे जरूरी है। किट लगने के बाद आपको RTO जाना होगा। वहां 'फ्यूल टाइप' में Petrol/Diesel को बदलकर 'Electric' किया जाएगा। पुरानी RC अपडेट होगी और गाड़ी की वैलिडिटी बढ़ाई जाएगी। आपको ग्रीन नंबर प्लेट (Green Number Plate) मिलेगी। 7. चुनौतियां और सरकार की तैयारी (Challenges Ahead) रेट्रोफिटिंग सुनने में बहुत अच्छा आइडिया लगता है, लेकिन धरातल पर अभी कई चुनौतियां हैं जिन्हें पॉलिसी 2.0 में सुलझाने की कोशिश की जा रही है। महंगी लागत: जैसा कि ऊपर बताया गया, ₹4-5 लाख का खर्च एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बहुत ज्यादा है। सरकार को सब्सिडी बढ़ानी पड़ सकती है या आसान लोन (Easy Loan) की व्यवस्था करनी होगी। किट की उपलब्धता: अभी बाजार में हर कार मॉडल (जैसे पुरानी Honda City या Santro) के लिए अप्रूव्ड किट मौजूद नहीं है। सुरक्षा चिंताएं: अगर सही तरीके से वायरिंग और बैटरी कूलिंग न हो, तो आग लगने का खतरा रहता है। इसलिए विशेषज्ञों की देखरेख जरूरी है। सरकार का रोडमैप: खबर के मुताबिक, आने वाले दिनों में दिल्ली सरकार रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में ज्यादा निवेश करेगी। सरकार का प्लान है कि रेट्रोफिटिंग सेक्टर को समझने के लिए विशेषज्ञों को जोड़ा जाए, ताकि सस्ती और सुरक्षित तकनीक विकसित हो सके। 8. पर्यावरण पर असर (Environmental Impact) रेट्रोफिटिंग सिर्फ जेब के लिए नहीं, फेफड़ों के लिए भी फायदेमंद है। एक पुरानी डीजल कार नई BS-6 कार के मुकाबले कई गुना ज्यादा प्रदूषण फैलाती है। स्क्रैपिंग पॉलिसी (Scrappage Policy) के तहत गाड़ी को नष्ट करने में भी ऊर्जा लगती है और कचरा पैदा होता है। रेट्रोफिटिंग 'सर्कुलर इकोनॉमी' (Circular Economy) को बढ़ावा देती है—यानी चीजों को फेंकने के बजाय दोबारा इस्तेमाल करना। दिल्ली सरकार की आगामी EV Policy 2.0 में रेट्रोफिटिंग पर सब्सिडी का प्रस्ताव एक दूरदर्शी कदम है। ₹50,000 की शुरुआती मदद भले ही "ऊंट के मुंह में जीरा" लगे, लेकिन यह एक सकारात्मक शुरुआत है। यह उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है जो अपनी लकी कार (Lucky Car) या विंटेज कार को दिल्ली की सड़कों पर दौड़ते हुए देखना चाहते हैं। अब नजर इस बात पर है कि कैबिनेट इस प्रस्ताव को कब मंजूरी देती है और क्या सब्सिडी की राशि भविष्य में और बढ़ाई जाएगी? Khabreelal की पाठकों को सलाह है कि अगर आप अपनी पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में बदलने का मन बना रहे हैं, तो पॉलिसी के आधिकारिक ऐलान और नोटिफिकेशन का इंतजार करें ताकि आप सब्सिडी का पूरा लाभ उठा सकें। FAQ: रेट्रोफिटिंग से जुड़े आपके सवाल प्रश्न 1: क्या मैं अपनी 15 साल पुरानी पेट्रोल कार को इलेक्ट्रिक बनाकर दिल्ली में चला सकता हूं? उत्तर: जी हां। अगर आप ARAI अप्रूव्ड किट लगवाकर RTO से RC पर 'Electric' इंडोर्समेंट (Endorsement) करवा लेते हैं, तो आप उसे कानूनी रूप से दिल्ली में चला सकते हैं। 15 साल का बैन इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू नहीं होता। प्रश्न 2: एक बार चार्ज करने पर गाड़ी कितनी दूर जाएगी? उत्तर: यह आपकी बैटरी के आकार पर निर्भर करता है। आमतौर पर रेट्रोफिट की गई गाड़ियां फुल चार्ज में 80 किलोमीटर से लेकर 150 किलोमीटर तक की रेंज देती हैं। प्रश्न 3: क्या गियरबॉक्स भी बदल दिया जाता है? उत्तर: कई रेट्रोफिटिंग किट्स में गियरबॉक्स को हटा दिया जाता है और 'डायरेक्ट ड्राइव' मोटर लगाई जाती है। लेकिन कुछ सस्ती किट्स में पुराने गियरबॉक्स को ही मोटर से जोड़ दिया जाता है, जिससे आप गियर बदलकर गाड़ी चलाते हैं (बिना क्लच के)। प्रश्न 4: चार्जिंग में कितना समय लगता है? उत्तर: रेट्रोफिट की गई गाड़ियां आमतौर पर 'स्लो चार्जिंग' सपोर्ट करती हैं। घर के सामान्य 15 एम्पीयर सॉकेट से चार्ज होने में इन्हें 6 से 8 घंटे लगते हैं। प्रश्न 5: क्या यह सुरक्षित है? उत्तर: अगर आप सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (Approved) किट और अधिकृत वर्कशॉप से काम कराते हैं, तो यह सुरक्षित है। जुगाड़ या अनाधिकृत किट लगवाना खतरनाक हो सकता है। (डिस्क्लेमर: यह खबर सूत्रों और प्रस्तावों पर आधारित है। पॉलिसी का अंतिम स्वरूप कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे निवेश से पहले आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करें।)
नए साल 2024 का आगाज आम यात्रियों के लिए एक सुखद खबर के साथ हुआ है। पिछले कुछ वर्षों से निजी कैब एग्रीगेटर्स (जैसे Ola, Uber, Rapido) की मनमानी कीमत, पीक आवर्स में दोगुना-तिगुना किराया (सर्ज प्राइसिंग) और राइड कैंसिलेशन की समस्याओं से जूझ रही जनता को केंद्र सरकार ने एक बड़ी राहत दी है। 1 जनवरी से देश में सरकारी सहायता प्राप्त एक नई टैक्सी सेवा, 'भारत टैक्सी' (Bharat Taxi) की शुरुआत हो गई है।READ ALSO:-UP School Big Update: यूपी में छात्रों और शिक्षकों के लिए 'डबल खबर'; सीएम योगी ने 5 जनवरी तक लगाई स्कूलों पर 'ताला', उधर 2026 के लिए छुट्टियों का 'पिटारा' खुला यह सिर्फ एक और ऐप नहीं है, बल्कि इसे शहरी परिवहन व्यवस्था में एक 'गेम चेंजर' माना जा रहा है। इसका सीधा मकसद निजी कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देना और यात्रियों को एक सस्ता, सुरक्षित और विश्वसनीय विकल्प मुहैया कराना है। 'भारत टैक्सी' का मॉडल 'सहकारिता' (Cooperative) पर आधारित है, जो न केवल यात्रियों की जेब का खयाल रखेगा बल्कि ड्राइवरों को भी शोषण से बचाएगा। आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि आखिर 'भारत टैक्सी' मौजूदा कैब सेवाओं से कितनी अलग है, इसका किराया मॉडल क्या है और यह आम आदमी की जिंदगी को कैसे आसान बनाएगी। 1. क्या है 'Bharat Taxi' और यह क्यों जरूरी थी? 'भारत टैक्सी' देश की पहली ऐसी प्रमुख कैब सेवा है जो सरकारी सहायता प्राप्त है और एक सहकारी मॉडल (Cooperative Model) पर काम करती है। इसे 'सहकार टैक्सी को-ऑपरेटिव लिमिटेड' (SAHAKAR TAXI COOPERATIVE LIMITED) द्वारा विकसित किया गया है। बाजार में इसकी जरूरत क्यों पड़ी? भारतीय शहरों में निजी कैब कंपनियों ने परिवहन को आसान जरूर बनाया, लेकिन समय के साथ उनकी 'डायनामिक प्राइसिंग' (Dynamic Pricing) नीति यात्रियों के लिए मुसीबत बन गई। हल्की बारिश होते ही, दफ्तर आने-जाने के समय या त्योहारों पर किराया अचानक आसमान छूने लगता है। कई बार 100 रुपये की राइड के लिए 300-400 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। इसके अलावा, ड्राइवरों द्वारा राइड कैंसिल करना और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ी हैं। 'भारत टैक्सी' इन्हीं समस्याओं का सीधा समाधान है। इसका मूल मंत्र है— "कम किराया, तय रेट और ज्यादा सुरक्षा"। 2. किराए का गणित: 30 रुपये में सफर शुरू, कोई 'हिडन चार्ज' नहीं 'भारत टैक्सी' का सबसे बड़ा आकर्षण इसका किराया मॉडल है, जो पूरी तरह से पारदर्शी और यात्रियों के अनुकूल है। बेस फेयर (Base Fare): इस सेवा की शुरुआत बेहद किफायती दरों पर की गई है। पहले 4 किलोमीटर तक के सफर के लिए बेस किराया सिर्फ 30 रुपये तय किया गया है। यह मौजूदा निजी कैब सेवाओं के बेस फेयर के मुकाबले काफी कम है, जो अक्सर 50 से 80 रुपये के बीच होता है। 'सर्ज प्राइसिंग' का खात्मा (No Surge Pricing): यात्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि 'भारत टैक्सी' में 'सर्ज प्राइसिंग' का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। चाहे भयंकर ट्रैफिक जाम हो। चाहे मूसलाधार बारिश हो रही हो। या फिर कोई त्योहार का दिन हो। किराया नहीं बढ़ेगा। आपको वही तय रेट देना होगा जो सामान्य दिनों में लगता है। यह फिक्स रेट पॉलिसी रोजाना सफर करने वाले ऑफिस गोअर्स और छात्रों के लिए वरदान साबित होगी। 3. ड्राइवरों को 'सम्मान' और 'हक': सहकारी मॉडल की ताकत यह सेवा सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि टैक्सी ड्राइवरों के लिए भी एक नई सुबह लेकर आई है। मौजूदा निजी कंपनियों के मॉडल में ड्राइवरों को अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा (अक्सर 20% से 30% तक) कमीशन के तौर पर कंपनी को देना पड़ता है। वे सिर्फ एक 'पार्टनर' बनकर रह जाते हैं और उन पर कंपनी के कड़े नियम लागू होते हैं। 'भारत टैक्सी' का मॉडल अलग कैसे है? मालिकाना हक: इस सहकारी मॉडल में ड्राइवर किसी निजी कंपनी के 'गुलाम' नहीं हैं। उन्हें अपनी टैक्सी पर पूरा मालिकाना हक मिलता है। वे एक तरह से इस सहकारी समिति के सदस्य और मालिक हैं। जीरो/कम कमीशन: ड्राइवरों से भारी-भरकम कमीशन नहीं वसूला जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि उनकी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा उन्हीं की जेब में जाएगा। आत्मसम्मान: ड्राइवरों को किसी एग्रीगेटर के मनमाने नियमों या पेनल्टी के डर के बिना काम करने की आजादी मिलेगी, जिससे उनका आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मसम्मान बढ़ेगा। 4. सुरक्षा कवच: दिल्ली पुलिस से सीधा जुड़ाव सुरक्षा, विशेषकर महिला यात्रियों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए, किसी भी कैब सेवा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होता है। 'भारत टैक्सी' ने इस पर विशेष ध्यान दिया है। पुलिस वेरिफिकेशन: इस सेवा से जुड़ने वाले हर एक ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) अनिवार्य किया गया है। बिना सत्यापन के कोई भी ड्राइवर प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड नहीं हो सकता। पुलिस के साथ एकीकरण: 'Bharat Taxi' ऐप को दिल्ली पुलिस (और भविष्य में अन्य शहरों की पुलिस) के सिस्टम और सरकारी सुरक्षा मानकों के साथ जोड़ा गया है। ऐप सेफ्टी फीचर्स: SOS/इमरजेंसी बटन: किसी भी आपात स्थिति में एक क्लिक पर मदद। लाइव लोकेशन शेयरिंग: यात्री अपनी राइड की लाइव लोकेशन अपने परिवार या दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं। ट्रिप हिस्ट्री: हर यात्रा का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। यह सरकारी जुड़ाव यात्रियों को निजी ऐप्स के मुकाबले कहीं ज्यादा भरोसेमंद सुरक्षा का अहसास कराता है। 5. यूज़र गाइड: 'Bharat Taxi' ऐप कैसे डाउनलोड करें और बुक करें? 'भारत टैक्सी' की सेवाएं शुरू हो चुकी हैं और आप आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। स्टेप 1: ऐप डाउनलोड करें यह ऐप Google Play Store (एंड्रॉइड यूज़र्स के लिए) और Apple App Store (iOS यूज़र्स के लिए) दोनों पर उपलब्ध है। अपने फोन के ऐप स्टोर में जाएं और सर्च करें: "Bharat Taxi- Cab, Auto & Bike"। जरूरी टिप: असली ऐप की पहचान के लिए डेवलपर का नाम जरूर चेक करें, जो "SAHAKAR TAXI COOPERATIVE LIMITED" होना चाहिए। (नोट: ड्राइवरों के लिए अलग ऐप है जिसका नाम "Bharat Taxi Driver" है)। स्टेप 2: रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) ऐप इंस्टॉल करने के बाद उसे ओपन करें। अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें। आपके नंबर पर एक OTP (वन टाइम पासवर्ड) आएगा, उसे दर्ज करके वेरिफाई करें। अपना नाम और अन्य जरूरी जानकारी भरकर प्रोफाइल बनाएं। स्टेप 3: राइड बुक करना ऐप के होम स्क्रीन पर अपनी 'पिक-अप लोकेशन' (जहां से आपको बैठना है) और 'ड्रॉप लोकेशन' (जहां आपको जाना है) दर्ज करें। ऐप आपको उपलब्ध विकल्प दिखाएगा: जैसे— बाइक (Bike), ऑटो (Auto), या टैक्सी/कैब (Taxi)। अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सवारी चुनें। आपको संभावित किराया पहले ही दिख जाएगा। ‘Book Now’ पर क्लिक करें। कुछ ही देर में नजदीकी ड्राइवर आपकी राइड स्वीकार कर लेगा। आप ऐप में अपनी कैब को रियल-टाइम में ट्रैक कर सकते हैं। एक नई शुरुआत की उम्मीद 'भारत टैक्सी' का लॉन्च भारतीय शहरी परिवहन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह साबित करता है कि तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि जनहित और सहकारी कल्याण के लिए भी किया जा सकता है। अगर यह सेवा अपनी गुणवत्ता, समय की पाबंदी और सुरक्षा के वादों पर खरी उतरती है, तो यह निश्चित रूप से निजी खिलाड़ियों के एकाधिकार को तोड़कर आम आदमी की पहली पसंद बन सकती है। यह सिर्फ 30 रुपये की शुरुआत नहीं, बल्कि एक बड़े बदलाव की शुरुआत है।
अगर आप भी उन वाहन मालिकों में से हैं जो प्रदूषण जांच (PUC) या फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने के लिए एजेंट को फोन करते थे और घर बैठे सर्टिफिकेट व्हाट्सएप पर मंगा लेते थे, तो आपके लिए बुरी खबर है। 'जुगाड़' का यह युग अब समाप्त होने वाला है। केंद्र सरकार और सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) ने फर्जीवाड़े पर नकेल कसने और प्रदूषण को जड़ से खत्म करने के लिए मोटर व्हीकल नियमों में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर ली है।READ ALSO:-मेरठ में 'शीत लहर' का टॉर्चर: घने कोहरे और बर्फीली हवाओं के आगे प्रशासन ने टेके घुटने, 12वीं तक के सभी स्कूलों में 5 जनवरी तक 'ताला', आदेश न मानने वालों पर होगी कार्रवाई प्रस्तावित नए नियमों के तहत, अब आपकी गाड़ी का फिटनेस टेस्ट किसी डॉक्टर के चेकअप से कम नहीं होगा। इसमें पारदर्शिता लाने के लिए टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है, और अगर यह लागू हुआ, तो केवल वही गाड़ियां सड़कों पर दौड़ेंगी जो वास्तव में फिट हैं। बाकी गाड़ियां सीधे कबाड़ (Scrap) में जाएंगी। खत्म होगा 'कागजी' फिटनेस का खेल अब तक देश के कई हिस्सों में यह 'ओपन सीक्रेट' था कि कुछ पैसों के बदले बिना गाड़ी दिखाए ही फिटनेस और पीयूसी सर्टिफिकेट बन जाते थे। लेकिन परिवहन मंत्रालय के नए प्रस्ताव ने इस सिस्टम की कमर तोड़ने की योजना बना ली है। अनिवार्य होगी फिजिकल उपस्थिति नए नियमों के मुताबिक, बिना वाहन को टेस्ट सेंटर ले जाए, सर्टिफिकेट जारी करना अब असंभव होगा। चाहे कमर्शियल वाहन हो या निजी (Private), अब हर गाड़ी को फिजिकली टेस्ट सेंटर पर मौजूद रहना होगा। मंत्रालय का स्पष्ट मानना है कि वायु प्रदूषण की बिगड़ती स्थिति और सड़कों पर दौड़ती खटारा गाड़ियों के पीछे मुख्य कारण फर्जी पीयूसी सर्टिफिकेट हैं। ऑटोमेटेड टेस्ट स्टेशन (ATS) की एंट्री अभी तक फिटनेस टेस्ट मैनुअल होते थे, जहां इंस्पेक्टर की मर्जी या 'सेटिंग' चल जाती थी। अब निजी वाहनों (Private Vehicles) के लिए भी ऑटोमेटेड टेस्ट अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि मशीनों द्वारा गाड़ी की जांच होगी। ब्रेक, इंजन, उत्सर्जन, हेडलाइट और स्टीयरिंग की जांच कंप्यूटराइज्ड होगी, जिसमें हेराफेरी की गुंजाइश न के बराबर होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, अभी देश में 160 से ज्यादा ऑटोमेटेड टेस्ट स्टेशन (ATS) काम कर रहे हैं, और इनकी संख्या बढ़ाई जा रही है। 'बिग बॉस' स्टाइल में होगी निगरानी - वीडियो सबूत जरूरी इस पूरे बदलाव का सबसे हाई-टेक और दिलचस्प पहलू है- वीडियो रिकॉर्डिंग (Video Evidence)। सरकार अब कागजों पर भरोसा नहीं करेगी, उसे आंखों देखा सबूत चाहिए। 10 सेकंड का जियो-टैग वीडियो ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, फिटनेस सर्टिफिकेट तभी रिन्यू या जारी होगा, जब टेस्ट सेंटर द्वारा वाहन का एक वीडियो पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। समय: वीडियो कम से कम 10 सेकंड का होना चाहिए। जियो-टैग (Geo-tagged): वीडियो में लोकेशन की जानकारी (GPS कोर्डिनेट्स) होनी चाहिए, जिससे यह साबित हो सके कि गाड़ी वास्तव में टेस्ट सेंटर पर मौजूद थी। क्या दिखाना होगा?: इस छोटे से वीडियो में कैमरामैन को वाहन को आगे, पीछे, दाएं और बाएं (360 डिग्री व्यू) से दिखाना होगा। पहचान: वीडियो में गाड़ी की नंबर प्लेट, चेसिस नंबर और इंजन नंबर साफ-साफ नजर आने चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जिस गाड़ी का सर्टिफिकेट बन रहा है, टेस्ट उसी का हुआ है। यह नियम उन फर्जीवाड़ों को रोकने के लिए है जहां पुरानी तारीखों में सर्टिफिकेट बनाए जाते थे या एक गाड़ी की जगह दूसरी गाड़ी का टेस्ट दिखा दिया जाता था। 15 साल पुरानी कारों पर विशेष नजर सरकार का मुख्य फोकस उन निजी वाहनों पर है जो 15 साल की उम्र पार कर चुके हैं। नियम कहते हैं कि 15 साल बाद निजी वाहनों का रजिस्ट्रेशन रिन्यू (RC Renewal) कराना होता है। नए प्रस्ताव के तहत: 15 साल से पुराने निजी वाहनों को रिन्यूअल के लिए फिटनेस टेस्ट से गुजरना ही होगा। यह टेस्ट अब सड़क किनारे किसी मैकेनिक के पास नहीं, बल्कि ऑटोमेटेड टेस्ट स्टेशन (ATS) पर होगा। एक बार पास होने के बाद, अगले 5 साल के लिए सर्टिफिकेट मिलेगा, जिसके बाद फिर से टेस्ट कराना होगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे पारदर्शिता आएगी और सिर्फ वही पुरानी गाड़ियां सड़कों पर रहेंगी जो पर्यावरण और सुरक्षा के मानकों पर खरी उतरती हैं। फेल हुए तो क्या? - 180 दिन का अल्टीमेटम सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर ऑटोमेटेड टेस्ट में आपकी प्यारी पुरानी कार फेल हो गई, तो क्या होगा? क्या उसे तुरंत जब्त कर लिया जाएगा? नहीं, सरकार ने इसके लिए भी नियम तय किए हैं। सुधरने का मौका अगर कोई वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाता है, तो मालिक को उसे ठीक (Repair) कराने का मौका दिया जाएगा। समय सीमा: वाहन मालिक को 180 दिन (6 महीने) का समय मिलेगा। दोबारा टेस्ट: रिपेयर कराने के बाद, 180 दिनों के भीतर गाड़ी को दोबारा टेस्ट के लिए लाना होगा। ELV (End of Life Vehicle) का खतरा यहीं पर नियम सख्त हो जाते हैं। अगर 180 दिनों के बाद भी वाहन दोबारा टेस्ट में पास नहीं होता, या मालिक उसे ठीक नहीं कराता, तो उसे End of Life Vehicle (ELV) घोषित कर दिया जाएगा। वाहन डेटाबेस में एंट्री: 'वाहन' (Vahan) पोर्टल पर उस गाड़ी के आगे ELV का ठप्पा लग जाएगा। परिणाम: ELV घोषित होने के बाद वह गाड़ी न तो सड़क पर चल सकेगी, न बेची जा सकेगी और न ही उसका ट्रांसफर होगा। वह कानूनी रूप से 'कचरा' मान ली जाएगी जिसे स्क्रैप करना ही एकमात्र विकल्प बचेगा। फीस देकर तारीख बढ़ाने का 'खेल खत्म' अब तक एक लूपहोल (कमी) यह था कि अगर गाड़ी अनफिट भी है, तो कई बार लोग सिर्फ फीस या जुर्माना भरकर समय सीमा बढ़वा लेते थे। अधिकारी का बयान: रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि नए नियम इस कमी को पूरी तरह खत्म कर देंगे। एक अधिकारी ने स्पष्ट कहा, "अब ऐसा नहीं होगा। सिर्फ फीस देकर समय नहीं बढ़ेगा। पहली बार वाहन के अनफिट घोषित होने के बाद 180 दिन के अंदर फिटनेस सर्टिफिकेट लेना ही होगा। यह 'करो या मरो' वाली स्थिति होगी।" यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी ATS (टेस्ट स्टेशन) गलत रिपोर्ट न दे। अगर कोई सेंटर गड़बड़ी करता पकड़ा गया, तो उसका लाइसेंस रद्द करने के साथ भारी जुर्माने का प्रावधान भी रखा जा सकता है। स्वच्छ हवा और सुरक्षित सड़कों की ओर कदम सड़क परिवहन मंत्रालय का यह कदम सख्त जरूर लग सकता है, लेकिन भारत के बढ़ते प्रदूषण स्तर और सड़क हादसों को देखते हुए यह वक्त की मांग है। दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण अनफिट वाहन हैं जो मानक से कई गुना ज्यादा धुआं छोड़ते हैं। वाहन मालिकों के लिए अब जरूरी है कि वे अपनी गाड़ियों के रखरखाव (Maintenance) पर ध्यान दें। अगर आपकी गाड़ी 15 साल पुरानी होने वाली है, तो तैयार हो जाइए- अब आपकी गाड़ी को मशीनों और कैमरों की अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। खबरीलाल की राय: "जुगाड़ टेक्नोलॉजी" भारत की पहचान रही है, लेकिन सुरक्षा और पर्यावरण के मामले में यह जुगाड़ अब भारी पड़ सकता है। यह नियम लागू होने के बाद दलालों की दुकानें बंद होंगी और सिस्टम पारदर्शी बनेगा। हमारी सलाह है कि अपनी गाड़ी के पेपर और इंजन, दोनों दुरुस्त रखें।
साल 2026 में अगर आपका ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) एक्सपायर हो गया है या होने वाला है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। बदलती तकनीक और सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण ने अब आरटीओ (RTO) के चक्कर लगाने की मजबूरी को खत्म कर दिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के 'सारथी परिवहन' पोर्टल के जरिए अब आप घर बैठे अपना लाइसेंस रिन्यू करा सकते हैं।READ ALSO:-यूपी रोडवेज का 'मेकओवर': अब हवाई अड्डों जैसी सुविधाओं से लैस होंगे प्रदेश के बस अड्डे; 'सिटिजन फर्स्ट' प्लान लागू, डिजिटल डिस्प्ले से लेकर AC वेटिंग रूम तक, जानें क्या-क्या बदलेगा लाइसेंस रिन्यू न कराना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत एक्सपायर लाइसेंस के साथ गाड़ी चलाने पर ₹5,000 तक का भारी जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा, अगर भगवान न करे कोई दुर्घटना हो जाए, तो एक्सपायर डीएल होने पर बीमा कंपनियां आपका क्लेम भी रिजेक्ट कर सकती हैं। आइए जानते हैं 2026 में ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू कराने का सबसे आसान और नया तरीका। कब तक वैध रहता है आपका लाइसेंस? (Validity Rules) लाइसेंस रिन्यू कराने से पहले आपको इसकी वैधता (Validity) के नियम पता होने चाहिए। भारत में मुख्य रूप से दो तरह के लाइसेंस होते हैं: प्राइवेट ड्राइविंग लाइसेंस (Private DL): यह आमतौर पर जारी होने की तारीख से 20 साल तक या आपके 40 साल की उम्र पूरा करने तक (जो भी पहले हो) वैध रहता है। 40 साल के बाद, इसे हर 10 साल और फिर 50 साल की उम्र के बाद हर 5 साल में रिन्यू कराना होता है। कमर्शियल लाइसेंस (Commercial DL): कमर्शियल वाहनों के लाइसेंस की वैधता कम होती है। इसे आमतौर पर हर 3 से 5 साल में रिन्यू कराना पड़ता है। आप अपने लाइसेंस की एक्सपायरी डेट से एक साल पहले रिन्यूअल के लिए आवेदन कर सकते हैं। एक्सपायरी के बाद आपको 30 दिन का ग्रेस पीरियड (Grace Period) मिलता है, जिसमें कोई लेट फीस नहीं लगती। ऑनलाइन रिन्यूअल का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस (Driving License Renewal Online Process) 2026 में डीएल रिन्यू कराने की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया गया है। नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें: वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले सड़क परिवहन मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट parivahan.gov.in या सारथी पोर्टल (sarathi.parivahan.gov.in) पर जाएं। राज्य चुनें: होमपेज पर 'Drivers/Learners License' विकल्प पर क्लिक करें और ड्रॉपडाउन मेनू से अपना राज्य (State) चुनें। सेवा का चयन करें: अब आपके सामने कई विकल्प आएंगे। यहां 'Apply for DL Renewal' या 'Services on Driving Licence (Renewal/Duplicate)' पर क्लिक करें। डीटेल भरें: अपना पुराना ड्राइविंग लाइसेंस नंबर, जन्मतिथि (DOB) और कैप्चा कोड डालें। इसके बाद 'Get DL Details' पर क्लिक करें। आपकी जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी। विकल्प चुनें: यहां आपको सेवा के प्रकार में 'Renewal of DL' को चुनना होगा। डॉक्यूमेंट अपलोड: आवेदन फॉर्म भरने के बाद आपको जरूरी दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करने होंगे। (नीचे दस्तावेजों की सूची देखें)। फीस भरें: अपनी श्रेणी के अनुसार रिन्यूअल फीस और स्मार्ट कार्ड फीस का भुगतान नेट बैंकिंग, यूपीआई या क्रेडिट/डेबिट कार्ड से करें। स्लॉट बुक करें (यदि जरूरी हो): कुछ राज्यों में या 40 साल से अधिक उम्र होने पर मेडिकल सर्टिफिकेट के सत्यापन के लिए आरटीओ जाने की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करें। रिन्यूअल के लिए जरूरी दस्तावेज (Documents Required) ऑनलाइन आवेदन करते समय आपके पास सॉफ्ट कॉपी में ये दस्तावेज होने चाहिए: एक्सपायर हुआ ओरिजिनल ड्राइविंग लाइसेंस। पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर (स्कैन किए हुए)। आधार कार्ड या पते का प्रमाण। फॉर्म 1 (Form 1): फिजिकल फिटनेस का सेल्फ-डिक्लेरेशन (40 साल से कम उम्र के लिए)。 फॉर्म 1A (Form 1A): अगर आपकी उम्र 40 साल से ज्यादा है या आपके पास कमर्शियल लाइसेंस है, तो आपको एक रजिस्टर्ड डॉक्टर द्वारा सत्यापित मेडिकल सर्टिफिकेट (Form 1A) अपलोड करना अनिवार्य है। फीस और जुर्माना (Fees and Fines) रिन्यूअल फीस: लगभग ₹200। स्मार्ट कार्ड फीस: लगभग ₹200 (राज्य के अनुसार अलग हो सकती है)। लेट फीस: ग्रेस पीरियड (30 दिन) खत्म होने के बाद ₹1,000 प्रति वर्ष या उसके भाग के हिसाब से जुर्माना लग सकता है। ऑफलाइन प्रोसेस (Offline Process) अगर आप तकनीक के साथ सहज नहीं हैं, तो आप पुराने तरीके से भी रिन्यू करा सकते हैं: अपने नजदीकी आरटीओ (RTO) ऑफिस जाएं। वहां से फॉर्म 9 (रिन्यूअल फॉर्म) लें। फॉर्म भरकर उसके साथ ओरिजिनल लाइसेंस, फोटो और फॉर्म 1A (अगर लागू हो) अटैच करें। फीस काउंटर पर पैसा जमा करें और रसीद प्राप्त करें। वेरिफिकेशन के बाद नया लाइसेंस आपके पते पर स्पीड पोस्ट से भेज दिया जाएगा। ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें 5 साल वाला नियम: अगर आपका लाइसेंस एक्सपायर हुए 5 साल से ज्यादा हो चुके हैं, तो आप उसे सीधे रिन्यू नहीं करा सकते। ऐसी स्थिति में आपको दोबारा से लर्नर लाइसेंस बनवाना पड़ सकता है और ड्राइविंग टेस्ट देना होगा। डिजिटल कॉपी: जब तक नया स्मार्ट कार्ड डाक से घर नहीं आता, आप DigiLocker या mParivahan ऐप पर अपने डिजिटल लाइसेंस का इस्तेमाल कर सकते हैं। ट्रैफिक पुलिस इसे मान्य मानती है। NRI के लिए: अनिवासी भारतीय भी पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें प्रक्रिया पूरी करने के लिए भारत आने पर आरटीओ जाना पड़ सकता है। ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल अब कोई सिरदर्द नहीं है। 2026 में सारथी पोर्टल की मदद से आप घर बैठे मिनटों में यह काम निपटा सकते हैं। ₹5,000 के चालान और कानूनी पचड़ों से बचने के लिए एक्सपायरी डेट का इंतजार न करें और समय रहते रिन्यूअल के लिए आवेदन करें। 2026 में ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू (Driving License Renewal) कराने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो गई है। आप सारथी परिवहन पोर्टल पर जाकर, डॉक्यूमेंट अपलोड कर और फीस भरकर अपना डीएल रिन्यू करा सकते हैं। 40 साल से अधिक उम्र वालों को फॉर्म 1A (मेडिकल सर्टिफिकेट) देना अनिवार्य है। एक्सपायरी के 30 दिन बाद रिन्यू कराने पर लेट फीस लगेगी और 5 साल बाद दोबारा टेस्ट देना पड़ सकता है।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बढ़ते क्रेज और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की घोषणा की गई है, जो देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर की तस्वीर बदल सकती है। वियतनाम की दिग्गज इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी VinFast ने भारतीय बाजार में अपनी जड़ें जमाने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक खेला है। VinFast की सहयोगी कंपनी V-Green और भारत की सरकारी तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है।Read also:-Railway Ka Digital Dhamaka: जनरल डिब्बे के यात्रियों की मौज! लाइन में लगने का झंझट खत्म, 'Rail One' ऐप से टिकट लेने पर 3% की सीधी छूट इस साझेदारी का सीधा उद्देश्य भारत में पब्लिक ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Public EV Charging Infrastructure) की सबसे बड़ी कमी को दूर करना है। अब आपको पेट्रोल भरवाने के लिए जितनी आसानी से पेट्रोल पंप मिल जाते हैं, भविष्य में उतनी ही आसानी से इलेक्ट्रिक गाड़ी चार्ज करने की सुविधा भी मिलने वाली है। आइये, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि यह डील आम जनता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है, VinFast का भारत को लेकर क्या प्लान है और HPCL अपने पेट्रोल पंपों को 'एनर्जी स्टेशनों' में कैसे बदल रहा है। 1. क्या है V-Green और HPCL की 'मेगा डील'? भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने से पहले ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल 'रेंज एंजाइटी' (Range Anxiety) का होता है—यानी "अगर रास्ते में बैटरी खत्म हो गई तो चार्ज कहाँ करेंगे?" इसी डर को खत्म करने के लिए यह साझेदारी की गई है। साझेदारी के मुख्य बिंदु: लक्ष्य: VinFast की ग्लोबल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी 'V-Green' भारत में चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाना चाहती है। इसके लिए उसने HPCL को अपना पार्टनर चुना है। प्लान: इस एग्रीमेंट के तहत, V-Green को HPCL के विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल करने का अधिकार मिलेगा। यानी HPCL के पेट्रोल पंपों पर V-Green अपने अत्याधुनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करेगी। फायदा: इससे VinFast को भारत में आते ही बना-बनाया नेटवर्क मिल जाएगा, और HPCL को अपने फ्यूल स्टेशनों को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी। यह कोलैबोरेशन सिर्फ दो कंपनियों का मिलन नहीं, बल्कि फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल-डीजल) से ग्रीन एनर्जी (इलेक्ट्रिक) की तरफ बढ़ने का एक ठोस कदम है। 2. HPCL का विशाल नेटवर्क: भारत की 'एनर्जी लाइफलाइन' हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) भारत की महारत्न कंपनियों में से एक है और इसका नेटवर्क देश के कोने-कोने में फैला हुआ है। V-Green के लिए HPCL से बेहतर पार्टनर शायद ही कोई और हो सकता था। आंकड़ों पर नजर डालें तो HPCL की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है: 24,400+ फ्यूल स्टेशन: HPCL के पास पूरे भारत में 24,400 से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं। चाहे शहर हो या हाइवे, HPCL की मौजूदगी हर जगह है। HP e-Charge ब्रांड: कंपनी पहले ही इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। अपने 'HP e-Charge' ब्रांड के तहत कंपनी ने अब तक 5,300 से ज्यादा EV चार्जिंग पॉइंट स्थापित कर लिए हैं। बैटरी स्वैपिंग: चार्जिंग के अलावा, HPCL ने देश भर में 150 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन भी लगाए हैं, जहाँ आप डिस्चार्ज बैटरी देकर फुल चार्ज बैटरी ले सकते हैं। इस साझेदारी के बाद, HPCL के स्टेशनों पर वियतनामी तकनीक वाले हाई-स्पीड चार्जर्स की सुविधा मिलेगी, जो लंबी दूरी की यात्रा करने वाले EV मालिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। 3. कौन है V-Green? (VinFast का 'पावर हाउस') बहुत से भारतीय पाठकों के लिए 'V-Green' एक नया नाम हो सकता है। असल में, यह VinFast की ही एक शाखा है, जिसे विशेष रूप से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करने के लिए बनाया गया है। V-Green की प्रोफाइल: स्थापना: इस कंपनी की शुरुआत मार्च 2024 में हुई थी। यह एक बहुत नई लेकिन बेहद आक्रामक रणनीति वाली कंपनी है। मालिक: इसकी स्थापना VinFast के फाउंडर फाम न्हाट वुओंग (Pham Nhat Vuong) ने की है। इस वेंचर में उनकी 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उद्देश्य: VinFast ने V-Green को एक अलग कंपनी (Spin-off) के रूप में इसलिए अलग किया, ताकि VinFast का पूरा ध्यान सिर्फ बेहतरीन इलेक्ट्रिक कारें बनाने और ग्लोबल मार्केटिंग पर रहे, जबकि V-Green का काम सिर्फ और सिर्फ चार्जिंग स्टेशन लगाने और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना हो। ट्रैक रिकॉर्ड: अपने घरेलू बाजार वियतनाम में V-Green ने क्रांति ला दी है। वहाँ कंपनी ने 1.50 लाख से ज्यादा चार्जिंग पोर्ट स्थापित किए हैं। अब वही अनुभव और तकनीक लेकर वे भारत आए हैं। 4. VinFast का 'इंडिया मिशन': सिर्फ कारें नहीं, इकोसिस्टम भी वियतनामी कंपनी VinFast भारतीय बाजार को लेकर बेहद गंभीर है। आमतौर पर विदेशी कंपनियां पहले अपनी कारें लॉन्च करती हैं और बाद में सर्विस या चार्जिंग पर ध्यान देती हैं। लेकिन VinFast की रणनीति अलग है। वे 'इकोसिस्टम' बनाने पर काम कर रहे हैं। VF6 और VF7 की एंट्री: रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार बनाने वाली कंपनी VinFast ने कुछ महीने पहले ही भारतीय बाजार में अपने पहले इलेक्ट्रिक वाहनों—VF6 और VF7—को पेश किया था। ये गाड़ियां अपनी प्रीमियम लुक, लंबी रेंज और एडवांस फीचर्स के लिए जानी जाती हैं। लेकिन कंपनी जानती है कि बिना चार्जिंग स्टेशन के गाड़ियां बेचना मुश्किल है। इसलिए, कारों के साथ-साथ चार्जिंग नेटवर्क खड़ा करना उनकी रणनीति का हिस्सा है। VinFast ने तमिलनाडु में अपना प्लांट लगाने की भी घोषणा की है, जो यह दर्शाता है कि वे भारत में लंबी पारी खेलने आए हैं। HPCL के साथ यह डील उनकी इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा है। 5. भारत के EV सेक्टर पर इसका प्रभाव यह साझेदारी भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। इसके कई दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे: हाईवे कनेक्टिविटी: अक्सर लोग इलेक्ट्रिक कार लेकर शहर से बाहर जाने में डरते हैं। HPCL के पेट्रोल पंप ज्यादातर हाइवे पर स्थित हैं। अगर वहां चार्जिंग स्टेशन बनते हैं, तो इंटर-सिटी ट्रैवल (एक शहर से दूसरे शहर जाना) आसान हो जाएगा। रोजगार के अवसर: चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण, रखरखाव और संचालन के लिए बड़ी संख्या में तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत होगी, जिससे रोजगार बढ़ेगा। चार्जिंग समय में कमी: V-Green वियतनाम में फास्ट चार्जिंग तकनीक का उपयोग करती है। अगर वही तकनीक भारत आती है, तो गाड़ियां घंटों की जगह मिनटों में चार्ज हो सकेंगी। प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी: Tata Power, Jio-bp और अन्य कंपनियां जो चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में हैं, उन्हें अब V-Green से कड़ी टक्कर मिलेगी। इससे अंततः फायदा ग्राहक का ही होगा क्योंकि कीमतें कम होंगी और सर्विस बेहतर होगी। 6. भविष्य की तस्वीर: पेट्रोल पंप बनेंगे 'ऊर्जा केंद्र' विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 10 सालों में पेट्रोल पंपों का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। HPCL और VinFast की यह डील उसी भविष्य की एक झलक है। फ्यूल स्टेशन अब सिर्फ तेल भरवाने की जगह नहीं रहेंगे, बल्कि वहां आप अपनी गाड़ी चार्ज करते समय कॉफी पी सकेंगे, शॉपिंग कर सकेंगे और रेस्ट कर सकेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत में चलने वाली 30% गाड़ियां इलेक्ट्रिक हों। इस लक्ष्य को पाने के लिए हमें लाखों चार्जिंग स्टेशनों की जरूरत है। HPCL और V-Green का यह कदम सरकार के 'ग्रीन इंडिया' मिशन को भी मजबूती देगा। एक नई क्रांति की शुरुआत VinFast की V-Green और HPCL का साथ आना भारतीय ग्राहकों के लिए एक बेहतरीन खबर है। यह साझेदारी न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाएगी, बल्कि भारत को प्रदूषण मुक्त परिवहन की दिशा में तेजी से आगे ले जाएगी। जब दुनिया की आधुनिक तकनीक (V-Green) और भारत का विशाल नेटवर्क (HPCL) मिलते हैं, तो सफलता की गारंटी पक्की हो जाती है। अब देखना यह होगा कि पहले चरण में किन शहरों के पेट्रोल पंपों पर ये हाई-टेक चार्जिंग स्टेशन लगाए जाते हैं और इनकी चार्जिंग दरें (Rates) क्या होती हैं।
देश की राजधानी दिल्ली, जो अक्सर प्रदूषण और धुंध (Smog) की खबरों के चलते सुर्खियों में रहती है, अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। दिल्ली की आबोहवा को बदलने और परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह से हाईटेक बनाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupta) ने कमर कस ली है। दिल्ली सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘इलेक्ट्रिक वाहन नीति’ (Electric Vehicle Policy) का एक व्यापक और विस्तृत खाका तैयार कर लिया है।READ ALSO:-Divine News: पूर्वोत्तर के द्वार पर अब विराजेंगे 'कलयुग के भगवान'; गुवाहाटी में बनेगा तिरुपति बालाजी का भव्य धाम, असम सरकार ने दी 25 एकड़ जमीन सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—दिल्ली की सड़कों से धुएं के गुबार को खत्म करना और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को इतना सुलभ बनाना कि यह हर दिल्लीवासी की पहली और एकमात्र पसंद बन जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, इस नई पॉलिसी को अगले वित्तीय वर्ष (Next Financial Year) से लागू किए जाने की प्रबल संभावना है। यह नीति सिर्फ गाड़ियों को बदलने के लिए नहीं, बल्कि दिल्ली के भविष्य को 'नेट जीरो' बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है। प्रदूषण के खिलाफ 'हथियार' बनेगी ईवी पॉलिसी राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर, विशेषकर सर्दियों के दौरान, चिंताजनक स्थिति में पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस समस्या की जड़ पर प्रहार करने की योजना बनाई है। उनका स्पष्ट कहना है कि दिल्ली सरकार की यह ईवी पॉलिसी केवल एक परिवहन नीति नहीं है, बल्कि यह प्रदूषण नियंत्रण (Pollution Control) का सबसे प्रभावी हथियार है। दिल्ली में अगले साल ‘New EV Policy’ लागू की जाएगी। • EV अब और सस्ते होंगे • पुरानी गाड़ी की स्क्रैपिंग पर बोनस और अतिरिक्त डिस्काउंट मिलेगा • कॉलोनियों और पब्लिक प्लेस पर चार्जिंग की सुविधाएं उपलब्ध होंगी • बैटरी स्वैपिंग की नई व्यवस्था होगी… pic.twitter.com/0RHZUrjyKj — Rekha Gupta (@gupta_rekha) December 20, 2025 मुख्यमंत्री ने कहा: "वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली में प्रदूषण का एक बड़ा और गंभीर कारक है। हमारी सरकार की यह नीति केवल लोगों को आर्थिक लाभ देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य दिल्ली को एक स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य देना है। जब दिल्ली का हर नागरिक ईवी अपनाएगा, तो पीएम 2.5 (PM 2.5) और पीएम 10 (PM 10) के स्तर में सीधी और भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।" सरकार का विजन दिल्ली को न केवल भारत की, बल्कि पूरी दुनिया की ‘ईवी राजधानी’ (EV Capital) के रूप में स्थापित करना है। प्रदूषण के खिलाफ इस युद्ध में आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग को सबसे बड़ा माध्यम बनाया गया है। आम आदमी के बजट में आएगी 'ईवी': सब्सिडी का बंपर प्लान अक्सर देखा जाता है कि पेट्रोल-डीजल (ICE - Internal Combustion Engine) वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक गाड़ियां महंगी होती हैं, जिसके कारण आम आदमी चाहकर भी उन्हें खरीद नहीं पाता। सीएम रेखा गुप्ता ने इस दर्द को समझा है और इसका समाधान भी पॉलिसी में शामिल किया है। कीमतों का अंतर खत्म होगा: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की नीति में सरकार का प्राथमिक फोकस 'वित्तीय प्रोत्साहन' (Financial Incentives) पर है। पेट्रोल-डीजल और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों के बीच जो बड़ा अंतर (Price Gap) है, उसे पाटने के लिए सरकार भारी सब्सिडी प्रदान करेगी। टैक्स में छूट: इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर रोड टैक्स (Road Tax) और पंजीकरण शुल्क (Registration Fees) को पहले ही माफ कर दिया है। सब्सिडी और टैक्स छूट मिलने के बाद, एक नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदना पेट्रोल गाड़ी के मुकाबले काफी किफायती हो जाएगा। पुरानी गाड़ी कबाड़ में दें, नई ईवी पर डिस्काउंट लें नई गाड़ी खरीदने से पहले लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि उनकी पुरानी पेट्रोल या डीजल गाड़ी का क्या होगा? क्या वह घर के बाहर सड़ती रहेगी? इस चिंता को दूर करने के लिए सरकार ने 'स्क्रैपिंग पॉलिसी' (Scrapping Policy) को बेहद सरल और आकर्षक बना दिया है। स्क्रैपिंग इंसेंटिव: सरकार प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए एक विशेष ‘स्क्रैपिंग इंसेंटिव’ योजना ला रही है। सीधा लाभ: यदि कोई नागरिक अपना पुराना पेट्रोल या डीजल वाहन आधिकारिक स्क्रैप डीलर के पास कबाड़ (Scrap) करवाता है, तो उसे सर्टिफिकेट मिलेगा। इस सर्टिफिकेट के आधार पर नया ईवी वाहन खरीदने पर उसे अतिरिक्त आर्थिक लाभ (Extra Financial Benefit) दिया जाएगा। यह सिस्टम एक तरह से 'एक्सचेंज ऑफर' की तरह काम करेगा, जो दिल्लीवासियों को पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को त्यागकर नई तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। अब घर के पास ही चार्ज होगी गाड़ी: बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों की सबसे बड़ी चिंता 'चार्जिंग' (Charging Anxiety) होती है। सीएम रेखा गुप्ता की सरकार ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने का प्लान बनाया है। सरकार अब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 'सिंगल विंडो' (Single Window) सुविधा और नेटवर्क विस्तार पर जोर दे रही है। आवासीय कॉलोनियों में चार्जिंग स्टेशन: अब तक चार्जिंग स्टेशन केवल पेट्रोल पंपों या मॉल में दिखते थे, लेकिन नई नीति के तहत: रेजिडेंशियल हब: दिल्ली की आवासीय कॉलोनियों (Residential Colonies) के पास और आरडब्ल्यूए (RWA) क्षेत्रों में सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए जाएंगे। बैटरी स्वैपिंग: चार्जिंग के लिए घंटों इंतजार न करना पड़े, इसके लिए 'बैटरी स्वैपिंग' (Battery Swapping) की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यानी आप डिस्चार्ज बैटरी देकर तुरंत चार्ज बैटरी ले सकेंगे। वैज्ञानिक निपटान: पुरानी हो चुकी बैटरियों के वैज्ञानिक तरीके से निपटान (Disposal) की व्यवस्था भी इस नीति का मुख्य हिस्सा है, ताकि जमीन और पानी प्रदूषित न हो। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि वाहन मालिकों को इलेक्ट्रिक माध्यम पर शिफ्ट होने के लिए पर्याप्त और उचित समय (Transition Period) दिया जाएगा, ताकि किसी पर अचानक बोझ न पड़े। प्रधानमंत्री मोदी के 'नेट जीरो' विजन को समर्पित मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपनी इस नीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के साथ जोड़ा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने वैश्विक मंचों पर भारत की प्रतिबद्धता दोहराई है कि देश को 2070 तक ‘नेट जीरो’ (Net Zero) उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना है। मुख्यमंत्री ने कहा: "प्रधानमंत्री जी का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन केवल प्रदूषण रोकने का माध्यम नहीं, बल्कि नए भारत की प्रगति का प्रतीक हैं। परिवहन का विद्युतीकरण न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा, बल्कि भारत को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता से भी मुक्त करेगा। यह युवाओं के लिए 'हरित रोजगार' (Green Jobs) के लाखों अवसर पैदा करेगा।" दिल्ली सरकार पीएम के इसी सपने को साकार करने के लिए सतत प्रयास कर रही है। सीएम का मानना है कि दिल्ली का भूगोल और जलवायु ऐसी है कि यहां अब ‘जीरो उत्सर्जन’ वाहनों के अलावा कोई दूसरा विकल्प शेष नहीं है। सरकार ईवी को 'लक्जरी' नहीं, बल्कि एक 'अनिवार्य आवश्यकता' मानती है। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद की निगरानी में तैयार हो रहा 'ब्लूप्रिंट' इस नीति को पूरी तरह से त्रुटिहीन (Flawless) और वैज्ञानिक बनाने के लिए सरकार कोई जल्दबाजी नहीं कर रही है। सीएम रेखा गुप्ता ने ऊर्जा और शिक्षा मंत्री आशीष सूद (Ashish Sood) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय मंत्रिमंडलीय समिति (GoM) का गठन किया है। विशेषज्ञों की राय: करीब चार माह पूर्व गठित इस समिति ने अब तक कई सघन बैठकें की हैं। इसमें आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के विशेषज्ञों, तकनीकी सलाहकारों और स्टेकहोल्डर्स के साथ सीधा संवाद किया गया है। समन्वय: सरकार ने वाहन निर्माताओं (OEMs) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे बाजार की मांग के अनुसार वाहनों की समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करें और लागत को वाजिब रखें। बिजली कंपनियों से चर्चा: नीति को अंतिम रूप देने से पहले बिजली कंपनियों (Discoms) और स्क्रैप डीलरों के साथ विस्तृत चर्चा चल रही है। जनता की राय: ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने हाल ही में कहा है कि यह समिति केवल सब्सिडी बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी को जीरो उत्सर्जन बनाने के लिए सारे उपाय तलाश रही है। जल्द ही इस नीति का मसौदा (Draft) जनता के सुझावों के लिए सार्वजनिक किया जाएगा। दिल्ली के लिए एक नई सुबह कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की यह पहल दिल्ली के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। अगर यह नीति धरातल पर सही तरीके से उतरती है, तो वह दिन दूर नहीं जब दिल्ली की सड़कों पर शोर और धुआं नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों की खामोश और स्वच्छ रफ्तार दिखाई देगी। अगले वित्तीय वर्ष से लागू होने वाली इस नीति पर ऑटोमोबाइल सेक्टर, पर्यावरणविदों और आम जनता की निगाहें टिकी हुई हैं। यह न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए गाड़ी खरीदना और चलाना भी सस्ता कर देगी।
ऑस्ट्रियाई दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी केटीएम (KTM) भारतीय युवाओं के बीच अपनी आक्रामक स्टाइलिंग और 'रेडी टू रेस' (Ready to Race) परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती है। कंपनी ने अपने एंट्री-लेवल पोर्टफोलियो को और मजबूत करते हुए KTM 160 Duke का एक नया टॉप-ऑफ-द-लाइन वेरियंट बाजार में उतारा है।READ ALSO:-कॉल मिस होने की टेंशन खत्म: Truecaller लाया जादुई 'AI वॉयसमेल' फीचर, अब सुनकर नहीं... पढ़कर जानें सामने वाले ने क्या कहा! इस नए मॉडल की यूएसपी (USP) इसका इंस्ट्रूमेंट कंसोल है। कंपनी ने पुराने एलसीडी डिस्प्ले को हटाकर इसमें एक आधुनिक और फीचर-लोडेड 5-इंच का कलर टीएफटी (Thin-Film Transistor) डिस्प्ले शामिल किया है। यह वही यूनिट है जो कंपनी अपनी महंगी और ज्यादा पावरफुल बाइक, KTM 390 Duke में देती है। इस अपग्रेड के साथ, 160 Duke अब न केवल दिखने में प्रीमियम लगती है, बल्कि फीचर्स के मामले में भी अपने सेगमेंट में सबसे आगे खड़ी हो गई है। कीमत और वेरियंट्स: क्या है नया गणित? केटीएम ने इस नए टीएफटी वेरियंट को मौजूदा स्टैंडर्ड वेरियंट के ऊपर पोजिशन किया है। KTM 160 Duke (TFT वेरियंट): इसकी कीमत ₹1.79 लाख (एक्स-शोरूम) रखी गई है। KTM 160 Duke (स्टैंडर्ड वेरियंट): यह मॉडल अभी भी बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा और इसकी कीमत ₹1.71 लाख (एक्स-शोरूम) है। इसका मतलब है कि लगभग ₹8,000 अतिरिक्त खर्च करके ग्राहक अब स्टैंडर्ड एलसीडी स्क्रीन की जगह हाई-टेक टीएफटी डिस्प्ले और कनेक्टिविटी फीचर्स का लाभ उठा सकते हैं। यह कीमत उन राइडर्स के लिए उचित लग सकती है जो अपनी बाइक में आधुनिक तकनीक और स्मार्टफोन इंटीग्रेशन चाहते हैं। 5-इंच TFT डिस्प्ले: फीचर्स का पूरा खजाना इस बाइक का सबसे बड़ा बदलाव इसका नया डिस्प्ले है। आइए जानते हैं कि 390 ड्यूक से लिया गया यह डिस्प्ले 160 ड्यूक में क्या खास लेकर आता है: 1. स्मार्टफोन कनेक्टिविटी और केटीएम ऐप यह टीएफटी डिस्प्ले ब्लूटूथ कनेक्टिविटी को सपोर्ट करता है। राइडर्स अपने स्मार्टफोन को 'केटीएम माई राइड' (KTM My Ride) ऐप के जरिए बाइक से कनेक्ट कर सकते हैं। एक बार कनेक्ट होने के बाद, राइडर को कई सुविधाएं मिलती हैं: कॉल और मैसेज अलर्ट: इनकमिंग कॉल्स और मैसेज के नोटिफिकेशन सीधे बाइक की स्क्रीन पर दिखाई देते हैं। म्यूजिक कंट्रोल: राइडर हैंडलबार पर दिए गए स्विचगियर का उपयोग करके अपने फोन के म्यूजिक प्लेयर को कंट्रोल कर सकते हैं (गाने बदलना, वॉल्यूम कम/ज्यादा करना)। टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन: यह सबसे उपयोगी फीचर है। ऐप के जरिए सेट किया गया डेस्टिनेशन बाइक की स्क्रीन पर टर्न-बाय-टर्न एरो (तीर) के निशान के साथ दिशा दिखाता है, जिससे अनजान रास्तों पर भी सफर आसान हो जाता है। 2. प्रीमियम क्वालिटी और विजिबिलिटी यह 5-इंच का डिस्प्ले 'बॉन्डेड ग्लास' टेक्नोलॉजी के साथ आता है। इसका फायदा यह है कि यह न केवल दिखने में प्रीमियम लगता है, बल्कि इसकी मजबूती भी ज्यादा होती है। इसके अलावा, इसका कलर आउटपुट बहुत तेज और साफ है, जिससे तेज धूप या दिन की रोशनी में भी स्क्रीन पर दी गई जानकारी को पढ़ना बेहद आसान होता है। 3. सूचनाओं का केंद्र कनेक्टिविटी के अलावा, यह डिस्प्ले बाइक से जुड़ी हर जरूरी जानकारी देता है: स्पीडोमीटर और टैकोमीटर (RPM गेज)। फ्यूल गेज और गियर पोजिशन इंडिकेटर। रियल-टाइम माइलेज और डिस्टेंस टू एम्पटी (DTE - बची हुई फ्यूल में कितनी दूर जाएगी)। ट्रिपमीटर, ओडोमीटर और घड़ी। ABS सुपरमोटो इंडिकेटर: यह दर्शाता है कि बाइक का एबीएस किस मोड में है। 4. नया स्विचगियर इस नए डिस्प्ले के मेन्यू को नेविगेट करने और विभिन्न सेटिंग्स को कंट्रोल करने के लिए, केटीएम ने हैंडलबार पर एक नया 4-वे मेन्यू स्विच दिया है। यह स्विचगियर भी प्रीमियम क्वालिटी का है और इसे सीधे 390 ड्यूक से लिया गया है, जो इस्तेमाल करने में काफी आसान और सहज है। KTM 160 Duke बनाम Yamaha MT-15: टक्कर हुई और जोरदार भारतीय बाजार में 160cc प्रीमियम स्पोर्ट्स सेगमेंट में KTM 160 Duke का सबसे बड़ा और सीधा मुकाबला Yamaha MT-15 V2 से है। डिस्प्ले की जंग: अब तक, यामाहा MT-15 अपने ब्लूटूथ-सक्षम एलसीडी कंसोल के साथ थोड़ी बढ़त बनाए हुए थी। हालांकि, हाल ही में यामाहा ने भी MT-15 में 4.2-इंच का टीएफटी डिस्प्ले दिया है। लेकिन KTM का 5-इंच का डिस्प्ले आकार में बड़ा है और 390 ड्यूक से लिए जाने के कारण इसका इंटरफेस और फीचर्स ज्यादा प्रीमियम महसूस होते हैं। इस अपग्रेड के साथ KTM ने टेक्नोलॉजी के मामले में यामाहा को कड़ी टक्कर दी है। परफॉर्मेंस: जहां तक पावर का सवाल है, KTM 160 Duke अभी भी इस सेगमेंट की 'बॉस' है। इसका 19 PS का पावर आउटपुट यामाहा MT-15 के 18.4 PS से थोड़ा ज्यादा है। हालांकि, दोनों बाइकें अपने-अपने तरीके से बेहतरीन राइडिंग अनुभव देती हैं - केटीएम अपनी आक्रामकता के लिए जानी जाती है, जबकि यामाहा अपनी रिफाइंड परफॉर्मेंस और बेहतरीन हैंडलिंग के लिए प्रसिद्ध है। इंजन और परफॉर्मेंस: वही भरोसेमंद पावरहाउस नए टीएफटी डिस्प्ले को छोड़कर, बाइक के मैकेनिकल डिपार्टमेंट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। KTM 160 Duke में वही दमदार इंजन मिलता है जो इसे अपने सेगमेंट में सबसे तेज बनाता है। इंजन: 164.2cc, लिक्विड-कूल्ड, सिंगल-सिलेंडर, SOHC इंजन। पावर: यह इंजन 10,000 rpm पर 19 PS की अधिकतम पावर जेनरेट करता है। टॉर्क: 8,000 rpm पर 15.5 Nm का पीक टॉर्क मिलता है। गियरबॉक्स: इसे 6-स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है, जो हाईवे पर स्मूथ क्रूजिंग में मदद करता है। इस इंजन का डिजाइन कंपनी की फ्लैगशिप बाइक '1290 सुपर ड्यूक आर' से प्रेरित है। लिक्विड कूलिंग तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि भारी ट्रैफिक या लंबी राइड पर भी इंजन का प्रदर्शन बना रहे और वह ज्यादा गर्म न हो। हार्डवेयर और अन्य फीचर्स: रेडी-टू-रेस DNA केटीएम अपनी बाइक्स में बेहतरीन हार्डवेयर देने के लिए जानी जाती है, और 160 ड्यूक कोई अपवाद नहीं है। सस्पेंशन: फ्रंट में हाई-परफॉर्मेंस वाले अल्ट्रा-लाइटवेट WP USD (अपसाइड-डाउन) फोर्क्स और रियर में WP एपेक्स मोनोशॉक सस्पेंशन दिया गया है। यह सेटअप बेहतरीन हैंडलिंग और स्थिरता प्रदान करता है। ब्रेक्स: ब्रेकिंग की जिम्मेदारी बायब्र (ByBre) के डिस्क ब्रेक्स पर है। ABS मोड्स: बाइक में सिंगल-चैनल ABS मिलता है, लेकिन इसमें 'सुपरमोटो ABS' मोड भी है। इस मोड को ऑन करने पर रियर व्हील का ABS बंद हो जाता है, जिससे अनुभवी राइडर्स को बाइक स्लाइड करने या स्टoppie (stoppie) करने की आजादी मिलती है। यह फीचर इस सेगमेंट में काफी अनोखा है। क्या आपको यह बाइक खरीदनी चाहिए? KTM 160 Duke को कंपनी ने 125 Duke की जगह बाजार में उतारा था, जो कि कीमत के हिसाब से थोड़ी कम पावरफुल लगती थी। 160 Duke ने उस कमी को पूरी तरह से भर दिया है और यह एक सच्चे 'पॉकेट रॉकेट' के रूप में उभरी है। अब नए टीएफटी डिस्प्ले के जुड़ जाने से यह पैकेज और भी आकर्षक हो गया है। यदि आप एक ऐसी एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक की तलाश में हैं जो न केवल चलाने में रोमांचक हो, बल्कि जिसमें बड़ी बाइक्स वाले प्रीमियम फीचर्स और कनेक्टिविटी भी मिले, तो KTM 160 Duke का यह नया टॉप मॉडल निश्चित रूप से आपकी सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए। ₹8,000 का अतिरिक्त प्रीमियम इसके द्वारा दिए जाने वाले आधुनिक फीचर्स और अनुभव के लिए उचित प्रतीत होता है।
नई दिल्ली (ब्यूरो): भारत क्लीन एनर्जी (Clean Energy) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाने की तैयारी में है। देश में पहली बार हाइड्रोजन से चलने वाली कार (Hydrogen Fuel Cell Car) की टेस्टिंग शुरू होने जा रही है। यह कदम भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। हाइड्रोजन को भविष्य का सबसे स्वच्छ और भरोसेमंद ईंधन माना जा रहा है, जो न केवल प्रदूषण को शून्य करेगा बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर भी बनाएगा। टोयोटा मिराई: भारत की पहली हाइड्रोजन कार जापानी ऑटोमोबाइल दिग्गज टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (Toyota Kirloskar Motor) और भारत सरकार मिलकर इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसके तहत टोयोटा की मशहूर हाइड्रोजन फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (FCEV) 'मिराई' (Mirai) को भारतीय सड़कों पर उतारा जाएगा। इसकी टेस्टिंग के लिए टोयोटा ने भारत सरकार की संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि भारत की विविध जलवायु और ड्राइविंग स्थितियों में हाइड्रोजन कार कितनी कारगर साबित होती है। सिर्फ कार ही नहीं, इन क्षेत्रों में भी बजेगा हाइड्रोजन का डंका आम तौर पर लोग हाइड्रोजन को सिर्फ कारों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि इसका इस्तेमाल ऑटोमोबाइल सेक्टर से कहीं आगे तक फैला हुआ है। आइए जानते हैं कि कारों के अलावा हाइड्रोजन ईंधन भविष्य में कहां-कहां अपनी ताकत दिखाएगा: 1. पब्लिक ट्रांसपोर्ट: बस, ट्रक और ट्रेन बसें और ट्रक: यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में हाइड्रोजन से चलने वाली बसें और ट्रक पहले से ही बड़ी संख्या में सड़कों पर दौड़ रहे हैं। भारत में भी दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में हाइड्रोजन बसों के ट्रायल शुरू हो चुके हैं। रेलवे: भारतीय रेलवे भी अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) के ट्रायल के लिए पूरी तरह तैयार है, जो डीजल इंजनों का एक स्वच्छ विकल्प बनेगी। जल परिवहन: वाराणसी में देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली बोट (Boat) का संचालन शुरू हो चुका है, जो बिना किसी प्रदूषण और शोर के गंगा में तैरती है। 2. भारी उद्योग: स्टील और सीमेंट हाइड्रोजन का उपयोग भारी उद्योगों को 'डीकार्बोनाइज' (Decarbonize) करने में क्रांतिकारी साबित हो रहा है। स्टील और सीमेंट जैसे पारंपरिक उद्योग कोयले और गैस पर निर्भर हैं, जो भारी प्रदूषण फैलाते हैं। ग्रीन स्टील: अब कई ग्लोबल कंपनियां 'ग्रीन हाइड्रोजन' का इस्तेमाल कर 'ग्रीन स्टील' बना रही हैं। भारत के इस्पात मंत्रालय ने भी इस दिशा में कई प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी है। रिफाइनरी: रिफाइनरी और केमिकल सेक्टर में हाइड्रोजन का इस्तेमाल पहले से होता है, लेकिन अब जोर इसे ग्रीन सोर्स से बनाने पर है ताकि लागत और प्रदूषण दोनों कम हो सकें। 3. भविष्य की उड़ान: हवाई जहाज और शिपिंग एविएशन सेक्टर दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों में से एक है। हवाई जहाज: एयरबस (Airbus) और बोइंग (Boeing) जैसी दिग्गज कंपनियां हाइड्रोजन आधारित विमानों की तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं, जो भविष्य में उड़ानों को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बना देंगी। शिपिंग: बड़े मालवाहक जहाजों (Cargo Ships) के लिए भी हाइड्रोजन और उससे बनने वाले अमोनिया को भविष्य के ईंधन के रूप में देखा जा रहा है। भारत में हाइड्रोजन कार की टेस्टिंग की शुरुआत एक स्वच्छ और हरित भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है। यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हमारी सड़कों पर पेट्रोल-डीजल नहीं, बल्कि हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियां दौड़ेंगी और हवा साफ-सुथरी होगी।
नई दिल्ली: देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का क्रेज अब बड़ों तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि अब बच्चे भी अपनी 'इलेक्ट्रिक सवारी' का आनंद ले सकेंगे। देश की दिग्गज दोपहिया वाहन कंपनी हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) के इलेक्ट्रिक ब्रांड 'विडा' (Vida) ने बच्चों के लिए अपनी पहली इलेक्ट्रिक डर्ट बाइक लॉन्च कर दी है।READ ALSO:-बिजनौर में 'पुष्पा' स्टाइल में कांड: 100 साल पुराने ऐतिहासिक 'पिलखन' पर चली रातों-रात आरी; स्कूल परिसर से गायब हुई लकड़ियां—ग्राम प्रधान हिरासत में इस शानदार बाइक का नाम Hero Vida Dirt.E K3 है। कंपनी ने इसे विशेष रूप से 4 से 10 साल के बच्चों और नए राइडर्स (Beginners) के लिए डिजाइन किया है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹69,990 रखी गई है, जो हीरो की ही पेट्रोल बाइक HF Deluxe के आसपास है। बच्चे की हाइट के साथ 'बड़ी' हो जाएगी बाइक इस बाइक की सबसे बड़ी खासियत इसका एडजस्टेबल डिजाइन है। आमतौर पर बच्चों के लिए खरीदी गई चीजें 1-2 साल में छोटी हो जाती हैं, लेकिन Dirt.E K3 के साथ ऐसा नहीं है। एडजस्टेबल हाइट: इस बाइक के व्हीलबेस और ऊंचाई को बच्चे की लंबाई के हिसाब से बदला जा सकता है। 3 लेवल सस्पेंशन: इसमें Small, Medium और High जैसे तीन लेवल दिए गए हैं। जैसे-जैसे बच्चे की उम्र और हाइट बढ़ेगी, आप बाइक को एडजस्ट कर सकते हैं। यह बाइक लंबे समय तक आपके बच्चे का साथ निभाएगी। रफ्तार और बैटरी: 25 kmph की टॉप स्पीड Hero Vida Dirt.E K3 में परफॉर्मेंस का भी पूरा ध्यान रखा गया है, लेकिन सुरक्षा के दायरे में। मोटर: इसमें 500W की पावरफुल इलेक्ट्रिक मोटर लगी है। बैटरी: 360 Wh की रिमूवेबल (निकालने योग्य) बैटरी दी गई है। चार्जिंग: बैटरी को 20% से 80% तक चार्ज होने में लगभग 2 घंटे का समय लगता है। स्पीड: बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इसकी टॉप स्पीड 25 किमी/घंटा तक सीमित (Lock) की गई है। राइडिंग को मजेदार बनाने के लिए इसमें तीन मोड्स दिए गए हैं- Beginner, Amateur और Pro। यह वीडियो गेम के लेवल की तरह है; जैसे-जैसे बच्चा ड्राइविंग में एक्सपर्ट होता जाएगा, वह अगले मोड पर शिफ्ट होकर स्पीड बढ़ा सकता है। पैरेंट्स के हाथ में होगा पूरा कंट्रोल (Safety Features) अक्सर माता-पिता बच्चों को बाइक देने से डरते हैं, लेकिन हीरो ने इस चिंता को दूर करने के लिए हाई-टेक फीचर्स दिए हैं। पैरेंटल कंट्रोल ऐप: यह बाइक ऐप-बेस्ड कनेक्टेड फीचर्स के साथ आती है। माता-पिता अपने मोबाइल से बाइक की स्पीड लिमिट सेट कर सकते हैं और बच्चे की राइडिंग एक्टिविटी को ट्रैक कर सकते हैं। मैग्नेटिक किल स्विच: बाइक में एक खास लैनिार्ड (डोरी) दी गई है, जो बच्चे की कलाई या कपड़े से बंधी होती है। अगर बच्चा गिरता है या संतुलन बिगड़ता है, तो यह डोरी खिंचते ही बाइक का पावर तुरंत बंद हो जाएगा। अन्य सुरक्षा: इसमें चेस्ट पैड, रिमूवेबल फुटपेग और पूरी तरह ढका हुआ ब्रेक रोटर दिया गया है, ताकि बच्चे को चोट न लगे। हीरो विडा की Dirt.E K3 उन माता-पिता के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो अपने बच्चों को कम उम्र में ही राइडिंग की सुरक्षित ट्रेनिंग देना चाहते हैं। ₹69,990 की कीमत में यह एक प्रीमियम प्रोडक्ट है, जो न केवल एक खिलौना है, बल्कि बच्चों के लिए एक लर्निंग टूल भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में प्रदूषण कम करने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार नए साल पर बड़ा धमाका करने की तैयारी में है। मौजूदा ईवी पॉलिसी (EV Policy) की समयसीमा 31 दिसंबर को समाप्त हो रही है। ऐसे में सरकार 'दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0' (Delhi EV Policy 2.0) लाने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, नई नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों पर 50% तक की छूट देने पर विचार किया जा रहा है।READ ALSO:-गाजियाबाद: क्रॉसिंग रिपब्लिक वालों की 'आफत' बढ़ी! दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का महत्वपूर्ण कट 6 महीने के लिए बंद, अब रोज झेलना होगा 10KM का एक्स्ट्रा चक्कर इस मसौदे पर अंतिम चर्चा के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupta) की अध्यक्षता में आज यानी गुरुवार को ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। क्या गाड़ियों की कीमतें होंगी आधी? दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को प्रोत्साहन देने के लिए 2020 में पहली पॉलिसी लागू की थी। अब पॉलिसी 2.0 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। सूत्रों का कहना है कि सरकार इस बार सब्सिडी का दायरा बढ़ा सकती है। 50% छूट का प्रस्ताव: ड्राफ्ट में कुछ श्रेणियों या मॉडल्स पर 50% तक की छूट (Incentives/Subsidies) देने के प्रस्ताव पर चर्चा संभव है। अगर यह लागू होता है, तो दिल्ली में इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदना पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के मुकाबले बेहद सस्ता हो जाएगा। समयसीमा: पुरानी पॉलिसी 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है, इसलिए नई पॉलिसी 1 जनवरी 2026 से लागू होने की पूरी संभावना है। बैटरी रीसाइक्लिंग पर सरकार का जोर 'दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0' में सिर्फ नई गाड़ियां बेचने पर ही नहीं, बल्कि पुरानी बैटरियों के निपटान पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। चूंकि ईवी बैटरियों की औसत लाइफ 8 साल होती है, इसलिए सरकार पहली बार एक 'संगठित बैटरी रीसाइक्लिंग चेन' (Organized Battery Recycling Chain) स्थापित करने जा रही है। नई व्यवस्था: इसमें इस्तेमाल की गई बैटरियों को इकट्ठा करने, उनकी रीसाइक्लिंग करने और सुरक्षित निपटान के लिए एक समग्र ढांचा तैयार किया जाएगा। पर्यावरण सुरक्षा: शहर में बढ़ते ई-वेस्ट को रोकने के लिए यह कदम बेहद जरूरी माना जा रहा है। जनता से मांगे जाएंगे सुझाव मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में होने वाली GoM की बैठक में मसौदे को मंजूरी मिलने के बाद इसे तुरंत लागू नहीं किया जाएगा। पारदर्शिता बरतते हुए सरकार इस ड्राफ्ट को पब्लिक डोमेन में रखेगी। आम जनता, ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे जाएंगे। सुझावों के आधार पर जरूरी बदलाव करने के बाद ही पॉलिसी का फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। दिल्ली को 'EV कैपिटल' बनाने का लक्ष्य दिल्ली सरकार का लक्ष्य राजधानी को भारत की 'ईवी कैपिटल' बनाना है। पिछली पॉलिसी के तहत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट जैसे कई फायदे दिए गए थे, जिससे दिल्ली में ईवी की बिक्री में भारी उछाल आया था। अब पॉलिसी 2.0 से उम्मीदें और बढ़ गई हैं। सरकार चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने पर भी फोकस कर रही है। अगर सरकार 50% छूट वाले प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो यह ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक क्रांतिकारी कदम होगा। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि आम आदमी के लिए अपनी कार का सपना पूरा करना भी आसान हो जाएगा। फिलहाल सबकी नजरें आज होने वाली सीएम की बैठक पर टिकी हैं। दिल्ली सरकार ईवी पॉलिसी 2.0 लाने जा रही है। मौजूदा पॉलिसी 31 दिसंबर को खत्म हो रही है। सीएम रेखा गुप्ता आज मसौदे पर चर्चा करेंगी। नई पॉलिसी में 50% तक छूट और बैटरी रीसाइक्लिंग के लिए ठोस नियम बनाने पर विचार किया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।