दिल्ली में अगले साल ‘New EV Policy’ लागू की जाएगी।
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) December 20, 2025
• EV अब और सस्ते होंगे
• पुरानी गाड़ी की स्क्रैपिंग पर बोनस और अतिरिक्त डिस्काउंट मिलेगा
• कॉलोनियों और पब्लिक प्लेस पर चार्जिंग की सुविधाएं उपलब्ध होंगी
• बैटरी स्वैपिंग की नई व्यवस्था होगी… pic.twitter.com/0RHZUrjyKj
"वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली में प्रदूषण का एक बड़ा और गंभीर कारक है। हमारी सरकार की यह नीति केवल लोगों को आर्थिक लाभ देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य दिल्ली को एक स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य देना है। जब दिल्ली का हर नागरिक ईवी अपनाएगा, तो पीएम 2.5 (PM 2.5) और पीएम 10 (PM 10) के स्तर में सीधी और भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।"
"प्रधानमंत्री जी का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन केवल प्रदूषण रोकने का माध्यम नहीं, बल्कि नए भारत की प्रगति का प्रतीक हैं। परिवहन का विद्युतीकरण न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा, बल्कि भारत को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता से भी मुक्त करेगा। यह युवाओं के लिए 'हरित रोजगार' (Green Jobs) के लाखों अवसर पैदा करेगा।"
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में कार खरीदते समय ग्राहक सबसे पहले सेल्समैन से एक ही सवाल पूछता है— "भैया, ये गाड़ी माइलेज (औसत) कितना देती है?" कंपनी के ब्रोशर और विज्ञापनों में 20 से 25 किलोमीटर प्रति लीटर का दावा देखकर ग्राहक खुश हो जाता है, लेकिन जब वह गाड़ी को सड़क पर उतारता है, तो हकीकत कुछ और ही निकलती है। एसी (Air Conditioner) ऑन करते ही माइलेज का आंकड़ा धड़ाम से नीचे गिर जाता है। सालों से चली आ रही ग्राहकों की इस टीस और शिकायत को अब सरकार ने गंभीरता से लिया है।READ ALSO:-Atal Pension Yojana 2026: मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, 2030-31 तक बढ़ाई गई स्कीम; 60 के बाद मिलेगी ₹5,000 की गारंटीड पेंशन केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने कार कंपनियों की मनमानी और लैब टेस्टिंग के पुराने तरीकों को बदलने का प्रस्ताव रखा है। अब माइलेज टेस्टिंग 'आदर्श स्थितियों' में नहीं, बल्कि 'वास्तविक स्थितियों' में होगी। इसका सीधा मतलब है कि अब कार का माइलेज टेस्ट एसी चलाकर किया जाएगा। यह नियम 2026 से लागू होने की उम्मीद है, जो भारतीय ऑटो सेक्टर में पारदर्शिता का एक नया अध्याय लिखेगा। सिर्फ माइलेज ही नहीं, बल्कि सुरक्षा (Safety) को लेकर भी सरकार ने कमर कस ली है। भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (Bharat NCAP) के अगले चरण में पैदल चलने वालों की सुरक्षा को भी रेटिंग का हिस्सा बनाया जाएगा। आइए, इस पूरी खबर को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि इसका आप पर क्या असर पड़ेगा। माइलेज टेस्टिंग में ऐतिहासिक बदलाव: अब मिलेगी 'सच्ची' जानकारी अब तक भारत में गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी (Fuel Efficiency) या माइलेज की टेस्टिंग जिन मानकों पर होती थी, वे यूरोपीय मानकों से प्रेरित थे, लेकिन उनमें एक बड़ी खामी थी। टेस्ट के दौरान गाड़ी का एयर कंडीशनर (AC) बंद रखा जाता था। भारत जैसे गर्म देश में, जहां साल के 8-9 महीने एसी के बिना गाड़ी चलाना लगभग नामुमकिन है, वहां एसी बंद करके निकाले गए माइलेज के आंकड़े ग्राहकों को गुमराह करने वाले साबित होते थे। क्या है नया प्रस्ताव? यूनियन रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री द्वारा जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार: लागू होने की तारीख: 1 अक्टूबर 2026। नया नियम: भारत में बिकने वाली सभी M1 कैटेगरी (पैसेंजर गाड़ियां) का माइलेज टेस्ट अब गाड़ी का एसी (AC) ऑन करके किया जाएगा। मानक (Standard): यह टेस्टिंग नए AIS 213 (Automotive Industry Standards) के तहत की जाएगी। क्यों पड़ी इसकी जरूरत? अक्सर देखा गया है कि अगर कोई कंपनी दावा करती है कि उनकी कार 20 kmpl का माइलेज देती है, तो शहर के ट्रैफिक में एसी चलाने पर वह घटकर 12-14 kmpl रह जाता है। यह अंतर इतना बड़ा होता है कि ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस करता है। लैब बनाम सड़क: वर्तमान में टेस्टिंग लैब के अंदर डायनोमोमीटर (Dynamometer) पर नियंत्रित वातावरण में होती है, जहां हवा का प्रतिरोध नहीं होता और एसी बंद रहता है। भारतीय मौसम: भारत में ड्राइविंग के दौरान एसी का इस्तेमाल अनिवार्य सा हो गया है। एसी कंप्रेसर इंजन पर लोड डालता है, जिससे ईंधन की खपत 10% से 15% तक बढ़ जाती है। नए नियम इसी अंतर को खत्म करेंगे। कंपनियों पर बढ़ेगी जवाबदेही, खत्म होंगे झूठे दावे इस नियम के लागू होने के बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी को बड़ा झटका लग सकता है। अब वे ग्राहकों को लुभाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े पेश नहीं कर पाएंगी। पारदर्शिता (Transparency): जब टेस्टिंग एसी ऑन करके होगी, तो जो आंकड़े सर्टिफिकेट पर आएंगे, वे ग्राहक को मिलने वाले असली माइलेज के बेहद करीब होंगे। भरोसा: इससे ब्रांड और ग्राहक के बीच भरोसे का रिश्ता मजबूत होगा। ग्राहक को गाड़ी खरीदते वक्त ही पता होगा कि उसकी जेब पर ईंधन का कितना बोझ पड़ने वाला है। तकनीकी सुधार: जानकारों का मानना है कि अपना माइलेज गिरने से बचाने के लिए कंपनियां अब इंजन तकनीक और एसी कंप्रेसर की एफिशिएंसी को सुधारने पर काम करेंगी, जिसका अंतिम फायदा ग्राहक को ही मिलेगा। सरकार ने इस ड्राफ्ट पर हितधारकों (कंपनियों और आम जनता) से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। भारत NCAP 2: सुरक्षा के मोर्चे पर भी सख्त तैयारी माइलेज के साथ-साथ सरकार ने सुरक्षा मानकों को भी ग्लोबल लेवल पर ले जाने की तैयारी कर ली है। भारत में हाल ही में लॉन्च हुए Bharat NCAP (New Car Assessment Program) को अपग्रेड करके Bharat NCAP 2 लाने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित तारीख: नए सुरक्षा नियम 1 अक्टूबर 2027 से लागू करने की योजना है। मकसद: सिर्फ गाड़ी के अंदर बैठे यात्रियों की जान बचाना ही नहीं, बल्कि गाड़ी की टक्कर से सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों को सुरक्षित रखना भी है। अभी तक गाड़ियों की स्टार रेटिंग मुख्य रूप से क्रैश टेस्ट (टक्कर होने पर गाड़ी का ढांचा कितना सुरक्षित है) पर आधारित होती थी। लेकिन नई व्यवस्था में इसे व्यापक बनाया जा रहा है। अब 5 पैमानों पर होगी सेफ्टी रेटिंग: पैदल यात्रियों का रखा जाएगा खास ख्याल नया प्रस्ताव सुरक्षा रेटिंग को पूरी तरह बदल देगा। अब सिर्फ मजबूत लोहा होना काफी नहीं होगा, बल्कि गाड़ी में एक्सीडेंट रोकने की तकनीक का होना भी जरूरी होगा। नई रेटिंग व्यवस्था इन पांच स्तंभों पर टिकी होगी: (i) क्रैश प्रोटेक्शन (Crash Protection): यह मौजूदा मानक है। इसमें देखा जाएगा कि टक्कर होने पर एयरबैग, सीटबेल्ट और गाड़ी की बॉडी यात्रियों को कितना सुरक्षित रखती है। (ii) पैदल यात्रियों की सुरक्षा (Pedestrian Protection): यह सबसे बड़ा बदलाव है। भारतीय सड़कों पर हर साल हजारों पैदल यात्री और साइकिल सवार गाड़ियों की चपेट में आते हैं। VRU (Vulnerable Road Users): नई रेटिंग में पैदल चलने वालों और दोपहिया सवारों (VRU) की सुरक्षा को कुल स्कोर में 20 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। इसका मतलब है कि गाड़ियों के बोनट और बंपर का डिजाइन ऐसा होना चाहिए कि अगर कोई पैदल यात्री गाड़ी से टकराए, तो उसे कम से कम चोट लगे। (iii) सेफ ड्राइविंग फीचर्स (Safe Driving Features): इसमें यह देखा जाएगा कि गाड़ी में ऐसे कौन से फीचर्स हैं जो ड्राइवर को सुरक्षित गाड़ी चलाने में मदद करते हैं। जैसे—स्पीड अलर्ट, सीट बेल्ट रिमाइंडर, और ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग। (iv) क्रैश अवॉयडेंस (Crash Avoidance): यह एडवांस तकनीक से जुड़ा है। इसमें ADAS (Advanced Driver Assistance Systems) जैसे फीचर्स की जांच होगी। क्या गाड़ी खुद ब्रेक लगा सकती है? क्या वह लेन से भटकने पर चेतावनी देती है? यानी हादसा होने से पहले ही उसे रोकने की क्षमता। (v) हादसे के बाद की सुरक्षा (Post-Crash Safety): एक्सीडेंट हो जाने के बाद गाड़ी कितनी सुरक्षित है? क्या दरवाजे आसानी से खुल रहे हैं ताकि यात्रियों को बाहर निकाला जा सके? क्या ईंधन लीक होकर आग लगने का खतरा तो नहीं है? इलेक्ट्रिक गाड़ियों के मामले में बैटरी की सुरक्षा को भी इसमें परखा जाएगा। 'हवा-हवाई' दावों का दौर क्यों था अब तक? आपके मन में सवाल उठ सकता है कि सरकार ने यह फैसला अब क्यों लिया, और अब तक हमें गलत माइलेज क्यों बताया जा रहा था? पुराना ढर्रा: अब तक भारत में ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) जो टेस्टिंग करता था, वह पुराने मापदंडों पर आधारित थी। इसमें गाड़ी को एक रोलर (Roller) पर खड़ा करके दौड़ाया जाता था, जहां न तो हवा का दबाव होता था, न ही सड़क के गड्ढे और न ही एसी का लोड। यूरोपीय मानक: भारत ने काफी हद तक यूरोपीय मानकों को अपनाया था। यूरोप में मौसम ठंडा रहता है, इसलिए वहां एसी के बिना टेस्टिंग करना व्यावहारिक था। लेकिन भारत की भीषण गर्मी (45-48 डिग्री सेल्सियस) में यह मानक पूरी तरह फेल साबित हो रहा था। कंपनियों का दबाव: कंपनियां हमेशा बेहतर आंकड़े दिखाना चाहती हैं। एसी बंद करके टेस्ट करने से माइलेज 15-20% ज्यादा दिखता है, जो मार्केटिंग के लिए अच्छा होता है। लेकिन अब उपभोक्ता मंत्रालय और परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत की "जमीनी हकीकत" को ध्यान में रखकर ही नियम बनेंगे। इस बदलाव का आम आदमी पर क्या असर होगा? यह बदलाव सीधे तौर पर आपकी कार खरीदने की योजना और जेब को प्रभावित करेगा। फायदे (Pros): सटीक बजटिंग: आपको गाड़ी खरीदते समय पता होगा कि महीने का पेट्रोल/डीजल खर्च कितना आएगा। धोखाधड़ी से बचाव: '25 का माइलेज' बोलकर '15 का माइलेज' देने वाली कारों की पोल खुल जाएगी। सुरक्षित सड़कें: नई सेफ्टी रेटिंग से भारतीय सड़कों पर पैदल चलने वालों की जान ज्यादा सुरक्षित होगी। बेहतर तकनीक: मजबूरन कंपनियों को बेहतर इंजन और सेफ्टी फीचर्स देने होंगे। चुनौतियां (Cons): गाड़ियां महंगी हो सकती हैं: सेफ्टी फीचर्स और माइलेज सुधारने के लिए नई तकनीक लगाने से कारों की लागत बढ़ सकती है। माइलेज के आंकड़े कम दिखेंगे: 2026 के बाद नई कारों के ब्रोशर पर माइलेज के आंकड़े मौजूदा आंकड़ों से कम नजर आएंगे, जिससे ग्राहकों को मानसिक रूप से तैयार होना होगा कि यह "कम" नहीं बल्कि "सच" है। भारतीय ऑटो बाजार का परिपक्व होता दौर भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है। ऐसे में, हमारे नियम भी विश्वस्तरीय होने चाहिए। सरकार द्वारा प्रस्तावित ये नए नियम—चाहे वह एसी के साथ माइलेज टेस्टिंग हो या पैदल यात्रियों की सुरक्षा—यह दर्शाते हैं कि भारतीय बाजार अब परिपक्व हो रहा है। अब वह दौर बीत रहा है जब सिर्फ "सस्ती और टिकाऊ" गाड़ी की मांग होती थी। आज का भारतीय ग्राहक "सुरक्षित और पारदर्शी" सौदा चाहता है। 2026 और 2027 में लागू होने वाले ये नियम निश्चित रूप से कार कंपनियों के लिए चुनौती होंगे, लेकिन अंततः जीत 'उपभोक्ता' की ही होगी। अब शोरूम की चमक-दमक के पीछे 'असली सच' छिप नहीं पाएगा। नोट: यह नियम अभी ड्राफ्ट चरण में हैं। सरकार ने सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी। ऑटो जगत की ऐसी ही बारीक और महत्वपूर्ण खबरों के लिए हमारे साथ बने रहें।
भारत के सड़क परिवहन इतिहास में साल 2026 एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। अगर आप अक्सर अपनी कार से नेशनल हाईवे पर सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। "भैया, खुल्ले नहीं हैं" या "कैश ले लो" जैसे वाक्य अब टोल प्लाजा पर सुनाई नहीं देंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने टोल कलेक्शन सिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव करने का फैसला किया है।Read also:-यूपी में कुदरत का 'श्वेत प्रहार': कोहरे के आगोश में समाया आधा उत्तर प्रदेश, 5 जिलों में 'डीप फ्रीज' जैसे हालात; शून्य हुई दृश्यता मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से देश के सभी टोल प्लाजा पूरी तरह से 'कैशलेस' (Cashless) हो जाएंगे। यानी, नकद लेन-देन (Cash Transaction) को 100% बंद कर दिया जाएगा। अब टोल बैरियर पर सिर्फ डिजिटल मोड यानी फास्टैग (FASTag) या यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए ही टैक्स वसूला जाएगा। इसके साथ ही, वाहन मालिकों को कागजी कार्रवाई से राहत देते हुए 1 फरवरी 2026 से फास्टैग जारी करने के लिए अनिवार्य KYV (Know Your Vehicle) प्रक्रिया को भी खत्म करने का बड़ा ऐलान किया गया है। 'मिशन कैशलेस' - 1 अप्रैल से क्या और क्यों बदल रहा है? केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने हाल ही में 'आज तक' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में इस नई व्यवस्था की पुष्टि की है। सरकार का विजन स्पष्ट है—हाईवे पर गाड़ियों के पहिए थमने नहीं चाहिए। 1. नकद लेन-देन पर पूर्ण प्रतिबंध (Total Ban on Cash) अभी तक नियम यह था कि अगर किसी गाड़ी में फास्टैग नहीं है या फास्टैग काम नहीं कर रहा है, तो वह दोगुनी राशि नकद देकर निकल सकता था। लेकिन 1 अप्रैल से यह विकल्प खत्म होने जा रहा है। नई व्यवस्था: अब हर लेन 'फास्टैग लेन' होगी। अगर आपके पास टैग नहीं है, तो आपको मौके पर ही डिजिटल भुगतान (UPI/QR Code) करना होगा। जुर्माना: यद्यपि जुर्माने की नई दरों का नोटिफिकेशन आना बाकी है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बिना डिजिटल भुगतान के बैरियर पार करने की कोशिश करने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा या गाड़ी को यू-टर्न लेने पर मजबूर किया जाएगा। 2. पायलट प्रोजेक्ट: 25 टोल प्लाजा पर ट्रायल शुरू सरकार ने इसे रातों-रात लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से शुरू किया है। वर्तमान में देश के 25 प्रमुख टोल प्लाजा पर इस 'नो-स्टॉप' और 'नो-कैश' सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट (Pilot Project) चल रहा है। यहाँ से मिल रहे फीडबैक के आधार पर ही 1 अप्रैल को इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। 3. सरकार के 3 बड़े लक्ष्य (The 3 Core Objectives) वी. उमाशंकर के अनुसार, इस फैसले के पीछे सरकार के तीन मुख्य उद्देश्य हैं: A. ईंधन की महाबचत (Fuel Conservation): एक रिपोर्ट के मुताबिक, टोल प्लाजा पर गाड़ियों के रुकने, इंजन चालू रखने और फिर रेंगते हुए आगे बढ़ने में सालाना हजारों करोड़ रुपये का डीजल और पेट्रोल बर्बाद होता है। कैशलेस सिस्टम से गाड़ियां फर्राटे से निकलेंगी, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार (जो तेल आयात में जाता है) बचेगा। B. पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम (Transparency): नकद लेन-देन में अक्सर हेराफेरी की गुंजाइश रहती थी। कई बार टोल ऑपरेटर बिना रसीद दिए कम पैसे लेकर गाड़ी निकाल देते थे। 100% डिजिटल होने से हर एक रुपये का हिसाब कंप्यूटर में दर्ज होगा, जिससे राजस्व चोरी रुकेगी। C. समय की बचत (Seamless Travel): छुट्टे पैसों (Change) के चक्कर में होने वाली बहस और मैनुअल रसीद काटने में लगने वाला समय अब बीते कल की बात हो जाएगी। इससे लॉजिस्टिक्स (ट्रक और ट्रांसपोर्ट) सेक्टर की रफ्तार बढ़ेगी, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी है। फास्टैग यूजर्स के लिए खुशखबरी - 1 फरवरी से KYV खत्म जहाँ एक तरफ नियमों को सख्त किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रक्रिया को आसान भी बनाया जा रहा है। नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने 1 फरवरी 2026 से KYV (Know Your Vehicle) प्रोसेस को खत्म करने का निर्णय लिया है। यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है? अभी तक जब आप नई गाड़ी के लिए फास्टैग खरीदते थे या पुराने को अपडेट करते थे, तो आपको गाड़ी की आरसी (RC), चेसिस नंबर की फोटो और मालिक की आईडी बार-बार अपलोड करनी पड़ती थी। इसे बैंक वेरीफाई करते थे, जिसमें 24 से 48 घंटे लग जाते थे। नया सिस्टम: अब बैंक और फास्टैग जारी करने वाली एजेंसियां सीधे 'वाहन' (VAHAN) डेटाबेस से जुड़ी होंगी। ऑटो-वेरिफिकेशन: जैसे ही आप गाड़ी का नंबर डालेंगे, सिस्टम सरकारी रिकॉर्ड से खुद सारी जानकारी (मालिक का नाम, गाड़ी का प्रकार) उठा लेगा। आपको मैन्युअली कागज अपलोड करने की जरूरत नहीं होगी। पुराने यूजर्स: जिनके पास पहले से फास्टैग है, उन्हें भी अब बार-बार रूटीन वेरिफिकेशन के मैसेज नहीं आएंगे। बैरियर-मुक्त भारत (Barrier-Free Tolling) की ओर पहला कदम 1 अप्रैल का यह बदलाव अंतिम मंजिल नहीं है, बल्कि एक बड़ी यात्रा की शुरुआत है। सरकार का अंतिम लक्ष्य भारत में 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' (MLFF) सिस्टम लागू करना है। भविष्य की तकनीक: सरकार सैटेलाइट आधारित टोलिंग (GNSS - Global Navigation Satellite System) और ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरों पर काम कर रही है। इसका मतलब है कि भविष्य में टोल प्लाजा ही हटा दिए जाएंगे। गाड़ियां हाईवे पर चलती रहेंगी और जीपीएस या कैमरों की मदद से अदृश्य रूप से टोल कट जाएगा। कैशलेस सिस्टम इसी दिशा में बढ़ाया गया पहला कदम है, ताकि लोगों को डिजिटल भुगतान की आदत पड़ जाए। आम जनता के लिए गाइड - 1 अप्रैल के लिए कैसे तैयार हों? 1 अप्रैल 2026 आने में अब ज्यादा वक्त नहीं है। अंतिम समय की भागदौड़ और जुर्माने से बचने के लिए आपको आज ही ये काम कर लेने चाहिए: 1. फास्टैग केवाईसी (KYC) चेक करें: ध्यान दें, सरकार ने KYV (गाड़ी का वेरिफिकेशन) हटाया है, KYC (ग्राहक का वेरिफिकेशन) नहीं। सुनिश्चित करें कि आपका फास्टैग वॉलेट आपके आधार/पैन से लिंक है और 'Active' स्टेटस में है। 2. UPI को बैकअप बनाएं: अगर किसी तकनीकी कारण से फास्टैग स्कैनर काम नहीं करता, तो आपके पास BHIM, PhonePe, Google Pay या Paytm जैसे UPI ऐप्स तैयार होने चाहिए। टोल प्लाजा पर अब क्यूआर कोड (QR Code) लगे होंगे, जिन्हें स्कैन करके आप तुरंत भुगतान कर सकेंगे। 3. 'ब्लैकलिस्ट' होने से बचें: अगर आपके फास्टैग में पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो वह ब्लैकलिस्ट हो सकता है। ऐसे में टोल प्लाजा का बूम बैरियर नहीं खुलेगा और पीछे लगी गाड़ियों की कतार में आप जाम का कारण बनेंगे। हमेशा 'ऑटो-रिचार्ज' (Auto-Recharge) का विकल्प ऑन रखें। प्रभाव विश्लेषण (Impact Analysis) - किसे फायदा, किसे नुकसान? फायदा (Pros): आम यात्री: लंबी लाइनों से मुक्ति, ईंधन की बचत और तनावमुक्त सफर। लॉजिस्टिक्स सेक्टर: ट्रकों का टर्नअराउंड टाइम (Turnaround Time) कम होगा। सामान जल्दी पहुंचेगा, जिससे मालभाड़ा कम हो सकता है। सरकार: टोल कलेक्शन बढ़ेगा, जिसका इस्तेमाल बेहतर सड़कें बनाने में होगा। चुनौतियां (Cons): तकनीकी खामियां: भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्कैनर की गुणवत्ता अभी भी कई जगहों पर चिंता का विषय है। अगर सर्वर डाउन हुआ, तो कैश न होने पर लंबा जाम लग सकता है। ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण इलाकों के ड्राइवर जो तकनीक से ज्यादा परिचित नहीं हैं, उन्हें शुरुआत में UPI इस्तेमाल करने में दिक्कत आ सकती है। एक नए युग की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 का सूर्योदय भारतीय राजमार्गों के लिए एक नई सुबह लेकर आएगा। कैशलेस टोल प्लाजा न केवल 'डिजिटल इंडिया' की ताकत को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि भारत अब दुनिया के विकसित देशों की तर्ज पर अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को स्मार्ट बना रहा है। हालांकि, इस बदलाव के शुरुआती दिनों में कुछ हिचकोले (Teething Issues) आ सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि में यह देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों के लिए एक सुखद यात्रा साबित होगी। तो अगली बार जब आप हाईवे पर निकलें, तो अपनी जेब में नकदी भले ही न रखें, लेकिन मोबाइल की बैटरी और फास्टैग का बैलेंस फुल जरूर रखें! FAQ: आपके मन में उठने वाले सवाल प्रश्न 1: अगर मेरे पास स्मार्टफोन या फास्टैग नहीं है, तो मैं टोल कैसे दूंगा? उत्तर: 1 अप्रैल से यह अनिवार्य है। अगर आप बिना डिजिटल माध्यम के पाए जाते हैं, तो आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है और भविष्य में बिना फास्टैग/UPI के हाईवे पर प्रवेश वर्जित हो सकता है। प्रश्न 2: क्या पुरानी गाड़ियों के लिए भी KYV खत्म हो गया है? उत्तर: हाँ, 1 फरवरी से पुरानी और नई दोनों गाड़ियों के लिए रूटीन KYV प्रक्रिया खत्म हो जाएगी, जब तक कि डेटा में कोई विसंगति (Mismatch) न हो। प्रश्न 3: अगर फास्टैग स्कैनर खराब हो तो? उत्तर: नियम के मुताबिक, अगर स्कैनर खराब है और आपके पास वैध फास्टैग है, तो आपको बिना टोल दिए जाने की अनुमति मिलनी चाहिए (जीरो ट्रांजैक्शन)। हालांकि, UPI बैकअप रखना समझदारी है।