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वंदे भारत स्लीपर का वॉटर बैलेंस टेस्ट वायरल

Engineering Marvel: 180 की रफ्तार और मेज पर 'अडिग' खड़ा पानी का गिलास! वंदे भारत स्लीपर के इस 'स्टंट' ने फिर उड़ाए होश; देखें वीडियो

Unknown दिसम्बर 31, 2025 0
vande bharat sleeper 180kmph water glass test viral video railway safety review
vande bharat sleeper 180kmph water glass test viral video railway safety review
क्या आपने कभी सोचा है कि आप 180 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से सफर कर रहे हों, और आपके सामने टेबल पर रखा पानी का गिलास हिले तक नहीं? सुनने में यह किसी जादू या विज्ञान गल्प (Sci-Fi) जैसा लग सकता है, लेकिन भारतीय रेलवे ने इसे हकीकत में बदल दिया है।READ ALSO:-सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट को लेकर केंद्र की 'रेड नोटिस': आईटी मंत्रालय ने दी चेतावनी- तुरंत हटाएं गंदा कंटेंट वरना दर्ज होगा केस, यूजर्स भी रहें सावधान

 

भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजना 'वंदे भारत स्लीपर' (Vande Bharat Sleeper) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह केवल गति के मामले में ही नहीं, बल्कि स्थिरता और यात्री आराम (Passenger Comfort) के मामले में भी विश्व स्तरीय ट्रेनों को टक्कर देने के लिए तैयार है। हाल ही में राजस्थान के कोटा-नागदा रेल खंड पर हुए एक ट्रायल रन के दौरान, कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (CRS) ने एक ऐसा 'वॉटर टेस्ट' (Water Test) किया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

 

यह वीडियो सिर्फ एक क्लिप नहीं है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' की उस इंजीनियरिंग क्षमता का प्रमाण है, जो अब भारतीय पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है।

 

1. क्या है यह वायरल 'वॉटर टेस्ट'? (The Viral Water Test)

अक्सर हम ट्रेनों में सफर करते समय चाय या पानी पीते हैं तो कप हिलता रहता है। कई बार तो झटकों (Jerks) के कारण चाय कप से बाहर गिर जाती है। लेकिन वंदे भारत स्लीपर के ट्रायल के दौरान जो नजारा दिखा, वह अविश्वसनीय था।

 

वीडियो में क्या दिखा? ट्रायल के दौरान ट्रेन 180 किलोमीटर प्रति घंटे (180 kmph) की रफ्तार से दौड़ रही थी। यह गति भारतीय रेलवे के इतिहास में सबसे तेज गति के ट्रायल्स में से एक है। इस दौरान ट्रेन के कोच के अंदर एक टेबल पर पानी से लबालब भरा एक कांच का गिलास रखा गया। रोमांच यहीं खत्म नहीं हुआ—अधिकारियों ने उस भरे हुए गिलास के ऊपर एक और कांच का गिलास संतुलित करके रख दिया।

 

हैरानी की बात यह रही कि बाहर पटरियों पर ट्रेन हवा से बातें कर रही थी, लेकिन अंदर गिलास का पानी बिल्कुल शांत था। उसमें कोई लहर नहीं थी, कोई छलकन नहीं थी। पानी की एक बूंद भी मेज पर नहीं गिरी।

 

किसने किया यह टेस्ट? यह टेस्ट किसी यूट्यूबर या आम यात्री ने नहीं, बल्कि रेलवे सुरक्षा के सबसे बड़े अधिकारी—कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (CRS) ने किया। सीआरएस रेलवे का वह स्वतंत्र निकाय है जो किसी भी नई ट्रेन को हरी झंडी देने से पहले उसकी सुरक्षा और मानकों की कड़े शब्दों में जांच करता है। उनका यह टेस्ट करना इस बात की पुष्टि करता है कि ट्रेन का 'सस्पेंशन सिस्टम' वर्ल्ड क्लास है।

 

2. रेल मंत्री का दावा: "सुरक्षा को समझने का नया तरीका"

इस अद्भुत वीडियो को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया। उन्होंने इस वीडियो के साथ एक गर्व भरा संदेश भी लिखा।

 

रेल मंत्री ने कहा, “यह रेलवे सेफ्टी और तकनीक को समझने का एक बिल्कुल अलग तरीका है। इस टेस्ट से नई तकनीक और सेफ्टी को समझाने का प्रयास किया गया है। वंदे भारत लगातार भारतीय रेल में लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है। हाई स्पीड ट्रेनों के इस जमाने में जहां हर देश एक के बाद एक नए आयाम स्थापित करना चाहता है, ऐसे में भारत भी लगातार वंदे भारत से तेज गति और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के प्रयास में है।”

 

मंत्री का यह बयान स्पष्ट करता है कि सरकार का फोकस अब सिर्फ ट्रेन चलाने पर नहीं है, बल्कि 'क्वालिटी ट्रैवल' (Quality Travel) पर है। अगर 180 की स्पीड पर पानी नहीं छलक रहा, तो इसका मतलब है कि रात में सोते समय यात्रियों को झटके महसूस नहीं होंगे और उनकी नींद खराब नहीं होगी।

 

3. इसके पीछे का विज्ञान: आखिर यह संभव कैसे हुआ? (The Engineering Behind Stability)

180 की स्पीड पर इतना संतुलन बनाए रखना कोई चमत्कार नहीं, बल्कि उन्नत इंजीनियरिंग का नतीजा है। आइए समझते हैं कि आखिर वंदे भारत स्लीपर में ऐसा क्या खास है:

 

  • सेमी-परमानेंट कपलर (Semi-Permanent Couplers): पुरानी ट्रेनों में डिब्बों को जोड़ने के लिए स्क्रू कपलर का इस्तेमाल होता था, जिससे ट्रेन चलने और रुकने पर झटके लगते थे। वंदे भारत में आधुनिक कप्लर्स हैं जो डिब्बों को कसकर पकड़े रहते हैं, जिससे झटके खत्म हो जाते हैं।
  • एयर स्प्रिंग सस्पेंशन (Air Spring Suspension): इस ट्रेन के पहियों और कोच के बीच में लोहे की कमानी की जगह 'हवा के गुब्बारे' (Pneumatic Suspension) जैसे सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। यह सिस्टम पटरियों के कंपन को सोख लेता है और ऊपर बैठे यात्री तक पहुंचने नहीं देता।
  • एयरोडायनामिक डिजाइन (Aerodynamic Design): ट्रेन का अगला हिस्सा बुलेट ट्रेन की तरह नुकीला है, जो हवा को चीरते हुए निकलता है। इससे हवा का दबाव (Air Drag) कम होता है और ट्रेन उच्च गति पर भी स्थिर रहती है।
  • बोगी डिजाइन: बोगियों (Bogie) को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे 200 kmph तक की स्पीड पर भी ट्रैक पर अपनी पकड़ बनाए रखें।

 

4. जनवरी में भी हुआ था ऐसा ही टेस्ट

आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब रेलवे ने यह 'बैलेंस टेस्ट' किया है। इससे पहले इसी साल जनवरी 2025 में भी वंदे भारत स्लीपर के शुरुआती प्रोटोटाइप ट्रायल के दौरान यह प्रयोग किया गया था।

 

तब भी ट्रेन को 180 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ाया गया था और पानी का गिलास रखकर स्थिरता जांची गई थी। उस समय और अब के टेस्ट में एक निरंतरता (Consistency) दिखाई देती है। यह साबित करता है कि ट्रेन की परफॉर्मेंस कोई तुक्का नहीं है, बल्कि यह एक सुस्थापित मानक (Standard) बन चुका है।

 

कोटा-नागदा सेक्शन ही क्यों? राजस्थान का कोटा-नागदा रेल खंड भारतीय रेलवे का सबसे बेहतरीन और सीधा ट्रैक माना जाता है। यहाँ घुमाव (Curves) कम हैं और पटरियां हाई स्पीड के लिए अनुकूल हैं। इसलिए, जब भी किसी ट्रेन की अधिकतम सीमा (Max Speed Limit) टेस्ट करनी होती है, तो इसी रूट को चुना जाता है।

 

5. जापान की 'बुलेट ट्रेन' से तुलना

इस टेस्ट ने लोगों को जापान की प्रसिद्ध शिंकांसेन (Shinkansen) बुलेट ट्रेन की याद दिला दी। वहां अक्सर यात्री अपनी वीडियो में दिखाते हैं कि 300 kmph की स्पीड पर भी खिडकी पर रखा सिक्का (Coin) गिरता नहीं है।

 

भारत का यह 'वॉटर टेस्ट' उसी दिशा में एक कदम है। हालांकि हमारी स्पीड अभी 180 है, लेकिन भारतीय पटरियों की स्थिति (जो जापान जैसी उन्नत नहीं है) को देखते हुए, इतनी स्थिरता हासिल करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह दिखाता है कि भारत अब 'हाई स्पीड रेल नेटवर्क' की दिशा में परिपक्व हो रहा है।

 

6. यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है?

तकनीकी बातें अपनी जगह हैं, लेकिन आम यात्री के लिए इसका सीधा मतलब है—आरामदायक सफर।

 

  • गहरी नींद: स्लीपर ट्रेन होने के नाते, इसमें लोग लंबी दूरी का सफर करेंगे। स्थिरता का मतलब है कि आप बिना हिले-डुले रात भर चैन की नींद सो सकेंगे।
  • काम करने में आसानी: जो लोग ट्रेन में लैपटॉप पर काम करते हैं या खाना खाते हैं, उनके लिए यह स्थिरता बहुत मायने रखती है।
  • सुरक्षा का भरोसा: जब ट्रेन पटरियों पर इतनी स्थिर (Stable) चलती है, तो पटरी से उतरने (Derailment) का खतरा भी कम हो जाता है।

 

7. कब शुरू होगी यात्री सेवा?

कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (CRS) के ये ट्रायल्स अंतिम चरण में माने जाते हैं।

 

  • सर्टिफिकेट: इन ट्रायल्स के सफल होने के बाद सीआरएस अपनी फाइनल रिपोर्ट देगा और ट्रेन को 'सेफ्टी सर्टिफिकेट' जारी करेगा।
  • लॉन्च: उम्मीद की जा रही है कि सर्टिफिकेट मिलते ही अगले कुछ हफ्तों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं।
  • रूट: पहली वंदे भारत स्लीपर दिल्ली-मुंबई या दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त और लंबे रूटों पर चलाई जा सकती है।

 

वंदे भारत स्लीपर का यह वाटर टेस्ट सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि बदलते भारत की तस्वीर है। एक समय था जब ट्रेन के सफर का मतलब ही 'खड़-खड़' की आवाज और लगातार लगते झटके होते थे। आज, 180 की स्पीड पर पानी का न छलकना यह बताता है कि भारतीय रेलवे ने तकनीक के मामले में कितनी लंबी छलांग लगाई है। यह ट्रेन न केवल राजधानी एक्सप्रेस का विकल्प बनेगी, बल्कि यात्रा के अनुभव को पूरी तरह से बदल देगी।

 

अतिरिक्त जानकारी: वंदे भारत स्लीपर की 5 बड़ी खासियतें 

  1. स्पीड: डिजाइन स्पीड 220 kmph, ऑपरेशनल स्पीड 160-180 kmph।
  2. इंटीरियर: वर्ल्ड क्लास एर्गोनोमिक सीटें, मॉडर्न टॉयलेट्स और सेंसर वाले दरवाजे।
  3. सुरक्षा: 'कवच' (Kavach) एंटी-कोलिजन सिस्टम से लैस।
  4. साइलेंट केबिन: बाहर का शोर कम करने के लिए बेहतर साउंडप्रूफिंग।
  5. किफायती: विश्व स्तरीय सुविधाओं के बावजूद, इसका किराया हवाई जहाज से कम रहने की उम्मीद है।

 

(नोट: यह रिपोर्ट वायरल वीडियो, रेल मंत्री के बयान और उपलब्ध तकनीकी जानकारी पर आधारित है।)
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बाथरूम में बिछी 'मौत की वायरिंग': नहाने गए सिपाही का बाल्टी में ही रह गया हाथ, इमर्शन रॉड के करंट ने ली जान; मेरठ में नम आंखों से दी गई विदाई

आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला   मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।   बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए।   दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था।   अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी।   बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।   2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे।   पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया।   एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी   सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता।   पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है।   आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

नमो भारत या 'शर्मसार' भारत? रैपिड रेल के CCTV से लीक हुआ स्कूली छात्र-छात्रा का 'प्राइवेट वीडियो', सुरक्षा के दावे फेल, NCRTC के कंट्रोल रूम में किसकी मिलीभगत?

देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।   सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया?   क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है।   पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है।   दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है।   सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?"   असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है।   सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है।   विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है।   विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।"   NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है।   NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।   CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।      आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया।  डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है।     कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं:   1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।   2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है।   सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है:   पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है।   दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।   गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।"   आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए।   सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है।   फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है।     जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन, 74 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; Kidney की बीमारी बनी मौत का कारण

बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है।   चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था।   टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।   फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी।   Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप   किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।   इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।"   Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।   सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।

दिल्ली-मेरठ Rapid Rail के साथ दौड़ने को तैयार 'Meerut Metro': जानें रूट, किराया, लागत और उद्घाटन की तारीख

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी।   आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:   Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi)   मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी।   रूट मैप (Route Map) और स्टेशन   मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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खबरीलाल डेस्क

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vande bharat sleeper 180kmph water glass test viral video railway safety review
Engineering Marvel: 180 की रफ्तार और मेज पर 'अडिग' खड़ा पानी का गिलास! वंदे भारत स्लीपर के इस 'स्टंट' ने फिर उड़ाए होश; देखें वीडियो

क्या आपने कभी सोचा है कि आप 180 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से सफर कर रहे हों, और आपके सामने टेबल पर रखा पानी का गिलास हिले तक नहीं? सुनने में यह किसी जादू या विज्ञान गल्प (Sci-Fi) जैसा लग सकता है, लेकिन भारतीय रेलवे ने इसे हकीकत में बदल दिया है।READ ALSO:-सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट को लेकर केंद्र की 'रेड नोटिस': आईटी मंत्रालय ने दी चेतावनी- तुरंत हटाएं गंदा कंटेंट वरना दर्ज होगा केस, यूजर्स भी रहें सावधान   भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजना 'वंदे भारत स्लीपर' (Vande Bharat Sleeper) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह केवल गति के मामले में ही नहीं, बल्कि स्थिरता और यात्री आराम (Passenger Comfort) के मामले में भी विश्व स्तरीय ट्रेनों को टक्कर देने के लिए तैयार है। हाल ही में राजस्थान के कोटा-नागदा रेल खंड पर हुए एक ट्रायल रन के दौरान, कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (CRS) ने एक ऐसा 'वॉटर टेस्ट' (Water Test) किया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। Vande Bharat Sleeper tested today by Commissioner Railway Safety. It ran at 180 kmph between Kota Nagda section. And our own water test demonstrated the technological features of this new generation train. pic.twitter.com/w0tE0Jcp2h — Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) December 30, 2025   यह वीडियो सिर्फ एक क्लिप नहीं है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' की उस इंजीनियरिंग क्षमता का प्रमाण है, जो अब भारतीय पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है।   1. क्या है यह वायरल 'वॉटर टेस्ट'? (The Viral Water Test) अक्सर हम ट्रेनों में सफर करते समय चाय या पानी पीते हैं तो कप हिलता रहता है। कई बार तो झटकों (Jerks) के कारण चाय कप से बाहर गिर जाती है। लेकिन वंदे भारत स्लीपर के ट्रायल के दौरान जो नजारा दिखा, वह अविश्वसनीय था।   वीडियो में क्या दिखा? ट्रायल के दौरान ट्रेन 180 किलोमीटर प्रति घंटे (180 kmph) की रफ्तार से दौड़ रही थी। यह गति भारतीय रेलवे के इतिहास में सबसे तेज गति के ट्रायल्स में से एक है। इस दौरान ट्रेन के कोच के अंदर एक टेबल पर पानी से लबालब भरा एक कांच का गिलास रखा गया। रोमांच यहीं खत्म नहीं हुआ—अधिकारियों ने उस भरे हुए गिलास के ऊपर एक और कांच का गिलास संतुलित करके रख दिया।   हैरानी की बात यह रही कि बाहर पटरियों पर ट्रेन हवा से बातें कर रही थी, लेकिन अंदर गिलास का पानी बिल्कुल शांत था। उसमें कोई लहर नहीं थी, कोई छलकन नहीं थी। पानी की एक बूंद भी मेज पर नहीं गिरी।   किसने किया यह टेस्ट? यह टेस्ट किसी यूट्यूबर या आम यात्री ने नहीं, बल्कि रेलवे सुरक्षा के सबसे बड़े अधिकारी—कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (CRS) ने किया। सीआरएस रेलवे का वह स्वतंत्र निकाय है जो किसी भी नई ट्रेन को हरी झंडी देने से पहले उसकी सुरक्षा और मानकों की कड़े शब्दों में जांच करता है। उनका यह टेस्ट करना इस बात की पुष्टि करता है कि ट्रेन का 'सस्पेंशन सिस्टम' वर्ल्ड क्लास है।   2. रेल मंत्री का दावा: "सुरक्षा को समझने का नया तरीका" इस अद्भुत वीडियो को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया। उन्होंने इस वीडियो के साथ एक गर्व भरा संदेश भी लिखा।   रेल मंत्री ने कहा, “यह रेलवे सेफ्टी और तकनीक को समझने का एक बिल्कुल अलग तरीका है। इस टेस्ट से नई तकनीक और सेफ्टी को समझाने का प्रयास किया गया है। वंदे भारत लगातार भारतीय रेल में लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है। हाई स्पीड ट्रेनों के इस जमाने में जहां हर देश एक के बाद एक नए आयाम स्थापित करना चाहता है, ऐसे में भारत भी लगातार वंदे भारत से तेज गति और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के प्रयास में है।”   मंत्री का यह बयान स्पष्ट करता है कि सरकार का फोकस अब सिर्फ ट्रेन चलाने पर नहीं है, बल्कि 'क्वालिटी ट्रैवल' (Quality Travel) पर है। अगर 180 की स्पीड पर पानी नहीं छलक रहा, तो इसका मतलब है कि रात में सोते समय यात्रियों को झटके महसूस नहीं होंगे और उनकी नींद खराब नहीं होगी।   3. इसके पीछे का विज्ञान: आखिर यह संभव कैसे हुआ? (The Engineering Behind Stability) 180 की स्पीड पर इतना संतुलन बनाए रखना कोई चमत्कार नहीं, बल्कि उन्नत इंजीनियरिंग का नतीजा है। आइए समझते हैं कि आखिर वंदे भारत स्लीपर में ऐसा क्या खास है:   सेमी-परमानेंट कपलर (Semi-Permanent Couplers): पुरानी ट्रेनों में डिब्बों को जोड़ने के लिए स्क्रू कपलर का इस्तेमाल होता था, जिससे ट्रेन चलने और रुकने पर झटके लगते थे। वंदे भारत में आधुनिक कप्लर्स हैं जो डिब्बों को कसकर पकड़े रहते हैं, जिससे झटके खत्म हो जाते हैं। एयर स्प्रिंग सस्पेंशन (Air Spring Suspension): इस ट्रेन के पहियों और कोच के बीच में लोहे की कमानी की जगह 'हवा के गुब्बारे' (Pneumatic Suspension) जैसे सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। यह सिस्टम पटरियों के कंपन को सोख लेता है और ऊपर बैठे यात्री तक पहुंचने नहीं देता। एयरोडायनामिक डिजाइन (Aerodynamic Design): ट्रेन का अगला हिस्सा बुलेट ट्रेन की तरह नुकीला है, जो हवा को चीरते हुए निकलता है। इससे हवा का दबाव (Air Drag) कम होता है और ट्रेन उच्च गति पर भी स्थिर रहती है। बोगी डिजाइन: बोगियों (Bogie) को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे 200 kmph तक की स्पीड पर भी ट्रैक पर अपनी पकड़ बनाए रखें।   4. जनवरी में भी हुआ था ऐसा ही टेस्ट आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब रेलवे ने यह 'बैलेंस टेस्ट' किया है। इससे पहले इसी साल जनवरी 2025 में भी वंदे भारत स्लीपर के शुरुआती प्रोटोटाइप ट्रायल के दौरान यह प्रयोग किया गया था।   तब भी ट्रेन को 180 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ाया गया था और पानी का गिलास रखकर स्थिरता जांची गई थी। उस समय और अब के टेस्ट में एक निरंतरता (Consistency) दिखाई देती है। यह साबित करता है कि ट्रेन की परफॉर्मेंस कोई तुक्का नहीं है, बल्कि यह एक सुस्थापित मानक (Standard) बन चुका है।   कोटा-नागदा सेक्शन ही क्यों? राजस्थान का कोटा-नागदा रेल खंड भारतीय रेलवे का सबसे बेहतरीन और सीधा ट्रैक माना जाता है। यहाँ घुमाव (Curves) कम हैं और पटरियां हाई स्पीड के लिए अनुकूल हैं। इसलिए, जब भी किसी ट्रेन की अधिकतम सीमा (Max Speed Limit) टेस्ट करनी होती है, तो इसी रूट को चुना जाता है।   5. जापान की 'बुलेट ट्रेन' से तुलना इस टेस्ट ने लोगों को जापान की प्रसिद्ध शिंकांसेन (Shinkansen) बुलेट ट्रेन की याद दिला दी। वहां अक्सर यात्री अपनी वीडियो में दिखाते हैं कि 300 kmph की स्पीड पर भी खिडकी पर रखा सिक्का (Coin) गिरता नहीं है।   भारत का यह 'वॉटर टेस्ट' उसी दिशा में एक कदम है। हालांकि हमारी स्पीड अभी 180 है, लेकिन भारतीय पटरियों की स्थिति (जो जापान जैसी उन्नत नहीं है) को देखते हुए, इतनी स्थिरता हासिल करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह दिखाता है कि भारत अब 'हाई स्पीड रेल नेटवर्क' की दिशा में परिपक्व हो रहा है।   6. यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है? तकनीकी बातें अपनी जगह हैं, लेकिन आम यात्री के लिए इसका सीधा मतलब है—आरामदायक सफर।   गहरी नींद: स्लीपर ट्रेन होने के नाते, इसमें लोग लंबी दूरी का सफर करेंगे। स्थिरता का मतलब है कि आप बिना हिले-डुले रात भर चैन की नींद सो सकेंगे। काम करने में आसानी: जो लोग ट्रेन में लैपटॉप पर काम करते हैं या खाना खाते हैं, उनके लिए यह स्थिरता बहुत मायने रखती है। सुरक्षा का भरोसा: जब ट्रेन पटरियों पर इतनी स्थिर (Stable) चलती है, तो पटरी से उतरने (Derailment) का खतरा भी कम हो जाता है।   7. कब शुरू होगी यात्री सेवा? कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (CRS) के ये ट्रायल्स अंतिम चरण में माने जाते हैं।   सर्टिफिकेट: इन ट्रायल्स के सफल होने के बाद सीआरएस अपनी फाइनल रिपोर्ट देगा और ट्रेन को 'सेफ्टी सर्टिफिकेट' जारी करेगा। लॉन्च: उम्मीद की जा रही है कि सर्टिफिकेट मिलते ही अगले कुछ हफ्तों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। रूट: पहली वंदे भारत स्लीपर दिल्ली-मुंबई या दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त और लंबे रूटों पर चलाई जा सकती है।   वंदे भारत स्लीपर का यह वाटर टेस्ट सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि बदलते भारत की तस्वीर है। एक समय था जब ट्रेन के सफर का मतलब ही 'खड़-खड़' की आवाज और लगातार लगते झटके होते थे। आज, 180 की स्पीड पर पानी का न छलकना यह बताता है कि भारतीय रेलवे ने तकनीक के मामले में कितनी लंबी छलांग लगाई है। यह ट्रेन न केवल राजधानी एक्सप्रेस का विकल्प बनेगी, बल्कि यात्रा के अनुभव को पूरी तरह से बदल देगी।   अतिरिक्त जानकारी: वंदे भारत स्लीपर की 5 बड़ी खासियतें  स्पीड: डिजाइन स्पीड 220 kmph, ऑपरेशनल स्पीड 160-180 kmph। इंटीरियर: वर्ल्ड क्लास एर्गोनोमिक सीटें, मॉडर्न टॉयलेट्स और सेंसर वाले दरवाजे। सुरक्षा: 'कवच' (Kavach) एंटी-कोलिजन सिस्टम से लैस। साइलेंट केबिन: बाहर का शोर कम करने के लिए बेहतर साउंडप्रूफिंग। किफायती: विश्व स्तरीय सुविधाओं के बावजूद, इसका किराया हवाई जहाज से कम रहने की उम्मीद है।   (नोट: यह रिपोर्ट वायरल वीडियो, रेल मंत्री के बयान और उपलब्ध तकनीकी जानकारी पर आधारित है।)

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