
"सीओ (CO) को इस पूरे मामले की गहनता से बिंदुवार (Point-to-point) जांच करके रिपोर्ट सौंपने के लिए निर्देशित किया गया है। हमारी टीम हर पहलू को खंगाल रही है। अगर जांच में यह पाया गया कि यह पूरा मामला जानबूझकर 'क्रिएट' (गढ़ा/Manufactured) किया गया है, तो इसे पुलिस का कीमती समय बर्बाद करने और प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश माना जाएगा। ऐसे में इन लोगों (शिकायतकर्ताओं) पर सख्त से सख्त विधिक कार्रवाई होगी। जो भी फैक्ट्स (तथ्य) हैं, वो बहुत जल्द जनता के सामने आ जाएंगे।"
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।
कहते हैं कि बच्चों का मन कांच की तरह नाजुक होता है, जरा सी ठेस लगे तो बिखर जाता है। लेकिन कभी-कभी यह बिखराव इतना भयानक होता है कि पूरा परिवार हमेशा के लिए टूट जाता है। उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी ही खबर सामने आई है, जिसने हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहाँ एक मां का अपने बेटे को पढ़ाई के लिए टोकना और दोस्तों के सामने डांटना इतना भारी पड़ गया कि 14 साल के बेटे ने अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर ली।Read also:-UGC के 'नए कानून' से सुलग उठा उत्तर भारत: सवर्णों ने भाजपाइयों के लिए टांगे 'नो एंट्री' के बोर्ड, करणी सेना ने फूंका आंदोलन का बिगुल आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगे, दोस्तों का शोर और बसंत का उल्लास—सब कुछ एक पल में सन्नाटे में बदल गया। शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि आज की पीढ़ी के घटते धैर्य और बढ़ते गुस्से का एक खौफनाक उदाहरण है। आइये, इस पूरे मामले की गहराई में जाते हैं और समझते हैं कि आखिर उस डेढ़ घंटे में ऐसा क्या हुआ जिसने हंसते-खेलते अनंत को मौत के गले लगाने पर मजबूर कर दिया। घटनाक्रम: वह काली दोपहर यह घटना मेरठ के नौचंदी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पॉश इलाके शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की है। तारीख थी 26 जनवरी, यानी गणतंत्र दिवस। पूरा देश जश्न में डूबा था और बसंत पंचमी के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पतंगबाजी का जोर था। अनंत चौहान (14 वर्ष), जो विद्या मंदिर स्कूल में कक्षा 9 का होनहार छात्र था, पिछले तीन दिनों से लगातार पतंगबाजी का लुत्फ उठा रहा था। उसके पिता, विनय चौहान, जो पेशे से ड्राइवर हैं, अपनी मेहनत से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार की तरह उनकी भी अपने बेटे से यही उम्मीद थी कि वह पढ़-लिखकर कुछ बड़ा करे। समय: सुबह 11:00 बजे अनंत अपने घर की छत पर दोस्तों के साथ मौजूद था। पिछले दो दिनों से बारिश और मौसम खराब होने के बावजूद उसका पतंग उड़ाने का जुनून कम नहीं हुआ था। 26 जनवरी की छुट्टी होने के कारण वह सुबह ही छत पर चढ़ गया था। इसी दौरान उसकी मां छत पर पहुंची। बेटे को लगातार तीसरे दिन पढ़ाई छोड़कर पतंग उड़ाते देख उनका सब्र जवाब दे गया। मां ने स्वाभाविक गुस्से में, जैसा कि हर भारतीय घर में होता है, अनंत को डांट दिया। लेकिन यहाँ एक गलती हो गई—डांट अकेले में नहीं, बल्कि उसके दोस्तों के सामने पड़ी। मां ने कहा, "अब पतंग नहीं उड़ाओ, जाकर पढ़ाई करो। पिछले 3 दिन से तो पतंग ही उड़ा रहे हो।" समय: दोपहर 11:15 बजे से 12:30 बजे के बीच मां की यह बात अनंत के दिल पर तीर की तरह लगी। दोस्तों के सामने अपमानित महसूस कर वह गुस्से में तमतमाता हुआ छत से नीचे आया और सीधे मकान की दूसरी मंजिल पर बने अपने कमरे में चला गया। उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। नीचे घर में किसी को अंदाजा नहीं था कि ऊपर कमरे में अनंत क्या सोच रहा है। मां को लगा कि बेटा गुस्से में है, थोड़ी देर में शांत हो जाएगा और पढ़ने लगेगा। पिता अपने काम में व्यस्त थे या घर के अन्य सदस्यों को लगा कि यह सामान्य 'टीनेज टेंट्रम' (किशोरावस्था का नखरा) है। लेकिन कमरे के अंदर अनंत जिंदगी और मौत का फैसला ले रहा था। समय: दोपहर 12:30 बजे करीब डेढ़ घंटे बीत चुके थे। छत पर अनंत के दोस्त अभी भी पतंग उड़ा रहे थे। जब अनंत काफी देर तक वापस नहीं आया, तो उसके दोस्तों को चिंता हुई। वे पतंग समेटकर नीचे उतरे और अनंत को खोजते हुए उसके कमरे की तरफ गए। दरवाजा या तो खुला था या दोस्तों ने खिड़की से झांका—दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अनंत का शरीर दुपट्टे के सहारे पंखे/हुक से लटका हुआ था। चीख-पुकार और अस्पताल की दौड़ दोस्तों की चीख ने पूरे घर को हिला दिया। उनकी आवाज सुनकर अनंत के माता-पिता और अन्य परिजन बदहवास होकर दौड़ते हुए दूसरी मंजिल पर पहुंचे। सामने का मंजर देखकर मां वहीं बेसुध होने लगीं। जिस बेटे को अभी डेढ़ घंटे पहले पढ़ाई के लिए डांटा था, वह अब शांत हो चुका था। आनन-फानन में पड़ोसियों की मदद से अनंत को फंदे से नीचे उतारा गया। उम्मीद की एक धुंधली किरण बाकी थी कि शायद सांसें चल रही हों। परिजन उसे लेकर तुरंत पास के लोकप्रिय अस्पताल भागे। अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में डॉक्टरों ने अनंत की जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एक 14 साल का बच्चा, जो सुबह तक आसमान में पेंच लड़ा रहा था, अब दुनिया छोड़ चुका था। पुलिस कार्यवाही और परिवार का इनकार घटना की सूचना मिलते ही नौचंदी थाने की पुलिस मौके पर और अस्पताल पहुंची। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत शव का पंचनामा भरने और पोस्टमार्टम कराने की बात कही। यह एक मानक प्रक्रिया है ताकि मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सके। हालांकि, अनंत के परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि यह एक दुर्घटना है और वे अपने बेटे के शरीर की चीर-फाड़ नहीं चाहते। वे पहले से ही गहरे सदमे में थे और कानूनी पचड़ों में नहीं पड़ना चाहते थे। चूंकि मामला आत्महत्या का था और परिवार की तरफ से कोई संदिग्ध परिस्थिति या किसी के खिलाफ शिकायत नहीं जताई गई, पुलिस ने परिजनों की भावनाओं और कानूनी प्रावधानों का सम्मान करते हुए शव को बिना पोस्टमार्टम के उन्हें सौंप दिया। "दोस्तों के सामने बेइज्जती": एक जानलेवा ट्रिगर इस पूरी घटना में जो सबसे महत्वपूर्ण पहलू उभरकर आया है, वह है—"दोस्तों के सामने डांटना"। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, 13 से 18 वर्ष की उम्र (किशोरावस्था) में बच्चों के लिए उनका 'पीयर ग्रुप' (दोस्तों का समूह) सबसे ज्यादा अहम होता है। इस उम्र में बच्चों के अंदर 'Self-Identity' (आत्म-पहचान) बन रही होती है। उनके लिए दोस्तों के बीच उनकी छवि, उनके माता-पिता की राय से भी ज्यादा मायने रखती है। अहंकार (Ego) की चोट: जब मां ने दोस्तों के सामने अनंत को डांटा, तो उसे अपनी 'इमेज' खराब होती महसूस हुई। उसे लगा कि अब दोस्त उसका मजाक उड़ाएंगे। आवेग (Impulse): किशोरावस्था में दिमाग का 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (जो निर्णय लेने और भावनाओं को नियंत्रित करने का काम करता है) पूरी तरह विकसित नहीं होता। यही कारण है कि किशोर गुस्से में बिना परिणाम सोचे घातक कदम उठा लेते हैं। अनंत के साथ भी यही हुआ। वह गुस्सा बर्दाश्त नहीं कर पाया। क्या सिर्फ एक डांट वजह थी? सतही तौर पर देखने पर लगता है कि मां की डांट की वजह से बच्चे ने जान दे दी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदम के पीछे कई परतें होती हैं: एग्जाम का दबाव: जनवरी का अंत और फरवरी की शुरुआत बच्चों के लिए तनावपूर्ण होती है क्योंकि फाइनल एग्जाम (Final Exams) सिर पर होते हैं। हो सकता है अनंत के मन में पढ़ाई को लेकर पहले से ही तनाव हो, और मां की डांट ने उस तनाव को 'ट्रिगर' कर दिया हो। संवाद की कमी: क्या अनंत अपनी बातें अपने माता-पिता से शेयर करता था? अक्सर जब बच्चों और पेरेंट्स के बीच 'दोस्ताना संवाद' की कमी होती है, तो बच्चे अपनी हताशा जाहिर नहीं कर पाते और उसे अंदर ही अंदर घोंटते रहते हैं। सहनशीलता की कमी (Low Tolerance): आज की पीढ़ी में 'ना' सुनने की आदत या अपमान सहने की शक्ति कम होती जा रही है। डिजिटल युग में 'इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन' (तुरंत संतुष्टि) की आदत ने धैर्य को कम कर दिया है। अभिभावकों के लिए वेक-अप कॉल: क्या करें, क्या न करें? मेरठ की यह घटना हर उस माता-पिता के लिए एक चेतावनी है जिनके घर में बढ़ते बच्चे (Teenagers) हैं। परवरिश अब सिर्फ खाना खिलाने और स्कूल भेजने तक सीमित नहीं है, यह एक मनोवैज्ञानिक जिम्मेदारी बन गई है। विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई 5 महत्वपूर्ण बातें: सार्वजनिक रूप से न डांटें (No Public Shaming): सबसे महत्वपूर्ण नियम—अपने बच्चे को कभी भी उसके दोस्तों, रिश्तेदारों या पड़ोसियों के सामने न डांटें। अगर आपको उसकी गलती बतानी है, तो उसे अकेले में ले जाकर समझाएं। सार्वजनिक डांट बच्चे के आत्म-सम्मान को कुचल देती है। गुस्से को पहचानें: अगर आपका बच्चा डांटने पर बहुत ज्यादा आक्रामक हो रहा है या बिल्कुल चुप हो गया है, तो इसे नजरअंदाज न करें। अनंत कमरे में गया और डेढ़ घंटे तक बाहर नहीं आया। अगर उसी समय मां या पिता जाकर उससे बात कर लेते, उसके सिर पर हाथ फेर देते, तो शायद यह घटना नहीं होती। तुलना न करें: "शर्मा जी के बेटे को देखो", "तुम्हारे दोस्त कितना पढ़ रहे हैं"—ऐसी तुलना बच्चों को डिप्रेशन में डाल देती है। हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। हॉबीज का सम्मान करें: अनंत को पतंग उड़ाना पसंद था। पढ़ाई जरूरी है, लेकिन अगर साल में एक-दो दिन त्योहार पर बच्चा खेल रहा है, तो उसे थोड़ी छूट दी जा सकती है। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाने में उसकी मदद करें, उसे रोके नहीं। कम्युनिकेशन गैप खत्म करें: अपने बच्चों से रोज कम से कम 20 मिनट बिना किसी उपदेश के बात करें। उनकी सुनें, अपनी सुनाएं। ताकि जब वे मुसीबत में हों, तो कमरे का दरवाजा बंद करने के बजाय आपके पास आएं। पड़ोस और स्कूल में पसरा मातम शास्त्रीनगर सेक्टर-3 की उस गली में अब सन्नाटा है जहाँ कल तक शोर था। अनंत के दोस्तों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार यही कह रहे हैं, "अगर हमें पता होता कि वो ऐसा कर लेगा, तो हम उसे डांट पड़ने ही नहीं देते, या हम उसे अकेला नहीं छोड़ते।" विद्या मंदिर स्कूल में, जहाँ अनंत पढ़ता था, वहां भी शोक की लहर है। शिक्षकों और सहपाठियों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि उनकी क्लास का एक छात्र अब कभी वापस नहीं आएगा। स्कूल प्रशासन भी अब विचार कर रहा है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' पर काउंसलिंग सेशन आयोजित किए जाएं। सामाजिक परिदृश्य: पतंगबाजी का जुनून और जोखिम पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मेरठ, हापुड़ और मुजफ्फरनगर में बसंत पंचमी और स्वतंत्रता/गणतंत्र दिवस पर पतंगबाजी का एक अलग ही जुनून होता है। यह संस्कृति का हिस्सा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह जुनून जानलेवा होता जा रहा है। कभी चाइनीज मांझे से राहगीरों की गर्दन कटने की खबरें आती हैं। कभी छत से गिरकर बच्चों की मौत होती है। और अब, पतंग उड़ाने से रोकने पर आत्महत्या जैसा कदम। यह दर्शाता है कि मनोरंजन का एक साधन कैसे जीवन और मरण का प्रश्न बन गया है। समाज को भी यह सोचना होगा कि त्योहारों को उत्सव की तरह कैसे मनाया जाए, न कि उन्माद की तरह। एक अधूरा सपना अनंत के पिता विनय चौहान एक ड्राइवर हैं। उन्होंने अपने बेटे के लिए न जाने कितने सपने देखे होंगे। वे शायद धूप और बारिश में गाड़ी चलाते वक्त यही सोचते होंगे कि मेरा बेटा पढ़-लिखकर अफ़सर बनेगा, एसी कमरे में बैठेगा। लेकिन एक क्षण के आवेग ने उन सपनों की डोरी हमेशा के लिए काट दी। यह घटना हमें सिखाती है कि जिंदगी किसी भी परीक्षा, किसी भी पतंग और किसी भी डांट से कहीं ज्यादा कीमती है। हमें अपने बच्चों को यह सिखाना होगा कि "विफलता" या "डांट" जीवन का अंत नहीं है। और हमें खुद को यह सिखाना होगा कि बच्चों को पालना, कांच के बर्तन को संभालने जैसा है—बहुत सावधानी, बहुत प्यार और बहुत समझदारी की जरूरत है। अनंत तो चला गया, लेकिन अनंत सवाल छोड़ गया है। उम्मीद है कि मेरठ की इस घटना से हम सब सबक लेंगे ताकि किसी और घर का चिराग इस तरह न बुझे। संक्षिप्त सारणी (Quick Summary) विवरण जानकारी मृतक का नाम अनंत चौहान उम्र/कक्षा 14 वर्ष, कक्षा 9 पिता का नाम विनय चौहान (पेशा: ड्राइवर) घटना स्थल शास्त्रीनगर सेक्टर-3, मेरठ घटना की तारीख 26 जनवरी (सोमवार) वजह मां द्वारा दोस्तों के सामने डांटना मृत्यु का कारण फांसी (आत्महत्या) पुलिस थाना नौचंदी थाना (नोट: यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया अकेले न रहें। अपने परिवार से बात करें या हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। जीवन अमूल्य है।)
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने मिर्जापुर की हालिया घटना को लेकर एक बेहद गंभीर और बड़ा बयान दिया है। रविवार को मिर्जापुर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अब लव जिहाद का स्वरूप बदल गया है। मिर्जापुर में जो हुआ, वह केवल लव जिहाद नहीं है, बल्कि अगर इसे 'जिम जिहाद' (Gym Jihad) कहा जाए, तो यह कतई गलत नहीं होगा।READ ALSO:-आगरा का 'संजय प्लेस हॉरर': ऑफिस के सन्नाटे में प्यार का खूनी अंत, प्रेमी ने प्रेमिका के सिर-पैर काटे, यमुना पुल पर खुले बोरे ने उगला मौत का सच बबीता चौहान का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने न केवल जिम संचालकों और ट्रेनरों की मंशा पर सवाल उठाए, बल्कि बुर्के की आड़ में होने वाली गतिविधियों और अभिभावकों की जिम्मेदारी पर भी खुलकर बात की। इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर बबीता चौहान ने जिम जिहाद को लेकर क्या तर्क दिए, मिर्जापुर का वह कौन सा मामला है जिसने इस बहस को जन्म दिया, और महिला सुरक्षा को लेकर आयोग अब क्या कदम उठाने जा रहा है। क्या है 'जिम जिहाद' (Gym Jihad)? बबीता चौहान का तर्क बबीता चौहान ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि धर्म विशेष के युवकों द्वारा नाम बदलकर या अपनी पहचान छिपाकर हिंदू युवतियों को प्रेम जाल में फंसाना अब पुराने तरीके (लव जिहाद) से आगे बढ़कर 'संस्थानिक जिहाद' का रूप ले रहा है। उन्होंने विशेष रूप से जिम (Gym) का उल्लेख करते हुए इसे जिम जिहाद की संज्ञा दी। उन्होंने कहा, "मिर्जापुर की घटना अब केवल लव जिहाद नहीं रही है। अगर इसे जिम जिहाद कहा जाए तो कतई गलत नहीं होगा। जिम में अब जितना जिहाद चल रहा है, उतना कहीं और नहीं चल रहा।" उनके अनुसार, जिम एक ऐसी जगह है जहाँ युवा लड़कियां अपनी फिटनेस और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जाती हैं। वहां वे अपने ट्रेनर पर भरोसा करती हैं। इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ ट्रेनर, जिनकी मानसिकता दूषित है, उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं। बबीता चौहान ने कहा कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र जैसा प्रतीत होता है, जहाँ शारीरिक प्रशिक्षण की आड़ में मानसिक ब्रेनवॉश किया जा रहा है। मिर्जापुर कांड और रमीज का कनेक्शन बबीता चौहान का यह बयान मिर्जापुर में हुई एक विशिष्ट घटना के संदर्भ में आया है। दरअसल, मिर्जापुर में एक जिम ट्रेनर रमीज (Rameez) पर आरोप है कि उसने एक युवती को अपने प्रेम जाल में फंसाया। आरोप है कि जिम ट्रेनिंग के दौरान नजदीकी बढ़ाई गई और बाद में युवती का शोषण किया गया। बबीता चौहान ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि "लव जिहाद को बढ़ावा देने वाला वह शख्स कोबरा सांप था। यह जो जिम जिहाद में शामिल रमीज जैसे लोग हैं, यह उसी के पैदा किए गए सपोले हैं।" उन्होंने प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार सख्त है। जिम जिहाद के मामले सामने आने के बाद कई लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं और जो बचे हैं, उन्हें भी जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। महिला ट्रेनर की अनिवार्यता पर जोर एक साल पहले उत्तर प्रदेश महिला आयोग ने एक प्रस्ताव रखा था कि महिलाओं के जिम और योग केंद्रों में महिला ट्रेनर का होना अनिवार्य किया जाए। अपने इस पुराने बयान को याद करते हुए बबीता चौहान ने कहा, "मुझे अपनी एक साल पुरानी वह बात याद आ रही है जिसमें मैंने जिम में महिला ट्रेनरों को शामिल किए जाने और बड़े ब्यूटी पार्लर व बुटीक में महिलाओं को अवश्य स्थान दिए जाने पर जोर दिया था।" उनका मानना है कि: सुरक्षा: अगर महिला जिम में महिला ट्रेनर होंगी, तो 'बैड टच' या गलत नीयत से छूने की घटनाओं पर लगाम लगेगी। रोजगार: इससे महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा। बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। विश्वास: परिवार वाले अपनी बेटियों को जिम भेजने में सुरक्षित महसूस करेंगे। आयोग का मानना है कि जिम, बुटीक और टेलरिंग की दुकानों पर जहां माप लेने का काम होता है, वहां पुरुषों के बजाय महिलाओं की नियुक्ति से 'जिम जिहाद' जैसे अपराधों को काफी हद तक रोका जा सकता है। "झांगुर बाबा" और जिहादी जाल पत्रकारों से वार्ता के दौरान बबीता चौहान ने एक स्थानीय संदर्भ या प्रतीकात्मक रूप में "झांगुर बाबा" का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सब उसी झांगुर का फैलाया हुआ जाल है। यह शब्दावली इस बात की ओर इशारा करती है कि वे इसे किसी एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह या मानसिकता (इकोसिस्टम) का हिस्सा मानती हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "इनसे बचने के लिए हमें सजग रहना होगा। क्योंकि जिम, बुटीक व ब्यूटी पार्लर जैसे स्थान उनके निशाने पर हैं।" बुर्के पर विवादास्पद और सीधा बयान बबीता चौहान ने बुर्के को लेकर भी अपनी बेबाक राय रखी। जब उनसे बुर्के को लेकर उनके पुराने बयानों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "आज बुर्के के पीछे क्या नहीं हो रहा, यह सब जानते हैं।" उनके प्रमुख बिंदु इस प्रकार थे: पहचान छिपाना: उनका कहना है कि बुर्के की आड़ में कई बार अपराधी अपनी पहचान छिपा लेते हैं। सुरक्षा का प्रश्न: उन्होंने उदाहरण दिया कि कई ज्वेलर्स ने सुरक्षा कारणों से अपनी दुकानों में बुर्का पहनकर आने वाली महिलाओं को प्रतिबंधित कर दिया है, ताकि चोरी या डकैती की वारदातों को रोका जा सके। सुनवाई के दौरान: उन्होंने बताया कि जब वे आयोग में सुनवाई करती हैं, तब भी कई महिलाएं बुर्का पहनकर आती हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "सवाल यह है उनके सामने बुर्का पहन के आने की क्या जरूरत है?" 6 साल की बच्ची का उदाहरण: अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने एक दर्दनाक घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "6 साल की बच्ची के साथ बुर्के में मौजूद हैवान ने गलत हरकत की, यह घटना किसी से छिपी नहीं है।" यह बयान स्पष्ट करता है कि महिला आयोग अध्यक्ष के अनुसार, परिधान की आड़ में सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और पहचान सुनिश्चित करना अनिवार्य है। अभिभावकों के लिए सलाह: "बच्चियों से संवाद बढ़ाएं" बबीता चौहान ने इस समस्या का एक बड़ा कारण परिवारों में बढ़ती दूरियों को बताया। उन्होंने कहा कि जिम जिहाद या लव जिहाद जैसे मामलों में फंसने का एक कारण यह भी है कि युवतियां अपने माता-पिता से कटी हुई हैं। उन्होंने अभिभावकों और महिलाओं को निम्नलिखित सलाह दी: बैकग्राउंड चेक: महिलाएं अपना दिमाग खोलकर किसी भी काम में शामिल हों। जिससे मिल रही हैं या जिससे दोस्ती कर रही हैं, उसकी पृष्ठभूमि (Background) जरूर देख लें। संवादहीनता खत्म करें: घरों के भीतर अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहने की जो प्रथा शुरू हो गई है, उसे खत्म करना होगा। माता-पिता को अपने बच्चों से बात करनी चाहिए ताकि वे बाहर की समस्याओं को घर पर साझा कर सकें। सुरक्षा ऑडिट: माता-पिता यह ध्यान रखें कि उनके बच्चे जिस जिम या सेंटर में जा रहे हैं, वह उनके लिए सुरक्षित है या नहीं। आयोग का एक्शन प्लान: जागरूकता अभियान उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग केवल बयानों तक सीमित नहीं है। अध्यक्ष बबीता चौहान ने बताया कि आयोग ने ऐसे प्रकरणों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने एक विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की है। जागरूकता: आयोग स्कूल, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जाकर महिला वर्ग को जागरूक करेगा। निगरानी: जिम और योगा सेंटर्स की निगरानी के लिए प्रशासन के साथ मिलकर काम किया जाएगा। पुलिस की भूमिका: उन्होंने कहा कि "जिहादियों के पीछे पुलिस पड़ चुकी है।" यूपी पुलिस मिशन शक्ति और अन्य अभियानों के तहत महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। जिम जिहाद: एक सामाजिक चुनौती बबीता चौहान का "जिम जिहाद" शब्द का प्रयोग करना दर्शाता है कि प्रशासन अब अपराध के बदलते तरीकों को डिकोड कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जिम एक ऐसा स्थान है जहाँ शारीरिक आकर्षण और स्वास्थ्य चर्चा के बीच भावनात्मक संबंध बनाना आसान होता है। इसी मनोवैज्ञानिक पहलू का फायदा उठाकर कुछ अपराधी प्रवृति के लोग युवतियों का शोषण करते हैं। आयोग का मानना है कि जब तक जिम संचालक पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराते और महिला ट्रेनर्स की नियुक्ति नहीं करते, तब तक यह खतरा बना रहेगा। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान का बयान यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार और आयोग महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है। मिर्जापुर की घटना को जिम जिहाद (Gym Jihad) का नाम देकर उन्होंने समाज को एक नए खतरे के प्रति आगाह किया है। चाहे वह बुर्के के पीछे की संदिग्ध गतिविधियों का मुद्दा हो या जिम और ब्यूटी पार्लर में पुरुष कर्मचारियों द्वारा शोषण का, आयोग ने साफ कर दिया है कि अब "आंख मूंदकर भरोसा करने का जमाना नहीं है।" बबीता चौहान के अनुसार, पुलिस की सख्ती के साथ-साथ पारिवारिक जागरूकता ही इस 'जाल' को काट सकती है। आने वाले दिनों में यूपी में जिम और योग सेंटर्स के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश देखने को मिल सकते हैं। यूपी महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने मिर्जापुर दौरे के दौरान कहा कि अब लव जिहाद का तरीका बदलकर 'जिम जिहाद' हो गया है। उन्होंने जिम ट्रेनर रमीज के मामले का हवाला देते हुए जिम और ब्यूटी पार्लर्स में महिला कर्मचारियों की अनिवार्यता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने बुर्के की आड़ में हो रहे अपराधों और अभिभावकों की सतर्कता पर भी बेबाक राय रखी।
मेरठ (ब्यूरो रिपोर्ट) - 25 जनवरी, 2026: देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता और सुधार के दावों के बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का एक नया प्रस्ताव विवादों के घेरे में आ गया है। साल की शुरुआत के साथ ही UGC द्वारा प्रस्तावित "उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता सर्वेक्षण हेतु विनियमन-2026" (Regulation for Equality Survey in Higher Education Institutions - 2026) ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की छात्र और सामाजिक राजनीति में भूचाल ला दिया है।READ ALSO:-बार्डर-2 की रिलीज के साथ ही मेरठ में भूचाल: दलित स्वाभिमान पर चोट या सिनेमाई चूक? 3 घंटे 19 मिनट की फिल्म के 27वें मिनट ने खड़ा किया बड़ा बखेड़ा मेरठ, जो हमेशा से क्रांतियों की धरा रही है, वहां से इस विनियमन के खिलाफ विरोध का पहला बड़ा स्वर फूट पड़ा है। युवा ब्राह्मण समाज संगठन (ट्रस्ट), मेरठ मण्डल ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे समाज को बांटने वाली साजिश करार दिया है। संगठन ने रविवार को एक आपात बैठक कर इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। 25 जनवरी: विरोध की पहली चिंगारी आज, रविवार को मेरठ के बी.एच. इंटर कॉलेज (B.H. Inter College) प्रांगण में युवा ब्राह्मण समाज संगठन के बैनर तले एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष जितेन्द्र गौतम ने की। इस बैठक में मेरठ मण्डल के प्रबुद्ध जनों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने हिस्सा लिया। माहौल में भारी आक्रोश था। वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा के मंदिरों में 'समानता' के नाम पर 'जातिगत और सामाजिक विभाजन' का जो बीज बोने की कोशिश की जा रही है, उसका परिणाम भविष्य में घातक होगा। बैठक के अंत में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर सरकार और यूजीसी को चेतावनी दी गई कि यदि इस विनियमन को रद्द नहीं किया गया, तो सड़कों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। क्या है विवाद की जड़? संगठन के अनुसार, UGC का नया ड्राफ्ट "समानता सर्वेक्षण" (Equality Survey) के नाम पर शिक्षण संस्थानों में छात्रों और कर्मचारियों की सामाजिक पृष्ठभूमि, जाति और वर्ग का डेटाबेस तैयार करने की बात करता है। युवा ब्राह्मण समाज का तर्क है कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान का प्रसार और अनुसंधान होना चाहिए, न कि यह गिनना कि किस जाति के कितने छात्र किस बेंच पर बैठे हैं। संगठन द्वारा उठाई गई 4 प्रमुख आपत्तियां: 1. सामाजिक विभाजन का खतरा (Social Division) बैठक में अध्यक्ष जितेन्द्र गौतम ने कहा, "यह विनियमन समानता लाने के बजाय असमानता की खाई को और चौड़ा करेगा। जब आप क्लासरूम में बैठे छात्र को उसकी मेधा के बजाय उसकी सामाजिक पहचान से तौलेंगे, तो वहां शिक्षा नहीं, राजनीति होगी। इससे छात्रों के बीच आपसी वैमनस्य बढ़ेगा।" 2. दुरुपयोग की प्रबल आशंका (Potential for Misuse) पत्र में एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया गया है कि इस नियम का दुरुपयोग केवल सामान्य वर्ग के खिलाफ ही नहीं, बल्कि दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के हितों के खिलाफ भी हो सकता है। डेटा का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए "सॉफ्ट टारगेटिंग" के रूप में किया जा सकता है। 3. शैक्षिक वातावरण का विनाश (Destruction of Academic Environment) संगठन का मानना है कि विश्वविद्यालयों का माहौल पहले ही छात्र राजनीति के कारण संवेदनशील रहता है। ऐसे में यह सर्वेक्षण शिक्षण संस्थानों को 'अखाड़ों' में तब्दील कर देगा। पढ़ाई और रिसर्च पीछे छूट जाएंगे और 'सर्वेक्षण और तुष्टिकरण' मुख्य मुद्दा बन जाएगा। 4. अव्यावहारिक मूल्यांकन (Lack of Practical Assessment) विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यह नियम वातानुकूलित कमरों में बैठकर बनाया गया है। इसमें भारतीय समाज की जटिल संरचना और जमीनी हकीकत (Ground Reality) का कोई वैज्ञानिक आकलन नहीं किया गया है। "शिक्षा में रिसर्च चाहिए, सर्वे नहीं": संगठन का विजन युवा ब्राह्मण समाज ने सिर्फ विरोध नहीं किया है, बल्कि शिक्षा सुधार के लिए एक सकारात्मक खाका (Roadmap) भी पेश किया है। संगठन के वरिष्ठ सदस्य श्री कुलदीप शर्मा और श्री राजीव नरहरी ने संयुक्त रूप से कहा कि भारत को यदि विश्वगुरु बनना है, तो उसे 'जाति' से ऊपर उठकर 'ज्ञान' की बात करनी होगी। संगठन ने सरकार के सामने 5 सूत्रीय मांगें रखी हैं: अनुसंधान-केंद्रित शिक्षा (Research-Centric Education): उच्च शिक्षा का पूरा फोकस रटने या डिग्री बांटने के बजाय रिसर्च पर होना चाहिए। विश्वस्तरीय प्रयोगशालाएं (World-Class Labs): यूजीसी का फंड सर्वे पर खर्च करने के बजाय कॉलेजों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की लैब बनाने पर खर्च हो। ब्रेन ड्रेन पर रोक (Stop Brain Drain): भारत की प्रतिभाएं विदेश क्यों जा रही हैं? उन्हें रोकने के लिए भारत में ही आकर्षक पैकेज और सुविधाएं दी जाएं। इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट: सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर आधुनिक शोध के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करें। स्टार्टअप और इनोवेशन: छात्रों को जातिगत आंकड़ों में उलझाने के बजाय स्टार्टअप और सामाजिक प्रभाव वाली परियोजनाओं (Social Impact Projects) के लिए प्रोत्साहित किया जाए। "हम चाहते हैं कि हमारा युवा यह न सोचे कि वह किस जाति का है, बल्कि यह सोचे कि वह देश के लिए क्या आविष्कार कर सकता है। यूजीसी का यह नियम युवाओं को पीछे धकेलने वाला है।" - ललित शर्मा, वरिष्ठ सदस्य 28 जनवरी को आर-पार की रणनीति आज की बैठक तो महज एक शुरुआत थी। युवा ब्राह्मण समाज ने आंदोलन को तेज करने का ऐलान कर दिया है। संगठन ने मीडिया को जानकारी दी है कि 28 जनवरी, 2026 (बुधवार) को एक बड़ी रणनीति बैठक बुलाई गई है। तिथि: 28 जनवरी, 2026 समय: दोपहर 3:00 बजे स्थान: मीटिंग हॉल, एन.ए.एस. इंटर कॉलेज (N.A.S. Inter College), मेरठ। इस बैठक में मेरठ मण्डल के अलावा आसपास के जिलों से भी युवा प्रतिनिधियों को बुलाया गया है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में "विनियमन वापसी" के लिए चरणबद्ध आंदोलन, धरना प्रदर्शन और यूजीसी चेयरमैन के नाम ज्ञापन सौंपने की रूपरेखा तैयार की जाएगी। उपस्थित गणमान्य आज बी.एच. इंटर कॉलेज में हुई बैठक में संगठन की मजबूती साफ दिखाई दी। मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे: जितेन्द्र गौतम (अध्यक्ष) - जिनके हस्ताक्षर से पत्र जारी किया गया। श्री कुलदीप शर्मा श्री राजीव नरहरी श्री ललित शर्मा श्री पुनीत शर्मा श्री सौरव दिवाकर शर्मा श्री सुरेंद्र शर्मा श्री रमाकांत पंचोरी डॉ पंकज शर्मा श्री गणेश दत्त शर्मा श्री संजय वाजपई श्री भूषण शर्मा सही अंकुर शर्मा तथा अन्य सक्रिय कार्यकर्ता। शिक्षा या राजनीति? यूजीसी का "समानता सर्वेक्षण-2026" अभी लागू होने की प्रक्रिया में है, लेकिन इसका विरोध यह दर्शाता है कि शिक्षा नीति में किसी भी तरह का सामाजिक हस्तक्षेप अब आसानी से स्वीकार नहीं किया जाएगा। जहां एक तरफ सरकार समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ युवा संगठन इसे 'फूट डालो और राज करो' की नीति के रूप में देख रहे हैं। 28 जनवरी की बैठक पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं। क्या यह विरोध मेरठ तक सीमित रहेगा या यह आग पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निकलकर दिल्ली तक पहुंचेगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।