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वाहन की श्रेणी (Vehicle Category)
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ग्रीन सेस (रुपये में)
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निजी कारें / मोटर कैब / मैक्सी कैब
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₹80
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डिलीवरी वैन (3 टन तक)
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₹80
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हल्के माल वाहन (3 से 7.5 टन)
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₹120
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बड़ी बसें (12 सीट से ज्यादा)
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₹140
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भारी निर्माण वाहन (JCB/क्रेन)
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₹250
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मध्यम माल वाहन (7.5 से 18.5 टन)
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₹250
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भारी वाहन (एक्सेल के हिसाब से)
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₹450 से ₹700
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ध्यान दें: एक बार ग्रीन सेस चुकाने के बाद वह रसीद पूरे दिन (24 घंटे) के लिए मान्य रहेगी। यानी एक दिन में आप कितनी भी बार बॉर्डर क्रॉस करें, टैक्स एक ही बार लगेगा।
पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर सोफिक एसके (Sofik SK) और उनकी कथित गर्लफ्रेंड सोनाली (Sonali), जो 'दूस्तु सोनाली' नाम से भी जानी जाती हैं, एक बड़े और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनका एक 15 मिनट से अधिक का निजी वीडियो (MMS) लीक हो गया है, जिसने इंटरनेट पर हंगामा मचा दिया है।READ ALSO:-वो एक फिल्म जिसने धर्मेंद्र को बनाया बॉलीवुड का 'ही-मैन', 1966 में रातों-रात बदल गई थी किस्मत; शर्ट उतारते ही मच गया था तहलका हमारे Telegram चैनल से जुड़ें अभी Join करें वीडियो के वायरल होने के बाद, सोफिक और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली ने चुप्पी तोड़ते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उनकी सहमति के बिना सर्कुलेट किया गया है और यह चोरी और ब्लैकमेलिंग का मामला है। कपल ने तोड़ी चुप्पी: आत्महत्या के विचार और ब्लैकमेलिंग का आरोप सोशल मीडिया पर गंभीर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करने के बाद, सोफिक और सोनाली ने इस विवाद पर अपना पक्ष रखा। दोनों ने साफ किया कि यह वीडियो निजी इस्तेमाल के लिए था और इसे उनकी अनुमति के बिना लीक किया गया है। सोनाली का बयान: सोनाली ने एक वीडियो जारी कर बेहद भावुक होते हुए कहा कि वीडियो लीक होने के बाद उन्हें लगातार आत्महत्या करने के विचार आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस वीडियो को किसी करीबी व्यक्ति ने चुराया और लीक किया है। ब्लैकमेलिंग का आरोप: सोनाली ने स्पष्ट रूप से 'रूबल' नामक एक व्यक्ति का नाम लिया और आरोप लगाया कि वही उन्हें वीडियो को लेकर ब्लैकमेल कर रहा था। जब कपल ने उस व्यक्ति के साथ काम करना बंद कर दिया, तो उसने बदला लेने के लिए वीडियो लीक कर दिया। सोफिक का माफीनामा: सोफिक एसके ने भी अपने फॉलोअर्स से माफी मांगते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह लीक हुआ वीडियो एक साल से अधिक पुराना है और अब वह एक बदले हुए इंसान हैं, जो सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ दोस्त उनकी तरक्की से जलते हैं और इसी वजह से उन्होंने यह वीडियो पोस्ट किया। प्राइवेसी उल्लंघन और डीपफेक की बहस लगभग 15 मिनट लंबा यह कथित वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'सोफिक वायरल वीडियो' के नाम से ट्रेंड कर रहा है। निजता का उल्लंघन: यह मामला एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और निजता के उल्लंघन (Privacy Breach) के गंभीर खतरों को सामने लाया है। ऑथेंटिसिटी पर संदेह: हालांकि कपल ने वीडियो के उनके होने की पुष्टि की है, लेकिन कई ऑनलाइन यूजर्स अभी भी यह बहस कर रहे हैं कि क्या यह वीडियो पूरी तरह से असली है या इसमें एआई आधारित 'डीपफेक' तकनीक का उपयोग किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कथित MMS स्कैंडल्स का सामना कर चुके हैं। सोफिक एसके कौन हैं? सोफिक एसके, जो पल्ली ग्राम टीवी (Palli Gram TV) नामक एक लोकप्रिय चैनल के मुख्य अभिनेता और डिजिटल क्रिएटर हैं, पश्चिम बंगाल में काफी प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कॉमेडी, लोक थिएटर शैली और बंगाली ड्रामा वीडियो के लिए जाने जाते हैं। इस गंभीर विवाद के बाद, सोशल मीडिया पर रूबल नामक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है, जिसने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के बाद इस निजी वीडियो को सार्वजनिक किया। बंगाली इन्फ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड सोनाली का कथित MMS लीक होना एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है। कपल के ब्लैकमेलिंग और चोरी के आरोपों ने इस घटना को एक निजी विवाद से बदलकर डिजिटल युग में प्राइवेसी और सुरक्षा के एक बड़े सवाल में बदल दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अब जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना होगा ताकि वीडियो को आगे फैलने से रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। /* CSS Styling for the Telegram Banner */ .telegram-banner { display: flex; align-items: center; justify-content: center; padding: 15px 20px; margin: 20px auto; /* Centering the banner */ max-width: 800px; /* Optional: Sets a max width */ background-color: #229ED9; /* Telegram Blue */ border-radius: 10px; box-shadow: 0 4px 15px rgba(0, 0, 0, 0.2); font-family: Arial, sans-serif; } .telegram-banner-content { display: flex; align-items: center; gap: 15px; /* Space between text and button/icon */ flex-wrap: wrap; /* Allows items to wrap on smaller screens */ justify-content: center; } .telegram-icon { font-size: 30px; color: white; /* You can replace this with an actual Telegram logo image or a font icon like Font Awesome */ } .telegram-text { color: white; font-size: 18px; font-weight: bold; line-height: 1.4; text-align: center; } .telegram-join-button { background-color: #f7f7f7; /* Light background for contrast */ color: #229ED9; /* Telegram Blue text */ border: none; padding: 10px 20px; border-radius: 5px; text-decoration: none; /* Removes underline from link */ font-weight: bold; font-size: 16px; transition: background-color 0.3s ease; text-align: center; } .telegram-join-button:hover { background-color: #e0e0e0; } /* For responsiveness on very small screens */ @media (max-width: 600px) { .telegram-banner { padding: 15px; } .telegram-text { font-size: 16px; } }
आगरा/मेरठ (Agra/Meerut News): उत्तर प्रदेश के आगरा में सर्दी की शुरुआत के साथ ही एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां मलपुरा थाने में तैनात 29 वर्षीय सिपाही निखिल मोतला (Constable Nikhil Motla) की बाथरूम में नहाते समय संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमर्शन रॉड (Immersion Rod) से बाल्टी के पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से सिपाही की जान चली गई।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला मूल रूप से मेरठ के दादरी सकौती के रहने वाले निखिल की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। शुक्रवार सुबह जब उनका शव गांव पहुंचा तो सपा विधायक अतुल प्रधान सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बंद कमरे में क्या हुआ उस वक्त? घटना आगरा के बमरौली रोड स्थित केसीआर कॉलोनी की है, जहां निखिल अपने बचपन के दोस्त और साथी सिपाही आशीष के साथ किराए के मकान में रहते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा गुरुवार सुबह हुआ। निखिल को सुबह ड्यूटी पर जाना था। ठंड के कारण उन्होंने नहाने के लिए बाथरूम में बाल्टी में पानी गर्म करने के लिए इमर्शन रॉड लगाई थी। प्लग ऑन करने के बाद वे कुछ देर के लिए कमरे में आए और वर्दी तैयार करने लगे। कुछ देर बाद जब उन्हें लगा कि पानी गर्म हो गया होगा, तो वे नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। दोस्त ने देखा खौफनाक मंजर निखिल के रूममेट और सिपाही आशीष ने बताया कि करीब 20 मिनट तक जब बाथरूम से पानी गिरने की आवाज नहीं आई और निखिल बाहर नहीं निकले, तो उन्हें शक हुआ। आशीष ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब आशीष बाथरूम की तरफ गए, तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर आशीष के होश उड़ गए। निखिल फर्श पर अचेत पड़े थे और उनका एक हाथ पानी की बाल्टी के अंदर ही था। बाल्टी में इमर्शन रॉड (Immersion Rod Accident) चालू हालत में थी। बचाने के प्रयास में दोस्त को भी लगा करंट आशीष ने बताया कि जैसे ही उन्होंने निखिल को उठाने की कोशिश की, उन्हें भी जोरदार बिजली का झटका लगा। समझदारी दिखाते हुए उन्होंने तुरंत स्विच बोर्ड से रॉड का प्लग बंद किया और तार को बाल्टी से बाहर खींचा। इसके बाद आनन-फानन में निखिल को ग्वालियर रोड स्थित नवभारत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 2021 बैच के सिपाही थे निखिल, 8 महीने की है बेटी निखिल मोतला 2021 बैच के आरक्षी थे और करीब 8 महीने पहले ही उनकी तैनाती आगरा के मलपुरा थाने में हुई थी। उनके पिता प्रदीप मोतला मेरठ के कद्दावर किसान नेता हैं और मंडौरा समिति के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि निखिल की शादी महज डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उनकी 8 महीने की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। निखिल मंगलवार को ही छुट्टी खत्म करके वापस ड्यूटी पर आगरा लौटे थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर सिपाही की मौत की सूचना मिलते ही एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि आशीष और निखिल बचपन के दोस्त थे, साथ पढ़े और साथ ही पुलिस में भर्ती हुए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में निखिल को श्रद्धांजलि दी गई और शव को सम्मान के साथ मेरठ भेजा गया। एक्सपर्ट की राय: इमर्शन रॉड इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी सर्दियों में इमर्शन रॉड से सिपाही की मौत (Agra Constable Electrocution) जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। बिजली एक्सपर्ट्स का कहना है कि इमर्शन रॉड एक सस्ता और पोर्टेबल वाटर हीटर है, लेकिन इसमें ऑटो-कट फीचर नहीं होता। पानी चेक न करें: रॉड चालू होने पर पानी में कभी उंगली डालकर तापमान चेक न करें। प्लास्टिक की बाल्टी: हो सके तो अच्छी क्वालिटी की प्लास्टिक बाल्टी का प्रयोग करें, लोहे की बाल्टी में करंट फैलने का खतरा 100% होता है। स्विच ऑफ करें: नहाने जाने से पहले प्लग को सॉकेट से पूरी तरह निकाल दें, केवल स्विच ऑफ करना काफी नहीं है। अर्थिंग: घर में अर्थिंग का सही होना बेहद जरूरी है। आगरा में हुए इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिपाही निखिल मोतला की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि बिजली के उपकरणों, खासकर इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
देश की राजधानी दिल्ली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हाईस्पीड महत्वाकांक्षी परियोजना 'नमो भारत' (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह इसकी रफ़्तार, वर्ल्ड क्लास सुविधाएं या तकनीकी उत्कृष्टता नहीं है। इस बार वजह है एक ऐसा वीडियो जिसने न केवल सार्वजनिक मर्यादाओं को तार-तार किया है, बल्कि रेलवे के 'सुरक्षित सफर' के दावे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों से एक वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो नमो भारत ट्रेन के एक कोच के भीतर का है, जिसमें एक प्रेमी युगल (जो स्कूली ड्रेस में नजर आ रहा है) बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि, मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं है। इस घटना ने एक बहुत बड़े खतरे की घंटी बजा दी है—और वह खतरा है 'डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध' का। आखिर एक अति-सुरक्षित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज बाहर कैसे आया? क्या है वायरल वीडियो में? (The Viral Content) प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो मेरठ से गाजियाबाद के बीच चलने वाली रैपिड रेल के किसी कोच का है। पात्र: वीडियो में दिख रहे युवक और युवती की उम्र कम लग रही है और दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म (School Dress) पहनी हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे किसी स्कूल के छात्र हैं। घटनाक्रम: कोच में अन्य यात्रियों की संख्या न के बराबर थी। खाली सीटों और एकांत का फायदा उठाकर यह युगल मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अश्लील हरकतें (Obscene Acts) करता नजर आया। कैमरा एंगल: वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि इसे किसी मोबाइल से रिकॉर्ड नहीं किया गया, बल्कि यह ऊपर लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग है। वीडियो में टाइम स्टैम्प और कैमरा आईडी जैसी तकनीकी डीटेल्स भी देखी जा सकती हैं, जो पुष्टि करती हैं कि यह आधिकारिक फुटेज है। दिल्ली मेट्रो की राह पर नमो भारत? यह पहली बार नहीं है जब किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) भी ऐसे ही कारणों से बदनाम हो चुकी है। वहां भी आए दिन 'किसिंग वीडियो' और आपत्तिजनक हरकतें वायरल होती रहती हैं। लेकिन नमो भारत में हुई यह घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि यह एक प्रीमियम और हाई-सिक्योरिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका संचालन और निगरानी बेहद सख्त मानी जाती है। सोशल मीडिया पर लोग अब तंज कस रहे हैं कि "क्या दिल्ली मेट्रो का वायरल वायरस अब नमो भारत तक पहुंच गया है?" असली मुद्दा: बेडरूम तक नहीं, कंट्रोल रूम तक है खतरा (The Real Scandal: CCTV Leak) इस पूरे मामले में स्कूली छात्रों की हरकत निंदनीय हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ा और गंभीर अपराध वह है जो NCRTC (National Capital Region Transport Corporation) के भीतर हुआ है। सवाल यह है कि CCTV फुटेज पब्लिक डोमेन में किसने डाला? रैपिड रेल में यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड और रिकॉर्डिंग केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मियों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के पास होती है। यह डेटा बेहद संवेदनशील (Sensitive Data) माना जाता है। विश्वासघात (Breach of Trust): यात्री इस भरोसे के साथ सफर करते हैं कि कैमरे उनकी सुरक्षा के लिए हैं, न कि उनका तमाशा बनाने के लिए। अगर कंट्रोल रूम में बैठा कोई कर्मचारी किसी कपल का वीडियो बनाकर वायरल कर रहा है, तो यह 'वॉयरिज्म' (Voyeurism) का अपराध है। सिस्टम की पोल: अगर यह वीडियो किसी कर्मचारी ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड स्क्रीन को शूट करके वायरल किया है, तो यह दर्शाता है कि कंट्रोल रूम में मोबाइल ले जाने या डेटा रिकॉर्ड करने की छूट है, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। निजता का हनन (Violation of Privacy): सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, निजता एक मौलिक अधिकार है। भले ही कोई सार्वजनिक स्थान पर गलत कर रहा हो, उसका सीसीटीवी फुटेज लीक करना आईटी एक्ट (IT Act) के तहत दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों का कहना है, "अगर आज एक कपल का वीडियो लीक हुआ है, तो कल किसी वीआईपी की मूवमेंट, किसी महिला यात्री की निजी जानकारी या सुरक्षा से जुड़ा कोई अन्य संवेदनशील डेटा भी लीक किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला भी बन सकता है।" NCRTC का एक्शन: जांच के आदेश और सख्ती वीडियो वायरल होते ही NCRTC महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच (Internal Inquiry) शुरू कर दी है। NCRTC के सूत्रों के अनुसार: सोर्स की तलाश: तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि वीडियो किस तारीख का है, किस समय का है और उस वक्त ड्यूटी पर कौन से कर्मचारी तैनात थे। डिजिटल फोरेंसिक: यह जांच की जा रही है कि वीडियो सिस्टम से डाउनलोड किया गया है या स्क्रीन से मोबाइल द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। कड़ी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जो भी कर्मचारी इस लीकेज के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। CCTV फुटेज लीक होने पर NCRTC सख़्त इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CCTV फुटेज लीक कैसे हुआ? रैपिड रेल का कंट्रोल रूम और उसका डेटा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में किसी निजी फुटेज का पब्लिक डोमेन में आना बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। आंतरिक जांच शुरू: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। लीकेज का स्रोत: अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंट्रोल रूम के किस कर्मचारी या सिस्टम के माध्यम से यह संवेदनशील फुटेज बाहर निकला और वायरल किया गया। डेटा प्राइवेसी: विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों का फुटेज इस तरह बाहर आना प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है। कानूनी पहलू: कौन है असली गुनहगार? कानून की नजर में इस मामले में दो अलग-अलग अपराध हुए हैं: 1. छात्रों का अपराध (सार्वजनिक अश्लीलता): भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व की IPC की धारा 294 के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करना अपराध है। चूंकि वे स्कूली छात्र (संभवतः नाबालिग) लग रहे हैं, इसलिए उन पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनकी काउंसलिंग की जा सकती है। 2. वीडियो लीक करने वाले का अपराध (डेटा चोरी): यह अपराध ज्यादा संगीन है। IT Act की धारा 66E: किसी की निजता का उल्लंघन करना और निजी अंगों या कृत्यों की तस्वीर/वीडियो प्रसारित करना। इसमें 3 साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। IT Act की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना। डेटा सुरक्षा कानून: आधिकारिक डेटा को लीक करना अनुबंध और विश्वास का उल्लंघन है। सार्वजनिक शिष्टाचार बनाम निगरानी (Public Decency vs Surveillance) यह घटना समाज के सामने दो बड़े सवाल खड़े करती है: पहला- गिरता नैतिक स्तर: स्कूली बच्चों द्वारा सार्वजनिक परिवहन में ऐसी हरकतें करना सामाजिक पतन और अभिभावकों की निगरानी में कमी को दर्शाता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के अनियंत्रित इस्तेमाल से किशोरों में 'सार्वजनिक और निजी' का अंतर खत्म होता जा रहा है। दूसरा- बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू (Big Brother is Watching): क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां हर वक्त कोई हमें देख रहा है और मजे ले रहा है? सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कैमरे अगर ब्लैकमेलिंग या मनोरंजन का साधन बन जाएं, तो महिलाएं और आम नागरिक ट्रेन में चढ़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। गाजियाबाद की एक नियमित यात्री, स्नेहा वर्मा कहती हैं, "मैं अक्सर रैपिड रेल से सफर करती हूं क्योंकि यह सुरक्षित है। लेकिन यह खबर सुनकर डर लग रहा है। अगर कल को मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं या कपड़े ठीक कर रही हूं और कोई गार्ड उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दे तो? यह बहुत डरावना है।" आगे क्या? (What Next?) NCRTC के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' है। सिर्फ शानदार कोच और तेज रफ्तार इंजन बना देना काफी नहीं है। उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की मानसिकता और ईमानदारी भी 'वर्ल्ड क्लास' होनी चाहिए। सुझाव और अपेक्षाएं: मोबाइल बैन: कंट्रोल रूम में कर्मचारियों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वाटरमार्क: सीसीटीवी फुटेज पर यूजर आईडी का वाटरमार्क होना चाहिए ताकि लीक होने पर तुरंत पता चल सके कि यह किसकी आईडी से देखा गया था। जागरूकता: स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है कि सार्वजनिक स्थानों पर कैसा आचरण अपेक्षित है। फिलहाल, पुलिस और NCRTC की जांच जारी है। देखना होगा कि वीडियो लीक करने वाला वह 'चेहरा' कब बेनकाब होता है जिसने सुरक्षा तंत्र का मजाक बनाकर रख दिया है। जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ। हम इस खबर पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।
बॉलीवुड और भारतीय टेलीविजन जगत के महान और बहुमुखी कलाकार सतीश शाह (Satish Shah) का आज (शनिवार, 25 अक्टूबर 2025) दुखद निधन हो गया है। अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले सतीश शाह ने 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपनी आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और किडनी फेलियर को उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। उनके निधन की पुष्टि प्रोड्यूसर और IFTDA के अध्यक्ष अशोक पंडित ने की है। चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन का सफर सतीश शाह का अभिनय करियर पाँच दशकों से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई सफल टीवी सीरियल्स में काम किया। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने पुणे के FTII (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया था। टीवी जगत का आइकॉन: उन्हें सबसे ज्यादा पहचान हिट कॉमेडी सीरियल 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में इंद्रावदन साराभाई (Indravadan Sarabhai) के किरदार से मिली। इस शो में उनके डायलॉग और एक्सप्रेशन आज भी कल्ट क्लासिक माने जाते हैं। 'ये जो है जिंदगी' (1984) में 55 अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत: उन्होंने 1983 की डार्क कॉमेडी फिल्म 'जाने भी दो यारों' में एक 'लाश' (Dead Body) का आइकॉनिक किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई थी। प्रमुख फिल्में: उनकी कुछ यादगार बॉलीवुड फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'मुझसे शादी करोगी', 'कल हो ना हो' और शाहरुख खान अभिनीत 'मैं हूँ ना' शामिल हैं, जहाँ उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से जान डाल दी। Read Also : थामा, और 'स्त्री 2' के म्यूजिक कंपोजर सचिन सांघवी गिरफ्तार, शादी और गाना देने का झांसा देकर 20 साल की युवती से यौन उत्पीड़न का आरोप किडनी फेलियर और निधन की पुष्टि मिली जानकारी के मुताबिक, अभिनेता सतीश शाह पिछले कुछ समय से किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्होंने आज दोपहर करीब 2:30 बजे अंतिम सांस ली। आधिकारिक रूप से किडनी फेलियर को उनकी मृत्यु का कारण बताया गया है। शाह के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। इंडस्ट्री में शोक की लहर मशहूर निर्माता अशोक पंडित ने सतीश शाह के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, "जी हाँ, सतीश शाह नहीं रहे। वो मेरे अच्छे मित्र थे। किडनी फेलियर के चलते उनका निधन हो गया है। इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति है।" Public Reaction or Social Media: श्रद्धांजलि सतीश शाह के निधन की खबर से उनके फैंस स्तब्ध हैं। सोशल मीडिया पर उनके फैंस और फिल्मी सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके सबसे यादगार किरदारों को याद कर रहे हैं। 'साराभाई वर्सेज साराभाई' की कास्ट और क्रू ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सिनेमा में हास्य की क्षति सतीश शाह का निधन हिंदी सिनेमा में चरित्र अभिनय और हास्य की एक पीढ़ी का अंत है। उनकी अभिनय शैली और हास्य टाइमिंग हमेशा दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के साथ ही मेरठ को अपनी पहली 'मेरठ मेट्रो' मिलने जा रही है। यह न केवल शहर के अंदर कनेक्टिविटी को सुधारेगी, बल्कि दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों से भी मेरठ के सफर को आसान और तेज बना देगी। आइए, मेरठ मेट्रो से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी पर एक विस्तृत नजर डालते हैं: Meerut Metro की कब होगी शुरुआत? (Kab Shuru Hogi) मेरठ मेट्रो का संचालन, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (जिसे 'नमो भारत' ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है) के साथ ही शुरू होना प्रस्तावित है। हालिया अपडेट: खबरों के अनुसार, 30 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नमो भारत ट्रेन के आखिरी चरण (मेरठ साउथ से मोदीपुरम) और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया जा सकता है। लक्ष्य: पूरी परियोजना (RRTS के साथ) को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। प्राथमिकता खंड (साहिबाबाद से दुहाई) का परिचालन अक्टूबर 2023 में पहले ही शुरू हो चुका है। खासियत: यह देश का पहला ऐसा ट्रैक होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन और तीन कोच वाली मेरठ मेट्रो ट्रेन, दोनों एक साथ चलेंगी। रूट मैप (Route Map) और स्टेशन मेरठ मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर का ही हिस्सा है। यह मुख्यतः मेरठ के शहरी क्षेत्र में सेवा प्रदान करेगी। कॉरिडोर का नाम: मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम (Meerut South to Modipuram) कुल लंबाई: लगभग 23 किमी स्टेशनों की संख्या: इस कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन हैं। केवल मेट्रो स्टेशन: इनमें से 10 स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के लिए होंगे। RRTS और मेट्रो दोनों के लिए स्टेशन (Integrated Stations): मेरठ साउथ, बेगमपुल, और मोदीपुरम स्टेशन RRTS और मेरठ मेट्रो, दोनों की सेवाओं के लिए इंटीग्रेटेड (एकीकृत) होंगे। प्रमुख स्टेशन (संभावित): मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, दौर्ली, मेरठ नॉर्थ, और मोदीपुरम। किराया (Kiraya) मेरठ मेट्रो का किराया दूरी के आधार पर तय किया जाएगा। यह किराया नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) द्वारा जारी किया जाएगा। नमो भारत (RRTS) का किराया (दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के लिए): मानक (Standard) कोच: ₹20 से शुरू होकर अधिकतम ₹150 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। प्रीमियम (Premium) कोच: ₹30 से शुरू होकर अधिकतम ₹225 तक हो सकता है (पूरे कॉरिडोर के लिए)। मेरठ मेट्रो का अनुमानित किराया: चूंकि मेरठ मेट्रो की यात्रा दूरी RRTS की तुलना में कम होगी (शहर के भीतर), इसका किराया ₹20 से ₹50 के बीच होने की संभावना है, जो यात्रियों द्वारा तय की गई दूरी पर निर्भर करेगा। मेरठ मेट्रो की आगे की योजना (Aage Ka Plan) मेरठ मेट्रो का पहला चरण (मेरठ दक्षिण से मोदीपुरम) पूरा होने के बाद, आगे की योजनाओं में शहर के विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ाना शामिल है: दूसरा कॉरिडोर प्रस्तावित: मेरठ मेट्रो के लिए दूसरा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिसका रूट श्रद्धापुरी एक्सटेंशन से जाग्रति विहार तक हो सकता है। इस पर अभी विस्तृत काम शुरू होना बाकी है। टाउनशिप और TOD: मेरठ में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर आधारित नई टाउनशिप का विकास किया जा रहा है। ये टाउनशिप RRTS/मेट्रो स्टेशनों के आस-पास होंगी, जिससे लोग अपने कार्यस्थल (Walk to Work) और जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकेंगे। इससे 2029 तक 20,000 से अधिक रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। फीडर सेवाएं: स्टेशनों से अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के लिए फीडर सेवाओं को मजबूत करने की योजना है। मेरठ मेट्रो न केवल शहर के ट्रैफिक को कम करेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर से मेरठ की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी, जिससे यहां के निवासियों के लिए समय और पैसे दोनों की बचत होगी। यह परियोजना मेरठ को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।
गोपेश्वर / चमोली / देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड के हिमालयी शिखरों में बसने वाले आदियोगी भगवान शिव के भक्तों के लिए आज का दिन अत्यंत मंगलकारी समाचार लेकर आया है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी, जिसे हम वसंत पंचमी (Vasant Panchami) के रूप में मनाते हैं, के पावन पर्व पर 'पंच केदार' (Panch Kedar) में से एक और अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति के लिए प्रसिद्ध चतुर्थ केदार भगवान श्री रुद्रनाथ (Rudranath) के कपाट खुलने की तिथि की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है।READ ALSO:-Badrinath Dham Kapat Opening Date 2026: 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, वसंत पंचमी पर हुआ तिथियों का ऐलान—जानें पूरी डिटेल चतुर्थ केदार भगवान श्री रुद्रनाथ के कपाट दिनांक 18 मई 2026 को दोपहर 12:57 बजे विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोले जाएंगे। 🙏🕉️ pic.twitter.com/N4IGeaSe3t — Chamoli Police Uttarakhand (@chamolipolice) January 23, 2026 शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को भगवान रुद्रनाथ के शीतकालीन गद्दी स्थल, ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर (Gopinath Mandir), गोपेश्वर में एक भव्य धार्मिक समारोह के दौरान हक-हकूकधारियों, पुजारियों और वेदपाठी ब्राह्मणों ने पंचांग गणना के आधार पर यह शुभ तिथि तय की। प्रमुख घोषणा: साल 2026 में भगवान रुद्रनाथ जी के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए 18 मई को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर पूर्ण वैदिक परंपरा और विधि-विधान के साथ आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। यह घोषणा न केवल धार्मिक आस्था का विषय है, बल्कि यह उस साहसिक यात्रा की शुरुआत का भी संकेत है, जिसे 'रुद्रनाथ ट्रैक' कहा जाता है—एक ऐसी यात्रा जो शरीर की परीक्षा लेती है और आत्मा को तृप्त करती है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कपाट खुलने की प्रक्रिया, डोली यात्रा का कार्यक्रम, भगवान के 'एकानन' स्वरूप का रहस्य, और 18 किलोमीटर की उस कठिन चढ़ाई के बारे में, जिसे पार करके भक्त अपने आराध्य तक पहुंचते हैं। वसंत पंचमी पर घोषणा: गोपीनाथ मंदिर में उत्सव का माहौल उत्तराखंड की परंपराओं में वसंत पंचमी का दिन केवल ऋतु परिवर्तन का सूचक नहीं है, बल्कि यह आगामी यात्रा सीजन की तैयारियों का शंखनाद भी है। शुक्रवार को गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर परिसर, जो भगवान रुद्रनाथ का शीतकालीन आवास है, वैदिक मंत्रों और स्थानीय वाद्य यंत्रों की ध्वनियों से गूंज उठा। पंचांग गणना की प्रक्रिया परंपरा के अनुसार, मंदिर के मुख्य पुजारी और हक-हकूकधारियों (मंदिर के पारंपरिक अधिकार धारक) ने भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद, ग्रहों और नक्षत्रों की चाल को देखते हुए, 'अभिजित मुहूर्त' और अन्य शुभ योगों का मिलान करके 18 मई की तारीख तय की गई। घोषणा का समय: 23 जनवरी, 2026 (शुक्रवार) कपाट खुलने का मुहूर्त: 18 मई, 2026 (दोपहर 12:57 बजे) स्थानीय लोगों के लिए यह क्षण भावुक करने वाला होता है, क्योंकि वे जानते हैं कि अब जल्द ही उनके आराध्य देवता शीतकालीन प्रवास से अपने मूल धाम (हिमालय की ऊंचाइयों पर) के लिए प्रस्थान करेंगे। डोली यात्रा और कपाट खुलने का विस्तृत कार्यक्रम भगवान रुद्रनाथ की यात्रा केवल एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि यह कई दिनों तक चलने वाला एक धार्मिक उत्सव है। मंदिर समिति द्वारा जारी किए गए कार्यक्रम के अनुसार, कपाट खुलने की प्रक्रिया इस प्रकार रहेगी: 15 और 16 मई: अंतिम शीतकालीन दर्शन कपाट खुलने के लिए डोली के प्रस्थान करने से पहले, भक्तों को भगवान के शीतकालीन आवास में दर्शन का अंतिम अवसर मिलेगा। स्थान: गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर। विवरण: 15 और 16 मई तक भगवान रुद्रनाथ के 'उत्सव विग्रह' (चल विग्रह) के दर्शन भक्त गोपेश्वर में ही कर सकेंगे। इस दौरान विशेष आरती और भोग का आयोजन होगा। स्थानीय भक्त अपने देवता को विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में उमड़ेंगे। 17 मई: डोली का प्रस्थान घटना: भगवान रुद्रनाथ जी की उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दी स्थल से मूल धाम के लिए प्रस्थान करेगी। दृश्य: यह एक अद्भुत नजारा होता है। फूलों से सजी डोली, पारंपरिक वाद्य यंत्रों (ढोल-दमाऊ) की थाप और 'जय भोलेनाथ' के जयकारों के साथ डोली गोपेश्वर से निकलती है। हजारों भक्त डोली को कंधे देने के लिए उत्सुक रहते हैं। पड़ाव: डोली सगर गांव होते हुए जंगल के रास्ते ल्वीटी बुग्याल या पनार बुग्याल में रात्रि विश्राम करती है (यह मौसम और व्यवस्था पर निर्भर करता है)। 18 मई: कपाट खुलना समय: दोपहर 12 बजकर 57 मिनट। प्रक्रिया: डोली के रुद्रनाथ मंदिर पहुंचने पर, मुख्य पुजारी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के द्वार (कपाट) खोलेंगे। सबसे पहले मंदिर के अंदर साफ-सफाई और शुद्धिकरण किया जाएगा। प्रथम पूजा: इसके बाद भगवान के 'एकानन' (मुख) स्वरूप का जलाभिषेक और श्रृंगार किया जाएगा, और फिर आम भक्तों के लिए दर्शन शुरू हो जाएंगे। चतुर्थ केदार रुद्रनाथ: जहां होती है शिव के 'मुख' की पूजा पंच केदार (केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर) में रुद्रनाथ का स्थान चौथा है, लेकिन महत्ता और विशिष्टता में यह अद्वितीय है। पौराणिक कथा: पांडवों और शिव का मिलन महाभारत युद्ध के बाद, पांडव अपने गोत्र हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव को खोज रहे थे। शिव उनसे नाराज थे और नंदी (बैल) का रूप धारण कर धरती में समाने लगे। उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से पांच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए। केदारनाथ: पीठ (कूबड़)। तुंगनाथ: भुजाएं। मध्यमहेश्वर: नाभि। कल्पेश्वर: जटाएं। रुद्रनाथ: मुख (Face)। एकानन स्वरूप और नील-लोहित रुद्रनाथ ही वह एकमात्र स्थान है जहां भगवान शिव के 'मुख' (Face) के दर्शन होते हैं। यहां शिवलिंग के बजाय एक प्राकृतिक शिला पर भगवान शिव का मुख बना हुआ है। इसे 'एकानन' (एक मुख वाला) स्वरूप कहा जाता है। स्थानीय मान्यताओं में उन्हें 'नील-लोहित' शिव भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। 18-20 किलोमीटर का कठिन ट्रैक: साहस और आस्था की परीक्षा रुद्रनाथ मंदिर समुद्र तल से लगभग 2286 मीटर (कुछ स्रोतों के अनुसार 3600 मीटर तक की ऊंचाई वाले बुग्यालों को पार करना पड़ता है) की ऊंचाई पर स्थित है। पंच केदारों में रुद्रनाथ की यात्रा को सबसे कठिन (Toughest Trek) माना जाता है। रास्ता 1: सगर गांव से (सबसे प्रचलित मार्ग) कपाट खुलने के दौरान डोली इसी रास्ते से जाती है। शुरुआत: गोपेश्वर से लगभग 5 किमी दूर 'सगर गांव'। चढ़ाई: यह लगभग 18-19 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई है। प्रमुख पड़ाव: पुंग बुग्याल: सगर से चढ़ाई शुरू करते ही घने जंगल और फिर घास के मैदान (बुग्याल) शुरू हो जाते हैं। ल्वीटी बुग्याल: यहां से हिमालय का दृश्य खुलने लगता है। पनार बुग्याल (Panar Bugyal): यह इस ट्रैक का सबसे सुंदर और कठिन हिस्सा है। मीलों तक फैले मखमली घास के मैदान और सामने नंदा देवी पर्वत का विराट रूप। यहां ऑक्सीजन की कमी महसूस हो सकती है। पितृधार: यह यात्रा का सबसे ऊंचा बिंदु है। यहां से रास्ता थोड़ा नीचे की ओर जाता है। रुद्रनाथ: अंत में चट्टानों के बीच स्थित छोटा सा मंदिर दिखाई देता है। रास्ता 2: मंडल और अनुसूया देवी से एक दूसरा रास्ता मंडल गांव से होकर जाता है, जो माता अनुसूया देवी के मंदिर से गुजरता है। यह रास्ता थोड़ा लंबा है लेकिन प्रकृति प्रेमियों के लिए अद्भुत है। कठिनाई का स्तर केदारनाथ में खच्चर और पालकी की सुविधा आसानी से मिल जाती है, लेकिन रुद्रनाथ का रास्ता संकरा और जंगलों से भरा है, इसलिए यहां सुविधाएं कम हैं। पानी के स्रोत सीमित हैं, इसलिए यात्रियों को अपनी व्यवस्था के साथ चलना होता है। यही कठिनाई इस यात्रा को 'विशिष्ट' बनाती है—यहां केवल वही पहुंचता है जिसमें दृढ़ इच्छाशक्ति हो। वैतरणी कुंड और पितरों का तर्पण रुद्रनाथ मंदिर के पास ही पवित्र 'वैतरणी कुंड' (Vaitarni Kund) स्थित है। हिंदू धर्म में वैतरणी नदी का विशेष महत्व है, जिसे मृत्यु के बाद पार करना होता है। महत्व: यहां श्रद्धालु अपने पूर्वजों (पितरों) का तर्पण और पिंडदान करते हैं। मान्यता: कहा जाता है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों को सीधे शिवलोक की प्राप्ति होती है। गया (बिहार) के बाद इसे पिंडदान के लिए अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य: फूलों की घाटी जैसा अनुभव रुद्रनाथ की यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक विजुअल ट्रीट (Visual Treat) भी है। बुरांश के जंगल: मई के महीने में जब कपाट खुलते हैं, तो पूरा रास्ता लाल और गुलाबी बुरांश (Rhododendron) के फूलों से लदा होता है। हिमालय दर्शन: पनार बुग्याल से नंदा देवी (Nanda Devi), त्रिशूल (Trishul) और नंदा घुंटी (Nanda Ghunti) चोटियों का जो नजारा दिखता है, वह दुनिया में कहीं और दुर्लभ है। ऐसा लगता है मानो आप हाथ बढ़ाकर पर्वतों को छू लेंगे। वन्यजीव: यह क्षेत्र नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है। भाग्यशाली यात्रियों को यहां हिमालयन मोनाल (उत्तराखंड का राज्य पक्षी), कस्तूरी मृग और कभी-कभी हिमालयी भालू भी देखने को मिल सकते हैं। शीतकालीन गद्दी: गोपीनाथ मंदिर का महत्व जब 18 मई को कपाट खुलेंगे, तब तक (यानी आज से मई तक) भगवान रुद्रनाथ की पूजा गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में ही होगी। ऐतिहासिकता: गोपीनाथ मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। यह पत्थरों से बना एक भव्य मंदिर है जिसका शिखर थोड़ा झुका हुआ है। त्रिशूल: मंदिर परिसर में एक विशाल अष्टधातु का त्रिशूल है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसे किसी भी मानवीय शक्ति से हिलाया नहीं जा सकता, लेकिन सच्चे मन से स्पर्श करने पर यह कंपन करता है। 6 माह का नियम: पौराणिक परंपराओं के अनुसार, शीतकाल में बर्फबारी के कारण रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 6 माह के लिए बंद कर दिए जाते हैं। तब भगवान की चल विग्रह डोली गोपीनाथ मंदिर में विराजमान होती है। जो भक्त कठिन चढ़ाई नहीं चढ़ सकते, वे सर्दियों में यहीं भगवान रुद्रनाथ के दर्शन करते हैं। यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह (Travel Tips) यदि आप 18 मई को कपाट खुलने के अवसर पर वहां जाने की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें: फिटनेस: यह ट्रैक आसान नहीं है। अभी से वॉक और कार्डियो शुरू करें। सामान: अपने साथ गर्म कपड़े, रेनकोट, टॉर्च, और ड्राई फ्रूट्स जरूर रखें। गाइड: यदि आप पहली बार जा रहे हैं, तो सगर गांव से किसी स्थानीय गाइड या पोर्टर को साथ लेना उचित है, क्योंकि जंगलों में रास्ता भटकने का डर रहता है। रुकने की व्यवस्था: रुद्रनाथ में मंदिर समिति की धर्मशाला और कुछ साधारण होमस्टे/टेंट उपलब्ध हैं। सुविधाएं बहुत ही बुनियादी हैं (बिना बिजली के), इसलिए विलासिता की उम्मीद न करें। पंजीकरण: चारधाम यात्रा की तरह ही इसके लिए भी उत्तराखंड पर्यटन की वेबसाइट पर पंजीकरण आवश्यक हो सकता है। एक बार अवश्य करें दर्शन भगवान रुद्रनाथ की यात्रा आपको शहर की भीड़भाड़ और शोर से दूर, शांति और आध्यात्म की एक अलग दुनिया में ले जाती है। 18 मई 2026 की तारीख नोट कर लें। जब आप पनार बुग्याल की ऊंचाइयों पर ठंडी हवाओं के बीच खड़े होकर सामने विशाल हिमालय और नीचे बादलों को देखेंगे, और फिर मंदिर में भगवान शिव के शांत मुखारविंद के दर्शन करेंगे, तो सारी थकान एक पल में गायब हो जाएगी। "जय भोलेनाथ, जय रुद्रनाथ" के उद्घोष के साथ, आइए हम सब इस पवित्र यात्रा के साक्षी बनने के लिए तैयार हों। त्वरित तथ्य (Quick Facts Box) विवरण जानकारी मंदिर श्री रुद्रनाथ (चतुर्थ केदार) स्थान चमोली जिला, उत्तराखंड कपाट खुलने की तिथि 18 मई, 2026 कपाट खुलने का समय दोपहर 12:57 बजे घोषणा स्थल गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर घोषणा तिथि 23 जनवरी, 2026 (वसंत पंचमी) विशेषता भगवान शिव के 'मुख' की पूजा ट्रैक की दूरी सगर गांव से लगभग 18-19 कि.मी. शीतकालीन आवास गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर निकटतम शहर गोपेश्वर (जिला मुख्यालय)
नैनीताल/रामनगर (ब्यूरो रिपोर्ट)। देवभूमि उत्तराखंड की गोद में बसे विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbett National Park) में अब जंगल सफारी का अनुभव पूरी तरह बदलने वाला है। अगर आप भी छुट्टियों में कॉर्बेट की हसीन वादियों में बाघों (Tigers) का दीदार करने या सोशल मीडिया के लिए 'रील्स' (Reels) और 'स्टोरी' (Stories) बनाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपको थोड़ा मायूस कर सकती है, लेकिन वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह किसी खुशखबरी से कम नहीं है।READ ALSO:-मेरठ का कपसाड़ कांड: एक मां की चिता, अगवा बेटी का इंतजार और 19 घंटे का वह 'महा-संग्राम' जिसने सिस्टम को हिला दिया पार्क प्रशासन ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लेते हुए सफारी के दौरान पर्यटकों द्वारा मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban) लगा दिया है। अब पर्यटक अपनी जिप्सी में मोबाइल लेकर जंगल के अंदर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देशों और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की गाइडलाइंस का पालन करते हुए लिया गया है। क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला? (The Reason Behind The Ban) कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) भारत का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित नेशनल पार्क है। यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, पर्यटन का स्वरूप बदला है और 'इको-टूरिज्म' (Eco-Tourism) की जगह 'सेल्फी-टूरिज्म' ने ले ली है। पार्क प्रशासन और वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स ने मोबाइल फोन को जंगल के लिए एक बड़ा खतरा माना है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी वजहें हैं: 1. वन्यजीवों के व्यवहार में बदलाव (Behavioral Changes in Wildlife) अक्सर देखा गया है कि सफारी के दौरान पर्यटक बाघ या हाथी को देखते ही मोबाइल निकालकर शोर मचाने लगते हैं। कई बार उत्साह में मोबाइल से तेज आवाज में म्यूजिक बजाया जाता है या रील बनाने के चक्कर में जानवरों के बहुत करीब जाने की कोशिश की जाती है। मोबाइल की रिंगटोन और कृत्रिम आवाजें जंगल के प्राकृतिक सन्नाटे को भंग करती हैं, जिससे वन्यजीव आक्रामक हो सकते हैं या तनाव (Stress) में आ सकते हैं। 2. लोकेशन शेयरिंग और भीड़ (Location Sharing & Overcrowding) मोबाइल फोन का सबसे बड़ा दुरुपयोग 'लोकेशन शेयरिंग' के रूप में सामने आया है। जैसे ही किसी एक जिप्सी को बाघ दिखाई देता था, पर्यटक और गाइड तुरंत मोबाइल से दूसरे ड्राइवरों को कॉल या मैसेज करके लोकेशन बता देते थे। इसके परिणामस्वरूप, कुछ ही मिनटों में वहां दर्जनों जिप्सियां इकट्ठा हो जाती थीं। इससे बाघ का रास्ता ब्लॉक हो जाता था और जंगल में 'ट्रैफिक जाम' जैसी स्थिति बन जाती थी, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है। 3. फ्लैश और सेल्फी का खतरा (Flash & Selfie Hazard) मोबाइल से फोटो खींचते समय अक्सर पर्यटक अनजाने में फ्लैश लाइट (Flash Light) जला देते हैं। रात की सफारी या कम रोशनी में यह फ्लैश जानवरों की आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है और उन्हें भड़का सकता है। इसके अलावा, सेल्फी लेने के चक्कर में पर्यटक जिप्सी से बाहर लटकने या नीचे उतरने का जोखिम उठाते हैं, जिससे जानलेवा हादसे हो सकते हैं। क्या है नया नियम? (What are the New Rules?) कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) के उप निदेशक राहुल मिश्रा ने नई व्यवस्था की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करने जा रहा है। गेट पर जमा होंगे फोन: पर्यटकों को सफारी जोन (बिजरानी, ढिकाला, झिरना, ढेला आदि) में प्रवेश करने से पहले अपने मोबाइल फोन प्रवेश द्वार (Entry Gate) पर जमा कराने होंगे या अपनी निजी गाड़ी में लॉकर में रखने होंगे। चेकिंग अभियान: सफारी गेट पर वन विभाग के कर्मचारी सघन चेकिंग करेंगे। अगर किसी पर्यटक के पास कपड़े या बैग में छिपाया हुआ मोबाइल मिलता है, तो उसे जब्त कर लिया जाएगा। DSLR को हरी झंडी: प्रशासन ने फोटोग्राफी के शौकीनों को राहत दी है। अगर आपके पास प्रोफेशनल कैमरा (DSLR या Mirrorless) है, तो आप उसे ले जा सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि प्रोफेशनल कैमरे का इस्तेमाल करने वाले लोग आमतौर पर वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के नियमों का पालन करते हैं और शोर नहीं मचाते। उल्लंघन करने पर दोहरी मार: पर्यटक और ड्राइवर दोनों नपेंगे इस बार प्रशासन ने नियमों को लागू करने के लिए 'सामूहिक जिम्मेदारी' (Collective Responsibility) का फॉर्मूला अपनाया है। अगर जंगल के अंदर किसी पर्यटक के पास मोबाइल पाया गया, तो सजा सिर्फ उसे नहीं मिलेगी, बल्कि उसे ले जाने वाले जिप्सी ड्राइवर और नेचर गाइड को भी भुगतना होगा। पर्यटक पर जुर्माना: मोबाइल के साथ पकड़े जाने पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा और पार्क से तुरंत बाहर निकाला जा सकता है। ड्राइवर/गाइड पर एक्शन: चूंकि पर्यटकों को नियमों का पालन कराना गाइड और ड्राइवर की जिम्मेदारी है, इसलिए उल्लंघन होने पर ड्राइवर की जिप्सी का रजिस्ट्रेशन और गाइड का लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है। इस नियम के बाद अब जिप्सी चालक खुद ही पर्यटकों को मोबाइल ले जाने से रोक रहे हैं, क्योंकि उनकी रोजी-रोटी का सवाल है। पर्यटकों के लिए 'डिजिटल डिटॉक्स' (Digital Detox Experience) पार्क प्रशासन इस प्रतिबंध को एक सकारात्मक पहल के रूप में देख रहा है। इसे 'डिजिटल डिटॉक्स' का नाम दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है, "हम चाहते हैं कि पर्यटक जंगल को अपनी आंखों से देखें, न कि 6 इंच की मोबाइल स्क्रीन से। जब आप मोबाइल में उलझे रहते हैं, तो आप जंगल की आवाज़ें, हवा की सरसराहट और पक्षियों की चहचहाहट को मिस कर देते हैं। यह नियम पर्यटकों को प्रकृति से सीधे जोड़ने का एक प्रयास है।" जिम कॉर्बेट पार्क: एक नजर में (About Jim Corbett National Park) यह नियम जिन क्षेत्रों में लागू होगा, उनके बारे में जानना भी जरूरी है। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान है, जिसकी स्थापना 1936 में हुई थी। पहले इसका नाम हैली नेशनल पार्क था। स्थान: नैनीताल जिला, उत्तराखंड। कुल क्षेत्रफल: लगभग 1318 वर्ग किलोमीटर। मुख्य आकर्षण: रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, 600 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां। सफारी जोन: ढिकाला (Dhikala): सबसे प्रसिद्ध और बड़ा जोन, जहां नाइट स्टे की सुविधा है। बिजरानी (Bijrani): बाघ दिखने की सबसे ज्यादा संभावना वाला जोन। झिरना (Jhirna): साल भर खुला रहने वाला जोन। ढेला (Dhela): नया इको-टूरिज्म जोन। दुर्गादेवी (Durgadevi): पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग। इन सभी जोन्स में सफारी के दौरान अब मोबाइल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। पर्यटकों के मन में उठते सवाल (FAQs for Tourists) Q: अगर इमरजेंसी हुई तो क्या करेंगे? A: हर सफारी जिप्सी के साथ एक प्रशिक्षित नेचर गाइड होता है। इसके अलावा वन विभाग की पेट्रोलिंग गाड़ियां वायरलेस सेट (Wireless Sets) से लैस होती हैं। किसी भी आपात स्थिति में गाइड तुरंत वन अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। पर्यटकों को अपने पास फोन रखने की आवश्यकता नहीं है। Q: क्या हम GoPro या एक्शन कैमरा ले जा सकते हैं? A: अभी तक के निर्देशों के अनुसार, केवल स्टिल फोटोग्राफी (DSLR/Mirrorless) पर स्पष्ट छूट है। एक्शन कैमरों और वीडियो कैमरों पर स्थिति जोन के हिसाब से भिन्न हो सकती है, इसलिए बुकिंग के समय या गेट पर पूछताछ करना बेहतर है। Q: क्या हम अपनी यादें संजो नहीं पाएंगे? A: आप डीएसएलआर कैमरा ले जा सकते हैं। अगर आपके पास कैमरा नहीं है, तो आप जंगल को अपनी यादों में संजोएं। कई बार बिना कैमरे की सफारी ज्यादा यादगार होती है क्योंकि आपका पूरा ध्यान प्रकृति पर होता है। विशेषज्ञों की राय वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट और फोटोग्राफर्स ने इस कदम का स्वागत किया है। वरिष्ठ वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर सुमित वर्मा कहते हैं, "यह एक बहुत जरूरी कदम था। रणथंभौर और काजीरंगा जैसे अन्य पार्कों में भी मोबाइल के कारण समस्याएं देखी गई हैं। मोबाइल फोन जंगल के अनुशासन को तोड़ते हैं। जब पर्यटक रील बनाने के बजाय जंगल को महसूस करेंगे, तो उन्हें असली रोमांच का पता चलेगा।" वहीं, स्थानीय होटल एसोसिएशन के कुछ लोगों का मानना है कि इससे युवाओं में थोड़ी निराशा हो सकती है जो सोशल मीडिया के लिए ही ट्रैवल करते हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह जिम कॉर्बेट की ब्रांड वैल्यू को बढ़ाएगा। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में मोबाइल बैन का फैसला वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह हमें याद दिलाता है कि हम जंगल में 'मेहमान' हैं, और हमें मेजबान (वन्यजीवों) के नियमों का पालन करना चाहिए। 2026 तक सरकार का लक्ष्य वी2वी (V2V) टेक्नोलॉजी से सड़कों को सुरक्षित बनाना है, वहीं जंगलों में 'नो-नेटवर्क, नो-मोबाइल' पॉलिसी से जानवरों को सुरक्षित बनाने की कवायद है। अगर आप अगली बार कॉर्बेट जाएं, तो अपना फोन होटल के कमरे में छोड़ें और अपनी आंखों व दिल के शटर को खुला रखें। यकीन मानिए, जंगल आपको वो दिखाएगा जो कोई मोबाइल कैमरा कैप्चर नहीं कर सकता। नोट: जिम कॉर्बेट जाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट से लेटेस्ट गाइडलाइंस जरूर चेक करें, क्योंकि नियम समय-समय पर अपडेट हो सकते हैं।
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग स्थित विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में शीतकाल के लिए कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भैया दूज के पावन अवसर पर, कल यानी 23 अक्टूबर 2025 की सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर, बाबा केदारनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाटबंदी की इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से पहले, चल विग्रह पंचमुखी डोली ने विधि-विधान से मंदिर के अंदर प्रवेश कर लिया है। आज शाम (22 अक्टूबर) को भगवान शिव की समाधि पूजा की तैयारी है।READ ALSO:-मेरठ शर्मसार: राज्य मंत्री का नाम लेते हुए व्यापारी से नाक रगड़वाने के मामले में चौकी प्रभारी समेत 3 Police कर्मी लाइन हाजिर रिकॉर्ड तोड़ यात्रा और अंतिम दर्शन इस वर्ष की चारधाम यात्रा रिकॉर्ड तोड़ रही है। केदारनाथ धाम में अब तक 17 लाख 45 हजार 065 श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं, जो इस यात्रा के प्रति भक्तों की अटूट आस्था को दर्शाता है। कपाटबंदी के बाद, अगले छह महीने तक भगवान केदारनाथ की पूजा उनके शीतकालीन गद्दीस्थल (Winter Seat) पर की जाएगी। समाधि पूजा का विधान और कपाटबंदी का समय कपाट बंद होने की प्रक्रिया बेहद धार्मिक और अनुशासित होती है, जिसे बीकेटीसी (Badrinath Kedarnath Temple Committee) पूरा करता है। अंतिम दर्शन: परंपरा के अनुसार, मध्य रात्रि से सुबह 4 बजे तक आम भक्त बाबा केदारनाथ के अंतिम दर्शन कर सकेंगे। समाधि पूजा: सुबह 5 बजे से 6 बजे तक भगवान शिव की समाधि पूजा की जाएगी। इस दौरान बाबा केदार के स्वयंभू लिंग को विशेष रूप से भस्म, अनाज, फल, फूल, रुद्राक्ष और सफेद कपड़े से ढक दिया जाएगा। कपाटबंदी: ठीक सुबह 6 बजे गर्भ गृह का द्वार बंद कर दिया जाएगा, और उसके बाद सुबह 8:30 बजे परम्परानुसार पूर्वी द्वार (मुख्य द्वार) को शीतकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा। चल विग्रह डोली का प्रस्थान कपाट बंद होने के तुरंत बाद, भगवान शिव की चल विग्रह पंचमुखी डोली अपने शीतकालीन प्रवास के लिए प्रस्थान करेगी। पहला पड़ाव: 23 अक्टूबर को डोली केदारनाथ से प्रस्थान कर रात्रि विश्राम के लिए रामपुर पहुँचेगी। दूसरा पड़ाव: 24 अक्टूबर को गुप्तकाशी पहुँचेगी। शीतकालीन गद्दीस्थल: 25 अक्टूबर को बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह डोली ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुँचेगी। अगले छह महीने तक श्रद्धालु यहीं पर बाबा केदार के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। चारधाम के कपाट बंद की तिथियां (Dates of Chardham Closing): केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही अन्य प्रमुख धामों की कपाटबंदी की तिथियाँ भी तय हैं: धाम (Dham) कपाट बंद होने की तिथि समय गंगोत्री धाम 22 अक्टूबर सुबह 11:36 बजे केदारनाथ धाम 23 अक्टूबर सुबह 8:30 बजे यमुनोत्री धाम 23 अक्टूबर दोपहर 12:30 बजे बदरीनाथ धाम 25 नवंबर (तिथि घोषित) शीतकालीन यात्रा की तैयारी केदारनाथ के कपाट बंद होने के साथ ही उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन (Winter Tourism) की शुरुआत हो जाएगी। अब भक्तों की आस्था का केंद्र ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ रहेगा, जहाँ शीतकालीन यात्रा के दौरान दर्शन किए जा सकेंगे।