कोटद्वार नगर निगम द्वारा स्वच्छता सेवा अभियान का आयोजन, महापौर ने स्वच्छ व विकसित कोटद्वार का दिलाया संकल्प

कोटद्वार :  नगर निगम द्वारा आयोजित “स्वच्छता सेवा – विशेष स्वच्छता अभियान” के अंतर्गत नगर के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक स्वच्छता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कोटद्वार नगर निगम के महापौर शैलेन्द्र सिंह रावत ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” के संकल्प को साकार करने तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा से नगर निगम द्वारा स्वच्छता सेवा अभियान निरंतर चलाया जा रहा है।

महापौर शैलेन्द्र रावत ने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सतत प्रयास है। नगर को स्वच्छ, सुंदर एवं विकसित बनाने के लिए नगर निगम द्वारा नियमित रूप से विशेष सफाई अभियान, जन-जागरूकता कार्यक्रम एवं सामूहिक श्रमदान आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि सभी नागरिक स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और नगर निगम के प्रयासों में सक्रिय सहयोग प्रदान करें, ताकि “स्वच्छ कोटद्वार – विकसित कोटद्वार” का लक्ष्य शीघ्र साकार हो सके।

इस अवसर पर संत निरंकारी सेवा संस्था का भी सराहनीय सहयोग रहा, जिन्होंने अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए स्वच्छता कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

कार्यक्रम में नगर आयुक्त पी.एल. शाह जी, नगर अध्यक्ष विकास दीप मित्तल, पार्षद कविता मित्तल जी, पार्षद विपिन डोबरियाल, पार्षद हिमांशु वर्मा, पार्षद परमेंद्र रावत, पार्षद अमित नेगी, पार्षद जे पी बहुखंडी, पार्षद सुखपाल शाह, पार्षद दीपक पाठक, युवा मोर्चा नगर अध्यक्ष कुंज अग्रवाल, पार्षद सुखपाल शाह, पार्षद जे पी बहुखंडी, युवा मोर्चा जिला उपाध्यक्ष शोभित अग्रवाल, संजय रावत, राकेश देवरानी, अजय सहित सभी सम्मानित क्षेत्रीय जनता उपस्थित रही।

अंत में महापौर शैलेन्द्र सिंह रावत ने सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनसहभागिता से ही स्वच्छता अभियान को सफलता मिलती है।

प्रशासन से वार्ता के बाद एनटीपीसी परियोजना पर नौ दिनों से जारी गतिरोध खत्म

ज्योतिर्मठ। एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के खिलाफ पिछले नौ दिनों से चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन आखिरकार जिला प्रशासन की मध्यस्थता के बाद समाप्त हो गया है। जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक के दौरान परियोजना प्रभावितों की 15 सूत्रीय मांगों पर लिखित सहमति बनी, जिसके बाद बुधवार सुबह से परियोजना का निर्माण कार्य आठ दिनों के लंबे अंतराल के बाद पुनः सुचारू हो सका। बुधवार को तहसीलदार जोशीमठ, एनटीपीसी और निर्माणदायी कंपनी एचसीसी (HCC) के अधिकारियों ने तपोवन स्थित कंपनी के मुख्य द्वार पर पहुँचकर प्रदर्शनकारी ग्रामीणों को जिलाधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित सहमति पत्र पढ़कर सुनाया, जिसके बाद ग्रामीणों ने अपने क्रमिक धरने को स्थगित करने की घोषणा की।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रधान संघ के अध्यक्ष मोहन बैंजवाल ने इसके उपरांत सेलंग स्थित टीवीएम (TBM) साइट और पैनी-अनिमठ में चल रहे धरना स्थलों पर पहुँचकर जनप्रतिनिधियों को समझौते की जानकारी दी और वहां भी आंदोलन को समाप्त करवाया। हालांकि, ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह समाधान अभी अस्थायी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले 20 दिनों के भीतर उनकी सबसे प्रमुख मांग ‘चारापत्ती मुआवजे’ पर एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे दोबारा उग्र आंदोलन और कार्य बहिष्कार के लिए बाध्य होंगे।

इस ऐतिहासिक समझौते और कार्य बहाली के अवसर पर क्षेत्र के तमाम प्रमुख जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें प्रधान संघ के अध्यक्ष मोहन बैंजवाल, सेलंग की ग्राम प्रधान रोशना बिष्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य वर्षा बिष्ट, पैनी की ग्राम प्रधान विनीता देवी, बड़ागांव की क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मी देवी व ग्राम प्रधान बीना देवी, और भंग्यूल की ग्राम प्रधान मिथलेश फर्स्वाण शामिल रहीं। साथ ही, अजीतपाल रावत, अनुज बिष्ट, सेलंग के सरपंच शिशुपाल भंडारी, राजे सिंह बिष्ट और पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य किशन सिंह बिष्ट सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए विकास कार्यों को गति देने में सहयोग का वादा किया। प्रशासन को उम्मीद है कि इस सहमति से क्षेत्र में शांति का माहौल बनेगा, वहीं ग्रामीण अब अपनी मांगों पर होने वाली आगामी कार्रवाई को लेकर बेहद सतर्क हैं।

चारधाम यात्रा 2026 : गैस संकट और बर्फबारी के बीच सरकार की दोहरी परीक्षा

उत्तराखंड में इस बार चारधाम यात्रा की तैयारियां असामान्य परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ रही हैं। एक ओर पहाड़ी क्षेत्रों में एल. पी. जी.  (गैस) आपूर्ति को लेकर संकट गहराता दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर लगातार हो रही बर्फबारी और बारिश ने व्यवस्थाओं को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में सरकार और प्रशासन के सामने यात्रा को सुचारु, सुरक्षित और व्यवस्थित कराने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।

मौसम की मार: यात्रा तैयारियों पर ब्रेक

केदारनाथ धाम, यमुनोत्री धाम और बदरीनाथ धाम सहित ऊंचाई वाले इलाकों में लगातार बर्फबारी का दौर जारी है। हालांकि यमुनोत्री में दो दिन बाद धूप खिलने से हालात कुछ सामान्य होते दिखे, लेकिन पैदल मार्ग, सड़कें और निर्माण कार्य अब भी प्रभावित हैं।

बदरीनाथ से औली तक पूरा क्षेत्र बर्फ से ढका हुआ है, जिससे अप्रैल में भी जनवरी जैसी ठंड का अहसास हो रहा है। रूपकुंड, वेदनी बुग्याल, ब्रह्मताल जैसे ट्रैकिंग रूट्स पर भारी बर्फबारी के कारण पर्यटकों को बेस कैंप लौटना पड़ा।

यमुनोत्री हाईवे पर कई स्थानों पर कीचड़ और दलदल बनने से आवाजाही जोखिम भरी हो गई है, जिससे यात्रा व्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ रहा है।

गैस संकट: स्थानीयों और यात्रियों के लिए बढ़ती परेशानी

चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन और ठहराव की व्यवस्थाएं अहम होती हैं। ऐसे में गैस आपूर्ति में आ रही दिक्कतें होटल व्यवसायियों, ढाबा संचालकों और स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से ही परिवहन और आपूर्ति की चुनौतियां रहती हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण सड़क मार्ग बाधित होने से गैस सिलेंडरों की सप्लाई और प्रभावित हो रही है। इससे यात्रा सीजन के दौरान भोजन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

प्रशासन की तैयारी: चुनौतियों के बीच संतुलन की कोशिश

राज्य सरकार और जिला प्रशासन दोनों मोर्चों पर स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हैं। एक ओर बर्फ हटाने, सड़क सुधार और पैदल मार्ग को सुचारु करने के लिए टीमें तैनात की गई हैं, वहीं दूसरी ओर आवश्यक वस्तुओं—खासकर गैस—की आपूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है।

यात्रा मार्गों पर निर्माण कार्य, अस्थायी पुल, रसोईघर, चेंजिंग रूम और सुरक्षा व्यवस्थाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों पर भी असर

चमोली और उत्तरकाशी के वाण, घेस, कुलिंग, दीदना जैसे गांवों में बर्फबारी और ठंडी हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। वहीं लगातार बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलें और सेब बागान भी नुकसान झेल रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

सरकार के सामने ‘दोहरी परीक्षा’

इस बार चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रशासनिक क्षमता की भी परीक्षा बन गई है।

  • एक तरफ मौसम की अनिश्चितता
  • दूसरी तरफ गैस और आवश्यक आपूर्ति का संकट
  • इन दोनों के बीच संतुलन बनाते हुए यात्रा को सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

सरकार को उठाने होंगे ये कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम में जल्द सुधार होता है और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत की जाती है, तो यात्रा को व्यवस्थित किया जा सकता है।

  • गैस सप्लाई की वैकल्पिक व्यवस्था.
  • आपातकालीन स्टॉक.
  • मार्गों की त्वरित मरम्मत.
  • और रियल-टाइम मॉनिटरिंग.
चारधाम यात्रा को सुचारू और सुरक्षित बनाने के लिए मुख्य सचिव की उच्चस्तरीय बैठक, विभागों को दिए निर्देश

देहरादून: सचिवालय में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि इस बार यात्रा को पिछले वर्षों से बेहतर व्यवस्था के साथ आयोजित किया जाएगा। ट्रैफिक प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश:

  • ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए प्रमुख जगहों पर पर्याप्त होल्डिंग एरिया विकसित करने के निर्देश।
  • 60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच अनिवार्य।
  • स्लाइडिंग जोन (भूस्खलन वाले क्षेत्रों) को पहले से चिन्हित कर वहां मशीनरी और जेसीबी तैनात रखने को कहा गया।
  • यात्रा मार्गों पर साइन बोर्ड, पब्लिक सुविधाएं और रेस्टिंग पॉइंट्स बढ़ाने के निर्देश।
  • हेलीकॉप्टर सेवा और रेस्क्यू सिस्टम को और मजबूत करने पर जोर।
  • बिजली, पेयजल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के सख्त आदेश।
  • यात्रियों को यात्रा संबंधी हर अपडेट SMS और WhatsApp के माध्यम से भेजने की व्यवस्था।

मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

बैठक में पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग, परिवहन, विद्युत, पेयजल सहित सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।