सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित, ऋषिकेश महायोजना–2031 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज, तपोवन क्षेत्र में अवैध निर्माण पर लगेगी लगाम
  • ऋषिकेश महायोजना–2031 : अव्यवस्थित विकास से सुनियोजित भविष्य की ओर बड़ा कदम
  • मुख्यमंत्री धामी के निर्देशों पर सचिवालय में मंथन, तपोवन क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान पर खास जोर

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के तहत ऋषिकेश महायोजना–2031 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी क्रम में सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में तीन जनपदों – टिहरी, पौड़ी और देहरादून – से जुड़े अधिकारियों ने भाग लिया। सरकार का उद्देश्य इस महायोजना के माध्यम से ऋषिकेश को एक सुनियोजित, व्यवस्थित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करना है, जहां पर्यटन और शहरी विकास में संतुलन बना रहे।

तपोवन बना चर्चा का केंद्र, अवैध निर्माण बड़ी चुनौती

बैठक के दौरान सबसे अधिक फोकस तपोवन क्षेत्र पर रहा, जो टिहरी विकास प्राधिकरण के अधीन आता है। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2011 की पूर्व महायोजना के बाद इस क्षेत्र में अनियोजित और अवैध निर्माण तेजी से बढ़े हैं। होटल, गेस्ट हाउस और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के अनियंत्रित विस्तार ने न केवल क्षेत्र की भौगोलिक संरचना को प्रभावित किया है, बल्कि यातायात, पार्किंग और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ाया है। इसके चलते स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

महायोजना–2031 में समाधान का रोडमैप तैयार

मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक द्वारा प्रस्तुत किए गए प्लान में इन समस्याओं के समाधान के लिए कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। जिन क्षेत्रों में पहले से होटल और व्यावसायिक गतिविधियां विकसित हो चुकी हैं, उन्हें ‘पर्यटन उपयोग क्षेत्र’ के रूप में चिन्हित किया गया है। इससे न केवल मौजूदा ढांचे को वैधता और संरचना मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, भविष्य में अनियोजित निर्माण पर रोक लगाने के लिए सख्त नियामक प्रावधान भी जोड़े गए हैं।

जनसुनवाई के बाद संशोधन, अब अंतिम चरण में योजना

अधिकारियों ने जानकारी दी कि महायोजना को पहले संबंधित प्राधिकरण बोर्डों से अनुमोदन मिल चुका है और इसके बाद इसे जनसुनवाई एवं प्रदर्शनी की प्रक्रिया से भी गुजारा गया। जनसुझावों के आधार पर इसमें संशोधन किए गए और फिर इसे शासन स्तर पर भेजा गया। शासन द्वारा पुनर्विचार के बाद इसे एक बार फिर संबंधित बोर्डों को भेजा गया, जहां से इसे अनुमन्य कर दिया गया है। अब योजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

तीन जिलों का समन्वय, 15 दिन में सुझाव होंगे एकत्र

ऋषिकेश महायोजना–2031 तीन जनपदों में फैली हुई है – टिहरी, पौड़ी और देहरादून। इनमें से दो जिलों ने योजना को स्वीकृति दे दी है, जबकि पौड़ी जनपद ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इन्हीं सुझावों पर विचार करने के लिए सचिव स्तर पर विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी जिलों से प्राप्त सुझावों को 15 दिनों के भीतर समेकित कर शासन को प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि महायोजना को जल्द अंतिम रूप दिया जा सके।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल

इस महायोजना के लागू होने से ऋषिकेश में पर्यटन गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। सुनियोजित विकास के माध्यम से जहां एक ओर पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सरकार का मानना है कि यह योजना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बैठक के अंत में यह विश्वास व्यक्त किया गया कि सभी संबंधित विभागों के समन्वय से ऋषिकेश महायोजना–2031 को शीघ्र लागू किया जाएगा। इसके लागू होने से न केवल शहर की आधारभूत संरचना मजबूत होगी, बल्कि ऋषिकेश को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगा।

जल्द लागू होगी महायोजना, विकास को मिलेगी नई दिशा – डॉ. आर राजेश कुमार

सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि ऋषिकेश महायोजना–2031 राज्य के लिए एक दूरदर्शी योजना है, जो आने वाले वर्षों में विकास की दिशा तय करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आपत्तियों और सुझावों का शीघ्र निस्तारण करते हुए महायोजना को अंतिम रूप दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि तपोवन जैसे क्षेत्रों में जो अव्यवस्थित विकास हुआ है, उसे सुधारने के लिए इस बार ठोस प्रावधान किए गए हैं, जिससे भविष्य में संतुलित और सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को तहरीर देकर यूट्यूब चैनल पर की कड़ी कार्रवाई की मांग
  • श्री महंत इन्दरेश अस्पताल राय शुमारी यूट्यूब चैनल पर करेगा 5 करोड़ की मानहानि का दावा

देहरादून। सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाने की होड़ में एक बार फिर यूट्यूब पत्रकारिता पर कानून की आंच आ सकती है। भ्रामक समाचार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने कड़ा रूख अपनाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को तहरीर देकर राय शुमारी यूट्यूब चैनल के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल राय शुमारी यूट्यूब चैनल पर 5 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा करने जा रहा है।

यूट्यूब चैनल ‘राय शुमारी’ ने एक भ्रामक वीडियो समाचार पोस्ट किया। वीडियो में राय शुमारी चैनल ने एक नवजात बच्चे के उपचार के मामले को तोड़-मरोड़कर पेश किया। यूट्यूब चैनल ने झूठी एवम् भ्रामक जानकारी को खबर का आधार बनाया ताकि लोगों के बीच भ्रम परोसा जा सके। इसका नतीजा यह रहा कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने एसएसपी देहरादून को पत्र लिखकर चैनल पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। राय शुमारी यूट्यूब चैनल ने बिना तथ्यों को जाॅचें परखे ऐसा दावा क्यों किया ?? यह चैनल के प्रबन्धन को उनके पत्रकारों से अवश्य पूछना चाहिए। समाचार में ऐसा झूठ बोला गया कि 25 हजार रुपये के अभाव में नवजात का इलाज नहीं हो सका। हालांकि, जब पूरे मामले की जांच की गई तो सच्चाई कुछ और ही सामने आई। बच्चे के पिता ने खुद यह स्पष्ट किया कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल द्वारा उनके बच्चे को उपचार देने में किसी प्रकार का कोई भी विलम्ब नहीं किया गया।

बच्चे के पिता आशीष राजवंशी ने स्वयं सामने आकर अस्पताल के पक्ष में बयान दिया। उन्होंने कहा कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने उनके बच्चे को नया जीवन दिया है और वह अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ की सेवाओं से पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अस्पताल से किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं है और बच्चे का इलाज बेहतर तरीके से चल रहा है। इमरजेंसी में आने पर उन्हंे तत्काल ईलाज मिला, उपचार में कोई देरी नहीं हुई। उम्मीद है कि एक-दो दिनों में बच्चे को अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। उल्लेखनीय है कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल उत्तराखण्ड में आयुष्मान योजना के तहत हर वर्ष सबसे अधिक मरीजों का इलाज करने वाला अग्रणी अस्पताल है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रबंधन ने यूट्यूब चैनल ‘राय शुमारी’ के खिलाफ 5 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा कर रहा है। सोशल मीडिया में इस प्रकार की खबरों को झूठे तरीके से परोसने के मामलों पर पूर्णं प्रतिबंध लगना चाहिए। इस तरह की फर्जी और भ्रामक खबरें न केवल समाज को गुमराह करती हैं, बल्कि मीडिया की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

धूमधाम से निकली हनुमान जयंती रैली

देहरादून। राजधानी में आज बजरंग दल द्वारा हनुमान जयंती का पर्व बेहद धूमधाम और अटूट श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर युवाओं और श्रद्धालुओं ने एक विशाल दो पहिया वाहन रैली निकालकर अपनी अटूट आस्था का परिचय दिया।

प्रमुख आकर्षण:
केसरिया सागर: शहर की सड़कों पर चारों ओर केसरिया झंडे लहराते दिखे।
भक्तिमय उद्घोष: ‘जय श्री राम’ और ‘बजरंगबली’ के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा।
भव्य स्वागत: रैली जिन क्षेत्रों से गुजरी, वहां स्थानीय निवासियों ने पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया।
उद्देश्य: इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं में धार्मिक चेतना जगाने के साथ-साथ समाज में एकता और सद्भाव का संदेश प्रसारित करना था।

उत्तराखंड : 30 साल बाद लौटा पति, हुआ भावुक मिलन, पत्नी की आंखें हुईं नम

अल्मोड़ा: स्याल्दे विकासखंड के देघाट क्षेत्र से एक भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जहां 30 साल के लंबे इंतजार के बाद एक महिला का अपने पति से मिलन हुआ। इस अनोखे पल को देख वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

ग्राम चक केलानी निवासी महिपाल सिंह रजवार वर्ष 1995 में नौकरी की तलाश में दिल्ली गए थे। उस समय वह अपनी पत्नी मीना देवी, ढाई माह की नवजात बेटी और परिवार को पीछे छोड़ गए थे। परिजन उनके लौटने का इंतजार करते रहे, लेकिन साल दर साल बीतते गए और महिपाल घर नहीं लौटे।

तीन दशक के लंबे इंतजार के बाद जब महिपाल सिंह रजवार सकुशल घर पहुंचे, तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पत्नी मीना देवी ने जैसे ही अपने पति को देखा, उनकी आंखें भर आईं और गला रुंध गया। पति भी भावुक हो उठा और कुछ बोल नहीं पाया, मानो उसे अपनी गलती का एहसास हो गया हो।

महिपाल के लौटने की खबर पूरे गांव में फैल गई, जिसके बाद उन्हें देखने और मिलने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। यह मिलन न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे गांव के लिए एक भावुक क्षण बन गया।

उत्तराखंड में कृषि और राजस्व कर्मियों का सरकार के खिलाफ हल्ला बोल

देहरादून। देहरादून की सड़कों पर “संघर्ष समन्वय समिति” के बैनर तले हजारों सरकारी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी। परेड ग्राउंड से सचिवालय तक निकाली गई इस आक्रोश रैली में कृषि, उद्यान, गन्ना और राजस्व विभाग के फील्ड कर्मियों ने भाग लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य सचिव को ज्ञापन दिया। इसमें मांग की गई कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य हिमाचल और मध्य प्रदेश की तर्ज पर यह कार्य निजी सर्वेयरों से कराया जाए, ताकि फील्ड कर्मियों पर काम का अतिरिक्त बोझ कम हो सके। मांग कि की काम के दबाव के कारण रोके गए वेतन और प्रतिकूल प्रविष्टियों जैसे दंडात्मक आदेशों को तुरंत रद्द किया जाए। फार्मर रजिस्ट्री का कार्य सीएससी (CSC) केंद्रों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए और कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाना बंद हो। कर्मचारी संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन और भी उग्र किया जाएगा। इस दौरान मुख्य संयोजक शुभम आर्य , सह संयोजक सौरभ लाल, संयोजक अर्जुन सिंह परवाल, विजय पाल सिंह आदि मौजूद थे।

‘संस्कार युक्त, नशामुक्त युवा’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन, धरा रावत ने पाया प्रथम स्थान

कोटद्वार : टूरिस्ट संदेश फाॅउण्डेशन तथा डॉ. पी.द.ब.हि.रा.स्ना.महावि. कोटद्वार के संयुक्त तत्वावधान में काॅलेज के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) डी.एस.नेगी की अध्यक्षता में समृद्ध राष्ट्र के लिए ‘संस्कार युक्त, नशामुक्त युवा’ विषय पर एक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक सुभाष चन्द्र नौटियाल तथा काॅलेज में एंटी ड्रग क्लब के नोडल अधिकारी जुनिस कुमार के संयोजन में आयोजित इस भाषण प्रतियोगिता के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध समाजसेवी सत्य प्रकाश थपलियाल तथा विशिष्ट वक्ता प्रकाश कोठारी एवं कै. पी.एल.खन्तवाल थे। भाषण प्रतियोगिता में काॅलेज के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान एमकाॅम द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा धरा रावत, द्वितीय स्थान एम. ए. चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा श्वेता बेंजवाल तथा तृतीय स्थान आशीष काला बीए द्वितीय सेमेस्टर ने हासिल किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) डी.एस. नेगी ने कहा कि, जीवन में नशामुक्ति के लिए भारतीय संस्कृति के स्थापित संस्कारों से आत्मसात करने की आवश्यकता है। इसके लिए हम सब को सामूहिक प्रयास करने होंगे। मुख्य वक्ता प्रसिद्ध समाजसेवी सत्य प्रकाश थपलियाल ने कहा कि, हमारे नौनिहाल भविष्य के राष्ट्र निर्माता हैं। हमारा राष्ट्र उन्नति के पथ पर तभी अग्रसर हो सकता है जब हमारे युवा संस्कार युक्त, नशामुक्त जीवनशैली अपनायेंगे। विशिष्ट वक्ता प्रकाश कोठारी तथा कै.पी.एल.खन्तवाल ने बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए माता-पिता को नशामुक्त रहने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है तभी हमारा समाज संस्कार युक्त, नशामुक्त हो सकता है। डॉ एस.के. गुप्ता ने कहा कि, संस्कार युक्त, नशामुक्त समाज बनाने के लिए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। भाषण प्रतियोगिता के निर्णायक डॉ विशन लाल शाह, डॉ प्रियंका भट्ट तथा अजयपाल सिंह रावत थे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ सुषमा थलेड़ी ने किया।

कार्यक्रम के अन्त में अरविन्द दुदपुड़ी ने उपस्थित सभी सम्मानित जनों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में संस्कार युक्त नशामुक्त जीवन के लिए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.(डॉ) डी.एस. नेगी ने उपस्थित सभी जनों की प्रतिज्ञा करवायी। इस अवसर पर प्रोफेसर (डॉ.) रमेश चौहान, डॉ सुनीता नौटियाल, योगेश धस्माणा, डॉ हीरा सिंह, डॉ सुशील बहुगुणा, डॉ मनोरथ नौगांई, अंजलि, डॉ विनोद सिंह, निखत अंसारी, मिलन, डॉ चन्द्रकला कण्डवाल, चक्रधर कण्डवाल, सुन्दर लाल जोशी, नेत्र सिंह रावत, मंजू रावत, प्रकाश चन्द्र भट्ट, चन्द्र मोहन जोशी, हेमराज आदि गणमान्य लोग तथा महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

एनडीएमए और यूएसडीएमए ने चारधाम यात्रा के लिए कसी कमर, गृह मंत्रालय के निर्देश पर 10 अप्रैल को होगी माॅक ड्रिल
  • यात्रा के दौरान आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखा जाएगा

देहरादून। गृह मंत्रालय भारत सरकार के निर्देश पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी आपदा की स्थिति तथा आकस्मिकता के निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में 10 अप्रैल को चारधाम यात्रा को लेकर मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। गुरुवार को यूएसडीएमए में आयोजित ओरियंटेशन तथा कोऑर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस में चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जनपदों के अधिकारी तथा विभिन्न रेखीय विभागों के अधिकारी शामिल हुए। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन तथा एनडीएमए के सीनियर कंसलटेंट मेजर जनरल सुधीर बहल (अप्रा) ने मॉक ड्रिल के आयोजन तथा संचालन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस मॉक ड्रिल का संचालन यूएसडीएमए स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से किया जाएगा।

सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि चारधाम यात्रा हमारे प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण आयोजन है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और दिशा-निर्देशन पर सभी विभागों ने अच्छी तैयारियां की हैं। आपदा प्रबंधन विभाग भी पूरी तरह से एलर्ट मोड पर है। उन्होंने बताया कि इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य सभी हितधारकों को एक मंच पर लाकर चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए उनकी क्षमताओं और तैयारी को परखना तथा उनमें वृद्धि करना है। इस दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि संसाधनों को कुशल उपयोग व प्रबंधन हो। उन्होंने बताया कि यह माॅक ड्रिल चारधाम यात्रा से जुड़े सात जिलों में होगी, जिनमें उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी तथा देहरादून शामिल हैं।

मेजर जनरल सुधीर बहल ने बताया कि यह मॉक ड्रिल आईआरएस यानी घटना प्रतिक्रिया प्रणाली के तहत संचालित की जाएगी। उन्होंने आईआरएस के तहत किस विभाग की तथा किस अधिकारी की क्या भूमिका है, इसे लेकर विस्तार से बताया। उन्होंने इंसीडेंस रिस्पांस टीम, क्रियान्वयन शाखा, नियोजन शाखा तथा संसाधन शाखा के दायित्वों एवं कर्तव्यों के साथ ही उत्तरदायी अधिकारी, इंसीडेंट कमाण्डर, शाखा प्रमुख, आब्जर्वर तथा नोडल अधिकारियों के उत्तरदायित्वों की जानकारी दी।

रिसोर्स और रिस्क मैपिंग आवश्यक-बहल

मेजर जनरल सुधीर बहल ने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान संभावित आपदाओं का प्रभावी तरीके से सामना किया जा सके तथा तैयारियां पुख्ता हों, इसके लिए रिसोर्स और रिस्क मैपिंग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कौन से संसाधन कहां पर हैं तथा जोखिम वाले क्षेत्र कौन से हैं, इसकी जीआईएस मैपिंग अवश्य की जानी चाहिए ताकि किसी आपदा की स्थिति में त्वरित गति से कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि माॅक अभ्यास के दौरान इनका भी परीक्षण किया जाएगा।

सुरक्षित चारधाम यात्रा के लिए दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

मेजर जनरल सुधीर बहल ने सुरक्षित चारधाम यात्रा के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि होटल और धर्मशालाओं की क्षमता कितनी है, इसका पूरा आकलन किया जाना आवश्यक है, ताकि यदि किसी आकस्मिक स्थिति अथवा आपदा की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर रोकना पड़े तो कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि यात्रियों को मौसम संबंधी एलर्ट भी समय पर प्रदान करने की व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही मार्गों की स्थिति, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों तथा खतरे वाले स्थानों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए ताकि यात्री सतर्क होकर यात्रा करें। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा मार्ग में ऐसे क्षेत्र जहां संचार व्यवस्थाएं नहीं हैं, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि किसी आकस्मिकता की स्थिति में सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सके। इसके लिए सेटेलाइट आधारित संचार पर भी विचार किया जाना चाहिए।

इन आपदाओं के परिदृश्यों पर होगी माॅक ड्रिल

सुरक्षित चारधाम यात्रा के लिए विभिन्न विभागों की तैयारियां कैसी हैं, इन्हें अलग-अलग आपदाओं के परिदृश्यों के जरिये परखा जाएगा। सड़क दुर्घटना, हेलीकॉप्टर दुर्घटना, भूकंप, होटल/धर्मशालाओं में अग्निकांड, धाम तथा संकरे मार्ग में भगदड़, खराब मौसम, बाढ़, आकाशीय बिजली, भूस्खलन, हिमस्खलन, पहाड़ी से पत्थर गिरना आदि परिदृश्यों पर माॅक ड्रिल की जाएगी। आपदा की स्थिति में विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों, एयरफोर्स, आर्मी, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, पैरामिलिट्री फोर्सेस के साथ स्थानीय प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, पुलिस, स्वास्थ्य, परिवहन आदि के द्वारा किस प्रकार समन्वय किया जाता है तथा उनके संसाधनों को किस प्रकार प्राप्त किया जाता है, इसका भी परीक्षण किया जाएगा।

बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन महावीर सिंह चौहान, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी, डाॅ, बिमलेश जोशी, आरटीओ देहरादून अनीता चमोला, राजीव बलोनी, विजय डंगवाल, सतेंद्र सिंह नेगी, रोहिताश्वा मिश्रा, एसके राणा, एसके साहू, शांतनु, तेजपाल, विनीत कुरील, आदि अधिकारी मौजूद रहे।

व्यवसायिक एलपीजी सिलेण्डर वितरण के लिए नई एसओपी, राज्य को मिला अतिरिक्त 26 प्रतिशत का कोटा, सचिव आनंद स्वरूप ने जारी की संशोधित एसओपी

देहरादून। राज्य में व्यवसायिक एलपीजी सिलेण्डरों की बढ़ती मांग और आपूर्ति संतुलन को ध्यान में रखते हुए पूर्व में निर्धारित एसओपी को अतिक्रमित करते हुए नई संशोधित एसओपी लागू कर दी गई है। सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति आनंद स्वरूप ने बताया कि राज्य द्वारा पीएनजी को बढ़ावा देने की दिशा में किए गए प्रयासों के फलस्वरूप उत्तराखण्ड को व्यवसायिक एलपीजी हेतु अतिरिक्त 6 प्रतिशत कोटा प्राप्त हुआ है, जबकि 20 प्रतिशत कोटा केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में प्रदान किया गया था। इस प्रकार पूर्व निर्धारित 40 प्रतिशत के कोटे में वृद्धि करते हुए अब कुल 66 प्रतिशत कोटे के आधार पर नई व्यवस्था लागू की गई है। बता दें कि पूर्व में 40 प्रतिशत कोटे के अनुसार एसओपी निर्धारित की गई थी।

सचिव आनंद स्वरूप ने बताया कि नई एसओपी का उद्देश्य विभिन्न उपभोक्ता वर्गों के बीच संतुलित, प्राथमिकता आधारित एवं पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करना है, ताकि चारधाम यात्रा, पर्यटन, औद्योगिक गतिविधियों एवं आवश्यक सेवाओं पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। यह व्यवस्था अग्रिम आदेशों तक प्रभावी रहेगी।

सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति आनंद स्वरूप ने बताया कि राज्य में कार्यरत तेल एवं गैस विपणन कंपनियों द्वारा उनकी बाजार हिस्सेदारी के अनुसार एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, सभी जिलाधिकारियों को आपूर्ति की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी और भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

रेस्टारेंट और ढाबों के लिए 2000 सिलेण्डर

सचिव स्वरूप ने बताया कि संशोधित एसओपी में विभिन्न उपभोक्ता श्रेणियों की दैनिक आवश्यकता को निर्धारित किया गया है। होटल एवं रिजॉर्ट जैसे पर्यटन आधारित प्रतिष्ठानों के लिए 1500 सिलेण्डर (24 प्रतिशत) तथा रेस्टोरेंट एवं ढाबों के लिए 2000 सिलेण्डर (32 प्रतिशत) निर्धारित किए गए हैं, जिससे पर्यटन सीजन के दौरान निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। सरकारी एवं सरकार द्वारा नियंत्रित गेस्टहाउसों के लिए 300 सिलेण्डर (5 प्रतिशत) आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, पेइंग गेस्ट सुविधा वाले छात्रावासों तथा होम-स्टे एवं स्वयं सहायता समूहों के प्रतिष्ठानों के लिए 200-200 सिलेण्डर (प्रत्येक 3 प्रतिशत) निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि विवाह समारोहों के लिए 660 सिलेण्डर (10 प्रतिशत) तथा फार्मास्यूटिकल, अस्पताल, ऑटोमोबाइल, कपड़ा, रसायन एवं अन्य प्राथमिकता वाले औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 1250 सिलेण्डर (20 प्रतिशत) का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार कुल 6310 सिलेण्डरों का दैनिक वितरण सुनिश्चित किया गया है।

देहरादून को सर्वाधिक 31 प्रतिशत आवंटन

सचिव आनंद स्वरूप ने बताया कि जनपदवार कोटा भी गैस कनेक्शनों की संख्या के अनुरूप निर्धारित कर दिया गया। देहरादून को 31 प्रतिशत के साथ सर्वाधिक आवंटन दिया गया है, जबकि हरिद्वार एवं नैनीताल को 13-13 प्रतिशत आवंटन निर्धारित किया गया है। उधमसिंह नगर को 9 प्रतिशत, चमोली को 6 प्रतिशत तथा रुद्रप्रयाग को 5 प्रतिशत आवंटन दिया गया है। टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी एवं अल्मोड़ा को 4-4 प्रतिशत, पिथौरागढ़ को 3 प्रतिशत तथा बागेश्वर एवं चम्पावत को 2-2 प्रतिशत आवंटन दिया गया है। यह व्यवस्था स्थानीय मांग और उपभोक्ता घनत्व को ध्यान में रखते हुए तय की गई है।

विवाह समारोह हेतु विशेष प्रावधान, 02 सिलेडर निर्धारित

सचिव आनंद स्वरूप ने बताया कि विवाह समारोहों के लिए विशेष प्रावधान करते हुए अधिकतम 2 व्यवसायिक सिलेण्डरों की सीमा निर्धारित की गई है। इसके लिए आवेदक को संबंधित जिलाधिकारी या नामित अधिकारी के समक्ष आवेदन करना होगा, जिसके बाद दस्तावेजों के परीक्षण उपरांत अनुमति प्रदान की जाएगी। अनुमोदन के बाद संबंधित गैस वितरक द्वारा अस्थायी कनेक्शन जारी कर आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी तथा इसकी सूचना जिलाधिकारी को भी दी जाएगी। निर्धारित अवधि पूर्ण होने के बाद यह कोटा पुनः सामान्य श्रेणियों में समायोजित कर लिया जाएगा, जिससे किसी प्रकार का दुरुपयोग न हो।

विवाह समारोह हेतु निर्धारित 660 सिलेण्डरों में देहरादून एवं नैनीताल को सर्वाधिक 176-176 सिलेण्डर आवंटित किए गए हैं, जबकि हरिद्वार एवं उधमसिंह नगर को 64-64 सिलेण्डर दिए गए हैं। अन्य जनपदों को उनकी आवश्यकतानुसार 18 से 24 सिलेण्डर तक आवंटित किए गए हैं। इसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्रों के लिए निर्धारित 1250 सिलेण्डरों में देहरादून, हरिद्वार एवं उधमसिंह नगर को 380-380 सिलेण्डर आवंटित किए गए हैं, नैनीताल व टिहरी को बीस-बीस तथा पौड़ी को 70 सिलेण्डर आवंटित किए गए हैं।

ff262_0001

उत्तराखंड पुलिस को “राष्ट्रपति पुलिस कलर”, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
  • सीएम धामी ने पुलिस महानिदेशक सहित सभी पुलिस कार्मिको को दी बधाई
  • राष्ट्रपति पुलिस कलर से सम्मानित हुई उत्तराखंड पुलिस, देश के चुनिंदा राज्यों में शामिल
  • सीएम धामी बोले – यह सम्मान नहीं, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की राष्ट्रीय पहचान
  • दुर्गम परिस्थितियों में उत्कृष्ट सेवा का मिला सम्मान, उत्तराखंड पुलिस ने रचा इतिहास
  • आपदा प्रबंधन से स्मार्ट पुलिसिंग तक, हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम – राष्ट्रपति पुलिस कलर
  • केदारनाथ आपदा से लेकर महाकुंभ तक, उत्तराखंड पुलिस की सेवाओं को राष्ट्रीय मान्यता
  • रजत जयंती वर्ष में मिला सर्वोच्च सम्मान, उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण
  • सीएम धामी ने कहा – उत्तराखंड पुलिस बनेगी स्मार्ट पुलिसिंग का वैश्विक मॉडल

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड पुलिस को “राष्ट्रपति पुलिस कलर” (President’s Police Colour) से अलंकृत किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे राज्य के इतिहास का “स्वर्णिम और गौरवपूर्ण अध्याय” बताया है। सीएम कहा कि उत्तराखंड के लिए यह क्षण केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि गौरव, परंपरा और अदम्य सेवा भावना का जीवंत प्रमाण बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में भेंट कर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने यह जानकारी दी ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान उत्तराखंड पुलिस को देश के उन चुनिंदा पुलिस बलों की श्रेणी में स्थापित करता है, जिन्हें उनकी विशिष्ट और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए यह सर्वोच्च राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक सहित सभी अधिकारियों और जवानों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए भारत के माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व और सतत मार्गदर्शन ने उत्तराखंड पुलिस को इस उच्च सम्मान तक पहुँचाया है। यह उपलब्धि न केवल पुलिस बल की प्रतिष्ठा को बढ़ाती है, बल्कि पूरे उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य करती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किया कि यह सम्मान केवल एक अलंकरण नहीं, बल्कि वर्षों की वीरता, अनुशासन, उत्कृष्ट सेवा, पेशेवर दक्षता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की मान्यता है। यह पुरस्कार एक कठोर और बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद दिया जाता है, जिसमें पुलिस बल के हर आयाम – कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, जनसुरक्षा और तकनीकी नवाचार – का गहन परीक्षण किया जाता है।

यह सम्मान पुलिस बल के ध्वज और वर्दी पर अंकित होकर उसके गौरव, अस्मिता और परंपरा का स्थायी प्रतीक बन जाता है, साथ ही हर पुलिसकर्मी के लिए प्रेरणा और जिम्मेदारी का स्रोत भी है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद पुलिस बल ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखते हुए अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आधुनिक तकनीक और स्मार्ट पुलिसिंग के माध्यम से जनता का विश्वास जीतना इस उपलब्धि का प्रमुख आधार रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस की भूमिका आपदा प्रबंधन में विशेष रूप से सराहनीय रही है। वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा सहित विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में पुलिस बल ने अद्भुत साहस, त्वरित कार्रवाई और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हजारों लोगों के जीवन की रक्षा की। इसके साथ ही महाकुंभ, चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा जैसे विशाल आयोजनों में सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन का उत्कृष्ट संचालन पुलिस की दक्षता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण, पर्यटन सुरक्षा और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे क्षेत्रों में उत्तराखंड पुलिस ने तकनीकी सशक्तिकरण और जनसहभागिता के माध्यम से एक ऐसा मॉडल विकसित किया है, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्थापना के “रजत जयंती वर्ष” में यह सम्मान मिलना इस उपलब्धि को और भी अधिक विशेष और ऐतिहासिक बनाता है। यह उत्तराखंड की 25 वर्षों की विकास यात्रा, सेवा और समर्पण का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड पुलिस “मित्रता, सेवा, सुरक्षा” के अपने ध्येय वाक्य के साथ आगे भी राष्ट्र और राज्य की सेवा में निरंतर अग्रसर रहेगी। राज्य सरकार पुलिस बल के आधुनिकीकरण और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि वैश्विक मानकों की स्मार्ट पुलिसिंग स्थापित की जा सके।

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने इस उपलब्धि को उत्तराखंड पुलिस के इतिहास का “स्वर्णिम अध्याय” बताते हुए कहा कि यह सम्मान प्रत्येक अधिकारी और जवान के समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के साथ-साथ पुलिस परिवारों के त्याग और सहयोग का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि भविष्य में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगी।

उत्तराखंड पुलिस अब इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के साथ राष्ट्र एवं राज्य की सेवा और सुरक्षा में और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ेगी।

उत्तराखंड के राजकीय महाविद्यालयों में हाईटेक होंगी प्रयोगशालाएं – डाॅ. धन सिंह रावत
  • एमबी पीजी काॅलेज व कोटद्वार महाविद्यालय में लैब अपग्रेडेशन को 4 करोड़ जारी
  • कहा – आई0आई0टी0 कानपुर की सहायता से उच्चीकृत की जायेंगी प्रयोगशालाएं

देहरादून : उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित एमबी पीजी काॅलेज हल्द्वानी एवं कोटद्वार महाविद्यालय में स्थापित विज्ञान प्रयोगशालाओं को हाईटेक बनाया जायेगा। दोनों महाविद्यालयों की प्रयोगशालाओं के उच्चीकरण को 4 करोड की धनराशि जारी कर दी गई है। इन दोनों महाविद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाओं को आईआईटी कानपुर के सहयोग से उच्चीकृत किया जायेगा, ताकि वहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को आधुनिक उपकरणों के जरिये प्रयोगात्मक एवं शोधात्मक प्रशिक्षण मिल सके।

सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा में शैक्षिक गुणवत्ता, नवाचार, प्रयोगात्मक व शोधात्मक गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में प्रदेशभर के राजकीय महाविद्यालयों में स्थापित प्रयोगशालाओं को उच्चीकृत कर हाईटेक बनाया जायेगा, ताकि अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को वैश्विक स्तर के मानदण्डों के अनुरूप प्रयोगात्मक कार्यों का प्रशिक्षण मिल सके। डाॅ. रावत ने बताया कि प्रथम चरण में एम.बी. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय हल्द्वानी तथा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में स्थापित विज्ञान प्रयोगशाला के उच्चीकरण को 2-2 करोड़ की धनराशि जारी कर दी है, शीघ्र ही आईआईटी कानपुर की सहायता से दोनों महाविद्यालयों की विज्ञान प्रयोगशाला को उच्चीकृत किया जायेगा, इसके लिये विभागीय अधिकारियों को प्रयोगशालाओं के समय पर उच्चीकरण करने निर्देश दे दिये गये हैं। डाॅ. रावत ने बताया कि आईआईटी कानपुर, आई.आई.एस.सी बैंगलुरू, आइसर मोहाली जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के सहायता से राजकीय महाविद्यालयों में बेसिक साइंस लैब, टिंगरिंग लैब, अप्लीकेशन लैब आदि आधारभूत संरचनाएं विकसित किये जायेंगे। इसके साथ ही छात्रों को हैण्ड्स ऑन ट्रेनिंग और लैब वर्क के माध्यम से प्रशिक्षण भी दिया जायेगा।

डाॅ. रावत ने बताया कि महाविद्यालयों में आधारभूत संरचनाओं के विकास के साथ-साथ शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि महाविद्यालयों में समग्र रूप से एक इकोसिस्टम बनाया जा सके और राज्य को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक माॅडल स्टेट के रूप में स्थापित किया जा सके।