यात्रा मार्ग पर स्वच्छ और शुद्ध भोजन के लिए व्यापक तैयारी, खाद्य संरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने हरित चारधाम यात्रा थीम पर शुरू किया अभियान

देहरादून : चारधाम यात्रा मार्ग के होटल – ढाबों में इस बार तीर्थयात्रियों को स्वच्छ और शुद्ध भोजन मिलेगा, इसके लिए खाद्य संरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने यात्रा मार्ग पर क्विक रिस्पांस टीमों और मोबाइल फूड सेफ्टी वैन की तैनाती की है। साथ ही विभाग ने यात्रा मार्ग के होटल- ढाबों और खाद्य कारोबारियों के साथ व्यापक स्तर संवाद और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरु किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चारधाम यात्रा को हरित यात्रा की थीम पर, संचालित करने पर जोर दे रहे हैं। इसी क्रम में खाद्य संरक्षा औषधि प्रशासन विभाग, यात्रा मार्ग के प्रमुख शहरों में होटल और खाद्य कारोबारियों के साथ प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित कर रहा है। विभाग ने चारधाम मार्ग पर शुद्ध और ताजा भोजन उपलब्ध कराने के लिए रोटेशन के आधार पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैनात किए हैं। साथ ही यात्रा मार्ग पर खाद्य पदार्थों की जांच और जन जागरुकता के लिए मोबाइल फूड सेफ्टी वैन और शिकायत रिस्तारण के लिए क्विक रिस्पांस टीम भी तैनात की गई है। विभाग ने शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर -18001804246 भी जारी किया है।

आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन सचिन कुर्वे के निर्देश पर विभाग यात्रा मार्ग के होटल, ढाबा संचालकों के साथ मीटिंग कर ग्रीन यात्रा, स्वच्छता और मिलावट रहित भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षण दे रहा है। उपायुक्त मुख्यालय गणेश कंडवाल ने बताया कि आयुक्त के दिशानिर्देशों के क्रम में अब तक उत्तरकाशी, श्रीनगर , देवप्रयाग, तीनधारा, चंबा, घनसाली, रुद्रप्रयाग, घट्टूगाड़ में 250 से अधिक होटल कारोबारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इन कार्यशालाओं में कारोबारियों से अपने भोजन में तेल, नमक और चीनी का उपयोग कम करने की अपील की जा रही है। इससे खासकर मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित यात्रियों को सुविधा रहेगी। साथ ही ईट राइट अभियान के क्रम में होटलों को खाद्य तेल को तीन बार से अधिक इस्तेमाल करने के बजाय इसे बायोफ्यूल बनाने के लिए उपलब्ध कराने के लिए कहा जा रहा है।

चारधाम यात्रा में देश विदेश के लाखों यात्री उत्तराखंड पहुंचते हैं। हमारा प्रयास है कि ना सिर्फ तीर्थ यात्रियों को शुद्ध भोजन और स्वच्छ वातावरण मिले, बल्कि यात्रा के चलते हमारे पवित्र तीर्थस्थलों पर सिंगल यूज प्लास्टिक की समस्या भी पैदा न हो, हम सिंगल यूज प्लास्टिक का रिड्यूज, रियूज और रिसाइकिल के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

नारी शक्ति वंदन विधेयकों पर सियासत तेज, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी ने विपक्ष पर साधा निशाना, महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों से जुड़े विधेयक गिरने पर जताई नाराजगी, कहा – यह करोड़ों महिलाओं के साथ अन्याय

कोटद्वार : विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण ने कोटद्वार-बद्रीनाथ मार्ग स्थित रैलीश रेस्टोरेंट में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने संसद में महिलाओं के अधिकारों से जुड़े नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने से संबंधित हालिया घटनाक्रम पर विस्तार से अपनी बात रखी।

प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र प्रारंभ हुआ, जिसमें 131वां संविधान संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया गया। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाना था, ताकि देश की आधी आबादी – महिलाओं – को उनका उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने आगे बताया कि इस संदर्भ में कुल तीन महत्वपूर्ण विधेयक सदन में लाए गए थे, जो महिलाओं को विधानसभाओं और लोकसभा में आरक्षण सुनिश्चित करने तथा अधिनियम के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए आवश्यक थे।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष ने इन तीनों विधेयकों का विरोध करते हुए उन्हें सदन में गिरा दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं और अधिकारों के साथ अन्याय है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जब वर्ष 2023 में यह ऐतिहासिक अधिनियम पारित हुआ था, तब सभी दलों ने एकजुट होकर इसका समर्थन किया था। लेकिन आज वही विपक्ष महिलाओं को उनका हक दिलाने में बाधा बन रहा है, जो बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की लगभग 70 करोड़ महिलाएं इस अधिनियम से सीधे प्रभावित होती हैं और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में इस प्रकार का राजनीतिक विरोध कहीं न कहीं उनकी प्रगति को रोकने का प्रयास है।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने स्पष्ट किया कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भविष्य में इस अधिनियम को लागू कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार दिलाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज और सभी राजनीतिक दलों का नैतिक कर्तव्य है।

अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर इसका उचित जवाब देगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी को मिलकर इस दिशा में कार्य करना चाहिए।

जोगियाणा को वेलनेस डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में कार्य तेज, डीएम स्वाति एस. भदौरिया ने आयुर्वेद विलेज के निर्माण कार्यों का किया स्थलीय निरीक्षण, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
  • जोगियाणा (मोहनचट्टी) आयुर्वेदिक विलेज के रूप में हो रहा विकसित, योग, ध्यान व पंचकर्म सुविधाओं को मिलेगा बढ़ावा
  • गरुड़चट्टी-नीलकंठ मोटर मार्ग का पैचवर्क हर हाल में 15 मई तक पूरा करें अधिकारी – डीएम

पौड़ी : जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने यमकेश्वर के मोहनचट्टी स्थित विकसित किए जा रहे आयुर्वेदिक विलेज जोगियाणा में निर्माणाधीन योगा हॉल एवं पंचकर्म यूनिट के साथ-साथ गरुड़चट्टी–नीलकंठ मोटर मार्ग का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आयुर्वेदिक विलेज की परिकल्पना के अनुरूप कार्यों को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूर्ण करने, वेलनेस गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा मोटर मार्ग पर पैचवर्क एवं जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने निर्माणदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि योगा हॉल एवं पंचकर्म यूनिट का निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि जोगियाणा (मोहनचट्टी) को आयुर्वेदिक विलेज के रूप में विकसित किए जाने की कड़ी में योगा हॉल एवं पंचकर्म केंद्र जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं। इसके विकसित होने से क्षेत्रीय नागरिकों को बेहतर आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने के साथ-साथ यह स्थल एक प्रमुख वेलनेस एवं पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिकी को भी बढ़ावा मिलेगा।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने राजस्व उपनिरीक्षक को निर्देशित किया कि चिकित्सालय से संबंधित भूमि की समस्याओं के समाधान हेतु सरकारी भूमि का सीमांकन शीघ्र सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि योगा हॉल एवं पंचकर्म यूनिट के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक उपकरणों एवं सामग्री की विस्तृत सूची तैयार कर जिला योजना में प्रस्तावित किया जाए।

इसके साथ ही जिलाधिकारी ने निर्माणदायी संस्था को निर्देशित किया कि पंचकर्म यूनिट एवं योगा हॉल का निर्माण इस प्रकार किया जाए कि परिसर सुव्यवस्थित, खुला एवं आकर्षक प्रतीत हो। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि प्रवेश द्वार को टाइल्स के स्थान पर सौंदर्यपरक एवं थीम आधारित डिज़ाइन, जैसे स्टोन फिनिश तथा वुडन लुक के अनुरूप विकसित किया जाए, जिससे चिकित्सालय का वातावरण अधिक सुसंगत एवं आकर्षक बन सके। जिलाधिकारी ने चिकित्सालय के पीछे कि ओर से गुजर रही गूल (नहर) को कवर करने के भी निर्देश दिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

इसके अलावा उन्होंने औषधि वितरण केंद्र, शल्यशालाक्य कक्ष एवं पुरुष वार्ड का निरीक्षण करते हुए व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने चिकित्सालय परिसर में पड़े ठोस अपशिष्ट को तत्काल हटाने तथा परिसर में हर्बल गार्डन का निर्माण किया जाए जिसमें औषधीय पौधे तथा उनके उपयोग के बारे में जानकारी हो। तत्पश्चात्‌ इसका उचित ढंग से रख रखाव भी सुनिश्चित किया जाए।

इसके उपरांत जिलाधिकारी ने गरुड़चट्टी–नीलकंठ मोटर मार्ग का स्थलीय निरीक्षण करते हुए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी 15 मई तक मार्ग पर आवश्यक पैचवर्क व इंटरलॉकिंग टाइल्स का कार्य पूर्ण कर उसकी फोटोग्राफ्स सहित प्रगति आख्या उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने उप जिलाधिकारी को भी निर्देश दिए कि 15 मई को उक्त मोटर मार्ग का पुनः निरीक्षण कर विस्तृत निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

जिलाधिकारी ने रत्तापानी क्षेत्र के समीप स्थित काजवे (पुलिया) की समुचित सफाई कराने तथा वर्षा जल के सड़क पर बहाव को रोकने हेतु जल निकासी की प्रभावी एवं व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए, ताकि आवागमन सुरक्षित एवं सुचारू बना रहे। इस अवसर पर जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. शैलेंद्र पांडे, नायब तहसीलदार वैभव जोशी, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. तृप्ति नेगी, अधिशासी अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग श्रीपति डोभाल, राजस्व उपनिरीक्षक अतुल बलोदी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

विकास का धामी मॉडल : मियावाला में तालाब बना खूबसूरत पार्क, लोगों को मिली नई सैर की जगह

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) जनहित से जुड़ी योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतार रहा है। खास तौर पर शहर के पुराने प्राकृतिक तालाबों, जल स्रोतों और पार्कों के संरक्षण व सौंदर्यीकरण की दिशा में प्राधिकरण की पहल अब साफ तौर पर नजर आने लगी है। इसी कड़ी में देहरादून के मियावाला क्षेत्र में एक पुराने प्राकृतिक तालाब को विकसित कर लगभग 3.30 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से युक्त आकर्षक तालाब तथा पार्क के रूप में तैयार किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधा का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है।

मियावाला पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़े पुराने प्राकृतिक तालाब के कायाकल्प के बाद तैयार इस पार्क का लोकार्पण आज रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने किया। इस अवसर पर स्थानीय पार्षद, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे। कार्यक्रम में एमडीडीए के प्रभारी अधीक्षण अभियंता अतुल गुप्ता सहित हॉर्टिकल्चर अनुभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी ने लगभग 3.30 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस परियोजना को क्षेत्र के विकास और पर्यावरण एवं जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और प्राधिकरण की कार्यशैली की सराहना की। तेजी से शहरीकरण के दौर में जहां प्राकृतिक जल स्रोत और हरित क्षेत्र लगातार सिमटते जा रहे हैं, वहीं एमडीडीए द्वारा इन संसाधनों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

पार्क में आधुनिक सुविधाओं का समावेश

नए विकसित पार्क में आमजन की सुविधा के लिए कई आधुनिक व्यवस्थाएं की गई हैं। पार्क का मुख्य द्वार उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली में बनाया गया है, जो स्थानीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करता है। इसके अलावा पार्क में योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, कैन्टीन, स्वच्छ शौचालय, सुरक्षा के लिए रेलिंग, आकर्षक गज़ीबो, व्यवस्थित वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच और हरियाली से भरपूर खुले क्षेत्र विकसित किए गए हैं।

शहर की सुंदरता और हरियाली को मिलेगा बढ़ावा

एमडीडीए द्वारा इस तरह की परियोजनाएं न केवल शहर की सुंदरता को बढ़ा रही हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। जलाशयों के संरक्षण से भूजल स्तर बनाए रखने में मदद मिलेगी, वहीं हरित क्षेत्रों के विस्तार से प्रदूषण नियंत्रण में भी सहायता मिलेगी। प्राधिकरण का कहना है कि इसी तर्ज पर अन्य स्थानों पर भी पार्कों और जल स्रोतों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जिससे देहरादून को एक स्वच्छ, हरित और सुव्यवस्थित शहर के रूप में विकसित किया जा सके। मियावाला में विकसित यह पार्क न केवल एक विकास परियोजना है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि यदि योजनाओं को सही दिशा और दृष्टि के साथ लागू किया जाए, तो विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। एमडीडीए की यह पहल देहरादून के लिए एक मॉडल बन सकती है, जिसे आने वाले समय में अन्य शहरों में भी अपनाया जा सकता है।

प्राकृतिक धरोहरों को नया जीवन देने की पहल- उमेश शर्मा काऊ

रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने मियावाला में विकसित किए गए इस पार्क का लोकार्पण करते हुए एमडीडीए की कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण ने जिस संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के साथ प्राकृतिक तालाब को संरक्षित करते हुए उसे जनसुविधा से जोड़ने का कार्य किया है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक पार्क नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनहित के बीच संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण है। काऊ ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में विकास कार्यों को नई दिशा मिल रही है और एमडीडीए उसी सोच को जमीन पर उतार रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इसी तरह की योजनाएं अन्य क्षेत्रों में लागू होंगी, जिससे लोगों को बेहतर जीवन स्तर और स्वच्छ वातावरण मिल सकेगा।

पुराने जल स्रोत को मिला नया जीवन- बंशीधर तिवारी

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य करना नहीं, बल्कि पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए विकास को आगे बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि मियावाला परियोजना इसी सोच का परिणाम है, जहां एक पुराने जल स्रोत को संरक्षित करते हुए उसे आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया है। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में ऐसे कई अन्य स्थलों की पहचान की गई है, जहां इसी तरह के कार्य किए जाएंगे। उनका कहना है कि इन परियोजनाओं से शहर की सुंदरता के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन भी मजबूत होगा।

प्रकृति और विकास का संगम- मोहन सिंह बर्निया

एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण द्वारा सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि मियावाला पार्क का निर्माण निर्धारित समयसीमा और मानकों के अनुरूप पूरा किया गया है। एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि भविष्य में भी जनहित को प्राथमिकता देते हुए इस तरह की योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि शहरवासियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

दोषरहित जीवन ही सती माता अनसूया का आदर्श – शंकराचार्य

गोपेश्वर (चमोली)। ज्योतिषपीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि माता अनसूया धर्म का पालन करने के कारण शक्ति स्वरूपा बनीं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति दूसरों में दुर्गुण नहीं देखता, वही अनसूया के आदर्श के अनुरूप होता है। खल्ला गांव में माता अनसूया देवी की देवरा यात्रा के तहत आयोजित लक्ष महायज्ञ एवं श्रीमद देवी भागवत कथा के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि माता अनसूया धर्म रक्षा की अधिष्ठात्री देवी हैं। धर्म के अनुपालन से ही वे शक्ति स्वरूपा बनीं और उनकी कीर्ति संसार में फैली। उन्होंने कहा कि “असूया” (दोष देखने की प्रवृत्ति) से रहित व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में अनसूया के गुणों को धारण करता है।

उन्होंने कहा कि मां अनसूया पवित्रता और पतिव्रता धर्म की सर्वोच्च प्रतीक हैं। उनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए सभी को दूसरों के दोष नहीं, बल्कि गुणों को आत्मसात करना चाहिए।

शंकराचार्य ने लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी शक्ति का उपयोग धर्म रक्षा में करें। उन्होंने चिंता जताई कि भौतिक सुखों के आकर्षण में लोग धर्म से दूर होते जा रहे हैं, जिससे आध्यात्मिक शक्ति कमजोर हो रही है। ऐसे में हर व्यक्ति को धर्म रक्षक बनने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं और धर्म रक्षा में मील का पत्थर साबित होते हैं। खल्ला गांव के लोगों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि देवरा यात्रा को सफलतापूर्वक संपन्न कर उन्होंने धार्मिक परंपराओं को सशक्त किया है।

इस दौरान ब्रह्मचारी मुकुंदानंद, ज्योतिर्मठ के पूर्व ब्लाॅक प्रमुख प्रकाश रावत, अनिल डिमरी, शिवानंद उनियाल, अभिषेक बहुगुणा, नवीन जोशी, व्यास आचार्य मनोज चमोली, यज्ञाचार्य पं. चंद्रशेखर तिवारी, देवरा यात्रा समिति के अध्यक्ष बीरेंद्र सिंह नेगी, धर्मस्व ग्राम समिति के अध्यक्ष अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, सचिव दिलबर सिंह बिष्ट, प्रधान कमल सिंह नेगी, महिला मंगल दल अध्यक्ष प्रियंका बिष्ट आदि मौजूद रहे।

इससे पूर्व खल्ला गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने शंकराचार्य का पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया। शंकराचार्य ने अनसूया देवी एवं ज्वाला देवी को नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

आईआईटी रुड़की और उत्तराखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के बीच हुआ एमओयू, अंतरिक्ष विज्ञान एवं जियोस्पेशियल तकनीक में सहयोग को बढ़ावा

रुड़की : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने उत्तराखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष विज्ञान एवं जियोस्पेशियल अनुप्रयोगों के क्षेत्र में अकादमिक, वैज्ञानिक और अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करना है।

यह समझौता प्रो. कमल किशोर पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की, तथा प्रो. दुर्गेश पंत, निदेशक, यूएसएसी द्वारा आईआईटी रुड़की परिसर में हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर सेंटर फॉर स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रमुख प्रो. संजय एच. उपाध्याय एवं डॉ. प्रियदर्शी उपाध्याय भी उपस्थित रहे।

इस सहयोग के अंतर्गत तीन प्रमुख क्षेत्रों – अकादमिक एवं अनुसंधान सहयोग, एम.टेक एवं पीएचडी छात्रों का संयुक्त मार्गदर्शन, तथा सम्मेलनों एवं कार्यशालाओं का संयुक्त आयोजन – पर कार्य किया जाएगा। दोनों संस्थान वैज्ञानिक ज्ञान, संकाय एवं तकनीकी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के साथ-साथ शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों की क्षमता निर्माण को भी प्रोत्साहित करेंगे।

अकादमिक एवं अनुसंधान सहयोग के तहत अंतरिक्ष अनुप्रयोग, जियोस्पेशियल तकनीक, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त शोध एवं पायलट परियोजनाएँ संचालित की जाएंगी। आईआईटी रुड़की के छात्रों को यूएसएसी में इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट कार्य एवं शोध अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उन्हें प्रयोगशालाओं और व्यावहारिक अनुभव का लाभ मिलेगा।

समझौते के तहत स्नातकोत्तर एवं डॉक्टोरल छात्रों का संयुक्त मार्गदर्शन भी किया जाएगा, जिसमें दोनों संस्थानों के संकाय और वैज्ञानिक मिलकर छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे। साथ ही, छात्रों को दोनों संस्थानों की सुविधाओं का उपयोग करने का अवसर मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, दोनों संस्थान सेमिनार, सम्मेलन, कार्यशालाएँ एवं अल्पकालिक पाठ्यक्रम संयुक्त रूप से आयोजित करेंगे। यह साझेदारी उत्तराखंड राज्य में अंतरिक्ष विज्ञान एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ अनुसंधान को व्यावहारिक अनुप्रयोगों में परिवर्तित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

उत्तराखण्ड : श्री गंगोत्री धाम और श्री यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन के साथ चारधाम यात्रा का शुभारंभ

गंगोत्री/यमुनोत्री : श्री गंगोत्री धाम और श्री यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर वैदिक मंत्रोच्चारण और पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इसके साथ ही उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा 2026 का भी शुभारंभ हो गया है। दोनों धामों में प्रधानमंत्री के नाम से पहली पूजा की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री धाम में कपाटोद्घाटन समारोह में संकल्प लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से पहली पूजा की और चारधाम यात्रा के सफल आयोजन तथा देश-प्रदेश की सुख समृद्धि एवं खुशहाली की मंगल कामना की है। 

धार्मिक परंपराओं के अनुसार आज मां गंगा की उत्सव डोली भैरव घाटी स्थित भैरव मंदिर से चलकर गंगोत्री धाम पहुंची। गंगोत्री धाम में विशेष पूजा-अभिषेक के साथ दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। 

गंगोत्री धाम के कपाटोद्घाटन समारोह में प्रतिभाग करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मॉं गंगा के मंदिर में शीश नवाया और विशेष पूजा-अर्चना कर देव डोली से आशीष भी प्राप्त किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पावन अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो चुका है। उत्तराखण्ड के चारधाम देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था के प्रमुख केन्द्र हैं और इन दिव्य धामों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करने की इच्छा हर श्रद्धालु के हृदय में रहती है।

उन्होंने कहा कि सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम चारधाम यात्रा के लिए राज्य सरकार द्वारा व्यापक और सुदृढ़ व्यवस्थाएँ की गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए हैं। साथ ही, यात्रा मार्गों पर सुचारु यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि देवभूमि उत्तराखण्ड में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को दिव्य धामों का आशीर्वाद प्राप्त होने के साथ-साथ यात्रा का एक सुखद, सुरक्षित और अविस्मरणीय अनुभव मिले। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से ग्रीन और क्लीन चारधाम यात्रा के सफल आयोजन हेतु सहयोग की अपील करते हुए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहने का आग्रह भी किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, विधायक सुरेश चौहान,पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण, दायित्वधारी प्रताप पंवार, डीएम प्रशान्त आर्य, एसपी कमलेश उपाध्याय, एडीएम मुक्ता मिश्रा, मुख्यमंत्री के गढ़वाल कोर्डिनेटर किशोर भट्ट, मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मांनंद सेमवाल, सचिव सुरेश सेमवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि,अधिकारी एवं मंदिर समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बद्रीनाथ धाम में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, चमोली पुलिस ने संभाली कमान

बद्रीनाथ। आगामी चारधाम यात्रा 2026 के सफल संचालन हेतु चमोली पुलिस ने श्री बद्रीनाथ धाम में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए बहु-स्तरीय सुरक्षा प्लान लागू किया गया है, जिसके तहत सीसीटीवी निगरानी और चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। इस बार सुरक्षा को ‘नेक्स्ट लेवल’ पर ले जाते हुए आतंकवादी निरोध दस्ता (ATS) को भी तैनात किया गया है। पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए अपील की है कि वे निश्चिंत होकर यात्रा करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

अक्षय तृतीया पर खुले यमुनोत्री धाम के कपाट

यमुनोत्री : अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट विधिवत पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। शुभ लग्नानुसार दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर कपाटोद्घाटन हुआ। जिसके साथ ही ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ भी हो गया। कपाट खुलने के बाद अब आगामी छह माह तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु श्री यमुनोत्री धाम में मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे।

सुबह मां यमुना की शीतकालीन गद्दी स्थल खुशीमठ (खरसाली) से पारंपरिक विधि-विधान के साथ डोली यात्रा प्रारंभ हुई। शनिदेव की डोली की अगुवाई में सुबह साढ़े आठ बजे मां यमुना की डोली श्री यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई। इस दौरान ग्रामीणों ने भव्य ढंग से मां यमुना को विदाई दी। इस दौरान यमुनोत्री घाटी क्षेत्र पारंपरिक वाद्य यंत्रों व आईटीबीपी देहरादून के बैंड की धुन से गुंजायमान रहा तथा मां यमुना के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

खुशीमठ से प्रस्थान करने के बाद डोली यात्रा श्री यमुनोत्री धाम पहुंची, जहां हवन-पूजन एवं विधिवत अनुष्ठान संपन्न किए गए। इसके पश्चात शुभ मुहूर्त में दोपहर 12:35 बजे परंपरानुसार कपाट खोल दिए गए। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कपाट खुलने के साथ ही श्री यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई है और पूरे क्षेत्र में आस्था व उत्साह का माहौल बना हुआ है। 

चारधाम यात्रा प्रारंभ से पूर्व श्री बद्रीनाथ धाम में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, एटीएस तैनात

बद्रीनाथ : आगामी कुछ दिनों में प्रारंभ होने जा रही श्री बद्रीनाथ धाम यात्रा के दृष्टिगत चमोली पुलिस द्वारा श्री बद्रीनाथ धाम में सुरक्षा व्यवस्था को पूर्णतः सुदृढ़ एवं अलर्ट मोड पर रखा गया है। यात्रा के सुचारु एवं सुरक्षित संचालन हेतु सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।

धाम क्षेत्र में संभावित भारी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए बहु-स्तरीय सुरक्षा प्लान लागू किया गया है। सभी प्रवेश मार्गों, प्रमुख स्थलों एवं संवेदनशील क्षेत्रों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। साथ ही सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सतत निगरानी रखी जा रही है तथा नियमित चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं।

सबसे अहम, आतंकवादी निरोध दस्ता (एटीएस) ने मोर्चा संभाल लिया है। एटीएस की तैनाती के साथ ही सुरक्षा का स्तर नेक्स्ट लेवल पर पहुंच चुका है—हर संभावित खतरे पर पहले से ही सख्त नजर और तुरंत एक्शन की पूरी तैयारी।

 

चमोली पुलिस का स्पष्ट संदेश है—

– श्रद्धालु निश्चिंत होकर यात्रा करें, आपकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।

–  संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें—आपकी एक सूचना बड़ा खतरा टाल सकती है।

चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और यादगार बनाने के लिए चमोली पुलिस पूरी मुस्तैदी से तैनात है।