मिट्टी बचाओ, भविष्य संवारो : एसबीएसयू में जैविक खेती पर जोर

 

सरदार भगवान सिंह यूनिवर्सिटी में हुआ सफल आयोजन

देहरादून। खेत की मिट्टी केवल अनाज उगाने का माध्यम नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन और आने वाले भविष्य की सबसे मजबूत आधारशिला है। इसी संदेश के साथ सरदार भगवान सिंह विश्वविद्यालय में शुक्रवार को “भूमि सुपोषण एवं संरक्षण” राष्ट्रीय जनजागरण अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

बदलते कृषि परिदृश्य, बढ़ते रासायनिक उपयोग और घटती मिट्टी की उर्वरता के बीच विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि टिकाऊ कृषि की दिशा में अब जैविक और संतुलित खेती ही सबसे व्यवहारिक और दीर्घकालिक समाधान है। इस अभियान में कृषि वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र और स्थानीय किसान एक साथ आए और दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सतत भूमि प्रबंधन और एकीकृत कृषि पद्धतियों को अपनाने की तत्काल आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया।

मुख्य भाषण देते हुए सरदार भगवान सिंह यूनिवर्सिटी कुलपति प्रो. (डॉ.) जे कुमार ने पारंपरिक कृषि पद्धतियों से लेकर आधुनिक गहन कृषि प्रणालियों तक कृषि के विकास का एक चिंतनशील अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जनसंख्या वृद्धि ने ऐतिहासिक रूप से कृषि में नवाचारों को प्रेरित किया है, जिसमें हरित क्रांति भी शामिल है, जिसने खाद्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि रासायनिक उर्वरकों के निरंतर और अत्यधिक उपयोग से मृदा क्षरण, पोषक तत्वों की कमी और मृदा स्वास्थ्य में गिरावट आई है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भविष्य के कृषि विकास को सततता पर आधारित होना चाहिए, जिसमें उत्पादकता और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। प्रोफ़ेसर कुमार ने एकीकृत कृषि प्रणालियों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि फसलों, पशुधन और मत्स्य पालन जैसी संबद्ध गतिविधियों के एकीकरण से लचीले और आत्मनिर्भर कृषि पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो सकता है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों को किसानों को ऐसी पद्धतियों की ओर मार्गदर्शन करने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जो रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करते हुए मिट्टी की उर्वरता को बहाल करती हैं।

 कार्यक्रम का शुभारंभ ग्रामीण कृषि के राज्य समन्वयक श्री ललित बडाकोटी के संबोधन से हुआ, जिन्होंने पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मिट्टी के स्वास्थ्य की केंद्रीय भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान से जोड़ना है, जिससे किसानों को टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल पद्धतियों को अपनाने के लिए सशक्त बनाया जा सके।

व्यावहारिक जानकारी देते हुए श्री दीपक उपाध्याय ने सहभागी किसानों के साथ मिलकर मिट्टी की उर्वरता में कमी के कारण फसल पैदावार में गिरावट से संबंधित अपने जमीनी अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि रासायनिक उपयोग में धीरे-धीरे कमी और एकीकृत कृषि पद्धतियों को अपनाने से मिट्टी की उर्वरता बहाल करने, मिट्टी की बनावट में सुधार करने और सूक्ष्मजीवों की गतिविधि बढ़ाने में मदद मिली है, जिससे दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता मजबूत हुई है।

पूर्व निदेशक, आईसीएआर–काजरी, डॉ. आरके भट्ट ने “जलवायु-स्मार्ट कृषि” पर व्याख्यान देते हुए बदलते जलवायु परिदृश्य में मृदा और जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने समझाया कि बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा के कारण किसान जलवायु परिवर्तन से अप्रभावित फसलों की किस्मों और विविध फसल प्रणालियों को अपनाने के लिए विवश हो रहे हैं। उन्होंने कार्बन क्रेडिट की अवधारणा भी प्रस्तुत की और बताया कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार कृषि पद्धतियां किसानों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा कर सकती हैं और साथ ही जलवायु परिवर्तन को कम करने में योगदान दे सकती हैं।

डॉ. निधि एस. बेलवाल ने मृदा उर्वरता बनाए रखने में मृदा सूक्ष्मजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने समझाया कि मृदा एक सजीव प्रणाली है जिसमें सूक्ष्मजीव पोषक तत्वों के चक्रण में सहायता करते हैं और वायुमंडलीय नाइट्रोजन और खनिजों को पौधों के लिए सुलभ रूपों में परिवर्तित करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि रसायनों का अत्यधिक उपयोग लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या को कम कर सकता है, जिससे धीरे-धीरे मृदा की उर्वरता घट जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए, उन्होंने मृदा स्वास्थ्य को पुनर्जीवित करने और जल धारण क्षमता में सुधार के लिए जैव उर्वरकों और सूक्ष्मजीव संवर्धकों के अधिक उपयोग की वकालत की।

कार्यक्रम का समापन असिस्टेंट प्रोफेसर अनिल पंवार ने कार्यशाला में आए सभी अतिथियों और प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। पंवार ने किसानों के बीच वित्तीय साक्षरता और सरकारी कृषि योजनाओं के प्रति जागरूकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल टिकाऊ, विज्ञान-आधारित कृषि पद्धतियों के लिए क्षेत्रीय मानक स्थापित करने में सहायक होती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की कृषि अनुसंधान और प्रदर्शन भूखंडों में “सूक्ष्मजीव-प्रथम” दृष्टिकोण अपनाने की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। कार्यक्रम में 70 से अधिक प्रतिभागियों ने “मिट्टी बचाओ” की शपथ ली। कार्यक्रम का सफल संचालन ऋष्टि मैठानी ने किया।

 इस अवसर पर प्रो. उर्मी चौरसिया (परीक्षा नियंत्रक), श्रीमती हेमलता भट्ट (एग्रो फॉरेस्ट्री, सहायक प्रोफेसर), प्रिया रावत (एग्रोनॉमी), डॉ. अनामिता सेन (सहायक प्रोफेसर, पादप रोग विज्ञान), डॉ. कुलजीत कौर (एसोसिएट प्रोफेसर, प्रबंधन अध्ययन), पियाली शर्मा (सहायक प्रोफेसर) सहित अनेक प्राध्यापक, किसान एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

 

मृदा स्वास्थ्य के लिए वैज्ञानिक सिफारिशें

देहरादून। “भूमि सुपोषण एवं संरक्षण” अभियान के तहत विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा, फसल और पर्यावरण के संतुलित संरक्षण के लिए व्यवहारिक और वैज्ञानिक उपाय अपनाने की सलाह दी। कार्यक्रम में टिकाऊ कृषि को भविष्य की जरूरत बताते हुए संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक विकल्पों पर विशेष जोर दिया गया।

मृदा परीक्षण से तय करें उर्वरक की मात्रा
विशेषज्ञों ने किसानों को हर 2–3 वर्ष में मृदा परीक्षण कराने की सलाह दी। इससे मिट्टी की उर्वरता, पीएच स्तर और पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है, जिससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग संभव होता है और लागत भी घटती है।

जैविक खाद से बढ़ेगी मिट्टी की ताकत
गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद के उपयोग पर जोर देते हुए बताया गया कि इससे मिट्टी की संरचना मजबूत होती है, जल धारण क्षमता बढ़ती है और सूक्ष्मजीव सक्रिय होते हैं।

फसल चक्र अपनाकर बढ़ाएं उत्पादन
दलहनी फसलों को फसल चक्र में शामिल करने की सलाह दी गई, जिससे मिट्टी में नाइट्रोजन की पूर्ति होती है। मिश्रित खेती और हरी खाद से मृदा संरक्षण और कीट नियंत्रण में भी मदद मिलती है।

मल्चिंग और कंटूर फार्मिंग से रुकेगा कटाव
ढालू जमीन में कंटूर फार्मिंग और मल्चिंग तकनीक अपनाने से मृदा अपरदन कम होता है। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।

जैविक उपायों से करें कीट नियंत्रण
रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर नीम आधारित और जैविक उपाय अपनाने की सलाह दी गई। एकीकृत कीट प्रबंधन से फसल सुरक्षित रहती है और पर्यावरण पर दुष्प्रभाव कम पड़ता है।

जलवायु स्मार्ट तकनीकों पर जोर
न्यूनतम जुताई और शून्य जुताई तकनीकों को अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है। खेतों के किनारों पर पेड़-पौधे लगाकर हरित क्षेत्र विकसित करने की भी सलाह दी गई।

संतुलित खेती ही टिकाऊ समाधान
विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक और जैविक उर्वरकों का संतुलित उपयोग ही दीर्घकाल में बेहतर उत्पादन और मिट्टी की सेहत बनाए रख सकता है।

 

 

कोटद्वार : नशे में ड्राइविंग पर पुलिस का कड़ा एक्शन, 144 चालान

कोटद्वार : जनपद में सड़क सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार के निर्देशन में पुलिस द्वारा सघन यातायात चेकिंग अभियान निरंतर प्रभावी रूप से चलाया जा रहा है। अभियान के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए न केवल दंडात्मक कार्यवाही की जा रही है, बल्कि आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।

इसी क्रम में दैनिक चेकिंग के दौरान 06 वाहन चालक (कोटद्वार–05, यातायात कोटद्वार–01) शराब के नशे में वाहन चलाते पाए गए। सभी वाहनों को तत्काल सीज करते हुए संबंधित चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई।

इसके अतिरिक्त, सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुलिस द्वारा रैश ड्राइविंग, ओवरलोडिंग, बिना हेलमेट वाहन चलाने तथा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग जैसे यातायात नियमों के उल्लंघन पर भी सख्त कार्रवाई की गई। इस दौरान कुल 52 वाहन चालकों (कोटद्वार–21, श्रीनगर–19, लक्ष्मणझूला–09, सतपुली–02, लैंसडाउन–01) के विरुद्ध चालानी कार्रवाई की गई।

जनपदभर में चलाए गए अभियान के तहत कुल 144 वाहन चालकों के विरुद्ध चालान किए गए, जिससे यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में पुलिस की सख्ती स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।

पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करें।

पौड़ी गढ़वाल : नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, 4 होटल संचालकों पर जुर्माना

पौड़ी : जनपद में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने हेतु “ऑपरेशन प्रहार” के अंतर्गत पौड़ी पुलिस द्वारा व्यापक एवं सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार के निर्देशन में समस्त थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

निर्देशों के तहत वांछित, फरार एवं पेशेवर अपराधियों की गिरफ्तारी, गुण्डा एवं असामाजिक तत्वों, दुराचारियों तथा स्ट्रीट क्राइम में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही संदिग्ध व्यक्तियों का सत्यापन, रैश एवं ड्रंकन ड्राइविंग, बिना नम्बर प्लेट, गैर-राज्य एवं हूटर युक्त वाहनों की चेकिंग के साथ-साथ बार, पब, क्लब, होटल एवं ढाबों की सघन जांच भी की जा रही है।

इसी क्रम में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली लक्ष्मणझूला श्री सूर्य भूषण नेगी के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा सार्वजनिक स्थलों, नदी किनारों तथा होटल एवं ढाबों में विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान ऐसे होटल एवं ढाबा संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जिन्होंने अपने यहां कार्यरत बाहरी कर्मचारियों का सत्यापन नहीं कराया था।

कार्रवाई के तहत 04 होटल/ढाबा संचालकों के विरुद्ध उत्तराखण्ड पुलिस अधिनियम के अंतर्गत चालानी कार्रवाई करते हुए कुल ₹40,000/- का जुर्माना लगाया गया।

इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में चलाए गए सघन चेकिंग अभियान के दौरान अतिक्रमण, शांति भंग एवं अमर्यादित आचरण करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई। इस दौरान कुल 16 चालान किए गए, जिनसे ₹8,000/- की धनराशि वसूल की गई। पुलिस द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जनपद में कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु इस प्रकार के अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेंगे।

क्लस्टर खेती और मनरेगा कन्वर्जेंस से ग्रामीण विकास को मिलेगी रफ्तार

पौड़ी : मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत ने विकास भवन सभागार में आयोजित मासिक स्टाफ बैठक के दौरान आजीविका उन्मुख योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय तथा पारदर्शी लाभार्थी चयन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने मनरेगा कन्वर्जेंस के माध्यम से विकास कार्यों में तेजी लाने पर विशेष बल देते हुए अधिकारियों को योजनाओं को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि कृषि, उद्यान, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर जनहितकारी योजनाओं को गति प्रदान करें, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर सुदृढ़ हों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले।

बैठक में उन्होंने समूह आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करते हुए क्लस्टर खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इसके लिए सभी विकासखंडों में एक सप्ताह के भीतर संबंधित विभागीय एवं क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित कर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्य विकास अधिकारी ने नवाचार आधारित कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को ड्रैगन फ्रूट, मशरूम जैसे उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन हेतु प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि प्रत्येक माह कम से कम दो समन्वय बैठकें आयोजित की जाएं तथा बैठक के तीन दिनों के भीतर कार्यवाही विवरण विकास भवन को उपलब्ध कराया जाए।

बैठक के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा अपनी योजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिससे आपसी समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी। मुख्य विकास अधिकारी ने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए तथा लाभार्थियों का चयन निष्पक्ष एवं सत्यापन के आधार पर किया जाए, ताकि वास्तविक जरूरतमंद और परिश्रमी काश्तकारों तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने खंड विकास अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि विभागों से प्राप्त प्रस्तावों का गहन परीक्षण करने के बाद ही उन्हें अग्रसारित किया जाए। साथ ही, मनरेगा कन्वर्जेंस के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों को शीघ्र प्रस्तुत करने तथा वार्षिक लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु मासिक प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में मनरेगा, एनआरएलएम, यूएसआरएलएम, मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम योजना एवं प्रोजेक्ट उन्नति जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की समीक्षा भी की गई।

इस अवसर पर परियोजना निदेशक डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विशाल शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी, एलडीएम किशन रावत, परियोजना प्रबंधक ग्रामोत्थान कुलदीप बिष्ट, मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा सहित सभी खंड विकास अधिकारी उपस्थित रहे।

 

कोटद्वार : अस्पतालों को दिया गया अग्नि सुरक्षा प्रशिक्षण

कोटद्वार : जनपद में “अग्निशमन सेवा सप्ताह” के अवसर पर अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने तथा आमजन, औद्योगिक एवं संस्थागत कर्मचारियों को जागरूक करने हेतु व्यापक स्तर पर विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी के निर्देशन में संचालित हो रहा है।

इसी क्रम में दिनांक 16 अप्रैल 2026 को फायर स्टेशन कोटद्वार द्वारा क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों, जैसे के.एम.सी. हॉस्पिटल, बालासौड़ एवं अन्य नर्सिंग होम्स में अग्नि सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम के दौरान अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों एवं कर्मचारियों को निम्न बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई:

अग्नि दुर्घटनाओं के संभावित कारण

आग से बचाव के प्रभावी उपाय

आपातकालीन परिस्थितियों में आवश्यक सावधानियाँ

साथ ही, अग्निशमन यंत्रों (Fire Extinguishers) के विभिन्न प्रकार, उनके सही उपयोग, संचालन विधि एवं नियमित रखरखाव के संबंध में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

इसके अतिरिक्त, निम्न महत्वपूर्ण विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया गया:

आपातकालीन निकासी योजना (Evacuation Plan)

अग्नि अलार्म प्रणाली की उपयोगिता

विद्युत सुरक्षा उपाय

अग्निशमन उपकरणों का नियमित निरीक्षण एवं रखरखाव

यह अभियान अस्पतालों में सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने तथा किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

चार धाम यात्रा का जनपद हरिद्वार से आगाज, मध्य प्रदेश के शहडोल जनपद से आए तीर्थ यात्रियों ने ऋषिकुल मैदान में ऑफलाइन यात्री पंजीकरण केंद्र में किया चार धाम यात्रा के लिए पहला पंजीकरण
  • अतिथि देवो भव की परम्परा से फूल मालाओं एवं टिका चंदन से जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  नवनीत सिंह भुल्लर ने किया गया तीर्थ यात्रियों का स्वागत
  • ऋषिकुल ऑफलाइन पंजीकरण केंद्र ने जिला प्रशासन द्वारा सभी व्यवस्थाएं की गई है चाक चौबंद

हरिद्वार : चारधाम यात्रा को सुगम, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए चारधाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए हरिद्वार ऋषिकुल मैदान में बनाए गए पंजीकरण केंद्र में यात्रियों का ऑफलाइन पंजीकरण आज से शुरू कर लिया गया है, चार धाम यात्रा और जाने वाले पहले तीर्थयात्री जिला शहडोल मध्य प्रदेश आए तीर्थयात्रियों के दल द्वारा चार धाम यात्रा के लिए पहला पंजीकरण कराया गया है।चारधाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों का जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने अतिथि देवो भव की परम्परा से तीर्थयात्रियों का फूल मालाओं एवं टिका चंदन से स्वागत किया तथा सभी यात्रियों की यात्रा की मंगलमय  हो इसके लिए सभी को शुभकामनाएं दी।

पहला पंजीकरण कराने में जनपद शहडोल मध्य प्रदेश से आए तीर्थयात्रियों के 07 सदस्य दल, जिसमें बिसाहू लाल विश्वकर्मा, श्रीमती मुन्नी विश्वकर्मा, प्यारेलाल विश्वकर्मा, रामदीन प्रजापति, दशरथ प्रजापति, शांति प्रजापति, पार्वती प्रजापति ने चारधाम यात्रा के लिए पहले पंजीकरण कराया।

चारधाम यात्रा और जाने वाले तीर्थ यात्रियों में खासा उत्साह दिखाई दिया तथा सभी यात्रियों ने चार धाम यात्रा के लिए ऋषिकुल मैदान में पंजीकरण के लिए की गई सभी व्यवस्थाओं के लिए जिला प्रशासन एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया।मध्यप्रदेश से आए तीर्थयात्री बिसाहू लाल विश्वकर्मा ने कहा कि पंजीकरण केंद्र में सभी व्यवस्थाएं ठीक प्रकार से की गई है तथा जिला प्रशासन द्वारा उनका फूल मालाओं से स्वागत किया गया है, जिसपर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।

यात्री मुन्नी विश्वकर्मा ने ऋषिकुल मैदान में ऑफलाइन पंजीकरण हेतु की गई व्यवस्थाओं एवं सुविधा के लिए राज्य सरकार का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों से आए भारी संख्या में आए तीर्थयात्रियों द्वारा चार धाम यात्रा के लिए पंजीकरण कराया जा रहा है तथा चार धाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों का स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण एवं स्क्रीनिंग भी कराई जा रही है।

इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी पीआर चौहान, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान, उप जिलाधिकारी हरिद्वार जितेंद्र कुमार, जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ अनिल वर्मा, जिला आपदा प्रबन्धन अधिकारी मीरा रावत, जिला सूचना अधिकारी रती लाल शाह सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी एवं विभिन्न राज्य से आए तीर्थ यात्री मौजूद रहे।

नंदानगर महाविद्यालय में अम्बेडकर वृतचित्र का प्रदर्शन

नंदानगर (चमोली)। अम्बेडकर जयंती के उपलक्ष्य में शहीद जगदीश प्रसाद पुरोहित राजकीय महाविद्यालय, नंदानगर में सोमवार को छात्रों के लिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन पर आधारित वृतचित्र का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं को भारतीय संविधान के निर्माता और महान समाज सुधारक के संघर्षमय जीवन से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम के तहत प्रदर्शित वृतचित्र (डॉक्यूमेंट्री) के माध्यम से छात्रों को डॉ. अम्बेडकर के जीवन, उनके विचारों और सामाजिक न्याय के लिए किए गए संघर्षों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों में समानता, शिक्षा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा।

महाविद्यालय के प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से छात्रों के भीतर सामाजिक न्याय और संविधान के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होती है। उन्होंने बताया कि वृतचित्र प्रदर्शन का उद्देश्य युवा पीढ़ी को बाबासाहेब के आदर्शों से जोड़ना और उन्हें समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करना है।

इस दौरान छात्र-छात्राओं ने वृतचित्र को अत्यंत प्रेरणादायक बताया। उनका कहना था कि डॉ. अम्बेडकर का जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि समानता और अधिकारों की एक बड़ी क्रांति का प्रतीक है। कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त कर्मचारी एवं शिक्षण स्टाफ की उपस्थिति रही।

प्रसिद्ध दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष अग्रवाल की सुपुत्री एंजिल अग्रवाल ने सीबीएसई हाईस्कूल में 98.4% अंक किए हासिल 

कोटद्वार : CBSE हाईस्कूल परीक्षा में ब्लूमिंग वेल पब्लिक स्कूल की छात्रा एंजिल अग्रवाल ने 98.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर शानदार सफलता हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि से विद्यालय और परिवार में खुशी का माहौल है। अलकनंदा कॉलोनी निवासी एंजिल अग्रवाल ने अपनी सफलता का श्रेय नियमित अध्ययन और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में वह प्रतिदिन 2 से 3 घंटे पढ़ाई करती थीं, जबकि परीक्षा के दौरान उन्होंने 6 से 7 घंटे तक स्वयं अध्ययन किया। तैयारी के लिए उन्होंने शिक्षकों के साथ-साथ यूट्यूब का भी सहारा लिया। एंजिल का लक्ष्य आगे चलकर एलएलबी की पढ़ाई कर न्यायाधीश बनना है। उनके पिता डॉ. आशीष अग्रवाल और माता डॉ. नीतिका अग्रवाल कोटद्वार गढ़वाल के प्रसिद्ध दंत रोग विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन किया।

विद्यालय की प्रधानाचार्य रेखा गौड़ ने बताया कि एंजिल ने अंग्रेजी में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। इसके अलावा हिंदी कोर्स और सामाजिक विज्ञान में 99-99 अंक, विज्ञान में 97, अतिरिक्त विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में 97 तथा गणित में 84 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। विद्यालय प्रशासन ने एंजिल की इस सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

पिता डॉ. आशीष अग्रवाल ने बताया कि  एंजिल की इस उपलब्धि पर मुझे अत्यंत गर्व है। उसने हमेशा अनुशासन और समर्पण के साथ पढ़ाई की है। हमने उसे कभी दबाव में नहीं रखा, बल्कि उसकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। एंजिल ने कठिन परिश्रम, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। आज के दौर में बच्चों के लिए सही मार्गदर्शन और सकारात्मक माहौल बहुत जरूरी होता है, जो हमने देने का प्रयास किया। मुझे विश्वास है कि वह आगे भी अपने लक्ष्य की ओर इसी लगन से बढ़ती रहेगी और एक दिन न्यायाधीश बनकर समाज की सेवा करेगी।

माता डॉ. नीतिका अग्रवाल ने बताया कि एंजिल बचपन से ही मेहनती और लक्ष्य के प्रति समर्पित रही है। उसकी सफलता उसके नियमित अध्ययन और आत्मविश्वास का परिणाम है। हमने हमेशा उसे संतुलित जीवन जीने की सीख दी, जिसमें पढ़ाई के साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाए। परीक्षा के समय उसने पूरी लगन से तैयारी की और अपने लक्ष्य को सामने रखकर मेहनत की। एक मां के रूप में मैं उसकी इस उपलब्धि से बेहद खुश हूं। मुझे पूरा भरोसा है कि वह आगे भी इसी तरह सफलता हासिल करती रहेगी और अपने सपनों को साकार करते हुए समाज के लिए प्रेरणा बनेगी।

सीएसआईआर–सीबीआरआई में स्मार्ट विलेज पहल पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न
  • कार्यशाला ग्रामीण क्षेत्रों में सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों के परिचालन नियोजन और तैनाती पर केंद्रित है
  • 2027 तक चयनित गांवों में स्मार्ट विलेज पहल के कार्यान्वयन के लिए रोडमैप तैयार
  • बाल रक्षा भारत के साथ सहयोग सामाजिक एकीकरण और संसाधन जुटाने की रणनीतियों को मजबूत करता है

रूडकी : सीएसआईआर-केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की ने बुधवार को अपने परिसर में बाल रक्षा भारत के सहयोग से स्मार्ट विलेज पहल पर दो दिवसीय प्रशिक्षण-सह-नियोजन कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन किया। दो दिवसीय कार्यशाला सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों के जमीनी स्तर पर तैनाती के लिए परिचालन नियोजन और संसाधन जुटाने की रणनीतियों पर केंद्रित थी, जिसमें 2027 तक कार्यान्वयन के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करने हेतु वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और एनजीओ प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सीएसआईआर-सीबीआरआई के निदेशक आर प्रदीप कुमार रामंचरला द्वारा उद्घाटन के साथ हुई, जिन्होंने नवीन और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों के माध्यम से समग्र ग्रामीण विकास को चलाने में स्मार्ट विलेज मिशन की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने संदर्भ-विशिष्ट समाधान प्रदान करने में 16 सीएसआईआर प्रयोगशालाओं की भूमिका पर जोर दिया और बाल रक्षा भारत के साथ सहयोग की सराहना की।

बाल रक्षा भारत के निदेशक अविनाश सिंह ने प्रभावी कार्यान्वयन के लिए हितधारकों की भागीदारी, सामाजिक एकीकरण और सीएसआर-आधारित वित्त पोषण रणनीतियों के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यशाला के दौरान, सीएसआईआर-सीबीआरआई और बाल रक्षा भारत के विशेषज्ञों ने चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लिया और परियोजना रोडमैप और तैनाती रणनीतियों को अंतिम रूप देने में योगदान दिया। किशोर कुलकर्णी के नेतृत्व में तकनीकी सत्र ने पहल का एक व्यापक अवलोकन प्रदान किया, जिसमें प्राप्त प्रगति, ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौतियाँ और प्रस्तावित तकनीकी हस्तक्षेप शामिल थे।

चार चयनित गांवों—सवाईपुरा (राजस्थान), कुसुनपुर (ओडिशा), जनकपुर (मध्य प्रदेश), और जोनाकीमंडल (असम)—के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रस्तुत की गईं। प्रतिभागियों को बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, कृषि, जल प्रबंधन और आजीविका सृजन जैसे क्षेत्रों में गांव-विशिष्ट चुनौतियों की पहचान करने और उपयुक्त समाधानों का खाका तैयार करने के लिए विषयगत समूहों में विभाजित किया गया था।

चर्चाओं के परिणामस्वरूप व्यापक तैनाती योजनाओं का निर्माण, वित्त पोषण भागीदारों की पहचान और प्रत्येक गांव के लिए परिचालन रणनीतियों और मास्टर बजट की तैयारी हुई।

दूसरे दिन, बाल रक्षा भारत के सीईओ शांतनु चक्रवर्ती और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की उपस्थिति से कार्यशाला और समृद्ध हुई। सत्रों में धन जुटाने की रणनीतियों, साझेदारी विकास और कार्यान्वयन ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया गया। एक प्रमुख परिणाम सीएसआईआर-सीबीआरआई और बीआरबी टीमों के बीच भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण था, जिससे समन्वित निष्पादन सुनिश्चित हो सके।

टीमों ने संयुक्त रूप से प्रत्येक गांव के लिए एक मजबूत “आगे का रास्ता योजना” विकसित की, जिसमें प्रौद्योगिकियों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कार्रवाई योग्य कदम, समय सीमा और परिचालन रणनीतियों को रेखांकित किया गया।

अपने समापन भाषण में, प्रो. रामंचरला ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए टिकाऊ, समावेशी और प्रौद्योगिकी-संचालित ग्रामीण विकास के लिए एक साझा दृष्टिकोण पर जोर दिया। शांतनु चक्रवर्ती ने बीआरबी के निरंतर समर्थन को दोहराया और हितधारकों को मिशन के प्रति प्रतिबद्ध रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यशाला ने ज्ञान के आदान-प्रदान, सहयोगी नियोजन और रणनीतिक संरेखण के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य किया, जिससे लचीला, आत्मनिर्भर और प्रौद्योगिकी-सक्षम ग्रामीण समुदायों के निर्माण के प्रति सीएसआईआर-सीबीआरआई और उसके भागीदारों की प्रतिबद्धता मजबूत हुई।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी कदम – ऋतु खंडूड़ी भूषण

देहरादून । उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खंडूड़ी भूषण ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश की लोकतांत्रिक यात्रा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल बताया है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को विधायिका में सशक्त प्रतिनिधित्व प्रदान करने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी को नई दिशा और गति देगा।

उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि यह अधिनियम महिलाओं के सम्मान, समानता और सशक्तिकरण के संकल्प को साकार करता है। इससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक समावेशी बनेगी। उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखंड का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां महिलाओं की भूमिका सामाजिक और आर्थिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, ऐसे में यह कानून राज्य के लिए और भी अधिक प्रभावी सिद्ध होगा।

ऋतु खंडूड़ी भूषण ने विश्वास व्यक्त किया कि इस अधिनियम के माध्यम से देश की आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिलेगा और भारत “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य की ओर और अधिक मजबूती से अग्रसर होगा।

इसी क्रम में उन्होंने देहरादून में आयोजित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन कार्यक्रम के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखंड के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे राज्य में पर्यटन, व्यापार और आवागमन को नई गति मिलेगी। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व और उत्तराखंड के प्रति उनके विशेष स्नेह का प्रतीक बताया।