चारधाम यात्रा की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी, सोशल मीडिया पर 24×7 निगरानी, भ्रामक खबर फैलाने वालों पर पुलिस द्वारा अब तक 3 FIR दर्ज
  • चारधाम यात्रा को बदनाम करने वालों पर एक्शन जारी, हर पोस्ट पर प्रशासन की पैनी नजर

देहरादून : चारधाम यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक एवं तथ्यहीन सूचनाएं प्रसारित करने वाले तत्वों के विरुद्ध राज्य सरकार ने कार्रवाई और तेज कर दी है। पूर्व में दर्ज प्रकरणों के क्रम में जनपद रुद्रप्रयाग में दो और प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। इसके साथ ही ऐसे मामलों में अब तक कुल तीन FIR दर्ज की जा चुकी हैं।

सोशल मीडिया मॉनीटरिंग के दौरान चिन्हित किए गए कुछ वीडियो एवं रील्स में केदारनाथ धाम की व्यवस्थाओं को लेकर भ्रामक एवं निराधार दावे किए गए। इनमें श्रद्धालुओं को बिना दर्शन लौटाए जाने, 15-15 घंटे तक कतार में खड़े रहने के बावजूद दर्शन न होने, पुलिस व्यवस्था के अभाव तथा अव्यवस्था एवं धक्का-मुक्की जैसी भ्रामक बातें प्रसारित की गईं।

वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित, चरणबद्ध एवं नियमानुसार दर्शन कराए जा रहे हैं। इन भ्रामक वीडियो के माध्यम से आमजन को भ्रमित करने, चारधाम यात्रा की छवि को नुकसान पहुंचाने तथा अनावश्यक भय एवं अविश्वास का वातावरण बनाने का प्रयास किया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चारधाम यात्रा से संबंधित किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना, अफवाह या दुष्प्रचार फैलाने वालों के विरुद्ध तत्काल, सख्त एवं प्रभावी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की 24×7 सतत निगरानी करते हुए ऐसे तत्वों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए।

उक्त प्रकरणों में संबंधित सोशल मीडिया आईडी संचालकों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। इसके अतिरिक्त अन्य संदिग्ध वीडियो एवं डिजिटल कंटेंट भी जांच के दायरे में हैं, जिन पर भी शीघ्र कठोर कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि चारधाम यात्रा की गरिमा, श्रद्धालुओं की आस्था एवं उत्तराखंड की छवि के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भ्रामक सूचना फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की यह प्रक्रिया निरंतर, संगठित एवं प्रभावी रूप से जारी रहेगी।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच खुले बदरीनाथ धाम के कपाट, जय बदरी विशाल से गुंजायमान हुआ धाम

​बदरीनाथ धाम । विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट आज गुरुवार सुबह 6:15 बजे मेष लग्न में ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए। वैदिक मंत्रोच्चार और पौराणिक परंपराओं के साथ जैसे ही भगवान नारायण के द्वार खुले, पूरा बदरीनाथ धाम ‘जय बदरी विशाल’ के उद्घोष से गुंजायमान हो गया। कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु कड़ाके की ठंड के बावजूद इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।

​इस वर्ष बदरीनाथ धाम की सजावट अद्वितीय रही। मंदिर को लगभग 25 क्विंटल देशी-विदेशी फूलों के साथ-साथ पहली बार अमरूद, केले और संतरों जैसे फलों से भव्य रूप से सजाया गया। मंदिर के मुख्य द्वार पर पुष्पों के माध्यम से ‘जय भगवान बदरी विशाल’, दक्षिणी छोर पर ‘ॐ लक्ष्मीपतये नमः’ और उत्तर की ओर ‘बैकुंठाय नमः’ अंकित किया गया था। विशेष आकर्षण के रूप में फूलों से बनाई गई मोर की आकृति श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रही।

​कपाट खुलने की प्रक्रिया तड़के 4:30 बजे से शुरू हो गई थी। नियमानुसार माता लक्ष्मी को उनके मंदिर में विराजमान किया गया, जिसके बाद कुबेर जी और उद्धव जी की मूर्तियों ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया। इस दौरान बामणी गांव की महिलाओं द्वारा गाए गए पारंपरिक मंगल गीतों और भारतीय सेना के बैंड की भक्तिमय धुनों ने पूरे वातावरण को अध्यात्म के रंग में सराबोर कर दिया।

पहली बार कपाट खुलने के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं बदरीनाथ धाम में उपस्थित रहे। उनके साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, बदरीनाथ धाम-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष (हेमंत द्विवेदी), उपाध्यक्ष (ऋषि प्रसाद सती), जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए यात्रियों की सुगम यात्रा की कामना की।​

इस अवसर पर बद्रीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला मैं कहा कि भगवान बद्री विशाल के दर्शन करके आनंद महसूस हो रहा है उन्होंने कहा की यात्रा व्यवस्थाएं सभी ठीक है मंदिर को रंग बिरंगे फूलों से सजाया गया है उन्होंने सभी तीर्थ यात्रियों से अपील की कि वह भगवान बद्री विशाल के दर्शनों के लिए अवश्य आए क्योंकि बद्रीनाथ धाम में सभी के लिए व्यवस्थाएं ठीक की गई हैं किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं है।

हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में खुले भू-बैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट

गोपेश्वर (चमोली)। वेद ऋचाओं तथा सेना के बैंड की मधुर ध्वनि के बीच हिमालय में स्थित भगवान बदरीविशाल के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खुल गए हैं। इसके चलते हजारों श्रद्धालुओं ने अखंड ज्योति के दर्शनों के साथ भगवान से खुशहाली की मनौती मांगी। इसके साथ ही अब बदरीनाथपुरी वेद ऋचाओं से गूंजने लगी है।

गुरूवार को ब्रह्म मुहूर्त में भगवान उद्धव तथा कुबेर की मूर्ति बदरीश पंचायतन में प्रतिष्ठापित की गई। इसके साथ ही बदरीश पंचायतन से मां लक्ष्मी की मूर्ति को लक्ष्मी मंदिर में प्रतिष्ठापित किया गया। वेद ऋचाओं तथा गढ़वाल स्काउटस के बैंड की मधुर ध्वनि के बीच स्वास्ति वाचन के साथ प्रातः 6 बजकर 15 मिनट पर रावल अमरनाथ नंबूदरी की अगुवाई में भगवान बदरीविशाल के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनों को खोल दिए गए। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद भट्ट ने पहली अभिषेक पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम करवाई। इस अवसर हजार श्रद्धालुओं ने पदमासन में विराजमान भगवान बदरीविशाल के दर्शनों का पुण्य लाभ अर्जित करने के साथ ही अखंड ज्योति का दीदार भी किया। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने सबसे पहले आदि केदारेश्वर के दर्शन किए। इसके पश्चात उन्होंने भगवान बदरीविशाल के दर्शन कर पूजा अर्चना का पुण्य लाभ अर्जित किया। इसके साथ ही भगवान बदरीविशाल के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खुलने  के साथ ही अब तक सन्नाटे में पसरी बदरीनाथपुरी में वेद ऋचाएं गूंजने लगी हैं।

बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही साधु सन्यासी धुनी रमाकर भगवान की भक्ति में लीन होने लगे है। देश-विदेश से आए भक्तजन भगवान की स्तुति में तल्लीन होने लगे है। अब बदरीशपुरी में पसरा सन्नाटा टूटने लगा है तो मानो पूरा देश बदरीनाथ की फिजाओं में रमने लगा है।

भारत के चारधामों में से एक श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलते ही बदरीनाथ पुरी में चहल-पहल शुरू हो गई है। वेद मंत्रोच्चार के बीच जैसे ही इस मोक्षधाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खुले वैसे ही यहां वेद ऋचाओं से बदरीनाथ पुरी आस्था व धर्म में डूब गई। भारतीय संस्कृति व एकता के संवाहक के रूप में प्रतिष्ठित इस धाम को शंकराचार्य ने भारत को एक सूत्र में पिरोने के लिए भारत के चारधामों में से एक बदरीनाथ धाम को भी प्रतिष्ठापित किया था। यही वजह है कि इस धाम में भारतवर्ष के कोने-कोने से यहां तुओं का छह माह तक भगवान के दर्शनों के लिए तांता लगा रहता है।

भारत के हर कोने कांतर का श्रद्धालु भगवान की भगवान को देखने के सिवा और कोई उत्सुकता नहीं थी। इस मोक्षधाम में आकर अपनी और अपने परिवार की समृद्धि की कामना में एक तरह से खो गए थे। इस अद्भुत व धार्मिक नजारे को देख भी वहां कई लोगों को आंखे छलछला उठी। यह विचित्र ही संयोग है कि अन्य मठ मंदिरों में पूजा-अर्चना के वक्त शंखनाद होता है किंतु बदरीनाथ मंदिर में शंखनाद की परंपरा ही नहीं है। इसके पीछे तरह-तरह के तर्क दिए जाते रहे हैं।

इससे पूर्व 19 अप्रैल को गंगोत्री तथा यमुनोत्री तथा 22 अप्रैल को केदारनाथ मंदिरों के कपाट खुलने के बाद गुरूवार को बदरीनाथ मंदिर के  कपाट खुल जाने से उत्तराखंड की चारधाम यात्रा का भी पूरी तरह से आगाज हो गया है। वैसे अब एक माह बाद उच्च हिमालय में स्थित हेमकुंड साहिब-लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट खुलेंगे। इस तरह अब कुछ दिनों बाद सिखों के प्रसिद्ध तीर्थ हेमकुंड व लोकपाल का यह क्षेत्र सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहेगा। कपाट खुलने के बाद लाखों लोगों के तीर्थाटन और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों में प्रतिभाग करने से रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में मदद मिल सकेगी।

इस सब के बावजूद बदरीनाथ धाम में लौटी रौनक से भारतीय एकता के भी स्पष्ट दर्शन होने लगे हैं। दरअसल शंकराचार्य ने समूचे भारत को जिस एकता में पिरोने का सपना संजोया था वह बदरीनाथ के संदर्भ में साकार होता दिखाई दे रहा है। आखिर इस हिमालय की फिजाओं में समूचे भारत के लोगों की आमद शंकराचार्य की वर्षों पुरानी कल्पना का साकार रूप लेता दिखाई दे रहा है। 

बताते चलें कि इस बाद दिल्ली के गुप्ता बंधुओं की ओर से बदरीनाथ मंदिर को 25 कुंतल विशेष प्रकार के फूलों से सजाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि मंदिर सुसज्जित करने के लिए फलों की माला भी लगाई गई है। इस बार इसी सजावट में पहली बार जय बदरीविशाल, ओम लक्ष्मीपतये नमः तथा ओम बैकुंठाय नमः भी फूलों से लिखा गया है।

इस दौरान बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला, बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, चमोली के डीएम गौरव कुमार, रूद्रप्रयाग के डीएम/सीईओ विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, जोशीमठ की पालिकाध्यक्ष देवेश्वरी शाह, ब्लाॅक प्रमुख अनूप नेगी, बीकेटीसी के पूर्व सदस्य वीरेंद्र असवाल, डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल बत्र्वाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुरेश डिमरी, बदरीनाथ मंदिर प्रभारी गिरीश चैहान, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चैहान, धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट, आचार्य वाणी विलास डिमरी आदि मौजूद रहे।

भू-वैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट वैदिक विधि-विधान के साथ खुले, शंकराचार्य जी के सान्निध्य में द्वार पूजा संपन्न

बदरीनाथ । उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित भू-वैकुंठ धाम भगवान बदरीविशाल के कपाट आज वैशाख शुक्ल सप्तमी के पावन पर्व पर वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। प्रातः 6:15 बजे के नियत शुभ मुहूर्त पर उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ के दिव्य सान्निध्य में द्वार पूजा और पंचांग पूजन संपन्न हुआ, जिसके उपरांत रावल जी ने नर पूजा की जिम्मेदारी संभालते हुए कपाट खोले।

इस पावन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि शंकराचार्य पद पर प्रतिष्ठित होने के बाद यह लगातार चौथी बार है जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी इस ऐतिहासिक समारोह की शोभा बढ़ा रहे हैं। भक्तों को आशीर्वाद देते हुए पूज्य शंकराचार्य जी ने कहा कि अब आगामी छह माह तक समस्त सनातन धर्मावलंबी भगवान बदरीनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगे। इस भव्य उद्घाटन समारोह में स्वामी सदाशिव ब्रह्मेन्द्रानन्द सरस्वती, स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि, विजय कपरवाण और डॉ. बृजेश सती सहित भारी संख्या में देश-विदेश से आए श्रद्धालु मौजूद रहे, जिससे पूरा बदरीनाथ धाम ‘जय बदरीविशाल’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

 

ब्रह्म कपाल में शुरू हुआ पिंडदान

बद्रीनाथ : भगवान बदरीविशाल के कपाट खुलने के साथ ही पावन ब्रह्म कपाल तीर्थ में पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण की प्रक्रिया भी विधिवत शुरू हो गई है। यात्रा के पहले दिन लगभग 100 श्रद्धालुओं ने तीर्थ पुरोहितों के सानिध्य में अपने पूर्वजों का श्राद्ध कर्म संपन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। ‘मोक्ष धाम’ के रूप में विख्यात बद्रीनाथ आने वाले प्रत्येक तीर्थयात्री के लिए ब्रह्म कपाल में तर्पण का विशेष महत्व है, क्योंकि मान्यता है कि यहाँ पिंडदान करने से पितरों को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है। परंपरा के अनुसार, भगवान बद्री विशाल को भोग लगाए जाने के बाद, ब्रह्म कपाल में भी पहला पिंडदान भगवान के उसी विशेष प्रसाद (भोग) से अर्पित किया जाता है, जिसके पश्चात ही अन्य श्रद्धालुओं के लिए यह प्रक्रिया आरंभ होती है।

बदरीनाथ मंदिर प्रभारी बने गिरीश चौहान

गोपेश्वर (चमोली)। श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गिरीश चौहान को  व्यवस्थाओं के संचालन के लिए बदरीनाथ मंदिर का प्रभारी अधिकारी बनाया गया है। मौजूदा यात्राकाल में व्यवस्थाओं के संचालन के लिए बीकेटीसी प्रबंधन ने चौहान को प्रभारी का अतिरिक्त दायित्व सौंपा है। चौहान ने कहा कि वह मंदिर समिति की व्यवस्थाओं बेहतर बनाने का प्रयास तो करेंगे ही अपितु श्रद्धालुओं के सुलभ दर्शन की सुविधा को भी अंजाम देंगे।

डॉ. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में वार्षिकोत्सव और छात्रसंघ समारोह संपन्न

कर्णप्रयाग (चमोली)। डॉ. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में छात्रसंघ समारोह और 45वां वार्षिकोत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इस भव्य आयोजन में छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। समारोह में मुख्य अतिथियों का जोरदार स्वागत किया गया।

महाविद्यालय के प्रांगण में आयोजित इस समारोह में पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी और राज्य मंत्री सतीश लखेड़ा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। छात्रसंघ के पदाधिकारियों ने गुलदस्ता भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया। छात्राओं ने स्वागत गीत गाकर उनका सम्मान किया। प्राचार्य डॉ. राम अवतार सिंह ने मुख्य अतिथियों को शॉल भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में एकल गीत, एकल नृत्य और समूह लघु हास्य नाटिकाएं प्रस्तुत की गईं। छात्राओं द्वारा गढ़वाली लोकगीतों की रंगारंग प्रस्तुति दी गई। हिमली हवा शररू, बगन्या पाणी तुरूरू, ऊँचा एडी सैंडल पीरिलु और बिंदुली रात रैगे जरासी जैसे मधुर गानों पर छात्र-छात्राएं झूम उठे, जिससे दर्शकों में ऊर्जा और जीवंतता भर गई।

समारोह की व्यवस्थाएं और उपस्थिति

एनसीसी कैडेट्स ने समारोह में जलपान और अतिथि स्वागत सहित सभी व्यवस्थाएं संभालीं। मंच का संचालन डॉ. आर.सी. भट्ट ने कुशलतापूर्वक किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रोफेसर, कर्मचारीगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। यह आयोजन महाविद्यालय के वार्षिक कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

डीएम गौरव कुमार ने बदरीनाथ धाम यात्रा व्यवस्थाओं का लिया जायजा, श्रद्धालुओं से लिया फीडबैक, सुरक्षित और सुगम यात्रा का दिया भरोसा

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बदरीनाथ यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लेने के निमित्त श्रद्धालुओं से फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को कोई असुविधा नहीं होने दी जाएगी।

बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने पर डीएम गौरव कुमार ने भगवान बदरीविशाल की पूजा अर्चना कर जनपदवासियों की सुख समृद्धि और खुशहाली की मनौती मांगी। इस दौरान रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी/बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विशाल मिश्रा एवं पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने भी उनके साथ भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर श्रद्धालुओं के सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना की। इस दौरान धाम में आयोजित विशाल भंडारे में जिलाधिकारी गौरव कुमार सहित सभी अधिकारियों ने प्रसाद ग्रहण किया तथा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

डीएम ने भंडारा संचालित कर रही मानव सेवा ईश्वर सेवा उत्थान समिति के सेवा भाव और उत्कृष्ट आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी राहत और प्रेरणा का कार्य करते हैं।

इस दौरान डीएम ने यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए तीर्थयात्रियों से संवाद कर फीडबैक भी लिया। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं के लिए सुगम, सुरक्षित एवं सुखद यात्रा का भरोसा दिया। कहा कि चमोली जिला प्रशासन मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में यात्रा को सुखद, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने भरोसा दिया कि धाम में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार के कोई असुविधा नहीं होगी।

 

बदरीनाथ धाम में फिर लौटी ठंड, बारिश और हिमपात से बदला मौसम

गोपेश्वर (चमोली)। उच्च हिमालय में स्थित बदरीनाथ धाम की पहाडियों पर बारिश तथा हिमपात से फिर ठंड लौट आई है। दरअसल बीते कुछ दिनों से बदरीनाथ धाम का मौसम खुश मिजाज बना हुआ था। इसके चलते ठंड का एहसास भी नहीं हो रहा था। सुहावने मौसम के बीच गुरूवार को बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुले तो मौसम सामान्य सा बना था। दोपहर बाद मौसम ने यकायक करवट बदली। इसके चलते बदरीनाथ धाम की पहाडियों पर बर्फवारी तथा बारिश के चलते फिर ठंड लौट आई है। वैसे भी पिछले दो-तीन दिनों से मौसम में काफी तपिश देखने को मिल रही थी। यकायक मौसम के बदले मिजाज के चलते तीर्थयात्रियों को ठंड एहसास होने लगा है। हालांकि कई तीर्थयात्री बदरीनाथ की पहाड़ियों पर हिमपात होते देख अभिभूत हो उठे।

उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को किया संबोधित, कहा – स्नातकों से सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता के साथ सेवा करने का किया आह्वान
  • उपराष्ट्रपति ने बुनियादी ढांचे और सेवाओं को मजबूत करने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की प्रशंसा की
  • पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती को अवसर में बदलें, युवा चिकित्सक- राज्यपाल
  • चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है, जिसे निष्ठा, संवेदनशीलता और करुणा के साथ निभाया जाना चाहिए- मुख्यमंत्री

देहरादून : भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। ऋषिकेश को चिंतन और उपचार का वैश्विक केंद्र होने के साथ-साथ हिमालय का प्रवेश द्वार के रूप में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा वातावरण दीक्षांत समारोह की गंभीरता को और भी गहरा कर देता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह न केवल वर्षों के अनुशासित प्रयासों और त्याग की परिणति है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से समर्पण और उद्देश्य की भावना के साथ अपने पेशेवर कर्तव्यों को निभाने का आग्रह किया।

कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सतत नवाचार और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारत के व्यापक टीकाकरण अभियान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 14 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने लाभ के लिए नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए टीके विकसित किए हैं।

उपराष्ट्रपति ने भारत की वैक्सीन मैत्री पहल के माध्यम से वैश्विक जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘‘वसुधैव कुटुंबकम’’ की भावना को दर्शाती है और एक दयालु और जिम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है।

स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में देश भर में स्थापित नए एम्स संस्थानों ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच को मजबूत किया है, उन्होंने कहा कि सुशासन लोगों की जरूरतों को समझने और उनकी सेवा करने में निहित है।

एम्स ऋषिकेश की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान नैदानिक देखभाल, शैक्षणिक क्षमता, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से टेलीमेडिसिन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा को अस्पताल परिसरों से आगे बढ़कर दूरस्थ और कम सुविधा प्राप्त आबादी तक पहुंचना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने हेली एम्बुलेंस सेवाओं और चार धाम यात्रा के दौरान तथा दूरस्थ क्षेत्रों में दवा वितरण के लिए ड्रोन के उपयोग जैसी नवोन्मेषी स्वास्थ्य सेवाओं की भी प्रशंसा की और इन्हें स्वास्थ्य सेवा वितरण में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का प्रभावी समाधान बताया।

उपराष्ट्रपति ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित क्षेत्र में अवसंरचना के तीव्र विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने समावेशी विकास को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार लाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार के प्रयासों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक जिम्मेदारी है और राष्ट्र निर्माण में चिकित्सा पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले डॉक्टरों से निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से योगदान देने और सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों का पालन करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि उनके मार्गदर्शन से युवा चिकित्सकों को राष्ट्रसेवा की नई ऊर्जा एवं दिशा प्राप्त होगी।

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की साधना, समर्पण और सेवा भाव का उत्सव है तथा यह वह महत्वपूर्ण क्षण है, जब वर्षों की कठिन मेहनत एक नई जिम्मेदारी में परिवर्तित होती है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता में माता-पिता के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और राष्ट्र की अपेक्षाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में चिकित्सा का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक अनुसंधान पद्धतियाँ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बना रही हैं। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जो स्वास्थ्य तंत्र को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।

राज्यपाल ने युवा चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता का क्षेत्र है। मरीज केवल उपचार ही नहीं, बल्कि विश्वास और आशा लेकर चिकित्सक के पास आता है। ऐसे में चिकित्सकों का व्यवहार, सहानुभूति और समर्पण ही मरीज को सुरक्षा और विश्वास प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अभी भी चुनौतीपूर्ण है और उन्होंने युवा चिकित्सकों से अपेक्षा है कि वे इन चुनौतियों को अवसर में परिवर्तित करते हुए दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा प्रदान करें तथा समाज में विश्वास का संचार करें। उन्होंने आह्वान किया कि वे अपने जीवन में नैतिकता, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों को सर्वाेपरि रखें तथा रोगी के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अवसर विद्यार्थियों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है और चिकित्सा क्षेत्र में उनका योगदान समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित देश के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की जनता की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने उपराष्ट्रपति के सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, जनसेवा के प्रति समर्पण और प्रेरणादायी जीवन यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने  कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है, जिसे निष्ठा, संवेदनशीलता और करुणा के साथ निभाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित एम्स ऋषिकेश आज प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रक्षक संस्थान के रूप में स्थापित हो चुका है। यहां कैंसर उपचार, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। साथ ही, हेली एम्बुलेंस सेवा राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊधमसिंह नगर में एम्स ऋषिकेश के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र की जनता को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, टेलीमेडिसिन नेटवर्क का विस्तार, जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाइयों की उपलब्धता तथा निःशुल्क पैथोलॉजिकल जांच जैसी योजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

समारोह केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उपाधि प्राप्त कर रहे डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा पेशा केवल करियर नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है। उन्होंने मरीजों के विश्वास को बनाए रखने और हर परिस्थिति में उनके हित को सर्वाेपरि रखने का आह्वान किया, साथ ही नैतिकता और ईमानदारी को अपने कार्य का आधार बनाने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर हो रहे बदलावों के बीच डॉक्टरों के लिए आजीवन सीखते रहना आवश्यक है, ताकि बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, मरीजों के साथ प्रभावी संवाद को भी उन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे विश्वास और उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, एम्स ऋषिकेश के अध्यक्ष प्रो. राज बहादुर, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन (अकादमिक) प्रो. सौरभ, संकाय सदस्यों, छात्रों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित कई गणमान्य लोगों ने प्रतिभाग किया।