धामी सरकार की पहल, ऐतिहासिक किपलिंग ट्रैक का होगा कायाकल्प, मसूरी को मिलेगा नया शांत पर्यटन मार्ग, उपाध्यक्ष MDDA बंशीधर तिवारी ने कहा – प्रकृति के बीच सुकून भरा सफर देगा किपलिंग ट्रैक

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में राज्य में पर्यटन अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में देहरादून से मसूरी को जोड़ने वाले ऐतिहासिक किपलिंग ट्रैक के पुनरोद्धार की महत्वाकांक्षी योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा लगभग 498.14 लाख रुपये की लागत से 3.50 किलोमीटर लंबे इस ऐतिहासिक ट्रैक का व्यापक विकास किया जा रहा है।

यह ट्रैक शहनसाही आश्रम से झड़ीपानी तक फैला हुआ है और प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण तथा पहाड़ी दृश्यों के कारण लंबे समय से पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। आधुनिक सड़क मार्गों पर बढ़ती भीड़ और वाहनों के शोर के बीच यह ट्रैक एक ऐसे वैकल्पिक पर्यटन मार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पर्यटक प्रकृति के करीब शांत और सुकून भरा अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

राज्य सरकार की मंशा है कि मसूरी क्षेत्र में पर्यटन को केवल सड़क आधारित यात्रा तक सीमित न रखकर प्रकृति आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जाए। इसी सोच के साथ किपलिंग ट्रैक के संरक्षण और विकास की योजना तैयार की गई है, ताकि आने वाले समय में यह मार्ग पर्यटकों के लिए एक अनूठा और आकर्षक अनुभव बन सके।

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच विकसित होगा ट्रैक

एमडीडीए द्वारा इस परियोजना के अंतर्गत ट्रैक के संरक्षण, मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई स्थानों पर रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाएगा, जिससे ट्रैक सुरक्षित और टिकाऊ बन सके। साथ ही ट्रैक के किनारों पर मजबूत रेलिंग लगाई जाएंगी, ताकि पर्यटक सुरक्षित रूप से इस मार्ग पर भ्रमण कर सकें। इस मार्ग को पैदल यात्रियों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने के लिए रास्ते को समतल और व्यवस्थित भी किया जाएगा।

पर्यटकों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

किपलिंग ट्रैक के विकास में केवल संरचनात्मक कार्य ही नहीं बल्कि पर्यटकों की सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है। परियोजना के अंतर्गत ट्रैक के विभिन्न स्थानों पर विश्राम स्थल विकसित किए जाएंगे, जहां आकर्षक गज़ीबो (Gazebo) बनाए जाएंगे। इन स्थानों पर बैठकर पर्यटक आसपास के पर्वतीय दृश्यों, हरियाली और प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकेंगे। इसके अतिरिक्त ट्रैक पर सेल्फी प्वाइंट, कैंटीन कियोस्क, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, शौचालय, कूड़ेदान और आधुनिक लैंप पोस्ट जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इन व्यवस्थाओं से न केवल पर्यटकों को सुविधा मिलेगी बल्कि ट्रैक को एक सुव्यवस्थित और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में पहचान भी मिलेगी।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

इस परियोजना की खास बात यह है कि इसके विकास में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को प्राथमिकता दी जा रही है। ट्रैक के आसपास व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता और अधिक बढ़ेगी। इसके अलावा पक्षियों के संरक्षण के लिए बर्ड हाउस भी बनाए जाएंगे, जिससे इस क्षेत्र में पक्षियों की उपस्थिति बढ़ेगी और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी। सरकार का उद्देश्य है कि पर्यटन विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रह सके।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

किपलिंग ट्रैक के विकास से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय व्यापारियों, गाइड्स, होमस्टे संचालकों और छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ मिलेगा। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जुड़े कार्यों में रोजगार मिलने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार की यह पहल सतत पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

प्रकृति के बीच नया अनुभव देगा किपलिंग ट्रैक : बंशीधर तिवारी

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि किपलिंग ट्रैक का पुनरोद्धार राज्य के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में प्रदेश में ऐसे पर्यटन स्थलों को विकसित किया जा रहा है, जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करें। उन्होंने बताया कि देहरादून से मसूरी जाने वाले पारंपरिक सड़क मार्गों पर अक्सर भीड़भाड़ रहती है, जिससे पर्यटकों को शोर और ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। किपलिंग ट्रैक के विकसित होने से पर्यटकों को एक वैकल्पिक और शांत मार्ग मिलेगा, जहां वे पैदल चलते हुए प्रकृति की गोद में समय बिता सकेंगे। बंशीधर तिवारी ने कहा कि इस ट्रैक पर विकसित की जा रही सुविधाएं इसे एक सुरक्षित, आकर्षक और व्यवस्थित पर्यटन मार्ग के रूप में स्थापित करेंगी। यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य, पर्वतीय दृश्यों और शांत वातावरण का आनंद लेते हुए एक अलग अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद यह ट्रैक न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी एक बेहतर मनोरंजन और प्रकृति से जुड़ने का स्थान बन जाएगा।

प्रकृति के अनुकूल तैयार हो रही परियोजना : मोहन सिंह बर्निया

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि किपलिंग ट्रैक के विकास की पूरी योजना प्रकृति के अनुकूल डिजाइन की गई है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना और जैव विविधता पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने बताया कि ट्रैक के आसपास वृक्षारोपण, बर्ड हाउस और स्वच्छता व्यवस्था जैसी पहलें इस परियोजना को एक पर्यावरण अनुकूल पर्यटन मॉडल बनाएंगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी मजबूत होगा।

मसूरी को मिलेगी “हरित” सौगात, 15.5 एकड़ में बनेगा प्रकृति उद्यान, उपाध्यक्ष MDDA बंशीधर तिवारी ने कहा – पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा नया आयाम

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में पर्यटन नगरी मसूरी को पर्यावरणीय दृष्टि से और अधिक समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। मसूरी- देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा मसूरी के हुसैनगंज क्षेत्र में लगभग 15.5 एकड़ भूमि पर अत्याधुनिक प्रकृति उद्यान (ईको पार्क) का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना पर्यटन विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देने वाली एक महत्वपूर्ण योजना मानी जा रही है।

मसूरी लंबे समय से उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल रही है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में पर्यटन के बढ़ते दबाव के बीच प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए एमडीडीए ने यह पहल की है, ताकि मसूरी को एक पर्यावरण-अनुकूल और संतुलित पर्यटन मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके।

प्रकृति के बीच आधुनिक सुविधाओं वाला उद्यान

प्रस्तावित प्रकृति उद्यान को पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल अवधारणा पर विकसित किया जाएगा। इसकी रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि पहाड़ी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। उद्यान में कृत्रिम पहाड़ी जलाशय, घने पेड़ों के बीच से गुजरने वाले वन पथ, बच्चों के लिए आकर्षक बाल उद्यान तथा युवाओं के लिए साहसिक गतिविधियों वाला क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इससे यह स्थान परिवारों, बच्चों और युवाओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस परियोजना का उद्देश्य केवल मनोरंजन स्थल तैयार करना नहीं है, बल्कि लोगों को प्रकृति के करीब लाने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी है। ऐसे प्रकृति उद्यान पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जैव विविधता को मिलेगा बढ़ावा

प्रकृति उद्यान में विभिन्न प्रजातियों के स्थानीय पेड़ों और पौधों का व्यापक रोपण किया जाएगा। इससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी और जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के हरित क्षेत्र न केवल प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं, बल्कि स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण भी प्रदान करते हैं। इसके अलावा उद्यान में आगंतुकों के लिए आरामदायक बैठने की व्यवस्था, आकर्षक मंडप (गज़ीबो), योग पथ और भोजनालय जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इन व्यवस्थाओं से पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने के साथ-साथ स्वास्थ्य और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे।

संस्कृति और प्रकृति से परिचित कराएगा संग्रहालय

परियोजना के अंतर्गत एक छोटा संग्रहालय भी स्थापित किया जाएगा। इसमें मसूरी और आसपास के क्षेत्रों की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय परंपराओं और जैव विविधता से जुड़ी जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी। इससे आने वाले पर्यटक न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेंगे, बल्कि इस क्षेत्र के इतिहास और पर्यावरणीय महत्व को भी समझ सकेंगे। यह पहल मसूरी को पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने में भी सहायक साबित हो सकती है।

निर्माण में रखा जाएगा पर्यावरण संतुलन का ध्यान

प्रकृति उद्यान के निर्माण के दौरान पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जाएगा। परियोजना में न्यूनतम कंक्रीट का उपयोग किया जाएगा तथा अधिकतम स्थानीय सामग्री को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे एक ओर पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकेगा, वहीं स्थानीय संसाधनों के उपयोग से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह उद्यान न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए भी एक सुंदर सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित होगा, जहां वे प्रकृति के बीच सुकून के क्षण बिता सकेंगे।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रही योजना – बंशीधर तिवारी

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में मसूरी को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हुसैनगंज में बनने वाला यह प्रकृति उद्यान मसूरी के पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना में प्रकृति के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और स्थानीय वनस्पतियों तथा प्राकृतिक ढलानों को सुरक्षित रखते हुए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उनका कहना है कि यह उद्यान आने वाले समय में मसूरी के पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण बनेगा और स्थानीय लोगों को भी प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए एक सुंदर एवं स्वच्छ सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराएगा।

विकास और संरक्षण के बीच संतुलन – मोहन सिंह बर्निया

एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि प्रकृति उद्यान की पूरी योजना पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि परियोजना का उद्देश्य विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है। उद्यान के डिजाइन में प्राकृतिक ढलानों, हरियाली और स्थानीय संसाधनों को सुरक्षित रखने का विशेष ध्यान रखा गया है। उनका कहना है कि इस परियोजना के पूरा होने से मसूरी में पर्यावरण- अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और यह स्थान भविष्य में पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र बनेगा।

भूमि विवाद प्रकरण में डीएम सविन बसंल के हस्तक्षेप से वर्षों से लटके भूमि सीमांकन पूर्ण
  • जनता दर्शन में फरियादी के पुनः पंहुचने पर डीएम ने पत्रावली की तलब
  • डीएम जनदर्शन; न्याय; शिक्षा, स्वास्थ्य उपचार, रोजगार से लेकर बिल एवं ऋणमाफी तक एक छत के नीचे मौके पर ही

देहरादून: जिलाधिकारी सविन बसंल की अध्यक्षता में आयोजित जन दर्शन/ जनता दरबार में फरियादी उम्मेद सिंह द्वारा अपने पुत्र उत्पल सिंह की निजी भूमि पर अवैध कब्जे से संबंधित शिकायत करते हुए भूमि सीमांकन का अनुरोध किया गया था जिस पर जिलाधिकारी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए कार्यावाही के निर्देश दिए थे। फरियादी उम्मेद सिंह द्वारा 06 अपै्रल को पुनः जन दर्शन में फरियाद लगाई कि उनके भूमि सीमांकन में किसी प्रकार का निर्णय नही हुआ है। शिकायतकर्ता द्वारा यह शिकायत की गई कि सीमांकन कार्य में विलंब किया जा रहा है तथा अपेक्षित सहयोग नहीं दिया जा रहा है, जिससे उन्हें मानसिक असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। जिस पर जिलाधिकारी ने तहसील प्रशासन डोईवाला को तलब करते हुए 07 अपै्रल 2026 तक प्रकरण पर पूर्व में दिए गए निर्देशों के परिपालन में आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।

जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में अवगत कराया है कि उत्पल सिंह द्वारा 22.04.2025 को धारा 41 एल.आर. एक्ट के अंतर्गत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसके क्रम में तहसीलदार, डोईवाला द्वारा 26.07.2025 को जांच आख्या प्रस्तुत की गई थी। इसके उपरांत पत्र 25.09.2025 के माध्यम से दोनों पक्षों को सूचित किया गया था कि फसल कटाई के उपरांत नियमानुसार सीमांकन की कार्यवाही पूर्ण की जाएगी।

उप जिलाधिकारी ने अवगत कराया कि राजस्व विभाग द्वारा नियमानुसार कार्यवाही करते हुए राजस्व निरीक्षक द्वारा 11.03.2026 को मौजा बक्सरवाला स्थित खसरा संख्या 132क, 138ख एवं 139 का सीमांकन कार्य संपन्न किया गया है। प्रस्तुत अभिलेखों के अनुसार खसरा संख्या 139, रकबा 0.4120 हेक्टेयर भूमि 04.03.1993 को क्रय की गई थी। प्रकरण में जिला शासकीय अधिवक्ता (दीवानी), देहरादून की विधिक राय भी प्राप्त हुई है, जिसमें संबंधित प्रकरण के निस्तारण हेतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा चिन्हांकन/निशानदेही सुनिश्चित करने एवं आवश्यकतानुसार पुलिस प्रशासन के माध्यम से विधिक कार्यवाही किए जाने का सुझाव दिया गया है।

जनगणना प्रशिक्षण में लापरवाही बरतने वाले प्रधानाचार्य को मसूरी प्रशासन ने थमाया नोटिस
  • मसूरी में जनगणना प्रशिक्षण से गैरहाजिरी, प्रधानाचार्य नरेश कुमार को नोटिस जारी
  • 24 घंटे में जवाब न देने पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी

मसूरी। जनगणना 2027 के तहत आयोजित प्रगणक एवं सुपरवाइजर प्रशिक्षण में अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए मसूरी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपजिलाधिकारी एवं उपखंड जनगणना अधिकारी, मसूरी द्वारा ओक ग्रोव स्कूल, झड़ीपानी के प्रधानाचार्य नरेश कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

जारी नोटिस के अनुसार, जनगणना अधिनियम 1948 के तहत प्रगणक एवं सुपरवाइजरों की नियुक्ति की गई थी, जिनके लिए 7 अप्रैल 2026 से तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें संबंधित शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य थी, लेकिन 9 अप्रैल तक भी विद्यालय के किसी भी शिक्षक/शिक्षिका ने प्रशिक्षण में भाग नहीं लिया।

प्रशासन ने इसे जनगणना अधिनियम के प्रावधानों की अवहेलना मानते हुए गंभीर लापरवाही बताया है। नोटिस में कहा गया है कि इस अनुपस्थिति के कारण राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण कार्य में बाधा उत्पन्न हुई है, जिस पर उच्च अधिकारियों ने भी नाराजगी जताई है।

उपखंड जनगणना अधिकारी ने प्रधानाचार्य से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 222 व 223 के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

इस मामले की जानकारी जनगणना आयुक्त उत्तराखंड, जिलाधिकारी देहरादून और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी भेज दी गई है।

चारधाम यात्रा-2026 से पूर्व देहरादून में मेगा मॉक ड्रिल, आपदा प्रबंधन की तैयारियों का लिया गया व्यापक जायजा
  • एनडीएमए-यूएसडीएमए के तत्वाधान में देहरादून के चार प्रमुख स्थलों पर एक साथ मॉक अभ्यास
  • टीमों के प्रदर्शन की सराहना, समन्वय, संचार और निर्णय क्षमता को सशक्त बनाने पर जोर

देहरादून : चारधाम यात्रा-2026 के दृष्टिगत संभावित आपदाओं एवं आकस्मिक परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए शुक्रवार को जनपद देहरादून में व्यापक स्तर पर मॉक अभ्यास आयोजित किया गया। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) एवं उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के तत्वावधान में चार प्रमुख स्थानों पर एक साथ संचालित किया गया।

जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से सुबह 9ः45 बजे विभिन्न आपदा परिदृश्यों की सूचना प्रसारित की गई। इसके अंतर्गत ऋषिकेश यात्रा ट्रांजिट कैंप में आग लगने, मौसम विभाग द्वारा रेड अलर्ट जारी होने के बाद तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ जुटने तथा देहरादून स्थित रिस्पना नदी में बादल फटने से आई बाढ़ के कारण सपेरा बस्ती क्षेत्र में जनहानि व क्षति की सूचना शामिल रही। साथ ही गांधी शताब्दी अस्पताल में घायलों के उपचार संबंधी व्यवस्थाओं का भी परीक्षण किया गया।

जिलाधिकारी/रिस्पांसिबल ऑफिसर सविन बंसल के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) के.के. मिश्रा ने कंट्रोल रूम की कमान संभालते हुए सभी इंसीडेंट कमांडरों को तत्काल स्टेजिंग एरिया से रेस्क्यू टीमों को घटना स्थल के लिए रवाना करने के निर्देश दिए। निर्देशों के अनुरूप टीमें त्वरित गति से घटनास्थलों पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया गया।

ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में आग की घटना के दौरान पूरे कैंप को सुरक्षित रूप से खाली कराया गया। अभ्यास के तहत पांच यात्रियों को गंभीर रूप से घायल दर्शाया गया, जिन्हें एंबुलेंस के माध्यम से एम्स ऋषिकेश भेजा गया, जबकि 12 अन्य घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। अग्निशमन विभाग ने तत्परता से आग पर काबू पाकर स्थिति सामान्य की।

दूसरी ओर, रेड अलर्ट के चलते ट्रांजिट कैंप में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यात्रियों को राहत शिविरों, होटलों एवं धर्मशालाओं में व्यवस्थित रूप से स्थानांतरित किया गया, जिससे स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सका।

तीसरे परिदृश्य में रिस्पना नदी में आई बाढ़ के दौरान एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। इस दौरान चार लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया तथा प्रभावितों को राहत शिविरों में ठहराकर भोजन, पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। लोगों को नदी से दूर रहने की हिदायत भी दी गई। जबकि गांधी शताब्दी अस्पताल में घायलों को त्वरित उपचार पहुंचाने के संबंध में तैयारियों को परखा गया।

मॉक अभ्यास के उपरांत इंसीडेंट कमांडरों द्वारा रेस्क्यू टीमों की ब्रीफिंग कर भविष्य में और अधिक सतर्कता एवं समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान आब्जर्वरों ने अभ्यास में सामने आई कमियों को दूर करने पर विशेष बल दिया।

एनडीएमए के विशेषज्ञों ने मॉक ड्रिल को सफल बताते हुए कहा कि सभी टीमों ने अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। उन्होंने आपदा प्रबंधन में निरंतर सुधार, बेहतर समन्वय, सुदृढ़ संचार व्यवस्था एवं त्वरित निर्णय क्षमता को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मॉक अभ्यास के दौरान कंट्रोल रूम में अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल, सीईओ वीके ढ़ौडियाल, डीपीओ जीतेन्द्र कुमार, डीआईओ एनआईसी अंकुश पांडेय, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित आर्मी, आईटीबीपी, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, होमगार्ड एवं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।












ज्योतिर्मठ में सामाजिक पहल, शादी-ब्याह समेत सभी आयोजनों में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर 51 हजार जुर्माना

​ज्योतिर्मठ । देवभूमि के द्वार ज्योतिर्मठ में समाज को कुरीतियों से मुक्त करने और युवा पीढ़ी को नशे की गर्त से बचाने के लिए एक साहसिक शंखनाद हुआ है। नृसिंह मंदिर वार्ड के निवासियों ने एकजुट होकर सामाजिक सरोकारों की एक नई मिसाल पेश की है। शुक्रवार को महिला मंगल दल, देवपुजाई समिति और वार्ड सभासद के नेतृत्व में आयोजित एक विशेष बैठक में जनता ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि अब वार्ड के भीतर किसी भी सामाजिक उत्सव में शराब का सेवन या वितरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​कठोर नियम और आर्थिक दंड

सामूहिक सहमति से पारित इस ऐतिहासिक प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि शादी-समारोह, मुंडन संस्कार या किसी भी अन्य सामाजिक आयोजन में शराब परोसना पूरी तरह वर्जित होगा। नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बैठक में यह निर्णय लिया गया कि उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति या परिवार पर 51,000 रुपये (इक्यावन हजार) का भारी अर्थदंड लगाया जाएगा। यह राशि महिला मंगल दल द्वारा वसूली जाएगी, ताकि सामाजिक अनुशासन बना रहे।

​शांति और समृद्धि की ओर कदम

बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने दो टूक कहा कि शराब न केवल आर्थिक बर्बादी का कारण है, बल्कि इससे सामाजिक सौहार्द और शांति व्यवस्था भी भंग होती है। स्थानीय जनता का मानना है कि इस कड़े कदम से न केवल फिजूलखर्ची रुकेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण मिल सकेगा। इस दौरान वार्ड के निवासियों ने हाथ उठाकर और शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कर इस मुहिम को अपना पूर्ण समर्थन दिया।

​इनकी रही सक्रिय भागीदारी

इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वालों में देवपुजाई समिति के अध्यक्ष, अनिल नंबुद्ररी, वार्ड-03 के सभासद दीपक शाह, महिला मंगल दल की अध्यक्ष श्रीमती सुमति देवी,प्रकाश चंद्र सती, संगीता कंवाण, संतोषी डिमरी, बबीता बिष्ट, प्रेमलता बिष्ट, सुशीला नम्बूरी, अंजना नम्बूरी और कुसुम सती सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक शामिल रहे। स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने वार्ड वासियों के इस फैसले की जमकर सराहना की है।

चारधाम यात्रा से पहले आपदा प्रबंधन की परखी गयी तैयारियां

पौड़ी : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चारधाम यात्रा के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की गयी। इसमें जनपद पौड़ी सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में अलग-अलग आपदा परिदृश्यों के तहत राहत एवं बचाव कार्यों का प्रभावी परीक्षण किया गया। मॉक अभ्यास के स्टेजिंग एरिया एनआईटी मैदान में बनाया गया था। 

श्रीनगर क्षेत्र में एनआईटी, सैनिक होटल, गढ़वाल मंडल विकास निगम, फरासू हनुमान मंदिर और सिरोबगड़ के पास मॉक अभ्यास कराया गया, जिसमें प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन समेत विभिन्न विभागों ने समन्वित रूप से भागीदारी निभायी। जिला मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम से मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत ने पूरे अभियान की निगरानी करते हुए सभी गतिविधियों पर सतत नजर बनाए रखी।

श्रीनगर क्षेत्र में आयोजित इस मॉक अभ्यास के तहत विभिन्न स्थानों को आपदा परिदृश्यों के रूप में चिन्हित कर घटनाओं का यथार्थ चित्रण किया गया। कहीं भूस्खलन की स्थिति में मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की चुनौती सामने आई, तो कहीं सड़क दुर्घटना में घायलों को त्वरित उपचार और अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था को परखा गया। अग्निकांड की स्थिति में प्रभावित स्थल से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने की तत्परता दिखाई गई, वहीं भूकंप जैसी स्थिति में क्षतिग्रस्त भवनों से रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित कर राहत कार्यों की प्रभावशीलता का परीक्षण किया गया।

अत्यधिक वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से नियंत्रित करने, यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने, भोजन एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा संवेदनशील क्षेत्रों को खाली कराने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का भी अभ्यास किया गया। इस दौरान प्रशासन द्वारा संसाधनों के समुचित प्रबंधन और त्वरित निर्णय क्षमता का प्रदर्शन किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि आपात स्थिति में व्यवस्थाओं को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा सकता है।

मॉक अभ्यास के पश्चात सभी संबंधित विभागों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गयी, जिसमें पूरे अभियान का विश्लेषण करते हुए समन्वय, संचार व्यवस्था, त्वरित प्रतिक्रिया और संसाधनों के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। ब्रीफिंग के माध्यम से अभ्यास के प्रत्येक चरण का पुनरावलोकन किया गया तथा सामने आई कमियों को गंभीरता से लेते हुए उनके सुधार के लिए ठोस रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि भविष्य में किसी भी आपदा की स्थिति में और अधिक प्रभावी एवं सुव्यवस्थित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि यह मॉक ड्रिल केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन की वास्तविक तैयारियों का व्यावहारिक परीक्षण है। इस अभ्यास के माध्यम से यह आकलन किया गया कि विभिन्न विभाग किस प्रकार आपसी समन्वय के साथ त्वरित निर्णय लेते हुए आपात स्थितियों से निपटते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभ्यास न केवल व्यवस्थाओं की मजबूती को परखते हैं, बल्कि सुधार की संभावनाओं को भी स्पष्ट करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य चारधाम यात्रा के दौरान प्रत्येक यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और इसके लिए हर स्तर पर तैयारियों को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में त्वरित, सटीक और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके।

इस अवसर पर डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव, अधीक्षण अभियंता जल संस्थान प्रवीण सैनी, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, जिला पंचायतीराज अधिकारी जितेंद्र कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी करण सिंह रावत, एसएसबी उप निरीक्षक धूम सिंह, अर्थ एवं संख्याधिकारी राम सलोने, जिला पूर्ति अधिकारी अरुण कुमार वर्मा, जिला युवा कल्याण अधिकारी रविन्द्र फोनिया, अपर सूचना विज्ञान अधिकारी हेमंत काला,  मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजेंद्र सिंह खाती, एआरटीओ एन के ओझा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी दीपेश चंद्र काला, सहायक अभियंता लोनिवि अंकिता सक्सेना, अर्चना कोली, मास्टर ट्रेनर किशन पंवार सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

नैनीताल–ऊधमसिंहनगर की योजनाओं की समीक्षा, मुख्यमंत्री धामी ने दिए सख्त निर्देश

देहरादून: पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में नैनीताल और ऊधमसिंहनगर जनपद की विभिन्न विधानसभाओं से जुड़ी मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए उनका त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याओं को शासन तक पहुंचाते हैं, इसलिए उन पर गंभीरता से कार्यवाही करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने अल्पकालिक कार्यों को शीघ्र पूरा करने और दीर्घकालिक योजनाओं को तय समयसीमा में चरणबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि बहु-विभागीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विभागों के बीच समन्वय मजबूत किया जाए और इनकी नियमित समीक्षा की जाए, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी न हो।

उन्होंने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया, जिससे समस्याओं की सही जानकारी मिल सके और उनके समाधान में तेजी आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर तालमेल से विकास कार्यों की गुणवत्ता और गति दोनों सुनिश्चित होंगी।

आगामी वर्षाकाल को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बरसाती नालों की समय से सफाई, सिल्ट हटाने और जल निकासी के प्रबंध पूरे करने के निर्देश दिए, ताकि जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं से निपटा जा सके। इसके साथ ही ग्रीष्मकाल में संभावित वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए विभागों के बीच समन्वय और जनजागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने पेयजल और बिजली आपूर्ति को लेकर भी अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित की जाएं, जिससे जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बैठक में विधायकगणों ने अपने क्षेत्रों की विभिन्न समस्याएं रखीं, जिनमें सड़क निर्माण व मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण, मिनी खेल मैदानों का निर्माण, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा, बाढ़ सुरक्षा और जलभराव जैसे मुद्दे शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने सभी समस्याओं के समयबद्ध और प्रभावी समाधान के निर्देश देते हुए कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

भारत तिब्बत सहयोग मंच उत्तराखंड के कार्यकारी अध्यक्ष बने स्वामी शिवम

देहरादून : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मार्गदर्शन में संचालित भारत तिब्बत सहयोग मंच उत्तराखंड की बैठक में संगठन विस्तार को लेकर अहम निर्णय लिया गया। बैठक में स्वामी शिवम को प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 10 अप्रैल 2026 को भारत तिब्बत सहयोग मंच उत्तराखंड की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में संगठनात्मक मजबूती और विस्तार को लेकर चर्चा की गई।

इस दौरान इन्द्रेश कुमार (राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) तथा पंकज गोयल (राष्ट्रीय महामंत्री, भारत तिब्बत सहयोग मंच) की संस्तुति पर स्वामी शिवम को उत्तराखंड प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। स्वामी शिवम चेतन ज्योति आश्रम से जुड़े हुए हैं और सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में उनकी विशेष रुचि रही है। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम वर्ष प्रशिक्षित स्वयंसेवक भी हैं, जिससे उन्हें संगठनात्मक कार्यों का अनुभव प्राप्त है।

बैठक में उम्मीद जताई गई कि उनके नेतृत्व में मंच जल्द ही पूरे प्रदेश में अपना विस्तार करेगा और समाज के विभिन्न वर्गों तक अपनी पहुंच मजबूत बनाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने स्वामी शिवम के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि संगठन उनके नेतृत्व में नई दिशा प्राप्त करेगा। स्वामी शिवम महंत जी की नियुक्ति से संगठन को नई गति मिलेगी। मुझे पूर्ण विश्वास है कि उनके कुशल नेतृत्व में भारत तिब्बत सहयोग मंच उत्तराखंड के कोने-कोने में अपना विस्तार करेगा। मैं उनके उज्जवल भविष्य और सफल कार्यकाल की मंगलकामना करता हूँ।

दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता, रिपोर्ट में खुलासा 

देहरादून/नई दिल्ली: दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर वन्यजीव संरक्षण के  क्षेत्र में एक बड़ी सफलता सामने आई है। National Highways Authority of India (NHAI) और Wildlife Institute of India (WII) द्वारा किए गए संयुक्त अध्ययन में पाया गया है कि कॉरिडोर पर लागू किए गए वन्यजीव सुरक्षा उपाय (Wildlife Mitigation Measures) काफी प्रभावी साबित हो रहे हैं। यह अध्ययन कॉरिडोर के 18 किलोमीटर लंबे गणेशपुर–अशारोड़ी खंड पर किया गया। अध्ययन के दौरान अंडरपास के माध्यम से गुजरने वाले वन्यजीवों की निगरानी की गई। जिसमें कुल 18 अलग-अलग प्रजातियों के जानवरों की 40,444 तस्वीरें रिकॉर्ड की गईं। इससे यह पुष्टि हुई है कि वन्यजीव इन अंडरपास का नियमित और सुरक्षित रूप से उपयोग कर रहे हैं।

 

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