आम श्रद्धालुओं के दर्शनों को एक मई को खुलेंगे लाटू धाम के कपाट

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के देवाल ब्लाॅक के वाण गांव में मां नंदा के भाई लाटू देवता मंदिर के कपाट शुक्रवार को पारंपरिक रीति रिवाजों के बीच आम श्रद्धालुओं के दर्शनों को खुलेंगे।

बताते चलें कि लाटू देवता का सीधा संबंध गढ़वाल और कुमाऊं की अधिष्ठात्री मां नंदा देवी से है। लाटू देवता को श्री नंदादेवी राजजात का रक्षक कहा जाता है। इसके चलते ही नंदा राजजात के मुख्य पड़ाव में लाटू देवता का मंदिर स्थित है। नंदादेवी जब एक दौर में मायके से कैलाश की ओर जा रही थी तो तब लाटू देवता को सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया। लोक कथाओं के अनुसार एक दिन लाटू देवता ने अत्यधिक प्यास के चलते भूलवश नशीले द्रव का सेवन कर उत्पात मचाया। बाद को उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने अपनी जीभ ही काट दी। इसके चलते लाटू देवता की मौन स्वरूप में पूजा की जाती है।

वाण गांव में स्थित मंदिर के गर्भगृह में लाटू देवता के निशान की पूजा की जाती है। इसके बावजूद इसकी दिव्य उर्जा का सामान्य व्यक्ति का देख पाना संभव नहीं है। इसके चलते ही गर्भगृह में प्रवेश करने वाले पुजारी आंखों में पट्टी बांध कर ही लाटू देवता की पूजा करते हैं। मंदिर में पूजा के दौरान पवित्रता बनाए रखने के लिए मुंह को कपड़े ढका जाता है। मंदिर के गर्भगृह में निर्धारित लोगों को ही प्रवेश की अनुमति है। इस तरह वाण गांव में लाटू देवता के कपाट खुलने को लोंगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। अब शुक्रवार को कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालु लाटू देवता के दर्शनों का पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगे।

बिना ट्यूशन 97% अंक : तन्वी सुंद्रियाल का शानदार प्रदर्शन, प्रशासनिक सेवा है लक्ष्य

देहरादून: काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) की ओर से घोषित आईसीएसई 10वीं और आईएससी 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणामों में देहरादून की छात्रा तन्वी सुंद्रियाल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल की छात्रा तन्वी ने आईएससी 12वीं की विज्ञान (पीसीएम) संकाय में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी मेहनत और लगन का परिचय दिया है। खास बात यह रही कि तन्वी ने यह सफलता बिना किसी ट्यूशन के हासिल की।

तन्वी ने बताया कि उन्होंने नियमित अध्ययन, एकाग्रता और समय प्रबंधन के बल पर यह उपलब्धि पाई। उन्होंने किसी भी विषय के लिए अलग से कोचिंग नहीं ली, बल्कि स्कूल की कक्षाओं और शिक्षकों के मार्गदर्शन को ही पर्याप्त माना।

अपनी सफलता का श्रेय तन्वी ने अपने स्कूल, शिक्षकों और माता-पिता को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित किया।

तन्वी का लक्ष्य आगे चलकर प्रशासनिक सेवा में करियर बनाना है। उनके पिता केंद्रीय सेवा में अधिकारी हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। तन्वी की इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार बल्कि स्कूल और क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है।

चारधाम यात्रा मॉनिटरिंग बनी मिसाल, हिमाचल में भी लागू होगा उत्तराखण्ड मॉडल
  • उत्तराखण्ड के यूएसडीएमए मॉडल से प्रभावित हुआ हिमाचल
  • चारधाम मॉनिटरिंग मॉडल बना मिसाल, हिमाचल में भी होगा लागू
  • यूएसडीएमए की तकनीक-आधारित व्यवस्था से प्रभावित हिमाचल, साझा करेगा आपदा प्रबंधन रणनीति
  • चारधाम यात्रा मॉनिटरिंग ने जीता हिमाचल का भरोसा, बढ़ेगा अंतरराज्यीय समन्वय

देहरादून। हिमाचल प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जगत सिंह नेगी ने गुरुवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का दौरा कर आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने दोनों राज्यों के बीच आपसी समन्वय एवं सहयोग को और मजबूत करने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश भौगोलिक दृष्टि से समान प्रकृति वाले पर्वतीय एवं संवेदनशील राज्य हैं, जहां भूस्खलन, अतिवृष्टि एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियां भी लगभग समान हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के बीच समन्वित रणनीति अपनाकर प्रभावी आपदा प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकता है।

इस दौरान मंत्री ने यूएसडीएमए द्वारा संचालित चारधाम यात्रा की मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली का अवलोकन किया। उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के माध्यम से केदारनाथ यात्रा की लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम, भीड़ प्रबंधन, मौसम एवं मार्ग की सतत निगरानी तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच त्वरित समन्वय की व्यवस्था को सराहा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का यह तकनीक-आधारित मॉडल अत्यंत प्रभावी है, जिसे हिमाचल प्रदेश में भी लागू किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कैलाश मणिमहेश, किन्नर कैलाश एवं श्रीखंड महादेव जैसी यात्राओं के दौरान इस प्रकार की प्रणाली से श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुचारु आवागमन एवं त्वरित आपदा प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी।

इस अवसर पर सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए की गतिविधियों एवं नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण द्वारा तकनीकी नवाचारों एवं सुदृढ़ तंत्र के माध्यम से आपदा प्रबंधन व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

मंत्री ने तहसील स्तर पर गठित की जा रही क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) की सराहना करते हुए इसे आपदा प्रबंधन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि ये टीमें आपदा के प्रारंभिक चरण में त्वरित राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने यूएसडीएमए द्वारा विकसित ‘भूदेव’ एप एवं मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की भी सराहना की तथा भूस्खलन प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों राज्यों के बीच संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘भूदेव’ एप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे आपदा संबंधी सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित हो सके।

इस अवसर पर यूप्रिपेयर के परियोजना निदेशक आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन महावीर सिंह चैहान, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी डीआईजी राजकुमार नेगी, अपर सचिव हिमाचल प्रदेश निशांत ठाकुर, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार, एसके बिरला आदि उपस्थित रहे।

10 हजार की उधारी बनी कत्ल की वजह, महीने पुराने मर्डर का खुलासा

गोपेश्वर (चमोली)। एक महीने पहले अलकनंदा नदी किनारे मिले अज्ञात शव के सनसनीखेज हत्याकांड का चमोली पुलिस ने खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस जांच में सामने आया कि महज 10 हजार की उधारी और सार्वजनिक अपमान इस हत्या की वजह बना। घटना के अनावरण पर गढ़वाल परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक ने पुलिस टीम को पांच हजार का ईनाम भी दिया गया है।

बीते माह की 10 मार्च  को लंगासू क्षेत्र में चंडिका माता मंदिर के नीचे नदी किनारे एक शव मिला था। जिसके हाथ-पैर बंधे थे। पहचान न होने पर पुलिस ने फिंगरप्रिंट और अन्य साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू की। मृतक के हाथ पर लिखे नाम के आधार पर जांच आगे बढ़ी।

बाद में सोशल मीडिया के जरिए मृतक की पहचान सूरज पुरोहित निवासी बमोथ (गौचर) के रूप में हुई। पत्नी की तहरीर पर मामला दर्ज कर एसआईटी और एसओजी की संयुक्त टीम ने जांच तेज की।

जांच में सामने आया कि सूरज पुरोहित नंदप्रयाग में रहकर काम कर रहा था और नरेन्द्र सिंह तोपाल के संपर्क में था। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी को शव को कार में ले जाते हुए देखा गया। सख्ती से पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल कर ली।

आरोपी ने बताया कि उसने उधार लिए पैसे को लेकर हो रहे विवाद और कथित अपमान से तंग आकर 16 फरवरी की रात सूरज की हत्या कर दी और शव को अलकनंदा नदी में फेंक दिया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त कार और रस्सी बरामद की है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

अपराध एवं कानून व्यवस्था अपर पुलिस महानिदेशक ने पुलिस टीम के उत्कृष्ट कार्य की प्रशंसा करते हुए घटना के अनावरण को पुलिस की तत्परता एवं पेशेवर दक्षता का बेहतर उदाहरण बताया है। प्रकरण के सफल अनावरण पर पुलिस महानिरीक्षक गढवाल परिक्षेत्र ने पुलिस टीम के उत्कृष्ट कार्य की प्रशंसा करते हुए टीम को उत्साहवर्धन स्वरूप पांच हजार का पारितोषिक प्रदान किया है।

डीएम सविन बंसल की सख्ती रंग लाई, वर्षों से खतरनाक बने 56 विद्यालय भवन किए गए ध्वस्त
  • वर्षों से नौनिहालों की सुरक्षा को खतरा बने जिले के 56 जर्जर भवन जिला प्रशासन ने कराए ध्वस्त, 
  • डीएम की सख्ती से जिले में 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 ध्वस्त, शेष पर कार्रवाई जारी;
  • शिक्षा अधिकारियों; प्रधानाचार्यों की नकेल कसने पर हुई त्वरित कार्रवाई 
  • नौनिहालों की शिक्षा एवं सुरक्षा लिए जिला प्रशासन संवेदनशील
  • जिलें में वर्षों से जर्जर पड़े सैकड़ो स्कूल भवन पहलीबार एक साथ ध्वस्त; सभी बच्चों के पठन-पाठन की वैकल्पिक व्यवस्था की सुनिश्चित
  • नौनिहालों के जीवन से नही होगा खिलवाड़ बर्दाश्तः मुख्यमंत्री के हैं सख्त निर्देश 
देहरादून।  जिला प्रशासन देहरादून द्वारा जनपद के जर्जर एवं निर्जीर्ण विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को तेज गति से संचालित किया जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी/जिलाधिकारी को प्रेषित रिपोर्ट के अनुसार, जनपद में चिन्हित कुल 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 भवनों का ध्वस्तीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जबकि शेष भवनों पर कार्रवाई प्रगति पर है। जिलाधिकारी के सख्त रूख कड़े निर्देश पर 64 जर्जर विद्यालय भवन निष्प्रोज्य ध्वस्त किए गए है। तथा शेष 8 निष्प्रोज्य भवन 1 माह के भीतर ध्वस्त कर दिए जाएंगे। इस सम्बन्ध में मुख्य शिक्षा अधिकारी ने जिलाधिकारी को अपनी आख्या प्रस्तुत की है। जिले में 04 माध्यमिक तथा 52 प्रारम्भिक विद्यालयों के भवनों का ध्वस्तीरकण किया जा चुका है। इसी प्रकार विद्यालयों में पूर्ण रूप से निष्प्रोज्य कक्षा कक्षों में माध्यमिक विद्यालय के 07 तथा प्रारम्भिक विद्यालय 10 कक्ष में से 14 का ध्वस्तीकरण किया गया है। तथा 03 निष्प्रोज्य कक्षा कक्षों को एक माह के भीतर ध्वस्त कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी की सख्ती से जिले के जर्जर पड़े सैकड़ो स्कूल भवन पहलीबार एक साथ ध्वस्त किए गए है। जिलाधिकारी द्वारा शिक्षा अधिकारियों, प्रधानाचार्यों की नकेल कसने पर जर्जर भवन के चिन्हिकरण एवं ध्वस्तीकरण की कार्यवाही हुई है।
 
जिले के विकासखण्ड चकराता में 23, कालसी में 17, विकासनगर में 8, सहसपुर में 2, रायपुर में 14, डोईवाला में 17 विद्यालय भवन चिन्हित किए गए थे। जिनमें में से कुल 70 विद्यालय भवनों एवं विद्यालय कक्षों का ध्वस्तीकरण किया जा चुका है, शेष जिन विद्यालय भवनों एवं विद्यालय कक्षों ध्वस्तीकरण विभिन्न कारणों से पूर्ण नहीं हो पाया है, ऐसे 11 पूर्ण एवं आंशिक रूप से निर्जीर्ण भवनों को ध्वस्तीकरण हेतु एक माह का अतिरिक्त समय देने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है, जर्जर भवनों को शीघ्र हटाकर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा शिक्षण कार्य बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी।
 
जिला प्रशासन ने जनपद के सभी जर्जर विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर लिया गया है। विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करना हमारी सर्वाेच्च जिम्मेदारी है, जिसके लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी निर्देशित किया गया हैै।  शेष भवनों पर भी शीघ्र कार्रवाई पूरी की जाएगी।
रेरा पोर्टल से जुड़ेगी मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया – सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार
  • रेरा पोर्टल से जुड़ेगा मानचित्र स्वीकृति सिस्टम, अवैध निर्माण पर सख्ती के संकेत
  • भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क पर पुनर्विचार के निर्देश, आवास विभाग के अधिसूचित क्षेत्र में पंचायतों का नक्शा पास करने का अधिकार खत्म, एक हफ्ते में प्रस्ताव मांगे
  • अवैध निर्माण और अनियमित कॉलोनियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए रेरा और प्राधिकरणों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा- डॉ. आर. राजेश कुमार

देहरादून : राज्य में निर्माण गतिविधियों को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में तय किया गया कि राज्य के नियोजित क्षेत्रों के बाहर स्थित परियोजनाओं के मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को उत्तराखण्ड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) की निर्माणाधीन वेबसाइट से जोड़ा जाएगा। इसके तहत मानचित्र स्वीकृति प्राधिकारियों को पोर्टल में शामिल किया जाएगा, जिससे स्वीकृति प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध हो सके। बैठक में रेरा सदस्य नरेश मठपाल, पंकज कुलश्रेष्ठ, एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया, अपर जिलाधिकारी उत्तरकाशी मुक्ता मिश्रा, संयुक्त निदेशक पंचायती राज एमएस राणा, वरिष्ठ नगर एवं ग्राम नियोजक शशि मोहन श्रीवास्तव समेत विभिन्न प्राधिकरणों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। बैठक में रेरा से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और निर्माण स्वीकृति से संबंधित जटिलताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क पर पुनर्विचार के संकेत

बैठक में 1 अगस्त 2025 के शासनादेश के तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में बढ़ोतरी के मुद्दे पर विशेष चर्चा हुई। वर्तमान प्रावधान के अनुसार, आवासीय या पर्यटन उपयोग में परिवर्तन पर सर्किल रेट के बराबर शुल्क तथा व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तन पर 1.5 गुना शुल्क लिया जा रहा है अधिकारियों ने बताया कि बढ़े हुए शुल्क के कारण आम लोगों को मानचित्र स्वीकृति में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर आवास सचिव ने सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने बोर्ड की बैठकों में इस विषय पर विचार कर एक सप्ताह के भीतर संशोधित प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराएं, ताकि जनहित में राहत देने पर निर्णय लिया जा सके।

आवास विभाग के अधिसूचित क्षेत्र में पंचायतों का नक्शा पास करने का अधिकार समाप्त

बैठक में एक बड़ा निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया गया कि अब पंचायती राज संस्थाओं को अधिसूचित क्षेत्रों में नक्शा पास करने का अधिकार नहीं रहेगा। दरअसल, 2025 के संशोधित अधिनियम की धारा-59 के तहत पंचायती राज अधिनियम की धारा-106 को निरस्त कर दिया गया है। इसके चलते अब केवल विकास प्राधिकरण ही अधिसूचित क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इस निर्णय के बाद आवास विभाग ने पंचायती राज विभाग को निर्देशित किया कि वे तत्काल प्रभाव से एक सर्कुलर जारी कर सभी जिला पंचायतों को इस नई व्यवस्था की जानकारी दें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

रेरा के जरिए कॉलोनियों पर कड़ी निगरानी

बैठक में यह भी तय किया गया कि विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित क्षेत्रों से बाहर भी यदि कहीं भूखंडों का उपविभाजन या कॉलोनी विकसित की जा रही है, तो वहां रेरा के माध्यम से सख्त निगरानी और विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्राधिकरणों और रेरा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अवैध कॉलोनियों और अनियोजित विकास पर रोक लगाई जा सके।

अवैध निर्माण रोकने के लिए बनेगा कॉमन ड्राफ्ट

राज्य में बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर भी बैठक में चिंता जताई गई। स्थगित क्षेत्रों में कार्रवाई के दौरान आ रही दिक्कतों को देखते हुए आवास सचिव ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को निर्देश दिए कि अवैध निर्माण रोकने के लिए एक कॉमन ड्राफ्ट तैयार किया जाए। यह ड्राफ्ट सभी प्राधिकरणों के लिए एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करेगा, जिससे अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज और प्रभावी हो सकेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इस ड्राफ्ट को जल्द से जल्द शासन को उपलब्ध कराया जाए।

ऑनलाइन सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता

बैठक के अंत में आवास सचिव ने कहा कि रेरा पोर्टल के माध्यम से मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को ऑनलाइन करने से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी। साथ ही आम लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने और तय समयसीमा के भीतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस बैठक के फैसलों से साफ है कि राज्य सरकार निर्माण क्षेत्र में सख्ती के साथ-साथ व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में इसका सीधा असर आम लोगों और रियल एस्टेट सेक्टर दोनों पर देखने को मिलेगा।

मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को रेरा पोर्टल से जोड़ा जाएगा- डॉ. आर. राजेश कुमार

राज्य में निर्माण और विकास गतिविधियों को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के लिए सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। आज की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को रेरा पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी बन सके। इससे आम नागरिकों को अनावश्यक जटिलताओं से राहत मिलेगी और समयबद्ध स्वीकृति सुनिश्चित होगी। भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क को लेकर प्राप्त फीडबैक के आधार पर सभी विकास प्राधिकरणों से प्रस्ताव मांगे गए हैं, ताकि जनमानस को राहत देने के विकल्पों पर विचार किया जा सके। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अधिसूचित क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति का अधिकार केवल प्राधिकरणों के पास होगा, जिससे एकरूपता बनी रहे। अवैध निर्माण और अनियमित कॉलोनियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए रेरा और प्राधिकरणों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। हमारा उद्देश्य है कि विकास योजनाएं नियमों के अनुरूप हों और आम जनता को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था का लाभ मिल सके।

UKSSSC भर्ती परीक्षा स्थगित, युवाओं को बड़ा झटका

देहरादून : उत्तराखण्ड में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे हजारों युवाओं के लिए एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) ने अचानक समूह ‘ग’ (Group C) भर्ती परीक्षा को स्थगित कर दिया है। यह फैसला ठीक उस समय लिया गया है जब अभ्यर्थी अपनी तैयारी के अंतिम चरण में थे, जिससे छात्रों में निराशा और असमंजस का माहौल बन गया है।

3 मई को होनी थी परीक्षा, अब अगली सूचना तक टली

आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार समूह ‘ग’ (Group C) की यह महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित होने वाली थी। उम्मीदवार महीनों से इसकी तैयारी में जुटे थे, लेकिन अचानक परीक्षा टलने से उनकी रणनीति पर सीधा असर पड़ा है।

57 पदों पर सीधी भर्ती, तकनीकी अभ्यर्थियों के लिए बड़ा मौका

इस भर्ती के तहत कुल 57 पदों पर नियुक्ति की जानी थी। खास बात यह थी कि ये पद विशेष तकनीकी योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों के लिए थे। यही कारण है कि बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी इस परीक्षा का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

आखिर क्यों टली परीक्षा?

UKSSSC ने परीक्षा स्थगित करने के पीछे “अपरिहार्य कारण” बताए हैं, लेकिन अभी तक इन कारणों का कोई स्पष्ट खुलासा नहीं किया गया है। यही वजह है कि छात्रों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं – क्या यह प्रशासनिक समस्या है, पेपर से जुड़ा मुद्दा है या कुछ और?

उम्मीदवारों के लिए जरूरी निर्देश

आयोग ने सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहें। किसी भी तरह की अफवाहों से बचें और सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।

पौड़ी गढ़वाल : बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत मेधावी छात्राओं का सम्मान, शिक्षा के लिए किया प्रेरित

थलीसैंण : महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत विकासखंड थलीसैंण क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विभागीय अधिकारियों ने छात्राओं एवं उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया।

उपजिलाधिकारी थलीसैंण कृष्णा त्रिपाठी द्वारा पूर्व में निर्देश दिए गए थे कि अपने-अपने विद्यालयों में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि उनका मनोबल बढ़े और अन्य छात्राएं भी प्रेरित हों। इसी क्रम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने छात्राओं से उच्च शिक्षा की तैयारी को लेकर संवाद किया और उन्हें निरंतर प्रयास करते हुए अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही अभिभावकों से भी बेटियों की शिक्षा में सहयोग बनाए रखने की अपील की गयी। 

बाल विकास परियोजना अधिकारी पूजा रावत ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे, जिससे बालिकाओं में शिक्षा के प्रति जागरुकता और उत्साह बढ़े। इस अवसर पर अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत दीपक प्रताप, कानूनगो जयप्रकाश शाह, सुपरवाइजर पूजा रावत, पटवारी हरेंद्र चौहान सहित छात्राएं उपस्थित रहीं।

द इंडियन एकेडमी कर्णप्रयाग का शानदार प्रदर्शन, 12वीं में सौम्या 97.5% के साथ जिला टॉपर

कर्णप्रयाग। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके ‘द इंडियन एकेडमी’ कर्णप्रयाग ने एक बार फिर बोर्ड परीक्षाओं में अपनी श्रेष्ठता का लोहा मनवाया है। आईसीएसई (कक्षा 10वीं) और आईएससी (कक्षा 12वीं) के घोषित परिणामों में विद्यालय ने न केवल शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त की, बल्कि पूर्व वर्षों की परंपरा को कायम रखते हुए चमोली जिले में सर्वोच्च स्थान भी हासिल किया है।

इंटरमीडिएट (आईएससी) के परिणामों में विद्यालय की छात्रा सौम्या चौहान ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 97.5 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। सौम्या ने जिले में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक क्षमता को सिद्ध किया है। उनके साथ ही मानसी जैन ने 97 प्रतिशत और दीपिका पंत ने 96.25 प्रतिशत अंक हासिल कर विद्यालय की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया। इन मेधावी छात्र-छात्राओं की इस अभूतपूर्व सफलता से पूरे विद्यालय परिवार और कर्णप्रयाग क्षेत्र में खुशी की लहर है।

हाईस्कूल (आईसीएसई) के परिणाम भी बेहद शानदार रहे। विद्यालय के सभी परीक्षार्थियों ने 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर अपनी योग्यता का परिचय दिया। कक्षा 10 में सिद्धार्थ भंडारी 91 प्रतिशत अंकों के साथ विद्यालय में प्रथम स्थान पर रहे। इनके अलावा अन्य छात्रों ने क्रमशः 88.4, 88 और 85.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी कड़ी मेहनत का फल प्राप्त किया।

विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती गीता खंडूरी ने इस शानदार उपलब्धि का श्रेय विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के निरंतर सहयोग को दिया। उन्होंने कहा, “यह सफलता हमारे विद्यार्थियों के निरंतर परिश्रम, विद्यालय के अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का परिणाम है।” उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भी विद्यालय इसी तरह जिले और प्रदेश का नाम रोशन करता रहेगा।

परिणाम घोषित होने के बाद विद्यालय प्रबंधन और समस्त स्टाफ ने सफल छात्र-छात्राओं को मिठाई खिलाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने भी विद्यालय की इस उपलब्धि को कर्णप्रयाग के लिए गौरव का विषय बताया है।

 

पौड़ी गढ़वाल: बच्चों की सुरक्षा व कार्यस्थल पर लैंगिक सम्मान के लिए जागरुकता कार्यक्रम आयोजित

पौड़ी : जनपद में बच्चों की सुरक्षा एवं कार्यस्थल पर लैंगिक सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में जिला परिवीक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, कोठार में पॉक्सो एवं पॉश अधिनियम, 2013 पर व्यापक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में जिला परिवीक्षा अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में बच्चों के प्रति संवेदनशीलता, सतर्कता एवं त्वरित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पॉक्सो एवं पॉश अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, शिकायत निवारण तंत्र, रिपोर्टिंग प्रक्रिया तथा विद्यालय स्तर पर अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

प्रधानाचार्य पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, कोठार अनीता बिष्ट ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को न केवल कानूनी रूप से सशक्त बनाते हैं, बल्कि विद्यालय परिसर को बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित एवं विश्वासपूर्ण वातावरण प्रदान करने में भी सहायक होते हैं।

इस अवसर पर बाल कल्याण समिति की अध्यक्षा द्वारा पॉक्सो एक्ट पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यालय के 26 शिक्षक-शिक्षिकाएं सक्रिय रूप से शामिल रहे। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बच्चों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा, दुरुपयोग की पहचान तथा समयबद्ध हस्तक्षेप की प्रक्रिया के संबंध में व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गयी।

कार्यक्रम में संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थागत) प्रज्ञा नैथानी, विधि सह परिवीक्षा अधिकारी (जिला बाल संरक्षण इकाई) निखिल सहित अन्य शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।