श्री केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं के लिए योग एवं प्राणायाम शिविर का शुभारंभ

केदारनाथ : श्री केदारनाथ धाम में जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. आर. एस. पाल के निर्देशन एवं नोडल अधिकारी डॉ. घनेंद्र वशिष्ठ के विशेष प्रयासों से समुद्र तल से 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर श्रद्धालुओं के शारीरिक स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक शांति के उद्देश्य से योग एवं प्राणायाम शिविर का शुभारंभ किया गया।

भगवान शिव के 11वें ज्योतिर्लिंग बाबा केदार के दर्शन हेतु देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को उच्च हिमालयी क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुकूल बनाने हेतु यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। केदारनाथ जैसे उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी एवं अत्यधिक ठंड के कारण स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां उत्पन्न होती हैं, जिनसे निपटने में योग एवं प्राणायाम अत्यंत प्रभावी सिद्ध होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, प्राणायाम शरीर को गर्म रखने, रक्तचाप को संतुलित करने तथा श्वसन क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक है। विशेष रूप से वे यात्री जो पैदल मार्ग के स्थान पर हेली सेवाओं से सीधे केदारनाथ पहुंचते हैं, उनके लिए यह अभ्यास शरीर को वातावरण के अनुरूप ढालने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

आयुर्वेद विभाग द्वारा केदारनाथ मंदिर के पीछे चयनित उपयुक्त स्थल पर प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से 11:00 बजे तक प्रशिक्षित योग अनुदेशक के निर्देशन में निशुल्क योगाभ्यास कराया जा रहा है।

विभाग द्वारा सभी श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि यदि उन्हें उच्च रक्तचाप, श्वास लेने में कठिनाई अथवा अन्य शारीरिक असुविधा का अनुभव हो, तो वे इस शिविर में अवश्य सहभागिता करें। योग एवं प्राणायाम के नियमित अभ्यास से न केवल स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, बल्कि उनकी यात्रा भी अधिक सुरक्षित एवं सुखद बन सकेगी।

जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. आर. एस. पाल ने कहा “केदारनाथ धाम जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्र में श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। योग एवं प्राणायाम जैसी प्राचीन भारतीय विधाएं शरीर को वातावरण के अनुरूप ढालने में अत्यंत प्रभावी हैं। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक श्रद्धालु स्वस्थ, सुरक्षित एवं सुखद यात्रा का अनुभव प्राप्त करे।”

नोडल अधिकारी डॉ. घनेंद्र वशिष्ठ ने कहा “उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में अचानक पहुंचने से शरीर पर प्रभाव पड़ता है, विशेषकर श्वसन एवं रक्तचाप संबंधी समस्याएं सामने आती हैं। योग एवं प्राणायाम इन समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध करते हैं कि इस निशुल्क सुविधा का लाभ उठाकर अपनी यात्रा को अधिक सहज एवं सुरक्षित बनाएं।”

अपील

आयुर्वेद विभाग ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे इस पहल का अधिकतम लाभ उठाएं तथा ‘स्वस्थ यात्रा – सुरक्षित यात्रा’ का संदेश देश-विदेश तक पहुंचाने में सहयोग करें।

डीएम स्वाति एस. भदौरिया ने दुगड्डा ग्रोथ सेंटर में मसाला व हर्बल चाय यूनिट का किया निरीक्षण, सेमी-ऑटोमेशन व ऑनलाइन बिक्री के निर्देश
  • पीरुल यूनिट स्थापना की तैयारी, उत्पादन वृद्धि व एमओयू प्रक्रिया तेज करने पर जोर
  • जिलाधिकारी ने महिला समूहों से किया संवाद, स्वरोजगार हेतु किया प्रेरित

पौड़ी : जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने विकासखण्ड दुगड्डा के अंतर्गत उमठगांव स्थित राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा संचालित फल एवं मसाला आधारित प्रसंस्करण ग्रोथ सेंटर का निरीक्षण किया। इस केंद्र में नवदुर्गा क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा संचालित मसाला यूनिट तथा लक्ष्य स्वायत्त सहकारिता फरसूल की हर्बल चाय यूनिट संचालित हैं।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने दोनों इकाइयों में उत्पादन एवं विपणन की प्रक्रियाओं का अवलोकन किया तथा समूह की महिलाओं से संवाद कर उत्पादों एवं पैकेजिंग की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने पाया कि मसाला यूनिट में वर्तमान में अधिकांश कार्य मैन्युअल रूप से किया जा रहा है, जिस पर उन्होंने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए यूनिट को सेमी-ऑटोमेटिक बनाने पर जोर दिया। साथ ही आवश्यक मशीनों के लिए प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी को निर्देशित किया कि समूह के उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री अमेजॉन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर सुनिश्चित की जाए, जिससे बाजार विस्तार के साथ आय में वृद्धि हो सके।

इसके उपरांत उन्होंने लक्ष्य स्वायत्त सहकारिता फरसूल द्वारा संचालित हर्बल चाय यूनिट का निरीक्षण किया तथा ग्रामोत्थान परियोजना प्रतिनिधि को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्टॉक, क्रय एवं विक्रय पंजिकाओं का निरीक्षण करते हुए उत्पादन की स्थिति का जायज़ा लिया और व्यय का विस्तृत लेखा-जोखा तैयार करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान समूह की महिलाओं द्वारा पीरुल यूनिट स्थापना की इच्छा व्यक्त की गई। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि चयनित भूमि का प्रस्ताव देने, मशीनों की खरीद तथा अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को शीघ्र प्रारंभ किया जाए। साथ ही वन विभाग के साथ एमओयू की प्रक्रिया जल्द पूर्ण करने एवं ब्रिकेट निर्माण हेतु यूनिट स्थापित करने को कहा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा बेलिंग यूनिट की स्थापना संभव न हो, तो इस संबंध में जिला कार्यालय में प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत किया जाए।

जिलाधिकारी ने महिलाओं से संवाद करते हुए उनके अनुभवों को जाना, उनसे महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए तथा विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर उनका फीडबैक लिया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं को आगे बढ़ने, आत्मनिर्भर बनने और विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। मुलाकात के बाद महिलाएं काफी उत्साहित नजर आईं और उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रशासन की इस पहल की सराहना की। इस अवसर पर प्रभारी तहसीलदार राजेंद्र सनवाल, बीडीओ विद्यादत्त रतूड़ी, समूह की महिलाएं तथा अन्य उपस्थित रहे।

वनाग्नि रोकथाम को लेकर डीएम स्वाति एस. भदौरिया सख्त, 01 मई से फायर अलार्म सिस्टम लागू, लापरवाहों पर होगी सख्त कार्रवाई
  • वनाग्नि रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन सख़्त, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली व जनसहभागिता पर जोर
  • संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशिक्षण, निगरानी एवं त्वरित सूचना तंत्र को सुदृढ़ करने पर जोर, सभी डीएफओ करेंगे सतत निगरानी
  • लागू होगा रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, तहसील स्तर पर एसडीएम करेंगे समन्वय बैठक
  • वनाग्नि रोकथाम के लिए ग्राम पंचायत स्तर तक नेटवर्क मजबूत, प्रधानों व विभागीय दलों के संयुक्त समूह बनेंगे

पौड़ी : जनपद में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम, त्वरित नियंत्रण एवं प्रभावी प्रबंधन के उद्देश्य से जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। बैठक में वन विभाग, प्रशासन एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ वनाग्नि के कारणों, रोकथाम के उपायों, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली एवं जनसहभागिता को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की गयी।

बैठक के दौरान प्रभागीय वनाधिकारी ने जानकारी दी कि वनाग्नि की अधिकांश घटनाएं सिविल क्षेत्रों में सामने आ रही हैं। इस पर जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में मैनुअल रिपोर्टिंग के माध्यम से सजग निगरानी की जा रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि 1 मई से फायर अलार्म सिस्टम के अनुरूप सभी घटनाओं की सटीक एवं समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रभावी नियंत्रण एवं त्वरित कार्रवाई संभव हो सके।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जो व्यक्ति जानबूझकर आड़ा फूकान की घटनाओं में संलिप्त पाए जाते हैं, उन्हें चिन्हित करते हुए उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाय तथा जनजागरुकता के माध्यम से ऐसे कृत्यों से बचने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने संवेदनशील वन रेंज के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों के प्रधानों का न्याय पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण संबंधित क्रू स्टेशन के सहयोग से आयोजित किया जाएगा, जिसमें आवश्यक अग्निशमन उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। बैठक में ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को इस कार्य हेतु नोडल अधिकारी नामित करते हुए ग्राम प्रधानों के समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में टोल-फ्री नंबर 1926 को प्रदर्शित किया जाय तथा सूचना तंत्र को सशक्त किया जाए, जिससे किसी भी वनाग्नि की सूचना त्वरित रूप से क्रू स्टेशनों तक पहुंच सके। उन्होंने वन विभाग को ग्राम प्रधानों के साथ सतत समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया। बैठक में जिलाधिकारी ने कंट्रोल बर्निंग की स्थिति की जानकारी ली तथा निर्देश दिए कि वनाग्नि की घटनाओं में रिस्पॉन्स टाइम का आकलन कर उसे न्यूनतम किया जाए और इन घटनाओं को आपदा की तरह गंभीरता से लिया जाए। अग्निशमन विभाग से उपलब्ध उपकरणों एवं कॉल रिस्पॉन्स सिस्टम की भी विस्तृत जानकारी ली गयी।

पीरूल (चीड़ की पत्तियों) के संग्रहण के संबंध में जिलाधिकारी ने डीएफओ को संबंधित संस्था से एमओयू करने के निर्देश दिए, जिससे वनाग्नि की घटनाओं में कमी लायी जा सके। जिलाधिकारी ने डीएफओ लैंसडाउन को निर्देशित किया कि उनके द्वारा तैयार मानक संचालन प्रक्रिया को जनपद में व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए। साथ ही, उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे एक सप्ताह के भीतर तहसील स्तर पर बैठक आयोजित करें, जिसमें एसडीओ वन, एडीओ पंचायत, ग्राम प्रधान, पटवारी एवं खंड विकास अधिकारी सम्मिलित हों।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों, डीएफओ एवं उप प्रभागीय वनाधिकारियों के साथ वनाग्नि के कारणों, रोकथाम के उपायों एवं प्रभावी नियंत्रण के संबंध में विस्तार से संवाद किया। उन्होंने निर्देशित किया कि ग्राम प्रधानों के साथ व्हाट्सएप समूह बनाए जाएं, जिससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत स्तर पर वीडीओ, वीपीडीओ, पटवारी एवं क्रू स्टेशन प्रभारियों के संयुक्त समूह गठित किए जाएं। युवक मंगल दलों को भी “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” के रूप में शामिल करते हुए उन्हें प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक क्रू स्टेशन का ग्राम पंचायतों के साथ मानचित्रण किया जाए जिससे सभी प्रधानों को अपनी निकटस्थ क्रू स्टेशन की जानकारी रहे। साथ ही ग्राम पंचायतों के निकटस्थ क्रू स्टेशनों की सूची उपजिलाधिकारियों को उपलब्ध करायी जाए, जिससे आपात स्थिति में त्वरित संपर्क स्थापित हो सके। साथ ही, वाहनों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार कर जनजागरुकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

बैठक में डीएफओ द्वारा अवगत कराया गया कि वनाग्नि की घटनाओं की निगरानी हेतु एक सप्ताह के भीतर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।

इस अवसर पर डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव, सिविल एवं सोयम पवन नेगी, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, डीपीआरओ जितेंद्र कुमार, अग्निशमन अधिकारी राजेंद्र खाती, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी दीपेश चंद्र काला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही अन्य उपजिलाधिकारी, डीएफओ तथा एसडीओ वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।

कुंभ मेला-2027 की तैयारियों को लेकर अपर मेलाधिकारी दयानंद ने किया स्थलीय निरीक्षण, वेद निकेतन घाट – खड़खड़ी श्मशान घाट एवं सूखी नदी पर पुल के नवनिर्माण कार्य का लिया जायजा

हरिद्वार : कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के अंतर्गत अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने गुरुवार को विभिन्न प्रस्तावित योजनाओं एवं निर्माण स्थलों का स्थलीय निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने वेद निकेतन घाट, खड़खड़ी श्मशान घाट तथा खड़खड़ी क्षेत्र में सूखी नदी पर निर्माणाधीन पुल का जायजा लिया।

अपर मेलाधिकारी ने वेद निकेतन घाट का निरीक्षण करते हुए कुंभ मेला मद से स्वीकृत योजना के अनुरूप घाट के सुदृढ़ीकरण, सुरक्षा उपायों तथा आवश्यक निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार समयबद्ध ढंग से पूर्ण किए जाएं।

इसके उपरांत उन्होंने खड़खड़ी श्मशान घाट का निरीक्षण कर वहां कुंभ मेला मद से प्रस्तावित विभिन्न कार्यों की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि कुंभ मेला मद से श्मशान घाट में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार एवं जीर्णोद्धार के कार्य किए जाएंगे। इसके अंतर्गत घाट एवं शवदाह प्लेटफॉर्म का विस्तार, शवदाह स्थल की चिमनियों की ऊंचाई बढ़ाना, गैस आधारित शवदाह चैम्बर का निर्माण तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है।

अपर मेलाधिकारी ने मौके पर इन कार्यों के लिए उपलब्ध भूमि एवं प्रस्तावित योजनाओं की उपयोगिता का परीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी कार्यों के लिए ग्रामीण निर्माण विभाग को विस्तृत आगणन तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

निरीक्षण के दौरान अपर मेलाधिकारी ने खड़खड़ी क्षेत्र में सूखी नदी पर निर्माणाधीन दो लेन स्टील पुल का भी स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य में और अधिक तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि परियोजना के प्रत्येक चरण की स्पष्ट टाइमलाइन तैयार की जाए तथा गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों का विशेष ध्यान रखते हुए कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्माण कार्य आगामी 31 अक्टूबर तक हर हाल में पूरा होना आवश्यक है।

निरीक्षण के दौरान अपर मेलाधिकारी ने खड़खड़ी श्मशान सेवा समिति के अध्यक्ष जगत सिंह तथा अन्य पदाधिकारियों के साथ ही स्थानीय नागरिकों से भी मुलाकात कर उनके सुझाव एवं फीडबैक प्राप्त किए।

इस अवसर पर मेला कार्यालय के तकनीकी प्रकोष्ठ के अधिशासी अभियंता अनुभव नौटियाल के अलावा लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग एवं ग्रामीण निर्माण विभाग के अभियंता भी उपस्थित रहे।

डीएम सविन बंसल की सख्ती का असर, वर्षों से नौनिहालों की सुरक्षा को खतरा बने जिले के 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 ध्वस्त, शेष पर कार्रवाई जारी
  • डीएम की सख्ती से जिले में 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 ध्वस्त, शेष पर कार्रवाई जारी
  • शिक्षा अधिकारियों; प्रधानाचार्यों की नकेल कसने पर हुई त्वरित कार्रवाई 
  • नौनिहालों की शिक्षा एवं सुरक्षा लिए जिला प्रशासन संवेदनशील
  • जिलें में वर्षों से जर्जर पड़े सैकड़ो स्कूल भवन पहलीबार एक साथ ध्वस्त; सभी बच्चों के पठन-पाठन की वैकल्पिक व्यवस्था की सुनिश्चित
  • नौनिहालों के जीवन से नही होगा खिलवाड़ बर्दाश्तः मुख्यमंत्री के हैं सख्त निर्देश 
देहरादून : जिला प्रशासन देहरादून द्वारा जनपद के जर्जर एवं निर्जीर्ण विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को तेज गति से संचालित किया जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी/जिलाधिकारी को प्रेषित रिपोर्ट के अनुसार, जनपद में चिन्हित कुल 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 भवनों का ध्वस्तीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जबकि शेष भवनों पर कार्रवाई प्रगति पर है।
जिलाधिकारी के सख्त रूख कड़े निर्देश पर 64 जर्जर विद्यालय भवन निष्प्रोज्य ध्वस्त किए गए है। तथा शेष 8 निष्प्रोज्य भवन 1 माह के भीतर ध्वस्त कर दिए जाएंगे। इस सम्बन्ध में मुख्य शिक्षा अधिकारी ने जिलाधिकारी को अपनी आख्या प्रस्तुत की है। जिले में 04 माध्यमिक तथा 52 प्रारम्भिक विद्यालयों के भवनों का ध्वस्तीरकण किया जा चुका है। इसी प्रकार विद्यालयों में पूर्ण रूप से निष्प्रोज्य कक्षा कक्षों में माध्यमिक विद्यालय के 07 तथा प्रारम्भिक विद्यालय 10 कक्ष में से 14 का ध्वस्तीकरण किया गया है। तथा 03 निष्प्रोज्य कक्षा कक्षों को एक माह के भीतर ध्वस्त कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी की सख्ती से जिले के जर्जर पड़े सैकड़ो स्कूल भवन पहलीबार एक साथ ध्वस्त किए गए है। जिलाधिकारी द्वारा शिक्षा अधिकारियों, प्रधानाचार्यों की नकेल कसने पर जर्जर भवन के चिन्हिकरण एवं ध्वस्तीकरण की कार्यवाही हुई है। 
जिले के विकासखण्ड चकराता में 23, कालसी में 17, विकासनगर में 8, सहसपुर में 2, रायपुर में 14, डोईवाला में 17 विद्यालय भवन चिन्हित किए गए थे। जिनमें में से कुल 70 विद्यालय भवनों एवं विद्यालय कक्षों का ध्वस्तीकरण किया जा चुका है, शेष जिन विद्यालय भवनों एवं विद्यालय कक्षों ध्वस्तीकरण विभिन्न कारणों से पूर्ण नहीं हो पाया है, ऐसे 11 पूर्ण एवं आंशिक रूप से निर्जीर्ण भवनों को ध्वस्तीकरण हेतु एक माह का अतिरिक्त समय देने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है, जर्जर भवनों को शीघ्र हटाकर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा शिक्षण कार्य बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी।
जिला प्रशासन ने जनपद के सभी जर्जर विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर लिया गया है। विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करना हमारी सर्वाेच्च जिम्मेदारी है, जिसके लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी निर्देशित किया गया हैै।  शेष भवनों पर भी शीघ्र कार्रवाई पूरी की जाएगी।
फल सब्जियों में कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर सरकार सख्त, कृषि विभाग के साथ मिलकर जनजागरुकता अभियान चलाएगा खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन

देहरादून : फल – सब्जियों में कीटनाशक अवशेषों के प्रयोग को लेकर खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन सख्त हो गया है। विभाग ने जहां एक और प्रदेश भर में फल – सब्जियों के सैम्पल लेकर प्रयोगशाला जांच की पहल शुरु की है, वहीं कृषि एवं उद्यान विभाग को भी पत्र भेजकर किसानों को कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने को कहा है।

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त सचिन कुर्वे की ओर से सचिव कृषि एवं उद्यान को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा समय-समय पर चलाए गए सर्विलांस अभियानों में खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अवशेष पाए जाने की पुष्टि हुई है। पत्र में बताया गया कि कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों के अवैज्ञानिक उपयोग के कारण फल, सब्जियां एवं अन्य खाद्य पदार्थों में अवशेष तय मानकों से अधिक मिल रहे हैं, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इसलिए इस विषय पर किसानों के बीच जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित किए जाने की आवश्यकता है। साथ ही फल सब्जी विक्रेताओं और स्थानीय मंडियों के व्यापारियों को भी इस बारे में जागरुक किए जाने की आवश्यकता है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के उपायुक्त (मुख्यालय) गणेश कंडवाल ने बताया कि आयुक्त के दिशा निर्देशों के क्रम मे विभाग ने प्रदेश भर में फलों के सैम्पल लेकर, प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे हैं। अब तक प्रदेश भर से आम, केला, पपीता, तरबूज जैसे फलों के 95 सैम्पल लिए जा चुके हैं। अभियान लगातार जारी रहेगा।

प्रदेश में इस समय चारधाम यात्रा चल रही है, साथ ही पयर्टन सीजन भी शुरु हो चुका है। इसलिए जन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, खाद्य पदार्थों में मिलावट और हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर सख्ती करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दिशा में सभी विभागों को मिलकर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

अवैध निर्माणों पर एमडीडीए का सख्त अभियान जारी, सेक्टरवार टीमें सक्रिय, ध्वस्तीकरण व सीलिंग की लगातार कार्रवाई
  • मेहुवाला माफी में 15 से 20 बीघा अवैध प्लॉटिंग पर चला बुलडोजर, जाखन और कुठाल गेट क्षेत्र में सीलिंग की कार्रवाई

देहरादून : मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ व्यापक अभियान लगातार जारी है। प्राधिकरण ने सेक्टरवार टीमों का गठन कर प्रत्येक दिन निरीक्षण और कार्रवाई सुनिश्चित की है, जिससे शहर के नियोजित विकास को गति मिल सके और अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। एमडीडीए के अधिकारियों के निर्देशों के तहत मेहुवाला माफी, राजपुर, जाखन तथा कुठाल गेट डोईवाला क्षेत्रों में अवैध निर्माण और प्लॉटिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए। संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के आदेशों के अनुपालन में कई स्थानों पर ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई की गई, जिससे अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों में हड़कंप मच गया।

जाखन और कुठाल गेट क्षेत्र में सीलिंग की कार्रवाई

प्राधिकरण द्वारा जाखन जोहड़ी रोड के निकट एसबीआई के पास मनीष कौशल द्वारा निर्मित अवैध बहुमंजिला भवन को सील किया गया। इसके अतिरिक्त, कुठाल गेट क्षेत्र में भी दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की गई। दिलशाद हुसैन द्वारा बेस्ट ग्रीन वैली, मसूरी रोड के निकट किए गए अवैध निर्माण को सील किया गया। वहीं, कुलदीप सलूजा द्वारा कुठाल गेट के समीप किए गए दो अवैध निर्माणों पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई। इन सभी कार्रवाइयों को सहायक अभियंता शैलेन्द्र सिंह रावत, अवर अभियंता सचिन कुमार एवं सुपरवाइजर की मौजूदगी में विधिवत अंजाम दिया गया।

मेहुवाला माफी में अवैध प्लॉटिंग पर चला बुलडोजर

एमडीडीए ने मेहुवाला माफी क्षेत्र में भी बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 15 से 20 बीघा भूमि पर बिना स्वीकृत मानचित्र के की जा रही अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त कर दिया। यह प्लॉटिंग सुरेश कुमार एवं अन्य द्वारा दुर्गा विहार कॉलोनी के निकट विकसित की जा रही थी। इस कार्रवाई को सहायक अभियंता विजय सिंह रावत, अवर अभियंता मुनेश राणा, सुपरवाइजर तथा पुलिस बल की उपस्थिति में अंजाम दिया गया। प्राधिकरण की इस कार्रवाई से अवैध प्लॉटिंग में संलिप्त लोगों में स्पष्ट संदेश गया है कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अवैध निर्माण और प्लॉटिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति- बंशीधर तिवारी

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और प्लॉटिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देहरादून और आसपास के क्षेत्रों के संतुलित और सुव्यवस्थित विकास के लिए यह आवश्यक है कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित नियमों और स्वीकृत मानचित्र के अनुसार ही किए जाएं। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण द्वारा सेक्टरवार टीमों का गठन कर नियमित निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सके। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि अवैध निर्माण न केवल शहर की संरचना को प्रभावित करते हैं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने आम जनता से अपील की कि किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले प्राधिकरण से स्वीकृति अवश्य प्राप्त करें और नियमों का पालन करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कार्रवाई से बचा जा सके।

अवैध प्लॉटिंग या निर्माण की सूचना प्राधिकरण को दें- मोहन सिंह बर्निया

एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माणों से सम्बन्धित गतिविधियों के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया जा रहा है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है और प्रकरणों पर नियमानुसार तत्काल प्रभाव से सीलिंग व ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राधिकरण की प्राथमिकता शहर का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करना है। इसके लिए आम नागरिकों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अवैध प्लॉटिंग या निर्माण में शामिल न हों और गतिविधि की सूचना प्राधिकरण को दें।

ड्रग्स के खिलाफ सख्ती बढ़ेगी, 15 दिन में तैयार होगा एक्शन प्लान – मुख्य सचिव

देहरादून : मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में राज्य स्तरीय नेशनल कोआर्डिनेशन सेंटर फॉर ड्रग लॉ एनफोर्समेंट (NCORD) की 11वीं बैठक संपन्न हुयी। बैठक के दौरान नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध व्यापार को रोके जाने को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों से बात कर जनपदों की स्थिति की जानकारी भी ली। उन्होंने जनपद स्तरीय एनकॉर्ड बैठकों का निर्धारित समय सीमा पर नियमित रूप से आयोजित किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने अगले 15 दिनों में मादक पदार्थों के खिलाफ अगले एक वर्ष का राज्य स्तरीय एवं जनपद स्तरीय रोडमैप तैयार कर प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी सम्बन्धित विभाग सहित जनपद भी अपना एनफोर्समेंट और रिहेबिलिटेशन आदि को लेकर रोडमैप अगले 15 दिनों में सचिव गृह को उपलब्ध कराएं।

मुख्य सचिव ने मादक पदार्थों से सम्बन्धित सभी मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि व्यवसायिक मात्रा में पकड़े गए मादक पदार्थों के मामलों को गंभीरता से लेते हुए लगातार फॉलोअप किया जाए, ताकि दोषियों पर यथोचित कार्रवाई की जा सके। उन्होंने पुलिस विभाग को मादक पदार्थों की सप्लाई चैन तोड़े जाने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाये जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने आमजन विशेषकर स्कूली बच्चों में ड्रग्स के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग क्लब बनाने और शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में गुटखा-तम्बाकू आदि की बिक्री पर रोक को प्रभावी रूप से लागू किए जाने की बात कही। उन्होंने प्रदेश में मादक पदार्थो के उपयोग पर एक सर्वे कराए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि मादक पदार्थों के जाल को जड़ से उखाड़ा जा सके।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में संचालित प्राईवेट डीएडिक्शन सेंटर्स की लगातार जांच किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जो सेंटर मानक पूर्ण नहीं कर रहे उनको तत्काल बंद कराया जाए। उन्होंने गढ़वाल एवं कुमाऊं मण्डल में समर्पित ड्रग इंस्पेक्टर नियुक्त किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने राजकीय स्वास्थ्य केन्द्रों में कुछ बेड को डी-एडिक्शन के लिए डेडिकेट किए जाने के भी निर्देश दिए। कहा कि शुरुवात में कम से कम जनपद में एक-एक अस्पताल में कुछ बेड को डी-एडिक्शन के लिए डेडिकेट किया जाए।

मुख्य सचिव ने एन.सी.बी. द्वारा राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्प लाईन मानस-1933 (मादक पदार्थ निशेध आसूचना-केन्द्र) के प्रचार प्रसार के भी निर्देश दिए। उन्होंने सभी हितधारक विभागों से हेल्पलाईन के प्रचार-प्रसार किये जाने के लिए अपने कार्यालयों के सूचनापट एवं प्रवेश द्वार पर जानकारी चस्पा किए जाने के निर्देश दिए, ताकि आमजन को मादक पदार्थों की बिक्री या आपूर्ति से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने में सहजता हो।

इस अवसर पर डीजी इंटेलीजेंस अभिनव कुमार, सचिव शैलेष बगौली, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भारणे, अपर सचिव गृह निवेदिता कुकरेती, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह सहित जनपदों से जिलाधिकारी एवं एसएसपी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड वन विकास निगम के “रजत जयंती समारोह” में किया प्रतिभाग, कुमाऊं में भी खुलेगा वन विकास निगम का कार्यालय

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को उत्तराखंड वन विकास निगम स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर, मुख्यमंत्री आवास में आयोजित “रजत जयंती समारोह” में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कुमाऊं मंडल में भी वन विकास निगम का कार्यालय खोलने की घोषणा की। मौन पालन को और बढ़ावा देने के लिए वन क्षेत्र में बी – बॉक्स स्थापित करने का प्रस्ताव कैबिनेट में लाने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वन विकास निगम के कर्मचारियों के बच्चों को सम्मानित भी किया, जिन्होंने बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विकास निगम राज्य की इकोनॉमी के साथ ही इकोलॉजी के लिए भी महत्वपूर्ण है। निगम वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, वन उपज के टिकाऊ दोहन, आरक्षित वन क्षेत्रों में खनन और इको-टूरिज्म संचालन का कार्य करता है, साथ ही वन उत्पादों और प्रमाणित लकड़ी की सरकारी आपूर्ति करता है। उन्होंने कहा कि वन विकास निगम केवल आर्थिक गतिविधियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वन क्षेत्रों से सूखे, मृतप्राय और उखड़े हुए पेड़ों को हटाकर उनकी जगह नए वन क्षेत्र विकसित करने में भी सहयोग कर रहा है। साथ ही, इको-टूरिज्म के माध्यम से युवाओं और छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य कर रहा है।

हिमकाष्ठ मोबाइल एप का लोकार्पण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर “हिमकाष्ठ” मोबाइल एप्लीकेशन का लोकार्पण करते हुए कहा कि इस एप्लीकेशन के माध्यम से वन विकास निगम से लकड़ी की बिक्री की जा सकेगी। साथ ही फॉरेस्ट गुड्ज का ऑनलाइन ऑक्शन भी किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि निगम की आधुनिक ई-नीलामी प्रणाली और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाओं ने इस क्षेत्र में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने का काम किया है। ये डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड वन विकास निगम ने अपनी इन 25 वर्षों की यात्रा में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। पिछले वर्ष उत्तराखंड वन विकास निगम ने 167 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। ये उपलब्धि इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जब नीति और नीयत साफ हो, तो संसाधनों का सही उपयोग विकास को नई दिशा दे सकता है।

इकोलॉजी और इकोनॉमी का संतुलन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि घने जंगल, ऊँचे-ऊँचे शिखर, विशाल ग्लेशियर, पवित्र नदियाँ और समृद्ध जैव विविधता, देवभूमि उत्तराखंड की अमूल्य धरोहर हैं। अपनी इस प्राकृतिक संपदा की रक्षा करना न केवल हमारी जिम्मेदारी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य भी है। उन्होंने कहा कि ये प्राकृतिक धरोहरें राज्य के आर्थिक विकास के लिए ही नहीं बल्कि हमारी लोक संस्कृति और लोक परंपरा का भी अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में “इकोनॉमी, इकोलॉजी और टेक्नोलॉजी” के बीच संतुलन स्थापित करते हुए आगे बढ़ रही है।

तीर्थयात्रियों – पर्यटकों से की अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विश्व मंच से ’’लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’’ का आह्वान किया है जो मात्र एक नारा नहीं, बल्कि धरती मां को बचाने का एक महामंत्र है। उन्होंने उत्तराखंड आने वाले सभी पर्यटकों से अपील करते हुए कहा कि वे जब भी वे जंगल सफारी या किसी धार्मिक पर्यटन स्थल की यात्रा करें तो वहां गंदगी न फैलाएं। ये छोटा सा प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि बीते कुछ दशकों में भौतिक विकास की जरूरत ने हमारी जीवनशैली को बदलने का काम किया है। लेकिन अगर हम विकास की दौड़ में प्रकृति, पर्यावरण और वनों को पीछे छोड़ देंगे, तो हमारा ये विकास हमेशा अधूरा ही रहेगा। इसलिए सबका ये प्रयास होना चाहिए कि भौतिक विकास और पर्यावरण का संतुलन हर हाल में बना रहे।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य में इकोनाॅमी और इकोलाॅजी में समन्वय के साथ वन संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। वन सम्पदाओं को लोगों की आर्थिकी से जोड़ने के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में वन विकास निगम ने कुल 627 करोड़ रूपये का राजस्व अर्जित किया। निगम द्वारा नवाचारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक सविता कपूर, मोहन सिंह बिष्ट, सुरेश गड़िया, प्रमोद नैनवाल, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र, सचिव सी. रविशंकर, प्रबंध निदेशक वन विकास निगम नीना ग्रेवाल मौजूद थे।

एक ही आंगन में छह शादियां : जौनसार बावर की “जोजोड़ा” परंपरा बनी मिसाल

विकासनगर: जौनसार बावर की पारंपरिक संस्कृति एक बार फिर चर्चा में है। यहां की अनोखी ‘जोजोड़ा’ विवाह परंपरा ने आधुनिक दौर में भी सामाजिक एकता, सादगी और सामूहिकता की मिसाल पेश की है। खारसी गांव में एक ही परिवार में पांच भाइयों की शादी एक साथ संपन्न हुई, जबकि उसी परिवार की बेटी की भी विदाई हुई, जिससे यह आयोजन और खास बन गया।

सामूहिक विवाह की अनूठी मिसाल

देहरादून जिले के इस जनजातीय क्षेत्र में वर्षों पुरानी परंपरा के तहत एक ही परिवार के कई भाइयों की शादी एक साथ की जाती है। इसका उद्देश्य संयुक्त परिवार को मजबूत करना और शादी में होने वाले फिजूलखर्च को रोकना है। खारसी गांव में 29 अप्रैल को आयोजित इस समारोह में पांच दुल्हनें एक साथ बारात लेकर दूल्हों के घर पहुंचीं। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और फूल-मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया गया।

‘जोजोड़ा’ परंपरा की खासियत

यहां विवाह की परंपरा देश के अन्य हिस्सों से अलग है। आमतौर पर जहां दूल्हा बारात लेकर दुल्हन के घर जाता है, वहीं जौनसार बावर में दुल्हन बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंचती है। इस परंपरा को ‘जोजोड़ा’ कहा जाता है। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कुल पुरोहित भीम दत्त शर्मा ने सभी जोड़ों का विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया।

एक परिवार, छह शादियां

परिवार के मुखिया दौलत सिंह चौहान के अनुसार, तीन भाइयों के पांच बेटों की शादी एक साथ कराई गई, जबकि उनकी बेटी की विदाई भी इसी अवसर पर हुई। उन्होंने बताया कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इससे परिवार की एकता बनी रहती है।

सादगी और सामाजिक संदेश

परिवार के बड़े सदस्य खजान सिंह चौहान ने बताया कि इस आयोजन में दिखावे और अनावश्यक खर्च से पूरी तरह बचा गया। शादी में न शराब का इस्तेमाल हुआ और न ही महंगे कपड़ों और गहनों पर जोर दिया गया। उन्होंने समाज से अपील की कि शादी में फिजूलखर्ची के बजाय बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दिया जाए।

खुशियों का माहौल

एक साथ पांच बहुओं के घर आने से परिवार में उत्सव जैसा माहौल रहा। परिवार की बेटी नीलम चौहान ने इसे गर्व का विषय बताते हुए कहा कि वह भी भविष्य में इसी परंपरा को अपनाना चाहेंगी। समारोह में शामिल लोगों ने भी इस पहल की सराहना की।

संस्कृति और विरासत की पहचान

जौनसार बावर क्षेत्र अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। देहरादून जिले के इस पर्वतीय इलाके में लोग आज भी अपनी पारंपरिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों को जीवित रखे हुए हैं। यहां के लोग महासू देवता मंदिर को अपना आराध्य मानते हैं और खुद को पांडवों का वंशज मानने की मान्यता भी प्रचलित है।

सामाजिक संदेश के साथ परंपरा

खारसी गांव में आयोजित यह सामूहिक विवाह न सिर्फ एक पारिवारिक आयोजन था, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश भी देता है, कि सादगी, एकता और परंपराओं के संरक्षण का। आधुनिक दौर में जहां शादियां दिखावे का माध्यम बनती जा रही हैं, वहीं जौनसार बावर की यह परंपरा एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।