डीएम गौरव कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय हिमोत्थान परियोजना समिति की समीक्षा बैठक आयोजित, दिए निर्देश
चमोली : जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को जिला सभागार गोपेश्वर में जिला स्तरीय हिमोत्थान परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने कृषि, उद्यान, पर्यटन, रीप, डेयरी विकास एवं अन्य संबंधित विभागीय अधिकारियों को हिमोत्थान सोसाइटी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए, स्थानीय जनता को रोजगार प्रदान करने, आमदनी में वृद्धि करने व जीवन स्तर को सुधारने में सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिये।
हिमोत्थान सोसाइटी चमोली के टीम लीडर डा0 आर एस कोश्यारी ने जिलाधिकारी को जानकारी देते हुए बताया कि हिमोत्थान सोसाइटी टाटा ट्रस्ट की एक पहल के रूप में वर्ष 2007 से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश एवं लद्दाख में प्रारम्भ किया गया था। यह सोसाइटी विशेषकर ग्रामीण विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि सोसाइटी का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की जनता के जीवन स्तर को बेहतर बनाना और आजीविका के स्थायी साधन विकसित करना व स्थानीय जनता को अलग-2 क्षेत्रों में कौशल विकास का प्रशिक्षण प्रदान करवाना है।
हिमोत्थान सोसाइटी जनपद के थराली, देवाल, कर्णप्रयाग,दशोली एवं जोशीमठ विकासखंड के 218 गॉव में कार्य कर रही है। जो पशुपालन, मोन पालन, कृषि, पर्यटन, और जल संरक्षण के माध्यम से स्थानीय जनता को अतिरिक्त आमदनी के स्रोत के रूप में सहायक सिद्ध हो रही है। इस दौरान बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, परियोजना निदेशक आनंद सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी, जयप्रकाश तिवारी, हिमोत्थान संस्था से शशिभूषण उनियाल, दीक्षा पुण्डीर एवं अन्य विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।




धार्मिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध सरकार – मुख्यमंत्री धामी

रामनगर : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने चारधाम यात्रा को और अधिक सशक्त और व्यवस्थित बनाने पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को रामनगर के छोई स्थित श्री हनुमान धाम में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि बजरंगबली की कृपा से ही किसी को उनके दरबार में आने का अवसर मिलता है।

मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कई बार प्रयास के बावजूद वे यहां नहीं आ पाए, लेकिन इस बार अचानक कार्यक्रम बनना बजरंगबली की कृपा का ही परिणाम है। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हुए धार्मिक और सांस्कृतिक विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम में चल रहे विकास कार्यों को ऐतिहासिक बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और इसकी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में राज्य में सख्त कानून लागू किए जा रहे हैं और धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है।

उन्होंने बताया कि राज्य के केदारखंड और मानसखंड सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और आधारभूत ढांचे के विकास पर लगातार कार्य हो रहा है, जिससे हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में प्रस्तावित कुंभ मेले की तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं। साथ ही शीतकालीन यात्रा भी जारी है और अब तक करीब 1.60 लाख श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दर्शन कर चुके हैं। आगामी चारधाम यात्रा के लिए भी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि शीतकाल में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक उत्तराखंड पहुंच रहे हैं, जो धार्मिक पर्यटन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। सरकार का लक्ष्य इसे और अधिक मजबूत करना है, ताकि उत्तराखंड की पहचान वैश्विक स्तर पर और सशक्त हो सके। अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उत्तराखंड की निरंतर प्रगति की कामना की।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने हरिद्वार कुम्भ मेला–2027 तैयारियों का किया स्थलीय निरीक्षण, दिए निर्देश

हरिद्वार : कुम्भ मेला–2027 की तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को हरिद्वार में विभिन्न निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए तथा विभागीय समन्वय को सुदृढ़ बनाते हुए कार्यों में तेजी लाई जाए।

कुंभ क्षेत्र के कार्यों के विस्तृत निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने अपर गंगा नहर के बाएं तट पर स्थित शहीद भगत सिंह घाट (कामधेनु घाट) से सिंहद्वार तक निर्माणाधीन घाट एवं बैरागी कैम्प घाट का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि घाटों का निर्माण श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए आधुनिक मानकों के अनुरूप किया जाए, ताकि कुम्भ के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

उन्होंने बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए घाटों पर रैम्प एवं अन्य सुगम्यता संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने, साथ ही चेंजिंग रूम एवं प्रसाधन की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि इस बार कुम्भ मेला–2027 के लिए ‘ग्रीन घाट’ विकसित किए जाएं, जिसके तहत घाटों पर हरित पट्टियां विकसित कर उन्हें फूलों एवं पौधों से सजाया-संवारा जाए।

इसके पश्चात उन्होंने ज्वालापुर–ईदगाह–पीएसी–शिवालिक नगर मोटर मार्ग के किलोमीटर-3 पर पथरी रौ नदी पर निर्माणाधीन 60 मीटर लंबे प्री-स्ट्रेस्ड आरसीसी सेतु के कार्य की प्रगति का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए तथा कार्य समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए।

मुख्य सचिव ने बहादराबाद–सिडकुल मार्ग (भाईचारा ढाबा से बीएचईएल सेक्टर-6 होते हुए शिवालिक नगर चौक एवं बीएचईएल मध्य मार्ग तक) के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह मार्ग कुम्भ के दौरान यातायात के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाए। उन्होंने धनौरी–सिडकुल लिंक मार्ग पर पथरी रौ नदी में पुरानी गंग नहर सायफन के डाउनस्ट्रीम में बन रहे 90 मीटर स्पान के पुल के निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस पुल से संबंधित नदी तल के कार्य वर्षाकाल से पूर्व पूर्ण कर लिए जाएं, ताकि वर्षा ऋतु में जलस्तर बढ़ने से कार्य प्रभावित न हो।

मुख्य सचिव ने हरिद्वार बाईपास रिंग रोड परियोजना के निर्माण कार्यों का भी स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने एनएचएआई के अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाईपास निर्माण कार्य अविलंब पूर्ण किया जाए तथा सप्ताहवार लक्ष्य निर्धारित कर टाइमलाइन के अनुसार प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना कुम्भ मेला प्रारंभ होने से पूर्व पूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही दिल्ली राजमार्ग पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी हरिद्वार को इसकी प्रगति का दैनिक ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए।

मुख्य सचिव ने बैरागी कैम्प में 1500 किलोलिटर क्षमता के ओवरहेड टैंक, एवं कार्यों की प्रगति का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जलापूर्ति संबंधी कार्य समय से पूर्ण कर कुम्भ के दौरान निर्बाध एवं स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि कुम्भ मेला–2027 एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन है, जिसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचेंगे। ऐसे में सभी विभागों को पूर्ण जिम्मेदारी एवं समर्पण के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने निर्माण कार्यों के साथ-साथ यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं को भी समान प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी समस्या का त्वरित समाधान किया जाए, ताकि तैयारियों में किसी प्रकार की कमी न रह जाए।

मुख्य सचिव ने मेला नियंत्रण भवन में संचालित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण कर सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने इस व्यवस्था में नवीनतम आईटी अनुप्रयोगों एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर सचिव शहरी विकास नितेश झा, आयुक्त गढ़वाल मंडल विनय शंकर पांडे, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, मेलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

देहरादून में अपराध पर सख्ती: “ऑपरेशन प्रहार” शुरू, डीजीपी के कड़े निर्देश

देहरादून। राजधानी में हालिया आपराधिक घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड सरकार के निर्देश पर पुलिस ने “ऑपरेशन प्रहार” शुरू करने का फैसला लिया है। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने की।

बैठक में आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे, एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराध पर नियंत्रण के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की गई।

डीजीपी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि देहरादून में कानून-व्यवस्था की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। आईजी गढ़वाल को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि एसएसपी देहरादून को अधीनस्थ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और प्रभावी पुलिसिंग बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही क्षेत्राधिकारी और थाना प्रभारियों को फील्ड में सक्रिय रहने, चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने और बैरियरों पर सघन चेकिंग करने को कहा गया है।

विशेष रूप से सुबह के समय पुलिस बल की उपस्थिति और सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
एसटीएफ को भी देहरादून में सक्रिय आपराधिक तत्वों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, किरायेदारों और पीजी में रहने वालों का सत्यापन अभियान तेज करने तथा होम-स्टे गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित समय के बाद संचालित बार और पब्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन प्रहार” के तहत राजधानी में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस पूरी मुस्तैदी और सतर्कता के साथ काम करेगी, ताकि आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

यमुनोत्री – गंगोत्री धामों के लिए सुपर नोडल अधिकारी और सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात

देहरादून। आगामी चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। जनपद प्रशासन ने यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम पर श्रद्धालुओं की सुरक्षित और सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था लागू की है।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने दोनों धामों के लिए मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह को यमुनोत्री और अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र को गंगोत्री धाम का सुपर नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। ये अधिकारी यात्रा से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का पर्यवेक्षण करेंगे। इसके अलावा, यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट और सेक्टर अधिकारियों की तैनाती भी की गई है।

धामों और मार्गों पर स्वास्थ्य, पेयजल, विद्युत, परिवहन, सफाई और अन्य सेवाओं के लिए संबंधित विभागों के नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रतिदिन निरीक्षण करें, व्यवस्थाओं की सतत निगरानी रखें और किसी भी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्रा अनुभव प्रदान किया जा सके।

 
 
उत्तराखंड : पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 30 अधिकारियों के तबादले

देहरादून में पुलिस महकमे में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। जारी ट्रांसफर सूची के अनुसार 3 थानाध्यक्षों सहित कुल 30 अधिकारियों का तबादला किया गया है।

IMG 20260402 WA0003

यह आदेश आधी रात को जारी किए गए, जिससे पुलिस विभाग में हलचल मच गई। कई थानों में प्रभारी अधिकारियों को बदला गया है, वहीं नए अधिकारियों को जल्द से जल्द कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

बताया जा रहा है कि यह फैसला कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि इस बदलाव से पुलिस व्यवस्था में सुधार होगा और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनेगी।

देहरादून में ऑपरेशन प्रहार के तहत बड़े पैमाने पर चेकिंग, हिरासत में 149 लोग

देहरादून। बुधवार देर रात देहरादून के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत विशेष चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान 149 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया और 40 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। साथ ही 67 वाहनों को सीज किया गया।

एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल ने बताया कि अभियान शहर पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार के नेतृत्व में चलाया गया। अभियान का मकसद सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने, शराब पीकर वाहन चलाने, हुड़दंग करने और अन्य नियमों का उल्लंघन रोकना था।

यातायात नियमों का उल्लंघन भी कड़ा किया गया

चेकिंग के दौरान यातायात नियम तोड़ने वाले 143 वाहन चालकों से कुल 86 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसके अलावा 157 वाहनों के चालान किए गए और 67 वाहनों को सीज किया गया।

प्रतिष्ठान और किरायेदारों पर कार्रवाई

पुलिस ने बिना सत्यापन अपने प्रतिष्ठानों में काम कराने और किरायेदार रखने वालों पर भी कार्रवाई की। इस संबंध में तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

पीजी और हॉस्टल में आकस्मिक निरीक्षण

एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल के निर्देश पर पुलिस ने शहर के पीजी और हॉस्टल में आकस्मिक चेकिंग अभियान भी चलाया। इस दौरान छात्रों को चेतावनी दी गई कि पढ़ाई की आड़ में हुड़दंग या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बदरीनाथ धाम में अब धार्मिक और अस्थायी कार्यक्रम के लिए अनुमति जरूरी

चमोली। बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजनों और अस्थायी निर्माण पर अब नगर पंचायत की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। नगर पंचायत बदरीनाथ द्वारा जारी तीन नई उपविधियों के तहत भागवत कथा, भंडारा और अन्य विशेष कार्यक्रम बिना अनुमति आयोजित करने पर ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा। नगर पंचायत की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से अनुमति लेना आवश्यक होगा। इसके अलावा, बदरीनाथ क्षेत्र में मांस लाने या झुग्गी-झोपड़ी बनाने पर भी सख्त रोक लगाई गई है।

  1. मांसाहार परिवहन एवं उपयोग प्रतिबंध उपविधि, 2026 – क्षेत्र में मांस का सेवन और परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित।
  2. झोपड़ी, अस्थायी आवास नियंत्रण एवं स्वच्छता उपविधि – झुग्गी-झोपड़ी बनाने से पहले अनुमति अनिवार्य, और नियमित रूप से शौचालय निर्माण करना भी जरूरी।
  3. भंडारा, भागवत कथा एवं विशेष कार्यक्रम नियंत्रण उपविधि – धार्मिक आयोजन केवल अनुमतियों के साथ ही संभव होंगे।

नगर पंचायत ने इन उपविधियों के साथ यूजर चार्ज की व्यवस्था भी की है ताकि व्यवस्थाएं और नियंत्रण सुनिश्चित किए जा सकें। ज्योतिर्मठ के उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उपविधियां लागू कर दी जाएंगी। नगर पंचायत ईओ सुनील पुरोहित ने बताया कि बीते वर्षों में क्षेत्र में कुछ मजदूर मांस के साथ पकड़े गए थे, अब इस पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

नगर पंचायत की यह नई व्यवस्था मुख्य रूप से पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक स्थलों की स्वच्छता और तीर्थयात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि इन नियमों के बावजूद तीर्थयात्रा पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। सभी नियम और उपविधियां यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और स्वच्छ बनाने के लिए हैं।

देहरादून : पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 30 अधिकारियों के तबादले

देहरादून में पुलिस महकमे में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। जारी ट्रांसफर सूची के अनुसार 3 थानाध्यक्षों सहित कुल 30 अधिकारियों का तबादला किया गया है।

IMG 20260402 WA0003

यह आदेश आधी रात को जारी किए गए, जिससे पुलिस विभाग में हलचल मच गई। कई थानों में प्रभारी अधिकारियों को बदला गया है, वहीं नए अधिकारियों को जल्द से जल्द कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

बताया जा रहा है कि यह फैसला कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि इस बदलाव से पुलिस व्यवस्था में सुधार होगा और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनेगी।

हिमालयी सुरक्षा के लिए मजबूत पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध – सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत
  • उत्तराखंड में स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 31 की
  • लैंसडाउन में नए एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर रडार की स्थापना के साथ राज्य में कुल तीन डॉप्लर रडार संचालित

देहरादून/ नई दिल्ली : लोकसभा में हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखंड त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा हिमालयी राज्यों, विशेषकर उत्तराखंड में बाढ़, भूस्खलन तथा ग्लेशियर पिघलने से उत्पन्न आपदाओं के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली के संबंध में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में पृथ्वी विज्ञान एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने अपने उत्तर में अवगत कराया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा एक समग्र बहु-जोखिम पूर्व चेतावनी प्रणाली (Multi-Hazard Early Warning System) विकसित की गई है, जिसमें प्रेक्षण नेटवर्क, उन्नत पूर्वानुमान मॉडल तथा जीआईएस आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली सम्मिलित है। यह प्रणाली चक्रवात, भारी वर्षा सहित विभिन्न मौसम संबंधी खतरों की समयपूर्व पहचान एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करती है तथा आधुनिक दूरसंचार माध्यमों के जरिए सूचनाओं का त्वरित प्रसार संभव बनाती है। उन्होंने बताया कि जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत केन्द्रीय जल आयोग(Central Water Commission) द्वारा हिमालयी राज्यों में अल्पकालिक बाढ़ पूर्वानुमान जारी किए जाते हैं, जिनमें 24 घंटे तक का लीड टाइम उपलब्ध रहता है। इसके साथ ही बाढ निगरानी 2.0 सी- फ्लड ( “FloodWatch India 2.0” एवं “C-FLOOD”) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा अन्य संचार माध्यमों के जरिए ग्राम स्तर तक बाढ़ संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। दक्षिण एशिया फ्लैश फ्लड गाइडेंस सिस्टम के माध्यम से 6 से 24 घंटे पूर्व फ्लैश फ्लड की चेतावनी भी दी जा रही है।

भूस्खलन की घटनाओं के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) द्वारा उत्तराखंड सहित विभिन्न हिमालयी राज्यों में मानसून अवधि के दौरान दैनिक भूस्खलन पूर्वानुमान बुलेटिन जारी किए जाते हैं, जिनमें आगामी 48 घंटे तक की संभावनाओं का आकलन किया जाता है।

उत्तराखंड राज्य में मौसम संबंधी अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए पिछले तीन वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की गई है। लैंसडाउन में नए एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर रडार की स्थापना के साथ राज्य में अब कुल तीन डॉप्लर रडार संचालित हैं। इसके अतिरिक्त स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 31 की गई है तथा वर्षा मापन के लिए स्वचालित वर्षामापक और निगरानी स्टेशनों का विस्तार किया गया है। केदारनाथ में उच्च-ऊंचाई स्वचालित मौसम प्रेक्षण प्रणाली की स्थापना से दुर्गम क्षेत्रों में भी मौसम निगरानी सुदृढ़ हुई है।

ग्लेशियरों की निगरानी के संबंध में मंत्री ने जानकारी दी कि इसरो (Indian Space Research Organisation) द्वारा उपग्रह आधारित रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली तकनीकों का उपयोग कर हिमालयी ग्लेशियरों के आकार, विस्तार एवं गतिशीलता की नियमित निगरानी की जा रही है। इस प्रक्रिया से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसे जोखिमों का आकलन करने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में सहायता मिल रही है।

आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आईएमडी ( भारत मौसम विभाग) द्वारा राज्यों को सात दिनों तक के वर्षा पूर्वानुमान, उच्च-रिजोल्यूशन मौसम आंकड़े, कृषि मौसम परामर्श सेवाएं तथा बिजली, भारी वर्षा और अन्य चरम मौसम घटनाओं के संबंध में समय-समय पर अलर्ट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त जिला स्तरीय जलवायु जोखिम एवं सुभेद्यता एटलस भी तैयार किए गए हैं, जिनका उपयोग राज्य सरकारें आपदा जोखिम न्यूनीकरण और योजना निर्माण में कर रही हैं।

सांसद रावत ने इस विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है और यहां पूर्व चेतावनी प्रणालियों का सुदृढ़ होना जनजीवन की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि इन व्यवस्थाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ग्राम स्तर तक सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय समुदाय समय रहते सतर्क हो सके और आपदा जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।

सांसद रावत ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पृथ्वी विज्ञान एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम हिमालयी राज्यों में आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।