चारधाम यात्रा से पहले प्रशासन एक्शन मोड में, डीएम स्वाति एस. भदौरिया ने निरीक्षण कर परखी हर व्यवस्था

श्रीनगर : चारधाम यात्रा को सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं यात्रीहितकारी बनाने के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने श्रीनगर स्थित तहसील सभागार में रेखीय विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक के उपरांत जिलाधिकारी ने स्वयं यात्रा मार्गों पर उतरकर व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया और सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध रूप से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगमता प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बैठक में जिलाधिकारी ने यात्रा मार्गों पर साइनेज, शौचालय एवं पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही यात्रियों को भुगतान के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने हेतु खाद्य अभिहित अधिकारी को नियमित निरीक्षण करने हेतु निर्देशित किया गया। जिलाधिकारी ने होटल एवं ढाबों में रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित कराने के लिए पर्यटन विभाग को भी निर्देश दिए गए। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कीर्तिनगर पुल से सिरोबगड़ तक मार्ग को तीन जोन में विभाजित करते हुए प्रत्येक जोन में तीन स्थायी एवं तीन अस्थायी चौकियां स्थापित करने तथा संयुक्त निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने को कहा गया।

यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने हेतु जिलाधिकारी ने मुख्य पार्किंग स्थलों के साथ-साथ अतिरिक्त पॉकेट पार्किंग चिन्हित करने, ट्रैफिक प्रबंधन को प्रभावी बनाने तथा स्थानीय हितधारकों से फीडबैक लेने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसे अवैध होर्डिंग/बैनर जो यातायात को बाधित कर रहे हैं, उनके विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर तत्काल हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उपजिलाधिकारी श्रीनगर नूपुर वर्मा ने अवगत कराया कि यात्रा संचालन हेतु तहसील स्तर पर कंट्रोल रूम तथा कलियासौड़ में पोर्टा केबिन स्थापित किया गया है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को रोके जाने की दशा में होल्डिंग एरिया एवं ट्रांजिट कैंप में विद्युत, पेयजल, शौचालय सहित सभी मूलभूत सुविधाएं सुदृढ़ रूप से उपलब्ध रहें।

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने फरासू, धारी देवी एवं भट्टीसेरा में स्थापित मेडिकल रिलीफ पोस्ट पर चिकित्सकों एवं सहायकों की रोस्टर के अनुसार तैनाती सुनिश्चित करने तथा जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही बेस चिकित्सालय में अतिरिक्त चिकित्सकों की तैनाती करने को कहा। उन्होंने यात्रा मार्गों पर सफाई व्यवस्था एवं पेयजल आपूर्ति के प्रभावी पर्यवेक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा फरासू एवं चमधार क्षेत्रों में अस्थायी सोलर लाइट लगाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त यात्रियों के ठहराव स्थलों का समय से समतलीकरण कराने तथा मुख्य मार्गों के साथ वैकल्पिक मार्गों को भी सुरक्षित एवं सुचारु बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

स्थलीय निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कीर्तिनगर पुल से सिरोबगड़ तक यात्रा व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया। निरीक्षण के दौरान कीर्तिनगर पुल के समीप स्थित सेल्फी प्वाइंट पर सुरक्षा रेलिंग लगाने, उफल्डा क्षेत्र में हैंडपंप को सुचारु रखने तथा सड़क किनारे नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यात्रा मार्गों के किनारों पर स्वच्छता बनाए रखने एवं कूड़ा संग्रहण केंद्रों को व्यवस्थित करने पर भी जोर दिया।

एनआईटी मैदान स्थित यात्री ठहराव स्थल पर पेयजल, शौचालय एवं विद्युत व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने एनआईटी ट्रांजिट कैंप तक जाने वाले मार्ग को शीघ्र दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था की जा रही है, वहां भोजन एवं पेयजल की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त, आवास विकास मैदान में निरीक्षण के दौरान परिसर में खड़े निजी वाहनों को हटाने तथा पेयजल टंकी की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए। इस दौरान जिलाधिकारी ने जल संस्थान के टोल फ्री नंबर पर कॉल कर शिकायत निवारण प्रणाली का परीक्षण भी किया।

जिलाधिकारी ने कलियासौड़ क्षेत्र में पोर्टा केबिन के समीप पड़े मलबे को तीन दिन के भीतर हटाकर उसे अस्थायी पार्किंग स्थल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए, साथ ही कंट्रोल रूम के संपर्क नंबरों की सक्रियता भी परखी गई। फरासू स्थित स्लाइडिंग जोन में मलबा हटाने एवं सड़क चौड़ीकरण की प्रगति की जानकारी लेते हुए कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। साथ ही चिकित्सा राहत इकाई के निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक दवाओं एवं मानव संसाधन की मांग तत्काल प्रेषित करने को कहा गया।

इसके अतिरिक्त पुलिस विभाग की चेकपोस्ट एवं बैरियरों पर यात्रियों के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु वाटर एटीएम अथवा टैंकर के साथ स्टैंड पोस्ट स्थापित करने के निर्देश जल संस्थान को दिए गए। तहसील प्रशासन एवं नगर निगम को अवैध पार्किंग पर नियंत्रण रखने तथा छोटे-छोटे पार्किंग स्थल चिन्हित करने के निर्देश दिए गए। 

निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने धारीदेवी मंदिर में पूजा अर्चना की तथा सभी की कुशलक्षेम की कामना की। उन्होंने धारीदेवी मंदिर के समीप सड़क सुरक्षा दीवार के निर्माण कार्य को भी शीघ्र प्रारंभ कराने को कहा गया। जिलाधिकारी ने पर्यटकों के साथ संवाद भी किया और व्यवस्थाओं के संबंध में फीडबैक तथा सुझाव भी लिए।

 
धराली में सजी लोकसंस्कृति की अनुपम झलक, ध्याणी-मैती मिलन समारोह बना आस्था और एकजुटता का केंद्र

बड़कोट: उत्तरकाशी जिले के नौगांव ब्लॉक के धराली गांव में उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब धराली गांव में “ध्याणी-मैती मिलन समारोह” यानी “ध्याणियों का मेला” पूरे हर्षोल्लास और भव्यता के साथ आयोजित किया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, पारिवारिक संबंधों की मजबूती और परंपराओं के संरक्षण का भी सशक्त माध्यम बना।

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मायके लौटी ध्याणियों का भावनात्मक मिलन

इस विशेष अवसर पर दूर-दराज क्षेत्रों से ध्याणियां अपने मायके पहुंचीं। वर्षों बाद मायके की दहलीज पर लौटने का यह अवसर उनके लिए भावनाओं से भरा रहा। पारंपरिक वेशभूषा में सजी ध्याणियों ने अपने बचपन की यादों को ताजा किया और रिश्तों की गर्माहट को फिर से महसूस किया।

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इष्टदेवों के प्रति श्रद्धा और भव्य अर्पण

समारोह के दौरान ध्याणियों ने अपने इष्टदेवों के प्रति गहरी आस्था प्रकट करते हुए विशेष भेंट अर्पित की।

  • तटेश्वर महादेव के लिए सोने के चार छत्र।
  • भगवती नागणी देवी को चांदी की माला।
  • पांच पांडव के लिए चांदी की कटोरी।
  • पोखू देवता को चांदी का छत्र।
  • भगवान श्री कृष्ण के लिए चांदी का मुंदड़ा।
  • केदारेश्वर महादेव को घंटा अर्पित।

ये सभी अर्पण न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि स्थानीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और परंपरागत विश्वासों की गहराई को भी दर्शाते हैं।

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लोक संस्कृति की गूंज और रंगारंग कार्यक्रम

पूरे आयोजन के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ध्वनि, लोकगीतों की मधुरता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को भक्तिमय और उत्सवमय बना दिया। महिलाओं और युवाओं ने लोकनृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम में रंग भर दिया, वहीं पारंपरिक गीतों ने पुरानी पीढ़ी की यादों को जीवंत कर दिया।

सम्मान समारोह: परंपरा के संरक्षकों को सलाम

ग्राम सभा की और से ध्याणियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। वहीं, इस अवसर पर ध्याणियों की ओर से गांव के बुजुर्गों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। साथ ही पुरोहितों और बागियों (पारंपरिक सेवाओं से जुड़े लोग) को भी सम्मान देकर उनके योगदान को सराहा गया। यह पहल समाज में आपसी सम्मान और परंपराओं के प्रति आदर की भावना को मजबूत करती है।

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नई पीढ़ी के लिए सांस्कृतिक पाठशाला

यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए अपनी जड़ों को समझने और उनसे जुड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

आज के आधुनिक दौर में, जब पारंपरिक मूल्य धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं, ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और सामाजिक मूल्यों से परिचित कराते हैं।

सामाजिक एकता और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक

“ध्याणी-मैती मिलन समारोह” उत्तराखंड की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें विवाहित बेटियों का मायके से अटूट संबंध बना रहता है। यह आयोजन न केवल पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करता है, बल्कि समाज में एकजुटता और भाईचारे की भावना को भी बढ़ावा देता है।