दून यूनिवर्सिटी रोड पर अवैध रेत-बजरी का भंडारण, नियमों को दरकिनार कर चल रहा कारोबार

देहरादून : देहरादून के दून यूनिवर्सिटी रोड क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर रेत और बजरी का भंडारण किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि विक्रेता जिस स्थान पर आरबीएम का भंडारण कर रहे हैं, उस स्थान के लिए उनके पास आवश्यक अनुमति तक नहीं है।

देहरादून के दून यूनिवर्सिटी रोड पर रेत और बजरी का बड़े पैमाने पर भंडारण किया गया है। यह इलाका मुख्य रूप से रिहायशी होने के बावजूद यहां खुलेआम आरबीएम (रेत-बजरी) रखा जा रहा है। नियमानुसार ऐसे भंडारण के लिए नगर निगम और खनन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां कारोबार करने वाले अधिकांश विक्रेताओं के पास वैध अनुमति नहीं बताई जा रही है।

जानकारों के अनुसार यदि किसी विक्रेता के पास रेत-बजरी की बिक्री की अनुमति भी हो, तब भी जिस स्थान पर सामग्री का भंडारण किया जाता है, उस जगह के लिए अलग से अनुमति लेना जरूरी होता है। आरोप है कि दून यूनिवर्सिटी रोड पर कई स्थानों पर बिना ऐसी अनुमति के ही भंडारण किया जा रहा है।

इस स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि रिहायशी इलाके में इस तरह का भंडारण न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे यातायात और पर्यावरण पर भी असर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निगम और खनन विभाग को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अवैध भंडारण करने वालों के खिलाफ जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि नियमों का पालन हो सके और शहर में व्यवस्था बनी रहे।
यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई तो शहर के अन्य रिहायशी क्षेत्रों में भी इस तरह के अवैध भंडारण की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। इसलिए जरूरी है कि संबंधित विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर अवैध कारोबार पर अंकुश लगाएं और शहर में व्यवस्था को बहाल करें।

परियोजना प्रभावितों के धरना प्रदर्शन को विधायक ने दिया समर्थन

बोले विधायक बुटोला मांगो के निस्तारण को करेंगे हर संभव प्रयास
गोपेश्वर (चमोली)। ज्योतिर्मठ ब्लाॅक के तपोवन क्षेत्र परियोजना प्रभावित ग्रामीणों का अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर एनटीपीसी के विरोध में चल रहे आंदोलन को रविवार को बदरीनाथ के विधायक लखपत बुटोला ने अपना समर्थन देते हुए एनटीपीसी से ग्रामीणों की मांगों का त्वरित निस्तारण करने को कहा।
गौरतलब है कि एनटीपीसी निर्माणाधीन तपोवन-विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना से प्रभावितों ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर बीते पांच दिनों से धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि परियोजना से प्रभावितों को चारापत्ति का लाभ दिया जाए, प्रभावित क्षेत्र के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को कंपनी नौकरी दी जाए, एनटीपीसी की कार्यदायी संस्था एचसीसी में कार्यरत 59 युवाओं की पुनः बहाली की जाए, भंग्यूल गांव को जोड़ने वाले पुल का जल्द निर्माण किया जाए।
आंदोलन को समर्थन देने के लिए रविवार को बदरीनाथ के विधायक लखपत बुटोला, प्रमुख अनूप नेगी, ज्योतिर्मठ की पालिकाध्यक्ष देवेश्वरी शाह धरना स्थल पर पहुंचे। विधायक बुटोला ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि वे उनके साथ खड़े हैं और उनकी जायज मांगों के निस्तारण के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ज्योतिर्मठ प्रधान संघ के अध्यक्ष मोहन बजवाल ने कहा कि पूर्व में भी ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया था, लेकिन तत्समय भी एनटीपीसी की ओर से कोरे आश्वासन देकर आंदोलन को समाप्त कर दिया गया था किंतु इस पर जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सोमवार को प्रभावितों की ओर से एक ज्ञापन एसडीएम के माध्यम से डीएम व एनटीपीसी को दिया जाएगा। इसमें अपनी पांच सूत्रीय मांगों को पूरा करने के लिए पांच दिनों का समय कंपनी को दिया जाएगा। यदि पांच दिनों के भीतर उनकी मांग पूरी नहीं की जाती है तो इसके बाद एनटीपीसी के कार्यालय पर तालाबंदी की जाएगी। आवश्यक सेवाओं को भी बंद किया जाएगा और तहसील प्रशासन का भी घेराव किया जाएगा।
इस दौरान पूर्व ब्लाॅक प्रमुख हरीश परमार, कांग्रेस के ब्लाक अध्यक्ष विक्रम फरस्वाण, सचिन गडिया, विकेंद्र नेगी, लक्ष्मण बुटोला, मीना चैहान, विनोद भंडारी, शिवलाल, लक्ष्मी खत्री, सुलभ सिंह फरस्वाण, वर्षा देवी, रोशनी देवी, विनीता देवी, बीना देवी, पूनम पंत आदि मौजूद रहे।

स्थायी राजधानी को लेकर फिर उभरा गैरसैंण आंदोलन, सरकार को चेतावनी – 2027 से पहले फैसला नहीं तो होगा बड़ा जनआंदोलन

देहरादून : उत्तराखंड की स्थाई राजधानी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। खास बातचीत में आंदोलनकारियों और विशेषज्ञों ने सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल उठाए हैं। उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 साल बाद भी गैरसैंण को स्थाई राजधानी न बनाए जाने पर जनता में भारी रोष है।

आंदोलन की गूँज और सरकार को चेतावनी

देहरादून में 8 मार्च से जारी क्रमिक अनशन अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। आंदोलनकारी लक्ष्मी प्रसाद ने बताया कि वे लंबे समय से यहां डटे हुए हैं और जब तक सरकार गैरसैंण को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि 2027 के चुनाव से पहले कोई हल नहीं निकला, तो सरकार को इसका खामियाजा भुगतना होगा।

संवैधानिक और आर्थिक पहलू

पूर्व प्रशासनिक अधिकारी (IAS) विनोद प्रसाद रतूड़ी ने इस मुद्दे पर संवैधानिक प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 2, 3 और 12 में कहीं भी ‘अस्थाई राजधानी’ का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा: “प्रदेश के 3500 से अधिक गांव खंडहर बन चुके हैं और लोग पलायन कर रहे हैं। जब तक राजधानी पहाड़ में नहीं होगी, तब तक रिवर्स माइग्रेशन (गांव वापसी) संभव नहीं है।”

रतूड़ी जी ने प्रदेश के आर्थिक हालातों पर भी चिंता व्यक्त की और बताया कि उत्तराखंड वर्तमान में भारी कर्ज के बोझ तले दबा है। उन्होंने देहरादून की बढ़ती अपराध दर और स्मार्ट सिटी के नाम पर हो रही बदहाली का भी जिक्र किया।

युवाओं की भूमिका और भविष्य की रणनीति

रिपोर्टिंग के दौरान यह बात भी सामने आई कि युवा वर्ग मुकदमे और जेल के डर से आंदोलनों से पीछे हट रहा है। हालांकि, आंदोलनकारियों का मानना है कि पहाड़ और राज्य के भविष्य के लिए युवाओं को आगे आना ही होगा।

प्रधानमंत्री के दौरे पर टिकी निगाहें

आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 14 अप्रैल के प्रस्तावित देहरादून दौरे पर बड़ी उम्मीदें जताई हैं। उन्होंने एक ज्ञापन भी तैयार किया है जिस पर सैकड़ों लोगों के हस्ताक्षर हैं। यदि प्रधानमंत्री इस दौरे पर गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित नहीं करते हैं, तो आंदोलनकारी अपने क्रमिक अनशन को ‘आमरण अनशन’ में बदलने की तैयारी कर रहे हैं।

गंगोत्री धाम में दर्शन समय बदला, अब शाम 4 बजे तक खुला रहेगा मंदिर

गंगोत्री : गंगोत्री धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस वर्ष से मुख्य मंदिर के दर्शन समय में अहम बदलाव किया गया है। गंगोत्री मंदिर समिति के निर्णय के अनुसार अब श्रद्धालु सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक मां गंगा के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद मंदिर के कपाट सायंकालीन आरती के लिए पुनः खोले जाएंगे, जो शाम 7:45 बजे आयोजित होगी। आरती के बाद रात 10 बजे तक दर्शन जारी रहेंगे।

यह निर्णय गंगोत्री धर्मशाला में आयोजित मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों की वार्षिक बैठक में लिया गया। बैठक में आय-व्यय के साथ-साथ इस वर्ष की पूजा व्यवस्था, पुजारियों की नियुक्ति और अन्य व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई।

समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि पिछले वर्ष तक मंदिर में दोपहर 2 बजे तक ही दर्शन होते थे, जिसके बाद कपाट कुछ समय के लिए बंद कर दिए जाते थे। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार सर्वसम्मति से दर्शन समय बढ़ाकर शाम 4 बजे तक कर दिया गया है।

वहीं, समिति के मीडिया प्रभारी सतेंद्र सेमवाल ने बताया कि इस बदलाव का उद्देश्य यात्रियों को धाम में अधिक समय तक रुकने के लिए प्रेरित करना है। इस दौरान श्रद्धालु घाटों पर पूजा-अर्चना कर सकेंगे और शाम 7 बजे होने वाली गंगा आरती में भी शामिल हो पाएंगे।

बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मंदिर परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही किसी भी प्रकार का लाइव दर्शन प्रसारण करने पर भी रोक रहेगी।

कोटद्वार पुलिस ने चेक बाउंस केस में फरार वारंटी को किया गिरफ्तार
कोटद्वार : वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार द्वारा जनपद के समस्त थाना प्रभारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि ऑपरेशन प्रहार के तहत प्रभावी निरोधात्मक कार्यवाही के साथ-साथ माननीय न्यायालय से प्राप्त गैर-जमानती वारंट (N.B.W.) की शत-प्रतिशत तामील कर, अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए। 

इसी क्रम में कोतवाली कोटद्वार पुलिस टीम द्वारा माननीय न्यायालय अपर मुख्य न्यायाधीश कोटद्वार द्वारा जारी वाद संख्या -269/20, धारा 138 NI Act सम्बन्धित फरार वारण्टी अभियुक्त राकेश सिंह रावत को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार वारंटी को माननीय न्यायालय के समक्ष पेशकर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।

गिरफ्तार वारंटी का नाम पता

  • राकेश सिंह रावत (उम्र 46 वर्ष) पुत्र भगवान सिंह रावत, निवासी- शिवपुर, कोटद्वार
फीताड़ी अग्निकांड : मंत्री सौरभ बहुगुणा ने पीड़ितों से की मुलाकात, 14 परिवारों को गोट वैली प्रोजेक्ट से जोड़ने की घोषणा

उत्तरकाशी। कैबिनेट मंत्री एवं जिला प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा ने फीताड़ी गांव पहुंचकर हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पीड़ितों का हालचाल जाना और हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।

मंत्री ने प्रभावित परिवारों के घरों का निरीक्षण कर आग से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने 14 प्रभावित परिवारों को ‘गोट वैली प्रोजेक्ट’ से जोड़ने की घोषणा करते हुए मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को बकरियों के वितरण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए, ताकि परिवारों की आजीविका को मजबूत कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

बताया गया कि मंत्री बहुगुणा तीन दिवसीय जनपद भ्रमण पर हैं। इसी क्रम में वे गांव पहुंचे और पीड़ितों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने मुआवजा, पुनर्वास और भविष्य में ऐसी घटनाओं से सुरक्षा के उपायों को लेकर अपनी चिंताएं रखीं, जिस पर मंत्री ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया।

गौरतलब है कि विकासखंड मोरी के फीताड़ी गांव में 23 मार्च की रात भीषण अग्निकांड हुआ था। इस हादसे में 8 आवासीय भवन और 6 अन्न भंडार जलकर नष्ट हो गए, जबकि 3 गायों की भी आग में झुलसकर मौत हो गई थी। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था।

उत्तराखंड : गैस सिलेंडर के लिए रातभर लगी कतारें, अफवाह से बढ़ी अफरा-तफरी

टिहरी। जनपद के घनसाली स्थित इंडियन गैस एजेंसी के बाहर रसोई गैस की किल्लत को लेकर देर रात उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग गईं। गैस की कमी की खबर फैलते ही लोग रात में ही सिलेंडर लेने पहुंच गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

सूचना मिलने पर एसडीएम घनसाली अलकेश नौडियाल मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने लोगों को समझा-बुझाकर घर लौटाया और आश्वासन दिया कि घबराने की आवश्यकता नहीं है। जिन उपभोक्ताओं की पहले से बुकिंग है, उन्हें ही प्राथमिकता के आधार पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा।

स्थानीय समाजसेवी विनोद लाल ने बताया कि पिछले पांच दिनों से गैस की सप्लाई नहीं आने के कारण लोगों में चिंता बढ़ गई है। इसी वजह से उपभोक्ता सुबह आने वाली गैस गाड़ी के इंतजार में रात से ही लाइन में खड़े हो गए।

प्रशासन के अनुसार, लंबी कतारें गलत सूचनाओं के कारण लगीं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गैस वितरण केवल बुकिंग के आधार पर ही किया जाएगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर प्रणाली के तहत सिलेंडर वितरित होंगे।

हालांकि प्रशासन की तत्परता से स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया, लेकिन गैस की कमी ने एक बार फिर आम लोगों की परेशानी को उजागर कर दिया है।

उत्तराखंड दौरे पर 14 अप्रैल को आएंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कई विकास योजनाओं की देंगे सौगात

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को राज्य के दौरे पर आएंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री प्रदेश को कई महत्वपूर्ण विकास योजनाओं की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का उत्तराखंड से गहरा आध्यात्मिक और व्यक्तिगत जुड़ाव रहा है।

लगभग पांच महीने बाद प्रधानमंत्री का यह दौरा हो रहा है। इससे पहले वे 9 नवंबर 2025 को राज्य स्थापना की रजत जयंती समारोह में शामिल होने देहरादून आए थे। उस दौरान उन्होंने एफआरआई परिसर में 8140 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। साथ ही ‘विकसित उत्तराखंड’ के विजन के तहत वेडिंग डेस्टिनेशन और ‘एक जिला, एक मेला’ जैसे महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए थे।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रदेश में उत्साह का माहौल है। इस दौरान देहरादून-नई दिल्ली एलिवेटेड एक्सप्रेस-वे सहित कई अन्य विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जाएगा।

हरीश रावत के ‘राजनीतिक अवकाश’ से कांग्रेस में हलचल, यशपाल आर्या ने की मुलाकात

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में इन दिनों सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के 15 दिन के ‘राजनीतिक अवकाश’ ने पार्टी के भीतर चर्चाओं और अटकलों का दौर शुरू कर दिया है। इस बीच सोमवार को नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने उनके आवास पर पहुंचकर मुलाकात की।

बताया जा रहा है कि हरीश रावत 27 मार्च से राजनीतिक अवकाश पर हैं। इसे उनकी नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे पार्टी हाईकमान को अपनी नाराजगी का संकेत देना चाहते हैं। खासतौर पर रामनगर के नेता संजय नेगी को कांग्रेस में शामिल कराने की उनकी इच्छा पूरी न होने के बाद यह कदम उठाया गया।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने भी रावत की नाराजगी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा था कि उन्हें नजरअंदाज कर कांग्रेस उत्तराखंड में मजबूत नहीं हो सकती। उनके इस बयान के बाद पार्टी में बहस और तेज हो गई।

वहीं, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी एक व्यक्ति के भरोसे पार्टी नहीं चलती और न ही किसी के बिना पार्टी खत्म होती है। उन्होंने यह भी कहा कि हरीश रावत को राजनीति में लगभग सभी प्रमुख पद मिल चुके हैं, ऐसे में उनकी नाराजगी समझ से परे है।

हरक सिंह रावत के इस बयान पर हरीश रावत के समर्थक हरीश धामी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और समर्थकों से सामूहिक इस्तीफे तक की बात कह दी, जिससे पार्टी में असहज स्थिति बन गई। इसके बाद कांग्रेस नेताओं और सहयोगी दलों ने एकजुटता बनाए रखने की अपील की।

इसी बीच भाजपा के कैबिनेट मंत्री खजान दास की हरीश रावत से मुलाकात ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी। हालांकि कांग्रेस ने इसे केवल शिष्टाचार मुलाकात बताया और किसी तरह की अटकलों से इनकार किया।

सोमवार को हुई मुलाकात के बाद हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या का उनके आवास पर स्नेहपूर्ण आगमन हुआ। दोनों के बीच प्रदेश के समसामयिक विषयों, जनहित के मुद्दों और राज्य के विकास को लेकर सार्थक चर्चा हुई।

गौरतलब है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर इस तरह की हलचल को पार्टी के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की चुप्पी भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

दून बुक फेस्टिवल-2026 का शुभारंभ, साहित्य और संस्कृति का संगम बना देहरादून

देहरादून मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को “दून बुक फेस्टिवल-2026” का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न प्रकाशकों के स्टॉल का अवलोकन किया और गढ़वाली व कुमाऊंनी भाषाओं की पुस्तकों का विमोचन भी किया।

शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार और राज्य सरकार के सहयोग से आयोजित इस नौ दिवसीय महोत्सव में देशभर से साहित्यकार, कलाकार और पुस्तक प्रेमी शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे साहित्य, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम बताते हुए कहा कि यह आयोजन ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान को नई दिशा देगा।

उन्होंने बताया कि महोत्सव के दौरान विभिन्न सत्र, संवाद कार्यक्रम, पुस्तक परिचर्चाएं और “लेखक से मिलिए” जैसे आयोजन किए जाएंगे। साथ ही बच्चों के लिए बनाए गए “चिल्ड्रेन पवेलियन” को उन्होंने सराहनीय पहल बताया, जो नई पीढ़ी में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देगा।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देवभूमि हमेशा से ज्ञान और सृजन की भूमि रही है। राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए “उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान” और “साहित्य भूषण” जैसे पुरस्कारों के माध्यम से साहित्यकारों को प्रोत्साहित कर रही है, साथ ही विभिन्न भाषाओं में ग्रंथ प्रकाशन के लिए अनुदान भी दिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में साहित्य ग्रामों की स्थापना की जा रही है, जिससे लेखकों को सृजन के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा और उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के रूप में विकसित किया जा सकेगा। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पुस्तकों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पुस्तकें केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान का स्थायी स्रोत हैं।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे उपहार के रूप में पुस्तकों और पौधों को प्रोत्साहित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को नई पहचान मिलने की बात भी कही और महोत्सव के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं दीं।